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Category: Indian Sex Stories

  • दीदी की एनिवर्सरी ओर मेरी… 4

    नाश्ता खत्म होने के बाद टेबल पर थोड़ी खामोशी छाई रही। दीदी ने मेरी तरफ देखा और साफ स्वर में बोली,

    “रात डिनर के बाद तैयार रहना चुदाई के लिए। तब तक तुम्हारे जीजू तुम्हें छुएंगे भी नहीं। तब तक मैं मजे ले लेती हूँ।”

    उसकी बात में न कोई हँसी थी, न कोई नरमपन। सीधा फैसला सुनाया था। जीजू ने सिर्फ सिर हिलाया। मैंने कुछ नहीं कहा। बस नज़रें झुका लीं। दिल की धड़कन फिर से तेज हो गई थी।

    थोड़ी देर बाद दीदी उठी और बोली, “चलो, पूल में चलते हैं।”

    तीनों पूल की तरफ गए। सुबह की धूप अब तेज हो चुकी थी। पानी चमक रहा था। दीदी ने बिना किसी हिचक के अपना ब्रा-पैंटी उतार दिया। जीजू ने भी शॉर्ट्स नीचे कर दी। दोनों पूरी तरह नंगे पूल में उतर गए। मैं किनारे पर खड़ी रही। दीदी ने मेरी तरफ देखकर कहा,

    “तू भी उतर जा। लेकिन आज सिर्फ देखना है। छूना नहीं।”

    मैंने बिकिनी में ही पानी में कदम रखा। दोनों पहले से पानी में थे। जीजू ने दीदी को दीवार की तरफ धकेल दिया। दोनों का शरीर पानी में चिपक गया। लंबा किस शुरू हो गया। जीजू के हाथ दीदी के स्तनों पर थे, दीदी के हाथ उसकी कमर पर। पानी में उनकी हरकतें साफ दिख रही थीं। थोड़ी देर बाद जीजू ने दीदी को घुमाया। दीदी ने पूल की किनारे वाली दीवार पकड़ ली। जीजू ने पीछे से अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया। पानी में हल्की लहरें उठने लगीं। दीदी की आहें पानी की आवाज में मिल रही थीं।

    “आह… हाँ… जोर से…”

    जीजू ने उसकी कमर पकड़कर धक्के मारने शुरू कर दिए। पानी छलक रहा था। दीदी का चेहरा साइड में मुड़ा हुआ था। आँखें आधी बंद थीं। मैं थोड़ी दूरी पर खड़ी यह सब देख रही थी। मेरी अपनी साँसें तेज हो चुकी थीं। पानी के अंदर मेरे शरीर में गर्मी फैल रही थी। दोनों लगभग बीस-पच्चीस मिनट तक पूल में ही जुड़े रहे। आखिर में जीजू ने दीदी की कमर कसकर अंदर ही पानी छोड़ दिया। दीदी ने लंबी सिसकी भरी और दीवार से लगकर खड़ी रही।

    दोनों ने पानी से निकलकर तौलिए से शरीर पोंछे। नंगे ही विला के अंदर आए। कपड़े पहने। फिर तीनों बाहर निकले। मालदीव की सड़कों पर घूमे। समुद्र किनारे चले। कई जगह रुक-रुककर फोटो खिंचवाईं। दीदी और जीजू सामान्य कपल की तरह व्यवहार कर रहे थे। कभी हाथ पकड़े, कभी हल्के में हँसे। मैं उनके साथ-साथ चलती रही। मन में सुबह वाली बात और पूल वाला नजारा बार-बार घूम रहा था। दोपहर के खाने के बाद और घूमे। समुद्र के पास बैठकर देर तक बातें कीं। समय बीतता गया।

    शाम के लगभग पाँच बजे हम विला वापस पहुँचे। थकान हो रही थी। तीनों ने थोड़ा आराम किया। दीदी और जीजू बेडरूम में चले गए। मैं लिविंग वाले हिस्से में सोफे पर लेट गई। आँखें बंद कीं लेकिन नींद नहीं आई। शरीर में एक अजीब सी बेचैनी थी।

    सात बजे के करीब डिनर आ गया। तीनों ने साथ में खाना खाया। बातें कम हुईं। माहौल में एक अलग तनाव था। खाना खत्म होने के बाद टेबल साफ किया गया। जीजू ने कुर्सी से उठते हुए मेरी तरफ देखा और सीधी आवाज में बोला,

    “चोटी… रेडी हो जा।”

    दीदी ने भी मेरी तरफ देखा। उसकी आँखों में वही निर्णायक भाव था जो सुबह था। कमरे में सजावट की रोशनी अभी भी जल रही थी। समुद्र की लहरों की आवाज दूर से आ रही थी। मैं कुर्सी पर बैठी रही। दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। रात अब सही मायनों में शुरू होने वाली थी।

    डिनर खत्म होने के बाद कमरे में एक अजीब सी खामोशी छा गई थी। दीदी ने मेरी तरफ देखा और धीमी लेकिन साफ आवाज में बोली,

    “थोड़ा डर लगेगा आज। लेकिन बाद में मजे आएंगे।”

    मैं कुछ बोल नहीं पाई। दिल जोर-जोर से धधक रहा था। जीजू मेरे पास आया। उसने बिना कुछ कहे मेरा चेहरा दोनों हाथों में लिया और किस करना शुरू कर दिया। पहले हल्का, फिर जोर से। उसकी जीभ मेरे होठों को खोलने लगी। मैंने पहले हिचकिचाहट महसूस की, लेकिन कुछ ही पल बाद मैं भी जवाब देने लगी। मेरी साँसें तेज हो गईं। दीदी पास खड़ी यह सब देख रही थी।

    जीजू के हाथ मेरी कमर पर आ गए। फिर ऊपर। उसने मेरे छोटे ड्रेस के जिप को खोला और उसे कंधों से नीचे सरका दिया। ड्रेस फर्श पर गिर गया। अब मैं सिर्फ ब्रा और पैंटी में थी। जीजू ने ब्रा के हुक खोले। ब्रा उतरते ही मेरे स्तन बाहर आ गए। उसने दोनों हाथों से उन्हें दबाया और निप्पल्स को उँगलियों के बीच लेकर मसलने लगा। मुझे अजीब सी सनसनाहट हुई। फिर उसने सिर झुकाया और एक निप्पल मुँह में ले लिया। जोर से चूसने लगा। मैंने उसकी गर्दन में हाथ डाल दिए। आँखें बंद हो गईं।

    थोड़ी देर बाद उसने मुझे बेड पर लिटा दिया। पैंटी भी खींच ली। अब मैं पूरी तरह नंगी थी। जीजू ने अपनी शॉर्ट्स उतारी। उसका १२ इंच का मोटा लंड पूरी तरह खड़ा था। उसने कंडोम का पैकेट खोला और लंड पर चढ़ा दिया। दीदी ने पास आकर मेरी टाँगें फैलाईं। मैंने शर्म और डर से उन्हें मिलाने की कोशिश की, लेकिन दीदी ने रोक दिया।

    “डर मत। सह ले,” दीदी ने कहा।

    जीजू मेरे ऊपर आ गया। लंड का मोटा सिर मेरी चूत पर टिका। उसने हल्का दबाव दिया। सिर्फ सिर अंदर गया और मुझे तेज दर्द महसूस हुआ। मैंने जोर से चीख मारी।

    “आआह्ह्ह… दर्द… निकालो…”

    जीजू ने और धक्का दिया। आधा लंड अंदर चला गया। मेरी आँखों से आँसू निकल आए। मैंने उसके सीने को धक्का देना शुरू कर दिया।

    “नहीं… बहुत दर्द… निकालो… प्लीज…”

    दीदी ने मेरे हाथ पकड़ लिए।
    “सह ले चोटी… अभी टूटेगी।”

    जीजू ने एक जोरदार धक्का मारा। पूरा लंड एक साथ अंदर धँस गया। मुझे ऐसा लगा जैसे कुछ अंदर फट गया हो। तेज जलन और दर्द की लहर पूरे शरीर में दौड़ गई। मैं जोर-जोर से चीखने लगी। आँसू बह रहे थे। मैंने कमर पीछे हटाने की कोशिश की, लंड को बाहर धकेलने की कोशिश की, लेकिन जीजू ने मेरी कमर पकड़ रखी थी।

    “आआआह्ह्ह… फट गई… दर्द… बहुत दर्द… निकालो… माँ…”

    मेरी चीखें कमरे में गूँज रही थीं। दीदी मेरे बाल सहला रही थी और बार-बार कह रही थी, “अब हुआ… अब आदत पड़ेगी… सह ले…”

    जीजू रुका नहीं। उसने धक्के शुरू कर दिए। हर धक्के के साथ मुझे तेज दर्द हो रहा था। चूत जल रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे कोई लोहे का गरमा-गरम रॉड अंदर-बाहर हो रहा हो। मैं रो रही थी, चीख रही थी, जीजू की पीठ में नाखून गड़ा रही थी। लेकिन वो बिना रुके जोर-जोर से चोदता जा रहा था। पूरा लंड हर बार जड़ तक जा रहा था।

    “नहीं… धीरे… दर्द… आआह्ह्ह… छोड़ो…”

    दीदी मेरे हाथ थामे हुए थी। कभी मेरे स्तन सहलाती, कभी माथे पर हाथ फेरती। उसकी आवाज में न सहानुभूति थी न कठोरता – बस एक अनुभव की सच्चाई।

    “चिल्ला… रो ले… लेकिन सह ले। पहली बार सबके साथ ऐसा ही होता है।”

    समय बीत रहा था। दस मिनट, बीस मिनट, तीस मिनट… दर्द कम होने का नाम नहीं ले रहा था। बस थोड़ा सुन्न पड़ने लगा था। जीजू की रफ्तार तेज हो गई थी। बेड जोर-जोर से हिल रहा था। मेरी चीखें अब सिसकियों में बदलने लगी थीं। आँखें सूज गई थीं। गला बैठ गया था। शरीर पसीने से तरबतर था।

    करीब चालीस-पैंतालीस मिनट बाद जीजू की साँसें बहुत तेज हो गईं। उसने और गहरे धक्के मारे। लेकिन अचानक उसने लंड बाहर खींच लिया। कंडोम में हल्का खून और मेरा पानी लगा हुआ था। उसने झटके से कंडोम उतारा और फेंक दिया। फिर तुरंत दीदी की तरफ मुड़ा। दीदी पहले से ही लेटी हुई थी। जीजू ने उसके पैर फैलाए और बिना किसी देरी के लंड उसकी चूत में डाल दिया। कुछ जोरदार धक्के मारे और फिर अंदर ही पानी छोड़ दिया। दीदी की हल्की आह निकली। जीजू उसके ऊपर झुका रहा। दोनों की साँसें हाँफ रही थीं।

    मैं बेड के एक कोने में करवट लिए हुए जोर-जोर से रो रही थी। दोनों हाथों से अपनी चूत को पकड़े हुए थी। जलन हो रही थी। हल्का खून लग रहा था। शरीर काँप रहा था। आँसू नहीं रुक रहे थे। पहली बार… मेरी सील टूट चुकी थी। दर्द अभी भी लहरें मार रहा था।

    दीदी ने जीजू के ऊपर से हटकर मेरे पास आने की कोशिश की, लेकिन मैंने चेहरा दूसरी तरफ कर लिया। कमरे में अब सिर्फ मेरी सिसकियाँ और उनकी भारी साँसें गूँज रही थीं। समुद्र की लहरें बाहर दूर से आवाज कर रही थीं। विला के काँच के दीवारों से रात की अंधेरी चमक आ रही थी।

    मैं रोती रही। शरीर में दर्द था, मन में उथल-पुथल थी। रात अभी खत्म नहीं हुई थी… लेकिन मेरी पहली बार खत्म हो चुकी थी।

    मैं बेड के किनारे करवट लिए हुए जोर-जोर से रो रही थी। दोनों हाथों से अपनी चूत को पकड़े हुए थी। जलन और दर्द की लहरें अभी भी पूरे निचले हिस्से में दौड़ रही थीं। हल्का खून उँगलियों पर लग रहा था। शरीर काँप रहा था। आँखें सूज चुकी थीं।

    दीदी मेरे पास आई। उसने मेरे बालों को पीछे किया और धीमी आवाज में बोली,

    “चोटी… आज के लिए इतना ही। कल…”

    उसने और कुछ नहीं कहा। बस इतना। फिर वो बाथरूम गई और गीला तौलिया लेकर आई। उसने बहुत धीरे-धीरे मेरी चूत साफ की। तौलिया पर हल्का खून और पानी लग गया। मैंने दर्द से सिसकी भरी लेकिन उसने काम जारी रखा। साफ करने के बाद उसने मुझे पानी का गिलास पकड़ाया।

    “पी ले। प्यास लगी होगी।”

    मैंने काँपते हाथों से गिलास लिया और कुछ घूँट पीए। पानी गले से उतरते हुए भी दर्द याद दिला रहा था। दीदी ने मुझे बेड पर ठीक से लिटाया। तकिया ठीक किया। चादर का एक कोना मेरे शरीर पर डाल दिया। मैं नंगी ही लेटी रही। ताकत नहीं बची थी कपड़े पहनने की।

    थोड़ी देर बाद जीजू ने एक छोटा सा बॉक्स निकाला। उसमें एक पतला सा नेकलेस था। सोने का, हल्का। उसने मेरे गले में पहना दिया। ठंडी धातु ने गर्दन को छुआ। मैंने कुछ नहीं कहा। सिर्फ आँखें बंद कर लीं। आँसू अभी भी रुक-रुककर बह रहे थे।

    फिर कमरे में फिर से हलचल शुरू हुई। जीजू ने दीदी को अपनी तरफ खींचा। दोनों का किस गहरा था। कपड़े पहले से ही कम थे। जल्दी ही दोनों फिर से नंगे हो गए। जीजू ने दीदी को डॉगी स्टाइल में कर दिया। लुब्रिकेंट लगाया। फिर अपना लंड उसकी गांड में डालने लगा। दीदी की आवाज में दर्द साफ था।

    “आह्ह… धीरे… अभी भी सूजी है…”

    जीजू ने पूरी तरह अंदर कर दिया और धक्के शुरू कर दिए। दीदी के हाथ तकिया कस रहे थे। वो सिसकियाँ ले रही थी। कभी-कभी जोर से आहें निकल जातीं। जीजू करीब बीस-पच्चीस मिनट तक उसकी गांड में जोर-जोर से पेलता रहा। आखिर में उसने अंदर ही पानी छोड़ दिया। दीदी आगे की तरफ गिर गई। साँसें हाँफ रही थीं। दोनों थककर बेड पर फैले पड़े थे।

    मैं उनकी तरफ पीठ किए हुए लेटी रही। दर्द अभी भी था। थकान ने आखिरकार मुझे जकड़ लिया। कब नींद आई, पता नहीं चला। नंगी ही सो गई।

    रात के लगभग चार बज रहे होंगे। नींद अचानक टूटी। एक तेज, भयंकर दर्द के साथ। किसी ने एक ही झटके में कुछ मेरी चूत में धकेल दिया था। पूरा। एकदम अंदर तक। मैंने जोर से चीख मारी —

    “आआआह्ह्ह!!!!!!!!!”

