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  • पति के गधेछाप लंड से चुत गांड चुदाई

    मैं एक इंटीरियर डिज़ाइनर हूँ और मेरा फिगर बहुत ही सेक्सी व स्लिम ट्रिम फिगर है.

    मेरी उम्र 25 साल है. मैं दूध की तरह गोरी हूँ, पूरे बदन के कटाव एकदम सेक्सी हैं. पेट पूरा सपाट है, तोंद तो है ही नहीं. मेरे बूब्स और चूतड़ तने हुए बड़े बड़े हैं.
    मेरा एक छोटा बच्चा भी है, जो अभी 4 महीने का ही है.

    ऐसे तो मेरे पति मुझे रोज चोदते हैं और ऐसे वैसे नहीं, एकदम किसी जंगली जानवर की तरह चोदते हैं.

    लेकिन आज रात तो अलग ही किस्म के जानवर या कहूँ कि सांड बन गए थे वो!
    उनकी चुदाई से कमरे में आधे से ज्यादा चीजें टूट चुकी थीं.

    हुआ यूं कि उस दिन मेरे पति ऑफिस में थे और मैं घर पर रह कर अपना काम कर रही थी.
    आजकल मेरा वर्क फ्रॉम होम चल रहा था.

    उसी समय मेरे पति का मुझे कॉल आया और हम दोनों बात करने लगे.
    हमारे बीच मजाक मस्ती की बातें होने लगीं.

    वो बोले- आज रात मैं अलग ही जोश में हूँ. आज पूरी रात इतनी ज़ोर से चुदाई करूँगा कि पूरा घर हिलने लगेगा.
    मैं भी जोश में बोली- ठीक है मेरे पति देव … पहले घर तो आ जाओ. क्या फोन से ही चोदोगे?

    वो बोले- काश, मेरा लंड इतना लम्बा होता कि फोन से घुस कर ही तुम्हारी चुत में घुस जाता तो मैं जरूर तुम्हारी चुदाई फ़ोन से ही कर देता.
    मैं हंस पड़ी.

    हम दोनों की बातें खत्म हुईं और मैंने घड़ी में देखा तो रात के दस बज चुके थे.
    मैंने काम करते करते टेबल पर खाना लगा दिया था.

    कुछ देर बाद मेरे पति घर आ गए.

    वो मुझे किस करना चाहते थे लेकिन मैंने उनको करने नहीं दी क्योंकि मैं एक नए छात्र को फोन पर कुछ टिप्स दे रही थी.

    उस नए छात्र से बात करते हुए मैंने उससे कहा- तुम्हारा पेन्सिल बॉक्स गलती से मेरे पास आ गया. मैं कल तुमको ऑफिस में दे दूंगी.
    उसने ओके कह दिया.

    अब तक मेरे पति फ्रेश होने चले गए थे, वो कुछ देर के बाद आ गए.

    वो खाना खाने बैठ गए और मैं भी कॉल खत्म करके खाना खाने बैठ गयी.

    खाना खाने बाद मेरे पति ने मुझे पीछे से पकड़ लिया और मुझे किस करने लगे.
    मुझे अभी भी उस छात्र को एक फाइल भेजना बाकी रह गया था.

    मैंने उनसे कहा- प्लीज, अभी कुछ देर रुक जाओ क्योंकि मुझे एक आखिरी फाइल भेज देने दो.
    मगर वो माने ही नहीं और मेरे मम्मों व गांड को दबाने लगे.

    मैं भी सनसनी में आने लगी.
    उन्होंने एक हाथ से अपने पजामा को खोल दिया और जल्द ही टी-शर्ट खोल कर सिर्फ अंडरवियर में रह गए.

    मैंने हंस कर कहा- ये भी क्यों रह गया, इसे भी हटा दो.
    इस पर उन्होंने अपना अंडरवियर भी खोल दिया.

    हमारा नन्हा सा बेटा बेडरूम में सो रहा था.

    उन्होंने मुझे गोद में उठाया और टेबल पर ही लेटा दिया.
    टेबल पर बहुत सारा खाने का सामान रखा था. साथ ही मेरे काम की चीजें भी थीं. कुछ पेपर्स, लैपटॉप और उसी छात्र का पेन्सिल बॉक्स आदि भी रखा था.

    मेरे पति ने मुझे टेबल पर उन सबके ऊपर ही लेटा दिया और मेरे कपड़े फाड़ दिए.
    वो मिशनरी पोजीशन में मेरे ऊपर आ गए और अपने बदन से मेरे बदन को ज़ोर से दबाए हुए थे.

    मेरे पति बहुत भारी हैं क्योंकि उनका पेट काफी बड़ा है.
    मैं पेपर्स और पेन्सिल बॉक्स के ऊपर लेटी हुई थी.

    पेन्सिल बॉक्स ठीक मेरी गांड के नीचे था और मेरे पति मेरे ऊपर पूरे जोश में मेरे बदन को काट रहे थे.
    फिर उन्होंने अपना काला लंड मेरी चुत में ज़ोर से घुसा दिया.

    मैं चिल्ला उठी.
    मैंने उन्हें धीरे चोदने के लिए कहा लेकिन वो माने ही नहीं.

    उन्होंने फुल स्पीड से चुदाई शुरू कर दी.
    मैं चिल्ला चिल्ला कर कामुक सिसकारियां ले रही थी- ऊऊओ … ऊऊ … जान आई मर गई … थोड़ा आराम से.
    लेकिन वो मान ही नहीं रहे थे.

    उन्होंने मेरी सिसकारियां सुनकर और ज्यादा वजन डाल दिया और मुझे और स्पीड से चोदने लगे.
    पूरी टेबल धप धाप धाप की आवाज कर रही थी और हम दोनों के वजन से ज़ोर ज़ोर से हिल रही थी.

    मेरी गांड के नीचे जो पेन्सिल बॉक्स था वो चुदाई से पूरा टूट गया था और पेपर फट गए थे.
    पेन्सिल बॉक्स के पीस मुझे मेरी गांड में चुभ रहे थे. लेकिन मेरे पति पूरे जोश में वाइल्ड सेक्स के नशे में थे और कूद कूद कर कर मुझे चोद रहे थे.

    जब वो मेरे ऊपर कूद कूद कर चुदाई कर रहे थे तो पूरी टेबल आगे पीछे होती हुई इतनी ज़ोर से हिलने लगी थी मानो अभी ही टूट जाएगी.
    खाने का सारा सामान नीचे जमीन पर गिरता जा रहा था और देखते ही टेबल टूट भी गई.

    हम लोग के चुदाई करते हुए ही खाने के ऊपर गिर गए.
    प्लास्टिक की चम्मचें आदि इधर उधर छिटक गईं.

    फिर भी उन्होंने मुझे चोदना नहीं रोका. वो मुझे किसी जंगली जानवर की तरह चोदे जा रहे थे.
    मैं चिल्ला रही थी- आह अय मांआ … मर गयी … अह रुको तो यार … आह सीइ सीई.

    वो नॉनस्टॉप चुदाई करने में लगे रहे.
    सब बचा हुआ खाना आदि मेरे जिस्म के नीचे पिसा जा रहा था.

    मगर मेरे पति कूद कूद कर जंगली जानवर की तरह मेरी चुदाई कर रहे थे.
    जब उनका माल निकल गया, तब वो रुके … और मुझे राहत मिली.
    वो मेरे ऊपर लेटे रहे.

    मुझे चूमते हुए बोले- मजा आया?
    मैंने कहा- मजा तो तुम्हें आया होगा. मेरी तो गांड छिल गई.

    वो बोले- क्यों?
    मैंने कहा- टेबल पर बहुत सारा सामान था, वो सब मेरी गांड में रगड़ कर पिस गया.

    वो हंसने लगे.
    मैं अपनी गांड सहलाने लगी.

    मुझे भी अपने पति के मोटे लंड से चुदकर मजा आया था मगर आपको तो मालूम ही है कि औरतों की आदत होती है, वो कभी संतुष्ट नहीं होतीं.

    फिर जब हम लोग उठे तो मैंने नीचे देखा.
    पूरा सत्यानाश हो चुका था. टेबल और खाने का सब सामान टूट गया था.

    मैं फ्रेश होने गयी.
    मेरे फ्रेश होने के बाद मेरे पति भी फ्रेश होकर आए.

    हम दोनों कमरे में आ गए और बेड पर लेट कर सोने लगे.

    मैंने देखा कि बगल में हमारा बेटा चैन की नींद सो रहा था.

    एक घंटा बाद मेरे पति का लंड फिर से खड़ा हो गया और वो फिर से मेरे ऊपर चढ़ गए.

    फिर से मिशनरी पोज़िशन में वो मेरी बॉडी को अपने जिस्म से ज़ोर से दबाए हुए थे.

    मेरी तो जान ही निकल रही थी.
    मैंने समझ लिया कि ये बिना लंड पेले मानेंगे नहीं, तो मैंने अपनी टांगें खोल दीं.

    उन्होंने अपना लंड ज़ोर से मेरी चुत में घुसा दिया और धकापेल ज़ोर ज़ोर से पूरी रफ़्तार में मेरी चुदाई कर रहे थे.
    पूरा बेड ज़ोर ज़ोर से हिलने लगा और मैंने देखा कि चुदाई से हमारा बेटा भी हिल रहा था.

    मुझे डर था कि मेरा बेटा जाग ना जाए. चुदाई के समय में ज़ोर से सिसकारियां ले रही थी.
    मैं- अया अयाया अयाया बस करो, फीलिक्स आराम से … आउच आह अयाया अया … आराम से.
    लेकिन मेरे पति मान ही नहीं रहे थे.

    कुछ देर बाद उन्होंने मुझे उल्टा कर दिया और मेरी गांड पर लंड सैट कर दिया.

    मैं कांप गई कि अब गांड भी मारी जाएगी.
    हालांकि मैं गांड तरफ से भी चुदती हूँ लेकिन उन महिलाओं को मालूम होगा कि गांड में लंड लेना कितना दुरूह कार्य होता है.
    फिर मेरे पति का लंड तो गधे के लंड से मैच करता है.

    वही हुआ … मेरे पति ने मेरी गांड में पूरी ताकत से अपना मूसल लंड घुसा दिया.
    लंड घुसा और वो कूद कूद कर गांड चुदाई करने लगे.

    पूरा बेड अब और ज़ोर से हिल रहा था.
    काफी देर बाद मेरे पति ने मुझे फिर से सीधा लेटा दिया और इस बार गलती से उन्होंने मुझे मेरे बेटे की प्लास्टिक टॉय कार के ऊपर लेटा दिया.

    मुझे पता नहीं था कि मेरे बेटे की टॉय कार हमारे बेड पर पड़ी है.
    क्योंकि वो बेड पर ही खेलता रहता है और कभी कभी उसके खिलौने बेड पर पड़े रह जाते हैं.
    चूँकि रूम में भी पूरा अंधेरा था इसलिए मैं भी देख नहीं पाई.

    मेरे पति अपने जिस्म का बोझ मेरे ऊपर इतना ज़ोर से दबाए हुए थे कि मेरी जान ही निकल रही थी.
    वो फिर से मिशनरी पोज़िशन में जंगली जानवर की तरह मेरी चुदाई करने लगे.

    उन्होंने मेरे जिस्म को एकदम कसके पकड़ा हुआ था और मेरे पैर को अपने पैर से दबाए हुए थे.
    वो कूद कूद कर रगड़ रगड़ कर जंगली सांड की तरह मुझे चोदने लगे.

    मैं लगातार चिल्लाए जा रही थी- आआह आआ फीलिक्स धीरे आराम से आह बस करो.
    मगर उनको चुदाई के समय कुछ होश नहीं रहता है.

    हमारा बेड बहुत ज़ोर से आगे पीछे हिल रहा था और चूं छुं कर रहा था, धाप धाप की आवाज आने लगी थी.
    फिर मुझे किसी चीज की टूटने की आवाज आई.

    ये आवाज मेरे जिस्म के नीचे से आई थी.
    मेरे बेटे की प्लास्टिक टॉय कार मेरे पति की जंगली चुदाई से टूट गयी थी.

    मैंने उन्हें रोकने की कोशिश की लेकिन मेरे पति फिर भी नहीं रुके.

    वो पूरी ताक़त के साथ इतनी ज़ोर से मुझे चोद रहे थे कि मेरी जान ही निकल रही थी.
    मुझे ऐसा लग रहा था कि बस किसी तरह से मैं अपने पति से छूट कर अलग हो जाऊं.

    फिर वही हुआ जिसका डर था.
    उनकी इस तरह की जंगली चुदाई से बेड टूट गया और मेरा बेटा नीचे गिर गया.

    उसी समय मेरे पति का स्पर्म निकल गया.
    मेरा बेटा रोने लगा था.

    फिर मैंने पति से हटने का कहा.
    वो मेरे ऊपर से हट गए.

    मैंने अपने बेटे को उठाया और उसे गोद में उठाकर चुप कराने लगी.
    चुदाई से हम दोनों की बॉडी पसीने से तर हो गयी थी.

    मैं चल नहीं पा रही थी. क्योंकि मेरे पति ने मेरी चुत लगभग फाड़ दी थी और गांड भी चिर गई थी.
    फिर वो फ्रेश हुए और मैं बेटे को चुप कराके उसको दूसरे बेड पर सुला आई.
    मैं और मेरे पति भी उसी कमरे में बेड पर सो गए.

    जब सुबह हुई तो फिर से मॉर्निंग रफ मिशनरी सेक्स हुआ और उसके बाद मैं ऑफिस चली गयी.
    मैं सही से चल भी नहीं पा रही थी.

    मैंने एक नया पेन्सिल बॉक्स खरीदा.
    ऑफिस में मेरे उस इन्टर्न छात्र ने मुझसे पूछा कि मेम आपको क्या हुआ आप ठीक से चल क्यों नहीं पा रही हैं?
    मैंने कहा- मेरे पैर में चोट लग गई है.

    फिर उसने पूछा कि ये न्यू पेन्सिल बॉक्स क्यों? मेरा पुराना वाला कहां गया?
    मैं बोली- यह गिफ्ट है, रख लो.

    मुझे कुछ बहाना मिला ही नहीं था. क्या ही बोलती उससे.
    तो यह थी मेरी ताबड़तोड़ चुदाई की सेक्स विद हसबैंड वाइफ पोर्न स्टोरी!

    मेरे पति मुझे रोज हर रात मुझे ऐसे ही चोदते हैं, रफ वाइल्ड मिशनरी सेक्स करते हैं.
    अब फर्क बस इतना है कि जिस कमरे में हम दोनों अब चुदाई करते हैं, वहां का बेड बहुत मजबूत है.
    लेकिन मेरे पति की रफ चुदाई से वो बेड भी हिलने लगता है और चूँ चूँ की आवाज आने लगती है.

    अपने पति के गधे छाप लंड से चुदने के बाद मुझे बहुत मस्त नींद आती है और बाद में उनकी चुदाई से मुझे मीठा मीठा सपना आता है.

  • पापा की परी की मटकती गांड में गधे जैसा लंड-Baap Beti Ki Chudai

    पापा का मजबूत लंड पजामे को फाडने को तैयार हो रहा था। तो मैरी चुत भी उस भयंकर लंड को लेने को बेताब थी। पापा की परी पापा की दुल्हन बन गयी थी मेरी दिल की धड़कन बढने लगी जैसे जैसे रात गहरी हो रही थी।

    दोस्तो मे सोनम कपूर मुंबई से आपके सामने मेरे जीवन का एक हसीन लम्हा जो आगे चलकर मेरी जिंदगी बन गया वो शेयर कर रही हूँ। इस Baap Beti Sex Story को अगर लिखने मे कोई गलती हो तो क्षमाँ करना मेरे सभी चोदू दोस्तो!

    मेरे परिवार मे मेरे से दो छोटी ओर मोम डेड है कॉलेज की पढाई के बाद मेरी शादी 19 साल की उम्र मे कर दी गयी। मेरे पापा एक बिजनेसमैन है तो उन्होंने मेरे लिए भी एक बिजनेसमैन लडका ही खोजा ओर हमाँरी शादी कर दी।

    सुहागरात पर ही मुझे मेरे गांडू पति की हकीकत पता चली वो पैसेवाला तो है मगर दमदार मर्द नही, मेरे ख्वाब ख्वाब ही रह गये। मगर ओर कोई रास्ता नही था शादी से पहले मेरा कोई अफेयर नही था। तो मैने सब अपनी किस्मत पर छोड़ दिया था।

    शादी के एक साल बाद मे जब पिहर आई तो माँ ओर बहने मेरी नानी के घर जा रही थी वो मुझे देखकर बहुत खुश हुई ओर मुझे भी साथ चलने का कहने लगी। मगर मेरा ननिहाल मे मन नही लगता था तो मैने मना कर दिया,

    ओर कहा – मै पापा के पास ही रहूगी!

    ये सुनकर माँ ने कहा – चलो ठीक है हम कल सुबह जाकर तीन दिन मे लोट आएगे तुम अपने पापा का ख्याल रखना।

    मेरे पापा की उम्र उस समय 40 की थी ओर मेरी19 की मेरी माँ भी मेरी बडी बहन जैसी लगती थी। वो उस समय 32 की थी उनका शरीर भी बडा कामुक था खैर दिन बातो मे निकल गया ओर रात को खाना खाकर हम सब सो गये।

    हम तीनो बहने ऊपर सो रही थी तभी रात को मुझे प्यास लगी तो मै पानी पीने नीचे आई तो माँ की आवाजे सुनकर मै उनके कमरे की तरफ देखने चली गयी। कमरा बंद था मगर मम्मी की आहे सुनकर मुझे पता चल गया की मेरा बाप मेरी माँ चोद रहे थे।

    माँ की कामुक आवाजो से मेरी भी चुदास भडक गयी ओर मै चुदाई देखने का जुगाड करने लगी। तभी कमरे के अंदर झाकने का मुझे जुगाड मिल गया, गेट के लोक के सामने बेड होने से मुझे अंदर का दृश्य साफ साफ दिखाई दे रहा था। मेरे पापा ने मेरे माँ के पैर चांद की तरफ कर रखे थे ओर माँ की चुत मै अपना गधे जैसा लंड पेल रहे थे।

    पापा का लंड देखते ही मेरी चुत का झरना बहने लगा ओर मेरा हाथ लोवर के अंदर से मेरी चुत को सहला रहा था। माँ की चिखे तो मेरी माँ की माँ की चीख निकल जाती अगर इतने बडे लंड से चुदती।

    वो कुछ देर बाद पापा ने माँ को कुतिया बनाया तो उनकी नजरे गेट पर चली ओर उन्हे गेट के नीचे से मेरे पैर दिखाई दिये। जिसे देखकर उन्होने अंदाजा लगाया की वहा मै उनकी चुदाई देख रही हू। माँ की चुत मे पापा का लंड अंदर जाता तो उनकी चीख निकल जाती ओर वो गाली देती हर बार।

    माँ – अब तो छोड दे मुझे हवशी जानवर… मेरे किस्मत मे ही लिखा था… ऐसा जानवरतो पापा ने कहा – रानी लोग देखने को तरसते है ऐसे लंड को!

    ओर उन्होने गेट की तरफ देखकर मुझे आंख माँर दी ओर हंसकर माँ की गांड मे उगली डाल दी। ओर वो लगातार गेट पर नजरे गढ़ाकर माँ की चुदाई करते रहै ओर इधर माँ की चुदाई देखकर मेरे बदन मे भी आग लग गयी थी। मगर मेरे पास कुछ नही था उस आग को बुझाने के लिए।

    दस मिनट बाद पापा ने माँ की चुत मे ढेर सारा वीर्य भर दिया ओर फिर अपना लंबा लंड चुत से बाहर निकाल लिया ओर गेट के सामने खडे होकर हिलाने लगे। तो मेरी उगलिओ की हरकत से मेरी चुत ने भी खडे खडे दोबारा अपना रस बाहर निकाल दिया।

    अब मै भागकर अपने कमरे मे चली गयी मगर पापा का मूसल लंड मेरी आंखो के सामने घुम रहा था ओर मेरी नींद भी गायब थी। पता नही कब आंख लगी मेरी सुबह जब माँ ओर बहन तैयार हो गयी तो मुझे उठाया।

    ओर कहने लगी – अब सोती ही रहेगी क्या उठ जा रात को क्या देख रही थी

    माँ की बात सुनकर मुझे रात का नजारा फिर से याद आ गया ओर मै मुह धोकर नीचे आ गयी। बहन ने चाय लाकर दे दी ओर वो कमरे मे समाँन पैक करने चली गयी।

    तो माँ ने कहा – सोनम क्या हुआ सब ठीक है

    तो पापा ने कहा – कुछ उदास तो है सोनम पता नही क्या बात है

    तो मम्मी बोली – कोई बात नही… तीन दिन आप ख्याल रखना ज्यादा तंग मत करना उसे…

    तो पापा बोले – तुम भी ना सोनम को तंग क्यो करूगा!

    तो मम्मी बोली – पता नही आपका मै जानती हू, मे ही झेल सकती हू,हर कोई नही,

    तो पापा ने कहा – सोनम क्या कम है वो भी झेल लेगी आराम से

    तो माँ बोली – रहने दो इसके बस की बात नही

    तो मै कहा – माँ.. मै भी झैल लूंगी आपकी बेटी हू!

    तो माँ बोली – बेटा देखने ओर करने मे बहुत फर्क है!  ये सुनकर मे सकपका गयी!

    तो पापा बोले – तुम डराओ मत तुमको कुछ हुआ था क्या जो संजू को होगा

    तो मम्मी बोली – मुझे ही पता है क्या हुआ था आपको क्या पता

    तो पापा बोले – संजू कुछ हुआ क्या माँलूम लगा तेरे को तो

    माँ – बोली आने के बाद पता लगेगा वो तो, मगर संभाल कर करना…

    ये सब बाते सुनकर मुझे एहसास हो गया था, माँ मेरी मदद कर रही है क्योकी माँ जानती थी मेरे पति मे दम नही है ओर मै खुश भी नही हू उस से, तो माँ ने ही पापा को मनाया था इसके लिए।

    तभी पापा बोले – सोनम रात के लिए तैयार तो हो ना?!!

    मैने भी कह दिया – पापा आपकी परी तैयार है बिलकुल!

    तो पापा बोले – फिर दोपहर मै लडके साथ समाँन भिजवा दूंगा, तुम तैयारी कर लेना अच्छे से ओर खाना मै लेकर आ जाऊगा, कोई दिक्कत है तो अपनी माँ को बता दो, अगर मुझे ना कहना चाहो!

    तो मैने कहा – ठीक है पापा!

    ओर मै रसोई मे जाकर माँ से गले लग गयी!

    तो माँ बोली – बेटी एकबार दर्द होगा बस थोडी हिम्मत रखना तुम्हारी खुशी के लिए बहुत मुश्किल से हा की है तेरे पापा ने!

    ये सुनकर मैने कहा – ठीक है माँ !

