Category: Bhabhi Sex Kahani

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  • मामी की चूत और कुंवारी गांड मिली 

    यह बात 2010 की है.

    उससे पहले मैंने कभी किसी लड़की या औरत के साथ चुदाई नहीं की थी और न ही कभी मुठ मारी थी.

    उस वक्त तक मुझे सेक्स के बारे में ज्यादा कुछ मालूम नहीं था.

    यह Desi Sex Kahani उन दिनों की है, जब मेरे मामा की नई नई शादी हुई थी.

    उस समय मेरी 19 साल थी और मामी की उम्र 22 साल की थी.

    वे दिखने में बेहद ही खूबसूरत थीं.

    उनका रंग एकदम दूध सा गोरा था और शरीर भरा हुआ था.

    शादी के दो महीने बाद मामा काम के सिलसिले में शहर चले गए थे.

    इसलिए उस समय घर में नाना, नानी और मामी ही थीं.

    एक दिन मैं अपने चाचा की शादी का कार्ड देने मामा के घर गया हुआ था और शाम होने की वजह से मैं वहीं रुक गया.

    मामा की शादी के बाद मैं पहली बार मामी से मिला था.

    कुछ ही घंटों में मामी से मेरी अच्छी जान पहचान हो गई.

    हम दोनों रात होने से पहले एक दूसरे से काफी हंसी मजाक करते रहे.

    मेरे मामा का घर बहुत बड़ा था लेकिन सिर्फ आगे का हिस्सा ही पूरी तरह बना हुआ था.

    जबकि पीछे के हिस्सा चारों तरफ से 7 फुट की बाउंड्री बना कर यूं ही छोड़ दिया गया था.

    रात को खाना खाने के बाद, नाना और नानी घर के बाहर सोने चले गए.

    गर्मियों में गांव के लोग ज्यादातर घर से बाहर ही सोते हैं.

    काफी गर्मी होने के कारण मामी ने घर के पीछे बाउंड्री वाले ओपन ग्राउंड में ही मेरा और अपना बिस्तर अलग अलग चारपाई पर लगा दिया.

    बिस्तर लगाने के बाद मैं मामी के साथ छेड़खानी करने लगा.

    मामी ने भी मजाक मजाक में मुझे बिस्तर पर पटक कर मेरे ऊपर चढ़ गईं.

    पहली बार किसी औरत कर स्पर्श पाकर मेरा लंड खड़ा हो गया और मुझे बहुत मजा आने लगा.

    कुछ देर तक हम दोनों पटका पटकी करते रहे.

    फिर जब मामी को अहसास हुआ कि मेरा लंड खड़ा हो गया है तो वे मेरे गाल पर किस करके हंसती हुई मुझे छोड़ कर अपने बिस्तर पर चली गईं.

    उनके जाने के बाद मैं अपने हाथ से ही अपने लंड को दबा कर शान्त करने लगा.

    शायद मामी की भी चूत में आग लग चुकी थी.

    लेकिन मेरी तरफ से कोई प्रक्रिया न पाकर मामी खुद ही बोलीं- अक्की … तुम्हारे अन्दर दम नहीं है, अगर दम होता तो तुम मेरे बिस्तर पर आकर अपना किस वापिस लेकर चले जाते.

    इतना सुनते ही मैं झट से मामी के बिस्तर पर जाकर उनके बगल में सीधा होकर लेट गया.

    लेकिन उन्हें छूने की हिम्मत अब भी नहीं हो रही थी.

    उस वक्त मामी आसमानी रंग की साड़ी पहनी हुई थीं और उनके जिस्म की खुशबू मुझे रह रह कर और कामुक कर रही थी.

    मामी- बस इतनी ही हिम्मत है?

    मैं- पहले आप मेरा किस वापिस कर दीजिए, फिर आपको अपनी हिम्मत दिखाता हूं.

    मामी समझ चुकी थीं कि मैं डर रहा हूं.

    फिर मामी ने धीरे से अपना पेटीकोट ऊपर करके मेरा हाथ अपनी नंगी चूत पर रख दिया और बोलीं- बस किस ही चाहिए?

    मैं पहली बार किसी चूत को छू रहा था.

    वाह … क्या चूत थी मामी की … एकदम मख़मली और बहुत ही बड़ी शायद कामसूत्र में कही हुई ‘हथिनी योनि’ जैसी!

    उनकी चूत पर एक भी बाल नहीं था.

    बिना कुछ बोले मैं मामी के अन्दर चल रही कामभावना को समझ चुका था.

    आज मेरे लंड को पहली चूत मिलने वाली थी इसलिए मैं कुछ नहीं बोला, बस धीरे धीरे उनकी चूत को अपने हाथ से सहलाने लगा.

    मामी को सांसें तेज होने लगीं.

    वे मेरे हाथ पर अपना हाथ रख कर अपनी चूत सहलवाती हुई सिसकारियां लेने लगीं- आह्ह्ह … उम्मम्म … उह्ह!

    दो मिनट तक चूत सहलाने के बाद मुझे अहसास हुआ कि उनकी चूत से चिपचिपा पानी जैसा कुछ निकाल रहा है.

    वह पदार्थ बिलकुल गर्म घी की तरह था.

    अब मेरा लंड उनकी चूत मे जाने के लिए बेचैन हो गया था.

    मैं झट से मामी के ऊपर चढ़ कर चुदाई की पोजीशन में आ गया और अपना लंड उनकी चूत पर सैट करने लगा.

    मामी भी मेरा लंड अपने हाथ में पकड़ती हुई बोलीं- मुझे पता है कि तुम पहली बार कर रहे हो और तुम्हें कुछ पता नहीं है, लेकिन मैं जैसा बोल रही हूं बस वैसा करो और वह भी बिना कुछ सवाल किए, तभी हम दोनों अच्छे से मजा ले पाएंगे!

    मैंने उनकी तरफ देखते हुए ‘हां’ में अपना सर हिला दिया.

    मामी ने धीरे से मेरे कान में कहा- पहले नीचे सरक कर मेरी चूत चाटो.

    मैं- छी: … मामी यह मुझे नहीं हो पाएगा.

    मामी गुस्से में बोली- ठीक है. तब तुम अपनी जगह जाकर सो जाओ, कुछ करने की जरूरत नहीं है.

    मैं पहली बार चूत चोदने के लिए काफी उत्सुक था इसलिए मैं उन्हें गुस्से में देख कर रिक्वेस्ट करते हुए बोला- प्लीज़ मामी. मैंने आज से पहले ऐसा कुछ नहीं किया है और मुझे आता भी नहीं है.

    मामी मेरे सर का पकड़ कर मुझे किस करती हुई आगे को हुईं और उन्होंने अपनी पूरी जीभ मेरे मुँह के अन्दर डाल दी.

    मैंने भी मामी के होंठों पर अपने होंठ रख दिए और उनके होंठों को ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा.

    मामी जी भी मेरा साथ देने लग गई थीं.

    धीरे धीरे मेरा हाथ मामी जी के स्तनों पर जा पहुंचा, मैं ब्लाउज के ऊपर से ही स्तनों को सहलाने लगा.

    मामी भी मेरी पीठ को अपने हाथों से सहला रही थीं.

    मैंने मामी जी की होंठ चुसाई के बाद उनकी गर्दन पर चूमना चालू कर दिया.

    मामी जी गर्म हो गई थीं, वे मेरा पूरा साथ दे रहीं थीं.

    उफ्फ … उनके होंठों का स्वाद मुझे पागल कर रहा था.

    हम दोनों एक दूसरे की जीभ और होंठों को बेतहाशा चूसने लगे थे.

    कभी कभी तो ऐसा लगता कि मामी मुझे पूरा खा जाना चाहती हैं.

    कुछ देर बाद मामी मुझे अलग करती हुई बोलीं- कैसा लगा?

    मैं- अहह मामी … मजा मजा आ गया.

    फिर मामी मेरे सर पकड़ कर नीचे करती हुई बोलीं- जैसे कुत्ते पानी पीते हैं, बस वैसे अपनी जीभ से मेरी चूत चाटो. उसके बाद तुम्हें और भी मजा आएगा.

    मैं समझ गया था कि बिना चूत चाटे वे अपनी चूत नहीं चोदने देंगी.

    इसलिए बिना झिझके मैं उनकी दोनों टांगों के बीच आ गया.

    चांदनी रात में मामी की नंगी जवानी क्या मस्त लग रही थी.

    मामी जी की चूत रात में एकदम चमाचमा उठी थी.

    उनकी चिकनी चूत कामरस से भीगी हुई थी.

    इस तरह चूत के दीदार करने के साथ मैंने अपनी जीभ उनकी चूत में घुसा दी.

    मामी जी एकदम से तिलमिला उठीं.

    फिर मैं धीरे धीरे उनकी चूत को जीभ से सहलाने लगा.

    मैं उनकी चूत की दोनों पंखुड़ियों के बीच की दरार में अपनी जीभ नीचे से ऊपर करके चूत चाटने लगा.

    मामी की सांसें तेज होने लगीं- आआह … उईई … ओह्ह … अई!

    वे मादक सिसकारियां भरने लगीं.

    अचानक से वे मुझे अपने ऊपर खींच कर मेरी चड्डी को निकल कर फेंकती हुई बोलीं- आह्ह्ह … मजा आ गया … अब तुम जल्दी से मेरी चूत में अपना लंड डालकर मुझे चोद दो.

    मेरा लंड कब से इस पल का इंतजार कर रहा था.

    मैं जल्दी से अपने हाथ में लंड को पकड़ कर उनकी चूत पर इधर उधर फिराने लगा.

    लेकिन मुझे उनकी चूत का छेद नहीं मिल रहा था.

    मामी थोड़ी मुस्कुराती हुई मेरे हाथ से लंड अपनी हाथ में लेती हुई बोलीं- मेरे राजा … तुम तो एक छेद भी नहीं ढूंढ पा रहे हो … मेरी चुदाई कैसे करोगे?

    फिर वे हंसती हुई अपनी चूत की छेद पर मेरे लंड सैट करती हुई बोलीं- अब धीरे धीरे अन्दर धकेलो.

    उनकी बात सुन कर मुझे बहुत बुरा लगा और उन पर गुस्सा आने लगा.

    मैंने गुस्से में अपनी पूरी ताकत के साथ एक ही झटके में अपना पूरा लंड उनकी चूत में पेल दिया.

    उस वक्त मेरा लंड सिर्फ पांच इंच का ही था.

    मामी की चुदाई शायद काफी दिनों से हुई नहीं थी और मेरे एक ही झटके में पूरा लंड अन्दर जाने से वह तिलमिला उठीं- अह्ह्ह … बहनचोद … उह्ह्ह … मर गई मादरचोद रुक जा भोसड़ी के!

    वे मुझे गन्दी गन्दी गालियां देने लगीं.

    मैं उनके दर्द के परवाह किए बगैर ताबड़तोड़ चुदाई करने लगा.

    मामी को मैं इतनी तेजी से चोदने लगा कि पट … पट … अह्ह हम्म्म उह्ह … आउच … की आवाजें गूंजने लगीं.

    उनकी जोर जोर से चीख निकलने लगी- आह आआआ … हा … उम्म्ह … अहह मर गई प्लीज़ … आराम से करो, बहुत दर्द हो रहा है.

    लेकिन मैंने अपना काम जारी रखा.

    कुछ धक्के मारने के बाद अब उनका दर्द भी कम हो गया था, वे भी अपनी गांड उठा उठा कर चुदाई करवाने लगीं.

    उनको भी मजा आने लगा और वे अब जोर जोर से सिसकारियां भर रही थीं- ऊफ्फ … ऊऊ श्श्श्श श्श्श्ह्स … म्म्म्ह म्म्म्म्म … चोदो और चोदो मुझे अक्की … मेरी चूत की प्यास बुझा दो … फाड़ डालो मेरी चूत!

    करीब 5 मिनट की चुदाई के बाद मेरा शरीर अकड़ने लगा.

    मैंने एक आह्ह्ह … के साथ अपना पहला गाढ़ा वीर्य उनकी चूत में छोड़ दिया और उनके बगल में लेट गया.

    मामी उठ कर बैठती हुई बोलीं- मुझे पता था कि तुम जल्दी झड़ जाओगे.

    मैं शर्म के वजह से कुछ नहीं बोला.

    मामी अपनी साड़ी को निकालती हुई मुझे देखने लगीं और साड़ी के साथ ही उन्होंने अपने ब्लाउज को भी निकल दिया.

    अब वह सिर्फ पेटीकोट और ब्रा में थीं.

    फिर उन्होंने अपने पेटीकोट को ऊपर करके अपनी एक टांग मेरे मुरझाए हुए लंड पर रख दी और अपने हाथ से पकड़ कर मेरे लंड को सहलाती हुई अपना आधा शरीर मेरे ऊपर रख कर लेट गईं.

    मैंने भी अपना एक हाथ उनकी गांड पर रख दिया और एक हाथ से उनकी चूचियों को दबाने लगा.

    एक बार फिर उनके मुँह से सिसकारियां निकलने लगीं- उम्म्ह … अहह … हय … याह … आआ आह्हह!

    नीचे उनके पैर मेरे पैरों पर रेंग रहे थे.

    मैं फिर से ऊपर आकर उनके निर्वस्त्र स्तनों पर जीभ फेरने लगा.

    मामी के मुँह से तो बस मादक सिसकारियां निकली जा रही थीं- अह्ह्ह ह्ह्ह्ह … मम्म … और जोर से!

    कुछ देर बाद मेरा लंड एक बार और खड़ा हो गया.

    अब मामी जी ने कहा- अब तुम नीचे लेट जाओ, मैं तुम्हारे लंड पर बैठ कर अपनी चूत चुदवाऊंगी.

    मैं बिस्तर पर सीधा होकर लेट गया.

    पहले तो वे मेरे लौड़े को अपने होंठों पर रख कर मुँह के अन्दर लेने लगीं और उसे कुल्फी की तरफ चूसने लगीं.

    पहली बार मेरा लंड किसी युवती के मुँह में था, जिससे मेरे मुँह से मादक आवाजें निकलने लगी थीं- आह … हहहह … इस्स … चूस साली रण्डी बड़ा मजा आ रहा है!

    मैं भी उत्तेजना से उनके मुँह में अपना लंड घपाघप पेले जा रहा था.

    उनके मुँह में इस तरह से लंड पेलने से गों … गों … की आवाज आ रही थी जिससे मैं और उत्तेजित होकर उन्हें और जोर से पेल रहा था.

    उनकी आंखों से आंसू निकल रहे थे.

    करीब पांच मिनट बाद उन्होंने मेरा लंड अपने मुँह से निकाला.

    मेरा लंड उनकी लार से भीग चुका था.

    उसके बाद जल्दी से मेरे लंड को अपनी चूत पर सैट करके वे धीरे धीरे बैठने लगीं.

    मामी के मुँह से ‘आआह … उऊऊ उफ फफ्फ़ … सईई … ’ की आवाजें निकल रही थीं.

    मेरा लंड अब पूरी तरह से उनकी चूत में घुस गया था.

    मामी जी जोर जोर से सिसकारियां भर रही थीं.

    अब मैंने नीचे से ही धीरे धीरे धक्के लगाना शुरू कर दिए.

    मामी को मज़ा आने लगा.

    वे मुझसे कहने लगीं- उम्म्ह … अहह … हय … याह … ओर जोर से … जोर जोर से चोदो मुझे अक्की!

    मैंने धक्कों की स्पीड बढ़ा दी, मामी भी अपनी कमर को अपने चूतड़ों को उछाल उछाल कर चुद रही थीं.

    मामी पूरे जोश में बोल रही थीं- आह आह्ह उई … उम्म्ह … अहह … हय … याह … उफ ओ आह्ह … अक्की और तेज पेलो … अह्ह्ह!

    इस तरह करीब पांच मिनट के बाद चुदाई करते हुए अचानक उनकी सांसें भी जोर जोर से चलने लगीं.

    इसी बीच मामी ने मुझे कस कर पकड़ लिया और चिल्लाईं- आआह हुउऊ सस्सीईई …

    बस यही सब करते करते उन्होंने अपना गर्म गर्म पानी छोड़ दिया और बगल में लेट गईं.

    हम दोनों पसीने से भीग चुके थे लेकिन मेरा लंड अभी भी खड़ा था.

    मैंने गुस्से में मामी के बालों को पकड़ते हुए गाल पर खींच कर तमाचा मार दिया और गाली देने लगा- साली रण्डी, जब पहली बार मैं झड़ गया था, तब बहुत नाटक कर रही थी. अब तेरी चूत का पानी निकल गया तो आराम करने लगी. इतनी ही गर्मी थी तुम में, गांड फट गई तेरी!

    उनकी आंखों में आँसू आ गए.

    मामी दर्द से अह्ह्ह … करके हुए बोली- मादरचोद … तू तो बहुत जल्दी चोदूं बन गया!

    मैं फिर एक तमाचा मरते हुए बोला- हां साली … तूने आज मेरी नुन्नू को लौड़ा बना दिया. मेरे कुंवारे लंड का पहला मजा ले लिया!

    इस बार मामी ने मेरे लंड को हाथ में पकड़ कर सोचती हुई बोलीं- मेरी एक चीज कुंवारी बची है, जो मैं तुम्हें दे सकती हूं. जिससे तेरा लंड शांत हो जाएगा.

    मैं- क्या?

    मामी चारपाई से उठती हुई बोलीं- चल मेरे साथ कमरे में, वहीं बताऊंगी.

    मैं बिना कुछ बोले नंगा ही उनके साथ चल दिया.

    मामी के कमरे के अन्दर अंधेरा था, कुछ भी साफ नहीं दिखाई दे रहा था.

