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  • शादी से पहले मेरी चूत चुदाई की कहानी

    मेरी चूत चुदाई की कहानी में पढ़ें कि मैंने कैसे पहली बार अपनी चूत और गांड चुदवाई? शादी से पहले मेरा एक बॉयफ्रेंड था कॉलेज का! मेरा सेक्स करने का बहुत मन करता था.

    मेरा नाम रश्मि है। मैं दिल्ली में रहती हूं 28 साल की औरत हूं मेरी शादी हो चुकी है।

    यह कहानी मेरी पहली चूत चुदाई की कहानी है अंतर्वासना पर जब मेरी शादी नहीं हुई थी मेरा एक बॉयफ्रेंड था कॉलेज के टाइम का मैं कैसे उसे अपनी चूत और गांड चुदवाती थी आज मैं वही आपको बताऊंगी मेरा बॉयफ्रेंड मेरी सारी ख्वाहिश पूरी करता था तो मैं भी उस पर जान छिड़कती थी।

    तब मेरी उम्र 21 साल के आसपास थी मेरा सेक्स करने का बहुत मन करता था मैं वासना से एकदम भरी हुई रहती थी उसने मुझे पटा लिया.
    मुझे खुद भी पता नहीं चला कि कब मैं उस उससे पट गई और उसकी बातों में आ गई क्योंकि वह बातें इतनी अच्छी-अच्छी करता था मेरी उससे फोन पर घंटों बात होती थी.

    एक बार उसने मुझे होटल में मिलने के लिए कहा. शुरू में मुझे बहुत डर लग रहा था तो मैंने मना कर दिया. लेकिन बाद में फिर हम उसकी ज्यादा जिद करने पर मैं मान गई और हम दोनों साथ में एक होटल में गए.

    वहां रूम में जाकर वह मेरे होठों पर चिपक गया, मुझे किस करने लगा. मैं तो गर्म होने लगी थी मेरी कामवासना धीरे धीरे जागने लगी थी.

    वो स्कर्ट के ऊपर से ही मेरी चूत पर अपना हाथ फिरा रहा था और मेरे होंठों पर किस कर रहा था. वो मेरी शर्ट के ऊपर से ही मेरे उरोज दबा रहा था.

    अब तो मुझे ऐसा लग रहा था कि मेरा यार मुझे जी भर कर चोदे. मैं हर तरह से तैयार थी उससे चुदवाने के लिए!

    फिर धीरे-धीरे उसने मेरी स्कर्ट उतार दी, मैं सिर्फ उसके सामने पेंटी में. थी मेरी नंगी जांगे उसके सामने थी वह मेरी जांघों पर किस करने लगा और पैंटी के ऊपर से ही मेरी चूत पर अपनी जीभ फिराने लगा.

    मैंने मजे में अपनी टांगें ऊपर उठा ली और उसके बालों पर हाथ फिराने लगी. मेरी उम्र ही ऐसी थी कि जब वासना जोर मारने लगती है. मैं भी कामुकता से भरी हुई थी.
    फिर मैंने खुद अपने कमीज़ उतार दी और अपनी ब्रा भी।

    मैंने उसको अपने ऊपर खींचा और उसे अपने बूब्स चूसने का इशारा किया. वह मेरे बूब्स को पागलों की तरह चूसने लगा.
    मुझे बहुत मजा आ रहा था. मेरे मुंह से कामुकता भरी आवाजें निकल रही थी. दो-तीन साल से इतनी बुरी तरह से मेरा चुदने का मन कर रहा था कि मैं ही जानती थी।

    फिर मैंने उसको बेड के दूसरी तरफ धक्का दे दिया और उसके कपड़े उतारने लगी. लेकिन मेरा मन लंड चूसने का कर रहा था इसलिए मैंने थोड़ी सी पैन्ट को नीचे उतारकर और उसके निक्कर में से उसके लंड को निकाल कर सीधा उसका लंड चूसने लगी.
    मेरे यार के मुख से सिसकारियाँ निकल रही थी ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’
    उसके आधे कपड़े निकले हुए थे, पूरे भी अभी नहीं उतरे थे।
    लेकिन मैं पूरी नंगी थी.

    मैंने अपने यार के लंड को चूस चूस कर इतना गीला कर दिया था कि उसने मुझे धक्का देकर बेड पर सीधा लिटा दिया और मेरी टांगों को हल्की सी ऊपर उठाकर मेरी चूत में अपना लंड डाल दिया.

    मैं चीखने लगी और अपने दांतों को उसकी गर्दन पर गड़ाने लगी. मुझे मजा भी आ रहा था और दर्द भी हो रहा था.

    लेकिन थोड़ी देर बाद मुझे दर्द होना बंद हो गया और पूरा मजा आने लगा।
    मैंने उसकी कमर पर अपने नाखून गड़ा दिए. वह भी मेरी कोली भरकर मुझे जमकर चोद रहा था और इसी पोज में मेरी चूत ने अपना पानी छोड़ दिया.

    मैं बहुत चिल्लाई जब मुझे मजा आया. मैंने अपने आप को उससे चिपका लिया और उसकी बांहों में सिमट कर रह गई. लेकिन वह मुझे ऐसे ही चोदता रहा.

    मेरे झड़ने के बाद मैंने उसको काफी मना किया कि अब मेरी चूत की चुदाई ना करे … लेकिन वह नहीं माना.
    मैंने अपने हाथों से उसको हटाना चाहा लेकिन वह नहीं हटा.

    तो मैं निढाल होकर बेड पर लेट गई और अपने बदन को टाइट करके उसके धक्कों का सामना करने लगी.

    10 मिनट के बाद मुझे फिर से मजा आने लगा और फिर से मैं उसका साथ देने लगी. उसने मुझे अब की बार घोड़ी बना लिया, पीछे से मेरी चूत में अपना लंड डाल दिया और मेरे बाल पकड़कर मुझे खूब चोदा.
    इस अवस्था में मुझे बहुत दर्द हुआ. मैं बहुत चिल्लाई भी लेकिन वह नहीं हटा और उसे मजा आने लगा तो उसने कहा- बेबी बताओ अपना वीर्य कहां निकालूं?
    मैंने उससे कहा- अंदर ही निकाल दो, मुझे आपके बच्चे की मां बनना है.

    और उसने ऐसे घोड़ी बने बने ही मेरी चूत में अपना सारा वीर्य छोड़ दिया. गर्म गर्म माल मेरे अंदर जाकर लग रहा था, मुझे महसूस हो रहा था उसका वीर्य, उसका पानी!

    फिर वह हट गया. मैं भी थक कर लेट गई, वीर्य मेरी चूत से निकलकर बाहर बहने लगा. हमने कपड़े से अपने अपने यौन अंगों को साफ किया और एक दूसरे से बहुत देर तक ऐसे ही नंगे चिपके रहे.

    फिर कुछ देर बाद उसका लंड फिर से खड़ा हो गया और उसने मुझे अपना लंड चूसने को कहा.

    मैंने भी अपने दोनों हाथों से उसके लंड की मालिश की थूक से! और फिर मैं उसका लंड चूसने लगी.

    वह ऊपर से मेरे सिर को दबाता तो मैं पूरा लंड उसका मुंह में ले लेती. लेकिन सांस ना आने के कारण फिर मैं जल्दी से बाहर निकाल लेती. हम दोनों इतनी गंदी तरह से सेक्स कर रहे थे क्योंकि हम दूसरे को बुरी तरह से चोदना चाहते थे.

    फिर उसने मुझे दोबारा से घोड़ी बना दिया और पीछे से मेरी गांड को चाटने लगा. उसने उंगली से मेरी गांड को धीरे-धीरे गीला कर दिया.
    मेरी गांड इतनी गीली हो गई कि बहुत ज्यादा! मैं जानती थी कि अब मेरी गांड की चुदवाने की बारी है।

    तो उसने अपनी पूरी उंगली गीली करके मेरी गांड में डाल दी. मुझे बहुत दर्द हुआ.
    मैंने चिल्ला कर कहा- नहीं बेबी, वहां नहीं!

    लेकिन वह धीरे-धीरे ऐसे ही करता रहा, कभी जीभ से चाटता, बार-बार कभी उंगली कभी चाटना!
    इस वजह से मुझे बहुत मज़ा आ रहा था.

    फिर उसने मुझे पेट के बल लेटा कर क्रीम अपने लंड पर लगा कर मेरी गांड में लंड डाल दिया. मैं बहुत चिल्लाई लेकिन उसने मेरी नहीं सुनी.

    लेकिन फिर धीरे-धीरे मुझे मजा आने लगा और मैं उसका साथ देने लगी.

    उस दिन पूरे दिन होटल में उसने मुझे बहुत चूसा मेरे कामुक बदन को … उसके दबाने काटने से मेरा सारा बदन लाल हो गया था. और मेरी चूत और मेरी गांड में उसने अपना वीर्य भर दिया था.
    हम दोनों ने खूब मजे किए फिर उस दिन … उसने मुझे बहुत चोदा. मेरी गांड में ही अपना वीर्य निकाल दिया.

    फिर एक बार मैंने उसके ऊपर राइडिंग की. मेरे बूब्स उसके मुंह में और मैंने उसके ऊपर बैठकर बहुत धक्के लगाए. वह मेरे हिप्स पर बहुत तेज मारता भी था बीच-बीच में … जिससे मुझे बहुत मजा आता था.

    उस दिन होटल में हम दोनों ने अपनी पूरी वासना निकाली; वहां पर उस दिन हम चार-पांच बार सेक्स किया और बहुत मजे किए.

    यह थी मेरी शादी से पहले की चुदाई की कहानी मेरे बॉयफ्रेंड के साथ … जिससे मैं चुदवाती थी.

    लेकिन अब तो मेरी शादी हो चुकी है और उसकी भी!
    अब वह मुझ से बात नहीं करता क्योंकि उसकी वाइफ उस पर शक करती है. और हम चाहते भी हैं कि हमारे रास्ते अलग अलग रहें.

    लेकिन मेरा फिर से मन भी करता है कि कोई ऐसा मेरी लाइफ में फिर से आए जो अच्छा हो, सच्चा हो और मेरे लिए हमेशा खड़ा रहे!

  • दोस्त की चूत फाड़ चुदाई

    मेरे बचपन की एक दोस्त मुझे काफी समय बाद मिली. तब तक मैंने किसी लड़की की चूत नहीं चोदी थी. वह इस बात पर मेरा मजाक उड़ाने लगी. तो मैंने क्या किया?

    मैं दिल्ली का रहने वाला एक सामान्य लड़का हूं. मेरी उम्र 23 साल है. मेरा शरीर भी औसत दर्जे का है. न तो मैं ज्यादा मोटा हूं और न ही पतला. मेरी बॉडी एथलेटिक है।

    मेरे पास एक अच्छा लंड है जिसे मैंने कभी नहीं मापा है. जहां तक लंड के साइज की बात है तो यह किसी भी औरत, लड़की या प्यासी चूत को संतुष्ट कर सकता है इसलिए इसके बारे में मुझे चिंता करने की आवश्यकता नहीं हुई.

    यह कहानी मेरे बचपन की दोस्त के बारे में है. उसने मुझे कभी दोस्त नहीं माना. मैं उसको अपनी अच्छी दोस्त मानता रहा लेकिन उसने फिर किसी और से शादी कर ली. समय के साथ मैं उसको भूल भी गया था.

    फिर एक दिन वह मेरे घर आई. शुरू में तो देखने पर मैं उसको पहचान भी नहीं पाया. मैंने मां से पूछा तो वो मां को सारी कहानी बता चुकी थी. उसकी बात सुनने के बाद मुझे उसके बारे में याद आई.

    उसने मुझे बाकी की कहानी सुनाई कि वह अपने पति के खिलाफ एक केस लड़ रही है और अपने पति से वह तलाक चाहती थी। मैंने उसकी पूरी बात सुनी और उसको सहजता से काम लेने की हिदायत दी. मुझसे मिलकर वो थोड़ा शांत हुई.

    एक हफ्ते बाद में मैं उसके घर गया. उससे बात करने पर पता लगा कि उसको कोई जॉब चाहिए थी. उस दिन उससे काफी देर तक बातें होती रहीं. फिर हम लोगों की फोन पर भी बातें होने लगीं.

    मुझे ऐसा लग रहा था कि उसको भी मेरे साथ बातें करना अच्छा लगता था. महीने भर तक हम दोनों फोन पर अक्सर ही बातें करते रहे. फिर ऐसे ही करते करते बात किस करने तक भी पहुंच गयी.

    उस समय तक मैं वर्जिन था. मैंने इससे पहले कभी सेक्स नहीं किया था. मुझे तो यह भी नहीं पता था कि किस कैसे करते हैं. मैंने उसको बताया कि मुझे किस करना भी नहीं आता है.

    वो बोली- इतने भी शरीफ मत बनो.
    मैंने कहा- सच में, मेरी लाइफ में आज तक कोई लड़की नहीं आई है.
    वो बोली- कोई बात नहीं, मैं तुम्हें किस करना सिखा दूंगी.

    एक महीने के बाद मेरे मां और पापा का घूमने का प्रोग्राम बना. मैंने अपनी दोस्त को छोटी सी पार्टी के लिए बुलाया. जब हमारी पार्टी खत्म हो गयी तो वो मेरा मजाक बनाने लगी.

    वो बोली- तुम तो बहुत डरपोक हो. लड़कियों से बात करना तुम्हारे बस की बात नहीं है.
    मुझे उसकी बातों पर गुस्सा आने लगा. मैंने उससे कहा- मेरी शराफत को मेरी मेरी कमजोरी न समझे.
    वो फिर भी मेरा मजाक बनाती रही.

    मेरी मर्दानगी पर बात आई तो मैंने उसको पकड़ कर किस कर दिया. वो हैरानी से मेरी ओर देखने लगी.
    फिर उसने भी मुझे गर्दन से पकड़ लिया और किस करने लगी. हम दोनों एक दूसरे के होंठों को पीने लगे.

    मेरे साथ यह सब पहली बार हो रहा था. इसलिए मैं ज्यादा आगे नहीं बढ़ना चाह रहा था. मैंने उसको किस करके छोड़ दिया. फिर उसके बाद वो कई दिन तक मुझे चिढ़ाती रही.

    उसके द्वारा किया जाने वाला ये उपहास मुझसे सहा न गया. मैंने उसको फिर से घर आने का न्यौता दिया. उस दिन भी इत्तेफाक से मैं घर पर अकेला ही था.

    कुछ देर बातें करने के बाद मैंने उसको किस करना शुरू कर दिया. वो भी शायद मुझसे चाहती थी. इसीलिए मुझे बार बार सेक्स के लिए उकसा रही थी. मैं भी अब उसकी चूत को चोद देना चाहता था.

    मैंने कई मिनट तक उसको किस किया. फिर मैंने उसके कपड़े उतारना शुरू कर दिया. उसके टॉप को उतारा और फिर उसकी पजामी को उतार दिया.

    सफेद रंग की ब्रा और पैंटी में वो काफी सेक्सी लग रही थी. मैंने उसकी ब्रा के ऊपर से उसकी चूचियों को दबा दिया. वो भी यही चाहती थी. जैसे ही मैंने उसकी चूचियां दबाईं तो वो सिसकार उठी. फिर मैंने उसकी चूचियों को जोर से दबा दिया. वो कसमसाने लगी.

    उसके बाद मैंने उसकी ब्रा को खोल दिया. मैंने पहली बार अपने सामने किसी लड़की की चूचियों को नंगी देखा था. मैंने उसकी नर्म मुलायम सी चूचियों को अपने हाथों में भर लिया. उनको प्यार से दबाकर देखने लगा.

    मेरे लंड में जोश भरने लगा. अब मुझे सेक्स चढ़ रहा था. चूंकि मेरा यह पहला सेक्स था तो मुझे ज्यादा कुछ पता नहीं था. उत्तेजना में ज्यादा कुछ सूझ भी नहीं रहा था.

    कुछ देर तक मैं उसकी चूचियों को दबाता रहा और वो मजे से अपने दूधों को मेरे हाथों में दबवाती रही. फिर उसने मेरे सिर को पकड़ कर मेरे होंठों को अपने दूधों पर रखवा दिया. मैं भी उसके दूधों को पीने लगा.

    मुझे चूचियां पीने में बहुत मजा आ रहा था. पोर्न सेक्स वीडियो में देखते हुए मुठ तो कई बार मारी थी लेकिन असल में चूचियों को पीने का मजा कुछ अलग ही होता है.

    मैं उसके निप्पलों को जोर से काटने लगा. उसकी चूचियों को चूस चूस कर मैंने एकदम से कड़क बना दिया. फिर मैंने उसको बेड पर लिटा लिया. उसकी पूरी बॉडी को किस करने लगा.

    अब मेरा मन भी कर रहा था कि वो मेरे लंड को पकड़ ले. तभी उसने खुद ही कह दिया- अपने कपड़े नहीं उतारोगे क्या?
    उसके कहते ही मैंने अपनी टीशर्ट और लोअर उतार दी. उसके सामने अंडरवियर में हो गया.

    फिर मैंने अपना अंडरवियर भी निकाल दिया और उसकी चूचियों पर टूट पड़ा. मुझे बूब्स चूसने में सबसे ज्यादा मजा आ रहा था. फिर वो मेरे होंठों को पीने लगी.

    उसने नीचे से मेरे लंड को पकड़ना चाहा. मैंने उसके हाथ में अपना लंड दे दिया. वो मेरे लंड को सहलाने लगी. उसकी मुठ मारने लगी. मुझे बहुत मजा आ रहा था.

    उसके होंठों को छोड़ कर मैं उसकी चूचियों से होते हुए उसकी नाभि पर किस करते हुए नीचे तक आ गया. फिर मैंने उसकी चूत की ओर रुख किया. उसकी पैंटी को निकाल दिया. उसकी चूत के आसपास के बाल साफ किये हुए थे.

    मैं उसकी चूत को ध्यान से देख रहा था. मैंने चूत अपनी जिन्दगी में अपनी आंखों के सामने पहली बार देखी थी. मैं उसकी चूत के इर्द गिर्द चूमने लगा और वो एकदम से सिहर गयी.

    फिर मैंने उसकी चूत पर मुंह रख दिया. मैं उसकी चूत को चाटने लगा. उसकी चूत पर मुंह लगा कर उसको चूसने लगा. उसकी चूत का रस बहुत ही मादक सा था. चूत की खुशबू पहली बार मैंने ली थी और स्वाद भी बहुत मस्त था.

    कुछ देर तक उसकी चूत को चूसने और चाटने के बाद मैंने उसकी चूत पर लंड को रख दिया. लंड को चूत पर रखने के बाद मैंने उसकी चूत में लंड को धकेला लेकिन लंड फिसल गया.

    मुझे चुदाई का तजुरबा तो था ही नहीं, साथ ही उसकी चूत भी बहुत टाइट थी. मैंने फिर से कोशिश की लेकिन फिर भी लंड नहीं गया. एक दो बार में ही मेरे लंड को सुपारा लाल हो गया. वो भी बार बार उचक रही थी.

    मैंने सोचा कि ऐसे बात नहीं बनेगी. मैंने तेल की शीशी ली और अपने लंड पर बहुत सारा तेल लगा लिया. उसकी चूत के द्वार पर भी काफी सारा तेल मल दिया.

    तेल लगाकर मैंने झटका मारा तो वो बेड पर ऊपर की ओर सरक गयी. मैंने उसको पकड़ लिया. फिर से नीचे लाकर उसकी चूत में फिर से लंड को घुसा दिया. वो चीखने को हुई लेकिन मैंने उसके मुंह को अपने मुंह से बंद कर दिया.

    धीरे धीरे करके मैंने लंड को उसकी चूत में उतार दिया और फिर उसके ऊपर लेट गया. कुछ देर का विराम देने के बाद मैंने फिर ऊपर नीचे होना शुरू किया. उसको भी अच्छा लगने लगा.

    पहले तो मैं धीरे धीरे करता रहा और फिर मैंने स्पीड बढ़ाने की सोची. उसकी चूत में अब मैं तेजी के साथ धक्के लगाने लगा. चुदाई में मुझे गजब का मजा मिल रहा था. उसकी चूत काफी टाइट थी. शायद उसके पति के साथ उसके सेक्स संबंध ज्यादा अच्छे नहीं थे.

    15 मिनट तक मैंने उसकी चूत को इसी पोज में चोदा. फिर मैंने उसको डॉगी स्टाइल में कर लिया. अब वो आराम से लंड को अंदर ले रही थी. मुझे भी चुदाई में पूरा आनंद मिल रहा था. उसके बाद मैंने उसकी चूत में पीछे से धक्के लगाना शुरू कर दिया.

    उसके मुंह को अपने हाथ से बंद कर लिया और तेज तेज उसकी चूत को चोदने लगा. वो गूं गूं की आवाज करने लगी मगर मुझे चुदाई का चस्का ऐसा चढ़ा कि मैंने उसकी चूत फाड़ ही डाली.

    आधे घंटे तक उसकी चूत चोदने के बाद मेरा पूरा बदन पसीने में भीग गया था और उसका हाल तो मुझसे भी बुरा था. उसके मुंह से अब तेज तेज आवाजें आ रही थीं उम्म्ह… अहह… हय… याह… जिनमें दर्द और आनंद का मिला जुला सा रूप था.

    चूंकि मेरा घर बाहरी एरिया में था इसलिए किसी को कुछ पता चलने का भी डर नहीं था. मैंने जमकर उसकी चूत चोदी. इतनी जबरदस्त चुदाई करने के बाद भी जब मैं नहीं झड़ा तो मैंने उसको सीधी कर लिया. उसकी टांगों को अपने कंधे पर रख लिया और उसकी चूत में फिर से लंड दे दिया.

    अगले दस मिनट तक फिर मैंने उसकी चूत को रगड़ा. वो बुरी तरह से थकी हुई लग रही थी. मुझे नहीं पता था कि औरत कितनी देर में झड़ती है. मगर मुझे लग रहा था कि इस दौरान वो 3-4 बार तो झड़ ही गई होगी.

    फिर मैं भी झड़ने के करीब पहुंच गया. मैंने उसकी चूत में वीर्य छोड़ दिया. उसकी चूत में वीर्य छोड़ने के बाद मैं हांफता हुआ उसके ऊपर गिर गया. वो जैसे बेसुध हो गयी थी.

    उसके बाद वो उठी और अपने कपड़े पहनने लगी. उससे सही से चला भी नहीं जा रहा था. फिर मैं उसको उसके घर तक छोड़ कर आया. इस तरह से मुझे बाद में पता चला कि मेरी टाइमिंग डेढ़ घंटे के करीब है.

    उस दिन मैंने उसकी चुदाई की ऑडियो रिकॉर्डिंग भी कर ली थी. वो रिकॉर्डिं करीब 45 मिनट की थी. अगर कोई लड़की उसको सुन ले तो उसकी चूत से पानी निकल जाये.

    पहली चुदाई के बाद उस दिन मुझे भी थकान हो रही थी तो मैं घर वापस आकर सो गया. उसके बाद मैंने अपनी बचपन की दोस्त की चूत कई बार चोदी. उसको होटल में ले जाकर भी कई बार चोदा.

    अब वो मेरे लंड से चुदने की आदी हो गयी थी. उसके साथ मैंने और क्या क्या किया वो सब मैं आप लोगों को फिर कभी बताऊंगा. फिलहाल की इस कहानी में इतना ही.

  • पत्नी की सहमति से विधवा सास के साथ संभोग- 2

    इस सेक्स कहानी के पहले भाग
    कुंवारी पत्नी के साथ सुहागरात
    में आपने पढ़ा था कि तपोश को अपने से बड़ी उम्र की महिलाएं अच्छी लगती थीं.
    फिर तपोश ने अपने ऑफिस में काम करने वाली अनुप्रिया से शादी हो गयी.
    तपोश को अपनी सास यानि अनुप्रिया की विधवा माँ अच्छी लगने लगी थीं.

    अब आगे की वाइफ मदर सेक्स कहानी तपोश की जुबानी सुनें.

    हमारी शादी हुए एक महीना हो गया था.

    हम हफ्ते में 2-3 बार मम्मी से मिलने जाते, हमने देखा था कि मम्मी कुछ कमजोर हो गयी थीं.
    शायद वे ठीक से खाना नहीं खा रही थीं.

    अनु के पूछने पर उन्होंने बताया कि अकेली के लिए खाना बनाने का मन नहीं करता.
    हम दोनों अपने घर वापस आ गए.

    मैं- अनु हम मम्मी को अपने घर ले आते हैं, अपना दो बेडरूम का फ्लैट है कोई मुश्किल नहीं होगी. मम्मी का स्कूल हमारे फ्लैट से पास ही है.
    अनु- हां … मैं भी यही कहने वाली थी.

    हम दोनों मम्मी को समझा बुझा कर अपने फ्लैट ले आए.
    अब मम्मी खुश रहने लगीं और उनकी तबियत सुधर गयी.

    जब मैं अपनी पत्नी अनुप्रिया को अनु कहकर आवाज़ लगाता, तो कभी कभी मम्मी कह उठतीं- आती हूँ!
    मम्मी का नाम अनुश्री है.

    मुझे मेरी पत्नी ने बताया उसके पिताजी माँ को अनु कहते थे.
    मैं सोच में पड़ गया.

    उस दिन मेरा जन्म दिन था.
    अनु बोली- हम वोडका पार्टी करेंगे, माँ पिताजी के साथ पीती थीं, उन्हें भी पिलाएंगे. पहले हम सब एक एक पैग पिएंगे, फिर केक काटेंगे.

    तीनों ने एक एक पैग पिया, फिर मैंने केक काटा.
    हमने एक दूसरे को केक खिलाया.

    अनु ने मुझे आलिंगन में लेकर जन्मदिन की बधाई दी और मुझसे बोली- मैं किचन से प्लेट लाती हूँ.

    वह यह कहकर चली गयी.

    मैंने हाथ फैलाकर कहा- आंटी, अपने दोस्त के गले लगकर बधाई नहीं देंगी?

    मम्मी ने मुझे कसकर आलिंगन में लेकर बधाई दी.
    मैंने भी उनको कसकर पकड़ लिया.

    फिर मम्मी के गाल में चुम्मी देकर कहा- थैंक्स.

    हम काफी देर आलिंगन में खड़े रहे थे.

    मम्मी के चूचे मेरी छाती में दबे हुए थे, लंड खड़ा हो रहा था.

    तभी अनु ने किचन से आवाज़ लगायी- खाना अभी खाएंगे या एक और पैग के बाद!

    उसकी आवाज सुनकर हम दोनों आलिंगन से अलग हुए.

    डिनर के बाद बेडरूम में मैंने और अनु ने एक एक पैग और लगाया और फोरप्ले करने लगे.

    अनु- तपोश, मैंने देखा था कि कैसे तुम और माँ काफी देर तक आलिंगन का मजा ले रहे थे. यदि तुम माँ को भी यौन सुख दो तो मुझे बहुत अच्छा लगेगा, तुम्हें बड़ी उम्र की महिला अच्छी लगती हैं. मैंने देखा था कि तुम्हारा लंड खड़ा होने लगा था.

    मम्मी को गले लगाकर मैं जोश में था, ऊपर से शराब का नशा मस्ती दे रहा था.

    मैं- तुम सोचकर बोल रही हो या नशे में?
    अनु- मैं काफी दिनों से यह बात बोलने का मौक़ा देख रही थी. सेक्स में इतना मजा आता है. पिताजी के देहांत के बाद माँ 11 साल बिना सेक्स के रही हैं. उन्होंने किसी पुरुष को अपने पास नहीं आने दिया, पूरा ध्यान मुझे बड़ा करने में दिया. मेरी माँ को बिना सेक्स के कितनी मुश्किल हुई होगी, मैं अब समझ सकती हूँ. माँ का ऑपरेशन हो गया है, वे गर्भवती नहीं हो सकतीं.

    मैं- मैं तैयार हूँ, पर क्या मम्मी राजी होंगी? तुम उनको राजी करो!
    अनु- मैं उनसे बात करूंगी.

    अगली रात अनु माँ के कमरे में सोई.

    सुबह अनु ने बताया- मैंने माँ को कहा कि शादी के बाद मुझे पता चला सेक्स में कितना मजा आता है. आप 11 साल मेरे लिए बिना सेक्स के रही हैं, आपको कितनी मुश्किल हुई, मैं अब समझ सकती हूँ. हम दोनों को जो भी मिला, हमने आपस में बांटा. मैंने देखा है कि आप और तपोश के दूसरे के प्रति आकर्षित हो. मैं तपोश को तुमसे बांटना चाहती हूँ. तपोश राजी हो गया है. माँ ने ना नुकर के बाद हाँ कह दिया है.

    इतना कह कर अनु नहाने चली गयी.

    मम्मी ने मुझे चाय दी और मुस्कुरा कर बोलीं- क्या तुम अभी भी बड़ी उम्र की महिलाओं को निहारने स्टेशन जाते हो?
    मैं समझ गया कि अनु ने यह बात बतायी है.

    मैं- नहीं अब नहीं जाता, मुझे खूबसूरत मधुर स्वभाव की कठिनाइयों के बावजूद खुश रहने वाली दोस्त जो मिल गयी है!

    यह कहकर मैंने मम्मी को अपने आलिंगन में भरा और उनके होंठ चूम लिए.

    वे पहले तो अचकचाईं फिर उन्होंने खुद को ढीला छोड़ दिया.

    अब मैं रोज मम्मी से करीबी बढ़ाने लगा, उनके हाथ पकड़कर उन्हें करीब बिठा कर बात करता, उनके कूल्हों पर हल्की चपत मार देता.

    तीन दिन बाद हमारे हेड ऑफिस में 7 दिन की ट्रैनिंग थी.
    अनु उसमें भाग लेने चली गयी.

    वह जाते समय बोली- आप दोनों एक दूसरे का ख्याल रखना.

    शाम को जब मैं घर आया, मम्मी तैयार होकर मेरा इन्तजार कर रही थीं.

    वे कुछ ज्यादा ही सुन्दर लग रही थीं.
    मुझे चाय देते समय शर्मा भी रही थीं.

    उस दिन वे स्लीवलेस ब्लाउज पहने हुई थीं.