    तो माँ ने कहा – आज तेरी सुहागरात ही है इसलिए दुल्हन बनकर तैयार हो जाना अच्छे से, तेरे पापा कपडे भी भेज देगे। हमने सब तैयारी कर रखी है तुम वैक्स करवा आना अभी फिर कमरे को संजाकर तैयार भी करना है, गहने भी पार्लर वाली से ले आना तुम।

    ये सब सुनकर मैरी आंखो से आंसू निकल आए।  तो माँ ने आंसू पूछते हुए कहा – बेटा हम तेरी खुशी के लिए सबकुछ कर रहै तो तुम भी खुशी खुशी मजे करो।

    तो मैने कहा – हा माँ जरूर!  मम्मी ओर बहन को छोड़ने के लिए पापा उनको साथ लेकर निकले ओर फिर वो फैक्ट्री चले गये वही से। मै गाडी लेकर पार्लर चली गयी ओर फिर वही से मैने वैक्स फेशियल करवाया ओर गहने लेकर आ गयी। दोपहर मे नहाकर गाऊन पहनकर समाँन का इंतजार कर रही थी।

    तभी लडका एक फूलो की टोकरी लेकर आ गया ओर एक बैग मे कपडे मैने पहले कमरे को अच्छे से सजा दिया। अब कमरे मे गुलाब की खुशबु महक रही थी तो मै भी कामुक हो रही थी।

    रात की चुदाई को लेकर फिर मैने कपडे देखे तो उसमे मेरा फेवरिट कलर का घाघरा चोली था लाल रंग का मै कुछ देर आराम करने लेटी तो दो घंटे बाद मुझे जाग आयी मम्मी का फोन आने पर।

    माँ ने पूछा – तैयारी कर ली

    तो मैने कहा – हा माँ

    तो माँ बोली – बेटा अब बाथरूम जाकर पेशाब करने के बाद सरसो के तेल से अंदर की माँलिश कर लेना अपनी उगलिओ से।ताकी रात को तकलीफ कम हो डरना मत बस थोडी हिम्मत रखना ओर पहले पूरा फोरप्ले करना जब बर्दाश्त से बाहर हो जाए तब पापा से कहना। एकबार ले लिया तो फिर कभी कोई दिक्कत नही होगी!

    ये सब बाते सुनकर ही मेरी चुचिया कडक हो गयी ओर मेरी चुत से कामरस निकलने लगा। माँ के फोन रखते ही मै एकबार फिर से नहाने चली ओर फिर चुत मे अच्छे से तेल माँलिश की अब मै बाहर आकर तैयार होने लगी। तभी पापा का फोन आया,

    तो मैने कहा – आप नो बजे तक आना

    तो पापा बोले – बेटा मुझे भी तैयार होना है

    तो मैने कहा – हो जाना पापा क्या जल्दी है

    तो पापा बोले – ठीक है बेटा

    ओर मैने अच्छे से मेकअप कर के अपनी ड्रेस पहनकर आज पापा की दुल्हन बन ने लगी! दो घंटे के मेकअप के बाद आखिरकार पापा की परी पापा की दुल्हन बन गयी थी मेरी दिल की धड़कन बढने लगी जैसे जैसे रात गहरी हो रही थी।

    आखिरकार पापा ने डोरबैल बजाई,

    तो मैने कहा – दरवाजा खुला है

    तो पापा लोक करके अंदर आ गये ओर वाशरूम जाकर वो नहाकर बाहर आये ओर उन्होने एक शेरवानी पहनी ओर पगडी लगाकर। फिर सेन्ट डालकर उन्होने मेरे कमरे का दरवाजा खटखटाया। तो मेरी सांसे उपर नीचे होने लगी तभी उन्होने दरवाजा खोला ओर अंदर आकर दरवाजा लोक कर दिया।

    पापा को देखकर मेरी चुत भी मचलने लगी, तभी पापा धीरे से फूलो की लडियो को हटाकर बेड पर बैठ गये ओर मेरे पास आ गये। मैने गर्दन नीचे कर ली, पापा को सामने देखकर।

    तब पापा ने बात शुरू करते हुए कहा – सोनम  बेटा ये सब हम मजबूरी मे कर रहै है तो अच्छा है हमे जब ये करना ही है तो हम मजे भी ले, ताकी तुझे जो सुख नही मिल पाया वो सुख मिले ये!सुनकर मैने कहा – पापा मै इस सुख के लिए ही तो आपकी दुल्हन बन गयी हू,अब मुझे ये सुख दे दो आप!

    तो पापा ने मेरा घुघट उठा दिया ओर मेरे चेहरे को प्यार से देखते रहै, मेरी आंखे बंद थी ओर गर्दन झुकी हुई।

    तभी पापा ने कहा – तुम कितनी खूबसूरत को आज देखा सही से मेने बिलकुल  लड़की लग रही हो। सोनम अब आखे खोलो शर्म करोगी तो केसै होगा ये सुनकर मै पापा से लिपट गयी ओर पापा ने मुझे बाहो मे भर लिया ओर हम दोनो एकदूसरे से लिपटकर बैठे रहे बहुत देर। पापा के हाथ अब धीरे धीरे मेरे बदन को सहलाकर मुझे गर्म कर रहे थे।

    तभी पापा ने मेरे मुह को अपने मुह के सामने कीया ओर मेरे होठो पर लगी लाल लिपस्टिक को खाने लगे। मेरी लिपस्टिक से पापा के होठ भी लाल हो गये तो पापा के हाथ मेरी चुचियो पर पहुंच गये ओर वो उन्हे मसलने लगे। धीरे धीरे हम दोनो गर्म होने लगे।

    पापा ने एक एक कर के मेरे सभी गहने उतारकर रखे तो फिर मैने पापा की शेरवानी के बटन खोलकर उनकी शेरवानी को खोलने मे मदद की। अब मै घाघरा चोली मै बैठी थी तो पापा बनियान ओर पजामे मे पापा का गधे जैसा लंड पजामे को फाडने को तैयार हो रहा था। तो मैरी चुत भी उस भयंकर लंड को लेने को बेताब थी।

    अब देखते ही देखते पापा ने मेरी काली ब्रा ओर चोली एक साथ खोल डाली उसके बाद उन्होने मेरे लांचे का नाडा खिंचकर मुझे खडा होने का कहा ओर मेने पेरो से लांचा निकालकर बाहर फेंका।

    तो पापा ने मेरी पेंटी को खींचकर निकाल दिया, मेरी चिकनी लाल चुत को देखकर पापा खो से गये ओर फिर पापा भी खडे हो गये ओर अपना पजापा कच्छा बनियान खोलकर फेंक डाला।

    अब हम दोनो नंगे हो गये तो पापा ने मुझे बेड पर सुला दिया ओर मेरे पेरो की उगलिओ को मुह मे भरकर चुसने लगे। ओर धीरे धीरे वो मेरि चुत तक पहुंच गये मेरी चुत से रह रहकर कामरस निकल रहा था। तो पापा अब वो कामरस का स्वाद लेने लगे।

    पापा की जबरदस्त चुसाई ने कुछ देर मे ही मेरी चुत ने उनके मुह मे ढेर सारा कामरस छोड़कर उनको अपने योवन रस का मजा दिया। तो फिर अब मेने पापा के मूसल लंड को हाथो मे लेकर सहलाने लगी। पापा का लंड कीसी गर्म पाइप की तरह तप रहा था।

    तभी मैने पापा के सुपारे को अपनी जीभ से चाटकर उसे अपने मुह मे भर लिया ओर सच कहू तो उनको इतना बडा लंड मेरे मुह मे नही जा रहा था। पापा का लंड सिर्फ लंबा ही नही साला मोटा भी बहुत था। मगर मेरी चुदास इतनी ज्यादा थी की मैने ना मुह मे जाते हुए ही पापा का लंड फंसा लिया मुह मे।

    मेरा मुह तो उनके आधे लंड से फटने को हो गया था, मगर फिर पापा मेरे सर को पकडकर धीरे धीरे मेरे मुह को चोदने लग गये। जब पापा लंड अंदर डालते तो मुझे सांस भी नही आ रहा था, मगर मेरी हवस इतनी बढ चुकी थी मै उनका पूरा लंड निगल जाना चाहती थी।

    मगर सारी कोशिश के बाद भी मे 7 इंच तक उनका लंड मुह मे ले पाई ओर पांच मिनट के अंदर मेरे जबडे भी दर्द करने लगे। तो मैने पापा का लंड बाहर निकाल दिया ओर फिर लंबी लंबी सांसे लेकर मेने खुद को नोर्मल कीया। तो पापा ने मुझे बाहो मे भर लिया ओर मेरे होठो पर होठ लगाकर कीस करने लगे।

    उनका मूसल लंड मेरी जाघो के बीच से गांड तक पहुंच रहा था पापा के दोनो हाथ मेरी चुचियो को दबा रहै थे। अब मै पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी। पापा के लंड को पकडकर मे दबाने लगी,

    ओर आखिरकार पापा को कहना पडा – पापा अब करो कुछ मे मर जाऊगी

    तो पापा बोले – ठीक है मेरी परि!

    पापा ने मुझे सुला दिया ओर मेरी गांड के नीचे दो तकिये लगा दिये, पापा ने मेरे हाथो को बांध दिया।

    मैने पूछा – पापा हाथ क्यो बांध रहै हो??!

    तो पापा बोले – बेटा तुम्हे दर्द नही होगा इसलिए

    ओर फिर पापा ने बेड की डोवर मे रखी बोरोप्लस अपनी उगलिओ पर लगाकर अपनी उगली मेरी चुत मे डालकर मेरी चुत चिकनी करने लगे ओर मेरा इतना बुरा हाल हो चुका था की मुझे अब चाहे कितना भी लंड हो मै लेने को तैयार थी।

    पापा ने थोडी सी क्रीम अपने लंड पर लगाई ओर अपने हाथो से मेरी नाजुक चुत की पंखुडियो को खोलकर उसका लंड का टोपा रख दिया। मेरी ओर धीरे धीरे मेरी चुत मे उन्होने अपना लंड का टोपा उतार दिया उसके बाद उन्होने झटके से टोपा पूरा अंदर कीया। तो मेरी चुत की दिवार हिल गयी ओर मै दर्द से कराहने लगी।

    मगर अभी तो सिर्फ दो इंच लंड ही घुसा था चुत मै तभी पापा ने एक तेज झटका लगाकर आधा लंड मेरी चुत मे फंसा दिया। तो मेरी चीख निकल गयी जोर से तभी पापा मेरे उपर लेट गये ओर मेरे होठो को अपने होठो मे कैद कर लिया।

    मगर मैने पूरा बेड हिला दिया उनकी पकड से निकलने के लिए मगर मै उनके शक्तिशाली शरीर के आगे बेबस लाचार थी। मेरा दर्द कम होने का नाम ही नही ले रहा था ओर तभी पापा ने दो झटके लगातार लगाकर अपना पूरा लंड मेरी चुत मे फंसा दिया।

    मेरी चुत फट गयी मेरा दर्द से बुरा हाल था मे लगभग बेहोश होने वाली थी तभी पापा ने मेरी चुचीयो को इतनी बेदर्दी से मसला की मेरा दर्द दुगना हो गया ओर मै बेहाल हो उठी। दोस्तो इस चुदाई  में, दस मिनट तक पापा अपनी मनमाँनी करते रहै, मै लगातार रोती रही, दस मिनट के बाद मेरा रोना बंद हुआ। तो उन्होने मेरे होठो को छोड़ा ओर मुझे खुली सांस लेने का मोका मिला।

    मगर सांस की बजाय मेरे मुह से सबसे पहले गाली निकली – कुते अपना लंड बाहर निकाल, मुझे नही चुदवाना हरामी,

    तो पापा बोले – कुतिया फट गयी इतनी जल्दी कब से फुदक फुदक कर रही थी… रंडी रूक जा अभी तेरी तो फटेगी तेरी ओर,ओर उन्होने अपना आधा लंड बाहर निकालकर एक झटके मे फिर से पूरा लंड चुत मे उतार दिया। तो मेरी चुत की दीवार हिल उठी मे फिर से चिल्ला उठी।

    तो पापा बोली – बस फट गयी एक झटके मे कुतिया तब तो बहुत मचल रही थी।

    मैने कहा – हा! कुते फट गयी अब बोल ओर बचा है तो वो भी डाल दे, बेटीचोद !!!

    दोस्तो इतना दर्द तो बच्चा पैदा करने मे भी नही हुआ जितना की पापा की पहली चुदाई से हुआ बेड पर चद्दर के उपर डाला सफेद तोलिया मेरी फटी चुत की दास्तान बयान कर रहा था। तभी पापा ने अपना लंड बाहर निकाला जिसे देखकर मुझे चक्कर आ गये! उन्होने एक बार फिर से अपने लंड पर ढेर सारी बोरोप्लस लगाने लगे!

    तो मै बोली – पापा बहुत दर्द हो रहा रहने दो प्लीज…

    पापा बोले – बेटा अब दर्द नही होगा…

    तो मैने अपनी टांगो को मोडकर चुत को छिपा लिया…

    ये देखकर पापा भडक गये – बोली बहुत नखरे कर रही है अब देख तू बहन की लोंडी बहुत देर हो गयी, तेरे नाटक को देखते!

    ओर उन्होने गुस्से मे आकर अपना लंड मेरी चुत मे पेल दिया, इसबार दर्द कम हुआ मगर मेरी चुत के अंदर अब भयंकर जलन हो रही थी ओर पापा गुस्से मे आकर ताबडतोड झटके दे रहे थे।

    मेरी चीखो से भी पापा को कोई फर्क नही पडा ओर वो मुझे गंदी गंदी गालिया देने लगे,रंडी की ओलाद चुप कर साली कुतिया, साली रंडी! तेरी माँ भी तो रोज चुदती है तो तेरी चुत कुछ अलग थोडी है बहनचोद रंडी क्यो चिल्लाह रही है!!!

    छिनाल। रंडी। बहन की चुत माँरू तेरी। तेरी माँ तो बडे मजे लेकर चुत ओर गांड मरवाती है। बुरचोदी रंडी। गालिया सुनकर मुझे भी गुस्सा आया, तो मैने भी पापा को गालिया देनी चालू कर दी – हा… भडवे चोद! कुते की ओलाद चोद अपनी बेटी की बुर को। हरामी की ओलाद।

    माँ के चोदे माँदरजात। बहन के लंड। हा चोद अपनी बेटी की बुर को हरामी माँदरचोद। लगता है तूने अपनी माँ को भी चोदा होगा हरामी। बेटीचोद।

    पापा – हा कुतिया अभी तो तेरी चुत फाडी है तेरी छोटी बहन की चुत भी मै ही फाडूगा वो भी गांड मटकाकर चलती है बहुत तुम दोनो की खुजली इसी लंड से मिटेगी अपनी माँ पर गयी हो तुम दोनो कुतिया वो भी ऐसे ही चुदती है मजे लेकर

    मेने बोला – बहनचोद रंडी की ओलाद आज रंडी बन ही गयी!

    दोस्तो बीस मिनट के बाद मेरी चुत उस मूसल लंड को आराम से अंदर लेने लगी तो मैने भी गांड उठाकर लंड चुत मे लेना चालू कर दिया अब दर्द तो हो रहा था मगर दर्द के साथ साथ मुझे मजा भी आने लगा

    मेरी चीखे अब आहो मे बदन गयी। ओर मे – हा आ आ अहह आ अम्म पापा… आ अहह अपनी परी को ऐसे ही पेलो जोर से रगडो मेरी चुत को पापा इसकी माँ की बहुत तंग करती है ये मुझे!

    पापा – अब से तंग नही करेगी बेटी आज तेरी चुत की माँ चुद जाएगी!

    मै बोली – तो चोद दे मेरी चुत बेटीचोद या बकचोदी ही करेगा हरामी

    पापा – अरे बहन की लोंडी अभी तो तू रो कर माँफी माँंग रही,अब बकचोदी करने लगी|

    ओर पापा ने मेरी टांगे सीधी कर के अपने पेट से लगाकर सीधी कर अपने दोनो हाथो से कसकर पकड ली ओर फिर पूरी ताकत से चुत का भोसडा बनाने लगे। तो मेरी गांड भी फटने लगी मेरी चुत ने एकबार फिर से ढेर सारा कामरस छोडा तो पापा का लंड ओर चिकना होकर मेरी चुत को फाडने लगा ओर मै मजे लेकर दर्द को भूलाकर चुदने लगी थी।

    मै बोली – ओ माँ बचाओ मारली पापा ने

    पापा हंसकर – नही बेटा ऐसा तो कुछ नही बस मजे ले लो एकबार की बात है

    ओर फिर पापा की बेरहम चुदाई बीस मिनट ओर जारी रही चालीस मिनट की इस चुदाई से मेरी माँ बहन चुद गयी थी। दोस्तो जब पापा ने मेरी चुत मे अपना गर्म गर्म वीर्य भर तो मुझे कुछ राहत मिली। दोस्तो पापा पसीने से नहा चुके थे ओर मेरा बदन भी पसीने से भर चुका था।

    कुछ देर बाद पापा खडे हुए ओर कहा – पापा की परी,तुम ठीक तो हो!

    मेने कहा – पापा अब पूछ रहै हो मेरी माँ चोदकर

    तो पापा हंसने लगे – बेटा तेरे पति का छोटा है तो भी दिक्कत ओर तेरे पापा का बडा है तो भी दिक्कत!

    तो मै बोली – पापा आपका बडा नही बहुत बडा है!!!

    तो पापा बोले – चल ठीक है खडी हो वाशरूम चलते है।

    मेरी तो बैठने की हिम्मत नही थी, पापा बचपन मे जैसे गोद मै लेकर मुझे घुमाँते थे वैसे ही आज पापा ने मुझे गोद मे उठा लिया ओर बाथरूम मे ले गये।

    मै सीट पर बैठकर मूतने लगी, तो मैरी चुत मे पेशाब की जलन भी हो रही थी बहुत ओर उससे मेरी आंखो मे आंसू भर आए। तभी पापा ने पास आकर मुझे चुमाँ ओर फिर पापा ने शावर चला दिया ओर अपने हाथो से मेरे बदन पर साबुन लगाकर अपने बदन पर साबुन लगाई।

    ओर फिर मुझे अच्छे से नहलाया नहाने के बाद मुझे कुछ आराम मिला तो पापा ने तोलिया लाकर मेरा ओर अपना बदन साफ कीया ओर फिर मै चलकर बेड पर पहुंची।

    तो पापा ने मुझे गाऊन लाकर दिया ओर फिर पापा किचन से खाना लेकर आये ओर मुझे अपने हाथो से खाना खिलाया। फिर पापा ने मुझे दर्द के लिए एक गोली दी जिसे खाने के बाद मुझे नींद आने लगी।ओर सुबह 9 बजे मुझे पापा ने उठाया – बेटा चाय तैयार है खडी हो जा

    तो मेरी आंख खुली मै अब ठीक महसूस कर रही थी काफी मेरे शरीर का दर्द गायब था। मगर चुत पर सोजन थी अब पेशाब कीया तो रात जितनी जलन नही थी मतलब मे अब पापा का गधे जैसा लंड लेने के लिए बिल्कुल तैयार थी।

    मै मुह धोकर बाहर आई ओर पापा की गोद मे जाकर बैठ गयी!

    तो पापा बोले – कैसा है मेरा बेटा??!!!

    तो मैने कहा – जिंदा हू पापा ओर हंसने लगी!!

    तो पापा बोले – मेरी परी अब से तो तुझे मजे ही मजे करने है बस ओर मुझे चुमने लगे!

    फिर हमने चाय पी ओर पापा ने कहा – मुझे फैक्ट्री जाकर आना है कुछ देर फिर दो दिन मे घर पर ही रहूगा। तो तुम नहा लेना हम दोपहर मे कही बाहर खाना खाने चलेगे। ये सुनकर मैने कहा – जी पापा!ओर पापा नहाकर फैक्ट्री चले गये। तभी माँ का फोन आ गया ओर वो पूछने लगी – केसी रही मेरी लाडो की सुहागरात!!

    तो मैने कहा – माँ हालत ख़राब करदी, चूत का पसीना निकल दिया, आपकी भी ऐसी ही रही होगी!!!!

    तो माँ बोली – एक बार दो दर्द होगा ही बेटा अब दो तीन दिन मे अपनी जवानी के असली मजे ले तू आराम से घर पर,तो मैने कहा माँ सही कहा अब इतना दर्द सहा है तो मजे तो लूंगी ही ओर फिर हम दोनो हंसने लगी…

    अगले भाग मे दर्द भरी दास्तान सुनने को मिलेगी क्योकी अब मेरी गांड की बारी थी जिससे मे बिलकुल अनजान थी। चलिए मिलते है अगले भाग मे आपको कैसी लगी मुझे कमेन्ट कर के जरूर बताना दोस्तो।

  • दादाजी – का लंड या गधे का लंड

    मेरा नाम रेशमा है, हमारा 3 लोगों का छोटा सा परिवार है मम्मी पापा और में. मेरे मम्मी पापा दोनों ही जॉब करते है और में दिखने में सुंदर हूँ और लंबे बाल है. में इस साईट की बहुत बड़ी फैन हूँ और आज में आपके साथ मेरा अनुभव शेयर करने जा रही हूँ. यह 3 साल से भी ज्यादा पुरानी बात है, तब मेरी उम्र 19 साल थी और मेरी हाईट 5 फुट 1 इंच और फिगर 32-25-32 था. हम लोग एक अपार्टमेंट में रहते थे,

    तभी हमारे पास के फ्लेट में एक नई फेमिली रहने को आई, जो कि कुछ दिनों से खाली था. उनकी फेमिली में एक कपल और उनके पिताजी थे, उन लोगों के रहने के बाद पड़ोसी के नाते दोनों फेमिली के बीच बातचीत शुरू हुई वो दोनों पति पत्नी जॉब करते थे.

    फिर अंकल ने बताया कि उनकी मम्मी 12 साल पहले गुजर गई और उनकी दीदी शादी के बाद अमेरिका में रहती है और उनके पापा रिटायर्ड होने के बाद उनके पास रहने आ गये. फिर मेरे मम्मी पापा उनके पापा को चाचा जी बोलने लगे और उसी हिसाब से में उनको अंकल, आंटी और दादा जी बुलाने लगी,

    इन 2 महीनों में दोनों परिवार काफ़ी नजदीक हो गये थे. एक दिन दोपहर में स्कूल के बाद घर आने के लिए में सिटी बस स्टॉप पहुँची और उसी बस स्टॉप पर दादा जी घर आने के लिए बस का इंतजार कर रहे थे, दादाजी 5 फुट 8 इंच और मजबूत बॉडी के थे, हांलाकि उनकी उम्र 61 साल के आस पास थी, लेकिन वो 50 साल के दिखते थे. फिर बस आने के बाद हम दोनों बस पर सवार हो गये और अपने घर की तरफ निकल पड़े.

    जब बारिश का महीना था और हल्की-हल्की बारिश शुरू हो गयी थी, बस स्टॉप पर सिर्फ़ हम दोनों उतरे. हम दोनों के पास छाता ना होने की वजह से हल्की-हल्की बारिश में भीगते हुए हम घर की और बढ़े, बस स्टॉप से घर करीब 10 मिनट पैदल जाने की दूरी पर है, हम बस स्टॉप से 2-3 मिनट ही चले थे कि बारिश जोर से होने लगी तो हम दोनों तेज-तेज चलने लगे, लेकिन ज़्यादा बारिश होने की वजह से दादा जी बोले कि साईड के बड़े पेड़ के नीचे इंतजार कर लेते है और तेज की बारिश की वजह से में मान गयी और हम दोनों साईड के पेड़ के नीचे चले गये, लेकिन तब तक हम दोनों पूरी तरह से भीग चुके थे और हमारे कपड़े गीले हो चुके थे,

    उस वक़्त में स्कूल ड्रेस पहने हुई थी जो कि सफ़ेद शर्ट और ग्रे स्कर्ट थी, में पूरी तरह से भीग चुकी थी और मेरी सफ़ेद शर्ट पारदर्शी होकर चिपक गयी थी. मैंने अन्दर ब्रा पहनी हुई थी, लेकिन गीली शर्ट से मेरे बूब्स के शेप का मालूम चल रहा था. फिर मैंने दादा जी की तरफ देखा तो उनकी नज़र मेरी भीगी हुई शर्ट में दिख रहे बूब्स और क्लीवेज पर थी.

