Tag: Chudai ki kahaniya – Hindi Sex Story

  • सपनो की जॉब 3

    कमरे में सिर्फ हल्की गोल्डन बेडसाइड लाइट जल रही थी। AC की ठंडी हवा दोनों के नंगे बदन पर लग रही थी। राहुल ने सीमा को बेड पर लिटा दिया। उनकी नंगी देह पूरी तरह फैली हुई थी — भारी 36D छातियाँ ऊपर-नीचे हो रही थीं, कमर पसीने से चमक रही थी, जाँघें थोड़ी फैली हुई थीं।

    राहुल उनके ऊपर झुका। पहले उसने उनके होंठों पर बहुत गहरा और लंबा किस किया। जीभें एक-दूसरे में घुल गईं। किस के दौरान राहुल ने सीमा की छातियों को दोनों हाथों से थाम लिया और धीरे-धीरे मसलने लगा। नरम, भारी मांस उँगलियों में दब रहा था। फिर उसने एक निप्पल को मुँह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगा। जीभ से चारों तरफ घुमाता, हल्के से काटता, फिर पूरा निप्पल मुँह में लेकर चूसता। दूसरी छाती को हाथ से मसलता रहा। सीमा की आहें निकलने लगीं — “आह्ह… राहुल… धीरे… बहुत अच्छा लग रहा है… उफ्फ…”

    राहुल ने लगातार 12-15 मिनट तक उनकी दोनों छातियों को चूसा, चाटा और नोचा। निप्पल्स लाल और सख्त हो चुके थे। फिर वो धीरे-धीरे नीचे सरका। सीमा की नाभि में जीभ डाली, फिर कमर चूमता हुआ उनकी जाँघों के बीच पहुँच गया। उसने सीमा की जाँघें चौड़ी कीं और चूत पर मुंह रख दिया। पहले क्लिटोरिस को जीभ से धीरे-धीरे घुमाया, फिर पूरी फाँक चाटी। जीभ अंदर डालकर चूसने लगा। सीमा की कमर बार-बार ऊपर उठ रही थी। उनकी चूत से गर्म रस निकल रहा था।

    “आह्ह्ह… राहुल… तुम्हारी जीभ… बहुत गहरी… हाँ… चूसो… मेरी चूत चूसो… उफ्फ… मैं गर्म हो रही हूँ…” सीमा की साँसें फूल रही थीं।

    राहुल ने 10 मिनट तक उनकी चूत को चाटा और चूसा। सीमा की जाँघें काँप रही थीं। उनकी चूत अब पूरी तरह गीली और तैयार थी।

    तभी सीमा ने काँपते हुए कहा, “राहुल… अब… कंडोम… कंडोम लगाओ…”

    राहुल ने सिर हिलाया। सीमा ने बेडसाइड ड्रॉअर से Trojan Magnum XL का पैकेट निकाला। उन्होंने पैकेट फाड़ा और राहुल के सामने घुटनों के बल बैठ गईं। राहुल का 11 इंच लंबा और 4 इंच मोटा लंड पहले से ही पूरा खड़ा था। सीमा ने कंडोम की रिंग लंड की नोक पर रखी और दोनों हाथों से धीरे-धीरे नीचे खींचा। कंडोम लंड की मोटाई पर पूरी तरह तन गया। अब राहुल का पूरा लंड कंडोम में चमक रहा था।

    सीमा ने राहुल की आँखों में देखकर गिड़गिड़ाते हुए कहा, “राहुल… प्लीज… सिर्फ 3 इंच… उससे ज़्यादा मत डालना… मेरी चूत अभी भी सूजी हुई है… दर्द हो रहा है… वादा करो…”

    राहुल ने सिर हिलाया। उसने सीमा को पीठ के बल लिटा दिया। उनकी जाँघें चौड़ी कीं। लंड की नोक को सूजी हुई चूत की फाँक पर रखा और बहुत धीरे-धीरे 3 इंच अंदर डाल दिया।

    सीमा की आँखें बंद हो गईं। “आह्ह… बस… बस इतना ही… और मत डालना…”

    राहुल ने 3 इंच ही रखकर धीमी गति से अंदर-बाहर करना शुरू किया। हर धक्का बहुत आहिस्ता था। लेकिन कुछ मिनट बाद राहुल ने अचानक कमर को जोर से आगे धकेला। लंड 6 इंच तक एक झटके में अंदर चला गया।

    सीमा की चीख फट पड़ी — “आआआह्ह्ह्ह… राहुल… नहीं… 6 इंच… बहुत दर्द… बहार निकालो… आह्ह्ह…”

    उनकी आँखों से तुरंत आँसू बहने लगे। चूत की सूजी हुई दीवारें लंड को कसकर जकड़ रही थीं। सीमा दोनों हाथों से राहुल की छाती को धकेल रही थीं। “राहुल… प्लीज… बहार निकालो… मैं सह नहीं पा रही… रो रही हूँ… आह्ह्ह…”

    लेकिन राहुल नहीं रुका। उसने और जोर से धक्के मारने शुरू कर दिए। अब लंड 6 इंच तक लगातार अंदर-बाहर हो रहा था। कमरे में फच… फच… फच… की तेज़ आवाज़ गूँज रही थी। सीमा ज़ोर-ज़ोर से चीख रही थीं और रो रही थीं। उनके आँसू गालों पर बह रहे थे। “राहुल… मत… मत… दर्द हो रहा है… बहार निकालो… आह्ह्ह…”

    राहुल ने 30 मिनट तक लगातार उन्हें पेला। हर धक्का गहरा और तेज़ था। सीमा की चूत पूरी तरह फैल गई थी। 18 मिनट में सीमा पहली बार झड़ गईं। उनका शरीर सख्त हो गया, चूत सिकुड़-सिकुड़कर लंड को दबाने लगी। “आह्ह्ह… पहली बार… राहुल… मैं आ गई…” लेकिन राहुल रुका नहीं।

    32 मिनट बाद सीमा दूसरी बार झड़ गईं। इस बार वो चीख पड़ीं — “दूसरी बार… आह्ह्ह… बहुत दर्द… रुक जाओ…”

    सीमा अब रो-रोकर गिड़गिड़ा रही थीं। “राहुल… प्लीज रुक जाओ… मैं सह नहीं पा रही… चूत फट रही है… आह्ह्ह…”

    लेकिन राहुल ने और तेज़ी से पेलना जारी रखा। 50 मिनट पूरे होने वाले थे। सीमा की हालत पूरी तरह खराब हो चुकी थी। उनकी आँखें सूज गई थीं, चेहरा लाल था, साँसें फूल रही थीं। वो पड़ी-पड़ी रो रही थीं।

    आखिरकार राहुल का शरीर तन गया। उसने सीमा की कमर को कसकर पकड़ा और आखिरी जोरदार धक्के मारे। कंडोम के अंदर गर्म, गाढ़ा वीर्य की मोटी धार निकली। राहुल ने पूरा पानी सीमा की चूत के अंदर छोड़ दिया।

    राहुल ने सीमा की चूत से लंड बाहर निकाला तो पूरा कमरा उनकी चीखों और रोने की आवाज़ से भर गया था। सीमा पड़ी-पड़ी ज़ोर-ज़ोर से रो रही थीं। उनकी आँखें सूज गई थीं, गालों पर आँसू की धार बह रही थी, साँसें फूल रही थीं। चूत बुरी तरह सूजी हुई, लाल और दर्द से फड़क रही थी। राहुल का दिल एक पल के लिए धड़क गया।

    उसने तुरंत कंडोम उतारा और बेड के किनारे बैठ गया। सीमा को दोनों हाथों से कसकर गले लगा लिया। उनकी नंगी देह अभी भी काँप रही थी। राहुल ने उनके बालों में हाथ फेरते हुए बहुत नरम और प्यार भरी आवाज़ में कहा,

    “सीमा जी… गलती हो गई… बहुत बड़ी गलती हो गई… मैंने आपकी बात नहीं मानी… आप रो रही थीं, मना कर रही थीं, फिर भी मैं नहीं रुका… मुझे माफ़ कर दो… अबसे कभी नहीं होगा… वादा है…”

    सीमा रोते-रोते राहुल की छाती में चेहरा छुपाए हुए थीं। राहुल ने उन्हें और कसकर गले लगाया। उनकी पीठ पर हल्के-हल्के हाथ फेरता रहा। वो बार-बार माफी माँगता रहा,

    “मैं बहुत गलत था… आपकी चूत पहले से ही सूजी हुई थी… फिर भी मैंने 6 इंच तक घुसा दिया… आपकी चीखें सुनकर भी मैं नहीं रुका… मुझे माफ़ कर दो सीमा जी… मैं आगे से हमेशा आपकी बात मानूँगा… आप जितना कहोगी उतना ही करूँगा… प्लीज रोना बंद करो…”

    राहुल ने उनके गालों से आँसू पोंछे, माथे पर किस किया, फिर दोनों गालों पर किस किया। वो बहुत प्यार से बातें कर रहा था — “आप मेरे लिए बहुत स्पेशल हो… मैं आपको कभी दर्द नहीं पहुँचाना चाहता था… बस भूख में होश नहीं रहा… अब कभी नहीं…”

    सीमा की रोना थोड़ा कम हुआ, लेकिन दर्द बढ़ता जा रहा था। उनकी चूत में जलन और सूजन इतनी तेज़ हो गई थी कि वो बार-बार कराह रही थीं — “आह्ह… राहुल… बहुत जलन हो रही है… दर्द… बहुत दर्द…”

    राहुल ने तुरंत उठकर इंटरकॉम फोन उठाया और मैड को बुलाया। 
    “रीना… जल्दी से बर्फ़ ले आओ… ज्यादा बर्फ़… और एक साफ़ कपड़ा भी।”

    रीना कुछ ही मिनट में बर्फ़ का कटोरा और साफ़ तौलिया लेकर आई। उसने ट्रे रखी और चुपचाप बाहर चली गई।

    राहुल ने बर्फ़ के टुकड़े कपड़े में लपेटे और बहुत धीरे-धीरे सीमा की सूजी हुई चूत पर लगाने लगा। ठंडी बर्फ़ छूते ही सीमा का शरीर हल्का सा काँप गया। “आह्ह… ठंडा… राहुल… धीरे…” राहुल ने बर्फ़ को बहुत नरम हाथों से उनकी फाँक पर, क्लिटोरिस पर और सूजे हुए हिस्से पर घुमाया। बर्फ़ पिघल रही थी और ठंडा पानी उनकी जाँघों पर बह रहा था। राहुल ने 10-12 मिनट तक लगातार बर्फ़ लगाई। धीरे-धीरे सीमा की जलन कम होने लगी। उनकी साँसें थोड़ी शांत हुईं।

    जब दर्द थोड़ा कम हुआ तो राहुल ने सीमा को अपनी गोद में उठा लिया। दोनों नंगे ही एक-दूसरे से चिपके बैठे थे। राहुल ने उन्हें बहुत प्यार से पूछा,

    “सीमा जी… एक बात बताओ ना… तुम्हारा एक लड़का है ना? वो किसकी pregnancy थी? वो निकला है यहीं से… तुम्हारी चूत से ही निकला होगा ना? फिर तुम इतना बड़ा लंड क्यों नहीं सह पा रही हो? अगर बच्चा निकल सकता है तो मेरा लंड भी तो अंदर जा सकता था…”

    सीमा ने राहुल की छाती पर सिर रखे हुए ही थोड़ी देर चुप रही। उनकी साँसें एक पल के लिए रुक गईं। फिर उन्होंने धीरे-धीरे सिर उठाया। उनकी आँखें अभी भी नम थीं। उन्होंने राहुल की आँखों में देखा और बहुत धीमी, शर्मीली लेकिन स्पष्ट आवाज़ में बोलीं,