    मैंने देखा मम्मी के हाथ पर जो छोटे छोटे बाल थे, वे गायब थे.
    मैं समझ गया कि मम्मी वैक्सिंग कराकर आयी हैं.

    चाय पीने के बाद मैं बाथरूम में फ्रेश होने गया.

    पहली बार वहां मम्मी की ब्रा टंगी थी.
    मैंने उसको अलट पलट कर देखा कि उनके चूचों का साइज 34 सी था.

    मैं वापस आकर उनसे बात करने लगा.

    मैं- आंटी, आज आप बहुत सुंदर लग रही हो. मेरी दोस्त, आज रात हम दोनों पार्टी करते हैं. मैं वोडका, स्प्राइट, चिकन टिक्का ले आया हूँ.

    मम्मी गिलास प्लेट लेकर आ गईं.

    हम दोनों सोफे पर पास पास पीने बैठे, टेबल पर चखना रखा था.

    मैंने मम्मी की जांघ पर हाथ रखकर कहा- चखने की प्लेट देना.
    मम्मी कसमसाईं, पर मेरे हाथ नहीं हटाए.

    पैग ख़त्म होने के बाद मैंने मम्मी के हाथ पकड़ कर उन्हें खड़ा किया.

    उन्हें आलिंगन में लेकर उनकी गर्दन चूमने लगा, कूल्हों पर हाथ फेरने लगा.
    काफी देर बाद हम दोनों अलग हुए.

    मैं उनके होंठ चूमने लगा, चूचे दबाने लगा.

    मम्मी का संयम का बांध टूट गया, वे भी मेरे होंठ चूमने लगीं.
    हम दोनों की सांसें तेज हो गईं.

    मम्मी अपने बेडरूम की ओर जाने लगीं, मैं उनके पीछे आ गया.

    बेडरूम में हम खड़े खड़े एक दूसरे के होंठ चूमने लगे.

    मम्मी की साड़ी का आंचल गिर गया, उनके ब्लाउज में ढके भरे हुए चूचे मुझे उत्तेजित करने लगे तो मैं उनके दूध दबाने लगा.

    वे होंठ काटने लगीं और सिसकारियां भरने लगीं.
    मैं उनके ब्लाउज के हुक खोलने लगा, मम्मी ने हाथ उठाकर ब्लाउज निकालने में मदद की.

    ब्लाउज हटा तो मैंने देखा कि उनकी कांख (आर्मपिट) पर एक भी बाल नहीं था.
    मैं कांख चूमने लगा और साथ ही साथ उनकी ब्रा को भी उतार दिया.

    भरे गेंहुए चूचे हल्के से लटके थे, पर उन पर भूरे निप्पल तने हुए थे.

    मैं एक चूचे को चूस रहा था और दूसरे को दबा रहा था.

    आंटी- ये ज्यादती है, तुम मेरे सब कपड़े उतार रहे हो, खुद कपड़े पहने हुए हो!

    यह कहकर मम्मी ने मेरा कुर्ता उतार दिया.
    हम दोनों कमर के ऊपर तक नंगे हो गए.

    मम्मी ने मुझे आलिंगन में ले लिया.

    मेरी नंगी छाती पर मम्मी के नंगे चूचे दबने लगे थे. मुझे बड़ा सकून मिल रहा था.

    मैंने मम्मी के साये के नाड़े की गांठ खोल दी तो साया ज़मीन पर गिर गया.
    मम्मी ने मेरा पजामा चड्डी सहित उतार दिया.

    मम्मी पलंग पर चित लेट गईं.
    मैंने उनकी पैंटी उतार दी.

    मैं मम्मी के नंगे भरे चिकने बदन को निहारने लगा.
    मम्मी की मोटी मांसल जांघें, फूली हुई चूत, बड़े बड़े चूचे, थोड़ा मोटा पेट … उस पर गहरी नाभि थी.

    मेरा खड़ा लंड उत्तेजना से झटके ले रहा था.

    मैं मम्मी के पैरों के बीच आ गया.
    मम्मी ने अपने पैर घुटनों से मोड़ लिए और कमर के नीचे टॉवल रख लिया.

    आंटी- अपने लंड पर तेल लगा लो, इतने साल बिना सम्भोग से मेरी चुत टाइट हो गयी है.
    मम्मी वोदका की मस्ती में खुल कर लंड चुत कह रही थीं.

    मुझसे तेल लगाने की कहकर उन्होंने पलंग के पास की टेबल पर रखी तेल की बोतल मुझे दे दी.

    मैंने लंड पर तेल लगाया और धीरे से लंड चूत में डालने लगा.

    उनकी चूत कुंवारी लड़की की तरह टाइट थी.

    मम्मी लंड घुसते ही दर्द से ‘आह आ’ करने लगीं.

    मैंने धीरे धीरे करके पूरा लंड चूत में पेल दिया और मम्मी के ऊपर लेट गया.

    मम्मी का बदन नर्म गद्देदार था.

    कुछ देर बाद मम्मी ने कमर हिलायी.
    मैं हाथों के दम पर उठकर उन्हें जोर जोर से चोदने लगा.

    आंटी- आह थोड़ा धीरे, मैं कहीं भागी नहीं जा रही!

    मैंने चोदने की गति कम कर दी, बीच बीच में रुक कर मैं चूचे दबाता, होंठ चूमता … फिर चोदने लगता.

    मम्मी थोड़ी देर कमर को उछालती रहीं … फिर लेट कर आधी आंखें बंद कर चुदाई का मजा लेने लगीं.

    उनके कंठ से मादक सिसकारी निकलती रही.
    चुदाई के कारण मेरी जांघें उनकी जांघों से टकरा कर थप थप की मधुर आवाज़ निकाल रही थीं.

    आंटी- आह और जोर से तप्पू … मेरा होने वाला है!
    मैंने चुदाई की गति बढ़ा दी.

    मम्मी का बदन कांपने लगा और शरीर धनुष की तरह हो गया.

    उनकी चूत से निकले कामरस से मेरा लंड भीग गया और मम्मी निढाल हो गईं.
    मैंने चुदाई जारी रखी.

    अब मम्मी की गीली चूत से फच फच की आवाज़ आ रही थी.
    थोड़ी देर में वीर्य की पिचकारी चूत में भर गयी.

    मम्मी के चेहरे पर सकून भरी मुस्कुराहट थी.
    मैं मम्मी के ऊपर लेट गया.

    कुछ देर में लंड सिकुड़ कर चूत से निकल गया तो मैं उनके ऊपर से उतर गया.

    मैं- मम्मी कैसा रहा, मैं पास हो गया न?

    मम्मी ने मुस्कुरा कर और शर्माकर अपना चेहरा हाथों से छुपाकर कहा- अव्वल नंबर से पास हुए हो. तुम्हारे लिंग ने मेरी योनि को बहुत सुख दिया है. तुम अकेले में मुझे मम्मी नहीं, अनुश्री कहा करो!

    मैं- अनुश्री तुम लिंग योनि नहीं, लंड चूत कहा करो.

    हमने फ्रेश होकर कपड़े पहनकर डिनर किया. मेरी मम्मी को एक बार और चोदने की इच्छा थी. अनुश्री मम्मी राजी नहीं हो रही थीं.
    उन्होंने कहा- मैं थक गयी हूँ.

    हम दोनों सो गए.

    सुबह मैं जागा, तब मम्मी सो रही थीं.

    मैं चाय बनाकर लाया और अनुश्री मम्मी के होंठ चूमकर उन्हें जगाया.
    चाय पीकर हम दोनों फ्रेश हुए.

    उस दिन हम दोनों ने छुट्टी ले ली.

    अनुश्री आंटी- रात में तुमने मुझे बहुत थका दिया था, अभी तक बदन दुःख रहा है.
    मैं- मालिश कर देता हूँ.

    मम्मी कपड़े उतार कर पलंग पर पेट के बल लेट गईं.
    मैं भी नंगा होकर उनकी पीठ की मालिश के बाद उनके गोल सुडौल कूल्हों की मालिश करने लगा.

    मालिश करते हुए मैं हल्के हाथ से थप्पड़ मारता, तो मम्मी के कूल्हे मस्त हिलते.
    मैं झट से उनके कूल्हों को चूम लेता.

    मैंने मम्मी को चित लिटा दिया, उनकी भरी हुई जांघों की मालिश की, चूत पर हाथ फेरा, फिर छाती और चूचों की मालिश करते समय चूचे दबाने लगा और निप्पल मरोड़ने लगा.
    वे सिसकारी लेने लगीं.

    मैं- एक बार हो जाए?
    आंटी- तुम्हें बहुत कुछ सिखाना है.

    यह कहकर वे बैठ कर पलंग के किनारे पर लेट गईं.
    उनकी कमर तक का शरीर पलंग पर था, पाँव आसमान की तरफ.

    वे बोली- अब मेरे पाँव अपने कंधों पर रखो और शुरू हो जाओ!

    मैं लंड लहराता हुआ आया, उनके पाँव अपने कंधों पर रखे और लंड पेल कर चोदना शुरू कर दिया.
    मम्मी के चूचे मस्त हिल रहे थे.

    मैं बहुत जोश में था, लग रहा था जल्द झड़ जाऊंगा.

    मम्मी ने मुझे रोककर कहा- मेरे होने से पहले झड़ना नहीं. जब लगे कि थोड़ी देर में झड़ने वाले हो, लंड बाहर निकाल लेना लंड की जड़ को उंगलियों से कसकर पकड़ लेना और लम्बी लम्बी सांसें लेना … अपना ध्यान दूसरी तरफ लगाना. फिर जब लगे कि झड़ना टल गया है तो फिर शुरू हो जाना.

    मैंने वैसा ही किया.
    इस विधि से मैं लंबा चला और मम्मी के झड़ने के बाद झड़ा.

    फिर हम दोनों एक साथ नहाये.

    नाश्ते के बाद मैंने कहा- मुझे तुम्हारी गांड मारनी है!

    अनुश्री- चार दिन बाद मारना, गांड टाइट हो गयी है.
    यह कहकर वे दो आस प्लग ले आईं.

    वे बोलीं- पहले दो दिन जितनी देर हो सके छोटा प्लग लगाकर रहूंगी, फिर दो दिन बड़ा वाला. गांड थोड़ी ढीली हो जाएगी. टाइट गांड में लंड डालने से बहुत दर्द होता है, गांड चिर भी सकती है.

    तब मैं समझा कि जब मैंने अपनी पत्नी अनु की गांड मारने की कोशिश की, पहले तो वह मान गयी, पर जब लंड डालने लगा तो उसे बहुत दर्द हुआ और वह रोने लगी थी. उसने मना कर दिया था.

    रात भर हम दोनों नंगे रह कर फोरप्ले करते रहे थे.

    अनुश्री आंटी- मैं घोड़ी बन जाती हूँ.

    बेडरूम में बड़ा आइना लगा ड्रेसिंग टेबल था.
    मम्मी ने डेढ़ फुट ऊंचा मजबूत टेबल आईने के सामने रखा, आईने की तरफ मुँह करकर उन्होंने अपने हाथ टेबल पर रखे और पैर फैलाकर कहा- अब हम अपनी चुदाई का लाइव शो देख पाएंगे.

    मैं पीछे से चूत चोदने लगा और कूल्हों पर थप्पड़ मारने लगा.

    अनुश्री मम्मी के पैंडुलम की तरह डोलते चूचे आइने में दिख रहे थे.

    मम्मी ने अपनी गांड में आस प्लग लगा रखा था.
    जब मुझे लगा मैं थोड़ी देर में झड़ जाऊंगा, मैं लंड बाहर निकाल कर लंड की जड़ को उंगलियों से पकड़ कर लम्बी लम्बी सांस लेने लगा. मेरा झड़ना टल गया, तो मैं फिर से चोदने लगा.

    अनुश्री मम्मी का कामरस बहने लगा.
    वे बोलीं- मेरा हो गया!

    मैंने चुदाई की गति बढ़ा दी तो मैं भी झड़ गया.

    सुबह अनुश्री मम्मी सिर्फ मैक्सी पहनती थीं, उसके अन्दर वे कुछ नहीं पहनती थीं.

    फ्रेश होने के बाद मैंने गुड मॉर्निंग कहकर अनुश्री मम्मी की आंख, होंठ चूमे, फिर पीछे जाकर मैक्सी कमर तक उठाकर उनके कूल्हों को चूमा.

    मैक्सी में हाथ डालकर चूचे दबाये.

    तब से रोज मैं गुड मॉर्निंग ऐसे ही कह रहा हूँ.

    शाम को काम से आने के बाद चाय पीते समय मैंने कहा- मेरी एक फतांसी है, मुझे तुम्हारा मूत पीना है!
    अनुश्री आंटी- सेक्स में कुछ भी कुछ भी अच्छा बुरा नहीं होता, सिर्फ आपसी सहमति चाहिए.

    वे मुझे बाथरूम ले गईं, कपड़े उतार दिए और सिर्फ चश्मा पहने रहने को कहा.

    फिर अनुश्री मम्मी ने दीवार पर अपनी पीठ टिकाकर पाँव फैला दिए.
    मैंने नंगे होकर नीचे स्टूल पर बैठकर मुँह खोला और मम्मी की चूत पर मुँह लगा दिया.
    वे मूतने लगीं और मैं पीने लगा.

    मूत ख़त्म होने पर अनुश्री मम्मी ने स्टूल पर बैठकर कहा- अब मैं पिऊंगी!
    उन्होंने मुँह खोल दिया, मैं मूतने लगा.
    वे पीने लगीं.

    चश्मे के कारण मूत्र हम दोनों की आंखों में नहीं जा रहा था.
    फिर हम साथ में नहाए.

    उस रात हम दोनों ने 69 पोजीशन में एक दूसरे के लंड चूत चूसे.

    अनुश्री मम्मी मेरे लंड का वीर्य पी गईं.
    मैंने चूत से निकला कामरस पी लिया.

    अगली रात अनुश्री मम्मी ने लंड की सवारी की, पर उनके भारी शरीर के कारण वे ज्यादा देर लंड पर नहीं उछल सकीं.

    मैंने बाकी चुदाई मिसनरी आसन में की.
    वे रोज चुदाई के वक्त अपनी गांड में आस प्लग लगाए रहती थीं.

    पांचवी रात गांड मारने की बारी थी.

    एक दूसरे को गर्म करने के बाद अनुश्री मम्मी ने कहा- गांड और लंड पर तेल लगाकर धीरे धीरे से डालना, मुझे थोड़ा दर्द हो सकता है! लंड डालकर रुकना, मैं जब कहूँ, तब चुदाई शुरू करना. सेक्स के बाद लंड साबुन से धो लेना, गांड के कीटाणु से लंड पर इन्फेक्शन हो सकता है.

    अनुश्री मम्मी ने पेट के बल लेटकर अपने कूल्हे हाथ से फैलाए और छेद से दूर कर दिए.

    मैंने उनकी गांड के अन्दर उंगली से तेल लगाया, लंड पर तेल लगाया.
    फिर धीरे से लंड गांड में डालकर उनके ऊपर लेट गया.

    अनुश्री मम्मी दर्द से आ आ कर रही थीं. उन्होंने तकिये को पकड़ रखा था.

    कुछ देर बाद अनुश्री मम्मी बोलीं- अब ठीक है.

    मैं मम्मी की गांड मारने लगा.

    जब लंड पूरा अन्दर जाता, मम्मी की गद्देदार कूल्हों से मेरी कमर टकराती, तो थप थप की मीठी आवाज़ आती.

    मम्मी सिसकारी लेने लगी थीं.
    उनकी गांड मारने में अलग ही आनन्द आया.

    इस तरह से हमने इन सात रातों में तरह तरह के आसनों में सम्भोग किया.

    अनुश्री मम्मी को सेक्स में दस वर्षों का गहरा अनुभव था.
    वाइफ मदर सेक्स करके मैंने बहुत कुछ नया सीखा.

    अगले दिन मेरी पत्नी अनु वापस आने वाली थी.

    अनुश्री आंटी- तपोश, अनु को हमारे यौन क्रीड़ा और सम्भोग के बारे में विस्तार से नहीं बताना, यह रुचिकर नहीं होगा. तुम उससे सिर्फ इतना कह सकते हो कि हम दोनों ने काफी मजे किए. अनु से सेक्स करते समय मेरे साथ किये सेक्स की तुलना नहीं करना, उस समय का आनन्द लेना.

    अनु शाम को आयी, अपनी माँ का खिला चेहरा देख समझ गयी कि उन्हें भरपूर यौन आनन्द मिला.
    वह माँ को गले लगाकर बोली- माँ, तुम्हें वर्षों बाद इतना खुश देख रही हूँ!

    अनु ने मुझे कुछ नहीं पूछा.

    उस रात अनु बहुत जोश में थी, हमने दो बार सम्भोग किया.
    हम करीब रोज रात अलग अलग आसन में सम्भोग करते.

    मैंने अनुश्री मम्मी से सेक्स में बहुत कुछ सीखा था, वह सब काम आया.
    हफ्ते में एक दो रात रात मैं अपनी सास अनुश्री मम्मी के बेडरूम में सोता.

    हम दोनों घमासान सेक्स करते.

    शादी के एक साल बाद अनु ने बेटी को जन्म दिया.

    मैं अनुप्रिया और अनुश्री मम्मी 10 साल से साथ रह रहे हैं.

    मैं दोनों के साथ यौन आनन्द लेता हूँ और उनको यौन आनन्द देता हूँ.

    आपको मेरी यह वाइफ मदर सेक्स कहानी कैसी लगी, प्लीज जरूर बताएं.

  • पत्नी की सहमति से विधवा सास के साथ संभोग- 1

    हसबैंड सेक्स विद वाइफ कहानी में मेरे ऑफिस में एक लड़की आई. वह मुझे अच्छी लगी. हमारी दोस्ती हो गयी. मैं उसके घर गया, उसकी विधवा मम्मी से शादी की बात की.

    फ्रेंड्स, आपको एक नए अनुभव से युक्त सेक्स कहानी का मजा लिख रहा हूँ, इस हसबैंड सेक्स विद वाइफ कहानी का आनन्द लें.

    तपोश की सास अनुश्री उससे कई साल बड़ी थी, उनके पति का देहांत हो गया था.

    सास का व्यहार दोस्ताना था, वह जिंदादिल और हंसमुख थी.
    तपोश की पहले उनसे दोस्ती हुई, फिर शारीरिक संबंध हुआ.

    आइए तपोश की सेक्स कहानी उसकी जुबानी सुनते हैं.

    उस समय मैं 24 उम्र का था.
    मैं एक कंपनी में 3 साल से नौकरी कर रहा था.

    मुझे अपने से बड़ी उम्र की भरे बदन की महिलाएं अच्छी लगती थीं.
    मैं अक्सर प्लेटफॉर्म टिकट लेकर रेलवे प्लेटफॉर्म पर बैठ जाता और बड़ी उम्र की महिलाओं को निहारा करता था.

    मुझे बड़ी उम्र की महिलाओं से बात करना बहुत अच्छा लगता था.

    हमारी कंपनी में 21 उम्र की अनुप्रिया ने ज्वाइन किया, उसकी यह पहली नौकरी थी.
    उसकी ट्रेनिंग की जिम्मेदारी मुझे मिली.

    अनुप्रिया साधरण नैन नक्श की गेहुंए रंगत की हंसमुख लड़की थी, उसका बदन खिलाड़ियों जैसा छरहरा था, फिगर 32बी-28-34 का था.

    वह खुलकर हंसती थी और जब वह हंसती थी, उसकी आंखें भी मुस्कुराती थीं.
    उस समय वह बहुत आकर्षक लगती थी.
    सच में उसमें एक कसक थी.

    अनुप्रिया जल्दी काम सीख रही थी. उससे कोई गलती होने पर जब मैं बताता, तो वह मेरी बात का बुरा नहीं मानती थी बल्कि गलती सुधारने की कोशिश करती थी.
    वह एक अच्छी सहकर्मचारी के रूप में मुझे काफी पसन्द थी.

    अनुप्रिया ने बताया कि वह अपनी माँ के साथ रहती है.
    जब उसकी उम्र 10 साल की थी, उसके पिताजी का देहांत हो गया था.
    उसकी माँ उस समय 30 साल की थीं.
    माँ ने उसकी देखभाल की, पढ़ाया और बढ़ा किया.
    उसकी माँ किसी स्कूल में पढ़ाती हैं.
    माँ उसकी सबसे अच्छी सहेली हैं.

    मैं अपने फ्लैट में अकेला रहता था, मेरे माता पिता पास के शहर में रहते हैं.

    मैं स्कूटर पर ऑफिस आता था.
    अनुप्रिया बस से आती थी.

    एक दिन बस की हड़ताल को गयी.
    मैंने अनुप्रिया से कहा- चलो मैं तुम्हें तुम्हारे घर छोड़ देता हूँ.

    वह स्कूटर पर बैठ गयी.

    अनुप्रिया- सर आज माँ घर पर हैं, यदि आपको जल्दी न हो तो कृपया मेरे घर आएं … हम सब साथ चाय पिएंगे.
    मैं राजी हो गया.

    हम दोनों अनुप्रिया के घर पहुंचे.

    अनुप्रिया की माँ ने दरवाज़ा खोला, तो अनुप्रिया ने मेरा परिचय कराया.
    उसकी माँ का नाम अनुश्री था.

    मैंने ध्यान से देखा तो पाया कि वे अनुप्रिया की माँ नहीं, बल्कि बड़ी बहन जैसी लग रही थीं.

    बल्कि मैं यूं कहूँ कि वे अनुप्रिया के समान दिख रही थीं, तो गलत न होगा.
    उनका बदन भरा हुआ था, न मोटी ना दुबली.

    मैं- आंटी, अनुप्रिया आपके बारे में हरदम बात करती है, कहती है आप उसकी सबसे अच्छी सहेली हैं.

    आंटी- अनुप्रिया मेरी बेटी ही नहीं, सबसे अच्छी सहेली ही है.
    उसी वक्त अनुप्रिया चाय बनाने गयी.

    आंटी- सर, अनुप्रिया आपकी बहुत तारीफ करती है. आप उसे अच्छे से काम सिखा रहे हैं. आपसे मिलकर मुझे बहुत अच्छा लगा.
    यह कहकर वे मुस्कुरा दीं.
    उनकी आंखें भी मुस्कुरा रही थीं.

    मुस्कुराते समय आंटी बहुत खूबसूरत लगीं.
    मैं मन्त्रमुग्थ होकर उन्हें देख रहा था.

    अनुप्रिया भी ऐसे ही हंसती है.

    मैं- आप मुझे मेरे नाम तपोश से बुलाएं प्लीज!

    चाय नाश्ते के समय आंटी के पूछने पर मैंने बताया कि मैं अकेला ही रहता हूँ.

    आंटी- तपोश, आज डिनर हमारे साथ करें, मैं खाना बनाती हूँ.
    यह कहकर वे उठने लगीं.

    मैं- आज मैंने घर पर ऑन लाइन चिकन बिरयानी मंगवाना तय किया था, यहीं मंगवा लेता हूँ.
    दरअसल मुझे आंटी से बात करना बहुत अच्छा लग रहा था.

    आंटी- ठीक है, पर पेमेंट मैं करूंगी!

    आंटी ने मेरे बारे में पूछा.
    मैंने बताया मेरे माता पिता अमुक शहर में रहते हैं, मैं उनकी एक मात्र संतान हूँ.

    आंटी अनुप्रिया के बचपन और उसकी शरारत की बात कर रही थीं और खुलकर हंस रही थीं.
    मैं मुग्ध होकर उनको देख रहा था.

    जब मैं बात कर रहा था, आंटी कभी कभी दीवार पर लगी फोटो को देखतीं, फिर मुझे देखतीं और किसी ख्याल में खो जातीं.

    कुछ देर बाद खाना आ गया.
    आंटी ने खाना ले लिया और अनुप्रिया प्लेट आदि लेने चली गयी.

    मैंने उठकर दीवार पर लगी फोटो को पास से देखा.

    आंटी और एक युवक की फोटो थी.
    युवक कुछ कुछ मेरे जैसा दिखता था.

    अनुप्रिया प्लेट लेकर आयी, उसने बताया वह फ़ोटो उसकी माँ और दिवंगत पिताजी की फोटो है.

    मैं समझ गया कि आंटी मुझे और फोटो की तरह बार बार क्यों देख रही थीं.

    इधर एक बात बताना चाहता हूँ कि जब भी मैं खाना खाता हूँ, खाते समय थोड़ा खाना मेरे कपड़ों पर गिर जाता है.
    उस दिन भी गिरा.

    अनुप्रिया- मेरे पिताजी भी जब खाना खाते थे, उनके कपड़ों पर भी खाना गिर ही जाता था.
    आंटी मुझे देखती हुई थोड़ी देर तक फिर अपने ख्यालों में खो गईं.

    फिर ख्यालों से उभरकर दूसरी बातें करने लगीं.
    मुझे आंटी का साथ अच्छा लगा.

    खाना होने के बाद मैं उनसे मुखातिब हुआ- आंटी, आपसे मिलकर मुझे बहुत अच्छा लगा!
    आंटी- मुझे भी अच्छा लगा, फिर आना!

    दूसरे दिन से ऑफिस के बाद मैं रोज अनुप्रिया को उसके घर के पास छोड़ने लगा.

    एक दिन अनुप्रिया ने बताया कि माँ इस समय घर पर नहीं रहतीं हैं, वे ट्यूशन पढ़ाने जाती हैं.
    यह बता कर वह चुप हो गई.

    उसने मुझे घर आने को नहीं कहा. शायद वह अकेले में मुझे घर पर बुलाने में संकोच कर रही थी.

    दस दिन बाद अनुप्रिया ने बताया- कल माँ का जन्म दिन है. माँ ने आपको आने का निमंत्रण दिया है, लंच साथ करेंगे.

    मैं फूल, गिफ्ट, मिठाई आदि लेकर उनके घर गया.
    आंटी ने दरवाज़ा खोला.

    वे काली शिफॉन की पतली साड़ी पहनी थीं. उनका ब्लाउज दिख रहा था, चूचे काफी बड़े थे.
    बाद में मुझे पता चला कि उनकी ब्रा का साइज 34 सी है.
    हल्के मेकअप में वे क़यामत सी सुंदर लग रही थीं.

    मैंने हैप्पी बर्थ डे कहकर उन्हें फूल और गिफ्ट देते हुए कहा- आप बहुत सुंदर लग रही हो.
    आंटी ने थोड़ा शर्माकर थैंक्स कहा.

    फिर उन्होंने बताया कि अनुप्रिया केक लेने गयी है.

    मुझे बिठाकर जल्दी में मेरे लिए पानी लेने जाने लगीं.
    तभी आंटी का पैर फिसल गया और वे गिर गईं.
    मैंने सहारा देकर उन्हें खड़ा किया.

    वे चल नहीं पा रही थीं.
    मैंने आंटी को गोद में उठाया, उनका भरा बदन मेरी छाती से लगा था, मुझे बहुत अच्छा लग रहा था.

    मेरा लंड खड़ा होने लगा.

    मैं आंटी को बेडरूम ले जाकर पलंग पर लिटाने लगा.

    उस समय मेरे होंठ आंटी के होंठों के काफी पास थे.
    मुझे उनके होंठ चूमने की तीव्र इच्छा हो रही थी.

    इतने में दरवाज़े की घंटी बजी, मैंने आंटी को लिटाकर दरवाज़ा खोला.
    अनुप्रिया अन्दर आयी, तो मैंने बताया कि आंटी के पैर में मोच आ गई है.

    वह जल्दी से भाग कर कमरे में चली गई.
    मैंने सोचा कि अच्छा हुआ अनुप्रिया आ गयी, मैं होंठ चूम लेता तो गड़बड़ हो जाती.

    अनुप्रिया नीली साड़ी और हल्के मेकअप में काफी सुंदर लग रही थी.

    मैंने आंटी के पैर की मोच लगी जगह बर्फ की सिकाई की, बाम लगाया और क्रेप बैंडेज बांध दी.

    अनुप्रिया ने उन्हें दर्द निवारक दवा दी.

    आंटी ने पलंग पर ही केक काटा और खाना खाया.

    उनका दर्द थोड़ा कम हुआ, तो मैं घर चला गया.

    मैं घर आकर सोचने लगा कि क्या मैं अनुप्रिया से शादी करूं!
    मैं समझ नहीं पा रहा था कि मैं अनुप्रिया के मधुर हंसमुख स्वभाव के कारण उससे शादी करने की सोच रहा हूँ या उसकी माँ के आकर्षण में उससे शादी करने की सोच रहा हूँ? या दोनों कारण हैं?

    ऑफिस के बाद स्कूटर पर अनुप्रिया को उसके घर छोड़ते समय हम दोनों कभी कभी किसी रेस्तरां में रुकते, नाश्ता करते और बातें करते.

    अनुप्रिया ने बताया- पिताजी के देहांत के बाद दोस्तों, रिश्तेदारों ने माँ को दूसरी शादी के लिए कहा, माँ राजी नहीं हुईं. उन्हें मुझे पढ़ाना और बड़ा करना था. जो जोड़े हमारे पारिवारिक मित्र थे, अब घर नहीं आते, उनकी पत्नियों को माँ से उनके पति का बात करना / मेलजोल में खतरा लगता था.

    एक महीने बाद मुझे समझ आया कि मैं अनुप्रिया से प्यार करने लगा हूँ.
    मैंने आंटी से बात करना तय किया.

    मैंने आंटी को फ़ोन किया- मैं आपसे चिकन पकाना सीखना चाहता हूँ, इस रविवार आ जाऊं?
    आंटी- बड़ी ख़ुशी से!

    मैं रविवार को चिकन लेकर उनके घर गया.

    मैं- आप मुझे और अनुप्रिया को खाना बनाना सिखाएं और एक बात … क्या आप मुझे भी अपना दोस्त मान सकती हैं?
    आंटी ने मुझसे हैंड शेक करते हुए कहा- आज से तुम मेरे दोस्त हो.

    तभी अनुप्रिया के फ़ोन पर कोई कॉल आ गई.
    तो वह बात करने दूसरे कमरे में चली गयी.

    मैं- आंटी मैं अनुप्रिया से शादी करना चाहता हूँ. आप की अनुमति मिले तो मैं अपने माँ पिताजी को आप दोनों से मिलने बुलाऊंगा.

