अध्याय 10: मास्टर बेडरूम – तीनों बहुओं की सुहागरात (विस्तृत संशोधित संस्करण)
रात के ठीक 10:45 बजे थे। पूरा घर सुनसान था, सिर्फ मास्टर बेडरूम में हल्की-हल्की रोशनी जल रही थी। मामी सुमन ने कमरे को खुद इतना खास बना दिया था कि देखते ही सांसें थम जातीं। किंग साइज बेड पर लाल और गुलाबी सिल्क की चादर बिछी हुई थी, जिस पर हजारों गुलाब की ताज़ा पंखुड़ियां बिखरी हुई थीं। चारों कोनों में छोटे-छोटे खुशबूदार मोमबत्तियाँ जल रही थीं, जिनकी हल्की-हल्की लौ कमरे को गुलाबी-नीली रोमांटिक रोशनी में डुबो रही थी। एयर कंडीशनर में जेस्मिन और चंदन की महक घुली हुई थी। बेड के सिरहाने पर तीन बड़े बॉक्स रखे थे — हर बॉक्स में 100-100 एक्स्ट्रा लार्ज अल्ट्रा-थिन कंडोम (रिब्ड, डिले और फ्लेवर्ड)। साथ में दो बोतलें एक्स्ट्रा स्ट्रॉन्ग लुब्रिकेंट और एक बोतल एनाल लुब्रिकेंट।
मामी सुमन ने तीनों बहुओं को खुद तैयार किया था। प्रिया ने लाल ट्रांसपेरेंट बेबीडॉल पहना था, जिससे उसके भरे-भरे 36D स्तन और वैक्स वाली गुलाबी चुत साफ दिख रही थी। नेहा ने काली शॉर्ट नेग्लिजी पहनी थी, जो उसकी मोटी गांड और टाइट चुत को और उभार रही थी। नई दुल्हन अदिति ने सफेद शीअर लिंगरी पहनी थी — बहुत पतली, लगभग पारदर्शी — जिससे उसकी 34C स्तनों की गुलाबी निप्पल और पूरी तरह बाल-रहित चुत एकदम नंगी-सी दिख रही थी। तीनों की चुतें और गांडें कल की वैक्सिंग से चमक रही थीं, गुलाबी और पूरी तरह साफ।
मामी ने अदिति के कान में धीरे से फुसफुसाया,
“बेटी… डरो मत। विक्रम बहुत जोर से करता है, बहुत बड़ा है। पहले थोड़ा दर्द होगा, लेकिन ये दोनों बहनें साथ हैं। पूरी रात सह लेना… कल सुबह तक तुम तीनों उसकी हो जाओगी।”
अदिति शरमा कर सिर झुका ली, उसके गाल लाल हो गए।
मामी सुमन ने आखिरी बार कमरे की व्यवस्था चेक की, फिर तीनों को अंदर धकेल दिया।
“जाओ… अब तुम तीनों की रात है। मैं राहुल जी के साथ सोने जा रही हूँ।”
मामी ने दरवाजा बंद कर दिया और चाबी बाहर से घुमा दी।
सुहागरात की शुरुआत
विक्रम बेड के बीच में बैठा था, सिर्फ काला शॉर्ट्स पहने। जैसे ही तीनों अंदर आईं, उसने शॉर्ट्स उतार दिया। उसका 13 इंच लंबा, मोटा, काला लंड पहले से ही आधा खड़ा होकर लटक रहा था, नसें उभरी हुईं, सिर पर मोटा फोड़ा चमक रहा था।
“आज तुम तीनों मेरी हो… पूरी रात… बिना किसी मना करने के…” विक्रम की आवाज भारी और भूखी थी।
सबसे पहले उसने नई दुल्हन अदिति को कलाई पकड़कर अपनी तरफ खींच लिया। अदिति कांप रही थी, उसकी सांसें तेज हो गई थीं। विक्रम ने अदिति की लिंगरी के दोनों स्ट्रैप खींचे। सफेद लिंगरी फिसलकर नीचे गिर गई। अदिति के गोरे, भरे स्तन बाहर आ गए, निप्पल पहले से ही सख्त हो चुके थे। विक्रम ने एक स्तन मुंह में भर लिया और जोर-जोर से चूसने लगा, दांतों से हल्का-हल्का काटते हुए।
“आह्ह्ह… नहीं… विक्रम जी… बहुत जोर से मत चूसो… दर्द हो रहा है… आह्ह… स्तन फट जाएंगे… प्लीज… धीरे…” अदिति की आवाज कांप रही थी, लेकिन उसकी कमर खुद-ब-खुद आगे बढ़ रही थी।
प्रिया ने आगे बढ़कर विक्रम की जांघों के बीच बैठ गई। उसने दोनों हाथों से लंड पकड़ा — एक हाथ में भी पूरी मुट्ठी नहीं आ रही थी — और धीरे-धीरे मुठ मारने लगी। नेहा ने लंड का सिर अदिति के मुंह के पास किया।
“बहन… चूसो… स्वाद ले लो… ये अब तुम्हारा भी है…” नेहा ने फुसफुसाया।
अदिति ने डरते हुए मुंह खोला। लंड का मोटा सिर उसके होंठों पर रखा। “उम्म्म… नहीं… इतना मोटा… गला फट जाएगा… आह्ह… सिर्फ सिर ही मुंह में आ रहा है… लार टपक रही है…” अदिति की आँखों से आंसू निकल आए, लेकिन वह चूसती रही।