    “राहुल… बात ये नहीं है… 
    मेरा बेटा मेरे पति का ही है… लेकिन वो मेरी चूत से नहीं निकला। 
    डॉक्टर ने कहा था कि मेरी चूत बहुत टाइट है और बच्चा बड़ा था… इसलिए नॉर्मल डिलीवरी नहीं हो सकती थी। उन्होंने C-section (ऑपरेशन) कर दिया। 
    बच्चा मेरी पेट की चीर-फाड़ करके निकाला गया… मेरी चूत कभी खुली ही नहीं। 
    वो आज भी वैसी की वैसी टाइट और संकरी है… जितनी शादी के समय थी।”

    सीमा ने राहुल की छाती पर हाथ फेरते हुए आगे कहा,

    “मेरे पति बहुत अच्छे इंसान हैं राहुल… 
    वे हमेशा मेरी इज्जत करते थे। कभी ज़ोर नहीं लगाया। हफ्ते में सिर्फ़ एक-दो बार… वो भी बहुत धीरे और प्यार से… कभी 3-4 मिनट से ज्यादा नहीं। 
    मैंने कभी उनसे ज़्यादा माँगा भी नहीं… शर्म आती थी। 
    पर अंदर ही अंदर मेरी भूख बढ़ती जा रही थी। 
    जब उन्होंने खुद कहा कि ‘अगर तुम किसी और से संतुष्ट होना चाहो तो करवा लो… मैं मना नहीं करूँगा’… तब मुझे लगा कि अब मौका है। 
    और जब तुम्हारा चेकअप हुआ… रिपोर्ट आई… 11 इंच लंबा और 4 इंच मोटा… तो पति ने खुद कहा — ‘ये लड़का सही है… इसे रख लो… लेकिन राज़ रहे’।”

    सीमा की आवाज़ में पति के लिए सम्मान और कृतज्ञता दोनों थी। उन्होंने राहुल की गर्दन में चेहरा छुपा लिया और धीरे से बोलीं,

    “मेरे पति ने मुझे कभी मजबूर नहीं किया… कभी गाली नहीं दी… कभी बाहर नहीं रखा… सब कुछ दिया… पैसे, घर, इज्जत, बेटा… बस एक चीज़ नहीं दे पाए — वो संतुष्टि… जो एक औरत को चाहिए। 
    इसलिए उन्होंने मुझे आजादी दी… ताकि मैं खुश रह सकूँ। 
    मैं उनके बहुत आभारी हूँ राहुल…”

    राहुल ने सीमा को और कसकर गले लगा लिया। दोनों की नंगी देह एक-दूसरे में पूरी तरह समा गई। राहुल ने सीमा के माथे पर, फिर दोनों गालों पर, फिर होंठों पर बहुत प्यार भरा किस किया। किस लंबा, गहरा और भावुक था। उनकी जीभें धीरे-धीरे एक-दूसरे में घुल गईं। किस के दौरान राहुल सीमा की पीठ पर हल्के-हल्के हाथ फेरता रहा। सीमा ने भी राहुल की गर्दन में हाथ डालकर जवाब दिया।

    किस खत्म होने पर दोनों एक-दूसरे की आँखों में देखते रहे। कोई शब्द नहीं, सिर्फ़ गहरी नज़रें। फिर सीमा ने राहुल की छाती पर सिर रख दिया। राहुल ने उन्हें अपनी बाँहों में कसकर भर लिया। दोनों पूरी तरह नंगे, एक-दूसरे की गर्माहट में लिपटे हुए थे। सीमा की भारी छातियाँ राहुल की छाती से दब रही थीं, उनकी जाँघें राहुल की जाँघों के बीच फँसी हुई थीं।

    राहुल ने सीमा के बालों में उँगलियाँ फिराईं और बहुत धीरे से फुसफुसाया, 
    “सो जाओ सीमा जी… मैं तुम्हारे पास हूँ…”

    सीमा ने आँखें बंद कर लीं। उनकी साँसें धीमी और शांत हो गईं। राहुल भी उनकी गरमाहट में डूबते हुए आँखें बंद कर लीं।

    दोनों नंगे ही, एक-दूसरे से चिपके हुए, गहरी नींद में सो गए। कमरे में सिर्फ AC की हल्की आवाज़ और बाहर हवा में पेड़ों की सरसराहट थी।

    राहुल की नींद सुबह के 7:40 बजे खुली। 

    जैसे ही उसकी आँखें खुलीं, सबसे पहले जो महसूस हुआ वो था — गर्म, नरम, गीली जीभ। सीमा उसके पैरों के बीच घुटनों के बल बैठी हुई थीं। उनकी लंबी, काली बालों की लटें राहुल की जाँघों पर बिखरी हुई थीं। उन्होंने राहुल के 11 इंच लंबे और 4 इंच मोटे लंड को एक हाथ में पकड़ रखा था और अपनी गर्म जीभ से उसकी गोतियों को चाट रही थीं। 

    एक-एक गोती को मुँह में लेकर बहुत प्यार से चूस रही थीं। जीभ चारों तरफ घुमा रही थीं, हल्के से चबा रही थीं, फिर मुँह में लेकर नरम-नरम चूस रही थीं। राहुल का पूरा लंड पहले से ही सख्त हो चुका था और पेट पर तना हुआ खड़ा था। सीमा की सलाइवा गोतियों से लेकर लंड की जड़ तक बह रहा था। 

    राहुल चुपचाप लेटा रहा। उसने आँखें बंद नहीं कीं। बस देखता रहा। सीमा की आँखें बंद थीं, चेहरा पूरी तरह भूख और समर्पण में डूबा हुआ था। उनकी भारी छातियाँ लटक रही थीं और हर हलचल के साथ हिल रही थीं। 

    कुछ देर बाद सीमा ने लंड को नीचे सरकाया और उसका सिरा मुँह में ले लिया। उन्होंने सिर्फ 3 इंच तक ही लंड को मुँह में लिया। उनके होंठ लंड की मोटाई से पूरी तरह फैल गए थे। वो धीरे-धीरे ऊपर-नीचे करने लगीं। गर्म, गीला मुँह लंड को निचोड़ रहा था। “मम्म… मम्म…” की हल्की आवाज़ कमरे में गूँज रही थी। 

    राहुल अब और नहीं देख सकता था। उसने सीमा के बाल पकड़े और उन्हें ऊपर खींच लिया। फिर खुद उनके ऊपर चढ़ गया। उसने सीमा को पीठ के बल लिटाया और उनकी दोनों छातियों को दोनों हाथों से थाम लिया। नरम, भारी मांस उँगलियों में दब गया। उसने एक निप्पल को मुँह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगा। जीभ से घुमाया, हल्के से काटा। दूसरी छाती को हाथ से मसलता रहा। सीमा की आहें निकलने लगीं — “आह्ह… राहुल… और जोर से… चूसो… उफ्फ…”

    राहुल ने लगातार 8-10 मिनट तक उनकी छातियों को चूसा। फिर वो नीचे सरका। सीमा की जाँघें अपने आप फैल गईं। राहुल ने उनकी चूत पर मुंह रख दिया और जीभ से पूरी फाँक चाटने लगा। क्लिटोरिस को घुमाया, अंदर जीभ डालकर चूसने लगा। सीमा की कमर बार-बार ऊपर उठ रही थी। उनकी आहें तेज़ हो गईं — “आह्ह्ह… राहुल… तुम्हारी जीभ… बहुत अच्छी… हाँ… चूसो… मेरी चूत चूसो…”

    ठीक 20 मिनट बाद सीमा का शरीर सख्त हो गया। उनकी चूत राहुल की जीभ को कसकर दबाने लगी। उन्होंने जोर से चीख मारी — “आआह्ह्ह… राहुल… मैं… आ गई… आह्ह्ह…” 
    पहला पानी निकला। गर्म, पतला रस राहुल के मुँह और चेहरे पर बह गया। सीमा का पूरा शरीर सिहर उठा। वो हाँफ रही थीं।

    सीमा ने राहुल को हल्के से धकेला और उठ बैठीं। उनकी साँसें अभी भी तेज़ थीं। उन्होंने बेडसाइड फोन उठाया और मैड को बुलाया। 

    रीना तुरंत आई। उसने बिना एक शब्द बोले बेडसाइड ड्रॉअर से Trojan Magnum XL का पैकेट निकाला। पैकेट फाड़ा, कंडोम निकाला और राहुल के सामने घुटनों के बल बैठकर बहुत सावधानी से लंड पर चढ़ा दिया। कंडोम लंड की 4 इंच मोटाई पर पूरी तरह तन गया।

    रीना ने अपनी साड़ी ऊपर करके standing doggy-style पोजीशन में आ गई। वो सामने वाले बड़े टीबल पर झुक गई। उसकी गोल, मोटी गांड ऊपर उठी हुई थी। साड़ी कमर तक लिपटी हुई थी। उसकी चूत पीछे से पूरी तरह खुली हुई दिख रही थी।

    सीमा ने राहुल की तरफ देखा। उनकी आवाज़ अभी भी थोड़ी काँप रही थी, 
    “राहुल… सिर्फ आधा… सिर्फ 5.5 इंच… उससे ज़्यादा मत डालना… प्लीज…”

    राहुल ने रीना की कमर पकड़ी। लंड की नोक को उसकी चूत पर रखा और धीरे-धीरे आधा (5.5 इंच) अंदर डाल दिया। रीना की आँखें फट गईं, लेकिन वो चुप रही। राहुल ने उसी पोजीशन में धीमी गति से चोदना शुरू किया।

    45 मिनट तक वो लगातार उसी standing doggy-style पोजीशन में रीना को चोदता रहा। हर धक्का गहरा और नियंत्रित था। रीना की गांड हर धक्के पर लहरा रही थी। कमरे में सिर्फ फच-फच… फच-फच… की तेज़ आवाज़ और रीना की दबी हुई आहें गूँज रही थीं। 

    सीमा पूरे समय बेड पर बैठी देख रही थीं। उनकी आँखें नम थीं, लेकिन वो कुछ नहीं बोलीं।

    रीना (मैड) ने राहुल के लंड से कंडोम उतारा, उसे टिश्यू में लपेटकर साइड टेबल पर रख दिया। फिर उसने अपनी साड़ी नीचे की तरफ सरकाई, कमर पर कसकर बाँधा, ब्लाउज़ का हुक ठीक किया और बिना एक शब्द बोले, बिना किसी सवाल या भावना दिखाए चुपचाप कमरे से बाहर चली गई। दरवाज़ा धीरे से बंद हो गया।

    राहुल अभी भी बेड पर बैठा था। उसका लंड अभी भी आधा सख्त था। उसने सीमा की तरफ देखा, जो बेड पर थकी हुई लेटी हुई थीं। उनकी चूत अभी भी सूजी हुई और लाल थी। राहुल ने धीरे से पूछा,

    “सीमा जी… ये मैड… रीना… बिना किसी सवाल के, बिना कुछ कहे… सब कुछ कर देती है? सेक्स भी… और इतनी आसानी से…?”

