Category: Family Sex Kahani

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  • सुहागरात पर ससुर ने चोदा

    साथियो, आज मैं आप लोगों को अपनी सुहागरात पर ससुर के साथ चुदाई की कहानी बताने जा रही हूँ.

    मेरी उम्र 20 साल की है.
    मेरी शादी कुछ दिन पहले ही हुई थी.

    हम लोग एक मेहनत मजदूरी करने वाली जनजाति से हैं.
    हमारे यहां शराब और मांस आदि का सेवन सभी लोग करते हैं.

    मेरी पहली सुहागरात मेरे ससुर के साथ हुई थी क्योंकि हमारे यहां रिवाज़ है कि पहली रात घर के मुखिया के साथ सोना पड़ता है.
    वे जैसा बोलते हैं, वैसे करना पड़ता है.

    मेरी शादी हुई और मैं अपने पति के साथ अपनी ससुराल आ गई.
    मेरे घर में मेरी सास नहीं हैं, वे मर चुकी हैं.

    मेरे ससुर पैसे वाले हैं और मैं गरीब घर की थी इसलिए मैं भी खुशी खुशी शादी करने को राजी हो गई थी.

    वहां पर रात को मुझे मेरे ससुर के कमरे में हल्दी वाला दूध देकर ले जाया गया.

    वह कमरा सुहागरात के कमरे के जैसे सज़ा हुआ था.

    मैं अन्दर गई, दूध को रखा और बेड पर बैठ गई.

    तब मैं फर्स्ट नाईट सेक्स के लिए अपने ससुर जी के आने का इंतज़ार करने लगी.

    कुछ देर बाद मेरे ससुर जी कमरे में आए और उन्होंने अन्दर से दरवाज़ा बन्द कर दिया.

    मेरे ससुर की उम्र 50 साल की रही होगी.
    वे दारू पीकर आए हुए थे.

    अन्दर आते ही उन्होंने सबसे पहले मेरा घूँघट उठाया.

    मैंने कहा- पहले दूध पी लीजिए.
    वे बोले- हां, आज तो मैं तुम्हारा दूध पियूंगा!

    मैं सोचने लगी कि ये क्या बोल रहे हैं!

    कुछ देर बाद उन्होंने मेरी साड़ी का पल्लू नीचे कर दिया.

    मैंने गहरे गले का ब्लाउज पहना था. उसमें से मेरे आधे दूध देखते ही वे मानो पागल हो गए.
    उन्होंने एक झटके से मेरी साड़ी निकाल दी.

    अब मैं उनके सामने ब्लाउज और पेटीकोट में थी.

    वे मेरे होंठों को चूसने लगे, काटने लगे, फिर गर्दन पर चूमने लगे.
    मेरी चूत भी गीली होती जा रही थी.

    कुछ देर बाद उन्होंने मेरा पेटीकोट और ब्लाउज भी फाड़ दिया और उन्हें मेरे जिस्म से अलग कर दिया.

    अब मैं अपने ससुर के सामने ब्लैक ब्रा और पैंटी में थी. वे मेरे गोरे बदन को काली ब्रा पैंटी में देखकर पागल हुए जा रहे थे.

    अब मेरे ससुर मेरे मम्मों को ब्रा के ऊपर से ही दबाने लगे और कुछ देर में उन्होंने मेरी ब्रा को भी खींच कर मम्मों से अलग कर दिया.
    ब्रा हटने से मेरे दूध आज़ाद हो गए थे और चूचियां हवा में फुदकने लगी थीं.

    मेरे ससुर मेरी चूचियों को हाथ से मसलने लगे और उन्हें काटने चूसने लगे.

    मेरी चूत पानी छोड़ कर गीली हुई जा रही थी.

    कुछ देर बाद उन्होंने मेरी चूत पर हाथ फेरा और उसकी फांक में उंगली करने लगे.

    मेरी कामुक जवानी देखकर उनका लंड खड़ा हो गया था.
    अब मैंने भी उनके कपड़े निकाल दिए.

    ससुर जी नंगे हुए तो मैंने देखा कि उनका लंड काफी बड़ा था.
    इतना बड़ा और मोटा लौड़ा देख कर मैं उनसे चुदवाने के लिए मरी जा रही थी.

    इधर ससुर जी अपने मुँह से कभी मेरे होंठों को चूसते तो कभी मेरी चूचियों को पीते.
    साथ ही साथ वे मेरी चूत में उंगली कर रहे थे.

    इस सबसे मैं भी पागल हुई जा रही थी.
    मैं बोलने लगी- आआअहह ससुर जी … और पीजिए मेरे दूध आह!

    मेरे ससुर इस तरह बोलने से और मदमस्त होकर मेरे दूध काटने पीने लगे.

    वे धीरे धीरे मेरी नाभि को चाटने लगे और चूत तक आकर पैंटी को चाटने लगे.

    मेरी पैंटी चूत रस से भीगी पड़ी थी.
    वे पैंटी के ऊपर से चूत का रस काटने लगे और अगले कुछ पल बाद उन्होंने मेरी पैंटी को भी फाड़ कर अलग कर दिया.

    अब मैं उनके सामने बिल्कुल नंगी थी.
    ससुर जी मेरी टांगें फैला कर मेरी चूत चाटने लगे.

    मुझे भी अपनी चूत चटवाने में मजा आ रहा था और मैं कमर उठा कर अपने ससुर के मुँह से अपनी चूत चुसवा रही थी.
    कुछ देर तक चूत चाटने के बाद मैं एकदम पागल हो रही थी.

    मैंने कहा- अब और मत तड़पाओ … चोद डालो ससुर जी!

    फिर उन्होंने अपना लौड़ा मेरे मुँह में दे दिया.
    उनके मोटे लंड से तो में साँस भी नहीं ले पा रही थी.

    लेकिन कुछ ही देर बाद मुझे अपने ससुर का लंड चूसने में मज़ा आने लगा था.
    मैं ससुर का लंड चूस रही थी.

    तभी ससुर ने कमरे में रखी हुई देसी दारू की बोतल से शराब को लौड़े पर टपकाना शुरू कर दिया.

    मैं दारू पीती थी, तो मुझे उनके लौड़े से टपकती दारू पीने में मजा आने लगा.

    बहुत देर तक मैं लंड चूसती रही और दारू का स्वाद लेती रही.

    उसके बाद ससुर जी ने मुझे चुदाई की पोजीशन में लिटाया और मेरी चूत में लंड डालने लगे.

    लंड ने चूत में घुसने का रास्ता खीज लिया और सुपारे ने चूत के मुँह पर अपनी पोजीशन सैट कर ली.
    मेरे ससुर ने एक ज़बरदस्त झटका मारा और उनका आधा लंड मेरी चूत को फाड़ते हुए अन्दर चला गया.

    मैं दर्द से चिल्लाने लगी पर उन्हें कहां सुनाई देने वाला था.
    चूंकि मैं भी कुछ दारू की मस्ती में थी तो उनके हैवी लौड़े को झेल गई.

    मैं अभी कसमसा ही रही थी कि मेरे ससुर ने फिर से धक्का दे मारा.
    इस बार उन्होंने अपना पूरा लंड मेरी चूत में ठांस दिया था.

    मेरी चूत फट गई थी और उसमें से रक्त बहने लगा था.
    कुछ देर रुक कर ससुर जी मेरी चूत में धक्के देने लगे.

    कुछ देर तक तो मुझे उनके लौड़े से चुदवाने में दर्द हुआ.
    फिर मज़ा आने लगा.

    अब मैं भी अपनी कमर उठा उठा कर सपने ससुर का साथ देने लगी.
    वे भी मुझे पूरी ताकत से चोदने लगे.

    पूरे कमरे में पच पच की आवाज़ गूंज रही थी.

    मैं बोलने लगी- आह ससुर जी और तेज चोदिए … आह मजा आ रहा है.
    वे बोलने लगे- साली रंडी, तुझे तो मैं रोज नंगी करके दिन रात चोदूंगा. इसलिए तो तुझे अपने बेटे से शादी करवा के घर लाया हूँ! तेरे ऊपर तो कब से मेरी नजर थी.

    मैं भी मस्ती से अपनी गांड उठा उठा कर अपने ससुर से चुद रही थी.
    ससुर अपनी ठरक में बके जा रहा था- साली, जब तक तू मेरे बच्चे को पैदा नहीं करेगी, तब तक तू रोज इसी बिस्तर पर नंगी होकर दिन रात मेरे लौड़े से चुदेगी.

    उनकी ऐसी बात सुन कर मैं और पागल हुई जा रही थी.
    मैंने भी उनको उत्तेजित करते हुए कहा- हां ससुर जी चोदो अपनी इस रंडी को … मां बना दो अपने बच्चे की!

    उनके तेज तेज लाने वाले धक्कों से मैं अब तक दो बार झड़ चुकी थी और मेरी चूत चुद चुद कर पूरी लाल हो गई थी.

    अब मेरे ससुर जी ने मुझे घोड़ी बनाया और पीछे से मुझे पेलने लगे.
    मुझे दर्द हो रहा था पर मजा भी आ रहा था.

    दूसरी तरफ वे नशे में थे तो कुछ सुनने समझने को तैयार ही नहीं थे.

    कुछ देर बाद उन्होंने मुझे घोड़ी बनाए रखा और दारू पिला कर मेरी गांड भी मारी.
    अब तो मेरी चूत और गांड एकदम लाल हो गई थी.

    ससुर जी बड़े पहलवान किस्म के चोदू थे. वे मुझे धकापेल चोदे ही जा रहे थे.

    वे बोल रहे थे- साली रंडी जब तक तू मेरे बच्चों की मां नहीं बनेगी … तब तक दिन रात तू मेरे बिस्तर पर ऐसी ही नंगी रहेगी और ऐसे ही चुदेगी.

    फिर ससुर जी मेरी चूत में झड़ गए और उसके बाद उन्होंने मेरे मम्मों को देसी दारू से नहला कर उन्हें खूब चूसा व काटा.

    वे मेरे निप्पलों से दारू पीने लगे.
    फिर लंड लगा कर मम्मों को चोदने लगे.

    मेरे बूब्स भी एकदम लाल हो गए थे.
    वे अभी भी मेरे दूध चूसे जा रहे थे.

    कुछ देर बाद उन्होंने मुझे फिर से अपनी कुतिया बनाया और मेरी चूत और गांड मारी.
    आधा घंटा तक चोदने के बाद वह मेरी चूत में ही झड़ गए.

    उसके बाद उन्होंने मेरे पूरे जिस्म पर अपनी दारू की बोतल से दारू डालकर मुझे चूसने लगे और मेरे अंगों को चाटने लगे.

    वे अब तक मेरी चूत में दो बार झड़ चुके थे और अब आराम कर रहे थे.

    कुछ देर बाद वे उठे और ग्लास का दूध पीकर मुझे कमरे के एक एक कोने में ले जाकर मेरी चुदाई करने लगे.
    उन्होंने मुझे सोफा, मेज, बेड हर जगह चोदा और हर बार मुझे बुरी तरह से ठोका.

    मैं दर्द के मारे चल और उठ नहीं पा रही थी.
    रात भर अपने ससुर से चुदवाने के बाद हम दोनों सो गए.

    सुबह जब मैं उठी तो ससुर जी भी उठ गए.
    वे मुझे अपनी गोद में लेकर बाथरूम में ले गए और वहां पर फुव्वारे के नीचे मुझे खड़ी करके मेरी चूत और गांड मारी.

    ससुर जी ने मुझे दीवार से सटा कर अपने लंड के ऊपर बैठा कर खूब पेला.
    मुझे भी घोड़ी बन कर चुदवाने में मजा आ रहा था.
    मैं मीठे मजे से चिल्ला रही थी.

    अब वे मुझे नहला कर कमरे में लाए और बिस्तर पर पटक दिया.
    फिर अपने कपड़े पहन कर ससुर जी बाहर चले गए.

    मेरी इतनी ज्यादा ठुकाई हुई थी कि मैं सही से खड़ी भी नहीं हो पा रही थी.
    मैं बेड पर ही नंगी पड़ी थी.

    कुछ देर बाद ससुर जी वापस कमरे में आए और बोले कि तुम्हारे पति को काम आ गया है, वह वापस अपने काम पर चला गया है.

    मेरी ससुराल में मेरे पति और ससुर ही थे.
    पति तो बाहर चले गए थे और ससुर मेरी ले रहे थे.

    शादी के एक महीने हो गए थे.
    मेरी चूत बुरी तरह फट गई थी.

    ससुर जी मुझे दिन रात ठोकते रहते हैं, वे मुझे पूरे घर में कहीं भी पकड़ कर चोद देते हैं.
    रात को छत पर, सीढ़ी पर, किचन में, सोफा पर, बाथरूम में … पूरे घर में एक भी जगह ऐसी नहीं बची है, जहां मैं अपने ससुर के हैवी लंड न चुदी होऊं.

    दिन रात रंडी की तरह बस मेरी चुदाई होती है.
    मैंने अब कपड़े पहनना ही बंद कर दिए हैं.

    ससुर जी भी घर में नंगे ही रहते हैं.

    जब तक एक दिन में अपने ससुर से चार बार न चुद लूँ, मेरा मन खुद नहीं भरता है.
    एक महीने बाद जब मेरा पति घर आया तो उस दिन ससुर ने कहा कि आज घर में पार्टी होगी.

    मैं समझी कि आज मेरा पति मेरी लेगा, इसलिए ससुर जी ऐसा कह रहे हैं.

    वे आज अंग्रेजी दारू की बोतल लाए और मुर्गा लाए.
    मैंने मुर्गा बनाया और अपने पति व ससुर को खाना परोसने लगी.

    उसी वक्त मेरे ससुर ने मुझे खींच कर अपनी गोदी में बिठा लिया और वे मुझे दारू पिलाने लगे.
    मैं भी बिना हील हुज्जत के उनके लंड पर बैठ कर दारू मुर्गा का मजा लेने लगी.

    कुछ देर बाद हम तीनों नशे में धुत्त हो गए और मेरे ससुर ने मुझे नंगी कर दिया.
    ससुर ने कहा- आज तुझे हम बाप बेटे मिल कर चोदेंगे.

    मैं भी उन दोनों के साथ सेक्स का मजा लेने के लिए तैयार हो गई थी.

    ससुर ने मुझे अपने लौड़े के ऊपर बिठाया और मेरी चूत चोदने लगे.
    उसी वक्त मेरे पति ने मेरी गांड में लंड पेल दिया और वे दोनों मिल कर मेरी सैंडविच चुदाई करने लगे.

    इस तरह से मुझे मेरे ससुर ने रंडी बना दिया था. मुझे भी अब अपने दोनों छेदों में एक साथ लंड लेने में मजा आने लगा था.
    आपको मैं अपनी सेक्स कहानी के अगले भाग में कुछ और भी रोचक सेक्स के बारे में लिखूँगी.

  • पति विदेश गया तो सर्दी की रात में देवर के साथ सैक्स का मजा

    मेरा नाम अनाया है और मैं 25 साल की हूँ।

    यह गरम भाभी की गरम कहानी तब की है, जब मेरी शादी को मात्र 4 महीने ही हुए थे।

    मेरे पति एक विदेशी कम्पनी में काम करते है इसीलिए वे शादी के कुछ दिन बाद ही अपने काम पर चले गए।

    मेरी तो नई-नई शादी हुई थी इसलिए मेरा मन अक्सर सेक्स करने का होता था।लेकिन मैं कुछ कर भी तो नहीं सकती थी।

    कहानी में आगे बढ़ने से पहले मैं आपको अपने परिवार के बारे में बता देती हूँ।

    मेरे परिवार में मेरे और मेरे पति के अलावा, मेरे सास-ससुर और एक प्यारा सा देवर रहता है।उसका नाम अंकित है, और वो सिर्फ़ 19 साल का है।दरअसल मेरे सास-ससुर को दूसरा बच्चा शादी के बहुत लेट हुआ था, इसीलिए मेरे पती और देवर की उम्र में थोड़ा ज्यादा अंतर है।

    चलिए अब कहानी को आगे बढ़ाते है।

    कई दिनों तक बिना सेक्स के रहने के बाद अब मैं अपने आप को कन्ट्रोल नहीं कर पा रही थी।मुझे अब बस एक लंड की तलाश थी।

    मेरे ससुर उम्र में बहुत बड़े थे और शरीफ़ घर से होने के कारण मैं कहीं बाहर यह सब नहीं कर सकती थी।

    अब बचा सिर्फ़ मेरा देवर।लेकिन वह उम्र में छोटा था और मुझे लगता था कि उसे इस बारे में कुछ पता भी नहीं था।क्योंकि मैंने एक-दो बार उस पर लाइन मारने की कोशिश की थी.अगर उसे इस सब के बारे में थोड़ी भी जानकारी होती, तो वह यह मौका कभी नहीं छोड़ता।

    पर अब धीरे-धीरे मेरी सेक्स की इच्छा बढ़ती जा रही थी।

    इसलिए मैंने एक प्लान बनाया जिसके जरिए मैं अपने देवर के साथ मज़े कर सकती थी।

    एक रात जब हम दोनों सब के साथ बैठकर खाना खा रहे थे.तब मैं उससे बोली- क्या तुम आज मेरे साथ एक मूवी देखोगे?

    क्योंकि उसके इक्ज़ाम ख़त्म हो गए थे इसलिए उसने झट से हाँ कर दी।

    मेरा आधा काम तो हो चुका था, बस आधा बाकी था।

    वह दूध पीने के बाद मेरे पास आया और बोला- भाभी, कौन सी मूवी देखेंगे?मैंने कहा- कोई होलीवुड की मूवी देखेंगे।वह बोला- चलो फ़िर मूवी देखते हैं।

    मैं उससे बोली- पहले तुम कपड़े बदल लो क्योंकि मूवी बहुत बड़ी है। इसलिए तुम मूवी देखने के बाद यहीं सो जाना।वह झट से मेरी बात मान गया।

    जब तक वह आया, मैंने भी अपने कपड़े बदल लिए।

    अब मैंने एक हाफ़ स्कर्ट और एक हाफ़ मैक्सी पहनी जिसमें से मेरे बड़ी-बड़ी चुच्चियां दिख रही थी.जबकि उसने एक हाफ़ टीशर्ट और पजामा पहना हुआ था।

    उन दिनों थोड़ी सर्दियां पड़ रही थी इसलिए हम दोनों एक ही कंबल में घुस गए।

    थोड़ी देर बाद मैंने मूवी प्ले कर दी।वो एक रोमैन्टिक मूवी थी।

    हम दोनो ही उस मूवी को बड़े मज़े से देख रहे थे।

    तभी मूवी में एक सैक्स का सीन आया जिसमें एक छोटी उम्र का लड़का अपनी गरम भाभी की चुदाई कर रहा था।मुझे किसी ऐसे ही मौके का इंतज़ार था।

    इस सीन के बाद जब मैंने उसकी तरफ़ देखा तो उसके पजामे में से उसका लंड साफ़ दिख रहा था।

    मैं समझ गई थी कि अब चिंगारी तो भड़क चुकी है, बस विस्फ़ोट होना बाकी है।

    थोड़ी देर बाद जब मूवी ख़त्म हुई तो मैं उससे बोली- तुम चाहो तो आज यहीं सो जाओ, मेरा मन भी लगा रहेगा।वह यह बात भी झट से मान गया।

    वह आख़िर था तो एक किशोरवय ही, उसे क्या पता था कि आज उसे कितना मजा आने वाला है।

    कुछ देर बाद मैं उससे बोली- मुझे बहुत खुजली हो रही है, क्या तुम तेल से मेरी मालिश कर दोगे?वह बोला- ठीक है भाभी।

    मैं झट से तेल ले आई।

    अब वह बोला- कहाँ मालिश करनी है भाभी?मैंने अपनी पीठ की तरफ़ इशारा करते हुए कहा- यहाँ खुजली हो रही है।

    यह सुनते ही वह शर्मा गया.मैं उससे बोली- कोई बात नहीं, अगर तुम्हारा मन नहीं है तो रहने दो।वह बोला- नहीं, ऐसी कोई बात नहीं है, मैं आपके अभी मालिश कर देता हूँ।

    अब उसने तेल लिया और मेरी पीठ की मालिश करने लगा।मालिश करते करते अब शायद उसे भी मजा आ रहा था।

    अब वह धीरे-धीरे मेरे कूल्हों तक हाथ फिराने लगा।

    लेकिन जब उसने देखा कि मुझे नींद आ गई है तो उसकी हिम्मत और बढ़ गई।

    अब वह जोर-जोर से मेरे चूतड़ों को सहलाने लगा।दरअसल मैं भी इस दौरान सोई नहीं थी बल्कि सोने का नाटक कर रही थी।

    जब उसे लगा कि अब मैं गहरी नींद में हूँ तो उसने मेरी मैक्सी की चेन खोली और मेरी ब्रा के ऊपर से ही मेरी चुच्चियों को दबाने लगा।

    मुझे भी अब बहुत मजा आ रहा था इसीलिए मैं उसे बिना कुछ बोले चुपचाप लेटी रही।थोड़ी देर बाद मैंने करवट ली ताकि वह मेरी ब्रा को खोल सके।

    पहले तो उसने थोड़ा इंतजार किया.लेकिन जब उसे यकीन हो गया कि मैं सो ही रही हू तो उसने मेरी ब्रा के हुक खोले और मेरी बड़ी-बड़ी चुच्चियों को ब्रा की कैद से आजाद कर दिया।

    अब मैं भी गर्म होने लगी थी।

    तभी वह नीचे आया और उसने मेरी स्कर्ट को मेरी जांघों तक ऊपर कर दिया।तब वह मेरी जांघों को सहलाने लगा.

    अब मैं भी कन्ट्रोल नहीं कर सकती थी इसलिए अब मैं धीरे-धीरे सिसकारियां लेने लगी।

    अब तो उसे इस बात का यकीन हो गया था कि मुझे भी सैक्स करने का मन है।इसलिए वह मेरी जांघों को छोड़कर ऊपर आया और मेरे लबों पर अपने होंठ रख दिये।

    अब मैं भी उसका भरपूर साथ दे रही थी।

    फ़िर वह एक बार फ़िर मेरी गर्दन से होता हुआ मेरी चुच्चियों तक पहुँचा और मेरे निप्पल को जोर-जोर से चूसने लगा।अब मुझे भी बहुत दर्द हो रहा था।

    फ़िर उसने अपने सारे कपड़े उतारे.जब मैंने उसका लंड देखा तो मैं हैरान हो गई, इतने से लड़के का इतना बड़ा लंड।मेरे मन में तो लड्डू फ़ूट रहे थे.

    इसलिए मैंने झट से उसका लंड मेरे मुँह में ले लिया और उसे जोर-जोर से चूसने लगी।

    थोड़ी देर बाद वह झड़ गया।

    फ़िर उसने मेरी स्कर्ट निकाल दी.अब मैं सिर्फ़ एक पैन्टी में थी।

    वह मेरी पैंटी के ऊपर से ही अपनी गरम भाभी की गरम चूत को सहलाने लगा.मैं तो अब पागल होती जा रही थी।

    मैंने उससे कहा- अब जल्दी मेरी चूत में लंड डाल दो।वह बोला- भाभी, इतनी भी जल्दी क्या है?

    इतना कहकर उसने मेरी पैन्टी उतारी और मेरी बिना बालों की चूत को अपनी जीभ से चाटने लगा।

    थोड़ी देर बाद मैं झड़ गई और वह मेरा सारा पानी पी गया।

    अब तक उसका लंड दोबारा खड़ा हो चुका था।उसने अपने लंड को मेरी चूत पर रखा और एक जोर के धक्के के साथ उसका पूरा लंड मेरी चूत में चला गया।

    अब मुझे बहुत दर्द हो रहा था लेकिन उसने अपने धक्के जारी रखे।

    पाँच मिनट बाद वह बोला- भाभी, मेरा होने वाला है।मैं बोली- मेरे अंदर ही निकाल दो। मैं बाद में दवाई खा लूँगी।

    इतना सुनकर उसने अपने धक्कों की स्पीड बढ़ा दी और थोड़ी देर बाद वह और मैं एक साथ झड़ गए।

    तब मैंने उससे पूछा- मैं तो सोचती थी कि तुम्हें सैक्स के बारे में कुछ नहीं पता?वह बोला- भाभी, मैं पहले भी सैक्स कर चुका हूँ।

    मैं बोली- कब?वह बताने लगा:

    जब आपकी और भैया की सुहागरात थी, उस रात मैं भैया और आपके साथ सोने की ज़िद कर रहा था।तब मम्मी मुझसे बोली- आज उनकी सुहागरात है। आज तुम उनके पास नहीं सो सकते।मैंने मम्मी से पूछा- सुहागरात में ऐसा क्या होता है कि मैं उनके पास नहीं सो सकता?मम्मी कुछ नहीं बोली।मैं बोला- या तो मुझे बताओ, वर्ना मैं उनके पास जा रहा हूँ।

    मेरे ज़िद करने पर मम्मी बोली- चल ठीक है, मैं सब कुछ बताऊंगी पर तुम उनके पास मत जाओ।मैं मान गया।

    और जब पापा सो गए तो मम्मी ने मुझे सब कुछ बता दिया।

    तभी से मैं एक मौके की तलाश में था क्योंकि मम्मी ने मुझे यह बताया था कि शादी के बाद एक बार यह सब करने के बाद यह सब दोबारा करने का मन करता है।और मैं जानता था कि आपने भैया के विदेश जाने के बाद एक बार भी सैक्स नहीं किया। इस लिए मैं अपनी भाभी की प्यासबुझाना चाहता था। इसलिए मैंने यह नाटक किया कि मैं सैक्स के बारे में कुछ नहीं जानता। ताकि आप खुद पहल करो।

    उसकी ये बातें सुनकर मैंने उसे अपने गले से लगा लिया।

    फ़िर तो हम दोनों ने उस रात कई बार सैक्स किया।और अब तो हम जब चाहें तब सैक्स कर लेते हैं.इसलिए मुझे अब मेरे पति की याद भी नहीं आती।

  • लोकडाउन में दिया बुआ ने गांड का मजा

    दोस्तो, मेरा नाम अमित है और मेरी उम्र 24 साल है. मैं जबलपुर में रहता हूं. यह Hindi Sex Stories मेरे पड़ोस में रहने वाली एक बुआ की है जिनका नाम कविता (बदला हुआ) है.

    उनकी शादी हो चुकी है परन्तु अब वो अपने पति के साथ नहीं रहती हैं. वो अब मायके में रहती हैं इसलिए सामाजिक रिश्ते के हिसाब से वो मेरी बुआ लगी.

    उनकी उम्र 40 के करीब है और 3 बच्चे हैं.

    दोस्तो, आपने कभी ध्यान दिया होगा कि जब भी आपके पास कोई काम नहीं होता है तो आपका ध्यान केवल एक चीज की तरफ ही ज्यादा जाता है और वह है सेक्स!

    मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ.

    उस वक्त लॉकडाउन का दौर था. किसी के पास कुछ करने को नहीं था.

    इस दौरान अक्सर शाम को पड़ोसी गली में आ जाते थे और पड़ोस के सब लोग गेम खेला करते थे.

    एक दिन की बात है जब मैं और मेरे दोस्त शाम के समय कैरम खेल रहे थे.

    हम तीन लोग थे तो चौथी खिलाड़ी बुआ आ गई और बोली कि मैं भी तुम लोगों के साथ खेलूंगी.

    तो हम सब खेलने लगे लेकिन बीच खेल में दोस्त को कुछ काम आ गया तो वो दोनों दोस्त अपने अपने घर चले गए.

    फिर मैं और बुआ ही बचे तो मैं खेल बंद करने लगा.

    मगर बुआ बोली- हम दोनों ही खेल लेते हैं.

    मैंने उनसे कहा- आपको कहां अच्छे से खेलना आता है, आप तो थोड़ी देर में ही हार जाओगी मुझसे!

    वो बोली- अच्छा, यह बात है तो शर्त लगा लो.

    मैंने कहा- ठीक है, मगर जो जीतेगा उसको मिलेगा क्या?

    कविता- जो हारेगा उसको जीतने वाली की एक बात माननी पड़ेगी.

    मैं- ठीक है, परन्तु आप सोच लो, अगर मैं जीता तो जो मांगूंगा वो आपको देना पड़ेगा?

    कविता- पहले जीत तो जाओ … फिर देखते हैं.

    फिर हमारा गेम चालू हुआ और हम दोनों अपनी धुन में ही खेलने लगे.

    मैंने एक ऐसा शॉट मारा कि मेरी गोटी उनके गाउन में चली गई.

    दोस्तो, वो ज्यादातर गाउन ही पहना करती थी.

    उसने गोटी को निकालने से मना कर दिया और बोली- अभी नहीं निकाल सकती, दूसरी से खेल लो.

    मगर मेरे मन में इतनी ही बात से हवस जाग गई.

    मैंने सोचा कि ये अच्छा मौका है; मैंने कहा- नहीं बुआ, अगर गेम आगे बढ़ाना है तो सारी गोटी ही चाहिए हैं. नहीं तो ये फिर चीटिंग हो जाएगी.

    मेरे कई बार कहने पर उसने गोटी गाउन से निकाली.

    धीरे धीरे गेम चलता रहा और आखिर में मैं ही जीत गया.

    अब शर्त के मुताबिक मैं उनसे कुछ भी मांग सकता था. मुझे तो बुआ की चुदाई करनी थी लेकिन सीधे सीधे तो कह नहीं सकता था कि बुआ मुझे चूत दे दो!

    मैंने दिमाग लगाया और सोचा कि इनसे कुछ ऐसा काम करवाता हूं जो कि ये कर ही न पाए और फिर मुझे फिर से एक बार उनको दूसरा काम देने का मौका मिले.

    फिर मैंने कहा- बुआ आपको एक बार चौराहे का चक्कर लगाकर आना है.

    वो डर गई और बोली- नहीं, तुम पागल हो क्या? जानते नहीं कि बाहर पुलिस का पहरा है, ऐसे कोई घूम नहीं सकता.

    मैंने कहा- तो फिर आप हार गईं, अब आपको शर्त तो पूरी करनी ही होगी.

    वो बोली- ठीक है, तो कुछ और काम बताओ.

    फिर मैंने कहा- तो फिर आपको रात के 11 बजे अकेले घर में एक भूतिया फिल्म देखनी होगी.

    वो बोली- कहां? तुम्हारे घर?

    मैं बोली- नहीं, आपके घर.

    वो बोली- मगर मेरे घर में तो कोई नहीं है, मेरी मां तो भाई के घर गई है दूसरी कॉलोनी में, बच्चे भी उनके साथ ही हैं.

    मैंने कहा- फिर तो और अच्छी बात है, यही तो चैलेंज है. आपको अकेले घर में भूतिया फिल्म देखनी है और वो भी आधी रात के वक्त.

    वो बोली- नहीं, मैं नहीं देखूंगी.

    तो मैंने फिर जोर देकर कहा- अगर आप में शर्त पूरी करने की हिम्मत नहीं थी तो फिर शर्त लगाई ही क्यों? मैं अपने दोस्तों को बता दूंगा कि आपको आगे से हमारे साथ न खेलने दें. या तो आप शर्त पूरी करो या फिर हमारे साथ मत खेलना.

    ये सुनकर वो भी थोड़े जोश में आ गई और बोली- ठीक है, मगर मैं अकेली नहीं देखूंगी. तुम भी रहना घर में.

    मैं मन ही मन खुश हो गया क्योंकि मैं तो यही चाहता था.

    मैंने कहा- ठीक है, मैं दूसरे रूम में रहूंगा. आप अपने रूम में अकेली देखना.

    इस तरह रात का प्रोग्राम तय हो गया.

    अब मैंने जानबूझकर उनको ऐसी मूवी देखने को कहा जिसमें कई सारे नंगे सेक्स सीन थे.

    रात को मैं उनके घर पहुंच गया.

    खाना मैं खा ही चुका था.

    बुआ भी सारा काम निपटाकर मेरा इंतजार कर रही थी.

    मैंने मूवी चला दी और सामने हॉल में जाकर अपने फोन में टाइमपास करने लगा.

    घर की लाइटें मैंने बंद करवा दीं और बुआ को अंधेरे रूम में मूवी देखने को कहा.

    वो मूवी देखने लगी और कुछ देर बाद ही वो डरने लगी.

    वो बोली- अमित, ये गलत बात है. मैं ऐसे अकेली नहीं देख सकती.

    मैंने कहा- यही तो शर्त है.

    बुआ ने कहा- मगर तुम कम से कम रूम में तो आ जाओ. यहां मुझे बहुत डर लग रहा है, हार्ट अटैक आ जाएगा.

    मैंने कहा- ठीक है.

    फिर मैं मन ही मन खुश होता हुआ बुआ के पास रूम में गया और बेड पर उनके साथ जाकर लेट गया और मूवी देखने लगा.

    मूवी में बीच बीच में सेक्स सीन आ रहे थे.

    मेरा लंड तो पहले से ही तना हुआ था.

    जब भी कोई सेक्स सीन आता था तो मैं अपने लंड को सहला देता था ताकि बुआ का ध्यान मेरे लंड पर जा सके.

    मैंने देखा भी कि जब जब मैं अपने लंड को सहला रहा था तो बुआ मेरे लंड की ओर देखती थी.

    मैं समझ गया कि इतने दिनों की प्यास बुआ की चूत को भी गीली कर रही है.

    अब वो डर के मारे मेरे और करीब आ गयी.

    मेरे लंड में और ज्यादा तनाव आ गया और लोवर में साफ साफ लंड के झटके लगते हुए दिखने लगे.

    जब एक गर्म सेक्स सीन आया तो मुझसे रहा न गया और मैंने बुआ की जांघ पर हाथ रख दिया और सहलाने लगा.

    वो सीधा टीवी में देखती रही और कोई प्रतिक्रिया नहीं दी.

    इससे मेरी हिम्मत बढ़ी और मैंने उनका हाथ पकड़ कर अपने उछल रहे लंड पर रखवा दिया.

    बुआ ने लंड पकड़ लिया और मेरी तरफ देखने लगी.

    बस इतना होना था कि हम दोनों एक दूसरे के होंठों पर टूट पड़े.

    मैंने बुआ को नीचे गिरा लिया और उसकी चूचियों को दबात हुए उसके होंठों को चूसने लगा.

    वो भी मेरे सिर को सहलाते हुए मेरी जीभ को अपने मुंह में खींचने लगी.

    हम दोनों की लार एक दूसरे के मुंह में जा रही थी.

    कम से कम 5 मिनट तक हम दोनों एक दूसरे को किस ही करते रहे.

    फिर अलग हुए तो मैं गाऊन के उपर से ही उनके दूध दबाने लगा जिससे कविता को दर्द होने लगा.

    मेरे हाथों की ताकत इतनी ज्यादा थी कि मुझे पता ही नहीं चला कि कितना जोर डाल रहा हूं.

    मैं पूरे जोश में था और बुआ की चुदाई के लिए तड़प रहा था.

    बहुत दिनों के बाद आज मुझे चूत मिलने वाली थी.

    फिर मैंने उसके गाऊन को उतार दिया.

    उसने नीचे से रेड कलर की ब्रा और पैंटी पहनी हुई थी.

    मैं ब्रा के ऊपर से ही दूधों को चूसने चाटने लगा.

    धीरे धीरे उसके बदन पर होते हुए मेरा एक हाथ उसकी पैंटी में जाने लगा.

    जैसे ही मेरा हाथ उसकी चूत पर पहुंचा तो उसने अपनी टांगें चौड़ी करके अपनी चूत को खोल दिया ताकि मैं अच्छे से उसकी चूत की मालिश कर सकूं.

    मैं बुआ की चूत को रगड़ने लगा और हथेली से उसकी चूत की फांकों को सहलाने लगा.

    वो अपनी चूत को उठाकर मेरे हाथ की तरफ दबाने लगी.

    लग रहा था जैसे कि उसकी चूत में बरसों की आग लगी हो.

    मेरी उंगली उसकी चूत को बार बार छेड़ रही थी.

    हल्की सी उंगली मैं उसकी चूत में अंदर भी डाल रहा था.

    जब मेरी उंगली उसकी चूत में थोड़ी अंदर जाती तो वह अपनी जांघों को भींच लेती थी.

    इससे पता चल रहा था कि वो लंड लेने के लिए कितनी बेताब हो चुकी है.

    मगर वो मुंह से कुछ नहीं बोल रही थी.

    बुआ ने चूत को क्लीन शेव किया हुआ था.

    चूत एकदम से चिकनी महसूस हो रही थी.

    उसकी गर्म गर्म चूत में जब उंगली अंदर जा रही थी तो मेरे लंड में जोर जोर से झटके लग रहे थे.

    धीरे धीरे अब उसकी चूत में मुझे गीलापन महसूस होने लगा था.

    मुझे चूत सहलाते और उंगली करते हुए दो-तीन मिनट हो चुके थे.

    वो भी अब तड़प चुकी थी.

    मैं अब चोदने के लिए और इंतजार नहीं कर सकता था.

    उधर बुआ भी लंड के लिए और इंतजार नहीं कर सकती थी.

    मैंने जल्दी से अपने कपड़े उतारे और बुआ की ब्रा-पैंटी को उतार कर उसको भी नंगी कर लिया.

    एक बार चोदने से पहले मैं बुआ की चूत की खुशबू और उसके रस का स्वाद लेना चाहता था.

    जल्दी से मैंने उसको बेड पर पटका और उसकी टांगों को अपने कंधे पर लेकर उसकी चूत में मुंह दे दिया.

    मैं बुआ की नमकीन-मीठे रस से भरी चूत को चूसने लगा.

    उसकी चूत में जीभ दे देकर उसको अंदर तक खोदने लगा.

    उसकी हालत खराब होने लगी; वो मेरी पीठ पर नाखून गड़ाने लगी.

    मेरी पीठ पर खरोंचें आने लगीं जिससे मुझे जलन होने लगी.

    मुझे थोड़ा गुस्सा आने लगा और मैंने उसके मुंह में लंड देने की सोची.

    मैंने लंड उसके मुंह के सामने कर दिया और चूसने को कहा.

    मगर उसने लंड को मुंह में लेने से मना कर दिया.

    मैंने कई बार उसको कहा लेकिन वो नहीं मानी.

    मैं फिर से उसकी चूत में जीभ देकर चाटने लगा.

    वो मेरे बालों को नोंचने लगी.

    मैं ज्यादा देर उसकी चुदास के सामने टिक नहीं सकता था.

    मैंने पांच मिनट तक किसी तरह उसकी चूत में जीभ देकर उसकी चूत का स्वाद लिया और खूब जोर से उसके चूचे भी दबाए.

    अब चुदने के लिए गुहार लगाने लगी- आह्ह … हरामी … बस कर … जान निकालेगा क्या … अब चोद भी दे … पागल कर दिया है तूने मुझे!

    मैंने मौका देखा और बोला- अगर लंड चूसने का मजा दोगी तो चोदूंगा… नहीं तो उंगली से चूत का पानी निकाल दूंगा.

    वो बोली- बड़ा मादरचोद है तू, ला … चूस देती हूं.

    मैं उठा और लंड उसके होंठों पर फिराते हुए कहा- चूस दे कविता डार्लिंग!

    उसने मुंह खोला और मेरे लंड को अपने गर्म गर्म मुंह में लिया- आह्ह …. मेरे मुंह से तो आनंद के सीत्कार फूट पड़े.

    इतनी देर से तना हुआ लंड दर्द कर रहा था.

    अब कविता के मुंह में जाने के बाद उसने ऐसा मजा दिया कि मैं तो पागल सा होने लगा.

    मैं बता नहीं सकता कि मेरे तड़पते लंड को कितना सुकून मिल रहा था.

    लंड चुसवाने की इच्छा पूरी होने के बाद अब उसको चोदने की बारी थी.

    मैंने उसकी गांड के नीचे तकिया लगाया और अपना लंड उसकी गीली चूत पर सेट करके उसके ऊपर लेटता चला गया.

    मेरा लंड बुआ की गीली चूत में प्रवेश करके अपना रास्ता बनाता चला गया.

    बीच में एक बार लंड अटका तो मैंने धक्का देकर उसको अंदर सरका दिया.

    बुआ ने मेरी पीठ को जकड़ लिया और मेरी नंगी गांड पर अपनी टांगें लपेट लीं.

    हम दोनों के होंठ मिल गए और मैं बुआ को चोदने लगा.

    वो थोड़ी देर तो कराहती रही और फिर मस्ती में आकर चुदने लगी.

    ऐसा मन कर रहा था कि चोदते हुए उसके जिस्म को काटकर खा लूं.

    मैं कभी उसके होंठों को खा रहा था तो कभी उसकी मोटी मोटी चूचियों को पी रहा था.

    उसकी चूचियों को चूस चूसकर मैंने लाल कर दिया था.

    15 मिनट की चुदाई के बाद मेरा माल निकलने को हो गया.

    मैंने बिना बताए उसकी चूत में ही माल छोड़ दिया.

    फिर हांफते हुए उसके ऊपर लेट गया.

    जब हम दोनों शांत हुए तो मैंने पूछा- तुम्हारा पानी नहीं निकला क्या?

    वो बोली- ऐसे जानवरों की तरह चोदते हो कि दो बार झड़ गई मैं!

    फिर मैंने उसकी चूत को रगड़ते हुए कहा- बहुत गर्मी है अभी इसमें.

    वो बोली- पांच साल से नहीं चुदी थी. आज जाकर प्यास थोड़ी शांत हुई है.

    अब हम दोनों फिर से चूमा चाटी में लग गए.

    कुछ देर बाद मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया.

    उसकी भारी गांड देखकर मेरा मन उसकी गांड मारने के लिए करने लगा.

    मैं बोला- कविता डार्लिंग … गांड दे दो ना प्लीज?

    वो बोली- नहीं, मैंने गांड न तो दी और न ही दूंगी.

    मैंने कहा- मैंने तुम्हारी बरसों की प्यास बुझाई, तुम इतना नहीं कर सकती?

    वो काफी देर तक ना-नुकुर करती रही. फिर आखिरकार वो मान गयी.

    मैंने उसकी गांड के छेद में उंगली से तेल लगाया और लंड के टोपे को भी तेल में तर कर लिया.

    फिर उसकी गांड के छेद पर लंड रखा और पीछे से उसकी गांड में देने लगा.

    उसको दर्द होने लगा तो वो आगे भागने लगी लेकिन मैंने उसके हाथ पकड़ लिए.

    मैं बोला- बस एक बार होगा दर्द फिर मजा ही मजा है.

    वो किसी तरह डटी रही और मैंने लंड को उसकी गांड में घुसा दिया.

    फिर मैं दो मिनट लंड डाले उस पर लेटा रहा और फिर उसकी गांड चुदाई शुरू की.

    थोड़ी देर में उसे भी गांड चुदवाने में मजा आने लगा और अबकी बार मैं उसकी गांड में खाली हुआ.

    इस तरह से हमने उस रात खूब मजा किया.

    उसके बाद से बुआ और मेरा चक्कर चला आ रहा है.

    जब भी वो घर में अकेली होती है तो मैं उसको चोदने पहुंच जाता हूं या फिर वो खुद ही मुझे बुला लेती है.

  • विधवा मौसी मेरे बाप से चुद गई

    मेरा नाम राजू है. मेरा जन्म उत्तर प्रदेश के एक शहर में हुआ. मेरे परिवार में मेरे माता पिता, मेरी एक सौतेली बहन है और मैं हूं. आज मेरी उम्र 30 साल के लगभग होगी. आज मेरी शादी हो चुकी मेरे बीवी के साथ मेरे अच्छे संबंध हैं और मेरी एक बेटी है.

    मुझको 10 साल पुरानी बात आज भी याद है कि मैं सेक्स प्रति कितना उत्तेजित हुआ करता था. मेरी छुट्टी खत्म होने को थी. मैं रोज़ शाम को दोस्तों के साथ घूमने फिरने के बहाने लड़कियां ताड़ने शहर में घूमा करता था. शाम की चाय और सिगरेट पीना, मुझे आज भी अपने पुराने दिनों की याद दिला देता है.

    ये वाकिया आज से करीब 8 साल पहले का है. मैं कॉलेज की पढ़ाई कर रहा था और इम्तिहान खत्म होने के बाद घर में छुट्टी मनाने के लिए घर आ गया था.घर परिवार में सब लोग खुश थे कि बेटा घर आया है. मेरे आने की ख़ुशी में घर पर पकवान बन रहे थे. उस दिन मेरा काफी खातिरदारी के साथ स्वागत हुआ था. जो लोग कॉलेज में रहे हैं, उन्हें मेरी बात समझ में आती होगी.

