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  • पति विदेश गया तो सर्दी की रात में देवर के साथ सैक्स का मजा

    मेरा नाम अनाया है और मैं 25 साल की हूँ।

    यह गरम भाभी की गरम कहानी तब की है, जब मेरी शादी को मात्र 4 महीने ही हुए थे।

    मेरे पति एक विदेशी कम्पनी में काम करते है इसीलिए वे शादी के कुछ दिन बाद ही अपने काम पर चले गए।

    मेरी तो नई-नई शादी हुई थी इसलिए मेरा मन अक्सर सेक्स करने का होता था।लेकिन मैं कुछ कर भी तो नहीं सकती थी।

    कहानी में आगे बढ़ने से पहले मैं आपको अपने परिवार के बारे में बता देती हूँ।

    मेरे परिवार में मेरे और मेरे पति के अलावा, मेरे सास-ससुर और एक प्यारा सा देवर रहता है।उसका नाम अंकित है, और वो सिर्फ़ 19 साल का है।दरअसल मेरे सास-ससुर को दूसरा बच्चा शादी के बहुत लेट हुआ था, इसीलिए मेरे पती और देवर की उम्र में थोड़ा ज्यादा अंतर है।

    चलिए अब कहानी को आगे बढ़ाते है।

    कई दिनों तक बिना सेक्स के रहने के बाद अब मैं अपने आप को कन्ट्रोल नहीं कर पा रही थी।मुझे अब बस एक लंड की तलाश थी।

    मेरे ससुर उम्र में बहुत बड़े थे और शरीफ़ घर से होने के कारण मैं कहीं बाहर यह सब नहीं कर सकती थी।

    अब बचा सिर्फ़ मेरा देवर।लेकिन वह उम्र में छोटा था और मुझे लगता था कि उसे इस बारे में कुछ पता भी नहीं था।क्योंकि मैंने एक-दो बार उस पर लाइन मारने की कोशिश की थी.अगर उसे इस सब के बारे में थोड़ी भी जानकारी होती, तो वह यह मौका कभी नहीं छोड़ता।

    पर अब धीरे-धीरे मेरी सेक्स की इच्छा बढ़ती जा रही थी।

    इसलिए मैंने एक प्लान बनाया जिसके जरिए मैं अपने देवर के साथ मज़े कर सकती थी।

    एक रात जब हम दोनों सब के साथ बैठकर खाना खा रहे थे.तब मैं उससे बोली- क्या तुम आज मेरे साथ एक मूवी देखोगे?

    क्योंकि उसके इक्ज़ाम ख़त्म हो गए थे इसलिए उसने झट से हाँ कर दी।

    मेरा आधा काम तो हो चुका था, बस आधा बाकी था।

    वह दूध पीने के बाद मेरे पास आया और बोला- भाभी, कौन सी मूवी देखेंगे?मैंने कहा- कोई होलीवुड की मूवी देखेंगे।वह बोला- चलो फ़िर मूवी देखते हैं।

    मैं उससे बोली- पहले तुम कपड़े बदल लो क्योंकि मूवी बहुत बड़ी है। इसलिए तुम मूवी देखने के बाद यहीं सो जाना।वह झट से मेरी बात मान गया।

    जब तक वह आया, मैंने भी अपने कपड़े बदल लिए।

    अब मैंने एक हाफ़ स्कर्ट और एक हाफ़ मैक्सी पहनी जिसमें से मेरे बड़ी-बड़ी चुच्चियां दिख रही थी.जबकि उसने एक हाफ़ टीशर्ट और पजामा पहना हुआ था।

    उन दिनों थोड़ी सर्दियां पड़ रही थी इसलिए हम दोनों एक ही कंबल में घुस गए।

    थोड़ी देर बाद मैंने मूवी प्ले कर दी।वो एक रोमैन्टिक मूवी थी।

    हम दोनो ही उस मूवी को बड़े मज़े से देख रहे थे।

    तभी मूवी में एक सैक्स का सीन आया जिसमें एक छोटी उम्र का लड़का अपनी गरम भाभी की चुदाई कर रहा था।मुझे किसी ऐसे ही मौके का इंतज़ार था।

    इस सीन के बाद जब मैंने उसकी तरफ़ देखा तो उसके पजामे में से उसका लंड साफ़ दिख रहा था।

    मैं समझ गई थी कि अब चिंगारी तो भड़क चुकी है, बस विस्फ़ोट होना बाकी है।

    थोड़ी देर बाद जब मूवी ख़त्म हुई तो मैं उससे बोली- तुम चाहो तो आज यहीं सो जाओ, मेरा मन भी लगा रहेगा।वह यह बात भी झट से मान गया।

    वह आख़िर था तो एक किशोरवय ही, उसे क्या पता था कि आज उसे कितना मजा आने वाला है।

    कुछ देर बाद मैं उससे बोली- मुझे बहुत खुजली हो रही है, क्या तुम तेल से मेरी मालिश कर दोगे?वह बोला- ठीक है भाभी।

    मैं झट से तेल ले आई।

    अब वह बोला- कहाँ मालिश करनी है भाभी?मैंने अपनी पीठ की तरफ़ इशारा करते हुए कहा- यहाँ खुजली हो रही है।

    यह सुनते ही वह शर्मा गया.मैं उससे बोली- कोई बात नहीं, अगर तुम्हारा मन नहीं है तो रहने दो।वह बोला- नहीं, ऐसी कोई बात नहीं है, मैं आपके अभी मालिश कर देता हूँ।