    अब वो इधर उधर की बातें करने लगे वो बीच बीच में मेरी बूब्स की और देख रहे थे, जैसे कि मुझे कोई शक़ ना हो. जब वो मेरी बूब्स की तरफ देख रहे थे, तब मेरे दिल में हलचल मच रही थी और मुझे एक अजीब सी ख़ुशी महसूस हुई और इससे पहले किसी ने मुझे इस तरह से नहीं देखा था. फिर 15 मिनट के बाद बारिश कम होते ही हम दोनों घर की और चल पड़े और चलते-चलते दादा जी मेरे भीगे हुए बदन को तिरछी नज़र से देख रहे थे, अब मुझे उनका देखना अच्छा लग रहा था.

    फिर हम दोनों अपने-अपने घर चले गये, आज तक मैंने सिर्फ़ सेक्स की वासना और सेक्स की नजर से देखने के बारे में पढ़ा और सुना था, लेकिन कभी महसूस नहीं किया था, लेकिन आज दादा जी जिस तरह से मुझे और मेरे भीगे हुए बूब्स को देख रहे थे तो मुझे एक ख़ुशी महसूस होने लगी थी और में उनके बारे में सोचने लगी. उस कच्ची उम्र में यह भावना आते ही मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था और में यह भूल चुकी थी कि वो 61 साल के और में सिर्फ़ 19 साल की हूँ, इसी हसीन याद से टाईम कट गया और देखते ही देखते शाम हो गयी.

    फिर में शाम तक अपना सब होमवर्क ख़त्म करके छत पर खुली हवा खाने के लिए चली गयी, तभी धीरे धीरे अंधेरा होने लगा था. जब में छत पर गयी तो वहां सामने कोई नहीं था, जब मैंने पूरी छत पर नज़र घुमाई तो एक कोने में दादा जी बेंच पर बैठे थे. उनको देखते ही मुझे एक ख़ुशी महसूस हुई, जैसे कि में उनसे वर्षो से मिलना चाहती हूँ और आज सामने मिल गये हो और मुझे देखते ही उनका चेहरा भी खुशी से चमक उठा और उन्होंने मुझे एक बड़ी सी स्माईल दी. फिर मैंने भी उनको रिप्लाई में एक स्माईल दी और जाकर उनकी बगल में बैठ गयी, उस वक़्त में लोंग स्कर्ट और वी गले की टॉप पहने हुई थी और दादा जी बात करते-करते मेरी क्लीवेज और बूब्स देख रहे थे और में जानबूझ कर अंजान बन रही थी.

    फिर थोड़ी देर के बाद दादाजी ने अपना एक हाथ मेरी जांघ पर रख दिया और सामने की तरफ देखकर मुझसे बात करने लगे. फिर में भी चुपचाप बैठकर उनसे बात करने लगी और मैंने उनका हाथ हटाने की कोई कोशिश भी नहीं की थी. फिर 2 मिनट के बाद दादा जी अपने हाथ से मेरी जांघ को सहलाने लगे और में चुपचाप बैठी हुई सामने की तरफ देख रही थी. फिर थोड़ी देर के बाद जब मैंने उनकी तरफ देखा तो वो मेरी जांघ सहला रहे थे और मेरी क्लीवेज को देख रहे थे.

    फिर उन्होंने मेरी आँखों में देखकर एक स्माइल दी, तो मैंने भी उन्हें एक स्माइल दे दी. फिर में हंसते हुए बोली कि मम्मी पापा के आने का टाईम हो गया है और अब में नीचे घर जाती हूँ और फिर में नीचे चली आई. फिर थोड़ी देर में मम्मी पापा अपनी जॉब से वापस आ गये, अब शाम के 9 बजे हुए थे और में सोफे पर बैठकर टी.वी देख रही थी और मम्मी किचन में काम कर रही थी और पापा लेपटॉप में अपना काम कर रहे थे. तभी डोर बेल बजी और मैंने जाकर दरवाजा खोला तो मैंने देखा कि दरवाजे के सामने दादा जी खड़े हुए थे.

    फिर उन्होंने मुझे देखते ही आँख मारी और स्माइल करते हुए अंदर आ गये, अब उन्हें देखकर मेरा दिल जोरो का धड़कने लगा था. अब पापा ने उनके चाचा जी को देखकर बड़ी खुशी से उनका स्वागत किया, तब दादा जी मुझसे बोले कि आओ और आराम से अपनी टी.वी देखो और में फिर से सोफे पर जाकर टी.वी देखने लगी और दादा जी आकर मेरे बगल में बैठ गये और पापा से बात करने लगे. फिर मम्मी किचन में उनके लिए चाय बनाने के लिए चली गयी, अब पापा अपने लेपटॉप पर काम करते-करते दादा जी से बात कर रहे थे, तो दादाजी अपने हाथ से मेरी पीठ सहलाने लगे. फिर जब मैंने उनकी तरफ देखा तो वो स्माइल देते हुए मेरे टॉप के अंदर हाथ घुसाते हुए मेरी नंगी पीठ सहलाने लगे, तभी दादाजी ने पापा से मेरे बारे में बात की.

    दादा जी : मुस्कान 11वीं में क्लास आ गयी है, उसकी पढाई कैसी चल रही है? तुम हेल्प कर रहे हो या नहीं ?

    पापा : नहीं चाचा जी, काम थोड़ा ज़्यादा है इसलिए ध्यान नहीं दे पा रहे है.

    दादा जी : अरे भाई काम तो चलता रहेगा, लेकिन बेटी की पढ़ाई का ध्यान तो रखना पड़ेगा ना.

    पापा : जी आप सही बोल रहे है, लेकिन काम का बोझ भी है अगर बुरा ना माने तो क्या आप मुस्कान की पढाई देख लेंगे? अगर आपके पास टाईम हो तो.

    दादा जी : अरे इसमें बुरा मानने की क्या बात है? में दोपहर को खाली बैठे-बैठे बोर होता रहता हूँ तो मेरा भी टाईम पास हो जायेगा. (फिर मेरी तरफ देखकर आँख मारी, और में स्माइल देते हुए फिर से टी.वी देखने लगी) तभी मम्मी चाय ले कर आई, तो दादा जी ने अपना हाथ मेरे टॉप से बाहर निकाल लिया और वो मुझे स्माईल कर रहे थे.

    मम्मी : चाचा जी आपको कोई परेशानी तो नहीं होगी ना.

    दादा जी : बिल्कुल नहीं बल्कि मुझे तो खुशी होगी.

    मम्मी : अकेली लड़की घर पर रहती है तो डर लगा रहता है और आप साथ रहेंगे तो दिल को तसल्ली भी रहेगी.

    दादा जी : हाँ बेटी सही कहा तुमने, माँ हो चिंता तो रहेगी, लेकिन आगे से मुस्कान अकेली नहीं रहेगी मेरे यहाँ आ जाया करेगी, तो में उसकी पढाई में हेल्प कर दूंगा.

    पापा : थैंक यू चाचा जी, मुस्कान कल से तुम स्कूल से आकर लंच के बाद पढाई करने के लिए चाचा जी के पास चली जाना.

    में : जी पापा.

    फिर चाय के बाद मम्मी किचन में चली गयी और दादा जी ने अपना हाथ फिर से मेरे टॉप के अंदर डाल दिया और उन्होंने इस बार नीचे कि तरफ स्कर्ट के अंदर डालने की कोशिश की, लेकिन स्कर्ट टाईट थी इसलिए वो सफल नहीं हुए. फिर वो मेरी पीठ को टॉप के अंदर से ही सहलाते रहे, फिर थोड़ी देर के बाद वो अपने घर जाने के लिए उठे और मुझे स्माइल देते हुए बोले कि कल वो इंतज़ार करेंगे, फिर वो चले गये. उसी रात अगले दिन के बारे में सोचते-सोचते कब मेरी आँख लग गयी मुझे मालूम ही नहीं चला.

    फिर में सुबह उठकर स्कूल के लिए तैयार हो गयी, फिर स्कूल जाते वक़्त मम्मी ने मुझे याद दिलाया कि लंच के बाद दादा जी के यहाँ पढ़ाई के लिए जाना है और में हाँ बोली. फिर स्कूल कैसे ख़त्म हो गया? मुझे पता भी नहीं चला और में घर वापस आ गयी. फिर में लंच करके दादा जी के यहाँ जाने के लिए तैयार होने लगी, उस टाईम मैंने टॉप और स्कर्ट पहने थी.

    अब मैंने दादा जी के घर के दरवाजे पर जाकर घंटी बजाई, फिर दरवाजा ओपन हुआ और अब सामने दादा जी सिर्फ़ एक पजामे में खड़े थे. मुझे देखते ही उनका चेहरा खुशी से चमक उठा और मुस्कुराते हुए बोले कि वो मेरा ही इंतज़ार कर रहे थे.

    अब मेरे अंदर जाते ही उन्होंने दरवाजा अन्दर से बंद कर दिया, और अब में जाकर सोफे पर बैठ गयी और सामने की टेबल पर अपनी किताब रख दी. तभी दादा जी एक ग्लास जूस मुझे देते हुए मेरे बगल में बैठ गये और अब वो मेरी पढ़ाई के बारे में पूछ रहे थे और में धीरे-धीरे जूस पीते हुए उन्हें जवाब दे रही थी, इसी बीच दादा जी ने मेरी जांघ पर हाथ रखकर सहलाना शुरू कर दिया.

    अब मेरा दिल ज़ोर से धड़कने लगा था और में चुपचाप अपना सिर नीचे करके जूस पीने लगी थी. तभी दादा जी ने पूछा कि मुझे बुरा तो नहीं लग रहा है वो मुझे टच कर रहे है, तो मैंने स्माइल देते हुए ना में सिर हिलाया. अब यह सुनकर दादा जी अपना दूसरा हाथ मेरे टॉप के अंदर डालकर मेरी पीठ सहलाने लगे.

    फिर मेरे हाथ को किस करते हुए बोले यहाँ हम सुरक्षित नहीं है और मेरा हाथ पकड़कर बेडरूम में ले गये. अब दादाजी मुस्कुराते हुए बोले यहाँ आराम से बात कर सकते है और हम दोनों बेड पर बैठ गये, फिर दादा जी ने अपना लेफ्ट हाथ मेरे कंधे पर रख दिया और अपने राईट हाथ से मेरे लेफ्ट बूब्स को सहलाने लगे. तब मैंने उनका हाथ पकड़ लिया, लेकिन मैंने उनका हाथ हटाने की कोशिश नहीं की, तो वो बूब्स को धीरे धीरे दबाने लगे. अब मैंने मेरी आँखे बंद कर ली, तभी उन्होंने दोनों बूब्स को दबाते हुए पूछा कि कैसा लग रहा है? तो मैंने कहा अच्छा लग रहा है.

    फिर वो अपना हाथ टॉप के अंदर डालकर मेरे बूब्स को ब्रा के ऊपर से सहलाने लगे और धीरे-धीरे दबाने लगे. अब में अपनी आँखें बंद करके मज़ा ले रही थी और उन्होंने अपना सर मेरे कंधे पर रखकर मेरी गर्दन को चूमना शुरू कर दिया. यह सब मेरे साथ पहली बार हो रहा था और अब में भी गर्म होने लगी थी, तभी दादा जी ने मेरे टॉप को नीचे से पकड़कर ऊपर किया और मेरे दोनों हाथ ऊपर करते ही एक झटके में मेरी टॉप मुझसे अलग हो गयी और अगले ही पल में मेरी ब्रा के हुक खोलकर ब्रा को भी मुझसे अलग कर दिया.

    अब में नीचे सिर्फ़ स्कर्ट में थी और ऊपर से पूरी नंगी थी, मेरी बूब्स देखकर दादा जी के मुँह से वाउ निकल गया और बोले, आआअहह क्या खूबसूरत बूब्स है? जी कर रहा है कच्चा खा जाऊं, क्या किसी ने आज से पहले बूब्स टच किया है? तो फिर मैंने ना में सिर हिलाया और वो एक भूखे बच्चे की तरह मेरे बूब्स को चूसने लगे और अपना हाथ मेरी स्कर्ट के अंदर डालकर मेरी जांघो को सहलाने लगे, तब तक मेरी पेंटी पूरी गीली हो चुकी थी.

    फिर थोड़ी देर में ही दादा जी अपने हाथ से मेरी चूत को पेंटी के ऊपर से ही टच करने लगे तो मैंने अपना हाथ उनके पजामे के ऊपर रख दिया और धीरे-धीरे उनके लंड को दबाने लगी. तभी दादा जी ने अपना पजामा उतार दिया और अब वो सिर्फ़ चड्डी में थे. फिर वो मुझसे बोले कि मुस्कान क्या तुम अपने दोस्त को बाहर नहीं निकालोगी?

    यह कहकर उन्होंने मेरा हाथ अपनी चड्डी के अंदर डाल दिया, अब मुझे ऐसा लगा कि मेरे हाथ में कोई गर्म रोड आ गयी है. फिर मैंने चड्डी में से उनका लंड बाहर निकाला, में लाईफ में पहली बार इतने बड़े और मोटे लंड को देख और छू रही थी, उनका लंड करीब 8 इंच लंबा, और 3 इंच चौड़ा था मैंने एक बार गधे का लंड देखा था दादाजी का लंड भी किसी घोड़े के लंड जैसा लग रहा था और में उसे एक ही नज़र में देखे जा रही थी, जैसे मुझे कोई अजूबा हाथ लगा हो. इसी बीच दादा जी ने अपनी चड्डी ऊतार दी और मेरी स्कर्ट भी खोल दी. अब वो मेरे सामने पूरे नंगे थे और में सिर्फ़ एक पेंटी में थी.

    अब में उनके लंड को अपने हाथ से सहला रही थी और वो मेरे बूब्स दबाते हुए मेरी आँखो में देख रहे थे. फिर धीरे-धीरे वो मेरे चेहरे के पास आकर मेरे लिप को चूमने लगे, अब में भी किस में उनका साथ देने लगी. फिर 2-3 मिनट तक लिप किस करने के बाद दादा जी मेरे सामने खड़े हो गये और अब उनका लंड ठीक मेरे सामने तनकर खड़ा था, मानों जैसे वो मुझे सलामी दे रहा है.

    फिर दादा जी मुझे लंड को मुँह में लेने के लिए बोले और मैंने लंड को दोनों हाथों से पकड़कर मुँह में ले लिया. अब दादा जी मेरे बालों को पकड़कर मेरे सिर को अपने लंड पर आगे पीछे करने लगे और अपनी आँखे बंद करके, उम्म्म हम्मम्मम्म करके सिसकारियाँ निकाल रहे थे. फिर में 3-4 मिनट तक उनका लंड चूसती रही और उन्होंने अचानक से ज़ोर से, आहह करते हुए अपना पूरा पानी मेरे मुँह के अंदर ही छोड़ दिया. उनके लंड के पानी का टेस्ट कुछ अजीब सा था, लेकिन में उनके लंड का सारा पानी पी गयी और मैंने लंड चाट कर साफ कर दिया.

    अब दादा जी ने मुझे उठाकर बेड पर लेटा दिया और मेरी पेंटी को नीचे खींचने लगे, अब देखते ही देखते मेरी पेंटी मुझसे अलग हो गयी और में पूरी नंगी बेड पर लेटी रही. फिर मेरी दोनों टांगो को खोलकर अपना सिर मेरी जांघो के बीच में रख दिया और मेरी चूत की फंको को खोलकर को किस करने लगे, मुझे ऐसी फीलिंग हो रही थी, जैसे कि हज़ारो चीटियाँ मेरी चूत को काट रही हो, मुझे इतनी अच्छी फीलिंग पहले कभी नहीं आई थी.

    फिर वो मेरी चूत को चाटने लगे और देखते ही देखते अपनी जीभ मेरी चूत में डालने लगे, अब वो मेरी चूत को चूसते रहे और अब में उनका सिर पकड़कर दबाब डाल रही थी और चूत चुसाई का मज़ा ले रही थी. अब करीब 5-6 मिनट तक चुसाई करवाने से मेरी चूत से पानी निकलने लगा था और वो मेरी चूत पर मुँह लगाकर पूरा पानी पी गये. अब पानी निकलने के बाद में हल्का महसूस कर रही थी और अब दादा जी मेरे ऊपर आकर मेरे बूब्स के साथ खेलने लगे और अब में भी उनके लंड को अपने हाथ से सहलाते हुए खेलने लगी.

    फिर 2 मिनट में ही दादा जी का हलब्बी लंड सलामी देते हुए फिर से खड़ा हो गया, तो वो मेरी दोनों टांगो के बीच में आकर बैठ गये. अब उन्होंने एक तकिया लेकर मेरी कमर के नीचे रख दिया, ताकि मेरी चूत थोड़ी ऊपर हो जाए. फिर बेड के साईड में टेबल पर रखी वेसलिन क्रीम निकाल कर थोड़ी मेरी चूत को खोलकर उस पर लगाई और थोड़ी अपने लंड पर लगा ली, फिर अपने हाथ से लंड को पकड़कर मेरी चूत के होल के सामने रगड़ने लगे.

    फिर वो मेरे ऊपर लेट गये और मेरे लिप पर किस करने लगे, अब में भी उनके किस का साथ दे रही थी और इसी बीच दादा जी ने एक ज़ोर के धक्के के साथ अपना लंड मेरी चूत के अंदर डाल दिया, तो में दर्द के मारे चिल्लाने लगी, लेकिन उन्होंने मेरे लिप को अपने लिप से बंद कर रखा था और अब में उनको हटाने लगी, लेकिन उन्होंने मेरी कमर को पकड़ कर रखा था और में हिल भी नहीं पा रही थी, अब दर्द के मारे मेरी आँखो से आंसू निकलने लगे थे.

    फिर दादा जी ने मेरे बूब्स को चूसा और फिर थोड़ी देर में जब मेरा दर्द कम हुआ तो वो फिर से अपनी कमर चलाने लगे. अब उनका लंड धीरे-धीरे चूत में अंदर बाहर होने लगा था, फिर जब में थोड़ी नोर्मल हुई तो उन्होंने और एक ज़ोर के धक्के से अपना पूरा लंड मेरी चूत में अंदर डाल दिया और तभी ज़ोर से पकड़कर मुझे किस करने लगे और धीरे-धीरे मेरा दर्द कम होने लगा और मेरा दर्द कम होने के बाद लंड को अंदर बाहर करके चोदने लगे.

    फिर थोड़ी देर में मुझे भी मज़ा आने लगा और में अपनी कमर उठा- उठाकर उनका साथ देने लगी और अब मुझे देखकर दादा जी भी जोश में आ गये और ज़ोर ज़ोर से मुझे चोदने लगे. फिर 7-8 मिनट तक चुदवाने के बाद मेरे पानी छोड़ने के बाद दादा जी भी कुछ 15-20 धक्के लगाकर वो भी अपना पानी मेरी चूत के अंदर डाल कर झड़ गये. अब चुदाई के बाद हम दोनों ही थक चुके थे और कुछ देर तक हम दोनों वैसे ही नंगे बेड पर पड़े रहे. दोस्तों यह थी मेरी पहली चुदाई की कहानी

  • ट्रक ड्राइवर बना मेरे जिस्म का मालिक

    दोस्तो, मेरा नाम काजल है, उम्र 23 साल, फिगर साइज 33-28-34 है.

    मैं दिखने में सांवली हूँ, मेरा कोई बॉयफ्रेंड नहीं था।
    मेरी चुत की आग ने मुझे जैसे रंडी ही बना दिया।

    तो अब माय सेक्स डिजायर X कहानी शुरू करती हूँ.

    मैं काजल अपनी दुनिया में खुश रहती थी.
    मेरी सहेलियों के ब्वॉयफ्रेंड थे और वे सब उनके साथ जवानी का मजा करती थीं.

    चुदाई के बाद मेरी सहेलियां जब मिलतीं तो वे सब चटखारे ले लेकर अपनी चुदाई के किस्से सुनातीं.
    मैं उनकी सेक्स की बातों को सुनकर गर्म हो जाती और बाद में अपनी बुर में उंगली करके अपनी बुर को, माय सेक्स डिजायर को ठंडा कर लेती थी.

    इसी तरह मैं रोज कॉलेज जाती और घर आ जाती.

    एक दिन मेरी सहेली फोन पर एक पोर्न साईट पर किसी से चैट कर रही थी.
    मैंने देखा तो उससे पूछा कि यह सब कैसे करते हैं.

    तो उसने मेरी भी आईडी उस साईट पर बना दी.

    अब मैं भी उस साईट पर रोज आने लगी.
    पर मुझे किसी का कोई मैसेज ही नहीं आता था.

    एक दिन मेरी सहेली ने पूछा- चैट हो रही है न वहां पर … अब तो मजा आ रहा होगा!
    तो मैंने उसको मना करते हुए सारी बात बताई.

    उसने मेरा फोन लिया और साईट को खोल कर उसने मेरी प्रोफाइल में 4-5 गंदी और अश्लील सी फोटो डाल दीं, साथ ही उसने बहुत कुछ चुदाई वाला मसाला भी लिख दिया.
    मैं शाम को घर आ गई.

    अगले 2 दिन तक कॉलेज की छुट्टी थी, तो मैं अपने घर के काम में व्यस्त रही.

    रविवार को रात को मैं बोर हो रही थी तो मैंने सोचा कि अब साईट खोल कर वीडियो देखा जाए और अपनी बुर को ठंडी कर लूं!
    मैंने अपने कमरे को अन्दर से बन्द किया और सलवार उतार कर बैड पर बैठ गई.

    मैंने मोबाईल पर पॉर्न साईट खोली तो देखा किसी का मैसेज आया हुआ था.
    तभी मैंने मैसेज खोला तो उसमें एक लड़के ने मेरी फ़ोटोज़ की बहुत तारीफ की थी.

    मैं बहुत खुश हुई.
    मैंने भी उसको धन्यवाद का रिप्लाई कर दिया.

    अब मैं गंदी फिल्म देखकर माय सेक्स डिजायर X शांत करने लगी.
    थोड़ी देर में ही उस लड़के का वापस रिप्लाई आया और इस बार उसने अपने लंड की तस्वीर के साथ मैसेज भेजा था.

    उस मैसेज में लिखा था कि लंड पसंद आया हो, तो रिप्लाई देना.
    उसका लंड देख कर ही मेरी बुर पानी छोड़ने लगी.

    उसका लंड सच में काफी लंबा और मोटा था.
    थोड़ी देर बाद मैंने उसको रिप्लाई किया- तुम्हारा बहुत अच्छा है!

    वह- धन्यवाद, तुम कहां से हो?
    मैंने अपनी जगह बता दी.

    वह- तुम तो बहुत सेक्सी हो, आज तक कितने लंड ली हो?
    मैं- अभी तक एक भी नहीं.
    वह- हो ही नहीं सकता है, तेरी बुर की फोटो देख कर लगता है कि तू बहुत चुदी है!

    मैं- वह मैंने तो ऐसे ही लगा दी है.
    वह- तो अपनी असली बुर ही दिखा दो न!
    मैं- नहीं!

    वह- अच्छा तो अपनी एक सेक्सी सी फोटो तो दिखा दो, अब मना मत करना.
    मैं- ठीक है, पर एक ही फ़ोटो दूँगी.
    वह- हां, पर अपनी ही दिखाना!