    जब शाम को मैं घर पहुंचा, तो पता लगा कि घर में मेहमान आए हुए हैं. मेरी मौसी और मौसा जी आए थे. घर का माहौल कुछ अलग सा था. सब अपनी बातें कर रहे थे.

    मेरी मौसी मुझे अपने पास बुलाकर बोलीं- बेटा कैसे हो … मैंने आज बड़े दिनों के बाद तुमको देखा है … कितना बड़ा हो गया है रे तू.

    कुछ देर बाद मौसा जी का फोन बजा और वो जल्दी से ‘अर्जेंट कॉल है …’ बोलकर बाहर निकल गए. वे अपने ऑफिस के रवाना हो गए. कुछ देर बाद उनकी कंपनी से फोन आया कि उनका एक्सिडेंट हो गया है.

    हम सब हॉस्पिटल के लिए दौड़े … और हमारे वहां पहुंचने से पहले ही उनका निधन हो चुका था. हम सब एकदम से अवाक थे कि ये क्या हो गया. सभी बेहद दुखी थे. मेरी मौसी और माता जी को रोते हुए देख कर मेरा भी मन खराब हो गया.

    मेरे पिताजी उन दोनों को हौसला देकर चुप करने की कोशिश कर रहे थे. मैंने अपनी छुट्टियां बढ़ा दीं और घर पर रुक गया.

    मौसी अब हमारे घर पर ही थीं. मौसी की कोई औलाद नहीं थी. उनका कोई भी नहीं था, जो उनके लिए कुछ कर सके.

    इसलिए मौसाजी की मृत्यु के बाद वो हमारे साथ ही रहने लगी थीं और हमने भी उनको अपने यहां ही रोकने का फैसला ले लिया था.

    जैसे तैसे दिन काट कर छुट्टियां खत्म हुईं और मैं कॉलेज आ गया.

    इसके 6 महीने बाद ही मैं घर आया. घर में सब लोग नॉर्मल थे. हम सभी एक नई शुरूआत में लग गए.

    दिन यूं ही बीत रहे थे. कुछ दिन बाद मेरे वापस जाने का दिन नजदीक था. मैं अपने पिता के द्वारा गिफ्ट किए गए मोबाइल फोन से बहुत खुश था और उसी फोन में सेक्स कहानी पढ़ रहा था.

    रात को खाना खाने के बाद मैं अपने कमरे में जाकर सोने की तैयारी करने लगा. मेरा कमरा और मेरे माता पिता का कमरा अगल बगल में ही था, जिससे उनके कमरे की कुछ आवाजें मैं आसानी से सुन सकता था.

    देर रात को मैंने कुछ आहट सुनी और मन किया कि सुना जाए क्या बातें चल रही हैं. उनके कमरे से मुझे आज कुछ अजीब सी आवाजें आ रही थीं. मैंने अपने रूम से बाहर निकल कर सुनने की कोशिश की.

    खिड़की की एक झिरी में से कमरे के अन्दर झांक कर देखा कि कमरे में एक छोटा सा बल्ब जल रहा था और कमरे के अन्दर से चाटने की आवाज आ रही थीं. मुझे इधर से कुछ दिखाई नहीं दे रहा था. इसलिए मैंने इधर उधर देखा तो मुझे अपने कमरे में से कॉमन दरवाजे से अन्दर देखना ठीक लगा. मैंने अपने और पापा के कमरे के बीच के दरवाजे में जगह देखी तो मुझे उधर एक बड़ी सी झिरी दिखने लगी. उस झिरी में से मैंने झांक कर देखा तो मैं हैरान रह गया.

    मेरी माँ और मौसी जी लगभग नंगी होकर एक दूसरे को चूमने का प्रयास कर रही थीं और वे दोनों एक दूसरे के ब्लाउज खोल रही थीं.

    इसके आगे का सीन देख कर तो मेरे होश ही उड़ गए. जब मैंने देखा कि पिता नग्न अवस्था में बिस्तर पर लेटे हुए थे. वे अपने लिंग पर उत्तेजक तेल से मालिश कर रहे थे.

    यह सब देख कर मुझे कुछ समझ नहीं आया और मैं अपनी सांसें नियंत्रित करने लगा. कुछ देर बाद मुझे खेल समझ में आया, तो मेरे अन्दर का शैतान भी जाग उठा. मैं अपने फोन को निकाला और चुपचाप उस झिरी में से झांक कर वीडियो रिकार्डिंग करने लगा.

    मैंने वीडियो बनाना ही शुरू किया था कि पिताजी अपने लिंग को सहलाते हुए बोले- लोहा गर्म है … जल्दी से आ जाओ दोनों मेरी पटरानियों … इसका मजा ले लो.

    तभी मेरी मां और मेरी मौसी दोनों ही मेरे पिता की तरफ लपकीं.मेरे पिता ने मौसी को इशारा किया कि वो उनके मुँह पर आकर बैठ जाएं और मेरी मां उनके लिंग की ओर आ जाएं.

    ये सब देखकर मेरा लिंग भी जोर मार रहा था.

    मैंने किसी तरह अपने आप पर कंट्रोल किया और देखा कि मेरी मां ने पिता का लिंग अपने मुँह से चूमना और चूसना शुरू कर दिया. मौसी अपनी योनि को मेरे पिता के मुँह पर रख कर बैठ गईं. मेरे पिता एक पेशेवर जिगोलो के जैसे मौसी की योनि को चूस रहे थे और मौसी अपने वक्षस्थल को मसल रही थीं.

    मेरे पिता ने मौसी की योनि में उंगली डालकर चूसना चालू किया, मौसी भी उनका भरपूर साथ दे रही थीं.

    मुझे अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था कि मेरे सामने ये सब हो रहा है. मगर मुझे इस खेल में अजीब सा मजा आ रहा था.

    कुछ देर बाद मौसी और मां, दोनों ने अपनी जगह बदल दी. अब मेरी मां पिता जी के मुँह पर जाकर बैठ गईं और अपनी योनि को पिता जी की जीभ से चुदवाने लगीं. दूसरी तरफ मेरी मौसी मेरे पिता के लिंग को हाथ में लेकर हस्तमैथुन करने लगीं. उस समय मेरे पिता की उम्र भी करीब 45 साल रही होगी. वो भी काफी मजबूत शरीर के आदमी थे.

    अब तक पिता जी उत्तेजित हो चुके थे और मेरी मौसी और मां भी गरमा गई थीं. पिता ने मौसी को लिंग को चूत पर सैट करने के लिए कहा.मौसी ने वैसा ही किया; वो पिता जी के लिंग को अपनी योनि में लगा आकर बैठ गईं. पिता जी ने कमर उचका कर लिंग को मौसी की योनि में डाल दिया.

    अब मौसी उनके हथौड़ेनुमा लिंग बैठ कर उछल रही थीं. पूरा कमरा फुच फुच की आवाज से गूंज रहा था. उधर मेरी मां ने अपना मोर्चा संभाल रखा था. वह अपनी योनि से पिता जी के जोश को बांटने की कोशिश कर रही थीं, पर मेरे पिता जी अपने जमाने मशहूर लड़कीबाज थे, वह एक अलग किस्सा है. जो मैं फिर कभी सुनाऊंगा.

    इधर इस सबको देखकर मेरे लिंग में उबाल आ रहा था. मौसी और मां दोनों ने मिलकर पिता के साथ 30 मिनट तक यह कामक्रीड़ा की. फिर पिता जी ने अखिर में उन दोनों के वक्ष स्थलों के ऊपर अपने वीर्य का छिड़काव कर दिया.

    उसके बाद मौसी और मेरी मां एक दूसरे को चाट चाट कर साफ़ करने लगीं. उसके बाद पिताजी ने दोनों को चुंबन किया और उनके कानों में कुछ कहने लगे.

    अब मेरी मां भी झड़ कर थक चुकी थीं. वह बिस्तर पर लेट गईं. मगर मेरे पिता का बड़ा लिंग अब भी जोर मार रहा था. मेरी मौसी ने उसे फिर से सहलाना शुरू कर दिया लिंग के पूरी तरह से खड़े हो जाने के बाद मौसी कंडोम का पैकट निकाल कर फाड़ने लगीं.

    तभी मेरी मां ने कंडोम छीन लिया और कहा- अपने जीजा से कैसा परहेज है तुझे … कंडोम रहने दो और अपनी योनि को राजू के बाप के लिंग से संभोग करवा लो.

    मेरी मौसी बोलीं- दीदी अगर मैं प्रेगनेंट हो गई, तो क्या होगा?तभी मेरे पिता जी ने कहा- तू भी मेरी आधी घरवाली है … पर आज से तू पूरी है.

    पिता ये कहते हुए मौसी का मुँह देखकर हंसने लगे. उसके बाद पिता जी ने मौसी को जमीन पर टांगें रखवा कर पलंग के सहारे से कुतिया जैसा बना दिया और पीछे से आकर मौसी की योनि में लिंग डाल कर कुत्ता कुतिया के जैसे कामक्रीड़ा करने लगे.

    मौसी नीचे से अपनी योनि को सहला कर पिताजी का पूरा साथ दे रही थीं.

    पिता जी का लिंग अन्दर घुसते ही एक बार फिर से कमरा फुच फुच की आवाज़ों से गूंज उठा. पिता जी ने मौसी की योनि के साथ 15 मिनट तक भरपूर कामक्रीड़ा की और अपना वीर्य मौसी की योनि में ही प्रवाहित कर दिया.

    इसके बाद वो तीनों एक पलंग पर नंगे ही लेट गए. मैं भी समझ गया कि अब खेल समाप्त हो गया है. मुझको भी अगले दिन हॉस्टल जाना था. मैं भी अपने लिंग को सहलाता हुआ अपने बिस्तर पर चला गया.मेरे मोबाइल फोन में यह पूरी घटना रिकॉर्ड हो गई थी.

    अगले दिन सब एकदम सामान्य था और मां मौसी आदि सभी मुझसे सामान्य व्यवहार करने लगे. मैं अब भी रात की उस घटना से स्तब्ध था.

    मेरे पिताजी बोले- चलो बेटा, तुम्हारी ट्रेन का टाइम हो रहा है.

    अपना बैग उठा कर मैं भी घर से निकल गया. मौसी और माता जी मुझको बाल्कनी से बाय बाय कर रही थी.

    मैं चला गया.

    कुछ समय बाद अगले साल छुट्टियां आने को थीं और मैं घर आने को बड़ा उत्तेजित था. मैंने पूरे नौ महीने तक हॉस्टल में रह कर हर दिन घर की उस वीडियो रिकॉर्डिंग को देखा था और मैं हस्तमैथुन कर लिया करता था.

    मगर इस बार घर वापस आते समय मैं एक खुश खबरी से अनजान था.

    जब मैं घर पहुंचा, तो मौसी को वहां पर नहीं देखा. मैंने मां से पूछा- मां मौसी कहां गई हैं?तो मां ने जवाब दिया- वो हॉस्पिटल में एडमिट हैं.

    मुझे लगा कि मौसी कुछ बीमार होंगी. फिर मैंने पिता के बारे पूछा, तो पता लगा कि वो ही मौसी को लेकर गए हैं.

    अब हमें भी हॉस्पिटल जाना होगा. मेरी मां और मैं, दोनों हॉस्पिटल के लिए रवाना हुए. उधर पता लगा कि मौसी प्रसूता वार्ड में हैं. मुझे तब समझ आया कि मौसी अब मेरी सौतेली मां बन चुकी हैं और उन्हें एक बच्ची को जन्म दिया है.

    मैंने मां से पूछा- क्या मैं जान सकता हूँ कि मौसी अब मेरी कौन लगती हैं?मां ने धीरे से कहा कि अब वो भी तेरी मां हैं. उन्होंने पापा से ही इस बच्ची को जन्म दिया है.

    मैं कुछ नहीं बोला और मौसी के पास जाकर उनको मां कह कर बोलने लगा. मेरी मौसी भी मेरी बात से खुश हो गई थीं.

    हालांकि ये पल मेरे लिए सोचने वाले थे, लेकिन दोस्तो, मैं ये समझता था कि बिना पति के मौसी की जिन्दगी जीना दुश्वार था. हो सकता था कि किसी अन्य से अपने जिस्मानी सम्बन्ध बना लेतीं, जो कि शायद हम सभी के लिए बेहद गलत होता. इसलिए मैंने मौसी को अपनी मां ही बना लिया था.

    मेरे पिताजी को भी अब किसी बात का मलाल नहीं था क्योंकि उनको भी मालूम हो गया था कि मैं सब जान गया हूँ.

    दोस्तो, ये मेरे ज़िन्दगी के कुछ ना भूल पाने वाले पल थे, मैं आशा करता हूं कि आपको मेरी ये गरम और सच्ची सेक्स कहानी पसंद आई होगी.

  • भाईजान ने बहन की चूत चोदी

    मेरी दो बहनें हैं. एक दिन मैं अपनी बहन के कॉलेज गया तो मुझे पता चला कि वो लड़कों से चुदती है. मैंने सोचा कि मैं भी अपनी बहन की चूत चुदाई करूंगा. ये मैंने कैसे किया?

    दोस्तो, मैं आपका दोस्त साजिद मुरादाबाद उ.प्र. से हूँ. मैं 22 साल की उम्र का एक नौजवान लड़का हूँ. मैं बहुत ही क्यूट सा बंदा हूँ. जो लड़की मुझे एक बार देख ले, तो वो मुझसे चुदने को राजी हो जाएगी.

    मैं अन्तर्वासना पर प्रकाशित हर सेक्स कहानी को पढ़ता हूँ और लंड हिला कर मज़ा भी लेता हूँ. इधर की सेक्स कहानी को पढ़ते हुए एक दिन मैंने सोचा कि क्यों ना मैं अपनी भी कहानी आप सबके साथ साझा करूं.

    मेरे परिवार में मम्मी पापा और एक छोटा भाई व 2 बहनें हैं. एक बहन का नाम हिना है, दूसरी का नाम रूबी है. रूभी अभी 19 साल की है.

    मैं घर में सबसे बड़ा हूँ. अब तक मैं बीएससी कर चुका हूँ. मैंने अपनी ही एक शॉप खोल ली थी.

    मेरी छोटी बहन रूबी अभी बारहवीं में पढ़ती है. मेरी चिकनी चिकनी चुत वाली प्यारी प्यारी पाठिकाओं और लंबे लंड वाले दोस्तों … आज मैं आपको अपनी इस कहानी में ये बताने वाला हूँ कि मैंने किस तरह अपनी छोटी बहन रूबी की चुदाई की और रूबी से बड़ी वाली हिना को लंड का रस पिलाया.

    वैसे तो मैं हर हफ्ते अपनी गर्लफ्रेंड की भी चुदाई करता हूँ, लेकिन सच तो ये है कि बहन की चुदाई करने में अलग ही आनन्द आता है. मैं अपने घर में एक अलग रूम में सोता हूँ.

    ये बात उस टाइम की है, जब मेरी रंडी बहन हिना ने कॉलेज में एडमिशन लिया था. उसका पहला ही साल था. वो रोज कॉलेज आती जाती थी.

    एक दिन मैंने सोचा कि चलो आज हिना बहन के कॉलेज घूम कर आते हैं. हिना अपने कॉलेज में कैसा पढ़ रही है. यही सब सोच कर मैं उसको कॉलेज चला गया. जब मैं अन्दर गया तो देखा कि अन्दर लड़का लड़की तो आपस में बात करते ही हैं. कुछ कुछ लड़के लड़कियां तो बातचीत के बहाने मजे भी लेने में लगे थे.

    ये सब देख कर मैंने सोचा कि मेरी बहन तो ऐसी नहीं है, वो ये सब काम में नहीं पड़ने वाली है.

    जब मैं उसकी क्लास में गया … तो उधर हिना नहीं थी. मैंने एक लड़की से पूछा- हिना कहां है?
    उसने मुझे बताया कि आज तो वो कॉलेज आई ही नहीं है.

    ये सुनकर मैं एकदम से हैरान हो गया कि वो तो सुबह ही तो मेरे सामने घर से कॉलेज के लिए निकली थी. कहां चली गई. कहीं उसे कुछ हो तो नहीं गया.
    अब मैं दिमाग़ लड़ाने लगा और मेरे मन में अलग अलग तरह के विचार आने लगे.

    कुछ देर बाद कॉलेज की छुट्टी का समय हो गया. मैं बाहर आकर कॉलेज के गेट के पास एक तरफ छिप कर खड़ा हो गया और बाहर निकलने वाले स्टूडेंट्स को देखने लगा.

    तभी मैंने देखा कि मेरी भोली भाली बहन और एक लड़की के साथ बाहर निकली और बाहर खड़ी एक कार में कुछ लड़कों के साथ उसी कार के अन्दर जाकर बैठ गई.

    मैंने सोचा कि कुछ तो दाल में काला है. कुछ ही समय में मैंने हिना के बारे में पूरा पता निकाल लिया और घर आ गया. हिना घर आ चुकी थी … मगर मैंने उससे कुछ नहीं बोला.

    जब वो दूसरे दिन फिर कॉलेज के लिए घर से निकली, तो मैं उसके पीछे जाने लगा.

    थोड़ी दूर एक जगह उसकी सहेली मिल गई और वो दोनों लड़कियां आगे बढ़ गईं. उस लड़की ने मोबाइल से किसी से बात करना शुरू कर दी. कुछ ही पल बाद एक कार उन दोनों के पास आकर रुकी और वे दोनों उस कार में बैठने लगीं. मैंने देखा कि ये कल वाली ही कार थी और उसमें कई लड़के बैठे थे.

    वे सब कार में बैठ कर कहीं जाने लगे. मैं बाइक से था, तो मैंने उस कार का पीछा करना शुरू कर दिया. काफी दूर तक जाने के बाद मैंने देखा कि कार एक घर के आगे रुक गई थी. वे सब कार से उतर कर उस घर में जाने लगे थे. वो सब अन्दर चले गए. पीछे से मैं भी उस घर के नजदीक गया और अन्दर देखने की जुगाड़ बनाने लगा.

    उस घर के बगल में एक गैलरी थी. मैं उधर गया तो उधर एक खिड़की थी. मैंने खिड़की में देखा तो अन्दर का नजारा साफ़ दिखाई देने लगा. मैं वहां छुप गया और अन्दर देखने लगा.

    मेरी जैसे ही अन्दर निगाह गई, मैं तो समझो पागल सा ही हो गया. उन सब लोगों ने बहुत जल्दी से अपने सारे कपड़े उतारे और सिर्फ चड्डी में होकर बैठ गए. तभी उनमें से एक लड़का बीयर की बोतलें लेकर आया और सबने एक एक बोतल ले ली. बियर पीने के बाद में वो सारे लड़के सिगरेट पीने लगे. एक लड़का मेरी बहन हिना से लिपटने लगा. दूसरा लड़का उस लड़की को अपने से लिपटाने लगा. बाकी के तीन सिगरेट का मजा लेते हुए उन दोनों लड़कियों की मस्ती देखने लगे.

    तभी सबने कुछ गोलियां खाईं और सब एक साथ उन दोनों लड़कियों के नजदीक आ गए. उन सभी ने लड़कियों को किस करना शुरू कर दिया. ये देख कर मैं गरम होने लगा. मैं इस लाइव ब्लूफिल्म देख कर ये भी भूल गया कि इन दो लड़कियों में से एक मेरी बहन भी है.

    वो लोग सेक्स में चालू हो गए. मैंने सोचा कि अब मुझे भी अपनी बहन को चोद लेने में ही फायदा है.

    उसकी चुदाई की बात दिमाग में आते ही मैंने प्लान बनाया और अपना फोन निकाल कर अपनी बहन की चूत चुदाई की वीडियो रेकॉर्ड करनी चालू कर दी.

    उन लोगों ने मेरी बहन को एकदम नंगी कर लिया और उसके ऊपर एक लड़का चढ़ गया. दूसरे ने अपना लंड मेरी बहन के मुँह में दे दिया और हिना लंड चूसने लगी.

    पहले वाले लड़के ने मेरी बहन की टांगें फैला दीं और अपना लंड उसकी चुत में ठांस दिया. हिना की हल्की सी कराह निकल गई, मगर वो लड़का उसे चोदता ही रहा.

    उसने बीस मिनट तक मेरी बहन की चुदाई का मजा लिया और अपने लंड का पानी उसके मुँह में ही निकाल दिया. साली मेरी रंडी बहन ने लंड के पानी को पूरा गटक लिया और वो लंड का पानी पीकर बहुत खुश दिखने लगी.

    इस सबका वीडियो बना कर मैं वहां से निकल आया.

    जब शाम को वो घर आई, तो मेरी बड़ी बहन हिना के चेहरे पर संतुष्टि भरी मुस्कुराहट थी.

    मैंने उसे देखा और कहा- हिना यार … ऐसी मुस्कुराहट तो मैं भी तुझे हर रोज दे सकता हूँ … इसके लिए कॉलेज क्या जाना.
    वो बोली- क्या मतलब भाईजान?
    मैं बोला- कुछ नहीं … तुम अन्दर जाओ … मैं बाद में बताऊंगा.

    मेरी बहन मेरे तेवर देख कर कुछ डर गई. मगर उस समय मैंने कुछ नहीं कहा. मैं रात होने का इंतज़ार करने लगा. मैं मन ही मन बहुत खुश था कि अब तो एक जवान कॉलेज गर्ल की चुत घर में ही मिलेगी … वो भी बिल्कुल फ्री में.

    आख़िर वो टाइम आ ही गया, जब रात को दस बज गए. इन दिनों सर्दियों का मौसम था, तो सब लोग जल्दी ही सो गए थे. मैं अपने रूम से निकला और बहन के रूम में गया. मैंने देखा कि वे दोनों बहनें सो रही हैं. जब मैं पास में गया, तो पागल ही हो गया. मैंने देखा कि मेरी बहन की सलवार खुली है और उसने अपनी चुत पर हाथ रखा हुआ है.

    आह क्या मस्त चुत थी … एकदम साफ और प्यारी सी. उसकी सलवार पर पानी भी निकला हुआ पड़ा था. मैं देख कर खुश हो गया था. शायद वो बस अभी अभी ही अपनी चुत में उंगली हिला कर सोई थी. उसकी चुत के पानी से सलवार अभी गीली थी.

    मैंने पहले तो धीरे से सलवार नीचे की और उसकी चुत का सारा पानी पिया. उसकी चुत के पानी स्वाद बड़ा मस्त था. उसे चाट कर मैं बहुत मस्त फील कर रहा था. क्योंकि आज मुझे कोई डर नहीं था. बस इतना सा मसला था कि छोटी वाली बहन ना जाग जाए.

    कुछ देर के बाद बाद मैंने उसकी सलवार पूरी तरह से निकाल दी और एक हाथ को उसकी नंगी टांगों पर फेरने लगा.

    आह उम्म्मह क्या मज़ा आ रहा था यार!

    इसके बाद मैंने ब्रा से अपनी बहन के चूचे बाहर निकाले और देखने लगा. सच में मेरी बहन के चूचे बड़े रसीले थे … एकदम गोल और भरे हुए. एकदम बड़ी साइज़ की गेंद के जैसे मम्मों को देख कर मेरा लंड टनटना उठा.

    नीचे उसकी चुत पूरी तरह से खुली थी. मैंने उसकी चुत में उंगली डाली, तो मुझे पता ही नहीं चल रहा था कि कितनी बड़ी है. आख़िर वो पांच लड़कों के लंड से जो चुदवा चुकी थी.

    जब मैंने उसके होंठों पर किस करना शुरू किया, तो वो जाग गई और खड़ी हो गई. पूरी नंगी क्या मस्त रांड लग रही थी. उसकी टाइट गांड देख कर मुझे बड़ा मजा आ रहा था.

    वो बोली- भाई ये क्या कर रहे हो?
    मैंने बोला- चल नाटक मत कर … मेरे लंड को मुँह में ले ले.
    वो बोली- मैं अभी पापा को बोलती हूँ.
    मैं बोला- अच्छा जानू … पहले ये भी देख लो.

    जैसे ही मैंने उसे उसकी चुदाई की वीडियो दिखाई, तो जैसे उसको सांप सूंघ गया.
    वो मुँह लटका कर बैठ गई और बोली- इसमें मेरी गलती नहीं है.

    मैंने कहा- तो मैं भी कुछ नहीं बोल रहा हूँ … मुझे क्यों मना कर रही है … मैं भी किसी को ये फिल्म नहीं दिखाने वाला हूँ.
    वो बोलने लगी- तुम बड़े भाई हो … मुझे शर्म आती है.
    मैंने कहा- सुन तू ये समझ कर लंड चूस ले … जैसे वो लड़के तुझे चोदते हैं, वैसे ही में हूँ.

    आख़िर कुछ देर बाद वो मान ही गई. वो हंस कर बोली- चलो आज एक लंड और ठीक …
    उसने ये कहते हुए बहुत तेज़ी से मेरे लंड को अपने मुँह में भर लिया और चूसने लगी.

    मेरे मुँह से ‘अहह उसस्स अम्म्म्म … ऊहह..’ की मस्त आवाज़ निकलने लगी थीं. पहली बार में तो मैंने उसके मुँह में ही पानी निकाल दिया.

    फिर दस मिनट बाद मैंने उसकी टांगें फैला दीं और एक उंगली चुत में डाल कर चुत चाटने लगा.
    अब उसके मुँह से भी ‘आह उउह … सस्स्सीई भाईजान..’ की आवाजें आने लगी थीं.

    हिना बोली- भाईजान … अब और मत सताओ … जल्दी से अपनी बहन की चुत में लंड पेल दो … वरना ये रंडी मर जाएगी भाई … जल्दी अन्दर करो.
    उसने चुत को फैला दिया और मैंने बिना सोचे पूरा का पूरा लंड चुत में पेल दिया.

    ओफ … यार क्या मस्ती आ रही थी … बस कुछ ना पूछो. मैं ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने लगा. मेरी बहन को भी मज़ा आ रहा था. मेरे मुँह में उसके मम्मे थे. मैं बीस मिनट में उसकी चुत में ही झड़ गया और मेरी बहन का पानी भी निकल गया. उसका पानी मैंने अपने मुँह में ले लिया.

    मैंने उस रात में 4 बार अपनी सग़ी बहन को चोदा और उसकी मखमली गांड भी चाटी.

    अब मैं उसकी रोज़ चुदाई करता हूँ. आज तक इतना मज़ा तो मुझे अपनी गर्लफ्रेंड को चोदने में भी कभी नहीं आया.

    मेरी बहनो, सोचो मत … भाईजान को पटाओ और उनका लंड ले लो. मेरे दोस्तो, अगर आपकी बहन भी मस्त है, तो समझो कि आपके पास अनमोल हीरा है. खूब लंड पेलो … घर का माल है चोदो.

  • ममेरे भाई ने मेरी बुर की सील तोड़ी

    मित्रो, मेरा नाम शर्मिष्ठा है, मैं गुजरात के एक छोटे से गांव से हूँ.
    मेरा रंग गोरा है और फिगर 30-28-32 की है. मेरी उम्र 22 साल की है.

    यह हॉट सिस्टर पोर्न कहानी तब की है, जब मैंने 12वीं पास करके कॉलेज में दाखिला लिया था.

    उसी कॉलेज में मेरे मामा के लड़के राहुल ने भी एडमिशन लिया था.
    वो दिखने में काफ़ी हैंडसम था. वो हमारे घर के पास ही रहने लगा था.

    कॉलेज स्टार्ट होने के बाद हम दोनों साथ में ही जाते थे. मेरा घर रास्ते में आता था तो वो मुझे वहां से पिक कर लेता था.
    हम दोनों में पहले सब भाई बहन जैसा ही था.

    कॉलेज जाने के बाद हम रोज रात में पढ़ाई को लेकर चैट करते थे.

    धीरे धीरे हमारे बीच और दूसरे विषय पर भी बात होने लगी.
    फिर पता नहीं कैसे, हमें एक दूसरे से प्यार हो गया.

    ये कुछ ऐसे हुआ कि एक दिन जब हम कॉलेज जा रहे थे तो उसने मुझे आई लव यू कहा.
    मैंने भी उसे आई लव यू टू कह दिया.

    बस हमारी लव स्टोरी शुरू हो गई.

    अब हम दोनों आधी रात तक बात करने लगे, हमारे बीच सेक्स चैट शुरू हो गई थी.

    मुझे उससे सेक्स से सम्बन्धित बातें करने में शर्म आती थी जबकि वो मुझसे खुल कर सेक्स की बातें करने को कहता था.

    एक दिन सुबह हम कॉलेज जा रहे थे तो रास्ते पर कोई ज्यादा गाड़ियां नहीं थीं, रास्ता लगभग सुनसान था.
    उसने सड़क के किनारे बाइक खड़ी की और मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए.

    मेरी सांसें तेज होने लगीं.
    मुझे भी मज़ा आने लगा.
    ये मेरी पहली किस थी.

    उसने काफी देर बाद मुझे छोड़ा.
    मैंने उसकी तरफ देखा तो वो वासना से मुझे देख रहा था.
    मैं भी गर्म हो गई थी.

    वो मेरे हाथ को पकड़ कर सड़क से नीचे उतार कर पेड़ों की आड़ में ले गया.
    हम दोनों फिर से चूमाचाटी में लग गए.

    उस दिन करीब आधा घंटा तक हम दोनों ने खुली सड़क पर अपने प्यार का इजहार किया.
    फिर हम दोनों कॉलेज चले गए.

    पूरा दिन मुझे किस वाला सीन याद आ रहा था.
    उसके सीने की रगड़ अपने मम्मों पर महसूस हो रही थी.

    उसी दिन रात में जब हम दोनों चैट कर रहे थे तो उसने मुझसे दिन वाले वाकिये को लेकर बात शुरू कर दी.

    उसने मुझसे पूछा- कैसा लगा मैं?
    मैंने कहा- बहुत बदमाश हो तुम!

    वो हंसा और मुझसे मजाक करने लगा- क्यों ऐसा क्या किया मैंने?
    मैंने कहा- तुमने बीच सड़क पर वो सब किया था जो नहीं करना चाहिए था.

    उसने कहा- हां, ये गलती तो हो गई थी मुझसे. अब बताओ किधर चलना है?
    मैंने कहा- क्या मतलब, किधर चलना है?

    उसने कहा- वो सब सड़क पर नहीं करेंगे … किसी कमरे में करते हैं. बोलो कौन से होटल में कमरा बुक करवा लूँ?
    मैंने कहा- पागल हो क्या? मुझे किसी होटल में नहीं जाना है.

    वो हंसने लगा- अच्छा छोड़ो … ये बताओ कि लगा कैसा था?
    मैं बोली- सच में मुझे बड़ा अजीब सा लगा.

    वो बोला- कैसा अजीब सा लगा?
    मैंने कहा- अब कैसे बताऊं?

    वो बोला- अच्छा चुम्मी करते समय कैसा लगा था.
    मैंने कहा- ऐसा लगा था जैसे करेंट लग गया हो.

    वो बोला- और क्या लगा था?
    मैंने कहा- अब और क्या बताऊं?

    उसने कहा- नीचे कुछ हुआ था?
    मैंने कहा- नीचे मतलब?

    वो बोला- नीचे मतलब चूत में कुछ हुआ था?
    मैंने धत्त कह कर उसे ऐसी बात करने से मना किया.

    इस बार उसने सीधे मुझसे सेक्स के लिए पूछा.
    मगर मेरी कोई इच्छा नहीं थी तो मैंने उससे ना कह दिया.

    इससे वो रूठ गया और दूसरे दिन आया तो उसका चेहरा लटका हुआ था.

    मैंने मौका देख कर उसको किस कर लिया.
    उसने मुझे अपने सीने से लगा लिया और मेरे दूध दबाने लगा.

    उस समय भी मेरा चुदाई का कोई मूड नहीं था इसलिए मैंने उससे साफ़ साफ कह दिया कि ये सब मुझे शादी से पहले नहीं करना है.
    वो मुझे बहुत प्यार करता था तो उसने कहा- जब तुम बोलोगी, तब ही तुम्हारी चुदाई करूंगा. भले ही तुम्हारी मुझसे शादी न हो.

    हम दोनों में शादी होना सम्भव भी नहीं थी, ये बात वो भी जानता था.
    मैं तब भी मान गई कि शादी से पहले उसके साथ सेक्स करूंगी.

    फिर 6 महीने बीत गए.
    हम दोनों रोज किस करते थे लेकिन वो सेक्स के लिए नहीं बोलता था.
    मुझे भी उससे बहुत प्यार हो गया था.

    मेरे कॉलेज की सभी फ्रेंड्स अपने ब्वॉयफ्रेंड के साथ चुदवाने जाती थीं लेकिन मुझे सेक्स में कोई इंटरेस्ट नहीं था.

    एक दिन बात करते करते मैंने उससे कहा- मेरी फ्रेंड आज चुदवाने गई थी, तो आई नहीं साली अब तक. मुझे उससे काम था.

    ये सुनकर वो एकदम से उदास हो गया.
    कुछ देर बाद वो उधर से चला गया.
    मैं समझ गई कि इसको फिर से चुदाई के कीड़े ने काट लिया है.

    दूसरे दिन हम कॉलेज जा रहे थे तो वो मुझसे बात भी नहीं कर रहा था.

    अचानक से उसने मुझसे ब्रेकअप करने को कहा और मैं समझ गई कि ये चुदाई न हो पाने के कारण मुझसे ब्रेकअप की बात कर रहा था.
    मैं ब्रेकअप के डर से उससे चुदवाने के लिए मान गयी.

    उसने मेरी तरफ देखा और कहा- दिल से राजी हो, सेक्स में तभी मजा आएगा.
    मैंने भी मन बना लिया था कि सेक्स करना है.
    तो मैंने हामी भर दी.

    उसने रात में मुझे मैसेज किया- कल के तैयार हो ना!
    मैंने हां कर दी.

    फिर उसने पूछा- चूत पर बाल हैं या साफ़ कर लिए?
    मैंने बोला- हैं.

    उसने कहा- चूत साफ करके आना.
    मैंने कहा- तुम ही कर देना.
    वो बोला- ठीक है.

    दूसरे दिन कॉलेज के बहाने वो मुझे लेने आया.
    मैं बाइक पर बैठ गई.

    वो मुझे होटल में ले गया, वहां एक रूम लिया और हम दोनों रूम में आ गए.

    रूम बंद करके ही वो मुझ पर टूट पड़ा.
    मेरे होंठों को चूसने लगा.
    मैं भी उसे किस किए जा रही थी.

    थोड़ी देर बाद उसने अपनी शर्ट उतार दी और मेरा टॉप उतार दिया, ब्रा भी उतार दी.

    मैं पहली बार किसी के सामने नंगी थी, मैं अपने हाथों को मम्मों पर रखकर ढक रही थी.

    वो बोला- जान, अब तो ये सब मेरा है. आज मैं तुम्हें इतने मज़े दूँगा कि कभी चुदाई के लिए ना नहीं कहोगी.

    उसने मम्मों पर से मेरे हाथ हटाए और ज़ोर ज़ोर से मम्मों को चूसने लगा दबाने लगा.
    मेरे मुँह से अहह अहह निकल रहा था. मुझे बहुत मज़ा आ रहा था.

    उसने आधे घंटे तक मेरे दोनों मम्मों को बारी बारी से चूसा.
    उसके बाद उसने मेरी लैगी और पैंटी भी निकाल दी.

    मेरी चूत पर बहुत बाल थे तो उसने बैग में से रेजर निकाला और बाल साफ करने लगा.

    चूत साफ होने के बाद उसने कहा- वॉशरूम में जाकर धोकर आओ.

    जब मैं चूत धोकर आई, तो वो पूरा नंगा खड़ा था. उसका 7 इंच का लंड मेरे सामने लहरा रहा था.

    मैं तो उसका लंड देख कर ही डर गई.

    फिर उसने मुझे हग किया और मुझसे बोला- तुम मेरे लिए क्या कर सकती हो?
    मैंने कहा- जो तुम बोलो.

    उसने कहा- अगर तुमसे नहीं हुआ तो आज से हमारा ब्रेकअप.
    मैं उसे खोना नहीं चाहती थी तो मैं मान गई.

    वो खड़ा था. उसने मुझे नीचे बिठाया और अपना लंड को चूसने को कहा.
    उसका लंड बहुत मोटा और बड़ा था.

    मैं नीचे घुटनों पर बैठ गई और उसका लंड पकड़ कर थोड़ा हिलाया.
    लंड से पानी निकल रहा था.

    मैंने पहले पूरे लंड पर किस की, फिर उसे अपने मुँह में ले लिया.
    उसका लंड बड़ी मुश्किल से मेरे मुँह में जा रहा था.

    आधा लंड भी नहीं जा रहा था.
    मुझे खट्टा सा स्वाद आ रहा था और लंड सी अजीब सी महक आ रही थी.

    थोड़ी देर चूसने के बाद मुझे भी अच्छा लगने लगा.
    कुछ मिनट तक चूसने के बाद उसका माल मेरे मुँह में ही निकल गया.

    वो मेरे बाल पकड़ कर लंड पर मुँह सटाए हुआ था तो मुझे उसका माल पीना पड़ा.

    उसके बाद उसने मेरे होंठों को चूस लिया और लिपकिस करने लगा.
    मैंने लंड चूसा था, तो किस में भी लंड का स्वाद आ रहा था.

    उसके बाद उसने मुझे बेड पर लिटाया और दोनों पैर फैला दिए.
    वो मेरी जांघों पर किस करने लगा.

    मेरे मुँह से सिसकारियां निकलने लगीं ‘आह आह …’

    उसने मेरी चूत पर जीभ लगाई तो मेरे शरीर में जैसे 440 वोल्ट का झटका लग रहा था.
    मैं अहह अहह कर रही थी.

    पांच मिनट चूत चाटने के बाद मेरा पानी निकल गया.
    उसका लंड भी खड़ा हो गया था.

    उसने मुझे एक बड़ी सी किस की और अपने मुँह से बहुत सारा थूक निकाल कर चूत के छिद्र पर लगा दिया.
    कुछ थूक लंड पर भी लगाया.

    फिर वो मेरे दोनों पैरों के बीच में आया और मुझे किस करके अपने लंड को चूत पर रख कर रगड़ा.
    मैं सिहर उठी.

    उसने छेद पर लंड को सैट किया, मेरे मुँह पर अपना मुँह रखा और किस करने लगा.
    अचानक से उसने एक झटका मारा और लंड का टोपा अन्दर घुसा दिया.

    मुझे बहुत दर्द हुआ.
    मैं रोने लगी.

    मगर अभी तो सिर्फ़ टोपा अन्दर घुसा था.
    दूसरे झटके में उसने आधे से ज्यादा लंड चूत में घुसा दिया.

    मैं तड़पने लगी.
    मेरी चूत में किसी ने गर्म सरिया घुसेड़ दिया हो, ऐसा लग रहा था.
    मेरी सील टूट चुकी थी.

    मैं उसे अपने ऊपर से हटाने की कोशिश कर रही थी लेकिन वो लंड को आगे पीछे करके चोदे जा रहा था.

    कुछ मिनट बाद मेरा पानी निकल गया.
    उसने चूत से लंड निकाल लिया.

    लंड पूरा सफ़ेद झाग से भरा हुआ था. उस पर वीर्य और खून लगा था.
    बेड पर भी खून था.

    मैं ये सब देख कर रोने लगी.
    उसने कहा- जान, पहली बार सबका निकलता है. तुम्हें मुझ पर ट्रस्ट है ना!
    मैंने हां कहा.

    कुछ देर बाद उसने लंड फिर से चूत में पेल दिया.
    जब लंड अन्दर घुसा तो मुझे बहुत दर्द हुआ. मगर इस बार थोड़ी देर बाद मुझे भी अच्छा लगने लगा.

    अब पच पच की आवाज़ आने लगी थी और मेरे मुँह से अहह अहह की आवाज आने लगी.
    दस मिनट बाद उसका रस निकल गया.

    उस दिन हम दोनों ने 3 बार चुदाई की.
    शाम को जब मैं घर वापस गई तो मैं ठीक से चल नहीं पा रही थी.
    मेरी चूत सूज चुकी थी.

    हॉट सिस्टर पोर्न के बाद तीन दिन तक चूत में दर्द रहा और उसके बाद सब ठीक हो गया.
    अब हम दोनों हफ्ते में 2 दिन कॉलेज से बंक मारकर चुदाई करने चले जाते थे.

    अब मुझे भी अब चुदवाने का बहुत शौक चढ़ गया था.
    जब भी मौका मिलता है, हम दोनों भरपूर चुदाई कर लेते हैं.
    भाई बहन होने के कारण कोई हम पर शक भी नहीं करता है.

  • साली ने घरवाली का सुख दिया

    आज मैं अन्तर्वासना की इस नयी साईट पर मेरी और मेरी साली की कहानी बताने जा रहा हूँ। मेरी शादी 2005 एक साधारण से परिवार में हुई थी, उस समय मेरी उम्र 25 साल थी, मेरी ससुराल में मेरी पत्नी, एक छोटी साली जिसकी उम्र 19 साल की थी और मेरे ससुर रहते थे. मेरी सास का देहांत लगभग 10 साल पहले ही हो गया था।

    मेरी पत्नी का कोई भी भाई नहीं था और ससुर भी अक्सर अपने गाँव में रहते थे इसलिए मुझे शादी के बाद अपनी पत्नी और साली के साथ उनके शहर वाले घर में रहना पड़ा। मेरी पत्नी मेरी देखने में बहुत सुंदर है साली से भी ज़्यादा, मैंने कभी भी अपनी साली से सेक्स करने के बारे में नहीं सोचा, हम लोगों की जिंदगी बहुत ही मज़े से कट रही थी।

    शादी के एक साल बाद मेरी पत्नी ने एक सुंदर से बेटे को जन्म दिया. क्योंकि बच्चा अभी छोटा था और उन दोनों की देखभाल करने वाली कोई समझदार स्त्री नहीं थी तो मेरी माँ ने मेरी पत्नी को अपने घर बुला लिया।
    अब घर में मैं और मेरी साली अकेले रह गये थे, मैं उससे बहुत कम बात करता था और सुबह जल्दी काम पर निकलता था रात को देर से आता था. मेरी साली मुझे खाना खिलाने के बाद पड़ोस में रह रहे अपने चाचा के घर में सोने चली जाती थी और सुबह जल्दी आकर मेरे लिए खाना बना देती थी. सारी चीजें अपने हिसाब से सही चल रही थीं।

    पत्नी से बिछड़े हुए लगभग एक महीना हो गया था और अब मेरा मन चुदाई करने का होने लगा था. लेकिन कोई तरीका समझ में नहीं आ रहा था। मैं कभी-कभी कोई अश्लील फिल्म की सीडी लाकर रात में फिल्म भी देख लेता था जिससे मेरे मन में चुदाई करने की चाहत और तेज होती जा रही थी।

    एक दिन मैंने सोचा कि क्यूँ ना अपनी साली को पटाया जाए चुदाई के लिए … इससे मेरा काम बहुत आसान हो जाएगा और जब तक पत्नी नहीं आती है, तब तक जब भी मन करेगा, भरपूर मज़े ले सकूँगा. यही सोच कर मैं साली को पाटने का जुगांड सोचने लगा।

    एक़ दिन की बात है कि मैं अश्लील फिल्म वाली सीडी अपने बिस्तर पर तकिया के नीचे भूल गया और काम पर चला गया. बाद में मुझे याद आया कि मैं सीडी तो घर पर ही भूल गया हूँ. फिर मैंने सोचा कि कोई बात नहीं … अगर वो सीडी साली ने देख ली तो मेरा काम और भी आसान हो जाएगा.

    यही सोच कर मेरा लंड पैंट के अंदर ही तन गया, अब मेरे मन में केवल अपनी साली को चोदने का ख्याल घूमने लगा।

    शाम को जब मैं घर आया तो मेरी साली बिल्कुल नॉर्मल दिखी, वो वैसे भी मुझसे कम ही बात करती थी और मैं भी उससे ज़्यादा बात नहीं करता था. उसको नॉर्मल देख कर मेरा मूड खराब हो गया. मैंने सोचा था कि उसकी कुँवारी चूत आज ही चोदने को मिल जायेगी लेकिन मेरे सारे सपने टूट गये।

    उस रात को मैंने अपनी साली को सोच कर दो बार मुठ मारी और अपनी वासना शांत कर ली. अब मैं अपना सारा दिमाग़ इस बात को सोचने में लगाने लगा कि कैसे अपने दिल की बात साली को बोलूं, पता नहीं वो भी मुझसे चुदना चाहती है या नहीं?
    ऐसा ना हो कि कुछ बवाल हो जाए!