विक्रम ने अदिति को बेड पर लिटा दिया। उसकी दोनों टांगें कंधों पर रखीं। प्रिया ने कंडोम का पहला पैकेट खोला, लंड पर लुब्रिकेंट लगाया और कंडोम चढ़ा दिया। विक्रम ने लंड का सिर अदिति की चुत के होंठों पर रखा और हल्का दबाया।
“नहीं… विक्रम जी… प्लीज… बहुत बड़ा है… मेरी चुत फट जाएगी… आआह्ह… सिर्फ सिर ही घुसा… रुक जाओ… मैं पहली बार हूँ… बहुत दर्द हो रहा है… आंसू आ रहे हैं…” अदिति जोर से चीख पड़ी, उसका पूरा शरीर ऐंठ गया।
विक्रम ने एक जोरदार धक्का मारा। आधा लंड अंदर चला गया। अदिति का पेट ऊपर उठ गया, उभार साफ दिखने लगा।
“आआआह्ह्ह… फट गई… पेट फाड़ रहा है… विक्रम जी… निकालो… प्लीज… मैं मर जाऊंगी… बहुत मोटा… चीर रहा है… आह्ह… और मत दबाओ…” अदिति रोते हुए चीख रही थी, उसके नाखून विक्रम की पीठ में गड़ रहे थे।
प्रिया ने अदिति के स्तन चूसते हुए कहा, “बहन… सह ले… पूरा अंदर ले… देख, कितना अच्छा लगेगा…”
विक्रम ने कमर हिलाई और पूरा 13 इंच एक झटके में अंदर धकेल दिया। अब अदिति की चुत पूरी तरह फैल चुकी थी। विक्रम ने तेज-तेज धक्के मारने शुरू कर दिए — पच… पच… पच… पच… हर धक्के पर लंड गहराई तक जा रहा था, अदिति का पेट बार-बार उभर रहा था।
“आह्ह… नहीं… जोर से मत… आआह्ह… मेरी चुत जल रही है… प्लीज रुक जाओ… मैं सह नहीं पा रही… आह्ह… हाँ… और गहरा… नहीं… मत… मैं झड़ रही हूँ… पहली बार… आआआह्ह्ह… पूरा रस निकल रहा है…”
20 मिनट बाद अदिति पहली बार झड़ गई। उसकी चुत ने लंड को कसकर पकड़ लिया, सफेद रस कंडोम के बाहर रिसने लगा।
विक्रम ने कंडोम बदलकर नेहा को खींच लिया। नेहा को घुटनों के बल मोड़कर डॉगी स्टाइल में खड़ा किया। लंड को गांड के छेद पर रखा और लुब्रिकेंट लगाकर धीरे से दबाया।
“नहीं… विक्रम जी… गांड में मत… आज चुत में ही… आह्ह… बहुत टाइट है… फट रही है… आआह्ह… आधा घुस गया… दर्द… प्लीज निकालो… मेरी गांड चीर दी…” नेहा रोते हुए चीखी।
विक्रम ने पूरा लंड गांड में धकेल दिया। फिर तेजी से पीछे से ठोकने लगा। नेहा की गांड हर धक्के पर हिल रही थी। प्रिया नेहा की चुत उंगलियों से चला रही थी।
“आह्ह… विक्रम जी… और जोर से… गांड फाड़ दो… आह्ह… मज़ा आ रहा है… नहीं… मत रुकना… मैं झड़ रही हूँ… आआह्ह…”
इसके बाद विक्रम ने प्रिया को अपनी गोद में उठा लिया। प्रिया ने खुद लंड पकड़कर अपनी चुत में उतारा। “हाँ पति जी… पूरा अंदर… मेरी चुत अब तुम्हारी है… फाड़ दो… आह्ह… जोर से… रोज की तरह…”
रात भर यही सिलसिला चला। विक्रम ने तीनों को हर पोजीशन में चोदा —
- अदिति को मिशनरी में 25 मिनट
- नेहा को राइडिंग में (वो ऊपर चढ़कर खुद हिल रही थी)
- प्रिया को स्पूनिंग में (साथ में दोनों बहनों की चुत चाटते हुए)
- तीनों को 69 पोजीशन में (विक्रम नीचे, तीनों ऊपर)
- स्टैंडिंग में बालकनी की तरफ मुंह करके
- आखिर में तीनों को बेड पर सिर टिकाकर गांड ऊपर करके एक-एक करके
कुल 14 कंडोम इस्तेमाल हुए। कमरे में सिर्फ चीखें, “आह्ह… नहीं… हाँ… और जोर से… प्लीज रुक जाओ… मत निकालो… फाड़ दो… मैं झड़ गई…” की आवाजें और पच-पच की थपाके गूंज रहे थे।
सुबह 5:30 बजे तीनों थककर विक्रम के सीने, पेट और जांघों पर नंगी लेटी हुई थीं। उनकी चुतें और गांडें सूजी हुई, लाल, लेकिन पूरी तरह भरी हुई थीं। गुलाब की पंखुड़ियां उनके शरीर पर चिपकी हुई थीं।
विक्रम ने तीनों के बालों में हाथ फेरते हुए कहा,
“अब तुम तीनों मेरी हो… रोज यही होगा। कोई मना नहीं।”
तीनों ने थकी हुई लेकिन संतुष्ट आवाज में “जी…” कहा।
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