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  • सुहागरात पर ससुर ने चोदा

    साथियो, आज मैं आप लोगों को अपनी सुहागरात पर ससुर के साथ चुदाई की कहानी बताने जा रही हूँ.

    मेरी उम्र 20 साल की है.
    मेरी शादी कुछ दिन पहले ही हुई थी.

    हम लोग एक मेहनत मजदूरी करने वाली जनजाति से हैं.
    हमारे यहां शराब और मांस आदि का सेवन सभी लोग करते हैं.

    मेरी पहली सुहागरात मेरे ससुर के साथ हुई थी क्योंकि हमारे यहां रिवाज़ है कि पहली रात घर के मुखिया के साथ सोना पड़ता है.
    वे जैसा बोलते हैं, वैसे करना पड़ता है.

    मेरी शादी हुई और मैं अपने पति के साथ अपनी ससुराल आ गई.
    मेरे घर में मेरी सास नहीं हैं, वे मर चुकी हैं.

    मेरे ससुर पैसे वाले हैं और मैं गरीब घर की थी इसलिए मैं भी खुशी खुशी शादी करने को राजी हो गई थी.

    वहां पर रात को मुझे मेरे ससुर के कमरे में हल्दी वाला दूध देकर ले जाया गया.

    वह कमरा सुहागरात के कमरे के जैसे सज़ा हुआ था.

    मैं अन्दर गई, दूध को रखा और बेड पर बैठ गई.

    तब मैं फर्स्ट नाईट सेक्स के लिए अपने ससुर जी के आने का इंतज़ार करने लगी.

    कुछ देर बाद मेरे ससुर जी कमरे में आए और उन्होंने अन्दर से दरवाज़ा बन्द कर दिया.

    मेरे ससुर की उम्र 50 साल की रही होगी.
    वे दारू पीकर आए हुए थे.

    अन्दर आते ही उन्होंने सबसे पहले मेरा घूँघट उठाया.

    मैंने कहा- पहले दूध पी लीजिए.
    वे बोले- हां, आज तो मैं तुम्हारा दूध पियूंगा!

    मैं सोचने लगी कि ये क्या बोल रहे हैं!

    कुछ देर बाद उन्होंने मेरी साड़ी का पल्लू नीचे कर दिया.

    मैंने गहरे गले का ब्लाउज पहना था. उसमें से मेरे आधे दूध देखते ही वे मानो पागल हो गए.
    उन्होंने एक झटके से मेरी साड़ी निकाल दी.

    अब मैं उनके सामने ब्लाउज और पेटीकोट में थी.

    वे मेरे होंठों को चूसने लगे, काटने लगे, फिर गर्दन पर चूमने लगे.
    मेरी चूत भी गीली होती जा रही थी.

    कुछ देर बाद उन्होंने मेरा पेटीकोट और ब्लाउज भी फाड़ दिया और उन्हें मेरे जिस्म से अलग कर दिया.

    अब मैं अपने ससुर के सामने ब्लैक ब्रा और पैंटी में थी. वे मेरे गोरे बदन को काली ब्रा पैंटी में देखकर पागल हुए जा रहे थे.

    अब मेरे ससुर मेरे मम्मों को ब्रा के ऊपर से ही दबाने लगे और कुछ देर में उन्होंने मेरी ब्रा को भी खींच कर मम्मों से अलग कर दिया.
    ब्रा हटने से मेरे दूध आज़ाद हो गए थे और चूचियां हवा में फुदकने लगी थीं.

    मेरे ससुर मेरी चूचियों को हाथ से मसलने लगे और उन्हें काटने चूसने लगे.

    मेरी चूत पानी छोड़ कर गीली हुई जा रही थी.

    कुछ देर बाद उन्होंने मेरी चूत पर हाथ फेरा और उसकी फांक में उंगली करने लगे.

    मेरी कामुक जवानी देखकर उनका लंड खड़ा हो गया था.
    अब मैंने भी उनके कपड़े निकाल दिए.

    ससुर जी नंगे हुए तो मैंने देखा कि उनका लंड काफी बड़ा था.
    इतना बड़ा और मोटा लौड़ा देख कर मैं उनसे चुदवाने के लिए मरी जा रही थी.