    यही सोचते सोचते सारा दिन बीत गया. मेरा काम में बिल्कुल भी मन नहीं लग रहा था इसलिए उस दिन मैं शाम को जल्दी घर आ गया.
    मुझे देखकर मेरी साली ने एक प्यारा सा स्माइल दिया और बोली- जीज्जा जी, आज तो आप बहुत जल्दी घर आ गये. आप चाय पीजिए, तब तक मैं सब्जी ले कर आती हूँ।

    मैं कपड़े बदलकर चुपचाप चाय पीने लगा और प्यासी नज़रों से साली को घूरने लगा. उसकी गोल बड़ी बड़ी चुचियाँ और 36 इंच की कमर मेरे अंदर वासना का तूफान पैदा कर रही थी।
    वो बोली- मैं सब्जी लेकर आती हूँ.
    और घर से बाहर निकल गई, मैं भूखी नज़रों से उसको देखता ही रह गया.

    बाज़ार से वापस आने के बाद वो अपने काम में लग गई और मैं कमरे से बाहर निकल कर पोर्च में बैठ गया. थोड़ी देर बाद जब मैं किसी काम से अंदर गया तो मैंने देखा कि कमरे का दरवाज़ा बंद है लेकिन उसमें कुण्डी नहीं लगी थी.

    मैंने धीरे से दरवाज़ा खोला और अंदर का नज़ारा देखकर मेरी आँखें फटी रह गईं. मेरी साली अपने कपड़े बदल रही थी, उसके शरीर पर केवल ब्रा और पेंटी थी, उसका शरीर बिल्कुल संगमरमर की तरह चिकना था.
    मैंने सोचा क़ि मौका बढ़िया है अभी जाकर इसको दबोच लेते हैं और अपनी इच्छा पूरी कर लेते हैं.
    लेकिन अंदर से एक डर भी था कि कहीं बात बिगड़ ना जाए क्योंकि हम दोनों के बीच कभी भी ज़्यादा बात नहीं होती थी और ना ही कोई हँसी मज़ाक होता था।

    अभी मैं ये सब सोच ही रहा था क़ि दरवाजे की घंटी बजी और मैं जल्दी से बाहर आ गया। दरवाजे पर पड़ोस में रहने वाली चाची और उनकी बेटी आए हुए थे.
    मेरा तो सारा मूड ही खराब हो गया, एक सुनहरी मौका आते आते हाथ से निकल गया।

    उसी बीच मैं 2 दिन की छुट्टी लेकर अपने घर आ गया क्योंकि अपने बेटे को देखे हुए काफ़ी दिन हो गये थे और पत्नी को भी बहुत दिनों से नहीं छुआ था. लेकिन घर आने के बाद भी पत्नी के साथ सेक्स करने का मौका नहीं मिला।
    2 दिन रुकने के बाद मैं वापस आ गया और मैंने जानबूझ कर शाम की ट्रेन पकड़ी, रात को लगभग 2 बजे मैं ससुराल वाले घर पहुँचा.

    मेरी साली और उसकी चचेरी बहन घर में थीं वो दोनों मेरे कमरे में मेरे ही बेड पर सो रही थी.
    मैंने उसको बोला- यही लेटी रहो, मैं एक किनारे लेट जाऊँगा.

    मेरी साली बीच में थी और उसकी चाचा की बेटी किनारे पर लेटी थी. मैं भी कपड़े बदल कर दूसरे किनारे पर लेट गया. लेकिन मेरी आँखों से नींद गायब थी.

    मैंने करवट लेने के बहाने अपनी एक टाँग अपनी साली के जिस्म के ऊपर रख ली और अपना हाथ उसकी छाती पर रख दिया. अब मेरा लंड तनकर खड़ा हो गया. मैंने अपने लंड को अपनी साली के कूल्हों से सटा दिया.

    लंड की चुभन से उसकी आँख खुल गई और मैं सोने का नाटक करने लगा. उसने सोचा कि मैं थकान की वजह से बहुत गहरी नींद में सो रहा हूँ। मेरा हाथ अभी भी उसकी छाती पर ही रखा था और मुझे उसकी धड़कनें तेज होती महसूस हो रही थीं.

    शायद मेरे स्पर्श से उसके अंदर भी वासना का संचार हो गया था. थोड़ी देर तो वो अपनी गांड को मेरे लंड पर दबाती रही.
    तभी उसकी चाचा की बेटी ने उसकी तरफ करवट ली जिससे मेरी साली थोड़ा सा अलग हो गई. फिर मैं भी चुपचाप सो गया.

    लेकिन मैंने मन ही मन ये सोच लिया था क़ि अपन साली को अब जल्दी ही चोदना है। मुझे मन ही मन अपनी चचेरी साली पर बहुत गुस्सा आ रहा था, अगर आज वो ना होती तो आज ही मैं अपनी साली के साथ चुदाई का मज़ा ले लेता.
    खैर कोई भी कम अपने समय से पहले नहीं होता.

    दूसरे दिन सुबह मैं देर से उठा और मैंने जानबूझ कर ऐसा दिखाया कि मेरा मूड बहुत खराब है. उस दिन मैं काम पर भी नहीं गया.

    दोपहर को खाना खाने के बाद मैं अपने कमरे में आकर लेट गया. थोड़ी देर बाद मेरी साली भी काम ख़त्म करके मेरे कमरे में आ गई और उसने मुझसे पूछा- जीजा, आपका मूड कुछ सही नहीं लग रहा है, क्या बात है?
    मैंने उसको बोला- मेरी लाइफ बिल्कुल नीरस हो गई है, मेरी बीवी और बेटा मुझसे दूर हैं और मैं यहाँ अकेला पड़ा हूँ. सभी लोग अपने अपने परिवार के साथ रह रहे हैं और मैं यहाँ अकेला पड़ा हूँ और बीवी और बेटे को प्यार भी नहीं कर सकता।

    यह सुनकर वो बहुत परेशान हो गई और रोने लगी, उसने बोला- इस सबकी वजह मैं हूँ, मेरी वजह से आप दोनों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
    मैंने उसको समझाया- ऐसा नहीं है.
    लेकिन उसने रोना बंद नहीं किया.

    फिर मैंने उसको गले से लगाया तो वो और तेज रोने लगी और मैं उसको चुप कराने लगा. तभी मैंने उसके माथे पर एक चुम्बन किया तो वो मुझसे कस कर लिपट गई. पर वो लगातार रो रही थी. मैंने सोचा कि यही मौका है उसको सांत्वना देने के बहाने उससे प्यार करने का!

    तभी मैंने उसको चूमना शुरू कर दिया और उसके होंठों को चूमने लगा. उसने हटने की कोशिश की तो मैं बोला- आज मत रोको, मैं प्यार का बहुत भूखा हूँ. अगर तुम मेरा साथ नहीं दोगी तो कौन देगा. अगर तुम चाहती हो क़ि मैं परेशान ना रहूं तो मुझे अपनी दीदी की कमी महसूस ना होने दो, मेरे प्यार को अपना लो।

    अब उसका विरोध कम हो गया और वो मेरी बांहों में लिपट गई. मैंने उसके होंठों को चूसना शुरू किया और अपने हाथ से उसकी चुचियों को दबाने लगा जिससे उसके अंदर भी वासना भर गई और वो मेरा भरपूर साथ देने लगी. उसने भी मेरे होंठों को चूसना शुरू कर दिया.

    मैंने उसके बदन को सहलाना शुरू कर दिया और उसने भी मेरे शरीर को सहलाना शुरू कर दिया. फिर उसने मेरे लंड को पैंट के उपर से रगड़ना शुरू कर दिया. मेरा लंड अब पूरी तरह से टाइट हो गया था.

    तभी मैंने उसके कपड़े उतरने शुरू कर दिए तो वो शरमाते हुए मना करने लगी और बोली- मुझे बहुत शर्म आ रही है. मैंने आज तक किसी के सामने कपड़े नहीं उतारे!
    यह सुनकर मैं बहुत खुश हो गया क्योंकि मुझे एक कुँवारी चूत मिलने वाली थी.

    मैंने उसको समझाते हुए कहा- अरे पगली … शरमाने से काम नहीं चलेगा. प्यार करने का असली मज़ा तो बिना कपड़ों के ही है. जब दो जिस्म आपस में बिना कपड़ों के मिलते हैं तो सुख दोगुना हो जाता है.

    धीरे धीरे मैंने अपनी जवान साली के कपड़ों को उसके शरीर से अलग कर दिया. अब वो केवल ब्रा और पैंटी में थी। मैं भी अब केवल जांघिया में था.

    साली का संगमरमर सा दूधिया बदन देख कर मैं पागल हो रहा था. फिर मैंने उसकी ब्रा भी उतार दी और उसकी दोनों चुचियों को चूसना शुरू कर दिया. वो लंबी लंबी साँसें लेने लगी और उसका शरीर अकड़ने लगा.

    मैं समझ गया कि अब उसकी वासना अपने चरम पर है लेकिन अभी मैं उसको भरपूर मज़ा देना चाह रहा था जिससे वो मेरी दीवानी हो जाये। मैं बहुत ही प्यार से उसकी चुचियों को चूस रहा था.

    और फिर मैंने अपना अंडरवीयर उतार दिया और उसको लंड सहलाने को बोला. अब मैं उसकी चुचियों को चूस रहा था और वो मेरे लंड को सहला रही थी. फिर मैंने उसकी पैंटी में हाथ डाल दिया और उसकी चूत को सहलाने लगा.

    मेरी साली की आँखों में वासना की लालिमा साफ झलक रही थी और वो अपनी कमर ऊपर की तरफ उठा रही थी. मैं समझ गया कि अब वो चुदाई के लिए बेताब हो रही है.
    तभी मैंने 69 की पोज़िशन बना ली और उसको अपना लंड चूसने को बोला और मैं उसकी चूत को चाटने लगा.

    जैसे ही मैंने उसकी चूत पर अपनी ज़ीभ लगाई तो वो बहुत ज़ोर से सिसकारियाँ लेने लगी. मैंने ज़ीभ को चूत के अंदर बाहर करना शुरू कर दिया. वो तो जैसे पागल सी हो गई और बड़बड़ाने लगी- आह … जीज्जा … बहुत मज़ा आ रहा है. आज से आप मेरे जीजा जी नहीं, मेरे पति हो! मेरे राजा और ज़ोर से चाटो मेरी चूत को! अपना लंड डाल के फाड़ दो मेरी चूत को! बहुत मज़ा आ रहा है. इतना मज़ा पहले क्यूँ नहीं दिया.

    वो बीच बीच में बड़बड़ा रही थी और रुक रुक कर मेरे लंड को चूस रही थी. वो मेरे लंड को अपने हलक की गहराई तक ले जा रही थी. उम्म्ह… अहह… हय… याह… हम दोनों लंड और चूत को चूसने में इतना ज़्यादा जोश में थे कि अपने चरम तक पहुँच गये. उसकी चूत ने मेरे मुँह पर ही पानी छोड़ दिया.

    वो बीच बीच में बड़बड़ा रही थी और रुक रुक कर मेरे लंड को चूस रही थी. वो मेरे लंड को अपने हलक की गहराई तक ले जा रही थी. उम्म्ह… अहह… हय… याह… हम दोनों लंड और चूत को चूसने में इतना ज़्यादा जोश में थे कि अपने चरम तक पहुँच गये. उसकी चूत ने मेरे मुँह पर ही पानी छोड़ दिया.

    फिर मैंने बोला- मेरा लंड भी झड़ने वाला है.
    तो वो बोली- अपना माल मेरे मुँह में ही गिरा दो.
    तभी मेरे लंड ने पिचकारी छोड़ दी और मेरे माल से उसका मुँह भर गया जिसको वो पी गई।

    थोड़ी देर तक हम दोनों वैसे ही शांत पड़े रहे. फिर मैंने उसको अपने सीने से लगा लिया और प्यार करने लगा. वो भी मुझसे लिपटी हुई थी.

    मैंने प्यार से उसके गाल पर हाथ फेरते हुए पूछा- कैसा लगा?
    तो वो मुस्कराते हुए बोली- बहुत मज़ा आया … अगर मैं यह जानती क़ि आप मुझको पसंद करते हैं तो मैं ये एक महीना बर्बाद नहीं होने देती, रात को जब आप और दीदी कमरे में सेक्स के मज़े लेते थे तो आप लोगों की आवाज़ें सुनकर मेरा भी बहुत मन होता था क़ि कोई मुझे भी ऐसे ही चोदे!

    तो मैंने पूछा- तुमने कोई बाय्फ्रेंड तो बनाया ही होगा? उससे ही चुदवा लेती.
    वो बोली- नहीं जीजाजी, लड़के बहुत हरामी होते हैं। कोई गर्लफ्रेंड बन जाए तो सारी दुनिया में बताते घूमते हैं. और मैं नहीं चाहती कि कोई मेरे बारे में उल्टी सीधी बात करे. मैं तो शुरू से ही आप के साथ प्यार करना चाहती थी. इससे मेरा काम भी चलता रहता और घर की बात घर में ही रहती।

    ये सब सुनकर मैं बहुत खुश हुआ और उसको चूमने लगा.
    तो वो बोली- क्या मेरी चूत को आपके लंड का स्वाद मिलेगा या खाली ज़ीभ से ही काम चलना पड़ेगा?
    मैं बोला- ज़रूर मिलेगा मेरी जान! लेकिन मैं इस दिन को एक यादगार दिन बनाना चाहता हूँ.
    वो बोली- कैसे?
    तो मैंने कहा- जैसे शादी की पहली रात होती है, वैसे ही हम दोनों सुहागदिन मनाएँगे.

    वो उठकर बाथरूम में चली गई और नहा धोकर बाहर आई और मुझसे बोली- आप भी नहा कर फ्रेश हो जाओ, तब तक मैं दुल्हन की तरह तैयार होती हूँ.
    मैं नहाकर बाहर निकला तो वो मेरे बेड पर बिल्कुल दुल्हन की तरह सजी हुई बैठी थी और घूँघट भी किए थी.

    मेरा दिल तो खुशी के मारे पागल हो रहा था क्योंकि मैं दोबारा सुहागरात मानने जा रहा था … वो भी एक कुँवारी कली के साथ।

    मैंने बिस्तर पर पहुँच कर उसका घूँघट उठाया तो उसको देखता ही रह गया. वो दुल्हन की तरह सजी हुई बहुत ही सुंदर लग रही थी.

    धीरे धीरे मैंने उसके सारे कपड़े उतार दिए और खुद भी पूरा नंगा हो गया. मेरा लंड तो चुदाई के बारे में सोच कर पहले ही खड़ा था. मैंने उसके पूरे शरीर को चूमना शुरू किया और वो भी मेरा भरपूर साथ दे रही थी.

    तभी मैंने अपनी उंगली उसकी चूत में डाली तो वो दर्द से उछाल गई और बोली- उंगली डालने से दर्द हो रहा है तो लंड कैसे झेलूँगी?
    मैंने कहा- डरो नहीं मेरे जान, मैं उंगली से तुम्हारी चूत को सहलाउँगा तो वो थोड़ी गीली हो जाएगी और शुरू में थोड़ा सा दर्द होगा. वो तो एक बार सब को होता है. लेकिन बाद में बहुत मज़ा आएगा।

    अब मैंने फिर से उसकी चूत को चूसना शुरू किया और उसको अपना लंड चूसने को बोला.

    जब चूत पूरी तरह गीली हो गई तो मैं बोला- आओ मेरी जान … अब हम दोनों एक हो जाएँ.
    इतना कह कर मैंने उसको पीठ के बल लिटाया और अपने लंड का सुपारा साली की चूत के मुहाने पर लगाया. वो वासना से भर चुकी थी और बोल रही थी- जल्दी करो मेरे राजा … अब ये आग बर्दाश्त नहीं हो रही! जल्दी से इस आग को बुझाओ.

    मैंने बड़ी ही सावधानी से अपने लंड को धीरे धीरे अंदर डालना शुरू किया. जैसे ही आधा लंड उसकी चूत में घुसा, वो दर्द से तड़प उठी. मैंने फ़ौरन ही उसकी चुचियों को सहलाना शुरू किया और उसके होंठों को चूसने लगा. उसकी चुचियों के निप्पल को भी धीरे धीरे मसलने लगा और लंड को पूरा अंदर डाल दिया.

    जैसे ही लंड उसकी चूत की जड़ तक पहुँचा, उसकी हल्की सी चीख निकल गई उम्म्ह … अहह … हय … ओह … फिर मैंने बहुत ही आराम से धीरे धीरे लंड को आगे पीछे करना शुरू किया और उसके होंठों को लगातार चूसता रहा. लगभग 10-12 धक्के मारने के बाद जब मुझे लगा क़ि अब उसका दर्द कुछ कम हो गया है तो मैंने धक्कों की स्पीड बढ़ा दी.

    अब वो भी मेरा साथ देने लगी और अपनी गांड को ऊपर की तरफ उछलने लगी. लगभग 10 मिनट की चुदाई के बाद वो बोली- अब मैं झड़ने वाली हूँ मेरे राजा!
    तो मैंने भी धक्कों की स्पीड और बढ़ा दी और 10-15 धक्के लगाने के बाद मेरा माल भी निकालने को तैयार हो गया.

    मैंने उससे पूछा- मैं भी झड़ने वाला हूँ अपना माल कहाँ गिरा दूं?
    तो वो बोली- आज मेरी जिंदगी का सबसे खूबसूरत और यादगार दिन है आज तो आप अपना माल मेरी चूत में ही गिरा दो!

    यह सुनकर मैंने अपनी पिचकारी को उसकी चूत में ही छोड़ दिया और उसकी फुद्दी मेरे गर्म माल से भर गई. इस चुदाई से हम दोनों इतना थक गये कि वैसे ही बिना कपड़ों के एक दूसरे की बांहों में लिपट कर सो गये.

    शाम को हमारी नींद देर से खुली. उसने जल्दी से उठ कर अपने कपड़े पहने और बोली- आप भी कपड़े पहन लो. कहीं चाचा के घर से कोई आ गया तो प्राब्लम हो जाएगी।

    मैं कपड़े पहनकर कमरे से बाहर आया तो उसने मुझे गले लगाकर मेरे होंठों को चूमा और बोली- अब तो मैं तुम्हारी घरवाली बन गई हूँ. तो अब जब तक दीदी नहीं आ जाती तब तक मुझे सुबह और शाम को डेली तुम्हारा लंड चाहिए. लेकिन अब कॉंडोम के बिना नहीं चोदने दूँगी. इसलिए अभी बाज़ार जाकर कॉंडोम ले आओ और कुछ खाने के लिए भी ले आना क्योंकि देर हो चुकी है और अभी खाना बनाने लगी तो चुदाई का प्रोग्राम नहीं हो पाएगा.

    उसके इस उतावलेपन को देखकर मैं बहुत खुश था, मैंने बाइक उठाई और बाज़ार चला गया.

    उस दिन से दोस्तो … मेरी तो दुनिया ही बदल गई. अब वो सुबह जल्दी आ जाती और मैं शाम को जल्दी आ जाता. हम दोनों के प्यार का सिलसिला चलने लगा. अब हम दोनों ही खुश थे मानो हम लोगो की दुनिया ही बदल चुकी थी।

  • साली की चूत चुदाई का सपना पूरा हुआ

    यह कहानी एक गर्म प्यासी चूत की चुदाई के बारे में है. अब आपका ज्यादा समय न लेते हुए मैं अपनी कहानी को शुरू करने जा रहा हूं. कहानी में कहीं कोई कमी रह जाये तो मुझे माफ करें.

    दस साल पहले जब मेरी शादी हुई थी तब मेरी साली हनीप्रीत बंगलौर में पढ़ रही थी. पढ़ाई पूरी होने के बाद उसको बंगलौर में ही नौकरी मिल गई. लगभग छह साल पहले उसकी शादी दिल्ली में रहने वाले एक युवक से हुई तो वह बंगलौर से दिल्ली आ गई.

    शादी के दो-तीन महीने बाद ही गुड़गांव में उसने कोई कम्पनी ज्वाइन कर ली और दिल्ली से डेली अपडाउन करती रही. करीब साल भर बाद पुणे की किसी कम्पनी से अच्छा ऑफर मिला तो उसने पुणे जाकर ज्वाइन कर लिया.

    पिछले पांच साल से हनी पुणे में रह रही थी और उसका पति दिल्ली में.

    मैंने अपनी पत्नी से इस बारे में कई बार बात की कि हनी पुणे में है और उसका पति दिल्ली में. क्या मामला है, इनका परिवार कैसे बनेगा? पति पत्नी एक साथ नहीं रहेंगे तो गृहस्थी कैसे बनेगी?
    मेरी पत्नी हमेशा एक ही जवाब देती- मुझे खुद समझ नहीं आ रहा और मम्मी से पूछती हूँ तो उनका भी ऐसा ही जवाब होता है.

    इधर एक महीना पहले मेरी सास को दिल का दौरा पड़ा, ईश्वर की कृपा से उनकी जान बच गई लेकिन बाईपास सर्जरी करानी पड़ी और बीस दिन तक अस्पताल में रहीं.

    मां की हालत की खबर सुनकर हनीप्रीत व उसका पति दोनों लोग एकदम से उनका हालचाल जानने के लिए आ पहुंचे. हनीप्रीत का पति तो दूसरे दिन लौट गया लेकिन हनी रुक गई. जिस अस्पताल में ऑपरेशन हुआ, वो मेरे घर से बहुत करीब था और मेरी ससुराल से काफी दूर.

    व्यवस्था इस प्रकार से बनी कि रात को हनी अस्पताल में रुकती, सुबह नौ बजे मैं अपनी पत्नी को अस्पताल ले जाता और हनी को अपने घर ड्राप करके अपने ऑफिस चला जाता.
    हनी नहा धोकर हमारे घर पर आराम करती.
    शाम को छह बजे मैं ऑफिस से लौटता और अपने घर से हनी को लेकर अस्पताल जाता व अपनी पत्नी को वापस ले आता.

    जब से मेरी शादी हुई थी, हनी के साथ मेरा रिश्ता नमस्ते-नमस्ते से अधिक नहीं था. हालांकि जब से शादी हुई थी हनी पर हाथ साफ करने की तमन्ना तो थी जो समय के साथ साथ ठंडी हो गई थी.

    पिछले पांच छह दिन से हनी रोज मेरी बाइक पर बैठकर मेरे घर तक आती-जाती थी. इस दौरान ब्रेक लगाते समय उसकी चूचियां मेरी पीठ से टकराकर मेरी तमन्ना फिर से जगा रही थीं.

    उस दिन अपनी पत्नी को अस्पताल छोड़कर मैं और हनी घर के लिए निकले तो मैंने तय कर लिया कि आज मैदान फतेह करना है. आमतौर पर मैं घर पहुंच कर ताला खोलकर चला जाता था. आज मैंने ताला खोला और मैं भी अन्दर आ गया.

    मैंने हनी से कहा- आज मुझे थोड़ी देर से जाना है. तुम नहा लो, फिर चाय बना लेना, तो मैं चाय पीकर चला जाऊंगा.
    हनी ने अपना गाउन और टॉवल उठाया और बाथरूम में घुस गई. नहाकर बाहर निकली तो उसके बालों से पानी टपक रहा था.

    ‘जहेनसीब’ कहकर मैं मुस्कुराया तो वो मेरी प्रतिक्रिया पर बोली- क्या हो गया?
    मैंने कहा- माशाअल्लाह … तुम इतनी खूबसूरत हो! मैंनें तो आज ही ध्यान से देखा.

    हनी को उम्मीद नहीं थी कि मेरे मुंह से अनायास ही उसके हुस्न की तारीफ में इतने रसीले शब्द टपकने लगेंगे.
    वो मेरी ओर देखती ही रह गयी. मेरी नजरें उसके बदन को जैसे छूकर नापने लगीं.

    नजरों के वार से वो खुद को बचा नहीं पा रही थी और उसका चेहरा लाल होने लगा था. उसकी बढ़ती हुई सांसों और बढ़ी हुई धड़कनों के साथ ही उसके ऊपर नीचे होते वक्ष इस बात के गवाह थे कि उसके अंदर मेरे शब्दों ने वासना की चिंगारी फूंक दी है.

    उठ कर मैं उसके पास गया और उसके बदन को ऊपर से नीचे तक निहारने लगा. उसके बदन को मेरी नजरें मोर के पंख की तरह सहला सी रही थी जिसके स्पर्श से उसके बदन में झुरझुरी सी पैदा होने लगी थी.

    उसके गाउन में उठे हुए उसके उरोजों की शेप और उसके उठे हुए नितम्बों से चिपके उसके गाऊन की मस्त से आकार को ताड़ते हुए मैं उसके करीब जैसे ही पहुंचा तो लंड में हलचल पैदा होनी शुरू हो गयी थी.

    मैं हनी के पीछे पहुंचा और मैंने उसे अपनी बांहों में भर लिया. मेरी बांहों के घेरे में आते ही उसके बदन में करंट सा दौड़ गया और उसके गर्म से जिस्म की छुअन ने मेरे अंदर एक उन्माद सा पैदा कर दिया.

    उसको बांहों में लेकर मैंने उसकी गर्दन को पीछे से चूम लिया तो वो आगे होते हुए अलग हो गयी.

    मगर अब तो आग लग चुकी थी, अब मैं रुकने वाला नहीं था. मैंने उसको दोबारा से अपनी बांहों में जकड़ लिया और उसकी चूचियों को दबाते हुए उसकी गर्दन को चूमने लगा.

    वो कसमसाते हुए बोली- क्या कर रहे हो जीजा जी!
    मैंने मदहोशी में उसको चूमते हुए कहा- तुम्हें प्यार देने की कोशिश कर रहा हूं.
    वो बोली- ये कहीं गलत तो नहीं है?
    मैंने कहा- इतना नहीं सोचते. सिर्फ ऐसे पलों का आनंद उठाते हैं.

    शुरुआती ना-नुकुर के बाद वो शिथिल पड़ गई और उसने मेरी बांहों में समर्पण कर दिया. मैंने कई मिनट तक उसके जिस्म की गर्मी को महसूस करते हुए उसको बांहों में लिपटाये रखा और चूमता रहा.

    उसकी गांड मेरे तन चुके लंड पर रगड़ खाने लगी थी. यह इस बात का संकेत था कि वह उत्तेजित होकर सेक्स क्रिया के लिए तैयार हो गयी थी. वो बार बार मेरे लंड पर अपनी गांड से सहला रही थी जिससे मेरे लंड में एक वेग सा उठते हुए उसमें जोर का उछाला दे रहा था.

    मैंने उसकी गांड की दरार में उसके गाउन के ऊपर से ही उसके चूतड़ों में लंड को दबाना शुरू कर दिया. उसकी चूचियों को उसके गाउन के ऊपर से दबाते हुए मैं उसके बदन के ऊपरी हिस्से को जगह जगह से चूमने लगा. कभी उसके कंधे पर चुम्बन कर रहा था तो कभी उसकी पीठ पर.

    वो भी मादक सिसकारियां लेते हुए इस बात का इशारा कर रही थी उसके अंदर अब वासना की आग को हवा दी जा रही है जो हर पल भड़कती ही जा रही है.

    हनी को अपनी ओर घुमाकर मैंने उसके होंठों पर अपने दहकते हुए होंठ रखे और उसके होंठों का रसपान करने लगा. हनी भी जैसे इस पल का इंतजार सा कर रही थी और वो मेरे होंठों से लार को खींचने लगी.

    उसके मुंह की लार मैं अपने मुंह में खींचने की कोशिश कर रहा था और वो मेरे मुंह की लार अपने मुंह में खींचने का प्रयास कर रही थी. दोनों ही एक दूसरे के होंठों का रस पीने में लगे हुए थे.

    थोड़ी देर तक उसके होंठों का रसपान करने के बाद में मैंने उसका गाउन उतार दिया. उसका मखमली बदन मेरे सामने उभरकर आ गया था जो ऐसे लग रहा था कि किसी ने कामदेवी का मूर्त रूप संगमरमर पर तराश दिया हो.

    गाउन उतारते ही उसके स्तन मेरे सामने नंगे हो गये थे. नहाने के बाद उसने ब्रा नहीं पहनी थी. नीचे से उसकी पैंटी भी गीली सी लग रही थी. मैंने पल दो पल उसको नजर भर कर देखा और फिर उसकी चूचियों पर मुंह को रख दिया. मेरे गर्म होंठ उसकी चूचियों को छू गये.

    जैसे ही मेरे होंठ उसकी चूचियों पर रखे गये तो उसने जोर से एक आह्ह सी ली और फिर मेरे सिर को पकड़ कर अपने स्तनों पर दबा लिया. मेरे होंठ उसके स्तनों में धंस गये. मैं उसके स्तनों के निप्पलों को पीने लगा.

    हनी के मुंह से आह्ह … आई … उम्म … जैसी मादक आवाजें निकलना शुरू हो गयीं. पुच… मुच … मुआह्ह … जैसी आवाजों के साथ मैं उसके स्तनों को चूसने लगा और वो कामुकता के शिखर की ओर रवानगी भरने लगी.

    इधर मेरे लौड़े का हाल भी बुरा हो गया था. मगर उससे भी ज्यादा बुरा हाल साली की गर्म चूत का मालूम पड़ रहा था. उसने नीचे से पैंटी पहनी हुई थी और मेरा हाथ अनायास ही साली की पैंटी पर चला गया जिसमें उभर रहा गीलापन मेरी उंगलियों को छू रहा था.

    कुछ देर तक उसकी चूचियों को पीते हुए मैं उसकी चूत को पैंटी के ऊपर से मसलता रहा और वो पागल सी हो गयी. मेरा लंड फटने को हो गया था. वो अब मेरे लंड को मेरी पैंट में से दबाते हुए उसको खींचने लगी थी.

    ऐसा लग रहा था कि वो लंड को बाहर लाकर अपने हाथ में भरना चाहती थी. मुझसे भी रुका नहीं जा रहा था. मैंने साली की पैंटी में हाथ डाल दिया. जैसे ही उसकी गीली गर्म चूत पर मेरी उंगलियां लगीं तो एकदम से उचक कर मुझसे लिपट गयी.

    मेरी गर्दन को चूमते हुए अपनी चूत को मेरे हाथ मेरे हाथ पर मसलने लगी. मैं भी उसकी गीली चूत को सहलाने लगा और वो नीचे से मेरे लंड को दबाने लगी. अब दोनों ही बेकाबू से हो गये.

    हनी को लेकर मैं अब बेडरूम में आ गया. उसको लिटाकर मैं बारी बारी से उसकी दोनों चूचियां चूसने लगा. मेरा दायां हाथ पैन्टी के ऊपर से ही साली की चूत को सहला रहा था. हनीप्रीत के हाव भाव बता रहे थे कि चुदवाने के लिए वो बेताब हो रही थी.

    मैंने उसकी पैन्टी उतारी और 69 की पोजीशन में लेटकर अपनी साली की चूत चाटने लगा. जैसे ही उसकी चूत पर मेरे गर्म होंठ लगे तो वो सिसकारते हुए मेरे लंड को पैंट के ऊपर से ही चूमने लगी.

    फिर उसने मेरी पैंट की चेन को खोल लिया और मेरे लंड को बाहर निकाल लिया. लंड को बाहर लाते हुए उसने मेरे लंड को अपने मुंह में भर लिया. मस्ती में मेरे लंड पर अपने गर्म होंठ कसते हुए वो मेरे लंड को चूसने लगी और दूसरी ओर मेरी जीभ उसकी चूत की गहराई नापने लगी.

    वो भी चूतड़ खिसका-खिसकाकर चूत के मुख चोदन का मजा ले रही थी. उसके मुंह में लेने से मेरा लंड एकदम से फूल सा गया था और पहले ज्यादा मोटा सा लगने लगा था. मैं उसके मुंह को हल्के हल्के चोदने लगा था. वो बीच बीच में लंड को मुंह से निकाल कर उसके टोपे को चाट लेती थी जिससे उत्तेजित होकर मैं उसकी चूत में पूरी जीभ घुसा देता था.

    जब मुझसे बर्दाश्त न हुआ तो मैंने लंड को बाहर खींच लिया और अपने कपड़े खोलने लगा. मैंने अपनी शर्ट और पैंट को सेकेन्ड्स की स्पीड से उतार फेंका और अंडरवियर निकाल कर नंगा हो गया. एक बार फिर से उसकी चूत में जीभ दे दी और मेरी साली मेरे लंड के साथ खेलने लगी. उसको हाथ में लेकर दबाते हुए मुंह में लेकर लॉलीपोप के जैसे चूसने लगी.

    उसने मुझे चूत चोदने के लिए तड़पा कर रख दिया था. वो खुद भी लंड लेने के लिए मचल गयी थी. मैंने क्रीम की शीशी व कॉण्डोम का पैकेट लिया और उसकी चूत की चुदाई की तैयारी कर दी.

    एक तकिया हनी के चूतड़ों के नीचे रखकर मैंने उसकी चूत पर जीभ फेरना शुरू किया तो वो बोली- आह्ह जीजू… अब और न तड़पाओ.
    उसकी बात सुनकर मैंने अपने लण्ड पर क्रीम चुपड़ी और साली की चूत के द्वार पर लण्ड का सुपारा रखकर दस्तक दी तो उसकी चूत ने जवाब दिया- चले आओ दरवाजा खुला है.

    मैंने धक्का मारा तो पहले धक्के में आधा और दूसरे धक्के में पूरा लण्ड हनीप्रीत की गुफा में समा गया.
    जैसे ही मेरा लंड उसकी चूत की गुफा में उतरा तो वो उसके मुंह से निकल गया- जी…जू … आह्हह … कहकर हनी ने अपने चूतड़ उचकाने शुरू कर दिये.

    चूत में लंड जाते ही उसके चेहरे के आनंद को देखकर मुझे समझते देर न लगी कि बहुत दिन से यह चुदासी है. मैंने हनी की कमर पकड़ ली और साली की चुदाई की ट्रेन चला दी. जैसे जैसे धक्के पड़ रहे थे वैसे वैसे ही उसके मुंह से जी…जू… उम्म्ह… अहह… हय… याह… जी…जू… की सिसकारियां निकल रही थीं.

    वो बार बार मेरा नाम लेकर अपनी गांड को ऊपर उठाने लगी. उत्तेजना बहुत ज्यादा हो गयी थी. मैं ज्यादा देर तक नहीं टिकने वाला था. इसलिए जब मुझे लगा कि मेरा काम होने वाला है तो मैंने अपना लण्ड बाहर निकाल लिया.

    लंड को बाहर निकाल कर उस पर हार्ड डॉटेड कॉण्डोम चढ़ाकर उसकी चूत में डाला तो लम्बी सी आहह.. भरते हुए हनी बोली- जीजू … आह्ह आपने तो दिन में तारे दिखा दिये.
    मैंने कहा- अब मुझे भी जन्नत का आनन्द लेने दो और मैंने धकाधक अपनी साली की चूत को पेलना शुरू किया.

    फच-फच की आवाज के साथ साली की पानी छोड़ रही चूत की चुदाई में मैं इतना खो गया कि क्या बताऊं. मैं बस धक्के पर धक्के लगाये जा रहा था.

    डिस्चार्ज होने से पहले लण्ड फूलकर इतना टाइट हो गया कि अन्दर बाहर करना मुश्किल हो रहा था लेकिन मैं रुका नहीं बस पेलता रहा. अगली पांच मिनटों तक मैंने उसकी चूत को जबरदस्त तरीके से रगड़ दिया.

    अब मुझसे रहा न गया और मेरे लंड पर मेरा कंट्रोल खो गया. मेरे लण्ड से एक फव्वारा छूटा जिसने मुझे जन्नत का दीदार करा दिया. मेरे लंड से वीर्य निकल कर कॉन्डम में भर गया.

    फिर हाँफते हुए मैं हनी के ऊपर ही ढेर हो गया. वो भी जोर जोर से सांसें लेते हुए मुझे अपनी चूचियों में शरण देने लगी. मैंने कई मिनट तक अपनी धड़कनें सामान्य होने का इंतजार किया और उसके बाद फिर से साली के जिस्म के साथ खेलना शुरू कर दिया.

    तभी उसने याद दिलाया कि आपको ऑफिस के लिए देर हो रही है. अब तो मैं ऑफिस और काम को भूल जाना चाहता था. मैं जल्दी से तैयार होकर ऑफिस गया और पांच दिन की छुट्टी लेकर आ गया.

    साली की चूत चुदाई का सुनहरा मौका मिला जिसका मैंने जमकर मजा लिया. पांच दिनों मैंने उसकी चूत कम से कम 15 बार तो जरूर चोदी होगी. वो भी मेरे लंड की जैसे दीवानी सी हो गयी थी. अब तो घर आते ही हम दोनों एक दूसरे के जिस्मों से लिपट जाते थे.

    इस तरह से साली की चूत चोदकर मैंने अपनी ख्वाहिश पूरी की और मुझे उसकी चूत चोदने में जैसे जन्नत का मजा मिला. बहुत दिनों के बाद काम का ऐसा सुख प्राप्त हुआ था.

  • पत्नी की सहमति से विधवा सास के साथ संभोग- 2

    इस सेक्स कहानी के पहले भाग
    कुंवारी पत्नी के साथ सुहागरात
    में आपने पढ़ा था कि तपोश को अपने से बड़ी उम्र की महिलाएं अच्छी लगती थीं.
    फिर तपोश ने अपने ऑफिस में काम करने वाली अनुप्रिया से शादी हो गयी.
    तपोश को अपनी सास यानि अनुप्रिया की विधवा माँ अच्छी लगने लगी थीं.

    अब आगे की वाइफ मदर सेक्स कहानी तपोश की जुबानी सुनें.

    हमारी शादी हुए एक महीना हो गया था.

    हम हफ्ते में 2-3 बार मम्मी से मिलने जाते, हमने देखा था कि मम्मी कुछ कमजोर हो गयी थीं.
    शायद वे ठीक से खाना नहीं खा रही थीं.

    अनु के पूछने पर उन्होंने बताया कि अकेली के लिए खाना बनाने का मन नहीं करता.
    हम दोनों अपने घर वापस आ गए.

    मैं- अनु हम मम्मी को अपने घर ले आते हैं, अपना दो बेडरूम का फ्लैट है कोई मुश्किल नहीं होगी. मम्मी का स्कूल हमारे फ्लैट से पास ही है.
    अनु- हां … मैं भी यही कहने वाली थी.

    हम दोनों मम्मी को समझा बुझा कर अपने फ्लैट ले आए.
    अब मम्मी खुश रहने लगीं और उनकी तबियत सुधर गयी.

    जब मैं अपनी पत्नी अनुप्रिया को अनु कहकर आवाज़ लगाता, तो कभी कभी मम्मी कह उठतीं- आती हूँ!
    मम्मी का नाम अनुश्री है.

    मुझे मेरी पत्नी ने बताया उसके पिताजी माँ को अनु कहते थे.
    मैं सोच में पड़ गया.

    उस दिन मेरा जन्म दिन था.
    अनु बोली- हम वोडका पार्टी करेंगे, माँ पिताजी के साथ पीती थीं, उन्हें भी पिलाएंगे. पहले हम सब एक एक पैग पिएंगे, फिर केक काटेंगे.

    तीनों ने एक एक पैग पिया, फिर मैंने केक काटा.
    हमने एक दूसरे को केक खिलाया.

    अनु ने मुझे आलिंगन में लेकर जन्मदिन की बधाई दी और मुझसे बोली- मैं किचन से प्लेट लाती हूँ.

    वह यह कहकर चली गयी.

    मैंने हाथ फैलाकर कहा- आंटी, अपने दोस्त के गले लगकर बधाई नहीं देंगी?

    मम्मी ने मुझे कसकर आलिंगन में लेकर बधाई दी.
    मैंने भी उनको कसकर पकड़ लिया.

    फिर मम्मी के गाल में चुम्मी देकर कहा- थैंक्स.

    हम काफी देर आलिंगन में खड़े रहे थे.

    मम्मी के चूचे मेरी छाती में दबे हुए थे, लंड खड़ा हो रहा था.

    तभी अनु ने किचन से आवाज़ लगायी- खाना अभी खाएंगे या एक और पैग के बाद!

    उसकी आवाज सुनकर हम दोनों आलिंगन से अलग हुए.

    डिनर के बाद बेडरूम में मैंने और अनु ने एक एक पैग और लगाया और फोरप्ले करने लगे.

    अनु- तपोश, मैंने देखा था कि कैसे तुम और माँ काफी देर तक आलिंगन का मजा ले रहे थे. यदि तुम माँ को भी यौन सुख दो तो मुझे बहुत अच्छा लगेगा, तुम्हें बड़ी उम्र की महिला अच्छी लगती हैं. मैंने देखा था कि तुम्हारा लंड खड़ा होने लगा था.

    मम्मी को गले लगाकर मैं जोश में था, ऊपर से शराब का नशा मस्ती दे रहा था.

    मैं- तुम सोचकर बोल रही हो या नशे में?
    अनु- मैं काफी दिनों से यह बात बोलने का मौक़ा देख रही थी. सेक्स में इतना मजा आता है. पिताजी के देहांत के बाद माँ 11 साल बिना सेक्स के रही हैं. उन्होंने किसी पुरुष को अपने पास नहीं आने दिया, पूरा ध्यान मुझे बड़ा करने में दिया. मेरी माँ को बिना सेक्स के कितनी मुश्किल हुई होगी, मैं अब समझ सकती हूँ. माँ का ऑपरेशन हो गया है, वे गर्भवती नहीं हो सकतीं.

    मैं- मैं तैयार हूँ, पर क्या मम्मी राजी होंगी? तुम उनको राजी करो!
    अनु- मैं उनसे बात करूंगी.

    अगली रात अनु माँ के कमरे में सोई.

    सुबह अनु ने बताया- मैंने माँ को कहा कि शादी के बाद मुझे पता चला सेक्स में कितना मजा आता है. आप 11 साल मेरे लिए बिना सेक्स के रही हैं, आपको कितनी मुश्किल हुई, मैं अब समझ सकती हूँ. हम दोनों को जो भी मिला, हमने आपस में बांटा. मैंने देखा है कि आप और तपोश के दूसरे के प्रति आकर्षित हो. मैं तपोश को तुमसे बांटना चाहती हूँ. तपोश राजी हो गया है. माँ ने ना नुकर के बाद हाँ कह दिया है.

    इतना कह कर अनु नहाने चली गयी.

    मम्मी ने मुझे चाय दी और मुस्कुरा कर बोलीं- क्या तुम अभी भी बड़ी उम्र की महिलाओं को निहारने स्टेशन जाते हो?
    मैं समझ गया कि अनु ने यह बात बतायी है.

    मैं- नहीं अब नहीं जाता, मुझे खूबसूरत मधुर स्वभाव की कठिनाइयों के बावजूद खुश रहने वाली दोस्त जो मिल गयी है!

    यह कहकर मैंने मम्मी को अपने आलिंगन में भरा और उनके होंठ चूम लिए.

    वे पहले तो अचकचाईं फिर उन्होंने खुद को ढीला छोड़ दिया.

    अब मैं रोज मम्मी से करीबी बढ़ाने लगा, उनके हाथ पकड़कर उन्हें करीब बिठा कर बात करता, उनके कूल्हों पर हल्की चपत मार देता.

    तीन दिन बाद हमारे हेड ऑफिस में 7 दिन की ट्रैनिंग थी.
    अनु उसमें भाग लेने चली गयी.

    वह जाते समय बोली- आप दोनों एक दूसरे का ख्याल रखना.

    शाम को जब मैं घर आया, मम्मी तैयार होकर मेरा इन्तजार कर रही थीं.

    वे कुछ ज्यादा ही सुन्दर लग रही थीं.
    मुझे चाय देते समय शर्मा भी रही थीं.

    उस दिन वे स्लीवलेस ब्लाउज पहने हुई थीं.

    मैंने देखा मम्मी के हाथ पर जो छोटे छोटे बाल थे, वे गायब थे.
    मैं समझ गया कि मम्मी वैक्सिंग कराकर आयी हैं.

    चाय पीने के बाद मैं बाथरूम में फ्रेश होने गया.

    पहली बार वहां मम्मी की ब्रा टंगी थी.
    मैंने उसको अलट पलट कर देखा कि उनके चूचों का साइज 34 सी था.

    मैं वापस आकर उनसे बात करने लगा.

    मैं- आंटी, आज आप बहुत सुंदर लग रही हो. मेरी दोस्त, आज रात हम दोनों पार्टी करते हैं. मैं वोडका, स्प्राइट, चिकन टिक्का ले आया हूँ.

