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  • दूसरी शादी की सुहागरात का मजा

    मेरा नाम रेनू है और मैं जयपुर में रहती हूँ. मेरी उम्र 37 वर्ष की है.
    मेरे पति और मैं दोनों सरकारी नौकरी करते थे.
    हम दोनों का एक ब/च्चा है.

    हमारी लाइफ ठीक चल रही थी.
    मेरे पति सुनील मुझे बहुत प्यार करते थे.
    हम दोनों भगवान की नेमत से बहुत खुश थे लेकिन एक दिन सड़क हादसे में उनकी मौत हो गई.

    ये खबर सुन कर मुझ पर दुखों का पहाड़ सा टूट पड़ा.

    मैं अपने पति के बिना जीना नहीं चाहती थी और मर जाना चाहती थी … लेकिन अपने ब/च्चे को देखकर अपने आप को संभाला.

    पीहर और ससुराल वाले ढांढस बँधाते और हिम्मत से काम लेने को बोलते.
    मैं किसी के ऊपर बोझ बनना नहीं चाहती थी.
    मैं रोज़ अपने पति को याद करती और अकेले में बैठकर रोती रहती.

    धीरे-धीरे ये मुश्किल वक्त निकल गया और मैं अकेली ही अपने ब/च्चे के साथ रहने लगी.

    अब मैंने उनकी यादों के सहारे अकेले जीना सीख लिया था.
    मुझे उनके इंश्योरेंस और फंड्स से बहुत पैसे मिले थे, पैसे की कोई कमी नहीं थी लेकिन पति की कमी कोई भी चीज़ पूरी नहीं कर सकती थी.

    जैसे-जैसे समय निकला, मैं अपनी नौकरी करके ब/च्चे को पालने लगी. मेरा पूरा समय ब/च्चे को खुश रखने और उसे खिलाने में निकल जाता था.
    बस इसी तरह से समय निकल रहा था.

    लेकिन एक औरत के लिए ये सब आसान नहीं होता.
    लोग मुझ पर गंदी निगाहें डालते; हर कोई हमदर्द बनना चाहता था.
    मैं किसी से बात नहीं करती थी; मुझे ऐसे लोगों से नफ़रत होती थी.

    मुझे अब पति की यादों के सहारे ही जीना था.
    मैं बिल्कुल साधारण तरीके से रहने लगी.

    मुझे अपनी चूत के बाल भी साफ़ करने का मन नहीं करता था.
    मेरी झांटें बहुत बड़ी हो गई थीं.

    जैसे ही एक बरसी पूरी हुई, घरवा ले बोलने लगे- बेटी अभी तेरी पूरी उम्र पड़ी है. ब/च्चे के भविष्य का सोच … दूसरी शादी कर ले!

    मुझे ये सब सुन कर गुस्सा आता था.
    अब तो मेरी सहेलियां भी शादी करने की बोलने लगी थीं.

    मेरी एक खास सहेली मुझसे बोली- देख यार, ऐसे जीवन नहीं चलता!

    लेकिन मैं किसी से शादी करना नहीं चाहती थी.
    मैं अपने पति को बहुत प्यार करती थी; उनकी यादों को मैं किसी के साथ बांटना नहीं चाहती थी.

    मेरे घर वालों ने पीछा नहीं छोड़ा.
    वे बोलते रहे कि बेटी समाज में विधवा का जीवन नरक से भी बदतर होता है. ब/च्चे के बारे में सोच … इसको भी तो बाप का प्यार चाहिए.

    ब/च्चे के बारे में सोचकर एक दिन मैंने हां कर दी.
    घर वाले बहुत खुश हुए.

    वैसे मैं जवान-सुंदर थी, नौकरी थी और अब पैसा भी बहुत था तो रिश्तों की कोई कमी नहीं थी.

    रोज़-रोज़ रिश्ते आ रहे थे.
    अनमैरिड और मैरिड सब तरह के रिश्ते आ रहे थे.

    घर वालों ने बहुत से लड़कों के फ़ोटो भेजे पसंद करने के लिए … लेकिन मैंने सब उन्हीं पर छोड़ दिया कि जो आपको ठीक लगे, वह करो.

    फिर उन्होंने एक लड़का फ़ाइनल कर दिया.
    वह भी शादीशुदा था.
    उसकी शादी दो साल पहले हुई थी लेकिन शादी के 3 दिन बाद ही उसकी बीवी पीहर में करंट लगने की वजह से चल बसी थी.

    उन्होंने फ़ाइनल किए लड़के की डिटेल और उसकी फ़ोटो मुझे भेज दी.
    उस लड़के का नाम रवि था.

    मुझे एक प्रतिशत भी इंट्रेस्ट नहीं था पर ब/च्चे की खातिर मैंने एक बार फ़ोटो देख लिया.
    वह लड़का बहुत स्मार्ट था अभी केवल 32 साल का था.
    उसकी सरकारी नौकरी थी और वह इंजीनियर था.

    मैं तो सोच भी नहीं सकती थी कि किसी विधवा को ऐसा हैंडसम जवान पति मिल सकता है.
    यहीं से इस हैपी एंडिंग सेक्स कहानी की शुरुआत हुई.

    घर वाले और सहेलियां मुझे पार्लर जाने और हुलिया सुधारने को बोलती थीं.
    लेकिन मैं तो शादी भी सिर्फ घर वालों और ब/च्चे की खुशी के लिए ही कर रही थी … अपने लिए नहीं.

    फिर भी रोज़-रोज़ उनकी ज़िद की वजह से मैं पार्लर जाने लगी.

    मेरी उसी पक्की सहेली ने कसम दी कि एक दुल्हन की तरह तैयार होना वर्ना कभी बात नहीं करूँगी.

    इस वजह से मैं फुल बॉडी वैक्सिंग और मेकअप करवाने लगी.
    फिर मैंने चूत को भी बिल्कुल साफ़ कर लिया.

    अब मैं भी किसी हीरोइन से कम नहीं लग रही थी.

    सब कुछ तय होने के एक महीने बाद ही हमारी शादी कर दी गई और मैं अब ससुराल आ गई.

    मेरे लिए सब नए थे.
    सभी लोग बहुत अच्छे थे.

    मेरी खूबसूरती की सबने तारीफ़ की … मुझे ऐसा नहीं लगा कि अनजान हैं.
    सबने मेरा खूब ध्यान रखा.

    मेरा ब/च्चा भी उनमें घुल-मिल गया.

    ये देख कर मेरा दुख कम हुआ लेकिन मैं तो बस मेरे पहले पति को ही याद कर रही थी.

    ये शादी मैंने खुद के लिए नहीं … ब/च्चे की खातिर की थी.

    जैसे-जैसे सुहागरात नज़दीक आ रही थी, मैं घबरा रही थी.
    मैं किसी और मर्द को खुद को छूने देना नहीं चाहती थी.

    सुहागरात को मैं कमरे में बेड पर घूँघट करके बैठी थी कि तभी दरवाज़ा खुला और रवि अन्दर आ गए.

    मैं चुपचाप घूँघट में से उनको देख रही थी.
    उनकी हाइट छह फीट, रंग गोरा था.

    तभी उन्होंने अपनी टाइट शर्ट-पैंट उतार दिए.
    उनकी पर्सनैलिटी किसी फौजी जैसी थी.

    वे बाथरूम में गए और हाथ-मुँह धोकर सिर्फ़ तौलिया लपेट कर बाहर निकल आए.

    फिर ड्रेसिंग टेबल के सामने खड़े होकर नीचे से कंघा उठाने जैसे ही झुके, उनका तौलिया खुल कर गिर गया.

    तभी मेरी नज़र ड्रेसिंग टेबल के ग्लास पर जा पड़ी.
    उन्होंने चड्डी नहीं पहनी हुई थी.

    मेरी आंखें फटी की फटी रह गईं.
    ये आदमी का लंड था या घोड़े का …

    मैंने ऐसा लंड कभी सोचा भी नहीं था.

    उन्होंने तुरंत तौलिया पहन ली लेकिन मेरी आंखों के सामने तो उनके लंड की फ़ोटो बन गई.

    इतने समय बाद आंखों के सामने लंड देखकर मेरी चूत भारी-भारी सी होने लगी.
    जैसे-तैसे करके मैंने खुद को संभाला.

    उन्होंने कमरे की लाइट बंद करके नाइट बल्ब जला दिया.
    वे बेड पर बैठे और मेरा घूँघट उठा कर बोले- यार कितनी खूबसूरत हो तुम … मेरा तो नसीब ही खुल गया!

    ये बोलकर उन्होंने मेरे हाथों में गिफ़्ट का डिब्बा पकड़ा दिया और खोलने को बोले.
    मैंने डिब्बा खोला तो उसमें एप्पल आईफ़ोन था.

    वाह … आई फोन!
    मैं बहुत खुश हुई.
    मैंने पहली बार एप्पल आईफ़ोन हाथ में लिया था.

    उन्होंने पूछा- कैसा लगा गिफ़्ट?
    तो मैंने सिर्फ़ गर्दन हिला कर हामी भर दी.

    तभी रवि ने मेरे हाथ को छुआ तो मैं बेड से नीचे उतर गई और बोली- सॉरी … ये सब हमारे बीच कभी नहीं होगा … आप मुझे कभी छूना मत!

    ये सुनकर वे मेरे पास आए और मेरे सामने खड़े होकर मेरे दोनों हाथों को पकड़ कर बोले- जान. ये मेरी पहली सुहागरात है. पहली बीवी सुहागरात के समय पीरियड्स में थी!

    ये ‘जान’ शब्द सुने डेढ़ साल हो गया था.
    उनकी पहली सुहागरात वाली बात सुनकर मैं मन ही मन खुश होने लगी लेकिन फिर भी मुँह बनाकर हाथ छुड़ाकर दूर हट गई और ड्रेसिंग टेबल के सामने खड़ी हो गई.

    तभी रवि मेरे पीछे आए और उन्होंने पीछे से अपने हाथ आगे करके मेरे दोनों बूब्स को पकड़ लिया.
    साथ ही अपना मूसल जैसा हथियार मेरी गांड पर टिका दिया.
    वे मेरे बूब्स को हल्के हाथों से सहलाने लगे.

    मेरे पूरे शरीर में करंट सा रेंगने लगा, चूत का भारीपन मैं संभाल नहीं पा रही थी कि अब पैर भी भारी लगने लगे और एक एक कदम उठाना भी भारी पड़ रहा था.

    मैं खुद को हटा नहीं पाई कि तभी रवि अपने एक हाथ से मेरे पेट पर सहलाते हुए उंगलियों को मेरी नाभि के चारों तरफ़ घुमाने लगे.
    फिर नाभि से नीचे मेरे पेड़ू पर रख लिया.

    दोस्तो, डेढ़ साल बाद अगर कोई हट्टा-कट्टा मर्द नाइट बल्ब के उजाले में पीछे से पकड़ ले और उसका लंड मूसल जैसा हथियार लड़की देख चुकी हो … तो खुद ही सोचो कि उस वक्त मेरी क्या हालत हुई होगी.

