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  • दूसरी शादी की सुहागरात का मजा

    मेरा नाम रेनू है और मैं जयपुर में रहती हूँ. मेरी उम्र 37 वर्ष की है.
    मेरे पति और मैं दोनों सरकारी नौकरी करते थे.
    हम दोनों का एक ब/च्चा है.

    हमारी लाइफ ठीक चल रही थी.
    मेरे पति सुनील मुझे बहुत प्यार करते थे.
    हम दोनों भगवान की नेमत से बहुत खुश थे लेकिन एक दिन सड़क हादसे में उनकी मौत हो गई.

    ये खबर सुन कर मुझ पर दुखों का पहाड़ सा टूट पड़ा.

    मैं अपने पति के बिना जीना नहीं चाहती थी और मर जाना चाहती थी … लेकिन अपने ब/च्चे को देखकर अपने आप को संभाला.

    पीहर और ससुराल वाले ढांढस बँधाते और हिम्मत से काम लेने को बोलते.
    मैं किसी के ऊपर बोझ बनना नहीं चाहती थी.
    मैं रोज़ अपने पति को याद करती और अकेले में बैठकर रोती रहती.

    धीरे-धीरे ये मुश्किल वक्त निकल गया और मैं अकेली ही अपने ब/च्चे के साथ रहने लगी.

    अब मैंने उनकी यादों के सहारे अकेले जीना सीख लिया था.
    मुझे उनके इंश्योरेंस और फंड्स से बहुत पैसे मिले थे, पैसे की कोई कमी नहीं थी लेकिन पति की कमी कोई भी चीज़ पूरी नहीं कर सकती थी.

    जैसे-जैसे समय निकला, मैं अपनी नौकरी करके ब/च्चे को पालने लगी. मेरा पूरा समय ब/च्चे को खुश रखने और उसे खिलाने में निकल जाता था.
    बस इसी तरह से समय निकल रहा था.

    लेकिन एक औरत के लिए ये सब आसान नहीं होता.
    लोग मुझ पर गंदी निगाहें डालते; हर कोई हमदर्द बनना चाहता था.
    मैं किसी से बात नहीं करती थी; मुझे ऐसे लोगों से नफ़रत होती थी.

    मुझे अब पति की यादों के सहारे ही जीना था.
    मैं बिल्कुल साधारण तरीके से रहने लगी.

    मुझे अपनी चूत के बाल भी साफ़ करने का मन नहीं करता था.
    मेरी झांटें बहुत बड़ी हो गई थीं.

    जैसे ही एक बरसी पूरी हुई, घरवा ले बोलने लगे- बेटी अभी तेरी पूरी उम्र पड़ी है. ब/च्चे के भविष्य का सोच … दूसरी शादी कर ले!

    मुझे ये सब सुन कर गुस्सा आता था.
    अब तो मेरी सहेलियां भी शादी करने की बोलने लगी थीं.

    मेरी एक खास सहेली मुझसे बोली- देख यार, ऐसे जीवन नहीं चलता!

    लेकिन मैं किसी से शादी करना नहीं चाहती थी.
    मैं अपने पति को बहुत प्यार करती थी; उनकी यादों को मैं किसी के साथ बांटना नहीं चाहती थी.

    मेरे घर वालों ने पीछा नहीं छोड़ा.
    वे बोलते रहे कि बेटी समाज में विधवा का जीवन नरक से भी बदतर होता है. ब/च्चे के बारे में सोच … इसको भी तो बाप का प्यार चाहिए.

    ब/च्चे के बारे में सोचकर एक दिन मैंने हां कर दी.
    घर वाले बहुत खुश हुए.

    वैसे मैं जवान-सुंदर थी, नौकरी थी और अब पैसा भी बहुत था तो रिश्तों की कोई कमी नहीं थी.

    रोज़-रोज़ रिश्ते आ रहे थे.
    अनमैरिड और मैरिड सब तरह के रिश्ते आ रहे थे.

    घर वालों ने बहुत से लड़कों के फ़ोटो भेजे पसंद करने के लिए … लेकिन मैंने सब उन्हीं पर छोड़ दिया कि जो आपको ठीक लगे, वह करो.

    फिर उन्होंने एक लड़का फ़ाइनल कर दिया.
    वह भी शादीशुदा था.
    उसकी शादी दो साल पहले हुई थी लेकिन शादी के 3 दिन बाद ही उसकी बीवी पीहर में करंट लगने की वजह से चल बसी थी.

    उन्होंने फ़ाइनल किए लड़के की डिटेल और उसकी फ़ोटो मुझे भेज दी.
    उस लड़के का नाम रवि था.

    मुझे एक प्रतिशत भी इंट्रेस्ट नहीं था पर ब/च्चे की खातिर मैंने एक बार फ़ोटो देख लिया.
    वह लड़का बहुत स्मार्ट था अभी केवल 32 साल का था.
    उसकी सरकारी नौकरी थी और वह इंजीनियर था.

    मैं तो सोच भी नहीं सकती थी कि किसी विधवा को ऐसा हैंडसम जवान पति मिल सकता है.
    यहीं से इस हैपी एंडिंग सेक्स कहानी की शुरुआत हुई.

    घर वाले और सहेलियां मुझे पार्लर जाने और हुलिया सुधारने को बोलती थीं.
    लेकिन मैं तो शादी भी सिर्फ घर वालों और ब/च्चे की खुशी के लिए ही कर रही थी … अपने लिए नहीं.

    फिर भी रोज़-रोज़ उनकी ज़िद की वजह से मैं पार्लर जाने लगी.

    मेरी उसी पक्की सहेली ने कसम दी कि एक दुल्हन की तरह तैयार होना वर्ना कभी बात नहीं करूँगी.

    इस वजह से मैं फुल बॉडी वैक्सिंग और मेकअप करवाने लगी.
    फिर मैंने चूत को भी बिल्कुल साफ़ कर लिया.

    अब मैं भी किसी हीरोइन से कम नहीं लग रही थी.

    सब कुछ तय होने के एक महीने बाद ही हमारी शादी कर दी गई और मैं अब ससुराल आ गई.

    मेरे लिए सब नए थे.
    सभी लोग बहुत अच्छे थे.

    मेरी खूबसूरती की सबने तारीफ़ की … मुझे ऐसा नहीं लगा कि अनजान हैं.
    सबने मेरा खूब ध्यान रखा.

    मेरा ब/च्चा भी उनमें घुल-मिल गया.

    ये देख कर मेरा दुख कम हुआ लेकिन मैं तो बस मेरे पहले पति को ही याद कर रही थी.

    ये शादी मैंने खुद के लिए नहीं … ब/च्चे की खातिर की थी.

    जैसे-जैसे सुहागरात नज़दीक आ रही थी, मैं घबरा रही थी.
    मैं किसी और मर्द को खुद को छूने देना नहीं चाहती थी.

    सुहागरात को मैं कमरे में बेड पर घूँघट करके बैठी थी कि तभी दरवाज़ा खुला और रवि अन्दर आ गए.

    मैं चुपचाप घूँघट में से उनको देख रही थी.
    उनकी हाइट छह फीट, रंग गोरा था.

    तभी उन्होंने अपनी टाइट शर्ट-पैंट उतार दिए.
    उनकी पर्सनैलिटी किसी फौजी जैसी थी.

    वे बाथरूम में गए और हाथ-मुँह धोकर सिर्फ़ तौलिया लपेट कर बाहर निकल आए.

    फिर ड्रेसिंग टेबल के सामने खड़े होकर नीचे से कंघा उठाने जैसे ही झुके, उनका तौलिया खुल कर गिर गया.

    तभी मेरी नज़र ड्रेसिंग टेबल के ग्लास पर जा पड़ी.
    उन्होंने चड्डी नहीं पहनी हुई थी.

    मेरी आंखें फटी की फटी रह गईं.
    ये आदमी का लंड था या घोड़े का …

    मैंने ऐसा लंड कभी सोचा भी नहीं था.

    उन्होंने तुरंत तौलिया पहन ली लेकिन मेरी आंखों के सामने तो उनके लंड की फ़ोटो बन गई.

    इतने समय बाद आंखों के सामने लंड देखकर मेरी चूत भारी-भारी सी होने लगी.
    जैसे-तैसे करके मैंने खुद को संभाला.

    उन्होंने कमरे की लाइट बंद करके नाइट बल्ब जला दिया.
    वे बेड पर बैठे और मेरा घूँघट उठा कर बोले- यार कितनी खूबसूरत हो तुम … मेरा तो नसीब ही खुल गया!

    ये बोलकर उन्होंने मेरे हाथों में गिफ़्ट का डिब्बा पकड़ा दिया और खोलने को बोले.
    मैंने डिब्बा खोला तो उसमें एप्पल आईफ़ोन था.

    वाह … आई फोन!
    मैं बहुत खुश हुई.
    मैंने पहली बार एप्पल आईफ़ोन हाथ में लिया था.

    उन्होंने पूछा- कैसा लगा गिफ़्ट?
    तो मैंने सिर्फ़ गर्दन हिला कर हामी भर दी.

    तभी रवि ने मेरे हाथ को छुआ तो मैं बेड से नीचे उतर गई और बोली- सॉरी … ये सब हमारे बीच कभी नहीं होगा … आप मुझे कभी छूना मत!

    ये सुनकर वे मेरे पास आए और मेरे सामने खड़े होकर मेरे दोनों हाथों को पकड़ कर बोले- जान. ये मेरी पहली सुहागरात है. पहली बीवी सुहागरात के समय पीरियड्स में थी!

    ये ‘जान’ शब्द सुने डेढ़ साल हो गया था.
    उनकी पहली सुहागरात वाली बात सुनकर मैं मन ही मन खुश होने लगी लेकिन फिर भी मुँह बनाकर हाथ छुड़ाकर दूर हट गई और ड्रेसिंग टेबल के सामने खड़ी हो गई.

    तभी रवि मेरे पीछे आए और उन्होंने पीछे से अपने हाथ आगे करके मेरे दोनों बूब्स को पकड़ लिया.
    साथ ही अपना मूसल जैसा हथियार मेरी गांड पर टिका दिया.
    वे मेरे बूब्स को हल्के हाथों से सहलाने लगे.

    मेरे पूरे शरीर में करंट सा रेंगने लगा, चूत का भारीपन मैं संभाल नहीं पा रही थी कि अब पैर भी भारी लगने लगे और एक एक कदम उठाना भी भारी पड़ रहा था.

    मैं खुद को हटा नहीं पाई कि तभी रवि अपने एक हाथ से मेरे पेट पर सहलाते हुए उंगलियों को मेरी नाभि के चारों तरफ़ घुमाने लगे.
    फिर नाभि से नीचे मेरे पेड़ू पर रख लिया.

    दोस्तो, डेढ़ साल बाद अगर कोई हट्टा-कट्टा मर्द नाइट बल्ब के उजाले में पीछे से पकड़ ले और उसका लंड मूसल जैसा हथियार लड़की देख चुकी हो … तो खुद ही सोचो कि उस वक्त मेरी क्या हालत हुई होगी.

    मैं निढाल होकर पीछे की तरफ़ रवि के ऊपर गिरने लगी और मन ही मन खुश होने लगी कि इतने दिन की प्यास आज मिटेगी.

    तभी रवि ने पकड़ कर मुझे अपनी तरफ़ मोड़ कर सीधा कर लिया.
    वे अपनी गर्म सांसें मेरे मुँह पर छोड़ने लगे.

    मेरे हाथ खुद ही उनके कंधों पर पहुंच गए और मेरे बूब्स तन कर रवि की छाती को छूने लगे थे.

    रवि ने मेरे होंठों को अपने मुँह में भर लिया.
    मुझ पर उनके लौड़े का नशा चढ़ गया था इसलिए मैं चुपचाप उनका साथ देती रही.

    थोड़ी देर अपने होंठों को चुसवाने के बाद मैंने मुँह खींच लिया.
    मेरी चूत रिसने लगी थी, पूरी पैंटी गीली हो गई थी.

    मेरा मन अब चुदाने को हां करने के बहाने ढूँढने लगा.
    मैं सोचने लगी कि अब कभी ना कभी तो नए जीवन की शुरुआत करनी पड़ेगी … मैं इनका जीवन क्यों खराब करूँ? इनका भी तो हक़ है मुझ पर!

    मैंने अपनी चूत की हालत देखकर सुनील को मन ही मन बोला- सॉरी, अब मैं नहीं रुक पाऊंगी.
    बस मैंने रवि के लौड़े पर हाथ रख दिया.

    ये देख रवि बहुत खुश हुए और मेरे हाथ के ऊपर अपना हाथ रख कर लौड़े को कस लिया.

    उनका आधा लौड़ा भी मेरी मुट्ठी में नहीं आ पा रहा था और यह एक बिलांड जितना लंबा था.
    कमाल की बात यह थी कि रवि का लंड गोरा था उसका टोपा बहुत मोटा था, झांटें बिल्कुल साफ़ थीं.

    सुनील का लंड तो इसके आगे आधा भी नहीं था.
    यह देखकर मैं बहुत खुश हुई कि अब से इस पर मेरा हक़ है और कभी भी चुदवा सकती हूँ.

    मैं ऊपर से लंड को सहला रही थी और रवि काम भरी सिसकारियां लेने लगे थे.

    तभी रवि ने मुझे अपनी बांहों में उठा लिया और बेड पर लिटा दिया.

    उसके बाद रवि ने मेरे गहने एक-एक करके उतारना शुरू कर दिए.
    मैंने आंखें बंद कर लीं और बस चुपचाप लेटी हुई रवि के हाथों से खुद को नंगी करवा रही थी.

    गहनों के बाद वे साड़ी की पिन खोलने लगे.
    ये देखकर तो मेरी चूत में आग सी लग गई क्योंकि अब ज़्यादा देर नहीं थी हमबिस्तर होने में.

    जल्द ही मैं सिर्फ़ ब्रा और पेटीकोट में थी.

    रवि मेरे दोनों पैरों के बीच आए और पेटीकोट को उठा कर अपने फौलादी हाथों को जांघों पर फिराने लगे.

    मैंने अंगड़ाई लेकर दोनों हाथों से बेडशीट पकड़ ली.
    तभी रवि ने अपना हाथ चूत के ऊपर रख दिया.

    उन्होंने मेरी तरफ़ देख कर नॉटी सी स्माइल दी तो मैं समझ गई कि रवि को मेरी चूत गीली होने का पता लग गया है.

    मैंने भी शर्मा कर स्माइल करके खुद को रवि को समर्पित करने का इशारा कर दिया.

    अब रवि ने पैंटी को नीचे खींच कर निकाल दिया.
    मेरी चिकनी साफ़ चूत देखकर वे बोले- वाह, कितनी सुंदर हो तुम … और तुम्हारा जिस्म!
    मैं मन ही मन बहुत खुश हुई.

    तभी रवि ने मुझे पकड़ कर उल्टा लिटा दिया और वे मेरे पैरों को चूमते हुए ऊपर आने लगे.
    उन्होंने फिर से मेरी जांघों को चूमा और मेरे एक कूल्हे को अपने मुँह में भर कर दांतों से काट लिया.

    ‘आआआह’ करके मैंने उस लव बाइट का मज़ा लिया.
    फिर मेरी कमर को चूमते हुए मेरी पीठ पर चिपक गए.

    उनका लंड मेरी गांड पर दब रहा था.
    उस Xxx लंड की लंबाई और मोटाई मैं अपने मन में नापने लगी.
    इससे मेरी चूत गर्म हो कर फड़कने लगी.

    फिर रवि ने मेरे बालों को एक तरफ़ कर के मेरी गर्दन पर गर्म सांसें छोड़ते हुए मुझे चूमने लगे तो मैं कामुक सिसकारियां लेती हुई उनका साथ देने लगी.
    मुझे इस तरह पोजीशन में बहुत अच्छा लग रहा था.

    फिर रवि ने अपने दोनों हाथों से बोबे पकड़ लिए और दबाने लगे.
    मैं अपने पैरों को रवि के पैरों में कसने लगी.

    फिर उन्होंने अपने हाथ नीचे ले जाते हुए मेरी कमर के नीचे घुसा दिए.
    हाय … मैं तो मज़े में पागल सी होने लगी और अपनी कमर उठा कर ऊपर-नीचे करने लगी.

    तभी मेरी कामुक अदाओं को देखकर रवि पूरे जोश में आ गए और मुझे सीधा करके खुद बेड से उतर गए.
    मैं समझ नहीं पाई कि वे क्या करना चाह रहे हैं.

    तभी वे मेरे दोनों पैर खींचकर बेड के एक कोने में ले गए तो मैं एकदम से सन्न ही रह गई.
    रवि ने मेरे पैर फैलाए और मेरी चूत की पंखुड़ियों को अपने मुँह में भर लिया.

    आआ आह रवि बहुत मज़ा आ रहा है … चूसो मुझे … आआहा उफ़्फ़ आआह्ह्ह!’
    मैं मदमस्त होकर के बुदबुदाने लगी.

    मेरी कामुक सिसकारियां सुन कर रवि ने अपनी पूरी जीभ मेरी तड़फती चूत में घुसेड़ दी.

    मैंने भी अपने दोनों हाथों से रवि का सिर पकड़ लिया और चूत पर दबाती हुई अपने कूल्हे उठा-उठा कर उनकी जीभ को अन्दर तक घुसवाने लगी.

    मुझे लग रहा था कि अगर एक-दो बार और कूल्हे उठा दिए तो मैं अभी झड़ जाऊंगी.
    मुझसे अब और रुका ही नहीं जा रहा था.

    मैंने जल्दी से रवि को अपने ऊपर खींच लिया- प्लीज डाल दो रवि जी … अब रुका नहीं जा रहा … अपनी बीवी बना लो मुझे … मैं बहुत समय से प्यासी हूँ. मेरी प्यास बुझा दो!

    तभी रवि ने लंड को चूत पर रगड़ कर टोपे को मेरी चूत के ही पानी से गीला किया और मुझसे चिपक कर चूत के ऊपर लंड को रगड़ कर मुझे तड़पाने लगे.

    मैं उनके लंड की प्यासी हो गई और कराहती हुई बोली- आह डालो ना रवि जी … आह!
    लेकिन शायद उन्हें मेरी तड़प भरी सिसकारियों को सुनने में बहुत मज़ा आ रहा था.

    अब इंतज़ार की हद हो गई थी और मेरे लिए और रुक पाना संभव नहीं हो पा रहा था.
    मैंने पूरी शर्म छोड़ कर उनका घोड़े जैसा लंड … जिसमें बहुत वज़न लग रहा था, उसे अपने हाथों में पकड़ा और चूत के छेद पर रख कर रवि की कमर को पकड़ लिया.
    उसी पल मैंने अपने कूल्हे एक ज़ोरदार झटके से ऊपर उठाए तो उनका लंड का सुपार अन्दर घुस तो गया, लेकिन मेरी जान ही निकल गई.

    इतनी गीली चूत होने के बाद भी लंड का सुपारा मेरी चुत में फंस गया था.
    लंड अब ना अन्दर घुस पा रहा था और ना बाहर निकल पा रहा था.

    ‘प्लीज़ रवि जी … इसे बाहर निकालो मैं मर जाऊंगी!’
    मैं उनकी कमर को दूर धकेलने लगी.

    तभी रवि ने धीरे-धीरे से अपने लंड के सुपारे को मेरी चुत से बाहर निकाला.
    अब जाकर मुझे सांस आई.

    रवि समझ चुके थे कि चाहे मैं कितनी भी चुद गई हूँ लेकिन चूत एकदम कुंवारी जैसी ही है.
    अब उनके घोड़े जैसे बिग लंड के आगे तो मैं कुंवारी जैसी ही थी.

    तभी रवि ने आलमारी से एक जैल निकाला और अपने लंड पर मल लिया.
    उन्होंने कुछ जैल उंगलियों में लेकर मेरी चूत में भी लगा दिया.

    अब उन्होंने वापिस अपने लंड को मेरी चुत के छेद पर लगा कर एक झटका मारा.
    ‘आ आआह मर गई आआ हाह छोड़ो प्लीज़ …’

    लेकिन इस बार उन्होंने मेरी एक ना सुनी और लंड को चुत की गहराई में दबाते ही चले गए.
    जैल की वजह से लंड फंसता-रगड़ता हुआ घुसता जा रहा था और मैं तड़पड़ाती रही थी.
    एक बार तो मेरे आंसू निकल गए.

    वे एक पल को रुके और बस चुपचाप मुझसे चिपक कर मेरे एक बोबे को चूसने लगे.
    जब चूत पानी छोड़ने लगी, तब जाकर दर्द कम होने लगा और मज़ा आने लगा.

    तभी उन्होंने फिर से एक झटका मारा तो Xxx लंड ब/च्चेदानी से अटक गया.

    अब मैं समझ चुकी थी कि यह इससे ज़्यादा नहीं घुस पाएगा.
    उनके बिग लंड की लंबाई मेरी चूत की गहराई से भी ज़्यादा थी.

    वे रुके और मेरे आंसू पौंछ कर मेरे माथे को चूमा.
    फिर होंठों को अपने होंठों में भरकर मेरे मुँह में अपनी जीभ डाल दी.
    मैं उनकी जीभ चूसने लगी.

    रवि एक सॉलिड मर्द हैं … ये मैं जान गई थी.

    अब मेरे जिस्म में सिर्फ़ हवस ही हवस भर गई थी … और क्यों ना भरे, ऐसा लंड पाकर तो बुढ़िया भी जवान हो जाए.

    अब रवि ने अपने दोनों हाथ पीठ के नीचे लगाए और धीरे-धीरे लंड को अन्दर-बाहर करने लगे.

    मैंने अपने पैर अपने पेट पर मोड़ लिए, जिससे लंड अन्दर-बाहर करने में थोड़ी आसानी हो.

    मेरी चूत का सफ़ेद-सफ़ेद सा गाढ़ा चिकना तरल रवि जी के लंड से चिपक कर बाहर आ रहा था

    आज मुझे पता चला कि असली संभोग क्या होता है.
    इतने सालों से मेरे पति सुनील के साथ कभी इतना मज़ा नहीं आया था.

    मैं मन ही मन अपनी उस सहेली को थैंक्स बोलने लगी, जिसने मुझ पर शादी के लिए दबाव बनाया था.

    अब तक मेरा पूरा दर्द ख़त्म हो गया था और मज़ा आने लगा था.

    उन्होंने धक्कों की स्पीड बढ़ा दी.
    मैं भी उनकी पीठ को सहलाने लगी.

    वे ज़ोर-ज़ोर से लंड पेलने लगे.
    जोश में मेरे नाखून उनकी पीठ पर गड़ने लगे.

    ‘आह चोदो रवि जी … आह मेरे राजा चोदो मुझे … इस चूत में जो आग लगी है आह उसे आज बुझा दो … अब से मुझे रोज़ ऐसे ही चोदना … ऐसी तो मैं कभी नहीं चुदी … आ आआह फ़ाड़ डालो रवि जी प्लीज़ … आआह उफ़्फ़ फ़क्क्क …’
    मेरा पानी झड़ने वाला था तो मैंने ज़ोर से रवि जी को कस लिया और अपने पैरों से उनकी जांघों को लपेट लिया.

    मैं खुद अपनी गांड उठा कर नीचे से झटका मारने लगी.
    ऊपर से रवि जी के झटके मेरी चुत को भोसड़ा बनाने पर तुले हुए थे.

    ‘आआह उऊऊई चोदोओओ …’

    हम दोनों के बदन की थरथराहट के बीच मेरी नाज़ुक चूत पिस कर झड़ गई थी.
    मैं चिपकी रह गई थी.

    ये देख वे भी रुक गए और बस हम दोनों कुछ मिनट तक ऐसे ही पड़े रहे.

    फिर रवि जी ने अपने लंड को बाहर निकाला तो मैंने देखा कि वह एकदम लाल हो चुका था.
    मेरी चूत भी लाल हो गई थी.

    लेकिन रवि जी अभी भी भूखे थे.
    उन्होंने मुझे उल्टा पटक कर कुतिया बनाया और पीछे से चुत में वापस लंड डाल दिया.

    उन्होंने पलक झपकते ही मेरी कमर पर अपने दोनों हाथ जमाए और झटके मारने लगे.
    उनके लंड के आगे मेरी चूत छोटी पड़ रही थी.
    इसलिए हर झटका मेरी ब/च्चेदानी को छू रहा था.

    इससे मैं फिर से तैयार होने लगी.
    मैंने मुँह बेड पर टिका लिया और झटकों का मज़ा लेने लगी.

    हर ज़ोरदार प्रहार के साथ मैं आगे को होती जा रही थी, इसलिए रवि जी ने मेरे हाथ पकड़े और पीछे की तरफ़ खींचने लगे.

    तभी अचानक से करंट बढ़ा और मैं फिर से झड़ने वाली हो गई थी.
    रवि जी के लंड के प्रहारों के सामने मेरी चूत टिक नहीं पाई और एक बार फिर झड़ गई.

    फिर वापिस उन्होंने मेरे मना करने के बावजूद मुझे सीधा लिटाकर पेलना शुरू कर दिया.
    जैसे ही वे झड़ने वाले थे, उनकी स्पीड बढ़ गई.
    हैपी एंडिंग सेक्स करती हुई मेरी ब/च्चेदानी से लंड टकराने से मैं तीसरी बार खाली हो गई.

    इस बार वे भी मुझे मेरे होंठों को चूसते हुए खाली हो गए.

    उस दिन मैं सुनील को भूल गई थी.
    रवि ही मुझे सुनील लगने लगे थे.
    उनका प्यार पाकर मैं निहाल हो गई थी.

    अब मैं रवि जी से रोज़ खुल कर चुदवाने लगी थी.
    यह मेरे जीवन की सेक्स कहानी उन जवान विधवाओं को समर्पित है जो अपनी शर्म को छोड़ कर जीवन का आनन्द लेने के लिए आगे बढ़ने में संकोच करती हैं.

    मैं उन्हें कहना चाहती हूँ कि जीवन में सेक्स करना एक प्राकृर्तिक क्रिया है और यह हरेक के जीवन में कुछ ही समय के लिए कारगर होटी है.
    इससे कोई समस्या नहीं है, प्लीज जीवन का आनन्द जरूर लें.

    आप मुझे मेरी हैपी एंडिंग सेक्स कहानी के लिए अपने विचार जरूर पोस्ट करें.

  • कुंवारी गर्लफ्रेंड के साथ पहली बार चुदाई

    वर्जिन गर्ल फर्स्ट सेक्स कहानी में मेरी दोस्ती एक लड़की से हो गयी. मैंने उसे प्रोपोज भी कर दिया. हम सेक्सी बातें करने लगे और अपने पहले सेक्स के लिए उतावले थे.

    दोस्तो!
    मेरा नाम राहुल है और मैं आगरा का रहने वाला हूँ.
    मैं अभी हाल ही में अपनी b.sc. पूरी की है.

    मेरी हाईट 5 फुट 8 इंच है और मेरे लन्ड का साइज 7 इंच है.

    फिलहाल मेरी उम्र 23 साल है।

    मैं इस साइट का नियमित पाठक हूँ.
    यहाँ बहुत सी उत्तेजित कहानियां पढ़ कर मुझे लगा कि मैं भी अपनी कहानी आपके साथ शेयर करूं।

    मेरी यह पहली कहानी है तो आप मुझे मेरे मेल आईडी पर अपना बहुमूल्य मत साझा करें।

    तो वर्जिन गर्ल फर्स्ट सेक्स कहानी में अब मैं आपको काजल के बारे में बारे में बताता हूँ.
    वह मुझे अपनी ग्रेजुएशन के दौरान ही मिली थी.

    वह दिखने में एकदम सिंपल सेक्सी जीरो फिगर वाली लड़की है, उसके बूब्स 30, कमर 26 और गांड 32 की है।

    तो अब आपको ज्यादा बोर न करते हुए कहानी पर आते हैं.

    यह कहानी आज से 2 साल पहले की है.
    इस समय तक मैं और काजल अच्छे दोस्त बन चुके थे.
    हम दोनों आपस में हर तरह बात शेयर किया करते थे।

    मैं उसे मन ही मन पसंद करता था.
    तो मैंने उसे वेलेंटाइन वाले दिन प्रपोज करने का सोचा.

    पर उस समय मेरी गांड भी फट रही थी कि कहीं वह मना ना कर दे!

    जैसे तैसे करके मैंने उसे लाल गुलाब देकर प्रपोज कर दिया.
    लेकिन हुआ कुछ उल्टा!
    पता चला कि वह भी मुझे पसंद करती थी और उसने मेरा प्रपोजल स्वीकार कर लिया।

    फिर मैं उसे पास ही के एक पार्क में ले गया.
    वहाँ जाकर हमने थोड़ी बहुत इधर उधर की बातें की.

    और अचानक से मैंने उसके लिप्स पर किस कर दिया.

    उसे समझ नही आया कि क्या हुआ और उसने अपनी आंखें बड़ी कर ली.
    मुझे लगा कि वह गुस्सा हो गई.

    लेकिन उसने कोई रिस्पॉन्स नहीं दिया और मैं उसके लब चूसता ही रहा.
    थोड़ी देर बाद वह भी जोश में आ गई तो उसने भी मुझे किस करना शुरू कर दिया.

    मैं धीरे धीरे आगे बढ़ा और उसके कमीज के ऊपर से ही उसके छोटे छोटे मजेदार बूब्स को सहलाना शुरू कर दिया.

    उसे जोश आने लगा तो वह वहीं घूम कर मेरे पैंट में बने हुए लन्ड के तंबू के ऊपर बैठ गई और पागलों की तरह मुझे किस करने लगी।

    थोड़ी देर बाद मुझे पता लगा कि कुछ लड़के हमारी तरफ आ रहे हैं.
    मुझे समझ आ रहा था कि वे क्या करने वाले हैं.

    इसीलिए मैंने उसे रोका और हम वहाँ से खिसक गए।

    फिर रात को हमारी फोन पर बात हुई.

    शायद दिन में जो जोश हमें आया था, वह ठंडा नहीं हुआ था.
    तो हमने फिर फोन सेक्स करना शुरू कर दिया.

    शायद यह इसीलिए भी था कि अब तक न उसने किसी के साथ सेक्स किया था और ना ही मैंने!

    कुछ दिन तक ऐसे ही रात को न्यूड वीडियो कॉल पर ही सेक्स चलता रहा.

    फिर हमारे एग्जाम्स भी पास आ रहे थे, उसी टाइम उसके घर वालों उनके गांव जाना था.
    लेकिन एग्जाम्स और असाईनमेंट्स की वजह से वह नहीं गई.
    तो उसके घर वालों ने उसके पड़ोस की लड़की को उसके पास सोने के लिए बोल दिया।

    जब यह बात उसने मुझे बताई तो मैं मन ही मन खुश हो गया और उससे मिलने की बात की.
    तो उसने बोला कि रात को 11 बजे कंडोम लेकर उससे मिलने आऊं।

    फिर उसके इतना बोलने पर 10 बजे मैं घर से निकल गया और ठेके से जाकर 2 बीयर ले ली.
    लेकिन मैंने कंडोम नही लिया क्योंकि मैं पहली बार बिना कंडोम के ही करना चाहता था।

    जब मैं उसके घर पहुंचा तो उसे फोन किया.
    तो वह और उसके साथ वाली लड़की दोनों दरवाजे पर आ गई.
    मैं दूसरी लड़की को देख कर एकदम चौंक गया क्योंकि काजल ने मुझे उसके बारे में कुछ बताया ही नहीं था.

    वैसे उस लड़की का नाम प्रिया था, वह दिखने में बहुत ही मस्त माल थी साली!
    उसके बूब्स 32, कमर 28 और गांड 34 की थी.

    मैंने उसको भी चोदा था. उसकी कहानी मैं आपको बाद मैं बताऊंगा, आज मैं सिर्फ आपको काजल की चुदाई के बारे में ही बताता हूँ।

    फिर काजल ने बताया कि प्रिया बस उसकी हेल्प के लिए ही है और उसे सब पता है.
    तो मैं थोड़ा नॉर्मल हुआ.
    लेकिन प्रिया की आंखों में एक अजीब सी ही मस्ती थी।

    ये सब इग्नोर करके मैं अंदर आ गया.
    अभी तो बस मैं काजल की वर्जिन जवानी का ही मजा लेना चाहता था।

    तो हम प्रिया को नीचे छोड़ कर सीधा ऊपर काजल के रूम में आ गए.

    जैसे ही काजल ने रूम लॉक किया, वैसे ही मैंने काजल को पीछे से जकड़ लिया और उसके बेड पर पटक दिया.

    मैं उसके ऊपर कूद गया और उसे पागलों की तरह चूमने और चाटने लग गया.
    वह भी मेरा साथ देने लगी.

    फिर एक झटके में ही मैंने उसकी शर्ट और सलवार उतार फैंकी.
    उफ्फ दोस्तो … क्या बताऊं! मैं पहली बार किसी लड़की को ब्रा और पैंटी में देख रहा था.

    मैं तो मानो जैसे पागल हो गया और अगले ही पल उसकी ब्रा भी निकाल फेंकी और उसके निप्पल को मुंह में लेकर चूसने लग गया।

    फिर उसने मुझे धक्का दिया और बोली- मुझे ही नंगी करोगे या खुद अपना भी आजाद करोगे? देखो कैसे पैंट में से बाहर आने को उतावला है।
    मैं- तुम खुद ही आजाद कर दो ना इसे मेरी जान!

    बस इतने कहने की ही देर थी कि अगले ही पल उसने मेरे सारे कपड़े निकाल दिए और मेरे लन्ड को अपने हाथ में लेकर बोली- उफ्फ राहुल … मेरी चूत बहुत छोटी है. यह अंदर कैसे जायेगा?
    मैं- देखून तो कैसी है?

    इतने में मैंने उसकी पैंटी निकाल के उसे पूरी नंगी कर दिया और उसकी चूत को अपने हाथ से सहलाने लगा.
    काजल- उफ्फ आह … ओह यस बेबी हा हा ओह!
    वह ऐसे ही जोर जोर से सिसकारियां ले रही थी.

    फिर मैंने उससे लन्ड चूसने को कहा.
    तो वह मना करने लगी.

    उसके मना करने पर मैं उसके बूब्स पर टूट पड़ा और जोर जोर से चूसने और काटने लगा.
    मैं अपने एक हाथ से उसकी चूत सहला रहा था.

    और फिर अपनी एक उंगली मैंने उसकी चूत में डाल दी.
    तो वह एकदम सिहर उठी.

    सच में यार बहुत टाइट थी उसकी चूत!
    मैं उसकी चूत में उंगली करता रहा.

    पहले तो उसे थोड़ा दर्द हुआ, फिर बाद में वह गांड़ उठा उठा कर मेरी उंगली अपनी चूत में लेने लगी.
    और वह बस जोर जोर से सिसकारियां ले रही थी.
    साथ ही मेरे लन्ड को अपने हाथ से आगे पीछे कर रही थी।

    फिर जब उससे रहा न गया तो उसने मेरा लन्ड अपनी चूत में लेने को कहा.
    मैं भी अपना लन्ड उसकी चूत में डालने को बेकरार था।

    अगले ही पल में उसकी चूत के पास आ गया और अपना लन्ड उसकी चूत के ऊपर सेट किया और एक धक्का दिया.
    तो मेरा लन्ड फिसल गया.
    थोड़ी और कोशिश करने पर भी अंदर नहीं गया.

    फिर मैंने उसके बेड के पास रखी वेसलीन देखी तो ढेर सारी वेसलीन अपने लन्ड पर लगा ली और थोड़ी उसकी चूत पर भी लगा दी.
    मैं समझ गया था कि काजल ने इसी लिए वेसलीन लाकर रखी हुई थी.

    तब मैंने उसकी चूत को थोड़ा खोलकर उसमें एक जोरदार धक्का लगाया और मेरा लन्ड का आगे का हिस्सा उसकी चूत में था.

    तो वह एकदम से चिहुंक उठी और चिल्लाने ही वाली थी कि मैंने अपने होठों से उसके होंठ बंद कर दिए.
    लेकिन वह अपने हाथों से मुझे पीछे धकेलने लगी.

    तो मैंने उसे पूरा जकड़ लिया तो वह कुछ कर नहीं सकती थी।

    फिर मैंने उसके लब चूसने और उसके बूब्स सहलाने शुरू कर दिए.
    फिर थोड़ी देर बाद वह थोड़ी नॉर्मल हुई तो मैंने बिना देर किए एक और धक्का लगा दिया.

    इस बार तो मुझे भी ऐसा लगा कि जैसे मेरा लन्ड ही फट गया हो.

    और काजल का भी हाल बेहाल था.
    वह छटपटाने लगी और उसकी आंखों से आंसू बह रहे थे.

    और मुझे भी बहुत दर्द हो रहा था.

    तभी मेरी नजर पास ही टेबल पर रखी बीयर पर गई जो मैं लेकर आया था।

    मैंने उसकी चूत में लन्ड डाले डाले ही बीयर उठाई.
    एक मैंने ली और एक उसे दे दी और बोला- इससे दर्द थोड़ा कम होगा.

    फिर हम दोनों ने अलग होकर बीयर पीकर खत्म की.

    तब तक थोड़ा दर्द भी कम हुआ तो मैंने अपना पूरा लन्ड उसकी चूत में ही डाल दिया.
    उसकी चूत से खून आने लगा.

    लेकिन थोड़ा सा बीयर का और थोड़ा हमारी हवस का नशा हमारे सिर चढ़ा हुआ था तो दर्द ज्यादा महसूस नहीं हुआ.

    फिर मैं धीरे धीरे लन्ड आगे पीछे करने लगा और हमारी चुदाई शुरू हो गई.

    और थोड़ी देर बाद तो हम जैसे दर्द को भूल ही गए।
    हमारी धकापेल चुदाई शुरू हो गई.

    और थोड़ी देर बाद तो हम जैसे दर्द को भूल ही गए।
    हमारी धकापेल चुदाई शुरू हो गई.

    काजल जोर जोर से सिसकारियां लेने लगी.
    हम दोनों इतने मदहोश हो गए कि प्रिया के बारे में बिल्कुल ही भूल गए.
    बस हमें अब अपनी चुदाई से मतलब रह गया था।

    काजल- आह आह … उफ्फ यस राहुल … चोदो उफ्फ … आह ओह हां हां … यस चोदो मुझे!

    मुझे उसकी ये सिसकारियां सुन के जोश चढ़ने लगा और मैं बस उसे चोदने के बारे में ही सोच रहा था.

    मेरे दिमाग में बस उसकी चूत और बूब्स का ही ख्याल था … और किसी चीज का मुझे होश ही नहीं था.

    मैं बस उसे जोर जोर से चोदे जा रहा था और वह सिसकारियां ले रही थी.

    उसकी मादक सिसकारियों से पूरा कमरा गूंजने लगा.
    और मेरा लन्ड अपनी पहली चूत चुदाई का पूरा अहसास ले रहा था.

    फिर कुछ देर बाद वह वर्जिन गर्ल फर्स्ट सेक्स करके झड़ गई और निढाल होकर बेड पर लेट गई.

    लेकिन यह मेरी पहली चुदाई का अनुभव था तो मैंने उसे चोदना बंद नहीं किया और उसे लगातार चोद रहा था.
    फिर करीब 2 मिनट बाद मेरा लन्ड भी अपना रस छोड़ने वाला था तो मैंने उसकी चूत से अपना लन्ड निकाला और उसके बूब्स पर अपना रस छोड़ दिया.
    और फिर मैं उसी के ऊपर लेट गया।

    थोड़ी देर बाद उसे होश आया तो उसने मुझे अपने ऊपर से बगल में लिटा दिया और मुझसे चिपक कर सो गई।

    और मैं भी थका हुआ था मुझे भी नींद आ गई.
    सुबह जब हम उठे तो उसकी चूत और मेरा लन्ड दोनों ही दर्द कर रहे थे.

    अब न मुझमें उसे चोदने की हिम्मत हो रही थी और न ही उसे चुदवाने की.
    तो मैंने अपने कपड़े पहने और उसे किस करके घर आ गया।

    अब तो हम दोनों ही चुदाई का मजा ले चुके थे.
    तो अब हमें जब भी मौका मिलता, हम चुदाई कर लेते थे.

    फिर उसने प्रिया को भी मुझसे चुदवाया.
    वह मैं आपको अगली कहानी में बताऊंगा।

    तो दोस्तो, कैसी लगी आपको मेरी पहली चुदाई की वर्जिन गर्ल फर्स्ट सेक्स कहानी?

  • पड़ोसी लड़के से बुर की सील तुड़वा ली मैंने

    दोस्तो, मैं अंजलि फिर एक बार एक नई सेक्स कहानी के साथ हाजिर हूँ.

    यह सेक्स कहानी मेरी एक प्रशंसिका सपना ने मुझे भेजी है और कहा है कि मैं उसके लिए इस घटना को कहानी के रूप में लिख कर अन्तर्वासना या फ्री सेक्स कहानी की साइट पर प्रकाशित करवाऊं.

    इस कहानी में गोपनीयता के लिहाज से सब नाम बदले हुए हैं.

    इस सेक्स विद टीनऐज गर्लफ्रेंड कहानी को आप सपना के शब्दों में सुनें.

    नमस्ते दोस्तो, मेरा नाम सपना है और मैं सूरत से हूं.
    मेरी उम्र 28 वर्ष है और मेरी शादी हो चुकी है, मेरा एक बेटा भी है.

    आज मैं जो कहानी बताने जा रही हूं, यह मेरी जीवन की एक सच्चाई है.

    यह घटना आज से सात साल पहले शुरू हुई दास्तान है जो हमारे पड़ोस में रहने आए एक व्यक्ति के साथ शुरू हुई थी.

    मेरे घर में हम चार लोग थे. मैं, मेरी बहन खुशबू, मां विमला और हमारे पापा अशोक.
    मेरे पापा एक कपड़े की मिल में मुंशी हैं.
    मां घर में ही रहती हैं. हम दोनों बहनों की पढ़ाई चल रही थी.

    मेरा पढ़ाई में मन बिल्कुल भी नहीं लगता था, बस ग्रेजुएशन पूरा कर रही थी.

    वहीं खुशबू पढ़ने में ज्यादा होशियार थी इसलिए वह सबकी लाड़ली भी थी.

    खुशबू मुझसे केवल एक साल ही छोटी है.
    तब मैं 21 साल थी.

    एक दिन हमारे घर के ठीक सामने एक परिवार रहने आया.
    उसमें माता पिता और उनका एक लड़का था, जो 25-26 वर्ष का होगा.

    उस परिवार का परिचय हम सबसे हुआ तो पता लगा कि उस लड़के का नाम विपुल है, वह एक मेडिकल कंपनी में काम करता है.

    वह अक्सर छत पर दिखता था और हमें ही घूरता रहता था.
    खुशबू उस पर ध्यान नहीं देती थी, पर मैं भी उसे ही देखती थी.
    मुझे वह अच्छा लगता था.

    कुछ दिनों बाद उसके माता पिता चले गए और अब विपुल अकेला ही रह गया था.

    मेरे पापा पर उनके सेठ जी को सबसे ज्यादा भरोसा था इसलिए वे पापा के ऊपर ही सारी जिम्मेदारी दिए रहते थे.
    इसी कारण से पापा कुछ ज्यादा ही व्यस्त रहते थे.
    वे घर पर ज्यादा ध्यान नहीं दे पाते थे.
    इस कारण से मां अक्सर नाराज रहती थीं.

    एक बार कुछ काम पड़ा तो मां बोलीं- जा, विपुल को बुला कर ला!

    हम दोनों बहनों को थोड़ा अजीब लगा कि ज्यादा जान पहचान नहीं है … और मां उसे बुलाने के लिए पूरे जोश से बोल रही हैं.

    मां और विपुल में क्या बात हुई, ये तो पता नहीं … पर उसने उसी वक्त हमारी मदद के लिए कुछ पैसे दिए थे.

    विपुल मुझे अच्छा लगता था, उसका कद 5 फुट 10 इंच का था.
    उसने अपने शरीर का काफी ध्यान रखा था और काफी स्मार्ट था.

    वहीं मेरा कद 5 फुट 5 इंच का था और फिगर 30-28-32 का था.

    मैं विपुल को अपना बॉयफ्रेंड ही मानने लगी थी.
    लेकिन वह क्या सोचता था, इसका मुझे कुछ नहीं पता था.

    मां काफी देर तक उससे बातें करती थीं.

    तब मेरी समझ में यह नहीं आया था कि ऐसा क्यों होता था?

    हमारी परीक्षाएं खत्म हो गई थीं.

    उसके एक दिन पहले हमारे मोहल्ले में एक पार्टी थी और सभी को बुलाया गया था.

    तय समय पर हम सब पार्टी में पहुंच गए.

    मेरी मां पहले से ही वहां थीं, जो अपनी सहेलियों से बात कर रही थीं.
    वहां वे विपुल के साथ दिख रही थीं.

    मैं वहां गई तो विपुल ने मेरी गांड पर धीरे से हाथ फेर दिया.
    जब मैंने मुड़कर देखा, तो उसने ऐसे देखा … जैसे कुछ हुआ ही नहीं.

    थोड़ी देर बाद उसने फिर वही एक चांटा सा धीरे से मारा और उधर से खिसक गया.

    अब मेरी नजरें विपुल को ही ढूंढ रही थीं क्योंकि वह अचानक से गायब हो गया था.
    मेरी मां भी नहीं दिख रही थीं.

    मां का तो पता था कि वह ज्यादा देर तक पार्टी में नहीं रहती हैं.

    रात के बारह बजे तक पार्टी खत्म खत्म होने को थी.
    सब खत्म होने के बाद मैं भी घर लौटी, तो देखा खुशबू छत पर फोन से बात कर रही थी और मां सो चुकी थीं.

    अगले दिन पापा ने खुशबू से कहा- विपुल को बुलाओ.
    जब वह आया तो हम सभी थे.

    पापा ने उससे कहा कि वह मुझे पढ़ाई में हेल्प करे!
    शायद पापा ने इसलिए कहा था क्योंकि यह मेरा आखिरी साल था.

    पहले उसने कुछ नखरे दिखाए, फिर मां ने कहा- थोड़ा ध्यान दो, मुझे तुमसे कुछ उम्मीद है.
    इस पर वह तैयार हो गया.

    मैं भी काफी खुश थी कि मुझे उसके साथ समय बिताने को मिलेगा.
    वहीं वह मेरी मां की तरफ देख रहा था और वे दोनों हंस रहे थे.

    मेरे प्रति उसके व्यवहार में कुछ फर्क आ गया था.
    अब वह मुझ पर एक हक सा जता रहा था.

    पढ़ाते हुए उसके हाथ मेरे जिस्म से टकरा जाते थे, तो कभी वह मेरे बूब्स पर हाथ से सहला देता.

    मुझे भी अच्छा लगता था इसलिए मैं भी उससे चिपक कर बैठ जाती थी.
    जिससे उसकी हिम्मत बढ़ गई.

    एक दिन पढ़ाते हुए उसने अचानक से मेरी चूत पर हाथ रखा और सहलाने लगा.
    मेरे मुँह से ‘आह …’ निकल गई.

    तभी उसने मुझे कमर से पकड़ लिया और दबाते हुए बोला- क्या हुआ, तुम ठीक हो न?
    मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि क्या कहूं?

    वह लगातार मेरी चूत सहलाता रहा.
    इससे पहले कि मैं कुछ कहती, उसने मुझे कस कर दबाया और मुझे किस करने लगा.

    इसमें पता ही नहीं चला कि कब मैं झड़ गई.
    तभी उसने मुझे छोड़ते हुए कहा कि हो गया काम!
    फिर वह उठकर चला गया.

    मैं यही सोचती रही कि ये क्या हुआ, सही था या नहीं?

    फिर मां से कहकर मैं अगले दिन कॉलेज चली गई.
    और जब लौटी तो देखा कि वह पहले से मौजूद है.

    मां मुझे आया देख कर वहां से बाहर निकल गईं.
    अब ये रोज होता था.

    मेरे से पहले वह मौजूद रहता था और मेरे शरीर को छूने के बहाने ढूंढता था.
    यह मुझे भी अच्छा लगता था.

    फिर एक दिन उसने पूछा- क्या हुआ आज कॉलेज में?
    मैं- कुछ खास नहीं, आज बस दो ही क्लास हुईं.

    विपुल- कौन कौन सी?
    यह कहते हुए वह आगे बढ़ा और मुझे अपनी बांहों में जकड़ लिया और मेरे माथे पर, आंखों पर किस करने लगा.

    तभी मैंने भी उसका लंड पकड़ लिया, जो तन रहा था.
    उसे शायद उम्मीद नहीं थी.

    तभी मैंने कहा- क्या है ये सब?
    वह मुझे अपनी बांहों में कसते हुए तेज आवाज में बोला- आंटी, आज मैं सपना को अपने साथ ले जा रहा हूं और इसको वहीं पढ़ा भी दूंगा.