    मम्मी गिलास प्लेट लेकर आ गईं.

    हम दोनों सोफे पर पास पास पीने बैठे, टेबल पर चखना रखा था.

    मैंने मम्मी की जांघ पर हाथ रखकर कहा- चखने की प्लेट देना.
    मम्मी कसमसाईं, पर मेरे हाथ नहीं हटाए.

    पैग ख़त्म होने के बाद मैंने मम्मी के हाथ पकड़ कर उन्हें खड़ा किया.

    उन्हें आलिंगन में लेकर उनकी गर्दन चूमने लगा, कूल्हों पर हाथ फेरने लगा.
    काफी देर बाद हम दोनों अलग हुए.

    मैं उनके होंठ चूमने लगा, चूचे दबाने लगा.

    मम्मी का संयम का बांध टूट गया, वे भी मेरे होंठ चूमने लगीं.
    हम दोनों की सांसें तेज हो गईं.

    मम्मी अपने बेडरूम की ओर जाने लगीं, मैं उनके पीछे आ गया.

    बेडरूम में हम खड़े खड़े एक दूसरे के होंठ चूमने लगे.

    मम्मी की साड़ी का आंचल गिर गया, उनके ब्लाउज में ढके भरे हुए चूचे मुझे उत्तेजित करने लगे तो मैं उनके दूध दबाने लगा.

    वे होंठ काटने लगीं और सिसकारियां भरने लगीं.
    मैं उनके ब्लाउज के हुक खोलने लगा, मम्मी ने हाथ उठाकर ब्लाउज निकालने में मदद की.

    ब्लाउज हटा तो मैंने देखा कि उनकी कांख (आर्मपिट) पर एक भी बाल नहीं था.
    मैं कांख चूमने लगा और साथ ही साथ उनकी ब्रा को भी उतार दिया.

    भरे गेंहुए चूचे हल्के से लटके थे, पर उन पर भूरे निप्पल तने हुए थे.

    मैं एक चूचे को चूस रहा था और दूसरे को दबा रहा था.

    आंटी- ये ज्यादती है, तुम मेरे सब कपड़े उतार रहे हो, खुद कपड़े पहने हुए हो!

    यह कहकर मम्मी ने मेरा कुर्ता उतार दिया.
    हम दोनों कमर के ऊपर तक नंगे हो गए.

    मम्मी ने मुझे आलिंगन में ले लिया.

    मेरी नंगी छाती पर मम्मी के नंगे चूचे दबने लगे थे. मुझे बड़ा सकून मिल रहा था.

    मैंने मम्मी के साये के नाड़े की गांठ खोल दी तो साया ज़मीन पर गिर गया.
    मम्मी ने मेरा पजामा चड्डी सहित उतार दिया.

    मम्मी पलंग पर चित लेट गईं.
    मैंने उनकी पैंटी उतार दी.

    मैं मम्मी के नंगे भरे चिकने बदन को निहारने लगा.
    मम्मी की मोटी मांसल जांघें, फूली हुई चूत, बड़े बड़े चूचे, थोड़ा मोटा पेट … उस पर गहरी नाभि थी.

    मेरा खड़ा लंड उत्तेजना से झटके ले रहा था.

    मैं मम्मी के पैरों के बीच आ गया.
    मम्मी ने अपने पैर घुटनों से मोड़ लिए और कमर के नीचे टॉवल रख लिया.

    आंटी- अपने लंड पर तेल लगा लो, इतने साल बिना सम्भोग से मेरी चुत टाइट हो गयी है.
    मम्मी वोदका की मस्ती में खुल कर लंड चुत कह रही थीं.

    मुझसे तेल लगाने की कहकर उन्होंने पलंग के पास की टेबल पर रखी तेल की बोतल मुझे दे दी.

    मैंने लंड पर तेल लगाया और धीरे से लंड चूत में डालने लगा.

    उनकी चूत कुंवारी लड़की की तरह टाइट थी.

    मम्मी लंड घुसते ही दर्द से ‘आह आ’ करने लगीं.

    मैंने धीरे धीरे करके पूरा लंड चूत में पेल दिया और मम्मी के ऊपर लेट गया.

    मम्मी का बदन नर्म गद्देदार था.

    कुछ देर बाद मम्मी ने कमर हिलायी.
    मैं हाथों के दम पर उठकर उन्हें जोर जोर से चोदने लगा.

    आंटी- आह थोड़ा धीरे, मैं कहीं भागी नहीं जा रही!

    मैंने चोदने की गति कम कर दी, बीच बीच में रुक कर मैं चूचे दबाता, होंठ चूमता … फिर चोदने लगता.

    मम्मी थोड़ी देर कमर को उछालती रहीं … फिर लेट कर आधी आंखें बंद कर चुदाई का मजा लेने लगीं.

    उनके कंठ से मादक सिसकारी निकलती रही.
    चुदाई के कारण मेरी जांघें उनकी जांघों से टकरा कर थप थप की मधुर आवाज़ निकाल रही थीं.

    आंटी- आह और जोर से तप्पू … मेरा होने वाला है!
    मैंने चुदाई की गति बढ़ा दी.

    मम्मी का बदन कांपने लगा और शरीर धनुष की तरह हो गया.

    उनकी चूत से निकले कामरस से मेरा लंड भीग गया और मम्मी निढाल हो गईं.
    मैंने चुदाई जारी रखी.

    अब मम्मी की गीली चूत से फच फच की आवाज़ आ रही थी.
    थोड़ी देर में वीर्य की पिचकारी चूत में भर गयी.

    मम्मी के चेहरे पर सकून भरी मुस्कुराहट थी.
    मैं मम्मी के ऊपर लेट गया.

    कुछ देर में लंड सिकुड़ कर चूत से निकल गया तो मैं उनके ऊपर से उतर गया.

    मैं- मम्मी कैसा रहा, मैं पास हो गया न?

    मम्मी ने मुस्कुरा कर और शर्माकर अपना चेहरा हाथों से छुपाकर कहा- अव्वल नंबर से पास हुए हो. तुम्हारे लिंग ने मेरी योनि को बहुत सुख दिया है. तुम अकेले में मुझे मम्मी नहीं, अनुश्री कहा करो!

    मैं- अनुश्री तुम लिंग योनि नहीं, लंड चूत कहा करो.

    हमने फ्रेश होकर कपड़े पहनकर डिनर किया. मेरी मम्मी को एक बार और चोदने की इच्छा थी. अनुश्री मम्मी राजी नहीं हो रही थीं.
    उन्होंने कहा- मैं थक गयी हूँ.

    हम दोनों सो गए.

    सुबह मैं जागा, तब मम्मी सो रही थीं.

    मैं चाय बनाकर लाया और अनुश्री मम्मी के होंठ चूमकर उन्हें जगाया.
    चाय पीकर हम दोनों फ्रेश हुए.

    उस दिन हम दोनों ने छुट्टी ले ली.

    अनुश्री आंटी- रात में तुमने मुझे बहुत थका दिया था, अभी तक बदन दुःख रहा है.
    मैं- मालिश कर देता हूँ.

    मम्मी कपड़े उतार कर पलंग पर पेट के बल लेट गईं.
    मैं भी नंगा होकर उनकी पीठ की मालिश के बाद उनके गोल सुडौल कूल्हों की मालिश करने लगा.

    मालिश करते हुए मैं हल्के हाथ से थप्पड़ मारता, तो मम्मी के कूल्हे मस्त हिलते.
    मैं झट से उनके कूल्हों को चूम लेता.

    मैंने मम्मी को चित लिटा दिया, उनकी भरी हुई जांघों की मालिश की, चूत पर हाथ फेरा, फिर छाती और चूचों की मालिश करते समय चूचे दबाने लगा और निप्पल मरोड़ने लगा.
    वे सिसकारी लेने लगीं.

    मैं- एक बार हो जाए?
    आंटी- तुम्हें बहुत कुछ सिखाना है.

    यह कहकर वे बैठ कर पलंग के किनारे पर लेट गईं.
    उनकी कमर तक का शरीर पलंग पर था, पाँव आसमान की तरफ.

    वे बोली- अब मेरे पाँव अपने कंधों पर रखो और शुरू हो जाओ!

    मैं लंड लहराता हुआ आया, उनके पाँव अपने कंधों पर रखे और लंड पेल कर चोदना शुरू कर दिया.
    मम्मी के चूचे मस्त हिल रहे थे.

    मैं बहुत जोश में था, लग रहा था जल्द झड़ जाऊंगा.

    मम्मी ने मुझे रोककर कहा- मेरे होने से पहले झड़ना नहीं. जब लगे कि थोड़ी देर में झड़ने वाले हो, लंड बाहर निकाल लेना लंड की जड़ को उंगलियों से कसकर पकड़ लेना और लम्बी लम्बी सांसें लेना … अपना ध्यान दूसरी तरफ लगाना. फिर जब लगे कि झड़ना टल गया है तो फिर शुरू हो जाना.

    मैंने वैसा ही किया.
    इस विधि से मैं लंबा चला और मम्मी के झड़ने के बाद झड़ा.

    फिर हम दोनों एक साथ नहाये.

    नाश्ते के बाद मैंने कहा- मुझे तुम्हारी गांड मारनी है!

    अनुश्री- चार दिन बाद मारना, गांड टाइट हो गयी है.
    यह कहकर वे दो आस प्लग ले आईं.

    वे बोलीं- पहले दो दिन जितनी देर हो सके छोटा प्लग लगाकर रहूंगी, फिर दो दिन बड़ा वाला. गांड थोड़ी ढीली हो जाएगी. टाइट गांड में लंड डालने से बहुत दर्द होता है, गांड चिर भी सकती है.

    तब मैं समझा कि जब मैंने अपनी पत्नी अनु की गांड मारने की कोशिश की, पहले तो वह मान गयी, पर जब लंड डालने लगा तो उसे बहुत दर्द हुआ और वह रोने लगी थी. उसने मना कर दिया था.

    रात भर हम दोनों नंगे रह कर फोरप्ले करते रहे थे.

    अनुश्री आंटी- मैं घोड़ी बन जाती हूँ.

    बेडरूम में बड़ा आइना लगा ड्रेसिंग टेबल था.
    मम्मी ने डेढ़ फुट ऊंचा मजबूत टेबल आईने के सामने रखा, आईने की तरफ मुँह करकर उन्होंने अपने हाथ टेबल पर रखे और पैर फैलाकर कहा- अब हम अपनी चुदाई का लाइव शो देख पाएंगे.

    मैं पीछे से चूत चोदने लगा और कूल्हों पर थप्पड़ मारने लगा.

    अनुश्री मम्मी के पैंडुलम की तरह डोलते चूचे आइने में दिख रहे थे.

    मम्मी ने अपनी गांड में आस प्लग लगा रखा था.
    जब मुझे लगा मैं थोड़ी देर में झड़ जाऊंगा, मैं लंड बाहर निकाल कर लंड की जड़ को उंगलियों से पकड़ कर लम्बी लम्बी सांस लेने लगा. मेरा झड़ना टल गया, तो मैं फिर से चोदने लगा.

    अनुश्री मम्मी का कामरस बहने लगा.
    वे बोलीं- मेरा हो गया!

    मैंने चुदाई की गति बढ़ा दी तो मैं भी झड़ गया.

    सुबह अनुश्री मम्मी सिर्फ मैक्सी पहनती थीं, उसके अन्दर वे कुछ नहीं पहनती थीं.

    फ्रेश होने के बाद मैंने गुड मॉर्निंग कहकर अनुश्री मम्मी की आंख, होंठ चूमे, फिर पीछे जाकर मैक्सी कमर तक उठाकर उनके कूल्हों को चूमा.

    मैक्सी में हाथ डालकर चूचे दबाये.

    तब से रोज मैं गुड मॉर्निंग ऐसे ही कह रहा हूँ.

    शाम को काम से आने के बाद चाय पीते समय मैंने कहा- मेरी एक फतांसी है, मुझे तुम्हारा मूत पीना है!
    अनुश्री आंटी- सेक्स में कुछ भी कुछ भी अच्छा बुरा नहीं होता, सिर्फ आपसी सहमति चाहिए.

    वे मुझे बाथरूम ले गईं, कपड़े उतार दिए और सिर्फ चश्मा पहने रहने को कहा.

    फिर अनुश्री मम्मी ने दीवार पर अपनी पीठ टिकाकर पाँव फैला दिए.
    मैंने नंगे होकर नीचे स्टूल पर बैठकर मुँह खोला और मम्मी की चूत पर मुँह लगा दिया.
    वे मूतने लगीं और मैं पीने लगा.

    मूत ख़त्म होने पर अनुश्री मम्मी ने स्टूल पर बैठकर कहा- अब मैं पिऊंगी!
    उन्होंने मुँह खोल दिया, मैं मूतने लगा.
    वे पीने लगीं.

    चश्मे के कारण मूत्र हम दोनों की आंखों में नहीं जा रहा था.
    फिर हम साथ में नहाए.

    उस रात हम दोनों ने 69 पोजीशन में एक दूसरे के लंड चूत चूसे.

    अनुश्री मम्मी मेरे लंड का वीर्य पी गईं.
    मैंने चूत से निकला कामरस पी लिया.

    अगली रात अनुश्री मम्मी ने लंड की सवारी की, पर उनके भारी शरीर के कारण वे ज्यादा देर लंड पर नहीं उछल सकीं.

    मैंने बाकी चुदाई मिसनरी आसन में की.
    वे रोज चुदाई के वक्त अपनी गांड में आस प्लग लगाए रहती थीं.

    पांचवी रात गांड मारने की बारी थी.

    एक दूसरे को गर्म करने के बाद अनुश्री मम्मी ने कहा- गांड और लंड पर तेल लगाकर धीरे धीरे से डालना, मुझे थोड़ा दर्द हो सकता है! लंड डालकर रुकना, मैं जब कहूँ, तब चुदाई शुरू करना. सेक्स के बाद लंड साबुन से धो लेना, गांड के कीटाणु से लंड पर इन्फेक्शन हो सकता है.

    अनुश्री मम्मी ने पेट के बल लेटकर अपने कूल्हे हाथ से फैलाए और छेद से दूर कर दिए.

    मैंने उनकी गांड के अन्दर उंगली से तेल लगाया, लंड पर तेल लगाया.
    फिर धीरे से लंड गांड में डालकर उनके ऊपर लेट गया.

    अनुश्री मम्मी दर्द से आ आ कर रही थीं. उन्होंने तकिये को पकड़ रखा था.

    कुछ देर बाद अनुश्री मम्मी बोलीं- अब ठीक है.

    मैं मम्मी की गांड मारने लगा.

    जब लंड पूरा अन्दर जाता, मम्मी की गद्देदार कूल्हों से मेरी कमर टकराती, तो थप थप की मीठी आवाज़ आती.

    मम्मी सिसकारी लेने लगी थीं.
    उनकी गांड मारने में अलग ही आनन्द आया.

    इस तरह से हमने इन सात रातों में तरह तरह के आसनों में सम्भोग किया.

    अनुश्री मम्मी को सेक्स में दस वर्षों का गहरा अनुभव था.
    वाइफ मदर सेक्स करके मैंने बहुत कुछ नया सीखा.

    अगले दिन मेरी पत्नी अनु वापस आने वाली थी.

    अनुश्री आंटी- तपोश, अनु को हमारे यौन क्रीड़ा और सम्भोग के बारे में विस्तार से नहीं बताना, यह रुचिकर नहीं होगा. तुम उससे सिर्फ इतना कह सकते हो कि हम दोनों ने काफी मजे किए. अनु से सेक्स करते समय मेरे साथ किये सेक्स की तुलना नहीं करना, उस समय का आनन्द लेना.

    अनु शाम को आयी, अपनी माँ का खिला चेहरा देख समझ गयी कि उन्हें भरपूर यौन आनन्द मिला.
    वह माँ को गले लगाकर बोली- माँ, तुम्हें वर्षों बाद इतना खुश देख रही हूँ!

    अनु ने मुझे कुछ नहीं पूछा.

    उस रात अनु बहुत जोश में थी, हमने दो बार सम्भोग किया.
    हम करीब रोज रात अलग अलग आसन में सम्भोग करते.

    मैंने अनुश्री मम्मी से सेक्स में बहुत कुछ सीखा था, वह सब काम आया.
    हफ्ते में एक दो रात रात मैं अपनी सास अनुश्री मम्मी के बेडरूम में सोता.

    हम दोनों घमासान सेक्स करते.

    शादी के एक साल बाद अनु ने बेटी को जन्म दिया.

    मैं अनुप्रिया और अनुश्री मम्मी 10 साल से साथ रह रहे हैं.

    मैं दोनों के साथ यौन आनन्द लेता हूँ और उनको यौन आनन्द देता हूँ.

    आपको मेरी यह वाइफ मदर सेक्स कहानी कैसी लगी, प्लीज जरूर बताएं.

  • पत्नी की सहमति से विधवा सास के साथ संभोग- 1

    हसबैंड सेक्स विद वाइफ कहानी में मेरे ऑफिस में एक लड़की आई. वह मुझे अच्छी लगी. हमारी दोस्ती हो गयी. मैं उसके घर गया, उसकी विधवा मम्मी से शादी की बात की.

    फ्रेंड्स, आपको एक नए अनुभव से युक्त सेक्स कहानी का मजा लिख रहा हूँ, इस हसबैंड सेक्स विद वाइफ कहानी का आनन्द लें.

    तपोश की सास अनुश्री उससे कई साल बड़ी थी, उनके पति का देहांत हो गया था.

    सास का व्यहार दोस्ताना था, वह जिंदादिल और हंसमुख थी.
    तपोश की पहले उनसे दोस्ती हुई, फिर शारीरिक संबंध हुआ.

    आइए तपोश की सेक्स कहानी उसकी जुबानी सुनते हैं.

    उस समय मैं 24 उम्र का था.
    मैं एक कंपनी में 3 साल से नौकरी कर रहा था.

    मुझे अपने से बड़ी उम्र की भरे बदन की महिलाएं अच्छी लगती थीं.
    मैं अक्सर प्लेटफॉर्म टिकट लेकर रेलवे प्लेटफॉर्म पर बैठ जाता और बड़ी उम्र की महिलाओं को निहारा करता था.

    मुझे बड़ी उम्र की महिलाओं से बात करना बहुत अच्छा लगता था.

    हमारी कंपनी में 21 उम्र की अनुप्रिया ने ज्वाइन किया, उसकी यह पहली नौकरी थी.
    उसकी ट्रेनिंग की जिम्मेदारी मुझे मिली.

    अनुप्रिया साधरण नैन नक्श की गेहुंए रंगत की हंसमुख लड़की थी, उसका बदन खिलाड़ियों जैसा छरहरा था, फिगर 32बी-28-34 का था.

    वह खुलकर हंसती थी और जब वह हंसती थी, उसकी आंखें भी मुस्कुराती थीं.
    उस समय वह बहुत आकर्षक लगती थी.
    सच में उसमें एक कसक थी.

    अनुप्रिया जल्दी काम सीख रही थी. उससे कोई गलती होने पर जब मैं बताता, तो वह मेरी बात का बुरा नहीं मानती थी बल्कि गलती सुधारने की कोशिश करती थी.
    वह एक अच्छी सहकर्मचारी के रूप में मुझे काफी पसन्द थी.

    अनुप्रिया ने बताया कि वह अपनी माँ के साथ रहती है.
    जब उसकी उम्र 10 साल की थी, उसके पिताजी का देहांत हो गया था.
    उसकी माँ उस समय 30 साल की थीं.
    माँ ने उसकी देखभाल की, पढ़ाया और बढ़ा किया.
    उसकी माँ किसी स्कूल में पढ़ाती हैं.
    माँ उसकी सबसे अच्छी सहेली हैं.

    मैं अपने फ्लैट में अकेला रहता था, मेरे माता पिता पास के शहर में रहते हैं.

    मैं स्कूटर पर ऑफिस आता था.
    अनुप्रिया बस से आती थी.

    एक दिन बस की हड़ताल को गयी.
    मैंने अनुप्रिया से कहा- चलो मैं तुम्हें तुम्हारे घर छोड़ देता हूँ.

    वह स्कूटर पर बैठ गयी.

    अनुप्रिया- सर आज माँ घर पर हैं, यदि आपको जल्दी न हो तो कृपया मेरे घर आएं … हम सब साथ चाय पिएंगे.
    मैं राजी हो गया.

    हम दोनों अनुप्रिया के घर पहुंचे.

    अनुप्रिया की माँ ने दरवाज़ा खोला, तो अनुप्रिया ने मेरा परिचय कराया.
    उसकी माँ का नाम अनुश्री था.

    मैंने ध्यान से देखा तो पाया कि वे अनुप्रिया की माँ नहीं, बल्कि बड़ी बहन जैसी लग रही थीं.

    बल्कि मैं यूं कहूँ कि वे अनुप्रिया के समान दिख रही थीं, तो गलत न होगा.
    उनका बदन भरा हुआ था, न मोटी ना दुबली.

    मैं- आंटी, अनुप्रिया आपके बारे में हरदम बात करती है, कहती है आप उसकी सबसे अच्छी सहेली हैं.

    आंटी- अनुप्रिया मेरी बेटी ही नहीं, सबसे अच्छी सहेली ही है.
    उसी वक्त अनुप्रिया चाय बनाने गयी.

    आंटी- सर, अनुप्रिया आपकी बहुत तारीफ करती है. आप उसे अच्छे से काम सिखा रहे हैं. आपसे मिलकर मुझे बहुत अच्छा लगा.
    यह कहकर वे मुस्कुरा दीं.
    उनकी आंखें भी मुस्कुरा रही थीं.

    मुस्कुराते समय आंटी बहुत खूबसूरत लगीं.
    मैं मन्त्रमुग्थ होकर उन्हें देख रहा था.

    अनुप्रिया भी ऐसे ही हंसती है.

    मैं- आप मुझे मेरे नाम तपोश से बुलाएं प्लीज!

    चाय नाश्ते के समय आंटी के पूछने पर मैंने बताया कि मैं अकेला ही रहता हूँ.

    आंटी- तपोश, आज डिनर हमारे साथ करें, मैं खाना बनाती हूँ.
    यह कहकर वे उठने लगीं.

    मैं- आज मैंने घर पर ऑन लाइन चिकन बिरयानी मंगवाना तय किया था, यहीं मंगवा लेता हूँ.
    दरअसल मुझे आंटी से बात करना बहुत अच्छा लग रहा था.

    आंटी- ठीक है, पर पेमेंट मैं करूंगी!

    आंटी ने मेरे बारे में पूछा.
    मैंने बताया मेरे माता पिता अमुक शहर में रहते हैं, मैं उनकी एक मात्र संतान हूँ.

    आंटी अनुप्रिया के बचपन और उसकी शरारत की बात कर रही थीं और खुलकर हंस रही थीं.
    मैं मुग्ध होकर उनको देख रहा था.

    जब मैं बात कर रहा था, आंटी कभी कभी दीवार पर लगी फोटो को देखतीं, फिर मुझे देखतीं और किसी ख्याल में खो जातीं.

    कुछ देर बाद खाना आ गया.
    आंटी ने खाना ले लिया और अनुप्रिया प्लेट आदि लेने चली गयी.

    मैंने उठकर दीवार पर लगी फोटो को पास से देखा.

    आंटी और एक युवक की फोटो थी.
    युवक कुछ कुछ मेरे जैसा दिखता था.

    अनुप्रिया प्लेट लेकर आयी, उसने बताया वह फ़ोटो उसकी माँ और दिवंगत पिताजी की फोटो है.

    मैं समझ गया कि आंटी मुझे और फोटो की तरह बार बार क्यों देख रही थीं.

    इधर एक बात बताना चाहता हूँ कि जब भी मैं खाना खाता हूँ, खाते समय थोड़ा खाना मेरे कपड़ों पर गिर जाता है.
    उस दिन भी गिरा.

    अनुप्रिया- मेरे पिताजी भी जब खाना खाते थे, उनके कपड़ों पर भी खाना गिर ही जाता था.
    आंटी मुझे देखती हुई थोड़ी देर तक फिर अपने ख्यालों में खो गईं.

    फिर ख्यालों से उभरकर दूसरी बातें करने लगीं.
    मुझे आंटी का साथ अच्छा लगा.

    खाना होने के बाद मैं उनसे मुखातिब हुआ- आंटी, आपसे मिलकर मुझे बहुत अच्छा लगा!
    आंटी- मुझे भी अच्छा लगा, फिर आना!

    दूसरे दिन से ऑफिस के बाद मैं रोज अनुप्रिया को उसके घर के पास छोड़ने लगा.

    एक दिन अनुप्रिया ने बताया कि माँ इस समय घर पर नहीं रहतीं हैं, वे ट्यूशन पढ़ाने जाती हैं.
    यह बता कर वह चुप हो गई.

    उसने मुझे घर आने को नहीं कहा. शायद वह अकेले में मुझे घर पर बुलाने में संकोच कर रही थी.

    दस दिन बाद अनुप्रिया ने बताया- कल माँ का जन्म दिन है. माँ ने आपको आने का निमंत्रण दिया है, लंच साथ करेंगे.

    मैं फूल, गिफ्ट, मिठाई आदि लेकर उनके घर गया.
    आंटी ने दरवाज़ा खोला.

    वे काली शिफॉन की पतली साड़ी पहनी थीं. उनका ब्लाउज दिख रहा था, चूचे काफी बड़े थे.
    बाद में मुझे पता चला कि उनकी ब्रा का साइज 34 सी है.
    हल्के मेकअप में वे क़यामत सी सुंदर लग रही थीं.

    मैंने हैप्पी बर्थ डे कहकर उन्हें फूल और गिफ्ट देते हुए कहा- आप बहुत सुंदर लग रही हो.
    आंटी ने थोड़ा शर्माकर थैंक्स कहा.

    फिर उन्होंने बताया कि अनुप्रिया केक लेने गयी है.

    मुझे बिठाकर जल्दी में मेरे लिए पानी लेने जाने लगीं.
    तभी आंटी का पैर फिसल गया और वे गिर गईं.
    मैंने सहारा देकर उन्हें खड़ा किया.

    वे चल नहीं पा रही थीं.
    मैंने आंटी को गोद में उठाया, उनका भरा बदन मेरी छाती से लगा था, मुझे बहुत अच्छा लग रहा था.

    मेरा लंड खड़ा होने लगा.

    मैं आंटी को बेडरूम ले जाकर पलंग पर लिटाने लगा.

    उस समय मेरे होंठ आंटी के होंठों के काफी पास थे.
    मुझे उनके होंठ चूमने की तीव्र इच्छा हो रही थी.

    इतने में दरवाज़े की घंटी बजी, मैंने आंटी को लिटाकर दरवाज़ा खोला.
    अनुप्रिया अन्दर आयी, तो मैंने बताया कि आंटी के पैर में मोच आ गई है.

    वह जल्दी से भाग कर कमरे में चली गई.
    मैंने सोचा कि अच्छा हुआ अनुप्रिया आ गयी, मैं होंठ चूम लेता तो गड़बड़ हो जाती.

    अनुप्रिया नीली साड़ी और हल्के मेकअप में काफी सुंदर लग रही थी.

    मैंने आंटी के पैर की मोच लगी जगह बर्फ की सिकाई की, बाम लगाया और क्रेप बैंडेज बांध दी.

    अनुप्रिया ने उन्हें दर्द निवारक दवा दी.

    आंटी ने पलंग पर ही केक काटा और खाना खाया.

    उनका दर्द थोड़ा कम हुआ, तो मैं घर चला गया.

    मैं घर आकर सोचने लगा कि क्या मैं अनुप्रिया से शादी करूं!
    मैं समझ नहीं पा रहा था कि मैं अनुप्रिया के मधुर हंसमुख स्वभाव के कारण उससे शादी करने की सोच रहा हूँ या उसकी माँ के आकर्षण में उससे शादी करने की सोच रहा हूँ? या दोनों कारण हैं?

    ऑफिस के बाद स्कूटर पर अनुप्रिया को उसके घर छोड़ते समय हम दोनों कभी कभी किसी रेस्तरां में रुकते, नाश्ता करते और बातें करते.

    अनुप्रिया ने बताया- पिताजी के देहांत के बाद दोस्तों, रिश्तेदारों ने माँ को दूसरी शादी के लिए कहा, माँ राजी नहीं हुईं. उन्हें मुझे पढ़ाना और बड़ा करना था. जो जोड़े हमारे पारिवारिक मित्र थे, अब घर नहीं आते, उनकी पत्नियों को माँ से उनके पति का बात करना / मेलजोल में खतरा लगता था.

    एक महीने बाद मुझे समझ आया कि मैं अनुप्रिया से प्यार करने लगा हूँ.
    मैंने आंटी से बात करना तय किया.

    मैंने आंटी को फ़ोन किया- मैं आपसे चिकन पकाना सीखना चाहता हूँ, इस रविवार आ जाऊं?
    आंटी- बड़ी ख़ुशी से!

    मैं रविवार को चिकन लेकर उनके घर गया.

    मैं- आप मुझे और अनुप्रिया को खाना बनाना सिखाएं और एक बात … क्या आप मुझे भी अपना दोस्त मान सकती हैं?
    आंटी ने मुझसे हैंड शेक करते हुए कहा- आज से तुम मेरे दोस्त हो.

    तभी अनुप्रिया के फ़ोन पर कोई कॉल आ गई.
    तो वह बात करने दूसरे कमरे में चली गयी.

    मैं- आंटी मैं अनुप्रिया से शादी करना चाहता हूँ. आप की अनुमति मिले तो मैं अपने माँ पिताजी को आप दोनों से मिलने बुलाऊंगा.

    आंटी- मैं अनुप्रिया से बात करूंगी. अब तुम दोनों खाना बनाना सीखो.
    आंटी ने अनुप्रिया को बुलाया.

    हम दोनों सीखने लगे.

    दूसरे दिन शाम घर जाते समय.

    अनुप्रिया- तपोश सर, हम लोग गार्डन चलें क्या? कुछ बात करनी है.
    मैंने ओके कह दिया और हम दोनों एक गार्डन में आ गए.

    अनुप्रिया- माँ ने बताया कि आप मुझसे शादी करना चाहते हैं. मैं आपको पसंद करती हूँ, पर शादी नहीं कर सकती. मैं अपनी माँ को अकेला नहीं छोड़ सकती.
    मैं- हम दोनों आंटी का ख्याल रखेंगे, आंटी मेरी दोस्त बन गयी हैं.

    अनुप्रिया शादी के लिए राजी हो गयी.

    मैं- तुम मुझे तपोश कहो, सर नहीं!

    मेरे माँ पिताजी आंटी से मिले, शादी एक महीने बाद तय हुई.

    मैं ऑफिस से घर जाते समय अनुप्रिया को अपने फ्लैट ले जाने लगा.
    वहां हम दोनों बातें करते, आलिंगन और चुंबन करते.

    अनुप्रिया ने कह दिया कि इससे ज्यादा सब शादी के बाद!

    शादी के बाद मैं अनुप्रिया को लेकर बारात के साथ अपने पिताजी के घर गया.
    छोटी सी रिसेप्शन पार्टी हुई.

    सुहागरात को महिलाओं ने अनुप्रिया का सजाकर बेडरूम में बिठाया.

    मैंने बेडरूम में जाकर दरवाज़ा बंद किया, अनुप्रिया का घूँघट उठाया, वह ऐसे शर्मा रही थी … जैसे हम पहली बार मिले हों.

    वह सुंदर लग रही थी.
    मैंने उसकी सुंदरता की तारीफ की, सोने की चेन भेंट में दी.

    अब मैं उसे लिटाकर चूमने लगा, वह भी साथ दे रही थी.

    पता ही नहीं चला कब हमने एक दूसरे के कपड़े उतार दिए.

    मैंने अनुप्रिया के नंगे चूचे पहली बार देखे थे.
    एकदम सुडौल और तने हुए थे.
    भूरे निप्पल उसके चूचों की शोभा बढ़ा रहे थे.

    मैं एक चूचे को दबा रहा था, दूसरे को चूस रहा था.
    अनुप्रिया सिसकारी लेने लगी.

    मैंने पहले कभी सम्भोग नहीं किया था इसलिए मैं बेकरार था.
    मेरा लंड खड़ा हो गया था.

    अनुप्रिया चित लेटी थी, मैं उसकी फैले पैरों के बीच आया.

    अनुप्रिया ने तकिये के नीचे से टर्किस टॉवल निकाल कर अपनी कमर के नीचे रखा.

    अनुप्रिया ने नारियल तेल की बोतल मुझे देकर लंड की तरफ इशारा करके कहा- इस पर लगा लीजिए!

    मैंने लंड पर तेल लगाया और चूत में डालने की कोशिश करने लगा.
    मुझे छेद नहीं मिल रहा था.

    अनुप्रिया ने लंड पकड़ कर चूत के छेद पर रखा कर हुं कहा.
    मैंने एक झटके से लंड पेल दिया.

    अनुप्रिया के मुँह से हल्की चीख निकल गई, उसकी आंखों में आंसू थे … पर चेहरे पर मुस्कान थी.

    मैं कमर हिलाकर उसे चोदने लगा और कुछ ही मिनट बाद झड़ गया.
    मैं शर्माकर उसके ऊपर से उतर गया.

    मेरे लंड पर खून लगा था.
    अनुप्रिया की चूत और कमर के नीचे टॉवल पर भी खून था.

    मैंने पढ़ा था कि पहली बार सम्भोग के समय सील टूटने पर खून निकलता है.

    मैं जल्द झड़ने के कारण उदास होकर बैठा था.

    अनुप्रिया- चलिए बाथरूम में अंग धो लेते हैं, उदास मत होइए … मैंने पढ़ा है कि पहली बार में उत्तेजना से ऐसा हो जाता है.
    हम दोनों ने बाथरूम में जाकर लंड चूत धोये और उसने टॉवल को साबुन से धोकर सूखने टांग दी.

    हम दोनों पानी पीकर पलंग पर नंगे करवट में एक दूसरे की तरफ मुँह करके लेटे थे.

    अनुप्रिया मेरे बालों में हाथ फेरने लगी.

    जल्द ही हम दोनों चूमा-चाटी करने लगे.

    अनुप्रिया चित पैर फैलाकर लेटी, उसने नया टॉवल अपनी कमर के नीचे लगाया.
    मैंने लंड पर तेल लगाया और उसके ऊपर चढ़ गया.

    उसने लंड को छेद पर लगाकर कहा- धीरे धीरे शुरू कीजिये, मैं आपकी ही हूँ और रात भी काफी बाकी है.

    मैं उसे चूमते हुए धीरे धीरे चोदने लगा.
    इस बार मुझे बहुत मजा आ रहा था.

    अनुप्रिया नीचे से अपनी कमर उछाल रही थी.

    कुछ देर बाद मेरी चोदने की गति बढ़ गयी.
    हम दोनों ही कामुक भाव से सिसकारी ले रहे थे.

    करीब 15 मिनट बाद अनुप्रिया मचलने लगी.
    उसकी चूत से कामरस का फ़व्वारा निकला और वह निढाल हो गयी.

    मैंने थोड़ी देर तक उसे और चोदा, फिर झड़ गया तो उसकी चूत अपने वीर्य से भरकर उसके ऊपर ही लेट गया.
    अनुप्रिया ने मुझे आलिंगन में ले लिया.

    कुछ पल बाद लंड सिकुड़ कर चूत से निकल गया.

    हम दोनों बाथरूम से लंड चूत साफ करके वापस बिस्तर पर आ गए और कपड़े पहन कर लेट गए.

    मैं- मुझे बहुत मजा आया!
    अनुप्रिया- मुझे भी.

    मैं- एक बात बताओ … तुमने सेक्स के बारे में किससे सीखा?
    अनुप्रिया- मेरी सबसे अच्छी सहेली मेरी माँ ने मुझे यह सब बताया है!

    सुबह के समय हम दोनों ने फिर से सम्भोग किया.
    इस बार मुझे छेद मिल गया.

    हम दोनों हनीमून पर बाहर गए और रोज अनुप्रिया की माँ से फ़ोन पर बात करते.

    हम हर रात एक दो बार सम्भोग करते, सेक्स वीडियो देखकर हसबैंड सेक्स विद वाइफ में नए नए आसन आजमाते.
    हम दोनों 69 की पोजीशन में लंड चूत चूसते.

    मैं कभी अनुप्रिया को घोड़ी बनाकर पलंग के किनारे खड़ा करता, कभी वह फर्श पर खड़ी होकर सामने झुककर पलंग पर हाथ रखकर घोड़ी बन जाती और मैं फर्श पर खड़ा होकर उसकी कमर पकड़कर पीछे से चूत चोदता, उसके कूल्हे पर चांटे मारता.

    कभी वह मेरे लंड की सवारी करती.
    कभी हम मिसनरी आसन में सम्भोग करते.

    मैं अनुप्रिया को अनु नाम से पुकारने लगा, वह मुझे तुम कहने लगी.

    हम अपने शहर जहां हम नौकरी करते हैं, वापस आ गए.
    आंटी के पास मेरे फ्लैट की चाबी थी उन्होंने हमारा स्वागत किया.

    मैं अनुप्रिया की माँ को आंटी कह कर ही बुलाता रहा.

    आंटी- पगफेरे की रस्म के अनुसार तुम दोनों को मेरे घर आना होगा और रात को वहीं रहना होगा.
    वे चली गईं.

    मेरे दोस्त ने बताया था कि कभी कभी वह और उसकी पत्नी थोड़ी शराब पीते हैं. उसके बाद सेक्स में अलग ही मजा आता है.

    मैं- अनु आज रात हम पार्टी करेंगे, बकार्डी शराब पिएंगे!
    अनु- मैंने कभी नहीं पी, सुना है स्वाद बेकार होता है.

    मैं- बकार्डी, स्प्राइट के साथ पीते समय अच्छी लगती है, बस थोड़ी ही पिएंगे.
    अनु राजी हो गयी.

    उस रात पीने के बाद हमने जमकर मजा किया, अनु ‘लंड चूत चोदो …’ आदि बोलने से कतराती थी, उसने उस रात सब बोला.

    दूसरे दिन हम आंटी के घर गए.

    लंच के बाद मैं बेडरूम में लेटा था.
    बेडरूम का दरवाज़ा खुला था.

    अनु अपनी माँ से ड्राइंगरूम में बात कर रही थी.
    मैं अधखुली आंखों से उनको देख रहा था और उनकी बातें सुन रहा था.

    आंटी- सुहागरात कैसी रही? शर्माओ नहीं … मैं तुम्हारी सहेली हूँ!
    अनु- माँ तुम्हारी बतायी बातें बहुत काम आईं. हम दोनों सेक्स के बारे में अनाड़ी थे.

    उसने विस्तार से सुहागरात में क्या क्या हुआ, माँ को बताया.

    अनु- सेक्स में इतना मजा आता है, मुझे मालूम ही नहीं था.
    वह बताने लगी कि हम दोनों ने किस किस आसनों में सम्भोग किया.

    हमने बकार्डी पीकर कैसे मजा किया, वह भी बताया.

    मैंने देखा सेक्स की बात सुनकर आंटी का चेहरा लाल हो गया था, वे मुट्ठी भींच कर लम्बी लम्बी सांसें ले रही थीं.
    सांसों के साथ उनके चूचे ऊपर नीचे हो रहे थे.

    आंटी- मैं और तेरे पिताजी कभी कभी पीकर मजा करते थे.

    उस रात अनु अपनी माँ के साथ सोई.
    सुबह हम दोनों अपने घर चले गए.

    मेरे करीबी दोस्त ने हमें उसके घर बुलाया.

    डिनर के बाद अनु दोस्त की पत्नी से बात कर रही थी.
    मैं दोस्त के साथ बालकनी में बात कर रहा था.

    दोस्त- तुम अपने से बड़ी उम्र की महिलाओं को पसंद करते हो, उन्हें देखने स्टेशन जाया करते थे. मुझे लगा था तुम कोई बड़ी उम्र की महिला से शादी करोगे, पर भाभी तो तुमसे कम उम्र है.

    यह सब बात होने के बाद हम दोनों पति पत्नी घर आ गए.

    अनु- मैंने सुना तुम्हारा दोस्त कह रहा था कि तुम्हें बड़ी उम्र की महिलाएं पसंद थीं. अब समझी कि तुमने मेरी माँ को क्यों दोस्त बना लिया!
    वह यह सब कहकर हंसने लगी.

    मैं- अनु मैं तुम्हें पसन्द करने लगा था, मैं तुम्हारी माँ से दो बार मिला. उनसे बात की तो देखा कि तुम्हारी माँ इस उम्र में भी इतनी सुंदर और कठिनाइयों के बाद भी खुश रहती हैं. मुझे विश्वास हुआ 17 साल बाद भी तुम इतनी सुंदर और खुशमिजाज रहोगी. इसी लिए मैंने तुमसे शादी करने का फैसला किया. मेरी खुशकिस्मती है कि मुझे तुम जैसी पत्नी और आंटी जैसी दोस्त मिली. मैं आंटी को खुश और सुखी रहने की पूरी कोशिश करूँगा.

    अनु मेरे सीने से लग गई.
    उस वक्त आंटी नहीं थीं तो हम दोनों ने जमकर चुदाई का मजा लिया.

    अब इसमें आंटी का प्रवेश कैसे हुआ वह सब आप सेक्स कहानी के अगले हिस्से में पढ़ सकते हैं.

    आपको मेरी यह हसबैंड सेक्स विद वाइफ कहानी कैसी लगी, बताएं.

  • मौसी के साथ मस्त सेक्स

    चुदाई कहानी में मैं मौसी के घर रहने गया तो वे अकेली थी. मौसी की जवानी ने मेरे लंड को हिला दिया. मैं रात को उनके साथ सोया और उनके गर्म बदन का मजा लिया.

    मेरा नाम जय है. मैं दिल्ली का रहने वाला हूँ.
    मेरी हाइट 5 फुट 2 इंच है और मेरा लंड 5 इंच का है.

    ये मेरी जिंदगी की सच्ची Xxx मास्सी चुदाई कहानी है.

    मैं 12 वीं पास कर चुका हूँ.
    मेरी छुट्टियां चल रही थीं क्योंकि कॉलेज में एडमिशन अभी नहीं हुआ था.

    मैं अपनी मौसी के घर चंडीगढ़ गया हुआ था.

    मेरी मौसी का नाम रूपाली है.
    उनकी उम्र 32 साल है और उनके बूब्स का साइज 28 है.
    वे देखने में एकदम सेक्सी लगती हैं, बिल्कुल टोटल कांटा पीस हैं.

    जैसे ही मैं वहां पहुंचा, मुझे देखकर रूपाली मौसी एकदम से खुश हो गईं.
    उन्होंने मुझे गले से लगा लिया.

    आह … क्या सुकून मिला जब उनकी छातियां मेरी छाती से टच हो रही थीं, बहुत गर्म-गर्म लग रहा था.

    फिर उन्होंने मुझे अन्दर आकर बैठने को कहा.
    मैं अन्दर जाकर सोफे पर बैठ गया.

    मौसी पानी का ग्लास लेकर आईं और किचन में जाने लगीं.

    जब वे मुड़ीं, तो सच बता रहा हूँ कि उनकी गांड क्या मस्त मटक रही थी … कसम से बबाल लग रही थी.

    फिर मैंने मुँह-हाथ धोकर थोड़ा आराम किया, खाना खाया और सो गया.

    रात को जब हम दोनों खाना खाने बैठे तो मौसी मेरे बगल में बैठ गईं.

    मैंने मौका देखकर उनकी जांघ पर हाथ रख दिया.
    वे मुझे ऐसे करते देखकर थोड़ा सिहर गईं, फिर उन्होंने मेरी ओर मुस्कुरा कर देखा और खाना खाने लगीं.

    रात को जब सोने की बारी आई, तो मैंने मौसी से कहा- मैं रात को अकेला नहीं सोता हूँ!
    उन्होंने धीमे से कहा- मेरे पास आकर सो जाना.

    मैं अन्दर से खुश हो गया.
    मैं उनके पास सो गया लेकिन मैंने सिर्फ आंखें बंद की थीं, अन्दर से जाग रहा था.

    मौसी ने श्वेत सलवार कुर्ता पहना हुआ था.
    उस सलवार कुर्ता का कपड़ा बहुत झीना था, उसमें से उनकी ब्लू ब्रा पैंटी साफ दिख रही थी.

    मैं अपनी आधी खुली आंखों से उनकी ब्रा पैंटी को देखने लगा.

    मौसी ने मुझे देखा, उन्हें लगा मैं सो रहा हूँ लेकिन मैंने आंखें हल्की-सी खोल रखी थीं.