    जीजू ने तुरंत मेरा मुँह अपने हाथ से बंद कर दिया। उसकी हथेली मेरे होठों पर दब गई। मैं आँखें फाड़े हुए थी। दर्द इतना तेज था कि साँस अटक रही थी। जीजू मेरे ऊपर था। उसका लंड बिना कंडोम के मेरी चूत में पूरी तरह धँसा हुआ था। उसने धक्के शुरू कर दिए। जोर के, गहरे, बिना किसी रियायत के।

    मैं रो रही थी। आँखों से आँसू बह रहे थे। मुँह उसके हाथ के नीचे सिसकियाँ निकाल रहा था। दर्द पहले से कहीं ज्यादा लग रहा था। कल वाली जलन में अब नए धक्कों की तेज चुभन जुड़ गई थी। हर बार जब लंड अंदर जाता तो लगता जैसे फिर से कुछ फट रहा हो। मैंने उसके हाथ को हटाने की कोशिश की, कमर पीछे करने की कोशिश की, लेकिन वो मजबूत था। मेरी टाँगें उसके कूल्हों के दोनों तरफ फैली हुई थीं। वो लगातार पेल रहा था।

    “उम्म… उम्म…” मेरे गले से सिर्फ दबी आवाजें निकल रही थीं। आँसू उसके हाथ तक बह रहे थे। शरीर काँप रहा था। दीदी बगल में लेटी हुई थी। उसने आँखें खोल ली थीं लेकिन कुछ नहीं बोला। बस देख रही थी।

    जीजू करीब पंद्रह-बीस मिनट तक इसी तरह जोर-जोर से चोदता रहा। मेरी चूत जल रही थी। दर्द इतना था कि मुझे लग रहा था कि मैं बेहोश हो जाऊँगी। आखिर में जब मेरी सिसकियाँ बहुत तेज हो गईं और शरीर ज्यादा तड़पने लगा तो उसने लंड बाहर खींच लिया। अचानक खाली होने पर भी दर्द की एक तेज लहर दौड़ गई। मैंने मुँह खोलकर लंबी साँस ली और जोर से रोने लगी। दोनों हाथों से अपनी चूत पकड़ ली।

    “बहुत दर्द… बहुत… मत करो…”

    जीजू ने कुछ नहीं कहा। उसका लंड अभी भी पूरी तरह खड़ा था। दीदी उठकर बैठ गई। उसने बिना किसी बात के जीजू के लंड को हाथ में लिया और उसके ऊपर सवार हो गई। खुद ही लंड को अपनी चूत में सेट करके नीचे बैठ गई। फिर ऊपर-नीचे होने लगी। जोर-जोर से। उसके स्तन काँप रहे थे। आहें निकल रही थीं। जीजू उसके कूल्हे पकड़े हुए नीचे से धक्के मार रहा था।

    मैं बगल में करवट लिए हुए रो रही थी। शरीर में दर्द लहरें मार रहा था। चूत सूजी हुई और संवेदनशील थी। आँसू तकिए को भिगो रहे थे। दीदी जीजू के ऊपर बैठकर मजे ले रही थी। कमरे में फिर से गीली आवाजें और आहें गूँजने लगी थीं। मैं नंगी, दर्द में, रोती हुई उनके बगल में लेटी रही। नींद अब पूरी तरह टूट चुकी थी। रात अभी बाकी थी।
    उस रात के बाद दो दिन और बीते। जीजू ने उन दोनों दिनों में मुझे बेरहमी से चोदा। सुबह, दोपहर, रात — बिना किसी रियायत के। दर्द बहुत हुआ। कभी रोती, कभी सह लेती। दीदी ज्यादातर पास रहती। कभी मुझे सहलाती, कभी खुद जीजू के साथ जुड़ जाती। तीसरे दिन से दर्द कम होना शुरू हुआ। जलन जाती रही और उसकी जगह एक अजीब सी गर्मी ने ले ली। फिर धीरे-धीरे मजा आने लगा। शरीर खुद प्रतिक्रिया देने लगा।

    उसके बाद तो पूरे विला में कोई कोना नहीं बचा जहाँ हम तीनों ने सेक्स न किया हो। पूल में पानी के अंदर, बालकनी में समुद्र के सामने, लिविंग रूम के सोफे पर, काँच की दीवारों के सामने, बेड पर, फर्श पर… हर जगह। कभी सिर्फ मैं और जीजू, कभी दीदी भी साथ। कभी दीदी देखती रहती, कभी मैं। सात दिनों में बहुत कुछ हो गया। बहुत मजे लिए। शरीर थक गया था, लेकिन मन में एक अजीब सा सुकून और उलझन दोनों थे।

    सातवें दिन हम घर वापस लौटे। एयरपोर्ट पर पापा मिले। सामान्य मुस्कानें, सामान्य बातें। घर आकर सब कुछ पहले जैसा लगने लगा, लेकिन अंदर बहुत कुछ बदल चुका था।

    रोहन से जो मुलाकात पंद्रह दिन बाद होनी थी, वो कैंसल हो गई। मैंने खुद टाल दी। मन नहीं मान रहा था। बीस दिन बाद दीदी और जीजू ने घर में बात आगे बढ़ाई। पापा से चर्चा हुई। रिश्ते वाले आए। मेरी सगाई रोहन से फिक्स हो गई। घर में खुशी का माहौल था। मम्मी मिठाई बाँटने लगीं। मैं मुस्कुराती रही।

    कुछ दिन बाद दीदी ने खुशखबरी दी।
    “मैं माँ बनने वाली हूँ।”

    पेट में नया जीवन था। जीजू के चेहरे पर एक अलग संतोष था। घर में फिर से मिठाईयाँ बँटीं। मैंने दीदी को गले लगाया। उसकी आँखों में मुस्कान थी।

    रोहन से मुलाकात हुई। हम दोनों अकेले बैठे। बातें हुईं। उसने मेरा हाथ पकड़ा। एक लंबा किस हुआ। बाकी सब… शादी के बाद। मैंने साफ कह दिया। उसने स्वीकार कर लिया।

    चार महीने बाद हमारी शादी हो गई। रस्मों-रिवाज, मेहंदी, संगीत, विदाई… सब हुआ। रोहन के साथ नया घर। नया जीवन।

    दीदी और जीजू अपने घर में खुश थे। उनका बच्चा आने वाला था। मैं रोहन के साथ अपनी जिंदगी शुरू कर चुकी थी।

    मेरी सुहागरात की कहानी…
    कभी बाद में बताऊँगी।

  • दीदी की एनिवर्सरी ओर मेरी… 3

    जीजू ने लंबी साँस छोड़ते हुए दीदी के बालों में हाथ फेरा और बोला,
    “मजा आ गया ना बेबी?”

    दीदी ने थकी हुई लेकिन संतुष्ट आवाज में जवाब दिया,
    “बहुत मजे आए हैं आज तो।”

    जीजू हल्का मुस्कुराया। उसने दीदी की गांड पर हल्के से थपथपाते हुए कहा,
    “गांड मारने में तो उस दिन जितना मजा नहीं आया जो होटल में हाथ-पैर बाँध के मारी थी ना…”

    दीदी की आँखें थोड़ी बंद हुईं। उसने साँस छोड़ते हुए कहा,
    “उस दिन के बाद तो पंद्रह दिन ठीक से चल नहीं पाई थी। इतना दर्द हुआ था।”

    मैं कैमरा थामे यह सुनकर अंदर तक चौंक गई। आज पहली बार साफ पता चला कि दीदी ने गांड सिर्फ आज नहीं मरवाई थी। पहले भी… होटल में… हाथ-पैर बाँधकर। मेरा दिल और तेज धड़कने लगा।

    जीजू ने फिर कहा,
    “एक राउंड तू पूरा लंड मुँह में लेकर चूस। पानी निकाल के पी जा। तब जाके चार राउंड पूरे होंगे। और वीडियो भी बंद कर देना।”

    मुझे लगा दीदी मना कर देगी। इतनी देर की थकान के बाद, गांड सूजी होने के बाद… लेकिन दीदी ने मेरी तरफ देखा और साफ कहा,

    “वीडियो ऑन कर।”

    मैंने फिर से कैमरा चालू किया। हाथ काँप रहे थे।

    दीदी उठकर जीजू के ऊपर सवार हो गई। उसने अपने बड़े स्तनों को दोनों हाथों से पकड़ा और लंड के चारों तरफ दबाने लगी। स्तनों के बीच लंड को ऊपर-नीचे रगड़ने लगी। क्रीम और पसीने की चमक के साथ लंड उसके स्तनों के बीच गायब हो रहा था और निकल रहा था। फिर उसने चेहरा नीचे किया और गालों से, होठों से लंड को सहलाने लगी। कभी जीभ निकाली, कभी सिर्फ साँस छोड़कर गर्म हवा छोड़ी।

    फिर उसने मुँह पूरा खोला और लंड को अंदर ले लिया। इस बार वो सिर्फ चूस नहीं रही थी। जीजू ने उसके बाल पकड़ लिए और कमर ऊपर की। दीदी का गला भर गया। आँखों से आँसू आने लगे लेकिन उसने मुँह नहीं हटाया। जीजू जोर-जोर से मुँह में धक्के मारने लगा। गले तक लंड जा रहा था। दीदी की गलघोंटू आवाजें आ रही थीं – ग्लक… ग्लक… ग्लक…। लार बहकर उसकी ठुड्डी और स्तनों पर गिर रही थी।

    एक घंटे तक यही सिलसिला चला। कभी दीदी खुद सिर ऊपर-नीचे करती, कभी जीजू उसके मुँह में जोर से पेलता। दीदी के गालों पर आँसू और लार मिलकर चमक रहे थे। आँखें लाल हो गई थीं। लेकिन वो रुकी नहीं। आखिर में जीजू की जाँघें तन गईं। उसने दीदी के सिर को दोनों हाथों से पकड़ लिया और जोर से निकलने लगा। दीदी ने लंड को मुँह से नहीं निकाला। पूरा पानी उसके मुँह में जाता रहा। उसने गले से निगलना शुरू कर दिया। एक बूँद बाहर नहीं गिरने दी। जब जीजू का शरीर ढीला पड़ा तो दीदी ने लंड को धीरे से साफ किया और बाहर निकाला। होठ चमक रहे थे।

    जीजू भारी साँसें लेते हुए बोला,
    “बहुत बढ़िया… अब चार राउंड पूरे।”

    दीदी ने सिर्फ सिर हिलाया। थकी हुई थी। दोनों कुछ देर चुपचाप लेटे रहे। बातें कम हुईं। बस हल्की साँसें और कभी-कभी एक-दूसरे को सहलाना।

    मैंने कैमरा बंद कर दिया। मेरी हालत खराब थी। चूत बहुत देर से तड़प रही थी। पैंटी पूरी तरह गीली चिपक चुकी थी। मन कर रहा था अभी जाकर उँगली कर लूँ। मैंने धीमी आवाज में कहा,

    “दीदी… नींद आ रही है। मैं बाहर सोफे पर सो जाती हूँ।”

    दीदी ने आँखें खोलीं।
    “यहीं बेड पर सो जा।”

    मैंने मना किया,
    “नहीं… मैं बाहर ही सो जाऊँगी।”

    दीदी की आवाज में अचानक गुस्सा आ गया।
    “यहीं सो जाओ। बाहर नहीं।”

    उसके स्वर में जोर था। मैं कुछ बोल नहीं पाई। चुपचाप बेड के किनारे बैठ गई। दीदी ने जगह बनाई। एक तरफ दीदी, दूसरी तरफ जीजू, और मैं बीच में। दोनों पूरी तरह नंगे थे। दीदी की नंगी पीठ मुझसे सट रही थी। जीजू की बाजू दूसरी तरफ से छू रही थी। चादर आधी-अधूरी थी।

    मेरी पैंटी पूरी तरह गीली थी। जाँघों के बीच नमी फैल रही थी। शरीर में गर्मी थी। लेकिन अब कुछ कर नहीं सकती थी। मैंने आँखें बंद कर लीं। दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। कमरे में तीनों शरीरों की गर्मी और सेक्स की हल्की गंध फैली हुई थी। दीदी और जीजू की साँसें धीरे-धीरे नियमित होने लगीं। वो सो गए।

    मैं आँखें बंद किए पड़ी रही। गीली पैंटी के साथ, तड़पती चूत के साथ, दो नंगे शरीरों के बीच। नींद देर तक नहीं आई। लेकिन बाहर सोफे पर जाने की हिम्मत भी नहीं हुई। दीदी का गुस्सा वाला स्वर अभी भी कानों में गूँज रहा था।

    रात धीरे-धीरे आगे बढ़ रही थी।
    मैं कब सो गई, मुझे पता नहीं चला। थकान, उत्तेजना और अजीब सी बेचैनी के बीच नींद आ गई थी। आँखें खुलीं तो कमरे में हल्की अंधेरा था। खिड़की से समुद्र की तरफ से हल्की रोशनी आ रही थी। घड़ी में लगभग पाँच बज रहे थे।

    दीदी और जीजू धीमी आवाज में बात कर रहे थे। मेरी अधूरी नींद टूट गई, लेकिन मैंने आँखें बंद रखीं। साँसें नियमित रखने की कोशिश की ताकि लगे कि मैं सो रही हूँ।

    दीदी की आवाज आई,
    “हाँ हाँ… तीनों भी करेंगे। अभी रुको तो सही। छह दिन और बचे हैं। छोटी की भी सील अभी तोड़ेंगे।”

    मेरा दिल एकदम जोर से धधक उठा। शरीर में जैसे करंट चल गया। छोटी… यानी मैं। सील तोड़ना…। आँखें बंद होने के बावजूद दिमाग तेज घूमने लगा।

    जीजू की भारी आवाज में जवाब मिला,
    “मेरा तो जी कर रहा है कि अभी नंगी करके पेल दूँ।”

    दीदी ने हल्के स्वर में रोका,
    “नहीं। वो अपनी मर्जी से देगी। सामने से। अब अपना लंड अंदर डालो। मुझे नींद नहीं आ रही। लंड तो पूरी रात चूत में ही होना चाहिए।”

    चादर के हल्के खिसकने की आवाज आई। फिर दीदी की हल्की आह। लग रहा था जीजू ने पीछे से या साइड से लंड अंदर डाल दिया है। दोनों की साँसें फिर से भारी होने लगीं। हल्की हरकतें होने लगीं। मैं आँखें बंद किए पड़ी रही। दिल इतनी जोर से धड़क रहा था कि मुझे डर लग रहा था कहीं उनको सुनाई न दे जाए।