    मैं धीमे से बोली- इसका क्या मतलब हुआ?
    विपुल- आज तुम्हें, तुम्हारी मां से मांग रहा हूं.

    इससे पहले कि मैं कुछ समझती कि मां ने जवाब देते हुए कहा- हां ठीक है, ध्यान रखना.
    विपुल बोला- हां जी बिल्कुल.

    उसने मुझे चलने का इशारा किया.

    मैं- वहां क्यों आज?
    विपुल- यहां कुछ सही नहीं लग रहा है … पता नहीं क्यों आज मजा नहीं आ रहा. मैं तुम्हारे दोनों होंठों को चखना चाहता हूं.

    मैं समझ गई कि यह मेरे नीचे वाले होंठों को जोड़ कर दोनों होंठों को चखने की बात कर रहा है.
    मैंने भी न जाने कौं सी रौ में कह दिया- अभी तक एक ही को लिया है क्या?

    वह शायद सुन नहीं पाया था.
    मेरा मतलब यह था कि क्या उसने अब तक किसी की चूत नहीं चोदी है क्या!

    घर पहुंचते ही उसने दरवाजा बंद किया और मुझे बेड पर धकेल दिया.
    फिर घूरते हुए कहा- क्या मस्त है तेरी जवानी भी!

    मैंने कहा- उस रात तुम्हीं मुझे तंग कर रहे थे न!

    विपुल- हां साली, चोदना तो मैं तुझे ही चाहता था लेकिन तेरी मां बीच में आ गई. लेकिन आज तुझे पूरा लेना होगा.
    मैं हंस कर रह गई और बोली- क्या पूरा लेना है?
    तभी उसने ‘लंड’ कहते हुए मेरी कुर्ती उतार दी.

    अब मैं सिर्फ ब्रा में थी और शर्मा कर मैंने अपनी आंखों को ढक लिया.

    मेरी आंखों पर से हाथ हटाते हुए वह मुझे किस करने लगा और अपना लंड सलवार के ऊपर से ही रगड़ने लगा.

    मैं भी मदहोश हो रही थी.

    तभी उसने मेरी सलवार भी उतार दी और बूब्स को दबाते हुए बोला- इनको तो बड़ा करना होगा.
    मैंने उसकी तरफ देखा तो वह सिर्फ अंडरवियर में था.

    मैं उठ कर उसका लंड सहलाने लगी जो अब काफी कड़क हो गया था और मोटा भी.

    हम दोनों अब एक दूसरे को चूमने लगे और एक दूसरे के जिस्म से खेल रहे थे.

    विपुल- अपनी मां से एक बात पूछेगी क्या?
    मैं- क्या?
    विपुल- वह क्या खाती थी जब तुझे पैदा किया?
    मैं- मतलब!

    विपुल- साली तू जो इतनी चिकनी है कि बस तुझे मसलते रहने का ही मन करता है.
    मैं चुदास भर स्वर में बोली- तो मसल दो न … मैंने कब मना किया है?

    मेरी चूचियों को दबाते हुए बोला- पूरी रंडी की तरह तैयार है चूत खुलवाने को!
    मैं अपने होंठ काट कर मुस्कुरा दी.

    वह मेरी चड्डी उतारते हुए मेरी जांघों को चूमने लगा और धीरे धीरे ऊपर आता जा रहा था.
    अब वह मेरी चूत में अपने होंठों को लगा कर चूसने लगा.

    मुझे चूत चुसवाने में बहुत अच्छा लग रहा था और मैं मचल रही थी.
    तभी उसने अपनी दो उंगलियां मेरी चूत में डाल दीं.

    मैंने कसमसा कर चादर को जोर से पकड़ लिया और मचलने लगी.

    कुछ ही देर में मेरा पानी निकल गया

    विपुल- साली लंड के लिए आवाज भी नहीं निकाल रही … मादरचोद, आज तेरी चूत का भोसड़ा बनाता हूं.

    वह मेरी चूत को अभी भी अपनी उंगलियों से चोद रहा था और मैं बस ‘आह ओह … ऐसे ही आज बना लो अपना आह मुझे!’ कह रही थी.

    विपुल- क्या बनाऊं साली … बहन की लौड़ी? बता न कुतिया बनेगी मेरी?
    मैं- आह … अपनी बीवी बना लो आह और मत तड़पाओ मुझे … अब चोद … दो आ … आह.

    तभी अचानक से उसने अपना 7 इंच का लंड मेरे मुँह में डाल दिया.
    विपुल- ले बहनचोद चूस इसे … आह.

    मैं भी उसका लंड चूसने लगी.
    उसका मोटा लंड मेरे गले में फंस रहा था और मैं जितनी ताकत से उसके लंड को बाहर निकालने की कोशिश करती, वह उतनी ही जोर से डाल रहा था.

    विपुल- ले साली छिनाल … आह चू….स अच्छे से मां की लौड़ी!
    मुझे उसकी गालियां अच्छी लग रही थीं.

    फिर उसने मुझे लिटा कर अचानक से एक ही झटके में मेरी चूत में अपना लंड ठांस दिया.

    मैं एकदम से लंड घुसने से जोर से चीख पड़ी.
    मुझे दर्द से बेहद तकलीफ हो रही थी.

    ऐसा लग रहा था मानो उसने मेरी चूत में गर्म खंजर घुसेड़ दिया हो.

    कुछ देर के लिए मेरी आंखें बंद रहीं.
    फिर मैं जैसे ही संभली तो देखा कि वह मुझे किस कर रहा है और धीरे धीरे लंड को चूत में अन्दर बाहर कर रहा है.

    मैं- आह बाहर निकालो … आह दर्द हो रहा है … आह अब बस … औ…र नहीं.
    विपुल- चुप साली रंडी, तेरी चूत फाड़ने के लिए अपने घर लाया हूं! ऐसे ही चुदती रह … तुझे मजा आएगा. इस वक्त मेरा लंड तेरे दूसरे होंठों को चूस रहा है बहन की लवड़ी … आज तेरे दोनों होंठों ने मेरा लंड चूसा. हां मेरी जान ऐसे ही लेती रह आह … तेरी चूत बहुत मस्त है.

    कुछ देर बाद मुझे अच्छा लगने लगा और मैं चुपचाप उससे चुदाई का मजा लेने लगी.

    फिर उसने मुझे पलटा और बोला- चल कुतिया बन जा!
    मैं जैसे ही कुतिया बनी उसने पीछे से मेरी चूत में अपना फनफनाता हुआ लंड एक झटके में ही घुसेड़ दिया और चोदने लगा.

    अब मैं भी उसका साथ दे रही थी और अपनी गांड उसके लंड के हिसाब से हिला रही थी.
    मैं भी पूरी मस्ती में आ गई थी और वह भी.

    मैं अब तक दो बार झड़ चुकी थी लेकिन वह अभी भी वैसे ही चोद रहा था.

    तब मैं बोली- आज मार ही डालोगे क्या … और कितना ठोकोगे मेरे नीचे वाले होंठों को?
    विपुल- बस मेरी जान ऐसे ही मजा लेती रह … आज तो तेरी चूत रबड़ी के जैसी मजा दे रही है!

    मैं- अब बस भी करो यार … तुम्हारे लंड के चक्कर में मेरी हालत खराब हो गई है.
    विपुल- बस आ रहा हूं मैं भी … ये ले और ले … आह साली कुत्ती … तेरी मां को चोदूं … बहन की लौड़ी आह आह.
    यही कहते हुए वह मेरी चूत में ही झड़ गया.

    हम दोनों हांफ रहे थे.

    तभी मेरी नज़र बेड पर गई.
    मेरी गांड के नीचे की तरफ वाला चादर खून से लाल हुआ पड़ा था.

    मैं- ये क्या किया तुमने?
    विपुल- आज तुझे जन्नत की सैर कराते हुए तुझे तेरी जवानी के बारे में बताया मेरी जान … और कुछ नहीं!

    मैं- अब ये साफ कैसे किया जाए?
    विपुल- घबराओ मत, तेरी मां ही सफाई करेगी!

    यह कहते हुए वह मुझे किस करने लगा और बोला- चल मेरे लौड़े को साफ कर!
    मैंने उसके लंड को उसी चादर से साफ किया. उसके बाद मैंने खुद को भी साफ किया और नहाने चली गई.

    सेक्स विद टीनऐज गर्लफ्रेंड का मजा लेने देने के बाद मैं अपने घर आ गई.

    कुछ देर बाद मैंने देखा कि सच में वह चादर हमारे घर में ही धुलाई के लिए रखी हुई है.

    उसके अगले दिन मां ने वह चादर धोकर विपुल के घर भिजवा दी.

    इसके बाद क्या हुआ अगली देसी कहानी में बताऊंगी.
    इस सेक्स विद टीनऐज गर्लफ्रेंड कहानी पर आप अपनी राय जरूर बताएं.

  • मामी ने मुठ मारना सिखाया

    मैं नया नया जवान हुआ था, मामा के घर गया. एक दिन मामी अपने बेटे को दूध पिला रही थी, मैं उनकी चूची देख रहा था. देखते हुए मामी ने मुझे पकड़ लिया. उसके बाद मामी ने …

    दोस्तो, मेरा नाम राज है। मैं पटना का रहने वाला हूं, मेरी उम्र 21 साल है और मैं अभी इंजीनियरिंग कर रहा हूं। मैं अन्तर्वासना का पुराना पाठक हूं. मैने सोचा कि क्यों न मैं भी अपनी एक कहानी लिखूं। मैं बहुत ही ठरकी किस्म का इंसान हूं लेकिन मैंने अभी तक किसी को चोदा नहीं है।

    अपनी ठरक के चलते मैं रोज पोर्न सेक्स वीडियो देखा करता हूं और सेक्स स्टोरी पढ़ कर मुठ भी मारा करता हूं. मुझे ये सेक्स और इससे संबंधित वीडियो और साहित्य में बहुत रूचि है. ऐसी चीजें देखते और पढ़ते समय मैं बहुत ही ज्यादा उत्तेजित हो जाता हूं. मुझे सेक्स चैट करने का भी शौक है.

    अब मैं आपका और समय न लेते हुए अपनी कहानी को आपके सामने रख रहा हूं. जैसा कि मैंने बताया कि मैंने अभी तक सेक्स नहीं किया है इसलिए मैं वर्जिन हूं. यह कहानी मेरी एक कल्पना है जिसमें मैंने अपनी सेक्स इच्छा को उजागर किया है.

    कहानी मेरी मामी के बारे में है. मेरी मामी देखने में एक टॉप माल है. उसकी उम्र 30 साल है और उसका फीगर 34-32-36 के करीब तो जरूर होगा. उसकी चूचियां काफी बड़ी बड़ी हैं. उसकी टाइट चूचियों और मोटी मोटी चूचियों को देख कर मेरे अंदर एकदम से वासना भर जाती है.

    मुझे हमेशा से ही बड़ी चूचियों को देखने और उनको हाथ से छूने की बहुत तमन्ना रहती थी. मगर आज तक मुझे ऐसी चूची को छूने का मौका नहीं मिला था. जब भी मैं अपने मामा के यहां जाता था तो मामी की चूचियों को देख कर मेरा मन बेकाबू सा हो जाता था.

    मेरी मामी दिल्ली में ही रहती है. मेरे मामा जी दिल्ली में नौकरी करते हैं. उनका एक 2 साल का बेटा भी है. उसका नाम करण है. दोस्तो, मैं देखने में काफी शरीफ सा लगता हूं लेकिन मेरे अंदर इतनी हवस भरी हुई है कि मैं हर वक्त लेडीज की चूचियों और गांड को ही ताड़ता रहता हूं.

    उस वक्त मैं अपने बोर्ड्स के एग्जाम देकर छुट्टियों में अपने मामा के यहां जा रहा था. स्टेशन पर ही मेरे मामा मुझे लेने के लिए आ गये. मैं और मामा घर के लिए निकल लिये.

    घर जाकर मेरी मामी ने दरवाजा खोला और मुस्कराकर मेरा स्वागत किया. उस वक्त मुझे उनके बारे में कुछ गलत ख्याल नहीं आ रहे थे. मैं नया नया जवान हुआ था लेकिन इतना भी ठरकी नहीं बना था कि अपनी मामी की चूत के बारे में ही सोचने लगूं. मुझे मुठ मारने या सेक्स करने के बारे में ज्यादा कुछ नहीं पता था.

    पहला दिन मैंने आराम किया. अगले दिन मामाजी की ऑफिस की छुट्टी थी तो मैं उनके साथ घूमने के लिए चला गया. शाम को हम लोग खाना भी बाहर ही खाकर आये थे. घर आकर मैंने थोड़ी देर के लिए टीवी देखा और फिर मैं सोने के लिए चला गया.

    मेरी मामी और मामा अपने बेटे करण के साथ एक रूम में सोने लगे. मैं दूसरे रूम में था. मुझे नींद नहीं आ रही थी. रात को मुझे फेसबुक और यूट्यूब पर वीडियो वगैरह देखने और फेसबुक चैट करने की आदत थी. मैं किसी लेडी के साथ बातें करते हुए अपने लंड को सहलाता रहता था. इस सब में मुझे बहुत मजा आता था.

    रात के 12 बज गये थे. मैं अपने लंड को सहला रहा था. मुझे पेशाब लगी तो मैं उठ कर बाथरूम में गया. जाते हुए मेरे कानों में कुछ धीमी धीमी आवाजें आईं. मैंने सुनने की कोशिश की तो मामी की आवाज थी- आह्ह… आह्ह… ईस्स… थोड़ा आराम से करिये न, अगर राज को सुनाई दे गया तो वो क्या सोचेगा?

    मुझे अंदाजा हो गया था कि अंदर मामा और मामी चुदाई कर रहे थे शायद. मगर मेरी इतनी हिम्मत नहीं हो रही थी कि मैं उनकी चुदाई देखने की कोशिश करूं या फिर वहीं खड़ा होकर उनकी बातें सुनूं. इसलिए मैं अपने रूम में वापस आ गया.

    अगली सुबह जब उठा तो उस दिन मामाजी घर पर ही थे. रविवार का दिन था. मैं फ्रेश हुआ और फिर किचन में गया. वहां पर मामी नाश्ता बना रही थी. पानी का गिलास भरते हुए मैंने मामी से पूछा- रात में आपको कुछ हुआ था क्या मामी?

    वो बोली- नहीं तो, मुझे क्या होने वाला था, ऐसा क्यों पूछ रहा है तू?
    मैंने कहा- पता नहीं, आपके रूम से कुछ दर्द भरी आवाजें आ रही थीं. मुझे लगा कि आपकी तबियत ठीक नहीं होगी.
    मेरी बात सुनकर मामी की जुबान जैसे लडखड़ा गयी और वो बोली- नन्.. नहीं तो … ऐसा तो कुछ भी नहीं हुआ.

    उसके बाद मामी मेरे सामने आने से बचने लगी. दोपहर को मैंने मूवी देख कर टाइम पास किया और उसके बाद फिर शाम को मैं घूमने के लिए निकल गया. वापस आकर खाना खाने के बाद मैं सोने के लिए चला गया.

    उस रात मेरे कान मामा-मामी के रूम की ओर ही लगे हुए थे लेकिन मुझे उस रात को कुछ भी आवाज नहीं सुनाई दी. फिर मुझे नींद आ गयी और मैं भी सो गया.

    अगले दिन मामाजी सुबह 8 बजे ऑफिस चले गये. मैं मामी के साथ बैठ कर बातें कर रहा था. तभी उनका बेटा करण रोने लगा. वो अभी 2 साल का ही था इसलिए उसको बार बार संभालना पड़ता था. उसको शायद भूख लगी थी.

    मेरी मामी ने मेरे सामने ही एक साइड से ब्लाउज के ऊपर करके अपनी चूची बाहर निकाली और अपने बेटे को दूध पिलाने लगी. उनकी मोटी और बड़ी चूची देख कर मेरी आंखें जैसे फटी रह गयी. मैं उनकी चूची को घूरने लगा.

    जब मामी ने देखा कि मैं उनकी चूची को ही घूर रहा हूं तो उन्होंने अपनी चूची को अपनी साड़ी के पल्लू से ढक लिया.
    मामी बोली- क्या देख रहा है?
    मैंने कहा- कुछ नहीं मामी, सॉरी.
    वो बोली- ठीक है, कोई बात नहीं

    फिर पता नहीं मामी के मन में क्या आया कि वो पूछ बैठी- तुमने अभी तक कोई गर्लफ्रेंड बनाई है या नहीं?
    मैंने कहा- नहीं मामी, मेरी तो कोई गर्लफ्रेंड नहीं है.
    वो बोली- ऐसा कैसे हो सकता है. तुम जवान हो गये हो. अभी तक हाथ से ही काम चला रहे हो क्या?

    मैंने अनजान बनते हुए कहा- मामी मैं आपकी बात समझा नहीं, हाथ से मतलब?
    वो बोली- बनो मत, सीधे से मेरे सवाल का जवाब दो.
    मैंने कहा- मैं नहीं समझ पा रहा आपकी बात.
    वो बोली- मुठ नहीं मारते क्या?

    इतना तो मैं जानता था कि मामी लंड के बारे में ही बात कर रही है लेकिन मुझे मुठ मारने का नहीं पता था.
    मैंने कहा- मुठ क्या होता है मामी?

    मामी बोली- तुम मेरे सामने ही नाटक कर रहे हो या तुम्हें सच में नहीं पता? इतने बड़े हो गये हो, तुम कंट्रोल कैसे करते हो?
    मैंने कहा- मामी, आप साफ साफ बताओ ना क्या कहना चाह रही हो?
    मामी बोली- अच्छा, सेक्स के बारे में तो पता होगा या वो भी नहीं पता?

    मैंने कहा- हां, उसमें तो लड़की को किस करते हैं.
    मामी बोली- किस से आगे और भी बहुत कुछ होता है. तुम्हें तो कुछ भी नहीं पता है अभी. अच्छा ये बताओ, तुमने कभी अपने पप्पू (लंड) को हिलाने की कोशिश नहीं की? अगर तुम अपने लंड को हिलाकर देखोगे तो तुम्हें बहुत मजा आयेगा.

    मुझे अपने लंड को सहलाने की आदत थी लेकिन मामी शायद किसी और बारे में बात कर रही थी.
    मैंने कहा- मुझे तो नहीं पता कि लंड को कैसे हिलाया जाता है.

    मामी बोली- कोई बात नहीं, मैं तुम्हें सिखा दूंगी लेकिन ये बात किसी से कहना मत.
    मैंने हां में गर्दन हिला दी.

    अभी मामी अपने बेटे करण को दूध पिला रही थी. दूध पिलाते हुए ही उन्होंने अपने चूचे से अपना पल्लू हटा दिया. मैं मामी के चूचे को नंगा देख कर आंखें फाड़ कर घूरने लगा.
    मामी बोली- पहले कभी नहीं देखा है क्या तुमने ये?

    मैंने कहा- मामी, देखा तो है लेकिन इतने पास से नहीं.
    वो बोली- कभी छूकर देखा है इसको?
    मैंने कहा- कभी नहीं.

    तभी मामी ने अपने दोनों बूब्स को बाहर कर लिया. उनके बूब्स बाहर लटकने लगे. एक को करण चूस रहा था और दूसरा हवा में झूल रहा था.
    मैंने कहा- मामी आपके दूध इतने बड़े कैसे हो गये?
    वो बोली- मुझे भी नहीं पता. बस हो गये हैं. एक तो ये करण इनको सारा दिन चूसता रहता है और तेरे मामा भी इनको नहीं छोड़ते हैं. दोनों बाप-बेटे मेरे दूधों को चूसते रहते हैं इसलिए शायद इतने बड़े हो गये हैं.

    मैंने पूछा- मामाजी और क्या करते हैं इनके साथ?
    वो बोली- इनको दबाते हैं.
    मैंने पूछा- आपके अपने दूध दबवाने से अच्छा लगता है क्या?
    वो बोली- हां, तुम्हें भी दबा कर देखना है क्या इनको?
    मैंने कहा- मुझे तो शर्म आती है मामी आपके सामने.

    मामी बोली- जब देख ही लिया है तो अब दबा कर भी देख लो कि कैसा लगता है. मजा आयेगा तुम्हें.
    मैंने घबराते हुए मामी के बूब्स की ओर हाथ बढ़ाया. मामी ने झटके से मेरा हाथ अपनी ओर खींच लिया और अपने बूब्स पर रखवा लिया.

    अपने बूब्स पर अपने हाथ से मेरे हाथ को दबाते हुए मामी ने कहा- अब दबाओ इनको!
    मुझे मामी के बूब्स काफी सोफ्ट लगे. मैं हल्के हल्के से उनको दबाने लगा.

    मामी ने करण को झूले में लिटा दिया. वो सो चुका था. उसके बाद मामी ने अपना ब्लाउज पूरी तरह से उतार ही दिया. उनकी दोनों चूचियां एकदम से नग्न हो गयीं.
    मामी बोली- अब आराम से दोनों हाथों से दबाओ.

    मैं दोनों हाथों से मामी के बूब्स को दबाने लगा. मुझे मजा आ रहा था. मामी ने पूछा- कैसा लग रहा है?
    मैंने कहा- अच्छा लग रहा है.
    मामी- लंड खड़ा हुआ?
    मैं- हां मामी, बिल्कुल टाइट हो गया है.

    मामी बोली- आओ, आज मैं तुम्हें मुठ मारना सिखाऊंगी. अपनी पैंट को उतार लो.
    मैं शरमा रहा था. उनके सामने इस तरह से पैंट उतारने में मुझे अजीब सा लग रहा था.

    वो बोली- शरमा क्यों रहे हो, मैंने भी तो तुम्हारे सामने अपना ब्लाउज उतारा है. तुम भी अपनी पैंट उतार लो.
    मैंने अपनी पैंट खोल दी और अंडरवियर को नीचे खींच दिया.
    मेरे जवानी के झाँट मेरे लंड के चारों ओर फैले हुए थे. मैंने कभी अपने झाँटों को नहीं काटा था.

    मैं मुठ भी नहीं मारा करता था उस वक्त तक, इसलिए मेरा लंड भी ज्यादा मोटा नहीं दिख रहा था. मामी ने मेरे लंड को देखा और मुस्कराने लगी. मगर कुछ बोली नहीं.
    फिर बोली- तुम अपने बालों को साफ नहीं करते हो क्या? कितने ज्यादा घने हो गये हैं.
    मैंने कहा- यहां के बाल तो मैंने कभी नहीं काटे मामी

    वो बोली- अच्छा ठीक है. मैं इनको शेव कर दूंगी.
    मैंने पूछा- आपके वहां भी नीचे ऐसे ही बाल हैं क्या?
    मामी ने कहा- हां, सबके ही होते हैं. मगर मेरे अभी कम हैं क्योंकि मैंने एक सप्ताह के पहले ही शेव किये थे. मगर मुझे झाँटें बहुत पसंद हैं. चलो अब मैं तुम्हें मुठ मारना सिखाती हूं.

    मामी ने मुट्ठी बना कर अपने हाथ से दिखाते हुए कहा कि इस तरह से अपने लंड को मुट्ठी में भर लो.
    मैंने लंड को मुट्ठी में भर लिया.
    मामी- अब इसकी स्किन को नीचे करो.
    मैंने स्किन नीचे कर दी.
    मामी- अब इसको ऊपर करो.

    उनके कहे अनुसार मैंने फिर ऊपर किया.
    वो बोली- अब इसी तरह से जल्दी जल्दी करो.
    मैं जल्दी जल्दी से लंड की स्किन को ऊपर नीचे करने लगा. मगर मैं बीच बीच में रुक जा रहा था.
    मामी बोली- रुको, मैं करके बताती हूं.

    मामी ने मेरे लंड को अपनी मुट्ठी में ले लिया. फिर उसको जोर जोर से हिलाने लगी. मामी का हाथ टच होते ही मुझे अजीब सा लगा. मुझे गुदगुदी होने लगी. मुझे बहुत मजा आया. मामी करते करते बीच में रुक गयी.

    मुझसे कहने लगी- अब तुम खुद करो. मैं जरा अपनी वाली (चूत) को देख लेती हूं. मेरा मन भी कर रहा है कुछ करने का.
    फिर मामी ने अपनी साड़ी खोल दी. मेरे देखते ही देखते मामी ने अपना सब कुछ उतार दिया. मामी मेरे सामने बिल्कुल नंगी हो गयी.

    मैंने देखा कि मामी की चूत पर बाल थे. उनकी चूत पर बाल काफी अच्छे लग रहे थे. मैंने मुठ मारना छोड़ कर मामी की चूत पर ही ध्यान लगा दिया.
    वो बोली- तुम क्यों रुक गये, ऐसे ही हिलाते रहो. कुछ देर के बाद तुम्हें करंट जैसी एक फीलिंग आयेगी जो तुम्हें बहुत मजा देगी.

    मामी से मैंने पूछा- मामी, लड़कियां भी अपनी चूत को अपने हाथ से मजा देती हैं क्या?
    वो बोली- तुम्हारी उम्र के सब लड़के-लड़कियां करते हैं. कुछ तो तुम्हारी उम्र में सेक्स का मजा भी ले चुके होते हैं.

    अपनी चूत को खोल कर दिखाते हुए मामी ने कहा- लड़के इसी चूत के छेद में अपने लंड को अंदर डालते हैं. इसमें लड़का और लड़की दोनों को ही बहुत मजा आता है. अभी तुम मुठ मारना सीखो, इसके आगे क्या और कैसे करते हैं वो सब मैं तुम्हें बाद में सिखा दूंगी.

    उसके बाद मामी अपनी चूत को रगड़ने लगी. वो तेजी के साथ अपनी चूत को सहला रही थी. कभी उसमें उंगली को अंदर डाल रही थी. मैं भी अपने लंड को जोर जोर से हिलाने लगा. मुझे भी मजा आ रहा था.

    मामी मेरे लंड को देख कर तेजी के साथ चूत को सहला रही थी और मैं मामी की चूत को देखते हुए तेजी के साथ लंड की मुठ मार रहा था. मुझे इतना मजा कभी नहीं आया था जितना अब मामी के सामने आ रहा था.

    कुछ ही देर के बाद मुझे लगने लगा कि मेरे लंड से कुछ बाहर निकलने वाला है.
    मैंने मामी से कहा- लगता है कि कुछ बाहर आने वाला है.
    वो बोली- रुकना मत, हिलाते रहो!

    फिर 5-10 सेकेंड के बाद मेरा वीर्य निकल गया. वीर्य निकलते ही ऐसा लगा कि मैं काफी थक सा गया हूं. मामी मेरे वीर्य को देख कर जोश में आ गयी और तेजी के साथ अपनी चूत में उंगली करने लगी.

    कुछ ही देर के बाद फिर वो भी झड़ गयी.
    मामी ने पूछा- कैसा लगा?
    मैं- बहुत मज़ा आया।

    मामी- तुम इतने दिन से इस मज़े से अनजान थे और तुम्हारी मामी ने तुम्हें सिखाया। तुम्हें मुझको थैंक्स बोलना होगा।
    मैंने मामी को थैंक्स बोला तो मामी बोली- ऐसे नहीं, इधर आओ और मेरे बूब्स को चूसो.
    मैंने पहले मामी के बूब्स को दबाया और फिर मुंह में लेकर चूसने लगा. कुछ देर तक हमने ऐसे ही मजे लिये.

    उसके बाद मामी बोली- सेक्स के बारे में मैं तुम्हें कल सिखाऊंगी.
    उस रात जब मैं सोने की तैयारी में था तो मैंने सुना कि मामी के रूम से आवाजें आ रही थीं. मैं समझ गया कि मामी आज अपनी चूत में मामा का लंड ले रही है.

    दोस्तो, इस तरह से मामी ने मुझे मुठ मारना सिखाया. पहली बार मामी के सामने मुठ मार कर मुझे बहुत मजा आया. उस दिन के बाद से मुझे मुठ मारने की लत सी लग गयी. मैं रोज रात को अपने लंड मुठ मारने लगा और मुझे बहुत मजा आता था.

    अपनी आने वाली कहानी में मैं आपको बताऊंगा कि मामी ने मुझे सेक्स करना कैसे सिखाया.

  • मकान मालिक की पत्नी की यौन तृप्ति

    मैं किराये पर रहता हूँ. मकानमालिक दुबला पतला है. पर उसकी पत्नी की गदरायी जवानी किसी को भी पागल कर सकती है. मुझे लगा कि वो अपने पति से खुश नहीं है. तो मैंने क्या किया?

    नमस्कार दोस्तो,
    मेरा नाम अबन कुमार मिश्रा है. मैं कोलकाता का रहने वाला हूं पर अभी मैं दिल्ली में हूं और मैं किसी बैंक का कर्मचारी हूं.

    यह मेरी पहली कहानी है और बिल्कुल सच्ची कहानी है इसमें जरा भी झूठ नहीं है. मुझे झूठ बिल्कुल पसंद नहीं इसलिए जो भी मैं कहानी बताने जा रहा हूं यह बिल्कुल सच है.
    अगर कहानी लिखने में कोई गलती हो जाए तो प्लीज मुझे माफ कर देना.

    मेरी उम्र 28 साल है और मैं दिखने में ठीक हूं.
    पिछले 4 सालों से दिल्ली में मैं एक किराए के कमरे में रहता हूं. मैंने कमरा नहीं बदला. जिस कमरे में मैं 4 साल पहले था उस कमरे में मैं आज भी हूं.

    मेरा मकान मालिक भी उसी बिल्डिंग में रहता है और उसकी पत्नी है नाम है रचना. मेरा मकान मालिक अपनी पत्नी के ऊपर बहुत शक करता है. यह आप लोग बहुत अच्छे से जानते हैं जो मर्द अपनी पत्नी को शारीरिक सुख नहीं दे पाता है, वही अपनी पत्नी पर शक करता है.

    मकान मालिक थोड़ा दुबला पतला और सेक्स के बारे में थोड़ा ढीला है. ऐसा दिखने में लगता है तो होगा भी!

    और आपको मैं रचना भाभी के बारे में बताऊँ जो दिखने में इतनी गजब की माल है कि मैं आपको लिखकर के बयां नहीं कर सकता. रचना भाभी की लंबाई 5 फीट 11 इंच है और उसके शरीर की बनावट 40 की छाती 32 की कमर और उसकी गांड 38 की है. भाभी की फूले हुए गाल, रसीले होंठ और 36 की उम्र, और उसकी गदराई जवानी उसकी एक नजर किसी भी लड़के को पागल बनाने के लिए काफी हैं. एक ऐसी औरत जिसको पाने के लिए मर्द अपना सब कुछ लुटा दे.

    तो मैं आपको बताता हूं कि मैंने उससे पटाया कैसे और पेला कैसे, मुझे उसको अपने बिस्तर तक लाने में 4 साल लग गए.

    शुरू शुरू में मैं समझता था कि वे ऐसी औरत नहीं है और मैं उस पर ध्यान नहीं देता था. इसी तरह मेरे 2 साल निकल गये.
    वो मुझसे ज्यादा बात भी नहीं किया करती थी, सिर्फ काम की बात किया करती थी.

    दो साल बीतने के बाद उसके पति की जॉब ऐसी जगह लगी जहां वह दोपहर के बाद ड्यूटी पर जाता है और रात में दो बजे घर वापस आता है. मैं बैंक कर्मचारी हूं तो मैं शाम को पाँच बजे अपने कमरे पर आ जाता हूं.

    उसका पति घर पर नहीं होता तो उससे बात करने का ज्यादा मौका मिलता है और वह मुझसे थोड़ा घुल मिल भी गई है. धीरे-धीरे हम दोनों में मजाक भी होने लगा. और ऐसे ही मजाक मजाक में हम दोनों में बहुत अंदर की बातें भी होने लगी.
    यह सिलसिला 2 सालों तक चला.

    पहले के 2 साल जिसमें हम दोनों में बहुत कम बातें हुई, सिर्फ काम की बात हुई. मैं रचना भाभी को पेलना तो बहुत पहले से चाहता था लेकिन मुझे लगता था ये औरत ऐसी नहीं है मजाक तो कर लेती है गंदा लेकिन मेरे बिस्तर में नहीं आ सकती. मैं इसे कभी चोद नहीं पाऊंगा.

    एक दिन मेरे बैंक की छुट्टी थी मैं अपने कमरे पर अपने कपड़े धो रहा था. और वह सीढ़ी पर बैठकर मुझसे बातें कर रही थी. बातों बातों में रचना भाभी ने मुझसे कहा- मेरी तबीयत ठीक नहीं है मुझे डॉक्टर के पास दिखाने जाना है.
    मैंने कहा- सुबह तो भैया घर पर ही होते हैं, भैया के साथ अस्पताल चली जाना.
    रचना भाभी ने मुझसे कहा- उनके पास टाइम कहाँ होता है.
    तो मैंने कहा- तुम खुद चली जाना.

    रचना भाभी ने मुझसे कहा- मुझे नहीं मालूम है अस्पताल का!
    तो मैंने भाभी से बोला- मैं आपको अस्पताल ले चलूंगा.
    भाभी बोली- ठीक है.

    बैंक का कर्मचारी गणित वाला दिमाग बाद में मेरे समझ में यह बात आई कि यह अपने पति के साथ नहीं जाना चाहती. यह लोकल औरत है और इसे अस्पताल के बारे में नहीं पता. मैं तो यहां चार साल पहले आया हूं. मैं बाहर का हूं लेकिन यह मेरे साथ अस्पताल जाना चाहती है.
    मैं सब कुछ समझ गया था लेकिन खुलकर नहीं समझ पाया.

    अब मैं इसके दिल की बात जानना चाहता था कि यह चाहती क्या मुझसे. जैसे मैं इसकी वासना में 4 साल से तड़प रहा हूं. क्या रचना भाभी भी जवानी की आग मेरे लौड़े से बुझाना चाहती है?

    एक दिन मैंने भैया को देखा चड्डी में छत पर टहल रहे थे. भैया की शरीर को देखने के बाद मुझे लगा कि रचना भाभी की प्यास भैया से बिल्कुल नहीं बुझती होगी.
    रचना भाभी का जैसा शरीर है रचना भाभी जैसी औरत को शांत करने के लिए घोड़े जैसा लौड़ा चाहिए और धमाकेदार मर्द.

    मैंने सोचा कि एक बार भैया के बारे में बात करूंगा भाभी से!
    हमारा मकान मालिक है लेकिन मैं उनको भैया और उनकी पत्नी को यानी रचना को भाभी बोलता हूं.

    एक दिन मौका मिला और मैंने रचना को यह बात बोल दी- भैया के शरीर को मैंने देखा चड्डी में … वे छत पर टहल रहे थे. मुझे नहीं लगता कि वे आपको शारीरिक सुख दे पाते होंगे.
    रचना भाभी ने बहुत आश्चर्य मुझसे कहा- तुम्हें कैसे पता? तुम कैसे जानते हो? तुमने मेरे बेडरुम में झांक कर देखा है क्या? तुम यह कैसे कह सकते हो?

    फिर मैंने कहा रचना भाभी को- भैया की उम्र 45 साल, आपकी उमर 36 साल. आपके शरीर को और उनके शरीर को देख कर के मैंने यह अनुमान लगाया है.
    रचना भाभी ने मुझसे कहा- इन सब बातों पर ज्यादा दिमाग मत लगाओ.

    फिर मेरे दिमाग में पहले वाली बात आई कि यह औरत ऐसी नहीं है.

    इसी तरह कुछ दिन बीत गये.

    रचना भाभी नीचे रहती हैं और मैं पहले मंजिला पर रहता हूं. एक दिन मैं सीढ़ियों से नीचे उतर रहा था और उसी टाइम भाभी छत पर जाने के लिए सीढ़ियों पर चढ़ रही थी. मैं आधी सीढ़ियों पर था तो मैंने दीवार के साइड में रुक कर के उसे जाने का रास्ता दे दिया,
    मुझे देखकर वह मुस्कुराते हुए सीढ़ियों पर चल रही थी और मेरे लौड़े पर अपनी कमर को रगड़ती हुई निकल गई.

    उसके बाद मैं समझ चुका था कि यह मेरे लौड़े से चुदाना चाहती है.

    दो दिनों बाद रचना भाभी ने अचानक मुझे आवाज लगाई- अबन नीचे आओ!
    मैंने कहा- आ रहा हूं मैं!

    जब मैं नीचे आया तो रचना भाभी ने पूछा- क्या तुमने खाना खा लिया?
    तो मैंने कहा- नहीं, अभी मैं खाना खाने जा रहा हूं.
    रचना भाभी ने कहा- जाओ कपड़े बदल कर आओ, हम दोनों शादी में चल रहे हैं. पास में शादी है.

    मैं कपड़े बदल कर आया और हम दोनों शादी में चले गए.
    रचना भाभी ने मुझसे पूछा- तुम पहले क्या खाओगे?
    मैंने कहा- दही भल्ले मेरा पसंदीदा हैं, मैं दही भल्ले पहले खाऊंगा.
    रचना भाभी ने कहा- मेरे भी पसंदीदा हैं, पहले मैं भी दही भल्ले ही खाऊंगी.

    दही भल्ले के लिए तीन-चार लोग पहले से खड़े थे उसके पीछे रचना भाभी खड़ी हो गई और रचना भाभी के पीछे खड़ा हो गया.
    रचना भाभी ने साड़ी पहन रकही थी और गजब की माल लग रही थी.

    मैं रचना भाभी के पीछे खड़ा था तो मेरा लौड़ा उसकी गांड पर लग रहा था. जब रचना भाभी को अपनी गांड पर मेरा लंड महसूस हुआ तो उसने मुझसे पीछे पलट के कहा- क्या कर रहे हो अबन?
    मैंने कहा- माफ करना भाभी, गलती से लग गया.
    रचना भाभी ने कहा- कोई बात नहीं, चलता है.

    इसके बाद डांस हो रहा था शादी में … हम दोनों डांस देखने लगे.
    धीरे-धीरे डांस देखने वालों की भीड़ लग गई. हम दोनों भीड़ के बीच में पड़ गए.

    भाभी मेरे दाहिने तरफ खड़ी थी भाभी ने मुझसे कहा- मैं तुम्हारे आगे आ जाती हूं तुम मुझे सुरक्षा दो.
    शायद भीड़ में भाभी ने अपने आप को असुरक्षित महसूस किया था.

    अपनी बांहों से मैंने रचना भाभी को घेर लिया. उसके बाद तो मेरा लौड़ा रचना भाभी की गांड पर ही टिका हुआ था.
    मैंने रचना भाभी के कान में कहा- माफ करना जो गलती हो रही है.
    रचना भाभी ने मेरे कान में कहा- कोई बात नहीं अबन, तुमको मेरी अनुमति है.
    और अपनी गांड खुद मेरे लौड़े पर दबा दी.

    मैंने पूछा- ये क्या?
    रचना भाभी ने कहा- सवाल मत करो, जो कर रहे हो, बस चुपचाप करते रहो.
    1 घंटे तक मैं रचना भाभी की गांड पर अपना लौड़ा रगड़ता रहा.

    जब मुझ से बर्दाश्त नहीं हुआ तो मैंने रचना भाभी को कहा- चलो अब यहां से!

    भाभी ने गांड पर लौड़ा सटाने की अनुमति दे दी, चूत देने में देर नहीं करेगी, ये मैं समझ गया था.

    हमने खाना खाया और हम दोनों वहां से निकल लिये.

    रास्ते में हम दोनों बात करते हुए आ रहे थे.
    भाभी ने पूछा- डांस देखने का मजा आया?
    मैंने कहा- हां.
    भाभी ने हंसते हुए पूछा- मेरी साड़ी तो गीली नहीं की है न?
    मैंने कहा- नहीं.

    भाभी मेरे हाथों में हाथ डालकर चलने लगी.

    सुनसान रास्ता हो गया था एक जगह मुझे अंधेरा मिला मैंने भाभी को पकड़कर दीवार पर चिपका दिया और जबरदस्त किस करने लगा. तकरीबन 10 मिनट तक मैं भाभी के होंठ को चूसता रहा
    भाभी भी पूरे जोश में साथ दे रही थी. वह भी हार मानने का नाम नहीं ले रही थी. लग रहा था वह मेरे ऊपर चढ़ जाएगी.
    लेकिन मैं भी जवान लड़का … भाभी को दीवार में रगड़ रगड़ के चूसा मैंने.

    तभी किसी के आने की आहट सुनाई दी और भाभी ने मुझे धक्का दिया और कहा- यहां नहीं, घर चलो.

    जब हम अपनी गली में आ गए तो वहां भी थोड़ा सुनसान है और अंधेरा भी.
    फिर से मैंने भाभी को पकड़ा और चूसना शुरू कर दिया. फिर भाभी ने पूरा साथ दिया पर दो मिनट के बाद अलग हो गई बोली- नहीं … घर चलो!

    मैंने मन में सोच लिया था कि आज भाभी की चूत में लौड़े का धमाका करूंगा. इसके पति को घर वापस आने में अभी टीम घंटे बाकी हैं. 2 घंटे के अंदर ऐसा चोदूंगा, उसकी चूत का भरता बना दूंगा. असली मर्द की ताकत आज नहीं दिखाई तो इसके सामने मैं अपना मुंह नहीं दिखा पाऊंगा.

    रचना भाभी ने दरवाजे का लॉक खोला, अंदर गए, रचना ने फ्रिज के पानी की बोतल निकाली हम दोनों ने पानी पिया.
    और वह किनारे में खड़ी होकर मुझे देख कर के मुस्कुराने लगी.

    फिर मैंने रचना भाभी को पकड़ा और दीवार में सटा दिया. उसके बाद फिर से उसके होंठों को चूसने लगा और हाथ से रचना भाभी की चूचियों को पकड़ कर मसल रहा था.

    यह सिलसिला 15 मिनट तक चला. रचना की हालत एक बेकाबू जानवर की तरह हो गई थी

    उसने मुझे एक जोर का धक्का दिया और खुद से अलग कर दिया.

    अलग करने के बाद मेरे पास आई और मेरे कपड़े उतारने लगी.
    मैंने भी बिना समय गवाए उसको नंगी कर दिया. रचना को बेड पर धकेल दिया. रचना बेड पर सीधे गिरी और मैं उसके ऊपर फौरन आ गया.
    फिर से मैं रचना के होंठों को चूसने लगा और चूचियों को खूब मसलने लगा.

    रचना ने 5 मिनट के बाद मेरे होंठ से अपना होंठ छुड़ा लिया और कराहने लगी.

    मेरी एक जांघ रचना की दोनों जांघों के बीच में फंसी थी और उसकी चूत को दबा रही थी. रचना की चूत मेरी जांघ को गीला कर रही थी.

    अब समय था रचना की चूत में अपना लौड़ा पेलने का! मैं रचना के दोनों जांघों के बीच में आ गया और अपने दोनों हाथों से रचना की कमर पकड़कर उसकी गांड उठा दी.
    रचना को कहा- इसके नीचे तकिया लगाओ!
    उसने बिना देर किए हुए आगे से तकिया लिया और अपनी गांड के नीचे लगा लिया.

    मैंने रचना के दोनों पैर पकड़ कर हवा में लहरा दिया. फिर मैंने रचना को किस करना शुरू कर दिया और उसकी चूचियों को दबाने लगा.

    फिर मैंने अपने एक हाथ से रचना की चूत पर अपने लौड़े को सेट किया और फिर अपने दोनों हाथों से रचना के सिर को पकड़ लिया ताकि लौड़े का धक्का लगने के बाद रचना आगे की तरफ ना उछले.
    और एक जोरदार लौड़ा का थक्का उसकी चूत में मारा. रचना दर्द से तिलमिलाने लगी. रचना की हालत देख कर के मुझे भी दया आ गयी.
    अभी आधा ही लौड़ा उसकी चूत में गया था

    फिर मैंने अगला धक्का अपने लौड़ा का उसकी चूत में नहीं मारा, मैं रुक कर उसके दर्द कम होने का इंतजार करने लगा.

    लगभग मिनट के बाद रचना का दर्द कम हुआ तो रचना ने मेरे सीने पर हाथ रखा और कहा- अबन आराम से, जब तक मैं ना बोलूं तब तक तुम धीरे धीरे करो. जब मेरा इशारा तुम्हें मिल जाए उसके बाद तुम मेरी चूत फाड़ देना. मर्द की मर्दानगी औरत देखकर ही परख लेती है और मैंने तुम्हारी मर्दानगी का अंदाजा तुमको देख कर लगा लिया था.

    रचना ने मेरे सीने से अपना हाथ हटा लिया.

    मैंने बाकी का आधा लौड़ा मैंने धीरे से रचना की चूत में डाल दिया और धीरे धीरे उसे चोदने लगा.

    5 मिनट बाद रचना ने खुद अपना पैर और हवा में फैलाया और मुझे कहा- अब करो आपकी मर्जी से!
    मैंने फिर रचना के सिर को जोर से पकड़ा और लौड़े का जबरदस्त धक्का उसकी चूत पर मारने लगा.

    15 मिनट चुदने के बाद रचना ने अपना पूरा बदन को बहुत टाइट कर लिया. मैं अपनी पूरी ताकत से लंड उसकी चूत में पेल रहा था. 2 मिनट बाद उसने अपने शरीर को ढीला छोड़ दिया.

    मैं रचना का अपने दोनों हाथों से सिर पकड़े उसकी चूत पर अपने लौड़े से धमाकेदार वार किए जा रहा था.

    कुछ समय बाद रचना ने दोबारा अपना पूरा शरीर टाइट कर लिया. जब भी रचना अपना पूरा शरीर टाइट करती थी, उसकी चूत से गर्म गर्म पानी निकलता था. और यह मैं अपने लौड़े पर महसूस कर रहा था.
    जब भी रचना की चूत का गर्म पानी मेरे लौड़े पर महसूस होता तो मेरी आग और भड़क जाती थी. मैं रचना को और भी ज्यादा जबरदस्त चोदने लगता था. एक लंबी ऊंची औरत को मैंने ऊपर से उसका सिर अपने दोनों हाथों से पकड़ रखा था और उसकी चूत पर अपने लौड़ा का जबरदस्त धक्के मार रहा था.

    रचना बिल्कुल सिकुड़ गई थी. मेरी और रचना की जांघ जब टकराती थी तो चट चट की आवाज पूरे कमरे में गूंज रही थी.

    मैं और रचना पसीने से तरबतर हो गए थे. 45 मिनट तक घमासान चोदाई चलने के बाद रचना ने फिर से अपना पूरा शरीर टाइट कर लिया और अपनी चूत से गर्म पानी छोड़ने लगी. रचना की चूत का गर्म पानी में अपने लौड़ा पे महसूस कर रहा था.

    रचना की चूत के गर्म पानी के जोश में मेरे लौड़ा से भी लावा निकलने लगा. रचना ने अपने शरीर को ढीला छोड़ दिया और शांत हो गई.
    मेरे लौड़े से दो मिनट तक लावा निकलता रहा थोड़ा थोड़ा करके और रचना शांत पड़ी रही.

    जब मेरे लौड़े का लावा रचना की चूत में आखरी बूंद तक टपक गया तो मैं निढाल होकर के रचना की बगल में लेट गया.
    हम दोनों पसीने से भीगे हुए थे. हम दोनों की सांसें बहुत तेज चल रही थी.

    10 मिनट के बाद हम दोनों की सांसें नॉर्मल हुई तो रचना ने पलटकर मेरी तरफ देखा. मैंने रचना को अपनी बांहों में भर लिया. रचना ने प्यारी सी मुस्कुराहट के साथ मुझे किस किया.

    मैंने रचना से पूछा- क्या तुम खुश हो? क्या तुम्हें वह सुख मिल पाया जिसकी उम्मीद करती थी तुम मेरी मर्दानगी से?
    रचना ने मुस्कुराहट के साथ मुझे बहुत कस के पकड़ा और एक जोरदार किस किया और कहा- समझदार के लिए इशारा काफी है. खुद ही समझ जाओ.

    15 मिनट तक मुझे बांहों में लेकर गहरी सांस भरती रही. जब भी मैं कुछ कहता तो मुझसे कहती- शांत लेटे रहो अबन!

    उसके बाद रचना ने खुद से मुझे अलग किया और मुझसे कहा- कपड़े पहन लो.
    मैंने कपड़े पहन लिये.
    रचना से मैंने पूछा- फिर कब दोगी?
    वह बोली- अभी जरा रुको,!