    अब उसने तेल लिया और मेरी पीठ की मालिश करने लगा।मालिश करते करते अब शायद उसे भी मजा आ रहा था।

    अब वह धीरे-धीरे मेरे कूल्हों तक हाथ फिराने लगा।

    लेकिन जब उसने देखा कि मुझे नींद आ गई है तो उसकी हिम्मत और बढ़ गई।

    अब वह जोर-जोर से मेरे चूतड़ों को सहलाने लगा।दरअसल मैं भी इस दौरान सोई नहीं थी बल्कि सोने का नाटक कर रही थी।

    जब उसे लगा कि अब मैं गहरी नींद में हूँ तो उसने मेरी मैक्सी की चेन खोली और मेरी ब्रा के ऊपर से ही मेरी चुच्चियों को दबाने लगा।

    मुझे भी अब बहुत मजा आ रहा था इसीलिए मैं उसे बिना कुछ बोले चुपचाप लेटी रही।थोड़ी देर बाद मैंने करवट ली ताकि वह मेरी ब्रा को खोल सके।

    पहले तो उसने थोड़ा इंतजार किया.लेकिन जब उसे यकीन हो गया कि मैं सो ही रही हू तो उसने मेरी ब्रा के हुक खोले और मेरी बड़ी-बड़ी चुच्चियों को ब्रा की कैद से आजाद कर दिया।

    अब मैं भी गर्म होने लगी थी।

    तभी वह नीचे आया और उसने मेरी स्कर्ट को मेरी जांघों तक ऊपर कर दिया।तब वह मेरी जांघों को सहलाने लगा.

    अब मैं भी कन्ट्रोल नहीं कर सकती थी इसलिए अब मैं धीरे-धीरे सिसकारियां लेने लगी।

    अब तो उसे इस बात का यकीन हो गया था कि मुझे भी सैक्स करने का मन है।इसलिए वह मेरी जांघों को छोड़कर ऊपर आया और मेरे लबों पर अपने होंठ रख दिये।

    अब मैं भी उसका भरपूर साथ दे रही थी।

    फ़िर वह एक बार फ़िर मेरी गर्दन से होता हुआ मेरी चुच्चियों तक पहुँचा और मेरे निप्पल को जोर-जोर से चूसने लगा।अब मुझे भी बहुत दर्द हो रहा था।

    फ़िर उसने अपने सारे कपड़े उतारे.जब मैंने उसका लंड देखा तो मैं हैरान हो गई, इतने से लड़के का इतना बड़ा लंड।मेरे मन में तो लड्डू फ़ूट रहे थे.

    इसलिए मैंने झट से उसका लंड मेरे मुँह में ले लिया और उसे जोर-जोर से चूसने लगी।

    थोड़ी देर बाद वह झड़ गया।

    फ़िर उसने मेरी स्कर्ट निकाल दी.अब मैं सिर्फ़ एक पैन्टी में थी।

    वह मेरी पैंटी के ऊपर से ही अपनी गरम भाभी की गरम चूत को सहलाने लगा.मैं तो अब पागल होती जा रही थी।

    मैंने उससे कहा- अब जल्दी मेरी चूत में लंड डाल दो।वह बोला- भाभी, इतनी भी जल्दी क्या है?

    इतना कहकर उसने मेरी पैन्टी उतारी और मेरी बिना बालों की चूत को अपनी जीभ से चाटने लगा।

    थोड़ी देर बाद मैं झड़ गई और वह मेरा सारा पानी पी गया।

    अब तक उसका लंड दोबारा खड़ा हो चुका था।उसने अपने लंड को मेरी चूत पर रखा और एक जोर के धक्के के साथ उसका पूरा लंड मेरी चूत में चला गया।

    अब मुझे बहुत दर्द हो रहा था लेकिन उसने अपने धक्के जारी रखे।

    पाँच मिनट बाद वह बोला- भाभी, मेरा होने वाला है।मैं बोली- मेरे अंदर ही निकाल दो। मैं बाद में दवाई खा लूँगी।

    इतना सुनकर उसने अपने धक्कों की स्पीड बढ़ा दी और थोड़ी देर बाद वह और मैं एक साथ झड़ गए।

    तब मैंने उससे पूछा- मैं तो सोचती थी कि तुम्हें सैक्स के बारे में कुछ नहीं पता?वह बोला- भाभी, मैं पहले भी सैक्स कर चुका हूँ।

    मैं बोली- कब?वह बताने लगा:

    जब आपकी और भैया की सुहागरात थी, उस रात मैं भैया और आपके साथ सोने की ज़िद कर रहा था।तब मम्मी मुझसे बोली- आज उनकी सुहागरात है। आज तुम उनके पास नहीं सो सकते।मैंने मम्मी से पूछा- सुहागरात में ऐसा क्या होता है कि मैं उनके पास नहीं सो सकता?मम्मी कुछ नहीं बोली।मैं बोला- या तो मुझे बताओ, वर्ना मैं उनके पास जा रहा हूँ।

    मेरे ज़िद करने पर मम्मी बोली- चल ठीक है, मैं सब कुछ बताऊंगी पर तुम उनके पास मत जाओ।मैं मान गया।

    और जब पापा सो गए तो मम्मी ने मुझे सब कुछ बता दिया।

    तभी से मैं एक मौके की तलाश में था क्योंकि मम्मी ने मुझे यह बताया था कि शादी के बाद एक बार यह सब करने के बाद यह सब दोबारा करने का मन करता है।और मैं जानता था कि आपने भैया के विदेश जाने के बाद एक बार भी सैक्स नहीं किया। इस लिए मैं अपनी भाभी की प्यासबुझाना चाहता था। इसलिए मैंने यह नाटक किया कि मैं सैक्स के बारे में कुछ नहीं जानता। ताकि आप खुद पहल करो।