    आंटी- मैं अनुप्रिया से बात करूंगी. अब तुम दोनों खाना बनाना सीखो.
    आंटी ने अनुप्रिया को बुलाया.

    हम दोनों सीखने लगे.

    दूसरे दिन शाम घर जाते समय.

    अनुप्रिया- तपोश सर, हम लोग गार्डन चलें क्या? कुछ बात करनी है.
    मैंने ओके कह दिया और हम दोनों एक गार्डन में आ गए.

    अनुप्रिया- माँ ने बताया कि आप मुझसे शादी करना चाहते हैं. मैं आपको पसंद करती हूँ, पर शादी नहीं कर सकती. मैं अपनी माँ को अकेला नहीं छोड़ सकती.
    मैं- हम दोनों आंटी का ख्याल रखेंगे, आंटी मेरी दोस्त बन गयी हैं.

    अनुप्रिया शादी के लिए राजी हो गयी.

    मैं- तुम मुझे तपोश कहो, सर नहीं!

    मेरे माँ पिताजी आंटी से मिले, शादी एक महीने बाद तय हुई.

    मैं ऑफिस से घर जाते समय अनुप्रिया को अपने फ्लैट ले जाने लगा.
    वहां हम दोनों बातें करते, आलिंगन और चुंबन करते.

    अनुप्रिया ने कह दिया कि इससे ज्यादा सब शादी के बाद!

    शादी के बाद मैं अनुप्रिया को लेकर बारात के साथ अपने पिताजी के घर गया.
    छोटी सी रिसेप्शन पार्टी हुई.

    सुहागरात को महिलाओं ने अनुप्रिया का सजाकर बेडरूम में बिठाया.

    मैंने बेडरूम में जाकर दरवाज़ा बंद किया, अनुप्रिया का घूँघट उठाया, वह ऐसे शर्मा रही थी … जैसे हम पहली बार मिले हों.

    वह सुंदर लग रही थी.
    मैंने उसकी सुंदरता की तारीफ की, सोने की चेन भेंट में दी.

    अब मैं उसे लिटाकर चूमने लगा, वह भी साथ दे रही थी.

    पता ही नहीं चला कब हमने एक दूसरे के कपड़े उतार दिए.

    मैंने अनुप्रिया के नंगे चूचे पहली बार देखे थे.
    एकदम सुडौल और तने हुए थे.
    भूरे निप्पल उसके चूचों की शोभा बढ़ा रहे थे.

    मैं एक चूचे को दबा रहा था, दूसरे को चूस रहा था.
    अनुप्रिया सिसकारी लेने लगी.

    मैंने पहले कभी सम्भोग नहीं किया था इसलिए मैं बेकरार था.
    मेरा लंड खड़ा हो गया था.

    अनुप्रिया चित लेटी थी, मैं उसकी फैले पैरों के बीच आया.

    अनुप्रिया ने तकिये के नीचे से टर्किस टॉवल निकाल कर अपनी कमर के नीचे रखा.

    अनुप्रिया ने नारियल तेल की बोतल मुझे देकर लंड की तरफ इशारा करके कहा- इस पर लगा लीजिए!

    मैंने लंड पर तेल लगाया और चूत में डालने की कोशिश करने लगा.
    मुझे छेद नहीं मिल रहा था.

    अनुप्रिया ने लंड पकड़ कर चूत के छेद पर रखा कर हुं कहा.
    मैंने एक झटके से लंड पेल दिया.

    अनुप्रिया के मुँह से हल्की चीख निकल गई, उसकी आंखों में आंसू थे … पर चेहरे पर मुस्कान थी.

    मैं कमर हिलाकर उसे चोदने लगा और कुछ ही मिनट बाद झड़ गया.
    मैं शर्माकर उसके ऊपर से उतर गया.

    मेरे लंड पर खून लगा था.
    अनुप्रिया की चूत और कमर के नीचे टॉवल पर भी खून था.

    मैंने पढ़ा था कि पहली बार सम्भोग के समय सील टूटने पर खून निकलता है.

    मैं जल्द झड़ने के कारण उदास होकर बैठा था.

    अनुप्रिया- चलिए बाथरूम में अंग धो लेते हैं, उदास मत होइए … मैंने पढ़ा है कि पहली बार में उत्तेजना से ऐसा हो जाता है.
    हम दोनों ने बाथरूम में जाकर लंड चूत धोये और उसने टॉवल को साबुन से धोकर सूखने टांग दी.

    हम दोनों पानी पीकर पलंग पर नंगे करवट में एक दूसरे की तरफ मुँह करके लेटे थे.

    अनुप्रिया मेरे बालों में हाथ फेरने लगी.

    जल्द ही हम दोनों चूमा-चाटी करने लगे.

    अनुप्रिया चित पैर फैलाकर लेटी, उसने नया टॉवल अपनी कमर के नीचे लगाया.
    मैंने लंड पर तेल लगाया और उसके ऊपर चढ़ गया.

    उसने लंड को छेद पर लगाकर कहा- धीरे धीरे शुरू कीजिये, मैं आपकी ही हूँ और रात भी काफी बाकी है.

    मैं उसे चूमते हुए धीरे धीरे चोदने लगा.
    इस बार मुझे बहुत मजा आ रहा था.

    अनुप्रिया नीचे से अपनी कमर उछाल रही थी.

    कुछ देर बाद मेरी चोदने की गति बढ़ गयी.
    हम दोनों ही कामुक भाव से सिसकारी ले रहे थे.

    करीब 15 मिनट बाद अनुप्रिया मचलने लगी.
    उसकी चूत से कामरस का फ़व्वारा निकला और वह निढाल हो गयी.

    मैंने थोड़ी देर तक उसे और चोदा, फिर झड़ गया तो उसकी चूत अपने वीर्य से भरकर उसके ऊपर ही लेट गया.
    अनुप्रिया ने मुझे आलिंगन में ले लिया.

    कुछ पल बाद लंड सिकुड़ कर चूत से निकल गया.

    हम दोनों बाथरूम से लंड चूत साफ करके वापस बिस्तर पर आ गए और कपड़े पहन कर लेट गए.

    मैं- मुझे बहुत मजा आया!
    अनुप्रिया- मुझे भी.

    मैं- एक बात बताओ … तुमने सेक्स के बारे में किससे सीखा?
    अनुप्रिया- मेरी सबसे अच्छी सहेली मेरी माँ ने मुझे यह सब बताया है!

    सुबह के समय हम दोनों ने फिर से सम्भोग किया.
    इस बार मुझे छेद मिल गया.

    हम दोनों हनीमून पर बाहर गए और रोज अनुप्रिया की माँ से फ़ोन पर बात करते.

    हम हर रात एक दो बार सम्भोग करते, सेक्स वीडियो देखकर हसबैंड सेक्स विद वाइफ में नए नए आसन आजमाते.
    हम दोनों 69 की पोजीशन में लंड चूत चूसते.

    मैं कभी अनुप्रिया को घोड़ी बनाकर पलंग के किनारे खड़ा करता, कभी वह फर्श पर खड़ी होकर सामने झुककर पलंग पर हाथ रखकर घोड़ी बन जाती और मैं फर्श पर खड़ा होकर उसकी कमर पकड़कर पीछे से चूत चोदता, उसके कूल्हे पर चांटे मारता.

    कभी वह मेरे लंड की सवारी करती.
    कभी हम मिसनरी आसन में सम्भोग करते.

    मैं अनुप्रिया को अनु नाम से पुकारने लगा, वह मुझे तुम कहने लगी.

    हम अपने शहर जहां हम नौकरी करते हैं, वापस आ गए.
    आंटी के पास मेरे फ्लैट की चाबी थी उन्होंने हमारा स्वागत किया.

    मैं अनुप्रिया की माँ को आंटी कह कर ही बुलाता रहा.

    आंटी- पगफेरे की रस्म के अनुसार तुम दोनों को मेरे घर आना होगा और रात को वहीं रहना होगा.
    वे चली गईं.

    मेरे दोस्त ने बताया था कि कभी कभी वह और उसकी पत्नी थोड़ी शराब पीते हैं. उसके बाद सेक्स में अलग ही मजा आता है.

    मैं- अनु आज रात हम पार्टी करेंगे, बकार्डी शराब पिएंगे!
    अनु- मैंने कभी नहीं पी, सुना है स्वाद बेकार होता है.

    मैं- बकार्डी, स्प्राइट के साथ पीते समय अच्छी लगती है, बस थोड़ी ही पिएंगे.
    अनु राजी हो गयी.

    उस रात पीने के बाद हमने जमकर मजा किया, अनु ‘लंड चूत चोदो …’ आदि बोलने से कतराती थी, उसने उस रात सब बोला.

    दूसरे दिन हम आंटी के घर गए.

    लंच के बाद मैं बेडरूम में लेटा था.
    बेडरूम का दरवाज़ा खुला था.

    अनु अपनी माँ से ड्राइंगरूम में बात कर रही थी.
    मैं अधखुली आंखों से उनको देख रहा था और उनकी बातें सुन रहा था.

    आंटी- सुहागरात कैसी रही? शर्माओ नहीं … मैं तुम्हारी सहेली हूँ!
    अनु- माँ तुम्हारी बतायी बातें बहुत काम आईं. हम दोनों सेक्स के बारे में अनाड़ी थे.

    उसने विस्तार से सुहागरात में क्या क्या हुआ, माँ को बताया.

    अनु- सेक्स में इतना मजा आता है, मुझे मालूम ही नहीं था.
    वह बताने लगी कि हम दोनों ने किस किस आसनों में सम्भोग किया.

    हमने बकार्डी पीकर कैसे मजा किया, वह भी बताया.

    मैंने देखा सेक्स की बात सुनकर आंटी का चेहरा लाल हो गया था, वे मुट्ठी भींच कर लम्बी लम्बी सांसें ले रही थीं.
    सांसों के साथ उनके चूचे ऊपर नीचे हो रहे थे.

    आंटी- मैं और तेरे पिताजी कभी कभी पीकर मजा करते थे.

    उस रात अनु अपनी माँ के साथ सोई.
    सुबह हम दोनों अपने घर चले गए.

    मेरे करीबी दोस्त ने हमें उसके घर बुलाया.

    डिनर के बाद अनु दोस्त की पत्नी से बात कर रही थी.
    मैं दोस्त के साथ बालकनी में बात कर रहा था.

    दोस्त- तुम अपने से बड़ी उम्र की महिलाओं को पसंद करते हो, उन्हें देखने स्टेशन जाया करते थे. मुझे लगा था तुम कोई बड़ी उम्र की महिला से शादी करोगे, पर भाभी तो तुमसे कम उम्र है.

    यह सब बात होने के बाद हम दोनों पति पत्नी घर आ गए.

    अनु- मैंने सुना तुम्हारा दोस्त कह रहा था कि तुम्हें बड़ी उम्र की महिलाएं पसंद थीं. अब समझी कि तुमने मेरी माँ को क्यों दोस्त बना लिया!
    वह यह सब कहकर हंसने लगी.

    मैं- अनु मैं तुम्हें पसन्द करने लगा था, मैं तुम्हारी माँ से दो बार मिला. उनसे बात की तो देखा कि तुम्हारी माँ इस उम्र में भी इतनी सुंदर और कठिनाइयों के बाद भी खुश रहती हैं. मुझे विश्वास हुआ 17 साल बाद भी तुम इतनी सुंदर और खुशमिजाज रहोगी. इसी लिए मैंने तुमसे शादी करने का फैसला किया. मेरी खुशकिस्मती है कि मुझे तुम जैसी पत्नी और आंटी जैसी दोस्त मिली. मैं आंटी को खुश और सुखी रहने की पूरी कोशिश करूँगा.

    अनु मेरे सीने से लग गई.
    उस वक्त आंटी नहीं थीं तो हम दोनों ने जमकर चुदाई का मजा लिया.

    अब इसमें आंटी का प्रवेश कैसे हुआ वह सब आप सेक्स कहानी के अगले हिस्से में पढ़ सकते हैं.

    आपको मेरी यह हसबैंड सेक्स विद वाइफ कहानी कैसी लगी, बताएं.

  • मौसी के साथ मस्त सेक्स

    चुदाई कहानी में मैं मौसी के घर रहने गया तो वे अकेली थी. मौसी की जवानी ने मेरे लंड को हिला दिया. मैं रात को उनके साथ सोया और उनके गर्म बदन का मजा लिया.

    मेरा नाम जय है. मैं दिल्ली का रहने वाला हूँ.
    मेरी हाइट 5 फुट 2 इंच है और मेरा लंड 5 इंच का है.

    ये मेरी जिंदगी की सच्ची Xxx मास्सी चुदाई कहानी है.

    मैं 12 वीं पास कर चुका हूँ.
    मेरी छुट्टियां चल रही थीं क्योंकि कॉलेज में एडमिशन अभी नहीं हुआ था.

    मैं अपनी मौसी के घर चंडीगढ़ गया हुआ था.

    मेरी मौसी का नाम रूपाली है.
    उनकी उम्र 32 साल है और उनके बूब्स का साइज 28 है.
    वे देखने में एकदम सेक्सी लगती हैं, बिल्कुल टोटल कांटा पीस हैं.

    जैसे ही मैं वहां पहुंचा, मुझे देखकर रूपाली मौसी एकदम से खुश हो गईं.
    उन्होंने मुझे गले से लगा लिया.

    आह … क्या सुकून मिला जब उनकी छातियां मेरी छाती से टच हो रही थीं, बहुत गर्म-गर्म लग रहा था.

    फिर उन्होंने मुझे अन्दर आकर बैठने को कहा.
    मैं अन्दर जाकर सोफे पर बैठ गया.

    मौसी पानी का ग्लास लेकर आईं और किचन में जाने लगीं.

    जब वे मुड़ीं, तो सच बता रहा हूँ कि उनकी गांड क्या मस्त मटक रही थी … कसम से बबाल लग रही थी.

    फिर मैंने मुँह-हाथ धोकर थोड़ा आराम किया, खाना खाया और सो गया.

    रात को जब हम दोनों खाना खाने बैठे तो मौसी मेरे बगल में बैठ गईं.

    मैंने मौका देखकर उनकी जांघ पर हाथ रख दिया.
    वे मुझे ऐसे करते देखकर थोड़ा सिहर गईं, फिर उन्होंने मेरी ओर मुस्कुरा कर देखा और खाना खाने लगीं.

    रात को जब सोने की बारी आई, तो मैंने मौसी से कहा- मैं रात को अकेला नहीं सोता हूँ!
    उन्होंने धीमे से कहा- मेरे पास आकर सो जाना.

    मैं अन्दर से खुश हो गया.
    मैं उनके पास सो गया लेकिन मैंने सिर्फ आंखें बंद की थीं, अन्दर से जाग रहा था.

    मौसी ने श्वेत सलवार कुर्ता पहना हुआ था.
    उस सलवार कुर्ता का कपड़ा बहुत झीना था, उसमें से उनकी ब्लू ब्रा पैंटी साफ दिख रही थी.

    मैं अपनी आधी खुली आंखों से उनकी ब्रा पैंटी को देखने लगा.

    मौसी ने मुझे देखा, उन्हें लगा मैं सो रहा हूँ लेकिन मैंने आंखें हल्की-सी खोल रखी थीं.

    कुछ देर बाद उन्होंने मेरे सामने ही कपड़े बदले.

    आह … साला आज तो किस्मत मेरे लौड़े पर बावली हुई जा रही थी.
    मौसी का क्या कामुक फिगर था.

    वे एकदम सनी लियोनी जैसी पॉर्न एक्ट्रेस लग रही थीं.
    ब्लू पैंटी और ब्रा में उनके बूब्स व गांड कमाल के लग रहे थे.

    मेरा मना Xxx मास्सी चुदाई करने का हो गया.

    फिर उन्होंने नाइट सूट पहना और मेरे पास आकर सो गईं.

    आधी रात को जब मौसी गहरी नींद में थीं, तब उनकी पीठ मेरी तरफ थी.

    मैंने उनकी गांड पर अपने हाथ से हल्का सा टच किया, ये देखने के लिए कि कहीं वे जाग तो नहीं रही हैं.

    उनकी तरफ से कुछ भी प्रतिक्रिया नहीं आई … वे तो गहरी नींद में थीं.

    फिर मैंने धीरे से पूरा हाथ उनकी गांड पर रख दिया और सहलाने लगा.

    कुछ देर बाद मौसी ने करवट बदली, अब उनका मुँह मेरी तरफ था.

    उनकी गर्म सांसें मेरे चेहरे से टकरा रही थीं.
    मुझे बड़ा मजा आ रहा था.

    मेरे अन्दर की हवस जाग गई थी और मेरा लंड पूरा खड़ा होकर कैबरे की जगह कोबरा डांस करने लगा.
    मैं कंट्रोल नहीं कर पा रहा था.

    मैंने धीरे से मौसी के चूचों पर हाथ फेरना शुरू किया.
    उनकी सांसें और गर्म होने लगीं, ऐसा लग रहा था जैसे उन्हें भी धीरे-धीरे सेक्स चढ़ रहा हो.

    मैंने गलती से उनके चूचे थोड़ा जोर से दबा दिए और मौसी की आंखें एकदम खुल गईं.

    वे मुझे नींद में देख रही थीं, मानो कह रही हों- कितना तड़प रहे हो सेक्स के लिए!
    फिर उन्होंने मुझे अपनी तरफ खींच लिया और लिप-टू-लिप किस शुरू हो गया.

    फिर उन्होंने मुझे अपनी तरफ खींच लिया और लिप-टू-लिप किस शुरू हो गया.

    मैं कुछ समझ ही नहीं पा रहा था कि इतनी जल्दी क्या हो रहा है.
    लेकिन किस करते हुए मजा आ रहा था.

    यह मेरी जिंदगी का पहला किस मेरी मौसी के साथ हो रहा था.
    बेहद मजा आ रहा था.

    फिर उन्होंने मेरे लंड पर हाथ फेरना शुरू किया जो पहले से ही कोबरा डांस कर रहा था.

    अब मैं भी उनके बूब्स दबाने लगा था.
    उनके बूब्स इतने बड़े थे कि एक हाथ से दबाए नहीं दब रहे थे.

    फिर मैं उनके एक दूध को पीने लगा.
    वे भी अपनी छाती आगे को करके मुझे चूची चुसवाने लगी थीं.

    उनकी चूची पीने में बेहद सुकून मिल रहा था. उनके बूब्स एकदम गर्म थे.
    कपड़ों के ऊपर से ही चूसने में ऐसा लग रहा था मानो जन्नत नसीब हो गई हो.

    मैं जोर-जोर से चूसे जा रहा था.

    मौसी बोलीं- बस पिएगा ही या और कुछ भी करेगा?
    अब मैंने उनकी चूत में एक साथ अपनी दो उंगलियां डाल दीं.

    मौसी की चूत एकदम लावा की तरह गर्म थी, थोड़ा थोड़ा पानी भी निकल रहा था.
    उनकी चुत में उंगली करने में मुझे बेहद मजा आ रहा था.

    नम चुत में उंगली करने से पुच-पुच की आवाज़ आ रही थी.
    मौसी भी मुझे किस कर रही थीं.

    कुछ मिनट तक ऐसा ही चलता रहा, फिर मौसी झड़ गईं.

    उनकी सांसें और तेज़ हो गईं.

    मैं उनकी गर्दन पर किस कर रहा था.

    फिर मैंने मौसी के सूट को उतार दिया और उन्हें पूरी नंगी कर दिया.

    फिर न जाने क्या मन हुआ कि मैं उठा और लाइट जलाकर देखने लगा.

    आह नंगी मौसी कसम से बवाल लग रही थीं.

    मैं भी नंगा हो गया और उनकी दोनों टांगों के बीच जाकर चूत चाटने लगा.
    मौसी ने एकदम से मेरा सिर पकड़ा और अपनी चुत की तरफ खींचने लगीं.

    मैं उनकी चूत को जीभ से चाटने लगा.
    मस्त नमकीन खट्टा सा स्वाद था.
    उनकी गुलाबी चूत एकदम रसीली हो गई थी.

    मौसी बोलीं- जल्दी से लंड डालो मेरी जान, मैं तड़प रही हूँ. मुझे और मत तड़पाओ!
    ये सुनकर मुझे और जोश चढ़ गया.

    मैंने झट से अपना लंड उनकी गुलाबी चूत पर रखा और ठेल दिया.
    मेरा लंड चूत को चीरता हुआ अन्दर गहराई में चला गया.

    मौसी बोलीं- थोड़ा धीरे डाल … आह दर्द हो रहा है!
    मैंने कहा- ठीक है!

    मैं थोड़ा रुक गया.

    मौसी ने कहा- तुझे इन सब चीजों का बहुत पता है … कितनी लड़कियां चोद चुका है?
    उनके मुँह से रंडी जैसी भाषा सुनकर मैं हैरान हो गया.

    ये क्या कह रही थीं?
    लेकिन थोड़ा सा बुरा भी लगा, क्योंकि मेरा अभी कोई बंदी सैट ही नहीं हुई थी.

    ये मेरी जिंदगी का पहला सेक्स था.
    मैंने मौसी से कहा- ये मेरा पहला सेक्स है!

    मौसी बोलीं- इतना अच्छा कैसे कर लेता है?
    मैंने कहा- सब जॉनी भैया के वीडियो से सीखा है!

    मौसी जॉनी सिन्स का नाम सुनकर थोड़ा मुस्कुरा दीं.

    फिर मैं धीरे-धीरे लंड अन्दर-बाहर करने लगा.
    अब हमें दोनों को मजा आने लगा.

    कुछ मिनट बाद मैंने लंड उनकी चूत से बाहर निकाला.

    मौसी बोलीं- क्या हुआ?
    मैंने कहा- मेरा लंड कभी किसी ने चूसा नहीं है!

    मौसी थोड़ा मुस्कुराईं और मेरा लंड हाथ में लेकर अपने होंठों पर लगाकर सूंघने लगीं.
    उनके नर्म होंठों के स्पर्श से मेरे शरीर में मानो करंट सा दौड़ने लगा.

    फिर उन्होंने मेरा लंड पूरा मुँह में ले लिया और गले तक उतार लिया.
    मैं मौसी का मुँह पकड़ कर उनके मुँह को ही चोदने लगा.

    करीब दस मिनट बाद मैं उनके मुँह में झड़ गया.

    मौसी ने मुझे देखा और मुँह खोल कर मेरा वीर्य मुझे दिखाती हुई एकदम से सारा माल पी गईं.

    थोड़ी देर बाद मैंने फिर से मौसी की चूत में लंड डाला.
    उनकी दोनों टांगें उठाकर अपने कंधे पर रखीं और लंड अन्दर-बाहर करने लगा.
    बहुत सुकून मिल रहा था.

    मौसी भी एक बार और झड़ गईं.
    उन्हें देखकर ऐसा लग रहा था, जैसे वह इस चुदाई से संतुष्ट हो गई हों.

    मैं जोर-जोर से धक्के लगाने लगा.
    पूरे कमरे में पुच-पुच की आवाज़ आने लगी.

    हम दोनों को ही भरपूर सुकून और आनन्द आ रहा था.

    फिर मैं झड़ने को होने लगा.
    मैंने मौसी से पूछा- कहां निकालूँ?
    उन्होंने कहा- अन्दर ही डाल दे.

    Xxx मास्सी चुदाई करके मैं मौसी की चुत के अन्दर ही झड़ गया और उनके ऊपर ही लेट गया.

    सुबह हो गई.

    रात की चुदाई के बाद मौसी बहुत खुश लग रही थीं.
    घर में हम दोनों के अलावा कोई नहीं था तो मौसी सिर्फ पैंटी में मेरे बाजू में लेटी थीं.

    मैंने उठ कर उनकी चूची मसली और उनके होंठों पर किस किया तो मौसी जाग गईं.

    सुबह सुबह की उत्तेजना बहुत ज्यादा होती है तो मैं उनकी चड्डी उतार कर उनके ऊपर चढ़ गया.
    मौसी ने भी मेरा साथ दिया और हम दोनों ने बीस मिनट तक बहुत ही मस्त चुदाई का मजा लिया.

    फिर हम साथ में नहाए और बाहर आकर मौसी चाय बनाने लगीं मैं उनके साथ किचन में मदद करने लगा.

  • रात में चाची की चुदाई

    Xxx चाची सेक्सी हिंदी कहानी में घर में ज्यादा मेहमानों के कारण मुझे चाचा के घर सोना पड़ा. बीच रात में देखा तो मैं चाची के साथ सोया हुआ था. मेरा ईमान डोल गया.

    दोस्तो, मेरा नाम कन्हैया है और मैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूं.

    मैं दिखने में बहुत स्मार्ट हूँ. मेरी हाईट 5 फुट 8 इंच है और मेरा औजार 6 इंच के खीरे जैसा मोटा है.
    यह अब तक अनेक औरतों और लड़कियों को चोद कर खुश कर चुका है.

    मैंने यहां हजारों सेक्स कहानियां पढ़ी हैं और अपना लंड भी खूब हिलाया है.

    आज इतने दिनों बाद मैंने सोचा क्यों न मैं भी अपनी चुदाई की कहानी आपको सुनाऊं.

    यह फैमिली फक सेक्स रिलेशन की Xxx चाची सेक्सी हिंदी कहानी आज से करीब 5 साल पहले की उस वक्त की है जब मैं बीए में पढ़ता था.
    यह सेक्स कहानी मेरी और मेरी चाची की है.

    मैं अपनी चाची को बहुत समय से चोदना चाहता था. मेरी चाची बहुत सुंदर और सेक्सी हैं.
    एकदम पतली फिगर, मटकती चाल … आह मैं जब भी उनको देखता था … मेरा लंड पानी छोड़ने लगता था.

    उनकी हाईट मुझसे बहुत कम है.
    वे केवल 5 फिट की थीं.

    मैं चाची को चोदने का मौका देखता रहता था क्योंकि मेरे चाचा और चाची का अक्सर झगड़ा रहता था.
    उनके झगड़े का मैं फायदा उठाना चाहता था.

    फिर एक सुहानी रात में मेरा इंतजार खत्म हो गया.
    मैंने उस दिन कल्पना भी नहीं की थी.

    सर्दी का समय था.
    दिसंबर शुरू ही हुआ था.

    तब शादियों का सीजन चल रहा था.
    उस दिन हमारे यहां गेस्ट आए हुए थे.

    सिटी में घर छोटे होने के कारण एडजस्ट करना पड़ता है.
    हमारा और चाची का घर बराबर में ही है

    उस शाम सब मेहमान शादी में से सीधा हमारे घर आ गए.
    सबने चाय नाश्ता किया और खाना खाया ही था कि तभी मेरी मौसी का फोन आया.

    वे भी आने के लिए बोलने लगीं.
    उनके बच्चे छोटे थे.

    अब मुझे सोने के लिए चाची के घर जाना पड़ा.
    वहां सभी बात कर रहे थे.
    मैं भी बैठ गया.

    मुझे जल्दी नींद आने लगती है तो मैं वहीं लेट कर सो गया चाची भी वहीं लेट गईं.
    उनको सुबह ड्यूटी भी जाना था.

    मैं और चाची एक ही रजाई में लेटे थे मेरी रात को आंख खुली तो मेरे होश उड़ गए और मेरी आंखें फटी की फटी रह गईं.

    चाची अपने दोनों पैर चौड़े करके लेटी हुई थीं और उनका कुर्ता ऊपर हो गया था.

    यह देख कर मेरे अरमान जागने लगे मैंने फिर से रजाई चाची के ऊपर डाली और तभी एक हाथ चाची के पेट पर रख दिया.

    कुछ देर ऐसे ही लेटा रहा उधर से कोई हलचल नहीं हुई तो मेरी हिम्मत और बढ़ गई.

    मैंने धीरे-धीरे हाथ नीचे किया और सलवार के ऊपर से उनकी चूत को टच किया.
    नीचे चाची ने कुछ नहीं पहना था.
    उनकी चुत की दोनों फांकें अलग-अलग महसूस हो रही थीं.

    मेरी धड़कनें तेज हो गईं, पसीना आने लगा.
    मुझे डर भी लग रहा था कि कहीं थप्पड़ न पड़ जाए.

    फिर भी मैं धीरे-धीरे उनकी चूत में ऊपर से उंगली करता रहा.
    अचानक चाची ने करवट ली और अपनी गांड मेरी तरफ कर ली.

    पहले तो मैं डर गया कि कहीं वे जाग तो नहीं गईं.
    फिर भी मैं वैसे ही लेटा रहा.

    पांच मिनट बाद मैंने चाची को पीछे से गले लगा लिया.
    वे थोड़ा और पीछे हो गईं और मेरा लंड उनकी गांड में लगने लगा.

    कुछ पल बाद उन्होंने दोबारा करवट ली.
    अब उनका मुँह मेरे मुँह से दो इंच की दूरी पर था.

    उन्होंने मुझे गले लगाया और एक पैर मेरे पैरों पर रख दिया.
    मेरी सांस और उनकी सांस आपस में टकरा रही थीं और पेट से पेट मिल रहे थे.

    वह अहसास मेरी जिंदगी का सबसे हसीन पल था.

    मैंने अपना मुँह आगे बढ़ाकर उनके होंठों से अपने होंठ टच किए.

    लंड में करंट-सा दौड़ गया और उनकी जांघ में रगड़ मारने लगा.

    चाची और मैं कुछ देर ऐसे ही लेटे रहे.
    फिर उन्होंने अपने होंठ खोल दिए और मैंने उनका निचला होंठ पकड़ लिया.

    मैं धीरे-धीरे चाची की जीभ को चूसने लगा.
    चाची सोने का नाटक कर रही थीं.

    अब हम बिलकुल चिपके हुए थे.
    उनकी चूत में खुजली होने लगी तो वे फिर से सीधी लेट गईं.

    मैंने फिर से उनकी चूत पर हाथ रखा और ऊपर से उंगली करने लगा.

    मेरी हिम्मत बढ़ने लगी.

    मैंने उनका नाड़ा खोलने की कोशिश की लेकिन वह नहीं खुला.

    चाची ने सोने का नाटक करते हुए खुजाने के बहाने नाड़ा खोल दिया.

    मैंने फिर से हाथ लगाया तो देखा नाड़ा खुला हुआ है.