    रचना अभी कपड़े पहनने गई थी. कपड़े पहनने के बाद मेरे पास आई और मेरे गले से लिपट गई. रचना बोली- इस जीवन में मैंने अपना पूरा शरीर अबन … तुमको हमेशा के लिए सौंप दिया.
    तुम जो चाहो मेरे शरीर के साथ करो. ये अनुमति हमने तुम्हें दे दी. जब भी मुझे मौका मिलेगा मैं खुद चलकर तुम्हारे पास आ जाऊंगी. अब तुम्हारे लंड राजा को कभी चूत की कमी महसूस नहीं होने दूँगी, यह मेरा वादा है. कसम से अबन … तुमको जाने देने का दिल नहीं कर रहा है. लेकिन रात ज्यादा हो चुकी है, तुम्हारे भैया के आने का समय हो गया.

    रचना ने एक जोरदार किस किया.
    मैंने भी रचना का साथ दिया और वो बोली- जाओ!

    और मैं अपने कमरे में आ गया.

  • लखनऊ में मिली लड़की को चोदा

    लखनऊ की लोकल बस में मेरे बगल में एक लड़की बैठी थी. बार बार ब्रेक लगने से मेरी कोहनी उसके चूचों पर टकराती थी. उसके बाद क्या हुआ? मैंने उसे कैसे चोदा?

    नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम आरव है. मेरी उम्र 24 साल है. मैं उत्तर प्रदेश के एक शहर का रहने वाला हूं और एक जिम ट्रेनर की नौकरी करता हूं.

    अन्तर्वासना पर ये मेरी पहली इंडियन सेक्स स्टोरी है. यह कहानी आज से लगभग 2 साल पहले की है. मैं कुछ काम से लखनऊ गया हुआ था. वहां चारबाग स्टेशन पर उतर कर मैंने महानगर के लिए बस पकड़ी.

    उसी बस में मेरे बगल में एक लड़की बैठी हुई थी. पहले तो मैंने उस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया, लेकिन जैसे ही बस चलने लगी, तो ट्रैफिक की वजह से बार बार ब्रेक लग रही थी. बस यहीं खेल हो गया. बार बार ब्रेक लगने से मेरी कोहनी उसके चूचों पर टच होने लगी थीं. मुझे एकदम से उसके मस्त मुलायम मम्मों का स्पर्श मिला, तो मैं अन्दर तक गनगना गया.

    फिर मैंने ध्यान से उस लड़की को देखा, तो उसका फिगर बहुत ही कमाल का था. बंदी के 34डी साइज़ के चूचे, पेट एकदम सपाट 30 इंच का और कमर के नीचे के उठे हुए चूतड़ों की नाप भी लगभग 36 की थी.

    मुझे उसमें रस आने लगा. जब बस धीरे धीरे चलने लगी, तो मैंने उससे बात करना शुरू किया. उसने अपना नाम रूबी (बदला हुआ) बताया. वो केसरबाग बस स्टैंड के पास किराये के रूम में रहती थी. लखनऊ में रहकर किसी इलैक्ट्रॉनिक कंपनी में नौकरी करती थी.

    हमारी काफी देर तक बातें हुईं और न जाने कुछ ऐसी बात बनी कि हमने एक दूसरे के नंबर तक ले दे लिए.

    उस दिन शाम को ही मैं वापस अपने शहर आ गया. अब हमारी फोन पर धीरे धीरे करके काफी बातें होने लगी थीं. उसका एक साल से कोई ब्वॉयफ्रेंड नहीं था.

    अगले ही हफ्ते मुझे फिर से लखनऊ जाना पड़ा. ये बात मैंने उसे बताई, तो वो एक दिन अपने पास रोकने को बोलने लगी. मैं भी यही चाहता था, तो मैंने भी तुरंत ही हां बोल दिया.

    मैं शनिवार की सुबह लखनऊ के लिए निकला और लगभग 3 घंटे में पहुंच गया. मैंने अपना काम खत्म करके शाम को 5 बजे उसे कॉल किया, तो वो भी बस अपने ऑफिस से निकलने ही वाली थी. हम दोनों हजरतगंज में मिले और फिर वहां से सीधे केसरबाग रूबी के रूम पर आ गए.

    उसका एक रूम का फ्लैट था, जिसमें किचन और बाथरूम अटैच थे. रूबी ने रूम को अच्छे से साफ-सुथरा रखा हुआ था.

    मैंने देखा कि उसके कमरे में एक सिंगल बेड था. उसके सामने एक अलमारी और पास में ही टीवी लगी हुई थी. मैं बेड पर बैठकर टीवी देखने लगा. रूबी ने भी बाथरूम में जाकर कपड़े बदली कर लिए थे.

    बाथरूम से आकर उसने चाय बनाई और दो कप में लाकर मेरे साथ बैठ गई. हम दोनों ने चाय पी और बातें करने लगे. उससे मेरी बातें इतनी घनिष्ठता से हो रही थीं, मानो हम दोनों न जाने कब से एक दूसरे से परिचित हों.

    इसी तरह इधर उधर की बातें करते हुए रात को 8 बज गए. फिर हम दोनों ने साथ में डिनर बनाया और खाना खाकर आराम करने लगे. अगले दिन संडे था, तो ऑफिस की किसी को टेंशन नहीं थी.

    सिंगल बेड में हम दोनों ही दीवार में टेक लगाकर बैठे थे और बातें कर रहे थे. थोड़ी देर में मैंने अपना एक हाथ रूबी की तरफ उठाकर उसके कंधे में रख दिया, जिससे अब वो पूरी तरह मेरी तरफ आ गई.

    उसने अपना सर भी मेरे सीने में रख लिया. उसके चूचे मेरे मेरे पेट में घुसे जा रहे थे. तभी मैं भी धीरे धीरे अपना हाथ उसकी पीठ पर चलाने लगा.
    उसने टी-शर्ट और लोअर पहना हुआ था. मैं भी टी-शर्ट और शॉर्ट्स में था.

    शॉर्ट्स में मेरा लंड धीरे धीरे खड़ा होने लगा था. मैंने एक हाथ से उसके चेहरे पर फैले बालों को हटाया और माथे पर एक किस किया. जिसका उसने भी कोई विरोध नहीं किया बल्कि मेरे से और चिपक गई.

    फिर मैंने पीठ से एक हाथ को टी-शर्ट के अन्दर डालकर सहलाने लगा. अन्दर उसने ब्रा पहनी थी, जो मेरे हाथों में फंस रही थी. मैंने उसके हुक को खोलकर ये रास्ता भी साफ कर लिया. ब्रा अब भी उसके शरीर पर थी, मगर उससे अब मुझे कोई दिक्कत नहीं हो रही थी. धीरे धीरे मैंने उसकी टी-शर्ट को भी ऊपर कर दिया, जिससे अब मेरा हाथ उसके चूचों पर लगने लगा था.

    फिर मैंने धीरे से एक चूची को सहला कर दबा दिया, तो रूबी की एक सिसकारी निकल गई. फिर मैं धीरे धीरे उसकी दोनों चूचियों को बारी बारी से दबाने लगा. वो मस्त आवाजें लेते हुए मेरे हाथों का मजा ले रही थी.

    मैंने उसके चेहरे को ऊपर उठाया. उसकी आंखें लाल हो गई थीं. मुझसे नजर मिलते ही उसने अपनी आंखें बंद कर लीं.

    मैंने उसके थरथराते होंठों को अपने होंठों से बंद कर लिया और किस करने लगा. वो भी शायद इसी का वेट कर रही थी. उसने भी मेरा पूरा साथ दिया. हम दोनों एक दूसरे की जीभ को आपस में कुश्ती करने लगे. ऐसा करते हुए मैंने उसकी ब्रा और टी-शर्ट को उसके शरीर से अलग कर दिया. अब मैं उसकी गर्दन पर किस करने लगा.. जिससे उसके शरीर का तापमान और बढ़ गया. नीचे उसके दोनों कबूतर आजाद थे. दूधिया रंग के चूचे उस पर हल्के भूरे रंग के किशमिश की तरह उठे हुए निप्पल एकदम मस्ती दिला रहे थे.

    उसके कड़क निप्पल देखते ही मैं उन पर टूट पड़ा और बारी बारी से चूसने लगा. उसके चूचियों को मैंने खूब दबाया और चूसा.

    इसके बाद मैंने एक हाथ नीचे रूबी की पैंटी में डाला, तो उसकी चूत पहले से ही रसीली हो गई थी. मैंने उसकी लोअर और पैंटी को एक साथ नीचे करके उतार दिया. खुद नीचे की तरफ बढ़ते हुए मैं उसकी नाभि में किस करने लगा. नाभि में किस करते ही वो मचलने लगी. मेरी निगाह चुत पर गई, तो नीचे उसने चूत को बिल्कुल साफ किया हुआ था, एक भी बाल नहीं बचा था. रूबी की चूत बिल्कुल गीली हो चुकी थी.

    मैंने जैसे ही एक हाथ से उसकी चूत को सहलाया, तो रूबी की बड़ी आह निकल गई.

    उसे किस करते करते मैं, अब उसकी जांघों पर किस करने लगा. पैरों पर किस करते करते मैंने अचानक उसकी गीली चूत को मुँह में भर लिया. अचानक हुए इस हमले के लिए वह तैयार नहीं थी. इससे उसकी हल्की से चीख निकल गई और उसने मेरे सर को जोर से पकड़ कर अपनी चूत पर दबा दिया और सर को चुत पर रगड़ने लगी. मैं भी मस्ती से रूबी की चुत को चाटे जा रहा था.

    अभी बस कुछ पल ही हुए होंगे कि रूबी एक लम्बी आहहह … के साथ झड़ गई और बेड पर बिल्कुल बेहोश सी लेटी रही.

    थोड़ी देर बाद वो मुझसे बोली कि आज तक उसके किसी ब्वॉयफ्रेंड ने उसकी चूत नहीं चूसी.

    मैं फिर से उस किस करने लगा. अब रूबी ने खुद आगे बढ़कर मेरा शॉर्ट्स और अंडरवियर उतार दिया. मेरा लंड पहले ही खड़ा हुआ था. वो लंड को किस करने लगी और फिर धीरे से मेरे लंड के टोपे को चूसने लगी. हम दोनों ने नजरें मिलाईं और पोजिशन लेकर 69 में आ गए.

    मेरा लंड वो और मैं उसकी चूत चूस रहा था. तभी मैं उसकी चूत के दाने को होंठों से पकड़ कर खींच कर जीभ से सहलाने लगा. इससे उसकी ‘आह …’ की सिसकारी निकल गई. वो भी मेरे लंड को बहुत अच्छे से चूस रही थी, पूरा गले तक ले जा रही थी, जिससे मेरे टट्टे उसकी नाक के ऊपर फिट हो जा रहे थे.

    काफी देर तक की चुसम चुसाई के बाद रूबी झड़ गई और मेरा भी वीर्यपात हो गया. फिर हम दोनों सीधे हुए और मैं उसके होंठों को चूसने लगा. वो सीधी बेड पर लेटी थी, मैंने अपने लंड को उसकी चूत पर सैट किया और धीरे से एक धक्का मारा, जिससे मेरे लंड का टोपा सीधे उसकी गीली चूत में फिट हो गया.

    लंड का टोपा घुसते ही रूबी ‘आःह्ह…’ की सिसकारी के साथ ऊपर की तरफ खिसक गई. मैंने फिर से उसको नीचे किया और किस करते हुए फिर से एक जोरदार शॉट मारा. अबकी बार मेरा पूरा लंड उसकी चूत में घुस गया और मेरे टट्टे उसकी गांड से लड़ गए.

    ‘आह्ह..’ की मस्त आवाज के साथ रूबी मुझे जोर से किस करने लगी. मैंने अपने धक्के तेज कर दिए और रूबी भी गांड उठाकर मेरा पूरा साथ दे रही थी.

    दसेक मिनट तक मैंने उसको हचक कर चोदा. उसकी टांगें उत्तेजना की अधिकता में और मस्त चुदाई से हवा में उठी हुई थीं.

    उसने मेरी तरफ देखा, तो मैं समझ गया. मैंने लंड बाहर खींचा और उसकी चूची पकड़ कर उसे उठने का इशारा किया. वो उठी और पलंग के किनारे कुतिया की पोजीशन में खड़ी हो गई. मैं पलंग से नीचे आ गया और लंड को उसकी चुत के छेद में लगा कर धक्का मार दिया.

    रूबी की मजेदार सीत्कार निकल गई. लंड चुत की कबड्डी होने लगी. मैं लंड खींचता, तो चुत भी आगे को हो जाती, फिर एक लय के साथ लंड चुत आपस में अन्दर तक जाकर मिलन करने लगते.

    मैंने उसकी चूचियों को पकड़ कर उसकी चुत खूब बजाई. इसके बाद वो फिर से पोजीशन बदलने की कहने लगी. मैंने इस बार उसे अपने लंड पर बिठाया और उसकी उछलती चूचियों को अपने हथेलियों में भर कर खूब मींजा.

    इस तरह से हम दोनों काफी देर तक सेक्स करते रहे. मैं हैरान था कि मैंने इतनी देर तक सेक्स कैसे किया. पर मुझे ध्यान आया और खुद पर गर्व भी हुआ कि ये मेरे मेडीटेशन करने का असर था.. जो आज मुझे पता चल रहा था.

    मैं पिछले 50 मिनट से रूबी को चोद रहा था. इस बीच वो 4 बार झड़ चुकी थी और मेरा लंड अभी भी जोरदार चुदाई में लगा हुआ था. आखिरकार एक बार फिर से घोड़ी बनी रूबी को चोदते हुए मेरे लंड की बारिश उसकी चूत पर हुई. रूबी की गर्म चूत भी वीर्य की फुहार से ठंडी हो गई.

    हम दोनों लिपट कर लेटे रहे. उस रात मैंने रूबी को 5 बार जमकर चोदा और अगली सुबह वापस अपने शहर आ गया.

    मैं अभी जब भी लखनऊ जाता हूं, तो रूबी के यहां रुक कर सारी रात उसकी चूत को शांत करता हूं.

  • दोस्त की सेक्सी बीवी की चूत चुदाई स्टोरी

    मेरे दोस्त की पत्नी बीवी … आह … कसम से क्या लड़की थी. वह दिखने में एकदम कमसिन लगती थी. उसका बदन बड़ा मस्त था. उसने कैसे मेरी लंड पर चढ़ कर ज़न्नत की सैर की?

    दोस्तो, मैं मनीष शर्मा अन्तर्वासना का एक नियमित पाठक हूँ और कोटा से हूं. वैसे तो मैं भी शादीशुदा हूँ और मेरा शादीशुदा जीवन भी बहुत अच्छा है. सुंदर बीवी के साथ मेरे दो बेटे भी हैं.

    आज यहां मैं वो दास्तान लिख रहा हूँ, जिसमें मेरे दोस्त की पत्नी ने किस तरह मुझे अपनी चुदाई करने को लेकर मुझे उकसाया. और जो नहीं होना चाहिये था, वो हो गया. क्योंकि तन की इंद्रियों पर भी किसी का जोर नहीं चलता है.

    दोस्तो, ये बात करीब डेढ़ महीने पहले की है. मेरा दोस्त जिसका नाम पार्थिव है, वो एक होटल में मैनेजर है तथा मेरे मकान से करीब आधे किलोमीटर की दूरी पर ही किराये के मकान में रहता है. चूंकि वो मेरा दोस्त था, इसलिए मैं कभी कभी उसकी आर्थिक मदद भी कर देता था. इसी लेनदेन के बहाने मेरा उसके घर आना जाना था.

    उसकी पत्नी माया … आह … कसम से क्या लड़की थी … बस एक बार जो देख ले, बार बार देखता रहे. माया दिखने में एकदम कमसिन लगती थी … उसका बदन बड़ा मस्त था. झील सी गहरी उसकी कजरारी आंखें … फिगर 32-34-32 साइज का. उसके उठे हुए चुच्चे, पतली सी कमर और टाईट सी गांड. जब वो अपनी गांड मटका कर चलती, तो अच्छे अच्छे के लौड़े भी खड़े हो जाते.

    कमाल की बात यह कि इतनी मस्त मॉल होने के बावजूद मैंने कभी भी माया को गलत नज़र से नहीं देखा था. क्योंकि मैं ये सोचता था कि माया मेरे दोस्त की पत्नी है … किंतु वो मेरे बारे में क्या सोचती थी, मुझे इसकी जानकारी बिल्कुल नहीं थी.

    वैसे पार्थिव की शादी को 3 साल हो गए थे, लेकिन उनको कोई बच्चा नहीं हुआ था. मैं इस बारे में उससे पूछता, तो वो हर बार हंस कर टाल देता था.

    एक दिन सुबह मैं उसके घर गया और डोरबेल बजाई. मुझे पार्थिव से जरूरी काम था. उसकी पत्नी ने दरवाज़ा खोला और मैंने माया को देखा, तो उसने सफेद कलर की गाउन पहन रखा था. उसमें से उसकी ब्लैक स्टेप और ब्लैक पेंटी साफ दिखाई दे रही थी, जो उसने पहन रखी थी. उस दिन पहली बार उसको देखकर मन में हलचल हुई थी. शायद वो भी इस बात को समझ चुकी थी कि मेरा ध्यान कहां हैं.

    वो बोली- हां भइया बोलिए … इतनी सुबह सुबह … कैसे आना हुआ!
    उसकी आवाज़ से जैसे मैं जागा, मैं बोला- पार्थिव है घर पर!
    वो बोली- हां यही हैं, वो सो रहे हैं.

    उसने मुझे अन्दर बुलाकर बिठाया और पानी का गिलास देकर चाय बनाने की बोल कर अन्दर किचन में चली गई. मेरी तो हालत उसके 32 साइज़ के चुच्चे देखकर ही खराब हो गई थी. जैसे तैसे मैंने अपने आप पर कंट्रोल किया, लेकिन मेरा लंड पूरा खड़ा हो गया था, जो ऊपर से साफ दिख रहा था.

    इतने में माया चाय लेकर आ गई थी. उसने मुझे चाय दी और खुद भी वहीं मेरे सामने बैठकर चाय पीने लगी. हालांकि मैं चाय पी रहा था, लेकिन मेरी नज़र बार बार उसके चुचों पर जा रही थी. मैं समझ नहीं पा रहा था कि वो मुझे उकसा रही है या उसके मन में कुछ और बात है.

    मैंने माया को पार्थिव को बुलाने के लिए बोला तो बोली- आप मुझे काम बता दीजिए, मैं उन्हें बोल दूंगी.
    फिर मैंने कहा- पार्थिव ने कुछ समय पहले मुझसे पैसे लिए थे, तो मुझे जरूरत है पैसों की, तो मैं लेने आया था.
    माया बोली- ठीक है … मैं उन्हें बोल दूंगी. आप शाम को आकर अपने पैसे ले जाना.

    इस तरह बोल कर वो मुस्कुराने लगी और फिर मैं भी वापस अपने घर आ गया.

    घर आकर सबसे पहले तो माया की चुदाई को याद करके मुठ मारी, तब जाकर शरीर को थोड़ी शांति मिली.

    दिन में मुझे पार्थिव मिला. शायद वो कहीं बाहर जा रहा था.
    मैं उससे कुछ बोलता, उससे पहले वो आ गया और बोला- शाम को घर जाकर पैसे ले लेना. मैं माया को देकर आ गया. मैं दो दिन के लिए शहर से बाहर जा रहा हूँ … कोई भी प्रॉब्लम हो, तो सम्भाल लेना.

    मैं बोला- ठीक है.

    अब तो मेरे मन में लड्डू फूटने लग गए कि हो सकता है आज शाम को मुझे माया की चूत चुदाई नसीब हो जाए.

    जैसे तैसे मैंने पूरा दिन निकाला और शाम को पार्थिव के घर पहुंच गया. मैंने डोरबेल बजाई. जैसे ही माया ने दरवाजा खोला, मैं तो उसे देखता ही रह गया.

    उसने ब्लैक कलर की साड़ी पहन रखी थी. कसम से क्या माल लग रही थी. उसने मुझे अन्दर बुलाया और वहीं ड्राइंगरूम में सोफे पर बिठाकर खुद भी मेरे सामने बैठ गई. मैं बस माया को ही देख रहा था.

    माया बोली- क्या हुआ भैया?
    जैसे मैं गहरी नींद से जगा … मैं बोला- कुछ नहीं … लेकिन आज तुम बला की ख़ूबसूरत लग रही हो.
    वो मुस्कुराई और बोली- वो आपको पैसे देने के लिए बोल कर गए हैं कि आप पैसे लेने आओगे.
    मैं बोला- हां जरूरत थी, इसलिए पार्थिव को बोला.

    मैं माया से बात तो कर रहा था, लेकिन मेरी बार बार नज़र उसके चुचों पर जा रही थी. दिल कर रहा था कि अभी पकड़ कर मसल दूँ, लेकिन क्या कर सकता था. उधर नीचे मेरा लंड अपना पूरा आकार ले चुका था. माया भी सब कुछ देख कर भी अनजान बन रही थी.

    वो बोली- क्या देख रहे हैं आप घूर घूर के?
    न जाने मैंने किस झौंक में उसके चुचों की तरफ इशारा करते हुए कह दिया- इनको देख रहा हूँ.
    माया पल्ला हटा कर अपने चूचे उठाते हुए बोली- आखिर इनमें ऐसा क्या है?

    ऐसा वो मुस्कुराते हुए बोली. उसकी इस हरकत से मैं समझ गया कि बंदी चुदने को रेडी है.

    मैं बोला- अगर तुम इज़ाज़त दो, तो बताऊं.
    उसने मुस्कुराते हुए हां में सर हिलाया.

    मैं उसके पास जाकर बैठ गया और माया को देखने लगा और धीरे धीरे उसके होंठों की तरफ अपने होंठों को बढ़ाने लगा.

    माया ने अपनी आंखें बंद कर लीं, जैसे उसने मुझे स्वीकृति दी हो. मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और उन्हें चूसने लगा और एक हाथ उसकी पीठ पर घुमाने लगा.

    थोड़ी देर में वो भी मेरा साथ देने लगी और हम एक दूसरे के होंठों को जोर जोर से चूसने लगे. मैं उसके पीठ को सहलाते हुए उसकी गर्दन के बायीं ओर उसे चूमने लगा. वो अपने मुँह से हल्की हल्की सीत्कारें निकालने लगी. मैं उसके चेहरे और उसके होंठों को पागलों की तरह चूमने लगा और वो अपने मुँह से ‘सीई ससीईई सससीईईई..’ की आवाजें करने लगी.

    धीरे से मैं अपने एक हाथ को नीचे उसके उरोजों पर ले गया और ब्लाउज के ऊपर से ही उन्हें दबाने लगा. क्या नर्म नर्म उरोज थे उसके. फिर मैंने उसके शरीर से उसकी साड़ी को अलग कर दिया और फिर से उसके उरोजों को दबाते मसलते हुए उसे चूमता रहा और वो अपने मुँह से ‘ऊह हहहह आह आह सस्स सस्स ससीई..’ की आवाजें निकालती रही.

    मैं अपने हाथ से माया के शरीर को सहला रहा था और उसे बेहताशा पागलों की तरह चूम भी रहा था. वो मदहोश होने लगी थी. धीरे धीरे मैंने माया का पेटीकोट ऊंचा कर दिया और उसकी जांघों को सहलाते हुए उसकी पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत को मसलने लगा.

    उसने मस्ती के मारे कस के मेरा लंड भींच दिया. मेरे मुँह से एक सिसकारी निकल गई. फिर मैंने उसका ब्लाउज और उसकी ब्रा दोनों को उतार दिया. उसके उरोजों को देखकर मेरी वासना और भड़क गई और मैं दोनों हाथों से उसके उरोजों को प्यार से मसलने और दबाने लगा. माया मस्ती के मारे ‘आह आह आह आह..’ करने लगी.

    वो बोली- ओह भैया … जोर से और जोर से दबाओ.

    मैं उन्हें प्यार से ही दबाने लगा. वो भी प्यार से मेरे लंड को मेरी पैंट के ऊपर से ही दबाने लगी थी.

    फिर मैं वापस माया के होंठों को चूमने लगा तथा दूसरे हाथ उसका पेटीकोट का नाड़ा खींचकर खोला और उसे उतार दिया. अब सामने उसकी चूत को मैं पेंटी के ऊपर से ही मसल और दबा रहा था.

    मैंने अपनी शर्ट और बनियान दोनों उतार दिए. मैंने फिर से माया को चूमना शुरू किया और एक हाथ से उसके चुचों को सहलाए जा रहा था. इसके बाद मैं थोड़ा नीचे आया, उसके उरोजों के सामने अपने होंठ लाया. उसके एक उरोज की चौंच को मैं अपनी जुबान से सहलाने लगा और होंठों के बीच दबाकर खींचकर छोड़ने लगा. वो मस्त हो गई.

    इधर मैं दूसरे को जोर जोर से मसलने लगा. फिर दूसरे उरोज को भी मुँह में लेकर उसकी चौंच को जुबान से सहलाने लगा. ऐसा करने पर वो ओर मचलने लग गई और बड़े प्यार से मुझे अपने मम्मे पिलाने लगी. मैं उसके निप्पलों को मुँह में लेकर जोर-जोर से चूसने लगा. मैं बहुत देर तक दूध चूसता रहा. वो मेरे सर में हाथ फिराते हुए ‘ससीईउई ससीईई..’ करने लगी और मेरे लंड को जोर से दबाने लगी.

    फिर माया ने मेरा मुँह वहां से हटाकर मेरे होंठों को चूसने लगी.

    उसके हाथों में इतनी जान थी कि मैं चाहकर भी अपना चेहरा नहीं हटा पा रहा था. फिर उसने मेरी पैंट और मेरे अंडरवियर को एक ही बार में उतार दिया और सीधा मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर ऐसे चूसने लगी, जैसे कई दिनों की भूखी हो.

    खैर माया मस्त होकर मेरे लंड को चूस रही थी. लंड के टोपे को अपने पतले होंठों के बीच लेकर खींच कर चूस रही थी. मेरे लंड के टोपे पर जुबान फिराकर और पूरा मुँह में लेकर ऐसे चूस रही थी, जैसे लंड को नहीं, सोफ्टी आइसक्रीम को चूस रही हो.

    मैं ज्यादा समय तक उसकी इस अदा पर नहीं टिक पाया और मेरे लंड ने सारा लावा उसके मुँह में ही उड़ेल दिया. माया एक एक बूंद को चूस चूस के पी गई, लेकिन इसके बावजूद वो मेरे लौड़े को चूसती रही.

    थोड़ी देर में मेरा लंड वापस खड़ा हो गया. फिर मैंने माया को सोफे पर बिठाया और उसके उरोजों को मसलकर चूसने लगा, वापस दबाने लगा. थोड़ी देर बाद उरोजों को चूसते हुए मैंने माया की पेंटी उतार दी और उसकी चूत को सहलाने लगा

    माया ‘सस्स सससीईईई..’ की आवाज़ निकलने लगी. फिर मैंने जैसे ही अपनी जुबान से उसकी चूत के दाने को सहलाया, वो तो बस ‘उईईई आह आह आह ससीईई..’ करने लगी. मैं उसकी चूत चाटने में लग गया.
    उसकी चूत से लगातार नमकीन टेस्टी पानी निकल रहा था, जिसे मैं चूसते हुए चाट रहा था.

    तभी माया ने मेरा मुँह अपनी चूत पर दबा लिया और अपनी गांड को हिलाने लगी. वो अपनी चूत को मेरे मुँह पर तेजी से घिसने लगी. मैं भी पूरा पक्का चूत चूसने में लगा रहा. उसकी चूत की दोनों फांकों को पूरा मुँह में दबा कर खींच कर चूसने लगा.

    माया बोली- अब तो अपना लंड मेरी चूत में डाल दो … मुझसे सहन नहीं होता.

    मैंने भी देर न करते हुए उसको थोड़ा आगे खींच कर उसके दोनों पैरों को अपने कंधे पर रख लिया. अपने लंड को उसकी चूत पर टिकाकर एक ही बार में पूरा लंड उसकी चूत की गहराइयों में उतार दिया.

    उसकी एक मीठी सी आह निकली और वो पूरा लंड लील गई.

    मैं अपने लंड को उसकी चूत के अन्दर बाहर करने लगा. वो भी मेरी कमर को पकड़ कर मुझे अपनी चूत की तरफ खींच रही थी.

    वो मस्ती में बोल रही थी- आंह चोदो और तेज चोदो … फाड़ डालो मेरी चूत को और … सससीईईई सससीईई आह आह आह उह उह आह..

    मैं भी उसे गाली दे दे कर चोद रहा. लंड अपनी पूरी रफ्तार से माया की चूत का बाज़ा बजा रहा था.
    माया बोली- मुझे तुम्हारे लंड की सैर करनी है.
    फिर मैं रुक गया.

    उसने मुझे सोफे पर बिठाया और खुद अपनी चूत को लंड पर सैट करके सोफे को पकड़ कर बैठ गई और ऊपर नीचे होने लगी.

    वो बोली- आहआह आह भैया … ऐसे तो पार्थिव ने मुझे कभी नहीं चोदा … आह आह आह!

    मैं उसकी बातों पर ध्यान नहीं दिया और उसकी चूची को मुँह में दबा कर चूसने लग गया. इस तरह माया ‘सससीईई सससीईई..’ करते हुई और जोर से लंड पर कूदने लगी.

    थोड़ी देर में उसकी चूत पानी छोड़ने लगी और ‘पच पच पच..’ की आवाजें आने लगीं. उसकी स्पीड कम हो गई थी, तो मैं अपनी गांड उचका कर उसको नीचे से चोदने लगा. मैं भी फुल स्पीड से चोदने में लगा था. तभी मेरा भी पानी छूटने वाला था.

    मैं बोला- माया अन्दर ही निकाल दूँ.
    वो बोली- हां भैया निकाल दो, मुझे आप अपने बच्चे की मां बना दो. शादी को 2 साल से ऊपर हो गए. बहुत कुछ सुनना पड़ता है.

    फिर मैंने अपने लंड का सारा लावा उसकी चूत में भर दिया. हम दोनों ने एक दूसरे को कसके बांहों में जकड़ लिया. जब थोड़ा नॉर्मल हुए, तो वो अलग हुई और बाथरूम जाकर खुद को ठीक करके मेरे लिए किचन से चाय बनाकर लायी.

    चाय पीने के बाद और हम दोनों ने एक और राउंड लिया. इस बार मैंने उसे खड़े खड़े घोड़ी बना कर चोदा.

    उसके बाद जब भी पार्थिव बाहर जाता, मैं माया की चूत को अपने लंड की सैर करवाता.

    कुछ दिनों के बाद उसने मुझे गर्भवती होने की बात बोली. वो भी खुश थी और मैं भी. उसके बाद माया ने किस तरह अपनी सहेली को भी मुझसे चुदवाया, वो अगली सेक्स कहानी में लिखूंगा.

  • नई आई चाची के साथ सुहागरात जैसी चुदाई

    न्यू चाची Xxx चुदाई कहानी में मेरे चाचा शादी के कुछ दिन बाद जॉब पर चले गए. पीछे चाची लंड की कमी से तड़पती थी. एक रात मैंने चाची को पूरी नंगी देखा. वे चूत में उंगली कर रही थी.

    हाय दोस्तो, मेरा नाम राज है.
    मैं 24 साल का हूँ और महाराष्ट्र के छोटे से गांव से हूँ.

    यह मेरी पहली सेक्स स्टोरी है जो मेरी सगी चाची और मेरे बीच घटी घटना है.

    मेरी चाची का नाम सोना है.
    जैसा उनका नाम है, वैसा ही उनका रंग है. वो बिल्कुल ऐश्वर्या राय जैसी दिखती हैं.
    उनका फिगर 32-28-34 का है, जो भी देखे उन्हें चोदने का मन करे!

    हमारा संयुक्त परिवार है. हम सब एक साथ ही रहते हैं.
    हमारे घर में मेरे दादा-दादी, मेरे पापा और हम दो भाई, दो चाचा और चाची हैं.

    न्यू चाची Xxx चुदाई कहानी में हुआ यूँ कि चाचा की शादी के 3 महीने बाद काम के सिलसिले में मुंबई चले गए और वहीं काम करने लगे.

    चाचा के जाने के बाद चाची उदास रहने लगीं.

    चाचा से रात में फोन पर चाची की बात होती, पर नई-नवेली दुल्हन सेक्स के बिना कितने दिन रहेगी?
    घर में मैं चाची के साथ एक दोस्त की तरह रहता था, कोई छोटा बच्चा नहीं था … तो चाचा के मुंबई जाने के बाद चाची के डबल बेड पलंग पर मैं और मेरी चाची दोनों साथ में सोते थे.

    हम रोज 10 बजे तक टीवी देखकर सब अपने-अपने कमरे में सो जाते. तब तक मेरे मन में चाची के लिए कोई गलत विचार नहीं था.

    लेकिन एक दिन रात को अचानक जब मेरी नींद खुली.
    तो मैंने देखा चाची बिल्कुल नंगी होकर दीवार के पास खड़ी होकर अपनी चूत में उंगली कर रही थीं.

    वे अपने संतरे जैसे बूब्स को एक हाथ से दबा रही थीं और सिसकारियां ले रही थीं.
    मैं उन्हें देखने लगा, पर उस वक्त मैं हैरान हो गया जब मैंने उनके मुँह से अपना नाम सुना.

    वे अपनी चुत रगड़ती हुई मेरा नाम लेती हुई बड़बड़ा रही थीं.
    ये सब देखकर मैं हैरान हो गया और पैंट में मेरा लंड खड़ा हो गया.

    थोड़ी देर बाद चाची झड़ गईं और पुनः सो गईं.
    फिर मैं थोड़ी देर बाद उठकर बाथरूम में जाकर चाची को याद करके मुठ मारकर सो गया.

    दूसरे दिन से चाची के लिए मेरी नजर बदल गई.
    अब मैं चाची को चोदने का प्लान बनाने लगा और सोचते-सोचते एक आइडिया मेरे दिमाग में आ गया.

    मैं खाना खाने के तुरंत बाद चाची के रूम में जाकर सोने का नाटक करने लगा.
    चाची काम निपटा कर रात के करीब दस बजे आईं और उन्होंने मुझे आवाज़ दी.
    मैं जगा हुआ था, लेकिन सोने का नाटक करता रहा.

    चाची ने जब देखा कि मैं गहरी नींद में सो रहा हूँ तो उन्होंने अपनी साड़ी उतारी. फिर पेटीकोट भी उतार दिया.
    वे मेरी तरफ अपनी गांड करके खड़ी थीं.
    मैं उन्हें देख रहा था.

    चाची ने ब्लाउज़ भी उतार दिया और ब्रा उतार कर पैंटी को भी उतार दिया.

    मैं ये सब चुपके से देख रहा था.
    फिर चाची पलंग पर रखी हुई अपनी नाइटी लेने के लिए जैसे ही मुड़ीं, मुझे उनकी चूत के दर्शन हो गए!

    क्या मस्त पावरोटी सी फूली हुई चूत थी यार … बिल्कुल क्लीन शेव्ड!
    उनकी मखमली चूत देखकर ऐसा लगा कि अभी पटक कर अपना 6 इंच लंबा और 3 इंच मोटा लंड चाची की चूत में डाल दूँ!

    पर मैं इतनी जल्दी ऐसा नहीं कर सकता था.

    फिर चाची ने अपनी चूत पर हाथ फिराया और नाइटी उठाई.
    वे मुझे देखती हुई नाइटी पहनने लगीं और आकर मेरे बाजू में लेट गईं.
    चाची की गांड मेरी तरफ थी और मेरा कंट्रोल खोता जा रहा था.

    मैं थोड़ी देर बाद उठा और बाथरूम जाकर मुठ मार कर वापस आया.
    मैंने वापस आकर देखा तो चाची की नाइटी उनकी जांघों तक आ गई थी.

    अब नींद मुझसे कोसों दूर थी, तो मैंने लाइट बंद की और जाकर उनसे चिपक कर सो गया.
    चाची के बदन की गर्मी मुझे महसूस हो रही थी.

    मैंने सोने का नाटक करते हुए चाची के ऊपर अपना एक हाथ रखा.
    इस पर चाची कुछ नहीं बोलीं, ऐसा लग रहा था मानो वे घोड़े बेच कर सो रही हों!

    यह देख कर मेरी हिम्मत बढ़ी.

    मैं धीरे-धीरे उनकी नाइटी के ऊपर से हाथ फिराने लगा और उनके चूचे दबाने लगा.
    चाची की गर्म सांसें मुझे महसूस हो रही थीं.

    अब मैंने आगे बढ़ने की सोची और दूसरा हाथ उनकी जांघ पर रखकर सहलाने लगा.
    इससे चाची गर्म होने लगीं और वे अचानक से मुड़ गईं.

    मैं डर गया कि अब लौड़े लग गए … लेकिन वे सोई रहीं.
    अब उनके चूचे बिल्कुल मेरे मुँह के सामने थे और उनके निप्पल एकदम खड़े हो गए थे.

    उनकी सांसें तेज़-तेज़ चल रही थीं और इस वजह से अब मेरा लंड उनकी चूत को छूने लगा था.

    मुझे उनकी तेज तेज चलती सांसों से समझ आ गया था कि चाची भी जाग रही हैं पर सोने का नाटक कर रही हैं.

    मैंने उनकी नाइटी को धीरे-धीरे सरकाना शुरू किया और उसे पूरी उतार दी.
    इसमें चाची ने भी बिना आंखें खोले मेरी मदद की.

    जब उन्होंने अपनी गांड उठाकर नाइटी निकल जाने दी और अपनी आंख नहीं खोली … न कुछ बोलीं, तो मुझे पक्का हो गया कि आज चाची चुत चुदवाने के लिए राजी है.
    कुछ देर के बाद मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए और अपना 6 इंच लौड़ा लेकर उनके साथ चिपक गया.

    मैं चाची की चूत में उंगली करने लगा तो यह उनसे सहन नहीं हुआ और वे मादक आंहों में आवाज निकालती हुई सिसकारने लगीं ‘आह सी आह्ह्ह … स्स्स आह्ह्ह्ह आआह मेरे राजा आह बहुत प्यासी हूँ मैं … आह!’

    चाची की चूत बहुत गर्म लग रही थी और टाइट भी थी.

    मैंने उन्हें किस किया और चाची के कान में धीरे से कहा- चाची, अब बस भी करो प्लीज … थोड़ा सपोर्ट करो न! वैसे तो मेरा नाम ले लेकर चूत में उंगली करती हो न!

    यह सुनकर तो चाची बिल्कुल जंगली बिल्ली की तरह मुझ पर झपटीं और मुझे अपनी बांहों में कसके भरने लगीं.
    मैं भी किस करते-करते उनके चूचे मसलने लगा और एक हाथ से चूत में उंगली करने लगा.

    चाची चुदास भरे स्वर में बोलीं- राज और मत तड़पाओ … प्लीज मुझे चोद दो!

    मैंने चाची को कुछ और तड़पाने की सोची और उनकी चूत में मुँह लगाकर जीभ अन्दर डालने लगा.
    इससे चाची को बहुत मज़ा आया.

    वे मादक स्वर में चिल्लाने लगीं- आआह ईई … अहम्ह्ह बहुत मज़ा आ रहा है … तुम्हारे चाचा ने पहले ऐसा कभी नहीं किया!
    यह कहती हुई चाची अकड़ने लगीं और मेरे सर को अपनी चूत में दबाने लगीं.

    वे कुछ ही पलों में झड़ गईं.

    अब मैंने उन्हें लंड मुँह में लेने को बोला.
    तो वे नानुकुर करने लगीं.

    मेरे थोड़ा ज़ोर देने पर वे मान गईं और मेरा लंड चूसने लगीं.

    मैं तेज़-तेज़ उनके मुँह को चोदने लगा, चाची के गले तक लौड़े को पेलने लगा.
    चाची ‘गो-गो’ करने लगीं.

    फिर मैंने पोजीशन ली.
    एक तकिया चाची की गांड के नीचे लगाया और उनके पैर अपने कंधे पर रखकर लंड का सुपारा उनकी गुलाबी चूत के मुँह पर रख कर रगड़ने लगा.

    चाची मस्त होने लगीं तो मैंने एक जोर का झटका दे मारा.
    पहली बार में मेरा लंड फिसल गया.

    चाची हंसने लगीं.

    मैंने फिर से लौड़े को चुत के मुँह पर सैट किया और करारा झटका दे मारा.
    इस बार मेरा 2 इंच लंड चूत के अन्दर चला गया और चाची की चीख निकल गई.
    उन्हें बहुत दर्द हुआ.

    मैंने कहा- क्या हुआ?
    चाची ने कहा- मैंने पहले कभी इतना बड़ा नहीं लिया! शादी से पहले मेरा कोई बॉयफ्रेंड भी नहीं था और तुम्हारे चाचा का बहुत पतला और छोटा सा है! प्लीज आराम से करो!

    मैंने उनसे हां कहा और उनकी कोई परवाह न करते हुए उनके होंठों पर होंठ रख कर चूसने लगा.
    मैं उनकी चीख न निकले इसलिए मुँह बंद किये हुए था.

    जैसे ही चाची मस्त हुईं, मैंने एक ज़ोरदार धक्का मारा.
    इस झटके से मेरा पूरा लंड चूत में उतर गया.

    वे दर्द से छटपटाने लगीं.
    उनकी चुत फट गई थी तो चूत से खू.न आने लगा था.
    पर मैंने उन्हें नहीं बताया.

    उनकी आंखों से आंसू आने लगे.

    मेरा भी पूरा लंड छिल गया, मुझे भी बहुत दर्द होने लगा.
    लेकिन कसी हुई चुत में लंड पेलने में बहुत सुख मिला था.

    चाची की चूत गर्म भट्टी जैसे तप रही थी.

    मैं थोड़ी देर ऐसे ही पड़ा रहा.
    फिर जैसे चाची का दर्द कम हुआ, मैंने दोबारा से झटके मारने चालू कर दिए.

    न्यू चाची अब लौड़े से Xxx चुदाई के मज़े लेने लगीं और मादक आवाज में सिसकारने लगीं ‘आह … आ मज़ा आ गया … और तेज़ करो … आह अह अह फाड़ दो आह ऐसे ही चोदो!’

    वे गर्मागर्म आहें भरने लगीं तो मैंने फुल स्पीड में चुदाई चालू कर दी.
    फिर जब मैं झड़ने को आया, तो मैंने चाची से कहा कि मेरा काम होने वाला है … माल कहां निकालूँ?

    चाची बोलीं- आह, मेरा भी होने वाला है … बाहर मत निकालना … अन्दर ही छोड़ दो!
    मैंने यह सुनते ही तेज़-तेज़ चार-पाँच झटके मार और चाची की चूत के अन्दर झड़ गया.

    झड़ कर मैं हांफने लगा था तो उसी अवस्था में चाची के ऊपर ढेर हो गया.
    थोड़ी देर बाद हम दोनों उठे और एक-दूसरे को साफ किया.

    उनकी बेडशीट पर पूरा खू.न लग गया था.
    चाची ने बेडशीट चेंज की और हम दोनों नंगे ही सो गए.

    इसके बाद तो रोज़ रात को हम दोनों नंगे होकर चुदाई करते और मजा लेते.
    जब तक चाचा नहीं आए, मैंने चाची की चुत को अपनी चुत समझा.

    चाचा के आने के बाद भी जब हमें मौका मिलता है, तो हम दोनों चुदाई कर लेते हैं.
    चाची मेरे लौड़े से बड़ी खुश हैं.

  • गर्लफ्रैंड की माँ ने चूत चुदवायी

    मैंने मेरे घर के सामने की एक लड़की पटा ली, हम दोनों में खूब चुदाई होती थी। एक दिन उसकी मम्मी ने हमारी चैट पढ़ ली और मुझे अपने घर बुलाया. उसके बाद क्या हुआ?

    हाय दोस्तो, मैं योगी रंग गोरा कद 5 फिट 8 इंच का गबरू जवान हूँ। मैं अभी 23 साल का हूँ मेरा लंड का साइज 7 इंच लंबा और 3 इंच मोटा है।

    चलो दोस्तो अब मैं कहानी पे आता हूँ. ये कहानी तब की है जब 20 साल का था.
    मैं जब फर्स्ट ईयर की पढ़ाई करने गांव से शहर गया. तब मैं वहाँ के माहौल में ढला और मेरे घर के सामने की एक लड़की पटा ली जिसको मैं बहुत प्यार करता था. और वो लड़की भी मुझसे प्यार करती थी, हम दोनों में खूब चुदाई होती थी।

    एक दिन हुआ क्या कि वो मुझसे चैट करते करते सो गई. रात के 11 बजे उसकी माँ उसके रूम में गयी लाइट बंद करने!
    इधर मैं सोच रहा था कि वो कैसे रिप्लाई नहीं कर रही है. यह सोच कर मैंने उसको कॉल किया तो उसकी माँ ने फोन उठाया.

    मैंने उसकी माँ के कुछ बोलने से पहले से बोल डाला- जानेमन … कुछ जवाब नहीं दे रही हो?
    तो उसकी माँ में कुछ नहीं कहा और हमारी सारी चैट को पढ़ लिया, उस चैट में हम लोग बहुत अश्लील बातें कर रहे थे.

    मेरी गर्लफ्रैंड की माँ के बारे में बता दूं … वो बहुत बड़ी चुदक्कड़ औरत थी. उसके जिस्म का साइज़ 36-30-38 था. माँ कसम यारो … उनको चोदने में जितना मजा आया, उतना तो मेरी गर्लफ्रैंड को चोदने में मजा नहीं आया और ना ही मेरी गर्लफ्रैंड की दोनों मामी और उसके एक विधवा बड़ी माँ (मेरे गर्लफ्रैंड की माँ की बड़ी बहन) को!

    मैं आप लोगों को एक बात बता दूँ कि उसकी फैमिली की सभी लेडिस बहुत चुदक्कड़ हैं। जब मैं थर्ड ईयर में बाहर में रहता था तो वो मेरे साथ हर रात बिताती थी. उसकी दोनों मामी और उसकी बड़ी माँ को मैंने कैसे पटाया और चोदा, ये बाद में बताऊंगा. आज उसकी माँ के बारे में बताऊंगा जो इन सबसे बड़ी चुदक्कड़ थी. जिसने मुझे खुद प्लान करके पटाया था।

    हाँ तो दोस्तो, जैसे मैंने बताया कि उस रात मेरी गर्लफ्रैंड मुझसे चैट करते सो गई तो उस दिन से मुझसे चुदवाने वाली की एक और संख्या बढ़ गयी।

    सुबह मुझे एक अज्ञात नंबर से कॉल आया. मैंने फोन उठाया तो वो मेरी गर्लफ्रेंड का नाम लेते हुए बोला- मैं इसकी माँ बोल रही हूं.
    मेरी गांड फट गयी क्योंकि मैं उनसे बहुत डरता था।
    उन्होंने कहा- क्या तुम घर आकर मुझसे मिलके बात कर सकते हो? मुझे तुमसे एक शिकायत है।

    मैंने उनसे कहा- क्या शिकायत है, आप बोलिये?
    तो उन्होंने कहा- घर में आओ अभी!
    “ठीक है आंटी!” कहक़र मैं उनके घर गया.

    तो उन्होंने मुझे बैठक कमरे में बिठाया और फिर मुझे कहा- तुम मेरी लड़की से प्यार करते हो?
    तो मैंने कहा- हाँ करता हूँ.
    “मैंने कल रात तुम्हारी चैटिंग पूरी पढ़ ली है।”

    फिन मेरी गर्लफ्रेंड की मम्मी ने पूछा- इसी तरह से बात करते हो या रियल में भी ये सब करते हो?
    तो मैंने उनसे कहा- नहीं आंटी, ये सब तो हम शादी के बाद करेंगे।
    तो उन्होंने खूब डांटा.
    मैं अपना सिर नीचे करके बस जवाब दे रहा था.

    तो उन्होंने कहा- तुम लड़कियों की तरह सिर क्यों झुकाये हो?
    मैंने सर उठाकर देखा वो बहुत गहरे गले का ब्लाउज पहने थी. उनके बड़े बड़े बूब्स की क्लीवेज साफ साफ दिख रहा था.
    तो उन्होंने मुझे देखते हुए देख लिया और पूछा- क्या देख रहा है?
    मैं चुप रहा.

    उन्होंने मुझसे कहा- लड़के तो तुम मुझे अच्छे लगते हो लेकिन ऐसी अश्लील बातें क्यो करते हो?

    तो मैंने उनसे कहा- सॉरी आँटी, आज के बाद नहीं करूँगा।
    वो बोली- मैं तो उसके पापा को सब बताने वाली हूँ. तू तो जानता है कि वो बहुत खतरनाक हैं. मैंने भी कई बार उनके हाथों से मार खायी है.

    मैंने उनसे गिड़गिड़ाते हुए माफी मांगी.
    तो उन्होंने कहा- ठीक है, नहीं कहूँगी उनसे! लेकिन तुम मेरा एक काम करोगे तब … और जब मैं बोलूंगी, वो काम तुमको करना पड़ेगा.
    मैंने कहा- ठीक है आँटी!
    उन्होंने कहा- कल 10 बजे सुबह आना।

    मैं रात भर नहीं सोया. ना ही अपनी गर्लफ्रैंड से बात की. बस सुबह होने का इंतजार किया.
    सुबह सुबह 4 बजे आंख लगने के कारण 9 बजे उठा.

