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  • सुहागरात पर ससुर ने चोदा

    साथियो, आज मैं आप लोगों को अपनी सुहागरात पर ससुर के साथ चुदाई की कहानी बताने जा रही हूँ.

    मेरी उम्र 20 साल की है.
    मेरी शादी कुछ दिन पहले ही हुई थी.

    हम लोग एक मेहनत मजदूरी करने वाली जनजाति से हैं.
    हमारे यहां शराब और मांस आदि का सेवन सभी लोग करते हैं.

    मेरी पहली सुहागरात मेरे ससुर के साथ हुई थी क्योंकि हमारे यहां रिवाज़ है कि पहली रात घर के मुखिया के साथ सोना पड़ता है.
    वे जैसा बोलते हैं, वैसे करना पड़ता है.

    मेरी शादी हुई और मैं अपने पति के साथ अपनी ससुराल आ गई.
    मेरे घर में मेरी सास नहीं हैं, वे मर चुकी हैं.

    मेरे ससुर पैसे वाले हैं और मैं गरीब घर की थी इसलिए मैं भी खुशी खुशी शादी करने को राजी हो गई थी.

    वहां पर रात को मुझे मेरे ससुर के कमरे में हल्दी वाला दूध देकर ले जाया गया.

    वह कमरा सुहागरात के कमरे के जैसे सज़ा हुआ था.

    मैं अन्दर गई, दूध को रखा और बेड पर बैठ गई.

    तब मैं फर्स्ट नाईट सेक्स के लिए अपने ससुर जी के आने का इंतज़ार करने लगी.

    कुछ देर बाद मेरे ससुर जी कमरे में आए और उन्होंने अन्दर से दरवाज़ा बन्द कर दिया.

    मेरे ससुर की उम्र 50 साल की रही होगी.
    वे दारू पीकर आए हुए थे.

    अन्दर आते ही उन्होंने सबसे पहले मेरा घूँघट उठाया.

    मैंने कहा- पहले दूध पी लीजिए.
    वे बोले- हां, आज तो मैं तुम्हारा दूध पियूंगा!

    मैं सोचने लगी कि ये क्या बोल रहे हैं!

    कुछ देर बाद उन्होंने मेरी साड़ी का पल्लू नीचे कर दिया.

    मैंने गहरे गले का ब्लाउज पहना था. उसमें से मेरे आधे दूध देखते ही वे मानो पागल हो गए.
    उन्होंने एक झटके से मेरी साड़ी निकाल दी.

    अब मैं उनके सामने ब्लाउज और पेटीकोट में थी.

    वे मेरे होंठों को चूसने लगे, काटने लगे, फिर गर्दन पर चूमने लगे.
    मेरी चूत भी गीली होती जा रही थी.

    कुछ देर बाद उन्होंने मेरा पेटीकोट और ब्लाउज भी फाड़ दिया और उन्हें मेरे जिस्म से अलग कर दिया.

    अब मैं अपने ससुर के सामने ब्लैक ब्रा और पैंटी में थी. वे मेरे गोरे बदन को काली ब्रा पैंटी में देखकर पागल हुए जा रहे थे.

    अब मेरे ससुर मेरे मम्मों को ब्रा के ऊपर से ही दबाने लगे और कुछ देर में उन्होंने मेरी ब्रा को भी खींच कर मम्मों से अलग कर दिया.
    ब्रा हटने से मेरे दूध आज़ाद हो गए थे और चूचियां हवा में फुदकने लगी थीं.

    मेरे ससुर मेरी चूचियों को हाथ से मसलने लगे और उन्हें काटने चूसने लगे.

    मेरी चूत पानी छोड़ कर गीली हुई जा रही थी.

    कुछ देर बाद उन्होंने मेरी चूत पर हाथ फेरा और उसकी फांक में उंगली करने लगे.

    मेरी कामुक जवानी देखकर उनका लंड खड़ा हो गया था.
    अब मैंने भी उनके कपड़े निकाल दिए.

    ससुर जी नंगे हुए तो मैंने देखा कि उनका लंड काफी बड़ा था.
    इतना बड़ा और मोटा लौड़ा देख कर मैं उनसे चुदवाने के लिए मरी जा रही थी.

    इधर ससुर जी अपने मुँह से कभी मेरे होंठों को चूसते तो कभी मेरी चूचियों को पीते.
    साथ ही साथ वे मेरी चूत में उंगली कर रहे थे.

    इस सबसे मैं भी पागल हुई जा रही थी.
    मैं बोलने लगी- आआअहह ससुर जी … और पीजिए मेरे दूध आह!

    मेरे ससुर इस तरह बोलने से और मदमस्त होकर मेरे दूध काटने पीने लगे.

    वे धीरे धीरे मेरी नाभि को चाटने लगे और चूत तक आकर पैंटी को चाटने लगे.

    मेरी पैंटी चूत रस से भीगी पड़ी थी.
    वे पैंटी के ऊपर से चूत का रस काटने लगे और अगले कुछ पल बाद उन्होंने मेरी पैंटी को भी फाड़ कर अलग कर दिया.

    अब मैं उनके सामने बिल्कुल नंगी थी.
    ससुर जी मेरी टांगें फैला कर मेरी चूत चाटने लगे.

    मुझे भी अपनी चूत चटवाने में मजा आ रहा था और मैं कमर उठा कर अपने ससुर के मुँह से अपनी चूत चुसवा रही थी.
    कुछ देर तक चूत चाटने के बाद मैं एकदम पागल हो रही थी.

    मैंने कहा- अब और मत तड़पाओ … चोद डालो ससुर जी!

    फिर उन्होंने अपना लौड़ा मेरे मुँह में दे दिया.
    उनके मोटे लंड से तो में साँस भी नहीं ले पा रही थी.

    लेकिन कुछ ही देर बाद मुझे अपने ससुर का लंड चूसने में मज़ा आने लगा था.
    मैं ससुर का लंड चूस रही थी.

    तभी ससुर ने कमरे में रखी हुई देसी दारू की बोतल से शराब को लौड़े पर टपकाना शुरू कर दिया.

    मैं दारू पीती थी, तो मुझे उनके लौड़े से टपकती दारू पीने में मजा आने लगा.

    बहुत देर तक मैं लंड चूसती रही और दारू का स्वाद लेती रही.

    उसके बाद ससुर जी ने मुझे चुदाई की पोजीशन में लिटाया और मेरी चूत में लंड डालने लगे.

    लंड ने चूत में घुसने का रास्ता खीज लिया और सुपारे ने चूत के मुँह पर अपनी पोजीशन सैट कर ली.
    मेरे ससुर ने एक ज़बरदस्त झटका मारा और उनका आधा लंड मेरी चूत को फाड़ते हुए अन्दर चला गया.

    मैं दर्द से चिल्लाने लगी पर उन्हें कहां सुनाई देने वाला था.
    चूंकि मैं भी कुछ दारू की मस्ती में थी तो उनके हैवी लौड़े को झेल गई.

    मैं अभी कसमसा ही रही थी कि मेरे ससुर ने फिर से धक्का दे मारा.
    इस बार उन्होंने अपना पूरा लंड मेरी चूत में ठांस दिया था.

    मेरी चूत फट गई थी और उसमें से रक्त बहने लगा था.
    कुछ देर रुक कर ससुर जी मेरी चूत में धक्के देने लगे.

    कुछ देर तक तो मुझे उनके लौड़े से चुदवाने में दर्द हुआ.
    फिर मज़ा आने लगा.

    अब मैं भी अपनी कमर उठा उठा कर सपने ससुर का साथ देने लगी.
    वे भी मुझे पूरी ताकत से चोदने लगे.

    पूरे कमरे में पच पच की आवाज़ गूंज रही थी.

    मैं बोलने लगी- आह ससुर जी और तेज चोदिए … आह मजा आ रहा है.
    वे बोलने लगे- साली रंडी, तुझे तो मैं रोज नंगी करके दिन रात चोदूंगा. इसलिए तो तुझे अपने बेटे से शादी करवा के घर लाया हूँ! तेरे ऊपर तो कब से मेरी नजर थी.

    मैं भी मस्ती से अपनी गांड उठा उठा कर अपने ससुर से चुद रही थी.
    ससुर अपनी ठरक में बके जा रहा था- साली, जब तक तू मेरे बच्चे को पैदा नहीं करेगी, तब तक तू रोज इसी बिस्तर पर नंगी होकर दिन रात मेरे लौड़े से चुदेगी.

    उनकी ऐसी बात सुन कर मैं और पागल हुई जा रही थी.
    मैंने भी उनको उत्तेजित करते हुए कहा- हां ससुर जी चोदो अपनी इस रंडी को … मां बना दो अपने बच्चे की!

    उनके तेज तेज लाने वाले धक्कों से मैं अब तक दो बार झड़ चुकी थी और मेरी चूत चुद चुद कर पूरी लाल हो गई थी.

    अब मेरे ससुर जी ने मुझे घोड़ी बनाया और पीछे से मुझे पेलने लगे.
    मुझे दर्द हो रहा था पर मजा भी आ रहा था.

    दूसरी तरफ वे नशे में थे तो कुछ सुनने समझने को तैयार ही नहीं थे.

    कुछ देर बाद उन्होंने मुझे घोड़ी बनाए रखा और दारू पिला कर मेरी गांड भी मारी.
    अब तो मेरी चूत और गांड एकदम लाल हो गई थी.

    ससुर जी बड़े पहलवान किस्म के चोदू थे. वे मुझे धकापेल चोदे ही जा रहे थे.

    वे बोल रहे थे- साली रंडी जब तक तू मेरे बच्चों की मां नहीं बनेगी … तब तक दिन रात तू मेरे बिस्तर पर ऐसी ही नंगी रहेगी और ऐसे ही चुदेगी.

    फिर ससुर जी मेरी चूत में झड़ गए और उसके बाद उन्होंने मेरे मम्मों को देसी दारू से नहला कर उन्हें खूब चूसा व काटा.

    वे मेरे निप्पलों से दारू पीने लगे.
    फिर लंड लगा कर मम्मों को चोदने लगे.

    मेरे बूब्स भी एकदम लाल हो गए थे.
    वे अभी भी मेरे दूध चूसे जा रहे थे.

    कुछ देर बाद उन्होंने मुझे फिर से अपनी कुतिया बनाया और मेरी चूत और गांड मारी.
    आधा घंटा तक चोदने के बाद वह मेरी चूत में ही झड़ गए.

    उसके बाद उन्होंने मेरे पूरे जिस्म पर अपनी दारू की बोतल से दारू डालकर मुझे चूसने लगे और मेरे अंगों को चाटने लगे.

    वे अब तक मेरी चूत में दो बार झड़ चुके थे और अब आराम कर रहे थे.

    कुछ देर बाद वे उठे और ग्लास का दूध पीकर मुझे कमरे के एक एक कोने में ले जाकर मेरी चुदाई करने लगे.
    उन्होंने मुझे सोफा, मेज, बेड हर जगह चोदा और हर बार मुझे बुरी तरह से ठोका.

    मैं दर्द के मारे चल और उठ नहीं पा रही थी.
    रात भर अपने ससुर से चुदवाने के बाद हम दोनों सो गए.

    सुबह जब मैं उठी तो ससुर जी भी उठ गए.
    वे मुझे अपनी गोद में लेकर बाथरूम में ले गए और वहां पर फुव्वारे के नीचे मुझे खड़ी करके मेरी चूत और गांड मारी.

    ससुर जी ने मुझे दीवार से सटा कर अपने लंड के ऊपर बैठा कर खूब पेला.
    मुझे भी घोड़ी बन कर चुदवाने में मजा आ रहा था.
    मैं मीठे मजे से चिल्ला रही थी.

    अब वे मुझे नहला कर कमरे में लाए और बिस्तर पर पटक दिया.
    फिर अपने कपड़े पहन कर ससुर जी बाहर चले गए.

    मेरी इतनी ज्यादा ठुकाई हुई थी कि मैं सही से खड़ी भी नहीं हो पा रही थी.
    मैं बेड पर ही नंगी पड़ी थी.

    कुछ देर बाद ससुर जी वापस कमरे में आए और बोले कि तुम्हारे पति को काम आ गया है, वह वापस अपने काम पर चला गया है.

    मेरी ससुराल में मेरे पति और ससुर ही थे.
    पति तो बाहर चले गए थे और ससुर मेरी ले रहे थे.

    शादी के एक महीने हो गए थे.
    मेरी चूत बुरी तरह फट गई थी.

    ससुर जी मुझे दिन रात ठोकते रहते हैं, वे मुझे पूरे घर में कहीं भी पकड़ कर चोद देते हैं.
    रात को छत पर, सीढ़ी पर, किचन में, सोफा पर, बाथरूम में … पूरे घर में एक भी जगह ऐसी नहीं बची है, जहां मैं अपने ससुर के हैवी लंड न चुदी होऊं.

    दिन रात रंडी की तरह बस मेरी चुदाई होती है.
    मैंने अब कपड़े पहनना ही बंद कर दिए हैं.

    ससुर जी भी घर में नंगे ही रहते हैं.

    जब तक एक दिन में अपने ससुर से चार बार न चुद लूँ, मेरा मन खुद नहीं भरता है.
    एक महीने बाद जब मेरा पति घर आया तो उस दिन ससुर ने कहा कि आज घर में पार्टी होगी.

    मैं समझी कि आज मेरा पति मेरी लेगा, इसलिए ससुर जी ऐसा कह रहे हैं.

    वे आज अंग्रेजी दारू की बोतल लाए और मुर्गा लाए.
    मैंने मुर्गा बनाया और अपने पति व ससुर को खाना परोसने लगी.

    उसी वक्त मेरे ससुर ने मुझे खींच कर अपनी गोदी में बिठा लिया और वे मुझे दारू पिलाने लगे.
    मैं भी बिना हील हुज्जत के उनके लंड पर बैठ कर दारू मुर्गा का मजा लेने लगी.

    कुछ देर बाद हम तीनों नशे में धुत्त हो गए और मेरे ससुर ने मुझे नंगी कर दिया.
    ससुर ने कहा- आज तुझे हम बाप बेटे मिल कर चोदेंगे.

    मैं भी उन दोनों के साथ सेक्स का मजा लेने के लिए तैयार हो गई थी.

    ससुर ने मुझे अपने लौड़े के ऊपर बिठाया और मेरी चूत चोदने लगे.
    उसी वक्त मेरे पति ने मेरी गांड में लंड पेल दिया और वे दोनों मिल कर मेरी सैंडविच चुदाई करने लगे.

    इस तरह से मुझे मेरे ससुर ने रंडी बना दिया था. मुझे भी अब अपने दोनों छेदों में एक साथ लंड लेने में मजा आने लगा था.
    आपको मैं अपनी सेक्स कहानी के अगले भाग में कुछ और भी रोचक सेक्स के बारे में लिखूँगी.

  • दिव्या मामी को सुहागरात की तरह चोदा

    हैल्लो दोस्तों आप सभी आंटी, दीदी, भाभी और लड़कियों के लिए में अभी यहाँ पर नया आया हूँ तो प्लीज आप सभी मेरा थोड़ा ख्याल रखना। अब में आप सभी को थोड़ा बहुत अपने बारे में बताता हूँ, दोस्तों में 33 साल का एक नौजवान लड़का हूँ और अभी तक कुंवारा हूँ मेरा नाम राज है और में आगरा का रहने वाला हूँ, मेरी हाईट 5 फीट 8 इंच है मेरा रंग गोरा है और मेरा लंड 7.5 इंच लंबा है और 3.5 इंच मोटा भी है। दोस्तों में हमेशा से ही नाभि का बहुत दिवाना हूँ मुझे गहरी और लम्बी नाभि बहुत पसंद है, नाभि इतनी बड़ी हो कि उसमे नींबू पूरा आ जाए फिर चाहे वो नाभि किसी लड़की, आंटी, भाभी और दीदी किसी की ही क्यों ना हो मुझे बहुत अच्छी लगती है। मुझे उसे चूसने को, चाटने को, काटने को, देखने को, इतना दिल करता है कि बस में नाभि के पास ही बैठा रहूँ, तो यह था मेरा पूरा परिचय और अब में अपनी कहानी पर आता हूँ यह मेरी चोद्काम डॉट कॉम पर पहली कहानी है जो कि करीब दस साल पहले की है यानी कि 2003 की तब मेरी उम्र 23 साल थी में उस समय अपनी पढ़ाई करने चंडीगढ़ अपने मामा के घर पर गया हुआ था क्योंकि आगरा के कुछ दोस्तों के साथ मेरी उस समय लड़ाई झगड़े हो गये थे इसलिए पापा ने मुझे चंडीगढ़ पढ़ाई करने भेज दिया था।
    दोस्तों में अपने मामा के पास पहली बार गया था और मैंने मामा और मामी को पहली बार देखा था। में 10 जून 2003 को चंडीगढ़ के लिए निकल पड़ा और 11 जून 2003 की सुबह में चंडीगढ़ पहुंच गया। वहाँ पर मामा ने अपने ड्राइवर को गाड़ी से मुझे घर पर लाने के लिए भेज दिया था, ड्राइवर ने मुझे अपने साथ में लिया और घर की तरफ निकल पड़ा में जैसे ही घर पर पहुंचा तो मेरी मामी बाहर आई और मुझसे बोली कि वहीं पर रुक जाओ। तो में वहीं पर रुक गया और वो एक आरती की थाली लेकर आई और उन्होंने मेरी आरती की और बोली कि हाँ अब अंदर आ जाओ। दोस्तों मेरी मामी का नाम दिव्या है और उनकी उम्र 35 साल है उनका रंग गोरा है और बदन बहुत सेक्सी है और उनके फिगर का साईज 36-30-32 था। दोस्तों मेरी मामी का फिगर बिल्कुल वैसा था जैसा में चाहता था। तभी अचानक जैसे ही मामी अंदर की तरफ बड़ी तो उनकी कमर पर लगा चाबी का गुच्छा निकलकर नीचे गिर गया और मामी उस गुच्छे को जैसे ही उठाने के लिए नीचे झुकी तो मुझे उनके बूब्स दिख गये। वाह दोस्तों क्या बूब्स थे एकदम गोरे और बड़े जैसे पका हुआ पपीता हो, लेकिन जब वो चाबी उठाकर उठी तब उनके पेट से साड़ी हट गई और मैंने उनकी नाभि को देख लिया उनकी नाभि करीब दो इंच गहरी और तीन इंच लंबी एकदम गोल थी और उसे देखकर मेरा लंड धीरे धीरे टाईट होने लगा। मुझे ऐसा लग रहा था कि मामी अपनी नाभि रोज़ मामा के लंड से चुदवाती है।

    फिर में नज़र नीचे करके अंदर चला गया, मामी बोली कि तुम बैठ जाओ में तुम्हारे लिए नाश्ता लाती हूँ मैंने उनसे पूछा कि मामा कहाँ है? तो मामी ने मुझे बताया कि मामा किसी काम के सिलसिले में दुबई गए हुए है और एक महीने बाद लोटेंगे। अब मैंने जैसे ही उनके मुहं से यह सब सुना मेरे मुहं में पानी आ गया में सोचने लगा कि में मामी को जरुर पटाउंगा और फिर शाम हुई और रात भी हो गई तो में उस समय अपने कमरे में था तो मामी ने आवाज़ लगाई कि राजा आ जाओ खाना खा लो, में अंदर गया और मैंने देखा कि मामी ने जीन्स और टॉप पहन रखा था वो टॉप एकदम टाईट था जिसमे से बूब्स बाहर आने को तड़प रहे थे और ब्रा की डोरी साफ साफ दिख रही थी और वो जीन्स मामी ने नाभि से करीब पांच इंच नीचे पहनी हुई थी जिससे नाभि साफ साफ दिखे, मुझे लगा कि शायद मामी को पता लग गया है कि में उनकी नाभि को देखना पसंद करता हूँ और जब में उनकी नाभि देख रहा था तो उन्होंने मुझे यह सब करते हुए देख लिया था और फिर हम लोग खाना खाने लगे और खाना खाने के बाद में अपने कमरे में चला गया। फिर रात को करीब 9 बजे मामी के कमरे में से आवाज़ आई कि राजा यहाँ आओ। तो में उनके कमरे के अंदर चला गया और मैंने देखा कि मामी ने उस समय मेक्सी पहन रखी थी और वो भी पूरी जालीदार जिसमे उनकी स्टाइलिश ब्रा और पेंटी साफ साफ नज़र आ रही थी। फिर मामी मुझसे मुस्कुराकर बोली कि दूर से देखते रहोगे क्या आओ राजा यहाँ पर बैठो।

    फिर मैंने पूछा कि जी मामी आपने मुझे क्यों बुलाया? मामी बोली कि मुझे अकेले सोने में बहुत डर लग रहा था तो मैंने सोचा कि तुम भी यहीं पर सो जाओ तो मुझे भी डर कम लगेगा और तुम्हे भी अच्छी नींद आ जाएगी। तो मैंने कहा कि ठीक है में सोफे पर सो जाता हूँ, तभी वो बोली कि अरे नहीं तुम मेरे पास यहीं बेड पर सो जाओ, तो मैंने कहा कि नहीं और फिर वो बोली कि लेकिन क्यों नहीं तुम मेरे पास क्यों नहीं सो सकते? तो मैंने कहा कि जी सो सकता हूँ। तो वो बोली कि फिर तुम अब ज्यादा सोचो मत और में उनके सो गया। तभी मामी मुझसे पूछने लगी कि क्यों सो गये? में बोला कि नहीं, तो मामी बोली कि कुछ अपने बारे में बताओ ना तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है या नहीं? में बोला कि नहीं मामी मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है। तो मामी बोली कि तुमने क्या कभी सेक्स भी नहीं किया है? क्या मामी आप मुझसे यह क्या पूछ रही हो? तो वो बोली कि हाँ मैंने तुमसे पूछा कि तुमने कभी सेक्स किया है कि नहीं? क्या तुम करना चाहोगे? तो मैंने पूछा कि किसके साथ? मामी बोली कि मेरे साथ, में बोला कि नहीं में आपके साथ यह सब कैसे कर सकता हूँ? तो वो बोली कि क्यों नहीं कर सकते? सुबह और अभी बाहर मेरी नाभि और बूब्स को तो तुम बहुत घूरकर देख रहे थे क्या तब तुम्हारे मन में सेक्स की भावना नहीं आ रही थी? दोस्तों मैंने सोचा कि यह एक बहुत अच्छा मौका है हाथ से मत जाने दो। तभी मैंने कहा कि लेकिन मेरी एक शर्त है कि में आपको शादी के जोड़े में सुहागरात की तरह चोदना चाहता हूँ। तो मामी बोली कि बहुत अच्छे, मुझे यह सुनकर बहुत अच्छा लगा, तुम बहुत सेक्सी हो में एक घंटे में तैयार होकर तुम्हे अंदर बुलाती हूँ।

    फिर मामी ने तैयार होकर मुझे आवाज़ लगाई आ जाओ जी में जब अंदर गया तो उन्होंने मेरे पैर छुए और मुझसे बोली कि तुम मेरी माँग भरो तब में तुम्हे सुहागरात मनाने दूँगी। अब में बोला कि ठीक है और मैंने उनकी माँग भर दी और फिर मैंने मामी को बिस्तर पर लेटा दिया मैंने देखा कि मामी ने लहंगा पहन रखा है और वो भी पीछे से पूरा खुला हुआ और पीछे सिर्फ़ दो डोरी से चोली बंधी हुई थी और ब्रा नहीं पहनी थी और चोली में से बहुत हद तक बूब्स बाहर आ रहे थे और जब मैंने नीचे की तरफ देखा तो उनका लहंगा नाभि से 6 इंच नीचे बंधा हुआ था चूत से थोड़ा ही उपर यह सब देखने में बहुत सेक्सी था और उससे भी कहीं ज्यादा सेक्सी लग रही थी उनकी गहरी नाभि जो कि अब उनके लेटे हुए होने की वजह से और भी गहरी हो गई थी। फिर मैंने पूछा कि मामी आपकी नाभि इतनी गहरी कैसे हुई? सबसे पहले तो मामी बोली कि मुझे तुम अब मामी मत बोलो, मुझे सिर्फ दिव्या बोलो और आप नहीं तुम या तू बोलो ठीक है। तो मैंने कहा कि ठीक है और फिर दिव्या बोली कि तुम्हारे मामा मेरी नाभि रोज़ चूसते चाटते और चोदते है तो फिर यह बड़ी क्यों नहीं होगी? दिव्या बोली कि तुम्हे मेरी नाभि क्यों पसंद है? तो मैंने कहा कि क्योंकि तुम्हारी नाभि बहुत बड़ी है और मुझे ठीक ऐसी ही नाभि बहुत पसंद है। फिर वो बोली कि पसंद है तो कुछ करो ना जानू, क्यों अब किस बात की देर है? तो दोस्तों जैसे ही मामी ने मुझे हुक्म दिया और मैंने उनकी नाभि को चाटना शुरू कर दिया में अब उनकी नाभि चाट रहा था तो मामी के मुहं से सेक्सी आवाज़ आना शुरू हो गई इसस्स्सस्स आअहह उूुुुईईईईईईई मर गई थोड़ा जीभ और अंदर करो ना आह्ह्हह्ह्ह्ह मज़ा आ रहा है, नाभि कहाँ से चूसना सीखा तुमने? तो मैंने कहा कि कहीं से नहीं आपको देखकर अपने आप नाभि चूसने का मन करने लगा। तो वो बोली कि क्या मेरी नाभि इतनी सेक्सी है? मैंने कहा कि हाँ मेरी रानी तेरी नाभि बहुत सेक्सी है। तो वो बोली कि तो थोड़ा और चूस ना, चूस चूसकर इसे लाल कर दो मेरे जानू और फिर मैंने नाभि को काटना शुरू किया, हल्के हल्के मामी के मुहं से आवाज़ आ रही थी हाँ और तेज जानू आहह्ह्ह् उहहह और तेज़।

    फिर वो बोली कि ज़रा मेरी नाभि में उंगली घुमाओ ना और फिर जैसे ही मैंने उंगली डाली मामी बोली कि हाँ और वो मेरी ऊँगली को पकड़ कर और अंदर ले गई और उंगली को नाभि में कसकर जकड़ लिया और मामी बोली कि कोई और दूसरे तरीके से नाभि का मज़ा दो ना। फिर मैंने कहा कि ठीक है फिर मैंने उनकी नाभि में एक चोकलेट खड़ी कर दी और फिर उसे खाता गया और जैसे ही में नाभि के पास पहुंचा वैसे ही नाभि को भी मुहं में भरा और काटने लगा, मामी बोली ऊहहह्ह्ह अह्ह्ह्ह कितना मज़ा आ रहा है जानू उूईईईईइ माँ मरी। फिर मैंने मामी को पलट कर उल्टा कर दिया और उनकी पीठ पर चूमने लगा मामी मुझसे बोली कि चूमो ना जानू और फिर मैंने उनकी पीछे से खुली हुई चोली की दोनों डोरी को खोल दिया और अब चोली को बाहर निकाल दिया ऊओफफफफफ्फ़ वाह क्या बूब्स थे मामी के एकदम बड़े और कसे हुए एकदम गोल, में आखें बन्द करके उन पर टूट पड़ा और उनके बूब्स पर और कसकर चूसने लगा। मामी मुझसे हर बार कर रही थी आआह्ह्ह्हहहह और ज़ोर से चूसो ना आईईईईई। दोस्तों फिर में क्या ज़ोर ज़ोर से बूब्स दबा रहा था और जमकर चूस रहा था और मामी सिसकियों के साथ साथ मोनिंग कर रही थी उूउइईईईईईईईईई आआआहह उूउउफफफफफफफ्फ़।
    फिर मैंने मामी का नाड़ा खोला तो मामी शरमा गई। मैंने मामी का लहंगा उतार दिया और मामी को पूरा नंगा कर दिया वो अब मेरे सामने सिर्फ़ पेंटी में थी और वो भी तीन बार गीली हो चुकी थी। फिर जैसे ही मैंने पेंटी उतारी वैसे ही मामी बोली कि नहीं आज चूत नहीं दूँगी आज मेरा मन सिर्फ़ नाभि सेक्स के लिए है और बूब्स दबाओ और पियो दूध निकल दो मेरे बूब्स से नाभि को चोदकर और गहरा कर दो। तो मैंने उनसे कहा कि तुम तो हर तरफ से सेक्सी लगती हो फिर मैंने मामी की नाभि में लंड डाला तो मामी बोली कि मज़ा नहीं आ रहा है और तभी मामी ने मेरा लंड पकड़ा और मेरे लंड पर मुठ मारने लगी और बोल रही थी कि तुम्हारे मामा ने मुझे कभी लंड पर मुठ नहीं मारने दिया और ना ही कभी लंड को मेरे मुहं में डाला। तुम अपना लंड मेरे मुहं में दो ना, में इसे चूसना चाहती हूँ। फिर मैंने कहा कि हाँ लो ना मेरी जान चूसो ज़ोर से चूसो इसे और मामी मेरे लंड को चूस रही थी और मुझसे कह रही थी कि वाह कितना बड़ा है जानू तुम्हारा लंड, तुम्हारे मामा का तो इसका आधा भी नहीं है और ऐसा ही करते करते 20 मिनट तक मामी मेरा लंड चूसती रही और मैंने कहा कि में अब झड़ने वाला हूँ। फिर मामी बोली कि प्लीज मेरे मुहं में ही अपना सारा पानी छोड़ दो मेरे लंड का पानी पीने की बहुत इच्छा थी प्लीज आज उसे तुम पूरा कर दो। फिर मैंने अपना सारा गरम गरम वीर्य उनके मुहं में डाल दिया और वो उसे चूस चूसकर पी गई, लेकिन फिर मेरा लंड सिकुड़कर बहुत छोटा हो गया और में उदास हो गया क्योंकि में अभी तक नाभि को नहीं चोद पाया था। फिर मामी मेरे मन की यह बात समझ गई और वो मेरे लंड पर एक बार फिर से मुठ मारने लगी और लंड को फिर से मुहं में लेकर वो मेरे लंड को खड़ा करने लगी उनके हाथों के स्पर्श से मेरा लंड फिर से लोहे जैसे रोड की तरह खड़ा हो गया और फिर मामी ने कहा कि लो अब इसे जल्दी से डाल दो मेरी गहरी नाभि में और अब मैंने उनकी नाभि में जैसे ही अपना लंड डाला तो मेरा तीन इंच मोटा लंड नाभि में चला गया और मैंने नाभि को चोदना शुरू किया मामी के मुहं से सिसकियों की आवाज़ आ रही थी आह्ह्ह्हह्ह ऊउक्ककच आईईईईईई उईईईईईइ माँ हाँ और तेज़ चोदो मेरी नाभि को। फिर में लगातार नाभि को चोदता रहा और मामी को बहुत मज़ा आ रहा था वो हाँ में और अब रोज़ चुदवाउंगी तुमसे कह रही थी। दोस्तों मुझे लगातार चोदते हुए करीब अब तीस मिनट होने वाले थे और में झड़ने वाला था तो मामी बोली कि सारा वीर्य मेरी नाभि में भर दो। फिर मैंने सारा वीर्य नाभि में भर दिया और फिर मामी ने अपने पूरे पेट की उसी पानी से मालिश की और बोली कि इस पानी से औरत का जिस्म और भी खिल जाता है फिर में लेट गया ।।

  • मामी की सुहागरात की अधूरी प्यास-1

    मेरे मामा की शादी हुई. मैंने मामी के मोटे चूचों को देखा तो मेरा मन मामी की नंगी चूत देखने के लिए मचलने लगा. उस चाहत को मैंने पूरा करने के लिए क्या किया?

    मेरा नाम सुधीर है और मैं उत्तर प्रदेश के पीलीभीत का रहने वाला हूं. मेरे लंड की लंबाई सात इंच है और मेरा लंड इतना मोटा है कि वो किसी भी औरत की चीख निकालने के लिए काफी है.

    औरत की चूत चाहे कितनी भी चौड़ी क्यों न हो लेकिन खड़ा होने के बाद मेरा लंड उसमें फंस जाता है. आप समझ ही गये होंगे कि मेरे लंड की मोटाई कितनी हो सकती है. मैंने एक दिन अपने लंड को नापने की कोशिश की तो पता लगा कि मेरा लंड पूरी उत्तेजना में 3 इंच से भी ज्यादा चौड़ा हो जाता है.

    आज मैं आपको अपने जीवन की एक सच्ची घटना बताने जा रहा हूं जो मेरे ननिहाल में हुई थी. मैं अपनी नानी के घर पर रह रहा था. मेरे मामा की शादी थी. जब मैंने उनकी दुल्हन यानि कि अपनी मामी को देखा तो मेरी हालत खराब हो गई. वो देखने में बहुत ही सेक्सी थी.

    उसका रंग एकदम दूध जैसा सफेद था. उसके स्तन भी काफी बड़े थे. मगर कमर एकदम पतली सी थी. कहने का मतलब है कि देखने में एकदम कयामत लग रही थी. मगर मैं क्या कर सकता था. मैं तो भान्जा था. ये सोच कर मन में आग लगी हुई थी कि मेरे मामा को इतनी मस्त चूत चोदने के लिए मिल रही है.

    मन मसोस रहा था कि वो मेरे मामा के पास चुदने के लिए जा रही है. तभी मेरे मन में ख्याल आया कि क्यों न मामा और मामी की सुहागरात देख लूं. इस बहाने मामी की चूत के दर्शन भी हो जायेंगे. मैंने मन बना लिया कि मामी की सुहागरात देख कर ही रहूंगा. देखूंगा कि मामा मेरी मामी को कैसे चोदते हैं. उनका पहला सेक्स कैसे होगा.

    मैंने प्लान करना शुरू कर दिया. उस दिन सब लोग अपने काम में लगे हुए थे. मैं सबसे नजर बचा कर मामा के कमरे में गया. वहां पर देखने लगा कि कहां से नजारा दिखाई दे सकता है. मैंने पाया कि खिड़की की दरार में से अंदर बिछा हुआ बेड साफ दिख रहा था. यह मेरी किस्मत ही थी कि उनकी सुहागरात के लिए इस तरह की व्यवस्था की गई थी कि खिड़की से ही सारा नजारा देखा जा सकता था.

    जिस रूम में मैं रहता था उसमें कोई नहीं जाता था. उसमें बस कुछ सामान रखा हुआ था. मैं रात होने का इंतजार करने लगा. रात में सब लोगों ने खाना खाया और तब तक 10 बज गये. रात के 10.30 बजे से ही मैं उस रूम में जाकर बैठ गया.

    रात के करीब 11 बजे मामा कमरे में आये. मेरी नई नवेली दुल्हन बनी मामी बेड पर घूंघट निकाल कर बैठी हुई थी. मामा धीरे से कमरे में दाखिल हो गये और उन्होंने दरवाजा बंद कर लिया. मैंने भी खिड़की की दरार पर अपनी नजरें जमा लीं.

    पहले तो वो दोनों आपस में कुछ बातें करने लगे. उसके बाद बातें करते हुए ही मामा ने मेरी मामी का हाथ पकड़ लिया. उन्होंने उनके हाथ को अपने हाथ में लेकर चूम लिया. मामी शरमाने लगी. मामा ने कुर्ता और धोती पहनी हुई थी. मामा ने अपने कुर्ते के बटन की तरफ हाथ बढ़ाते हुए कुर्ते को उतारना शुरू किया.

    उन्होंने कुर्ता उतार दिया. फिर अपने बनियान को भी उतार दिया. मामा ऊपर से नंगे हो गये. उनकी धोती अभी भी बची हुई थी. मामा ने मामी की तरफ देखा तो मामी ने मुंह फेर लिया था. वो दूसरी तरफ मुंह करके बैठ गयी थी.

    मामा ने अपनी धोती को खोलना शुरू किया और उसको अपनी टांगों से अलग कर दिया. नीचे से मामा ने बड़ा सा कच्छा पहना हुआ था. उनका लंड अभी ज्यादा तनाव में नहीं दिखाई दे रहा था मगर हल्का सा तनाव आने के कारण पता लग पा रहा था कि लंड उत्तेजना में आ रहा है.

    उसके बाद मामा मेरी मामी की तरफ बढ़े. बेड पर जाकर मामी के कंधे को सहलाना शुरू किया. मामी अभी भी शरमा रही थी और ऊपर की तरफ नजर नहीं उठा रही थी. मामा ने उनकी साड़ी को हटाना शुरू किया. मामी के लाल रंग के ब्लाउज में भरे हुए उनके मोटे और बड़े स्तन दिखने लगे.

    उनको देखते ही मेरा लंड भी तनाव में आ गया. मैंने देखा कि जैसे ही मामा की नजर मामी के ब्लाउज पर गई तो उनके लंड में भी एकदम से तनाव आ गया था. उनका लंड उनके कच्छे में तन कर टाइट हो गया था. उसके बाद मामा ने अपने लंड को मामी के कंधे पर सहलाना शुरू किया. मामी अभी भी नीचे नजर करके ही देख रही थी.

    अब मामा ने उनकी कमर को सहलाना शुरू किया, फिर उनके स्तनों की तरफ हाथ बढ़ाने लगे तो मामी ने उनके हाथ को रोक दिया. उसके बाद मामी ने उनके हाथ को छोड़ दिया. मामा ने ब्लाउज के ऊपर से ही अपने हाथ मामी के स्तनों पर रख दिये. मामी की बेचैन सी हो उठी.

    मामा ने उनको बेड पर लेटा दिया. उनकी साड़ी की सिलवटें खोल दीं और अब मामी केवल ब्लाउज और पैटीकोट में ही रह गई थी. उसके बाद मामा बेड पर आये और मामी के ऊपर लेट कर उनके होंठों को चूसने लगे. मामी भी पहले तो शरमाती रही लेकिन फिर उन्होंने मामा को अपनी बांहों में भर लिया मामा के होंठों को चूसने लगी.

    वो दोनों काफी देर तक एक दूसरे के होंठों को चूसते हुए एक दूसरे के होंठों का रस पीते रहे. उसके बाद मामा ने उनके होंठों से हट कर अपने होंठों को मामी के ब्लाउज के अंदर के क्लीवेज पर लगा दिया. वो अपने दोनों हाथों से मामी के स्तनों को दबाने लगे और उनका लंड मामी की जांघों के बीच में घुसने की कोशिश करने लगा.

    अब शायद दोनों ही गर्म हो चुके थे. मामा ने फिर मामी को पेट के बल पलटी दी और उसके ब्लाउज को खोलने लगे. अगले ही कुछ पलों में मामी की गुलाबी ब्रा दिखने लगी. उसकी ब्रा में उसके चूचे एकदम से फंसे हुए थे. मामा ने उसकी ब्रा को हड़बड़ी में खोलना शुरू कर दिया. फिर दो पल के अंदर ही मामी के चूचे हवा में झूल रहे थे.

    बाहर से देखते हुए ऐसा लग रहा था कि मामी की छाती पर बड़ी बड़ी फुटबॉल लटकी हुई हैं जिनको देख कर मेरे लंड का बुरा हाल होने लगा था. मैंने वहीं पर खड़े होकर अपने लंड को मसलना शुरू कर दिया था. इधर मामा की हालत मुझसे भी ज्यादा खराब हो रही थी. उसने मामी के चूचों को जोर से दबाना शुरू किया और फिर मामी के मोटे मोटे चूचों को मुंह में भर कर पीने लगे.

    अब मामी के मुंह से आहें निकलने लगीं. वो मामा के सामने बेबस होने लगी. मामा ने जोर से मामी के चूचों को चूसना शुरू कर दिया. वो मामी के चूचों को दोनों हाथों से जैसे निचोड़ते हुए उनका दूध निकालने की कोशिश कर रहे थे. मामी की गांड ऊपर उठने लगी थी. इससे मुझे भी पता चल गया था कि मामी की चूत में खुजली होना शुरू हो गई है.

    मेरी मामी बार मामा के मुंह को अपने चूचों में दबाने लगी थी. इधर मामा ने कुछ देर तक चूचों को चूसा और फिर उसके निप्पलों को जीभ से चूसने लगे. फिर शायद उन्होंने दांत से काट लिया तो मामी की सिसकारी निकल गई. मेरा हाथ मेरे लंड को रगड़ रहा था. मैं भूल गया था कि मैं बेपरवाह होकर उनकी ये रासलीला देख रहा हूं.

    कुछ देर तक मामी के निप्पलों को पीने के बाद मामा ने उसके पैटीकोट को खोल दिया. मामी की काली पैंटी दिखने लगी. मामा ने उसकी पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत को चूम लिया. मामी की गोरी जांघें देख कर मैं भी और ज्यादा उत्तेजित हो रहा था. मेरे मामा मेरी मामी की चूत को पैंटी के ऊपर से ही चाटने में लगे हुए थे.

    फिर मुझे ध्यान आया कि क्यों मामी के नंगे बदन को कैमरे में कैद कर लिया जाये. ऐसा मौका फिर शायद मिले न मिले. मैंने अपनी जेब से फोन निकाला और कैमरा ऑन करके वीडियो बनाना शुरू कर दिया. दूर से ज्यादा साफ तो नहीं दिखाई दे रहा था मगर इतना तो पता चल रहा था कि मामी का नंगा बदन कैसा है.

    मामी के चूचे ऊपर नीचे होते हुए वीडियो में साफ दिख रहे थे. वो इस बात को बता रहे थे कि मामी की चूत पूरी गर्म हो चुकी है. उसके बाद मामा ने उसकी पैंटी को उतार दिया. मामी की चूत एकदम बाल रहित थी. उनकी चूत को देख कर मुझसे भी रहा न गया और मैंने अपने लंड को अपनी पैंट से बाहर निकाल कर उसकी मुठ मारनी शुरू कर दी.

    मेरी हालत बहुत खराब हो रही थी. मन कर रहा था कि मैं भी अभी के अभी कमरे में घुस जाऊं और मामी की चूत को चाट लूं. मगर किस्मत तो मामा की चमक रही थी. उन्होंने मामी की चूत में उंगली की और उनकी चूत को चूसने लगे. मामी अब जोर से सिसकारियां लेने लगी. उनको देख कर ऐसा लग रहा था कि वो पहले भी इस तरह का कुछ कर चुकी हैं.

    मामी भी पूरी गर्म थी और मामा भी गर्मजोशी से उसकी चूत को चूसने में लगे हुए थे. पूरे कमरे में आह्ह … इस्सस… पुच-पुच … मुच-मुच की आवाज हो रही थी. उनकी इन कामुक आवाजों को सुन कर मेरे लंड का हाल और बुरा होने लगा था. मैंने जोर से अपने लंड को रगड़ना शुरू कर दिया था. मगर साथ ही फोन को भी संभाल रहा था. बहुत मजा आ रहा था मुझे.

    उसके बाद मामा से जब रहा न गया तो उन्होंने उनकी चूत से जीभ को हटा लिया और अपना कच्छा निकाल दिया. मामा का लंड एकदम से टनटना रहा था. मामा के लंड का साइज देख कर मैं हैरान रह गया. मेरे मामा शरीर से काफी हट्टे कट्टे थे लेकिन उनका लंड देखा तो मुझे यकीन नहीं हुआ.

    उनका लंड ज्यादा लम्बा नहीं था. देखने में चार इंच या उससे थोड़ा ज्यादा का लग रहा था. मामा के लंड की मोटाई न के बराबर थी. देखने में एक पतली सी डंडी के जैसा लग रहा था. मामा ने मामी की टांगों को चौड़ी किया और उनकी चूत में लंड को लगा कर उसके ऊपर लेट गये.

    दोनों के दोनों नंगे थे और मामा ने मामी की चूत को चोदना शुरू कर दिया. मगर मामी को देख कर लग रहा था कि उनको जैसे पता ही नहीं लग रहा कि मामा ने उनकी चूत में लंड को डाला हुआ है. वो मामी की चूत में लंड डाल कर हिलाते रहे मगर मामी को जैसे कुछ फर्क ही नहीं पड़ रहा था.

    मामी के चेहरे से साफ पता लग रहा था कि उनको मजा नहीं आ रहा है. तीन-चार मिनट तक मामा उनकी चूत में लंड को डाल कर हिलते रहे और फिर अचानक है ढीले पड़ कर मामी के ऊपर गिर गये. फिर कुछ पल तक मामी के ऊपर पड़े रहे और फिर साइड में जाकर लेट गये. पांच मिनट तक मामा ऐसे ही पड़े रहे.

    मामी के चेहरे पर मायूसी सी छा गयी थी. फिर कुछ देर के बाद मामा ने मेरी मामी के गालों को किस करने कोशिश की तो मामी ने मरे मन से उनको किस करने दिया. फिर जब मामी के ऊपर आने की कोशिश करने लगे तो मामी ने उनको एक तरफ धकेल दिया और चादर ओढ़ कर लेट गई.

    दोबारा मामा की हिम्मत नहीं हुई कि वो मामी के करीब आ सकें. मामी की चूत प्यासी की प्यासी रह गई थी. मुझे भी मामी पर तरस आ रहा था. मामा ने दोबारा से मामी को मनाने की कोशिश की लेकिन उन्होंने फिर मामा को फिर अपने बदन को छूने नहीं दिया. फिर मामा उठ कर कमरे के दरवाजे की तरफ आने लगे.

    मैंने अपने लंड को अंदर किया और वहां से एक तरफ छिप गया. बाहर बाथरूम बना हुआ था. मामा बाथरूम में गये और कुछ देर के बाद वापस आ गये. अंदर जाने के बाद मैंने देखा कि मामी ने अपने रात वाले कपड़े पहन लिये थे. वो एक तरफ होकर सो गई और मामा भी अपनी धोती लपेट कर बेड पर लेट गये. उसके बाद मामा ने लाइट बंद कर दी.

    उसके बाद मैं भी वहां से वापस आ गया. अपने रूम में आकर मैंने वीडियो को देखा. मामी के मोटे चूचे वीडियो में हिलते हुए देख कर मैंने तेजी से अपने लंड पर हाथ चलाना शुरू कर दिया. फिर अपने लंड की मुठ मारी. वीर्य निकलने के बाद मुझे संतुष्टि मिली. उसके बाद मैं सोचने लगा कि मामा का लंड शायद मामी की प्यास नहीं बुझा पायेगा. मुझे इस बात का फायदा उठाना चाहिए.

  • पति विदेश गया तो सर्दी की रात में देवर के साथ सैक्स का मजा

    मेरा नाम अनाया है और मैं 25 साल की हूँ।

    यह गरम भाभी की गरम कहानी तब की है, जब मेरी शादी को मात्र 4 महीने ही हुए थे।

    मेरे पति एक विदेशी कम्पनी में काम करते है इसीलिए वे शादी के कुछ दिन बाद ही अपने काम पर चले गए।

    मेरी तो नई-नई शादी हुई थी इसलिए मेरा मन अक्सर सेक्स करने का होता था।लेकिन मैं कुछ कर भी तो नहीं सकती थी।

    कहानी में आगे बढ़ने से पहले मैं आपको अपने परिवार के बारे में बता देती हूँ।

    मेरे परिवार में मेरे और मेरे पति के अलावा, मेरे सास-ससुर और एक प्यारा सा देवर रहता है।उसका नाम अंकित है, और वो सिर्फ़ 19 साल का है।दरअसल मेरे सास-ससुर को दूसरा बच्चा शादी के बहुत लेट हुआ था, इसीलिए मेरे पती और देवर की उम्र में थोड़ा ज्यादा अंतर है।

    चलिए अब कहानी को आगे बढ़ाते है।

    कई दिनों तक बिना सेक्स के रहने के बाद अब मैं अपने आप को कन्ट्रोल नहीं कर पा रही थी।मुझे अब बस एक लंड की तलाश थी।

    मेरे ससुर उम्र में बहुत बड़े थे और शरीफ़ घर से होने के कारण मैं कहीं बाहर यह सब नहीं कर सकती थी।

    अब बचा सिर्फ़ मेरा देवर।लेकिन वह उम्र में छोटा था और मुझे लगता था कि उसे इस बारे में कुछ पता भी नहीं था।क्योंकि मैंने एक-दो बार उस पर लाइन मारने की कोशिश की थी.अगर उसे इस सब के बारे में थोड़ी भी जानकारी होती, तो वह यह मौका कभी नहीं छोड़ता।

    पर अब धीरे-धीरे मेरी सेक्स की इच्छा बढ़ती जा रही थी।

    इसलिए मैंने एक प्लान बनाया जिसके जरिए मैं अपने देवर के साथ मज़े कर सकती थी।

    एक रात जब हम दोनों सब के साथ बैठकर खाना खा रहे थे.तब मैं उससे बोली- क्या तुम आज मेरे साथ एक मूवी देखोगे?

    क्योंकि उसके इक्ज़ाम ख़त्म हो गए थे इसलिए उसने झट से हाँ कर दी।

    मेरा आधा काम तो हो चुका था, बस आधा बाकी था।

    वह दूध पीने के बाद मेरे पास आया और बोला- भाभी, कौन सी मूवी देखेंगे?मैंने कहा- कोई होलीवुड की मूवी देखेंगे।वह बोला- चलो फ़िर मूवी देखते हैं।

    मैं उससे बोली- पहले तुम कपड़े बदल लो क्योंकि मूवी बहुत बड़ी है। इसलिए तुम मूवी देखने के बाद यहीं सो जाना।वह झट से मेरी बात मान गया।

    जब तक वह आया, मैंने भी अपने कपड़े बदल लिए।

    अब मैंने एक हाफ़ स्कर्ट और एक हाफ़ मैक्सी पहनी जिसमें से मेरे बड़ी-बड़ी चुच्चियां दिख रही थी.जबकि उसने एक हाफ़ टीशर्ट और पजामा पहना हुआ था।

    उन दिनों थोड़ी सर्दियां पड़ रही थी इसलिए हम दोनों एक ही कंबल में घुस गए।

    थोड़ी देर बाद मैंने मूवी प्ले कर दी।वो एक रोमैन्टिक मूवी थी।

    हम दोनो ही उस मूवी को बड़े मज़े से देख रहे थे।

    तभी मूवी में एक सैक्स का सीन आया जिसमें एक छोटी उम्र का लड़का अपनी गरम भाभी की चुदाई कर रहा था।मुझे किसी ऐसे ही मौके का इंतज़ार था।

    इस सीन के बाद जब मैंने उसकी तरफ़ देखा तो उसके पजामे में से उसका लंड साफ़ दिख रहा था।

    मैं समझ गई थी कि अब चिंगारी तो भड़क चुकी है, बस विस्फ़ोट होना बाकी है।

    थोड़ी देर बाद जब मूवी ख़त्म हुई तो मैं उससे बोली- तुम चाहो तो आज यहीं सो जाओ, मेरा मन भी लगा रहेगा।वह यह बात भी झट से मान गया।

    वह आख़िर था तो एक किशोरवय ही, उसे क्या पता था कि आज उसे कितना मजा आने वाला है।

    कुछ देर बाद मैं उससे बोली- मुझे बहुत खुजली हो रही है, क्या तुम तेल से मेरी मालिश कर दोगे?वह बोला- ठीक है भाभी।

    मैं झट से तेल ले आई।

    अब वह बोला- कहाँ मालिश करनी है भाभी?मैंने अपनी पीठ की तरफ़ इशारा करते हुए कहा- यहाँ खुजली हो रही है।

    यह सुनते ही वह शर्मा गया.मैं उससे बोली- कोई बात नहीं, अगर तुम्हारा मन नहीं है तो रहने दो।वह बोला- नहीं, ऐसी कोई बात नहीं है, मैं आपके अभी मालिश कर देता हूँ।

    अब उसने तेल लिया और मेरी पीठ की मालिश करने लगा।मालिश करते करते अब शायद उसे भी मजा आ रहा था।

    अब वह धीरे-धीरे मेरे कूल्हों तक हाथ फिराने लगा।

    लेकिन जब उसने देखा कि मुझे नींद आ गई है तो उसकी हिम्मत और बढ़ गई।

    अब वह जोर-जोर से मेरे चूतड़ों को सहलाने लगा।दरअसल मैं भी इस दौरान सोई नहीं थी बल्कि सोने का नाटक कर रही थी।

    जब उसे लगा कि अब मैं गहरी नींद में हूँ तो उसने मेरी मैक्सी की चेन खोली और मेरी ब्रा के ऊपर से ही मेरी चुच्चियों को दबाने लगा।

    मुझे भी अब बहुत मजा आ रहा था इसीलिए मैं उसे बिना कुछ बोले चुपचाप लेटी रही।थोड़ी देर बाद मैंने करवट ली ताकि वह मेरी ब्रा को खोल सके।

    पहले तो उसने थोड़ा इंतजार किया.लेकिन जब उसे यकीन हो गया कि मैं सो ही रही हू तो उसने मेरी ब्रा के हुक खोले और मेरी बड़ी-बड़ी चुच्चियों को ब्रा की कैद से आजाद कर दिया।

    अब मैं भी गर्म होने लगी थी।

    तभी वह नीचे आया और उसने मेरी स्कर्ट को मेरी जांघों तक ऊपर कर दिया।तब वह मेरी जांघों को सहलाने लगा.

    अब मैं भी कन्ट्रोल नहीं कर सकती थी इसलिए अब मैं धीरे-धीरे सिसकारियां लेने लगी।

    अब तो उसे इस बात का यकीन हो गया था कि मुझे भी सैक्स करने का मन है।इसलिए वह मेरी जांघों को छोड़कर ऊपर आया और मेरे लबों पर अपने होंठ रख दिये।

    अब मैं भी उसका भरपूर साथ दे रही थी।

    फ़िर वह एक बार फ़िर मेरी गर्दन से होता हुआ मेरी चुच्चियों तक पहुँचा और मेरे निप्पल को जोर-जोर से चूसने लगा।अब मुझे भी बहुत दर्द हो रहा था।

    फ़िर उसने अपने सारे कपड़े उतारे.जब मैंने उसका लंड देखा तो मैं हैरान हो गई, इतने से लड़के का इतना बड़ा लंड।मेरे मन में तो लड्डू फ़ूट रहे थे.

    इसलिए मैंने झट से उसका लंड मेरे मुँह में ले लिया और उसे जोर-जोर से चूसने लगी।

    थोड़ी देर बाद वह झड़ गया।

    फ़िर उसने मेरी स्कर्ट निकाल दी.अब मैं सिर्फ़ एक पैन्टी में थी।

    वह मेरी पैंटी के ऊपर से ही अपनी गरम भाभी की गरम चूत को सहलाने लगा.मैं तो अब पागल होती जा रही थी।

    मैंने उससे कहा- अब जल्दी मेरी चूत में लंड डाल दो।वह बोला- भाभी, इतनी भी जल्दी क्या है?

    इतना कहकर उसने मेरी पैन्टी उतारी और मेरी बिना बालों की चूत को अपनी जीभ से चाटने लगा।

    थोड़ी देर बाद मैं झड़ गई और वह मेरा सारा पानी पी गया।

    अब तक उसका लंड दोबारा खड़ा हो चुका था।उसने अपने लंड को मेरी चूत पर रखा और एक जोर के धक्के के साथ उसका पूरा लंड मेरी चूत में चला गया।

    अब मुझे बहुत दर्द हो रहा था लेकिन उसने अपने धक्के जारी रखे।

    पाँच मिनट बाद वह बोला- भाभी, मेरा होने वाला है।मैं बोली- मेरे अंदर ही निकाल दो। मैं बाद में दवाई खा लूँगी।

    इतना सुनकर उसने अपने धक्कों की स्पीड बढ़ा दी और थोड़ी देर बाद वह और मैं एक साथ झड़ गए।

    तब मैंने उससे पूछा- मैं तो सोचती थी कि तुम्हें सैक्स के बारे में कुछ नहीं पता?वह बोला- भाभी, मैं पहले भी सैक्स कर चुका हूँ।

    मैं बोली- कब?वह बताने लगा:

    जब आपकी और भैया की सुहागरात थी, उस रात मैं भैया और आपके साथ सोने की ज़िद कर रहा था।तब मम्मी मुझसे बोली- आज उनकी सुहागरात है। आज तुम उनके पास नहीं सो सकते।मैंने मम्मी से पूछा- सुहागरात में ऐसा क्या होता है कि मैं उनके पास नहीं सो सकता?मम्मी कुछ नहीं बोली।मैं बोला- या तो मुझे बताओ, वर्ना मैं उनके पास जा रहा हूँ।

    मेरे ज़िद करने पर मम्मी बोली- चल ठीक है, मैं सब कुछ बताऊंगी पर तुम उनके पास मत जाओ।मैं मान गया।

    और जब पापा सो गए तो मम्मी ने मुझे सब कुछ बता दिया।

    तभी से मैं एक मौके की तलाश में था क्योंकि मम्मी ने मुझे यह बताया था कि शादी के बाद एक बार यह सब करने के बाद यह सब दोबारा करने का मन करता है।और मैं जानता था कि आपने भैया के विदेश जाने के बाद एक बार भी सैक्स नहीं किया। इस लिए मैं अपनी भाभी की प्यासबुझाना चाहता था। इसलिए मैंने यह नाटक किया कि मैं सैक्स के बारे में कुछ नहीं जानता। ताकि आप खुद पहल करो।

    उसकी ये बातें सुनकर मैंने उसे अपने गले से लगा लिया।

    फ़िर तो हम दोनों ने उस रात कई बार सैक्स किया।और अब तो हम जब चाहें तब सैक्स कर लेते हैं.इसलिए मुझे अब मेरे पति की याद भी नहीं आती।

  • क्लासरूम में जवान कुंवारी लड़की की पहली बार चुदाई

    मेरी क्लास की एक लड़की पर सब लड़के बुरी नजर डालते थे क्योंकि वो बेपनाह हुस्न की मलिका थी. मुझे बहुत बुरा लगता था लड़कों की बातें सुन कर. तो मैंने क्या किया?

    मेरा नाम रोहण है. जब मैं 19 साल का था, तब मुझे जैनब (काल्पनिक नाम) नाम की एक लड़की पसंद आ गयी. जैनब मेरे कोचिंग में पढ़ती थी. जैनब का रंग गोरा था और वो करीबन साढ़े पांच फिट लंबी थी. उसकी चुचियों की साइज 32 इंच थी और नजरें कंटीली थीं.

    जैनब को देख कर कोचिंग और मोहल्ले के लड़के मुठ मार कर खुद को शांत कर लेते थे.

    हमारी ये कोचिंग स्कूल में ही थी. स्कूल के बाद शाम में 03:00 बजे से कोचिंग से घर के लिए चल देता था. मैं पढ़ाई में अच्छा हूँ … लड़कियों से हमेशा से दूरी रखने वाला लड़का हूँ.

    मुझे उसको देख कर न जाने ऐसा क्यों लगने लगता था कि इस लड़की को मुझे इन भूखे भेड़ियों की वासना से बचा लेना चाहिए. यही सोच कर मैं कोचिंग से जब भी घर जाने के लिए निकलता तो जैनब के पीछे पीछे कुछ दूरी बनाता हुआ उसे उसके घर तक पहुंचा कर ही अपने घर जाता था.

    मेरी इस बात को मेरा एक दोस्त समझता था. पहले पहल तो उसने मेरी इस बात पर ध्यान नहीं दिया. मगर जब दोस्तों के बीच जैनब की जवानी की चर्चा होने लगती, तो मैं उखड़ जाता था.

    ये सब देख कर मेरा वो दोस्त समझ गया था कि जैनब मुझे बेहद पसंद है.
    उसने मुझसे कहा कि यदि तुमको जैनब पसंद है, तो उससे अपनी बात कहते क्यों नहीं?

    मगर मैं ऐसा नहीं कह सकता था, शायद मेरा शर्मीलापन मुझे ऐसा करने देने के आड़े आ रहा था.

    फिर एक दिन की बात है कि मेरे इसी दोस्त ने मुझे चैलेंज किया कि तुम यदि उस लड़की को किसी लड़के की जबरदस्ती से बचाना चाहते हो, तो उस लड़की को पटा लो. वरना कोई न कोई उस कली को मसल देगा.
    मैंने कहा- ठीक है … एक महीने में मैं उससे ही खुद को प्रपोज करवा लूंगा.

    अब ये सामने चैलेंज था, तो मैंने एक तरकीब सोची. मैं हमेशा की तरह कोचिंग आता और जाता, लेकिन पढ़ाई के साथ अब साथ जैनब को देखता रहता. इसी दौरान जब उसकी नजर मुझसे मिल जाती थी, तो मैं नजरें घुमा कर बोर्ड पर कर लेता. इस तरह से देखने से एक दो बार जैनब भी मुस्कुराई … मगर मैंने उसकी तरफ से अपना मुँह मोड़ लिया.

    अब भी कोचिंग के बाद जब अपने घर जाने लगता, तो उसे घर तक पहुंचा कर ही जाता. ये बात उसने नोट कर ली थी.

    इस बीच मैं उससे कुछ नहीं कहता था. जैनब भी ये समझ गयी थी कि मैं उससे कुछ भी कहने से रहा.

    एक दिन टेस्ट एग्जाम चल रहे थे. मैंने सारे प्रश्न हल कर दिए थे. इस बीच जिसने भी मुझे हेल्प मांगी … मैंने सबको मदद की.

    अचानक से मेरे पेन की स्याही खत्म हो गई. मैं परेशान हो गया. मुझे परेशान देख कर मेरे एक दोस्त ने मुझसे पूछा- क्या हुआ?

    मैंने पेन को हथेली पर चला कर उसे बताया कि पेन की इंक खत्म हो गई.

    मेरे दोस्त ने ये देखा तो उसने जोर से लगभग चिल्लाते हुए क्लास से कहा- भाई कोई एक्स्ट्रा पेन लाया है, तो दे दो … रोहण का पेन काम नहीं कर रहा है.

    जैनब ने मुस्कुराते हुए मुझे देखा और सबसे पहले अपने बॉक्स में से एक पेन निकाल कर मेरी तरफ बढ़ा दिया.

    फिर उसने मुझसे अपने आंसर भी मिलवा लिए कि उसने सही लिखे या नहीं.

    ये देख कर मेरे दोस्त उसे या मुझे देख कर फब्ती कसने लगे थे. हम दोनों ये सब चुपचाप होकर सुनते और मुस्कुरा कर सबकी फब्तियों को टाल देते.

    फिर 5 सितंबर आने वाला हो गया. सभी शिक्षक दिवस मनाने के लिए चंदा जमा करने लगे. लड़कियों ने गिफ्ट और लड़कों ने डेकोरेशन की जिम्मेदारी ली. केक का जिम्मा मैंने ले लिया और डिसाइड किया कि मैं पांच सितंबर को एक बजे ही कोचिंग क्लास में केक लेकर आ जाऊंगा और 2:30 बजे से सजावट के सामान लाने चलूंगा.

    जैनब को मेरा प्लान पता चल गया. जैनब पांच सितंबर को एक बजे से कुछ पहले ही कोचिंग पहुंच गयी. मैं भी पांच मिनट बाद पहुंच गया.

    मैं जैनब को देख कर सरप्राइज हो गया. मैंने पूछा- इतनी जल्दी आ गयी?

    उसने उसी समय मुझे प्रपोज कर दिया. मैं हक्का-बक्का था … निशब्द हो गया था. वो मुझे चुप देख कर रोने लगी. मैं कुछ बोल पाता, उसने आगे बढ़ कर मुझे लिपकिस कर दिया.

    जैसे ही वो मुझसे लिपटी, मुझे उसके कपड़ों का अहसास हो गया. उसने शर्ट के अन्दर कुछ भी नहीं पहना था. मुझे तो जैनब से चिपकने की तमन्ना न जाने कबसे थी. उसकी भरी हुई छातियों ने मुझे एकदम से गर्म कर दिया और मैंने भी बदले में उससे पूरा लिपट कर उसे किस करने लगा.

    मैंने उसे अपनी बांहों में कस लिया. उसकी आंखों से प्यार को पा लेने के आंसू झड़ रहे थे और मैं भी उसे अपने सीने में चिपकाए हुए एक अजीब सा सुकून पा रहा था. उसके मादक जिस्म की महक मुझे एक अजीब से लोक में ले गई थी.

    हम थोड़ी देर में अलग हो गए. मैं उसे देखने लगा. वो भी मेरी आंखों में झांकने लगी. फिर उसने शर्म से अपनी आंखें झुका लीं.

    मैं हंस दिया, तो वो भी हंस दी.

    मैंने कहा- मुझे तुमसे कुछ कहना है.
    वो बोली- अब भी कुछ कहना बाकी है?
    मैंने कहा- हां.

    वो मेरी तरफ देखने लगी.

    आज मैं उसे पाना चाहता था, इसलिए मैंने बिना कुछ कहे फिर से अपनी बांहें उसकी तरफ फ़ैला दीं.

    वो समझ गई. उसने नजरें झुका कर बोला कि अभी एक घंटा है, तुम्हारा जवाब जो भी हो … मुझे इस एक घंटे में प्यार करके बता दो प्लीज़.

    ये कहते हुए उसने क्लास रूम बंद कर दिया और एक एक करके अपनी शर्ट के बटन खोल दिए और मुझसे लिपट गयी.

    अब शेर के आगे बकरे को डालोगे, तो उसका शिकार तय है. मैंने भी सोचना छोड़ दिया और उससे लिपट गया. मैं उसे कस कस कर लिपकिस करने लगा. मेरे हाथों ने उसकी शर्ट को निकाल दिया. उसने भी मेरी शर्ट निकाल दी.

    उसकी चुचियां बिल्कुल तनी हुई और कसी हुई थीं, किसी बॉल की तरह गर्म थीं. हम दोनों की सांसें एकदम गर्म हो चुकी थीं. उसने मेरी जींस और जांघिया खोल कर मुझे नंगा कर दिया. मैंने भी उसे पूरी तरह से नंगा कर दिया और हम दोनों एक दूसरे के नंगे जिस्मों की अगन को महसूस करने लगे.

    इस समय हम दोनों ही कामवासना के वशीभूत थे. मैंने इधर उधर देखा और दो हाई बेंच मिलाकर अपने लिए सेज तैयार कर ली. मैंने उसे उस पर लिटा दिया. उसने भी लेट कर अपनी आंखें मूंद लीं.

    मैंने उसके दोनों चुचों को चूसना चालू कर दिया और हाथ चुत पर लगा दिया. वो ‘आ आ आआ आऊऊऊ ऊऊऊऊ आउच..’ कर रही थी.

    उसने अपने पैर फैलाते हुए कहा- रोहण अब जल्दी से मेरी चुत में अपना लंड डाल दो … मुझसे सहन नहीं हो रहा.

    मैंने उसके दोनों पैर पूरी तरह से फैला दिए और उसकी चुत को देखने लगा. उसकी चुत पर हल्के बाल थे और उसकी चुत एकदम गुलाब की पंखुड़ियों के जैसे पिंक थी.

    मैंने पोर्न फिल्मों से चुदाई करना कुछ सीख लिया था. बस वही सब याद करते हुए मैंने सीधे अपनी जीभ को उसकी चुत पर लगा दी.

    जैनब इस समय गर्म हो चुकी थी. उसने आंख खोल कर मिन्नत भरी आवाज बोली कि रोहण अभी ये सब छोड़ो … पहले जल्दी से अन्दर डाल दो … नहीं तो लंड खा जाऊँ गी.

    मगर मैं उसकी चुत चूसने में लीन रहा. उसकी चुत की आग बेहद बढ़ गई थी.
    उसने अपने दोनों पैरों और हाथों से मेरा सिर अपनी चुत में ठेल दिया और मादक आवाजें निकलाने लगी ‘ऊऊऊ यसस्स … सीसीई.’

    वो तेज आवाज निकलते हुए झड़ने लगी और फिर ढीली होने लगी.

    एक मिनट तक मानो झंझावात थम सा गया था. अचानक से जैनब उठ गई और मेरा लंड मुँह में लेकर लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी.

    अब मैं ‘आहा आह..’ की आवाज निकालने लगा.

    एक मिनट बाद ही मैंने जैनब के मुँह से लंड खींच लिया और उसकी चुत फाड़ने की तैयारी में जुट गया.

    मैं इस समय पूरे जोश में आ गया था. मैंने हाई बेंच पर जैनब को चित लिटाया और अपने लंड को उसकी चुत पर घिसने लगा.

    जैनब फिर से गरम हो गयी थी. उसने खुद ही लंड चुत पर सैट कर लिया. उसकी चुत सील बंद थी.

    उसने बोला- रोहण मेरा पहली बार है … प्लीज़ मेरी चुत में धीरे धीरे धक्का देना … मुझे दर्द होगा, लेकिन तुम छोड़ना नहीं.

    मैं ठहरा अनाड़ी … मैंने पहले ही धक्के में 3 इंच लंड चुत में उतार दिया. जैनब की चूत से खून आने लगा. वो दर्द से छटपटाने लगी. मैंने उसे गले लगा कर कस कर दाबे रखा और किस करने लगा.

    उसकी आंखों से आंसू आ रहे थे, वो कांप रही थी. उसके शरीर की कम्पन के रुकते ही मैंने लंड चुत में पेल दिया. चुत चीरता हुआ मेरा 7 इंच का लंड चुत में गायब हो गया.

    जैनब ने मुझे कसके जकड़ लिया और दबी जुबान से चिल्लाई- उई ममउम्मी … मर गई!

    मैं उसे चूमता रहा. उसकी चुचियों को चूसता रहा और धीरे धीरे उसे चोदने लगा.

    अब जैनब को भी मजा आने लगा. वो भी मस्त हो गई औऱ ‘आह आह आउच ओह आह..’ की आवाज निकलने लगी.

    ‘आह और जोर से … मेरे रोहण..’

    मैं भी पूरी ताकत से उसे चोदने लगा. कुछ ही मिनट बाद वो मुझे पकड़ कर झड़ चुकी थी. मैंने भी देर नहीं करते हुए ताबड़तोड़ धक्के देना शुरू कर दिए. मैं भी झड़ने वाला हो गया था.

    मैंने उससे पूछा, तो वो बोली- मैंने पहली बार किसी को पसंद किया है … आज चुत का उद्घाटन हुआ है … तुम अन्दर ही डाल दो.

    मैंने 20 धक्के मारकर जैनब को जकड़ लिया. जैनब ने भी मुझे जकड़ लिया और हम दोनों झड़ने लगे.

    जैनब की आंखों में ख़ुशी थी. हमने एक दूसरे को जबरदस्त किस किया और अलग होकर कपड़े पहने.

    मैंने जैनब को दूसरे लड़कों और मोहल्ले के लड़कों के विचार उसे बताए और उसे बताया कि मैंने तो तुम्हें उनसे बचाने के लिए अब तक ऐसे किया था.

    उसने बोला- जो भी हो … मेरी तरफ से सिग्नल मिलने के बाद भी तुमने अपनी अच्छाई नहीं छोड़ी … ये मुझे बहुत अच्छा लगा.
    मैंने उससे पूछा- और क्या क्या अच्छा लगा … मेरा मतलब अभी दस मिनट पहले.
    वो हंस दी और कहने लगी- तुमने बहुत अच्छा चोदा है मुझे … जब भी मन हो बोल देना, लेकिन मैं जानती हूं तुम अभी भी नहीं बोल पाओगे.

    मैंने उसे फिर से चूम लिया.

    वो बोली- रोहण ये बात हम दोनों के बीच ही रहनी चाहिए.
    मैंने बोला- ठीक है.

    अब तक 2:30 बज चुके थे. मैं उससे केक देखने को कह कर डेकोरेशन का सामान लेने चला गया.

    अब हम दोनों जब भी मिलते, मुस्कुरा देते थे. हालांकि मेरा प्यार परवान तो चढ़ा, पर मंजिल नहीं पा सका. उसकी शादी हो गयी और बच्चे भी हो गए.

  • भाईजान ने बहन की चूत चोदी

    मेरी दो बहनें हैं. एक दिन मैं अपनी बहन के कॉलेज गया तो मुझे पता चला कि वो लड़कों से चुदती है. मैंने सोचा कि मैं भी अपनी बहन की चूत चुदाई करूंगा. ये मैंने कैसे किया?

    दोस्तो, मैं आपका दोस्त साजिद मुरादाबाद उ.प्र. से हूँ. मैं 22 साल की उम्र का एक नौजवान लड़का हूँ. मैं बहुत ही क्यूट सा बंदा हूँ. जो लड़की मुझे एक बार देख ले, तो वो मुझसे चुदने को राजी हो जाएगी.

    मैं अन्तर्वासना पर प्रकाशित हर सेक्स कहानी को पढ़ता हूँ और लंड हिला कर मज़ा भी लेता हूँ. इधर की सेक्स कहानी को पढ़ते हुए एक दिन मैंने सोचा कि क्यों ना मैं अपनी भी कहानी आप सबके साथ साझा करूं.

    मेरे परिवार में मम्मी पापा और एक छोटा भाई व 2 बहनें हैं. एक बहन का नाम हिना है, दूसरी का नाम रूबी है. रूभी अभी 19 साल की है.

    मैं घर में सबसे बड़ा हूँ. अब तक मैं बीएससी कर चुका हूँ. मैंने अपनी ही एक शॉप खोल ली थी.

    मेरी छोटी बहन रूबी अभी बारहवीं में पढ़ती है. मेरी चिकनी चिकनी चुत वाली प्यारी प्यारी पाठिकाओं और लंबे लंड वाले दोस्तों … आज मैं आपको अपनी इस कहानी में ये बताने वाला हूँ कि मैंने किस तरह अपनी छोटी बहन रूबी की चुदाई की और रूबी से बड़ी वाली हिना को लंड का रस पिलाया.

    वैसे तो मैं हर हफ्ते अपनी गर्लफ्रेंड की भी चुदाई करता हूँ, लेकिन सच तो ये है कि बहन की चुदाई करने में अलग ही आनन्द आता है. मैं अपने घर में एक अलग रूम में सोता हूँ.

    ये बात उस टाइम की है, जब मेरी रंडी बहन हिना ने कॉलेज में एडमिशन लिया था. उसका पहला ही साल था. वो रोज कॉलेज आती जाती थी.

    एक दिन मैंने सोचा कि चलो आज हिना बहन के कॉलेज घूम कर आते हैं. हिना अपने कॉलेज में कैसा पढ़ रही है. यही सब सोच कर मैं उसको कॉलेज चला गया. जब मैं अन्दर गया तो देखा कि अन्दर लड़का लड़की तो आपस में बात करते ही हैं. कुछ कुछ लड़के लड़कियां तो बातचीत के बहाने मजे भी लेने में लगे थे.

    ये सब देख कर मैंने सोचा कि मेरी बहन तो ऐसी नहीं है, वो ये सब काम में नहीं पड़ने वाली है.

    जब मैं उसकी क्लास में गया … तो उधर हिना नहीं थी. मैंने एक लड़की से पूछा- हिना कहां है?
    उसने मुझे बताया कि आज तो वो कॉलेज आई ही नहीं है.

    ये सुनकर मैं एकदम से हैरान हो गया कि वो तो सुबह ही तो मेरे सामने घर से कॉलेज के लिए निकली थी. कहां चली गई. कहीं उसे कुछ हो तो नहीं गया.
    अब मैं दिमाग़ लड़ाने लगा और मेरे मन में अलग अलग तरह के विचार आने लगे.

    कुछ देर बाद कॉलेज की छुट्टी का समय हो गया. मैं बाहर आकर कॉलेज के गेट के पास एक तरफ छिप कर खड़ा हो गया और बाहर निकलने वाले स्टूडेंट्स को देखने लगा.

    तभी मैंने देखा कि मेरी भोली भाली बहन और एक लड़की के साथ बाहर निकली और बाहर खड़ी एक कार में कुछ लड़कों के साथ उसी कार के अन्दर जाकर बैठ गई.

    मैंने सोचा कि कुछ तो दाल में काला है. कुछ ही समय में मैंने हिना के बारे में पूरा पता निकाल लिया और घर आ गया. हिना घर आ चुकी थी … मगर मैंने उससे कुछ नहीं बोला.

    जब वो दूसरे दिन फिर कॉलेज के लिए घर से निकली, तो मैं उसके पीछे जाने लगा.

    थोड़ी दूर एक जगह उसकी सहेली मिल गई और वो दोनों लड़कियां आगे बढ़ गईं. उस लड़की ने मोबाइल से किसी से बात करना शुरू कर दी. कुछ ही पल बाद एक कार उन दोनों के पास आकर रुकी और वे दोनों उस कार में बैठने लगीं. मैंने देखा कि ये कल वाली ही कार थी और उसमें कई लड़के बैठे थे.

    वे सब कार में बैठ कर कहीं जाने लगे. मैं बाइक से था, तो मैंने उस कार का पीछा करना शुरू कर दिया. काफी दूर तक जाने के बाद मैंने देखा कि कार एक घर के आगे रुक गई थी. वे सब कार से उतर कर उस घर में जाने लगे थे. वो सब अन्दर चले गए. पीछे से मैं भी उस घर के नजदीक गया और अन्दर देखने की जुगाड़ बनाने लगा.

    उस घर के बगल में एक गैलरी थी. मैं उधर गया तो उधर एक खिड़की थी. मैंने खिड़की में देखा तो अन्दर का नजारा साफ़ दिखाई देने लगा. मैं वहां छुप गया और अन्दर देखने लगा.

    मेरी जैसे ही अन्दर निगाह गई, मैं तो समझो पागल सा ही हो गया. उन सब लोगों ने बहुत जल्दी से अपने सारे कपड़े उतारे और सिर्फ चड्डी में होकर बैठ गए. तभी उनमें से एक लड़का बीयर की बोतलें लेकर आया और सबने एक एक बोतल ले ली. बियर पीने के बाद में वो सारे लड़के सिगरेट पीने लगे. एक लड़का मेरी बहन हिना से लिपटने लगा. दूसरा लड़का उस लड़की को अपने से लिपटाने लगा. बाकी के तीन सिगरेट का मजा लेते हुए उन दोनों लड़कियों की मस्ती देखने लगे.

    तभी सबने कुछ गोलियां खाईं और सब एक साथ उन दोनों लड़कियों के नजदीक आ गए. उन सभी ने लड़कियों को किस करना शुरू कर दिया. ये देख कर मैं गरम होने लगा. मैं इस लाइव ब्लूफिल्म देख कर ये भी भूल गया कि इन दो लड़कियों में से एक मेरी बहन भी है.

    वो लोग सेक्स में चालू हो गए. मैंने सोचा कि अब मुझे भी अपनी बहन को चोद लेने में ही फायदा है.

    उसकी चुदाई की बात दिमाग में आते ही मैंने प्लान बनाया और अपना फोन निकाल कर अपनी बहन की चूत चुदाई की वीडियो रेकॉर्ड करनी चालू कर दी.

    उन लोगों ने मेरी बहन को एकदम नंगी कर लिया और उसके ऊपर एक लड़का चढ़ गया. दूसरे ने अपना लंड मेरी बहन के मुँह में दे दिया और हिना लंड चूसने लगी.

    पहले वाले लड़के ने मेरी बहन की टांगें फैला दीं और अपना लंड उसकी चुत में ठांस दिया. हिना की हल्की सी कराह निकल गई, मगर वो लड़का उसे चोदता ही रहा.

    उसने बीस मिनट तक मेरी बहन की चुदाई का मजा लिया और अपने लंड का पानी उसके मुँह में ही निकाल दिया. साली मेरी रंडी बहन ने लंड के पानी को पूरा गटक लिया और वो लंड का पानी पीकर बहुत खुश दिखने लगी.

    इस सबका वीडियो बना कर मैं वहां से निकल आया.

    जब शाम को वो घर आई, तो मेरी बड़ी बहन हिना के चेहरे पर संतुष्टि भरी मुस्कुराहट थी.

    मैंने उसे देखा और कहा- हिना यार … ऐसी मुस्कुराहट तो मैं भी तुझे हर रोज दे सकता हूँ … इसके लिए कॉलेज क्या जाना.
    वो बोली- क्या मतलब भाईजान?
    मैं बोला- कुछ नहीं … तुम अन्दर जाओ … मैं बाद में बताऊंगा.

    मेरी बहन मेरे तेवर देख कर कुछ डर गई. मगर उस समय मैंने कुछ नहीं कहा. मैं रात होने का इंतज़ार करने लगा. मैं मन ही मन बहुत खुश था कि अब तो एक जवान कॉलेज गर्ल की चुत घर में ही मिलेगी … वो भी बिल्कुल फ्री में.

    आख़िर वो टाइम आ ही गया, जब रात को दस बज गए. इन दिनों सर्दियों का मौसम था, तो सब लोग जल्दी ही सो गए थे. मैं अपने रूम से निकला और बहन के रूम में गया. मैंने देखा कि वे दोनों बहनें सो रही हैं. जब मैं पास में गया, तो पागल ही हो गया. मैंने देखा कि मेरी बहन की सलवार खुली है और उसने अपनी चुत पर हाथ रखा हुआ है.

    आह क्या मस्त चुत थी … एकदम साफ और प्यारी सी. उसकी सलवार पर पानी भी निकला हुआ पड़ा था. मैं देख कर खुश हो गया था. शायद वो बस अभी अभी ही अपनी चुत में उंगली हिला कर सोई थी. उसकी चुत के पानी से सलवार अभी गीली थी.

    मैंने पहले तो धीरे से सलवार नीचे की और उसकी चुत का सारा पानी पिया. उसकी चुत के पानी स्वाद बड़ा मस्त था. उसे चाट कर मैं बहुत मस्त फील कर रहा था. क्योंकि आज मुझे कोई डर नहीं था. बस इतना सा मसला था कि छोटी वाली बहन ना जाग जाए.

    कुछ देर के बाद बाद मैंने उसकी सलवार पूरी तरह से निकाल दी और एक हाथ को उसकी नंगी टांगों पर फेरने लगा.

    आह उम्म्मह क्या मज़ा आ रहा था यार!

    इसके बाद मैंने ब्रा से अपनी बहन के चूचे बाहर निकाले और देखने लगा. सच में मेरी बहन के चूचे बड़े रसीले थे … एकदम गोल और भरे हुए. एकदम बड़ी साइज़ की गेंद के जैसे मम्मों को देख कर मेरा लंड टनटना उठा.

    नीचे उसकी चुत पूरी तरह से खुली थी. मैंने उसकी चुत में उंगली डाली, तो मुझे पता ही नहीं चल रहा था कि कितनी बड़ी है. आख़िर वो पांच लड़कों के लंड से जो चुदवा चुकी थी.

    जब मैंने उसके होंठों पर किस करना शुरू किया, तो वो जाग गई और खड़ी हो गई. पूरी नंगी क्या मस्त रांड लग रही थी. उसकी टाइट गांड देख कर मुझे बड़ा मजा आ रहा था.

    वो बोली- भाई ये क्या कर रहे हो?
    मैंने बोला- चल नाटक मत कर … मेरे लंड को मुँह में ले ले.
    वो बोली- मैं अभी पापा को बोलती हूँ.
    मैं बोला- अच्छा जानू … पहले ये भी देख लो.

    जैसे ही मैंने उसे उसकी चुदाई की वीडियो दिखाई, तो जैसे उसको सांप सूंघ गया.
    वो मुँह लटका कर बैठ गई और बोली- इसमें मेरी गलती नहीं है.

    मैंने कहा- तो मैं भी कुछ नहीं बोल रहा हूँ … मुझे क्यों मना कर रही है … मैं भी किसी को ये फिल्म नहीं दिखाने वाला हूँ.
    वो बोलने लगी- तुम बड़े भाई हो … मुझे शर्म आती है.
    मैंने कहा- सुन तू ये समझ कर लंड चूस ले … जैसे वो लड़के तुझे चोदते हैं, वैसे ही में हूँ.

    आख़िर कुछ देर बाद वो मान ही गई. वो हंस कर बोली- चलो आज एक लंड और ठीक …
    उसने ये कहते हुए बहुत तेज़ी से मेरे लंड को अपने मुँह में भर लिया और चूसने लगी.

    मेरे मुँह से ‘अहह उसस्स अम्म्म्म … ऊहह..’ की मस्त आवाज़ निकलने लगी थीं. पहली बार में तो मैंने उसके मुँह में ही पानी निकाल दिया.

    फिर दस मिनट बाद मैंने उसकी टांगें फैला दीं और एक उंगली चुत में डाल कर चुत चाटने लगा.
    अब उसके मुँह से भी ‘आह उउह … सस्स्सीई भाईजान..’ की आवाजें आने लगी थीं.

    हिना बोली- भाईजान … अब और मत सताओ … जल्दी से अपनी बहन की चुत में लंड पेल दो … वरना ये रंडी मर जाएगी भाई … जल्दी अन्दर करो.
    उसने चुत को फैला दिया और मैंने बिना सोचे पूरा का पूरा लंड चुत में पेल दिया.

    ओफ … यार क्या मस्ती आ रही थी … बस कुछ ना पूछो. मैं ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने लगा. मेरी बहन को भी मज़ा आ रहा था. मेरे मुँह में उसके मम्मे थे. मैं बीस मिनट में उसकी चुत में ही झड़ गया और मेरी बहन का पानी भी निकल गया. उसका पानी मैंने अपने मुँह में ले लिया.

    मैंने उस रात में 4 बार अपनी सग़ी बहन को चोदा और उसकी मखमली गांड भी चाटी.

    अब मैं उसकी रोज़ चुदाई करता हूँ. आज तक इतना मज़ा तो मुझे अपनी गर्लफ्रेंड को चोदने में भी कभी नहीं आया.

    मेरी बहनो, सोचो मत … भाईजान को पटाओ और उनका लंड ले लो. मेरे दोस्तो, अगर आपकी बहन भी मस्त है, तो समझो कि आपके पास अनमोल हीरा है. खूब लंड पेलो … घर का माल है चोदो.

  • सेक्स चैट वेबसाइट पर मेरा पहला अनुभव

    मैं आज आपको दिल्ली सेक्स चैट वेबसाइट पर मेरा पहला अनुभव बता रहा हूँ. मेरी भी सेक्स लाइफ एकदम मज़ेदार हो गयी है दिल्ली सेक्स चैट पर अपना समय बिताकर!

    नमस्ते दोस्तो, मेरा नाम निलेश तिवारी है. मैं आज आप लोगों को दिल्ली सेक्स चैट वेबसाइट पर मेरा पहला अनुभव बताने वाला हूँ. दिल्ली सेक्स चैट एक जानी मानी वेबसाइट है जहाँ पर लोग सेक्स का मज़ा लेते हैं.
    मेरी भी सेक्स लाइफ एकदम मज़ेदार हो गयी है दिल्ली सेक्स चैट पर अपना समय बिताकर!
    कैसे?
    कहानी पढ़कर जान लीजिए.

    कुछ दिनों पहले की बात है. मैं दोपहर को अपने बिस्तर पर लेटे सोच रहा था कि मैं 20 साल का हो गया हूँ और मेरी ना तो कोई गर्लफ्रेंड है और ना ही मैंने किसी लड़की को चोदा है.
    दुनिया में लोग आए दिन अपनी और दूसरों की माँ, बहन, बेटी, भाभी को दिन-रात मज़े से चोदते रहते हैं और एक मैं हूँ जिसे कोई भी लड़की घास नहीं डालती.

    मुझमें कुछ कमी नहीं है. तक़लीफ़ यह है कि ये साली लड़कियां बहुत भाव खाती हैं. इन पर पैसे खर्च करो, इनकी बकवास बातें सुनो, इनके काम करो. इतना सब कुछ करने के बाद इस बात की कोई गांरटी नहीं हैं कि ये हमें चोदने देंगी.

    ऐसे ही सोचते-सोचते मेरे दिमाग में विचार आया कि क्यों ना इंटरनेट में सेक्स लाइफ के मज़े लेने की तरकीब पता करूं. 20-25 मिनट इंटरनेट सर्फिंग करने के बाद पता चला कि लाइव सेक्स चैट से सेक्स का मज़ा घर बैठे ले सकते हैं.
    लाइव सेक्स चैट पर खूबसूरत लड़कियां और महिलायें अपने बातों सें और अंग प्रदर्शन से मर्दों के लंड को खड़ा करतीं है.

    मैंने काफ़ी सारी वेबसाइट में से दिल्ली सेक्स चैट को चुना और अपना नसीब आज़माया. वैसे भी मैं लड़कियों की नंगी तस्वीरें देखते मुठ मारकर थक गया था. अब वक़्त था उनसे गंदी बातें और मस्ती करने का.

    दिल्ली सेक्स चैट के वेबसाइट पर जाते ही इतनी सारी सुंदर लड़कियों के प्रोफाइल देखकर मेरा शरीर गर्म होने लगा. वेबसाइट पर एक से एक छमिया जिस में से कुछ ने ब्रा-पेंटी पहनी थी. कुछ ऊपर से नंगी थी और कुछ अपने गांड का छेद दिखाते हुए.

    मैंने बिना कोई देरी किए दिल्ली सेक्स चैट पर अपना अकाउंट बना दिया. मेरा लंड तो सिर्फ़ लड़कियों का प्रोफाइल देखकर ही खड़ा हो गया. मुझें इस बार सिर्फ़ तस्वीर देखकर मूठ नहीं मारनी था. इसलिए मैंने अपने लंड को हाथ ही नहीं लगाया.

    अब रास्ता बिलकुल साफ़ था क्योंकि मेरे पिताजी ऑफ़िस से रात दस बजे तक ही आते हैं और मेरी माँ स्कूल टीचर हैं जो शाम को घर आती हैं.

    मैंने बेडरूम का पर्दा लगा दिया और घर के मुख्य दरवाज़े की कुंडी लगा दी ताकि माँ या पिताजी में से अगर आज कोई घर जल्दी आ जाए तो किसी से भी दरवाज़ा चाबी से ना खुले.
    मैं नहीं चाहता था कि माँ पिताजी की नज़रों में मैं गिर जाऊं और वे मेरी आजादी छीन लें.
    वैसे भी सेक्स का मज़ा आराम से और बिना किसी चिंता के लेना चाहिए ना कि जल्दबाजी में डर डर कर!

    सभी चीज़ों का ध्यान मैंने रखा था ताकि लाइव सेक्स चैट करतें समय कोई दिक्कत ना हो.

    दिल्ली सेक्स चैट के वेबसाइट पर मैं सेक्सी लड़की और भाभियों का प्रोफाइल देख रहा था और सोच रहा था कि इनमें से किसे चुनूं.
    मैं कुछ सालों सें अपनी माँ को गंदी नज़रों सें देखने लगा था. इसलिए सोचा कि कोई भाभी से सेक्स चैट करूं जिसका फिगर मेरी मोटी गांड वाली माँ जैसा हैं. मुझे ज़्यादा देर नहीं लगी ऐसी भाभी ढूंढ़ने में जिसे देखकर मुझें मेरीं माँ याद आती हो.

    मुझे एक भाभी मिली जिसका नाम निकिता है. उसका प्रोफाइल चुनकर मैं पेमेंट मोड की तरफ बढ़ा. मैंने XXX वीडियो वाला सेक्स चैट चुना और पेमेंट देकर भाभी को बुक किया.

    दिल्ली सेक्स चैट पर मेरा पहला लाइव सेक्स चैट सेशन शुरू हो गया; स्क्रीन पर थी नॉटी निकिता भाभी. गोर रंग की भरे बदन वाली निकिता भाभी ने गुलाबी रंग की साड़ी पहनी थी और सफ़ेद रंग का ब्लाउज जिसका एक ही बटन लगा हुआ था.

    निकिता भाभी का फिगर मेरी माँ जैसा ही था- भूरा रंग, बड़े स्तन, मोटी कमर, उभरी हुई गांड और मोटे जांघ. निकिता भाभी ने सुहागरात वाला माहौल बनाया हुआ था लेकिन मुझे तो उनको अपनी माँ बनाकर उनके साथ कामुक आनंद लेनी थी. मैंने अपने लंड पे नारियल का तेल लगाकर मालिश की और अपनी माँ को याद करते हुए मूड बनाया.

    निकिता भाभी- हेलो जानेमन, बताओ अपनी फरमाइश. मेरी चूत का पानी किस तरह निकालना चाहोगे तुम? (अपनी चूत को रगड़ते हुए).

    मैं- भाभी आप तो बहुत सेक्सी लग रही हो. आपको देखकर मुझे मेरी बड़ी गांड वाली माँ की याद आती है. मेरी माँ को बाथरूम में नहाते देख मैंने कई बार मुठ मारी है. असल जिंदगी में नहीं तो आप को ही मेरी माँ समझ कर आपका पेशाब निकाल दूंगा. चलो एक रोल-प्ले गेम खेलते है.

    निकिता भाभी- तो राजा बेटा को अपनी माँ के साथ मस्ती करनी है. मुझे भी रोल-प्ले गेम खेलना पसंद है; बताओ क्या करना है?

    मैं- आपकी जांघों में दर्द है और आप मुझे बैडरूम में बुलाती है आपकी मालिश करने के लिए. अपने बेटे के हाथों से मालिश करवाते समय आप गर्म हो जाती हैं. आप अपने बेटे के साथ थोड़ी कामुक मस्ती करने की सोचती है. बातें करते हुए आप कल रात वाली चुदाई के बारे में बोलने लगती हैं. ये सब बोलते वक़्त आप उत्तेजित होकर गैर मर्दों के साथ आपकी चुदाई के बारे में बताती हैं. यहीं से माँ-बेटे की चुदाई शुरू हो जाती है.

    निकिता भाभी ने इशारा कर दिया कि उनको खेल समझ आ गया है. वो बिस्तर पर अपनी साड़ी ठीक करके लेट जाती है. उत्तेजना की वजह से मुझे भी गंदी मस्ती करने की हिम्मत आ जाती है. अपनी माँ के साथ हकीकत में नहीं तो किसी दूसरी औरत को अपनी माँ बनाकर अपनी हवस मिटाऊंगा.

    निकिता भाभी- अरे नीलेश बेटा, ज़रा बैडरूम में आना तो!

    मैं- क्या हुआ माँ? कल रात को भी बैडरूम से तुम्हारी आवाज़ आ रही थी, तुम ठीक तो हो ना?

    निकिता भाभी- मेरी जांघों में दर्द हो रहा है, ज़रा मालिश कर देना तो. रात भर सोई नहीं हूँ मैं, तू भी रात भर मेरी आवाज़ सुनकर जाग रहा था? (मुस्कुराते हुए)

    निकिता भाभी साड़ी को अपने जांघों तक उठाती है और अपने पैर थोड़ा सा फैला लेती है. मैं जल्दी नहीं झड़ना चाहता था इसलिए मैंने अपना लंड हिलाना बंद कर दिया. फिर निकिता भाभी अपने हाथों से अपने जांघों को सहलाने लगी. वो अपने हाथ को चूत के हिस्से के बेहद नज़दीक ले जा रही थी.

    – मैं कैसे सोता माँ? आवाज़ ही कुछ ऐसी आ रही थी कि मुझे फिर नींद नहीं आई. (आँख मारते हुए)

    निकिता भाभी- आह! तेरे मालिश से तो मुझे कुछ अजीब सा लग रहा है. मेरी जांघों तक ही मालिश करना, मैंने अंदर कुछ पहना नहीं है. नहीं तो तू जोश में आकर मेरी चूत में उंगली डाल देगा.

    मैं- आपकी चूत से ही तो मैं निकला हूँ. क्या उस पर मेरा भी हक़ नहीं बनता?

    निकिता भाभी- छी नालायक़!
    फिर हंसती हुई- अपनी माँ के साथ कोई ऐसे बात करता है भला? वैसे तू हक़ की बात मत कर, तेरे बाप ने अपना हक़ मेरी चूत पर कल सारी रात जताया है. तेरे बाप के लंड पे पूरी रात उछल-उछल कर मेरी कमर टूट गई. रात को अचानक उसका मूड बन गया और मुझे अपने ऊपर चढ़ाकर मेरी गांड मसलने लगा. मेरे स्तनों को ऐसे चूसा कि कभी चूसने मिला ही ना हो. तू मेरे स्तनों की भी मालिश कर दे ज़रा. तू मत चूसना; तूने अपने हिस्से का दूध पी लिया है.

    निकिता भाभी ने अपना साड़ी का पल्लू उतारा और अपना ब्लाउज खोलकर अपने भूरे, पपीते जैसे आकार वाले स्तनों के दर्शन दे दिए. उन्होंने अपने हाथों से अपने स्तनों को दबाया और मुझे चिढ़ाया. मैंने अपने माँ की वैसी चूचियाँ जब वो नहाती थी तब देकही है, मेरा मन करता था कि उसे वहीं जाकर पीछे से दबोच लूं.

    निकिता भाभी- उम्! तू कितने अच्छे से मेरी चूचियों की मालिश कर रहा है. और एक तेरा बाप है, कुत्ते को हर वक़्त इन्हें दबोचकर काटनी होती है. देख अभी भी मेरी चूची लाल है. चल तू अब इतने अच्छे से मालिश कर ही रहा है तो मेरी चूत की भी मालिश कर दे. अपनी उंगली डालकर अच्छे से सहला मेरी चूत को.
    फिर हंसती हुई बोली- ध्यान रख कि तू अपना लंड ना घुसेड़ दे.

    निकिता भाभी ने अपनी साड़ी पूरी उठा दी. उसकी काले रंग वाली बालों से भरी चूत देखकर मैं अपने लंड को जोर से हिलाने लगा. मेरी माँ की भी चूत ऐसी ही दिखती है. वो नहाते वक़्त अपने पैर फैलाती है और अपनी ऊँगली से चूत को साफ़ करती है.

    मैं- माँ तेरी चूत को देखकर ऐसा लगता है कि पापा तुम्हारी रोज़ रात को चुदाई करते हैं. लगता है कि पापा तुम्हारी गांड में भी अपना लंड घुसाते हैं. इसमें मेरी दो उँगलियाँ आसानी से घुस जायेंगी.

    निकिता भाभी- तेरा बाप तो क्या हमारा पड़ोसी भी मेरी चुदाई करता है. बेटा अब जो मैं तुझे बताने जा रही हूँ वो बात तेरे पापा को मत बताना. नहीं तो मेरी आजादी छीन ली जायेगी. तेरे पापा को कभी कभार ही सेक्स का मूड आता हैं और मेरी प्यास तो रोज़ बुझनी ज़रूरी है नहीं तो मैं इधर उधर मुँह मार लेती हूँ.

    निकिता भाभी की बातें सुनकर मेरा लंड तो और कड़क हो गया. अपनी माँ के बारे में ऐसा सुनकर मेरी हवस को राहत मिली. अब से मैं अपनी माँ के बारे में ऐसे ही विचार लाऊँगा. दिल्ली सेक्स चैट की भाभियाँ वाकई में कमाल की हैं दोस्तो.

    निकिता भाभी- सुबह जब मैं हमारे कॉमन बाथरूम में नहाने जाती हूँ, तब हमारा पड़ोसी भी मेरे साथ बाथरूम में घुस जाता है. मेरी मैक्सी उतारकर सबसे पहले मेरी चूतड़ों को फैलाकर मेरी गांड के छेद में अपनी ज़ुबान डालकर मुझे मस्त कर देता है. फिर उसके बाद मेरी बालों से भरी चूत को अपने मुंह में डालकर भीगा देता है. मेरी चीखें न निकलें इसलिए अपना हाथ मेरे मुँह पर रखता है.
    इतने में तो मेरे चूत से एक बार पानी निकल जाता है. फिर मुझे मेरी जांघों से उठाकर उसके लंड पे उछालता रहता है. ऐसे मैं रोज़ उसके साथ सुबह सेक्स करती हूँ.

    एक बार तो वो अपने भाई को भी मेरी चुदाई करने ले आया. दोनों मिलकर सुबह सुबह मेरे शरीर के हर एक छेद को चाटकर साफ़ करने लगे. फिर मुझे अपने बीच में दबाकर बारी बारी मेरी चूत और गांड में अपना लंड घुसाने लगे.

    उस दिन तो मेरी चूत से पेशाब निकल गया था ऐसी चुदाई की थी.

    तू चाहता है कि तेरी माँ ऐसे ही किसी गैर मर्दों के साथ सेक्स करती रहे? क्या तू अपनी माँ को अपनी रंडी नहीं बना सकता? घुसा अपना लौड़ा मेरी चूत में और कर मेरी चुदाई. जब मेरे ही घर में जवान लौड़ा है तो में क्यूँ किसी दूसरे का लौड़ा चुसूं, आह! निकाल मेरा पेशाब, उफ़! ऐसी ही घुसते रेह और फाड़ दे मेरी चूत.

    निकिता भाभी ने एक नकली लौड़ा यानि डिलडो निकाला और उसे वो अपनी चूत में घुसाने लगी. उसने अपने दोनों पैर उठाकर फैला दिए और अपनी गांड में उंगली भी डालने लगी.

    मैं इधर अपने लंड को ज़ोर जोर से हिला रहा था. मेरा तो थोड़ी देर में झड़ने को आ गया था. मेरे से और रहा नहीं गया क्यूंकि ऐसा दृश्य तो मैंने कभी नहीं देखा था. मैंने अपना लंड का माल निकाल दिया. वहाँ पर निकिता भाभी नकली लंड को अपनी गांड में घुस रही थी.

    मैं- अरे भाभी मेरे लंड का पानी तो निकल गया आपकी गांड को देखकर, उफ़ मज़ा आ गया.

    निकिता भाभी- ये तुम्हारा पहला सेक्स चैट सेशन है इसलिए तुम इतनी जल्दी झड़ गए. मेरे साथ कुछ और समय बिताओ फिर देखो हम घंटों तक मस्ती करते रहेंगे. क्या पता शायद तुम अपनी असली माँ की भी चुदाई कर दो (आँख मारते हुए).

    मैं- सही कहा भाभी आपने. मैं अब रोज़ आपसे सेक्स चैट करूँगा. आप मुझे लड़की को पटाने के तरीके बताना फिर उसे मैं यहाँ लाकर आपके सामने उसकी गांड में अपना लंड घुसाउँगा. चलो तो फिर कल मिलते हैं भाभी.

    निकिता भाभी- बिल्कुल, कल मिलेंगे जानेमन. (अपनी गांड का छेड दिखाकर मुझे चिढ़ाते हुए).

    दोस्तो, ये था दिल्ली सेक्स चैट वेबसाइट पर मेरा पहला अनुभव.

    उस दिन के बाद से मैंने कई सेक्सी लड़की और कामुक भाभियों को पटाया है. अब मैं तो हर रोज़ ऐश करता रहता हूँ. आप लोग भी दिल्ली सेक्स चैट वेबसाइट पर जाकर सेक्स के मज़े लीजिये. एक बात और, लड़की और भाभियों की लिस्ट बनाना नहीं तो आप भूल जाओगे कि आपने कितनी आइटम लड़कियों भाभियों को पटाया है.

  • दूसरी शादी की सुहागरात का मजा

    मेरा नाम रेनू है और मैं जयपुर में रहती हूँ. मेरी उम्र 37 वर्ष की है.
    मेरे पति और मैं दोनों सरकारी नौकरी करते थे.
    हम दोनों का एक ब/च्चा है.

    हमारी लाइफ ठीक चल रही थी.
    मेरे पति सुनील मुझे बहुत प्यार करते थे.
    हम दोनों भगवान की नेमत से बहुत खुश थे लेकिन एक दिन सड़क हादसे में उनकी मौत हो गई.

    ये खबर सुन कर मुझ पर दुखों का पहाड़ सा टूट पड़ा.

    मैं अपने पति के बिना जीना नहीं चाहती थी और मर जाना चाहती थी … लेकिन अपने ब/च्चे को देखकर अपने आप को संभाला.

    पीहर और ससुराल वाले ढांढस बँधाते और हिम्मत से काम लेने को बोलते.
    मैं किसी के ऊपर बोझ बनना नहीं चाहती थी.
    मैं रोज़ अपने पति को याद करती और अकेले में बैठकर रोती रहती.

    धीरे-धीरे ये मुश्किल वक्त निकल गया और मैं अकेली ही अपने ब/च्चे के साथ रहने लगी.

    अब मैंने उनकी यादों के सहारे अकेले जीना सीख लिया था.
    मुझे उनके इंश्योरेंस और फंड्स से बहुत पैसे मिले थे, पैसे की कोई कमी नहीं थी लेकिन पति की कमी कोई भी चीज़ पूरी नहीं कर सकती थी.

    जैसे-जैसे समय निकला, मैं अपनी नौकरी करके ब/च्चे को पालने लगी. मेरा पूरा समय ब/च्चे को खुश रखने और उसे खिलाने में निकल जाता था.
    बस इसी तरह से समय निकल रहा था.

    लेकिन एक औरत के लिए ये सब आसान नहीं होता.
    लोग मुझ पर गंदी निगाहें डालते; हर कोई हमदर्द बनना चाहता था.
    मैं किसी से बात नहीं करती थी; मुझे ऐसे लोगों से नफ़रत होती थी.

    मुझे अब पति की यादों के सहारे ही जीना था.
    मैं बिल्कुल साधारण तरीके से रहने लगी.

    मुझे अपनी चूत के बाल भी साफ़ करने का मन नहीं करता था.
    मेरी झांटें बहुत बड़ी हो गई थीं.

    जैसे ही एक बरसी पूरी हुई, घरवा ले बोलने लगे- बेटी अभी तेरी पूरी उम्र पड़ी है. ब/च्चे के भविष्य का सोच … दूसरी शादी कर ले!

    मुझे ये सब सुन कर गुस्सा आता था.
    अब तो मेरी सहेलियां भी शादी करने की बोलने लगी थीं.

    मेरी एक खास सहेली मुझसे बोली- देख यार, ऐसे जीवन नहीं चलता!

    लेकिन मैं किसी से शादी करना नहीं चाहती थी.
    मैं अपने पति को बहुत प्यार करती थी; उनकी यादों को मैं किसी के साथ बांटना नहीं चाहती थी.

    मेरे घर वालों ने पीछा नहीं छोड़ा.
    वे बोलते रहे कि बेटी समाज में विधवा का जीवन नरक से भी बदतर होता है. ब/च्चे के बारे में सोच … इसको भी तो बाप का प्यार चाहिए.

    ब/च्चे के बारे में सोचकर एक दिन मैंने हां कर दी.
    घर वाले बहुत खुश हुए.

    वैसे मैं जवान-सुंदर थी, नौकरी थी और अब पैसा भी बहुत था तो रिश्तों की कोई कमी नहीं थी.

    रोज़-रोज़ रिश्ते आ रहे थे.
    अनमैरिड और मैरिड सब तरह के रिश्ते आ रहे थे.

    घर वालों ने बहुत से लड़कों के फ़ोटो भेजे पसंद करने के लिए … लेकिन मैंने सब उन्हीं पर छोड़ दिया कि जो आपको ठीक लगे, वह करो.

    फिर उन्होंने एक लड़का फ़ाइनल कर दिया.
    वह भी शादीशुदा था.
    उसकी शादी दो साल पहले हुई थी लेकिन शादी के 3 दिन बाद ही उसकी बीवी पीहर में करंट लगने की वजह से चल बसी थी.