    मैंने उसको अपनी फोटो भेज दी, उसने मेरी बहुत तारीफ की.
    मैं भी बहुत खुश हुई.

    अब जब भी मौका मिलता, हम बात करने लगते.

    कुछ ही समय बाद हम दोनों ने अपने नम्बर भी एक दूसरे के साथ शेयर कर लिए थे.
    अब हम दोनों वीडियो कॉल पर भी बात करते थे.

    कुछ दिनों तक बात हुई, तो हम दोनों खुल कर बात करने लगे.
    हम दोनों को सेक्सी बातें करते हुए एक महीने से ऊपर हो गया था.

    एक दिन हम दोनों नंगे होकर बात कर रहे थे.

    हम दोनों जब भी नंगे होते थे तो अपना चेहरा नहीं दिखाते थे.
    उस दिन उसने मुझसे कहा- काजल मैं कोई जवान लड़का नहीं हूँ. मैं 45 साल एक हट्टा-कट्टा मर्द हूँ.

    मैंने भी सोचा कि यह मजाक कर रहा है.
    वह बोला- लोगी मेरे लंड को?

    मैंने भी कहा- कब से तो तड़फ रही हूँ … पर आप हो कि आते ही नहीं हो!
    तो वह एकदम से बोल पड़ा- तुम रात को 10 बजे घर से बाहर आ सकती हो?

    मैंने सोची कि यह मजाक कर रहा होगा.
    तो मैंने भी हां कर दी.
    अब वह ऑफ लाइन हो गया.

    रात को ठीक 10 बज कर 10 मिनट पर उसका फोन आया ‘कहां हो तुम, मैं बाहर इंतजार कर रहा हूँ … जल्दी बाहर आओ!’
    मैं कुछ समझ पाती कि उसने फोन रख दिया.

    मैंने सोचा कि मैंने तो उसको अपने घर का पता अभी तक बताया ही नहीं था, तो कहां से बाहर आ गया!

    मैं फिर घर के पीछे वाले दरवाजे से बाहर आ गई.

    बाहर अन्धेरा बहुत था, मैं एक साइड खड़ी हो गई.

    तभी एक हाथ निकल कर आया और मेरे मुँह पर आ गया.
    मैं एकदम से इस हरकत से बहुत डर गई.

    जब मैंने पीछे देखा तो पास के रमेश अंकल थे.

    मैं उनसे छूट कर दूर हुई और बोली- यह क्या गंदी हरकत कर रहे हो अंकल?
    अंकल बोले- वही, जो रोज फोन में करते थे.

    अब मैं समझ गई कि मैं जिसको एक लड़का समझ रही थी, वह लड़का रमेश अंकल हैं.

    अंकल ने मुझे पकड़ लिया और मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए.
    वे पागलों की तरह मुझे किस किए जा रहे थे.

    अब अंकल मेरी कमीज के ऊपर से मेरे बूब्स को दबाने लगे.
    मैंने उनको धक्का देकर पीछे कर दिया.

    अंकल बोले- क्या हुआ?
    मेरे मुँह से निकल गया कि कोई देख लेगा अंकल!

    ‘अब यहां इस टाइम कौन आएगा?’
    मैं- नहीं, कोई भी आ सकता है.

    अंकल ने मेरा हाथ पकड़ा और वे मुझे एक ट्रक के पास ले आए.
    उन्होंने जल्दी से ट्रक के गेट को खोला और मुझे ट्रक के अन्दर ले गए.

    अंकल ने ट्रक के अगले शीशे पर स्क्रीन लगा दी.
    इससे ट्रक के अन्दर अन्धेरा हो गया.

    अब अंकल ने मुझे पकड़ा और मेरे होंठों पर अपने होंठ रख कर चूसने लगे.
    मुझे भी मजा आने लगा था तो मैं भी अंकल का साथ देने लगी थी.

    थोड़ी देर में ही हम दोनों पूरे नंगे हो गए.

    अंकल ट्रक की पिछली सीट पर लेट गए और लंड को हाथ में पकड़कर बोले- चूस रानी, पूरा चूस!
    यह कह कर उन्होंने मेरा एक दूध पकड़ लिया और उसे मसलते हुए सहलाने लगे.

    मैंने भी ब्लू फिल्मों में लंड की चुसाई देखी थी और मेरी सहेलियां भी खुल कर बताती थीं कि वे अपने ब्वॉयफ्रेंड्स का लंड चूसती हैं.

    यह सब सोच कर मैंने रमेश अंकल के लंड को पकड़ा और अपने मुँह में लेकर चूसने लगी.

    अंकल का लंड सच में बहुत बड़ा था; पूरा लंड मुँह में नहीं आ रहा था.
    तो अंकल अपनी गांड उठा कर अपना लंड पूरा का पूरा मेरे मुँह में डालने की कोशिश कर रहे थे.

    मैं अंकल के लंड को चूसने के साथ एक हाथ से अपनी बुर को भी सहला रही थी.

    कुछ देर बाद अंकल उठ गए और बोले- लंड की गोलियां भी चूस ले … बहुत मजा आ रहा है तेरे साथ!
    मैं अंकल के टट्टे भी मुँह में लेकर चूसने लगी.

    अंकल बोले- साली काजल, तू तो वीडियो देख कर ही एक पूरी रंडी के जैसा मजा दे रही है!
    अंकल के मुँह से ‘रंडी’ शब्द सुनते ही मैं उनके लंड को और जोर से चूसने लगी.

    अंकल ने अब मुझे नीचे लिटाया और वे मेरी बुर चाटने लगे.
    तभी अंकल ने एक उंगली मेरी गांड में डाल दी जिससे मेरी हल्की सी चीख निकल गई.

    अंकल अपने काम में लगे रहे.

    कुछ ही देर बाद अंकल मेरी गांड पर टूट पड़े.
    उनकी एक उंगली मेरी बुर के अन्दर थी और जीभ मेरी गांड में चलने लगी थी.
    उनकी नर्म गर्म जीभ से मुझे बहुत मजा आ रहा था.

    कुछ पल बाद अंकल मेरे ऊपर चढ़ गए और अपने लंड को मेरी बुर पर घिसने लगे.
    उन्होंने अपने एक हाथ से मेरा मुँह बन्द कर दिया और एक कड़क झटका मारते हुए अपना लंड अन्दर पेल दिया.

    इस एक ही कड़क झटके में उनका लंड मेरी बुर को फाड़ता हुआ अन्दर चला गया.

    मेरे मुँह से निकली हुई चीख मेरे मुँह में ही दब कर रह गई.
    मुझे बेहद दर्द हो रहा था और चाह कर भी मैं चिल्ला नहीं पा रही थी.

    तभी अंकल ने फिर से झटका मारा.
    इस बार ऐसा लगा मानो उनका पूरा लंड मेरे पेट के अन्दर चला गया हो.

    इसके बाद थोड़ी देर तक अंकल मेरे ऊपर वैसे ही चढ़े रहे और उनका लंड मेरी बुर में अपनी जगह बनाता रहा.

    फिर मेरा दर्द कम हुआ तो अंकल धीरे धीरे अपने लंड को बुर में आगे पीछे करने लगे.

    कुछ देर बाद अंकल ने मेरे मुँह से अपना हाथ हटा दिया तो मैं जोर जोर से सांस लेने लगी.
    मैं बोली- बाहर निकाल लो अंकल, बहुत दर्द हो रहा है.

    अंकल ने मेरी कोई बात नहीं सुनी और मेरी बुर को चोदना जारी रखा.

    कुछ देर बाद मुझे भी अंकल के लंड से मजा आने लगा था.
    मैं भी गांड उठाकर अंकल का साथ देने लगी.

    थोड़ी देर में ही मेरी बुर ने पानी छोड़ दिया और मैं निढाल हो गई.
    अंकल लगातार अपनी गंदी गंदी गालियों के साथ मुझे चोदे जा रहे थे- आह साली छिनाल रंडी … बहन की लौड़ी बड़ा मजा दे रही है तेरी बुर … आह आज तो साली तेरी बुर का भोसड़ा बना कर रहूँगा!

    कुछ ही देर में मैं फिर से चार्ज हो गई और अंकल की चुदाई में सहयोग करने लगी.

    अंकल अब झड़ने वाले थे.
    तो उन्होंने मुझे पेट के बल कर दिया और सारा पानी मेरी गांड पर छोड़ दिया.

    उसके बाद अंकल ने अपने पानी को मेरी गांड में मल दिया.

    मैं हाँफ रही थी और मुझे बेहद सुकून मिल रहा था.
    मेरा जिस्म फूल की भान्ति हल्का हो गया था.
    चुदाई के बाद इतना चैन मिल सकता है, इसका अहसास मुझे पहली बार हुआ था.

    मैं अंकल के साथ चिपक कर सो गई.

    कुछ देर बाद अंकल मेरे एक दूध को मसलते हुए बोले- साली रंडी, तेरी गांड का भी मजा लेना है! मुझे पता नहीं था कि तेरे जैसी मस्त रंडी मुझे यहीं मिल जाएगी.
    यह बोलते हुए अंकल ने मेरे चूतड़ों पर अपना एक हाथ भी फेर रहे थे.

    तभी अंकल ने एक उंगली मेरी गांड में घुसेड़ दी.
    मुझे फिर से बहुत दर्द हुआ.
    पर अंकल को कोई फर्क नहीं पड़ रहा था.

    अंकल ने मेरी गांड को उंगली से चोदना शुरू कर दिया.

    कुछ ही देर में अंकल ने अपनी एक और उंगली गांड में डाल दी.
    मुझे भी अब मजा आ रहा था.

    अंकल का लंड भी अब टाईट हो गया था. अंकल ने मुझे कुतिया बना दिया.
    मैंने भी अपने हाथों से अपनी गांड को पकड़ कर खोल दिया.

    अंकल ने मेरी गांड और अपने लंड पर थूक लगाया और लंड को गांड में सैट कर दिया.

    उसके ठीक बाद अंकल ने जोर का झटका मारा तो लंड गांड के अन्दर चला गया.

    मैं तड़फ उठी.
    अंकल बोले- शाबाश रंडी, बस थोड़ा और सह ले.

    यह कहते हुए अंकल ने दूसरे झटके में अपना पूरा लंड गांड में डाल दिया.

    मेरी तो समझो मेरी गांड फट ही गई थी.
    उनका हाथ मेरे मुँह पर जमा हुआ था तो आवाज बंद थी.

    अंकल अब मेरी गांड में लंड के साथ थप्पड़ भी मार रहे थे- साली रंडी बहुत मस्त कुतिया है तू!

    वे यह सब बोल कर गांड फाड़ चुदाई किये जा रहे थे.
    अंकल कभी मेरे बूब्स पकड़ कर दबाते तो कभी मुझे बालों से पकड़ कर एक घोड़ी की तरह खींचते.

    कुछ 25 मिनट तक मेरी गांड चोदने के बाद अंकल ने अपने दोनों हाथों से मेरे दोनों दूध दबोचे और वे मेरी गांड में ही झड़ गए.
    झड़ कर वे मेरे ऊपर ही लेट गए.

    कब हम दोनों को नींद आ गई, कुछ पता ही नहीं चला.
    जब मेरी नींद खुली तो मैंने देखा कि सुबह होने वाली है.
    मैंने अपने कपड़े पहने, अंकल नंगे ही सोए थे.

    मैं ट्रक से बाहर निकल कर घर आ गई.

    अगले दिन कॉलेज भी नहीं गई, चूत से ज्यादा मेरी गांड में दर्द हो रहा था.

    उसके बाद अंकल ने मेरी बहुत बार चुदाई की, कभी ट्रक में चोदा तो कभी बाहर खड़े खड़े ही चोद देते थे.

    एक दिन अंकल और उनके दोस्त ने एक साथ मुझे मिल कर चोदा.
    यह घटना मैं आपको अगली सेक्स कहानी में बताऊंगी.

  • पहले पहले प्यार में पड़कर बुर चुदाई

    मेरा नाम प्रिया है और मैं आपको, प्यार में पहली बार हुई मेरी चुदाई के बारे में बता रही हूँ.

    मेरा राहुल नाम का एक ब्वॉयफ्रेंड था, हम दोनों एक दूसरे से बहुत प्यार करते थे.

    राहुल हमारे घर के पास ही में रहता था. राहुल और मैं साथ में पढ़ाई करते थे.

    BF Chudai GF कहानी ऐसे शुरू हुई.

    एक दिन मां बाजार से खरीददारी करने के लिए गई थीं और घर में मैं अकेली ही थी.
    राहुल हर रोज की तरह पढ़ाई करने के लिए घर पर आया.
    हम दोनों साथ में पढ़ाई करने के लिए बैठ गए.

    राहुल ने मुझसे पूछा- तुम्हारे घर में कोई नहीं है क्या?
    मैंने कहा- पापा काम पर गए हैं और मां बाजार से सामान आदि लाने गई हैं.

    राहुल बोला- मतलब हम दोनों ही घर में हैं!
    मैंने हाँ कहा.
    अब हम दोनों पढ़ाई करने बैठ गए.

    राहुल ने मुझसे पूछा- तुम मुझे कितना प्यार करती हो?
    मैंने कहा- बहुत!

    राहुल बोला- मैं जो तुम्हें कहूंगा, वह करोगी!
    मैं बोली- हां!

    राहुल मेरे पास आया और मेरी तरफ देखने लगा.
    फिर अचानक से वह मुझे किस करने लगा, मेरे होंठों को चूसने लगा.

    मैं राहुल से कहने लगी- मुझे छोड़ो … ये सब अभी नहीं राहुल!
    पर राहुल मेरी बात नहीं सुन रहा था, वह मुझे चूमता ही जा रहा था.

    मैंने उस दिन जींस पैन्ट और टी-शर्ट पहनी थी.
    राहुल का एक हाथ मेरी जींस के ऊपर से मेरी गांड को दबा रहा था और दूसरे हाथ से वो मेरे स्तनों को दबा रहा था.

    उसने मुझे चूमते चूमते मेरी टी-शर्ट निकाली और मेरी गर्दन पर चूमने लगा.
    अब मैं राहुल के सामने ब्रा और जींस पैन्ट में थी.

    वो मेरी नाभि को चूमने लगा.
    मेरी सांसें धीरे धीरे तेज होने लगीं.

    राहुल मेरी पैन्ट निकालने ही वाला था, तभी दरवाजे की घंटी बजी.
    मैंने राहुल को दूर धकेल दिया और जल्दी कपड़े पहन कर दरवाजे खोलने के लिए गई.

    मां मार्केट से वापस आ गई थीं.
    रोहन और मैं उनके सामने खड़े थे.

    मेरी मां ने राहुल से पूछा- कैसी पढ़ाई चल रही है?
    राहुल- हां आंटी, पढ़ाई अच्छी चल रही है.

    मम्मी अन्दर चली गईं और राहुल मुझे गुस्से से देखता हुआ वहां से चला गया.
    चूंकि मैंने उसे धकेल दिया था इसलिए वह मुझ पर गुस्सा हो गया था.

    मां मुझसे बोलीं- प्रिया राहुल को क्या हुआ, ये क्यों चला गया?
    “कुछ नहीं मां … उसकी तबीयत ठीक नहीं है.”

    बाद में मैंने राहुल को कॉल किया- राहुल क्या हुआ, तुम उस दिन घर से गुस्से से क्यों निकल गए?
    राहुल- प्रिया तुम मुझसे प्यार नहीं करती हो!

    मैं- मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ.
    राहुल- फिर तुमने मुझे धकेला क्यों?
    मैं- मैं डर गई थी. मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था और दरवाजे की घंटी बजी इसलिए मैंने तुम्हें धकेल दिया.

    राहुल- प्रिया फोन रखो, तुम मुझसे बात मत करो.
    मैं- राहुल तुम गुस्सा मत करो, पंद्रह दिन बाद मम्मी पापा दोस्त के शादी में जाने वाले हैं. उस दिन तुम घर आना और जो चाहे वह कर लेना, मैं कुछ नहीं कहूंगी.

    राहुल- सच में कुछ नहीं कहोगी ना!
    मैंने हां कहकर फोन रख दिया और खाना खाकर सोने चली गई.

    सोते समय राहुल ने जो आज किया, मैं उसके बारे में सोच रही थी.
    आज दोपहर में जो राहुल ने आग लगाई थी, मुझे उसे हर हाल में बुझाना ही था इसलिए मैंने अपने रूम का दरवाजा बंद किया और अपनी पैंट निकाल दी.

    मैं एक हाथ से चूत को सहलाने लगी, उसके अन्दर उंगली अन्दर बाहर करने लगी.
    दूसरे हाथ से मैं अपने मम्मों को दबाने लगी.

    कोई दस पंद्रह मिनट तक अपनी चूत को सहलाने के बाद मैं झड़ गई और सो गई.

    अगले दिन मैंने बाथरूम में जाकर अपनी चूत के सारे बाल साफ किए और बुर को शीशे में देखने लगी.
    मेरी चूत एकदम चिकनी दिखने लगी थी.

    मैं शीशे में देख कर फिर से अपनी बुर को सहलाने लगी.
    मुझे फिर से चुदास चढ़ने लगी और मैं बुर में कुछ डालने की सोचने लगी.

    मैं जल्दी से कमरे में आई और बुर में पेलने के लिए कुछ ढूँढने लगी.
    मुझे गोल हत्थे वाली कंघी दिखाई दी और मैं उसी को लेकर वापस बाथरूम में आ गई.
    मैंने उसे बुर में रगड़ना चालू किया तो मुझे मजा आने लगा.

    फिर मैंने उसे शैंपू से चिकना किया और बुर में डालने लगी.
    वो हत्था मेरी बुर में आधा इंच से कुछ ज्यादा ही जा पा रहा था.
    उसके बाद शायद मेरी बुर की झिल्ली उसे अन्दर जाने से रोक रही थी.

    मैंने कंघी के हत्थे को और अन्दर नहीं डाल बस उससे अपनी बुर के दाने को रगड़ती रही.
    कुछ ही देर बाद मैं झड़ गई और बाहर आ गई.

    उस दिन दोपहर में खाना खाकर मुझे बहुत मस्त नींद आई.

    रात को मैंने अन्तर्वासना की साइट खोली और एक सेक्स कहानी पढ़ने लगी.
    उसमें गांड को किस तरह से मरवाते हैं, उसको लेकर लिखा था.

    मेरे दिमाग में अपने आशिक के लिए गांड का छेद खोलने की सोची और अपने उसी प्यारे से कंघी के हत्थे को उठाया लिया.

    मैं उसमें वैसलीन लगा कर उसे अपनी गांड के छेद में लगा कर छेद को कुरेदने लगी.
    गांड ने भी मुँह खोल दिया और वो हत्था मेरी गांड में घुस गया.

    हालांकि अभी वो कुछ ही अन्दर जा पाया था कि दो वजहों से वो रुकने लगा.
    एक तो शायद गांड काफी कसी हुई थी और मुझे उसकी अन्दर की बनावट के बारे में मालूम नहीं था इसलिए मैं डर रही थी कि कुछ गलत न हो जाए.

    दूसरी बात ये थी कि उस हत्थे की बनावट कुछ ऐसी थी कि वो आगे कुछ मोटा सा हो गया था.
    मतलब शुरुआत में पतला गोल था और आगे जाकर ज्यादा मोटा था.
    इसलिए वो मेरी गांड में नहीं जा रहा था.

    अब मैं जितना हत्था गांड में घुस गया था, उतने से ही अपनी गांड को कुरदने लगी.
    मुझे मजा आने लगा.

    फिर मैंने उस हत्थे को अपनी गांड में लगा कर छोड़ दिया और गांड को कसके और ढीली करके उसे अपनी गांड में फुदकता सा महसूस करने लगी.

    आह मुझे बेहद मजा आने लगा था.
    तभी मेरे हाथ की हथेली ने मेरी बुर को सहलाया तो मुझे डबल मजा आने लगा.

    उस दिन काफी देर तक मैंने ऐसा ही किया और झड़ कर एक ही करवट लिए सो गई.
    कंघी का हत्था सारी रात मेरी गांड में ही घुसा रहा.

    सुबह मुझे वो कंघी का हत्था मेरे हाथ से टकराया तो बरबस ही मुझे मुस्कान आ गई और मैंने उसे निकाल दिया.

    मैं बाथरूम में गई और पॉटी करने के लिए कमोड पर बैठी, तो पॉटी करते समय मुझे मेरी गांड में बड़ी सुरसुरी सी हुई और काफी अच्छा लगा.

    अब मैं ये रोज करने लगी.
    इससे मेरी गांड ढीली होकर आसानी से कंघी के हत्थे को तीन चार इंच तक अन्दर लेने लगी थी.

    इससे मुझे लगने लगा था कि मैं अपने आशिक का लंड अपनी गांड में बड़ी आसानी से ले लूँगी.
    ये मैंने एक सरप्राइज के रूप में उसे देने का तय किया था.

    अब वो दिन आ गया था, जिस दिन मेरी चुदाई होने वाली थी.

    मम्मी और पापा शादी के लिए निकल गए.
    मैं राहुल का इंतजार कर रही थी.

    तभी दरवाज़े की घंटी बजी.
    मैंने जाकर दरवाजा खोला.
    सामने राहुल था.

    मैंने राहुल को अन्दर बुलाया और उसे अपने कमरे में लेकर गई.
    वो मेरी तरफ देख रहा था.

    मैं- राहुल आज तुम मेरे साथ जो करना चाहते हो, वो कर सकते हो. मैं तुम्हें कुछ नहीं कहूंगी.

    राहुल मेरे पास आया और मुझे चूमने लगा.
    मेरी चूत को हाथ से सहलाने लगा और जल्दी ही वो उतावला हो गया.

    उसने मेरी जींस टी-शर्ट को निकाला. मुझे ब्रा और पैन्टी में देख कर राहुल का लंड पैंट के अन्दर ही उछलने लगा था.

    उसकी पैंट का उभार मुझे उसके फूले हुए लंड का अहसास करवाने लगा था.
    मैंने उसके लंड पर हाथ फेरा, तो राहुल ने बड़े नशीले नदाज में मुझे देखा.

    उसके बाद राहुल ने मुझे घुटनों पर बिठाया और उसने अपनी शर्ट निकाल कर मुझसे कहा- मेरी पैंट निकालो प्रिया!

    मैं राहुल की पैंट निकालने लगी.
    उसका तना हुआ लंड मेरे मुँह के सामने आ गया.

    मैं सामने से आज पहली बार किसी का लंड देखने और चूसने वाली थी.

    राहुल का लंड बहुत मोटा और लंबा था.

    उसने मेरे मुँह के अन्दर लंड डाला और मुझे लंड चूसवाने लगा.
    राहुल के लंड स्वाद कुछ अजीब सा था.
    मैंने राहुल से कहा- मैं तुम्हारा लंड नहीं चूसूँगी.

    राहुल कहने लगा- तुमने मुझे क्या कहा था कि मैं तुम्हारे साथ जो चाहे कर सकता हूं. अब ये चीटिंग है.

    मैंने ओके कहा और फिर मैंने राहुल के लंड के ऊपर स्ट्राबेरी फ्लेवर की लिपबाम लगा कर लंड चूसने लगी.

    अब लंड का स्वाद स्ट्राबेरी की तरह था.
    मैं राहुल का लंड मजे से चूसने लगी.

    थोड़ी देर के बाद राहुल ने मुझे बेड पर लिटा दिया और मेरी पैंट निकाल कर मेरी पैंटी निकाल दी.
    वो मेरी चूत को चूसने लगा.