    मेरे लिए वह नाड़ा नहीं, मेरे लंड की किस्मत का दरवाजा था.

    Xxx चाची सेक्सी हिंदी कहानी बनने लगी थी.

    मैंने अन्दर हाथ डाला तो चूत बहुत गीली थी जिससे मेरी उंगली आसानी से अन्दर चली गई.

    अब मैं दूसरी उंगली डालने वाला था कि चाची ने अपनी एक टांग मेरे ऊपर रख दी.
    उनकी चूत खुल गई.

    अब मैं आसानी से उंगली कर रहा था.
    थोड़ी देर में चाची ने पानी छोड़ दिया.

    फिर वे उठकर बाथरूम चली गईं.

    मैंने टाइम देखा तो सुबह के 4:30 बज चुके थे.
    अब मैं परेशान था कि छेद का जुगाड़ कैसे होगा.

    मैं लेटा रहा कि शायद चाची आएंगी.

    लेकिन बहुत देर हो गई.

    मुझे भी मूतने की जरूरत पड़ी और डरते-डरते मैं ऊपर चला गया.

    चाची बाहर बैठी थीं.
    उन्होंने नहाने के लिए गीजर चला रखा था.

    मैं मूतने अन्दर चला गया.

    मैं मूत ही रहा था कि चाची पीछे से आईं और उन्होंने मेरे लंड को पकड़ लिया.
    मैं डरने की एक्टिंग करने लगा.

    मैंने कहा- चाची, ये क्या कर रही हो आप … छोड़ो इसे!

    लड़कों का तो सुबह-सुबह हमेशा खड़ा ही रहता है.

    इतने में मूतना खत्म हुआ.

    चाची ने मेरे लंड को आगे-पीछे करना शुरू कर दिया.
    मेरी हालत खराब होने लगी.

    चाची बोलीं- साले हरामजदे … पूरी रात सोने न दिया … आग लगा दी मेरी चूत में. अब कौन बुझाएगा इसे?

    यह सुनकर मैं चुप खड़ा रहा.

    चाची नीचे बैठ गईं और मेरे लंड पर गर्म पानी डालकर उसे मुँह में लेकर चूसने लगीं.

    मैं तो जन्नत में पहुंच गया और जल्दी ही उनके मुँह में छूट गया.

    चाची लंड की रबड़ी खाती हुई बोलीं- जल्दी जा और जीने का गेट लगा कर आ … कहीं कोई ऊपर न आ जाए!
    मैं मन ही मन खुश हो रहा था.

    मैं जल्दी से गेट लगाकर वापस आ गया.
    जैसे ही मैं बाथरूम में घुसा, देखा कि चाची पूरी नंगी खड़ी थीं और अपनी चूत को रगड़ रही थीं.

    चाची ने कहा- नीचे बैठ!
    मैं नीचे बैठ गया.

    उन्होंने एक टांग मेरे कंधे पर रखी और अपनी चूत मेरे मुँह पर अड़ा दी.

    मैंने भी देर न करते हुए चूत चाटना शुरू कर दिया जो मेरी सबसे पसंदीदा चीज थी.
    चाची का पानी फिर से छूट गया.

    मैंने उसे नहीं पिया.
    चाची ने गर्म पानी से चूत साफ की और नीचे जाने को कहा.

    मैंने जिद की- मुझे आपको चोदना है!
    लेकिन उन्होंने मना कर दिया.

    मेरा दिमाग खराब हो गया.
    मैं उदास हो गया.

    तभी चाची ने मेरा लंड हाथ में लिया और उसे चूमा.
    फिर मेरे होंठों को चूमा और बोलीं- कोई ऊपर आ जाएगा, मैं नहा लूँ. ये काम फिर कभी करेंगे!

    मैंने उदास मन से उनकी चूत पर एक किस किया.
    चाची हंसने लगीं.

    मैं नीचे आ गया.
    फिर सब उठ चुके थे.
    मुझे मौके की तलाश बेकरार कर रही थी.

    अगली रात को चमत्कार हो गया.
    चाचा को बाहर शादी में जाना था.

    चाची ने तबीयत खराब होने का बहाना बना दिया और अपने देखभाल के लिए मुझे अपने पास बुलाया लिया.

    रात को दस बजे तो चाची ने दरवाजे बंद करने का आदेश दिया और खुद अपने सारे कपड़े उतार कर पूरी नंगी होकर रजाई में घुस गईं.

    मैंने दरवाजे बंद करते समय देख लिया था कि नंगी चाची आज चुदाई की मस्ती में थीं.

    दरवाजे बंद करके मैं घूमा और अपने कपड़े उतारने लगा.
    चाची मुस्कुरा कर मेरे लौड़े को देख रही थीं.

    मैं फुल नंगा होकर चाची के साथ रजाई में लेट गया और हम दोनों लिपट कर चुम्मी करने लगे.

    कुछ देर बाद चाची बोलीं- तेरा औजार तो बड़ा मस्त है?
    मैंने कहा- हां. अब इसे चूस कर कड़क करो तब आपको इसका कमाल दिखाता हूँ.

    चाची झट से रजाई में अन्दर घुस गईं और मेरे लौड़े को चूसने लगीं.

    जवान लड़के के लंड को कड़क होने में कितना समय लगना था, झट से लोहे की रॉड बन गया.

    मैंने चाची को अपने बाजू में खींचा और रजाई को हटा कर अलग कर दिया.

    फिर चुदाई की पोजीशन में आकर मैंने चाची की चुत में लंड का सुपारा सैट किया और उसी पल चाची ने गांड उठा दी.

    मेरा लंड अन्दर सरक गया.
    चाची आह की आवाज के साथ लौड़े को लील गईं और चुदाई चालू हो गई.

    मैंने बीस मिनट तक धकापेल चुदाई की और उसके बाद चाची झड़ गईं.
    मैंने एक कपड़े से चाची की चुत को पौंछा और उन्हें घोड़ी बना दिया.

    चाची बोलीं- तू अभी तक नहीं झड़ पाया … क्या दवा खाई है तूने?
    मेरे लंड में अभी झांट असर नहीं हुआ था तो मैंने कहा- अभी तो आधे रास्ते में भी नहीं आया हूँ चाची!

    वे सहम कर बोलीं- साले चुत का भोसड़ा बनाएगा क्या?
    मैं हंस दिया और उनकी सवारी गाँठने लगा.

    दस बारह मिनट बाद मैंने कहा- अब झड़ने पर आ रहा हूँ. माल किधर निकालूँ?

    चाची बिना कुछ मेरे लौड़े से हट गईं और लंड को मुँह में लेकर चूसने लगीं.

    मैंने चाची के चूचे मसलते हुए लंड का फव्वारा उनके मुँह में ही छोड़ दिया और चाची सारी मलाई चाट गईं.

    हम दोनों थक कर लेट गए.

    उसके बाद चाची ने मेवा मसाले वाला दूध बनाया और एक बार और धमाकेदार चुदाई का खेल हुआ.

    फिर हम दोनों कपड़े पहन कर सो गए.

  • घर में हुई सबके साथ मस्त चुदाई



    मेरे परिवार के पास बहुत पैसा है. सब अय्याश हैं. एक बार मैं घर पहुंचा वहां 2 गोरखे नेपाली नौकर, उनकी बीवियां, मेरे मम्मी पापा, दो बहनें सब नंगे चुदाई कर रहे थे.
    मेरा नाम विक्कू है दोस्तो, मैं 27 साल एक मद मस्त नौजवान हूँ और एक बहुत बड़ी कंपनी में काम करता हूँ.
    यह Xxx ग्रुप पोर्न स्टोरी मेरे घर की है.
    मेरा ऑफिस घर से बहुत दूर है आने जाने में दो दिन लगते हैं.
    इसलिए मैं अभी अकेले ही आफिस के पास रहता हूँ और ऑफिस आराम से आता जाता हूँ।
    हमारे ऑफिस में 2 सिक्योरिटी गार्ड हैं।
    दोनों ही नेपाली हैं, नाम उनके गामा और गुरंग है।
    वे दोनों ही शादीशुदा है और अपनी अपनी पत्नी के साथ पास में ही रहते हैं।
    दोनों ही ड्यूटी बड़ी मेहनत से करते हैं, हमारे बॉस उनसे बहुत खुश भी रहतें हैं।
    कुछ दिन के बाद कंपनी का ऑफिस एक ऐसी जगह शिफ्ट हो गया जहाँ सिक्योरिटी गार्ड की कोई जरूरत नहीं थी।
    ऐसे में कंपनी ने उन दोनों को नौकरी से निकाल दिया।
    नौकरी से निकलने के बाद वो दोनों मेरे घर आये और फूट फूट कर रोने लगे।
    कहने लगे- अब हमारा क्या होगा? हमारी तो रोज़ी रोटी चली गई। अब हम क्या करेंगे? कहाँ जायेंगे?
    मुझे उन दोनों पर दया आ गई तब मैंने कहा अच्छा रुको मैं कुछ कोशिश करता हूँ।
    फिर मैंने अपने पापा से बात की।
    सच्चाई यह है दोस्तो … मेरे पापा का बहुत बड़ा कारोबार है।
    वे एक बहुत बड़े और सफल बिज़नेस मैन हैं।
    मैंने जब इन दोनों की दर्द भरी कहानी सुनाई.
    तो पापा ने कहा- ठीक है. दोनों को हमारे पास भेज दो मैं उन्हें नौकरी दे दूंगा।
    मैंने जब यह बात उन दोनों को बताई तो वे लोग ख़ुशी के मारे उछल पड़े और मेरे पैरों पर गिर पड़े।
    मैंने दोनों को परिवार सहित भेज दिया।
    मुझे यही भी खबर मिली की दोनों को गार्ड का काम सौंप दिया गया है और उनकी बीवियों को घर के काम काज में मेड की हैसियत से रख लिया गया है।
    इस तरह दोनों नेपालियों की डबल इनकम होने लगी।
    उनकी ज़िन्दगी में जबरदस्त खुशहाली आ गई।
    हमारे पापा की एक बहुत बड़ी कमजोरी है, वे अय्याश प्रकृति के व्यक्ति हैं और उन्हें खूबसूरत लड़कियां और बीवियां चोदने का शौक है।
    कुछ कुछ ऐसा मेरे साथ भी है।
    मैं शादी के पहले 2 लड़कियों को चोद चुका था और मोहल्ले की एक औरत को चोदा था जिसका नाम मिसेज मोनिका है।
    मैं उसे भाभी कहता हूँ।
    फिर कुछ दिन बाद उसने मुझसे अपनी ननद चुदवाई और एक महीने के बाद अपनी देवरानी भी चुदवा ली।
    मैंने इन तीनों को कई बार चोदा है और खूब हचक हचक के चोदा है।
    आज भी जब घर जाता हूँ तो इनको चोद कर आता हूँ।
    यह बात मेरी मम्मी और बहनों को पता है।
    आगे आपको मम्मी और बहनों के बारे में भी मालूम हो जायेगा।
    एक बात समझ लो की हमारी फैमिली एक मॉडर्न फैमिली है, सच कहूं तो अय्याश फैमिली है।
    हमारे पास पैसा बहुत है, हम सब जवान हैं तो अय्याशी क्यों न करें?
    मुझे घर से आये हुए लगभग एक साल हो चुका था।
    एक साल से मैं यहाँ अकेला ही रहता था बाकि हमारी फैमिली वाले सब घर पर ही थे.
    यहाँ तक कि मेरी बीवी अर्चना भी।
    एक दिन मेरा मन घर आने का हुआ तो मैंने एक हफ्ते की छुट्टी ली और घर आ गया।
    मेरा घर बहुत बड़ा है।
    घर क्या पूरा महल है।
    तीन मंजिला की एक भव्य आलीशान बिल्डिंग है

    मैं अंदर दाखिल हुआ तो मुझे कोई दिखाई नहीं पड़ा। मैं समझा कि शायद सब लोग ऊपर होंगे.
    तो मैं फ़ौरन पहली मंजिल पर चढ़ गया।
    वहां सब जगह देखा, कहीं कोई दिखाई नहीं पड़ा।
    मन में शंका हुई कि कहाँ गए सब लोग?
    फिर दूसरी मंजिल पर गया तो वहां भी पूरा सन्नाटा।
    कहीं कोई नहीं।
    तब मुझे किसी अनहोनी की शंका होने लगी, मैं मन ही मन घबराने लगा और आखिरी मंजिल की तरफ कदम बढ़ाने लगा तब मुझे कुछ आवाज़ें सुनाईं पड़ी तो दिल को बड़ी तसल्ली हुई।
    मैं जल्दी से उस बड़े ए सी हाल में पहुँच गया।
    वहां जो हो रहा था उसे देख कर दंग रह गया।
    ऐसा तो मैंने कभी सोचा भी न था।
    मैं चुपचाप एक कोने में खड़े होकर वहां का नज़ारा देखने लगा।
    नज़ारा इतना रोमांटिक था कि मेरा लण्ड साला खड़ा हो गया।
    मैंने देखा कि घर के सारे लोग चुदाई में लगे हुए हैं; खूब जम कर अय्याशी हो रही है।
    मेरी मम्मी सुनीता एकदम नंगी नंगी नेपाली गामा के लण्ड पर कूद रहीं हैं।
    उनके बड़े बड़े दूध उछल रहे हैं और लण्ड पूरा का पूरा उसकी चूत में घुसा हुआ है।
    मेरी बड़ी बहन रूचि दूसरे नेपाली के लण्ड पर कूद रही है और झमाझम चुदवा रही है।
    मेरी छोटी बहन रीता पहले वाले नेपाली के मुंह पर नंगी नंगी बैठी हुई अपनी चूत चटवा रही है।
    मेरी बीवी भी दूसरे नेपाली के मुँह पर बैठ कर अपनी बुर चटवा रही है।
    मेरे पापा के लण्ड पर गामा की बीवी बैठी हुई अपना भोसड़ा चुदवा रही है और गुरुंग की बीवी पापा के मुंह पर बैठी हुई बुर चटवा रही है।
    इतने में घर का नौकर बिट्टू आ गया और मम्मी के सामने नंगा खड़ा हो गया।
    मम्मी ने गप्प से उसका लण्ड अपने मुंह में भर लिया।
    मम्मी की चूत में लण्ड और मुंह में लण्ड देख कर मैं बहुत ज्यादा उत्तेजित हो गया।
    रूचि और रीता को बुर चटवाते हुए देखकर मेरे मुंह में पानी आ गया।
    मेरा मन हुआ कि मैं पहले मम्मी का भोसड़ा चोद डालूं और फिर दोनों बहनों की चूत में लण्ड पेल पेल कर पूरा मज़ा ले लूँ।
    फिर क्या … Xxx ग्रुप पोर्न लाइव देख मेरा लण्ड साला मेरे काबू के बाहर हो गया।
    वो साला पैंट के बाहर निकल कर टनटनाने लगा।
    दोनों नेपाली की बीवियां भी बड़ी सेक्सी और हॉट थीं।
    मैंने ठान लिया कि मैं इन दोनों बीवियों को उनके हसबैंड के सामने पटक पटक के चोदूंगा और सबके सामने चोदूंगा।
    तब तक गुरंग की बीवी गिनी ने मुझे देख लिया और मेरा खड़ा लण्ड देख लिया।
    वह नंगी ही दौड़ी पड़ी मेरी तरफ और मेरे पास आकर मेरा लण्ड पकड़ लिया।
    लण्ड पकड़े पकड़े वह मुझे सबके सामने ले गई।
    मुझे देख कर मम्मी बोली- अरे विक्कू बेटा, तू कब आ गया? तूने पहले तो बताया नहीं?
    मैंने कहा- अच्छा हुआ मम्मी जो मैंने पहले नहीं बताया। अगर बता दिया होता तो ये तुम सबकी अय्याशी कैसे देखने को मिलती?
    मम्मी ने कहा- अच्छा अब देख ही लिया है तो तू भी शामिल हो जा इसमें। मैं तेरी हरकतें जानती हूँ। तू मोनिका को चोदता है, उसकी ननद की बुर में लण्ड पेलता है, उसकी देवरानी को भी चोदता है तू! मुझसे कुछ भी छुपा नहीं। अब घर में ही माँ बहन चोद कर मज़ा ले ले न? बाहर जाने की जरूरत क्या है? तेरा लौड़ा तो भोसड़ी का बहुत बड़ा हो गया है।
    उधर से रूचि दीदी बोली- अरे हां विक्कू, तेरा लौड़ा तो बड़ा मोटा भी है।
    फिर छोटी बहन रीता बोली- हां भइया, तेरा लण्ड हम सबकी चूत फाड़ डालेगा जरूर!
    मम्मी ने कहा- लण्ड इतना बढ़िया है तो फाड़ेगा ही सबकी चूत।
    इतने में गामा की बीवी बोली- पहले तो मैं फड़वाऊंगी अपनी चूत इसके लण्ड से। मेरी नज़र बहुत दिनों से थी विक्कू के ऊपर। मैं तो इसके नाम की उँगली भी किया करती थी।
    तब तक मेरा लौड़ा साला और ज्यादा तन गया।
    फिर मैंने गामा की बीवी को उठा के पटका और सीधे लण्ड पेल दिया उसकी चूत में।
    मैं बेधड़क होकर बड़ी बेशर्मी से उसे चोदने लगा।
    मम्मी और दोनों बहने बड़े गौर से मुझे चोदते हुए देखने लगीं।
    आखिरी राउंड में मैंने देखा कि बिट्टू कुछ ज्यादा ही उत्साहित है।
    उसकी नज़र दोनों नेपालियों की बीवियों पर टिकी थी।
    गोरी गोरी नंगी नंगी दोनों बीवियां सच में बड़ी हॉट लग रहीं थीं।
    बिट्टू उनके पास गया और एक की चूचियाँ मसलने लगा दूसरी की चूत।
    वह दोनों को दबा कर गचागच चोदने लगा।
    तब तक इधर मेरी बड़ी बहन ने मेरा लण्ड पकड़ कर बड़ी मस्ती से हिलाकर बोली- विक्कू, तेरा लौड़ा बड़ा क्यूट है, बड़ा प्यारा और ये साला माँ को चोद कर बहुत बड़ा मादरचोद हो गया है. अब मैं इसे बहनचोद बनाऊंगी।
    ऐसा बोल कर रूचि दीदी ने लण्ड मुंह में भर लिया और चूसने लगीं.
    मैं उसकी चूत में उँगली करने लगा।
    उधर पापा ने लण्ड मेरी छोटी बहन रीता की चूत में पेल रखा था।
    रीता भी पापा का लण्ड पूरा पेलवाकर चुदाई का मज़ा लेने लगी थी।
    मैंने देखा कि मेरी बीवी अर्चना गामा का लण्ड अपनी गांड में डाले हुए है।
    गामा मेरी बीवी की गांड मारने में जुटा हुआ है।
    मेरी मम्मी गुरुंग का लण्ड अपनी चूचियों के बीच पेलवा कर मज़ा ले रही हैं।
    इस तरह पूरा दिन पूरी रात हम लोग चुदाई में लिप्त रहे।
    न थके और न रुके बल्कि चूत अदल बदल कर चोदते रहे।
    मैंने मम्मी को खूब चोदा दोनों बहनों को चोदा और नेपालियों की दोनों बीवियों को भी खूब पटक पटक के चोदा।
    बिट्टू ने भी मेरी माँ चोदी, मेरी बहनों की चूत में और गांड में लण्ड पेला और मेरी बीवी की बुर भी बड़े मजे से लिया.
    उसके बाद नेपाली बीवियों को भी चोद चोद कर मज़ा लिया।
    नेपालियों ने भी सबको चोदने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
    मेरी माँ बहन चोद चोद पूरे टाइम उत्तेजित होते रहे।
    मेरे पापा ने भी सबको बड़े प्यार से चोदा, उन्हें सबसे ज्यादा मज़ा नेपालियों की बीवियां चोदने में आया।
    दूसरी रात में मैं अचानक छत पर पहुँच गया।
    मैंने देखा कि वहां मेरी मम्मी रेलिंग पर खड़ीं हैं।
    वे अकेली ही थी और रेलिंग पकड़ कर थोड़ा आगे की तरफ झुकी हुईं थीं।
    उनकी गांड पीछे से बड़ी सेक्सी लग रही थी।
    बस मेरा मन मचल गया तो मैंने पीछे से उसकी साड़ी उठा कर लण्ड उसकी चूत में घुसा दिया।
    मम्मी भी मस्ती के मूड में आ गईं।
    वे अपनी गांड आगे पीछे करती हुई मुझसे बड़े प्यार से रेलिंग पकड़े पकड़े चुदवाने लगीं।
    बड़ा बढ़िया रोमांटिक मौसम था।
    ठंडी ठंडी हवा चल रही थी।
    तो मैंने धीरे से लण्ड उसकी चूत से निकाल कर उनकी गांड में घुसेड़ दिया।
    वे बोली- अरे विक्कू … यह क्या किया तूने? मैं गांड किसी को नहीं देती।
    मैंने कहा- मुझे नहीं मम्मी, मेरे लण्ड को दे दो न अपनी गांड प्लीज। मेरा लण्ड तेरी गांड का भूखा है।
    इसी बीच मैंने लण्ड उसकी गांड में ही अंदर बाहर करने लगा और धीरे धीरे स्पीड बढ़ाने लगा।
    कुछ देर बाद मम्मी ने खुद कहा- बेटा विक्कू, गांड चुदाने में
    इतना मज़ा आता है, यह मुझे नहीं मालूम था। तुम पूरा लौड़ा पेल दो अंदर और धकाधक चोदो मेरी गांड। अब तो मैं भोसड़ा चुदवाने के साथ साथ गांड भी चुदवाया करुँगी अपनी।
    यह सुनकर मेरा लण्ड साला और ज्यादा सख्त हो गया।
    मैंने फिर मम्मी की चूत और गांड दोनों घपाघप चोद कर खूब मज़ा लिया।
    मैंने इसी तरह रूचि और रीता की भी गांड मारी और दोनों नेपाली बीवियों की गांड में भी खूब जम कर लण्ड पेला और कई बार पेला।
    फिर क्या … हम सबने सबकी चूत और गांड चोदने का पूरा मज़ा लिया।

  • घर बुलाकर गर्लफ्रेंड की चुदाई

    मेरी एक गर्लफ्रेंड थी लेकिन दूसरे शहर की … हम फोन पर खूब बातें करते. हमारा मिलने का मन था लेकिन हम मिल नहीं पा रहे थे. जब हम मिले तो …

    हैलो फ्रेंड्स, कैसे हैं आप लोग. मेरा नाम रूबल शर्मा है और मैं बांदा उत्तर प्रदेश का रहने वाला हूँ. मैं देखने में साधारण ही हूँ. औसत बॉडी है.

    अन्तर्वासना पर ये मेरी पहली सेक्स स्टोरी है गर्लफ्रेंड की चुदाई की. चूंकि पहली बार है इसलिए ग़लती हो जाना पक्का है. प्लीज़ नजरअंदाज कर दीजिएगा.

    ये कहानी आज से 2 साल पहले की है, जब मैं अपना ग्रॅजुयेशन कर रहा था. उन दिनों मेरी एक गर्लफ्रेंड थी, जिसका नाम नम्रता था. वो ग्वालियर से थी, देखने में थोड़ी सी सांवली थी, लेकिन थी सेक्सी.

    हम लोग फोन बार खूब बात किया करते थे. उसका मुझसे मिलने का बड़ा मन था और मुझे तो था ही. लेकिन हम दोनों के मिलने का कुछ नहीं हो पा रहा था.

    एक बार मेरे घर में शादी थी, तो सब लोगों को दिल्ली जाना था. मेरा मन नहीं था. तो मैं घर में ही रुक गया.

    उस दिन जब मेरी उससे बात हुई और मैंने उससे अपने यहां आने का कहा. पहले तो वो थोड़ा डर गयी, लेकिन फिर मेरे कहने पर मान गयी.
    उसने अपने घर में कह दिया कि कॉलेज का ट्रिप है, तो बाहर जाना है.

    मैंने उसका रात वाली गाड़ी से रिज़र्वेशन भी करा दिया. रात को गाड़ी आई, तो उसे लेने मैं स्टेशन आ गया. वहाँ से उसको लिया और अपने घर ले आया. रास्ते में वो मुझसे चिपक कर बैठी थी.

    घर ले आने के बाद मैं उसे अपने कमरे में ले गया और उसे बिठा दिया. उसका गला सूख रहा था, तो उसने मुझसे पानी मांगा. मैंने उसे पानी पीने को दिया.

    वो अभी भी डर रही थी. मैं उसके बाजू में ही बैठा था. हम दोनों इधर उधर की बातें ही कर रहे थे. थोड़ी देर बाद वो नॉर्मल हुई, तो मैंने उससे बात करते करते उसके बाल खोल दिए.

    वो शर्मा गयी और उसने मेरे कंधे पर अपना सिर रख लिया. मैंने उसके सर को उठाया और किस करने लगा. उसने आँखें बंद कर लीं.

    थोड़ी देर किस करने के बाद मैंने उसे बेड पर लिटा दिया और उसके ऊपर आकर उसे किस करने लगा. उसने भी मुझे अपने से चिपका लिया.

    मैंने उसे हाथ ऊपर करने वो कहा, तो उसने हाथ ऊपर कर लिए. मैंने उसकी कुरती उतार दी. अन्दर उसने एक छोटी सी गुलाबी रंग की ब्रा पहनी हुई थी.

    मैंने एक पल उसकी ब्रा में कैद उसकी चुचियों को निहारा और अगले ही पल उसकी पूरी बॉडी पर किस करने लगा. मेरे ताबड़तोड़ चूमने से उसकी सांसें तेज हो गईं और वो भी बहकने लगी.

    जब मैंने उसकी नाभि में जीभ घुमाई, तो वो तड़प उठी और उसने मेरा सिर दबा लिया. मैं धीरे धीरे किस करता हुआ नीचे आया और उसकी सलवार भी उतार दी. मेरे सामने वो ब्रा पेंटी में थी और शर्मा रही थी. उसकी पेंटी गीली हो गयी थी.

    मैंने झुक कर चुत को भी चूम लिया. चुत पर मेरे होंठों की छुअने पाते ही उसके मुख से एक सिसकारी निकल गयी.

    अब मैं खड़ा हुआ और मैंने अपनी चड्डी छोड़ कर सारे कपड़े उतार दिए. मैंने उसको भी खड़ा कर दिया. उसके पैर काँप रहे थे, तो मैंने उसे सहारा दिया और उसे चूमते हुए दीवार से चिपका दिया और उसकी पीठ पर किस करने लगा.

    वो ‘आहह आहह’ करते हुए आहें भर रही थी.

    इसी बीच मैंने उसकी ब्रा और अपनी चड्डी को उतार दिया. वो अभी भी दीवार से लगी हुई थी, तो मैं भी पीछे से जाकर उससे चिपक कर उसकी गर्दन और कंधे पर किस करने लगा. मेरा लंड उसकी गांड में गड़ने लगा. वो लंड का स्पर्श पाकर एकदम से चिहुंक गई.

    मैंने उसको सीधा किया, तो उसने अपनी आँखें बंद की हुई थीं. मैंने उसका हाथ अपने लिंग पर रखते हुए कहा- ये ले तेरी अमानत.
    लंड छूते ही वो शर्मा गयी और उसने झट से हाथ हटा लिया.

    अब मैं उसके मम्मों को चूसने लगा और वो ‘आह आआअहह आआ…’ करते हुए सिसकारियां लेने लगी.

    एक बार मैंने उसके निप्पल को काट लिया, तो वो ‘आउच …’ बोल कर बोली- आराम से चूसो … ये अब सिर्फ़ तुम्हारे ही हैं.

    फिर मैंने अपना हाथ उसकी पेंटी में डाल दिया और उसकी चूत सहलाने लगा उसकी चूत पर थोड़े से बाल थे.

    मैंने उसकी टाँगें खोल दीं और पेंटी उतारने लगा.
    उसने मेरा हाथ पकड़ लिया.
    मैंने पूछा- क्या हुआ जानू … अब कैसी शर्म? अब तो सब कुछ मेरा है ना!

    उसने हंस कर हाथ हटा दिया. मैंने उसकी पेंटी उतारी, तो उसकी चूत पूरी गीली हो गयी थी. मैंने चुत पर हाथ लगाया तो वो ‘उई … माँ … सीईईई..’ कर उठी.

    मैं नीचे बैठ कर उसकी चूत चाटने लगा. वो तड़प उठी और ‘उफफफ्फ़ आआहह … सीईईईई.’ करने लगी. उसने अपने हाथों से मेरे सिर को अपनी चूत पर दबा लिया. मैं बेतहाशा उसकी चूत चाटे जा रहा था.

    वो लगातार ‘उम्म्म्म … अहहहह … आराम से.’ बोलते हुए सिसकारती जा रही थी. मैंने कुछ पल बाद उसका एक पैर अपने कंधे पर रखा और उसकी चूत पूरी अन्दर तक और पूरी पीछे तक चाटने लगा. मेरे मुँह में उसकी झांटों के बाल आ रहे थे, लेकिन चुत चाटने में मज़ा भी बहुत आ रहा था.

    कोई पांच मिनट तक चुत चाटने के बाद मैं उसको बेड पर ले आया और लिटा दिया. मैंने उसकी टाँगें खोल दीं और मैं उसकी चूत में उंगली डालने लगा, तो उसे तकलीफ़ होने लगी. उसकी चूत बहुत टाइट थी.

    मैंने पास रखी वैसलीन लगाई और फिर कोशिश करने लगा. इस बार मेरी आधी उंगली अन्दर चली गयी.

    वो तड़प उठी और बोली- बस करो, इतना ही रहने दो.
    मैंने कहा- जानू अभी तो आधी ही अन्दर गयी है … अभी तो मैं इसमें पूरा हाथ भर का अपना अन्दर डालूँगा.
    इस पर वो बुरी तरह से शर्मा गयी और बोली- तुम ना बहुत बदतमीज़ हो.

    उसकी इस बात से मुझे हंसी आ गयी और मैंने उसे किस कर लिया. मैं उसके ऊपर लेट गया और हमने एक दूसरे को कसके चिपका लिया.

