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  • गर्लफ्रेंड की पहली चुदाई मौसी के कमरे में

    यंग गर्ल वेट पुसी स्टोरी में मेरी दोस्ती एक लड़की से हुई. हम दोनों सेक्स करना चाहते थे पर मौक़ा नहीं मिल रहा था. मैं उसे अपनी मौसी के घर ले गया.

    नमस्ते दोस्तो, मेरा नाम शिवराज है और मैं विदिशा, एमपी का रहने वाला हूँ.
    मैं मध्यमवर्गीय परिवार से हूँ.

    मैंने बी.एस.सी. कंप्यूटर से ग्रेजुएशन किया हुआ है और कॉम्पिटिशन एग्ज़ाम की तैयारी कर रहा हूँ.

    पढ़ाई के साथ ही बाइक के शोरूम पर कंप्यूटर ऑपरेटर की जॉब भी कर रहा हूँ.

    मैं साढ़े पांच फीट का हट्टा-कट्टा नौजवान हूँ.
    मेरा औज़ार 5 इंच का है तथा ये 2.5 इंच मोटा है.

    यह यंग गर्ल वेट पुसी स्टोरी मेरी गर्लफ्रेंड भारती की है.
    भारती से मेरी फ्रेंडशिप 4 साल पहले फेसबुक पर हुई थी.

    जब भी वह अपनी फोटो अपलोड करती, तो मैं उसकी बहुत तारीफ़ करता और उसकी फोटो पर अच्छे-अच्छे कमेंट करता.

    इस तरह वह मुझसे प्रभावित होने लगी.
    भारती का रंग गेहुंआ जरूर है लेकिन फेस कट बहुत खूबसूरत है.

    उसके घर में उसके मां-पापा, भाई-भाभी और उनकी एक लड़की थी जो कि अभी एक साल की थी.

    कुछ ही समय में हमारी फ्रेंडशिप प्यार में बदल गई और हम व्हाट्सएप पर भी बात करने लगे.
    फिर धीरे-धीरे कॉल पर प्यार भरी बातें करने लगे.

    भारती का फिगर 30-28-32 का है.
    उसके चूचे ज्यादा बड़े नहीं, पर एकदम मस्त और सख्त हैं.

    उसके दोनों चूतड़ एकदम गोल, पावभाजी वाले बन-रोटी की तरह हैं.
    उसकी गांड मसलने में खूब मजा आता है.

    भारती बी.टेक प्रथम वर्ष में अध्ययनरत है और रेंट पर भोपाल शहर में रहकर पढ़ाई कर रही थी.

    जल्द ही हमने मिलने का प्लान बनाया और मैं उससे मिलने भोपाल पहुंच गया.
    भोपाल में हम घूमे-फिरे, बहुत मौज-मस्ती की.

    दोपहर को मैंने उसे अपनी मौसी के रूम पर चलने को कहा जो कि भोपाल में ही अपने पति के साथ किराए के रूम पर रह रही थीं.
    मेरी मौसी से सैटिंग है, वह एक अलग सेक्स कहानी में लिख कर बताऊंगा कि मौसी मेरे साथ कैसे खुली थीं.

    भारती मान गई और मेरे साथ मौसी के रूम पर चली आई.
    मौसी ने हमारे लिए चाय बनाई और थोड़ी देर बाद मौसी कुछ सामान लाने का बोलकर बाज़ार चली गईं.

    यह मैंने मौसी को पहले ही बता दिया था कि मैं उसे लेकर जब आऊं, तब आप एक-दो घंटे के लिए कहीं चली जाना और उन्होंने ठीक वैसा ही किया.

    मौसा जी तो शाम से पहले अपने काम से लौटने वाले नहीं थे तो मैं बेफिक्र था.

    मौसी के जाते ही मैंने उसे अपनी बांहों में भर लिया और धीरे-धीरे मेरा एक हाथ उसके स्तनों पर आ गया.

    मैं एक हाथ से उसकी चूचियों को व दूसरे हाथ से उसकी पीठ को सहलाने लगा.
    उसने सफेद कलर का टॉप पहन रखा था.

    मैंने धीरे-धीरे करके अपना हाथ टॉप के नीचे से अन्दर डाल दिया और ब्रा के ऊपर से उसके एक स्तन को सहलाने लगा.
    वह मस्त होने लगी, तो मैंने धीरे से उसका टॉप निकाल दिया.

    उसने अपने हाथों को ऊपर करके टॉप निकालने में मेरी मदद की.
    वह खुद चुदने के मूड में आ गई थी तो मैं उसे मौसी के बेड पर ले गया.

    उधर मैंने फिर से उसके साथ चूमाचाटी शुरू कर दी और अपने दोनों हाथों से उसके चूचों को ब्रा के ऊपर से दबाने लगा.
    उसने सफेद कलर की ब्रा पहन रखी थी.

    फिर उसे किस करते हुए ही मैं एक हाथ नीचे ले गया और उसकी सफेद लैगिंग्स के ऊपर से उसकी चूत को सहलाने लगा.
    उसने अपनी टांगें फैला दीं और चुत की रगड़ाई का मजा लेने लगी.

    यह देख कर मैंने उसकी लैगिंग्स को धीरे से नीचे को सरकाते हुए टांगों से बाहर निकाल दिया.
    उसने अपनी गांड उठाकर लैगिंग्स को निकालने में मेरी मदद की.

    लैगिंग्स के नीचे उसने अन्दर ब्लैक कलर की पैंटी पहन रखी थी जो हल्की सी भीग गई थी.
    मैं पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत सहलाने लगा.

    इस सब में वह मेरा पूरा साथ दे रही थी और बहुत गर्म हो गई थी.
    फिर मैंने उसके होंठों को अपने होंठों से अलग किया और उसकी ब्रा को ऊपर करके उसके एक चूचे को मुँह में भर लिया और दूसरे दूध को मसलने लगा.

    वह आह आह करने लगी और जल्दी ही उसने खुद ही अपनी ब्रा निकाल दी.
    जब वह अपनी ब्रा निकाल रही थी, उसी वक्त मैंने उसकी पैंटी निकाल दी.

    उसकी चूत पर घुंघराले काले बाल थे जो कि ज्यादा बड़े नहीं थे, शायद उसने दो हफ्ते पहले ही साफ किए थे.
    फिर उसने मेरे कान में कहा- पहले बताया होता कि यह करने वाले हो तो मैं मैदान साफ करके आती!