    मेरा मन उस पल बहुत अजीब हालत में था। एक तरफ बहुत जोर से इच्छा हो रही थी कि अभी उठकर खुद को दे दूँ। शरीर तड़प रहा था। रात भर की भीगी हुई चूत अभी भी संवेदनशील थी। लेकिन दूसरी तरफ दिमाग कह रहा था – ऐसे नहीं। जबरदस्ती या नींद में नहीं। अब मुझे समझ आ गया था कि आगे क्या करना है। अपनी मर्जी से, सामने से… जैसा दीदी ने कहा।

    थोड़ी देर बाद हरकतें रुक गईं। दोनों की साँसें फिर से गहरी होने लगीं। वो सो गए। मैं देर तक आँखें बंद किए पड़ी रही। “छोटी की सील” वाला वाक्य बार-बार कानों में गूँज रहा था। आखिरकार थकान ने फिर से मुझे घेर लिया।

    अगली बार जब आँखें खुलीं तो कमरे में अच्छी रोशनी थी। लगभग नौ बज रहे होंगे। मैंने हल्के से करवट ली तो महसूस हुआ कि बगल में कोई हरकत कर रहा है। आँखें खोलीं।

    दीदी मेरे बिल्कुल पास थी। वो जीजू के ऊपर बैठी हुई थी। नंगी। जीजू भी नंगे लेटे हुए थे। दीदी का चेहरा मेरी तरफ नहीं था, लेकिन उसका शरीर इतने करीब था कि मैं साफ देख सकती थी। वो लंड पर बैठकर ऊपर-नीचे हो रही थी। धीमी लेकिन गहरी हरकतें। स्तन हर बार ऊपर-नीचे काँप रहे थे। जीजू के हाथ उसकी कमर पर थे। दोनों की साँसें भारी थीं।

    दीदी कभी धीरे बैठती, कभी जोर से। कभी आगे झुक जाती तो उसके बाल मेरे हाथ के पास आ जाते। कमरे में हल्की गीली आवाजें आ रही थीं। मैं हिल नहीं रही थी। साँस रोककर देखे जा रही थी। मेरी चूत फिर से तड़पने लगी। रात वाली गीली पैंटी अभी भी चिपकी हुई थी।

    थोड़ी देर और चला। दीदी की रफ्तार बढ़ गई। वो अब जोर-जोर से बैठने लगी। आहें निकलने लगीं। जीजू नीचे से भी कमर उठा रहा था। अचानक दीदी की शरीर अकड़ गई। उसने जीजू की छाती पर हाथ रखे और जोर से नीचे बैठ गई। उसकी लंबी सिसकी निकली। उसी समय जीजू ने भी उसके कूल्हे दबाए और अंदर ही पानी निकाल दिया। दोनों कुछ पल वैसे ही जुड़े रहे। काँपते हुए।

    दीदी ने धीरे से साँस छोड़ी और जीजू के ऊपर झुक गई। लंड अभी भी अंदर था। दोनों की पीठ पसीने से चमक रही थी। मैं आँखें बंद करके फिर से सोने का नाटक करने लगी। दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। शरीर में गर्मी लहरें मार रही थी।

    दीदी ने धीरे से लंड बाहर निकाला और जीजू के बगल में लेट गई। दोनों फिर से शांत हो गए। कमरे में अब सिर्फ पंखे और समुद्र की हल्की आवाज रह गई। मैं बिस्तर पर लेटी हुई अपनी तड़पती हुई चूत और रात-सुबह की सारी बातें दोनों के बीच फँसी हुई थी।

    छह दिन और बचे थे।
    और दीदी के मुँह से निकला वाक्य अभी भी कानों में घूम रहा था।

    थोड़ी देर बाद दोनों का राउंड खत्म हो चुका था। दीदी जीजू के बगल में लेटी हुई साँसें सँभाल रही थी। कमरे में अभी भी सेक्स की हल्की गंध बनी हुई थी। दीदी ने करवट लेते हुए मुझसे कहा,

    “आज तू फ्रेश हो जा। फिर तुम्हारे लिए भी सरप्राइज है।”

    इतने में डोरबेल बज उठी। जीजू ने तुरंत चादर खींचते हुए कहा,
    “डोर ओपन करो। ब्रेकफास्ट वाला आया है।”

    दीदी और जीजू दोनों नंगे ही कंबल के अंदर घुस गए। मैंने जल्दी से बिस्तर से उतरकर दरवाजा खोला। स्टाफ ने ट्रे टेबल पर रखी और चला गया। मैंने दरवाजा बंद किया। पीछे मुड़कर देखा तो दीदी और जीजू अभी भी कंबल के अंदर थे। थोड़ी देर बाद दोनों निकले। दीदी ने लापरवाही से ब्रा-पैंटी पहन ली, जीजू ने शॉर्ट्स।

    तीनों ने टेबल पर नाश्ता शुरू किया। चुपचाप। कुछ देर बाद दीदी ने अचानक मेरी तरफ देखते हुए कहा,

    “चुदाई मजा आ रहा है ना तुझे? तुम भी कभी ऐसे ही एंजॉय करोगी रोहन के साथ।”

    मेरी साँस एकदम तेज हो गई। दिल जोर से धधक उठा। रोहन… मेरा बॉयफ्रेंड। जिससे मैं शादी करना चाहती थी। दीदी को कैसे पता? मैंने कभी घर में किसी को नहीं बताया था। दिमाग में सवालों का तूफान आ गया।

    दीदी ने मेरी हालत देखकर हल्के स्वर में कहा,
    “तुम ज्यादा सोचो मत। मुझे सब पता है। तुम रोहन को मिलने वाली थी आज से पंद्रह दिन बाद होटल में। और तुम्हें शादी भी करनी है रोहन के साथ। जो तुझे शादी करनी है रोहन से, तो पापा से मैं बात करूँगी। तुम्हारी शादी भी करवाऊँगी। पर तुझे अपने जीजू को खुश करना पड़ेगा। और ये बात सिर्फ हम तीन को ही पता रहेगी।”

    जीजू ने नाश्ते का टुकड़ा मुँह में रखते हुए कहा,
    “बस यहाँ पर ही। बाकी घर जाके मैं कभी तुझे इस बारे में नहीं बोलूँगा।”

    मैं चुपचाप बैठी उनकी बातें सुन रही थी। दिमाग में रोहन का चेहरा घूम रहा था। शादी… पापा से बात… और बदले में जीजू को खुश करना। मेरी इच्छा तो पहले से ही रोहन से शादी की थी। लेकिन ये शर्त…

    थोड़ी देर खामोशी रही। फिर मैंने धीमी लेकिन साफ आवाज में कहा,

    “ठीक है दीदी। लेकिन मेरी शादी कुछ भी हो, तुझे करवानी ही पड़ेगी। और कोई भी वीडियो घर या गाँव नहीं जाएगी। और आराम-आराम से होगी चुदाई।”

    दीदी ने मेरी आँखों में देखा। फिर धीरे से सिर हिलाया।
    “हो जाएगा। सब हो जाएगा।”

    जीजू ने भी सिर हिलाया। नाश्ते की टेबल पर तीनों के बीच एक अजीब सा समझौता हो चुका था। समुद्र की लहरें बाहर हल्के स्वर में आवाज कर रही थीं। विला के काँच के दीवारों से सुबह की रोशनी आ रही थी।

    मैंने कप में बची चाय की आखिरी घूँट ली। हाथ हल्के काँप रहे थे। मन में डर, उत्सुकता और एक अजीब सी स्वीकारोक्ति एक साथ चल रही थी। छह दिन अभी बाकी थे। और अब बात सिर्फ देखने की नहीं रह गई थी।

  • दीदी की एनिवर्सरी ओर मेरी… 2

    मैंने कैमरा हाथ में लिया। हाथ हल्के काँप रहे थे। दीदी और जीजू केक के पास खड़े थे। कमरे में हल्की रोशनी और सजावट के फूल बिखरे हुए थे। जीजू ने मेरी तरफ देखकर कहा,

    “पूरा आज रात का वीडियो लेना। सेक्सी केक सेलिब्रेशन। कुछ मत छोड़ना।”

    मैंने सिर हिला दिया। कैमरा ऑन कर दिया।

    पहले दोनों ने लंबा और गहरा किस किया। इतना लंबा कि मैं हैरान रह गई। जीजू के हाथ दीदी की कमर पर थे, दीदी के हाथ उसके गले पर। दोनों के शरीर एक-दूसरे से सट गए थे। किस टूटने का नाम नहीं ले रहा था। जब उन्होंने अलग हुए तो दोनों के होंठ चमक रहे थे।

    फिर जीजू ने अपनी शॉर्ट्स के नाड़े खोले और उसे नीचे सरका दिया। अब वो सिर्फ अंडरवियर में रह गए। दीदी ने मुस्कुराते हुए मुझे इशारा किया कि रिकॉर्डिंग जारी रखो।

    दीदी ने केक पर कुछ लिखा। पहले मेरे नाम का छोटा सा मैसेज, फिर जीजू के लिए। उसने चाकू से केक का एक छोटा टुकड़ा काटा और जीजू के मुँह में डाला। फिर खुद भी थोड़ा खाया। इसके बाद उसने जीजू को फिर से किस किया — इस बार केक की मिठास के साथ।

    थोड़ी देर बाद दीदी ने अपने ब्रा के हुक खोले। ब्रा धीरे से उतर गई। उसके बड़े और भरे हुए स्तन बाहर आ गए। उसने दोनों हाथों से केक को थोड़ा सा दबाया और अपने स्तनों को केक में धँसा दिया। क्रीम और केक उसके स्तनों पर चिपक गए। निप्पल तक क्रीम लग गई।

    जीजू तुरंत उसके करीब आ गया। उसने सिर झुकाया और दीदी के स्तनों से क्रीम चाटने लगा। जीभ से धीरे-धीरे साफ कर रहा था। कभी निप्पल को मुँह में लेकर चूस लेता, कभी आसपास की क्रीम चाटता। दीदी की गर्दन पीछे की तरफ झुक गई। उसकी साँसें तेज हो गईं। वो जीजू के सिर को अपने स्तनों पर और दबा रही थी।

    “चाट… पूरा साफ कर…” दीदी की आवाज में हल्की उत्तेजना थी।

    जीजू लगन से चाट रहा था। क्रीम उसके होठों और ठुड्डी पर लग रही थी। दीदी के स्तन चमक रहे थे। कमरे में सिर्फ उनकी साँसों और चाटने की हल्की आवाजें गूँज रही थीं। मैं कैमरा थामे यह सब रिकॉर्ड कर रही थी। मेरी अपनी साँसें तेज हो चुकी थीं। आँखें फटी हुई थीं। जो कुछ हो रहा था, वो इतना खुला और साहसिक था कि मुझे यकीन ही नहीं हो रहा था।

    दीदी ने आँखें खोलकर एक बार मेरी तरफ देखा। उसके चेहरे पर कोई शर्म नहीं थी। बस एक अजीब सी मुस्कान थी, जैसे कह रही हो — देखती रह… आज रात लंबी है।

    जीजू अभी भी उसके स्तनों से क्रीम चाट रहा था। सेलिब्रेशन अब सही मायनों में शुरू हो चुका था।
    केक की क्रीम अभी भी दीदी के स्तनों पर हल्की चमक छोड़ रही थी। जीजू ने आखिरी निशान भी जीभ से साफ कर दिए थे। दोनों की साँसें तेज चल रही थीं। मैं कैमरा थामे खड़ी थी। हाथों में हल्का कंपन था, लेकिन रिकॉर्डिंग चालू रखी हुई थी।

    दीदी ने अचानक मुस्कुराते हुए जीजू की तरफ देखा और बोली,
    “जीजू… आपके लिए सरप्राइज है।”

    जीजू की भौंहें उठीं।
    “क्या?”

    दीदी ने कोई जवाब नहीं दिया। उसने धीरे-धीरे अपनी पैंटी के दोनों साइड के धागे खोले और उसे नीचे सरका दिया। अब वो पूरी तरह नंगी खड़ी थी। फिर वो बेड की तरफ मुड़ी, घुटनों के बल हो गई और हाथ आगे करके डॉगी स्टाइल में आ गई। उसकी गांड पीछे की तरफ उठी हुई थी।

    मैंने कैमरा थोड़ा नीचे किया तो साफ दिखा – दीदी की गांड पर कुछ लिपटा हुआ था। पारदर्शी प्लास्टिक जैसा, बिल्कुल वैसा ही जैसा गिफ्ट के ऊपर चढ़ाया जाता है। ऊपर एक छोटी सी रिबन जैसी चीज भी बंधी थी। दीदी ने पीछे मुड़कर जीजू को देखा और धीमी लेकिन साफ आवाज में कहा,

    “आज से ये गांड आपकी हुई। फुल को हटाके… आपकी कीजिए।”

    जीजू कुछ पल बस देखता रहा। फिर उसकी आवाज में हैरानी और उत्तेजना दोनों थी,
    “बेबी… थैंक यू।”

    दीदी ने एक बार मेरी तरफ देखा। उसकी आँखों में एक अजीब सा संकल्प था। उसने पहले ही मुझे साफ कह दिया था –
    “मुझे कितना भी दर्द हो, तुम वीडियो मत रोकना।”

    मैंने सिर्फ सिर हिलाया। कैमरा स्थिर रखा।

    जीजू ने धीरे से उस प्लास्टिक को पकड़ा और एक झटके में हटा दिया। दीदी की चिकनी, गोल गांड अब पूरी तरह नंगी थी। बीच में गुलाबी छेद हल्का सिकुड़ा हुआ दिख रहा था। जीजू ने दोनों हाथों से उसके कूल्हों को सहलाया। फिर उसने लुब्रिकेंट की ट्यूब उठाई, काफी मात्रा में निकालकर अपनी उँगलियों पर लगाया और दीदी की गांड के छेद पर धीरे-धीरे मलने लगा। एक उँगली धीरे से अंदर धकेली। दीदी की कमर में हल्की सिहरन दौड़ी।

    “आह…” उसकी आवाज निकली।

    जीजू ने दो उँगलियाँ कर दीं। अंदर-बाहर करने लगा। दीदी का सिर तकिए पर रखा हुआ था। उसकी साँसें तेज हो रही थीं। कुछ देर तक जीजू ने उसे तैयार किया। फिर उसने अपना लंड पकड़ा – जो पहले से ही पूरी तरह खड़ा था – और सिर को दीदी की गांड के छेद पर लगाया।

    “ready हो?” उसने पूछा।

    दीदी ने सिर हिलाया।
    “करो…”