    उन्होंने फ़ाइनल किए लड़के की डिटेल और उसकी फ़ोटो मुझे भेज दी.
    उस लड़के का नाम रवि था.

    मुझे एक प्रतिशत भी इंट्रेस्ट नहीं था पर ब/च्चे की खातिर मैंने एक बार फ़ोटो देख लिया.
    वह लड़का बहुत स्मार्ट था अभी केवल 32 साल का था.
    उसकी सरकारी नौकरी थी और वह इंजीनियर था.

    मैं तो सोच भी नहीं सकती थी कि किसी विधवा को ऐसा हैंडसम जवान पति मिल सकता है.
    यहीं से इस हैपी एंडिंग सेक्स कहानी की शुरुआत हुई.

    घर वाले और सहेलियां मुझे पार्लर जाने और हुलिया सुधारने को बोलती थीं.
    लेकिन मैं तो शादी भी सिर्फ घर वालों और ब/च्चे की खुशी के लिए ही कर रही थी … अपने लिए नहीं.

    फिर भी रोज़-रोज़ उनकी ज़िद की वजह से मैं पार्लर जाने लगी.

    मेरी उसी पक्की सहेली ने कसम दी कि एक दुल्हन की तरह तैयार होना वर्ना कभी बात नहीं करूँगी.

    इस वजह से मैं फुल बॉडी वैक्सिंग और मेकअप करवाने लगी.
    फिर मैंने चूत को भी बिल्कुल साफ़ कर लिया.

    अब मैं भी किसी हीरोइन से कम नहीं लग रही थी.

    सब कुछ तय होने के एक महीने बाद ही हमारी शादी कर दी गई और मैं अब ससुराल आ गई.

    मेरे लिए सब नए थे.
    सभी लोग बहुत अच्छे थे.

    मेरी खूबसूरती की सबने तारीफ़ की … मुझे ऐसा नहीं लगा कि अनजान हैं.
    सबने मेरा खूब ध्यान रखा.

    मेरा ब/च्चा भी उनमें घुल-मिल गया.

    ये देख कर मेरा दुख कम हुआ लेकिन मैं तो बस मेरे पहले पति को ही याद कर रही थी.

    ये शादी मैंने खुद के लिए नहीं … ब/च्चे की खातिर की थी.

    जैसे-जैसे सुहागरात नज़दीक आ रही थी, मैं घबरा रही थी.
    मैं किसी और मर्द को खुद को छूने देना नहीं चाहती थी.

    सुहागरात को मैं कमरे में बेड पर घूँघट करके बैठी थी कि तभी दरवाज़ा खुला और रवि अन्दर आ गए.

    मैं चुपचाप घूँघट में से उनको देख रही थी.
    उनकी हाइट छह फीट, रंग गोरा था.

    तभी उन्होंने अपनी टाइट शर्ट-पैंट उतार दिए.
    उनकी पर्सनैलिटी किसी फौजी जैसी थी.

    वे बाथरूम में गए और हाथ-मुँह धोकर सिर्फ़ तौलिया लपेट कर बाहर निकल आए.

    फिर ड्रेसिंग टेबल के सामने खड़े होकर नीचे से कंघा उठाने जैसे ही झुके, उनका तौलिया खुल कर गिर गया.

    तभी मेरी नज़र ड्रेसिंग टेबल के ग्लास पर जा पड़ी.
    उन्होंने चड्डी नहीं पहनी हुई थी.

    मेरी आंखें फटी की फटी रह गईं.
    ये आदमी का लंड था या घोड़े का …

    मैंने ऐसा लंड कभी सोचा भी नहीं था.

    उन्होंने तुरंत तौलिया पहन ली लेकिन मेरी आंखों के सामने तो उनके लंड की फ़ोटो बन गई.

    इतने समय बाद आंखों के सामने लंड देखकर मेरी चूत भारी-भारी सी होने लगी.
    जैसे-तैसे करके मैंने खुद को संभाला.

    उन्होंने कमरे की लाइट बंद करके नाइट बल्ब जला दिया.
    वे बेड पर बैठे और मेरा घूँघट उठा कर बोले- यार कितनी खूबसूरत हो तुम … मेरा तो नसीब ही खुल गया!

    ये बोलकर उन्होंने मेरे हाथों में गिफ़्ट का डिब्बा पकड़ा दिया और खोलने को बोले.
    मैंने डिब्बा खोला तो उसमें एप्पल आईफ़ोन था.

    वाह … आई फोन!
    मैं बहुत खुश हुई.
    मैंने पहली बार एप्पल आईफ़ोन हाथ में लिया था.

    उन्होंने पूछा- कैसा लगा गिफ़्ट?
    तो मैंने सिर्फ़ गर्दन हिला कर हामी भर दी.

    तभी रवि ने मेरे हाथ को छुआ तो मैं बेड से नीचे उतर गई और बोली- सॉरी … ये सब हमारे बीच कभी नहीं होगा … आप मुझे कभी छूना मत!

    ये सुनकर वे मेरे पास आए और मेरे सामने खड़े होकर मेरे दोनों हाथों को पकड़ कर बोले- जान. ये मेरी पहली सुहागरात है. पहली बीवी सुहागरात के समय पीरियड्स में थी!

    ये ‘जान’ शब्द सुने डेढ़ साल हो गया था.
    उनकी पहली सुहागरात वाली बात सुनकर मैं मन ही मन खुश होने लगी लेकिन फिर भी मुँह बनाकर हाथ छुड़ाकर दूर हट गई और ड्रेसिंग टेबल के सामने खड़ी हो गई.

    तभी रवि मेरे पीछे आए और उन्होंने पीछे से अपने हाथ आगे करके मेरे दोनों बूब्स को पकड़ लिया.
    साथ ही अपना मूसल जैसा हथियार मेरी गांड पर टिका दिया.
    वे मेरे बूब्स को हल्के हाथों से सहलाने लगे.

    मेरे पूरे शरीर में करंट सा रेंगने लगा, चूत का भारीपन मैं संभाल नहीं पा रही थी कि अब पैर भी भारी लगने लगे और एक एक कदम उठाना भी भारी पड़ रहा था.

    मैं खुद को हटा नहीं पाई कि तभी रवि अपने एक हाथ से मेरे पेट पर सहलाते हुए उंगलियों को मेरी नाभि के चारों तरफ़ घुमाने लगे.
    फिर नाभि से नीचे मेरे पेड़ू पर रख लिया.

    दोस्तो, डेढ़ साल बाद अगर कोई हट्टा-कट्टा मर्द नाइट बल्ब के उजाले में पीछे से पकड़ ले और उसका लंड मूसल जैसा हथियार लड़की देख चुकी हो … तो खुद ही सोचो कि उस वक्त मेरी क्या हालत हुई होगी.

    मैं निढाल होकर पीछे की तरफ़ रवि के ऊपर गिरने लगी और मन ही मन खुश होने लगी कि इतने दिन की प्यास आज मिटेगी.

    तभी रवि ने पकड़ कर मुझे अपनी तरफ़ मोड़ कर सीधा कर लिया.
    वे अपनी गर्म सांसें मेरे मुँह पर छोड़ने लगे.

    मेरे हाथ खुद ही उनके कंधों पर पहुंच गए और मेरे बूब्स तन कर रवि की छाती को छूने लगे थे.

    रवि ने मेरे होंठों को अपने मुँह में भर लिया.
    मुझ पर उनके लौड़े का नशा चढ़ गया था इसलिए मैं चुपचाप उनका साथ देती रही.

    थोड़ी देर अपने होंठों को चुसवाने के बाद मैंने मुँह खींच लिया.
    मेरी चूत रिसने लगी थी, पूरी पैंटी गीली हो गई थी.

    मेरा मन अब चुदाने को हां करने के बहाने ढूँढने लगा.
    मैं सोचने लगी कि अब कभी ना कभी तो नए जीवन की शुरुआत करनी पड़ेगी … मैं इनका जीवन क्यों खराब करूँ? इनका भी तो हक़ है मुझ पर!

    मैंने अपनी चूत की हालत देखकर सुनील को मन ही मन बोला- सॉरी, अब मैं नहीं रुक पाऊंगी.
    बस मैंने रवि के लौड़े पर हाथ रख दिया.

    ये देख रवि बहुत खुश हुए और मेरे हाथ के ऊपर अपना हाथ रख कर लौड़े को कस लिया.

    उनका आधा लौड़ा भी मेरी मुट्ठी में नहीं आ पा रहा था और यह एक बिलांड जितना लंबा था.
    कमाल की बात यह थी कि रवि का लंड गोरा था उसका टोपा बहुत मोटा था, झांटें बिल्कुल साफ़ थीं.

    सुनील का लंड तो इसके आगे आधा भी नहीं था.
    यह देखकर मैं बहुत खुश हुई कि अब से इस पर मेरा हक़ है और कभी भी चुदवा सकती हूँ.

    मैं ऊपर से लंड को सहला रही थी और रवि काम भरी सिसकारियां लेने लगे थे.

    तभी रवि ने मुझे अपनी बांहों में उठा लिया और बेड पर लिटा दिया.

    उसके बाद रवि ने मेरे गहने एक-एक करके उतारना शुरू कर दिए.
    मैंने आंखें बंद कर लीं और बस चुपचाप लेटी हुई रवि के हाथों से खुद को नंगी करवा रही थी.

    गहनों के बाद वे साड़ी की पिन खोलने लगे.
    ये देखकर तो मेरी चूत में आग सी लग गई क्योंकि अब ज़्यादा देर नहीं थी हमबिस्तर होने में.

    जल्द ही मैं सिर्फ़ ब्रा और पेटीकोट में थी.

    रवि मेरे दोनों पैरों के बीच आए और पेटीकोट को उठा कर अपने फौलादी हाथों को जांघों पर फिराने लगे.

    मैंने अंगड़ाई लेकर दोनों हाथों से बेडशीट पकड़ ली.
    तभी रवि ने अपना हाथ चूत के ऊपर रख दिया.

    उन्होंने मेरी तरफ़ देख कर नॉटी सी स्माइल दी तो मैं समझ गई कि रवि को मेरी चूत गीली होने का पता लग गया है.

    मैंने भी शर्मा कर स्माइल करके खुद को रवि को समर्पित करने का इशारा कर दिया.

    अब रवि ने पैंटी को नीचे खींच कर निकाल दिया.
    मेरी चिकनी साफ़ चूत देखकर वे बोले- वाह, कितनी सुंदर हो तुम … और तुम्हारा जिस्म!
    मैं मन ही मन बहुत खुश हुई.

    तभी रवि ने मुझे पकड़ कर उल्टा लिटा दिया और वे मेरे पैरों को चूमते हुए ऊपर आने लगे.
    उन्होंने फिर से मेरी जांघों को चूमा और मेरे एक कूल्हे को अपने मुँह में भर कर दांतों से काट लिया.

    ‘आआआह’ करके मैंने उस लव बाइट का मज़ा लिया.
    फिर मेरी कमर को चूमते हुए मेरी पीठ पर चिपक गए.

    उनका लंड मेरी गांड पर दब रहा था.
    उस Xxx लंड की लंबाई और मोटाई मैं अपने मन में नापने लगी.
    इससे मेरी चूत गर्म हो कर फड़कने लगी.

    फिर रवि ने मेरे बालों को एक तरफ़ कर के मेरी गर्दन पर गर्म सांसें छोड़ते हुए मुझे चूमने लगे तो मैं कामुक सिसकारियां लेती हुई उनका साथ देने लगी.
    मुझे इस तरह पोजीशन में बहुत अच्छा लग रहा था.

    फिर रवि ने अपने दोनों हाथों से बोबे पकड़ लिए और दबाने लगे.
    मैं अपने पैरों को रवि के पैरों में कसने लगी.

    फिर उन्होंने अपने हाथ नीचे ले जाते हुए मेरी कमर के नीचे घुसा दिए.
    हाय … मैं तो मज़े में पागल सी होने लगी और अपनी कमर उठा कर ऊपर-नीचे करने लगी.

    तभी मेरी कामुक अदाओं को देखकर रवि पूरे जोश में आ गए और मुझे सीधा करके खुद बेड से उतर गए.
    मैं समझ नहीं पाई कि वे क्या करना चाह रहे हैं.

    तभी वे मेरे दोनों पैर खींचकर बेड के एक कोने में ले गए तो मैं एकदम से सन्न ही रह गई.
    रवि ने मेरे पैर फैलाए और मेरी चूत की पंखुड़ियों को अपने मुँह में भर लिया.

    आआ आह रवि बहुत मज़ा आ रहा है … चूसो मुझे … आआहा उफ़्फ़ आआह्ह्ह!’
    मैं मदमस्त होकर के बुदबुदाने लगी.

    मेरी कामुक सिसकारियां सुन कर रवि ने अपनी पूरी जीभ मेरी तड़फती चूत में घुसेड़ दी.

    मैंने भी अपने दोनों हाथों से रवि का सिर पकड़ लिया और चूत पर दबाती हुई अपने कूल्हे उठा-उठा कर उनकी जीभ को अन्दर तक घुसवाने लगी.

    मुझे लग रहा था कि अगर एक-दो बार और कूल्हे उठा दिए तो मैं अभी झड़ जाऊंगी.
    मुझसे अब और रुका ही नहीं जा रहा था.

    मैंने जल्दी से रवि को अपने ऊपर खींच लिया- प्लीज डाल दो रवि जी … अब रुका नहीं जा रहा … अपनी बीवी बना लो मुझे … मैं बहुत समय से प्यासी हूँ. मेरी प्यास बुझा दो!

    तभी रवि ने लंड को चूत पर रगड़ कर टोपे को मेरी चूत के ही पानी से गीला किया और मुझसे चिपक कर चूत के ऊपर लंड को रगड़ कर मुझे तड़पाने लगे.

    मैं उनके लंड की प्यासी हो गई और कराहती हुई बोली- आह डालो ना रवि जी … आह!
    लेकिन शायद उन्हें मेरी तड़प भरी सिसकारियों को सुनने में बहुत मज़ा आ रहा था.

    अब इंतज़ार की हद हो गई थी और मेरे लिए और रुक पाना संभव नहीं हो पा रहा था.
    मैंने पूरी शर्म छोड़ कर उनका घोड़े जैसा लंड … जिसमें बहुत वज़न लग रहा था, उसे अपने हाथों में पकड़ा और चूत के छेद पर रख कर रवि की कमर को पकड़ लिया.
    उसी पल मैंने अपने कूल्हे एक ज़ोरदार झटके से ऊपर उठाए तो उनका लंड का सुपार अन्दर घुस तो गया, लेकिन मेरी जान ही निकल गई.

    इतनी गीली चूत होने के बाद भी लंड का सुपारा मेरी चुत में फंस गया था.
    लंड अब ना अन्दर घुस पा रहा था और ना बाहर निकल पा रहा था.

    ‘प्लीज़ रवि जी … इसे बाहर निकालो मैं मर जाऊंगी!’
    मैं उनकी कमर को दूर धकेलने लगी.

    तभी रवि ने धीरे-धीरे से अपने लंड के सुपारे को मेरी चुत से बाहर निकाला.
    अब जाकर मुझे सांस आई.

    रवि समझ चुके थे कि चाहे मैं कितनी भी चुद गई हूँ लेकिन चूत एकदम कुंवारी जैसी ही है.
    अब उनके घोड़े जैसे बिग लंड के आगे तो मैं कुंवारी जैसी ही थी.

    तभी रवि ने आलमारी से एक जैल निकाला और अपने लंड पर मल लिया.
    उन्होंने कुछ जैल उंगलियों में लेकर मेरी चूत में भी लगा दिया.

    अब उन्होंने वापिस अपने लंड को मेरी चुत के छेद पर लगा कर एक झटका मारा.
    ‘आ आआह मर गई आआ हाह छोड़ो प्लीज़ …’

    लेकिन इस बार उन्होंने मेरी एक ना सुनी और लंड को चुत की गहराई में दबाते ही चले गए.
    जैल की वजह से लंड फंसता-रगड़ता हुआ घुसता जा रहा था और मैं तड़पड़ाती रही थी.
    एक बार तो मेरे आंसू निकल गए.

    वे एक पल को रुके और बस चुपचाप मुझसे चिपक कर मेरे एक बोबे को चूसने लगे.
    जब चूत पानी छोड़ने लगी, तब जाकर दर्द कम होने लगा और मज़ा आने लगा.

    तभी उन्होंने फिर से एक झटका मारा तो Xxx लंड ब/च्चेदानी से अटक गया.

    अब मैं समझ चुकी थी कि यह इससे ज़्यादा नहीं घुस पाएगा.
    उनके बिग लंड की लंबाई मेरी चूत की गहराई से भी ज़्यादा थी.

    वे रुके और मेरे आंसू पौंछ कर मेरे माथे को चूमा.
    फिर होंठों को अपने होंठों में भरकर मेरे मुँह में अपनी जीभ डाल दी.
    मैं उनकी जीभ चूसने लगी.

    रवि एक सॉलिड मर्द हैं … ये मैं जान गई थी.

    अब मेरे जिस्म में सिर्फ़ हवस ही हवस भर गई थी … और क्यों ना भरे, ऐसा लंड पाकर तो बुढ़िया भी जवान हो जाए.

    अब रवि ने अपने दोनों हाथ पीठ के नीचे लगाए और धीरे-धीरे लंड को अन्दर-बाहर करने लगे.

    मैंने अपने पैर अपने पेट पर मोड़ लिए, जिससे लंड अन्दर-बाहर करने में थोड़ी आसानी हो.

    मेरी चूत का सफ़ेद-सफ़ेद सा गाढ़ा चिकना तरल रवि जी के लंड से चिपक कर बाहर आ रहा था

    आज मुझे पता चला कि असली संभोग क्या होता है.
    इतने सालों से मेरे पति सुनील के साथ कभी इतना मज़ा नहीं आया था.

    मैं मन ही मन अपनी उस सहेली को थैंक्स बोलने लगी, जिसने मुझ पर शादी के लिए दबाव बनाया था.

    अब तक मेरा पूरा दर्द ख़त्म हो गया था और मज़ा आने लगा था.

    उन्होंने धक्कों की स्पीड बढ़ा दी.
    मैं भी उनकी पीठ को सहलाने लगी.

    वे ज़ोर-ज़ोर से लंड पेलने लगे.
    जोश में मेरे नाखून उनकी पीठ पर गड़ने लगे.

    ‘आह चोदो रवि जी … आह मेरे राजा चोदो मुझे … इस चूत में जो आग लगी है आह उसे आज बुझा दो … अब से मुझे रोज़ ऐसे ही चोदना … ऐसी तो मैं कभी नहीं चुदी … आ आआह फ़ाड़ डालो रवि जी प्लीज़ … आआह उफ़्फ़ फ़क्क्क …’
    मेरा पानी झड़ने वाला था तो मैंने ज़ोर से रवि जी को कस लिया और अपने पैरों से उनकी जांघों को लपेट लिया.

    मैं खुद अपनी गांड उठा कर नीचे से झटका मारने लगी.
    ऊपर से रवि जी के झटके मेरी चुत को भोसड़ा बनाने पर तुले हुए थे.

    ‘आआह उऊऊई चोदोओओ …’

    हम दोनों के बदन की थरथराहट के बीच मेरी नाज़ुक चूत पिस कर झड़ गई थी.
    मैं चिपकी रह गई थी.

    ये देख वे भी रुक गए और बस हम दोनों कुछ मिनट तक ऐसे ही पड़े रहे.

    फिर रवि जी ने अपने लंड को बाहर निकाला तो मैंने देखा कि वह एकदम लाल हो चुका था.
    मेरी चूत भी लाल हो गई थी.

    लेकिन रवि जी अभी भी भूखे थे.
    उन्होंने मुझे उल्टा पटक कर कुतिया बनाया और पीछे से चुत में वापस लंड डाल दिया.

    उन्होंने पलक झपकते ही मेरी कमर पर अपने दोनों हाथ जमाए और झटके मारने लगे.
    उनके लंड के आगे मेरी चूत छोटी पड़ रही थी.
    इसलिए हर झटका मेरी ब/च्चेदानी को छू रहा था.

    इससे मैं फिर से तैयार होने लगी.
    मैंने मुँह बेड पर टिका लिया और झटकों का मज़ा लेने लगी.

    हर ज़ोरदार प्रहार के साथ मैं आगे को होती जा रही थी, इसलिए रवि जी ने मेरे हाथ पकड़े और पीछे की तरफ़ खींचने लगे.

    तभी अचानक से करंट बढ़ा और मैं फिर से झड़ने वाली हो गई थी.
    रवि जी के लंड के प्रहारों के सामने मेरी चूत टिक नहीं पाई और एक बार फिर झड़ गई.

    फिर वापिस उन्होंने मेरे मना करने के बावजूद मुझे सीधा लिटाकर पेलना शुरू कर दिया.
    जैसे ही वे झड़ने वाले थे, उनकी स्पीड बढ़ गई.
    हैपी एंडिंग सेक्स करती हुई मेरी ब/च्चेदानी से लंड टकराने से मैं तीसरी बार खाली हो गई.

    इस बार वे भी मुझे मेरे होंठों को चूसते हुए खाली हो गए.

    उस दिन मैं सुनील को भूल गई थी.
    रवि ही मुझे सुनील लगने लगे थे.
    उनका प्यार पाकर मैं निहाल हो गई थी.

    अब मैं रवि जी से रोज़ खुल कर चुदवाने लगी थी.
    यह मेरे जीवन की सेक्स कहानी उन जवान विधवाओं को समर्पित है जो अपनी शर्म को छोड़ कर जीवन का आनन्द लेने के लिए आगे बढ़ने में संकोच करती हैं.

    मैं उन्हें कहना चाहती हूँ कि जीवन में सेक्स करना एक प्राकृर्तिक क्रिया है और यह हरेक के जीवन में कुछ ही समय के लिए कारगर होटी है.
    इससे कोई समस्या नहीं है, प्लीज जीवन का आनन्द जरूर लें.

    आप मुझे मेरी हैपी एंडिंग सेक्स कहानी के लिए अपने विचार जरूर पोस्ट करें.

  • कुंवारी गर्लफ्रेंड के साथ पहली बार चुदाई

    वर्जिन गर्ल फर्स्ट सेक्स कहानी में मेरी दोस्ती एक लड़की से हो गयी. मैंने उसे प्रोपोज भी कर दिया. हम सेक्सी बातें करने लगे और अपने पहले सेक्स के लिए उतावले थे.

    दोस्तो!
    मेरा नाम राहुल है और मैं आगरा का रहने वाला हूँ.
    मैं अभी हाल ही में अपनी b.sc. पूरी की है.

    मेरी हाईट 5 फुट 8 इंच है और मेरे लन्ड का साइज 7 इंच है.

    फिलहाल मेरी उम्र 23 साल है।

    मैं इस साइट का नियमित पाठक हूँ.
    यहाँ बहुत सी उत्तेजित कहानियां पढ़ कर मुझे लगा कि मैं भी अपनी कहानी आपके साथ शेयर करूं।

    मेरी यह पहली कहानी है तो आप मुझे मेरे मेल आईडी पर अपना बहुमूल्य मत साझा करें।

    तो वर्जिन गर्ल फर्स्ट सेक्स कहानी में अब मैं आपको काजल के बारे में बारे में बताता हूँ.
    वह मुझे अपनी ग्रेजुएशन के दौरान ही मिली थी.

    वह दिखने में एकदम सिंपल सेक्सी जीरो फिगर वाली लड़की है, उसके बूब्स 30, कमर 26 और गांड 32 की है।

    तो अब आपको ज्यादा बोर न करते हुए कहानी पर आते हैं.

    यह कहानी आज से 2 साल पहले की है.
    इस समय तक मैं और काजल अच्छे दोस्त बन चुके थे.
    हम दोनों आपस में हर तरह बात शेयर किया करते थे।

    मैं उसे मन ही मन पसंद करता था.
    तो मैंने उसे वेलेंटाइन वाले दिन प्रपोज करने का सोचा.

    पर उस समय मेरी गांड भी फट रही थी कि कहीं वह मना ना कर दे!

    जैसे तैसे करके मैंने उसे लाल गुलाब देकर प्रपोज कर दिया.
    लेकिन हुआ कुछ उल्टा!
    पता चला कि वह भी मुझे पसंद करती थी और उसने मेरा प्रपोजल स्वीकार कर लिया।

    फिर मैं उसे पास ही के एक पार्क में ले गया.
    वहाँ जाकर हमने थोड़ी बहुत इधर उधर की बातें की.

    और अचानक से मैंने उसके लिप्स पर किस कर दिया.

    उसे समझ नही आया कि क्या हुआ और उसने अपनी आंखें बड़ी कर ली.
    मुझे लगा कि वह गुस्सा हो गई.

    लेकिन उसने कोई रिस्पॉन्स नहीं दिया और मैं उसके लब चूसता ही रहा.
    थोड़ी देर बाद वह भी जोश में आ गई तो उसने भी मुझे किस करना शुरू कर दिया.

    मैं धीरे धीरे आगे बढ़ा और उसके कमीज के ऊपर से ही उसके छोटे छोटे मजेदार बूब्स को सहलाना शुरू कर दिया.

    उसे जोश आने लगा तो वह वहीं घूम कर मेरे पैंट में बने हुए लन्ड के तंबू के ऊपर बैठ गई और पागलों की तरह मुझे किस करने लगी।

    थोड़ी देर बाद मुझे पता लगा कि कुछ लड़के हमारी तरफ आ रहे हैं.
    मुझे समझ आ रहा था कि वे क्या करने वाले हैं.

    इसीलिए मैंने उसे रोका और हम वहाँ से खिसक गए।

    फिर रात को हमारी फोन पर बात हुई.

    शायद दिन में जो जोश हमें आया था, वह ठंडा नहीं हुआ था.
    तो हमने फिर फोन सेक्स करना शुरू कर दिया.

    शायद यह इसीलिए भी था कि अब तक न उसने किसी के साथ सेक्स किया था और ना ही मैंने!

    कुछ दिन तक ऐसे ही रात को न्यूड वीडियो कॉल पर ही सेक्स चलता रहा.

    फिर हमारे एग्जाम्स भी पास आ रहे थे, उसी टाइम उसके घर वालों उनके गांव जाना था.
    लेकिन एग्जाम्स और असाईनमेंट्स की वजह से वह नहीं गई.
    तो उसके घर वालों ने उसके पड़ोस की लड़की को उसके पास सोने के लिए बोल दिया।

    जब यह बात उसने मुझे बताई तो मैं मन ही मन खुश हो गया और उससे मिलने की बात की.
    तो उसने बोला कि रात को 11 बजे कंडोम लेकर उससे मिलने आऊं।

    फिर उसके इतना बोलने पर 10 बजे मैं घर से निकल गया और ठेके से जाकर 2 बीयर ले ली.
    लेकिन मैंने कंडोम नही लिया क्योंकि मैं पहली बार बिना कंडोम के ही करना चाहता था।

    जब मैं उसके घर पहुंचा तो उसे फोन किया.
    तो वह और उसके साथ वाली लड़की दोनों दरवाजे पर आ गई.
    मैं दूसरी लड़की को देख कर एकदम चौंक गया क्योंकि काजल ने मुझे उसके बारे में कुछ बताया ही नहीं था.

    वैसे उस लड़की का नाम प्रिया था, वह दिखने में बहुत ही मस्त माल थी साली!
    उसके बूब्स 32, कमर 28 और गांड 34 की थी.

    मैंने उसको भी चोदा था. उसकी कहानी मैं आपको बाद मैं बताऊंगा, आज मैं सिर्फ आपको काजल की चुदाई के बारे में ही बताता हूँ।

    फिर काजल ने बताया कि प्रिया बस उसकी हेल्प के लिए ही है और उसे सब पता है.
    तो मैं थोड़ा नॉर्मल हुआ.
    लेकिन प्रिया की आंखों में एक अजीब सी ही मस्ती थी।

    ये सब इग्नोर करके मैं अंदर आ गया.
    अभी तो बस मैं काजल की वर्जिन जवानी का ही मजा लेना चाहता था।

    तो हम प्रिया को नीचे छोड़ कर सीधा ऊपर काजल के रूम में आ गए.

    जैसे ही काजल ने रूम लॉक किया, वैसे ही मैंने काजल को पीछे से जकड़ लिया और उसके बेड पर पटक दिया.

    मैं उसके ऊपर कूद गया और उसे पागलों की तरह चूमने और चाटने लग गया.
    वह भी मेरा साथ देने लगी.

    फिर एक झटके में ही मैंने उसकी शर्ट और सलवार उतार फैंकी.
    उफ्फ दोस्तो … क्या बताऊं! मैं पहली बार किसी लड़की को ब्रा और पैंटी में देख रहा था.

    मैं तो मानो जैसे पागल हो गया और अगले ही पल उसकी ब्रा भी निकाल फेंकी और उसके निप्पल को मुंह में लेकर चूसने लग गया।

    फिर उसने मुझे धक्का दिया और बोली- मुझे ही नंगी करोगे या खुद अपना भी आजाद करोगे? देखो कैसे पैंट में से बाहर आने को उतावला है।
    मैं- तुम खुद ही आजाद कर दो ना इसे मेरी जान!

    बस इतने कहने की ही देर थी कि अगले ही पल उसने मेरे सारे कपड़े निकाल दिए और मेरे लन्ड को अपने हाथ में लेकर बोली- उफ्फ राहुल … मेरी चूत बहुत छोटी है. यह अंदर कैसे जायेगा?
    मैं- देखून तो कैसी है?

    इतने में मैंने उसकी पैंटी निकाल के उसे पूरी नंगी कर दिया और उसकी चूत को अपने हाथ से सहलाने लगा.
    काजल- उफ्फ आह … ओह यस बेबी हा हा ओह!
    वह ऐसे ही जोर जोर से सिसकारियां ले रही थी.

    फिर मैंने उससे लन्ड चूसने को कहा.
    तो वह मना करने लगी.

    उसके मना करने पर मैं उसके बूब्स पर टूट पड़ा और जोर जोर से चूसने और काटने लगा.
    मैं अपने एक हाथ से उसकी चूत सहला रहा था.

    और फिर अपनी एक उंगली मैंने उसकी चूत में डाल दी.
    तो वह एकदम सिहर उठी.

    सच में यार बहुत टाइट थी उसकी चूत!
    मैं उसकी चूत में उंगली करता रहा.

    पहले तो उसे थोड़ा दर्द हुआ, फिर बाद में वह गांड़ उठा उठा कर मेरी उंगली अपनी चूत में लेने लगी.
    और वह बस जोर जोर से सिसकारियां ले रही थी.
    साथ ही मेरे लन्ड को अपने हाथ से आगे पीछे कर रही थी।

    फिर जब उससे रहा न गया तो उसने मेरा लन्ड अपनी चूत में लेने को कहा.
    मैं भी अपना लन्ड उसकी चूत में डालने को बेकरार था।

    अगले ही पल में उसकी चूत के पास आ गया और अपना लन्ड उसकी चूत के ऊपर सेट किया और एक धक्का दिया.
    तो मेरा लन्ड फिसल गया.
    थोड़ी और कोशिश करने पर भी अंदर नहीं गया.

    फिर मैंने उसके बेड के पास रखी वेसलीन देखी तो ढेर सारी वेसलीन अपने लन्ड पर लगा ली और थोड़ी उसकी चूत पर भी लगा दी.
    मैं समझ गया था कि काजल ने इसी लिए वेसलीन लाकर रखी हुई थी.

    तब मैंने उसकी चूत को थोड़ा खोलकर उसमें एक जोरदार धक्का लगाया और मेरा लन्ड का आगे का हिस्सा उसकी चूत में था.

    तो वह एकदम से चिहुंक उठी और चिल्लाने ही वाली थी कि मैंने अपने होठों से उसके होंठ बंद कर दिए.
    लेकिन वह अपने हाथों से मुझे पीछे धकेलने लगी.

    तो मैंने उसे पूरा जकड़ लिया तो वह कुछ कर नहीं सकती थी।

    फिर मैंने उसके लब चूसने और उसके बूब्स सहलाने शुरू कर दिए.
    फिर थोड़ी देर बाद वह थोड़ी नॉर्मल हुई तो मैंने बिना देर किए एक और धक्का लगा दिया.

    इस बार तो मुझे भी ऐसा लगा कि जैसे मेरा लन्ड ही फट गया हो.

    और काजल का भी हाल बेहाल था.
    वह छटपटाने लगी और उसकी आंखों से आंसू बह रहे थे.

    और मुझे भी बहुत दर्द हो रहा था.

    तभी मेरी नजर पास ही टेबल पर रखी बीयर पर गई जो मैं लेकर आया था।

    मैंने उसकी चूत में लन्ड डाले डाले ही बीयर उठाई.
    एक मैंने ली और एक उसे दे दी और बोला- इससे दर्द थोड़ा कम होगा.

    फिर हम दोनों ने अलग होकर बीयर पीकर खत्म की.

    तब तक थोड़ा दर्द भी कम हुआ तो मैंने अपना पूरा लन्ड उसकी चूत में ही डाल दिया.
    उसकी चूत से खून आने लगा.

    लेकिन थोड़ा सा बीयर का और थोड़ा हमारी हवस का नशा हमारे सिर चढ़ा हुआ था तो दर्द ज्यादा महसूस नहीं हुआ.

    फिर मैं धीरे धीरे लन्ड आगे पीछे करने लगा और हमारी चुदाई शुरू हो गई.

    और थोड़ी देर बाद तो हम जैसे दर्द को भूल ही गए।
    हमारी धकापेल चुदाई शुरू हो गई.

    और थोड़ी देर बाद तो हम जैसे दर्द को भूल ही गए।
    हमारी धकापेल चुदाई शुरू हो गई.

    काजल जोर जोर से सिसकारियां लेने लगी.
    हम दोनों इतने मदहोश हो गए कि प्रिया के बारे में बिल्कुल ही भूल गए.
    बस हमें अब अपनी चुदाई से मतलब रह गया था।

    काजल- आह आह … उफ्फ यस राहुल … चोदो उफ्फ … आह ओह हां हां … यस चोदो मुझे!

    मुझे उसकी ये सिसकारियां सुन के जोश चढ़ने लगा और मैं बस उसे चोदने के बारे में ही सोच रहा था.

    मेरे दिमाग में बस उसकी चूत और बूब्स का ही ख्याल था … और किसी चीज का मुझे होश ही नहीं था.

    मैं बस उसे जोर जोर से चोदे जा रहा था और वह सिसकारियां ले रही थी.

    उसकी मादक सिसकारियों से पूरा कमरा गूंजने लगा.
    और मेरा लन्ड अपनी पहली चूत चुदाई का पूरा अहसास ले रहा था.

    फिर कुछ देर बाद वह वर्जिन गर्ल फर्स्ट सेक्स करके झड़ गई और निढाल होकर बेड पर लेट गई.

    लेकिन यह मेरी पहली चुदाई का अनुभव था तो मैंने उसे चोदना बंद नहीं किया और उसे लगातार चोद रहा था.
    फिर करीब 2 मिनट बाद मेरा लन्ड भी अपना रस छोड़ने वाला था तो मैंने उसकी चूत से अपना लन्ड निकाला और उसके बूब्स पर अपना रस छोड़ दिया.
    और फिर मैं उसी के ऊपर लेट गया।

    थोड़ी देर बाद उसे होश आया तो उसने मुझे अपने ऊपर से बगल में लिटा दिया और मुझसे चिपक कर सो गई।

    और मैं भी थका हुआ था मुझे भी नींद आ गई.
    सुबह जब हम उठे तो उसकी चूत और मेरा लन्ड दोनों ही दर्द कर रहे थे.

    अब न मुझमें उसे चोदने की हिम्मत हो रही थी और न ही उसे चुदवाने की.
    तो मैंने अपने कपड़े पहने और उसे किस करके घर आ गया।

    अब तो हम दोनों ही चुदाई का मजा ले चुके थे.
    तो अब हमें जब भी मौका मिलता, हम चुदाई कर लेते थे.

    फिर उसने प्रिया को भी मुझसे चुदवाया.
    वह मैं आपको अगली कहानी में बताऊंगा।

    तो दोस्तो, कैसी लगी आपको मेरी पहली चुदाई की वर्जिन गर्ल फर्स्ट सेक्स कहानी?

  • भाभी की महीनों की चुदाई की प्यास बुझाई

    भाभी की चुदाई हिंदी कहानी में मेरे ताऊ जी की पुत्रवधू पति से अलग ससुराल में रह रही थी. तो उनकी चूत चुदाई नहीं हो रही थी. मैंने भाभी की जरूरत को समझ कर उनकी चूत और गांड का मजा लिया.

    नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम दीप है. मैं उत्तराखण्ड के देहरादून में रहता हूं.
    मेरी उम्र महज 19 साल ही है लेकिन मेरा 7 इंच का लंड, प्यासी भाभियों के लिए काफी मस्त है.

    यह मेरी पहली चुदाई की पहली कहानी है.
    मेरी भाभी की चुदाई हिंदी कहानी की मुख्य पात्र मेरी 32 साल की कमसिन भाभी हैं … जिनका 36-30-38 का फिगर बड़ा ही लाजवाब है.
    वे मेरे ताऊजी के लड़के की बीवी हैं.

    उनके तने हुए दूध देखकर तो हमेशा ही मेरा लंड तन जाता था.
    दरअसल मेरी भाभी भैया के साथ बंगलोर में रहती हैं.

    फरवरी के महीने भाभी अपने पति के साथ घर आई हुई थीं.

    भैया को अचानक से अपने काम के सिलसिले में वापस जाना पड़ गया.
    तो भाभी यहां बाकी परिवार के साथ ही रहने लगीं.

    एक दिन भाभी का सैड स्टेटस देखने के बाद मैंने यूँ ही रिप्लाई कर दिया.
    तो उसके बाद भाभी के साथ मेरी कुछ अलग सी बातें शुरू होने लगीं.

    कुछ ही दिनों में भाभी ने मुझसे अपने दिल की बात बताते हुए कहा कि वे मुझसे प्यार करती हैं.
    मैं तो था ही उनके लिए पागल!

    अब भाभी मेरी गर्लफ्रेंड बन गई थीं.
    हम दोनों फ़ोन पर सामान्य बात करते करते किस करने लगते और सेक्स की भी बातें करने लगते थे.

    भाभी ने मुझे वीडियो कॉल पर अपने बूब्स भी दिखाए थे और मेरा तना हुआ लंड भी वीडियो कॉल पर देखा था.

    अब हम दोनों को अपने लंड और चूत के मिलन का इंतजार था.

    एक दिन भाभी ने मुझे मिलने के लिए बुला लिया.

    उस दिन एग्जाम के कारण मुझे आने में थोड़ी देर हो गई.
    मैं भाभी के घर होते हुए अपने घर आया.

    उनके घर जाकर मैं भाभी के मन की बात समझ गया था लेकिन उनके परिवार के अन्य लोगों के होते मैं कुछ नहीं कर सकता था.

    कुछ दिन और यूँ ही चला, हम दोनों की कामुक भावनाएं भड़कती रहीं.

    फिर आखिर वह दिन आ ही गया, जब मैंने भाभी की प्यास बुझाई … और मेरी प्यास भाभी ने!

    यह मई महीने की बात है.
    मैं उस दिन भाभी के घर गया था.

    उनके घर पर कोई नहीं था तो मैंने भाभी को किस करना चालू कर दिया.
    भाभी ने भी पूरा साथ दिया.

    मैं किस करते करते भाभी के 36 इंच के दूध दबाने लगा और उनकी गर्दन को चाटने लगा.

    भाभी भी ‘आह … उह … इस्स’ की आवाज़ें निकालकर मुझे मदहोश कर रही थीं मगर हमारे पास सिर्फ किस करने का ही वक्त था.
    उनके घर के बाकी के लोग घर वापस आने वाले थे.

    भाभी की चुम्मियां लेने से मेरी वासना ने उग्र रूप धारण कर लिया था और अब भाभी की चूत चोदे बिना शांति नहीं मिलने वाली थी.

    इसलिए उस दिन मैंने भाभी के घर पर ही रुकने का फैसला कर लिया.

    रात को खाना खाने के बाद मैं बैठक वाले कमरे में सोने गया.
    पर नींद किसे आने वाली थी.

    जब भाभी को लगा कि सब सो गए हैं तो भाभी ने मुझे अपने कमरे में बुलाने के लिए कॉल किया.

    उनका कॉल देख कर मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था.
    जिंदगी में पहली बार मैं आज अपनी जवानी जीने वाला था, वह भी भाभी के साथ.

    वैसे तो मैं अब तक और चूत चोद चुका था पर भाभी के साथ दिल लग गया था.

    मैं जल्दी से उनके रूम में आ गया.
    भाभी बेड पर लेटी हुई थीं.

    मैं उनके पीछे जाकर चिपक कर लेट गया.

    भाभी को मेरी महक मिल गई थी और वे काम से पीड़ित मादा की भांति अपनी गांड मेरे लौड़े से रगड़ने लगी थीं.

    पीछे से ही मैं भी उनकी गर्दन को किस करने लगा.
    मैं अपने हाथ कभी उनकी पीठ पर फेरता, तो कभी गर्दन पर … और कभी टी-शर्ट के बाहर से ही उनके मम्मों पर अपने हाथ दबा कर दूध दबाने का मजा लेने लगता.
    कभी मैं उनके लोअर के अन्दर अपने एक हाथ को डाल कर उनकी टांगों के बीच में छेद को टटोलने लगता.

    मुझसे अब सब्र नहीं हो रहा था.
    तो मैंने अपना एक हाथ टी-शर्ट के अन्दर डालकर उनके मम्मों को दबाना चालू कर दिया.

    भाभी भी काफी गर्म हो चुकी थीं, उनकी चूत में कब से लंड नहीं गया था.

    वे मेरी तरफ पलटीं और हम दोनों के होंठ एक हो गए.

    भाभी को करीब 10 मिनट तक किस करने के बाद मैंने उनकी टी-शर्ट हटा दी.

    वे मेरे सामने एक पिंक कलर की ब्रा पहनी हुई थीं और अपनी जवानी दिखा कर मुझे मदहोश कर रही थीं.
    उनकी ब्रा के ऊपर से ही मैंने उनके मम्मों को दबाना चालू किया और उनके सारे बदन को चूमा.

    मैंने भाभी से पूछा- आपने कितने समय से सेक्स नहीं किया है?
    भाभी ने धीमी आवाज़ में जवाब दिया- मैं फरवरी से प्यासी हूँ.

    भाभी की चुदाई हिंदी कहानी बनने का रास्ता साफ़ हो चुका था.

    मैंने कहा- क्यों आपको कोई और नहीं मिला!
    वे बोलीं- यह मेरी ससुराल का घर है, यदि मैं बंगलोर में होती तो अब तक सत्तर लंड मेरी चूत में घुस चुके होते!

    मैंने कहा- अरे वाह … इसका मतलब आप तो पूरी लंड खोर हैं!
    वे हंस दीं और बोलीं- क्यों तू चूत खोर नहीं है क्या?

    मैंने कहा- हां, मैं भी चूत का आशिक हूँ और अब तक छह चूत चोद चुका हूँ … आज आप सातवीं हैं!

    भाभी मेरे लंड को टटोलती हुई बोलीं- जब से मैंने तेरे लंड को वीडियो कॉल देख लिया था, तभी से इसके लिए पागल हूँ.

    मैंने कहा- भैया का लंड कैसा है?
    वे हंस कर बोलीं- उनका भी मस्त है … तुझे अपनी गांड में लेना हो तो मैं उनसे बात कर सकती हूँ.

    मैंने हंस कर कहा- अरे रहने दो भाभी, मैं छोटी लाइन वाला बंदा नहीं हूँ. मुझे तो चूत चोदना ही पसंद आता है!

    भाभी बोलीं- क्यों गांड मारने का शौक भी नहीं है?
    मैंने कहा- अब तक किसी ने पीछे की दी ही नहीं. यदि आप गांड मरवाने के लिए राजी हों, तो मुझे उसका भी स्वाद मिल जाएगा!

    भाभी लंड को सहलाने लगीं और बोलीं- पहले चूत में अपनी ताकत दिखा कर मुझे खुश कर … बाद में गांड में लेने की भी सोच सकती हूँ.
    मैंने उनके दूध को मसलते हुए कहा- भैया आपकी गांड मारते हैं क्या?

    वे बोलीं- अरे उन्हें तो गांड मारने में ही मजा आता है, तभी तो मेरी चूत लंड के लिए प्यासी ही रहती है. यूं समझो कि तुम्हारे भैया चार बार गांड मारेंगे तब एक बार चूत में लंड पेलते हैं.

    मैंने कहा- अरे वाह भाभी … इसका मतलब तो आपकी हर रात में पांच बार चुदाई होती है?
    वे बोलीं- नहीं रे बुद्धू … तेरे भैया एक रात में एक ही बार चुदाई करते हैं. वह तो मेरे कहने का मतलब यह है कि वे चार बार गांड का मजा ले लेते हैं … तब मेरे कहने पर अगली बार मेरी चूत में लंड पेलते हैं!

    मैंने कहा- अरे, इसका मतलब तो यह हुआ कि वे गे भी हो सकते हैं!
    भाभी हंस कर बोलीं- हां यार, तेरे भैया गांडू ही हैं. उन्हें अपने गांडू दोस्तों से गांड मरवाने में भी मजा आता है. वे मुझे छोड़ कर बंगलोर इसी लिए तो गए हैं ताकि वे अपनी गांड मारने और मरवाने की खुजली मिटवा सकें.

    मैंने कहा- तो आप उनसे कुछ कहती नहीं हैं?
    भाभी- पहले पहल तो मैंने उनसे खूब कहा, पर उन्होंने मुझे भी छूट दे दी कि मैं जिससे चाहूँ चुद सकती हूँ, तभी तो मैंने तुम्हें अपना सही साथी चुना है!

    मैंने कहा- अरे भाभी, यदि आपको तरह तरह के लंड से चुदने का शौक है तो मैं आपके लिए लंड की लाइन लगा दूंगा.
    यह सुनकर भाभी खुश हो गईं और बोलीं- पहले तुमसे चुद कर मजा ले लेने दो फिर बाद में एक साथ दो लंड से चुदने का मजा भी ले लूँगी.

    उनकी सेक्सी बातें सुनकर मेरे लौड़े को तो मानो पंख लग गए थे.

    इसी दौरान मैं भाभी के बदन को किस करते करते उनकी कमर तक पहुँच गया.

    अब वक्त आ गया था, जब भाभी के लोअर को उतार कर उनके बदन से अलग करना था.

    भाभी का लोअर उतारते ही मैं अपने हाथों को उनकी जांघ पर फेरने लगा और ब्रा के ऊपर से ही चूचे चूसने लगा.
    अपना हाथ मैं उनकी गांड पर फेरने लगा.

    अब बारी भाभी के ब्रा की थी.
    ब्रा उतारते ही भाभी के 36 इंच के दूध मेरे सामने आज़ाद होकर गजब फुदक रहे थे.

    मुझसे रहा नहीं गया और मैं तुरंत ही उनके दोनों बूब्स दबाने चूसने और काटने लगा.
    भाभी तो मानो मदहोश हो चुकी थीं.

    भाभी की चूचियां चूसते हुए मैंने अपना हाथ भाभी की पैंटी के बाहर से ही हरकत में लाना शुरू किया.
    मैंने उनकी चूत पर अपने हाथ को चलाना चालू कर दिया.

    भाभी की चूत पूरी गीली हो चुकी थी इसलिए मैंने भी देर न करते हुए उनकी पैंटी उतार कर फेंक दी और उंगली से उनकी चूत का स्पर्श करने लगा.

    उनकी गीली चूत और रसीली सिसकारियां मुझे मदहोश कर रही थीं.

    मैंने अपनी उंगली भाभी की चूत में डाल दी.
    भाभी उंगली लेते ही बिल्कुल कामुक हो चुकी थीं और वे मुझे जोर जोर से किस करने लगीं.

    जब उनसे सहन न हुआ तो वे मुझे धक्का देकर खुद मेरे ऊपर आ गईं.
    वे मेरे होंठों से गर्दन पर होती हुई छाती पर किस करने लगीं.

    मैं भी भाभी का साथ देने लगा और भाभी के बूब्स दबाने लगा.

    इतने में भाभी ने मेरी टी-शर्ट और लोअर उतार कर मुझे अंडरवियर में छोड़ दिया और लंड को ऊपर से ही सहलाने लगीं.

    अब मेरे सब्र का बांध टूट रहा था तो मैं भाभी को लेटाकर खुद उनकी चूत के सामने आ गया और उनकी चूत चाटने लगा.

    कुछ ही देर में भाभी को मजा आने लगा और वे अपने हाथ से मेरे सर को अपनी चूत पर दबाने लगीं.

    भाभी अपने मुँह से कामुक आवाज़ें निकालती हुई बोलीं- आह … बहुत मजा आ रहा है … और अन्दर तक चाटो आह आह!

    मुझे यह जानकर बड़ी हैरानी हुई कि भाभी ने आज पहली बार चूत चटवाई थी.
    भैया ने आज तक कभी उनकी चूत चाटी ही नहीं थी.
    किसी और मर्द ने भी उनकी चूत को चाटने का सुख नहीं दिया था.

    थोड़ी देर बाद मैं किस करता हुआ उनके बूब्स तक आ गया.

    भाभी ने मुझे धक्का देकर अपना कुत्ता बना लिया; मेरी अंडरवियर उतारकर भाभी खुद ही मेरे लंड पर बैठ गईं.

    एक बार में ही मेरा पूरा लंड भाभी की चूत में चला गया.
    अब भाभी लंड की सवारी करती हुई अपनी गांड को ऊपर नीचे करने लगीं.

    दस मिनट तक ऐसे ही भाभी की चूत चोदने के बाद मुझे भाभी के ऊपर चढ़कर उनको चोदना था.

    मैंने भाभी को गिरा दिया और ऊपर से आकर भाभी की चूत में लंड पेल दिया.

    करीब 10 मिनट उसकी चुदाई करने के बाद भाभी ढीली पड़कर झड़ गईं.
    उनके झड़ने के बाद मैंने तेज तेज धक्के देने शुरू किए और कुछ ही धक्कों के बाद मैं भी झड़ने को हो गया.

    भाभी ने कहा- अन्दर ही निकाल दो.
    मैं उनकी चूत में ही झड़ गया.

    कुछ देर तक एक दूसरे से चिपके रहने के बाद भाभी मेरे लंड को चूसने लगीं.

    मैं समझ गया भाभी अब रांड बनकर मुझसे और चुदना चाहती हैं.

    उन्होंने मेरा फिर से मूड बना दिया तो दूसरे राउंड की चुदाई शुरू हो गयी.

    इस बार मैंने भाभी को 15 मिनट तक लगातार अलग अलग पोजीशन में चोदा.

    फिर भाभी को अपने लंड पर बैठाकर उनकी गांड पकड़ कर उन्हें चोदने लगा.

    दस मिनट की चुदाई के बाद भाभी झड़ गईं और मेरे ऊपर ही लेट गईं.

    मैं उनकी गांड हिलाने लगा.
    लगभग 5 मिनट बाद मेरे लंड ने भी जवाब दे दिया और मैं उनकी चूत में ही झड़ गया.

    मैं भाभी को अपने ऊपर लेटाकर ही सो गया.
    अगले दिन सुबह उठकर भाभी को प्यार से किस करता हुआ अपने घर चला गया.

    दोस्तो, ये अपनी भाभी के साथ मेरी पहली चुदाई की कहानी थी.

    अगली बार उनकी गांड चुदाई व थ्री-सम चुदाई की कहानी का मजा भी आपके साथ साझा करूंगा.

  • पड़ोसी लड़के से बुर की सील तुड़वा ली मैंने

    दोस्तो, मैं अंजलि फिर एक बार एक नई सेक्स कहानी के साथ हाजिर हूँ.

    यह सेक्स कहानी मेरी एक प्रशंसिका सपना ने मुझे भेजी है और कहा है कि मैं उसके लिए इस घटना को कहानी के रूप में लिख कर अन्तर्वासना या फ्री सेक्स कहानी की साइट पर प्रकाशित करवाऊं.

    इस कहानी में गोपनीयता के लिहाज से सब नाम बदले हुए हैं.

    इस सेक्स विद टीनऐज गर्लफ्रेंड कहानी को आप सपना के शब्दों में सुनें.

    नमस्ते दोस्तो, मेरा नाम सपना है और मैं सूरत से हूं.
    मेरी उम्र 28 वर्ष है और मेरी शादी हो चुकी है, मेरा एक बेटा भी है.

    आज मैं जो कहानी बताने जा रही हूं, यह मेरी जीवन की एक सच्चाई है.

    यह घटना आज से सात साल पहले शुरू हुई दास्तान है जो हमारे पड़ोस में रहने आए एक व्यक्ति के साथ शुरू हुई थी.

    मेरे घर में हम चार लोग थे. मैं, मेरी बहन खुशबू, मां विमला और हमारे पापा अशोक.
    मेरे पापा एक कपड़े की मिल में मुंशी हैं.
    मां घर में ही रहती हैं. हम दोनों बहनों की पढ़ाई चल रही थी.

    मेरा पढ़ाई में मन बिल्कुल भी नहीं लगता था, बस ग्रेजुएशन पूरा कर रही थी.

    वहीं खुशबू पढ़ने में ज्यादा होशियार थी इसलिए वह सबकी लाड़ली भी थी.

    खुशबू मुझसे केवल एक साल ही छोटी है.
    तब मैं 21 साल थी.

    एक दिन हमारे घर के ठीक सामने एक परिवार रहने आया.
    उसमें माता पिता और उनका एक लड़का था, जो 25-26 वर्ष का होगा.

    उस परिवार का परिचय हम सबसे हुआ तो पता लगा कि उस लड़के का नाम विपुल है, वह एक मेडिकल कंपनी में काम करता है.

    वह अक्सर छत पर दिखता था और हमें ही घूरता रहता था.
    खुशबू उस पर ध्यान नहीं देती थी, पर मैं भी उसे ही देखती थी.
    मुझे वह अच्छा लगता था.

    कुछ दिनों बाद उसके माता पिता चले गए और अब विपुल अकेला ही रह गया था.

    मेरे पापा पर उनके सेठ जी को सबसे ज्यादा भरोसा था इसलिए वे पापा के ऊपर ही सारी जिम्मेदारी दिए रहते थे.
    इसी कारण से पापा कुछ ज्यादा ही व्यस्त रहते थे.
    वे घर पर ज्यादा ध्यान नहीं दे पाते थे.
    इस कारण से मां अक्सर नाराज रहती थीं.

    एक बार कुछ काम पड़ा तो मां बोलीं- जा, विपुल को बुला कर ला!

    हम दोनों बहनों को थोड़ा अजीब लगा कि ज्यादा जान पहचान नहीं है … और मां उसे बुलाने के लिए पूरे जोश से बोल रही हैं.

    मां और विपुल में क्या बात हुई, ये तो पता नहीं … पर उसने उसी वक्त हमारी मदद के लिए कुछ पैसे दिए थे.

    विपुल मुझे अच्छा लगता था, उसका कद 5 फुट 10 इंच का था.
    उसने अपने शरीर का काफी ध्यान रखा था और काफी स्मार्ट था.

    वहीं मेरा कद 5 फुट 5 इंच का था और फिगर 30-28-32 का था.

    मैं विपुल को अपना बॉयफ्रेंड ही मानने लगी थी.
    लेकिन वह क्या सोचता था, इसका मुझे कुछ नहीं पता था.

    मां काफी देर तक उससे बातें करती थीं.

    तब मेरी समझ में यह नहीं आया था कि ऐसा क्यों होता था?

    हमारी परीक्षाएं खत्म हो गई थीं.

    उसके एक दिन पहले हमारे मोहल्ले में एक पार्टी थी और सभी को बुलाया गया था.

    तय समय पर हम सब पार्टी में पहुंच गए.

    मेरी मां पहले से ही वहां थीं, जो अपनी सहेलियों से बात कर रही थीं.
    वहां वे विपुल के साथ दिख रही थीं.

    मैं वहां गई तो विपुल ने मेरी गांड पर धीरे से हाथ फेर दिया.
    जब मैंने मुड़कर देखा, तो उसने ऐसे देखा … जैसे कुछ हुआ ही नहीं.

    थोड़ी देर बाद उसने फिर वही एक चांटा सा धीरे से मारा और उधर से खिसक गया.

    अब मेरी नजरें विपुल को ही ढूंढ रही थीं क्योंकि वह अचानक से गायब हो गया था.
    मेरी मां भी नहीं दिख रही थीं.

    मां का तो पता था कि वह ज्यादा देर तक पार्टी में नहीं रहती हैं.

    रात के बारह बजे तक पार्टी खत्म खत्म होने को थी.
    सब खत्म होने के बाद मैं भी घर लौटी, तो देखा खुशबू छत पर फोन से बात कर रही थी और मां सो चुकी थीं.

    अगले दिन पापा ने खुशबू से कहा- विपुल को बुलाओ.
    जब वह आया तो हम सभी थे.

    पापा ने उससे कहा कि वह मुझे पढ़ाई में हेल्प करे!
    शायद पापा ने इसलिए कहा था क्योंकि यह मेरा आखिरी साल था.

    पहले उसने कुछ नखरे दिखाए, फिर मां ने कहा- थोड़ा ध्यान दो, मुझे तुमसे कुछ उम्मीद है.
    इस पर वह तैयार हो गया.

    मैं भी काफी खुश थी कि मुझे उसके साथ समय बिताने को मिलेगा.
    वहीं वह मेरी मां की तरफ देख रहा था और वे दोनों हंस रहे थे.

    मेरे प्रति उसके व्यवहार में कुछ फर्क आ गया था.
    अब वह मुझ पर एक हक सा जता रहा था.

    पढ़ाते हुए उसके हाथ मेरे जिस्म से टकरा जाते थे, तो कभी वह मेरे बूब्स पर हाथ से सहला देता.

    मुझे भी अच्छा लगता था इसलिए मैं भी उससे चिपक कर बैठ जाती थी.
    जिससे उसकी हिम्मत बढ़ गई.

    एक दिन पढ़ाते हुए उसने अचानक से मेरी चूत पर हाथ रखा और सहलाने लगा.
    मेरे मुँह से ‘आह …’ निकल गई.

    तभी उसने मुझे कमर से पकड़ लिया और दबाते हुए बोला- क्या हुआ, तुम ठीक हो न?
    मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि क्या कहूं?

    वह लगातार मेरी चूत सहलाता रहा.
    इससे पहले कि मैं कुछ कहती, उसने मुझे कस कर दबाया और मुझे किस करने लगा.

    इसमें पता ही नहीं चला कि कब मैं झड़ गई.
    तभी उसने मुझे छोड़ते हुए कहा कि हो गया काम!
    फिर वह उठकर चला गया.

    मैं यही सोचती रही कि ये क्या हुआ, सही था या नहीं?

    फिर मां से कहकर मैं अगले दिन कॉलेज चली गई.
    और जब लौटी तो देखा कि वह पहले से मौजूद है.

    मां मुझे आया देख कर वहां से बाहर निकल गईं.
    अब ये रोज होता था.

    मेरे से पहले वह मौजूद रहता था और मेरे शरीर को छूने के बहाने ढूंढता था.
    यह मुझे भी अच्छा लगता था.

    फिर एक दिन उसने पूछा- क्या हुआ आज कॉलेज में?
    मैं- कुछ खास नहीं, आज बस दो ही क्लास हुईं.

    विपुल- कौन कौन सी?
    यह कहते हुए वह आगे बढ़ा और मुझे अपनी बांहों में जकड़ लिया और मेरे माथे पर, आंखों पर किस करने लगा.

    तभी मैंने भी उसका लंड पकड़ लिया, जो तन रहा था.
    उसे शायद उम्मीद नहीं थी.

    तभी मैंने कहा- क्या है ये सब?
    वह मुझे अपनी बांहों में कसते हुए तेज आवाज में बोला- आंटी, आज मैं सपना को अपने साथ ले जा रहा हूं और इसको वहीं पढ़ा भी दूंगा.

    मैं धीमे से बोली- इसका क्या मतलब हुआ?
    विपुल- आज तुम्हें, तुम्हारी मां से मांग रहा हूं.

    इससे पहले कि मैं कुछ समझती कि मां ने जवाब देते हुए कहा- हां ठीक है, ध्यान रखना.
    विपुल बोला- हां जी बिल्कुल.

    उसने मुझे चलने का इशारा किया.

    मैं- वहां क्यों आज?
    विपुल- यहां कुछ सही नहीं लग रहा है … पता नहीं क्यों आज मजा नहीं आ रहा. मैं तुम्हारे दोनों होंठों को चखना चाहता हूं.

    मैं समझ गई कि यह मेरे नीचे वाले होंठों को जोड़ कर दोनों होंठों को चखने की बात कर रहा है.
    मैंने भी न जाने कौं सी रौ में कह दिया- अभी तक एक ही को लिया है क्या?

    वह शायद सुन नहीं पाया था.
    मेरा मतलब यह था कि क्या उसने अब तक किसी की चूत नहीं चोदी है क्या!

    घर पहुंचते ही उसने दरवाजा बंद किया और मुझे बेड पर धकेल दिया.
    फिर घूरते हुए कहा- क्या मस्त है तेरी जवानी भी!

    मैंने कहा- उस रात तुम्हीं मुझे तंग कर रहे थे न!

    विपुल- हां साली, चोदना तो मैं तुझे ही चाहता था लेकिन तेरी मां बीच में आ गई. लेकिन आज तुझे पूरा लेना होगा.
    मैं हंस कर रह गई और बोली- क्या पूरा लेना है?
    तभी उसने ‘लंड’ कहते हुए मेरी कुर्ती उतार दी.

    अब मैं सिर्फ ब्रा में थी और शर्मा कर मैंने अपनी आंखों को ढक लिया.

    मेरी आंखों पर से हाथ हटाते हुए वह मुझे किस करने लगा और अपना लंड सलवार के ऊपर से ही रगड़ने लगा.

    मैं भी मदहोश हो रही थी.

    तभी उसने मेरी सलवार भी उतार दी और बूब्स को दबाते हुए बोला- इनको तो बड़ा करना होगा.
    मैंने उसकी तरफ देखा तो वह सिर्फ अंडरवियर में था.

    मैं उठ कर उसका लंड सहलाने लगी जो अब काफी कड़क हो गया था और मोटा भी.

    हम दोनों अब एक दूसरे को चूमने लगे और एक दूसरे के जिस्म से खेल रहे थे.

    विपुल- अपनी मां से एक बात पूछेगी क्या?
    मैं- क्या?
    विपुल- वह क्या खाती थी जब तुझे पैदा किया?
    मैं- मतलब!

    विपुल- साली तू जो इतनी चिकनी है कि बस तुझे मसलते रहने का ही मन करता है.
    मैं चुदास भर स्वर में बोली- तो मसल दो न … मैंने कब मना किया है?

    मेरी चूचियों को दबाते हुए बोला- पूरी रंडी की तरह तैयार है चूत खुलवाने को!
    मैं अपने होंठ काट कर मुस्कुरा दी.

    वह मेरी चड्डी उतारते हुए मेरी जांघों को चूमने लगा और धीरे धीरे ऊपर आता जा रहा था.
    अब वह मेरी चूत में अपने होंठों को लगा कर चूसने लगा.

    मुझे चूत चुसवाने में बहुत अच्छा लग रहा था और मैं मचल रही थी.
    तभी उसने अपनी दो उंगलियां मेरी चूत में डाल दीं.

    मैंने कसमसा कर चादर को जोर से पकड़ लिया और मचलने लगी.

    कुछ ही देर में मेरा पानी निकल गया

    विपुल- साली लंड के लिए आवाज भी नहीं निकाल रही … मादरचोद, आज तेरी चूत का भोसड़ा बनाता हूं.

    वह मेरी चूत को अभी भी अपनी उंगलियों से चोद रहा था और मैं बस ‘आह ओह … ऐसे ही आज बना लो अपना आह मुझे!’ कह रही थी.

    विपुल- क्या बनाऊं साली … बहन की लौड़ी? बता न कुतिया बनेगी मेरी?
    मैं- आह … अपनी बीवी बना लो आह और मत तड़पाओ मुझे … अब चोद … दो आ … आह.

    तभी अचानक से उसने अपना 7 इंच का लंड मेरे मुँह में डाल दिया.
    विपुल- ले बहनचोद चूस इसे … आह.

    मैं भी उसका लंड चूसने लगी.
    उसका मोटा लंड मेरे गले में फंस रहा था और मैं जितनी ताकत से उसके लंड को बाहर निकालने की कोशिश करती, वह उतनी ही जोर से डाल रहा था.

    विपुल- ले साली छिनाल … आह चू….स अच्छे से मां की लौड़ी!
    मुझे उसकी गालियां अच्छी लग रही थीं.

    फिर उसने मुझे लिटा कर अचानक से एक ही झटके में मेरी चूत में अपना लंड ठांस दिया.

    मैं एकदम से लंड घुसने से जोर से चीख पड़ी.
    मुझे दर्द से बेहद तकलीफ हो रही थी.

    ऐसा लग रहा था मानो उसने मेरी चूत में गर्म खंजर घुसेड़ दिया हो.

    कुछ देर के लिए मेरी आंखें बंद रहीं.
    फिर मैं जैसे ही संभली तो देखा कि वह मुझे किस कर रहा है और धीरे धीरे लंड को चूत में अन्दर बाहर कर रहा है.

    मैं- आह बाहर निकालो … आह दर्द हो रहा है … आह अब बस … औ…र नहीं.
    विपुल- चुप साली रंडी, तेरी चूत फाड़ने के लिए अपने घर लाया हूं! ऐसे ही चुदती रह … तुझे मजा आएगा. इस वक्त मेरा लंड तेरे दूसरे होंठों को चूस रहा है बहन की लवड़ी … आज तेरे दोनों होंठों ने मेरा लंड चूसा. हां मेरी जान ऐसे ही लेती रह आह … तेरी चूत बहुत मस्त है.

    कुछ देर बाद मुझे अच्छा लगने लगा और मैं चुपचाप उससे चुदाई का मजा लेने लगी.

    फिर उसने मुझे पलटा और बोला- चल कुतिया बन जा!
    मैं जैसे ही कुतिया बनी उसने पीछे से मेरी चूत में अपना फनफनाता हुआ लंड एक झटके में ही घुसेड़ दिया और चोदने लगा.

    अब मैं भी उसका साथ दे रही थी और अपनी गांड उसके लंड के हिसाब से हिला रही थी.
    मैं भी पूरी मस्ती में आ गई थी और वह भी.

    मैं अब तक दो बार झड़ चुकी थी लेकिन वह अभी भी वैसे ही चोद रहा था.

    तब मैं बोली- आज मार ही डालोगे क्या … और कितना ठोकोगे मेरे नीचे वाले होंठों को?
    विपुल- बस मेरी जान ऐसे ही मजा लेती रह … आज तो तेरी चूत रबड़ी के जैसी मजा दे रही है!

    मैं- अब बस भी करो यार … तुम्हारे लंड के चक्कर में मेरी हालत खराब हो गई है.
    विपुल- बस आ रहा हूं मैं भी … ये ले और ले … आह साली कुत्ती … तेरी मां को चोदूं … बहन की लौड़ी आह आह.
    यही कहते हुए वह मेरी चूत में ही झड़ गया.

    हम दोनों हांफ रहे थे.

    तभी मेरी नज़र बेड पर गई.
    मेरी गांड के नीचे की तरफ वाला चादर खून से लाल हुआ पड़ा था.

    मैं- ये क्या किया तुमने?
    विपुल- आज तुझे जन्नत की सैर कराते हुए तुझे तेरी जवानी के बारे में बताया मेरी जान … और कुछ नहीं!

    मैं- अब ये साफ कैसे किया जाए?
    विपुल- घबराओ मत, तेरी मां ही सफाई करेगी!

    यह कहते हुए वह मुझे किस करने लगा और बोला- चल मेरे लौड़े को साफ कर!
    मैंने उसके लंड को उसी चादर से साफ किया. उसके बाद मैंने खुद को भी साफ किया और नहाने चली गई.

    सेक्स विद टीनऐज गर्लफ्रेंड का मजा लेने देने के बाद मैं अपने घर आ गई.

    कुछ देर बाद मैंने देखा कि सच में वह चादर हमारे घर में ही धुलाई के लिए रखी हुई है.

    उसके अगले दिन मां ने वह चादर धोकर विपुल के घर भिजवा दी.

    इसके बाद क्या हुआ अगली देसी कहानी में बताऊंगी.
    इस सेक्स विद टीनऐज गर्लफ्रेंड कहानी पर आप अपनी राय जरूर बताएं.

  • पड़ोसन भाभी को चोदकर प्रेग्नेंट किया

    सकीना की चूत का मजा मुझे तब मिला जब मैंने एक कमरा किराये पर लिया और बगल वाले कमरे में सकीना और उसका शौहर रहते थे. उसे बच्चा नहीं हो रहा था.

    मेरा नाम राम सिंह है. मैं 6 फुट का बड़े लंड का मर्द हूँ और मैं बिहार से हूँ.
    यह सकीना की चूत की कहानी 2013 की है, तब मैं बंगलोर में जॉब करता था.
    उधर मैं एक रूम किराए पर लेकर रहता था.

    मेरे बगल वाले कमरे में एक अन्य कपल रहता था.
    वे दोनों बिहार से थे, इसी नाते हमारे बीच दोस्ती हो गयी.

    उसमें युवक का नाम तौफीक था.
    उसकी उम्र 37 साल की थी.
    तौफीक की बीवी 24 साल की थी. उसका का नाम सकीना था.
    वह बहुत ही सुंदर थी.

    उनकी शादी को 5 साल हो गए थे और अब तक उन्हें कोई बच्चा नहीं हुआ था.

    तौफीक एयरटेल कंपनी के टॉवर लगाने का काम करता था.
    वह अपने काम के सिलसिले में महीने में 15 दिन बाहर ही रहता था.

    दिखने में तौफीक एक सूखा सा हड्डी था.
    मुझे लगता था कि वह सकीना भाभी को सही से चोद ही नहीं पाता होगा.
    वह बच्चे के लिए अपनी बीवी से लड़ता भी था.

    मेरा उसके घर मेरा आना जाना हो गया था.
    तौफीक की बीवी सकीना मुझे देख कर बड़ी खुश हो जाती थी.
    यह बात मुझे जरा कम समझ में आती थी.

    मैंने कभी भी उसकी तरफ कामुक नजरों से नहीं देखा था.
    क्योंकि एक तो वह हर वक्त बुरके में रहती थी और ऐसा उसका कोई खास फिगर भी समझ नहीं आता था जिस वजह से मैं उस पर अपनी नीयत खराब करूँ.

    मैं जिधर काम करता था उधर एक से एक मस्त माल मेरे लंड को खड़ा करने के लिए दिखाई देते थे.
    तो मैं सकीना की ओर नहीं देखता था.

    तौफीक को मेरे ऊपर बड़ा भरोसा भी था क्योंकि मैं एक तो बिहार का रहने वाला था और वह भी मेरे जिले का ही था.

    दूसरी बात यह थी कि वह अपने काम के सिलसिले में शहर से बाहर जाता था, तो उसकी बीवी की देख-रेख के लिए उसे मुझसे ज्यादा मुफीद आदमी कोई और समझ नहीं आता था.

    कुल मिलाकर वह मेरी बड़ी कद्र करता था और मेरे ऊपर भरोसा करता था.

    मैं भी उसकी गैर हाजिरी में सकीना भाभी से उनकी जरूरत के सामान आदि के लिए पूछ लेता था तो वह भी मेरे सामने खुल कर आ जाती थी और मुझसे बात कर लेती थी.

    एक रोज ऐसे ही मैं सुबह सुबह सकीना भाभी के घर के दरवाजे को बजा कर पूछने लगा- भाभी, कुछ लाना तो नहीं है, मैं बाजार जा रहा हूँ!
    इस पर सकीना भाभी ने दरवाजा खोला और मुझसे अन्दर आने का कहा.

    उस वक्त वह हिजाब में नहीं थी तो मैं उसे देखता रह गया.
    मेरी आंखों को ललचाई नजरों से देखता पाकर वह मुस्कुरा दी और बोली- क्या हुआ भाईसाब, कभी लड़की नहीं देखी है क्या?

    मैंने कहा- अरे भाभी, मैंने तो एक से एक परकटी लड़कियां देखी हैं और रोज ही उनसे मिलता भी रहता हूँ … पर आज आपको देख कर मैं हैरान हो गया कि चाँद तो बाजू में ही छिपा था, बाहर तो सिर्फ चाँद के टुकड़े दिखाई देते थे!

    यह सुनकर सकीना भाभी हंसने लगी और मुझे शुक्रिया कहने लगी.

    मैंने कहा- सच में भाभी, आप हिजाब में थीं तो दिखाई ही नहीं देती थीं.

    इस तरह से मेरी बात अब सकीना भाभी से हंसी मजाक का दौर चलने लगा.

    एक बार तौफीक टॉवर लगाने 5 दिन के लिए कहीं बाहर गया था.

    उस दिन मैं सकीना भाभी से बात कर रहा था.

    मैंने उससे पूछा- 5 साल हो गए हैं भाभी, बेबी क्यों नहीं हुआ?
    तो वह खुल कर बताने लगी- मेरे शौहर का अंग छोटा है, वह मेरे साथ सही से सेक्स नहीं कर पाते हैं. जब सेक्स सही से नहीं होगा, तो बेबी कहां से होगा.
    यह बता कर वह रोने लगी.

    मैंने उसे चुप कराया, तो वह अचानक से मेरे गले से लिपट कर रोने लगी.

    मैं उसके दूध अपने सीने पर गड़ते हुए महसूस करने लगा.
    मुझे सकीना भाभी को चोदने का मन करने लगा.

    वह रोती हुई बोली- मैं ग़रीब घर से थी, मेरे अब्बा ने इस बूढ़े से शादी करवा दी और मेरी जिंदगी खराब कर दी.
    मैं बोला- भाभी अगर तुम चाहो, तो सब ठीक हो जाएगा.

    वह बोली- कैसे ठीक होगा … वह बूढ़ा जवान तो नहीं हो जाएगा ना!
    मैं बोला- वह जवान नहीं होगा, पर मैं तो हूँ ना … मैं दूँगा तुमको जवानी का सुख … और बच्चा भी दूंगा.

    वह बोली- पर ये तो गलत होगा.
    मैंने उसे अच्छे से समझाया- अपनी जवानी को बर्बाद मत करो. मेरे साथ इन्जॉय करो.

    वह बोली- तुम हिंदू हो, मैं मु स्लिम … तो कैसे होगा!
    मैंने कहा- हम दोनों शादी नहीं कर रहे हैं. केवल सेक्स करेंगे.

    बहुत देर समझाने के बाद वह मान गयी और बोली- तुम किसी को मत बताना.
    मैंने हामी भर दी.

    उसी रात से हम दोनों की चुदाई शुरू हुई.
    सकीना मुझे अपने रूम में ले गयी और अपने पलंग पर बैठा कर मेरी सेवा करने लगी.

    उसने मुझे पानी दिया और मुझे देख कर मुस्कुराने लगी.

    मैंने उसे अपने पास खींचा और उसे किस करने लगा.
    वह भी मेरा साथ देने लगी.

    धीरे धीरे मैंने उसके सारे कपड़े खोल दिए और अपने भी खोल दिए.

    वह मेरे सीने पर अपने हाथ फेरने लगी और मैं उसके दूध सहलाने लगा.
    उसके एक दूध को अपने मुँह में भर कर चूसने लगा और दूसरे को हाथ से मसलने लगा.

    वह आह आह करती हुई कामुक होने लगी.
    मैंने उसका हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रख दिया तो वह लंड को सहलाने लगी.

    मैंने उसको लिटा दिया और उसके ऊपर चढ़ कर उसके दोनों मम्मों को दबा दबा कर पीने लगा.

    उस वक्त मेरा लंड उसकी चूत से रगड़ खा रहा था तो वह अपनी कमर को इधर उधर करती हुई लंड को अपनी चूत से मसल रही थी.

    मैंने उसकी चुदास देखते हुए उसकी चूत पर लंड सटा दिया और उसकी चूत की दरार में लंड के सुपारे को फंसा दिया.

    वह उस वक्त मेरे लंड की गर्मी से एकदम व्याकुल हो रही थी और जल्दी से लंड को अन्दर पेलवाने की जद्दोजहद कर रही थी.

    मुझे मालूम था कि इसकी चूत में जैसे ही मैं अपना मोटा लंड पेलूँगा, यह दर्द से रोने लगेगी.

    फिर मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रखे और चूत फाड़ने की नियत से एक जोरदार धक्का मार दिया.

    लंड चूत को फाड़ता हुआ अन्दर घुस गया और भाभी की अम्मी चुद गई.

    वह जोर जोर से चिल्लाने की कोशिश कर रही थी लेकिन उसका मुँह बन्द था तो वह कुछ कर ही न सकी.

    उसकी छटपटाहट बता रही थी कि इसकी चूत की सही से आज ही चुदाई हुई है.

    मुझे मालूम था कि दर्द तो होना ही है तो क्यों न इसकी चूत का भोसड़ा बनाने की नीयत से इसे पेलता रहूँ.

    हर चूत का दर्द कुछ देर बाद हो ही जाता है.
    बस यही सोच कर मैं तेज तेज झटके देता हुआ उसकी चूत में लंड पेलता रहा.

    कुछ मिनट पेलने के बाद वह दर्द से निजात पा गई और धकापेल का मजा लेने लगी.

    उसकी छटपटाहट खत्म हुई तो मैंने उसके मुँह से मुँह हटा लिया और वह लंबी सांस लेती हुई आह आह करने लगी.

    कुछ देर बाद वह झड़ गयी और मैं भी उसकी चूत में ही फारिग हो गया.

    अब हम दोनों नंगे ही एक दूसरे से लिपटे पड़े थे.

    वह बताने लगी- मेरे शौहर का लंड तुमसे आधा भी नहीं है.

    मैंने पूछा- मजा आया?
    वह हंस दी और बोली- शुरू शुरू में तो तुमने मुझे मार ही दिया था, पर बाद में बहुत अच्छा लगा!

    मैंने कहा- अच्छा लगा या मजा आया?

    वह फिर से हंस दी और मेरी छाती पर मुक्का मारती हुई धीमे से बोली- मजा आया.

    मैंने कहा- तो फिर से मजा लें!
    वह फिर से हंस दी.

    इस बार उसने मेरे साथ 69 में शुरुआत की और मेरे लंड को चूस कर खड़ा कर दिया.

    जब दूसरी बार चुदाई हुई तो सकीना ने बहुत मजे से चूत चुदवाई.
    अब वह मेरे लंड से मुहब्बत कर बैठी थी.

    बाद में उसने बताया कि मैं न जाने कबसे तुमसे चुदवाना चाहती थी.

    मैंने कहा- हां, जब से तुम्हें बिना हिजाब के देखा, तभी से मैं भी तुम्हें चोदने के लिए उतावला था.

    उस दिन की चुदाई के बाद जब भी उसका शौहर घर से बाहर होता, वह मेरे साथ ही सोती थी.

    वह पहले पतली थी, उसके दूध भी छोटे छोटे से थे.
    पर मेरे लंड से से चुद चुद कर भर गई और उसके दूध भी रसीले हो गए.

    कोई 15 दिन के बाद उसका मासिक धर्म नहीं हुआ तो वह समझ गई कि वह हमल से हो गई है.

    उसने मुझे बताया तो मैं उसकी जांच के लिए प्रेग्नेंसी जाँचने वाली किट ले आया.

    उस पर सकीना भाभी ने अपनी पेशाब की दो बूंदें टपकाईं, तो रिजल्ट पॉज़िटिव आया.

    वह बहुत खुश थी और मुझसे लिपट कर मुझको चूमने लगी थी.
    खुशी के मारे उसके आंसू निकलने लगे थे.

    उसने मुझको शुक्रिया बोला और मेरे लंड के साथ खेलने लगी.

    उसके शौहर को भी जब मालूम हुआ कि उसकी बीवी हमल से हो गई है तो वह भी बेहद खुश हुआ.

    उसे लग रहा था कि उसके मरियल लंड के पानी से उसकी बीवी प्रेग्नेंट हो गई है.

    उसके बाद मैं उसे चार महीने तक जब भी उसका शौहर घर पर नहीं होता, उसे नियमित रूप से चोदता रहा.

    उसको नौ महीने बाद एक बेटा पैदा हुआ.
    उसके बाद वह फिर से मेरे लौड़े से चुदने आने लगी.

    इस तरह से मैंने उसे 3 साल तक चोदा.
    मेरे लंड से उसको और 2 बेटे हुए.

    अब मैं बंगलोर से दिल्ली आ गया हूँ और यहीं जॉब करता हूँ.

    उसका शौहर फिलहाल बिहार चला गया है.
    लॉकडाउन के समय में उसका काम छूट गया था, तो वह अभी भी बेरोज़गार घूम रहा है.

    पिछले महीने सकीना मुझे फोन करके बोल रही थी कि मैं उसके शौहर के लिए दिल्ली में जॉब देख लूँ.

    उसे चोदने की नीयत से मैंने इधर दिल्ली में तौफीक के लिए जॉब ढूँढ ली है.
    यह जॉब नाइट शिफ्ट वाली है.

    मैंने जानबूझ कर उसके लिए यह जॉब पक्की की है ताकि सकीना मेरे लौड़े से चुदने आ सके.

    अगले हफ्ते वह अपने शौहर के साथ दिल्ली आ जाएगी.
    वह नाइट ड्यूटी जाएगा और मैं उसकी बीवी को चोदूंगा.

    सकीना की चूत चोदने के बाद मुझे किसी और लड़की की चूत पसंद ही नहीं आती है.

    शायद मेरे लंड में भी कुछ खासियत है कि जो लड़की एक बार मेरा लंड ले लेती है, वह बार बार मेरे लंड से चुदने की बात कहती है.

    लड़कियों को इस बात पर यदि भरोसा न हो, तो वे मुझे एक बार मौका देकर इस बात को समझ सकती हैं कि मैं कोरी गप्प नहीं हांक रहा हूँ.

    मैंने भी तय कर लिया है कि मैं उसी लड़की से शादी करूंगा तो सकीना जैसी माल लड़की हो और मेरे लंड पर कलाबाजी खा सके.

  • बरसात में आंटी की चूत चुदाई का मजा

    न्यूड पुसी Xxx कहानी में मैं एक शोरूम में नौकरी करता था. वहां मालिक की बेटी बिजनेस सम्भाल रही थी. मैं उसे चोदना चाहता था. एक बार मुझे मौक़ा मिल ही गया.

    नमस्कार दोस्तो,
    मेरा नाम राहुल है और यह नाम बदला हुआ है. मैं 20 साल का हूँ. मेरी कद काठी बहुत अच्छी है और मैं दिखने में भी बहुत आकर्षक हूँ.

    मैं बहुत सालों से अन्तर्वासना में कहानियां पढ़ रहा हूँ.
    आज मैं अपनी सच्ची न्यूड पुसी Xxx कहानी आपके सामने लेकर आया हूं।
    यह मेरी इस साइट पर पहली कहानी है.

    हालांकि यह मेरी पहली चुदाई नहीं है, मैं इससे पहले भी एक बार सेक्स कर चुका था.
    वह सेक्स कहानी मैं किसी और दिन लिखूँगा.

    मैं जवान होते ही सेक्स का बड़ा आदी हो गया था. चूत मिलना इतना आसान नहीं होता है तो बस लड़कियों को देख देख कर मुठ बहुत मार लेता था.
    मुठ मारने से मेरे लंड का आकार भी लगभग सात इन्च का हो गया है.
    मैं हर समय किसी न किसी को चोदने की सोचता रहता हूँ.

    यह कहानी अभी कुछ समय पहले की ही है.
    उस समय मैं पढ़ाई के लिए घर से दूर रहता था.

    मुझे एक पार्ट टाइम नौकरी की तलाश भी थी क्योंकि घर वालों से पैसे मांगना मुझे अच्छा नहीं लगता था.

    जल्दी ही मुझे एक दुकान में अकान्टेन्ट की नौकरी भी मिल गई.
    मेरे कॉलेज से दुकान नजदीक होने की वजह से मैं सुबह का खाना वहीं कर लेता था.

    मेरे कॉलेज से मुझे दस बजे छुट्टी मिलती थी और कॉलेज से मेरा कमरा दूर था.
    इसलिए सिर्फ नाश्ते के लिए कमरे तक जाना मुझे सुविधाजनक नहीं लगता था.
    कॉलेज से सीधे दुकान पर ही आ जाता था.

    मैं जिस दुकान में काम करता था, उस दुकान के मालिक बहुत अमीर आदमी थे.
    मगर वे बहुत उम्र वाले बूढ़े व्यक्ति थे.

    उनका बेटा विदेश में रहता था.
    सेठ जी की एक बेटी भी थी, उनका नाम पूजा था.
    वे 35 साल की रही होंगी.

    उनका अपने पति से तलाक हो गया था इसलिए वे अपने पिता जी के साथ ही रहती थीं.
    मैं उन्हें पूजा दीदी कह कर बुलाता था जबकि वे मुझसे उम्र में लगभग दुगनी बड़ी थीं.

    उनकी बड़ी सी गांड और बड़े बड़े दूध बहुत ही मस्त लगते थे.
    वे एक मस्त सेक्सी आंटी सरीखी दिखती थीं.
    लेकिन मालकिन थीं तो मजबूरी में उन्हें दीदी कहना पड़ता था.

    दीदी के बच्चे उनके पति के साथ ही पढ़ाई करने के लिए विदेश में रहते थे.
    इधर वे अकेली ही थीं और अक्सर दुकान में आया करती थीं.

    वे मुझसे भी बहुत फ्रेन्ड्ली बात करती थीं.

    मुझे उन्हें देखते ही चोदने का मन हो गया था मगर में अभी वहां नया था इसलिए कुछ भी कर पाना संभव नहीं था.
    तब भी इतने कम समय में मैं उनसे काफी घुल-मिल गया था.

    मैं किसी मौके की तलाश में था.
    पर मुझे मौका मिल ही नहीं रहा था क्योंकि दीदी के मां बाप वहीं होते थे और उनसे अकेले में बात ही नहीं हो पाती थी.

    उन्हीं दिनों मालिक के बेटे विदेश से आए और उन्होंने मां बाप को कुछ दिनों के लिए विदेश घुमाने ले जाने का प्लान बनाया.

    उनका पूरा परिवार घूमने जाने वाला था मगर वे दुकान बन्द करके जाना नहीं चाहते थे.

    चूंकि उन दिनों बाजार में बिक्री अधिक होने वाला टाइम था तो उन्होंने सारी जिम्मेदारी मुझे सौंप दी.

    अब तक मुझे उनके यहां आए 4 महीने हो चुके थे और उनका मुझ पर भरोसा जम गया था.
    उन दिनों मेरा कॉलेज भी बंद था तो मुझे कोई दिक्कत नहीं थी.

    जब जाने की सारी तैयारी हो गई, तभी पूजा दीदी की तबियत थोड़ी बिगड़ गई और उन्होंने घूमने जाने से इंकार कर दिया.

    उनके मां बाप ने भी उनसे कहा- ठीक है, तुम भी राहुल के साथ यहीं रूक जाओ. उसे खाना भी बाहर खाने की जरूरत नहीं पड़ेगी … और तुम होगी तो हमें दुकान की भी कोई टेंशन नहीं रहेगी.
    दीदी ने भी हां कर दी और वे लोग घूमने चले गए.

    उस दिन से मैं दुकान का सारा काम देखने में बिजी हो गया.
    अब तो व्यस्तता के चलते और भी कुछ नहीं हो पा रहा था.

    लेकिन मैंने उन्हें चोदने का मन बना लिया था.

    चार दिन बाद जब मैं दुकान बंद करके घर आया तो पूजा दीदी के बारे में सोचते हुए अपना लंड हिलाने लगा.

    मैं पहले भी उनके बारे में सोचते हुए अपना लंड हिलाता था लेकिन इस बार कुछ अलग ही मज़ा आ रहा था.

    मुझमें हिम्मत भी आ रही थी कि इस बार तो कुछ भी हो जाए, उन्हें चोदना ही है.
    चाहे मुझे उसके बदले अपनी जॉब ही क्यों ना छोड़नी पड़े.

    मैं उस रात बहुत सारा पानी निकाल कर सो गया.

    अगले दिन सुबह जब मैं उठा तो हल्की हल्की बारिश हो रही थी और आसमान में काले बादल छाए हुए थे.

    मैं दुकान गया और सब साफ सफाई करके अपना काम करने लगा.

    फिर मैंने सोचा कि पूजा दीदी तो बीमार हैं और अभी तक आई नहीं, कहीं उन्हें कुछ ज्यादा दिक्कत न हो गई हो मतलब तेज बुखार न आ गया हो, तो हॉस्पिटल ले जाना पड़ सकता है.

    इसलिए मैंने उन्हें कॉल किया तो घंटी जाती रही.
    उन्होंने थोड़ी देर बाद फोन उठाया.

    मैं- हैलो दीदी आप ठीक तो है ना … आप अभी तक नहीं आईं तो मैंने सोचा कि कहीं आपकी तबियत और तो नहीं बिगड़ गई है?
    पूजा दीदी- नहीं नहीं राहुल, मैं बिलकुल ठीक हूं … और बस दुकान के लिए निकल ही रही हूँ. बाहर बारिश हो रही थी तो मुझे सुबह होने का पता ही नहीं चला. इसलिए थोड़ा ज्यादा सो गई. मैं बस आ रही हूँ.
    यह कह कर उन्होंने फोन रख दिया.

    उसके दस मिनट बाद वे आईं तो वह थोड़ी भीगी हुई थीं जिसमें वे एक खूबसूरत हसीना लग रही थीं.
    उन्होंने सलवार सूट पहना था और अपने बाल खुले छोड़े हुए थे.

    उनके भीगे बाल आगे आ गए थे और उनके मम्मों को छू रहे थे.

    यह देख कर मेरा लंड जाग उठा और मैंने उसी समय अपने हाथ से उसे जोर से मसल दिया क्योंकि तब मैं अपनी कंप्यूटर टेबल के पीछे बैठा था.
    उन्होंने मुझे वह सब करते नहीं देखा.

    उन्होंने कहा- मैं भीग गई हूँ और बहुत ठंड भी है, मैं दूध लेकर आई हूं. पहले चाय पीते हैं, ठीक है!

    यह सुनते ही मेरी नजर उनके बड़े बड़े चूचों पर चली गई जिनको उनके लहराते बाल बड़ी नजाकत से चूम रहे थे.

    मैं उनके बूब्स की तरफ देखते हुए ही बोला- ठीक है, दूध वाली चाय से थोड़ी गर्माहट मिल जाएगी.

    उन्होंने यह सुना तो मेरी नजरों को देखकर कहा- लगता है तुम बहुत ठंडे पड़े हुए थे, अब मैं आ गई हूं. मैं तुम्हें गर्म कर दूंगी.
    यह कह कर वे अपनी गांड मटकाती हुई किचन की ओर चल दीं.

    सेठ जी की दुकान में अन्दर ही एक छोटा सा किचन भी है. उधर एक रूम और बाथरूम आदि सबकी सुविधा है.

    दीदी की ऐसी बात सुन कर मेरा लंड मेरी जींस को फाड़ कर बाहर निकलने की कोशिश करने लगा.

    थोड़ी देर बाद दीदी चाय लेकर आईं और मेरे सामने झुकती हुई चाय का कप टेबल पर रख दिया.
    ऐसा करते वक्त उनकी चूचियों के बीच की घाटी का मुझे मस्त दीदार हो गया.

    मैं उनके दूधिया मम्मे देख कर एकदम से सिहर उठा.
    उनकी वासना से भरी आंखें मेरी नजरों का पीछा कर रही थीं.

    मैंने अचानक से उन्हें देखा तो मैंने झट से उनके मम्मों से नजरें हटा लीं.

    उन्होंने भी कुछ नहीं कहा … और न ही अपने मम्मों को छुपाने का कोई जतन किया.

    फिर हम दोनों बातें करते हुए चाय पीने लगे.

    उन्होंने पूछा- चाय कैसी बनी है?
    मैंने कहा- बहुत ज्यादा अच्छी बनी है … लगता है आपका लाया दूध बहुत गाढ़ा था.

    इस पर वे हंसती हुई बोलीं- हां वह तो है.

    वे फिर से अन्दर चली गईं.

    उस वक्त हल्की बारिश हो रही थी तो दुकान में कोई आ नहीं रहा था.
    फिर भी मेरा थोड़ा काम था तो मैं वह करने लगा.

    कुछ देर बाद दीदी कुछ नाश्ता बना कर ले आईं.

    हम दोनों वहीं बैठ कर खाने लगे और इधर उधर की बातें करने लगे.

    तभी अचानक से बहुत तेज बारिश शुरु हो गई.
    तेज हवा के कारण बारिश का पानी दुकान के अन्दर आ रहा था, तो मैंने दुकान का शटर बंद कर दिया.

    तभी मुझे पीछे से पूजा दीदी की चिल्लाने की आवाज आई.
    तो मैं दौड़ता हुआ अन्दर गया.

    मैंने देखा कि अन्दर बहुत सारा पानी भर गया था और पूजा दीदी उसमें फिसल कर गिर गई थीं और पानी में पूरी भीग गई थीं.

    मैं उन्हें उठाने के लिए दौड़ता हुआ गया तो मैं भी फिसल कर उनके ऊपर ही गिर पड़ा.
    हम दोनों ही पूरी तरह से भीग गए थे.

    मैं उठा और उनको भी उठाया.
    मैंने देखा कि पानी के पाइप में कुछ फंसा होने की वजह से वहां पानी भर गया था.

    अब हम दोनों ने मिल कर पहले उस फंसी हुई चीज को पाइप से निकाला और पानी साफ किया.

    लेकिन उतनी देर में हम दोनों पूरी तरह से भीग चुके थे और हमारे पास बदलने के लिए दूसरे कपड़े भी नहीं थे.

    इतना सब होने के बाद मैंने जब पूजा दीदी को देखा तो उनके सारे कपड़े भीग गए थे और उनकी कुर्ती के अन्दर की ब्रा भी साफ साफ दिख रही थी.
    उनके निप्पल भी बहुत कड़क दिख रहे थे और उनके गुलाबी होंठ ठंड से थरथरा रहे थे.

    वहां एक तौलिया पड़ा था, मैंने वह तौलिया देकर पूजा दीदी से कहा- आप पूरी भीग गई हैं और आपके कपड़े भी पूरे भीग गए हैं. अगर ज्यादा देर यही कपड़े पहनी रहीं तो आप फिर बीमार पड़ सकती हैं.
    उन्होंने कहा- मगर मेरे पास दूसरे कपड़े नहीं हैं.

    मैंने कह दिया- अरे आप ये कपड़े उतारकर सुखा लीजिए न … अभी बारिश हो रही है तो दुकान बंद ही है. कोई आएगा भी नहीं, तब तक आप इस तौलिये को पहन सकती हैं.
    उन्होंने भी हामी भरते हुए कहा- कि ठीक है, लेकिन तुम भी पूरा भीग गए हो. तुम भी अपने कपड़े उतार दो और सुखा लो … बल्कि पहले इसी तौलिये से तुम अपने आप को पौंछ लो. इसलिए जल्दी करो.
    यह कह कर दीदी ने मुझे तौलिया थमा दिया.

    अब तक मेरा लंड मेरी पैंट में टनटना रहा था और बाहर निकलने की फिराक में था.

    जब मैंने अपनी शर्ट को उतारा और पूजा दीदी की ओर चुपके से देखा.
    वे मेरी तरफ़ ही बहुत कामुक आंखों से देख रही थीं.
    ऐसा लग रहा था कि वह मेरे लंड को देखने के लिए बेताब हैं.

    मैंने भी उनकी तरफ ही मुँह करते हुए अपनी पैंट उतार दी.
    मेरा लंड अब सिर्फ मेरी चड्डी में था और बाहर से ही साफ साफ दिख रहा था.

    फूले हुए लौड़े को देख कर पूजा दीदी हैरान हो गईं और मुझे देखते ही रह गईं.

    मैं भी उन्हें अपना औजार दिखाते हुए अपने पूरे बदन को पौंछने लगा और अपनी चड्डी में हाथ डाल कर अपना लंड सीधा करते हुए दीदी की ओर देखा.
    वे मेरे लंड की तरफ ही आंखें गड़ाई हुई थीं.

    मैंने उन्हें तौलिया देते हुए कहा- लीजिए अब आपकी बारी!

    यह सुनते ही वे ऐसे चौंक गईं जैसे किसी सपने से अचानक उठी हों.
    वे मेरे हाथ से तौलिया लेकर हंसती हुई बाथरूम के अन्दर चली गईं.

    मेरा मन कर रहा था कि पीछे से जाकर उन्हें दबोच लूँ और अपना 7 इंच मोटा लंड उनकी गांड में घुसा दूँ.

    पर मैंने अपने ऊपर काबू किया और चुपके से जाकर बाथरूम के दरवाजे के छोटे से होल से देखने लगा.
    वे अन्दर अपने कपड़े उतार रही थीं.

    मैं अपना लंड जोर जोर से हिलाने लगा.
    उन्होंने अन्दर जाते ही अपनी सलवार और कुर्ती को उतार दिया.

    उनका गोरा बदन देख कर मेरे लंड ने अपना पूरा आकार ले लिया.

    पूजा दीदी को नंगी देखने का मेरा सपना सच हो रहा था.
    उन्हें सिर्फ ब्रा और पैन्टी में देखकर मैं पागल हो गया.

    उन्होंने गुलाबी रंग की ब्रा और पैंटी पहनी हुई थी और वह अपने बदन को तौलिया से पौंछ रही थीं.

    इतने में ही उन्हें कुछ हुआ, उन्होंने अपनी ब्रा भी उतार दी और अपने मम्मों को अपने दोनों हाथों से दबाने लगीं.
    उनके मम्मे ऐसे दिख रहे थे मानो दो मधुमक्खी के छत्ते लटक रहे हो और उनसे शहद टपक रहा हो.

    वे जोर जोर से अपने ही बूब्स दबाते हुए अपने ही होंठों को अपने दांतों से काट रही थीं और हल्की हल्की सिसकारियां ले रही थीं.
    फिर उन्होंने अपनी पैंटी भी निकाल दी और अपनी चूत में एक उंगली धीरे धीरे डालने लगीं.

    उनकी चूत पूरी गीली थी और उसमें कुछ कुछ बाल भी थे.
    ऐसा लग रहा था कि उन्होंने कुछ दिन पहले ही चूत की शेविंग की है.

    वे अब एक हाथ से न्यूड पुसी Xxx में उंगली कर रही थीं और दूसरे हाथ से अपने बूब्स दबा रही थीं.
    साथ ही वे अपनी चूची को उठा कर उसका निप्पल अपने मुँह में लेकर चूसने और काटने की कोशिश कर रही थीं.

    फिर अचानक से वे यह काम तेज तेज करने लगीं और ‘आह … आह … ऊह … ऊह …’ करके कराहने लगीं.
    थोड़ी ही देर में उनकी चूत ने पानी छोड़ दिया और वे उन्ह उन्ह करती हुई शांत हो गईं.

    इधर मैं भी उन्हें देखते हुए अपने लंड को जोर जोर से हिला रहा था और थोड़ी थोड़ी आवाज भी निकाल रहा था.
    दीदी के साथ साथ मैं भी झड़ गया और आज मैंने बहुत ही ज्यादा पानी निकाल दिया था.

    मैंने बाथरूम के दरवाजे के सामने ही सारा पानी गिरा दिया.
    मेरी आंखें मुंद गई थीं और मैं अपने लंड से निकलते पानी का मजा ले रहा था.
    तभी दीदी ने दरवाजा खोला और मुझे अन्दर खींच लिया.

    मैं उनके इस कदम से एकदम से सकपका गया और उसके बाद वह हुआ, जो मैं उनके लिए सोचता रहता था.
    दीदी पूरी नंगी थीं और मैं भी अपनी चड्डी से लंड बाहर निकाले हुए था.

    दीदी ने मुझे अपने बदन से चिपका लिया और हम दोनों नाग नागिन के जोड़े के जैसे एक दूसरे के साथ चुम्बन सुख लेने लगे.

    कब हम दोनों बाथरूम से बाहर आ गए और बेड पर लेट कर सेक्स का सुख लेने लगे, इसका कोइ अहसास ही नहीं हुआ.
    दीदी की चूत में मेरा लंड कड़क होकर घुस गया था और मैं उन्हें दे दनादन चोद रहा था.

    दीदी भी न जाने कब से प्यासी चूत को मेरे लौड़े में समा देना चाह रही थीं.

    कुछ देर बाद ही हम दोनों का स्खलन हो गया और तूफान निकल जाने के बाद की शांति ने हम दोनों के चेहरों पर मुस्कान ला दी.

    उस दिन मैंने दीदी के साथ और दो बार सेक्स किया और अब वे मेरे साथ सहजता से सेक्स का सुख लेने लगी थीं.

  • मामी ने मुठ मारना सिखाया

    मैं नया नया जवान हुआ था, मामा के घर गया. एक दिन मामी अपने बेटे को दूध पिला रही थी, मैं उनकी चूची देख रहा था. देखते हुए मामी ने मुझे पकड़ लिया. उसके बाद मामी ने …

    दोस्तो, मेरा नाम राज है। मैं पटना का रहने वाला हूं, मेरी उम्र 21 साल है और मैं अभी इंजीनियरिंग कर रहा हूं। मैं अन्तर्वासना का पुराना पाठक हूं. मैने सोचा कि क्यों न मैं भी अपनी एक कहानी लिखूं। मैं बहुत ही ठरकी किस्म का इंसान हूं लेकिन मैंने अभी तक किसी को चोदा नहीं है।

    अपनी ठरक के चलते मैं रोज पोर्न सेक्स वीडियो देखा करता हूं और सेक्स स्टोरी पढ़ कर मुठ भी मारा करता हूं. मुझे ये सेक्स और इससे संबंधित वीडियो और साहित्य में बहुत रूचि है. ऐसी चीजें देखते और पढ़ते समय मैं बहुत ही ज्यादा उत्तेजित हो जाता हूं. मुझे सेक्स चैट करने का भी शौक है.

    अब मैं आपका और समय न लेते हुए अपनी कहानी को आपके सामने रख रहा हूं. जैसा कि मैंने बताया कि मैंने अभी तक सेक्स नहीं किया है इसलिए मैं वर्जिन हूं. यह कहानी मेरी एक कल्पना है जिसमें मैंने अपनी सेक्स इच्छा को उजागर किया है.

    कहानी मेरी मामी के बारे में है. मेरी मामी देखने में एक टॉप माल है. उसकी उम्र 30 साल है और उसका फीगर 34-32-36 के करीब तो जरूर होगा. उसकी चूचियां काफी बड़ी बड़ी हैं. उसकी टाइट चूचियों और मोटी मोटी चूचियों को देख कर मेरे अंदर एकदम से वासना भर जाती है.

    मुझे हमेशा से ही बड़ी चूचियों को देखने और उनको हाथ से छूने की बहुत तमन्ना रहती थी. मगर आज तक मुझे ऐसी चूची को छूने का मौका नहीं मिला था. जब भी मैं अपने मामा के यहां जाता था तो मामी की चूचियों को देख कर मेरा मन बेकाबू सा हो जाता था.

    मेरी मामी दिल्ली में ही रहती है. मेरे मामा जी दिल्ली में नौकरी करते हैं. उनका एक 2 साल का बेटा भी है. उसका नाम करण है. दोस्तो, मैं देखने में काफी शरीफ सा लगता हूं लेकिन मेरे अंदर इतनी हवस भरी हुई है कि मैं हर वक्त लेडीज की चूचियों और गांड को ही ताड़ता रहता हूं.

    उस वक्त मैं अपने बोर्ड्स के एग्जाम देकर छुट्टियों में अपने मामा के यहां जा रहा था. स्टेशन पर ही मेरे मामा मुझे लेने के लिए आ गये. मैं और मामा घर के लिए निकल लिये.

    घर जाकर मेरी मामी ने दरवाजा खोला और मुस्कराकर मेरा स्वागत किया. उस वक्त मुझे उनके बारे में कुछ गलत ख्याल नहीं आ रहे थे. मैं नया नया जवान हुआ था लेकिन इतना भी ठरकी नहीं बना था कि अपनी मामी की चूत के बारे में ही सोचने लगूं. मुझे मुठ मारने या सेक्स करने के बारे में ज्यादा कुछ नहीं पता था.

    पहला दिन मैंने आराम किया. अगले दिन मामाजी की ऑफिस की छुट्टी थी तो मैं उनके साथ घूमने के लिए चला गया. शाम को हम लोग खाना भी बाहर ही खाकर आये थे. घर आकर मैंने थोड़ी देर के लिए टीवी देखा और फिर मैं सोने के लिए चला गया.

    मेरी मामी और मामा अपने बेटे करण के साथ एक रूम में सोने लगे. मैं दूसरे रूम में था. मुझे नींद नहीं आ रही थी. रात को मुझे फेसबुक और यूट्यूब पर वीडियो वगैरह देखने और फेसबुक चैट करने की आदत थी. मैं किसी लेडी के साथ बातें करते हुए अपने लंड को सहलाता रहता था. इस सब में मुझे बहुत मजा आता था.

    रात के 12 बज गये थे. मैं अपने लंड को सहला रहा था. मुझे पेशाब लगी तो मैं उठ कर बाथरूम में गया. जाते हुए मेरे कानों में कुछ धीमी धीमी आवाजें आईं. मैंने सुनने की कोशिश की तो मामी की आवाज थी- आह्ह… आह्ह… ईस्स… थोड़ा आराम से करिये न, अगर राज को सुनाई दे गया तो वो क्या सोचेगा?

    मुझे अंदाजा हो गया था कि अंदर मामा और मामी चुदाई कर रहे थे शायद. मगर मेरी इतनी हिम्मत नहीं हो रही थी कि मैं उनकी चुदाई देखने की कोशिश करूं या फिर वहीं खड़ा होकर उनकी बातें सुनूं. इसलिए मैं अपने रूम में वापस आ गया.

    अगली सुबह जब उठा तो उस दिन मामाजी घर पर ही थे. रविवार का दिन था. मैं फ्रेश हुआ और फिर किचन में गया. वहां पर मामी नाश्ता बना रही थी. पानी का गिलास भरते हुए मैंने मामी से पूछा- रात में आपको कुछ हुआ था क्या मामी?

