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  • पापा की भूख, मम्मी की चूत

    रात की चुप्पी और पापा की भूख

    रात के ठीक 1:45 बजे थे। हमारे घर का मास्टर बेडरूम अंधेरे में डूबा हुआ था, सिर्फ बेडसाइड लैंप की हल्की-सी पीली रोशनी जल रही थी। मैं (उनका 22 साल का बेटा) अपने बेड पर लेटा हुआ था, आँखें बंद किए हुए, लेकिन नींद नाम की चीज नहीं थी। मैं चुपके से आँखें खोलकर देख रहा था।

    मेरे सामने, सिर्फ 8 फीट की दूरी पर, पापा और मम्मी का बेड था।

    पापा ने मम्मी का पेटीकोट ऊपर चढ़ा दिया था। मम्मी की गोरी, मोटी जांघें और पूरी तरह बाल-रहित चूत अब खुली हुई थी। पापा का 12 इंच लंबा, मोटा, काला लंड पहले से ही पूरा खड़ा था — नसें उभरी हुईं, सिर पर मोटा फोड़ा चमक रहा था। पापा ने मम्मी की पेटीकोट पूरी तरह खोलकर खुद नीचे से ऊपर निकल आए और पेटीकोट को मम्मी की कमर पर कसकर बांध दिया, ताकि मम्मी हिल भी न सकें।

    मम्मी ने पापा के कान में फुसफुसाकर कहा,
    “बच्चे के सामने तो छोड़ दो ना… प्लीज… वो सो रहा है… आज मत करो…”

    लेकिन पापा ने मम्मी के दोनों उरोजों को जोर-जोर से मसलना शुरू कर दिया। उनके बड़े-बड़े, भारी स्तन पापा की हथेलियों में दब रहे थे। पापा ने मम्मी की टांगें कंधों पर रख दीं और अपना 12 इंच का विशाल लंड मम्मी की चूत के होंठों पर सेट कर दिया।

    “आह्ह… नहीं… राम… प्लीज… आज मत… मैंने कहा ना बच्चा सामने है… आह्ह… बहुत मोटा है… फट जाएगी…” मम्मी ने कांपते स्वर में कहा।

    पापा ने एक जोरदार धक्का मारा। पूरा 12 इंच का लंड मम्मी की चूत में आधा घुस गया। मम्मी की आँखें फट गईं।

    “आआआह्ह्ह… राम… निकालो… बहुत दर्द हो रहा है… मेरी चुत फट गई… प्लीज… बच्चे के सामने मत… आह्ह… रुक जाओ…” मम्मी चीखना चाहती थीं लेकिन पापा ने उनके होंठों को अपने होंठों से कसकर बंद कर रखा था।

    मैं चुपके से बेड पर लेटा सब देख रहा था। मेरी सांसें तेज हो गई थीं। पापा का लंड इतना बड़ा था कि मम्मी की चूत पूरी तरह फैल गई थी। पेट पर उभार साफ दिख रहा था।

    पापा अब गधे की तरह चोदने लगे थे — तेज, बेरहम, बिना रुके। हर धक्के पर “पच… पच… पच…” की आवाज कमरे में गूंज रही थी। मम्मी के स्तन उछल-उछलकर पापा के चेहरे पर पड़ रहे थे।

    मम्मी बार-बार सिर हिला रही थीं, लेकिन पापा के होंठों से मुंह नहीं छूट रहा था। उनकी आँखों से आंसू बह रहे थे।

    आधे घंटे तक पापा उसी अवस्था में मम्मी को चोदते रहे। दोनों पसीने से तर हो चुके थे। आखिरकार पापा ने होंठ छोड़े और गरजते हुए बोले,
    “तुझे और किसी मर्द से चुदते देख मुझे मुठ मारनी है… तेरी चूत बहुत मस्त है रे… कितनी टाइट… कितनी गीली…”

    मम्मी हांफते हुए बोलीं,
    “तुम्हारी बीबी हूँ… कोई रंडी नहीं… जिससे मन हुआ चुदवा दोगे… प्लीज… आज काफी हो गया…”

    पापा जानबूझकर मम्मी को उत्तेजित कर रहे थे। वे जानते थे कि मम्मी को सेक्स बिल्कुल पसंद नहीं है, फिर भी वे उन्हें गुस्सा दिलाकर और जोर से चोदना चाहते थे।

    मम्मी के इतना कहते ही पापा और तेज हो गए।
    “तू मेरी रंडी तो है… रोज रात मुझसे अपनी चूत मरवाती है… भूल गई क्या? सुहागरात पर तेरे साथ क्या किया था… याद है ना?”

    पापा अपनी स्पीड बढ़ाते जा रहे थे। हर धक्के पर मम्मी का पूरा शरीर हिल रहा था।

    मम्मी सिसकते हुए बोलीं,
    “धीरे करो… नहीं… बच्चा जग जाएगा… आह्ह… राम… बहुत जोर से… मेरी चुत जल रही है… प्लीज… रुक जाओ…”

    लेकिन पापा की धुन में मस्त थे। वे मम्मी की चूत को पूरी तरह फाड़ रहे थे। मम्मी अब सिसकने लगीं। उनकी चूत से पानी निकलना शुरू हो गया था।

    “आह्ह… नहीं… मैं… मैं झड़ रही हूँ… राम… प्लीज… मत… आआह्ह… पूरा अंदर… बहुत गहरा…”

    मैं चुपके से देखता रहा। मेरी पैंट में लंड खड़ा हो चुका था। पापा का 12 इंच का लंड मम्मी की चूत में बार-बार घुस-घुसकर बाहर आ रहा था। मम्मी की चूत पूरी तरह लाल और सूजी हुई दिख रही थी।

    पापा ने मम्मी को घुटनों के बल मोड़ दिया। अब मम्मी की गांड ऊपर थी। पापा ने लंड गांड पर रखा और एक झटके में आधा घुसा दिया।

    “नहीं… वहाँ मत… गांड फट जाएगी… राम… प्लीज… बच्चे के सामने… आआह्ह… पूरा घुस गया… दर्द… आह्ह… मत मारो…”

    पापा ने मम्मी की कमर पकड़कर जोर-जोर से गांड मारनी शुरू कर दी। कमरे में सिर्फ थपाकों की आवाज और मम्मी की दबी हुई सिसकियाँ गूंज रही थीं।

    मैं बिस्तर पर लेटा-लेटा सब देख रहा था। मेरी सांसें भारी हो रही थीं। पापा मम्मी को बिना रुके 40 मिनट तक चोदते रहे। आखिरकार पापा ने जोर से धक्का मारा और मम्मी की चूत में अपना गर्म वीर्य भर दिया।

    मम्मी थककर बेड पर गिर पड़ीं। उनकी चुत और गांड दोनों सूजी हुई, लाल, और वीर्य से भरी हुई थीं।

    पापा ने मम्मी के कान में फुसफुसाया,
    “कल रात फिर करूंगा… और परसों भी… तू मेरी बीबी है… मेरी रंडी भी…”

    मम्मी ने आँखें बंद कर लीं और धीरे से रो पड़ीं।

    मैं चुपके से लेटा रहा। लेकिन मेरे मन में एक आग जल रही थी।