    इधर ससुर जी अपने मुँह से कभी मेरे होंठों को चूसते तो कभी मेरी चूचियों को पीते.
    साथ ही साथ वे मेरी चूत में उंगली कर रहे थे.

    इस सबसे मैं भी पागल हुई जा रही थी.
    मैं बोलने लगी- आआअहह ससुर जी … और पीजिए मेरे दूध आह!

    मेरे ससुर इस तरह बोलने से और मदमस्त होकर मेरे दूध काटने पीने लगे.

    वे धीरे धीरे मेरी नाभि को चाटने लगे और चूत तक आकर पैंटी को चाटने लगे.

    मेरी पैंटी चूत रस से भीगी पड़ी थी.
    वे पैंटी के ऊपर से चूत का रस काटने लगे और अगले कुछ पल बाद उन्होंने मेरी पैंटी को भी फाड़ कर अलग कर दिया.

    अब मैं उनके सामने बिल्कुल नंगी थी.
    ससुर जी मेरी टांगें फैला कर मेरी चूत चाटने लगे.

    मुझे भी अपनी चूत चटवाने में मजा आ रहा था और मैं कमर उठा कर अपने ससुर के मुँह से अपनी चूत चुसवा रही थी.
    कुछ देर तक चूत चाटने के बाद मैं एकदम पागल हो रही थी.

    मैंने कहा- अब और मत तड़पाओ … चोद डालो ससुर जी!

    फिर उन्होंने अपना लौड़ा मेरे मुँह में दे दिया.
    उनके मोटे लंड से तो में साँस भी नहीं ले पा रही थी.

    लेकिन कुछ ही देर बाद मुझे अपने ससुर का लंड चूसने में मज़ा आने लगा था.
    मैं ससुर का लंड चूस रही थी.

    तभी ससुर ने कमरे में रखी हुई देसी दारू की बोतल से शराब को लौड़े पर टपकाना शुरू कर दिया.

    मैं दारू पीती थी, तो मुझे उनके लौड़े से टपकती दारू पीने में मजा आने लगा.

    बहुत देर तक मैं लंड चूसती रही और दारू का स्वाद लेती रही.

    उसके बाद ससुर जी ने मुझे चुदाई की पोजीशन में लिटाया और मेरी चूत में लंड डालने लगे.

    लंड ने चूत में घुसने का रास्ता खीज लिया और सुपारे ने चूत के मुँह पर अपनी पोजीशन सैट कर ली.
    मेरे ससुर ने एक ज़बरदस्त झटका मारा और उनका आधा लंड मेरी चूत को फाड़ते हुए अन्दर चला गया.

    मैं दर्द से चिल्लाने लगी पर उन्हें कहां सुनाई देने वाला था.
    चूंकि मैं भी कुछ दारू की मस्ती में थी तो उनके हैवी लौड़े को झेल गई.

    मैं अभी कसमसा ही रही थी कि मेरे ससुर ने फिर से धक्का दे मारा.
    इस बार उन्होंने अपना पूरा लंड मेरी चूत में ठांस दिया था.

    मेरी चूत फट गई थी और उसमें से रक्त बहने लगा था.
    कुछ देर रुक कर ससुर जी मेरी चूत में धक्के देने लगे.

    कुछ देर तक तो मुझे उनके लौड़े से चुदवाने में दर्द हुआ.
    फिर मज़ा आने लगा.

    अब मैं भी अपनी कमर उठा उठा कर सपने ससुर का साथ देने लगी.
    वे भी मुझे पूरी ताकत से चोदने लगे.

    पूरे कमरे में पच पच की आवाज़ गूंज रही थी.

    मैं बोलने लगी- आह ससुर जी और तेज चोदिए … आह मजा आ रहा है.
    वे बोलने लगे- साली रंडी, तुझे तो मैं रोज नंगी करके दिन रात चोदूंगा. इसलिए तो तुझे अपने बेटे से शादी करवा के घर लाया हूँ! तेरे ऊपर तो कब से मेरी नजर थी.