    एक पल बाद मैं उठ कर चुदाई की पोजीशन में आया और मैंने उसे ऊपर से नीचे तक देखा.
    वो शरमा कर बोली- ऐसे क्या देख रहे हो?
    मैंने कहा- तू बहुत खूबसूरत है.
    वो शर्मा गयी.

    उसने पूछा- क्या मैं कपड़ों में खूबसूरत नहीं लगती हूँ?
    मैं हंस दिया और अपनी बात को पलटते हुए बोला- यदि तुम कपड़ों में खूबसूरत नहीं दिखतीं तो हम दोनों में प्यार कैसे हो सकता था.
    वो हंसी और बोली- तो अभी ये बात कहने का क्या मतलब है?
    मैंने उसकी चूची मसली और कहा कि मेरा मतलब ये था कि तुम पूरी नंगी होने पर और भी खूबसूरत लग रही हो.

    उसने समर्पण की मुद्रा में अपने दोनों हाथ फैला कर मुझे आगे बढ़ने का इशारा किया.

    मैंने धीरे धीरे उसकी टाँगें खोलीं और अपना लंड उसकी चूत के मुहाने पर रख कर घिसने लगा. उसकी चूत पानी छोड़ रही थी.
    उसने आँखें खोलीं और कहा- जानू आराम से करना … मेरा पहली बार है.
    मैंने कहा- चिंता मत करो बिल्कुल तकलीफ़ नहीं होगी.

    मैंने धीरे धीरे लंड घिसते हुए एक झटका मारा और मेरा लंड उसकी चूत में घुस गया.

    उसी पल वो चिल्ला दी- उई … माँ … मर गई … आआहह … फट गई … मैं मर गयी.

    मैं उसके ऊपर झुक गया और उसे किस करने लगा. उसके मम्मों को चूसने लगा. वो शांत हुई ही थी कि मैंने थोड़ा रुक कर एक और झटका दे मारा. इस बार मेरा पूरा लंड उसकी चूत में समा गया.

    उसकी चूत में से खून निकल रहा था और आँखों में से आँसू बह रहे थे. मैंने उसे सहलाते हुए कहा- बस हो गया जानू …
    अब मैं धीरे धीरे शॉट्स मारने लगा. थोड़ी देर में उसको मज़ा आने लगा और वो भी गांड उठा उठा कर मेरा साथ देने लगी.
    मैं दनादन धक्के मार रहा था और वो ‘आआह … अहह … मजा आ रहा है … और तेज करो …’ बोल रही थी.

    कोई बीस मिनट बाद हम दोनों ही झड़ गए. मैं उसके ऊपर गिर गया. उसने मुझे कसके चिपका लिया और ऐसे ही किस करते हुए हम एक दूसरे की बांहों में सो गए.

    उस रात हम दोनों ने चार बार सेक्स किया और सुबह देर तक सोने के बाद हम दोनों साथ ही नहाये और बाथरूम में भी एक बार सेक्स किया. फिर मैं उसे मोहल्ले वालों की नजर से बचाते हुए स्टेशन छोड़ कर आ गया.

    दोस्तो, ये थी मेरी गर्लफ्रेंड की सील तोड़ चुदाई … आपको मेरी ये गंदी कहानी कैसी लगी 

  • कुँवारी बुर की चुदाई पहली बार

    कुँवारी बुर की चुदाई की कहानी में पढ़ें कि कैसे मेरे पड़ोस में रहने वाली लड़की ने अपनी कामवासना से मजबूर होकर अपने कमसिन जिस्म को मेरे हवाले कर दिया.

    हाय दोस्तो, मेरा नाम सुमीत शर्मा है। वैसे तो मैं दतिया का रहने वाला हूं लेकिन मेरी जॉब के कारण फिलहाल इंदौर में रहता हूं। मेरी ऊंचाई 5 फुट 8 इंच है।

    मेरी शादी को दो साल हो चुके हैं। मेरी बीवी बहुत सुंदर है और मेरा बहुत खयाल रखने वाली है। हमारा वैवाहिक जीवन बहुत अच्छा चल रहा है। में और मेरी बीवी शुरू से ही सेक्स का पूरा मजा लेते हैं। हमने कई तरीके से और नई-नई जगह चुदाई करने का मजा लिया है। जैसा कि मैंने आपको बताया कि मेरी जॉब घर से दूर है तो मैं यहां अपनी बीवी के साथ ही रहता हूँ।

    यह कहानी 6 महीने पुरानी है। हमारे घर के सामने एक थोड़ा ग़रीब परिवार रहता है, परिवार में चार सदस्य हैं पति, पत्नी, उनकी बेटी सोनम जिसकी उम्र 19 साल है और छोटा बेटा पंकज जिसकी उम्र 11 साल है।
    मैं जॉब के कारण दिनभर बाहर ही रहता हूँ इसलिये मेरी बीवी बाजार के छोटे मोटे काम के लिए सोनम को ही बुला लेती है। और सोनम भी खुशी खुशी उसकी सहायता के लिए आ जाती है।

    हम इस घर में 2 साल पहले ही आये थे। तब मैंने सोनम पर कभी इतना ध्यान नहीं दिया था।

    पर कुछ दिन पहले जब मैं ड्यूटी के लिए निकल रहा था तो सामने से आ रही सोनम को देखा। उसके स्तन 32 के भरे पूरे सुडौल हो चुके थे और उसकी गांड 36 की हो गई थी। सोनम को देखकर मुझे विश्वास नहीं हुआ कि ये वही सोनम है जो मेरे यहाँ आने पर दुबली पतली हुआ करती थी। मैं समझ गया सोनम का शरीर अपनी जवानी के पूरे उफान पर है।

    कुछ दिन बाद मेरी बीवी को मेरी सास की तबियत खराब होने के कारण अपने मायके जाना पड़ा। मैं उसको घर छोड़कर वापस आ गया। सोनम के घर में टी वी न होने के कारण सोनम और उसका भाई लगभग रोज ही हमारे घर टी वी देखने आया करते थे। सोनम के परिवार और हमें किसी को कोई आपत्ति नहीं थी इसलिए ये लोग देर रात 11-12 बजे तक टी वी देखते रहते थे।

    उस दिन भी सोनम और उसका भाई टी वी देखने आए हुए थे। मेरी बीवी के न होने के कारण में अकेला था। उस दिन सोनम के भाई को 10 बजे ही नींद आने लगी और वो सोने के लिए घर चला गया।

    अब घर में केवल में और सोनम ही थे।

    जब तक हमें इस बात का अहसास न हुआ, तब तक सब नार्मल रहा। लेकिन जब हमें इस बात का अहसास हुआ कि मैं और एक जवान लड़की रात में अकेले मेरे घर में हैं तो हम दोनों ही थोड़े असहज हो गए। लेकिन हम दोनों ही सामान्य दिखाने की कोशिश करते रहे और टी वी पर आ रही फिल्म को एन्जॉय करते रहे।

    उस दिन टी वी पर आ रही फिल्म भी कुछ ज्यादा ही कामुक दृश्यों से भरी हुई थी। फ़िल्म में हीरो हिरोइन एक दूसरे को फ़्रेंच किस कर रहे थे और एक दूसरे के कपड़ों में हाथ डाल रहे थे। ये सब देखकर मेरा बुरा हाल था और शायद सोनम भी मुश्किल से अपने आप को सामान्य दिखा पा रही थी।

    मेरा लंड पैंट के अंदर खड़ा हो चुका था और थोड़ा थोड़ा लीक कर रहा था। जब मुझसे रहा नहीं गया तो मैं उठकर बाथरूम चला गया और मुठ मार कर अपनी वासना को शांत किया।

    जब मैं बाथरूम से वापस आया तो देखा सोनम अपने सलवार में हाथ डाल कर अपनी बुर को सहला रही है। मैं समझ गया कि ये लड़की अपनी बुर की चुदाई के लिए तड़प रही है.

    मुझे वापस आया देखकर उसने तुरंत अपना हाथ निकाल लिया और फिर से सामान्य दिखने की कोशिश करने लगी।

    पर अब अपनी बुर को छेड़ने के कारण वो अपनी तेज साँसों पर नियंत्रण रखने में असमर्थ थी। उसकी तेज सांसें मुझे उसके अंदर लगी वासना की आग का पूरा हाल बयान कर रही थी।

    अबकी बार मैं जान बूझ कर सोनम के बिल्कुल पास ही बैठा और उसकी जांघ पर हल्के से हाथ रखकर हटा लिया। इस पर उसने कोई रिस्पांस नहीं दिया।

    सच कहूं तो मेरी भी बिल्कुल हिम्मत नहीं हो रही थी क्योंकि आज तक मैंने अपनी बीवी के अलावा किसी और लड़की को वासना की नजर छुआ भी नहीं था। लेकिन आज सोनम को अपने पास पाकर मैं खुद को रोक नहीं पा रहा था। मैं किसी भी हालत में आज सोनम को अपना बनाना चाहता था।

    इसीलिए मैंने एक बार और हिम्मत करके अपना एक हाथ उसके कंधे पर रखकर हल्के से दबा दिया। इस बार मेरा प्रयास सफल हुआ, सोनम ने लंबी सांस लेकर अपना सिर मेरे कंधे पर टिका दिया। उसने एक बार आशा भरी नजरों से मेरी आँखों में देखा और अगले ही पल टी वी पर चल रहे सेक्सी सीन को देखने लगी।

    फिर कुछ देर बाद बोली- अंकल जी, क्या शादी के बाद सब ऐसा ही करते हैं?
    मैंने उसके होंठों पर उंगली रखते हुए कहा- अंकल जी मत बोलो … केवल सुमीत कहो।
    उसने हल्की सी स्माइल दी, फिर पलट कर अपना सर मेरे सीने में गड़ाते हुये मुझे हग कर लिया।

    मैंने भी उसे कस कर अपने सीने में दबा लिया। अब मैं उसके बड़े बड़े स्तनों को अपने सीने पर महसूस कर सकता था।

    अब मैंने उसके मुंह को थोड़ी पकड़ कर उठाया और उसके होंठों को अपने होंठों पर लगा कर किस करने लगा, वो भी मेरा साथ दे रही थी।
    चुम्बन करते करते मैंने उसके कुर्ते में पीछे से हाथ डाल दिया और उसकी पीठ सहलाने लगा। शायद अब तक पहली बार किसी मर्द ने उसके होंठों और उसकी नंगी पीठ को छुआ था इसलिए इस अद्भुद आनन्द के कारण उसकी आंखें बंद हो गई और वो सिसकारियाँ लेने लगी।

    कुछ देर बाद उसे अहसास हुआ कि वो वासना में बहक गई है और उसने मुझे रोका, बोली- सुमीत जी रहने दीजिए ना!
    लेकिन मना करते हुए भी वो मर्द के स्पर्श से प्राप्त आनन्द को भुला नहीं पा रही थी इसलिए मना करते हुए उसकी आवाज में आत्मविश्वास की कमी थी।

    मैंने उससे पूछा- क्या हुआ सोनम?
    वो बोली- रात के 10:30 बज चुके हैं। कहीं किसी को पता चल गया तो मेरी बहुत बदनामी होगी.
    और यह कहते हुए उसकी आँखों में आंसू आ गए।

    मैंने उसके माथे पर चूमते हुए उससे कहा- सोनम, तुम चिंता मत करो, तुम्हारी बदनामी मेरी बदनामी है. इसलिए किसी को कुछ पता नहीं चलेगा. और वैसे भी तुम 12 बजे तक तो टी वी देखती ही हो. लेकिन अगर फिर भी तुम डरती हो तो रहने दो, मैं कोई जबरदस्ती नहीं करूँगा।

    मेरी बातों से उसका डर कम हो गया और वो एक बार फिर मेरी बांहों में आ गई। अब मैंने उसके पूरे चेहरे को चूमना शुरू किया उसके कानों की लौ को किस किया और कपड़ों के ऊपर से पीठ को सहलाता रहा।

    मैंने कपड़ों के ऊपर से ही उसके बूब्स को सहलाना शुरु किया. उस पर सेक्स का शुरूर चढ़ रहा था और उसकी तेज साँसें इसका सबूत दे रही थीं। ऊपर से सहलाने के बाद मैंने उसके कुर्ते में ऊपर से हाथ डालकर उसके बूब्स को ब्रा के ऊपर से दबाया. कोई विरोध न होने पर मैंने उसकी ब्रा को कुर्ते के अंदर ही ऊपर उठाकर उसके नंगे स्तन को अपने हाथ में लेकर दबाया।

    पहली बार किसी मर्द के द्वारा अपने स्तन को छूने के अहसास से वो सिहर उठी और उसकी साँसें पहले से भी ज्यादा तेज हो गयीं।

    अब मैंने देर न करते हुये उसके कुर्ते को कमर से पकड़कर उतारने के लिए उठाया। सोनम मेरा हाथ पकड़कर धीरे से बोला- रहने दो ना प्लीज।
    लेकिन उसकी आवाज में असहमति नहीं बल्कि एक लड़की की शर्म थी।

    मैंने उसका हाथ हल्के से हटाकर उसके कुर्ते को फिर उठाया. इस बार सोनम ने दोनों हाथ उठाकर कुर्ता निकालने में अपना सहर्ष सहयोग प्रदान किया। अब मेरे सामने उसका एक नंगा स्तन था जो गोल मटोल सुडौल तथा निप्पल पर हल्के भूरे रंग का था, उसके निप्पल देखकर मुझे अपनी सुहागरात याद आ गई।
    उसके निप्पल बहुत ही सुंदर थे।

    अब मैंने देर न करते हुए उसके निप्पल को चूसना शुरू कर दिया। इस अद्भुत अहसास के रोमांच से उसका हाथ अपने आप ही मेरे सर पर सहलाने लगा। सोनम ‘और चूसो … और चूसो!’ बड़बड़ाने लगी।

    मैंने स्तन चूसते चूसते उसकी सफेद ब्रा को उसके शरीर से अलग ही कर दिया। अब वो ऊपर से पूरी नंगी थी। मैं बारी बारी से उसके दोनों स्तनों को चूस रहा था और वो इस असीम आनन्द में गोते खा रही थी।

    अब में उससे अलग हुआ, ऊपर से नीचे तक उसको देखा।
    उसने स्त्रीसुलभ लज्जा से अपनी आंखें अपने हाथों से बंद कर ली।

    मैंने उसके हाथों को आंखों से हटाकर उसको किस किया और उसे गले लगाकर बोला- आई लव यू सोनम!
    सोनम ने भी ‘आई लव यू टू!’ सुमीत बोलकर मुझे किस किया।

    तब मैं उसे उठाकर अपने बेड पर ले गया और बहुत प्यार से उसे वहां लिटाया। बेड पर ऊपर से नंगी सोनम किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी।
    अब मैंने अपने अंडरवियर को छोड़कर बाकी सारे कपड़े निकाल दिए।
    सोनम मेरी छाती के बालों को देखकर मंत्रमुग्ध हो गयी।

    मैं सोनम के बगल में लेट गया और उसको ऊपर से नीचे तक चुम्बन करने लगा। उसके बूब्स को पीने के बाद उसकी नाभि को चूमा। वो बस आंख बंद करके आहें भर रही थी।

    अब मैंने उसके सलवार का नाड़ा ढीला किया और सलवार को नीचे की तरफ खींचा. उसने अपनी गांड उठाकर सलवार निकलने में अपना सहयोग दिया।
    अब वो केवल पैंटी में थी।

    उसकी पैंटी भूरे रंग की थी तथा इलास्टिक के पास थोड़ी फटी हुई थी। उसके काम रस के कारण उनकी पैंटी बुर के पास पूरी भीग चुकी थी। कुँवारी बुर की चुदाई के लिए तैयार हो रही थी.
    मैंने उसकी बुर की दरार में लगे उसके काम रस को पैंटी के ऊपर से ही चाटा तो वो चिंहुक उठी और गांड उठाकर मजे लेने लगी।

    अब मैंने अपनी दो उंगली उसकी पैंटी की इलास्टिक में पैंटी उतारने के लिए डाली। उसने पैंटी को पकड़कर अपनी बुर को नंगा होने से रोका, बोली- ये मत करो ना!
    मैंने उसके चेहरे की तरफ देखा उसके चेहरे पर डर और शर्म के भाव साफ दिखाई दे रहे थे।

    सोनम के चेहरे का ये भाव, डर समाज की बदनामी का नहीं बल्कि उसकी पहली चुदाई का था। मैंने उसके हाथ को हल्के से हटाकर उसकी पैंटी को धीरे से निकाला।
    उसने अपने कूल्हे थोड़े से उठाकर अपना विरोध खत्म करते हुए पैंटी भी निकल जाने दी।

    अब वो पूरी नंगी मेरे सामने पड़ी हुई थी।

    उसकी बुर थोड़ी उभरी हुई तथा हल्की सी सांवली थी, उसकी छोटी छोटी झांटें बुर रस में भीगी हुई चमक रही थी. बुर के होंठ एक दूसरे से चिपके हुए थे। बुर की दरार ऐसी थी जैसे किसी ने पेंसिल से बना दी हो।

    उसकी बुर को देखकर समझ गया था कि सोनम के बाद उसकी प्यारी बुर को देखने वाला पहला खुशनसीब इंसान मैं ही था।
    मैंने सोनम की बुर को चूम कर के उसकी मुंहदिखाई उसे दी.

    बुर पर चुम्बन से सोनम की साँस एक बार फिर तेज हो गई।

    अब मैंने अपना अंडरवियर भी निकाल दिया औऱ सोनम को सलामी दी रहे अपने 8 इंच के लंड को सोनम के हाथों में दे दिया। सोनम ने कांपते हुए हाथों से मेरे लंड को पकड़ा।

    सोनम ने लंड को आगे पीछे करके अच्छी तरह देखा जैसे कोई इंसान किसी नई चीज को पहली बार देखता है और लंड के सुपाड़े को किस करके छोड़ दिया।

    अब मैं नीचे आया और सोनम के पैरों के बीच टांगों को फैलाकर बैठ गया। मैंने अपनी जीभ बुर की दरार में डाल दी और उसकी बुर को चूसना शुरु कर दिया।

    बुर पर हुये इस हमले से सोनम पागल होने लगी और मेरे बालों को पकड़कर अपनी बुर पर दबाने लगी.
    वैसे भी मेरी बीवी कहती है कि मैं बुर बहुत अच्छी चूसता हूँ।

    थोड़ी देर बुर चुसवाने के बाद सोनम का अपने ऊपर कंट्रोल खत्म हो गया ‘और चाटो … चूसो … पी जाओ मेरा पूरा पानी … लाल कर दो मेरी बुर को चूस चूस के …’ ये सब बड़बड़ाने लगी।

    थोड़ी देर में सोनम बुर की चुदाई के लिए गिड़गिड़ाने लगी और बोली- प्लीज चोद दो मुझे, नहीं तो मैं मर जाऊँगी. प्लीज … प्लीज … प्लीज … चोद दो न मुझे … फाड़ दो मेरी बुर को … अब सहन नहीं होता।

    मैंने भी अब कुँवारी बुर की चुदाई में और देर करना ठीक नहीं समझा और अपना लंड उसकी बुर के छेद पर टिका दिया। सोनम की बुर के रस और मेरे लंड के प्रिकम के कारण चिकनाई की कोई कमी नहीं थी।

    सोनम को मैंने बोला- आज तुम्हारा पहली बार है तो थोड़ा दर्द होगा, बाद में मजा आएगा।
    उस प्यासी जवानी के अंदर चुदाई की आग लगी हुई थी, उसने बोला- सुमीत आप देर मत करो, बस फाड़ दो, मेरी बुर को सारा दर्द मैं सह लूँगी।

    मैंने सोचा ‘ठीक है मुझे क्या करना … जब ये बोल ही रही है तो!’ मैंने लंड को बुर के छेद पर सेट करके हल्का का धक्का लगाया.
    सोनम को थोड़ा सा दर्द हुआ और उसकी आह निकल गई लेकिन फिर भी वो बोली- सुमीत प्लीज जल्दी करो … फाड़ दो मेरी बुर को।

    दोबारा मैंने देर न करते हुये, अपने दोनों हाथों को सोनम के कंधों पर टिकाकर जोरदार धक्का दिया, मेरा आधा लंड सोनम की कौमार्य झिल्ली को फाड़ता हुआ उसकी बुर में समा गया और वो दर्द के कारण बिन पानी की मछली की तरह तड़पने लगी।

    सोनम गिड़गिड़ाने लगी- सुमीत प्लीज छोड़ दो मुझे … मुझे कुछ नहीं करना, मैं मर जाऊंगी।

    उसकी बुर सच में फट चुकी थी और उसमें खून बह रहा था जो मेरे लंड को गीला कर चुका था।

    मैंने सोनम को उसकी बुर के बारे में कुछ नहीं बताया, नहीं तो वो मुझे आगे नहीं बढ़ने देती।
    मैं उसी अवस्था में लेटे लेटे उसके बूब्स को सहलाता रहा। जब उसका दर्द कम हो गया तो मैं अपने आधे ही लंड को अंदर बाहर करने लगा।

    थोड़ी देर बाद उसे मजा आने लगा, तब मैंने उसे बताया कि अभी आधा ही लंड अंदर गया है। अगर वो कहे तो पूरा डाल दूँ।
    सोनम बोली- अब दर्द तो नहीं होगा?
    मैंने कहा- थोड़ा सा होगा। लेकिन यह दर्द एक बार हर लड़की को सहना ही पड़ता है। आज के बाद दर्द नहीं होगा, केवल मजा आयेगा।
    उसने कहा- ठीक है लेकिन आराम से डालना।
    मैंने ओके बोला. पर मुझे पता था कि लंड कैसे डालना है।

    मैंने कुछ देर और आधे लंड को अंदर बाहर किया और उसके बूब्स से खेलता रहा।
    जब मुझे लगा कि अब सोनम सामान्य हो चुकी है और दर्द सहने के लिये तैयार है. तब मैंने अपने दोनों हाथों से उसके कंधों को दबाया और पूरी ताकत से अपना लंड उसकी बुर में डाल दिया।

    लंड बुर की सारी दीवारों को फाड़ता हुआ सीधा बच्चेदानी से टकराया।
    सोनम की चीख निकल गयी, उसकी आंखें फटी की फटी रह गईं, शरीर अकड़ गया और वो दर्द के कारण लगभग बेहोश हो गई.

    मैं डर गया और कुछ देर तक उसी अवस्था में उसके ऊपर लेटा रह के उसे सहलाता रहा. कुछ देर बाद जब उसका दर्द कुछ कम हुआ तो मैंने धीरे धीरे धक्के लगाना शुरू किये।

    जब उसे भी मजा आने लगा तो वो भी चूतड़ उठाकर चुदाई में अपना सहयोग देने लगी। अब मैं उसे पूरे जोर से चोद रहा था, मेरा लंड उसकी बच्चेदानी से टकरा रहा था। अब उसका दर्द बिल्कुल खत्म हो गया था। वो आह आह करके अपनी पहली चुदाई का पूरा मजा ले रही थी।

    करीब 10 मिनट की हाहाकारी चुदाई के बाद सोनम और मैं एक साथ झड़े।

    मैंने उसे किस किया और बगल में लेट गया। कुँवारी बुर की चुदाई हो चुकी थी.

    उसने अपनी बुर देखी तो पूरी सूज गयी थी। बुर से उसके पानी और मेरे वीर्य का मिश्रण निकल रहा था और उसके खून से बेडशीट पर बहुत बड़ा धब्बा पड़ गया था।
    खून देखकर वो डर गई तो मैंने उसे समझाया- हर लड़की के पहली बार खून आता है इसमें कोई डर की बात नहीं है।

    उसकी बुर में बहुत दर्द हो रहा था जिसके कारण जब वो उठ कर चली तो वो लंगड़ा के चल पा रही थी। मैंने उसे एक दर्दनिवारक गोली दी और कहा- अब तुम घर जाओ क्योंकि रात के 12 बज चुके हैं. कहीं किसी को शक न हो जाये।

    वो घर चली गयी।

    अगले दिन मैंने उसे एक गर्भ निरोधक लाकर दी।

    इस घटना के बाद भी सोनम हमारे घर आती रही लेकिन वो सब फिर कभी नहीं हुआ क्योंकि मुझे सोनम की बदनामी का डर था।

    अभी 2 महीने पहले सोनम की शादी हो गई। मैंने उसकी शादी में उसके पिताजी की बहुत सहायता की।

    सोनम जब भी मायके आती है तो हमारे घर मेरी बीवी से मिलने जरूर आती है और मुझे मुस्करा के नमस्ते करती है।
    वो अपने ससुराल में बहुत खुश है और मैं भी उसे खुश देख कर खुश हूँ.

  • मेरी गर्लफ्रेंड की चुत की कहानी

    मैं अपनी कुंवारी गर्लफ्रेंड की चुत की कहानी बता रहा हूँ कि कैसे मैंने उसे पटाकर गर्लफ्रेंड बनाया और लम्बे अरसे तक रोमांस के बाद मैं उसकी चूत की सील तोड़ पाया.

    दोस्तो, मेरा नाम रजा है, मेरी उम्र 21 साल है, और मैं मुरादाबाद के पास सम्भल नामक कस्बे से हूँ। मेरी हाईट 5 फीट 10 इंच है, मेरा लण्ड 7 इंच लम्बा और 3.5 इंच मोटा है। मैं शहर का रहने वाला हूँ और देखने में अच्छा हूँ।

    यह मेरी पहली सैक्स स्टोरी है जो मैं आप सब लोगों को बताने जा रहा हूँ, यह एक सच्ची घटना है।

    मैं अपनी गर्लफ्रैंड के बारे में बता दूँ, उसका नाम ज़ेबा है, उसका रंग बिल्कुल दूध से सफेद है। उसका फिगर 32-34-36 है। अदाएँ ऐसी की हर कोई पागल हुआ फिरता था, लेकिन वह बुर्के में रहती थी, वह दिखने में बिल्कुल फिल्मों की हीरोइन लगती थी।
    बात 2 साल पहले की है, वह मेरे साथ ग्रेजुएशन के दूसरे साल में थी।

    जब पहली बार वह ट्यूशन पर पढ़ने आयी तो मैं तो उसको देखता ही रह गया, क्या क़ातिल लग रही थी वह!
    पहले ही दिन वह मुझको पसंद आ गयी, मैंने दिल में सोच लिया था कि इसको गर्लफ्रैंड बनाना ही है।

    फिर 2 दिन बाद वह दूसरे ट्यूशन पर भी साथ हो गयी, मेरी तो मानो जैसे लॉटरी ही लग गयी। फिर 4 या 5 दिन हुए थे कि वह मेरे साथ तीसरे ट्यूशन पर भी आ गयी, मुझको तो यकीन ही नहीं हो रहा था.
    मैंने सोचा कि लगता हूँ ऊपरवाला भी मेहरबान है जो यह मेरे साथ 3 ट्यूशन पर है।

    दिन गुज़रे तो मैंने उसकी 1 सहेली से कहा कि मुझको यह पसंद है, तू मेरी बात कर दे इससे एक बार!
    तो उसकी सहेली मान गयी, उसने उससे अलग में जाकर कह दिया।

    अब यहाँ हमारी डर के मारे गांड फट रही थी, उसने कुछ कह तो नहीं लेकिन 3 दिन के बाद मुझको कॉल की और अपना नाम बताया.
    फिर कहने लगी- मैं ऐसी लड़की नहीं हूँ, तुम मुझे छोड़ दो. तुमको तो बहुत मिल जाएंगी।
    मैंने उससे कुछ नहीं कहा।

    दिन गुज़रते गए हम साथ में पढ़ते रहे, फिर ग्रेजुएशन में उसका एक दिन व्हाट्सएप पर मैसेज आया, मुझको तो यकीन ही नहीं हो रहा था, हम दोनों की बात शुरू हुई. 2 महीने बात हुई, हम कई बार मिले भी! हम सेक्स की बातें भी करते थे.
    इस तरह हमारा रोमांस चलता रहा लेकिन चुत मिलने की कहानी हमेशा दूर लगती रही थी.

    फिर वह एक स्कूल में पढ़ाने लगी थी। अब मेरे दिल में उसको चोदने की इच्छा हुई। पहले मैंने उससे चुदाई की बातें मोबाइल पर करनी शुरू की। अब वो समझ चुकी थी कि मैं उसे चोदना चाहता हूँ.

    एक दिन मैंने उसको कॉल की तो वह कहने लगी- मैं स्कूल में हूँ, और बच्चों के एग्जाम चल रहे हैं, जल्दी छुट्टी हो जाएगी.
    तो मैंने कहा- मुझको मिलना है.
    तो वह तैयार हो गयी.

    मैं छुट्टी के टाइम उसके स्कूल चला गया और उसको वहां से ले आया., हमारे पास मिलने के लिए जगह नहीं थी तो मैं उसको अपनी नानी के घर ले गया.
    मेरे मामू अपने काम पर गए हुए थे तो मैं उसको बैठक में ले गया।

    मैं अपने साथ कॉन्डोम ले कर गया था. पहले तो हमने ऐसे ही कुछ बातें की, फिर मैंने उससे कहा- मुझको किस करना है.
    पहले तो वह मना करने लगी लेकिन मैंने ज़्यादा कहा तो वह मान गयी।

    मैंने उसके होंठो से अपने होंठ लगा दिए. यह हमारा पहला किस था. हम दोनों किस में ऐसे खोये कि 10 मिनट तक किस ही करते रहे।

    उसके बाद उसने अपना मुंह हटा लिया और कहने लगी- बहुत ज़िद्दी हो … हो गयी इच्छा पूरी? अब मैं जाऊँ?
    मैंने कहा- अभी कहाँ … अभी तो बहुत कुछ बाकी है.

    तो वह समझ गयी और कहने लगी- यह सब नहीं!
    लेकिन मैंने फिर से ज़िद की और वह मान गयी।

    मैंने फिर से उसको किस करना शुरू किया, इस बार दोनों ही मूड में आ गए। मैंने किस करते हुए एक हाथ उसके दूध पर रख दिया और बुर्के के ऊपर से ही सहलाने लगा. जब उसने कुछ नहीं कहा तो मैंने हिम्मत करके हाथ उसके कपड़ों के अंदर घुसा दिया.