    कुछ देर बाद उन्होंने मेरे सामने ही कपड़े बदले.

    आह … साला आज तो किस्मत मेरे लौड़े पर बावली हुई जा रही थी.
    मौसी का क्या कामुक फिगर था.

    वे एकदम सनी लियोनी जैसी पॉर्न एक्ट्रेस लग रही थीं.
    ब्लू पैंटी और ब्रा में उनके बूब्स व गांड कमाल के लग रहे थे.

    मेरा मना Xxx मास्सी चुदाई करने का हो गया.

    फिर उन्होंने नाइट सूट पहना और मेरे पास आकर सो गईं.

    आधी रात को जब मौसी गहरी नींद में थीं, तब उनकी पीठ मेरी तरफ थी.

    मैंने उनकी गांड पर अपने हाथ से हल्का सा टच किया, ये देखने के लिए कि कहीं वे जाग तो नहीं रही हैं.

    उनकी तरफ से कुछ भी प्रतिक्रिया नहीं आई … वे तो गहरी नींद में थीं.

    फिर मैंने धीरे से पूरा हाथ उनकी गांड पर रख दिया और सहलाने लगा.

    कुछ देर बाद मौसी ने करवट बदली, अब उनका मुँह मेरी तरफ था.

    उनकी गर्म सांसें मेरे चेहरे से टकरा रही थीं.
    मुझे बड़ा मजा आ रहा था.

    मेरे अन्दर की हवस जाग गई थी और मेरा लंड पूरा खड़ा होकर कैबरे की जगह कोबरा डांस करने लगा.
    मैं कंट्रोल नहीं कर पा रहा था.

    मैंने धीरे से मौसी के चूचों पर हाथ फेरना शुरू किया.
    उनकी सांसें और गर्म होने लगीं, ऐसा लग रहा था जैसे उन्हें भी धीरे-धीरे सेक्स चढ़ रहा हो.

    मैंने गलती से उनके चूचे थोड़ा जोर से दबा दिए और मौसी की आंखें एकदम खुल गईं.

    वे मुझे नींद में देख रही थीं, मानो कह रही हों- कितना तड़प रहे हो सेक्स के लिए!
    फिर उन्होंने मुझे अपनी तरफ खींच लिया और लिप-टू-लिप किस शुरू हो गया.

    फिर उन्होंने मुझे अपनी तरफ खींच लिया और लिप-टू-लिप किस शुरू हो गया.

    मैं कुछ समझ ही नहीं पा रहा था कि इतनी जल्दी क्या हो रहा है.
    लेकिन किस करते हुए मजा आ रहा था.

    यह मेरी जिंदगी का पहला किस मेरी मौसी के साथ हो रहा था.
    बेहद मजा आ रहा था.

    फिर उन्होंने मेरे लंड पर हाथ फेरना शुरू किया जो पहले से ही कोबरा डांस कर रहा था.

    अब मैं भी उनके बूब्स दबाने लगा था.
    उनके बूब्स इतने बड़े थे कि एक हाथ से दबाए नहीं दब रहे थे.

    फिर मैं उनके एक दूध को पीने लगा.
    वे भी अपनी छाती आगे को करके मुझे चूची चुसवाने लगी थीं.

    उनकी चूची पीने में बेहद सुकून मिल रहा था. उनके बूब्स एकदम गर्म थे.
    कपड़ों के ऊपर से ही चूसने में ऐसा लग रहा था मानो जन्नत नसीब हो गई हो.

    मैं जोर-जोर से चूसे जा रहा था.

    मौसी बोलीं- बस पिएगा ही या और कुछ भी करेगा?
    अब मैंने उनकी चूत में एक साथ अपनी दो उंगलियां डाल दीं.

    मौसी की चूत एकदम लावा की तरह गर्म थी, थोड़ा थोड़ा पानी भी निकल रहा था.
    उनकी चुत में उंगली करने में मुझे बेहद मजा आ रहा था.

    नम चुत में उंगली करने से पुच-पुच की आवाज़ आ रही थी.
    मौसी भी मुझे किस कर रही थीं.

    कुछ मिनट तक ऐसा ही चलता रहा, फिर मौसी झड़ गईं.

    उनकी सांसें और तेज़ हो गईं.

    मैं उनकी गर्दन पर किस कर रहा था.

    फिर मैंने मौसी के सूट को उतार दिया और उन्हें पूरी नंगी कर दिया.

    फिर न जाने क्या मन हुआ कि मैं उठा और लाइट जलाकर देखने लगा.

    आह नंगी मौसी कसम से बवाल लग रही थीं.

    मैं भी नंगा हो गया और उनकी दोनों टांगों के बीच जाकर चूत चाटने लगा.
    मौसी ने एकदम से मेरा सिर पकड़ा और अपनी चुत की तरफ खींचने लगीं.

    मैं उनकी चूत को जीभ से चाटने लगा.
    मस्त नमकीन खट्टा सा स्वाद था.
    उनकी गुलाबी चूत एकदम रसीली हो गई थी.

    मौसी बोलीं- जल्दी से लंड डालो मेरी जान, मैं तड़प रही हूँ. मुझे और मत तड़पाओ!
    ये सुनकर मुझे और जोश चढ़ गया.

    मैंने झट से अपना लंड उनकी गुलाबी चूत पर रखा और ठेल दिया.
    मेरा लंड चूत को चीरता हुआ अन्दर गहराई में चला गया.

    मौसी बोलीं- थोड़ा धीरे डाल … आह दर्द हो रहा है!
    मैंने कहा- ठीक है!

    मैं थोड़ा रुक गया.

    मौसी ने कहा- तुझे इन सब चीजों का बहुत पता है … कितनी लड़कियां चोद चुका है?
    उनके मुँह से रंडी जैसी भाषा सुनकर मैं हैरान हो गया.

    ये क्या कह रही थीं?
    लेकिन थोड़ा सा बुरा भी लगा, क्योंकि मेरा अभी कोई बंदी सैट ही नहीं हुई थी.

    ये मेरी जिंदगी का पहला सेक्स था.
    मैंने मौसी से कहा- ये मेरा पहला सेक्स है!

    मौसी बोलीं- इतना अच्छा कैसे कर लेता है?
    मैंने कहा- सब जॉनी भैया के वीडियो से सीखा है!

    मौसी जॉनी सिन्स का नाम सुनकर थोड़ा मुस्कुरा दीं.

    फिर मैं धीरे-धीरे लंड अन्दर-बाहर करने लगा.
    अब हमें दोनों को मजा आने लगा.

    कुछ मिनट बाद मैंने लंड उनकी चूत से बाहर निकाला.

    मौसी बोलीं- क्या हुआ?
    मैंने कहा- मेरा लंड कभी किसी ने चूसा नहीं है!

    मौसी थोड़ा मुस्कुराईं और मेरा लंड हाथ में लेकर अपने होंठों पर लगाकर सूंघने लगीं.
    उनके नर्म होंठों के स्पर्श से मेरे शरीर में मानो करंट सा दौड़ने लगा.

    फिर उन्होंने मेरा लंड पूरा मुँह में ले लिया और गले तक उतार लिया.
    मैं मौसी का मुँह पकड़ कर उनके मुँह को ही चोदने लगा.

    करीब दस मिनट बाद मैं उनके मुँह में झड़ गया.

    मौसी ने मुझे देखा और मुँह खोल कर मेरा वीर्य मुझे दिखाती हुई एकदम से सारा माल पी गईं.

    थोड़ी देर बाद मैंने फिर से मौसी की चूत में लंड डाला.
    उनकी दोनों टांगें उठाकर अपने कंधे पर रखीं और लंड अन्दर-बाहर करने लगा.
    बहुत सुकून मिल रहा था.

    मौसी भी एक बार और झड़ गईं.
    उन्हें देखकर ऐसा लग रहा था, जैसे वह इस चुदाई से संतुष्ट हो गई हों.

    मैं जोर-जोर से धक्के लगाने लगा.
    पूरे कमरे में पुच-पुच की आवाज़ आने लगी.

    हम दोनों को ही भरपूर सुकून और आनन्द आ रहा था.

    फिर मैं झड़ने को होने लगा.
    मैंने मौसी से पूछा- कहां निकालूँ?
    उन्होंने कहा- अन्दर ही डाल दे.

    Xxx मास्सी चुदाई करके मैं मौसी की चुत के अन्दर ही झड़ गया और उनके ऊपर ही लेट गया.

    सुबह हो गई.

    रात की चुदाई के बाद मौसी बहुत खुश लग रही थीं.
    घर में हम दोनों के अलावा कोई नहीं था तो मौसी सिर्फ पैंटी में मेरे बाजू में लेटी थीं.

    मैंने उठ कर उनकी चूची मसली और उनके होंठों पर किस किया तो मौसी जाग गईं.

    सुबह सुबह की उत्तेजना बहुत ज्यादा होती है तो मैं उनकी चड्डी उतार कर उनके ऊपर चढ़ गया.
    मौसी ने भी मेरा साथ दिया और हम दोनों ने बीस मिनट तक बहुत ही मस्त चुदाई का मजा लिया.

    फिर हम साथ में नहाए और बाहर आकर मौसी चाय बनाने लगीं मैं उनके साथ किचन में मदद करने लगा.

  • रात में चाची की चुदाई

    Xxx चाची सेक्सी हिंदी कहानी में घर में ज्यादा मेहमानों के कारण मुझे चाचा के घर सोना पड़ा. बीच रात में देखा तो मैं चाची के साथ सोया हुआ था. मेरा ईमान डोल गया.

    दोस्तो, मेरा नाम कन्हैया है और मैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूं.

    मैं दिखने में बहुत स्मार्ट हूँ. मेरी हाईट 5 फुट 8 इंच है और मेरा औजार 6 इंच के खीरे जैसा मोटा है.
    यह अब तक अनेक औरतों और लड़कियों को चोद कर खुश कर चुका है.

    मैंने यहां हजारों सेक्स कहानियां पढ़ी हैं और अपना लंड भी खूब हिलाया है.

    आज इतने दिनों बाद मैंने सोचा क्यों न मैं भी अपनी चुदाई की कहानी आपको सुनाऊं.

    यह फैमिली फक सेक्स रिलेशन की Xxx चाची सेक्सी हिंदी कहानी आज से करीब 5 साल पहले की उस वक्त की है जब मैं बीए में पढ़ता था.
    यह सेक्स कहानी मेरी और मेरी चाची की है.

    मैं अपनी चाची को बहुत समय से चोदना चाहता था. मेरी चाची बहुत सुंदर और सेक्सी हैं.
    एकदम पतली फिगर, मटकती चाल … आह मैं जब भी उनको देखता था … मेरा लंड पानी छोड़ने लगता था.

    उनकी हाईट मुझसे बहुत कम है.
    वे केवल 5 फिट की थीं.

    मैं चाची को चोदने का मौका देखता रहता था क्योंकि मेरे चाचा और चाची का अक्सर झगड़ा रहता था.
    उनके झगड़े का मैं फायदा उठाना चाहता था.

    फिर एक सुहानी रात में मेरा इंतजार खत्म हो गया.
    मैंने उस दिन कल्पना भी नहीं की थी.

    सर्दी का समय था.
    दिसंबर शुरू ही हुआ था.

    तब शादियों का सीजन चल रहा था.
    उस दिन हमारे यहां गेस्ट आए हुए थे.

    सिटी में घर छोटे होने के कारण एडजस्ट करना पड़ता है.
    हमारा और चाची का घर बराबर में ही है

    उस शाम सब मेहमान शादी में से सीधा हमारे घर आ गए.
    सबने चाय नाश्ता किया और खाना खाया ही था कि तभी मेरी मौसी का फोन आया.

    वे भी आने के लिए बोलने लगीं.
    उनके बच्चे छोटे थे.

    अब मुझे सोने के लिए चाची के घर जाना पड़ा.
    वहां सभी बात कर रहे थे.
    मैं भी बैठ गया.

    मुझे जल्दी नींद आने लगती है तो मैं वहीं लेट कर सो गया चाची भी वहीं लेट गईं.
    उनको सुबह ड्यूटी भी जाना था.

    मैं और चाची एक ही रजाई में लेटे थे मेरी रात को आंख खुली तो मेरे होश उड़ गए और मेरी आंखें फटी की फटी रह गईं.

    चाची अपने दोनों पैर चौड़े करके लेटी हुई थीं और उनका कुर्ता ऊपर हो गया था.

    यह देख कर मेरे अरमान जागने लगे मैंने फिर से रजाई चाची के ऊपर डाली और तभी एक हाथ चाची के पेट पर रख दिया.

    कुछ देर ऐसे ही लेटा रहा उधर से कोई हलचल नहीं हुई तो मेरी हिम्मत और बढ़ गई.

    मैंने धीरे-धीरे हाथ नीचे किया और सलवार के ऊपर से उनकी चूत को टच किया.
    नीचे चाची ने कुछ नहीं पहना था.
    उनकी चुत की दोनों फांकें अलग-अलग महसूस हो रही थीं.

    मेरी धड़कनें तेज हो गईं, पसीना आने लगा.
    मुझे डर भी लग रहा था कि कहीं थप्पड़ न पड़ जाए.

    फिर भी मैं धीरे-धीरे उनकी चूत में ऊपर से उंगली करता रहा.
    अचानक चाची ने करवट ली और अपनी गांड मेरी तरफ कर ली.

    पहले तो मैं डर गया कि कहीं वे जाग तो नहीं गईं.
    फिर भी मैं वैसे ही लेटा रहा.

    पांच मिनट बाद मैंने चाची को पीछे से गले लगा लिया.
    वे थोड़ा और पीछे हो गईं और मेरा लंड उनकी गांड में लगने लगा.

    कुछ पल बाद उन्होंने दोबारा करवट ली.
    अब उनका मुँह मेरे मुँह से दो इंच की दूरी पर था.

    उन्होंने मुझे गले लगाया और एक पैर मेरे पैरों पर रख दिया.
    मेरी सांस और उनकी सांस आपस में टकरा रही थीं और पेट से पेट मिल रहे थे.

    वह अहसास मेरी जिंदगी का सबसे हसीन पल था.

    मैंने अपना मुँह आगे बढ़ाकर उनके होंठों से अपने होंठ टच किए.

    लंड में करंट-सा दौड़ गया और उनकी जांघ में रगड़ मारने लगा.

    चाची और मैं कुछ देर ऐसे ही लेटे रहे.
    फिर उन्होंने अपने होंठ खोल दिए और मैंने उनका निचला होंठ पकड़ लिया.

    मैं धीरे-धीरे चाची की जीभ को चूसने लगा.
    चाची सोने का नाटक कर रही थीं.

    अब हम बिलकुल चिपके हुए थे.
    उनकी चूत में खुजली होने लगी तो वे फिर से सीधी लेट गईं.

    मैंने फिर से उनकी चूत पर हाथ रखा और ऊपर से उंगली करने लगा.

    मेरी हिम्मत बढ़ने लगी.

    मैंने उनका नाड़ा खोलने की कोशिश की लेकिन वह नहीं खुला.

    चाची ने सोने का नाटक करते हुए खुजाने के बहाने नाड़ा खोल दिया.

    मैंने फिर से हाथ लगाया तो देखा नाड़ा खुला हुआ है.

    मेरे लिए वह नाड़ा नहीं, मेरे लंड की किस्मत का दरवाजा था.

    Xxx चाची सेक्सी हिंदी कहानी बनने लगी थी.

    मैंने अन्दर हाथ डाला तो चूत बहुत गीली थी जिससे मेरी उंगली आसानी से अन्दर चली गई.

    अब मैं दूसरी उंगली डालने वाला था कि चाची ने अपनी एक टांग मेरे ऊपर रख दी.
    उनकी चूत खुल गई.

    अब मैं आसानी से उंगली कर रहा था.
    थोड़ी देर में चाची ने पानी छोड़ दिया.

    फिर वे उठकर बाथरूम चली गईं.

    मैंने टाइम देखा तो सुबह के 4:30 बज चुके थे.
    अब मैं परेशान था कि छेद का जुगाड़ कैसे होगा.

    मैं लेटा रहा कि शायद चाची आएंगी.

    लेकिन बहुत देर हो गई.

    मुझे भी मूतने की जरूरत पड़ी और डरते-डरते मैं ऊपर चला गया.

    चाची बाहर बैठी थीं.
    उन्होंने नहाने के लिए गीजर चला रखा था.

    मैं मूतने अन्दर चला गया.

    मैं मूत ही रहा था कि चाची पीछे से आईं और उन्होंने मेरे लंड को पकड़ लिया.
    मैं डरने की एक्टिंग करने लगा.

    मैंने कहा- चाची, ये क्या कर रही हो आप … छोड़ो इसे!

    लड़कों का तो सुबह-सुबह हमेशा खड़ा ही रहता है.

    इतने में मूतना खत्म हुआ.

    चाची ने मेरे लंड को आगे-पीछे करना शुरू कर दिया.
    मेरी हालत खराब होने लगी.

    चाची बोलीं- साले हरामजदे … पूरी रात सोने न दिया … आग लगा दी मेरी चूत में. अब कौन बुझाएगा इसे?

    यह सुनकर मैं चुप खड़ा रहा.

    चाची नीचे बैठ गईं और मेरे लंड पर गर्म पानी डालकर उसे मुँह में लेकर चूसने लगीं.

    मैं तो जन्नत में पहुंच गया और जल्दी ही उनके मुँह में छूट गया.

    चाची लंड की रबड़ी खाती हुई बोलीं- जल्दी जा और जीने का गेट लगा कर आ … कहीं कोई ऊपर न आ जाए!
    मैं मन ही मन खुश हो रहा था.

    मैं जल्दी से गेट लगाकर वापस आ गया.
    जैसे ही मैं बाथरूम में घुसा, देखा कि चाची पूरी नंगी खड़ी थीं और अपनी चूत को रगड़ रही थीं.

    चाची ने कहा- नीचे बैठ!
    मैं नीचे बैठ गया.

    उन्होंने एक टांग मेरे कंधे पर रखी और अपनी चूत मेरे मुँह पर अड़ा दी.

    मैंने भी देर न करते हुए चूत चाटना शुरू कर दिया जो मेरी सबसे पसंदीदा चीज थी.
    चाची का पानी फिर से छूट गया.

    मैंने उसे नहीं पिया.
    चाची ने गर्म पानी से चूत साफ की और नीचे जाने को कहा.

    मैंने जिद की- मुझे आपको चोदना है!
    लेकिन उन्होंने मना कर दिया.

    मेरा दिमाग खराब हो गया.
    मैं उदास हो गया.

    तभी चाची ने मेरा लंड हाथ में लिया और उसे चूमा.
    फिर मेरे होंठों को चूमा और बोलीं- कोई ऊपर आ जाएगा, मैं नहा लूँ. ये काम फिर कभी करेंगे!

    मैंने उदास मन से उनकी चूत पर एक किस किया.
    चाची हंसने लगीं.

    मैं नीचे आ गया.
    फिर सब उठ चुके थे.
    मुझे मौके की तलाश बेकरार कर रही थी.

    अगली रात को चमत्कार हो गया.
    चाचा को बाहर शादी में जाना था.

    चाची ने तबीयत खराब होने का बहाना बना दिया और अपने देखभाल के लिए मुझे अपने पास बुलाया लिया.

    रात को दस बजे तो चाची ने दरवाजे बंद करने का आदेश दिया और खुद अपने सारे कपड़े उतार कर पूरी नंगी होकर रजाई में घुस गईं.

    मैंने दरवाजे बंद करते समय देख लिया था कि नंगी चाची आज चुदाई की मस्ती में थीं.

    दरवाजे बंद करके मैं घूमा और अपने कपड़े उतारने लगा.
    चाची मुस्कुरा कर मेरे लौड़े को देख रही थीं.

    मैं फुल नंगा होकर चाची के साथ रजाई में लेट गया और हम दोनों लिपट कर चुम्मी करने लगे.

    कुछ देर बाद चाची बोलीं- तेरा औजार तो बड़ा मस्त है?
    मैंने कहा- हां. अब इसे चूस कर कड़क करो तब आपको इसका कमाल दिखाता हूँ.

    चाची झट से रजाई में अन्दर घुस गईं और मेरे लौड़े को चूसने लगीं.

    जवान लड़के के लंड को कड़क होने में कितना समय लगना था, झट से लोहे की रॉड बन गया.

    मैंने चाची को अपने बाजू में खींचा और रजाई को हटा कर अलग कर दिया.

    फिर चुदाई की पोजीशन में आकर मैंने चाची की चुत में लंड का सुपारा सैट किया और उसी पल चाची ने गांड उठा दी.

    मेरा लंड अन्दर सरक गया.
    चाची आह की आवाज के साथ लौड़े को लील गईं और चुदाई चालू हो गई.

    मैंने बीस मिनट तक धकापेल चुदाई की और उसके बाद चाची झड़ गईं.
    मैंने एक कपड़े से चाची की चुत को पौंछा और उन्हें घोड़ी बना दिया.

    चाची बोलीं- तू अभी तक नहीं झड़ पाया … क्या दवा खाई है तूने?
    मेरे लंड में अभी झांट असर नहीं हुआ था तो मैंने कहा- अभी तो आधे रास्ते में भी नहीं आया हूँ चाची!

    वे सहम कर बोलीं- साले चुत का भोसड़ा बनाएगा क्या?
    मैं हंस दिया और उनकी सवारी गाँठने लगा.

    दस बारह मिनट बाद मैंने कहा- अब झड़ने पर आ रहा हूँ. माल किधर निकालूँ?

    चाची बिना कुछ मेरे लौड़े से हट गईं और लंड को मुँह में लेकर चूसने लगीं.

    मैंने चाची के चूचे मसलते हुए लंड का फव्वारा उनके मुँह में ही छोड़ दिया और चाची सारी मलाई चाट गईं.

    हम दोनों थक कर लेट गए.

    उसके बाद चाची ने मेवा मसाले वाला दूध बनाया और एक बार और धमाकेदार चुदाई का खेल हुआ.

    फिर हम दोनों कपड़े पहन कर सो गए.

  • घर में हुई सबके साथ मस्त चुदाई



    मेरे परिवार के पास बहुत पैसा है. सब अय्याश हैं. एक बार मैं घर पहुंचा वहां 2 गोरखे नेपाली नौकर, उनकी बीवियां, मेरे मम्मी पापा, दो बहनें सब नंगे चुदाई कर रहे थे.
    मेरा नाम विक्कू है दोस्तो, मैं 27 साल एक मद मस्त नौजवान हूँ और एक बहुत बड़ी कंपनी में काम करता हूँ.
    यह Xxx ग्रुप पोर्न स्टोरी मेरे घर की है.
    मेरा ऑफिस घर से बहुत दूर है आने जाने में दो दिन लगते हैं.
    इसलिए मैं अभी अकेले ही आफिस के पास रहता हूँ और ऑफिस आराम से आता जाता हूँ।
    हमारे ऑफिस में 2 सिक्योरिटी गार्ड हैं।
    दोनों ही नेपाली हैं, नाम उनके गामा और गुरंग है।
    वे दोनों ही शादीशुदा है और अपनी अपनी पत्नी के साथ पास में ही रहते हैं।
    दोनों ही ड्यूटी बड़ी मेहनत से करते हैं, हमारे बॉस उनसे बहुत खुश भी रहतें हैं।
    कुछ दिन के बाद कंपनी का ऑफिस एक ऐसी जगह शिफ्ट हो गया जहाँ सिक्योरिटी गार्ड की कोई जरूरत नहीं थी।
    ऐसे में कंपनी ने उन दोनों को नौकरी से निकाल दिया।
    नौकरी से निकलने के बाद वो दोनों मेरे घर आये और फूट फूट कर रोने लगे।
    कहने लगे- अब हमारा क्या होगा? हमारी तो रोज़ी रोटी चली गई। अब हम क्या करेंगे? कहाँ जायेंगे?
    मुझे उन दोनों पर दया आ गई तब मैंने कहा अच्छा रुको मैं कुछ कोशिश करता हूँ।
    फिर मैंने अपने पापा से बात की।
    सच्चाई यह है दोस्तो … मेरे पापा का बहुत बड़ा कारोबार है।
    वे एक बहुत बड़े और सफल बिज़नेस मैन हैं।
    मैंने जब इन दोनों की दर्द भरी कहानी सुनाई.
    तो पापा ने कहा- ठीक है. दोनों को हमारे पास भेज दो मैं उन्हें नौकरी दे दूंगा।
    मैंने जब यह बात उन दोनों को बताई तो वे लोग ख़ुशी के मारे उछल पड़े और मेरे पैरों पर गिर पड़े।
    मैंने दोनों को परिवार सहित भेज दिया।
    मुझे यही भी खबर मिली की दोनों को गार्ड का काम सौंप दिया गया है और उनकी बीवियों को घर के काम काज में मेड की हैसियत से रख लिया गया है।
    इस तरह दोनों नेपालियों की डबल इनकम होने लगी।
    उनकी ज़िन्दगी में जबरदस्त खुशहाली आ गई।
    हमारे पापा की एक बहुत बड़ी कमजोरी है, वे अय्याश प्रकृति के व्यक्ति हैं और उन्हें खूबसूरत लड़कियां और बीवियां चोदने का शौक है।
    कुछ कुछ ऐसा मेरे साथ भी है।
    मैं शादी के पहले 2 लड़कियों को चोद चुका था और मोहल्ले की एक औरत को चोदा था जिसका नाम मिसेज मोनिका है।
    मैं उसे भाभी कहता हूँ।
    फिर कुछ दिन बाद उसने मुझसे अपनी ननद चुदवाई और एक महीने के बाद अपनी देवरानी भी चुदवा ली।
    मैंने इन तीनों को कई बार चोदा है और खूब हचक हचक के चोदा है।
    आज भी जब घर जाता हूँ तो इनको चोद कर आता हूँ।
    यह बात मेरी मम्मी और बहनों को पता है।
    आगे आपको मम्मी और बहनों के बारे में भी मालूम हो जायेगा।
    एक बात समझ लो की हमारी फैमिली एक मॉडर्न फैमिली है, सच कहूं तो अय्याश फैमिली है।
    हमारे पास पैसा बहुत है, हम सब जवान हैं तो अय्याशी क्यों न करें?
    मुझे घर से आये हुए लगभग एक साल हो चुका था।
    एक साल से मैं यहाँ अकेला ही रहता था बाकि हमारी फैमिली वाले सब घर पर ही थे.
    यहाँ तक कि मेरी बीवी अर्चना भी।
    एक दिन मेरा मन घर आने का हुआ तो मैंने एक हफ्ते की छुट्टी ली और घर आ गया।
    मेरा घर बहुत बड़ा है।
    घर क्या पूरा महल है।
    तीन मंजिला की एक भव्य आलीशान बिल्डिंग है

    मैं अंदर दाखिल हुआ तो मुझे कोई दिखाई नहीं पड़ा। मैं समझा कि शायद सब लोग ऊपर होंगे.
    तो मैं फ़ौरन पहली मंजिल पर चढ़ गया।
    वहां सब जगह देखा, कहीं कोई दिखाई नहीं पड़ा।
    मन में शंका हुई कि कहाँ गए सब लोग?
    फिर दूसरी मंजिल पर गया तो वहां भी पूरा सन्नाटा।
    कहीं कोई नहीं।
    तब मुझे किसी अनहोनी की शंका होने लगी, मैं मन ही मन घबराने लगा और आखिरी मंजिल की तरफ कदम बढ़ाने लगा तब मुझे कुछ आवाज़ें सुनाईं पड़ी तो दिल को बड़ी तसल्ली हुई।
    मैं जल्दी से उस बड़े ए सी हाल में पहुँच गया।
    वहां जो हो रहा था उसे देख कर दंग रह गया।
    ऐसा तो मैंने कभी सोचा भी न था।
    मैं चुपचाप एक कोने में खड़े होकर वहां का नज़ारा देखने लगा।
    नज़ारा इतना रोमांटिक था कि मेरा लण्ड साला खड़ा हो गया।
    मैंने देखा कि घर के सारे लोग चुदाई में लगे हुए हैं; खूब जम कर अय्याशी हो रही है।
    मेरी मम्मी सुनीता एकदम नंगी नंगी नेपाली गामा के लण्ड पर कूद रहीं हैं।
    उनके बड़े बड़े दूध उछल रहे हैं और लण्ड पूरा का पूरा उसकी चूत में घुसा हुआ है।
    मेरी बड़ी बहन रूचि दूसरे नेपाली के लण्ड पर कूद रही है और झमाझम चुदवा रही है।
    मेरी छोटी बहन रीता पहले वाले नेपाली के मुंह पर नंगी नंगी बैठी हुई अपनी चूत चटवा रही है।
    मेरी बीवी भी दूसरे नेपाली के मुँह पर बैठ कर अपनी बुर चटवा रही है।
    मेरे पापा के लण्ड पर गामा की बीवी बैठी हुई अपना भोसड़ा चुदवा रही है और गुरुंग की बीवी पापा के मुंह पर बैठी हुई बुर चटवा रही है।
    इतने में घर का नौकर बिट्टू आ गया और मम्मी के सामने नंगा खड़ा हो गया।
    मम्मी ने गप्प से उसका लण्ड अपने मुंह में भर लिया।
    मम्मी की चूत में लण्ड और मुंह में लण्ड देख कर मैं बहुत ज्यादा उत्तेजित हो गया।
    रूचि और रीता को बुर चटवाते हुए देखकर मेरे मुंह में पानी आ गया।
    मेरा मन हुआ कि मैं पहले मम्मी का भोसड़ा चोद डालूं और फिर दोनों बहनों की चूत में लण्ड पेल पेल कर पूरा मज़ा ले लूँ।
    फिर क्या … Xxx ग्रुप पोर्न लाइव देख मेरा लण्ड साला मेरे काबू के बाहर हो गया।
    वो साला पैंट के बाहर निकल कर टनटनाने लगा।
    दोनों नेपाली की बीवियां भी बड़ी सेक्सी और हॉट थीं।
    मैंने ठान लिया कि मैं इन दोनों बीवियों को उनके हसबैंड के सामने पटक पटक के चोदूंगा और सबके सामने चोदूंगा।
    तब तक गुरंग की बीवी गिनी ने मुझे देख लिया और मेरा खड़ा लण्ड देख लिया।
    वह नंगी ही दौड़ी पड़ी मेरी तरफ और मेरे पास आकर मेरा लण्ड पकड़ लिया।
    लण्ड पकड़े पकड़े वह मुझे सबके सामने ले गई।
    मुझे देख कर मम्मी बोली- अरे विक्कू बेटा, तू कब आ गया? तूने पहले तो बताया नहीं?
    मैंने कहा- अच्छा हुआ मम्मी जो मैंने पहले नहीं बताया। अगर बता दिया होता तो ये तुम सबकी अय्याशी कैसे देखने को मिलती?
    मम्मी ने कहा- अच्छा अब देख ही लिया है तो तू भी शामिल हो जा इसमें। मैं तेरी हरकतें जानती हूँ। तू मोनिका को चोदता है, उसकी ननद की बुर में लण्ड पेलता है, उसकी देवरानी को भी चोदता है तू! मुझसे कुछ भी छुपा नहीं। अब घर में ही माँ बहन चोद कर मज़ा ले ले न? बाहर जाने की जरूरत क्या है? तेरा लौड़ा तो भोसड़ी का बहुत बड़ा हो गया है।
    उधर से रूचि दीदी बोली- अरे हां विक्कू, तेरा लौड़ा तो बड़ा मोटा भी है।
    फिर छोटी बहन रीता बोली- हां भइया, तेरा लण्ड हम सबकी चूत फाड़ डालेगा जरूर!
    मम्मी ने कहा- लण्ड इतना बढ़िया है तो फाड़ेगा ही सबकी चूत।
    इतने में गामा की बीवी बोली- पहले तो मैं फड़वाऊंगी अपनी चूत इसके लण्ड से। मेरी नज़र बहुत दिनों से थी विक्कू के ऊपर। मैं तो इसके नाम की उँगली भी किया करती थी।
    तब तक मेरा लौड़ा साला और ज्यादा तन गया।
    फिर मैंने गामा की बीवी को उठा के पटका और सीधे लण्ड पेल दिया उसकी चूत में।
    मैं बेधड़क होकर बड़ी बेशर्मी से उसे चोदने लगा।
    मम्मी और दोनों बहने बड़े गौर से मुझे चोदते हुए देखने लगीं।
    आखिरी राउंड में मैंने देखा कि बिट्टू कुछ ज्यादा ही उत्साहित है।
    उसकी नज़र दोनों नेपालियों की बीवियों पर टिकी थी।
    गोरी गोरी नंगी नंगी दोनों बीवियां सच में बड़ी हॉट लग रहीं थीं।
    बिट्टू उनके पास गया और एक की चूचियाँ मसलने लगा दूसरी की चूत।
    वह दोनों को दबा कर गचागच चोदने लगा।
    तब तक इधर मेरी बड़ी बहन ने मेरा लण्ड पकड़ कर बड़ी मस्ती से हिलाकर बोली- विक्कू, तेरा लौड़ा बड़ा क्यूट है, बड़ा प्यारा और ये साला माँ को चोद कर बहुत बड़ा मादरचोद हो गया है. अब मैं इसे बहनचोद बनाऊंगी।
    ऐसा बोल कर रूचि दीदी ने लण्ड मुंह में भर लिया और चूसने लगीं.
    मैं उसकी चूत में उँगली करने लगा।
    उधर पापा ने लण्ड मेरी छोटी बहन रीता की चूत में पेल रखा था।
    रीता भी पापा का लण्ड पूरा पेलवाकर चुदाई का मज़ा लेने लगी थी।
    मैंने देखा कि मेरी बीवी अर्चना गामा का लण्ड अपनी गांड में डाले हुए है।
    गामा मेरी बीवी की गांड मारने में जुटा हुआ है।
    मेरी मम्मी गुरुंग का लण्ड अपनी चूचियों के बीच पेलवा कर मज़ा ले रही हैं।
    इस तरह पूरा दिन पूरी रात हम लोग चुदाई में लिप्त रहे।
    न थके और न रुके बल्कि चूत अदल बदल कर चोदते रहे।
    मैंने मम्मी को खूब चोदा दोनों बहनों को चोदा और नेपालियों की दोनों बीवियों को भी खूब पटक पटक के चोदा।
    बिट्टू ने भी मेरी माँ चोदी, मेरी बहनों की चूत में और गांड में लण्ड पेला और मेरी बीवी की बुर भी बड़े मजे से लिया.
    उसके बाद नेपाली बीवियों को भी चोद चोद कर मज़ा लिया।
    नेपालियों ने भी सबको चोदने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
    मेरी माँ बहन चोद चोद पूरे टाइम उत्तेजित होते रहे।
    मेरे पापा ने भी सबको बड़े प्यार से चोदा, उन्हें सबसे ज्यादा मज़ा नेपालियों की बीवियां चोदने में आया।
    दूसरी रात में मैं अचानक छत पर पहुँच गया।
    मैंने देखा कि वहां मेरी मम्मी रेलिंग पर खड़ीं हैं।
    वे अकेली ही थी और रेलिंग पकड़ कर थोड़ा आगे की तरफ झुकी हुईं थीं।
    उनकी गांड पीछे से बड़ी सेक्सी लग रही थी।
    बस मेरा मन मचल गया तो मैंने पीछे से उसकी साड़ी उठा कर लण्ड उसकी चूत में घुसा दिया।
    मम्मी भी मस्ती के मूड में आ गईं।
    वे अपनी गांड आगे पीछे करती हुई मुझसे बड़े प्यार से रेलिंग पकड़े पकड़े चुदवाने लगीं।
    बड़ा बढ़िया रोमांटिक मौसम था।
    ठंडी ठंडी हवा चल रही थी।
    तो मैंने धीरे से लण्ड उसकी चूत से निकाल कर उनकी गांड में घुसेड़ दिया।
    वे बोली- अरे विक्कू … यह क्या किया तूने? मैं गांड किसी को नहीं देती।
    मैंने कहा- मुझे नहीं मम्मी, मेरे लण्ड को दे दो न अपनी गांड प्लीज। मेरा लण्ड तेरी गांड का भूखा है।
    इसी बीच मैंने लण्ड उसकी गांड में ही अंदर बाहर करने लगा और धीरे धीरे स्पीड बढ़ाने लगा।
    कुछ देर बाद मम्मी ने खुद कहा- बेटा विक्कू, गांड चुदाने में
    इतना मज़ा आता है, यह मुझे नहीं मालूम था। तुम पूरा लौड़ा पेल दो अंदर और धकाधक चोदो मेरी गांड। अब तो मैं भोसड़ा चुदवाने के साथ साथ गांड भी चुदवाया करुँगी अपनी।
    यह सुनकर मेरा लण्ड साला और ज्यादा सख्त हो गया।
    मैंने फिर मम्मी की चूत और गांड दोनों घपाघप चोद कर खूब मज़ा लिया।
    मैंने इसी तरह रूचि और रीता की भी गांड मारी और दोनों नेपाली बीवियों की गांड में भी खूब जम कर लण्ड पेला और कई बार पेला।
    फिर क्या … हम सबने सबकी चूत और गांड चोदने का पूरा मज़ा लिया।

  • कुँवारी बुर की चुदाई पहली बार

    कुँवारी बुर की चुदाई की कहानी में पढ़ें कि कैसे मेरे पड़ोस में रहने वाली लड़की ने अपनी कामवासना से मजबूर होकर अपने कमसिन जिस्म को मेरे हवाले कर दिया.

    हाय दोस्तो, मेरा नाम सुमीत शर्मा है। वैसे तो मैं दतिया का रहने वाला हूं लेकिन मेरी जॉब के कारण फिलहाल इंदौर में रहता हूं। मेरी ऊंचाई 5 फुट 8 इंच है।

    मेरी शादी को दो साल हो चुके हैं। मेरी बीवी बहुत सुंदर है और मेरा बहुत खयाल रखने वाली है। हमारा वैवाहिक जीवन बहुत अच्छा चल रहा है। में और मेरी बीवी शुरू से ही सेक्स का पूरा मजा लेते हैं। हमने कई तरीके से और नई-नई जगह चुदाई करने का मजा लिया है। जैसा कि मैंने आपको बताया कि मेरी जॉब घर से दूर है तो मैं यहां अपनी बीवी के साथ ही रहता हूँ।

    यह कहानी 6 महीने पुरानी है। हमारे घर के सामने एक थोड़ा ग़रीब परिवार रहता है, परिवार में चार सदस्य हैं पति, पत्नी, उनकी बेटी सोनम जिसकी उम्र 19 साल है और छोटा बेटा पंकज जिसकी उम्र 11 साल है।
    मैं जॉब के कारण दिनभर बाहर ही रहता हूँ इसलिये मेरी बीवी बाजार के छोटे मोटे काम के लिए सोनम को ही बुला लेती है। और सोनम भी खुशी खुशी उसकी सहायता के लिए आ जाती है।

    हम इस घर में 2 साल पहले ही आये थे। तब मैंने सोनम पर कभी इतना ध्यान नहीं दिया था।

    पर कुछ दिन पहले जब मैं ड्यूटी के लिए निकल रहा था तो सामने से आ रही सोनम को देखा। उसके स्तन 32 के भरे पूरे सुडौल हो चुके थे और उसकी गांड 36 की हो गई थी। सोनम को देखकर मुझे विश्वास नहीं हुआ कि ये वही सोनम है जो मेरे यहाँ आने पर दुबली पतली हुआ करती थी। मैं समझ गया सोनम का शरीर अपनी जवानी के पूरे उफान पर है।

    कुछ दिन बाद मेरी बीवी को मेरी सास की तबियत खराब होने के कारण अपने मायके जाना पड़ा। मैं उसको घर छोड़कर वापस आ गया। सोनम के घर में टी वी न होने के कारण सोनम और उसका भाई लगभग रोज ही हमारे घर टी वी देखने आया करते थे। सोनम के परिवार और हमें किसी को कोई आपत्ति नहीं थी इसलिए ये लोग देर रात 11-12 बजे तक टी वी देखते रहते थे।

    उस दिन भी सोनम और उसका भाई टी वी देखने आए हुए थे। मेरी बीवी के न होने के कारण में अकेला था। उस दिन सोनम के भाई को 10 बजे ही नींद आने लगी और वो सोने के लिए घर चला गया।

    अब घर में केवल में और सोनम ही थे।

    जब तक हमें इस बात का अहसास न हुआ, तब तक सब नार्मल रहा। लेकिन जब हमें इस बात का अहसास हुआ कि मैं और एक जवान लड़की रात में अकेले मेरे घर में हैं तो हम दोनों ही थोड़े असहज हो गए। लेकिन हम दोनों ही सामान्य दिखाने की कोशिश करते रहे और टी वी पर आ रही फिल्म को एन्जॉय करते रहे।

    उस दिन टी वी पर आ रही फिल्म भी कुछ ज्यादा ही कामुक दृश्यों से भरी हुई थी। फ़िल्म में हीरो हिरोइन एक दूसरे को फ़्रेंच किस कर रहे थे और एक दूसरे के कपड़ों में हाथ डाल रहे थे। ये सब देखकर मेरा बुरा हाल था और शायद सोनम भी मुश्किल से अपने आप को सामान्य दिखा पा रही थी।

    मेरा लंड पैंट के अंदर खड़ा हो चुका था और थोड़ा थोड़ा लीक कर रहा था। जब मुझसे रहा नहीं गया तो मैं उठकर बाथरूम चला गया और मुठ मार कर अपनी वासना को शांत किया।

    जब मैं बाथरूम से वापस आया तो देखा सोनम अपने सलवार में हाथ डाल कर अपनी बुर को सहला रही है। मैं समझ गया कि ये लड़की अपनी बुर की चुदाई के लिए तड़प रही है.