    मैं भी मस्ती से अपनी गांड उठा उठा कर अपने ससुर से चुद रही थी.
    ससुर अपनी ठरक में बके जा रहा था- साली, जब तक तू मेरे बच्चे को पैदा नहीं करेगी, तब तक तू रोज इसी बिस्तर पर नंगी होकर दिन रात मेरे लौड़े से चुदेगी.

    उनकी ऐसी बात सुन कर मैं और पागल हुई जा रही थी.
    मैंने भी उनको उत्तेजित करते हुए कहा- हां ससुर जी चोदो अपनी इस रंडी को … मां बना दो अपने बच्चे की!

    उनके तेज तेज लाने वाले धक्कों से मैं अब तक दो बार झड़ चुकी थी और मेरी चूत चुद चुद कर पूरी लाल हो गई थी.

    अब मेरे ससुर जी ने मुझे घोड़ी बनाया और पीछे से मुझे पेलने लगे.
    मुझे दर्द हो रहा था पर मजा भी आ रहा था.

    दूसरी तरफ वे नशे में थे तो कुछ सुनने समझने को तैयार ही नहीं थे.

    कुछ देर बाद उन्होंने मुझे घोड़ी बनाए रखा और दारू पिला कर मेरी गांड भी मारी.
    अब तो मेरी चूत और गांड एकदम लाल हो गई थी.

    ससुर जी बड़े पहलवान किस्म के चोदू थे. वे मुझे धकापेल चोदे ही जा रहे थे.

    वे बोल रहे थे- साली रंडी जब तक तू मेरे बच्चों की मां नहीं बनेगी … तब तक दिन रात तू मेरे बिस्तर पर ऐसी ही नंगी रहेगी और ऐसे ही चुदेगी.

    फिर ससुर जी मेरी चूत में झड़ गए और उसके बाद उन्होंने मेरे मम्मों को देसी दारू से नहला कर उन्हें खूब चूसा व काटा.

    वे मेरे निप्पलों से दारू पीने लगे.
    फिर लंड लगा कर मम्मों को चोदने लगे.

    मेरे बूब्स भी एकदम लाल हो गए थे.
    वे अभी भी मेरे दूध चूसे जा रहे थे.

    कुछ देर बाद उन्होंने मुझे फिर से अपनी कुतिया बनाया और मेरी चूत और गांड मारी.
    आधा घंटा तक चोदने के बाद वह मेरी चूत में ही झड़ गए.

    उसके बाद उन्होंने मेरे पूरे जिस्म पर अपनी दारू की बोतल से दारू डालकर मुझे चूसने लगे और मेरे अंगों को चाटने लगे.

    वे अब तक मेरी चूत में दो बार झड़ चुके थे और अब आराम कर रहे थे.

    कुछ देर बाद वे उठे और ग्लास का दूध पीकर मुझे कमरे के एक एक कोने में ले जाकर मेरी चुदाई करने लगे.
    उन्होंने मुझे सोफा, मेज, बेड हर जगह चोदा और हर बार मुझे बुरी तरह से ठोका.

    मैं दर्द के मारे चल और उठ नहीं पा रही थी.
    रात भर अपने ससुर से चुदवाने के बाद हम दोनों सो गए.

    सुबह जब मैं उठी तो ससुर जी भी उठ गए.
    वे मुझे अपनी गोद में लेकर बाथरूम में ले गए और वहां पर फुव्वारे के नीचे मुझे खड़ी करके मेरी चूत और गांड मारी.

    ससुर जी ने मुझे दीवार से सटा कर अपने लंड के ऊपर बैठा कर खूब पेला.
    मुझे भी घोड़ी बन कर चुदवाने में मजा आ रहा था.
    मैं मीठे मजे से चिल्ला रही थी.

    अब वे मुझे नहला कर कमरे में लाए और बिस्तर पर पटक दिया.
    फिर अपने कपड़े पहन कर ससुर जी बाहर चले गए.

    मेरी इतनी ज्यादा ठुकाई हुई थी कि मैं सही से खड़ी भी नहीं हो पा रही थी.
    मैं बेड पर ही नंगी पड़ी थी.