    उसकी ये बातें सुनकर मैंने उसे अपने गले से लगा लिया।

    फ़िर तो हम दोनों ने उस रात कई बार सैक्स किया।और अब तो हम जब चाहें तब सैक्स कर लेते हैं.इसलिए मुझे अब मेरे पति की याद भी नहीं आती।

  • लोकडाउन में दिया बुआ ने गांड का मजा

    दोस्तो, मेरा नाम अमित है और मेरी उम्र 24 साल है. मैं जबलपुर में रहता हूं. यह Hindi Sex Stories मेरे पड़ोस में रहने वाली एक बुआ की है जिनका नाम कविता (बदला हुआ) है.

    उनकी शादी हो चुकी है परन्तु अब वो अपने पति के साथ नहीं रहती हैं. वो अब मायके में रहती हैं इसलिए सामाजिक रिश्ते के हिसाब से वो मेरी बुआ लगी.

    उनकी उम्र 40 के करीब है और 3 बच्चे हैं.

    दोस्तो, आपने कभी ध्यान दिया होगा कि जब भी आपके पास कोई काम नहीं होता है तो आपका ध्यान केवल एक चीज की तरफ ही ज्यादा जाता है और वह है सेक्स!

    मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ.

    उस वक्त लॉकडाउन का दौर था. किसी के पास कुछ करने को नहीं था.

    इस दौरान अक्सर शाम को पड़ोसी गली में आ जाते थे और पड़ोस के सब लोग गेम खेला करते थे.

    एक दिन की बात है जब मैं और मेरे दोस्त शाम के समय कैरम खेल रहे थे.

    हम तीन लोग थे तो चौथी खिलाड़ी बुआ आ गई और बोली कि मैं भी तुम लोगों के साथ खेलूंगी.

    तो हम सब खेलने लगे लेकिन बीच खेल में दोस्त को कुछ काम आ गया तो वो दोनों दोस्त अपने अपने घर चले गए.

    फिर मैं और बुआ ही बचे तो मैं खेल बंद करने लगा.

    मगर बुआ बोली- हम दोनों ही खेल लेते हैं.

    मैंने उनसे कहा- आपको कहां अच्छे से खेलना आता है, आप तो थोड़ी देर में ही हार जाओगी मुझसे!

    वो बोली- अच्छा, यह बात है तो शर्त लगा लो.

    मैंने कहा- ठीक है, मगर जो जीतेगा उसको मिलेगा क्या?

    कविता- जो हारेगा उसको जीतने वाली की एक बात माननी पड़ेगी.

    मैं- ठीक है, परन्तु आप सोच लो, अगर मैं जीता तो जो मांगूंगा वो आपको देना पड़ेगा?

    कविता- पहले जीत तो जाओ … फिर देखते हैं.

    फिर हमारा गेम चालू हुआ और हम दोनों अपनी धुन में ही खेलने लगे.

    मैंने एक ऐसा शॉट मारा कि मेरी गोटी उनके गाउन में चली गई.

    दोस्तो, वो ज्यादातर गाउन ही पहना करती थी.

    उसने गोटी को निकालने से मना कर दिया और बोली- अभी नहीं निकाल सकती, दूसरी से खेल लो.

    मगर मेरे मन में इतनी ही बात से हवस जाग गई.

    मैंने सोचा कि ये अच्छा मौका है; मैंने कहा- नहीं बुआ, अगर गेम आगे बढ़ाना है तो सारी गोटी ही चाहिए हैं. नहीं तो ये फिर चीटिंग हो जाएगी.

    मेरे कई बार कहने पर उसने गोटी गाउन से निकाली.

    धीरे धीरे गेम चलता रहा और आखिर में मैं ही जीत गया.

    अब शर्त के मुताबिक मैं उनसे कुछ भी मांग सकता था. मुझे तो बुआ की चुदाई करनी थी लेकिन सीधे सीधे तो कह नहीं सकता था कि बुआ मुझे चूत दे दो!

    मैंने दिमाग लगाया और सोचा कि इनसे कुछ ऐसा काम करवाता हूं जो कि ये कर ही न पाए और फिर मुझे फिर से एक बार उनको दूसरा काम देने का मौका मिले.

    फिर मैंने कहा- बुआ आपको एक बार चौराहे का चक्कर लगाकर आना है.

    वो डर गई और बोली- नहीं, तुम पागल हो क्या? जानते नहीं कि बाहर पुलिस का पहरा है, ऐसे कोई घूम नहीं सकता.

    मैंने कहा- तो फिर आप हार गईं, अब आपको शर्त तो पूरी करनी ही होगी.

    वो बोली- ठीक है, तो कुछ और काम बताओ.

    फिर मैंने कहा- तो फिर आपको रात के 11 बजे अकेले घर में एक भूतिया फिल्म देखनी होगी.

    वो बोली- कहां? तुम्हारे घर?

    मैं बोली- नहीं, आपके घर.

    वो बोली- मगर मेरे घर में तो कोई नहीं है, मेरी मां तो भाई के घर गई है दूसरी कॉलोनी में, बच्चे भी उनके साथ ही हैं.

    मैंने कहा- फिर तो और अच्छी बात है, यही तो चैलेंज है. आपको अकेले घर में भूतिया फिल्म देखनी है और वो भी आधी रात के वक्त.