    वह ब्रा पहने हुए थी, मैं ब्रा के ऊपर से ही सहलाने लगा। उसको भी मज़ा आ रहा था, ऊके साथ यह सब पहली बार हो रहा था, फिर मैंने किस छोड़कर उसके कपड़े उतारे तो वह मना करने लगी, मैंने उसके कपड़े उतार दिये, उसके बदन पर बस ब्रा और पैंटी ही बची थी।

    मैं उसको फिर से किस करने लगा, वह भी मेरा साथ देने लगी।
    किस करते हुए मैंने उसकी ब्रा का हुक खोल दिया, उसके 32 के चूचे मेरे सामने आज़ाद हो गए, मैंने जैसे ही उनको अपने हाथ में ले कर मसला तो वह सिहर उठी, उसको मज़ा आने लगा था.

    मैं उसके होंठ छोड़कर उसके चूचों पर आ गया और मुँह में लेकर चूसने लगा. वह तो मेरी इस हरकत से मदहोश होने लगी, तड़पने लगी.

    मैं चूचे चूसते हुए ही उसकी पेन्टी में हाथ घुसाने लगा. जैसे ही मेरा हाथ उसकी चूत पर गया तो मानो उसको करंट लग गया हो, वह उछल गयी और मुझसे लिपट गई।

    मैंने देर न करते हुए उसकी पेन्टी भी उतार दी और उसकी चूत को अपने हाथ से रगड़ने लगा, वह मदहोश हुए जा रही थी।

    फिर मैंने अपने सारे कपड़े उतारे और आ गया उसके ऊपर!
    मैंने अपने लण्ड पर कंडोम चढ़ाया, उससे पूछा- डाल दूँ?
    तो वो कहने लगी- देर मत लगाओ … बस जल्दी से डाल दो.

    मैंने उसकी चूत को हल्का सा खोला और लण्ड का टोपा उसकी चूत के मुंह पर रखा.
    अब वह डरने लगी तो मैंने उसे समझाया कि कुछ नहीं होगा.

    मैं उसे किस करने लगा, किस करते हुए मैंने एक जोरदार झटका मारा, तो मेरा लण्ड उसकी चूत को चीरता हुआ आधा अंदर चला गया.
    वह जोर से चिल्लायी ‘उम्म्ह … अहह … हय … ओह …’ रोने लगी, कहने लगी- मुझे छोड़ दो, बहुत दर्द हो रहा है, मैं मर जाऊँगी.
    मैं रुक गया और उसको किस करने लगा।

    जब वह थोड़ी नार्मल हुई तो मैंने आराम आराम से अंदर बाहर करना शुरू किया, फिर अचानक से ज़ोर का झटका मारा और पूरा लण्ड अंदर घुसा दिया, वह फिर से तड़पने लगी।
    फिर मैं आराम से अंदर बाहर करने लगा।

    अब उसको भी थोड़ा सुकून मिल गया था, उसको भी मज़ा आने लगा.
    मैंने उसकी टाँगें उठाकर अपने काँधे पर रखी और फिर से चुदाई चालू कर दी।

    5 मिनट की चुदाई के बाद मैं झड़ गया और उसके ऊपर ही लेट गया।

    उसे लगा कि उसकी चूत से कुछ बह रहा तो उसने अपनी चूत में हाथ लगा कर देखा तो उसे पता कि वो खूँ है.
    वह कहने लगी- जान, मेरी चूत से खून निकल रहा है, क्या करूँ?

    मैं कपड़ा लाया, उसका खून साफ किया और उसको फिर से किस करने लगा.

    वह कहने लगी- जान, देर हो रही है, घर पर अम्मी इंतज़ार कर रही होंगी, अब जाने दो, अब तुम्हारी इच्छा पूरी हो गयी।
    मैं कहने लगा- अभी तो बस एक राउंड हुआ है.
    तो वो कहने लगी- अब फिर कभी कर लेना, अब तो यह तुम्हारी ही है।

    मैंने उसको अपने हाथों से कपड़े पहनाये और उसको भेज दिया।

    दोस्तो, यह थी मेरी गर्लफ्रैंड की सील तोड़ चुदाई! उम्मीद है आपको चुत की कहानी पसंद आई होगी.
    अगर ग़लती हुई हो तो माफ करना।

    .

  • मेरी चूत स्टोरी बॉयफ्रेंड से सील तोड़ चुदाई की

    मेरी चूत स्टोरी में पढ़े कि मेरी चूत की पहली बार चुदाई कैसे हुई. मेरा पहला बॉयफ्रेंड मुझे अपने दोस्त के कमरे में ले गया. लेकिन वो साला फिसड्डी निकला तो मैंने नया यार बना लिया.

    हैलो फ्रेंडज़, मेरा नाम नीलम है. मैं मध्यप्रदेश की रहने वाली हूँ. मैं एक बहुत सेक्सी लड़की हूँ और मेरा साइज 28-30-32 है.

    यह चूत स्टोरी उन दिनों की है, जब मैं बीएससी फर्स्ट ईयर में थी. मैं एक लड़के को बहुत चाहती थी, वो लड़का भी मुझे पसंद करता था.

    एक दिन बात है, जब मैं कॉलेज जा रही थी. तब मैं बस स्टॉप पर खड़ी अपनी बस का इंतजार कर रही थी. तभी मेरा ब्वॉयफ्रेंड बाइक से आया और उसने मुझे साथ चलने को कहा. मैं भी बड़ी खुशी से उसके साथ बाइक पर बैठकर कॉलेज के लिए निकल पड़ी.

    उसने बाइक को लम्बे वाले रास्ते से ले जाने का कहा. मैं उसके साथ मस्ती से चिपकी बैठी थी. मैंने भी उससे कह दिया कि जानी जब तू मेरे साथ है, तो क्या डर है, तू जिधर भी ले चल मैं तेरे साथ राजी हूँ.

    वो हंस दिया और वोला- सोच ले मेरी जान … मैं तुझे जंगल के रास्ते से ले जाने वाला हूँ.
    मैंने उसकी छाती से चिपकते हुए कहा- हां ले चल … मुझे कोई चिंता नहीं है.
    उस समय तक हमने कभी सेक्स नहीं किया था लेकिन हम दोनों अपने पहले सेक्स के लिए उतावले हो रहे थे, चूत स्टोरी बनाने के लिए आतुर हो रहे थे.

    वो मुझे जंगल के रास्ते से ले आया. एक सुनसान जगह देख आकर उसने रास्ते से अलग हटते हुए एक कच्ची पगडंडी पर बाइक उतार दी.

    कुछ आगे ले जाकर उसने साइड में बाइक रोकी और मुझे किस करना शुरू कर दिया. मैं भी उसका साथ देने साथ देने लगी. उसने मेरी चूची पर हाथ लगाया और चूची पकड़ कर जोर जोर से दबाने लगा. मैं आज उसके साथ इस घने जंगल में मतवाली हुई जा रही थी. मैं चुदास से पागल हो रही थी और मेरी चूत में पानी निकलने लगा था.

    उसके बाद उसने मेरी पैन्ट का हुक खोला और पैन्टी सरका कर मेरी चूत में उंगली करने लगा. मैं मस्त होने लगी. अब मेरा भी मन हो रहा था कि आज मैं इसके लंड से यहीं पर चुद जाऊं. लेकिन रास्ते में कांटें होने की वजह से चुदाई नहीं हो सकती थी. मेरा मन बेक़ाबू हो रहा था, तो मैंने उसके पैंट के अन्दर से ही उसके लंड को पकड़ लिया और हिलाने लगी. मैं उसके लंड को आगे पीछे करने लगी. वो भी मेरी चूत में लगातार उंगली पेले जा रहा था.

    थोड़ी देर बाद मेरी चूत से पानी निकलने को हो गया … मैं अकड़ने लगी. तभी मैंने जोश में उसका लंड मरोड़ दिया.
    वो जोर से चीख़ उठा- आं आह … उई … क्या कर रही है … लंड उखाड़ेगी क्या.

    मेरी हंसी छूट गई और मैंने उसका लंड छोड़ दिया. लेकिन उसी वक्त उसने भी मेरी चूत के दाने को पकड़ कर खींच दिया. मुझे भी बहुत दर्द हुआ. मैंने भी उसको धक्का दे दिया. फिर हम दोनों हंस दिए और फिर से एक दूसरे से खेलने लगे. उसने मेरी चूत में फिर से उंगली करना शुरू कर दी. मैंने भी उसके लंड की मुठ मारना चालू कर दी. कुछ देर के बाद उसका पानी निकल गया. मेरी चूत भी झड़ गई.

    उसके बाद हम दोनों कुछ देर अपनी साँसें काबू में करते रहे. फिर हम वहां से निकल पड़े.

    मैंने झुझलाते हुए कहा- चड्डी के अन्दर जो छुपा रखा है न … उसको देखना है.
    उसने कहा- चड्डी के अन्दर क्या है?
    मैंने उसका लंड मसलते हुए कहा- इसको देखना है.
    उसने मेरी दूध दबाए और कहा- उसका कोई नाम भी तो होगा.

    मैं समझ गई कि ये मुझसे लंड कहने के लिए कह रहा है. मैंने कहा- हाँ उसका नाम है न.
    वो मेरी आंखों में आंखें डाल कर बोला- बताओ न क्या नाम है इसका?
    मैंने भी उसकी आंखों में आंखें डाल कर कहा- मुझे तुम्हारा लंड देखना है.
    उसने मुझे चूमा और कहा- अब ये मेरा नहीं है … ये तुम्हारा लंड है.
    मैंने फिर उसको चूमा और कहा- हां मुझे अपना लंड देखना है.

    उसने अपने सारे कपड़े निकाल दिए. उसका लंड हवा में झूल रहा था.
    वो बोला- लो, अपना लंड देख लो और इसे प्यार भी कर लो.

    मैं उसके लंड को हाथ में पकड़ कर हिलाने लगी. मैंने पहली बार लंड देखा था. मुझे बड़ा अजीब सा लग रहा था. मैं जोर जोर से लंड हिलाने लगी. कुछ ही समय में उसका रस मेरी हथेली में ही निकल गया.

    मैंने पूछा- ये कैसे निकल गया?
    वो बोला- यार नीलम, मेरा जल्दी निकल जाता है … ये पहले से बीमारी है. हम कल मिलते हैं और चुदाई करेंगे.
    ये बोल कर वो अपने कपड़े पहनने लगा.

    मुझे उस वक्त तक लंड के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी कि ये दुबारा भी खड़ा हो सकता है, यदि कुछ देर कोशिश की जाए.

    अपनी नाकाम चूत स्टोरी से मैं मायूस हो गई और हम दोनों वहां से निकल आए. इस वक्त मेरी तो चुत में आग लगी थी … मगर क्या कर सकती थी.

    उसके बाद 3 दिन तक मेरी उससे बात नहीं हुई. फिर उसने कॉल किया, तो वो मुझसे फिर से बोला कि मिलना है.

    मैंने हां तो बोल दी … लेकिन उससे नहीं मिली. उससे मेरा ब्रेकअप हो गया.

    कुछ दिन बीत जाने के बाद मेरे नम्बर पर एक अनजान नम्बर से कॉल आई. उसने अपना नाम हेमंत बताया. मुझे उसकी बातें अच्छी लगीं. फिर हम दोस्त बन गए.

    एक महीना बाद उसने मुझे प्रपोज किया और मैंने भी हां कर दी, क्योंकि मैं हेमंत के लंड को चूत में लेना चाहती थी. उसके बाद हेमंत ने मुझे मिलने के लिए एक होटल में बुलाया. मैंने भी हां कर दी और उससे मिलने होटल में चली गई. मैंने वहां जाकर हेमंत को देखा, तो वो बहुत ही हैंडसम था. उसकी हाइट 5 फ़ीट 6 इंच की थी. हालांकि उसकी बॉडी औसत ही थी.

    उसके बाद हम दोनों एक कमरे में चले गए. उधर कुछ देर बैठ कर बात हुई, फिर मैं कमरे के बाथरूम में जाकर फ्रेश हुई. उसने मेरे साथ कोई जल्दबाजी नहीं की. इससे मुझ पर उसका अच्छा प्रभाव पड़ा.

    इसके बाद हम दोनों खाना खाने बाहर आ गए. खाना खाने के बाद वापस होटल के कमरे में आने के बाद उसने मुझे किस किया. मैंने भी उसको किस किया. हम दोनों में गर्मी बढ़ने लगी. कुछ देर बाद उसने मेरे सारे कपड़े निकाल दिए. मुझे भी लगने लगा था कि अब मैं जल्दी से चुद जाऊं.

    उसने मेरे कपड़े निकालने के बाद अपने भी निकाल दिए. अब मैं सिर्फ पैन्टी में उसके सामने बेड पर चित लेटी थी. वो अपने लंड को मेरे सामने निकाल कर हाथ से आगे पीछे करने लगा. उसका लंड काफी सुन्दर दिख रहा था. एकदम लाल सुपारा अपनी चमक से मेरी आग को भड़का रहा था. उसके लंड का साइज यही कोई 6 इंच का था.

    मैं भी उसके लंड को देख कर मन ही मन खुश होने लगी थी. साथ ही मैं अपनी चूचियों के निप्पलों को अपनी उंगलियों में दबा कर मींजने लगी थी. मेरी आंखों में वासना का खुमार चढ़ने लगा था. पर अभी भी मैं कुछ सोच रही थी कि कहीं इसके लंड का काम तमाम न जाए. मुझे पिछले अनुभव से अभी भी उसके लंड की ताकत को देखना था.

    कुछ पल लौड़ा हिलाने के बाद वो मेरे पास आ गया. उसने मुझे किस किया और अपने होंठों में मेरी चुची को दबाकर चूसने लगा.
    उसकी चूची चुसाई से मेरे मुँह से कामुक आवाजें निकलने लगी- आंआह … उन्हह … उई … इस्स … धीरे … आह मैं मर गयी.

    उसने मेरी दोनों चूचियों को मन भर चूसा और मेरा हाथ अपने लंड पर रखवा दिया. मुझे उसका लंड बड़ा सख्त सा लगा. मैं उसके लंड को अपने हाथों से सहलाने लगी. उसने मेरी आंखों में अपनी आंखें डालीं और अपना लंड मेरे मुँह की तरफ बढ़ा दिया. मैंने खुद उसके लंड को पकड़ कर अपने मुँह की तरफ खींचा तो उसने मेरे मुँह में अपना लंड डाल दिया.

    मैं उसके मस्त मोटे लंड को चूसने लगी. कुछ देर तक लंड चुसाने के बाद उसने मेरी चूत में लंड लगा दिया. वो मेरी चूत की फांकों में लंड का सुपारा घिसने लगा. मुझे इस वक्त बेहद आग लग चुकी थी और उसका कड़क लंड मुझे इस समय अपनी चूत की खुराक दिखने लगा था.

    वो मेरी चूत में लंड डालने लगा. लेकिन चूत सील पैक थी और लंड मोटा था. इसलिए लंड चूत के अन्दर नहीं जा रहा था. वो बार बार इधर उधर फिसला जा रहा था. उसके लंड की बेबसी पर मैं हंस रही थी.

    वो बोला- हंस मत यार … मुझे गुस्सा आ रहा है.
    मैं बोली- तो निकाल दो अपना सारा गुस्सा मेरी चूत में … फट क्यों रही है?
    उसने कहा- ठीक है … देखता हूँ कि किसी फटती है.

    उसने मुझे फिर से पकड़ा. अपना लंड पकड़ कर चूत में लगाया और एक बार में ही पूरा लंड चूत में उतार दिया. मैं दर्द से तड़पने लगी और उसे मना करने लगी.

    मैंने कहने लगी- उम्म्ह … अहह … हय … ओह … मर गई … निकाल लो … मुझे नहीं चुदाई करवाना … आह मेरी फट रही है.
    लेकिन इस बार उसने मेरी एक न सुनी और लंड से चूत की चुदाई करता रहा. उसका लंड अन्दर तक पेवस्त हो गया था, जिससे मेरी सील टूट चुकी थी और मैं दर्द से आह भर रही थी.

    वो मस्त सांड सा मेरी चूत में पिला पड़ा रहा. कुछ समय बाद मेरा दर्द कम हुआ और मैं भी उसका साथ देने लगी. वो मेरी चूची दबाते हुए मेरी चूत के चीथड़े उड़ाने में लगा था. जल्दी ही मैं निकल गई. मगर वो लगा रहा.

    मेरे झड़ने के कोई दस मिनट बाद वो भी चरम पर आ गया. उसने मुझे कुछ कहा ही नहीं … बस सीधा मेरी चूत में अपना लावा निकाल कर मेरे ऊपर ढेर हो गया.
    हम दोनों स्खलित हो चुके थे और एक दूसरे की बांहों में पड़े थे.

    कुछ देर बाद मैं उठी और देखा तो बिस्तर पर खून ही खून के दाग लग गए थे. मैं घबराई, तो वो हंसने लगा.
    फिर उसने मुझे समझाया कि तेरी सील टूट गई है … अब तू मजे लेने के लिए खुल गई है.

    मुझे भी मजा आने लगा. मैंने सोचा कि अब खेल खत्म हो गया है. मगर कुछ देर बाद उसका लंड फिर से खड़ा हो गया. मैं हैरान थी कि इसका लंड तो फिर से खड़ा हो गया.
    मैंने उससे पूछा- अब ये कैसे खड़ा हो गया?

    उसकी समझ में नहीं आई, तो उसने मुझसे पूछा- ये खड़ा क्यों नहीं हो सकता?
    मैं चुप थी, उससे कह भी नहीं सकती थी कि पिछली बार क्या हुआ था.

    मैंने कुछ नहीं कहा … बस मुस्कुरा दी. उसने मुझे फिर से लंड चूसने के लिए कहा. मैंने लंड चूसा तो वो फिर से एकदम लोहा बन गया. मेरी समझ में आ गया कि लंड में दम हो, तो वो कितनी ही बार खड़ा हो सकता है.
    उस दिन हम दोनों ने चार बार चुदाई की. मैं आज पूरी तरह से तृप्त हो गई थी.

    इसके बाद उसने मुझे कई बार चोदा और हर बार उसने मुझे चोद कर मस्त कर दिया.

  • भाभी की चूत को उसके मायके में जाकर चोदा


    कैसे हो दोस्तो? मैं आपके लिए पड़ोसन भाभी की चूत की एक कहानी लेकर आया हूं. उससे पहले मैं अपने बारे में कुछ बता देता हूं. मेरे दोस्त मुझे प्यार से योगू बुलाते हैं. मैं एक 26 साल का सेक्सी, हैंडसम और अच्छे घर का लड़का हूं. जब से मैं जवान हुआ हूं मेरा लंड मुझे चैन से नहीं बैठने देता है. मैं रोज ही अपने लंड को हिलाता हूं. इसकी प्यास बुझती ही नहीं है. मुझे चुदक्कड़ आंटियां और प्यासी भाभियां बहुत पसंद हैं.
    यह बात उन दिनों की है जब मैं बस से कॉलेज जाया करता था. आप सब तो जानते ही हैं कि सुबह के टाइम पर बसों में कितनी भीड़ होती है. मैं हमेशा की तरह अपने कॉलेज जा रहा था. उस दिन मेरे साथ ही मेरे पड़ोस की एक भाभी भी उस बस में चढ़ गई. बस में काफी भीड़ थी.
    भाभी ने मेरी तरफ देखा और मैंने भाभी की तरफ. हम दोनों पास में ही खड़े हुए थे. फिर कुछ दूर चलने के बाद बस में और ज्यादा लोग चढ़ गये. अब बस बिल्कुल खचाखच भर गई. भाभी की मोटी गांड मेरे लंड से आकर सट गई. जैसे ही मुझे इस बात का अहसास हुआ कि भाभी की गांड मेरे लंड से सट चुकी है तो मेरा लंड मेरी पैंट में खड़ा होना शुरू हो गया.
    मैंने हल्का सा जोर लगा कर अपने लंड को भाभी की गांड की दरार पर मसल दिया. भाभी ने पीछे मुड़ कर देखा. एक बार तो मैं डर गया कि शायद भाभी गुस्सा हो गई होगी. लेकिन उसने मुझे देख कर एक स्माइल दी और फिर मुझसे कहा- मेरे बैग को ऊपर रख दो.
    मेरी जान में जान आई कि भाभी गुस्सा नहीं हो रही थी.
    मैंने भाभी के बैग को ऊपर सामान रखने की जगह पर रख दिया. फिर भाभी आराम से खड़ी हो गई.
    हम दोनों में बातें होने लगी.
    मैंने भाभी से पूछा कि वो कहां जा रही है तो भाभी ने बताया कि वो अपने मायके जा रही है.
    भाभी अकेली ही थी इसलिए मुझे भी कोई डर नहीं था. बीच बीच में जब धक्के लगते थे तो भाभी मुझसे बिल्कुल चिपक जाती थी. ऐसा करते करते मेरे लंड का तन कर बुरा हाल हो गया.
    फिर मैंने महसूस किया कि भाभी भी अपनी गांड मेरे लंड पर धकेल रही थी. वो अपनी गांड की दरार को मेरे लंड पर सटा कर पीछे की तरफ दबाव बना रही थी. मैं भी बदले में अपने लंड को उनकी गांड की दरार में पूरा का पूरा घुसाने की कोशिश करने लगा. बहुत मजा आ रहा था. मन कर रहा था अभी भाभी को नंगी करके चोद दूं लेकिन जैसे तैसे मैंने खुद को कंट्रोल करके रखा हुआ था.
    हम दोनों आपस में बातें करते हुए ऐसे दिखा रहे थे कि सब कुछ नॉर्मल ही हो रहा है.

    उसके कुछ पल के बाद भाभी ने अपना हाथ धीरे पीछे ले जाकर मेरे लंड को पकड़ लिया और उसको सहलाने लगी. मेरी तो हवा टाइट हो गई. भाभी भरी बस में मेरे लंड को पकड़ कर सहला रही थी.
    मैंने भी पूरा जोर लगा कर भाभी की तरफ अपने शरीर के वजन को आगे धकेल दिया. हम दोनों इस कामुक मदहोश कर देने वाले पलों का मजा ले रहे थे.
    तभी मैंने सीट वाले डंडे पर अपने हाथ को आगे की तरफ रख लिया. भाभी ने अपने मस्त चूचों को मेरी कुहनी के आगे वाले भाग की तरफ अपने चूचों को मेरे हाथ से सटा दिया और मेरे हाथ पर अपने चूचों को स्पर्श देने लगी.
    मैं पागल सा होता जा रहा था. इधर भाभी के अंदर भी सेक्स पूरा भड़का हुआ था.
    फिर मैंने आस पास देखा कि कोई हमारी इस हरकत पर ध्यान तो नहीं दे रहा. जब सब जगह नजर दौड़ाने के बाद मैंने ठीक ठाक पाया तो मैंने हल्के से अपने हाथ को भाभी के चूचों पर लाकर उनको छेड़ने लगा. मेरे हाथ की उंगलियां भाभी के चूचों के निप्पलों पर लग रही थीं.
    भाभी की हल्की सी सिसकारी निकलना शुरू हो गई थी. भाभी के चूचों के निप्पल काफी टाइट थे. उसको छूकर पता नहीं चल रहा था कि वो दो बच्चों की मां है. मैंने जोर से उसके निप्पलों को मसलना शुरू किया तो भाभी बोली- आज मेरे साथ मायके ही चलो. मैं तुम्हें अपने मायके की सैर करवाऊंगी.
    मैं भी समझ गया था कि भाभी मायके की नहीं अपनी चूत की सैर करवाने के मूड में लग रही है.
    तभी भाभी ने अपने पर्स से फोन निकाला और अपने घर वालों को बता दिया कि उनके साथ मैं भी उनके मायके आ रहा हूं. भाभी के बदन को छेड़ते छेड़ते कब सफर कट गया कुछ नहीं पता लगा.
    फिर उनके घर जाकर हमने आराम किया. अब मुझसे रात का इंतजार करना मुश्किल हो रहा था. उनके घर में मेरी काफी खातिरदारी हुई और फिर आखिरकार सोने का समय भी आ ही गया. भाभी और मैं दोनों एक ही कमरे में सोने वाले थे. ये सोच कर मेरा लंड तो पहले से ही खड़ा होने लगा था. मेरे लंड ने कई बार चिपचिपा पदार्थ छोड़ दिया. भाभी की चूत के बारे में सोच कर ही मेरा कामरस निकला जा रहा था.
    लेकिन तभी उसकी मां हमारे बीच में आ गई. वो अपनी बेटी से बात करने के लिए हमारे कमरे में ही आ गयी. मैं मन ही मन उसकी मां को गालियां देने लगा. मगर फिर मुझे इस बात से थोड़ा सन्तोष करना पड़ा कि हम दोनों का बिस्तर जमीन पर नीचे एक साथ लगा दिया गया. ऊपर बेड पर उसकी मां सोने वाली थी.
    वो दोनों आपस में बातें करने लगीं और कुछ देर के बाद लाइट बुझा दी गई. लेकिन उन दोनों की बातें अभी भी चल रही थीं. मैं तो पहले से ही सोने का नाटक कर रहा था. जैसे ही लाइट बंद की गई मैंने धीरे अपने और भाभी के बदन को चादर के नीचे ढक लिया और मैं भाभी की गांड के साथ चिपक गया.
    ज्यादा कुछ हरकत तो नहीं हो सकती थी क्योंकि उसकी मां को हमारे बारे में पता चल जाता. मैं धीरे धीरे भाभी की गांड को अपने हाथ से दबाने लगा. मैंने अपने लंड को साड़ी के ऊपर से ही भाभी की गांड से सटा रखा था. भाभी बातों में लगी हुई थी. फिर मैंने धीरे से उसकी साड़ी को ऊपर करना शुरू कर दिया. अंधेरे में कुछ पता नहीं चल रहा था लेकिन उसकी चिकनी टांगों पर उंगलियां फिराते हुए मुझे बहुत मजा आ रहा था.



    जब पूरी साड़ी ऊपर तक आ गई तो मैं अपने पैरों को उसकी जांघों से घिसने लगा. फिर मैंने उसकी भारी सी गांड में फंसी हुई छोटी सी जालीदार पैंटी को उसके कूल्हों के बीच से उंगली घुसाते हुए खींच दिया. उसके बाद मैंने अपने अंडरवियर को भी नीचे किया और उसकी पैंटी के अंदर लंड को लगा कर उसकी जांघों के बीच में भाभी की चूत के पास फंसा दिया. मेरा लंड भाभी के चूतड़ों में जाकर सट गया.
    मेरे तने हुए लंड की छुअन से भाभी की हल्की सी आह्ह निकली लेकिन भाभी ने खुद को रोका हुआ था. वो अपनी मां को बातों में लगाए हुए थी और साथ में ही मेरे लंड का मजा भी ले रही थी. मैं अपने लंड को उसकी गांड पर घिसने लगा. भाभी मेरा पूरा साथ दे रही थी.
    कुछ देर जब ऐसे ही घिसते हुए हो गई तो भाभी ने धीरे अपने हाथ पर थूक लगाया और अपना हाथ अपनी जांघों के बीच में लाकर मेरे लंड के सुपारे पर थूक को मलते हुए उसको चिकना करने लगी. भाभी ने मेरे लंड को पूरा चिकना कर दिया. मेरे लंड के सुपारे पर जब भाभी के हाथ घिस रहे थे तो मैं भाभी की चूत चूत को चोदने के लिए जैसे मरा जा रहा था. मेरे लंड के सुपारे में एक अजीब सी सरसराहट दौड़ रही थी.
    फिर भाभी ने मेरे लंड को अपने हाथ में पकड़ा और अपनी चूत के मुंह पर लगा कर अपनी गांड को पीछे धकेल दिया. मुझे भाभी का इशारा मिल गया.
    मैंने अपने लंड को भाभी की चूत पर सटे हुए आगे की तरफ एक हल्का सा धक्का मारा और मेरा लंड भाभी की गर्म चूत में घुस गया.
    उम्म्ह … अहह … हय … ओह … मजा आ गया.

    भाभी की गर्म चूत में जाते ही मैंने उसकी कमर को अपने हाथों में थाम लिया और बिल्कुल धीरे-धीरे अपनी गांड को हिलाते हुए मैं भाभी की चूत में धक्के लगाने लगा. भाभी भी हल्के हल्के अंदाज में अपनी गांड को मेरे लंड की तरफ धकेल रही थी.
    धीमी चुदाई शुरू हो गई.
    भाभी की चूत में जाते ही मेरा लंड और ज्यादा गर्म और टाइट हो गया था. भाभी की चूत ने जैसे मेरे लंड को अंदर ही जकड़ लिया था. मैं धीरे से लंड को बाहर लाता और फिर हल्के से धक्के के साथ भाभी की चिकनी चूत में फिर से धक्का लगा देता. पूरा लंड भाभी की चिकनी चूत की गहराइयों में उतरने लगा. उसकी चूत की पंखुड़ियां जैसे मेरे लंड को निचोड़ने में लगी हुई थी. मुझे जैसे जन्नत का मजा मिल रहा था.
    कुछ देर तक ऐसे ही करने के बाद मुझसे रहा न गया और मैंने अपने मोटे लंड जोर से भाभी की चूत में पेल दिया तो भाभी की आह्ह निकल गई.
    उसकी ऐसी आवाज सुनकर उसकी मां बोली- क्या हुआ?
    भाभी बोली- कुछ नहीं, ऐसा लग रहा था जैसे पीछे कुछ चुभ रहा हो.
    उसकी मां बोली- लाइट जला कर देख लो.
    भाभी तपाक से बोली- नहीं मां, सब ठीक है.
    भाभी को भी डर हो गया था कि अगर लाइट जली तो सारा मजा खराब हो जायेगा. इसलिए उसने बात को तुरंत संभाल लिया. उसके बाद वो दोनों फिर से बातों में लग गई. कुछ देर तक मैंने भाभी की चूत में लंड डाल कर मजा लिया और फिर मैं भाभी की गांड के छेद पर भी उंगली चलाने लगा.
    भाभी ने अपनी दोनों जांघों को थोड़ा सा और खोल दिया और मेरी उंगली भाभी की गांड में चली गई. भाभी उचक सी गई लेकिन उसने कोई आवाज नहीं की. एक दो बार मैंने भाभी की गांड में उंगली की और फिर वापस निकाल ली.
    फिर पता नहीं भाभी को क्या शरारत सूझी कि उसने अपने एक हाथ को पीछे लाकर मेरी गांड पर टटोलते हुए मेरी गांड के छेद को ढूंढ लिया और अपनी उंगली मेरी गांड में घुसाने की कोशिश करने लगी. मुझे मजा तो नहीं आ रहा था लेकिन मेरे लिए यह एक नया अनुभव था. मेरा लंड भाभी की चूत में था और भाभी की उंगली मेरी गांड के छेद को सहला रही थी. फिर उसने अपने हाथ को वापस आगे की तरफ खींच लिया.
    मुझे गांड में जलन सी होने लगी. शायद भाभी की उंगलियों का तेज नाखून मेरी गांड में लग गया था. मैंने जोर से भाभी की चूत को चोदना शुरू कर दिया. पच-पच की आवाज हो गई तो उसकी मां को फिर शक हो गया.
    वो बोली- ये आवाज कैसी आ रही है?
    भाभी बोली- कुछ नहीं, योगू को शायद मच्छर परेशान कर रहे हैं. वो मच्छर मार रहा है.