    मैंने हंस कर कहा- कोई बात नहीं जान, आज तेरी घुंघराली झाड़ियों में लंड घुसेड़ कर मजा ले लूँगा, तुम अगली बार मैदान चमका कर आ जाना!
    यह सुनकर वह धीरे से हंस दी.

    अब मैंने उसके दोनों पैरों को फैलाया और उसकी टांगों के बीच में आ गया.
    अपने लंड को मैं उसकी चूत पर रगड़ते हुए किस करने लगा.
    मैं अपने दोनों हाथों से उसके मम्मों को जोर-जोर से मसलने लगा.

    वह बहुत गर्म हो गई थी और मेरे कूल्हों पर हाथ रखकर अपनी चूत पर लंड को दबाने लगी थी.
    मैंने एक हाथ नीचे ले जाकर लंड को उसकी चूत पर रखा और जोर का धक्का लगाया.

    चूत बहुत गीली होने के कारण लंड का टोपा अन्दर चला गया.
    उसके होंठ मेरे होंठों में दबे होने के कारण उसकी चीख दब कर रह गई, वरना वह बहुत जोर से चिल्ला देती.

    लौड़े की नोक चुत में घुसने से वह बहुत मचलने लगी और मुझे अपने हाथों से धकेलने की कोशिश करने लगी.
    पर मैंने उसे जकड़ रखा था.
    उसकी आंखों से आंसू बह निकले.

    मैं थोड़ी देर ऐसे ही रुका रहा.

    फिर एक और जोर के धक्के के साथ पूरा लंड मैंने उसकी चूत में पेल दिया.
    उसकी चूत फट चुकी थी और उससे खून आने लगा था जो कि मुझे मेरे लंड पर गर्म महसूस हुआ.

    वह लगभग बेहोश हो चुकी थी.
    मैं ऐसे ही रुक गया और उसे किस करने लगा.

    धीरे-धीरे उसे होश आने लगा और अब वह थोड़ा शांत हो गई थी.
    मैं धीरे-धीरे लंड को अन्दर-बाहर करने लगा.

    वह अपने मुँह से कामुक आवाज़ निकालने लगी थी.

    उसका मीठा दर्द अब मादक सिसकारियों में बदल चुका था और शायद उसे भी अब मज़ा आने लगा था.
    वह धीरे-धीरे ‘अह … उह …’ की आवाज़ें निकालने लगी.

    करीब आधे घंटे तक मस्त चुदाई चली.
    इस बीच में वह दो बार झड़ चुकी थी और अब मैं भी झड़ने वाला था.

    लंड का पानी चुत के अन्दर ना निकले इसलिए मैंने तुरंत अपने लंड को झटके से बाहर निकाल लिया.

    मैं आपको बताना भूल गया कि मेरे लंड का टोपा थोड़ा बड़ा है इसलिए जैसे ही लंड बाहर निकाला, एक पक्क की आवाज़ हुई और उसकी चीख निकल गई!
    वह बोली- अह … शिबु मर गई … ऐसे कोई निकालता है क्या!

    उसे थोड़ा दर्द होने लगा.
    अब तक करीब डेढ़ घंटा बीत गया था तो हम दोनों ने जल्दी-जल्दी अपने कपड़े उठाए और वह कपड़े लेकर अपनी चूत को साफ करने के लिए बाथरूम में चली गई.

    वह कुछ पल बाद बाहर आ गई.
    अब तक मैंने भी अपने कपड़े पहन लिए थे.

    थोड़ी देर में मौसी आ गईं और हम लोग नाश्ता करके निकल गए.
    रास्ते में उसने मुझसे कहा- मुझे चूत में बहुत जलन हो रही है और शायद खून भी आ रहा है.

    मैंने मेडिकल शॉप से पेन किलर खरीद कर उसे दे दिया.
    फिर उसके रूम के पास आकर मैं उसे सड़क पर विदा करके अपने घर को निकल गया.

    उसके बाद तो हम रोज़ रात को सेक्स चैट करने लगे और व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर एक-दूसरे को अपने-अपने अंगों का प्रदर्शन करने लगे.
    वह अलग-अलग रंग व डिज़ाइन की ब्रा पहन कर मुझे फोटो भेजा करती थी और मैं उन फोटोज़ को अपने पास मेमोरी बना कर रख लेता था.

    वह साड़ी वगैरह पहन कर भी अपनी फोटो भेजा करती थी.
    मैं उसे अपनी चूत और गांड में उंगली करने को कहता तो वह मेरी खुशी के लिए दर्द होते हुए भी करती थी.

    उसकी गांड एकदम कुंवारी थी और उसका छेद बहुत छोटा था इसलिए उसे बहुत दर्द होता था.
    फिर भी वह मेरी खुशी के लिए यह सब करती थी.

    एक बार जब मैं उससे नाराज़ हो गया तो उसने मुझे एक वीडियो बनाकर भेजी जिसमें वह टूथब्रश को अपनी गांड में डालकर अन्दर-बाहर कर रही थी.

    गांड में टूथब्रश करने के साथ ही वह बोली- यह सब मैं आपकी खुशी के लिए कर रही हूँ, अब अगर आप हंसे नहीं तो मैं अपनी जान दे दूँगी!
    मैंने उसे माफ़ कर दिया और हम फिर से बात करने लगे.

    फिर कुछ दिनों बाद उसके भाई की बेटी यानि उसकी भतीजी का बर्थडे था.
    तो उसने मुझे अपने घर पर इनवाइट किया.

    उसने मुझे अपने परिवार से कॉलेज फ्रेंड कहकर मिलवाया और फिर मेरे साथ ही वह मार्केट जाकर केक वगैरह और सजावट का सामान लेकर आई.

    मैंने उसकी भतीजी के लिए साइकिल खरीदी गिफ्ट करने के लिए.
    वह फुसफुसाती हुई बोली- वाह फूफा जी! अपनी भतीजी के लिए गिफ्ट खरीद रहे हो!
    मैं भी हंस दिया.

    हम लोग खरीदी करके वापस उसके गांव वाले घर पहुंच गए.
    वहां बहुत से मेहमान आए हुए थे, जिनमें उसके कजिन्स भी थे.

    सबने मेरी खूब खातिरदारी की और मैंने भी साज-सज्जा में भारती की मदद की.

    फिर वह तैयार होने के लिए चली गई और लगभग एक घंटे बाद वह तैयार होकर आई तो मैं उसे देखता ही रह गया.

    उसने गांव के हिसाब से चूड़ीदार कुर्ता और लैगिंग्स पहन रखा था जो कि प्याजी कलर का था और सफेद लैगिंग्स थी.