    मैं निढाल होकर पीछे की तरफ़ रवि के ऊपर गिरने लगी और मन ही मन खुश होने लगी कि इतने दिन की प्यास आज मिटेगी.

    तभी रवि ने पकड़ कर मुझे अपनी तरफ़ मोड़ कर सीधा कर लिया.
    वे अपनी गर्म सांसें मेरे मुँह पर छोड़ने लगे.

    मेरे हाथ खुद ही उनके कंधों पर पहुंच गए और मेरे बूब्स तन कर रवि की छाती को छूने लगे थे.

    रवि ने मेरे होंठों को अपने मुँह में भर लिया.
    मुझ पर उनके लौड़े का नशा चढ़ गया था इसलिए मैं चुपचाप उनका साथ देती रही.

    थोड़ी देर अपने होंठों को चुसवाने के बाद मैंने मुँह खींच लिया.
    मेरी चूत रिसने लगी थी, पूरी पैंटी गीली हो गई थी.

    मेरा मन अब चुदाने को हां करने के बहाने ढूँढने लगा.
    मैं सोचने लगी कि अब कभी ना कभी तो नए जीवन की शुरुआत करनी पड़ेगी … मैं इनका जीवन क्यों खराब करूँ? इनका भी तो हक़ है मुझ पर!

    मैंने अपनी चूत की हालत देखकर सुनील को मन ही मन बोला- सॉरी, अब मैं नहीं रुक पाऊंगी.
    बस मैंने रवि के लौड़े पर हाथ रख दिया.

    ये देख रवि बहुत खुश हुए और मेरे हाथ के ऊपर अपना हाथ रख कर लौड़े को कस लिया.

    उनका आधा लौड़ा भी मेरी मुट्ठी में नहीं आ पा रहा था और यह एक बिलांड जितना लंबा था.
    कमाल की बात यह थी कि रवि का लंड गोरा था उसका टोपा बहुत मोटा था, झांटें बिल्कुल साफ़ थीं.

    सुनील का लंड तो इसके आगे आधा भी नहीं था.
    यह देखकर मैं बहुत खुश हुई कि अब से इस पर मेरा हक़ है और कभी भी चुदवा सकती हूँ.

    मैं ऊपर से लंड को सहला रही थी और रवि काम भरी सिसकारियां लेने लगे थे.

    तभी रवि ने मुझे अपनी बांहों में उठा लिया और बेड पर लिटा दिया.

    उसके बाद रवि ने मेरे गहने एक-एक करके उतारना शुरू कर दिए.
    मैंने आंखें बंद कर लीं और बस चुपचाप लेटी हुई रवि के हाथों से खुद को नंगी करवा रही थी.

    गहनों के बाद वे साड़ी की पिन खोलने लगे.
    ये देखकर तो मेरी चूत में आग सी लग गई क्योंकि अब ज़्यादा देर नहीं थी हमबिस्तर होने में.

    जल्द ही मैं सिर्फ़ ब्रा और पेटीकोट में थी.

    रवि मेरे दोनों पैरों के बीच आए और पेटीकोट को उठा कर अपने फौलादी हाथों को जांघों पर फिराने लगे.

    मैंने अंगड़ाई लेकर दोनों हाथों से बेडशीट पकड़ ली.
    तभी रवि ने अपना हाथ चूत के ऊपर रख दिया.

    उन्होंने मेरी तरफ़ देख कर नॉटी सी स्माइल दी तो मैं समझ गई कि रवि को मेरी चूत गीली होने का पता लग गया है.

    मैंने भी शर्मा कर स्माइल करके खुद को रवि को समर्पित करने का इशारा कर दिया.

    अब रवि ने पैंटी को नीचे खींच कर निकाल दिया.
    मेरी चिकनी साफ़ चूत देखकर वे बोले- वाह, कितनी सुंदर हो तुम … और तुम्हारा जिस्म!
    मैं मन ही मन बहुत खुश हुई.

    तभी रवि ने मुझे पकड़ कर उल्टा लिटा दिया और वे मेरे पैरों को चूमते हुए ऊपर आने लगे.
    उन्होंने फिर से मेरी जांघों को चूमा और मेरे एक कूल्हे को अपने मुँह में भर कर दांतों से काट लिया.

    ‘आआआह’ करके मैंने उस लव बाइट का मज़ा लिया.
    फिर मेरी कमर को चूमते हुए मेरी पीठ पर चिपक गए.

    उनका लंड मेरी गांड पर दब रहा था.
    उस Xxx लंड की लंबाई और मोटाई मैं अपने मन में नापने लगी.
    इससे मेरी चूत गर्म हो कर फड़कने लगी.

    फिर रवि ने मेरे बालों को एक तरफ़ कर के मेरी गर्दन पर गर्म सांसें छोड़ते हुए मुझे चूमने लगे तो मैं कामुक सिसकारियां लेती हुई उनका साथ देने लगी.
    मुझे इस तरह पोजीशन में बहुत अच्छा लग रहा था.

    फिर रवि ने अपने दोनों हाथों से बोबे पकड़ लिए और दबाने लगे.
    मैं अपने पैरों को रवि के पैरों में कसने लगी.

    फिर उन्होंने अपने हाथ नीचे ले जाते हुए मेरी कमर के नीचे घुसा दिए.
    हाय … मैं तो मज़े में पागल सी होने लगी और अपनी कमर उठा कर ऊपर-नीचे करने लगी.

    तभी मेरी कामुक अदाओं को देखकर रवि पूरे जोश में आ गए और मुझे सीधा करके खुद बेड से उतर गए.
    मैं समझ नहीं पाई कि वे क्या करना चाह रहे हैं.

    तभी वे मेरे दोनों पैर खींचकर बेड के एक कोने में ले गए तो मैं एकदम से सन्न ही रह गई.
    रवि ने मेरे पैर फैलाए और मेरी चूत की पंखुड़ियों को अपने मुँह में भर लिया.

    आआ आह रवि बहुत मज़ा आ रहा है … चूसो मुझे … आआहा उफ़्फ़ आआह्ह्ह!’
    मैं मदमस्त होकर के बुदबुदाने लगी.

    मेरी कामुक सिसकारियां सुन कर रवि ने अपनी पूरी जीभ मेरी तड़फती चूत में घुसेड़ दी.

    मैंने भी अपने दोनों हाथों से रवि का सिर पकड़ लिया और चूत पर दबाती हुई अपने कूल्हे उठा-उठा कर उनकी जीभ को अन्दर तक घुसवाने लगी.

    मुझे लग रहा था कि अगर एक-दो बार और कूल्हे उठा दिए तो मैं अभी झड़ जाऊंगी.
    मुझसे अब और रुका ही नहीं जा रहा था.

    मैंने जल्दी से रवि को अपने ऊपर खींच लिया- प्लीज डाल दो रवि जी … अब रुका नहीं जा रहा … अपनी बीवी बना लो मुझे … मैं बहुत समय से प्यासी हूँ. मेरी प्यास बुझा दो!

    तभी रवि ने लंड को चूत पर रगड़ कर टोपे को मेरी चूत के ही पानी से गीला किया और मुझसे चिपक कर चूत के ऊपर लंड को रगड़ कर मुझे तड़पाने लगे.

    मैं उनके लंड की प्यासी हो गई और कराहती हुई बोली- आह डालो ना रवि जी … आह!
    लेकिन शायद उन्हें मेरी तड़प भरी सिसकारियों को सुनने में बहुत मज़ा आ रहा था.

    अब इंतज़ार की हद हो गई थी और मेरे लिए और रुक पाना संभव नहीं हो पा रहा था.
    मैंने पूरी शर्म छोड़ कर उनका घोड़े जैसा लंड … जिसमें बहुत वज़न लग रहा था, उसे अपने हाथों में पकड़ा और चूत के छेद पर रख कर रवि की कमर को पकड़ लिया.
    उसी पल मैंने अपने कूल्हे एक ज़ोरदार झटके से ऊपर उठाए तो उनका लंड का सुपार अन्दर घुस तो गया, लेकिन मेरी जान ही निकल गई.

    इतनी गीली चूत होने के बाद भी लंड का सुपारा मेरी चुत में फंस गया था.
    लंड अब ना अन्दर घुस पा रहा था और ना बाहर निकल पा रहा था.

    ‘प्लीज़ रवि जी … इसे बाहर निकालो मैं मर जाऊंगी!’
    मैं उनकी कमर को दूर धकेलने लगी.

    तभी रवि ने धीरे-धीरे से अपने लंड के सुपारे को मेरी चुत से बाहर निकाला.
    अब जाकर मुझे सांस आई.

    रवि समझ चुके थे कि चाहे मैं कितनी भी चुद गई हूँ लेकिन चूत एकदम कुंवारी जैसी ही है.
    अब उनके घोड़े जैसे बिग लंड के आगे तो मैं कुंवारी जैसी ही थी.

    तभी रवि ने आलमारी से एक जैल निकाला और अपने लंड पर मल लिया.
    उन्होंने कुछ जैल उंगलियों में लेकर मेरी चूत में भी लगा दिया.

    अब उन्होंने वापिस अपने लंड को मेरी चुत के छेद पर लगा कर एक झटका मारा.
    ‘आ आआह मर गई आआ हाह छोड़ो प्लीज़ …’

    लेकिन इस बार उन्होंने मेरी एक ना सुनी और लंड को चुत की गहराई में दबाते ही चले गए.
    जैल की वजह से लंड फंसता-रगड़ता हुआ घुसता जा रहा था और मैं तड़पड़ाती रही थी.
    एक बार तो मेरे आंसू निकल गए.

    वे एक पल को रुके और बस चुपचाप मुझसे चिपक कर मेरे एक बोबे को चूसने लगे.
    जब चूत पानी छोड़ने लगी, तब जाकर दर्द कम होने लगा और मज़ा आने लगा.

    तभी उन्होंने फिर से एक झटका मारा तो Xxx लंड ब/च्चेदानी से अटक गया.

    अब मैं समझ चुकी थी कि यह इससे ज़्यादा नहीं घुस पाएगा.
    उनके बिग लंड की लंबाई मेरी चूत की गहराई से भी ज़्यादा थी.

    वे रुके और मेरे आंसू पौंछ कर मेरे माथे को चूमा.
    फिर होंठों को अपने होंठों में भरकर मेरे मुँह में अपनी जीभ डाल दी.
    मैं उनकी जीभ चूसने लगी.

    रवि एक सॉलिड मर्द हैं … ये मैं जान गई थी.

    अब मेरे जिस्म में सिर्फ़ हवस ही हवस भर गई थी … और क्यों ना भरे, ऐसा लंड पाकर तो बुढ़िया भी जवान हो जाए.

    अब रवि ने अपने दोनों हाथ पीठ के नीचे लगाए और धीरे-धीरे लंड को अन्दर-बाहर करने लगे.

    मैंने अपने पैर अपने पेट पर मोड़ लिए, जिससे लंड अन्दर-बाहर करने में थोड़ी आसानी हो.