    सीमा ने धीरे से सिर उठाया। उनकी आँखें अभी भी नम थीं। उन्होंने राहुल की छाती पर हाथ रखा और बहुत धीमी, थकी हुई लेकिन स्पष्ट आवाज़ में बताया,

    “रीना विधवा है राहुल… सिर्फ 27 साल की… उसका पति दो साल पहले एक्सीडेंट में मर गया। 
    उसके बाद से उसकी ज़िंदगी में कोई पुरुष नहीं आया। 
    वो यहाँ फार्महाउस में अकेली काम करती है। मैंने उसे पूरा भरोसा दिया है। 
    उसे पता है कि यहाँ जो होता है, वो राज़ रहेगा। 
    उसकी अपनी भी इच्छा होती है… लेकिन वो कभी किसी से कुछ नहीं माँगती। 
    मैं उसकी सब कुछ हूँ — उसकी मालकिन भी, सहारा भी, और कभी-कभी… उसकी इच्छा पूरी करने वाली भी। 
    इसलिए वो बिना कुछ पूछे, बिना शर्माए, जो मैं कहती हूँ, वो करती है।”

    सीमा ने राहुल की जाँघ पर हाथ फेरा और बोलीं, 
    “चलो… अब नहाते हैं।”

    दोनों नंगे ही उठे और अटैच्ड बाथरूम में चले गए। बाथरूम बहुत बड़ा और लग्जरी था — बीच में बड़ा जकूजी टब, चारों तरफ शीशे, हल्की नीली लाइट्स और गर्म पानी का सिस्टम।

    सीमा ने जकूजी का नल खोला। गर्म पानी तेज़ी से भरने लगा। दोनों नंगे ही टब में उतर गए। गर्म पानी उनके नंगे बदन को छूते ही दोनों सिहर गए। सीमा राहुल की गोद में बैठ गईं। उनकी पीठ राहुल की छाती से सटी हुई थी। राहुल ने उन्हें पीछे से गले लगा लिया। उनकी भारी छातियाँ पानी के ऊपर तैर रही थीं।

    राहुल ने सीमा की गर्दन चूमनी शुरू की। फिर उनके कंधे, फिर कान। सीमा की साँसें फिर से भारी होने लगीं। राहुल ने उन्हें टब के किनारे की तरफ मोड़ा। सीमा दोनों हाथों से टब का किनारा पकड़कर झुक गईं। राहुल ने उनके पीछे बैठकर उनकी चूत को दोनों हाथों से फैलाया और जीभ से चाटना शुरू कर दिया।

    गर्म पानी की धार उनके शरीर पर गिर रही थी। राहुल की जीभ सीमा की चूत की फाँक पर घूम रही थी। क्लिटोरिस को चूस रहा था, अंदर जीभ डालकर चूस रहा था। सीमा की आहें निकलने लगीं — “आह्ह… राहुल… पानी में… बहुत मजा आ रहा है… हाँ… चूसो…”

    राहुल ने 12-15 मिनट तक उनकी चूत को चाटा। गर्म पानी और जीभ का मिश्रण सीमा को पागल कर रहा था। आखिर में सीमा का शरीर सख्त हो गया। उन्होंने जोर से चीख मारी — “आह्ह्ह… राहुल… फिर से… आ गया… आह्ह्ह…” 
    उनकी चूत से दूसरा पानी निकला। गर्म पानी के साथ उनका रस टब में मिल गया।

    सीमा थककर राहुल की गोद में आ गईं। अब राहुल ने उन्हें अपनी तरफ मोड़ा। उसने अपनी छातियों के बीच अपना 11 इंच लंबा और 4 इंच मोटा लंड रख लिया। फिर दोनों हाथों से सीमा की छातियों को आपस में दबाकर लंड को बीच में फँसा लिया। धीरे-धीरे आगे-पीछे करना शुरू कर दिया।

    लंड की नोक सीमा की ठोड़ी तक पहुँच रही थी। छातियों का नरम, गर्म, गीला मांस लंड को चारों तरफ से निचोड़ रहा था। राहुल ने 30 मिनट तक लगातार छातियों के बीच लंड रगड़ा। कभी तेज़, कभी धीरे। सीमा भी अपनी छातियों को और जोर से दबा रही थीं। लेकिन राहुल का पानी फिर भी नहीं निकला। लंड वैसा का वैसा सख्त और तना हुआ था।

    आखिरकार सीमा ने राहुल की आँखों में देखा। उन्होंने अपना एक हाथ नीचे ले जाकर लंड को पकड़ लिया और जोर-जोर से मुठ मारने लगीं। दूसरा हाथ गोतियों को सहला रहा था। उनकी उँगलियाँ बहुत तेज़ी से ऊपर-नीचे हो रही थीं।

    कुछ ही मिनट बाद राहुल का शरीर तन गया। उसने लंबी साँस ली और सीमा के हाथ पर गाढ़ा, गर्म, सफेद वीर्य की मोटी-मोटी धार निकलने लगी। बहुत सारा पानी सीमा की हथेली पर, उनकी छातियों पर और पानी में फैल गया।

    दोनों ने कुछ देर जकूजी में ही आराम किया। फिर बाहर निकलकर नहाए, तौलिए से शरीर पोंछा और कपड़े पहन लिए — राहुल ने नई शर्ट-पैंट, सीमा ने हल्की साड़ी।

    दोनों नाश्ते के लिए बालकनी की तरफ चले गए।

    नाश्ते के समय ठीक 8:45 बजे मैड (रीना) बालकनी में आई। उसके हाथ में बड़ा ट्रे था। ट्रे पर दो प्लेट्स में ऑमलेट, टोस्ट, फ्रेश फ्रूट सलाद, ब्रेड बटर, कॉफी और ऑरेंज जूस रखा हुआ था। रीना ने ट्रे को टेबल पर रखा, दोनों की तरफ देखा और बिना कुछ बोले मुस्कुराते हुए वापस चली गई।

    राहुल और सीमा दोनों ने नाश्ता शुरू किया। सुबह की हल्की ठंडी हवा बालकनी में आ रही थी। सीमा ने सफेद साड़ी पहनी थी, जिसमें उनकी भारी छातियाँ हल्के से उभर रही थीं। राहुल नई शर्ट और ट्राउज़र में था।

    दोनों ने कुछ देर चुपचाप खाया। फिर सीमा ने राहुल की तरफ देखकर धीरे से कहा, 
    “राहुल… कल रात तुमने मुझे बहुत दर्द दिया था… लेकिन आज सुबह तुमने बहुत प्यार से संभाला… थैंक यू।”

    राहुल मुस्कुराया और बोला, “मैंने वादा किया था ना… अबसे हमेशा आपकी बात मानूँगा।”

    सीमा ने हल्के से सिर हिलाया और दोनों ने फिर से खाना जारी रखा। बीच-बीच में छोटी-छोटी बातें हुईं — मौसम की, फार्महाउस की खूबसूरती की, और राहुल की नई शॉपिंग की। सीमा ने राहुल की नई शर्ट की तारीफ की और हँसते हुए कहा, “अब तुम और भी हैंडसम लग रहे हो।”

    नाश्ता खत्म होने के बाद दोनों बालकनी में ही बैठे रहे। सीमा ने राहुल का हाथ अपने हाथ में ले लिया और हल्के से सहलाने लगीं। ठीक उसी समय सीमा का फोन बज उठा। उन्होंने स्क्रीन देखा और फोन उठाया। बात कुछ मिनट चली। सीमा ने “हाँ”, “ठीक है” और “मैं तैयार कर लूँगी” जैसे शब्द कहे और फोन काट दिया।

    उन्होंने राहुल की तरफ देखकर कहा, 
    “चलो… अब वापस चलते हैं।”

    दोनों उठे। राहुल ने अपना बैग उठाया। सीमा ने ड्राइवर को बुलाया। काली BMW तैयार थी। दोनों कार में बैठ गए। कार फार्महाउस से निकलकर हाईवे की तरफ चल पड़ी।

    रास्ते में सीमा ने राहुल की तरफ मुड़कर धीरे से बताया,

    “राहुल… अब हम दूसरी बार मिलेंगे तो मेरे दूसरे और भी बड़े, और ज़्यादा लग्जरी फार्महाउस पर। वो फार्म 15 एकड़ में फैला हुआ है। वहाँ प्राइवेट स्विमिंग पूल, जकूजी, होम थिएटर, स्पा रूम और बहुत बड़ा गार्डन है। वहाँ सिर्फ हम दोनों ही रहेंगे। कोई और नहीं।”

    सीमा ने राहुल का हाथ पकड़ लिया और बोलीं, 
    “वहाँ हम और आराम से, और धीरे-धीरे आगे बढ़ेंगे। मैं चाहती हूँ कि तुम मुझे धीरे-धीरे तैयार करो… ताकि मैं तुम्हारा पूरा लंड ले सकूँ।”

    राहुल ने सिर हिलाया। सीमा ने अपनी पर्स से 50,000 रुपये नोटों में निकाले और राहुल को थमा दिए।

    “ये लो…

    ओर हम 1.5 महीने बाद हम पेरिस जा रहे हैं। वहाँ भी हम साथ रहेंगे। 
    अब घर जाकर आराम करो। अगले हफ्ते या उसके बाद मैं तुम्हें बुलाऊँगी।”

    राहुल ने पैसे ले लिए और धन्यवाद कहा। कार शहर में दाखिल हो चुकी थी। कुछ देर बाद कार राहुल के घर के गेट पर रुक गई।

    सीमा ने झुककर राहुल के गाल पर हल्का किस किया और फुसफुसाई, 
    “ख्याल रखना।

    राहुल कार से उतरा। BMW धीरे-धीरे आगे बढ़ गई। राहुल हाथ में 50,000 रुपये और मन में नई उम्मीद लेकर घर के अंदर चला गया।

    राहुल के लिए अगले सात दिन सामान्य लेकिन व्यस्त गुजरे। सुबह जल्दी उठकर वो जिम जाता, फिर नाश्ता करके शहर घूमने निकल पड़ता। कभी पुरानी किताबों की दुकान पर घंटों बिताता, कभी मॉल में घूमता-फिरता, कभी अकेले कैफे में बैठकर कॉफी पीते हुए सीमा की याद में खो जाता। 

    तीन दिन बाद उसने दोस्तों के साथ शॉपिंग की — नई घड़ी, कुछ अच्छे परफ्यूम और दो प्रीमियम शर्ट्स खरीदे। शाम को कभी बीच पर घूमता, कभी पुराने किले की दीवारों पर बैठकर सूरजास्त देखता। लेकिन हर पल उसके दिमाग में सिर्फ़ एक ही चेहरा घूमता — सीमा। उनकी भारी छातियाँ, उनकी सूजी हुई चूत, उनकी चीखें, उनकी रोती हुई आँखें… सब कुछ बार-बार याद आता। वो रात को बिस्तर पर लेटकर बार-बार सोचता, “कब बुलाएँगी…?”