    वो बोली- नहीं तो, मुझे क्या होने वाला था, ऐसा क्यों पूछ रहा है तू?
    मैंने कहा- पता नहीं, आपके रूम से कुछ दर्द भरी आवाजें आ रही थीं. मुझे लगा कि आपकी तबियत ठीक नहीं होगी.
    मेरी बात सुनकर मामी की जुबान जैसे लडखड़ा गयी और वो बोली- नन्.. नहीं तो … ऐसा तो कुछ भी नहीं हुआ.

    उसके बाद मामी मेरे सामने आने से बचने लगी. दोपहर को मैंने मूवी देख कर टाइम पास किया और उसके बाद फिर शाम को मैं घूमने के लिए निकल गया. वापस आकर खाना खाने के बाद मैं सोने के लिए चला गया.

    उस रात मेरे कान मामा-मामी के रूम की ओर ही लगे हुए थे लेकिन मुझे उस रात को कुछ भी आवाज नहीं सुनाई दी. फिर मुझे नींद आ गयी और मैं भी सो गया.

    अगले दिन मामाजी सुबह 8 बजे ऑफिस चले गये. मैं मामी के साथ बैठ कर बातें कर रहा था. तभी उनका बेटा करण रोने लगा. वो अभी 2 साल का ही था इसलिए उसको बार बार संभालना पड़ता था. उसको शायद भूख लगी थी.

    मेरी मामी ने मेरे सामने ही एक साइड से ब्लाउज के ऊपर करके अपनी चूची बाहर निकाली और अपने बेटे को दूध पिलाने लगी. उनकी मोटी और बड़ी चूची देख कर मेरी आंखें जैसे फटी रह गयी. मैं उनकी चूची को घूरने लगा.

    जब मामी ने देखा कि मैं उनकी चूची को ही घूर रहा हूं तो उन्होंने अपनी चूची को अपनी साड़ी के पल्लू से ढक लिया.
    मामी बोली- क्या देख रहा है?
    मैंने कहा- कुछ नहीं मामी, सॉरी.
    वो बोली- ठीक है, कोई बात नहीं

    फिर पता नहीं मामी के मन में क्या आया कि वो पूछ बैठी- तुमने अभी तक कोई गर्लफ्रेंड बनाई है या नहीं?
    मैंने कहा- नहीं मामी, मेरी तो कोई गर्लफ्रेंड नहीं है.
    वो बोली- ऐसा कैसे हो सकता है. तुम जवान हो गये हो. अभी तक हाथ से ही काम चला रहे हो क्या?

    मैंने अनजान बनते हुए कहा- मामी मैं आपकी बात समझा नहीं, हाथ से मतलब?
    वो बोली- बनो मत, सीधे से मेरे सवाल का जवाब दो.
    मैंने कहा- मैं नहीं समझ पा रहा आपकी बात.
    वो बोली- मुठ नहीं मारते क्या?

    इतना तो मैं जानता था कि मामी लंड के बारे में ही बात कर रही है लेकिन मुझे मुठ मारने का नहीं पता था.
    मैंने कहा- मुठ क्या होता है मामी?

    मामी बोली- तुम मेरे सामने ही नाटक कर रहे हो या तुम्हें सच में नहीं पता? इतने बड़े हो गये हो, तुम कंट्रोल कैसे करते हो?
    मैंने कहा- मामी, आप साफ साफ बताओ ना क्या कहना चाह रही हो?
    मामी बोली- अच्छा, सेक्स के बारे में तो पता होगा या वो भी नहीं पता?

    मैंने कहा- हां, उसमें तो लड़की को किस करते हैं.
    मामी बोली- किस से आगे और भी बहुत कुछ होता है. तुम्हें तो कुछ भी नहीं पता है अभी. अच्छा ये बताओ, तुमने कभी अपने पप्पू (लंड) को हिलाने की कोशिश नहीं की? अगर तुम अपने लंड को हिलाकर देखोगे तो तुम्हें बहुत मजा आयेगा.

    मुझे अपने लंड को सहलाने की आदत थी लेकिन मामी शायद किसी और बारे में बात कर रही थी.
    मैंने कहा- मुझे तो नहीं पता कि लंड को कैसे हिलाया जाता है.

    मामी बोली- कोई बात नहीं, मैं तुम्हें सिखा दूंगी लेकिन ये बात किसी से कहना मत.
    मैंने हां में गर्दन हिला दी.

    अभी मामी अपने बेटे करण को दूध पिला रही थी. दूध पिलाते हुए ही उन्होंने अपने चूचे से अपना पल्लू हटा दिया. मैं मामी के चूचे को नंगा देख कर आंखें फाड़ कर घूरने लगा.
    मामी बोली- पहले कभी नहीं देखा है क्या तुमने ये?

    मैंने कहा- मामी, देखा तो है लेकिन इतने पास से नहीं.
    वो बोली- कभी छूकर देखा है इसको?
    मैंने कहा- कभी नहीं.

    तभी मामी ने अपने दोनों बूब्स को बाहर कर लिया. उनके बूब्स बाहर लटकने लगे. एक को करण चूस रहा था और दूसरा हवा में झूल रहा था.
    मैंने कहा- मामी आपके दूध इतने बड़े कैसे हो गये?
    वो बोली- मुझे भी नहीं पता. बस हो गये हैं. एक तो ये करण इनको सारा दिन चूसता रहता है और तेरे मामा भी इनको नहीं छोड़ते हैं. दोनों बाप-बेटे मेरे दूधों को चूसते रहते हैं इसलिए शायद इतने बड़े हो गये हैं.

    मैंने पूछा- मामाजी और क्या करते हैं इनके साथ?
    वो बोली- इनको दबाते हैं.
    मैंने पूछा- आपके अपने दूध दबवाने से अच्छा लगता है क्या?
    वो बोली- हां, तुम्हें भी दबा कर देखना है क्या इनको?
    मैंने कहा- मुझे तो शर्म आती है मामी आपके सामने.

    मामी बोली- जब देख ही लिया है तो अब दबा कर भी देख लो कि कैसा लगता है. मजा आयेगा तुम्हें.
    मैंने घबराते हुए मामी के बूब्स की ओर हाथ बढ़ाया. मामी ने झटके से मेरा हाथ अपनी ओर खींच लिया और अपने बूब्स पर रखवा लिया.

    अपने बूब्स पर अपने हाथ से मेरे हाथ को दबाते हुए मामी ने कहा- अब दबाओ इनको!
    मुझे मामी के बूब्स काफी सोफ्ट लगे. मैं हल्के हल्के से उनको दबाने लगा.

    मामी ने करण को झूले में लिटा दिया. वो सो चुका था. उसके बाद मामी ने अपना ब्लाउज पूरी तरह से उतार ही दिया. उनकी दोनों चूचियां एकदम से नग्न हो गयीं.
    मामी बोली- अब आराम से दोनों हाथों से दबाओ.

    मैं दोनों हाथों से मामी के बूब्स को दबाने लगा. मुझे मजा आ रहा था. मामी ने पूछा- कैसा लग रहा है?
    मैंने कहा- अच्छा लग रहा है.
    मामी- लंड खड़ा हुआ?
    मैं- हां मामी, बिल्कुल टाइट हो गया है.

    मामी बोली- आओ, आज मैं तुम्हें मुठ मारना सिखाऊंगी. अपनी पैंट को उतार लो.
    मैं शरमा रहा था. उनके सामने इस तरह से पैंट उतारने में मुझे अजीब सा लग रहा था.

    वो बोली- शरमा क्यों रहे हो, मैंने भी तो तुम्हारे सामने अपना ब्लाउज उतारा है. तुम भी अपनी पैंट उतार लो.
    मैंने अपनी पैंट खोल दी और अंडरवियर को नीचे खींच दिया.
    मेरे जवानी के झाँट मेरे लंड के चारों ओर फैले हुए थे. मैंने कभी अपने झाँटों को नहीं काटा था.

    मैं मुठ भी नहीं मारा करता था उस वक्त तक, इसलिए मेरा लंड भी ज्यादा मोटा नहीं दिख रहा था. मामी ने मेरे लंड को देखा और मुस्कराने लगी. मगर कुछ बोली नहीं.
    फिर बोली- तुम अपने बालों को साफ नहीं करते हो क्या? कितने ज्यादा घने हो गये हैं.
    मैंने कहा- यहां के बाल तो मैंने कभी नहीं काटे मामी

    वो बोली- अच्छा ठीक है. मैं इनको शेव कर दूंगी.
    मैंने पूछा- आपके वहां भी नीचे ऐसे ही बाल हैं क्या?
    मामी ने कहा- हां, सबके ही होते हैं. मगर मेरे अभी कम हैं क्योंकि मैंने एक सप्ताह के पहले ही शेव किये थे. मगर मुझे झाँटें बहुत पसंद हैं. चलो अब मैं तुम्हें मुठ मारना सिखाती हूं.

    मामी ने मुट्ठी बना कर अपने हाथ से दिखाते हुए कहा कि इस तरह से अपने लंड को मुट्ठी में भर लो.
    मैंने लंड को मुट्ठी में भर लिया.
    मामी- अब इसकी स्किन को नीचे करो.
    मैंने स्किन नीचे कर दी.
    मामी- अब इसको ऊपर करो.

    उनके कहे अनुसार मैंने फिर ऊपर किया.
    वो बोली- अब इसी तरह से जल्दी जल्दी करो.
    मैं जल्दी जल्दी से लंड की स्किन को ऊपर नीचे करने लगा. मगर मैं बीच बीच में रुक जा रहा था.
    मामी बोली- रुको, मैं करके बताती हूं.

    मामी ने मेरे लंड को अपनी मुट्ठी में ले लिया. फिर उसको जोर जोर से हिलाने लगी. मामी का हाथ टच होते ही मुझे अजीब सा लगा. मुझे गुदगुदी होने लगी. मुझे बहुत मजा आया. मामी करते करते बीच में रुक गयी.

    मुझसे कहने लगी- अब तुम खुद करो. मैं जरा अपनी वाली (चूत) को देख लेती हूं. मेरा मन भी कर रहा है कुछ करने का.
    फिर मामी ने अपनी साड़ी खोल दी. मेरे देखते ही देखते मामी ने अपना सब कुछ उतार दिया. मामी मेरे सामने बिल्कुल नंगी हो गयी.

    मैंने देखा कि मामी की चूत पर बाल थे. उनकी चूत पर बाल काफी अच्छे लग रहे थे. मैंने मुठ मारना छोड़ कर मामी की चूत पर ही ध्यान लगा दिया.
    वो बोली- तुम क्यों रुक गये, ऐसे ही हिलाते रहो. कुछ देर के बाद तुम्हें करंट जैसी एक फीलिंग आयेगी जो तुम्हें बहुत मजा देगी.

    मामी से मैंने पूछा- मामी, लड़कियां भी अपनी चूत को अपने हाथ से मजा देती हैं क्या?
    वो बोली- तुम्हारी उम्र के सब लड़के-लड़कियां करते हैं. कुछ तो तुम्हारी उम्र में सेक्स का मजा भी ले चुके होते हैं.

    अपनी चूत को खोल कर दिखाते हुए मामी ने कहा- लड़के इसी चूत के छेद में अपने लंड को अंदर डालते हैं. इसमें लड़का और लड़की दोनों को ही बहुत मजा आता है. अभी तुम मुठ मारना सीखो, इसके आगे क्या और कैसे करते हैं वो सब मैं तुम्हें बाद में सिखा दूंगी.

    उसके बाद मामी अपनी चूत को रगड़ने लगी. वो तेजी के साथ अपनी चूत को सहला रही थी. कभी उसमें उंगली को अंदर डाल रही थी. मैं भी अपने लंड को जोर जोर से हिलाने लगा. मुझे भी मजा आ रहा था.

    मामी मेरे लंड को देख कर तेजी के साथ चूत को सहला रही थी और मैं मामी की चूत को देखते हुए तेजी के साथ लंड की मुठ मार रहा था. मुझे इतना मजा कभी नहीं आया था जितना अब मामी के सामने आ रहा था.

    कुछ ही देर के बाद मुझे लगने लगा कि मेरे लंड से कुछ बाहर निकलने वाला है.
    मैंने मामी से कहा- लगता है कि कुछ बाहर आने वाला है.
    वो बोली- रुकना मत, हिलाते रहो!

    फिर 5-10 सेकेंड के बाद मेरा वीर्य निकल गया. वीर्य निकलते ही ऐसा लगा कि मैं काफी थक सा गया हूं. मामी मेरे वीर्य को देख कर जोश में आ गयी और तेजी के साथ अपनी चूत में उंगली करने लगी.

    कुछ ही देर के बाद फिर वो भी झड़ गयी.
    मामी ने पूछा- कैसा लगा?
    मैं- बहुत मज़ा आया।

    मामी- तुम इतने दिन से इस मज़े से अनजान थे और तुम्हारी मामी ने तुम्हें सिखाया। तुम्हें मुझको थैंक्स बोलना होगा।
    मैंने मामी को थैंक्स बोला तो मामी बोली- ऐसे नहीं, इधर आओ और मेरे बूब्स को चूसो.
    मैंने पहले मामी के बूब्स को दबाया और फिर मुंह में लेकर चूसने लगा. कुछ देर तक हमने ऐसे ही मजे लिये.

    उसके बाद मामी बोली- सेक्स के बारे में मैं तुम्हें कल सिखाऊंगी.
    उस रात जब मैं सोने की तैयारी में था तो मैंने सुना कि मामी के रूम से आवाजें आ रही थीं. मैं समझ गया कि मामी आज अपनी चूत में मामा का लंड ले रही है.

    दोस्तो, इस तरह से मामी ने मुझे मुठ मारना सिखाया. पहली बार मामी के सामने मुठ मार कर मुझे बहुत मजा आया. उस दिन के बाद से मुझे मुठ मारने की लत सी लग गयी. मैं रोज रात को अपने लंड मुठ मारने लगा और मुझे बहुत मजा आता था.

    अपनी आने वाली कहानी में मैं आपको बताऊंगा कि मामी ने मुझे सेक्स करना कैसे सिखाया.

  • मकान मालिक की पत्नी की यौन तृप्ति

    मैं किराये पर रहता हूँ. मकानमालिक दुबला पतला है. पर उसकी पत्नी की गदरायी जवानी किसी को भी पागल कर सकती है. मुझे लगा कि वो अपने पति से खुश नहीं है. तो मैंने क्या किया?

    नमस्कार दोस्तो,
    मेरा नाम अबन कुमार मिश्रा है. मैं कोलकाता का रहने वाला हूं पर अभी मैं दिल्ली में हूं और मैं किसी बैंक का कर्मचारी हूं.

    यह मेरी पहली कहानी है और बिल्कुल सच्ची कहानी है इसमें जरा भी झूठ नहीं है. मुझे झूठ बिल्कुल पसंद नहीं इसलिए जो भी मैं कहानी बताने जा रहा हूं यह बिल्कुल सच है.
    अगर कहानी लिखने में कोई गलती हो जाए तो प्लीज मुझे माफ कर देना.

    मेरी उम्र 28 साल है और मैं दिखने में ठीक हूं.
    पिछले 4 सालों से दिल्ली में मैं एक किराए के कमरे में रहता हूं. मैंने कमरा नहीं बदला. जिस कमरे में मैं 4 साल पहले था उस कमरे में मैं आज भी हूं.

    मेरा मकान मालिक भी उसी बिल्डिंग में रहता है और उसकी पत्नी है नाम है रचना. मेरा मकान मालिक अपनी पत्नी के ऊपर बहुत शक करता है. यह आप लोग बहुत अच्छे से जानते हैं जो मर्द अपनी पत्नी को शारीरिक सुख नहीं दे पाता है, वही अपनी पत्नी पर शक करता है.

    मकान मालिक थोड़ा दुबला पतला और सेक्स के बारे में थोड़ा ढीला है. ऐसा दिखने में लगता है तो होगा भी!

    और आपको मैं रचना भाभी के बारे में बताऊँ जो दिखने में इतनी गजब की माल है कि मैं आपको लिखकर के बयां नहीं कर सकता. रचना भाभी की लंबाई 5 फीट 11 इंच है और उसके शरीर की बनावट 40 की छाती 32 की कमर और उसकी गांड 38 की है. भाभी की फूले हुए गाल, रसीले होंठ और 36 की उम्र, और उसकी गदराई जवानी उसकी एक नजर किसी भी लड़के को पागल बनाने के लिए काफी हैं. एक ऐसी औरत जिसको पाने के लिए मर्द अपना सब कुछ लुटा दे.

    तो मैं आपको बताता हूं कि मैंने उससे पटाया कैसे और पेला कैसे, मुझे उसको अपने बिस्तर तक लाने में 4 साल लग गए.

    शुरू शुरू में मैं समझता था कि वे ऐसी औरत नहीं है और मैं उस पर ध्यान नहीं देता था. इसी तरह मेरे 2 साल निकल गये.
    वो मुझसे ज्यादा बात भी नहीं किया करती थी, सिर्फ काम की बात किया करती थी.

    दो साल बीतने के बाद उसके पति की जॉब ऐसी जगह लगी जहां वह दोपहर के बाद ड्यूटी पर जाता है और रात में दो बजे घर वापस आता है. मैं बैंक कर्मचारी हूं तो मैं शाम को पाँच बजे अपने कमरे पर आ जाता हूं.

    उसका पति घर पर नहीं होता तो उससे बात करने का ज्यादा मौका मिलता है और वह मुझसे थोड़ा घुल मिल भी गई है. धीरे-धीरे हम दोनों में मजाक भी होने लगा. और ऐसे ही मजाक मजाक में हम दोनों में बहुत अंदर की बातें भी होने लगी.
    यह सिलसिला 2 सालों तक चला.

    पहले के 2 साल जिसमें हम दोनों में बहुत कम बातें हुई, सिर्फ काम की बात हुई. मैं रचना भाभी को पेलना तो बहुत पहले से चाहता था लेकिन मुझे लगता था ये औरत ऐसी नहीं है मजाक तो कर लेती है गंदा लेकिन मेरे बिस्तर में नहीं आ सकती. मैं इसे कभी चोद नहीं पाऊंगा.

    एक दिन मेरे बैंक की छुट्टी थी मैं अपने कमरे पर अपने कपड़े धो रहा था. और वह सीढ़ी पर बैठकर मुझसे बातें कर रही थी. बातों बातों में रचना भाभी ने मुझसे कहा- मेरी तबीयत ठीक नहीं है मुझे डॉक्टर के पास दिखाने जाना है.
    मैंने कहा- सुबह तो भैया घर पर ही होते हैं, भैया के साथ अस्पताल चली जाना.
    रचना भाभी ने मुझसे कहा- उनके पास टाइम कहाँ होता है.
    तो मैंने कहा- तुम खुद चली जाना.

    रचना भाभी ने मुझसे कहा- मुझे नहीं मालूम है अस्पताल का!
    तो मैंने भाभी से बोला- मैं आपको अस्पताल ले चलूंगा.
    भाभी बोली- ठीक है.

    बैंक का कर्मचारी गणित वाला दिमाग बाद में मेरे समझ में यह बात आई कि यह अपने पति के साथ नहीं जाना चाहती. यह लोकल औरत है और इसे अस्पताल के बारे में नहीं पता. मैं तो यहां चार साल पहले आया हूं. मैं बाहर का हूं लेकिन यह मेरे साथ अस्पताल जाना चाहती है.
    मैं सब कुछ समझ गया था लेकिन खुलकर नहीं समझ पाया.

    अब मैं इसके दिल की बात जानना चाहता था कि यह चाहती क्या मुझसे. जैसे मैं इसकी वासना में 4 साल से तड़प रहा हूं. क्या रचना भाभी भी जवानी की आग मेरे लौड़े से बुझाना चाहती है?

    एक दिन मैंने भैया को देखा चड्डी में छत पर टहल रहे थे. भैया की शरीर को देखने के बाद मुझे लगा कि रचना भाभी की प्यास भैया से बिल्कुल नहीं बुझती होगी.
    रचना भाभी का जैसा शरीर है रचना भाभी जैसी औरत को शांत करने के लिए घोड़े जैसा लौड़ा चाहिए और धमाकेदार मर्द.

    मैंने सोचा कि एक बार भैया के बारे में बात करूंगा भाभी से!
    हमारा मकान मालिक है लेकिन मैं उनको भैया और उनकी पत्नी को यानी रचना को भाभी बोलता हूं.

    एक दिन मौका मिला और मैंने रचना को यह बात बोल दी- भैया के शरीर को मैंने देखा चड्डी में … वे छत पर टहल रहे थे. मुझे नहीं लगता कि वे आपको शारीरिक सुख दे पाते होंगे.
    रचना भाभी ने बहुत आश्चर्य मुझसे कहा- तुम्हें कैसे पता? तुम कैसे जानते हो? तुमने मेरे बेडरुम में झांक कर देखा है क्या? तुम यह कैसे कह सकते हो?

    फिर मैंने कहा रचना भाभी को- भैया की उम्र 45 साल, आपकी उमर 36 साल. आपके शरीर को और उनके शरीर को देख कर के मैंने यह अनुमान लगाया है.
    रचना भाभी ने मुझसे कहा- इन सब बातों पर ज्यादा दिमाग मत लगाओ.

    फिर मेरे दिमाग में पहले वाली बात आई कि यह औरत ऐसी नहीं है.

    इसी तरह कुछ दिन बीत गये.

    रचना भाभी नीचे रहती हैं और मैं पहले मंजिला पर रहता हूं. एक दिन मैं सीढ़ियों से नीचे उतर रहा था और उसी टाइम भाभी छत पर जाने के लिए सीढ़ियों पर चढ़ रही थी. मैं आधी सीढ़ियों पर था तो मैंने दीवार के साइड में रुक कर के उसे जाने का रास्ता दे दिया,
    मुझे देखकर वह मुस्कुराते हुए सीढ़ियों पर चल रही थी और मेरे लौड़े पर अपनी कमर को रगड़ती हुई निकल गई.

    उसके बाद मैं समझ चुका था कि यह मेरे लौड़े से चुदाना चाहती है.

    दो दिनों बाद रचना भाभी ने अचानक मुझे आवाज लगाई- अबन नीचे आओ!
    मैंने कहा- आ रहा हूं मैं!

    जब मैं नीचे आया तो रचना भाभी ने पूछा- क्या तुमने खाना खा लिया?
    तो मैंने कहा- नहीं, अभी मैं खाना खाने जा रहा हूं.
    रचना भाभी ने कहा- जाओ कपड़े बदल कर आओ, हम दोनों शादी में चल रहे हैं. पास में शादी है.

    मैं कपड़े बदल कर आया और हम दोनों शादी में चले गए.
    रचना भाभी ने मुझसे पूछा- तुम पहले क्या खाओगे?
    मैंने कहा- दही भल्ले मेरा पसंदीदा हैं, मैं दही भल्ले पहले खाऊंगा.
    रचना भाभी ने कहा- मेरे भी पसंदीदा हैं, पहले मैं भी दही भल्ले ही खाऊंगी.

    दही भल्ले के लिए तीन-चार लोग पहले से खड़े थे उसके पीछे रचना भाभी खड़ी हो गई और रचना भाभी के पीछे खड़ा हो गया.
    रचना भाभी ने साड़ी पहन रकही थी और गजब की माल लग रही थी.

    मैं रचना भाभी के पीछे खड़ा था तो मेरा लौड़ा उसकी गांड पर लग रहा था. जब रचना भाभी को अपनी गांड पर मेरा लंड महसूस हुआ तो उसने मुझसे पीछे पलट के कहा- क्या कर रहे हो अबन?
    मैंने कहा- माफ करना भाभी, गलती से लग गया.
    रचना भाभी ने कहा- कोई बात नहीं, चलता है.

    इसके बाद डांस हो रहा था शादी में … हम दोनों डांस देखने लगे.
    धीरे-धीरे डांस देखने वालों की भीड़ लग गई. हम दोनों भीड़ के बीच में पड़ गए.

    भाभी मेरे दाहिने तरफ खड़ी थी भाभी ने मुझसे कहा- मैं तुम्हारे आगे आ जाती हूं तुम मुझे सुरक्षा दो.
    शायद भीड़ में भाभी ने अपने आप को असुरक्षित महसूस किया था.

    अपनी बांहों से मैंने रचना भाभी को घेर लिया. उसके बाद तो मेरा लौड़ा रचना भाभी की गांड पर ही टिका हुआ था.
    मैंने रचना भाभी के कान में कहा- माफ करना जो गलती हो रही है.
    रचना भाभी ने मेरे कान में कहा- कोई बात नहीं अबन, तुमको मेरी अनुमति है.
    और अपनी गांड खुद मेरे लौड़े पर दबा दी.

    मैंने पूछा- ये क्या?
    रचना भाभी ने कहा- सवाल मत करो, जो कर रहे हो, बस चुपचाप करते रहो.
    1 घंटे तक मैं रचना भाभी की गांड पर अपना लौड़ा रगड़ता रहा.

    जब मुझ से बर्दाश्त नहीं हुआ तो मैंने रचना भाभी को कहा- चलो अब यहां से!

    भाभी ने गांड पर लौड़ा सटाने की अनुमति दे दी, चूत देने में देर नहीं करेगी, ये मैं समझ गया था.

    हमने खाना खाया और हम दोनों वहां से निकल लिये.

    रास्ते में हम दोनों बात करते हुए आ रहे थे.
    भाभी ने पूछा- डांस देखने का मजा आया?
    मैंने कहा- हां.
    भाभी ने हंसते हुए पूछा- मेरी साड़ी तो गीली नहीं की है न?
    मैंने कहा- नहीं.

    भाभी मेरे हाथों में हाथ डालकर चलने लगी.

    सुनसान रास्ता हो गया था एक जगह मुझे अंधेरा मिला मैंने भाभी को पकड़कर दीवार पर चिपका दिया और जबरदस्त किस करने लगा. तकरीबन 10 मिनट तक मैं भाभी के होंठ को चूसता रहा
    भाभी भी पूरे जोश में साथ दे रही थी. वह भी हार मानने का नाम नहीं ले रही थी. लग रहा था वह मेरे ऊपर चढ़ जाएगी.
    लेकिन मैं भी जवान लड़का … भाभी को दीवार में रगड़ रगड़ के चूसा मैंने.

    तभी किसी के आने की आहट सुनाई दी और भाभी ने मुझे धक्का दिया और कहा- यहां नहीं, घर चलो.

    जब हम अपनी गली में आ गए तो वहां भी थोड़ा सुनसान है और अंधेरा भी.
    फिर से मैंने भाभी को पकड़ा और चूसना शुरू कर दिया. फिर भाभी ने पूरा साथ दिया पर दो मिनट के बाद अलग हो गई बोली- नहीं … घर चलो!

    मैंने मन में सोच लिया था कि आज भाभी की चूत में लौड़े का धमाका करूंगा. इसके पति को घर वापस आने में अभी टीम घंटे बाकी हैं. 2 घंटे के अंदर ऐसा चोदूंगा, उसकी चूत का भरता बना दूंगा. असली मर्द की ताकत आज नहीं दिखाई तो इसके सामने मैं अपना मुंह नहीं दिखा पाऊंगा.

    रचना भाभी ने दरवाजे का लॉक खोला, अंदर गए, रचना ने फ्रिज के पानी की बोतल निकाली हम दोनों ने पानी पिया.
    और वह किनारे में खड़ी होकर मुझे देख कर के मुस्कुराने लगी.

    फिर मैंने रचना भाभी को पकड़ा और दीवार में सटा दिया. उसके बाद फिर से उसके होंठों को चूसने लगा और हाथ से रचना भाभी की चूचियों को पकड़ कर मसल रहा था.

    यह सिलसिला 15 मिनट तक चला. रचना की हालत एक बेकाबू जानवर की तरह हो गई थी

    उसने मुझे एक जोर का धक्का दिया और खुद से अलग कर दिया.

    अलग करने के बाद मेरे पास आई और मेरे कपड़े उतारने लगी.
    मैंने भी बिना समय गवाए उसको नंगी कर दिया. रचना को बेड पर धकेल दिया. रचना बेड पर सीधे गिरी और मैं उसके ऊपर फौरन आ गया.
    फिर से मैं रचना के होंठों को चूसने लगा और चूचियों को खूब मसलने लगा.

    रचना ने 5 मिनट के बाद मेरे होंठ से अपना होंठ छुड़ा लिया और कराहने लगी.

    मेरी एक जांघ रचना की दोनों जांघों के बीच में फंसी थी और उसकी चूत को दबा रही थी. रचना की चूत मेरी जांघ को गीला कर रही थी.

    अब समय था रचना की चूत में अपना लौड़ा पेलने का! मैं रचना के दोनों जांघों के बीच में आ गया और अपने दोनों हाथों से रचना की कमर पकड़कर उसकी गांड उठा दी.
    रचना को कहा- इसके नीचे तकिया लगाओ!
    उसने बिना देर किए हुए आगे से तकिया लिया और अपनी गांड के नीचे लगा लिया.

    मैंने रचना के दोनों पैर पकड़ कर हवा में लहरा दिया. फिर मैंने रचना को किस करना शुरू कर दिया और उसकी चूचियों को दबाने लगा.

    फिर मैंने अपने एक हाथ से रचना की चूत पर अपने लौड़े को सेट किया और फिर अपने दोनों हाथों से रचना के सिर को पकड़ लिया ताकि लौड़े का धक्का लगने के बाद रचना आगे की तरफ ना उछले.
    और एक जोरदार लौड़ा का थक्का उसकी चूत में मारा. रचना दर्द से तिलमिलाने लगी. रचना की हालत देख कर के मुझे भी दया आ गयी.
    अभी आधा ही लौड़ा उसकी चूत में गया था

    फिर मैंने अगला धक्का अपने लौड़ा का उसकी चूत में नहीं मारा, मैं रुक कर उसके दर्द कम होने का इंतजार करने लगा.

    लगभग मिनट के बाद रचना का दर्द कम हुआ तो रचना ने मेरे सीने पर हाथ रखा और कहा- अबन आराम से, जब तक मैं ना बोलूं तब तक तुम धीरे धीरे करो. जब मेरा इशारा तुम्हें मिल जाए उसके बाद तुम मेरी चूत फाड़ देना. मर्द की मर्दानगी औरत देखकर ही परख लेती है और मैंने तुम्हारी मर्दानगी का अंदाजा तुमको देख कर लगा लिया था.

    रचना ने मेरे सीने से अपना हाथ हटा लिया.

    मैंने बाकी का आधा लौड़ा मैंने धीरे से रचना की चूत में डाल दिया और धीरे धीरे उसे चोदने लगा.

    5 मिनट बाद रचना ने खुद अपना पैर और हवा में फैलाया और मुझे कहा- अब करो आपकी मर्जी से!
    मैंने फिर रचना के सिर को जोर से पकड़ा और लौड़े का जबरदस्त धक्का उसकी चूत पर मारने लगा.

    15 मिनट चुदने के बाद रचना ने अपना पूरा बदन को बहुत टाइट कर लिया. मैं अपनी पूरी ताकत से लंड उसकी चूत में पेल रहा था. 2 मिनट बाद उसने अपने शरीर को ढीला छोड़ दिया.

    मैं रचना का अपने दोनों हाथों से सिर पकड़े उसकी चूत पर अपने लौड़े से धमाकेदार वार किए जा रहा था.

    कुछ समय बाद रचना ने दोबारा अपना पूरा शरीर टाइट कर लिया. जब भी रचना अपना पूरा शरीर टाइट करती थी, उसकी चूत से गर्म गर्म पानी निकलता था. और यह मैं अपने लौड़े पर महसूस कर रहा था.
    जब भी रचना की चूत का गर्म पानी मेरे लौड़े पर महसूस होता तो मेरी आग और भड़क जाती थी. मैं रचना को और भी ज्यादा जबरदस्त चोदने लगता था. एक लंबी ऊंची औरत को मैंने ऊपर से उसका सिर अपने दोनों हाथों से पकड़ रखा था और उसकी चूत पर अपने लौड़ा का जबरदस्त धक्के मार रहा था.

    रचना बिल्कुल सिकुड़ गई थी. मेरी और रचना की जांघ जब टकराती थी तो चट चट की आवाज पूरे कमरे में गूंज रही थी.

    मैं और रचना पसीने से तरबतर हो गए थे. 45 मिनट तक घमासान चोदाई चलने के बाद रचना ने फिर से अपना पूरा शरीर टाइट कर लिया और अपनी चूत से गर्म पानी छोड़ने लगी. रचना की चूत का गर्म पानी में अपने लौड़ा पे महसूस कर रहा था.

    रचना की चूत के गर्म पानी के जोश में मेरे लौड़ा से भी लावा निकलने लगा. रचना ने अपने शरीर को ढीला छोड़ दिया और शांत हो गई.
    मेरे लौड़े से दो मिनट तक लावा निकलता रहा थोड़ा थोड़ा करके और रचना शांत पड़ी रही.

    जब मेरे लौड़े का लावा रचना की चूत में आखरी बूंद तक टपक गया तो मैं निढाल होकर के रचना की बगल में लेट गया.
    हम दोनों पसीने से भीगे हुए थे. हम दोनों की सांसें बहुत तेज चल रही थी.

    10 मिनट के बाद हम दोनों की सांसें नॉर्मल हुई तो रचना ने पलटकर मेरी तरफ देखा. मैंने रचना को अपनी बांहों में भर लिया. रचना ने प्यारी सी मुस्कुराहट के साथ मुझे किस किया.

    मैंने रचना से पूछा- क्या तुम खुश हो? क्या तुम्हें वह सुख मिल पाया जिसकी उम्मीद करती थी तुम मेरी मर्दानगी से?
    रचना ने मुस्कुराहट के साथ मुझे बहुत कस के पकड़ा और एक जोरदार किस किया और कहा- समझदार के लिए इशारा काफी है. खुद ही समझ जाओ.

    15 मिनट तक मुझे बांहों में लेकर गहरी सांस भरती रही. जब भी मैं कुछ कहता तो मुझसे कहती- शांत लेटे रहो अबन!

    उसके बाद रचना ने खुद से मुझे अलग किया और मुझसे कहा- कपड़े पहन लो.
    मैंने कपड़े पहन लिये.
    रचना से मैंने पूछा- फिर कब दोगी?
    वह बोली- अभी जरा रुको,!

    रचना अभी कपड़े पहनने गई थी. कपड़े पहनने के बाद मेरे पास आई और मेरे गले से लिपट गई. रचना बोली- इस जीवन में मैंने अपना पूरा शरीर अबन … तुमको हमेशा के लिए सौंप दिया.
    तुम जो चाहो मेरे शरीर के साथ करो. ये अनुमति हमने तुम्हें दे दी. जब भी मुझे मौका मिलेगा मैं खुद चलकर तुम्हारे पास आ जाऊंगी. अब तुम्हारे लंड राजा को कभी चूत की कमी महसूस नहीं होने दूँगी, यह मेरा वादा है. कसम से अबन … तुमको जाने देने का दिल नहीं कर रहा है. लेकिन रात ज्यादा हो चुकी है, तुम्हारे भैया के आने का समय हो गया.

    रचना ने एक जोरदार किस किया.
    मैंने भी रचना का साथ दिया और वो बोली- जाओ!

    और मैं अपने कमरे में आ गया.

  • लखनऊ में मिली लड़की को चोदा

    लखनऊ की लोकल बस में मेरे बगल में एक लड़की बैठी थी. बार बार ब्रेक लगने से मेरी कोहनी उसके चूचों पर टकराती थी. उसके बाद क्या हुआ? मैंने उसे कैसे चोदा?

    नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम आरव है. मेरी उम्र 24 साल है. मैं उत्तर प्रदेश के एक शहर का रहने वाला हूं और एक जिम ट्रेनर की नौकरी करता हूं.

    अन्तर्वासना पर ये मेरी पहली इंडियन सेक्स स्टोरी है. यह कहानी आज से लगभग 2 साल पहले की है. मैं कुछ काम से लखनऊ गया हुआ था. वहां चारबाग स्टेशन पर उतर कर मैंने महानगर के लिए बस पकड़ी.

    उसी बस में मेरे बगल में एक लड़की बैठी हुई थी. पहले तो मैंने उस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया, लेकिन जैसे ही बस चलने लगी, तो ट्रैफिक की वजह से बार बार ब्रेक लग रही थी. बस यहीं खेल हो गया. बार बार ब्रेक लगने से मेरी कोहनी उसके चूचों पर टच होने लगी थीं. मुझे एकदम से उसके मस्त मुलायम मम्मों का स्पर्श मिला, तो मैं अन्दर तक गनगना गया.

    फिर मैंने ध्यान से उस लड़की को देखा, तो उसका फिगर बहुत ही कमाल का था. बंदी के 34डी साइज़ के चूचे, पेट एकदम सपाट 30 इंच का और कमर के नीचे के उठे हुए चूतड़ों की नाप भी लगभग 36 की थी.

    मुझे उसमें रस आने लगा. जब बस धीरे धीरे चलने लगी, तो मैंने उससे बात करना शुरू किया. उसने अपना नाम रूबी (बदला हुआ) बताया. वो केसरबाग बस स्टैंड के पास किराये के रूम में रहती थी. लखनऊ में रहकर किसी इलैक्ट्रॉनिक कंपनी में नौकरी करती थी.

    हमारी काफी देर तक बातें हुईं और न जाने कुछ ऐसी बात बनी कि हमने एक दूसरे के नंबर तक ले दे लिए.

    उस दिन शाम को ही मैं वापस अपने शहर आ गया. अब हमारी फोन पर धीरे धीरे करके काफी बातें होने लगी थीं. उसका एक साल से कोई ब्वॉयफ्रेंड नहीं था.

    अगले ही हफ्ते मुझे फिर से लखनऊ जाना पड़ा. ये बात मैंने उसे बताई, तो वो एक दिन अपने पास रोकने को बोलने लगी. मैं भी यही चाहता था, तो मैंने भी तुरंत ही हां बोल दिया.

    मैं शनिवार की सुबह लखनऊ के लिए निकला और लगभग 3 घंटे में पहुंच गया. मैंने अपना काम खत्म करके शाम को 5 बजे उसे कॉल किया, तो वो भी बस अपने ऑफिस से निकलने ही वाली थी. हम दोनों हजरतगंज में मिले और फिर वहां से सीधे केसरबाग रूबी के रूम पर आ गए.

    उसका एक रूम का फ्लैट था, जिसमें किचन और बाथरूम अटैच थे. रूबी ने रूम को अच्छे से साफ-सुथरा रखा हुआ था.

    मैंने देखा कि उसके कमरे में एक सिंगल बेड था. उसके सामने एक अलमारी और पास में ही टीवी लगी हुई थी. मैं बेड पर बैठकर टीवी देखने लगा. रूबी ने भी बाथरूम में जाकर कपड़े बदली कर लिए थे.

    बाथरूम से आकर उसने चाय बनाई और दो कप में लाकर मेरे साथ बैठ गई. हम दोनों ने चाय पी और बातें करने लगे. उससे मेरी बातें इतनी घनिष्ठता से हो रही थीं, मानो हम दोनों न जाने कब से एक दूसरे से परिचित हों.

    इसी तरह इधर उधर की बातें करते हुए रात को 8 बज गए. फिर हम दोनों ने साथ में डिनर बनाया और खाना खाकर आराम करने लगे. अगले दिन संडे था, तो ऑफिस की किसी को टेंशन नहीं थी.

    सिंगल बेड में हम दोनों ही दीवार में टेक लगाकर बैठे थे और बातें कर रहे थे. थोड़ी देर में मैंने अपना एक हाथ रूबी की तरफ उठाकर उसके कंधे में रख दिया, जिससे अब वो पूरी तरह मेरी तरफ आ गई.

    उसने अपना सर भी मेरे सीने में रख लिया. उसके चूचे मेरे मेरे पेट में घुसे जा रहे थे. तभी मैं भी धीरे धीरे अपना हाथ उसकी पीठ पर चलाने लगा.
    उसने टी-शर्ट और लोअर पहना हुआ था. मैं भी टी-शर्ट और शॉर्ट्स में था.

    शॉर्ट्स में मेरा लंड धीरे धीरे खड़ा होने लगा था. मैंने एक हाथ से उसके चेहरे पर फैले बालों को हटाया और माथे पर एक किस किया. जिसका उसने भी कोई विरोध नहीं किया बल्कि मेरे से और चिपक गई.

    फिर मैंने पीठ से एक हाथ को टी-शर्ट के अन्दर डालकर सहलाने लगा. अन्दर उसने ब्रा पहनी थी, जो मेरे हाथों में फंस रही थी. मैंने उसके हुक को खोलकर ये रास्ता भी साफ कर लिया. ब्रा अब भी उसके शरीर पर थी, मगर उससे अब मुझे कोई दिक्कत नहीं हो रही थी. धीरे धीरे मैंने उसकी टी-शर्ट को भी ऊपर कर दिया, जिससे अब मेरा हाथ उसके चूचों पर लगने लगा था.

    फिर मैंने धीरे से एक चूची को सहला कर दबा दिया, तो रूबी की एक सिसकारी निकल गई. फिर मैं धीरे धीरे उसकी दोनों चूचियों को बारी बारी से दबाने लगा. वो मस्त आवाजें लेते हुए मेरे हाथों का मजा ले रही थी.

    मैंने उसके चेहरे को ऊपर उठाया. उसकी आंखें लाल हो गई थीं. मुझसे नजर मिलते ही उसने अपनी आंखें बंद कर लीं.

    मैंने उसके थरथराते होंठों को अपने होंठों से बंद कर लिया और किस करने लगा. वो भी शायद इसी का वेट कर रही थी. उसने भी मेरा पूरा साथ दिया. हम दोनों एक दूसरे की जीभ को आपस में कुश्ती करने लगे. ऐसा करते हुए मैंने उसकी ब्रा और टी-शर्ट को उसके शरीर से अलग कर दिया. अब मैं उसकी गर्दन पर किस करने लगा.. जिससे उसके शरीर का तापमान और बढ़ गया. नीचे उसके दोनों कबूतर आजाद थे. दूधिया रंग के चूचे उस पर हल्के भूरे रंग के किशमिश की तरह उठे हुए निप्पल एकदम मस्ती दिला रहे थे.

    उसके कड़क निप्पल देखते ही मैं उन पर टूट पड़ा और बारी बारी से चूसने लगा. उसके चूचियों को मैंने खूब दबाया और चूसा.

    इसके बाद मैंने एक हाथ नीचे रूबी की पैंटी में डाला, तो उसकी चूत पहले से ही रसीली हो गई थी. मैंने उसकी लोअर और पैंटी को एक साथ नीचे करके उतार दिया. खुद नीचे की तरफ बढ़ते हुए मैं उसकी नाभि में किस करने लगा. नाभि में किस करते ही वो मचलने लगी. मेरी निगाह चुत पर गई, तो नीचे उसने चूत को बिल्कुल साफ किया हुआ था, एक भी बाल नहीं बचा था. रूबी की चूत बिल्कुल गीली हो चुकी थी.

    मैंने जैसे ही एक हाथ से उसकी चूत को सहलाया, तो रूबी की बड़ी आह निकल गई.

    उसे किस करते करते मैं, अब उसकी जांघों पर किस करने लगा. पैरों पर किस करते करते मैंने अचानक उसकी गीली चूत को मुँह में भर लिया. अचानक हुए इस हमले के लिए वह तैयार नहीं थी. इससे उसकी हल्की से चीख निकल गई और उसने मेरे सर को जोर से पकड़ कर अपनी चूत पर दबा दिया और सर को चुत पर रगड़ने लगी. मैं भी मस्ती से रूबी की चुत को चाटे जा रहा था.

    अभी बस कुछ पल ही हुए होंगे कि रूबी एक लम्बी आहहह … के साथ झड़ गई और बेड पर बिल्कुल बेहोश सी लेटी रही.

    थोड़ी देर बाद वो मुझसे बोली कि आज तक उसके किसी ब्वॉयफ्रेंड ने उसकी चूत नहीं चूसी.

    मैं फिर से उस किस करने लगा. अब रूबी ने खुद आगे बढ़कर मेरा शॉर्ट्स और अंडरवियर उतार दिया. मेरा लंड पहले ही खड़ा हुआ था. वो लंड को किस करने लगी और फिर धीरे से मेरे लंड के टोपे को चूसने लगी. हम दोनों ने नजरें मिलाईं और पोजिशन लेकर 69 में आ गए.

    मेरा लंड वो और मैं उसकी चूत चूस रहा था. तभी मैं उसकी चूत के दाने को होंठों से पकड़ कर खींच कर जीभ से सहलाने लगा. इससे उसकी ‘आह …’ की सिसकारी निकल गई. वो भी मेरे लंड को बहुत अच्छे से चूस रही थी, पूरा गले तक ले जा रही थी, जिससे मेरे टट्टे उसकी नाक के ऊपर फिट हो जा रहे थे.

    काफी देर तक की चुसम चुसाई के बाद रूबी झड़ गई और मेरा भी वीर्यपात हो गया. फिर हम दोनों सीधे हुए और मैं उसके होंठों को चूसने लगा. वो सीधी बेड पर लेटी थी, मैंने अपने लंड को उसकी चूत पर सैट किया और धीरे से एक धक्का मारा, जिससे मेरे लंड का टोपा सीधे उसकी गीली चूत में फिट हो गया.

    लंड का टोपा घुसते ही रूबी ‘आःह्ह…’ की सिसकारी के साथ ऊपर की तरफ खिसक गई. मैंने फिर से उसको नीचे किया और किस करते हुए फिर से एक जोरदार शॉट मारा. अबकी बार मेरा पूरा लंड उसकी चूत में घुस गया और मेरे टट्टे उसकी गांड से लड़ गए.

    ‘आह्ह..’ की मस्त आवाज के साथ रूबी मुझे जोर से किस करने लगी. मैंने अपने धक्के तेज कर दिए और रूबी भी गांड उठाकर मेरा पूरा साथ दे रही थी.

    दसेक मिनट तक मैंने उसको हचक कर चोदा. उसकी टांगें उत्तेजना की अधिकता में और मस्त चुदाई से हवा में उठी हुई थीं.

    उसने मेरी तरफ देखा, तो मैं समझ गया. मैंने लंड बाहर खींचा और उसकी चूची पकड़ कर उसे उठने का इशारा किया. वो उठी और पलंग के किनारे कुतिया की पोजीशन में खड़ी हो गई. मैं पलंग से नीचे आ गया और लंड को उसकी चुत के छेद में लगा कर धक्का मार दिया.

    रूबी की मजेदार सीत्कार निकल गई. लंड चुत की कबड्डी होने लगी. मैं लंड खींचता, तो चुत भी आगे को हो जाती, फिर एक लय के साथ लंड चुत आपस में अन्दर तक जाकर मिलन करने लगते.

    मैंने उसकी चूचियों को पकड़ कर उसकी चुत खूब बजाई. इसके बाद वो फिर से पोजीशन बदलने की कहने लगी. मैंने इस बार उसे अपने लंड पर बिठाया और उसकी उछलती चूचियों को अपने हथेलियों में भर कर खूब मींजा.

    इस तरह से हम दोनों काफी देर तक सेक्स करते रहे. मैं हैरान था कि मैंने इतनी देर तक सेक्स कैसे किया. पर मुझे ध्यान आया और खुद पर गर्व भी हुआ कि ये मेरे मेडीटेशन करने का असर था.. जो आज मुझे पता चल रहा था.

    मैं पिछले 50 मिनट से रूबी को चोद रहा था. इस बीच वो 4 बार झड़ चुकी थी और मेरा लंड अभी भी जोरदार चुदाई में लगा हुआ था. आखिरकार एक बार फिर से घोड़ी बनी रूबी को चोदते हुए मेरे लंड की बारिश उसकी चूत पर हुई. रूबी की गर्म चूत भी वीर्य की फुहार से ठंडी हो गई.

    हम दोनों लिपट कर लेटे रहे. उस रात मैंने रूबी को 5 बार जमकर चोदा और अगली सुबह वापस अपने शहर आ गया.

    मैं अभी जब भी लखनऊ जाता हूं, तो रूबी के यहां रुक कर सारी रात उसकी चूत को शांत करता हूं.

  • दोस्त की सेक्सी बीवी की चूत चुदाई स्टोरी

    मेरे दोस्त की पत्नी बीवी … आह … कसम से क्या लड़की थी. वह दिखने में एकदम कमसिन लगती थी. उसका बदन बड़ा मस्त था. उसने कैसे मेरी लंड पर चढ़ कर ज़न्नत की सैर की?

    दोस्तो, मैं मनीष शर्मा अन्तर्वासना का एक नियमित पाठक हूँ और कोटा से हूं. वैसे तो मैं भी शादीशुदा हूँ और मेरा शादीशुदा जीवन भी बहुत अच्छा है. सुंदर बीवी के साथ मेरे दो बेटे भी हैं.

    आज यहां मैं वो दास्तान लिख रहा हूँ, जिसमें मेरे दोस्त की पत्नी ने किस तरह मुझे अपनी चुदाई करने को लेकर मुझे उकसाया. और जो नहीं होना चाहिये था, वो हो गया. क्योंकि तन की इंद्रियों पर भी किसी का जोर नहीं चलता है.

    दोस्तो, ये बात करीब डेढ़ महीने पहले की है. मेरा दोस्त जिसका नाम पार्थिव है, वो एक होटल में मैनेजर है तथा मेरे मकान से करीब आधे किलोमीटर की दूरी पर ही किराये के मकान में रहता है. चूंकि वो मेरा दोस्त था, इसलिए मैं कभी कभी उसकी आर्थिक मदद भी कर देता था. इसी लेनदेन के बहाने मेरा उसके घर आना जाना था.

    उसकी पत्नी माया … आह … कसम से क्या लड़की थी … बस एक बार जो देख ले, बार बार देखता रहे. माया दिखने में एकदम कमसिन लगती थी … उसका बदन बड़ा मस्त था. झील सी गहरी उसकी कजरारी आंखें … फिगर 32-34-32 साइज का. उसके उठे हुए चुच्चे, पतली सी कमर और टाईट सी गांड. जब वो अपनी गांड मटका कर चलती, तो अच्छे अच्छे के लौड़े भी खड़े हो जाते.

    कमाल की बात यह कि इतनी मस्त मॉल होने के बावजूद मैंने कभी भी माया को गलत नज़र से नहीं देखा था. क्योंकि मैं ये सोचता था कि माया मेरे दोस्त की पत्नी है … किंतु वो मेरे बारे में क्या सोचती थी, मुझे इसकी जानकारी बिल्कुल नहीं थी.

    वैसे पार्थिव की शादी को 3 साल हो गए थे, लेकिन उनको कोई बच्चा नहीं हुआ था. मैं इस बारे में उससे पूछता, तो वो हर बार हंस कर टाल देता था.

    एक दिन सुबह मैं उसके घर गया और डोरबेल बजाई. मुझे पार्थिव से जरूरी काम था. उसकी पत्नी ने दरवाज़ा खोला और मैंने माया को देखा, तो उसने सफेद कलर की गाउन पहन रखा था. उसमें से उसकी ब्लैक स्टेप और ब्लैक पेंटी साफ दिखाई दे रही थी, जो उसने पहन रखी थी. उस दिन पहली बार उसको देखकर मन में हलचल हुई थी. शायद वो भी इस बात को समझ चुकी थी कि मेरा ध्यान कहां हैं.

    वो बोली- हां भइया बोलिए … इतनी सुबह सुबह … कैसे आना हुआ!
    उसकी आवाज़ से जैसे मैं जागा, मैं बोला- पार्थिव है घर पर!
    वो बोली- हां यही हैं, वो सो रहे हैं.

    उसने मुझे अन्दर बुलाकर बिठाया और पानी का गिलास देकर चाय बनाने की बोल कर अन्दर किचन में चली गई. मेरी तो हालत उसके 32 साइज़ के चुच्चे देखकर ही खराब हो गई थी. जैसे तैसे मैंने अपने आप पर कंट्रोल किया, लेकिन मेरा लंड पूरा खड़ा हो गया था, जो ऊपर से साफ दिख रहा था.

    इतने में माया चाय लेकर आ गई थी. उसने मुझे चाय दी और खुद भी वहीं मेरे सामने बैठकर चाय पीने लगी. हालांकि मैं चाय पी रहा था, लेकिन मेरी नज़र बार बार उसके चुचों पर जा रही थी. मैं समझ नहीं पा रहा था कि वो मुझे उकसा रही है या उसके मन में कुछ और बात है.

    मैंने माया को पार्थिव को बुलाने के लिए बोला तो बोली- आप मुझे काम बता दीजिए, मैं उन्हें बोल दूंगी.
    फिर मैंने कहा- पार्थिव ने कुछ समय पहले मुझसे पैसे लिए थे, तो मुझे जरूरत है पैसों की, तो मैं लेने आया था.
    माया बोली- ठीक है … मैं उन्हें बोल दूंगी. आप शाम को आकर अपने पैसे ले जाना.

    इस तरह बोल कर वो मुस्कुराने लगी और फिर मैं भी वापस अपने घर आ गया.

    घर आकर सबसे पहले तो माया की चुदाई को याद करके मुठ मारी, तब जाकर शरीर को थोड़ी शांति मिली.

    दिन में मुझे पार्थिव मिला. शायद वो कहीं बाहर जा रहा था.
    मैं उससे कुछ बोलता, उससे पहले वो आ गया और बोला- शाम को घर जाकर पैसे ले लेना. मैं माया को देकर आ गया. मैं दो दिन के लिए शहर से बाहर जा रहा हूँ … कोई भी प्रॉब्लम हो, तो सम्भाल लेना.

    मैं बोला- ठीक है.

    अब तो मेरे मन में लड्डू फूटने लग गए कि हो सकता है आज शाम को मुझे माया की चूत चुदाई नसीब हो जाए.

    जैसे तैसे मैंने पूरा दिन निकाला और शाम को पार्थिव के घर पहुंच गया. मैंने डोरबेल बजाई. जैसे ही माया ने दरवाजा खोला, मैं तो उसे देखता ही रह गया.

    उसने ब्लैक कलर की साड़ी पहन रखी थी. कसम से क्या माल लग रही थी. उसने मुझे अन्दर बुलाया और वहीं ड्राइंगरूम में सोफे पर बिठाकर खुद भी मेरे सामने बैठ गई. मैं बस माया को ही देख रहा था.

    माया बोली- क्या हुआ भैया?
    जैसे मैं गहरी नींद से जगा … मैं बोला- कुछ नहीं … लेकिन आज तुम बला की ख़ूबसूरत लग रही हो.
    वो मुस्कुराई और बोली- वो आपको पैसे देने के लिए बोल कर गए हैं कि आप पैसे लेने आओगे.
    मैं बोला- हां जरूरत थी, इसलिए पार्थिव को बोला.

    मैं माया से बात तो कर रहा था, लेकिन मेरी बार बार नज़र उसके चुचों पर जा रही थी. दिल कर रहा था कि अभी पकड़ कर मसल दूँ, लेकिन क्या कर सकता था. उधर नीचे मेरा लंड अपना पूरा आकार ले चुका था. माया भी सब कुछ देख कर भी अनजान बन रही थी.

    वो बोली- क्या देख रहे हैं आप घूर घूर के?
    न जाने मैंने किस झौंक में उसके चुचों की तरफ इशारा करते हुए कह दिया- इनको देख रहा हूँ.
    माया पल्ला हटा कर अपने चूचे उठाते हुए बोली- आखिर इनमें ऐसा क्या है?

    ऐसा वो मुस्कुराते हुए बोली. उसकी इस हरकत से मैं समझ गया कि बंदी चुदने को रेडी है.

    मैं बोला- अगर तुम इज़ाज़त दो, तो बताऊं.
    उसने मुस्कुराते हुए हां में सर हिलाया.

    मैं उसके पास जाकर बैठ गया और माया को देखने लगा और धीरे धीरे उसके होंठों की तरफ अपने होंठों को बढ़ाने लगा.

    माया ने अपनी आंखें बंद कर लीं, जैसे उसने मुझे स्वीकृति दी हो. मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और उन्हें चूसने लगा और एक हाथ उसकी पीठ पर घुमाने लगा.

    थोड़ी देर में वो भी मेरा साथ देने लगी और हम एक दूसरे के होंठों को जोर जोर से चूसने लगे. मैं उसके पीठ को सहलाते हुए उसकी गर्दन के बायीं ओर उसे चूमने लगा. वो अपने मुँह से हल्की हल्की सीत्कारें निकालने लगी. मैं उसके चेहरे और उसके होंठों को पागलों की तरह चूमने लगा और वो अपने मुँह से ‘सीई ससीईई सससीईईई..’ की आवाजें करने लगी.

    धीरे से मैं अपने एक हाथ को नीचे उसके उरोजों पर ले गया और ब्लाउज के ऊपर से ही उन्हें दबाने लगा. क्या नर्म नर्म उरोज थे उसके. फिर मैंने उसके शरीर से उसकी साड़ी को अलग कर दिया और फिर से उसके उरोजों को दबाते मसलते हुए उसे चूमता रहा और वो अपने मुँह से ‘ऊह हहहह आह आह सस्स सस्स ससीई..’ की आवाजें निकालती रही.

    मैं अपने हाथ से माया के शरीर को सहला रहा था और उसे बेहताशा पागलों की तरह चूम भी रहा था. वो मदहोश होने लगी थी. धीरे धीरे मैंने माया का पेटीकोट ऊंचा कर दिया और उसकी जांघों को सहलाते हुए उसकी पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत को मसलने लगा.

    उसने मस्ती के मारे कस के मेरा लंड भींच दिया. मेरे मुँह से एक सिसकारी निकल गई. फिर मैंने उसका ब्लाउज और उसकी ब्रा दोनों को उतार दिया. उसके उरोजों को देखकर मेरी वासना और भड़क गई और मैं दोनों हाथों से उसके उरोजों को प्यार से मसलने और दबाने लगा. माया मस्ती के मारे ‘आह आह आह आह..’ करने लगी.

    वो बोली- ओह भैया … जोर से और जोर से दबाओ.

    मैं उन्हें प्यार से ही दबाने लगा. वो भी प्यार से मेरे लंड को मेरी पैंट के ऊपर से ही दबाने लगी थी.

    फिर मैं वापस माया के होंठों को चूमने लगा तथा दूसरे हाथ उसका पेटीकोट का नाड़ा खींचकर खोला और उसे उतार दिया. अब सामने उसकी चूत को मैं पेंटी के ऊपर से ही मसल और दबा रहा था.

    मैंने अपनी शर्ट और बनियान दोनों उतार दिए. मैंने फिर से माया को चूमना शुरू किया और एक हाथ से उसके चुचों को सहलाए जा रहा था. इसके बाद मैं थोड़ा नीचे आया, उसके उरोजों के सामने अपने होंठ लाया. उसके एक उरोज की चौंच को मैं अपनी जुबान से सहलाने लगा और होंठों के बीच दबाकर खींचकर छोड़ने लगा. वो मस्त हो गई.

    इधर मैं दूसरे को जोर जोर से मसलने लगा. फिर दूसरे उरोज को भी मुँह में लेकर उसकी चौंच को जुबान से सहलाने लगा. ऐसा करने पर वो ओर मचलने लग गई और बड़े प्यार से मुझे अपने मम्मे पिलाने लगी. मैं उसके निप्पलों को मुँह में लेकर जोर-जोर से चूसने लगा. मैं बहुत देर तक दूध चूसता रहा. वो मेरे सर में हाथ फिराते हुए ‘ससीईउई ससीईई..’ करने लगी और मेरे लंड को जोर से दबाने लगी.

    फिर माया ने मेरा मुँह वहां से हटाकर मेरे होंठों को चूसने लगी.

    उसके हाथों में इतनी जान थी कि मैं चाहकर भी अपना चेहरा नहीं हटा पा रहा था. फिर उसने मेरी पैंट और मेरे अंडरवियर को एक ही बार में उतार दिया और सीधा मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर ऐसे चूसने लगी, जैसे कई दिनों की भूखी हो.

    खैर माया मस्त होकर मेरे लंड को चूस रही थी. लंड के टोपे को अपने पतले होंठों के बीच लेकर खींच कर चूस रही थी. मेरे लंड के टोपे पर जुबान फिराकर और पूरा मुँह में लेकर ऐसे चूस रही थी, जैसे लंड को नहीं, सोफ्टी आइसक्रीम को चूस रही हो.

    मैं ज्यादा समय तक उसकी इस अदा पर नहीं टिक पाया और मेरे लंड ने सारा लावा उसके मुँह में ही उड़ेल दिया. माया एक एक बूंद को चूस चूस के पी गई, लेकिन इसके बावजूद वो मेरे लौड़े को चूसती रही.

    थोड़ी देर में मेरा लंड वापस खड़ा हो गया. फिर मैंने माया को सोफे पर बिठाया और उसके उरोजों को मसलकर चूसने लगा, वापस दबाने लगा. थोड़ी देर बाद उरोजों को चूसते हुए मैंने माया की पेंटी उतार दी और उसकी चूत को सहलाने लगा

    माया ‘सस्स सससीईईई..’ की आवाज़ निकलने लगी. फिर मैंने जैसे ही अपनी जुबान से उसकी चूत के दाने को सहलाया, वो तो बस ‘उईईई आह आह आह ससीईई..’ करने लगी. मैं उसकी चूत चाटने में लग गया.
    उसकी चूत से लगातार नमकीन टेस्टी पानी निकल रहा था, जिसे मैं चूसते हुए चाट रहा था.

    तभी माया ने मेरा मुँह अपनी चूत पर दबा लिया और अपनी गांड को हिलाने लगी. वो अपनी चूत को मेरे मुँह पर तेजी से घिसने लगी. मैं भी पूरा पक्का चूत चूसने में लगा रहा. उसकी चूत की दोनों फांकों को पूरा मुँह में दबा कर खींच कर चूसने लगा.

    माया बोली- अब तो अपना लंड मेरी चूत में डाल दो … मुझसे सहन नहीं होता.

    मैंने भी देर न करते हुए उसको थोड़ा आगे खींच कर उसके दोनों पैरों को अपने कंधे पर रख लिया. अपने लंड को उसकी चूत पर टिकाकर एक ही बार में पूरा लंड उसकी चूत की गहराइयों में उतार दिया.

    उसकी एक मीठी सी आह निकली और वो पूरा लंड लील गई.

    मैं अपने लंड को उसकी चूत के अन्दर बाहर करने लगा. वो भी मेरी कमर को पकड़ कर मुझे अपनी चूत की तरफ खींच रही थी.

    वो मस्ती में बोल रही थी- आंह चोदो और तेज चोदो … फाड़ डालो मेरी चूत को और … सससीईईई सससीईई आह आह आह उह उह आह..

    मैं भी उसे गाली दे दे कर चोद रहा. लंड अपनी पूरी रफ्तार से माया की चूत का बाज़ा बजा रहा था.
    माया बोली- मुझे तुम्हारे लंड की सैर करनी है.
    फिर मैं रुक गया.

    उसने मुझे सोफे पर बिठाया और खुद अपनी चूत को लंड पर सैट करके सोफे को पकड़ कर बैठ गई और ऊपर नीचे होने लगी.

    वो बोली- आहआह आह भैया … ऐसे तो पार्थिव ने मुझे कभी नहीं चोदा … आह आह आह!

    मैं उसकी बातों पर ध्यान नहीं दिया और उसकी चूची को मुँह में दबा कर चूसने लग गया. इस तरह माया ‘सससीईई सससीईई..’ करते हुई और जोर से लंड पर कूदने लगी.

    थोड़ी देर में उसकी चूत पानी छोड़ने लगी और ‘पच पच पच..’ की आवाजें आने लगीं. उसकी स्पीड कम हो गई थी, तो मैं अपनी गांड उचका कर उसको नीचे से चोदने लगा. मैं भी फुल स्पीड से चोदने में लगा था. तभी मेरा भी पानी छूटने वाला था.

    मैं बोला- माया अन्दर ही निकाल दूँ.
    वो बोली- हां भैया निकाल दो, मुझे आप अपने बच्चे की मां बना दो. शादी को 2 साल से ऊपर हो गए. बहुत कुछ सुनना पड़ता है.

    फिर मैंने अपने लंड का सारा लावा उसकी चूत में भर दिया. हम दोनों ने एक दूसरे को कसके बांहों में जकड़ लिया. जब थोड़ा नॉर्मल हुए, तो वो अलग हुई और बाथरूम जाकर खुद को ठीक करके मेरे लिए किचन से चाय बनाकर लायी.

    चाय पीने के बाद और हम दोनों ने एक और राउंड लिया. इस बार मैंने उसे खड़े खड़े घोड़ी बना कर चोदा.

    उसके बाद जब भी पार्थिव बाहर जाता, मैं माया की चूत को अपने लंड की सैर करवाता.

    कुछ दिनों के बाद उसने मुझे गर्भवती होने की बात बोली. वो भी खुश थी और मैं भी. उसके बाद माया ने किस तरह अपनी सहेली को भी मुझसे चुदवाया, वो अगली सेक्स कहानी में लिखूंगा.

  • नई आई चाची के साथ सुहागरात जैसी चुदाई

    न्यू चाची Xxx चुदाई कहानी में मेरे चाचा शादी के कुछ दिन बाद जॉब पर चले गए. पीछे चाची लंड की कमी से तड़पती थी. एक रात मैंने चाची को पूरी नंगी देखा. वे चूत में उंगली कर रही थी.

    हाय दोस्तो, मेरा नाम राज है.
    मैं 24 साल का हूँ और महाराष्ट्र के छोटे से गांव से हूँ.

    यह मेरी पहली सेक्स स्टोरी है जो मेरी सगी चाची और मेरे बीच घटी घटना है.

    मेरी चाची का नाम सोना है.
    जैसा उनका नाम है, वैसा ही उनका रंग है. वो बिल्कुल ऐश्वर्या राय जैसी दिखती हैं.
    उनका फिगर 32-28-34 का है, जो भी देखे उन्हें चोदने का मन करे!

    हमारा संयुक्त परिवार है. हम सब एक साथ ही रहते हैं.
    हमारे घर में मेरे दादा-दादी, मेरे पापा और हम दो भाई, दो चाचा और चाची हैं.

    न्यू चाची Xxx चुदाई कहानी में हुआ यूँ कि चाचा की शादी के 3 महीने बाद काम के सिलसिले में मुंबई चले गए और वहीं काम करने लगे.

    चाचा के जाने के बाद चाची उदास रहने लगीं.

    चाचा से रात में फोन पर चाची की बात होती, पर नई-नवेली दुल्हन सेक्स के बिना कितने दिन रहेगी?
    घर में मैं चाची के साथ एक दोस्त की तरह रहता था, कोई छोटा बच्चा नहीं था … तो चाचा के मुंबई जाने के बाद चाची के डबल बेड पलंग पर मैं और मेरी चाची दोनों साथ में सोते थे.

    हम रोज 10 बजे तक टीवी देखकर सब अपने-अपने कमरे में सो जाते. तब तक मेरे मन में चाची के लिए कोई गलत विचार नहीं था.

    लेकिन एक दिन रात को अचानक जब मेरी नींद खुली.
    तो मैंने देखा चाची बिल्कुल नंगी होकर दीवार के पास खड़ी होकर अपनी चूत में उंगली कर रही थीं.

    वे अपने संतरे जैसे बूब्स को एक हाथ से दबा रही थीं और सिसकारियां ले रही थीं.
    मैं उन्हें देखने लगा, पर उस वक्त मैं हैरान हो गया जब मैंने उनके मुँह से अपना नाम सुना.

    वे अपनी चुत रगड़ती हुई मेरा नाम लेती हुई बड़बड़ा रही थीं.
    ये सब देखकर मैं हैरान हो गया और पैंट में मेरा लंड खड़ा हो गया.

    थोड़ी देर बाद चाची झड़ गईं और पुनः सो गईं.
    फिर मैं थोड़ी देर बाद उठकर बाथरूम में जाकर चाची को याद करके मुठ मारकर सो गया.

    दूसरे दिन से चाची के लिए मेरी नजर बदल गई.
    अब मैं चाची को चोदने का प्लान बनाने लगा और सोचते-सोचते एक आइडिया मेरे दिमाग में आ गया.

    मैं खाना खाने के तुरंत बाद चाची के रूम में जाकर सोने का नाटक करने लगा.
    चाची काम निपटा कर रात के करीब दस बजे आईं और उन्होंने मुझे आवाज़ दी.
    मैं जगा हुआ था, लेकिन सोने का नाटक करता रहा.

    चाची ने जब देखा कि मैं गहरी नींद में सो रहा हूँ तो उन्होंने अपनी साड़ी उतारी. फिर पेटीकोट भी उतार दिया.
    वे मेरी तरफ अपनी गांड करके खड़ी थीं.
    मैं उन्हें देख रहा था.

    चाची ने ब्लाउज़ भी उतार दिया और ब्रा उतार कर पैंटी को भी उतार दिया.

    मैं ये सब चुपके से देख रहा था.
    फिर चाची पलंग पर रखी हुई अपनी नाइटी लेने के लिए जैसे ही मुड़ीं, मुझे उनकी चूत के दर्शन हो गए!

    क्या मस्त पावरोटी सी फूली हुई चूत थी यार … बिल्कुल क्लीन शेव्ड!
    उनकी मखमली चूत देखकर ऐसा लगा कि अभी पटक कर अपना 6 इंच लंबा और 3 इंच मोटा लंड चाची की चूत में डाल दूँ!

    पर मैं इतनी जल्दी ऐसा नहीं कर सकता था.

    फिर चाची ने अपनी चूत पर हाथ फिराया और नाइटी उठाई.
    वे मुझे देखती हुई नाइटी पहनने लगीं और आकर मेरे बाजू में लेट गईं.
    चाची की गांड मेरी तरफ थी और मेरा कंट्रोल खोता जा रहा था.

    मैं थोड़ी देर बाद उठा और बाथरूम जाकर मुठ मार कर वापस आया.
    मैंने वापस आकर देखा तो चाची की नाइटी उनकी जांघों तक आ गई थी.

    अब नींद मुझसे कोसों दूर थी, तो मैंने लाइट बंद की और जाकर उनसे चिपक कर सो गया.
    चाची के बदन की गर्मी मुझे महसूस हो रही थी.

    मैंने सोने का नाटक करते हुए चाची के ऊपर अपना एक हाथ रखा.
    इस पर चाची कुछ नहीं बोलीं, ऐसा लग रहा था मानो वे घोड़े बेच कर सो रही हों!

    यह देख कर मेरी हिम्मत बढ़ी.

    मैं धीरे-धीरे उनकी नाइटी के ऊपर से हाथ फिराने लगा और उनके चूचे दबाने लगा.
    चाची की गर्म सांसें मुझे महसूस हो रही थीं.

    अब मैंने आगे बढ़ने की सोची और दूसरा हाथ उनकी जांघ पर रखकर सहलाने लगा.
    इससे चाची गर्म होने लगीं और वे अचानक से मुड़ गईं.

    मैं डर गया कि अब लौड़े लग गए … लेकिन वे सोई रहीं.
    अब उनके चूचे बिल्कुल मेरे मुँह के सामने थे और उनके निप्पल एकदम खड़े हो गए थे.

    उनकी सांसें तेज़-तेज़ चल रही थीं और इस वजह से अब मेरा लंड उनकी चूत को छूने लगा था.

    मुझे उनकी तेज तेज चलती सांसों से समझ आ गया था कि चाची भी जाग रही हैं पर सोने का नाटक कर रही हैं.

    मैंने उनकी नाइटी को धीरे-धीरे सरकाना शुरू किया और उसे पूरी उतार दी.
    इसमें चाची ने भी बिना आंखें खोले मेरी मदद की.

    जब उन्होंने अपनी गांड उठाकर नाइटी निकल जाने दी और अपनी आंख नहीं खोली … न कुछ बोलीं, तो मुझे पक्का हो गया कि आज चाची चुत चुदवाने के लिए राजी है.
    कुछ देर के बाद मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए और अपना 6 इंच लौड़ा लेकर उनके साथ चिपक गया.

    मैं चाची की चूत में उंगली करने लगा तो यह उनसे सहन नहीं हुआ और वे मादक आंहों में आवाज निकालती हुई सिसकारने लगीं ‘आह सी आह्ह्ह … स्स्स आह्ह्ह्ह आआह मेरे राजा आह बहुत प्यासी हूँ मैं … आह!’

    चाची की चूत बहुत गर्म लग रही थी और टाइट भी थी.

    मैंने उन्हें किस किया और चाची के कान में धीरे से कहा- चाची, अब बस भी करो प्लीज … थोड़ा सपोर्ट करो न! वैसे तो मेरा नाम ले लेकर चूत में उंगली करती हो न!

    यह सुनकर तो चाची बिल्कुल जंगली बिल्ली की तरह मुझ पर झपटीं और मुझे अपनी बांहों में कसके भरने लगीं.
    मैं भी किस करते-करते उनके चूचे मसलने लगा और एक हाथ से चूत में उंगली करने लगा.

    चाची चुदास भरे स्वर में बोलीं- राज और मत तड़पाओ … प्लीज मुझे चोद दो!

    मैंने चाची को कुछ और तड़पाने की सोची और उनकी चूत में मुँह लगाकर जीभ अन्दर डालने लगा.
    इससे चाची को बहुत मज़ा आया.

    वे मादक स्वर में चिल्लाने लगीं- आआह ईई … अहम्ह्ह बहुत मज़ा आ रहा है … तुम्हारे चाचा ने पहले ऐसा कभी नहीं किया!
    यह कहती हुई चाची अकड़ने लगीं और मेरे सर को अपनी चूत में दबाने लगीं.

    वे कुछ ही पलों में झड़ गईं.

    अब मैंने उन्हें लंड मुँह में लेने को बोला.
    तो वे नानुकुर करने लगीं.

    मेरे थोड़ा ज़ोर देने पर वे मान गईं और मेरा लंड चूसने लगीं.

    मैं तेज़-तेज़ उनके मुँह को चोदने लगा, चाची के गले तक लौड़े को पेलने लगा.
    चाची ‘गो-गो’ करने लगीं.

    फिर मैंने पोजीशन ली.
    एक तकिया चाची की गांड के नीचे लगाया और उनके पैर अपने कंधे पर रखकर लंड का सुपारा उनकी गुलाबी चूत के मुँह पर रख कर रगड़ने लगा.

    चाची मस्त होने लगीं तो मैंने एक जोर का झटका दे मारा.
    पहली बार में मेरा लंड फिसल गया.

    चाची हंसने लगीं.

    मैंने फिर से लौड़े को चुत के मुँह पर सैट किया और करारा झटका दे मारा.
    इस बार मेरा 2 इंच लंड चूत के अन्दर चला गया और चाची की चीख निकल गई.
    उन्हें बहुत दर्द हुआ.

    मैंने कहा- क्या हुआ?
    चाची ने कहा- मैंने पहले कभी इतना बड़ा नहीं लिया! शादी से पहले मेरा कोई बॉयफ्रेंड भी नहीं था और तुम्हारे चाचा का बहुत पतला और छोटा सा है! प्लीज आराम से करो!

    मैंने उनसे हां कहा और उनकी कोई परवाह न करते हुए उनके होंठों पर होंठ रख कर चूसने लगा.
    मैं उनकी चीख न निकले इसलिए मुँह बंद किये हुए था.

    जैसे ही चाची मस्त हुईं, मैंने एक ज़ोरदार धक्का मारा.
    इस झटके से मेरा पूरा लंड चूत में उतर गया.

    वे दर्द से छटपटाने लगीं.
    उनकी चुत फट गई थी तो चूत से खू.न आने लगा था.
    पर मैंने उन्हें नहीं बताया.

    उनकी आंखों से आंसू आने लगे.

    मेरा भी पूरा लंड छिल गया, मुझे भी बहुत दर्द होने लगा.
    लेकिन कसी हुई चुत में लंड पेलने में बहुत सुख मिला था.

    चाची की चूत गर्म भट्टी जैसे तप रही थी.

    मैं थोड़ी देर ऐसे ही पड़ा रहा.
    फिर जैसे चाची का दर्द कम हुआ, मैंने दोबारा से झटके मारने चालू कर दिए.

    न्यू चाची अब लौड़े से Xxx चुदाई के मज़े लेने लगीं और मादक आवाज में सिसकारने लगीं ‘आह … आ मज़ा आ गया … और तेज़ करो … आह अह अह फाड़ दो आह ऐसे ही चोदो!’

    वे गर्मागर्म आहें भरने लगीं तो मैंने फुल स्पीड में चुदाई चालू कर दी.
    फिर जब मैं झड़ने को आया, तो मैंने चाची से कहा कि मेरा काम होने वाला है … माल कहां निकालूँ?

    चाची बोलीं- आह, मेरा भी होने वाला है … बाहर मत निकालना … अन्दर ही छोड़ दो!
    मैंने यह सुनते ही तेज़-तेज़ चार-पाँच झटके मार और चाची की चूत के अन्दर झड़ गया.

    झड़ कर मैं हांफने लगा था तो उसी अवस्था में चाची के ऊपर ढेर हो गया.
    थोड़ी देर बाद हम दोनों उठे और एक-दूसरे को साफ किया.

    उनकी बेडशीट पर पूरा खू.न लग गया था.
    चाची ने बेडशीट चेंज की और हम दोनों नंगे ही सो गए.

    इसके बाद तो रोज़ रात को हम दोनों नंगे होकर चुदाई करते और मजा लेते.
    जब तक चाचा नहीं आए, मैंने चाची की चुत को अपनी चुत समझा.

    चाचा के आने के बाद भी जब हमें मौका मिलता है, तो हम दोनों चुदाई कर लेते हैं.
    चाची मेरे लौड़े से बड़ी खुश हैं.

  • गर्लफ्रैंड की माँ ने चूत चुदवायी

    मैंने मेरे घर के सामने की एक लड़की पटा ली, हम दोनों में खूब चुदाई होती थी। एक दिन उसकी मम्मी ने हमारी चैट पढ़ ली और मुझे अपने घर बुलाया. उसके बाद क्या हुआ?

    हाय दोस्तो, मैं योगी रंग गोरा कद 5 फिट 8 इंच का गबरू जवान हूँ। मैं अभी 23 साल का हूँ मेरा लंड का साइज 7 इंच लंबा और 3 इंच मोटा है।

    चलो दोस्तो अब मैं कहानी पे आता हूँ. ये कहानी तब की है जब 20 साल का था.
    मैं जब फर्स्ट ईयर की पढ़ाई करने गांव से शहर गया. तब मैं वहाँ के माहौल में ढला और मेरे घर के सामने की एक लड़की पटा ली जिसको मैं बहुत प्यार करता था. और वो लड़की भी मुझसे प्यार करती थी, हम दोनों में खूब चुदाई होती थी।

    एक दिन हुआ क्या कि वो मुझसे चैट करते करते सो गई. रात के 11 बजे उसकी माँ उसके रूम में गयी लाइट बंद करने!
    इधर मैं सोच रहा था कि वो कैसे रिप्लाई नहीं कर रही है. यह सोच कर मैंने उसको कॉल किया तो उसकी माँ ने फोन उठाया.

    मैंने उसकी माँ के कुछ बोलने से पहले से बोल डाला- जानेमन … कुछ जवाब नहीं दे रही हो?
    तो उसकी माँ में कुछ नहीं कहा और हमारी सारी चैट को पढ़ लिया, उस चैट में हम लोग बहुत अश्लील बातें कर रहे थे.

    मेरी गर्लफ्रैंड की माँ के बारे में बता दूं … वो बहुत बड़ी चुदक्कड़ औरत थी. उसके जिस्म का साइज़ 36-30-38 था. माँ कसम यारो … उनको चोदने में जितना मजा आया, उतना तो मेरी गर्लफ्रैंड को चोदने में मजा नहीं आया और ना ही मेरी गर्लफ्रैंड की दोनों मामी और उसके एक विधवा बड़ी माँ (मेरे गर्लफ्रैंड की माँ की बड़ी बहन) को!

    मैं आप लोगों को एक बात बता दूँ कि उसकी फैमिली की सभी लेडिस बहुत चुदक्कड़ हैं। जब मैं थर्ड ईयर में बाहर में रहता था तो वो मेरे साथ हर रात बिताती थी. उसकी दोनों मामी और उसकी बड़ी माँ को मैंने कैसे पटाया और चोदा, ये बाद में बताऊंगा. आज उसकी माँ के बारे में बताऊंगा जो इन सबसे बड़ी चुदक्कड़ थी. जिसने मुझे खुद प्लान करके पटाया था।

    हाँ तो दोस्तो, जैसे मैंने बताया कि उस रात मेरी गर्लफ्रैंड मुझसे चैट करते सो गई तो उस दिन से मुझसे चुदवाने वाली की एक और संख्या बढ़ गयी।

    सुबह मुझे एक अज्ञात नंबर से कॉल आया. मैंने फोन उठाया तो वो मेरी गर्लफ्रेंड का नाम लेते हुए बोला- मैं इसकी माँ बोल रही हूं.
    मेरी गांड फट गयी क्योंकि मैं उनसे बहुत डरता था।
    उन्होंने कहा- क्या तुम घर आकर मुझसे मिलके बात कर सकते हो? मुझे तुमसे एक शिकायत है।

    मैंने उनसे कहा- क्या शिकायत है, आप बोलिये?
    तो उन्होंने कहा- घर में आओ अभी!
    “ठीक है आंटी!” कहक़र मैं उनके घर गया.

    तो उन्होंने मुझे बैठक कमरे में बिठाया और फिर मुझे कहा- तुम मेरी लड़की से प्यार करते हो?
    तो मैंने कहा- हाँ करता हूँ.
    “मैंने कल रात तुम्हारी चैटिंग पूरी पढ़ ली है।”

    फिन मेरी गर्लफ्रेंड की मम्मी ने पूछा- इसी तरह से बात करते हो या रियल में भी ये सब करते हो?
    तो मैंने उनसे कहा- नहीं आंटी, ये सब तो हम शादी के बाद करेंगे।
    तो उन्होंने खूब डांटा.
    मैं अपना सिर नीचे करके बस जवाब दे रहा था.

    तो उन्होंने कहा- तुम लड़कियों की तरह सिर क्यों झुकाये हो?
    मैंने सर उठाकर देखा वो बहुत गहरे गले का ब्लाउज पहने थी. उनके बड़े बड़े बूब्स की क्लीवेज साफ साफ दिख रहा था.
    तो उन्होंने मुझे देखते हुए देख लिया और पूछा- क्या देख रहा है?
    मैं चुप रहा.

    उन्होंने मुझसे कहा- लड़के तो तुम मुझे अच्छे लगते हो लेकिन ऐसी अश्लील बातें क्यो करते हो?

    तो मैंने उनसे कहा- सॉरी आँटी, आज के बाद नहीं करूँगा।
    वो बोली- मैं तो उसके पापा को सब बताने वाली हूँ. तू तो जानता है कि वो बहुत खतरनाक हैं. मैंने भी कई बार उनके हाथों से मार खायी है.

    मैंने उनसे गिड़गिड़ाते हुए माफी मांगी.
    तो उन्होंने कहा- ठीक है, नहीं कहूँगी उनसे! लेकिन तुम मेरा एक काम करोगे तब … और जब मैं बोलूंगी, वो काम तुमको करना पड़ेगा.
    मैंने कहा- ठीक है आँटी!
    उन्होंने कहा- कल 10 बजे सुबह आना।

    मैं रात भर नहीं सोया. ना ही अपनी गर्लफ्रैंड से बात की. बस सुबह होने का इंतजार किया.
    सुबह सुबह 4 बजे आंख लगने के कारण 9 बजे उठा.

    उन्होंने कॉल किया- आ रहा है या नहीं?
    मुझे कुछ पता नहीं था कि मेरे साथ क्या होना था.
    मेरे को क्या पता था कि वो मेरी ज़िंदगी का सबसे हसीन पल था.

    मेरी सेक्स लाइफ का, अय्याशी का सब जबरदस्त मोड़ था क्योंकि मैंने इसके बाद मेरी गर्लफ्रैंड की फैमिली में केवल उसकी नानी को बस को नहीं चोदा क्योंकि वो बहुत ज्यादा बूढ़ी हो गयी थी. उसके मामा की पूरी फैमिली चुदती थी. मजे की बात यह कि इसके बारे में मेरी गर्लफ्रैंड को कुछ नहीं पता था।

    9 बजकर 55 मिनट में मैं उनके घर पहुंचा. मैंने उनको आवाज दी तो वो बोली- मेरे रूम में बैठ … मैं नहा रही हूँ.
    तो मैं उनके रूम में गया.

    उनके बेड पे उनकी ब्रा और पेंटी रखी थी. मैं उनकी ब्रा और पैंटी को नाक के पास ले जाकर सूंघने लगा. क्या मस्त खुशबू आ रही थी. लेकिन मैंने डर में भी अपने कमीनेपन को नहीं छोड़ा।

    फिर वो नहा कर टॉवल में बाथरूम से बाहर आयी. मैंने अचानक से उनको देखा तो उनकी पैंटी को बेड पे रख दिया. जब वो टॉवल में आ रही थी तब वो सेक्स की देवी लग रही थी. मैं उनको एकटक देखते रह गया.
    तो उन्होंने कहा- क्या देख रहा है?
    मैंने उनसे कुछ नहीं कहा।

    फिर वो मेरे को बकने लगी- तू मेरे बिस्तर पे कैसे बैठा है? तू नीचे बैठ! वो एक टॉवल रखा है उसको उठा कर ला और मेरे हाथ पैर को टॉवल से पौंछ!

    मैंने उनके हाथ पैर के पानी को टॉवेल से साफ किया. उनके बाल भी सुखाये. ये सब करते हुए मुझे डर तो लग रहा था लेकिन उनके अर्धनग्न शरीर का दीदार भी हो रहा था.
    मन तो कर रहा था कि उसके टॉवल को खींचकर नंगी करके चोद दूँ. लेकिन डर भी रहा था कि अगर बात बिगड़ गयी थी सबसे हाथ धोना पड़ जाए!

    फिर उन्होंने मुझसे कहा- किस सोच में पड़ गए तुम? उस बॉडी लोशन को लाओ और मेरे हाथों में लगाओ, पैरों में लगाओ. आज से तुम मेरा रोज ऐसी काम करोगे।

    मैंने बॉडी लोशन आंटी की बाजू पर लगाया. फिर उसके बाद मैंने उनके पैरों में आया, जांघों पर आया. क्या मोटी और सेक्सी जाँघें थी आंटी की! मेरा लंड पूरा 7 इंच का हो गया.
    उन्होंने ये सब देख लिया.

    फिर मैंने जैसे ही लोशन जाँघों में लगाया तो वो बोली- बस इतना ही?
    बोल करके आंटी ने अपने दोनों पैरों को फैला दिया और मेरे हाथों को अपनी चूत में ले जाकर कहने लगी- यहां कौन करेगा?
    और वो अपने टॉवल को निकालकर पूरी तरह से नंगी हो गयी.

    मैं तो पागल हो गया. फिर उठकर मैंने ढेर सारा बॉडी लोशन को उनके पूरे नंगे जिस्म पर डाल के लगाया.

    फिर मैं उनके होंठों को चूमने लगा. वो भी बेतहाशा मुझे चूमने लगी.
    मैं धीरे धीरे उसके पूरे बदन को चूमने लगा.

    फिर मैंने आंटी की चूत को चाटना चालू कर दिया. फिर वो उह आह करने लगी और बड़बड़ाने लगी- जबसे मैंने तुम्हारा मैसेज पढ़ा … तब से पता चल गया था कि तुम माहिर खिलाड़ी हो. तब से ही मैं तुम से चुदवाना चाहती हूँ योगी!

    मैं बोला- उस दिन आपका क्लीवेज देखा तब से आपको चोदने का मन था मेरा … लेकिन डर रहा था.

    फिर मैंने भी अपने कपड़े निकाले, मेरा 7 इंच का लंड देखकर आंटी का मुंह खुल गया. मैंने इसको देखकर आंटी के मुँह में लंड डाल दिया. तो आंटी पागल की तरह चूसने लग गयी.
    मेरे को चूत चाटना बहुत ज्यादा पसंद है और गांड का छेद चाटना … मैंने आंटी को 69 में किया और इत्मीनान के साथ आंटी की चूत चाट रहा था.

    हम दोनों ही 69 की अवस्था में एक दूसरे को संतुष्ट कर रहे थे. फिर वो झड़ने वाली थी तो वो मेरा सर अपने चूत में दबा रही थी.
    फिर वो झड़ गयी. मैंने उनके पानी पी लिया और वो भी मेरा गटक गयी.

    थोड़ी देर के बाद फिर हम चुदाई के लिये तैयार हो गए. मेरी गर्लफ्रेंड की माँ कहने लगी- डाल दे जानू!
    मैंने अपने लंड को उनकी चूत में डाला.
    वो तड़प गयी.
    शुरु में गर्लफ्रेंड की माँ की चूत में लंड बहुत टाइट जा रहा था क्योंकि वो बहुत दिनों से चुदी नहीं थी।

    मैंने उनको दो बार चोदा 10 बजे से 12 बजे तक. फिर उन्होंने हम दोनों के लिए खाना बनाया. फिर हम लोगों ने खाया फिर हम सो गए.

    हम 3 बजे उठे दोपहर में! अब फिर मैंने उनको चोदा.
    फिर उन्होंने कहा- रात में सबके सोने के बाद आना. मैं अपने पति के साथ सोती नहीं, अलग से रूम से सोती हूँ. तुम आना, फिर रातभर करेंगे.

    मैं रात को 10 बजे गया, सुबह 5 बजे वापस आया. पूरी रात चली चुदाई से वो चल भी नहीं पा रही थी.

    अब तो हर रात और दोपहर में चुदाई चली शनिवार और रविवार छोड़कर। ऐसी पूरे एक साल चला.

    फिर मैंने थर्ड इयर में मैं दूसरी जगह रूम लेकर रहने लगा तो वो उस रूम में आने लगी।

  • ट्रेन में मिले टीसी ने होटल में मुझे चोदा

    दोस्तो, मेरा नाम गुड़िया है. मैं दिल्ली के आनंद बिहार में रहती हूँ. मेरे पति एक एमएनसी में नौकरी करते हैं.
    हमारी शादी को 14 साल हो चुके हैं और हमारा एक बेटा है, जो अब 12 साल का है.

    मेरे पति ज्यादा सेक्सुअली एक्टिव नहीं हैं.
    हम दोनों महीने में बस 2-3 बार ही सेक्स करते हैं.

    ये HindiXxx चुदाई कहानी उस समय की है, जब मेरा बेटा चार साल का था लेकिन वह अभी भी मेरा दूध पीता था

    मुझे अपने घर लखनऊ जाना था, तो मैं अकेली ट्रेन से जा रही थी.

    मेरे पास थर्ड एसी का टिकट था.
    मैंने साड़ी पहनी थी और उस दिन नेट की साड़ी में मेरा फिगर बहुत सेक्सी दिख रहा था.
    ट्रेन हजरत निजामुद्दीन से निकल चुकी थी.

    मैंने डिनर का ऑर्डर किया और अपने बेटे को अपनी सीट पर सुला दिया.
    मैं भी निचली सीट पर साड़ी में ही सोने जा रही थी.

    तभी एक स्टेशन आया और सामने वाली सीट पर एक 40 साल का टीसी आया. उसने कहा- ये सीट खाली है, मैं यहीं सोऊंगा.
    मैंने कहा- ठीक है. हालांकि मुझे अपने बेटे के साथ सोने में थोड़ी असहजता होगी, लेकिन मैं अडजस्ट कर लूँगी.

    अब मेरा बेटा और मैं एक ही सीट पर थे.
    मुझे नहीं पता था कि आगे क्या होगा.

    फिर टीसी बोला- फर्स्ट एसी में एक कूपा खाली है. आप अपने बेटे को लेकर वहां लखनऊ तक आराम से सोती हुई चली जाइए.
    पहले तो मैंने मना किया लेकिन बाद में मान गई.

    उसने मेरा सामान लिया और मुझे फर्स्ट एसी में शिफ्ट कर दिया.
    पूरा कूपा खाली था और सीटें भी बहुत आरामदायक थीं.

    मुझे वहां अच्छी नींद आई.

    सुबह जब मैं उठी, तो ट्रेन लखनऊ से 2 घंटे दूर थी.
    तभी टीसी आया और उसने कहा- गुड मॉर्निंग मैडम.

    मैंने उसे धन्यवाद बोला.
    उसने मुस्कुराते हुए कहा- धन्यवाद से काम नहीं चलेगा. आप मुझे कुछ …

    मैंने उसकी बात को समझ लिया और अपने पर्स से 1000 रुपये निकाल कर उसे दे दिए.
    उसने 500 रुपये और माँगे, लेकिन मैंने मना कर दिया.

    अब वह मुझसे बातें करने लगा.
    मैंने उससे कहा- आप जब तक यहां बैठे हैं, तब तक मेरे बेटे को देख लीजिए. उतनी देर में मैं फ्रेश हो आती हूँ.
    उसने हामी भर दी.

    मैं फ्रेश होने वॉशरूम गई.
    वहां साड़ी उतार कर पेटीकोट और ब्लाउज में फ्रेश हुई.

    फिर सोचा कि अब साड़ी नहीं पहनूँगी. तो मैंने वापस साड़ी लपेटी और कूपे में आकर अपने बैग से जींस और टॉप निकाला, नई ब्रा-पैंटी भी निकाली और तौलिया लेकर वॉशरूम चली गई.

    वह यह सब देख रहा था.

    वॉशरूम में मैंने सारे कपड़े उतार दिए, सिवाय ब्रा-पैंटी के.
    तभी टीसी की आवाज आई- मैडम, आपका बेटा रो रहा है!

    मैंने कहा- प्लीज, उसे मेरे पास लेकर आ जाइए.
    तब तक मैं नहा चुकी थी और पूरी नंगी थी.

    टीसी ने दरवाजा खटखटाया.
    मैंने जल्दी से जींस पहनी और लॉक खोला.

    मेरी ब्रा पूरी भीग चुकी थी.

    टीसी मुझे देखकर बोला- सॉरी!
    मैंने कहा- प्लीज, 2 मिनट बाद इसे सीट पर ले जाइए. मैं इसे दूध पिला देती हूँ तो यह चुप हो जाएगा.
    वह बोला- ओके!

    मैंने गेट लॉक करके अपने बेटे को दूध पिलाया और उसे टीसी की गोद में दे दिया.
    वह मेरी भीगी ब्रा को देखकर हंस रहा था, उसे हंसता देख कर मैं भी मुस्कुरा दी.

    वह चला गया.

    मैंने नहाकर जींस और टॉप पहना और वापस सीट पर आ गई.

    टीसी फिर आया और बोला- मैं भी लखनऊ जा रहा हूँ, किसी काम से. क्या आप किसी होटल के बारे में जानती हैं?
    मैंने उससे कहा- हां आप चाहें तो मेरे साथ चल सकते हैं.

    वह भी राजी हो गया.
    मैंने उसे अपने साथ ऑटो में ले लिया.
    ऑटो में सामान होने की वजह से जगह कम थी.

    मेरे मोटे नितंब, जो जींस में और भी सेक्सी लग रहे थे, उसकी जांघ के ऊपर थे.

    रास्ते में मैंने उसके लंड के उभार को भी महसूस किया. उसने मेरे स्तनों को भी हाथ से छुआ.
    मेरे निपल्स तंग होकर खड़े हो गए.

    उसके लौड़े का उभार साफ दिख रहा था.
    इससे मुझे भी चुदाई का मन होने लगा.

    उसका शरीर बहुत मजबूत था.
    मैं उसकी मर्दानगी को अपने बिस्तर पर महसूस करना चाहती थी.
    उसके लंड को अपने कोमल शरीर पर रगड़ना चाहती थी.
    पूरी नंगी होकर उसके साथ कंबल में सोना चाहती थी और उसके मोटे औजार को अपनी नंगी टांगों के बीच में महसूस करना चाहती थी.

    यह सब सोचकर मैं गर्म हो गई थी.

    तभी ऑटो वाले ने एक होटल के सामने रोक कर कहा कि यह होटल देख लीजिए … यह बढ़िया है!
    वह उतर कर गया और एक कमरा बुक करके आ गया.

    फिर उसने मुझे अपने कमरे में चाय के लिए बुलाया.
    मैं आ गई और उसने चाय मंगवाई.

    हम दोनों बिस्तर पर बैठकर चाय पीने लगे.
    उसकी बातों में एक अपनापन था.

    मुझे उसके साथ एक ही बिस्तर पर उसका पूरा अहसास चाहिए था.

    चाय पीते-पीते वह मेरे बेटे के साथ खेलने लगा.
    मेरा बेटा मेरे दूध निकाल कर पीने लगा.

    टीसी अब मस्त नजरों से मुझे दूध पिलाता हुआ देख रहा था.

    वह बोला- सही से पिला दो न!
    मैं भी उसकी बात सुनकर मुस्कुरा दी और जानबूझ कर अपना टॉप उतार दिया.

    मैंने उससे कहा- दरअसल मेरी ब्रा टाइट है न … तो दूध पिलाने में दिक्कत हो रही है. क्या मैं इसे भी निकाल दूँ?
    वह उठकर जाने लगा.

    मैंने उसे रोक लिया और मुस्कुराते हुए कहा- आप यहीं बैठे रहो.
    वह हंसकर वहीं बैठ गया.

    मैंने अपनी ब्रा उतार दी.
    मेरे स्तन बड़े-बड़े होकर उसके सामने फुदकने लगे थे.

    मेरे नग्न दूध देख कर उसका लंड उफान मारने लगा.

    मैंने पूछा- तुम्हारी बीवी नहीं है?
    उसने कहा- वह गांव में रहती है.
    उसने मेरे बेटे को गोद में ले लिया और मेरा फोन लेकर उसे यूट्यूब पर शॉर्ट फिल्म दिखाने के लिए साइड में बिठा दिया.

    मेरा बेटा फोन देखने लगा.
    टीसी बोला- यार, दो साल से मैंने किसी औरत को छुआ नहीं है, आज आपका सेक्सी बदन देखकर मुझसे रहा नहीं जाता है … अगर …

    यह सुनते ही मैंने उसकी बाकी की बात पूरी होने से पहले तुरंत अपने होंठ उसके होंठों से लगा दिए.

    वह भूखे कुत्ते की तरह मेरे होंठ चूसने लगा, मेरे गाल चाटने लगा और अपने मजबूत हाथों से मेरे चूतड़ दबाने लगा.

    हम दोनों खड़े होकर एक-दूसरे को चूम रहे थे.
    उसका लंड मेरी चूत को टच कर रहा था.
    उसने मेरी गांड के छेद में जींस के अन्दर करके उंगली डाल दी.

    मैं बहुत गर्म हो चुकी थी.
    मुझे लग रहा था कि अभी उसका लंड मेरी चूत फाड़ देगा.

    उसने मुझे पेट के बल लिटा दिया और मेरे उभरे हुए मोटे-मोटे चूतड़ों को जींस के ऊपर से ही काटने लगा.

    मैंने भी जींस का बटन खोल दिया
    तभी मेरे पति का फोन आ गया.
    मैंने ट्रेन लेट होने का बहाना बना दिया.

    तब तक टीसी ने मुझे पूरी नंगी कर दिया था.

    मैंने कहा- जल्दी से मेरी प्यास बुझा दो, राजा!
    उसके मजबूत शरीर ने मुझे पूरा मसल दिया था.

    जैसे ही उसने अपना लोअर उतारा और उसका लंड एकदम से मेरे सामने किसी अजगर की तरह लहराने लगा.
    मैं उसके मोटे लंड को देख कर समझ गई कि आज चुत का भोसड़ा बनने में कसर नहीं रहने वाली है.

    वह अपने लौड़े को मेरे चूतड़ों पर फिराने लगा.
    मैं पागल हो गई.

    उसका लंड लोहे की रॉड जैसा था.
    मैंने पीठ के बल लेटकर अपनी टांगें उसके मजबूत कंधों पर रख दीं.

    उसके लंड से प्री-कम बहुत निकल रहा था और मेरी चूत उसके लंड को निगलने के मचली जा रही थी.

    जैसे ही उसके लंड का सुपारा मेरी चूत में घुसा, मैं जोर से चिल्ला उठी- आह जोर से चोद दे मुझे!
    उसका 6 इंच का लंड मेरे प्राण निकाल रहा था, लेकिन मुझे चुदाई का भूत सवार हो गया था.

    मैं अपनी दर्द भरी आवाज निकाल रही थी और उसके लंड को अन्दर लेती जा रही थी.
    पूरा कमरा हम दोनों की आवाजों से गूँज रहा था.

    मेरा बेटा फोन में ईयरफोन लगाए हुए था.
    उस मर्द टीसी के झटकों से मैं काफी सुकून महसूस कर रही थी.
    जल्दी ही मैं चरम सुख के करीब आ गई थी.

    हम दोनों मिशनरी पोजीशन में चुदाई कर रहे थे.
    उसने मेरे होंठों को अपने दांतों से काटना शुरू कर दिया.

    मैं उत्तेजना से कांपने लगी और मेरी चूत से पेशाब जैसा कुछ बहने लगा.

    मैं थक कर एकदम से शिथिल हो गई लेकिन उसका लंड मेरी चूत में झटके मार रहा था.

    कुछ देर बाद उसने अपना लंड निकाला और मुझे डॉगी स्टाइल में करके मेरी चूत चोदने लगा.
    मेरी चूत में उसके लंड के तेज धक्कों की आवाज गूँज रही थी.

    फिर उसने अपनी पिचकारी मेरे चूतड़ों के ऊपर छोड़ दी.

    हम दोनों 15 मिनट में ही शांत हो गए.
    उसने जल्दी से टिश्यू पेपर लिया और मेरे चूतड़ों पर लगे अपने स्पर्म को साफ कर दिया.

    उसने मेरे बेटे को प्यार से किस किया.
    मैंने अब साड़ी पहन ली क्योंकि मेरी जींस उसके थूक से पूरी गीली हो चुकी थी.

    मेरा बेटा बोला- मम्मा, अंकल आपको क्यों मार रहे थे? वह आपको किस क्यों कर रहे थे?
    मैंने बस मुस्कुरा दिया और सामान लेकर अपने घर पहुंच गई.

    घर पहुंचने के बाद भी मेरा बेटा बोला- मम्मा, जब अंकल आपको किस कर रहे थे और आपकी पैंट चाट रहे थे, तब मैंने वीडियो बना लिया था.
    मैंने उससे फोन लिया और देखा तो पूरा 12 मिनट का वीडियो था!

  • मम्मी और उनके फ्रेंड अंकल की चुदाई देखी

    लाइव सेक्स शो स्टोरी में मैं अपनी मम्मी के साथ उनके दोस्त के घर में रहती हूँ. पापा मम्मी अलग हो चुके हैं. एक रात मेरी नींद खुली कुछ आवाजों से जो मम्मी के कमरे से आ रही थी.

    दोस्तो, मेरा नाम शिक्षा है.
    मैं लखनऊ, उत्तर प्रदेश की रहने वाली हूँ.
    मेरी उम्र 18 साल है.

    मैं 30 साइज़ की ब्रा पहनती हूँ. मेरी कमर का साइज़ 26 है और मेरी कमर के नीचे का साइज़ 32 है.
    मेरा रंग गोरा है और देखने में मैं बहुत प्यारी दिखती हूँ.

    मैं अपनी मम्मा के साथ उनके बेस्ट फ्रेंड के विला में रहती हूँ क्योंकि मेरी मम्मा ने पापा से तलाक ले लिया है.
    अब वे अपने बेस्ट फ्रेंड के साथ रहती हैं.

    मेरी मम्मा की उम्र 37 साल है और उनकी ब्रा का साइज़ 34 है.
    उनकी कमर शायद 29 होगी या मान सकते हैं 30 होगी … और उनकी कमर के नीचे का साइज़ 34 होगा.

    मेरी मम्मा बहुत ही हॉट दिखती हैं, जब वे साड़ी पहनती हैं … तो समझो आग लगा देती हैं!

    उनके बेस्ट फ्रेंड की उम्र 35 साल है. उनका नाम सम्राट है.
    वे बहुत ही स्मार्ट दिखते हैं.

    उनकी हाइट होगी 175 सेमी.
    उनकी बॉडी में सिक्स पैक एब्स हैं.

    वे रोज़ जिम जाते हैं तो उनकी बॉडी एकदम मस्त है.

    आज मैं आपको अपनी ज़िंदगी की पहली सेक्स कहानी सुनाने जा रही हूँ.
    लाइव सेक्स शो स्टोरी अगर अच्छी लगे, तो अपना प्यार ज़रूर देना!

    इतना मेरा वादा है कि कहानी पढ़ने के बाद आप मेरे दीवाने हो जाएंगे क्योंकि ये कहानी बहुत ही रोमांटिक और इरोटिक है.

    जितना हॉट आप इस लाइव सेक्स शो स्टोरी को पढ़कर फील करेंगे, रियल में ये उससे भी ज़्यादा इरोटिक और रोमांटिक थी क्योंकि मैंने इसे खुद फील किया है!

    ये बात है आज से दो महीने पहले की, जब मैं और मेरी मम्मा लखनऊ से अहमदाबाद रहने आ गए थे, मम्मा के बेस्ट फ्रेंड के विला में रहने के लिए.

    हम लोग उनके यहां रहने लगे.
    सम्राट अंकल ने मेरा ट्रांसफर लखनऊ से अहमदाबाद के स्कूल में करा दिया था तो मैं यहां 12वीं में पढ़ती हूँ.

    दिन में मैं स्कूल चली जाती हूँ.

    सम्राट अंकल को बिज़नेस का काम रहता है, तो वे भी बिज़ी रहते हैं और मम्मा विला में अकेली रहती हैं.

    शाम को हम सब साथ होते हैं और डिनर साथ में करते हैं.

    फिर मम्मा अपने बेडरूम में चली जाती हैं और मैं अपने बेडरूम में क्योंकि सम्राट अंकल के यहां दो बेडरूम हैं.
    एक उनका पर्सनल, जिसमें वे और मम्मा सोते हैं.

    एक दूसरा कमरा है, उसमें मैं सोती हूँ.
    हम लोग वीकेंड पर काफ़ी मस्ती करते हैं. घूमने जाते हैं, डिनर पर जाते हैं.

    सब मिलाकर हम सम्राट अंकल के साथ बहुत खुशहाल ज़िंदगी जी रहे हैं.

    सेक्स कहानी में आगे बढ़ने से पहले मैं बता दूँ, ये सेक्स कहानी रियल है और मैं इसका यूनिवर्स बनाना चाहती हूँ.

    अगर इस कहानी को आपका भरपूर सपोर्ट मिला, तो इसके आगे के पार्ट में रियल स्टोरी को और नेक्स्ट लेवल तक ले जाने का ट्राई करूँगी!

    तो हम लोग अंकल के साथ हैप्पी लाइफ जी रहे हैं.