    उन्होंने कॉल किया- आ रहा है या नहीं?
    मुझे कुछ पता नहीं था कि मेरे साथ क्या होना था.
    मेरे को क्या पता था कि वो मेरी ज़िंदगी का सबसे हसीन पल था.

    मेरी सेक्स लाइफ का, अय्याशी का सब जबरदस्त मोड़ था क्योंकि मैंने इसके बाद मेरी गर्लफ्रैंड की फैमिली में केवल उसकी नानी को बस को नहीं चोदा क्योंकि वो बहुत ज्यादा बूढ़ी हो गयी थी. उसके मामा की पूरी फैमिली चुदती थी. मजे की बात यह कि इसके बारे में मेरी गर्लफ्रैंड को कुछ नहीं पता था।

    9 बजकर 55 मिनट में मैं उनके घर पहुंचा. मैंने उनको आवाज दी तो वो बोली- मेरे रूम में बैठ … मैं नहा रही हूँ.
    तो मैं उनके रूम में गया.

    उनके बेड पे उनकी ब्रा और पेंटी रखी थी. मैं उनकी ब्रा और पैंटी को नाक के पास ले जाकर सूंघने लगा. क्या मस्त खुशबू आ रही थी. लेकिन मैंने डर में भी अपने कमीनेपन को नहीं छोड़ा।

    फिर वो नहा कर टॉवल में बाथरूम से बाहर आयी. मैंने अचानक से उनको देखा तो उनकी पैंटी को बेड पे रख दिया. जब वो टॉवल में आ रही थी तब वो सेक्स की देवी लग रही थी. मैं उनको एकटक देखते रह गया.
    तो उन्होंने कहा- क्या देख रहा है?
    मैंने उनसे कुछ नहीं कहा।

    फिर वो मेरे को बकने लगी- तू मेरे बिस्तर पे कैसे बैठा है? तू नीचे बैठ! वो एक टॉवल रखा है उसको उठा कर ला और मेरे हाथ पैर को टॉवल से पौंछ!

    मैंने उनके हाथ पैर के पानी को टॉवेल से साफ किया. उनके बाल भी सुखाये. ये सब करते हुए मुझे डर तो लग रहा था लेकिन उनके अर्धनग्न शरीर का दीदार भी हो रहा था.
    मन तो कर रहा था कि उसके टॉवल को खींचकर नंगी करके चोद दूँ. लेकिन डर भी रहा था कि अगर बात बिगड़ गयी थी सबसे हाथ धोना पड़ जाए!

    फिर उन्होंने मुझसे कहा- किस सोच में पड़ गए तुम? उस बॉडी लोशन को लाओ और मेरे हाथों में लगाओ, पैरों में लगाओ. आज से तुम मेरा रोज ऐसी काम करोगे।

    मैंने बॉडी लोशन आंटी की बाजू पर लगाया. फिर उसके बाद मैंने उनके पैरों में आया, जांघों पर आया. क्या मोटी और सेक्सी जाँघें थी आंटी की! मेरा लंड पूरा 7 इंच का हो गया.
    उन्होंने ये सब देख लिया.

    फिर मैंने जैसे ही लोशन जाँघों में लगाया तो वो बोली- बस इतना ही?
    बोल करके आंटी ने अपने दोनों पैरों को फैला दिया और मेरे हाथों को अपनी चूत में ले जाकर कहने लगी- यहां कौन करेगा?
    और वो अपने टॉवल को निकालकर पूरी तरह से नंगी हो गयी.

    मैं तो पागल हो गया. फिर उठकर मैंने ढेर सारा बॉडी लोशन को उनके पूरे नंगे जिस्म पर डाल के लगाया.

    फिर मैं उनके होंठों को चूमने लगा. वो भी बेतहाशा मुझे चूमने लगी.
    मैं धीरे धीरे उसके पूरे बदन को चूमने लगा.

    फिर मैंने आंटी की चूत को चाटना चालू कर दिया. फिर वो उह आह करने लगी और बड़बड़ाने लगी- जबसे मैंने तुम्हारा मैसेज पढ़ा … तब से पता चल गया था कि तुम माहिर खिलाड़ी हो. तब से ही मैं तुम से चुदवाना चाहती हूँ योगी!

    मैं बोला- उस दिन आपका क्लीवेज देखा तब से आपको चोदने का मन था मेरा … लेकिन डर रहा था.

    फिर मैंने भी अपने कपड़े निकाले, मेरा 7 इंच का लंड देखकर आंटी का मुंह खुल गया. मैंने इसको देखकर आंटी के मुँह में लंड डाल दिया. तो आंटी पागल की तरह चूसने लग गयी.
    मेरे को चूत चाटना बहुत ज्यादा पसंद है और गांड का छेद चाटना … मैंने आंटी को 69 में किया और इत्मीनान के साथ आंटी की चूत चाट रहा था.

    हम दोनों ही 69 की अवस्था में एक दूसरे को संतुष्ट कर रहे थे. फिर वो झड़ने वाली थी तो वो मेरा सर अपने चूत में दबा रही थी.
    फिर वो झड़ गयी. मैंने उनके पानी पी लिया और वो भी मेरा गटक गयी.

    थोड़ी देर के बाद फिर हम चुदाई के लिये तैयार हो गए. मेरी गर्लफ्रेंड की माँ कहने लगी- डाल दे जानू!
    मैंने अपने लंड को उनकी चूत में डाला.
    वो तड़प गयी.
    शुरु में गर्लफ्रेंड की माँ की चूत में लंड बहुत टाइट जा रहा था क्योंकि वो बहुत दिनों से चुदी नहीं थी।

    मैंने उनको दो बार चोदा 10 बजे से 12 बजे तक. फिर उन्होंने हम दोनों के लिए खाना बनाया. फिर हम लोगों ने खाया फिर हम सो गए.

    हम 3 बजे उठे दोपहर में! अब फिर मैंने उनको चोदा.
    फिर उन्होंने कहा- रात में सबके सोने के बाद आना. मैं अपने पति के साथ सोती नहीं, अलग से रूम से सोती हूँ. तुम आना, फिर रातभर करेंगे.

    मैं रात को 10 बजे गया, सुबह 5 बजे वापस आया. पूरी रात चली चुदाई से वो चल भी नहीं पा रही थी.

    अब तो हर रात और दोपहर में चुदाई चली शनिवार और रविवार छोड़कर। ऐसी पूरे एक साल चला.

    फिर मैंने थर्ड इयर में मैं दूसरी जगह रूम लेकर रहने लगा तो वो उस रूम में आने लगी।

  • ट्रेन में मिले टीसी ने होटल में मुझे चोदा

    दोस्तो, मेरा नाम गुड़िया है. मैं दिल्ली के आनंद बिहार में रहती हूँ. मेरे पति एक एमएनसी में नौकरी करते हैं.
    हमारी शादी को 14 साल हो चुके हैं और हमारा एक बेटा है, जो अब 12 साल का है.

    मेरे पति ज्यादा सेक्सुअली एक्टिव नहीं हैं.
    हम दोनों महीने में बस 2-3 बार ही सेक्स करते हैं.

    ये HindiXxx चुदाई कहानी उस समय की है, जब मेरा बेटा चार साल का था लेकिन वह अभी भी मेरा दूध पीता था

    मुझे अपने घर लखनऊ जाना था, तो मैं अकेली ट्रेन से जा रही थी.

    मेरे पास थर्ड एसी का टिकट था.
    मैंने साड़ी पहनी थी और उस दिन नेट की साड़ी में मेरा फिगर बहुत सेक्सी दिख रहा था.
    ट्रेन हजरत निजामुद्दीन से निकल चुकी थी.

    मैंने डिनर का ऑर्डर किया और अपने बेटे को अपनी सीट पर सुला दिया.
    मैं भी निचली सीट पर साड़ी में ही सोने जा रही थी.

    तभी एक स्टेशन आया और सामने वाली सीट पर एक 40 साल का टीसी आया. उसने कहा- ये सीट खाली है, मैं यहीं सोऊंगा.
    मैंने कहा- ठीक है. हालांकि मुझे अपने बेटे के साथ सोने में थोड़ी असहजता होगी, लेकिन मैं अडजस्ट कर लूँगी.

    अब मेरा बेटा और मैं एक ही सीट पर थे.
    मुझे नहीं पता था कि आगे क्या होगा.

    फिर टीसी बोला- फर्स्ट एसी में एक कूपा खाली है. आप अपने बेटे को लेकर वहां लखनऊ तक आराम से सोती हुई चली जाइए.
    पहले तो मैंने मना किया लेकिन बाद में मान गई.

    उसने मेरा सामान लिया और मुझे फर्स्ट एसी में शिफ्ट कर दिया.
    पूरा कूपा खाली था और सीटें भी बहुत आरामदायक थीं.

    मुझे वहां अच्छी नींद आई.

    सुबह जब मैं उठी, तो ट्रेन लखनऊ से 2 घंटे दूर थी.
    तभी टीसी आया और उसने कहा- गुड मॉर्निंग मैडम.

    मैंने उसे धन्यवाद बोला.
    उसने मुस्कुराते हुए कहा- धन्यवाद से काम नहीं चलेगा. आप मुझे कुछ …

    मैंने उसकी बात को समझ लिया और अपने पर्स से 1000 रुपये निकाल कर उसे दे दिए.
    उसने 500 रुपये और माँगे, लेकिन मैंने मना कर दिया.

    अब वह मुझसे बातें करने लगा.
    मैंने उससे कहा- आप जब तक यहां बैठे हैं, तब तक मेरे बेटे को देख लीजिए. उतनी देर में मैं फ्रेश हो आती हूँ.
    उसने हामी भर दी.

    मैं फ्रेश होने वॉशरूम गई.
    वहां साड़ी उतार कर पेटीकोट और ब्लाउज में फ्रेश हुई.

    फिर सोचा कि अब साड़ी नहीं पहनूँगी. तो मैंने वापस साड़ी लपेटी और कूपे में आकर अपने बैग से जींस और टॉप निकाला, नई ब्रा-पैंटी भी निकाली और तौलिया लेकर वॉशरूम चली गई.

    वह यह सब देख रहा था.

    वॉशरूम में मैंने सारे कपड़े उतार दिए, सिवाय ब्रा-पैंटी के.
    तभी टीसी की आवाज आई- मैडम, आपका बेटा रो रहा है!

    मैंने कहा- प्लीज, उसे मेरे पास लेकर आ जाइए.
    तब तक मैं नहा चुकी थी और पूरी नंगी थी.

    टीसी ने दरवाजा खटखटाया.
    मैंने जल्दी से जींस पहनी और लॉक खोला.

    मेरी ब्रा पूरी भीग चुकी थी.

    टीसी मुझे देखकर बोला- सॉरी!
    मैंने कहा- प्लीज, 2 मिनट बाद इसे सीट पर ले जाइए. मैं इसे दूध पिला देती हूँ तो यह चुप हो जाएगा.
    वह बोला- ओके!

    मैंने गेट लॉक करके अपने बेटे को दूध पिलाया और उसे टीसी की गोद में दे दिया.
    वह मेरी भीगी ब्रा को देखकर हंस रहा था, उसे हंसता देख कर मैं भी मुस्कुरा दी.

    वह चला गया.

    मैंने नहाकर जींस और टॉप पहना और वापस सीट पर आ गई.

    टीसी फिर आया और बोला- मैं भी लखनऊ जा रहा हूँ, किसी काम से. क्या आप किसी होटल के बारे में जानती हैं?
    मैंने उससे कहा- हां आप चाहें तो मेरे साथ चल सकते हैं.

    वह भी राजी हो गया.
    मैंने उसे अपने साथ ऑटो में ले लिया.
    ऑटो में सामान होने की वजह से जगह कम थी.

    मेरे मोटे नितंब, जो जींस में और भी सेक्सी लग रहे थे, उसकी जांघ के ऊपर थे.

    रास्ते में मैंने उसके लंड के उभार को भी महसूस किया. उसने मेरे स्तनों को भी हाथ से छुआ.
    मेरे निपल्स तंग होकर खड़े हो गए.

    उसके लौड़े का उभार साफ दिख रहा था.
    इससे मुझे भी चुदाई का मन होने लगा.

    उसका शरीर बहुत मजबूत था.
    मैं उसकी मर्दानगी को अपने बिस्तर पर महसूस करना चाहती थी.
    उसके लंड को अपने कोमल शरीर पर रगड़ना चाहती थी.
    पूरी नंगी होकर उसके साथ कंबल में सोना चाहती थी और उसके मोटे औजार को अपनी नंगी टांगों के बीच में महसूस करना चाहती थी.

    यह सब सोचकर मैं गर्म हो गई थी.

    तभी ऑटो वाले ने एक होटल के सामने रोक कर कहा कि यह होटल देख लीजिए … यह बढ़िया है!
    वह उतर कर गया और एक कमरा बुक करके आ गया.

    फिर उसने मुझे अपने कमरे में चाय के लिए बुलाया.
    मैं आ गई और उसने चाय मंगवाई.

    हम दोनों बिस्तर पर बैठकर चाय पीने लगे.
    उसकी बातों में एक अपनापन था.

    मुझे उसके साथ एक ही बिस्तर पर उसका पूरा अहसास चाहिए था.

    चाय पीते-पीते वह मेरे बेटे के साथ खेलने लगा.
    मेरा बेटा मेरे दूध निकाल कर पीने लगा.

    टीसी अब मस्त नजरों से मुझे दूध पिलाता हुआ देख रहा था.

    वह बोला- सही से पिला दो न!
    मैं भी उसकी बात सुनकर मुस्कुरा दी और जानबूझ कर अपना टॉप उतार दिया.

    मैंने उससे कहा- दरअसल मेरी ब्रा टाइट है न … तो दूध पिलाने में दिक्कत हो रही है. क्या मैं इसे भी निकाल दूँ?
    वह उठकर जाने लगा.

    मैंने उसे रोक लिया और मुस्कुराते हुए कहा- आप यहीं बैठे रहो.
    वह हंसकर वहीं बैठ गया.

    मैंने अपनी ब्रा उतार दी.
    मेरे स्तन बड़े-बड़े होकर उसके सामने फुदकने लगे थे.

    मेरे नग्न दूध देख कर उसका लंड उफान मारने लगा.

    मैंने पूछा- तुम्हारी बीवी नहीं है?
    उसने कहा- वह गांव में रहती है.
    उसने मेरे बेटे को गोद में ले लिया और मेरा फोन लेकर उसे यूट्यूब पर शॉर्ट फिल्म दिखाने के लिए साइड में बिठा दिया.

    मेरा बेटा फोन देखने लगा.
    टीसी बोला- यार, दो साल से मैंने किसी औरत को छुआ नहीं है, आज आपका सेक्सी बदन देखकर मुझसे रहा नहीं जाता है … अगर …

    यह सुनते ही मैंने उसकी बाकी की बात पूरी होने से पहले तुरंत अपने होंठ उसके होंठों से लगा दिए.

    वह भूखे कुत्ते की तरह मेरे होंठ चूसने लगा, मेरे गाल चाटने लगा और अपने मजबूत हाथों से मेरे चूतड़ दबाने लगा.

    हम दोनों खड़े होकर एक-दूसरे को चूम रहे थे.
    उसका लंड मेरी चूत को टच कर रहा था.
    उसने मेरी गांड के छेद में जींस के अन्दर करके उंगली डाल दी.

    मैं बहुत गर्म हो चुकी थी.
    मुझे लग रहा था कि अभी उसका लंड मेरी चूत फाड़ देगा.

    उसने मुझे पेट के बल लिटा दिया और मेरे उभरे हुए मोटे-मोटे चूतड़ों को जींस के ऊपर से ही काटने लगा.

    मैंने भी जींस का बटन खोल दिया
    तभी मेरे पति का फोन आ गया.
    मैंने ट्रेन लेट होने का बहाना बना दिया.

    तब तक टीसी ने मुझे पूरी नंगी कर दिया था.

    मैंने कहा- जल्दी से मेरी प्यास बुझा दो, राजा!
    उसके मजबूत शरीर ने मुझे पूरा मसल दिया था.

    जैसे ही उसने अपना लोअर उतारा और उसका लंड एकदम से मेरे सामने किसी अजगर की तरह लहराने लगा.
    मैं उसके मोटे लंड को देख कर समझ गई कि आज चुत का भोसड़ा बनने में कसर नहीं रहने वाली है.

    वह अपने लौड़े को मेरे चूतड़ों पर फिराने लगा.
    मैं पागल हो गई.

    उसका लंड लोहे की रॉड जैसा था.
    मैंने पीठ के बल लेटकर अपनी टांगें उसके मजबूत कंधों पर रख दीं.

    उसके लंड से प्री-कम बहुत निकल रहा था और मेरी चूत उसके लंड को निगलने के मचली जा रही थी.

    जैसे ही उसके लंड का सुपारा मेरी चूत में घुसा, मैं जोर से चिल्ला उठी- आह जोर से चोद दे मुझे!
    उसका 6 इंच का लंड मेरे प्राण निकाल रहा था, लेकिन मुझे चुदाई का भूत सवार हो गया था.

    मैं अपनी दर्द भरी आवाज निकाल रही थी और उसके लंड को अन्दर लेती जा रही थी.
    पूरा कमरा हम दोनों की आवाजों से गूँज रहा था.

    मेरा बेटा फोन में ईयरफोन लगाए हुए था.
    उस मर्द टीसी के झटकों से मैं काफी सुकून महसूस कर रही थी.
    जल्दी ही मैं चरम सुख के करीब आ गई थी.

    हम दोनों मिशनरी पोजीशन में चुदाई कर रहे थे.
    उसने मेरे होंठों को अपने दांतों से काटना शुरू कर दिया.

    मैं उत्तेजना से कांपने लगी और मेरी चूत से पेशाब जैसा कुछ बहने लगा.

    मैं थक कर एकदम से शिथिल हो गई लेकिन उसका लंड मेरी चूत में झटके मार रहा था.

    कुछ देर बाद उसने अपना लंड निकाला और मुझे डॉगी स्टाइल में करके मेरी चूत चोदने लगा.
    मेरी चूत में उसके लंड के तेज धक्कों की आवाज गूँज रही थी.

    फिर उसने अपनी पिचकारी मेरे चूतड़ों के ऊपर छोड़ दी.

    हम दोनों 15 मिनट में ही शांत हो गए.
    उसने जल्दी से टिश्यू पेपर लिया और मेरे चूतड़ों पर लगे अपने स्पर्म को साफ कर दिया.

    उसने मेरे बेटे को प्यार से किस किया.
    मैंने अब साड़ी पहन ली क्योंकि मेरी जींस उसके थूक से पूरी गीली हो चुकी थी.

    मेरा बेटा बोला- मम्मा, अंकल आपको क्यों मार रहे थे? वह आपको किस क्यों कर रहे थे?
    मैंने बस मुस्कुरा दिया और सामान लेकर अपने घर पहुंच गई.

    घर पहुंचने के बाद भी मेरा बेटा बोला- मम्मा, जब अंकल आपको किस कर रहे थे और आपकी पैंट चाट रहे थे, तब मैंने वीडियो बना लिया था.
    मैंने उससे फोन लिया और देखा तो पूरा 12 मिनट का वीडियो था!

  • मम्मी और उनके फ्रेंड अंकल की चुदाई देखी

    लाइव सेक्स शो स्टोरी में मैं अपनी मम्मी के साथ उनके दोस्त के घर में रहती हूँ. पापा मम्मी अलग हो चुके हैं. एक रात मेरी नींद खुली कुछ आवाजों से जो मम्मी के कमरे से आ रही थी.

    दोस्तो, मेरा नाम शिक्षा है.
    मैं लखनऊ, उत्तर प्रदेश की रहने वाली हूँ.
    मेरी उम्र 18 साल है.

    मैं 30 साइज़ की ब्रा पहनती हूँ. मेरी कमर का साइज़ 26 है और मेरी कमर के नीचे का साइज़ 32 है.
    मेरा रंग गोरा है और देखने में मैं बहुत प्यारी दिखती हूँ.

    मैं अपनी मम्मा के साथ उनके बेस्ट फ्रेंड के विला में रहती हूँ क्योंकि मेरी मम्मा ने पापा से तलाक ले लिया है.
    अब वे अपने बेस्ट फ्रेंड के साथ रहती हैं.

    मेरी मम्मा की उम्र 37 साल है और उनकी ब्रा का साइज़ 34 है.
    उनकी कमर शायद 29 होगी या मान सकते हैं 30 होगी … और उनकी कमर के नीचे का साइज़ 34 होगा.

    मेरी मम्मा बहुत ही हॉट दिखती हैं, जब वे साड़ी पहनती हैं … तो समझो आग लगा देती हैं!

    उनके बेस्ट फ्रेंड की उम्र 35 साल है. उनका नाम सम्राट है.
    वे बहुत ही स्मार्ट दिखते हैं.

    उनकी हाइट होगी 175 सेमी.
    उनकी बॉडी में सिक्स पैक एब्स हैं.

    वे रोज़ जिम जाते हैं तो उनकी बॉडी एकदम मस्त है.

    आज मैं आपको अपनी ज़िंदगी की पहली सेक्स कहानी सुनाने जा रही हूँ.
    लाइव सेक्स शो स्टोरी अगर अच्छी लगे, तो अपना प्यार ज़रूर देना!

    इतना मेरा वादा है कि कहानी पढ़ने के बाद आप मेरे दीवाने हो जाएंगे क्योंकि ये कहानी बहुत ही रोमांटिक और इरोटिक है.

    जितना हॉट आप इस लाइव सेक्स शो स्टोरी को पढ़कर फील करेंगे, रियल में ये उससे भी ज़्यादा इरोटिक और रोमांटिक थी क्योंकि मैंने इसे खुद फील किया है!

    ये बात है आज से दो महीने पहले की, जब मैं और मेरी मम्मा लखनऊ से अहमदाबाद रहने आ गए थे, मम्मा के बेस्ट फ्रेंड के विला में रहने के लिए.

    हम लोग उनके यहां रहने लगे.
    सम्राट अंकल ने मेरा ट्रांसफर लखनऊ से अहमदाबाद के स्कूल में करा दिया था तो मैं यहां 12वीं में पढ़ती हूँ.

    दिन में मैं स्कूल चली जाती हूँ.

    सम्राट अंकल को बिज़नेस का काम रहता है, तो वे भी बिज़ी रहते हैं और मम्मा विला में अकेली रहती हैं.

    शाम को हम सब साथ होते हैं और डिनर साथ में करते हैं.

    फिर मम्मा अपने बेडरूम में चली जाती हैं और मैं अपने बेडरूम में क्योंकि सम्राट अंकल के यहां दो बेडरूम हैं.
    एक उनका पर्सनल, जिसमें वे और मम्मा सोते हैं.

    एक दूसरा कमरा है, उसमें मैं सोती हूँ.
    हम लोग वीकेंड पर काफ़ी मस्ती करते हैं. घूमने जाते हैं, डिनर पर जाते हैं.

    सब मिलाकर हम सम्राट अंकल के साथ बहुत खुशहाल ज़िंदगी जी रहे हैं.

    सेक्स कहानी में आगे बढ़ने से पहले मैं बता दूँ, ये सेक्स कहानी रियल है और मैं इसका यूनिवर्स बनाना चाहती हूँ.

    अगर इस कहानी को आपका भरपूर सपोर्ट मिला, तो इसके आगे के पार्ट में रियल स्टोरी को और नेक्स्ट लेवल तक ले जाने का ट्राई करूँगी!

    तो हम लोग अंकल के साथ हैप्पी लाइफ जी रहे हैं.

    एक दिन की बात है, जब मेरी थोड़ी सी बेवकूफी की वजह से मैं खुद ही मुसीबत में फंस गई.

    वह करवा चौथ की रात का दिन था.
    मैं अपने बेडरूम में सो रही थी.

    वैसे तो मैं रात को कभी नहीं जागती, पढ़ने की वजह से मुझे नींद आ जाती है और मैं सुबह ही जागती हूँ.

    लेकिन उस रात मुझे प्यास लगी तो मैं जागी और कॉमन हॉल में पानी पीने के लिए गई.

    मुझे लगा जैसे मम्मा के बेडरूम से कुछ आवाज़ आ रही है.

    वह आवाज़ कुछ अजीब-सी थी, जैसे किसी ने मम्मा का गला दबा रखा हो और वो सांस लेने के लिए तड़प रही हों.

    मैं उनके बेडरूम के पास गई, तो देखा कि उनके बेडरूम के दरवाज़े में थोड़ी-सी दरार है और रूम की लाइट भी ऑन है.

    वैसे तो मम्मा के बेडरूम का दरवाज़ा हमेशा लॉक ही रहता है और उन्हें बुलाने के लिए बेल ही बजानी पड़ती है.
    आज उनका दरवाज़ा लॉक नहीं था.
    शायद वे लॉक करना भूल गए होंगी।

    मैंने दरवाज़े की सांस से अन्दर देखने की कोशिश की कि मम्मा के साथ क्या हो रहा है!
    चूंकि वे ऐसे कराह रही थीं, जैसे वे किसी बड़ी मुसीबत में हों.

    मैंने अपनी आंखें दरवाज़े की सांस में लगा दीं और अन्दर का नज़ारा देखने की कोशिश करने लगी.
    जैसे ही मेरी नज़र मम्मा के बेड पर पड़ी, मैं डर गई!

    थोड़ी देर के लिए लगा जैसे मैं न तो हिल पा रही हूँ, न डुल पा रही हूँ!

    अन्दर का नज़ारा देखकर मुझे बहुत तेज़ पसीना आ गया … मेरे रोंगटे खड़े हो गए.

    मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूँ, इसलिए मैं बस टकटकी लगाए देखती रह गई.

    बेड पर मम्मा लेटी थीं, अपने दोनों हाथों से बेड को पकड़े हुए थीं और बहुत तेज़ी से सांसें ले रही थीं.
    उनके जिस्म पर एक भी कपड़ा नहीं था.
    उनके ऊपर एक सफेद चादर डाली हुई थी, जो उनके आधे सीने से लेकर नीचे की बॉडी को ढके हुई थी.

    मैंने जब देखा, तो मम्मा उस बेड पर ऐसे तड़प रही थीं जैसे सेक्स मूवी में कोई एक्ट्रेस तड़पती है!
    चूंकि मेरी मम्मा किसी एक्ट्रेस से कम नहीं लगतीं तो वे बिल्कुल वैसी ही लग रही थीं.

    उस समय तो वे एक्ट्रेस से भी ज़्यादा खूबसूरत दिख रही थीं!

    पूरा बेड सफेद कपड़ों से बहुत ही सुंदर तरीके से सजाया गया था.
    मम्मा को ऐसे तड़पती देख मुझे अन्दर से अजीब-सी फीलिंग आने लगी.

    तभी मेरी नज़र मम्मा के ऊपर डाली गई चादर पर पड़ी, तो मुझे लगा कि चादर के अन्दर कोई है, नीचे की साइड!
    मैंने ध्यान से देखा कि जैसे ही चादर के अन्दर हलचल हुई, मेरी मम्मा बहुत तेज़ी से उछल पड़ीं और तड़पने लगीं.

    मैं सोच में पड़ गई कि चादर के अन्दर कौन हो सकता है, क्योंकि जब हम लोग सोने गए थे, तब अंकल घर पर नहीं थे!
    मैं उस इंसान के चादर से बाहर निकलने का इंतज़ार करने लगी, लेकिन वह इंसान निकलने को तैयार ही नहीं था.

    रूम में AC चल रहा था, लेकिन फिर भी मेरी मम्मा पसीने से तर हो चुकी थीं और तड़पती हुई बोल रही थीं- प्लीज़, बस करो ना आह … आह्ह् … आह्ह मैं मर जाऊंगी प्लीज़ … आह्ह आह्ह आह्ह!
    लेकिन वह इंसान रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था!

    पता नहीं चादर के अन्दर से ऐसा क्या कर रहा था कि मम्मा कंट्रोल खो रही थीं!
    जब मम्मा ने हद से ज़्यादा आवाज़ें निकालनी शुरू कीं, तो आवाज़ पूरे रूम में गूँजने लगी.

    तभी मैंने देखा कि वह चादर धीरे-धीरे मम्मा के जिस्म से नीचे की साइड जा रही है.
    थोड़ी-सी ही देर में मम्मा के बूब्स खुल गए!

    मैं देखकर शॉक्ड हो गई!
    मम्मा के बूब्स एकदम फूले हुए थे, बहुत ही टाइट थे.

    वे एक खूबसूरत अप्सरा लग रही थीं और कह रही थीं- आ आ आ … आह्ह ओह माय गॉड … ओह माय गॉड मैं मर जाऊंगी … प्लीज़!
    उस समय पूरी चादर नीचे चली गई और मैं देखकर हैरान हो गई!

    जो इंसान चादर के अन्दर से निकला, मैं यकीन नहीं कर पा रही थी कि वह और कोई नहीं … सम्राट अंकल ही थे!
    वे पूरी तरह नंगे थे और ऋतिक रोशन से कम नहीं लग रहे थे.

    वे मम्मा के पैरों के पास बैठे थे और मम्मा के दोनों पैर पकड़ कर घुमा दिए.
    मम्मा भी एकदम नंगी थीं!

    जब मम्मा घूमीं, तो मैंने देखा कि मम्मा की दोनों टांगों के बीच लाल-लाल, गुलाबी-गुलाबी सा कुछ दिख रहा था.
    वह उनकी चूत थी.

    फिर अंकल मम्मा के पीछे लेट गए और अपने दोनों हाथों से मम्मा के मम्मों को पीछे से दबाने लगे.
    वे लोग ऐसे लेटे थे कि मम्मा के बूब्स मुझे दिख रहे थे.

    मम्मा की आवाज़ें बढ़ती ही जा रही थीं- आह आह्ह आह … म्म्म्ह ओह्ह!

    उनकी तड़प और तेज़ होती जा रही थी.
    फिर थोड़ी देर में अंकल बैठे और मम्मा को सीधा करके उनकी टांगें उठाने लगे.

    तब मैंने देखा, अंकल का लंड एकदम टाइट और बहुत बड़ा लग रहा था!
    मैं देखकर डर गई!

    उन्होंने मम्मा की चूत में अपना लंड रखा.
    मम्मा पहले से ही बहुत तड़प रही थीं और आवाज़ें निकाल रही थीं इसलिए शायद अंकल और भी ज़्यादा उत्तेजित थे!

    उन्होंने मम्मा की टांगें उठाईं और बीच में जाकर लंड मम्मा की चूत में रखा.

    मम्मा ने अपनी दोनों टांगों से उन्हें जकड़ लिया और बोलीं- आह्ह आह्ह म्म्ह बेबी … फक मी हार्डर हार्डर बेबी! फक मी हार्डर!

    अंकल ने मम्मा के कंधों को पकड़ा और ज़ोर का धक्का दे दिया.
    मेरी मम्मा उछल पड़ीं और तेज़ आवाज़ निकालने लगीं- आआह्ह … आह्ह … ओह नो … आह्ह!

    मम्मा का मुँह बंद ही नहीं हो पा रहा था.
    तभी उन्होंने दोबारा से धक्का मारा. मम्मा का चेहरा पहले से लाल हो रखा था.
    अब और लाल हो गया.

    वे बहुत तेज आवाज़ें निकालने लगीं- आह्ह ओह्ह माय गॉड आह्ह!
    अंकल ने थोड़ा आराम से मम्मा की चूत में अपना लंड अन्दर-बाहर करना शुरू किया.

    जैसे ही अंकल लंड बाहर की साइड लाते, मम्मा को थोड़ा चैन सा मिल जाता, लेकिन जैसे ही वे लौड़े को अन्दर ले जाते, मम्मा मचलने लगती थीं.
    ऐसे ही थोड़ी देर चलता रहा.

    मम्मा के हाव भाव देखकर अंकल बोले- तुम इतनी कामुक आवाज़ निकालती हो तो मेरा हंड्रेड परसेंट निकलवा लेती हो! मुझे और तेज़-तेज़ करने का मन होता है!
    तभी मेरे हाथ से गलती से दरवाज़े पर थोड़ा धक्का लग गया.

    मम्मा तो खोई हुई थीं, उन्हें पता ही नहीं चला.

    लेकिन अंकल ने मुड़कर देखा … तो मैं छुप गई ताकि अंकल मुझे न देख लें.
    लेकिन शायद अंकल को शक हो गया कि कोई दरवाज़े पर है.

    उन्हें तो पता ही था कि ज़्यादा-से-ज़्यादा कौन हो सकता है … शिक्षा यानि मैं!
    वे थोड़ा मुस्कुराए और उन्होंने मम्मा को तेज़-तेज़ धक्के मारना शुरू कर दिया.

    मम्मा की कामुक आवाज़ें पूरे रूम में गूँजने लगीं.
    मम्मा भी खुलकर आवाज़ें निकाल रही थीं- ओह ओह … आह्ह बेबी …आआह्ह .. बी स्लो हनी … आआह्ह म्म्म्ह!

    उन्हें मालूम था कि आवाज़ रूम के बाहर नहीं जाएगी, बस उन्हें यह नहीं पता था कि रूम आज लॉक नहीं है.
    अंकल मम्मा को इतने तेज़-तेज़ धक्के मार रहे थे कि उन दोनों के जिस्मों के मिलने की आवाज़ मेरे पास तक आ रही थी … और मम्मा का तो बुरा हाल था.

    ऐसा लग रहा था कि बस अब उनकी जान निकल जाएगी.
    मम्मा की आंखों से आंसू भी निकलने लगे, लेकिन अंकल रुक नहीं रहे थे!

    मम्मा की आवाज़ें बहुत तेज़ होती जा रही थीं.
    उन्होंने ने अपने हाथों से अंकल की पीठ को पकड़ रखा था.

    करीब 20-25 मिनट बाद मम्मा और अंकल दोनों तेज़-तेज़ झटके मारने लगे.

    फिर 8-10 झटकों के बाद अंकल धीरे-धीरे झटके मारने लगे और उनकी पूरी उत्तेजना खत्म हो गई.

    दोनों एक-दूसरे से चिपक कर लेट गए.
    तभी मेरी नज़र अंकल की पीठ पर पड़ी, जहां से खू.न निकल रहा था.
    मुझे समझ आ गया था कि मेरी मम्मा के नाखून उनकी पीठ में लग गए थे.

    फिर मेरी भी बुरी हालत थी तो मैं झट से अपने बेडरूम में जाकर लेट गई और सो गई.
    सुबह जागी तो पता चला कि मम्मा को बुखार है.

    मम्मा सारा दिन अपने बेडरूम में ही आराम करती रहीं.
    उस दिन जब रात को अंकल घर आए, तो हम सब बैठे थे.

    उन्होंने मुझसे पूछा- मम्मा कैसी हैं?
    तो मैंने बताया कि उन्हें बुखार है.

    तो वे हंसने लगे और मेरी तरफ देखने लगे.
    उस वक्त उन्हें देखकर मुझे बहुत अजीब सा फील हो रहा था.

    अंकल धीरे से बोले- तुमको मजा आया न!
    मैं भौंचक्की थी.

    तभी अंकल ने मेरे गाल पर हाथ फेर कर कहा- यू आर सो स्वीट बेबी!

    अब आगे की सेक्स कहानी आपके कमेंट्स मिलने के बाद बताऊंगी.

  • मौसेरी बहन की चूत में मेरा

    Xxx कजिन सेक्स कहानी में मैंने अपनी मौसी की जवान बेटी की चूत का मजा लिया. मैं उनके घर गया हुआ था तो मैंने अपनी कजिन को उसके बॉयफ्रेंड से चुदती देखा.

    सबको मेरा नमस्कार, यह मेरी पहली सेक्स कहानी है.
    आशा करता हूँ कि ये Xxx कजिन सेक्स कहानी सबको पसंद आएगी कि कैसे मैंने अपनी मौसी की बेटी को अपने लंड की रानी बनाया.

    मेरा नाम रोहित है. मैं जम्मू का रहने वाला हूँ. मेरा कद 5 फुट 10 इंच है. उम्र 26 साल, रंग सांवला.

    मेरे लंड की लंबाई इतनी है कि जिसके भी ऊपर एक बार चोदने के लिए चढ़ जाता हूँ तो संतुष्ट किए बिना रुकता नहीं हूँ.

    मेरी मौसी की बेटी के बारे में बताऊं तो उसका नाम सिमरन (बदला हुआ) नाम है.
    उसकी हाइट 5 फुट 6 इंच है. उसके बूब्स का आकार 34 डी का है. रंग एकदम दूध सा सफेद … जो भी उसे एक बार देखता, तो बस देखता ही रह जाता.

    जब यह सब हुआ था, वो उस वक्त टीचर की जॉब कर रही थी; साथ ही वो अपने घर पर ट्यूशन भी पढ़ाती थी.

    हुआ ऐसा कि मैं उस समय मौसी के रहता था.
    शाम को खाली टाईम मिलता तो हम दोनों घूमने निकल जाते थे.

    मेरे मन में उसके लिए कभी कोई बुरा ख्याल नहीं आया था.
    सब बहुत अच्छा चल रहा था.

    एक दिन ऐसा हुआ कि उसके बर्थडे के दिन उसका ब्वॉयफ्रेंड रात को चोरी छिपे घर पर मिलने आया.
    उसके आने का मुझे पता लग गया और मैं चोरी से सब देखता रहा.

    उस रात मैं पानी पीने उठा था और किचन में गया था.
    तभी मुझे सिमरन की कुछ आवाज आई.

    मैं आगे बढ़ा और सिमरन के कमरे में देखने लगा.
    वो अन्दर किसी लड़के के साथ एकदम नंगी थी.
    मैं उसे देख कर हैरान रह गया.

    वो लड़का सिमरन का ब्वॉयफ्रेंड था जो उसे उसकी बर्थडे पर चोदने आया था.

    उसने सिमरन को कुछ देर धकापेल चोदा और अपना माल उसके पेट पर छोड़ कर अलग हो गया.
    हालांकि सिमरन के चेहरे पर कुछ गुस्सा सा था; शायद उसका ब्वॉयफ्रेंड उसे सन्तुष्ट किए बिना झड़ गया था.

    सिमरन का सेक्सी बदन देख कर मेरा लंड में आग लग गई और ऐसा लगा कि मैं अभी अन्दर जाकर उसे चोद दूँ.

    फिर मैं अपने कमरे में आ गया और मुठ मारकर सो गया.

    मैंने जब से ये सब देखा, तब से सिमरन को लेकर मेरा ख्याल बदल गया.
    अब मैंने उसको टच करना शुरू कर दिया.

    कमाल की बात ये कि उसने सब कुछ समझ लिया कि मेरा टच करने का मतलब क्या है और उसने कोई विरोध भी नहीं किया.

    मैं सोचने लगा कि सिमरन तो एकदम चालू माल निकली जबकि मैं इसे बड़ी मासूम लड़की समझ रहा था.
    फिर वो घड़ी आई, जब हमने एक दूसरे को पहली बारी किस किया.

    उस दिन वो ट्यूशन पढ़ा रही थी तो मैं उसके कमरे में जाकर बैठ गया.
    हमारी बातें होने लगीं.

    कुछ टाइम बाद ट्यूशन ऑफ हुई, तो हम दोनों बिस्तर पर लेट गए और हम दोनों में बातें होने लगी.

    उसने कहा- मुझे शाम को परेड जाना है … साथ चलेगा?
    मैंने भी कहा- हां, मुझे भी तेरे साथ चलना है.

    वो बोली- शाम को घूमना है तो क्यों ना अभी आराम कर लेते हैं!
    मैंने ओके कहा.

    हम दोनों ने कुछ टाइम आराम करने का सोचा.
    वो सोने लगी.
    उसकी आंखें एकदम बंद हो गई थीं.

    मैं उसके चूचियों को ही देख रहा था और अन्दर ही अन्दर मेरे लौड़े की आग भड़क रही थी.

    मैंने बहुत हिम्मत की और सोने का नाटक करते करते उसको टच करने लगा.
    उसने जरा सा भी ऐतराज नहीं किया.

    यह सब कुछ टाइम यूं ही चलता रहा.

    मैंने उसके गाल पर अपने होंठ रख दिए.

    तभी अचानक से सिमरन उठ गई.
    तो मैं डर गया कि आज गया काम से.

    सिमरन ने उठ कर रूम का दरवाजा बंद कर दिया और मेरी साइड अपनी गांड करके सोने का नाटक करने लगी.
    मैंने उसको पीछे से हग किया, वो कुछ नहीं बोली और सोने का नाटक करती रही.

    मैंने पीछे से अपना लंड उसकी गांड पर रगड़ा, तो उसकी बॉडी में गर्मी बढ़ने लगी जिसे वो रोक नहीं पाई.
    वो एकदम से पलट कर मेरी तरफ घूमी और उसने मुझे बहुत टाइट हग कर लिया.

    मैं कुछ समझ पाता कि वो पागलों के जैसे मुझे किस करने लगी.
    मैं भी लग गया.

    हम दोनों के बीच यह चूमाचाटी का सिलसिला कोई 15 मिनट तक चला.
    उसके बाद किसी ने दरवाजा खटखटा दिया, तो हम दोनों डर गए.

    उसने मुझसे कहा- तुम सोने का नाटक करो, मैं देखती हूँ.
    उसने दरवाजा खोला, तो मौसी थीं.

    वो बोलीं- अब उठो बेटा, कितना सोना है?
    सिमरन ने बोला- बस हो गया … मुझे जाना भी है. आप इसको उठा दो मम्मी, इसे भी मेरे साथ जाना है. जब तक मैं तैयार हो जाती हूँ.

    मौसी ने मुझे उठाया.
    फिर हम दोनों तैयार होकर शहर चले गए.

    सिमरन और मैं एक दूसरे के साथ एकदम शांत होकर चल रहे थे.
    मैंने कहा- सब अचानक हो गया … उसके लिए सॉरी!

    सिमरन बोली- जो होना था, वो हो गया. इसमें हम दोनों गलत थे.
    मैंने बोला- इसमें गलत क्या था?

    वो बोली- नहीं यार, हम ऐसा नहीं कर सकते!
    मैंने बोला- जब तुम अपने ब्वॉयफ्रेंड के साथ कर रही होती हो, तब कुछ गलत नहीं लगता? मैंने देखा था कि उसने तुझे आधे रास्ते में छोड़ दिया था.

    वो ये सुनकर सोच में पड़ गई.

    मैंने कहा- मुझसे तुम निराश नहीं होगी.
    उसने मेरी तरफ देखा और मुस्कुरा दी.

    शाम को जब वापिस आए तो हम दोनों थक गए थे इसलिए जल्द सो गए.

    रात के 2 बजे मैंने सिमरन को मेसेज किया.

    वो ही जाग रही थी. उसका तुरंत उत्तर आया कि तू सोया नहीं?
    मैंने कहा- तू कौन सा सो गई है. तू भी तो जाग रही है!

    ऐसे ही हमारी बात शुरू हुई.

    तो मैंने उससे कहा- मेरे रूम में आ जा!
    उसने मना कर दिया कि अभी नहीं.

    मैंने भी उसको ज्यादा फोर्स नहीं किया.

    अगले दिन गुरुपर्व था, मौसी और घर के बाकी के सदस्य गुरुद्वारा चले गए.
    मैं देर से सोया था तो सुबह देर से उठ पाया और अपने काम से जा ही नहीं पाया.

    सिमरन भी कहीं चली गई थी.

    मैं घर से बाहर निकल गया और इधर उधर टहलता रहा; एक पार्क में बैठ कर सिमरन के बारे में ही सोचता रहा.

    फिर जब घर वापस आया तो घर पर देखा कि सिमरन आ चुकी थी.

    उस वक्त घर में सिर्फ मैं और सिमरन थे.
    मैं उसके पास गया और उससे बातें होने लगीं.

    मैंने टीवी चलाया और उस पर एक मूवी लगा दी.
    उसमें सेक्सी सीन आने पर सिमरन उठ कर जाने लगी.

    मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और उसको खींचा, तो वो मेरी गोद में गिर गई और हम दोनों चिपक गए.
    मैं उसके होंठों पर होंठ रख कर चूमने लगा.

    पहले उसने बहुत नखरे किए पर मैंने उसको किस करना शुरू कर दिया.
    वो गर्म हो गई और मेरा साथ देने लगी.

    कोई 15 मिनट तक सब चला.
    फिर वो बोली- मैं गेट बंद करके आती हूँ.
    मैंने उसे जाने दिया.

    उसके वापस आते ही हम दोनों फिर से शुरू हो गए.
    मैंने टाइम खराब न करते हुए उसको नंगी कर दिया और उसने भी मेरे कपड़े खोलना शुरू कर दिया.

    जल्द ही हम दोनों ने एक दूसरे के सारे कपड़े उतार दिए.
    मैंने उसके मम्मों को मसलना शुरू कर दिया.
    उसकी सिसकारियां निकलने लगीं.

    कुछ देर बाद मैंने उसको बेड पर लिटा दिया और उसके जिस्म के साथ खेलने लगा.
    वो भी मेरे साथ मस्ती कर रही थी.

    उसके दूध बड़े मस्त थे.
    मैं उसके मम्मों के साथ मस्ती कर रहा था और उसके निप्पल अपने मुँह में लेकर खींच खींच कर चूस रहा था, जिससे उसकी चूत में सनसनी होने लगी थी.

    वो ‘इस्स आंह धीरे कर न …’ कहती हुई मुझसे मजे लेने लगी थी.
    मम्मों से खेलते खेलते मैंने उसकी फुद्दी में उंगली घुसा दी.
    वो तड़फ उठी.

    मैंने समय खराब न करते हुए उसकी फुद्दी को चाटना शुरू कर दिया और कुछ ही देर में हम दोनों 69 की पोजीशन में आ गए.

    एक दूसरे के गुप्तांग चाटते चूसते हुए 20 मिनट हो गए.
    यह सब मस्त चला.
    फिर वो झड़ गई और उसके बाद मैं भी झड़ गया.

    अब बारी उसको चोदने की थी.
    वो मेरे लंड के साथ खेलने लगी और जल्दी ही मैं फिर से उसको चोदने को तैयार हो गया.

    मैंने उसकी गांड के नीचे एक तकिया रखा और उसकी टांगें खोल कर उसकी फुद्दी पर लंड रगड़ने लगा.
    वो तड़फने लगी और बोलने लगी- आह … अब पेल भी दे बहनचोद साले … फाड़ दे मेरी फुद्दी!

    वो खुल कर गालियां निकालने लगी.
    उसकी मादक सिसकारियां मुझे पागल कर रही थीं.

    मैंने जैसे ही अपना लंड फुद्दी में डाला, उसको रोना आ गया.
    वो दर्द से तड़फने लगी और बोली- आह धीमे कर … मैं कहीं भागी थोड़ी जा रही हूँ.

    मैंने उसको किस की और अपने काम पर लग गया.

    धीरे धीरे मेरा पूरा लंड उसकी फुद्दी में घुस गया और हम दोनों चुदाई का मजा लेने लगे.

    कोई 10 मिनट बाद मैंने उसको घोड़ी बनाया और हमारी धकापेल चुदाई चलने लगी.

    सिमरन के मुँह से लगातार गालियां निकल रही थीं- आह चोद दे साले भड़वे … आह पेल मादरचोद आह पूरा लंड पेल कमीने!
    उसकी गालियां मुझे और भी पागल बना रही थीं.

    करीब 20 मिनट बाद मैं झड़ने को हुआ.
    मैंने उससे पूछा, तो सिमरन बोली- मुझे तेरा माल अन्दर लेना है.
    मैंने भी बिंदास अपनी ट्रेन सरपट दौड़ा दी.

    उसके बाद हम दोनों वाशरूम गए.
    मैंने उसको नहलाया और उसने मुझे!

    उसके बाद मौसी का कॉल आया कि हम सब रात को 10 बजे तक आ पाएंगे.

    जब मौसी ने यह कहा तो सिमरन बहुत खुश हो गई क्योंकि उस वक्त शाम के 5 बज रहे थे.

    सिमरन बोली- जा और बाहर से कुछ खाने का ले आ!
    मैंने उसको किस किया और चला गया.

    मैं जैसे ही वापिस आया तो देखा कि सिमरन वनपीस पहनी हुई थी.
    वो बोली- चलो, पहले जल्दी से खाना खाओ .. फिर दोबारा शुरू करते हैं.

    हम दोनों ने दो दो पैग लगाए और खाने के बाद 2 राउंड और लगाए.
    जिसमें मैंने उसकी फुद्दी पर डेरी मिल्क सिल्क चॉकलेट लगाकर उसको खूब चूसा भी और चोदा भी.