    मैंने फिर से अपने धक्कों को धीमा कर दिया. जोर से चुदाई होना अभी संभव नहीं था. मैं धीरे धीरे ही भाभी चूत में लंड को चलाता रहा. भाभी भी पूरे रिदम में मेरा साथ देती रही.
    दोस्तो, इस तरह धीमी चुदाई करने में भी बहुत मजा आता है. जिन लोगों ने इस तरह से प्यार वाली धीमी चुदाई का मजा लिया है वो जानते होंगे कि इस तरह की चुदाई में ताबड़तोड़ चुदाई से ज्यादा रस मिलता है. भाभी की चूत रस छोड़ते हुए पूरी चिकनी हो गई थी. उसकी चूत में लंड डालते हुए अब मुझे ऐसा लगने लगा था कि जैसे मैं किसी मक्खन के कटोरे में लंड को डाल रहा हूं.
    गर्म चिकनी चूत की चुदाई का जो मजा भाभी उस रात को मुझे दे रही थी उसको अपने शब्दों में मैं लिख नहीं पा रहा हूं. मैं जोर से उसकी चूत को फाड़ देना चाहता था लेकिन ऐसा नहीं कर पा रहा था. फिर मैंने उसके चूचों को पकड़ लिया और उसको कस कर बांहों में भरते हुए उसके चूचे भी साथ में दबाने लगा. भाभी का पूरा बदन मेरे बदन से सट गया था. उसके मोटे चूचे दबाते हुए मैं उसकी चूत में धीरे-धीरे लंड को घिसता रहा.
    काफी देर तक ऐसे ही हम पड़े-पड़े हिलते रहे. भाभी की आवाज भारी होने लगी थी. उसकी आवाज से कामुकता साफ झलक रही थी. लेकिन अपने आप को कंट्रोल करके रखे हुए थी. उसकी मां को भी नींद नहीं आई थी. अब भाभी से जब रुका नहीं गया तो उसने पीछे हाथ लाकर मेरे चूतड़ों को अपने हाथों में पकड़ लिया और मेरी गांड को आगे की तरफ धकेलते हुए अपनी चूत के अन्दर मेरे लंड के धक्के मरवाने लगी.
    मैं भाभी की बेबसी समझ सकता था. अगर उसकी मां वहां पर न होती तो मैं भाभी की चूत को फाड़ कर रख देता लेकिन हम दोनों ही मजबूर थे. मैंने भी थोड़ा और अंदर तक लंड को घुसाने की कोशिश की.
    भाभी की गांड काफी भारी थी. इसलिए लंड पूरा जड़ तक भाभी की चूत में नहीं उतर रहा था. या फिर भाभी को और गहराई तक लंड लेने की आदत थी. वो बार-बार मेरी गांड को अपने हाथों के सहारे से अपनी चूत की तरफ धकेल रही थी.
    उसकी आवाज लड़खड़ाने लगी थी. लेकिन वो ऐेसे बर्ताव कर रही थी जैसे वो नींद आने के चलते बड़बड़ा रही है ताकि उसको मां को इस बात का शक न हो जाये कि उसकी बेटी एक मोटे और लंबे लंड के साथ नीचे फर्श पर पड़ी हुई अपनी चूत की चुदाई करवा रही है.
    फिर मैंने तेजी से लंड को भाभी की चूत में चलाना शुरू कर दिया. मैंने भाभी को कस कर पकड़ लिया और तीन चार जोर के धक्के लगा दिये और फिर मेरे लंड ने जवाब दे दिया. मेरे लंड से गर्म गर्म वीर्य निकल कर भाभी की चिकनी चूत में भरने लगा. मैं झटके मारते हुए भाभी की चूत में वीर्य को गिराता चला गया.
    मैंने सारा का सारा वीर्य उसकी चूत में खाली कर दिया. भाभी ने जैसे मेरे लंड को अपनी चूत में दबोच लिया था. ऐसा लग रहा था कि वो भी झड़ गई है. फिर हम दोनों नॉर्मल होते आ गये. अभी तक भी उसकी मां नहीं सोई थी. मुझे गुस्सा आ रहा था. लेकिन मैं चुपचाप भाभी की चूत में लंड को डाले हुए लेटा रहा.
    जब काफी देर तक की उनकी बातें खत्म नहीं हुईं तो मैंने भाभी को अपनी बांहों में भर लिया और अपने लंड को ऐसे ही उनकी चूत में रख कर सो गया.
    सुबह जब उठा तो मैं अकेला ही वहां पर सोया हुआ था. मैंने उठ कर देखा तो चादर मेरे ऊपर थी और मेरा लंड अभी भी बाहर ही लटक रहा था लेकिन अब सोई हुई अवस्था में था इसलिए चादर के नीचे से पता नहीं लग रहा था.
    वो दोनों मां-बेटी वहां कमरे में नहीं थी. फिर मैं भाभी के साथ ही अपने घर पर वापस आ गया. अब जब भी कभी मुझे मौका मिलता है मैं भाभी को कॉल कर लेता हूं. मुझे वो सेक्सी चुदक्कड़ भाभी पूरे मजे देती है.
    अब तो मैं सोच रहा हूं कि कॉल ब्वॉय का धंधा ही शुरू कर दूं. मुझे भाभियों और आंटियों की चूत भी मिल जाया करेगी और इस तरह से मेरी चुदाई की इच्छा पूरी होने के साथ ही मेरी कुछ कमाई भी हो जाया करेगी.
    तो दोस्तो, ये थी भाभी की चूत चुदाई की कहानी. आपको मेरी यह कहानी कैसी लगी.

  • ससुर जी की जवानी

    कोमल ki शादी को दो साल हो चुके थे. बचपन से ही कोमल बहुत खूबसूरत थी. १६ साल की उम्र में ही जिस्म खिलने लग गया था. सोलहवां साल लगते लगते तो कोमल की जवानी पूरी तरह नीखर आई थी. ऐसा लगता ही नहीं था की अभी १०थ् क्लास में पर्ती है. School की स्किर्ट में उसकी भरी भरी जांघें लड़कों पे कहर ढाने लागी थी. School के लड़के skirt के नीचे सी झाँक कर कोमल की पैंटी की एक झलक पाने के लीये पागल रहते थे. कभी कभार जब बास्केटबाल खेलते हुए या कभी हवा के झोंके सी कोमल की स्किर्ट उठ जाती तो किस्मत वालों को उसकी पैंटी के दर्शन हो जाते. लड़के तो लड़के, School के Teacher भी कोमल की जवानी के असर से नहीं बचे थे. कोमल के भारी नितम्ब, पतली कमर और उभरती चूचियां देखके उनके सीने पे चहुरियन चल जाती. कोमल को भी अपनी जवानी पे नाज़ था. वो भी लोगों का दिल जलाने में कोई कसर नहीं छोड़ती थी.

    उनीस साल की होते ही कोमल की शादी हो गई. कोमल ने शादी तक अपने कुंवारे बदन को संभाल के रखा था. उसने सोच रखा था की उसका कुंवारा बदन ही उसके पति के लीये सुहाग रात को एक उन्मोल तोह्फहोगा. सुहाग रात को पति का मोटा लम्बा लंड देख कर कोमल के होश उर गए थे. उस मोटे लंड ने कोमल की कुंवारी चूत लहू लुहान कर दी थी. शादी के बाद कुछ din तो कोमल का पति उसे रोज़ चार पाँच बार चोद्ता था. कोमल भी एक लम्बा मोटा लौडा पा कर बहुत खुश थी. लेकीन धीरे धीरे चुदाई कम होने लगी और शादी के एक्साल बाद तो ये नौबत आ गई थी की महीने में मुश्किल से एक दो बार ही कोमल की चुदाई होती. हालांकी कोमल ने सुहाग रात को अपने पति को अपनी कुंवारी चूत का तोहफा दीया था, लेकीन वो बचपन से ही बहुत कामुक लड़की थी. बस कीसी तरह अपनी वासना को कंट्रोल करके, अपने School और कॉलेज के लड़कों और टीचर्स से शादी तक अपनी चूत को बचा के रखने में सफल हो गई थी. महीने में एक दो बार की चुदाई से

    कोमल की वासना की प्यास कैसे बुझती ? उसे तो एक दिन में कम से कम तीन चार बार चुदाई की ज़रूरत थी.
    आखिकार जब कोमल का पति जब तीन महीने के लीये टुर पे गया तो कोमल के देवर ने उसके अकेलेपन का फायदा उठा कर उसकी वासना को तृप्त किया. अब तो कोमल का देवर रामू कोमल को रोज़ चोद कर उसकी प्यास बुझाता था. एक दिन गाँव से टेलीग्राम आया की सास की तबियत कुछ ख़राब हो गई है. कोमल के ससुर एक बड़े ज़मींदार थे. गाँव में उनकी काफ़ी खेती थी. कोमल का पति राजेश काम के कारण नहीं जा सकता था और देवर रामू का कॉलेज था. कोमल को ही गाँव जाना पड़ा. वैसे भी वहां कोमल की ही ज़रूरत थी, जो सास और सुर दोनों का ख्याल कर सके और सास की जगह घर को संभाल सके.

    कोमल शादी के फौरन बाद अपने ससुराल गई थी. सास सौर की खूब सेवा करके कोमल ने उन्हें खुश कर दीया था. कोमल की खूबसूरती और भोलेपन से दोनों ही बहुत प्राभवित थे. कोमल की सास माया देवी तो उसकी प्रशंसा करते नहीं थकती थी. दोनों इतनी सुंदर, सुशील और मेहनती बहू से बहुत खुश थे. बात बात पे शर्मा जाने की अदा पे तो ससुर रामलाल फीदा थे. उन्होंने ख़ास कर कोमल को कम से कम दो महीने के लीये भेजने को कहा था. दो महीने सुन कर कोमल का कलेजा धक् रह गया था. दो महीने बिना चुदाई के रहना बहुत मुश्किल था. यहाँ तो पति की कमी उसका देवर रामू पूरी कर देता था. गाँव में दो महीने तक क्या होगा, ये सोच सोच कर कोमल परेशान थी लेकीन कोई चारा भी तो नहीं था. जाना तो था ही. राजेश ने कोमल को कानपूर में ट्रेन में बैठा दीया. अगले दिन सबह ट्रेन गोपालपुर गाँव पहुँच गई जो की कोमल की सौराल थी.

    कोमल ने चूरिदार पहन रखा था. कुरता कोमल के घुटनों से करीब आठ इंच ऊपर था और कुरते के दोनों साइड का कटाव कमर तक था. चूरिदार कोमल के नितम्ब तक तैघ्त था. चलते वक्त जब कुरते का पल्ला आगे पीछे होता या हवा के झोंके से उठ जाता तो तिघ्त चूरिदार में कसी कोमल की टांगें, मदहोश कर देने वाली मांसल जांघें और विशाल नितम्ब बहुत ही Sexy लगते. ट्रेन में सब मर्दों की नज़रें कोमल की टांगों पर लगी हुई थी. स्टेशन पर कोमल को लेने सास और ससुर दोनों आए हुए थे. कोमल अपने ससुर से परदा कत्र्ती थी इसलिए उसने चुन्नी का घूँघट अपने सिर पे ले लिया. अभी तक जो चुन्नी कोमल की छातीयों के उभार को छुपा रही थी, अब उसके घूँघट का काम करने लगी. कोमल की बड़ी बड़ी छातियन स्टेशन पे सबका ध्यान खींच रही थी. कोमल ने झुक के सास के पाँव छूए. जैसे ही कोमल पों छूने के लीये झुकी रामलाल को उसकी चूरिदार में कसी मांसल जांघें और नितम्ब नज़र आने लगे. रामलाल का दिल एक बार तो धड़क उठा. शादी के बाद से बहू किखूब्सूरती को चार चाँद लग गए थे.

    बदन भर गया था और्जवानी पूरी तरह नीखर आई थी. रामलाल को साफ दीख रहा था की बहू का तिघत चूरिदार और कुरता बरी मुश्किल से उसकी जवानी को समेटे हुए थे. सास से आशिर्वाद लेने के बाद कोमल ने सुर्जी के भी पैर छूए. रामलाल ने बहू को प्यार से गले लगा लीया. बहू के जवान बदन का स्पर्श पाते ही रामलाल कांप गया. कोमल की सास माया देवी बहू के आने से बहुत खुश थी. स्टेशन के बाहर नीकल कर उन्होंने तांगा कीया. पहले माया देवी टाँगे पे चढी. उसके बाद रामलाल ने बहू को चढ़ने दीया. रामलाल को मालूम था की जब बहू टाँगे पे चढ़ने के लीये टांग ऊपर करेगी तो उसे कुरते के कटाव में से बहू की पूरी टांग और नितम्ब भी देखने को मिल जाएंगे. वाही हुआ. जैसे ही कोमल ने टाँगे पे बैठने के लीये टांग ऊपर की राम्म्लाल को चूरिदार में कसी बहू की Sexy टांगों और भारी चूतडों की झलक मिल गई. यहाँ तक की रमलाल को चूरिदार के सफ़ेद महीन कपरे में से बहू की कच्छी (पैंटी) की भी झलक मिल गई. बहू ने गुलाबी रंग की कच्छी पहन रखी थी. अब तो रामलाल का लंड भी हरकत करने लगा. उसने बरी मुश्किल से अपने को संभाला. रामलाल को अपनी बहू के बरे में ऐसा सोचते हुए अपने ऊपर शरम आ रही थी. वो सोच रहा था की मैं कैसा इंसान हूँ जो अपनी ही बहू को ऐसी नज़रों से देख रहा हूँ. बहू तो बेटी के समान होती है. लेकीन क्या करता ? था तो मरद ही. घर पहुँच कर सास ससुर ने बहू की खूब खातिरदारी की.

    गाँव में आ कर अब कोमल को १५ दिन हो चुके थे. सास की तबियत ख़राब होने के कारण कोमल ने सारा घरका काम संभाल लीया था. उसने सास ससुर की खूब सेवा करके उन्हें खुश कर दीया था. गाँव में औरतें लहंगा चोली पहनती थी, इसलिए कोमल ने भी कभी कभी लहंगा चोली पहनना शुरू कर दीया. लहंगे चोली ने तो कोमल की जवानी पे चार चाँद लगा दिए. गोरी पतली कमर और उसके नीचे फैलते हुए भारी नितम्ब ने तो रामलाल का जीना हराम कर रखा था.
    पिताजी.” कोमल सोच रही थी की कीसी तरह ये धरती फत्जाए और मैं उसमे समा जाऊं.” बेटी इसमे शर्माने की क्या बात है ?. तुम्हारी उम्र में लड़किओं कि कछी अक्सर बहुत जल्दी छोटी हो जाती है. गाँव में तो और्तें कच्च्ही पहनती नहीं हैं. अगर छोटी हो गई है तो सासू माँ सेकः देना शहर जा कर और खरीद एंगी. हम गए तो हम ले आएँगे.लो ये सूख गई है, रख लो.” ये कह कर रामलाल ने कोमल को उस्कि पंटी और ब्रा दे दी. इस घटना के बाद रामलाल ने कोमल के साथ और्खुल कर बातें करना शुरू कर दीया था एक दिन माया देवी को शहर सत्संग में जन था. रामलाल उनको ले कर शहर जाने वाला था.

    दोनों घर से सबह स्टेशन की और चल पड़े.रास्ते में रामलाल के जान पहचान का लड़का कार से शहर जाता हामिल गया. रामलाल ने कहा की Aunty को भी साथ ले जाओ. लड़का मंगाया और माया देवी उसके साथ कार में शहर चली गई. रामलाल घर्वापस आ गया. दरवाज़ा उंदर से बूंद था. बाथरूम से पानी गिरने किअवाज़ आ रही थी. शायद बहू नहा रही थी. कोमल तो समझ रहिथि की सास ससुर शाम तक ही वापस लौटेंगे. रामलाल के कमरे का एक्दार्वाज़ा गली में भी खुलता था. रामलाल कमरे का टला खोल के अप्नेकमरे में आ गया. उधर कोमल बेखबर थी. वो तो समझ रही थीकि घर में कोई नहीं है. नहा कर कोमल सिर्फ़ पेटीकोट और ब्लाउज में ही बाथरूम से बाहर नीकल आई. उसका बदन अब भी गीला था. बाल भीगे हुए थे. कोमल अपनी पैंटी और ब्रा जो अभी उसने धोई थी सुखाने के लीये आँगन में आ गई. रामलाल अपने कमरे के परदे के पीछे से सारा नज़ारा देख रहा था. बहू को पेटीकोट और ब्लाउज में देख कर रामलाल को पसीना आ गया. क्या बाला की खूबसूरत थी.



  • ससुर जी का घोड़े जेसा लंड

    दोस्तो मेरी उमर 26 साल की है मेरी शादी हो चुकी है मेरे पति एक मार्केटिंग कंपनी मे जॉब करते है इस लिए वो ज़्यादातर घर से बाहर ही रहते है. अभी मेरी शादी को सिर्फ़ 3 साल हुए है और ये कहानी दोस्तो आज से करीब 2 साल पहले की है. मेरे घर मे मेरे सास ससुर और मेरी एक 18 साल की ननद रहती है. बेस्ट इंडियन सेक्स स्टोरीस
    मेरी शादी को 3 साल हो चुके है और अभीतक मैं 25-30 बार ही सेक्स किया है क्योकि मेरे हज़्बेंड के पास इतना टाइम नही होता. इसलिए मैं और मेरी चूत चुदाई के लिए तड़पति रहती है. एक दिन की बात है मैं अपने रूम मे बैठकर .वी पर कुछ देख रही थी तभी मुझे प्यास लगी और मैं किचन मे से पानी पीने के लिए जाने लगी. जब मैं किचन मे जा रही थी तभी मुझे अपने ननंद के रूम मे से कुछ आवाज़े सुनी, मैने उसके रूम की विंडो मे से चुपके से देखा तो मैं पूरी तरह से हैरान रह गई.
    मैने देखा की मेरी ननंद नंगी नीचे ज़मीन पर पूरी नंगी लेटी हुई है और हमारा कुत्ता उसकी चूत को चाट रहा है और वो कुत्ते के लंड को अपने हाथ मे लेकर ज़ोर ज़ोर से उपर नीचे कर रही है और कुछ ही देर बाद वो कुत्ते के सामने कुत्ति बन गई और कुत्ता उसके उपर पीछे से चढ़ गया और ज़ोर ज़ोर से उसे चोदने लग गया. मुझसे ये सब देखा ना गया इसलिए मैं वाहा से हट गई.
    करीब 15 मिनिट बाद मेरी ननंद के रूम मे से कुत्ता बाहर आया और उसके पीछे से मेरी ननंद भी आ गई. मैने उसे सॉफ सॉफ बता दिया की मैने उसे ये सब करते हुए देख लिया है. वो मेरे सामने रोने लग गई पर मैने उसे समझाते हुए कहा तुम कोई अपना बॉयफ्रेंड बना लो ऐसे जानवर से ऐसे काम करवाना ठीक नही है.
    तब मेरी ननंद ने कहा – भाभी मैं बॉयफ्रेंड तो बना लून पर आदमी का तो कुत्ते से भी ज़्यादा बड़ा होता है इसलिए मुझे डर लगता है.
    मैं – नही इतना भी बड़ा नही होता जितना तुम समझ रही हो.
    मेरी ननद – नही भाभी मैने देखा है इस लिए मैं कह रही हूँ.
    मैं – अछा किस का देख लिया है तूने, कही हॉर्स का तो नही देख लिया.
    मेरी ननंद – नही भाभी मैने डॅड का देखा है उनका लंड तो हॉर्स से बड़ा है कसम से इतना लंबा और मोटा लंड तो मैने आज तक नही देखा.
    ननंद के मूह से ऐसी बातें सुनकर मेरी चूत मे खुज़ली होनी शुरू हो गई. मुझे तो पता ही नही था की मेरे घर मे जबरदस्त चुदाई का समान है. अब मुझे किसी भी हालत मे ससुर जी का लंड देखना था बस मुझे एक आछे से मोके की तलाश थी.
    और मुझे जल्दी ही एक . मिल गया. उस दिन मेरे सारे घरवाले किसी शादी मे 2 दिन के लिए चले गये. घर मे मैं और मेरे ससुर थे. जब रात हुई तो मैने ससुर जी के दूध मे नींद की मेडिसिन घोल कर दे दी. दूध पीते ही उन्हे नींद आनी शुरू हो गई. पर फिर भी मैं करीब 30 मिनिट बाद ही उनके रूम मे गई. बेस्ट इंडियन सेक्स स्टोरीस
    मैने अंदर जाते ही ससुर जी को बहोत हिलाया जब वो नही उठे तो मैं समझ गई अब रास्ता सॉफ है, मैं जल्दी से उनकी धोती साइड मे करी और अंडरवेर का नाडा खोल कर उनका लंड बाहर निकाल लिया. उनका लंड देख कर तो मेरी आँखों मे एक अलग सी चमक आ गई. मेरी ननंद सच मे सच कह रही थी, मेरे ससुर का लंड सच मे काफ़ी बड़ा और मोटा था वो कमाल की बात तो ये थी की अभी लंड बैठा हुआ था तो भी वो कितना ख़तरनाक लग रहा था.
    मैने अपने दोनो हाथो से लंड को पकड़ कर उपर नीचे करने लग गई और पता नही कब खुद ही मेरे होंठ लंड के पास आ गये और उसे चूमने लग गये. अब मैं लंड को अपने मूह मे लेकर चूसने लग गई और नीचे से उपर तक लंड को अपनी ज़ुबान से चाटने लग गई. तभी अचानक लंड मे एक करेंट सा लगा और लंड खड़ा होना शुरू हो गया. देखते ही देखते लॅंड 5 इंच से 14 इंच का हो गया
    मेरी आँखें खुली की खुली रह गई और मेरी खुशी का कोई ठिकाना नही था. सच मे लंड काफ़ी शानदार लग रहा था. अब तो मेरी ज़ुबान लंड को चाटने मे लगी हुई थी. लंड को देखकर अब मेरी चूत मे खुज़ली होनी शुरू हो गई थी. मैं उठी और अपनी सारी और पेटिकोट उतार सीधा लंड के उपर आ गई और लंड को अपने हाथ मे पकड़ अपनी चूत पर रगड़ने लग गई. मुझे बहोत मज़ा आ रहा था. मैं इतने बड़े लंड को चूत मे कैसे लूँगी इसके बारे मे सोच रही थी और लंड को अपनी चूत पर लगा कर नाप रही थी. मैने देखा की लंड अगर चूत मे जाता है तो वो मेरे पेट तक आता है.
    मुझे अब डर सा लगने लग गया इस लिए अब मैने जाने का फ़ैसला किया. मैं जैसे ही लंड के उपर से उठने लगी तभी मेरी कमर को किसी ने ज़ोर से पकड़ लिया. मैं एकदम बहोत डर गई, मैने देखा तो ससुर जी जाग चुके थे और उन्होने ही मुझे पकड़ा हुआ था.
    ससुर – बहू अब लंड को नाप तो लिया है तुमने अब . अपनी चूत मे भी ले लो ना तुम्हे बहोत मज़ा आएगा.
    मैं उन्हे अपने को छुड़वाने की कोशिश करी पर उन्होने एक दम मुझे बेड पर दे मारा और मेरे उपर आ कर बहोत बुरी तरह मेरे बूब्स को मसलने लग गये. मेरे आँखे बंद होनी शुरू हो गई क्योकि अब मैं मदहोश सी होनी शुरू हो गई थी. तभी ससुर जी ने मेरा ब्लाउस पकड़ा और खींच कर फाड़ दिया और मेरे नंगे बूब्स को एक एक करके अपने मूह मे लेकर चूसने लग गये.
    मुझे बहोत मज़ा आने लग गया मैं पागल सी होने लगी थी क्योकि आज तक मेरे बूब्स मेरे पति ने भी नही चूसे थे. ससुर जी अब मेरी चूत मे उंगलिया कर रहे थे. मेरी चूत गीली होनी शुरू हो गई थी. मुझे सच मे बहोत मज़ा आ रहा था. तभी ससुर जी नीचे गये और मेरी चूत को अपनी ज़ुबान से चाटने लग गये. जैसे ही उनकी ज़ुबान मेरी चूत पर लगी वैसेही मेरे पूरे जिस्म मे करेंट सा दौड़ने लग गया. अब मेरे एक हाथ मे उनका लंड था जिसे मैं ज़ोर ज़ोर से उपर नीचे कर रही थी.
    अचानक ही ससुर जी ने मेरे हात से लंड ले लिया और खुद ही अपना लंड मेरी चूत के उपर रगड़ने लग गये मेरी चूत के दाने के उपर लंड पूरी स्पीड मे उपर नीचे हो रहा था. मैं पूरी तरह से पागल हो चुकी थी क्योकि आज तक ऐसा मज़ा कभी नही मिला था. करीब 2 मिनिट बाद ही मेरी चूत ने काफ़ी सारा पानी बाहर निकाल दिया.
    ससुर जी – बहू ये क्या है अभी तो मेरा लंड तेरी चूत के अंदर गया भी नही और तेरी चूत ने पहले ही जवाब दे दिया. बेस्ट इंडियन सेक्स स्टोरीस
    उनके मूह से ऐसी बातें सुनकर मैं शर्मा गई और मैं धीरे से बोली – ससुर जी अब प्लीज़ आप मेरी चूत को आछे से चोद दे मुझे बहोत परेशान करती है.
    ये सुनते ही ससुर जी ने मेरे होंठो को चूसा और नीचे जाकर मेरी चूत को फिरसे चाटने लग गये. अब की बार वो अपनी ज़ुबान मेरी चूत के दाने पर घुमा रहे थे जिससे मेरे मूह से अब आहह आहह की मस्ती से भरी आवाज़े निकल रही थी.
    ससुर जी अब अपनी दो उंगलिया मेरी चूत मे उतार दी और ज़ोर ज़ोर से उपर नीचे कर रहे थे और साथ मे ही उपर से मेरी चूत के दाने को चाट रहे थे. एक साथ दो हमले मेरी चूत सहन ना कर पाई और करीब एक मिनिट मे ही मेरी चूत ने फिर अपना सारा पानी निकल दिया.
    मैं – ससुर जी अब क्यो आप मुझे तड़पा रहे हो प्लीज़ जल्दी से अब आप अपना लंड मेरी चूत मे डालो और मेरी प्यास को भुजा दो प्लीज़.
    मैने उनके लंड को हाथ मे पकड़ा तो मैने देखा की ये तो इतना मोटा है की ये मेरे हाथ मे नही आ रहा है ये तो मेरी चूत के चितड़े चितड़े कर देगा. मेरे चेहरे पर इस परेशानी के भाव देख कर ससुर जी बोले – मेरी बहू तू फिकर ना कर आज इस लंड को अपनी चूत मे ले फिर, आज के बाद तू किसी दूसरे के लंड को देखेंगी भी नही.
    मैं – पर ससुर जी आज आप मेरी चूत की आछे से चुदाइ करना ये साली मुझे बहोत तंग करती है.
    ये सुनते ही ससुर जीने मेरी तरफ देखकर हल्की सी स्माइल करी और अपना लंड मेरे मूह के पास कर दिया. मैं समझ गई की अब ये क्या चाहते है मैने झट से अपना मूह खोल दिया और ज़ोर ज़ोर से लंड को आछे से चूसने लगी.
    ससुर जी तभी मेरा सिर पकड़ लिया और ज़ोर ज़ोर से मेरे को अपने लंड से चोदने लग गये. अब उनका लंड मेरे गले के अंदर जा रहा था जिससे मुझे सांस लेने मे बहोत दिक्कत आ रही थी पर वो रुके नही और करीब 5 मिनिट तक मेरे मूह ऐसे ही बे- रहमी से चोदते रहे.
    अब उन्होने अपना लंड मेरे मूह से निकाला और मेरी चूत पर रखकर और थोड़ासा ज़ोर लगा कर अपने लंड का आगे वाला हिस्सा पहले मेरी चूत मे उतारा और बाद मे फिर एक ज़ोर से धक्का लगा कर करीब 4-5 इंच तक लंड मेरी चूत मे उतार दिया. बेस्ट इंडियन सेक्स स्टोरीस
    लंड अंदर जाते ही मेरी जान निकल गई मैं उनके नीचे एक मछली की तरह तड़प रही थी. अब ससुर जी बहोत पुराने खिलाड़ी थे और धीरे धीरे मेरी चूत मे अपना लंड अंदर बाहर करते रहे. अब उन्होने मेरी गॅंड के नीचे मे पिल्लो रखा जिससे अब मेरी चूत उपर उठ गई और अब तो ससुर जी ने अपना लंड मेरी चूत मे एक दम डाला और उपर नीचे करने लग गये. अब ससुर जी मेरे उपर आ गये और ज़ोर ज़ोर से मेरी चूत को चोदने लग गये.
    ससुर जी ने अब अपना बाहर निकाला और एक जोरदार धक्के से अपना पूरा 14 इंच का लंड एक ही बार मे मेरी चूत मे उतार दिया. अब मैने अपनी दोनो टाँगे उपर उठा ली और अपनी गॅंड उठा उठा कर अपने ससुर जी का लंड अपनी चूत मे लेने लग गई. ससुर जीने मेरी दोनो टाँगो को अपने मोढ़े पर रख लिया और ज़ोर ज़ोर से मुझे चोदने लग गये. मुझे बहोत मज़ा आ रहा था मैं अपनी दोनो आँखें बंद कर के ससुर जी के हर धक्के का मज़ा ले रही थी.
    करीब 20 मिनिट की इस घमासान चुदाई के बाद अचानक मेरा पूरा जिस्म अकड़ गया मेरी चूत ने ससुर जी के लंड पर अपने पानी की बारिश कर दी और 2 मिनिट बाद ही ससुर जी ने भी अपना सारा पानी मेरी चूत मे ही निकाल दिया. मुझे बहोत ज़ोर से पेशाब आ रहा था पर मुझसे उठा तक नही जा रहा था इस लिए ससुर जी मुझे अपनी गोद मे उठाकर बाथरूम मे ले गये और मैने उनके सामने बाथरूम किया क्योकि उन्होने मेरी चूत मे से निकलते पेशाब को देखना था.
    मुझे अपना फीडबॅक देने के लिए कृपया कहानी को ‘लाइक’ ज़रूर करे, ताकि कहानियों का ये दौर देसीकाहानी पर आपके लिए यूँही चलता रहे.
    मेरी चूत से निकलते गरम गरम पीले पीले पेशाब को देखकर ससुर जी फिर से गरम हो गये और अपना लंड मेरे मूह मे डाल कर फिर से मेरे मूह को चोदने लग गये. फिर ससुर जीने मुझे टाय्लेट की सीट पर बिताया और मेरी दोनो टाँगे उपर कर के मेरी चूत और गॅंड दोनो मारी. आज मेरी चूत और गॅंड दोनो आछे से फट चुकी थी और मेरी बहोत ज़्यादा बुरी हालत हो चुकी थी. बेस्ट इंडियन सेक्स स्टोरीस
    उस दिन से मैं रोज रात को अपने ससुर जी से चुदति हूँ, एक दिन मेरी ननंद ने मुझे और अपने डॅड से सेक्स करते देख लिया और फिर मैने अपने साथ उसे भी ले लिया. अब हम तीनो इस सेक्स लाइफ के पूरे मज़े लेते है.