    राहुल बोला- प्रिया तेरी चूत का स्वाद स्ट्राबेरी की तरह है.
    मैंने कहा- हां मैंने तेरे आने से पहले अपनी चूत पर स्ट्राबेरी फ्लेवर की लिप बाम लगाई थी.

    राहुल मेरी चूत को बहुत देर तक चूसता रहा.
    इसके बाद मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया.
    राहुल ने मेरी चूत का सारा पानी पी लिया.

    अब राहुल ने मेरी चूत पर थूक लगाया और मेरी चूत में जोर से लंड घुसेड़ कर धक्के मारने लगा.
    मैं दर्द के कारण चिल्लाने लगी. राहुल का मोटा लंड मेरी चूत में अभी आधा ही गया था.

    राहुल ने मेरी चीख पुकार को नजरअंदाज किया और दो तीन तेज धक्के मारकर अपना पूरा लंड अन्दर पेल दिया.
    वो लंड पेल कर रुक गया और मुझे सहलाने चूमने लगा.

    कुछ देर के बाद मेरा दर्द जाता रहा और मुझे भी मजा आने लगा.
    मैं अपनी गांड उठाने लगी तो राहुल समझ गया और वो मुझे धकापेल चोदने लगा.

    उसके बाद मैं राहुल से कहने लगी- आह मजा आ रहा है … और जोर से … और जोर से चोदो मुझे राहुल!
    अब मेरे मुँह से चुदासी सिसकारियां निकलने लगी थीं- आह हाआ हां … बहुत मजा आ रहा है राहुल!

    राहुल ने काफी देर तक मेरी चुदाई करने के बाद कहा- मैं झड़ने वाला हूँ.
    मैंने राहुल से कहा- तुमने कॉन्डम नहीं पहना है, तो सारा रस मुझे पिला दो.

    राहुल ने मेरी चूत से लंड निकाला और मेरे मुँह में डाल दिया.
    मैं लंड चूसने लगी.

    कुछ ही पलों में राहुल मेरे मुँह में झड़ गया.
    मैंने उसका सारा रस पी लिया.

    हम दोनों बेड पर ही लेट गए.

    मैंने राहुल से कहा- खाने का टाइम हो गया है. तुम यहां पर ही खाकर चले जाओ.
    राहुल बोला- ठीक है.

    मैं बेड से उतर कर कपड़े पहनने लगी.

    राहुल बोला- अभी रुको प्रिया, तुम कपड़े मत पहनो. वैसे भी घर में हम दोनों के अलावा कोई नहीं है.
    मैंने पहले तो मना किया, पर बाद में मैं मान गई.

    हम दोनों नंगे ही किचन में चले गए.

    मैं प्लेट में खाना ले रही थी और राहुल पीछे से मेरी गांड को ताड़ रहा था.
    उसका लंड मेरी गांड देख कर खड़ा हो गया.

    मैंने ये सब देख लिया था.
    मुझे पता लग गया कि राहुल को मेरी गांड पसंद आ गई है और वो मेरी गांड मारना चाहता है.

  • ममेरे भाई ने मेरी बुर की सील तोड़ी

    मित्रो, मेरा नाम शर्मिष्ठा है, मैं गुजरात के एक छोटे से गांव से हूँ.
    मेरा रंग गोरा है और फिगर 30-28-32 की है. मेरी उम्र 22 साल की है.

    यह हॉट सिस्टर पोर्न कहानी तब की है, जब मैंने 12वीं पास करके कॉलेज में दाखिला लिया था.

    उसी कॉलेज में मेरे मामा के लड़के राहुल ने भी एडमिशन लिया था.
    वो दिखने में काफ़ी हैंडसम था. वो हमारे घर के पास ही रहने लगा था.

    कॉलेज स्टार्ट होने के बाद हम दोनों साथ में ही जाते थे. मेरा घर रास्ते में आता था तो वो मुझे वहां से पिक कर लेता था.
    हम दोनों में पहले सब भाई बहन जैसा ही था.

    कॉलेज जाने के बाद हम रोज रात में पढ़ाई को लेकर चैट करते थे.

    धीरे धीरे हमारे बीच और दूसरे विषय पर भी बात होने लगी.
    फिर पता नहीं कैसे, हमें एक दूसरे से प्यार हो गया.

    ये कुछ ऐसे हुआ कि एक दिन जब हम कॉलेज जा रहे थे तो उसने मुझे आई लव यू कहा.
    मैंने भी उसे आई लव यू टू कह दिया.

    बस हमारी लव स्टोरी शुरू हो गई.

    अब हम दोनों आधी रात तक बात करने लगे, हमारे बीच सेक्स चैट शुरू हो गई थी.

    मुझे उससे सेक्स से सम्बन्धित बातें करने में शर्म आती थी जबकि वो मुझसे खुल कर सेक्स की बातें करने को कहता था.

    एक दिन सुबह हम कॉलेज जा रहे थे तो रास्ते पर कोई ज्यादा गाड़ियां नहीं थीं, रास्ता लगभग सुनसान था.
    उसने सड़क के किनारे बाइक खड़ी की और मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए.

    मेरी सांसें तेज होने लगीं.
    मुझे भी मज़ा आने लगा.
    ये मेरी पहली किस थी.

    उसने काफी देर बाद मुझे छोड़ा.
    मैंने उसकी तरफ देखा तो वो वासना से मुझे देख रहा था.
    मैं भी गर्म हो गई थी.

    वो मेरे हाथ को पकड़ कर सड़क से नीचे उतार कर पेड़ों की आड़ में ले गया.
    हम दोनों फिर से चूमाचाटी में लग गए.

    उस दिन करीब आधा घंटा तक हम दोनों ने खुली सड़क पर अपने प्यार का इजहार किया.
    फिर हम दोनों कॉलेज चले गए.

    पूरा दिन मुझे किस वाला सीन याद आ रहा था.
    उसके सीने की रगड़ अपने मम्मों पर महसूस हो रही थी.

    उसी दिन रात में जब हम दोनों चैट कर रहे थे तो उसने मुझसे दिन वाले वाकिये को लेकर बात शुरू कर दी.

    उसने मुझसे पूछा- कैसा लगा मैं?
    मैंने कहा- बहुत बदमाश हो तुम!

    वो हंसा और मुझसे मजाक करने लगा- क्यों ऐसा क्या किया मैंने?
    मैंने कहा- तुमने बीच सड़क पर वो सब किया था जो नहीं करना चाहिए था.

    उसने कहा- हां, ये गलती तो हो गई थी मुझसे. अब बताओ किधर चलना है?
    मैंने कहा- क्या मतलब, किधर चलना है?

    उसने कहा- वो सब सड़क पर नहीं करेंगे … किसी कमरे में करते हैं. बोलो कौन से होटल में कमरा बुक करवा लूँ?
    मैंने कहा- पागल हो क्या? मुझे किसी होटल में नहीं जाना है.

    वो हंसने लगा- अच्छा छोड़ो … ये बताओ कि लगा कैसा था?
    मैं बोली- सच में मुझे बड़ा अजीब सा लगा.

    वो बोला- कैसा अजीब सा लगा?
    मैंने कहा- अब कैसे बताऊं?

    वो बोला- अच्छा चुम्मी करते समय कैसा लगा था.
    मैंने कहा- ऐसा लगा था जैसे करेंट लग गया हो.

    वो बोला- और क्या लगा था?
    मैंने कहा- अब और क्या बताऊं?

    उसने कहा- नीचे कुछ हुआ था?
    मैंने कहा- नीचे मतलब?

    वो बोला- नीचे मतलब चूत में कुछ हुआ था?
    मैंने धत्त कह कर उसे ऐसी बात करने से मना किया.

    इस बार उसने सीधे मुझसे सेक्स के लिए पूछा.
    मगर मेरी कोई इच्छा नहीं थी तो मैंने उससे ना कह दिया.

    इससे वो रूठ गया और दूसरे दिन आया तो उसका चेहरा लटका हुआ था.

    मैंने मौका देख कर उसको किस कर लिया.
    उसने मुझे अपने सीने से लगा लिया और मेरे दूध दबाने लगा.

    उस समय भी मेरा चुदाई का कोई मूड नहीं था इसलिए मैंने उससे साफ़ साफ कह दिया कि ये सब मुझे शादी से पहले नहीं करना है.
    वो मुझे बहुत प्यार करता था तो उसने कहा- जब तुम बोलोगी, तब ही तुम्हारी चुदाई करूंगा. भले ही तुम्हारी मुझसे शादी न हो.

    हम दोनों में शादी होना सम्भव भी नहीं थी, ये बात वो भी जानता था.
    मैं तब भी मान गई कि शादी से पहले उसके साथ सेक्स करूंगी.

    फिर 6 महीने बीत गए.
    हम दोनों रोज किस करते थे लेकिन वो सेक्स के लिए नहीं बोलता था.
    मुझे भी उससे बहुत प्यार हो गया था.

    मेरे कॉलेज की सभी फ्रेंड्स अपने ब्वॉयफ्रेंड के साथ चुदवाने जाती थीं लेकिन मुझे सेक्स में कोई इंटरेस्ट नहीं था.

    एक दिन बात करते करते मैंने उससे कहा- मेरी फ्रेंड आज चुदवाने गई थी, तो आई नहीं साली अब तक. मुझे उससे काम था.

    ये सुनकर वो एकदम से उदास हो गया.
    कुछ देर बाद वो उधर से चला गया.
    मैं समझ गई कि इसको फिर से चुदाई के कीड़े ने काट लिया है.

    दूसरे दिन हम कॉलेज जा रहे थे तो वो मुझसे बात भी नहीं कर रहा था.

    अचानक से उसने मुझसे ब्रेकअप करने को कहा और मैं समझ गई कि ये चुदाई न हो पाने के कारण मुझसे ब्रेकअप की बात कर रहा था.
    मैं ब्रेकअप के डर से उससे चुदवाने के लिए मान गयी.

    उसने मेरी तरफ देखा और कहा- दिल से राजी हो, सेक्स में तभी मजा आएगा.
    मैंने भी मन बना लिया था कि सेक्स करना है.
    तो मैंने हामी भर दी.

    उसने रात में मुझे मैसेज किया- कल के तैयार हो ना!
    मैंने हां कर दी.

    फिर उसने पूछा- चूत पर बाल हैं या साफ़ कर लिए?
    मैंने बोला- हैं.

    उसने कहा- चूत साफ करके आना.
    मैंने कहा- तुम ही कर देना.
    वो बोला- ठीक है.

    दूसरे दिन कॉलेज के बहाने वो मुझे लेने आया.
    मैं बाइक पर बैठ गई.

    वो मुझे होटल में ले गया, वहां एक रूम लिया और हम दोनों रूम में आ गए.

    रूम बंद करके ही वो मुझ पर टूट पड़ा.
    मेरे होंठों को चूसने लगा.
    मैं भी उसे किस किए जा रही थी.

    थोड़ी देर बाद उसने अपनी शर्ट उतार दी और मेरा टॉप उतार दिया, ब्रा भी उतार दी.

    मैं पहली बार किसी के सामने नंगी थी, मैं अपने हाथों को मम्मों पर रखकर ढक रही थी.

    वो बोला- जान, अब तो ये सब मेरा है. आज मैं तुम्हें इतने मज़े दूँगा कि कभी चुदाई के लिए ना नहीं कहोगी.

    उसने मम्मों पर से मेरे हाथ हटाए और ज़ोर ज़ोर से मम्मों को चूसने लगा दबाने लगा.
    मेरे मुँह से अहह अहह निकल रहा था. मुझे बहुत मज़ा आ रहा था.

    उसने आधे घंटे तक मेरे दोनों मम्मों को बारी बारी से चूसा.
    उसके बाद उसने मेरी लैगी और पैंटी भी निकाल दी.

    मेरी चूत पर बहुत बाल थे तो उसने बैग में से रेजर निकाला और बाल साफ करने लगा.

    चूत साफ होने के बाद उसने कहा- वॉशरूम में जाकर धोकर आओ.

    जब मैं चूत धोकर आई, तो वो पूरा नंगा खड़ा था. उसका 7 इंच का लंड मेरे सामने लहरा रहा था.

    मैं तो उसका लंड देख कर ही डर गई.

    फिर उसने मुझे हग किया और मुझसे बोला- तुम मेरे लिए क्या कर सकती हो?
    मैंने कहा- जो तुम बोलो.

    उसने कहा- अगर तुमसे नहीं हुआ तो आज से हमारा ब्रेकअप.
    मैं उसे खोना नहीं चाहती थी तो मैं मान गई.

    वो खड़ा था. उसने मुझे नीचे बिठाया और अपना लंड को चूसने को कहा.
    उसका लंड बहुत मोटा और बड़ा था.

    मैं नीचे घुटनों पर बैठ गई और उसका लंड पकड़ कर थोड़ा हिलाया.
    लंड से पानी निकल रहा था.

    मैंने पहले पूरे लंड पर किस की, फिर उसे अपने मुँह में ले लिया.
    उसका लंड बड़ी मुश्किल से मेरे मुँह में जा रहा था.

    आधा लंड भी नहीं जा रहा था.
    मुझे खट्टा सा स्वाद आ रहा था और लंड सी अजीब सी महक आ रही थी.

    थोड़ी देर चूसने के बाद मुझे भी अच्छा लगने लगा.
    कुछ मिनट तक चूसने के बाद उसका माल मेरे मुँह में ही निकल गया.

    वो मेरे बाल पकड़ कर लंड पर मुँह सटाए हुआ था तो मुझे उसका माल पीना पड़ा.

    उसके बाद उसने मेरे होंठों को चूस लिया और लिपकिस करने लगा.
    मैंने लंड चूसा था, तो किस में भी लंड का स्वाद आ रहा था.

    उसके बाद उसने मुझे बेड पर लिटाया और दोनों पैर फैला दिए.
    वो मेरी जांघों पर किस करने लगा.

    मेरे मुँह से सिसकारियां निकलने लगीं ‘आह आह …’

    उसने मेरी चूत पर जीभ लगाई तो मेरे शरीर में जैसे 440 वोल्ट का झटका लग रहा था.
    मैं अहह अहह कर रही थी.

    पांच मिनट चूत चाटने के बाद मेरा पानी निकल गया.
    उसका लंड भी खड़ा हो गया था.

    उसने मुझे एक बड़ी सी किस की और अपने मुँह से बहुत सारा थूक निकाल कर चूत के छिद्र पर लगा दिया.
    कुछ थूक लंड पर भी लगाया.

    फिर वो मेरे दोनों पैरों के बीच में आया और मुझे किस करके अपने लंड को चूत पर रख कर रगड़ा.
    मैं सिहर उठी.

    उसने छेद पर लंड को सैट किया, मेरे मुँह पर अपना मुँह रखा और किस करने लगा.
    अचानक से उसने एक झटका मारा और लंड का टोपा अन्दर घुसा दिया.

    मुझे बहुत दर्द हुआ.
    मैं रोने लगी.

    मगर अभी तो सिर्फ़ टोपा अन्दर घुसा था.
    दूसरे झटके में उसने आधे से ज्यादा लंड चूत में घुसा दिया.

    मैं तड़पने लगी.
    मेरी चूत में किसी ने गर्म सरिया घुसेड़ दिया हो, ऐसा लग रहा था.
    मेरी सील टूट चुकी थी.

    मैं उसे अपने ऊपर से हटाने की कोशिश कर रही थी लेकिन वो लंड को आगे पीछे करके चोदे जा रहा था.

    कुछ मिनट बाद मेरा पानी निकल गया.
    उसने चूत से लंड निकाल लिया.

    लंड पूरा सफ़ेद झाग से भरा हुआ था. उस पर वीर्य और खून लगा था.
    बेड पर भी खून था.

    मैं ये सब देख कर रोने लगी.
    उसने कहा- जान, पहली बार सबका निकलता है. तुम्हें मुझ पर ट्रस्ट है ना!
    मैंने हां कहा.

    कुछ देर बाद उसने लंड फिर से चूत में पेल दिया.
    जब लंड अन्दर घुसा तो मुझे बहुत दर्द हुआ. मगर इस बार थोड़ी देर बाद मुझे भी अच्छा लगने लगा.

    अब पच पच की आवाज़ आने लगी थी और मेरे मुँह से अहह अहह की आवाज आने लगी.
    दस मिनट बाद उसका रस निकल गया.

    उस दिन हम दोनों ने 3 बार चुदाई की.
    शाम को जब मैं घर वापस गई तो मैं ठीक से चल नहीं पा रही थी.
    मेरी चूत सूज चुकी थी.

    हॉट सिस्टर पोर्न के बाद तीन दिन तक चूत में दर्द रहा और उसके बाद सब ठीक हो गया.
    अब हम दोनों हफ्ते में 2 दिन कॉलेज से बंक मारकर चुदाई करने चले जाते थे.

    अब मुझे भी अब चुदवाने का बहुत शौक चढ़ गया था.
    जब भी मौका मिलता है, हम दोनों भरपूर चुदाई कर लेते हैं.
    भाई बहन होने के कारण कोई हम पर शक भी नहीं करता है.

  • साली ने घरवाली का सुख दिया

    आज मैं अन्तर्वासना की इस नयी साईट पर मेरी और मेरी साली की कहानी बताने जा रहा हूँ। मेरी शादी 2005 एक साधारण से परिवार में हुई थी, उस समय मेरी उम्र 25 साल थी, मेरी ससुराल में मेरी पत्नी, एक छोटी साली जिसकी उम्र 19 साल की थी और मेरे ससुर रहते थे. मेरी सास का देहांत लगभग 10 साल पहले ही हो गया था।

    मेरी पत्नी का कोई भी भाई नहीं था और ससुर भी अक्सर अपने गाँव में रहते थे इसलिए मुझे शादी के बाद अपनी पत्नी और साली के साथ उनके शहर वाले घर में रहना पड़ा। मेरी पत्नी मेरी देखने में बहुत सुंदर है साली से भी ज़्यादा, मैंने कभी भी अपनी साली से सेक्स करने के बारे में नहीं सोचा, हम लोगों की जिंदगी बहुत ही मज़े से कट रही थी।

    शादी के एक साल बाद मेरी पत्नी ने एक सुंदर से बेटे को जन्म दिया. क्योंकि बच्चा अभी छोटा था और उन दोनों की देखभाल करने वाली कोई समझदार स्त्री नहीं थी तो मेरी माँ ने मेरी पत्नी को अपने घर बुला लिया।
    अब घर में मैं और मेरी साली अकेले रह गये थे, मैं उससे बहुत कम बात करता था और सुबह जल्दी काम पर निकलता था रात को देर से आता था. मेरी साली मुझे खाना खिलाने के बाद पड़ोस में रह रहे अपने चाचा के घर में सोने चली जाती थी और सुबह जल्दी आकर मेरे लिए खाना बना देती थी. सारी चीजें अपने हिसाब से सही चल रही थीं।

    पत्नी से बिछड़े हुए लगभग एक महीना हो गया था और अब मेरा मन चुदाई करने का होने लगा था. लेकिन कोई तरीका समझ में नहीं आ रहा था। मैं कभी-कभी कोई अश्लील फिल्म की सीडी लाकर रात में फिल्म भी देख लेता था जिससे मेरे मन में चुदाई करने की चाहत और तेज होती जा रही थी।

    एक दिन मैंने सोचा कि क्यूँ ना अपनी साली को पटाया जाए चुदाई के लिए … इससे मेरा काम बहुत आसान हो जाएगा और जब तक पत्नी नहीं आती है, तब तक जब भी मन करेगा, भरपूर मज़े ले सकूँगा. यही सोच कर मैं साली को पाटने का जुगांड सोचने लगा।

    एक़ दिन की बात है कि मैं अश्लील फिल्म वाली सीडी अपने बिस्तर पर तकिया के नीचे भूल गया और काम पर चला गया. बाद में मुझे याद आया कि मैं सीडी तो घर पर ही भूल गया हूँ. फिर मैंने सोचा कि कोई बात नहीं … अगर वो सीडी साली ने देख ली तो मेरा काम और भी आसान हो जाएगा.

    यही सोच कर मेरा लंड पैंट के अंदर ही तन गया, अब मेरे मन में केवल अपनी साली को चोदने का ख्याल घूमने लगा।

    शाम को जब मैं घर आया तो मेरी साली बिल्कुल नॉर्मल दिखी, वो वैसे भी मुझसे कम ही बात करती थी और मैं भी उससे ज़्यादा बात नहीं करता था. उसको नॉर्मल देख कर मेरा मूड खराब हो गया. मैंने सोचा था कि उसकी कुँवारी चूत आज ही चोदने को मिल जायेगी लेकिन मेरे सारे सपने टूट गये।

    उस रात को मैंने अपनी साली को सोच कर दो बार मुठ मारी और अपनी वासना शांत कर ली. अब मैं अपना सारा दिमाग़ इस बात को सोचने में लगाने लगा कि कैसे अपने दिल की बात साली को बोलूं, पता नहीं वो भी मुझसे चुदना चाहती है या नहीं?
    ऐसा ना हो कि कुछ बवाल हो जाए!

    यही सोचते सोचते सारा दिन बीत गया. मेरा काम में बिल्कुल भी मन नहीं लग रहा था इसलिए उस दिन मैं शाम को जल्दी घर आ गया.
    मुझे देखकर मेरी साली ने एक प्यारा सा स्माइल दिया और बोली- जीज्जा जी, आज तो आप बहुत जल्दी घर आ गये. आप चाय पीजिए, तब तक मैं सब्जी ले कर आती हूँ।

    मैं कपड़े बदलकर चुपचाप चाय पीने लगा और प्यासी नज़रों से साली को घूरने लगा. उसकी गोल बड़ी बड़ी चुचियाँ और 36 इंच की कमर मेरे अंदर वासना का तूफान पैदा कर रही थी।
    वो बोली- मैं सब्जी लेकर आती हूँ.
    और घर से बाहर निकल गई, मैं भूखी नज़रों से उसको देखता ही रह गया.

    बाज़ार से वापस आने के बाद वो अपने काम में लग गई और मैं कमरे से बाहर निकल कर पोर्च में बैठ गया. थोड़ी देर बाद जब मैं किसी काम से अंदर गया तो मैंने देखा कि कमरे का दरवाज़ा बंद है लेकिन उसमें कुण्डी नहीं लगी थी.

    मैंने धीरे से दरवाज़ा खोला और अंदर का नज़ारा देखकर मेरी आँखें फटी रह गईं. मेरी साली अपने कपड़े बदल रही थी, उसके शरीर पर केवल ब्रा और पेंटी थी, उसका शरीर बिल्कुल संगमरमर की तरह चिकना था.
    मैंने सोचा क़ि मौका बढ़िया है अभी जाकर इसको दबोच लेते हैं और अपनी इच्छा पूरी कर लेते हैं.
    लेकिन अंदर से एक डर भी था कि कहीं बात बिगड़ ना जाए क्योंकि हम दोनों के बीच कभी भी ज़्यादा बात नहीं होती थी और ना ही कोई हँसी मज़ाक होता था।

    अभी मैं ये सब सोच ही रहा था क़ि दरवाजे की घंटी बजी और मैं जल्दी से बाहर आ गया। दरवाजे पर पड़ोस में रहने वाली चाची और उनकी बेटी आए हुए थे.
    मेरा तो सारा मूड ही खराब हो गया, एक सुनहरी मौका आते आते हाथ से निकल गया।

    उसी बीच मैं 2 दिन की छुट्टी लेकर अपने घर आ गया क्योंकि अपने बेटे को देखे हुए काफ़ी दिन हो गये थे और पत्नी को भी बहुत दिनों से नहीं छुआ था. लेकिन घर आने के बाद भी पत्नी के साथ सेक्स करने का मौका नहीं मिला।
    2 दिन रुकने के बाद मैं वापस आ गया और मैंने जानबूझ कर शाम की ट्रेन पकड़ी, रात को लगभग 2 बजे मैं ससुराल वाले घर पहुँचा.