    7वें दिन शाम 6:45 बजे सीमा का मैसेज आया।

    “राहुल, अगले हफ्ते मिलेंगे। अभी मेरे बिजनेस में थोड़ा काम है। तैयार रहना।”

    राहुल ने तुरंत रिप्लाई किया — “जी मैडम, तैयार रहूँगा।”

    फिर करीब 15 दिन और निकल गए। राहुल ने इन दिनों को भी अच्छे से बिताया — सुबह रनिंग, दोपहर में दोस्तों के साथ घूमना-फिरना, एक दिन नई कार देखने गया, एक दिन सिनेमा गया। लेकिन मन पूरी तरह सीमा पर था।

    15वें दिन रात 11:20 बजे फोन पर मैसेज आया।

    “सुबह 10 बजे तैयार रहना। गाड़ी आ जाएगी।”

    राहुल ने मुस्कुराते हुए “ओके मैडम” लिख दिया और सो गया।



    अगली सुबह — 9:50 बजे

    राहुल पहले से तैयार खड़ा था। नई शर्ट, डिज़ाइनर ट्राउज़र, नया परफ्यूम। ठीक 10 बजे घर के गेट के बाहर एक शानदार ब्लैक कलर की Mercedes-Maybach आकर रुकी। कार की चमक इतनी तेज़ थी कि राहुल को आँखें सिकोड़नी पड़ीं। ड्राइवर ने दरवाज़ा खोला। राहुल बैठ गया।

    कार सीधे शहर के सबसे लग्जरी सैलून की तरफ चल पड़ी। सैलून पहुँचते ही राहुल को प्राइवेट VIP रूम में ले जाया गया।

    पहले बाल और दाढ़ी का सेशन शुरू हुआ। स्टाइलिश हेयरकट — साइड्स फेड, ऊपर थोड़ा वॉल्यूम। दाढ़ी पूरी क्लीन शेव। फिर फुल बॉडी वैक्सिंग। राहुल को नंगा करके गर्म वैक्स लगाया गया। छाती, पीठ, हाथ, पैर, जाँघें, लंड, अंडकोष और गांड तक हर जगह के बाल एक-एक करके निकाले गए। जलन हुई, लेकिन जब सब हो गया तो राहुल का शरीर बिल्कुल स्मूद, चमकदार और नया-नया लग रहा था।

    वैक्सिंग के बाद अच्छा मसाज और परफ्यूम लगाया गया।

    जब राहुल बाहर निकला तो सीमा बाहर ही खड़ी थीं। आज वो काली साड़ी में थीं — बहुत हॉट और पावरफुल लग रही थीं। उनकी भारी छातियाँ ब्लाउज़ में कसकर भरी हुई थीं। उन्होंने राहुल को देखते ही मुस्कुराकर गले लगा लिया और कान में फुसफुसाईं,

    “बहुत अच्छे लग रहे हो… चलो, नया फार्महाउस चलते हैं।”

    दोनों Mercedes में बैठ गए। कार हाईवे पर दौड़ पड़ी।

    3 घंटे का सफर

    रास्ते में सीमा ने राहुल का हाथ पकड़ रखा था। उन्होंने बताया,

    “ये नया फार्महाउस मेरे सबसे बड़े प्रोजेक्ट में से एक है। 25 एकड़ में फैला हुआ है। अंदर-बाहर बहुत सारे नौकर हैं — गार्ड, गार्डनर, कुक, क्लीनर — सब। लेकिन अंदर वाले बंगले में सिर्फ़ हम दोनों और पुरानी मैड (रीना) होगी। कोई और नहीं।”

    कार ठीक 3 घंटे बाद नए फार्महाउस के विशाल गेट पर रुकी। गेट खुला। अंदर घुसते ही राहुल को आश्चर्य हुआ — इतना बड़ा फार्महाउस उसने पहले कभी नहीं देखा था। हरे-भरे लॉन, चारों तरफ ताड़ के पेड़, बड़ा स्विमिंग पूल, टेनिस कोर्ट, घुड़सवारी का एरिया और बीच में बहुत बड़ा, लग्जरी बंगला।

    बंगले के बाहर बहुत सारे नौकर काम कर रहे थे — गार्डनर लॉन काट रहे थे, कुछ लोग पूल साफ़ कर रहे थे। लेकिन जैसे ही कार बंगले के मुख्य द्वार के पास रुकी, सब नौकर दूर हट गए।

    अंदर सिर्फ़ पुरानी मैड (रीना) खड़ी थी। वो चुपचाप मुस्कुराई और दोनों का स्वागत किया।

    सीमा ने राहुल का हाथ पकड़ लिया। उनकी आँखों में इस बार बहुत तेज़ तड़प थी। उन्होंने राहुल को कान में फुसफुसाकर कहा,

    “राहुल… इस बार मैं बहुत तड़प रही हूँ… बहुत दिन हो गए… मुझे जल्दी से अंदर ले चलो…”

    यहाँ कहानी का अगला हिस्सा बहुत विस्तार से लिखा है:



    कार बंगले के मुख्य द्वार के ठीक सामने रुकी। सीमा ने राहुल का हाथ कसकर पकड़ लिया और लगभग खींचते हुए उसे अंदर ले गईं। जैसे ही मुख्य दरवाज़ा बंद हुआ, बाहर की दुनिया पूरी तरह कट गई। अंदर सिर्फ़ ठंडी AC की हवा, हल्की परफ्यूम की महक और दोनों की तेज़ होती साँसें थीं।

    सीमा ने राहुल को सीधे लिविंग रूम के बड़े, सॉफ्ट लेदर सोफे की तरफ ले जाया। बिना एक पल भी बर्बाद किए उन्होंने राहुल को सोफे पर धकेल दिया। राहुल पीठ के बल बैठ गया। सीमा तुरंत उसके सामने घुटनों के बल बैठ गईं।

    उनकी आँखों में भूख थी — बहुत दिनों की तड़प, बहुत दिनों की प्यास। उन्होंने राहुल की शर्ट के बटन एक-एक करके खोलने शुरू किए। हर बटन खुलने के साथ उनकी साँसें तेज़ होती जा रही थीं। शर्ट पूरी तरह खुलते ही उन्होंने राहुल की छाती पर हाथ रख दिया और नरम-नरम सहलाने लगीं। फिर ट्राउज़र की बेल्ट खोली, जिप नीचे की और पैंट को जाँघों तक सरका दिया। राहुल अब सिर्फ़ अंडरवियर में था।

    सीमा ने अंडरवियर को भी नीचे खींच दिया। राहुल का 11 इंच लंबा और 4 इंच मोटा लंड एकदम से बाहर आ गया — पहले से ही आधा सख्त और नब्ज की तरह धड़क रहा था।

    सीमा ने राहुल को सोफे पर और पीछे धकेला ताकि वो पूरी तरह लेट जाए। फिर उन्होंने खुद भी जल्दी-जल्दी अपने कपड़े उतारने शुरू कर दिए। साड़ी का पल्लू गिरा, ब्लाउज़ के हुक खोले, ब्रा उतारी। उनकी भारी 36D छातियाँ बाहर आ गईं। फिर साड़ी और पेटीकोट फिसलकर गिर गए। आखिर में उन्होंने पैंटी भी उतार दी और सिर्फ़ एक छोटी-सी काली बिकनी पहने रही। लेकिन कुछ सेकंड बाद उन्होंने बिकनी की ब्रा भी निकाल दी। अब उनकी छातियाँ पूरी तरह नंगी थीं।

    सीमा फिर से राहुल के पैरों के बीच बैठ गईं। उन्होंने दोनों हाथों से राहुल के लंड को पकड़ा और नीचे सरककर उसकी गोतियों को चूसना शुरू कर दिया। एक-एक गोती को मुँह में लेकर बहुत प्यार से चूस रही थीं। जीभ से घुमा रही थीं, हल्के से चबा रही थीं। राहुल की साँसें भारी हो गईं।

    फिर सीमा ने लंड को ऊपर किया और उसका सिरा मुँह में ले लिया। उन्होंने धीरे-धीरे 3 इंच तक लंड को मुँह में लिया और सहलाते हुए चूसने लगीं। उनकी गर्म जीभ लंड के नीचे वाले हिस्से पर घूम रही थी। कभी-कभी वो लंड को पूरी तरह मुँह से निकालकर सिर्फ़ नोक को चूसतीं, फिर फिर से अंदर ले लेतीं।

    राहुल ने हाथ बढ़ाकर सीमा की नंगी छातियों को थाम लिया और उन्हें चूसने लगा। एक निप्पल को मुँह में लेकर जोर-जोर से चूसता, दूसरी छाती को हाथ से मसलता। बीच-बीच में दोनों किस भी कर लेते। 

    इस तरह 25 मिनट बीत गए। 

    सीमा अब और नहीं रुक सकती थीं। उनकी चूत पहले से ही गीली हो चुकी थी। उन्होंने राहुल के लंड को मुँह से निकाला, उसकी तरफ देखा और हाँफते हुए कहा,

    “राहुल… अब जaldi… अंदर डाल दो… मैं बहुत तड़प रही हूँ…”

    यहाँ कहानी का अगला हिस्सा बहुत विस्तार से लिखा है:



    कार बंगले के मुख्य द्वार के ठीक सामने रुकी। सीमा ने राहुल का हाथ कसकर पकड़ लिया और लगभग खींचते हुए उसे अंदर ले गईं। जैसे ही मुख्य दरवाज़ा बंद हुआ, बाहर की दुनिया पूरी तरह कट गई। अंदर सिर्फ़ ठंडी AC की हवा, हल्की परफ्यूम की महक और दोनों की तेज़ होती साँसें थीं।

    सीमा ने राहुल को सीधे लिविंग रूम के बड़े, सॉफ्ट लेदर सोफे की तरफ ले जाया। बिना एक पल भी बर्बाद किए उन्होंने राहुल को सोफे पर धकेल दिया। राहुल पीठ के बल बैठ गया। सीमा तुरंत उसके सामने घुटनों के बल बैठ गईं।

    उनकी आँखों में भूख थी — बहुत दिनों की तड़प, बहुत दिनों की प्यास। उन्होंने राहुल की शर्ट के बटन एक-एक करके खोलने शुरू किए। हर बटन खुलने के साथ उनकी साँसें तेज़ होती जा रही थीं। शर्ट पूरी तरह खुलते ही उन्होंने राहुल की छाती पर हाथ रख दिया और नरम-नरम सहलाने लगीं। फिर ट्राउज़र की बेल्ट खोली, जिप नीचे की और पैंट को जाँघों तक सरका दिया। राहुल अब सिर्फ़ अंडरवियर में था।

    सीमा ने अंडरवियर को भी नीचे खींच दिया। राहुल का 11 इंच लंबा और 4 इंच मोटा लंड एकदम से बाहर आ गया — पहले से ही आधा सख्त और नब्ज की तरह धड़क रहा था।

    सीमा ने राहुल को सोफे पर और पीछे धकेला ताकि वो पूरी तरह लेट जाए। फिर उन्होंने खुद भी जल्दी-जल्दी अपने कपड़े उतारने शुरू कर दिए। साड़ी का पल्लू गिरा, ब्लाउज़ के हुक खोले, ब्रा उतारी। उनकी भारी 36D छातियाँ बाहर आ गईं। फिर साड़ी और पेटीकोट फिसलकर गिर गए। आखिर में उन्होंने पैंटी भी उतार दी और सिर्फ़ एक छोटी-सी काली बिकनी पहने रही। लेकिन कुछ सेकंड बाद उन्होंने बिकनी की ब्रा भी निकाल दी। अब उनकी छातियाँ पूरी तरह नंगी थीं।

    सीमा फिर से राहुल के पैरों के बीच बैठ गईं। उन्होंने दोनों हाथों से राहुल के लंड को पकड़ा और नीचे सरककर उसकी गोतियों को चूसना शुरू कर दिया। एक-एक गोती को मुँह में लेकर बहुत प्यार से चूस रही थीं। जीभ से घुमा रही थीं, हल्के से चबा रही थीं। राहुल की साँसें भारी हो गईं।

    फिर सीमा ने लंड को ऊपर किया और उसका सिरा मुँह में ले लिया। उन्होंने धीरे-धीरे 3 इंच तक लंड को मुँह में लिया और सहलाते हुए चूसने लगीं। उनकी गर्म जीभ लंड के नीचे वाले हिस्से पर घूम रही थी। कभी-कभी वो लंड को पूरी तरह मुँह से निकालकर सिर्फ़ नोक को चूसतीं, फिर फिर से अंदर ले लेतीं।

    राहुल ने हाथ बढ़ाकर सीमा की नंगी छातियों को थाम लिया और उन्हें चूसने लगा। एक निप्पल को मुँह में लेकर जोर-जोर से चूसता, दूसरी छाती को हाथ से मसलता। बीच-बीच में दोनों किस भी कर लेते। 

    इस तरह 25 मिनट बीत गए। 

    सीमा अब और नहीं रुक सकती थीं। उनकी चूत पहले से ही गीली हो चुकी थी। उन्होंने राहुल के लंड को मुँह से निकाला, उसकी तरफ देखा और हाँफते हुए कहा,