    मैंने मामी से लाइट चालू करने के लिए कहा, तो उन्होंने मना कर दिया.

    वे बोलीं- लाइट चालू होगी तो मम्मी पापा को पता चल जाएगा कि हम दोनों जागे हुए हैं.

    इस पर मैं बोला- हां ठीक है, लेकिन जल्दी बताओ कि आपके पास ऐसा क्या है, जो आपकी अब तक कुंवारी है? प्लीज जल्दी बताओ मुझसे अब और बर्दाश्त नहीं हो रहा है.

    मामी ने मेरा हाथ पकड़ा और उसे अपनी मखमली गांड पर रखती हुई बोलीं- ये रही मेरी कुंवारी मख़मली गांड, जो आज तक किसी ने नहीं मारी. आज तुम इसे खोल कर मार लो.

    मैं उनकी गांड को दबाते हुए बोला- वाउ … मामी हो तो आपकी जैसी!

    मामी ने बगल की अलमारी से वैसलीन निकाल कर मेरे लंड पर लगाना शुरू किया.

    वे लंड की मसाज करती हुई बोलीं- कुंवारे लंड के लिए कुंवारी गांड तो बनती है!

    फिर मामी जल्दी से बेड पर चढ़ कर घोड़ी बनती हुई बोलीं- आओ जल्दी से और मेरी गांड में अपना लंड पेल कर इसकी सील तोड़ दो. तुम्हारे मामा जी ने तो आज तक इसको छुआ तक नहीं है … इसलिए प्लीज थोड़ा रहम दिखाना और आराम से उद्घाटन करना.

    मैं ‘ठीक है!’ बोल कर मामी की गांड मारने पीछे की तरफ आ गया.

    मैंने मामी जी की कमर को जोर से पकड़ लिया और लंड का सुपारा गांड के छेद पर लगा दिया.

    कोरी करारी गांड पर लंड का गर्म गर्म स्पर्श होते ही मामी के बदन में एक सिहरन सी दौड़ गई.

    मैंने धीरे से अन्दर की ओर दबाव बनाया और सुपारे को मामी की गांड के पहले छल्ले में फंसा दिया.

    लंड पर वैसलीन लगने की वजह से एक ही बार मेरे लंड का सुपारा मामी जी की गांड में चला गया.

    जैसे ही सुपारे का हमला हुआ तो उस वजह वे ज़ोर से चीख पड़ीं- आईईई मैं मर गई … प्लीज … आराम से आह्ह … उई आह आहिस्ते आहिस्ते डालो … प्लीज़ दर्द हो रहा है. मैं पहली बार गांड मरवा रही हूं.

    मैं थोड़ी देर के लिए रुक गया उसके बाद मैंने अपने लंड को एक बार थोड़ा सा बाहर खींचा और फिर से एक धक्का लगा दिया.

    इस बार लगभग मेरा आधा लंड मामी की गांड की गहराई में उतर गया था.

    मामी के मुँह से फिर से चीख निकल गई- इईईई … श्श्शशश … अआह … उम्म्ह!

    उन्होंने कसकर बेडशीट पकड़ ली और अपनी आंखें बंद कर लीं.

    मैंने देखा कि मामी की आँखों में से पानी निकल आया था.

    मैं थोड़ी देर वैसे ही रुका रहा.

    जैसे ही मामी थोड़ी नॉर्मल हुईं, मैंने धीरे धीरे धक्के लगाने शुरू कर दिए.

    अब उनको भी मज़ा आ रहा था.

    वे मादक कराह लेती हुई सिसकारने लगी थीं- हाईई रे … हाई … इसमें तो चूत से भी ज़्यादा मज़ा आता है … और कसकर पेलो मेरे राजा … हाईईई रे सच में बहुत मजा आ रहा है … सीई हाईई … और रगड़ कर चोदो … आह सीईई ईई और कसकर … हाय माँ … आआह … मजा आ गया रे!

    यह सुनकर मैं अब उनको बस धकापेल चोदने लगा और ताबड़तोड़ गांड को तबला समझ कर बजाता ही जा रहा था.

    वे ‘उफ्फ्फ … स्स्स्सस … ’ करती जा रही थीं.

    अब मेरी गोटियां भी मामी के मुलायम नितंबों से टकरा रही थीं.

    मैं थूक टपकाता जा रहा था और मस्ती से अपने लंड को मामी की गांड में अन्दर बाहर कर रहा था.

    उनकी मक्खन जैसी कोमल मुलायम गांड में मेरा लंड बड़े प्यार से चल रहा था.

    साथ ही मैं अपने हाथ की उंगलियों से उनकी चूत के दाने को भी मसल रहा था.

    इससे कुछ ही देर में मामी जी बहुत ही उत्तेजित हो गई थीं- अहह हहाआ इईई … श्शशश … आआह … मज़ा आ गया … ऊफ्फफ … फाड़ दे अपने लौड़े से मेरी गांड … अया … अब तो मैं तेरी बीवी हो गई हूँ … आअह सुहागरात को तेरे मामा जी ने मेरी कुंवारी चूत चोदी थी और आज तुम उईई … अहह हहाआ … मेरी कुंवारी गांड मार रहे हो … आह … चोद मेरे राजा चोद मुझे … जी भर के चोद आआअ … उम्म उफ्फ़ हाय मजा आ गया!

    इसी के साथ मेरे धक्के और भी तेज होते जा रहे थे, मैं मामी जी को पूरे जोश के साथ चोद रहा था.

    मामी फक करते हुए मेरा लंड पच पच की आवाज के साथ अन्दर बाहर हो रहा था.

    मैं- मामी जी मेरी जान, आपने तो मुझे जन्नत की सैर ही करवा दी आह … मेरी जान … मैं तो … मैं … तो … ग … गयाआ … आआह … मेरा पानी निकलने वाला है, कहां निकालूँ?

    मामी बोलीं- मेरी गांड में ही अपना पानी निकाल दो!

    फिर मैंने ‘ये आअहह … ऊहह … लो’ कहा और उनकी गांड में ही अपना वीर्य छोड़ दिया.

    मैं सारा वीर्य उनकी गांड में आखिरी बूँद तक डालकर ऐसे ही कुछ देर तक उनके ऊपर लेटा रहा.

    फिर जब मैंने अपना आधा सिकुड़ा हुआ लंड उनकी गांड से बाहर निकाला तो मैंने देखा कि उनकी गांड मेरे वीर्य से लबालब भरी हुई थी और लंड की रगड़ से लाल हो गई थी.

    उनकी गांड से थोड़ा थोड़ा करके वीर्य उनकी चूत की तरफ बहने लगा था.

    थोड़ी देर बाद मामी ने उठ कर अपनी चूत और गांड को बेडशीट से अच्छे से पौंछ कर साफ किया.

    उसके बाद हम दोनों फिर बाहर चारपाई पर आ गए और सुबह तक चुदाई करते रहे.

    उस दिन सुबह में मामी ठीक से चल भी नहीं पा रही थीं.

    यह देख कर मैं मुस्कुरा रहा था.

  • भाभी की महीनों की चुदाई की प्यास बुझाई

    भाभी की चुदाई हिंदी कहानी में मेरे ताऊ जी की पुत्रवधू पति से अलग ससुराल में रह रही थी. तो उनकी चूत चुदाई नहीं हो रही थी. मैंने भाभी की जरूरत को समझ कर उनकी चूत और गांड का मजा लिया.

    नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम दीप है. मैं उत्तराखण्ड के देहरादून में रहता हूं.
    मेरी उम्र महज 19 साल ही है लेकिन मेरा 7 इंच का लंड, प्यासी भाभियों के लिए काफी मस्त है.

    यह मेरी पहली चुदाई की पहली कहानी है.
    मेरी भाभी की चुदाई हिंदी कहानी की मुख्य पात्र मेरी 32 साल की कमसिन भाभी हैं … जिनका 36-30-38 का फिगर बड़ा ही लाजवाब है.
    वे मेरे ताऊजी के लड़के की बीवी हैं.

    उनके तने हुए दूध देखकर तो हमेशा ही मेरा लंड तन जाता था.
    दरअसल मेरी भाभी भैया के साथ बंगलोर में रहती हैं.

    फरवरी के महीने भाभी अपने पति के साथ घर आई हुई थीं.

    भैया को अचानक से अपने काम के सिलसिले में वापस जाना पड़ गया.
    तो भाभी यहां बाकी परिवार के साथ ही रहने लगीं.

    एक दिन भाभी का सैड स्टेटस देखने के बाद मैंने यूँ ही रिप्लाई कर दिया.
    तो उसके बाद भाभी के साथ मेरी कुछ अलग सी बातें शुरू होने लगीं.

    कुछ ही दिनों में भाभी ने मुझसे अपने दिल की बात बताते हुए कहा कि वे मुझसे प्यार करती हैं.
    मैं तो था ही उनके लिए पागल!

    अब भाभी मेरी गर्लफ्रेंड बन गई थीं.
    हम दोनों फ़ोन पर सामान्य बात करते करते किस करने लगते और सेक्स की भी बातें करने लगते थे.

    भाभी ने मुझे वीडियो कॉल पर अपने बूब्स भी दिखाए थे और मेरा तना हुआ लंड भी वीडियो कॉल पर देखा था.

    अब हम दोनों को अपने लंड और चूत के मिलन का इंतजार था.

    एक दिन भाभी ने मुझे मिलने के लिए बुला लिया.

    उस दिन एग्जाम के कारण मुझे आने में थोड़ी देर हो गई.
    मैं भाभी के घर होते हुए अपने घर आया.

    उनके घर जाकर मैं भाभी के मन की बात समझ गया था लेकिन उनके परिवार के अन्य लोगों के होते मैं कुछ नहीं कर सकता था.

    कुछ दिन और यूँ ही चला, हम दोनों की कामुक भावनाएं भड़कती रहीं.

    फिर आखिर वह दिन आ ही गया, जब मैंने भाभी की प्यास बुझाई … और मेरी प्यास भाभी ने!

    यह मई महीने की बात है.
    मैं उस दिन भाभी के घर गया था.

    उनके घर पर कोई नहीं था तो मैंने भाभी को किस करना चालू कर दिया.
    भाभी ने भी पूरा साथ दिया.

    मैं किस करते करते भाभी के 36 इंच के दूध दबाने लगा और उनकी गर्दन को चाटने लगा.

    भाभी भी ‘आह … उह … इस्स’ की आवाज़ें निकालकर मुझे मदहोश कर रही थीं मगर हमारे पास सिर्फ किस करने का ही वक्त था.
    उनके घर के बाकी के लोग घर वापस आने वाले थे.

    भाभी की चुम्मियां लेने से मेरी वासना ने उग्र रूप धारण कर लिया था और अब भाभी की चूत चोदे बिना शांति नहीं मिलने वाली थी.

    इसलिए उस दिन मैंने भाभी के घर पर ही रुकने का फैसला कर लिया.

    रात को खाना खाने के बाद मैं बैठक वाले कमरे में सोने गया.
    पर नींद किसे आने वाली थी.

    जब भाभी को लगा कि सब सो गए हैं तो भाभी ने मुझे अपने कमरे में बुलाने के लिए कॉल किया.

    उनका कॉल देख कर मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था.
    जिंदगी में पहली बार मैं आज अपनी जवानी जीने वाला था, वह भी भाभी के साथ.

    वैसे तो मैं अब तक और चूत चोद चुका था पर भाभी के साथ दिल लग गया था.

    मैं जल्दी से उनके रूम में आ गया.
    भाभी बेड पर लेटी हुई थीं.

    मैं उनके पीछे जाकर चिपक कर लेट गया.

    भाभी को मेरी महक मिल गई थी और वे काम से पीड़ित मादा की भांति अपनी गांड मेरे लौड़े से रगड़ने लगी थीं.

    पीछे से ही मैं भी उनकी गर्दन को किस करने लगा.
    मैं अपने हाथ कभी उनकी पीठ पर फेरता, तो कभी गर्दन पर … और कभी टी-शर्ट के बाहर से ही उनके मम्मों पर अपने हाथ दबा कर दूध दबाने का मजा लेने लगता.
    कभी मैं उनके लोअर के अन्दर अपने एक हाथ को डाल कर उनकी टांगों के बीच में छेद को टटोलने लगता.

    मुझसे अब सब्र नहीं हो रहा था.
    तो मैंने अपना एक हाथ टी-शर्ट के अन्दर डालकर उनके मम्मों को दबाना चालू कर दिया.

    भाभी भी काफी गर्म हो चुकी थीं, उनकी चूत में कब से लंड नहीं गया था.

    वे मेरी तरफ पलटीं और हम दोनों के होंठ एक हो गए.

    भाभी को करीब 10 मिनट तक किस करने के बाद मैंने उनकी टी-शर्ट हटा दी.

    वे मेरे सामने एक पिंक कलर की ब्रा पहनी हुई थीं और अपनी जवानी दिखा कर मुझे मदहोश कर रही थीं.
    उनकी ब्रा के ऊपर से ही मैंने उनके मम्मों को दबाना चालू किया और उनके सारे बदन को चूमा.

    मैंने भाभी से पूछा- आपने कितने समय से सेक्स नहीं किया है?
    भाभी ने धीमी आवाज़ में जवाब दिया- मैं फरवरी से प्यासी हूँ.

    भाभी की चुदाई हिंदी कहानी बनने का रास्ता साफ़ हो चुका था.

    मैंने कहा- क्यों आपको कोई और नहीं मिला!
    वे बोलीं- यह मेरी ससुराल का घर है, यदि मैं बंगलोर में होती तो अब तक सत्तर लंड मेरी चूत में घुस चुके होते!

    मैंने कहा- अरे वाह … इसका मतलब आप तो पूरी लंड खोर हैं!
    वे हंस दीं और बोलीं- क्यों तू चूत खोर नहीं है क्या?

    मैंने कहा- हां, मैं भी चूत का आशिक हूँ और अब तक छह चूत चोद चुका हूँ … आज आप सातवीं हैं!

    भाभी मेरे लंड को टटोलती हुई बोलीं- जब से मैंने तेरे लंड को वीडियो कॉल देख लिया था, तभी से इसके लिए पागल हूँ.

    मैंने कहा- भैया का लंड कैसा है?
    वे हंस कर बोलीं- उनका भी मस्त है … तुझे अपनी गांड में लेना हो तो मैं उनसे बात कर सकती हूँ.

    मैंने हंस कर कहा- अरे रहने दो भाभी, मैं छोटी लाइन वाला बंदा नहीं हूँ. मुझे तो चूत चोदना ही पसंद आता है!

    भाभी बोलीं- क्यों गांड मारने का शौक भी नहीं है?
    मैंने कहा- अब तक किसी ने पीछे की दी ही नहीं. यदि आप गांड मरवाने के लिए राजी हों, तो मुझे उसका भी स्वाद मिल जाएगा!

    भाभी लंड को सहलाने लगीं और बोलीं- पहले चूत में अपनी ताकत दिखा कर मुझे खुश कर … बाद में गांड में लेने की भी सोच सकती हूँ.
    मैंने उनके दूध को मसलते हुए कहा- भैया आपकी गांड मारते हैं क्या?

    वे बोलीं- अरे उन्हें तो गांड मारने में ही मजा आता है, तभी तो मेरी चूत लंड के लिए प्यासी ही रहती है. यूं समझो कि तुम्हारे भैया चार बार गांड मारेंगे तब एक बार चूत में लंड पेलते हैं.

    मैंने कहा- अरे वाह भाभी … इसका मतलब तो आपकी हर रात में पांच बार चुदाई होती है?
    वे बोलीं- नहीं रे बुद्धू … तेरे भैया एक रात में एक ही बार चुदाई करते हैं. वह तो मेरे कहने का मतलब यह है कि वे चार बार गांड का मजा ले लेते हैं … तब मेरे कहने पर अगली बार मेरी चूत में लंड पेलते हैं!

    मैंने कहा- अरे, इसका मतलब तो यह हुआ कि वे गे भी हो सकते हैं!
    भाभी हंस कर बोलीं- हां यार, तेरे भैया गांडू ही हैं. उन्हें अपने गांडू दोस्तों से गांड मरवाने में भी मजा आता है. वे मुझे छोड़ कर बंगलोर इसी लिए तो गए हैं ताकि वे अपनी गांड मारने और मरवाने की खुजली मिटवा सकें.

    मैंने कहा- तो आप उनसे कुछ कहती नहीं हैं?
    भाभी- पहले पहल तो मैंने उनसे खूब कहा, पर उन्होंने मुझे भी छूट दे दी कि मैं जिससे चाहूँ चुद सकती हूँ, तभी तो मैंने तुम्हें अपना सही साथी चुना है!

    मैंने कहा- अरे भाभी, यदि आपको तरह तरह के लंड से चुदने का शौक है तो मैं आपके लिए लंड की लाइन लगा दूंगा.
    यह सुनकर भाभी खुश हो गईं और बोलीं- पहले तुमसे चुद कर मजा ले लेने दो फिर बाद में एक साथ दो लंड से चुदने का मजा भी ले लूँगी.

    उनकी सेक्सी बातें सुनकर मेरे लौड़े को तो मानो पंख लग गए थे.

    इसी दौरान मैं भाभी के बदन को किस करते करते उनकी कमर तक पहुँच गया.

    अब वक्त आ गया था, जब भाभी के लोअर को उतार कर उनके बदन से अलग करना था.

    भाभी का लोअर उतारते ही मैं अपने हाथों को उनकी जांघ पर फेरने लगा और ब्रा के ऊपर से ही चूचे चूसने लगा.
    अपना हाथ मैं उनकी गांड पर फेरने लगा.

    अब बारी भाभी के ब्रा की थी.
    ब्रा उतारते ही भाभी के 36 इंच के दूध मेरे सामने आज़ाद होकर गजब फुदक रहे थे.