    मुझे वापस आया देखकर उसने तुरंत अपना हाथ निकाल लिया और फिर से सामान्य दिखने की कोशिश करने लगी।

    पर अब अपनी बुर को छेड़ने के कारण वो अपनी तेज साँसों पर नियंत्रण रखने में असमर्थ थी। उसकी तेज सांसें मुझे उसके अंदर लगी वासना की आग का पूरा हाल बयान कर रही थी।

    अबकी बार मैं जान बूझ कर सोनम के बिल्कुल पास ही बैठा और उसकी जांघ पर हल्के से हाथ रखकर हटा लिया। इस पर उसने कोई रिस्पांस नहीं दिया।

    सच कहूं तो मेरी भी बिल्कुल हिम्मत नहीं हो रही थी क्योंकि आज तक मैंने अपनी बीवी के अलावा किसी और लड़की को वासना की नजर छुआ भी नहीं था। लेकिन आज सोनम को अपने पास पाकर मैं खुद को रोक नहीं पा रहा था। मैं किसी भी हालत में आज सोनम को अपना बनाना चाहता था।

    इसीलिए मैंने एक बार और हिम्मत करके अपना एक हाथ उसके कंधे पर रखकर हल्के से दबा दिया। इस बार मेरा प्रयास सफल हुआ, सोनम ने लंबी सांस लेकर अपना सिर मेरे कंधे पर टिका दिया। उसने एक बार आशा भरी नजरों से मेरी आँखों में देखा और अगले ही पल टी वी पर चल रहे सेक्सी सीन को देखने लगी।

    फिर कुछ देर बाद बोली- अंकल जी, क्या शादी के बाद सब ऐसा ही करते हैं?
    मैंने उसके होंठों पर उंगली रखते हुए कहा- अंकल जी मत बोलो … केवल सुमीत कहो।
    उसने हल्की सी स्माइल दी, फिर पलट कर अपना सर मेरे सीने में गड़ाते हुये मुझे हग कर लिया।

    मैंने भी उसे कस कर अपने सीने में दबा लिया। अब मैं उसके बड़े बड़े स्तनों को अपने सीने पर महसूस कर सकता था।

    अब मैंने उसके मुंह को थोड़ी पकड़ कर उठाया और उसके होंठों को अपने होंठों पर लगा कर किस करने लगा, वो भी मेरा साथ दे रही थी।
    चुम्बन करते करते मैंने उसके कुर्ते में पीछे से हाथ डाल दिया और उसकी पीठ सहलाने लगा। शायद अब तक पहली बार किसी मर्द ने उसके होंठों और उसकी नंगी पीठ को छुआ था इसलिए इस अद्भुद आनन्द के कारण उसकी आंखें बंद हो गई और वो सिसकारियाँ लेने लगी।

    कुछ देर बाद उसे अहसास हुआ कि वो वासना में बहक गई है और उसने मुझे रोका, बोली- सुमीत जी रहने दीजिए ना!
    लेकिन मना करते हुए भी वो मर्द के स्पर्श से प्राप्त आनन्द को भुला नहीं पा रही थी इसलिए मना करते हुए उसकी आवाज में आत्मविश्वास की कमी थी।

    मैंने उससे पूछा- क्या हुआ सोनम?
    वो बोली- रात के 10:30 बज चुके हैं। कहीं किसी को पता चल गया तो मेरी बहुत बदनामी होगी.
    और यह कहते हुए उसकी आँखों में आंसू आ गए।

    मैंने उसके माथे पर चूमते हुए उससे कहा- सोनम, तुम चिंता मत करो, तुम्हारी बदनामी मेरी बदनामी है. इसलिए किसी को कुछ पता नहीं चलेगा. और वैसे भी तुम 12 बजे तक तो टी वी देखती ही हो. लेकिन अगर फिर भी तुम डरती हो तो रहने दो, मैं कोई जबरदस्ती नहीं करूँगा।

    मेरी बातों से उसका डर कम हो गया और वो एक बार फिर मेरी बांहों में आ गई। अब मैंने उसके पूरे चेहरे को चूमना शुरू किया उसके कानों की लौ को किस किया और कपड़ों के ऊपर से पीठ को सहलाता रहा।

    मैंने कपड़ों के ऊपर से ही उसके बूब्स को सहलाना शुरु किया. उस पर सेक्स का शुरूर चढ़ रहा था और उसकी तेज साँसें इसका सबूत दे रही थीं। ऊपर से सहलाने के बाद मैंने उसके कुर्ते में ऊपर से हाथ डालकर उसके बूब्स को ब्रा के ऊपर से दबाया. कोई विरोध न होने पर मैंने उसकी ब्रा को कुर्ते के अंदर ही ऊपर उठाकर उसके नंगे स्तन को अपने हाथ में लेकर दबाया।

    पहली बार किसी मर्द के द्वारा अपने स्तन को छूने के अहसास से वो सिहर उठी और उसकी साँसें पहले से भी ज्यादा तेज हो गयीं।

    अब मैंने देर न करते हुये उसके कुर्ते को कमर से पकड़कर उतारने के लिए उठाया। सोनम मेरा हाथ पकड़कर धीरे से बोला- रहने दो ना प्लीज।
    लेकिन उसकी आवाज में असहमति नहीं बल्कि एक लड़की की शर्म थी।

    मैंने उसका हाथ हल्के से हटाकर उसके कुर्ते को फिर उठाया. इस बार सोनम ने दोनों हाथ उठाकर कुर्ता निकालने में अपना सहर्ष सहयोग प्रदान किया। अब मेरे सामने उसका एक नंगा स्तन था जो गोल मटोल सुडौल तथा निप्पल पर हल्के भूरे रंग का था, उसके निप्पल देखकर मुझे अपनी सुहागरात याद आ गई।
    उसके निप्पल बहुत ही सुंदर थे।

    अब मैंने देर न करते हुए उसके निप्पल को चूसना शुरू कर दिया। इस अद्भुत अहसास के रोमांच से उसका हाथ अपने आप ही मेरे सर पर सहलाने लगा। सोनम ‘और चूसो … और चूसो!’ बड़बड़ाने लगी।

    मैंने स्तन चूसते चूसते उसकी सफेद ब्रा को उसके शरीर से अलग ही कर दिया। अब वो ऊपर से पूरी नंगी थी। मैं बारी बारी से उसके दोनों स्तनों को चूस रहा था और वो इस असीम आनन्द में गोते खा रही थी।

    अब में उससे अलग हुआ, ऊपर से नीचे तक उसको देखा।
    उसने स्त्रीसुलभ लज्जा से अपनी आंखें अपने हाथों से बंद कर ली।

    मैंने उसके हाथों को आंखों से हटाकर उसको किस किया और उसे गले लगाकर बोला- आई लव यू सोनम!
    सोनम ने भी ‘आई लव यू टू!’ सुमीत बोलकर मुझे किस किया।

    तब मैं उसे उठाकर अपने बेड पर ले गया और बहुत प्यार से उसे वहां लिटाया। बेड पर ऊपर से नंगी सोनम किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी।
    अब मैंने अपने अंडरवियर को छोड़कर बाकी सारे कपड़े निकाल दिए।
    सोनम मेरी छाती के बालों को देखकर मंत्रमुग्ध हो गयी।

    मैं सोनम के बगल में लेट गया और उसको ऊपर से नीचे तक चुम्बन करने लगा। उसके बूब्स को पीने के बाद उसकी नाभि को चूमा। वो बस आंख बंद करके आहें भर रही थी।

    अब मैंने उसके सलवार का नाड़ा ढीला किया और सलवार को नीचे की तरफ खींचा. उसने अपनी गांड उठाकर सलवार निकलने में अपना सहयोग दिया।
    अब वो केवल पैंटी में थी।

    उसकी पैंटी भूरे रंग की थी तथा इलास्टिक के पास थोड़ी फटी हुई थी। उसके काम रस के कारण उनकी पैंटी बुर के पास पूरी भीग चुकी थी। कुँवारी बुर की चुदाई के लिए तैयार हो रही थी.
    मैंने उसकी बुर की दरार में लगे उसके काम रस को पैंटी के ऊपर से ही चाटा तो वो चिंहुक उठी और गांड उठाकर मजे लेने लगी।

    अब मैंने अपनी दो उंगली उसकी पैंटी की इलास्टिक में पैंटी उतारने के लिए डाली। उसने पैंटी को पकड़कर अपनी बुर को नंगा होने से रोका, बोली- ये मत करो ना!
    मैंने उसके चेहरे की तरफ देखा उसके चेहरे पर डर और शर्म के भाव साफ दिखाई दे रहे थे।

    सोनम के चेहरे का ये भाव, डर समाज की बदनामी का नहीं बल्कि उसकी पहली चुदाई का था। मैंने उसके हाथ को हल्के से हटाकर उसकी पैंटी को धीरे से निकाला।
    उसने अपने कूल्हे थोड़े से उठाकर अपना विरोध खत्म करते हुए पैंटी भी निकल जाने दी।

    अब वो पूरी नंगी मेरे सामने पड़ी हुई थी।

    उसकी बुर थोड़ी उभरी हुई तथा हल्की सी सांवली थी, उसकी छोटी छोटी झांटें बुर रस में भीगी हुई चमक रही थी. बुर के होंठ एक दूसरे से चिपके हुए थे। बुर की दरार ऐसी थी जैसे किसी ने पेंसिल से बना दी हो।

    उसकी बुर को देखकर समझ गया था कि सोनम के बाद उसकी प्यारी बुर को देखने वाला पहला खुशनसीब इंसान मैं ही था।
    मैंने सोनम की बुर को चूम कर के उसकी मुंहदिखाई उसे दी.

    बुर पर चुम्बन से सोनम की साँस एक बार फिर तेज हो गई।

    अब मैंने अपना अंडरवियर भी निकाल दिया औऱ सोनम को सलामी दी रहे अपने 8 इंच के लंड को सोनम के हाथों में दे दिया। सोनम ने कांपते हुए हाथों से मेरे लंड को पकड़ा।

    सोनम ने लंड को आगे पीछे करके अच्छी तरह देखा जैसे कोई इंसान किसी नई चीज को पहली बार देखता है और लंड के सुपाड़े को किस करके छोड़ दिया।

    अब मैं नीचे आया और सोनम के पैरों के बीच टांगों को फैलाकर बैठ गया। मैंने अपनी जीभ बुर की दरार में डाल दी और उसकी बुर को चूसना शुरु कर दिया।

    बुर पर हुये इस हमले से सोनम पागल होने लगी और मेरे बालों को पकड़कर अपनी बुर पर दबाने लगी.
    वैसे भी मेरी बीवी कहती है कि मैं बुर बहुत अच्छी चूसता हूँ।

    थोड़ी देर बुर चुसवाने के बाद सोनम का अपने ऊपर कंट्रोल खत्म हो गया ‘और चाटो … चूसो … पी जाओ मेरा पूरा पानी … लाल कर दो मेरी बुर को चूस चूस के …’ ये सब बड़बड़ाने लगी।

    थोड़ी देर में सोनम बुर की चुदाई के लिए गिड़गिड़ाने लगी और बोली- प्लीज चोद दो मुझे, नहीं तो मैं मर जाऊँगी. प्लीज … प्लीज … प्लीज … चोद दो न मुझे … फाड़ दो मेरी बुर को … अब सहन नहीं होता।

    मैंने भी अब कुँवारी बुर की चुदाई में और देर करना ठीक नहीं समझा और अपना लंड उसकी बुर के छेद पर टिका दिया। सोनम की बुर के रस और मेरे लंड के प्रिकम के कारण चिकनाई की कोई कमी नहीं थी।

    सोनम को मैंने बोला- आज तुम्हारा पहली बार है तो थोड़ा दर्द होगा, बाद में मजा आएगा।
    उस प्यासी जवानी के अंदर चुदाई की आग लगी हुई थी, उसने बोला- सुमीत आप देर मत करो, बस फाड़ दो, मेरी बुर को सारा दर्द मैं सह लूँगी।

    मैंने सोचा ‘ठीक है मुझे क्या करना … जब ये बोल ही रही है तो!’ मैंने लंड को बुर के छेद पर सेट करके हल्का का धक्का लगाया.
    सोनम को थोड़ा सा दर्द हुआ और उसकी आह निकल गई लेकिन फिर भी वो बोली- सुमीत प्लीज जल्दी करो … फाड़ दो मेरी बुर को।

    दोबारा मैंने देर न करते हुये, अपने दोनों हाथों को सोनम के कंधों पर टिकाकर जोरदार धक्का दिया, मेरा आधा लंड सोनम की कौमार्य झिल्ली को फाड़ता हुआ उसकी बुर में समा गया और वो दर्द के कारण बिन पानी की मछली की तरह तड़पने लगी।

    सोनम गिड़गिड़ाने लगी- सुमीत प्लीज छोड़ दो मुझे … मुझे कुछ नहीं करना, मैं मर जाऊंगी।

    उसकी बुर सच में फट चुकी थी और उसमें खून बह रहा था जो मेरे लंड को गीला कर चुका था।

    मैंने सोनम को उसकी बुर के बारे में कुछ नहीं बताया, नहीं तो वो मुझे आगे नहीं बढ़ने देती।
    मैं उसी अवस्था में लेटे लेटे उसके बूब्स को सहलाता रहा। जब उसका दर्द कम हो गया तो मैं अपने आधे ही लंड को अंदर बाहर करने लगा।

    थोड़ी देर बाद उसे मजा आने लगा, तब मैंने उसे बताया कि अभी आधा ही लंड अंदर गया है। अगर वो कहे तो पूरा डाल दूँ।
    सोनम बोली- अब दर्द तो नहीं होगा?
    मैंने कहा- थोड़ा सा होगा। लेकिन यह दर्द एक बार हर लड़की को सहना ही पड़ता है। आज के बाद दर्द नहीं होगा, केवल मजा आयेगा।
    उसने कहा- ठीक है लेकिन आराम से डालना।
    मैंने ओके बोला. पर मुझे पता था कि लंड कैसे डालना है।

    मैंने कुछ देर और आधे लंड को अंदर बाहर किया और उसके बूब्स से खेलता रहा।
    जब मुझे लगा कि अब सोनम सामान्य हो चुकी है और दर्द सहने के लिये तैयार है. तब मैंने अपने दोनों हाथों से उसके कंधों को दबाया और पूरी ताकत से अपना लंड उसकी बुर में डाल दिया।

    लंड बुर की सारी दीवारों को फाड़ता हुआ सीधा बच्चेदानी से टकराया।
    सोनम की चीख निकल गयी, उसकी आंखें फटी की फटी रह गईं, शरीर अकड़ गया और वो दर्द के कारण लगभग बेहोश हो गई.

    मैं डर गया और कुछ देर तक उसी अवस्था में उसके ऊपर लेटा रह के उसे सहलाता रहा. कुछ देर बाद जब उसका दर्द कुछ कम हुआ तो मैंने धीरे धीरे धक्के लगाना शुरू किये।

    जब उसे भी मजा आने लगा तो वो भी चूतड़ उठाकर चुदाई में अपना सहयोग देने लगी। अब मैं उसे पूरे जोर से चोद रहा था, मेरा लंड उसकी बच्चेदानी से टकरा रहा था। अब उसका दर्द बिल्कुल खत्म हो गया था। वो आह आह करके अपनी पहली चुदाई का पूरा मजा ले रही थी।

    करीब 10 मिनट की हाहाकारी चुदाई के बाद सोनम और मैं एक साथ झड़े।

    मैंने उसे किस किया और बगल में लेट गया। कुँवारी बुर की चुदाई हो चुकी थी.

    उसने अपनी बुर देखी तो पूरी सूज गयी थी। बुर से उसके पानी और मेरे वीर्य का मिश्रण निकल रहा था और उसके खून से बेडशीट पर बहुत बड़ा धब्बा पड़ गया था।
    खून देखकर वो डर गई तो मैंने उसे समझाया- हर लड़की के पहली बार खून आता है इसमें कोई डर की बात नहीं है।

    उसकी बुर में बहुत दर्द हो रहा था जिसके कारण जब वो उठ कर चली तो वो लंगड़ा के चल पा रही थी। मैंने उसे एक दर्दनिवारक गोली दी और कहा- अब तुम घर जाओ क्योंकि रात के 12 बज चुके हैं. कहीं किसी को शक न हो जाये।

    वो घर चली गयी।

    अगले दिन मैंने उसे एक गर्भ निरोधक लाकर दी।

    इस घटना के बाद भी सोनम हमारे घर आती रही लेकिन वो सब फिर कभी नहीं हुआ क्योंकि मुझे सोनम की बदनामी का डर था।

    अभी 2 महीने पहले सोनम की शादी हो गई। मैंने उसकी शादी में उसके पिताजी की बहुत सहायता की।

    सोनम जब भी मायके आती है तो हमारे घर मेरी बीवी से मिलने जरूर आती है और मुझे मुस्करा के नमस्ते करती है।
    वो अपने ससुराल में बहुत खुश है और मैं भी उसे खुश देख कर खुश हूँ.

  • मेरी चूत स्टोरी बॉयफ्रेंड से सील तोड़ चुदाई की

    मेरी चूत स्टोरी में पढ़े कि मेरी चूत की पहली बार चुदाई कैसे हुई. मेरा पहला बॉयफ्रेंड मुझे अपने दोस्त के कमरे में ले गया. लेकिन वो साला फिसड्डी निकला तो मैंने नया यार बना लिया.

    हैलो फ्रेंडज़, मेरा नाम नीलम है. मैं मध्यप्रदेश की रहने वाली हूँ. मैं एक बहुत सेक्सी लड़की हूँ और मेरा साइज 28-30-32 है.

    यह चूत स्टोरी उन दिनों की है, जब मैं बीएससी फर्स्ट ईयर में थी. मैं एक लड़के को बहुत चाहती थी, वो लड़का भी मुझे पसंद करता था.

    एक दिन बात है, जब मैं कॉलेज जा रही थी. तब मैं बस स्टॉप पर खड़ी अपनी बस का इंतजार कर रही थी. तभी मेरा ब्वॉयफ्रेंड बाइक से आया और उसने मुझे साथ चलने को कहा. मैं भी बड़ी खुशी से उसके साथ बाइक पर बैठकर कॉलेज के लिए निकल पड़ी.

    उसने बाइक को लम्बे वाले रास्ते से ले जाने का कहा. मैं उसके साथ मस्ती से चिपकी बैठी थी. मैंने भी उससे कह दिया कि जानी जब तू मेरे साथ है, तो क्या डर है, तू जिधर भी ले चल मैं तेरे साथ राजी हूँ.

    वो हंस दिया और वोला- सोच ले मेरी जान … मैं तुझे जंगल के रास्ते से ले जाने वाला हूँ.
    मैंने उसकी छाती से चिपकते हुए कहा- हां ले चल … मुझे कोई चिंता नहीं है.
    उस समय तक हमने कभी सेक्स नहीं किया था लेकिन हम दोनों अपने पहले सेक्स के लिए उतावले हो रहे थे, चूत स्टोरी बनाने के लिए आतुर हो रहे थे.

    वो मुझे जंगल के रास्ते से ले आया. एक सुनसान जगह देख आकर उसने रास्ते से अलग हटते हुए एक कच्ची पगडंडी पर बाइक उतार दी.

    कुछ आगे ले जाकर उसने साइड में बाइक रोकी और मुझे किस करना शुरू कर दिया. मैं भी उसका साथ देने साथ देने लगी. उसने मेरी चूची पर हाथ लगाया और चूची पकड़ कर जोर जोर से दबाने लगा. मैं आज उसके साथ इस घने जंगल में मतवाली हुई जा रही थी. मैं चुदास से पागल हो रही थी और मेरी चूत में पानी निकलने लगा था.

    उसके बाद उसने मेरी पैन्ट का हुक खोला और पैन्टी सरका कर मेरी चूत में उंगली करने लगा. मैं मस्त होने लगी. अब मेरा भी मन हो रहा था कि आज मैं इसके लंड से यहीं पर चुद जाऊं. लेकिन रास्ते में कांटें होने की वजह से चुदाई नहीं हो सकती थी. मेरा मन बेक़ाबू हो रहा था, तो मैंने उसके पैंट के अन्दर से ही उसके लंड को पकड़ लिया और हिलाने लगी. मैं उसके लंड को आगे पीछे करने लगी. वो भी मेरी चूत में लगातार उंगली पेले जा रहा था.

    थोड़ी देर बाद मेरी चूत से पानी निकलने को हो गया … मैं अकड़ने लगी. तभी मैंने जोश में उसका लंड मरोड़ दिया.
    वो जोर से चीख़ उठा- आं आह … उई … क्या कर रही है … लंड उखाड़ेगी क्या.

    मेरी हंसी छूट गई और मैंने उसका लंड छोड़ दिया. लेकिन उसी वक्त उसने भी मेरी चूत के दाने को पकड़ कर खींच दिया. मुझे भी बहुत दर्द हुआ. मैंने भी उसको धक्का दे दिया. फिर हम दोनों हंस दिए और फिर से एक दूसरे से खेलने लगे. उसने मेरी चूत में फिर से उंगली करना शुरू कर दी. मैंने भी उसके लंड की मुठ मारना चालू कर दी. कुछ देर के बाद उसका पानी निकल गया. मेरी चूत भी झड़ गई.

    उसके बाद हम दोनों कुछ देर अपनी साँसें काबू में करते रहे. फिर हम वहां से निकल पड़े.

    मैंने झुझलाते हुए कहा- चड्डी के अन्दर जो छुपा रखा है न … उसको देखना है.
    उसने कहा- चड्डी के अन्दर क्या है?
    मैंने उसका लंड मसलते हुए कहा- इसको देखना है.
    उसने मेरी दूध दबाए और कहा- उसका कोई नाम भी तो होगा.

    मैं समझ गई कि ये मुझसे लंड कहने के लिए कह रहा है. मैंने कहा- हाँ उसका नाम है न.
    वो मेरी आंखों में आंखें डाल कर बोला- बताओ न क्या नाम है इसका?
    मैंने भी उसकी आंखों में आंखें डाल कर कहा- मुझे तुम्हारा लंड देखना है.
    उसने मुझे चूमा और कहा- अब ये मेरा नहीं है … ये तुम्हारा लंड है.
    मैंने फिर उसको चूमा और कहा- हां मुझे अपना लंड देखना है.

    उसने अपने सारे कपड़े निकाल दिए. उसका लंड हवा में झूल रहा था.
    वो बोला- लो, अपना लंड देख लो और इसे प्यार भी कर लो.

    मैं उसके लंड को हाथ में पकड़ कर हिलाने लगी. मैंने पहली बार लंड देखा था. मुझे बड़ा अजीब सा लग रहा था. मैं जोर जोर से लंड हिलाने लगी. कुछ ही समय में उसका रस मेरी हथेली में ही निकल गया.

    मैंने पूछा- ये कैसे निकल गया?
    वो बोला- यार नीलम, मेरा जल्दी निकल जाता है … ये पहले से बीमारी है. हम कल मिलते हैं और चुदाई करेंगे.
    ये बोल कर वो अपने कपड़े पहनने लगा.

    मुझे उस वक्त तक लंड के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी कि ये दुबारा भी खड़ा हो सकता है, यदि कुछ देर कोशिश की जाए.

    अपनी नाकाम चूत स्टोरी से मैं मायूस हो गई और हम दोनों वहां से निकल आए. इस वक्त मेरी तो चुत में आग लगी थी … मगर क्या कर सकती थी.

    उसके बाद 3 दिन तक मेरी उससे बात नहीं हुई. फिर उसने कॉल किया, तो वो मुझसे फिर से बोला कि मिलना है.

    मैंने हां तो बोल दी … लेकिन उससे नहीं मिली. उससे मेरा ब्रेकअप हो गया.

    कुछ दिन बीत जाने के बाद मेरे नम्बर पर एक अनजान नम्बर से कॉल आई. उसने अपना नाम हेमंत बताया. मुझे उसकी बातें अच्छी लगीं. फिर हम दोस्त बन गए.

    एक महीना बाद उसने मुझे प्रपोज किया और मैंने भी हां कर दी, क्योंकि मैं हेमंत के लंड को चूत में लेना चाहती थी. उसके बाद हेमंत ने मुझे मिलने के लिए एक होटल में बुलाया. मैंने भी हां कर दी और उससे मिलने होटल में चली गई. मैंने वहां जाकर हेमंत को देखा, तो वो बहुत ही हैंडसम था. उसकी हाइट 5 फ़ीट 6 इंच की थी. हालांकि उसकी बॉडी औसत ही थी.

    उसके बाद हम दोनों एक कमरे में चले गए. उधर कुछ देर बैठ कर बात हुई, फिर मैं कमरे के बाथरूम में जाकर फ्रेश हुई. उसने मेरे साथ कोई जल्दबाजी नहीं की. इससे मुझ पर उसका अच्छा प्रभाव पड़ा.

    इसके बाद हम दोनों खाना खाने बाहर आ गए. खाना खाने के बाद वापस होटल के कमरे में आने के बाद उसने मुझे किस किया. मैंने भी उसको किस किया. हम दोनों में गर्मी बढ़ने लगी. कुछ देर बाद उसने मेरे सारे कपड़े निकाल दिए. मुझे भी लगने लगा था कि अब मैं जल्दी से चुद जाऊं.

    उसने मेरे कपड़े निकालने के बाद अपने भी निकाल दिए. अब मैं सिर्फ पैन्टी में उसके सामने बेड पर चित लेटी थी. वो अपने लंड को मेरे सामने निकाल कर हाथ से आगे पीछे करने लगा. उसका लंड काफी सुन्दर दिख रहा था. एकदम लाल सुपारा अपनी चमक से मेरी आग को भड़का रहा था. उसके लंड का साइज यही कोई 6 इंच का था.

    मैं भी उसके लंड को देख कर मन ही मन खुश होने लगी थी. साथ ही मैं अपनी चूचियों के निप्पलों को अपनी उंगलियों में दबा कर मींजने लगी थी. मेरी आंखों में वासना का खुमार चढ़ने लगा था. पर अभी भी मैं कुछ सोच रही थी कि कहीं इसके लंड का काम तमाम न जाए. मुझे पिछले अनुभव से अभी भी उसके लंड की ताकत को देखना था.

    कुछ पल लौड़ा हिलाने के बाद वो मेरे पास आ गया. उसने मुझे किस किया और अपने होंठों में मेरी चुची को दबाकर चूसने लगा.
    उसकी चूची चुसाई से मेरे मुँह से कामुक आवाजें निकलने लगी- आंआह … उन्हह … उई … इस्स … धीरे … आह मैं मर गयी.

    उसने मेरी दोनों चूचियों को मन भर चूसा और मेरा हाथ अपने लंड पर रखवा दिया. मुझे उसका लंड बड़ा सख्त सा लगा. मैं उसके लंड को अपने हाथों से सहलाने लगी. उसने मेरी आंखों में अपनी आंखें डालीं और अपना लंड मेरे मुँह की तरफ बढ़ा दिया. मैंने खुद उसके लंड को पकड़ कर अपने मुँह की तरफ खींचा तो उसने मेरे मुँह में अपना लंड डाल दिया.

    मैं उसके मस्त मोटे लंड को चूसने लगी. कुछ देर तक लंड चुसाने के बाद उसने मेरी चूत में लंड लगा दिया. वो मेरी चूत की फांकों में लंड का सुपारा घिसने लगा. मुझे इस वक्त बेहद आग लग चुकी थी और उसका कड़क लंड मुझे इस समय अपनी चूत की खुराक दिखने लगा था.

    वो मेरी चूत में लंड डालने लगा. लेकिन चूत सील पैक थी और लंड मोटा था. इसलिए लंड चूत के अन्दर नहीं जा रहा था. वो बार बार इधर उधर फिसला जा रहा था. उसके लंड की बेबसी पर मैं हंस रही थी.

    वो बोला- हंस मत यार … मुझे गुस्सा आ रहा है.
    मैं बोली- तो निकाल दो अपना सारा गुस्सा मेरी चूत में … फट क्यों रही है?
    उसने कहा- ठीक है … देखता हूँ कि किसी फटती है.

    उसने मुझे फिर से पकड़ा. अपना लंड पकड़ कर चूत में लगाया और एक बार में ही पूरा लंड चूत में उतार दिया. मैं दर्द से तड़पने लगी और उसे मना करने लगी.

    मैंने कहने लगी- उम्म्ह … अहह … हय … ओह … मर गई … निकाल लो … मुझे नहीं चुदाई करवाना … आह मेरी फट रही है.
    लेकिन इस बार उसने मेरी एक न सुनी और लंड से चूत की चुदाई करता रहा. उसका लंड अन्दर तक पेवस्त हो गया था, जिससे मेरी सील टूट चुकी थी और मैं दर्द से आह भर रही थी.

    वो मस्त सांड सा मेरी चूत में पिला पड़ा रहा. कुछ समय बाद मेरा दर्द कम हुआ और मैं भी उसका साथ देने लगी. वो मेरी चूची दबाते हुए मेरी चूत के चीथड़े उड़ाने में लगा था. जल्दी ही मैं निकल गई. मगर वो लगा रहा.

    मेरे झड़ने के कोई दस मिनट बाद वो भी चरम पर आ गया. उसने मुझे कुछ कहा ही नहीं … बस सीधा मेरी चूत में अपना लावा निकाल कर मेरे ऊपर ढेर हो गया.
    हम दोनों स्खलित हो चुके थे और एक दूसरे की बांहों में पड़े थे.

    कुछ देर बाद मैं उठी और देखा तो बिस्तर पर खून ही खून के दाग लग गए थे. मैं घबराई, तो वो हंसने लगा.
    फिर उसने मुझे समझाया कि तेरी सील टूट गई है … अब तू मजे लेने के लिए खुल गई है.

    मुझे भी मजा आने लगा. मैंने सोचा कि अब खेल खत्म हो गया है. मगर कुछ देर बाद उसका लंड फिर से खड़ा हो गया. मैं हैरान थी कि इसका लंड तो फिर से खड़ा हो गया.
    मैंने उससे पूछा- अब ये कैसे खड़ा हो गया?

    उसकी समझ में नहीं आई, तो उसने मुझसे पूछा- ये खड़ा क्यों नहीं हो सकता?
    मैं चुप थी, उससे कह भी नहीं सकती थी कि पिछली बार क्या हुआ था.

    मैंने कुछ नहीं कहा … बस मुस्कुरा दी. उसने मुझे फिर से लंड चूसने के लिए कहा. मैंने लंड चूसा तो वो फिर से एकदम लोहा बन गया. मेरी समझ में आ गया कि लंड में दम हो, तो वो कितनी ही बार खड़ा हो सकता है.
    उस दिन हम दोनों ने चार बार चुदाई की. मैं आज पूरी तरह से तृप्त हो गई थी.

    इसके बाद उसने मुझे कई बार चोदा और हर बार उसने मुझे चोद कर मस्त कर दिया.

  • ससुर जी की जवानी

    कोमल ki शादी को दो साल हो चुके थे. बचपन से ही कोमल बहुत खूबसूरत थी. १६ साल की उम्र में ही जिस्म खिलने लग गया था. सोलहवां साल लगते लगते तो कोमल की जवानी पूरी तरह नीखर आई थी. ऐसा लगता ही नहीं था की अभी १०थ् क्लास में पर्ती है. School की स्किर्ट में उसकी भरी भरी जांघें लड़कों पे कहर ढाने लागी थी. School के लड़के skirt के नीचे सी झाँक कर कोमल की पैंटी की एक झलक पाने के लीये पागल रहते थे. कभी कभार जब बास्केटबाल खेलते हुए या कभी हवा के झोंके सी कोमल की स्किर्ट उठ जाती तो किस्मत वालों को उसकी पैंटी के दर्शन हो जाते. लड़के तो लड़के, School के Teacher भी कोमल की जवानी के असर से नहीं बचे थे. कोमल के भारी नितम्ब, पतली कमर और उभरती चूचियां देखके उनके सीने पे चहुरियन चल जाती. कोमल को भी अपनी जवानी पे नाज़ था. वो भी लोगों का दिल जलाने में कोई कसर नहीं छोड़ती थी.

    उनीस साल की होते ही कोमल की शादी हो गई. कोमल ने शादी तक अपने कुंवारे बदन को संभाल के रखा था. उसने सोच रखा था की उसका कुंवारा बदन ही उसके पति के लीये सुहाग रात को एक उन्मोल तोह्फहोगा. सुहाग रात को पति का मोटा लम्बा लंड देख कर कोमल के होश उर गए थे. उस मोटे लंड ने कोमल की कुंवारी चूत लहू लुहान कर दी थी. शादी के बाद कुछ din तो कोमल का पति उसे रोज़ चार पाँच बार चोद्ता था. कोमल भी एक लम्बा मोटा लौडा पा कर बहुत खुश थी. लेकीन धीरे धीरे चुदाई कम होने लगी और शादी के एक्साल बाद तो ये नौबत आ गई थी की महीने में मुश्किल से एक दो बार ही कोमल की चुदाई होती. हालांकी कोमल ने सुहाग रात को अपने पति को अपनी कुंवारी चूत का तोहफा दीया था, लेकीन वो बचपन से ही बहुत कामुक लड़की थी. बस कीसी तरह अपनी वासना को कंट्रोल करके, अपने School और कॉलेज के लड़कों और टीचर्स से शादी तक अपनी चूत को बचा के रखने में सफल हो गई थी. महीने में एक दो बार की चुदाई से

    कोमल की वासना की प्यास कैसे बुझती ? उसे तो एक दिन में कम से कम तीन चार बार चुदाई की ज़रूरत थी.
    आखिकार जब कोमल का पति जब तीन महीने के लीये टुर पे गया तो कोमल के देवर ने उसके अकेलेपन का फायदा उठा कर उसकी वासना को तृप्त किया. अब तो कोमल का देवर रामू कोमल को रोज़ चोद कर उसकी प्यास बुझाता था. एक दिन गाँव से टेलीग्राम आया की सास की तबियत कुछ ख़राब हो गई है. कोमल के ससुर एक बड़े ज़मींदार थे. गाँव में उनकी काफ़ी खेती थी. कोमल का पति राजेश काम के कारण नहीं जा सकता था और देवर रामू का कॉलेज था. कोमल को ही गाँव जाना पड़ा. वैसे भी वहां कोमल की ही ज़रूरत थी, जो सास और सुर दोनों का ख्याल कर सके और सास की जगह घर को संभाल सके.

    कोमल शादी के फौरन बाद अपने ससुराल गई थी. सास सौर की खूब सेवा करके कोमल ने उन्हें खुश कर दीया था. कोमल की खूबसूरती और भोलेपन से दोनों ही बहुत प्राभवित थे. कोमल की सास माया देवी तो उसकी प्रशंसा करते नहीं थकती थी. दोनों इतनी सुंदर, सुशील और मेहनती बहू से बहुत खुश थे. बात बात पे शर्मा जाने की अदा पे तो ससुर रामलाल फीदा थे. उन्होंने ख़ास कर कोमल को कम से कम दो महीने के लीये भेजने को कहा था. दो महीने सुन कर कोमल का कलेजा धक् रह गया था. दो महीने बिना चुदाई के रहना बहुत मुश्किल था. यहाँ तो पति की कमी उसका देवर रामू पूरी कर देता था. गाँव में दो महीने तक क्या होगा, ये सोच सोच कर कोमल परेशान थी लेकीन कोई चारा भी तो नहीं था. जाना तो था ही. राजेश ने कोमल को कानपूर में ट्रेन में बैठा दीया. अगले दिन सबह ट्रेन गोपालपुर गाँव पहुँच गई जो की कोमल की सौराल थी.

    कोमल ने चूरिदार पहन रखा था. कुरता कोमल के घुटनों से करीब आठ इंच ऊपर था और कुरते के दोनों साइड का कटाव कमर तक था. चूरिदार कोमल के नितम्ब तक तैघ्त था. चलते वक्त जब कुरते का पल्ला आगे पीछे होता या हवा के झोंके से उठ जाता तो तिघ्त चूरिदार में कसी कोमल की टांगें, मदहोश कर देने वाली मांसल जांघें और विशाल नितम्ब बहुत ही Sexy लगते. ट्रेन में सब मर्दों की नज़रें कोमल की टांगों पर लगी हुई थी. स्टेशन पर कोमल को लेने सास और ससुर दोनों आए हुए थे. कोमल अपने ससुर से परदा कत्र्ती थी इसलिए उसने चुन्नी का घूँघट अपने सिर पे ले लिया. अभी तक जो चुन्नी कोमल की छातीयों के उभार को छुपा रही थी, अब उसके घूँघट का काम करने लगी. कोमल की बड़ी बड़ी छातियन स्टेशन पे सबका ध्यान खींच रही थी. कोमल ने झुक के सास के पाँव छूए. जैसे ही कोमल पों छूने के लीये झुकी रामलाल को उसकी चूरिदार में कसी मांसल जांघें और नितम्ब नज़र आने लगे. रामलाल का दिल एक बार तो धड़क उठा. शादी के बाद से बहू किखूब्सूरती को चार चाँद लग गए थे.

    बदन भर गया था और्जवानी पूरी तरह नीखर आई थी. रामलाल को साफ दीख रहा था की बहू का तिघत चूरिदार और कुरता बरी मुश्किल से उसकी जवानी को समेटे हुए थे. सास से आशिर्वाद लेने के बाद कोमल ने सुर्जी के भी पैर छूए. रामलाल ने बहू को प्यार से गले लगा लीया. बहू के जवान बदन का स्पर्श पाते ही रामलाल कांप गया. कोमल की सास माया देवी बहू के आने से बहुत खुश थी. स्टेशन के बाहर नीकल कर उन्होंने तांगा कीया. पहले माया देवी टाँगे पे चढी. उसके बाद रामलाल ने बहू को चढ़ने दीया. रामलाल को मालूम था की जब बहू टाँगे पे चढ़ने के लीये टांग ऊपर करेगी तो उसे कुरते के कटाव में से बहू की पूरी टांग और नितम्ब भी देखने को मिल जाएंगे. वाही हुआ. जैसे ही कोमल ने टाँगे पे बैठने के लीये टांग ऊपर की राम्म्लाल को चूरिदार में कसी बहू की Sexy टांगों और भारी चूतडों की झलक मिल गई. यहाँ तक की रमलाल को चूरिदार के सफ़ेद महीन कपरे में से बहू की कच्छी (पैंटी) की भी झलक मिल गई. बहू ने गुलाबी रंग की कच्छी पहन रखी थी. अब तो रामलाल का लंड भी हरकत करने लगा. उसने बरी मुश्किल से अपने को संभाला. रामलाल को अपनी बहू के बरे में ऐसा सोचते हुए अपने ऊपर शरम आ रही थी. वो सोच रहा था की मैं कैसा इंसान हूँ जो अपनी ही बहू को ऐसी नज़रों से देख रहा हूँ. बहू तो बेटी के समान होती है. लेकीन क्या करता ? था तो मरद ही. घर पहुँच कर सास ससुर ने बहू की खूब खातिरदारी की.

    गाँव में आ कर अब कोमल को १५ दिन हो चुके थे. सास की तबियत ख़राब होने के कारण कोमल ने सारा घरका काम संभाल लीया था. उसने सास ससुर की खूब सेवा करके उन्हें खुश कर दीया था. गाँव में औरतें लहंगा चोली पहनती थी, इसलिए कोमल ने भी कभी कभी लहंगा चोली पहनना शुरू कर दीया. लहंगे चोली ने तो कोमल की जवानी पे चार चाँद लगा दिए. गोरी पतली कमर और उसके नीचे फैलते हुए भारी नितम्ब ने तो रामलाल का जीना हराम कर रखा था.
    पिताजी.” कोमल सोच रही थी की कीसी तरह ये धरती फत्जाए और मैं उसमे समा जाऊं.” बेटी इसमे शर्माने की क्या बात है ?. तुम्हारी उम्र में लड़किओं कि कछी अक्सर बहुत जल्दी छोटी हो जाती है. गाँव में तो और्तें कच्च्ही पहनती नहीं हैं. अगर छोटी हो गई है तो सासू माँ सेकः देना शहर जा कर और खरीद एंगी. हम गए तो हम ले आएँगे.लो ये सूख गई है, रख लो.” ये कह कर रामलाल ने कोमल को उस्कि पंटी और ब्रा दे दी. इस घटना के बाद रामलाल ने कोमल के साथ और्खुल कर बातें करना शुरू कर दीया था एक दिन माया देवी को शहर सत्संग में जन था. रामलाल उनको ले कर शहर जाने वाला था.

    दोनों घर से सबह स्टेशन की और चल पड़े.रास्ते में रामलाल के जान पहचान का लड़का कार से शहर जाता हामिल गया. रामलाल ने कहा की Aunty को भी साथ ले जाओ. लड़का मंगाया और माया देवी उसके साथ कार में शहर चली गई. रामलाल घर्वापस आ गया. दरवाज़ा उंदर से बूंद था. बाथरूम से पानी गिरने किअवाज़ आ रही थी. शायद बहू नहा रही थी. कोमल तो समझ रहिथि की सास ससुर शाम तक ही वापस लौटेंगे. रामलाल के कमरे का एक्दार्वाज़ा गली में भी खुलता था. रामलाल कमरे का टला खोल के अप्नेकमरे में आ गया. उधर कोमल बेखबर थी. वो तो समझ रही थीकि घर में कोई नहीं है. नहा कर कोमल सिर्फ़ पेटीकोट और ब्लाउज में ही बाथरूम से बाहर नीकल आई. उसका बदन अब भी गीला था. बाल भीगे हुए थे. कोमल अपनी पैंटी और ब्रा जो अभी उसने धोई थी सुखाने के लीये आँगन में आ गई. रामलाल अपने कमरे के परदे के पीछे से सारा नज़ारा देख रहा था. बहू को पेटीकोट और ब्लाउज में देख कर रामलाल को पसीना आ गया. क्या बाला की खूबसूरत थी.