    वो बोली- नहीं, मैं नहीं देखूंगी.

    तो मैंने फिर जोर देकर कहा- अगर आप में शर्त पूरी करने की हिम्मत नहीं थी तो फिर शर्त लगाई ही क्यों? मैं अपने दोस्तों को बता दूंगा कि आपको आगे से हमारे साथ न खेलने दें. या तो आप शर्त पूरी करो या फिर हमारे साथ मत खेलना.

    ये सुनकर वो भी थोड़े जोश में आ गई और बोली- ठीक है, मगर मैं अकेली नहीं देखूंगी. तुम भी रहना घर में.

    मैं मन ही मन खुश हो गया क्योंकि मैं तो यही चाहता था.

    मैंने कहा- ठीक है, मैं दूसरे रूम में रहूंगा. आप अपने रूम में अकेली देखना.

    इस तरह रात का प्रोग्राम तय हो गया.

    अब मैंने जानबूझकर उनको ऐसी मूवी देखने को कहा जिसमें कई सारे नंगे सेक्स सीन थे.

    रात को मैं उनके घर पहुंच गया.

    खाना मैं खा ही चुका था.

    बुआ भी सारा काम निपटाकर मेरा इंतजार कर रही थी.

    मैंने मूवी चला दी और सामने हॉल में जाकर अपने फोन में टाइमपास करने लगा.

    घर की लाइटें मैंने बंद करवा दीं और बुआ को अंधेरे रूम में मूवी देखने को कहा.

    वो मूवी देखने लगी और कुछ देर बाद ही वो डरने लगी.

    वो बोली- अमित, ये गलत बात है. मैं ऐसे अकेली नहीं देख सकती.

    मैंने कहा- यही तो शर्त है.

    बुआ ने कहा- मगर तुम कम से कम रूम में तो आ जाओ. यहां मुझे बहुत डर लग रहा है, हार्ट अटैक आ जाएगा.

    मैंने कहा- ठीक है.

    फिर मैं मन ही मन खुश होता हुआ बुआ के पास रूम में गया और बेड पर उनके साथ जाकर लेट गया और मूवी देखने लगा.

    मूवी में बीच बीच में सेक्स सीन आ रहे थे.

    मेरा लंड तो पहले से ही तना हुआ था.

    जब भी कोई सेक्स सीन आता था तो मैं अपने लंड को सहला देता था ताकि बुआ का ध्यान मेरे लंड पर जा सके.

    मैंने देखा भी कि जब जब मैं अपने लंड को सहला रहा था तो बुआ मेरे लंड की ओर देखती थी.

    मैं समझ गया कि इतने दिनों की प्यास बुआ की चूत को भी गीली कर रही है.

    अब वो डर के मारे मेरे और करीब आ गयी.

    मेरे लंड में और ज्यादा तनाव आ गया और लोवर में साफ साफ लंड के झटके लगते हुए दिखने लगे.

    जब एक गर्म सेक्स सीन आया तो मुझसे रहा न गया और मैंने बुआ की जांघ पर हाथ रख दिया और सहलाने लगा.

    वो सीधा टीवी में देखती रही और कोई प्रतिक्रिया नहीं दी.

    इससे मेरी हिम्मत बढ़ी और मैंने उनका हाथ पकड़ कर अपने उछल रहे लंड पर रखवा दिया.

    बुआ ने लंड पकड़ लिया और मेरी तरफ देखने लगी.

    बस इतना होना था कि हम दोनों एक दूसरे के होंठों पर टूट पड़े.

    मैंने बुआ को नीचे गिरा लिया और उसकी चूचियों को दबात हुए उसके होंठों को चूसने लगा.

    वो भी मेरे सिर को सहलाते हुए मेरी जीभ को अपने मुंह में खींचने लगी.

    हम दोनों की लार एक दूसरे के मुंह में जा रही थी.

    कम से कम 5 मिनट तक हम दोनों एक दूसरे को किस ही करते रहे.

    फिर अलग हुए तो मैं गाऊन के उपर से ही उनके दूध दबाने लगा जिससे कविता को दर्द होने लगा.

    मेरे हाथों की ताकत इतनी ज्यादा थी कि मुझे पता ही नहीं चला कि कितना जोर डाल रहा हूं.

    मैं पूरे जोश में था और बुआ की चुदाई के लिए तड़प रहा था.

    बहुत दिनों के बाद आज मुझे चूत मिलने वाली थी.

    फिर मैंने उसके गाऊन को उतार दिया.

    उसने नीचे से रेड कलर की ब्रा और पैंटी पहनी हुई थी.

    मैं ब्रा के ऊपर से ही दूधों को चूसने चाटने लगा.

    धीरे धीरे उसके बदन पर होते हुए मेरा एक हाथ उसकी पैंटी में जाने लगा.

    जैसे ही मेरा हाथ उसकी चूत पर पहुंचा तो उसने अपनी टांगें चौड़ी करके अपनी चूत को खोल दिया ताकि मैं अच्छे से उसकी चूत की मालिश कर सकूं.

    मैं बुआ की चूत को रगड़ने लगा और हथेली से उसकी चूत की फांकों को सहलाने लगा.

    वो अपनी चूत को उठाकर मेरे हाथ की तरफ दबाने लगी.

    लग रहा था जैसे कि उसकी चूत में बरसों की आग लगी हो.

    मेरी उंगली उसकी चूत को बार बार छेड़ रही थी.