  • ससुर जी की जवानी 2



    बहुत कसा हुआ पेटीकोट पहनती थी. बदन गीला होने के कारण पेटीकोट उसके चूतडों से चिपका जा रहा था. बहू के फैले हुए चूतडों पेटीकोट में बरी मुश्किल से समा रहे थे. बहू का मादक रूप मनो उसके ब्लाउज और पेटीकोट में से बाहर निकलने की कोशिश कर रहा था. उफ क्या गद्राया हुआ बदन था. बहू ने अपनी धुली हुई कच्छी और ब्रा डोरी पर सूखने दाल दी. अचानक वो कुछ उठाने के लीये झुकी तो पेटीकोट उसके विशाल चूतडों पर कास गया. पेटीकोट के सफ़ेद कपरे में से रामलाल को साफ दीख रहा था की आज बहू ने काले रंग की कच्छी पहन रखी है. उफ बहू के सिर्फ़ बीस प्रतिशत चूतडों ही कच्छी में थे बाकी तो बाहर गिर रहे थे. जब बहू सीधी हुई तो उसकी कच्छी और पेटीकोट उसके विशाल चूतडों के बीच में phans gaye. अब तो रामलाल का लौडा फन्फनाने लगा. उसका मन कर रहा था की वो जा कर बहू के चूतडों की दरार में फँसी पेटीकोट और कच्छी को खींच के निकाल ले.

    बहू ने मानो रामलाल के दिल की आवाज़ सुन ली. उसने अपनी चूतडों की दरार में फँसे पेटीकोट को कींच के बाहर निकाला लीया. बहू आँगन में खरी थी इसलिए पेटीकोट में से उसकी मांसल टांगें भी नज़र आ रही थी. रामलाल के लंड में इतना तनाव सीता को चोदते वक्त भी नहीं हुआ था. बहू के Sexy चूतडों को देख के रामलाल सोचने लगा की इसकी गांड मार के तो आदमी धन्य हो जाए. रामलाल ने आज तक कीसी औरत की गांड नहीं मारी थी. असलियत तो ये थी की रामलाल का गधे जैसा लौडा देख कर कोई औरत गांड मरवाने के लीये राज़ी ही नहीं थी. माया देवी तो चूत ही बरी मुश्किल से देती थी गांड देना तो बहुत दूर की बात थी. एक दिन कोमल ने खेतों में जाने की इच्छा प्रकट की. उसने सासू माँ से कहा, ” मम्मी जी मैं खेतों में जाना चाहती हूँ, अगर आप इजाज़त देन तो आपके खेत और फसल देख औन. शहर में तो ये देखने को मिलता नहीं है.”

    ” अरे बेटी इसमें इजाज़त की क्या बात है? तुम्हारे ही खेत हैं जब चाहो चली जाओ. मैं अभी तुम्हारे ससुर जी से कहती हूँ तुम्हें खेत दिखाने ले जाएँ.”
    ” नहीं नहीं मम्मी जी आप पिताजी को क्यों परेशान करती हैं मैं अकेली ही चली जाउंगी.”
    ” इसमे परेशान करने की क्या बात है? कई दिन से ये भी खेत नहीं गए हैं तुझे भी साथ ले जाएंगे. जाओ टब तैयार हो जाओ. और हाँ लहंगा चोली पहन लेना, खेतों में जाने के लीये वही ठीक रहता है.” कोमल तैयार होने गई. माया देवी ने रामलाल को कहा,
    ” अजी सुनते हो, आज बहू को खेत दिखा लाओ. कह रही थी मैं अकेली ही चली जाती हूँ. मैंने ही उसको रोका और कहा ससुरजी तुझे ले जाएंगे.”

    ” ठीक है मैं ले जाऊंगा, लेकीन अकेली भी चली जाती तो क्या हो जाता ? गाँव में किस बात का डर?””
    ” कैसी बातें करते हो जी? जवान बहू को अकेले भेजना चाहते हो. अभी नादाँ है. अपनी जवानी तो उससे संभाली नहीं जाती, अपने आप को क्या संभालेगी? ” इतने में कोमल आ गई. लहंगा चोली में बला की खूबसूरत लग रही थी.
    ” चलिए पिताजी मैं टायर हूँ.”

    ” चलो बहू हम भी टायर हैं.” ससुर और बहू दोनों खेत की और नीकल परे. कोमल आगे आगे चल रही थी और रामलाल उसके पीछे. कोमल ने घूंघट निकाल रखा था. रामलाल बहू की मस्तानी चाल देख कर पागल हुआ जा रहा था. बहू की पतली गोरी कमर बल खा रही थी. उसके नीचे फैले हुए मोटे मोटे चूतडों चलते वक्त ऊपर नीचे हो रहे थे. लहंगा घुटनों से थोड़ा ही नीचे था. बहू की गोरी गोरी टांगें और चूतडों तक लटकते लंबे घने काले बाल रामलाल की दिल की धड़कन बारह रहे थे. ऐसा नज़ारा तो रामलाल को ज़िंदगी में पहले कभी नसीब नहीं हुआ. रामलाल की नज़रें बहू के मटकते हुए मोटे मोटे चूतडों और पतली बल खाती कमर पर ही टिकी हुई थी.

    Un जान लेवा चूतडों को मटकते देख कर रामलाल की आंखों के सामने उस दिन का नजारा घूम गया जिस दिन उसने बहू के चूतडों के बीच उसके पेटीकोट और कच्छी को फँसे हुए देखा था. रामलाल का लौडा खड़ा होने लगा. कोमल घूंघट निकाले आगे आगे चली जा रही थी. वो अच्छी तरह जानती थी की ससुर जी की आँखें उसके मटकते हुए नितम्ब पे लगी हुई हैं. रास्ता संकरा हो गया था और अब वो दोनों एक पूग डंडी पे चल रहे थे. अचानक साइड की पूग डंडी से दो गधे कोमल के सामने आ गए. रास्ता इतना कम चौरा था की साइड से आगे निकलना भी मुश्किल था. मजबूरन कोमल को गधों के पीछे पीछे चलना पड़ा. अचानक कोमल का ध्यान पीछे वाले गधे पे गया.

    ” अरे पिताजी देखिये ये कैसा गधा है ? इसकी तो पाँच टांगें हैं.” कोमल आगे चल रहे गधे की और इशारा करते हुए बोली.
    ” बेटी, टब तो बहुत भोली हो, ज़रा ध्यान से देखो इसकी पाँच टांगें नहीं हैं.” कोमल ने फीर ध्यान से देखा तो उसका कलेजा दहक सा रह गया. गधे की पाँच टांगें नहीं थी, वो तो गधे का लंड था. बाप रे क्या लम्बा लंड था ! ऐसा लग रहा था जैसे उसकी टांग हो. कोमल ने ये भी नोटिस कीया की आगे वाला गधा, गधा नहीं बल्कि गधी थी क्योंकि उसका लंड नहीं था. गधे का लंड खरा हुआ था. कोमल समझ गई की गधा क्या करने वाला था. अब तो कोमल के पसीने चूत गए. पीछे पीछे ससुर जी चल रहे थे. कोमल अपने आप को कोसने लगी की ससुर जी से क्या सवाल पूछ लीया. कोमल का शरम के मरे बुरा हाल था. रामलाल को अच्छा मोका मिल गया था. उसने फीर से कहा,

    ” बोलो, बहू हैं क्या इसकी पाँच टांगें ?” कोमल का मुंह शरम से लाल हो गया, और हक्लाती हुई बोली,
    ” जज..जी चार ही हैं.”
    ” तो वो पांचवी चीज़ क्या है बहु?”
    ” ज्ज्ज…जी वो तो ……जी हमें नहीं पटा.”
    „ पहले कभी देखा नहीं बेटी ?” रामलाल मेज़ लेता हुआ बोला.
    ” नहीं पिताजी.” कोमल शर्माते हुए बोली.
    ” मर्दों की टांगों के बीच में जो होता है वो तो देखा है न?”
    ” जी..” अब तो कोमल का मुंह लाल हो गया.

    अरे बहू जो चीज़ मर्दों के टांगों के बीच में होती है ये वाही चीज़ तो है.” रामलाल कोमल के साथ इस तरह की बातें कर ही रहा था की वाही हुआ जो कोमल मन ही मन मन रही थी की ना हो. गधा अचानक गधी पे चढ़ गया और उसने अपना तीन फ़ुट लम्बा लंड गधी की चूत में पेल दीया. गधा वहीं खरा हो कर गधी के उंदर अपना लंड पेलने लगा. इतना लम्बा लंड गधी की चूत में जाता देख कोमल हार्बर कर रुक गई और उसके मुंह से चीख नीकल गई,
    ” ऊओईइ मा….”
    ” क्या हुआ बहू ?”
    ” ज्ज्ज..जी कुछ नहीं.” कोमल घबराते हुए बोली.
    ” लगता है हमारी बहू डर गई.” रामलाल मौके का पूरा फायदा उठता हुआ दरी हुई कोमल का साहस बर्हाने के बहाने उसकी पीठ पे हाथ रखता हुआ बोला.
    ” जी पिताजी.”
    ” क्यों डरने की क्या बात है ?”
    वैसे ही.”

    ” वैसे ही क्या मतलब ? कोई तो बात ज़रूर है. पहली बार देख रही हो न?” रामलाल कोमल की पीठ सहलाता हुआ बोला.
    ” जी.” कोमल शर्माते हुए बोली.
    ” अरे इसमें शर्माने की क्या बात है बहु. जो राकेश तुम्हारे साथ हेर रात करता है वाही ये गधा भी गधी के साथ कर रहा है.”
    ” लेकीन इसका तो इतना…….” कोमल के मुंह से अनायास ही नीकल गया और फीर वो पच्छ्तायी..
    ” बहुत बड़ा है बहु?” रामलाल कोमल की बात पूरी करता हुआ बोला.
    अब रामलाल का हाथ फिसल कर कोमल के नितम्ब पे आ गया था.
    ” ज्ज्जी….” कोमल सिर नीचे किए हुए बोली.
    ” ओ ! तो इसका इतना बार देख के डर गई ? कुछ मर्दों का भी गधे जैसा ही होता है बहु. इसमें डरने की क्या बात है ?. जब औरत बरे से बार झेल लेती है, फीर ये तो गधी है.”
    कोमल का चेहरा शरम से लाल हो गया था. वो बोली,
    ” चलिए पिताजी वापस चलते हैं, हमें बहुत शरम आ रही है.”

    ” क्यों बहू वापस जाने की क्या बात है? तुम तो बहुत शर्माती हो. बस दो मिनट में इस गधे का काम खत्म हो जाएगा फीर खेत में चैलेन्ज.” बातों बातों में रामलाल एक दो बार कोमल के नितम्ब पे हाथ भी फेर चुक्का था. रामलाल का लंड कोमल के मुलायम नितम्ब पर हाथ फेर के खड़ा होने लगा था. वो कोमल की पैंटी भी फील कर रहा था. कोमल क्या करती ? घूंघट में से गधे को अपना लंड गधी के उंदर पेलते हुए देखती रही. इतना लम्बा लंड गधी के उंदर बाहर जाता देख उसकी चूत पे भी चीतियन रेंगने लगी थी.

    कोमल को रामलाल का हाथ अपने नितम्ब पर महसूस हो रहा था. इतनी भोली तो थी नहीं. दुनियादारी अच्छी तरह से समझती थी. वो अच्छी तरह समझ रही थी की ससुर जी मौके का फायदा उठा के सहानुभूति जताने का बहाना करके उसकी पीठ और नितम्ब पे हाथ फेर रहे हैं. इतने में गधा झर गया और उसने अपना तीन फ़ुट लम्बा लंड बाहर निकाल लीया. गधे के लंड में से अब भी वीर्य गिर रहा था. ससुर जी ने दोनों गधों को रास्ते से हटाया और कोमल के चूतडों पे हथेली रख कर उसे आगे की और हलके से धक्का देता हुआ बोला,
    ” चलो बहू अब हम खेत चलत हैं.”
    ” चलिए पिताजी.”
    ” बहू मालूम है तुम्हारी सासू माँ भी मुझे गधा बोलती है.”
    ” हा.. ! क्यों ? आप तो इतने अच्छे हैं.”

    ” बहू तुम तो बहुत भोली हो. वो तो कीसी और वझे से मुझे गधा बोलती है.” अचानक कोमल रामलाल का मतलब समझ गई. शायद ससुर जी का लंड भी गधे के लंड के माफिक लम्बा था तुभी सासू माँ ससुर जी को गधा बोलती थी. इतनी सी बात समझ नहीं आई ये सोच कर कोमल अपने आप को मन ही मन कोसने लगी. कोमल सोच रही थी की ससुर जी उससे कुछ ज़्यादा ही खुल कर बातें करने लगे हैं. इस तरह की बातें बहू और ससुर के बीच तो नहीं होती हैं. बात बात में प्यार जताने के लीये उसकी पीठ और नितम्ब पे भी हाथ फेर देते थे.थोरी ही देर में दोनों खेत में पहुँच गए. रामलाल ने कोमल को सारा खेत दिखाया और खेत में काम करने वाली औरतों से भी मिलवाया. कोमल थक गई थी इसलिए रामलाल ने उसे एक आम के पैर के नीचे बैठा दीया.

    ” बहू तुम यहाँ आराम करो मैं कीसी औरत को तुम्हारे पास भेजता हूँ. मुझे थोड़ा पम्प हौस में काम है.”
    ” ठीक है पिताजी मैं यहाँ बैठ जाती हूँ.”
    रामलाल पम्प हौस में चला गया

  • बूढ़े ससुर का 11 इंच का लंड

    मेरी शादी हो चुकी हे. मेरे पति एक मार्केटिंग कम्पनी में जॉब करते हे. इसलिए वो अक्सर घर से बहार ही रहते हे. अभी मेरी शादी को सिर्फ 3 साल हुए हे और ये कहानी दोस्तों आज से करीब 2 साल पहले की हे. मेरे घर में मेरे सास, ससुर और मेरी एक 18 साल की ननंद रहती हे. मेरी शादी को 3 साल चुके हे लेकिन मैंने अभी तक अपने पति के साथ 30-40 बार ही सेक्स किया हे. क्यूंकि मेरे हसबंड पर इतना टाइम ही नहीं होता. इसलिए मैं और मेरी चूत चुदाई के लिए लिए तड़पती रहती हे. एक दिन की बार हे मैं अपने रूम में बैठ कर टीवी देख रही थी. तभी मुझे प्यास लगी और मैं किचन में से पानी लेने के लिए जाने लगी. जब मैं किचन में जा रही रही तभी मुझे अपनी ननंद की रूम से कुछ आवाजे आई. मैंने उसके रूम की विंडो में से चुपके से देखा तो मैं पूरी तरह से हैरान हो गई.
    मैंने देखा की मेरी ननंद नंगी हो के लेटी हुई थी. मुझसे ये सब देखा ना गया इसलिए मैं वहां से हट गई. मैंने उसे साफ़ साफ़ बता दिया की मैंने उसे ये सब करते हुए देख लिया हे. वो मेरे सामने रोने लगी. मैंने उसे कहा देखो मैं किसी को कुछ नहीं कहूँगी लेकिन तुम ऐसे सेक्स करो वो गलत हे. इस से अच्छा तो तुम किसी लड़के के साथ अफेयर कर लो.
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    मेरी ननंद बोली: भाभी मैं बॉयफ्रेंड तो रख लूँ लेकिन आदमी का तो बड़ा होता हे इसलिए मुझे डर लगता हे.
    मैं: अरे नहीं इतना बड़ा नहीं होता हे जितना तुम समझ रही हो.
    ननंद: नहीं भाभी मैंने देखा हे इसलिए मैं कह रही हूँ.
    मैं: अच्छा किस का देख लिया हे तूने, कही किसी घोड़े का लंड तो नहीं देख लिया.
    ननंद: नहीं भाभी मैंने डेडी जी का देखा हे. उनका लंड तो घोड़े से भी बड़ा हे. कसम से इतना लम्बा और मोटा लंड तो मैंने आजतक नहीं देखा हे.
    ननंद के मुहं से ऐसी बातें सुनकर मेरी चूत में खुजली होने लगी. मुझे तो पता नहीं था की मेरे घर में ही जबरदस्त चुदाई का सामान हे. अब मैं भी मन ही मन में जैसे गाँठ बाँध के बैठी थी की मौका मिले तो ससुर जी का लंड देखना जरुर हे! और मुझे जल्दी ही एक मौका मिल भी गया. उस दिन मेरे सारे घरवाले किसी शादी में 2 दिन के लिए चले गए. घर में मैं और मेरे ससुर ही थे. जब रात हुई तो मैंने ससुर जी का दूध देने के लिए गई. मैंने दूध के अन्दर निंद की गोली डाल दी थी. दूध पिने के कुछ मिनिट में ही उनको नींद आनी शरु हो गई. पर फिर भी मैं कुछ आधे घंटे तक वेट करती रही. और उसके बाद ही मैं उन्के रूम में गई.
    मैंने अन्दर जाते ही ससुर जी को बहुत हिलाया. पर जब वो नहीं उठे तो मैं समझ गई की अब रास्ता साफ़ हे. मैंने जल्दी से उनकी धोती को साइड में कर दी और कच्छा खोल कर उनका लंड बहार निकाल लिया. उनका लंड देख कर मेरी आँखों में अलग ही चमक आ गई. मेरी ननंद ने जो कहा था वो एकदम सच था. मेरे ससुर का लंड सच में काफी बड़ा और मोटा था. और सब से कमाल की बात ये थी की वो लंड अभी सोया हुआ था तो भी बहुत मोटा और लम्बा था. जब वो लंड कडक होगा तो कैसे होगा!!! मैंने अपने दोनों हाथो से लंड को पकड़ कर ऊपर करना चालू किया. और पता नहीं मेरा अपने ऊपर से कंट्रोल ही जैसे चला गया था. मैंने लंड को थोडा हिलाया और फिर निचे झुक के अपने होंठो से उसे चूमने भी लगी. अब मैं इस मोटे लंड को मुहं में ले के चूमने लग गई. और निचे से ऊपर तक पुरे लोडे को अपनी जबान से चाटने लगी. तभी अचानक इस बड़े लोडे के अन्दर जैसे करंट आ गया. और लंड खड़ा होना चालु हो गया. कुछ देर पहले जो लंड 5 इंच का था अब वो लम्बा हो के 11 इंच का हो गया.
    मेरी आँखे खुली की खुली रह गई और मेरी ख़ुशी का कोई ठिकाना ना रहा. सच में लंड काफी शानदार लग रहा था. अब तो मेरी जुबान लंड को चाटने में लगी हुई थी. लंड को देख कर अब मेरी चूत में खुजली होनी शरु हो गई थी. मैं उठी और अपनी साडी और पेटीकोट उतार के सीधा लंड के ऊपर आ गई और लंड को अपने हाथ में पकड़ के अपनी चूत के ऊपर रगड़ने लग गई. मुझे बहोत मजा आ रहा था. मैंने इतने बड़े लंड को चूत में कैसे लेना हे वो भी सोचा नहीं था. और लंड को चूत पर लगाकर नाप रही थी. मैंने देखा की अलंद अगर ये लंड मेरी चूत में पूरा जाता हे तो मेरे पेट तक अ जाएगा!
    मुझे अब डर सा लगने लगा था. इसलिए अब मैंने जाने का फैसला कर लिया. मैं लंड के ऊपर से उठ ही रही थी की ससुर जी ने अपने मजबूत हाथो से मुझे कमर में से पकड़ लिया. मैं एकदम बहोत ही डर गई. मैंने देखा की ससुर जी जाग चुके थे और वो मुझे पकड़ के वापस लंड पर बिठाने लगे थे.ससुर जी: बहु अब लंड को नाप तो लिया तो तुम अब इसको अपनी चूत में भी ले लो ना, कसम से जिसने भी लिया हे उसकी चूत तडपती हे इसे बार बार लेने के लिए!
    मैंने उनसे खुद को छुडवाने की कोशिश की लेकिन पर उन्होंने एकदम मुझे बेड पर दे मारा और मेरे ऊपर आकर बहोत बुरी तरह से मेरे बूब्स को मसलने लगे. मेरी आँखे बंद होनी लगी थी. मैं मदहोश भी होने लगी थी. तभी ससुर जी ने मेरा ब्लाउज पकड़ा और उसे खिंच कर पूरा फाड़ दिया. और वो मेरे नंगे बूब्स को एक एक कर के अपने मुहं में ले के चूसने लगे. मुझे बहोत ही मजा आने लगा था, मैं पागल सी होने लगी थी क्यूंकि आजतक मेरे बूब्स मेरे पति ने भी नहीं चुसे थे ऐसे तो.ससुर जी ने अब मेरी चूत में उंगलिया करनी चालू कर दी. मेरी चूत गीली होने लगी थी. मुझे सच में बहोत ही मजा आ रहा था. तभी ससुर जी निचे गए और मेरी चूत को अपनी जुबान से चाटने लगे. जैसी ही उनकी जीभ मेरी चूत पर लगी वैसे ही मेरे पुरे जिस्म में करंट दौड़ गया. अब मेरे एक हाथ में उनका लंड था जिसे मैं जोर जोर से ऊपर निचे कर के हिला रही थी.
    अचानक ससुर जी ने मेरे हाथ से लंड ले लिया और खुद ही अपने लंड को मेरी चूत के ऊपर रगड़ने लगे. मेरी चूत के दाने के ऊपर लंड पूरी स्पीड में ऊपर निचे हो रहा था. मैं पूरी तरह से पागल हो चुकी थी क्यूंकि आजतक ऐसा मजा पहले कभी नहीं आया था. 2 मिनिट बाद ही मेरी चूत ने काफी सारा पानी बहार निकाल दिया.
    ससुर जी: बहु ये क्या अभी तो मेरा लंड तेरी चूत के अन्दर गया भी नहीं और तेरी चूत ने पहले ही जवाब दे के पानी छोड़ दिया.
    उन्के मुहं से ऐसी बातें सुन के मैं शर्मा गई और मैं धीरे से बोली: ससुर जी अब प्लीज़ आप मेरी चूत को अच्छे से चोदो ये मुझे बहुत परेशान करती हे.ये सुनते ही ससुर जी ने मेरे होंठों को चूसा और निचे जाकर मेरी चूत को फिर से चाटने लगे. अब की वो अपनी जुबान को मेरी चूत के दाने पर घुमा रहे थे जिस से मेरे मुहं में से अह्ह्ह अह्ह्ह्ह ऊह्ह्ह अह्ह्ह की मस्ती भरी आवाजें निकल रही थी. ससुर जी अब अपनी दो उंगलिया मेरी चूत में उतार के उसे जोर जोर से ऊपर निचे करने लगे थे. और साथ में ही ऊपर से मेरी चूत के दाने को भी चाट रहे थे. एक साथ दो हमले मेरी चूत सह न कर पाई और करीब एक मिनिट में ही मेरी चूत ने फिर से अपना सारा पानी निकाल दिया.
    मैं: ससुर जी अब क्यूँ मुझे तडपा रहे हो प्लीज़ जल्दी से अब आप अपना लंड मेरी चूत में डालो और मेरी प्यास को बुझा दो प्लीज़
    मैंने उन्के बड़े लंड को हाथ में पकड़ा तो मैंने देखा की ये तो इतना मोटा हे की ये मेरे हाथ में नहीं आ रहा हे. ते तो मेरी चूत के चीथड़े चीथड़े कर देगा, ये सोच के एक डर की लहर दौड़ उठी मेरे अन्दर. मेरे चहरे पर इस परेशानी के भाव देख कर ससुर जी बोले: मेरी बहु तू फ़िक्र ना कर आज इस लंड को अपनी चूत में ले ले. फिर आज के बाद तू किसी दुसरे के लंड को देखेंगी भी नहीं!
    मैं: पर ससुर जी आप मेरी को अच्छी तरह से चोदना मुझे बहुत तंग किया हुआ हे उसने!
    ये सुनते ही ससुर जी ने मेरी तरफ देख कर हलकी सी स्माइल करने लगी और अपना लंड मेरे मुह के पास कर दिया. मैं समझ गई की अब ये क्या चाहते हैं. मैंने झट से अपना मुहं खोल दिया और अच्छे से उन्के लंड को चूसने लगी.ससुर जी तभी मेरा सर पकड़ के अपने लंड को जोर जोर से मेरे मुहं में मारने लगे और मुहं की मस्त चुदाई करने लगे. अब उनका लंड मेरे गले के अन्दर जा रहा था जिस से मुझे सांस लेने में बहोत ही दिक्कत हो रही थी. पर वो रुके नहीं और करीब 5 मिनिट तक मेरे मुहं को ऐसे ही बेरहमी से चोदते रहे.
    अब उन्होंने अपने लंड मेरे मुहं से निकाला और मेरी चूत पर रख कर और थोडा सा जोर लगा कर अपने लंड का आगे का हिस्सा पहले मेरी चूत में डाला और बाद में फिर एक जोर से धक्का लगा कर करीब 4-5 इंच जितना लंड मेरी चूत में उतार दिया.लंड अंदर जाते ही मेरी जान निकल सी गई. मैं उन्के निचे एक मछली की तरह तडप रही थी. अब ससुर जी बहोत पुराने खिलाडी थे और धीरे धीरे मेरी चूत में अपना लंड अन्दर बाहर कर रहे थे. उन्होंने अभी तक आधे से भी कम लंड ही अन्दर डाला था और ऐसे मुझे चोद रहे थे. ससुर जी ने अब मेरी गांड के निचे एक तकिया लगा दिया जिस से मेरी चूत ऊपर उठ गई और अब तो ससुर जी ने अपना लंड मेरी चूत के एकदम साला और ऊपर निचे करने लगे. अब ससुर जी मेरे ऊपर आ गए और जोर जोर से मेरी चूत को चोदने लगे.
    ससुर जी ने अब अपना बहार निकाला और फिर एक धक्के से अपना पूरा 11 इंच का लंड एक ही बार में मेरी चूत में उतार दिया. अब मैंने अपनी दोनों टांगो को ऊपर उठा ली और अपनी गांड उठा उठा कर अपने ससुर जी का लंड अपनी चूत में लेने लग गई. ससुर जी ने मेरी दोनों टांगो को अपने कंधे के ऊपर रख दिया और जोर जोर से मुझे चोदने लगे. मुझे बहुत हो ही मजा आ रहा था. मैंने अपनी दोनों आँखे बंद कर के ससुर जी के हर धक्के का मजा लिया.करीब 20 मिनिट की इस घमशान चुदाई के बाद अचानक मेरा पूरा जिस्म अकड गया था. मेरी चूत ने ससुर जी के लंड पर अपने पानी की बारिश कर दी और 2 मिनिट बाद ही ससुर जी ने भी अपना सारा पानी मेरी चूत में ही निकाल दिया. मुझे बहोत जोर से पेशाब आ रही थी पर मेरे से उठा भी नहीं जा रहा था. इसलिए ससुर जी ने मुझे अपनी गोदी में उठा के बाथरूम में ले जा के मुताया. ससुर जी मेरी चूत में से निकलते हुए पेशाब को देख रहे थे. मेरी चूत से निकलते गरम गरम पीले पीले पेशाब को देख कर ससुर जी फिर से गरम हो गए और अपने लंड को मेरे मुहं में डाल कर फिर से मेरे मुहं को चोदने लग गए. फिर ससुर जी ने मुझे टॉयलेट की सिट पर बिठाया और मेरी दोनों टांगो को ऊपर कर के मेरी चूत और गांड दोनों मारी. आज मेरी चूत और गांड दोनों अछे से फट चुकी थी. और मेरी बहुत ज्यादा हालत ख़राब हो चुकी थी.उस दिन से मैं रोज रात को अपने ससुर जी से चुदवाती हूँ. एक दिन मेरी ननद ने मुझे और अपने डेडी से सेक्स करते देख लिया. फिर मैंने अपने साथ उसे भी ले लिया. अब हम तीनो इस सेक्स लाइफ का पूरा मजा लेते हे!