    कुछ देर बाद ससुर जी वापस कमरे में आए और बोले कि तुम्हारे पति को काम आ गया है, वह वापस अपने काम पर चला गया है.

    मेरी ससुराल में मेरे पति और ससुर ही थे.
    पति तो बाहर चले गए थे और ससुर मेरी ले रहे थे.

    शादी के एक महीने हो गए थे.
    मेरी चूत बुरी तरह फट गई थी.

    ससुर जी मुझे दिन रात ठोकते रहते हैं, वे मुझे पूरे घर में कहीं भी पकड़ कर चोद देते हैं.
    रात को छत पर, सीढ़ी पर, किचन में, सोफा पर, बाथरूम में … पूरे घर में एक भी जगह ऐसी नहीं बची है, जहां मैं अपने ससुर के हैवी लंड न चुदी होऊं.

    दिन रात रंडी की तरह बस मेरी चुदाई होती है.
    मैंने अब कपड़े पहनना ही बंद कर दिए हैं.

    ससुर जी भी घर में नंगे ही रहते हैं.

    जब तक एक दिन में अपने ससुर से चार बार न चुद लूँ, मेरा मन खुद नहीं भरता है.
    एक महीने बाद जब मेरा पति घर आया तो उस दिन ससुर ने कहा कि आज घर में पार्टी होगी.

    मैं समझी कि आज मेरा पति मेरी लेगा, इसलिए ससुर जी ऐसा कह रहे हैं.

    वे आज अंग्रेजी दारू की बोतल लाए और मुर्गा लाए.
    मैंने मुर्गा बनाया और अपने पति व ससुर को खाना परोसने लगी.

    उसी वक्त मेरे ससुर ने मुझे खींच कर अपनी गोदी में बिठा लिया और वे मुझे दारू पिलाने लगे.
    मैं भी बिना हील हुज्जत के उनके लंड पर बैठ कर दारू मुर्गा का मजा लेने लगी.

    कुछ देर बाद हम तीनों नशे में धुत्त हो गए और मेरे ससुर ने मुझे नंगी कर दिया.
    ससुर ने कहा- आज तुझे हम बाप बेटे मिल कर चोदेंगे.

    मैं भी उन दोनों के साथ सेक्स का मजा लेने के लिए तैयार हो गई थी.

    ससुर ने मुझे अपने लौड़े के ऊपर बिठाया और मेरी चूत चोदने लगे.
    उसी वक्त मेरे पति ने मेरी गांड में लंड पेल दिया और वे दोनों मिल कर मेरी सैंडविच चुदाई करने लगे.

    इस तरह से मुझे मेरे ससुर ने रंडी बना दिया था. मुझे भी अब अपने दोनों छेदों में एक साथ लंड लेने में मजा आने लगा था.
    आपको मैं अपनी सेक्स कहानी के अगले भाग में कुछ और भी रोचक सेक्स के बारे में लिखूँगी.

  • गर्लफ्रेंड की पहली चुदाई मौसी के कमरे में

    यंग गर्ल वेट पुसी स्टोरी में मेरी दोस्ती एक लड़की से हुई. हम दोनों सेक्स करना चाहते थे पर मौक़ा नहीं मिल रहा था. मैं उसे अपनी मौसी के घर ले गया.

    नमस्ते दोस्तो, मेरा नाम शिवराज है और मैं विदिशा, एमपी का रहने वाला हूँ.
    मैं मध्यमवर्गीय परिवार से हूँ.

    मैंने बी.एस.सी. कंप्यूटर से ग्रेजुएशन किया हुआ है और कॉम्पिटिशन एग्ज़ाम की तैयारी कर रहा हूँ.

    पढ़ाई के साथ ही बाइक के शोरूम पर कंप्यूटर ऑपरेटर की जॉब भी कर रहा हूँ.

    मैं साढ़े पांच फीट का हट्टा-कट्टा नौजवान हूँ.
    मेरा औज़ार 5 इंच का है तथा ये 2.5 इंच मोटा है.

    यह यंग गर्ल वेट पुसी स्टोरी मेरी गर्लफ्रेंड भारती की है.
    भारती से मेरी फ्रेंडशिप 4 साल पहले फेसबुक पर हुई थी.

