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भाभी की मस्त चूत की गर्म चुदाई

कीर्तन में अपना टाइम काट लेती है. इस वजह से वो घर पर कई बार अकेली ही रहती है.

मैंने उससे पूछा- आपके बच्चे कभी दिखाई नहीं दिये.वो बोली- मुझे अभी सन्तान का सुख नहीं मिल पाया है.

शादी को दस साल हो चुके हैं लेकिन पता नहीं हमें अभी तक औलाद क्यों नहीं हुई है.उसके ये कहने पर मैं चुप हो गया.

मैंने शायद गलत सवाल पूछ लिया था.फिर वो भी चुप ही रही. कुछ ही देर में हम लोग उसके घर के बाहर पहुंच गये. उसने घर से कुछ दूरी पर ही गाड़ी रुकवा ली.

मैंने कहा कि मैं आपको घर के सामने तक छोड़ देता हूं लेकिन वो मना करने लगी. कहने लगी कि उससे ससुर ने देख लिया तो वो पता नहीं क्या सोचेंगे.मैं भी उसकी बात से सहमत से हो गया.

इसलिए उसके कहने पर मैंने गाड़ी को वहीं घर से कुछ दूरी पर ही रोक दिया.वो उतर कर जाने लगी तो मैंने उससे उसका नम्बर मांग लिया.

एक बार तो वो कहने लगी कि आप मेरे नम्बर का क्या करोगे.फिर मैंने हिम्मत करके कह दिया कि वो सब मैं आपको बाद में बताऊंगा.

फिर उसने अपना नम्बर दे दिया और मुस्करा कर अन्दर चली गई.मैं दिवाली मनाने के लिए अपने गांव के लिए निकल गया.

घर जाकर ऐसे ही दो चार दिन निकल गये. फिर जब वापस रूम पर आया तो उस दिन आते ही भाभी के दर्शन हो गये. कयामत लग रही थी रानी भाभी.उसको देखते ही दिल में हलचल सी मच गई और मैंने उसको टोकते हुए नमस्ते की तो वो भी मेरी तरफ देख कर हल्के से मुस्करा दी.

जब वो मुस्काराती थी तो मेरा दिन बन जाता था. उस दिन मेरा काम पर जाने का मन नहीं था.

मैं रूम पर पड़ा हुआ बोर हो रहा था तो मैंने सोचा कि क्यों न आज भाभी को फोन करके देखा जाये.

उसका नम्बर तो मेरे पास था ही.मैंने भाभी को फोन किया तो उसने प्यारी सी आवाज में हैल्लो किया.

मैंने बताया कि मैं उनका पड़ोसी राज बोल रहा हूं. मैंने उनको नमस्ते किया और उन्होंने भी वहां से नमस्ते किया. फिर वो कुछ जल्दी में लग रही थी.

पूछने पर उसने बताया कि वो पैकिंग करने में लगी हुई है.मैंने पूछा कि कहीं पर जा रहे हो क्या आप?

भाभी ने बताया कि उसके सास-ससुर पांच दिन के लिए बाहर जा रहे हैं.

उन्हीं का सामान पैक करने में लगी हुई थी.मैंने भैया के बारे में पूछा तो भाभी ने बताया कि वो तो एक दिन पहले ही काम के लिए निकल गये थे.

बस दिवाली पर दो दिन के लिए आये थे. उनको कुछ जरूरी काम था तो वो वापस चले गये.फिर वो कहने लगी कि अभी वो पैकिंग करने में व्यस्त है.

इसलिए उसने बाद में बात करने के लिए कहा और फोन रख दिया.मेरे मन में तो लड्डू फूटने शुरू हो गये थे. भाभी घर पर अकेली थी. इससे अच्छा मौका क्या हो सकता था.

मैं बाहर आकर खिड़की के पास भाभी के घर पर नजर लगा कर बैठ गया कि कब उसके सास और ससुर घर से निकलेंगे और मैं भाभी को पटाने के लिए फिर से अपनी कोशिश करूंगा.

आधे घंटे के बाद मैंने देखा कि उसके सास-ससुर अपना सामान ऑटो में रख कर निकल गये. भाभी ने गेट बंद कर लिया और अन्दर चली गई.

मैंने तुरंत भाभी को फोन लगाया तो भाभी ने फोन उठा लिया. फिर हमारे बीच में बातें होने लगीं.ऐसे ही एक दो दिन भाभी से बात करते हुए हो गया तो हम दोनों में काफी कुछ बातें होने लगीं.

फिर एक दिन मैंने उनसे कहा कि आपने बच्चों के बारे में डॉक्टर से सलाह ली है क्या?

मेरी बात को वो टाल गई.फिर हमारे बीच में यहां-वहां की बातें होने लगीं. अगले दिन मैं घर पर ही था और भाभी भी काम पर नहीं गई थी. मैंने उनको दिन में फोन लगाया और हम दोनों घंटों तक बातें करते रहे.

भाभी की चूत को चोद कर खुश कर दिया. फिर सुबह 4 बजे मैं अपने रूम पर चला गया क्योंकि भाभी ने कह दिया था कि किसी को पता नहीं चलना चाहिए कि मैं रात में उसके घर पर ही रुका हुआ था.

इस तरह अगले तीन दिन तक हमारा हनीमून चलता रहा. मैंने भाभी की चूत खूब चोदी.

फिर चौथे दिन उसके सास और ससुर वापस आ गये.फिर हमें चुदाई का ज्यादा मौका नहीं मिल पाता था.

एक दो बार तो मैंने गाड़ी में ही भाभी की चूत मारी. वो भी मेरा लंड लेकर खुश रहने लगी थी.

फिर मेरा काम वहां से खत्म हो गया और मैं अपने गांव वापस चला गया. उसके बाद मैंने उसको फोन करने की कोशिश की लेकिन उसका वो नम्बर बंद हो चुका था.फिर मैंने भी उससे संपर्क करने की कोशिश नहीं की.

लेकिन जब-जब मैंने उसकी चूत चोदी मुझे उसने बहुत मजा दिया.

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