    मेरी चूत का सफ़ेद-सफ़ेद सा गाढ़ा चिकना तरल रवि जी के लंड से चिपक कर बाहर आ रहा था

    आज मुझे पता चला कि असली संभोग क्या होता है.
    इतने सालों से मेरे पति सुनील के साथ कभी इतना मज़ा नहीं आया था.

    मैं मन ही मन अपनी उस सहेली को थैंक्स बोलने लगी, जिसने मुझ पर शादी के लिए दबाव बनाया था.

    अब तक मेरा पूरा दर्द ख़त्म हो गया था और मज़ा आने लगा था.

    उन्होंने धक्कों की स्पीड बढ़ा दी.
    मैं भी उनकी पीठ को सहलाने लगी.

    वे ज़ोर-ज़ोर से लंड पेलने लगे.
    जोश में मेरे नाखून उनकी पीठ पर गड़ने लगे.

    ‘आह चोदो रवि जी … आह मेरे राजा चोदो मुझे … इस चूत में जो आग लगी है आह उसे आज बुझा दो … अब से मुझे रोज़ ऐसे ही चोदना … ऐसी तो मैं कभी नहीं चुदी … आ आआह फ़ाड़ डालो रवि जी प्लीज़ … आआह उफ़्फ़ फ़क्क्क …’
    मेरा पानी झड़ने वाला था तो मैंने ज़ोर से रवि जी को कस लिया और अपने पैरों से उनकी जांघों को लपेट लिया.

    मैं खुद अपनी गांड उठा कर नीचे से झटका मारने लगी.
    ऊपर से रवि जी के झटके मेरी चुत को भोसड़ा बनाने पर तुले हुए थे.

    ‘आआह उऊऊई चोदोओओ …’

    हम दोनों के बदन की थरथराहट के बीच मेरी नाज़ुक चूत पिस कर झड़ गई थी.
    मैं चिपकी रह गई थी.

    ये देख वे भी रुक गए और बस हम दोनों कुछ मिनट तक ऐसे ही पड़े रहे.

    फिर रवि जी ने अपने लंड को बाहर निकाला तो मैंने देखा कि वह एकदम लाल हो चुका था.
    मेरी चूत भी लाल हो गई थी.

    लेकिन रवि जी अभी भी भूखे थे.
    उन्होंने मुझे उल्टा पटक कर कुतिया बनाया और पीछे से चुत में वापस लंड डाल दिया.

    उन्होंने पलक झपकते ही मेरी कमर पर अपने दोनों हाथ जमाए और झटके मारने लगे.
    उनके लंड के आगे मेरी चूत छोटी पड़ रही थी.
    इसलिए हर झटका मेरी ब/च्चेदानी को छू रहा था.

    इससे मैं फिर से तैयार होने लगी.
    मैंने मुँह बेड पर टिका लिया और झटकों का मज़ा लेने लगी.

    हर ज़ोरदार प्रहार के साथ मैं आगे को होती जा रही थी, इसलिए रवि जी ने मेरे हाथ पकड़े और पीछे की तरफ़ खींचने लगे.

    तभी अचानक से करंट बढ़ा और मैं फिर से झड़ने वाली हो गई थी.
    रवि जी के लंड के प्रहारों के सामने मेरी चूत टिक नहीं पाई और एक बार फिर झड़ गई.

    फिर वापिस उन्होंने मेरे मना करने के बावजूद मुझे सीधा लिटाकर पेलना शुरू कर दिया.
    जैसे ही वे झड़ने वाले थे, उनकी स्पीड बढ़ गई.
    हैपी एंडिंग सेक्स करती हुई मेरी ब/च्चेदानी से लंड टकराने से मैं तीसरी बार खाली हो गई.

    इस बार वे भी मुझे मेरे होंठों को चूसते हुए खाली हो गए.

    उस दिन मैं सुनील को भूल गई थी.
    रवि ही मुझे सुनील लगने लगे थे.
    उनका प्यार पाकर मैं निहाल हो गई थी.

    अब मैं रवि जी से रोज़ खुल कर चुदवाने लगी थी.
    यह मेरे जीवन की सेक्स कहानी उन जवान विधवाओं को समर्पित है जो अपनी शर्म को छोड़ कर जीवन का आनन्द लेने के लिए आगे बढ़ने में संकोच करती हैं.

    मैं उन्हें कहना चाहती हूँ कि जीवन में सेक्स करना एक प्राकृर्तिक क्रिया है और यह हरेक के जीवन में कुछ ही समय के लिए कारगर होटी है.
    इससे कोई समस्या नहीं है, प्लीज जीवन का आनन्द जरूर लें.

    आप मुझे मेरी हैपी एंडिंग सेक्स कहानी के लिए अपने विचार जरूर पोस्ट करें.

  • कुंवारी गर्लफ्रेंड के साथ पहली बार चुदाई

    वर्जिन गर्ल फर्स्ट सेक्स कहानी में मेरी दोस्ती एक लड़की से हो गयी. मैंने उसे प्रोपोज भी कर दिया. हम सेक्सी बातें करने लगे और अपने पहले सेक्स के लिए उतावले थे.

    दोस्तो!
    मेरा नाम राहुल है और मैं आगरा का रहने वाला हूँ.
    मैं अभी हाल ही में अपनी b.sc. पूरी की है.

    मेरी हाईट 5 फुट 8 इंच है और मेरे लन्ड का साइज 7 इंच है.

    फिलहाल मेरी उम्र 23 साल है।

    मैं इस साइट का नियमित पाठक हूँ.
    यहाँ बहुत सी उत्तेजित कहानियां पढ़ कर मुझे लगा कि मैं भी अपनी कहानी आपके साथ शेयर करूं।

    मेरी यह पहली कहानी है तो आप मुझे मेरे मेल आईडी पर अपना बहुमूल्य मत साझा करें।

    तो वर्जिन गर्ल फर्स्ट सेक्स कहानी में अब मैं आपको काजल के बारे में बारे में बताता हूँ.
    वह मुझे अपनी ग्रेजुएशन के दौरान ही मिली थी.

    वह दिखने में एकदम सिंपल सेक्सी जीरो फिगर वाली लड़की है, उसके बूब्स 30, कमर 26 और गांड 32 की है।

    तो अब आपको ज्यादा बोर न करते हुए कहानी पर आते हैं.

    यह कहानी आज से 2 साल पहले की है.
    इस समय तक मैं और काजल अच्छे दोस्त बन चुके थे.
    हम दोनों आपस में हर तरह बात शेयर किया करते थे।

    मैं उसे मन ही मन पसंद करता था.
    तो मैंने उसे वेलेंटाइन वाले दिन प्रपोज करने का सोचा.

    पर उस समय मेरी गांड भी फट रही थी कि कहीं वह मना ना कर दे!

    जैसे तैसे करके मैंने उसे लाल गुलाब देकर प्रपोज कर दिया.
    लेकिन हुआ कुछ उल्टा!
    पता चला कि वह भी मुझे पसंद करती थी और उसने मेरा प्रपोजल स्वीकार कर लिया।

    फिर मैं उसे पास ही के एक पार्क में ले गया.
    वहाँ जाकर हमने थोड़ी बहुत इधर उधर की बातें की.

    और अचानक से मैंने उसके लिप्स पर किस कर दिया.

    उसे समझ नही आया कि क्या हुआ और उसने अपनी आंखें बड़ी कर ली.
    मुझे लगा कि वह गुस्सा हो गई.

    लेकिन उसने कोई रिस्पॉन्स नहीं दिया और मैं उसके लब चूसता ही रहा.
    थोड़ी देर बाद वह भी जोश में आ गई तो उसने भी मुझे किस करना शुरू कर दिया.

    मैं धीरे धीरे आगे बढ़ा और उसके कमीज के ऊपर से ही उसके छोटे छोटे मजेदार बूब्स को सहलाना शुरू कर दिया.

    उसे जोश आने लगा तो वह वहीं घूम कर मेरे पैंट में बने हुए लन्ड के तंबू के ऊपर बैठ गई और पागलों की तरह मुझे किस करने लगी।

    थोड़ी देर बाद मुझे पता लगा कि कुछ लड़के हमारी तरफ आ रहे हैं.
    मुझे समझ आ रहा था कि वे क्या करने वाले हैं.

    इसीलिए मैंने उसे रोका और हम वहाँ से खिसक गए।

    फिर रात को हमारी फोन पर बात हुई.

    शायद दिन में जो जोश हमें आया था, वह ठंडा नहीं हुआ था.
    तो हमने फिर फोन सेक्स करना शुरू कर दिया.

    शायद यह इसीलिए भी था कि अब तक न उसने किसी के साथ सेक्स किया था और ना ही मैंने!

    कुछ दिन तक ऐसे ही रात को न्यूड वीडियो कॉल पर ही सेक्स चलता रहा.

    फिर हमारे एग्जाम्स भी पास आ रहे थे, उसी टाइम उसके घर वालों उनके गांव जाना था.
    लेकिन एग्जाम्स और असाईनमेंट्स की वजह से वह नहीं गई.
    तो उसके घर वालों ने उसके पड़ोस की लड़की को उसके पास सोने के लिए बोल दिया।

    जब यह बात उसने मुझे बताई तो मैं मन ही मन खुश हो गया और उससे मिलने की बात की.
    तो उसने बोला कि रात को 11 बजे कंडोम लेकर उससे मिलने आऊं।

    फिर उसके इतना बोलने पर 10 बजे मैं घर से निकल गया और ठेके से जाकर 2 बीयर ले ली.
    लेकिन मैंने कंडोम नही लिया क्योंकि मैं पहली बार बिना कंडोम के ही करना चाहता था।

    जब मैं उसके घर पहुंचा तो उसे फोन किया.
    तो वह और उसके साथ वाली लड़की दोनों दरवाजे पर आ गई.
    मैं दूसरी लड़की को देख कर एकदम चौंक गया क्योंकि काजल ने मुझे उसके बारे में कुछ बताया ही नहीं था.

    वैसे उस लड़की का नाम प्रिया था, वह दिखने में बहुत ही मस्त माल थी साली!
    उसके बूब्स 32, कमर 28 और गांड 34 की थी.

    मैंने उसको भी चोदा था. उसकी कहानी मैं आपको बाद मैं बताऊंगा, आज मैं सिर्फ आपको काजल की चुदाई के बारे में ही बताता हूँ।

    फिर काजल ने बताया कि प्रिया बस उसकी हेल्प के लिए ही है और उसे सब पता है.
    तो मैं थोड़ा नॉर्मल हुआ.
    लेकिन प्रिया की आंखों में एक अजीब सी ही मस्ती थी।

    ये सब इग्नोर करके मैं अंदर आ गया.
    अभी तो बस मैं काजल की वर्जिन जवानी का ही मजा लेना चाहता था।

    तो हम प्रिया को नीचे छोड़ कर सीधा ऊपर काजल के रूम में आ गए.

    जैसे ही काजल ने रूम लॉक किया, वैसे ही मैंने काजल को पीछे से जकड़ लिया और उसके बेड पर पटक दिया.