    मुझसे रहा नहीं गया और मैं तुरंत ही उनके दोनों बूब्स दबाने चूसने और काटने लगा.
    भाभी तो मानो मदहोश हो चुकी थीं.

    भाभी की चूचियां चूसते हुए मैंने अपना हाथ भाभी की पैंटी के बाहर से ही हरकत में लाना शुरू किया.
    मैंने उनकी चूत पर अपने हाथ को चलाना चालू कर दिया.

    भाभी की चूत पूरी गीली हो चुकी थी इसलिए मैंने भी देर न करते हुए उनकी पैंटी उतार कर फेंक दी और उंगली से उनकी चूत का स्पर्श करने लगा.

    उनकी गीली चूत और रसीली सिसकारियां मुझे मदहोश कर रही थीं.

    मैंने अपनी उंगली भाभी की चूत में डाल दी.
    भाभी उंगली लेते ही बिल्कुल कामुक हो चुकी थीं और वे मुझे जोर जोर से किस करने लगीं.

    जब उनसे सहन न हुआ तो वे मुझे धक्का देकर खुद मेरे ऊपर आ गईं.
    वे मेरे होंठों से गर्दन पर होती हुई छाती पर किस करने लगीं.

    मैं भी भाभी का साथ देने लगा और भाभी के बूब्स दबाने लगा.

    इतने में भाभी ने मेरी टी-शर्ट और लोअर उतार कर मुझे अंडरवियर में छोड़ दिया और लंड को ऊपर से ही सहलाने लगीं.

    अब मेरे सब्र का बांध टूट रहा था तो मैं भाभी को लेटाकर खुद उनकी चूत के सामने आ गया और उनकी चूत चाटने लगा.

    कुछ ही देर में भाभी को मजा आने लगा और वे अपने हाथ से मेरे सर को अपनी चूत पर दबाने लगीं.

    भाभी अपने मुँह से कामुक आवाज़ें निकालती हुई बोलीं- आह … बहुत मजा आ रहा है … और अन्दर तक चाटो आह आह!

    मुझे यह जानकर बड़ी हैरानी हुई कि भाभी ने आज पहली बार चूत चटवाई थी.
    भैया ने आज तक कभी उनकी चूत चाटी ही नहीं थी.
    किसी और मर्द ने भी उनकी चूत को चाटने का सुख नहीं दिया था.

    थोड़ी देर बाद मैं किस करता हुआ उनके बूब्स तक आ गया.

    भाभी ने मुझे धक्का देकर अपना कुत्ता बना लिया; मेरी अंडरवियर उतारकर भाभी खुद ही मेरे लंड पर बैठ गईं.

    एक बार में ही मेरा पूरा लंड भाभी की चूत में चला गया.
    अब भाभी लंड की सवारी करती हुई अपनी गांड को ऊपर नीचे करने लगीं.

    दस मिनट तक ऐसे ही भाभी की चूत चोदने के बाद मुझे भाभी के ऊपर चढ़कर उनको चोदना था.

    मैंने भाभी को गिरा दिया और ऊपर से आकर भाभी की चूत में लंड पेल दिया.

    करीब 10 मिनट उसकी चुदाई करने के बाद भाभी ढीली पड़कर झड़ गईं.
    उनके झड़ने के बाद मैंने तेज तेज धक्के देने शुरू किए और कुछ ही धक्कों के बाद मैं भी झड़ने को हो गया.

    भाभी ने कहा- अन्दर ही निकाल दो.
    मैं उनकी चूत में ही झड़ गया.

    कुछ देर तक एक दूसरे से चिपके रहने के बाद भाभी मेरे लंड को चूसने लगीं.

    मैं समझ गया भाभी अब रांड बनकर मुझसे और चुदना चाहती हैं.

    उन्होंने मेरा फिर से मूड बना दिया तो दूसरे राउंड की चुदाई शुरू हो गयी.

    इस बार मैंने भाभी को 15 मिनट तक लगातार अलग अलग पोजीशन में चोदा.

    फिर भाभी को अपने लंड पर बैठाकर उनकी गांड पकड़ कर उन्हें चोदने लगा.

    दस मिनट की चुदाई के बाद भाभी झड़ गईं और मेरे ऊपर ही लेट गईं.

    मैं उनकी गांड हिलाने लगा.
    लगभग 5 मिनट बाद मेरे लंड ने भी जवाब दे दिया और मैं उनकी चूत में ही झड़ गया.

    मैं भाभी को अपने ऊपर लेटाकर ही सो गया.
    अगले दिन सुबह उठकर भाभी को प्यार से किस करता हुआ अपने घर चला गया.

    दोस्तो, ये अपनी भाभी के साथ मेरी पहली चुदाई की कहानी थी.

    अगली बार उनकी गांड चुदाई व थ्री-सम चुदाई की कहानी का मजा भी आपके साथ साझा करूंगा.

  • पड़ोसन भाभी को चोदकर प्रेग्नेंट किया

    सकीना की चूत का मजा मुझे तब मिला जब मैंने एक कमरा किराये पर लिया और बगल वाले कमरे में सकीना और उसका शौहर रहते थे. उसे बच्चा नहीं हो रहा था.

    मेरा नाम राम सिंह है. मैं 6 फुट का बड़े लंड का मर्द हूँ और मैं बिहार से हूँ.
    यह सकीना की चूत की कहानी 2013 की है, तब मैं बंगलोर में जॉब करता था.
    उधर मैं एक रूम किराए पर लेकर रहता था.

    मेरे बगल वाले कमरे में एक अन्य कपल रहता था.
    वे दोनों बिहार से थे, इसी नाते हमारे बीच दोस्ती हो गयी.

    उसमें युवक का नाम तौफीक था.
    उसकी उम्र 37 साल की थी.
    तौफीक की बीवी 24 साल की थी. उसका का नाम सकीना था.
    वह बहुत ही सुंदर थी.

    उनकी शादी को 5 साल हो गए थे और अब तक उन्हें कोई बच्चा नहीं हुआ था.

    तौफीक एयरटेल कंपनी के टॉवर लगाने का काम करता था.
    वह अपने काम के सिलसिले में महीने में 15 दिन बाहर ही रहता था.

    दिखने में तौफीक एक सूखा सा हड्डी था.
    मुझे लगता था कि वह सकीना भाभी को सही से चोद ही नहीं पाता होगा.
    वह बच्चे के लिए अपनी बीवी से लड़ता भी था.

    मेरा उसके घर मेरा आना जाना हो गया था.
    तौफीक की बीवी सकीना मुझे देख कर बड़ी खुश हो जाती थी.
    यह बात मुझे जरा कम समझ में आती थी.

    मैंने कभी भी उसकी तरफ कामुक नजरों से नहीं देखा था.
    क्योंकि एक तो वह हर वक्त बुरके में रहती थी और ऐसा उसका कोई खास फिगर भी समझ नहीं आता था जिस वजह से मैं उस पर अपनी नीयत खराब करूँ.

    मैं जिधर काम करता था उधर एक से एक मस्त माल मेरे लंड को खड़ा करने के लिए दिखाई देते थे.
    तो मैं सकीना की ओर नहीं देखता था.

    तौफीक को मेरे ऊपर बड़ा भरोसा भी था क्योंकि मैं एक तो बिहार का रहने वाला था और वह भी मेरे जिले का ही था.

    दूसरी बात यह थी कि वह अपने काम के सिलसिले में शहर से बाहर जाता था, तो उसकी बीवी की देख-रेख के लिए उसे मुझसे ज्यादा मुफीद आदमी कोई और समझ नहीं आता था.

    कुल मिलाकर वह मेरी बड़ी कद्र करता था और मेरे ऊपर भरोसा करता था.

    मैं भी उसकी गैर हाजिरी में सकीना भाभी से उनकी जरूरत के सामान आदि के लिए पूछ लेता था तो वह भी मेरे सामने खुल कर आ जाती थी और मुझसे बात कर लेती थी.

    एक रोज ऐसे ही मैं सुबह सुबह सकीना भाभी के घर के दरवाजे को बजा कर पूछने लगा- भाभी, कुछ लाना तो नहीं है, मैं बाजार जा रहा हूँ!
    इस पर सकीना भाभी ने दरवाजा खोला और मुझसे अन्दर आने का कहा.

    उस वक्त वह हिजाब में नहीं थी तो मैं उसे देखता रह गया.
    मेरी आंखों को ललचाई नजरों से देखता पाकर वह मुस्कुरा दी और बोली- क्या हुआ भाईसाब, कभी लड़की नहीं देखी है क्या?

    मैंने कहा- अरे भाभी, मैंने तो एक से एक परकटी लड़कियां देखी हैं और रोज ही उनसे मिलता भी रहता हूँ … पर आज आपको देख कर मैं हैरान हो गया कि चाँद तो बाजू में ही छिपा था, बाहर तो सिर्फ चाँद के टुकड़े दिखाई देते थे!

    यह सुनकर सकीना भाभी हंसने लगी और मुझे शुक्रिया कहने लगी.

    मैंने कहा- सच में भाभी, आप हिजाब में थीं तो दिखाई ही नहीं देती थीं.

    इस तरह से मेरी बात अब सकीना भाभी से हंसी मजाक का दौर चलने लगा.

    एक बार तौफीक टॉवर लगाने 5 दिन के लिए कहीं बाहर गया था.

    उस दिन मैं सकीना भाभी से बात कर रहा था.

    मैंने उससे पूछा- 5 साल हो गए हैं भाभी, बेबी क्यों नहीं हुआ?
    तो वह खुल कर बताने लगी- मेरे शौहर का अंग छोटा है, वह मेरे साथ सही से सेक्स नहीं कर पाते हैं. जब सेक्स सही से नहीं होगा, तो बेबी कहां से होगा.
    यह बता कर वह रोने लगी.

    मैंने उसे चुप कराया, तो वह अचानक से मेरे गले से लिपट कर रोने लगी.

    मैं उसके दूध अपने सीने पर गड़ते हुए महसूस करने लगा.
    मुझे सकीना भाभी को चोदने का मन करने लगा.

    वह रोती हुई बोली- मैं ग़रीब घर से थी, मेरे अब्बा ने इस बूढ़े से शादी करवा दी और मेरी जिंदगी खराब कर दी.
    मैं बोला- भाभी अगर तुम चाहो, तो सब ठीक हो जाएगा.

    वह बोली- कैसे ठीक होगा … वह बूढ़ा जवान तो नहीं हो जाएगा ना!
    मैं बोला- वह जवान नहीं होगा, पर मैं तो हूँ ना … मैं दूँगा तुमको जवानी का सुख … और बच्चा भी दूंगा.

    वह बोली- पर ये तो गलत होगा.
    मैंने उसे अच्छे से समझाया- अपनी जवानी को बर्बाद मत करो. मेरे साथ इन्जॉय करो.

    वह बोली- तुम हिंदू हो, मैं मु स्लिम … तो कैसे होगा!
    मैंने कहा- हम दोनों शादी नहीं कर रहे हैं. केवल सेक्स करेंगे.

    बहुत देर समझाने के बाद वह मान गयी और बोली- तुम किसी को मत बताना.
    मैंने हामी भर दी.

    उसी रात से हम दोनों की चुदाई शुरू हुई.
    सकीना मुझे अपने रूम में ले गयी और अपने पलंग पर बैठा कर मेरी सेवा करने लगी.

    उसने मुझे पानी दिया और मुझे देख कर मुस्कुराने लगी.

    मैंने उसे अपने पास खींचा और उसे किस करने लगा.
    वह भी मेरा साथ देने लगी.

    धीरे धीरे मैंने उसके सारे कपड़े खोल दिए और अपने भी खोल दिए.

    वह मेरे सीने पर अपने हाथ फेरने लगी और मैं उसके दूध सहलाने लगा.
    उसके एक दूध को अपने मुँह में भर कर चूसने लगा और दूसरे को हाथ से मसलने लगा.

    वह आह आह करती हुई कामुक होने लगी.
    मैंने उसका हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रख दिया तो वह लंड को सहलाने लगी.

    मैंने उसको लिटा दिया और उसके ऊपर चढ़ कर उसके दोनों मम्मों को दबा दबा कर पीने लगा.

    उस वक्त मेरा लंड उसकी चूत से रगड़ खा रहा था तो वह अपनी कमर को इधर उधर करती हुई लंड को अपनी चूत से मसल रही थी.

    मैंने उसकी चुदास देखते हुए उसकी चूत पर लंड सटा दिया और उसकी चूत की दरार में लंड के सुपारे को फंसा दिया.

    वह उस वक्त मेरे लंड की गर्मी से एकदम व्याकुल हो रही थी और जल्दी से लंड को अन्दर पेलवाने की जद्दोजहद कर रही थी.

    मुझे मालूम था कि इसकी चूत में जैसे ही मैं अपना मोटा लंड पेलूँगा, यह दर्द से रोने लगेगी.

    फिर मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रखे और चूत फाड़ने की नियत से एक जोरदार धक्का मार दिया.

    लंड चूत को फाड़ता हुआ अन्दर घुस गया और भाभी की अम्मी चुद गई.

    वह जोर जोर से चिल्लाने की कोशिश कर रही थी लेकिन उसका मुँह बन्द था तो वह कुछ कर ही न सकी.

    उसकी छटपटाहट बता रही थी कि इसकी चूत की सही से आज ही चुदाई हुई है.

    मुझे मालूम था कि दर्द तो होना ही है तो क्यों न इसकी चूत का भोसड़ा बनाने की नीयत से इसे पेलता रहूँ.

    हर चूत का दर्द कुछ देर बाद हो ही जाता है.
    बस यही सोच कर मैं तेज तेज झटके देता हुआ उसकी चूत में लंड पेलता रहा.

    कुछ मिनट पेलने के बाद वह दर्द से निजात पा गई और धकापेल का मजा लेने लगी.

    उसकी छटपटाहट खत्म हुई तो मैंने उसके मुँह से मुँह हटा लिया और वह लंबी सांस लेती हुई आह आह करने लगी.

    कुछ देर बाद वह झड़ गयी और मैं भी उसकी चूत में ही फारिग हो गया.

    अब हम दोनों नंगे ही एक दूसरे से लिपटे पड़े थे.

    वह बताने लगी- मेरे शौहर का लंड तुमसे आधा भी नहीं है.

    मैंने पूछा- मजा आया?
    वह हंस दी और बोली- शुरू शुरू में तो तुमने मुझे मार ही दिया था, पर बाद में बहुत अच्छा लगा!

    मैंने कहा- अच्छा लगा या मजा आया?

    वह फिर से हंस दी और मेरी छाती पर मुक्का मारती हुई धीमे से बोली- मजा आया.

    मैंने कहा- तो फिर से मजा लें!
    वह फिर से हंस दी.

    इस बार उसने मेरे साथ 69 में शुरुआत की और मेरे लंड को चूस कर खड़ा कर दिया.

    जब दूसरी बार चुदाई हुई तो सकीना ने बहुत मजे से चूत चुदवाई.
    अब वह मेरे लंड से मुहब्बत कर बैठी थी.

    बाद में उसने बताया कि मैं न जाने कबसे तुमसे चुदवाना चाहती थी.

    मैंने कहा- हां, जब से तुम्हें बिना हिजाब के देखा, तभी से मैं भी तुम्हें चोदने के लिए उतावला था.

    उस दिन की चुदाई के बाद जब भी उसका शौहर घर से बाहर होता, वह मेरे साथ ही सोती थी.

    वह पहले पतली थी, उसके दूध भी छोटे छोटे से थे.
    पर मेरे लंड से से चुद चुद कर भर गई और उसके दूध भी रसीले हो गए.

    कोई 15 दिन के बाद उसका मासिक धर्म नहीं हुआ तो वह समझ गई कि वह हमल से हो गई है.

    उसने मुझे बताया तो मैं उसकी जांच के लिए प्रेग्नेंसी जाँचने वाली किट ले आया.

    उस पर सकीना भाभी ने अपनी पेशाब की दो बूंदें टपकाईं, तो रिजल्ट पॉज़िटिव आया.

    वह बहुत खुश थी और मुझसे लिपट कर मुझको चूमने लगी थी.
    खुशी के मारे उसके आंसू निकलने लगे थे.

    उसने मुझको शुक्रिया बोला और मेरे लंड के साथ खेलने लगी.

    उसके शौहर को भी जब मालूम हुआ कि उसकी बीवी हमल से हो गई है तो वह भी बेहद खुश हुआ.

    उसे लग रहा था कि उसके मरियल लंड के पानी से उसकी बीवी प्रेग्नेंट हो गई है.

    उसके बाद मैं उसे चार महीने तक जब भी उसका शौहर घर पर नहीं होता, उसे नियमित रूप से चोदता रहा.

    उसको नौ महीने बाद एक बेटा पैदा हुआ.
    उसके बाद वह फिर से मेरे लौड़े से चुदने आने लगी.

    इस तरह से मैंने उसे 3 साल तक चोदा.
    मेरे लंड से उसको और 2 बेटे हुए.

    अब मैं बंगलोर से दिल्ली आ गया हूँ और यहीं जॉब करता हूँ.

    उसका शौहर फिलहाल बिहार चला गया है.
    लॉकडाउन के समय में उसका काम छूट गया था, तो वह अभी भी बेरोज़गार घूम रहा है.

    पिछले महीने सकीना मुझे फोन करके बोल रही थी कि मैं उसके शौहर के लिए दिल्ली में जॉब देख लूँ.

    उसे चोदने की नीयत से मैंने इधर दिल्ली में तौफीक के लिए जॉब ढूँढ ली है.
    यह जॉब नाइट शिफ्ट वाली है.

    मैंने जानबूझ कर उसके लिए यह जॉब पक्की की है ताकि सकीना मेरे लौड़े से चुदने आ सके.