    जब भी वह अपनी फोटो अपलोड करती, तो मैं उसकी बहुत तारीफ़ करता और उसकी फोटो पर अच्छे-अच्छे कमेंट करता.

    इस तरह वह मुझसे प्रभावित होने लगी.
    भारती का रंग गेहुंआ जरूर है लेकिन फेस कट बहुत खूबसूरत है.

    उसके घर में उसके मां-पापा, भाई-भाभी और उनकी एक लड़की थी जो कि अभी एक साल की थी.

    कुछ ही समय में हमारी फ्रेंडशिप प्यार में बदल गई और हम व्हाट्सएप पर भी बात करने लगे.
    फिर धीरे-धीरे कॉल पर प्यार भरी बातें करने लगे.

    भारती का फिगर 30-28-32 का है.
    उसके चूचे ज्यादा बड़े नहीं, पर एकदम मस्त और सख्त हैं.

    उसके दोनों चूतड़ एकदम गोल, पावभाजी वाले बन-रोटी की तरह हैं.
    उसकी गांड मसलने में खूब मजा आता है.

    भारती बी.टेक प्रथम वर्ष में अध्ययनरत है और रेंट पर भोपाल शहर में रहकर पढ़ाई कर रही थी.

    जल्द ही हमने मिलने का प्लान बनाया और मैं उससे मिलने भोपाल पहुंच गया.
    भोपाल में हम घूमे-फिरे, बहुत मौज-मस्ती की.

    दोपहर को मैंने उसे अपनी मौसी के रूम पर चलने को कहा जो कि भोपाल में ही अपने पति के साथ किराए के रूम पर रह रही थीं.
    मेरी मौसी से सैटिंग है, वह एक अलग सेक्स कहानी में लिख कर बताऊंगा कि मौसी मेरे साथ कैसे खुली थीं.

    भारती मान गई और मेरे साथ मौसी के रूम पर चली आई.
    मौसी ने हमारे लिए चाय बनाई और थोड़ी देर बाद मौसी कुछ सामान लाने का बोलकर बाज़ार चली गईं.

    यह मैंने मौसी को पहले ही बता दिया था कि मैं उसे लेकर जब आऊं, तब आप एक-दो घंटे के लिए कहीं चली जाना और उन्होंने ठीक वैसा ही किया.

    मौसा जी तो शाम से पहले अपने काम से लौटने वाले नहीं थे तो मैं बेफिक्र था.

    मौसी के जाते ही मैंने उसे अपनी बांहों में भर लिया और धीरे-धीरे मेरा एक हाथ उसके स्तनों पर आ गया.

    मैं एक हाथ से उसकी चूचियों को व दूसरे हाथ से उसकी पीठ को सहलाने लगा.
    उसने सफेद कलर का टॉप पहन रखा था.

    मैंने धीरे-धीरे करके अपना हाथ टॉप के नीचे से अन्दर डाल दिया और ब्रा के ऊपर से उसके एक स्तन को सहलाने लगा.
    वह मस्त होने लगी, तो मैंने धीरे से उसका टॉप निकाल दिया.

    उसने अपने हाथों को ऊपर करके टॉप निकालने में मेरी मदद की.
    वह खुद चुदने के मूड में आ गई थी तो मैं उसे मौसी के बेड पर ले गया.

    उधर मैंने फिर से उसके साथ चूमाचाटी शुरू कर दी और अपने दोनों हाथों से उसके चूचों को ब्रा के ऊपर से दबाने लगा.
    उसने सफेद कलर की ब्रा पहन रखी थी.

    फिर उसे किस करते हुए ही मैं एक हाथ नीचे ले गया और उसकी सफेद लैगिंग्स के ऊपर से उसकी चूत को सहलाने लगा.
    उसने अपनी टांगें फैला दीं और चुत की रगड़ाई का मजा लेने लगी.

    यह देख कर मैंने उसकी लैगिंग्स को धीरे से नीचे को सरकाते हुए टांगों से बाहर निकाल दिया.
    उसने अपनी गांड उठाकर लैगिंग्स को निकालने में मेरी मदद की.