    मैंने उसे लोगों से नज़रें चुराकर एक फ्लाइंग किस दी.
    उसने भी लोगों से नज़रें चुराते हुए मेरे किस का जवाब दिया.
    अपने होठों को चुम्मा बनाकर मुझे इशारा किया.

    फिर केक कटिंग हुई और मैंने भतीजी को साइकिल दी.
    भारती और मैंने भतीजी के साथ फोटो खिंचाया.

    वह मेरे एकदम पास खड़ी थी तो मैंने मौका देखकर उससे पूछा कि किस रंग की ब्रा-पैंटी पहनी तो उसने धीरे से फुसफुसाते हुए कहा- रेड कलर का सैट!

    मेरा मन हुआ कि अभी उसके कपड़े उतरवा कर उसे रेड कलर के 2 पीस में देखूँ, पर वहां बहुत मेहमान थे तो यह संभव नहीं था.

    हम लोगों ने साथ में खाना खाया और डीजे पर बहुत डांस किया.
    फिर मैं थक कर साइड में खड़ा हो गया.

    तब देखा कि वह एक लड़के के साथ नाच रही थी तो मैंने उसे घूर कर देखा, जिससे वह डर गई और धीरे से एक कान पकड़कर माफी मांगने लगी और मेरे पास आकर खड़ी हो गई.

    मैंने स्माइल की और उसकी मम्मी का डांस देखने लगा.
    उसकी मम्मी की गांड भी बहुत बड़ी थी जो कि वह मटका-मटका कर नाच रही थी.

    तकरीबन रात के 11:00 बजे मैंने उसके पापा से घर जाने की आज्ञा ली तो उन्होंने मुझे जाने से इनकार कर दिया और कहा- बेटा, रात ज्यादा हो गई है, आज रात यहीं रुक जाओ, हमें भी अच्छा लगेगा.
    फिर भारती और भारती के मम्मी-पापा के कहने पर मैं वहीं रुक गया और अपने घर पर कह दिया कि मैं कल सुबह आऊंगा, लेट हो जाने के कारण मैं आज अपने दोस्त के घर रुक गया हूँ.

    मेहमान ज्यादा होने के कारण हम लोग हॉल में सोए.
    मेरे साइड में उसका भाई सोया हुआ था और लेफ्ट साइड में भारती थोड़ी दूरी पर अपना बिस्तर बिछाकर सोई हुई थी.
    उसके साथ उसकी बुआ की लड़की भी सोई हुई थी.

    रात को करीबन 3:00 बजे मेरी नींद खुली, तो मैंने देखा सभी लोग गहरी नींद में सोए हुए थे.
    मैंने धीरे से अपना हाथ भारती की ओर बढ़ाया और उसके कुर्ते को ऊपर उठाते हुए उसकी लैगिंग्स और पैंटी के अन्दर हाथ डाल दिया और उसकी चूत पर चलाने लगा.

    शायद वह जाग गई थी पर कोई रिएक्शन नहीं दे रही थी और मज़ा ले रही थी.
    फिर धीरे-धीरे मैंने एक उंगली उसकी चूत के अन्दर डालकर अन्दर-बाहर करना शुरू कर दिया.

    यह सब मैं उसके भाई पर ध्यान रखते हुए कर रहा था.
    बुआ की लड़की की वजह से ज्यादा रिस्क नहीं कर रही थी, बस मेरे हाथ पर अपना हाथ रखे हुई थी.

    फिर धीरे-धीरे मैंने दूसरी उंगली भी उसकी चूत में डाल दी और यंग गर्ल वेट पुसी के अन्दर-बाहर करने लगा.
    उसने अपनी टांगें थोड़ी फैला ली थी. अब उसकी चूत बहुत गीली हो चुकी थी और पानी छोड़ने लगी.

    फिर मैं उसकी पैंटी से अपना हाथ निकाल लिया और हाथ को ऊपर ले जाकर उसके कुर्ते के गले से अन्दर डालने लगा और उसके दूध सहलाने लगा.

    थोड़ी देर बाद मुझे नींद आने लगी तो मैं अपने हाथ उसके स्तन से हटाकर सो गया.

    सुबह जब मैं उठा तो 8:00 बज चुके थे और सभी लोग उठ चुके थे.
    भारती भी उठ चुकी थी और मेरे लिए चाय लेकर आई थी.

    उसी ने मुझे उठाया और मेरे होंठों पर इधर-उधर देखकर किस कर दी और ‘गुड मॉर्निंग!’ कहा.
    फिर मैं 9:00 बजे उसके घर से निकल गया.

  • सुहागरात 1

    सुहागरात मैं अहमदाबाद (गुजरात) का निवासी हूँ,

    यह एक सच्ची कहानी है पर पात्रों के नाम व स्थानों के नाम बदल दिए हैं और कहानी को रोचक बनाने के लिए कुछ काल्पनिक चीज़ों का समावेश किया गया है,

    आशा करता हूँ आपको पसंद आएगी।मैं अपने मम्मी पापा का इकलौता लड़का हूँ इसी वजह से मैं 14 साल तक अपने मम्मी पापा के साथ ही सोता था। मैं अपनी मम्मी पापा के बीच में सोता था पर मैं जब सुबह उठता तो मुझे यह देखकर बहुत गुस्सा आता कि मेरे मम्मी पापा अगल बगल सो रहे हैं और मैं किनारे की तरफ सो रहा होता था।

    मैं उठकर मम्मी से पूछता भी तो वे मुस्कुरा कर कहती- मैं तो सारी रात तेरे बगल में सो रही थी, तेरे पापा तो अभी सुबह ही आकर इधर लेटे हैं।लेकिन अब वो नहीं रहा मेरी मम्मी हमे छोड़ कर इस दुनिया से चली गई और में अकेला हो जाता हु।दो साल बाद मेरे पापा दूसरी शादी कर ले ते हैं मम्मी और पापा एक दूसरे को जानते थे पहले भी मेरी नई मम्मी का भी डिवोर्स हुआ था पहला पति बहुत मारता था इस।ओर पापा मम्मी एक ही ऑफिस में कम करते थे तो उनलोगोन शादी कर लीपापा कोर्ट में ही शादी करते हैं।पापा ने मुझे बगल वाले कमरे में शिफ्ट होने की इज़ाज़त दे दी। मैंने भी अपना बोरिया बिस्तर बाँधा और अपने बेडरूम से बिल्कुल सटे दूसरे कमरे में आ गया।इस कमरे में एक बेड था,