    हल्की सी उंगली मैं उसकी चूत में अंदर भी डाल रहा था.

    जब मेरी उंगली उसकी चूत में थोड़ी अंदर जाती तो वह अपनी जांघों को भींच लेती थी.

    इससे पता चल रहा था कि वो लंड लेने के लिए कितनी बेताब हो चुकी है.

    मगर वो मुंह से कुछ नहीं बोल रही थी.

    बुआ ने चूत को क्लीन शेव किया हुआ था.

    चूत एकदम से चिकनी महसूस हो रही थी.

    उसकी गर्म गर्म चूत में जब उंगली अंदर जा रही थी तो मेरे लंड में जोर जोर से झटके लग रहे थे.

    धीरे धीरे अब उसकी चूत में मुझे गीलापन महसूस होने लगा था.

    मुझे चूत सहलाते और उंगली करते हुए दो-तीन मिनट हो चुके थे.

    वो भी अब तड़प चुकी थी.

    मैं अब चोदने के लिए और इंतजार नहीं कर सकता था.

    उधर बुआ भी लंड के लिए और इंतजार नहीं कर सकती थी.

    मैंने जल्दी से अपने कपड़े उतारे और बुआ की ब्रा-पैंटी को उतार कर उसको भी नंगी कर लिया.

    एक बार चोदने से पहले मैं बुआ की चूत की खुशबू और उसके रस का स्वाद लेना चाहता था.

    जल्दी से मैंने उसको बेड पर पटका और उसकी टांगों को अपने कंधे पर लेकर उसकी चूत में मुंह दे दिया.

    मैं बुआ की नमकीन-मीठे रस से भरी चूत को चूसने लगा.

    उसकी चूत में जीभ दे देकर उसको अंदर तक खोदने लगा.

    उसकी हालत खराब होने लगी; वो मेरी पीठ पर नाखून गड़ाने लगी.

    मेरी पीठ पर खरोंचें आने लगीं जिससे मुझे जलन होने लगी.

    मुझे थोड़ा गुस्सा आने लगा और मैंने उसके मुंह में लंड देने की सोची.

    मैंने लंड उसके मुंह के सामने कर दिया और चूसने को कहा.

    मगर उसने लंड को मुंह में लेने से मना कर दिया.

    मैंने कई बार उसको कहा लेकिन वो नहीं मानी.

    मैं फिर से उसकी चूत में जीभ देकर चाटने लगा.

    वो मेरे बालों को नोंचने लगी.

    मैं ज्यादा देर उसकी चुदास के सामने टिक नहीं सकता था.

    मैंने पांच मिनट तक किसी तरह उसकी चूत में जीभ देकर उसकी चूत का स्वाद लिया और खूब जोर से उसके चूचे भी दबाए.

    अब चुदने के लिए गुहार लगाने लगी- आह्ह … हरामी … बस कर … जान निकालेगा क्या … अब चोद भी दे … पागल कर दिया है तूने मुझे!

    मैंने मौका देखा और बोला- अगर लंड चूसने का मजा दोगी तो चोदूंगा… नहीं तो उंगली से चूत का पानी निकाल दूंगा.

    वो बोली- बड़ा मादरचोद है तू, ला … चूस देती हूं.

    मैं उठा और लंड उसके होंठों पर फिराते हुए कहा- चूस दे कविता डार्लिंग!

    उसने मुंह खोला और मेरे लंड को अपने गर्म गर्म मुंह में लिया- आह्ह …. मेरे मुंह से तो आनंद के सीत्कार फूट पड़े.

    इतनी देर से तना हुआ लंड दर्द कर रहा था.

    अब कविता के मुंह में जाने के बाद उसने ऐसा मजा दिया कि मैं तो पागल सा होने लगा.

    मैं बता नहीं सकता कि मेरे तड़पते लंड को कितना सुकून मिल रहा था.

    लंड चुसवाने की इच्छा पूरी होने के बाद अब उसको चोदने की बारी थी.

    मैंने उसकी गांड के नीचे तकिया लगाया और अपना लंड उसकी गीली चूत पर सेट करके उसके ऊपर लेटता चला गया.

    मेरा लंड बुआ की गीली चूत में प्रवेश करके अपना रास्ता बनाता चला गया.

    बीच में एक बार लंड अटका तो मैंने धक्का देकर उसको अंदर सरका दिया.

    बुआ ने मेरी पीठ को जकड़ लिया और मेरी नंगी गांड पर अपनी टांगें लपेट लीं.

    हम दोनों के होंठ मिल गए और मैं बुआ को चोदने लगा.

    वो थोड़ी देर तो कराहती रही और फिर मस्ती में आकर चुदने लगी.

    ऐसा मन कर रहा था कि चोदते हुए उसके जिस्म को काटकर खा लूं.

    मैं कभी उसके होंठों को खा रहा था तो कभी उसकी मोटी मोटी चूचियों को पी रहा था.

    उसकी चूचियों को चूस चूसकर मैंने लाल कर दिया था.

    15 मिनट की चुदाई के बाद मेरा माल निकलने को हो गया.

    मैंने बिना बताए उसकी चूत में ही माल छोड़ दिया.

    फिर हांफते हुए उसके ऊपर लेट गया.

    जब हम दोनों शांत हुए तो मैंने पूछा- तुम्हारा पानी नहीं निकला क्या?

    वो बोली- ऐसे जानवरों की तरह चोदते हो कि दो बार झड़ गई मैं!