    मेरी साली और उसकी चचेरी बहन घर में थीं वो दोनों मेरे कमरे में मेरे ही बेड पर सो रही थी.
    मैंने उसको बोला- यही लेटी रहो, मैं एक किनारे लेट जाऊँगा.

    मेरी साली बीच में थी और उसकी चाचा की बेटी किनारे पर लेटी थी. मैं भी कपड़े बदल कर दूसरे किनारे पर लेट गया. लेकिन मेरी आँखों से नींद गायब थी.

    मैंने करवट लेने के बहाने अपनी एक टाँग अपनी साली के जिस्म के ऊपर रख ली और अपना हाथ उसकी छाती पर रख दिया. अब मेरा लंड तनकर खड़ा हो गया. मैंने अपने लंड को अपनी साली के कूल्हों से सटा दिया.

    लंड की चुभन से उसकी आँख खुल गई और मैं सोने का नाटक करने लगा. उसने सोचा कि मैं थकान की वजह से बहुत गहरी नींद में सो रहा हूँ। मेरा हाथ अभी भी उसकी छाती पर ही रखा था और मुझे उसकी धड़कनें तेज होती महसूस हो रही थीं.

    शायद मेरे स्पर्श से उसके अंदर भी वासना का संचार हो गया था. थोड़ी देर तो वो अपनी गांड को मेरे लंड पर दबाती रही.
    तभी उसकी चाचा की बेटी ने उसकी तरफ करवट ली जिससे मेरी साली थोड़ा सा अलग हो गई. फिर मैं भी चुपचाप सो गया.

    लेकिन मैंने मन ही मन ये सोच लिया था क़ि अपन साली को अब जल्दी ही चोदना है। मुझे मन ही मन अपनी चचेरी साली पर बहुत गुस्सा आ रहा था, अगर आज वो ना होती तो आज ही मैं अपनी साली के साथ चुदाई का मज़ा ले लेता.
    खैर कोई भी कम अपने समय से पहले नहीं होता.

    दूसरे दिन सुबह मैं देर से उठा और मैंने जानबूझ कर ऐसा दिखाया कि मेरा मूड बहुत खराब है. उस दिन मैं काम पर भी नहीं गया.

    दोपहर को खाना खाने के बाद मैं अपने कमरे में आकर लेट गया. थोड़ी देर बाद मेरी साली भी काम ख़त्म करके मेरे कमरे में आ गई और उसने मुझसे पूछा- जीजा, आपका मूड कुछ सही नहीं लग रहा है, क्या बात है?
    मैंने उसको बोला- मेरी लाइफ बिल्कुल नीरस हो गई है, मेरी बीवी और बेटा मुझसे दूर हैं और मैं यहाँ अकेला पड़ा हूँ. सभी लोग अपने अपने परिवार के साथ रह रहे हैं और मैं यहाँ अकेला पड़ा हूँ और बीवी और बेटे को प्यार भी नहीं कर सकता।

    यह सुनकर वो बहुत परेशान हो गई और रोने लगी, उसने बोला- इस सबकी वजह मैं हूँ, मेरी वजह से आप दोनों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
    मैंने उसको समझाया- ऐसा नहीं है.
    लेकिन उसने रोना बंद नहीं किया.

    फिर मैंने उसको गले से लगाया तो वो और तेज रोने लगी और मैं उसको चुप कराने लगा. तभी मैंने उसके माथे पर एक चुम्बन किया तो वो मुझसे कस कर लिपट गई. पर वो लगातार रो रही थी. मैंने सोचा कि यही मौका है उसको सांत्वना देने के बहाने उससे प्यार करने का!

    तभी मैंने उसको चूमना शुरू कर दिया और उसके होंठों को चूमने लगा. उसने हटने की कोशिश की तो मैं बोला- आज मत रोको, मैं प्यार का बहुत भूखा हूँ. अगर तुम मेरा साथ नहीं दोगी तो कौन देगा. अगर तुम चाहती हो क़ि मैं परेशान ना रहूं तो मुझे अपनी दीदी की कमी महसूस ना होने दो, मेरे प्यार को अपना लो।

    अब उसका विरोध कम हो गया और वो मेरी बांहों में लिपट गई. मैंने उसके होंठों को चूसना शुरू किया और अपने हाथ से उसकी चुचियों को दबाने लगा जिससे उसके अंदर भी वासना भर गई और वो मेरा भरपूर साथ देने लगी. उसने भी मेरे होंठों को चूसना शुरू कर दिया.

    मैंने उसके बदन को सहलाना शुरू कर दिया और उसने भी मेरे शरीर को सहलाना शुरू कर दिया. फिर उसने मेरे लंड को पैंट के उपर से रगड़ना शुरू कर दिया. मेरा लंड अब पूरी तरह से टाइट हो गया था.

    तभी मैंने उसके कपड़े उतरने शुरू कर दिए तो वो शरमाते हुए मना करने लगी और बोली- मुझे बहुत शर्म आ रही है. मैंने आज तक किसी के सामने कपड़े नहीं उतारे!
    यह सुनकर मैं बहुत खुश हो गया क्योंकि मुझे एक कुँवारी चूत मिलने वाली थी.

    मैंने उसको समझाते हुए कहा- अरे पगली … शरमाने से काम नहीं चलेगा. प्यार करने का असली मज़ा तो बिना कपड़ों के ही है. जब दो जिस्म आपस में बिना कपड़ों के मिलते हैं तो सुख दोगुना हो जाता है.

    धीरे धीरे मैंने अपनी जवान साली के कपड़ों को उसके शरीर से अलग कर दिया. अब वो केवल ब्रा और पैंटी में थी। मैं भी अब केवल जांघिया में था.

    साली का संगमरमर सा दूधिया बदन देख कर मैं पागल हो रहा था. फिर मैंने उसकी ब्रा भी उतार दी और उसकी दोनों चुचियों को चूसना शुरू कर दिया. वो लंबी लंबी साँसें लेने लगी और उसका शरीर अकड़ने लगा.

    मैं समझ गया कि अब उसकी वासना अपने चरम पर है लेकिन अभी मैं उसको भरपूर मज़ा देना चाह रहा था जिससे वो मेरी दीवानी हो जाये। मैं बहुत ही प्यार से उसकी चुचियों को चूस रहा था.

    और फिर मैंने अपना अंडरवीयर उतार दिया और उसको लंड सहलाने को बोला. अब मैं उसकी चुचियों को चूस रहा था और वो मेरे लंड को सहला रही थी. फिर मैंने उसकी पैंटी में हाथ डाल दिया और उसकी चूत को सहलाने लगा.

    मेरी साली की आँखों में वासना की लालिमा साफ झलक रही थी और वो अपनी कमर ऊपर की तरफ उठा रही थी. मैं समझ गया कि अब वो चुदाई के लिए बेताब हो रही है.
    तभी मैंने 69 की पोज़िशन बना ली और उसको अपना लंड चूसने को बोला और मैं उसकी चूत को चाटने लगा.

    जैसे ही मैंने उसकी चूत पर अपनी ज़ीभ लगाई तो वो बहुत ज़ोर से सिसकारियाँ लेने लगी. मैंने ज़ीभ को चूत के अंदर बाहर करना शुरू कर दिया. वो तो जैसे पागल सी हो गई और बड़बड़ाने लगी- आह … जीज्जा … बहुत मज़ा आ रहा है. आज से आप मेरे जीजा जी नहीं, मेरे पति हो! मेरे राजा और ज़ोर से चाटो मेरी चूत को! अपना लंड डाल के फाड़ दो मेरी चूत को! बहुत मज़ा आ रहा है. इतना मज़ा पहले क्यूँ नहीं दिया.

    वो बीच बीच में बड़बड़ा रही थी और रुक रुक कर मेरे लंड को चूस रही थी. वो मेरे लंड को अपने हलक की गहराई तक ले जा रही थी. उम्म्ह… अहह… हय… याह… हम दोनों लंड और चूत को चूसने में इतना ज़्यादा जोश में थे कि अपने चरम तक पहुँच गये. उसकी चूत ने मेरे मुँह पर ही पानी छोड़ दिया.

    वो बीच बीच में बड़बड़ा रही थी और रुक रुक कर मेरे लंड को चूस रही थी. वो मेरे लंड को अपने हलक की गहराई तक ले जा रही थी. उम्म्ह… अहह… हय… याह… हम दोनों लंड और चूत को चूसने में इतना ज़्यादा जोश में थे कि अपने चरम तक पहुँच गये. उसकी चूत ने मेरे मुँह पर ही पानी छोड़ दिया.

    फिर मैंने बोला- मेरा लंड भी झड़ने वाला है.
    तो वो बोली- अपना माल मेरे मुँह में ही गिरा दो.
    तभी मेरे लंड ने पिचकारी छोड़ दी और मेरे माल से उसका मुँह भर गया जिसको वो पी गई।

    थोड़ी देर तक हम दोनों वैसे ही शांत पड़े रहे. फिर मैंने उसको अपने सीने से लगा लिया और प्यार करने लगा. वो भी मुझसे लिपटी हुई थी.

    मैंने प्यार से उसके गाल पर हाथ फेरते हुए पूछा- कैसा लगा?
    तो वो मुस्कराते हुए बोली- बहुत मज़ा आया … अगर मैं यह जानती क़ि आप मुझको पसंद करते हैं तो मैं ये एक महीना बर्बाद नहीं होने देती, रात को जब आप और दीदी कमरे में सेक्स के मज़े लेते थे तो आप लोगों की आवाज़ें सुनकर मेरा भी बहुत मन होता था क़ि कोई मुझे भी ऐसे ही चोदे!

    तो मैंने पूछा- तुमने कोई बाय्फ्रेंड तो बनाया ही होगा? उससे ही चुदवा लेती.
    वो बोली- नहीं जीजाजी, लड़के बहुत हरामी होते हैं। कोई गर्लफ्रेंड बन जाए तो सारी दुनिया में बताते घूमते हैं. और मैं नहीं चाहती कि कोई मेरे बारे में उल्टी सीधी बात करे. मैं तो शुरू से ही आप के साथ प्यार करना चाहती थी. इससे मेरा काम भी चलता रहता और घर की बात घर में ही रहती।

    ये सब सुनकर मैं बहुत खुश हुआ और उसको चूमने लगा.
    तो वो बोली- क्या मेरी चूत को आपके लंड का स्वाद मिलेगा या खाली ज़ीभ से ही काम चलना पड़ेगा?
    मैं बोला- ज़रूर मिलेगा मेरी जान! लेकिन मैं इस दिन को एक यादगार दिन बनाना चाहता हूँ.
    वो बोली- कैसे?
    तो मैंने कहा- जैसे शादी की पहली रात होती है, वैसे ही हम दोनों सुहागदिन मनाएँगे.

    वो उठकर बाथरूम में चली गई और नहा धोकर बाहर आई और मुझसे बोली- आप भी नहा कर फ्रेश हो जाओ, तब तक मैं दुल्हन की तरह तैयार होती हूँ.
    मैं नहाकर बाहर निकला तो वो मेरे बेड पर बिल्कुल दुल्हन की तरह सजी हुई बैठी थी और घूँघट भी किए थी.

    मेरा दिल तो खुशी के मारे पागल हो रहा था क्योंकि मैं दोबारा सुहागरात मानने जा रहा था … वो भी एक कुँवारी कली के साथ।

    मैंने बिस्तर पर पहुँच कर उसका घूँघट उठाया तो उसको देखता ही रह गया. वो दुल्हन की तरह सजी हुई बहुत ही सुंदर लग रही थी.

    धीरे धीरे मैंने उसके सारे कपड़े उतार दिए और खुद भी पूरा नंगा हो गया. मेरा लंड तो चुदाई के बारे में सोच कर पहले ही खड़ा था. मैंने उसके पूरे शरीर को चूमना शुरू किया और वो भी मेरा भरपूर साथ दे रही थी.

    तभी मैंने अपनी उंगली उसकी चूत में डाली तो वो दर्द से उछाल गई और बोली- उंगली डालने से दर्द हो रहा है तो लंड कैसे झेलूँगी?
    मैंने कहा- डरो नहीं मेरे जान, मैं उंगली से तुम्हारी चूत को सहलाउँगा तो वो थोड़ी गीली हो जाएगी और शुरू में थोड़ा सा दर्द होगा. वो तो एक बार सब को होता है. लेकिन बाद में बहुत मज़ा आएगा।

    अब मैंने फिर से उसकी चूत को चूसना शुरू किया और उसको अपना लंड चूसने को बोला.

    जब चूत पूरी तरह गीली हो गई तो मैं बोला- आओ मेरी जान … अब हम दोनों एक हो जाएँ.
    इतना कह कर मैंने उसको पीठ के बल लिटाया और अपने लंड का सुपारा साली की चूत के मुहाने पर लगाया. वो वासना से भर चुकी थी और बोल रही थी- जल्दी करो मेरे राजा … अब ये आग बर्दाश्त नहीं हो रही! जल्दी से इस आग को बुझाओ.

    मैंने बड़ी ही सावधानी से अपने लंड को धीरे धीरे अंदर डालना शुरू किया. जैसे ही आधा लंड उसकी चूत में घुसा, वो दर्द से तड़प उठी. मैंने फ़ौरन ही उसकी चुचियों को सहलाना शुरू किया और उसके होंठों को चूसने लगा. उसकी चुचियों के निप्पल को भी धीरे धीरे मसलने लगा और लंड को पूरा अंदर डाल दिया.

    जैसे ही लंड उसकी चूत की जड़ तक पहुँचा, उसकी हल्की सी चीख निकल गई उम्म्ह … अहह … हय … ओह … फिर मैंने बहुत ही आराम से धीरे धीरे लंड को आगे पीछे करना शुरू किया और उसके होंठों को लगातार चूसता रहा. लगभग 10-12 धक्के मारने के बाद जब मुझे लगा क़ि अब उसका दर्द कुछ कम हो गया है तो मैंने धक्कों की स्पीड बढ़ा दी.

    अब वो भी मेरा साथ देने लगी और अपनी गांड को ऊपर की तरफ उछलने लगी. लगभग 10 मिनट की चुदाई के बाद वो बोली- अब मैं झड़ने वाली हूँ मेरे राजा!
    तो मैंने भी धक्कों की स्पीड और बढ़ा दी और 10-15 धक्के लगाने के बाद मेरा माल भी निकालने को तैयार हो गया.

    मैंने उससे पूछा- मैं भी झड़ने वाला हूँ अपना माल कहाँ गिरा दूं?
    तो वो बोली- आज मेरी जिंदगी का सबसे खूबसूरत और यादगार दिन है आज तो आप अपना माल मेरी चूत में ही गिरा दो!

    यह सुनकर मैंने अपनी पिचकारी को उसकी चूत में ही छोड़ दिया और उसकी फुद्दी मेरे गर्म माल से भर गई. इस चुदाई से हम दोनों इतना थक गये कि वैसे ही बिना कपड़ों के एक दूसरे की बांहों में लिपट कर सो गये.

    शाम को हमारी नींद देर से खुली. उसने जल्दी से उठ कर अपने कपड़े पहने और बोली- आप भी कपड़े पहन लो. कहीं चाचा के घर से कोई आ गया तो प्राब्लम हो जाएगी।

    मैं कपड़े पहनकर कमरे से बाहर आया तो उसने मुझे गले लगाकर मेरे होंठों को चूमा और बोली- अब तो मैं तुम्हारी घरवाली बन गई हूँ. तो अब जब तक दीदी नहीं आ जाती तब तक मुझे सुबह और शाम को डेली तुम्हारा लंड चाहिए. लेकिन अब कॉंडोम के बिना नहीं चोदने दूँगी. इसलिए अभी बाज़ार जाकर कॉंडोम ले आओ और कुछ खाने के लिए भी ले आना क्योंकि देर हो चुकी है और अभी खाना बनाने लगी तो चुदाई का प्रोग्राम नहीं हो पाएगा.

    उसके इस उतावलेपन को देखकर मैं बहुत खुश था, मैंने बाइक उठाई और बाज़ार चला गया.

    उस दिन से दोस्तो … मेरी तो दुनिया ही बदल गई. अब वो सुबह जल्दी आ जाती और मैं शाम को जल्दी आ जाता. हम दोनों के प्यार का सिलसिला चलने लगा. अब हम दोनों ही खुश थे मानो हम लोगो की दुनिया ही बदल चुकी थी।

  • सुहागरात में फटी बीवी की फटी चूत का इलाज

    मेरी नयी नयी शादी हुई थी. मन में सुहागरात मनाने का जोश था और उत्साह भी. चूत चुदाई के हसीन ख्वाब देख रहा था. बड़ी मुश्किल से मैंने अपनी शादी की रस्में खत्म कीं और फिर चुदाई के लिए तैयारी करने लगा.

    नई नवेली पत्नी की चुदाई को लेकर बहुत उत्साहित था. मेरी पत्नी के बारे में आपको क्या बताऊं. वो दिखने में ऐसी थी कि आलिया भट्ट को शादी का जोड़ा पहना दिया गया हो. हूबहू आलिया की कॉपी थी.

    रात को अपने कमरे में पहुंचा तो मेरा लंड बल्ले बल्ले कर रहा था. सुहागरात की सेज पर पहुंचने से पहले ही शेरवानी की पजामी में तन गया था. एक एक पल का इंतजार करना मुश्किल हो रहा था. परीशा से मेरी बात शादी से पहले भी होती थी. फोन पर सब कुछ शेयर कर लिया था. बस अब दो जिस्मों का एक हो जाना बाकी था.

    मेरी पत्नी परीशा एकदम से नाजुक और हसीन सी कली थी. कमरे में पहुंचा तो रात के दस बज गये थे. मैंने जाते ही दरवाजा लॉक कर दिया. अब घूंघट उठाने और मुंह दिखाई जैसी रस्म के लिए सब्र नहीं हो रहा था. मैंने जाते ही परीशा को अपनी बांहों में ले लिया और उसे लेकर लेट गया.

    जल्दी ही दोनों एक दूसरे के जिस्मों की जैसे तहें खोलने लगे. मैंने उसके आभूषण उतारे और फिर उसका ब्लाउज और लहंगा. फिर पेटीकोट में उसकी नंगी चूचियों को पीते हुए उसको लेकर चूसने लगा.

    मेरी दुल्हन भी पूरी चुदासी हो रही थी. मेरे जिस्म को बांहों में भर रही थी. काफी देर तक उसके दूध से सफेद उरोजों को पीने के बाद मैंने परीशा का पेटीकोट भी उतार दिया. उसकी नयी नवेली चूत ने अपना मीठा रस छोड़ना शुरू कर दिया.

    मैंने परीशा की चूत पर मुंह रख दिया और उसकी चूत का रसपान करने लगा. दो मिनट के अंदर ही वो अपनी चूत को मेरे मुंह की ओर उठाने लगी थी. मैं भी पूरी शिद्दत के साथ अपनी पत्नी की चूत के रस को पी रहा था.

    फिर परीशा ने भी शर्म का गहना उतार फेंका और मुझे नंगा करने लगी. मेरी कमीज को उतारा और फिर नीचे की पजामी को. मैंने वी-शेप का अंडरवियर पहना हुआ था. मुझे नीचे लिटा कर मेरी पत्नी मेरी फ्रेंची के ऊपर से ही तने हुए लौड़े को अपनी जीभ से चाटने लगी.

    मेरे लंड का तो पहले से ही बुरा हाल हो गया था. परीशा की चूचियों को पीते हुए ही उसने अपनी मिठास मेरी फ्रेंची में चारों ओर फैला दी थी. इधर परीशा भी लौड़े के रस को मेरी फ्रेंची से ऐसे चूस रही थी जैसे अंडरवियर के कपड़े में अमृत लगा हो.

    परीशा ने मेरे अंडरवियर को खींच दिया और मेरे लंड को मुंह में भरकर चूसने लगी. इससे पहले मैंने परीशा को अपने लंड की पिक्स सेक्स चैट के दौरान उसके फोन में भेजी हुई थी. वो शायद मेरे लंड को देख कर शादी से पहले ही चूत में उंगली भी कर चुकी थी. इसलिए सारी शर्म छोड़कर वो लंड को पी रही थी.

    जैसे ही उसने मेरे लंड को मुंह में भरा तो मैं जन्नत की सैर करने लगा. मेरे हाथ मेरी नंगी दुल्हन के सिर को पकड़ कर लंड पर दबाने लगे. वो भी जैसे रंडियों से दीक्षा लेकर आई थी. 6.5 इंच का लौड़ा गले तक उतार रही थी.

    पांच मिनट तक लंड चुसवाने का मजा लेकर मैं अपने आपे से बाहर हो गया. मैंने उसे नीचे पटका और उसकी चूत में जोर जोर से मुख चोदन करने लगा. परीशा तड़पने लगी. वो मेरे सिर को पकड़ कर अपनी चूत में दबाने लगी.

    बात दोनों के बर्दाश्त से बाहर थी. मैंने फ्रेंची निकाल फेंकी और नंगा होकर परीशा की टांगों को खींचते हुए उसे अपनी ओर खींचा. उसकी चूत पर लंड को रगड़ते हुए उसकी आंखों में देखने लगा. दोनों पर ही पहली चुदाई का नशा सवार था.

    उसने भी आंखों ही आंखों में कह दिया- मेरी चूत का उद्घाटन करने में इतनी देर न करो स्वामी.
    मैंने उसके मन की इच्छा को भांपते हुए जिस्मों के मिलन की घड़ी को करीब लाते हुए उसकी चूत में अपने चिकने लंड का सुपारा गच से घुसा दिया.

    लंड घुसने भर की देर थी कि मैं किसी इंजन के पिस्टन की तरह परीशा की चूत को ताबड़तोड़ चोदने लगा. वो भी सिसकारियां लेते हुए कामसुख में खो सी गयी.
    पहला राउंड पांच मिनट तक ही खिंच पाया. परीशा तो 4 मिनट के करीब में ही झड़ गयी थी और उसकी चूत के रस से सराबोर अब मेरे लंड के धक्के पच-पच उसकी चूत में लगने लगे.

    एक मिनट के अंदर ही आनंद के उन्माद ने मेरे वीर्य को लंड से बाहर खींच लिया और मैं अपनी पत्नी चूत में स्खलित हो गया. एक आंधी सी आकर रुक गयी. मगर ये कुछ देर की शांति थी. तूफान तो आना अभी बाकी था.

    उसके दस मिनट बाद तक मैं उसकी चूचियों को पीता रहा और लंड महाराज फिर से चढ़ाई करने के लिए तैयार हो गये. मेरी गोरी चिट्टी पत्नी के मखमली से बदन को चोदने के लिए एक बार फिर से मैंने हथियार को पैना कर लिया.

    दोबारा से चुदाई शुरू हुई जो लगभग 30 मिनट तक चली. अबकी बार परीशा नहीं झड़ी. शायद उसकी चूत दुख गयी थी. इसलिए पहली बार वाली उत्तेजना पैदा नहीं हो पायी थी. मगर लंड को चैन कहां था.

    आधे घंटे का विराम देकर मैंने फिर से उसकी चूचियों को छेड़ना शुरू कर दिया. उसकी चूत में उंगली करने लगा और अगले तीन-चार मिनट में उसकी चूत को उंगलियों से ही स्खलित कर दिया.