    एक दिन की बात है, जब मेरी थोड़ी सी बेवकूफी की वजह से मैं खुद ही मुसीबत में फंस गई.

    वह करवा चौथ की रात का दिन था.
    मैं अपने बेडरूम में सो रही थी.

    वैसे तो मैं रात को कभी नहीं जागती, पढ़ने की वजह से मुझे नींद आ जाती है और मैं सुबह ही जागती हूँ.

    लेकिन उस रात मुझे प्यास लगी तो मैं जागी और कॉमन हॉल में पानी पीने के लिए गई.

    मुझे लगा जैसे मम्मा के बेडरूम से कुछ आवाज़ आ रही है.

    वह आवाज़ कुछ अजीब-सी थी, जैसे किसी ने मम्मा का गला दबा रखा हो और वो सांस लेने के लिए तड़प रही हों.

    मैं उनके बेडरूम के पास गई, तो देखा कि उनके बेडरूम के दरवाज़े में थोड़ी-सी दरार है और रूम की लाइट भी ऑन है.

    वैसे तो मम्मा के बेडरूम का दरवाज़ा हमेशा लॉक ही रहता है और उन्हें बुलाने के लिए बेल ही बजानी पड़ती है.
    आज उनका दरवाज़ा लॉक नहीं था.
    शायद वे लॉक करना भूल गए होंगी।

    मैंने दरवाज़े की सांस से अन्दर देखने की कोशिश की कि मम्मा के साथ क्या हो रहा है!
    चूंकि वे ऐसे कराह रही थीं, जैसे वे किसी बड़ी मुसीबत में हों.

    मैंने अपनी आंखें दरवाज़े की सांस में लगा दीं और अन्दर का नज़ारा देखने की कोशिश करने लगी.
    जैसे ही मेरी नज़र मम्मा के बेड पर पड़ी, मैं डर गई!

    थोड़ी देर के लिए लगा जैसे मैं न तो हिल पा रही हूँ, न डुल पा रही हूँ!

    अन्दर का नज़ारा देखकर मुझे बहुत तेज़ पसीना आ गया … मेरे रोंगटे खड़े हो गए.

    मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूँ, इसलिए मैं बस टकटकी लगाए देखती रह गई.

    बेड पर मम्मा लेटी थीं, अपने दोनों हाथों से बेड को पकड़े हुए थीं और बहुत तेज़ी से सांसें ले रही थीं.
    उनके जिस्म पर एक भी कपड़ा नहीं था.
    उनके ऊपर एक सफेद चादर डाली हुई थी, जो उनके आधे सीने से लेकर नीचे की बॉडी को ढके हुई थी.

    मैंने जब देखा, तो मम्मा उस बेड पर ऐसे तड़प रही थीं जैसे सेक्स मूवी में कोई एक्ट्रेस तड़पती है!
    चूंकि मेरी मम्मा किसी एक्ट्रेस से कम नहीं लगतीं तो वे बिल्कुल वैसी ही लग रही थीं.

    उस समय तो वे एक्ट्रेस से भी ज़्यादा खूबसूरत दिख रही थीं!

    पूरा बेड सफेद कपड़ों से बहुत ही सुंदर तरीके से सजाया गया था.
    मम्मा को ऐसे तड़पती देख मुझे अन्दर से अजीब-सी फीलिंग आने लगी.

    तभी मेरी नज़र मम्मा के ऊपर डाली गई चादर पर पड़ी, तो मुझे लगा कि चादर के अन्दर कोई है, नीचे की साइड!
    मैंने ध्यान से देखा कि जैसे ही चादर के अन्दर हलचल हुई, मेरी मम्मा बहुत तेज़ी से उछल पड़ीं और तड़पने लगीं.

    मैं सोच में पड़ गई कि चादर के अन्दर कौन हो सकता है, क्योंकि जब हम लोग सोने गए थे, तब अंकल घर पर नहीं थे!
    मैं उस इंसान के चादर से बाहर निकलने का इंतज़ार करने लगी, लेकिन वह इंसान निकलने को तैयार ही नहीं था.

    रूम में AC चल रहा था, लेकिन फिर भी मेरी मम्मा पसीने से तर हो चुकी थीं और तड़पती हुई बोल रही थीं- प्लीज़, बस करो ना आह … आह्ह् … आह्ह मैं मर जाऊंगी प्लीज़ … आह्ह आह्ह आह्ह!
    लेकिन वह इंसान रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था!

    पता नहीं चादर के अन्दर से ऐसा क्या कर रहा था कि मम्मा कंट्रोल खो रही थीं!
    जब मम्मा ने हद से ज़्यादा आवाज़ें निकालनी शुरू कीं, तो आवाज़ पूरे रूम में गूँजने लगी.

    तभी मैंने देखा कि वह चादर धीरे-धीरे मम्मा के जिस्म से नीचे की साइड जा रही है.
    थोड़ी-सी ही देर में मम्मा के बूब्स खुल गए!

    मैं देखकर शॉक्ड हो गई!
    मम्मा के बूब्स एकदम फूले हुए थे, बहुत ही टाइट थे.

    वे एक खूबसूरत अप्सरा लग रही थीं और कह रही थीं- आ आ आ … आह्ह ओह माय गॉड … ओह माय गॉड मैं मर जाऊंगी … प्लीज़!
    उस समय पूरी चादर नीचे चली गई और मैं देखकर हैरान हो गई!

    जो इंसान चादर के अन्दर से निकला, मैं यकीन नहीं कर पा रही थी कि वह और कोई नहीं … सम्राट अंकल ही थे!
    वे पूरी तरह नंगे थे और ऋतिक रोशन से कम नहीं लग रहे थे.

    वे मम्मा के पैरों के पास बैठे थे और मम्मा के दोनों पैर पकड़ कर घुमा दिए.
    मम्मा भी एकदम नंगी थीं!

    जब मम्मा घूमीं, तो मैंने देखा कि मम्मा की दोनों टांगों के बीच लाल-लाल, गुलाबी-गुलाबी सा कुछ दिख रहा था.
    वह उनकी चूत थी.

    फिर अंकल मम्मा के पीछे लेट गए और अपने दोनों हाथों से मम्मा के मम्मों को पीछे से दबाने लगे.
    वे लोग ऐसे लेटे थे कि मम्मा के बूब्स मुझे दिख रहे थे.

    मम्मा की आवाज़ें बढ़ती ही जा रही थीं- आह आह्ह आह … म्म्म्ह ओह्ह!

    उनकी तड़प और तेज़ होती जा रही थी.
    फिर थोड़ी देर में अंकल बैठे और मम्मा को सीधा करके उनकी टांगें उठाने लगे.

    तब मैंने देखा, अंकल का लंड एकदम टाइट और बहुत बड़ा लग रहा था!
    मैं देखकर डर गई!

    उन्होंने मम्मा की चूत में अपना लंड रखा.
    मम्मा पहले से ही बहुत तड़प रही थीं और आवाज़ें निकाल रही थीं इसलिए शायद अंकल और भी ज़्यादा उत्तेजित थे!

    उन्होंने मम्मा की टांगें उठाईं और बीच में जाकर लंड मम्मा की चूत में रखा.

    मम्मा ने अपनी दोनों टांगों से उन्हें जकड़ लिया और बोलीं- आह्ह आह्ह म्म्ह बेबी … फक मी हार्डर हार्डर बेबी! फक मी हार्डर!

    अंकल ने मम्मा के कंधों को पकड़ा और ज़ोर का धक्का दे दिया.
    मेरी मम्मा उछल पड़ीं और तेज़ आवाज़ निकालने लगीं- आआह्ह … आह्ह … ओह नो … आह्ह!

    मम्मा का मुँह बंद ही नहीं हो पा रहा था.
    तभी उन्होंने दोबारा से धक्का मारा. मम्मा का चेहरा पहले से लाल हो रखा था.
    अब और लाल हो गया.

    वे बहुत तेज आवाज़ें निकालने लगीं- आह्ह ओह्ह माय गॉड आह्ह!
    अंकल ने थोड़ा आराम से मम्मा की चूत में अपना लंड अन्दर-बाहर करना शुरू किया.

    जैसे ही अंकल लंड बाहर की साइड लाते, मम्मा को थोड़ा चैन सा मिल जाता, लेकिन जैसे ही वे लौड़े को अन्दर ले जाते, मम्मा मचलने लगती थीं.
    ऐसे ही थोड़ी देर चलता रहा.

    मम्मा के हाव भाव देखकर अंकल बोले- तुम इतनी कामुक आवाज़ निकालती हो तो मेरा हंड्रेड परसेंट निकलवा लेती हो! मुझे और तेज़-तेज़ करने का मन होता है!
    तभी मेरे हाथ से गलती से दरवाज़े पर थोड़ा धक्का लग गया.

    मम्मा तो खोई हुई थीं, उन्हें पता ही नहीं चला.

    लेकिन अंकल ने मुड़कर देखा … तो मैं छुप गई ताकि अंकल मुझे न देख लें.
    लेकिन शायद अंकल को शक हो गया कि कोई दरवाज़े पर है.

    उन्हें तो पता ही था कि ज़्यादा-से-ज़्यादा कौन हो सकता है … शिक्षा यानि मैं!
    वे थोड़ा मुस्कुराए और उन्होंने मम्मा को तेज़-तेज़ धक्के मारना शुरू कर दिया.

    मम्मा की कामुक आवाज़ें पूरे रूम में गूँजने लगीं.
    मम्मा भी खुलकर आवाज़ें निकाल रही थीं- ओह ओह … आह्ह बेबी …आआह्ह .. बी स्लो हनी … आआह्ह म्म्म्ह!

    उन्हें मालूम था कि आवाज़ रूम के बाहर नहीं जाएगी, बस उन्हें यह नहीं पता था कि रूम आज लॉक नहीं है.
    अंकल मम्मा को इतने तेज़-तेज़ धक्के मार रहे थे कि उन दोनों के जिस्मों के मिलने की आवाज़ मेरे पास तक आ रही थी … और मम्मा का तो बुरा हाल था.

    ऐसा लग रहा था कि बस अब उनकी जान निकल जाएगी.
    मम्मा की आंखों से आंसू भी निकलने लगे, लेकिन अंकल रुक नहीं रहे थे!

    मम्मा की आवाज़ें बहुत तेज़ होती जा रही थीं.
    उन्होंने ने अपने हाथों से अंकल की पीठ को पकड़ रखा था.

    करीब 20-25 मिनट बाद मम्मा और अंकल दोनों तेज़-तेज़ झटके मारने लगे.

    फिर 8-10 झटकों के बाद अंकल धीरे-धीरे झटके मारने लगे और उनकी पूरी उत्तेजना खत्म हो गई.

    दोनों एक-दूसरे से चिपक कर लेट गए.
    तभी मेरी नज़र अंकल की पीठ पर पड़ी, जहां से खू.न निकल रहा था.
    मुझे समझ आ गया था कि मेरी मम्मा के नाखून उनकी पीठ में लग गए थे.

    फिर मेरी भी बुरी हालत थी तो मैं झट से अपने बेडरूम में जाकर लेट गई और सो गई.
    सुबह जागी तो पता चला कि मम्मा को बुखार है.

    मम्मा सारा दिन अपने बेडरूम में ही आराम करती रहीं.
    उस दिन जब रात को अंकल घर आए, तो हम सब बैठे थे.

    उन्होंने मुझसे पूछा- मम्मा कैसी हैं?
    तो मैंने बताया कि उन्हें बुखार है.

    तो वे हंसने लगे और मेरी तरफ देखने लगे.
    उस वक्त उन्हें देखकर मुझे बहुत अजीब सा फील हो रहा था.

    अंकल धीरे से बोले- तुमको मजा आया न!
    मैं भौंचक्की थी.

    तभी अंकल ने मेरे गाल पर हाथ फेर कर कहा- यू आर सो स्वीट बेबी!

    अब आगे की सेक्स कहानी आपके कमेंट्स मिलने के बाद बताऊंगी.

  • मौसेरी बहन की चूत में मेरा

    Xxx कजिन सेक्स कहानी में मैंने अपनी मौसी की जवान बेटी की चूत का मजा लिया. मैं उनके घर गया हुआ था तो मैंने अपनी कजिन को उसके बॉयफ्रेंड से चुदती देखा.

    सबको मेरा नमस्कार, यह मेरी पहली सेक्स कहानी है.
    आशा करता हूँ कि ये Xxx कजिन सेक्स कहानी सबको पसंद आएगी कि कैसे मैंने अपनी मौसी की बेटी को अपने लंड की रानी बनाया.

    मेरा नाम रोहित है. मैं जम्मू का रहने वाला हूँ. मेरा कद 5 फुट 10 इंच है. उम्र 26 साल, रंग सांवला.

    मेरे लंड की लंबाई इतनी है कि जिसके भी ऊपर एक बार चोदने के लिए चढ़ जाता हूँ तो संतुष्ट किए बिना रुकता नहीं हूँ.

    मेरी मौसी की बेटी के बारे में बताऊं तो उसका नाम सिमरन (बदला हुआ) नाम है.
    उसकी हाइट 5 फुट 6 इंच है. उसके बूब्स का आकार 34 डी का है. रंग एकदम दूध सा सफेद … जो भी उसे एक बार देखता, तो बस देखता ही रह जाता.

    जब यह सब हुआ था, वो उस वक्त टीचर की जॉब कर रही थी; साथ ही वो अपने घर पर ट्यूशन भी पढ़ाती थी.

    हुआ ऐसा कि मैं उस समय मौसी के रहता था.
    शाम को खाली टाईम मिलता तो हम दोनों घूमने निकल जाते थे.

    मेरे मन में उसके लिए कभी कोई बुरा ख्याल नहीं आया था.
    सब बहुत अच्छा चल रहा था.

    एक दिन ऐसा हुआ कि उसके बर्थडे के दिन उसका ब्वॉयफ्रेंड रात को चोरी छिपे घर पर मिलने आया.
    उसके आने का मुझे पता लग गया और मैं चोरी से सब देखता रहा.

    उस रात मैं पानी पीने उठा था और किचन में गया था.
    तभी मुझे सिमरन की कुछ आवाज आई.

    मैं आगे बढ़ा और सिमरन के कमरे में देखने लगा.
    वो अन्दर किसी लड़के के साथ एकदम नंगी थी.
    मैं उसे देख कर हैरान रह गया.

    वो लड़का सिमरन का ब्वॉयफ्रेंड था जो उसे उसकी बर्थडे पर चोदने आया था.

    उसने सिमरन को कुछ देर धकापेल चोदा और अपना माल उसके पेट पर छोड़ कर अलग हो गया.
    हालांकि सिमरन के चेहरे पर कुछ गुस्सा सा था; शायद उसका ब्वॉयफ्रेंड उसे सन्तुष्ट किए बिना झड़ गया था.

    सिमरन का सेक्सी बदन देख कर मेरा लंड में आग लग गई और ऐसा लगा कि मैं अभी अन्दर जाकर उसे चोद दूँ.

    फिर मैं अपने कमरे में आ गया और मुठ मारकर सो गया.

    मैंने जब से ये सब देखा, तब से सिमरन को लेकर मेरा ख्याल बदल गया.
    अब मैंने उसको टच करना शुरू कर दिया.

    कमाल की बात ये कि उसने सब कुछ समझ लिया कि मेरा टच करने का मतलब क्या है और उसने कोई विरोध भी नहीं किया.

    मैं सोचने लगा कि सिमरन तो एकदम चालू माल निकली जबकि मैं इसे बड़ी मासूम लड़की समझ रहा था.
    फिर वो घड़ी आई, जब हमने एक दूसरे को पहली बारी किस किया.

    उस दिन वो ट्यूशन पढ़ा रही थी तो मैं उसके कमरे में जाकर बैठ गया.
    हमारी बातें होने लगीं.

    कुछ टाइम बाद ट्यूशन ऑफ हुई, तो हम दोनों बिस्तर पर लेट गए और हम दोनों में बातें होने लगी.

    उसने कहा- मुझे शाम को परेड जाना है … साथ चलेगा?
    मैंने भी कहा- हां, मुझे भी तेरे साथ चलना है.

    वो बोली- शाम को घूमना है तो क्यों ना अभी आराम कर लेते हैं!
    मैंने ओके कहा.

    हम दोनों ने कुछ टाइम आराम करने का सोचा.
    वो सोने लगी.
    उसकी आंखें एकदम बंद हो गई थीं.

    मैं उसके चूचियों को ही देख रहा था और अन्दर ही अन्दर मेरे लौड़े की आग भड़क रही थी.

    मैंने बहुत हिम्मत की और सोने का नाटक करते करते उसको टच करने लगा.
    उसने जरा सा भी ऐतराज नहीं किया.

    यह सब कुछ टाइम यूं ही चलता रहा.

    मैंने उसके गाल पर अपने होंठ रख दिए.

    तभी अचानक से सिमरन उठ गई.
    तो मैं डर गया कि आज गया काम से.

    सिमरन ने उठ कर रूम का दरवाजा बंद कर दिया और मेरी साइड अपनी गांड करके सोने का नाटक करने लगी.
    मैंने उसको पीछे से हग किया, वो कुछ नहीं बोली और सोने का नाटक करती रही.

    मैंने पीछे से अपना लंड उसकी गांड पर रगड़ा, तो उसकी बॉडी में गर्मी बढ़ने लगी जिसे वो रोक नहीं पाई.
    वो एकदम से पलट कर मेरी तरफ घूमी और उसने मुझे बहुत टाइट हग कर लिया.

    मैं कुछ समझ पाता कि वो पागलों के जैसे मुझे किस करने लगी.
    मैं भी लग गया.

    हम दोनों के बीच यह चूमाचाटी का सिलसिला कोई 15 मिनट तक चला.
    उसके बाद किसी ने दरवाजा खटखटा दिया, तो हम दोनों डर गए.

    उसने मुझसे कहा- तुम सोने का नाटक करो, मैं देखती हूँ.
    उसने दरवाजा खोला, तो मौसी थीं.

    वो बोलीं- अब उठो बेटा, कितना सोना है?
    सिमरन ने बोला- बस हो गया … मुझे जाना भी है. आप इसको उठा दो मम्मी, इसे भी मेरे साथ जाना है. जब तक मैं तैयार हो जाती हूँ.

    मौसी ने मुझे उठाया.
    फिर हम दोनों तैयार होकर शहर चले गए.

    सिमरन और मैं एक दूसरे के साथ एकदम शांत होकर चल रहे थे.
    मैंने कहा- सब अचानक हो गया … उसके लिए सॉरी!

    सिमरन बोली- जो होना था, वो हो गया. इसमें हम दोनों गलत थे.
    मैंने बोला- इसमें गलत क्या था?

    वो बोली- नहीं यार, हम ऐसा नहीं कर सकते!
    मैंने बोला- जब तुम अपने ब्वॉयफ्रेंड के साथ कर रही होती हो, तब कुछ गलत नहीं लगता? मैंने देखा था कि उसने तुझे आधे रास्ते में छोड़ दिया था.

    वो ये सुनकर सोच में पड़ गई.

    मैंने कहा- मुझसे तुम निराश नहीं होगी.
    उसने मेरी तरफ देखा और मुस्कुरा दी.

    शाम को जब वापिस आए तो हम दोनों थक गए थे इसलिए जल्द सो गए.

    रात के 2 बजे मैंने सिमरन को मेसेज किया.

    वो ही जाग रही थी. उसका तुरंत उत्तर आया कि तू सोया नहीं?
    मैंने कहा- तू कौन सा सो गई है. तू भी तो जाग रही है!

    ऐसे ही हमारी बात शुरू हुई.

    तो मैंने उससे कहा- मेरे रूम में आ जा!
    उसने मना कर दिया कि अभी नहीं.

    मैंने भी उसको ज्यादा फोर्स नहीं किया.

    अगले दिन गुरुपर्व था, मौसी और घर के बाकी के सदस्य गुरुद्वारा चले गए.
    मैं देर से सोया था तो सुबह देर से उठ पाया और अपने काम से जा ही नहीं पाया.

    सिमरन भी कहीं चली गई थी.

    मैं घर से बाहर निकल गया और इधर उधर टहलता रहा; एक पार्क में बैठ कर सिमरन के बारे में ही सोचता रहा.

    फिर जब घर वापस आया तो घर पर देखा कि सिमरन आ चुकी थी.

    उस वक्त घर में सिर्फ मैं और सिमरन थे.
    मैं उसके पास गया और उससे बातें होने लगीं.

    मैंने टीवी चलाया और उस पर एक मूवी लगा दी.
    उसमें सेक्सी सीन आने पर सिमरन उठ कर जाने लगी.

    मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और उसको खींचा, तो वो मेरी गोद में गिर गई और हम दोनों चिपक गए.
    मैं उसके होंठों पर होंठ रख कर चूमने लगा.

    पहले उसने बहुत नखरे किए पर मैंने उसको किस करना शुरू कर दिया.
    वो गर्म हो गई और मेरा साथ देने लगी.

    कोई 15 मिनट तक सब चला.
    फिर वो बोली- मैं गेट बंद करके आती हूँ.
    मैंने उसे जाने दिया.

    उसके वापस आते ही हम दोनों फिर से शुरू हो गए.
    मैंने टाइम खराब न करते हुए उसको नंगी कर दिया और उसने भी मेरे कपड़े खोलना शुरू कर दिया.

    जल्द ही हम दोनों ने एक दूसरे के सारे कपड़े उतार दिए.
    मैंने उसके मम्मों को मसलना शुरू कर दिया.
    उसकी सिसकारियां निकलने लगीं.

    कुछ देर बाद मैंने उसको बेड पर लिटा दिया और उसके जिस्म के साथ खेलने लगा.
    वो भी मेरे साथ मस्ती कर रही थी.

    उसके दूध बड़े मस्त थे.
    मैं उसके मम्मों के साथ मस्ती कर रहा था और उसके निप्पल अपने मुँह में लेकर खींच खींच कर चूस रहा था, जिससे उसकी चूत में सनसनी होने लगी थी.

    वो ‘इस्स आंह धीरे कर न …’ कहती हुई मुझसे मजे लेने लगी थी.
    मम्मों से खेलते खेलते मैंने उसकी फुद्दी में उंगली घुसा दी.
    वो तड़फ उठी.

    मैंने समय खराब न करते हुए उसकी फुद्दी को चाटना शुरू कर दिया और कुछ ही देर में हम दोनों 69 की पोजीशन में आ गए.

    एक दूसरे के गुप्तांग चाटते चूसते हुए 20 मिनट हो गए.
    यह सब मस्त चला.
    फिर वो झड़ गई और उसके बाद मैं भी झड़ गया.

    अब बारी उसको चोदने की थी.
    वो मेरे लंड के साथ खेलने लगी और जल्दी ही मैं फिर से उसको चोदने को तैयार हो गया.

    मैंने उसकी गांड के नीचे एक तकिया रखा और उसकी टांगें खोल कर उसकी फुद्दी पर लंड रगड़ने लगा.
    वो तड़फने लगी और बोलने लगी- आह … अब पेल भी दे बहनचोद साले … फाड़ दे मेरी फुद्दी!

    वो खुल कर गालियां निकालने लगी.
    उसकी मादक सिसकारियां मुझे पागल कर रही थीं.

    मैंने जैसे ही अपना लंड फुद्दी में डाला, उसको रोना आ गया.
    वो दर्द से तड़फने लगी और बोली- आह धीमे कर … मैं कहीं भागी थोड़ी जा रही हूँ.

    मैंने उसको किस की और अपने काम पर लग गया.

    धीरे धीरे मेरा पूरा लंड उसकी फुद्दी में घुस गया और हम दोनों चुदाई का मजा लेने लगे.

    कोई 10 मिनट बाद मैंने उसको घोड़ी बनाया और हमारी धकापेल चुदाई चलने लगी.

    सिमरन के मुँह से लगातार गालियां निकल रही थीं- आह चोद दे साले भड़वे … आह पेल मादरचोद आह पूरा लंड पेल कमीने!
    उसकी गालियां मुझे और भी पागल बना रही थीं.

    करीब 20 मिनट बाद मैं झड़ने को हुआ.
    मैंने उससे पूछा, तो सिमरन बोली- मुझे तेरा माल अन्दर लेना है.
    मैंने भी बिंदास अपनी ट्रेन सरपट दौड़ा दी.

    उसके बाद हम दोनों वाशरूम गए.
    मैंने उसको नहलाया और उसने मुझे!

    उसके बाद मौसी का कॉल आया कि हम सब रात को 10 बजे तक आ पाएंगे.

    जब मौसी ने यह कहा तो सिमरन बहुत खुश हो गई क्योंकि उस वक्त शाम के 5 बज रहे थे.

    सिमरन बोली- जा और बाहर से कुछ खाने का ले आ!
    मैंने उसको किस किया और चला गया.

    मैं जैसे ही वापिस आया तो देखा कि सिमरन वनपीस पहनी हुई थी.
    वो बोली- चलो, पहले जल्दी से खाना खाओ .. फिर दोबारा शुरू करते हैं.

    हम दोनों ने दो दो पैग लगाए और खाने के बाद 2 राउंड और लगाए.
    जिसमें मैंने उसकी फुद्दी पर डेरी मिल्क सिल्क चॉकलेट लगाकर उसको खूब चूसा भी और चोदा भी.

    यह Xxx कजिन सेक्स का सिलसिला अब हर दूसरे दिन चलने लगा था.
    अभी दो साल पहले उसकी शादी हो गई और जीजू उसको अपने साथ न्यूजीलैंड लेकर चले गए.

    उसके जाने के बाद लॉकडाउन लग गया, जिसकी वजह से वो अभी तक वापिस नहीं आई है.
    इस साल उसका वापसी आना तय हो गया है.
    शायद हम दोनों मिल पाएं क्योंकि मैं भी फिलहाल देश से बाहर जाने वाला हूँ.

    ये सब हमारे वीजा पर निर्भर है कि हमारा मिलन हो पाता है या नहीं.

    हालांकि सिमरन के जाने के बाद मैंने बहुत सी लड़कियों को चोदा था, पर उसके जैसा मजा कहीं नहीं आया.

    मैंने अपने चाचा की बेटी, जिसके 2 बच्चे हैं, उसको भी चोदा था.
    वो सेक्स कहानी भी आपको सुनाऊंगा.

  • पड़ोसी आंटी को चोदा बीयर पिलाकर

    देसी आंटी सेक्स कहानी तब की है जब मैं गुड़गांव में रहता था, एक प्राइवेट कम्पनी में काम करता था.

    मैं जिस बिल्डिंग में रहता था, पास में एक अंकल और आंटी भी किराए पर रहने आये.

    एक दिन मेरी नज़र आंटी पर गयी. मस्त भरे मम्मे. उभरी गांड देखकर बुड्ढा भी लंड खड़ा कर ले.
    मेरा भी लंड खड़ा होने लगा.

    मैं अपने रूम में आ गया लेकिन उसका बदन मेरे सामने था जैसे!
    मेरा लौड़ा खड़ा हो गया और मैंने धीरे धीरे सहलाना शुरू कर दिया.

    उसे याद करके लंड हिलाने लगा और झटके मारने लगा थोड़ी देर में मेरा पानी निकल गया.
    अब मैं सोचने लगा कैसे इसको चोदा जाए.

    फिर मैंने धीरे धीरे उनसे नजदीकियां बढ़ाना शुरू कर दिया और हमारी दोस्ती हो गयी.

    एक दिन मैं कम्पनी ऑफिस से रूम पर आया.
    तभी अंजुमन आंटी ने आवाज़ दी.
    मैं रूक गया.

    वो बोली- राज, रात का खाना मेरे रूम में खा लेना आज. मैंने अंडे बनाए हैं.
    मैं बोला- हां आंटी, ठीक है.
    और मैं अपने रूम में आ गया।

    मैं बहुत खुश था कि देसी आंटी सेक्स का मौक़ा मिल सकता है.

    मैंने तुरंत एक प्लान बनाया.
    मैं बाजार गया, 4 बोतल बीयर, कंडोम और सैक्स की गोलियां लाया.

    मैंने लोवर के अंदर अंडरवियर नहीं पहना और पूरी तैयारी से नीचे आ गया.

    नीचे आया तो देखा अंजुमन आंटी भी दुल्हन के जैसे तैयार थी.
    मैंने पूछा- आंटी, कहीं शादी में जा रही हो क्या?
    और मैं मन ही मन दुखी हो गया कि आज का प्लान बेकार हो गया।

    वो बोली- नहीं, आज मेरा जन्मदिन है. लेकिन तेरे अंकल काम से नोएडा गये हैं.
    और रोने लगी.

    मैंने मौका देखकर उसको पकड़ा और बोला- आंटी, आप रोना बंद करो. मैं मनाऊंगा आपका जन्मदिन!
    और मैं जल्दी से केक ले आया.

    आंटी ने केक काटा, मुझे खिलाया और मैंने उनको!
    उन्होंने एकदम से मुझे अपने सीने से लगा लिया और बोली- थैंक्स राज!
    मैंने कहा- पार्टी तो बाकी है.
    और मैंने बैग से बीयर निकाली.

    पहले आंटी मना करने लगी लेकिन मेरे बोलने से मान गयी.
    हमने 2 बोतल खाली कर दी.

    अब आंटी को नशा होने लगा. मैंने धीरे से गोली निकाली और पैग मैं डाल दी और वो गटागट पी गयी.
    थोड़ी देर में गोली ने अपना काम शुरू कर दिया.

    फिर एक गोली मैंने खा‌ ली तीसरी बोतल भी खाली कर दी.

    अब आंटी के बदन में आग जलने लगी, आंटी बोली- राज, मेरा गिफ्ट कहां है?
    मैं चुप हो गया क्योंकि जल्दी जल्दी में गिफ्ट लाना भूल गया था.

    मैं चुप था तो वो बोली- क्या हुआ?
    तो मैं बोला- गिफ्ट कल मिल जाएगा. क्या चाहिए बोलो?
    वो बोली- आज जन्मदिन है तो गिफ्ट भी आज लूंगी.

    मैंने एकदम से उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और चूसने लगा.
    थोड़ी देर बाद वे दोनों अलग हो गये.

    वो बोली- ये नहीं … मुझे मेरा गिफ्ट चाहिए.
    और एकदम से लोवर के उपर से ही लंड को पकड़ कर बोली- दो मेरा गिफ्ट!

    मैं चौंक गया और कुछ ना बोला.
    उसने मेरे लोवर के अंदर हाथ डाल दिया.

    जैसे ही उसने मेरे लौड़े को अपने हाथ में लिया, मेरे शरीर में करंट दौड़ने लगा और मैंने उसके बूब्स दबाने शुरू कर दिए; उसकी साड़ी अलग कर दी और उसको लेकर बिस्तर में आ गया.

    अब आंटी के बूब्स बाहर आने को बैचेन थे. मैंने उसका ब्लाउज और ब्रा अलग किये तो उसके पके आम मेरे हाथ में आ गये और मैं चूसने लगा.
    वो भी धीरे धीरे मेरे लौड़े को सहलाने लगी.
    उसने मेरी लोवर उतार दी और मेरे लौड़े से खेलने लगी.

    मैं उठा और उसकी छाती पर बैठ गया और लन्ड को उसके होंठों पर रगड़ने लगा.
    उसने लन्ड को तुरंत मुंह में लिया और लोलीपॉप के जैसे चूसने लगी जैसे बहुत दिनों से प्यासी हो.

    और मैं झटके मारके उसका मुंह चोदने लगा. वो लंड को लोलीपॉप के जैसे मस्त हो कर चूस रही थी.

    अब दोनों बहुत गर्म हो चुके थे.
    मेरे शरीर में अकड़न हुई और लंड का पानी निकल गया. उसने गटागट करके पी लिया.
    मैं थोड़ी देर लंड मुंह में डाले लेटा रहा.

    उसके बाद मैं उठा और उसका पेटीकोट उतारा तो उसने भी पैंटी नहीं पहनी थी.
    आंटी की चूत बिल्कुल चिकनी थी जैसे उसने आज ही बाल साफ़ किए हों.

    मैंने बिना देर किए अपने होंठ उसकी मखमली गुलाबी चूत में रख दिए और धीरे धीरे चाटने लगा.
    वो सिसकारियां भरने लगी.

    मैंने जैसे ही जीभ घुसाई, वो चिल्लाने लगी.

    अब मैंने जल्दी जल्दी जीभ चलाना शुरू कर दिया.
    वो मचलने लगी, बोली- राज, मेरी चूत को खा जा! ये तेरे लिए कब से तड़प रही थी.
    मैं चौंक गया.

    अब मेरा जोश दुगुना हो गया और जोर जोर से आंटी की चूत चाटने लगा.
    वो उईई आआहह सीईई की आवाज निकालने लगी.

    थोड़ी देर बाद अंजुमन आंटी की चूत से नमकीन पानी निकलने लगा और मैं पी गया.

    फिर मैं उठा और कंडोम निकाला.
    आंटी ने मेरा हाथ पकड़ लिया और बोली- राज, आज मेरा जन्मदिन है आज मेरी चलेगी.

    उन्होंने कंडोम वापस रखवा दिया.
    वो बोली- पूरे 7 माह हो गये मेरी चूत में लन्ड नहीं गया. मैं कबसे तड़प रही थी लेकिन मौका नहीं मिला. उस दिन जब तुम अपने कमरे में मेरा नाम लेकर मुठ मार रहे थे तो मेरा मन किया था कि मैं आ जाती. पर डरती थी. आज मौका मिला है.
    इतना बोलकर आंटी लंड चूसने लगी.

    अब मेरे लौड़े में करंट दौड़ने लगा.
    मैं उससे बोला- कंडोम तो लगाने दो.
    वो बोली- नहीं.
    मैं भी क्या करता!

    मैंने कहा- रूको, और लंड में केक लगा लिया.
    आंटी उसे मुंह में लेकर चूसने लगी और पूरे लंड को गीला कर दिया.

    आंटी को लिटाकर मैंने उनके चूतड़ों के नीचे तकिया लगाया और चूत में लन्ड रगड़ने लगा.
    वो सिसकारियां भरने लगी और बोली- राज, आज की रात को यादगार बना दो. अब तड़पाओ नहीं … अपना लौड़ा मेरी चूत में घुसा दो.

    मैं बोला- आंटीजी, आपने मुझे बहुत तड़पाया है.
    तो वो बोली- आंटी नहीं अंजुमन बोलो राज!

    मैंने एकदम से झटके से लंड उसकी मखमली चूत में घुसा दिया और अंजुमन की चीख और आंसू निकलने लगे.

    अब मैंने लंड को बाहर किया और एक झटके से पूरा घुसा दिया.
    उसकी चीख निकल पड़ी.

    मैंने धीरे से उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और शांत हो गया.
    थोड़ी देर बाद जब अंजुमन के शरीर में हरक़त होने लगी तो मैंने लंड को चलाना शुरू कर दिया.

    अंजुमन 7 माह से चुदी नहीं थी तो उसकी चूत एकदम टाइट थी.
    मेरे लौड़े के हर झटके से उसकी सिसकारी तेज़ होने लगी.

    अब मैं तेज़ तेज़ झटके मारने लगा.
    अंजुमन बोली- चोदो राजा, मेरी प्यासी चूत की आज प्यास मिटा दो.

    मेरे लौड़े को और जोश आ गया.
    पूरे कमरे में पच्च पच्च फच्च फच्च उईई आआहह उईई सीईई की आवाज तेज होने लगी.

    अंजुमन की चीख के साथ पानी निकल गया. मेरा लौड़ा गर्म पानी से और टाइट हो गया.

    अब मैंने उसे अपने लौड़े पर बैठने को कहा.
    उसने लंड को अपने मुंह में लेकर थूक से गीला कर दिया और वो मेरे लौड़े पर आ गई.

    जैसे ही उसने चूत को लंड पर रखा, लंड सट्ट से अंदर घुस गया और अंजुमन की चीख निकल पड़ी.
    मैंने बिना रूके झटके मारने शुरू कर दिया.
    वो बोली- राज फ़ाड़ दे मेरी चूत!
    और लंड पर उछलने लगी.

    मैंने अपनी रफ़्तार बढ़ा दी और फच्च फच्च उईई आआहह उईई आआहह उईई आआहह की आवाज तेज हो गई.
    मेरे दोनों हाथ उसके बूब्स पर थे और वो लंड के घोड़े पर सवार होकर जन्नत पहुंच गई थी.
    आंटी की चूत ने पानी छोड़ दिया और मेरा लौड़ा गर्म पानी से भीग गया; फच्च फच्च फच्च फच्च की आवाज होने लगी.

    गोली के असर से मेरे लौड़े ने पानी नहीं छोड़ा.

    मैंने अंजुमन को बेड के नीचे किया और खड़ा हो गया.
    वो लंड मुंह में लेकर चूसने लगी और लन्ड को तैयार करके घोड़ी बन गई.

    मैंने उसकी मखमली चूत में थूक लगाया और लंड डालकर चोदने लगा.

    आंटी बोली- राज, यह मेरी लाइफ का सबसे अच्छा गिफ्ट है.
    मैं खुश हो गया और लन्ड को तुरंत चौथे गियर में डाल दिया और फुल स्पीड से उसकी चुदाई करने लगा.

    थोड़ी देर बाद मैंने अंजुमन को बेड पर लिटा दिया और उसकी टांगों को अपने कंधे पर रख दिया. फिर मैंने चूत में लन्ड घुसा दिया और धीरे धीरे झटके मारने लगा.

    अब दोनों थकने लगे थे, उसने नीचे से गांड चलाना शुरू कर दी. दोनों की सिसकारियों से कमरा गूंजने लगा और सांसें तेज होने लगी.

    मैंने कई औरतों, लड़कियों को चोदा लेकिन जो मजा आज अंजुमन ने दिया, ऐसा कभी नहीं मिला।

    अब अंजुमन के पैर नीचे कर दिए और मैं ऊपर आ गया.
    आज मेरा लौड़ा झड़ने का नाम नहीं ले रहा था.

    अंजुमन ने फिर से पानी छोड़ दिया मैंने भी झटकों की रफ्तार बढ़ा दी मैं तो जैसे स्वर्ग में था।

    अब धीरे धीरे मेरे शरीर में अकड़न होने लगी.
    मैं बोला- अंजुमन, मेरा निकलने वाला है.
    तो वो खुश हो गई और उसने अपनी गांड चलाना शुरू कर दी.

    आंटी बोली- राज अंदर पानी छोड़ना!
    और उसने मुझे कसकर अपनी बांहों में भर लिया और हम दोनों जोर जोर से झटके मारने लगे.

    एकदम से मेरी आंखें बंद होने लगी और लंड से निकलकर आग अंजुमन की चूत में भर गई.
    फिर हम दोनों वैसे ही पड़े रहे, दोनों को बहुत खुशी थी क्योंकि दोनों को आज जन्नत का मज़ा मिला।

    हम दोनों एक साथ बाथरूम गये और मैं उसको गोद में लेकर वापस आया।

    उस रात हमने 4 बार चुदाई की.

    फिर जब भी हमें मौका मिलता हम दोनों एक हो जाते।
    मैंने आंटी की गान्ड भी मारी. वो अगली कहानी में!

  • पति के गधेछाप लंड से चुत गांड चुदाई

    मैं एक इंटीरियर डिज़ाइनर हूँ और मेरा फिगर बहुत ही सेक्सी व स्लिम ट्रिम फिगर है.

    मेरी उम्र 25 साल है. मैं दूध की तरह गोरी हूँ, पूरे बदन के कटाव एकदम सेक्सी हैं. पेट पूरा सपाट है, तोंद तो है ही नहीं. मेरे बूब्स और चूतड़ तने हुए बड़े बड़े हैं.
    मेरा एक छोटा बच्चा भी है, जो अभी 4 महीने का ही है.

    ऐसे तो मेरे पति मुझे रोज चोदते हैं और ऐसे वैसे नहीं, एकदम किसी जंगली जानवर की तरह चोदते हैं.

    लेकिन आज रात तो अलग ही किस्म के जानवर या कहूँ कि सांड बन गए थे वो!
    उनकी चुदाई से कमरे में आधे से ज्यादा चीजें टूट चुकी थीं.

    हुआ यूं कि उस दिन मेरे पति ऑफिस में थे और मैं घर पर रह कर अपना काम कर रही थी.
    आजकल मेरा वर्क फ्रॉम होम चल रहा था.

    उसी समय मेरे पति का मुझे कॉल आया और हम दोनों बात करने लगे.
    हमारे बीच मजाक मस्ती की बातें होने लगीं.

    वो बोले- आज रात मैं अलग ही जोश में हूँ. आज पूरी रात इतनी ज़ोर से चुदाई करूँगा कि पूरा घर हिलने लगेगा.
    मैं भी जोश में बोली- ठीक है मेरे पति देव … पहले घर तो आ जाओ. क्या फोन से ही चोदोगे?

    वो बोले- काश, मेरा लंड इतना लम्बा होता कि फोन से घुस कर ही तुम्हारी चुत में घुस जाता तो मैं जरूर तुम्हारी चुदाई फ़ोन से ही कर देता.
    मैं हंस पड़ी.

    हम दोनों की बातें खत्म हुईं और मैंने घड़ी में देखा तो रात के दस बज चुके थे.
    मैंने काम करते करते टेबल पर खाना लगा दिया था.

    कुछ देर बाद मेरे पति घर आ गए.

    वो मुझे किस करना चाहते थे लेकिन मैंने उनको करने नहीं दी क्योंकि मैं एक नए छात्र को फोन पर कुछ टिप्स दे रही थी.

    उस नए छात्र से बात करते हुए मैंने उससे कहा- तुम्हारा पेन्सिल बॉक्स गलती से मेरे पास आ गया. मैं कल तुमको ऑफिस में दे दूंगी.
    उसने ओके कह दिया.

    अब तक मेरे पति फ्रेश होने चले गए थे, वो कुछ देर के बाद आ गए.

    वो खाना खाने बैठ गए और मैं भी कॉल खत्म करके खाना खाने बैठ गयी.

    खाना खाने बाद मेरे पति ने मुझे पीछे से पकड़ लिया और मुझे किस करने लगे.
    मुझे अभी भी उस छात्र को एक फाइल भेजना बाकी रह गया था.

    मैंने उनसे कहा- प्लीज, अभी कुछ देर रुक जाओ क्योंकि मुझे एक आखिरी फाइल भेज देने दो.
    मगर वो माने ही नहीं और मेरे मम्मों व गांड को दबाने लगे.

    मैं भी सनसनी में आने लगी.
    उन्होंने एक हाथ से अपने पजामा को खोल दिया और जल्द ही टी-शर्ट खोल कर सिर्फ अंडरवियर में रह गए.

    मैंने हंस कर कहा- ये भी क्यों रह गया, इसे भी हटा दो.
    इस पर उन्होंने अपना अंडरवियर भी खोल दिया.

    हमारा नन्हा सा बेटा बेडरूम में सो रहा था.

    उन्होंने मुझे गोद में उठाया और टेबल पर ही लेटा दिया.
    टेबल पर बहुत सारा खाने का सामान रखा था. साथ ही मेरे काम की चीजें भी थीं. कुछ पेपर्स, लैपटॉप और उसी छात्र का पेन्सिल बॉक्स आदि भी रखा था.

    मेरे पति ने मुझे टेबल पर उन सबके ऊपर ही लेटा दिया और मेरे कपड़े फाड़ दिए.
    वो मिशनरी पोजीशन में मेरे ऊपर आ गए और अपने बदन से मेरे बदन को ज़ोर से दबाए हुए थे.

    मेरे पति बहुत भारी हैं क्योंकि उनका पेट काफी बड़ा है.
    मैं पेपर्स और पेन्सिल बॉक्स के ऊपर लेटी हुई थी.

    पेन्सिल बॉक्स ठीक मेरी गांड के नीचे था और मेरे पति मेरे ऊपर पूरे जोश में मेरे बदन को काट रहे थे.
    फिर उन्होंने अपना काला लंड मेरी चुत में ज़ोर से घुसा दिया.

    मैं चिल्ला उठी.
    मैंने उन्हें धीरे चोदने के लिए कहा लेकिन वो माने ही नहीं.

    उन्होंने फुल स्पीड से चुदाई शुरू कर दी.
    मैं चिल्ला चिल्ला कर कामुक सिसकारियां ले रही थी- ऊऊओ … ऊऊ … जान आई मर गई … थोड़ा आराम से.
    लेकिन वो मान ही नहीं रहे थे.

    उन्होंने मेरी सिसकारियां सुनकर और ज्यादा वजन डाल दिया और मुझे और स्पीड से चोदने लगे.
    पूरी टेबल धप धाप धाप की आवाज कर रही थी और हम दोनों के वजन से ज़ोर ज़ोर से हिल रही थी.

    मेरी गांड के नीचे जो पेन्सिल बॉक्स था वो चुदाई से पूरा टूट गया था और पेपर फट गए थे.
    पेन्सिल बॉक्स के पीस मुझे मेरी गांड में चुभ रहे थे. लेकिन मेरे पति पूरे जोश में वाइल्ड सेक्स के नशे में थे और कूद कूद कर कर मुझे चोद रहे थे.

    जब वो मेरे ऊपर कूद कूद कर चुदाई कर रहे थे तो पूरी टेबल आगे पीछे होती हुई इतनी ज़ोर से हिलने लगी थी मानो अभी ही टूट जाएगी.
    खाने का सारा सामान नीचे जमीन पर गिरता जा रहा था और देखते ही टेबल टूट भी गई.

    हम लोग के चुदाई करते हुए ही खाने के ऊपर गिर गए.
    प्लास्टिक की चम्मचें आदि इधर उधर छिटक गईं.

    फिर भी उन्होंने मुझे चोदना नहीं रोका. वो मुझे किसी जंगली जानवर की तरह चोदे जा रहे थे.
    मैं चिल्ला रही थी- आह अय मांआ … मर गयी … अह रुको तो यार … आह सीइ सीई.

    वो नॉनस्टॉप चुदाई करने में लगे रहे.
    सब बचा हुआ खाना आदि मेरे जिस्म के नीचे पिसा जा रहा था.

    मगर मेरे पति कूद कूद कर जंगली जानवर की तरह मेरी चुदाई कर रहे थे.
    जब उनका माल निकल गया, तब वो रुके … और मुझे राहत मिली.
    वो मेरे ऊपर लेटे रहे.

    मुझे चूमते हुए बोले- मजा आया?
    मैंने कहा- मजा तो तुम्हें आया होगा. मेरी तो गांड छिल गई.

    वो बोले- क्यों?
    मैंने कहा- टेबल पर बहुत सारा सामान था, वो सब मेरी गांड में रगड़ कर पिस गया.

    वो हंसने लगे.
    मैं अपनी गांड सहलाने लगी.

    मुझे भी अपने पति के मोटे लंड से चुदकर मजा आया था मगर आपको तो मालूम ही है कि औरतों की आदत होती है, वो कभी संतुष्ट नहीं होतीं.

    फिर जब हम लोग उठे तो मैंने नीचे देखा.
    पूरा सत्यानाश हो चुका था. टेबल और खाने का सब सामान टूट गया था.

    मैं फ्रेश होने गयी.
    मेरे फ्रेश होने के बाद मेरे पति भी फ्रेश होकर आए.

    हम दोनों कमरे में आ गए और बेड पर लेट कर सोने लगे.

    मैंने देखा कि बगल में हमारा बेटा चैन की नींद सो रहा था.

    एक घंटा बाद मेरे पति का लंड फिर से खड़ा हो गया और वो फिर से मेरे ऊपर चढ़ गए.

    फिर से मिशनरी पोज़िशन में वो मेरी बॉडी को अपने जिस्म से ज़ोर से दबाए हुए थे.

    मेरी तो जान ही निकल रही थी.
    मैंने समझ लिया कि ये बिना लंड पेले मानेंगे नहीं, तो मैंने अपनी टांगें खोल दीं.

    उन्होंने अपना लंड ज़ोर से मेरी चुत में घुसा दिया और धकापेल ज़ोर ज़ोर से पूरी रफ़्तार में मेरी चुदाई कर रहे थे.
    पूरा बेड ज़ोर ज़ोर से हिलने लगा और मैंने देखा कि चुदाई से हमारा बेटा भी हिल रहा था.

    मुझे डर था कि मेरा बेटा जाग ना जाए. चुदाई के समय में ज़ोर से सिसकारियां ले रही थी.
    मैं- अया अयाया अयाया बस करो, फीलिक्स आराम से … आउच आह अयाया अया … आराम से.
    लेकिन मेरे पति मान ही नहीं रहे थे.

    कुछ देर बाद उन्होंने मुझे उल्टा कर दिया और मेरी गांड पर लंड सैट कर दिया.

    मैं कांप गई कि अब गांड भी मारी जाएगी.
    हालांकि मैं गांड तरफ से भी चुदती हूँ लेकिन उन महिलाओं को मालूम होगा कि गांड में लंड लेना कितना दुरूह कार्य होता है.
    फिर मेरे पति का लंड तो गधे के लंड से मैच करता है.

    वही हुआ … मेरे पति ने मेरी गांड में पूरी ताकत से अपना मूसल लंड घुसा दिया.
    लंड घुसा और वो कूद कूद कर गांड चुदाई करने लगे.

    पूरा बेड अब और ज़ोर से हिल रहा था.
    काफी देर बाद मेरे पति ने मुझे फिर से सीधा लेटा दिया और इस बार गलती से उन्होंने मुझे मेरे बेटे की प्लास्टिक टॉय कार के ऊपर लेटा दिया.

    मुझे पता नहीं था कि मेरे बेटे की टॉय कार हमारे बेड पर पड़ी है.
    क्योंकि वो बेड पर ही खेलता रहता है और कभी कभी उसके खिलौने बेड पर पड़े रह जाते हैं.
    चूँकि रूम में भी पूरा अंधेरा था इसलिए मैं भी देख नहीं पाई.

    मेरे पति अपने जिस्म का बोझ मेरे ऊपर इतना ज़ोर से दबाए हुए थे कि मेरी जान ही निकल रही थी.
    वो फिर से मिशनरी पोज़िशन में जंगली जानवर की तरह मेरी चुदाई करने लगे.

    उन्होंने मेरे जिस्म को एकदम कसके पकड़ा हुआ था और मेरे पैर को अपने पैर से दबाए हुए थे.
    वो कूद कूद कर रगड़ रगड़ कर जंगली सांड की तरह मुझे चोदने लगे.

    मैं लगातार चिल्लाए जा रही थी- आआह आआ फीलिक्स धीरे आराम से आह बस करो.
    मगर उनको चुदाई के समय कुछ होश नहीं रहता है.

    हमारा बेड बहुत ज़ोर से आगे पीछे हिल रहा था और चूं छुं कर रहा था, धाप धाप की आवाज आने लगी थी.
    फिर मुझे किसी चीज की टूटने की आवाज आई.

    ये आवाज मेरे जिस्म के नीचे से आई थी.
    मेरे बेटे की प्लास्टिक टॉय कार मेरे पति की जंगली चुदाई से टूट गयी थी.

    मैंने उन्हें रोकने की कोशिश की लेकिन मेरे पति फिर भी नहीं रुके.

    वो पूरी ताक़त के साथ इतनी ज़ोर से मुझे चोद रहे थे कि मेरी जान ही निकल रही थी.
    मुझे ऐसा लग रहा था कि बस किसी तरह से मैं अपने पति से छूट कर अलग हो जाऊं.

    फिर वही हुआ जिसका डर था.
    उनकी इस तरह की जंगली चुदाई से बेड टूट गया और मेरा बेटा नीचे गिर गया.

    उसी समय मेरे पति का स्पर्म निकल गया.
    मेरा बेटा रोने लगा था.

    फिर मैंने पति से हटने का कहा.
    वो मेरे ऊपर से हट गए.

    मैंने अपने बेटे को उठाया और उसे गोद में उठाकर चुप कराने लगी.
    चुदाई से हम दोनों की बॉडी पसीने से तर हो गयी थी.

    मैं चल नहीं पा रही थी. क्योंकि मेरे पति ने मेरी चुत लगभग फाड़ दी थी और गांड भी चिर गई थी.
    फिर वो फ्रेश हुए और मैं बेटे को चुप कराके उसको दूसरे बेड पर सुला आई.
    मैं और मेरे पति भी उसी कमरे में बेड पर सो गए.

    जब सुबह हुई तो फिर से मॉर्निंग रफ मिशनरी सेक्स हुआ और उसके बाद मैं ऑफिस चली गयी.
    मैं सही से चल भी नहीं पा रही थी.

    मैंने एक नया पेन्सिल बॉक्स खरीदा.
    ऑफिस में मेरे उस इन्टर्न छात्र ने मुझसे पूछा कि मेम आपको क्या हुआ आप ठीक से चल क्यों नहीं पा रही हैं?
    मैंने कहा- मेरे पैर में चोट लग गई है.

    फिर उसने पूछा कि ये न्यू पेन्सिल बॉक्स क्यों? मेरा पुराना वाला कहां गया?
    मैं बोली- यह गिफ्ट है, रख लो.

    मुझे कुछ बहाना मिला ही नहीं था. क्या ही बोलती उससे.
    तो यह थी मेरी ताबड़तोड़ चुदाई की सेक्स विद हसबैंड वाइफ पोर्न स्टोरी!

    मेरे पति मुझे रोज हर रात मुझे ऐसे ही चोदते हैं, रफ वाइल्ड मिशनरी सेक्स करते हैं.
    अब फर्क बस इतना है कि जिस कमरे में हम दोनों अब चुदाई करते हैं, वहां का बेड बहुत मजबूत है.
    लेकिन मेरे पति की रफ चुदाई से वो बेड भी हिलने लगता है और चूँ चूँ की आवाज आने लगती है.

    अपने पति के गधे छाप लंड से चुदने के बाद मुझे बहुत मस्त नींद आती है और बाद में उनकी चुदाई से मुझे मीठा मीठा सपना आता है.

  • पापा की परी की मटकती गांड में गधे जैसा लंड-Baap Beti Ki Chudai

    पापा का मजबूत लंड पजामे को फाडने को तैयार हो रहा था। तो मैरी चुत भी उस भयंकर लंड को लेने को बेताब थी। पापा की परी पापा की दुल्हन बन गयी थी मेरी दिल की धड़कन बढने लगी जैसे जैसे रात गहरी हो रही थी।

    दोस्तो मे सोनम कपूर मुंबई से आपके सामने मेरे जीवन का एक हसीन लम्हा जो आगे चलकर मेरी जिंदगी बन गया वो शेयर कर रही हूँ। इस Baap Beti Sex Story को अगर लिखने मे कोई गलती हो तो क्षमाँ करना मेरे सभी चोदू दोस्तो!

    मेरे परिवार मे मेरे से दो छोटी ओर मोम डेड है कॉलेज की पढाई के बाद मेरी शादी 19 साल की उम्र मे कर दी गयी। मेरे पापा एक बिजनेसमैन है तो उन्होंने मेरे लिए भी एक बिजनेसमैन लडका ही खोजा ओर हमाँरी शादी कर दी।

    सुहागरात पर ही मुझे मेरे गांडू पति की हकीकत पता चली वो पैसेवाला तो है मगर दमदार मर्द नही, मेरे ख्वाब ख्वाब ही रह गये। मगर ओर कोई रास्ता नही था शादी से पहले मेरा कोई अफेयर नही था। तो मैने सब अपनी किस्मत पर छोड़ दिया था।

    शादी के एक साल बाद मे जब पिहर आई तो माँ ओर बहने मेरी नानी के घर जा रही थी वो मुझे देखकर बहुत खुश हुई ओर मुझे भी साथ चलने का कहने लगी। मगर मेरा ननिहाल मे मन नही लगता था तो मैने मना कर दिया,

    ओर कहा – मै पापा के पास ही रहूगी!

    ये सुनकर माँ ने कहा – चलो ठीक है हम कल सुबह जाकर तीन दिन मे लोट आएगे तुम अपने पापा का ख्याल रखना।

    मेरे पापा की उम्र उस समय 40 की थी ओर मेरी19 की मेरी माँ भी मेरी बडी बहन जैसी लगती थी। वो उस समय 32 की थी उनका शरीर भी बडा कामुक था खैर दिन बातो मे निकल गया ओर रात को खाना खाकर हम सब सो गये।

    हम तीनो बहने ऊपर सो रही थी तभी रात को मुझे प्यास लगी तो मै पानी पीने नीचे आई तो माँ की आवाजे सुनकर मै उनके कमरे की तरफ देखने चली गयी। कमरा बंद था मगर मम्मी की आहे सुनकर मुझे पता चल गया की मेरा बाप मेरी माँ चोद रहे थे।

    माँ की कामुक आवाजो से मेरी भी चुदास भडक गयी ओर मै चुदाई देखने का जुगाड करने लगी। तभी कमरे के अंदर झाकने का मुझे जुगाड मिल गया, गेट के लोक के सामने बेड होने से मुझे अंदर का दृश्य साफ साफ दिखाई दे रहा था। मेरे पापा ने मेरे माँ के पैर चांद की तरफ कर रखे थे ओर माँ की चुत मै अपना गधे जैसा लंड पेल रहे थे।

    पापा का लंड देखते ही मेरी चुत का झरना बहने लगा ओर मेरा हाथ लोवर के अंदर से मेरी चुत को सहला रहा था। माँ की चिखे तो मेरी माँ की माँ की चीख निकल जाती अगर इतने बडे लंड से चुदती।

    वो कुछ देर बाद पापा ने माँ को कुतिया बनाया तो उनकी नजरे गेट पर चली ओर उन्हे गेट के नीचे से मेरे पैर दिखाई दिये। जिसे देखकर उन्होने अंदाजा लगाया की वहा मै उनकी चुदाई देख रही हू। माँ की चुत मे पापा का लंड अंदर जाता तो उनकी चीख निकल जाती ओर वो गाली देती हर बार।

    माँ – अब तो छोड दे मुझे हवशी जानवर… मेरे किस्मत मे ही लिखा था… ऐसा जानवरतो पापा ने कहा – रानी लोग देखने को तरसते है ऐसे लंड को!

    ओर उन्होने गेट की तरफ देखकर मुझे आंख माँर दी ओर हंसकर माँ की गांड मे उगली डाल दी। ओर वो लगातार गेट पर नजरे गढ़ाकर माँ की चुदाई करते रहै ओर इधर माँ की चुदाई देखकर मेरे बदन मे भी आग लग गयी थी। मगर मेरे पास कुछ नही था उस आग को बुझाने के लिए।

    दस मिनट बाद पापा ने माँ की चुत मे ढेर सारा वीर्य भर दिया ओर फिर अपना लंबा लंड चुत से बाहर निकाल लिया ओर गेट के सामने खडे होकर हिलाने लगे। तो मेरी उगलिओ की हरकत से मेरी चुत ने भी खडे खडे दोबारा अपना रस बाहर निकाल दिया।

    अब मै भागकर अपने कमरे मे चली गयी मगर पापा का मूसल लंड मेरी आंखो के सामने घुम रहा था ओर मेरी नींद भी गायब थी। पता नही कब आंख लगी मेरी सुबह जब माँ ओर बहन तैयार हो गयी तो मुझे उठाया।

    ओर कहने लगी – अब सोती ही रहेगी क्या उठ जा रात को क्या देख रही थी

    माँ की बात सुनकर मुझे रात का नजारा फिर से याद आ गया ओर मै मुह धोकर नीचे आ गयी। बहन ने चाय लाकर दे दी ओर वो कमरे मे समाँन पैक करने चली गयी।

    तो माँ ने कहा – सोनम क्या हुआ सब ठीक है

    तो पापा ने कहा – कुछ उदास तो है सोनम पता नही क्या बात है

    तो मम्मी बोली – कोई बात नही… तीन दिन आप ख्याल रखना ज्यादा तंग मत करना उसे…

    तो पापा बोले – तुम भी ना सोनम को तंग क्यो करूगा!

    तो मम्मी बोली – पता नही आपका मै जानती हू, मे ही झेल सकती हू,हर कोई नही,

    तो पापा ने कहा – सोनम क्या कम है वो भी झेल लेगी आराम से

    तो माँ बोली – रहने दो इसके बस की बात नही

    तो मै कहा – माँ.. मै भी झैल लूंगी आपकी बेटी हू!

    तो माँ बोली – बेटा देखने ओर करने मे बहुत फर्क है!  ये सुनकर मे सकपका गयी!

    तो पापा बोले – तुम डराओ मत तुमको कुछ हुआ था क्या जो संजू को होगा

    तो मम्मी बोली – मुझे ही पता है क्या हुआ था आपको क्या पता

    तो पापा बोले – संजू कुछ हुआ क्या माँलूम लगा तेरे को तो

    माँ – बोली आने के बाद पता लगेगा वो तो, मगर संभाल कर करना…

    ये सब बाते सुनकर मुझे एहसास हो गया था, माँ मेरी मदद कर रही है क्योकी माँ जानती थी मेरे पति मे दम नही है ओर मै खुश भी नही हू उस से, तो माँ ने ही पापा को मनाया था इसके लिए।

    तभी पापा बोले – सोनम रात के लिए तैयार तो हो ना?!!

    मैने भी कह दिया – पापा आपकी परी तैयार है बिलकुल!

    तो पापा बोले – फिर दोपहर मै लडके साथ समाँन भिजवा दूंगा, तुम तैयारी कर लेना अच्छे से ओर खाना मै लेकर आ जाऊगा, कोई दिक्कत है तो अपनी माँ को बता दो, अगर मुझे ना कहना चाहो!

    तो मैने कहा – ठीक है पापा!

    ओर मै रसोई मे जाकर माँ से गले लग गयी!

    तो माँ बोली – बेटी एकबार दर्द होगा बस थोडी हिम्मत रखना तुम्हारी खुशी के लिए बहुत मुश्किल से हा की है तेरे पापा ने!

    ये सुनकर मैने कहा – ठीक है माँ !

    तो माँ ने कहा – आज तेरी सुहागरात ही है इसलिए दुल्हन बनकर तैयार हो जाना अच्छे से, तेरे पापा कपडे भी भेज देगे। हमने सब तैयारी कर रखी है तुम वैक्स करवा आना अभी फिर कमरे को संजाकर तैयार भी करना है, गहने भी पार्लर वाली से ले आना तुम।

    ये सब सुनकर मैरी आंखो से आंसू निकल आए।  तो माँ ने आंसू पूछते हुए कहा – बेटा हम तेरी खुशी के लिए सबकुछ कर रहै तो तुम भी खुशी खुशी मजे करो।

    तो मैने कहा – हा माँ जरूर!  मम्मी ओर बहन को छोड़ने के लिए पापा उनको साथ लेकर निकले ओर फिर वो फैक्ट्री चले गये वही से। मै गाडी लेकर पार्लर चली गयी ओर फिर वही से मैने वैक्स फेशियल करवाया ओर गहने लेकर आ गयी। दोपहर मे नहाकर गाऊन पहनकर समाँन का इंतजार कर रही थी।

    तभी लडका एक फूलो की टोकरी लेकर आ गया ओर एक बैग मे कपडे मैने पहले कमरे को अच्छे से सजा दिया। अब कमरे मे गुलाब की खुशबु महक रही थी तो मै भी कामुक हो रही थी।

    रात की चुदाई को लेकर फिर मैने कपडे देखे तो उसमे मेरा फेवरिट कलर का घाघरा चोली था लाल रंग का मै कुछ देर आराम करने लेटी तो दो घंटे बाद मुझे जाग आयी मम्मी का फोन आने पर।

    माँ ने पूछा – तैयारी कर ली

    तो मैने कहा – हा माँ

    तो माँ बोली – बेटा अब बाथरूम जाकर पेशाब करने के बाद सरसो के तेल से अंदर की माँलिश कर लेना अपनी उगलिओ से।ताकी रात को तकलीफ कम हो डरना मत बस थोडी हिम्मत रखना ओर पहले पूरा फोरप्ले करना जब बर्दाश्त से बाहर हो जाए तब पापा से कहना। एकबार ले लिया तो फिर कभी कोई दिक्कत नही होगी!

    ये सब बाते सुनकर ही मेरी चुचिया कडक हो गयी ओर मेरी चुत से कामरस निकलने लगा। माँ के फोन रखते ही मै एकबार फिर से नहाने चली ओर फिर चुत मे अच्छे से तेल माँलिश की अब मै बाहर आकर तैयार होने लगी। तभी पापा का फोन आया,

    तो मैने कहा – आप नो बजे तक आना

    तो पापा बोले – बेटा मुझे भी तैयार होना है

    तो मैने कहा – हो जाना पापा क्या जल्दी है

    तो पापा बोले – ठीक है बेटा

    ओर मैने अच्छे से मेकअप कर के अपनी ड्रेस पहनकर आज पापा की दुल्हन बन ने लगी! दो घंटे के मेकअप के बाद आखिरकार पापा की परी पापा की दुल्हन बन गयी थी मेरी दिल की धड़कन बढने लगी जैसे जैसे रात गहरी हो रही थी।

    आखिरकार पापा ने डोरबैल बजाई,

    तो मैने कहा – दरवाजा खुला है

    तो पापा लोक करके अंदर आ गये ओर वाशरूम जाकर वो नहाकर बाहर आये ओर उन्होने एक शेरवानी पहनी ओर पगडी लगाकर। फिर सेन्ट डालकर उन्होने मेरे कमरे का दरवाजा खटखटाया। तो मेरी सांसे उपर नीचे होने लगी तभी उन्होने दरवाजा खोला ओर अंदर आकर दरवाजा लोक कर दिया।

    पापा को देखकर मेरी चुत भी मचलने लगी, तभी पापा धीरे से फूलो की लडियो को हटाकर बेड पर बैठ गये ओर मेरे पास आ गये। मैने गर्दन नीचे कर ली, पापा को सामने देखकर।

    तब पापा ने बात शुरू करते हुए कहा – सोनम  बेटा ये सब हम मजबूरी मे कर रहै है तो अच्छा है हमे जब ये करना ही है तो हम मजे भी ले, ताकी तुझे जो सुख नही मिल पाया वो सुख मिले ये!सुनकर मैने कहा – पापा मै इस सुख के लिए ही तो आपकी दुल्हन बन गयी हू,अब मुझे ये सुख दे दो आप!

    तो पापा ने मेरा घुघट उठा दिया ओर मेरे चेहरे को प्यार से देखते रहै, मेरी आंखे बंद थी ओर गर्दन झुकी हुई।

    तभी पापा ने कहा – तुम कितनी खूबसूरत को आज देखा सही से मेने बिलकुल  लड़की लग रही हो। सोनम अब आखे खोलो शर्म करोगी तो केसै होगा ये सुनकर मै पापा से लिपट गयी ओर पापा ने मुझे बाहो मे भर लिया ओर हम दोनो एकदूसरे से लिपटकर बैठे रहे बहुत देर। पापा के हाथ अब धीरे धीरे मेरे बदन को सहलाकर मुझे गर्म कर रहे थे।

    तभी पापा ने मेरे मुह को अपने मुह के सामने कीया ओर मेरे होठो पर लगी लाल लिपस्टिक को खाने लगे। मेरी लिपस्टिक से पापा के होठ भी लाल हो गये तो पापा के हाथ मेरी चुचियो पर पहुंच गये ओर वो उन्हे मसलने लगे। धीरे धीरे हम दोनो गर्म होने लगे।

    पापा ने एक एक कर के मेरे सभी गहने उतारकर रखे तो फिर मैने पापा की शेरवानी के बटन खोलकर उनकी शेरवानी को खोलने मे मदद की। अब मै घाघरा चोली मै बैठी थी तो पापा बनियान ओर पजामे मे पापा का गधे जैसा लंड पजामे को फाडने को तैयार हो रहा था। तो मैरी चुत भी उस भयंकर लंड को लेने को बेताब थी।

    अब देखते ही देखते पापा ने मेरी काली ब्रा ओर चोली एक साथ खोल डाली उसके बाद उन्होने मेरे लांचे का नाडा खिंचकर मुझे खडा होने का कहा ओर मेने पेरो से लांचा निकालकर बाहर फेंका।

    तो पापा ने मेरी पेंटी को खींचकर निकाल दिया, मेरी चिकनी लाल चुत को देखकर पापा खो से गये ओर फिर पापा भी खडे हो गये ओर अपना पजापा कच्छा बनियान खोलकर फेंक डाला।

    अब हम दोनो नंगे हो गये तो पापा ने मुझे बेड पर सुला दिया ओर मेरे पेरो की उगलिओ को मुह मे भरकर चुसने लगे। ओर धीरे धीरे वो मेरि चुत तक पहुंच गये मेरी चुत से रह रहकर कामरस निकल रहा था। तो पापा अब वो कामरस का स्वाद लेने लगे।

    पापा की जबरदस्त चुसाई ने कुछ देर मे ही मेरी चुत ने उनके मुह मे ढेर सारा कामरस छोड़कर उनको अपने योवन रस का मजा दिया। तो फिर अब मेने पापा के मूसल लंड को हाथो मे लेकर सहलाने लगी। पापा का लंड कीसी गर्म पाइप की तरह तप रहा था।

    तभी मैने पापा के सुपारे को अपनी जीभ से चाटकर उसे अपने मुह मे भर लिया ओर सच कहू तो उनको इतना बडा लंड मेरे मुह मे नही जा रहा था। पापा का लंड सिर्फ लंबा ही नही साला मोटा भी बहुत था। मगर मेरी चुदास इतनी ज्यादा थी की मैने ना मुह मे जाते हुए ही पापा का लंड फंसा लिया मुह मे।

    मेरा मुह तो उनके आधे लंड से फटने को हो गया था, मगर फिर पापा मेरे सर को पकडकर धीरे धीरे मेरे मुह को चोदने लग गये। जब पापा लंड अंदर डालते तो मुझे सांस भी नही आ रहा था, मगर मेरी हवस इतनी बढ चुकी थी मै उनका पूरा लंड निगल जाना चाहती थी।

    मगर सारी कोशिश के बाद भी मे 7 इंच तक उनका लंड मुह मे ले पाई ओर पांच मिनट के अंदर मेरे जबडे भी दर्द करने लगे। तो मैने पापा का लंड बाहर निकाल दिया ओर फिर लंबी लंबी सांसे लेकर मेने खुद को नोर्मल कीया। तो पापा ने मुझे बाहो मे भर लिया ओर मेरे होठो पर होठ लगाकर कीस करने लगे।

    उनका मूसल लंड मेरी जाघो के बीच से गांड तक पहुंच रहा था पापा के दोनो हाथ मेरी चुचियो को दबा रहै थे। अब मै पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी। पापा के लंड को पकडकर मे दबाने लगी,

    ओर आखिरकार पापा को कहना पडा – पापा अब करो कुछ मे मर जाऊगी

    तो पापा बोले – ठीक है मेरी परि!

    पापा ने मुझे सुला दिया ओर मेरी गांड के नीचे दो तकिये लगा दिये, पापा ने मेरे हाथो को बांध दिया।

    मैने पूछा – पापा हाथ क्यो बांध रहै हो??!

    तो पापा बोले – बेटा तुम्हे दर्द नही होगा इसलिए

    ओर फिर पापा ने बेड की डोवर मे रखी बोरोप्लस अपनी उगलिओ पर लगाकर अपनी उगली मेरी चुत मे डालकर मेरी चुत चिकनी करने लगे ओर मेरा इतना बुरा हाल हो चुका था की मुझे अब चाहे कितना भी लंड हो मै लेने को तैयार थी।

    पापा ने थोडी सी क्रीम अपने लंड पर लगाई ओर अपने हाथो से मेरी नाजुक चुत की पंखुडियो को खोलकर उसका लंड का टोपा रख दिया। मेरी ओर धीरे धीरे मेरी चुत मे उन्होने अपना लंड का टोपा उतार दिया उसके बाद उन्होने झटके से टोपा पूरा अंदर कीया। तो मेरी चुत की दिवार हिल गयी ओर मै दर्द से कराहने लगी।

    मगर अभी तो सिर्फ दो इंच लंड ही घुसा था चुत मै तभी पापा ने एक तेज झटका लगाकर आधा लंड मेरी चुत मे फंसा दिया। तो मेरी चीख निकल गयी जोर से तभी पापा मेरे उपर लेट गये ओर मेरे होठो को अपने होठो मे कैद कर लिया।

    मगर मैने पूरा बेड हिला दिया उनकी पकड से निकलने के लिए मगर मै उनके शक्तिशाली शरीर के आगे बेबस लाचार थी। मेरा दर्द कम होने का नाम ही नही ले रहा था ओर तभी पापा ने दो झटके लगातार लगाकर अपना पूरा लंड मेरी चुत मे फंसा दिया।

    मेरी चुत फट गयी मेरा दर्द से बुरा हाल था मे लगभग बेहोश होने वाली थी तभी पापा ने मेरी चुचीयो को इतनी बेदर्दी से मसला की मेरा दर्द दुगना हो गया ओर मै बेहाल हो उठी। दोस्तो इस चुदाई  में, दस मिनट तक पापा अपनी मनमाँनी करते रहै, मै लगातार रोती रही, दस मिनट के बाद मेरा रोना बंद हुआ। तो उन्होने मेरे होठो को छोड़ा ओर मुझे खुली सांस लेने का मोका मिला।

    मगर सांस की बजाय मेरे मुह से सबसे पहले गाली निकली – कुते अपना लंड बाहर निकाल, मुझे नही चुदवाना हरामी,

    तो पापा बोले – कुतिया फट गयी इतनी जल्दी कब से फुदक फुदक कर रही थी… रंडी रूक जा अभी तेरी तो फटेगी तेरी ओर,ओर उन्होने अपना आधा लंड बाहर निकालकर एक झटके मे फिर से पूरा लंड चुत मे उतार दिया। तो मेरी चुत की दीवार हिल उठी मे फिर से चिल्ला उठी।

    तो पापा बोली – बस फट गयी एक झटके मे कुतिया तब तो बहुत मचल रही थी।

    मैने कहा – हा! कुते फट गयी अब बोल ओर बचा है तो वो भी डाल दे, बेटीचोद !!!

    दोस्तो इतना दर्द तो बच्चा पैदा करने मे भी नही हुआ जितना की पापा की पहली चुदाई से हुआ बेड पर चद्दर के उपर डाला सफेद तोलिया मेरी फटी चुत की दास्तान बयान कर रहा था। तभी पापा ने अपना लंड बाहर निकाला जिसे देखकर मुझे चक्कर आ गये! उन्होने एक बार फिर से अपने लंड पर ढेर सारी बोरोप्लस लगाने लगे!

    तो मै बोली – पापा बहुत दर्द हो रहा रहने दो प्लीज…

    पापा बोले – बेटा अब दर्द नही होगा…

    तो मैने अपनी टांगो को मोडकर चुत को छिपा लिया…

    ये देखकर पापा भडक गये – बोली बहुत नखरे कर रही है अब देख तू बहन की लोंडी बहुत देर हो गयी, तेरे नाटक को देखते!

    ओर उन्होने गुस्से मे आकर अपना लंड मेरी चुत मे पेल दिया, इसबार दर्द कम हुआ मगर मेरी चुत के अंदर अब भयंकर जलन हो रही थी ओर पापा गुस्से मे आकर ताबडतोड झटके दे रहे थे।

    मेरी चीखो से भी पापा को कोई फर्क नही पडा ओर वो मुझे गंदी गंदी गालिया देने लगे,रंडी की ओलाद चुप कर साली कुतिया, साली रंडी! तेरी माँ भी तो रोज चुदती है तो तेरी चुत कुछ अलग थोडी है बहनचोद रंडी क्यो चिल्लाह रही है!!!

    छिनाल। रंडी। बहन की चुत माँरू तेरी। तेरी माँ तो बडे मजे लेकर चुत ओर गांड मरवाती है। बुरचोदी रंडी। गालिया सुनकर मुझे भी गुस्सा आया, तो मैने भी पापा को गालिया देनी चालू कर दी – हा… भडवे चोद! कुते की ओलाद चोद अपनी बेटी की बुर को। हरामी की ओलाद।

    माँ के चोदे माँदरजात। बहन के लंड। हा चोद अपनी बेटी की बुर को हरामी माँदरचोद। लगता है तूने अपनी माँ को भी चोदा होगा हरामी। बेटीचोद।

    पापा – हा कुतिया अभी तो तेरी चुत फाडी है तेरी छोटी बहन की चुत भी मै ही फाडूगा वो भी गांड मटकाकर चलती है बहुत तुम दोनो की खुजली इसी लंड से मिटेगी अपनी माँ पर गयी हो तुम दोनो कुतिया वो भी ऐसे ही चुदती है मजे लेकर

    मेने बोला – बहनचोद रंडी की ओलाद आज रंडी बन ही गयी!

    दोस्तो बीस मिनट के बाद मेरी चुत उस मूसल लंड को आराम से अंदर लेने लगी तो मैने भी गांड उठाकर लंड चुत मे लेना चालू कर दिया अब दर्द तो हो रहा था मगर दर्द के साथ साथ मुझे मजा भी आने लगा

    मेरी चीखे अब आहो मे बदन गयी। ओर मे – हा आ आ अहह आ अम्म पापा… आ अहह अपनी परी को ऐसे ही पेलो जोर से रगडो मेरी चुत को पापा इसकी माँ की बहुत तंग करती है ये मुझे!

    पापा – अब से तंग नही करेगी बेटी आज तेरी चुत की माँ चुद जाएगी!

    मै बोली – तो चोद दे मेरी चुत बेटीचोद या बकचोदी ही करेगा हरामी

    पापा – अरे बहन की लोंडी अभी तो तू रो कर माँफी माँंग रही,अब बकचोदी करने लगी|

    ओर पापा ने मेरी टांगे सीधी कर के अपने पेट से लगाकर सीधी कर अपने दोनो हाथो से कसकर पकड ली ओर फिर पूरी ताकत से चुत का भोसडा बनाने लगे। तो मेरी गांड भी फटने लगी मेरी चुत ने एकबार फिर से ढेर सारा कामरस छोडा तो पापा का लंड ओर चिकना होकर मेरी चुत को फाडने लगा ओर मै मजे लेकर दर्द को भूलाकर चुदने लगी थी।

    मै बोली – ओ माँ बचाओ मारली पापा ने

    पापा हंसकर – नही बेटा ऐसा तो कुछ नही बस मजे ले लो एकबार की बात है

    ओर फिर पापा की बेरहम चुदाई बीस मिनट ओर जारी रही चालीस मिनट की इस चुदाई से मेरी माँ बहन चुद गयी थी। दोस्तो जब पापा ने मेरी चुत मे अपना गर्म गर्म वीर्य भर तो मुझे कुछ राहत मिली। दोस्तो पापा पसीने से नहा चुके थे ओर मेरा बदन भी पसीने से भर चुका था।

    कुछ देर बाद पापा खडे हुए ओर कहा – पापा की परी,तुम ठीक तो हो!

    मेने कहा – पापा अब पूछ रहै हो मेरी माँ चोदकर

    तो पापा हंसने लगे – बेटा तेरे पति का छोटा है तो भी दिक्कत ओर तेरे पापा का बडा है तो भी दिक्कत!

    तो मै बोली – पापा आपका बडा नही बहुत बडा है!!!

    तो पापा बोले – चल ठीक है खडी हो वाशरूम चलते है।

    मेरी तो बैठने की हिम्मत नही थी, पापा बचपन मे जैसे गोद मै लेकर मुझे घुमाँते थे वैसे ही आज पापा ने मुझे गोद मे उठा लिया ओर बाथरूम मे ले गये।

    मै सीट पर बैठकर मूतने लगी, तो मैरी चुत मे पेशाब की जलन भी हो रही थी बहुत ओर उससे मेरी आंखो मे आंसू भर आए। तभी पापा ने पास आकर मुझे चुमाँ ओर फिर पापा ने शावर चला दिया ओर अपने हाथो से मेरे बदन पर साबुन लगाकर अपने बदन पर साबुन लगाई।

    ओर फिर मुझे अच्छे से नहलाया नहाने के बाद मुझे कुछ आराम मिला तो पापा ने तोलिया लाकर मेरा ओर अपना बदन साफ कीया ओर फिर मै चलकर बेड पर पहुंची।

    तो पापा ने मुझे गाऊन लाकर दिया ओर फिर पापा किचन से खाना लेकर आये ओर मुझे अपने हाथो से खाना खिलाया। फिर पापा ने मुझे दर्द के लिए एक गोली दी जिसे खाने के बाद मुझे नींद आने लगी।ओर सुबह 9 बजे मुझे पापा ने उठाया – बेटा चाय तैयार है खडी हो जा

    तो मेरी आंख खुली मै अब ठीक महसूस कर रही थी काफी मेरे शरीर का दर्द गायब था। मगर चुत पर सोजन थी अब पेशाब कीया तो रात जितनी जलन नही थी मतलब मे अब पापा का गधे जैसा लंड लेने के लिए बिल्कुल तैयार थी।

    मै मुह धोकर बाहर आई ओर पापा की गोद मे जाकर बैठ गयी!

    तो पापा बोले – कैसा है मेरा बेटा??!!!

    तो मैने कहा – जिंदा हू पापा ओर हंसने लगी!!

    तो पापा बोले – मेरी परी अब से तो तुझे मजे ही मजे करने है बस ओर मुझे चुमने लगे!

    फिर हमने चाय पी ओर पापा ने कहा – मुझे फैक्ट्री जाकर आना है कुछ देर फिर दो दिन मे घर पर ही रहूगा। तो तुम नहा लेना हम दोपहर मे कही बाहर खाना खाने चलेगे। ये सुनकर मैने कहा – जी पापा!ओर पापा नहाकर फैक्ट्री चले गये। तभी माँ का फोन आ गया ओर वो पूछने लगी – केसी रही मेरी लाडो की सुहागरात!!

    तो मैने कहा – माँ हालत ख़राब करदी, चूत का पसीना निकल दिया, आपकी भी ऐसी ही रही होगी!!!!

    तो माँ बोली – एक बार दो दर्द होगा ही बेटा अब दो तीन दिन मे अपनी जवानी के असली मजे ले तू आराम से घर पर,तो मैने कहा माँ सही कहा अब इतना दर्द सहा है तो मजे तो लूंगी ही ओर फिर हम दोनो हंसने लगी…

    अगले भाग मे दर्द भरी दास्तान सुनने को मिलेगी क्योकी अब मेरी गांड की बारी थी जिससे मे बिलकुल अनजान थी। चलिए मिलते है अगले भाग मे आपको कैसी लगी मुझे कमेन्ट कर के जरूर बताना दोस्तो।

  • दादाजी – का लंड या गधे का लंड

    मेरा नाम रेशमा है, हमारा 3 लोगों का छोटा सा परिवार है मम्मी पापा और में. मेरे मम्मी पापा दोनों ही जॉब करते है और में दिखने में सुंदर हूँ और लंबे बाल है. में इस साईट की बहुत बड़ी फैन हूँ और आज में आपके साथ मेरा अनुभव शेयर करने जा रही हूँ. यह 3 साल से भी ज्यादा पुरानी बात है, तब मेरी उम्र 19 साल थी और मेरी हाईट 5 फुट 1 इंच और फिगर 32-25-32 था. हम लोग एक अपार्टमेंट में रहते थे,

    तभी हमारे पास के फ्लेट में एक नई फेमिली रहने को आई, जो कि कुछ दिनों से खाली था. उनकी फेमिली में एक कपल और उनके पिताजी थे, उन लोगों के रहने के बाद पड़ोसी के नाते दोनों फेमिली के बीच बातचीत शुरू हुई वो दोनों पति पत्नी जॉब करते थे.

    फिर अंकल ने बताया कि उनकी मम्मी 12 साल पहले गुजर गई और उनकी दीदी शादी के बाद अमेरिका में रहती है और उनके पापा रिटायर्ड होने के बाद उनके पास रहने आ गये. फिर मेरे मम्मी पापा उनके पापा को चाचा जी बोलने लगे और उसी हिसाब से में उनको अंकल, आंटी और दादा जी बुलाने लगी,

    इन 2 महीनों में दोनों परिवार काफ़ी नजदीक हो गये थे. एक दिन दोपहर में स्कूल के बाद घर आने के लिए में सिटी बस स्टॉप पहुँची और उसी बस स्टॉप पर दादा जी घर आने के लिए बस का इंतजार कर रहे थे, दादाजी 5 फुट 8 इंच और मजबूत बॉडी के थे, हांलाकि उनकी उम्र 61 साल के आस पास थी, लेकिन वो 50 साल के दिखते थे. फिर बस आने के बाद हम दोनों बस पर सवार हो गये और अपने घर की तरफ निकल पड़े.

    जब बारिश का महीना था और हल्की-हल्की बारिश शुरू हो गयी थी, बस स्टॉप पर सिर्फ़ हम दोनों उतरे. हम दोनों के पास छाता ना होने की वजह से हल्की-हल्की बारिश में भीगते हुए हम घर की और बढ़े, बस स्टॉप से घर करीब 10 मिनट पैदल जाने की दूरी पर है, हम बस स्टॉप से 2-3 मिनट ही चले थे कि बारिश जोर से होने लगी तो हम दोनों तेज-तेज चलने लगे, लेकिन ज़्यादा बारिश होने की वजह से दादा जी बोले कि साईड के बड़े पेड़ के नीचे इंतजार कर लेते है और तेज की बारिश की वजह से में मान गयी और हम दोनों साईड के पेड़ के नीचे चले गये, लेकिन तब तक हम दोनों पूरी तरह से भीग चुके थे और हमारे कपड़े गीले हो चुके थे,

    उस वक़्त में स्कूल ड्रेस पहने हुई थी जो कि सफ़ेद शर्ट और ग्रे स्कर्ट थी, में पूरी तरह से भीग चुकी थी और मेरी सफ़ेद शर्ट पारदर्शी होकर चिपक गयी थी. मैंने अन्दर ब्रा पहनी हुई थी, लेकिन गीली शर्ट से मेरे बूब्स के शेप का मालूम चल रहा था. फिर मैंने दादा जी की तरफ देखा तो उनकी नज़र मेरी भीगी हुई शर्ट में दिख रहे बूब्स और क्लीवेज पर थी.

    अब वो इधर उधर की बातें करने लगे वो बीच बीच में मेरी बूब्स की और देख रहे थे, जैसे कि मुझे कोई शक़ ना हो. जब वो मेरी बूब्स की तरफ देख रहे थे, तब मेरे दिल में हलचल मच रही थी और मुझे एक अजीब सी ख़ुशी महसूस हुई और इससे पहले किसी ने मुझे इस तरह से नहीं देखा था. फिर 15 मिनट के बाद बारिश कम होते ही हम दोनों घर की और चल पड़े और चलते-चलते दादा जी मेरे भीगे हुए बदन को तिरछी नज़र से देख रहे थे, अब मुझे उनका देखना अच्छा लग रहा था.

    फिर हम दोनों अपने-अपने घर चले गये, आज तक मैंने सिर्फ़ सेक्स की वासना और सेक्स की नजर से देखने के बारे में पढ़ा और सुना था, लेकिन कभी महसूस नहीं किया था, लेकिन आज दादा जी जिस तरह से मुझे और मेरे भीगे हुए बूब्स को देख रहे थे तो मुझे एक ख़ुशी महसूस होने लगी थी और में उनके बारे में सोचने लगी. उस कच्ची उम्र में यह भावना आते ही मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था और में यह भूल चुकी थी कि वो 61 साल के और में सिर्फ़ 19 साल की हूँ, इसी हसीन याद से टाईम कट गया और देखते ही देखते शाम हो गयी.

    फिर में शाम तक अपना सब होमवर्क ख़त्म करके छत पर खुली हवा खाने के लिए चली गयी, तभी धीरे धीरे अंधेरा होने लगा था. जब में छत पर गयी तो वहां सामने कोई नहीं था, जब मैंने पूरी छत पर नज़र घुमाई तो एक कोने में दादा जी बेंच पर बैठे थे. उनको देखते ही मुझे एक ख़ुशी महसूस हुई, जैसे कि में उनसे वर्षो से मिलना चाहती हूँ और आज सामने मिल गये हो और मुझे देखते ही उनका चेहरा भी खुशी से चमक उठा और उन्होंने मुझे एक बड़ी सी स्माईल दी. फिर मैंने भी उनको रिप्लाई में एक स्माईल दी और जाकर उनकी बगल में बैठ गयी, उस वक़्त में लोंग स्कर्ट और वी गले की टॉप पहने हुई थी और दादा जी बात करते-करते मेरी क्लीवेज और बूब्स देख रहे थे और में जानबूझ कर अंजान बन रही थी.

    फिर थोड़ी देर के बाद दादाजी ने अपना एक हाथ मेरी जांघ पर रख दिया और सामने की तरफ देखकर मुझसे बात करने लगे. फिर में भी चुपचाप बैठकर उनसे बात करने लगी और मैंने उनका हाथ हटाने की कोई कोशिश भी नहीं की थी. फिर 2 मिनट के बाद दादा जी अपने हाथ से मेरी जांघ को सहलाने लगे और में चुपचाप बैठी हुई सामने की तरफ देख रही थी. फिर थोड़ी देर के बाद जब मैंने उनकी तरफ देखा तो वो मेरी जांघ सहला रहे थे और मेरी क्लीवेज को देख रहे थे.

    फिर उन्होंने मेरी आँखों में देखकर एक स्माइल दी, तो मैंने भी उन्हें एक स्माइल दे दी. फिर में हंसते हुए बोली कि मम्मी पापा के आने का टाईम हो गया है और अब में नीचे घर जाती हूँ और फिर में नीचे चली आई. फिर थोड़ी देर में मम्मी पापा अपनी जॉब से वापस आ गये, अब शाम के 9 बजे हुए थे और में सोफे पर बैठकर टी.वी देख रही थी और मम्मी किचन में काम कर रही थी और पापा लेपटॉप में अपना काम कर रहे थे. तभी डोर बेल बजी और मैंने जाकर दरवाजा खोला तो मैंने देखा कि दरवाजे के सामने दादा जी खड़े हुए थे.

    फिर उन्होंने मुझे देखते ही आँख मारी और स्माइल करते हुए अंदर आ गये, अब उन्हें देखकर मेरा दिल जोरो का धड़कने लगा था. अब पापा ने उनके चाचा जी को देखकर बड़ी खुशी से उनका स्वागत किया, तब दादा जी मुझसे बोले कि आओ और आराम से अपनी टी.वी देखो और में फिर से सोफे पर जाकर टी.वी देखने लगी और दादा जी आकर मेरे बगल में बैठ गये और पापा से बात करने लगे. फिर मम्मी किचन में उनके लिए चाय बनाने के लिए चली गयी, अब पापा अपने लेपटॉप पर काम करते-करते दादा जी से बात कर रहे थे, तो दादाजी अपने हाथ से मेरी पीठ सहलाने लगे. फिर जब मैंने उनकी तरफ देखा तो वो स्माइल देते हुए मेरे टॉप के अंदर हाथ घुसाते हुए मेरी नंगी पीठ सहलाने लगे, तभी दादाजी ने पापा से मेरे बारे में बात की.

    दादा जी : मुस्कान 11वीं में क्लास आ गयी है, उसकी पढाई कैसी चल रही है? तुम हेल्प कर रहे हो या नहीं ?

    पापा : नहीं चाचा जी, काम थोड़ा ज़्यादा है इसलिए ध्यान नहीं दे पा रहे है.

    दादा जी : अरे भाई काम तो चलता रहेगा, लेकिन बेटी की पढ़ाई का ध्यान तो रखना पड़ेगा ना.

    पापा : जी आप सही बोल रहे है, लेकिन काम का बोझ भी है अगर बुरा ना माने तो क्या आप मुस्कान की पढाई देख लेंगे? अगर आपके पास टाईम हो तो.

    दादा जी : अरे इसमें बुरा मानने की क्या बात है? में दोपहर को खाली बैठे-बैठे बोर होता रहता हूँ तो मेरा भी टाईम पास हो जायेगा. (फिर मेरी तरफ देखकर आँख मारी, और में स्माइल देते हुए फिर से टी.वी देखने लगी) तभी मम्मी चाय ले कर आई, तो दादा जी ने अपना हाथ मेरे टॉप से बाहर निकाल लिया और वो मुझे स्माईल कर रहे थे.

    मम्मी : चाचा जी आपको कोई परेशानी तो नहीं होगी ना.

    दादा जी : बिल्कुल नहीं बल्कि मुझे तो खुशी होगी.

    मम्मी : अकेली लड़की घर पर रहती है तो डर लगा रहता है और आप साथ रहेंगे तो दिल को तसल्ली भी रहेगी.

    दादा जी : हाँ बेटी सही कहा तुमने, माँ हो चिंता तो रहेगी, लेकिन आगे से मुस्कान अकेली नहीं रहेगी मेरे यहाँ आ जाया करेगी, तो में उसकी पढाई में हेल्प कर दूंगा.

    पापा : थैंक यू चाचा जी, मुस्कान कल से तुम स्कूल से आकर लंच के बाद पढाई करने के लिए चाचा जी के पास चली जाना.

    में : जी पापा.

    फिर चाय के बाद मम्मी किचन में चली गयी और दादा जी ने अपना हाथ फिर से मेरे टॉप के अंदर डाल दिया और उन्होंने इस बार नीचे कि तरफ स्कर्ट के अंदर डालने की कोशिश की, लेकिन स्कर्ट टाईट थी इसलिए वो सफल नहीं हुए. फिर वो मेरी पीठ को टॉप के अंदर से ही सहलाते रहे, फिर थोड़ी देर के बाद वो अपने घर जाने के लिए उठे और मुझे स्माइल देते हुए बोले कि कल वो इंतज़ार करेंगे, फिर वो चले गये. उसी रात अगले दिन के बारे में सोचते-सोचते कब मेरी आँख लग गयी मुझे मालूम ही नहीं चला.

    फिर में सुबह उठकर स्कूल के लिए तैयार हो गयी, फिर स्कूल जाते वक़्त मम्मी ने मुझे याद दिलाया कि लंच के बाद दादा जी के यहाँ पढ़ाई के लिए जाना है और में हाँ बोली. फिर स्कूल कैसे ख़त्म हो गया? मुझे पता भी नहीं चला और में घर वापस आ गयी. फिर में लंच करके दादा जी के यहाँ जाने के लिए तैयार होने लगी, उस टाईम मैंने टॉप और स्कर्ट पहने थी.

    अब मैंने दादा जी के घर के दरवाजे पर जाकर घंटी बजाई, फिर दरवाजा ओपन हुआ और अब सामने दादा जी सिर्फ़ एक पजामे में खड़े थे. मुझे देखते ही उनका चेहरा खुशी से चमक उठा और मुस्कुराते हुए बोले कि वो मेरा ही इंतज़ार कर रहे थे.

    अब मेरे अंदर जाते ही उन्होंने दरवाजा अन्दर से बंद कर दिया, और अब में जाकर सोफे पर बैठ गयी और सामने की टेबल पर अपनी किताब रख दी. तभी दादा जी एक ग्लास जूस मुझे देते हुए मेरे बगल में बैठ गये और अब वो मेरी पढ़ाई के बारे में पूछ रहे थे और में धीरे-धीरे जूस पीते हुए उन्हें जवाब दे रही थी, इसी बीच दादा जी ने मेरी जांघ पर हाथ रखकर सहलाना शुरू कर दिया.

    अब मेरा दिल ज़ोर से धड़कने लगा था और में चुपचाप अपना सिर नीचे करके जूस पीने लगी थी. तभी दादा जी ने पूछा कि मुझे बुरा तो नहीं लग रहा है वो मुझे टच कर रहे है, तो मैंने स्माइल देते हुए ना में सिर हिलाया. अब यह सुनकर दादा जी अपना दूसरा हाथ मेरे टॉप के अंदर डालकर मेरी पीठ सहलाने लगे.

    फिर मेरे हाथ को किस करते हुए बोले यहाँ हम सुरक्षित नहीं है और मेरा हाथ पकड़कर बेडरूम में ले गये. अब दादाजी मुस्कुराते हुए बोले यहाँ आराम से बात कर सकते है और हम दोनों बेड पर बैठ गये, फिर दादा जी ने अपना लेफ्ट हाथ मेरे कंधे पर रख दिया और अपने राईट हाथ से मेरे लेफ्ट बूब्स को सहलाने लगे. तब मैंने उनका हाथ पकड़ लिया, लेकिन मैंने उनका हाथ हटाने की कोशिश नहीं की, तो वो बूब्स को धीरे धीरे दबाने लगे. अब मैंने मेरी आँखे बंद कर ली, तभी उन्होंने दोनों बूब्स को दबाते हुए पूछा कि कैसा लग रहा है? तो मैंने कहा अच्छा लग रहा है.

    फिर वो अपना हाथ टॉप के अंदर डालकर मेरे बूब्स को ब्रा के ऊपर से सहलाने लगे और धीरे-धीरे दबाने लगे. अब में अपनी आँखें बंद करके मज़ा ले रही थी और उन्होंने अपना सर मेरे कंधे पर रखकर मेरी गर्दन को चूमना शुरू कर दिया. यह सब मेरे साथ पहली बार हो रहा था और अब में भी गर्म होने लगी थी, तभी दादा जी ने मेरे टॉप को नीचे से पकड़कर ऊपर किया और मेरे दोनों हाथ ऊपर करते ही एक झटके में मेरी टॉप मुझसे अलग हो गयी और अगले ही पल में मेरी ब्रा के हुक खोलकर ब्रा को भी मुझसे अलग कर दिया.

    अब में नीचे सिर्फ़ स्कर्ट में थी और ऊपर से पूरी नंगी थी, मेरी बूब्स देखकर दादा जी के मुँह से वाउ निकल गया और बोले, आआअहह क्या खूबसूरत बूब्स है? जी कर रहा है कच्चा खा जाऊं, क्या किसी ने आज से पहले बूब्स टच किया है? तो फिर मैंने ना में सिर हिलाया और वो एक भूखे बच्चे की तरह मेरे बूब्स को चूसने लगे और अपना हाथ मेरी स्कर्ट के अंदर डालकर मेरी जांघो को सहलाने लगे, तब तक मेरी पेंटी पूरी गीली हो चुकी थी.

    फिर थोड़ी देर में ही दादा जी अपने हाथ से मेरी चूत को पेंटी के ऊपर से ही टच करने लगे तो मैंने अपना हाथ उनके पजामे के ऊपर रख दिया और धीरे-धीरे उनके लंड को दबाने लगी. तभी दादा जी ने अपना पजामा उतार दिया और अब वो सिर्फ़ चड्डी में थे. फिर वो मुझसे बोले कि मुस्कान क्या तुम अपने दोस्त को बाहर नहीं निकालोगी?

    यह कहकर उन्होंने मेरा हाथ अपनी चड्डी के अंदर डाल दिया, अब मुझे ऐसा लगा कि मेरे हाथ में कोई गर्म रोड आ गयी है. फिर मैंने चड्डी में से उनका लंड बाहर निकाला, में लाईफ में पहली बार इतने बड़े और मोटे लंड को देख और छू रही थी, उनका लंड करीब 8 इंच लंबा, और 3 इंच चौड़ा था मैंने एक बार गधे का लंड देखा था दादाजी का लंड भी किसी घोड़े के लंड जैसा लग रहा था और में उसे एक ही नज़र में देखे जा रही थी, जैसे मुझे कोई अजूबा हाथ लगा हो. इसी बीच दादा जी ने अपनी चड्डी ऊतार दी और मेरी स्कर्ट भी खोल दी. अब वो मेरे सामने पूरे नंगे थे और में सिर्फ़ एक पेंटी में थी.

    अब में उनके लंड को अपने हाथ से सहला रही थी और वो मेरे बूब्स दबाते हुए मेरी आँखो में देख रहे थे. फिर धीरे-धीरे वो मेरे चेहरे के पास आकर मेरे लिप को चूमने लगे, अब में भी किस में उनका साथ देने लगी. फिर 2-3 मिनट तक लिप किस करने के बाद दादा जी मेरे सामने खड़े हो गये और अब उनका लंड ठीक मेरे सामने तनकर खड़ा था, मानों जैसे वो मुझे सलामी दे रहा है.

    फिर दादा जी मुझे लंड को मुँह में लेने के लिए बोले और मैंने लंड को दोनों हाथों से पकड़कर मुँह में ले लिया. अब दादा जी मेरे बालों को पकड़कर मेरे सिर को अपने लंड पर आगे पीछे करने लगे और अपनी आँखे बंद करके, उम्म्म हम्मम्मम्म करके सिसकारियाँ निकाल रहे थे. फिर में 3-4 मिनट तक उनका लंड चूसती रही और उन्होंने अचानक से ज़ोर से, आहह करते हुए अपना पूरा पानी मेरे मुँह के अंदर ही छोड़ दिया. उनके लंड के पानी का टेस्ट कुछ अजीब सा था, लेकिन में उनके लंड का सारा पानी पी गयी और मैंने लंड चाट कर साफ कर दिया.

    अब दादा जी ने मुझे उठाकर बेड पर लेटा दिया और मेरी पेंटी को नीचे खींचने लगे, अब देखते ही देखते मेरी पेंटी मुझसे अलग हो गयी और में पूरी नंगी बेड पर लेटी रही. फिर मेरी दोनों टांगो को खोलकर अपना सिर मेरी जांघो के बीच में रख दिया और मेरी चूत की फंको को खोलकर को किस करने लगे, मुझे ऐसी फीलिंग हो रही थी, जैसे कि हज़ारो चीटियाँ मेरी चूत को काट रही हो, मुझे इतनी अच्छी फीलिंग पहले कभी नहीं आई थी.

    फिर वो मेरी चूत को चाटने लगे और देखते ही देखते अपनी जीभ मेरी चूत में डालने लगे, अब वो मेरी चूत को चूसते रहे और अब में उनका सिर पकड़कर दबाब डाल रही थी और चूत चुसाई का मज़ा ले रही थी. अब करीब 5-6 मिनट तक चुसाई करवाने से मेरी चूत से पानी निकलने लगा था और वो मेरी चूत पर मुँह लगाकर पूरा पानी पी गये. अब पानी निकलने के बाद में हल्का महसूस कर रही थी और अब दादा जी मेरे ऊपर आकर मेरे बूब्स के साथ खेलने लगे और अब में भी उनके लंड को अपने हाथ से सहलाते हुए खेलने लगी.

    फिर 2 मिनट में ही दादा जी का हलब्बी लंड सलामी देते हुए फिर से खड़ा हो गया, तो वो मेरी दोनों टांगो के बीच में आकर बैठ गये. अब उन्होंने एक तकिया लेकर मेरी कमर के नीचे रख दिया, ताकि मेरी चूत थोड़ी ऊपर हो जाए. फिर बेड के साईड में टेबल पर रखी वेसलिन क्रीम निकाल कर थोड़ी मेरी चूत को खोलकर उस पर लगाई और थोड़ी अपने लंड पर लगा ली, फिर अपने हाथ से लंड को पकड़कर मेरी चूत के होल के सामने रगड़ने लगे.

    फिर वो मेरे ऊपर लेट गये और मेरे लिप पर किस करने लगे, अब में भी उनके किस का साथ दे रही थी और इसी बीच दादा जी ने एक ज़ोर के धक्के के साथ अपना लंड मेरी चूत के अंदर डाल दिया, तो में दर्द के मारे चिल्लाने लगी, लेकिन उन्होंने मेरे लिप को अपने लिप से बंद कर रखा था और अब में उनको हटाने लगी, लेकिन उन्होंने मेरी कमर को पकड़ कर रखा था और में हिल भी नहीं पा रही थी, अब दर्द के मारे मेरी आँखो से आंसू निकलने लगे थे.

    फिर दादा जी ने मेरे बूब्स को चूसा और फिर थोड़ी देर में जब मेरा दर्द कम हुआ तो वो फिर से अपनी कमर चलाने लगे. अब उनका लंड धीरे-धीरे चूत में अंदर बाहर होने लगा था, फिर जब में थोड़ी नोर्मल हुई तो उन्होंने और एक ज़ोर के धक्के से अपना पूरा लंड मेरी चूत में अंदर डाल दिया और तभी ज़ोर से पकड़कर मुझे किस करने लगे और धीरे-धीरे मेरा दर्द कम होने लगा और मेरा दर्द कम होने के बाद लंड को अंदर बाहर करके चोदने लगे.

    फिर थोड़ी देर में मुझे भी मज़ा आने लगा और में अपनी कमर उठा- उठाकर उनका साथ देने लगी और अब मुझे देखकर दादा जी भी जोश में आ गये और ज़ोर ज़ोर से मुझे चोदने लगे. फिर 7-8 मिनट तक चुदवाने के बाद मेरे पानी छोड़ने के बाद दादा जी भी कुछ 15-20 धक्के लगाकर वो भी अपना पानी मेरी चूत के अंदर डाल कर झड़ गये. अब चुदाई के बाद हम दोनों ही थक चुके थे और कुछ देर तक हम दोनों वैसे ही नंगे बेड पर पड़े रहे. दोस्तों यह थी मेरी पहली चुदाई की कहानी

  • ट्रक ड्राइवर बना मेरे जिस्म का मालिक

    दोस्तो, मेरा नाम काजल है, उम्र 23 साल, फिगर साइज 33-28-34 है.

    मैं दिखने में सांवली हूँ, मेरा कोई बॉयफ्रेंड नहीं था।
    मेरी चुत की आग ने मुझे जैसे रंडी ही बना दिया।

    तो अब माय सेक्स डिजायर X कहानी शुरू करती हूँ.

    मैं काजल अपनी दुनिया में खुश रहती थी.
    मेरी सहेलियों के ब्वॉयफ्रेंड थे और वे सब उनके साथ जवानी का मजा करती थीं.

    चुदाई के बाद मेरी सहेलियां जब मिलतीं तो वे सब चटखारे ले लेकर अपनी चुदाई के किस्से सुनातीं.
    मैं उनकी सेक्स की बातों को सुनकर गर्म हो जाती और बाद में अपनी बुर में उंगली करके अपनी बुर को, माय सेक्स डिजायर को ठंडा कर लेती थी.

    इसी तरह मैं रोज कॉलेज जाती और घर आ जाती.

    एक दिन मेरी सहेली फोन पर एक पोर्न साईट पर किसी से चैट कर रही थी.
    मैंने देखा तो उससे पूछा कि यह सब कैसे करते हैं.

    तो उसने मेरी भी आईडी उस साईट पर बना दी.

    अब मैं भी उस साईट पर रोज आने लगी.
    पर मुझे किसी का कोई मैसेज ही नहीं आता था.

    एक दिन मेरी सहेली ने पूछा- चैट हो रही है न वहां पर … अब तो मजा आ रहा होगा!
    तो मैंने उसको मना करते हुए सारी बात बताई.

    उसने मेरा फोन लिया और साईट को खोल कर उसने मेरी प्रोफाइल में 4-5 गंदी और अश्लील सी फोटो डाल दीं, साथ ही उसने बहुत कुछ चुदाई वाला मसाला भी लिख दिया.
    मैं शाम को घर आ गई.