    मैं उसके ऊपर कूद गया और उसे पागलों की तरह चूमने और चाटने लग गया.
    वह भी मेरा साथ देने लगी.

    फिर एक झटके में ही मैंने उसकी शर्ट और सलवार उतार फैंकी.
    उफ्फ दोस्तो … क्या बताऊं! मैं पहली बार किसी लड़की को ब्रा और पैंटी में देख रहा था.

    मैं तो मानो जैसे पागल हो गया और अगले ही पल उसकी ब्रा भी निकाल फेंकी और उसके निप्पल को मुंह में लेकर चूसने लग गया।

    फिर उसने मुझे धक्का दिया और बोली- मुझे ही नंगी करोगे या खुद अपना भी आजाद करोगे? देखो कैसे पैंट में से बाहर आने को उतावला है।
    मैं- तुम खुद ही आजाद कर दो ना इसे मेरी जान!

    बस इतने कहने की ही देर थी कि अगले ही पल उसने मेरे सारे कपड़े निकाल दिए और मेरे लन्ड को अपने हाथ में लेकर बोली- उफ्फ राहुल … मेरी चूत बहुत छोटी है. यह अंदर कैसे जायेगा?
    मैं- देखून तो कैसी है?

    इतने में मैंने उसकी पैंटी निकाल के उसे पूरी नंगी कर दिया और उसकी चूत को अपने हाथ से सहलाने लगा.
    काजल- उफ्फ आह … ओह यस बेबी हा हा ओह!
    वह ऐसे ही जोर जोर से सिसकारियां ले रही थी.

    फिर मैंने उससे लन्ड चूसने को कहा.
    तो वह मना करने लगी.

    उसके मना करने पर मैं उसके बूब्स पर टूट पड़ा और जोर जोर से चूसने और काटने लगा.
    मैं अपने एक हाथ से उसकी चूत सहला रहा था.

    और फिर अपनी एक उंगली मैंने उसकी चूत में डाल दी.
    तो वह एकदम सिहर उठी.

    सच में यार बहुत टाइट थी उसकी चूत!
    मैं उसकी चूत में उंगली करता रहा.

    पहले तो उसे थोड़ा दर्द हुआ, फिर बाद में वह गांड़ उठा उठा कर मेरी उंगली अपनी चूत में लेने लगी.
    और वह बस जोर जोर से सिसकारियां ले रही थी.
    साथ ही मेरे लन्ड को अपने हाथ से आगे पीछे कर रही थी।

    फिर जब उससे रहा न गया तो उसने मेरा लन्ड अपनी चूत में लेने को कहा.
    मैं भी अपना लन्ड उसकी चूत में डालने को बेकरार था।

    अगले ही पल में उसकी चूत के पास आ गया और अपना लन्ड उसकी चूत के ऊपर सेट किया और एक धक्का दिया.
    तो मेरा लन्ड फिसल गया.
    थोड़ी और कोशिश करने पर भी अंदर नहीं गया.

    फिर मैंने उसके बेड के पास रखी वेसलीन देखी तो ढेर सारी वेसलीन अपने लन्ड पर लगा ली और थोड़ी उसकी चूत पर भी लगा दी.
    मैं समझ गया था कि काजल ने इसी लिए वेसलीन लाकर रखी हुई थी.

    तब मैंने उसकी चूत को थोड़ा खोलकर उसमें एक जोरदार धक्का लगाया और मेरा लन्ड का आगे का हिस्सा उसकी चूत में था.

    तो वह एकदम से चिहुंक उठी और चिल्लाने ही वाली थी कि मैंने अपने होठों से उसके होंठ बंद कर दिए.
    लेकिन वह अपने हाथों से मुझे पीछे धकेलने लगी.

    तो मैंने उसे पूरा जकड़ लिया तो वह कुछ कर नहीं सकती थी।

    फिर मैंने उसके लब चूसने और उसके बूब्स सहलाने शुरू कर दिए.
    फिर थोड़ी देर बाद वह थोड़ी नॉर्मल हुई तो मैंने बिना देर किए एक और धक्का लगा दिया.

    इस बार तो मुझे भी ऐसा लगा कि जैसे मेरा लन्ड ही फट गया हो.

    और काजल का भी हाल बेहाल था.
    वह छटपटाने लगी और उसकी आंखों से आंसू बह रहे थे.

    और मुझे भी बहुत दर्द हो रहा था.

    तभी मेरी नजर पास ही टेबल पर रखी बीयर पर गई जो मैं लेकर आया था।

    मैंने उसकी चूत में लन्ड डाले डाले ही बीयर उठाई.
    एक मैंने ली और एक उसे दे दी और बोला- इससे दर्द थोड़ा कम होगा.

    फिर हम दोनों ने अलग होकर बीयर पीकर खत्म की.

    तब तक थोड़ा दर्द भी कम हुआ तो मैंने अपना पूरा लन्ड उसकी चूत में ही डाल दिया.
    उसकी चूत से खून आने लगा.

    लेकिन थोड़ा सा बीयर का और थोड़ा हमारी हवस का नशा हमारे सिर चढ़ा हुआ था तो दर्द ज्यादा महसूस नहीं हुआ.

    फिर मैं धीरे धीरे लन्ड आगे पीछे करने लगा और हमारी चुदाई शुरू हो गई.

    और थोड़ी देर बाद तो हम जैसे दर्द को भूल ही गए।
    हमारी धकापेल चुदाई शुरू हो गई.

    और थोड़ी देर बाद तो हम जैसे दर्द को भूल ही गए।
    हमारी धकापेल चुदाई शुरू हो गई.

    काजल जोर जोर से सिसकारियां लेने लगी.
    हम दोनों इतने मदहोश हो गए कि प्रिया के बारे में बिल्कुल ही भूल गए.
    बस हमें अब अपनी चुदाई से मतलब रह गया था।

    काजल- आह आह … उफ्फ यस राहुल … चोदो उफ्फ … आह ओह हां हां … यस चोदो मुझे!

    मुझे उसकी ये सिसकारियां सुन के जोश चढ़ने लगा और मैं बस उसे चोदने के बारे में ही सोच रहा था.

    मेरे दिमाग में बस उसकी चूत और बूब्स का ही ख्याल था … और किसी चीज का मुझे होश ही नहीं था.

    मैं बस उसे जोर जोर से चोदे जा रहा था और वह सिसकारियां ले रही थी.

    उसकी मादक सिसकारियों से पूरा कमरा गूंजने लगा.
    और मेरा लन्ड अपनी पहली चूत चुदाई का पूरा अहसास ले रहा था.

    फिर कुछ देर बाद वह वर्जिन गर्ल फर्स्ट सेक्स करके झड़ गई और निढाल होकर बेड पर लेट गई.

    लेकिन यह मेरी पहली चुदाई का अनुभव था तो मैंने उसे चोदना बंद नहीं किया और उसे लगातार चोद रहा था.
    फिर करीब 2 मिनट बाद मेरा लन्ड भी अपना रस छोड़ने वाला था तो मैंने उसकी चूत से अपना लन्ड निकाला और उसके बूब्स पर अपना रस छोड़ दिया.
    और फिर मैं उसी के ऊपर लेट गया।

    थोड़ी देर बाद उसे होश आया तो उसने मुझे अपने ऊपर से बगल में लिटा दिया और मुझसे चिपक कर सो गई।

    और मैं भी थका हुआ था मुझे भी नींद आ गई.
    सुबह जब हम उठे तो उसकी चूत और मेरा लन्ड दोनों ही दर्द कर रहे थे.

    अब न मुझमें उसे चोदने की हिम्मत हो रही थी और न ही उसे चुदवाने की.
    तो मैंने अपने कपड़े पहने और उसे किस करके घर आ गया।

    अब तो हम दोनों ही चुदाई का मजा ले चुके थे.
    तो अब हमें जब भी मौका मिलता, हम चुदाई कर लेते थे.

    फिर उसने प्रिया को भी मुझसे चुदवाया.
    वह मैं आपको अगली कहानी में बताऊंगा।

    तो दोस्तो, कैसी लगी आपको मेरी पहली चुदाई की वर्जिन गर्ल फर्स्ट सेक्स कहानी?

  • भाभी की महीनों की चुदाई की प्यास बुझाई

    भाभी की चुदाई हिंदी कहानी में मेरे ताऊ जी की पुत्रवधू पति से अलग ससुराल में रह रही थी. तो उनकी चूत चुदाई नहीं हो रही थी. मैंने भाभी की जरूरत को समझ कर उनकी चूत और गांड का मजा लिया.

    नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम दीप है. मैं उत्तराखण्ड के देहरादून में रहता हूं.
    मेरी उम्र महज 19 साल ही है लेकिन मेरा 7 इंच का लंड, प्यासी भाभियों के लिए काफी मस्त है.

    यह मेरी पहली चुदाई की पहली कहानी है.
    मेरी भाभी की चुदाई हिंदी कहानी की मुख्य पात्र मेरी 32 साल की कमसिन भाभी हैं … जिनका 36-30-38 का फिगर बड़ा ही लाजवाब है.
    वे मेरे ताऊजी के लड़के की बीवी हैं.

    उनके तने हुए दूध देखकर तो हमेशा ही मेरा लंड तन जाता था.
    दरअसल मेरी भाभी भैया के साथ बंगलोर में रहती हैं.

    फरवरी के महीने भाभी अपने पति के साथ घर आई हुई थीं.

    भैया को अचानक से अपने काम के सिलसिले में वापस जाना पड़ गया.
    तो भाभी यहां बाकी परिवार के साथ ही रहने लगीं.

    एक दिन भाभी का सैड स्टेटस देखने के बाद मैंने यूँ ही रिप्लाई कर दिया.
    तो उसके बाद भाभी के साथ मेरी कुछ अलग सी बातें शुरू होने लगीं.

    कुछ ही दिनों में भाभी ने मुझसे अपने दिल की बात बताते हुए कहा कि वे मुझसे प्यार करती हैं.
    मैं तो था ही उनके लिए पागल!

    अब भाभी मेरी गर्लफ्रेंड बन गई थीं.
    हम दोनों फ़ोन पर सामान्य बात करते करते किस करने लगते और सेक्स की भी बातें करने लगते थे.

    भाभी ने मुझे वीडियो कॉल पर अपने बूब्स भी दिखाए थे और मेरा तना हुआ लंड भी वीडियो कॉल पर देखा था.

    अब हम दोनों को अपने लंड और चूत के मिलन का इंतजार था.

    एक दिन भाभी ने मुझे मिलने के लिए बुला लिया.

    उस दिन एग्जाम के कारण मुझे आने में थोड़ी देर हो गई.
    मैं भाभी के घर होते हुए अपने घर आया.

    उनके घर जाकर मैं भाभी के मन की बात समझ गया था लेकिन उनके परिवार के अन्य लोगों के होते मैं कुछ नहीं कर सकता था.

    कुछ दिन और यूँ ही चला, हम दोनों की कामुक भावनाएं भड़कती रहीं.

    फिर आखिर वह दिन आ ही गया, जब मैंने भाभी की प्यास बुझाई … और मेरी प्यास भाभी ने!