    अब मैं फिर से अधूरा रह गया था लेकिन परीशा की चूत को भी गर्म करना जरूरी था. फिर मुझे उसके नंगे जिस्म पर लेटे हुए नींद आ गयी. और रात के 3 बजे के करीब फिर से लंड तना हुआ मिला.

    मैंने नींद में ही उसकी चूत में लंड को डाल दिया. अब तक ऊर्जा भी इकट्ठा हो गयी थी और परीशा की चूत को भी आराम मिल चुका था. एक घंटे की चुदाई में मैंने उसको दो बार स्खलित किया. अब मेरे लंड में भी दर्द होने लगा था.

    दोनों ही फिर से थक कर सो गये. चार बजे के सोये हुए मेरी नींद सुबह के आठ बजे परीशा ने ही खोली.
    वो कह रही थी कि उसकी चूत में बहुत तेज दर्द हो रहा है. उसको पेशाब करने में भी दिक्कत हो रही थी.

    पत्नी थी इसलिए उसका खयाल रखना भी पहली प्राथमिकता थी. मैंने उसे दिलासा दिया और करीब 11 बजे डॉक्टर दिव्या की क्लीनिक ले गया. दिव्या लगभग 40 साल की महिला रही होगी. क्षेत्र की प्रतिष्ठित डॉक्टर. उन्होंने मेरी नयी नवेली दुल्हन परीशा की जांच की.

    जांच करने के बाद पत्नी को उसने खाने व लगाने की दवा दी तथा ठीक होने तक चुदाई न करने की सलाह दी. चलते समय डॉक्टर दिव्या ने मुझसे कहा कि दो बजे अकेले आकर मिलिये.
    मैंने संकोचवश एक ओर जाकर पूछा- कुछ बड़ी समस्या है क्या?
    लेडी डॉक्टर ने कहा- चिन्ता की कोई बात नहीं लेकिन आप दो बजे आइये. तब तसल्ली से बात करते हैं. अभी इनको (पत्नी को) आराम की जरूरत है.

    घबरा कर मैं परेशान सा हो गया कि आखिर ऐसी क्या बात है जो डॉक्टर मुझे अकेले में बताना चाहती है. कहीं जोश जोश में मैंने कुछ कांड तो नहीं कर दिया अपनी कमसिन सी बीवी के साथ? मन में सौ तरह के सवाल थे लेकिन मैंने परीशा से कुछ भी नहीं कहा.

    दो बजे क्लीनिक पहुंचा तो डॉक्टर एक मरीज को देख रही थीं. मरीज के जाने के बाद डॉक्टर ने अपने स्टाफ को छुट्टी दे दी और मुझसे मुखातिब हुईं.
    वो बोली- आपकी शादी कब हुई?
    मैंने कहा- परसों हुई थी.
    दिव्या जी ने पूछा- इससे पहले आपने किसी के साथ सेक्स किया है?
    संकोचवश मैंने कहा- कभी नहीं किया मैम.

    दिव्या जी बोलीं- मिस्टर, मैं दस साल से प्रैक्टिस कर रही हूँ और बीस साल से चुदवा रही हूँ. मेरे सामने ऐसा कोई केस नहीं आया. आप अन्दर चलिये, आपका चेकअप करना होगा.

    एक बार तो मैं सकपका गया कि इसको मेरे चेकअप की क्या पड़ी है. फिर सोचा कि वो डॉक्टर है, हो सकता है कुछ जांच परख करना चाह रही हो.

    मैं उठा और अन्दर की ओर चल दिया. इस बीच डॉक्टर साहिबा ने क्लीनिक का मेन डोर लॉक कर दिया और अन्दर आ गईं. मैं अन्दर मासूम सा मुंह बनाकर खड़ा था जैसे स्कूल में उपद्रव करने के बाद बच्चे को प्रिंसीपल के सामने खड़ा कर दिया जाता है.

    वो बोली- ऐसे चेकअप होगा क्या आपका? पैंट खोलिये.
    जैसे उसने पैंट खोलने की बात कही तो लंड में गुदगुदी सी मची. लेकिन सेक्स जैसी कोई भावना नहीं थी. मैं तो इसे जांच का हिस्सा समझ रहा था.
    मैंने कहा- ओह्ह … सॉरी मैम, अभी निकाल देता हूं.

    डॉक्टर साहिबा के कहने पर मैंने अपनी पैन्ट खोल दी. अब नीचे से अंडरवियर के अंदर में मेरा लंड लटका हुआ था.
    वो बोली- ये भी उतारिये.
    उसके कहने पर मैंने सकुचाते हुए अपना अण्डरवियर भी उतार दिया.

    घबराहट भी हो रही थी और शर्म भी आ रही थी. डॉक्टर साहिबा ने लंड को लटकता देख कर एक बोतल में से कोई जेल अपने हाथ में लिया और मेरे लण्ड पर मलने लगीं.
    जैसे ही उसका हाथ मेरे गर्म से सोये हुए लंड पर लगा तो लंड में करंट सा दौड़ गया. हवस को उफनते हुए देर न लगी और लौड़ा उसके हाथ में भरता हुआ आ गया.

    वो लंड खड़ा होने के बाद भी लंड पर जेल रगड़ रही थी. उसके चेहरे पर वासना टपकने लगी थी. मैं भी मजा लेने लगा था. लंड तनकर एकदम सख्त लोहे की रॉड की तरह हो गया. मगर वो अभी भी लंड को मसले जा रही थी.

    मुझे समझते देर न लगी कि ये कोई चेकअप नहीं कर रही बल्कि ये तो चूत चुदवाने के चक्कर में है. मैं डॉक्टर साहिबा के जिस्म का मुआयना करने लगा. लगभग 40 साल की उम्र, गोरा चिट्टा भरा बदन, बड़ी बड़ी चूचियां और भारी भरकम चूतड़.

    भले ही वो बीस साल से चूत चुदवाने की बात कह चुकी थीं लेकिन थीं तो वो अविवाहित. यानि कि तकनीकी रूप से मुझे एक कुंवारी महिला को चोदने का मौका मिलने वाला था.

    मेरे लंड को हाथ में भरकर वो उसको दबाने लगी थी. फिर उसने मेरी ओर देखा और एकदम से मेरे लंड को मुंह में लेकर चूसने लगी. मैं तो पहले ही चुदाई के कयास लगाये बैठा था इसलिए लंड चुसवाने का मजा लेने लगा. मुझे हैरान नहीं हो रही थी कि क्योंकि उसकी हरकत ही चुदक्कड़ औरत वाली थी.

    लेडी डॉक्टर मेरे लंड को मुंह में लेकर जोर जोर से चूसने लगी. मेरे मुंह से सिसकारियां निकलने लगीं. उसकी चूचियों की घाटी मुझे नीचे हिलती हुई दिखाई दे रही थी जो मेरी उत्तेजना को और ज्यादा तीव्र कर रही थी.

    उसकी साड़ी का पल्लू कंधे से नीचे सरक गया था और ब्लाउज में उसकी मोटी मोटी चूचियां भरी हुई अलग से दिखाई दे रही थीं. मैंने उसके सिर को पकड़ लिया और उसके मुंह को चोदने लगा. अब मेरे धक्के उसके मुंह में लग रहे थे.

    वो भी पक्की रंडी थी. पूरा लंड गले तक ले रही थी. मेरे लौड़े की नसें फटने को हो गयी थीं. उसने माहौल ही ऐसा पैदा कर दिया था कि उसकी चूत को फाड़ देने का मन कर रहा था.

    तभी डॉक्टर साहिबा ने अपनी साड़ी, पेटीकोट को उतार कर एक तरफ फेंका और केवल पैंटी और ब्लाउज में मेरे सामने खड़ी हो गयी. मैं उसकी चूचियों पर टूट पड़ा उसके उरोजों को उसके ब्लाउज के ऊपर से दबाते हुए मसलने लगा. वो सिसकारने लगी और मेरा लंड उसकी जांघों से टकराने लगा.

    मैंने फिर उसकी पैंटी भी उतार दी और उसकी चूत को चाटने लगा. वो मेरे मुंह को अपनी चूत में दबाने लगी. जब उससे रहा न गया तो उसने मेरी शर्ट को खोला और फिर खुद जाकर बेड (जांच कक्ष के स्ट्रेचर) पर लेट गयी.

    चूत खोलकर वो चुदने के लिए तैयार थी और मेरी तोप उसकी चूत की धज्जियां उड़ाने के लिए. मैं उसकी टांगों के बीच आया तो उन्होंने अपनी टांगें फैला दीं जिससे बुर के लब अपने आप खुल गये.

    मैंने लण्ड का सुपारा बुर पर रखकर ठोका तो सुपारा टप्प से बुर के अन्दर हो गया. मैं रुका नहीं और पूरा लण्ड उनकी बुर में पेल दिया. पूरा लण्ड बुर में जाते ही डॉक्टर साहिबा ने अपने ब्लाउज़ के हुक खोलकर ब्रा ऊपर खिसका दी और अपने कबूतर आजाद कर दिये.

    चूचियां नगीं होते ही मैंने लपककर एक चूची मुंह में ले ली और चूसने लगा. डॉक्टर साहिबा बार बार अपनी बुर को अन्दर की ओर सिकोड़ रही थीं जिससे मेरा लण्ड टनटनाता जा रहा था. मैंने चूची छोड़ी और लण्ड को अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया.

    सिसकारते हुए बोली- उम्म्ह… अहह… हय… याह… इतने प्यार से चोदो, इतनी जोर से चोदो, इतनी देर तक चोदो कि मैं दुनिया भूल जाऊं.
    मैंने कहा- डॉक्टर साहिबा, अभी तीन बजे हैं, मैं अगले पांच घंटे तक फ्री हूं, आप पड़ी रहिये, मैं चोदता रहूंगा.
    वो बोलीं- मेरे पास तीन घंटे का ही समय है, छह बजे मेरा स्टाफ आ जाता है, तब तक चोद चोद कर मेरी चूत का कचूमर निकाल दो.

    मैंने उनकी दोनों टांगें उठाकर अपने कंधों पर रख लीं और राजधानी एक्सप्रेस की रफ्तार से उसकी चूत को चोदने लगा.
    लंड जाते ही चिल्ला पड़ी- बस करो, बस करो … आह्ह आराम से … चोदो.
    मैं रुक गया तो अगले ही पल फिर से सिसकार उठी- अच्छा और तेज करो … आह्ह चोदो … पूरा जोर लगाकर.

    समझ नहीं आ रहा था कि क्या कहना चाह रही थी. जाने क्या क्या बोल रहीं थी और चूतड़ उचका उचकाकर मेरा साथ दे रही थी. आधे घंटे तक उसकी चूत को पेलने के बाद मेरे स्खलन का समय नजदीक आ गया.

    उस समय मेरा लण्ड फूलकर और मोटा व टाइट होने लगा तो वो समझ गईं और बोली- अब रुकना नहीं, डिस्चार्ज होने के बाद भी नहीं.

    मैंने वैसा ही किया और डिस्चार्ज होने के बाद भी ठुकाई जारी रखी.

    फिर निढाल होकर बोली- बस करो राजा, तुमने आज जन्नत दिखा दी. आओ अब खाना खा लें, फिर दूसरा राउण्ड होगा और इस बार तुम नीचे लेटोगे और मैं तुम्हें चोदूंगी.

    चुदाई का पहला राउंड खत्म हो गया था. उसके बाद हमने कुछ देर का आराम किया और फिर से जांच कक्ष (चुदाई कक्ष) में पहुंच गये. अबकी बार मैं बेड पर लेटा और वो मेरे लंड पर अपनी चूत को चौड़ी करके बैठ गयी.

     नीचे से उसकी चूत में धक्के लगाते हुए उसको पेलना शुरू कर दिया. उसकी फुटबाल के आकार की मोटी मोटी चूचियां उछल-कूद करने लगीं. वो मेरे लंड पर कूदते हुए लंड को अंदर तक लेकर आनंदित होने लगी. दस-पंद्रह मिनट के बाद ही उसकी चूत ने पानी फेंक दिया और फच-फच की आवाज के साथ चुदाई करते हुए दो मिनट के बाद मेरा वीर्य भी उसकी चूत में निकल गया.

    दूसरा राउंड हो गया था. पंद्रह मिनट का विराम दिया और एक बार फिर से उसने मेरे लंड को चूसना शुरू कर दिया. दस मिनट लगे लंड को फिर से चुदाई लायक होने के लिए. मैंने लंड पर फिर से जेल लगाया और उस लेडी डॉक्टर को वहीं बेंच पर घोड़ी बना लिया.

    उसकी चूचियों को भींचते हुए जोर जोर से गचके लगाते हुए उसकी चूत को ठोकने लगा. वो भी साली रंडियों की तरह मेरे लंड को पूरा अंदर तक सोखने लगी. मैंने बीस मिनट तक उसकी चूत चोदी. फिर भी उसकी प्यास न बुझी तो वो मेरे सामने पीठ के बल लेटकर चूत को मसलने लगी.

    मैंने उसकी टांगों को पकड़ लिया और एक बार फिर से उसकी चूत को लंड से रगड़ना शुरू कर दिया. अबकी बार जितनी ताकत के साथ मैं धक्के लगा सकता था मैंने लगाये और उसकी चूत का कचूमर निकाल दिया.
    फिर आखिर में एक बार फिर से उसकी चूत में स्खलित होते हुए उस पर गिर पड़ा. वो भी बेसुध सी हो गयी थी.

    अब तक उसके स्टाफ के आने का समय भी हो गया था. हमने जल्दी से अपने अपने कपड़े पहने और फिर मैं वहां से निकल आया. ऐसी चुदक्कड़ लेडी डॉक्टर मुझे यूं मिल जायेगी मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था.

  • साली की चूत चुदाई का सपना पूरा हुआ

    यह कहानी एक गर्म प्यासी चूत की चुदाई के बारे में है. अब आपका ज्यादा समय न लेते हुए मैं अपनी कहानी को शुरू करने जा रहा हूं. कहानी में कहीं कोई कमी रह जाये तो मुझे माफ करें.

    दस साल पहले जब मेरी शादी हुई थी तब मेरी साली हनीप्रीत बंगलौर में पढ़ रही थी. पढ़ाई पूरी होने के बाद उसको बंगलौर में ही नौकरी मिल गई. लगभग छह साल पहले उसकी शादी दिल्ली में रहने वाले एक युवक से हुई तो वह बंगलौर से दिल्ली आ गई.

    शादी के दो-तीन महीने बाद ही गुड़गांव में उसने कोई कम्पनी ज्वाइन कर ली और दिल्ली से डेली अपडाउन करती रही. करीब साल भर बाद पुणे की किसी कम्पनी से अच्छा ऑफर मिला तो उसने पुणे जाकर ज्वाइन कर लिया.

    पिछले पांच साल से हनी पुणे में रह रही थी और उसका पति दिल्ली में.

    मैंने अपनी पत्नी से इस बारे में कई बार बात की कि हनी पुणे में है और उसका पति दिल्ली में. क्या मामला है, इनका परिवार कैसे बनेगा? पति पत्नी एक साथ नहीं रहेंगे तो गृहस्थी कैसे बनेगी?
    मेरी पत्नी हमेशा एक ही जवाब देती- मुझे खुद समझ नहीं आ रहा और मम्मी से पूछती हूँ तो उनका भी ऐसा ही जवाब होता है.

    इधर एक महीना पहले मेरी सास को दिल का दौरा पड़ा, ईश्वर की कृपा से उनकी जान बच गई लेकिन बाईपास सर्जरी करानी पड़ी और बीस दिन तक अस्पताल में रहीं.

    मां की हालत की खबर सुनकर हनीप्रीत व उसका पति दोनों लोग एकदम से उनका हालचाल जानने के लिए आ पहुंचे. हनीप्रीत का पति तो दूसरे दिन लौट गया लेकिन हनी रुक गई. जिस अस्पताल में ऑपरेशन हुआ, वो मेरे घर से बहुत करीब था और मेरी ससुराल से काफी दूर.

    व्यवस्था इस प्रकार से बनी कि रात को हनी अस्पताल में रुकती, सुबह नौ बजे मैं अपनी पत्नी को अस्पताल ले जाता और हनी को अपने घर ड्राप करके अपने ऑफिस चला जाता.
    हनी नहा धोकर हमारे घर पर आराम करती.
    शाम को छह बजे मैं ऑफिस से लौटता और अपने घर से हनी को लेकर अस्पताल जाता व अपनी पत्नी को वापस ले आता.

    जब से मेरी शादी हुई थी, हनी के साथ मेरा रिश्ता नमस्ते-नमस्ते से अधिक नहीं था. हालांकि जब से शादी हुई थी हनी पर हाथ साफ करने की तमन्ना तो थी जो समय के साथ साथ ठंडी हो गई थी.

    पिछले पांच छह दिन से हनी रोज मेरी बाइक पर बैठकर मेरे घर तक आती-जाती थी. इस दौरान ब्रेक लगाते समय उसकी चूचियां मेरी पीठ से टकराकर मेरी तमन्ना फिर से जगा रही थीं.

    उस दिन अपनी पत्नी को अस्पताल छोड़कर मैं और हनी घर के लिए निकले तो मैंने तय कर लिया कि आज मैदान फतेह करना है. आमतौर पर मैं घर पहुंच कर ताला खोलकर चला जाता था. आज मैंने ताला खोला और मैं भी अन्दर आ गया.

    मैंने हनी से कहा- आज मुझे थोड़ी देर से जाना है. तुम नहा लो, फिर चाय बना लेना, तो मैं चाय पीकर चला जाऊंगा.
    हनी ने अपना गाउन और टॉवल उठाया और बाथरूम में घुस गई. नहाकर बाहर निकली तो उसके बालों से पानी टपक रहा था.

    ‘जहेनसीब’ कहकर मैं मुस्कुराया तो वो मेरी प्रतिक्रिया पर बोली- क्या हो गया?
    मैंने कहा- माशाअल्लाह … तुम इतनी खूबसूरत हो! मैंनें तो आज ही ध्यान से देखा.

    हनी को उम्मीद नहीं थी कि मेरे मुंह से अनायास ही उसके हुस्न की तारीफ में इतने रसीले शब्द टपकने लगेंगे.
    वो मेरी ओर देखती ही रह गयी. मेरी नजरें उसके बदन को जैसे छूकर नापने लगीं.

    नजरों के वार से वो खुद को बचा नहीं पा रही थी और उसका चेहरा लाल होने लगा था. उसकी बढ़ती हुई सांसों और बढ़ी हुई धड़कनों के साथ ही उसके ऊपर नीचे होते वक्ष इस बात के गवाह थे कि उसके अंदर मेरे शब्दों ने वासना की चिंगारी फूंक दी है.

    उठ कर मैं उसके पास गया और उसके बदन को ऊपर से नीचे तक निहारने लगा. उसके बदन को मेरी नजरें मोर के पंख की तरह सहला सी रही थी जिसके स्पर्श से उसके बदन में झुरझुरी सी पैदा होने लगी थी.

    उसके गाउन में उठे हुए उसके उरोजों की शेप और उसके उठे हुए नितम्बों से चिपके उसके गाऊन की मस्त से आकार को ताड़ते हुए मैं उसके करीब जैसे ही पहुंचा तो लंड में हलचल पैदा होनी शुरू हो गयी थी.

    मैं हनी के पीछे पहुंचा और मैंने उसे अपनी बांहों में भर लिया. मेरी बांहों के घेरे में आते ही उसके बदन में करंट सा दौड़ गया और उसके गर्म से जिस्म की छुअन ने मेरे अंदर एक उन्माद सा पैदा कर दिया.

    उसको बांहों में लेकर मैंने उसकी गर्दन को पीछे से चूम लिया तो वो आगे होते हुए अलग हो गयी.

    मगर अब तो आग लग चुकी थी, अब मैं रुकने वाला नहीं था. मैंने उसको दोबारा से अपनी बांहों में जकड़ लिया और उसकी चूचियों को दबाते हुए उसकी गर्दन को चूमने लगा.

    वो कसमसाते हुए बोली- क्या कर रहे हो जीजा जी!
    मैंने मदहोशी में उसको चूमते हुए कहा- तुम्हें प्यार देने की कोशिश कर रहा हूं.
    वो बोली- ये कहीं गलत तो नहीं है?
    मैंने कहा- इतना नहीं सोचते. सिर्फ ऐसे पलों का आनंद उठाते हैं.

    शुरुआती ना-नुकुर के बाद वो शिथिल पड़ गई और उसने मेरी बांहों में समर्पण कर दिया. मैंने कई मिनट तक उसके जिस्म की गर्मी को महसूस करते हुए उसको बांहों में लिपटाये रखा और चूमता रहा.

    उसकी गांड मेरे तन चुके लंड पर रगड़ खाने लगी थी. यह इस बात का संकेत था कि वह उत्तेजित होकर सेक्स क्रिया के लिए तैयार हो गयी थी. वो बार बार मेरे लंड पर अपनी गांड से सहला रही थी जिससे मेरे लंड में एक वेग सा उठते हुए उसमें जोर का उछाला दे रहा था.

    मैंने उसकी गांड की दरार में उसके गाउन के ऊपर से ही उसके चूतड़ों में लंड को दबाना शुरू कर दिया. उसकी चूचियों को उसके गाउन के ऊपर से दबाते हुए मैं उसके बदन के ऊपरी हिस्से को जगह जगह से चूमने लगा. कभी उसके कंधे पर चुम्बन कर रहा था तो कभी उसकी पीठ पर.

    वो भी मादक सिसकारियां लेते हुए इस बात का इशारा कर रही थी उसके अंदर अब वासना की आग को हवा दी जा रही है जो हर पल भड़कती ही जा रही है.

    हनी को अपनी ओर घुमाकर मैंने उसके होंठों पर अपने दहकते हुए होंठ रखे और उसके होंठों का रसपान करने लगा. हनी भी जैसे इस पल का इंतजार सा कर रही थी और वो मेरे होंठों से लार को खींचने लगी.

    उसके मुंह की लार मैं अपने मुंह में खींचने की कोशिश कर रहा था और वो मेरे मुंह की लार अपने मुंह में खींचने का प्रयास कर रही थी. दोनों ही एक दूसरे के होंठों का रस पीने में लगे हुए थे.

    थोड़ी देर तक उसके होंठों का रसपान करने के बाद में मैंने उसका गाउन उतार दिया. उसका मखमली बदन मेरे सामने उभरकर आ गया था जो ऐसे लग रहा था कि किसी ने कामदेवी का मूर्त रूप संगमरमर पर तराश दिया हो.

    गाउन उतारते ही उसके स्तन मेरे सामने नंगे हो गये थे. नहाने के बाद उसने ब्रा नहीं पहनी थी. नीचे से उसकी पैंटी भी गीली सी लग रही थी. मैंने पल दो पल उसको नजर भर कर देखा और फिर उसकी चूचियों पर मुंह को रख दिया. मेरे गर्म होंठ उसकी चूचियों को छू गये.

    जैसे ही मेरे होंठ उसकी चूचियों पर रखे गये तो उसने जोर से एक आह्ह सी ली और फिर मेरे सिर को पकड़ कर अपने स्तनों पर दबा लिया. मेरे होंठ उसके स्तनों में धंस गये. मैं उसके स्तनों के निप्पलों को पीने लगा.

    हनी के मुंह से आह्ह … आई … उम्म … जैसी मादक आवाजें निकलना शुरू हो गयीं. पुच… मुच … मुआह्ह … जैसी आवाजों के साथ मैं उसके स्तनों को चूसने लगा और वो कामुकता के शिखर की ओर रवानगी भरने लगी.