  • ससुर जी का घोड़े जेसा लंड

    दोस्तो मेरी उमर 26 साल की है मेरी शादी हो चुकी है मेरे पति एक मार्केटिंग कंपनी मे जॉब करते है इस लिए वो ज़्यादातर घर से बाहर ही रहते है. अभी मेरी शादी को सिर्फ़ 3 साल हुए है और ये कहानी दोस्तो आज से करीब 2 साल पहले की है. मेरे घर मे मेरे सास ससुर और मेरी एक 18 साल की ननद रहती है. बेस्ट इंडियन सेक्स स्टोरीस
    मेरी शादी को 3 साल हो चुके है और अभीतक मैं 25-30 बार ही सेक्स किया है क्योकि मेरे हज़्बेंड के पास इतना टाइम नही होता. इसलिए मैं और मेरी चूत चुदाई के लिए तड़पति रहती है. एक दिन की बात है मैं अपने रूम मे बैठकर .वी पर कुछ देख रही थी तभी मुझे प्यास लगी और मैं किचन मे से पानी पीने के लिए जाने लगी. जब मैं किचन मे जा रही थी तभी मुझे अपने ननंद के रूम मे से कुछ आवाज़े सुनी, मैने उसके रूम की विंडो मे से चुपके से देखा तो मैं पूरी तरह से हैरान रह गई.
    मैने देखा की मेरी ननंद नंगी नीचे ज़मीन पर पूरी नंगी लेटी हुई है और हमारा कुत्ता उसकी चूत को चाट रहा है और वो कुत्ते के लंड को अपने हाथ मे लेकर ज़ोर ज़ोर से उपर नीचे कर रही है और कुछ ही देर बाद वो कुत्ते के सामने कुत्ति बन गई और कुत्ता उसके उपर पीछे से चढ़ गया और ज़ोर ज़ोर से उसे चोदने लग गया. मुझसे ये सब देखा ना गया इसलिए मैं वाहा से हट गई.
    करीब 15 मिनिट बाद मेरी ननंद के रूम मे से कुत्ता बाहर आया और उसके पीछे से मेरी ननंद भी आ गई. मैने उसे सॉफ सॉफ बता दिया की मैने उसे ये सब करते हुए देख लिया है. वो मेरे सामने रोने लग गई पर मैने उसे समझाते हुए कहा तुम कोई अपना बॉयफ्रेंड बना लो ऐसे जानवर से ऐसे काम करवाना ठीक नही है.
    तब मेरी ननंद ने कहा – भाभी मैं बॉयफ्रेंड तो बना लून पर आदमी का तो कुत्ते से भी ज़्यादा बड़ा होता है इसलिए मुझे डर लगता है.
    मैं – नही इतना भी बड़ा नही होता जितना तुम समझ रही हो.
    मेरी ननद – नही भाभी मैने देखा है इस लिए मैं कह रही हूँ.
    मैं – अछा किस का देख लिया है तूने, कही हॉर्स का तो नही देख लिया.
    मेरी ननंद – नही भाभी मैने डॅड का देखा है उनका लंड तो हॉर्स से बड़ा है कसम से इतना लंबा और मोटा लंड तो मैने आज तक नही देखा.
    ननंद के मूह से ऐसी बातें सुनकर मेरी चूत मे खुज़ली होनी शुरू हो गई. मुझे तो पता ही नही था की मेरे घर मे जबरदस्त चुदाई का समान है. अब मुझे किसी भी हालत मे ससुर जी का लंड देखना था बस मुझे एक आछे से मोके की तलाश थी.
    और मुझे जल्दी ही एक . मिल गया. उस दिन मेरे सारे घरवाले किसी शादी मे 2 दिन के लिए चले गये. घर मे मैं और मेरे ससुर थे. जब रात हुई तो मैने ससुर जी के दूध मे नींद की मेडिसिन घोल कर दे दी. दूध पीते ही उन्हे नींद आनी शुरू हो गई. पर फिर भी मैं करीब 30 मिनिट बाद ही उनके रूम मे गई. बेस्ट इंडियन सेक्स स्टोरीस
    मैने अंदर जाते ही ससुर जी को बहोत हिलाया जब वो नही उठे तो मैं समझ गई अब रास्ता सॉफ है, मैं जल्दी से उनकी धोती साइड मे करी और अंडरवेर का नाडा खोल कर उनका लंड बाहर निकाल लिया. उनका लंड देख कर तो मेरी आँखों मे एक अलग सी चमक आ गई. मेरी ननंद सच मे सच कह रही थी, मेरे ससुर का लंड सच मे काफ़ी बड़ा और मोटा था वो कमाल की बात तो ये थी की अभी लंड बैठा हुआ था तो भी वो कितना ख़तरनाक लग रहा था.
    मैने अपने दोनो हाथो से लंड को पकड़ कर उपर नीचे करने लग गई और पता नही कब खुद ही मेरे होंठ लंड के पास आ गये और उसे चूमने लग गये. अब मैं लंड को अपने मूह मे लेकर चूसने लग गई और नीचे से उपर तक लंड को अपनी ज़ुबान से चाटने लग गई. तभी अचानक लंड मे एक करेंट सा लगा और लंड खड़ा होना शुरू हो गया. देखते ही देखते लॅंड 5 इंच से 14 इंच का हो गया
    मेरी आँखें खुली की खुली रह गई और मेरी खुशी का कोई ठिकाना नही था. सच मे लंड काफ़ी शानदार लग रहा था. अब तो मेरी ज़ुबान लंड को चाटने मे लगी हुई थी. लंड को देखकर अब मेरी चूत मे खुज़ली होनी शुरू हो गई थी. मैं उठी और अपनी सारी और पेटिकोट उतार सीधा लंड के उपर आ गई और लंड को अपने हाथ मे पकड़ अपनी चूत पर रगड़ने लग गई. मुझे बहोत मज़ा आ रहा था. मैं इतने बड़े लंड को चूत मे कैसे लूँगी इसके बारे मे सोच रही थी और लंड को अपनी चूत पर लगा कर नाप रही थी. मैने देखा की लंड अगर चूत मे जाता है तो वो मेरे पेट तक आता है.
    मुझे अब डर सा लगने लग गया इस लिए अब मैने जाने का फ़ैसला किया. मैं जैसे ही लंड के उपर से उठने लगी तभी मेरी कमर को किसी ने ज़ोर से पकड़ लिया. मैं एकदम बहोत डर गई, मैने देखा तो ससुर जी जाग चुके थे और उन्होने ही मुझे पकड़ा हुआ था.
    ससुर – बहू अब लंड को नाप तो लिया है तुमने अब . अपनी चूत मे भी ले लो ना तुम्हे बहोत मज़ा आएगा.
    मैं उन्हे अपने को छुड़वाने की कोशिश करी पर उन्होने एक दम मुझे बेड पर दे मारा और मेरे उपर आ कर बहोत बुरी तरह मेरे बूब्स को मसलने लग गये. मेरे आँखे बंद होनी शुरू हो गई क्योकि अब मैं मदहोश सी होनी शुरू हो गई थी. तभी ससुर जी ने मेरा ब्लाउस पकड़ा और खींच कर फाड़ दिया और मेरे नंगे बूब्स को एक एक करके अपने मूह मे लेकर चूसने लग गये.
    मुझे बहोत मज़ा आने लग गया मैं पागल सी होने लगी थी क्योकि आज तक मेरे बूब्स मेरे पति ने भी नही चूसे थे. ससुर जी अब मेरी चूत मे उंगलिया कर रहे थे. मेरी चूत गीली होनी शुरू हो गई थी. मुझे सच मे बहोत मज़ा आ रहा था. तभी ससुर जी नीचे गये और मेरी चूत को अपनी ज़ुबान से चाटने लग गये. जैसे ही उनकी ज़ुबान मेरी चूत पर लगी वैसेही मेरे पूरे जिस्म मे करेंट सा दौड़ने लग गया. अब मेरे एक हाथ मे उनका लंड था जिसे मैं ज़ोर ज़ोर से उपर नीचे कर रही थी.
    अचानक ही ससुर जी ने मेरे हात से लंड ले लिया और खुद ही अपना लंड मेरी चूत के उपर रगड़ने लग गये मेरी चूत के दाने के उपर लंड पूरी स्पीड मे उपर नीचे हो रहा था. मैं पूरी तरह से पागल हो चुकी थी क्योकि आज तक ऐसा मज़ा कभी नही मिला था. करीब 2 मिनिट बाद ही मेरी चूत ने काफ़ी सारा पानी बाहर निकाल दिया.
    ससुर जी – बहू ये क्या है अभी तो मेरा लंड तेरी चूत के अंदर गया भी नही और तेरी चूत ने पहले ही जवाब दे दिया. बेस्ट इंडियन सेक्स स्टोरीस
    उनके मूह से ऐसी बातें सुनकर मैं शर्मा गई और मैं धीरे से बोली – ससुर जी अब प्लीज़ आप मेरी चूत को आछे से चोद दे मुझे बहोत परेशान करती है.
    ये सुनते ही ससुर जी ने मेरे होंठो को चूसा और नीचे जाकर मेरी चूत को फिरसे चाटने लग गये. अब की बार वो अपनी ज़ुबान मेरी चूत के दाने पर घुमा रहे थे जिससे मेरे मूह से अब आहह आहह की मस्ती से भरी आवाज़े निकल रही थी.
    ससुर जी अब अपनी दो उंगलिया मेरी चूत मे उतार दी और ज़ोर ज़ोर से उपर नीचे कर रहे थे और साथ मे ही उपर से मेरी चूत के दाने को चाट रहे थे. एक साथ दो हमले मेरी चूत सहन ना कर पाई और करीब एक मिनिट मे ही मेरी चूत ने फिर अपना सारा पानी निकल दिया.
    मैं – ससुर जी अब क्यो आप मुझे तड़पा रहे हो प्लीज़ जल्दी से अब आप अपना लंड मेरी चूत मे डालो और मेरी प्यास को भुजा दो प्लीज़.
    मैने उनके लंड को हाथ मे पकड़ा तो मैने देखा की ये तो इतना मोटा है की ये मेरे हाथ मे नही आ रहा है ये तो मेरी चूत के चितड़े चितड़े कर देगा. मेरे चेहरे पर इस परेशानी के भाव देख कर ससुर जी बोले – मेरी बहू तू फिकर ना कर आज इस लंड को अपनी चूत मे ले फिर, आज के बाद तू किसी दूसरे के लंड को देखेंगी भी नही.
    मैं – पर ससुर जी आज आप मेरी चूत की आछे से चुदाइ करना ये साली मुझे बहोत तंग करती है.
    ये सुनते ही ससुर जीने मेरी तरफ देखकर हल्की सी स्माइल करी और अपना लंड मेरे मूह के पास कर दिया. मैं समझ गई की अब ये क्या चाहते है मैने झट से अपना मूह खोल दिया और ज़ोर ज़ोर से लंड को आछे से चूसने लगी.
    ससुर जी तभी मेरा सिर पकड़ लिया और ज़ोर ज़ोर से मेरे को अपने लंड से चोदने लग गये. अब उनका लंड मेरे गले के अंदर जा रहा था जिससे मुझे सांस लेने मे बहोत दिक्कत आ रही थी पर वो रुके नही और करीब 5 मिनिट तक मेरे मूह ऐसे ही बे- रहमी से चोदते रहे.
    अब उन्होने अपना लंड मेरे मूह से निकाला और मेरी चूत पर रखकर और थोड़ासा ज़ोर लगा कर अपने लंड का आगे वाला हिस्सा पहले मेरी चूत मे उतारा और बाद मे फिर एक ज़ोर से धक्का लगा कर करीब 4-5 इंच तक लंड मेरी चूत मे उतार दिया. बेस्ट इंडियन सेक्स स्टोरीस
    लंड अंदर जाते ही मेरी जान निकल गई मैं उनके नीचे एक मछली की तरह तड़प रही थी. अब ससुर जी बहोत पुराने खिलाड़ी थे और धीरे धीरे मेरी चूत मे अपना लंड अंदर बाहर करते रहे. अब उन्होने मेरी गॅंड के नीचे मे पिल्लो रखा जिससे अब मेरी चूत उपर उठ गई और अब तो ससुर जी ने अपना लंड मेरी चूत मे एक दम डाला और उपर नीचे करने लग गये. अब ससुर जी मेरे उपर आ गये और ज़ोर ज़ोर से मेरी चूत को चोदने लग गये.
    ससुर जी ने अब अपना बाहर निकाला और एक जोरदार धक्के से अपना पूरा 14 इंच का लंड एक ही बार मे मेरी चूत मे उतार दिया. अब मैने अपनी दोनो टाँगे उपर उठा ली और अपनी गॅंड उठा उठा कर अपने ससुर जी का लंड अपनी चूत मे लेने लग गई. ससुर जीने मेरी दोनो टाँगो को अपने मोढ़े पर रख लिया और ज़ोर ज़ोर से मुझे चोदने लग गये. मुझे बहोत मज़ा आ रहा था मैं अपनी दोनो आँखें बंद कर के ससुर जी के हर धक्के का मज़ा ले रही थी.
    करीब 20 मिनिट की इस घमासान चुदाई के बाद अचानक मेरा पूरा जिस्म अकड़ गया मेरी चूत ने ससुर जी के लंड पर अपने पानी की बारिश कर दी और 2 मिनिट बाद ही ससुर जी ने भी अपना सारा पानी मेरी चूत मे ही निकाल दिया. मुझे बहोत ज़ोर से पेशाब आ रहा था पर मुझसे उठा तक नही जा रहा था इस लिए ससुर जी मुझे अपनी गोद मे उठाकर बाथरूम मे ले गये और मैने उनके सामने बाथरूम किया क्योकि उन्होने मेरी चूत मे से निकलते पेशाब को देखना था.
    मुझे अपना फीडबॅक देने के लिए कृपया कहानी को ‘लाइक’ ज़रूर करे, ताकि कहानियों का ये दौर देसीकाहानी पर आपके लिए यूँही चलता रहे.
    मेरी चूत से निकलते गरम गरम पीले पीले पेशाब को देखकर ससुर जी फिर से गरम हो गये और अपना लंड मेरे मूह मे डाल कर फिर से मेरे मूह को चोदने लग गये. फिर ससुर जीने मुझे टाय्लेट की सीट पर बिताया और मेरी दोनो टाँगे उपर कर के मेरी चूत और गॅंड दोनो मारी. आज मेरी चूत और गॅंड दोनो आछे से फट चुकी थी और मेरी बहोत ज़्यादा बुरी हालत हो चुकी थी. बेस्ट इंडियन सेक्स स्टोरीस
    उस दिन से मैं रोज रात को अपने ससुर जी से चुदति हूँ, एक दिन मेरी ननंद ने मुझे और अपने डॅड से सेक्स करते देख लिया और फिर मैने अपने साथ उसे भी ले लिया. अब हम तीनो इस सेक्स लाइफ के पूरे मज़े लेते है.

  • ससुर जी की जवानी 2



    बहुत कसा हुआ पेटीकोट पहनती थी. बदन गीला होने के कारण पेटीकोट उसके चूतडों से चिपका जा रहा था. बहू के फैले हुए चूतडों पेटीकोट में बरी मुश्किल से समा रहे थे. बहू का मादक रूप मनो उसके ब्लाउज और पेटीकोट में से बाहर निकलने की कोशिश कर रहा था. उफ क्या गद्राया हुआ बदन था. बहू ने अपनी धुली हुई कच्छी और ब्रा डोरी पर सूखने दाल दी. अचानक वो कुछ उठाने के लीये झुकी तो पेटीकोट उसके विशाल चूतडों पर कास गया. पेटीकोट के सफ़ेद कपरे में से रामलाल को साफ दीख रहा था की आज बहू ने काले रंग की कच्छी पहन रखी है. उफ बहू के सिर्फ़ बीस प्रतिशत चूतडों ही कच्छी में थे बाकी तो बाहर गिर रहे थे. जब बहू सीधी हुई तो उसकी कच्छी और पेटीकोट उसके विशाल चूतडों के बीच में phans gaye. अब तो रामलाल का लौडा फन्फनाने लगा. उसका मन कर रहा था की वो जा कर बहू के चूतडों की दरार में फँसी पेटीकोट और कच्छी को खींच के निकाल ले.

    बहू ने मानो रामलाल के दिल की आवाज़ सुन ली. उसने अपनी चूतडों की दरार में फँसे पेटीकोट को कींच के बाहर निकाला लीया. बहू आँगन में खरी थी इसलिए पेटीकोट में से उसकी मांसल टांगें भी नज़र आ रही थी. रामलाल के लंड में इतना तनाव सीता को चोदते वक्त भी नहीं हुआ था. बहू के Sexy चूतडों को देख के रामलाल सोचने लगा की इसकी गांड मार के तो आदमी धन्य हो जाए. रामलाल ने आज तक कीसी औरत की गांड नहीं मारी थी. असलियत तो ये थी की रामलाल का गधे जैसा लौडा देख कर कोई औरत गांड मरवाने के लीये राज़ी ही नहीं थी. माया देवी तो चूत ही बरी मुश्किल से देती थी गांड देना तो बहुत दूर की बात थी. एक दिन कोमल ने खेतों में जाने की इच्छा प्रकट की. उसने सासू माँ से कहा, ” मम्मी जी मैं खेतों में जाना चाहती हूँ, अगर आप इजाज़त देन तो आपके खेत और फसल देख औन. शहर में तो ये देखने को मिलता नहीं है.”

    ” अरे बेटी इसमें इजाज़त की क्या बात है? तुम्हारे ही खेत हैं जब चाहो चली जाओ. मैं अभी तुम्हारे ससुर जी से कहती हूँ तुम्हें खेत दिखाने ले जाएँ.”
    ” नहीं नहीं मम्मी जी आप पिताजी को क्यों परेशान करती हैं मैं अकेली ही चली जाउंगी.”
    ” इसमे परेशान करने की क्या बात है? कई दिन से ये भी खेत नहीं गए हैं तुझे भी साथ ले जाएंगे. जाओ टब तैयार हो जाओ. और हाँ लहंगा चोली पहन लेना, खेतों में जाने के लीये वही ठीक रहता है.” कोमल तैयार होने गई. माया देवी ने रामलाल को कहा,
    ” अजी सुनते हो, आज बहू को खेत दिखा लाओ. कह रही थी मैं अकेली ही चली जाती हूँ. मैंने ही उसको रोका और कहा ससुरजी तुझे ले जाएंगे.”

    ” ठीक है मैं ले जाऊंगा, लेकीन अकेली भी चली जाती तो क्या हो जाता ? गाँव में किस बात का डर?””
    ” कैसी बातें करते हो जी? जवान बहू को अकेले भेजना चाहते हो. अभी नादाँ है. अपनी जवानी तो उससे संभाली नहीं जाती, अपने आप को क्या संभालेगी? ” इतने में कोमल आ गई. लहंगा चोली में बला की खूबसूरत लग रही थी.
    ” चलिए पिताजी मैं टायर हूँ.”

    ” चलो बहू हम भी टायर हैं.” ससुर और बहू दोनों खेत की और नीकल परे. कोमल आगे आगे चल रही थी और रामलाल उसके पीछे. कोमल ने घूंघट निकाल रखा था. रामलाल बहू की मस्तानी चाल देख कर पागल हुआ जा रहा था. बहू की पतली गोरी कमर बल खा रही थी. उसके नीचे फैले हुए मोटे मोटे चूतडों चलते वक्त ऊपर नीचे हो रहे थे. लहंगा घुटनों से थोड़ा ही नीचे था. बहू की गोरी गोरी टांगें और चूतडों तक लटकते लंबे घने काले बाल रामलाल की दिल की धड़कन बारह रहे थे. ऐसा नज़ारा तो रामलाल को ज़िंदगी में पहले कभी नसीब नहीं हुआ. रामलाल की नज़रें बहू के मटकते हुए मोटे मोटे चूतडों और पतली बल खाती कमर पर ही टिकी हुई थी.

    Un जान लेवा चूतडों को मटकते देख कर रामलाल की आंखों के सामने उस दिन का नजारा घूम गया जिस दिन उसने बहू के चूतडों के बीच उसके पेटीकोट और कच्छी को फँसे हुए देखा था. रामलाल का लौडा खड़ा होने लगा. कोमल घूंघट निकाले आगे आगे चली जा रही थी. वो अच्छी तरह जानती थी की ससुर जी की आँखें उसके मटकते हुए नितम्ब पे लगी हुई हैं. रास्ता संकरा हो गया था और अब वो दोनों एक पूग डंडी पे चल रहे थे. अचानक साइड की पूग डंडी से दो गधे कोमल के सामने आ गए. रास्ता इतना कम चौरा था की साइड से आगे निकलना भी मुश्किल था. मजबूरन कोमल को गधों के पीछे पीछे चलना पड़ा. अचानक कोमल का ध्यान पीछे वाले गधे पे गया.

    ” अरे पिताजी देखिये ये कैसा गधा है ? इसकी तो पाँच टांगें हैं.” कोमल आगे चल रहे गधे की और इशारा करते हुए बोली.
    ” बेटी, टब तो बहुत भोली हो, ज़रा ध्यान से देखो इसकी पाँच टांगें नहीं हैं.” कोमल ने फीर ध्यान से देखा तो उसका कलेजा दहक सा रह गया. गधे की पाँच टांगें नहीं थी, वो तो गधे का लंड था. बाप रे क्या लम्बा लंड था ! ऐसा लग रहा था जैसे उसकी टांग हो. कोमल ने ये भी नोटिस कीया की आगे वाला गधा, गधा नहीं बल्कि गधी थी क्योंकि उसका लंड नहीं था. गधे का लंड खरा हुआ था. कोमल समझ गई की गधा क्या करने वाला था. अब तो कोमल के पसीने चूत गए. पीछे पीछे ससुर जी चल रहे थे. कोमल अपने आप को कोसने लगी की ससुर जी से क्या सवाल पूछ लीया. कोमल का शरम के मरे बुरा हाल था. रामलाल को अच्छा मोका मिल गया था. उसने फीर से कहा,

    ” बोलो, बहू हैं क्या इसकी पाँच टांगें ?” कोमल का मुंह शरम से लाल हो गया, और हक्लाती हुई बोली,
    ” जज..जी चार ही हैं.”
    ” तो वो पांचवी चीज़ क्या है बहु?”
    ” ज्ज्ज…जी वो तो ……जी हमें नहीं पटा.”
    „ पहले कभी देखा नहीं बेटी ?” रामलाल मेज़ लेता हुआ बोला.
    ” नहीं पिताजी.” कोमल शर्माते हुए बोली.
    ” मर्दों की टांगों के बीच में जो होता है वो तो देखा है न?”
    ” जी..” अब तो कोमल का मुंह लाल हो गया.

    अरे बहू जो चीज़ मर्दों के टांगों के बीच में होती है ये वाही चीज़ तो है.” रामलाल कोमल के साथ इस तरह की बातें कर ही रहा था की वाही हुआ जो कोमल मन ही मन मन रही थी की ना हो. गधा अचानक गधी पे चढ़ गया और उसने अपना तीन फ़ुट लम्बा लंड गधी की चूत में पेल दीया. गधा वहीं खरा हो कर गधी के उंदर अपना लंड पेलने लगा. इतना लम्बा लंड गधी की चूत में जाता देख कोमल हार्बर कर रुक गई और उसके मुंह से चीख नीकल गई,
    ” ऊओईइ मा….”
    ” क्या हुआ बहू ?”
    ” ज्ज्ज..जी कुछ नहीं.” कोमल घबराते हुए बोली.
    ” लगता है हमारी बहू डर गई.” रामलाल मौके का पूरा फायदा उठता हुआ दरी हुई कोमल का साहस बर्हाने के बहाने उसकी पीठ पे हाथ रखता हुआ बोला.
    ” जी पिताजी.”
    ” क्यों डरने की क्या बात है ?”
    वैसे ही.”

    ” वैसे ही क्या मतलब ? कोई तो बात ज़रूर है. पहली बार देख रही हो न?” रामलाल कोमल की पीठ सहलाता हुआ बोला.
    ” जी.” कोमल शर्माते हुए बोली.
    ” अरे इसमें शर्माने की क्या बात है बहु. जो राकेश तुम्हारे साथ हेर रात करता है वाही ये गधा भी गधी के साथ कर रहा है.”
    ” लेकीन इसका तो इतना…….” कोमल के मुंह से अनायास ही नीकल गया और फीर वो पच्छ्तायी..
    ” बहुत बड़ा है बहु?” रामलाल कोमल की बात पूरी करता हुआ बोला.
    अब रामलाल का हाथ फिसल कर कोमल के नितम्ब पे आ गया था.
    ” ज्ज्जी….” कोमल सिर नीचे किए हुए बोली.
    ” ओ ! तो इसका इतना बार देख के डर गई ? कुछ मर्दों का भी गधे जैसा ही होता है बहु. इसमें डरने की क्या बात है ?. जब औरत बरे से बार झेल लेती है, फीर ये तो गधी है.”
    कोमल का चेहरा शरम से लाल हो गया था. वो बोली,
    ” चलिए पिताजी वापस चलते हैं, हमें बहुत शरम आ रही है.”

    ” क्यों बहू वापस जाने की क्या बात है? तुम तो बहुत शर्माती हो. बस दो मिनट में इस गधे का काम खत्म हो जाएगा फीर खेत में चैलेन्ज.” बातों बातों में रामलाल एक दो बार कोमल के नितम्ब पे हाथ भी फेर चुक्का था. रामलाल का लंड कोमल के मुलायम नितम्ब पर हाथ फेर के खड़ा होने लगा था. वो कोमल की पैंटी भी फील कर रहा था. कोमल क्या करती ? घूंघट में से गधे को अपना लंड गधी के उंदर पेलते हुए देखती रही. इतना लम्बा लंड गधी के उंदर बाहर जाता देख उसकी चूत पे भी चीतियन रेंगने लगी थी.

    कोमल को रामलाल का हाथ अपने नितम्ब पर महसूस हो रहा था. इतनी भोली तो थी नहीं. दुनियादारी अच्छी तरह से समझती थी. वो अच्छी तरह समझ रही थी की ससुर जी मौके का फायदा उठा के सहानुभूति जताने का बहाना करके उसकी पीठ और नितम्ब पे हाथ फेर रहे हैं. इतने में गधा झर गया और उसने अपना तीन फ़ुट लम्बा लंड बाहर निकाल लीया. गधे के लंड में से अब भी वीर्य गिर रहा था. ससुर जी ने दोनों गधों को रास्ते से हटाया और कोमल के चूतडों पे हथेली रख कर उसे आगे की और हलके से धक्का देता हुआ बोला,
    ” चलो बहू अब हम खेत चलत हैं.”
    ” चलिए पिताजी.”
    ” बहू मालूम है तुम्हारी सासू माँ भी मुझे गधा बोलती है.”
    ” हा.. ! क्यों ? आप तो इतने अच्छे हैं.”

    ” बहू तुम तो बहुत भोली हो. वो तो कीसी और वझे से मुझे गधा बोलती है.” अचानक कोमल रामलाल का मतलब समझ गई. शायद ससुर जी का लंड भी गधे के लंड के माफिक लम्बा था तुभी सासू माँ ससुर जी को गधा बोलती थी. इतनी सी बात समझ नहीं आई ये सोच कर कोमल अपने आप को मन ही मन कोसने लगी. कोमल सोच रही थी की ससुर जी उससे कुछ ज़्यादा ही खुल कर बातें करने लगे हैं. इस तरह की बातें बहू और ससुर के बीच तो नहीं होती हैं. बात बात में प्यार जताने के लीये उसकी पीठ और नितम्ब पे भी हाथ फेर देते थे.थोरी ही देर में दोनों खेत में पहुँच गए. रामलाल ने कोमल को सारा खेत दिखाया और खेत में काम करने वाली औरतों से भी मिलवाया. कोमल थक गई थी इसलिए रामलाल ने उसे एक आम के पैर के नीचे बैठा दीया.

    ” बहू तुम यहाँ आराम करो मैं कीसी औरत को तुम्हारे पास भेजता हूँ. मुझे थोड़ा पम्प हौस में काम है.”
    ” ठीक है पिताजी मैं यहाँ बैठ जाती हूँ.”
    रामलाल पम्प हौस में चला गया

  • बूढ़े ससुर का 11 इंच का लंड

    मेरी शादी हो चुकी हे. मेरे पति एक मार्केटिंग कम्पनी में जॉब करते हे. इसलिए वो अक्सर घर से बहार ही रहते हे. अभी मेरी शादी को सिर्फ 3 साल हुए हे और ये कहानी दोस्तों आज से करीब 2 साल पहले की हे. मेरे घर में मेरे सास, ससुर और मेरी एक 18 साल की ननंद रहती हे. मेरी शादी को 3 साल चुके हे लेकिन मैंने अभी तक अपने पति के साथ 30-40 बार ही सेक्स किया हे. क्यूंकि मेरे हसबंड पर इतना टाइम ही नहीं होता. इसलिए मैं और मेरी चूत चुदाई के लिए लिए तड़पती रहती हे. एक दिन की बार हे मैं अपने रूम में बैठ कर टीवी देख रही थी. तभी मुझे प्यास लगी और मैं किचन में से पानी लेने के लिए जाने लगी. जब मैं किचन में जा रही रही तभी मुझे अपनी ननंद की रूम से कुछ आवाजे आई. मैंने उसके रूम की विंडो में से चुपके से देखा तो मैं पूरी तरह से हैरान हो गई.
    मैंने देखा की मेरी ननंद नंगी हो के लेटी हुई थी. मुझसे ये सब देखा ना गया इसलिए मैं वहां से हट गई. मैंने उसे साफ़ साफ़ बता दिया की मैंने उसे ये सब करते हुए देख लिया हे. वो मेरे सामने रोने लगी. मैंने उसे कहा देखो मैं किसी को कुछ नहीं कहूँगी लेकिन तुम ऐसे सेक्स करो वो गलत हे. इस से अच्छा तो तुम किसी लड़के के साथ अफेयर कर लो.
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    मेरी ननंद बोली: भाभी मैं बॉयफ्रेंड तो रख लूँ लेकिन आदमी का तो बड़ा होता हे इसलिए मुझे डर लगता हे.
    मैं: अरे नहीं इतना बड़ा नहीं होता हे जितना तुम समझ रही हो.
    ननंद: नहीं भाभी मैंने देखा हे इसलिए मैं कह रही हूँ.
    मैं: अच्छा किस का देख लिया हे तूने, कही किसी घोड़े का लंड तो नहीं देख लिया.
    ननंद: नहीं भाभी मैंने डेडी जी का देखा हे. उनका लंड तो घोड़े से भी बड़ा हे. कसम से इतना लम्बा और मोटा लंड तो मैंने आजतक नहीं देखा हे.
    ननंद के मुहं से ऐसी बातें सुनकर मेरी चूत में खुजली होने लगी. मुझे तो पता नहीं था की मेरे घर में ही जबरदस्त चुदाई का सामान हे. अब मैं भी मन ही मन में जैसे गाँठ बाँध के बैठी थी की मौका मिले तो ससुर जी का लंड देखना जरुर हे! और मुझे जल्दी ही एक मौका मिल भी गया. उस दिन मेरे सारे घरवाले किसी शादी में 2 दिन के लिए चले गए. घर में मैं और मेरे ससुर ही थे. जब रात हुई तो मैंने ससुर जी का दूध देने के लिए गई. मैंने दूध के अन्दर निंद की गोली डाल दी थी. दूध पिने के कुछ मिनिट में ही उनको नींद आनी शरु हो गई. पर फिर भी मैं कुछ आधे घंटे तक वेट करती रही. और उसके बाद ही मैं उन्के रूम में गई.
    मैंने अन्दर जाते ही ससुर जी को बहुत हिलाया. पर जब वो नहीं उठे तो मैं समझ गई की अब रास्ता साफ़ हे. मैंने जल्दी से उनकी धोती को साइड में कर दी और कच्छा खोल कर उनका लंड बहार निकाल लिया. उनका लंड देख कर मेरी आँखों में अलग ही चमक आ गई. मेरी ननंद ने जो कहा था वो एकदम सच था. मेरे ससुर का लंड सच में काफी बड़ा और मोटा था. और सब से कमाल की बात ये थी की वो लंड अभी सोया हुआ था तो भी बहुत मोटा और लम्बा था. जब वो लंड कडक होगा तो कैसे होगा!!! मैंने अपने दोनों हाथो से लंड को पकड़ कर ऊपर करना चालू किया. और पता नहीं मेरा अपने ऊपर से कंट्रोल ही जैसे चला गया था. मैंने लंड को थोडा हिलाया और फिर निचे झुक के अपने होंठो से उसे चूमने भी लगी. अब मैं इस मोटे लंड को मुहं में ले के चूमने लग गई. और निचे से ऊपर तक पुरे लोडे को अपनी जबान से चाटने लगी. तभी अचानक इस बड़े लोडे के अन्दर जैसे करंट आ गया. और लंड खड़ा होना चालु हो गया. कुछ देर पहले जो लंड 5 इंच का था अब वो लम्बा हो के 11 इंच का हो गया.
    मेरी आँखे खुली की खुली रह गई और मेरी ख़ुशी का कोई ठिकाना ना रहा. सच में लंड काफी शानदार लग रहा था. अब तो मेरी जुबान लंड को चाटने में लगी हुई थी. लंड को देख कर अब मेरी चूत में खुजली होनी शरु हो गई थी. मैं उठी और अपनी साडी और पेटीकोट उतार के सीधा लंड के ऊपर आ गई और लंड को अपने हाथ में पकड़ के अपनी चूत के ऊपर रगड़ने लग गई. मुझे बहोत मजा आ रहा था. मैंने इतने बड़े लंड को चूत में कैसे लेना हे वो भी सोचा नहीं था. और लंड को चूत पर लगाकर नाप रही थी. मैंने देखा की अलंद अगर ये लंड मेरी चूत में पूरा जाता हे तो मेरे पेट तक अ जाएगा!
    मुझे अब डर सा लगने लगा था. इसलिए अब मैंने जाने का फैसला कर लिया. मैं लंड के ऊपर से उठ ही रही थी की ससुर जी ने अपने मजबूत हाथो से मुझे कमर में से पकड़ लिया. मैं एकदम बहोत ही डर गई. मैंने देखा की ससुर जी जाग चुके थे और वो मुझे पकड़ के वापस लंड पर बिठाने लगे थे.ससुर जी: बहु अब लंड को नाप तो लिया तो तुम अब इसको अपनी चूत में भी ले लो ना, कसम से जिसने भी लिया हे उसकी चूत तडपती हे इसे बार बार लेने के लिए!
    मैंने उनसे खुद को छुडवाने की कोशिश की लेकिन पर उन्होंने एकदम मुझे बेड पर दे मारा और मेरे ऊपर आकर बहोत बुरी तरह से मेरे बूब्स को मसलने लगे. मेरी आँखे बंद होनी लगी थी. मैं मदहोश भी होने लगी थी. तभी ससुर जी ने मेरा ब्लाउज पकड़ा और उसे खिंच कर पूरा फाड़ दिया. और वो मेरे नंगे बूब्स को एक एक कर के अपने मुहं में ले के चूसने लगे. मुझे बहोत ही मजा आने लगा था, मैं पागल सी होने लगी थी क्यूंकि आजतक मेरे बूब्स मेरे पति ने भी नहीं चुसे थे ऐसे तो.ससुर जी ने अब मेरी चूत में उंगलिया करनी चालू कर दी. मेरी चूत गीली होने लगी थी. मुझे सच में बहोत ही मजा आ रहा था. तभी ससुर जी निचे गए और मेरी चूत को अपनी जुबान से चाटने लगे. जैसी ही उनकी जीभ मेरी चूत पर लगी वैसे ही मेरे पुरे जिस्म में करंट दौड़ गया. अब मेरे एक हाथ में उनका लंड था जिसे मैं जोर जोर से ऊपर निचे कर के हिला रही थी.
    अचानक ससुर जी ने मेरे हाथ से लंड ले लिया और खुद ही अपने लंड को मेरी चूत के ऊपर रगड़ने लगे. मेरी चूत के दाने के ऊपर लंड पूरी स्पीड में ऊपर निचे हो रहा था. मैं पूरी तरह से पागल हो चुकी थी क्यूंकि आजतक ऐसा मजा पहले कभी नहीं आया था. 2 मिनिट बाद ही मेरी चूत ने काफी सारा पानी बहार निकाल दिया.
    ससुर जी: बहु ये क्या अभी तो मेरा लंड तेरी चूत के अन्दर गया भी नहीं और तेरी चूत ने पहले ही जवाब दे के पानी छोड़ दिया.
    उन्के मुहं से ऐसी बातें सुन के मैं शर्मा गई और मैं धीरे से बोली: ससुर जी अब प्लीज़ आप मेरी चूत को अच्छे से चोदो ये मुझे बहुत परेशान करती हे.ये सुनते ही ससुर जी ने मेरे होंठों को चूसा और निचे जाकर मेरी चूत को फिर से चाटने लगे. अब की वो अपनी जुबान को मेरी चूत के दाने पर घुमा रहे थे जिस से मेरे मुहं में से अह्ह्ह अह्ह्ह्ह ऊह्ह्ह अह्ह्ह की मस्ती भरी आवाजें निकल रही थी. ससुर जी अब अपनी दो उंगलिया मेरी चूत में उतार के उसे जोर जोर से ऊपर निचे करने लगे थे. और साथ में ही ऊपर से मेरी चूत के दाने को भी चाट रहे थे. एक साथ दो हमले मेरी चूत सह न कर पाई और करीब एक मिनिट में ही मेरी चूत ने फिर से अपना सारा पानी निकाल दिया.
    मैं: ससुर जी अब क्यूँ मुझे तडपा रहे हो प्लीज़ जल्दी से अब आप अपना लंड मेरी चूत में डालो और मेरी प्यास को बुझा दो प्लीज़
    मैंने उन्के बड़े लंड को हाथ में पकड़ा तो मैंने देखा की ये तो इतना मोटा हे की ये मेरे हाथ में नहीं आ रहा हे. ते तो मेरी चूत के चीथड़े चीथड़े कर देगा, ये सोच के एक डर की लहर दौड़ उठी मेरे अन्दर. मेरे चहरे पर इस परेशानी के भाव देख कर ससुर जी बोले: मेरी बहु तू फ़िक्र ना कर आज इस लंड को अपनी चूत में ले ले. फिर आज के बाद तू किसी दुसरे के लंड को देखेंगी भी नहीं!
    मैं: पर ससुर जी आप मेरी को अच्छी तरह से चोदना मुझे बहुत तंग किया हुआ हे उसने!
    ये सुनते ही ससुर जी ने मेरी तरफ देख कर हलकी सी स्माइल करने लगी और अपना लंड मेरे मुह के पास कर दिया. मैं समझ गई की अब ये क्या चाहते हैं. मैंने झट से अपना मुहं खोल दिया और अच्छे से उन्के लंड को चूसने लगी.ससुर जी तभी मेरा सर पकड़ के अपने लंड को जोर जोर से मेरे मुहं में मारने लगे और मुहं की मस्त चुदाई करने लगे. अब उनका लंड मेरे गले के अन्दर जा रहा था जिस से मुझे सांस लेने में बहोत ही दिक्कत हो रही थी. पर वो रुके नहीं और करीब 5 मिनिट तक मेरे मुहं को ऐसे ही बेरहमी से चोदते रहे.
    अब उन्होंने अपने लंड मेरे मुहं से निकाला और मेरी चूत पर रख कर और थोडा सा जोर लगा कर अपने लंड का आगे का हिस्सा पहले मेरी चूत में डाला और बाद में फिर एक जोर से धक्का लगा कर करीब 4-5 इंच जितना लंड मेरी चूत में उतार दिया.लंड अंदर जाते ही मेरी जान निकल सी गई. मैं उन्के निचे एक मछली की तरह तडप रही थी. अब ससुर जी बहोत पुराने खिलाडी थे और धीरे धीरे मेरी चूत में अपना लंड अन्दर बाहर कर रहे थे. उन्होंने अभी तक आधे से भी कम लंड ही अन्दर डाला था और ऐसे मुझे चोद रहे थे. ससुर जी ने अब मेरी गांड के निचे एक तकिया लगा दिया जिस से मेरी चूत ऊपर उठ गई और अब तो ससुर जी ने अपना लंड मेरी चूत के एकदम साला और ऊपर निचे करने लगे. अब ससुर जी मेरे ऊपर आ गए और जोर जोर से मेरी चूत को चोदने लगे.
    ससुर जी ने अब अपना बहार निकाला और फिर एक धक्के से अपना पूरा 11 इंच का लंड एक ही बार में मेरी चूत में उतार दिया. अब मैंने अपनी दोनों टांगो को ऊपर उठा ली और अपनी गांड उठा उठा कर अपने ससुर जी का लंड अपनी चूत में लेने लग गई. ससुर जी ने मेरी दोनों टांगो को अपने कंधे के ऊपर रख दिया और जोर जोर से मुझे चोदने लगे. मुझे बहुत हो ही मजा आ रहा था. मैंने अपनी दोनों आँखे बंद कर के ससुर जी के हर धक्के का मजा लिया.करीब 20 मिनिट की इस घमशान चुदाई के बाद अचानक मेरा पूरा जिस्म अकड गया था. मेरी चूत ने ससुर जी के लंड पर अपने पानी की बारिश कर दी और 2 मिनिट बाद ही ससुर जी ने भी अपना सारा पानी मेरी चूत में ही निकाल दिया. मुझे बहोत जोर से पेशाब आ रही थी पर मेरे से उठा भी नहीं जा रहा था. इसलिए ससुर जी ने मुझे अपनी गोदी में उठा के बाथरूम में ले जा के मुताया. ससुर जी मेरी चूत में से निकलते हुए पेशाब को देख रहे थे. मेरी चूत से निकलते गरम गरम पीले पीले पेशाब को देख कर ससुर जी फिर से गरम हो गए और अपने लंड को मेरे मुहं में डाल कर फिर से मेरे मुहं को चोदने लग गए. फिर ससुर जी ने मुझे टॉयलेट की सिट पर बिठाया और मेरी दोनों टांगो को ऊपर कर के मेरी चूत और गांड दोनों मारी. आज मेरी चूत और गांड दोनों अछे से फट चुकी थी. और मेरी बहुत ज्यादा हालत ख़राब हो चुकी थी.उस दिन से मैं रोज रात को अपने ससुर जी से चुदवाती हूँ. एक दिन मेरी ननद ने मुझे और अपने डेडी से सेक्स करते देख लिया. फिर मैंने अपने साथ उसे भी ले लिया. अब हम तीनो इस सेक्स लाइफ का पूरा मजा लेते हे!

  • सुहागरात 1

    सुहागरात मैं अहमदाबाद (गुजरात) का निवासी हूँ,

    यह एक सच्ची कहानी है पर पात्रों के नाम व स्थानों के नाम बदल दिए हैं और कहानी को रोचक बनाने के लिए कुछ काल्पनिक चीज़ों का समावेश किया गया है,

    आशा करता हूँ आपको पसंद आएगी।मैं अपने मम्मी पापा का इकलौता लड़का हूँ इसी वजह से मैं 14 साल तक अपने मम्मी पापा के साथ ही सोता था। मैं अपनी मम्मी पापा के बीच में सोता था पर मैं जब सुबह उठता तो मुझे यह देखकर बहुत गुस्सा आता कि मेरे मम्मी पापा अगल बगल सो रहे हैं और मैं किनारे की तरफ सो रहा होता था।

    मैं उठकर मम्मी से पूछता भी तो वे मुस्कुरा कर कहती- मैं तो सारी रात तेरे बगल में सो रही थी, तेरे पापा तो अभी सुबह ही आकर इधर लेटे हैं।लेकिन अब वो नहीं रहा मेरी मम्मी हमे छोड़ कर इस दुनिया से चली गई और में अकेला हो जाता हु।दो साल बाद मेरे पापा दूसरी शादी कर ले ते हैं मम्मी और पापा एक दूसरे को जानते थे पहले भी मेरी नई मम्मी का भी डिवोर्स हुआ था पहला पति बहुत मारता था इस।ओर पापा मम्मी एक ही ऑफिस में कम करते थे तो उनलोगोन शादी कर लीपापा कोर्ट में ही शादी करते हैं।पापा ने मुझे बगल वाले कमरे में शिफ्ट होने की इज़ाज़त दे दी। मैंने भी अपना बोरिया बिस्तर बाँधा और अपने बेडरूम से बिल्कुल सटे दूसरे कमरे में आ गया।इस कमरे में एक बेड था,

    एक कुर्सी और एक मेज थी, बेड जिस दीवार से सटकर लगा था उस दीवार पर ही एक लकड़ी की खिड़की थी जो हमारे बैडरूम की ओर ही खुलती थी पर मैं उसे कहाँ खोल सकता था।और मुझे उनकी सुहागरात देखने का विचार आता हे।नए जोड़े अपनी शादी के शुरूआती दिनों,

    सुहागरात या फिर हनीमून में करते हैं।जब मैंने देखा कि कोई घर पर नहीं था तो जल्दी से पेंचकस लाकर खिड़की में छोटा सा छेद कर दिया। अब मैं कभी भी बेड पर लेटे हुए भी मम्मी पापा की चुदाई देख सकता था। मैंने अपना सारी बुक्स वगैरह दूसरे कमरे में शिफ्ट कर ली। मेरी तैयारी पूरी हो चुकी थी, अब मैं पापा मम्मी को चुदाई करते कभी भी देख सकता था।शाम को पापा मम्मी घर जाते हैं में उनका स्वागत करता हूँ।और उनलोगा का कमरा पापा के कहने पर सजा देता हूँ।मम्मी आते ही काम पर लग जाती है।लगभग 8:30 बजे मम्मी ने खाना बना लिया और कुछ देर बाद हम सब डाइनिंग टेबल पर खाना खाने लगे।

    मैं बाजार गया और आइसक्रीम लेकर आया और फिर हम सबने उसे मज़े से खाया।आइसक्रीम खाकर में अपने नए कमरे, जहाँ मैं शिफ्ट हुआ था, में आ गया और उनकी चुदाई शुरू होने का इंतज़ार करने लगा।करीब 10:30 बजे मम्मी सब काम निबटा कर कमरे में आई और बेड पर आकर बैठ गई।मेरे नई मम्मी 25 की है. उसका नाम सुरभि है.उसका बदन 34-32-36 साइज का है.ओर पापा 38 साल के हैं।पापा बोले- कैसा लग रहा है यहां?’मम्मी बोली मुँह नीचे किए बोली- ठीक लग रहा है.पापा ने प्यार से मम्मी को किस किया और कहा- तुम भी करो.मम्मी ने दोनों गालों पर किस की.मम्मी थोड़ा शर्माने लगी नखरे करने लगी।

    पापा बोले-तुमने कहा था कि अब की सुहागरात के दिन जो कहोगे वो करूँगी।

    मम्मी बोली- हाँ बाबा ! जो करना हो कर लो, अभी भी कह रही हूँ, बस गन्दी संदी चीजें न कहना!

    पापा बोले- सम्भोग में कुछ भी गन्दा नहीं होता!मम्मी बोली- जो करना है वो अब करो बस!

    मम्मी पापा की बात सुनकर ऐसा लग रहा था जैसे मैं किसी दूसरी दुनिया में पहुँच गया हूँ।

    पापा बोले आज तुम्हारे शरीर के हर अंग से वैसे ही खेलूंगा जैसे मैने अपनी सुहागरात में किया था। क्या तुम अपनी सुहागरात मनाने के लिए तैयार हो?

    मम्मी बोली- मैं तो कब से तैयार हूँ, तुम ही नखरे कर रहे हो।इतना कह कर दोनों हँसने लगे।

    पापा मम्मी को चूमने लगे कभी गालों पर, कभी गर्दन पर, कभी होंठों पर उन्होंने मम्मी के ऊपर जैसे चुम्बनों की बारिश कर दी, पापा का एक हाथ (पेटीकोट के ऊपर से ही) मम्मी के नितम्बों पर और दूसरा उनकी मुनिया पर चल रहा था।मम्मी भी मजा लेने लगी तभी शर्माते हुए बोली- धीरे कीजिए न प्लीज़ मुझे दर्द हो रहा हे!

    पापा धीमी आवाज से बोले- मेरी जान दर्द का अपना अलग ही मजा होता हे सेक्स के अंदरमम्मी अब बिस्तर पर सीधे लेट गई और पापा, मम्मी के थोड़ा ऊपर आ गए, उन्होंने मम्मी का सिर अपने हाथों में पकड़ लिया और अपने होंठ उनके होंठों पर रख दिए।

    मम्मी ने भी पापा को अपनी बाँहों में कस लिया, पापा मम्मी एक दूसरे को बेतहाशा चूमे जा रहे थे। इसी बीच पापा ने अपनी जीभ मम्मी के मुँह में डाल दिया।

    मम्मी ने पापा की जुबान को अपने मुँह से उगल दिया और बोली- यह किस तरह से किस करने लगे हो? पूरी जीभ मेरे मुँह में ही डाल देते हो छीः !

    पापा बोले- क्यों अच्छा नहीं लगता क्या?

    मम्मी बोली- गन्दा लगता है। पापा बोले- तुम भी न, बिल्कुल नासमझ की तरह बात कर रही हो।

    प्रेम करने में कुछ भी गलत या गन्दा नहीं होता, केवल जो भी करो अपने साथी की ख़ुशी के लिए करो, उसे प्यार और सिर्फ प्यार करो और अपने साथी को पूरी तरह संतुष्ट कर के उसे खुश कर दो।

    पापा बोले- मैं तुम्हें चूम रहा हूँ और तुम्हें अच्छा लग रहा है तो इसमें गन्दा क्या है?