    यह मई महीने की बात है.
    मैं उस दिन भाभी के घर गया था.

    उनके घर पर कोई नहीं था तो मैंने भाभी को किस करना चालू कर दिया.
    भाभी ने भी पूरा साथ दिया.

    मैं किस करते करते भाभी के 36 इंच के दूध दबाने लगा और उनकी गर्दन को चाटने लगा.

    भाभी भी ‘आह … उह … इस्स’ की आवाज़ें निकालकर मुझे मदहोश कर रही थीं मगर हमारे पास सिर्फ किस करने का ही वक्त था.
    उनके घर के बाकी के लोग घर वापस आने वाले थे.

    भाभी की चुम्मियां लेने से मेरी वासना ने उग्र रूप धारण कर लिया था और अब भाभी की चूत चोदे बिना शांति नहीं मिलने वाली थी.

    इसलिए उस दिन मैंने भाभी के घर पर ही रुकने का फैसला कर लिया.

    रात को खाना खाने के बाद मैं बैठक वाले कमरे में सोने गया.
    पर नींद किसे आने वाली थी.

    जब भाभी को लगा कि सब सो गए हैं तो भाभी ने मुझे अपने कमरे में बुलाने के लिए कॉल किया.

    उनका कॉल देख कर मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था.
    जिंदगी में पहली बार मैं आज अपनी जवानी जीने वाला था, वह भी भाभी के साथ.

    वैसे तो मैं अब तक और चूत चोद चुका था पर भाभी के साथ दिल लग गया था.

    मैं जल्दी से उनके रूम में आ गया.
    भाभी बेड पर लेटी हुई थीं.

    मैं उनके पीछे जाकर चिपक कर लेट गया.

    भाभी को मेरी महक मिल गई थी और वे काम से पीड़ित मादा की भांति अपनी गांड मेरे लौड़े से रगड़ने लगी थीं.

    पीछे से ही मैं भी उनकी गर्दन को किस करने लगा.
    मैं अपने हाथ कभी उनकी पीठ पर फेरता, तो कभी गर्दन पर … और कभी टी-शर्ट के बाहर से ही उनके मम्मों पर अपने हाथ दबा कर दूध दबाने का मजा लेने लगता.
    कभी मैं उनके लोअर के अन्दर अपने एक हाथ को डाल कर उनकी टांगों के बीच में छेद को टटोलने लगता.

    मुझसे अब सब्र नहीं हो रहा था.
    तो मैंने अपना एक हाथ टी-शर्ट के अन्दर डालकर उनके मम्मों को दबाना चालू कर दिया.

    भाभी भी काफी गर्म हो चुकी थीं, उनकी चूत में कब से लंड नहीं गया था.

    वे मेरी तरफ पलटीं और हम दोनों के होंठ एक हो गए.

    भाभी को करीब 10 मिनट तक किस करने के बाद मैंने उनकी टी-शर्ट हटा दी.

    वे मेरे सामने एक पिंक कलर की ब्रा पहनी हुई थीं और अपनी जवानी दिखा कर मुझे मदहोश कर रही थीं.
    उनकी ब्रा के ऊपर से ही मैंने उनके मम्मों को दबाना चालू किया और उनके सारे बदन को चूमा.

    मैंने भाभी से पूछा- आपने कितने समय से सेक्स नहीं किया है?
    भाभी ने धीमी आवाज़ में जवाब दिया- मैं फरवरी से प्यासी हूँ.

    भाभी की चुदाई हिंदी कहानी बनने का रास्ता साफ़ हो चुका था.

    मैंने कहा- क्यों आपको कोई और नहीं मिला!
    वे बोलीं- यह मेरी ससुराल का घर है, यदि मैं बंगलोर में होती तो अब तक सत्तर लंड मेरी चूत में घुस चुके होते!

    मैंने कहा- अरे वाह … इसका मतलब आप तो पूरी लंड खोर हैं!
    वे हंस दीं और बोलीं- क्यों तू चूत खोर नहीं है क्या?

    मैंने कहा- हां, मैं भी चूत का आशिक हूँ और अब तक छह चूत चोद चुका हूँ … आज आप सातवीं हैं!

    भाभी मेरे लंड को टटोलती हुई बोलीं- जब से मैंने तेरे लंड को वीडियो कॉल देख लिया था, तभी से इसके लिए पागल हूँ.

    मैंने कहा- भैया का लंड कैसा है?
    वे हंस कर बोलीं- उनका भी मस्त है … तुझे अपनी गांड में लेना हो तो मैं उनसे बात कर सकती हूँ.

    मैंने हंस कर कहा- अरे रहने दो भाभी, मैं छोटी लाइन वाला बंदा नहीं हूँ. मुझे तो चूत चोदना ही पसंद आता है!

    भाभी बोलीं- क्यों गांड मारने का शौक भी नहीं है?
    मैंने कहा- अब तक किसी ने पीछे की दी ही नहीं. यदि आप गांड मरवाने के लिए राजी हों, तो मुझे उसका भी स्वाद मिल जाएगा!

    भाभी लंड को सहलाने लगीं और बोलीं- पहले चूत में अपनी ताकत दिखा कर मुझे खुश कर … बाद में गांड में लेने की भी सोच सकती हूँ.
    मैंने उनके दूध को मसलते हुए कहा- भैया आपकी गांड मारते हैं क्या?

    वे बोलीं- अरे उन्हें तो गांड मारने में ही मजा आता है, तभी तो मेरी चूत लंड के लिए प्यासी ही रहती है. यूं समझो कि तुम्हारे भैया चार बार गांड मारेंगे तब एक बार चूत में लंड पेलते हैं.

    मैंने कहा- अरे वाह भाभी … इसका मतलब तो आपकी हर रात में पांच बार चुदाई होती है?
    वे बोलीं- नहीं रे बुद्धू … तेरे भैया एक रात में एक ही बार चुदाई करते हैं. वह तो मेरे कहने का मतलब यह है कि वे चार बार गांड का मजा ले लेते हैं … तब मेरे कहने पर अगली बार मेरी चूत में लंड पेलते हैं!

    मैंने कहा- अरे, इसका मतलब तो यह हुआ कि वे गे भी हो सकते हैं!
    भाभी हंस कर बोलीं- हां यार, तेरे भैया गांडू ही हैं. उन्हें अपने गांडू दोस्तों से गांड मरवाने में भी मजा आता है. वे मुझे छोड़ कर बंगलोर इसी लिए तो गए हैं ताकि वे अपनी गांड मारने और मरवाने की खुजली मिटवा सकें.

    मैंने कहा- तो आप उनसे कुछ कहती नहीं हैं?
    भाभी- पहले पहल तो मैंने उनसे खूब कहा, पर उन्होंने मुझे भी छूट दे दी कि मैं जिससे चाहूँ चुद सकती हूँ, तभी तो मैंने तुम्हें अपना सही साथी चुना है!

    मैंने कहा- अरे भाभी, यदि आपको तरह तरह के लंड से चुदने का शौक है तो मैं आपके लिए लंड की लाइन लगा दूंगा.
    यह सुनकर भाभी खुश हो गईं और बोलीं- पहले तुमसे चुद कर मजा ले लेने दो फिर बाद में एक साथ दो लंड से चुदने का मजा भी ले लूँगी.

    उनकी सेक्सी बातें सुनकर मेरे लौड़े को तो मानो पंख लग गए थे.

    इसी दौरान मैं भाभी के बदन को किस करते करते उनकी कमर तक पहुँच गया.

    अब वक्त आ गया था, जब भाभी के लोअर को उतार कर उनके बदन से अलग करना था.

    भाभी का लोअर उतारते ही मैं अपने हाथों को उनकी जांघ पर फेरने लगा और ब्रा के ऊपर से ही चूचे चूसने लगा.
    अपना हाथ मैं उनकी गांड पर फेरने लगा.

    अब बारी भाभी के ब्रा की थी.
    ब्रा उतारते ही भाभी के 36 इंच के दूध मेरे सामने आज़ाद होकर गजब फुदक रहे थे.

    मुझसे रहा नहीं गया और मैं तुरंत ही उनके दोनों बूब्स दबाने चूसने और काटने लगा.
    भाभी तो मानो मदहोश हो चुकी थीं.

    भाभी की चूचियां चूसते हुए मैंने अपना हाथ भाभी की पैंटी के बाहर से ही हरकत में लाना शुरू किया.
    मैंने उनकी चूत पर अपने हाथ को चलाना चालू कर दिया.

    भाभी की चूत पूरी गीली हो चुकी थी इसलिए मैंने भी देर न करते हुए उनकी पैंटी उतार कर फेंक दी और उंगली से उनकी चूत का स्पर्श करने लगा.

    उनकी गीली चूत और रसीली सिसकारियां मुझे मदहोश कर रही थीं.

    मैंने अपनी उंगली भाभी की चूत में डाल दी.
    भाभी उंगली लेते ही बिल्कुल कामुक हो चुकी थीं और वे मुझे जोर जोर से किस करने लगीं.

    जब उनसे सहन न हुआ तो वे मुझे धक्का देकर खुद मेरे ऊपर आ गईं.
    वे मेरे होंठों से गर्दन पर होती हुई छाती पर किस करने लगीं.

    मैं भी भाभी का साथ देने लगा और भाभी के बूब्स दबाने लगा.

    इतने में भाभी ने मेरी टी-शर्ट और लोअर उतार कर मुझे अंडरवियर में छोड़ दिया और लंड को ऊपर से ही सहलाने लगीं.

    अब मेरे सब्र का बांध टूट रहा था तो मैं भाभी को लेटाकर खुद उनकी चूत के सामने आ गया और उनकी चूत चाटने लगा.

    कुछ ही देर में भाभी को मजा आने लगा और वे अपने हाथ से मेरे सर को अपनी चूत पर दबाने लगीं.

    भाभी अपने मुँह से कामुक आवाज़ें निकालती हुई बोलीं- आह … बहुत मजा आ रहा है … और अन्दर तक चाटो आह आह!

    मुझे यह जानकर बड़ी हैरानी हुई कि भाभी ने आज पहली बार चूत चटवाई थी.
    भैया ने आज तक कभी उनकी चूत चाटी ही नहीं थी.
    किसी और मर्द ने भी उनकी चूत को चाटने का सुख नहीं दिया था.

    थोड़ी देर बाद मैं किस करता हुआ उनके बूब्स तक आ गया.

    भाभी ने मुझे धक्का देकर अपना कुत्ता बना लिया; मेरी अंडरवियर उतारकर भाभी खुद ही मेरे लंड पर बैठ गईं.

    एक बार में ही मेरा पूरा लंड भाभी की चूत में चला गया.
    अब भाभी लंड की सवारी करती हुई अपनी गांड को ऊपर नीचे करने लगीं.

    दस मिनट तक ऐसे ही भाभी की चूत चोदने के बाद मुझे भाभी के ऊपर चढ़कर उनको चोदना था.

    मैंने भाभी को गिरा दिया और ऊपर से आकर भाभी की चूत में लंड पेल दिया.