    अगले हफ्ते वह अपने शौहर के साथ दिल्ली आ जाएगी.
    वह नाइट ड्यूटी जाएगा और मैं उसकी बीवी को चोदूंगा.

    सकीना की चूत चोदने के बाद मुझे किसी और लड़की की चूत पसंद ही नहीं आती है.

    शायद मेरे लंड में भी कुछ खासियत है कि जो लड़की एक बार मेरा लंड ले लेती है, वह बार बार मेरे लंड से चुदने की बात कहती है.

    लड़कियों को इस बात पर यदि भरोसा न हो, तो वे मुझे एक बार मौका देकर इस बात को समझ सकती हैं कि मैं कोरी गप्प नहीं हांक रहा हूँ.

    मैंने भी तय कर लिया है कि मैं उसी लड़की से शादी करूंगा तो सकीना जैसी माल लड़की हो और मेरे लंड पर कलाबाजी खा सके.

  • बरसात में आंटी की चूत चुदाई का मजा

    न्यूड पुसी Xxx कहानी में मैं एक शोरूम में नौकरी करता था. वहां मालिक की बेटी बिजनेस सम्भाल रही थी. मैं उसे चोदना चाहता था. एक बार मुझे मौक़ा मिल ही गया.

    नमस्कार दोस्तो,
    मेरा नाम राहुल है और यह नाम बदला हुआ है. मैं 20 साल का हूँ. मेरी कद काठी बहुत अच्छी है और मैं दिखने में भी बहुत आकर्षक हूँ.

    मैं बहुत सालों से अन्तर्वासना में कहानियां पढ़ रहा हूँ.
    आज मैं अपनी सच्ची न्यूड पुसी Xxx कहानी आपके सामने लेकर आया हूं।
    यह मेरी इस साइट पर पहली कहानी है.

    हालांकि यह मेरी पहली चुदाई नहीं है, मैं इससे पहले भी एक बार सेक्स कर चुका था.
    वह सेक्स कहानी मैं किसी और दिन लिखूँगा.

    मैं जवान होते ही सेक्स का बड़ा आदी हो गया था. चूत मिलना इतना आसान नहीं होता है तो बस लड़कियों को देख देख कर मुठ बहुत मार लेता था.
    मुठ मारने से मेरे लंड का आकार भी लगभग सात इन्च का हो गया है.
    मैं हर समय किसी न किसी को चोदने की सोचता रहता हूँ.

    यह कहानी अभी कुछ समय पहले की ही है.
    उस समय मैं पढ़ाई के लिए घर से दूर रहता था.

    मुझे एक पार्ट टाइम नौकरी की तलाश भी थी क्योंकि घर वालों से पैसे मांगना मुझे अच्छा नहीं लगता था.

    जल्दी ही मुझे एक दुकान में अकान्टेन्ट की नौकरी भी मिल गई.
    मेरे कॉलेज से दुकान नजदीक होने की वजह से मैं सुबह का खाना वहीं कर लेता था.

    मेरे कॉलेज से मुझे दस बजे छुट्टी मिलती थी और कॉलेज से मेरा कमरा दूर था.
    इसलिए सिर्फ नाश्ते के लिए कमरे तक जाना मुझे सुविधाजनक नहीं लगता था.
    कॉलेज से सीधे दुकान पर ही आ जाता था.

    मैं जिस दुकान में काम करता था, उस दुकान के मालिक बहुत अमीर आदमी थे.
    मगर वे बहुत उम्र वाले बूढ़े व्यक्ति थे.

    उनका बेटा विदेश में रहता था.
    सेठ जी की एक बेटी भी थी, उनका नाम पूजा था.
    वे 35 साल की रही होंगी.

    उनका अपने पति से तलाक हो गया था इसलिए वे अपने पिता जी के साथ ही रहती थीं.
    मैं उन्हें पूजा दीदी कह कर बुलाता था जबकि वे मुझसे उम्र में लगभग दुगनी बड़ी थीं.

    उनकी बड़ी सी गांड और बड़े बड़े दूध बहुत ही मस्त लगते थे.
    वे एक मस्त सेक्सी आंटी सरीखी दिखती थीं.
    लेकिन मालकिन थीं तो मजबूरी में उन्हें दीदी कहना पड़ता था.

    दीदी के बच्चे उनके पति के साथ ही पढ़ाई करने के लिए विदेश में रहते थे.
    इधर वे अकेली ही थीं और अक्सर दुकान में आया करती थीं.

    वे मुझसे भी बहुत फ्रेन्ड्ली बात करती थीं.

    मुझे उन्हें देखते ही चोदने का मन हो गया था मगर में अभी वहां नया था इसलिए कुछ भी कर पाना संभव नहीं था.
    तब भी इतने कम समय में मैं उनसे काफी घुल-मिल गया था.

    मैं किसी मौके की तलाश में था.
    पर मुझे मौका मिल ही नहीं रहा था क्योंकि दीदी के मां बाप वहीं होते थे और उनसे अकेले में बात ही नहीं हो पाती थी.

    उन्हीं दिनों मालिक के बेटे विदेश से आए और उन्होंने मां बाप को कुछ दिनों के लिए विदेश घुमाने ले जाने का प्लान बनाया.

    उनका पूरा परिवार घूमने जाने वाला था मगर वे दुकान बन्द करके जाना नहीं चाहते थे.

    चूंकि उन दिनों बाजार में बिक्री अधिक होने वाला टाइम था तो उन्होंने सारी जिम्मेदारी मुझे सौंप दी.

    अब तक मुझे उनके यहां आए 4 महीने हो चुके थे और उनका मुझ पर भरोसा जम गया था.
    उन दिनों मेरा कॉलेज भी बंद था तो मुझे कोई दिक्कत नहीं थी.

    जब जाने की सारी तैयारी हो गई, तभी पूजा दीदी की तबियत थोड़ी बिगड़ गई और उन्होंने घूमने जाने से इंकार कर दिया.

    उनके मां बाप ने भी उनसे कहा- ठीक है, तुम भी राहुल के साथ यहीं रूक जाओ. उसे खाना भी बाहर खाने की जरूरत नहीं पड़ेगी … और तुम होगी तो हमें दुकान की भी कोई टेंशन नहीं रहेगी.
    दीदी ने भी हां कर दी और वे लोग घूमने चले गए.

    उस दिन से मैं दुकान का सारा काम देखने में बिजी हो गया.
    अब तो व्यस्तता के चलते और भी कुछ नहीं हो पा रहा था.

    लेकिन मैंने उन्हें चोदने का मन बना लिया था.

    चार दिन बाद जब मैं दुकान बंद करके घर आया तो पूजा दीदी के बारे में सोचते हुए अपना लंड हिलाने लगा.

    मैं पहले भी उनके बारे में सोचते हुए अपना लंड हिलाता था लेकिन इस बार कुछ अलग ही मज़ा आ रहा था.

    मुझमें हिम्मत भी आ रही थी कि इस बार तो कुछ भी हो जाए, उन्हें चोदना ही है.
    चाहे मुझे उसके बदले अपनी जॉब ही क्यों ना छोड़नी पड़े.

    मैं उस रात बहुत सारा पानी निकाल कर सो गया.

    अगले दिन सुबह जब मैं उठा तो हल्की हल्की बारिश हो रही थी और आसमान में काले बादल छाए हुए थे.

    मैं दुकान गया और सब साफ सफाई करके अपना काम करने लगा.

    फिर मैंने सोचा कि पूजा दीदी तो बीमार हैं और अभी तक आई नहीं, कहीं उन्हें कुछ ज्यादा दिक्कत न हो गई हो मतलब तेज बुखार न आ गया हो, तो हॉस्पिटल ले जाना पड़ सकता है.

    इसलिए मैंने उन्हें कॉल किया तो घंटी जाती रही.
    उन्होंने थोड़ी देर बाद फोन उठाया.

    मैं- हैलो दीदी आप ठीक तो है ना … आप अभी तक नहीं आईं तो मैंने सोचा कि कहीं आपकी तबियत और तो नहीं बिगड़ गई है?
    पूजा दीदी- नहीं नहीं राहुल, मैं बिलकुल ठीक हूं … और बस दुकान के लिए निकल ही रही हूँ. बाहर बारिश हो रही थी तो मुझे सुबह होने का पता ही नहीं चला. इसलिए थोड़ा ज्यादा सो गई. मैं बस आ रही हूँ.
    यह कह कर उन्होंने फोन रख दिया.

    उसके दस मिनट बाद वे आईं तो वह थोड़ी भीगी हुई थीं जिसमें वे एक खूबसूरत हसीना लग रही थीं.
    उन्होंने सलवार सूट पहना था और अपने बाल खुले छोड़े हुए थे.

    उनके भीगे बाल आगे आ गए थे और उनके मम्मों को छू रहे थे.

    यह देख कर मेरा लंड जाग उठा और मैंने उसी समय अपने हाथ से उसे जोर से मसल दिया क्योंकि तब मैं अपनी कंप्यूटर टेबल के पीछे बैठा था.
    उन्होंने मुझे वह सब करते नहीं देखा.

    उन्होंने कहा- मैं भीग गई हूँ और बहुत ठंड भी है, मैं दूध लेकर आई हूं. पहले चाय पीते हैं, ठीक है!

    यह सुनते ही मेरी नजर उनके बड़े बड़े चूचों पर चली गई जिनको उनके लहराते बाल बड़ी नजाकत से चूम रहे थे.

    मैं उनके बूब्स की तरफ देखते हुए ही बोला- ठीक है, दूध वाली चाय से थोड़ी गर्माहट मिल जाएगी.

    उन्होंने यह सुना तो मेरी नजरों को देखकर कहा- लगता है तुम बहुत ठंडे पड़े हुए थे, अब मैं आ गई हूं. मैं तुम्हें गर्म कर दूंगी.
    यह कह कर वे अपनी गांड मटकाती हुई किचन की ओर चल दीं.

    सेठ जी की दुकान में अन्दर ही एक छोटा सा किचन भी है. उधर एक रूम और बाथरूम आदि सबकी सुविधा है.

    दीदी की ऐसी बात सुन कर मेरा लंड मेरी जींस को फाड़ कर बाहर निकलने की कोशिश करने लगा.

    थोड़ी देर बाद दीदी चाय लेकर आईं और मेरे सामने झुकती हुई चाय का कप टेबल पर रख दिया.
    ऐसा करते वक्त उनकी चूचियों के बीच की घाटी का मुझे मस्त दीदार हो गया.

    मैं उनके दूधिया मम्मे देख कर एकदम से सिहर उठा.
    उनकी वासना से भरी आंखें मेरी नजरों का पीछा कर रही थीं.

    मैंने अचानक से उन्हें देखा तो मैंने झट से उनके मम्मों से नजरें हटा लीं.

    उन्होंने भी कुछ नहीं कहा … और न ही अपने मम्मों को छुपाने का कोई जतन किया.

    फिर हम दोनों बातें करते हुए चाय पीने लगे.

    उन्होंने पूछा- चाय कैसी बनी है?
    मैंने कहा- बहुत ज्यादा अच्छी बनी है … लगता है आपका लाया दूध बहुत गाढ़ा था.

    इस पर वे हंसती हुई बोलीं- हां वह तो है.

    वे फिर से अन्दर चली गईं.

    उस वक्त हल्की बारिश हो रही थी तो दुकान में कोई आ नहीं रहा था.
    फिर भी मेरा थोड़ा काम था तो मैं वह करने लगा.

    कुछ देर बाद दीदी कुछ नाश्ता बना कर ले आईं.

    हम दोनों वहीं बैठ कर खाने लगे और इधर उधर की बातें करने लगे.

    तभी अचानक से बहुत तेज बारिश शुरु हो गई.
    तेज हवा के कारण बारिश का पानी दुकान के अन्दर आ रहा था, तो मैंने दुकान का शटर बंद कर दिया.

    तभी मुझे पीछे से पूजा दीदी की चिल्लाने की आवाज आई.
    तो मैं दौड़ता हुआ अन्दर गया.

    मैंने देखा कि अन्दर बहुत सारा पानी भर गया था और पूजा दीदी उसमें फिसल कर गिर गई थीं और पानी में पूरी भीग गई थीं.

    मैं उन्हें उठाने के लिए दौड़ता हुआ गया तो मैं भी फिसल कर उनके ऊपर ही गिर पड़ा.
    हम दोनों ही पूरी तरह से भीग गए थे.

    मैं उठा और उनको भी उठाया.
    मैंने देखा कि पानी के पाइप में कुछ फंसा होने की वजह से वहां पानी भर गया था.

    अब हम दोनों ने मिल कर पहले उस फंसी हुई चीज को पाइप से निकाला और पानी साफ किया.

    लेकिन उतनी देर में हम दोनों पूरी तरह से भीग चुके थे और हमारे पास बदलने के लिए दूसरे कपड़े भी नहीं थे.

    इतना सब होने के बाद मैंने जब पूजा दीदी को देखा तो उनके सारे कपड़े भीग गए थे और उनकी कुर्ती के अन्दर की ब्रा भी साफ साफ दिख रही थी.
    उनके निप्पल भी बहुत कड़क दिख रहे थे और उनके गुलाबी होंठ ठंड से थरथरा रहे थे.

    वहां एक तौलिया पड़ा था, मैंने वह तौलिया देकर पूजा दीदी से कहा- आप पूरी भीग गई हैं और आपके कपड़े भी पूरे भीग गए हैं. अगर ज्यादा देर यही कपड़े पहनी रहीं तो आप फिर बीमार पड़ सकती हैं.
    उन्होंने कहा- मगर मेरे पास दूसरे कपड़े नहीं हैं.

    मैंने कह दिया- अरे आप ये कपड़े उतारकर सुखा लीजिए न … अभी बारिश हो रही है तो दुकान बंद ही है. कोई आएगा भी नहीं, तब तक आप इस तौलिये को पहन सकती हैं.
    उन्होंने भी हामी भरते हुए कहा- कि ठीक है, लेकिन तुम भी पूरा भीग गए हो. तुम भी अपने कपड़े उतार दो और सुखा लो … बल्कि पहले इसी तौलिये से तुम अपने आप को पौंछ लो. इसलिए जल्दी करो.
    यह कह कर दीदी ने मुझे तौलिया थमा दिया.

    अब तक मेरा लंड मेरी पैंट में टनटना रहा था और बाहर निकलने की फिराक में था.

    जब मैंने अपनी शर्ट को उतारा और पूजा दीदी की ओर चुपके से देखा.
    वे मेरी तरफ़ ही बहुत कामुक आंखों से देख रही थीं.
    ऐसा लग रहा था कि वह मेरे लंड को देखने के लिए बेताब हैं.

    मैंने भी उनकी तरफ ही मुँह करते हुए अपनी पैंट उतार दी.
    मेरा लंड अब सिर्फ मेरी चड्डी में था और बाहर से ही साफ साफ दिख रहा था.

    फूले हुए लौड़े को देख कर पूजा दीदी हैरान हो गईं और मुझे देखते ही रह गईं.

    मैं भी उन्हें अपना औजार दिखाते हुए अपने पूरे बदन को पौंछने लगा और अपनी चड्डी में हाथ डाल कर अपना लंड सीधा करते हुए दीदी की ओर देखा.
    वे मेरे लंड की तरफ ही आंखें गड़ाई हुई थीं.

    मैंने उन्हें तौलिया देते हुए कहा- लीजिए अब आपकी बारी!

    यह सुनते ही वे ऐसे चौंक गईं जैसे किसी सपने से अचानक उठी हों.
    वे मेरे हाथ से तौलिया लेकर हंसती हुई बाथरूम के अन्दर चली गईं.

    मेरा मन कर रहा था कि पीछे से जाकर उन्हें दबोच लूँ और अपना 7 इंच मोटा लंड उनकी गांड में घुसा दूँ.

    पर मैंने अपने ऊपर काबू किया और चुपके से जाकर बाथरूम के दरवाजे के छोटे से होल से देखने लगा.
    वे अन्दर अपने कपड़े उतार रही थीं.

    मैं अपना लंड जोर जोर से हिलाने लगा.
    उन्होंने अन्दर जाते ही अपनी सलवार और कुर्ती को उतार दिया.

    उनका गोरा बदन देख कर मेरे लंड ने अपना पूरा आकार ले लिया.

    पूजा दीदी को नंगी देखने का मेरा सपना सच हो रहा था.
    उन्हें सिर्फ ब्रा और पैन्टी में देखकर मैं पागल हो गया.

    उन्होंने गुलाबी रंग की ब्रा और पैंटी पहनी हुई थी और वह अपने बदन को तौलिया से पौंछ रही थीं.

    इतने में ही उन्हें कुछ हुआ, उन्होंने अपनी ब्रा भी उतार दी और अपने मम्मों को अपने दोनों हाथों से दबाने लगीं.
    उनके मम्मे ऐसे दिख रहे थे मानो दो मधुमक्खी के छत्ते लटक रहे हो और उनसे शहद टपक रहा हो.

    वे जोर जोर से अपने ही बूब्स दबाते हुए अपने ही होंठों को अपने दांतों से काट रही थीं और हल्की हल्की सिसकारियां ले रही थीं.
    फिर उन्होंने अपनी पैंटी भी निकाल दी और अपनी चूत में एक उंगली धीरे धीरे डालने लगीं.

    उनकी चूत पूरी गीली थी और उसमें कुछ कुछ बाल भी थे.
    ऐसा लग रहा था कि उन्होंने कुछ दिन पहले ही चूत की शेविंग की है.

    वे अब एक हाथ से न्यूड पुसी Xxx में उंगली कर रही थीं और दूसरे हाथ से अपने बूब्स दबा रही थीं.
    साथ ही वे अपनी चूची को उठा कर उसका निप्पल अपने मुँह में लेकर चूसने और काटने की कोशिश कर रही थीं.