    अगले 2 दिन तक कॉलेज की छुट्टी थी, तो मैं अपने घर के काम में व्यस्त रही.

    रविवार को रात को मैं बोर हो रही थी तो मैंने सोचा कि अब साईट खोल कर वीडियो देखा जाए और अपनी बुर को ठंडी कर लूं!
    मैंने अपने कमरे को अन्दर से बन्द किया और सलवार उतार कर बैड पर बैठ गई.

    मैंने मोबाईल पर पॉर्न साईट खोली तो देखा किसी का मैसेज आया हुआ था.
    तभी मैंने मैसेज खोला तो उसमें एक लड़के ने मेरी फ़ोटोज़ की बहुत तारीफ की थी.

    मैं बहुत खुश हुई.
    मैंने भी उसको धन्यवाद का रिप्लाई कर दिया.

    अब मैं गंदी फिल्म देखकर माय सेक्स डिजायर X शांत करने लगी.
    थोड़ी देर में ही उस लड़के का वापस रिप्लाई आया और इस बार उसने अपने लंड की तस्वीर के साथ मैसेज भेजा था.

    उस मैसेज में लिखा था कि लंड पसंद आया हो, तो रिप्लाई देना.
    उसका लंड देख कर ही मेरी बुर पानी छोड़ने लगी.

    उसका लंड सच में काफी लंबा और मोटा था.
    थोड़ी देर बाद मैंने उसको रिप्लाई किया- तुम्हारा बहुत अच्छा है!

    वह- धन्यवाद, तुम कहां से हो?
    मैंने अपनी जगह बता दी.

    वह- तुम तो बहुत सेक्सी हो, आज तक कितने लंड ली हो?
    मैं- अभी तक एक भी नहीं.
    वह- हो ही नहीं सकता है, तेरी बुर की फोटो देख कर लगता है कि तू बहुत चुदी है!

    मैं- वह मैंने तो ऐसे ही लगा दी है.
    वह- तो अपनी असली बुर ही दिखा दो न!
    मैं- नहीं!

    वह- अच्छा तो अपनी एक सेक्सी सी फोटो तो दिखा दो, अब मना मत करना.
    मैं- ठीक है, पर एक ही फ़ोटो दूँगी.
    वह- हां, पर अपनी ही दिखाना!

    मैंने उसको अपनी फोटो भेज दी, उसने मेरी बहुत तारीफ की.
    मैं भी बहुत खुश हुई.

    अब जब भी मौका मिलता, हम बात करने लगते.

    कुछ ही समय बाद हम दोनों ने अपने नम्बर भी एक दूसरे के साथ शेयर कर लिए थे.
    अब हम दोनों वीडियो कॉल पर भी बात करते थे.

    कुछ दिनों तक बात हुई, तो हम दोनों खुल कर बात करने लगे.
    हम दोनों को सेक्सी बातें करते हुए एक महीने से ऊपर हो गया था.

    एक दिन हम दोनों नंगे होकर बात कर रहे थे.

    हम दोनों जब भी नंगे होते थे तो अपना चेहरा नहीं दिखाते थे.
    उस दिन उसने मुझसे कहा- काजल मैं कोई जवान लड़का नहीं हूँ. मैं 45 साल एक हट्टा-कट्टा मर्द हूँ.

    मैंने भी सोचा कि यह मजाक कर रहा है.
    वह बोला- लोगी मेरे लंड को?

    मैंने भी कहा- कब से तो तड़फ रही हूँ … पर आप हो कि आते ही नहीं हो!
    तो वह एकदम से बोल पड़ा- तुम रात को 10 बजे घर से बाहर आ सकती हो?

    मैंने सोची कि यह मजाक कर रहा होगा.
    तो मैंने भी हां कर दी.
    अब वह ऑफ लाइन हो गया.

    रात को ठीक 10 बज कर 10 मिनट पर उसका फोन आया ‘कहां हो तुम, मैं बाहर इंतजार कर रहा हूँ … जल्दी बाहर आओ!’
    मैं कुछ समझ पाती कि उसने फोन रख दिया.

    मैंने सोचा कि मैंने तो उसको अपने घर का पता अभी तक बताया ही नहीं था, तो कहां से बाहर आ गया!

    मैं फिर घर के पीछे वाले दरवाजे से बाहर आ गई.

    बाहर अन्धेरा बहुत था, मैं एक साइड खड़ी हो गई.

    तभी एक हाथ निकल कर आया और मेरे मुँह पर आ गया.
    मैं एकदम से इस हरकत से बहुत डर गई.

    जब मैंने पीछे देखा तो पास के रमेश अंकल थे.

    मैं उनसे छूट कर दूर हुई और बोली- यह क्या गंदी हरकत कर रहे हो अंकल?
    अंकल बोले- वही, जो रोज फोन में करते थे.

    अब मैं समझ गई कि मैं जिसको एक लड़का समझ रही थी, वह लड़का रमेश अंकल हैं.

    अंकल ने मुझे पकड़ लिया और मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए.
    वे पागलों की तरह मुझे किस किए जा रहे थे.

    अब अंकल मेरी कमीज के ऊपर से मेरे बूब्स को दबाने लगे.
    मैंने उनको धक्का देकर पीछे कर दिया.

    अंकल बोले- क्या हुआ?
    मेरे मुँह से निकल गया कि कोई देख लेगा अंकल!

    ‘अब यहां इस टाइम कौन आएगा?’
    मैं- नहीं, कोई भी आ सकता है.

    अंकल ने मेरा हाथ पकड़ा और वे मुझे एक ट्रक के पास ले आए.
    उन्होंने जल्दी से ट्रक के गेट को खोला और मुझे ट्रक के अन्दर ले गए.

    अंकल ने ट्रक के अगले शीशे पर स्क्रीन लगा दी.
    इससे ट्रक के अन्दर अन्धेरा हो गया.

    अब अंकल ने मुझे पकड़ा और मेरे होंठों पर अपने होंठ रख कर चूसने लगे.
    मुझे भी मजा आने लगा था तो मैं भी अंकल का साथ देने लगी थी.

    थोड़ी देर में ही हम दोनों पूरे नंगे हो गए.

    अंकल ट्रक की पिछली सीट पर लेट गए और लंड को हाथ में पकड़कर बोले- चूस रानी, पूरा चूस!
    यह कह कर उन्होंने मेरा एक दूध पकड़ लिया और उसे मसलते हुए सहलाने लगे.

    मैंने भी ब्लू फिल्मों में लंड की चुसाई देखी थी और मेरी सहेलियां भी खुल कर बताती थीं कि वे अपने ब्वॉयफ्रेंड्स का लंड चूसती हैं.

    यह सब सोच कर मैंने रमेश अंकल के लंड को पकड़ा और अपने मुँह में लेकर चूसने लगी.

    अंकल का लंड सच में बहुत बड़ा था; पूरा लंड मुँह में नहीं आ रहा था.
    तो अंकल अपनी गांड उठा कर अपना लंड पूरा का पूरा मेरे मुँह में डालने की कोशिश कर रहे थे.

    मैं अंकल के लंड को चूसने के साथ एक हाथ से अपनी बुर को भी सहला रही थी.

    कुछ देर बाद अंकल उठ गए और बोले- लंड की गोलियां भी चूस ले … बहुत मजा आ रहा है तेरे साथ!
    मैं अंकल के टट्टे भी मुँह में लेकर चूसने लगी.

    अंकल बोले- साली काजल, तू तो वीडियो देख कर ही एक पूरी रंडी के जैसा मजा दे रही है!
    अंकल के मुँह से ‘रंडी’ शब्द सुनते ही मैं उनके लंड को और जोर से चूसने लगी.

    अंकल ने अब मुझे नीचे लिटाया और वे मेरी बुर चाटने लगे.
    तभी अंकल ने एक उंगली मेरी गांड में डाल दी जिससे मेरी हल्की सी चीख निकल गई.

    अंकल अपने काम में लगे रहे.

    कुछ ही देर बाद अंकल मेरी गांड पर टूट पड़े.
    उनकी एक उंगली मेरी बुर के अन्दर थी और जीभ मेरी गांड में चलने लगी थी.
    उनकी नर्म गर्म जीभ से मुझे बहुत मजा आ रहा था.

    कुछ पल बाद अंकल मेरे ऊपर चढ़ गए और अपने लंड को मेरी बुर पर घिसने लगे.
    उन्होंने अपने एक हाथ से मेरा मुँह बन्द कर दिया और एक कड़क झटका मारते हुए अपना लंड अन्दर पेल दिया.

    इस एक ही कड़क झटके में उनका लंड मेरी बुर को फाड़ता हुआ अन्दर चला गया.

    मेरे मुँह से निकली हुई चीख मेरे मुँह में ही दब कर रह गई.
    मुझे बेहद दर्द हो रहा था और चाह कर भी मैं चिल्ला नहीं पा रही थी.

    तभी अंकल ने फिर से झटका मारा.
    इस बार ऐसा लगा मानो उनका पूरा लंड मेरे पेट के अन्दर चला गया हो.

    इसके बाद थोड़ी देर तक अंकल मेरे ऊपर वैसे ही चढ़े रहे और उनका लंड मेरी बुर में अपनी जगह बनाता रहा.

    फिर मेरा दर्द कम हुआ तो अंकल धीरे धीरे अपने लंड को बुर में आगे पीछे करने लगे.

    कुछ देर बाद अंकल ने मेरे मुँह से अपना हाथ हटा दिया तो मैं जोर जोर से सांस लेने लगी.
    मैं बोली- बाहर निकाल लो अंकल, बहुत दर्द हो रहा है.

    अंकल ने मेरी कोई बात नहीं सुनी और मेरी बुर को चोदना जारी रखा.

    कुछ देर बाद मुझे भी अंकल के लंड से मजा आने लगा था.
    मैं भी गांड उठाकर अंकल का साथ देने लगी.

    थोड़ी देर में ही मेरी बुर ने पानी छोड़ दिया और मैं निढाल हो गई.
    अंकल लगातार अपनी गंदी गंदी गालियों के साथ मुझे चोदे जा रहे थे- आह साली छिनाल रंडी … बहन की लौड़ी बड़ा मजा दे रही है तेरी बुर … आह आज तो साली तेरी बुर का भोसड़ा बना कर रहूँगा!

    कुछ ही देर में मैं फिर से चार्ज हो गई और अंकल की चुदाई में सहयोग करने लगी.

    अंकल अब झड़ने वाले थे.
    तो उन्होंने मुझे पेट के बल कर दिया और सारा पानी मेरी गांड पर छोड़ दिया.

    उसके बाद अंकल ने अपने पानी को मेरी गांड में मल दिया.

    मैं हाँफ रही थी और मुझे बेहद सुकून मिल रहा था.
    मेरा जिस्म फूल की भान्ति हल्का हो गया था.
    चुदाई के बाद इतना चैन मिल सकता है, इसका अहसास मुझे पहली बार हुआ था.

    मैं अंकल के साथ चिपक कर सो गई.

    कुछ देर बाद अंकल मेरे एक दूध को मसलते हुए बोले- साली रंडी, तेरी गांड का भी मजा लेना है! मुझे पता नहीं था कि तेरे जैसी मस्त रंडी मुझे यहीं मिल जाएगी.
    यह बोलते हुए अंकल ने मेरे चूतड़ों पर अपना एक हाथ भी फेर रहे थे.

    तभी अंकल ने एक उंगली मेरी गांड में घुसेड़ दी.
    मुझे फिर से बहुत दर्द हुआ.
    पर अंकल को कोई फर्क नहीं पड़ रहा था.

    अंकल ने मेरी गांड को उंगली से चोदना शुरू कर दिया.

    कुछ ही देर में अंकल ने अपनी एक और उंगली गांड में डाल दी.
    मुझे भी अब मजा आ रहा था.

    अंकल का लंड भी अब टाईट हो गया था. अंकल ने मुझे कुतिया बना दिया.
    मैंने भी अपने हाथों से अपनी गांड को पकड़ कर खोल दिया.

    अंकल ने मेरी गांड और अपने लंड पर थूक लगाया और लंड को गांड में सैट कर दिया.

    उसके ठीक बाद अंकल ने जोर का झटका मारा तो लंड गांड के अन्दर चला गया.

    मैं तड़फ उठी.
    अंकल बोले- शाबाश रंडी, बस थोड़ा और सह ले.

    यह कहते हुए अंकल ने दूसरे झटके में अपना पूरा लंड गांड में डाल दिया.

    मेरी तो समझो मेरी गांड फट ही गई थी.
    उनका हाथ मेरे मुँह पर जमा हुआ था तो आवाज बंद थी.

    अंकल अब मेरी गांड में लंड के साथ थप्पड़ भी मार रहे थे- साली रंडी बहुत मस्त कुतिया है तू!

    वे यह सब बोल कर गांड फाड़ चुदाई किये जा रहे थे.
    अंकल कभी मेरे बूब्स पकड़ कर दबाते तो कभी मुझे बालों से पकड़ कर एक घोड़ी की तरह खींचते.

    कुछ 25 मिनट तक मेरी गांड चोदने के बाद अंकल ने अपने दोनों हाथों से मेरे दोनों दूध दबोचे और वे मेरी गांड में ही झड़ गए.
    झड़ कर वे मेरे ऊपर ही लेट गए.

    कब हम दोनों को नींद आ गई, कुछ पता ही नहीं चला.
    जब मेरी नींद खुली तो मैंने देखा कि सुबह होने वाली है.
    मैंने अपने कपड़े पहने, अंकल नंगे ही सोए थे.

    मैं ट्रक से बाहर निकल कर घर आ गई.

    अगले दिन कॉलेज भी नहीं गई, चूत से ज्यादा मेरी गांड में दर्द हो रहा था.

    उसके बाद अंकल ने मेरी बहुत बार चुदाई की, कभी ट्रक में चोदा तो कभी बाहर खड़े खड़े ही चोद देते थे.

    एक दिन अंकल और उनके दोस्त ने एक साथ मुझे मिल कर चोदा.
    यह घटना मैं आपको अगली सेक्स कहानी में बताऊंगी.

  • पहले पहले प्यार में पड़कर बुर चुदाई

    मेरा नाम प्रिया है और मैं आपको, प्यार में पहली बार हुई मेरी चुदाई के बारे में बता रही हूँ.

    मेरा राहुल नाम का एक ब्वॉयफ्रेंड था, हम दोनों एक दूसरे से बहुत प्यार करते थे.

    राहुल हमारे घर के पास ही में रहता था. राहुल और मैं साथ में पढ़ाई करते थे.

    BF Chudai GF कहानी ऐसे शुरू हुई.

    एक दिन मां बाजार से खरीददारी करने के लिए गई थीं और घर में मैं अकेली ही थी.
    राहुल हर रोज की तरह पढ़ाई करने के लिए घर पर आया.
    हम दोनों साथ में पढ़ाई करने के लिए बैठ गए.

    राहुल ने मुझसे पूछा- तुम्हारे घर में कोई नहीं है क्या?
    मैंने कहा- पापा काम पर गए हैं और मां बाजार से सामान आदि लाने गई हैं.

    राहुल बोला- मतलब हम दोनों ही घर में हैं!
    मैंने हाँ कहा.
    अब हम दोनों पढ़ाई करने बैठ गए.

    राहुल ने मुझसे पूछा- तुम मुझे कितना प्यार करती हो?
    मैंने कहा- बहुत!

    राहुल बोला- मैं जो तुम्हें कहूंगा, वह करोगी!
    मैं बोली- हां!

    राहुल मेरे पास आया और मेरी तरफ देखने लगा.
    फिर अचानक से वह मुझे किस करने लगा, मेरे होंठों को चूसने लगा.

    मैं राहुल से कहने लगी- मुझे छोड़ो … ये सब अभी नहीं राहुल!
    पर राहुल मेरी बात नहीं सुन रहा था, वह मुझे चूमता ही जा रहा था.

    मैंने उस दिन जींस पैन्ट और टी-शर्ट पहनी थी.
    राहुल का एक हाथ मेरी जींस के ऊपर से मेरी गांड को दबा रहा था और दूसरे हाथ से वो मेरे स्तनों को दबा रहा था.

    उसने मुझे चूमते चूमते मेरी टी-शर्ट निकाली और मेरी गर्दन पर चूमने लगा.
    अब मैं राहुल के सामने ब्रा और जींस पैन्ट में थी.

    वो मेरी नाभि को चूमने लगा.
    मेरी सांसें धीरे धीरे तेज होने लगीं.

    राहुल मेरी पैन्ट निकालने ही वाला था, तभी दरवाजे की घंटी बजी.
    मैंने राहुल को दूर धकेल दिया और जल्दी कपड़े पहन कर दरवाजे खोलने के लिए गई.

    मां मार्केट से वापस आ गई थीं.
    रोहन और मैं उनके सामने खड़े थे.

    मेरी मां ने राहुल से पूछा- कैसी पढ़ाई चल रही है?
    राहुल- हां आंटी, पढ़ाई अच्छी चल रही है.

    मम्मी अन्दर चली गईं और राहुल मुझे गुस्से से देखता हुआ वहां से चला गया.
    चूंकि मैंने उसे धकेल दिया था इसलिए वह मुझ पर गुस्सा हो गया था.

    मां मुझसे बोलीं- प्रिया राहुल को क्या हुआ, ये क्यों चला गया?
    “कुछ नहीं मां … उसकी तबीयत ठीक नहीं है.”

    बाद में मैंने राहुल को कॉल किया- राहुल क्या हुआ, तुम उस दिन घर से गुस्से से क्यों निकल गए?
    राहुल- प्रिया तुम मुझसे प्यार नहीं करती हो!

    मैं- मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ.
    राहुल- फिर तुमने मुझे धकेला क्यों?
    मैं- मैं डर गई थी. मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था और दरवाजे की घंटी बजी इसलिए मैंने तुम्हें धकेल दिया.

    राहुल- प्रिया फोन रखो, तुम मुझसे बात मत करो.
    मैं- राहुल तुम गुस्सा मत करो, पंद्रह दिन बाद मम्मी पापा दोस्त के शादी में जाने वाले हैं. उस दिन तुम घर आना और जो चाहे वह कर लेना, मैं कुछ नहीं कहूंगी.

    राहुल- सच में कुछ नहीं कहोगी ना!
    मैंने हां कहकर फोन रख दिया और खाना खाकर सोने चली गई.

    सोते समय राहुल ने जो आज किया, मैं उसके बारे में सोच रही थी.
    आज दोपहर में जो राहुल ने आग लगाई थी, मुझे उसे हर हाल में बुझाना ही था इसलिए मैंने अपने रूम का दरवाजा बंद किया और अपनी पैंट निकाल दी.

    मैं एक हाथ से चूत को सहलाने लगी, उसके अन्दर उंगली अन्दर बाहर करने लगी.
    दूसरे हाथ से मैं अपने मम्मों को दबाने लगी.

    कोई दस पंद्रह मिनट तक अपनी चूत को सहलाने के बाद मैं झड़ गई और सो गई.

    अगले दिन मैंने बाथरूम में जाकर अपनी चूत के सारे बाल साफ किए और बुर को शीशे में देखने लगी.
    मेरी चूत एकदम चिकनी दिखने लगी थी.

    मैं शीशे में देख कर फिर से अपनी बुर को सहलाने लगी.
    मुझे फिर से चुदास चढ़ने लगी और मैं बुर में कुछ डालने की सोचने लगी.

    मैं जल्दी से कमरे में आई और बुर में पेलने के लिए कुछ ढूँढने लगी.
    मुझे गोल हत्थे वाली कंघी दिखाई दी और मैं उसी को लेकर वापस बाथरूम में आ गई.
    मैंने उसे बुर में रगड़ना चालू किया तो मुझे मजा आने लगा.

    फिर मैंने उसे शैंपू से चिकना किया और बुर में डालने लगी.
    वो हत्था मेरी बुर में आधा इंच से कुछ ज्यादा ही जा पा रहा था.
    उसके बाद शायद मेरी बुर की झिल्ली उसे अन्दर जाने से रोक रही थी.

    मैंने कंघी के हत्थे को और अन्दर नहीं डाल बस उससे अपनी बुर के दाने को रगड़ती रही.
    कुछ ही देर बाद मैं झड़ गई और बाहर आ गई.

    उस दिन दोपहर में खाना खाकर मुझे बहुत मस्त नींद आई.

    रात को मैंने अन्तर्वासना की साइट खोली और एक सेक्स कहानी पढ़ने लगी.
    उसमें गांड को किस तरह से मरवाते हैं, उसको लेकर लिखा था.

    मेरे दिमाग में अपने आशिक के लिए गांड का छेद खोलने की सोची और अपने उसी प्यारे से कंघी के हत्थे को उठाया लिया.

    मैं उसमें वैसलीन लगा कर उसे अपनी गांड के छेद में लगा कर छेद को कुरेदने लगी.
    गांड ने भी मुँह खोल दिया और वो हत्था मेरी गांड में घुस गया.

    हालांकि अभी वो कुछ ही अन्दर जा पाया था कि दो वजहों से वो रुकने लगा.
    एक तो शायद गांड काफी कसी हुई थी और मुझे उसकी अन्दर की बनावट के बारे में मालूम नहीं था इसलिए मैं डर रही थी कि कुछ गलत न हो जाए.

    दूसरी बात ये थी कि उस हत्थे की बनावट कुछ ऐसी थी कि वो आगे कुछ मोटा सा हो गया था.
    मतलब शुरुआत में पतला गोल था और आगे जाकर ज्यादा मोटा था.
    इसलिए वो मेरी गांड में नहीं जा रहा था.

    अब मैं जितना हत्था गांड में घुस गया था, उतने से ही अपनी गांड को कुरदने लगी.
    मुझे मजा आने लगा.

    फिर मैंने उस हत्थे को अपनी गांड में लगा कर छोड़ दिया और गांड को कसके और ढीली करके उसे अपनी गांड में फुदकता सा महसूस करने लगी.

    आह मुझे बेहद मजा आने लगा था.
    तभी मेरे हाथ की हथेली ने मेरी बुर को सहलाया तो मुझे डबल मजा आने लगा.

    उस दिन काफी देर तक मैंने ऐसा ही किया और झड़ कर एक ही करवट लिए सो गई.
    कंघी का हत्था सारी रात मेरी गांड में ही घुसा रहा.

    सुबह मुझे वो कंघी का हत्था मेरे हाथ से टकराया तो बरबस ही मुझे मुस्कान आ गई और मैंने उसे निकाल दिया.

    मैं बाथरूम में गई और पॉटी करने के लिए कमोड पर बैठी, तो पॉटी करते समय मुझे मेरी गांड में बड़ी सुरसुरी सी हुई और काफी अच्छा लगा.

    अब मैं ये रोज करने लगी.
    इससे मेरी गांड ढीली होकर आसानी से कंघी के हत्थे को तीन चार इंच तक अन्दर लेने लगी थी.

    इससे मुझे लगने लगा था कि मैं अपने आशिक का लंड अपनी गांड में बड़ी आसानी से ले लूँगी.
    ये मैंने एक सरप्राइज के रूप में उसे देने का तय किया था.

    अब वो दिन आ गया था, जिस दिन मेरी चुदाई होने वाली थी.

    मम्मी और पापा शादी के लिए निकल गए.
    मैं राहुल का इंतजार कर रही थी.

    तभी दरवाज़े की घंटी बजी.
    मैंने जाकर दरवाजा खोला.
    सामने राहुल था.

    मैंने राहुल को अन्दर बुलाया और उसे अपने कमरे में लेकर गई.
    वो मेरी तरफ देख रहा था.

    मैं- राहुल आज तुम मेरे साथ जो करना चाहते हो, वो कर सकते हो. मैं तुम्हें कुछ नहीं कहूंगी.

    राहुल मेरे पास आया और मुझे चूमने लगा.
    मेरी चूत को हाथ से सहलाने लगा और जल्दी ही वो उतावला हो गया.

    उसने मेरी जींस टी-शर्ट को निकाला. मुझे ब्रा और पैन्टी में देख कर राहुल का लंड पैंट के अन्दर ही उछलने लगा था.

    उसकी पैंट का उभार मुझे उसके फूले हुए लंड का अहसास करवाने लगा था.
    मैंने उसके लंड पर हाथ फेरा, तो राहुल ने बड़े नशीले नदाज में मुझे देखा.

    उसके बाद राहुल ने मुझे घुटनों पर बिठाया और उसने अपनी शर्ट निकाल कर मुझसे कहा- मेरी पैंट निकालो प्रिया!

    मैं राहुल की पैंट निकालने लगी.
    उसका तना हुआ लंड मेरे मुँह के सामने आ गया.

    मैं सामने से आज पहली बार किसी का लंड देखने और चूसने वाली थी.

    राहुल का लंड बहुत मोटा और लंबा था.

    उसने मेरे मुँह के अन्दर लंड डाला और मुझे लंड चूसवाने लगा.
    राहुल के लंड स्वाद कुछ अजीब सा था.
    मैंने राहुल से कहा- मैं तुम्हारा लंड नहीं चूसूँगी.

    राहुल कहने लगा- तुमने मुझे क्या कहा था कि मैं तुम्हारे साथ जो चाहे कर सकता हूं. अब ये चीटिंग है.

    मैंने ओके कहा और फिर मैंने राहुल के लंड के ऊपर स्ट्राबेरी फ्लेवर की लिपबाम लगा कर लंड चूसने लगी.

    अब लंड का स्वाद स्ट्राबेरी की तरह था.
    मैं राहुल का लंड मजे से चूसने लगी.

    थोड़ी देर के बाद राहुल ने मुझे बेड पर लिटा दिया और मेरी पैंट निकाल कर मेरी पैंटी निकाल दी.
    वो मेरी चूत को चूसने लगा.

    राहुल बोला- प्रिया तेरी चूत का स्वाद स्ट्राबेरी की तरह है.
    मैंने कहा- हां मैंने तेरे आने से पहले अपनी चूत पर स्ट्राबेरी फ्लेवर की लिप बाम लगाई थी.

    राहुल मेरी चूत को बहुत देर तक चूसता रहा.
    इसके बाद मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया.
    राहुल ने मेरी चूत का सारा पानी पी लिया.

    अब राहुल ने मेरी चूत पर थूक लगाया और मेरी चूत में जोर से लंड घुसेड़ कर धक्के मारने लगा.
    मैं दर्द के कारण चिल्लाने लगी. राहुल का मोटा लंड मेरी चूत में अभी आधा ही गया था.

    राहुल ने मेरी चीख पुकार को नजरअंदाज किया और दो तीन तेज धक्के मारकर अपना पूरा लंड अन्दर पेल दिया.
    वो लंड पेल कर रुक गया और मुझे सहलाने चूमने लगा.

    कुछ देर के बाद मेरा दर्द जाता रहा और मुझे भी मजा आने लगा.
    मैं अपनी गांड उठाने लगी तो राहुल समझ गया और वो मुझे धकापेल चोदने लगा.

    उसके बाद मैं राहुल से कहने लगी- आह मजा आ रहा है … और जोर से … और जोर से चोदो मुझे राहुल!
    अब मेरे मुँह से चुदासी सिसकारियां निकलने लगी थीं- आह हाआ हां … बहुत मजा आ रहा है राहुल!

    राहुल ने काफी देर तक मेरी चुदाई करने के बाद कहा- मैं झड़ने वाला हूँ.
    मैंने राहुल से कहा- तुमने कॉन्डम नहीं पहना है, तो सारा रस मुझे पिला दो.

    राहुल ने मेरी चूत से लंड निकाला और मेरे मुँह में डाल दिया.
    मैं लंड चूसने लगी.

    कुछ ही पलों में राहुल मेरे मुँह में झड़ गया.
    मैंने उसका सारा रस पी लिया.

    हम दोनों बेड पर ही लेट गए.

    मैंने राहुल से कहा- खाने का टाइम हो गया है. तुम यहां पर ही खाकर चले जाओ.
    राहुल बोला- ठीक है.

    मैं बेड से उतर कर कपड़े पहनने लगी.

    राहुल बोला- अभी रुको प्रिया, तुम कपड़े मत पहनो. वैसे भी घर में हम दोनों के अलावा कोई नहीं है.
    मैंने पहले तो मना किया, पर बाद में मैं मान गई.

    हम दोनों नंगे ही किचन में चले गए.

    मैं प्लेट में खाना ले रही थी और राहुल पीछे से मेरी गांड को ताड़ रहा था.
    उसका लंड मेरी गांड देख कर खड़ा हो गया.

    मैंने ये सब देख लिया था.
    मुझे पता लग गया कि राहुल को मेरी गांड पसंद आ गई है और वो मेरी गांड मारना चाहता है.

  • ममेरे भाई ने मेरी बुर की सील तोड़ी

    मित्रो, मेरा नाम शर्मिष्ठा है, मैं गुजरात के एक छोटे से गांव से हूँ.
    मेरा रंग गोरा है और फिगर 30-28-32 की है. मेरी उम्र 22 साल की है.

    यह हॉट सिस्टर पोर्न कहानी तब की है, जब मैंने 12वीं पास करके कॉलेज में दाखिला लिया था.

    उसी कॉलेज में मेरे मामा के लड़के राहुल ने भी एडमिशन लिया था.
    वो दिखने में काफ़ी हैंडसम था. वो हमारे घर के पास ही रहने लगा था.

    कॉलेज स्टार्ट होने के बाद हम दोनों साथ में ही जाते थे. मेरा घर रास्ते में आता था तो वो मुझे वहां से पिक कर लेता था.
    हम दोनों में पहले सब भाई बहन जैसा ही था.

    कॉलेज जाने के बाद हम रोज रात में पढ़ाई को लेकर चैट करते थे.

    धीरे धीरे हमारे बीच और दूसरे विषय पर भी बात होने लगी.
    फिर पता नहीं कैसे, हमें एक दूसरे से प्यार हो गया.

    ये कुछ ऐसे हुआ कि एक दिन जब हम कॉलेज जा रहे थे तो उसने मुझे आई लव यू कहा.
    मैंने भी उसे आई लव यू टू कह दिया.

    बस हमारी लव स्टोरी शुरू हो गई.

    अब हम दोनों आधी रात तक बात करने लगे, हमारे बीच सेक्स चैट शुरू हो गई थी.

    मुझे उससे सेक्स से सम्बन्धित बातें करने में शर्म आती थी जबकि वो मुझसे खुल कर सेक्स की बातें करने को कहता था.

    एक दिन सुबह हम कॉलेज जा रहे थे तो रास्ते पर कोई ज्यादा गाड़ियां नहीं थीं, रास्ता लगभग सुनसान था.
    उसने सड़क के किनारे बाइक खड़ी की और मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए.

    मेरी सांसें तेज होने लगीं.
    मुझे भी मज़ा आने लगा.
    ये मेरी पहली किस थी.

    उसने काफी देर बाद मुझे छोड़ा.
    मैंने उसकी तरफ देखा तो वो वासना से मुझे देख रहा था.
    मैं भी गर्म हो गई थी.

    वो मेरे हाथ को पकड़ कर सड़क से नीचे उतार कर पेड़ों की आड़ में ले गया.
    हम दोनों फिर से चूमाचाटी में लग गए.

    उस दिन करीब आधा घंटा तक हम दोनों ने खुली सड़क पर अपने प्यार का इजहार किया.
    फिर हम दोनों कॉलेज चले गए.

    पूरा दिन मुझे किस वाला सीन याद आ रहा था.
    उसके सीने की रगड़ अपने मम्मों पर महसूस हो रही थी.

    उसी दिन रात में जब हम दोनों चैट कर रहे थे तो उसने मुझसे दिन वाले वाकिये को लेकर बात शुरू कर दी.

    उसने मुझसे पूछा- कैसा लगा मैं?
    मैंने कहा- बहुत बदमाश हो तुम!

    वो हंसा और मुझसे मजाक करने लगा- क्यों ऐसा क्या किया मैंने?
    मैंने कहा- तुमने बीच सड़क पर वो सब किया था जो नहीं करना चाहिए था.

    उसने कहा- हां, ये गलती तो हो गई थी मुझसे. अब बताओ किधर चलना है?
    मैंने कहा- क्या मतलब, किधर चलना है?

    उसने कहा- वो सब सड़क पर नहीं करेंगे … किसी कमरे में करते हैं. बोलो कौन से होटल में कमरा बुक करवा लूँ?
    मैंने कहा- पागल हो क्या? मुझे किसी होटल में नहीं जाना है.

    वो हंसने लगा- अच्छा छोड़ो … ये बताओ कि लगा कैसा था?
    मैं बोली- सच में मुझे बड़ा अजीब सा लगा.

    वो बोला- कैसा अजीब सा लगा?
    मैंने कहा- अब कैसे बताऊं?

    वो बोला- अच्छा चुम्मी करते समय कैसा लगा था.
    मैंने कहा- ऐसा लगा था जैसे करेंट लग गया हो.

    वो बोला- और क्या लगा था?
    मैंने कहा- अब और क्या बताऊं?

    उसने कहा- नीचे कुछ हुआ था?
    मैंने कहा- नीचे मतलब?

    वो बोला- नीचे मतलब चूत में कुछ हुआ था?
    मैंने धत्त कह कर उसे ऐसी बात करने से मना किया.

    इस बार उसने सीधे मुझसे सेक्स के लिए पूछा.
    मगर मेरी कोई इच्छा नहीं थी तो मैंने उससे ना कह दिया.

    इससे वो रूठ गया और दूसरे दिन आया तो उसका चेहरा लटका हुआ था.

    मैंने मौका देख कर उसको किस कर लिया.
    उसने मुझे अपने सीने से लगा लिया और मेरे दूध दबाने लगा.

    उस समय भी मेरा चुदाई का कोई मूड नहीं था इसलिए मैंने उससे साफ़ साफ कह दिया कि ये सब मुझे शादी से पहले नहीं करना है.
    वो मुझे बहुत प्यार करता था तो उसने कहा- जब तुम बोलोगी, तब ही तुम्हारी चुदाई करूंगा. भले ही तुम्हारी मुझसे शादी न हो.

    हम दोनों में शादी होना सम्भव भी नहीं थी, ये बात वो भी जानता था.
    मैं तब भी मान गई कि शादी से पहले उसके साथ सेक्स करूंगी.

    फिर 6 महीने बीत गए.
    हम दोनों रोज किस करते थे लेकिन वो सेक्स के लिए नहीं बोलता था.
    मुझे भी उससे बहुत प्यार हो गया था.

    मेरे कॉलेज की सभी फ्रेंड्स अपने ब्वॉयफ्रेंड के साथ चुदवाने जाती थीं लेकिन मुझे सेक्स में कोई इंटरेस्ट नहीं था.

    एक दिन बात करते करते मैंने उससे कहा- मेरी फ्रेंड आज चुदवाने गई थी, तो आई नहीं साली अब तक. मुझे उससे काम था.

    ये सुनकर वो एकदम से उदास हो गया.
    कुछ देर बाद वो उधर से चला गया.
    मैं समझ गई कि इसको फिर से चुदाई के कीड़े ने काट लिया है.

    दूसरे दिन हम कॉलेज जा रहे थे तो वो मुझसे बात भी नहीं कर रहा था.

    अचानक से उसने मुझसे ब्रेकअप करने को कहा और मैं समझ गई कि ये चुदाई न हो पाने के कारण मुझसे ब्रेकअप की बात कर रहा था.
    मैं ब्रेकअप के डर से उससे चुदवाने के लिए मान गयी.

    उसने मेरी तरफ देखा और कहा- दिल से राजी हो, सेक्स में तभी मजा आएगा.
    मैंने भी मन बना लिया था कि सेक्स करना है.
    तो मैंने हामी भर दी.

    उसने रात में मुझे मैसेज किया- कल के तैयार हो ना!
    मैंने हां कर दी.

    फिर उसने पूछा- चूत पर बाल हैं या साफ़ कर लिए?
    मैंने बोला- हैं.

    उसने कहा- चूत साफ करके आना.
    मैंने कहा- तुम ही कर देना.
    वो बोला- ठीक है.

    दूसरे दिन कॉलेज के बहाने वो मुझे लेने आया.
    मैं बाइक पर बैठ गई.

    वो मुझे होटल में ले गया, वहां एक रूम लिया और हम दोनों रूम में आ गए.

    रूम बंद करके ही वो मुझ पर टूट पड़ा.
    मेरे होंठों को चूसने लगा.
    मैं भी उसे किस किए जा रही थी.

    थोड़ी देर बाद उसने अपनी शर्ट उतार दी और मेरा टॉप उतार दिया, ब्रा भी उतार दी.

    मैं पहली बार किसी के सामने नंगी थी, मैं अपने हाथों को मम्मों पर रखकर ढक रही थी.

    वो बोला- जान, अब तो ये सब मेरा है. आज मैं तुम्हें इतने मज़े दूँगा कि कभी चुदाई के लिए ना नहीं कहोगी.

    उसने मम्मों पर से मेरे हाथ हटाए और ज़ोर ज़ोर से मम्मों को चूसने लगा दबाने लगा.
    मेरे मुँह से अहह अहह निकल रहा था. मुझे बहुत मज़ा आ रहा था.

    उसने आधे घंटे तक मेरे दोनों मम्मों को बारी बारी से चूसा.
    उसके बाद उसने मेरी लैगी और पैंटी भी निकाल दी.

    मेरी चूत पर बहुत बाल थे तो उसने बैग में से रेजर निकाला और बाल साफ करने लगा.

    चूत साफ होने के बाद उसने कहा- वॉशरूम में जाकर धोकर आओ.

    जब मैं चूत धोकर आई, तो वो पूरा नंगा खड़ा था. उसका 7 इंच का लंड मेरे सामने लहरा रहा था.

    मैं तो उसका लंड देख कर ही डर गई.

    फिर उसने मुझे हग किया और मुझसे बोला- तुम मेरे लिए क्या कर सकती हो?
    मैंने कहा- जो तुम बोलो.

    उसने कहा- अगर तुमसे नहीं हुआ तो आज से हमारा ब्रेकअप.
    मैं उसे खोना नहीं चाहती थी तो मैं मान गई.

    वो खड़ा था. उसने मुझे नीचे बिठाया और अपना लंड को चूसने को कहा.
    उसका लंड बहुत मोटा और बड़ा था.

    मैं नीचे घुटनों पर बैठ गई और उसका लंड पकड़ कर थोड़ा हिलाया.
    लंड से पानी निकल रहा था.

    मैंने पहले पूरे लंड पर किस की, फिर उसे अपने मुँह में ले लिया.
    उसका लंड बड़ी मुश्किल से मेरे मुँह में जा रहा था.

    आधा लंड भी नहीं जा रहा था.
    मुझे खट्टा सा स्वाद आ रहा था और लंड सी अजीब सी महक आ रही थी.

    थोड़ी देर चूसने के बाद मुझे भी अच्छा लगने लगा.
    कुछ मिनट तक चूसने के बाद उसका माल मेरे मुँह में ही निकल गया.

    वो मेरे बाल पकड़ कर लंड पर मुँह सटाए हुआ था तो मुझे उसका माल पीना पड़ा.

    उसके बाद उसने मेरे होंठों को चूस लिया और लिपकिस करने लगा.
    मैंने लंड चूसा था, तो किस में भी लंड का स्वाद आ रहा था.

    उसके बाद उसने मुझे बेड पर लिटाया और दोनों पैर फैला दिए.
    वो मेरी जांघों पर किस करने लगा.

    मेरे मुँह से सिसकारियां निकलने लगीं ‘आह आह …’

    उसने मेरी चूत पर जीभ लगाई तो मेरे शरीर में जैसे 440 वोल्ट का झटका लग रहा था.
    मैं अहह अहह कर रही थी.

    पांच मिनट चूत चाटने के बाद मेरा पानी निकल गया.
    उसका लंड भी खड़ा हो गया था.

    उसने मुझे एक बड़ी सी किस की और अपने मुँह से बहुत सारा थूक निकाल कर चूत के छिद्र पर लगा दिया.
    कुछ थूक लंड पर भी लगाया.

    फिर वो मेरे दोनों पैरों के बीच में आया और मुझे किस करके अपने लंड को चूत पर रख कर रगड़ा.
    मैं सिहर उठी.

    उसने छेद पर लंड को सैट किया, मेरे मुँह पर अपना मुँह रखा और किस करने लगा.
    अचानक से उसने एक झटका मारा और लंड का टोपा अन्दर घुसा दिया.

    मुझे बहुत दर्द हुआ.
    मैं रोने लगी.

    मगर अभी तो सिर्फ़ टोपा अन्दर घुसा था.
    दूसरे झटके में उसने आधे से ज्यादा लंड चूत में घुसा दिया.

    मैं तड़पने लगी.
    मेरी चूत में किसी ने गर्म सरिया घुसेड़ दिया हो, ऐसा लग रहा था.
    मेरी सील टूट चुकी थी.

    मैं उसे अपने ऊपर से हटाने की कोशिश कर रही थी लेकिन वो लंड को आगे पीछे करके चोदे जा रहा था.

    कुछ मिनट बाद मेरा पानी निकल गया.
    उसने चूत से लंड निकाल लिया.

    लंड पूरा सफ़ेद झाग से भरा हुआ था. उस पर वीर्य और खून लगा था.
    बेड पर भी खून था.

    मैं ये सब देख कर रोने लगी.
    उसने कहा- जान, पहली बार सबका निकलता है. तुम्हें मुझ पर ट्रस्ट है ना!
    मैंने हां कहा.

    कुछ देर बाद उसने लंड फिर से चूत में पेल दिया.
    जब लंड अन्दर घुसा तो मुझे बहुत दर्द हुआ. मगर इस बार थोड़ी देर बाद मुझे भी अच्छा लगने लगा.

    अब पच पच की आवाज़ आने लगी थी और मेरे मुँह से अहह अहह की आवाज आने लगी.
    दस मिनट बाद उसका रस निकल गया.

    उस दिन हम दोनों ने 3 बार चुदाई की.
    शाम को जब मैं घर वापस गई तो मैं ठीक से चल नहीं पा रही थी.
    मेरी चूत सूज चुकी थी.

    हॉट सिस्टर पोर्न के बाद तीन दिन तक चूत में दर्द रहा और उसके बाद सब ठीक हो गया.
    अब हम दोनों हफ्ते में 2 दिन कॉलेज से बंक मारकर चुदाई करने चले जाते थे.

    अब मुझे भी अब चुदवाने का बहुत शौक चढ़ गया था.
    जब भी मौका मिलता है, हम दोनों भरपूर चुदाई कर लेते हैं.
    भाई बहन होने के कारण कोई हम पर शक भी नहीं करता है.

  • साली ने घरवाली का सुख दिया

    आज मैं अन्तर्वासना की इस नयी साईट पर मेरी और मेरी साली की कहानी बताने जा रहा हूँ। मेरी शादी 2005 एक साधारण से परिवार में हुई थी, उस समय मेरी उम्र 25 साल थी, मेरी ससुराल में मेरी पत्नी, एक छोटी साली जिसकी उम्र 19 साल की थी और मेरे ससुर रहते थे. मेरी सास का देहांत लगभग 10 साल पहले ही हो गया था।

    मेरी पत्नी का कोई भी भाई नहीं था और ससुर भी अक्सर अपने गाँव में रहते थे इसलिए मुझे शादी के बाद अपनी पत्नी और साली के साथ उनके शहर वाले घर में रहना पड़ा। मेरी पत्नी मेरी देखने में बहुत सुंदर है साली से भी ज़्यादा, मैंने कभी भी अपनी साली से सेक्स करने के बारे में नहीं सोचा, हम लोगों की जिंदगी बहुत ही मज़े से कट रही थी।

    शादी के एक साल बाद मेरी पत्नी ने एक सुंदर से बेटे को जन्म दिया. क्योंकि बच्चा अभी छोटा था और उन दोनों की देखभाल करने वाली कोई समझदार स्त्री नहीं थी तो मेरी माँ ने मेरी पत्नी को अपने घर बुला लिया।
    अब घर में मैं और मेरी साली अकेले रह गये थे, मैं उससे बहुत कम बात करता था और सुबह जल्दी काम पर निकलता था रात को देर से आता था. मेरी साली मुझे खाना खिलाने के बाद पड़ोस में रह रहे अपने चाचा के घर में सोने चली जाती थी और सुबह जल्दी आकर मेरे लिए खाना बना देती थी. सारी चीजें अपने हिसाब से सही चल रही थीं।

    पत्नी से बिछड़े हुए लगभग एक महीना हो गया था और अब मेरा मन चुदाई करने का होने लगा था. लेकिन कोई तरीका समझ में नहीं आ रहा था। मैं कभी-कभी कोई अश्लील फिल्म की सीडी लाकर रात में फिल्म भी देख लेता था जिससे मेरे मन में चुदाई करने की चाहत और तेज होती जा रही थी।

    एक दिन मैंने सोचा कि क्यूँ ना अपनी साली को पटाया जाए चुदाई के लिए … इससे मेरा काम बहुत आसान हो जाएगा और जब तक पत्नी नहीं आती है, तब तक जब भी मन करेगा, भरपूर मज़े ले सकूँगा. यही सोच कर मैं साली को पाटने का जुगांड सोचने लगा।

    एक़ दिन की बात है कि मैं अश्लील फिल्म वाली सीडी अपने बिस्तर पर तकिया के नीचे भूल गया और काम पर चला गया. बाद में मुझे याद आया कि मैं सीडी तो घर पर ही भूल गया हूँ. फिर मैंने सोचा कि कोई बात नहीं … अगर वो सीडी साली ने देख ली तो मेरा काम और भी आसान हो जाएगा.

    यही सोच कर मेरा लंड पैंट के अंदर ही तन गया, अब मेरे मन में केवल अपनी साली को चोदने का ख्याल घूमने लगा।

    शाम को जब मैं घर आया तो मेरी साली बिल्कुल नॉर्मल दिखी, वो वैसे भी मुझसे कम ही बात करती थी और मैं भी उससे ज़्यादा बात नहीं करता था. उसको नॉर्मल देख कर मेरा मूड खराब हो गया. मैंने सोचा था कि उसकी कुँवारी चूत आज ही चोदने को मिल जायेगी लेकिन मेरे सारे सपने टूट गये।

    उस रात को मैंने अपनी साली को सोच कर दो बार मुठ मारी और अपनी वासना शांत कर ली. अब मैं अपना सारा दिमाग़ इस बात को सोचने में लगाने लगा कि कैसे अपने दिल की बात साली को बोलूं, पता नहीं वो भी मुझसे चुदना चाहती है या नहीं?
    ऐसा ना हो कि कुछ बवाल हो जाए!

    यही सोचते सोचते सारा दिन बीत गया. मेरा काम में बिल्कुल भी मन नहीं लग रहा था इसलिए उस दिन मैं शाम को जल्दी घर आ गया.
    मुझे देखकर मेरी साली ने एक प्यारा सा स्माइल दिया और बोली- जीज्जा जी, आज तो आप बहुत जल्दी घर आ गये. आप चाय पीजिए, तब तक मैं सब्जी ले कर आती हूँ।

    मैं कपड़े बदलकर चुपचाप चाय पीने लगा और प्यासी नज़रों से साली को घूरने लगा. उसकी गोल बड़ी बड़ी चुचियाँ और 36 इंच की कमर मेरे अंदर वासना का तूफान पैदा कर रही थी।
    वो बोली- मैं सब्जी लेकर आती हूँ.
    और घर से बाहर निकल गई, मैं भूखी नज़रों से उसको देखता ही रह गया.

    बाज़ार से वापस आने के बाद वो अपने काम में लग गई और मैं कमरे से बाहर निकल कर पोर्च में बैठ गया. थोड़ी देर बाद जब मैं किसी काम से अंदर गया तो मैंने देखा कि कमरे का दरवाज़ा बंद है लेकिन उसमें कुण्डी नहीं लगी थी.

    मैंने धीरे से दरवाज़ा खोला और अंदर का नज़ारा देखकर मेरी आँखें फटी रह गईं. मेरी साली अपने कपड़े बदल रही थी, उसके शरीर पर केवल ब्रा और पेंटी थी, उसका शरीर बिल्कुल संगमरमर की तरह चिकना था.
    मैंने सोचा क़ि मौका बढ़िया है अभी जाकर इसको दबोच लेते हैं और अपनी इच्छा पूरी कर लेते हैं.
    लेकिन अंदर से एक डर भी था कि कहीं बात बिगड़ ना जाए क्योंकि हम दोनों के बीच कभी भी ज़्यादा बात नहीं होती थी और ना ही कोई हँसी मज़ाक होता था।

    अभी मैं ये सब सोच ही रहा था क़ि दरवाजे की घंटी बजी और मैं जल्दी से बाहर आ गया। दरवाजे पर पड़ोस में रहने वाली चाची और उनकी बेटी आए हुए थे.
    मेरा तो सारा मूड ही खराब हो गया, एक सुनहरी मौका आते आते हाथ से निकल गया।

    उसी बीच मैं 2 दिन की छुट्टी लेकर अपने घर आ गया क्योंकि अपने बेटे को देखे हुए काफ़ी दिन हो गये थे और पत्नी को भी बहुत दिनों से नहीं छुआ था. लेकिन घर आने के बाद भी पत्नी के साथ सेक्स करने का मौका नहीं मिला।
    2 दिन रुकने के बाद मैं वापस आ गया और मैंने जानबूझ कर शाम की ट्रेन पकड़ी, रात को लगभग 2 बजे मैं ससुराल वाले घर पहुँचा.

    मेरी साली और उसकी चचेरी बहन घर में थीं वो दोनों मेरे कमरे में मेरे ही बेड पर सो रही थी.
    मैंने उसको बोला- यही लेटी रहो, मैं एक किनारे लेट जाऊँगा.

    मेरी साली बीच में थी और उसकी चाचा की बेटी किनारे पर लेटी थी. मैं भी कपड़े बदल कर दूसरे किनारे पर लेट गया. लेकिन मेरी आँखों से नींद गायब थी.

    मैंने करवट लेने के बहाने अपनी एक टाँग अपनी साली के जिस्म के ऊपर रख ली और अपना हाथ उसकी छाती पर रख दिया. अब मेरा लंड तनकर खड़ा हो गया. मैंने अपने लंड को अपनी साली के कूल्हों से सटा दिया.

    लंड की चुभन से उसकी आँख खुल गई और मैं सोने का नाटक करने लगा. उसने सोचा कि मैं थकान की वजह से बहुत गहरी नींद में सो रहा हूँ। मेरा हाथ अभी भी उसकी छाती पर ही रखा था और मुझे उसकी धड़कनें तेज होती महसूस हो रही थीं.

    शायद मेरे स्पर्श से उसके अंदर भी वासना का संचार हो गया था. थोड़ी देर तो वो अपनी गांड को मेरे लंड पर दबाती रही.
    तभी उसकी चाचा की बेटी ने उसकी तरफ करवट ली जिससे मेरी साली थोड़ा सा अलग हो गई. फिर मैं भी चुपचाप सो गया.

    लेकिन मैंने मन ही मन ये सोच लिया था क़ि अपन साली को अब जल्दी ही चोदना है। मुझे मन ही मन अपनी चचेरी साली पर बहुत गुस्सा आ रहा था, अगर आज वो ना होती तो आज ही मैं अपनी साली के साथ चुदाई का मज़ा ले लेता.
    खैर कोई भी कम अपने समय से पहले नहीं होता.

    दूसरे दिन सुबह मैं देर से उठा और मैंने जानबूझ कर ऐसा दिखाया कि मेरा मूड बहुत खराब है. उस दिन मैं काम पर भी नहीं गया.

    दोपहर को खाना खाने के बाद मैं अपने कमरे में आकर लेट गया. थोड़ी देर बाद मेरी साली भी काम ख़त्म करके मेरे कमरे में आ गई और उसने मुझसे पूछा- जीजा, आपका मूड कुछ सही नहीं लग रहा है, क्या बात है?
    मैंने उसको बोला- मेरी लाइफ बिल्कुल नीरस हो गई है, मेरी बीवी और बेटा मुझसे दूर हैं और मैं यहाँ अकेला पड़ा हूँ. सभी लोग अपने अपने परिवार के साथ रह रहे हैं और मैं यहाँ अकेला पड़ा हूँ और बीवी और बेटे को प्यार भी नहीं कर सकता।

    यह सुनकर वो बहुत परेशान हो गई और रोने लगी, उसने बोला- इस सबकी वजह मैं हूँ, मेरी वजह से आप दोनों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
    मैंने उसको समझाया- ऐसा नहीं है.
    लेकिन उसने रोना बंद नहीं किया.

    फिर मैंने उसको गले से लगाया तो वो और तेज रोने लगी और मैं उसको चुप कराने लगा. तभी मैंने उसके माथे पर एक चुम्बन किया तो वो मुझसे कस कर लिपट गई. पर वो लगातार रो रही थी. मैंने सोचा कि यही मौका है उसको सांत्वना देने के बहाने उससे प्यार करने का!

    तभी मैंने उसको चूमना शुरू कर दिया और उसके होंठों को चूमने लगा. उसने हटने की कोशिश की तो मैं बोला- आज मत रोको, मैं प्यार का बहुत भूखा हूँ. अगर तुम मेरा साथ नहीं दोगी तो कौन देगा. अगर तुम चाहती हो क़ि मैं परेशान ना रहूं तो मुझे अपनी दीदी की कमी महसूस ना होने दो, मेरे प्यार को अपना लो।

    अब उसका विरोध कम हो गया और वो मेरी बांहों में लिपट गई. मैंने उसके होंठों को चूसना शुरू किया और अपने हाथ से उसकी चुचियों को दबाने लगा जिससे उसके अंदर भी वासना भर गई और वो मेरा भरपूर साथ देने लगी. उसने भी मेरे होंठों को चूसना शुरू कर दिया.

    मैंने उसके बदन को सहलाना शुरू कर दिया और उसने भी मेरे शरीर को सहलाना शुरू कर दिया. फिर उसने मेरे लंड को पैंट के उपर से रगड़ना शुरू कर दिया. मेरा लंड अब पूरी तरह से टाइट हो गया था.

    तभी मैंने उसके कपड़े उतरने शुरू कर दिए तो वो शरमाते हुए मना करने लगी और बोली- मुझे बहुत शर्म आ रही है. मैंने आज तक किसी के सामने कपड़े नहीं उतारे!
    यह सुनकर मैं बहुत खुश हो गया क्योंकि मुझे एक कुँवारी चूत मिलने वाली थी.

    मैंने उसको समझाते हुए कहा- अरे पगली … शरमाने से काम नहीं चलेगा. प्यार करने का असली मज़ा तो बिना कपड़ों के ही है. जब दो जिस्म आपस में बिना कपड़ों के मिलते हैं तो सुख दोगुना हो जाता है.

    धीरे धीरे मैंने अपनी जवान साली के कपड़ों को उसके शरीर से अलग कर दिया. अब वो केवल ब्रा और पैंटी में थी। मैं भी अब केवल जांघिया में था.

    साली का संगमरमर सा दूधिया बदन देख कर मैं पागल हो रहा था. फिर मैंने उसकी ब्रा भी उतार दी और उसकी दोनों चुचियों को चूसना शुरू कर दिया. वो लंबी लंबी साँसें लेने लगी और उसका शरीर अकड़ने लगा.

    मैं समझ गया कि अब उसकी वासना अपने चरम पर है लेकिन अभी मैं उसको भरपूर मज़ा देना चाह रहा था जिससे वो मेरी दीवानी हो जाये। मैं बहुत ही प्यार से उसकी चुचियों को चूस रहा था.

    और फिर मैंने अपना अंडरवीयर उतार दिया और उसको लंड सहलाने को बोला. अब मैं उसकी चुचियों को चूस रहा था और वो मेरे लंड को सहला रही थी. फिर मैंने उसकी पैंटी में हाथ डाल दिया और उसकी चूत को सहलाने लगा.

    मेरी साली की आँखों में वासना की लालिमा साफ झलक रही थी और वो अपनी कमर ऊपर की तरफ उठा रही थी. मैं समझ गया कि अब वो चुदाई के लिए बेताब हो रही है.
    तभी मैंने 69 की पोज़िशन बना ली और उसको अपना लंड चूसने को बोला और मैं उसकी चूत को चाटने लगा.

    जैसे ही मैंने उसकी चूत पर अपनी ज़ीभ लगाई तो वो बहुत ज़ोर से सिसकारियाँ लेने लगी. मैंने ज़ीभ को चूत के अंदर बाहर करना शुरू कर दिया. वो तो जैसे पागल सी हो गई और बड़बड़ाने लगी- आह … जीज्जा … बहुत मज़ा आ रहा है. आज से आप मेरे जीजा जी नहीं, मेरे पति हो! मेरे राजा और ज़ोर से चाटो मेरी चूत को! अपना लंड डाल के फाड़ दो मेरी चूत को! बहुत मज़ा आ रहा है. इतना मज़ा पहले क्यूँ नहीं दिया.

    वो बीच बीच में बड़बड़ा रही थी और रुक रुक कर मेरे लंड को चूस रही थी. वो मेरे लंड को अपने हलक की गहराई तक ले जा रही थी. उम्म्ह… अहह… हय… याह… हम दोनों लंड और चूत को चूसने में इतना ज़्यादा जोश में थे कि अपने चरम तक पहुँच गये. उसकी चूत ने मेरे मुँह पर ही पानी छोड़ दिया.

    वो बीच बीच में बड़बड़ा रही थी और रुक रुक कर मेरे लंड को चूस रही थी. वो मेरे लंड को अपने हलक की गहराई तक ले जा रही थी. उम्म्ह… अहह… हय… याह… हम दोनों लंड और चूत को चूसने में इतना ज़्यादा जोश में थे कि अपने चरम तक पहुँच गये. उसकी चूत ने मेरे मुँह पर ही पानी छोड़ दिया.

    फिर मैंने बोला- मेरा लंड भी झड़ने वाला है.
    तो वो बोली- अपना माल मेरे मुँह में ही गिरा दो.
    तभी मेरे लंड ने पिचकारी छोड़ दी और मेरे माल से उसका मुँह भर गया जिसको वो पी गई।

    थोड़ी देर तक हम दोनों वैसे ही शांत पड़े रहे. फिर मैंने उसको अपने सीने से लगा लिया और प्यार करने लगा. वो भी मुझसे लिपटी हुई थी.

    मैंने प्यार से उसके गाल पर हाथ फेरते हुए पूछा- कैसा लगा?
    तो वो मुस्कराते हुए बोली- बहुत मज़ा आया … अगर मैं यह जानती क़ि आप मुझको पसंद करते हैं तो मैं ये एक महीना बर्बाद नहीं होने देती, रात को जब आप और दीदी कमरे में सेक्स के मज़े लेते थे तो आप लोगों की आवाज़ें सुनकर मेरा भी बहुत मन होता था क़ि कोई मुझे भी ऐसे ही चोदे!

    तो मैंने पूछा- तुमने कोई बाय्फ्रेंड तो बनाया ही होगा? उससे ही चुदवा लेती.
    वो बोली- नहीं जीजाजी, लड़के बहुत हरामी होते हैं। कोई गर्लफ्रेंड बन जाए तो सारी दुनिया में बताते घूमते हैं. और मैं नहीं चाहती कि कोई मेरे बारे में उल्टी सीधी बात करे. मैं तो शुरू से ही आप के साथ प्यार करना चाहती थी. इससे मेरा काम भी चलता रहता और घर की बात घर में ही रहती।

    ये सब सुनकर मैं बहुत खुश हुआ और उसको चूमने लगा.
    तो वो बोली- क्या मेरी चूत को आपके लंड का स्वाद मिलेगा या खाली ज़ीभ से ही काम चलना पड़ेगा?
    मैं बोला- ज़रूर मिलेगा मेरी जान! लेकिन मैं इस दिन को एक यादगार दिन बनाना चाहता हूँ.
    वो बोली- कैसे?
    तो मैंने कहा- जैसे शादी की पहली रात होती है, वैसे ही हम दोनों सुहागदिन मनाएँगे.

    वो उठकर बाथरूम में चली गई और नहा धोकर बाहर आई और मुझसे बोली- आप भी नहा कर फ्रेश हो जाओ, तब तक मैं दुल्हन की तरह तैयार होती हूँ.
    मैं नहाकर बाहर निकला तो वो मेरे बेड पर बिल्कुल दुल्हन की तरह सजी हुई बैठी थी और घूँघट भी किए थी.

    मेरा दिल तो खुशी के मारे पागल हो रहा था क्योंकि मैं दोबारा सुहागरात मानने जा रहा था … वो भी एक कुँवारी कली के साथ।

    मैंने बिस्तर पर पहुँच कर उसका घूँघट उठाया तो उसको देखता ही रह गया. वो दुल्हन की तरह सजी हुई बहुत ही सुंदर लग रही थी.

    धीरे धीरे मैंने उसके सारे कपड़े उतार दिए और खुद भी पूरा नंगा हो गया. मेरा लंड तो चुदाई के बारे में सोच कर पहले ही खड़ा था. मैंने उसके पूरे शरीर को चूमना शुरू किया और वो भी मेरा भरपूर साथ दे रही थी.

    तभी मैंने अपनी उंगली उसकी चूत में डाली तो वो दर्द से उछाल गई और बोली- उंगली डालने से दर्द हो रहा है तो लंड कैसे झेलूँगी?
    मैंने कहा- डरो नहीं मेरे जान, मैं उंगली से तुम्हारी चूत को सहलाउँगा तो वो थोड़ी गीली हो जाएगी और शुरू में थोड़ा सा दर्द होगा. वो तो एक बार सब को होता है. लेकिन बाद में बहुत मज़ा आएगा।

    अब मैंने फिर से उसकी चूत को चूसना शुरू किया और उसको अपना लंड चूसने को बोला.

    जब चूत पूरी तरह गीली हो गई तो मैं बोला- आओ मेरी जान … अब हम दोनों एक हो जाएँ.
    इतना कह कर मैंने उसको पीठ के बल लिटाया और अपने लंड का सुपारा साली की चूत के मुहाने पर लगाया. वो वासना से भर चुकी थी और बोल रही थी- जल्दी करो मेरे राजा … अब ये आग बर्दाश्त नहीं हो रही! जल्दी से इस आग को बुझाओ.

    मैंने बड़ी ही सावधानी से अपने लंड को धीरे धीरे अंदर डालना शुरू किया. जैसे ही आधा लंड उसकी चूत में घुसा, वो दर्द से तड़प उठी. मैंने फ़ौरन ही उसकी चुचियों को सहलाना शुरू किया और उसके होंठों को चूसने लगा. उसकी चुचियों के निप्पल को भी धीरे धीरे मसलने लगा और लंड को पूरा अंदर डाल दिया.

    जैसे ही लंड उसकी चूत की जड़ तक पहुँचा, उसकी हल्की सी चीख निकल गई उम्म्ह … अहह … हय … ओह … फिर मैंने बहुत ही आराम से धीरे धीरे लंड को आगे पीछे करना शुरू किया और उसके होंठों को लगातार चूसता रहा. लगभग 10-12 धक्के मारने के बाद जब मुझे लगा क़ि अब उसका दर्द कुछ कम हो गया है तो मैंने धक्कों की स्पीड बढ़ा दी.

    अब वो भी मेरा साथ देने लगी और अपनी गांड को ऊपर की तरफ उछलने लगी. लगभग 10 मिनट की चुदाई के बाद वो बोली- अब मैं झड़ने वाली हूँ मेरे राजा!
    तो मैंने भी धक्कों की स्पीड और बढ़ा दी और 10-15 धक्के लगाने के बाद मेरा माल भी निकालने को तैयार हो गया.

    मैंने उससे पूछा- मैं भी झड़ने वाला हूँ अपना माल कहाँ गिरा दूं?
    तो वो बोली- आज मेरी जिंदगी का सबसे खूबसूरत और यादगार दिन है आज तो आप अपना माल मेरी चूत में ही गिरा दो!

    यह सुनकर मैंने अपनी पिचकारी को उसकी चूत में ही छोड़ दिया और उसकी फुद्दी मेरे गर्म माल से भर गई. इस चुदाई से हम दोनों इतना थक गये कि वैसे ही बिना कपड़ों के एक दूसरे की बांहों में लिपट कर सो गये.

    शाम को हमारी नींद देर से खुली. उसने जल्दी से उठ कर अपने कपड़े पहने और बोली- आप भी कपड़े पहन लो. कहीं चाचा के घर से कोई आ गया तो प्राब्लम हो जाएगी।

    मैं कपड़े पहनकर कमरे से बाहर आया तो उसने मुझे गले लगाकर मेरे होंठों को चूमा और बोली- अब तो मैं तुम्हारी घरवाली बन गई हूँ. तो अब जब तक दीदी नहीं आ जाती तब तक मुझे सुबह और शाम को डेली तुम्हारा लंड चाहिए. लेकिन अब कॉंडोम के बिना नहीं चोदने दूँगी. इसलिए अभी बाज़ार जाकर कॉंडोम ले आओ और कुछ खाने के लिए भी ले आना क्योंकि देर हो चुकी है और अभी खाना बनाने लगी तो चुदाई का प्रोग्राम नहीं हो पाएगा.

    उसके इस उतावलेपन को देखकर मैं बहुत खुश था, मैंने बाइक उठाई और बाज़ार चला गया.

    उस दिन से दोस्तो … मेरी तो दुनिया ही बदल गई. अब वो सुबह जल्दी आ जाती और मैं शाम को जल्दी आ जाता. हम दोनों के प्यार का सिलसिला चलने लगा. अब हम दोनों ही खुश थे मानो हम लोगो की दुनिया ही बदल चुकी थी।

  • सुहागरात में फटी बीवी की फटी चूत का इलाज

    मेरी नयी नयी शादी हुई थी. मन में सुहागरात मनाने का जोश था और उत्साह भी. चूत चुदाई के हसीन ख्वाब देख रहा था. बड़ी मुश्किल से मैंने अपनी शादी की रस्में खत्म कीं और फिर चुदाई के लिए तैयारी करने लगा.

    नई नवेली पत्नी की चुदाई को लेकर बहुत उत्साहित था. मेरी पत्नी के बारे में आपको क्या बताऊं. वो दिखने में ऐसी थी कि आलिया भट्ट को शादी का जोड़ा पहना दिया गया हो. हूबहू आलिया की कॉपी थी.

    रात को अपने कमरे में पहुंचा तो मेरा लंड बल्ले बल्ले कर रहा था. सुहागरात की सेज पर पहुंचने से पहले ही शेरवानी की पजामी में तन गया था. एक एक पल का इंतजार करना मुश्किल हो रहा था. परीशा से मेरी बात शादी से पहले भी होती थी. फोन पर सब कुछ शेयर कर लिया था. बस अब दो जिस्मों का एक हो जाना बाकी था.

    मेरी पत्नी परीशा एकदम से नाजुक और हसीन सी कली थी. कमरे में पहुंचा तो रात के दस बज गये थे. मैंने जाते ही दरवाजा लॉक कर दिया. अब घूंघट उठाने और मुंह दिखाई जैसी रस्म के लिए सब्र नहीं हो रहा था. मैंने जाते ही परीशा को अपनी बांहों में ले लिया और उसे लेकर लेट गया.

    जल्दी ही दोनों एक दूसरे के जिस्मों की जैसे तहें खोलने लगे. मैंने उसके आभूषण उतारे और फिर उसका ब्लाउज और लहंगा. फिर पेटीकोट में उसकी नंगी चूचियों को पीते हुए उसको लेकर चूसने लगा.

    मेरी दुल्हन भी पूरी चुदासी हो रही थी. मेरे जिस्म को बांहों में भर रही थी. काफी देर तक उसके दूध से सफेद उरोजों को पीने के बाद मैंने परीशा का पेटीकोट भी उतार दिया. उसकी नयी नवेली चूत ने अपना मीठा रस छोड़ना शुरू कर दिया.

    मैंने परीशा की चूत पर मुंह रख दिया और उसकी चूत का रसपान करने लगा. दो मिनट के अंदर ही वो अपनी चूत को मेरे मुंह की ओर उठाने लगी थी. मैं भी पूरी शिद्दत के साथ अपनी पत्नी की चूत के रस को पी रहा था.

    फिर परीशा ने भी शर्म का गहना उतार फेंका और मुझे नंगा करने लगी. मेरी कमीज को उतारा और फिर नीचे की पजामी को. मैंने वी-शेप का अंडरवियर पहना हुआ था. मुझे नीचे लिटा कर मेरी पत्नी मेरी फ्रेंची के ऊपर से ही तने हुए लौड़े को अपनी जीभ से चाटने लगी.

    मेरे लंड का तो पहले से ही बुरा हाल हो गया था. परीशा की चूचियों को पीते हुए ही उसने अपनी मिठास मेरी फ्रेंची में चारों ओर फैला दी थी. इधर परीशा भी लौड़े के रस को मेरी फ्रेंची से ऐसे चूस रही थी जैसे अंडरवियर के कपड़े में अमृत लगा हो.

    परीशा ने मेरे अंडरवियर को खींच दिया और मेरे लंड को मुंह में भरकर चूसने लगी. इससे पहले मैंने परीशा को अपने लंड की पिक्स सेक्स चैट के दौरान उसके फोन में भेजी हुई थी. वो शायद मेरे लंड को देख कर शादी से पहले ही चूत में उंगली भी कर चुकी थी. इसलिए सारी शर्म छोड़कर वो लंड को पी रही थी.

    जैसे ही उसने मेरे लंड को मुंह में भरा तो मैं जन्नत की सैर करने लगा. मेरे हाथ मेरी नंगी दुल्हन के सिर को पकड़ कर लंड पर दबाने लगे. वो भी जैसे रंडियों से दीक्षा लेकर आई थी. 6.5 इंच का लौड़ा गले तक उतार रही थी.

    पांच मिनट तक लंड चुसवाने का मजा लेकर मैं अपने आपे से बाहर हो गया. मैंने उसे नीचे पटका और उसकी चूत में जोर जोर से मुख चोदन करने लगा. परीशा तड़पने लगी. वो मेरे सिर को पकड़ कर अपनी चूत में दबाने लगी.

    बात दोनों के बर्दाश्त से बाहर थी. मैंने फ्रेंची निकाल फेंकी और नंगा होकर परीशा की टांगों को खींचते हुए उसे अपनी ओर खींचा. उसकी चूत पर लंड को रगड़ते हुए उसकी आंखों में देखने लगा. दोनों पर ही पहली चुदाई का नशा सवार था.

    उसने भी आंखों ही आंखों में कह दिया- मेरी चूत का उद्घाटन करने में इतनी देर न करो स्वामी.
    मैंने उसके मन की इच्छा को भांपते हुए जिस्मों के मिलन की घड़ी को करीब लाते हुए उसकी चूत में अपने चिकने लंड का सुपारा गच से घुसा दिया.

    लंड घुसने भर की देर थी कि मैं किसी इंजन के पिस्टन की तरह परीशा की चूत को ताबड़तोड़ चोदने लगा. वो भी सिसकारियां लेते हुए कामसुख में खो सी गयी.
    पहला राउंड पांच मिनट तक ही खिंच पाया. परीशा तो 4 मिनट के करीब में ही झड़ गयी थी और उसकी चूत के रस से सराबोर अब मेरे लंड के धक्के पच-पच उसकी चूत में लगने लगे.

    एक मिनट के अंदर ही आनंद के उन्माद ने मेरे वीर्य को लंड से बाहर खींच लिया और मैं अपनी पत्नी चूत में स्खलित हो गया. एक आंधी सी आकर रुक गयी. मगर ये कुछ देर की शांति थी. तूफान तो आना अभी बाकी था.

    उसके दस मिनट बाद तक मैं उसकी चूचियों को पीता रहा और लंड महाराज फिर से चढ़ाई करने के लिए तैयार हो गये. मेरी गोरी चिट्टी पत्नी के मखमली से बदन को चोदने के लिए एक बार फिर से मैंने हथियार को पैना कर लिया.

    दोबारा से चुदाई शुरू हुई जो लगभग 30 मिनट तक चली. अबकी बार परीशा नहीं झड़ी. शायद उसकी चूत दुख गयी थी. इसलिए पहली बार वाली उत्तेजना पैदा नहीं हो पायी थी. मगर लंड को चैन कहां था.

    आधे घंटे का विराम देकर मैंने फिर से उसकी चूचियों को छेड़ना शुरू कर दिया. उसकी चूत में उंगली करने लगा और अगले तीन-चार मिनट में उसकी चूत को उंगलियों से ही स्खलित कर दिया.

    अब मैं फिर से अधूरा रह गया था लेकिन परीशा की चूत को भी गर्म करना जरूरी था. फिर मुझे उसके नंगे जिस्म पर लेटे हुए नींद आ गयी. और रात के 3 बजे के करीब फिर से लंड तना हुआ मिला.

    मैंने नींद में ही उसकी चूत में लंड को डाल दिया. अब तक ऊर्जा भी इकट्ठा हो गयी थी और परीशा की चूत को भी आराम मिल चुका था. एक घंटे की चुदाई में मैंने उसको दो बार स्खलित किया. अब मेरे लंड में भी दर्द होने लगा था.

    दोनों ही फिर से थक कर सो गये. चार बजे के सोये हुए मेरी नींद सुबह के आठ बजे परीशा ने ही खोली.
    वो कह रही थी कि उसकी चूत में बहुत तेज दर्द हो रहा है. उसको पेशाब करने में भी दिक्कत हो रही थी.

    पत्नी थी इसलिए उसका खयाल रखना भी पहली प्राथमिकता थी. मैंने उसे दिलासा दिया और करीब 11 बजे डॉक्टर दिव्या की क्लीनिक ले गया. दिव्या लगभग 40 साल की महिला रही होगी. क्षेत्र की प्रतिष्ठित डॉक्टर. उन्होंने मेरी नयी नवेली दुल्हन परीशा की जांच की.

    जांच करने के बाद पत्नी को उसने खाने व लगाने की दवा दी तथा ठीक होने तक चुदाई न करने की सलाह दी. चलते समय डॉक्टर दिव्या ने मुझसे कहा कि दो बजे अकेले आकर मिलिये.
    मैंने संकोचवश एक ओर जाकर पूछा- कुछ बड़ी समस्या है क्या?
    लेडी डॉक्टर ने कहा- चिन्ता की कोई बात नहीं लेकिन आप दो बजे आइये. तब तसल्ली से बात करते हैं. अभी इनको (पत्नी को) आराम की जरूरत है.

    घबरा कर मैं परेशान सा हो गया कि आखिर ऐसी क्या बात है जो डॉक्टर मुझे अकेले में बताना चाहती है. कहीं जोश जोश में मैंने कुछ कांड तो नहीं कर दिया अपनी कमसिन सी बीवी के साथ? मन में सौ तरह के सवाल थे लेकिन मैंने परीशा से कुछ भी नहीं कहा.

    दो बजे क्लीनिक पहुंचा तो डॉक्टर एक मरीज को देख रही थीं. मरीज के जाने के बाद डॉक्टर ने अपने स्टाफ को छुट्टी दे दी और मुझसे मुखातिब हुईं.
    वो बोली- आपकी शादी कब हुई?
    मैंने कहा- परसों हुई थी.
    दिव्या जी ने पूछा- इससे पहले आपने किसी के साथ सेक्स किया है?
    संकोचवश मैंने कहा- कभी नहीं किया मैम.

    दिव्या जी बोलीं- मिस्टर, मैं दस साल से प्रैक्टिस कर रही हूँ और बीस साल से चुदवा रही हूँ. मेरे सामने ऐसा कोई केस नहीं आया. आप अन्दर चलिये, आपका चेकअप करना होगा.

    एक बार तो मैं सकपका गया कि इसको मेरे चेकअप की क्या पड़ी है. फिर सोचा कि वो डॉक्टर है, हो सकता है कुछ जांच परख करना चाह रही हो.

    मैं उठा और अन्दर की ओर चल दिया. इस बीच डॉक्टर साहिबा ने क्लीनिक का मेन डोर लॉक कर दिया और अन्दर आ गईं. मैं अन्दर मासूम सा मुंह बनाकर खड़ा था जैसे स्कूल में उपद्रव करने के बाद बच्चे को प्रिंसीपल के सामने खड़ा कर दिया जाता है.

    वो बोली- ऐसे चेकअप होगा क्या आपका? पैंट खोलिये.
    जैसे उसने पैंट खोलने की बात कही तो लंड में गुदगुदी सी मची. लेकिन सेक्स जैसी कोई भावना नहीं थी. मैं तो इसे जांच का हिस्सा समझ रहा था.
    मैंने कहा- ओह्ह … सॉरी मैम, अभी निकाल देता हूं.

    डॉक्टर साहिबा के कहने पर मैंने अपनी पैन्ट खोल दी. अब नीचे से अंडरवियर के अंदर में मेरा लंड लटका हुआ था.
    वो बोली- ये भी उतारिये.
    उसके कहने पर मैंने सकुचाते हुए अपना अण्डरवियर भी उतार दिया.

    घबराहट भी हो रही थी और शर्म भी आ रही थी. डॉक्टर साहिबा ने लंड को लटकता देख कर एक बोतल में से कोई जेल अपने हाथ में लिया और मेरे लण्ड पर मलने लगीं.
    जैसे ही उसका हाथ मेरे गर्म से सोये हुए लंड पर लगा तो लंड में करंट सा दौड़ गया. हवस को उफनते हुए देर न लगी और लौड़ा उसके हाथ में भरता हुआ आ गया.

    वो लंड खड़ा होने के बाद भी लंड पर जेल रगड़ रही थी. उसके चेहरे पर वासना टपकने लगी थी. मैं भी मजा लेने लगा था. लंड तनकर एकदम सख्त लोहे की रॉड की तरह हो गया. मगर वो अभी भी लंड को मसले जा रही थी.

    मुझे समझते देर न लगी कि ये कोई चेकअप नहीं कर रही बल्कि ये तो चूत चुदवाने के चक्कर में है. मैं डॉक्टर साहिबा के जिस्म का मुआयना करने लगा. लगभग 40 साल की उम्र, गोरा चिट्टा भरा बदन, बड़ी बड़ी चूचियां और भारी भरकम चूतड़.

    भले ही वो बीस साल से चूत चुदवाने की बात कह चुकी थीं लेकिन थीं तो वो अविवाहित. यानि कि तकनीकी रूप से मुझे एक कुंवारी महिला को चोदने का मौका मिलने वाला था.

    मेरे लंड को हाथ में भरकर वो उसको दबाने लगी थी. फिर उसने मेरी ओर देखा और एकदम से मेरे लंड को मुंह में लेकर चूसने लगी. मैं तो पहले ही चुदाई के कयास लगाये बैठा था इसलिए लंड चुसवाने का मजा लेने लगा. मुझे हैरान नहीं हो रही थी कि क्योंकि उसकी हरकत ही चुदक्कड़ औरत वाली थी.

    लेडी डॉक्टर मेरे लंड को मुंह में लेकर जोर जोर से चूसने लगी. मेरे मुंह से सिसकारियां निकलने लगीं. उसकी चूचियों की घाटी मुझे नीचे हिलती हुई दिखाई दे रही थी जो मेरी उत्तेजना को और ज्यादा तीव्र कर रही थी.

    उसकी साड़ी का पल्लू कंधे से नीचे सरक गया था और ब्लाउज में उसकी मोटी मोटी चूचियां भरी हुई अलग से दिखाई दे रही थीं. मैंने उसके सिर को पकड़ लिया और उसके मुंह को चोदने लगा. अब मेरे धक्के उसके मुंह में लग रहे थे.

    वो भी पक्की रंडी थी. पूरा लंड गले तक ले रही थी. मेरे लौड़े की नसें फटने को हो गयी थीं. उसने माहौल ही ऐसा पैदा कर दिया था कि उसकी चूत को फाड़ देने का मन कर रहा था.

    तभी डॉक्टर साहिबा ने अपनी साड़ी, पेटीकोट को उतार कर एक तरफ फेंका और केवल पैंटी और ब्लाउज में मेरे सामने खड़ी हो गयी. मैं उसकी चूचियों पर टूट पड़ा उसके उरोजों को उसके ब्लाउज के ऊपर से दबाते हुए मसलने लगा. वो सिसकारने लगी और मेरा लंड उसकी जांघों से टकराने लगा.

    मैंने फिर उसकी पैंटी भी उतार दी और उसकी चूत को चाटने लगा. वो मेरे मुंह को अपनी चूत में दबाने लगी. जब उससे रहा न गया तो उसने मेरी शर्ट को खोला और फिर खुद जाकर बेड (जांच कक्ष के स्ट्रेचर) पर लेट गयी.

    चूत खोलकर वो चुदने के लिए तैयार थी और मेरी तोप उसकी चूत की धज्जियां उड़ाने के लिए. मैं उसकी टांगों के बीच आया तो उन्होंने अपनी टांगें फैला दीं जिससे बुर के लब अपने आप खुल गये.

    मैंने लण्ड का सुपारा बुर पर रखकर ठोका तो सुपारा टप्प से बुर के अन्दर हो गया. मैं रुका नहीं और पूरा लण्ड उनकी बुर में पेल दिया. पूरा लण्ड बुर में जाते ही डॉक्टर साहिबा ने अपने ब्लाउज़ के हुक खोलकर ब्रा ऊपर खिसका दी और अपने कबूतर आजाद कर दिये.

    चूचियां नगीं होते ही मैंने लपककर एक चूची मुंह में ले ली और चूसने लगा. डॉक्टर साहिबा बार बार अपनी बुर को अन्दर की ओर सिकोड़ रही थीं जिससे मेरा लण्ड टनटनाता जा रहा था. मैंने चूची छोड़ी और लण्ड को अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया.

    सिसकारते हुए बोली- उम्म्ह… अहह… हय… याह… इतने प्यार से चोदो, इतनी जोर से चोदो, इतनी देर तक चोदो कि मैं दुनिया भूल जाऊं.
    मैंने कहा- डॉक्टर साहिबा, अभी तीन बजे हैं, मैं अगले पांच घंटे तक फ्री हूं, आप पड़ी रहिये, मैं चोदता रहूंगा.
    वो बोलीं- मेरे पास तीन घंटे का ही समय है, छह बजे मेरा स्टाफ आ जाता है, तब तक चोद चोद कर मेरी चूत का कचूमर निकाल दो.

    मैंने उनकी दोनों टांगें उठाकर अपने कंधों पर रख लीं और राजधानी एक्सप्रेस की रफ्तार से उसकी चूत को चोदने लगा.
    लंड जाते ही चिल्ला पड़ी- बस करो, बस करो … आह्ह आराम से … चोदो.
    मैं रुक गया तो अगले ही पल फिर से सिसकार उठी- अच्छा और तेज करो … आह्ह चोदो … पूरा जोर लगाकर.

    समझ नहीं आ रहा था कि क्या कहना चाह रही थी. जाने क्या क्या बोल रहीं थी और चूतड़ उचका उचकाकर मेरा साथ दे रही थी. आधे घंटे तक उसकी चूत को पेलने के बाद मेरे स्खलन का समय नजदीक आ गया.

    उस समय मेरा लण्ड फूलकर और मोटा व टाइट होने लगा तो वो समझ गईं और बोली- अब रुकना नहीं, डिस्चार्ज होने के बाद भी नहीं.

    मैंने वैसा ही किया और डिस्चार्ज होने के बाद भी ठुकाई जारी रखी.

    फिर निढाल होकर बोली- बस करो राजा, तुमने आज जन्नत दिखा दी. आओ अब खाना खा लें, फिर दूसरा राउण्ड होगा और इस बार तुम नीचे लेटोगे और मैं तुम्हें चोदूंगी.

    चुदाई का पहला राउंड खत्म हो गया था. उसके बाद हमने कुछ देर का आराम किया और फिर से जांच कक्ष (चुदाई कक्ष) में पहुंच गये. अबकी बार मैं बेड पर लेटा और वो मेरे लंड पर अपनी चूत को चौड़ी करके बैठ गयी.

     नीचे से उसकी चूत में धक्के लगाते हुए उसको पेलना शुरू कर दिया. उसकी फुटबाल के आकार की मोटी मोटी चूचियां उछल-कूद करने लगीं. वो मेरे लंड पर कूदते हुए लंड को अंदर तक लेकर आनंदित होने लगी. दस-पंद्रह मिनट के बाद ही उसकी चूत ने पानी फेंक दिया और फच-फच की आवाज के साथ चुदाई करते हुए दो मिनट के बाद मेरा वीर्य भी उसकी चूत में निकल गया.

    दूसरा राउंड हो गया था. पंद्रह मिनट का विराम दिया और एक बार फिर से उसने मेरे लंड को चूसना शुरू कर दिया. दस मिनट लगे लंड को फिर से चुदाई लायक होने के लिए. मैंने लंड पर फिर से जेल लगाया और उस लेडी डॉक्टर को वहीं बेंच पर घोड़ी बना लिया.

    उसकी चूचियों को भींचते हुए जोर जोर से गचके लगाते हुए उसकी चूत को ठोकने लगा. वो भी साली रंडियों की तरह मेरे लंड को पूरा अंदर तक सोखने लगी. मैंने बीस मिनट तक उसकी चूत चोदी. फिर भी उसकी प्यास न बुझी तो वो मेरे सामने पीठ के बल लेटकर चूत को मसलने लगी.

    मैंने उसकी टांगों को पकड़ लिया और एक बार फिर से उसकी चूत को लंड से रगड़ना शुरू कर दिया. अबकी बार जितनी ताकत के साथ मैं धक्के लगा सकता था मैंने लगाये और उसकी चूत का कचूमर निकाल दिया.
    फिर आखिर में एक बार फिर से उसकी चूत में स्खलित होते हुए उस पर गिर पड़ा. वो भी बेसुध सी हो गयी थी.

    अब तक उसके स्टाफ के आने का समय भी हो गया था. हमने जल्दी से अपने अपने कपड़े पहने और फिर मैं वहां से निकल आया. ऐसी चुदक्कड़ लेडी डॉक्टर मुझे यूं मिल जायेगी मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था.

  • साली की चूत चुदाई का सपना पूरा हुआ

    यह कहानी एक गर्म प्यासी चूत की चुदाई के बारे में है. अब आपका ज्यादा समय न लेते हुए मैं अपनी कहानी को शुरू करने जा रहा हूं. कहानी में कहीं कोई कमी रह जाये तो मुझे माफ करें.

    दस साल पहले जब मेरी शादी हुई थी तब मेरी साली हनीप्रीत बंगलौर में पढ़ रही थी. पढ़ाई पूरी होने के बाद उसको बंगलौर में ही नौकरी मिल गई. लगभग छह साल पहले उसकी शादी दिल्ली में रहने वाले एक युवक से हुई तो वह बंगलौर से दिल्ली आ गई.

    शादी के दो-तीन महीने बाद ही गुड़गांव में उसने कोई कम्पनी ज्वाइन कर ली और दिल्ली से डेली अपडाउन करती रही. करीब साल भर बाद पुणे की किसी कम्पनी से अच्छा ऑफर मिला तो उसने पुणे जाकर ज्वाइन कर लिया.

    पिछले पांच साल से हनी पुणे में रह रही थी और उसका पति दिल्ली में.

    मैंने अपनी पत्नी से इस बारे में कई बार बात की कि हनी पुणे में है और उसका पति दिल्ली में. क्या मामला है, इनका परिवार कैसे बनेगा? पति पत्नी एक साथ नहीं रहेंगे तो गृहस्थी कैसे बनेगी?
    मेरी पत्नी हमेशा एक ही जवाब देती- मुझे खुद समझ नहीं आ रहा और मम्मी से पूछती हूँ तो उनका भी ऐसा ही जवाब होता है.

    इधर एक महीना पहले मेरी सास को दिल का दौरा पड़ा, ईश्वर की कृपा से उनकी जान बच गई लेकिन बाईपास सर्जरी करानी पड़ी और बीस दिन तक अस्पताल में रहीं.

    मां की हालत की खबर सुनकर हनीप्रीत व उसका पति दोनों लोग एकदम से उनका हालचाल जानने के लिए आ पहुंचे. हनीप्रीत का पति तो दूसरे दिन लौट गया लेकिन हनी रुक गई. जिस अस्पताल में ऑपरेशन हुआ, वो मेरे घर से बहुत करीब था और मेरी ससुराल से काफी दूर.

    व्यवस्था इस प्रकार से बनी कि रात को हनी अस्पताल में रुकती, सुबह नौ बजे मैं अपनी पत्नी को अस्पताल ले जाता और हनी को अपने घर ड्राप करके अपने ऑफिस चला जाता.
    हनी नहा धोकर हमारे घर पर आराम करती.
    शाम को छह बजे मैं ऑफिस से लौटता और अपने घर से हनी को लेकर अस्पताल जाता व अपनी पत्नी को वापस ले आता.

    जब से मेरी शादी हुई थी, हनी के साथ मेरा रिश्ता नमस्ते-नमस्ते से अधिक नहीं था. हालांकि जब से शादी हुई थी हनी पर हाथ साफ करने की तमन्ना तो थी जो समय के साथ साथ ठंडी हो गई थी.

    पिछले पांच छह दिन से हनी रोज मेरी बाइक पर बैठकर मेरे घर तक आती-जाती थी. इस दौरान ब्रेक लगाते समय उसकी चूचियां मेरी पीठ से टकराकर मेरी तमन्ना फिर से जगा रही थीं.

    उस दिन अपनी पत्नी को अस्पताल छोड़कर मैं और हनी घर के लिए निकले तो मैंने तय कर लिया कि आज मैदान फतेह करना है. आमतौर पर मैं घर पहुंच कर ताला खोलकर चला जाता था. आज मैंने ताला खोला और मैं भी अन्दर आ गया.

    मैंने हनी से कहा- आज मुझे थोड़ी देर से जाना है. तुम नहा लो, फिर चाय बना लेना, तो मैं चाय पीकर चला जाऊंगा.
    हनी ने अपना गाउन और टॉवल उठाया और बाथरूम में घुस गई. नहाकर बाहर निकली तो उसके बालों से पानी टपक रहा था.

    ‘जहेनसीब’ कहकर मैं मुस्कुराया तो वो मेरी प्रतिक्रिया पर बोली- क्या हो गया?
    मैंने कहा- माशाअल्लाह … तुम इतनी खूबसूरत हो! मैंनें तो आज ही ध्यान से देखा.

    हनी को उम्मीद नहीं थी कि मेरे मुंह से अनायास ही उसके हुस्न की तारीफ में इतने रसीले शब्द टपकने लगेंगे.
    वो मेरी ओर देखती ही रह गयी. मेरी नजरें उसके बदन को जैसे छूकर नापने लगीं.

    नजरों के वार से वो खुद को बचा नहीं पा रही थी और उसका चेहरा लाल होने लगा था. उसकी बढ़ती हुई सांसों और बढ़ी हुई धड़कनों के साथ ही उसके ऊपर नीचे होते वक्ष इस बात के गवाह थे कि उसके अंदर मेरे शब्दों ने वासना की चिंगारी फूंक दी है.

    उठ कर मैं उसके पास गया और उसके बदन को ऊपर से नीचे तक निहारने लगा. उसके बदन को मेरी नजरें मोर के पंख की तरह सहला सी रही थी जिसके स्पर्श से उसके बदन में झुरझुरी सी पैदा होने लगी थी.

    उसके गाउन में उठे हुए उसके उरोजों की शेप और उसके उठे हुए नितम्बों से चिपके उसके गाऊन की मस्त से आकार को ताड़ते हुए मैं उसके करीब जैसे ही पहुंचा तो लंड में हलचल पैदा होनी शुरू हो गयी थी.

    मैं हनी के पीछे पहुंचा और मैंने उसे अपनी बांहों में भर लिया. मेरी बांहों के घेरे में आते ही उसके बदन में करंट सा दौड़ गया और उसके गर्म से जिस्म की छुअन ने मेरे अंदर एक उन्माद सा पैदा कर दिया.

    उसको बांहों में लेकर मैंने उसकी गर्दन को पीछे से चूम लिया तो वो आगे होते हुए अलग हो गयी.

    मगर अब तो आग लग चुकी थी, अब मैं रुकने वाला नहीं था. मैंने उसको दोबारा से अपनी बांहों में जकड़ लिया और उसकी चूचियों को दबाते हुए उसकी गर्दन को चूमने लगा.

    वो कसमसाते हुए बोली- क्या कर रहे हो जीजा जी!
    मैंने मदहोशी में उसको चूमते हुए कहा- तुम्हें प्यार देने की कोशिश कर रहा हूं.
    वो बोली- ये कहीं गलत तो नहीं है?
    मैंने कहा- इतना नहीं सोचते. सिर्फ ऐसे पलों का आनंद उठाते हैं.

    शुरुआती ना-नुकुर के बाद वो शिथिल पड़ गई और उसने मेरी बांहों में समर्पण कर दिया. मैंने कई मिनट तक उसके जिस्म की गर्मी को महसूस करते हुए उसको बांहों में लिपटाये रखा और चूमता रहा.

    उसकी गांड मेरे तन चुके लंड पर रगड़ खाने लगी थी. यह इस बात का संकेत था कि वह उत्तेजित होकर सेक्स क्रिया के लिए तैयार हो गयी थी. वो बार बार मेरे लंड पर अपनी गांड से सहला रही थी जिससे मेरे लंड में एक वेग सा उठते हुए उसमें जोर का उछाला दे रहा था.

    मैंने उसकी गांड की दरार में उसके गाउन के ऊपर से ही उसके चूतड़ों में लंड को दबाना शुरू कर दिया. उसकी चूचियों को उसके गाउन के ऊपर से दबाते हुए मैं उसके बदन के ऊपरी हिस्से को जगह जगह से चूमने लगा. कभी उसके कंधे पर चुम्बन कर रहा था तो कभी उसकी पीठ पर.

    वो भी मादक सिसकारियां लेते हुए इस बात का इशारा कर रही थी उसके अंदर अब वासना की आग को हवा दी जा रही है जो हर पल भड़कती ही जा रही है.

    हनी को अपनी ओर घुमाकर मैंने उसके होंठों पर अपने दहकते हुए होंठ रखे और उसके होंठों का रसपान करने लगा. हनी भी जैसे इस पल का इंतजार सा कर रही थी और वो मेरे होंठों से लार को खींचने लगी.

    उसके मुंह की लार मैं अपने मुंह में खींचने की कोशिश कर रहा था और वो मेरे मुंह की लार अपने मुंह में खींचने का प्रयास कर रही थी. दोनों ही एक दूसरे के होंठों का रस पीने में लगे हुए थे.

    थोड़ी देर तक उसके होंठों का रसपान करने के बाद में मैंने उसका गाउन उतार दिया. उसका मखमली बदन मेरे सामने उभरकर आ गया था जो ऐसे लग रहा था कि किसी ने कामदेवी का मूर्त रूप संगमरमर पर तराश दिया हो.

    गाउन उतारते ही उसके स्तन मेरे सामने नंगे हो गये थे. नहाने के बाद उसने ब्रा नहीं पहनी थी. नीचे से उसकी पैंटी भी गीली सी लग रही थी. मैंने पल दो पल उसको नजर भर कर देखा और फिर उसकी चूचियों पर मुंह को रख दिया. मेरे गर्म होंठ उसकी चूचियों को छू गये.

    जैसे ही मेरे होंठ उसकी चूचियों पर रखे गये तो उसने जोर से एक आह्ह सी ली और फिर मेरे सिर को पकड़ कर अपने स्तनों पर दबा लिया. मेरे होंठ उसके स्तनों में धंस गये. मैं उसके स्तनों के निप्पलों को पीने लगा.

    हनी के मुंह से आह्ह … आई … उम्म … जैसी मादक आवाजें निकलना शुरू हो गयीं. पुच… मुच … मुआह्ह … जैसी आवाजों के साथ मैं उसके स्तनों को चूसने लगा और वो कामुकता के शिखर की ओर रवानगी भरने लगी.

    इधर मेरे लौड़े का हाल भी बुरा हो गया था. मगर उससे भी ज्यादा बुरा हाल साली की गर्म चूत का मालूम पड़ रहा था. उसने नीचे से पैंटी पहनी हुई थी और मेरा हाथ अनायास ही साली की पैंटी पर चला गया जिसमें उभर रहा गीलापन मेरी उंगलियों को छू रहा था.

    कुछ देर तक उसकी चूचियों को पीते हुए मैं उसकी चूत को पैंटी के ऊपर से मसलता रहा और वो पागल सी हो गयी. मेरा लंड फटने को हो गया था. वो अब मेरे लंड को मेरी पैंट में से दबाते हुए उसको खींचने लगी थी.

    ऐसा लग रहा था कि वो लंड को बाहर लाकर अपने हाथ में भरना चाहती थी. मुझसे भी रुका नहीं जा रहा था. मैंने साली की पैंटी में हाथ डाल दिया. जैसे ही उसकी गीली गर्म चूत पर मेरी उंगलियां लगीं तो एकदम से उचक कर मुझसे लिपट गयी.

    मेरी गर्दन को चूमते हुए अपनी चूत को मेरे हाथ मेरे हाथ पर मसलने लगी. मैं भी उसकी गीली चूत को सहलाने लगा और वो नीचे से मेरे लंड को दबाने लगी. अब दोनों ही बेकाबू से हो गये.

    हनी को लेकर मैं अब बेडरूम में आ गया. उसको लिटाकर मैं बारी बारी से उसकी दोनों चूचियां चूसने लगा. मेरा दायां हाथ पैन्टी के ऊपर से ही साली की चूत को सहला रहा था. हनीप्रीत के हाव भाव बता रहे थे कि चुदवाने के लिए वो बेताब हो रही थी.

    मैंने उसकी पैन्टी उतारी और 69 की पोजीशन में लेटकर अपनी साली की चूत चाटने लगा. जैसे ही उसकी चूत पर मेरे गर्म होंठ लगे तो वो सिसकारते हुए मेरे लंड को पैंट के ऊपर से ही चूमने लगी.

    फिर उसने मेरी पैंट की चेन को खोल लिया और मेरे लंड को बाहर निकाल लिया. लंड को बाहर लाते हुए उसने मेरे लंड को अपने मुंह में भर लिया. मस्ती में मेरे लंड पर अपने गर्म होंठ कसते हुए वो मेरे लंड को चूसने लगी और दूसरी ओर मेरी जीभ उसकी चूत की गहराई नापने लगी.

    वो भी चूतड़ खिसका-खिसकाकर चूत के मुख चोदन का मजा ले रही थी. उसके मुंह में लेने से मेरा लंड एकदम से फूल सा गया था और पहले ज्यादा मोटा सा लगने लगा था. मैं उसके मुंह को हल्के हल्के चोदने लगा था. वो बीच बीच में लंड को मुंह से निकाल कर उसके टोपे को चाट लेती थी जिससे उत्तेजित होकर मैं उसकी चूत में पूरी जीभ घुसा देता था.

    जब मुझसे बर्दाश्त न हुआ तो मैंने लंड को बाहर खींच लिया और अपने कपड़े खोलने लगा. मैंने अपनी शर्ट और पैंट को सेकेन्ड्स की स्पीड से उतार फेंका और अंडरवियर निकाल कर नंगा हो गया. एक बार फिर से उसकी चूत में जीभ दे दी और मेरी साली मेरे लंड के साथ खेलने लगी. उसको हाथ में लेकर दबाते हुए मुंह में लेकर लॉलीपोप के जैसे चूसने लगी.

    उसने मुझे चूत चोदने के लिए तड़पा कर रख दिया था. वो खुद भी लंड लेने के लिए मचल गयी थी. मैंने क्रीम की शीशी व कॉण्डोम का पैकेट लिया और उसकी चूत की चुदाई की तैयारी कर दी.

    एक तकिया हनी के चूतड़ों के नीचे रखकर मैंने उसकी चूत पर जीभ फेरना शुरू किया तो वो बोली- आह्ह जीजू… अब और न तड़पाओ.
    उसकी बात सुनकर मैंने अपने लण्ड पर क्रीम चुपड़ी और साली की चूत के द्वार पर लण्ड का सुपारा रखकर दस्तक दी तो उसकी चूत ने जवाब दिया- चले आओ दरवाजा खुला है.

    मैंने धक्का मारा तो पहले धक्के में आधा और दूसरे धक्के में पूरा लण्ड हनीप्रीत की गुफा में समा गया.
    जैसे ही मेरा लंड उसकी चूत की गुफा में उतरा तो वो उसके मुंह से निकल गया- जी…जू … आह्हह … कहकर हनी ने अपने चूतड़ उचकाने शुरू कर दिये.

    चूत में लंड जाते ही उसके चेहरे के आनंद को देखकर मुझे समझते देर न लगी कि बहुत दिन से यह चुदासी है. मैंने हनी की कमर पकड़ ली और साली की चुदाई की ट्रेन चला दी. जैसे जैसे धक्के पड़ रहे थे वैसे वैसे ही उसके मुंह से जी…जू… उम्म्ह… अहह… हय… याह… जी…जू… की सिसकारियां निकल रही थीं.

    वो बार बार मेरा नाम लेकर अपनी गांड को ऊपर उठाने लगी. उत्तेजना बहुत ज्यादा हो गयी थी. मैं ज्यादा देर तक नहीं टिकने वाला था. इसलिए जब मुझे लगा कि मेरा काम होने वाला है तो मैंने अपना लण्ड बाहर निकाल लिया.

    लंड को बाहर निकाल कर उस पर हार्ड डॉटेड कॉण्डोम चढ़ाकर उसकी चूत में डाला तो लम्बी सी आहह.. भरते हुए हनी बोली- जीजू … आह्ह आपने तो दिन में तारे दिखा दिये.
    मैंने कहा- अब मुझे भी जन्नत का आनन्द लेने दो और मैंने धकाधक अपनी साली की चूत को पेलना शुरू किया.

    फच-फच की आवाज के साथ साली की पानी छोड़ रही चूत की चुदाई में मैं इतना खो गया कि क्या बताऊं. मैं बस धक्के पर धक्के लगाये जा रहा था.

    डिस्चार्ज होने से पहले लण्ड फूलकर इतना टाइट हो गया कि अन्दर बाहर करना मुश्किल हो रहा था लेकिन मैं रुका नहीं बस पेलता रहा. अगली पांच मिनटों तक मैंने उसकी चूत को जबरदस्त तरीके से रगड़ दिया.

    अब मुझसे रहा न गया और मेरे लंड पर मेरा कंट्रोल खो गया. मेरे लण्ड से एक फव्वारा छूटा जिसने मुझे जन्नत का दीदार करा दिया. मेरे लंड से वीर्य निकल कर कॉन्डम में भर गया.

    फिर हाँफते हुए मैं हनी के ऊपर ही ढेर हो गया. वो भी जोर जोर से सांसें लेते हुए मुझे अपनी चूचियों में शरण देने लगी. मैंने कई मिनट तक अपनी धड़कनें सामान्य होने का इंतजार किया और उसके बाद फिर से साली के जिस्म के साथ खेलना शुरू कर दिया.

    तभी उसने याद दिलाया कि आपको ऑफिस के लिए देर हो रही है. अब तो मैं ऑफिस और काम को भूल जाना चाहता था. मैं जल्दी से तैयार होकर ऑफिस गया और पांच दिन की छुट्टी लेकर आ गया.

    साली की चूत चुदाई का सुनहरा मौका मिला जिसका मैंने जमकर मजा लिया. पांच दिनों मैंने उसकी चूत कम से कम 15 बार तो जरूर चोदी होगी. वो भी मेरे लंड की जैसे दीवानी सी हो गयी थी. अब तो घर आते ही हम दोनों एक दूसरे के जिस्मों से लिपट जाते थे.

    इस तरह से साली की चूत चोदकर मैंने अपनी ख्वाहिश पूरी की और मुझे उसकी चूत चोदने में जैसे जन्नत का मजा मिला. बहुत दिनों के बाद काम का ऐसा सुख प्राप्त हुआ था.

  • चाची की चुत और मेरी वासना

    मैंने अपनी चाची की चुत की चुदाई की. असल में चाची के उभरे चूचों को देख कर मेरा लंड खड़ा हो जाता था और मैं मौके की तलाश में था. एक बार बहाने से मैंने चाची को गर्म कर दिया और …

    मेरा नाम आर्यन है और मैं बिहार के जमुई जिले के पास में झाझा का रहने वाला हूं.

    मैं हिंदी बेस्ट सेक्स स्टोरी अन्तर्वासना की कहानियां काफी समय से पढ़ रहा हूं और मैंने इसकी कहानियां ख़ासकर चाची की चुत की चुदाई कहानी पढ़ना आज से करीब 8 या 10 साल पहले शुरू किया था. अभी मैं 28 के ऊपर का हो चुका हूं और अभी तक कुंवारा ही हूं. मगर अन्तर्वासना से मेरा नाता बहुत पुराना है.

    यह कहानी वैसे तो वास्तविक है लेकिन इस कहानी में मनोरंजन के लिए मैंने थोड़ा सा मसाला भी डाल दिया है ताकि आपको कहानी पढ़ने में मजा आये.

    यह कहानी मेरे और मेरी चाची के बीच में हुई घटना की है. इसलिए मैं अपनी चाची का नाम यहां पर नहीं बताऊंगा.

    दोस्तो, वैसे तो मैंने आज तक अपनी जिन्दगी में बहुत सी लड़कियां और भाभी चोद कर मजा लिया. मेरी गर्लफ्रेंड की चुदाई भी मैंने खूब की है. मगर चाची की चुत चुदाई की ये घटना कुछ निराली थी. इसलिए मैंने सोचा कि पाठकों के साथ अपनी चाची की चुत चुदाई का किस्सा शेयर करूं.

    मैंने रंडी की चुदाई के साथ-साथ रिश्तों में चुदाई भी खूब की है. जिसमें मेरी मौसी की चुदाई भी शामिल है. मगर इस कहानी में मैंने अपनी चाची की चुत कैसे मारी सिर्फ उस घटना का जिक्र ही किया है. तो अब आपका ज्यादा समय न लेते हुए मैं अपनी कहानी पर आता हूं. मैं उम्मीद करता हूं कि आपको मेरी चाची की चुत की कहानी पढ़ते हुए मजा आयेगा.

    कहानी तब की है जब मैंने अपनी कॉलेज की पढ़ाई शुरू की थी. उस वक्त मेरी पढ़ाई पूरी करने के लिए मैं पहली बार घर से बाहर गया था. कॉलेज के समय में मेरा लंड भी बहुत परेशान करने लगा था. मैंने कॉलेज में जाते ही गर्लफ्रेंड बना ली थी. कुछ ही दिन के बाद उसकी चुत को चोद दिया. मगर चुत की प्यास और बढ़ गई थी.

    जब मेरे कॉलेज का पहला साल खत्म हुआ तो मैं घर वापस आ गया था. एक महीने की छुट्टी थी. घर आये हुए मुझे एक सप्ताह ही हुआ था कि मेरे लंड ने मुझे फिर से परेशान करना शुरू कर दिया. कई दिनों तक मैं अन्तर्वासना सेक्स स्टोरी साइट पर सेक्सी कहानियां पढ़ कर लंड को हिलाता रहा लेकिन मुझे चुत चाहिए थी.