    इधर मेरे लौड़े का हाल भी बुरा हो गया था. मगर उससे भी ज्यादा बुरा हाल साली की गर्म चूत का मालूम पड़ रहा था. उसने नीचे से पैंटी पहनी हुई थी और मेरा हाथ अनायास ही साली की पैंटी पर चला गया जिसमें उभर रहा गीलापन मेरी उंगलियों को छू रहा था.

    कुछ देर तक उसकी चूचियों को पीते हुए मैं उसकी चूत को पैंटी के ऊपर से मसलता रहा और वो पागल सी हो गयी. मेरा लंड फटने को हो गया था. वो अब मेरे लंड को मेरी पैंट में से दबाते हुए उसको खींचने लगी थी.

    ऐसा लग रहा था कि वो लंड को बाहर लाकर अपने हाथ में भरना चाहती थी. मुझसे भी रुका नहीं जा रहा था. मैंने साली की पैंटी में हाथ डाल दिया. जैसे ही उसकी गीली गर्म चूत पर मेरी उंगलियां लगीं तो एकदम से उचक कर मुझसे लिपट गयी.

    मेरी गर्दन को चूमते हुए अपनी चूत को मेरे हाथ मेरे हाथ पर मसलने लगी. मैं भी उसकी गीली चूत को सहलाने लगा और वो नीचे से मेरे लंड को दबाने लगी. अब दोनों ही बेकाबू से हो गये.

    हनी को लेकर मैं अब बेडरूम में आ गया. उसको लिटाकर मैं बारी बारी से उसकी दोनों चूचियां चूसने लगा. मेरा दायां हाथ पैन्टी के ऊपर से ही साली की चूत को सहला रहा था. हनीप्रीत के हाव भाव बता रहे थे कि चुदवाने के लिए वो बेताब हो रही थी.

    मैंने उसकी पैन्टी उतारी और 69 की पोजीशन में लेटकर अपनी साली की चूत चाटने लगा. जैसे ही उसकी चूत पर मेरे गर्म होंठ लगे तो वो सिसकारते हुए मेरे लंड को पैंट के ऊपर से ही चूमने लगी.

    फिर उसने मेरी पैंट की चेन को खोल लिया और मेरे लंड को बाहर निकाल लिया. लंड को बाहर लाते हुए उसने मेरे लंड को अपने मुंह में भर लिया. मस्ती में मेरे लंड पर अपने गर्म होंठ कसते हुए वो मेरे लंड को चूसने लगी और दूसरी ओर मेरी जीभ उसकी चूत की गहराई नापने लगी.

    वो भी चूतड़ खिसका-खिसकाकर चूत के मुख चोदन का मजा ले रही थी. उसके मुंह में लेने से मेरा लंड एकदम से फूल सा गया था और पहले ज्यादा मोटा सा लगने लगा था. मैं उसके मुंह को हल्के हल्के चोदने लगा था. वो बीच बीच में लंड को मुंह से निकाल कर उसके टोपे को चाट लेती थी जिससे उत्तेजित होकर मैं उसकी चूत में पूरी जीभ घुसा देता था.

    जब मुझसे बर्दाश्त न हुआ तो मैंने लंड को बाहर खींच लिया और अपने कपड़े खोलने लगा. मैंने अपनी शर्ट और पैंट को सेकेन्ड्स की स्पीड से उतार फेंका और अंडरवियर निकाल कर नंगा हो गया. एक बार फिर से उसकी चूत में जीभ दे दी और मेरी साली मेरे लंड के साथ खेलने लगी. उसको हाथ में लेकर दबाते हुए मुंह में लेकर लॉलीपोप के जैसे चूसने लगी.

    उसने मुझे चूत चोदने के लिए तड़पा कर रख दिया था. वो खुद भी लंड लेने के लिए मचल गयी थी. मैंने क्रीम की शीशी व कॉण्डोम का पैकेट लिया और उसकी चूत की चुदाई की तैयारी कर दी.

    एक तकिया हनी के चूतड़ों के नीचे रखकर मैंने उसकी चूत पर जीभ फेरना शुरू किया तो वो बोली- आह्ह जीजू… अब और न तड़पाओ.
    उसकी बात सुनकर मैंने अपने लण्ड पर क्रीम चुपड़ी और साली की चूत के द्वार पर लण्ड का सुपारा रखकर दस्तक दी तो उसकी चूत ने जवाब दिया- चले आओ दरवाजा खुला है.

    मैंने धक्का मारा तो पहले धक्के में आधा और दूसरे धक्के में पूरा लण्ड हनीप्रीत की गुफा में समा गया.
    जैसे ही मेरा लंड उसकी चूत की गुफा में उतरा तो वो उसके मुंह से निकल गया- जी…जू … आह्हह … कहकर हनी ने अपने चूतड़ उचकाने शुरू कर दिये.

    चूत में लंड जाते ही उसके चेहरे के आनंद को देखकर मुझे समझते देर न लगी कि बहुत दिन से यह चुदासी है. मैंने हनी की कमर पकड़ ली और साली की चुदाई की ट्रेन चला दी. जैसे जैसे धक्के पड़ रहे थे वैसे वैसे ही उसके मुंह से जी…जू… उम्म्ह… अहह… हय… याह… जी…जू… की सिसकारियां निकल रही थीं.

    वो बार बार मेरा नाम लेकर अपनी गांड को ऊपर उठाने लगी. उत्तेजना बहुत ज्यादा हो गयी थी. मैं ज्यादा देर तक नहीं टिकने वाला था. इसलिए जब मुझे लगा कि मेरा काम होने वाला है तो मैंने अपना लण्ड बाहर निकाल लिया.

    लंड को बाहर निकाल कर उस पर हार्ड डॉटेड कॉण्डोम चढ़ाकर उसकी चूत में डाला तो लम्बी सी आहह.. भरते हुए हनी बोली- जीजू … आह्ह आपने तो दिन में तारे दिखा दिये.
    मैंने कहा- अब मुझे भी जन्नत का आनन्द लेने दो और मैंने धकाधक अपनी साली की चूत को पेलना शुरू किया.

    फच-फच की आवाज के साथ साली की पानी छोड़ रही चूत की चुदाई में मैं इतना खो गया कि क्या बताऊं. मैं बस धक्के पर धक्के लगाये जा रहा था.

    डिस्चार्ज होने से पहले लण्ड फूलकर इतना टाइट हो गया कि अन्दर बाहर करना मुश्किल हो रहा था लेकिन मैं रुका नहीं बस पेलता रहा. अगली पांच मिनटों तक मैंने उसकी चूत को जबरदस्त तरीके से रगड़ दिया.

    अब मुझसे रहा न गया और मेरे लंड पर मेरा कंट्रोल खो गया. मेरे लण्ड से एक फव्वारा छूटा जिसने मुझे जन्नत का दीदार करा दिया. मेरे लंड से वीर्य निकल कर कॉन्डम में भर गया.

    फिर हाँफते हुए मैं हनी के ऊपर ही ढेर हो गया. वो भी जोर जोर से सांसें लेते हुए मुझे अपनी चूचियों में शरण देने लगी. मैंने कई मिनट तक अपनी धड़कनें सामान्य होने का इंतजार किया और उसके बाद फिर से साली के जिस्म के साथ खेलना शुरू कर दिया.

    तभी उसने याद दिलाया कि आपको ऑफिस के लिए देर हो रही है. अब तो मैं ऑफिस और काम को भूल जाना चाहता था. मैं जल्दी से तैयार होकर ऑफिस गया और पांच दिन की छुट्टी लेकर आ गया.

    साली की चूत चुदाई का सुनहरा मौका मिला जिसका मैंने जमकर मजा लिया. पांच दिनों मैंने उसकी चूत कम से कम 15 बार तो जरूर चोदी होगी. वो भी मेरे लंड की जैसे दीवानी सी हो गयी थी. अब तो घर आते ही हम दोनों एक दूसरे के जिस्मों से लिपट जाते थे.

    इस तरह से साली की चूत चोदकर मैंने अपनी ख्वाहिश पूरी की और मुझे उसकी चूत चोदने में जैसे जन्नत का मजा मिला. बहुत दिनों के बाद काम का ऐसा सुख प्राप्त हुआ था.

  • चाची की चुत और मेरी वासना

    मैंने अपनी चाची की चुत की चुदाई की. असल में चाची के उभरे चूचों को देख कर मेरा लंड खड़ा हो जाता था और मैं मौके की तलाश में था. एक बार बहाने से मैंने चाची को गर्म कर दिया और …

    मेरा नाम आर्यन है और मैं बिहार के जमुई जिले के पास में झाझा का रहने वाला हूं.

    मैं हिंदी बेस्ट सेक्स स्टोरी अन्तर्वासना की कहानियां काफी समय से पढ़ रहा हूं और मैंने इसकी कहानियां ख़ासकर चाची की चुत की चुदाई कहानी पढ़ना आज से करीब 8 या 10 साल पहले शुरू किया था. अभी मैं 28 के ऊपर का हो चुका हूं और अभी तक कुंवारा ही हूं. मगर अन्तर्वासना से मेरा नाता बहुत पुराना है.

    यह कहानी वैसे तो वास्तविक है लेकिन इस कहानी में मनोरंजन के लिए मैंने थोड़ा सा मसाला भी डाल दिया है ताकि आपको कहानी पढ़ने में मजा आये.

    यह कहानी मेरे और मेरी चाची के बीच में हुई घटना की है. इसलिए मैं अपनी चाची का नाम यहां पर नहीं बताऊंगा.

    दोस्तो, वैसे तो मैंने आज तक अपनी जिन्दगी में बहुत सी लड़कियां और भाभी चोद कर मजा लिया. मेरी गर्लफ्रेंड की चुदाई भी मैंने खूब की है. मगर चाची की चुत चुदाई की ये घटना कुछ निराली थी. इसलिए मैंने सोचा कि पाठकों के साथ अपनी चाची की चुत चुदाई का किस्सा शेयर करूं.

    मैंने रंडी की चुदाई के साथ-साथ रिश्तों में चुदाई भी खूब की है. जिसमें मेरी मौसी की चुदाई भी शामिल है. मगर इस कहानी में मैंने अपनी चाची की चुत कैसे मारी सिर्फ उस घटना का जिक्र ही किया है. तो अब आपका ज्यादा समय न लेते हुए मैं अपनी कहानी पर आता हूं. मैं उम्मीद करता हूं कि आपको मेरी चाची की चुत की कहानी पढ़ते हुए मजा आयेगा.

    कहानी तब की है जब मैंने अपनी कॉलेज की पढ़ाई शुरू की थी. उस वक्त मेरी पढ़ाई पूरी करने के लिए मैं पहली बार घर से बाहर गया था. कॉलेज के समय में मेरा लंड भी बहुत परेशान करने लगा था. मैंने कॉलेज में जाते ही गर्लफ्रेंड बना ली थी. कुछ ही दिन के बाद उसकी चुत को चोद दिया. मगर चुत की प्यास और बढ़ गई थी.

    जब मेरे कॉलेज का पहला साल खत्म हुआ तो मैं घर वापस आ गया था. एक महीने की छुट्टी थी. घर आये हुए मुझे एक सप्ताह ही हुआ था कि मेरे लंड ने मुझे फिर से परेशान करना शुरू कर दिया. कई दिनों तक मैं अन्तर्वासना सेक्स स्टोरी साइट पर सेक्सी कहानियां पढ़ कर लंड को हिलाता रहा लेकिन मुझे चुत चाहिए थी.

    एक दिन मेरी चाची मेरे घर पर आयी. मैंने एक रात पहले ही चाची की चुत की चुदाई की कहानी पढ़ी थी. कहानी को पढ़कर मेरी नजर चाची के चूचों पर गई तो मेरा लंड खड़ा हो गया. उस दिन मैंने चाची के चूचों के बारे में सोच कर मुठ मारी. फिर मैंने सोचा कि क्यों न चाची की चुत चुदाई का मजा ले लूं.

    मैंने चाची की चुदाई करने का प्लान सोचना शुरू कर दिया लेकिन मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि मैं यह कैसे कर पाऊंगा. एक दिन की बात है कि मेरे घर पर कोई भी नहीं था. पापा काम से बाहर गये हुए थे और मां किसी रिश्तेदार के यहां पर गई हुई थी. उस दिन चाची घर आई और मेरी मां के बारे में पूछने लगी.

    चाची कई बार मेरी मां के पास आ जाती थी और दिन भर बैठ कर बातें करती रहती थी. मैं भी चुपके से चाची के उभारों को देख कर मजा लिया करता था. उस दिन भी मैंने सोचा कि चाची मेरी मां के पास आई है. मैंने मां के बारे में बताया तो चाची ने कहा कि ठीक है मैं फिर बाद में आऊंगी.

    मैं बोला- चाची कुछ काम है तो मुझे बता दो.
    चाची बोली- नहीं कुछ खास नहीं, मेरे सिर में दर्द हो रहा था. मैं तो तुम्हारी मां के पास बाम लेने के लिए आई थी. मेरे घर में मुझे बाम नहीं मिल रही थी.
    मैं बोला- कोई बात नहीं चाची, मैं आपको बाम ढूंढ कर दे देता हूं.

    मैं चाची के सामने ही बाम ढूंढने लगा और मुझे मिल गई.

    चाची को बाम थमाते हुए मैंने चाची के ब्लाउज की तरफ देखा तो मुझे चाची के क्लिवेज दिख गये. मेरे मन में वासना जाग गई.
    मैंने कहा- चाची अगर ज्यादा दर्द हो रहा है तो मैं आपके सिर में बाम लगा देता हूं.
    वो बोली- नहीं, मैं खुद से लगा लूंगी.
    मैंने कहा- अरे चाची, दूसरे के हाथ से मालिश करवाने में ज्यादा आराम मिलता है.

    फिर मेरे जोर देने पर चाची मान गई. मैंने चाची को अन्दर वाले कमरे में चलने के लिए कह दिया. चाची मेरे सामने बेड पर जाकर लेट गई और मैंने चाची के सिर बाम लगाना शुरू कर दिया. अब चाची के उठे हुए चूचे मुझे और अच्छी तरह नजर आ रहे थे.

    ब्लाउज में मेरी चाची के चूचे ऐेसे तने हुए थे जैसे कोई मिसाइल हो. चाची के उभारों को देख कर मेरे लंड में तनाव आ चुका था. मैं बेड के किनारे पर खड़ा होकर चाची के सिर में बाम की मालिश कर रहा था. मेरा तना हुआ लंड मेरी लोअर में मुझे परेशान करने लगा था.

    मालिश करने के बहाने धीरे धीरे मैं चाची के कंधे पर अपने तने हुए लंड को टच कर देता था. जब मेरा लंड चाची के कंधे से टच होता था उसमें और उत्तेजना आ जाती थी और चाची के कंधे पर झटका लगता था. मेरी वासना बढ़ती जा रही थी.

    सामने चाची के चूचों की दरार मुझे दिख रही थी और दूसरी तरफ चाची के कंधे पर लंड के छूने से मेरा बुरा हाल हो रहा था.
    मैं बोला- चाची कई बार सिर में दर्द पीछे गर्दन की वजह से भी हो जाता है.
    वो बोली- ठीक है तो फिर थोडी़ मालिश गर्दन की भी कर दो.

    मेरे कहने पर चाची पलट गई. चाची के पलटते ही उसकी भारी सी गांड मुझे साड़ी के अंदर ही उठी हुई दिखाई देने लगी. अब चाची की नजर मेरी लोअर पर थी. मेरी लोअर में तना हुआ लंड चाची को दिख गया. मगर चाची ने कुछ नहीं बोला.

    मैं भी देख रहा था कि चाची मेरे तने हुए लंड को देख रही थी. इस वजह से मेरे लंड में और ज्यादा उत्तेजना हो रही थी. मैं जान बूझ कर लंड में झटके दे रहा था ताकि चाची मेरे लंड को देख कर उत्तेजित हो सके. कई बार मैंने चाची की नजर के सामने ही अपने लंड को झटका दिया.

    अब चाची की नजर मेरे लंड पर गड़ गई थी. वो बार-बार बहाने से मेरे लंड की तरफ ही देख रही थी. मैं भी अपने तने हुए लंड को चाची के होंठों के पास लेकर जाने लगा था. एक बार तो मैंने बहाने से चाची की नाक को अपने लंड से छू भी दिया.

    मुझसे बर्दाश्त करना मुश्किल हो रहा था लेकिन चाची कुछ पहल नहीं कर रही थी. फिर मैंने चाची की गर्दन पर मालिश करने के बहाने हाथ पीछे तक ले जाना शुरू कर दिया. अब चाची की पीठ पर उसकी ब्रा की पट्टियों पर मेरी उंगलियां छू रही थी. मैं जान बूझकर चाची की ब्रा को छू रहा था. मुझे बहुत मजा आ रहा था.

    कुछ देर ऐसे ही करने के बाद अब मेरी मेहनत का असर दिखने लगा था. चाची पलटते हुए बोली- अब गर्दन की मालिश बहुत हो गई. अब सिर की ही मालिश कर दे.
    चाची ने अपनी साड़ी का पल्लू अपने चूचों के ऊपर से हटा दिया था. चाची के ब्लाउज में तने हुए चूचे मुझे साफ नजर आ रहे थे.

    मैंने बाम की शीशी चाची की बाजुओं की बगल में पेट पास रख दी. इस तरह से कोण बनाया कि जिस तरफ मैं खड़ा था उसके दूसरी तरफ शीशी रखी हुई थी. अब मैं जब शीशी उठाने के लिए चाची के ऊपर झुका तो मेरा लंड चाची के सिर पर लग गया और मेरी कुहनी चाची के चूचों से छू कर जाने लगी.

    एक दो बार मैंने ऐसा ही किया. अब चाची की टांगें भी फैलने लगी थीं. शायद चाची की चुत गीली हो रही थी. मैंने मालिश करना जारी रखा.

    फिर जब चाची से रहा न गया तो उसने पीछे हाथ लाकर मेरे लंड को पकड़ लिया और उसको सहलाने लगी. चाची की आंखें बंद थीं.

    मुझे भी इसी पल का इंतजार था. मैंने तुरंत चाची के चूचों को दबाना शुरू कर दिया. अगले ही पल हम दोनों के होंठ एक दूसरे के होंठों से मिले हुए थे. मैं चाची के चूचों को दबाते हुए उसके होंठों का रस पी रहा था. चाची भी मेरा पूरा साथ दे रही थी. उसके 36 के चूचे दबाते हुए मुजे गजब का मजा आ रहा था.

    फिर चाची खुद ही उठते हुए अपने ब्लाउज को खोलने लगी. उसकी ब्रा को मैंने झट से आजाद करवा दिया. चाची ऊपर से नंगी हो गई. मैंने चाची के स्तनों को मुंह में भर कर पीना शुरू कर दिया. चाची इतनी गर्म हो गई कि मुझे अपने ऊपर लेकर लेटती चली गई.

    नीचे से मैंने चाची की साड़ी को खोल दिया और उसके पैटीकोट का नाड़ा खोल कर उसे नीचे किया तो उसकी पैंट पर हाथ जा लगा. मैंने पैंटी को हाथ से रगड़ा और चाची की गीली चुत पर हाथ लगा कर देखा तो वो उभर कर ऊपर अलग से मेरे हाथ में महसूस हो रही थी.

    अब तो हद ही हो गई थी. मैंने तुरंत चाची की चड्डी को खींच कर चाची की चुत को नंगी कर दिया और उसकी टांगों को उठा कर उसकी चुत में जीभ लगा दी. चाची तड़पते हुए मेरे मुंह को अपनी चुत में दबाने लगी. मैं चाची की चुत में जीभ डाल कर उसे चोदने लगा.

    उसके बाद चाची उठी और मेरे लोअर को निकाल दिया. उसने मेरे कच्छे को भी नीचे खींच दिया और फिर मेरे लंड को सीधा मुंह में भर कर जोर से चूसने लगी. मैं तो आनंद में डूबने लगा. चाची मेरे लंड को मुंह में लेकर तेजी के साथ चूस रही थी. दो मिनट तक चाची ने मेरे लंड को चूसा. इस बीच में मैंने टीशर्ट भी उतार दी थी. अब दोनों नंगे थे.

    मैंने चाची की टांगों को फैलाया और उसके थूक से सराबोर हो रहे लंड को उसकी चुत पर टिका दिया. मैंने जोर लगाते हुए चाची की चुत में लौड़े को घुसा दिया. चाची ने मुझे बांहों में भर लिया और अपनी चुत को चुदवाने लगी.

    दोस्तो मुझे इतना मजा आ रहा था कि मैं बता नहीं सकता. मैंने चाची की चुत चुदाई जारी रखी और पांच मिनट के बाद मेरा वीर्य निकलने को हो गया तो मैंने चाची से पूछा कि कहां निकालूं तो उसने कहा कि अन्दर मत निकालना.

    चाची के कहने पर मैंने लंड को बाहर निकाल लिया और उसके पेट पर अपने वीर्य को छोड़ दिया. हम दोनों शांत हो गये. उसके बाद चाची ने अपने कपड़े वापस से दुरुस्त किये और चली गई. मुझे मजा आ गया उस दिन.

    मेरी चाची दिखने में भले ही साधारण थी लेकिन उसके अंदर सेक्स की आग बहुत थी. उस दिन मैंने इस बात को महसूस किया. एक दिन चाचा जब घर पर नहीं थे तो चाची ने काम के बहाने से मुझे रात को घर पर बुला लिया.

    उस दिन मैंने चाची की चुत में उंगली की तो चाची बोली- मुझे तेरे लंड चाहिये, उंगली से काम नहीं चलेगा.
    उस रात को मैंने चाची की चुत की चुदाई लगभग 35 मिनट तक की. फिर तो मैं मौका मिलते ही चाची की साड़ी को ऊपर उठा कर चाची की चुत में उंगली कर देता था.

    ऐेसे ही एक बार मेरी मां मेरे मामा के यहां पर गई हुई थी. उस दिन घर पर खाना बनाने की जिम्मेदारी चाची की ही थी. हम दोनों तो बस मौके की तलाश में थे. पापा के लिए नाश्ता बनाने के बाद वो काम पर निकल गये और मैंने किचन में ही चाची को पकड़ लिया. चाची की साड़ी उठा कर वहीं पर उसकी कच्छी निकाल दी.

    किचन के स्लैब पर चाची को झुका कर चाची की चुत मारी. उस दिन मैंने चाची की चुत में ही अपना माल गिराया. दोस्तो, चुत के अंदर माल गिराने का अलग ही मजा है. चाची अब अपनी चुत में ही माल गिरवाती थी.

    उसके बाद फिर मैं पढ़ाई के लिए बैंगलोर चला गया. वहां से चार साल के बाद वापस आया. वापस आने के बाद मैंने और चाची ने आते ही चुदाई शुरू कर दी मगर चाची के बेटे ने हम दोनों को देख लिया. उसको तो हमने किसी तरह चुप करवा दिया.

    मगर सच कभी न कभी सामने आ ही जाता है. ऐसे ही एक दिन मेरी मां ने मुझे और चाची को रंगे हाथ चुदाई करते हुए पकड़ लिया तो चाची ने सारा इल्जाम मेरे सिर पर लगा दिया.

    उस दिन के बाद से मेरी और चाची की लड़ाई हो गई. फिर हम दोनों ने कभी चुदाई नहीं की. लेकिन मैंने चाची की चुत को चोद कर खूब मजे लिये. मुझे कई बार दुख होता है कि चाची ने मेरे साथ सही नहीं किया.

    आपकी राय मेरी आपबीती के बारे में क्या है मुझे जरूर बतायें.