    करीब 10 मिनट उसकी चुदाई करने के बाद भाभी ढीली पड़कर झड़ गईं.
    उनके झड़ने के बाद मैंने तेज तेज धक्के देने शुरू किए और कुछ ही धक्कों के बाद मैं भी झड़ने को हो गया.

    भाभी ने कहा- अन्दर ही निकाल दो.
    मैं उनकी चूत में ही झड़ गया.

    कुछ देर तक एक दूसरे से चिपके रहने के बाद भाभी मेरे लंड को चूसने लगीं.

    मैं समझ गया भाभी अब रांड बनकर मुझसे और चुदना चाहती हैं.

    उन्होंने मेरा फिर से मूड बना दिया तो दूसरे राउंड की चुदाई शुरू हो गयी.

    इस बार मैंने भाभी को 15 मिनट तक लगातार अलग अलग पोजीशन में चोदा.

    फिर भाभी को अपने लंड पर बैठाकर उनकी गांड पकड़ कर उन्हें चोदने लगा.

    दस मिनट की चुदाई के बाद भाभी झड़ गईं और मेरे ऊपर ही लेट गईं.

    मैं उनकी गांड हिलाने लगा.
    लगभग 5 मिनट बाद मेरे लंड ने भी जवाब दे दिया और मैं उनकी चूत में ही झड़ गया.

    मैं भाभी को अपने ऊपर लेटाकर ही सो गया.
    अगले दिन सुबह उठकर भाभी को प्यार से किस करता हुआ अपने घर चला गया.

    दोस्तो, ये अपनी भाभी के साथ मेरी पहली चुदाई की कहानी थी.

    अगली बार उनकी गांड चुदाई व थ्री-सम चुदाई की कहानी का मजा भी आपके साथ साझा करूंगा.

  • पड़ोसी लड़के से बुर की सील तुड़वा ली मैंने

    दोस्तो, मैं अंजलि फिर एक बार एक नई सेक्स कहानी के साथ हाजिर हूँ.

    यह सेक्स कहानी मेरी एक प्रशंसिका सपना ने मुझे भेजी है और कहा है कि मैं उसके लिए इस घटना को कहानी के रूप में लिख कर अन्तर्वासना या फ्री सेक्स कहानी की साइट पर प्रकाशित करवाऊं.

    इस कहानी में गोपनीयता के लिहाज से सब नाम बदले हुए हैं.

    इस सेक्स विद टीनऐज गर्लफ्रेंड कहानी को आप सपना के शब्दों में सुनें.

    नमस्ते दोस्तो, मेरा नाम सपना है और मैं सूरत से हूं.
    मेरी उम्र 28 वर्ष है और मेरी शादी हो चुकी है, मेरा एक बेटा भी है.

    आज मैं जो कहानी बताने जा रही हूं, यह मेरी जीवन की एक सच्चाई है.

    यह घटना आज से सात साल पहले शुरू हुई दास्तान है जो हमारे पड़ोस में रहने आए एक व्यक्ति के साथ शुरू हुई थी.

    मेरे घर में हम चार लोग थे. मैं, मेरी बहन खुशबू, मां विमला और हमारे पापा अशोक.
    मेरे पापा एक कपड़े की मिल में मुंशी हैं.
    मां घर में ही रहती हैं. हम दोनों बहनों की पढ़ाई चल रही थी.

    मेरा पढ़ाई में मन बिल्कुल भी नहीं लगता था, बस ग्रेजुएशन पूरा कर रही थी.

    वहीं खुशबू पढ़ने में ज्यादा होशियार थी इसलिए वह सबकी लाड़ली भी थी.

    खुशबू मुझसे केवल एक साल ही छोटी है.
    तब मैं 21 साल थी.

    एक दिन हमारे घर के ठीक सामने एक परिवार रहने आया.
    उसमें माता पिता और उनका एक लड़का था, जो 25-26 वर्ष का होगा.

    उस परिवार का परिचय हम सबसे हुआ तो पता लगा कि उस लड़के का नाम विपुल है, वह एक मेडिकल कंपनी में काम करता है.

    वह अक्सर छत पर दिखता था और हमें ही घूरता रहता था.
    खुशबू उस पर ध्यान नहीं देती थी, पर मैं भी उसे ही देखती थी.
    मुझे वह अच्छा लगता था.

    कुछ दिनों बाद उसके माता पिता चले गए और अब विपुल अकेला ही रह गया था.

    मेरे पापा पर उनके सेठ जी को सबसे ज्यादा भरोसा था इसलिए वे पापा के ऊपर ही सारी जिम्मेदारी दिए रहते थे.
    इसी कारण से पापा कुछ ज्यादा ही व्यस्त रहते थे.
    वे घर पर ज्यादा ध्यान नहीं दे पाते थे.
    इस कारण से मां अक्सर नाराज रहती थीं.

    एक बार कुछ काम पड़ा तो मां बोलीं- जा, विपुल को बुला कर ला!

    हम दोनों बहनों को थोड़ा अजीब लगा कि ज्यादा जान पहचान नहीं है … और मां उसे बुलाने के लिए पूरे जोश से बोल रही हैं.

    मां और विपुल में क्या बात हुई, ये तो पता नहीं … पर उसने उसी वक्त हमारी मदद के लिए कुछ पैसे दिए थे.

    विपुल मुझे अच्छा लगता था, उसका कद 5 फुट 10 इंच का था.
    उसने अपने शरीर का काफी ध्यान रखा था और काफी स्मार्ट था.

    वहीं मेरा कद 5 फुट 5 इंच का था और फिगर 30-28-32 का था.

    मैं विपुल को अपना बॉयफ्रेंड ही मानने लगी थी.
    लेकिन वह क्या सोचता था, इसका मुझे कुछ नहीं पता था.

    मां काफी देर तक उससे बातें करती थीं.

    तब मेरी समझ में यह नहीं आया था कि ऐसा क्यों होता था?

    हमारी परीक्षाएं खत्म हो गई थीं.

    उसके एक दिन पहले हमारे मोहल्ले में एक पार्टी थी और सभी को बुलाया गया था.

    तय समय पर हम सब पार्टी में पहुंच गए.

    मेरी मां पहले से ही वहां थीं, जो अपनी सहेलियों से बात कर रही थीं.
    वहां वे विपुल के साथ दिख रही थीं.

    मैं वहां गई तो विपुल ने मेरी गांड पर धीरे से हाथ फेर दिया.
    जब मैंने मुड़कर देखा, तो उसने ऐसे देखा … जैसे कुछ हुआ ही नहीं.

    थोड़ी देर बाद उसने फिर वही एक चांटा सा धीरे से मारा और उधर से खिसक गया.

    अब मेरी नजरें विपुल को ही ढूंढ रही थीं क्योंकि वह अचानक से गायब हो गया था.
    मेरी मां भी नहीं दिख रही थीं.

    मां का तो पता था कि वह ज्यादा देर तक पार्टी में नहीं रहती हैं.

    रात के बारह बजे तक पार्टी खत्म खत्म होने को थी.
    सब खत्म होने के बाद मैं भी घर लौटी, तो देखा खुशबू छत पर फोन से बात कर रही थी और मां सो चुकी थीं.

    अगले दिन पापा ने खुशबू से कहा- विपुल को बुलाओ.
    जब वह आया तो हम सभी थे.

    पापा ने उससे कहा कि वह मुझे पढ़ाई में हेल्प करे!
    शायद पापा ने इसलिए कहा था क्योंकि यह मेरा आखिरी साल था.

    पहले उसने कुछ नखरे दिखाए, फिर मां ने कहा- थोड़ा ध्यान दो, मुझे तुमसे कुछ उम्मीद है.
    इस पर वह तैयार हो गया.

    मैं भी काफी खुश थी कि मुझे उसके साथ समय बिताने को मिलेगा.
    वहीं वह मेरी मां की तरफ देख रहा था और वे दोनों हंस रहे थे.

    मेरे प्रति उसके व्यवहार में कुछ फर्क आ गया था.
    अब वह मुझ पर एक हक सा जता रहा था.

    पढ़ाते हुए उसके हाथ मेरे जिस्म से टकरा जाते थे, तो कभी वह मेरे बूब्स पर हाथ से सहला देता.

    मुझे भी अच्छा लगता था इसलिए मैं भी उससे चिपक कर बैठ जाती थी.
    जिससे उसकी हिम्मत बढ़ गई.

    एक दिन पढ़ाते हुए उसने अचानक से मेरी चूत पर हाथ रखा और सहलाने लगा.
    मेरे मुँह से ‘आह …’ निकल गई.

    तभी उसने मुझे कमर से पकड़ लिया और दबाते हुए बोला- क्या हुआ, तुम ठीक हो न?
    मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि क्या कहूं?

    वह लगातार मेरी चूत सहलाता रहा.
    इससे पहले कि मैं कुछ कहती, उसने मुझे कस कर दबाया और मुझे किस करने लगा.

    इसमें पता ही नहीं चला कि कब मैं झड़ गई.
    तभी उसने मुझे छोड़ते हुए कहा कि हो गया काम!
    फिर वह उठकर चला गया.

    मैं यही सोचती रही कि ये क्या हुआ, सही था या नहीं?

    फिर मां से कहकर मैं अगले दिन कॉलेज चली गई.
    और जब लौटी तो देखा कि वह पहले से मौजूद है.

    मां मुझे आया देख कर वहां से बाहर निकल गईं.
    अब ये रोज होता था.

    मेरे से पहले वह मौजूद रहता था और मेरे शरीर को छूने के बहाने ढूंढता था.
    यह मुझे भी अच्छा लगता था.

    फिर एक दिन उसने पूछा- क्या हुआ आज कॉलेज में?
    मैं- कुछ खास नहीं, आज बस दो ही क्लास हुईं.

    विपुल- कौन कौन सी?
    यह कहते हुए वह आगे बढ़ा और मुझे अपनी बांहों में जकड़ लिया और मेरे माथे पर, आंखों पर किस करने लगा.

    तभी मैंने भी उसका लंड पकड़ लिया, जो तन रहा था.
    उसे शायद उम्मीद नहीं थी.

    तभी मैंने कहा- क्या है ये सब?
    वह मुझे अपनी बांहों में कसते हुए तेज आवाज में बोला- आंटी, आज मैं सपना को अपने साथ ले जा रहा हूं और इसको वहीं पढ़ा भी दूंगा.

    मैं धीमे से बोली- इसका क्या मतलब हुआ?
    विपुल- आज तुम्हें, तुम्हारी मां से मांग रहा हूं.

    इससे पहले कि मैं कुछ समझती कि मां ने जवाब देते हुए कहा- हां ठीक है, ध्यान रखना.
    विपुल बोला- हां जी बिल्कुल.

    उसने मुझे चलने का इशारा किया.

    मैं- वहां क्यों आज?
    विपुल- यहां कुछ सही नहीं लग रहा है … पता नहीं क्यों आज मजा नहीं आ रहा. मैं तुम्हारे दोनों होंठों को चखना चाहता हूं.