    फिर मैंने उसकी चूत को रगड़ते हुए कहा- बहुत गर्मी है अभी इसमें.

    वो बोली- पांच साल से नहीं चुदी थी. आज जाकर प्यास थोड़ी शांत हुई है.

    अब हम दोनों फिर से चूमा चाटी में लग गए.

    कुछ देर बाद मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया.

    उसकी भारी गांड देखकर मेरा मन उसकी गांड मारने के लिए करने लगा.

    मैं बोला- कविता डार्लिंग … गांड दे दो ना प्लीज?

    वो बोली- नहीं, मैंने गांड न तो दी और न ही दूंगी.

    मैंने कहा- मैंने तुम्हारी बरसों की प्यास बुझाई, तुम इतना नहीं कर सकती?

    वो काफी देर तक ना-नुकुर करती रही. फिर आखिरकार वो मान गयी.

    मैंने उसकी गांड के छेद में उंगली से तेल लगाया और लंड के टोपे को भी तेल में तर कर लिया.

    फिर उसकी गांड के छेद पर लंड रखा और पीछे से उसकी गांड में देने लगा.

    उसको दर्द होने लगा तो वो आगे भागने लगी लेकिन मैंने उसके हाथ पकड़ लिए.

    मैं बोला- बस एक बार होगा दर्द फिर मजा ही मजा है.

    वो किसी तरह डटी रही और मैंने लंड को उसकी गांड में घुसा दिया.

    फिर मैं दो मिनट लंड डाले उस पर लेटा रहा और फिर उसकी गांड चुदाई शुरू की.

    थोड़ी देर में उसे भी गांड चुदवाने में मजा आने लगा और अबकी बार मैं उसकी गांड में खाली हुआ.

    इस तरह से हमने उस रात खूब मजा किया.

    उसके बाद से बुआ और मेरा चक्कर चला आ रहा है.

    जब भी वो घर में अकेली होती है तो मैं उसको चोदने पहुंच जाता हूं या फिर वो खुद ही मुझे बुला लेती है.

  • विधवा मौसी मेरे बाप से चुद गई

    मेरा नाम राजू है. मेरा जन्म उत्तर प्रदेश के एक शहर में हुआ. मेरे परिवार में मेरे माता पिता, मेरी एक सौतेली बहन है और मैं हूं. आज मेरी उम्र 30 साल के लगभग होगी. आज मेरी शादी हो चुकी मेरे बीवी के साथ मेरे अच्छे संबंध हैं और मेरी एक बेटी है.

    मुझको 10 साल पुरानी बात आज भी याद है कि मैं सेक्स प्रति कितना उत्तेजित हुआ करता था. मेरी छुट्टी खत्म होने को थी. मैं रोज़ शाम को दोस्तों के साथ घूमने फिरने के बहाने लड़कियां ताड़ने शहर में घूमा करता था. शाम की चाय और सिगरेट पीना, मुझे आज भी अपने पुराने दिनों की याद दिला देता है.

    ये वाकिया आज से करीब 8 साल पहले का है. मैं कॉलेज की पढ़ाई कर रहा था और इम्तिहान खत्म होने के बाद घर में छुट्टी मनाने के लिए घर आ गया था.घर परिवार में सब लोग खुश थे कि बेटा घर आया है. मेरे आने की ख़ुशी में घर पर पकवान बन रहे थे. उस दिन मेरा काफी खातिरदारी के साथ स्वागत हुआ था. जो लोग कॉलेज में रहे हैं, उन्हें मेरी बात समझ में आती होगी.

    जब शाम को मैं घर पहुंचा, तो पता लगा कि घर में मेहमान आए हुए हैं. मेरी मौसी और मौसा जी आए थे. घर का माहौल कुछ अलग सा था. सब अपनी बातें कर रहे थे.

    मेरी मौसी मुझे अपने पास बुलाकर बोलीं- बेटा कैसे हो … मैंने आज बड़े दिनों के बाद तुमको देखा है … कितना बड़ा हो गया है रे तू.

    कुछ देर बाद मौसा जी का फोन बजा और वो जल्दी से ‘अर्जेंट कॉल है …’ बोलकर बाहर निकल गए. वे अपने ऑफिस के रवाना हो गए. कुछ देर बाद उनकी कंपनी से फोन आया कि उनका एक्सिडेंट हो गया है.

    हम सब हॉस्पिटल के लिए दौड़े … और हमारे वहां पहुंचने से पहले ही उनका निधन हो चुका था. हम सब एकदम से अवाक थे कि ये क्या हो गया. सभी बेहद दुखी थे. मेरी मौसी और माता जी को रोते हुए देख कर मेरा भी मन खराब हो गया.

    मेरे पिताजी उन दोनों को हौसला देकर चुप करने की कोशिश कर रहे थे. मैंने अपनी छुट्टियां बढ़ा दीं और घर पर रुक गया.

    मौसी अब हमारे घर पर ही थीं. मौसी की कोई औलाद नहीं थी. उनका कोई भी नहीं था, जो उनके लिए कुछ कर सके.

    इसलिए मौसाजी की मृत्यु के बाद वो हमारे साथ ही रहने लगी थीं और हमने भी उनको अपने यहां ही रोकने का फैसला ले लिया था.

    जैसे तैसे दिन काट कर छुट्टियां खत्म हुईं और मैं कॉलेज आ गया.

    इसके 6 महीने बाद ही मैं घर आया. घर में सब लोग नॉर्मल थे. हम सभी एक नई शुरूआत में लग गए.