    एक दिन मेरी चाची मेरे घर पर आयी. मैंने एक रात पहले ही चाची की चुत की चुदाई की कहानी पढ़ी थी. कहानी को पढ़कर मेरी नजर चाची के चूचों पर गई तो मेरा लंड खड़ा हो गया. उस दिन मैंने चाची के चूचों के बारे में सोच कर मुठ मारी. फिर मैंने सोचा कि क्यों न चाची की चुत चुदाई का मजा ले लूं.

    मैंने चाची की चुदाई करने का प्लान सोचना शुरू कर दिया लेकिन मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि मैं यह कैसे कर पाऊंगा. एक दिन की बात है कि मेरे घर पर कोई भी नहीं था. पापा काम से बाहर गये हुए थे और मां किसी रिश्तेदार के यहां पर गई हुई थी. उस दिन चाची घर आई और मेरी मां के बारे में पूछने लगी.

    चाची कई बार मेरी मां के पास आ जाती थी और दिन भर बैठ कर बातें करती रहती थी. मैं भी चुपके से चाची के उभारों को देख कर मजा लिया करता था. उस दिन भी मैंने सोचा कि चाची मेरी मां के पास आई है. मैंने मां के बारे में बताया तो चाची ने कहा कि ठीक है मैं फिर बाद में आऊंगी.

    मैं बोला- चाची कुछ काम है तो मुझे बता दो.
    चाची बोली- नहीं कुछ खास नहीं, मेरे सिर में दर्द हो रहा था. मैं तो तुम्हारी मां के पास बाम लेने के लिए आई थी. मेरे घर में मुझे बाम नहीं मिल रही थी.
    मैं बोला- कोई बात नहीं चाची, मैं आपको बाम ढूंढ कर दे देता हूं.

    मैं चाची के सामने ही बाम ढूंढने लगा और मुझे मिल गई.

    चाची को बाम थमाते हुए मैंने चाची के ब्लाउज की तरफ देखा तो मुझे चाची के क्लिवेज दिख गये. मेरे मन में वासना जाग गई.
    मैंने कहा- चाची अगर ज्यादा दर्द हो रहा है तो मैं आपके सिर में बाम लगा देता हूं.
    वो बोली- नहीं, मैं खुद से लगा लूंगी.
    मैंने कहा- अरे चाची, दूसरे के हाथ से मालिश करवाने में ज्यादा आराम मिलता है.

    फिर मेरे जोर देने पर चाची मान गई. मैंने चाची को अन्दर वाले कमरे में चलने के लिए कह दिया. चाची मेरे सामने बेड पर जाकर लेट गई और मैंने चाची के सिर बाम लगाना शुरू कर दिया. अब चाची के उठे हुए चूचे मुझे और अच्छी तरह नजर आ रहे थे.

    ब्लाउज में मेरी चाची के चूचे ऐेसे तने हुए थे जैसे कोई मिसाइल हो. चाची के उभारों को देख कर मेरे लंड में तनाव आ चुका था. मैं बेड के किनारे पर खड़ा होकर चाची के सिर में बाम की मालिश कर रहा था. मेरा तना हुआ लंड मेरी लोअर में मुझे परेशान करने लगा था.

    मालिश करने के बहाने धीरे धीरे मैं चाची के कंधे पर अपने तने हुए लंड को टच कर देता था. जब मेरा लंड चाची के कंधे से टच होता था उसमें और उत्तेजना आ जाती थी और चाची के कंधे पर झटका लगता था. मेरी वासना बढ़ती जा रही थी.

    सामने चाची के चूचों की दरार मुझे दिख रही थी और दूसरी तरफ चाची के कंधे पर लंड के छूने से मेरा बुरा हाल हो रहा था.
    मैं बोला- चाची कई बार सिर में दर्द पीछे गर्दन की वजह से भी हो जाता है.
    वो बोली- ठीक है तो फिर थोडी़ मालिश गर्दन की भी कर दो.

    मेरे कहने पर चाची पलट गई. चाची के पलटते ही उसकी भारी सी गांड मुझे साड़ी के अंदर ही उठी हुई दिखाई देने लगी. अब चाची की नजर मेरी लोअर पर थी. मेरी लोअर में तना हुआ लंड चाची को दिख गया. मगर चाची ने कुछ नहीं बोला.

    मैं भी देख रहा था कि चाची मेरे तने हुए लंड को देख रही थी. इस वजह से मेरे लंड में और ज्यादा उत्तेजना हो रही थी. मैं जान बूझ कर लंड में झटके दे रहा था ताकि चाची मेरे लंड को देख कर उत्तेजित हो सके. कई बार मैंने चाची की नजर के सामने ही अपने लंड को झटका दिया.

    अब चाची की नजर मेरे लंड पर गड़ गई थी. वो बार-बार बहाने से मेरे लंड की तरफ ही देख रही थी. मैं भी अपने तने हुए लंड को चाची के होंठों के पास लेकर जाने लगा था. एक बार तो मैंने बहाने से चाची की नाक को अपने लंड से छू भी दिया.

    मुझसे बर्दाश्त करना मुश्किल हो रहा था लेकिन चाची कुछ पहल नहीं कर रही थी. फिर मैंने चाची की गर्दन पर मालिश करने के बहाने हाथ पीछे तक ले जाना शुरू कर दिया. अब चाची की पीठ पर उसकी ब्रा की पट्टियों पर मेरी उंगलियां छू रही थी. मैं जान बूझकर चाची की ब्रा को छू रहा था. मुझे बहुत मजा आ रहा था.

    कुछ देर ऐसे ही करने के बाद अब मेरी मेहनत का असर दिखने लगा था. चाची पलटते हुए बोली- अब गर्दन की मालिश बहुत हो गई. अब सिर की ही मालिश कर दे.
    चाची ने अपनी साड़ी का पल्लू अपने चूचों के ऊपर से हटा दिया था. चाची के ब्लाउज में तने हुए चूचे मुझे साफ नजर आ रहे थे.

    मैंने बाम की शीशी चाची की बाजुओं की बगल में पेट पास रख दी. इस तरह से कोण बनाया कि जिस तरफ मैं खड़ा था उसके दूसरी तरफ शीशी रखी हुई थी. अब मैं जब शीशी उठाने के लिए चाची के ऊपर झुका तो मेरा लंड चाची के सिर पर लग गया और मेरी कुहनी चाची के चूचों से छू कर जाने लगी.

    एक दो बार मैंने ऐसा ही किया. अब चाची की टांगें भी फैलने लगी थीं. शायद चाची की चुत गीली हो रही थी. मैंने मालिश करना जारी रखा.

    फिर जब चाची से रहा न गया तो उसने पीछे हाथ लाकर मेरे लंड को पकड़ लिया और उसको सहलाने लगी. चाची की आंखें बंद थीं.

    मुझे भी इसी पल का इंतजार था. मैंने तुरंत चाची के चूचों को दबाना शुरू कर दिया. अगले ही पल हम दोनों के होंठ एक दूसरे के होंठों से मिले हुए थे. मैं चाची के चूचों को दबाते हुए उसके होंठों का रस पी रहा था. चाची भी मेरा पूरा साथ दे रही थी. उसके 36 के चूचे दबाते हुए मुजे गजब का मजा आ रहा था.

    फिर चाची खुद ही उठते हुए अपने ब्लाउज को खोलने लगी. उसकी ब्रा को मैंने झट से आजाद करवा दिया. चाची ऊपर से नंगी हो गई. मैंने चाची के स्तनों को मुंह में भर कर पीना शुरू कर दिया. चाची इतनी गर्म हो गई कि मुझे अपने ऊपर लेकर लेटती चली गई.

    नीचे से मैंने चाची की साड़ी को खोल दिया और उसके पैटीकोट का नाड़ा खोल कर उसे नीचे किया तो उसकी पैंट पर हाथ जा लगा. मैंने पैंटी को हाथ से रगड़ा और चाची की गीली चुत पर हाथ लगा कर देखा तो वो उभर कर ऊपर अलग से मेरे हाथ में महसूस हो रही थी.

    अब तो हद ही हो गई थी. मैंने तुरंत चाची की चड्डी को खींच कर चाची की चुत को नंगी कर दिया और उसकी टांगों को उठा कर उसकी चुत में जीभ लगा दी. चाची तड़पते हुए मेरे मुंह को अपनी चुत में दबाने लगी. मैं चाची की चुत में जीभ डाल कर उसे चोदने लगा.

    उसके बाद चाची उठी और मेरे लोअर को निकाल दिया. उसने मेरे कच्छे को भी नीचे खींच दिया और फिर मेरे लंड को सीधा मुंह में भर कर जोर से चूसने लगी. मैं तो आनंद में डूबने लगा. चाची मेरे लंड को मुंह में लेकर तेजी के साथ चूस रही थी. दो मिनट तक चाची ने मेरे लंड को चूसा. इस बीच में मैंने टीशर्ट भी उतार दी थी. अब दोनों नंगे थे.

    मैंने चाची की टांगों को फैलाया और उसके थूक से सराबोर हो रहे लंड को उसकी चुत पर टिका दिया. मैंने जोर लगाते हुए चाची की चुत में लौड़े को घुसा दिया. चाची ने मुझे बांहों में भर लिया और अपनी चुत को चुदवाने लगी.

    दोस्तो मुझे इतना मजा आ रहा था कि मैं बता नहीं सकता. मैंने चाची की चुत चुदाई जारी रखी और पांच मिनट के बाद मेरा वीर्य निकलने को हो गया तो मैंने चाची से पूछा कि कहां निकालूं तो उसने कहा कि अन्दर मत निकालना.

    चाची के कहने पर मैंने लंड को बाहर निकाल लिया और उसके पेट पर अपने वीर्य को छोड़ दिया. हम दोनों शांत हो गये. उसके बाद चाची ने अपने कपड़े वापस से दुरुस्त किये और चली गई. मुझे मजा आ गया उस दिन.

    मेरी चाची दिखने में भले ही साधारण थी लेकिन उसके अंदर सेक्स की आग बहुत थी. उस दिन मैंने इस बात को महसूस किया. एक दिन चाचा जब घर पर नहीं थे तो चाची ने काम के बहाने से मुझे रात को घर पर बुला लिया.

    उस दिन मैंने चाची की चुत में उंगली की तो चाची बोली- मुझे तेरे लंड चाहिये, उंगली से काम नहीं चलेगा.
    उस रात को मैंने चाची की चुत की चुदाई लगभग 35 मिनट तक की. फिर तो मैं मौका मिलते ही चाची की साड़ी को ऊपर उठा कर चाची की चुत में उंगली कर देता था.

    ऐेसे ही एक बार मेरी मां मेरे मामा के यहां पर गई हुई थी. उस दिन घर पर खाना बनाने की जिम्मेदारी चाची की ही थी. हम दोनों तो बस मौके की तलाश में थे. पापा के लिए नाश्ता बनाने के बाद वो काम पर निकल गये और मैंने किचन में ही चाची को पकड़ लिया. चाची की साड़ी उठा कर वहीं पर उसकी कच्छी निकाल दी.

    किचन के स्लैब पर चाची को झुका कर चाची की चुत मारी. उस दिन मैंने चाची की चुत में ही अपना माल गिराया. दोस्तो, चुत के अंदर माल गिराने का अलग ही मजा है. चाची अब अपनी चुत में ही माल गिरवाती थी.

    उसके बाद फिर मैं पढ़ाई के लिए बैंगलोर चला गया. वहां से चार साल के बाद वापस आया. वापस आने के बाद मैंने और चाची ने आते ही चुदाई शुरू कर दी मगर चाची के बेटे ने हम दोनों को देख लिया. उसको तो हमने किसी तरह चुप करवा दिया.

    मगर सच कभी न कभी सामने आ ही जाता है. ऐसे ही एक दिन मेरी मां ने मुझे और चाची को रंगे हाथ चुदाई करते हुए पकड़ लिया तो चाची ने सारा इल्जाम मेरे सिर पर लगा दिया.

    उस दिन के बाद से मेरी और चाची की लड़ाई हो गई. फिर हम दोनों ने कभी चुदाई नहीं की. लेकिन मैंने चाची की चुत को चोद कर खूब मजे लिये. मुझे कई बार दुख होता है कि चाची ने मेरे साथ सही नहीं किया.

    आपकी राय मेरी आपबीती के बारे में क्या है मुझे जरूर बतायें.

  • शादी से पहले मेरी चूत चुदाई की कहानी

    मेरी चूत चुदाई की कहानी में पढ़ें कि मैंने कैसे पहली बार अपनी चूत और गांड चुदवाई? शादी से पहले मेरा एक बॉयफ्रेंड था कॉलेज का! मेरा सेक्स करने का बहुत मन करता था.

    मेरा नाम रश्मि है। मैं दिल्ली में रहती हूं 28 साल की औरत हूं मेरी शादी हो चुकी है।

    यह कहानी मेरी पहली चूत चुदाई की कहानी है अंतर्वासना पर जब मेरी शादी नहीं हुई थी मेरा एक बॉयफ्रेंड था कॉलेज के टाइम का मैं कैसे उसे अपनी चूत और गांड चुदवाती थी आज मैं वही आपको बताऊंगी मेरा बॉयफ्रेंड मेरी सारी ख्वाहिश पूरी करता था तो मैं भी उस पर जान छिड़कती थी।

    तब मेरी उम्र 21 साल के आसपास थी मेरा सेक्स करने का बहुत मन करता था मैं वासना से एकदम भरी हुई रहती थी उसने मुझे पटा लिया.
    मुझे खुद भी पता नहीं चला कि कब मैं उस उससे पट गई और उसकी बातों में आ गई क्योंकि वह बातें इतनी अच्छी-अच्छी करता था मेरी उससे फोन पर घंटों बात होती थी.

    एक बार उसने मुझे होटल में मिलने के लिए कहा. शुरू में मुझे बहुत डर लग रहा था तो मैंने मना कर दिया. लेकिन बाद में फिर हम उसकी ज्यादा जिद करने पर मैं मान गई और हम दोनों साथ में एक होटल में गए.

    वहां रूम में जाकर वह मेरे होठों पर चिपक गया, मुझे किस करने लगा. मैं तो गर्म होने लगी थी मेरी कामवासना धीरे धीरे जागने लगी थी.

    वो स्कर्ट के ऊपर से ही मेरी चूत पर अपना हाथ फिरा रहा था और मेरे होंठों पर किस कर रहा था. वो मेरी शर्ट के ऊपर से ही मेरे उरोज दबा रहा था.

    अब तो मुझे ऐसा लग रहा था कि मेरा यार मुझे जी भर कर चोदे. मैं हर तरह से तैयार थी उससे चुदवाने के लिए!

    फिर धीरे-धीरे उसने मेरी स्कर्ट उतार दी, मैं सिर्फ उसके सामने पेंटी में. थी मेरी नंगी जांगे उसके सामने थी वह मेरी जांघों पर किस करने लगा और पैंटी के ऊपर से ही मेरी चूत पर अपनी जीभ फिराने लगा.

    मैंने मजे में अपनी टांगें ऊपर उठा ली और उसके बालों पर हाथ फिराने लगी. मेरी उम्र ही ऐसी थी कि जब वासना जोर मारने लगती है. मैं भी कामुकता से भरी हुई थी.
    फिर मैंने खुद अपने कमीज़ उतार दी और अपनी ब्रा भी।

    मैंने उसको अपने ऊपर खींचा और उसे अपने बूब्स चूसने का इशारा किया. वह मेरे बूब्स को पागलों की तरह चूसने लगा.
    मुझे बहुत मजा आ रहा था. मेरे मुंह से कामुकता भरी आवाजें निकल रही थी. दो-तीन साल से इतनी बुरी तरह से मेरा चुदने का मन कर रहा था कि मैं ही जानती थी।

    फिर मैंने उसको बेड के दूसरी तरफ धक्का दे दिया और उसके कपड़े उतारने लगी. लेकिन मेरा मन लंड चूसने का कर रहा था इसलिए मैंने थोड़ी सी पैन्ट को नीचे उतारकर और उसके निक्कर में से उसके लंड को निकाल कर सीधा उसका लंड चूसने लगी.
    मेरे यार के मुख से सिसकारियाँ निकल रही थी ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’
    उसके आधे कपड़े निकले हुए थे, पूरे भी अभी नहीं उतरे थे।
    लेकिन मैं पूरी नंगी थी.

    मैंने अपने यार के लंड को चूस चूस कर इतना गीला कर दिया था कि उसने मुझे धक्का देकर बेड पर सीधा लिटा दिया और मेरी टांगों को हल्की सी ऊपर उठाकर मेरी चूत में अपना लंड डाल दिया.

    मैं चीखने लगी और अपने दांतों को उसकी गर्दन पर गड़ाने लगी. मुझे मजा भी आ रहा था और दर्द भी हो रहा था.

    लेकिन थोड़ी देर बाद मुझे दर्द होना बंद हो गया और पूरा मजा आने लगा।
    मैंने उसकी कमर पर अपने नाखून गड़ा दिए. वह भी मेरी कोली भरकर मुझे जमकर चोद रहा था और इसी पोज में मेरी चूत ने अपना पानी छोड़ दिया.

    मैं बहुत चिल्लाई जब मुझे मजा आया. मैंने अपने आप को उससे चिपका लिया और उसकी बांहों में सिमट कर रह गई. लेकिन वह मुझे ऐसे ही चोदता रहा.

    मेरे झड़ने के बाद मैंने उसको काफी मना किया कि अब मेरी चूत की चुदाई ना करे … लेकिन वह नहीं माना.
    मैंने अपने हाथों से उसको हटाना चाहा लेकिन वह नहीं हटा.

    तो मैं निढाल होकर बेड पर लेट गई और अपने बदन को टाइट करके उसके धक्कों का सामना करने लगी.

    10 मिनट के बाद मुझे फिर से मजा आने लगा और फिर से मैं उसका साथ देने लगी. उसने मुझे अब की बार घोड़ी बना लिया, पीछे से मेरी चूत में अपना लंड डाल दिया और मेरे बाल पकड़कर मुझे खूब चोदा.
    इस अवस्था में मुझे बहुत दर्द हुआ. मैं बहुत चिल्लाई भी लेकिन वह नहीं हटा और उसे मजा आने लगा तो उसने कहा- बेबी बताओ अपना वीर्य कहां निकालूं?
    मैंने उससे कहा- अंदर ही निकाल दो, मुझे आपके बच्चे की मां बनना है.

    और उसने ऐसे घोड़ी बने बने ही मेरी चूत में अपना सारा वीर्य छोड़ दिया. गर्म गर्म माल मेरे अंदर जाकर लग रहा था, मुझे महसूस हो रहा था उसका वीर्य, उसका पानी!

    फिर वह हट गया. मैं भी थक कर लेट गई, वीर्य मेरी चूत से निकलकर बाहर बहने लगा. हमने कपड़े से अपने अपने यौन अंगों को साफ किया और एक दूसरे से बहुत देर तक ऐसे ही नंगे चिपके रहे.

    फिर कुछ देर बाद उसका लंड फिर से खड़ा हो गया और उसने मुझे अपना लंड चूसने को कहा.

    मैंने भी अपने दोनों हाथों से उसके लंड की मालिश की थूक से! और फिर मैं उसका लंड चूसने लगी.

    वह ऊपर से मेरे सिर को दबाता तो मैं पूरा लंड उसका मुंह में ले लेती. लेकिन सांस ना आने के कारण फिर मैं जल्दी से बाहर निकाल लेती. हम दोनों इतनी गंदी तरह से सेक्स कर रहे थे क्योंकि हम दूसरे को बुरी तरह से चोदना चाहते थे.

    फिर उसने मुझे दोबारा से घोड़ी बना दिया और पीछे से मेरी गांड को चाटने लगा. उसने उंगली से मेरी गांड को धीरे-धीरे गीला कर दिया.
    मेरी गांड इतनी गीली हो गई कि बहुत ज्यादा! मैं जानती थी कि अब मेरी गांड की चुदवाने की बारी है।

    तो उसने अपनी पूरी उंगली गीली करके मेरी गांड में डाल दी. मुझे बहुत दर्द हुआ.
    मैंने चिल्ला कर कहा- नहीं बेबी, वहां नहीं!

    लेकिन वह धीरे-धीरे ऐसे ही करता रहा, कभी जीभ से चाटता, बार-बार कभी उंगली कभी चाटना!
    इस वजह से मुझे बहुत मज़ा आ रहा था.

    फिर उसने मुझे पेट के बल लेटा कर क्रीम अपने लंड पर लगा कर मेरी गांड में लंड डाल दिया. मैं बहुत चिल्लाई लेकिन उसने मेरी नहीं सुनी.

    लेकिन फिर धीरे-धीरे मुझे मजा आने लगा और मैं उसका साथ देने लगी.

    उस दिन पूरे दिन होटल में उसने मुझे बहुत चूसा मेरे कामुक बदन को … उसके दबाने काटने से मेरा सारा बदन लाल हो गया था. और मेरी चूत और मेरी गांड में उसने अपना वीर्य भर दिया था.
    हम दोनों ने खूब मजे किए फिर उस दिन … उसने मुझे बहुत चोदा. मेरी गांड में ही अपना वीर्य निकाल दिया.

    फिर एक बार मैंने उसके ऊपर राइडिंग की. मेरे बूब्स उसके मुंह में और मैंने उसके ऊपर बैठकर बहुत धक्के लगाए. वह मेरे हिप्स पर बहुत तेज मारता भी था बीच-बीच में … जिससे मुझे बहुत मजा आता था.

    उस दिन होटल में हम दोनों ने अपनी पूरी वासना निकाली; वहां पर उस दिन हम चार-पांच बार सेक्स किया और बहुत मजे किए.

    यह थी मेरी शादी से पहले की चुदाई की कहानी मेरे बॉयफ्रेंड के साथ … जिससे मैं चुदवाती थी.

    लेकिन अब तो मेरी शादी हो चुकी है और उसकी भी!
    अब वह मुझ से बात नहीं करता क्योंकि उसकी वाइफ उस पर शक करती है. और हम चाहते भी हैं कि हमारे रास्ते अलग अलग रहें.

    लेकिन मेरा फिर से मन भी करता है कि कोई ऐसा मेरी लाइफ में फिर से आए जो अच्छा हो, सच्चा हो और मेरे लिए हमेशा खड़ा रहे!

  • दोस्त की चूत फाड़ चुदाई

    मेरे बचपन की एक दोस्त मुझे काफी समय बाद मिली. तब तक मैंने किसी लड़की की चूत नहीं चोदी थी. वह इस बात पर मेरा मजाक उड़ाने लगी. तो मैंने क्या किया?

    मैं दिल्ली का रहने वाला एक सामान्य लड़का हूं. मेरी उम्र 23 साल है. मेरा शरीर भी औसत दर्जे का है. न तो मैं ज्यादा मोटा हूं और न ही पतला. मेरी बॉडी एथलेटिक है।

    मेरे पास एक अच्छा लंड है जिसे मैंने कभी नहीं मापा है. जहां तक लंड के साइज की बात है तो यह किसी भी औरत, लड़की या प्यासी चूत को संतुष्ट कर सकता है इसलिए इसके बारे में मुझे चिंता करने की आवश्यकता नहीं हुई.

    यह कहानी मेरे बचपन की दोस्त के बारे में है. उसने मुझे कभी दोस्त नहीं माना. मैं उसको अपनी अच्छी दोस्त मानता रहा लेकिन उसने फिर किसी और से शादी कर ली. समय के साथ मैं उसको भूल भी गया था.

    फिर एक दिन वह मेरे घर आई. शुरू में तो देखने पर मैं उसको पहचान भी नहीं पाया. मैंने मां से पूछा तो वो मां को सारी कहानी बता चुकी थी. उसकी बात सुनने के बाद मुझे उसके बारे में याद आई.

    उसने मुझे बाकी की कहानी सुनाई कि वह अपने पति के खिलाफ एक केस लड़ रही है और अपने पति से वह तलाक चाहती थी। मैंने उसकी पूरी बात सुनी और उसको सहजता से काम लेने की हिदायत दी. मुझसे मिलकर वो थोड़ा शांत हुई.

    एक हफ्ते बाद में मैं उसके घर गया. उससे बात करने पर पता लगा कि उसको कोई जॉब चाहिए थी. उस दिन उससे काफी देर तक बातें होती रहीं. फिर हम लोगों की फोन पर भी बातें होने लगीं.

    मुझे ऐसा लग रहा था कि उसको भी मेरे साथ बातें करना अच्छा लगता था. महीने भर तक हम दोनों फोन पर अक्सर ही बातें करते रहे. फिर ऐसे ही करते करते बात किस करने तक भी पहुंच गयी.

    उस समय तक मैं वर्जिन था. मैंने इससे पहले कभी सेक्स नहीं किया था. मुझे तो यह भी नहीं पता था कि किस कैसे करते हैं. मैंने उसको बताया कि मुझे किस करना भी नहीं आता है.

    वो बोली- इतने भी शरीफ मत बनो.
    मैंने कहा- सच में, मेरी लाइफ में आज तक कोई लड़की नहीं आई है.
    वो बोली- कोई बात नहीं, मैं तुम्हें किस करना सिखा दूंगी.

    एक महीने के बाद मेरे मां और पापा का घूमने का प्रोग्राम बना. मैंने अपनी दोस्त को छोटी सी पार्टी के लिए बुलाया. जब हमारी पार्टी खत्म हो गयी तो वो मेरा मजाक बनाने लगी.

    वो बोली- तुम तो बहुत डरपोक हो. लड़कियों से बात करना तुम्हारे बस की बात नहीं है.
    मुझे उसकी बातों पर गुस्सा आने लगा. मैंने उससे कहा- मेरी शराफत को मेरी मेरी कमजोरी न समझे.
    वो फिर भी मेरा मजाक बनाती रही.

    मेरी मर्दानगी पर बात आई तो मैंने उसको पकड़ कर किस कर दिया. वो हैरानी से मेरी ओर देखने लगी.
    फिर उसने भी मुझे गर्दन से पकड़ लिया और किस करने लगी. हम दोनों एक दूसरे के होंठों को पीने लगे.

    मेरे साथ यह सब पहली बार हो रहा था. इसलिए मैं ज्यादा आगे नहीं बढ़ना चाह रहा था. मैंने उसको किस करके छोड़ दिया. फिर उसके बाद वो कई दिन तक मुझे चिढ़ाती रही.

    उसके द्वारा किया जाने वाला ये उपहास मुझसे सहा न गया. मैंने उसको फिर से घर आने का न्यौता दिया. उस दिन भी इत्तेफाक से मैं घर पर अकेला ही था.

    कुछ देर बातें करने के बाद मैंने उसको किस करना शुरू कर दिया. वो भी शायद मुझसे चाहती थी. इसीलिए मुझे बार बार सेक्स के लिए उकसा रही थी. मैं भी अब उसकी चूत को चोद देना चाहता था.

    मैंने कई मिनट तक उसको किस किया. फिर मैंने उसके कपड़े उतारना शुरू कर दिया. उसके टॉप को उतारा और फिर उसकी पजामी को उतार दिया.

    सफेद रंग की ब्रा और पैंटी में वो काफी सेक्सी लग रही थी. मैंने उसकी ब्रा के ऊपर से उसकी चूचियों को दबा दिया. वो भी यही चाहती थी. जैसे ही मैंने उसकी चूचियां दबाईं तो वो सिसकार उठी. फिर मैंने उसकी चूचियों को जोर से दबा दिया. वो कसमसाने लगी.

    उसके बाद मैंने उसकी ब्रा को खोल दिया. मैंने पहली बार अपने सामने किसी लड़की की चूचियों को नंगी देखा था. मैंने उसकी नर्म मुलायम सी चूचियों को अपने हाथों में भर लिया. उनको प्यार से दबाकर देखने लगा.

    मेरे लंड में जोश भरने लगा. अब मुझे सेक्स चढ़ रहा था. चूंकि मेरा यह पहला सेक्स था तो मुझे ज्यादा कुछ पता नहीं था. उत्तेजना में ज्यादा कुछ सूझ भी नहीं रहा था.

    कुछ देर तक मैं उसकी चूचियों को दबाता रहा और वो मजे से अपने दूधों को मेरे हाथों में दबवाती रही. फिर उसने मेरे सिर को पकड़ कर मेरे होंठों को अपने दूधों पर रखवा दिया. मैं भी उसके दूधों को पीने लगा.

    मुझे चूचियां पीने में बहुत मजा आ रहा था. पोर्न सेक्स वीडियो में देखते हुए मुठ तो कई बार मारी थी लेकिन असल में चूचियों को पीने का मजा कुछ अलग ही होता है.

    मैं उसके निप्पलों को जोर से काटने लगा. उसकी चूचियों को चूस चूस कर मैंने एकदम से कड़क बना दिया. फिर मैंने उसको बेड पर लिटा लिया. उसकी पूरी बॉडी को किस करने लगा.

    अब मेरा मन भी कर रहा था कि वो मेरे लंड को पकड़ ले. तभी उसने खुद ही कह दिया- अपने कपड़े नहीं उतारोगे क्या?
    उसके कहते ही मैंने अपनी टीशर्ट और लोअर उतार दी. उसके सामने अंडरवियर में हो गया.

    फिर मैंने अपना अंडरवियर भी निकाल दिया और उसकी चूचियों पर टूट पड़ा. मुझे बूब्स चूसने में सबसे ज्यादा मजा आ रहा था. फिर वो मेरे होंठों को पीने लगी.

    उसने नीचे से मेरे लंड को पकड़ना चाहा. मैंने उसके हाथ में अपना लंड दे दिया. वो मेरे लंड को सहलाने लगी. उसकी मुठ मारने लगी. मुझे बहुत मजा आ रहा था.

    उसके होंठों को छोड़ कर मैं उसकी चूचियों से होते हुए उसकी नाभि पर किस करते हुए नीचे तक आ गया. फिर मैंने उसकी चूत की ओर रुख किया. उसकी पैंटी को निकाल दिया. उसकी चूत के आसपास के बाल साफ किये हुए थे.

    मैं उसकी चूत को ध्यान से देख रहा था. मैंने चूत अपनी जिन्दगी में अपनी आंखों के सामने पहली बार देखी थी. मैं उसकी चूत के इर्द गिर्द चूमने लगा और वो एकदम से सिहर गयी.

    फिर मैंने उसकी चूत पर मुंह रख दिया. मैं उसकी चूत को चाटने लगा. उसकी चूत पर मुंह लगा कर उसको चूसने लगा. उसकी चूत का रस बहुत ही मादक सा था. चूत की खुशबू पहली बार मैंने ली थी और स्वाद भी बहुत मस्त था.

    कुछ देर तक उसकी चूत को चूसने और चाटने के बाद मैंने उसकी चूत पर लंड को रख दिया. लंड को चूत पर रखने के बाद मैंने उसकी चूत में लंड को धकेला लेकिन लंड फिसल गया.

    मुझे चुदाई का तजुरबा तो था ही नहीं, साथ ही उसकी चूत भी बहुत टाइट थी. मैंने फिर से कोशिश की लेकिन फिर भी लंड नहीं गया. एक दो बार में ही मेरे लंड को सुपारा लाल हो गया. वो भी बार बार उचक रही थी.

    मैंने सोचा कि ऐसे बात नहीं बनेगी. मैंने तेल की शीशी ली और अपने लंड पर बहुत सारा तेल लगा लिया. उसकी चूत के द्वार पर भी काफी सारा तेल मल दिया.

    तेल लगाकर मैंने झटका मारा तो वो बेड पर ऊपर की ओर सरक गयी. मैंने उसको पकड़ लिया. फिर से नीचे लाकर उसकी चूत में फिर से लंड को घुसा दिया. वो चीखने को हुई लेकिन मैंने उसके मुंह को अपने मुंह से बंद कर दिया.

    धीरे धीरे करके मैंने लंड को उसकी चूत में उतार दिया और फिर उसके ऊपर लेट गया. कुछ देर का विराम देने के बाद मैंने फिर ऊपर नीचे होना शुरू किया. उसको भी अच्छा लगने लगा.

    पहले तो मैं धीरे धीरे करता रहा और फिर मैंने स्पीड बढ़ाने की सोची. उसकी चूत में अब मैं तेजी के साथ धक्के लगाने लगा. चुदाई में मुझे गजब का मजा मिल रहा था. उसकी चूत काफी टाइट थी. शायद उसके पति के साथ उसके सेक्स संबंध ज्यादा अच्छे नहीं थे.

    15 मिनट तक मैंने उसकी चूत को इसी पोज में चोदा. फिर मैंने उसको डॉगी स्टाइल में कर लिया. अब वो आराम से लंड को अंदर ले रही थी. मुझे भी चुदाई में पूरा आनंद मिल रहा था. उसके बाद मैंने उसकी चूत में पीछे से धक्के लगाना शुरू कर दिया.

    उसके मुंह को अपने हाथ से बंद कर लिया और तेज तेज उसकी चूत को चोदने लगा. वो गूं गूं की आवाज करने लगी मगर मुझे चुदाई का चस्का ऐसा चढ़ा कि मैंने उसकी चूत फाड़ ही डाली.

    आधे घंटे तक उसकी चूत चोदने के बाद मेरा पूरा बदन पसीने में भीग गया था और उसका हाल तो मुझसे भी बुरा था. उसके मुंह से अब तेज तेज आवाजें आ रही थीं उम्म्ह… अहह… हय… याह… जिनमें दर्द और आनंद का मिला जुला सा रूप था.

    चूंकि मेरा घर बाहरी एरिया में था इसलिए किसी को कुछ पता चलने का भी डर नहीं था. मैंने जमकर उसकी चूत चोदी. इतनी जबरदस्त चुदाई करने के बाद भी जब मैं नहीं झड़ा तो मैंने उसको सीधी कर लिया. उसकी टांगों को अपने कंधे पर रख लिया और उसकी चूत में फिर से लंड दे दिया.

    अगले दस मिनट तक फिर मैंने उसकी चूत को रगड़ा. वो बुरी तरह से थकी हुई लग रही थी. मुझे नहीं पता था कि औरत कितनी देर में झड़ती है. मगर मुझे लग रहा था कि इस दौरान वो 3-4 बार तो झड़ ही गई होगी.

    फिर मैं भी झड़ने के करीब पहुंच गया. मैंने उसकी चूत में वीर्य छोड़ दिया. उसकी चूत में वीर्य छोड़ने के बाद मैं हांफता हुआ उसके ऊपर गिर गया. वो जैसे बेसुध हो गयी थी.

    उसके बाद वो उठी और अपने कपड़े पहनने लगी. उससे सही से चला भी नहीं जा रहा था. फिर मैं उसको उसके घर तक छोड़ कर आया. इस तरह से मुझे बाद में पता चला कि मेरी टाइमिंग डेढ़ घंटे के करीब है.

    उस दिन मैंने उसकी चुदाई की ऑडियो रिकॉर्डिंग भी कर ली थी. वो रिकॉर्डिं करीब 45 मिनट की थी. अगर कोई लड़की उसको सुन ले तो उसकी चूत से पानी निकल जाये.

    पहली चुदाई के बाद उस दिन मुझे भी थकान हो रही थी तो मैं घर वापस आकर सो गया. उसके बाद मैंने अपनी बचपन की दोस्त की चूत कई बार चोदी. उसको होटल में ले जाकर भी कई बार चोदा.

    अब वो मेरे लंड से चुदने की आदी हो गयी थी. उसके साथ मैंने और क्या क्या किया वो सब मैं आप लोगों को फिर कभी बताऊंगा. फिलहाल की इस कहानी में इतना ही.

  • पत्नी की सहमति से विधवा सास के साथ संभोग- 2

    इस सेक्स कहानी के पहले भाग
    कुंवारी पत्नी के साथ सुहागरात
    में आपने पढ़ा था कि तपोश को अपने से बड़ी उम्र की महिलाएं अच्छी लगती थीं.
    फिर तपोश ने अपने ऑफिस में काम करने वाली अनुप्रिया से शादी हो गयी.
    तपोश को अपनी सास यानि अनुप्रिया की विधवा माँ अच्छी लगने लगी थीं.

    अब आगे की वाइफ मदर सेक्स कहानी तपोश की जुबानी सुनें.

    हमारी शादी हुए एक महीना हो गया था.

    हम हफ्ते में 2-3 बार मम्मी से मिलने जाते, हमने देखा था कि मम्मी कुछ कमजोर हो गयी थीं.
    शायद वे ठीक से खाना नहीं खा रही थीं.

    अनु के पूछने पर उन्होंने बताया कि अकेली के लिए खाना बनाने का मन नहीं करता.
    हम दोनों अपने घर वापस आ गए.

    मैं- अनु हम मम्मी को अपने घर ले आते हैं, अपना दो बेडरूम का फ्लैट है कोई मुश्किल नहीं होगी. मम्मी का स्कूल हमारे फ्लैट से पास ही है.
    अनु- हां … मैं भी यही कहने वाली थी.

    हम दोनों मम्मी को समझा बुझा कर अपने फ्लैट ले आए.
    अब मम्मी खुश रहने लगीं और उनकी तबियत सुधर गयी.

    जब मैं अपनी पत्नी अनुप्रिया को अनु कहकर आवाज़ लगाता, तो कभी कभी मम्मी कह उठतीं- आती हूँ!
    मम्मी का नाम अनुश्री है.

    मुझे मेरी पत्नी ने बताया उसके पिताजी माँ को अनु कहते थे.
    मैं सोच में पड़ गया.

    उस दिन मेरा जन्म दिन था.
    अनु बोली- हम वोडका पार्टी करेंगे, माँ पिताजी के साथ पीती थीं, उन्हें भी पिलाएंगे. पहले हम सब एक एक पैग पिएंगे, फिर केक काटेंगे.

    तीनों ने एक एक पैग पिया, फिर मैंने केक काटा.
    हमने एक दूसरे को केक खिलाया.

    अनु ने मुझे आलिंगन में लेकर जन्मदिन की बधाई दी और मुझसे बोली- मैं किचन से प्लेट लाती हूँ.

    वह यह कहकर चली गयी.

    मैंने हाथ फैलाकर कहा- आंटी, अपने दोस्त के गले लगकर बधाई नहीं देंगी?

    मम्मी ने मुझे कसकर आलिंगन में लेकर बधाई दी.
    मैंने भी उनको कसकर पकड़ लिया.

    फिर मम्मी के गाल में चुम्मी देकर कहा- थैंक्स.

    हम काफी देर आलिंगन में खड़े रहे थे.

    मम्मी के चूचे मेरी छाती में दबे हुए थे, लंड खड़ा हो रहा था.

    तभी अनु ने किचन से आवाज़ लगायी- खाना अभी खाएंगे या एक और पैग के बाद!

    उसकी आवाज सुनकर हम दोनों आलिंगन से अलग हुए.

    डिनर के बाद बेडरूम में मैंने और अनु ने एक एक पैग और लगाया और फोरप्ले करने लगे.

    अनु- तपोश, मैंने देखा था कि कैसे तुम और माँ काफी देर तक आलिंगन का मजा ले रहे थे. यदि तुम माँ को भी यौन सुख दो तो मुझे बहुत अच्छा लगेगा, तुम्हें बड़ी उम्र की महिला अच्छी लगती हैं. मैंने देखा था कि तुम्हारा लंड खड़ा होने लगा था.

    मम्मी को गले लगाकर मैं जोश में था, ऊपर से शराब का नशा मस्ती दे रहा था.

    मैं- तुम सोचकर बोल रही हो या नशे में?
    अनु- मैं काफी दिनों से यह बात बोलने का मौक़ा देख रही थी. सेक्स में इतना मजा आता है. पिताजी के देहांत के बाद माँ 11 साल बिना सेक्स के रही हैं. उन्होंने किसी पुरुष को अपने पास नहीं आने दिया, पूरा ध्यान मुझे बड़ा करने में दिया. मेरी माँ को बिना सेक्स के कितनी मुश्किल हुई होगी, मैं अब समझ सकती हूँ. माँ का ऑपरेशन हो गया है, वे गर्भवती नहीं हो सकतीं.

    मैं- मैं तैयार हूँ, पर क्या मम्मी राजी होंगी? तुम उनको राजी करो!
    अनु- मैं उनसे बात करूंगी.

    अगली रात अनु माँ के कमरे में सोई.

    सुबह अनु ने बताया- मैंने माँ को कहा कि शादी के बाद मुझे पता चला सेक्स में कितना मजा आता है. आप 11 साल मेरे लिए बिना सेक्स के रही हैं, आपको कितनी मुश्किल हुई, मैं अब समझ सकती हूँ. हम दोनों को जो भी मिला, हमने आपस में बांटा. मैंने देखा है कि आप और तपोश के दूसरे के प्रति आकर्षित हो. मैं तपोश को तुमसे बांटना चाहती हूँ. तपोश राजी हो गया है. माँ ने ना नुकर के बाद हाँ कह दिया है.

    इतना कह कर अनु नहाने चली गयी.

    मम्मी ने मुझे चाय दी और मुस्कुरा कर बोलीं- क्या तुम अभी भी बड़ी उम्र की महिलाओं को निहारने स्टेशन जाते हो?
    मैं समझ गया कि अनु ने यह बात बतायी है.

    मैं- नहीं अब नहीं जाता, मुझे खूबसूरत मधुर स्वभाव की कठिनाइयों के बावजूद खुश रहने वाली दोस्त जो मिल गयी है!

    यह कहकर मैंने मम्मी को अपने आलिंगन में भरा और उनके होंठ चूम लिए.

    वे पहले तो अचकचाईं फिर उन्होंने खुद को ढीला छोड़ दिया.

    अब मैं रोज मम्मी से करीबी बढ़ाने लगा, उनके हाथ पकड़कर उन्हें करीब बिठा कर बात करता, उनके कूल्हों पर हल्की चपत मार देता.

    तीन दिन बाद हमारे हेड ऑफिस में 7 दिन की ट्रैनिंग थी.
    अनु उसमें भाग लेने चली गयी.

    वह जाते समय बोली- आप दोनों एक दूसरे का ख्याल रखना.

    शाम को जब मैं घर आया, मम्मी तैयार होकर मेरा इन्तजार कर रही थीं.

    वे कुछ ज्यादा ही सुन्दर लग रही थीं.
    मुझे चाय देते समय शर्मा भी रही थीं.

    उस दिन वे स्लीवलेस ब्लाउज पहने हुई थीं.

    मैंने देखा मम्मी के हाथ पर जो छोटे छोटे बाल थे, वे गायब थे.
    मैं समझ गया कि मम्मी वैक्सिंग कराकर आयी हैं.

    चाय पीने के बाद मैं बाथरूम में फ्रेश होने गया.

    पहली बार वहां मम्मी की ब्रा टंगी थी.
    मैंने उसको अलट पलट कर देखा कि उनके चूचों का साइज 34 सी था.

    मैं वापस आकर उनसे बात करने लगा.

    मैं- आंटी, आज आप बहुत सुंदर लग रही हो. मेरी दोस्त, आज रात हम दोनों पार्टी करते हैं. मैं वोडका, स्प्राइट, चिकन टिक्का ले आया हूँ.

    मम्मी गिलास प्लेट लेकर आ गईं.

    हम दोनों सोफे पर पास पास पीने बैठे, टेबल पर चखना रखा था.

    मैंने मम्मी की जांघ पर हाथ रखकर कहा- चखने की प्लेट देना.
    मम्मी कसमसाईं, पर मेरे हाथ नहीं हटाए.

    पैग ख़त्म होने के बाद मैंने मम्मी के हाथ पकड़ कर उन्हें खड़ा किया.

    उन्हें आलिंगन में लेकर उनकी गर्दन चूमने लगा, कूल्हों पर हाथ फेरने लगा.
    काफी देर बाद हम दोनों अलग हुए.

    मैं उनके होंठ चूमने लगा, चूचे दबाने लगा.

    मम्मी का संयम का बांध टूट गया, वे भी मेरे होंठ चूमने लगीं.
    हम दोनों की सांसें तेज हो गईं.

    मम्मी अपने बेडरूम की ओर जाने लगीं, मैं उनके पीछे आ गया.

    बेडरूम में हम खड़े खड़े एक दूसरे के होंठ चूमने लगे.

    मम्मी की साड़ी का आंचल गिर गया, उनके ब्लाउज में ढके भरे हुए चूचे मुझे उत्तेजित करने लगे तो मैं उनके दूध दबाने लगा.

    वे होंठ काटने लगीं और सिसकारियां भरने लगीं.
    मैं उनके ब्लाउज के हुक खोलने लगा, मम्मी ने हाथ उठाकर ब्लाउज निकालने में मदद की.

    ब्लाउज हटा तो मैंने देखा कि उनकी कांख (आर्मपिट) पर एक भी बाल नहीं था.
    मैं कांख चूमने लगा और साथ ही साथ उनकी ब्रा को भी उतार दिया.

    भरे गेंहुए चूचे हल्के से लटके थे, पर उन पर भूरे निप्पल तने हुए थे.

    मैं एक चूचे को चूस रहा था और दूसरे को दबा रहा था.

    आंटी- ये ज्यादती है, तुम मेरे सब कपड़े उतार रहे हो, खुद कपड़े पहने हुए हो!

    यह कहकर मम्मी ने मेरा कुर्ता उतार दिया.
    हम दोनों कमर के ऊपर तक नंगे हो गए.

    मम्मी ने मुझे आलिंगन में ले लिया.

    मेरी नंगी छाती पर मम्मी के नंगे चूचे दबने लगे थे. मुझे बड़ा सकून मिल रहा था.

    मैंने मम्मी के साये के नाड़े की गांठ खोल दी तो साया ज़मीन पर गिर गया.
    मम्मी ने मेरा पजामा चड्डी सहित उतार दिया.

    मम्मी पलंग पर चित लेट गईं.
    मैंने उनकी पैंटी उतार दी.

    मैं मम्मी के नंगे भरे चिकने बदन को निहारने लगा.
    मम्मी की मोटी मांसल जांघें, फूली हुई चूत, बड़े बड़े चूचे, थोड़ा मोटा पेट … उस पर गहरी नाभि थी.

    मेरा खड़ा लंड उत्तेजना से झटके ले रहा था.

    मैं मम्मी के पैरों के बीच आ गया.
    मम्मी ने अपने पैर घुटनों से मोड़ लिए और कमर के नीचे टॉवल रख लिया.

    आंटी- अपने लंड पर तेल लगा लो, इतने साल बिना सम्भोग से मेरी चुत टाइट हो गयी है.
    मम्मी वोदका की मस्ती में खुल कर लंड चुत कह रही थीं.

    मुझसे तेल लगाने की कहकर उन्होंने पलंग के पास की टेबल पर रखी तेल की बोतल मुझे दे दी.

    मैंने लंड पर तेल लगाया और धीरे से लंड चूत में डालने लगा.

    उनकी चूत कुंवारी लड़की की तरह टाइट थी.

    मम्मी लंड घुसते ही दर्द से ‘आह आ’ करने लगीं.

    मैंने धीरे धीरे करके पूरा लंड चूत में पेल दिया और मम्मी के ऊपर लेट गया.

    मम्मी का बदन नर्म गद्देदार था.

    कुछ देर बाद मम्मी ने कमर हिलायी.
    मैं हाथों के दम पर उठकर उन्हें जोर जोर से चोदने लगा.

    आंटी- आह थोड़ा धीरे, मैं कहीं भागी नहीं जा रही!

    मैंने चोदने की गति कम कर दी, बीच बीच में रुक कर मैं चूचे दबाता, होंठ चूमता … फिर चोदने लगता.

    मम्मी थोड़ी देर कमर को उछालती रहीं … फिर लेट कर आधी आंखें बंद कर चुदाई का मजा लेने लगीं.

    उनके कंठ से मादक सिसकारी निकलती रही.
    चुदाई के कारण मेरी जांघें उनकी जांघों से टकरा कर थप थप की मधुर आवाज़ निकाल रही थीं.

    आंटी- आह और जोर से तप्पू … मेरा होने वाला है!
    मैंने चुदाई की गति बढ़ा दी.

    मम्मी का बदन कांपने लगा और शरीर धनुष की तरह हो गया.

    उनकी चूत से निकले कामरस से मेरा लंड भीग गया और मम्मी निढाल हो गईं.
    मैंने चुदाई जारी रखी.

    अब मम्मी की गीली चूत से फच फच की आवाज़ आ रही थी.
    थोड़ी देर में वीर्य की पिचकारी चूत में भर गयी.

    मम्मी के चेहरे पर सकून भरी मुस्कुराहट थी.
    मैं मम्मी के ऊपर लेट गया.

    कुछ देर में लंड सिकुड़ कर चूत से निकल गया तो मैं उनके ऊपर से उतर गया.

    मैं- मम्मी कैसा रहा, मैं पास हो गया न?

    मम्मी ने मुस्कुरा कर और शर्माकर अपना चेहरा हाथों से छुपाकर कहा- अव्वल नंबर से पास हुए हो. तुम्हारे लिंग ने मेरी योनि को बहुत सुख दिया है. तुम अकेले में मुझे मम्मी नहीं, अनुश्री कहा करो!

    मैं- अनुश्री तुम लिंग योनि नहीं, लंड चूत कहा करो.

    हमने फ्रेश होकर कपड़े पहनकर डिनर किया. मेरी मम्मी को एक बार और चोदने की इच्छा थी. अनुश्री मम्मी राजी नहीं हो रही थीं.
    उन्होंने कहा- मैं थक गयी हूँ.

    हम दोनों सो गए.

    सुबह मैं जागा, तब मम्मी सो रही थीं.

    मैं चाय बनाकर लाया और अनुश्री मम्मी के होंठ चूमकर उन्हें जगाया.
    चाय पीकर हम दोनों फ्रेश हुए.

    उस दिन हम दोनों ने छुट्टी ले ली.

    अनुश्री आंटी- रात में तुमने मुझे बहुत थका दिया था, अभी तक बदन दुःख रहा है.
    मैं- मालिश कर देता हूँ.

    मम्मी कपड़े उतार कर पलंग पर पेट के बल लेट गईं.
    मैं भी नंगा होकर उनकी पीठ की मालिश के बाद उनके गोल सुडौल कूल्हों की मालिश करने लगा.

    मालिश करते हुए मैं हल्के हाथ से थप्पड़ मारता, तो मम्मी के कूल्हे मस्त हिलते.
    मैं झट से उनके कूल्हों को चूम लेता.

    मैंने मम्मी को चित लिटा दिया, उनकी भरी हुई जांघों की मालिश की, चूत पर हाथ फेरा, फिर छाती और चूचों की मालिश करते समय चूचे दबाने लगा और निप्पल मरोड़ने लगा.
    वे सिसकारी लेने लगीं.

    मैं- एक बार हो जाए?
    आंटी- तुम्हें बहुत कुछ सिखाना है.

    यह कहकर वे बैठ कर पलंग के किनारे पर लेट गईं.
    उनकी कमर तक का शरीर पलंग पर था, पाँव आसमान की तरफ.

    वे बोली- अब मेरे पाँव अपने कंधों पर रखो और शुरू हो जाओ!

    मैं लंड लहराता हुआ आया, उनके पाँव अपने कंधों पर रखे और लंड पेल कर चोदना शुरू कर दिया.
    मम्मी के चूचे मस्त हिल रहे थे.

    मैं बहुत जोश में था, लग रहा था जल्द झड़ जाऊंगा.

    मम्मी ने मुझे रोककर कहा- मेरे होने से पहले झड़ना नहीं. जब लगे कि थोड़ी देर में झड़ने वाले हो, लंड बाहर निकाल लेना लंड की जड़ को उंगलियों से कसकर पकड़ लेना और लम्बी लम्बी सांसें लेना … अपना ध्यान दूसरी तरफ लगाना. फिर जब लगे कि झड़ना टल गया है तो फिर शुरू हो जाना.

    मैंने वैसा ही किया.
    इस विधि से मैं लंबा चला और मम्मी के झड़ने के बाद झड़ा.

    फिर हम दोनों एक साथ नहाये.

    नाश्ते के बाद मैंने कहा- मुझे तुम्हारी गांड मारनी है!

    अनुश्री- चार दिन बाद मारना, गांड टाइट हो गयी है.
    यह कहकर वे दो आस प्लग ले आईं.

    वे बोलीं- पहले दो दिन जितनी देर हो सके छोटा प्लग लगाकर रहूंगी, फिर दो दिन बड़ा वाला. गांड थोड़ी ढीली हो जाएगी. टाइट गांड में लंड डालने से बहुत दर्द होता है, गांड चिर भी सकती है.

    तब मैं समझा कि जब मैंने अपनी पत्नी अनु की गांड मारने की कोशिश की, पहले तो वह मान गयी, पर जब लंड डालने लगा तो उसे बहुत दर्द हुआ और वह रोने लगी थी. उसने मना कर दिया था.

    रात भर हम दोनों नंगे रह कर फोरप्ले करते रहे थे.

    अनुश्री आंटी- मैं घोड़ी बन जाती हूँ.

    बेडरूम में बड़ा आइना लगा ड्रेसिंग टेबल था.
    मम्मी ने डेढ़ फुट ऊंचा मजबूत टेबल आईने के सामने रखा, आईने की तरफ मुँह करकर उन्होंने अपने हाथ टेबल पर रखे और पैर फैलाकर कहा- अब हम अपनी चुदाई का लाइव शो देख पाएंगे.

    मैं पीछे से चूत चोदने लगा और कूल्हों पर थप्पड़ मारने लगा.

    अनुश्री मम्मी के पैंडुलम की तरह डोलते चूचे आइने में दिख रहे थे.

    मम्मी ने अपनी गांड में आस प्लग लगा रखा था.
    जब मुझे लगा मैं थोड़ी देर में झड़ जाऊंगा, मैं लंड बाहर निकाल कर लंड की जड़ को उंगलियों से पकड़ कर लम्बी लम्बी सांस लेने लगा. मेरा झड़ना टल गया, तो मैं फिर से चोदने लगा.

    अनुश्री मम्मी का कामरस बहने लगा.
    वे बोलीं- मेरा हो गया!

    मैंने चुदाई की गति बढ़ा दी तो मैं भी झड़ गया.

    सुबह अनुश्री मम्मी सिर्फ मैक्सी पहनती थीं, उसके अन्दर वे कुछ नहीं पहनती थीं.

    फ्रेश होने के बाद मैंने गुड मॉर्निंग कहकर अनुश्री मम्मी की आंख, होंठ चूमे, फिर पीछे जाकर मैक्सी कमर तक उठाकर उनके कूल्हों को चूमा.

    मैक्सी में हाथ डालकर चूचे दबाये.

    तब से रोज मैं गुड मॉर्निंग ऐसे ही कह रहा हूँ.

    शाम को काम से आने के बाद चाय पीते समय मैंने कहा- मेरी एक फतांसी है, मुझे तुम्हारा मूत पीना है!
    अनुश्री आंटी- सेक्स में कुछ भी कुछ भी अच्छा बुरा नहीं होता, सिर्फ आपसी सहमति चाहिए.

    वे मुझे बाथरूम ले गईं, कपड़े उतार दिए और सिर्फ चश्मा पहने रहने को कहा.

    फिर अनुश्री मम्मी ने दीवार पर अपनी पीठ टिकाकर पाँव फैला दिए.
    मैंने नंगे होकर नीचे स्टूल पर बैठकर मुँह खोला और मम्मी की चूत पर मुँह लगा दिया.
    वे मूतने लगीं और मैं पीने लगा.

    मूत ख़त्म होने पर अनुश्री मम्मी ने स्टूल पर बैठकर कहा- अब मैं पिऊंगी!
    उन्होंने मुँह खोल दिया, मैं मूतने लगा.
    वे पीने लगीं.

    चश्मे के कारण मूत्र हम दोनों की आंखों में नहीं जा रहा था.
    फिर हम साथ में नहाए.

    उस रात हम दोनों ने 69 पोजीशन में एक दूसरे के लंड चूत चूसे.

    अनुश्री मम्मी मेरे लंड का वीर्य पी गईं.
    मैंने चूत से निकला कामरस पी लिया.

    अगली रात अनुश्री मम्मी ने लंड की सवारी की, पर उनके भारी शरीर के कारण वे ज्यादा देर लंड पर नहीं उछल सकीं.

    मैंने बाकी चुदाई मिसनरी आसन में की.
    वे रोज चुदाई के वक्त अपनी गांड में आस प्लग लगाए रहती थीं.

    पांचवी रात गांड मारने की बारी थी.

    एक दूसरे को गर्म करने के बाद अनुश्री मम्मी ने कहा- गांड और लंड पर तेल लगाकर धीरे धीरे से डालना, मुझे थोड़ा दर्द हो सकता है! लंड डालकर रुकना, मैं जब कहूँ, तब चुदाई शुरू करना. सेक्स के बाद लंड साबुन से धो लेना, गांड के कीटाणु से लंड पर इन्फेक्शन हो सकता है.

    अनुश्री मम्मी ने पेट के बल लेटकर अपने कूल्हे हाथ से फैलाए और छेद से दूर कर दिए.

    मैंने उनकी गांड के अन्दर उंगली से तेल लगाया, लंड पर तेल लगाया.
    फिर धीरे से लंड गांड में डालकर उनके ऊपर लेट गया.

    अनुश्री मम्मी दर्द से आ आ कर रही थीं. उन्होंने तकिये को पकड़ रखा था.

    कुछ देर बाद अनुश्री मम्मी बोलीं- अब ठीक है.

    मैं मम्मी की गांड मारने लगा.

    जब लंड पूरा अन्दर जाता, मम्मी की गद्देदार कूल्हों से मेरी कमर टकराती, तो थप थप की मीठी आवाज़ आती.

    मम्मी सिसकारी लेने लगी थीं.
    उनकी गांड मारने में अलग ही आनन्द आया.

    इस तरह से हमने इन सात रातों में तरह तरह के आसनों में सम्भोग किया.

    अनुश्री मम्मी को सेक्स में दस वर्षों का गहरा अनुभव था.
    वाइफ मदर सेक्स करके मैंने बहुत कुछ नया सीखा.

    अगले दिन मेरी पत्नी अनु वापस आने वाली थी.

    अनुश्री आंटी- तपोश, अनु को हमारे यौन क्रीड़ा और सम्भोग के बारे में विस्तार से नहीं बताना, यह रुचिकर नहीं होगा. तुम उससे सिर्फ इतना कह सकते हो कि हम दोनों ने काफी मजे किए. अनु से सेक्स करते समय मेरे साथ किये सेक्स की तुलना नहीं करना, उस समय का आनन्द लेना.

    अनु शाम को आयी, अपनी माँ का खिला चेहरा देख समझ गयी कि उन्हें भरपूर यौन आनन्द मिला.
    वह माँ को गले लगाकर बोली- माँ, तुम्हें वर्षों बाद इतना खुश देख रही हूँ!

    अनु ने मुझे कुछ नहीं पूछा.

    उस रात अनु बहुत जोश में थी, हमने दो बार सम्भोग किया.
    हम करीब रोज रात अलग अलग आसन में सम्भोग करते.

    मैंने अनुश्री मम्मी से सेक्स में बहुत कुछ सीखा था, वह सब काम आया.
    हफ्ते में एक दो रात रात मैं अपनी सास अनुश्री मम्मी के बेडरूम में सोता.

    हम दोनों घमासान सेक्स करते.

    शादी के एक साल बाद अनु ने बेटी को जन्म दिया.

    मैं अनुप्रिया और अनुश्री मम्मी 10 साल से साथ रह रहे हैं.

    मैं दोनों के साथ यौन आनन्द लेता हूँ और उनको यौन आनन्द देता हूँ.

    आपको मेरी यह वाइफ मदर सेक्स कहानी कैसी लगी, प्लीज जरूर बताएं.

  • पत्नी की सहमति से विधवा सास के साथ संभोग- 1

    हसबैंड सेक्स विद वाइफ कहानी में मेरे ऑफिस में एक लड़की आई. वह मुझे अच्छी लगी. हमारी दोस्ती हो गयी. मैं उसके घर गया, उसकी विधवा मम्मी से शादी की बात की.

    फ्रेंड्स, आपको एक नए अनुभव से युक्त सेक्स कहानी का मजा लिख रहा हूँ, इस हसबैंड सेक्स विद वाइफ कहानी का आनन्द लें.

    तपोश की सास अनुश्री उससे कई साल बड़ी थी, उनके पति का देहांत हो गया था.

    सास का व्यहार दोस्ताना था, वह जिंदादिल और हंसमुख थी.
    तपोश की पहले उनसे दोस्ती हुई, फिर शारीरिक संबंध हुआ.

    आइए तपोश की सेक्स कहानी उसकी जुबानी सुनते हैं.

    उस समय मैं 24 उम्र का था.
    मैं एक कंपनी में 3 साल से नौकरी कर रहा था.

    मुझे अपने से बड़ी उम्र की भरे बदन की महिलाएं अच्छी लगती थीं.
    मैं अक्सर प्लेटफॉर्म टिकट लेकर रेलवे प्लेटफॉर्म पर बैठ जाता और बड़ी उम्र की महिलाओं को निहारा करता था.

    मुझे बड़ी उम्र की महिलाओं से बात करना बहुत अच्छा लगता था.

    हमारी कंपनी में 21 उम्र की अनुप्रिया ने ज्वाइन किया, उसकी यह पहली नौकरी थी.
    उसकी ट्रेनिंग की जिम्मेदारी मुझे मिली.

    अनुप्रिया साधरण नैन नक्श की गेहुंए रंगत की हंसमुख लड़की थी, उसका बदन खिलाड़ियों जैसा छरहरा था, फिगर 32बी-28-34 का था.

    वह खुलकर हंसती थी और जब वह हंसती थी, उसकी आंखें भी मुस्कुराती थीं.
    उस समय वह बहुत आकर्षक लगती थी.
    सच में उसमें एक कसक थी.

    अनुप्रिया जल्दी काम सीख रही थी. उससे कोई गलती होने पर जब मैं बताता, तो वह मेरी बात का बुरा नहीं मानती थी बल्कि गलती सुधारने की कोशिश करती थी.
    वह एक अच्छी सहकर्मचारी के रूप में मुझे काफी पसन्द थी.

    अनुप्रिया ने बताया कि वह अपनी माँ के साथ रहती है.
    जब उसकी उम्र 10 साल की थी, उसके पिताजी का देहांत हो गया था.
    उसकी माँ उस समय 30 साल की थीं.
    माँ ने उसकी देखभाल की, पढ़ाया और बढ़ा किया.
    उसकी माँ किसी स्कूल में पढ़ाती हैं.
    माँ उसकी सबसे अच्छी सहेली हैं.

    मैं अपने फ्लैट में अकेला रहता था, मेरे माता पिता पास के शहर में रहते हैं.

    मैं स्कूटर पर ऑफिस आता था.
    अनुप्रिया बस से आती थी.

    एक दिन बस की हड़ताल को गयी.
    मैंने अनुप्रिया से कहा- चलो मैं तुम्हें तुम्हारे घर छोड़ देता हूँ.

    वह स्कूटर पर बैठ गयी.

    अनुप्रिया- सर आज माँ घर पर हैं, यदि आपको जल्दी न हो तो कृपया मेरे घर आएं … हम सब साथ चाय पिएंगे.
    मैं राजी हो गया.

    हम दोनों अनुप्रिया के घर पहुंचे.

    अनुप्रिया की माँ ने दरवाज़ा खोला, तो अनुप्रिया ने मेरा परिचय कराया.
    उसकी माँ का नाम अनुश्री था.

    मैंने ध्यान से देखा तो पाया कि वे अनुप्रिया की माँ नहीं, बल्कि बड़ी बहन जैसी लग रही थीं.

    बल्कि मैं यूं कहूँ कि वे अनुप्रिया के समान दिख रही थीं, तो गलत न होगा.
    उनका बदन भरा हुआ था, न मोटी ना दुबली.

    मैं- आंटी, अनुप्रिया आपके बारे में हरदम बात करती है, कहती है आप उसकी सबसे अच्छी सहेली हैं.

    आंटी- अनुप्रिया मेरी बेटी ही नहीं, सबसे अच्छी सहेली ही है.
    उसी वक्त अनुप्रिया चाय बनाने गयी.

    आंटी- सर, अनुप्रिया आपकी बहुत तारीफ करती है. आप उसे अच्छे से काम सिखा रहे हैं. आपसे मिलकर मुझे बहुत अच्छा लगा.
    यह कहकर वे मुस्कुरा दीं.
    उनकी आंखें भी मुस्कुरा रही थीं.

    मुस्कुराते समय आंटी बहुत खूबसूरत लगीं.
    मैं मन्त्रमुग्थ होकर उन्हें देख रहा था.

    अनुप्रिया भी ऐसे ही हंसती है.

    मैं- आप मुझे मेरे नाम तपोश से बुलाएं प्लीज!

    चाय नाश्ते के समय आंटी के पूछने पर मैंने बताया कि मैं अकेला ही रहता हूँ.

    आंटी- तपोश, आज डिनर हमारे साथ करें, मैं खाना बनाती हूँ.
    यह कहकर वे उठने लगीं.

    मैं- आज मैंने घर पर ऑन लाइन चिकन बिरयानी मंगवाना तय किया था, यहीं मंगवा लेता हूँ.
    दरअसल मुझे आंटी से बात करना बहुत अच्छा लग रहा था.

    आंटी- ठीक है, पर पेमेंट मैं करूंगी!

    आंटी ने मेरे बारे में पूछा.
    मैंने बताया मेरे माता पिता अमुक शहर में रहते हैं, मैं उनकी एक मात्र संतान हूँ.

    आंटी अनुप्रिया के बचपन और उसकी शरारत की बात कर रही थीं और खुलकर हंस रही थीं.
    मैं मुग्ध होकर उनको देख रहा था.

    जब मैं बात कर रहा था, आंटी कभी कभी दीवार पर लगी फोटो को देखतीं, फिर मुझे देखतीं और किसी ख्याल में खो जातीं.

    कुछ देर बाद खाना आ गया.
    आंटी ने खाना ले लिया और अनुप्रिया प्लेट आदि लेने चली गयी.

    मैंने उठकर दीवार पर लगी फोटो को पास से देखा.

    आंटी और एक युवक की फोटो थी.
    युवक कुछ कुछ मेरे जैसा दिखता था.

    अनुप्रिया प्लेट लेकर आयी, उसने बताया वह फ़ोटो उसकी माँ और दिवंगत पिताजी की फोटो है.

    मैं समझ गया कि आंटी मुझे और फोटो की तरह बार बार क्यों देख रही थीं.

    इधर एक बात बताना चाहता हूँ कि जब भी मैं खाना खाता हूँ, खाते समय थोड़ा खाना मेरे कपड़ों पर गिर जाता है.
    उस दिन भी गिरा.

    अनुप्रिया- मेरे पिताजी भी जब खाना खाते थे, उनके कपड़ों पर भी खाना गिर ही जाता था.
    आंटी मुझे देखती हुई थोड़ी देर तक फिर अपने ख्यालों में खो गईं.

    फिर ख्यालों से उभरकर दूसरी बातें करने लगीं.
    मुझे आंटी का साथ अच्छा लगा.

    खाना होने के बाद मैं उनसे मुखातिब हुआ- आंटी, आपसे मिलकर मुझे बहुत अच्छा लगा!
    आंटी- मुझे भी अच्छा लगा, फिर आना!

    दूसरे दिन से ऑफिस के बाद मैं रोज अनुप्रिया को उसके घर के पास छोड़ने लगा.

    एक दिन अनुप्रिया ने बताया कि माँ इस समय घर पर नहीं रहतीं हैं, वे ट्यूशन पढ़ाने जाती हैं.
    यह बता कर वह चुप हो गई.

    उसने मुझे घर आने को नहीं कहा. शायद वह अकेले में मुझे घर पर बुलाने में संकोच कर रही थी.

    दस दिन बाद अनुप्रिया ने बताया- कल माँ का जन्म दिन है. माँ ने आपको आने का निमंत्रण दिया है, लंच साथ करेंगे.

    मैं फूल, गिफ्ट, मिठाई आदि लेकर उनके घर गया.
    आंटी ने दरवाज़ा खोला.

    वे काली शिफॉन की पतली साड़ी पहनी थीं. उनका ब्लाउज दिख रहा था, चूचे काफी बड़े थे.
    बाद में मुझे पता चला कि उनकी ब्रा का साइज 34 सी है.
    हल्के मेकअप में वे क़यामत सी सुंदर लग रही थीं.

    मैंने हैप्पी बर्थ डे कहकर उन्हें फूल और गिफ्ट देते हुए कहा- आप बहुत सुंदर लग रही हो.
    आंटी ने थोड़ा शर्माकर थैंक्स कहा.

    फिर उन्होंने बताया कि अनुप्रिया केक लेने गयी है.

    मुझे बिठाकर जल्दी में मेरे लिए पानी लेने जाने लगीं.
    तभी आंटी का पैर फिसल गया और वे गिर गईं.
    मैंने सहारा देकर उन्हें खड़ा किया.

    वे चल नहीं पा रही थीं.
    मैंने आंटी को गोद में उठाया, उनका भरा बदन मेरी छाती से लगा था, मुझे बहुत अच्छा लग रहा था.

    मेरा लंड खड़ा होने लगा.

    मैं आंटी को बेडरूम ले जाकर पलंग पर लिटाने लगा.

    उस समय मेरे होंठ आंटी के होंठों के काफी पास थे.
    मुझे उनके होंठ चूमने की तीव्र इच्छा हो रही थी.

    इतने में दरवाज़े की घंटी बजी, मैंने आंटी को लिटाकर दरवाज़ा खोला.
    अनुप्रिया अन्दर आयी, तो मैंने बताया कि आंटी के पैर में मोच आ गई है.

    वह जल्दी से भाग कर कमरे में चली गई.
    मैंने सोचा कि अच्छा हुआ अनुप्रिया आ गयी, मैं होंठ चूम लेता तो गड़बड़ हो जाती.

    अनुप्रिया नीली साड़ी और हल्के मेकअप में काफी सुंदर लग रही थी.

    मैंने आंटी के पैर की मोच लगी जगह बर्फ की सिकाई की, बाम लगाया और क्रेप बैंडेज बांध दी.

    अनुप्रिया ने उन्हें दर्द निवारक दवा दी.

    आंटी ने पलंग पर ही केक काटा और खाना खाया.

    उनका दर्द थोड़ा कम हुआ, तो मैं घर चला गया.

    मैं घर आकर सोचने लगा कि क्या मैं अनुप्रिया से शादी करूं!
    मैं समझ नहीं पा रहा था कि मैं अनुप्रिया के मधुर हंसमुख स्वभाव के कारण उससे शादी करने की सोच रहा हूँ या उसकी माँ के आकर्षण में उससे शादी करने की सोच रहा हूँ? या दोनों कारण हैं?

    ऑफिस के बाद स्कूटर पर अनुप्रिया को उसके घर छोड़ते समय हम दोनों कभी कभी किसी रेस्तरां में रुकते, नाश्ता करते और बातें करते.

    अनुप्रिया ने बताया- पिताजी के देहांत के बाद दोस्तों, रिश्तेदारों ने माँ को दूसरी शादी के लिए कहा, माँ राजी नहीं हुईं. उन्हें मुझे पढ़ाना और बड़ा करना था. जो जोड़े हमारे पारिवारिक मित्र थे, अब घर नहीं आते, उनकी पत्नियों को माँ से उनके पति का बात करना / मेलजोल में खतरा लगता था.

    एक महीने बाद मुझे समझ आया कि मैं अनुप्रिया से प्यार करने लगा हूँ.
    मैंने आंटी से बात करना तय किया.

    मैंने आंटी को फ़ोन किया- मैं आपसे चिकन पकाना सीखना चाहता हूँ, इस रविवार आ जाऊं?
    आंटी- बड़ी ख़ुशी से!

    मैं रविवार को चिकन लेकर उनके घर गया.

    मैं- आप मुझे और अनुप्रिया को खाना बनाना सिखाएं और एक बात … क्या आप मुझे भी अपना दोस्त मान सकती हैं?
    आंटी ने मुझसे हैंड शेक करते हुए कहा- आज से तुम मेरे दोस्त हो.

    तभी अनुप्रिया के फ़ोन पर कोई कॉल आ गई.
    तो वह बात करने दूसरे कमरे में चली गयी.

    मैं- आंटी मैं अनुप्रिया से शादी करना चाहता हूँ. आप की अनुमति मिले तो मैं अपने माँ पिताजी को आप दोनों से मिलने बुलाऊंगा.

    आंटी- मैं अनुप्रिया से बात करूंगी. अब तुम दोनों खाना बनाना सीखो.
    आंटी ने अनुप्रिया को बुलाया.

    हम दोनों सीखने लगे.

    दूसरे दिन शाम घर जाते समय.

    अनुप्रिया- तपोश सर, हम लोग गार्डन चलें क्या? कुछ बात करनी है.
    मैंने ओके कह दिया और हम दोनों एक गार्डन में आ गए.

    अनुप्रिया- माँ ने बताया कि आप मुझसे शादी करना चाहते हैं. मैं आपको पसंद करती हूँ, पर शादी नहीं कर सकती. मैं अपनी माँ को अकेला नहीं छोड़ सकती.
    मैं- हम दोनों आंटी का ख्याल रखेंगे, आंटी मेरी दोस्त बन गयी हैं.

    अनुप्रिया शादी के लिए राजी हो गयी.

    मैं- तुम मुझे तपोश कहो, सर नहीं!

    मेरे माँ पिताजी आंटी से मिले, शादी एक महीने बाद तय हुई.

    मैं ऑफिस से घर जाते समय अनुप्रिया को अपने फ्लैट ले जाने लगा.
    वहां हम दोनों बातें करते, आलिंगन और चुंबन करते.

    अनुप्रिया ने कह दिया कि इससे ज्यादा सब शादी के बाद!

    शादी के बाद मैं अनुप्रिया को लेकर बारात के साथ अपने पिताजी के घर गया.
    छोटी सी रिसेप्शन पार्टी हुई.

    सुहागरात को महिलाओं ने अनुप्रिया का सजाकर बेडरूम में बिठाया.

    मैंने बेडरूम में जाकर दरवाज़ा बंद किया, अनुप्रिया का घूँघट उठाया, वह ऐसे शर्मा रही थी … जैसे हम पहली बार मिले हों.

    वह सुंदर लग रही थी.
    मैंने उसकी सुंदरता की तारीफ की, सोने की चेन भेंट में दी.

    अब मैं उसे लिटाकर चूमने लगा, वह भी साथ दे रही थी.

    पता ही नहीं चला कब हमने एक दूसरे के कपड़े उतार दिए.

    मैंने अनुप्रिया के नंगे चूचे पहली बार देखे थे.
    एकदम सुडौल और तने हुए थे.
    भूरे निप्पल उसके चूचों की शोभा बढ़ा रहे थे.

    मैं एक चूचे को दबा रहा था, दूसरे को चूस रहा था.
    अनुप्रिया सिसकारी लेने लगी.

    मैंने पहले कभी सम्भोग नहीं किया था इसलिए मैं बेकरार था.
    मेरा लंड खड़ा हो गया था.

    अनुप्रिया चित लेटी थी, मैं उसकी फैले पैरों के बीच आया.

    अनुप्रिया ने तकिये के नीचे से टर्किस टॉवल निकाल कर अपनी कमर के नीचे रखा.

    अनुप्रिया ने नारियल तेल की बोतल मुझे देकर लंड की तरफ इशारा करके कहा- इस पर लगा लीजिए!

    मैंने लंड पर तेल लगाया और चूत में डालने की कोशिश करने लगा.
    मुझे छेद नहीं मिल रहा था.

    अनुप्रिया ने लंड पकड़ कर चूत के छेद पर रखा कर हुं कहा.
    मैंने एक झटके से लंड पेल दिया.

    अनुप्रिया के मुँह से हल्की चीख निकल गई, उसकी आंखों में आंसू थे … पर चेहरे पर मुस्कान थी.

    मैं कमर हिलाकर उसे चोदने लगा और कुछ ही मिनट बाद झड़ गया.
    मैं शर्माकर उसके ऊपर से उतर गया.

    मेरे लंड पर खून लगा था.
    अनुप्रिया की चूत और कमर के नीचे टॉवल पर भी खून था.

    मैंने पढ़ा था कि पहली बार सम्भोग के समय सील टूटने पर खून निकलता है.

    मैं जल्द झड़ने के कारण उदास होकर बैठा था.

    अनुप्रिया- चलिए बाथरूम में अंग धो लेते हैं, उदास मत होइए … मैंने पढ़ा है कि पहली बार में उत्तेजना से ऐसा हो जाता है.
    हम दोनों ने बाथरूम में जाकर लंड चूत धोये और उसने टॉवल को साबुन से धोकर सूखने टांग दी.

    हम दोनों पानी पीकर पलंग पर नंगे करवट में एक दूसरे की तरफ मुँह करके लेटे थे.

    अनुप्रिया मेरे बालों में हाथ फेरने लगी.

    जल्द ही हम दोनों चूमा-चाटी करने लगे.

    अनुप्रिया चित पैर फैलाकर लेटी, उसने नया टॉवल अपनी कमर के नीचे लगाया.
    मैंने लंड पर तेल लगाया और उसके ऊपर चढ़ गया.

    उसने लंड को छेद पर लगाकर कहा- धीरे धीरे शुरू कीजिये, मैं आपकी ही हूँ और रात भी काफी बाकी है.

    मैं उसे चूमते हुए धीरे धीरे चोदने लगा.
    इस बार मुझे बहुत मजा आ रहा था.

    अनुप्रिया नीचे से अपनी कमर उछाल रही थी.

    कुछ देर बाद मेरी चोदने की गति बढ़ गयी.
    हम दोनों ही कामुक भाव से सिसकारी ले रहे थे.

    करीब 15 मिनट बाद अनुप्रिया मचलने लगी.
    उसकी चूत से कामरस का फ़व्वारा निकला और वह निढाल हो गयी.

    मैंने थोड़ी देर तक उसे और चोदा, फिर झड़ गया तो उसकी चूत अपने वीर्य से भरकर उसके ऊपर ही लेट गया.
    अनुप्रिया ने मुझे आलिंगन में ले लिया.

    कुछ पल बाद लंड सिकुड़ कर चूत से निकल गया.

    हम दोनों बाथरूम से लंड चूत साफ करके वापस बिस्तर पर आ गए और कपड़े पहन कर लेट गए.

    मैं- मुझे बहुत मजा आया!
    अनुप्रिया- मुझे भी.

    मैं- एक बात बताओ … तुमने सेक्स के बारे में किससे सीखा?
    अनुप्रिया- मेरी सबसे अच्छी सहेली मेरी माँ ने मुझे यह सब बताया है!

    सुबह के समय हम दोनों ने फिर से सम्भोग किया.
    इस बार मुझे छेद मिल गया.

    हम दोनों हनीमून पर बाहर गए और रोज अनुप्रिया की माँ से फ़ोन पर बात करते.

    हम हर रात एक दो बार सम्भोग करते, सेक्स वीडियो देखकर हसबैंड सेक्स विद वाइफ में नए नए आसन आजमाते.
    हम दोनों 69 की पोजीशन में लंड चूत चूसते.

    मैं कभी अनुप्रिया को घोड़ी बनाकर पलंग के किनारे खड़ा करता, कभी वह फर्श पर खड़ी होकर सामने झुककर पलंग पर हाथ रखकर घोड़ी बन जाती और मैं फर्श पर खड़ा होकर उसकी कमर पकड़कर पीछे से चूत चोदता, उसके कूल्हे पर चांटे मारता.

    कभी वह मेरे लंड की सवारी करती.
    कभी हम मिसनरी आसन में सम्भोग करते.

    मैं अनुप्रिया को अनु नाम से पुकारने लगा, वह मुझे तुम कहने लगी.

    हम अपने शहर जहां हम नौकरी करते हैं, वापस आ गए.
    आंटी के पास मेरे फ्लैट की चाबी थी उन्होंने हमारा स्वागत किया.

    मैं अनुप्रिया की माँ को आंटी कह कर ही बुलाता रहा.

    आंटी- पगफेरे की रस्म के अनुसार तुम दोनों को मेरे घर आना होगा और रात को वहीं रहना होगा.
    वे चली गईं.

    मेरे दोस्त ने बताया था कि कभी कभी वह और उसकी पत्नी थोड़ी शराब पीते हैं. उसके बाद सेक्स में अलग ही मजा आता है.

    मैं- अनु आज रात हम पार्टी करेंगे, बकार्डी शराब पिएंगे!
    अनु- मैंने कभी नहीं पी, सुना है स्वाद बेकार होता है.

    मैं- बकार्डी, स्प्राइट के साथ पीते समय अच्छी लगती है, बस थोड़ी ही पिएंगे.
    अनु राजी हो गयी.

    उस रात पीने के बाद हमने जमकर मजा किया, अनु ‘लंड चूत चोदो …’ आदि बोलने से कतराती थी, उसने उस रात सब बोला.

    दूसरे दिन हम आंटी के घर गए.

    लंच के बाद मैं बेडरूम में लेटा था.
    बेडरूम का दरवाज़ा खुला था.

    अनु अपनी माँ से ड्राइंगरूम में बात कर रही थी.
    मैं अधखुली आंखों से उनको देख रहा था और उनकी बातें सुन रहा था.

    आंटी- सुहागरात कैसी रही? शर्माओ नहीं … मैं तुम्हारी सहेली हूँ!
    अनु- माँ तुम्हारी बतायी बातें बहुत काम आईं. हम दोनों सेक्स के बारे में अनाड़ी थे.

    उसने विस्तार से सुहागरात में क्या क्या हुआ, माँ को बताया.

    अनु- सेक्स में इतना मजा आता है, मुझे मालूम ही नहीं था.
    वह बताने लगी कि हम दोनों ने किस किस आसनों में सम्भोग किया.

    हमने बकार्डी पीकर कैसे मजा किया, वह भी बताया.

    मैंने देखा सेक्स की बात सुनकर आंटी का चेहरा लाल हो गया था, वे मुट्ठी भींच कर लम्बी लम्बी सांसें ले रही थीं.
    सांसों के साथ उनके चूचे ऊपर नीचे हो रहे थे.

    आंटी- मैं और तेरे पिताजी कभी कभी पीकर मजा करते थे.

    उस रात अनु अपनी माँ के साथ सोई.
    सुबह हम दोनों अपने घर चले गए.

    मेरे करीबी दोस्त ने हमें उसके घर बुलाया.

    डिनर के बाद अनु दोस्त की पत्नी से बात कर रही थी.
    मैं दोस्त के साथ बालकनी में बात कर रहा था.

    दोस्त- तुम अपने से बड़ी उम्र की महिलाओं को पसंद करते हो, उन्हें देखने स्टेशन जाया करते थे. मुझे लगा था तुम कोई बड़ी उम्र की महिला से शादी करोगे, पर भाभी तो तुमसे कम उम्र है.

    यह सब बात होने के बाद हम दोनों पति पत्नी घर आ गए.

    अनु- मैंने सुना तुम्हारा दोस्त कह रहा था कि तुम्हें बड़ी उम्र की महिलाएं पसंद थीं. अब समझी कि तुमने मेरी माँ को क्यों दोस्त बना लिया!
    वह यह सब कहकर हंसने लगी.

    मैं- अनु मैं तुम्हें पसन्द करने लगा था, मैं तुम्हारी माँ से दो बार मिला. उनसे बात की तो देखा कि तुम्हारी माँ इस उम्र में भी इतनी सुंदर और कठिनाइयों के बाद भी खुश रहती हैं. मुझे विश्वास हुआ 17 साल बाद भी तुम इतनी सुंदर और खुशमिजाज रहोगी. इसी लिए मैंने तुमसे शादी करने का फैसला किया. मेरी खुशकिस्मती है कि मुझे तुम जैसी पत्नी और आंटी जैसी दोस्त मिली. मैं आंटी को खुश और सुखी रहने की पूरी कोशिश करूँगा.

    अनु मेरे सीने से लग गई.
    उस वक्त आंटी नहीं थीं तो हम दोनों ने जमकर चुदाई का मजा लिया.

    अब इसमें आंटी का प्रवेश कैसे हुआ वह सब आप सेक्स कहानी के अगले हिस्से में पढ़ सकते हैं.

    आपको मेरी यह हसबैंड सेक्स विद वाइफ कहानी कैसी लगी, बताएं.

  • मौसी के साथ मस्त सेक्स

    चुदाई कहानी में मैं मौसी के घर रहने गया तो वे अकेली थी. मौसी की जवानी ने मेरे लंड को हिला दिया. मैं रात को उनके साथ सोया और उनके गर्म बदन का मजा लिया.

    मेरा नाम जय है. मैं दिल्ली का रहने वाला हूँ.
    मेरी हाइट 5 फुट 2 इंच है और मेरा लंड 5 इंच का है.

    ये मेरी जिंदगी की सच्ची Xxx मास्सी चुदाई कहानी है.

    मैं 12 वीं पास कर चुका हूँ.
    मेरी छुट्टियां चल रही थीं क्योंकि कॉलेज में एडमिशन अभी नहीं हुआ था.

    मैं अपनी मौसी के घर चंडीगढ़ गया हुआ था.

    मेरी मौसी का नाम रूपाली है.
    उनकी उम्र 32 साल है और उनके बूब्स का साइज 28 है.
    वे देखने में एकदम सेक्सी लगती हैं, बिल्कुल टोटल कांटा पीस हैं.

    जैसे ही मैं वहां पहुंचा, मुझे देखकर रूपाली मौसी एकदम से खुश हो गईं.
    उन्होंने मुझे गले से लगा लिया.

    आह … क्या सुकून मिला जब उनकी छातियां मेरी छाती से टच हो रही थीं, बहुत गर्म-गर्म लग रहा था.

    फिर उन्होंने मुझे अन्दर आकर बैठने को कहा.
    मैं अन्दर जाकर सोफे पर बैठ गया.

    मौसी पानी का ग्लास लेकर आईं और किचन में जाने लगीं.

    जब वे मुड़ीं, तो सच बता रहा हूँ कि उनकी गांड क्या मस्त मटक रही थी … कसम से बबाल लग रही थी.

    फिर मैंने मुँह-हाथ धोकर थोड़ा आराम किया, खाना खाया और सो गया.

    रात को जब हम दोनों खाना खाने बैठे तो मौसी मेरे बगल में बैठ गईं.

    मैंने मौका देखकर उनकी जांघ पर हाथ रख दिया.
    वे मुझे ऐसे करते देखकर थोड़ा सिहर गईं, फिर उन्होंने मेरी ओर मुस्कुरा कर देखा और खाना खाने लगीं.

    रात को जब सोने की बारी आई, तो मैंने मौसी से कहा- मैं रात को अकेला नहीं सोता हूँ!
    उन्होंने धीमे से कहा- मेरे पास आकर सो जाना.

    मैं अन्दर से खुश हो गया.
    मैं उनके पास सो गया लेकिन मैंने सिर्फ आंखें बंद की थीं, अन्दर से जाग रहा था.

    मौसी ने श्वेत सलवार कुर्ता पहना हुआ था.
    उस सलवार कुर्ता का कपड़ा बहुत झीना था, उसमें से उनकी ब्लू ब्रा पैंटी साफ दिख रही थी.

    मैं अपनी आधी खुली आंखों से उनकी ब्रा पैंटी को देखने लगा.

    मौसी ने मुझे देखा, उन्हें लगा मैं सो रहा हूँ लेकिन मैंने आंखें हल्की-सी खोल रखी थीं.

    कुछ देर बाद उन्होंने मेरे सामने ही कपड़े बदले.

    आह … साला आज तो किस्मत मेरे लौड़े पर बावली हुई जा रही थी.
    मौसी का क्या कामुक फिगर था.

    वे एकदम सनी लियोनी जैसी पॉर्न एक्ट्रेस लग रही थीं.
    ब्लू पैंटी और ब्रा में उनके बूब्स व गांड कमाल के लग रहे थे.

    मेरा मना Xxx मास्सी चुदाई करने का हो गया.

    फिर उन्होंने नाइट सूट पहना और मेरे पास आकर सो गईं.

    आधी रात को जब मौसी गहरी नींद में थीं, तब उनकी पीठ मेरी तरफ थी.

    मैंने उनकी गांड पर अपने हाथ से हल्का सा टच किया, ये देखने के लिए कि कहीं वे जाग तो नहीं रही हैं.

    उनकी तरफ से कुछ भी प्रतिक्रिया नहीं आई … वे तो गहरी नींद में थीं.

    फिर मैंने धीरे से पूरा हाथ उनकी गांड पर रख दिया और सहलाने लगा.

    कुछ देर बाद मौसी ने करवट बदली, अब उनका मुँह मेरी तरफ था.

    उनकी गर्म सांसें मेरे चेहरे से टकरा रही थीं.
    मुझे बड़ा मजा आ रहा था.

    मेरे अन्दर की हवस जाग गई थी और मेरा लंड पूरा खड़ा होकर कैबरे की जगह कोबरा डांस करने लगा.
    मैं कंट्रोल नहीं कर पा रहा था.

    मैंने धीरे से मौसी के चूचों पर हाथ फेरना शुरू किया.
    उनकी सांसें और गर्म होने लगीं, ऐसा लग रहा था जैसे उन्हें भी धीरे-धीरे सेक्स चढ़ रहा हो.

    मैंने गलती से उनके चूचे थोड़ा जोर से दबा दिए और मौसी की आंखें एकदम खुल गईं.

    वे मुझे नींद में देख रही थीं, मानो कह रही हों- कितना तड़प रहे हो सेक्स के लिए!
    फिर उन्होंने मुझे अपनी तरफ खींच लिया और लिप-टू-लिप किस शुरू हो गया.

    फिर उन्होंने मुझे अपनी तरफ खींच लिया और लिप-टू-लिप किस शुरू हो गया.

    मैं कुछ समझ ही नहीं पा रहा था कि इतनी जल्दी क्या हो रहा है.
    लेकिन किस करते हुए मजा आ रहा था.

    यह मेरी जिंदगी का पहला किस मेरी मौसी के साथ हो रहा था.
    बेहद मजा आ रहा था.

    फिर उन्होंने मेरे लंड पर हाथ फेरना शुरू किया जो पहले से ही कोबरा डांस कर रहा था.

    अब मैं भी उनके बूब्स दबाने लगा था.
    उनके बूब्स इतने बड़े थे कि एक हाथ से दबाए नहीं दब रहे थे.

    फिर मैं उनके एक दूध को पीने लगा.
    वे भी अपनी छाती आगे को करके मुझे चूची चुसवाने लगी थीं.

    उनकी चूची पीने में बेहद सुकून मिल रहा था. उनके बूब्स एकदम गर्म थे.
    कपड़ों के ऊपर से ही चूसने में ऐसा लग रहा था मानो जन्नत नसीब हो गई हो.

    मैं जोर-जोर से चूसे जा रहा था.

    मौसी बोलीं- बस पिएगा ही या और कुछ भी करेगा?
    अब मैंने उनकी चूत में एक साथ अपनी दो उंगलियां डाल दीं.

    मौसी की चूत एकदम लावा की तरह गर्म थी, थोड़ा थोड़ा पानी भी निकल रहा था.
    उनकी चुत में उंगली करने में मुझे बेहद मजा आ रहा था.

    नम चुत में उंगली करने से पुच-पुच की आवाज़ आ रही थी.
    मौसी भी मुझे किस कर रही थीं.

    कुछ मिनट तक ऐसा ही चलता रहा, फिर मौसी झड़ गईं.

    उनकी सांसें और तेज़ हो गईं.

    मैं उनकी गर्दन पर किस कर रहा था.

    फिर मैंने मौसी के सूट को उतार दिया और उन्हें पूरी नंगी कर दिया.

    फिर न जाने क्या मन हुआ कि मैं उठा और लाइट जलाकर देखने लगा.

    आह नंगी मौसी कसम से बवाल लग रही थीं.

    मैं भी नंगा हो गया और उनकी दोनों टांगों के बीच जाकर चूत चाटने लगा.
    मौसी ने एकदम से मेरा सिर पकड़ा और अपनी चुत की तरफ खींचने लगीं.

    मैं उनकी चूत को जीभ से चाटने लगा.
    मस्त नमकीन खट्टा सा स्वाद था.
    उनकी गुलाबी चूत एकदम रसीली हो गई थी.

    मौसी बोलीं- जल्दी से लंड डालो मेरी जान, मैं तड़प रही हूँ. मुझे और मत तड़पाओ!
    ये सुनकर मुझे और जोश चढ़ गया.

    मैंने झट से अपना लंड उनकी गुलाबी चूत पर रखा और ठेल दिया.
    मेरा लंड चूत को चीरता हुआ अन्दर गहराई में चला गया.

    मौसी बोलीं- थोड़ा धीरे डाल … आह दर्द हो रहा है!
    मैंने कहा- ठीक है!

    मैं थोड़ा रुक गया.

    मौसी ने कहा- तुझे इन सब चीजों का बहुत पता है … कितनी लड़कियां चोद चुका है?
    उनके मुँह से रंडी जैसी भाषा सुनकर मैं हैरान हो गया.

    ये क्या कह रही थीं?
    लेकिन थोड़ा सा बुरा भी लगा, क्योंकि मेरा अभी कोई बंदी सैट ही नहीं हुई थी.

    ये मेरी जिंदगी का पहला सेक्स था.
    मैंने मौसी से कहा- ये मेरा पहला सेक्स है!

    मौसी बोलीं- इतना अच्छा कैसे कर लेता है?
    मैंने कहा- सब जॉनी भैया के वीडियो से सीखा है!

    मौसी जॉनी सिन्स का नाम सुनकर थोड़ा मुस्कुरा दीं.

    फिर मैं धीरे-धीरे लंड अन्दर-बाहर करने लगा.
    अब हमें दोनों को मजा आने लगा.

    कुछ मिनट बाद मैंने लंड उनकी चूत से बाहर निकाला.

    मौसी बोलीं- क्या हुआ?
    मैंने कहा- मेरा लंड कभी किसी ने चूसा नहीं है!

    मौसी थोड़ा मुस्कुराईं और मेरा लंड हाथ में लेकर अपने होंठों पर लगाकर सूंघने लगीं.
    उनके नर्म होंठों के स्पर्श से मेरे शरीर में मानो करंट सा दौड़ने लगा.

    फिर उन्होंने मेरा लंड पूरा मुँह में ले लिया और गले तक उतार लिया.
    मैं मौसी का मुँह पकड़ कर उनके मुँह को ही चोदने लगा.

    करीब दस मिनट बाद मैं उनके मुँह में झड़ गया.

    मौसी ने मुझे देखा और मुँह खोल कर मेरा वीर्य मुझे दिखाती हुई एकदम से सारा माल पी गईं.

    थोड़ी देर बाद मैंने फिर से मौसी की चूत में लंड डाला.
    उनकी दोनों टांगें उठाकर अपने कंधे पर रखीं और लंड अन्दर-बाहर करने लगा.
    बहुत सुकून मिल रहा था.

    मौसी भी एक बार और झड़ गईं.
    उन्हें देखकर ऐसा लग रहा था, जैसे वह इस चुदाई से संतुष्ट हो गई हों.

    मैं जोर-जोर से धक्के लगाने लगा.
    पूरे कमरे में पुच-पुच की आवाज़ आने लगी.

    हम दोनों को ही भरपूर सुकून और आनन्द आ रहा था.

    फिर मैं झड़ने को होने लगा.
    मैंने मौसी से पूछा- कहां निकालूँ?
    उन्होंने कहा- अन्दर ही डाल दे.

    Xxx मास्सी चुदाई करके मैं मौसी की चुत के अन्दर ही झड़ गया और उनके ऊपर ही लेट गया.

    सुबह हो गई.

    रात की चुदाई के बाद मौसी बहुत खुश लग रही थीं.
    घर में हम दोनों के अलावा कोई नहीं था तो मौसी सिर्फ पैंटी में मेरे बाजू में लेटी थीं.

    मैंने उठ कर उनकी चूची मसली और उनके होंठों पर किस किया तो मौसी जाग गईं.

    सुबह सुबह की उत्तेजना बहुत ज्यादा होती है तो मैं उनकी चड्डी उतार कर उनके ऊपर चढ़ गया.
    मौसी ने भी मेरा साथ दिया और हम दोनों ने बीस मिनट तक बहुत ही मस्त चुदाई का मजा लिया.

    फिर हम साथ में नहाए और बाहर आकर मौसी चाय बनाने लगीं मैं उनके साथ किचन में मदद करने लगा.

  • रात में चाची की चुदाई

    Xxx चाची सेक्सी हिंदी कहानी में घर में ज्यादा मेहमानों के कारण मुझे चाचा के घर सोना पड़ा. बीच रात में देखा तो मैं चाची के साथ सोया हुआ था. मेरा ईमान डोल गया.

    दोस्तो, मेरा नाम कन्हैया है और मैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूं.

    मैं दिखने में बहुत स्मार्ट हूँ. मेरी हाईट 5 फुट 8 इंच है और मेरा औजार 6 इंच के खीरे जैसा मोटा है.
    यह अब तक अनेक औरतों और लड़कियों को चोद कर खुश कर चुका है.

    मैंने यहां हजारों सेक्स कहानियां पढ़ी हैं और अपना लंड भी खूब हिलाया है.

    आज इतने दिनों बाद मैंने सोचा क्यों न मैं भी अपनी चुदाई की कहानी आपको सुनाऊं.

    यह फैमिली फक सेक्स रिलेशन की Xxx चाची सेक्सी हिंदी कहानी आज से करीब 5 साल पहले की उस वक्त की है जब मैं बीए में पढ़ता था.
    यह सेक्स कहानी मेरी और मेरी चाची की है.

    मैं अपनी चाची को बहुत समय से चोदना चाहता था. मेरी चाची बहुत सुंदर और सेक्सी हैं.
    एकदम पतली फिगर, मटकती चाल … आह मैं जब भी उनको देखता था … मेरा लंड पानी छोड़ने लगता था.

    उनकी हाईट मुझसे बहुत कम है.
    वे केवल 5 फिट की थीं.

    मैं चाची को चोदने का मौका देखता रहता था क्योंकि मेरे चाचा और चाची का अक्सर झगड़ा रहता था.
    उनके झगड़े का मैं फायदा उठाना चाहता था.

    फिर एक सुहानी रात में मेरा इंतजार खत्म हो गया.
    मैंने उस दिन कल्पना भी नहीं की थी.

    सर्दी का समय था.
    दिसंबर शुरू ही हुआ था.

    तब शादियों का सीजन चल रहा था.
    उस दिन हमारे यहां गेस्ट आए हुए थे.

    सिटी में घर छोटे होने के कारण एडजस्ट करना पड़ता है.
    हमारा और चाची का घर बराबर में ही है

    उस शाम सब मेहमान शादी में से सीधा हमारे घर आ गए.
    सबने चाय नाश्ता किया और खाना खाया ही था कि तभी मेरी मौसी का फोन आया.

    वे भी आने के लिए बोलने लगीं.
    उनके बच्चे छोटे थे.

    अब मुझे सोने के लिए चाची के घर जाना पड़ा.
    वहां सभी बात कर रहे थे.
    मैं भी बैठ गया.

    मुझे जल्दी नींद आने लगती है तो मैं वहीं लेट कर सो गया चाची भी वहीं लेट गईं.
    उनको सुबह ड्यूटी भी जाना था.

    मैं और चाची एक ही रजाई में लेटे थे मेरी रात को आंख खुली तो मेरे होश उड़ गए और मेरी आंखें फटी की फटी रह गईं.

    चाची अपने दोनों पैर चौड़े करके लेटी हुई थीं और उनका कुर्ता ऊपर हो गया था.

    यह देख कर मेरे अरमान जागने लगे मैंने फिर से रजाई चाची के ऊपर डाली और तभी एक हाथ चाची के पेट पर रख दिया.

    कुछ देर ऐसे ही लेटा रहा उधर से कोई हलचल नहीं हुई तो मेरी हिम्मत और बढ़ गई.

    मैंने धीरे-धीरे हाथ नीचे किया और सलवार के ऊपर से उनकी चूत को टच किया.
    नीचे चाची ने कुछ नहीं पहना था.
    उनकी चुत की दोनों फांकें अलग-अलग महसूस हो रही थीं.

    मेरी धड़कनें तेज हो गईं, पसीना आने लगा.
    मुझे डर भी लग रहा था कि कहीं थप्पड़ न पड़ जाए.

    फिर भी मैं धीरे-धीरे उनकी चूत में ऊपर से उंगली करता रहा.
    अचानक चाची ने करवट ली और अपनी गांड मेरी तरफ कर ली.

    पहले तो मैं डर गया कि कहीं वे जाग तो नहीं गईं.
    फिर भी मैं वैसे ही लेटा रहा.

    पांच मिनट बाद मैंने चाची को पीछे से गले लगा लिया.
    वे थोड़ा और पीछे हो गईं और मेरा लंड उनकी गांड में लगने लगा.

    कुछ पल बाद उन्होंने दोबारा करवट ली.
    अब उनका मुँह मेरे मुँह से दो इंच की दूरी पर था.

    उन्होंने मुझे गले लगाया और एक पैर मेरे पैरों पर रख दिया.
    मेरी सांस और उनकी सांस आपस में टकरा रही थीं और पेट से पेट मिल रहे थे.

    वह अहसास मेरी जिंदगी का सबसे हसीन पल था.

    मैंने अपना मुँह आगे बढ़ाकर उनके होंठों से अपने होंठ टच किए.

    लंड में करंट-सा दौड़ गया और उनकी जांघ में रगड़ मारने लगा.

    चाची और मैं कुछ देर ऐसे ही लेटे रहे.
    फिर उन्होंने अपने होंठ खोल दिए और मैंने उनका निचला होंठ पकड़ लिया.

    मैं धीरे-धीरे चाची की जीभ को चूसने लगा.
    चाची सोने का नाटक कर रही थीं.

    अब हम बिलकुल चिपके हुए थे.
    उनकी चूत में खुजली होने लगी तो वे फिर से सीधी लेट गईं.

    मैंने फिर से उनकी चूत पर हाथ रखा और ऊपर से उंगली करने लगा.

    मेरी हिम्मत बढ़ने लगी.

    मैंने उनका नाड़ा खोलने की कोशिश की लेकिन वह नहीं खुला.

    चाची ने सोने का नाटक करते हुए खुजाने के बहाने नाड़ा खोल दिया.

    मैंने फिर से हाथ लगाया तो देखा नाड़ा खुला हुआ है.

    मेरे लिए वह नाड़ा नहीं, मेरे लंड की किस्मत का दरवाजा था.

    Xxx चाची सेक्सी हिंदी कहानी बनने लगी थी.

    मैंने अन्दर हाथ डाला तो चूत बहुत गीली थी जिससे मेरी उंगली आसानी से अन्दर चली गई.

    अब मैं दूसरी उंगली डालने वाला था कि चाची ने अपनी एक टांग मेरे ऊपर रख दी.
    उनकी चूत खुल गई.

    अब मैं आसानी से उंगली कर रहा था.
    थोड़ी देर में चाची ने पानी छोड़ दिया.

    फिर वे उठकर बाथरूम चली गईं.

    मैंने टाइम देखा तो सुबह के 4:30 बज चुके थे.
    अब मैं परेशान था कि छेद का जुगाड़ कैसे होगा.

    मैं लेटा रहा कि शायद चाची आएंगी.

    लेकिन बहुत देर हो गई.

    मुझे भी मूतने की जरूरत पड़ी और डरते-डरते मैं ऊपर चला गया.

    चाची बाहर बैठी थीं.
    उन्होंने नहाने के लिए गीजर चला रखा था.

    मैं मूतने अन्दर चला गया.

    मैं मूत ही रहा था कि चाची पीछे से आईं और उन्होंने मेरे लंड को पकड़ लिया.
    मैं डरने की एक्टिंग करने लगा.

    मैंने कहा- चाची, ये क्या कर रही हो आप … छोड़ो इसे!

    लड़कों का तो सुबह-सुबह हमेशा खड़ा ही रहता है.

    इतने में मूतना खत्म हुआ.

    चाची ने मेरे लंड को आगे-पीछे करना शुरू कर दिया.
    मेरी हालत खराब होने लगी.

    चाची बोलीं- साले हरामजदे … पूरी रात सोने न दिया … आग लगा दी मेरी चूत में. अब कौन बुझाएगा इसे?

    यह सुनकर मैं चुप खड़ा रहा.

    चाची नीचे बैठ गईं और मेरे लंड पर गर्म पानी डालकर उसे मुँह में लेकर चूसने लगीं.

    मैं तो जन्नत में पहुंच गया और जल्दी ही उनके मुँह में छूट गया.

    चाची लंड की रबड़ी खाती हुई बोलीं- जल्दी जा और जीने का गेट लगा कर आ … कहीं कोई ऊपर न आ जाए!
    मैं मन ही मन खुश हो रहा था.

    मैं जल्दी से गेट लगाकर वापस आ गया.
    जैसे ही मैं बाथरूम में घुसा, देखा कि चाची पूरी नंगी खड़ी थीं और अपनी चूत को रगड़ रही थीं.

    चाची ने कहा- नीचे बैठ!
    मैं नीचे बैठ गया.

    उन्होंने एक टांग मेरे कंधे पर रखी और अपनी चूत मेरे मुँह पर अड़ा दी.

    मैंने भी देर न करते हुए चूत चाटना शुरू कर दिया जो मेरी सबसे पसंदीदा चीज थी.
    चाची का पानी फिर से छूट गया.

    मैंने उसे नहीं पिया.
    चाची ने गर्म पानी से चूत साफ की और नीचे जाने को कहा.

    मैंने जिद की- मुझे आपको चोदना है!
    लेकिन उन्होंने मना कर दिया.

    मेरा दिमाग खराब हो गया.
    मैं उदास हो गया.

    तभी चाची ने मेरा लंड हाथ में लिया और उसे चूमा.
    फिर मेरे होंठों को चूमा और बोलीं- कोई ऊपर आ जाएगा, मैं नहा लूँ. ये काम फिर कभी करेंगे!

    मैंने उदास मन से उनकी चूत पर एक किस किया.
    चाची हंसने लगीं.

    मैं नीचे आ गया.
    फिर सब उठ चुके थे.
    मुझे मौके की तलाश बेकरार कर रही थी.

    अगली रात को चमत्कार हो गया.
    चाचा को बाहर शादी में जाना था.

    चाची ने तबीयत खराब होने का बहाना बना दिया और अपने देखभाल के लिए मुझे अपने पास बुलाया लिया.

    रात को दस बजे तो चाची ने दरवाजे बंद करने का आदेश दिया और खुद अपने सारे कपड़े उतार कर पूरी नंगी होकर रजाई में घुस गईं.