    लैगिंग्स के नीचे उसने अन्दर ब्लैक कलर की पैंटी पहन रखी थी जो हल्की सी भीग गई थी.
    मैं पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत सहलाने लगा.

    इस सब में वह मेरा पूरा साथ दे रही थी और बहुत गर्म हो गई थी.
    फिर मैंने उसके होंठों को अपने होंठों से अलग किया और उसकी ब्रा को ऊपर करके उसके एक चूचे को मुँह में भर लिया और दूसरे दूध को मसलने लगा.

    वह आह आह करने लगी और जल्दी ही उसने खुद ही अपनी ब्रा निकाल दी.
    जब वह अपनी ब्रा निकाल रही थी, उसी वक्त मैंने उसकी पैंटी निकाल दी.

    उसकी चूत पर घुंघराले काले बाल थे जो कि ज्यादा बड़े नहीं थे, शायद उसने दो हफ्ते पहले ही साफ किए थे.
    फिर उसने मेरे कान में कहा- पहले बताया होता कि यह करने वाले हो तो मैं मैदान साफ करके आती!

    मैंने हंस कर कहा- कोई बात नहीं जान, आज तेरी घुंघराली झाड़ियों में लंड घुसेड़ कर मजा ले लूँगा, तुम अगली बार मैदान चमका कर आ जाना!
    यह सुनकर वह धीरे से हंस दी.

    अब मैंने उसके दोनों पैरों को फैलाया और उसकी टांगों के बीच में आ गया.
    अपने लंड को मैं उसकी चूत पर रगड़ते हुए किस करने लगा.
    मैं अपने दोनों हाथों से उसके मम्मों को जोर-जोर से मसलने लगा.

    वह बहुत गर्म हो गई थी और मेरे कूल्हों पर हाथ रखकर अपनी चूत पर लंड को दबाने लगी थी.
    मैंने एक हाथ नीचे ले जाकर लंड को उसकी चूत पर रखा और जोर का धक्का लगाया.

    चूत बहुत गीली होने के कारण लंड का टोपा अन्दर चला गया.
    उसके होंठ मेरे होंठों में दबे होने के कारण उसकी चीख दब कर रह गई, वरना वह बहुत जोर से चिल्ला देती.

    लौड़े की नोक चुत में घुसने से वह बहुत मचलने लगी और मुझे अपने हाथों से धकेलने की कोशिश करने लगी.
    पर मैंने उसे जकड़ रखा था.
    उसकी आंखों से आंसू बह निकले.

    मैं थोड़ी देर ऐसे ही रुका रहा.

    फिर एक और जोर के धक्के के साथ पूरा लंड मैंने उसकी चूत में पेल दिया.
    उसकी चूत फट चुकी थी और उससे खून आने लगा था जो कि मुझे मेरे लंड पर गर्म महसूस हुआ.

    वह लगभग बेहोश हो चुकी थी.
    मैं ऐसे ही रुक गया और उसे किस करने लगा.

    धीरे-धीरे उसे होश आने लगा और अब वह थोड़ा शांत हो गई थी.
    मैं धीरे-धीरे लंड को अन्दर-बाहर करने लगा.

    वह अपने मुँह से कामुक आवाज़ निकालने लगी थी.

    उसका मीठा दर्द अब मादक सिसकारियों में बदल चुका था और शायद उसे भी अब मज़ा आने लगा था.
    वह धीरे-धीरे ‘अह … उह …’ की आवाज़ें निकालने लगी.

    करीब आधे घंटे तक मस्त चुदाई चली.
    इस बीच में वह दो बार झड़ चुकी थी और अब मैं भी झड़ने वाला था.

    लंड का पानी चुत के अन्दर ना निकले इसलिए मैंने तुरंत अपने लंड को झटके से बाहर निकाल लिया.

    मैं आपको बताना भूल गया कि मेरे लंड का टोपा थोड़ा बड़ा है इसलिए जैसे ही लंड बाहर निकाला, एक पक्क की आवाज़ हुई और उसकी चीख निकल गई!
    वह बोली- अह … शिबु मर गई … ऐसे कोई निकालता है क्या!