    “राहुल… अब जaldi… अंदर डाल दो… मैं बहुत तड़प रही हूँ…”

    राहुल ने सीमा को सोफे पर लिटाया। उसका 11 इंच लंबा और 4 इंच मोटा लंड अभी भी पूरी तरह खड़ा और नब्ज की तरह धड़क रहा था। सीमा की आँखों में प्यास थी, लेकिन राहुल ने एक पल रुककर सीमा की तरफ देखा और दृढ़ स्वर में कहा,

    “सीमा जी… कंडोम… पहले कंडोम लगाओ… मैं बिना कंडोम के कभी नहीं करूँगा…”

    सीमा ने राहुल की छाती पर हाथ रखा। उनकी साँसें बहुत तेज़ थीं। उन्होंने शर्माते हुए, लेकिन बहुत प्यार और तड़प के साथ कहा,

    “राहुल… मैं… मैं कंडोम भूल गई हूँ… घर से निकलते समय याद ही नहीं रहा… प्लीज… आज बिना कंडोम के ही कर लो… मैं बहुत तड़प रही हूँ… 15 दिन हो गए… मेरी चूत सूखी पड़ गई है…”

    राहुल ने तुरंत सिर हिला दिया। उसकी आवाज़ सख्त थी,

    “नहीं सीमा जी… मैंने वादा किया था… बिना कंडोम के कभी नहीं…”

    सीमा ने राहुल को कसकर गले लगा लिया। उनकी नंगी छातियाँ राहुल की छाती से पूरी तरह दब गईं। उन्होंने राहुल के कान में फुसफुसाते हुए, रोते-रोते, गिड़गिड़ाते हुए मनाना शुरू किया,

    “राहुल… प्लीज… सिर्फ़ आज के लिए… मैं प्रॉमिस करती हूँ… अगली बार से हमेशा कंडोम यूज़ करेंगे… लेकिन आज… आज मुझे रोक मत… मेरी चूत जल रही है… तुम्हारे बिना 15 दिन कैसे कटे… प्लीज… मैं तेरी हूँ… तेरी चूत हूँ… आज बिना कंडोम के भर दो मुझे…”

    सीमा ने राहुल के लंड को दोनों हाथों में पकड़ लिया और उसे अपनी चूत की फाँक पर रगड़ने लगीं। उनकी गर्म, गीली चूत लंड की नोक को छू रही थी। उन्होंने राहुल की आँखों में देखकर आँसू भरकर कहा,

    “देखो… कितनी गीली हो गई हूँ… सिर्फ़ तुम्हारे लंड को देखकर… प्लीज राहुल… आज एक बार… मैं तेरी हूँ…”

    राहुल कुछ पल तक चुप रहा। फिर उसकी भूख और सीमा की तड़प देखकर वो थोड़ा नरम पड़ा। उसने गहरी साँस ली और बोला,

    “ठीक है… लेकिन सिर्फ़ 4-5 इंच… उससे ज़्यादा नहीं…”

    सीमा ने राहुल को कसकर चूम लिया।

    यहाँ कहानी का वह हिस्सा बहुत ज्यादा विस्तार से लिखा है। 70 मिनट की चुदाई को हर 12-15 मिनट के अंतराल पर ब्रेकडाउन करके, हर झड़ने को अलग-अलग विस्तार से, सीमा की चीखों, आँसुओं, शरीर की हर हलचल, दर्द-मजा के मिश्रण और राहुल की बेरहमी को बारीकी से लिखा गया है।



    राहुल ने सीमा को बेड पर लिटाया। उसका 11 इंच लंबा और 4 इंच मोटा लंड बिना कंडोम के, पूरी तरह नंगा और चमकदार था। सीमा की सूजी हुई चूत पहले से ही गीली थी, लेकिन राहुल की भूख 15 दिनों की थी। उसने सीमा की जाँघें चौड़ी कीं और लंड की नोक को चूत की फाँक पर रखकर एक जोरदार धक्का मारा।

    पहले 12 मिनट

    राहुल ने शुरू में 5 इंच तक ही रखकर धीमी गति से चोदना शुरू किया। लेकिन जैसे-जैसे सीमा की चूत गीली होती गई, उसकी रफ्तार बढ़ती गई। हर धक्का अब गहरा और तेज़ होता जा रहा था। सीमा की भारी छातियाँ हर झटके के साथ ऊपर-नीचे उछल रही थीं। उनकी आँखें आधी बंद थीं और मुँह से लगातार आहें निकल रही थीं।

    “आह्ह… राहुल… धीरे… आह्ह… 5 इंच… बहुत मोटा लग रहा है… उफ्फ…”

    12वें मिनट में सीमा का शरीर अचानक सख्त हो गया। उनकी चूत राहुल के लंड को कसकर जकड़ने लगी। उन्होंने जोर से चीख मारी — “आआह्ह्ह… राहुल… पहली बार… आ गया… आह्ह्ह…” 
    उनकी चूत से गर्म पानी की पहली धार फूट पड़ी। पूरा शरीर सिहर उठा। सीमा की जाँघें काँप रही थीं। राहुल ने इस दौरान भी रफ्तार कम नहीं की। वो लगातार धक्के मारता रहा।

    12 से 28 मिनट तक

    राहुल की गति अब और तेज़ हो गई थी। लंड अब 5.5 इंच तक अंदर-बाहर हो रहा था। हर धक्के के साथ सीमा की चूत से सफ़ेद झाग बनने लगा था। उनकी छातियाँ जोर-जोर से उछल रही थीं। सीमा अब दर्द और मजा के मिश्रण में चीख रही थीं।

    “आह्ह… राहुल… बहुत तेज़… आह्ह… चूत फट रही है… लेकिन… मजा भी आ रहा है… हाँ… इसी तरह…”

    28वें मिनट में सीमा दूसरी बार झड़ गईं। इस बार झड़ना और भी तीव्र था। उनकी कमर ऊपर उठ गई, आँखें पलट गईं और उन्होंने लंबी चीख मारी — “आआह्ह्ह… दूसरी बार… राहुल… मैं मर रही हूँ… आह्ह्ह…” 
    चूत से दूसरा गर्म रस निकला और राहुल के लंड को और फिसलन भरा बना दिया। सीमा के आँसू बहने लगे थे। लेकिन राहुल रुका नहीं। उसने और जोर से पेलना जारी रखा।

    28 से 42 मिनट तक

    अब राहुल पूरी तरह जानवर बन चुका था। उसकी कमर मशीन की तरह चल रही थी। लंड 5.5-6 इंच तक अंदर जा रहा था। हर धक्के पर सीमा की गांड उठ रही थी। कमरे में सिर्फ चुदाई की तेज़ फच-फच आवाज़ और सीमा की चीखें गूँज रही थीं।

    सीमा अब लगातार रो रही थीं। “राहुल… बहुत हो गया… आह्ह… दर्द… मजा… दोनों… आह्ह्ह…”

    42वें मिनट में तीसरा ऑर्गेज्म आया। सीमा का पूरा शरीर सख्त हो गया। उन्होंने राहुल की पीठ पर नाखून गड़ा दिए और चीख पड़ीं — “तीसरी बार… आह्ह्ह… राहुल… मैं सह नहीं पा रही… आह्ह्ह…” 
    उनकी चूत बार-बार सिकुड़ रही थी। रस की तीसरी धार निकली। अब सीमा की साँसें फूल रही थीं और चेहरा लाल हो चुका था।

    42 से 55 मिनट तक

    राहुल की रफ्तार अब और बढ़ गई थी। वो पूरी ताकत से धक्के मार रहा था। सीमा की छातियाँ लाल हो गई थीं। उनकी चूत से सफ़ेद झाग अब और ज्यादा बन रहा था। सीमा अब चीख-चीखकर रो रही थीं।

    “राहुल… प्लीज… रुक जाओ… आह्ह… चौथी बार आने वाली है… मैं मर जाऊँगी…”

    55वें मिनट में चौथा ऑर्गेज्म आया। इस बार सीमा की चीख बहुत लंबी और तेज़ थी — “आआह्ह्ह… चौथी बार… राहुल… बहुत दर्द… लेकिन… आ गया… आह्ह्ह…” 
    उनका शरीर इतना जोर से काँपा कि राहुल को भी महसूस हुआ। चूत से चौथा रस निकला और बेडशीट को गीला कर दिया।

    55 से 68 मिनट तक

    राहुल अब पूरी तरह बेकाबू था। वो 6 इंच तक लंड अंदर डालकर जोर-जोर से पेल रहा था। सीमा की चूत पूरी तरह फैल चुकी थी। उनकी आवाज़ अब लगभग टूट चुकी थी। वो रो-रोकर गिड़गिड़ा रही थीं,

    “राहुल… पाँचवी बार… आह्ह… मैं सह नहीं पा रही… रुक जाओ… प्लीज…”

    68वें मिनट में पाँचवाँ ऑर्गेज्म आया। सीमा ने जोर से चीख मारी — “पाँचवी बार… आह्ह्ह… राहुल… मैं… मर गई… आह्ह्ह…” 
    उनका शरीर इतना जोर से सिहरा कि लग रहा था जैसे वो बेहोश हो जाएँगी। चूत से पाँचवाँ रस निकला। अब सीमा की साँसें बहुत तेज़ और छोटी हो गई थीं। उनका चेहरा आँसुओं से भीगा हुआ था।

    70 मिनट पूरे होने पर

    राहुल ने आखिरी 2 मिनट और भी तेज़ी से पेला। उसकी कमर मशीन की तरह चल रही थी। आखिरकार उसका शरीर तन गया। उसने सीमा की कमर को दोनों हाथों से कसकर पकड़ा और आखिरी 8-10 बहुत जोरदार धक्के मारे।

    फिर उसका गाढ़ा, गर्म वीर्य सीमा की चूत के अंदर फूट पड़ा। बहुत सारा, मोटा और गर्म वीर्य लगातार निकलता रहा। सीमा की चूत भर गई और अतिरिक्त वीर्य बाहर बहने लगा।

    जैसे ही राहुल ने लंड बाहर निकाला, सीमा की चूत से सफ़ेद वीर्य की मोटी धार निकलकर बेडशीट पर फैल गई। उनकी चूत बुरी तरह सूजी हुई, लाल और फड़क रही थी।

    सीमा पड़ी-पड़ी ज़ोर-ज़ोर से रो रही थीं। उनके आँसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। साँसें फूल रही थीं। शरीर अभी भी हल्का-हल्का काँप रहा था। उन्होंने काँपती हुई आवाज़ में रोते हुए कहा,

    “राहुल… 70 मिनट… पाँच बार… तुमने मुझे… पूरी तरह तोड़ दिया…”

  • रवि और शिल्पा की हनीमून की कहानी 1

    रवि और शिल्पा की हनीमून की कहानी

    शादी की रात। रवि और शिल्पा का घर जोड़ परिवार का था। पूरा घर मेहमानों से भरा पड़ा था। उनके कमरे का दरवाज़ा बिल्कुल गलियारे के पास था, बगल में रवि की माँ-बाप का कमरा, सामने चाचा-चाची का। दीवारें पतली थीं, आवाज़ थोड़ी भी ऊँची हुई तो पूरे घर में गूँज जाती। रवि ७.१ फीट लंबा, १०१ किलो वजन वाला विशालकाय शरीर वाला था। उसकी छाती चौड़ी, बाहें मोटी, कंधे भारी। शिल्पा सिर्फ ४.५ फीट की, ४२ किलो वजन की नन्ही-सी, बेहद पतली-पतली, गोरी, नाजुक। उसके बाल कमर तक के, चेहरा गोल-मटोल, आँखें बड़ी-बड़ी।