    फिर अचानक से वे यह काम तेज तेज करने लगीं और ‘आह … आह … ऊह … ऊह …’ करके कराहने लगीं.
    थोड़ी ही देर में उनकी चूत ने पानी छोड़ दिया और वे उन्ह उन्ह करती हुई शांत हो गईं.

    इधर मैं भी उन्हें देखते हुए अपने लंड को जोर जोर से हिला रहा था और थोड़ी थोड़ी आवाज भी निकाल रहा था.
    दीदी के साथ साथ मैं भी झड़ गया और आज मैंने बहुत ही ज्यादा पानी निकाल दिया था.

    मैंने बाथरूम के दरवाजे के सामने ही सारा पानी गिरा दिया.
    मेरी आंखें मुंद गई थीं और मैं अपने लंड से निकलते पानी का मजा ले रहा था.
    तभी दीदी ने दरवाजा खोला और मुझे अन्दर खींच लिया.

    मैं उनके इस कदम से एकदम से सकपका गया और उसके बाद वह हुआ, जो मैं उनके लिए सोचता रहता था.
    दीदी पूरी नंगी थीं और मैं भी अपनी चड्डी से लंड बाहर निकाले हुए था.

    दीदी ने मुझे अपने बदन से चिपका लिया और हम दोनों नाग नागिन के जोड़े के जैसे एक दूसरे के साथ चुम्बन सुख लेने लगे.

    कब हम दोनों बाथरूम से बाहर आ गए और बेड पर लेट कर सेक्स का सुख लेने लगे, इसका कोइ अहसास ही नहीं हुआ.
    दीदी की चूत में मेरा लंड कड़क होकर घुस गया था और मैं उन्हें दे दनादन चोद रहा था.

    दीदी भी न जाने कब से प्यासी चूत को मेरे लौड़े में समा देना चाह रही थीं.

    कुछ देर बाद ही हम दोनों का स्खलन हो गया और तूफान निकल जाने के बाद की शांति ने हम दोनों के चेहरों पर मुस्कान ला दी.

    उस दिन मैंने दीदी के साथ और दो बार सेक्स किया और अब वे मेरे साथ सहजता से सेक्स का सुख लेने लगी थीं.

  • पड़ोसी आंटी को चोदा बीयर पिलाकर

    देसी आंटी सेक्स कहानी तब की है जब मैं गुड़गांव में रहता था, एक प्राइवेट कम्पनी में काम करता था.

    मैं जिस बिल्डिंग में रहता था, पास में एक अंकल और आंटी भी किराए पर रहने आये.

    एक दिन मेरी नज़र आंटी पर गयी. मस्त भरे मम्मे. उभरी गांड देखकर बुड्ढा भी लंड खड़ा कर ले.
    मेरा भी लंड खड़ा होने लगा.

    मैं अपने रूम में आ गया लेकिन उसका बदन मेरे सामने था जैसे!
    मेरा लौड़ा खड़ा हो गया और मैंने धीरे धीरे सहलाना शुरू कर दिया.

    उसे याद करके लंड हिलाने लगा और झटके मारने लगा थोड़ी देर में मेरा पानी निकल गया.
    अब मैं सोचने लगा कैसे इसको चोदा जाए.

    फिर मैंने धीरे धीरे उनसे नजदीकियां बढ़ाना शुरू कर दिया और हमारी दोस्ती हो गयी.

    एक दिन मैं कम्पनी ऑफिस से रूम पर आया.
    तभी अंजुमन आंटी ने आवाज़ दी.
    मैं रूक गया.

    वो बोली- राज, रात का खाना मेरे रूम में खा लेना आज. मैंने अंडे बनाए हैं.
    मैं बोला- हां आंटी, ठीक है.
    और मैं अपने रूम में आ गया।

    मैं बहुत खुश था कि देसी आंटी सेक्स का मौक़ा मिल सकता है.

    मैंने तुरंत एक प्लान बनाया.
    मैं बाजार गया, 4 बोतल बीयर, कंडोम और सैक्स की गोलियां लाया.

    मैंने लोवर के अंदर अंडरवियर नहीं पहना और पूरी तैयारी से नीचे आ गया.

    नीचे आया तो देखा अंजुमन आंटी भी दुल्हन के जैसे तैयार थी.
    मैंने पूछा- आंटी, कहीं शादी में जा रही हो क्या?
    और मैं मन ही मन दुखी हो गया कि आज का प्लान बेकार हो गया।

    वो बोली- नहीं, आज मेरा जन्मदिन है. लेकिन तेरे अंकल काम से नोएडा गये हैं.
    और रोने लगी.

    मैंने मौका देखकर उसको पकड़ा और बोला- आंटी, आप रोना बंद करो. मैं मनाऊंगा आपका जन्मदिन!
    और मैं जल्दी से केक ले आया.

    आंटी ने केक काटा, मुझे खिलाया और मैंने उनको!
    उन्होंने एकदम से मुझे अपने सीने से लगा लिया और बोली- थैंक्स राज!
    मैंने कहा- पार्टी तो बाकी है.
    और मैंने बैग से बीयर निकाली.

    पहले आंटी मना करने लगी लेकिन मेरे बोलने से मान गयी.
    हमने 2 बोतल खाली कर दी.

    अब आंटी को नशा होने लगा. मैंने धीरे से गोली निकाली और पैग मैं डाल दी और वो गटागट पी गयी.
    थोड़ी देर में गोली ने अपना काम शुरू कर दिया.

    फिर एक गोली मैंने खा‌ ली तीसरी बोतल भी खाली कर दी.

    अब आंटी के बदन में आग जलने लगी, आंटी बोली- राज, मेरा गिफ्ट कहां है?
    मैं चुप हो गया क्योंकि जल्दी जल्दी में गिफ्ट लाना भूल गया था.

    मैं चुप था तो वो बोली- क्या हुआ?
    तो मैं बोला- गिफ्ट कल मिल जाएगा. क्या चाहिए बोलो?
    वो बोली- आज जन्मदिन है तो गिफ्ट भी आज लूंगी.

    मैंने एकदम से उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और चूसने लगा.
    थोड़ी देर बाद वे दोनों अलग हो गये.

    वो बोली- ये नहीं … मुझे मेरा गिफ्ट चाहिए.
    और एकदम से लोवर के उपर से ही लंड को पकड़ कर बोली- दो मेरा गिफ्ट!

    मैं चौंक गया और कुछ ना बोला.
    उसने मेरे लोवर के अंदर हाथ डाल दिया.

    जैसे ही उसने मेरे लौड़े को अपने हाथ में लिया, मेरे शरीर में करंट दौड़ने लगा और मैंने उसके बूब्स दबाने शुरू कर दिए; उसकी साड़ी अलग कर दी और उसको लेकर बिस्तर में आ गया.

    अब आंटी के बूब्स बाहर आने को बैचेन थे. मैंने उसका ब्लाउज और ब्रा अलग किये तो उसके पके आम मेरे हाथ में आ गये और मैं चूसने लगा.
    वो भी धीरे धीरे मेरे लौड़े को सहलाने लगी.
    उसने मेरी लोवर उतार दी और मेरे लौड़े से खेलने लगी.

    मैं उठा और उसकी छाती पर बैठ गया और लन्ड को उसके होंठों पर रगड़ने लगा.
    उसने लन्ड को तुरंत मुंह में लिया और लोलीपॉप के जैसे चूसने लगी जैसे बहुत दिनों से प्यासी हो.

    और मैं झटके मारके उसका मुंह चोदने लगा. वो लंड को लोलीपॉप के जैसे मस्त हो कर चूस रही थी.

    अब दोनों बहुत गर्म हो चुके थे.
    मेरे शरीर में अकड़न हुई और लंड का पानी निकल गया. उसने गटागट करके पी लिया.
    मैं थोड़ी देर लंड मुंह में डाले लेटा रहा.

    उसके बाद मैं उठा और उसका पेटीकोट उतारा तो उसने भी पैंटी नहीं पहनी थी.
    आंटी की चूत बिल्कुल चिकनी थी जैसे उसने आज ही बाल साफ़ किए हों.

    मैंने बिना देर किए अपने होंठ उसकी मखमली गुलाबी चूत में रख दिए और धीरे धीरे चाटने लगा.
    वो सिसकारियां भरने लगी.

    मैंने जैसे ही जीभ घुसाई, वो चिल्लाने लगी.

    अब मैंने जल्दी जल्दी जीभ चलाना शुरू कर दिया.
    वो मचलने लगी, बोली- राज, मेरी चूत को खा जा! ये तेरे लिए कब से तड़प रही थी.
    मैं चौंक गया.

    अब मेरा जोश दुगुना हो गया और जोर जोर से आंटी की चूत चाटने लगा.
    वो उईई आआहह सीईई की आवाज निकालने लगी.

    थोड़ी देर बाद अंजुमन आंटी की चूत से नमकीन पानी निकलने लगा और मैं पी गया.

    फिर मैं उठा और कंडोम निकाला.
    आंटी ने मेरा हाथ पकड़ लिया और बोली- राज, आज मेरा जन्मदिन है आज मेरी चलेगी.

    उन्होंने कंडोम वापस रखवा दिया.
    वो बोली- पूरे 7 माह हो गये मेरी चूत में लन्ड नहीं गया. मैं कबसे तड़प रही थी लेकिन मौका नहीं मिला. उस दिन जब तुम अपने कमरे में मेरा नाम लेकर मुठ मार रहे थे तो मेरा मन किया था कि मैं आ जाती. पर डरती थी. आज मौका मिला है.
    इतना बोलकर आंटी लंड चूसने लगी.

    अब मेरे लौड़े में करंट दौड़ने लगा.
    मैं उससे बोला- कंडोम तो लगाने दो.
    वो बोली- नहीं.
    मैं भी क्या करता!

    मैंने कहा- रूको, और लंड में केक लगा लिया.
    आंटी उसे मुंह में लेकर चूसने लगी और पूरे लंड को गीला कर दिया.

    आंटी को लिटाकर मैंने उनके चूतड़ों के नीचे तकिया लगाया और चूत में लन्ड रगड़ने लगा.
    वो सिसकारियां भरने लगी और बोली- राज, आज की रात को यादगार बना दो. अब तड़पाओ नहीं … अपना लौड़ा मेरी चूत में घुसा दो.

    मैं बोला- आंटीजी, आपने मुझे बहुत तड़पाया है.
    तो वो बोली- आंटी नहीं अंजुमन बोलो राज!

    मैंने एकदम से झटके से लंड उसकी मखमली चूत में घुसा दिया और अंजुमन की चीख और आंसू निकलने लगे.

    अब मैंने लंड को बाहर किया और एक झटके से पूरा घुसा दिया.
    उसकी चीख निकल पड़ी.

    मैंने धीरे से उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और शांत हो गया.
    थोड़ी देर बाद जब अंजुमन के शरीर में हरक़त होने लगी तो मैंने लंड को चलाना शुरू कर दिया.

    अंजुमन 7 माह से चुदी नहीं थी तो उसकी चूत एकदम टाइट थी.
    मेरे लौड़े के हर झटके से उसकी सिसकारी तेज़ होने लगी.

    अब मैं तेज़ तेज़ झटके मारने लगा.
    अंजुमन बोली- चोदो राजा, मेरी प्यासी चूत की आज प्यास मिटा दो.

    मेरे लौड़े को और जोश आ गया.
    पूरे कमरे में पच्च पच्च फच्च फच्च उईई आआहह उईई सीईई की आवाज तेज होने लगी.

    अंजुमन की चीख के साथ पानी निकल गया. मेरा लौड़ा गर्म पानी से और टाइट हो गया.

    अब मैंने उसे अपने लौड़े पर बैठने को कहा.
    उसने लंड को अपने मुंह में लेकर थूक से गीला कर दिया और वो मेरे लौड़े पर आ गई.

    जैसे ही उसने चूत को लंड पर रखा, लंड सट्ट से अंदर घुस गया और अंजुमन की चीख निकल पड़ी.
    मैंने बिना रूके झटके मारने शुरू कर दिया.
    वो बोली- राज फ़ाड़ दे मेरी चूत!
    और लंड पर उछलने लगी.

    मैंने अपनी रफ़्तार बढ़ा दी और फच्च फच्च उईई आआहह उईई आआहह उईई आआहह की आवाज तेज हो गई.
    मेरे दोनों हाथ उसके बूब्स पर थे और वो लंड के घोड़े पर सवार होकर जन्नत पहुंच गई थी.
    आंटी की चूत ने पानी छोड़ दिया और मेरा लौड़ा गर्म पानी से भीग गया; फच्च फच्च फच्च फच्च की आवाज होने लगी.

    गोली के असर से मेरे लौड़े ने पानी नहीं छोड़ा.

    मैंने अंजुमन को बेड के नीचे किया और खड़ा हो गया.
    वो लंड मुंह में लेकर चूसने लगी और लन्ड को तैयार करके घोड़ी बन गई.

    मैंने उसकी मखमली चूत में थूक लगाया और लंड डालकर चोदने लगा.

    आंटी बोली- राज, यह मेरी लाइफ का सबसे अच्छा गिफ्ट है.
    मैं खुश हो गया और लन्ड को तुरंत चौथे गियर में डाल दिया और फुल स्पीड से उसकी चुदाई करने लगा.

    थोड़ी देर बाद मैंने अंजुमन को बेड पर लिटा दिया और उसकी टांगों को अपने कंधे पर रख दिया. फिर मैंने चूत में लन्ड घुसा दिया और धीरे धीरे झटके मारने लगा.

    अब दोनों थकने लगे थे, उसने नीचे से गांड चलाना शुरू कर दी. दोनों की सिसकारियों से कमरा गूंजने लगा और सांसें तेज होने लगी.

    मैंने कई औरतों, लड़कियों को चोदा लेकिन जो मजा आज अंजुमन ने दिया, ऐसा कभी नहीं मिला।

    अब अंजुमन के पैर नीचे कर दिए और मैं ऊपर आ गया.
    आज मेरा लौड़ा झड़ने का नाम नहीं ले रहा था.

    अंजुमन ने फिर से पानी छोड़ दिया मैंने भी झटकों की रफ्तार बढ़ा दी मैं तो जैसे स्वर्ग में था।

    अब धीरे धीरे मेरे शरीर में अकड़न होने लगी.
    मैं बोला- अंजुमन, मेरा निकलने वाला है.
    तो वो खुश हो गई और उसने अपनी गांड चलाना शुरू कर दी.

    आंटी बोली- राज अंदर पानी छोड़ना!
    और उसने मुझे कसकर अपनी बांहों में भर लिया और हम दोनों जोर जोर से झटके मारने लगे.

    एकदम से मेरी आंखें बंद होने लगी और लंड से निकलकर आग अंजुमन की चूत में भर गई.
    फिर हम दोनों वैसे ही पड़े रहे, दोनों को बहुत खुशी थी क्योंकि दोनों को आज जन्नत का मज़ा मिला।

    हम दोनों एक साथ बाथरूम गये और मैं उसको गोद में लेकर वापस आया।

    उस रात हमने 4 बार चुदाई की.

    फिर जब भी हमें मौका मिलता हम दोनों एक हो जाते।
    मैंने आंटी की गान्ड भी मारी. वो अगली कहानी में!

  • घर बुलाकर गर्लफ्रेंड की चुदाई

    मेरी एक गर्लफ्रेंड थी लेकिन दूसरे शहर की … हम फोन पर खूब बातें करते. हमारा मिलने का मन था लेकिन हम मिल नहीं पा रहे थे. जब हम मिले तो …

    हैलो फ्रेंड्स, कैसे हैं आप लोग. मेरा नाम रूबल शर्मा है और मैं बांदा उत्तर प्रदेश का रहने वाला हूँ. मैं देखने में साधारण ही हूँ. औसत बॉडी है.

    अन्तर्वासना पर ये मेरी पहली सेक्स स्टोरी है गर्लफ्रेंड की चुदाई की. चूंकि पहली बार है इसलिए ग़लती हो जाना पक्का है. प्लीज़ नजरअंदाज कर दीजिएगा.

    ये कहानी आज से 2 साल पहले की है, जब मैं अपना ग्रॅजुयेशन कर रहा था. उन दिनों मेरी एक गर्लफ्रेंड थी, जिसका नाम नम्रता था. वो ग्वालियर से थी, देखने में थोड़ी सी सांवली थी, लेकिन थी सेक्सी.

    हम लोग फोन बार खूब बात किया करते थे. उसका मुझसे मिलने का बड़ा मन था और मुझे तो था ही. लेकिन हम दोनों के मिलने का कुछ नहीं हो पा रहा था.

    एक बार मेरे घर में शादी थी, तो सब लोगों को दिल्ली जाना था. मेरा मन नहीं था. तो मैं घर में ही रुक गया.

    उस दिन जब मेरी उससे बात हुई और मैंने उससे अपने यहां आने का कहा. पहले तो वो थोड़ा डर गयी, लेकिन फिर मेरे कहने पर मान गयी.
    उसने अपने घर में कह दिया कि कॉलेज का ट्रिप है, तो बाहर जाना है.

    मैंने उसका रात वाली गाड़ी से रिज़र्वेशन भी करा दिया. रात को गाड़ी आई, तो उसे लेने मैं स्टेशन आ गया. वहाँ से उसको लिया और अपने घर ले आया. रास्ते में वो मुझसे चिपक कर बैठी थी.

    घर ले आने के बाद मैं उसे अपने कमरे में ले गया और उसे बिठा दिया. उसका गला सूख रहा था, तो उसने मुझसे पानी मांगा. मैंने उसे पानी पीने को दिया.