    उसे थोड़ा दर्द होने लगा.
    अब तक करीब डेढ़ घंटा बीत गया था तो हम दोनों ने जल्दी-जल्दी अपने कपड़े उठाए और वह कपड़े लेकर अपनी चूत को साफ करने के लिए बाथरूम में चली गई.

    वह कुछ पल बाद बाहर आ गई.
    अब तक मैंने भी अपने कपड़े पहन लिए थे.

    थोड़ी देर में मौसी आ गईं और हम लोग नाश्ता करके निकल गए.
    रास्ते में उसने मुझसे कहा- मुझे चूत में बहुत जलन हो रही है और शायद खून भी आ रहा है.

    मैंने मेडिकल शॉप से पेन किलर खरीद कर उसे दे दिया.
    फिर उसके रूम के पास आकर मैं उसे सड़क पर विदा करके अपने घर को निकल गया.

    उसके बाद तो हम रोज़ रात को सेक्स चैट करने लगे और व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर एक-दूसरे को अपने-अपने अंगों का प्रदर्शन करने लगे.
    वह अलग-अलग रंग व डिज़ाइन की ब्रा पहन कर मुझे फोटो भेजा करती थी और मैं उन फोटोज़ को अपने पास मेमोरी बना कर रख लेता था.

    वह साड़ी वगैरह पहन कर भी अपनी फोटो भेजा करती थी.
    मैं उसे अपनी चूत और गांड में उंगली करने को कहता तो वह मेरी खुशी के लिए दर्द होते हुए भी करती थी.

    उसकी गांड एकदम कुंवारी थी और उसका छेद बहुत छोटा था इसलिए उसे बहुत दर्द होता था.
    फिर भी वह मेरी खुशी के लिए यह सब करती थी.

    एक बार जब मैं उससे नाराज़ हो गया तो उसने मुझे एक वीडियो बनाकर भेजी जिसमें वह टूथब्रश को अपनी गांड में डालकर अन्दर-बाहर कर रही थी.

    गांड में टूथब्रश करने के साथ ही वह बोली- यह सब मैं आपकी खुशी के लिए कर रही हूँ, अब अगर आप हंसे नहीं तो मैं अपनी जान दे दूँगी!
    मैंने उसे माफ़ कर दिया और हम फिर से बात करने लगे.

    फिर कुछ दिनों बाद उसके भाई की बेटी यानि उसकी भतीजी का बर्थडे था.
    तो उसने मुझे अपने घर पर इनवाइट किया.

    उसने मुझे अपने परिवार से कॉलेज फ्रेंड कहकर मिलवाया और फिर मेरे साथ ही वह मार्केट जाकर केक वगैरह और सजावट का सामान लेकर आई.

    मैंने उसकी भतीजी के लिए साइकिल खरीदी गिफ्ट करने के लिए.
    वह फुसफुसाती हुई बोली- वाह फूफा जी! अपनी भतीजी के लिए गिफ्ट खरीद रहे हो!
    मैं भी हंस दिया.

    हम लोग खरीदी करके वापस उसके गांव वाले घर पहुंच गए.
    वहां बहुत से मेहमान आए हुए थे, जिनमें उसके कजिन्स भी थे.

    सबने मेरी खूब खातिरदारी की और मैंने भी साज-सज्जा में भारती की मदद की.

    फिर वह तैयार होने के लिए चली गई और लगभग एक घंटे बाद वह तैयार होकर आई तो मैं उसे देखता ही रह गया.

    उसने गांव के हिसाब से चूड़ीदार कुर्ता और लैगिंग्स पहन रखा था जो कि प्याजी कलर का था और सफेद लैगिंग्स थी.

    मैंने उसे लोगों से नज़रें चुराकर एक फ्लाइंग किस दी.
    उसने भी लोगों से नज़रें चुराते हुए मेरे किस का जवाब दिया.
    अपने होठों को चुम्मा बनाकर मुझे इशारा किया.

    फिर केक कटिंग हुई और मैंने भतीजी को साइकिल दी.
    भारती और मैंने भतीजी के साथ फोटो खिंचाया.