    दिन यूं ही बीत रहे थे. कुछ दिन बाद मेरे वापस जाने का दिन नजदीक था. मैं अपने पिता के द्वारा गिफ्ट किए गए मोबाइल फोन से बहुत खुश था और उसी फोन में सेक्स कहानी पढ़ रहा था.

    रात को खाना खाने के बाद मैं अपने कमरे में जाकर सोने की तैयारी करने लगा. मेरा कमरा और मेरे माता पिता का कमरा अगल बगल में ही था, जिससे उनके कमरे की कुछ आवाजें मैं आसानी से सुन सकता था.

    देर रात को मैंने कुछ आहट सुनी और मन किया कि सुना जाए क्या बातें चल रही हैं. उनके कमरे से मुझे आज कुछ अजीब सी आवाजें आ रही थीं. मैंने अपने रूम से बाहर निकल कर सुनने की कोशिश की.

    खिड़की की एक झिरी में से कमरे के अन्दर झांक कर देखा कि कमरे में एक छोटा सा बल्ब जल रहा था और कमरे के अन्दर से चाटने की आवाज आ रही थीं. मुझे इधर से कुछ दिखाई नहीं दे रहा था. इसलिए मैंने इधर उधर देखा तो मुझे अपने कमरे में से कॉमन दरवाजे से अन्दर देखना ठीक लगा. मैंने अपने और पापा के कमरे के बीच के दरवाजे में जगह देखी तो मुझे उधर एक बड़ी सी झिरी दिखने लगी. उस झिरी में से मैंने झांक कर देखा तो मैं हैरान रह गया.

    मेरी माँ और मौसी जी लगभग नंगी होकर एक दूसरे को चूमने का प्रयास कर रही थीं और वे दोनों एक दूसरे के ब्लाउज खोल रही थीं.

    इसके आगे का सीन देख कर तो मेरे होश ही उड़ गए. जब मैंने देखा कि पिता नग्न अवस्था में बिस्तर पर लेटे हुए थे. वे अपने लिंग पर उत्तेजक तेल से मालिश कर रहे थे.

    यह सब देख कर मुझे कुछ समझ नहीं आया और मैं अपनी सांसें नियंत्रित करने लगा. कुछ देर बाद मुझे खेल समझ में आया, तो मेरे अन्दर का शैतान भी जाग उठा. मैं अपने फोन को निकाला और चुपचाप उस झिरी में से झांक कर वीडियो रिकार्डिंग करने लगा.

    मैंने वीडियो बनाना ही शुरू किया था कि पिताजी अपने लिंग को सहलाते हुए बोले- लोहा गर्म है … जल्दी से आ जाओ दोनों मेरी पटरानियों … इसका मजा ले लो.

    तभी मेरी मां और मेरी मौसी दोनों ही मेरे पिता की तरफ लपकीं.मेरे पिता ने मौसी को इशारा किया कि वो उनके मुँह पर आकर बैठ जाएं और मेरी मां उनके लिंग की ओर आ जाएं.

    ये सब देखकर मेरा लिंग भी जोर मार रहा था.

    मैंने किसी तरह अपने आप पर कंट्रोल किया और देखा कि मेरी मां ने पिता का लिंग अपने मुँह से चूमना और चूसना शुरू कर दिया. मौसी अपनी योनि को मेरे पिता के मुँह पर रख कर बैठ गईं. मेरे पिता एक पेशेवर जिगोलो के जैसे मौसी की योनि को चूस रहे थे और मौसी अपने वक्षस्थल को मसल रही थीं.

    मेरे पिता ने मौसी की योनि में उंगली डालकर चूसना चालू किया, मौसी भी उनका भरपूर साथ दे रही थीं.

    मुझे अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था कि मेरे सामने ये सब हो रहा है. मगर मुझे इस खेल में अजीब सा मजा आ रहा था.

    कुछ देर बाद मौसी और मां, दोनों ने अपनी जगह बदल दी. अब मेरी मां पिता जी के मुँह पर जाकर बैठ गईं और अपनी योनि को पिता जी की जीभ से चुदवाने लगीं. दूसरी तरफ मेरी मौसी मेरे पिता के लिंग को हाथ में लेकर हस्तमैथुन करने लगीं. उस समय मेरे पिता की उम्र भी करीब 45 साल रही होगी. वो भी काफी मजबूत शरीर के आदमी थे.

    अब तक पिता जी उत्तेजित हो चुके थे और मेरी मौसी और मां भी गरमा गई थीं. पिता ने मौसी को लिंग को चूत पर सैट करने के लिए कहा.मौसी ने वैसा ही किया; वो पिता जी के लिंग को अपनी योनि में लगा आकर बैठ गईं. पिता जी ने कमर उचका कर लिंग को मौसी की योनि में डाल दिया.

    अब मौसी उनके हथौड़ेनुमा लिंग बैठ कर उछल रही थीं. पूरा कमरा फुच फुच की आवाज से गूंज रहा था. उधर मेरी मां ने अपना मोर्चा संभाल रखा था. वह अपनी योनि से पिता जी के जोश को बांटने की कोशिश कर रही थीं, पर मेरे पिता जी अपने जमाने मशहूर लड़कीबाज थे, वह एक अलग किस्सा है. जो मैं फिर कभी सुनाऊंगा.

    इधर इस सबको देखकर मेरे लिंग में उबाल आ रहा था. मौसी और मां दोनों ने मिलकर पिता के साथ 30 मिनट तक यह कामक्रीड़ा की. फिर पिता जी ने अखिर में उन दोनों के वक्ष स्थलों के ऊपर अपने वीर्य का छिड़काव कर दिया.