    यह Xxx कजिन सेक्स का सिलसिला अब हर दूसरे दिन चलने लगा था.
    अभी दो साल पहले उसकी शादी हो गई और जीजू उसको अपने साथ न्यूजीलैंड लेकर चले गए.

    उसके जाने के बाद लॉकडाउन लग गया, जिसकी वजह से वो अभी तक वापिस नहीं आई है.
    इस साल उसका वापसी आना तय हो गया है.
    शायद हम दोनों मिल पाएं क्योंकि मैं भी फिलहाल देश से बाहर जाने वाला हूँ.

    ये सब हमारे वीजा पर निर्भर है कि हमारा मिलन हो पाता है या नहीं.

    हालांकि सिमरन के जाने के बाद मैंने बहुत सी लड़कियों को चोदा था, पर उसके जैसा मजा कहीं नहीं आया.

    मैंने अपने चाचा की बेटी, जिसके 2 बच्चे हैं, उसको भी चोदा था.
    वो सेक्स कहानी भी आपको सुनाऊंगा.

  • पड़ोसी आंटी को चोदा बीयर पिलाकर

    देसी आंटी सेक्स कहानी तब की है जब मैं गुड़गांव में रहता था, एक प्राइवेट कम्पनी में काम करता था.

    मैं जिस बिल्डिंग में रहता था, पास में एक अंकल और आंटी भी किराए पर रहने आये.

    एक दिन मेरी नज़र आंटी पर गयी. मस्त भरे मम्मे. उभरी गांड देखकर बुड्ढा भी लंड खड़ा कर ले.
    मेरा भी लंड खड़ा होने लगा.

    मैं अपने रूम में आ गया लेकिन उसका बदन मेरे सामने था जैसे!
    मेरा लौड़ा खड़ा हो गया और मैंने धीरे धीरे सहलाना शुरू कर दिया.

    उसे याद करके लंड हिलाने लगा और झटके मारने लगा थोड़ी देर में मेरा पानी निकल गया.
    अब मैं सोचने लगा कैसे इसको चोदा जाए.

    फिर मैंने धीरे धीरे उनसे नजदीकियां बढ़ाना शुरू कर दिया और हमारी दोस्ती हो गयी.

    एक दिन मैं कम्पनी ऑफिस से रूम पर आया.
    तभी अंजुमन आंटी ने आवाज़ दी.
    मैं रूक गया.

    वो बोली- राज, रात का खाना मेरे रूम में खा लेना आज. मैंने अंडे बनाए हैं.
    मैं बोला- हां आंटी, ठीक है.
    और मैं अपने रूम में आ गया।

    मैं बहुत खुश था कि देसी आंटी सेक्स का मौक़ा मिल सकता है.

    मैंने तुरंत एक प्लान बनाया.
    मैं बाजार गया, 4 बोतल बीयर, कंडोम और सैक्स की गोलियां लाया.

    मैंने लोवर के अंदर अंडरवियर नहीं पहना और पूरी तैयारी से नीचे आ गया.

    नीचे आया तो देखा अंजुमन आंटी भी दुल्हन के जैसे तैयार थी.
    मैंने पूछा- आंटी, कहीं शादी में जा रही हो क्या?
    और मैं मन ही मन दुखी हो गया कि आज का प्लान बेकार हो गया।

    वो बोली- नहीं, आज मेरा जन्मदिन है. लेकिन तेरे अंकल काम से नोएडा गये हैं.
    और रोने लगी.

    मैंने मौका देखकर उसको पकड़ा और बोला- आंटी, आप रोना बंद करो. मैं मनाऊंगा आपका जन्मदिन!
    और मैं जल्दी से केक ले आया.

    आंटी ने केक काटा, मुझे खिलाया और मैंने उनको!
    उन्होंने एकदम से मुझे अपने सीने से लगा लिया और बोली- थैंक्स राज!
    मैंने कहा- पार्टी तो बाकी है.
    और मैंने बैग से बीयर निकाली.

    पहले आंटी मना करने लगी लेकिन मेरे बोलने से मान गयी.
    हमने 2 बोतल खाली कर दी.

    अब आंटी को नशा होने लगा. मैंने धीरे से गोली निकाली और पैग मैं डाल दी और वो गटागट पी गयी.
    थोड़ी देर में गोली ने अपना काम शुरू कर दिया.

    फिर एक गोली मैंने खा‌ ली तीसरी बोतल भी खाली कर दी.

    अब आंटी के बदन में आग जलने लगी, आंटी बोली- राज, मेरा गिफ्ट कहां है?
    मैं चुप हो गया क्योंकि जल्दी जल्दी में गिफ्ट लाना भूल गया था.

    मैं चुप था तो वो बोली- क्या हुआ?
    तो मैं बोला- गिफ्ट कल मिल जाएगा. क्या चाहिए बोलो?
    वो बोली- आज जन्मदिन है तो गिफ्ट भी आज लूंगी.

    मैंने एकदम से उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और चूसने लगा.
    थोड़ी देर बाद वे दोनों अलग हो गये.

    वो बोली- ये नहीं … मुझे मेरा गिफ्ट चाहिए.
    और एकदम से लोवर के उपर से ही लंड को पकड़ कर बोली- दो मेरा गिफ्ट!

    मैं चौंक गया और कुछ ना बोला.
    उसने मेरे लोवर के अंदर हाथ डाल दिया.

    जैसे ही उसने मेरे लौड़े को अपने हाथ में लिया, मेरे शरीर में करंट दौड़ने लगा और मैंने उसके बूब्स दबाने शुरू कर दिए; उसकी साड़ी अलग कर दी और उसको लेकर बिस्तर में आ गया.

    अब आंटी के बूब्स बाहर आने को बैचेन थे. मैंने उसका ब्लाउज और ब्रा अलग किये तो उसके पके आम मेरे हाथ में आ गये और मैं चूसने लगा.
    वो भी धीरे धीरे मेरे लौड़े को सहलाने लगी.
    उसने मेरी लोवर उतार दी और मेरे लौड़े से खेलने लगी.

    मैं उठा और उसकी छाती पर बैठ गया और लन्ड को उसके होंठों पर रगड़ने लगा.
    उसने लन्ड को तुरंत मुंह में लिया और लोलीपॉप के जैसे चूसने लगी जैसे बहुत दिनों से प्यासी हो.

    और मैं झटके मारके उसका मुंह चोदने लगा. वो लंड को लोलीपॉप के जैसे मस्त हो कर चूस रही थी.

    अब दोनों बहुत गर्म हो चुके थे.
    मेरे शरीर में अकड़न हुई और लंड का पानी निकल गया. उसने गटागट करके पी लिया.
    मैं थोड़ी देर लंड मुंह में डाले लेटा रहा.

    उसके बाद मैं उठा और उसका पेटीकोट उतारा तो उसने भी पैंटी नहीं पहनी थी.
    आंटी की चूत बिल्कुल चिकनी थी जैसे उसने आज ही बाल साफ़ किए हों.

    मैंने बिना देर किए अपने होंठ उसकी मखमली गुलाबी चूत में रख दिए और धीरे धीरे चाटने लगा.
    वो सिसकारियां भरने लगी.

    मैंने जैसे ही जीभ घुसाई, वो चिल्लाने लगी.

    अब मैंने जल्दी जल्दी जीभ चलाना शुरू कर दिया.
    वो मचलने लगी, बोली- राज, मेरी चूत को खा जा! ये तेरे लिए कब से तड़प रही थी.
    मैं चौंक गया.

    अब मेरा जोश दुगुना हो गया और जोर जोर से आंटी की चूत चाटने लगा.
    वो उईई आआहह सीईई की आवाज निकालने लगी.

    थोड़ी देर बाद अंजुमन आंटी की चूत से नमकीन पानी निकलने लगा और मैं पी गया.

    फिर मैं उठा और कंडोम निकाला.
    आंटी ने मेरा हाथ पकड़ लिया और बोली- राज, आज मेरा जन्मदिन है आज मेरी चलेगी.

    उन्होंने कंडोम वापस रखवा दिया.
    वो बोली- पूरे 7 माह हो गये मेरी चूत में लन्ड नहीं गया. मैं कबसे तड़प रही थी लेकिन मौका नहीं मिला. उस दिन जब तुम अपने कमरे में मेरा नाम लेकर मुठ मार रहे थे तो मेरा मन किया था कि मैं आ जाती. पर डरती थी. आज मौका मिला है.
    इतना बोलकर आंटी लंड चूसने लगी.

    अब मेरे लौड़े में करंट दौड़ने लगा.
    मैं उससे बोला- कंडोम तो लगाने दो.
    वो बोली- नहीं.
    मैं भी क्या करता!

    मैंने कहा- रूको, और लंड में केक लगा लिया.
    आंटी उसे मुंह में लेकर चूसने लगी और पूरे लंड को गीला कर दिया.

    आंटी को लिटाकर मैंने उनके चूतड़ों के नीचे तकिया लगाया और चूत में लन्ड रगड़ने लगा.
    वो सिसकारियां भरने लगी और बोली- राज, आज की रात को यादगार बना दो. अब तड़पाओ नहीं … अपना लौड़ा मेरी चूत में घुसा दो.

    मैं बोला- आंटीजी, आपने मुझे बहुत तड़पाया है.
    तो वो बोली- आंटी नहीं अंजुमन बोलो राज!

    मैंने एकदम से झटके से लंड उसकी मखमली चूत में घुसा दिया और अंजुमन की चीख और आंसू निकलने लगे.

    अब मैंने लंड को बाहर किया और एक झटके से पूरा घुसा दिया.
    उसकी चीख निकल पड़ी.

    मैंने धीरे से उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और शांत हो गया.
    थोड़ी देर बाद जब अंजुमन के शरीर में हरक़त होने लगी तो मैंने लंड को चलाना शुरू कर दिया.

    अंजुमन 7 माह से चुदी नहीं थी तो उसकी चूत एकदम टाइट थी.
    मेरे लौड़े के हर झटके से उसकी सिसकारी तेज़ होने लगी.

    अब मैं तेज़ तेज़ झटके मारने लगा.
    अंजुमन बोली- चोदो राजा, मेरी प्यासी चूत की आज प्यास मिटा दो.

    मेरे लौड़े को और जोश आ गया.
    पूरे कमरे में पच्च पच्च फच्च फच्च उईई आआहह उईई सीईई की आवाज तेज होने लगी.

    अंजुमन की चीख के साथ पानी निकल गया. मेरा लौड़ा गर्म पानी से और टाइट हो गया.

    अब मैंने उसे अपने लौड़े पर बैठने को कहा.
    उसने लंड को अपने मुंह में लेकर थूक से गीला कर दिया और वो मेरे लौड़े पर आ गई.

    जैसे ही उसने चूत को लंड पर रखा, लंड सट्ट से अंदर घुस गया और अंजुमन की चीख निकल पड़ी.
    मैंने बिना रूके झटके मारने शुरू कर दिया.
    वो बोली- राज फ़ाड़ दे मेरी चूत!
    और लंड पर उछलने लगी.

    मैंने अपनी रफ़्तार बढ़ा दी और फच्च फच्च उईई आआहह उईई आआहह उईई आआहह की आवाज तेज हो गई.
    मेरे दोनों हाथ उसके बूब्स पर थे और वो लंड के घोड़े पर सवार होकर जन्नत पहुंच गई थी.
    आंटी की चूत ने पानी छोड़ दिया और मेरा लौड़ा गर्म पानी से भीग गया; फच्च फच्च फच्च फच्च की आवाज होने लगी.

    गोली के असर से मेरे लौड़े ने पानी नहीं छोड़ा.

    मैंने अंजुमन को बेड के नीचे किया और खड़ा हो गया.
    वो लंड मुंह में लेकर चूसने लगी और लन्ड को तैयार करके घोड़ी बन गई.

    मैंने उसकी मखमली चूत में थूक लगाया और लंड डालकर चोदने लगा.

    आंटी बोली- राज, यह मेरी लाइफ का सबसे अच्छा गिफ्ट है.
    मैं खुश हो गया और लन्ड को तुरंत चौथे गियर में डाल दिया और फुल स्पीड से उसकी चुदाई करने लगा.

    थोड़ी देर बाद मैंने अंजुमन को बेड पर लिटा दिया और उसकी टांगों को अपने कंधे पर रख दिया. फिर मैंने चूत में लन्ड घुसा दिया और धीरे धीरे झटके मारने लगा.

    अब दोनों थकने लगे थे, उसने नीचे से गांड चलाना शुरू कर दी. दोनों की सिसकारियों से कमरा गूंजने लगा और सांसें तेज होने लगी.

    मैंने कई औरतों, लड़कियों को चोदा लेकिन जो मजा आज अंजुमन ने दिया, ऐसा कभी नहीं मिला।

    अब अंजुमन के पैर नीचे कर दिए और मैं ऊपर आ गया.
    आज मेरा लौड़ा झड़ने का नाम नहीं ले रहा था.

    अंजुमन ने फिर से पानी छोड़ दिया मैंने भी झटकों की रफ्तार बढ़ा दी मैं तो जैसे स्वर्ग में था।

    अब धीरे धीरे मेरे शरीर में अकड़न होने लगी.
    मैं बोला- अंजुमन, मेरा निकलने वाला है.
    तो वो खुश हो गई और उसने अपनी गांड चलाना शुरू कर दी.

    आंटी बोली- राज अंदर पानी छोड़ना!
    और उसने मुझे कसकर अपनी बांहों में भर लिया और हम दोनों जोर जोर से झटके मारने लगे.

    एकदम से मेरी आंखें बंद होने लगी और लंड से निकलकर आग अंजुमन की चूत में भर गई.
    फिर हम दोनों वैसे ही पड़े रहे, दोनों को बहुत खुशी थी क्योंकि दोनों को आज जन्नत का मज़ा मिला।

    हम दोनों एक साथ बाथरूम गये और मैं उसको गोद में लेकर वापस आया।

    उस रात हमने 4 बार चुदाई की.

    फिर जब भी हमें मौका मिलता हम दोनों एक हो जाते।
    मैंने आंटी की गान्ड भी मारी. वो अगली कहानी में!

  • पति के गधेछाप लंड से चुत गांड चुदाई

    मैं एक इंटीरियर डिज़ाइनर हूँ और मेरा फिगर बहुत ही सेक्सी व स्लिम ट्रिम फिगर है.

    मेरी उम्र 25 साल है. मैं दूध की तरह गोरी हूँ, पूरे बदन के कटाव एकदम सेक्सी हैं. पेट पूरा सपाट है, तोंद तो है ही नहीं. मेरे बूब्स और चूतड़ तने हुए बड़े बड़े हैं.
    मेरा एक छोटा बच्चा भी है, जो अभी 4 महीने का ही है.

    ऐसे तो मेरे पति मुझे रोज चोदते हैं और ऐसे वैसे नहीं, एकदम किसी जंगली जानवर की तरह चोदते हैं.

    लेकिन आज रात तो अलग ही किस्म के जानवर या कहूँ कि सांड बन गए थे वो!
    उनकी चुदाई से कमरे में आधे से ज्यादा चीजें टूट चुकी थीं.

    हुआ यूं कि उस दिन मेरे पति ऑफिस में थे और मैं घर पर रह कर अपना काम कर रही थी.
    आजकल मेरा वर्क फ्रॉम होम चल रहा था.

    उसी समय मेरे पति का मुझे कॉल आया और हम दोनों बात करने लगे.
    हमारे बीच मजाक मस्ती की बातें होने लगीं.

    वो बोले- आज रात मैं अलग ही जोश में हूँ. आज पूरी रात इतनी ज़ोर से चुदाई करूँगा कि पूरा घर हिलने लगेगा.
    मैं भी जोश में बोली- ठीक है मेरे पति देव … पहले घर तो आ जाओ. क्या फोन से ही चोदोगे?

    वो बोले- काश, मेरा लंड इतना लम्बा होता कि फोन से घुस कर ही तुम्हारी चुत में घुस जाता तो मैं जरूर तुम्हारी चुदाई फ़ोन से ही कर देता.
    मैं हंस पड़ी.

    हम दोनों की बातें खत्म हुईं और मैंने घड़ी में देखा तो रात के दस बज चुके थे.
    मैंने काम करते करते टेबल पर खाना लगा दिया था.

    कुछ देर बाद मेरे पति घर आ गए.

    वो मुझे किस करना चाहते थे लेकिन मैंने उनको करने नहीं दी क्योंकि मैं एक नए छात्र को फोन पर कुछ टिप्स दे रही थी.

    उस नए छात्र से बात करते हुए मैंने उससे कहा- तुम्हारा पेन्सिल बॉक्स गलती से मेरे पास आ गया. मैं कल तुमको ऑफिस में दे दूंगी.
    उसने ओके कह दिया.

    अब तक मेरे पति फ्रेश होने चले गए थे, वो कुछ देर के बाद आ गए.

    वो खाना खाने बैठ गए और मैं भी कॉल खत्म करके खाना खाने बैठ गयी.

    खाना खाने बाद मेरे पति ने मुझे पीछे से पकड़ लिया और मुझे किस करने लगे.
    मुझे अभी भी उस छात्र को एक फाइल भेजना बाकी रह गया था.

    मैंने उनसे कहा- प्लीज, अभी कुछ देर रुक जाओ क्योंकि मुझे एक आखिरी फाइल भेज देने दो.
    मगर वो माने ही नहीं और मेरे मम्मों व गांड को दबाने लगे.

    मैं भी सनसनी में आने लगी.
    उन्होंने एक हाथ से अपने पजामा को खोल दिया और जल्द ही टी-शर्ट खोल कर सिर्फ अंडरवियर में रह गए.

    मैंने हंस कर कहा- ये भी क्यों रह गया, इसे भी हटा दो.
    इस पर उन्होंने अपना अंडरवियर भी खोल दिया.

    हमारा नन्हा सा बेटा बेडरूम में सो रहा था.

    उन्होंने मुझे गोद में उठाया और टेबल पर ही लेटा दिया.
    टेबल पर बहुत सारा खाने का सामान रखा था. साथ ही मेरे काम की चीजें भी थीं. कुछ पेपर्स, लैपटॉप और उसी छात्र का पेन्सिल बॉक्स आदि भी रखा था.

    मेरे पति ने मुझे टेबल पर उन सबके ऊपर ही लेटा दिया और मेरे कपड़े फाड़ दिए.
    वो मिशनरी पोजीशन में मेरे ऊपर आ गए और अपने बदन से मेरे बदन को ज़ोर से दबाए हुए थे.

    मेरे पति बहुत भारी हैं क्योंकि उनका पेट काफी बड़ा है.
    मैं पेपर्स और पेन्सिल बॉक्स के ऊपर लेटी हुई थी.

    पेन्सिल बॉक्स ठीक मेरी गांड के नीचे था और मेरे पति मेरे ऊपर पूरे जोश में मेरे बदन को काट रहे थे.
    फिर उन्होंने अपना काला लंड मेरी चुत में ज़ोर से घुसा दिया.

    मैं चिल्ला उठी.
    मैंने उन्हें धीरे चोदने के लिए कहा लेकिन वो माने ही नहीं.

    उन्होंने फुल स्पीड से चुदाई शुरू कर दी.
    मैं चिल्ला चिल्ला कर कामुक सिसकारियां ले रही थी- ऊऊओ … ऊऊ … जान आई मर गई … थोड़ा आराम से.
    लेकिन वो मान ही नहीं रहे थे.

    उन्होंने मेरी सिसकारियां सुनकर और ज्यादा वजन डाल दिया और मुझे और स्पीड से चोदने लगे.
    पूरी टेबल धप धाप धाप की आवाज कर रही थी और हम दोनों के वजन से ज़ोर ज़ोर से हिल रही थी.

    मेरी गांड के नीचे जो पेन्सिल बॉक्स था वो चुदाई से पूरा टूट गया था और पेपर फट गए थे.
    पेन्सिल बॉक्स के पीस मुझे मेरी गांड में चुभ रहे थे. लेकिन मेरे पति पूरे जोश में वाइल्ड सेक्स के नशे में थे और कूद कूद कर कर मुझे चोद रहे थे.

    जब वो मेरे ऊपर कूद कूद कर चुदाई कर रहे थे तो पूरी टेबल आगे पीछे होती हुई इतनी ज़ोर से हिलने लगी थी मानो अभी ही टूट जाएगी.
    खाने का सारा सामान नीचे जमीन पर गिरता जा रहा था और देखते ही टेबल टूट भी गई.

    हम लोग के चुदाई करते हुए ही खाने के ऊपर गिर गए.
    प्लास्टिक की चम्मचें आदि इधर उधर छिटक गईं.

    फिर भी उन्होंने मुझे चोदना नहीं रोका. वो मुझे किसी जंगली जानवर की तरह चोदे जा रहे थे.
    मैं चिल्ला रही थी- आह अय मांआ … मर गयी … अह रुको तो यार … आह सीइ सीई.

    वो नॉनस्टॉप चुदाई करने में लगे रहे.
    सब बचा हुआ खाना आदि मेरे जिस्म के नीचे पिसा जा रहा था.

    मगर मेरे पति कूद कूद कर जंगली जानवर की तरह मेरी चुदाई कर रहे थे.
    जब उनका माल निकल गया, तब वो रुके … और मुझे राहत मिली.
    वो मेरे ऊपर लेटे रहे.

    मुझे चूमते हुए बोले- मजा आया?
    मैंने कहा- मजा तो तुम्हें आया होगा. मेरी तो गांड छिल गई.

    वो बोले- क्यों?
    मैंने कहा- टेबल पर बहुत सारा सामान था, वो सब मेरी गांड में रगड़ कर पिस गया.

    वो हंसने लगे.
    मैं अपनी गांड सहलाने लगी.

    मुझे भी अपने पति के मोटे लंड से चुदकर मजा आया था मगर आपको तो मालूम ही है कि औरतों की आदत होती है, वो कभी संतुष्ट नहीं होतीं.

    फिर जब हम लोग उठे तो मैंने नीचे देखा.
    पूरा सत्यानाश हो चुका था. टेबल और खाने का सब सामान टूट गया था.

    मैं फ्रेश होने गयी.
    मेरे फ्रेश होने के बाद मेरे पति भी फ्रेश होकर आए.

    हम दोनों कमरे में आ गए और बेड पर लेट कर सोने लगे.

    मैंने देखा कि बगल में हमारा बेटा चैन की नींद सो रहा था.

    एक घंटा बाद मेरे पति का लंड फिर से खड़ा हो गया और वो फिर से मेरे ऊपर चढ़ गए.

    फिर से मिशनरी पोज़िशन में वो मेरी बॉडी को अपने जिस्म से ज़ोर से दबाए हुए थे.

    मेरी तो जान ही निकल रही थी.
    मैंने समझ लिया कि ये बिना लंड पेले मानेंगे नहीं, तो मैंने अपनी टांगें खोल दीं.

    उन्होंने अपना लंड ज़ोर से मेरी चुत में घुसा दिया और धकापेल ज़ोर ज़ोर से पूरी रफ़्तार में मेरी चुदाई कर रहे थे.
    पूरा बेड ज़ोर ज़ोर से हिलने लगा और मैंने देखा कि चुदाई से हमारा बेटा भी हिल रहा था.

    मुझे डर था कि मेरा बेटा जाग ना जाए. चुदाई के समय में ज़ोर से सिसकारियां ले रही थी.
    मैं- अया अयाया अयाया बस करो, फीलिक्स आराम से … आउच आह अयाया अया … आराम से.
    लेकिन मेरे पति मान ही नहीं रहे थे.

    कुछ देर बाद उन्होंने मुझे उल्टा कर दिया और मेरी गांड पर लंड सैट कर दिया.

    मैं कांप गई कि अब गांड भी मारी जाएगी.
    हालांकि मैं गांड तरफ से भी चुदती हूँ लेकिन उन महिलाओं को मालूम होगा कि गांड में लंड लेना कितना दुरूह कार्य होता है.
    फिर मेरे पति का लंड तो गधे के लंड से मैच करता है.

    वही हुआ … मेरे पति ने मेरी गांड में पूरी ताकत से अपना मूसल लंड घुसा दिया.
    लंड घुसा और वो कूद कूद कर गांड चुदाई करने लगे.

    पूरा बेड अब और ज़ोर से हिल रहा था.
    काफी देर बाद मेरे पति ने मुझे फिर से सीधा लेटा दिया और इस बार गलती से उन्होंने मुझे मेरे बेटे की प्लास्टिक टॉय कार के ऊपर लेटा दिया.

    मुझे पता नहीं था कि मेरे बेटे की टॉय कार हमारे बेड पर पड़ी है.
    क्योंकि वो बेड पर ही खेलता रहता है और कभी कभी उसके खिलौने बेड पर पड़े रह जाते हैं.
    चूँकि रूम में भी पूरा अंधेरा था इसलिए मैं भी देख नहीं पाई.

    मेरे पति अपने जिस्म का बोझ मेरे ऊपर इतना ज़ोर से दबाए हुए थे कि मेरी जान ही निकल रही थी.
    वो फिर से मिशनरी पोज़िशन में जंगली जानवर की तरह मेरी चुदाई करने लगे.

    उन्होंने मेरे जिस्म को एकदम कसके पकड़ा हुआ था और मेरे पैर को अपने पैर से दबाए हुए थे.
    वो कूद कूद कर रगड़ रगड़ कर जंगली सांड की तरह मुझे चोदने लगे.

    मैं लगातार चिल्लाए जा रही थी- आआह आआ फीलिक्स धीरे आराम से आह बस करो.
    मगर उनको चुदाई के समय कुछ होश नहीं रहता है.

    हमारा बेड बहुत ज़ोर से आगे पीछे हिल रहा था और चूं छुं कर रहा था, धाप धाप की आवाज आने लगी थी.
    फिर मुझे किसी चीज की टूटने की आवाज आई.

    ये आवाज मेरे जिस्म के नीचे से आई थी.
    मेरे बेटे की प्लास्टिक टॉय कार मेरे पति की जंगली चुदाई से टूट गयी थी.

    मैंने उन्हें रोकने की कोशिश की लेकिन मेरे पति फिर भी नहीं रुके.

    वो पूरी ताक़त के साथ इतनी ज़ोर से मुझे चोद रहे थे कि मेरी जान ही निकल रही थी.
    मुझे ऐसा लग रहा था कि बस किसी तरह से मैं अपने पति से छूट कर अलग हो जाऊं.

    फिर वही हुआ जिसका डर था.
    उनकी इस तरह की जंगली चुदाई से बेड टूट गया और मेरा बेटा नीचे गिर गया.

    उसी समय मेरे पति का स्पर्म निकल गया.
    मेरा बेटा रोने लगा था.

    फिर मैंने पति से हटने का कहा.
    वो मेरे ऊपर से हट गए.

    मैंने अपने बेटे को उठाया और उसे गोद में उठाकर चुप कराने लगी.
    चुदाई से हम दोनों की बॉडी पसीने से तर हो गयी थी.

    मैं चल नहीं पा रही थी. क्योंकि मेरे पति ने मेरी चुत लगभग फाड़ दी थी और गांड भी चिर गई थी.
    फिर वो फ्रेश हुए और मैं बेटे को चुप कराके उसको दूसरे बेड पर सुला आई.
    मैं और मेरे पति भी उसी कमरे में बेड पर सो गए.

    जब सुबह हुई तो फिर से मॉर्निंग रफ मिशनरी सेक्स हुआ और उसके बाद मैं ऑफिस चली गयी.
    मैं सही से चल भी नहीं पा रही थी.

    मैंने एक नया पेन्सिल बॉक्स खरीदा.
    ऑफिस में मेरे उस इन्टर्न छात्र ने मुझसे पूछा कि मेम आपको क्या हुआ आप ठीक से चल क्यों नहीं पा रही हैं?
    मैंने कहा- मेरे पैर में चोट लग गई है.

    फिर उसने पूछा कि ये न्यू पेन्सिल बॉक्स क्यों? मेरा पुराना वाला कहां गया?
    मैं बोली- यह गिफ्ट है, रख लो.

    मुझे कुछ बहाना मिला ही नहीं था. क्या ही बोलती उससे.
    तो यह थी मेरी ताबड़तोड़ चुदाई की सेक्स विद हसबैंड वाइफ पोर्न स्टोरी!

    मेरे पति मुझे रोज हर रात मुझे ऐसे ही चोदते हैं, रफ वाइल्ड मिशनरी सेक्स करते हैं.
    अब फर्क बस इतना है कि जिस कमरे में हम दोनों अब चुदाई करते हैं, वहां का बेड बहुत मजबूत है.
    लेकिन मेरे पति की रफ चुदाई से वो बेड भी हिलने लगता है और चूँ चूँ की आवाज आने लगती है.

    अपने पति के गधे छाप लंड से चुदने के बाद मुझे बहुत मस्त नींद आती है और बाद में उनकी चुदाई से मुझे मीठा मीठा सपना आता है.

  • पापा की परी की मटकती गांड में गधे जैसा लंड-Baap Beti Ki Chudai

    पापा का मजबूत लंड पजामे को फाडने को तैयार हो रहा था। तो मैरी चुत भी उस भयंकर लंड को लेने को बेताब थी। पापा की परी पापा की दुल्हन बन गयी थी मेरी दिल की धड़कन बढने लगी जैसे जैसे रात गहरी हो रही थी।

    दोस्तो मे सोनम कपूर मुंबई से आपके सामने मेरे जीवन का एक हसीन लम्हा जो आगे चलकर मेरी जिंदगी बन गया वो शेयर कर रही हूँ। इस Baap Beti Sex Story को अगर लिखने मे कोई गलती हो तो क्षमाँ करना मेरे सभी चोदू दोस्तो!

    मेरे परिवार मे मेरे से दो छोटी ओर मोम डेड है कॉलेज की पढाई के बाद मेरी शादी 19 साल की उम्र मे कर दी गयी। मेरे पापा एक बिजनेसमैन है तो उन्होंने मेरे लिए भी एक बिजनेसमैन लडका ही खोजा ओर हमाँरी शादी कर दी।

    सुहागरात पर ही मुझे मेरे गांडू पति की हकीकत पता चली वो पैसेवाला तो है मगर दमदार मर्द नही, मेरे ख्वाब ख्वाब ही रह गये। मगर ओर कोई रास्ता नही था शादी से पहले मेरा कोई अफेयर नही था। तो मैने सब अपनी किस्मत पर छोड़ दिया था।

    शादी के एक साल बाद मे जब पिहर आई तो माँ ओर बहने मेरी नानी के घर जा रही थी वो मुझे देखकर बहुत खुश हुई ओर मुझे भी साथ चलने का कहने लगी। मगर मेरा ननिहाल मे मन नही लगता था तो मैने मना कर दिया,

    ओर कहा – मै पापा के पास ही रहूगी!

    ये सुनकर माँ ने कहा – चलो ठीक है हम कल सुबह जाकर तीन दिन मे लोट आएगे तुम अपने पापा का ख्याल रखना।

    मेरे पापा की उम्र उस समय 40 की थी ओर मेरी19 की मेरी माँ भी मेरी बडी बहन जैसी लगती थी। वो उस समय 32 की थी उनका शरीर भी बडा कामुक था खैर दिन बातो मे निकल गया ओर रात को खाना खाकर हम सब सो गये।

    हम तीनो बहने ऊपर सो रही थी तभी रात को मुझे प्यास लगी तो मै पानी पीने नीचे आई तो माँ की आवाजे सुनकर मै उनके कमरे की तरफ देखने चली गयी। कमरा बंद था मगर मम्मी की आहे सुनकर मुझे पता चल गया की मेरा बाप मेरी माँ चोद रहे थे।

    माँ की कामुक आवाजो से मेरी भी चुदास भडक गयी ओर मै चुदाई देखने का जुगाड करने लगी। तभी कमरे के अंदर झाकने का मुझे जुगाड मिल गया, गेट के लोक के सामने बेड होने से मुझे अंदर का दृश्य साफ साफ दिखाई दे रहा था। मेरे पापा ने मेरे माँ के पैर चांद की तरफ कर रखे थे ओर माँ की चुत मै अपना गधे जैसा लंड पेल रहे थे।

    पापा का लंड देखते ही मेरी चुत का झरना बहने लगा ओर मेरा हाथ लोवर के अंदर से मेरी चुत को सहला रहा था। माँ की चिखे तो मेरी माँ की माँ की चीख निकल जाती अगर इतने बडे लंड से चुदती।

    वो कुछ देर बाद पापा ने माँ को कुतिया बनाया तो उनकी नजरे गेट पर चली ओर उन्हे गेट के नीचे से मेरे पैर दिखाई दिये। जिसे देखकर उन्होने अंदाजा लगाया की वहा मै उनकी चुदाई देख रही हू। माँ की चुत मे पापा का लंड अंदर जाता तो उनकी चीख निकल जाती ओर वो गाली देती हर बार।

    माँ – अब तो छोड दे मुझे हवशी जानवर… मेरे किस्मत मे ही लिखा था… ऐसा जानवरतो पापा ने कहा – रानी लोग देखने को तरसते है ऐसे लंड को!

    ओर उन्होने गेट की तरफ देखकर मुझे आंख माँर दी ओर हंसकर माँ की गांड मे उगली डाल दी। ओर वो लगातार गेट पर नजरे गढ़ाकर माँ की चुदाई करते रहै ओर इधर माँ की चुदाई देखकर मेरे बदन मे भी आग लग गयी थी। मगर मेरे पास कुछ नही था उस आग को बुझाने के लिए।

    दस मिनट बाद पापा ने माँ की चुत मे ढेर सारा वीर्य भर दिया ओर फिर अपना लंबा लंड चुत से बाहर निकाल लिया ओर गेट के सामने खडे होकर हिलाने लगे। तो मेरी उगलिओ की हरकत से मेरी चुत ने भी खडे खडे दोबारा अपना रस बाहर निकाल दिया।

    अब मै भागकर अपने कमरे मे चली गयी मगर पापा का मूसल लंड मेरी आंखो के सामने घुम रहा था ओर मेरी नींद भी गायब थी। पता नही कब आंख लगी मेरी सुबह जब माँ ओर बहन तैयार हो गयी तो मुझे उठाया।

    ओर कहने लगी – अब सोती ही रहेगी क्या उठ जा रात को क्या देख रही थी

    माँ की बात सुनकर मुझे रात का नजारा फिर से याद आ गया ओर मै मुह धोकर नीचे आ गयी। बहन ने चाय लाकर दे दी ओर वो कमरे मे समाँन पैक करने चली गयी।

    तो माँ ने कहा – सोनम क्या हुआ सब ठीक है

    तो पापा ने कहा – कुछ उदास तो है सोनम पता नही क्या बात है

    तो मम्मी बोली – कोई बात नही… तीन दिन आप ख्याल रखना ज्यादा तंग मत करना उसे…

    तो पापा बोले – तुम भी ना सोनम को तंग क्यो करूगा!

    तो मम्मी बोली – पता नही आपका मै जानती हू, मे ही झेल सकती हू,हर कोई नही,

    तो पापा ने कहा – सोनम क्या कम है वो भी झेल लेगी आराम से

    तो माँ बोली – रहने दो इसके बस की बात नही

    तो मै कहा – माँ.. मै भी झैल लूंगी आपकी बेटी हू!

    तो माँ बोली – बेटा देखने ओर करने मे बहुत फर्क है!  ये सुनकर मे सकपका गयी!

    तो पापा बोले – तुम डराओ मत तुमको कुछ हुआ था क्या जो संजू को होगा

    तो मम्मी बोली – मुझे ही पता है क्या हुआ था आपको क्या पता

    तो पापा बोले – संजू कुछ हुआ क्या माँलूम लगा तेरे को तो

    माँ – बोली आने के बाद पता लगेगा वो तो, मगर संभाल कर करना…

    ये सब बाते सुनकर मुझे एहसास हो गया था, माँ मेरी मदद कर रही है क्योकी माँ जानती थी मेरे पति मे दम नही है ओर मै खुश भी नही हू उस से, तो माँ ने ही पापा को मनाया था इसके लिए।

    तभी पापा बोले – सोनम रात के लिए तैयार तो हो ना?!!

    मैने भी कह दिया – पापा आपकी परी तैयार है बिलकुल!

    तो पापा बोले – फिर दोपहर मै लडके साथ समाँन भिजवा दूंगा, तुम तैयारी कर लेना अच्छे से ओर खाना मै लेकर आ जाऊगा, कोई दिक्कत है तो अपनी माँ को बता दो, अगर मुझे ना कहना चाहो!

    तो मैने कहा – ठीक है पापा!

    ओर मै रसोई मे जाकर माँ से गले लग गयी!

    तो माँ बोली – बेटी एकबार दर्द होगा बस थोडी हिम्मत रखना तुम्हारी खुशी के लिए बहुत मुश्किल से हा की है तेरे पापा ने!

    ये सुनकर मैने कहा – ठीक है माँ !

    तो माँ ने कहा – आज तेरी सुहागरात ही है इसलिए दुल्हन बनकर तैयार हो जाना अच्छे से, तेरे पापा कपडे भी भेज देगे। हमने सब तैयारी कर रखी है तुम वैक्स करवा आना अभी फिर कमरे को संजाकर तैयार भी करना है, गहने भी पार्लर वाली से ले आना तुम।

    ये सब सुनकर मैरी आंखो से आंसू निकल आए।  तो माँ ने आंसू पूछते हुए कहा – बेटा हम तेरी खुशी के लिए सबकुछ कर रहै तो तुम भी खुशी खुशी मजे करो।

    तो मैने कहा – हा माँ जरूर!  मम्मी ओर बहन को छोड़ने के लिए पापा उनको साथ लेकर निकले ओर फिर वो फैक्ट्री चले गये वही से। मै गाडी लेकर पार्लर चली गयी ओर फिर वही से मैने वैक्स फेशियल करवाया ओर गहने लेकर आ गयी। दोपहर मे नहाकर गाऊन पहनकर समाँन का इंतजार कर रही थी।

    तभी लडका एक फूलो की टोकरी लेकर आ गया ओर एक बैग मे कपडे मैने पहले कमरे को अच्छे से सजा दिया। अब कमरे मे गुलाब की खुशबु महक रही थी तो मै भी कामुक हो रही थी।

    रात की चुदाई को लेकर फिर मैने कपडे देखे तो उसमे मेरा फेवरिट कलर का घाघरा चोली था लाल रंग का मै कुछ देर आराम करने लेटी तो दो घंटे बाद मुझे जाग आयी मम्मी का फोन आने पर।

    माँ ने पूछा – तैयारी कर ली

    तो मैने कहा – हा माँ

    तो माँ बोली – बेटा अब बाथरूम जाकर पेशाब करने के बाद सरसो के तेल से अंदर की माँलिश कर लेना अपनी उगलिओ से।ताकी रात को तकलीफ कम हो डरना मत बस थोडी हिम्मत रखना ओर पहले पूरा फोरप्ले करना जब बर्दाश्त से बाहर हो जाए तब पापा से कहना। एकबार ले लिया तो फिर कभी कोई दिक्कत नही होगी!

    ये सब बाते सुनकर ही मेरी चुचिया कडक हो गयी ओर मेरी चुत से कामरस निकलने लगा। माँ के फोन रखते ही मै एकबार फिर से नहाने चली ओर फिर चुत मे अच्छे से तेल माँलिश की अब मै बाहर आकर तैयार होने लगी। तभी पापा का फोन आया,

    तो मैने कहा – आप नो बजे तक आना

    तो पापा बोले – बेटा मुझे भी तैयार होना है

    तो मैने कहा – हो जाना पापा क्या जल्दी है

    तो पापा बोले – ठीक है बेटा

    ओर मैने अच्छे से मेकअप कर के अपनी ड्रेस पहनकर आज पापा की दुल्हन बन ने लगी! दो घंटे के मेकअप के बाद आखिरकार पापा की परी पापा की दुल्हन बन गयी थी मेरी दिल की धड़कन बढने लगी जैसे जैसे रात गहरी हो रही थी।

    आखिरकार पापा ने डोरबैल बजाई,

    तो मैने कहा – दरवाजा खुला है

    तो पापा लोक करके अंदर आ गये ओर वाशरूम जाकर वो नहाकर बाहर आये ओर उन्होने एक शेरवानी पहनी ओर पगडी लगाकर। फिर सेन्ट डालकर उन्होने मेरे कमरे का दरवाजा खटखटाया। तो मेरी सांसे उपर नीचे होने लगी तभी उन्होने दरवाजा खोला ओर अंदर आकर दरवाजा लोक कर दिया।

    पापा को देखकर मेरी चुत भी मचलने लगी, तभी पापा धीरे से फूलो की लडियो को हटाकर बेड पर बैठ गये ओर मेरे पास आ गये। मैने गर्दन नीचे कर ली, पापा को सामने देखकर।

    तब पापा ने बात शुरू करते हुए कहा – सोनम  बेटा ये सब हम मजबूरी मे कर रहै है तो अच्छा है हमे जब ये करना ही है तो हम मजे भी ले, ताकी तुझे जो सुख नही मिल पाया वो सुख मिले ये!सुनकर मैने कहा – पापा मै इस सुख के लिए ही तो आपकी दुल्हन बन गयी हू,अब मुझे ये सुख दे दो आप!

    तो पापा ने मेरा घुघट उठा दिया ओर मेरे चेहरे को प्यार से देखते रहै, मेरी आंखे बंद थी ओर गर्दन झुकी हुई।

    तभी पापा ने कहा – तुम कितनी खूबसूरत को आज देखा सही से मेने बिलकुल  लड़की लग रही हो। सोनम अब आखे खोलो शर्म करोगी तो केसै होगा ये सुनकर मै पापा से लिपट गयी ओर पापा ने मुझे बाहो मे भर लिया ओर हम दोनो एकदूसरे से लिपटकर बैठे रहे बहुत देर। पापा के हाथ अब धीरे धीरे मेरे बदन को सहलाकर मुझे गर्म कर रहे थे।

    तभी पापा ने मेरे मुह को अपने मुह के सामने कीया ओर मेरे होठो पर लगी लाल लिपस्टिक को खाने लगे। मेरी लिपस्टिक से पापा के होठ भी लाल हो गये तो पापा के हाथ मेरी चुचियो पर पहुंच गये ओर वो उन्हे मसलने लगे। धीरे धीरे हम दोनो गर्म होने लगे।

    पापा ने एक एक कर के मेरे सभी गहने उतारकर रखे तो फिर मैने पापा की शेरवानी के बटन खोलकर उनकी शेरवानी को खोलने मे मदद की। अब मै घाघरा चोली मै बैठी थी तो पापा बनियान ओर पजामे मे पापा का गधे जैसा लंड पजामे को फाडने को तैयार हो रहा था। तो मैरी चुत भी उस भयंकर लंड को लेने को बेताब थी।

    अब देखते ही देखते पापा ने मेरी काली ब्रा ओर चोली एक साथ खोल डाली उसके बाद उन्होने मेरे लांचे का नाडा खिंचकर मुझे खडा होने का कहा ओर मेने पेरो से लांचा निकालकर बाहर फेंका।

    तो पापा ने मेरी पेंटी को खींचकर निकाल दिया, मेरी चिकनी लाल चुत को देखकर पापा खो से गये ओर फिर पापा भी खडे हो गये ओर अपना पजापा कच्छा बनियान खोलकर फेंक डाला।

    अब हम दोनो नंगे हो गये तो पापा ने मुझे बेड पर सुला दिया ओर मेरे पेरो की उगलिओ को मुह मे भरकर चुसने लगे। ओर धीरे धीरे वो मेरि चुत तक पहुंच गये मेरी चुत से रह रहकर कामरस निकल रहा था। तो पापा अब वो कामरस का स्वाद लेने लगे।

    पापा की जबरदस्त चुसाई ने कुछ देर मे ही मेरी चुत ने उनके मुह मे ढेर सारा कामरस छोड़कर उनको अपने योवन रस का मजा दिया। तो फिर अब मेने पापा के मूसल लंड को हाथो मे लेकर सहलाने लगी। पापा का लंड कीसी गर्म पाइप की तरह तप रहा था।

    तभी मैने पापा के सुपारे को अपनी जीभ से चाटकर उसे अपने मुह मे भर लिया ओर सच कहू तो उनको इतना बडा लंड मेरे मुह मे नही जा रहा था। पापा का लंड सिर्फ लंबा ही नही साला मोटा भी बहुत था। मगर मेरी चुदास इतनी ज्यादा थी की मैने ना मुह मे जाते हुए ही पापा का लंड फंसा लिया मुह मे।

    मेरा मुह तो उनके आधे लंड से फटने को हो गया था, मगर फिर पापा मेरे सर को पकडकर धीरे धीरे मेरे मुह को चोदने लग गये। जब पापा लंड अंदर डालते तो मुझे सांस भी नही आ रहा था, मगर मेरी हवस इतनी बढ चुकी थी मै उनका पूरा लंड निगल जाना चाहती थी।

    मगर सारी कोशिश के बाद भी मे 7 इंच तक उनका लंड मुह मे ले पाई ओर पांच मिनट के अंदर मेरे जबडे भी दर्द करने लगे। तो मैने पापा का लंड बाहर निकाल दिया ओर फिर लंबी लंबी सांसे लेकर मेने खुद को नोर्मल कीया। तो पापा ने मुझे बाहो मे भर लिया ओर मेरे होठो पर होठ लगाकर कीस करने लगे।

    उनका मूसल लंड मेरी जाघो के बीच से गांड तक पहुंच रहा था पापा के दोनो हाथ मेरी चुचियो को दबा रहै थे। अब मै पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी। पापा के लंड को पकडकर मे दबाने लगी,

    ओर आखिरकार पापा को कहना पडा – पापा अब करो कुछ मे मर जाऊगी

    तो पापा बोले – ठीक है मेरी परि!

    पापा ने मुझे सुला दिया ओर मेरी गांड के नीचे दो तकिये लगा दिये, पापा ने मेरे हाथो को बांध दिया।

    मैने पूछा – पापा हाथ क्यो बांध रहै हो??!

    तो पापा बोले – बेटा तुम्हे दर्द नही होगा इसलिए

    ओर फिर पापा ने बेड की डोवर मे रखी बोरोप्लस अपनी उगलिओ पर लगाकर अपनी उगली मेरी चुत मे डालकर मेरी चुत चिकनी करने लगे ओर मेरा इतना बुरा हाल हो चुका था की मुझे अब चाहे कितना भी लंड हो मै लेने को तैयार थी।

    पापा ने थोडी सी क्रीम अपने लंड पर लगाई ओर अपने हाथो से मेरी नाजुक चुत की पंखुडियो को खोलकर उसका लंड का टोपा रख दिया। मेरी ओर धीरे धीरे मेरी चुत मे उन्होने अपना लंड का टोपा उतार दिया उसके बाद उन्होने झटके से टोपा पूरा अंदर कीया। तो मेरी चुत की दिवार हिल गयी ओर मै दर्द से कराहने लगी।

    मगर अभी तो सिर्फ दो इंच लंड ही घुसा था चुत मै तभी पापा ने एक तेज झटका लगाकर आधा लंड मेरी चुत मे फंसा दिया। तो मेरी चीख निकल गयी जोर से तभी पापा मेरे उपर लेट गये ओर मेरे होठो को अपने होठो मे कैद कर लिया।

    मगर मैने पूरा बेड हिला दिया उनकी पकड से निकलने के लिए मगर मै उनके शक्तिशाली शरीर के आगे बेबस लाचार थी। मेरा दर्द कम होने का नाम ही नही ले रहा था ओर तभी पापा ने दो झटके लगातार लगाकर अपना पूरा लंड मेरी चुत मे फंसा दिया।

    मेरी चुत फट गयी मेरा दर्द से बुरा हाल था मे लगभग बेहोश होने वाली थी तभी पापा ने मेरी चुचीयो को इतनी बेदर्दी से मसला की मेरा दर्द दुगना हो गया ओर मै बेहाल हो उठी। दोस्तो इस चुदाई  में, दस मिनट तक पापा अपनी मनमाँनी करते रहै, मै लगातार रोती रही, दस मिनट के बाद मेरा रोना बंद हुआ। तो उन्होने मेरे होठो को छोड़ा ओर मुझे खुली सांस लेने का मोका मिला।

    मगर सांस की बजाय मेरे मुह से सबसे पहले गाली निकली – कुते अपना लंड बाहर निकाल, मुझे नही चुदवाना हरामी,

    तो पापा बोले – कुतिया फट गयी इतनी जल्दी कब से फुदक फुदक कर रही थी… रंडी रूक जा अभी तेरी तो फटेगी तेरी ओर,ओर उन्होने अपना आधा लंड बाहर निकालकर एक झटके मे फिर से पूरा लंड चुत मे उतार दिया। तो मेरी चुत की दीवार हिल उठी मे फिर से चिल्ला उठी।

    तो पापा बोली – बस फट गयी एक झटके मे कुतिया तब तो बहुत मचल रही थी।

    मैने कहा – हा! कुते फट गयी अब बोल ओर बचा है तो वो भी डाल दे, बेटीचोद !!!