    पापा की बात मम्मी के समझ में आ गई और वो दोनों पुनः अपनी काम क्रीड़ा में लग गए।अब कभी पापा अपनी जीभ मम्मी के मुँह में डाल देते तो कभी मम्मी अपनी जीभ पापा के मुँह में डाल देती, वो दोनों उसे कुल्फी की तरह चूस रहे थे। शायद पापा ने यह चुम्बन अभी जल्दी इज़ाद किया था इसलिए मम्मी इस तरह से किश करने में थोड़ा झिझक रही थी और शरमा भी रही थी पर थोड़ी देर बाद उनकी झिझक एकदम गायब हो गई।पापा कभी मम्मी के गालो को चूमते, तो कभी गर्दन को।मम्मी भी अब पीछे नहीं होना चाहती थी, उनके हाथ पापा के पीठ पर लगातार चल रहे थे।

    मम्मी के होंठ आज लगातार खूब मेहनत कर रहे थे, कभी वे पापा के गालों को चूमते और चूसते, तो कभी कंधों और गर्दन के बीच उतर आते, कभी कानों के पीछे, तो कभी ठुड्डी के नीचे।मम्मी की कामोत्तेजना कितनी प्रखर होती जा रही थी।पापा के होंठ,

    मम्मी के होंठों की तुलना में कुछ मोठे और कठोर थे इसलिए जब पापा के होंठ, मम्मी के कोमल गुलाबी होंठों को चूम रहे थे तो मुझे ऐसा लग रहता था मानो मम्मी के नाज़ुक नरम होंठ पापा के भारी कठोर होंठो के भार के नीचे दबे हुए हो और पापा के होंठो के नीचे पिस से रहे हों।मम्मी के होंठ गुलाबी तो हैं ही पर आज पापा के बेतहाशा चूमने के कारण वो और भी लाल प्रतीत हो रहे थे जैसे गुलाब की कोमल लाल पंखुड़ियाँ हों और उन पर बिखरी मुँह की लार को देख कर ऐसा लग रहा था कि वो गुलाब के फूलों से बना शरबत हो जिसे पापा स्वाद ले ले कर पी रहे हों।मुझे तो ऐसा लगा कि कहीं मम्मी के होंठ छिल न जाये।सारे कमरे में पुच पुच की आवाज़ गूंज रही थी और रात का सन्नाटा होने के कारण आवाजें और भी साफ़ सुनाई पड़ रही थी।जहाँ पापा मम्मी के गुलाबी अधरों का रस पान कर रहे थे,

    वहीं मम्मी पापा के मुँह का रस पी रही थी और रोमाँच के कारण उनके मुँह से केवल उम्म… उम्ह… उम्ह की सिसकारी रूपी आवाजें निकल रही थी।अब पापा के हाथ मम्मी के ब्लाउज पर आ गए,

    पापा अपने हाथ मम्मी के उरोजों पर ब्लाउज के ऊपर से ही फिराने लगे।मैंने देखा कि पापा मम्मी के होंठ आपस में अब भी लिपटे हुए थे और उन दोनों के हाथ एक दूसरे के शरीर पर कसे पड़े थे। इस तरह चुम्मा चाटी करते हुए करीब 20 मिनट बीत चुके थे, अब पापा का हाथ मम्मी की पीठ से खिसक कर उनके ब्लाउज पर आ गया और वो शायद मम्मी के ब्लाउज के बटन खोलने लगे।मुझे लगा पापा जल्दी से ही मम्मी का ब्लाउज़ उतार कर उनके जिस्म से उसे अलग कर देंगे पर शायद मम्मी के ब्लाउज के बटन बहुत टाइट थे इसलिए पापा उन्हें खोल नहीं पाये और झल्ला गए, पापा बोले- अरे यार सुरभि, यह कैसा ब्लाउज पहन लिया? कितने टाइट है इसके बटन।

    मम्मी बोली- अरे बाबा, रुको मैं खोलती हूँ। तुमसे तो ब्लाउज के बटन खुलते ही नहीं ।

    मम्मी पापा को छेड़ते हुए बोली- जब तुमसे एक ब्लाउज का बटन नहीं खुला तो तुम मेरी मुनिया पर लगे दो पल्ले वाले दरवाजे को कैसे खोल पाओगे?

    पापा हँस कर बोले- सुरभि, अभी पता चल जायेगा कि तुम्हारी मुनिया के दरवाजे खुलते हैं या टूटते हैं।पापा के इतना कहते ही दोनों खिलखिला कर हंस पड़े।मुझे ऐसा लग रहा था कि मानो मम्मी ने इतने स्वतंत्र रूप से यानि इतना खुल कर पहले कभी भी चुदाई नहीं की थी शायद इसीलिए वो बहुत शरमा रही थी,

    शर्म के कारण ही उन्होंने अपना चेहरा अपने हाथों से ढक लिया था।पापा बोले- सुरभि इतना शर्मा क्यों रही तुम! प्रेम तो दुनिया की सबसे अनमोल चीज़ है। प्यार से बढ़ कए दुनिया में कोई चीज़ नहीं है और फिर हम दोनों तो पति पत्नी हैं।

    हम दोनों को तो ये सब करने का अधिकार है।इतना कह कर पापा ने अपने हाथों से मम्मी के हाथों को उनके चेहरे से अलग किया।पापा ने मम्मी को अपनी बाँहों में भर लिया। इस बार तो पापा इतने उतावले हो रहे थे मानो देर होने पर उनकी कोई गाड़ी छूट जायेगी।

    मम्मी ने भी इस बार अपनी बाहें पापा की पीठ पर लपेट ली।मैंने देखा कि अचानक पापा का हाथ मम्मी की पीठ पर आ गया और ब्रा के आखरी सिरे पर उनके हुक को टटोलने लगा।

    पापा ने मम्मी को अपने हाथों का सहारा देकर उठाया ताकि वो मम्मी की ब्रा हुक खोल सके और देखते ही देखते उन्होंने मम्मी की ब्रा को खींच कर उनके खूबसूरत जिस्म से जुदा कर दिया।पापा ने जैसे ही मम्मी की ब्रा को उनके जिस्म से अलग किया, मम्मी के दोनों पयोधर, अमृत कलश यानि चूचियाँ ब्रा की सख्त कैद से आजाद हो गए।पापा के हाथ अब मम्मी के उरोजों पर चल रहे थे,

    वो मम्मी की चूचियों को इस प्रकार से दबा कर छोड़ रहे जैसे कोई डॉक्टर ब्लड प्रेशर नापने की मशीन के पम्प को दबाता और छोड़ता है।पापा अब भी मम्मी की चूचियों से चिपके हुए थे। अचानक पापा ने मम्मी के बाएं स्तन के चुचूक को मुँह में भर लिया और उसे पहले तो चूसा फिर धीरे से दांतों के बीच लेकर दबा दिया।

    मम्मी के मुख से हल्की सी चीख निकल पड़ी।अब पापा का हाथ मम्मी की कमर से होता हुआ उनके पेटीकोट पर जा टिका, पापा ने एक झटके में ही मम्मी के पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया और मम्मी से बोले- सुरभि,

    थोड़ा कमर उठा नामम्मी ने अपने दोनों हाथों को बिस्तर पर मजबूती से टिकाया और धीरे से अपनी कमर उठा दी।मम्मी के कमर उठाते ही पापा ने उनका पेटीकोट झट से नीचे खिसका कर उतार दिया।

    पापा मम्मी को चूमे जा रहे थे तो मम्मी भी चुम्मों का जवाब चुम्मों से दे रही थी।वो दोनों इतने उत्तेजित हो चुके थे, इसका पता इस चीज से ही लग रहा था कि पापा मम्मी, दोनों की सांसें खूब तेज़ चल रही थी और वो दोनों हांफ से रहे थे, उनके सांसों की गूंज बगल के कमरे में भी साफ़ सुनी जा सकती थी जहाँ मैं बैठकर मज़े से उनकी चुदाई देख रहा था।उन दोनों के होंठ आपस में लिपटे हुए थे और हाथ एक दूसरे की पीठ पर चल रहे थे, बीच बीच में आनन्द के कारण मम्मी अपने नाखूनों को पापा की पीठ पर चुभा देती,

    जिससे पापा के मुंह से सिसकारी सी निकल जाती थी।पापा भी कभी मम्मी के एक उरोज को मुँह में भर लेते तो कभी दूसरे को धीरे से मसलने लगते, तो कभी मुँह में भरकर चूसने लग जाते थे।

    मुझे यह सब देखकर बहुत आनन्द आ रहा था।मैंने अब देखा कि पापा अब नीचे की ओर सरकने लगे हैं, उन्होंने पहले मम्मी की नाभि को चूमा और फिर पेड़ू को!मम्मी को देख कर लगा कि जैसे उनके आनन्द की कोई सीमा ही ना रही हो,

    मम्मी की जांघें जो अब तक आपस में जुड़ी हुई थी, वो अब अपने आप ही खुलने लगी।पापा ने अब पैंटी के ऊपर से ही मम्मी मुनिया को चूम लिया मुनिया को चूमते ऐसा लगा कि मानो मम्मी के सारे शरीर में करंट सा दौड़ गया।पापा ने अब अपने हाथ मम्मी की कमर पर बढ़ा कर मम्मी की पैंटी को इतनी जल्दी उतार दिया मानो कि कोई व्यक्ति केले से उसके छिलके को उतार देता है।मैं झूठ नहीं बोलूँगा,

    इतनी दूर से मम्मी की मुनिया इतनी साफ़ नहीं दिख रही थी पर यह कह सकता हूँ कि सांवले रंग की थी और उस पर हल्के हल्के बाल थे, जिससे वो और काली लग रही थी।पापा ने अब अपना मुंह भग-ओष्ठ पर रख दिए और मम्मी की योनि को चाटने लगे।

    मम्मी अब तक बहुत उत्तेजित हो गई थी और अब उनसे ये उत्तेजना बर्दाश्त नहीं हो रही थी, शायद इसीलिए जब पापा मम्मी की योनि में अपनी जुबान इधर उधर चला रहे थे तब मम्मी ने कहा अब करो भी!

    तुम बहुत परेशांन कर ते हो।

    मम्मी बोली- मुझे तो पूरा नंगा कर दिया है और खुद जनाब जांघिया बनियान पहने हुए है।

    मम्मी का इतना कहना था कि पापा उठ खड़े हुए और उन्होंने अपनी जांघिया और बनियान उतार दी। पापा जहाँ बिस्तर के बगल में एकदम मादर जात (बिल्कुल निर्वस्त्र) हो खड़े थे, वहीं मम्मी भी एकदम नग्न होकर बिस्तर पर पड़ी थी, दोनों एक दूसरे के नंगे शरीर को अपलक टकटकी बांधे देख रहे थे और देख देख के मुस्कुरा रहे थे।पापा का साढ़े आठ इंच का लिंग एकदम टाइट होकर खड़ा था मानो मम्मी के निर्वस्त्र शरीर को देखकर सलामी दे रहा हो।

    मम्मी बोली – इतना बड़ा ?

    पापा बोले – आज से तुम्हारा हुआ।

    मम्मी बोली- अब करोगे भी?

    पापा बोले- आज हमारी सुहागरात है, सब कुछ करेंगे आज !मम्मी बोली- आओ न अब ! कह तो रही हूँ जो कहोगे, करु गई।

    पापा बोले- देखो जी, वादा कर के मुकर मत जाना।मम्मी बोली- हाँ बाबा, अब आओ भी!

    पापा अब फिर से मम्मी के ऊपर आ गए।पापा के ऊपर आते ही मम्मी ने अपनी बाँहों का फंदा बनाकर पापा के गले में डाल दिया और बाँहों में जकड़ लिया, फिर धीरे से मुस्कुराते हुए बोली- अभी बहुत नाटक दिखा रहे थे, अब तुम्हें मज़ा चखाऊँगी।

    मम्मी ने पापा के होंठों पर एक ज़ोरदार चुम्बन जड़ दिया।पापा ने मम्मी से कहा- सुरभि, थोड़ा रुको!पापा ने अपने हाथ तकिये के नीचे बढ़ाये और मैनफोर्स कंडोम के पैकेट से एक कंडोम निकाला और अब पापा मम्मी के शरीर से नीचे की ओर आए और घुटनों के बल बिस्तर पर खडे होकर कंडोम को बे मन से अपने बेहद टाइट लिंग (लंड) पर चढ़ाने लगे।

    मम्मी बोली- अब यह क्या कर रहे हो?

    पापा बोले- अरे कंडोम लगा रहा हूँ। तुम प्रेग्नेंट न हो इसलिए!

    मम्मी बोली- तुम भी न…अरे मेरे राजा, अब देर न कर, जल्दी से मेरे ऊपर चढ़ जा।इतना बोलकर वो खिलखिला कर हँसने लगी और पापा से बोली- इसी तरह बोलते हैं न देसी ब्लू फ़िल्म में।

    पापा बोले- हाँ बिल्कुल इसी तरह बोलते हैं सुरभि।और दोनों हँसने लगे।

    पापा अब एक बार फिर मम्मी के ऊपर चढ़ गए और उन दोनों के नंगे जिस्म आपस में चिपक गए।पापा ने अपने मुन्ने को मम्मी की लाडो के दरवाजे पर (चीरे) पर रख दिया।मेरे आश्चर्य का तब ठिकाना ना रहा जब मैंने देखा कि पापा अपने मुन्ने को मम्मी की लाडो में डालने के बजाए उसे उस पर रगड़ा जिससे मम्मी के मुँह से एक सिसकी सी निकल गई और उनका पूरा शरीर उत्तेजना और रोमांच के कारण काम्प गया।मुझे नहीं पता कि वो यह सब अपने लिंग को सेट करने के लिए कर रहे थे या फिर एक दूसरे को उत्तेजित करने के लिए, पर मम्मी इससे जरूर उत्तेजित हो रही थी।

    करीब 10-15 सेकंड ऐसा करने के बाद पापा अचानक रुके और अपने एक हाथ से मम्मी की कमर को पकड़ा और दूसरे हाथ से अपने खूटे रूपी मुन्ने को मम्मी की गुफा रूपी लाडो पर लगा दिया,

    मम्मी बोली- धीरे धीरे करना प्लीज तुम्हारा काफी बड़ा है।

    पापा बोले – ठीक हे।फिर पापा ने अपने हाथ मम्मी के कंधों पर टिकाये और फिर एक जोरदार धक्का मारा, प्यारी चूत के अन्दर दरवाजे को तोड़ता हुआ आधा घुस आया।

    मम्मी तिलमिला उठी — आह्ह्ह्ह हाई भग्वान्न्न्नन्न्न्न अआः मेरी माया आःह्ह्ह मर गई बाप रे, कितना दर्द हूऊऊओ रह्ह्ह्हह्ह हे, प्लीज़ निकल्लल्ल्ल्ल लो इसे।

    पापा बोले – मेरी रानी ये दर्द तो थोड़ी देर का हे मेरा थोड़ा बड़ा हे इसलिए और अब तुझे असली मजा आएगा मेरी जान।अब पापा ने। एक जोरदार धक्के के साथ अन्दर घुसा दिया। अब लंड पूरा चूत में घुस गया था ।मानो मम्मी की चूत फट गई हो इस धक्के से।

    दर्द से तिलमिला उठी आह्ह्ह्ह मर गेई बाप रीईईईईई अह्ह्ह्हह्ह ऊऊऊउ ईईईईइ, प्लीज़ निकाल आआआअ दर्द हो रहा हे ।एक बेदर्द की तरह पापा मम्मी की चूत धनाधन बजने लगे और फच फच फच की साउंड के साथ चुदाई कर रहे थे। मम्मी की चीेखे जैसे कमरे की दीवारों इ समा रही हो।मम्मी बोली- तुम्हें तो जहाँ थोड़ी छूट दे दी जाए, बिल्कुल जानवरों की तरह करते हो सेक्स!

    पापा ने मम्मी की बातों पर ध्यान नहीं दिया और उस एक तेज़ धक्के के बाद हल्के हल्के धक्के लगाने लगे और फिर उन्होंने मम्मी को अपनी बाँहों जकड़ लिया और अपने होंठों से मम्मी के होंठों को ढक लिया और फिर उन्हें अपने मुँह में भर कर लगातार चूसने लगे।

    मम्मी के हाथ भी पापा की पीठ पर अब बिना रुके चले जा रहे थे ।अब एक तरफ तो पापा धीरे धीरे धक्के लगा रहे थे और उनके दोनों हाथ अब कभी मम्मी के अमृत कलशों पर, कभी कमर पर, कभी पीठ पर चल रहे थे और उनके होंठ मम्मी के होंठों से चिपके हुए थे,

    कभी पापा के होंठ मम्मीके गालों पर फिसल जाते तो कभी गर्दन पर और कभी गर्दन के पीछे वाले भाग पर, कभी कानों पर आ जाते तो कभी कंधों पर तो कभी मम्मी की छाती पर आकर लगातार अपना काम किये जा रहे थे, जिससे पूरे कमरे में पुच पुच की आवाज आ रही थी।

    मम्मी भी पापा का पूरा साथ दे रही थी।मैंने एक बात ध्यान दी कि जब पापा धक्के लगाते और पापा का लण्ड मम्मी की चूत में प्रवेश करता या घुसता तो हल्की हल्की कुच कुच कुच… की लयबद्ध ध्वनि सुनाई पड़ रही थी। यह आवाज वैसे ही थी जैसे किसी बेहद पतली नाली से धीरे धीरे लेकिन लगातार पानी के रिसने की आवाज निकलती है।शायद मम्मी की मुनिया लगातार रतिरस छोड़ रही थी जिस कारण वो बेहद गीली और चिकनी थी, शायद इसीलिए ही जब पापा अपना मुन्ना मम्मी की मुनिया अंदर बाहर कर रहे थे तो कुच कुच कुच की आवाज निकल रही थी।

    मम्मी की पीठ पर पापा के हाथ एकदम कस से गए और पापा की छाती मम्मी की चूचियों से एकदम चिपक सी गई।शायद वो झड़ने वाले थे, इसलिए अपने आप को झड़ने से रोकने के लिए उन्होंने ऐसा किया था।‘अंकित के पापा धक्के मारते मारते रुक क्यों जाते हो?

    ’ मम्मी बोली- जल्दी से कर वर के छुट्टी करो।पापा बोले- सुहागरात में भी जल्दी मचा रखी है तुमने तो !

    पापा मम्मी एक दूसरे के शरीर से चिपके हुए धीरे धीरे ये बातें कर रहे थे।अब पापा कुछ नीचे सरके, मैं समझ गया कि अब वो क्या करने वाले हैं।

    पापा बोले- सुरभि लाओ जरा तुम्हारे मम्मों से तो खेल लूँ।मम्मी बोली- इतनी देर से तो खेल रहे हो जी, तुम्हारा तो कभी दिल ही नहीं भरता इनसे !

    पापा बोले- ये साले हैं ही इतने खूबसूरत कि जो भी देख ले, इन्हें उनकी नियत ख़राब हो जाये।पापा मम्मी की बात सुनकर ऐश लग रहा था कि दोनों ने पहले भी सेक्स किया है।अब पापा का एक हाथ मम्मी के बाएँ दुग्ध कलश पर चल रहा था और दाहिने को लगातार चूस रहे थे कभी पापा मम्मी की चूचियों को सहलाते तो कभी चूचियों की भूरी भूरी घुंडियों को अपनी उंगलियों से मसल देते जिससे मम्मी की सिसकारी निकल जाती।

    पापा और मम्मी एक दूसरे की आँखों में लगातार टकटकी बांधे देखे जा रहे थे, उनकी आँखें और चेहरे की मुस्कराहट ही उनके प्यार को बयाँ करने को काफी थी।अब वो एक तरफ मम्मी की अमृत कलशों से खेल रहे थे तो दूसरी तरफ वो बहुत ही मज़े से धीरे धीरे धक्के लगा रहे थे और साथ मम्मी के होंठो को हल्के हल्के काटते हुए बेतहाशा चूस रहे थे।धीरे धीरे करने से उन दोनों

    (मम्मी और पापा) को मज़ा भी बहुत आ रहा थामैंने ध्यान दिया कि धक्के मारते समय बीच बीच में मम्मी और पापा दोनों के ही मुंह से अब सिसकारियाँ कुछ ज्यादा ही निकल रही थी।शायद जब पापा का लिंग मम्मी की मुनिया की दीवार से रगड़ खाता तो उन दोनों की सिसकारी निकल जाती थी।यह सारे दृश्य देख कर मेरी तो हालत ही ख़राब हो गई।अब मम्मी ने अपने पैर थोड़े ऊपर उठा कर पापा की कमर से लपेट लिए, ऐसा करने से मम्मी के नितम्ब थोड़े ऊपर हो गए, अब पापा ने मम्मी के गोल और कसे हुए नितम्बों पर भी हाथ फिराना चालू कर दिया।

    मुझे लगा जैसे कुछ पानी सा मम्मी की लाडो से निकल रहा है, बहुत ज्यादा नहीं, पर हाँ उनकी लाडो के दोनों मखमली गद्दीदार कपाट कुछ भीगे से लग रहे थे जो इस बात की पुष्टि कर रहे थे कि उनकी लाडो लागातार पानी छोड़ रही है और उन्हें उसके निकलने से शायद कुछ गुदगुदी सी होने लगी थी।अब पापा ने धक्कों की गति कुछ बढ़ा दी थी, उनका हाथ मम्मी के अमृत कलशों को मसलने में लगा पड़ा था, कभी वो उसके शिखरोंको मसलते, क7pभी उन्हें मुँह में लेकर चूम लेते कभी दांतों से दबा देते।मम्मी का तो जैसे रोम रोम पुलकित होने लगा था, उनका पूरा शरीर रोमांचित हो रहा था।मुझे लगा कि जैसे मम्मी सारी देह तरंगित सी होने लगी है और और उन्होंने अपनी आँखें मूँद सी ली,

    उनके मुँह से बस हल्की हल्की सिसकारियाँ ही निकल रही थी- आह…. आह… आह…आह…मम्मी ने अपने पैर थोड़े से और खोल दिए और अपने पैरों को हवा में ही चौड़ा कर दिया ताकि पापा को किसी प्रकार की कोई परेशानी ना हो।

    ओह…मम्मी के ऐसा करने से मम्मी के पांवों में पहनी हुई निगोड़ी पायल रुनझुन रुनझुन की मंद मंद ध्वनि सी करने लगी, लयबद्ध धक्कों के साथ पायल और चूड़ियों की झंकार सुनकर पापा और भी रोमांचित से होने लगे और मम्मी जोर जोर से चूमने लगे।दो ध्वनि और भी आ रही थी एक थी चुर चुर चुर चुर… जो तेज़ धक्के लगाने के कारण पुराने बेड के हिलने से आ रही थी और दूसरी थी- थप थप थप थप…जो पापा के अखरोटों और मम्मी की लाडो के बार बार टकराव से उत्पन हो रही थी।क्योंकि अब पापा ने धक्को की गति बढ़ा दी थी इसलिए मम्मी की लाडो से आने वाली कुच कुच कुच… की आवाज जैसे कहीं गायब सी हो गई थी या इन सारी आवाजो में कहीं गुम सी हो गई थी।मम्मी का रोमांच और स्पंदन अब अपने चरम पर था, मम्मी की साँसें अब उखड़ने लगी थी और पूरी देह अकड़ने लगी थी। मम्मी ने पापा के होंठों को अपने मुँह में कस लिया और अपनी बाहों को उनकी कमर पर जोर से कस लिया और मम्मी to की प्रेम रस में डूबी सीत्कार निकालने लगी थी।मुझे लगा कि आज मम्मी तो जैसे लाज के सारे बंधन ही तोड़ देंगी।पापा का भी यही हाल था, वो अब जल्दी जल्दी धक्के लगाने लगे थे, उनकी साँसें और दिल की धड़कन भी बहुत तेज़ होने लगी थी और चहरे का रंग लाल सा हो चुका था।वो भी अब मम्मी को जोर जोर से चूमे जा रहे थे

    मम्मी के उरोजों को मसले जा रहे थे- मेरी जान आह… या…मम्मी के मुख से अचानक कुछ सीत्कार सी निकली और मम्मी बोली- मैं बस होने ही वाली हूँ!

    मम्मी के पूरे शरीर में सिहरन सी उत्पन हो गई और वो तो जैसे छटपटाने सी लगी थी।अचानक मम्मी ने पापा के होंठों को इतना जोर से चूसा कि मुझे लगा कि उनमें तो खून ही निकल आएगा, मpम्मी ने उन्हें इतना जोर से अपनी बाहों में भींचा कि उनकी कलाइयों में पहनी चूड़ियाँ ही चटक गई और मुझे लगा कि मेरी मम्मी आनन्द के परम शिखर पर पहुँच गई हैं, वो कितनी देर प्रकृति से लड़ती, मम्मी का रति रस अंततः छूट ही गया।

    पापा बोले- मेरा भी छुटने वाला है!पापा ने भी 3-4 अंतिम धक्के लगाए और फिर मम्मी को कस कर अपनी बाहों में भर कर मम्मी के ऊपर ही लेट गए।

    Bhejjमम्मी की लाडो ने पापा के मुन्ने को कस कर अंदर भींच लिया। पापा और मम्मी बिना कुछ कहे कोई 5-7 मिनट इसी तरह पड़े रहे।सुहागरात के इस साक्ष्य को उन्होंने अपने होंठों से लगा कर चूम लिया- सुरभि, तुम्हारा बहुत बहुत शुक्रिया!मम्मी हंस कर बोली- सुहागरात को पूरी तरह फील कर रहे हो

    पापा बोले- क्यों न करूँ जी! रोज़ रोज़ थोड़ी न मनाई जाती है सुहागरात! मेरी जान! आज तुमने मुझे खुश कर दिया !इतना कह कर उन्होंने अपनी बाहें मम्मी के गले में डाल दी।उन्होंने मम्मी के सर को थोड़ा सा नीचे करने की कोशिश की तो मम्मी ने अपना सर थोड़ा सा नीचे कर दिया। पापा ने फिर मम्मी होंठों को एक बार फिर से चूम लिया।मम्मी खुले बाल उनके चहरे पर आ गिरे।

    पापा ने मम्मी के एक उरोज को अपने मुँह में भर लिया और चूसने लगे।मम्मी ने पापा का मुख अपनी चूचियों से हटाया और बोली- ऐ जी हटो भी अब! बहुत मस्ती कर

  • दो पत्नी ओ के साथ सुहागरात

    हेलो दोस्तों मेरा नाम जय और में 30 साल का हु।

    में कहानी सुना रहा हु 5 साल पहले कीजब मेरी शादी होने वाली थी तब की।

    हम गांव में रहते हे और मेरे परिवार में दादा दादी और चाचा चाची हे मेरे मम्मी पापा नहीं हे मेरे दादाजी के पास बहुत पैसे हे बहुत सारे खेत.

    मेरी कुछ ही दिन में शादी होने वाली है और वो भी 2 पत्नी आने वाली है क्योंकि की जब मुझे देखनी के लिए तब दो बहने मुझसे शादी करने के लिए तैयार हो गई और मेरे ससुर ने दादाजी को कहा मेरी दोनों लड़की को आपका लड़का पसंद आ रहा हे .

    मेरे दादाजी ने भी कहा दिया कि दोनों से शादी करा लो वो मान गई क्यूंकि हमारे पास बहुत पैसे थे।

    मरी शादी के पंद्रह दिन के पहले की बात के जब मुझे मेरे दादी और दादाजी ने बुलाया और कहा कि तुम्हार सेक्स टाइम कितना हे दादाजी को पता था कि में खेत में काम करने वाली मजदूर की लड़की यो के साथ पैसे देके सेक्स करते हु।

    मैने बताया कि 15 मिनट मुझे दादाजी ने कहा कि तुम्हारी अब दो पत्नी आने वाली हे तो ये नहीं चलेगा तुम पावर बढ़ानी होगी और अपना औजार भी मुझे एक जड़ी बूटियों से बनी दवाएं दी तेल भी दिया।

    और कहा कि तू रो रातको खा लेना ओर तेल औजार पे लगाना तुम्हारे चाची को बोलना कामवाली बाई तुम तेल लगाना सिखाए ।

    मैने कहा ठीक है।

    मुझे पता था कि दादा दादी इसका इस्तेमाल करके रो एक घंटे तक सेक्स करते हे में चाचा चाची भी इस तरह करते है।

    रात हो गई और में खाना खाया और दवाई खा ली और चाची को बुलाया तो चाची ने बताया कि तू इसे दो घंटे तक नहीं थको हे और चाची मेरी फ्रेंड जैसी थी चाची ने कहा कि हमारे घर में कामवाली से मैने बोल दिया हे।

    वो आ जाएगी और मुझे अभी जाना है तुम्हारे चाचा को आराम देना हे मैने कहा ठीक है

    थोड़ी देर बाद वो कामवाली बाईं आई और मेरी पैंट निकली अंडरवेर निकली और तेल की मसाज करने मसाज करते करते वो नंगी हुईं और मेरे लंड पे बैठ कर अपनी चूत में लंड लेके ऊपर नीचे होने लगी और करीब एक घंटे तक चुदाई चली ना में कुछ बोल ना कुछ वो बोली। जाते टाइम बोली अब से तुम खुद करना मसाज क्योंकि तुम्हारी शादी होने वाली ओर तुम अपनी ताकत बचाके रखना चली गई।

    में समझ गया कि हमारे चाची ने समझा के भेजी होगी .

    केवल 15 दिन में मेरा लंड 12 इंच का ही गया मेरी शादी हो गई और मेरी दो पत्नी भी आ गई और हमारे में रिवाज हे कि शादी की दूसरी रात सुहागरात मनाई जाती हे।

    शादी के रात हम पास नहीं सोते ।

    अब दुसर दिन की रात हुई मेरा कमरा सजा दिया था।

    मेरी दोनों पत्नी या रूम में सज के बैठी थी में रूम में गया तो पीछे से चाची दुद लेके आ गई मुझे कान मे कहा कि आराम पहली बार हे इनका।

    एक का नाम रानी था और दुशरी का नाम पूजा था दोनों सजी हुई पलंग पे बैठे थी मैने रूम का दरवाज बंद किया और पलंग पर बैठे ।

    मने कहा कि तुम दोनों की आज सुहागरात हे तो तू आज शे मेरी हो जाओगी तुम दोनों मेरी लिए एक सामन हो ।

    पूजा – हम आज से आपकी हुई और आज हमको कच्ची कली से पका फूल बना दो।

    रानी – हा पति देव.

    में – चलो ठीक हे तुम अपने पूरे कपड़े निकल दो ।

    उस दोनों फिगर 38-32-40 है।

    दोनों ने अपने अपने कपड़े निकले मैने भी निकल दिये

    मेरा लंड दो नो चौक गई

    पूजा – इतना बड़ा हमसे नहीं लिया जाएगा हमारी चूत नहीं स पायेगी

    रानी – ये तो बहुत बड़ा है।

    में – ये तुम दोनों के लिए ही हे और तुम्हे ही लेना हे चलो पहले कौन आएगा

    पूजा – में छोटी हु इसलिए पहले रानी आएगी कल

    में – कल क्यों आज ही पर अब पहले तुम ओगी

    रानी तुम देखो तुम्हारी बारी थोड़ी देर बाद तुम सोफे पे जाके बैठ जा।

    रानी – ठीक है पति देव।

    मरे लंड भी बहुत बड़ा तो टाइट ही गए था।

    अब मुझसे ज़्यादा इंतज़ार नहीं हो रहा था, मेरा सब्रा टूट रहा था। पूजा को मैंने उसको अपनी तरफ घुमाया, और उसको किस करना शुरू कर दिया। उसकी आंखें बंद थीं, और वो भी मेरा साथ देने लगी।

    मैं उसके ऊपर आ गया, और उसकी क्लीवेज का मजा लेने लगा। वो भी मुझे अपनी बाहो में कस रही थी। फिर मैंने उसकी ब्रा को नीचे करके उसके दोनों बूब्स को बाहर निकाल लिए। मैं भी अब अपनी पत्नी के साथ सुहागरात का मजा लेने लगा।

    जब मैं उसके निपल्स चुमने लगा, तो उसने कामुक आहें भरनी शुरू कर दी। आहहह अहह अह्ह्ह की सिसकिया लेने लगी। फिर मैं नीचे गया, और उसकी कमर को चूमता हुआ उसकी जाँघों पर पहुँच गया।

    और कुंवारी चूत मेरे सामने थी। मैंने उसकी जाँघों को चाटना और काटना शुरू कर दिया। फ़िर मैं उसकी ख़ूबसूरत गुलाबी चूत पर पाहुंचा।

    सुहाग-रात की वजह से उसकी चूत बिल्कुल साफ थी। उसकी चूत पर एक भी बाल नहीं था, और वो बिल्कुल आइसक्रीम की तरह लग रही थी।

    मैंने बिना समय बर्बाद किये उसकी चूत को चाटना शुरू कर दिया। वो मेरे सर को अपनी चूत में दबा रही थी, और उसकी चूत धड़ाधड़ पानी छोड़ रही थी।

    मैं उसकी छाती के ऊपर बैठ गया, और उसके रसीले होठों पर अपना लंड रगड़ने लग गया।

    फिर जैसे ही उसने मुँह खोला, तो मैंने अपना आधा लंड उसके मुँह में घुसा दिया । अब मैं उसके मुँह में अपना लंड अंदर बाहर कर रहा था, और वो आँखें बंद करके मेरा लंड मजे से चूस रही थी।

    शायद उसे भी बहुत मजा आने लगा था इसलिए वो भी चुपचाप मेरा मोटा लंड अपने मुँह में लेकर मजे से चूसने लगी। फिर मैंने लंड उसके मुँह से बाहर निकाल लिया, और मैं उसकी टांगो के बीच आ गया।

    उसने अपनी टाँगे फैलाकर रखी थी, मैंने अपना लण्ड अंदर डालने की कोशिश की लेकिन कुंवारी चूत होने की वजह से मेरा लंड उसकी

    टाइट बुर में नहीं घुस रहा था।

    उसने मेरे लंड को अपने हाथों से पकड़ कर उसकी योनि पर रखा ।

    मैंने एक झटका दिया और लण्ड का टोपा उसकी बुर में घुस गया और वो चिल्ला उठी।

    थोड़ी देर बाद में एक जोरदार झटका फिर मारा और मेरा लगभग आधा लंड उसकी टाइट चूत में घुस गया।

    और वो चिल्लाने लगी, उसकी आँखों से आँसू आ गये और गिड़गिड़ाने लगी- प्लीज़ निकाल लो, मुझे नहीं चुदवाना! बहुत दर्द हो

    रहा है।

    मैं- थोड़ी धीरज रखो पूजा, बाद में बड़ा मज़ा आएगा।

    पूजा – नहीं निकालो प्लीज

    में – अभी तक मेरा आधा ही लंड अन्दर घुसा है

    अभी मेरा पूरा घुसे गा तुम मेरी पत्नी हो ये तो सहना ही पड़ेगा ना।

    खून निकलने लगा था। लंड मेरे गाढे लाल खून से रंग गया

    मैंने उसे उसी पोज़िशन में रख कर बूब्स दबाए और चुम्बन करता रहा और हाथ से उसकी क्लाइटॉरिस को चुटकी में लेकर मसल दिया।

    मैंने बिना समय बर्बाद किये उसकी चूत को चाटना शुरू कर दिया। वो मेरे सर को अपनी चूत में दबा रही थी, और उसकी चूत धड़ाधड़ पानी छोड़ रही थी।

    मैं उसकी छाती के ऊपर बैठ गया, और उसके रसीले होठों पर अपना लंड रगड़ने लग गया।

    फिर जैसे ही उसने मुँह खोला, तो मैंने अपना आधा लंड उसके मुँह में घुसा दिया । अब मैं उसके मुँह में अपना लंड अंदर बाहर कर रहा था, और वो आँखें बंद करके मेरा लंड मजे से चूस रही थी।

    शायद उसे भी बहुत मजा आने लगा था इसलिए वो भी चुपचाप मेरा मोटा लंड अपने मुँह में लेकर मजे से चूसने लगी। फिर मैंने लंड उसके मुँह से बाहर निकाल लिया, और मैं उसकी टांगो के बीच आ गया।

    उसने अपनी टाँगे फैलाकर रखी थी, मैंने अपना लण्ड अंदर डालने की कोशिश की लेकिन कुंवारी चूत होने की वजह से मेरा लंड उसकी

    टाइट बुर में नहीं घुस रहा था।

    उसने मेरे लंड को अपने हाथों से पकड़ कर उसकी योनि पर रखा ।

    मैंने एक झटका दिया और लण्ड का टोपा उसकी बुर में घुस गया और वो चिल्ला उठी।

    थोड़ी देर बाद में एक जोरदार झटका फिर मारा और मेरा लगभग आधा लंड उसकी टाइट चूत में घुस गया।

    और वो चिल्लाने लगी, उसकी आँखों से आँसू आ गये और गिड़गिड़ाने लगी- प्लीज़ निकाल लो, मुझे नहीं चुदवाना! बहुत दर्द हो

    रहा है।

    मैं- थोड़ी धीरज रखो पूजा, बाद में बड़ा मज़ा आएगा।

    पूजा – नहीं निकालो प्लीज

    में – अभी तक मेरा आधा ही लंड अन्दर घुसा है

    अभी मेरा पूरा घुसे गा तुम मेरी पत्नी हो ये तो सहना ही पड़ेगा ना।

    खून निकलने लगा था। लंड मेरे गाढे लाल खून से रंग गया

    मैंने उसे उसी पोज़िशन में रख कर बूब्स दबाए और चुम्बन करता रहा और हाथ से उसकी क्लाइटॉरिस को चुटकी में लेकर मसल दिया।

    अपना लंड चूत के मुंह पर लगाकर एक जोर का धक्का मारा.

    पूजा

    मुंह से एक लंबी दर्द भरी चीख निकल गई- आह ओह ईईई ऊऊच ऊं … उई मां मर गई … आह ओह ईईई … ऊऊऊ!

    मेरा लंड पूजा की चूत को फाड़ता हुआ अंदर घुस चुका था.

    लेकिन मैने चीखों पर ध्यान ना देकर ताबड़तोड़ तगड़े धक्के लगाकर अपना लंबा मोटा फौलादी लंड चूत में जड़ तक पहुंचा दिया.

    पूजा की आंखों में आंसू आ गए दर्द के कारण … पूजा चूत से खून की धार छूट गयी थी.

    दर्द के मारे मैं अपना सर इधर उधर पटकने लगी थी.

    पूजा जोर जोर से दर्द भरी चीखें निकल रही थी- आह हहह उई मां मरर गई … आह ओह … ईईई ऊऊऊ … ऊचच चचच … उममह ममम … आह हहह … उई मां!

    में ताबड़तोड़ धक्के मार मार कर पूजा की चूत के चीथड़े उड़ा रहा था.

    मेरा लौड़ा हर धक्के पर पूजा की बच्चेदानी में जा रहा था.

    पूजा ने एक हाथ मैंने अपनी चूत पर लगा कर देखा तो मेरा पूरा लंड मेरी चूत में तेजी से अंदर बाहर हो रहा था.

    पूजा ने चूत पर और मेरा लंड पर उंगलियां लगाई तो पूजा के हाथ पर काफी सारा खून लग गया था.

    पूजा समझ गई कि अपने लंबे मोटे फौलादी लंड से मेरी सील तोड़ दी. इस कारण मेरी चूत से काफी खून निकल रहा था.

    तभी पूजा की चूत ने पानी छोड़ दिया और पूजा को दर्द के बजाए आनन्द आने लगा था.

    मैने करीब बहुत चुदाय की ओर में करीब 45 मिनट बाद मैने बोला कहा पे पानी निकालू तो कुछ नहीं बोली क्यों कि हालत बहुत खराब हो गई थी वो 8-9 बार जड़ गई होगी ।

    बस फच फच फचाक फचाक की आवाज से कमरा गूंजने लगा.

    कुछ समय बाद झड़ने को हुआ और उसने अपना सारा वीर्य पूजा की बुर में डाल दिया.

    वह वीर्य पूजा की चूत के पानी से मिलकर बाहर बहने लगा. वो इसे ही पड़ी थी मैने उसको उठाया और सोफे से रानी को हटने को बोला और मैने सोफे पे सुला लिया नंगी ही।

    रानी अब तुम्हारी बारी जैसे ही पास आई मैने उसे खींच कर बेड पर गिरा दिया इसके में चूमा चाटी करने लगा चूमा चाटू करते करते मैने सारे कपड़े रानी के उतार दिए।

    मैने रानी को अपना मुँह डाल कर चूसने चाटने लगा.

    मेरी वासना मेरे ऊपर पूर्ण रूप से हावी हो चुकी थी और मैंने उसकी एक चूची को अपने मुँह में लेकर जोर से काट ली.

    उसकी मदभरी सिसकारी निकल गई- आह प्यार से काटो न!

    यह सुन कर मुझसे रहा नहीं गया और मैंने उसे पीछे पलट दिया और अपनी छाती उसकी पीठ से सटा दी.

    चूंचियो के निप्पल को पकड़ पकड़ कर खीचते हुए रानी को गर्म कर रहे था। रानी “……अई…अई….अई……अई….इसस्स्स्स्स्…….उहह्ह्ह्ह…..ओह्ह्ह्हह्ह….” की सिकरिया भर रही थी

    अपना मुह रानी की गोरी गोरी चूंचियो के काले काले निप्पल पर लगा दिया। विलास बछड़े की तरह निप्पल को खींच खींच कर दूध पी रहा था।

    कुछ देर तक पीने के बाद

    अपना लंड चूसने कहा

    बोली- “आज नहीं। ये सब कल से किया जायेगा”.

    सर पकड़ कर अपने लंड को रगड़ने लगा ।

    अपना लण्ड अन्दर करके मे चुसाना शुरू कर दिया

    उसको लंड मुह में रख कर बहुत बुरा लग रहा था।

    मैने मुंह में से बाहर निकला और दोनों पैर को उठाकर लंड चूत के मुंह पर रखा और एक जोर का धका दिया लंड चूत के अंदर ओर रानी जोर जोर से “आआआअ ह्हह् हह …..ईईईईईईई….ओह्ह्ह्….अई. .अई..अई…..अई..मम्मी….” चिल्लाने लगी। उनके लंड का टोपा म चूत में जाकर फंस गया।

    में धक्का मार मार कर रानी की चूत में डाल डाल कर निकालने लगे। दर्द से तड़प रही थी। लेकिन मुझे कोई फर्क नहीं पड़ रहा था। चूत की फडाई में लगे हुए थे। रानी का लग रहा था। किसी ने लोहे का मोटा रॉड गर्म करके चूत में डाल दिया हो।

    रानी चूत की दर्द को भूल कर चुदाई करवा रही थी। अचानक में मोटा काला लंड रानी की चूत में हलचल मचाने लगा। में रानी को किसी कुत्ते की तरह जल्दी जल्दी चोदने लगे। सैयां जी की ट्रेन ने स्पीड पकड़ ली थी। में ब्रेक मारने का नाम ही नहीं ले रहे थे।

    खून से मेरा लंड पूरा लाल हो गया था और में पूरे जो से चूदाई कर रहा था वो अभी तक 2 बार पानी निकल चुकी थी

    मेरी स्पीड की रगड़ से मै बहुत परेशान हो गई थी। दर्द से “उ उ उ उ उ……अ अ अ अ अ आ आ आ आ… सी सी सी सी….. ऊँ— ऊँ… ऊँ….” की आवाज के साथ अपनी चूत फड़वा रही थी। रानी की चूत का दर्द धीरे धीरे कम होने लगा। रानी मुझे महसूस करने लगी थी ।

    5 मिनट बाद फिर जड़ गई अब माना करने लगी थी।

    रानी – अब छोड़ दोना कल कर लेना आज इतना ही बहुत दर्द हो रहा हे

    में – देख तुम्हारी बहन पूजने भी सहन किया है तुमसे छोटी हो तो भी बस थोड़ी देर ओर

    रानी – नहीं रुक जाओ

    में – में तुम्हारा पति हू तुम मेरी बात मानी होगी

    वो ऐश ही पड़ी रही ओर में करीब 30 मिनट बाद पानी उसकी चूत में ही छोड़ दिया।

    रानी की हालत बहुत खराब हो गई थी मैने खून साफ किया दोनों बहन का और नंगे ही हम तीनों सो गई।

    में सुबह 8 बजे उठा और पूजा रानी को उठाया और कपड़े पहनने को बोला वो दोनों ठीक से चल भा नहीं पा रही थी।

    में रूम में से बाहर आ गया

    चाची – कैसी गई तुम्हारी सुहागरात।

    में – पूजा और रानी को पूछो जाके

    चाची – हालत खराब कर दी हे तू चिंता करो में दवाई दे देती हु रात तक ठीक हो जाएगी

    में – ठीक हे

    दादी ने रानी और पूजा के पास गई वो दोनों चल नहीं पा रही थी तो दादी ने गर्म पानी कर के दोनों को नहलाया और दर्द की दवा दे दी।

    उस दिन की चुदाई ने तो सब यादगार बना दिया।