    वो अभी भी डर रही थी. मैं उसके बाजू में ही बैठा था. हम दोनों इधर उधर की बातें ही कर रहे थे. थोड़ी देर बाद वो नॉर्मल हुई, तो मैंने उससे बात करते करते उसके बाल खोल दिए.

    वो शर्मा गयी और उसने मेरे कंधे पर अपना सिर रख लिया. मैंने उसके सर को उठाया और किस करने लगा. उसने आँखें बंद कर लीं.

    थोड़ी देर किस करने के बाद मैंने उसे बेड पर लिटा दिया और उसके ऊपर आकर उसे किस करने लगा. उसने भी मुझे अपने से चिपका लिया.

    मैंने उसे हाथ ऊपर करने वो कहा, तो उसने हाथ ऊपर कर लिए. मैंने उसकी कुरती उतार दी. अन्दर उसने एक छोटी सी गुलाबी रंग की ब्रा पहनी हुई थी.

    मैंने एक पल उसकी ब्रा में कैद उसकी चुचियों को निहारा और अगले ही पल उसकी पूरी बॉडी पर किस करने लगा. मेरे ताबड़तोड़ चूमने से उसकी सांसें तेज हो गईं और वो भी बहकने लगी.

    जब मैंने उसकी नाभि में जीभ घुमाई, तो वो तड़प उठी और उसने मेरा सिर दबा लिया. मैं धीरे धीरे किस करता हुआ नीचे आया और उसकी सलवार भी उतार दी. मेरे सामने वो ब्रा पेंटी में थी और शर्मा रही थी. उसकी पेंटी गीली हो गयी थी.

    मैंने झुक कर चुत को भी चूम लिया. चुत पर मेरे होंठों की छुअने पाते ही उसके मुख से एक सिसकारी निकल गयी.

    अब मैं खड़ा हुआ और मैंने अपनी चड्डी छोड़ कर सारे कपड़े उतार दिए. मैंने उसको भी खड़ा कर दिया. उसके पैर काँप रहे थे, तो मैंने उसे सहारा दिया और उसे चूमते हुए दीवार से चिपका दिया और उसकी पीठ पर किस करने लगा.

    वो ‘आहह आहह’ करते हुए आहें भर रही थी.

    इसी बीच मैंने उसकी ब्रा और अपनी चड्डी को उतार दिया. वो अभी भी दीवार से लगी हुई थी, तो मैं भी पीछे से जाकर उससे चिपक कर उसकी गर्दन और कंधे पर किस करने लगा. मेरा लंड उसकी गांड में गड़ने लगा. वो लंड का स्पर्श पाकर एकदम से चिहुंक गई.

    मैंने उसको सीधा किया, तो उसने अपनी आँखें बंद की हुई थीं. मैंने उसका हाथ अपने लिंग पर रखते हुए कहा- ये ले तेरी अमानत.
    लंड छूते ही वो शर्मा गयी और उसने झट से हाथ हटा लिया.

    अब मैं उसके मम्मों को चूसने लगा और वो ‘आह आआअहह आआ…’ करते हुए सिसकारियां लेने लगी.

    एक बार मैंने उसके निप्पल को काट लिया, तो वो ‘आउच …’ बोल कर बोली- आराम से चूसो … ये अब सिर्फ़ तुम्हारे ही हैं.

    फिर मैंने अपना हाथ उसकी पेंटी में डाल दिया और उसकी चूत सहलाने लगा उसकी चूत पर थोड़े से बाल थे.

    मैंने उसकी टाँगें खोल दीं और पेंटी उतारने लगा.
    उसने मेरा हाथ पकड़ लिया.
    मैंने पूछा- क्या हुआ जानू … अब कैसी शर्म? अब तो सब कुछ मेरा है ना!

    उसने हंस कर हाथ हटा दिया. मैंने उसकी पेंटी उतारी, तो उसकी चूत पूरी गीली हो गयी थी. मैंने चुत पर हाथ लगाया तो वो ‘उई … माँ … सीईईई..’ कर उठी.

    मैं नीचे बैठ कर उसकी चूत चाटने लगा. वो तड़प उठी और ‘उफफफ्फ़ आआहह … सीईईईई.’ करने लगी. उसने अपने हाथों से मेरे सिर को अपनी चूत पर दबा लिया. मैं बेतहाशा उसकी चूत चाटे जा रहा था.

    वो लगातार ‘उम्म्म्म … अहहहह … आराम से.’ बोलते हुए सिसकारती जा रही थी. मैंने कुछ पल बाद उसका एक पैर अपने कंधे पर रखा और उसकी चूत पूरी अन्दर तक और पूरी पीछे तक चाटने लगा. मेरे मुँह में उसकी झांटों के बाल आ रहे थे, लेकिन चुत चाटने में मज़ा भी बहुत आ रहा था.

    कोई पांच मिनट तक चुत चाटने के बाद मैं उसको बेड पर ले आया और लिटा दिया. मैंने उसकी टाँगें खोल दीं और मैं उसकी चूत में उंगली डालने लगा, तो उसे तकलीफ़ होने लगी. उसकी चूत बहुत टाइट थी.

    मैंने पास रखी वैसलीन लगाई और फिर कोशिश करने लगा. इस बार मेरी आधी उंगली अन्दर चली गयी.

    वो तड़प उठी और बोली- बस करो, इतना ही रहने दो.
    मैंने कहा- जानू अभी तो आधी ही अन्दर गयी है … अभी तो मैं इसमें पूरा हाथ भर का अपना अन्दर डालूँगा.
    इस पर वो बुरी तरह से शर्मा गयी और बोली- तुम ना बहुत बदतमीज़ हो.

    उसकी इस बात से मुझे हंसी आ गयी और मैंने उसे किस कर लिया. मैं उसके ऊपर लेट गया और हमने एक दूसरे को कसके चिपका लिया.

    एक पल बाद मैं उठ कर चुदाई की पोजीशन में आया और मैंने उसे ऊपर से नीचे तक देखा.
    वो शरमा कर बोली- ऐसे क्या देख रहे हो?
    मैंने कहा- तू बहुत खूबसूरत है.
    वो शर्मा गयी.

    उसने पूछा- क्या मैं कपड़ों में खूबसूरत नहीं लगती हूँ?
    मैं हंस दिया और अपनी बात को पलटते हुए बोला- यदि तुम कपड़ों में खूबसूरत नहीं दिखतीं तो हम दोनों में प्यार कैसे हो सकता था.
    वो हंसी और बोली- तो अभी ये बात कहने का क्या मतलब है?
    मैंने उसकी चूची मसली और कहा कि मेरा मतलब ये था कि तुम पूरी नंगी होने पर और भी खूबसूरत लग रही हो.

    उसने समर्पण की मुद्रा में अपने दोनों हाथ फैला कर मुझे आगे बढ़ने का इशारा किया.

    मैंने धीरे धीरे उसकी टाँगें खोलीं और अपना लंड उसकी चूत के मुहाने पर रख कर घिसने लगा. उसकी चूत पानी छोड़ रही थी.
    उसने आँखें खोलीं और कहा- जानू आराम से करना … मेरा पहली बार है.
    मैंने कहा- चिंता मत करो बिल्कुल तकलीफ़ नहीं होगी.

    मैंने धीरे धीरे लंड घिसते हुए एक झटका मारा और मेरा लंड उसकी चूत में घुस गया.

    उसी पल वो चिल्ला दी- उई … माँ … मर गई … आआहह … फट गई … मैं मर गयी.

    मैं उसके ऊपर झुक गया और उसे किस करने लगा. उसके मम्मों को चूसने लगा. वो शांत हुई ही थी कि मैंने थोड़ा रुक कर एक और झटका दे मारा. इस बार मेरा पूरा लंड उसकी चूत में समा गया.

    उसकी चूत में से खून निकल रहा था और आँखों में से आँसू बह रहे थे. मैंने उसे सहलाते हुए कहा- बस हो गया जानू …
    अब मैं धीरे धीरे शॉट्स मारने लगा. थोड़ी देर में उसको मज़ा आने लगा और वो भी गांड उठा उठा कर मेरा साथ देने लगी.
    मैं दनादन धक्के मार रहा था और वो ‘आआह … अहह … मजा आ रहा है … और तेज करो …’ बोल रही थी.

    कोई बीस मिनट बाद हम दोनों ही झड़ गए. मैं उसके ऊपर गिर गया. उसने मुझे कसके चिपका लिया और ऐसे ही किस करते हुए हम एक दूसरे की बांहों में सो गए.

    उस रात हम दोनों ने चार बार सेक्स किया और सुबह देर तक सोने के बाद हम दोनों साथ ही नहाये और बाथरूम में भी एक बार सेक्स किया. फिर मैं उसे मोहल्ले वालों की नजर से बचाते हुए स्टेशन छोड़ कर आ गया.

    दोस्तो, ये थी मेरी गर्लफ्रेंड की सील तोड़ चुदाई … आपको मेरी ये गंदी कहानी कैसी लगी 

  • मेरी गर्लफ्रेंड की चुत की कहानी

    मैं अपनी कुंवारी गर्लफ्रेंड की चुत की कहानी बता रहा हूँ कि कैसे मैंने उसे पटाकर गर्लफ्रेंड बनाया और लम्बे अरसे तक रोमांस के बाद मैं उसकी चूत की सील तोड़ पाया.

    दोस्तो, मेरा नाम रजा है, मेरी उम्र 21 साल है, और मैं मुरादाबाद के पास सम्भल नामक कस्बे से हूँ। मेरी हाईट 5 फीट 10 इंच है, मेरा लण्ड 7 इंच लम्बा और 3.5 इंच मोटा है। मैं शहर का रहने वाला हूँ और देखने में अच्छा हूँ।

    यह मेरी पहली सैक्स स्टोरी है जो मैं आप सब लोगों को बताने जा रहा हूँ, यह एक सच्ची घटना है।

    मैं अपनी गर्लफ्रैंड के बारे में बता दूँ, उसका नाम ज़ेबा है, उसका रंग बिल्कुल दूध से सफेद है। उसका फिगर 32-34-36 है। अदाएँ ऐसी की हर कोई पागल हुआ फिरता था, लेकिन वह बुर्के में रहती थी, वह दिखने में बिल्कुल फिल्मों की हीरोइन लगती थी।
    बात 2 साल पहले की है, वह मेरे साथ ग्रेजुएशन के दूसरे साल में थी।

    जब पहली बार वह ट्यूशन पर पढ़ने आयी तो मैं तो उसको देखता ही रह गया, क्या क़ातिल लग रही थी वह!
    पहले ही दिन वह मुझको पसंद आ गयी, मैंने दिल में सोच लिया था कि इसको गर्लफ्रैंड बनाना ही है।

    फिर 2 दिन बाद वह दूसरे ट्यूशन पर भी साथ हो गयी, मेरी तो मानो जैसे लॉटरी ही लग गयी। फिर 4 या 5 दिन हुए थे कि वह मेरे साथ तीसरे ट्यूशन पर भी आ गयी, मुझको तो यकीन ही नहीं हो रहा था.
    मैंने सोचा कि लगता हूँ ऊपरवाला भी मेहरबान है जो यह मेरे साथ 3 ट्यूशन पर है।

    दिन गुज़रे तो मैंने उसकी 1 सहेली से कहा कि मुझको यह पसंद है, तू मेरी बात कर दे इससे एक बार!
    तो उसकी सहेली मान गयी, उसने उससे अलग में जाकर कह दिया।

    अब यहाँ हमारी डर के मारे गांड फट रही थी, उसने कुछ कह तो नहीं लेकिन 3 दिन के बाद मुझको कॉल की और अपना नाम बताया.
    फिर कहने लगी- मैं ऐसी लड़की नहीं हूँ, तुम मुझे छोड़ दो. तुमको तो बहुत मिल जाएंगी।
    मैंने उससे कुछ नहीं कहा।

    दिन गुज़रते गए हम साथ में पढ़ते रहे, फिर ग्रेजुएशन में उसका एक दिन व्हाट्सएप पर मैसेज आया, मुझको तो यकीन ही नहीं हो रहा था, हम दोनों की बात शुरू हुई. 2 महीने बात हुई, हम कई बार मिले भी! हम सेक्स की बातें भी करते थे.
    इस तरह हमारा रोमांस चलता रहा लेकिन चुत मिलने की कहानी हमेशा दूर लगती रही थी.

    फिर वह एक स्कूल में पढ़ाने लगी थी। अब मेरे दिल में उसको चोदने की इच्छा हुई। पहले मैंने उससे चुदाई की बातें मोबाइल पर करनी शुरू की। अब वो समझ चुकी थी कि मैं उसे चोदना चाहता हूँ.

    एक दिन मैंने उसको कॉल की तो वह कहने लगी- मैं स्कूल में हूँ, और बच्चों के एग्जाम चल रहे हैं, जल्दी छुट्टी हो जाएगी.
    तो मैंने कहा- मुझको मिलना है.
    तो वह तैयार हो गयी.

    मैं छुट्टी के टाइम उसके स्कूल चला गया और उसको वहां से ले आया., हमारे पास मिलने के लिए जगह नहीं थी तो मैं उसको अपनी नानी के घर ले गया.
    मेरे मामू अपने काम पर गए हुए थे तो मैं उसको बैठक में ले गया।

    मैं अपने साथ कॉन्डोम ले कर गया था. पहले तो हमने ऐसे ही कुछ बातें की, फिर मैंने उससे कहा- मुझको किस करना है.
    पहले तो वह मना करने लगी लेकिन मैंने ज़्यादा कहा तो वह मान गयी।

    मैंने उसके होंठो से अपने होंठ लगा दिए. यह हमारा पहला किस था. हम दोनों किस में ऐसे खोये कि 10 मिनट तक किस ही करते रहे।

    उसके बाद उसने अपना मुंह हटा लिया और कहने लगी- बहुत ज़िद्दी हो … हो गयी इच्छा पूरी? अब मैं जाऊँ?
    मैंने कहा- अभी कहाँ … अभी तो बहुत कुछ बाकी है.

    तो वह समझ गयी और कहने लगी- यह सब नहीं!
    लेकिन मैंने फिर से ज़िद की और वह मान गयी।

    मैंने फिर से उसको किस करना शुरू किया, इस बार दोनों ही मूड में आ गए। मैंने किस करते हुए एक हाथ उसके दूध पर रख दिया और बुर्के के ऊपर से ही सहलाने लगा. जब उसने कुछ नहीं कहा तो मैंने हिम्मत करके हाथ उसके कपड़ों के अंदर घुसा दिया.

    वह ब्रा पहने हुए थी, मैं ब्रा के ऊपर से ही सहलाने लगा। उसको भी मज़ा आ रहा था, ऊके साथ यह सब पहली बार हो रहा था, फिर मैंने किस छोड़कर उसके कपड़े उतारे तो वह मना करने लगी, मैंने उसके कपड़े उतार दिये, उसके बदन पर बस ब्रा और पैंटी ही बची थी।

    मैं उसको फिर से किस करने लगा, वह भी मेरा साथ देने लगी।
    किस करते हुए मैंने उसकी ब्रा का हुक खोल दिया, उसके 32 के चूचे मेरे सामने आज़ाद हो गए, मैंने जैसे ही उनको अपने हाथ में ले कर मसला तो वह सिहर उठी, उसको मज़ा आने लगा था.

    मैं उसके होंठ छोड़कर उसके चूचों पर आ गया और मुँह में लेकर चूसने लगा. वह तो मेरी इस हरकत से मदहोश होने लगी, तड़पने लगी.

    मैं चूचे चूसते हुए ही उसकी पेन्टी में हाथ घुसाने लगा. जैसे ही मेरा हाथ उसकी चूत पर गया तो मानो उसको करंट लग गया हो, वह उछल गयी और मुझसे लिपट गई।

    मैंने देर न करते हुए उसकी पेन्टी भी उतार दी और उसकी चूत को अपने हाथ से रगड़ने लगा, वह मदहोश हुए जा रही थी।

    फिर मैंने अपने सारे कपड़े उतारे और आ गया उसके ऊपर!
    मैंने अपने लण्ड पर कंडोम चढ़ाया, उससे पूछा- डाल दूँ?
    तो वो कहने लगी- देर मत लगाओ … बस जल्दी से डाल दो.

    मैंने उसकी चूत को हल्का सा खोला और लण्ड का टोपा उसकी चूत के मुंह पर रखा.
    अब वह डरने लगी तो मैंने उसे समझाया कि कुछ नहीं होगा.

    मैं उसे किस करने लगा, किस करते हुए मैंने एक जोरदार झटका मारा, तो मेरा लण्ड उसकी चूत को चीरता हुआ आधा अंदर चला गया.
    वह जोर से चिल्लायी ‘उम्म्ह … अहह … हय … ओह …’ रोने लगी, कहने लगी- मुझे छोड़ दो, बहुत दर्द हो रहा है, मैं मर जाऊँगी.
    मैं रुक गया और उसको किस करने लगा।

    जब वह थोड़ी नार्मल हुई तो मैंने आराम आराम से अंदर बाहर करना शुरू किया, फिर अचानक से ज़ोर का झटका मारा और पूरा लण्ड अंदर घुसा दिया, वह फिर से तड़पने लगी।
    फिर मैं आराम से अंदर बाहर करने लगा।

    अब उसको भी थोड़ा सुकून मिल गया था, उसको भी मज़ा आने लगा.
    मैंने उसकी टाँगें उठाकर अपने काँधे पर रखी और फिर से चुदाई चालू कर दी।

    5 मिनट की चुदाई के बाद मैं झड़ गया और उसके ऊपर ही लेट गया।

    उसे लगा कि उसकी चूत से कुछ बह रहा तो उसने अपनी चूत में हाथ लगा कर देखा तो उसे पता कि वो खूँ है.
    वह कहने लगी- जान, मेरी चूत से खून निकल रहा है, क्या करूँ?