    एक कुर्सी और एक मेज थी, बेड जिस दीवार से सटकर लगा था उस दीवार पर ही एक लकड़ी की खिड़की थी जो हमारे बैडरूम की ओर ही खुलती थी पर मैं उसे कहाँ खोल सकता था।और मुझे उनकी सुहागरात देखने का विचार आता हे।नए जोड़े अपनी शादी के शुरूआती दिनों,

    सुहागरात या फिर हनीमून में करते हैं।जब मैंने देखा कि कोई घर पर नहीं था तो जल्दी से पेंचकस लाकर खिड़की में छोटा सा छेद कर दिया। अब मैं कभी भी बेड पर लेटे हुए भी मम्मी पापा की चुदाई देख सकता था। मैंने अपना सारी बुक्स वगैरह दूसरे कमरे में शिफ्ट कर ली। मेरी तैयारी पूरी हो चुकी थी, अब मैं पापा मम्मी को चुदाई करते कभी भी देख सकता था।शाम को पापा मम्मी घर जाते हैं में उनका स्वागत करता हूँ।और उनलोगा का कमरा पापा के कहने पर सजा देता हूँ।मम्मी आते ही काम पर लग जाती है।लगभग 8:30 बजे मम्मी ने खाना बना लिया और कुछ देर बाद हम सब डाइनिंग टेबल पर खाना खाने लगे।

    मैं बाजार गया और आइसक्रीम लेकर आया और फिर हम सबने उसे मज़े से खाया।आइसक्रीम खाकर में अपने नए कमरे, जहाँ मैं शिफ्ट हुआ था, में आ गया और उनकी चुदाई शुरू होने का इंतज़ार करने लगा।करीब 10:30 बजे मम्मी सब काम निबटा कर कमरे में आई और बेड पर आकर बैठ गई।मेरे नई मम्मी 25 की है. उसका नाम सुरभि है.उसका बदन 34-32-36 साइज का है.ओर पापा 38 साल के हैं।पापा बोले- कैसा लग रहा है यहां?’मम्मी बोली मुँह नीचे किए बोली- ठीक लग रहा है.पापा ने प्यार से मम्मी को किस किया और कहा- तुम भी करो.मम्मी ने दोनों गालों पर किस की.मम्मी थोड़ा शर्माने लगी नखरे करने लगी।

    पापा बोले-तुमने कहा था कि अब की सुहागरात के दिन जो कहोगे वो करूँगी।

    मम्मी बोली- हाँ बाबा ! जो करना हो कर लो, अभी भी कह रही हूँ, बस गन्दी संदी चीजें न कहना!

    पापा बोले- सम्भोग में कुछ भी गन्दा नहीं होता!मम्मी बोली- जो करना है वो अब करो बस!

    मम्मी पापा की बात सुनकर ऐसा लग रहा था जैसे मैं किसी दूसरी दुनिया में पहुँच गया हूँ।

    पापा बोले आज तुम्हारे शरीर के हर अंग से वैसे ही खेलूंगा जैसे मैने अपनी सुहागरात में किया था। क्या तुम अपनी सुहागरात मनाने के लिए तैयार हो?

    मम्मी बोली- मैं तो कब से तैयार हूँ, तुम ही नखरे कर रहे हो।इतना कह कर दोनों हँसने लगे।

    पापा मम्मी को चूमने लगे कभी गालों पर, कभी गर्दन पर, कभी होंठों पर उन्होंने मम्मी के ऊपर जैसे चुम्बनों की बारिश कर दी, पापा का एक हाथ (पेटीकोट के ऊपर से ही) मम्मी के नितम्बों पर और दूसरा उनकी मुनिया पर चल रहा था।मम्मी भी मजा लेने लगी तभी शर्माते हुए बोली- धीरे कीजिए न प्लीज़ मुझे दर्द हो रहा हे!

    पापा धीमी आवाज से बोले- मेरी जान दर्द का अपना अलग ही मजा होता हे सेक्स के अंदरमम्मी अब बिस्तर पर सीधे लेट गई और पापा, मम्मी के थोड़ा ऊपर आ गए, उन्होंने मम्मी का सिर अपने हाथों में पकड़ लिया और अपने होंठ उनके होंठों पर रख दिए।

    मम्मी ने भी पापा को अपनी बाँहों में कस लिया, पापा मम्मी एक दूसरे को बेतहाशा चूमे जा रहे थे। इसी बीच पापा ने अपनी जीभ मम्मी के मुँह में डाल दिया।

    मम्मी ने पापा की जुबान को अपने मुँह से उगल दिया और बोली- यह किस तरह से किस करने लगे हो? पूरी जीभ मेरे मुँह में ही डाल देते हो छीः !

    पापा बोले- क्यों अच्छा नहीं लगता क्या?

    मम्मी बोली- गन्दा लगता है। पापा बोले- तुम भी न, बिल्कुल नासमझ की तरह बात कर रही हो।

    प्रेम करने में कुछ भी गलत या गन्दा नहीं होता, केवल जो भी करो अपने साथी की ख़ुशी के लिए करो, उसे प्यार और सिर्फ प्यार करो और अपने साथी को पूरी तरह संतुष्ट कर के उसे खुश कर दो।

    पापा बोले- मैं तुम्हें चूम रहा हूँ और तुम्हें अच्छा लग रहा है तो इसमें गन्दा क्या है?

    पापा की बात मम्मी के समझ में आ गई और वो दोनों पुनः अपनी काम क्रीड़ा में लग गए।अब कभी पापा अपनी जीभ मम्मी के मुँह में डाल देते तो कभी मम्मी अपनी जीभ पापा के मुँह में डाल देती, वो दोनों उसे कुल्फी की तरह चूस रहे थे। शायद पापा ने यह चुम्बन अभी जल्दी इज़ाद किया था इसलिए मम्मी इस तरह से किश करने में थोड़ा झिझक रही थी और शरमा भी रही थी पर थोड़ी देर बाद उनकी झिझक एकदम गायब हो गई।पापा कभी मम्मी के गालो को चूमते, तो कभी गर्दन को।मम्मी भी अब पीछे नहीं होना चाहती थी, उनके हाथ पापा के पीठ पर लगातार चल रहे थे।

    मम्मी के होंठ आज लगातार खूब मेहनत कर रहे थे, कभी वे पापा के गालों को चूमते और चूसते, तो कभी कंधों और गर्दन के बीच उतर आते, कभी कानों के पीछे, तो कभी ठुड्डी के नीचे।मम्मी की कामोत्तेजना कितनी प्रखर होती जा रही थी।पापा के होंठ,