    मैंने दरवाजे बंद करते समय देख लिया था कि नंगी चाची आज चुदाई की मस्ती में थीं.

    दरवाजे बंद करके मैं घूमा और अपने कपड़े उतारने लगा.
    चाची मुस्कुरा कर मेरे लौड़े को देख रही थीं.

    मैं फुल नंगा होकर चाची के साथ रजाई में लेट गया और हम दोनों लिपट कर चुम्मी करने लगे.

    कुछ देर बाद चाची बोलीं- तेरा औजार तो बड़ा मस्त है?
    मैंने कहा- हां. अब इसे चूस कर कड़क करो तब आपको इसका कमाल दिखाता हूँ.

    चाची झट से रजाई में अन्दर घुस गईं और मेरे लौड़े को चूसने लगीं.

    जवान लड़के के लंड को कड़क होने में कितना समय लगना था, झट से लोहे की रॉड बन गया.

    मैंने चाची को अपने बाजू में खींचा और रजाई को हटा कर अलग कर दिया.

    फिर चुदाई की पोजीशन में आकर मैंने चाची की चुत में लंड का सुपारा सैट किया और उसी पल चाची ने गांड उठा दी.

    मेरा लंड अन्दर सरक गया.
    चाची आह की आवाज के साथ लौड़े को लील गईं और चुदाई चालू हो गई.

    मैंने बीस मिनट तक धकापेल चुदाई की और उसके बाद चाची झड़ गईं.
    मैंने एक कपड़े से चाची की चुत को पौंछा और उन्हें घोड़ी बना दिया.

    चाची बोलीं- तू अभी तक नहीं झड़ पाया … क्या दवा खाई है तूने?
    मेरे लंड में अभी झांट असर नहीं हुआ था तो मैंने कहा- अभी तो आधे रास्ते में भी नहीं आया हूँ चाची!

    वे सहम कर बोलीं- साले चुत का भोसड़ा बनाएगा क्या?
    मैं हंस दिया और उनकी सवारी गाँठने लगा.

    दस बारह मिनट बाद मैंने कहा- अब झड़ने पर आ रहा हूँ. माल किधर निकालूँ?

    चाची बिना कुछ मेरे लौड़े से हट गईं और लंड को मुँह में लेकर चूसने लगीं.

    मैंने चाची के चूचे मसलते हुए लंड का फव्वारा उनके मुँह में ही छोड़ दिया और चाची सारी मलाई चाट गईं.

    हम दोनों थक कर लेट गए.

    उसके बाद चाची ने मेवा मसाले वाला दूध बनाया और एक बार और धमाकेदार चुदाई का खेल हुआ.

    फिर हम दोनों कपड़े पहन कर सो गए.

  • घर में हुई सबके साथ मस्त चुदाई



    मेरे परिवार के पास बहुत पैसा है. सब अय्याश हैं. एक बार मैं घर पहुंचा वहां 2 गोरखे नेपाली नौकर, उनकी बीवियां, मेरे मम्मी पापा, दो बहनें सब नंगे चुदाई कर रहे थे.
    मेरा नाम विक्कू है दोस्तो, मैं 27 साल एक मद मस्त नौजवान हूँ और एक बहुत बड़ी कंपनी में काम करता हूँ.
    यह Xxx ग्रुप पोर्न स्टोरी मेरे घर की है.
    मेरा ऑफिस घर से बहुत दूर है आने जाने में दो दिन लगते हैं.
    इसलिए मैं अभी अकेले ही आफिस के पास रहता हूँ और ऑफिस आराम से आता जाता हूँ।
    हमारे ऑफिस में 2 सिक्योरिटी गार्ड हैं।
    दोनों ही नेपाली हैं, नाम उनके गामा और गुरंग है।
    वे दोनों ही शादीशुदा है और अपनी अपनी पत्नी के साथ पास में ही रहते हैं।
    दोनों ही ड्यूटी बड़ी मेहनत से करते हैं, हमारे बॉस उनसे बहुत खुश भी रहतें हैं।
    कुछ दिन के बाद कंपनी का ऑफिस एक ऐसी जगह शिफ्ट हो गया जहाँ सिक्योरिटी गार्ड की कोई जरूरत नहीं थी।
    ऐसे में कंपनी ने उन दोनों को नौकरी से निकाल दिया।
    नौकरी से निकलने के बाद वो दोनों मेरे घर आये और फूट फूट कर रोने लगे।
    कहने लगे- अब हमारा क्या होगा? हमारी तो रोज़ी रोटी चली गई। अब हम क्या करेंगे? कहाँ जायेंगे?
    मुझे उन दोनों पर दया आ गई तब मैंने कहा अच्छा रुको मैं कुछ कोशिश करता हूँ।
    फिर मैंने अपने पापा से बात की।
    सच्चाई यह है दोस्तो … मेरे पापा का बहुत बड़ा कारोबार है।
    वे एक बहुत बड़े और सफल बिज़नेस मैन हैं।
    मैंने जब इन दोनों की दर्द भरी कहानी सुनाई.
    तो पापा ने कहा- ठीक है. दोनों को हमारे पास भेज दो मैं उन्हें नौकरी दे दूंगा।
    मैंने जब यह बात उन दोनों को बताई तो वे लोग ख़ुशी के मारे उछल पड़े और मेरे पैरों पर गिर पड़े।
    मैंने दोनों को परिवार सहित भेज दिया।
    मुझे यही भी खबर मिली की दोनों को गार्ड का काम सौंप दिया गया है और उनकी बीवियों को घर के काम काज में मेड की हैसियत से रख लिया गया है।
    इस तरह दोनों नेपालियों की डबल इनकम होने लगी।
    उनकी ज़िन्दगी में जबरदस्त खुशहाली आ गई।
    हमारे पापा की एक बहुत बड़ी कमजोरी है, वे अय्याश प्रकृति के व्यक्ति हैं और उन्हें खूबसूरत लड़कियां और बीवियां चोदने का शौक है।
    कुछ कुछ ऐसा मेरे साथ भी है।
    मैं शादी के पहले 2 लड़कियों को चोद चुका था और मोहल्ले की एक औरत को चोदा था जिसका नाम मिसेज मोनिका है।
    मैं उसे भाभी कहता हूँ।
    फिर कुछ दिन बाद उसने मुझसे अपनी ननद चुदवाई और एक महीने के बाद अपनी देवरानी भी चुदवा ली।
    मैंने इन तीनों को कई बार चोदा है और खूब हचक हचक के चोदा है।
    आज भी जब घर जाता हूँ तो इनको चोद कर आता हूँ।
    यह बात मेरी मम्मी और बहनों को पता है।
    आगे आपको मम्मी और बहनों के बारे में भी मालूम हो जायेगा।
    एक बात समझ लो की हमारी फैमिली एक मॉडर्न फैमिली है, सच कहूं तो अय्याश फैमिली है।
    हमारे पास पैसा बहुत है, हम सब जवान हैं तो अय्याशी क्यों न करें?
    मुझे घर से आये हुए लगभग एक साल हो चुका था।
    एक साल से मैं यहाँ अकेला ही रहता था बाकि हमारी फैमिली वाले सब घर पर ही थे.
    यहाँ तक कि मेरी बीवी अर्चना भी।
    एक दिन मेरा मन घर आने का हुआ तो मैंने एक हफ्ते की छुट्टी ली और घर आ गया।
    मेरा घर बहुत बड़ा है।
    घर क्या पूरा महल है।
    तीन मंजिला की एक भव्य आलीशान बिल्डिंग है

    मैं अंदर दाखिल हुआ तो मुझे कोई दिखाई नहीं पड़ा। मैं समझा कि शायद सब लोग ऊपर होंगे.
    तो मैं फ़ौरन पहली मंजिल पर चढ़ गया।
    वहां सब जगह देखा, कहीं कोई दिखाई नहीं पड़ा।
    मन में शंका हुई कि कहाँ गए सब लोग?
    फिर दूसरी मंजिल पर गया तो वहां भी पूरा सन्नाटा।
    कहीं कोई नहीं।
    तब मुझे किसी अनहोनी की शंका होने लगी, मैं मन ही मन घबराने लगा और आखिरी मंजिल की तरफ कदम बढ़ाने लगा तब मुझे कुछ आवाज़ें सुनाईं पड़ी तो दिल को बड़ी तसल्ली हुई।
    मैं जल्दी से उस बड़े ए सी हाल में पहुँच गया।
    वहां जो हो रहा था उसे देख कर दंग रह गया।
    ऐसा तो मैंने कभी सोचा भी न था।
    मैं चुपचाप एक कोने में खड़े होकर वहां का नज़ारा देखने लगा।
    नज़ारा इतना रोमांटिक था कि मेरा लण्ड साला खड़ा हो गया।
    मैंने देखा कि घर के सारे लोग चुदाई में लगे हुए हैं; खूब जम कर अय्याशी हो रही है।
    मेरी मम्मी सुनीता एकदम नंगी नंगी नेपाली गामा के लण्ड पर कूद रहीं हैं।
    उनके बड़े बड़े दूध उछल रहे हैं और लण्ड पूरा का पूरा उसकी चूत में घुसा हुआ है।
    मेरी बड़ी बहन रूचि दूसरे नेपाली के लण्ड पर कूद रही है और झमाझम चुदवा रही है।
    मेरी छोटी बहन रीता पहले वाले नेपाली के मुंह पर नंगी नंगी बैठी हुई अपनी चूत चटवा रही है।
    मेरी बीवी भी दूसरे नेपाली के मुँह पर बैठ कर अपनी बुर चटवा रही है।
    मेरे पापा के लण्ड पर गामा की बीवी बैठी हुई अपना भोसड़ा चुदवा रही है और गुरुंग की बीवी पापा के मुंह पर बैठी हुई बुर चटवा रही है।
    इतने में घर का नौकर बिट्टू आ गया और मम्मी के सामने नंगा खड़ा हो गया।
    मम्मी ने गप्प से उसका लण्ड अपने मुंह में भर लिया।
    मम्मी की चूत में लण्ड और मुंह में लण्ड देख कर मैं बहुत ज्यादा उत्तेजित हो गया।
    रूचि और रीता को बुर चटवाते हुए देखकर मेरे मुंह में पानी आ गया।
    मेरा मन हुआ कि मैं पहले मम्मी का भोसड़ा चोद डालूं और फिर दोनों बहनों की चूत में लण्ड पेल पेल कर पूरा मज़ा ले लूँ।
    फिर क्या … Xxx ग्रुप पोर्न लाइव देख मेरा लण्ड साला मेरे काबू के बाहर हो गया।
    वो साला पैंट के बाहर निकल कर टनटनाने लगा।
    दोनों नेपाली की बीवियां भी बड़ी सेक्सी और हॉट थीं।
    मैंने ठान लिया कि मैं इन दोनों बीवियों को उनके हसबैंड के सामने पटक पटक के चोदूंगा और सबके सामने चोदूंगा।
    तब तक गुरंग की बीवी गिनी ने मुझे देख लिया और मेरा खड़ा लण्ड देख लिया।
    वह नंगी ही दौड़ी पड़ी मेरी तरफ और मेरे पास आकर मेरा लण्ड पकड़ लिया।
    लण्ड पकड़े पकड़े वह मुझे सबके सामने ले गई।
    मुझे देख कर मम्मी बोली- अरे विक्कू बेटा, तू कब आ गया? तूने पहले तो बताया नहीं?
    मैंने कहा- अच्छा हुआ मम्मी जो मैंने पहले नहीं बताया। अगर बता दिया होता तो ये तुम सबकी अय्याशी कैसे देखने को मिलती?
    मम्मी ने कहा- अच्छा अब देख ही लिया है तो तू भी शामिल हो जा इसमें। मैं तेरी हरकतें जानती हूँ। तू मोनिका को चोदता है, उसकी ननद की बुर में लण्ड पेलता है, उसकी देवरानी को भी चोदता है तू! मुझसे कुछ भी छुपा नहीं। अब घर में ही माँ बहन चोद कर मज़ा ले ले न? बाहर जाने की जरूरत क्या है? तेरा लौड़ा तो भोसड़ी का बहुत बड़ा हो गया है।
    उधर से रूचि दीदी बोली- अरे हां विक्कू, तेरा लौड़ा तो बड़ा मोटा भी है।
    फिर छोटी बहन रीता बोली- हां भइया, तेरा लण्ड हम सबकी चूत फाड़ डालेगा जरूर!
    मम्मी ने कहा- लण्ड इतना बढ़िया है तो फाड़ेगा ही सबकी चूत।
    इतने में गामा की बीवी बोली- पहले तो मैं फड़वाऊंगी अपनी चूत इसके लण्ड से। मेरी नज़र बहुत दिनों से थी विक्कू के ऊपर। मैं तो इसके नाम की उँगली भी किया करती थी।
    तब तक मेरा लौड़ा साला और ज्यादा तन गया।
    फिर मैंने गामा की बीवी को उठा के पटका और सीधे लण्ड पेल दिया उसकी चूत में।
    मैं बेधड़क होकर बड़ी बेशर्मी से उसे चोदने लगा।
    मम्मी और दोनों बहने बड़े गौर से मुझे चोदते हुए देखने लगीं।
    आखिरी राउंड में मैंने देखा कि बिट्टू कुछ ज्यादा ही उत्साहित है।
    उसकी नज़र दोनों नेपालियों की बीवियों पर टिकी थी।
    गोरी गोरी नंगी नंगी दोनों बीवियां सच में बड़ी हॉट लग रहीं थीं।
    बिट्टू उनके पास गया और एक की चूचियाँ मसलने लगा दूसरी की चूत।
    वह दोनों को दबा कर गचागच चोदने लगा।
    तब तक इधर मेरी बड़ी बहन ने मेरा लण्ड पकड़ कर बड़ी मस्ती से हिलाकर बोली- विक्कू, तेरा लौड़ा बड़ा क्यूट है, बड़ा प्यारा और ये साला माँ को चोद कर बहुत बड़ा मादरचोद हो गया है. अब मैं इसे बहनचोद बनाऊंगी।
    ऐसा बोल कर रूचि दीदी ने लण्ड मुंह में भर लिया और चूसने लगीं.
    मैं उसकी चूत में उँगली करने लगा।
    उधर पापा ने लण्ड मेरी छोटी बहन रीता की चूत में पेल रखा था।
    रीता भी पापा का लण्ड पूरा पेलवाकर चुदाई का मज़ा लेने लगी थी।
    मैंने देखा कि मेरी बीवी अर्चना गामा का लण्ड अपनी गांड में डाले हुए है।
    गामा मेरी बीवी की गांड मारने में जुटा हुआ है।
    मेरी मम्मी गुरुंग का लण्ड अपनी चूचियों के बीच पेलवा कर मज़ा ले रही हैं।
    इस तरह पूरा दिन पूरी रात हम लोग चुदाई में लिप्त रहे।
    न थके और न रुके बल्कि चूत अदल बदल कर चोदते रहे।
    मैंने मम्मी को खूब चोदा दोनों बहनों को चोदा और नेपालियों की दोनों बीवियों को भी खूब पटक पटक के चोदा।
    बिट्टू ने भी मेरी माँ चोदी, मेरी बहनों की चूत में और गांड में लण्ड पेला और मेरी बीवी की बुर भी बड़े मजे से लिया.
    उसके बाद नेपाली बीवियों को भी चोद चोद कर मज़ा लिया।
    नेपालियों ने भी सबको चोदने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
    मेरी माँ बहन चोद चोद पूरे टाइम उत्तेजित होते रहे।
    मेरे पापा ने भी सबको बड़े प्यार से चोदा, उन्हें सबसे ज्यादा मज़ा नेपालियों की बीवियां चोदने में आया।
    दूसरी रात में मैं अचानक छत पर पहुँच गया।
    मैंने देखा कि वहां मेरी मम्मी रेलिंग पर खड़ीं हैं।
    वे अकेली ही थी और रेलिंग पकड़ कर थोड़ा आगे की तरफ झुकी हुईं थीं।
    उनकी गांड पीछे से बड़ी सेक्सी लग रही थी।
    बस मेरा मन मचल गया तो मैंने पीछे से उसकी साड़ी उठा कर लण्ड उसकी चूत में घुसा दिया।
    मम्मी भी मस्ती के मूड में आ गईं।
    वे अपनी गांड आगे पीछे करती हुई मुझसे बड़े प्यार से रेलिंग पकड़े पकड़े चुदवाने लगीं।
    बड़ा बढ़िया रोमांटिक मौसम था।
    ठंडी ठंडी हवा चल रही थी।
    तो मैंने धीरे से लण्ड उसकी चूत से निकाल कर उनकी गांड में घुसेड़ दिया।
    वे बोली- अरे विक्कू … यह क्या किया तूने? मैं गांड किसी को नहीं देती।
    मैंने कहा- मुझे नहीं मम्मी, मेरे लण्ड को दे दो न अपनी गांड प्लीज। मेरा लण्ड तेरी गांड का भूखा है।
    इसी बीच मैंने लण्ड उसकी गांड में ही अंदर बाहर करने लगा और धीरे धीरे स्पीड बढ़ाने लगा।
    कुछ देर बाद मम्मी ने खुद कहा- बेटा विक्कू, गांड चुदाने में
    इतना मज़ा आता है, यह मुझे नहीं मालूम था। तुम पूरा लौड़ा पेल दो अंदर और धकाधक चोदो मेरी गांड। अब तो मैं भोसड़ा चुदवाने के साथ साथ गांड भी चुदवाया करुँगी अपनी।
    यह सुनकर मेरा लण्ड साला और ज्यादा सख्त हो गया।
    मैंने फिर मम्मी की चूत और गांड दोनों घपाघप चोद कर खूब मज़ा लिया।
    मैंने इसी तरह रूचि और रीता की भी गांड मारी और दोनों नेपाली बीवियों की गांड में भी खूब जम कर लण्ड पेला और कई बार पेला।
    फिर क्या … हम सबने सबकी चूत और गांड चोदने का पूरा मज़ा लिया।

  • घर बुलाकर गर्लफ्रेंड की चुदाई

    मेरी एक गर्लफ्रेंड थी लेकिन दूसरे शहर की … हम फोन पर खूब बातें करते. हमारा मिलने का मन था लेकिन हम मिल नहीं पा रहे थे. जब हम मिले तो …

    हैलो फ्रेंड्स, कैसे हैं आप लोग. मेरा नाम रूबल शर्मा है और मैं बांदा उत्तर प्रदेश का रहने वाला हूँ. मैं देखने में साधारण ही हूँ. औसत बॉडी है.

    अन्तर्वासना पर ये मेरी पहली सेक्स स्टोरी है गर्लफ्रेंड की चुदाई की. चूंकि पहली बार है इसलिए ग़लती हो जाना पक्का है. प्लीज़ नजरअंदाज कर दीजिएगा.

    ये कहानी आज से 2 साल पहले की है, जब मैं अपना ग्रॅजुयेशन कर रहा था. उन दिनों मेरी एक गर्लफ्रेंड थी, जिसका नाम नम्रता था. वो ग्वालियर से थी, देखने में थोड़ी सी सांवली थी, लेकिन थी सेक्सी.

    हम लोग फोन बार खूब बात किया करते थे. उसका मुझसे मिलने का बड़ा मन था और मुझे तो था ही. लेकिन हम दोनों के मिलने का कुछ नहीं हो पा रहा था.

    एक बार मेरे घर में शादी थी, तो सब लोगों को दिल्ली जाना था. मेरा मन नहीं था. तो मैं घर में ही रुक गया.

    उस दिन जब मेरी उससे बात हुई और मैंने उससे अपने यहां आने का कहा. पहले तो वो थोड़ा डर गयी, लेकिन फिर मेरे कहने पर मान गयी.
    उसने अपने घर में कह दिया कि कॉलेज का ट्रिप है, तो बाहर जाना है.

    मैंने उसका रात वाली गाड़ी से रिज़र्वेशन भी करा दिया. रात को गाड़ी आई, तो उसे लेने मैं स्टेशन आ गया. वहाँ से उसको लिया और अपने घर ले आया. रास्ते में वो मुझसे चिपक कर बैठी थी.

    घर ले आने के बाद मैं उसे अपने कमरे में ले गया और उसे बिठा दिया. उसका गला सूख रहा था, तो उसने मुझसे पानी मांगा. मैंने उसे पानी पीने को दिया.

    वो अभी भी डर रही थी. मैं उसके बाजू में ही बैठा था. हम दोनों इधर उधर की बातें ही कर रहे थे. थोड़ी देर बाद वो नॉर्मल हुई, तो मैंने उससे बात करते करते उसके बाल खोल दिए.

    वो शर्मा गयी और उसने मेरे कंधे पर अपना सिर रख लिया. मैंने उसके सर को उठाया और किस करने लगा. उसने आँखें बंद कर लीं.

    थोड़ी देर किस करने के बाद मैंने उसे बेड पर लिटा दिया और उसके ऊपर आकर उसे किस करने लगा. उसने भी मुझे अपने से चिपका लिया.

    मैंने उसे हाथ ऊपर करने वो कहा, तो उसने हाथ ऊपर कर लिए. मैंने उसकी कुरती उतार दी. अन्दर उसने एक छोटी सी गुलाबी रंग की ब्रा पहनी हुई थी.

    मैंने एक पल उसकी ब्रा में कैद उसकी चुचियों को निहारा और अगले ही पल उसकी पूरी बॉडी पर किस करने लगा. मेरे ताबड़तोड़ चूमने से उसकी सांसें तेज हो गईं और वो भी बहकने लगी.

    जब मैंने उसकी नाभि में जीभ घुमाई, तो वो तड़प उठी और उसने मेरा सिर दबा लिया. मैं धीरे धीरे किस करता हुआ नीचे आया और उसकी सलवार भी उतार दी. मेरे सामने वो ब्रा पेंटी में थी और शर्मा रही थी. उसकी पेंटी गीली हो गयी थी.

    मैंने झुक कर चुत को भी चूम लिया. चुत पर मेरे होंठों की छुअने पाते ही उसके मुख से एक सिसकारी निकल गयी.

    अब मैं खड़ा हुआ और मैंने अपनी चड्डी छोड़ कर सारे कपड़े उतार दिए. मैंने उसको भी खड़ा कर दिया. उसके पैर काँप रहे थे, तो मैंने उसे सहारा दिया और उसे चूमते हुए दीवार से चिपका दिया और उसकी पीठ पर किस करने लगा.

    वो ‘आहह आहह’ करते हुए आहें भर रही थी.

    इसी बीच मैंने उसकी ब्रा और अपनी चड्डी को उतार दिया. वो अभी भी दीवार से लगी हुई थी, तो मैं भी पीछे से जाकर उससे चिपक कर उसकी गर्दन और कंधे पर किस करने लगा. मेरा लंड उसकी गांड में गड़ने लगा. वो लंड का स्पर्श पाकर एकदम से चिहुंक गई.

    मैंने उसको सीधा किया, तो उसने अपनी आँखें बंद की हुई थीं. मैंने उसका हाथ अपने लिंग पर रखते हुए कहा- ये ले तेरी अमानत.
    लंड छूते ही वो शर्मा गयी और उसने झट से हाथ हटा लिया.

    अब मैं उसके मम्मों को चूसने लगा और वो ‘आह आआअहह आआ…’ करते हुए सिसकारियां लेने लगी.

    एक बार मैंने उसके निप्पल को काट लिया, तो वो ‘आउच …’ बोल कर बोली- आराम से चूसो … ये अब सिर्फ़ तुम्हारे ही हैं.

    फिर मैंने अपना हाथ उसकी पेंटी में डाल दिया और उसकी चूत सहलाने लगा उसकी चूत पर थोड़े से बाल थे.

    मैंने उसकी टाँगें खोल दीं और पेंटी उतारने लगा.
    उसने मेरा हाथ पकड़ लिया.
    मैंने पूछा- क्या हुआ जानू … अब कैसी शर्म? अब तो सब कुछ मेरा है ना!

    उसने हंस कर हाथ हटा दिया. मैंने उसकी पेंटी उतारी, तो उसकी चूत पूरी गीली हो गयी थी. मैंने चुत पर हाथ लगाया तो वो ‘उई … माँ … सीईईई..’ कर उठी.

    मैं नीचे बैठ कर उसकी चूत चाटने लगा. वो तड़प उठी और ‘उफफफ्फ़ आआहह … सीईईईई.’ करने लगी. उसने अपने हाथों से मेरे सिर को अपनी चूत पर दबा लिया. मैं बेतहाशा उसकी चूत चाटे जा रहा था.

    वो लगातार ‘उम्म्म्म … अहहहह … आराम से.’ बोलते हुए सिसकारती जा रही थी. मैंने कुछ पल बाद उसका एक पैर अपने कंधे पर रखा और उसकी चूत पूरी अन्दर तक और पूरी पीछे तक चाटने लगा. मेरे मुँह में उसकी झांटों के बाल आ रहे थे, लेकिन चुत चाटने में मज़ा भी बहुत आ रहा था.

    कोई पांच मिनट तक चुत चाटने के बाद मैं उसको बेड पर ले आया और लिटा दिया. मैंने उसकी टाँगें खोल दीं और मैं उसकी चूत में उंगली डालने लगा, तो उसे तकलीफ़ होने लगी. उसकी चूत बहुत टाइट थी.

    मैंने पास रखी वैसलीन लगाई और फिर कोशिश करने लगा. इस बार मेरी आधी उंगली अन्दर चली गयी.

    वो तड़प उठी और बोली- बस करो, इतना ही रहने दो.
    मैंने कहा- जानू अभी तो आधी ही अन्दर गयी है … अभी तो मैं इसमें पूरा हाथ भर का अपना अन्दर डालूँगा.
    इस पर वो बुरी तरह से शर्मा गयी और बोली- तुम ना बहुत बदतमीज़ हो.

    उसकी इस बात से मुझे हंसी आ गयी और मैंने उसे किस कर लिया. मैं उसके ऊपर लेट गया और हमने एक दूसरे को कसके चिपका लिया.

    एक पल बाद मैं उठ कर चुदाई की पोजीशन में आया और मैंने उसे ऊपर से नीचे तक देखा.
    वो शरमा कर बोली- ऐसे क्या देख रहे हो?
    मैंने कहा- तू बहुत खूबसूरत है.
    वो शर्मा गयी.

    उसने पूछा- क्या मैं कपड़ों में खूबसूरत नहीं लगती हूँ?
    मैं हंस दिया और अपनी बात को पलटते हुए बोला- यदि तुम कपड़ों में खूबसूरत नहीं दिखतीं तो हम दोनों में प्यार कैसे हो सकता था.
    वो हंसी और बोली- तो अभी ये बात कहने का क्या मतलब है?
    मैंने उसकी चूची मसली और कहा कि मेरा मतलब ये था कि तुम पूरी नंगी होने पर और भी खूबसूरत लग रही हो.

    उसने समर्पण की मुद्रा में अपने दोनों हाथ फैला कर मुझे आगे बढ़ने का इशारा किया.

    मैंने धीरे धीरे उसकी टाँगें खोलीं और अपना लंड उसकी चूत के मुहाने पर रख कर घिसने लगा. उसकी चूत पानी छोड़ रही थी.
    उसने आँखें खोलीं और कहा- जानू आराम से करना … मेरा पहली बार है.
    मैंने कहा- चिंता मत करो बिल्कुल तकलीफ़ नहीं होगी.

    मैंने धीरे धीरे लंड घिसते हुए एक झटका मारा और मेरा लंड उसकी चूत में घुस गया.

    उसी पल वो चिल्ला दी- उई … माँ … मर गई … आआहह … फट गई … मैं मर गयी.

    मैं उसके ऊपर झुक गया और उसे किस करने लगा. उसके मम्मों को चूसने लगा. वो शांत हुई ही थी कि मैंने थोड़ा रुक कर एक और झटका दे मारा. इस बार मेरा पूरा लंड उसकी चूत में समा गया.

    उसकी चूत में से खून निकल रहा था और आँखों में से आँसू बह रहे थे. मैंने उसे सहलाते हुए कहा- बस हो गया जानू …
    अब मैं धीरे धीरे शॉट्स मारने लगा. थोड़ी देर में उसको मज़ा आने लगा और वो भी गांड उठा उठा कर मेरा साथ देने लगी.
    मैं दनादन धक्के मार रहा था और वो ‘आआह … अहह … मजा आ रहा है … और तेज करो …’ बोल रही थी.

    कोई बीस मिनट बाद हम दोनों ही झड़ गए. मैं उसके ऊपर गिर गया. उसने मुझे कसके चिपका लिया और ऐसे ही किस करते हुए हम एक दूसरे की बांहों में सो गए.

    उस रात हम दोनों ने चार बार सेक्स किया और सुबह देर तक सोने के बाद हम दोनों साथ ही नहाये और बाथरूम में भी एक बार सेक्स किया. फिर मैं उसे मोहल्ले वालों की नजर से बचाते हुए स्टेशन छोड़ कर आ गया.

    दोस्तो, ये थी मेरी गर्लफ्रेंड की सील तोड़ चुदाई … आपको मेरी ये गंदी कहानी कैसी लगी 

  • कुँवारी बुर की चुदाई पहली बार

    कुँवारी बुर की चुदाई की कहानी में पढ़ें कि कैसे मेरे पड़ोस में रहने वाली लड़की ने अपनी कामवासना से मजबूर होकर अपने कमसिन जिस्म को मेरे हवाले कर दिया.

    हाय दोस्तो, मेरा नाम सुमीत शर्मा है। वैसे तो मैं दतिया का रहने वाला हूं लेकिन मेरी जॉब के कारण फिलहाल इंदौर में रहता हूं। मेरी ऊंचाई 5 फुट 8 इंच है।

    मेरी शादी को दो साल हो चुके हैं। मेरी बीवी बहुत सुंदर है और मेरा बहुत खयाल रखने वाली है। हमारा वैवाहिक जीवन बहुत अच्छा चल रहा है। में और मेरी बीवी शुरू से ही सेक्स का पूरा मजा लेते हैं। हमने कई तरीके से और नई-नई जगह चुदाई करने का मजा लिया है। जैसा कि मैंने आपको बताया कि मेरी जॉब घर से दूर है तो मैं यहां अपनी बीवी के साथ ही रहता हूँ।

    यह कहानी 6 महीने पुरानी है। हमारे घर के सामने एक थोड़ा ग़रीब परिवार रहता है, परिवार में चार सदस्य हैं पति, पत्नी, उनकी बेटी सोनम जिसकी उम्र 19 साल है और छोटा बेटा पंकज जिसकी उम्र 11 साल है।
    मैं जॉब के कारण दिनभर बाहर ही रहता हूँ इसलिये मेरी बीवी बाजार के छोटे मोटे काम के लिए सोनम को ही बुला लेती है। और सोनम भी खुशी खुशी उसकी सहायता के लिए आ जाती है।

    हम इस घर में 2 साल पहले ही आये थे। तब मैंने सोनम पर कभी इतना ध्यान नहीं दिया था।

    पर कुछ दिन पहले जब मैं ड्यूटी के लिए निकल रहा था तो सामने से आ रही सोनम को देखा। उसके स्तन 32 के भरे पूरे सुडौल हो चुके थे और उसकी गांड 36 की हो गई थी। सोनम को देखकर मुझे विश्वास नहीं हुआ कि ये वही सोनम है जो मेरे यहाँ आने पर दुबली पतली हुआ करती थी। मैं समझ गया सोनम का शरीर अपनी जवानी के पूरे उफान पर है।

    कुछ दिन बाद मेरी बीवी को मेरी सास की तबियत खराब होने के कारण अपने मायके जाना पड़ा। मैं उसको घर छोड़कर वापस आ गया। सोनम के घर में टी वी न होने के कारण सोनम और उसका भाई लगभग रोज ही हमारे घर टी वी देखने आया करते थे। सोनम के परिवार और हमें किसी को कोई आपत्ति नहीं थी इसलिए ये लोग देर रात 11-12 बजे तक टी वी देखते रहते थे।

    उस दिन भी सोनम और उसका भाई टी वी देखने आए हुए थे। मेरी बीवी के न होने के कारण में अकेला था। उस दिन सोनम के भाई को 10 बजे ही नींद आने लगी और वो सोने के लिए घर चला गया।

    अब घर में केवल में और सोनम ही थे।

    जब तक हमें इस बात का अहसास न हुआ, तब तक सब नार्मल रहा। लेकिन जब हमें इस बात का अहसास हुआ कि मैं और एक जवान लड़की रात में अकेले मेरे घर में हैं तो हम दोनों ही थोड़े असहज हो गए। लेकिन हम दोनों ही सामान्य दिखाने की कोशिश करते रहे और टी वी पर आ रही फिल्म को एन्जॉय करते रहे।

    उस दिन टी वी पर आ रही फिल्म भी कुछ ज्यादा ही कामुक दृश्यों से भरी हुई थी। फ़िल्म में हीरो हिरोइन एक दूसरे को फ़्रेंच किस कर रहे थे और एक दूसरे के कपड़ों में हाथ डाल रहे थे। ये सब देखकर मेरा बुरा हाल था और शायद सोनम भी मुश्किल से अपने आप को सामान्य दिखा पा रही थी।

    मेरा लंड पैंट के अंदर खड़ा हो चुका था और थोड़ा थोड़ा लीक कर रहा था। जब मुझसे रहा नहीं गया तो मैं उठकर बाथरूम चला गया और मुठ मार कर अपनी वासना को शांत किया।

    जब मैं बाथरूम से वापस आया तो देखा सोनम अपने सलवार में हाथ डाल कर अपनी बुर को सहला रही है। मैं समझ गया कि ये लड़की अपनी बुर की चुदाई के लिए तड़प रही है.

    मुझे वापस आया देखकर उसने तुरंत अपना हाथ निकाल लिया और फिर से सामान्य दिखने की कोशिश करने लगी।

    पर अब अपनी बुर को छेड़ने के कारण वो अपनी तेज साँसों पर नियंत्रण रखने में असमर्थ थी। उसकी तेज सांसें मुझे उसके अंदर लगी वासना की आग का पूरा हाल बयान कर रही थी।

    अबकी बार मैं जान बूझ कर सोनम के बिल्कुल पास ही बैठा और उसकी जांघ पर हल्के से हाथ रखकर हटा लिया। इस पर उसने कोई रिस्पांस नहीं दिया।

    सच कहूं तो मेरी भी बिल्कुल हिम्मत नहीं हो रही थी क्योंकि आज तक मैंने अपनी बीवी के अलावा किसी और लड़की को वासना की नजर छुआ भी नहीं था। लेकिन आज सोनम को अपने पास पाकर मैं खुद को रोक नहीं पा रहा था। मैं किसी भी हालत में आज सोनम को अपना बनाना चाहता था।

    इसीलिए मैंने एक बार और हिम्मत करके अपना एक हाथ उसके कंधे पर रखकर हल्के से दबा दिया। इस बार मेरा प्रयास सफल हुआ, सोनम ने लंबी सांस लेकर अपना सिर मेरे कंधे पर टिका दिया। उसने एक बार आशा भरी नजरों से मेरी आँखों में देखा और अगले ही पल टी वी पर चल रहे सेक्सी सीन को देखने लगी।

    फिर कुछ देर बाद बोली- अंकल जी, क्या शादी के बाद सब ऐसा ही करते हैं?
    मैंने उसके होंठों पर उंगली रखते हुए कहा- अंकल जी मत बोलो … केवल सुमीत कहो।
    उसने हल्की सी स्माइल दी, फिर पलट कर अपना सर मेरे सीने में गड़ाते हुये मुझे हग कर लिया।

    मैंने भी उसे कस कर अपने सीने में दबा लिया। अब मैं उसके बड़े बड़े स्तनों को अपने सीने पर महसूस कर सकता था।

    अब मैंने उसके मुंह को थोड़ी पकड़ कर उठाया और उसके होंठों को अपने होंठों पर लगा कर किस करने लगा, वो भी मेरा साथ दे रही थी।
    चुम्बन करते करते मैंने उसके कुर्ते में पीछे से हाथ डाल दिया और उसकी पीठ सहलाने लगा। शायद अब तक पहली बार किसी मर्द ने उसके होंठों और उसकी नंगी पीठ को छुआ था इसलिए इस अद्भुद आनन्द के कारण उसकी आंखें बंद हो गई और वो सिसकारियाँ लेने लगी।

    कुछ देर बाद उसे अहसास हुआ कि वो वासना में बहक गई है और उसने मुझे रोका, बोली- सुमीत जी रहने दीजिए ना!
    लेकिन मना करते हुए भी वो मर्द के स्पर्श से प्राप्त आनन्द को भुला नहीं पा रही थी इसलिए मना करते हुए उसकी आवाज में आत्मविश्वास की कमी थी।

    मैंने उससे पूछा- क्या हुआ सोनम?
    वो बोली- रात के 10:30 बज चुके हैं। कहीं किसी को पता चल गया तो मेरी बहुत बदनामी होगी.
    और यह कहते हुए उसकी आँखों में आंसू आ गए।

    मैंने उसके माथे पर चूमते हुए उससे कहा- सोनम, तुम चिंता मत करो, तुम्हारी बदनामी मेरी बदनामी है. इसलिए किसी को कुछ पता नहीं चलेगा. और वैसे भी तुम 12 बजे तक तो टी वी देखती ही हो. लेकिन अगर फिर भी तुम डरती हो तो रहने दो, मैं कोई जबरदस्ती नहीं करूँगा।

    मेरी बातों से उसका डर कम हो गया और वो एक बार फिर मेरी बांहों में आ गई। अब मैंने उसके पूरे चेहरे को चूमना शुरू किया उसके कानों की लौ को किस किया और कपड़ों के ऊपर से पीठ को सहलाता रहा।

    मैंने कपड़ों के ऊपर से ही उसके बूब्स को सहलाना शुरु किया. उस पर सेक्स का शुरूर चढ़ रहा था और उसकी तेज साँसें इसका सबूत दे रही थीं। ऊपर से सहलाने के बाद मैंने उसके कुर्ते में ऊपर से हाथ डालकर उसके बूब्स को ब्रा के ऊपर से दबाया. कोई विरोध न होने पर मैंने उसकी ब्रा को कुर्ते के अंदर ही ऊपर उठाकर उसके नंगे स्तन को अपने हाथ में लेकर दबाया।

    पहली बार किसी मर्द के द्वारा अपने स्तन को छूने के अहसास से वो सिहर उठी और उसकी साँसें पहले से भी ज्यादा तेज हो गयीं।

    अब मैंने देर न करते हुये उसके कुर्ते को कमर से पकड़कर उतारने के लिए उठाया। सोनम मेरा हाथ पकड़कर धीरे से बोला- रहने दो ना प्लीज।
    लेकिन उसकी आवाज में असहमति नहीं बल्कि एक लड़की की शर्म थी।

    मैंने उसका हाथ हल्के से हटाकर उसके कुर्ते को फिर उठाया. इस बार सोनम ने दोनों हाथ उठाकर कुर्ता निकालने में अपना सहर्ष सहयोग प्रदान किया। अब मेरे सामने उसका एक नंगा स्तन था जो गोल मटोल सुडौल तथा निप्पल पर हल्के भूरे रंग का था, उसके निप्पल देखकर मुझे अपनी सुहागरात याद आ गई।
    उसके निप्पल बहुत ही सुंदर थे।

    अब मैंने देर न करते हुए उसके निप्पल को चूसना शुरू कर दिया। इस अद्भुत अहसास के रोमांच से उसका हाथ अपने आप ही मेरे सर पर सहलाने लगा। सोनम ‘और चूसो … और चूसो!’ बड़बड़ाने लगी।

    मैंने स्तन चूसते चूसते उसकी सफेद ब्रा को उसके शरीर से अलग ही कर दिया। अब वो ऊपर से पूरी नंगी थी। मैं बारी बारी से उसके दोनों स्तनों को चूस रहा था और वो इस असीम आनन्द में गोते खा रही थी।

    अब में उससे अलग हुआ, ऊपर से नीचे तक उसको देखा।
    उसने स्त्रीसुलभ लज्जा से अपनी आंखें अपने हाथों से बंद कर ली।

    मैंने उसके हाथों को आंखों से हटाकर उसको किस किया और उसे गले लगाकर बोला- आई लव यू सोनम!
    सोनम ने भी ‘आई लव यू टू!’ सुमीत बोलकर मुझे किस किया।

    तब मैं उसे उठाकर अपने बेड पर ले गया और बहुत प्यार से उसे वहां लिटाया। बेड पर ऊपर से नंगी सोनम किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी।
    अब मैंने अपने अंडरवियर को छोड़कर बाकी सारे कपड़े निकाल दिए।
    सोनम मेरी छाती के बालों को देखकर मंत्रमुग्ध हो गयी।

    मैं सोनम के बगल में लेट गया और उसको ऊपर से नीचे तक चुम्बन करने लगा। उसके बूब्स को पीने के बाद उसकी नाभि को चूमा। वो बस आंख बंद करके आहें भर रही थी।

    अब मैंने उसके सलवार का नाड़ा ढीला किया और सलवार को नीचे की तरफ खींचा. उसने अपनी गांड उठाकर सलवार निकलने में अपना सहयोग दिया।
    अब वो केवल पैंटी में थी।

    उसकी पैंटी भूरे रंग की थी तथा इलास्टिक के पास थोड़ी फटी हुई थी। उसके काम रस के कारण उनकी पैंटी बुर के पास पूरी भीग चुकी थी। कुँवारी बुर की चुदाई के लिए तैयार हो रही थी.
    मैंने उसकी बुर की दरार में लगे उसके काम रस को पैंटी के ऊपर से ही चाटा तो वो चिंहुक उठी और गांड उठाकर मजे लेने लगी।

    अब मैंने अपनी दो उंगली उसकी पैंटी की इलास्टिक में पैंटी उतारने के लिए डाली। उसने पैंटी को पकड़कर अपनी बुर को नंगा होने से रोका, बोली- ये मत करो ना!
    मैंने उसके चेहरे की तरफ देखा उसके चेहरे पर डर और शर्म के भाव साफ दिखाई दे रहे थे।

    सोनम के चेहरे का ये भाव, डर समाज की बदनामी का नहीं बल्कि उसकी पहली चुदाई का था। मैंने उसके हाथ को हल्के से हटाकर उसकी पैंटी को धीरे से निकाला।
    उसने अपने कूल्हे थोड़े से उठाकर अपना विरोध खत्म करते हुए पैंटी भी निकल जाने दी।

    अब वो पूरी नंगी मेरे सामने पड़ी हुई थी।

    उसकी बुर थोड़ी उभरी हुई तथा हल्की सी सांवली थी, उसकी छोटी छोटी झांटें बुर रस में भीगी हुई चमक रही थी. बुर के होंठ एक दूसरे से चिपके हुए थे। बुर की दरार ऐसी थी जैसे किसी ने पेंसिल से बना दी हो।

    उसकी बुर को देखकर समझ गया था कि सोनम के बाद उसकी प्यारी बुर को देखने वाला पहला खुशनसीब इंसान मैं ही था।
    मैंने सोनम की बुर को चूम कर के उसकी मुंहदिखाई उसे दी.

    बुर पर चुम्बन से सोनम की साँस एक बार फिर तेज हो गई।

    अब मैंने अपना अंडरवियर भी निकाल दिया औऱ सोनम को सलामी दी रहे अपने 8 इंच के लंड को सोनम के हाथों में दे दिया। सोनम ने कांपते हुए हाथों से मेरे लंड को पकड़ा।

    सोनम ने लंड को आगे पीछे करके अच्छी तरह देखा जैसे कोई इंसान किसी नई चीज को पहली बार देखता है और लंड के सुपाड़े को किस करके छोड़ दिया।

    अब मैं नीचे आया और सोनम के पैरों के बीच टांगों को फैलाकर बैठ गया। मैंने अपनी जीभ बुर की दरार में डाल दी और उसकी बुर को चूसना शुरु कर दिया।

    बुर पर हुये इस हमले से सोनम पागल होने लगी और मेरे बालों को पकड़कर अपनी बुर पर दबाने लगी.
    वैसे भी मेरी बीवी कहती है कि मैं बुर बहुत अच्छी चूसता हूँ।

    थोड़ी देर बुर चुसवाने के बाद सोनम का अपने ऊपर कंट्रोल खत्म हो गया ‘और चाटो … चूसो … पी जाओ मेरा पूरा पानी … लाल कर दो मेरी बुर को चूस चूस के …’ ये सब बड़बड़ाने लगी।

    थोड़ी देर में सोनम बुर की चुदाई के लिए गिड़गिड़ाने लगी और बोली- प्लीज चोद दो मुझे, नहीं तो मैं मर जाऊँगी. प्लीज … प्लीज … प्लीज … चोद दो न मुझे … फाड़ दो मेरी बुर को … अब सहन नहीं होता।

    मैंने भी अब कुँवारी बुर की चुदाई में और देर करना ठीक नहीं समझा और अपना लंड उसकी बुर के छेद पर टिका दिया। सोनम की बुर के रस और मेरे लंड के प्रिकम के कारण चिकनाई की कोई कमी नहीं थी।

    सोनम को मैंने बोला- आज तुम्हारा पहली बार है तो थोड़ा दर्द होगा, बाद में मजा आएगा।
    उस प्यासी जवानी के अंदर चुदाई की आग लगी हुई थी, उसने बोला- सुमीत आप देर मत करो, बस फाड़ दो, मेरी बुर को सारा दर्द मैं सह लूँगी।

    मैंने सोचा ‘ठीक है मुझे क्या करना … जब ये बोल ही रही है तो!’ मैंने लंड को बुर के छेद पर सेट करके हल्का का धक्का लगाया.
    सोनम को थोड़ा सा दर्द हुआ और उसकी आह निकल गई लेकिन फिर भी वो बोली- सुमीत प्लीज जल्दी करो … फाड़ दो मेरी बुर को।

    दोबारा मैंने देर न करते हुये, अपने दोनों हाथों को सोनम के कंधों पर टिकाकर जोरदार धक्का दिया, मेरा आधा लंड सोनम की कौमार्य झिल्ली को फाड़ता हुआ उसकी बुर में समा गया और वो दर्द के कारण बिन पानी की मछली की तरह तड़पने लगी।

    सोनम गिड़गिड़ाने लगी- सुमीत प्लीज छोड़ दो मुझे … मुझे कुछ नहीं करना, मैं मर जाऊंगी।

    उसकी बुर सच में फट चुकी थी और उसमें खून बह रहा था जो मेरे लंड को गीला कर चुका था।

    मैंने सोनम को उसकी बुर के बारे में कुछ नहीं बताया, नहीं तो वो मुझे आगे नहीं बढ़ने देती।
    मैं उसी अवस्था में लेटे लेटे उसके बूब्स को सहलाता रहा। जब उसका दर्द कम हो गया तो मैं अपने आधे ही लंड को अंदर बाहर करने लगा।

    थोड़ी देर बाद उसे मजा आने लगा, तब मैंने उसे बताया कि अभी आधा ही लंड अंदर गया है। अगर वो कहे तो पूरा डाल दूँ।
    सोनम बोली- अब दर्द तो नहीं होगा?
    मैंने कहा- थोड़ा सा होगा। लेकिन यह दर्द एक बार हर लड़की को सहना ही पड़ता है। आज के बाद दर्द नहीं होगा, केवल मजा आयेगा।
    उसने कहा- ठीक है लेकिन आराम से डालना।
    मैंने ओके बोला. पर मुझे पता था कि लंड कैसे डालना है।

    मैंने कुछ देर और आधे लंड को अंदर बाहर किया और उसके बूब्स से खेलता रहा।
    जब मुझे लगा कि अब सोनम सामान्य हो चुकी है और दर्द सहने के लिये तैयार है. तब मैंने अपने दोनों हाथों से उसके कंधों को दबाया और पूरी ताकत से अपना लंड उसकी बुर में डाल दिया।

    लंड बुर की सारी दीवारों को फाड़ता हुआ सीधा बच्चेदानी से टकराया।
    सोनम की चीख निकल गयी, उसकी आंखें फटी की फटी रह गईं, शरीर अकड़ गया और वो दर्द के कारण लगभग बेहोश हो गई.

    मैं डर गया और कुछ देर तक उसी अवस्था में उसके ऊपर लेटा रह के उसे सहलाता रहा. कुछ देर बाद जब उसका दर्द कुछ कम हुआ तो मैंने धीरे धीरे धक्के लगाना शुरू किये।

    जब उसे भी मजा आने लगा तो वो भी चूतड़ उठाकर चुदाई में अपना सहयोग देने लगी। अब मैं उसे पूरे जोर से चोद रहा था, मेरा लंड उसकी बच्चेदानी से टकरा रहा था। अब उसका दर्द बिल्कुल खत्म हो गया था। वो आह आह करके अपनी पहली चुदाई का पूरा मजा ले रही थी।

    करीब 10 मिनट की हाहाकारी चुदाई के बाद सोनम और मैं एक साथ झड़े।

    मैंने उसे किस किया और बगल में लेट गया। कुँवारी बुर की चुदाई हो चुकी थी.

    उसने अपनी बुर देखी तो पूरी सूज गयी थी। बुर से उसके पानी और मेरे वीर्य का मिश्रण निकल रहा था और उसके खून से बेडशीट पर बहुत बड़ा धब्बा पड़ गया था।
    खून देखकर वो डर गई तो मैंने उसे समझाया- हर लड़की के पहली बार खून आता है इसमें कोई डर की बात नहीं है।

    उसकी बुर में बहुत दर्द हो रहा था जिसके कारण जब वो उठ कर चली तो वो लंगड़ा के चल पा रही थी। मैंने उसे एक दर्दनिवारक गोली दी और कहा- अब तुम घर जाओ क्योंकि रात के 12 बज चुके हैं. कहीं किसी को शक न हो जाये।

    वो घर चली गयी।

    अगले दिन मैंने उसे एक गर्भ निरोधक लाकर दी।

    इस घटना के बाद भी सोनम हमारे घर आती रही लेकिन वो सब फिर कभी नहीं हुआ क्योंकि मुझे सोनम की बदनामी का डर था।

    अभी 2 महीने पहले सोनम की शादी हो गई। मैंने उसकी शादी में उसके पिताजी की बहुत सहायता की।

    सोनम जब भी मायके आती है तो हमारे घर मेरी बीवी से मिलने जरूर आती है और मुझे मुस्करा के नमस्ते करती है।
    वो अपने ससुराल में बहुत खुश है और मैं भी उसे खुश देख कर खुश हूँ.

  • मेरी गर्लफ्रेंड की चुत की कहानी

    मैं अपनी कुंवारी गर्लफ्रेंड की चुत की कहानी बता रहा हूँ कि कैसे मैंने उसे पटाकर गर्लफ्रेंड बनाया और लम्बे अरसे तक रोमांस के बाद मैं उसकी चूत की सील तोड़ पाया.

    दोस्तो, मेरा नाम रजा है, मेरी उम्र 21 साल है, और मैं मुरादाबाद के पास सम्भल नामक कस्बे से हूँ। मेरी हाईट 5 फीट 10 इंच है, मेरा लण्ड 7 इंच लम्बा और 3.5 इंच मोटा है। मैं शहर का रहने वाला हूँ और देखने में अच्छा हूँ।

    यह मेरी पहली सैक्स स्टोरी है जो मैं आप सब लोगों को बताने जा रहा हूँ, यह एक सच्ची घटना है।

    मैं अपनी गर्लफ्रैंड के बारे में बता दूँ, उसका नाम ज़ेबा है, उसका रंग बिल्कुल दूध से सफेद है। उसका फिगर 32-34-36 है। अदाएँ ऐसी की हर कोई पागल हुआ फिरता था, लेकिन वह बुर्के में रहती थी, वह दिखने में बिल्कुल फिल्मों की हीरोइन लगती थी।
    बात 2 साल पहले की है, वह मेरे साथ ग्रेजुएशन के दूसरे साल में थी।

    जब पहली बार वह ट्यूशन पर पढ़ने आयी तो मैं तो उसको देखता ही रह गया, क्या क़ातिल लग रही थी वह!
    पहले ही दिन वह मुझको पसंद आ गयी, मैंने दिल में सोच लिया था कि इसको गर्लफ्रैंड बनाना ही है।

    फिर 2 दिन बाद वह दूसरे ट्यूशन पर भी साथ हो गयी, मेरी तो मानो जैसे लॉटरी ही लग गयी। फिर 4 या 5 दिन हुए थे कि वह मेरे साथ तीसरे ट्यूशन पर भी आ गयी, मुझको तो यकीन ही नहीं हो रहा था.
    मैंने सोचा कि लगता हूँ ऊपरवाला भी मेहरबान है जो यह मेरे साथ 3 ट्यूशन पर है।

    दिन गुज़रे तो मैंने उसकी 1 सहेली से कहा कि मुझको यह पसंद है, तू मेरी बात कर दे इससे एक बार!
    तो उसकी सहेली मान गयी, उसने उससे अलग में जाकर कह दिया।

    अब यहाँ हमारी डर के मारे गांड फट रही थी, उसने कुछ कह तो नहीं लेकिन 3 दिन के बाद मुझको कॉल की और अपना नाम बताया.
    फिर कहने लगी- मैं ऐसी लड़की नहीं हूँ, तुम मुझे छोड़ दो. तुमको तो बहुत मिल जाएंगी।
    मैंने उससे कुछ नहीं कहा।

    दिन गुज़रते गए हम साथ में पढ़ते रहे, फिर ग्रेजुएशन में उसका एक दिन व्हाट्सएप पर मैसेज आया, मुझको तो यकीन ही नहीं हो रहा था, हम दोनों की बात शुरू हुई. 2 महीने बात हुई, हम कई बार मिले भी! हम सेक्स की बातें भी करते थे.
    इस तरह हमारा रोमांस चलता रहा लेकिन चुत मिलने की कहानी हमेशा दूर लगती रही थी.

    फिर वह एक स्कूल में पढ़ाने लगी थी। अब मेरे दिल में उसको चोदने की इच्छा हुई। पहले मैंने उससे चुदाई की बातें मोबाइल पर करनी शुरू की। अब वो समझ चुकी थी कि मैं उसे चोदना चाहता हूँ.

    एक दिन मैंने उसको कॉल की तो वह कहने लगी- मैं स्कूल में हूँ, और बच्चों के एग्जाम चल रहे हैं, जल्दी छुट्टी हो जाएगी.
    तो मैंने कहा- मुझको मिलना है.
    तो वह तैयार हो गयी.

    मैं छुट्टी के टाइम उसके स्कूल चला गया और उसको वहां से ले आया., हमारे पास मिलने के लिए जगह नहीं थी तो मैं उसको अपनी नानी के घर ले गया.
    मेरे मामू अपने काम पर गए हुए थे तो मैं उसको बैठक में ले गया।

    मैं अपने साथ कॉन्डोम ले कर गया था. पहले तो हमने ऐसे ही कुछ बातें की, फिर मैंने उससे कहा- मुझको किस करना है.
    पहले तो वह मना करने लगी लेकिन मैंने ज़्यादा कहा तो वह मान गयी।

    मैंने उसके होंठो से अपने होंठ लगा दिए. यह हमारा पहला किस था. हम दोनों किस में ऐसे खोये कि 10 मिनट तक किस ही करते रहे।

    उसके बाद उसने अपना मुंह हटा लिया और कहने लगी- बहुत ज़िद्दी हो … हो गयी इच्छा पूरी? अब मैं जाऊँ?
    मैंने कहा- अभी कहाँ … अभी तो बहुत कुछ बाकी है.

    तो वह समझ गयी और कहने लगी- यह सब नहीं!
    लेकिन मैंने फिर से ज़िद की और वह मान गयी।

    मैंने फिर से उसको किस करना शुरू किया, इस बार दोनों ही मूड में आ गए। मैंने किस करते हुए एक हाथ उसके दूध पर रख दिया और बुर्के के ऊपर से ही सहलाने लगा. जब उसने कुछ नहीं कहा तो मैंने हिम्मत करके हाथ उसके कपड़ों के अंदर घुसा दिया.

    वह ब्रा पहने हुए थी, मैं ब्रा के ऊपर से ही सहलाने लगा। उसको भी मज़ा आ रहा था, ऊके साथ यह सब पहली बार हो रहा था, फिर मैंने किस छोड़कर उसके कपड़े उतारे तो वह मना करने लगी, मैंने उसके कपड़े उतार दिये, उसके बदन पर बस ब्रा और पैंटी ही बची थी।

    मैं उसको फिर से किस करने लगा, वह भी मेरा साथ देने लगी।
    किस करते हुए मैंने उसकी ब्रा का हुक खोल दिया, उसके 32 के चूचे मेरे सामने आज़ाद हो गए, मैंने जैसे ही उनको अपने हाथ में ले कर मसला तो वह सिहर उठी, उसको मज़ा आने लगा था.

    मैं उसके होंठ छोड़कर उसके चूचों पर आ गया और मुँह में लेकर चूसने लगा. वह तो मेरी इस हरकत से मदहोश होने लगी, तड़पने लगी.

    मैं चूचे चूसते हुए ही उसकी पेन्टी में हाथ घुसाने लगा. जैसे ही मेरा हाथ उसकी चूत पर गया तो मानो उसको करंट लग गया हो, वह उछल गयी और मुझसे लिपट गई।

    मैंने देर न करते हुए उसकी पेन्टी भी उतार दी और उसकी चूत को अपने हाथ से रगड़ने लगा, वह मदहोश हुए जा रही थी।

    फिर मैंने अपने सारे कपड़े उतारे और आ गया उसके ऊपर!
    मैंने अपने लण्ड पर कंडोम चढ़ाया, उससे पूछा- डाल दूँ?
    तो वो कहने लगी- देर मत लगाओ … बस जल्दी से डाल दो.

    मैंने उसकी चूत को हल्का सा खोला और लण्ड का टोपा उसकी चूत के मुंह पर रखा.
    अब वह डरने लगी तो मैंने उसे समझाया कि कुछ नहीं होगा.

    मैं उसे किस करने लगा, किस करते हुए मैंने एक जोरदार झटका मारा, तो मेरा लण्ड उसकी चूत को चीरता हुआ आधा अंदर चला गया.
    वह जोर से चिल्लायी ‘उम्म्ह … अहह … हय … ओह …’ रोने लगी, कहने लगी- मुझे छोड़ दो, बहुत दर्द हो रहा है, मैं मर जाऊँगी.
    मैं रुक गया और उसको किस करने लगा।

    जब वह थोड़ी नार्मल हुई तो मैंने आराम आराम से अंदर बाहर करना शुरू किया, फिर अचानक से ज़ोर का झटका मारा और पूरा लण्ड अंदर घुसा दिया, वह फिर से तड़पने लगी।
    फिर मैं आराम से अंदर बाहर करने लगा।

    अब उसको भी थोड़ा सुकून मिल गया था, उसको भी मज़ा आने लगा.
    मैंने उसकी टाँगें उठाकर अपने काँधे पर रखी और फिर से चुदाई चालू कर दी।

    5 मिनट की चुदाई के बाद मैं झड़ गया और उसके ऊपर ही लेट गया।

    उसे लगा कि उसकी चूत से कुछ बह रहा तो उसने अपनी चूत में हाथ लगा कर देखा तो उसे पता कि वो खूँ है.
    वह कहने लगी- जान, मेरी चूत से खून निकल रहा है, क्या करूँ?

    मैं कपड़ा लाया, उसका खून साफ किया और उसको फिर से किस करने लगा.

    वह कहने लगी- जान, देर हो रही है, घर पर अम्मी इंतज़ार कर रही होंगी, अब जाने दो, अब तुम्हारी इच्छा पूरी हो गयी।
    मैं कहने लगा- अभी तो बस एक राउंड हुआ है.
    तो वो कहने लगी- अब फिर कभी कर लेना, अब तो यह तुम्हारी ही है।

    मैंने उसको अपने हाथों से कपड़े पहनाये और उसको भेज दिया।

    दोस्तो, यह थी मेरी गर्लफ्रैंड की सील तोड़ चुदाई! उम्मीद है आपको चुत की कहानी पसंद आई होगी.
    अगर ग़लती हुई हो तो माफ करना।

    .

  • मेरी चूत स्टोरी बॉयफ्रेंड से सील तोड़ चुदाई की

    मेरी चूत स्टोरी में पढ़े कि मेरी चूत की पहली बार चुदाई कैसे हुई. मेरा पहला बॉयफ्रेंड मुझे अपने दोस्त के कमरे में ले गया. लेकिन वो साला फिसड्डी निकला तो मैंने नया यार बना लिया.

    हैलो फ्रेंडज़, मेरा नाम नीलम है. मैं मध्यप्रदेश की रहने वाली हूँ. मैं एक बहुत सेक्सी लड़की हूँ और मेरा साइज 28-30-32 है.

    यह चूत स्टोरी उन दिनों की है, जब मैं बीएससी फर्स्ट ईयर में थी. मैं एक लड़के को बहुत चाहती थी, वो लड़का भी मुझे पसंद करता था.

    एक दिन बात है, जब मैं कॉलेज जा रही थी. तब मैं बस स्टॉप पर खड़ी अपनी बस का इंतजार कर रही थी. तभी मेरा ब्वॉयफ्रेंड बाइक से आया और उसने मुझे साथ चलने को कहा. मैं भी बड़ी खुशी से उसके साथ बाइक पर बैठकर कॉलेज के लिए निकल पड़ी.

    उसने बाइक को लम्बे वाले रास्ते से ले जाने का कहा. मैं उसके साथ मस्ती से चिपकी बैठी थी. मैंने भी उससे कह दिया कि जानी जब तू मेरे साथ है, तो क्या डर है, तू जिधर भी ले चल मैं तेरे साथ राजी हूँ.

    वो हंस दिया और वोला- सोच ले मेरी जान … मैं तुझे जंगल के रास्ते से ले जाने वाला हूँ.
    मैंने उसकी छाती से चिपकते हुए कहा- हां ले चल … मुझे कोई चिंता नहीं है.
    उस समय तक हमने कभी सेक्स नहीं किया था लेकिन हम दोनों अपने पहले सेक्स के लिए उतावले हो रहे थे, चूत स्टोरी बनाने के लिए आतुर हो रहे थे.

    वो मुझे जंगल के रास्ते से ले आया. एक सुनसान जगह देख आकर उसने रास्ते से अलग हटते हुए एक कच्ची पगडंडी पर बाइक उतार दी.

    कुछ आगे ले जाकर उसने साइड में बाइक रोकी और मुझे किस करना शुरू कर दिया. मैं भी उसका साथ देने साथ देने लगी. उसने मेरी चूची पर हाथ लगाया और चूची पकड़ कर जोर जोर से दबाने लगा. मैं आज उसके साथ इस घने जंगल में मतवाली हुई जा रही थी. मैं चुदास से पागल हो रही थी और मेरी चूत में पानी निकलने लगा था.

    उसके बाद उसने मेरी पैन्ट का हुक खोला और पैन्टी सरका कर मेरी चूत में उंगली करने लगा. मैं मस्त होने लगी. अब मेरा भी मन हो रहा था कि आज मैं इसके लंड से यहीं पर चुद जाऊं. लेकिन रास्ते में कांटें होने की वजह से चुदाई नहीं हो सकती थी. मेरा मन बेक़ाबू हो रहा था, तो मैंने उसके पैंट के अन्दर से ही उसके लंड को पकड़ लिया और हिलाने लगी. मैं उसके लंड को आगे पीछे करने लगी. वो भी मेरी चूत में लगातार उंगली पेले जा रहा था.

    थोड़ी देर बाद मेरी चूत से पानी निकलने को हो गया … मैं अकड़ने लगी. तभी मैंने जोश में उसका लंड मरोड़ दिया.
    वो जोर से चीख़ उठा- आं आह … उई … क्या कर रही है … लंड उखाड़ेगी क्या.

    मेरी हंसी छूट गई और मैंने उसका लंड छोड़ दिया. लेकिन उसी वक्त उसने भी मेरी चूत के दाने को पकड़ कर खींच दिया. मुझे भी बहुत दर्द हुआ. मैंने भी उसको धक्का दे दिया. फिर हम दोनों हंस दिए और फिर से एक दूसरे से खेलने लगे. उसने मेरी चूत में फिर से उंगली करना शुरू कर दी. मैंने भी उसके लंड की मुठ मारना चालू कर दी. कुछ देर के बाद उसका पानी निकल गया. मेरी चूत भी झड़ गई.

    उसके बाद हम दोनों कुछ देर अपनी साँसें काबू में करते रहे. फिर हम वहां से निकल पड़े.

    मैंने झुझलाते हुए कहा- चड्डी के अन्दर जो छुपा रखा है न … उसको देखना है.
    उसने कहा- चड्डी के अन्दर क्या है?
    मैंने उसका लंड मसलते हुए कहा- इसको देखना है.
    उसने मेरी दूध दबाए और कहा- उसका कोई नाम भी तो होगा.

    मैं समझ गई कि ये मुझसे लंड कहने के लिए कह रहा है. मैंने कहा- हाँ उसका नाम है न.
    वो मेरी आंखों में आंखें डाल कर बोला- बताओ न क्या नाम है इसका?
    मैंने भी उसकी आंखों में आंखें डाल कर कहा- मुझे तुम्हारा लंड देखना है.
    उसने मुझे चूमा और कहा- अब ये मेरा नहीं है … ये तुम्हारा लंड है.
    मैंने फिर उसको चूमा और कहा- हां मुझे अपना लंड देखना है.

    उसने अपने सारे कपड़े निकाल दिए. उसका लंड हवा में झूल रहा था.
    वो बोला- लो, अपना लंड देख लो और इसे प्यार भी कर लो.

    मैं उसके लंड को हाथ में पकड़ कर हिलाने लगी. मैंने पहली बार लंड देखा था. मुझे बड़ा अजीब सा लग रहा था. मैं जोर जोर से लंड हिलाने लगी. कुछ ही समय में उसका रस मेरी हथेली में ही निकल गया.

    मैंने पूछा- ये कैसे निकल गया?
    वो बोला- यार नीलम, मेरा जल्दी निकल जाता है … ये पहले से बीमारी है. हम कल मिलते हैं और चुदाई करेंगे.
    ये बोल कर वो अपने कपड़े पहनने लगा.

    मुझे उस वक्त तक लंड के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी कि ये दुबारा भी खड़ा हो सकता है, यदि कुछ देर कोशिश की जाए.

    अपनी नाकाम चूत स्टोरी से मैं मायूस हो गई और हम दोनों वहां से निकल आए. इस वक्त मेरी तो चुत में आग लगी थी … मगर क्या कर सकती थी.

    उसके बाद 3 दिन तक मेरी उससे बात नहीं हुई. फिर उसने कॉल किया, तो वो मुझसे फिर से बोला कि मिलना है.

    मैंने हां तो बोल दी … लेकिन उससे नहीं मिली. उससे मेरा ब्रेकअप हो गया.

    कुछ दिन बीत जाने के बाद मेरे नम्बर पर एक अनजान नम्बर से कॉल आई. उसने अपना नाम हेमंत बताया. मुझे उसकी बातें अच्छी लगीं. फिर हम दोस्त बन गए.

    एक महीना बाद उसने मुझे प्रपोज किया और मैंने भी हां कर दी, क्योंकि मैं हेमंत के लंड को चूत में लेना चाहती थी. उसके बाद हेमंत ने मुझे मिलने के लिए एक होटल में बुलाया. मैंने भी हां कर दी और उससे मिलने होटल में चली गई. मैंने वहां जाकर हेमंत को देखा, तो वो बहुत ही हैंडसम था. उसकी हाइट 5 फ़ीट 6 इंच की थी. हालांकि उसकी बॉडी औसत ही थी.

    उसके बाद हम दोनों एक कमरे में चले गए. उधर कुछ देर बैठ कर बात हुई, फिर मैं कमरे के बाथरूम में जाकर फ्रेश हुई. उसने मेरे साथ कोई जल्दबाजी नहीं की. इससे मुझ पर उसका अच्छा प्रभाव पड़ा.

    इसके बाद हम दोनों खाना खाने बाहर आ गए. खाना खाने के बाद वापस होटल के कमरे में आने के बाद उसने मुझे किस किया. मैंने भी उसको किस किया. हम दोनों में गर्मी बढ़ने लगी. कुछ देर बाद उसने मेरे सारे कपड़े निकाल दिए. मुझे भी लगने लगा था कि अब मैं जल्दी से चुद जाऊं.

    उसने मेरे कपड़े निकालने के बाद अपने भी निकाल दिए. अब मैं सिर्फ पैन्टी में उसके सामने बेड पर चित लेटी थी. वो अपने लंड को मेरे सामने निकाल कर हाथ से आगे पीछे करने लगा. उसका लंड काफी सुन्दर दिख रहा था. एकदम लाल सुपारा अपनी चमक से मेरी आग को भड़का रहा था. उसके लंड का साइज यही कोई 6 इंच का था.

    मैं भी उसके लंड को देख कर मन ही मन खुश होने लगी थी. साथ ही मैं अपनी चूचियों के निप्पलों को अपनी उंगलियों में दबा कर मींजने लगी थी. मेरी आंखों में वासना का खुमार चढ़ने लगा था. पर अभी भी मैं कुछ सोच रही थी कि कहीं इसके लंड का काम तमाम न जाए. मुझे पिछले अनुभव से अभी भी उसके लंड की ताकत को देखना था.

    कुछ पल लौड़ा हिलाने के बाद वो मेरे पास आ गया. उसने मुझे किस किया और अपने होंठों में मेरी चुची को दबाकर चूसने लगा.
    उसकी चूची चुसाई से मेरे मुँह से कामुक आवाजें निकलने लगी- आंआह … उन्हह … उई … इस्स … धीरे … आह मैं मर गयी.

    उसने मेरी दोनों चूचियों को मन भर चूसा और मेरा हाथ अपने लंड पर रखवा दिया. मुझे उसका लंड बड़ा सख्त सा लगा. मैं उसके लंड को अपने हाथों से सहलाने लगी. उसने मेरी आंखों में अपनी आंखें डालीं और अपना लंड मेरे मुँह की तरफ बढ़ा दिया. मैंने खुद उसके लंड को पकड़ कर अपने मुँह की तरफ खींचा तो उसने मेरे मुँह में अपना लंड डाल दिया.

    मैं उसके मस्त मोटे लंड को चूसने लगी. कुछ देर तक लंड चुसाने के बाद उसने मेरी चूत में लंड लगा दिया. वो मेरी चूत की फांकों में लंड का सुपारा घिसने लगा. मुझे इस वक्त बेहद आग लग चुकी थी और उसका कड़क लंड मुझे इस समय अपनी चूत की खुराक दिखने लगा था.

    वो मेरी चूत में लंड डालने लगा. लेकिन चूत सील पैक थी और लंड मोटा था. इसलिए लंड चूत के अन्दर नहीं जा रहा था. वो बार बार इधर उधर फिसला जा रहा था. उसके लंड की बेबसी पर मैं हंस रही थी.

    वो बोला- हंस मत यार … मुझे गुस्सा आ रहा है.
    मैं बोली- तो निकाल दो अपना सारा गुस्सा मेरी चूत में … फट क्यों रही है?
    उसने कहा- ठीक है … देखता हूँ कि किसी फटती है.

    उसने मुझे फिर से पकड़ा. अपना लंड पकड़ कर चूत में लगाया और एक बार में ही पूरा लंड चूत में उतार दिया. मैं दर्द से तड़पने लगी और उसे मना करने लगी.

    मैंने कहने लगी- उम्म्ह … अहह … हय … ओह … मर गई … निकाल लो … मुझे नहीं चुदाई करवाना … आह मेरी फट रही है.
    लेकिन इस बार उसने मेरी एक न सुनी और लंड से चूत की चुदाई करता रहा. उसका लंड अन्दर तक पेवस्त हो गया था, जिससे मेरी सील टूट चुकी थी और मैं दर्द से आह भर रही थी.

    वो मस्त सांड सा मेरी चूत में पिला पड़ा रहा. कुछ समय बाद मेरा दर्द कम हुआ और मैं भी उसका साथ देने लगी. वो मेरी चूची दबाते हुए मेरी चूत के चीथड़े उड़ाने में लगा था. जल्दी ही मैं निकल गई. मगर वो लगा रहा.

    मेरे झड़ने के कोई दस मिनट बाद वो भी चरम पर आ गया. उसने मुझे कुछ कहा ही नहीं … बस सीधा मेरी चूत में अपना लावा निकाल कर मेरे ऊपर ढेर हो गया.
    हम दोनों स्खलित हो चुके थे और एक दूसरे की बांहों में पड़े थे.

    कुछ देर बाद मैं उठी और देखा तो बिस्तर पर खून ही खून के दाग लग गए थे. मैं घबराई, तो वो हंसने लगा.
    फिर उसने मुझे समझाया कि तेरी सील टूट गई है … अब तू मजे लेने के लिए खुल गई है.

    मुझे भी मजा आने लगा. मैंने सोचा कि अब खेल खत्म हो गया है. मगर कुछ देर बाद उसका लंड फिर से खड़ा हो गया. मैं हैरान थी कि इसका लंड तो फिर से खड़ा हो गया.
    मैंने उससे पूछा- अब ये कैसे खड़ा हो गया?

    उसकी समझ में नहीं आई, तो उसने मुझसे पूछा- ये खड़ा क्यों नहीं हो सकता?
    मैं चुप थी, उससे कह भी नहीं सकती थी कि पिछली बार क्या हुआ था.

    मैंने कुछ नहीं कहा … बस मुस्कुरा दी. उसने मुझे फिर से लंड चूसने के लिए कहा. मैंने लंड चूसा तो वो फिर से एकदम लोहा बन गया. मेरी समझ में आ गया कि लंड में दम हो, तो वो कितनी ही बार खड़ा हो सकता है.
    उस दिन हम दोनों ने चार बार चुदाई की. मैं आज पूरी तरह से तृप्त हो गई थी.

    इसके बाद उसने मुझे कई बार चोदा और हर बार उसने मुझे चोद कर मस्त कर दिया.

  • भाभी की चूत को उसके मायके में जाकर चोदा


    कैसे हो दोस्तो? मैं आपके लिए पड़ोसन भाभी की चूत की एक कहानी लेकर आया हूं. उससे पहले मैं अपने बारे में कुछ बता देता हूं. मेरे दोस्त मुझे प्यार से योगू बुलाते हैं. मैं एक 26 साल का सेक्सी, हैंडसम और अच्छे घर का लड़का हूं. जब से मैं जवान हुआ हूं मेरा लंड मुझे चैन से नहीं बैठने देता है. मैं रोज ही अपने लंड को हिलाता हूं. इसकी प्यास बुझती ही नहीं है. मुझे चुदक्कड़ आंटियां और प्यासी भाभियां बहुत पसंद हैं.
    यह बात उन दिनों की है जब मैं बस से कॉलेज जाया करता था. आप सब तो जानते ही हैं कि सुबह के टाइम पर बसों में कितनी भीड़ होती है. मैं हमेशा की तरह अपने कॉलेज जा रहा था. उस दिन मेरे साथ ही मेरे पड़ोस की एक भाभी भी उस बस में चढ़ गई. बस में काफी भीड़ थी.
    भाभी ने मेरी तरफ देखा और मैंने भाभी की तरफ. हम दोनों पास में ही खड़े हुए थे. फिर कुछ दूर चलने के बाद बस में और ज्यादा लोग चढ़ गये. अब बस बिल्कुल खचाखच भर गई. भाभी की मोटी गांड मेरे लंड से आकर सट गई. जैसे ही मुझे इस बात का अहसास हुआ कि भाभी की गांड मेरे लंड से सट चुकी है तो मेरा लंड मेरी पैंट में खड़ा होना शुरू हो गया.
    मैंने हल्का सा जोर लगा कर अपने लंड को भाभी की गांड की दरार पर मसल दिया. भाभी ने पीछे मुड़ कर देखा. एक बार तो मैं डर गया कि शायद भाभी गुस्सा हो गई होगी. लेकिन उसने मुझे देख कर एक स्माइल दी और फिर मुझसे कहा- मेरे बैग को ऊपर रख दो.
    मेरी जान में जान आई कि भाभी गुस्सा नहीं हो रही थी.
    मैंने भाभी के बैग को ऊपर सामान रखने की जगह पर रख दिया. फिर भाभी आराम से खड़ी हो गई.
    हम दोनों में बातें होने लगी.
    मैंने भाभी से पूछा कि वो कहां जा रही है तो भाभी ने बताया कि वो अपने मायके जा रही है.
    भाभी अकेली ही थी इसलिए मुझे भी कोई डर नहीं था. बीच बीच में जब धक्के लगते थे तो भाभी मुझसे बिल्कुल चिपक जाती थी. ऐसा करते करते मेरे लंड का तन कर बुरा हाल हो गया.
    फिर मैंने महसूस किया कि भाभी भी अपनी गांड मेरे लंड पर धकेल रही थी. वो अपनी गांड की दरार को मेरे लंड पर सटा कर पीछे की तरफ दबाव बना रही थी. मैं भी बदले में अपने लंड को उनकी गांड की दरार में पूरा का पूरा घुसाने की कोशिश करने लगा. बहुत मजा आ रहा था. मन कर रहा था अभी भाभी को नंगी करके चोद दूं लेकिन जैसे तैसे मैंने खुद को कंट्रोल करके रखा हुआ था.
    हम दोनों आपस में बातें करते हुए ऐसे दिखा रहे थे कि सब कुछ नॉर्मल ही हो रहा है.

    उसके कुछ पल के बाद भाभी ने अपना हाथ धीरे पीछे ले जाकर मेरे लंड को पकड़ लिया और उसको सहलाने लगी. मेरी तो हवा टाइट हो गई. भाभी भरी बस में मेरे लंड को पकड़ कर सहला रही थी.
    मैंने भी पूरा जोर लगा कर भाभी की तरफ अपने शरीर के वजन को आगे धकेल दिया. हम दोनों इस कामुक मदहोश कर देने वाले पलों का मजा ले रहे थे.
    तभी मैंने सीट वाले डंडे पर अपने हाथ को आगे की तरफ रख लिया. भाभी ने अपने मस्त चूचों को मेरी कुहनी के आगे वाले भाग की तरफ अपने चूचों को मेरे हाथ से सटा दिया और मेरे हाथ पर अपने चूचों को स्पर्श देने लगी.
    मैं पागल सा होता जा रहा था. इधर भाभी के अंदर भी सेक्स पूरा भड़का हुआ था.
    फिर मैंने आस पास देखा कि कोई हमारी इस हरकत पर ध्यान तो नहीं दे रहा. जब सब जगह नजर दौड़ाने के बाद मैंने ठीक ठाक पाया तो मैंने हल्के से अपने हाथ को भाभी के चूचों पर लाकर उनको छेड़ने लगा. मेरे हाथ की उंगलियां भाभी के चूचों के निप्पलों पर लग रही थीं.
    भाभी की हल्की सी सिसकारी निकलना शुरू हो गई थी. भाभी के चूचों के निप्पल काफी टाइट थे. उसको छूकर पता नहीं चल रहा था कि वो दो बच्चों की मां है. मैंने जोर से उसके निप्पलों को मसलना शुरू किया तो भाभी बोली- आज मेरे साथ मायके ही चलो. मैं तुम्हें अपने मायके की सैर करवाऊंगी.
    मैं भी समझ गया था कि भाभी मायके की नहीं अपनी चूत की सैर करवाने के मूड में लग रही है.
    तभी भाभी ने अपने पर्स से फोन निकाला और अपने घर वालों को बता दिया कि उनके साथ मैं भी उनके मायके आ रहा हूं. भाभी के बदन को छेड़ते छेड़ते कब सफर कट गया कुछ नहीं पता लगा.
    फिर उनके घर जाकर हमने आराम किया. अब मुझसे रात का इंतजार करना मुश्किल हो रहा था. उनके घर में मेरी काफी खातिरदारी हुई और फिर आखिरकार सोने का समय भी आ ही गया. भाभी और मैं दोनों एक ही कमरे में सोने वाले थे. ये सोच कर मेरा लंड तो पहले से ही खड़ा होने लगा था. मेरे लंड ने कई बार चिपचिपा पदार्थ छोड़ दिया. भाभी की चूत के बारे में सोच कर ही मेरा कामरस निकला जा रहा था.
    लेकिन तभी उसकी मां हमारे बीच में आ गई. वो अपनी बेटी से बात करने के लिए हमारे कमरे में ही आ गयी. मैं मन ही मन उसकी मां को गालियां देने लगा. मगर फिर मुझे इस बात से थोड़ा सन्तोष करना पड़ा कि हम दोनों का बिस्तर जमीन पर नीचे एक साथ लगा दिया गया. ऊपर बेड पर उसकी मां सोने वाली थी.
    वो दोनों आपस में बातें करने लगीं और कुछ देर के बाद लाइट बुझा दी गई. लेकिन उन दोनों की बातें अभी भी चल रही थीं. मैं तो पहले से ही सोने का नाटक कर रहा था. जैसे ही लाइट बंद की गई मैंने धीरे अपने और भाभी के बदन को चादर के नीचे ढक लिया और मैं भाभी की गांड के साथ चिपक गया.
    ज्यादा कुछ हरकत तो नहीं हो सकती थी क्योंकि उसकी मां को हमारे बारे में पता चल जाता. मैं धीरे धीरे भाभी की गांड को अपने हाथ से दबाने लगा. मैंने अपने लंड को साड़ी के ऊपर से ही भाभी की गांड से सटा रखा था. भाभी बातों में लगी हुई थी. फिर मैंने धीरे से उसकी साड़ी को ऊपर करना शुरू कर दिया. अंधेरे में कुछ पता नहीं चल रहा था लेकिन उसकी चिकनी टांगों पर उंगलियां फिराते हुए मुझे बहुत मजा आ रहा था.



    जब पूरी साड़ी ऊपर तक आ गई तो मैं अपने पैरों को उसकी जांघों से घिसने लगा. फिर मैंने उसकी भारी सी गांड में फंसी हुई छोटी सी जालीदार पैंटी को उसके कूल्हों के बीच से उंगली घुसाते हुए खींच दिया. उसके बाद मैंने अपने अंडरवियर को भी नीचे किया और उसकी पैंटी के अंदर लंड को लगा कर उसकी जांघों के बीच में भाभी की चूत के पास फंसा दिया. मेरा लंड भाभी के चूतड़ों में जाकर सट गया.
    मेरे तने हुए लंड की छुअन से भाभी की हल्की सी आह्ह निकली लेकिन भाभी ने खुद को रोका हुआ था. वो अपनी मां को बातों में लगाए हुए थी और साथ में ही मेरे लंड का मजा भी ले रही थी. मैं अपने लंड को उसकी गांड पर घिसने लगा. भाभी मेरा पूरा साथ दे रही थी.
    कुछ देर जब ऐसे ही घिसते हुए हो गई तो भाभी ने धीरे अपने हाथ पर थूक लगाया और अपना हाथ अपनी जांघों के बीच में लाकर मेरे लंड के सुपारे पर थूक को मलते हुए उसको चिकना करने लगी. भाभी ने मेरे लंड को पूरा चिकना कर दिया. मेरे लंड के सुपारे पर जब भाभी के हाथ घिस रहे थे तो मैं भाभी की चूत चूत को चोदने के लिए जैसे मरा जा रहा था. मेरे लंड के सुपारे में एक अजीब सी सरसराहट दौड़ रही थी.
    फिर भाभी ने मेरे लंड को अपने हाथ में पकड़ा और अपनी चूत के मुंह पर लगा कर अपनी गांड को पीछे धकेल दिया. मुझे भाभी का इशारा मिल गया.
    मैंने अपने लंड को भाभी की चूत पर सटे हुए आगे की तरफ एक हल्का सा धक्का मारा और मेरा लंड भाभी की गर्म चूत में घुस गया.
    उम्म्ह … अहह … हय … ओह … मजा आ गया.

    भाभी की गर्म चूत में जाते ही मैंने उसकी कमर को अपने हाथों में थाम लिया और बिल्कुल धीरे-धीरे अपनी गांड को हिलाते हुए मैं भाभी की चूत में धक्के लगाने लगा. भाभी भी हल्के हल्के अंदाज में अपनी गांड को मेरे लंड की तरफ धकेल रही थी.
    धीमी चुदाई शुरू हो गई.
    भाभी की चूत में जाते ही मेरा लंड और ज्यादा गर्म और टाइट हो गया था. भाभी की चूत ने जैसे मेरे लंड को अंदर ही जकड़ लिया था. मैं धीरे से लंड को बाहर लाता और फिर हल्के से धक्के के साथ भाभी की चिकनी चूत में फिर से धक्का लगा देता. पूरा लंड भाभी की चिकनी चूत की गहराइयों में उतरने लगा. उसकी चूत की पंखुड़ियां जैसे मेरे लंड को निचोड़ने में लगी हुई थी. मुझे जैसे जन्नत का मजा मिल रहा था.
    कुछ देर तक ऐसे ही करने के बाद मुझसे रहा न गया और मैंने अपने मोटे लंड जोर से भाभी की चूत में पेल दिया तो भाभी की आह्ह निकल गई.
    उसकी ऐसी आवाज सुनकर उसकी मां बोली- क्या हुआ?
    भाभी बोली- कुछ नहीं, ऐसा लग रहा था जैसे पीछे कुछ चुभ रहा हो.
    उसकी मां बोली- लाइट जला कर देख लो.
    भाभी तपाक से बोली- नहीं मां, सब ठीक है.
    भाभी को भी डर हो गया था कि अगर लाइट जली तो सारा मजा खराब हो जायेगा. इसलिए उसने बात को तुरंत संभाल लिया. उसके बाद वो दोनों फिर से बातों में लग गई. कुछ देर तक मैंने भाभी की चूत में लंड डाल कर मजा लिया और फिर मैं भाभी की गांड के छेद पर भी उंगली चलाने लगा.
    भाभी ने अपनी दोनों जांघों को थोड़ा सा और खोल दिया और मेरी उंगली भाभी की गांड में चली गई. भाभी उचक सी गई लेकिन उसने कोई आवाज नहीं की. एक दो बार मैंने भाभी की गांड में उंगली की और फिर वापस निकाल ली.
    फिर पता नहीं भाभी को क्या शरारत सूझी कि उसने अपने एक हाथ को पीछे लाकर मेरी गांड पर टटोलते हुए मेरी गांड के छेद को ढूंढ लिया और अपनी उंगली मेरी गांड में घुसाने की कोशिश करने लगी. मुझे मजा तो नहीं आ रहा था लेकिन मेरे लिए यह एक नया अनुभव था. मेरा लंड भाभी की चूत में था और भाभी की उंगली मेरी गांड के छेद को सहला रही थी. फिर उसने अपने हाथ को वापस आगे की तरफ खींच लिया.
    मुझे गांड में जलन सी होने लगी. शायद भाभी की उंगलियों का तेज नाखून मेरी गांड में लग गया था. मैंने जोर से भाभी की चूत को चोदना शुरू कर दिया. पच-पच की आवाज हो गई तो उसकी मां को फिर शक हो गया.
    वो बोली- ये आवाज कैसी आ रही है?
    भाभी बोली- कुछ नहीं, योगू को शायद मच्छर परेशान कर रहे हैं. वो मच्छर मार रहा है.

    मैंने फिर से अपने धक्कों को धीमा कर दिया. जोर से चुदाई होना अभी संभव नहीं था. मैं धीरे धीरे ही भाभी चूत में लंड को चलाता रहा. भाभी भी पूरे रिदम में मेरा साथ देती रही.
    दोस्तो, इस तरह धीमी चुदाई करने में भी बहुत मजा आता है. जिन लोगों ने इस तरह से प्यार वाली धीमी चुदाई का मजा लिया है वो जानते होंगे कि इस तरह की चुदाई में ताबड़तोड़ चुदाई से ज्यादा रस मिलता है. भाभी की चूत रस छोड़ते हुए पूरी चिकनी हो गई थी. उसकी चूत में लंड डालते हुए अब मुझे ऐसा लगने लगा था कि जैसे मैं किसी मक्खन के कटोरे में लंड को डाल रहा हूं.
    गर्म चिकनी चूत की चुदाई का जो मजा भाभी उस रात को मुझे दे रही थी उसको अपने शब्दों में मैं लिख नहीं पा रहा हूं. मैं जोर से उसकी चूत को फाड़ देना चाहता था लेकिन ऐसा नहीं कर पा रहा था. फिर मैंने उसके चूचों को पकड़ लिया और उसको कस कर बांहों में भरते हुए उसके चूचे भी साथ में दबाने लगा. भाभी का पूरा बदन मेरे बदन से सट गया था. उसके मोटे चूचे दबाते हुए मैं उसकी चूत में धीरे-धीरे लंड को घिसता रहा.
    काफी देर तक ऐसे ही हम पड़े-पड़े हिलते रहे. भाभी की आवाज भारी होने लगी थी. उसकी आवाज से कामुकता साफ झलक रही थी. लेकिन अपने आप को कंट्रोल करके रखे हुए थी. उसकी मां को भी नींद नहीं आई थी. अब भाभी से जब रुका नहीं गया तो उसने पीछे हाथ लाकर मेरे चूतड़ों को अपने हाथों में पकड़ लिया और मेरी गांड को आगे की तरफ धकेलते हुए अपनी चूत के अन्दर मेरे लंड के धक्के मरवाने लगी.
    मैं भाभी की बेबसी समझ सकता था. अगर उसकी मां वहां पर न होती तो मैं भाभी की चूत को फाड़ कर रख देता लेकिन हम दोनों ही मजबूर थे. मैंने भी थोड़ा और अंदर तक लंड को घुसाने की कोशिश की.
    भाभी की गांड काफी भारी थी. इसलिए लंड पूरा जड़ तक भाभी की चूत में नहीं उतर रहा था. या फिर भाभी को और गहराई तक लंड लेने की आदत थी. वो बार-बार मेरी गांड को अपने हाथों के सहारे से अपनी चूत की तरफ धकेल रही थी.
    उसकी आवाज लड़खड़ाने लगी थी. लेकिन वो ऐेसे बर्ताव कर रही थी जैसे वो नींद आने के चलते बड़बड़ा रही है ताकि उसको मां को इस बात का शक न हो जाये कि उसकी बेटी एक मोटे और लंबे लंड के साथ नीचे फर्श पर पड़ी हुई अपनी चूत की चुदाई करवा रही है.
    फिर मैंने तेजी से लंड को भाभी की चूत में चलाना शुरू कर दिया. मैंने भाभी को कस कर पकड़ लिया और तीन चार जोर के धक्के लगा दिये और फिर मेरे लंड ने जवाब दे दिया. मेरे लंड से गर्म गर्म वीर्य निकल कर भाभी की चिकनी चूत में भरने लगा. मैं झटके मारते हुए भाभी की चूत में वीर्य को गिराता चला गया.
    मैंने सारा का सारा वीर्य उसकी चूत में खाली कर दिया. भाभी ने जैसे मेरे लंड को अपनी चूत में दबोच लिया था. ऐसा लग रहा था कि वो भी झड़ गई है. फिर हम दोनों नॉर्मल होते आ गये. अभी तक भी उसकी मां नहीं सोई थी. मुझे गुस्सा आ रहा था. लेकिन मैं चुपचाप भाभी की चूत में लंड को डाले हुए लेटा रहा.
    जब काफी देर तक की उनकी बातें खत्म नहीं हुईं तो मैंने भाभी को अपनी बांहों में भर लिया और अपने लंड को ऐसे ही उनकी चूत में रख कर सो गया.
    सुबह जब उठा तो मैं अकेला ही वहां पर सोया हुआ था. मैंने उठ कर देखा तो चादर मेरे ऊपर थी और मेरा लंड अभी भी बाहर ही लटक रहा था लेकिन अब सोई हुई अवस्था में था इसलिए चादर के नीचे से पता नहीं लग रहा था.
    वो दोनों मां-बेटी वहां कमरे में नहीं थी. फिर मैं भाभी के साथ ही अपने घर पर वापस आ गया. अब जब भी कभी मुझे मौका मिलता है मैं भाभी को कॉल कर लेता हूं. मुझे वो सेक्सी चुदक्कड़ भाभी पूरे मजे देती है.
    अब तो मैं सोच रहा हूं कि कॉल ब्वॉय का धंधा ही शुरू कर दूं. मुझे भाभियों और आंटियों की चूत भी मिल जाया करेगी और इस तरह से मेरी चुदाई की इच्छा पूरी होने के साथ ही मेरी कुछ कमाई भी हो जाया करेगी.
    तो दोस्तो, ये थी भाभी की चूत चुदाई की कहानी. आपको मेरी यह कहानी कैसी लगी.

  • ससुर जी की जवानी

    कोमल ki शादी को दो साल हो चुके थे. बचपन से ही कोमल बहुत खूबसूरत थी. १६ साल की उम्र में ही जिस्म खिलने लग गया था. सोलहवां साल लगते लगते तो कोमल की जवानी पूरी तरह नीखर आई थी. ऐसा लगता ही नहीं था की अभी १०थ् क्लास में पर्ती है. School की स्किर्ट में उसकी भरी भरी जांघें लड़कों पे कहर ढाने लागी थी. School के लड़के skirt के नीचे सी झाँक कर कोमल की पैंटी की एक झलक पाने के लीये पागल रहते थे. कभी कभार जब बास्केटबाल खेलते हुए या कभी हवा के झोंके सी कोमल की स्किर्ट उठ जाती तो किस्मत वालों को उसकी पैंटी के दर्शन हो जाते. लड़के तो लड़के, School के Teacher भी कोमल की जवानी के असर से नहीं बचे थे. कोमल के भारी नितम्ब, पतली कमर और उभरती चूचियां देखके उनके सीने पे चहुरियन चल जाती. कोमल को भी अपनी जवानी पे नाज़ था. वो भी लोगों का दिल जलाने में कोई कसर नहीं छोड़ती थी.

    उनीस साल की होते ही कोमल की शादी हो गई. कोमल ने शादी तक अपने कुंवारे बदन को संभाल के रखा था. उसने सोच रखा था की उसका कुंवारा बदन ही उसके पति के लीये सुहाग रात को एक उन्मोल तोह्फहोगा. सुहाग रात को पति का मोटा लम्बा लंड देख कर कोमल के होश उर गए थे. उस मोटे लंड ने कोमल की कुंवारी चूत लहू लुहान कर दी थी. शादी के बाद कुछ din तो कोमल का पति उसे रोज़ चार पाँच बार चोद्ता था. कोमल भी एक लम्बा मोटा लौडा पा कर बहुत खुश थी. लेकीन धीरे धीरे चुदाई कम होने लगी और शादी के एक्साल बाद तो ये नौबत आ गई थी की महीने में मुश्किल से एक दो बार ही कोमल की चुदाई होती. हालांकी कोमल ने सुहाग रात को अपने पति को अपनी कुंवारी चूत का तोहफा दीया था, लेकीन वो बचपन से ही बहुत कामुक लड़की थी. बस कीसी तरह अपनी वासना को कंट्रोल करके, अपने School और कॉलेज के लड़कों और टीचर्स से शादी तक अपनी चूत को बचा के रखने में सफल हो गई थी. महीने में एक दो बार की चुदाई से

    कोमल की वासना की प्यास कैसे बुझती ? उसे तो एक दिन में कम से कम तीन चार बार चुदाई की ज़रूरत थी.
    आखिकार जब कोमल का पति जब तीन महीने के लीये टुर पे गया तो कोमल के देवर ने उसके अकेलेपन का फायदा उठा कर उसकी वासना को तृप्त किया. अब तो कोमल का देवर रामू कोमल को रोज़ चोद कर उसकी प्यास बुझाता था. एक दिन गाँव से टेलीग्राम आया की सास की तबियत कुछ ख़राब हो गई है. कोमल के ससुर एक बड़े ज़मींदार थे. गाँव में उनकी काफ़ी खेती थी. कोमल का पति राजेश काम के कारण नहीं जा सकता था और देवर रामू का कॉलेज था. कोमल को ही गाँव जाना पड़ा. वैसे भी वहां कोमल की ही ज़रूरत थी, जो सास और सुर दोनों का ख्याल कर सके और सास की जगह घर को संभाल सके.

    कोमल शादी के फौरन बाद अपने ससुराल गई थी. सास सौर की खूब सेवा करके कोमल ने उन्हें खुश कर दीया था. कोमल की खूबसूरती और भोलेपन से दोनों ही बहुत प्राभवित थे. कोमल की सास माया देवी तो उसकी प्रशंसा करते नहीं थकती थी. दोनों इतनी सुंदर, सुशील और मेहनती बहू से बहुत खुश थे. बात बात पे शर्मा जाने की अदा पे तो ससुर रामलाल फीदा थे. उन्होंने ख़ास कर कोमल को कम से कम दो महीने के लीये भेजने को कहा था. दो महीने सुन कर कोमल का कलेजा धक् रह गया था. दो महीने बिना चुदाई के रहना बहुत मुश्किल था. यहाँ तो पति की कमी उसका देवर रामू पूरी कर देता था. गाँव में दो महीने तक क्या होगा, ये सोच सोच कर कोमल परेशान थी लेकीन कोई चारा भी तो नहीं था. जाना तो था ही. राजेश ने कोमल को कानपूर में ट्रेन में बैठा दीया. अगले दिन सबह ट्रेन गोपालपुर गाँव पहुँच गई जो की कोमल की सौराल थी.

    कोमल ने चूरिदार पहन रखा था. कुरता कोमल के घुटनों से करीब आठ इंच ऊपर था और कुरते के दोनों साइड का कटाव कमर तक था. चूरिदार कोमल के नितम्ब तक तैघ्त था. चलते वक्त जब कुरते का पल्ला आगे पीछे होता या हवा के झोंके से उठ जाता तो तिघ्त चूरिदार में कसी कोमल की टांगें, मदहोश कर देने वाली मांसल जांघें और विशाल नितम्ब बहुत ही Sexy लगते. ट्रेन में सब मर्दों की नज़रें कोमल की टांगों पर लगी हुई थी. स्टेशन पर कोमल को लेने सास और ससुर दोनों आए हुए थे. कोमल अपने ससुर से परदा कत्र्ती थी इसलिए उसने चुन्नी का घूँघट अपने सिर पे ले लिया. अभी तक जो चुन्नी कोमल की छातीयों के उभार को छुपा रही थी, अब उसके घूँघट का काम करने लगी. कोमल की बड़ी बड़ी छातियन स्टेशन पे सबका ध्यान खींच रही थी. कोमल ने झुक के सास के पाँव छूए. जैसे ही कोमल पों छूने के लीये झुकी रामलाल को उसकी चूरिदार में कसी मांसल जांघें और नितम्ब नज़र आने लगे. रामलाल का दिल एक बार तो धड़क उठा. शादी के बाद से बहू किखूब्सूरती को चार चाँद लग गए थे.

    बदन भर गया था और्जवानी पूरी तरह नीखर आई थी. रामलाल को साफ दीख रहा था की बहू का तिघत चूरिदार और कुरता बरी मुश्किल से उसकी जवानी को समेटे हुए थे. सास से आशिर्वाद लेने के बाद कोमल ने सुर्जी के भी पैर छूए. रामलाल ने बहू को प्यार से गले लगा लीया. बहू के जवान बदन का स्पर्श पाते ही रामलाल कांप गया. कोमल की सास माया देवी बहू के आने से बहुत खुश थी. स्टेशन के बाहर नीकल कर उन्होंने तांगा कीया. पहले माया देवी टाँगे पे चढी. उसके बाद रामलाल ने बहू को चढ़ने दीया. रामलाल को मालूम था की जब बहू टाँगे पे चढ़ने के लीये टांग ऊपर करेगी तो उसे कुरते के कटाव में से बहू की पूरी टांग और नितम्ब भी देखने को मिल जाएंगे. वाही हुआ. जैसे ही कोमल ने टाँगे पे बैठने के लीये टांग ऊपर की राम्म्लाल को चूरिदार में कसी बहू की Sexy टांगों और भारी चूतडों की झलक मिल गई. यहाँ तक की रमलाल को चूरिदार के सफ़ेद महीन कपरे में से बहू की कच्छी (पैंटी) की भी झलक मिल गई. बहू ने गुलाबी रंग की कच्छी पहन रखी थी. अब तो रामलाल का लंड भी हरकत करने लगा. उसने बरी मुश्किल से अपने को संभाला. रामलाल को अपनी बहू के बरे में ऐसा सोचते हुए अपने ऊपर शरम आ रही थी. वो सोच रहा था की मैं कैसा इंसान हूँ जो अपनी ही बहू को ऐसी नज़रों से देख रहा हूँ. बहू तो बेटी के समान होती है. लेकीन क्या करता ? था तो मरद ही. घर पहुँच कर सास ससुर ने बहू की खूब खातिरदारी की.

    गाँव में आ कर अब कोमल को १५ दिन हो चुके थे. सास की तबियत ख़राब होने के कारण कोमल ने सारा घरका काम संभाल लीया था. उसने सास ससुर की खूब सेवा करके उन्हें खुश कर दीया था. गाँव में औरतें लहंगा चोली पहनती थी, इसलिए कोमल ने भी कभी कभी लहंगा चोली पहनना शुरू कर दीया. लहंगे चोली ने तो कोमल की जवानी पे चार चाँद लगा दिए. गोरी पतली कमर और उसके नीचे फैलते हुए भारी नितम्ब ने तो रामलाल का जीना हराम कर रखा था.
    पिताजी.” कोमल सोच रही थी की कीसी तरह ये धरती फत्जाए और मैं उसमे समा जाऊं.” बेटी इसमे शर्माने की क्या बात है ?. तुम्हारी उम्र में लड़किओं कि कछी अक्सर बहुत जल्दी छोटी हो जाती है. गाँव में तो और्तें कच्च्ही पहनती नहीं हैं. अगर छोटी हो गई है तो सासू माँ सेकः देना शहर जा कर और खरीद एंगी. हम गए तो हम ले आएँगे.लो ये सूख गई है, रख लो.” ये कह कर रामलाल ने कोमल को उस्कि पंटी और ब्रा दे दी. इस घटना के बाद रामलाल ने कोमल के साथ और्खुल कर बातें करना शुरू कर दीया था एक दिन माया देवी को शहर सत्संग में जन था. रामलाल उनको ले कर शहर जाने वाला था.

    दोनों घर से सबह स्टेशन की और चल पड़े.रास्ते में रामलाल के जान पहचान का लड़का कार से शहर जाता हामिल गया. रामलाल ने कहा की Aunty को भी साथ ले जाओ. लड़का मंगाया और माया देवी उसके साथ कार में शहर चली गई. रामलाल घर्वापस आ गया. दरवाज़ा उंदर से बूंद था. बाथरूम से पानी गिरने किअवाज़ आ रही थी. शायद बहू नहा रही थी. कोमल तो समझ रहिथि की सास ससुर शाम तक ही वापस लौटेंगे. रामलाल के कमरे का एक्दार्वाज़ा गली में भी खुलता था. रामलाल कमरे का टला खोल के अप्नेकमरे में आ गया. उधर कोमल बेखबर थी. वो तो समझ रही थीकि घर में कोई नहीं है. नहा कर कोमल सिर्फ़ पेटीकोट और ब्लाउज में ही बाथरूम से बाहर नीकल आई. उसका बदन अब भी गीला था. बाल भीगे हुए थे. कोमल अपनी पैंटी और ब्रा जो अभी उसने धोई थी सुखाने के लीये आँगन में आ गई. रामलाल अपने कमरे के परदे के पीछे से सारा नज़ारा देख रहा था. बहू को पेटीकोट और ब्लाउज में देख कर रामलाल को पसीना आ गया. क्या बाला की खूबसूरत थी.