    दोनों रात के ११:४५ बजे कमरे में आए। शिल्पा अभी भी भारी लाल लेहंगे में थी, दुपट्टा कंधे पर, मेकअप ताज़ा। रवि शेरवानी में, लेकिन उसका विशाल शरीर कमरे को छोटा कर रहा था। दरवाज़ा बंद करते ही रवि ने शिल्पा को धीरे से अपने सीने से लगा लिया। उसकी एक बाँह शिल्पा की पूरी कमर को घेर रही थी। “डर लग रहा है ना?” रवि ने बहुत धीमी आवाज़ में पूछा। शिल्पा ने सिर्फ सिर हिलाया, उसकी साँसें तेज़ हो गई थीं।

    रवि ने शिल्पा के गाल थामे, उसके होंठों पर अपना मोटा, गर्म होंठ रख दिया। पहला किस – बहुत नरम, बहुत धीमा। उसने शिल्पा के निचले होंठ को चूसा, फिर ऊपरी को, फिर अपनी जीभ हल्के से उसके मुंह में डाली। शिल्पा की जीभ से हल्का-हल्का खेला। किस ४-५ मिनट तक चला। दोनों की साँसें मिल रही थीं। शिल्पा के हाथ रवि की चौड़ी छाती पर रखे हुए थे, लेकिन वो कुछ ज्यादा नहीं कर पा रही थी। रवि जानता था – अगर आज उसने आगे बढ़ाया तो शिल्पा की चीख पूरे घर में गूँज जाएगी। उसका १३ इंच लंबा और ४.५ इंच मोटा लंड पहले से ही पैंट में तन गया था, लेकिन उसने खुद को रोका।

    किस खत्म होने के बाद रवि ने शिल्पा को बेड पर लिटाया। दोनों कपड़े उतारे बिना ही लेट गए। रवि ने शिल्पा को अपनी बाँहों में भर लिया, उसकी पीठ पर हाथ फेरता रहा। “कल से ४ दिन तक हम यहीं रहेंगे… बस किस ही करेंगे… कुछ और नहीं। घर में आवाज़ बहुत जाती है। मैं नहीं चाहता कि कोई सुन ले। हनीमून पर जाकर सब कुछ होगा,” रवि फुसफुसाया। शिल्पा ने शर्म से सिर हिलाया और रवि के सीने में मुँह छिपा लिया। दोनों थोड़ी देर और किस करते रहे – कभी-कभी गहरे, कभी हल्के। रात के १:३० बजे दोनों थककर सो गए।

    अगले ४ दिन घर में ही बीते। हर रात रवि शिल्पा को सिर्फ किस करता। कभी बेड पर लिटाकर, कभी बालकनी में खड़े होकर। कभी-कभी शिल्पा के गाल, गर्दन, कान चूमता। लेकिन उसके हाथ कभी ब्रा या पैंटी के अंदर नहीं गए। शिल्पा भी हर रात शर्माती, लेकिन रवि की विशाल बाँहों में सुरक्षित महसूस करती। रवि का १३ इंच का लंड हर रात तन जाता, लेकिन वो खुद को रोक लेता। “हनीमून पर… वहाँ कोई नहीं सुनेगा… वहाँ तुम जितना चिल्लाना चाहो चिल्ला सकती हो,” वो शिल्पा के कान में फुसफुसाता।

    ४ दिन बाद हनीमून। दोनों पेरिस के लिए निकल पड़े। वहाँ एक लग्जरी रिसॉर्ट बुक था – Seine नदी के किनारे, प्राइवेट विला टाइप का सूट। पूरा सूट १२०० स्क्वायर फीट का, अलग बालकनी, प्राइवेट जकूजी, सॉफ्ट लाइटिंग। शाम के ७:३० बजे वे रिसॉर्ट पहुँचे। कमरा गुलाब की पंखुड़ियों और मोमबत्तियों से सजा हुआ था। बाहर फ्रेंच विंडो से एफिल टावर की रोशनी दिख रही थी।

    दरवाज़ा बंद करते ही रवि ने शिल्पा को उठा लिया। शिल्पा उसकी विशाल बाँहों में बिल्कुल खिलौने जैसी लग रही थी – ४.५ फीट की वो नन्ही लड़की ७.१ फीट के रवि की गोद में समा गई। रवि ने उसे बेड पर लिटाया। “अब कोई डर नहीं… कोई आवाज़ नहीं… सिर्फ तुम और मैं,” उसने कहा।

    रवि ने बहुत धीरे-धीरे शिल्पा का ट्रैवलिंग टॉप उतारा। फिर स्कर्ट का बटन खोला। शिल्पा की साँसें तेज़ हो गईं। रवि ने ब्रा का हुक खोला। शिल्पा के छोटे-छोटे, लेकिन बहुत नाजुक, गुलाबी-भूरे निप्पल्स वाले स्तन बाहर आ गए। रवि ने एक लंबी साँस ली। फिर उसने शिल्पा की पैंटी भी उतार दी। अब शिल्पा पूरी तरह नंगी लेटी थी – उसका छोटा-सा, चिकना, गोरा शरीर, पतली कमर, छोटी जाँघें, बिल्कुल नन्ही चूत।

    रवि ने खुद के कपड़े उतारे। उसका १०१ किलो का विशाल शरीर सामने आया। जब उसने अपनी पैंट उतारी तो १३ इंच लंबा और ४.५ इंच मोटा, नसों वाला, भारी लंड बाहर आ गया – पूरा खड़ा, सिर चमक रहा था। शिल्पा की आँखें फैल गईं, लेकिन रवि ने उसे चुप कराया। “आज सिर्फ ये…” उसने कहा।

    रवि शिल्पा के ऊपर झुका। उसने दोनों हाथों से शिल्पा के स्तनों को थामा। वे उसके विशाल हाथों में पूरी तरह समा गए। फिर उसने एक निप्पल मुंह में ले लिया। बहुत धीरे, बहुत प्यार से चूसना शुरू किया। जीभ से घुमाया, होंठों से चूसा, कभी हल्का-हल्का दाँत लगाया। दूसरा स्तन हाथ से मसलता रहा। शिल्पा की साँसें भारी हो गईं। “रवि… आह्ह्ह…” वो पहली

    बार हल्की सिसकारी निकाली।

    रवि ने १०-१० मिनट तक एक-एक स्तन को चूसा। फिर दोनों को एक साथ मुंह में लेने की कोशिश की। उसका मोटा मुंह शिल्पा के दोनों स्तनों को लगभग ढक लेता था। वो लगातार चूसता रहा – कभी तेज़, कभी धीरे, कभी सिर्फ जीभ से चाटता। शिल्पा की कमर उठ-उठकर उसके मुंह की तरफ आ रही थी। “उफ्फ… रवि… बहुत देर से… आह्ह्ह… अच्छा लग रहा है…” शिल्पा की आवाज़ काँप रही थी।

    रवि ने शिल्पा को अपनी गोद में उठा लिया। अब शिल्पा उसकी जाँघों पर बैठी थी, नंगी। रवि ने फिर दोनों स्तनों को मुंह में लिया और १५-१५ मिनट तक बिना रुके चूसता रहा। शिल्पा के निप्पल्स लाल और सूजे हुए हो गए थे। वो बार-बार सिसकारियाँ भर रही थी – “आह्ह्ह… रवि… धीरे… लेकिन मत छोड़ो… आह्ह्ह!!”

    रवि ने शिल्पा को बेड पर लिटाया और उसके ऊपर लेट गया। उसका भारी शरीर शिल्पा को पूरी तरह ढक रहा था, लेकिन वो अपना वजन संभाल रहा था। फिर उसने फिर से स्तनों पर हमला बोल दिया। अब और देर तक, और गहराई से। २० मिनट, २५ मिनट… लगातार चूसता रहा। कभी-कभी स्तनों के बीच में चूमता, कभी गर्दन पर, लेकिन मुख्य रूप से स्तन ही। शिल्पा का पूरा शरीर पसीने से तर हो गया था। उसकी साँसें फूल रही थीं, आँखें बंद, मुँह थोड़ा खुला। “रवि… मैं… मैं काँप रही हूँ… बहुत देर हो गई… आह्ह्ह…”

    रवि ने ४० मिनट तक लगातार शिल्पा के स्तनों को चूसा। कभी-कभी रुककर सिर्फ जीभ से चाटता, फिर फिर से जोर से चूसता। शिल्पा की हालत पूरी तरह बदल गई थी – नन्हा-सा शरीर थर-थर काँप रहा था, स्तन लाल और चमकदार हो गए थे।

    रवि आखिर में रुका। उसने शिल्पा को चूम लिया और उसके कान में फुसफुसाया, “ये सिर्फ शुरुआत थी जान… हनीमून अभी बहुत लंबा है…”

    मैं कोने में खड़ा था… शिल्पा की नंगी, काँपती हुई हालत, रवि का विशाल शरीर, और उसकी लंबी-लंबी चुसाई… सब बहुत करीब से देख रहा था।

  • राज और नीता की सुहागरात

    राज और नीता की सुहागरात

    शादी की रात। लंदन का वो विशाल लग्जरी सूट, पूरा १८०० स्क्वायर फुट का प्राइवेट सुइट। कमरा गहरे लाल, गोल्डन और सॉफ्ट वाइन लाइट्स से जगमगा रहा है। फर्श पर सफेद और लाल गुलाब की हजारों ताज़ा पंखुड़ियाँ बिछी हुई हैं, हवा में जूही, चन्दन, रोज़ और वेनिला की मीठी-तीखी खुशबू घुली हुई है। बेड किंग साइज, सिल्क की चमकदार क्रीम कलर की चादरें, चारों तरफ मोमबत्तियों की लपटें धीरे-धीरे नाच रही हैं। बाहर बालकनी से टेम्स नदी की रात की चमक और शहर की दूर की रोशनी दिख रही है, लेकिन अंदर सिर्फ उनकी तेज़ होती साँसों, कपड़ों की सरसराहट और हल्की-हल्की सिसकारियों की आवाज़ें भर रही हैं।

    नीता अभी-अभी रिसेप्शन से वापस आई है। उसका भारी लाल लेहंगा पूरा फैला हुआ है, दुपट्टा कंधे पर लहरा रहा है, घुटनों तक नीचे झूल रहा है। मेकअप थोड़ा पसीने और किस के कारण गीला और फैला हुआ – काजल की काली लकीर आँखों के नीचे हल्की-हल्की बह रही है, लिपस्टिक आधी मिट चुकी है, गालों पर हल्की लाली चढ़ी हुई है। उसके लंबे, घने, काले बाल खुले हुए हैं, कमर तक लहराते हुए, कुछ बाल चेहरे पर चिपक गए हैं। राज शेरवानी में है, ऊपरी तीन बटन खुले हुए, छाती के घने बाल दिख रहे हैं, आँखों में वो जंगली, भूखी चमक जो शादी के बाद पहली बार पूरी तरह उभर रही है।

    मैं दीवार से सटा खड़ा हूँ। हवा में उनकी शरीर की गर्मी और खुशबू दोनों महसूस हो रही हैं।

    राज धीरे-धीरे नीता के बहुत पास आया। उसने दोनों हाथों से उसके गाल थाम लिए, अँगूठों से हल्का-हल्का दबाते हुए उसके चेहरे को ऊपर उठाया। “आज से तुम मेरी हो… पूरी तरह मेरी… तुम्हारा हर हिस्सा, हर छेद, हर साँस मेरा है,” उसकी आवाज भारी, गहरी और थरथराती हुई थी। फिर उसने नीता के नरम, गुलाबी होंठों पर अपना मोटा, गर्म होंठ रख दिया। पहला किस बहुत धीमा, बहुत गहरा, बहुत लंबा। राज ने नीता के निचले होंठ को चूसा, फिर ऊपरी को, फिर अपनी जीभ को उसके मुंह में डाल दिया। दोनों की जीभें एक-दूसरे से उलझ गईं, चाटने लगीं, घुमने लगीं। राज ने नीता का सिर थोड़ा पीछे झुकाया और किस को और गहरा, और गीला बनाया। नीता की साँसें तेज़ हो गईं, उसकी छाती ऊपर-नीचे हो रही थी, हाथ राज की पीठ पर फिसल रहे थे, नाखून हल्के-हल्के उसके मांस में गड़ रहे थे। यह किस पूरे ५-६ मिनट तक लगातार चला। दोनों के मुँह से हल्की-हल्की “म्ह्म्म…” और “आह्ह…” की आवाज़ें निकल रही थीं।