    मम्मी के होंठों की तुलना में कुछ मोठे और कठोर थे इसलिए जब पापा के होंठ, मम्मी के कोमल गुलाबी होंठों को चूम रहे थे तो मुझे ऐसा लग रहता था मानो मम्मी के नाज़ुक नरम होंठ पापा के भारी कठोर होंठो के भार के नीचे दबे हुए हो और पापा के होंठो के नीचे पिस से रहे हों।मम्मी के होंठ गुलाबी तो हैं ही पर आज पापा के बेतहाशा चूमने के कारण वो और भी लाल प्रतीत हो रहे थे जैसे गुलाब की कोमल लाल पंखुड़ियाँ हों और उन पर बिखरी मुँह की लार को देख कर ऐसा लग रहा था कि वो गुलाब के फूलों से बना शरबत हो जिसे पापा स्वाद ले ले कर पी रहे हों।मुझे तो ऐसा लगा कि कहीं मम्मी के होंठ छिल न जाये।सारे कमरे में पुच पुच की आवाज़ गूंज रही थी और रात का सन्नाटा होने के कारण आवाजें और भी साफ़ सुनाई पड़ रही थी।जहाँ पापा मम्मी के गुलाबी अधरों का रस पान कर रहे थे,

    वहीं मम्मी पापा के मुँह का रस पी रही थी और रोमाँच के कारण उनके मुँह से केवल उम्म… उम्ह… उम्ह की सिसकारी रूपी आवाजें निकल रही थी।अब पापा के हाथ मम्मी के ब्लाउज पर आ गए,

    पापा अपने हाथ मम्मी के उरोजों पर ब्लाउज के ऊपर से ही फिराने लगे।मैंने देखा कि पापा मम्मी के होंठ आपस में अब भी लिपटे हुए थे और उन दोनों के हाथ एक दूसरे के शरीर पर कसे पड़े थे। इस तरह चुम्मा चाटी करते हुए करीब 20 मिनट बीत चुके थे, अब पापा का हाथ मम्मी की पीठ से खिसक कर उनके ब्लाउज पर आ गया और वो शायद मम्मी के ब्लाउज के बटन खोलने लगे।मुझे लगा पापा जल्दी से ही मम्मी का ब्लाउज़ उतार कर उनके जिस्म से उसे अलग कर देंगे पर शायद मम्मी के ब्लाउज के बटन बहुत टाइट थे इसलिए पापा उन्हें खोल नहीं पाये और झल्ला गए, पापा बोले- अरे यार सुरभि, यह कैसा ब्लाउज पहन लिया? कितने टाइट है इसके बटन।

    मम्मी बोली- अरे बाबा, रुको मैं खोलती हूँ। तुमसे तो ब्लाउज के बटन खुलते ही नहीं ।

    मम्मी पापा को छेड़ते हुए बोली- जब तुमसे एक ब्लाउज का बटन नहीं खुला तो तुम मेरी मुनिया पर लगे दो पल्ले वाले दरवाजे को कैसे खोल पाओगे?

    पापा हँस कर बोले- सुरभि, अभी पता चल जायेगा कि तुम्हारी मुनिया के दरवाजे खुलते हैं या टूटते हैं।पापा के इतना कहते ही दोनों खिलखिला कर हंस पड़े।मुझे ऐसा लग रहा था कि मानो मम्मी ने इतने स्वतंत्र रूप से यानि इतना खुल कर पहले कभी भी चुदाई नहीं की थी शायद इसीलिए वो बहुत शरमा रही थी,

    शर्म के कारण ही उन्होंने अपना चेहरा अपने हाथों से ढक लिया था।पापा बोले- सुरभि इतना शर्मा क्यों रही तुम! प्रेम तो दुनिया की सबसे अनमोल चीज़ है। प्यार से बढ़ कए दुनिया में कोई चीज़ नहीं है और फिर हम दोनों तो पति पत्नी हैं।

    हम दोनों को तो ये सब करने का अधिकार है।इतना कह कर पापा ने अपने हाथों से मम्मी के हाथों को उनके चेहरे से अलग किया।पापा ने मम्मी को अपनी बाँहों में भर लिया। इस बार तो पापा इतने उतावले हो रहे थे मानो देर होने पर उनकी कोई गाड़ी छूट जायेगी।

    मम्मी ने भी इस बार अपनी बाहें पापा की पीठ पर लपेट ली।मैंने देखा कि अचानक पापा का हाथ मम्मी की पीठ पर आ गया और ब्रा के आखरी सिरे पर उनके हुक को टटोलने लगा।

    पापा ने मम्मी को अपने हाथों का सहारा देकर उठाया ताकि वो मम्मी की ब्रा हुक खोल सके और देखते ही देखते उन्होंने मम्मी की ब्रा को खींच कर उनके खूबसूरत जिस्म से जुदा कर दिया।पापा ने जैसे ही मम्मी की ब्रा को उनके जिस्म से अलग किया, मम्मी के दोनों पयोधर, अमृत कलश यानि चूचियाँ ब्रा की सख्त कैद से आजाद हो गए।पापा के हाथ अब मम्मी के उरोजों पर चल रहे थे,

    वो मम्मी की चूचियों को इस प्रकार से दबा कर छोड़ रहे जैसे कोई डॉक्टर ब्लड प्रेशर नापने की मशीन के पम्प को दबाता और छोड़ता है।पापा अब भी मम्मी की चूचियों से चिपके हुए थे। अचानक पापा ने मम्मी के बाएं स्तन के चुचूक को मुँह में भर लिया और उसे पहले तो चूसा फिर धीरे से दांतों के बीच लेकर दबा दिया।

    मम्मी के मुख से हल्की सी चीख निकल पड़ी।अब पापा का हाथ मम्मी की कमर से होता हुआ उनके पेटीकोट पर जा टिका, पापा ने एक झटके में ही मम्मी के पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया और मम्मी से बोले- सुरभि,

    थोड़ा कमर उठा नामम्मी ने अपने दोनों हाथों को बिस्तर पर मजबूती से टिकाया और धीरे से अपनी कमर उठा दी।मम्मी के कमर उठाते ही पापा ने उनका पेटीकोट झट से नीचे खिसका कर उतार दिया।