    मैं समझ गई कि यह मेरे नीचे वाले होंठों को जोड़ कर दोनों होंठों को चखने की बात कर रहा है.
    मैंने भी न जाने कौं सी रौ में कह दिया- अभी तक एक ही को लिया है क्या?

    वह शायद सुन नहीं पाया था.
    मेरा मतलब यह था कि क्या उसने अब तक किसी की चूत नहीं चोदी है क्या!

    घर पहुंचते ही उसने दरवाजा बंद किया और मुझे बेड पर धकेल दिया.
    फिर घूरते हुए कहा- क्या मस्त है तेरी जवानी भी!

    मैंने कहा- उस रात तुम्हीं मुझे तंग कर रहे थे न!

    विपुल- हां साली, चोदना तो मैं तुझे ही चाहता था लेकिन तेरी मां बीच में आ गई. लेकिन आज तुझे पूरा लेना होगा.
    मैं हंस कर रह गई और बोली- क्या पूरा लेना है?
    तभी उसने ‘लंड’ कहते हुए मेरी कुर्ती उतार दी.

    अब मैं सिर्फ ब्रा में थी और शर्मा कर मैंने अपनी आंखों को ढक लिया.

    मेरी आंखों पर से हाथ हटाते हुए वह मुझे किस करने लगा और अपना लंड सलवार के ऊपर से ही रगड़ने लगा.

    मैं भी मदहोश हो रही थी.

    तभी उसने मेरी सलवार भी उतार दी और बूब्स को दबाते हुए बोला- इनको तो बड़ा करना होगा.
    मैंने उसकी तरफ देखा तो वह सिर्फ अंडरवियर में था.

    मैं उठ कर उसका लंड सहलाने लगी जो अब काफी कड़क हो गया था और मोटा भी.

    हम दोनों अब एक दूसरे को चूमने लगे और एक दूसरे के जिस्म से खेल रहे थे.

    विपुल- अपनी मां से एक बात पूछेगी क्या?
    मैं- क्या?
    विपुल- वह क्या खाती थी जब तुझे पैदा किया?
    मैं- मतलब!

    विपुल- साली तू जो इतनी चिकनी है कि बस तुझे मसलते रहने का ही मन करता है.
    मैं चुदास भर स्वर में बोली- तो मसल दो न … मैंने कब मना किया है?

    मेरी चूचियों को दबाते हुए बोला- पूरी रंडी की तरह तैयार है चूत खुलवाने को!
    मैं अपने होंठ काट कर मुस्कुरा दी.

    वह मेरी चड्डी उतारते हुए मेरी जांघों को चूमने लगा और धीरे धीरे ऊपर आता जा रहा था.
    अब वह मेरी चूत में अपने होंठों को लगा कर चूसने लगा.

    मुझे चूत चुसवाने में बहुत अच्छा लग रहा था और मैं मचल रही थी.
    तभी उसने अपनी दो उंगलियां मेरी चूत में डाल दीं.

    मैंने कसमसा कर चादर को जोर से पकड़ लिया और मचलने लगी.

    कुछ ही देर में मेरा पानी निकल गया

    विपुल- साली लंड के लिए आवाज भी नहीं निकाल रही … मादरचोद, आज तेरी चूत का भोसड़ा बनाता हूं.

    वह मेरी चूत को अभी भी अपनी उंगलियों से चोद रहा था और मैं बस ‘आह ओह … ऐसे ही आज बना लो अपना आह मुझे!’ कह रही थी.

    विपुल- क्या बनाऊं साली … बहन की लौड़ी? बता न कुतिया बनेगी मेरी?
    मैं- आह … अपनी बीवी बना लो आह और मत तड़पाओ मुझे … अब चोद … दो आ … आह.

    तभी अचानक से उसने अपना 7 इंच का लंड मेरे मुँह में डाल दिया.
    विपुल- ले बहनचोद चूस इसे … आह.

    मैं भी उसका लंड चूसने लगी.
    उसका मोटा लंड मेरे गले में फंस रहा था और मैं जितनी ताकत से उसके लंड को बाहर निकालने की कोशिश करती, वह उतनी ही जोर से डाल रहा था.

    विपुल- ले साली छिनाल … आह चू….स अच्छे से मां की लौड़ी!
    मुझे उसकी गालियां अच्छी लग रही थीं.

    फिर उसने मुझे लिटा कर अचानक से एक ही झटके में मेरी चूत में अपना लंड ठांस दिया.

    मैं एकदम से लंड घुसने से जोर से चीख पड़ी.
    मुझे दर्द से बेहद तकलीफ हो रही थी.

    ऐसा लग रहा था मानो उसने मेरी चूत में गर्म खंजर घुसेड़ दिया हो.

    कुछ देर के लिए मेरी आंखें बंद रहीं.
    फिर मैं जैसे ही संभली तो देखा कि वह मुझे किस कर रहा है और धीरे धीरे लंड को चूत में अन्दर बाहर कर रहा है.

    मैं- आह बाहर निकालो … आह दर्द हो रहा है … आह अब बस … औ…र नहीं.
    विपुल- चुप साली रंडी, तेरी चूत फाड़ने के लिए अपने घर लाया हूं! ऐसे ही चुदती रह … तुझे मजा आएगा. इस वक्त मेरा लंड तेरे दूसरे होंठों को चूस रहा है बहन की लवड़ी … आज तेरे दोनों होंठों ने मेरा लंड चूसा. हां मेरी जान ऐसे ही लेती रह आह … तेरी चूत बहुत मस्त है.

    कुछ देर बाद मुझे अच्छा लगने लगा और मैं चुपचाप उससे चुदाई का मजा लेने लगी.

    फिर उसने मुझे पलटा और बोला- चल कुतिया बन जा!
    मैं जैसे ही कुतिया बनी उसने पीछे से मेरी चूत में अपना फनफनाता हुआ लंड एक झटके में ही घुसेड़ दिया और चोदने लगा.

    अब मैं भी उसका साथ दे रही थी और अपनी गांड उसके लंड के हिसाब से हिला रही थी.
    मैं भी पूरी मस्ती में आ गई थी और वह भी.

    मैं अब तक दो बार झड़ चुकी थी लेकिन वह अभी भी वैसे ही चोद रहा था.

    तब मैं बोली- आज मार ही डालोगे क्या … और कितना ठोकोगे मेरे नीचे वाले होंठों को?
    विपुल- बस मेरी जान ऐसे ही मजा लेती रह … आज तो तेरी चूत रबड़ी के जैसी मजा दे रही है!

    मैं- अब बस भी करो यार … तुम्हारे लंड के चक्कर में मेरी हालत खराब हो गई है.
    विपुल- बस आ रहा हूं मैं भी … ये ले और ले … आह साली कुत्ती … तेरी मां को चोदूं … बहन की लौड़ी आह आह.
    यही कहते हुए वह मेरी चूत में ही झड़ गया.

    हम दोनों हांफ रहे थे.

    तभी मेरी नज़र बेड पर गई.
    मेरी गांड के नीचे की तरफ वाला चादर खून से लाल हुआ पड़ा था.

    मैं- ये क्या किया तुमने?
    विपुल- आज तुझे जन्नत की सैर कराते हुए तुझे तेरी जवानी के बारे में बताया मेरी जान … और कुछ नहीं!

    मैं- अब ये साफ कैसे किया जाए?
    विपुल- घबराओ मत, तेरी मां ही सफाई करेगी!

    यह कहते हुए वह मुझे किस करने लगा और बोला- चल मेरे लौड़े को साफ कर!
    मैंने उसके लंड को उसी चादर से साफ किया. उसके बाद मैंने खुद को भी साफ किया और नहाने चली गई.

    सेक्स विद टीनऐज गर्लफ्रेंड का मजा लेने देने के बाद मैं अपने घर आ गई.

    कुछ देर बाद मैंने देखा कि सच में वह चादर हमारे घर में ही धुलाई के लिए रखी हुई है.

    उसके अगले दिन मां ने वह चादर धोकर विपुल के घर भिजवा दी.

    इसके बाद क्या हुआ अगली देसी कहानी में बताऊंगी.
    इस सेक्स विद टीनऐज गर्लफ्रेंड कहानी पर आप अपनी राय जरूर बताएं.

  • पड़ोसन भाभी को चोदकर प्रेग्नेंट किया

    सकीना की चूत का मजा मुझे तब मिला जब मैंने एक कमरा किराये पर लिया और बगल वाले कमरे में सकीना और उसका शौहर रहते थे. उसे बच्चा नहीं हो रहा था.

    मेरा नाम राम सिंह है. मैं 6 फुट का बड़े लंड का मर्द हूँ और मैं बिहार से हूँ.
    यह सकीना की चूत की कहानी 2013 की है, तब मैं बंगलोर में जॉब करता था.
    उधर मैं एक रूम किराए पर लेकर रहता था.

    मेरे बगल वाले कमरे में एक अन्य कपल रहता था.
    वे दोनों बिहार से थे, इसी नाते हमारे बीच दोस्ती हो गयी.

    उसमें युवक का नाम तौफीक था.
    उसकी उम्र 37 साल की थी.
    तौफीक की बीवी 24 साल की थी. उसका का नाम सकीना था.
    वह बहुत ही सुंदर थी.

    उनकी शादी को 5 साल हो गए थे और अब तक उन्हें कोई बच्चा नहीं हुआ था.

    तौफीक एयरटेल कंपनी के टॉवर लगाने का काम करता था.
    वह अपने काम के सिलसिले में महीने में 15 दिन बाहर ही रहता था.

    दिखने में तौफीक एक सूखा सा हड्डी था.
    मुझे लगता था कि वह सकीना भाभी को सही से चोद ही नहीं पाता होगा.
    वह बच्चे के लिए अपनी बीवी से लड़ता भी था.

    मेरा उसके घर मेरा आना जाना हो गया था.
    तौफीक की बीवी सकीना मुझे देख कर बड़ी खुश हो जाती थी.
    यह बात मुझे जरा कम समझ में आती थी.

    मैंने कभी भी उसकी तरफ कामुक नजरों से नहीं देखा था.
    क्योंकि एक तो वह हर वक्त बुरके में रहती थी और ऐसा उसका कोई खास फिगर भी समझ नहीं आता था जिस वजह से मैं उस पर अपनी नीयत खराब करूँ.

    मैं जिधर काम करता था उधर एक से एक मस्त माल मेरे लंड को खड़ा करने के लिए दिखाई देते थे.
    तो मैं सकीना की ओर नहीं देखता था.

    तौफीक को मेरे ऊपर बड़ा भरोसा भी था क्योंकि मैं एक तो बिहार का रहने वाला था और वह भी मेरे जिले का ही था.

    दूसरी बात यह थी कि वह अपने काम के सिलसिले में शहर से बाहर जाता था, तो उसकी बीवी की देख-रेख के लिए उसे मुझसे ज्यादा मुफीद आदमी कोई और समझ नहीं आता था.

    कुल मिलाकर वह मेरी बड़ी कद्र करता था और मेरे ऊपर भरोसा करता था.