    राज ने नीता को धीरे से बेड की तरफ धकेल दिया। सबसे पहले उसने भारी दुपट्टे को कंधों से उतारा और फर्श पर फेंक दिया। फिर ब्लाउज के एक-एक हुक को बहुत धीरे-धीरे खोलना शुरू किया। हर हुक खुलते ही नीता की साँस रुक रही थी, उसकी छाती तेज़ी से हिल रही थी। ब्लाउज पूरी तरह निकल गया तो नीता का लाल जरी वाला ब्रा सामने आ गया – ३४D, दोनों स्तन भरे-भरे, ऊपर से उभरे हुए, निप्पल्स पहले से ही सख्त होकर खड़े थे। राज ने ब्रा के कपड़े के ऊपर से ही दोनों स्तनों को दोनों हाथों से मसलना शुरू कर दिया। अँगुलियाँ गोल-गोल घुमा रहा था, कभी हल्का दबा रहा, कभी जोर से निचोड़ रहा, निप्पल्स को अँगुलियों के बीच दबाकर खींच रहा था। नीता की आँखें आधी बंद, मुँह थोड़ा खुला, “राज… धीरे… मुझे बहुत डर लग रहा है… मैं… मैं कभी नहीं किया…”

    राज घुटनों पर बैठ गया। पेटीकोट का नादा खोला, लेहंगा धीरे-धीरे सरककर फर्श पर गिर गया। अब नीता सिर्फ ब्रा और मैचिंग लाल लेस पैंटी में खड़ी थी। उसकी जाँघें चिकनी, गोरी, हल्के-हल्के काँप रही थीं। राज ने दोनों जाँघों के अंदरूनी हिस्से को चूमना शुरू किया – बहुत धीरे, बहुत ऊपर की तरफ। जब उसकी नाक और होंठ पैंटी के ऊपर से चूत के पास पहुँचे तो नीता ने जोर से सिसकारी भरी, “आह्ह्ह…!” पैंटी का कपड़ा पहले से ही गीला हो चुका था, नमी साफ दिख रही थी।

    राज ने ब्रा का हुक खोला। दोनों बड़े, भारी, गोल, दूध जैसे सफेद स्तन बाहर छलांग लगाकर निकले। गुलाबी-भूरे निप्पल्स पूरी तरह सख्त और खड़े थे। राज ने एक निप्पल मुंह में ले लिया, जीभ से चारों तरफ घुमाया, दाँतों से हल्का-हल्का काटा, फिर जोर-जोर से चूसने लगा। दूसरा हाथ नीचे गया, पैंटी के अंदर उँगलियाँ डाल दीं। नीता की चूत गर्म, सिकुड़ी हुई, पहले से बहुत गीली थी। राज ने मध्यमा उँगली धीरे-धीरे अंदर डाली, फिर अंदर-बाहर करने लगा, अँगूठे से क्लिटोरिस को रगड़ते हुए। नीता के घुटने लड़खड़ाए। वो राज के बाल पकड़कर चीखी, “उफ्फ… राज… मैं वर्जिन हूँ… बहुत धीरे… प्लीज…”

    राज ने पैंटी भी उतार दी। नीता अब पूरी तरह नंगी खड़ी थी। उसकी चूत छोटी-छोटी बालों वाली, गुलाबी, सूजी हुई, पहले से चमक रही थी। राज ने उसे बेड पर लिटा दिया, दोनों पैर कंधों पर रखे। फिर उसकी गर्म, नम जीभ चूत पर रख दी। ऊपर से नीचे चाटा, क्लिटोरिस पर गोल-गोल घुमाया, फिर जीभ अंदर डालकर अंदर-बाहर करने लगा। नीता पूरी तरह पागल हो गई। दोनों हाथों से चादर को जोर-जोर

    से पकड़कर खींच रही थी, कमर उठा-उठाकर चूत को राज के मुंह में धकेल रही थी। “आआह्ह्ह… राज… क्या कर रहे हो… उफ्फ… मैं मर जाऊंगी… बस… बस… बहुत अच्छा लग रहा है… आह्ह्ह!!”

    ५-७ मिनट तक राज ने चूत चाटी। नीता दो-तीन बार छोटी-छोटी झड़ गई, उसका पूरा शरीर हर बार काँप उठा।

    अब राज उठा। उसने शेरवानी, पैंट, अंडरवियर सब उतार दिया। जब उसका १० इंच लंबा, मोटा, नसों से भरा, काला-भूरा लंड बाहर निकला – पूरा खड़ा, सिर चमकदार, नीचे दो भारी अंडकोष लटक रहे – नीता की आँखें फैल गईं। “ये… ये अंदर जाएगा? राज… इतना बड़ा… नहीं… मैं नहीं कर पाऊंगी… डर लग रहा है…”

    राज ने नीता के पैर कंधों पर रखे, लंड का गर्म सिर चूत के मुंहाने पर रखा। बहुत धीरे दबाया। आधा लंड घुसा तो नीता चीखी, “आह्ह्ह… दर्द… बहुत दर्द हो रहा है…” राज ने एक जोरदार झटका दिया। पूरा १० इंच एकदम अंदर चला गया। नीता की चूत फट गई। खून की पतली धार निकली। नीता जोर से चीखी, “आआआह्ह्ह… मर गई… निकालो… फट गई… बहुत तेज़ दर्द… आह्ह्ह!!”

    राज रुका नहीं। धीमी गति से पंपिंग शुरू की। हर धक्के के साथ नीता की चीख निकल रही थी। धीरे-धीरे दर्द के साथ मजा भी आने लगा। राज ने स्पीड बढ़ाई। ठक-ठक-ठक की तेज़ आवाज पूरे कमरे में गूंज रही थी। नीता के स्तन उछल-उछलकर उसके चेहरे पर गिर रहे थे। राज दोनों स्तनों को जोर-जोर से मसल रहा था, निप्पल्स खींच रहा था।

    “कैसा लग रहा है जान?”
    नीता आँखें बंद किए, आँसू बहाते हुए बोली, “बहुत… बहुत बड़ा है… फट रही हूँ… लेकिन… अंदर तक भर गया है… आह्ह्ह… तेज… तेज करो राज…”

    राज ने उसे डॉगी स्टाइल में घुमाया। पीछे से पूरा लंड एक झटके में अंदर। नीता की चूत लाल-सूजी हो गई। १८-२२ मिनट तक लगातार चोदा। नीता तीन-चार बार झड़ गई। आखिर में राज ने जोर-जोर से १०-१२ झटके दिए और नीता की चूत के अंदर ही गर्म-गर्म वीर्य का पूरा लोड भर दिया। नीता का शरीर अंतिम बार काँपा और बिस्तर पर ढेर हो गया। चूत से खून और वीर्य का मिश्रण बह रहा था।

    लेकिन राज अभी पूरी तरह थका नहीं था। उसने नीता को पेट के बल लिटाया। उसके दोनों नितंब फैलाए, गांड के छेद को देखा। “अब दूसरा राउंड… तुम्हारी गांड… पूरे ५० मिनट तक… आज इसे पूरी तरह तोड़ दूँगा।”

    नीता की आँखें खुलीं। घबराकर, डरकर बोली, “नहीं राज… वहाँ नहीं… वो बहुत दर्द देगा… मैंने कभी नहीं किया… प्लीज… नहीं… मैं सह नहीं पाऊंगी… १० इंच… फट जाएगी… मैं मना करती हूँ… बहुत मना करती हूँ…”

    राज ने उसकी कमर मजबूती से पकड़ ली। नीता ने जोर लगाकर उठने की कोशिश की, बेड से उतरकर भागने लगी। “छोड़ो… मैं नहीं करूंगी… छोड़ दो मुझे… प्लीज राज… मैं रो रही हूँ…” वो रोते हुए चीखी और बाथरूम की तरफ भागने लगी।

    राज हँसा। दो बड़े कदम में पहुँच गया। उसने नीता की कमर से पकड़कर जैसे कोई खिलौना हो, उठा लिया। नीता पैर मार रही थी, हाथ पीछे करके मारने की कोशिश कर रही थी, रो रही थी। “छोड़ दो… प्लीज… मैं मना कर रही हूँ… बहुत बार मना कर रही हूँ… नहीं… आह्ह्ह…” लेकिन राज ने उसे बेड पर पटक दिया, पेट के बल, दोनों हाथ पीछे की तरफ मोड़कर पकड़ लिए।

    “आज तुम भाग नहीं पाओगी… ५० मिनट तक चिल्लाती, रोती, मना करती रहोगी… लेकिन मैं नहीं रुकूँगा।”

    उसने अपनी उँगली पर थूक लगाया और नीता की गांड के छोटे, सिकुड़े हुए छेद पर घुमाया, हल्का दबाया। नीता जोर-जोर से रो रही थी, “नहीं… नहीं… बहुत दर्द होगा… राज… मैं तुमसे प्यार करती हूँ… प्लीज मत करो… मैं मना करती हूँ… बहुत मना कर रही हूँ…”

    राज ने १० इंच लंड का गर्म, मोटा सिर गांड के छेद पर रख दिया और धीरे से दबाया। पहला इंच घुसते ही नीता की चीख फट पड़ी – “आआआआह्ह्ह्ह्ह!!! फट गई… निकालो… मर गई… बहुत तेज़ दर्द… आह्ह्ह्ह्ह!!” उसकी आवाज इतनी तेज़ और भयानक थी कि कमरे की दीवारें गूंज उठीं। आँखों से आँसू की धार बहने लगी, पूरा शरीर जोर-जोर से काँप रहा था।

    राज रुका नहीं। बहुत धीरे-धीरे लेकिन लगातार दबाता गया। ३ इंच… ५ इंच… ७ इंच… और आखिर पूरा १० इंच गांड के अंदर चला गया। नीता की गांड की दीवारें फट रही थीं। खून की पतली लकीर निकल आई। नीता बार-बार चीख रही थी, “आह्ह्ह… आह्ह्ह… बस… बस… निकालो… मैं सह नहीं पा रही… राज… प्लीज… मैं बहुत बार मना कर रही हूँ… छोड़ दो… आआह्ह्ह!!”

    राज ने पंपिंग शुरू कर दी। पहले धीमी गति, फिर धीरे-धीरे तेज़। हर झटके के साथ नीता की चीख निकल रही थी – “उफ्फ… आआह्ह्ह… दर्द… बहुत दर्द… फट रही हूँ… मम्मी… बचाओ… आह्ह्ह्ह!!” वो बार-बार हाथ पीछे करके राज को धकेलने की कोशिश कर रही थी, नाखून गाड़ रही थी।

    १० मिनट बाद नीता ने फिर भागने की कोशिश की। उसने पूरा जोर लगाकर आगे सरकने की कोशिश की, बेड से नीचे उतरने लगी। राज ने उसके बाल पकड़े, कमर से उठाया, फिर से पेट के बल लिटा दिया और एक और जोरदार झटका मारा। नीता चीखी, “नहीं… फिर से… आआह्ह्ह… मैं मर जाऊंगी… रुक जाओ… प्लीज… मैं रो रही हूँ… देखो आँसू… बहुत आँसू आ रहे हैं…”

    राज की स्पीड बढ़ती गई। अब हर सेकंड एक तेज़ झटका। नीता की गांड लाल, सूजी, पूरी तरह फटी हुई। २० मिनट हो चुके थे। नीता का गला बैठने लगा था। चीख अब भारी और काँपती हुई हो गई थी – “हां… हां… आह्ह्ह… नहीं… बस… मैं… मैं… फट गई… राज… तुम… बहुत क्रूर हो… आह्ह्ह्ह!!”