    जीजू ने कमर से दबाव दिया। लंड का मोटा सिर धीरे-धीरे अंदर धँसने लगा। दीदी की मुट्ठियाँ तकिया कस गईं। उसके मुँह से एक लंबी, दबी हुई आवाज निकली —

    “आआह्ह्ह… दर्द… धीरे…”

    जीजू रुका नहीं। उसने और धक्का दिया। आधा लंड अंदर चला गया। दीदी की गांड फैल गई। उसकी आवाज अब चीख में बदलने लगी।

    “आआआह्ह्ह… बहुत मोटा… निकालो… नहीं… आआह्ह…”

    जीजू ने उसके कूल्हे और कस लिए और एक लंबा धक्का मारकर पूरा १२ इंच अंदर कर दिया। दीदी की चीख कमरे में गूँज गई। उसका शरीर आगे की तरफ झपट पड़ा, लेकिन जीजू ने कमर पकड़कर उसे रोके रखा। पूरा लंड उसकी गांड में धँसा हुआ था। दीदी जोर-जोर से साँसें ले रही थी। आँखें बंद थीं, माथा पसीने से तर।

    “अब निकलेगा…” जीजू ने भारी आवाज में कहा।

    उसने धीरे-धीरे बाहर खींचा – लगभग पूरा – फिर जोर से अंदर धकेल दिया। दीदी फिर से चीख पड़ी। जीजू ने रफ्तार पकड़ ली। पहले मध्यम, फिर तेज। हर धक्के के साथ दीदी की गांड काँप रही थी। आवाज “थप-थप-थप” की तेज गूँज के साथ मिल रही थी। दीदी की चीखें अब नियंत्रण से बाहर थीं।

    “आआह्ह्ह… दर्द… बहुत दर्द… धीरे… प्लीज… आआह्ह्ह…”

    लेकिन जीजू की रफ्तार कम नहीं हुई। वो जोर-जोर से पेल रहा था। पूरा लंड हर बार जड़ तक जा रहा था। दीदी के स्तन हर धक्के के साथ नीचे की तरफ झूल रहे थे। उसने तकिया मुँह में दबा लिया था, लेकिन आवाजें दब नहीं पा रही थीं। कभी-कभी वो “नहीं” कहती, कभी सिर्फ रोती। आँसू तकिए को भिगो रहे थे।

    मैं कैमरा थामे यह सब रिकॉर्ड कर रही थी। मेरी अपनी साँसें तेज हो चुकी थीं। जाँघों के बीच अजीब सी गर्मी और नमी महसूस हो रही थी। दीदी की चीखें, जीजू के जोरदार धक्के, गांड के फैलने का नजारा… सब कुछ इतना कच्चा और तीव्र था कि मेरी चूत खुद-ब-खुद गीली होती जा रही थी। पैंटी पूरी तरह भीग चुकी थी। लेकिन मैंने कैमरा नहीं रोका। दीदी की हिदायत याद थी।

    पंद्रह मिनट हो चुके थे। जीजू ने दीदी के बाल पकड़ लिए और पीछे खींचते हुए और तेज धक्के मारने लगा। दीदी का चेहरा ऊपर उठ गया। उसकी आँखें आधी खुली हुई थीं, मुँह खुला। आवाजें अब और तेज हो गई थीं।

    “आआह्ह्ह… फट गई… बहुत जोर से… आआह्ह… छोड़ो… नहीं…”

    जीजू ने एक हाथ उसकी गांड पर थप्पड़ मारा। फिर दूसरा। हर थप्पड़ पर दीदी की चीख और तेज हो जाती। उसकी गांड लाल पड़ने लगी थी। जीजू बिना रुके पेलता जा रहा था। पसीना उसके शरीर पर चमक रहा था। दीदी की टाँगें काँप रही थीं। वो बार-बार आगे गिरने लगती, लेकिन जीजू उसे कमर से पकड़कर संभाल लेता।
    तीस मिनट के करीब दीदी की आवाज बैठने लगी थी। वो अब सिर्फ सिसकियाँ और अधूरी चीखें ले रही थी। “आह… आह… दर्द… आआह…”। जीजू ने पोजीशन थोड़ी बदली। उसने दीदी के कूल्हों को और ऊँचा किया और और गहरे धक्के मारने लगा। लंड हर बार पूरा गायब हो जाता और फिर बाहर आता। दीदी की गांड पूरी तरह खुल चुकी थी। बीच-बीच में हल्की सफेद झाग जैसी चीज भी दिख रही थी।

    मैं कैमरा हिलाए बिना देखे जा रही थी। मेरी चूत अब पूरी तरह भीग चुकी थी। पैंटी चिपकी हुई थी। जाँघों के अंदर नमी फैल रही थी। मैं खुद को काबू में रखने की कोशिश कर रही थी, लेकिन शरीर में गर्मी बढ़ती जा रही थी। दीदी की हर चीख मेरे अंदर तक उतर रही थी।

    चालीस मिनट हो रहे थे। जीजू की साँसें हाँफने लगी थीं। उसने रफ्तार और बढ़ा दी। धक्के बहुत तेज और छोटे हो गए। दीदी अब लगभग बेहोशी की हालत में थी। उसका शरीर ढीला पड़ रहा था। सिर्फ गले से निकलने वाली सिसकियाँ बच रही थीं। जीजू ने आखिरी कुछ धक्के बहुत जोर से मारे। पूरा लंड अंदर धँसाए रखा और जोर से काँपते हुए निकलने लगा। दीदी की गांड में गर्म तरल महसूस हुआ। उसने एक लंबी, काँपती हुई सिसकी भरी और बेड पर आगे की तरफ ढेर हो गई।

    जीजू कुछ पल और अंदर रहा। फिर धीरे से लंड बाहर निकाला। दीदी की गांड खुली और लाल थी। सफेद तरल धीरे-धीरे बाहर निकल रहा था। दीदी मुँह के बल गिरी हुई जोर-जोर से साँसें ले रही थी। आँसू और पसीना मिले हुए थे। उसका पूरा शरीर काँप रहा था।

    जीजू ने साँस सँभालते हुए उसके कूल्हे पर हाथ फेरा।
    “बेबी… थैंक यू। आज वाला सरप्राइज… कभी नहीं भूलूँगा।”

    दीदी ने सिर्फ सिसकी भरी। वो कुछ बोलने की हालत में नहीं थी।

    मैं अभी भी कैमरा थामे खड़ी थी। रिकॉर्डिंग चल रही थी। मेरी चूत पूरी तरह भीगी हुई थी। पैंटी गीली चिपक रही थी। जाँघों के बीच नमी साफ महसूस हो रही थी। मैंने धीरे से साँस ली। हाथ काँप रहे थे। जो कुछ अभी देखा था – ४५ मिनट की बेरहम गांड की चुदाई – वो मेरे दिमाग में बार-बार घूम रहा था।

    कमरे में अब सिर्फ तीनों की तेज साँसें गूँज रही थीं। दीदी थककर गिरी हुई थी। जीजू उसके बगल में बैठकर पसीना पोंछ रहा था। और मैं… कैमरा थामे, भीगी हुई, सब कुछ रिकॉर्ड करती हुई खड़ी थी।

    एनिवर्सरी रात अभी खत्म नहीं हुई थी।
    गांड वाली लंबी चुदाई खत्म होने के बाद कमरे में भारी साँसें चल रही थीं। दीदी बेड पर मुँह के बल गिरी हुई थी। उसकी गांड अभी भी हल्की काँप रही थी और लाल थी। जीजू उसके बगल में बैठकर पसीना पोंछ रहा था। मैं कैमरा थामे खड़ी रही। रिकॉर्डिंग अभी भी चालू थी।

    जीजू ने मेरी तरफ देखा और पूछा,
    “वीडियो कैसा आया?”

    मैंने हल्के गले से जवाब दिया,
    “अच्छा… पूरा आ गया है।”

    जीजू ने सिर हिलाया। फिर उसने दीदी की तरफ इशारा करते हुए कहा,
    “अब इसकी बारी।”

    दीदी ने तुरंत सिर उठाया। आँखें अभी भी लाल थीं।
    “नहीं… कल।”

    दोनों ने कुछ देर कम आवाज में बात की। कुछ शब्द कोड जैसे लग रहे थे, मुझे पूरा समझ नहीं आया। बस इतना साफ सुनाई दिया कि जीजू जोर दे रहा था और दीदी मना कर रही थी।

    जीजू ने फिर कहा,
    “एक और बार कर दूँ गांड में?”

    दीदी ने सिर हिलाया,
    “नहीं। अब सूज गई है। दर्द हो रहा है। कल कर लेना। अभी नहीं।”

    जीजू थोड़ी देर चुप रहा। फिर थोड़े जोर से बोला,
    “चूत में तो नहीं हो रहा है ना?”

    दीदी ने कुछ नहीं कहा। बस साँस छोड़ी। जीजू ने मेरी तरफ देखा और साफ आदेश दिया,
    “वीडियो ऑन कर। चालू रख।”

    मैंने कैमरा फिर से ठीक किया। दिल जोर-जोर से धड़क रहा था।

    जीजू बेड पर उठकर बैठ गया। उसका लंड अभी पूरी तरह नरम नहीं हुआ था। दीदी ने धीरे से करवट ली और उसके पास आ गई। बिना कुछ बोले उसने लंड को हाथ में लिया और मुँह में ले लिया। पहले सिर्फ सिर। फिर धीरे-धीरे और अंदर। वो जोर-जोर से चूसने लगी। गाल धँस रहे थे। लार की आवाज साफ आ रही थी। जीजू का हाथ उसके सिर पर था। वो दीदी के बालों को सहला रहा था।

    कुछ ही देर में लंड फिर से पूरी तरह खड़ा हो गया – मोटा, तना हुआ, १२ इंच। दीदी ने उसे मुँह से निकाला। लार की चमक उस पर फैल रही थी। जीजू ने उसे दबाकर लिटा दिया। दीदी की टाँगें खुद ही फैल गईं। जीजू ने लंड का सिर उसकी चूत पर लगाया और एक ही धक्के में काफी अंदर डाल दिया।

    “आह्ह्ह…” दीदी की आवाज निकली।

    इस बार उसकी आवाज में दर्द नहीं, मजा था। जीजू ने और धक्का दिया। पूरा लंड अंदर चला गया। दीदी की कमर उठ गई। जीजू ने धक्के शुरू कर दिए – जोर के, गहरे और नियमित। दीदी की आवाजें अब खुली हुई थीं।

    “आह… हाँ… जोर से… वहीं… अच्छा लग रहा है…”

    जीजू ने पहले मिशनरी में ही काफी देर तक मारा। दीदी के पैर उसके कंधों पर थे। हर धक्के के साथ उसके स्तन काँप रहे थे। दीदी खुद कमर मिला रही थी। उसकी उँगलियाँ जीजू की पीठ में गड़ रही थीं। मैं कैमरा थामे देख रही थी। मेरी अपनी चूत पहले से भीगी हुई थी, अब और तड़पने लगी थी। लंड का वो मोटा आकार बार-बार दीदी की चूत में गायब हो रहा था और निकल रहा था। नजारा इतना कच्चा था कि मेरी जाँघें सिकुड़ रही थीं।

    करीब बीस-पच्चीस मिनट मिशनरी के बाद जीजू ने दीदी को पलटा। डॉगी स्टाइल। दीदी ने खुद ही गांड ऊपर कर ली। जीजू ने पीछे से लंड एक झटके में अंदर कर दिया और जोर-जोर से पेलने लगा। थप-थप की आवाज तेज हो गई। दीदी की आवाजें भी।

    “आह्ह्ह… और जोर से… फाड़ दो… आज पूरा मजा दो…”

    जीजू उसके बाल पकड़कर पीछे खींच रहा था। कभी गांड पर थप्पड़ मारता। दीदी हर थप्पड़ पर और जोर से आहें भरती। उसकी चूत पूरी तरह खुल चुकी थी। लंड आसानी से अंदर-बाहर हो रहा था। मैं देखे जा रही थी। मेरी पैंटी अब पूरी तरह गीली चिपक चुकी थी। चूत तड़प रही थी। बार-बार मन करता कि मैं भी वहाँ हूँ, लेकिन मैं सिर्फ रिकॉर्ड कर रही थी।

    पचास मिनट के करीब जीजू की साँसें बहुत तेज हो गईं। उसने दीदी की कमर जकड़ ली और गहरे धक्के मारते हुए अंदर ही निकलने लगा। दीदी ने भी उसी समय जोर से सिसकी भरी। दोनों का शरीर काँप रहा था। लेकिन जीजू ने लंड बाहर नहीं निकाला। थोड़ी देर रुककर उसने फिर से धक्के शुरू कर दिए। दूसरा राउंड बिना रुके चालू हो गया।

    दीदी हैरान रह गई, लेकिन मना नहीं किया।
    “फिर से…? आह… हाँ… चलता रह…”

    जीजू ने बिना रुके चोदना जारी रखा। पोजीशन बदलता रहा – कभी डॉगी, कभी फिर से मिशनरी, कभी दीदी को साइड में करके। लंड कभी बाहर नहीं निकला। सिर्फ गति बदलती रही। दीदी की आवाजें अब और खुली हुई थीं। वो खुद मांग रही थी।

    “और तेज… मत निकालना… अंदर ही… आआह्ह…”

    समय बीतता जा रहा था। पचास… पचपन मिनट… लगभग दो घंटे का सिलसिला बन चुका था। मैं लगातार देख रही थी। मेरी चूत अब बहुत तड़प रही थी। लंड का वो मोटा, चमकदार रूप बार-बार दीदी के अंदर गायब होते देखकर शरीर में गर्मी लहरें मार रही थी। जाँघें भीग चुकी थीं। पैंटी पूरी तरह गीली थी। मैंने कई बार पैर बदले, लेकिन तड़प कम नहीं हुई।

    आखिर में जीजू ने फिर से जोरदार धक्कों के साथ अंदर ही दूसरा राउंड भी खत्म किया। दीदी उसके नीचे पूरी तरह ढीली पड़ गई। दोनों की साँसें हाँफ रही थीं। शरीर पसीने से चमक रहे थे। कमरे में सेक्स की गंध फैल चुकी थी।
    जीजू ने धीरे से लंड बाहर निकाला। दीदी की चूत से सफेद तरल बाहर निकल रहा था। वो आँखें बंद किए लेटी हुई थी। चेहरे पर थकान और संतुष्टि दोनों थे।

    मैंने कैमरा धीरे से नीचे किया। हाथ काँप रहे थे। मेरी चूत अभी भी तड़प रही थी। लंड का नजारा आँखों के सामने से हट नहीं रहा था। मैंने गहरी साँस ली। कमरे में अब सिर्फ तीनों की भारी साँसें बची थीं।