  • ससुर जी का घोड़े जेसा लंड

    दोस्तो मेरी उमर 26 साल की है मेरी शादी हो चुकी है मेरे पति एक मार्केटिंग कंपनी मे जॉब करते है इस लिए वो ज़्यादातर घर से बाहर ही रहते है. अभी मेरी शादी को सिर्फ़ 3 साल हुए है और ये कहानी दोस्तो आज से करीब 2 साल पहले की है. मेरे घर मे मेरे सास ससुर और मेरी एक 18 साल की ननद रहती है. बेस्ट इंडियन सेक्स स्टोरीस
    मेरी शादी को 3 साल हो चुके है और अभीतक मैं 25-30 बार ही सेक्स किया है क्योकि मेरे हज़्बेंड के पास इतना टाइम नही होता. इसलिए मैं और मेरी चूत चुदाई के लिए तड़पति रहती है. एक दिन की बात है मैं अपने रूम मे बैठकर .वी पर कुछ देख रही थी तभी मुझे प्यास लगी और मैं किचन मे से पानी पीने के लिए जाने लगी. जब मैं किचन मे जा रही थी तभी मुझे अपने ननंद के रूम मे से कुछ आवाज़े सुनी, मैने उसके रूम की विंडो मे से चुपके से देखा तो मैं पूरी तरह से हैरान रह गई.
    मैने देखा की मेरी ननंद नंगी नीचे ज़मीन पर पूरी नंगी लेटी हुई है और हमारा कुत्ता उसकी चूत को चाट रहा है और वो कुत्ते के लंड को अपने हाथ मे लेकर ज़ोर ज़ोर से उपर नीचे कर रही है और कुछ ही देर बाद वो कुत्ते के सामने कुत्ति बन गई और कुत्ता उसके उपर पीछे से चढ़ गया और ज़ोर ज़ोर से उसे चोदने लग गया. मुझसे ये सब देखा ना गया इसलिए मैं वाहा से हट गई.
    करीब 15 मिनिट बाद मेरी ननंद के रूम मे से कुत्ता बाहर आया और उसके पीछे से मेरी ननंद भी आ गई. मैने उसे सॉफ सॉफ बता दिया की मैने उसे ये सब करते हुए देख लिया है. वो मेरे सामने रोने लग गई पर मैने उसे समझाते हुए कहा तुम कोई अपना बॉयफ्रेंड बना लो ऐसे जानवर से ऐसे काम करवाना ठीक नही है.
    तब मेरी ननंद ने कहा – भाभी मैं बॉयफ्रेंड तो बना लून पर आदमी का तो कुत्ते से भी ज़्यादा बड़ा होता है इसलिए मुझे डर लगता है.
    मैं – नही इतना भी बड़ा नही होता जितना तुम समझ रही हो.
    मेरी ननद – नही भाभी मैने देखा है इस लिए मैं कह रही हूँ.
    मैं – अछा किस का देख लिया है तूने, कही हॉर्स का तो नही देख लिया.
    मेरी ननंद – नही भाभी मैने डॅड का देखा है उनका लंड तो हॉर्स से बड़ा है कसम से इतना लंबा और मोटा लंड तो मैने आज तक नही देखा.
    ननंद के मूह से ऐसी बातें सुनकर मेरी चूत मे खुज़ली होनी शुरू हो गई. मुझे तो पता ही नही था की मेरे घर मे जबरदस्त चुदाई का समान है. अब मुझे किसी भी हालत मे ससुर जी का लंड देखना था बस मुझे एक आछे से मोके की तलाश थी.
    और मुझे जल्दी ही एक . मिल गया. उस दिन मेरे सारे घरवाले किसी शादी मे 2 दिन के लिए चले गये. घर मे मैं और मेरे ससुर थे. जब रात हुई तो मैने ससुर जी के दूध मे नींद की मेडिसिन घोल कर दे दी. दूध पीते ही उन्हे नींद आनी शुरू हो गई. पर फिर भी मैं करीब 30 मिनिट बाद ही उनके रूम मे गई. बेस्ट इंडियन सेक्स स्टोरीस
    मैने अंदर जाते ही ससुर जी को बहोत हिलाया जब वो नही उठे तो मैं समझ गई अब रास्ता सॉफ है, मैं जल्दी से उनकी धोती साइड मे करी और अंडरवेर का नाडा खोल कर उनका लंड बाहर निकाल लिया. उनका लंड देख कर तो मेरी आँखों मे एक अलग सी चमक आ गई. मेरी ननंद सच मे सच कह रही थी, मेरे ससुर का लंड सच मे काफ़ी बड़ा और मोटा था वो कमाल की बात तो ये थी की अभी लंड बैठा हुआ था तो भी वो कितना ख़तरनाक लग रहा था.
    मैने अपने दोनो हाथो से लंड को पकड़ कर उपर नीचे करने लग गई और पता नही कब खुद ही मेरे होंठ लंड के पास आ गये और उसे चूमने लग गये. अब मैं लंड को अपने मूह मे लेकर चूसने लग गई और नीचे से उपर तक लंड को अपनी ज़ुबान से चाटने लग गई. तभी अचानक लंड मे एक करेंट सा लगा और लंड खड़ा होना शुरू हो गया. देखते ही देखते लॅंड 5 इंच से 14 इंच का हो गया
    मेरी आँखें खुली की खुली रह गई और मेरी खुशी का कोई ठिकाना नही था. सच मे लंड काफ़ी शानदार लग रहा था. अब तो मेरी ज़ुबान लंड को चाटने मे लगी हुई थी. लंड को देखकर अब मेरी चूत मे खुज़ली होनी शुरू हो गई थी. मैं उठी और अपनी सारी और पेटिकोट उतार सीधा लंड के उपर आ गई और लंड को अपने हाथ मे पकड़ अपनी चूत पर रगड़ने लग गई. मुझे बहोत मज़ा आ रहा था. मैं इतने बड़े लंड को चूत मे कैसे लूँगी इसके बारे मे सोच रही थी और लंड को अपनी चूत पर लगा कर नाप रही थी. मैने देखा की लंड अगर चूत मे जाता है तो वो मेरे पेट तक आता है.
    मुझे अब डर सा लगने लग गया इस लिए अब मैने जाने का फ़ैसला किया. मैं जैसे ही लंड के उपर से उठने लगी तभी मेरी कमर को किसी ने ज़ोर से पकड़ लिया. मैं एकदम बहोत डर गई, मैने देखा तो ससुर जी जाग चुके थे और उन्होने ही मुझे पकड़ा हुआ था.
    ससुर – बहू अब लंड को नाप तो लिया है तुमने अब . अपनी चूत मे भी ले लो ना तुम्हे बहोत मज़ा आएगा.
    मैं उन्हे अपने को छुड़वाने की कोशिश करी पर उन्होने एक दम मुझे बेड पर दे मारा और मेरे उपर आ कर बहोत बुरी तरह मेरे बूब्स को मसलने लग गये. मेरे आँखे बंद होनी शुरू हो गई क्योकि अब मैं मदहोश सी होनी शुरू हो गई थी. तभी ससुर जी ने मेरा ब्लाउस पकड़ा और खींच कर फाड़ दिया और मेरे नंगे बूब्स को एक एक करके अपने मूह मे लेकर चूसने लग गये.
    मुझे बहोत मज़ा आने लग गया मैं पागल सी होने लगी थी क्योकि आज तक मेरे बूब्स मेरे पति ने भी नही चूसे थे. ससुर जी अब मेरी चूत मे उंगलिया कर रहे थे. मेरी चूत गीली होनी शुरू हो गई थी. मुझे सच मे बहोत मज़ा आ रहा था. तभी ससुर जी नीचे गये और मेरी चूत को अपनी ज़ुबान से चाटने लग गये. जैसे ही उनकी ज़ुबान मेरी चूत पर लगी वैसेही मेरे पूरे जिस्म मे करेंट सा दौड़ने लग गया. अब मेरे एक हाथ मे उनका लंड था जिसे मैं ज़ोर ज़ोर से उपर नीचे कर रही थी.
    अचानक ही ससुर जी ने मेरे हात से लंड ले लिया और खुद ही अपना लंड मेरी चूत के उपर रगड़ने लग गये मेरी चूत के दाने के उपर लंड पूरी स्पीड मे उपर नीचे हो रहा था. मैं पूरी तरह से पागल हो चुकी थी क्योकि आज तक ऐसा मज़ा कभी नही मिला था. करीब 2 मिनिट बाद ही मेरी चूत ने काफ़ी सारा पानी बाहर निकाल दिया.
    ससुर जी – बहू ये क्या है अभी तो मेरा लंड तेरी चूत के अंदर गया भी नही और तेरी चूत ने पहले ही जवाब दे दिया. बेस्ट इंडियन सेक्स स्टोरीस
    उनके मूह से ऐसी बातें सुनकर मैं शर्मा गई और मैं धीरे से बोली – ससुर जी अब प्लीज़ आप मेरी चूत को आछे से चोद दे मुझे बहोत परेशान करती है.
    ये सुनते ही ससुर जी ने मेरे होंठो को चूसा और नीचे जाकर मेरी चूत को फिरसे चाटने लग गये. अब की बार वो अपनी ज़ुबान मेरी चूत के दाने पर घुमा रहे थे जिससे मेरे मूह से अब आहह आहह की मस्ती से भरी आवाज़े निकल रही थी.
    ससुर जी अब अपनी दो उंगलिया मेरी चूत मे उतार दी और ज़ोर ज़ोर से उपर नीचे कर रहे थे और साथ मे ही उपर से मेरी चूत के दाने को चाट रहे थे. एक साथ दो हमले मेरी चूत सहन ना कर पाई और करीब एक मिनिट मे ही मेरी चूत ने फिर अपना सारा पानी निकल दिया.
    मैं – ससुर जी अब क्यो आप मुझे तड़पा रहे हो प्लीज़ जल्दी से अब आप अपना लंड मेरी चूत मे डालो और मेरी प्यास को भुजा दो प्लीज़.
    मैने उनके लंड को हाथ मे पकड़ा तो मैने देखा की ये तो इतना मोटा है की ये मेरे हाथ मे नही आ रहा है ये तो मेरी चूत के चितड़े चितड़े कर देगा. मेरे चेहरे पर इस परेशानी के भाव देख कर ससुर जी बोले – मेरी बहू तू फिकर ना कर आज इस लंड को अपनी चूत मे ले फिर, आज के बाद तू किसी दूसरे के लंड को देखेंगी भी नही.
    मैं – पर ससुर जी आज आप मेरी चूत की आछे से चुदाइ करना ये साली मुझे बहोत तंग करती है.
    ये सुनते ही ससुर जीने मेरी तरफ देखकर हल्की सी स्माइल करी और अपना लंड मेरे मूह के पास कर दिया. मैं समझ गई की अब ये क्या चाहते है मैने झट से अपना मूह खोल दिया और ज़ोर ज़ोर से लंड को आछे से चूसने लगी.
    ससुर जी तभी मेरा सिर पकड़ लिया और ज़ोर ज़ोर से मेरे को अपने लंड से चोदने लग गये. अब उनका लंड मेरे गले के अंदर जा रहा था जिससे मुझे सांस लेने मे बहोत दिक्कत आ रही थी पर वो रुके नही और करीब 5 मिनिट तक मेरे मूह ऐसे ही बे- रहमी से चोदते रहे.
    अब उन्होने अपना लंड मेरे मूह से निकाला और मेरी चूत पर रखकर और थोड़ासा ज़ोर लगा कर अपने लंड का आगे वाला हिस्सा पहले मेरी चूत मे उतारा और बाद मे फिर एक ज़ोर से धक्का लगा कर करीब 4-5 इंच तक लंड मेरी चूत मे उतार दिया. बेस्ट इंडियन सेक्स स्टोरीस
    लंड अंदर जाते ही मेरी जान निकल गई मैं उनके नीचे एक मछली की तरह तड़प रही थी. अब ससुर जी बहोत पुराने खिलाड़ी थे और धीरे धीरे मेरी चूत मे अपना लंड अंदर बाहर करते रहे. अब उन्होने मेरी गॅंड के नीचे मे पिल्लो रखा जिससे अब मेरी चूत उपर उठ गई और अब तो ससुर जी ने अपना लंड मेरी चूत मे एक दम डाला और उपर नीचे करने लग गये. अब ससुर जी मेरे उपर आ गये और ज़ोर ज़ोर से मेरी चूत को चोदने लग गये.
    ससुर जी ने अब अपना बाहर निकाला और एक जोरदार धक्के से अपना पूरा 14 इंच का लंड एक ही बार मे मेरी चूत मे उतार दिया. अब मैने अपनी दोनो टाँगे उपर उठा ली और अपनी गॅंड उठा उठा कर अपने ससुर जी का लंड अपनी चूत मे लेने लग गई. ससुर जीने मेरी दोनो टाँगो को अपने मोढ़े पर रख लिया और ज़ोर ज़ोर से मुझे चोदने लग गये. मुझे बहोत मज़ा आ रहा था मैं अपनी दोनो आँखें बंद कर के ससुर जी के हर धक्के का मज़ा ले रही थी.
    करीब 20 मिनिट की इस घमासान चुदाई के बाद अचानक मेरा पूरा जिस्म अकड़ गया मेरी चूत ने ससुर जी के लंड पर अपने पानी की बारिश कर दी और 2 मिनिट बाद ही ससुर जी ने भी अपना सारा पानी मेरी चूत मे ही निकाल दिया. मुझे बहोत ज़ोर से पेशाब आ रहा था पर मुझसे उठा तक नही जा रहा था इस लिए ससुर जी मुझे अपनी गोद मे उठाकर बाथरूम मे ले गये और मैने उनके सामने बाथरूम किया क्योकि उन्होने मेरी चूत मे से निकलते पेशाब को देखना था.
    मुझे अपना फीडबॅक देने के लिए कृपया कहानी को ‘लाइक’ ज़रूर करे, ताकि कहानियों का ये दौर देसीकाहानी पर आपके लिए यूँही चलता रहे.
    मेरी चूत से निकलते गरम गरम पीले पीले पेशाब को देखकर ससुर जी फिर से गरम हो गये और अपना लंड मेरे मूह मे डाल कर फिर से मेरे मूह को चोदने लग गये. फिर ससुर जीने मुझे टाय्लेट की सीट पर बिताया और मेरी दोनो टाँगे उपर कर के मेरी चूत और गॅंड दोनो मारी. आज मेरी चूत और गॅंड दोनो आछे से फट चुकी थी और मेरी बहोत ज़्यादा बुरी हालत हो चुकी थी. बेस्ट इंडियन सेक्स स्टोरीस
    उस दिन से मैं रोज रात को अपने ससुर जी से चुदति हूँ, एक दिन मेरी ननंद ने मुझे और अपने डॅड से सेक्स करते देख लिया और फिर मैने अपने साथ उसे भी ले लिया. अब हम तीनो इस सेक्स लाइफ के पूरे मज़े लेते है.

  • ससुर जी की जवानी 2



    बहुत कसा हुआ पेटीकोट पहनती थी. बदन गीला होने के कारण पेटीकोट उसके चूतडों से चिपका जा रहा था. बहू के फैले हुए चूतडों पेटीकोट में बरी मुश्किल से समा रहे थे. बहू का मादक रूप मनो उसके ब्लाउज और पेटीकोट में से बाहर निकलने की कोशिश कर रहा था. उफ क्या गद्राया हुआ बदन था. बहू ने अपनी धुली हुई कच्छी और ब्रा डोरी पर सूखने दाल दी. अचानक वो कुछ उठाने के लीये झुकी तो पेटीकोट उसके विशाल चूतडों पर कास गया. पेटीकोट के सफ़ेद कपरे में से रामलाल को साफ दीख रहा था की आज बहू ने काले रंग की कच्छी पहन रखी है. उफ बहू के सिर्फ़ बीस प्रतिशत चूतडों ही कच्छी में थे बाकी तो बाहर गिर रहे थे. जब बहू सीधी हुई तो उसकी कच्छी और पेटीकोट उसके विशाल चूतडों के बीच में phans gaye. अब तो रामलाल का लौडा फन्फनाने लगा. उसका मन कर रहा था की वो जा कर बहू के चूतडों की दरार में फँसी पेटीकोट और कच्छी को खींच के निकाल ले.

    बहू ने मानो रामलाल के दिल की आवाज़ सुन ली. उसने अपनी चूतडों की दरार में फँसे पेटीकोट को कींच के बाहर निकाला लीया. बहू आँगन में खरी थी इसलिए पेटीकोट में से उसकी मांसल टांगें भी नज़र आ रही थी. रामलाल के लंड में इतना तनाव सीता को चोदते वक्त भी नहीं हुआ था. बहू के Sexy चूतडों को देख के रामलाल सोचने लगा की इसकी गांड मार के तो आदमी धन्य हो जाए. रामलाल ने आज तक कीसी औरत की गांड नहीं मारी थी. असलियत तो ये थी की रामलाल का गधे जैसा लौडा देख कर कोई औरत गांड मरवाने के लीये राज़ी ही नहीं थी. माया देवी तो चूत ही बरी मुश्किल से देती थी गांड देना तो बहुत दूर की बात थी. एक दिन कोमल ने खेतों में जाने की इच्छा प्रकट की. उसने सासू माँ से कहा, ” मम्मी जी मैं खेतों में जाना चाहती हूँ, अगर आप इजाज़त देन तो आपके खेत और फसल देख औन. शहर में तो ये देखने को मिलता नहीं है.”

    ” अरे बेटी इसमें इजाज़त की क्या बात है? तुम्हारे ही खेत हैं जब चाहो चली जाओ. मैं अभी तुम्हारे ससुर जी से कहती हूँ तुम्हें खेत दिखाने ले जाएँ.”
    ” नहीं नहीं मम्मी जी आप पिताजी को क्यों परेशान करती हैं मैं अकेली ही चली जाउंगी.”
    ” इसमे परेशान करने की क्या बात है? कई दिन से ये भी खेत नहीं गए हैं तुझे भी साथ ले जाएंगे. जाओ टब तैयार हो जाओ. और हाँ लहंगा चोली पहन लेना, खेतों में जाने के लीये वही ठीक रहता है.” कोमल तैयार होने गई. माया देवी ने रामलाल को कहा,
    ” अजी सुनते हो, आज बहू को खेत दिखा लाओ. कह रही थी मैं अकेली ही चली जाती हूँ. मैंने ही उसको रोका और कहा ससुरजी तुझे ले जाएंगे.”

    ” ठीक है मैं ले जाऊंगा, लेकीन अकेली भी चली जाती तो क्या हो जाता ? गाँव में किस बात का डर?””
    ” कैसी बातें करते हो जी? जवान बहू को अकेले भेजना चाहते हो. अभी नादाँ है. अपनी जवानी तो उससे संभाली नहीं जाती, अपने आप को क्या संभालेगी? ” इतने में कोमल आ गई. लहंगा चोली में बला की खूबसूरत लग रही थी.
    ” चलिए पिताजी मैं टायर हूँ.”

    ” चलो बहू हम भी टायर हैं.” ससुर और बहू दोनों खेत की और नीकल परे. कोमल आगे आगे चल रही थी और रामलाल उसके पीछे. कोमल ने घूंघट निकाल रखा था. रामलाल बहू की मस्तानी चाल देख कर पागल हुआ जा रहा था. बहू की पतली गोरी कमर बल खा रही थी. उसके नीचे फैले हुए मोटे मोटे चूतडों चलते वक्त ऊपर नीचे हो रहे थे. लहंगा घुटनों से थोड़ा ही नीचे था. बहू की गोरी गोरी टांगें और चूतडों तक लटकते लंबे घने काले बाल रामलाल की दिल की धड़कन बारह रहे थे. ऐसा नज़ारा तो रामलाल को ज़िंदगी में पहले कभी नसीब नहीं हुआ. रामलाल की नज़रें बहू के मटकते हुए मोटे मोटे चूतडों और पतली बल खाती कमर पर ही टिकी हुई थी.

    Un जान लेवा चूतडों को मटकते देख कर रामलाल की आंखों के सामने उस दिन का नजारा घूम गया जिस दिन उसने बहू के चूतडों के बीच उसके पेटीकोट और कच्छी को फँसे हुए देखा था. रामलाल का लौडा खड़ा होने लगा. कोमल घूंघट निकाले आगे आगे चली जा रही थी. वो अच्छी तरह जानती थी की ससुर जी की आँखें उसके मटकते हुए नितम्ब पे लगी हुई हैं. रास्ता संकरा हो गया था और अब वो दोनों एक पूग डंडी पे चल रहे थे. अचानक साइड की पूग डंडी से दो गधे कोमल के सामने आ गए. रास्ता इतना कम चौरा था की साइड से आगे निकलना भी मुश्किल था. मजबूरन कोमल को गधों के पीछे पीछे चलना पड़ा. अचानक कोमल का ध्यान पीछे वाले गधे पे गया.

    ” अरे पिताजी देखिये ये कैसा गधा है ? इसकी तो पाँच टांगें हैं.” कोमल आगे चल रहे गधे की और इशारा करते हुए बोली.
    ” बेटी, टब तो बहुत भोली हो, ज़रा ध्यान से देखो इसकी पाँच टांगें नहीं हैं.” कोमल ने फीर ध्यान से देखा तो उसका कलेजा दहक सा रह गया. गधे की पाँच टांगें नहीं थी, वो तो गधे का लंड था. बाप रे क्या लम्बा लंड था ! ऐसा लग रहा था जैसे उसकी टांग हो. कोमल ने ये भी नोटिस कीया की आगे वाला गधा, गधा नहीं बल्कि गधी थी क्योंकि उसका लंड नहीं था. गधे का लंड खरा हुआ था. कोमल समझ गई की गधा क्या करने वाला था. अब तो कोमल के पसीने चूत गए. पीछे पीछे ससुर जी चल रहे थे. कोमल अपने आप को कोसने लगी की ससुर जी से क्या सवाल पूछ लीया. कोमल का शरम के मरे बुरा हाल था. रामलाल को अच्छा मोका मिल गया था. उसने फीर से कहा,

    ” बोलो, बहू हैं क्या इसकी पाँच टांगें ?” कोमल का मुंह शरम से लाल हो गया, और हक्लाती हुई बोली,
    ” जज..जी चार ही हैं.”
    ” तो वो पांचवी चीज़ क्या है बहु?”
    ” ज्ज्ज…जी वो तो ……जी हमें नहीं पटा.”
    „ पहले कभी देखा नहीं बेटी ?” रामलाल मेज़ लेता हुआ बोला.
    ” नहीं पिताजी.” कोमल शर्माते हुए बोली.
    ” मर्दों की टांगों के बीच में जो होता है वो तो देखा है न?”
    ” जी..” अब तो कोमल का मुंह लाल हो गया.

    अरे बहू जो चीज़ मर्दों के टांगों के बीच में होती है ये वाही चीज़ तो है.” रामलाल कोमल के साथ इस तरह की बातें कर ही रहा था की वाही हुआ जो कोमल मन ही मन मन रही थी की ना हो. गधा अचानक गधी पे चढ़ गया और उसने अपना तीन फ़ुट लम्बा लंड गधी की चूत में पेल दीया. गधा वहीं खरा हो कर गधी के उंदर अपना लंड पेलने लगा. इतना लम्बा लंड गधी की चूत में जाता देख कोमल हार्बर कर रुक गई और उसके मुंह से चीख नीकल गई,
    ” ऊओईइ मा….”
    ” क्या हुआ बहू ?”
    ” ज्ज्ज..जी कुछ नहीं.” कोमल घबराते हुए बोली.
    ” लगता है हमारी बहू डर गई.” रामलाल मौके का पूरा फायदा उठता हुआ दरी हुई कोमल का साहस बर्हाने के बहाने उसकी पीठ पे हाथ रखता हुआ बोला.
    ” जी पिताजी.”
    ” क्यों डरने की क्या बात है ?”
    वैसे ही.”

    ” वैसे ही क्या मतलब ? कोई तो बात ज़रूर है. पहली बार देख रही हो न?” रामलाल कोमल की पीठ सहलाता हुआ बोला.
    ” जी.” कोमल शर्माते हुए बोली.
    ” अरे इसमें शर्माने की क्या बात है बहु. जो राकेश तुम्हारे साथ हेर रात करता है वाही ये गधा भी गधी के साथ कर रहा है.”
    ” लेकीन इसका तो इतना…….” कोमल के मुंह से अनायास ही नीकल गया और फीर वो पच्छ्तायी..
    ” बहुत बड़ा है बहु?” रामलाल कोमल की बात पूरी करता हुआ बोला.
    अब रामलाल का हाथ फिसल कर कोमल के नितम्ब पे आ गया था.
    ” ज्ज्जी….” कोमल सिर नीचे किए हुए बोली.
    ” ओ ! तो इसका इतना बार देख के डर गई ? कुछ मर्दों का भी गधे जैसा ही होता है बहु. इसमें डरने की क्या बात है ?. जब औरत बरे से बार झेल लेती है, फीर ये तो गधी है.”
    कोमल का चेहरा शरम से लाल हो गया था. वो बोली,
    ” चलिए पिताजी वापस चलते हैं, हमें बहुत शरम आ रही है.”

    ” क्यों बहू वापस जाने की क्या बात है? तुम तो बहुत शर्माती हो. बस दो मिनट में इस गधे का काम खत्म हो जाएगा फीर खेत में चैलेन्ज.” बातों बातों में रामलाल एक दो बार कोमल के नितम्ब पे हाथ भी फेर चुक्का था. रामलाल का लंड कोमल के मुलायम नितम्ब पर हाथ फेर के खड़ा होने लगा था. वो कोमल की पैंटी भी फील कर रहा था. कोमल क्या करती ? घूंघट में से गधे को अपना लंड गधी के उंदर पेलते हुए देखती रही. इतना लम्बा लंड गधी के उंदर बाहर जाता देख उसकी चूत पे भी चीतियन रेंगने लगी थी.

    कोमल को रामलाल का हाथ अपने नितम्ब पर महसूस हो रहा था. इतनी भोली तो थी नहीं. दुनियादारी अच्छी तरह से समझती थी. वो अच्छी तरह समझ रही थी की ससुर जी मौके का फायदा उठा के सहानुभूति जताने का बहाना करके उसकी पीठ और नितम्ब पे हाथ फेर रहे हैं. इतने में गधा झर गया और उसने अपना तीन फ़ुट लम्बा लंड बाहर निकाल लीया. गधे के लंड में से अब भी वीर्य गिर रहा था. ससुर जी ने दोनों गधों को रास्ते से हटाया और कोमल के चूतडों पे हथेली रख कर उसे आगे की और हलके से धक्का देता हुआ बोला,
    ” चलो बहू अब हम खेत चलत हैं.”
    ” चलिए पिताजी.”
    ” बहू मालूम है तुम्हारी सासू माँ भी मुझे गधा बोलती है.”
    ” हा.. ! क्यों ? आप तो इतने अच्छे हैं.”

    ” बहू तुम तो बहुत भोली हो. वो तो कीसी और वझे से मुझे गधा बोलती है.” अचानक कोमल रामलाल का मतलब समझ गई. शायद ससुर जी का लंड भी गधे के लंड के माफिक लम्बा था तुभी सासू माँ ससुर जी को गधा बोलती थी. इतनी सी बात समझ नहीं आई ये सोच कर कोमल अपने आप को मन ही मन कोसने लगी. कोमल सोच रही थी की ससुर जी उससे कुछ ज़्यादा ही खुल कर बातें करने लगे हैं. इस तरह की बातें बहू और ससुर के बीच तो नहीं होती हैं. बात बात में प्यार जताने के लीये उसकी पीठ और नितम्ब पे भी हाथ फेर देते थे.थोरी ही देर में दोनों खेत में पहुँच गए. रामलाल ने कोमल को सारा खेत दिखाया और खेत में काम करने वाली औरतों से भी मिलवाया. कोमल थक गई थी इसलिए रामलाल ने उसे एक आम के पैर के नीचे बैठा दीया.

    ” बहू तुम यहाँ आराम करो मैं कीसी औरत को तुम्हारे पास भेजता हूँ. मुझे थोड़ा पम्प हौस में काम है.”
    ” ठीक है पिताजी मैं यहाँ बैठ जाती हूँ.”
    रामलाल पम्प हौस में चला गया

  • बूढ़े ससुर का 11 इंच का लंड

    मेरी शादी हो चुकी हे. मेरे पति एक मार्केटिंग कम्पनी में जॉब करते हे. इसलिए वो अक्सर घर से बहार ही रहते हे. अभी मेरी शादी को सिर्फ 3 साल हुए हे और ये कहानी दोस्तों आज से करीब 2 साल पहले की हे. मेरे घर में मेरे सास, ससुर और मेरी एक 18 साल की ननंद रहती हे. मेरी शादी को 3 साल चुके हे लेकिन मैंने अभी तक अपने पति के साथ 30-40 बार ही सेक्स किया हे. क्यूंकि मेरे हसबंड पर इतना टाइम ही नहीं होता. इसलिए मैं और मेरी चूत चुदाई के लिए लिए तड़पती रहती हे. एक दिन की बार हे मैं अपने रूम में बैठ कर टीवी देख रही थी. तभी मुझे प्यास लगी और मैं किचन में से पानी लेने के लिए जाने लगी. जब मैं किचन में जा रही रही तभी मुझे अपनी ननंद की रूम से कुछ आवाजे आई. मैंने उसके रूम की विंडो में से चुपके से देखा तो मैं पूरी तरह से हैरान हो गई.
    मैंने देखा की मेरी ननंद नंगी हो के लेटी हुई थी. मुझसे ये सब देखा ना गया इसलिए मैं वहां से हट गई. मैंने उसे साफ़ साफ़ बता दिया की मैंने उसे ये सब करते हुए देख लिया हे. वो मेरे सामने रोने लगी. मैंने उसे कहा देखो मैं किसी को कुछ नहीं कहूँगी लेकिन तुम ऐसे सेक्स करो वो गलत हे. इस से अच्छा तो तुम किसी लड़के के साथ अफेयर कर लो.
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    मेरी ननंद बोली: भाभी मैं बॉयफ्रेंड तो रख लूँ लेकिन आदमी का तो बड़ा होता हे इसलिए मुझे डर लगता हे.
    मैं: अरे नहीं इतना बड़ा नहीं होता हे जितना तुम समझ रही हो.
    ननंद: नहीं भाभी मैंने देखा हे इसलिए मैं कह रही हूँ.
    मैं: अच्छा किस का देख लिया हे तूने, कही किसी घोड़े का लंड तो नहीं देख लिया.
    ननंद: नहीं भाभी मैंने डेडी जी का देखा हे. उनका लंड तो घोड़े से भी बड़ा हे. कसम से इतना लम्बा और मोटा लंड तो मैंने आजतक नहीं देखा हे.
    ननंद के मुहं से ऐसी बातें सुनकर मेरी चूत में खुजली होने लगी. मुझे तो पता नहीं था की मेरे घर में ही जबरदस्त चुदाई का सामान हे. अब मैं भी मन ही मन में जैसे गाँठ बाँध के बैठी थी की मौका मिले तो ससुर जी का लंड देखना जरुर हे! और मुझे जल्दी ही एक मौका मिल भी गया. उस दिन मेरे सारे घरवाले किसी शादी में 2 दिन के लिए चले गए. घर में मैं और मेरे ससुर ही थे. जब रात हुई तो मैंने ससुर जी का दूध देने के लिए गई. मैंने दूध के अन्दर निंद की गोली डाल दी थी. दूध पिने के कुछ मिनिट में ही उनको नींद आनी शरु हो गई. पर फिर भी मैं कुछ आधे घंटे तक वेट करती रही. और उसके बाद ही मैं उन्के रूम में गई.
    मैंने अन्दर जाते ही ससुर जी को बहुत हिलाया. पर जब वो नहीं उठे तो मैं समझ गई की अब रास्ता साफ़ हे. मैंने जल्दी से उनकी धोती को साइड में कर दी और कच्छा खोल कर उनका लंड बहार निकाल लिया. उनका लंड देख कर मेरी आँखों में अलग ही चमक आ गई. मेरी ननंद ने जो कहा था वो एकदम सच था. मेरे ससुर का लंड सच में काफी बड़ा और मोटा था. और सब से कमाल की बात ये थी की वो लंड अभी सोया हुआ था तो भी बहुत मोटा और लम्बा था. जब वो लंड कडक होगा तो कैसे होगा!!! मैंने अपने दोनों हाथो से लंड को पकड़ कर ऊपर करना चालू किया. और पता नहीं मेरा अपने ऊपर से कंट्रोल ही जैसे चला गया था. मैंने लंड को थोडा हिलाया और फिर निचे झुक के अपने होंठो से उसे चूमने भी लगी. अब मैं इस मोटे लंड को मुहं में ले के चूमने लग गई. और निचे से ऊपर तक पुरे लोडे को अपनी जबान से चाटने लगी. तभी अचानक इस बड़े लोडे के अन्दर जैसे करंट आ गया. और लंड खड़ा होना चालु हो गया. कुछ देर पहले जो लंड 5 इंच का था अब वो लम्बा हो के 11 इंच का हो गया.
    मेरी आँखे खुली की खुली रह गई और मेरी ख़ुशी का कोई ठिकाना ना रहा. सच में लंड काफी शानदार लग रहा था. अब तो मेरी जुबान लंड को चाटने में लगी हुई थी. लंड को देख कर अब मेरी चूत में खुजली होनी शरु हो गई थी. मैं उठी और अपनी साडी और पेटीकोट उतार के सीधा लंड के ऊपर आ गई और लंड को अपने हाथ में पकड़ के अपनी चूत के ऊपर रगड़ने लग गई. मुझे बहोत मजा आ रहा था. मैंने इतने बड़े लंड को चूत में कैसे लेना हे वो भी सोचा नहीं था. और लंड को चूत पर लगाकर नाप रही थी. मैंने देखा की अलंद अगर ये लंड मेरी चूत में पूरा जाता हे तो मेरे पेट तक अ जाएगा!
    मुझे अब डर सा लगने लगा था. इसलिए अब मैंने जाने का फैसला कर लिया. मैं लंड के ऊपर से उठ ही रही थी की ससुर जी ने अपने मजबूत हाथो से मुझे कमर में से पकड़ लिया. मैं एकदम बहोत ही डर गई. मैंने देखा की ससुर जी जाग चुके थे और वो मुझे पकड़ के वापस लंड पर बिठाने लगे थे.ससुर जी: बहु अब लंड को नाप तो लिया तो तुम अब इसको अपनी चूत में भी ले लो ना, कसम से जिसने भी लिया हे उसकी चूत तडपती हे इसे बार बार लेने के लिए!
    मैंने उनसे खुद को छुडवाने की कोशिश की लेकिन पर उन्होंने एकदम मुझे बेड पर दे मारा और मेरे ऊपर आकर बहोत बुरी तरह से मेरे बूब्स को मसलने लगे. मेरी आँखे बंद होनी लगी थी. मैं मदहोश भी होने लगी थी. तभी ससुर जी ने मेरा ब्लाउज पकड़ा और उसे खिंच कर पूरा फाड़ दिया. और वो मेरे नंगे बूब्स को एक एक कर के अपने मुहं में ले के चूसने लगे. मुझे बहोत ही मजा आने लगा था, मैं पागल सी होने लगी थी क्यूंकि आजतक मेरे बूब्स मेरे पति ने भी नहीं चुसे थे ऐसे तो.ससुर जी ने अब मेरी चूत में उंगलिया करनी चालू कर दी. मेरी चूत गीली होने लगी थी. मुझे सच में बहोत ही मजा आ रहा था. तभी ससुर जी निचे गए और मेरी चूत को अपनी जुबान से चाटने लगे. जैसी ही उनकी जीभ मेरी चूत पर लगी वैसे ही मेरे पुरे जिस्म में करंट दौड़ गया. अब मेरे एक हाथ में उनका लंड था जिसे मैं जोर जोर से ऊपर निचे कर के हिला रही थी.
    अचानक ससुर जी ने मेरे हाथ से लंड ले लिया और खुद ही अपने लंड को मेरी चूत के ऊपर रगड़ने लगे. मेरी चूत के दाने के ऊपर लंड पूरी स्पीड में ऊपर निचे हो रहा था. मैं पूरी तरह से पागल हो चुकी थी क्यूंकि आजतक ऐसा मजा पहले कभी नहीं आया था. 2 मिनिट बाद ही मेरी चूत ने काफी सारा पानी बहार निकाल दिया.
    ससुर जी: बहु ये क्या अभी तो मेरा लंड तेरी चूत के अन्दर गया भी नहीं और तेरी चूत ने पहले ही जवाब दे के पानी छोड़ दिया.
    उन्के मुहं से ऐसी बातें सुन के मैं शर्मा गई और मैं धीरे से बोली: ससुर जी अब प्लीज़ आप मेरी चूत को अच्छे से चोदो ये मुझे बहुत परेशान करती हे.ये सुनते ही ससुर जी ने मेरे होंठों को चूसा और निचे जाकर मेरी चूत को फिर से चाटने लगे. अब की वो अपनी जुबान को मेरी चूत के दाने पर घुमा रहे थे जिस से मेरे मुहं में से अह्ह्ह अह्ह्ह्ह ऊह्ह्ह अह्ह्ह की मस्ती भरी आवाजें निकल रही थी. ससुर जी अब अपनी दो उंगलिया मेरी चूत में उतार के उसे जोर जोर से ऊपर निचे करने लगे थे. और साथ में ही ऊपर से मेरी चूत के दाने को भी चाट रहे थे. एक साथ दो हमले मेरी चूत सह न कर पाई और करीब एक मिनिट में ही मेरी चूत ने फिर से अपना सारा पानी निकाल दिया.
    मैं: ससुर जी अब क्यूँ मुझे तडपा रहे हो प्लीज़ जल्दी से अब आप अपना लंड मेरी चूत में डालो और मेरी प्यास को बुझा दो प्लीज़
    मैंने उन्के बड़े लंड को हाथ में पकड़ा तो मैंने देखा की ये तो इतना मोटा हे की ये मेरे हाथ में नहीं आ रहा हे. ते तो मेरी चूत के चीथड़े चीथड़े कर देगा, ये सोच के एक डर की लहर दौड़ उठी मेरे अन्दर. मेरे चहरे पर इस परेशानी के भाव देख कर ससुर जी बोले: मेरी बहु तू फ़िक्र ना कर आज इस लंड को अपनी चूत में ले ले. फिर आज के बाद तू किसी दुसरे के लंड को देखेंगी भी नहीं!
    मैं: पर ससुर जी आप मेरी को अच्छी तरह से चोदना मुझे बहुत तंग किया हुआ हे उसने!
    ये सुनते ही ससुर जी ने मेरी तरफ देख कर हलकी सी स्माइल करने लगी और अपना लंड मेरे मुह के पास कर दिया. मैं समझ गई की अब ये क्या चाहते हैं. मैंने झट से अपना मुहं खोल दिया और अच्छे से उन्के लंड को चूसने लगी.ससुर जी तभी मेरा सर पकड़ के अपने लंड को जोर जोर से मेरे मुहं में मारने लगे और मुहं की मस्त चुदाई करने लगे. अब उनका लंड मेरे गले के अन्दर जा रहा था जिस से मुझे सांस लेने में बहोत ही दिक्कत हो रही थी. पर वो रुके नहीं और करीब 5 मिनिट तक मेरे मुहं को ऐसे ही बेरहमी से चोदते रहे.
    अब उन्होंने अपने लंड मेरे मुहं से निकाला और मेरी चूत पर रख कर और थोडा सा जोर लगा कर अपने लंड का आगे का हिस्सा पहले मेरी चूत में डाला और बाद में फिर एक जोर से धक्का लगा कर करीब 4-5 इंच जितना लंड मेरी चूत में उतार दिया.लंड अंदर जाते ही मेरी जान निकल सी गई. मैं उन्के निचे एक मछली की तरह तडप रही थी. अब ससुर जी बहोत पुराने खिलाडी थे और धीरे धीरे मेरी चूत में अपना लंड अन्दर बाहर कर रहे थे. उन्होंने अभी तक आधे से भी कम लंड ही अन्दर डाला था और ऐसे मुझे चोद रहे थे. ससुर जी ने अब मेरी गांड के निचे एक तकिया लगा दिया जिस से मेरी चूत ऊपर उठ गई और अब तो ससुर जी ने अपना लंड मेरी चूत के एकदम साला और ऊपर निचे करने लगे. अब ससुर जी मेरे ऊपर आ गए और जोर जोर से मेरी चूत को चोदने लगे.
    ससुर जी ने अब अपना बहार निकाला और फिर एक धक्के से अपना पूरा 11 इंच का लंड एक ही बार में मेरी चूत में उतार दिया. अब मैंने अपनी दोनों टांगो को ऊपर उठा ली और अपनी गांड उठा उठा कर अपने ससुर जी का लंड अपनी चूत में लेने लग गई. ससुर जी ने मेरी दोनों टांगो को अपने कंधे के ऊपर रख दिया और जोर जोर से मुझे चोदने लगे. मुझे बहुत हो ही मजा आ रहा था. मैंने अपनी दोनों आँखे बंद कर के ससुर जी के हर धक्के का मजा लिया.करीब 20 मिनिट की इस घमशान चुदाई के बाद अचानक मेरा पूरा जिस्म अकड गया था. मेरी चूत ने ससुर जी के लंड पर अपने पानी की बारिश कर दी और 2 मिनिट बाद ही ससुर जी ने भी अपना सारा पानी मेरी चूत में ही निकाल दिया. मुझे बहोत जोर से पेशाब आ रही थी पर मेरे से उठा भी नहीं जा रहा था. इसलिए ससुर जी ने मुझे अपनी गोदी में उठा के बाथरूम में ले जा के मुताया. ससुर जी मेरी चूत में से निकलते हुए पेशाब को देख रहे थे. मेरी चूत से निकलते गरम गरम पीले पीले पेशाब को देख कर ससुर जी फिर से गरम हो गए और अपने लंड को मेरे मुहं में डाल कर फिर से मेरे मुहं को चोदने लग गए. फिर ससुर जी ने मुझे टॉयलेट की सिट पर बिठाया और मेरी दोनों टांगो को ऊपर कर के मेरी चूत और गांड दोनों मारी. आज मेरी चूत और गांड दोनों अछे से फट चुकी थी. और मेरी बहुत ज्यादा हालत ख़राब हो चुकी थी.उस दिन से मैं रोज रात को अपने ससुर जी से चुदवाती हूँ. एक दिन मेरी ननद ने मुझे और अपने डेडी से सेक्स करते देख लिया. फिर मैंने अपने साथ उसे भी ले लिया. अब हम तीनो इस सेक्स लाइफ का पूरा मजा लेते हे!

  • भाभी देवर की सेक्सी चुदाई

    मैंने भाभी को अपना नम्बर दिया और साइड में हो गया.
    तभी मम्मी आ गई और बोलीं- चलें!
    मैं बोला- हां चलो मम्मी.
    फिर मैं घर आया, तो देखा मेरे मोबाइल पर दो मिस कॉल पड़े थे. मैं समझ गया कि ये भाभी की कॉल हैं.
    मैं में घर था मगर मम्मी सामने थीं तो मैं घर पर भाभी से बात नहीं कर पाया.
    वैसे भी मैं घर में भाभी से सही से बात नहीं कर सकता था … क्योंकि सब होते हैं.
    मैं बहाना बना कर छत पर चला गया. मैंने भाभी को कॉल की, तो उधर से आवाज आई- तुमने कॉल ना उठाने के लिए नम्बर दिया था!
    मैंने बताया- अरे भाभी, वो मैं मम्मी के साथ रास्ते में था.
    भाभी हंस दीं.
    फिर हमारी बात शुरू हुईं.
    भाभी- कैसे हो?
    मैं- बढ़िया हूँ.
    भाभी- तुम वहां बार बार मुझे क्यों देख रहे थे?
    मैं- आप बहुत खूबसूरत हो भाभी, आप पर से मेरी नजर ही नहीं हट रही थी.
    भाभी- अच्छा … लगता है मौसी से बोल कर आपकी शादी करवानी पड़ेगी.
    मैं हंस दिया और मैंने कह दिया- भाभी आप जैसी कोई सुन्दर मिलेगी, तो जरूर आप मम्मी से बात कर लेना.
    वो भी हंस दीं.
    ऐसे ही हम दोनों नॉर्मल हंसी मजाक करते रहे.
    मैं बहुत देर तक उन्हें पटाने की कोशिश करता रहा … क्योंकि मैं समझ गया था कि भाभी जल्दी ही मेरे लंड के नीचे होंगी.
    अब रोज ही भाभी से बात होने लगी थी. हम दोनों कुछ ज्यादा ही खुलने लगे थे.
    एक रात में ही मैंने भाभी से कुछ ज्यादा ही खुल कर बातें कर लीं … क्योंकि ज्यादा गोल गोल घुमाना मुझे भी पसंद नहीं था. उधर वो भी प्यासी थीं. पर एक दिन में ही सब हो जाए, इतनी जल्दी भी सही नहीं था. मैंने हंसी मजाक करके और उन्हें फील करवाके अपनी मुठ मार के सो गया.
    उस दिन भाभी भी कुछ गरमा गई थीं.
    ऐसे ही कुछ दिन हमारी बातें हुईं. हमारी बातों में, हम दोनों प्यासे हैं, ये बात दोनों को समझ आ गई थी, बस जरूरत थी कि सही समय मिले.
    चूंकि भाभी एक जॉइंट फैमिली में रहती हैं, तो हम दोनों को सही समय नहीं मिल पा रहा था.
    फिर एक दिन उनसे मैंने व्हाट्सैप पर फ़ोन सेक्स किया. वीडियो काल पर मैंने उन्हें अपना खड़ा लंड दिखाया और उनकी चूत और गांड को पूरी तरह से नंगी करवा कर लंड हिलाया.
    उस दिन भाभी मुझसे चुदने के लिए मरी जा रही थीं.
    हम दोनों ने फोन सेक्स से ख़ूब मज़े किए और दोनों झड़ गए. भाभी अपनी चूत में उंगली करके झड़ गईं और मैं लंड हिला कर.
    अब हम दोनों को चुदाई की जरूरत थी.
    फिर अगले दिन उनसे पूरे दिन बात नहीं हुई … न उनकी कॉल आई, न मैंने की. क्योंकि मैं अपने काम में बिजी था.
    उस दिन शाम को 7 बजे भाभी की कॉल आई, तब मैं घर से बाहर ही था. मैं उनसे बात करने लगा.
    भाभी ने बोला- आज घर पर कोई नहीं है … और तुम एक घंटे बाद आज ही आ जाओ.
    ये सुन कर तो मेरा लंड और मैं दोनों खुश हो गए.
    मैं बोला- ओके रानी तुम तैयार रहो … आज तीनों छेदों का रास्ता साफ कर दूँगा.
    भाभी वासना से बोलीं- मैं तो कब से तैयार हूं राजा … जल्दी से आजा … बस अब बजा दे अपनी रानी का बाजा.
    मैं बोला- ठीक है आप तैयार रहो, अभी 7 बजे हैं, मैं घर में बहाना बना कर अभी आया.
    भाभी बोलीं- सब तैयारी कर ली है जान … एकदम सफाचट पिच है … बस लंड की बैटिंग की जरूरत है.
    मैं बोला- ठीक है मेरी जान अभी आया. आज छक्के ही छक्के उड़ाऊंगा.
    भाभी हंस दीं.
    फिर मैं घर गया और मैंने मम्मी को बोला- मम्मी आज मेरे दोस्त की एक पार्टी है. मैं खाना वहीं खाऊंगा और काम है … तो मुझे वहीं रुकना पड़ेगा.
    मुझे जन्नत जैसा मजा आने लगा.
    मैं भाभी की चूत को लगभग खाने लगा था. मैं भाभी जी की चूत का दीवाना हो गया. भाभी भी मेरा सर अपनी चूत पर दबाने लगी थीं. वो मुझे ऐसे खींच रही थीं, जैसे अपनी चूत में घुसा ही लेंगी.
    तभी उन्होंने अपनी चूत का रस मेरे मुँह में भर दिया, जिसे मैं पूरा पी गया. मैं भी भाभी के मुँह में लंड के धक्के मारने लगा और झड़ गया. भाभी भी मेरा रस पी गईं.
    फिर मैं उठा और भाभी को अपनी बांहों में लेकर उन्हें फिर से किस करने लगा. हम दोनों के वीर्य का स्वाद अब हम दोनों ले रहे थे.
    थोड़ी देर में लंड महाराज सर उठाने लगे. मैं भाभी की चूत पर हाथ फेरने लगा. भाभी की चूत फिर से गीली हो गई थी.
    भाभी बोलीं- राजा देखो तुम्हारी रानी कैसे बह रही है, अब देर मत करो जान जल्दी से अपनी रानी का बाजा बजा दो.
    ये बोल कर भाभी ने दोनों टांगें ऊपर कर लीं. मैं भाभी की चूत पर लंड रगड़ने लगा. भाभी नीचे से कमर उठाने लगीं … पर मैंने लंड नहीं घुसाया.
    भाभी उत्तेजित होते हुए बोलीं- भोसड़ी के … चूत के मजे मत ले … जल्दी से अन्दर डाल दे अपना लंड … मां के लौड़े.
    फिर मैं हंस कर बोला- ठीक है मेरी रंडी … ले साली लंड खा.
    मैंने एक झटके में ही अपना लंड चूत में घुसा दिया. भाभी काफी टाइम से चुदी नहीं थी, तो उनको थोड़ा दर्द हुआ. तेज सिसकारी निकली और चूत ने लंड को खा लिया.
    मैं उनके होंठ चूसने लगा और धक्के लगाने लगा.
    अब भाभी को मजा आने लगा. वो मुझे गाली देने लगीं.
    मुझे भी चुदाई के समय गाली देने और सुनने में मजा आता है.
    भाभी गांड उठाते हुए बोलने लगीं- आह भोसड़ी के चोद … मादरचोद … और तेज चोद … ऐसे ही हां रगड़ दे हरामी … ऐसे ही पेल साले … बड़ा मजा आ रहा है … आंह पूरा अन्दर पेल … ऐसे ही … जान न्ह्ह … मेरे राजा … चोद अपनी चूत रानी को प्यासी है ये. पति के बाद किसी का लंड मिला ही नहीं.
    मैं भी जोश में आ गया- ले साली मेरी चूत रानी … ये ले बहनचोदी … ले लंड ले छिनाल … साली रंडी तेरी मां को चोदूं!
    मस्त धकापेल चुदाई होने लगी थी. पांच मिनट बाद मैंने भाभी को कुतिया बनाया, फिर पीछे से लंड लगा कर भाभी को चोदने लगा- आह मेरी कुतिया … रांड साली … ये ले लंड खा.
    भाभी भी कुतिया की तरह गांड हिला कर साथ देते हुए बोलीं- मेरे कुत्ते राजा … घुसा दे अपनी कुतिया रानी की चूत में अपना लंड … आंह ऐसे ही चोद … हां ऐसे ही जान.
    फिर भाभी एकदम से रुक कर लेट गईं और बोलीं- अब चोदो.
    मैं फिर से चोदने लगा.
    भाभी ने मुझे कसके पकड़ लिया और तेज आवाज करते हुए झड़ गईं. मैं भी तेज़ तेज़ धक्के लगाने लगा.
    मैं बोला- बस मेरी जान … मैं आ रहा हूं. रस किधर लेना है?
    भाभी बोलीं- अन्दर ही कर दो जान … ज़मीन सूखी पड़ी है.
    मैं भाभी की चूत में ही झड़ गया और वहीं भाभी के पास लेट गया.
    मैं भाभी जी की चूत का दीवाना हो गया एक बार देवर भाभी की सेक्सी चुदाई करके!
    हम दोनों एक दूसरे को बांहों में लेकर बातें करने लगे. उस रात हमने 3 बार चुदाई की पर मैं भाभी की गांड नहीं मार पाया.
    फिर सुबह मैं अपने घर आ गया.
    इसके बाद भी मैंने भाभी को चोदा, पर वो फिर कभी लिखूंगा.
    दोस्तों ऐसे कई किस्से मेरी जिन्दगी में हुए हैं … आप मुझे मेल करके बताएं कि आपको मेरी देवर भाभी की सेक्सी चुदाई कहानी कैसी लगी.

  • भाभी की मस्त चूत की गर्म चुदाई

    कीर्तन में अपना टाइम काट लेती है. इस वजह से वो घर पर कई बार अकेली ही रहती है.

    मैंने उससे पूछा- आपके बच्चे कभी दिखाई नहीं दिये.वो बोली- मुझे अभी सन्तान का सुख नहीं मिल पाया है.

    शादी को दस साल हो चुके हैं लेकिन पता नहीं हमें अभी तक औलाद क्यों नहीं हुई है.उसके ये कहने पर मैं चुप हो गया.

    मैंने शायद गलत सवाल पूछ लिया था.फिर वो भी चुप ही रही. कुछ ही देर में हम लोग उसके घर के बाहर पहुंच गये. उसने घर से कुछ दूरी पर ही गाड़ी रुकवा ली.

    मैंने कहा कि मैं आपको घर के सामने तक छोड़ देता हूं लेकिन वो मना करने लगी. कहने लगी कि उससे ससुर ने देख लिया तो वो पता नहीं क्या सोचेंगे.मैं भी उसकी बात से सहमत से हो गया.

    इसलिए उसके कहने पर मैंने गाड़ी को वहीं घर से कुछ दूरी पर ही रोक दिया.वो उतर कर जाने लगी तो मैंने उससे उसका नम्बर मांग लिया.

    एक बार तो वो कहने लगी कि आप मेरे नम्बर का क्या करोगे.फिर मैंने हिम्मत करके कह दिया कि वो सब मैं आपको बाद में बताऊंगा.

    फिर उसने अपना नम्बर दे दिया और मुस्करा कर अन्दर चली गई.मैं दिवाली मनाने के लिए अपने गांव के लिए निकल गया.

    घर जाकर ऐसे ही दो चार दिन निकल गये. फिर जब वापस रूम पर आया तो उस दिन आते ही भाभी के दर्शन हो गये. कयामत लग रही थी रानी भाभी.उसको देखते ही दिल में हलचल सी मच गई और मैंने उसको टोकते हुए नमस्ते की तो वो भी मेरी तरफ देख कर हल्के से मुस्करा दी.

    जब वो मुस्काराती थी तो मेरा दिन बन जाता था. उस दिन मेरा काम पर जाने का मन नहीं था.

    मैं रूम पर पड़ा हुआ बोर हो रहा था तो मैंने सोचा कि क्यों न आज भाभी को फोन करके देखा जाये.

    उसका नम्बर तो मेरे पास था ही.मैंने भाभी को फोन किया तो उसने प्यारी सी आवाज में हैल्लो किया.

    मैंने बताया कि मैं उनका पड़ोसी राज बोल रहा हूं. मैंने उनको नमस्ते किया और उन्होंने भी वहां से नमस्ते किया. फिर वो कुछ जल्दी में लग रही थी.

    पूछने पर उसने बताया कि वो पैकिंग करने में लगी हुई है.मैंने पूछा कि कहीं पर जा रहे हो क्या आप?

    भाभी ने बताया कि उसके सास-ससुर पांच दिन के लिए बाहर जा रहे हैं.

    उन्हीं का सामान पैक करने में लगी हुई थी.मैंने भैया के बारे में पूछा तो भाभी ने बताया कि वो तो एक दिन पहले ही काम के लिए निकल गये थे.

    बस दिवाली पर दो दिन के लिए आये थे. उनको कुछ जरूरी काम था तो वो वापस चले गये.फिर वो कहने लगी कि अभी वो पैकिंग करने में व्यस्त है.

    इसलिए उसने बाद में बात करने के लिए कहा और फोन रख दिया.मेरे मन में तो लड्डू फूटने शुरू हो गये थे. भाभी घर पर अकेली थी. इससे अच्छा मौका क्या हो सकता था.

    मैं बाहर आकर खिड़की के पास भाभी के घर पर नजर लगा कर बैठ गया कि कब उसके सास और ससुर घर से निकलेंगे और मैं भाभी को पटाने के लिए फिर से अपनी कोशिश करूंगा.

    आधे घंटे के बाद मैंने देखा कि उसके सास-ससुर अपना सामान ऑटो में रख कर निकल गये. भाभी ने गेट बंद कर लिया और अन्दर चली गई.

    मैंने तुरंत भाभी को फोन लगाया तो भाभी ने फोन उठा लिया. फिर हमारे बीच में बातें होने लगीं.ऐसे ही एक दो दिन भाभी से बात करते हुए हो गया तो हम दोनों में काफी कुछ बातें होने लगीं.

    फिर एक दिन मैंने उनसे कहा कि आपने बच्चों के बारे में डॉक्टर से सलाह ली है क्या?

    मेरी बात को वो टाल गई.फिर हमारे बीच में यहां-वहां की बातें होने लगीं. अगले दिन मैं घर पर ही था और भाभी भी काम पर नहीं गई थी. मैंने उनको दिन में फोन लगाया और हम दोनों घंटों तक बातें करते रहे.

    भाभी की चूत को चोद कर खुश कर दिया. फिर सुबह 4 बजे मैं अपने रूम पर चला गया क्योंकि भाभी ने कह दिया था कि किसी को पता नहीं चलना चाहिए कि मैं रात में उसके घर पर ही रुका हुआ था.

    इस तरह अगले तीन दिन तक हमारा हनीमून चलता रहा. मैंने भाभी की चूत खूब चोदी.

    फिर चौथे दिन उसके सास और ससुर वापस आ गये.फिर हमें चुदाई का ज्यादा मौका नहीं मिल पाता था.

    एक दो बार तो मैंने गाड़ी में ही भाभी की चूत मारी. वो भी मेरा लंड लेकर खुश रहने लगी थी.

    फिर मेरा काम वहां से खत्म हो गया और मैं अपने गांव वापस चला गया. उसके बाद मैंने उसको फोन करने की कोशिश की लेकिन उसका वो नम्बर बंद हो चुका था.फिर मैंने भी उससे संपर्क करने की कोशिश नहीं की.

    लेकिन जब-जब मैंने उसकी चूत चोदी मुझे उसने बहुत मजा दिया.

  • सुहागरात 1

    सुहागरात मैं अहमदाबाद (गुजरात) का निवासी हूँ,

    यह एक सच्ची कहानी है पर पात्रों के नाम व स्थानों के नाम बदल दिए हैं और कहानी को रोचक बनाने के लिए कुछ काल्पनिक चीज़ों का समावेश किया गया है,

    आशा करता हूँ आपको पसंद आएगी।मैं अपने मम्मी पापा का इकलौता लड़का हूँ इसी वजह से मैं 14 साल तक अपने मम्मी पापा के साथ ही सोता था। मैं अपनी मम्मी पापा के बीच में सोता था पर मैं जब सुबह उठता तो मुझे यह देखकर बहुत गुस्सा आता कि मेरे मम्मी पापा अगल बगल सो रहे हैं और मैं किनारे की तरफ सो रहा होता था।

    मैं उठकर मम्मी से पूछता भी तो वे मुस्कुरा कर कहती- मैं तो सारी रात तेरे बगल में सो रही थी, तेरे पापा तो अभी सुबह ही आकर इधर लेटे हैं।लेकिन अब वो नहीं रहा मेरी मम्मी हमे छोड़ कर इस दुनिया से चली गई और में अकेला हो जाता हु।दो साल बाद मेरे पापा दूसरी शादी कर ले ते हैं मम्मी और पापा एक दूसरे को जानते थे पहले भी मेरी नई मम्मी का भी डिवोर्स हुआ था पहला पति बहुत मारता था इस।ओर पापा मम्मी एक ही ऑफिस में कम करते थे तो उनलोगोन शादी कर लीपापा कोर्ट में ही शादी करते हैं।पापा ने मुझे बगल वाले कमरे में शिफ्ट होने की इज़ाज़त दे दी। मैंने भी अपना बोरिया बिस्तर बाँधा और अपने बेडरूम से बिल्कुल सटे दूसरे कमरे में आ गया।इस कमरे में एक बेड था,

    एक कुर्सी और एक मेज थी, बेड जिस दीवार से सटकर लगा था उस दीवार पर ही एक लकड़ी की खिड़की थी जो हमारे बैडरूम की ओर ही खुलती थी पर मैं उसे कहाँ खोल सकता था।और मुझे उनकी सुहागरात देखने का विचार आता हे।नए जोड़े अपनी शादी के शुरूआती दिनों,

    सुहागरात या फिर हनीमून में करते हैं।जब मैंने देखा कि कोई घर पर नहीं था तो जल्दी से पेंचकस लाकर खिड़की में छोटा सा छेद कर दिया। अब मैं कभी भी बेड पर लेटे हुए भी मम्मी पापा की चुदाई देख सकता था। मैंने अपना सारी बुक्स वगैरह दूसरे कमरे में शिफ्ट कर ली। मेरी तैयारी पूरी हो चुकी थी, अब मैं पापा मम्मी को चुदाई करते कभी भी देख सकता था।शाम को पापा मम्मी घर जाते हैं में उनका स्वागत करता हूँ।और उनलोगा का कमरा पापा के कहने पर सजा देता हूँ।मम्मी आते ही काम पर लग जाती है।लगभग 8:30 बजे मम्मी ने खाना बना लिया और कुछ देर बाद हम सब डाइनिंग टेबल पर खाना खाने लगे।

    मैं बाजार गया और आइसक्रीम लेकर आया और फिर हम सबने उसे मज़े से खाया।आइसक्रीम खाकर में अपने नए कमरे, जहाँ मैं शिफ्ट हुआ था, में आ गया और उनकी चुदाई शुरू होने का इंतज़ार करने लगा।करीब 10:30 बजे मम्मी सब काम निबटा कर कमरे में आई और बेड पर आकर बैठ गई।मेरे नई मम्मी 25 की है. उसका नाम सुरभि है.उसका बदन 34-32-36 साइज का है.ओर पापा 38 साल के हैं।पापा बोले- कैसा लग रहा है यहां?’मम्मी बोली मुँह नीचे किए बोली- ठीक लग रहा है.पापा ने प्यार से मम्मी को किस किया और कहा- तुम भी करो.मम्मी ने दोनों गालों पर किस की.मम्मी थोड़ा शर्माने लगी नखरे करने लगी।

    पापा बोले-तुमने कहा था कि अब की सुहागरात के दिन जो कहोगे वो करूँगी।

    मम्मी बोली- हाँ बाबा ! जो करना हो कर लो, अभी भी कह रही हूँ, बस गन्दी संदी चीजें न कहना!

    पापा बोले- सम्भोग में कुछ भी गन्दा नहीं होता!मम्मी बोली- जो करना है वो अब करो बस!

    मम्मी पापा की बात सुनकर ऐसा लग रहा था जैसे मैं किसी दूसरी दुनिया में पहुँच गया हूँ।

    पापा बोले आज तुम्हारे शरीर के हर अंग से वैसे ही खेलूंगा जैसे मैने अपनी सुहागरात में किया था। क्या तुम अपनी सुहागरात मनाने के लिए तैयार हो?

    मम्मी बोली- मैं तो कब से तैयार हूँ, तुम ही नखरे कर रहे हो।इतना कह कर दोनों हँसने लगे।

    पापा मम्मी को चूमने लगे कभी गालों पर, कभी गर्दन पर, कभी होंठों पर उन्होंने मम्मी के ऊपर जैसे चुम्बनों की बारिश कर दी, पापा का एक हाथ (पेटीकोट के ऊपर से ही) मम्मी के नितम्बों पर और दूसरा उनकी मुनिया पर चल रहा था।मम्मी भी मजा लेने लगी तभी शर्माते हुए बोली- धीरे कीजिए न प्लीज़ मुझे दर्द हो रहा हे!

    पापा धीमी आवाज से बोले- मेरी जान दर्द का अपना अलग ही मजा होता हे सेक्स के अंदरमम्मी अब बिस्तर पर सीधे लेट गई और पापा, मम्मी के थोड़ा ऊपर आ गए, उन्होंने मम्मी का सिर अपने हाथों में पकड़ लिया और अपने होंठ उनके होंठों पर रख दिए।

    मम्मी ने भी पापा को अपनी बाँहों में कस लिया, पापा मम्मी एक दूसरे को बेतहाशा चूमे जा रहे थे। इसी बीच पापा ने अपनी जीभ मम्मी के मुँह में डाल दिया।

    मम्मी ने पापा की जुबान को अपने मुँह से उगल दिया और बोली- यह किस तरह से किस करने लगे हो? पूरी जीभ मेरे मुँह में ही डाल देते हो छीः !

    पापा बोले- क्यों अच्छा नहीं लगता क्या?

    मम्मी बोली- गन्दा लगता है। पापा बोले- तुम भी न, बिल्कुल नासमझ की तरह बात कर रही हो।

    प्रेम करने में कुछ भी गलत या गन्दा नहीं होता, केवल जो भी करो अपने साथी की ख़ुशी के लिए करो, उसे प्यार और सिर्फ प्यार करो और अपने साथी को पूरी तरह संतुष्ट कर के उसे खुश कर दो।

    पापा बोले- मैं तुम्हें चूम रहा हूँ और तुम्हें अच्छा लग रहा है तो इसमें गन्दा क्या है?

    पापा की बात मम्मी के समझ में आ गई और वो दोनों पुनः अपनी काम क्रीड़ा में लग गए।अब कभी पापा अपनी जीभ मम्मी के मुँह में डाल देते तो कभी मम्मी अपनी जीभ पापा के मुँह में डाल देती, वो दोनों उसे कुल्फी की तरह चूस रहे थे। शायद पापा ने यह चुम्बन अभी जल्दी इज़ाद किया था इसलिए मम्मी इस तरह से किश करने में थोड़ा झिझक रही थी और शरमा भी रही थी पर थोड़ी देर बाद उनकी झिझक एकदम गायब हो गई।पापा कभी मम्मी के गालो को चूमते, तो कभी गर्दन को।मम्मी भी अब पीछे नहीं होना चाहती थी, उनके हाथ पापा के पीठ पर लगातार चल रहे थे।

    मम्मी के होंठ आज लगातार खूब मेहनत कर रहे थे, कभी वे पापा के गालों को चूमते और चूसते, तो कभी कंधों और गर्दन के बीच उतर आते, कभी कानों के पीछे, तो कभी ठुड्डी के नीचे।मम्मी की कामोत्तेजना कितनी प्रखर होती जा रही थी।पापा के होंठ,

    मम्मी के होंठों की तुलना में कुछ मोठे और कठोर थे इसलिए जब पापा के होंठ, मम्मी के कोमल गुलाबी होंठों को चूम रहे थे तो मुझे ऐसा लग रहता था मानो मम्मी के नाज़ुक नरम होंठ पापा के भारी कठोर होंठो के भार के नीचे दबे हुए हो और पापा के होंठो के नीचे पिस से रहे हों।मम्मी के होंठ गुलाबी तो हैं ही पर आज पापा के बेतहाशा चूमने के कारण वो और भी लाल प्रतीत हो रहे थे जैसे गुलाब की कोमल लाल पंखुड़ियाँ हों और उन पर बिखरी मुँह की लार को देख कर ऐसा लग रहा था कि वो गुलाब के फूलों से बना शरबत हो जिसे पापा स्वाद ले ले कर पी रहे हों।मुझे तो ऐसा लगा कि कहीं मम्मी के होंठ छिल न जाये।सारे कमरे में पुच पुच की आवाज़ गूंज रही थी और रात का सन्नाटा होने के कारण आवाजें और भी साफ़ सुनाई पड़ रही थी।जहाँ पापा मम्मी के गुलाबी अधरों का रस पान कर रहे थे,

    वहीं मम्मी पापा के मुँह का रस पी रही थी और रोमाँच के कारण उनके मुँह से केवल उम्म… उम्ह… उम्ह की सिसकारी रूपी आवाजें निकल रही थी।अब पापा के हाथ मम्मी के ब्लाउज पर आ गए,

    पापा अपने हाथ मम्मी के उरोजों पर ब्लाउज के ऊपर से ही फिराने लगे।मैंने देखा कि पापा मम्मी के होंठ आपस में अब भी लिपटे हुए थे और उन दोनों के हाथ एक दूसरे के शरीर पर कसे पड़े थे। इस तरह चुम्मा चाटी करते हुए करीब 20 मिनट बीत चुके थे, अब पापा का हाथ मम्मी की पीठ से खिसक कर उनके ब्लाउज पर आ गया और वो शायद मम्मी के ब्लाउज के बटन खोलने लगे।मुझे लगा पापा जल्दी से ही मम्मी का ब्लाउज़ उतार कर उनके जिस्म से उसे अलग कर देंगे पर शायद मम्मी के ब्लाउज के बटन बहुत टाइट थे इसलिए पापा उन्हें खोल नहीं पाये और झल्ला गए, पापा बोले- अरे यार सुरभि, यह कैसा ब्लाउज पहन लिया? कितने टाइट है इसके बटन।

    मम्मी बोली- अरे बाबा, रुको मैं खोलती हूँ। तुमसे तो ब्लाउज के बटन खुलते ही नहीं ।

    मम्मी पापा को छेड़ते हुए बोली- जब तुमसे एक ब्लाउज का बटन नहीं खुला तो तुम मेरी मुनिया पर लगे दो पल्ले वाले दरवाजे को कैसे खोल पाओगे?

    पापा हँस कर बोले- सुरभि, अभी पता चल जायेगा कि तुम्हारी मुनिया के दरवाजे खुलते हैं या टूटते हैं।पापा के इतना कहते ही दोनों खिलखिला कर हंस पड़े।मुझे ऐसा लग रहा था कि मानो मम्मी ने इतने स्वतंत्र रूप से यानि इतना खुल कर पहले कभी भी चुदाई नहीं की थी शायद इसीलिए वो बहुत शरमा रही थी,

    शर्म के कारण ही उन्होंने अपना चेहरा अपने हाथों से ढक लिया था।पापा बोले- सुरभि इतना शर्मा क्यों रही तुम! प्रेम तो दुनिया की सबसे अनमोल चीज़ है। प्यार से बढ़ कए दुनिया में कोई चीज़ नहीं है और फिर हम दोनों तो पति पत्नी हैं।

    हम दोनों को तो ये सब करने का अधिकार है।इतना कह कर पापा ने अपने हाथों से मम्मी के हाथों को उनके चेहरे से अलग किया।पापा ने मम्मी को अपनी बाँहों में भर लिया। इस बार तो पापा इतने उतावले हो रहे थे मानो देर होने पर उनकी कोई गाड़ी छूट जायेगी।

    मम्मी ने भी इस बार अपनी बाहें पापा की पीठ पर लपेट ली।मैंने देखा कि अचानक पापा का हाथ मम्मी की पीठ पर आ गया और ब्रा के आखरी सिरे पर उनके हुक को टटोलने लगा।

    पापा ने मम्मी को अपने हाथों का सहारा देकर उठाया ताकि वो मम्मी की ब्रा हुक खोल सके और देखते ही देखते उन्होंने मम्मी की ब्रा को खींच कर उनके खूबसूरत जिस्म से जुदा कर दिया।पापा ने जैसे ही मम्मी की ब्रा को उनके जिस्म से अलग किया, मम्मी के दोनों पयोधर, अमृत कलश यानि चूचियाँ ब्रा की सख्त कैद से आजाद हो गए।पापा के हाथ अब मम्मी के उरोजों पर चल रहे थे,

    वो मम्मी की चूचियों को इस प्रकार से दबा कर छोड़ रहे जैसे कोई डॉक्टर ब्लड प्रेशर नापने की मशीन के पम्प को दबाता और छोड़ता है।पापा अब भी मम्मी की चूचियों से चिपके हुए थे। अचानक पापा ने मम्मी के बाएं स्तन के चुचूक को मुँह में भर लिया और उसे पहले तो चूसा फिर धीरे से दांतों के बीच लेकर दबा दिया।

    मम्मी के मुख से हल्की सी चीख निकल पड़ी।अब पापा का हाथ मम्मी की कमर से होता हुआ उनके पेटीकोट पर जा टिका, पापा ने एक झटके में ही मम्मी के पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया और मम्मी से बोले- सुरभि,

    थोड़ा कमर उठा नामम्मी ने अपने दोनों हाथों को बिस्तर पर मजबूती से टिकाया और धीरे से अपनी कमर उठा दी।मम्मी के कमर उठाते ही पापा ने उनका पेटीकोट झट से नीचे खिसका कर उतार दिया।

    पापा मम्मी को चूमे जा रहे थे तो मम्मी भी चुम्मों का जवाब चुम्मों से दे रही थी।वो दोनों इतने उत्तेजित हो चुके थे, इसका पता इस चीज से ही लग रहा था कि पापा मम्मी, दोनों की सांसें खूब तेज़ चल रही थी और वो दोनों हांफ से रहे थे, उनके सांसों की गूंज बगल के कमरे में भी साफ़ सुनी जा सकती थी जहाँ मैं बैठकर मज़े से उनकी चुदाई देख रहा था।उन दोनों के होंठ आपस में लिपटे हुए थे और हाथ एक दूसरे की पीठ पर चल रहे थे, बीच बीच में आनन्द के कारण मम्मी अपने नाखूनों को पापा की पीठ पर चुभा देती,

    जिससे पापा के मुंह से सिसकारी सी निकल जाती थी।पापा भी कभी मम्मी के एक उरोज को मुँह में भर लेते तो कभी दूसरे को धीरे से मसलने लगते, तो कभी मुँह में भरकर चूसने लग जाते थे।

    मुझे यह सब देखकर बहुत आनन्द आ रहा था।मैंने अब देखा कि पापा अब नीचे की ओर सरकने लगे हैं, उन्होंने पहले मम्मी की नाभि को चूमा और फिर पेड़ू को!मम्मी को देख कर लगा कि जैसे उनके आनन्द की कोई सीमा ही ना रही हो,

    मम्मी की जांघें जो अब तक आपस में जुड़ी हुई थी, वो अब अपने आप ही खुलने लगी।पापा ने अब पैंटी के ऊपर से ही मम्मी मुनिया को चूम लिया मुनिया को चूमते ऐसा लगा कि मानो मम्मी के सारे शरीर में करंट सा दौड़ गया।पापा ने अब अपने हाथ मम्मी की कमर पर बढ़ा कर मम्मी की पैंटी को इतनी जल्दी उतार दिया मानो कि कोई व्यक्ति केले से उसके छिलके को उतार देता है।मैं झूठ नहीं बोलूँगा,

    इतनी दूर से मम्मी की मुनिया इतनी साफ़ नहीं दिख रही थी पर यह कह सकता हूँ कि सांवले रंग की थी और उस पर हल्के हल्के बाल थे, जिससे वो और काली लग रही थी।पापा ने अब अपना मुंह भग-ओष्ठ पर रख दिए और मम्मी की योनि को चाटने लगे।

    मम्मी अब तक बहुत उत्तेजित हो गई थी और अब उनसे ये उत्तेजना बर्दाश्त नहीं हो रही थी, शायद इसीलिए जब पापा मम्मी की योनि में अपनी जुबान इधर उधर चला रहे थे तब मम्मी ने कहा अब करो भी!

    तुम बहुत परेशांन कर ते हो।

    मम्मी बोली- मुझे तो पूरा नंगा कर दिया है और खुद जनाब जांघिया बनियान पहने हुए है।

    मम्मी का इतना कहना था कि पापा उठ खड़े हुए और उन्होंने अपनी जांघिया और बनियान उतार दी। पापा जहाँ बिस्तर के बगल में एकदम मादर जात (बिल्कुल निर्वस्त्र) हो खड़े थे, वहीं मम्मी भी एकदम नग्न होकर बिस्तर पर पड़ी थी, दोनों एक दूसरे के नंगे शरीर को अपलक टकटकी बांधे देख रहे थे और देख देख के मुस्कुरा रहे थे।पापा का साढ़े आठ इंच का लिंग एकदम टाइट होकर खड़ा था मानो मम्मी के निर्वस्त्र शरीर को देखकर सलामी दे रहा हो।

    मम्मी बोली – इतना बड़ा ?

    पापा बोले – आज से तुम्हारा हुआ।

    मम्मी बोली- अब करोगे भी?

    पापा बोले- आज हमारी सुहागरात है, सब कुछ करेंगे आज !मम्मी बोली- आओ न अब ! कह तो रही हूँ जो कहोगे, करु गई।

    पापा बोले- देखो जी, वादा कर के मुकर मत जाना।मम्मी बोली- हाँ बाबा, अब आओ भी!

    पापा अब फिर से मम्मी के ऊपर आ गए।पापा के ऊपर आते ही मम्मी ने अपनी बाँहों का फंदा बनाकर पापा के गले में डाल दिया और बाँहों में जकड़ लिया, फिर धीरे से मुस्कुराते हुए बोली- अभी बहुत नाटक दिखा रहे थे, अब तुम्हें मज़ा चखाऊँगी।

    मम्मी ने पापा के होंठों पर एक ज़ोरदार चुम्बन जड़ दिया।पापा ने मम्मी से कहा- सुरभि, थोड़ा रुको!पापा ने अपने हाथ तकिये के नीचे बढ़ाये और मैनफोर्स कंडोम के पैकेट से एक कंडोम निकाला और अब पापा मम्मी के शरीर से नीचे की ओर आए और घुटनों के बल बिस्तर पर खडे होकर कंडोम को बे मन से अपने बेहद टाइट लिंग (लंड) पर चढ़ाने लगे।

    मम्मी बोली- अब यह क्या कर रहे हो?

    पापा बोले- अरे कंडोम लगा रहा हूँ। तुम प्रेग्नेंट न हो इसलिए!

    मम्मी बोली- तुम भी न…अरे मेरे राजा, अब देर न कर, जल्दी से मेरे ऊपर चढ़ जा।इतना बोलकर वो खिलखिला कर हँसने लगी और पापा से बोली- इसी तरह बोलते हैं न देसी ब्लू फ़िल्म में।

    पापा बोले- हाँ बिल्कुल इसी तरह बोलते हैं सुरभि।और दोनों हँसने लगे।

    पापा अब एक बार फिर मम्मी के ऊपर चढ़ गए और उन दोनों के नंगे जिस्म आपस में चिपक गए।पापा ने अपने मुन्ने को मम्मी की लाडो के दरवाजे पर (चीरे) पर रख दिया।मेरे आश्चर्य का तब ठिकाना ना रहा जब मैंने देखा कि पापा अपने मुन्ने को मम्मी की लाडो में डालने के बजाए उसे उस पर रगड़ा जिससे मम्मी के मुँह से एक सिसकी सी निकल गई और उनका पूरा शरीर उत्तेजना और रोमांच के कारण काम्प गया।मुझे नहीं पता कि वो यह सब अपने लिंग को सेट करने के लिए कर रहे थे या फिर एक दूसरे को उत्तेजित करने के लिए, पर मम्मी इससे जरूर उत्तेजित हो रही थी।

    करीब 10-15 सेकंड ऐसा करने के बाद पापा अचानक रुके और अपने एक हाथ से मम्मी की कमर को पकड़ा और दूसरे हाथ से अपने खूटे रूपी मुन्ने को मम्मी की गुफा रूपी लाडो पर लगा दिया,

    मम्मी बोली- धीरे धीरे करना प्लीज तुम्हारा काफी बड़ा है।

    पापा बोले – ठीक हे।फिर पापा ने अपने हाथ मम्मी के कंधों पर टिकाये और फिर एक जोरदार धक्का मारा, प्यारी चूत के अन्दर दरवाजे को तोड़ता हुआ आधा घुस आया।

    मम्मी तिलमिला उठी — आह्ह्ह्ह हाई भग्वान्न्न्नन्न्न्न अआः मेरी माया आःह्ह्ह मर गई बाप रे, कितना दर्द हूऊऊओ रह्ह्ह्हह्ह हे, प्लीज़ निकल्लल्ल्ल्ल लो इसे।

    पापा बोले – मेरी रानी ये दर्द तो थोड़ी देर का हे मेरा थोड़ा बड़ा हे इसलिए और अब तुझे असली मजा आएगा मेरी जान।अब पापा ने। एक जोरदार धक्के के साथ अन्दर घुसा दिया। अब लंड पूरा चूत में घुस गया था ।मानो मम्मी की चूत फट गई हो इस धक्के से।

    दर्द से तिलमिला उठी आह्ह्ह्ह मर गेई बाप रीईईईईई अह्ह्ह्हह्ह ऊऊऊउ ईईईईइ, प्लीज़ निकाल आआआअ दर्द हो रहा हे ।एक बेदर्द की तरह पापा मम्मी की चूत धनाधन बजने लगे और फच फच फच की साउंड के साथ चुदाई कर रहे थे। मम्मी की चीेखे जैसे कमरे की दीवारों इ समा रही हो।मम्मी बोली- तुम्हें तो जहाँ थोड़ी छूट दे दी जाए, बिल्कुल जानवरों की तरह करते हो सेक्स!

    पापा ने मम्मी की बातों पर ध्यान नहीं दिया और उस एक तेज़ धक्के के बाद हल्के हल्के धक्के लगाने लगे और फिर उन्होंने मम्मी को अपनी बाँहों जकड़ लिया और अपने होंठों से मम्मी के होंठों को ढक लिया और फिर उन्हें अपने मुँह में भर कर लगातार चूसने लगे।

    मम्मी के हाथ भी पापा की पीठ पर अब बिना रुके चले जा रहे थे ।अब एक तरफ तो पापा धीरे धीरे धक्के लगा रहे थे और उनके दोनों हाथ अब कभी मम्मी के अमृत कलशों पर, कभी कमर पर, कभी पीठ पर चल रहे थे और उनके होंठ मम्मी के होंठों से चिपके हुए थे,

    कभी पापा के होंठ मम्मीके गालों पर फिसल जाते तो कभी गर्दन पर और कभी गर्दन के पीछे वाले भाग पर, कभी कानों पर आ जाते तो कभी कंधों पर तो कभी मम्मी की छाती पर आकर लगातार अपना काम किये जा रहे थे, जिससे पूरे कमरे में पुच पुच की आवाज आ रही थी।

    मम्मी भी पापा का पूरा साथ दे रही थी।मैंने एक बात ध्यान दी कि जब पापा धक्के लगाते और पापा का लण्ड मम्मी की चूत में प्रवेश करता या घुसता तो हल्की हल्की कुच कुच कुच… की लयबद्ध ध्वनि सुनाई पड़ रही थी। यह आवाज वैसे ही थी जैसे किसी बेहद पतली नाली से धीरे धीरे लेकिन लगातार पानी के रिसने की आवाज निकलती है।शायद मम्मी की मुनिया लगातार रतिरस छोड़ रही थी जिस कारण वो बेहद गीली और चिकनी थी, शायद इसीलिए ही जब पापा अपना मुन्ना मम्मी की मुनिया अंदर बाहर कर रहे थे तो कुच कुच कुच की आवाज निकल रही थी।

    मम्मी की पीठ पर पापा के हाथ एकदम कस से गए और पापा की छाती मम्मी की चूचियों से एकदम चिपक सी गई।शायद वो झड़ने वाले थे, इसलिए अपने आप को झड़ने से रोकने के लिए उन्होंने ऐसा किया था।‘अंकित के पापा धक्के मारते मारते रुक क्यों जाते हो?

    ’ मम्मी बोली- जल्दी से कर वर के छुट्टी करो।पापा बोले- सुहागरात में भी जल्दी मचा रखी है तुमने तो !

    पापा मम्मी एक दूसरे के शरीर से चिपके हुए धीरे धीरे ये बातें कर रहे थे।अब पापा कुछ नीचे सरके, मैं समझ गया कि अब वो क्या करने वाले हैं।

    पापा बोले- सुरभि लाओ जरा तुम्हारे मम्मों से तो खेल लूँ।मम्मी बोली- इतनी देर से तो खेल रहे हो जी, तुम्हारा तो कभी दिल ही नहीं भरता इनसे !

    पापा बोले- ये साले हैं ही इतने खूबसूरत कि जो भी देख ले, इन्हें उनकी नियत ख़राब हो जाये।पापा मम्मी की बात सुनकर ऐश लग रहा था कि दोनों ने पहले भी सेक्स किया है।अब पापा का एक हाथ मम्मी के बाएँ दुग्ध कलश पर चल रहा था और दाहिने को लगातार चूस रहे थे कभी पापा मम्मी की चूचियों को सहलाते तो कभी चूचियों की भूरी भूरी घुंडियों को अपनी उंगलियों से मसल देते जिससे मम्मी की सिसकारी निकल जाती।

    पापा और मम्मी एक दूसरे की आँखों में लगातार टकटकी बांधे देखे जा रहे थे, उनकी आँखें और चेहरे की मुस्कराहट ही उनके प्यार को बयाँ करने को काफी थी।अब वो एक तरफ मम्मी की अमृत कलशों से खेल रहे थे तो दूसरी तरफ वो बहुत ही मज़े से धीरे धीरे धक्के लगा रहे थे और साथ मम्मी के होंठो को हल्के हल्के काटते हुए बेतहाशा चूस रहे थे।धीरे धीरे करने से उन दोनों

    (मम्मी और पापा) को मज़ा भी बहुत आ रहा थामैंने ध्यान दिया कि धक्के मारते समय बीच बीच में मम्मी और पापा दोनों के ही मुंह से अब सिसकारियाँ कुछ ज्यादा ही निकल रही थी।शायद जब पापा का लिंग मम्मी की मुनिया की दीवार से रगड़ खाता तो उन दोनों की सिसकारी निकल जाती थी।यह सारे दृश्य देख कर मेरी तो हालत ही ख़राब हो गई।अब मम्मी ने अपने पैर थोड़े ऊपर उठा कर पापा की कमर से लपेट लिए, ऐसा करने से मम्मी के नितम्ब थोड़े ऊपर हो गए, अब पापा ने मम्मी के गोल और कसे हुए नितम्बों पर भी हाथ फिराना चालू कर दिया।

    मुझे लगा जैसे कुछ पानी सा मम्मी की लाडो से निकल रहा है, बहुत ज्यादा नहीं, पर हाँ उनकी लाडो के दोनों मखमली गद्दीदार कपाट कुछ भीगे से लग रहे थे जो इस बात की पुष्टि कर रहे थे कि उनकी लाडो लागातार पानी छोड़ रही है और उन्हें उसके निकलने से शायद कुछ गुदगुदी सी होने लगी थी।अब पापा ने धक्कों की गति कुछ बढ़ा दी थी, उनका हाथ मम्मी के अमृत कलशों को मसलने में लगा पड़ा था, कभी वो उसके शिखरोंको मसलते, क7pभी उन्हें मुँह में लेकर चूम लेते कभी दांतों से दबा देते।मम्मी का तो जैसे रोम रोम पुलकित होने लगा था, उनका पूरा शरीर रोमांचित हो रहा था।मुझे लगा कि जैसे मम्मी सारी देह तरंगित सी होने लगी है और और उन्होंने अपनी आँखें मूँद सी ली,

    उनके मुँह से बस हल्की हल्की सिसकारियाँ ही निकल रही थी- आह…. आह… आह…आह…मम्मी ने अपने पैर थोड़े से और खोल दिए और अपने पैरों को हवा में ही चौड़ा कर दिया ताकि पापा को किसी प्रकार की कोई परेशानी ना हो।

    ओह…मम्मी के ऐसा करने से मम्मी के पांवों में पहनी हुई निगोड़ी पायल रुनझुन रुनझुन की मंद मंद ध्वनि सी करने लगी, लयबद्ध धक्कों के साथ पायल और चूड़ियों की झंकार सुनकर पापा और भी रोमांचित से होने लगे और मम्मी जोर जोर से चूमने लगे।दो ध्वनि और भी आ रही थी एक थी चुर चुर चुर चुर… जो तेज़ धक्के लगाने के कारण पुराने बेड के हिलने से आ रही थी और दूसरी थी- थप थप थप थप…जो पापा के अखरोटों और मम्मी की लाडो के बार बार टकराव से उत्पन हो रही थी।क्योंकि अब पापा ने धक्को की गति बढ़ा दी थी इसलिए मम्मी की लाडो से आने वाली कुच कुच कुच… की आवाज जैसे कहीं गायब सी हो गई थी या इन सारी आवाजो में कहीं गुम सी हो गई थी।मम्मी का रोमांच और स्पंदन अब अपने चरम पर था, मम्मी की साँसें अब उखड़ने लगी थी और पूरी देह अकड़ने लगी थी। मम्मी ने पापा के होंठों को अपने मुँह में कस लिया और अपनी बाहों को उनकी कमर पर जोर से कस लिया और मम्मी to की प्रेम रस में डूबी सीत्कार निकालने लगी थी।मुझे लगा कि आज मम्मी तो जैसे लाज के सारे बंधन ही तोड़ देंगी।पापा का भी यही हाल था, वो अब जल्दी जल्दी धक्के लगाने लगे थे, उनकी साँसें और दिल की धड़कन भी बहुत तेज़ होने लगी थी और चहरे का रंग लाल सा हो चुका था।वो भी अब मम्मी को जोर जोर से चूमे जा रहे थे

    मम्मी के उरोजों को मसले जा रहे थे- मेरी जान आह… या…मम्मी के मुख से अचानक कुछ सीत्कार सी निकली और मम्मी बोली- मैं बस होने ही वाली हूँ!

    मम्मी के पूरे शरीर में सिहरन सी उत्पन हो गई और वो तो जैसे छटपटाने सी लगी थी।अचानक मम्मी ने पापा के होंठों को इतना जोर से चूसा कि मुझे लगा कि उनमें तो खून ही निकल आएगा, मpम्मी ने उन्हें इतना जोर से अपनी बाहों में भींचा कि उनकी कलाइयों में पहनी चूड़ियाँ ही चटक गई और मुझे लगा कि मेरी मम्मी आनन्द के परम शिखर पर पहुँच गई हैं, वो कितनी देर प्रकृति से लड़ती, मम्मी का रति रस अंततः छूट ही गया।

    पापा बोले- मेरा भी छुटने वाला है!पापा ने भी 3-4 अंतिम धक्के लगाए और फिर मम्मी को कस कर अपनी बाहों में भर कर मम्मी के ऊपर ही लेट गए।

    Bhejjमम्मी की लाडो ने पापा के मुन्ने को कस कर अंदर भींच लिया। पापा और मम्मी बिना कुछ कहे कोई 5-7 मिनट इसी तरह पड़े रहे।सुहागरात के इस साक्ष्य को उन्होंने अपने होंठों से लगा कर चूम लिया- सुरभि, तुम्हारा बहुत बहुत शुक्रिया!मम्मी हंस कर बोली- सुहागरात को पूरी तरह फील कर रहे हो

    पापा बोले- क्यों न करूँ जी! रोज़ रोज़ थोड़ी न मनाई जाती है सुहागरात! मेरी जान! आज तुमने मुझे खुश कर दिया !इतना कह कर उन्होंने अपनी बाहें मम्मी के गले में डाल दी।उन्होंने मम्मी के सर को थोड़ा सा नीचे करने की कोशिश की तो मम्मी ने अपना सर थोड़ा सा नीचे कर दिया। पापा ने फिर मम्मी होंठों को एक बार फिर से चूम लिया।मम्मी खुले बाल उनके चहरे पर आ गिरे।

    पापा ने मम्मी के एक उरोज को अपने मुँह में भर लिया और चूसने लगे।मम्मी ने पापा का मुख अपनी चूचियों से हटाया और बोली- ऐ जी हटो भी अब! बहुत मस्ती कर

  • दो पत्नी ओ के साथ सुहागरात

    हेलो दोस्तों मेरा नाम जय और में 30 साल का हु।

    में कहानी सुना रहा हु 5 साल पहले कीजब मेरी शादी होने वाली थी तब की।

    हम गांव में रहते हे और मेरे परिवार में दादा दादी और चाचा चाची हे मेरे मम्मी पापा नहीं हे मेरे दादाजी के पास बहुत पैसे हे बहुत सारे खेत.

    मेरी कुछ ही दिन में शादी होने वाली है और वो भी 2 पत्नी आने वाली है क्योंकि की जब मुझे देखनी के लिए तब दो बहने मुझसे शादी करने के लिए तैयार हो गई और मेरे ससुर ने दादाजी को कहा मेरी दोनों लड़की को आपका लड़का पसंद आ रहा हे .

    मेरे दादाजी ने भी कहा दिया कि दोनों से शादी करा लो वो मान गई क्यूंकि हमारे पास बहुत पैसे थे।

    मरी शादी के पंद्रह दिन के पहले की बात के जब मुझे मेरे दादी और दादाजी ने बुलाया और कहा कि तुम्हार सेक्स टाइम कितना हे दादाजी को पता था कि में खेत में काम करने वाली मजदूर की लड़की यो के साथ पैसे देके सेक्स करते हु।

    मैने बताया कि 15 मिनट मुझे दादाजी ने कहा कि तुम्हारी अब दो पत्नी आने वाली हे तो ये नहीं चलेगा तुम पावर बढ़ानी होगी और अपना औजार भी मुझे एक जड़ी बूटियों से बनी दवाएं दी तेल भी दिया।

    और कहा कि तू रो रातको खा लेना ओर तेल औजार पे लगाना तुम्हारे चाची को बोलना कामवाली बाई तुम तेल लगाना सिखाए ।

    मैने कहा ठीक है।

    मुझे पता था कि दादा दादी इसका इस्तेमाल करके रो एक घंटे तक सेक्स करते हे में चाचा चाची भी इस तरह करते है।

    रात हो गई और में खाना खाया और दवाई खा ली और चाची को बुलाया तो चाची ने बताया कि तू इसे दो घंटे तक नहीं थको हे और चाची मेरी फ्रेंड जैसी थी चाची ने कहा कि हमारे घर में कामवाली से मैने बोल दिया हे।

    वो आ जाएगी और मुझे अभी जाना है तुम्हारे चाचा को आराम देना हे मैने कहा ठीक है

    थोड़ी देर बाद वो कामवाली बाईं आई और मेरी पैंट निकली अंडरवेर निकली और तेल की मसाज करने मसाज करते करते वो नंगी हुईं और मेरे लंड पे बैठ कर अपनी चूत में लंड लेके ऊपर नीचे होने लगी और करीब एक घंटे तक चुदाई चली ना में कुछ बोल ना कुछ वो बोली। जाते टाइम बोली अब से तुम खुद करना मसाज क्योंकि तुम्हारी शादी होने वाली ओर तुम अपनी ताकत बचाके रखना चली गई।

    में समझ गया कि हमारे चाची ने समझा के भेजी होगी .

    केवल 15 दिन में मेरा लंड 12 इंच का ही गया मेरी शादी हो गई और मेरी दो पत्नी भी आ गई और हमारे में रिवाज हे कि शादी की दूसरी रात सुहागरात मनाई जाती हे।

    शादी के रात हम पास नहीं सोते ।

    अब दुसर दिन की रात हुई मेरा कमरा सजा दिया था।

    मेरी दोनों पत्नी या रूम में सज के बैठी थी में रूम में गया तो पीछे से चाची दुद लेके आ गई मुझे कान मे कहा कि आराम पहली बार हे इनका।

    एक का नाम रानी था और दुशरी का नाम पूजा था दोनों सजी हुई पलंग पे बैठे थी मैने रूम का दरवाज बंद किया और पलंग पर बैठे ।

    मने कहा कि तुम दोनों की आज सुहागरात हे तो तू आज शे मेरी हो जाओगी तुम दोनों मेरी लिए एक सामन हो ।

    पूजा – हम आज से आपकी हुई और आज हमको कच्ची कली से पका फूल बना दो।

    रानी – हा पति देव.

    में – चलो ठीक हे तुम अपने पूरे कपड़े निकल दो ।

    उस दोनों फिगर 38-32-40 है।

    दोनों ने अपने अपने कपड़े निकले मैने भी निकल दिये

    मेरा लंड दो नो चौक गई

    पूजा – इतना बड़ा हमसे नहीं लिया जाएगा हमारी चूत नहीं स पायेगी

    रानी – ये तो बहुत बड़ा है।

    में – ये तुम दोनों के लिए ही हे और तुम्हे ही लेना हे चलो पहले कौन आएगा

    पूजा – में छोटी हु इसलिए पहले रानी आएगी कल

    में – कल क्यों आज ही पर अब पहले तुम ओगी

    रानी तुम देखो तुम्हारी बारी थोड़ी देर बाद तुम सोफे पे जाके बैठ जा।

    रानी – ठीक है पति देव।

    मरे लंड भी बहुत बड़ा तो टाइट ही गए था।

    अब मुझसे ज़्यादा इंतज़ार नहीं हो रहा था, मेरा सब्रा टूट रहा था। पूजा को मैंने उसको अपनी तरफ घुमाया, और उसको किस करना शुरू कर दिया। उसकी आंखें बंद थीं, और वो भी मेरा साथ देने लगी।

    मैं उसके ऊपर आ गया, और उसकी क्लीवेज का मजा लेने लगा। वो भी मुझे अपनी बाहो में कस रही थी। फिर मैंने उसकी ब्रा को नीचे करके उसके दोनों बूब्स को बाहर निकाल लिए। मैं भी अब अपनी पत्नी के साथ सुहागरात का मजा लेने लगा।

    जब मैं उसके निपल्स चुमने लगा, तो उसने कामुक आहें भरनी शुरू कर दी। आहहह अहह अह्ह्ह की सिसकिया लेने लगी। फिर मैं नीचे गया, और उसकी कमर को चूमता हुआ उसकी जाँघों पर पहुँच गया।

    और कुंवारी चूत मेरे सामने थी। मैंने उसकी जाँघों को चाटना और काटना शुरू कर दिया। फ़िर मैं उसकी ख़ूबसूरत गुलाबी चूत पर पाहुंचा।

    सुहाग-रात की वजह से उसकी चूत बिल्कुल साफ थी। उसकी चूत पर एक भी बाल नहीं था, और वो बिल्कुल आइसक्रीम की तरह लग रही थी।

    मैंने बिना समय बर्बाद किये उसकी चूत को चाटना शुरू कर दिया। वो मेरे सर को अपनी चूत में दबा रही थी, और उसकी चूत धड़ाधड़ पानी छोड़ रही थी।

    मैं उसकी छाती के ऊपर बैठ गया, और उसके रसीले होठों पर अपना लंड रगड़ने लग गया।

    फिर जैसे ही उसने मुँह खोला, तो मैंने अपना आधा लंड उसके मुँह में घुसा दिया । अब मैं उसके मुँह में अपना लंड अंदर बाहर कर रहा था, और वो आँखें बंद करके मेरा लंड मजे से चूस रही थी।

    शायद उसे भी बहुत मजा आने लगा था इसलिए वो भी चुपचाप मेरा मोटा लंड अपने मुँह में लेकर मजे से चूसने लगी। फिर मैंने लंड उसके मुँह से बाहर निकाल लिया, और मैं उसकी टांगो के बीच आ गया।

    उसने अपनी टाँगे फैलाकर रखी थी, मैंने अपना लण्ड अंदर डालने की कोशिश की लेकिन कुंवारी चूत होने की वजह से मेरा लंड उसकी

    टाइट बुर में नहीं घुस रहा था।

    उसने मेरे लंड को अपने हाथों से पकड़ कर उसकी योनि पर रखा ।

    मैंने एक झटका दिया और लण्ड का टोपा उसकी बुर में घुस गया और वो चिल्ला उठी।

    थोड़ी देर बाद में एक जोरदार झटका फिर मारा और मेरा लगभग आधा लंड उसकी टाइट चूत में घुस गया।

    और वो चिल्लाने लगी, उसकी आँखों से आँसू आ गये और गिड़गिड़ाने लगी- प्लीज़ निकाल लो, मुझे नहीं चुदवाना! बहुत दर्द हो

    रहा है।

    मैं- थोड़ी धीरज रखो पूजा, बाद में बड़ा मज़ा आएगा।

    पूजा – नहीं निकालो प्लीज

    में – अभी तक मेरा आधा ही लंड अन्दर घुसा है

    अभी मेरा पूरा घुसे गा तुम मेरी पत्नी हो ये तो सहना ही पड़ेगा ना।

    खून निकलने लगा था। लंड मेरे गाढे लाल खून से रंग गया

    मैंने उसे उसी पोज़िशन में रख कर बूब्स दबाए और चुम्बन करता रहा और हाथ से उसकी क्लाइटॉरिस को चुटकी में लेकर मसल दिया।

    मैंने बिना समय बर्बाद किये उसकी चूत को चाटना शुरू कर दिया। वो मेरे सर को अपनी चूत में दबा रही थी, और उसकी चूत धड़ाधड़ पानी छोड़ रही थी।

    मैं उसकी छाती के ऊपर बैठ गया, और उसके रसीले होठों पर अपना लंड रगड़ने लग गया।

    फिर जैसे ही उसने मुँह खोला, तो मैंने अपना आधा लंड उसके मुँह में घुसा दिया । अब मैं उसके मुँह में अपना लंड अंदर बाहर कर रहा था, और वो आँखें बंद करके मेरा लंड मजे से चूस रही थी।

    शायद उसे भी बहुत मजा आने लगा था इसलिए वो भी चुपचाप मेरा मोटा लंड अपने मुँह में लेकर मजे से चूसने लगी। फिर मैंने लंड उसके मुँह से बाहर निकाल लिया, और मैं उसकी टांगो के बीच आ गया।

    उसने अपनी टाँगे फैलाकर रखी थी, मैंने अपना लण्ड अंदर डालने की कोशिश की लेकिन कुंवारी चूत होने की वजह से मेरा लंड उसकी

    टाइट बुर में नहीं घुस रहा था।

    उसने मेरे लंड को अपने हाथों से पकड़ कर उसकी योनि पर रखा ।

    मैंने एक झटका दिया और लण्ड का टोपा उसकी बुर में घुस गया और वो चिल्ला उठी।

    थोड़ी देर बाद में एक जोरदार झटका फिर मारा और मेरा लगभग आधा लंड उसकी टाइट चूत में घुस गया।

    और वो चिल्लाने लगी, उसकी आँखों से आँसू आ गये और गिड़गिड़ाने लगी- प्लीज़ निकाल लो, मुझे नहीं चुदवाना! बहुत दर्द हो

    रहा है।

    मैं- थोड़ी धीरज रखो पूजा, बाद में बड़ा मज़ा आएगा।

    पूजा – नहीं निकालो प्लीज

    में – अभी तक मेरा आधा ही लंड अन्दर घुसा है

    अभी मेरा पूरा घुसे गा तुम मेरी पत्नी हो ये तो सहना ही पड़ेगा ना।

    खून निकलने लगा था। लंड मेरे गाढे लाल खून से रंग गया

    मैंने उसे उसी पोज़िशन में रख कर बूब्स दबाए और चुम्बन करता रहा और हाथ से उसकी क्लाइटॉरिस को चुटकी में लेकर मसल दिया।

    अपना लंड चूत के मुंह पर लगाकर एक जोर का धक्का मारा.

    पूजा

    मुंह से एक लंबी दर्द भरी चीख निकल गई- आह ओह ईईई ऊऊच ऊं … उई मां मर गई … आह ओह ईईई … ऊऊऊ!

    मेरा लंड पूजा की चूत को फाड़ता हुआ अंदर घुस चुका था.

    लेकिन मैने चीखों पर ध्यान ना देकर ताबड़तोड़ तगड़े धक्के लगाकर अपना लंबा मोटा फौलादी लंड चूत में जड़ तक पहुंचा दिया.

    पूजा की आंखों में आंसू आ गए दर्द के कारण … पूजा चूत से खून की धार छूट गयी थी.

    दर्द के मारे मैं अपना सर इधर उधर पटकने लगी थी.

    पूजा जोर जोर से दर्द भरी चीखें निकल रही थी- आह हहह उई मां मरर गई … आह ओह … ईईई ऊऊऊ … ऊचच चचच … उममह ममम … आह हहह … उई मां!

    में ताबड़तोड़ धक्के मार मार कर पूजा की चूत के चीथड़े उड़ा रहा था.

    मेरा लौड़ा हर धक्के पर पूजा की बच्चेदानी में जा रहा था.

    पूजा ने एक हाथ मैंने अपनी चूत पर लगा कर देखा तो मेरा पूरा लंड मेरी चूत में तेजी से अंदर बाहर हो रहा था.

    पूजा ने चूत पर और मेरा लंड पर उंगलियां लगाई तो पूजा के हाथ पर काफी सारा खून लग गया था.

    पूजा समझ गई कि अपने लंबे मोटे फौलादी लंड से मेरी सील तोड़ दी. इस कारण मेरी चूत से काफी खून निकल रहा था.

    तभी पूजा की चूत ने पानी छोड़ दिया और पूजा को दर्द के बजाए आनन्द आने लगा था.

    मैने करीब बहुत चुदाय की ओर में करीब 45 मिनट बाद मैने बोला कहा पे पानी निकालू तो कुछ नहीं बोली क्यों कि हालत बहुत खराब हो गई थी वो 8-9 बार जड़ गई होगी ।

    बस फच फच फचाक फचाक की आवाज से कमरा गूंजने लगा.

    कुछ समय बाद झड़ने को हुआ और उसने अपना सारा वीर्य पूजा की बुर में डाल दिया.

    वह वीर्य पूजा की चूत के पानी से मिलकर बाहर बहने लगा. वो इसे ही पड़ी थी मैने उसको उठाया और सोफे से रानी को हटने को बोला और मैने सोफे पे सुला लिया नंगी ही।

    रानी अब तुम्हारी बारी जैसे ही पास आई मैने उसे खींच कर बेड पर गिरा दिया इसके में चूमा चाटी करने लगा चूमा चाटू करते करते मैने सारे कपड़े रानी के उतार दिए।

    मैने रानी को अपना मुँह डाल कर चूसने चाटने लगा.

    मेरी वासना मेरे ऊपर पूर्ण रूप से हावी हो चुकी थी और मैंने उसकी एक चूची को अपने मुँह में लेकर जोर से काट ली.

    उसकी मदभरी सिसकारी निकल गई- आह प्यार से काटो न!

    यह सुन कर मुझसे रहा नहीं गया और मैंने उसे पीछे पलट दिया और अपनी छाती उसकी पीठ से सटा दी.

    चूंचियो के निप्पल को पकड़ पकड़ कर खीचते हुए रानी को गर्म कर रहे था। रानी “……अई…अई….अई……अई….इसस्स्स्स्स्…….उहह्ह्ह्ह…..ओह्ह्ह्हह्ह….” की सिकरिया भर रही थी

    अपना मुह रानी की गोरी गोरी चूंचियो के काले काले निप्पल पर लगा दिया। विलास बछड़े की तरह निप्पल को खींच खींच कर दूध पी रहा था।

    कुछ देर तक पीने के बाद

    अपना लंड चूसने कहा

    बोली- “आज नहीं। ये सब कल से किया जायेगा”.

    सर पकड़ कर अपने लंड को रगड़ने लगा ।

    अपना लण्ड अन्दर करके मे चुसाना शुरू कर दिया

    उसको लंड मुह में रख कर बहुत बुरा लग रहा था।

    मैने मुंह में से बाहर निकला और दोनों पैर को उठाकर लंड चूत के मुंह पर रखा और एक जोर का धका दिया लंड चूत के अंदर ओर रानी जोर जोर से “आआआअ ह्हह् हह …..ईईईईईईई….ओह्ह्ह्….अई. .अई..अई…..अई..मम्मी….” चिल्लाने लगी। उनके लंड का टोपा म चूत में जाकर फंस गया।

    में धक्का मार मार कर रानी की चूत में डाल डाल कर निकालने लगे। दर्द से तड़प रही थी। लेकिन मुझे कोई फर्क नहीं पड़ रहा था। चूत की फडाई में लगे हुए थे। रानी का लग रहा था। किसी ने लोहे का मोटा रॉड गर्म करके चूत में डाल दिया हो।

    रानी चूत की दर्द को भूल कर चुदाई करवा रही थी। अचानक में मोटा काला लंड रानी की चूत में हलचल मचाने लगा। में रानी को किसी कुत्ते की तरह जल्दी जल्दी चोदने लगे। सैयां जी की ट्रेन ने स्पीड पकड़ ली थी। में ब्रेक मारने का नाम ही नहीं ले रहे थे।

    खून से मेरा लंड पूरा लाल हो गया था और में पूरे जो से चूदाई कर रहा था वो अभी तक 2 बार पानी निकल चुकी थी

    मेरी स्पीड की रगड़ से मै बहुत परेशान हो गई थी। दर्द से “उ उ उ उ उ……अ अ अ अ अ आ आ आ आ… सी सी सी सी….. ऊँ— ऊँ… ऊँ….” की आवाज के साथ अपनी चूत फड़वा रही थी। रानी की चूत का दर्द धीरे धीरे कम होने लगा। रानी मुझे महसूस करने लगी थी ।

    5 मिनट बाद फिर जड़ गई अब माना करने लगी थी।

    रानी – अब छोड़ दोना कल कर लेना आज इतना ही बहुत दर्द हो रहा हे

    में – देख तुम्हारी बहन पूजने भी सहन किया है तुमसे छोटी हो तो भी बस थोड़ी देर ओर

    रानी – नहीं रुक जाओ

    में – में तुम्हारा पति हू तुम मेरी बात मानी होगी

    वो ऐश ही पड़ी रही ओर में करीब 30 मिनट बाद पानी उसकी चूत में ही छोड़ दिया।

    रानी की हालत बहुत खराब हो गई थी मैने खून साफ किया दोनों बहन का और नंगे ही हम तीनों सो गई।

    में सुबह 8 बजे उठा और पूजा रानी को उठाया और कपड़े पहनने को बोला वो दोनों ठीक से चल भा नहीं पा रही थी।

    में रूम में से बाहर आ गया

    चाची – कैसी गई तुम्हारी सुहागरात।

    में – पूजा और रानी को पूछो जाके

    चाची – हालत खराब कर दी हे तू चिंता करो में दवाई दे देती हु रात तक ठीक हो जाएगी

    में – ठीक हे

    दादी ने रानी और पूजा के पास गई वो दोनों चल नहीं पा रही थी तो दादी ने गर्म पानी कर के दोनों को नहलाया और दर्द की दवा दे दी।

    उस दिन की चुदाई ने तो सब यादगार बना दिया।