    दोस्तो इतना दर्द तो बच्चा पैदा करने मे भी नही हुआ जितना की पापा की पहली चुदाई से हुआ बेड पर चद्दर के उपर डाला सफेद तोलिया मेरी फटी चुत की दास्तान बयान कर रहा था। तभी पापा ने अपना लंड बाहर निकाला जिसे देखकर मुझे चक्कर आ गये! उन्होने एक बार फिर से अपने लंड पर ढेर सारी बोरोप्लस लगाने लगे!

    तो मै बोली – पापा बहुत दर्द हो रहा रहने दो प्लीज…

    पापा बोले – बेटा अब दर्द नही होगा…

    तो मैने अपनी टांगो को मोडकर चुत को छिपा लिया…

    ये देखकर पापा भडक गये – बोली बहुत नखरे कर रही है अब देख तू बहन की लोंडी बहुत देर हो गयी, तेरे नाटक को देखते!

    ओर उन्होने गुस्से मे आकर अपना लंड मेरी चुत मे पेल दिया, इसबार दर्द कम हुआ मगर मेरी चुत के अंदर अब भयंकर जलन हो रही थी ओर पापा गुस्से मे आकर ताबडतोड झटके दे रहे थे।

    मेरी चीखो से भी पापा को कोई फर्क नही पडा ओर वो मुझे गंदी गंदी गालिया देने लगे,रंडी की ओलाद चुप कर साली कुतिया, साली रंडी! तेरी माँ भी तो रोज चुदती है तो तेरी चुत कुछ अलग थोडी है बहनचोद रंडी क्यो चिल्लाह रही है!!!

    छिनाल। रंडी। बहन की चुत माँरू तेरी। तेरी माँ तो बडे मजे लेकर चुत ओर गांड मरवाती है। बुरचोदी रंडी। गालिया सुनकर मुझे भी गुस्सा आया, तो मैने भी पापा को गालिया देनी चालू कर दी – हा… भडवे चोद! कुते की ओलाद चोद अपनी बेटी की बुर को। हरामी की ओलाद।

    माँ के चोदे माँदरजात। बहन के लंड। हा चोद अपनी बेटी की बुर को हरामी माँदरचोद। लगता है तूने अपनी माँ को भी चोदा होगा हरामी। बेटीचोद।

    पापा – हा कुतिया अभी तो तेरी चुत फाडी है तेरी छोटी बहन की चुत भी मै ही फाडूगा वो भी गांड मटकाकर चलती है बहुत तुम दोनो की खुजली इसी लंड से मिटेगी अपनी माँ पर गयी हो तुम दोनो कुतिया वो भी ऐसे ही चुदती है मजे लेकर

    मेने बोला – बहनचोद रंडी की ओलाद आज रंडी बन ही गयी!

    दोस्तो बीस मिनट के बाद मेरी चुत उस मूसल लंड को आराम से अंदर लेने लगी तो मैने भी गांड उठाकर लंड चुत मे लेना चालू कर दिया अब दर्द तो हो रहा था मगर दर्द के साथ साथ मुझे मजा भी आने लगा

    मेरी चीखे अब आहो मे बदन गयी। ओर मे – हा आ आ अहह आ अम्म पापा… आ अहह अपनी परी को ऐसे ही पेलो जोर से रगडो मेरी चुत को पापा इसकी माँ की बहुत तंग करती है ये मुझे!

    पापा – अब से तंग नही करेगी बेटी आज तेरी चुत की माँ चुद जाएगी!

    मै बोली – तो चोद दे मेरी चुत बेटीचोद या बकचोदी ही करेगा हरामी

    पापा – अरे बहन की लोंडी अभी तो तू रो कर माँफी माँंग रही,अब बकचोदी करने लगी|

    ओर पापा ने मेरी टांगे सीधी कर के अपने पेट से लगाकर सीधी कर अपने दोनो हाथो से कसकर पकड ली ओर फिर पूरी ताकत से चुत का भोसडा बनाने लगे। तो मेरी गांड भी फटने लगी मेरी चुत ने एकबार फिर से ढेर सारा कामरस छोडा तो पापा का लंड ओर चिकना होकर मेरी चुत को फाडने लगा ओर मै मजे लेकर दर्द को भूलाकर चुदने लगी थी।

    मै बोली – ओ माँ बचाओ मारली पापा ने

    पापा हंसकर – नही बेटा ऐसा तो कुछ नही बस मजे ले लो एकबार की बात है

    ओर फिर पापा की बेरहम चुदाई बीस मिनट ओर जारी रही चालीस मिनट की इस चुदाई से मेरी माँ बहन चुद गयी थी। दोस्तो जब पापा ने मेरी चुत मे अपना गर्म गर्म वीर्य भर तो मुझे कुछ राहत मिली। दोस्तो पापा पसीने से नहा चुके थे ओर मेरा बदन भी पसीने से भर चुका था।

    कुछ देर बाद पापा खडे हुए ओर कहा – पापा की परी,तुम ठीक तो हो!

    मेने कहा – पापा अब पूछ रहै हो मेरी माँ चोदकर

    तो पापा हंसने लगे – बेटा तेरे पति का छोटा है तो भी दिक्कत ओर तेरे पापा का बडा है तो भी दिक्कत!

    तो मै बोली – पापा आपका बडा नही बहुत बडा है!!!

    तो पापा बोले – चल ठीक है खडी हो वाशरूम चलते है।

    मेरी तो बैठने की हिम्मत नही थी, पापा बचपन मे जैसे गोद मै लेकर मुझे घुमाँते थे वैसे ही आज पापा ने मुझे गोद मे उठा लिया ओर बाथरूम मे ले गये।

    मै सीट पर बैठकर मूतने लगी, तो मैरी चुत मे पेशाब की जलन भी हो रही थी बहुत ओर उससे मेरी आंखो मे आंसू भर आए। तभी पापा ने पास आकर मुझे चुमाँ ओर फिर पापा ने शावर चला दिया ओर अपने हाथो से मेरे बदन पर साबुन लगाकर अपने बदन पर साबुन लगाई।

    ओर फिर मुझे अच्छे से नहलाया नहाने के बाद मुझे कुछ आराम मिला तो पापा ने तोलिया लाकर मेरा ओर अपना बदन साफ कीया ओर फिर मै चलकर बेड पर पहुंची।

    तो पापा ने मुझे गाऊन लाकर दिया ओर फिर पापा किचन से खाना लेकर आये ओर मुझे अपने हाथो से खाना खिलाया। फिर पापा ने मुझे दर्द के लिए एक गोली दी जिसे खाने के बाद मुझे नींद आने लगी।ओर सुबह 9 बजे मुझे पापा ने उठाया – बेटा चाय तैयार है खडी हो जा

    तो मेरी आंख खुली मै अब ठीक महसूस कर रही थी काफी मेरे शरीर का दर्द गायब था। मगर चुत पर सोजन थी अब पेशाब कीया तो रात जितनी जलन नही थी मतलब मे अब पापा का गधे जैसा लंड लेने के लिए बिल्कुल तैयार थी।

    मै मुह धोकर बाहर आई ओर पापा की गोद मे जाकर बैठ गयी!

    तो पापा बोले – कैसा है मेरा बेटा??!!!

    तो मैने कहा – जिंदा हू पापा ओर हंसने लगी!!

    तो पापा बोले – मेरी परी अब से तो तुझे मजे ही मजे करने है बस ओर मुझे चुमने लगे!

    फिर हमने चाय पी ओर पापा ने कहा – मुझे फैक्ट्री जाकर आना है कुछ देर फिर दो दिन मे घर पर ही रहूगा। तो तुम नहा लेना हम दोपहर मे कही बाहर खाना खाने चलेगे। ये सुनकर मैने कहा – जी पापा!ओर पापा नहाकर फैक्ट्री चले गये। तभी माँ का फोन आ गया ओर वो पूछने लगी – केसी रही मेरी लाडो की सुहागरात!!

    तो मैने कहा – माँ हालत ख़राब करदी, चूत का पसीना निकल दिया, आपकी भी ऐसी ही रही होगी!!!!

    तो माँ बोली – एक बार दो दर्द होगा ही बेटा अब दो तीन दिन मे अपनी जवानी के असली मजे ले तू आराम से घर पर,तो मैने कहा माँ सही कहा अब इतना दर्द सहा है तो मजे तो लूंगी ही ओर फिर हम दोनो हंसने लगी…

    अगले भाग मे दर्द भरी दास्तान सुनने को मिलेगी क्योकी अब मेरी गांड की बारी थी जिससे मे बिलकुल अनजान थी। चलिए मिलते है अगले भाग मे आपको कैसी लगी मुझे कमेन्ट कर के जरूर बताना दोस्तो।

  • दादाजी – का लंड या गधे का लंड

    मेरा नाम रेशमा है, हमारा 3 लोगों का छोटा सा परिवार है मम्मी पापा और में. मेरे मम्मी पापा दोनों ही जॉब करते है और में दिखने में सुंदर हूँ और लंबे बाल है. में इस साईट की बहुत बड़ी फैन हूँ और आज में आपके साथ मेरा अनुभव शेयर करने जा रही हूँ. यह 3 साल से भी ज्यादा पुरानी बात है, तब मेरी उम्र 19 साल थी और मेरी हाईट 5 फुट 1 इंच और फिगर 32-25-32 था. हम लोग एक अपार्टमेंट में रहते थे,

    तभी हमारे पास के फ्लेट में एक नई फेमिली रहने को आई, जो कि कुछ दिनों से खाली था. उनकी फेमिली में एक कपल और उनके पिताजी थे, उन लोगों के रहने के बाद पड़ोसी के नाते दोनों फेमिली के बीच बातचीत शुरू हुई वो दोनों पति पत्नी जॉब करते थे.

    फिर अंकल ने बताया कि उनकी मम्मी 12 साल पहले गुजर गई और उनकी दीदी शादी के बाद अमेरिका में रहती है और उनके पापा रिटायर्ड होने के बाद उनके पास रहने आ गये. फिर मेरे मम्मी पापा उनके पापा को चाचा जी बोलने लगे और उसी हिसाब से में उनको अंकल, आंटी और दादा जी बुलाने लगी,

    इन 2 महीनों में दोनों परिवार काफ़ी नजदीक हो गये थे. एक दिन दोपहर में स्कूल के बाद घर आने के लिए में सिटी बस स्टॉप पहुँची और उसी बस स्टॉप पर दादा जी घर आने के लिए बस का इंतजार कर रहे थे, दादाजी 5 फुट 8 इंच और मजबूत बॉडी के थे, हांलाकि उनकी उम्र 61 साल के आस पास थी, लेकिन वो 50 साल के दिखते थे. फिर बस आने के बाद हम दोनों बस पर सवार हो गये और अपने घर की तरफ निकल पड़े.

    जब बारिश का महीना था और हल्की-हल्की बारिश शुरू हो गयी थी, बस स्टॉप पर सिर्फ़ हम दोनों उतरे. हम दोनों के पास छाता ना होने की वजह से हल्की-हल्की बारिश में भीगते हुए हम घर की और बढ़े, बस स्टॉप से घर करीब 10 मिनट पैदल जाने की दूरी पर है, हम बस स्टॉप से 2-3 मिनट ही चले थे कि बारिश जोर से होने लगी तो हम दोनों तेज-तेज चलने लगे, लेकिन ज़्यादा बारिश होने की वजह से दादा जी बोले कि साईड के बड़े पेड़ के नीचे इंतजार कर लेते है और तेज की बारिश की वजह से में मान गयी और हम दोनों साईड के पेड़ के नीचे चले गये, लेकिन तब तक हम दोनों पूरी तरह से भीग चुके थे और हमारे कपड़े गीले हो चुके थे,

    उस वक़्त में स्कूल ड्रेस पहने हुई थी जो कि सफ़ेद शर्ट और ग्रे स्कर्ट थी, में पूरी तरह से भीग चुकी थी और मेरी सफ़ेद शर्ट पारदर्शी होकर चिपक गयी थी. मैंने अन्दर ब्रा पहनी हुई थी, लेकिन गीली शर्ट से मेरे बूब्स के शेप का मालूम चल रहा था. फिर मैंने दादा जी की तरफ देखा तो उनकी नज़र मेरी भीगी हुई शर्ट में दिख रहे बूब्स और क्लीवेज पर थी.

    अब वो इधर उधर की बातें करने लगे वो बीच बीच में मेरी बूब्स की और देख रहे थे, जैसे कि मुझे कोई शक़ ना हो. जब वो मेरी बूब्स की तरफ देख रहे थे, तब मेरे दिल में हलचल मच रही थी और मुझे एक अजीब सी ख़ुशी महसूस हुई और इससे पहले किसी ने मुझे इस तरह से नहीं देखा था. फिर 15 मिनट के बाद बारिश कम होते ही हम दोनों घर की और चल पड़े और चलते-चलते दादा जी मेरे भीगे हुए बदन को तिरछी नज़र से देख रहे थे, अब मुझे उनका देखना अच्छा लग रहा था.

    फिर हम दोनों अपने-अपने घर चले गये, आज तक मैंने सिर्फ़ सेक्स की वासना और सेक्स की नजर से देखने के बारे में पढ़ा और सुना था, लेकिन कभी महसूस नहीं किया था, लेकिन आज दादा जी जिस तरह से मुझे और मेरे भीगे हुए बूब्स को देख रहे थे तो मुझे एक ख़ुशी महसूस होने लगी थी और में उनके बारे में सोचने लगी. उस कच्ची उम्र में यह भावना आते ही मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था और में यह भूल चुकी थी कि वो 61 साल के और में सिर्फ़ 19 साल की हूँ, इसी हसीन याद से टाईम कट गया और देखते ही देखते शाम हो गयी.

    फिर में शाम तक अपना सब होमवर्क ख़त्म करके छत पर खुली हवा खाने के लिए चली गयी, तभी धीरे धीरे अंधेरा होने लगा था. जब में छत पर गयी तो वहां सामने कोई नहीं था, जब मैंने पूरी छत पर नज़र घुमाई तो एक कोने में दादा जी बेंच पर बैठे थे. उनको देखते ही मुझे एक ख़ुशी महसूस हुई, जैसे कि में उनसे वर्षो से मिलना चाहती हूँ और आज सामने मिल गये हो और मुझे देखते ही उनका चेहरा भी खुशी से चमक उठा और उन्होंने मुझे एक बड़ी सी स्माईल दी. फिर मैंने भी उनको रिप्लाई में एक स्माईल दी और जाकर उनकी बगल में बैठ गयी, उस वक़्त में लोंग स्कर्ट और वी गले की टॉप पहने हुई थी और दादा जी बात करते-करते मेरी क्लीवेज और बूब्स देख रहे थे और में जानबूझ कर अंजान बन रही थी.

    फिर थोड़ी देर के बाद दादाजी ने अपना एक हाथ मेरी जांघ पर रख दिया और सामने की तरफ देखकर मुझसे बात करने लगे. फिर में भी चुपचाप बैठकर उनसे बात करने लगी और मैंने उनका हाथ हटाने की कोई कोशिश भी नहीं की थी. फिर 2 मिनट के बाद दादा जी अपने हाथ से मेरी जांघ को सहलाने लगे और में चुपचाप बैठी हुई सामने की तरफ देख रही थी. फिर थोड़ी देर के बाद जब मैंने उनकी तरफ देखा तो वो मेरी जांघ सहला रहे थे और मेरी क्लीवेज को देख रहे थे.

    फिर उन्होंने मेरी आँखों में देखकर एक स्माइल दी, तो मैंने भी उन्हें एक स्माइल दे दी. फिर में हंसते हुए बोली कि मम्मी पापा के आने का टाईम हो गया है और अब में नीचे घर जाती हूँ और फिर में नीचे चली आई. फिर थोड़ी देर में मम्मी पापा अपनी जॉब से वापस आ गये, अब शाम के 9 बजे हुए थे और में सोफे पर बैठकर टी.वी देख रही थी और मम्मी किचन में काम कर रही थी और पापा लेपटॉप में अपना काम कर रहे थे. तभी डोर बेल बजी और मैंने जाकर दरवाजा खोला तो मैंने देखा कि दरवाजे के सामने दादा जी खड़े हुए थे.

    फिर उन्होंने मुझे देखते ही आँख मारी और स्माइल करते हुए अंदर आ गये, अब उन्हें देखकर मेरा दिल जोरो का धड़कने लगा था. अब पापा ने उनके चाचा जी को देखकर बड़ी खुशी से उनका स्वागत किया, तब दादा जी मुझसे बोले कि आओ और आराम से अपनी टी.वी देखो और में फिर से सोफे पर जाकर टी.वी देखने लगी और दादा जी आकर मेरे बगल में बैठ गये और पापा से बात करने लगे. फिर मम्मी किचन में उनके लिए चाय बनाने के लिए चली गयी, अब पापा अपने लेपटॉप पर काम करते-करते दादा जी से बात कर रहे थे, तो दादाजी अपने हाथ से मेरी पीठ सहलाने लगे. फिर जब मैंने उनकी तरफ देखा तो वो स्माइल देते हुए मेरे टॉप के अंदर हाथ घुसाते हुए मेरी नंगी पीठ सहलाने लगे, तभी दादाजी ने पापा से मेरे बारे में बात की.

    दादा जी : मुस्कान 11वीं में क्लास आ गयी है, उसकी पढाई कैसी चल रही है? तुम हेल्प कर रहे हो या नहीं ?

    पापा : नहीं चाचा जी, काम थोड़ा ज़्यादा है इसलिए ध्यान नहीं दे पा रहे है.

    दादा जी : अरे भाई काम तो चलता रहेगा, लेकिन बेटी की पढ़ाई का ध्यान तो रखना पड़ेगा ना.

    पापा : जी आप सही बोल रहे है, लेकिन काम का बोझ भी है अगर बुरा ना माने तो क्या आप मुस्कान की पढाई देख लेंगे? अगर आपके पास टाईम हो तो.

    दादा जी : अरे इसमें बुरा मानने की क्या बात है? में दोपहर को खाली बैठे-बैठे बोर होता रहता हूँ तो मेरा भी टाईम पास हो जायेगा. (फिर मेरी तरफ देखकर आँख मारी, और में स्माइल देते हुए फिर से टी.वी देखने लगी) तभी मम्मी चाय ले कर आई, तो दादा जी ने अपना हाथ मेरे टॉप से बाहर निकाल लिया और वो मुझे स्माईल कर रहे थे.

    मम्मी : चाचा जी आपको कोई परेशानी तो नहीं होगी ना.

    दादा जी : बिल्कुल नहीं बल्कि मुझे तो खुशी होगी.

    मम्मी : अकेली लड़की घर पर रहती है तो डर लगा रहता है और आप साथ रहेंगे तो दिल को तसल्ली भी रहेगी.

    दादा जी : हाँ बेटी सही कहा तुमने, माँ हो चिंता तो रहेगी, लेकिन आगे से मुस्कान अकेली नहीं रहेगी मेरे यहाँ आ जाया करेगी, तो में उसकी पढाई में हेल्प कर दूंगा.

    पापा : थैंक यू चाचा जी, मुस्कान कल से तुम स्कूल से आकर लंच के बाद पढाई करने के लिए चाचा जी के पास चली जाना.

    में : जी पापा.

    फिर चाय के बाद मम्मी किचन में चली गयी और दादा जी ने अपना हाथ फिर से मेरे टॉप के अंदर डाल दिया और उन्होंने इस बार नीचे कि तरफ स्कर्ट के अंदर डालने की कोशिश की, लेकिन स्कर्ट टाईट थी इसलिए वो सफल नहीं हुए. फिर वो मेरी पीठ को टॉप के अंदर से ही सहलाते रहे, फिर थोड़ी देर के बाद वो अपने घर जाने के लिए उठे और मुझे स्माइल देते हुए बोले कि कल वो इंतज़ार करेंगे, फिर वो चले गये. उसी रात अगले दिन के बारे में सोचते-सोचते कब मेरी आँख लग गयी मुझे मालूम ही नहीं चला.

    फिर में सुबह उठकर स्कूल के लिए तैयार हो गयी, फिर स्कूल जाते वक़्त मम्मी ने मुझे याद दिलाया कि लंच के बाद दादा जी के यहाँ पढ़ाई के लिए जाना है और में हाँ बोली. फिर स्कूल कैसे ख़त्म हो गया? मुझे पता भी नहीं चला और में घर वापस आ गयी. फिर में लंच करके दादा जी के यहाँ जाने के लिए तैयार होने लगी, उस टाईम मैंने टॉप और स्कर्ट पहने थी.

    अब मैंने दादा जी के घर के दरवाजे पर जाकर घंटी बजाई, फिर दरवाजा ओपन हुआ और अब सामने दादा जी सिर्फ़ एक पजामे में खड़े थे. मुझे देखते ही उनका चेहरा खुशी से चमक उठा और मुस्कुराते हुए बोले कि वो मेरा ही इंतज़ार कर रहे थे.

    अब मेरे अंदर जाते ही उन्होंने दरवाजा अन्दर से बंद कर दिया, और अब में जाकर सोफे पर बैठ गयी और सामने की टेबल पर अपनी किताब रख दी. तभी दादा जी एक ग्लास जूस मुझे देते हुए मेरे बगल में बैठ गये और अब वो मेरी पढ़ाई के बारे में पूछ रहे थे और में धीरे-धीरे जूस पीते हुए उन्हें जवाब दे रही थी, इसी बीच दादा जी ने मेरी जांघ पर हाथ रखकर सहलाना शुरू कर दिया.

    अब मेरा दिल ज़ोर से धड़कने लगा था और में चुपचाप अपना सिर नीचे करके जूस पीने लगी थी. तभी दादा जी ने पूछा कि मुझे बुरा तो नहीं लग रहा है वो मुझे टच कर रहे है, तो मैंने स्माइल देते हुए ना में सिर हिलाया. अब यह सुनकर दादा जी अपना दूसरा हाथ मेरे टॉप के अंदर डालकर मेरी पीठ सहलाने लगे.

    फिर मेरे हाथ को किस करते हुए बोले यहाँ हम सुरक्षित नहीं है और मेरा हाथ पकड़कर बेडरूम में ले गये. अब दादाजी मुस्कुराते हुए बोले यहाँ आराम से बात कर सकते है और हम दोनों बेड पर बैठ गये, फिर दादा जी ने अपना लेफ्ट हाथ मेरे कंधे पर रख दिया और अपने राईट हाथ से मेरे लेफ्ट बूब्स को सहलाने लगे. तब मैंने उनका हाथ पकड़ लिया, लेकिन मैंने उनका हाथ हटाने की कोशिश नहीं की, तो वो बूब्स को धीरे धीरे दबाने लगे. अब मैंने मेरी आँखे बंद कर ली, तभी उन्होंने दोनों बूब्स को दबाते हुए पूछा कि कैसा लग रहा है? तो मैंने कहा अच्छा लग रहा है.

    फिर वो अपना हाथ टॉप के अंदर डालकर मेरे बूब्स को ब्रा के ऊपर से सहलाने लगे और धीरे-धीरे दबाने लगे. अब में अपनी आँखें बंद करके मज़ा ले रही थी और उन्होंने अपना सर मेरे कंधे पर रखकर मेरी गर्दन को चूमना शुरू कर दिया. यह सब मेरे साथ पहली बार हो रहा था और अब में भी गर्म होने लगी थी, तभी दादा जी ने मेरे टॉप को नीचे से पकड़कर ऊपर किया और मेरे दोनों हाथ ऊपर करते ही एक झटके में मेरी टॉप मुझसे अलग हो गयी और अगले ही पल में मेरी ब्रा के हुक खोलकर ब्रा को भी मुझसे अलग कर दिया.

    अब में नीचे सिर्फ़ स्कर्ट में थी और ऊपर से पूरी नंगी थी, मेरी बूब्स देखकर दादा जी के मुँह से वाउ निकल गया और बोले, आआअहह क्या खूबसूरत बूब्स है? जी कर रहा है कच्चा खा जाऊं, क्या किसी ने आज से पहले बूब्स टच किया है? तो फिर मैंने ना में सिर हिलाया और वो एक भूखे बच्चे की तरह मेरे बूब्स को चूसने लगे और अपना हाथ मेरी स्कर्ट के अंदर डालकर मेरी जांघो को सहलाने लगे, तब तक मेरी पेंटी पूरी गीली हो चुकी थी.

    फिर थोड़ी देर में ही दादा जी अपने हाथ से मेरी चूत को पेंटी के ऊपर से ही टच करने लगे तो मैंने अपना हाथ उनके पजामे के ऊपर रख दिया और धीरे-धीरे उनके लंड को दबाने लगी. तभी दादा जी ने अपना पजामा उतार दिया और अब वो सिर्फ़ चड्डी में थे. फिर वो मुझसे बोले कि मुस्कान क्या तुम अपने दोस्त को बाहर नहीं निकालोगी?

    यह कहकर उन्होंने मेरा हाथ अपनी चड्डी के अंदर डाल दिया, अब मुझे ऐसा लगा कि मेरे हाथ में कोई गर्म रोड आ गयी है. फिर मैंने चड्डी में से उनका लंड बाहर निकाला, में लाईफ में पहली बार इतने बड़े और मोटे लंड को देख और छू रही थी, उनका लंड करीब 8 इंच लंबा, और 3 इंच चौड़ा था मैंने एक बार गधे का लंड देखा था दादाजी का लंड भी किसी घोड़े के लंड जैसा लग रहा था और में उसे एक ही नज़र में देखे जा रही थी, जैसे मुझे कोई अजूबा हाथ लगा हो. इसी बीच दादा जी ने अपनी चड्डी ऊतार दी और मेरी स्कर्ट भी खोल दी. अब वो मेरे सामने पूरे नंगे थे और में सिर्फ़ एक पेंटी में थी.

    अब में उनके लंड को अपने हाथ से सहला रही थी और वो मेरे बूब्स दबाते हुए मेरी आँखो में देख रहे थे. फिर धीरे-धीरे वो मेरे चेहरे के पास आकर मेरे लिप को चूमने लगे, अब में भी किस में उनका साथ देने लगी. फिर 2-3 मिनट तक लिप किस करने के बाद दादा जी मेरे सामने खड़े हो गये और अब उनका लंड ठीक मेरे सामने तनकर खड़ा था, मानों जैसे वो मुझे सलामी दे रहा है.

    फिर दादा जी मुझे लंड को मुँह में लेने के लिए बोले और मैंने लंड को दोनों हाथों से पकड़कर मुँह में ले लिया. अब दादा जी मेरे बालों को पकड़कर मेरे सिर को अपने लंड पर आगे पीछे करने लगे और अपनी आँखे बंद करके, उम्म्म हम्मम्मम्म करके सिसकारियाँ निकाल रहे थे. फिर में 3-4 मिनट तक उनका लंड चूसती रही और उन्होंने अचानक से ज़ोर से, आहह करते हुए अपना पूरा पानी मेरे मुँह के अंदर ही छोड़ दिया. उनके लंड के पानी का टेस्ट कुछ अजीब सा था, लेकिन में उनके लंड का सारा पानी पी गयी और मैंने लंड चाट कर साफ कर दिया.

    अब दादा जी ने मुझे उठाकर बेड पर लेटा दिया और मेरी पेंटी को नीचे खींचने लगे, अब देखते ही देखते मेरी पेंटी मुझसे अलग हो गयी और में पूरी नंगी बेड पर लेटी रही. फिर मेरी दोनों टांगो को खोलकर अपना सिर मेरी जांघो के बीच में रख दिया और मेरी चूत की फंको को खोलकर को किस करने लगे, मुझे ऐसी फीलिंग हो रही थी, जैसे कि हज़ारो चीटियाँ मेरी चूत को काट रही हो, मुझे इतनी अच्छी फीलिंग पहले कभी नहीं आई थी.

    फिर वो मेरी चूत को चाटने लगे और देखते ही देखते अपनी जीभ मेरी चूत में डालने लगे, अब वो मेरी चूत को चूसते रहे और अब में उनका सिर पकड़कर दबाब डाल रही थी और चूत चुसाई का मज़ा ले रही थी. अब करीब 5-6 मिनट तक चुसाई करवाने से मेरी चूत से पानी निकलने लगा था और वो मेरी चूत पर मुँह लगाकर पूरा पानी पी गये. अब पानी निकलने के बाद में हल्का महसूस कर रही थी और अब दादा जी मेरे ऊपर आकर मेरे बूब्स के साथ खेलने लगे और अब में भी उनके लंड को अपने हाथ से सहलाते हुए खेलने लगी.

    फिर 2 मिनट में ही दादा जी का हलब्बी लंड सलामी देते हुए फिर से खड़ा हो गया, तो वो मेरी दोनों टांगो के बीच में आकर बैठ गये. अब उन्होंने एक तकिया लेकर मेरी कमर के नीचे रख दिया, ताकि मेरी चूत थोड़ी ऊपर हो जाए. फिर बेड के साईड में टेबल पर रखी वेसलिन क्रीम निकाल कर थोड़ी मेरी चूत को खोलकर उस पर लगाई और थोड़ी अपने लंड पर लगा ली, फिर अपने हाथ से लंड को पकड़कर मेरी चूत के होल के सामने रगड़ने लगे.

    फिर वो मेरे ऊपर लेट गये और मेरे लिप पर किस करने लगे, अब में भी उनके किस का साथ दे रही थी और इसी बीच दादा जी ने एक ज़ोर के धक्के के साथ अपना लंड मेरी चूत के अंदर डाल दिया, तो में दर्द के मारे चिल्लाने लगी, लेकिन उन्होंने मेरे लिप को अपने लिप से बंद कर रखा था और अब में उनको हटाने लगी, लेकिन उन्होंने मेरी कमर को पकड़ कर रखा था और में हिल भी नहीं पा रही थी, अब दर्द के मारे मेरी आँखो से आंसू निकलने लगे थे.

    फिर दादा जी ने मेरे बूब्स को चूसा और फिर थोड़ी देर में जब मेरा दर्द कम हुआ तो वो फिर से अपनी कमर चलाने लगे. अब उनका लंड धीरे-धीरे चूत में अंदर बाहर होने लगा था, फिर जब में थोड़ी नोर्मल हुई तो उन्होंने और एक ज़ोर के धक्के से अपना पूरा लंड मेरी चूत में अंदर डाल दिया और तभी ज़ोर से पकड़कर मुझे किस करने लगे और धीरे-धीरे मेरा दर्द कम होने लगा और मेरा दर्द कम होने के बाद लंड को अंदर बाहर करके चोदने लगे.

    फिर थोड़ी देर में मुझे भी मज़ा आने लगा और में अपनी कमर उठा- उठाकर उनका साथ देने लगी और अब मुझे देखकर दादा जी भी जोश में आ गये और ज़ोर ज़ोर से मुझे चोदने लगे. फिर 7-8 मिनट तक चुदवाने के बाद मेरे पानी छोड़ने के बाद दादा जी भी कुछ 15-20 धक्के लगाकर वो भी अपना पानी मेरी चूत के अंदर डाल कर झड़ गये. अब चुदाई के बाद हम दोनों ही थक चुके थे और कुछ देर तक हम दोनों वैसे ही नंगे बेड पर पड़े रहे. दोस्तों यह थी मेरी पहली चुदाई की कहानी

  • ट्रक ड्राइवर बना मेरे जिस्म का मालिक

    दोस्तो, मेरा नाम काजल है, उम्र 23 साल, फिगर साइज 33-28-34 है.

    मैं दिखने में सांवली हूँ, मेरा कोई बॉयफ्रेंड नहीं था।
    मेरी चुत की आग ने मुझे जैसे रंडी ही बना दिया।

    तो अब माय सेक्स डिजायर X कहानी शुरू करती हूँ.

    मैं काजल अपनी दुनिया में खुश रहती थी.
    मेरी सहेलियों के ब्वॉयफ्रेंड थे और वे सब उनके साथ जवानी का मजा करती थीं.

    चुदाई के बाद मेरी सहेलियां जब मिलतीं तो वे सब चटखारे ले लेकर अपनी चुदाई के किस्से सुनातीं.
    मैं उनकी सेक्स की बातों को सुनकर गर्म हो जाती और बाद में अपनी बुर में उंगली करके अपनी बुर को, माय सेक्स डिजायर को ठंडा कर लेती थी.

    इसी तरह मैं रोज कॉलेज जाती और घर आ जाती.

    एक दिन मेरी सहेली फोन पर एक पोर्न साईट पर किसी से चैट कर रही थी.
    मैंने देखा तो उससे पूछा कि यह सब कैसे करते हैं.

    तो उसने मेरी भी आईडी उस साईट पर बना दी.

    अब मैं भी उस साईट पर रोज आने लगी.
    पर मुझे किसी का कोई मैसेज ही नहीं आता था.

    एक दिन मेरी सहेली ने पूछा- चैट हो रही है न वहां पर … अब तो मजा आ रहा होगा!
    तो मैंने उसको मना करते हुए सारी बात बताई.

    उसने मेरा फोन लिया और साईट को खोल कर उसने मेरी प्रोफाइल में 4-5 गंदी और अश्लील सी फोटो डाल दीं, साथ ही उसने बहुत कुछ चुदाई वाला मसाला भी लिख दिया.
    मैं शाम को घर आ गई.

    अगले 2 दिन तक कॉलेज की छुट्टी थी, तो मैं अपने घर के काम में व्यस्त रही.

    रविवार को रात को मैं बोर हो रही थी तो मैंने सोचा कि अब साईट खोल कर वीडियो देखा जाए और अपनी बुर को ठंडी कर लूं!
    मैंने अपने कमरे को अन्दर से बन्द किया और सलवार उतार कर बैड पर बैठ गई.

    मैंने मोबाईल पर पॉर्न साईट खोली तो देखा किसी का मैसेज आया हुआ था.
    तभी मैंने मैसेज खोला तो उसमें एक लड़के ने मेरी फ़ोटोज़ की बहुत तारीफ की थी.

    मैं बहुत खुश हुई.
    मैंने भी उसको धन्यवाद का रिप्लाई कर दिया.

    अब मैं गंदी फिल्म देखकर माय सेक्स डिजायर X शांत करने लगी.
    थोड़ी देर में ही उस लड़के का वापस रिप्लाई आया और इस बार उसने अपने लंड की तस्वीर के साथ मैसेज भेजा था.

    उस मैसेज में लिखा था कि लंड पसंद आया हो, तो रिप्लाई देना.
    उसका लंड देख कर ही मेरी बुर पानी छोड़ने लगी.

    उसका लंड सच में काफी लंबा और मोटा था.
    थोड़ी देर बाद मैंने उसको रिप्लाई किया- तुम्हारा बहुत अच्छा है!

    वह- धन्यवाद, तुम कहां से हो?
    मैंने अपनी जगह बता दी.

    वह- तुम तो बहुत सेक्सी हो, आज तक कितने लंड ली हो?
    मैं- अभी तक एक भी नहीं.
    वह- हो ही नहीं सकता है, तेरी बुर की फोटो देख कर लगता है कि तू बहुत चुदी है!

    मैं- वह मैंने तो ऐसे ही लगा दी है.
    वह- तो अपनी असली बुर ही दिखा दो न!
    मैं- नहीं!

    वह- अच्छा तो अपनी एक सेक्सी सी फोटो तो दिखा दो, अब मना मत करना.
    मैं- ठीक है, पर एक ही फ़ोटो दूँगी.
    वह- हां, पर अपनी ही दिखाना!

    मैंने उसको अपनी फोटो भेज दी, उसने मेरी बहुत तारीफ की.
    मैं भी बहुत खुश हुई.

    अब जब भी मौका मिलता, हम बात करने लगते.

    कुछ ही समय बाद हम दोनों ने अपने नम्बर भी एक दूसरे के साथ शेयर कर लिए थे.
    अब हम दोनों वीडियो कॉल पर भी बात करते थे.

    कुछ दिनों तक बात हुई, तो हम दोनों खुल कर बात करने लगे.
    हम दोनों को सेक्सी बातें करते हुए एक महीने से ऊपर हो गया था.

    एक दिन हम दोनों नंगे होकर बात कर रहे थे.

    हम दोनों जब भी नंगे होते थे तो अपना चेहरा नहीं दिखाते थे.
    उस दिन उसने मुझसे कहा- काजल मैं कोई जवान लड़का नहीं हूँ. मैं 45 साल एक हट्टा-कट्टा मर्द हूँ.

    मैंने भी सोचा कि यह मजाक कर रहा है.
    वह बोला- लोगी मेरे लंड को?

    मैंने भी कहा- कब से तो तड़फ रही हूँ … पर आप हो कि आते ही नहीं हो!
    तो वह एकदम से बोल पड़ा- तुम रात को 10 बजे घर से बाहर आ सकती हो?

    मैंने सोची कि यह मजाक कर रहा होगा.
    तो मैंने भी हां कर दी.
    अब वह ऑफ लाइन हो गया.

    रात को ठीक 10 बज कर 10 मिनट पर उसका फोन आया ‘कहां हो तुम, मैं बाहर इंतजार कर रहा हूँ … जल्दी बाहर आओ!’
    मैं कुछ समझ पाती कि उसने फोन रख दिया.

    मैंने सोचा कि मैंने तो उसको अपने घर का पता अभी तक बताया ही नहीं था, तो कहां से बाहर आ गया!

    मैं फिर घर के पीछे वाले दरवाजे से बाहर आ गई.

    बाहर अन्धेरा बहुत था, मैं एक साइड खड़ी हो गई.

    तभी एक हाथ निकल कर आया और मेरे मुँह पर आ गया.
    मैं एकदम से इस हरकत से बहुत डर गई.

    जब मैंने पीछे देखा तो पास के रमेश अंकल थे.

    मैं उनसे छूट कर दूर हुई और बोली- यह क्या गंदी हरकत कर रहे हो अंकल?
    अंकल बोले- वही, जो रोज फोन में करते थे.

    अब मैं समझ गई कि मैं जिसको एक लड़का समझ रही थी, वह लड़का रमेश अंकल हैं.

    अंकल ने मुझे पकड़ लिया और मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए.
    वे पागलों की तरह मुझे किस किए जा रहे थे.

    अब अंकल मेरी कमीज के ऊपर से मेरे बूब्स को दबाने लगे.
    मैंने उनको धक्का देकर पीछे कर दिया.

    अंकल बोले- क्या हुआ?
    मेरे मुँह से निकल गया कि कोई देख लेगा अंकल!

    ‘अब यहां इस टाइम कौन आएगा?’
    मैं- नहीं, कोई भी आ सकता है.

    अंकल ने मेरा हाथ पकड़ा और वे मुझे एक ट्रक के पास ले आए.
    उन्होंने जल्दी से ट्रक के गेट को खोला और मुझे ट्रक के अन्दर ले गए.

    अंकल ने ट्रक के अगले शीशे पर स्क्रीन लगा दी.
    इससे ट्रक के अन्दर अन्धेरा हो गया.

    अब अंकल ने मुझे पकड़ा और मेरे होंठों पर अपने होंठ रख कर चूसने लगे.
    मुझे भी मजा आने लगा था तो मैं भी अंकल का साथ देने लगी थी.

    थोड़ी देर में ही हम दोनों पूरे नंगे हो गए.

    अंकल ट्रक की पिछली सीट पर लेट गए और लंड को हाथ में पकड़कर बोले- चूस रानी, पूरा चूस!
    यह कह कर उन्होंने मेरा एक दूध पकड़ लिया और उसे मसलते हुए सहलाने लगे.

    मैंने भी ब्लू फिल्मों में लंड की चुसाई देखी थी और मेरी सहेलियां भी खुल कर बताती थीं कि वे अपने ब्वॉयफ्रेंड्स का लंड चूसती हैं.

    यह सब सोच कर मैंने रमेश अंकल के लंड को पकड़ा और अपने मुँह में लेकर चूसने लगी.

    अंकल का लंड सच में बहुत बड़ा था; पूरा लंड मुँह में नहीं आ रहा था.
    तो अंकल अपनी गांड उठा कर अपना लंड पूरा का पूरा मेरे मुँह में डालने की कोशिश कर रहे थे.

    मैं अंकल के लंड को चूसने के साथ एक हाथ से अपनी बुर को भी सहला रही थी.

    कुछ देर बाद अंकल उठ गए और बोले- लंड की गोलियां भी चूस ले … बहुत मजा आ रहा है तेरे साथ!
    मैं अंकल के टट्टे भी मुँह में लेकर चूसने लगी.

    अंकल बोले- साली काजल, तू तो वीडियो देख कर ही एक पूरी रंडी के जैसा मजा दे रही है!
    अंकल के मुँह से ‘रंडी’ शब्द सुनते ही मैं उनके लंड को और जोर से चूसने लगी.

    अंकल ने अब मुझे नीचे लिटाया और वे मेरी बुर चाटने लगे.
    तभी अंकल ने एक उंगली मेरी गांड में डाल दी जिससे मेरी हल्की सी चीख निकल गई.

    अंकल अपने काम में लगे रहे.

    कुछ ही देर बाद अंकल मेरी गांड पर टूट पड़े.
    उनकी एक उंगली मेरी बुर के अन्दर थी और जीभ मेरी गांड में चलने लगी थी.
    उनकी नर्म गर्म जीभ से मुझे बहुत मजा आ रहा था.

    कुछ पल बाद अंकल मेरे ऊपर चढ़ गए और अपने लंड को मेरी बुर पर घिसने लगे.
    उन्होंने अपने एक हाथ से मेरा मुँह बन्द कर दिया और एक कड़क झटका मारते हुए अपना लंड अन्दर पेल दिया.

    इस एक ही कड़क झटके में उनका लंड मेरी बुर को फाड़ता हुआ अन्दर चला गया.

    मेरे मुँह से निकली हुई चीख मेरे मुँह में ही दब कर रह गई.
    मुझे बेहद दर्द हो रहा था और चाह कर भी मैं चिल्ला नहीं पा रही थी.

    तभी अंकल ने फिर से झटका मारा.
    इस बार ऐसा लगा मानो उनका पूरा लंड मेरे पेट के अन्दर चला गया हो.

    इसके बाद थोड़ी देर तक अंकल मेरे ऊपर वैसे ही चढ़े रहे और उनका लंड मेरी बुर में अपनी जगह बनाता रहा.

    फिर मेरा दर्द कम हुआ तो अंकल धीरे धीरे अपने लंड को बुर में आगे पीछे करने लगे.

    कुछ देर बाद अंकल ने मेरे मुँह से अपना हाथ हटा दिया तो मैं जोर जोर से सांस लेने लगी.
    मैं बोली- बाहर निकाल लो अंकल, बहुत दर्द हो रहा है.

    अंकल ने मेरी कोई बात नहीं सुनी और मेरी बुर को चोदना जारी रखा.

    कुछ देर बाद मुझे भी अंकल के लंड से मजा आने लगा था.
    मैं भी गांड उठाकर अंकल का साथ देने लगी.

    थोड़ी देर में ही मेरी बुर ने पानी छोड़ दिया और मैं निढाल हो गई.
    अंकल लगातार अपनी गंदी गंदी गालियों के साथ मुझे चोदे जा रहे थे- आह साली छिनाल रंडी … बहन की लौड़ी बड़ा मजा दे रही है तेरी बुर … आह आज तो साली तेरी बुर का भोसड़ा बना कर रहूँगा!

    कुछ ही देर में मैं फिर से चार्ज हो गई और अंकल की चुदाई में सहयोग करने लगी.

    अंकल अब झड़ने वाले थे.
    तो उन्होंने मुझे पेट के बल कर दिया और सारा पानी मेरी गांड पर छोड़ दिया.

    उसके बाद अंकल ने अपने पानी को मेरी गांड में मल दिया.

    मैं हाँफ रही थी और मुझे बेहद सुकून मिल रहा था.
    मेरा जिस्म फूल की भान्ति हल्का हो गया था.
    चुदाई के बाद इतना चैन मिल सकता है, इसका अहसास मुझे पहली बार हुआ था.

    मैं अंकल के साथ चिपक कर सो गई.

    कुछ देर बाद अंकल मेरे एक दूध को मसलते हुए बोले- साली रंडी, तेरी गांड का भी मजा लेना है! मुझे पता नहीं था कि तेरे जैसी मस्त रंडी मुझे यहीं मिल जाएगी.
    यह बोलते हुए अंकल ने मेरे चूतड़ों पर अपना एक हाथ भी फेर रहे थे.

    तभी अंकल ने एक उंगली मेरी गांड में घुसेड़ दी.
    मुझे फिर से बहुत दर्द हुआ.
    पर अंकल को कोई फर्क नहीं पड़ रहा था.

    अंकल ने मेरी गांड को उंगली से चोदना शुरू कर दिया.

    कुछ ही देर में अंकल ने अपनी एक और उंगली गांड में डाल दी.
    मुझे भी अब मजा आ रहा था.

    अंकल का लंड भी अब टाईट हो गया था. अंकल ने मुझे कुतिया बना दिया.
    मैंने भी अपने हाथों से अपनी गांड को पकड़ कर खोल दिया.

    अंकल ने मेरी गांड और अपने लंड पर थूक लगाया और लंड को गांड में सैट कर दिया.

    उसके ठीक बाद अंकल ने जोर का झटका मारा तो लंड गांड के अन्दर चला गया.

    मैं तड़फ उठी.
    अंकल बोले- शाबाश रंडी, बस थोड़ा और सह ले.

    यह कहते हुए अंकल ने दूसरे झटके में अपना पूरा लंड गांड में डाल दिया.

    मेरी तो समझो मेरी गांड फट ही गई थी.
    उनका हाथ मेरे मुँह पर जमा हुआ था तो आवाज बंद थी.

    अंकल अब मेरी गांड में लंड के साथ थप्पड़ भी मार रहे थे- साली रंडी बहुत मस्त कुतिया है तू!

    वे यह सब बोल कर गांड फाड़ चुदाई किये जा रहे थे.
    अंकल कभी मेरे बूब्स पकड़ कर दबाते तो कभी मुझे बालों से पकड़ कर एक घोड़ी की तरह खींचते.

    कुछ 25 मिनट तक मेरी गांड चोदने के बाद अंकल ने अपने दोनों हाथों से मेरे दोनों दूध दबोचे और वे मेरी गांड में ही झड़ गए.
    झड़ कर वे मेरे ऊपर ही लेट गए.

    कब हम दोनों को नींद आ गई, कुछ पता ही नहीं चला.
    जब मेरी नींद खुली तो मैंने देखा कि सुबह होने वाली है.
    मैंने अपने कपड़े पहने, अंकल नंगे ही सोए थे.

    मैं ट्रक से बाहर निकल कर घर आ गई.

    अगले दिन कॉलेज भी नहीं गई, चूत से ज्यादा मेरी गांड में दर्द हो रहा था.

    उसके बाद अंकल ने मेरी बहुत बार चुदाई की, कभी ट्रक में चोदा तो कभी बाहर खड़े खड़े ही चोद देते थे.

    एक दिन अंकल और उनके दोस्त ने एक साथ मुझे मिल कर चोदा.
    यह घटना मैं आपको अगली सेक्स कहानी में बताऊंगी.

  • पहले पहले प्यार में पड़कर बुर चुदाई

    मेरा नाम प्रिया है और मैं आपको, प्यार में पहली बार हुई मेरी चुदाई के बारे में बता रही हूँ.

    मेरा राहुल नाम का एक ब्वॉयफ्रेंड था, हम दोनों एक दूसरे से बहुत प्यार करते थे.

    राहुल हमारे घर के पास ही में रहता था. राहुल और मैं साथ में पढ़ाई करते थे.

    BF Chudai GF कहानी ऐसे शुरू हुई.

    एक दिन मां बाजार से खरीददारी करने के लिए गई थीं और घर में मैं अकेली ही थी.
    राहुल हर रोज की तरह पढ़ाई करने के लिए घर पर आया.
    हम दोनों साथ में पढ़ाई करने के लिए बैठ गए.

    राहुल ने मुझसे पूछा- तुम्हारे घर में कोई नहीं है क्या?
    मैंने कहा- पापा काम पर गए हैं और मां बाजार से सामान आदि लाने गई हैं.

    राहुल बोला- मतलब हम दोनों ही घर में हैं!
    मैंने हाँ कहा.
    अब हम दोनों पढ़ाई करने बैठ गए.

    राहुल ने मुझसे पूछा- तुम मुझे कितना प्यार करती हो?
    मैंने कहा- बहुत!

    राहुल बोला- मैं जो तुम्हें कहूंगा, वह करोगी!
    मैं बोली- हां!

    राहुल मेरे पास आया और मेरी तरफ देखने लगा.
    फिर अचानक से वह मुझे किस करने लगा, मेरे होंठों को चूसने लगा.

    मैं राहुल से कहने लगी- मुझे छोड़ो … ये सब अभी नहीं राहुल!
    पर राहुल मेरी बात नहीं सुन रहा था, वह मुझे चूमता ही जा रहा था.