    पापा मम्मी को चूमे जा रहे थे तो मम्मी भी चुम्मों का जवाब चुम्मों से दे रही थी।वो दोनों इतने उत्तेजित हो चुके थे, इसका पता इस चीज से ही लग रहा था कि पापा मम्मी, दोनों की सांसें खूब तेज़ चल रही थी और वो दोनों हांफ से रहे थे, उनके सांसों की गूंज बगल के कमरे में भी साफ़ सुनी जा सकती थी जहाँ मैं बैठकर मज़े से उनकी चुदाई देख रहा था।उन दोनों के होंठ आपस में लिपटे हुए थे और हाथ एक दूसरे की पीठ पर चल रहे थे, बीच बीच में आनन्द के कारण मम्मी अपने नाखूनों को पापा की पीठ पर चुभा देती,

    जिससे पापा के मुंह से सिसकारी सी निकल जाती थी।पापा भी कभी मम्मी के एक उरोज को मुँह में भर लेते तो कभी दूसरे को धीरे से मसलने लगते, तो कभी मुँह में भरकर चूसने लग जाते थे।

    मुझे यह सब देखकर बहुत आनन्द आ रहा था।मैंने अब देखा कि पापा अब नीचे की ओर सरकने लगे हैं, उन्होंने पहले मम्मी की नाभि को चूमा और फिर पेड़ू को!मम्मी को देख कर लगा कि जैसे उनके आनन्द की कोई सीमा ही ना रही हो,

    मम्मी की जांघें जो अब तक आपस में जुड़ी हुई थी, वो अब अपने आप ही खुलने लगी।पापा ने अब पैंटी के ऊपर से ही मम्मी मुनिया को चूम लिया मुनिया को चूमते ऐसा लगा कि मानो मम्मी के सारे शरीर में करंट सा दौड़ गया।पापा ने अब अपने हाथ मम्मी की कमर पर बढ़ा कर मम्मी की पैंटी को इतनी जल्दी उतार दिया मानो कि कोई व्यक्ति केले से उसके छिलके को उतार देता है।मैं झूठ नहीं बोलूँगा,

    इतनी दूर से मम्मी की मुनिया इतनी साफ़ नहीं दिख रही थी पर यह कह सकता हूँ कि सांवले रंग की थी और उस पर हल्के हल्के बाल थे, जिससे वो और काली लग रही थी।पापा ने अब अपना मुंह भग-ओष्ठ पर रख दिए और मम्मी की योनि को चाटने लगे।

    मम्मी अब तक बहुत उत्तेजित हो गई थी और अब उनसे ये उत्तेजना बर्दाश्त नहीं हो रही थी, शायद इसीलिए जब पापा मम्मी की योनि में अपनी जुबान इधर उधर चला रहे थे तब मम्मी ने कहा अब करो भी!

    तुम बहुत परेशांन कर ते हो।

    मम्मी बोली- मुझे तो पूरा नंगा कर दिया है और खुद जनाब जांघिया बनियान पहने हुए है।

    मम्मी का इतना कहना था कि पापा उठ खड़े हुए और उन्होंने अपनी जांघिया और बनियान उतार दी। पापा जहाँ बिस्तर के बगल में एकदम मादर जात (बिल्कुल निर्वस्त्र) हो खड़े थे, वहीं मम्मी भी एकदम नग्न होकर बिस्तर पर पड़ी थी, दोनों एक दूसरे के नंगे शरीर को अपलक टकटकी बांधे देख रहे थे और देख देख के मुस्कुरा रहे थे।पापा का साढ़े आठ इंच का लिंग एकदम टाइट होकर खड़ा था मानो मम्मी के निर्वस्त्र शरीर को देखकर सलामी दे रहा हो।

    मम्मी बोली – इतना बड़ा ?

    पापा बोले – आज से तुम्हारा हुआ।

    मम्मी बोली- अब करोगे भी?

    पापा बोले- आज हमारी सुहागरात है, सब कुछ करेंगे आज !मम्मी बोली- आओ न अब ! कह तो रही हूँ जो कहोगे, करु गई।

    पापा बोले- देखो जी, वादा कर के मुकर मत जाना।मम्मी बोली- हाँ बाबा, अब आओ भी!

    पापा अब फिर से मम्मी के ऊपर आ गए।पापा के ऊपर आते ही मम्मी ने अपनी बाँहों का फंदा बनाकर पापा के गले में डाल दिया और बाँहों में जकड़ लिया, फिर धीरे से मुस्कुराते हुए बोली- अभी बहुत नाटक दिखा रहे थे, अब तुम्हें मज़ा चखाऊँगी।

    मम्मी ने पापा के होंठों पर एक ज़ोरदार चुम्बन जड़ दिया।पापा ने मम्मी से कहा- सुरभि, थोड़ा रुको!पापा ने अपने हाथ तकिये के नीचे बढ़ाये और मैनफोर्स कंडोम के पैकेट से एक कंडोम निकाला और अब पापा मम्मी के शरीर से नीचे की ओर आए और घुटनों के बल बिस्तर पर खडे होकर कंडोम को बे मन से अपने बेहद टाइट लिंग (लंड) पर चढ़ाने लगे।

    मम्मी बोली- अब यह क्या कर रहे हो?

    पापा बोले- अरे कंडोम लगा रहा हूँ। तुम प्रेग्नेंट न हो इसलिए!

    मम्मी बोली- तुम भी न…अरे मेरे राजा, अब देर न कर, जल्दी से मेरे ऊपर चढ़ जा।इतना बोलकर वो खिलखिला कर हँसने लगी और पापा से बोली- इसी तरह बोलते हैं न देसी ब्लू फ़िल्म में।

    पापा बोले- हाँ बिल्कुल इसी तरह बोलते हैं सुरभि।और दोनों हँसने लगे।

    पापा अब एक बार फिर मम्मी के ऊपर चढ़ गए और उन दोनों के नंगे जिस्म आपस में चिपक गए।पापा ने अपने मुन्ने को मम्मी की लाडो के दरवाजे पर (चीरे) पर रख दिया।मेरे आश्चर्य का तब ठिकाना ना रहा जब मैंने देखा कि पापा अपने मुन्ने को मम्मी की लाडो में डालने के बजाए उसे उस पर रगड़ा जिससे मम्मी के मुँह से एक सिसकी सी निकल गई और उनका पूरा शरीर उत्तेजना और रोमांच के कारण काम्प गया।मुझे नहीं पता कि वो यह सब अपने लिंग को सेट करने के लिए कर रहे थे या फिर एक दूसरे को उत्तेजित करने के लिए, पर मम्मी इससे जरूर उत्तेजित हो रही थी।