  • रवि और शिल्पा की हनीमून की कहानी 4

    सुबह के ८:४५ बजे थे। पेरिस के लग्जरी सूट में सूरज की नरम सुनहरी किरणें खिड़की से अंदर आ रही थीं। रवि सबसे पहले उठा। उसका विशाल १०१ किलो का शरीर बेड से उठते ही बेड हिल गया। उसने शिल्पा की तरफ देखा। शिल्पा अभी भी नंगी पड़ी थी – उसका नन्हा-सा ४२ किलो वाला शरीर थका हुआ, चेहरे पर थकान और हल्की सूजन, जाँघें थोड़ी अलग, चूत अभी भी कल रात की वजह से लाल और थोड़ी सूजी हुई। उसकी साँसें धीमी थीं, लेकिन नींद अभी नहीं टूटी थी।

    रवि ने मुस्कुराते हुए शिल्पा के माथे पर हाथ रखा और धीरे-धीरे जगाया, “जान… उठो… सुबह हो गई।” शिल्पा ने आँखें खोलीं, लेकिन उठने की कोशिश में ही हल्की सिसकारी निकली, “आह्ह्ह… रवि… अभी भी दर्द हो रहा है… चूत जल रही है…” रवि ने तुरंत बेडसाइड टेबल से वो Women Sex Power Booster Capsule निकाला (जिसे वो painkiller बोलकर दे रहा था)। उसे पानी के ग्लास के साथ शिल्पा के हाथ में रख दिया और बोला, “ये लो… दर्द और थकान दोनों कम हो जाएगी। थोड़ी देर और आराम करो… तब तक मैं jacuzzi में नहाता हूँ।”

    शिल्पा ने कैप्सूल निगल लिया। रवि ने उसे चादर ओढ़ा दी और खुद नंगा ही jacuzzi की तरफ चला गया।

    लेकिन सिर्फ १०-१२ मिनट बाद कैप्सूल का असर शुरू हो गया। शिल्पा का पूरा शरीर अचानक गर्म होने लगा। पहले छाती में, फिर पेट में, और फिर चूत में तेज़ गर्मी उठी। उसकी चूत अंदर से पल-पल गीली होती जा रही थी, निप्पल्स सख्त होकर खड़े हो गए, साँसें तेज़ हो गईं। वो बेड पर करवट बदलते ही हल्की सिसकारी भर उठी, “आह्ह्ह… क्या हो रहा है… बहुत गर्मी…” उसकी जाँघें आपस में रगड़ने लगीं।

    शिल्पा उठी। उसकी आँखों में भूख साफ दिख रही थी। वो सीधे jacuzzi की तरफ गई। रवि jacuzzi में बैठा था, पानी में उसका १३ इंच लंड आधा तना हुआ ऊपर दिख रहा था। शिल्पा बिना कुछ बोले jacuzzi में घुस गई और सीधे रवि के लंड पर झुक गई। उसने मुँह खोला और पूरा लंड चूसने लगी – जोर-जोर से, गहरी गहरी। “म्ह्म्म… आह्ह्ह… रवि… बहुत स्वादिष्ट…” वो लगातार चूस रही थी, जीभ से नसें चाट रही थी, सिर को गले तक ले जाने की कोशिश कर रही थी।

    कैप्सूल का पावर अब तेज़ी से बढ़ रहा था। शिल्पा की चूत से अब पानी बह रहा था, साँसें फूल रही थीं, वो खुद को रोक नहीं पा रही थी। वो रवि को तड़पाने लगी – कभी लंड चूसती, कभी gotiyon को चाटती, कभी ऊपर आकर उसके होंठ चूमती। “रवि… बहुत गर्मी हो रही है… आह्ह्ह… मुझे चाहिए… बहुत चाहिए…” लेकिन रवि जानबूझकर उसे तड़पा रहा था। वो सिर्फ मुस्कुराता और कहता, “थोड़ा और तड़प लो जान… देखता हूँ तुम कितनी पागल हो…”

    बहुत देर तक तड़पाने के बाद शिल्पा बर्दाश्त नहीं कर पाई। वो रवि के ऊपर चढ़ गई, उसके लंड को हाथ से पकड़ा, अपनी चूत के मुंहाने पर सेट किया और धीरे-धीरे नीचे बैठने लगी। पहले ७ इंच… फिर ८ इंच तक वो खुद ही अंदर लेने लगी। “आह्ह्ह… ८ इंच… भर गया… आह्ह्ह… बहुत मजा आ रहा है…” वो ४० मिनट तक इसी तरह रवि के लंड पर बैठकर ऊपर-नीचे होती रही। कभी तेज़, कभी धीरे, कभी घुमाकर। उसके छोटे स्तन उछल रहे थे, चीखें और सिसकारियाँ निकल रही थीं। “आह्ह्ह… रवि… ८ इंच… परफेक्ट… आह्ह्ह… और चाहिए… लेकिन… आह्ह्ह!!”

    लेकिन रवि अब और इंतज़ार नहीं कर सका। उसने शिल्पा को गोद में उठाया, jacuzzi से बाहर निकाला और बेड पर लिटा दिया। उसके दोनों पैर कंधों पर रखे, ऊँचे कर दिए। रात का लाया हुआ massage oil निकाला और शिल्पा की चूत पर भर-भरकर लगा दिया। फिर अपना लंड मुंहाने पर रखा।

    पहले ८ इंच आराम से अंदर। लेकिन ५ मिनट बाद रवि ने जोर लगाया और १० इंच पूरा-पूरा एक झटके में अंदर धकेल दिया।

    शिल्पा की चीख आसमान फाड़ गई – “आआआआह्ह्ह्ह्ह्ह!!! फट गई… १० इंच… मर गई… निकालो… आआह्ह्ह्ह्ह!!” उसकी आँखें फैल गईं, आँसू की धार बहने लगी, पूरा शरीर बेड पर उछल पड़ा। “रवि… बहुत बड़ा… फट रही हूँ… पेट तक जा रहा है… आआह्ह्ह्ह्ह!!” चूत बुरी तरह फट गई थी, खून की पतली धार निकलने लगी। शिल्पा जोर-जोर से चीख रही थी, रो रही थी, हाथ-पैर मार रही थी। “आह्ह्ह… दर्द… बहुत दर्द… मम्मी… बचाओ… रवि… निकालो… आआह्ह्ह्ह्ह!! मैं मर जाऊंगी… फट गई… बहुत मोटा… आआह्ह्ह्ह्ह!!”

    लेकिन रवि नहीं रुका। उसने ५० मिनट तक लगातार १० इंच की पूरी गहराई पर पेला। हर झटके पर शिल्पा की चीख फटती – “आआह्ह्ह्ह… फट रही हूँ… पेट फाड़ रहा है… आह्ह्ह्ह… रो रही हूँ… देखो आँसू… बहुत आँसू… निकालो… प्लीज… आआह्ह्ह्ह्ह!!” वो बार-बार रवि को धकेलने की कोशिश करती, लेकिन रवि का विशाल शरीर उसे दबाए रखता। “आह्ह्ह… दर्द… बहुत दर्द… लेकिन… अंदर तक… आह्ह्ह… रुक जाओ… मैं सह नहीं पा रही… आआह्ह्ह्ह्ह!!”

    शिल्पा की हालत पूरी तरह खराब हो गई थी। आवाज़ बैठ गई, सिर्फ सिसकियाँ और तेज़ रोना बचा था। आँखें सूजी, चेहरा आँसुओं से नम, शरीर थर-थर काँप रहा था।

    उस सुबह के बाद पूरा दिन दोनों ने सेक्स बिल्कुल नहीं किया। शिल्पा की हालत बहुत खराब थी। उसका नन्हा-सा शरीर बेड पर पड़ा था – चूत बुरी तरह सूजी हुई, लाल, फटी हुई, हल्का खून अभी भी रिस रहा था, जाँघें काँप रही थीं, आँखें सूजी हुई, चेहरा आँसुओं से नम। वो उठने की कोशिश भी नहीं कर पा रही थी। सिर्फ हल्की-हल्की सिसकियाँ निकल रही थीं, “आह्ह्ह… रवि… बहुत दर्द… मैं चल भी नहीं पा रही…” उसका मूड भी पूरी तरह खराब था। वो शर्मिंदा भी थी और थकी हुई भी।

    रवि ने उसे प्यार से चूम लिया। “कोई बात नहीं जान… आज पूरा दिन आराम करो। मैं तुम्हारे लिए कुछ खास लाता हूँ।” वो बाहर गया और रिसॉर्ट की शॉप से बहुत सुंदर गिफ्ट्स ले आया – एक बड़ा सा टेडी बियर (जिसके गले में “I Love You” लिखा था), शिल्पा की पसंद का डायमंड ब्रेसलेट, एक सॉफ्ट सिल्क का नाइट गाउन, चॉकलेट बॉक्स, और फ्रेश गुलाबों का बड़ा गुलदस्ता। कमरे में वापस आकर उसने सब शिल्पा के बेड के पास रख दिया। फिर उसके पास बैठ गया, उसके बालों में हाथ फेरता रहा, माथे पर किस करता रहा और बहुत मीठी-मीठी बातें करने लगा, “तुम मेरी जान हो… मैं तुम्हें कभी दुखी नहीं देख सकता… आज बस आराम करो… मैं तुम्हारा ख्याल रखूँगा।”

    शिल्पा की आँखों में आँसू आ गए, लेकिन वो मुस्कुराई। दोनों ने लंच रूम में ही मँगवाया – लाइट फ्रेंच सलाद, पास्ता, फ्रूट ज्यूस। रवि ने खुद शिल्पा को खिलाया, चम्मच से मुँह में डाला, “खाओ जान… ताकत आएगी।” शाम को डिनर भी रूम में ही – कैंडल लाइट, वाइन (शिल्पा ने सिर्फ एक घूँट लिया), और बहुत सारा प्यार। डिनर के बाद रवि ने शिल्पा को गोद में उठाया, बालकनी में ले गया, उसके होंठों पर लंबा-लंबा किस किया, गर्दन चूमी, लेकिन आगे कुछ नहीं। सिर्फ प्यार। फिर दोनों बेड पर लेट गए, शिल्पा रवि की छाती पर सिर रखकर सो गई।

    अगली सुबह। रवि सबसे पहले उठा। उसने शिल्पा को जगाया और धीरे से बोला, “जान… आज फिर से करना है… तुम तैयार हो?” शिल्पा ने तुरंत सिर हिलाया और गुस्से में बोली, “नहीं… गुसे से नहीं करना मुझे… कल तुमने बहुत ज्यादा कर दिया… मैं अभी भी दर्द में हूँ… आज नहीं… प्लीज।” उसका चेहरा लाल हो गया था, वो करवट बदलकर दूसरी तरफ मुंह कर गई।

    लेकिन शिल्पा ने चुपके से वो Women Sex Power Booster Capsule उठा ली। रवि को कुछ बताए बिना पानी के साथ निगल लिया। रवि को अंदाजा हो गया कि अब क्या होने वाला है। वो मुस्कुराया और मन में बोला, “अब गुस्से में नहीं… मैं भी तड़पाऊँगा… लेकिन प्यार से।”

    कैप्सूल का असर शुरू हुआ। सिर्फ १५ मिनट बाद शिल्पा का पूरा शरीर गर्म होने लगा। उसकी चूत अंदर से पल-पल गीली होती गई, निप्पल्स सख्त, साँसें तेज़। वो बर्दाश्त नहीं कर पाई। उठकर रवि के पास आई, उसके पैरों के पास घुटनों पर बैठ गई और गिड़गिड़ाते हुए बोली, “प्लीज रवि… गलती हो गई… मैंने गुस्सा किया… अब कर लो… बहुत जरूरत है… आह्ह्ह… मुझे माफ कर दो… कर लो ना…”

    रवि ने जानबूझकर मजाक किया, “अरे… अभी तो तुमने मना किया था… अब क्यों?” शिल्पा ने कुछ नहीं सुना। उसने रवि का अंडरवियर उतार दिया और सीधा लंड मुँह में ले लिया। जोर-जोर से चूसने लगी – ३-४ इंच तक गहरी, जीभ से नसें चाटती, gotiyon को हाथ से मसलती। “म्ह्म्म… आह्ह्ह… रवि… बहुत स्वाद… आह्ह्ह…”

    रवि भी शुरू हो गया। उसने शिल्पा को ऊपर खींचा, उसके छोटे स्तनों को चूसना शुरू किया – जोर से, चबाते हुए, निप्पल्स को दाँत से खींचते हुए। शिल्पा ने gotiyon को फिर से चाटना शुरू किया। दोनों ३० मिनट तक एक-दूसरे को तड़पाते रहे।

    फिर रवि ने शिल्पा को तड़पाया। वो जानबूझकर लंड चूत के पास रखता, लेकिन अंदर नहीं डालता। शिल्पा पागल हो गई, “आह्ह्ह… रवि… अब मत तड़पाओ… डाल दो… पूरा डाल दो…”

    आखिरकार रवि ने अलग-अलग पोजीशन में पूरा १० इंच लंड डालना शुरू किया। missionary, doggy, cowgirl, spooning, standing – हर पोजीशन में पूरा लंड अंदर, ५० मिनट तक लगातार। शिल्पा चीख रही थी, “आआह्ह्ह्ह… १० इंच… फट गई… आह्ह्ह… दर्द… लेकिन मजा… आआह्ह्ह्ह!!” वो रो रही थी, चीख रही थी, लेकिन कमर खुद उठा रही थी। “आह्ह्ह… रवि… बहुत बड़ा… पेट फाड़ रहा है… आआह्ह्ह्ह… लेकिन मत रुको… आह्ह्ह!!”

    ५० मिनट बाद रवि ने अपना पूरा माल शिल्पा की चूत में भर दिया।

    फिर बचे हुए दिन दोनों ने बहुत मस्ती की।

    Jacuzzi में: दोनों नंगे jacuzzi में घुसे। रवि ने शिल्पा को गोद में बैठाया और पानी के अंदर ही पूरा १० इंच अंदर किया। शिल्पा चीखी, लेकिन पानी की वजह से दर्द कम था। २० मिनट तक jacuzzi में ही चोदा।

    बालकनी में: रात को बालकनी में खड़े-खड़े doggy स्टाइल में पूरा लंड अंदर। शहर की रोशनी देखते हुए ३० मिनट तक पेला। शिल्पा चीख रही थी, “आह्ह्ह… कोई देख लेगा… लेकिन मत रुको… आह्ह्ह!!”