    मैंने उस दिन जींस पैन्ट और टी-शर्ट पहनी थी.
    राहुल का एक हाथ मेरी जींस के ऊपर से मेरी गांड को दबा रहा था और दूसरे हाथ से वो मेरे स्तनों को दबा रहा था.

    उसने मुझे चूमते चूमते मेरी टी-शर्ट निकाली और मेरी गर्दन पर चूमने लगा.
    अब मैं राहुल के सामने ब्रा और जींस पैन्ट में थी.

    वो मेरी नाभि को चूमने लगा.
    मेरी सांसें धीरे धीरे तेज होने लगीं.

    राहुल मेरी पैन्ट निकालने ही वाला था, तभी दरवाजे की घंटी बजी.
    मैंने राहुल को दूर धकेल दिया और जल्दी कपड़े पहन कर दरवाजे खोलने के लिए गई.

    मां मार्केट से वापस आ गई थीं.
    रोहन और मैं उनके सामने खड़े थे.

    मेरी मां ने राहुल से पूछा- कैसी पढ़ाई चल रही है?
    राहुल- हां आंटी, पढ़ाई अच्छी चल रही है.

    मम्मी अन्दर चली गईं और राहुल मुझे गुस्से से देखता हुआ वहां से चला गया.
    चूंकि मैंने उसे धकेल दिया था इसलिए वह मुझ पर गुस्सा हो गया था.

    मां मुझसे बोलीं- प्रिया राहुल को क्या हुआ, ये क्यों चला गया?
    “कुछ नहीं मां … उसकी तबीयत ठीक नहीं है.”

    बाद में मैंने राहुल को कॉल किया- राहुल क्या हुआ, तुम उस दिन घर से गुस्से से क्यों निकल गए?
    राहुल- प्रिया तुम मुझसे प्यार नहीं करती हो!

    मैं- मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ.
    राहुल- फिर तुमने मुझे धकेला क्यों?
    मैं- मैं डर गई थी. मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था और दरवाजे की घंटी बजी इसलिए मैंने तुम्हें धकेल दिया.

    राहुल- प्रिया फोन रखो, तुम मुझसे बात मत करो.
    मैं- राहुल तुम गुस्सा मत करो, पंद्रह दिन बाद मम्मी पापा दोस्त के शादी में जाने वाले हैं. उस दिन तुम घर आना और जो चाहे वह कर लेना, मैं कुछ नहीं कहूंगी.

    राहुल- सच में कुछ नहीं कहोगी ना!
    मैंने हां कहकर फोन रख दिया और खाना खाकर सोने चली गई.

    सोते समय राहुल ने जो आज किया, मैं उसके बारे में सोच रही थी.
    आज दोपहर में जो राहुल ने आग लगाई थी, मुझे उसे हर हाल में बुझाना ही था इसलिए मैंने अपने रूम का दरवाजा बंद किया और अपनी पैंट निकाल दी.

    मैं एक हाथ से चूत को सहलाने लगी, उसके अन्दर उंगली अन्दर बाहर करने लगी.
    दूसरे हाथ से मैं अपने मम्मों को दबाने लगी.

    कोई दस पंद्रह मिनट तक अपनी चूत को सहलाने के बाद मैं झड़ गई और सो गई.

    अगले दिन मैंने बाथरूम में जाकर अपनी चूत के सारे बाल साफ किए और बुर को शीशे में देखने लगी.
    मेरी चूत एकदम चिकनी दिखने लगी थी.

    मैं शीशे में देख कर फिर से अपनी बुर को सहलाने लगी.
    मुझे फिर से चुदास चढ़ने लगी और मैं बुर में कुछ डालने की सोचने लगी.

    मैं जल्दी से कमरे में आई और बुर में पेलने के लिए कुछ ढूँढने लगी.
    मुझे गोल हत्थे वाली कंघी दिखाई दी और मैं उसी को लेकर वापस बाथरूम में आ गई.
    मैंने उसे बुर में रगड़ना चालू किया तो मुझे मजा आने लगा.

    फिर मैंने उसे शैंपू से चिकना किया और बुर में डालने लगी.
    वो हत्था मेरी बुर में आधा इंच से कुछ ज्यादा ही जा पा रहा था.
    उसके बाद शायद मेरी बुर की झिल्ली उसे अन्दर जाने से रोक रही थी.

    मैंने कंघी के हत्थे को और अन्दर नहीं डाल बस उससे अपनी बुर के दाने को रगड़ती रही.
    कुछ ही देर बाद मैं झड़ गई और बाहर आ गई.

    उस दिन दोपहर में खाना खाकर मुझे बहुत मस्त नींद आई.

    रात को मैंने अन्तर्वासना की साइट खोली और एक सेक्स कहानी पढ़ने लगी.
    उसमें गांड को किस तरह से मरवाते हैं, उसको लेकर लिखा था.

    मेरे दिमाग में अपने आशिक के लिए गांड का छेद खोलने की सोची और अपने उसी प्यारे से कंघी के हत्थे को उठाया लिया.

    मैं उसमें वैसलीन लगा कर उसे अपनी गांड के छेद में लगा कर छेद को कुरेदने लगी.
    गांड ने भी मुँह खोल दिया और वो हत्था मेरी गांड में घुस गया.

    हालांकि अभी वो कुछ ही अन्दर जा पाया था कि दो वजहों से वो रुकने लगा.
    एक तो शायद गांड काफी कसी हुई थी और मुझे उसकी अन्दर की बनावट के बारे में मालूम नहीं था इसलिए मैं डर रही थी कि कुछ गलत न हो जाए.

    दूसरी बात ये थी कि उस हत्थे की बनावट कुछ ऐसी थी कि वो आगे कुछ मोटा सा हो गया था.
    मतलब शुरुआत में पतला गोल था और आगे जाकर ज्यादा मोटा था.
    इसलिए वो मेरी गांड में नहीं जा रहा था.

    अब मैं जितना हत्था गांड में घुस गया था, उतने से ही अपनी गांड को कुरदने लगी.
    मुझे मजा आने लगा.

    फिर मैंने उस हत्थे को अपनी गांड में लगा कर छोड़ दिया और गांड को कसके और ढीली करके उसे अपनी गांड में फुदकता सा महसूस करने लगी.

    आह मुझे बेहद मजा आने लगा था.
    तभी मेरे हाथ की हथेली ने मेरी बुर को सहलाया तो मुझे डबल मजा आने लगा.

    उस दिन काफी देर तक मैंने ऐसा ही किया और झड़ कर एक ही करवट लिए सो गई.
    कंघी का हत्था सारी रात मेरी गांड में ही घुसा रहा.

    सुबह मुझे वो कंघी का हत्था मेरे हाथ से टकराया तो बरबस ही मुझे मुस्कान आ गई और मैंने उसे निकाल दिया.

    मैं बाथरूम में गई और पॉटी करने के लिए कमोड पर बैठी, तो पॉटी करते समय मुझे मेरी गांड में बड़ी सुरसुरी सी हुई और काफी अच्छा लगा.

    अब मैं ये रोज करने लगी.
    इससे मेरी गांड ढीली होकर आसानी से कंघी के हत्थे को तीन चार इंच तक अन्दर लेने लगी थी.

    इससे मुझे लगने लगा था कि मैं अपने आशिक का लंड अपनी गांड में बड़ी आसानी से ले लूँगी.
    ये मैंने एक सरप्राइज के रूप में उसे देने का तय किया था.

    अब वो दिन आ गया था, जिस दिन मेरी चुदाई होने वाली थी.

    मम्मी और पापा शादी के लिए निकल गए.
    मैं राहुल का इंतजार कर रही थी.

    तभी दरवाज़े की घंटी बजी.
    मैंने जाकर दरवाजा खोला.
    सामने राहुल था.

    मैंने राहुल को अन्दर बुलाया और उसे अपने कमरे में लेकर गई.
    वो मेरी तरफ देख रहा था.

    मैं- राहुल आज तुम मेरे साथ जो करना चाहते हो, वो कर सकते हो. मैं तुम्हें कुछ नहीं कहूंगी.

    राहुल मेरे पास आया और मुझे चूमने लगा.
    मेरी चूत को हाथ से सहलाने लगा और जल्दी ही वो उतावला हो गया.

    उसने मेरी जींस टी-शर्ट को निकाला. मुझे ब्रा और पैन्टी में देख कर राहुल का लंड पैंट के अन्दर ही उछलने लगा था.

    उसकी पैंट का उभार मुझे उसके फूले हुए लंड का अहसास करवाने लगा था.
    मैंने उसके लंड पर हाथ फेरा, तो राहुल ने बड़े नशीले नदाज में मुझे देखा.

    उसके बाद राहुल ने मुझे घुटनों पर बिठाया और उसने अपनी शर्ट निकाल कर मुझसे कहा- मेरी पैंट निकालो प्रिया!

    मैं राहुल की पैंट निकालने लगी.
    उसका तना हुआ लंड मेरे मुँह के सामने आ गया.

    मैं सामने से आज पहली बार किसी का लंड देखने और चूसने वाली थी.

    राहुल का लंड बहुत मोटा और लंबा था.

    उसने मेरे मुँह के अन्दर लंड डाला और मुझे लंड चूसवाने लगा.
    राहुल के लंड स्वाद कुछ अजीब सा था.
    मैंने राहुल से कहा- मैं तुम्हारा लंड नहीं चूसूँगी.

    राहुल कहने लगा- तुमने मुझे क्या कहा था कि मैं तुम्हारे साथ जो चाहे कर सकता हूं. अब ये चीटिंग है.

    मैंने ओके कहा और फिर मैंने राहुल के लंड के ऊपर स्ट्राबेरी फ्लेवर की लिपबाम लगा कर लंड चूसने लगी.

    अब लंड का स्वाद स्ट्राबेरी की तरह था.
    मैं राहुल का लंड मजे से चूसने लगी.

    थोड़ी देर के बाद राहुल ने मुझे बेड पर लिटा दिया और मेरी पैंट निकाल कर मेरी पैंटी निकाल दी.
    वो मेरी चूत को चूसने लगा.

    राहुल बोला- प्रिया तेरी चूत का स्वाद स्ट्राबेरी की तरह है.
    मैंने कहा- हां मैंने तेरे आने से पहले अपनी चूत पर स्ट्राबेरी फ्लेवर की लिप बाम लगाई थी.

    राहुल मेरी चूत को बहुत देर तक चूसता रहा.
    इसके बाद मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया.
    राहुल ने मेरी चूत का सारा पानी पी लिया.

    अब राहुल ने मेरी चूत पर थूक लगाया और मेरी चूत में जोर से लंड घुसेड़ कर धक्के मारने लगा.
    मैं दर्द के कारण चिल्लाने लगी. राहुल का मोटा लंड मेरी चूत में अभी आधा ही गया था.

    राहुल ने मेरी चीख पुकार को नजरअंदाज किया और दो तीन तेज धक्के मारकर अपना पूरा लंड अन्दर पेल दिया.
    वो लंड पेल कर रुक गया और मुझे सहलाने चूमने लगा.

    कुछ देर के बाद मेरा दर्द जाता रहा और मुझे भी मजा आने लगा.
    मैं अपनी गांड उठाने लगी तो राहुल समझ गया और वो मुझे धकापेल चोदने लगा.

    उसके बाद मैं राहुल से कहने लगी- आह मजा आ रहा है … और जोर से … और जोर से चोदो मुझे राहुल!
    अब मेरे मुँह से चुदासी सिसकारियां निकलने लगी थीं- आह हाआ हां … बहुत मजा आ रहा है राहुल!

    राहुल ने काफी देर तक मेरी चुदाई करने के बाद कहा- मैं झड़ने वाला हूँ.
    मैंने राहुल से कहा- तुमने कॉन्डम नहीं पहना है, तो सारा रस मुझे पिला दो.

    राहुल ने मेरी चूत से लंड निकाला और मेरे मुँह में डाल दिया.
    मैं लंड चूसने लगी.

    कुछ ही पलों में राहुल मेरे मुँह में झड़ गया.
    मैंने उसका सारा रस पी लिया.

    हम दोनों बेड पर ही लेट गए.

    मैंने राहुल से कहा- खाने का टाइम हो गया है. तुम यहां पर ही खाकर चले जाओ.
    राहुल बोला- ठीक है.

    मैं बेड से उतर कर कपड़े पहनने लगी.

    राहुल बोला- अभी रुको प्रिया, तुम कपड़े मत पहनो. वैसे भी घर में हम दोनों के अलावा कोई नहीं है.
    मैंने पहले तो मना किया, पर बाद में मैं मान गई.

    हम दोनों नंगे ही किचन में चले गए.

    मैं प्लेट में खाना ले रही थी और राहुल पीछे से मेरी गांड को ताड़ रहा था.
    उसका लंड मेरी गांड देख कर खड़ा हो गया.

    मैंने ये सब देख लिया था.
    मुझे पता लग गया कि राहुल को मेरी गांड पसंद आ गई है और वो मेरी गांड मारना चाहता है.

  • सुहागरात में फटी बीवी की फटी चूत का इलाज

    मेरी नयी नयी शादी हुई थी. मन में सुहागरात मनाने का जोश था और उत्साह भी. चूत चुदाई के हसीन ख्वाब देख रहा था. बड़ी मुश्किल से मैंने अपनी शादी की रस्में खत्म कीं और फिर चुदाई के लिए तैयारी करने लगा.

    नई नवेली पत्नी की चुदाई को लेकर बहुत उत्साहित था. मेरी पत्नी के बारे में आपको क्या बताऊं. वो दिखने में ऐसी थी कि आलिया भट्ट को शादी का जोड़ा पहना दिया गया हो. हूबहू आलिया की कॉपी थी.

    रात को अपने कमरे में पहुंचा तो मेरा लंड बल्ले बल्ले कर रहा था. सुहागरात की सेज पर पहुंचने से पहले ही शेरवानी की पजामी में तन गया था. एक एक पल का इंतजार करना मुश्किल हो रहा था. परीशा से मेरी बात शादी से पहले भी होती थी. फोन पर सब कुछ शेयर कर लिया था. बस अब दो जिस्मों का एक हो जाना बाकी था.

    मेरी पत्नी परीशा एकदम से नाजुक और हसीन सी कली थी. कमरे में पहुंचा तो रात के दस बज गये थे. मैंने जाते ही दरवाजा लॉक कर दिया. अब घूंघट उठाने और मुंह दिखाई जैसी रस्म के लिए सब्र नहीं हो रहा था. मैंने जाते ही परीशा को अपनी बांहों में ले लिया और उसे लेकर लेट गया.

    जल्दी ही दोनों एक दूसरे के जिस्मों की जैसे तहें खोलने लगे. मैंने उसके आभूषण उतारे और फिर उसका ब्लाउज और लहंगा. फिर पेटीकोट में उसकी नंगी चूचियों को पीते हुए उसको लेकर चूसने लगा.

    मेरी दुल्हन भी पूरी चुदासी हो रही थी. मेरे जिस्म को बांहों में भर रही थी. काफी देर तक उसके दूध से सफेद उरोजों को पीने के बाद मैंने परीशा का पेटीकोट भी उतार दिया. उसकी नयी नवेली चूत ने अपना मीठा रस छोड़ना शुरू कर दिया.

    मैंने परीशा की चूत पर मुंह रख दिया और उसकी चूत का रसपान करने लगा. दो मिनट के अंदर ही वो अपनी चूत को मेरे मुंह की ओर उठाने लगी थी. मैं भी पूरी शिद्दत के साथ अपनी पत्नी की चूत के रस को पी रहा था.

    फिर परीशा ने भी शर्म का गहना उतार फेंका और मुझे नंगा करने लगी. मेरी कमीज को उतारा और फिर नीचे की पजामी को. मैंने वी-शेप का अंडरवियर पहना हुआ था. मुझे नीचे लिटा कर मेरी पत्नी मेरी फ्रेंची के ऊपर से ही तने हुए लौड़े को अपनी जीभ से चाटने लगी.

    मेरे लंड का तो पहले से ही बुरा हाल हो गया था. परीशा की चूचियों को पीते हुए ही उसने अपनी मिठास मेरी फ्रेंची में चारों ओर फैला दी थी. इधर परीशा भी लौड़े के रस को मेरी फ्रेंची से ऐसे चूस रही थी जैसे अंडरवियर के कपड़े में अमृत लगा हो.

    परीशा ने मेरे अंडरवियर को खींच दिया और मेरे लंड को मुंह में भरकर चूसने लगी. इससे पहले मैंने परीशा को अपने लंड की पिक्स सेक्स चैट के दौरान उसके फोन में भेजी हुई थी. वो शायद मेरे लंड को देख कर शादी से पहले ही चूत में उंगली भी कर चुकी थी. इसलिए सारी शर्म छोड़कर वो लंड को पी रही थी.

    जैसे ही उसने मेरे लंड को मुंह में भरा तो मैं जन्नत की सैर करने लगा. मेरे हाथ मेरी नंगी दुल्हन के सिर को पकड़ कर लंड पर दबाने लगे. वो भी जैसे रंडियों से दीक्षा लेकर आई थी. 6.5 इंच का लौड़ा गले तक उतार रही थी.

    पांच मिनट तक लंड चुसवाने का मजा लेकर मैं अपने आपे से बाहर हो गया. मैंने उसे नीचे पटका और उसकी चूत में जोर जोर से मुख चोदन करने लगा. परीशा तड़पने लगी. वो मेरे सिर को पकड़ कर अपनी चूत में दबाने लगी.

    बात दोनों के बर्दाश्त से बाहर थी. मैंने फ्रेंची निकाल फेंकी और नंगा होकर परीशा की टांगों को खींचते हुए उसे अपनी ओर खींचा. उसकी चूत पर लंड को रगड़ते हुए उसकी आंखों में देखने लगा. दोनों पर ही पहली चुदाई का नशा सवार था.

    उसने भी आंखों ही आंखों में कह दिया- मेरी चूत का उद्घाटन करने में इतनी देर न करो स्वामी.
    मैंने उसके मन की इच्छा को भांपते हुए जिस्मों के मिलन की घड़ी को करीब लाते हुए उसकी चूत में अपने चिकने लंड का सुपारा गच से घुसा दिया.

    लंड घुसने भर की देर थी कि मैं किसी इंजन के पिस्टन की तरह परीशा की चूत को ताबड़तोड़ चोदने लगा. वो भी सिसकारियां लेते हुए कामसुख में खो सी गयी.
    पहला राउंड पांच मिनट तक ही खिंच पाया. परीशा तो 4 मिनट के करीब में ही झड़ गयी थी और उसकी चूत के रस से सराबोर अब मेरे लंड के धक्के पच-पच उसकी चूत में लगने लगे.

    एक मिनट के अंदर ही आनंद के उन्माद ने मेरे वीर्य को लंड से बाहर खींच लिया और मैं अपनी पत्नी चूत में स्खलित हो गया. एक आंधी सी आकर रुक गयी. मगर ये कुछ देर की शांति थी. तूफान तो आना अभी बाकी था.

    उसके दस मिनट बाद तक मैं उसकी चूचियों को पीता रहा और लंड महाराज फिर से चढ़ाई करने के लिए तैयार हो गये. मेरी गोरी चिट्टी पत्नी के मखमली से बदन को चोदने के लिए एक बार फिर से मैंने हथियार को पैना कर लिया.

    दोबारा से चुदाई शुरू हुई जो लगभग 30 मिनट तक चली. अबकी बार परीशा नहीं झड़ी. शायद उसकी चूत दुख गयी थी. इसलिए पहली बार वाली उत्तेजना पैदा नहीं हो पायी थी. मगर लंड को चैन कहां था.

    आधे घंटे का विराम देकर मैंने फिर से उसकी चूचियों को छेड़ना शुरू कर दिया. उसकी चूत में उंगली करने लगा और अगले तीन-चार मिनट में उसकी चूत को उंगलियों से ही स्खलित कर दिया.

    अब मैं फिर से अधूरा रह गया था लेकिन परीशा की चूत को भी गर्म करना जरूरी था. फिर मुझे उसके नंगे जिस्म पर लेटे हुए नींद आ गयी. और रात के 3 बजे के करीब फिर से लंड तना हुआ मिला.

    मैंने नींद में ही उसकी चूत में लंड को डाल दिया. अब तक ऊर्जा भी इकट्ठा हो गयी थी और परीशा की चूत को भी आराम मिल चुका था. एक घंटे की चुदाई में मैंने उसको दो बार स्खलित किया. अब मेरे लंड में भी दर्द होने लगा था.

    दोनों ही फिर से थक कर सो गये. चार बजे के सोये हुए मेरी नींद सुबह के आठ बजे परीशा ने ही खोली.
    वो कह रही थी कि उसकी चूत में बहुत तेज दर्द हो रहा है. उसको पेशाब करने में भी दिक्कत हो रही थी.

    पत्नी थी इसलिए उसका खयाल रखना भी पहली प्राथमिकता थी. मैंने उसे दिलासा दिया और करीब 11 बजे डॉक्टर दिव्या की क्लीनिक ले गया. दिव्या लगभग 40 साल की महिला रही होगी. क्षेत्र की प्रतिष्ठित डॉक्टर. उन्होंने मेरी नयी नवेली दुल्हन परीशा की जांच की.

    जांच करने के बाद पत्नी को उसने खाने व लगाने की दवा दी तथा ठीक होने तक चुदाई न करने की सलाह दी. चलते समय डॉक्टर दिव्या ने मुझसे कहा कि दो बजे अकेले आकर मिलिये.
    मैंने संकोचवश एक ओर जाकर पूछा- कुछ बड़ी समस्या है क्या?
    लेडी डॉक्टर ने कहा- चिन्ता की कोई बात नहीं लेकिन आप दो बजे आइये. तब तसल्ली से बात करते हैं. अभी इनको (पत्नी को) आराम की जरूरत है.

    घबरा कर मैं परेशान सा हो गया कि आखिर ऐसी क्या बात है जो डॉक्टर मुझे अकेले में बताना चाहती है. कहीं जोश जोश में मैंने कुछ कांड तो नहीं कर दिया अपनी कमसिन सी बीवी के साथ? मन में सौ तरह के सवाल थे लेकिन मैंने परीशा से कुछ भी नहीं कहा.

    दो बजे क्लीनिक पहुंचा तो डॉक्टर एक मरीज को देख रही थीं. मरीज के जाने के बाद डॉक्टर ने अपने स्टाफ को छुट्टी दे दी और मुझसे मुखातिब हुईं.
    वो बोली- आपकी शादी कब हुई?
    मैंने कहा- परसों हुई थी.
    दिव्या जी ने पूछा- इससे पहले आपने किसी के साथ सेक्स किया है?
    संकोचवश मैंने कहा- कभी नहीं किया मैम.

    दिव्या जी बोलीं- मिस्टर, मैं दस साल से प्रैक्टिस कर रही हूँ और बीस साल से चुदवा रही हूँ. मेरे सामने ऐसा कोई केस नहीं आया. आप अन्दर चलिये, आपका चेकअप करना होगा.

    एक बार तो मैं सकपका गया कि इसको मेरे चेकअप की क्या पड़ी है. फिर सोचा कि वो डॉक्टर है, हो सकता है कुछ जांच परख करना चाह रही हो.

    मैं उठा और अन्दर की ओर चल दिया. इस बीच डॉक्टर साहिबा ने क्लीनिक का मेन डोर लॉक कर दिया और अन्दर आ गईं. मैं अन्दर मासूम सा मुंह बनाकर खड़ा था जैसे स्कूल में उपद्रव करने के बाद बच्चे को प्रिंसीपल के सामने खड़ा कर दिया जाता है.

    वो बोली- ऐसे चेकअप होगा क्या आपका? पैंट खोलिये.
    जैसे उसने पैंट खोलने की बात कही तो लंड में गुदगुदी सी मची. लेकिन सेक्स जैसी कोई भावना नहीं थी. मैं तो इसे जांच का हिस्सा समझ रहा था.
    मैंने कहा- ओह्ह … सॉरी मैम, अभी निकाल देता हूं.

    डॉक्टर साहिबा के कहने पर मैंने अपनी पैन्ट खोल दी. अब नीचे से अंडरवियर के अंदर में मेरा लंड लटका हुआ था.
    वो बोली- ये भी उतारिये.
    उसके कहने पर मैंने सकुचाते हुए अपना अण्डरवियर भी उतार दिया.

    घबराहट भी हो रही थी और शर्म भी आ रही थी. डॉक्टर साहिबा ने लंड को लटकता देख कर एक बोतल में से कोई जेल अपने हाथ में लिया और मेरे लण्ड पर मलने लगीं.
    जैसे ही उसका हाथ मेरे गर्म से सोये हुए लंड पर लगा तो लंड में करंट सा दौड़ गया. हवस को उफनते हुए देर न लगी और लौड़ा उसके हाथ में भरता हुआ आ गया.

    वो लंड खड़ा होने के बाद भी लंड पर जेल रगड़ रही थी. उसके चेहरे पर वासना टपकने लगी थी. मैं भी मजा लेने लगा था. लंड तनकर एकदम सख्त लोहे की रॉड की तरह हो गया. मगर वो अभी भी लंड को मसले जा रही थी.

    मुझे समझते देर न लगी कि ये कोई चेकअप नहीं कर रही बल्कि ये तो चूत चुदवाने के चक्कर में है. मैं डॉक्टर साहिबा के जिस्म का मुआयना करने लगा. लगभग 40 साल की उम्र, गोरा चिट्टा भरा बदन, बड़ी बड़ी चूचियां और भारी भरकम चूतड़.

    भले ही वो बीस साल से चूत चुदवाने की बात कह चुकी थीं लेकिन थीं तो वो अविवाहित. यानि कि तकनीकी रूप से मुझे एक कुंवारी महिला को चोदने का मौका मिलने वाला था.

    मेरे लंड को हाथ में भरकर वो उसको दबाने लगी थी. फिर उसने मेरी ओर देखा और एकदम से मेरे लंड को मुंह में लेकर चूसने लगी. मैं तो पहले ही चुदाई के कयास लगाये बैठा था इसलिए लंड चुसवाने का मजा लेने लगा. मुझे हैरान नहीं हो रही थी कि क्योंकि उसकी हरकत ही चुदक्कड़ औरत वाली थी.

    लेडी डॉक्टर मेरे लंड को मुंह में लेकर जोर जोर से चूसने लगी. मेरे मुंह से सिसकारियां निकलने लगीं. उसकी चूचियों की घाटी मुझे नीचे हिलती हुई दिखाई दे रही थी जो मेरी उत्तेजना को और ज्यादा तीव्र कर रही थी.

    उसकी साड़ी का पल्लू कंधे से नीचे सरक गया था और ब्लाउज में उसकी मोटी मोटी चूचियां भरी हुई अलग से दिखाई दे रही थीं. मैंने उसके सिर को पकड़ लिया और उसके मुंह को चोदने लगा. अब मेरे धक्के उसके मुंह में लग रहे थे.

    वो भी पक्की रंडी थी. पूरा लंड गले तक ले रही थी. मेरे लौड़े की नसें फटने को हो गयी थीं. उसने माहौल ही ऐसा पैदा कर दिया था कि उसकी चूत को फाड़ देने का मन कर रहा था.

    तभी डॉक्टर साहिबा ने अपनी साड़ी, पेटीकोट को उतार कर एक तरफ फेंका और केवल पैंटी और ब्लाउज में मेरे सामने खड़ी हो गयी. मैं उसकी चूचियों पर टूट पड़ा उसके उरोजों को उसके ब्लाउज के ऊपर से दबाते हुए मसलने लगा. वो सिसकारने लगी और मेरा लंड उसकी जांघों से टकराने लगा.

    मैंने फिर उसकी पैंटी भी उतार दी और उसकी चूत को चाटने लगा. वो मेरे मुंह को अपनी चूत में दबाने लगी. जब उससे रहा न गया तो उसने मेरी शर्ट को खोला और फिर खुद जाकर बेड (जांच कक्ष के स्ट्रेचर) पर लेट गयी.

    चूत खोलकर वो चुदने के लिए तैयार थी और मेरी तोप उसकी चूत की धज्जियां उड़ाने के लिए. मैं उसकी टांगों के बीच आया तो उन्होंने अपनी टांगें फैला दीं जिससे बुर के लब अपने आप खुल गये.

    मैंने लण्ड का सुपारा बुर पर रखकर ठोका तो सुपारा टप्प से बुर के अन्दर हो गया. मैं रुका नहीं और पूरा लण्ड उनकी बुर में पेल दिया. पूरा लण्ड बुर में जाते ही डॉक्टर साहिबा ने अपने ब्लाउज़ के हुक खोलकर ब्रा ऊपर खिसका दी और अपने कबूतर आजाद कर दिये.

    चूचियां नगीं होते ही मैंने लपककर एक चूची मुंह में ले ली और चूसने लगा. डॉक्टर साहिबा बार बार अपनी बुर को अन्दर की ओर सिकोड़ रही थीं जिससे मेरा लण्ड टनटनाता जा रहा था. मैंने चूची छोड़ी और लण्ड को अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया.

    सिसकारते हुए बोली- उम्म्ह… अहह… हय… याह… इतने प्यार से चोदो, इतनी जोर से चोदो, इतनी देर तक चोदो कि मैं दुनिया भूल जाऊं.
    मैंने कहा- डॉक्टर साहिबा, अभी तीन बजे हैं, मैं अगले पांच घंटे तक फ्री हूं, आप पड़ी रहिये, मैं चोदता रहूंगा.
    वो बोलीं- मेरे पास तीन घंटे का ही समय है, छह बजे मेरा स्टाफ आ जाता है, तब तक चोद चोद कर मेरी चूत का कचूमर निकाल दो.

    मैंने उनकी दोनों टांगें उठाकर अपने कंधों पर रख लीं और राजधानी एक्सप्रेस की रफ्तार से उसकी चूत को चोदने लगा.
    लंड जाते ही चिल्ला पड़ी- बस करो, बस करो … आह्ह आराम से … चोदो.
    मैं रुक गया तो अगले ही पल फिर से सिसकार उठी- अच्छा और तेज करो … आह्ह चोदो … पूरा जोर लगाकर.

    समझ नहीं आ रहा था कि क्या कहना चाह रही थी. जाने क्या क्या बोल रहीं थी और चूतड़ उचका उचकाकर मेरा साथ दे रही थी. आधे घंटे तक उसकी चूत को पेलने के बाद मेरे स्खलन का समय नजदीक आ गया.

    उस समय मेरा लण्ड फूलकर और मोटा व टाइट होने लगा तो वो समझ गईं और बोली- अब रुकना नहीं, डिस्चार्ज होने के बाद भी नहीं.

    मैंने वैसा ही किया और डिस्चार्ज होने के बाद भी ठुकाई जारी रखी.

    फिर निढाल होकर बोली- बस करो राजा, तुमने आज जन्नत दिखा दी. आओ अब खाना खा लें, फिर दूसरा राउण्ड होगा और इस बार तुम नीचे लेटोगे और मैं तुम्हें चोदूंगी.

    चुदाई का पहला राउंड खत्म हो गया था. उसके बाद हमने कुछ देर का आराम किया और फिर से जांच कक्ष (चुदाई कक्ष) में पहुंच गये. अबकी बार मैं बेड पर लेटा और वो मेरे लंड पर अपनी चूत को चौड़ी करके बैठ गयी.

     नीचे से उसकी चूत में धक्के लगाते हुए उसको पेलना शुरू कर दिया. उसकी फुटबाल के आकार की मोटी मोटी चूचियां उछल-कूद करने लगीं. वो मेरे लंड पर कूदते हुए लंड को अंदर तक लेकर आनंदित होने लगी. दस-पंद्रह मिनट के बाद ही उसकी चूत ने पानी फेंक दिया और फच-फच की आवाज के साथ चुदाई करते हुए दो मिनट के बाद मेरा वीर्य भी उसकी चूत में निकल गया.

    दूसरा राउंड हो गया था. पंद्रह मिनट का विराम दिया और एक बार फिर से उसने मेरे लंड को चूसना शुरू कर दिया. दस मिनट लगे लंड को फिर से चुदाई लायक होने के लिए. मैंने लंड पर फिर से जेल लगाया और उस लेडी डॉक्टर को वहीं बेंच पर घोड़ी बना लिया.

    उसकी चूचियों को भींचते हुए जोर जोर से गचके लगाते हुए उसकी चूत को ठोकने लगा. वो भी साली रंडियों की तरह मेरे लंड को पूरा अंदर तक सोखने लगी. मैंने बीस मिनट तक उसकी चूत चोदी. फिर भी उसकी प्यास न बुझी तो वो मेरे सामने पीठ के बल लेटकर चूत को मसलने लगी.

    मैंने उसकी टांगों को पकड़ लिया और एक बार फिर से उसकी चूत को लंड से रगड़ना शुरू कर दिया. अबकी बार जितनी ताकत के साथ मैं धक्के लगा सकता था मैंने लगाये और उसकी चूत का कचूमर निकाल दिया.
    फिर आखिर में एक बार फिर से उसकी चूत में स्खलित होते हुए उस पर गिर पड़ा. वो भी बेसुध सी हो गयी थी.

    अब तक उसके स्टाफ के आने का समय भी हो गया था. हमने जल्दी से अपने अपने कपड़े पहने और फिर मैं वहां से निकल आया. ऐसी चुदक्कड़ लेडी डॉक्टर मुझे यूं मिल जायेगी मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था.

  • चाची की चुत और मेरी वासना

    मैंने अपनी चाची की चुत की चुदाई की. असल में चाची के उभरे चूचों को देख कर मेरा लंड खड़ा हो जाता था और मैं मौके की तलाश में था. एक बार बहाने से मैंने चाची को गर्म कर दिया और …

    मेरा नाम आर्यन है और मैं बिहार के जमुई जिले के पास में झाझा का रहने वाला हूं.

    मैं हिंदी बेस्ट सेक्स स्टोरी अन्तर्वासना की कहानियां काफी समय से पढ़ रहा हूं और मैंने इसकी कहानियां ख़ासकर चाची की चुत की चुदाई कहानी पढ़ना आज से करीब 8 या 10 साल पहले शुरू किया था. अभी मैं 28 के ऊपर का हो चुका हूं और अभी तक कुंवारा ही हूं. मगर अन्तर्वासना से मेरा नाता बहुत पुराना है.

    यह कहानी वैसे तो वास्तविक है लेकिन इस कहानी में मनोरंजन के लिए मैंने थोड़ा सा मसाला भी डाल दिया है ताकि आपको कहानी पढ़ने में मजा आये.

    यह कहानी मेरे और मेरी चाची के बीच में हुई घटना की है. इसलिए मैं अपनी चाची का नाम यहां पर नहीं बताऊंगा.

    दोस्तो, वैसे तो मैंने आज तक अपनी जिन्दगी में बहुत सी लड़कियां और भाभी चोद कर मजा लिया. मेरी गर्लफ्रेंड की चुदाई भी मैंने खूब की है. मगर चाची की चुत चुदाई की ये घटना कुछ निराली थी. इसलिए मैंने सोचा कि पाठकों के साथ अपनी चाची की चुत चुदाई का किस्सा शेयर करूं.

    मैंने रंडी की चुदाई के साथ-साथ रिश्तों में चुदाई भी खूब की है. जिसमें मेरी मौसी की चुदाई भी शामिल है. मगर इस कहानी में मैंने अपनी चाची की चुत कैसे मारी सिर्फ उस घटना का जिक्र ही किया है. तो अब आपका ज्यादा समय न लेते हुए मैं अपनी कहानी पर आता हूं. मैं उम्मीद करता हूं कि आपको मेरी चाची की चुत की कहानी पढ़ते हुए मजा आयेगा.

    कहानी तब की है जब मैंने अपनी कॉलेज की पढ़ाई शुरू की थी. उस वक्त मेरी पढ़ाई पूरी करने के लिए मैं पहली बार घर से बाहर गया था. कॉलेज के समय में मेरा लंड भी बहुत परेशान करने लगा था. मैंने कॉलेज में जाते ही गर्लफ्रेंड बना ली थी. कुछ ही दिन के बाद उसकी चुत को चोद दिया. मगर चुत की प्यास और बढ़ गई थी.

    जब मेरे कॉलेज का पहला साल खत्म हुआ तो मैं घर वापस आ गया था. एक महीने की छुट्टी थी. घर आये हुए मुझे एक सप्ताह ही हुआ था कि मेरे लंड ने मुझे फिर से परेशान करना शुरू कर दिया. कई दिनों तक मैं अन्तर्वासना सेक्स स्टोरी साइट पर सेक्सी कहानियां पढ़ कर लंड को हिलाता रहा लेकिन मुझे चुत चाहिए थी.

    एक दिन मेरी चाची मेरे घर पर आयी. मैंने एक रात पहले ही चाची की चुत की चुदाई की कहानी पढ़ी थी. कहानी को पढ़कर मेरी नजर चाची के चूचों पर गई तो मेरा लंड खड़ा हो गया. उस दिन मैंने चाची के चूचों के बारे में सोच कर मुठ मारी. फिर मैंने सोचा कि क्यों न चाची की चुत चुदाई का मजा ले लूं.

    मैंने चाची की चुदाई करने का प्लान सोचना शुरू कर दिया लेकिन मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि मैं यह कैसे कर पाऊंगा. एक दिन की बात है कि मेरे घर पर कोई भी नहीं था. पापा काम से बाहर गये हुए थे और मां किसी रिश्तेदार के यहां पर गई हुई थी. उस दिन चाची घर आई और मेरी मां के बारे में पूछने लगी.

    चाची कई बार मेरी मां के पास आ जाती थी और दिन भर बैठ कर बातें करती रहती थी. मैं भी चुपके से चाची के उभारों को देख कर मजा लिया करता था. उस दिन भी मैंने सोचा कि चाची मेरी मां के पास आई है. मैंने मां के बारे में बताया तो चाची ने कहा कि ठीक है मैं फिर बाद में आऊंगी.

    मैं बोला- चाची कुछ काम है तो मुझे बता दो.
    चाची बोली- नहीं कुछ खास नहीं, मेरे सिर में दर्द हो रहा था. मैं तो तुम्हारी मां के पास बाम लेने के लिए आई थी. मेरे घर में मुझे बाम नहीं मिल रही थी.
    मैं बोला- कोई बात नहीं चाची, मैं आपको बाम ढूंढ कर दे देता हूं.

    मैं चाची के सामने ही बाम ढूंढने लगा और मुझे मिल गई.

    चाची को बाम थमाते हुए मैंने चाची के ब्लाउज की तरफ देखा तो मुझे चाची के क्लिवेज दिख गये. मेरे मन में वासना जाग गई.
    मैंने कहा- चाची अगर ज्यादा दर्द हो रहा है तो मैं आपके सिर में बाम लगा देता हूं.
    वो बोली- नहीं, मैं खुद से लगा लूंगी.
    मैंने कहा- अरे चाची, दूसरे के हाथ से मालिश करवाने में ज्यादा आराम मिलता है.

    फिर मेरे जोर देने पर चाची मान गई. मैंने चाची को अन्दर वाले कमरे में चलने के लिए कह दिया. चाची मेरे सामने बेड पर जाकर लेट गई और मैंने चाची के सिर बाम लगाना शुरू कर दिया. अब चाची के उठे हुए चूचे मुझे और अच्छी तरह नजर आ रहे थे.

    ब्लाउज में मेरी चाची के चूचे ऐेसे तने हुए थे जैसे कोई मिसाइल हो. चाची के उभारों को देख कर मेरे लंड में तनाव आ चुका था. मैं बेड के किनारे पर खड़ा होकर चाची के सिर में बाम की मालिश कर रहा था. मेरा तना हुआ लंड मेरी लोअर में मुझे परेशान करने लगा था.

    मालिश करने के बहाने धीरे धीरे मैं चाची के कंधे पर अपने तने हुए लंड को टच कर देता था. जब मेरा लंड चाची के कंधे से टच होता था उसमें और उत्तेजना आ जाती थी और चाची के कंधे पर झटका लगता था. मेरी वासना बढ़ती जा रही थी.

    सामने चाची के चूचों की दरार मुझे दिख रही थी और दूसरी तरफ चाची के कंधे पर लंड के छूने से मेरा बुरा हाल हो रहा था.
    मैं बोला- चाची कई बार सिर में दर्द पीछे गर्दन की वजह से भी हो जाता है.
    वो बोली- ठीक है तो फिर थोडी़ मालिश गर्दन की भी कर दो.

    मेरे कहने पर चाची पलट गई. चाची के पलटते ही उसकी भारी सी गांड मुझे साड़ी के अंदर ही उठी हुई दिखाई देने लगी. अब चाची की नजर मेरी लोअर पर थी. मेरी लोअर में तना हुआ लंड चाची को दिख गया. मगर चाची ने कुछ नहीं बोला.

    मैं भी देख रहा था कि चाची मेरे तने हुए लंड को देख रही थी. इस वजह से मेरे लंड में और ज्यादा उत्तेजना हो रही थी. मैं जान बूझ कर लंड में झटके दे रहा था ताकि चाची मेरे लंड को देख कर उत्तेजित हो सके. कई बार मैंने चाची की नजर के सामने ही अपने लंड को झटका दिया.

    अब चाची की नजर मेरे लंड पर गड़ गई थी. वो बार-बार बहाने से मेरे लंड की तरफ ही देख रही थी. मैं भी अपने तने हुए लंड को चाची के होंठों के पास लेकर जाने लगा था. एक बार तो मैंने बहाने से चाची की नाक को अपने लंड से छू भी दिया.

    मुझसे बर्दाश्त करना मुश्किल हो रहा था लेकिन चाची कुछ पहल नहीं कर रही थी. फिर मैंने चाची की गर्दन पर मालिश करने के बहाने हाथ पीछे तक ले जाना शुरू कर दिया. अब चाची की पीठ पर उसकी ब्रा की पट्टियों पर मेरी उंगलियां छू रही थी. मैं जान बूझकर चाची की ब्रा को छू रहा था. मुझे बहुत मजा आ रहा था.

    कुछ देर ऐसे ही करने के बाद अब मेरी मेहनत का असर दिखने लगा था. चाची पलटते हुए बोली- अब गर्दन की मालिश बहुत हो गई. अब सिर की ही मालिश कर दे.
    चाची ने अपनी साड़ी का पल्लू अपने चूचों के ऊपर से हटा दिया था. चाची के ब्लाउज में तने हुए चूचे मुझे साफ नजर आ रहे थे.

    मैंने बाम की शीशी चाची की बाजुओं की बगल में पेट पास रख दी. इस तरह से कोण बनाया कि जिस तरफ मैं खड़ा था उसके दूसरी तरफ शीशी रखी हुई थी. अब मैं जब शीशी उठाने के लिए चाची के ऊपर झुका तो मेरा लंड चाची के सिर पर लग गया और मेरी कुहनी चाची के चूचों से छू कर जाने लगी.

    एक दो बार मैंने ऐसा ही किया. अब चाची की टांगें भी फैलने लगी थीं. शायद चाची की चुत गीली हो रही थी. मैंने मालिश करना जारी रखा.

    फिर जब चाची से रहा न गया तो उसने पीछे हाथ लाकर मेरे लंड को पकड़ लिया और उसको सहलाने लगी. चाची की आंखें बंद थीं.

    मुझे भी इसी पल का इंतजार था. मैंने तुरंत चाची के चूचों को दबाना शुरू कर दिया. अगले ही पल हम दोनों के होंठ एक दूसरे के होंठों से मिले हुए थे. मैं चाची के चूचों को दबाते हुए उसके होंठों का रस पी रहा था. चाची भी मेरा पूरा साथ दे रही थी. उसके 36 के चूचे दबाते हुए मुजे गजब का मजा आ रहा था.

    फिर चाची खुद ही उठते हुए अपने ब्लाउज को खोलने लगी. उसकी ब्रा को मैंने झट से आजाद करवा दिया. चाची ऊपर से नंगी हो गई. मैंने चाची के स्तनों को मुंह में भर कर पीना शुरू कर दिया. चाची इतनी गर्म हो गई कि मुझे अपने ऊपर लेकर लेटती चली गई.

    नीचे से मैंने चाची की साड़ी को खोल दिया और उसके पैटीकोट का नाड़ा खोल कर उसे नीचे किया तो उसकी पैंट पर हाथ जा लगा. मैंने पैंटी को हाथ से रगड़ा और चाची की गीली चुत पर हाथ लगा कर देखा तो वो उभर कर ऊपर अलग से मेरे हाथ में महसूस हो रही थी.

    अब तो हद ही हो गई थी. मैंने तुरंत चाची की चड्डी को खींच कर चाची की चुत को नंगी कर दिया और उसकी टांगों को उठा कर उसकी चुत में जीभ लगा दी. चाची तड़पते हुए मेरे मुंह को अपनी चुत में दबाने लगी. मैं चाची की चुत में जीभ डाल कर उसे चोदने लगा.

    उसके बाद चाची उठी और मेरे लोअर को निकाल दिया. उसने मेरे कच्छे को भी नीचे खींच दिया और फिर मेरे लंड को सीधा मुंह में भर कर जोर से चूसने लगी. मैं तो आनंद में डूबने लगा. चाची मेरे लंड को मुंह में लेकर तेजी के साथ चूस रही थी. दो मिनट तक चाची ने मेरे लंड को चूसा. इस बीच में मैंने टीशर्ट भी उतार दी थी. अब दोनों नंगे थे.

    मैंने चाची की टांगों को फैलाया और उसके थूक से सराबोर हो रहे लंड को उसकी चुत पर टिका दिया. मैंने जोर लगाते हुए चाची की चुत में लौड़े को घुसा दिया. चाची ने मुझे बांहों में भर लिया और अपनी चुत को चुदवाने लगी.

    दोस्तो मुझे इतना मजा आ रहा था कि मैं बता नहीं सकता. मैंने चाची की चुत चुदाई जारी रखी और पांच मिनट के बाद मेरा वीर्य निकलने को हो गया तो मैंने चाची से पूछा कि कहां निकालूं तो उसने कहा कि अन्दर मत निकालना.

    चाची के कहने पर मैंने लंड को बाहर निकाल लिया और उसके पेट पर अपने वीर्य को छोड़ दिया. हम दोनों शांत हो गये. उसके बाद चाची ने अपने कपड़े वापस से दुरुस्त किये और चली गई. मुझे मजा आ गया उस दिन.

    मेरी चाची दिखने में भले ही साधारण थी लेकिन उसके अंदर सेक्स की आग बहुत थी. उस दिन मैंने इस बात को महसूस किया. एक दिन चाचा जब घर पर नहीं थे तो चाची ने काम के बहाने से मुझे रात को घर पर बुला लिया.

    उस दिन मैंने चाची की चुत में उंगली की तो चाची बोली- मुझे तेरे लंड चाहिये, उंगली से काम नहीं चलेगा.
    उस रात को मैंने चाची की चुत की चुदाई लगभग 35 मिनट तक की. फिर तो मैं मौका मिलते ही चाची की साड़ी को ऊपर उठा कर चाची की चुत में उंगली कर देता था.

    ऐेसे ही एक बार मेरी मां मेरे मामा के यहां पर गई हुई थी. उस दिन घर पर खाना बनाने की जिम्मेदारी चाची की ही थी. हम दोनों तो बस मौके की तलाश में थे. पापा के लिए नाश्ता बनाने के बाद वो काम पर निकल गये और मैंने किचन में ही चाची को पकड़ लिया. चाची की साड़ी उठा कर वहीं पर उसकी कच्छी निकाल दी.

    किचन के स्लैब पर चाची को झुका कर चाची की चुत मारी. उस दिन मैंने चाची की चुत में ही अपना माल गिराया. दोस्तो, चुत के अंदर माल गिराने का अलग ही मजा है. चाची अब अपनी चुत में ही माल गिरवाती थी.

    उसके बाद फिर मैं पढ़ाई के लिए बैंगलोर चला गया. वहां से चार साल के बाद वापस आया. वापस आने के बाद मैंने और चाची ने आते ही चुदाई शुरू कर दी मगर चाची के बेटे ने हम दोनों को देख लिया. उसको तो हमने किसी तरह चुप करवा दिया.

    मगर सच कभी न कभी सामने आ ही जाता है. ऐसे ही एक दिन मेरी मां ने मुझे और चाची को रंगे हाथ चुदाई करते हुए पकड़ लिया तो चाची ने सारा इल्जाम मेरे सिर पर लगा दिया.

    उस दिन के बाद से मेरी और चाची की लड़ाई हो गई. फिर हम दोनों ने कभी चुदाई नहीं की. लेकिन मैंने चाची की चुत को चोद कर खूब मजे लिये. मुझे कई बार दुख होता है कि चाची ने मेरे साथ सही नहीं किया.

    आपकी राय मेरी आपबीती के बारे में क्या है मुझे जरूर बतायें.