    वह मेरे एकदम पास खड़ी थी तो मैंने मौका देखकर उससे पूछा कि किस रंग की ब्रा-पैंटी पहनी तो उसने धीरे से फुसफुसाते हुए कहा- रेड कलर का सैट!

    मेरा मन हुआ कि अभी उसके कपड़े उतरवा कर उसे रेड कलर के 2 पीस में देखूँ, पर वहां बहुत मेहमान थे तो यह संभव नहीं था.

    हम लोगों ने साथ में खाना खाया और डीजे पर बहुत डांस किया.
    फिर मैं थक कर साइड में खड़ा हो गया.

    तब देखा कि वह एक लड़के के साथ नाच रही थी तो मैंने उसे घूर कर देखा, जिससे वह डर गई और धीरे से एक कान पकड़कर माफी मांगने लगी और मेरे पास आकर खड़ी हो गई.

    मैंने स्माइल की और उसकी मम्मी का डांस देखने लगा.
    उसकी मम्मी की गांड भी बहुत बड़ी थी जो कि वह मटका-मटका कर नाच रही थी.

    तकरीबन रात के 11:00 बजे मैंने उसके पापा से घर जाने की आज्ञा ली तो उन्होंने मुझे जाने से इनकार कर दिया और कहा- बेटा, रात ज्यादा हो गई है, आज रात यहीं रुक जाओ, हमें भी अच्छा लगेगा.
    फिर भारती और भारती के मम्मी-पापा के कहने पर मैं वहीं रुक गया और अपने घर पर कह दिया कि मैं कल सुबह आऊंगा, लेट हो जाने के कारण मैं आज अपने दोस्त के घर रुक गया हूँ.

    मेहमान ज्यादा होने के कारण हम लोग हॉल में सोए.
    मेरे साइड में उसका भाई सोया हुआ था और लेफ्ट साइड में भारती थोड़ी दूरी पर अपना बिस्तर बिछाकर सोई हुई थी.
    उसके साथ उसकी बुआ की लड़की भी सोई हुई थी.

    रात को करीबन 3:00 बजे मेरी नींद खुली, तो मैंने देखा सभी लोग गहरी नींद में सोए हुए थे.
    मैंने धीरे से अपना हाथ भारती की ओर बढ़ाया और उसके कुर्ते को ऊपर उठाते हुए उसकी लैगिंग्स और पैंटी के अन्दर हाथ डाल दिया और उसकी चूत पर चलाने लगा.

    शायद वह जाग गई थी पर कोई रिएक्शन नहीं दे रही थी और मज़ा ले रही थी.
    फिर धीरे-धीरे मैंने एक उंगली उसकी चूत के अन्दर डालकर अन्दर-बाहर करना शुरू कर दिया.

    यह सब मैं उसके भाई पर ध्यान रखते हुए कर रहा था.
    बुआ की लड़की की वजह से ज्यादा रिस्क नहीं कर रही थी, बस मेरे हाथ पर अपना हाथ रखे हुई थी.

    फिर धीरे-धीरे मैंने दूसरी उंगली भी उसकी चूत में डाल दी और यंग गर्ल वेट पुसी के अन्दर-बाहर करने लगा.
    उसने अपनी टांगें थोड़ी फैला ली थी. अब उसकी चूत बहुत गीली हो चुकी थी और पानी छोड़ने लगी.

    फिर मैं उसकी पैंटी से अपना हाथ निकाल लिया और हाथ को ऊपर ले जाकर उसके कुर्ते के गले से अन्दर डालने लगा और उसके दूध सहलाने लगा.

    थोड़ी देर बाद मुझे नींद आने लगी तो मैं अपने हाथ उसके स्तन से हटाकर सो गया.

    सुबह जब मैं उठा तो 8:00 बज चुके थे और सभी लोग उठ चुके थे.
    भारती भी उठ चुकी थी और मेरे लिए चाय लेकर आई थी.

    उसी ने मुझे उठाया और मेरे होंठों पर इधर-उधर देखकर किस कर दी और ‘गुड मॉर्निंग!’ कहा.
    फिर मैं 9:00 बजे उसके घर से निकल गया.