    Swimming Pool में: प्राइवेट swimming pool में रात को नंगे तैरते हुए, pool के किनारे बैठकर cowgirl में पूरा लंड अंदर। पानी में ४० मिनट तक मस्ती।

    Private Yard में: सबसे खास – रिसॉर्ट का प्राइवेट yard। रवि ने surprise party दी – सिर्फ दोनों के लिए। Yard में candle lights, गुलाब, music, cake। शिल्पा खुश हो गई। पार्टी के दौरान रवि ने yard के घास पर शिल्पा को ४ बार पूरा १० इंच डाला – missionary, doggy, standing, और lotus position में। हर बार २०-२० मिनट। शिल्पा चीखती रही, “आह्ह्ह… yard में… आह्ह्ह… कोई आएगा… लेकिन बहुत मजा… आआह्ह्ह्ह!!” कुल ४ बार yard में पेला – पूरी रात मस्ती।

    आखिरी एक दिन बचा था घर जाने से पहले। उस दिन रवि ने शिल्पा को पूरे सूट में घुमाया – bed, sofa, bathroom, balcony, jacuzzi – हर जगह पूरा १० इंच डालकर ६ बार चोदा। सुबह १ घंटा, दोपहर १ घंटा, शाम १ घंटा। शिल्पा पूरी तरह थक गई, लेकिन खुश भी थी। “रवि… अब आदत पड़ गई… घर जाकर भी हम यही करेंगे… बिना डर… आह्ह्ह…”

    दोनों नंगे ही लेट गए। घर जाने का सामान पैक कर लिया,

    रात के ११:४० बजे थे। पेरिस का लग्जरी सूट अब आखिरी रात की रोशनी में नहाया हुआ था। मोमबत्तियाँ अभी भी धीरे-धीरे जल रही थीं, कमरे में हल्की चॉकलेट और वेनिला की खुशबू फैली हुई थी। दोनों पूरी तरह नंगे थे। शिल्पा रवि की छाती से चिपकी हुई लेटी थी, उसका नन्हा-सा ४२ किलो वाला गोरा शरीर रवि के विशाल १०१ किलो वाले शरीर पर बिल्कुल छोटा-सा खिलौना लग रहा था। रवि का एक हाथ शिल्पा की पीठ पर धीरे-धीरे फेर रहा था, दूसरा हाथ उसकी नितंबों पर।

    रवि ने धीरे से शिल्पा की गांड के बीच उँगली सरकाने की कोशिश की। जैसे ही उसकी मोटी उँगली गांड के छेद को छूने लगी, शिल्पा ने चौंककर अपना नितंब पीछे खींच लिया और रवि का हाथ हटा दिया।

    “नहीं रवि… वहाँ मत…” शिल्पा ने तुरंत कहा, उसकी आवाज़ में डर और दृढ़ता दोनों थे। “मुझे बहुत दर्द होता है वहाँ… कल भी जब तुमने उँगली डाली थी तो बहुत जलन हुई थी। गांड में अभी नहीं… प्लीज। हम अगले हनीमून पर करेंगे… तब तक मैं तैयार हो जाऊंगी। आज नहीं… मान जाओ ना।”

    रवि ने एक पल उसे देखा, फिर मुस्कुराकर उसके माथे पर किस कर दिया। “ठीक है जान… जैसी तुम चाहो। अगले हनीमून पर तुम्हारी गांड भी पूरी तरह मेरी होगी। आज नहीं छूँगा।”

    शिल्पा ने राहत की साँस ली और रवि की छाती में मुँह छिपा लिया।

    रवि ने थोड़ी देर चुप रहकर फिर बोला, “शिल्पा… एक बात बताऊँ? वो जो रोज़ सुबह वाली गोली मैं तुम्हें दे रहा था… वो painkiller नहीं थी। वो Women Sex Power Booster Capsule थी… सेक्स पावर बढ़ाने वाली।”

    शिल्पा ने तुरंत सिर उठाया। उसकी आँखें फैल गईं। “क्या? तुमने मुझे बिना बताए वो वाली गोली दी? मैं सोच रही थी दर्द कम करने वाली है… और तुम… तुमने मुझे भड़काने वाली गोली दी?” वो थोड़ा गुस्सा हो गई, लेकिन गुस्सा मजाकिया था। उसने रवि की छाती पर हल्का-सा मुक्का मारा। “बहुत शरारती हो तुम… मैं समझ गई थी कि अचानक मुझे इतनी भूख क्यों लग रही है… तुमने मुझे जानबूझकर पागल बनाया… बदमाश!”

    रवि हँसा। “हाँ… बिना उस गोली के तुम पूरा १० इंच नहीं ले पाती… तुम बहुत छोटी हो, मैं बहुत बड़ा हूँ। इसलिए थोड़ी मदद लेनी पड़ी। लेकिन देखो… अब तुम्हें आदत भी पड़ गई है ना?”

    शिल्पा ने शर्माते हुए सिर हिलाया। “हाँ… पड़ गई है… लेकिन फिर भी तुमने धोखा दिया।”

    रवि ने उसे कसकर गले लगा लिया और कान में फुसफुसाया, “तो अब सजा दो… एक जोरदार राउंड।”

    शिल्पा ने कुछ नहीं कहा, बस रवि के लंड को हाथ में पकड़ लिया।

    फिर शुरू हुआ उनका आखिरी और सबसे लंबा राउंड। रवि ने शिल्पा को पहले missionary में लिया – पूरा १० इंच धीरे-धीरे अंदर किया। शिल्पा चीखी, लेकिन इस बार कम। फिर पोजीशन बदले – doggy, cowgirl, spooning, standing against wall, lotus position। हर पोजीशन में पूरा लंड, जोरदार धक्के, लेकिन बहुत प्यार के साथ।

    करीब १ घंटे तक लगातार चला। शिल्पा बार-बार चीखती, “आह्ह्ह… १० इंच… फट रही हूँ… आह्ह्ह… लेकिन मत रुको… आह्ह्ह!!” कभी रोती, कभी मजा लेती। आखिर में रवि ने शिल्पा की चूत के अंदर ही पूरा वीर्य भर दिया। दोनों थककर नंगे ही एक-दूसरे से चिपके सो गए।


    अगली सुबह।

    उठते ही रवि ने शिल्पा को फिर से चोदा। इस बार सिर्फ ४० मिनट का तेज़ राउंड – पूरा १० इंच, doggy और missionary में। शिल्पा चीखी, रोई, लेकिन अंत में मुस्कुराई।

    फिर दोनों तैयार हुए। सामान पैक किया, रिसॉर्ट से चेकआउट किया और एयरपोर्ट पहुँचे। फ्लाइट में भी दोनों हाथों में हाथ डाले बैठे रहे।

    भारत पहुँचकर एयरपोर्ट पर दोनों अलग हो गए। शिल्पा सीधे अपनी माँ के घर चली गई। रवि अपने घर।

    शिल्पा जब अपनी माँ से मिली तो उसने सिर्फ मुस्कुराकर कहा, “हनीमून बहुत अच्छा था मम्मी…” लेकिन उसके चेहरे पर वो नई चमक और थकान दोनों साफ दिख रही थी।

    रवि घर पहुँचकर बिस्तर पर लेट गया और मुस्कुराते हुए सोचने लगा – “अब असली जिंदगी शुरू होती है…”

    शिल्पा जब एयरपोर्ट से सीधे अपनी माँ के घर पहुँची तो शाम के ७:३० बज रहे थे। दरवाजा खुलते ही उसकी माँ (जो नाम था रमा) ने उसे गले लगा लिया। रमा ने शिल्पा को ऊपर से नीचे तक देखा। शिल्पा का चेहरा थका हुआ था, लेकिन आँखों में एक नई चमक थी। उसके स्तन पहले से काफ़ी बड़े और भरे हुए दिख रहे थे, ब्रा का साइज़ बढ़ गया था। कमर थोड़ी और पतली लग रही थी, लेकिन नितंब और जाँघें थोड़ी सूजी हुई थीं। चेहरे पर वो “सर्विस्ड” वाली चमक साफ़ झलक रही थी – जैसे कोई औरत अब पूरी तरह औरत बन चुकी हो।

    रमा ने मुस्कुराते हुए पूछा, “बेटा… कैसा रहा तुम्हारा हनीमून? सब ठीक तो है ना?”

    शिल्पा शर्म से लाल हो गई। उसने माँ की गोद में सिर रख दिया और धीरे से बोला, “मम्मी… कच्ची कली के फूल बना दिया रवि ने… पूरी तरह औरत बना दिया मुझे।”

    रमा ने हँसते हुए शिल्पा के स्तनों को देखा और कहा, “वो तो दिख रहा है बेटा… तुम्हारे boobs देखकर लग रहा है जैसे कोई ने बहुत जोर-जोर से मसल-मसलकर बड़ा कर दिया हो। चेहरा भी देखो… आँखों में वो चमक… साफ़ लग रहा है कि तुम्हें खूब सर्विस किया गया है।” फिर उसने शिल्पा को पास बैठाया, उसके बालों में हाथ फेरते हुए पूछा, “बताओ ना… कैसे हुआ सब? डर तो नहीं लगा? रवि बहुत बड़ा है ना… तुम इतनी छोटी हो…”

    शिल्पा ने शर्माते हुए लेकिन विस्तार से बताना शुरू किया। “मम्मी… पहले तो बहुत डर लग रहा था। रवि का… १३ इंच लंबा और ४.५ इंच मोटा… मैं देखकर ही घबरा गई थी। पहले दिन सिर्फ किस और boobs चूसने तक रहा। लेकिन हनीमून पर… वो पूरा-पूरा अंदर करने लगा। पहले तो सिर्फ आधा ले पाती थी… बहुत दर्द होता था… चूत फट जाती थी… खून निकलता था… मैं रोती-चिल्लाती रहती थी। लेकिन रवि रुकता नहीं था।”

    रमा ने आँखें फैलाकर पूछा, “और वो गोली वाली बात? तुमने बताया था ना?”

    शिल्पा ने सिर हिलाया, “हाँ मम्मी… वो Women Sex Power Booster Capsule थी। दर्द की गोली नहीं। रवि ने बिना बताए दी थी। उससे मेरी भूख बढ़ जाती थी… मैं खुद-ब-खुद उसके लंड पर चढ़ जाती थी। पहले ६-८ इंच ले पाती थी… बाद में पूरा १० इंच भी लेने लगी। हर दिन ३-५ राउंड… कभी jacuzzi में, कभी balcony में, कभी pool में, कभी yard में… रवि ने surprise party भी दी थी yard में… वहाँ घास पर ४ बार पूरा डाला… मैं चीखती थी, रोती थी, लेकिन मजा भी आता था। आखिरी रात तो १ घंटे तक लगातार चला… मैं उठने की हालत में नहीं थी…”

    रमा ने शिल्पा को सीने से लगा लिया। “बेटा… दर्द हुआ होगा… लेकिन अब तुम औरत बन गई हो। घर आकर भी यही सब चलेगा… बस सावधानी रखना।”

    शिल्पा शर्म से मुस्कुराई और चुप हो गई।

    —

    अगले दिन सुबह शिल्पा रवि के घर चली गई। रवि ने उसे दरवाजे पर ही गोद में उठा लिया और अंदर ले गया। दोनों को अकेले छोड़ दिया गया था – पूरा घर खाली था।

    उसी रात शुरू हुआ उनका असली वैवाहिक जीवन।

    पहला राउंड – बेडरूम में। रवि ने शिल्पा को दीवार से सटाकर खड़ा किया और पीछे से पूरा १० इंच एक झटके में अंदर कर दिया। शिल्पा चीखी, “आआह्ह्ह… पूरा… फट गई… आह्ह्ह!!” २५ मिनट तक जोर-जोर से पेला।

    दूसरा राउंड – शावर में। दोनों नहाते हुए, शिल्पा को दीवार से लगाकर missionary स्टाइल में २० मिनट तक चोदा।

    तीसरा राउंड – सोफे पर। शिल्पा ऊपर बैठकर cowgirl में ३० मिनट तक खुद ऊपर-नीचे होती रही।

    चौथा राउंड – बालकनी में। रात की ठंडी हवा में doggy स्टाइल, पूरा १० इंच, २५ मिनट।

    पाँचवाँ राउंड – फिर बेड पर। आखिरी राउंड सबसे लंबा – ४० मिनट तक अलग-अलग पोजीशन में। शिल्पा अब पूरी तरह थक चुकी थी, लेकिन खुश थी। दोनों नंगे ही एक-दूसरे से चिपके सो गए।

    उस एक रात में कुल ५ राउंड हो गए।

    फिर रोज़ का नियम बन गया – हर दिन कम से कम ३ राउंड। कभी सुबह, कभी दोपहर, कभी रात। कभी जल्दी-जल्दी, कभी घंटों तक। शिल्पा अब पूरी तरह आदत डाल चुकी थी। वो खुद कहती, “रवि… आज ४ कर लो… मुझे पसंद है।”

    हनीमून खत्म हो गया था, लेकिन उनकी असली कहानी अभी शुरू हुई थी।

    अगली कहानी आएगी – “गांड का हनीमून”
    जिसमें शिल्पा अपनी गांड भी रवि को पूरी तरह सौंप देगी… और वो भी बहुत विस्तार से।

    ये थी रवि और शिल्पा की हनीमून की पूरी, सबसे लंबी और सबसे गर्म कहानी। अब उनकी नई जिंदगी शुरू हो चुकी है… जहाँ हर रात नई मस्ती है।

  • रवि और शिल्पा की हनीमून की कहानी 3

    रवि ने कंडोम उतारा और शिल्पा की चूत से बाहर निकला। जैसे ही लंड निकला, शिल्पा की छोटी-सी चूत से कंडोम का थोड़ा-सा वीर्य और हल्का खून बाहर बहने लगा। रवि तुरंत उठा। उसने बेडसाइड टेबल से पानी का ग्लास उठाया, शिल्पा के सिर को हल्का सहारा दिया और बहुत प्यार से बोला, “जान… पानी पी लो… थोड़ा आराम करो…” शिल्पा की आँखें सूजी हुई थीं, गालों पर आँसू सूख चुके थे लेकिन नई धार बह रही थी। उसने काँपते हाथ से ग्लास पकड़ा, दो-तीन घूँट पीए, लेकिन गला रुंधा हुआ था। “रवि… मैं ठीक नहीं हूँ… बहुत दर्द हो रहा है… चूत जल रही है… सूज गई है… मैं उठ भी नहीं पा रही… तुमने मुझे बहुत मार दिया…” वो सिसकते हुए बोली, आवाज़ इतनी कमजोर कि मुश्किल से सुनाई दे रही थी।

    रवि जानता था कि अगर यही हालत रही तो घर जाकर शिल्पा चीखेगी, पूरा जोड़ परिवार सुन लेगा, सवाल होंगे। उसे आदत डालनी ही पड़ेगी। उसने शिल्पा को प्यार से चूम लिया, उसके माथे पर हाथ रखा और फुसफुसाया, “मैं जानता हूँ बहुत दर्द हुआ… लेकिन हमें करना पड़ेगा… वरना घर जाकर तुम चीखोगी… सबको पता चल जाएगा… इसलिए मैं तुम्हारी मदद करता हूँ…”