    ३० मिनट बाद नीता लगातार रो रही थी, सिसक रही थी। आवाज काँप रही थी, “प्लीज… ५० मिनट… मैं नहीं सह सकती… मुझे छोड़ दो… मैं तुम्हारी हूँ… लेकिन ये… ये बहुत… आआह्ह्ह…!” वो बार-बार मना कर रही थी, “मैं मना करती हूँ… बहुत बार… रुक जाओ… प्लीज… मैं वादा करती हूँ… कभी नहीं भागूंगी… बस रुक जाओ… आह्ह्ह!!”

    राज ने पोजीशन बदला। उसे कुत्ते की तरह घुटनों पर खड़ा किया, दोनों हाथ पीछे पकड़े। अब और तेज़, और गहरा। ठप-ठप-ठप-ठप की तेज़ आवाज पूरे सूट में गूंज रही थी। नीता का सिर नीचे लटका हुआ, आँसू बिस्तर पर टपक रहे थे। उसकी चीख अब सिसकियों में बदल गई थी – “सिस… सिस… आह्ह्ह… मर रही हूँ… गांड फट गई… बहुत… बहुत दर्द… राज… मैं… सह नहीं पा रही…”

    ४० मिनट बाद नीता की हालत पूरी तरह खराब हो गई। आवाज लगभग गायब, सिर्फ हल्की-हल्की सिसकियाँ और “नहीं… नहीं…” निकल रहा था। पूरा शरीर पसीने से तर-बतर, गांड से खून और राज का थूक बह रहा था। वो बार-बार बेहोश होने जैसी हो रही थी, आँखें ऊपर चढ़ रही थीं, लेकिन राज हर बार उसके गाल थपथपाकर जगा देता और फिर और तेज़ पेलता।

    आखिरी १० मिनट – राज ने सबसे तेज़ स्पीड पकड़ ली। नीता सिर्फ काँप रही थी, शरीर थर-थर कर रहा था। कोई बड़ी चीख नहीं, सिर्फ हल्की साँसें, रोना और हल्की सिसकियाँ। आखिर में राज ने १०-१२ जोरदार, तेज़ झटके दिए और नीता की गांड के सबसे अंदर ही अपना पूरा गर्म, मोटा वीर्य भर दिया।

    नीता बिस्तर पर पड़ी थी – पूरी तरह नंगी, गांड बुरी तरह सूजी, लाल, फटी हुई, खून और वीर्य का मिश्रण लगातार बह रहा था। जाँघें जोर-जोर से काँप रही थीं। आँखें सूजी हुई, आँसू सूख चुके थे लेकिन चेहरा अभी भी रोने वाला था। साँसें फूल रही थीं, बोलने की ताकत भी नहीं बची थी। सिर्फ हल्की-हल्की सिसकियाँ और काँपन निकल रही थी। उसकी हालत इतनी बुरी थी कि वो उठने की कोशिश भी नहीं कर पा रही थी, बस पड़ी रह गई थी।

    राज उसके पास लेट गया, उसके बालों में हाथ फेरते हुए, पसीने से तर चेहरे को चूमते हुए बोला, “ये सिर्फ दूसरा राउंड था जान… अभी तो पूरी रात बाकी है…”

    मैं वहाँ खड़ा था… नीता की वो बेहाल, रोती-चिल्लाती, भागने की कोशिश करती, बार-बार मना करती हुई हालत ५० मिनट तक बहुत करीब से देख रहा था।

    लगभग १० मिनट बीत चुके थे। नीता बेड पर पेट के बल पड़ी हुई थी, साँसें अभी भी फूल रही थीं। उसकी आँखें आधी बंद, चेहरा आँसुओं से नम, बाल बिखरे हुए, पूरा शरीर पसीने से चिपचिपा हुआ। गांड बुरी तरह सूजी और लाल हो गई थी, हल्का-हल्का खून अभी भी रिस रहा था। वो हिलने की कोशिश भी नहीं कर पा रही थी। सिर्फ हल्की-हल्की सिसकियाँ निकल रही थीं – “सिस… सिस… राज… बहुत दर्द… मैं उठ भी नहीं पा रही…”

    राज उसके बगल में लेटा था। उसका १० इंच का लंड अभी भी आधा खड़ा था, नीता के वीर्य और खून से चिपका हुआ। उसने नीता के बालों में हाथ फेरा, उसके गाल को चूम लिया और धीरे से बोला, “आराम कर लिया? अब तीसरा राउंड शुरू करते हैं जान। इस बार मैं तुम्हें और भी गहराई तक ले जाना चाहता हूँ।”

    नीता ने डरते हुए आँखें खोलीं। उसकी आवाज बहुत कमजोर और काँपती हुई थी, “नहीं राज… प्लीज… अब नहीं… मेरी हालत बहुत खराब है… गांड फट गई है… चूत भी जल रही है… मैं कुछ देर आराम करना चाहती हूँ… बहुत मना कर रही हूँ… प्लीज…”

    लेकिन राज ने उसकी बात नहीं सुनी। उसने नीता को पलटकर पीठ के बल लिटा दिया। नीता के दोनों पैर फैलाए, घुटनों को मोड़कर कंधों की तरफ दबा दिया। उसकी चूत और गांड दोनों एक साथ सामने थीं, दोनों ही बुरी तरह सूजी हुईं। राज ने बेडसाइड टेबल से लुब्रिकेंट की बोतल उठाई और दोनों हाथों पर भर-भरकर लगाया।

    “इस बार दोनों जगह एक साथ खेलेंगे,” उसने कहा और अपना लंड फिर से पूरा खड़ा कर लिया।

    नीता घबराकर हाथ मारने लगी, “नहीं… राज… मैं सह नहीं पाऊंगी… दो जगह… इतना बड़ा… प्लीज… मैं रो रही हूँ… देखो… आँखों में आँसू हैं… बहुत बार मना कर रही हूँ… रुक जाओ…”

    राज ने पहले अपनी दो उँगलियाँ नीता की चूत में डालीं, फिर तीसरी गांड में। नीता जोर से सिसकारी भरी, “आह्ह्ह… जल रही है… दर्द हो रहा है…” राज ने उँगलियाँ अंदर-बाहर करने लगा, लुब्रिकेंट अच्छे से फैलाया। नीता का शरीर बार-बार काँप रहा था।

    कुछ देर उँगलियों से खेलने के बाद राज ने अपना मोटा लंड नीता की चूत पर रखा। एक जोरदार झटके से पूरा १० इंच चूत में उतार दिया। नीता की पीठ कमान की तरह झुक गई, “आआआह्ह्ह!!! फिर से… बहुत सूज गई है… फट रही है… निकालो… आह्ह्ह!!”

    राज ने तेज़-तेज़ पंपिंग शुरू कर दी। ठक-ठक-ठक-ठक की तेज़ आवाज फिर से कमरे में गूंजने लगी। नीता के स्तन जोर-जोर से उछल रहे थे। राज एक हाथ से स्तनों को मसल रहा था, दूसरे हाथ से उसके क्लिटोरिस को रगड़ रहा था। हर धक्के पर नीता चीख रही थी – “उफ्फ… राज… धीरे… बहुत तेज़… आह्ह्ह… मैं मर जाऊंगी… चूत जल रही है…”

    १० मिनट तक चूत चोदने के बाद राज ने लंड निकाला। अब उसने नीता की गांड पर सिर रखा और धीरे से दबाया। गांड अभी भी बहुत टाइट और सूजी हुई थी। पूरा लंड अंदर घुसते ही नीता फिर से चीख उठी, “आआह्ह्ह्ह… गांड… फिर से… बहुत दर्द… राज… प्लीज… मैं मना करती हूँ… बहुत मना कर रही हूँ… रुक जाओ…”

    राज ने दोनों जगह बदल-बदलकर चोदना शुरू किया – २-२ मिनट चूत, फिर २-२ मिनट गांड। नीता का रोना और चीखना लगातार जारी था। वो बार-बार हाथ से राज की छाती धकेलने की कोशिश कर रही थी, “छोड़ दो… अब बस करो… मैं उठना चाहती हूँ… राज… प्लीज… मेरी हालत देखो… मैं काँप रही हूँ…”

    राज ने नीता को उठाकर अपनी गोद में बैठा लिया – cowgirl पोजीशन लेकिन वो खुद नीचे से जोर-जोर से ऊपर धक्के दे रहा था। नीता की कमर पकड़कर उसे ऊपर-नीचे कर रहा था। नीता के स्तन उसके चेहरे पर बार-बार गिर रहे थे। वो नीता के निप्पल्स को चूस रहा था, काट रहा था। नीता का सिर पीछे झुक गया था, मुँह खुला, आँखें आधी बंद, लगातार चीख और सिसकारियाँ निकल रही थीं – “आह्ह्ह… आह्ह्ह… बहुत गहरा जा रहा है… दोनों जगह जल रही हैं… राज… मैं सह नहीं पा रही… रुक जाओ… प्लीज… मैं तुमसे विनती कर रही हूँ…”

    इस पोजीशन में १५ मिनट तक चोदा गया। नीता कई बार झड़ गई, लेकिन हर बार उसकी चीख और दर्द बढ़ता ही गया।

    आखिर में राज ने नीता को फिर पेट के बल लिटाया, दोनों हाथ पीछे पकड़े और सिर्फ गांड में पूरा जोर लगा दिया। अब सबसे तेज़ स्पीड। ठप-ठप-ठप-ठप… कमरे में सिर्फ ये आवाज और नीता की काँपती चीखें गूंज रही थीं।

    “आआह्ह्ह… बस… अब सच में नहीं… गांड फट जाएगी… राज… मैं मर रही हूँ… आह्ह्ह… बहुत बार मना किया… फिर भी नहीं रुके… आह्ह्ह!!”

    नीता का पूरा शरीर पसीने, आँसुओं और लुब्रिकेंट से तर था। उसकी आवाज अब लगभग फट चुकी थी, सिर्फ सिसकियाँ और हल्की चीखें निकल रही थीं। २५-३० मिनट तक इस राउंड में लगातार चोदने के बाद राज ने आखिरी बार बहुत तेज़ १५-२० झटके दिए और पहले नीता की चूत में, फिर गांड में अपना वीर्य भर दिया।

    नीता अंत में पूरी तरह बेहाल होकर बिस्तर पर गिर पड़ी। उसकी चूत और गांड दोनों बुरी तरह सूजी, लाल, फटी हुई, वीर्य और खून से भरी हुई। जाँघें अनियंत्रित रूप से काँप रही थीं। आँखें बंद, मुँह थोड़ा खुला, साँसें बहुत तेज़ और छोटी-छोटी। बोलने की ताकत बिल्कुल खत्म। सिर्फ हल्की-हल्की सिसकियाँ और शरीर का थरथराना बचा था।

    राज उसके पास लेट गया, उसे चूमते हुए, उसके कान में फुसफुसाते हुए बोला, “अब चौथा राउंड शुरू करने से पहले थोड़ा पानी पिला दूँ तुम्हें… रात अभी बहुत लंबी है।”

    नीता की वो अंतिम हालत, उसकी थकी हुई सिसकियाँ, काँपता शरीर… सब कुछ।