    करीब 10-15 सेकंड ऐसा करने के बाद पापा अचानक रुके और अपने एक हाथ से मम्मी की कमर को पकड़ा और दूसरे हाथ से अपने खूटे रूपी मुन्ने को मम्मी की गुफा रूपी लाडो पर लगा दिया,

    मम्मी बोली- धीरे धीरे करना प्लीज तुम्हारा काफी बड़ा है।

    पापा बोले – ठीक हे।फिर पापा ने अपने हाथ मम्मी के कंधों पर टिकाये और फिर एक जोरदार धक्का मारा, प्यारी चूत के अन्दर दरवाजे को तोड़ता हुआ आधा घुस आया।

    मम्मी तिलमिला उठी — आह्ह्ह्ह हाई भग्वान्न्न्नन्न्न्न अआः मेरी माया आःह्ह्ह मर गई बाप रे, कितना दर्द हूऊऊओ रह्ह्ह्हह्ह हे, प्लीज़ निकल्लल्ल्ल्ल लो इसे।

    पापा बोले – मेरी रानी ये दर्द तो थोड़ी देर का हे मेरा थोड़ा बड़ा हे इसलिए और अब तुझे असली मजा आएगा मेरी जान।अब पापा ने। एक जोरदार धक्के के साथ अन्दर घुसा दिया। अब लंड पूरा चूत में घुस गया था ।मानो मम्मी की चूत फट गई हो इस धक्के से।

    दर्द से तिलमिला उठी आह्ह्ह्ह मर गेई बाप रीईईईईई अह्ह्ह्हह्ह ऊऊऊउ ईईईईइ, प्लीज़ निकाल आआआअ दर्द हो रहा हे ।एक बेदर्द की तरह पापा मम्मी की चूत धनाधन बजने लगे और फच फच फच की साउंड के साथ चुदाई कर रहे थे। मम्मी की चीेखे जैसे कमरे की दीवारों इ समा रही हो।मम्मी बोली- तुम्हें तो जहाँ थोड़ी छूट दे दी जाए, बिल्कुल जानवरों की तरह करते हो सेक्स!

    पापा ने मम्मी की बातों पर ध्यान नहीं दिया और उस एक तेज़ धक्के के बाद हल्के हल्के धक्के लगाने लगे और फिर उन्होंने मम्मी को अपनी बाँहों जकड़ लिया और अपने होंठों से मम्मी के होंठों को ढक लिया और फिर उन्हें अपने मुँह में भर कर लगातार चूसने लगे।

    मम्मी के हाथ भी पापा की पीठ पर अब बिना रुके चले जा रहे थे ।अब एक तरफ तो पापा धीरे धीरे धक्के लगा रहे थे और उनके दोनों हाथ अब कभी मम्मी के अमृत कलशों पर, कभी कमर पर, कभी पीठ पर चल रहे थे और उनके होंठ मम्मी के होंठों से चिपके हुए थे,

    कभी पापा के होंठ मम्मीके गालों पर फिसल जाते तो कभी गर्दन पर और कभी गर्दन के पीछे वाले भाग पर, कभी कानों पर आ जाते तो कभी कंधों पर तो कभी मम्मी की छाती पर आकर लगातार अपना काम किये जा रहे थे, जिससे पूरे कमरे में पुच पुच की आवाज आ रही थी।

    मम्मी भी पापा का पूरा साथ दे रही थी।मैंने एक बात ध्यान दी कि जब पापा धक्के लगाते और पापा का लण्ड मम्मी की चूत में प्रवेश करता या घुसता तो हल्की हल्की कुच कुच कुच… की लयबद्ध ध्वनि सुनाई पड़ रही थी। यह आवाज वैसे ही थी जैसे किसी बेहद पतली नाली से धीरे धीरे लेकिन लगातार पानी के रिसने की आवाज निकलती है।शायद मम्मी की मुनिया लगातार रतिरस छोड़ रही थी जिस कारण वो बेहद गीली और चिकनी थी, शायद इसीलिए ही जब पापा अपना मुन्ना मम्मी की मुनिया अंदर बाहर कर रहे थे तो कुच कुच कुच की आवाज निकल रही थी।

    मम्मी की पीठ पर पापा के हाथ एकदम कस से गए और पापा की छाती मम्मी की चूचियों से एकदम चिपक सी गई।शायद वो झड़ने वाले थे, इसलिए अपने आप को झड़ने से रोकने के लिए उन्होंने ऐसा किया था।‘अंकित के पापा धक्के मारते मारते रुक क्यों जाते हो?

    ’ मम्मी बोली- जल्दी से कर वर के छुट्टी करो।पापा बोले- सुहागरात में भी जल्दी मचा रखी है तुमने तो !

    पापा मम्मी एक दूसरे के शरीर से चिपके हुए धीरे धीरे ये बातें कर रहे थे।अब पापा कुछ नीचे सरके, मैं समझ गया कि अब वो क्या करने वाले हैं।

    पापा बोले- सुरभि लाओ जरा तुम्हारे मम्मों से तो खेल लूँ।मम्मी बोली- इतनी देर से तो खेल रहे हो जी, तुम्हारा तो कभी दिल ही नहीं भरता इनसे !

    पापा बोले- ये साले हैं ही इतने खूबसूरत कि जो भी देख ले, इन्हें उनकी नियत ख़राब हो जाये।पापा मम्मी की बात सुनकर ऐश लग रहा था कि दोनों ने पहले भी सेक्स किया है।अब पापा का एक हाथ मम्मी के बाएँ दुग्ध कलश पर चल रहा था और दाहिने को लगातार चूस रहे थे कभी पापा मम्मी की चूचियों को सहलाते तो कभी चूचियों की भूरी भूरी घुंडियों को अपनी उंगलियों से मसल देते जिससे मम्मी की सिसकारी निकल जाती।

    पापा और मम्मी एक दूसरे की आँखों में लगातार टकटकी बांधे देखे जा रहे थे, उनकी आँखें और चेहरे की मुस्कराहट ही उनके प्यार को बयाँ करने को काफी थी।अब वो एक तरफ मम्मी की अमृत कलशों से खेल रहे थे तो दूसरी तरफ वो बहुत ही मज़े से धीरे धीरे धक्के लगा रहे थे और साथ मम्मी के होंठो को हल्के हल्के काटते हुए बेतहाशा चूस रहे थे।धीरे धीरे करने से उन दोनों