    उसने तुरंत रिसॉर्ट के कंजियर को कॉल किया। “हैलो… सूट ७०१… एक strong painkiller tablet चाहिए… जो दर्द और सूजन कम करे… और हाँ, crushed ice भी भेज दो… जल्दी।” दस मिनट बाद दरवाजे पर नॉक हुई। रवि ने डोर खोली। स्टाफ ने एक छोटी दवा की शीशी (pink painkiller tablet) और एक छोटा आइस बैग थमा दिया। रवि ने टिप दी और दरवाजा बंद कर दिया।

    वो बेड पर वापस आया। शिल्पा अभी भी पेट के बल पड़ी थी, जाँघें हल्के-हल्के काँप रही थीं। रवि ने गोलियाँ निकालीं – सिर्फ एक pink painkiller tablet। उसने शिल्पा को गोद में उठाया, उसे बैठाया और पानी के साथ वो एक गोली उसके मुंह में रख दी। “ये लो… दर्द कम हो जाएगा… डर भी कम होगा… पी लो…” शिल्पा ने काँपते हाथ से पानी पिया और गोली निगल ली। फिर रवि ने आइस बैग से crushed ice निकाला, एक साफ सफेद कपड़े में लपेटा और बहुत धीरे-धीरे शिल्पा की सूजी हुई चूत पर लगाने लगा। ठंडी बर्फ छूते ही शिल्पा ने सिसकारी भरी, “आह्ह्ह… ठंडा… लेकिन अच्छा लग रहा है… जलन कम हो रही है…” रवि ने १०-१० मिनट तक बर्फ लगाई – कभी हल्का दबाकर, कभी घुमाकर, कभी सिर्फ रखकर। बर्फ पिघलकर पानी बन रहा था, शिल्पा की जाँघों पर बह रहा था।

    लगभग २ घंटे बाद रवि ने शिल्पा की चूत को ध्यान से देखा। सूजन काफी कम हो गई थी – लालिमा कम, मुंहाना थोड़ा सामान्य दिख रहा था। रवि ने शिल्पा की ठोड़ी थामी, आँखों में आँखें डालीं और बहुत प्यार से पूछा, “अब बताओ… डर कम हुआ है ना? सूजन भी कम हो गई है…” शिल्पा ने हल्के से सिर हिलाया, “हाँ… थोड़ा… डर कम हुआ है… लेकिन अभी भी डर लग रहा है…” रवि मुस्कुराया। वो अब और ज्यादा sure हो गया था।

    लेकिन इस बार उसने सिर्फ ६ इंच तक ही जाने का फैसला किया। उसने फिर कंडोम चढ़ाया, शिल्पा को प्यार से लिटाया, दोनों पैर फैलाए। पहला झटका – ४ इंच। दूसरा झटका – ६ इंच। शिल्पा फिर चीखी, लेकिन पिछली बार जितनी तेज़ नहीं। “आह्ह्ह… फिर दर्द… लेकिन कम… आह्ह्ह… रवि… अभी भी जल रही है… आह्ह्ह!!” रवि ने ४० मिनट तक लगातार ६ इंच की गहराई पर पंपिंग की। हर धक्के पर शिल्पा चीखती, रोती, लेकिन इस बार चीख में थोड़ा-थोड़ा मजा भी आने लगा। “उफ्फ… आह्ह्ह… दर्द तो है… लेकिन… अंदर तक भर गया है… आह्ह्ह… रवि… धीरे… लेकिन मत रुको… आह्ह्ह!!” वो बार-बार रो रही थी, आँसू बह रहे थे, लेकिन कभी-कभी उसकी कमर खुद उठने लगती थी। फिर भी वो मना कर रही थी – “नहीं… रवि… मैं मना करती हूँ… बहुत मना करती हूँ… बस करो… आह्ह्ह… मैं सह नहीं पा रही… लेकिन… थोड़ा अच्छा भी लग रहा है… आह्ह्ह!!”

    रवि ने रुकने का नाम नहीं लिया। ४० मिनट तक ठक-ठक-ठक की आवाज़ गूंजती रही। शिल्पा की हालत खराब थी, लेकिन पिछली बार जितनी बुरी नहीं। आखिर में रवि ने तेज़ झटके दिए और चूत के अंदर ही (कंडोम में) पूरा भर दिया। शिल्पा अंत में काँपती हुई, रोती हुई, लेकिन थोड़े मजा के साथ ढेर हो गई।

    रवि ने उसे साफ किया, पानी पिलाया, गले लगाया। “कोई बात नहीं जान… तुम ठीक हो जाओगी…” फिर उसने शिल्पा को प्यार से चूम लिया और बोला, “अब बस हो गया… लेकिन अगले २ दिन तक हर सुबह उठते ही ये एक टैबलेट ले लेना… ताकि दर्द न हो… मैं तुम्हें हर रोज़ दूँगा…” शिल्पा ने थकान से सिर हिलाया। रवि ने वो एक गोली उसके हाथ में रख दी, खुद भी लेट गया और दोनों सो गए।

    दूसरे दिन सुबह। सूरज की हल्की सुनहरी किरणें खिड़की से अंदर आ रही थीं, कमरे में हल्की गुलाबी रोशनी फैल गई थी। शिल्पा सबसे पहले उठी। उसका नन्हा-सा शरीर अभी भी थोड़ा थका हुआ था, लेकिन कल रात की सूजन अब काफी कम हो गई थी। उसने रवि की तरफ देखा – रवि अभी गहरी नींद में था, उसका विशाल १०१ किलो का शरीर चादर के नीचे फैला हुआ, छाती ऊपर-नीचे हो रही थी।

    शिल्पा ने बेडसाइड टेबल की तरफ हाथ बढ़ाया। वहाँ वो एक कैप्सूल रखा था – Women Sex Power Booster Capsule। रवि ने कल रात उसे यही दिया था, कहकर कि “ये ले लो… दर्द नहीं होगा… और सब ठीक हो जाएगा।” शिल्पा ने कैप्सूल को पानी के ग्लास के साथ निगल लिया। ठंडा पानी गले से नीचे उतरा, कैप्सूल अंदर चला गया।

    शिल्पा वापस लेट गई, रवि की बाँह में अपना सिर रख दिया। पहले तो कुछ नहीं हुआ। लेकिन धीरे-धीरे, सिर्फ १०-१२ मिनट बाद, उसका शरीर अजीब सा महसूस करने लगा।

    पहले तो उसकी छाती में हल्की गर्मी उठी। फिर वो गर्मी धीरे-धीरे नीचे उतरने लगी – पेट में, जाँघों में, और सबसे ज्यादा उसकी चूत में। शिल्पा की साँसें थोड़ी तेज़ हो गईं। उसकी चूत अचानक गर्म और नम होने लगी – बिना कुछ छुए भी अंदर से पल-पल गीली होती जा रही थी। निप्पल्स सख्त होकर खड़े हो गए, छोटे-छोटे स्तन भारी लगने लगे। पूरा शरीर हल्का-हल्का काँपने लगा, लेकिन ये काँपना दर्द का नहीं, बल्कि एक अजीब सी भूख का था।

    शिल्पा ने रवि की तरफ देखा। उसकी नजर रवि के चेहरे पर, फिर उसकी चौड़ी छाती पर, और फिर चादर के नीचे उभरे हुए उसके १३ इंच लंड पर अटक गई। कैप्सूल का असर तेज़ी से बढ़ रहा था। शिल्पा को अचानक बहुत गर्मी लगने लगी। उसका मुँह सूख गया, लेकिन चूत से लगातार नमी निकल रही थी। वो खुद को रोक नहीं पाई।

    धीरे से वो रवि के करीब सरकी। पहले तो उसने रवि के गाल पर हल्का-सा किस किया। फिर होंठों पर। किस गहरा होता गया। शिल्पा की जीभ रवि के होंठों पर घूमने लगी, उसके मुँह में घुसने लगी। “म्ह्म्म…” वो खुद ही हल्की सिसकारी भर रही थी। फिर उसका हाथ रवि की छाती पर फिसला, नीचे की तरफ गया। चादर हटाई और रवि का भारी, मोटा लंड हाथ में ले लिया। वो अभी सोया हुआ था, लेकिन शिल्पा के गर्म हाथ लगते ही हल्का सा हिल गया।

    शिल्पा ने रवि की तरफ झुककर लंड को चूम लिया। पहले सिर को, फिर पूरे शाफ्ट को। फिर उसने मुँह खोला और सिर्फ २ इंच तक लंड को अंदर ले लिया। जीभ से घुमाने लगी, ऊपर-नीचे चूसने लगी। “म्ह्म्म… आह्ह्ह…” उसके मुँह से आवाज़ निकल रही थी। लंड का स्वाद, उसकी गर्मी, उसकी मोटाई – सब कुछ उसे और ज्यादा उत्तेजित कर रहा था।

    फिर वो नीचे सरकी। रवि की दो भारी-भारी gotiya (अंडकोष) को देखा। उन्होंने भी उसे बहुत आकर्षित किया। शिल्पा ने जीभ निकाली और पहले एक goti को चाटा, फिर दूसरी को। दोनों को बारी-बारी से मुँह में लिया, जीभ से घुमाया, हल्का-हल्का चूसा। कैप्सूल का असर अब पूरा छा गया था। शिल्पा का पूरा शरीर गर्म हो रहा था, चूत से लगातार पानी बह रहा था, जाँघें भीग रही थीं। वो खुद को रोक नहीं पा रही थी। लंड को फिर २ इंच तक मुँह में लिया, जोर-जोर से चूसने लगी, gotiyon को हाथ से मसलते हुए। “आह्ह्ह… रवि… तुम्हारा… बहुत अच्छा लग रहा है…” वो फुसफुसाई, हालाँकि रवि अभी सोया हुआ था।

    उसका सिर ऊपर-नीचे होने लगा, लंड के सिर को चूसते हुए, कभी-कभी पूरी लंबाई पर जीभ फेरते हुए। पूरा कमरा सिर्फ उसकी सिसकारियों और चूसने की हल्की-हल्की आवाज़ से भर गया था।

    तभी रवि की आँखें धीरे-धीरे खुलीं।

    रवि की आँखें धीरे-धीरे खुलीं। पहले तो वो थोड़ा confused था, लेकिन फिर सब समझ में आ गया। शिल्पा का नन्हा-सा मुँह उसके १३ इंच लंबे, मोटे लंड को २ इंच तक चूस रहा था, जीभ ऊपर-नीचे घुमा रही थी, gotiyon को हाथ से मसल रही थी। शिल्पा की साँसें तेज़ थीं, आँखें बंद, चेहरा गर्म और लाल। रवि ने तुरंत समझ लिया – वो Women Sex Power Booster Capsule काम कर रहा था। शिल्पा अब खुद-ब-खुद भूखी हो रही थी।

    रवि मुस्कुराया। उसने शिल्पा के बालों में हाथ डाला, हल्का-सा सहलाया और धीरे से बोला, “अरे… जान… इतनी जल्दी? कैप्सूल का असर शुरू हो गया लगता है…” शिल्पा ने लंड मुँह से निकाला नहीं, सिर्फ आँखें ऊपर उठाकर देखा और “म्ह्म्म…” करके और जोर से चूसने लगी।

    रवि ने शिल्पा को पलटकर अपने ऊपर खींच लिया। “आ… ६९ में आ जा…” उसने कहा। शिल्पा को उसने अपनी छाती पर लिटा लिया, लेकिन उल्टा – उसका मुँह रवि के लंड की तरफ, और रवि का मुँह शिल्पा की चूत की तरफ। शिल्पा का छोटा-सा ४२ किलो वाला शरीर रवि के विशाल शरीर पर पूरी तरह फैल गया।

    दोनों एक साथ शुरू हो गए।

    शिल्पा ने फिर से रवि का लंड मुँह में लिया – अब और गहराई से, २.५-३ इंच तक। जोर-जोर से चूसने लगी, जीभ से नसों पर घुमाती, सिर को चाटती। कभी-कभी gotiyon को भी चूस लेती। उसके मुँह से “म्ह्म्म… आह्ह्ह…” की आवाज़ें निकल रही थीं।

    रवि ने शिल्पा की जाँघें फैलाईं और अपनी जीभ सीधे उसकी चूत पर रख दी। चूत पहले से ही गीली और गर्म थी – कैप्सूल की वजह से। रवि ने ऊपर से नीचे चाटा, क्लिटोरिस को जीभ से घुमाया, फिर जीभ अंदर डालकर अंदर-बाहर करने लगा। शिल्पा की कमर अपने आप उठने लगी। “आह्ह्ह… रवि… वहाँ… और जोर से… आह्ह्ह!!” वो लंड चूसते हुए ही चीखी।

    दोनों २० मिनट तक लगातार ६९ में रहे। कमरे में सिर्फ चूसने की, चाटने की, सिसकारियों की और हल्की-हल्की ठक-ठक की आवाज़ें गूंज रही थीं। शिल्पा का पूरा शरीर पसीने से तर हो गया था। उसकी चूत रवि के मुँह पर लगातार गीली होती जा रही थी। रवि का लंड भी शिल्पा के मुँह में और सख्त हो गया था।

    अचानक २० मिनट बाद शिल्पा ने लंड मुँह से निकाला। उसके होंठ चमक रहे थे, साँसें बहुत तेज़ थीं। वो रवि की जाँघों के बीच से उठी, उसकी आँखों में भूख और desperation था। शिल्पा ने रवि की छाती पर हाथ रखे, अपनी चूत को रवि के लंड के ठीक ऊपर ले आई और काँपते हुए बोली, “रवि… प्लीज… अंदर डाल दो… please under dalo… मुझे बहुत जरूरत है… मैं सह नहीं पा रही… आह्ह्ह… बहुत गर्मी हो रही है… प्लीज… अब मत तड़पाओ…”

    लेकिन रवि ने मुस्कुराकर शिल्पा की कमर पकड़ ली और उसे थोड़ा ऊपर उठा दिया, ताकि लंड अभी भी बाहर ही रहे। उसने शिल्पा की आँखों में देखा और धीरे से बोला, “अभी नहीं जान… थोड़ा और तड़प लो… मैं देखना चाहता हूँ तुम कितनी भूखी हो…”

    शिल्पा की साँसें और तेज़ हो गईं। वो रवि की छाती पर गिरकर फिर से गिड़गिड़ाई, “प्लीज रवि… under dalo… मैं मर रही हूँ… आह्ह्ह… बहुत जरूरत है…”

    रवि ने शिल्पा की कमर को अपनी बड़ी-बड़ी हथेलियों में कसकर पकड़ लिया और उसे थोड़ा ऊपर उठा दिया, ताकि उसका लंड अभी भी शिल्पा की चूत के मुंहाने से सिर्फ छू रहा हो, अंदर न जाए। शिल्पा का पूरा नन्हा शरीर रवि के विशाल सीने पर काँप रहा था। उसकी साँसें बहुत तेज़ और गर्म थीं, चूत से लगातार गर्म पानी बह रहा था, जाँघें भीग चुकी थीं। कैप्सूल का असर अब पूरी तरह चरम पर था।

    “प्लीज रवि… under dalo ना… मैं मर रही हूँ… बहुत गर्मी हो रही है… आह्ह्ह… देखो मेरी चूत कितनी गीली हो गई है…” शिल्पा रवि की छाती पर गिरकर गिड़गिड़ाई, उसकी आवाज़ में desperation और भूख साफ झलक रही थी। वो अपनी कमर नीचे करने की कोशिश कर रही थी, लेकिन रवि की मजबूत बाँहें उसे ऊपर ही रोक रही थीं।

    रवि मुस्कुराया। उसने शिल्पा के गाल थामे, उसकी आँखों में गहरी नजर डाली और धीरे-धीरे बोला, “अभी नहीं जान… पहले थोड़ा और तड़प लो… मैं देखना चाहता हूँ तुम कितनी पागल हो गई हो…” उसने शिल्पा की चूत के मुंहाने पर अपना लंड का सिर सिर्फ रगड़ा – ऊपर-नीचे, गोल-गोल, लेकिन अंदर नहीं डाला। हर बार छूते ही शिल्पा की कमर झनझना जाती, वो जोर से सिसकारी भरती, “आह्ह्ह… रवि… मत तड़पाओ… प्लीज… मैं सह नहीं पा रही… आह्ह्ह!!”