  • शादी से पहले मेरी चूत चुदाई की कहानी

    मेरी चूत चुदाई की कहानी में पढ़ें कि मैंने कैसे पहली बार अपनी चूत और गांड चुदवाई? शादी से पहले मेरा एक बॉयफ्रेंड था कॉलेज का! मेरा सेक्स करने का बहुत मन करता था.

    मेरा नाम रश्मि है। मैं दिल्ली में रहती हूं 28 साल की औरत हूं मेरी शादी हो चुकी है।

    यह कहानी मेरी पहली चूत चुदाई की कहानी है अंतर्वासना पर जब मेरी शादी नहीं हुई थी मेरा एक बॉयफ्रेंड था कॉलेज के टाइम का मैं कैसे उसे अपनी चूत और गांड चुदवाती थी आज मैं वही आपको बताऊंगी मेरा बॉयफ्रेंड मेरी सारी ख्वाहिश पूरी करता था तो मैं भी उस पर जान छिड़कती थी।

    तब मेरी उम्र 21 साल के आसपास थी मेरा सेक्स करने का बहुत मन करता था मैं वासना से एकदम भरी हुई रहती थी उसने मुझे पटा लिया.
    मुझे खुद भी पता नहीं चला कि कब मैं उस उससे पट गई और उसकी बातों में आ गई क्योंकि वह बातें इतनी अच्छी-अच्छी करता था मेरी उससे फोन पर घंटों बात होती थी.

    एक बार उसने मुझे होटल में मिलने के लिए कहा. शुरू में मुझे बहुत डर लग रहा था तो मैंने मना कर दिया. लेकिन बाद में फिर हम उसकी ज्यादा जिद करने पर मैं मान गई और हम दोनों साथ में एक होटल में गए.

    वहां रूम में जाकर वह मेरे होठों पर चिपक गया, मुझे किस करने लगा. मैं तो गर्म होने लगी थी मेरी कामवासना धीरे धीरे जागने लगी थी.

    वो स्कर्ट के ऊपर से ही मेरी चूत पर अपना हाथ फिरा रहा था और मेरे होंठों पर किस कर रहा था. वो मेरी शर्ट के ऊपर से ही मेरे उरोज दबा रहा था.

    अब तो मुझे ऐसा लग रहा था कि मेरा यार मुझे जी भर कर चोदे. मैं हर तरह से तैयार थी उससे चुदवाने के लिए!

    फिर धीरे-धीरे उसने मेरी स्कर्ट उतार दी, मैं सिर्फ उसके सामने पेंटी में. थी मेरी नंगी जांगे उसके सामने थी वह मेरी जांघों पर किस करने लगा और पैंटी के ऊपर से ही मेरी चूत पर अपनी जीभ फिराने लगा.

    मैंने मजे में अपनी टांगें ऊपर उठा ली और उसके बालों पर हाथ फिराने लगी. मेरी उम्र ही ऐसी थी कि जब वासना जोर मारने लगती है. मैं भी कामुकता से भरी हुई थी.
    फिर मैंने खुद अपने कमीज़ उतार दी और अपनी ब्रा भी।

    मैंने उसको अपने ऊपर खींचा और उसे अपने बूब्स चूसने का इशारा किया. वह मेरे बूब्स को पागलों की तरह चूसने लगा.
    मुझे बहुत मजा आ रहा था. मेरे मुंह से कामुकता भरी आवाजें निकल रही थी. दो-तीन साल से इतनी बुरी तरह से मेरा चुदने का मन कर रहा था कि मैं ही जानती थी।

    फिर मैंने उसको बेड के दूसरी तरफ धक्का दे दिया और उसके कपड़े उतारने लगी. लेकिन मेरा मन लंड चूसने का कर रहा था इसलिए मैंने थोड़ी सी पैन्ट को नीचे उतारकर और उसके निक्कर में से उसके लंड को निकाल कर सीधा उसका लंड चूसने लगी.
    मेरे यार के मुख से सिसकारियाँ निकल रही थी ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’
    उसके आधे कपड़े निकले हुए थे, पूरे भी अभी नहीं उतरे थे।
    लेकिन मैं पूरी नंगी थी.

    मैंने अपने यार के लंड को चूस चूस कर इतना गीला कर दिया था कि उसने मुझे धक्का देकर बेड पर सीधा लिटा दिया और मेरी टांगों को हल्की सी ऊपर उठाकर मेरी चूत में अपना लंड डाल दिया.

    मैं चीखने लगी और अपने दांतों को उसकी गर्दन पर गड़ाने लगी. मुझे मजा भी आ रहा था और दर्द भी हो रहा था.

    लेकिन थोड़ी देर बाद मुझे दर्द होना बंद हो गया और पूरा मजा आने लगा।
    मैंने उसकी कमर पर अपने नाखून गड़ा दिए. वह भी मेरी कोली भरकर मुझे जमकर चोद रहा था और इसी पोज में मेरी चूत ने अपना पानी छोड़ दिया.

    मैं बहुत चिल्लाई जब मुझे मजा आया. मैंने अपने आप को उससे चिपका लिया और उसकी बांहों में सिमट कर रह गई. लेकिन वह मुझे ऐसे ही चोदता रहा.

    मेरे झड़ने के बाद मैंने उसको काफी मना किया कि अब मेरी चूत की चुदाई ना करे … लेकिन वह नहीं माना.
    मैंने अपने हाथों से उसको हटाना चाहा लेकिन वह नहीं हटा.

    तो मैं निढाल होकर बेड पर लेट गई और अपने बदन को टाइट करके उसके धक्कों का सामना करने लगी.

    10 मिनट के बाद मुझे फिर से मजा आने लगा और फिर से मैं उसका साथ देने लगी. उसने मुझे अब की बार घोड़ी बना लिया, पीछे से मेरी चूत में अपना लंड डाल दिया और मेरे बाल पकड़कर मुझे खूब चोदा.
    इस अवस्था में मुझे बहुत दर्द हुआ. मैं बहुत चिल्लाई भी लेकिन वह नहीं हटा और उसे मजा आने लगा तो उसने कहा- बेबी बताओ अपना वीर्य कहां निकालूं?
    मैंने उससे कहा- अंदर ही निकाल दो, मुझे आपके बच्चे की मां बनना है.

    और उसने ऐसे घोड़ी बने बने ही मेरी चूत में अपना सारा वीर्य छोड़ दिया. गर्म गर्म माल मेरे अंदर जाकर लग रहा था, मुझे महसूस हो रहा था उसका वीर्य, उसका पानी!

    फिर वह हट गया. मैं भी थक कर लेट गई, वीर्य मेरी चूत से निकलकर बाहर बहने लगा. हमने कपड़े से अपने अपने यौन अंगों को साफ किया और एक दूसरे से बहुत देर तक ऐसे ही नंगे चिपके रहे.

    फिर कुछ देर बाद उसका लंड फिर से खड़ा हो गया और उसने मुझे अपना लंड चूसने को कहा.

    मैंने भी अपने दोनों हाथों से उसके लंड की मालिश की थूक से! और फिर मैं उसका लंड चूसने लगी.

    वह ऊपर से मेरे सिर को दबाता तो मैं पूरा लंड उसका मुंह में ले लेती. लेकिन सांस ना आने के कारण फिर मैं जल्दी से बाहर निकाल लेती. हम दोनों इतनी गंदी तरह से सेक्स कर रहे थे क्योंकि हम दूसरे को बुरी तरह से चोदना चाहते थे.

    फिर उसने मुझे दोबारा से घोड़ी बना दिया और पीछे से मेरी गांड को चाटने लगा. उसने उंगली से मेरी गांड को धीरे-धीरे गीला कर दिया.
    मेरी गांड इतनी गीली हो गई कि बहुत ज्यादा! मैं जानती थी कि अब मेरी गांड की चुदवाने की बारी है।

    तो उसने अपनी पूरी उंगली गीली करके मेरी गांड में डाल दी. मुझे बहुत दर्द हुआ.
    मैंने चिल्ला कर कहा- नहीं बेबी, वहां नहीं!

    लेकिन वह धीरे-धीरे ऐसे ही करता रहा, कभी जीभ से चाटता, बार-बार कभी उंगली कभी चाटना!
    इस वजह से मुझे बहुत मज़ा आ रहा था.

    फिर उसने मुझे पेट के बल लेटा कर क्रीम अपने लंड पर लगा कर मेरी गांड में लंड डाल दिया. मैं बहुत चिल्लाई लेकिन उसने मेरी नहीं सुनी.

    लेकिन फिर धीरे-धीरे मुझे मजा आने लगा और मैं उसका साथ देने लगी.

    उस दिन पूरे दिन होटल में उसने मुझे बहुत चूसा मेरे कामुक बदन को … उसके दबाने काटने से मेरा सारा बदन लाल हो गया था. और मेरी चूत और मेरी गांड में उसने अपना वीर्य भर दिया था.
    हम दोनों ने खूब मजे किए फिर उस दिन … उसने मुझे बहुत चोदा. मेरी गांड में ही अपना वीर्य निकाल दिया.

    फिर एक बार मैंने उसके ऊपर राइडिंग की. मेरे बूब्स उसके मुंह में और मैंने उसके ऊपर बैठकर बहुत धक्के लगाए. वह मेरे हिप्स पर बहुत तेज मारता भी था बीच-बीच में … जिससे मुझे बहुत मजा आता था.

    उस दिन होटल में हम दोनों ने अपनी पूरी वासना निकाली; वहां पर उस दिन हम चार-पांच बार सेक्स किया और बहुत मजे किए.

    यह थी मेरी शादी से पहले की चुदाई की कहानी मेरे बॉयफ्रेंड के साथ … जिससे मैं चुदवाती थी.

    लेकिन अब तो मेरी शादी हो चुकी है और उसकी भी!
    अब वह मुझ से बात नहीं करता क्योंकि उसकी वाइफ उस पर शक करती है. और हम चाहते भी हैं कि हमारे रास्ते अलग अलग रहें.

    लेकिन मेरा फिर से मन भी करता है कि कोई ऐसा मेरी लाइफ में फिर से आए जो अच्छा हो, सच्चा हो और मेरे लिए हमेशा खड़ा रहे!

  • दोस्त की चूत फाड़ चुदाई

    मेरे बचपन की एक दोस्त मुझे काफी समय बाद मिली. तब तक मैंने किसी लड़की की चूत नहीं चोदी थी. वह इस बात पर मेरा मजाक उड़ाने लगी. तो मैंने क्या किया?

    मैं दिल्ली का रहने वाला एक सामान्य लड़का हूं. मेरी उम्र 23 साल है. मेरा शरीर भी औसत दर्जे का है. न तो मैं ज्यादा मोटा हूं और न ही पतला. मेरी बॉडी एथलेटिक है।

    मेरे पास एक अच्छा लंड है जिसे मैंने कभी नहीं मापा है. जहां तक लंड के साइज की बात है तो यह किसी भी औरत, लड़की या प्यासी चूत को संतुष्ट कर सकता है इसलिए इसके बारे में मुझे चिंता करने की आवश्यकता नहीं हुई.

    यह कहानी मेरे बचपन की दोस्त के बारे में है. उसने मुझे कभी दोस्त नहीं माना. मैं उसको अपनी अच्छी दोस्त मानता रहा लेकिन उसने फिर किसी और से शादी कर ली. समय के साथ मैं उसको भूल भी गया था.

    फिर एक दिन वह मेरे घर आई. शुरू में तो देखने पर मैं उसको पहचान भी नहीं पाया. मैंने मां से पूछा तो वो मां को सारी कहानी बता चुकी थी. उसकी बात सुनने के बाद मुझे उसके बारे में याद आई.

    उसने मुझे बाकी की कहानी सुनाई कि वह अपने पति के खिलाफ एक केस लड़ रही है और अपने पति से वह तलाक चाहती थी। मैंने उसकी पूरी बात सुनी और उसको सहजता से काम लेने की हिदायत दी. मुझसे मिलकर वो थोड़ा शांत हुई.

    एक हफ्ते बाद में मैं उसके घर गया. उससे बात करने पर पता लगा कि उसको कोई जॉब चाहिए थी. उस दिन उससे काफी देर तक बातें होती रहीं. फिर हम लोगों की फोन पर भी बातें होने लगीं.

    मुझे ऐसा लग रहा था कि उसको भी मेरे साथ बातें करना अच्छा लगता था. महीने भर तक हम दोनों फोन पर अक्सर ही बातें करते रहे. फिर ऐसे ही करते करते बात किस करने तक भी पहुंच गयी.

    उस समय तक मैं वर्जिन था. मैंने इससे पहले कभी सेक्स नहीं किया था. मुझे तो यह भी नहीं पता था कि किस कैसे करते हैं. मैंने उसको बताया कि मुझे किस करना भी नहीं आता है.

    वो बोली- इतने भी शरीफ मत बनो.
    मैंने कहा- सच में, मेरी लाइफ में आज तक कोई लड़की नहीं आई है.
    वो बोली- कोई बात नहीं, मैं तुम्हें किस करना सिखा दूंगी.

    एक महीने के बाद मेरे मां और पापा का घूमने का प्रोग्राम बना. मैंने अपनी दोस्त को छोटी सी पार्टी के लिए बुलाया. जब हमारी पार्टी खत्म हो गयी तो वो मेरा मजाक बनाने लगी.

    वो बोली- तुम तो बहुत डरपोक हो. लड़कियों से बात करना तुम्हारे बस की बात नहीं है.
    मुझे उसकी बातों पर गुस्सा आने लगा. मैंने उससे कहा- मेरी शराफत को मेरी मेरी कमजोरी न समझे.
    वो फिर भी मेरा मजाक बनाती रही.

    मेरी मर्दानगी पर बात आई तो मैंने उसको पकड़ कर किस कर दिया. वो हैरानी से मेरी ओर देखने लगी.
    फिर उसने भी मुझे गर्दन से पकड़ लिया और किस करने लगी. हम दोनों एक दूसरे के होंठों को पीने लगे.

    मेरे साथ यह सब पहली बार हो रहा था. इसलिए मैं ज्यादा आगे नहीं बढ़ना चाह रहा था. मैंने उसको किस करके छोड़ दिया. फिर उसके बाद वो कई दिन तक मुझे चिढ़ाती रही.

    उसके द्वारा किया जाने वाला ये उपहास मुझसे सहा न गया. मैंने उसको फिर से घर आने का न्यौता दिया. उस दिन भी इत्तेफाक से मैं घर पर अकेला ही था.

    कुछ देर बातें करने के बाद मैंने उसको किस करना शुरू कर दिया. वो भी शायद मुझसे चाहती थी. इसीलिए मुझे बार बार सेक्स के लिए उकसा रही थी. मैं भी अब उसकी चूत को चोद देना चाहता था.

    मैंने कई मिनट तक उसको किस किया. फिर मैंने उसके कपड़े उतारना शुरू कर दिया. उसके टॉप को उतारा और फिर उसकी पजामी को उतार दिया.

    सफेद रंग की ब्रा और पैंटी में वो काफी सेक्सी लग रही थी. मैंने उसकी ब्रा के ऊपर से उसकी चूचियों को दबा दिया. वो भी यही चाहती थी. जैसे ही मैंने उसकी चूचियां दबाईं तो वो सिसकार उठी. फिर मैंने उसकी चूचियों को जोर से दबा दिया. वो कसमसाने लगी.

    उसके बाद मैंने उसकी ब्रा को खोल दिया. मैंने पहली बार अपने सामने किसी लड़की की चूचियों को नंगी देखा था. मैंने उसकी नर्म मुलायम सी चूचियों को अपने हाथों में भर लिया. उनको प्यार से दबाकर देखने लगा.

    मेरे लंड में जोश भरने लगा. अब मुझे सेक्स चढ़ रहा था. चूंकि मेरा यह पहला सेक्स था तो मुझे ज्यादा कुछ पता नहीं था. उत्तेजना में ज्यादा कुछ सूझ भी नहीं रहा था.

    कुछ देर तक मैं उसकी चूचियों को दबाता रहा और वो मजे से अपने दूधों को मेरे हाथों में दबवाती रही. फिर उसने मेरे सिर को पकड़ कर मेरे होंठों को अपने दूधों पर रखवा दिया. मैं भी उसके दूधों को पीने लगा.

    मुझे चूचियां पीने में बहुत मजा आ रहा था. पोर्न सेक्स वीडियो में देखते हुए मुठ तो कई बार मारी थी लेकिन असल में चूचियों को पीने का मजा कुछ अलग ही होता है.

    मैं उसके निप्पलों को जोर से काटने लगा. उसकी चूचियों को चूस चूस कर मैंने एकदम से कड़क बना दिया. फिर मैंने उसको बेड पर लिटा लिया. उसकी पूरी बॉडी को किस करने लगा.

    अब मेरा मन भी कर रहा था कि वो मेरे लंड को पकड़ ले. तभी उसने खुद ही कह दिया- अपने कपड़े नहीं उतारोगे क्या?
    उसके कहते ही मैंने अपनी टीशर्ट और लोअर उतार दी. उसके सामने अंडरवियर में हो गया.

    फिर मैंने अपना अंडरवियर भी निकाल दिया और उसकी चूचियों पर टूट पड़ा. मुझे बूब्स चूसने में सबसे ज्यादा मजा आ रहा था. फिर वो मेरे होंठों को पीने लगी.

    उसने नीचे से मेरे लंड को पकड़ना चाहा. मैंने उसके हाथ में अपना लंड दे दिया. वो मेरे लंड को सहलाने लगी. उसकी मुठ मारने लगी. मुझे बहुत मजा आ रहा था.

    उसके होंठों को छोड़ कर मैं उसकी चूचियों से होते हुए उसकी नाभि पर किस करते हुए नीचे तक आ गया. फिर मैंने उसकी चूत की ओर रुख किया. उसकी पैंटी को निकाल दिया. उसकी चूत के आसपास के बाल साफ किये हुए थे.

    मैं उसकी चूत को ध्यान से देख रहा था. मैंने चूत अपनी जिन्दगी में अपनी आंखों के सामने पहली बार देखी थी. मैं उसकी चूत के इर्द गिर्द चूमने लगा और वो एकदम से सिहर गयी.

    फिर मैंने उसकी चूत पर मुंह रख दिया. मैं उसकी चूत को चाटने लगा. उसकी चूत पर मुंह लगा कर उसको चूसने लगा. उसकी चूत का रस बहुत ही मादक सा था. चूत की खुशबू पहली बार मैंने ली थी और स्वाद भी बहुत मस्त था.

    कुछ देर तक उसकी चूत को चूसने और चाटने के बाद मैंने उसकी चूत पर लंड को रख दिया. लंड को चूत पर रखने के बाद मैंने उसकी चूत में लंड को धकेला लेकिन लंड फिसल गया.

    मुझे चुदाई का तजुरबा तो था ही नहीं, साथ ही उसकी चूत भी बहुत टाइट थी. मैंने फिर से कोशिश की लेकिन फिर भी लंड नहीं गया. एक दो बार में ही मेरे लंड को सुपारा लाल हो गया. वो भी बार बार उचक रही थी.

    मैंने सोचा कि ऐसे बात नहीं बनेगी. मैंने तेल की शीशी ली और अपने लंड पर बहुत सारा तेल लगा लिया. उसकी चूत के द्वार पर भी काफी सारा तेल मल दिया.

    तेल लगाकर मैंने झटका मारा तो वो बेड पर ऊपर की ओर सरक गयी. मैंने उसको पकड़ लिया. फिर से नीचे लाकर उसकी चूत में फिर से लंड को घुसा दिया. वो चीखने को हुई लेकिन मैंने उसके मुंह को अपने मुंह से बंद कर दिया.

    धीरे धीरे करके मैंने लंड को उसकी चूत में उतार दिया और फिर उसके ऊपर लेट गया. कुछ देर का विराम देने के बाद मैंने फिर ऊपर नीचे होना शुरू किया. उसको भी अच्छा लगने लगा.

    पहले तो मैं धीरे धीरे करता रहा और फिर मैंने स्पीड बढ़ाने की सोची. उसकी चूत में अब मैं तेजी के साथ धक्के लगाने लगा. चुदाई में मुझे गजब का मजा मिल रहा था. उसकी चूत काफी टाइट थी. शायद उसके पति के साथ उसके सेक्स संबंध ज्यादा अच्छे नहीं थे.

    15 मिनट तक मैंने उसकी चूत को इसी पोज में चोदा. फिर मैंने उसको डॉगी स्टाइल में कर लिया. अब वो आराम से लंड को अंदर ले रही थी. मुझे भी चुदाई में पूरा आनंद मिल रहा था. उसके बाद मैंने उसकी चूत में पीछे से धक्के लगाना शुरू कर दिया.

    उसके मुंह को अपने हाथ से बंद कर लिया और तेज तेज उसकी चूत को चोदने लगा. वो गूं गूं की आवाज करने लगी मगर मुझे चुदाई का चस्का ऐसा चढ़ा कि मैंने उसकी चूत फाड़ ही डाली.

    आधे घंटे तक उसकी चूत चोदने के बाद मेरा पूरा बदन पसीने में भीग गया था और उसका हाल तो मुझसे भी बुरा था. उसके मुंह से अब तेज तेज आवाजें आ रही थीं उम्म्ह… अहह… हय… याह… जिनमें दर्द और आनंद का मिला जुला सा रूप था.

    चूंकि मेरा घर बाहरी एरिया में था इसलिए किसी को कुछ पता चलने का भी डर नहीं था. मैंने जमकर उसकी चूत चोदी. इतनी जबरदस्त चुदाई करने के बाद भी जब मैं नहीं झड़ा तो मैंने उसको सीधी कर लिया. उसकी टांगों को अपने कंधे पर रख लिया और उसकी चूत में फिर से लंड दे दिया.

    अगले दस मिनट तक फिर मैंने उसकी चूत को रगड़ा. वो बुरी तरह से थकी हुई लग रही थी. मुझे नहीं पता था कि औरत कितनी देर में झड़ती है. मगर मुझे लग रहा था कि इस दौरान वो 3-4 बार तो झड़ ही गई होगी.

    फिर मैं भी झड़ने के करीब पहुंच गया. मैंने उसकी चूत में वीर्य छोड़ दिया. उसकी चूत में वीर्य छोड़ने के बाद मैं हांफता हुआ उसके ऊपर गिर गया. वो जैसे बेसुध हो गयी थी.

    उसके बाद वो उठी और अपने कपड़े पहनने लगी. उससे सही से चला भी नहीं जा रहा था. फिर मैं उसको उसके घर तक छोड़ कर आया. इस तरह से मुझे बाद में पता चला कि मेरी टाइमिंग डेढ़ घंटे के करीब है.

    उस दिन मैंने उसकी चुदाई की ऑडियो रिकॉर्डिंग भी कर ली थी. वो रिकॉर्डिं करीब 45 मिनट की थी. अगर कोई लड़की उसको सुन ले तो उसकी चूत से पानी निकल जाये.

    पहली चुदाई के बाद उस दिन मुझे भी थकान हो रही थी तो मैं घर वापस आकर सो गया. उसके बाद मैंने अपनी बचपन की दोस्त की चूत कई बार चोदी. उसको होटल में ले जाकर भी कई बार चोदा.

    अब वो मेरे लंड से चुदने की आदी हो गयी थी. उसके साथ मैंने और क्या क्या किया वो सब मैं आप लोगों को फिर कभी बताऊंगा. फिलहाल की इस कहानी में इतना ही.

  • घर बुलाकर गर्लफ्रेंड की चुदाई

    मेरी एक गर्लफ्रेंड थी लेकिन दूसरे शहर की … हम फोन पर खूब बातें करते. हमारा मिलने का मन था लेकिन हम मिल नहीं पा रहे थे. जब हम मिले तो …

    हैलो फ्रेंड्स, कैसे हैं आप लोग. मेरा नाम रूबल शर्मा है और मैं बांदा उत्तर प्रदेश का रहने वाला हूँ. मैं देखने में साधारण ही हूँ. औसत बॉडी है.

    अन्तर्वासना पर ये मेरी पहली सेक्स स्टोरी है गर्लफ्रेंड की चुदाई की. चूंकि पहली बार है इसलिए ग़लती हो जाना पक्का है. प्लीज़ नजरअंदाज कर दीजिएगा.

    ये कहानी आज से 2 साल पहले की है, जब मैं अपना ग्रॅजुयेशन कर रहा था. उन दिनों मेरी एक गर्लफ्रेंड थी, जिसका नाम नम्रता था. वो ग्वालियर से थी, देखने में थोड़ी सी सांवली थी, लेकिन थी सेक्सी.

    हम लोग फोन बार खूब बात किया करते थे. उसका मुझसे मिलने का बड़ा मन था और मुझे तो था ही. लेकिन हम दोनों के मिलने का कुछ नहीं हो पा रहा था.

    एक बार मेरे घर में शादी थी, तो सब लोगों को दिल्ली जाना था. मेरा मन नहीं था. तो मैं घर में ही रुक गया.

    उस दिन जब मेरी उससे बात हुई और मैंने उससे अपने यहां आने का कहा. पहले तो वो थोड़ा डर गयी, लेकिन फिर मेरे कहने पर मान गयी.
    उसने अपने घर में कह दिया कि कॉलेज का ट्रिप है, तो बाहर जाना है.

    मैंने उसका रात वाली गाड़ी से रिज़र्वेशन भी करा दिया. रात को गाड़ी आई, तो उसे लेने मैं स्टेशन आ गया. वहाँ से उसको लिया और अपने घर ले आया. रास्ते में वो मुझसे चिपक कर बैठी थी.

    घर ले आने के बाद मैं उसे अपने कमरे में ले गया और उसे बिठा दिया. उसका गला सूख रहा था, तो उसने मुझसे पानी मांगा. मैंने उसे पानी पीने को दिया.

    वो अभी भी डर रही थी. मैं उसके बाजू में ही बैठा था. हम दोनों इधर उधर की बातें ही कर रहे थे. थोड़ी देर बाद वो नॉर्मल हुई, तो मैंने उससे बात करते करते उसके बाल खोल दिए.

    वो शर्मा गयी और उसने मेरे कंधे पर अपना सिर रख लिया. मैंने उसके सर को उठाया और किस करने लगा. उसने आँखें बंद कर लीं.

    थोड़ी देर किस करने के बाद मैंने उसे बेड पर लिटा दिया और उसके ऊपर आकर उसे किस करने लगा. उसने भी मुझे अपने से चिपका लिया.

    मैंने उसे हाथ ऊपर करने वो कहा, तो उसने हाथ ऊपर कर लिए. मैंने उसकी कुरती उतार दी. अन्दर उसने एक छोटी सी गुलाबी रंग की ब्रा पहनी हुई थी.

    मैंने एक पल उसकी ब्रा में कैद उसकी चुचियों को निहारा और अगले ही पल उसकी पूरी बॉडी पर किस करने लगा. मेरे ताबड़तोड़ चूमने से उसकी सांसें तेज हो गईं और वो भी बहकने लगी.

    जब मैंने उसकी नाभि में जीभ घुमाई, तो वो तड़प उठी और उसने मेरा सिर दबा लिया. मैं धीरे धीरे किस करता हुआ नीचे आया और उसकी सलवार भी उतार दी. मेरे सामने वो ब्रा पेंटी में थी और शर्मा रही थी. उसकी पेंटी गीली हो गयी थी.

    मैंने झुक कर चुत को भी चूम लिया. चुत पर मेरे होंठों की छुअने पाते ही उसके मुख से एक सिसकारी निकल गयी.

    अब मैं खड़ा हुआ और मैंने अपनी चड्डी छोड़ कर सारे कपड़े उतार दिए. मैंने उसको भी खड़ा कर दिया. उसके पैर काँप रहे थे, तो मैंने उसे सहारा दिया और उसे चूमते हुए दीवार से चिपका दिया और उसकी पीठ पर किस करने लगा.

    वो ‘आहह आहह’ करते हुए आहें भर रही थी.

    इसी बीच मैंने उसकी ब्रा और अपनी चड्डी को उतार दिया. वो अभी भी दीवार से लगी हुई थी, तो मैं भी पीछे से जाकर उससे चिपक कर उसकी गर्दन और कंधे पर किस करने लगा. मेरा लंड उसकी गांड में गड़ने लगा. वो लंड का स्पर्श पाकर एकदम से चिहुंक गई.

    मैंने उसको सीधा किया, तो उसने अपनी आँखें बंद की हुई थीं. मैंने उसका हाथ अपने लिंग पर रखते हुए कहा- ये ले तेरी अमानत.
    लंड छूते ही वो शर्मा गयी और उसने झट से हाथ हटा लिया.

    अब मैं उसके मम्मों को चूसने लगा और वो ‘आह आआअहह आआ…’ करते हुए सिसकारियां लेने लगी.

    एक बार मैंने उसके निप्पल को काट लिया, तो वो ‘आउच …’ बोल कर बोली- आराम से चूसो … ये अब सिर्फ़ तुम्हारे ही हैं.

    फिर मैंने अपना हाथ उसकी पेंटी में डाल दिया और उसकी चूत सहलाने लगा उसकी चूत पर थोड़े से बाल थे.

    मैंने उसकी टाँगें खोल दीं और पेंटी उतारने लगा.
    उसने मेरा हाथ पकड़ लिया.
    मैंने पूछा- क्या हुआ जानू … अब कैसी शर्म? अब तो सब कुछ मेरा है ना!

    उसने हंस कर हाथ हटा दिया. मैंने उसकी पेंटी उतारी, तो उसकी चूत पूरी गीली हो गयी थी. मैंने चुत पर हाथ लगाया तो वो ‘उई … माँ … सीईईई..’ कर उठी.

    मैं नीचे बैठ कर उसकी चूत चाटने लगा. वो तड़प उठी और ‘उफफफ्फ़ आआहह … सीईईईई.’ करने लगी. उसने अपने हाथों से मेरे सिर को अपनी चूत पर दबा लिया. मैं बेतहाशा उसकी चूत चाटे जा रहा था.

    वो लगातार ‘उम्म्म्म … अहहहह … आराम से.’ बोलते हुए सिसकारती जा रही थी. मैंने कुछ पल बाद उसका एक पैर अपने कंधे पर रखा और उसकी चूत पूरी अन्दर तक और पूरी पीछे तक चाटने लगा. मेरे मुँह में उसकी झांटों के बाल आ रहे थे, लेकिन चुत चाटने में मज़ा भी बहुत आ रहा था.

    कोई पांच मिनट तक चुत चाटने के बाद मैं उसको बेड पर ले आया और लिटा दिया. मैंने उसकी टाँगें खोल दीं और मैं उसकी चूत में उंगली डालने लगा, तो उसे तकलीफ़ होने लगी. उसकी चूत बहुत टाइट थी.

    मैंने पास रखी वैसलीन लगाई और फिर कोशिश करने लगा. इस बार मेरी आधी उंगली अन्दर चली गयी.

    वो तड़प उठी और बोली- बस करो, इतना ही रहने दो.
    मैंने कहा- जानू अभी तो आधी ही अन्दर गयी है … अभी तो मैं इसमें पूरा हाथ भर का अपना अन्दर डालूँगा.
    इस पर वो बुरी तरह से शर्मा गयी और बोली- तुम ना बहुत बदतमीज़ हो.

    उसकी इस बात से मुझे हंसी आ गयी और मैंने उसे किस कर लिया. मैं उसके ऊपर लेट गया और हमने एक दूसरे को कसके चिपका लिया.

    एक पल बाद मैं उठ कर चुदाई की पोजीशन में आया और मैंने उसे ऊपर से नीचे तक देखा.
    वो शरमा कर बोली- ऐसे क्या देख रहे हो?
    मैंने कहा- तू बहुत खूबसूरत है.
    वो शर्मा गयी.

    उसने पूछा- क्या मैं कपड़ों में खूबसूरत नहीं लगती हूँ?
    मैं हंस दिया और अपनी बात को पलटते हुए बोला- यदि तुम कपड़ों में खूबसूरत नहीं दिखतीं तो हम दोनों में प्यार कैसे हो सकता था.
    वो हंसी और बोली- तो अभी ये बात कहने का क्या मतलब है?
    मैंने उसकी चूची मसली और कहा कि मेरा मतलब ये था कि तुम पूरी नंगी होने पर और भी खूबसूरत लग रही हो.

    उसने समर्पण की मुद्रा में अपने दोनों हाथ फैला कर मुझे आगे बढ़ने का इशारा किया.

    मैंने धीरे धीरे उसकी टाँगें खोलीं और अपना लंड उसकी चूत के मुहाने पर रख कर घिसने लगा. उसकी चूत पानी छोड़ रही थी.
    उसने आँखें खोलीं और कहा- जानू आराम से करना … मेरा पहली बार है.
    मैंने कहा- चिंता मत करो बिल्कुल तकलीफ़ नहीं होगी.

    मैंने धीरे धीरे लंड घिसते हुए एक झटका मारा और मेरा लंड उसकी चूत में घुस गया.

    उसी पल वो चिल्ला दी- उई … माँ … मर गई … आआहह … फट गई … मैं मर गयी.

    मैं उसके ऊपर झुक गया और उसे किस करने लगा. उसके मम्मों को चूसने लगा. वो शांत हुई ही थी कि मैंने थोड़ा रुक कर एक और झटका दे मारा. इस बार मेरा पूरा लंड उसकी चूत में समा गया.

    उसकी चूत में से खून निकल रहा था और आँखों में से आँसू बह रहे थे. मैंने उसे सहलाते हुए कहा- बस हो गया जानू …
    अब मैं धीरे धीरे शॉट्स मारने लगा. थोड़ी देर में उसको मज़ा आने लगा और वो भी गांड उठा उठा कर मेरा साथ देने लगी.
    मैं दनादन धक्के मार रहा था और वो ‘आआह … अहह … मजा आ रहा है … और तेज करो …’ बोल रही थी.

    कोई बीस मिनट बाद हम दोनों ही झड़ गए. मैं उसके ऊपर गिर गया. उसने मुझे कसके चिपका लिया और ऐसे ही किस करते हुए हम एक दूसरे की बांहों में सो गए.

    उस रात हम दोनों ने चार बार सेक्स किया और सुबह देर तक सोने के बाद हम दोनों साथ ही नहाये और बाथरूम में भी एक बार सेक्स किया. फिर मैं उसे मोहल्ले वालों की नजर से बचाते हुए स्टेशन छोड़ कर आ गया.

    दोस्तो, ये थी मेरी गर्लफ्रेंड की सील तोड़ चुदाई … आपको मेरी ये गंदी कहानी कैसी लगी 

  • ससुर जी का घोड़े जेसा लंड

    दोस्तो मेरी उमर 26 साल की है मेरी शादी हो चुकी है मेरे पति एक मार्केटिंग कंपनी मे जॉब करते है इस लिए वो ज़्यादातर घर से बाहर ही रहते है. अभी मेरी शादी को सिर्फ़ 3 साल हुए है और ये कहानी दोस्तो आज से करीब 2 साल पहले की है. मेरे घर मे मेरे सास ससुर और मेरी एक 18 साल की ननद रहती है. बेस्ट इंडियन सेक्स स्टोरीस
    मेरी शादी को 3 साल हो चुके है और अभीतक मैं 25-30 बार ही सेक्स किया है क्योकि मेरे हज़्बेंड के पास इतना टाइम नही होता. इसलिए मैं और मेरी चूत चुदाई के लिए तड़पति रहती है. एक दिन की बात है मैं अपने रूम मे बैठकर .वी पर कुछ देख रही थी तभी मुझे प्यास लगी और मैं किचन मे से पानी पीने के लिए जाने लगी. जब मैं किचन मे जा रही थी तभी मुझे अपने ननंद के रूम मे से कुछ आवाज़े सुनी, मैने उसके रूम की विंडो मे से चुपके से देखा तो मैं पूरी तरह से हैरान रह गई.
    मैने देखा की मेरी ननंद नंगी नीचे ज़मीन पर पूरी नंगी लेटी हुई है और हमारा कुत्ता उसकी चूत को चाट रहा है और वो कुत्ते के लंड को अपने हाथ मे लेकर ज़ोर ज़ोर से उपर नीचे कर रही है और कुछ ही देर बाद वो कुत्ते के सामने कुत्ति बन गई और कुत्ता उसके उपर पीछे से चढ़ गया और ज़ोर ज़ोर से उसे चोदने लग गया. मुझसे ये सब देखा ना गया इसलिए मैं वाहा से हट गई.
    करीब 15 मिनिट बाद मेरी ननंद के रूम मे से कुत्ता बाहर आया और उसके पीछे से मेरी ननंद भी आ गई. मैने उसे सॉफ सॉफ बता दिया की मैने उसे ये सब करते हुए देख लिया है. वो मेरे सामने रोने लग गई पर मैने उसे समझाते हुए कहा तुम कोई अपना बॉयफ्रेंड बना लो ऐसे जानवर से ऐसे काम करवाना ठीक नही है.
    तब मेरी ननंद ने कहा – भाभी मैं बॉयफ्रेंड तो बना लून पर आदमी का तो कुत्ते से भी ज़्यादा बड़ा होता है इसलिए मुझे डर लगता है.
    मैं – नही इतना भी बड़ा नही होता जितना तुम समझ रही हो.
    मेरी ननद – नही भाभी मैने देखा है इस लिए मैं कह रही हूँ.
    मैं – अछा किस का देख लिया है तूने, कही हॉर्स का तो नही देख लिया.
    मेरी ननंद – नही भाभी मैने डॅड का देखा है उनका लंड तो हॉर्स से बड़ा है कसम से इतना लंबा और मोटा लंड तो मैने आज तक नही देखा.
    ननंद के मूह से ऐसी बातें सुनकर मेरी चूत मे खुज़ली होनी शुरू हो गई. मुझे तो पता ही नही था की मेरे घर मे जबरदस्त चुदाई का समान है. अब मुझे किसी भी हालत मे ससुर जी का लंड देखना था बस मुझे एक आछे से मोके की तलाश थी.
    और मुझे जल्दी ही एक . मिल गया. उस दिन मेरे सारे घरवाले किसी शादी मे 2 दिन के लिए चले गये. घर मे मैं और मेरे ससुर थे. जब रात हुई तो मैने ससुर जी के दूध मे नींद की मेडिसिन घोल कर दे दी. दूध पीते ही उन्हे नींद आनी शुरू हो गई. पर फिर भी मैं करीब 30 मिनिट बाद ही उनके रूम मे गई. बेस्ट इंडियन सेक्स स्टोरीस
    मैने अंदर जाते ही ससुर जी को बहोत हिलाया जब वो नही उठे तो मैं समझ गई अब रास्ता सॉफ है, मैं जल्दी से उनकी धोती साइड मे करी और अंडरवेर का नाडा खोल कर उनका लंड बाहर निकाल लिया. उनका लंड देख कर तो मेरी आँखों मे एक अलग सी चमक आ गई. मेरी ननंद सच मे सच कह रही थी, मेरे ससुर का लंड सच मे काफ़ी बड़ा और मोटा था वो कमाल की बात तो ये थी की अभी लंड बैठा हुआ था तो भी वो कितना ख़तरनाक लग रहा था.
    मैने अपने दोनो हाथो से लंड को पकड़ कर उपर नीचे करने लग गई और पता नही कब खुद ही मेरे होंठ लंड के पास आ गये और उसे चूमने लग गये. अब मैं लंड को अपने मूह मे लेकर चूसने लग गई और नीचे से उपर तक लंड को अपनी ज़ुबान से चाटने लग गई. तभी अचानक लंड मे एक करेंट सा लगा और लंड खड़ा होना शुरू हो गया. देखते ही देखते लॅंड 5 इंच से 14 इंच का हो गया
    मेरी आँखें खुली की खुली रह गई और मेरी खुशी का कोई ठिकाना नही था. सच मे लंड काफ़ी शानदार लग रहा था. अब तो मेरी ज़ुबान लंड को चाटने मे लगी हुई थी. लंड को देखकर अब मेरी चूत मे खुज़ली होनी शुरू हो गई थी. मैं उठी और अपनी सारी और पेटिकोट उतार सीधा लंड के उपर आ गई और लंड को अपने हाथ मे पकड़ अपनी चूत पर रगड़ने लग गई. मुझे बहोत मज़ा आ रहा था. मैं इतने बड़े लंड को चूत मे कैसे लूँगी इसके बारे मे सोच रही थी और लंड को अपनी चूत पर लगा कर नाप रही थी. मैने देखा की लंड अगर चूत मे जाता है तो वो मेरे पेट तक आता है.
    मुझे अब डर सा लगने लग गया इस लिए अब मैने जाने का फ़ैसला किया. मैं जैसे ही लंड के उपर से उठने लगी तभी मेरी कमर को किसी ने ज़ोर से पकड़ लिया. मैं एकदम बहोत डर गई, मैने देखा तो ससुर जी जाग चुके थे और उन्होने ही मुझे पकड़ा हुआ था.
    ससुर – बहू अब लंड को नाप तो लिया है तुमने अब . अपनी चूत मे भी ले लो ना तुम्हे बहोत मज़ा आएगा.
    मैं उन्हे अपने को छुड़वाने की कोशिश करी पर उन्होने एक दम मुझे बेड पर दे मारा और मेरे उपर आ कर बहोत बुरी तरह मेरे बूब्स को मसलने लग गये. मेरे आँखे बंद होनी शुरू हो गई क्योकि अब मैं मदहोश सी होनी शुरू हो गई थी. तभी ससुर जी ने मेरा ब्लाउस पकड़ा और खींच कर फाड़ दिया और मेरे नंगे बूब्स को एक एक करके अपने मूह मे लेकर चूसने लग गये.
    मुझे बहोत मज़ा आने लग गया मैं पागल सी होने लगी थी क्योकि आज तक मेरे बूब्स मेरे पति ने भी नही चूसे थे. ससुर जी अब मेरी चूत मे उंगलिया कर रहे थे. मेरी चूत गीली होनी शुरू हो गई थी. मुझे सच मे बहोत मज़ा आ रहा था. तभी ससुर जी नीचे गये और मेरी चूत को अपनी ज़ुबान से चाटने लग गये. जैसे ही उनकी ज़ुबान मेरी चूत पर लगी वैसेही मेरे पूरे जिस्म मे करेंट सा दौड़ने लग गया. अब मेरे एक हाथ मे उनका लंड था जिसे मैं ज़ोर ज़ोर से उपर नीचे कर रही थी.
    अचानक ही ससुर जी ने मेरे हात से लंड ले लिया और खुद ही अपना लंड मेरी चूत के उपर रगड़ने लग गये मेरी चूत के दाने के उपर लंड पूरी स्पीड मे उपर नीचे हो रहा था. मैं पूरी तरह से पागल हो चुकी थी क्योकि आज तक ऐसा मज़ा कभी नही मिला था. करीब 2 मिनिट बाद ही मेरी चूत ने काफ़ी सारा पानी बाहर निकाल दिया.
    ससुर जी – बहू ये क्या है अभी तो मेरा लंड तेरी चूत के अंदर गया भी नही और तेरी चूत ने पहले ही जवाब दे दिया. बेस्ट इंडियन सेक्स स्टोरीस
    उनके मूह से ऐसी बातें सुनकर मैं शर्मा गई और मैं धीरे से बोली – ससुर जी अब प्लीज़ आप मेरी चूत को आछे से चोद दे मुझे बहोत परेशान करती है.
    ये सुनते ही ससुर जी ने मेरे होंठो को चूसा और नीचे जाकर मेरी चूत को फिरसे चाटने लग गये. अब की बार वो अपनी ज़ुबान मेरी चूत के दाने पर घुमा रहे थे जिससे मेरे मूह से अब आहह आहह की मस्ती से भरी आवाज़े निकल रही थी.
    ससुर जी अब अपनी दो उंगलिया मेरी चूत मे उतार दी और ज़ोर ज़ोर से उपर नीचे कर रहे थे और साथ मे ही उपर से मेरी चूत के दाने को चाट रहे थे. एक साथ दो हमले मेरी चूत सहन ना कर पाई और करीब एक मिनिट मे ही मेरी चूत ने फिर अपना सारा पानी निकल दिया.
    मैं – ससुर जी अब क्यो आप मुझे तड़पा रहे हो प्लीज़ जल्दी से अब आप अपना लंड मेरी चूत मे डालो और मेरी प्यास को भुजा दो प्लीज़.
    मैने उनके लंड को हाथ मे पकड़ा तो मैने देखा की ये तो इतना मोटा है की ये मेरे हाथ मे नही आ रहा है ये तो मेरी चूत के चितड़े चितड़े कर देगा. मेरे चेहरे पर इस परेशानी के भाव देख कर ससुर जी बोले – मेरी बहू तू फिकर ना कर आज इस लंड को अपनी चूत मे ले फिर, आज के बाद तू किसी दूसरे के लंड को देखेंगी भी नही.
    मैं – पर ससुर जी आज आप मेरी चूत की आछे से चुदाइ करना ये साली मुझे बहोत तंग करती है.
    ये सुनते ही ससुर जीने मेरी तरफ देखकर हल्की सी स्माइल करी और अपना लंड मेरे मूह के पास कर दिया. मैं समझ गई की अब ये क्या चाहते है मैने झट से अपना मूह खोल दिया और ज़ोर ज़ोर से लंड को आछे से चूसने लगी.
    ससुर जी तभी मेरा सिर पकड़ लिया और ज़ोर ज़ोर से मेरे को अपने लंड से चोदने लग गये. अब उनका लंड मेरे गले के अंदर जा रहा था जिससे मुझे सांस लेने मे बहोत दिक्कत आ रही थी पर वो रुके नही और करीब 5 मिनिट तक मेरे मूह ऐसे ही बे- रहमी से चोदते रहे.
    अब उन्होने अपना लंड मेरे मूह से निकाला और मेरी चूत पर रखकर और थोड़ासा ज़ोर लगा कर अपने लंड का आगे वाला हिस्सा पहले मेरी चूत मे उतारा और बाद मे फिर एक ज़ोर से धक्का लगा कर करीब 4-5 इंच तक लंड मेरी चूत मे उतार दिया. बेस्ट इंडियन सेक्स स्टोरीस
    लंड अंदर जाते ही मेरी जान निकल गई मैं उनके नीचे एक मछली की तरह तड़प रही थी. अब ससुर जी बहोत पुराने खिलाड़ी थे और धीरे धीरे मेरी चूत मे अपना लंड अंदर बाहर करते रहे. अब उन्होने मेरी गॅंड के नीचे मे पिल्लो रखा जिससे अब मेरी चूत उपर उठ गई और अब तो ससुर जी ने अपना लंड मेरी चूत मे एक दम डाला और उपर नीचे करने लग गये. अब ससुर जी मेरे उपर आ गये और ज़ोर ज़ोर से मेरी चूत को चोदने लग गये.
    ससुर जी ने अब अपना बाहर निकाला और एक जोरदार धक्के से अपना पूरा 14 इंच का लंड एक ही बार मे मेरी चूत मे उतार दिया. अब मैने अपनी दोनो टाँगे उपर उठा ली और अपनी गॅंड उठा उठा कर अपने ससुर जी का लंड अपनी चूत मे लेने लग गई. ससुर जीने मेरी दोनो टाँगो को अपने मोढ़े पर रख लिया और ज़ोर ज़ोर से मुझे चोदने लग गये. मुझे बहोत मज़ा आ रहा था मैं अपनी दोनो आँखें बंद कर के ससुर जी के हर धक्के का मज़ा ले रही थी.
    करीब 20 मिनिट की इस घमासान चुदाई के बाद अचानक मेरा पूरा जिस्म अकड़ गया मेरी चूत ने ससुर जी के लंड पर अपने पानी की बारिश कर दी और 2 मिनिट बाद ही ससुर जी ने भी अपना सारा पानी मेरी चूत मे ही निकाल दिया. मुझे बहोत ज़ोर से पेशाब आ रहा था पर मुझसे उठा तक नही जा रहा था इस लिए ससुर जी मुझे अपनी गोद मे उठाकर बाथरूम मे ले गये और मैने उनके सामने बाथरूम किया क्योकि उन्होने मेरी चूत मे से निकलते पेशाब को देखना था.
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    मेरी चूत से निकलते गरम गरम पीले पीले पेशाब को देखकर ससुर जी फिर से गरम हो गये और अपना लंड मेरे मूह मे डाल कर फिर से मेरे मूह को चोदने लग गये. फिर ससुर जीने मुझे टाय्लेट की सीट पर बिताया और मेरी दोनो टाँगे उपर कर के मेरी चूत और गॅंड दोनो मारी. आज मेरी चूत और गॅंड दोनो आछे से फट चुकी थी और मेरी बहोत ज़्यादा बुरी हालत हो चुकी थी. बेस्ट इंडियन सेक्स स्टोरीस
    उस दिन से मैं रोज रात को अपने ससुर जी से चुदति हूँ, एक दिन मेरी ननंद ने मुझे और अपने डॅड से सेक्स करते देख लिया और फिर मैने अपने साथ उसे भी ले लिया. अब हम तीनो इस सेक्स लाइफ के पूरे मज़े लेते है.