    मैं भी उसकी गैर हाजिरी में सकीना भाभी से उनकी जरूरत के सामान आदि के लिए पूछ लेता था तो वह भी मेरे सामने खुल कर आ जाती थी और मुझसे बात कर लेती थी.

    एक रोज ऐसे ही मैं सुबह सुबह सकीना भाभी के घर के दरवाजे को बजा कर पूछने लगा- भाभी, कुछ लाना तो नहीं है, मैं बाजार जा रहा हूँ!
    इस पर सकीना भाभी ने दरवाजा खोला और मुझसे अन्दर आने का कहा.

    उस वक्त वह हिजाब में नहीं थी तो मैं उसे देखता रह गया.
    मेरी आंखों को ललचाई नजरों से देखता पाकर वह मुस्कुरा दी और बोली- क्या हुआ भाईसाब, कभी लड़की नहीं देखी है क्या?

    मैंने कहा- अरे भाभी, मैंने तो एक से एक परकटी लड़कियां देखी हैं और रोज ही उनसे मिलता भी रहता हूँ … पर आज आपको देख कर मैं हैरान हो गया कि चाँद तो बाजू में ही छिपा था, बाहर तो सिर्फ चाँद के टुकड़े दिखाई देते थे!

    यह सुनकर सकीना भाभी हंसने लगी और मुझे शुक्रिया कहने लगी.

    मैंने कहा- सच में भाभी, आप हिजाब में थीं तो दिखाई ही नहीं देती थीं.

    इस तरह से मेरी बात अब सकीना भाभी से हंसी मजाक का दौर चलने लगा.

    एक बार तौफीक टॉवर लगाने 5 दिन के लिए कहीं बाहर गया था.

    उस दिन मैं सकीना भाभी से बात कर रहा था.

    मैंने उससे पूछा- 5 साल हो गए हैं भाभी, बेबी क्यों नहीं हुआ?
    तो वह खुल कर बताने लगी- मेरे शौहर का अंग छोटा है, वह मेरे साथ सही से सेक्स नहीं कर पाते हैं. जब सेक्स सही से नहीं होगा, तो बेबी कहां से होगा.
    यह बता कर वह रोने लगी.

    मैंने उसे चुप कराया, तो वह अचानक से मेरे गले से लिपट कर रोने लगी.

    मैं उसके दूध अपने सीने पर गड़ते हुए महसूस करने लगा.
    मुझे सकीना भाभी को चोदने का मन करने लगा.

    वह रोती हुई बोली- मैं ग़रीब घर से थी, मेरे अब्बा ने इस बूढ़े से शादी करवा दी और मेरी जिंदगी खराब कर दी.
    मैं बोला- भाभी अगर तुम चाहो, तो सब ठीक हो जाएगा.

    वह बोली- कैसे ठीक होगा … वह बूढ़ा जवान तो नहीं हो जाएगा ना!
    मैं बोला- वह जवान नहीं होगा, पर मैं तो हूँ ना … मैं दूँगा तुमको जवानी का सुख … और बच्चा भी दूंगा.

    वह बोली- पर ये तो गलत होगा.
    मैंने उसे अच्छे से समझाया- अपनी जवानी को बर्बाद मत करो. मेरे साथ इन्जॉय करो.

    वह बोली- तुम हिंदू हो, मैं मु स्लिम … तो कैसे होगा!
    मैंने कहा- हम दोनों शादी नहीं कर रहे हैं. केवल सेक्स करेंगे.

    बहुत देर समझाने के बाद वह मान गयी और बोली- तुम किसी को मत बताना.
    मैंने हामी भर दी.

    उसी रात से हम दोनों की चुदाई शुरू हुई.
    सकीना मुझे अपने रूम में ले गयी और अपने पलंग पर बैठा कर मेरी सेवा करने लगी.

    उसने मुझे पानी दिया और मुझे देख कर मुस्कुराने लगी.

    मैंने उसे अपने पास खींचा और उसे किस करने लगा.
    वह भी मेरा साथ देने लगी.

    धीरे धीरे मैंने उसके सारे कपड़े खोल दिए और अपने भी खोल दिए.

    वह मेरे सीने पर अपने हाथ फेरने लगी और मैं उसके दूध सहलाने लगा.
    उसके एक दूध को अपने मुँह में भर कर चूसने लगा और दूसरे को हाथ से मसलने लगा.

    वह आह आह करती हुई कामुक होने लगी.
    मैंने उसका हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रख दिया तो वह लंड को सहलाने लगी.

    मैंने उसको लिटा दिया और उसके ऊपर चढ़ कर उसके दोनों मम्मों को दबा दबा कर पीने लगा.

    उस वक्त मेरा लंड उसकी चूत से रगड़ खा रहा था तो वह अपनी कमर को इधर उधर करती हुई लंड को अपनी चूत से मसल रही थी.

    मैंने उसकी चुदास देखते हुए उसकी चूत पर लंड सटा दिया और उसकी चूत की दरार में लंड के सुपारे को फंसा दिया.

    वह उस वक्त मेरे लंड की गर्मी से एकदम व्याकुल हो रही थी और जल्दी से लंड को अन्दर पेलवाने की जद्दोजहद कर रही थी.

    मुझे मालूम था कि इसकी चूत में जैसे ही मैं अपना मोटा लंड पेलूँगा, यह दर्द से रोने लगेगी.

    फिर मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रखे और चूत फाड़ने की नियत से एक जोरदार धक्का मार दिया.

    लंड चूत को फाड़ता हुआ अन्दर घुस गया और भाभी की अम्मी चुद गई.

    वह जोर जोर से चिल्लाने की कोशिश कर रही थी लेकिन उसका मुँह बन्द था तो वह कुछ कर ही न सकी.

    उसकी छटपटाहट बता रही थी कि इसकी चूत की सही से आज ही चुदाई हुई है.

    मुझे मालूम था कि दर्द तो होना ही है तो क्यों न इसकी चूत का भोसड़ा बनाने की नीयत से इसे पेलता रहूँ.

    हर चूत का दर्द कुछ देर बाद हो ही जाता है.
    बस यही सोच कर मैं तेज तेज झटके देता हुआ उसकी चूत में लंड पेलता रहा.

    कुछ मिनट पेलने के बाद वह दर्द से निजात पा गई और धकापेल का मजा लेने लगी.

    उसकी छटपटाहट खत्म हुई तो मैंने उसके मुँह से मुँह हटा लिया और वह लंबी सांस लेती हुई आह आह करने लगी.

    कुछ देर बाद वह झड़ गयी और मैं भी उसकी चूत में ही फारिग हो गया.

    अब हम दोनों नंगे ही एक दूसरे से लिपटे पड़े थे.

    वह बताने लगी- मेरे शौहर का लंड तुमसे आधा भी नहीं है.

    मैंने पूछा- मजा आया?
    वह हंस दी और बोली- शुरू शुरू में तो तुमने मुझे मार ही दिया था, पर बाद में बहुत अच्छा लगा!

    मैंने कहा- अच्छा लगा या मजा आया?

    वह फिर से हंस दी और मेरी छाती पर मुक्का मारती हुई धीमे से बोली- मजा आया.

    मैंने कहा- तो फिर से मजा लें!
    वह फिर से हंस दी.

    इस बार उसने मेरे साथ 69 में शुरुआत की और मेरे लंड को चूस कर खड़ा कर दिया.

    जब दूसरी बार चुदाई हुई तो सकीना ने बहुत मजे से चूत चुदवाई.
    अब वह मेरे लंड से मुहब्बत कर बैठी थी.

    बाद में उसने बताया कि मैं न जाने कबसे तुमसे चुदवाना चाहती थी.

    मैंने कहा- हां, जब से तुम्हें बिना हिजाब के देखा, तभी से मैं भी तुम्हें चोदने के लिए उतावला था.

    उस दिन की चुदाई के बाद जब भी उसका शौहर घर से बाहर होता, वह मेरे साथ ही सोती थी.

    वह पहले पतली थी, उसके दूध भी छोटे छोटे से थे.
    पर मेरे लंड से से चुद चुद कर भर गई और उसके दूध भी रसीले हो गए.

    कोई 15 दिन के बाद उसका मासिक धर्म नहीं हुआ तो वह समझ गई कि वह हमल से हो गई है.

    उसने मुझे बताया तो मैं उसकी जांच के लिए प्रेग्नेंसी जाँचने वाली किट ले आया.

    उस पर सकीना भाभी ने अपनी पेशाब की दो बूंदें टपकाईं, तो रिजल्ट पॉज़िटिव आया.

    वह बहुत खुश थी और मुझसे लिपट कर मुझको चूमने लगी थी.
    खुशी के मारे उसके आंसू निकलने लगे थे.

    उसने मुझको शुक्रिया बोला और मेरे लंड के साथ खेलने लगी.

    उसके शौहर को भी जब मालूम हुआ कि उसकी बीवी हमल से हो गई है तो वह भी बेहद खुश हुआ.

    उसे लग रहा था कि उसके मरियल लंड के पानी से उसकी बीवी प्रेग्नेंट हो गई है.

    उसके बाद मैं उसे चार महीने तक जब भी उसका शौहर घर पर नहीं होता, उसे नियमित रूप से चोदता रहा.

    उसको नौ महीने बाद एक बेटा पैदा हुआ.
    उसके बाद वह फिर से मेरे लौड़े से चुदने आने लगी.

    इस तरह से मैंने उसे 3 साल तक चोदा.
    मेरे लंड से उसको और 2 बेटे हुए.

    अब मैं बंगलोर से दिल्ली आ गया हूँ और यहीं जॉब करता हूँ.

    उसका शौहर फिलहाल बिहार चला गया है.
    लॉकडाउन के समय में उसका काम छूट गया था, तो वह अभी भी बेरोज़गार घूम रहा है.

    पिछले महीने सकीना मुझे फोन करके बोल रही थी कि मैं उसके शौहर के लिए दिल्ली में जॉब देख लूँ.

    उसे चोदने की नीयत से मैंने इधर दिल्ली में तौफीक के लिए जॉब ढूँढ ली है.
    यह जॉब नाइट शिफ्ट वाली है.

    मैंने जानबूझ कर उसके लिए यह जॉब पक्की की है ताकि सकीना मेरे लौड़े से चुदने आ सके.

    अगले हफ्ते वह अपने शौहर के साथ दिल्ली आ जाएगी.
    वह नाइट ड्यूटी जाएगा और मैं उसकी बीवी को चोदूंगा.

    सकीना की चूत चोदने के बाद मुझे किसी और लड़की की चूत पसंद ही नहीं आती है.

    शायद मेरे लंड में भी कुछ खासियत है कि जो लड़की एक बार मेरा लंड ले लेती है, वह बार बार मेरे लंड से चुदने की बात कहती है.

    लड़कियों को इस बात पर यदि भरोसा न हो, तो वे मुझे एक बार मौका देकर इस बात को समझ सकती हैं कि मैं कोरी गप्प नहीं हांक रहा हूँ.

    मैंने भी तय कर लिया है कि मैं उसी लड़की से शादी करूंगा तो सकीना जैसी माल लड़की हो और मेरे लंड पर कलाबाजी खा सके.