    मैं कपड़ा लाया, उसका खून साफ किया और उसको फिर से किस करने लगा.

    वह कहने लगी- जान, देर हो रही है, घर पर अम्मी इंतज़ार कर रही होंगी, अब जाने दो, अब तुम्हारी इच्छा पूरी हो गयी।
    मैं कहने लगा- अभी तो बस एक राउंड हुआ है.
    तो वो कहने लगी- अब फिर कभी कर लेना, अब तो यह तुम्हारी ही है।

    मैंने उसको अपने हाथों से कपड़े पहनाये और उसको भेज दिया।

    दोस्तो, यह थी मेरी गर्लफ्रैंड की सील तोड़ चुदाई! उम्मीद है आपको चुत की कहानी पसंद आई होगी.
    अगर ग़लती हुई हो तो माफ करना।

    .

  • भाभी की चूत को उसके मायके में जाकर चोदा


    कैसे हो दोस्तो? मैं आपके लिए पड़ोसन भाभी की चूत की एक कहानी लेकर आया हूं. उससे पहले मैं अपने बारे में कुछ बता देता हूं. मेरे दोस्त मुझे प्यार से योगू बुलाते हैं. मैं एक 26 साल का सेक्सी, हैंडसम और अच्छे घर का लड़का हूं. जब से मैं जवान हुआ हूं मेरा लंड मुझे चैन से नहीं बैठने देता है. मैं रोज ही अपने लंड को हिलाता हूं. इसकी प्यास बुझती ही नहीं है. मुझे चुदक्कड़ आंटियां और प्यासी भाभियां बहुत पसंद हैं.
    यह बात उन दिनों की है जब मैं बस से कॉलेज जाया करता था. आप सब तो जानते ही हैं कि सुबह के टाइम पर बसों में कितनी भीड़ होती है. मैं हमेशा की तरह अपने कॉलेज जा रहा था. उस दिन मेरे साथ ही मेरे पड़ोस की एक भाभी भी उस बस में चढ़ गई. बस में काफी भीड़ थी.
    भाभी ने मेरी तरफ देखा और मैंने भाभी की तरफ. हम दोनों पास में ही खड़े हुए थे. फिर कुछ दूर चलने के बाद बस में और ज्यादा लोग चढ़ गये. अब बस बिल्कुल खचाखच भर गई. भाभी की मोटी गांड मेरे लंड से आकर सट गई. जैसे ही मुझे इस बात का अहसास हुआ कि भाभी की गांड मेरे लंड से सट चुकी है तो मेरा लंड मेरी पैंट में खड़ा होना शुरू हो गया.
    मैंने हल्का सा जोर लगा कर अपने लंड को भाभी की गांड की दरार पर मसल दिया. भाभी ने पीछे मुड़ कर देखा. एक बार तो मैं डर गया कि शायद भाभी गुस्सा हो गई होगी. लेकिन उसने मुझे देख कर एक स्माइल दी और फिर मुझसे कहा- मेरे बैग को ऊपर रख दो.
    मेरी जान में जान आई कि भाभी गुस्सा नहीं हो रही थी.
    मैंने भाभी के बैग को ऊपर सामान रखने की जगह पर रख दिया. फिर भाभी आराम से खड़ी हो गई.
    हम दोनों में बातें होने लगी.
    मैंने भाभी से पूछा कि वो कहां जा रही है तो भाभी ने बताया कि वो अपने मायके जा रही है.
    भाभी अकेली ही थी इसलिए मुझे भी कोई डर नहीं था. बीच बीच में जब धक्के लगते थे तो भाभी मुझसे बिल्कुल चिपक जाती थी. ऐसा करते करते मेरे लंड का तन कर बुरा हाल हो गया.
    फिर मैंने महसूस किया कि भाभी भी अपनी गांड मेरे लंड पर धकेल रही थी. वो अपनी गांड की दरार को मेरे लंड पर सटा कर पीछे की तरफ दबाव बना रही थी. मैं भी बदले में अपने लंड को उनकी गांड की दरार में पूरा का पूरा घुसाने की कोशिश करने लगा. बहुत मजा आ रहा था. मन कर रहा था अभी भाभी को नंगी करके चोद दूं लेकिन जैसे तैसे मैंने खुद को कंट्रोल करके रखा हुआ था.
    हम दोनों आपस में बातें करते हुए ऐसे दिखा रहे थे कि सब कुछ नॉर्मल ही हो रहा है.

    उसके कुछ पल के बाद भाभी ने अपना हाथ धीरे पीछे ले जाकर मेरे लंड को पकड़ लिया और उसको सहलाने लगी. मेरी तो हवा टाइट हो गई. भाभी भरी बस में मेरे लंड को पकड़ कर सहला रही थी.
    मैंने भी पूरा जोर लगा कर भाभी की तरफ अपने शरीर के वजन को आगे धकेल दिया. हम दोनों इस कामुक मदहोश कर देने वाले पलों का मजा ले रहे थे.
    तभी मैंने सीट वाले डंडे पर अपने हाथ को आगे की तरफ रख लिया. भाभी ने अपने मस्त चूचों को मेरी कुहनी के आगे वाले भाग की तरफ अपने चूचों को मेरे हाथ से सटा दिया और मेरे हाथ पर अपने चूचों को स्पर्श देने लगी.
    मैं पागल सा होता जा रहा था. इधर भाभी के अंदर भी सेक्स पूरा भड़का हुआ था.
    फिर मैंने आस पास देखा कि कोई हमारी इस हरकत पर ध्यान तो नहीं दे रहा. जब सब जगह नजर दौड़ाने के बाद मैंने ठीक ठाक पाया तो मैंने हल्के से अपने हाथ को भाभी के चूचों पर लाकर उनको छेड़ने लगा. मेरे हाथ की उंगलियां भाभी के चूचों के निप्पलों पर लग रही थीं.
    भाभी की हल्की सी सिसकारी निकलना शुरू हो गई थी. भाभी के चूचों के निप्पल काफी टाइट थे. उसको छूकर पता नहीं चल रहा था कि वो दो बच्चों की मां है. मैंने जोर से उसके निप्पलों को मसलना शुरू किया तो भाभी बोली- आज मेरे साथ मायके ही चलो. मैं तुम्हें अपने मायके की सैर करवाऊंगी.
    मैं भी समझ गया था कि भाभी मायके की नहीं अपनी चूत की सैर करवाने के मूड में लग रही है.
    तभी भाभी ने अपने पर्स से फोन निकाला और अपने घर वालों को बता दिया कि उनके साथ मैं भी उनके मायके आ रहा हूं. भाभी के बदन को छेड़ते छेड़ते कब सफर कट गया कुछ नहीं पता लगा.
    फिर उनके घर जाकर हमने आराम किया. अब मुझसे रात का इंतजार करना मुश्किल हो रहा था. उनके घर में मेरी काफी खातिरदारी हुई और फिर आखिरकार सोने का समय भी आ ही गया. भाभी और मैं दोनों एक ही कमरे में सोने वाले थे. ये सोच कर मेरा लंड तो पहले से ही खड़ा होने लगा था. मेरे लंड ने कई बार चिपचिपा पदार्थ छोड़ दिया. भाभी की चूत के बारे में सोच कर ही मेरा कामरस निकला जा रहा था.
    लेकिन तभी उसकी मां हमारे बीच में आ गई. वो अपनी बेटी से बात करने के लिए हमारे कमरे में ही आ गयी. मैं मन ही मन उसकी मां को गालियां देने लगा. मगर फिर मुझे इस बात से थोड़ा सन्तोष करना पड़ा कि हम दोनों का बिस्तर जमीन पर नीचे एक साथ लगा दिया गया. ऊपर बेड पर उसकी मां सोने वाली थी.
    वो दोनों आपस में बातें करने लगीं और कुछ देर के बाद लाइट बुझा दी गई. लेकिन उन दोनों की बातें अभी भी चल रही थीं. मैं तो पहले से ही सोने का नाटक कर रहा था. जैसे ही लाइट बंद की गई मैंने धीरे अपने और भाभी के बदन को चादर के नीचे ढक लिया और मैं भाभी की गांड के साथ चिपक गया.
    ज्यादा कुछ हरकत तो नहीं हो सकती थी क्योंकि उसकी मां को हमारे बारे में पता चल जाता. मैं धीरे धीरे भाभी की गांड को अपने हाथ से दबाने लगा. मैंने अपने लंड को साड़ी के ऊपर से ही भाभी की गांड से सटा रखा था. भाभी बातों में लगी हुई थी. फिर मैंने धीरे से उसकी साड़ी को ऊपर करना शुरू कर दिया. अंधेरे में कुछ पता नहीं चल रहा था लेकिन उसकी चिकनी टांगों पर उंगलियां फिराते हुए मुझे बहुत मजा आ रहा था.



    जब पूरी साड़ी ऊपर तक आ गई तो मैं अपने पैरों को उसकी जांघों से घिसने लगा. फिर मैंने उसकी भारी सी गांड में फंसी हुई छोटी सी जालीदार पैंटी को उसके कूल्हों के बीच से उंगली घुसाते हुए खींच दिया. उसके बाद मैंने अपने अंडरवियर को भी नीचे किया और उसकी पैंटी के अंदर लंड को लगा कर उसकी जांघों के बीच में भाभी की चूत के पास फंसा दिया. मेरा लंड भाभी के चूतड़ों में जाकर सट गया.
    मेरे तने हुए लंड की छुअन से भाभी की हल्की सी आह्ह निकली लेकिन भाभी ने खुद को रोका हुआ था. वो अपनी मां को बातों में लगाए हुए थी और साथ में ही मेरे लंड का मजा भी ले रही थी. मैं अपने लंड को उसकी गांड पर घिसने लगा. भाभी मेरा पूरा साथ दे रही थी.
    कुछ देर जब ऐसे ही घिसते हुए हो गई तो भाभी ने धीरे अपने हाथ पर थूक लगाया और अपना हाथ अपनी जांघों के बीच में लाकर मेरे लंड के सुपारे पर थूक को मलते हुए उसको चिकना करने लगी. भाभी ने मेरे लंड को पूरा चिकना कर दिया. मेरे लंड के सुपारे पर जब भाभी के हाथ घिस रहे थे तो मैं भाभी की चूत चूत को चोदने के लिए जैसे मरा जा रहा था. मेरे लंड के सुपारे में एक अजीब सी सरसराहट दौड़ रही थी.
    फिर भाभी ने मेरे लंड को अपने हाथ में पकड़ा और अपनी चूत के मुंह पर लगा कर अपनी गांड को पीछे धकेल दिया. मुझे भाभी का इशारा मिल गया.
    मैंने अपने लंड को भाभी की चूत पर सटे हुए आगे की तरफ एक हल्का सा धक्का मारा और मेरा लंड भाभी की गर्म चूत में घुस गया.
    उम्म्ह … अहह … हय … ओह … मजा आ गया.

    भाभी की गर्म चूत में जाते ही मैंने उसकी कमर को अपने हाथों में थाम लिया और बिल्कुल धीरे-धीरे अपनी गांड को हिलाते हुए मैं भाभी की चूत में धक्के लगाने लगा. भाभी भी हल्के हल्के अंदाज में अपनी गांड को मेरे लंड की तरफ धकेल रही थी.
    धीमी चुदाई शुरू हो गई.
    भाभी की चूत में जाते ही मेरा लंड और ज्यादा गर्म और टाइट हो गया था. भाभी की चूत ने जैसे मेरे लंड को अंदर ही जकड़ लिया था. मैं धीरे से लंड को बाहर लाता और फिर हल्के से धक्के के साथ भाभी की चिकनी चूत में फिर से धक्का लगा देता. पूरा लंड भाभी की चिकनी चूत की गहराइयों में उतरने लगा. उसकी चूत की पंखुड़ियां जैसे मेरे लंड को निचोड़ने में लगी हुई थी. मुझे जैसे जन्नत का मजा मिल रहा था.
    कुछ देर तक ऐसे ही करने के बाद मुझसे रहा न गया और मैंने अपने मोटे लंड जोर से भाभी की चूत में पेल दिया तो भाभी की आह्ह निकल गई.
    उसकी ऐसी आवाज सुनकर उसकी मां बोली- क्या हुआ?
    भाभी बोली- कुछ नहीं, ऐसा लग रहा था जैसे पीछे कुछ चुभ रहा हो.
    उसकी मां बोली- लाइट जला कर देख लो.
    भाभी तपाक से बोली- नहीं मां, सब ठीक है.
    भाभी को भी डर हो गया था कि अगर लाइट जली तो सारा मजा खराब हो जायेगा. इसलिए उसने बात को तुरंत संभाल लिया. उसके बाद वो दोनों फिर से बातों में लग गई. कुछ देर तक मैंने भाभी की चूत में लंड डाल कर मजा लिया और फिर मैं भाभी की गांड के छेद पर भी उंगली चलाने लगा.
    भाभी ने अपनी दोनों जांघों को थोड़ा सा और खोल दिया और मेरी उंगली भाभी की गांड में चली गई. भाभी उचक सी गई लेकिन उसने कोई आवाज नहीं की. एक दो बार मैंने भाभी की गांड में उंगली की और फिर वापस निकाल ली.
    फिर पता नहीं भाभी को क्या शरारत सूझी कि उसने अपने एक हाथ को पीछे लाकर मेरी गांड पर टटोलते हुए मेरी गांड के छेद को ढूंढ लिया और अपनी उंगली मेरी गांड में घुसाने की कोशिश करने लगी. मुझे मजा तो नहीं आ रहा था लेकिन मेरे लिए यह एक नया अनुभव था. मेरा लंड भाभी की चूत में था और भाभी की उंगली मेरी गांड के छेद को सहला रही थी. फिर उसने अपने हाथ को वापस आगे की तरफ खींच लिया.
    मुझे गांड में जलन सी होने लगी. शायद भाभी की उंगलियों का तेज नाखून मेरी गांड में लग गया था. मैंने जोर से भाभी की चूत को चोदना शुरू कर दिया. पच-पच की आवाज हो गई तो उसकी मां को फिर शक हो गया.
    वो बोली- ये आवाज कैसी आ रही है?
    भाभी बोली- कुछ नहीं, योगू को शायद मच्छर परेशान कर रहे हैं. वो मच्छर मार रहा है.

    मैंने फिर से अपने धक्कों को धीमा कर दिया. जोर से चुदाई होना अभी संभव नहीं था. मैं धीरे धीरे ही भाभी चूत में लंड को चलाता रहा. भाभी भी पूरे रिदम में मेरा साथ देती रही.
    दोस्तो, इस तरह धीमी चुदाई करने में भी बहुत मजा आता है. जिन लोगों ने इस तरह से प्यार वाली धीमी चुदाई का मजा लिया है वो जानते होंगे कि इस तरह की चुदाई में ताबड़तोड़ चुदाई से ज्यादा रस मिलता है. भाभी की चूत रस छोड़ते हुए पूरी चिकनी हो गई थी. उसकी चूत में लंड डालते हुए अब मुझे ऐसा लगने लगा था कि जैसे मैं किसी मक्खन के कटोरे में लंड को डाल रहा हूं.
    गर्म चिकनी चूत की चुदाई का जो मजा भाभी उस रात को मुझे दे रही थी उसको अपने शब्दों में मैं लिख नहीं पा रहा हूं. मैं जोर से उसकी चूत को फाड़ देना चाहता था लेकिन ऐसा नहीं कर पा रहा था. फिर मैंने उसके चूचों को पकड़ लिया और उसको कस कर बांहों में भरते हुए उसके चूचे भी साथ में दबाने लगा. भाभी का पूरा बदन मेरे बदन से सट गया था. उसके मोटे चूचे दबाते हुए मैं उसकी चूत में धीरे-धीरे लंड को घिसता रहा.
    काफी देर तक ऐसे ही हम पड़े-पड़े हिलते रहे. भाभी की आवाज भारी होने लगी थी. उसकी आवाज से कामुकता साफ झलक रही थी. लेकिन अपने आप को कंट्रोल करके रखे हुए थी. उसकी मां को भी नींद नहीं आई थी. अब भाभी से जब रुका नहीं गया तो उसने पीछे हाथ लाकर मेरे चूतड़ों को अपने हाथों में पकड़ लिया और मेरी गांड को आगे की तरफ धकेलते हुए अपनी चूत के अन्दर मेरे लंड के धक्के मरवाने लगी.
    मैं भाभी की बेबसी समझ सकता था. अगर उसकी मां वहां पर न होती तो मैं भाभी की चूत को फाड़ कर रख देता लेकिन हम दोनों ही मजबूर थे. मैंने भी थोड़ा और अंदर तक लंड को घुसाने की कोशिश की.
    भाभी की गांड काफी भारी थी. इसलिए लंड पूरा जड़ तक भाभी की चूत में नहीं उतर रहा था. या फिर भाभी को और गहराई तक लंड लेने की आदत थी. वो बार-बार मेरी गांड को अपने हाथों के सहारे से अपनी चूत की तरफ धकेल रही थी.
    उसकी आवाज लड़खड़ाने लगी थी. लेकिन वो ऐेसे बर्ताव कर रही थी जैसे वो नींद आने के चलते बड़बड़ा रही है ताकि उसको मां को इस बात का शक न हो जाये कि उसकी बेटी एक मोटे और लंबे लंड के साथ नीचे फर्श पर पड़ी हुई अपनी चूत की चुदाई करवा रही है.
    फिर मैंने तेजी से लंड को भाभी की चूत में चलाना शुरू कर दिया. मैंने भाभी को कस कर पकड़ लिया और तीन चार जोर के धक्के लगा दिये और फिर मेरे लंड ने जवाब दे दिया. मेरे लंड से गर्म गर्म वीर्य निकल कर भाभी की चिकनी चूत में भरने लगा. मैं झटके मारते हुए भाभी की चूत में वीर्य को गिराता चला गया.
    मैंने सारा का सारा वीर्य उसकी चूत में खाली कर दिया. भाभी ने जैसे मेरे लंड को अपनी चूत में दबोच लिया था. ऐसा लग रहा था कि वो भी झड़ गई है. फिर हम दोनों नॉर्मल होते आ गये. अभी तक भी उसकी मां नहीं सोई थी. मुझे गुस्सा आ रहा था. लेकिन मैं चुपचाप भाभी की चूत में लंड को डाले हुए लेटा रहा.
    जब काफी देर तक की उनकी बातें खत्म नहीं हुईं तो मैंने भाभी को अपनी बांहों में भर लिया और अपने लंड को ऐसे ही उनकी चूत में रख कर सो गया.
    सुबह जब उठा तो मैं अकेला ही वहां पर सोया हुआ था. मैंने उठ कर देखा तो चादर मेरे ऊपर थी और मेरा लंड अभी भी बाहर ही लटक रहा था लेकिन अब सोई हुई अवस्था में था इसलिए चादर के नीचे से पता नहीं लग रहा था.
    वो दोनों मां-बेटी वहां कमरे में नहीं थी. फिर मैं भाभी के साथ ही अपने घर पर वापस आ गया. अब जब भी कभी मुझे मौका मिलता है मैं भाभी को कॉल कर लेता हूं. मुझे वो सेक्सी चुदक्कड़ भाभी पूरे मजे देती है.
    अब तो मैं सोच रहा हूं कि कॉल ब्वॉय का धंधा ही शुरू कर दूं. मुझे भाभियों और आंटियों की चूत भी मिल जाया करेगी और इस तरह से मेरी चुदाई की इच्छा पूरी होने के साथ ही मेरी कुछ कमाई भी हो जाया करेगी.
    तो दोस्तो, ये थी भाभी की चूत चुदाई की कहानी. आपको मेरी यह कहानी कैसी लगी.