    (मम्मी और पापा) को मज़ा भी बहुत आ रहा थामैंने ध्यान दिया कि धक्के मारते समय बीच बीच में मम्मी और पापा दोनों के ही मुंह से अब सिसकारियाँ कुछ ज्यादा ही निकल रही थी।शायद जब पापा का लिंग मम्मी की मुनिया की दीवार से रगड़ खाता तो उन दोनों की सिसकारी निकल जाती थी।यह सारे दृश्य देख कर मेरी तो हालत ही ख़राब हो गई।अब मम्मी ने अपने पैर थोड़े ऊपर उठा कर पापा की कमर से लपेट लिए, ऐसा करने से मम्मी के नितम्ब थोड़े ऊपर हो गए, अब पापा ने मम्मी के गोल और कसे हुए नितम्बों पर भी हाथ फिराना चालू कर दिया।

    मुझे लगा जैसे कुछ पानी सा मम्मी की लाडो से निकल रहा है, बहुत ज्यादा नहीं, पर हाँ उनकी लाडो के दोनों मखमली गद्दीदार कपाट कुछ भीगे से लग रहे थे जो इस बात की पुष्टि कर रहे थे कि उनकी लाडो लागातार पानी छोड़ रही है और उन्हें उसके निकलने से शायद कुछ गुदगुदी सी होने लगी थी।अब पापा ने धक्कों की गति कुछ बढ़ा दी थी, उनका हाथ मम्मी के अमृत कलशों को मसलने में लगा पड़ा था, कभी वो उसके शिखरोंको मसलते, क7pभी उन्हें मुँह में लेकर चूम लेते कभी दांतों से दबा देते।मम्मी का तो जैसे रोम रोम पुलकित होने लगा था, उनका पूरा शरीर रोमांचित हो रहा था।मुझे लगा कि जैसे मम्मी सारी देह तरंगित सी होने लगी है और और उन्होंने अपनी आँखें मूँद सी ली,

    उनके मुँह से बस हल्की हल्की सिसकारियाँ ही निकल रही थी- आह…. आह… आह…आह…मम्मी ने अपने पैर थोड़े से और खोल दिए और अपने पैरों को हवा में ही चौड़ा कर दिया ताकि पापा को किसी प्रकार की कोई परेशानी ना हो।

    ओह…मम्मी के ऐसा करने से मम्मी के पांवों में पहनी हुई निगोड़ी पायल रुनझुन रुनझुन की मंद मंद ध्वनि सी करने लगी, लयबद्ध धक्कों के साथ पायल और चूड़ियों की झंकार सुनकर पापा और भी रोमांचित से होने लगे और मम्मी जोर जोर से चूमने लगे।दो ध्वनि और भी आ रही थी एक थी चुर चुर चुर चुर… जो तेज़ धक्के लगाने के कारण पुराने बेड के हिलने से आ रही थी और दूसरी थी- थप थप थप थप…जो पापा के अखरोटों और मम्मी की लाडो के बार बार टकराव से उत्पन हो रही थी।क्योंकि अब पापा ने धक्को की गति बढ़ा दी थी इसलिए मम्मी की लाडो से आने वाली कुच कुच कुच… की आवाज जैसे कहीं गायब सी हो गई थी या इन सारी आवाजो में कहीं गुम सी हो गई थी।मम्मी का रोमांच और स्पंदन अब अपने चरम पर था, मम्मी की साँसें अब उखड़ने लगी थी और पूरी देह अकड़ने लगी थी। मम्मी ने पापा के होंठों को अपने मुँह में कस लिया और अपनी बाहों को उनकी कमर पर जोर से कस लिया और मम्मी to की प्रेम रस में डूबी सीत्कार निकालने लगी थी।मुझे लगा कि आज मम्मी तो जैसे लाज के सारे बंधन ही तोड़ देंगी।पापा का भी यही हाल था, वो अब जल्दी जल्दी धक्के लगाने लगे थे, उनकी साँसें और दिल की धड़कन भी बहुत तेज़ होने लगी थी और चहरे का रंग लाल सा हो चुका था।वो भी अब मम्मी को जोर जोर से चूमे जा रहे थे

    मम्मी के उरोजों को मसले जा रहे थे- मेरी जान आह… या…मम्मी के मुख से अचानक कुछ सीत्कार सी निकली और मम्मी बोली- मैं बस होने ही वाली हूँ!

    मम्मी के पूरे शरीर में सिहरन सी उत्पन हो गई और वो तो जैसे छटपटाने सी लगी थी।अचानक मम्मी ने पापा के होंठों को इतना जोर से चूसा कि मुझे लगा कि उनमें तो खून ही निकल आएगा, मpम्मी ने उन्हें इतना जोर से अपनी बाहों में भींचा कि उनकी कलाइयों में पहनी चूड़ियाँ ही चटक गई और मुझे लगा कि मेरी मम्मी आनन्द के परम शिखर पर पहुँच गई हैं, वो कितनी देर प्रकृति से लड़ती, मम्मी का रति रस अंततः छूट ही गया।

    पापा बोले- मेरा भी छुटने वाला है!पापा ने भी 3-4 अंतिम धक्के लगाए और फिर मम्मी को कस कर अपनी बाहों में भर कर मम्मी के ऊपर ही लेट गए।

    Bhejjमम्मी की लाडो ने पापा के मुन्ने को कस कर अंदर भींच लिया। पापा और मम्मी बिना कुछ कहे कोई 5-7 मिनट इसी तरह पड़े रहे।सुहागरात के इस साक्ष्य को उन्होंने अपने होंठों से लगा कर चूम लिया- सुरभि, तुम्हारा बहुत बहुत शुक्रिया!मम्मी हंस कर बोली- सुहागरात को पूरी तरह फील कर रहे हो

    पापा बोले- क्यों न करूँ जी! रोज़ रोज़ थोड़ी न मनाई जाती है सुहागरात! मेरी जान! आज तुमने मुझे खुश कर दिया !इतना कह कर उन्होंने अपनी बाहें मम्मी के गले में डाल दी।उन्होंने मम्मी के सर को थोड़ा सा नीचे करने की कोशिश की तो मम्मी ने अपना सर थोड़ा सा नीचे कर दिया। पापा ने फिर मम्मी होंठों को एक बार फिर से चूम लिया।मम्मी खुले बाल उनके चहरे पर आ गिरे।

    पापा ने मम्मी के एक उरोज को अपने मुँह में भर लिया और चूसने लगे।मम्मी ने पापा का मुख अपनी चूचियों से हटाया और बोली- ऐ जी हटो भी अब! बहुत मस्ती कर