    उसके बाद मौसी और मेरी मां एक दूसरे को चाट चाट कर साफ़ करने लगीं. उसके बाद पिताजी ने दोनों को चुंबन किया और उनके कानों में कुछ कहने लगे.

    अब मेरी मां भी झड़ कर थक चुकी थीं. वह बिस्तर पर लेट गईं. मगर मेरे पिता का बड़ा लिंग अब भी जोर मार रहा था. मेरी मौसी ने उसे फिर से सहलाना शुरू कर दिया लिंग के पूरी तरह से खड़े हो जाने के बाद मौसी कंडोम का पैकट निकाल कर फाड़ने लगीं.

    तभी मेरी मां ने कंडोम छीन लिया और कहा- अपने जीजा से कैसा परहेज है तुझे … कंडोम रहने दो और अपनी योनि को राजू के बाप के लिंग से संभोग करवा लो.

    मेरी मौसी बोलीं- दीदी अगर मैं प्रेगनेंट हो गई, तो क्या होगा?तभी मेरे पिता जी ने कहा- तू भी मेरी आधी घरवाली है … पर आज से तू पूरी है.

    पिता ये कहते हुए मौसी का मुँह देखकर हंसने लगे. उसके बाद पिता जी ने मौसी को जमीन पर टांगें रखवा कर पलंग के सहारे से कुतिया जैसा बना दिया और पीछे से आकर मौसी की योनि में लिंग डाल कर कुत्ता कुतिया के जैसे कामक्रीड़ा करने लगे.

    मौसी नीचे से अपनी योनि को सहला कर पिताजी का पूरा साथ दे रही थीं.

    पिता जी का लिंग अन्दर घुसते ही एक बार फिर से कमरा फुच फुच की आवाज़ों से गूंज उठा. पिता जी ने मौसी की योनि के साथ 15 मिनट तक भरपूर कामक्रीड़ा की और अपना वीर्य मौसी की योनि में ही प्रवाहित कर दिया.

    इसके बाद वो तीनों एक पलंग पर नंगे ही लेट गए. मैं भी समझ गया कि अब खेल समाप्त हो गया है. मुझको भी अगले दिन हॉस्टल जाना था. मैं भी अपने लिंग को सहलाता हुआ अपने बिस्तर पर चला गया.मेरे मोबाइल फोन में यह पूरी घटना रिकॉर्ड हो गई थी.

    अगले दिन सब एकदम सामान्य था और मां मौसी आदि सभी मुझसे सामान्य व्यवहार करने लगे. मैं अब भी रात की उस घटना से स्तब्ध था.

    मेरे पिताजी बोले- चलो बेटा, तुम्हारी ट्रेन का टाइम हो रहा है.

    अपना बैग उठा कर मैं भी घर से निकल गया. मौसी और माता जी मुझको बाल्कनी से बाय बाय कर रही थी.

    मैं चला गया.

    कुछ समय बाद अगले साल छुट्टियां आने को थीं और मैं घर आने को बड़ा उत्तेजित था. मैंने पूरे नौ महीने तक हॉस्टल में रह कर हर दिन घर की उस वीडियो रिकॉर्डिंग को देखा था और मैं हस्तमैथुन कर लिया करता था.

    मगर इस बार घर वापस आते समय मैं एक खुश खबरी से अनजान था.

    जब मैं घर पहुंचा, तो मौसी को वहां पर नहीं देखा. मैंने मां से पूछा- मां मौसी कहां गई हैं?तो मां ने जवाब दिया- वो हॉस्पिटल में एडमिट हैं.

    मुझे लगा कि मौसी कुछ बीमार होंगी. फिर मैंने पिता के बारे पूछा, तो पता लगा कि वो ही मौसी को लेकर गए हैं.

    अब हमें भी हॉस्पिटल जाना होगा. मेरी मां और मैं, दोनों हॉस्पिटल के लिए रवाना हुए. उधर पता लगा कि मौसी प्रसूता वार्ड में हैं. मुझे तब समझ आया कि मौसी अब मेरी सौतेली मां बन चुकी हैं और उन्हें एक बच्ची को जन्म दिया है.

    मैंने मां से पूछा- क्या मैं जान सकता हूँ कि मौसी अब मेरी कौन लगती हैं?मां ने धीरे से कहा कि अब वो भी तेरी मां हैं. उन्होंने पापा से ही इस बच्ची को जन्म दिया है.

    मैं कुछ नहीं बोला और मौसी के पास जाकर उनको मां कह कर बोलने लगा. मेरी मौसी भी मेरी बात से खुश हो गई थीं.

    हालांकि ये पल मेरे लिए सोचने वाले थे, लेकिन दोस्तो, मैं ये समझता था कि बिना पति के मौसी की जिन्दगी जीना दुश्वार था. हो सकता था कि किसी अन्य से अपने जिस्मानी सम्बन्ध बना लेतीं, जो कि शायद हम सभी के लिए बेहद गलत होता. इसलिए मैंने मौसी को अपनी मां ही बना लिया था.

    मेरे पिताजी को भी अब किसी बात का मलाल नहीं था क्योंकि उनको भी मालूम हो गया था कि मैं सब जान गया हूँ.

    दोस्तो, ये मेरे ज़िन्दगी के कुछ ना भूल पाने वाले पल थे, मैं आशा करता हूं कि आपको मेरी ये गरम और सच्ची सेक्स कहानी पसंद आई होगी.