  • भाभी देवर की सेक्सी चुदाई

    मैंने भाभी को अपना नम्बर दिया और साइड में हो गया.
    तभी मम्मी आ गई और बोलीं- चलें!
    मैं बोला- हां चलो मम्मी.
    फिर मैं घर आया, तो देखा मेरे मोबाइल पर दो मिस कॉल पड़े थे. मैं समझ गया कि ये भाभी की कॉल हैं.
    मैं में घर था मगर मम्मी सामने थीं तो मैं घर पर भाभी से बात नहीं कर पाया.
    वैसे भी मैं घर में भाभी से सही से बात नहीं कर सकता था … क्योंकि सब होते हैं.
    मैं बहाना बना कर छत पर चला गया. मैंने भाभी को कॉल की, तो उधर से आवाज आई- तुमने कॉल ना उठाने के लिए नम्बर दिया था!
    मैंने बताया- अरे भाभी, वो मैं मम्मी के साथ रास्ते में था.
    भाभी हंस दीं.
    फिर हमारी बात शुरू हुईं.
    भाभी- कैसे हो?
    मैं- बढ़िया हूँ.
    भाभी- तुम वहां बार बार मुझे क्यों देख रहे थे?
    मैं- आप बहुत खूबसूरत हो भाभी, आप पर से मेरी नजर ही नहीं हट रही थी.
    भाभी- अच्छा … लगता है मौसी से बोल कर आपकी शादी करवानी पड़ेगी.
    मैं हंस दिया और मैंने कह दिया- भाभी आप जैसी कोई सुन्दर मिलेगी, तो जरूर आप मम्मी से बात कर लेना.
    वो भी हंस दीं.
    ऐसे ही हम दोनों नॉर्मल हंसी मजाक करते रहे.
    मैं बहुत देर तक उन्हें पटाने की कोशिश करता रहा … क्योंकि मैं समझ गया था कि भाभी जल्दी ही मेरे लंड के नीचे होंगी.
    अब रोज ही भाभी से बात होने लगी थी. हम दोनों कुछ ज्यादा ही खुलने लगे थे.
    एक रात में ही मैंने भाभी से कुछ ज्यादा ही खुल कर बातें कर लीं … क्योंकि ज्यादा गोल गोल घुमाना मुझे भी पसंद नहीं था. उधर वो भी प्यासी थीं. पर एक दिन में ही सब हो जाए, इतनी जल्दी भी सही नहीं था. मैंने हंसी मजाक करके और उन्हें फील करवाके अपनी मुठ मार के सो गया.
    उस दिन भाभी भी कुछ गरमा गई थीं.
    ऐसे ही कुछ दिन हमारी बातें हुईं. हमारी बातों में, हम दोनों प्यासे हैं, ये बात दोनों को समझ आ गई थी, बस जरूरत थी कि सही समय मिले.
    चूंकि भाभी एक जॉइंट फैमिली में रहती हैं, तो हम दोनों को सही समय नहीं मिल पा रहा था.
    फिर एक दिन उनसे मैंने व्हाट्सैप पर फ़ोन सेक्स किया. वीडियो काल पर मैंने उन्हें अपना खड़ा लंड दिखाया और उनकी चूत और गांड को पूरी तरह से नंगी करवा कर लंड हिलाया.
    उस दिन भाभी मुझसे चुदने के लिए मरी जा रही थीं.
    हम दोनों ने फोन सेक्स से ख़ूब मज़े किए और दोनों झड़ गए. भाभी अपनी चूत में उंगली करके झड़ गईं और मैं लंड हिला कर.
    अब हम दोनों को चुदाई की जरूरत थी.
    फिर अगले दिन उनसे पूरे दिन बात नहीं हुई … न उनकी कॉल आई, न मैंने की. क्योंकि मैं अपने काम में बिजी था.
    उस दिन शाम को 7 बजे भाभी की कॉल आई, तब मैं घर से बाहर ही था. मैं उनसे बात करने लगा.
    भाभी ने बोला- आज घर पर कोई नहीं है … और तुम एक घंटे बाद आज ही आ जाओ.
    ये सुन कर तो मेरा लंड और मैं दोनों खुश हो गए.
    मैं बोला- ओके रानी तुम तैयार रहो … आज तीनों छेदों का रास्ता साफ कर दूँगा.
    भाभी वासना से बोलीं- मैं तो कब से तैयार हूं राजा … जल्दी से आजा … बस अब बजा दे अपनी रानी का बाजा.
    मैं बोला- ठीक है आप तैयार रहो, अभी 7 बजे हैं, मैं घर में बहाना बना कर अभी आया.
    भाभी बोलीं- सब तैयारी कर ली है जान … एकदम सफाचट पिच है … बस लंड की बैटिंग की जरूरत है.
    मैं बोला- ठीक है मेरी जान अभी आया. आज छक्के ही छक्के उड़ाऊंगा.
    भाभी हंस दीं.
    फिर मैं घर गया और मैंने मम्मी को बोला- मम्मी आज मेरे दोस्त की एक पार्टी है. मैं खाना वहीं खाऊंगा और काम है … तो मुझे वहीं रुकना पड़ेगा.
    मुझे जन्नत जैसा मजा आने लगा.
    मैं भाभी की चूत को लगभग खाने लगा था. मैं भाभी जी की चूत का दीवाना हो गया. भाभी भी मेरा सर अपनी चूत पर दबाने लगी थीं. वो मुझे ऐसे खींच रही थीं, जैसे अपनी चूत में घुसा ही लेंगी.
    तभी उन्होंने अपनी चूत का रस मेरे मुँह में भर दिया, जिसे मैं पूरा पी गया. मैं भी भाभी के मुँह में लंड के धक्के मारने लगा और झड़ गया. भाभी भी मेरा रस पी गईं.
    फिर मैं उठा और भाभी को अपनी बांहों में लेकर उन्हें फिर से किस करने लगा. हम दोनों के वीर्य का स्वाद अब हम दोनों ले रहे थे.
    थोड़ी देर में लंड महाराज सर उठाने लगे. मैं भाभी की चूत पर हाथ फेरने लगा. भाभी की चूत फिर से गीली हो गई थी.
    भाभी बोलीं- राजा देखो तुम्हारी रानी कैसे बह रही है, अब देर मत करो जान जल्दी से अपनी रानी का बाजा बजा दो.
    ये बोल कर भाभी ने दोनों टांगें ऊपर कर लीं. मैं भाभी की चूत पर लंड रगड़ने लगा. भाभी नीचे से कमर उठाने लगीं … पर मैंने लंड नहीं घुसाया.
    भाभी उत्तेजित होते हुए बोलीं- भोसड़ी के … चूत के मजे मत ले … जल्दी से अन्दर डाल दे अपना लंड … मां के लौड़े.
    फिर मैं हंस कर बोला- ठीक है मेरी रंडी … ले साली लंड खा.
    मैंने एक झटके में ही अपना लंड चूत में घुसा दिया. भाभी काफी टाइम से चुदी नहीं थी, तो उनको थोड़ा दर्द हुआ. तेज सिसकारी निकली और चूत ने लंड को खा लिया.
    मैं उनके होंठ चूसने लगा और धक्के लगाने लगा.
    अब भाभी को मजा आने लगा. वो मुझे गाली देने लगीं.
    मुझे भी चुदाई के समय गाली देने और सुनने में मजा आता है.
    भाभी गांड उठाते हुए बोलने लगीं- आह भोसड़ी के चोद … मादरचोद … और तेज चोद … ऐसे ही हां रगड़ दे हरामी … ऐसे ही पेल साले … बड़ा मजा आ रहा है … आंह पूरा अन्दर पेल … ऐसे ही … जान न्ह्ह … मेरे राजा … चोद अपनी चूत रानी को प्यासी है ये. पति के बाद किसी का लंड मिला ही नहीं.
    मैं भी जोश में आ गया- ले साली मेरी चूत रानी … ये ले बहनचोदी … ले लंड ले छिनाल … साली रंडी तेरी मां को चोदूं!
    मस्त धकापेल चुदाई होने लगी थी. पांच मिनट बाद मैंने भाभी को कुतिया बनाया, फिर पीछे से लंड लगा कर भाभी को चोदने लगा- आह मेरी कुतिया … रांड साली … ये ले लंड खा.
    भाभी भी कुतिया की तरह गांड हिला कर साथ देते हुए बोलीं- मेरे कुत्ते राजा … घुसा दे अपनी कुतिया रानी की चूत में अपना लंड … आंह ऐसे ही चोद … हां ऐसे ही जान.
    फिर भाभी एकदम से रुक कर लेट गईं और बोलीं- अब चोदो.
    मैं फिर से चोदने लगा.
    भाभी ने मुझे कसके पकड़ लिया और तेज आवाज करते हुए झड़ गईं. मैं भी तेज़ तेज़ धक्के लगाने लगा.
    मैं बोला- बस मेरी जान … मैं आ रहा हूं. रस किधर लेना है?
    भाभी बोलीं- अन्दर ही कर दो जान … ज़मीन सूखी पड़ी है.
    मैं भाभी की चूत में ही झड़ गया और वहीं भाभी के पास लेट गया.
    मैं भाभी जी की चूत का दीवाना हो गया एक बार देवर भाभी की सेक्सी चुदाई करके!
    हम दोनों एक दूसरे को बांहों में लेकर बातें करने लगे. उस रात हमने 3 बार चुदाई की पर मैं भाभी की गांड नहीं मार पाया.
    फिर सुबह मैं अपने घर आ गया.
    इसके बाद भी मैंने भाभी को चोदा, पर वो फिर कभी लिखूंगा.
    दोस्तों ऐसे कई किस्से मेरी जिन्दगी में हुए हैं … आप मुझे मेल करके बताएं कि आपको मेरी देवर भाभी की सेक्सी चुदाई कहानी कैसी लगी.

  • भाभी की मस्त चूत की गर्म चुदाई

    कीर्तन में अपना टाइम काट लेती है. इस वजह से वो घर पर कई बार अकेली ही रहती है.

    मैंने उससे पूछा- आपके बच्चे कभी दिखाई नहीं दिये.वो बोली- मुझे अभी सन्तान का सुख नहीं मिल पाया है.

    शादी को दस साल हो चुके हैं लेकिन पता नहीं हमें अभी तक औलाद क्यों नहीं हुई है.उसके ये कहने पर मैं चुप हो गया.

    मैंने शायद गलत सवाल पूछ लिया था.फिर वो भी चुप ही रही. कुछ ही देर में हम लोग उसके घर के बाहर पहुंच गये. उसने घर से कुछ दूरी पर ही गाड़ी रुकवा ली.

    मैंने कहा कि मैं आपको घर के सामने तक छोड़ देता हूं लेकिन वो मना करने लगी. कहने लगी कि उससे ससुर ने देख लिया तो वो पता नहीं क्या सोचेंगे.मैं भी उसकी बात से सहमत से हो गया.

    इसलिए उसके कहने पर मैंने गाड़ी को वहीं घर से कुछ दूरी पर ही रोक दिया.वो उतर कर जाने लगी तो मैंने उससे उसका नम्बर मांग लिया.

    एक बार तो वो कहने लगी कि आप मेरे नम्बर का क्या करोगे.फिर मैंने हिम्मत करके कह दिया कि वो सब मैं आपको बाद में बताऊंगा.

    फिर उसने अपना नम्बर दे दिया और मुस्करा कर अन्दर चली गई.मैं दिवाली मनाने के लिए अपने गांव के लिए निकल गया.

    घर जाकर ऐसे ही दो चार दिन निकल गये. फिर जब वापस रूम पर आया तो उस दिन आते ही भाभी के दर्शन हो गये. कयामत लग रही थी रानी भाभी.उसको देखते ही दिल में हलचल सी मच गई और मैंने उसको टोकते हुए नमस्ते की तो वो भी मेरी तरफ देख कर हल्के से मुस्करा दी.

    जब वो मुस्काराती थी तो मेरा दिन बन जाता था. उस दिन मेरा काम पर जाने का मन नहीं था.

    मैं रूम पर पड़ा हुआ बोर हो रहा था तो मैंने सोचा कि क्यों न आज भाभी को फोन करके देखा जाये.

    उसका नम्बर तो मेरे पास था ही.मैंने भाभी को फोन किया तो उसने प्यारी सी आवाज में हैल्लो किया.

    मैंने बताया कि मैं उनका पड़ोसी राज बोल रहा हूं. मैंने उनको नमस्ते किया और उन्होंने भी वहां से नमस्ते किया. फिर वो कुछ जल्दी में लग रही थी.

    पूछने पर उसने बताया कि वो पैकिंग करने में लगी हुई है.मैंने पूछा कि कहीं पर जा रहे हो क्या आप?

    भाभी ने बताया कि उसके सास-ससुर पांच दिन के लिए बाहर जा रहे हैं.

    उन्हीं का सामान पैक करने में लगी हुई थी.मैंने भैया के बारे में पूछा तो भाभी ने बताया कि वो तो एक दिन पहले ही काम के लिए निकल गये थे.

    बस दिवाली पर दो दिन के लिए आये थे. उनको कुछ जरूरी काम था तो वो वापस चले गये.फिर वो कहने लगी कि अभी वो पैकिंग करने में व्यस्त है.

    इसलिए उसने बाद में बात करने के लिए कहा और फोन रख दिया.मेरे मन में तो लड्डू फूटने शुरू हो गये थे. भाभी घर पर अकेली थी. इससे अच्छा मौका क्या हो सकता था.

    मैं बाहर आकर खिड़की के पास भाभी के घर पर नजर लगा कर बैठ गया कि कब उसके सास और ससुर घर से निकलेंगे और मैं भाभी को पटाने के लिए फिर से अपनी कोशिश करूंगा.

    आधे घंटे के बाद मैंने देखा कि उसके सास-ससुर अपना सामान ऑटो में रख कर निकल गये. भाभी ने गेट बंद कर लिया और अन्दर चली गई.

    मैंने तुरंत भाभी को फोन लगाया तो भाभी ने फोन उठा लिया. फिर हमारे बीच में बातें होने लगीं.ऐसे ही एक दो दिन भाभी से बात करते हुए हो गया तो हम दोनों में काफी कुछ बातें होने लगीं.

    फिर एक दिन मैंने उनसे कहा कि आपने बच्चों के बारे में डॉक्टर से सलाह ली है क्या?

    मेरी बात को वो टाल गई.फिर हमारे बीच में यहां-वहां की बातें होने लगीं. अगले दिन मैं घर पर ही था और भाभी भी काम पर नहीं गई थी. मैंने उनको दिन में फोन लगाया और हम दोनों घंटों तक बातें करते रहे.

    भाभी की चूत को चोद कर खुश कर दिया. फिर सुबह 4 बजे मैं अपने रूम पर चला गया क्योंकि भाभी ने कह दिया था कि किसी को पता नहीं चलना चाहिए कि मैं रात में उसके घर पर ही रुका हुआ था.

    इस तरह अगले तीन दिन तक हमारा हनीमून चलता रहा. मैंने भाभी की चूत खूब चोदी.

    फिर चौथे दिन उसके सास और ससुर वापस आ गये.फिर हमें चुदाई का ज्यादा मौका नहीं मिल पाता था.

    एक दो बार तो मैंने गाड़ी में ही भाभी की चूत मारी. वो भी मेरा लंड लेकर खुश रहने लगी थी.

    फिर मेरा काम वहां से खत्म हो गया और मैं अपने गांव वापस चला गया. उसके बाद मैंने उसको फोन करने की कोशिश की लेकिन उसका वो नम्बर बंद हो चुका था.फिर मैंने भी उससे संपर्क करने की कोशिश नहीं की.

    लेकिन जब-जब मैंने उसकी चूत चोदी मुझे उसने बहुत मजा दिया.