    शिल्पा ने रवि की छाती पर नाखून गड़ाए, उसके कंधे पकड़े और रो-रोकर गिड़गिड़ाई, “रवि… please under dalo… मैं तुम्हारी हूँ… जितना चाहो कर लो… लेकिन अब मत रोको… बहुत जरूरत है… आह्ह्ह… देखो मैं कितनी गर्म हो गई हूँ…” उसकी चूत रवि के लंड के सिर को बार-बार छू रही थी, लेकिन रवि हर बार हल्का सा पीछे खींच लेता।

    लगभग २-३ मिनट तक रवि ने उसे इसी तरह तड़पाया। शिल्पा अब पूरी तरह बेकाबू हो गई थी। आँखें आधी बंद, मुँह खुला, साँसें फूल रही थीं। “रवि… जaldi… मैं जल रही हूँ… आह्ह्ह… condom bina karlo… जaldi dalo… प्लीज… बिना condom के ही डाल दो… मुझे अब इंतज़ार नहीं हो रहा…”

    रवि ने शिल्पा की कमर को और मजबूती से पकड़ा और बोला, “अब नहीं… पहले condom लगाओ… जल्दी करो…” शिल्पा बहुत गर्म थी, उसकी उँगलियाँ काँप रही थीं, लेकिन वो तुरंत बेडसाइड टेबल की तरफ झुकी। कंडोम का पैकेट फाड़ा, कंडोम निकाला और रवि के खड़े, मोटे लंड पर काँपते हाथों से चढ़ाने लगी। “जaldi… जaldi…” वो खुद ही फुसफुसा रही थी। आखिरकार कंडोम पूरा चढ़ गया।

    रवि ने शिल्पा को फिर से अपनी गोद में खींच लिया और बोला, “अब पूरा डालूँगा… लेकिन जैसा तुम चाहो वैसा डालो… बस मुझे मत तड़पाना… समझी?” शिल्पा ने हाँ में सिर हिलाया, उसकी आँखों में भूख और प्यास साफ दिख रही थी।

    रवि को पता था कि कैप्सूल के असर से आज शिल्पा एक ही बार में पूरा ले पाएगी। उसने शिल्पा को ऊपर उठाया। शिल्पा ने खुद अपनी जाँघें फैलाईं, रवि के लंड को अपनी चूत के मुंहाने पर रखा और धीरे-धीरे नीचे बैठने लगी।

    पहले ४ इंच… फिर ५… और फिर ६ इंच तक लंड एक ही बार में अंदर चला गया। शिल्पा की आँखें बंद हो गईं, मुँह से लंबी सिसकारी निकली, “आआह्ह्ह… भर गया… ६ इंच… आह्ह्ह… बहुत अच्छा लग रहा है…” वो रवि के लंड पर बैठकर ६ इंच के ही मजा लेने लगी।

    अब शिल्पा ऊपर-नीचे होने लगी – धीरे-धीरे, लेकिन लगातार। हर बार नीचे बैठते ही वो जोर से सिसकारती, “आह्ह्ह… गहरा… बहुत गहरा… आह्ह्ह… रवि… कितना मोटा है… आह्ह्ह!!” कभी वो घुमाकर बैठती, कभी सीधे ऊपर-नीचे। उसके छोटे स्तन उछल-उछल रहे थे। रवि उसके स्तनों को हाथों में थामे हुए था, निप्पल्स को हल्का-हल्का दबाता। शिल्पा की चूत अब पूरी तरह गीली और चिकनी हो गई थी, हर बार उठते-बैठते ठक-ठक-ठक की हल्की आवाज़ निकल रही थी।

    २५ मिनट तक शिल्पा इसी तरह ६ इंच पर सवार रही। वो कभी तेज़ हो जाती, कभी धीमी, कभी रुककर सिर्फ अंदर घुमाती। “आह्ह्ह… रवि… इतना मजा… पहले कभी नहीं हुआ… आह्ह्ह… ६ इंच ही काफी है… लेकिन और चाहिए… आह्ह्ह!!” उसकी साँसें फूल रही थीं, पसीना टपक रहा था, लेकिन वो रुकने का नाम नहीं ले रही थी। रवि सिर्फ नीचे से हल्का-हल्का धक्के दे रहा था, उसे पूरा कंट्रोल लेने दे रहा था।

    २५ मिनट बाद रवि ने अचानक पोजीशन बदल दी। उसने शिल्पा को अपनी गोद से उठाया, बेड पर पीठ के बल लिटा दिया, उसके दोनों पैर कंधों पर रखे और ऊँचे कर दिए। शिल्पा की चूत अब पूरी तरह ऊपर की तरफ थी, पूरी तरह खुली हुई। रवि घुटनों के बल बैठ गया, लंड फिर से मुंहाने पर रखा।

    शिल्पा ने दोनों हाथों से रवि की बाँहें पकड़ीं और काँपते हुए बोली, “अब डालो रवि… पूरा डाल दो… प्लीज… मैं तड़प रही हूँ… आह्ह्ह… जल्दी करो…”

    लेकिन रवि ने फिर से मुस्कुराकर सिर्फ लंड का सिर चूत के मुंहाने पर रगड़ना शुरू कर दिया – ऊपर-नीचे, गोल-गोल, लेकिन अंदर नहीं डाला। शिल्पा पागल हो गई। “रवि… मत तड़पाओ… प्लीज… अब मत… मैं मर जाऊंगी… आह्ह्ह… under dalo ना… पूरा डालो… आह्ह्ह!!”

    “प्लीज रवि… अब मत तड़पाओ… मैं जल रही हूँ… आह्ह्ह… under dalo ना…” शिल्पा रो-रोकर गिड़गिड़ा रही थी, उसकी आँखों में आँसू थे, लेकिन भूख भी थी। रवि मुस्कुराया और धीरे-धीरे बोला, “अभी नहीं जान… पहले और थोड़ा तड़प लो… मैं देखना चाहता हूँ तुम कितनी पागल हो चुकी हो…”

    लगभग ४-५ मिनट तक रवि ने उसे इसी तरह तड़पाया। लंड का सिर सिर्फ चूत के मुंहाने पर रगड़ता, कभी गोल-गोल घुमाता, कभी हल्का-हल्का दबाता, लेकिन अंदर नहीं डालता। शिल्पा पागल हो गई थी। वो रवि की छाती पर नाखून गड़ाती, “आह्ह्ह… रवि… मैं मर जाऊंगी… बहुत गर्मी… चूत फट रही है… प्लीज… अब मत रोको…” उसकी साँसें फूल रही थीं, जाँघें काँप रही थीं, चूत से लगातार गर्म पानी बह रहा था।

    आखिरकार रवि ने शिल्पा की कमर को नीचे दबाया। पहले ६ इंच लंड एक ही झटके में अंदर चला गया। शिल्पा की आँखें बंद हो गईं, मुँह से लंबी सिसकारी निकली, “आआह्ह्ह… भर गया… ६ इंच… बहुत अच्छा… आह्ह्ह!!” लेकिन रवि रुका नहीं। उसने और जोर लगाया। अगला २ इंच और अंदर – कुल ८ इंच।

    जैसे ही वो अतिरिक्त २ इंच घुसा, शिल्पा की चीख फट पड़ी – “आआआआह्ह्ह्ह्ह!!! फट गई… बहुत दर्द… आह्ह्ह्ह्ह!! रवि… निकालो… ८ इंच… फट रही हूँ… आआह्ह्ह्ह!!” उसकी आवाज़ इतनी तेज़ और भयानक थी कि पूरा कमरा गूँज उठा। आँखों से आँसू की धार बहने लगी, पूरा नन्हा शरीर बेड पर उछल पड़ा। “आह्ह्ह… दर्द… बहुत दर्द… लेकिन… अंदर तक भर गया है… आह्ह्ह्ह!!” दर्द के साथ-साथ एक अजीब सा मजा भी आने लगा था। शिल्पा बार-बार चीखती, “उफ्फ… आह्ह्ह… रवि… रुक जाओ… लेकिन मत रुको… आह्ह्ह्ह!!” कभी दर्द से चीखती, “मर गई… फट गई… आआह्ह्ह्ह!!” तो कभी मजा आने पर सिसकारती, “आह्ह्ह… गहरा… बहुत गहरा… अच्छा लग रहा है… आह्ह्ह!!”

    रवि ने रुकने का नाम नहीं लिया। उसने ८ इंच की गहराई पर ही तेज़-तेज़ पंपिंग शुरू कर दी। ठक-ठक-ठक-ठक… हर धक्के पर शिल्पा की चीख फटती। “आह्ह्ह… आह्ह्ह… दर्द हो रहा है… लेकिन मजा भी आ रहा है… रवि… बहुत जोर से… आआह्ह्ह्ह!!” वो बार-बार रवि की बाँहें पकड़ती, नाखून गड़ाती, कभी “निकालो… फट रही हूँ…” चीखती, तो कभी “और तेज… आह्ह्ह… मत रुको…” कहती। उसकी चूत बुरी तरह सूज गई थी, लेकिन कैप्सूल के असर से दर्द के साथ मजा भी बढ़ रहा था।

    ३५ मिनट तक रवि लगातार पेलता रहा। शिल्पा की हालत पूरी तरह खराब हो चुकी थी। उसकी आवाज़ बैठ गई थी, लेकिन चीखें और सिसकारियाँ अभी भी निकल रही थीं – “आह्ह्ह… दर्द… बहुत दर्द… आह्ह्ह… लेकिन अंदर तक… आह्ह्ह… रवि… मैं मर रही हूँ… आआह्ह्ह!!” आँखें सूजी हुई, चेहरा पसीने और आँसुओं से नम, छोटा-सा शरीर थर-थर काँप रहा था।

    आखिर में रवि ने बहुत तेज़ १५-२० झटके दिए और शिल्पा की चूत के अंदर ही (कंडोम में) अपना पूरा गर्म वीर्य भर दिया। शिल्पा अंत में एक लंबी सिसकारी के साथ ढेर हो गई। वो बस पड़ी रही – नंगी, काँपती हुई, चूत बुरी तरह सूजी और लाल, साँसें फूल रही थीं। दर्द भी सहा था और मजा भी लिया था, लेकिन बोलने की ताकत भी नहीं बची थी।

    लगभग १ घंटे बाद रवि उठा। उसने रिसॉर्ट को कॉल किया और crushed ice मँगवाया। फिर शिल्पा की चूत पर बहुत धीरे-धीरे बर्फ लगाने लगा। ठंडी बर्फ छूते ही शिल्पा हल्की सिसकारी भरती, “आह्ह्ह… ठंडा… अच्छा लग रहा है…” रवि ने बर्फ लगाते-लगाते उसे वो सच्ची painkiller tablet भी दे दी। “ये लो… असली दर्द की गोली… अब आराम से हो जाओगी।”

    थोड़ी देर बाद दोनों साथ में नहाने गए। शावर के नीचे रवि ने शिल्पा को अपनी छाती से लगा लिया। वो सिर्फ उसके स्तनों को धीरे-धीरे दबाता रहा, निप्पल्स को उँगलियों से घुमाता, कभी-कभी चूम लेता। शिल्पा भी उससे चिपकी रही, बस kiss करती रही। कोई और कुछ नहीं – सिर्फ प्यार भरे स्पर्श और किस।

    नहाकर दोनों तैयार हुए। शिल्पा ने एक सुंदर फ्लोरल ड्रेस पहना, रवि ने कैजुअल शर्ट और जींस। दोनों घूमने निकले। पहले थोड़ी शॉपिंग की – शिल्पा ने कुछ सुंदर ज्वेलरी और एक छोटा हैंडबैग खरीदा, रवि ने उसे प्यार से सब दिलवाया। फिर Seine नदी के किनारे घूमे, एफिल टावर की रोशनी देखी, कुछ फोटो खिंचवाई। शाम ढलते-ढलते दोनों एक रोमांटिक रेस्टोरेंट में डिनर करने गए। कैंडल लाइट में दोनों ने खाना खाया, हाथों में हाथ डाले, हल्के-हल्के किस किए, नॉर्मल रोमांस किया। शिल्पा थोड़ी शर्माती रही, लेकिन खुश भी थी।

    डिनर के बाद दोनों

    डिनर के बाद रात के करीब १०:४५ बजे थे। पेरिस की सड़कें अभी भी रोशनी से जगमगा रही थीं। रवि और शिल्पा रेस्टोरेंट से बाहर निकले। शिल्पा का हाथ रवि के बड़े हाथ में था, वो थोड़ी शर्माती हुई उसके साथ चल रही थी। रवि ने मुस्कुराते हुए कहा, “चलो, एक जगह ले चलता हूँ… कुछ नया देखेंगे।” शिल्पा ने पूछा, “कहाँ?” रवि ने बस मुस्कुराकर उसका हाथ और कस लिया।

    दोनों पैदल ही कुछ दूर गए। एक छोटी लेकिन बहुत लग्जरी और प्राइवेट “Adult Toy Boutique” के सामने पहुँचे। बाहर से वो बहुत सुंदर और मॉडर्न दिख रही थी – गुलाबी-नीली नीयन लाइट, लेकिन अंदर से पूरी तरह प्राइवेट। रवि ने दरवाजा खोला और शिल्पा को अंदर ले गया।

    अंदर हल्की पर्पल और गुलाबी लाइट थी, एयर में हल्की वेनिला और रोज़ की खुशबू। शॉप काफी बड़ी थी, लेकिन इस समय सिर्फ कुछ कपल्स ही थे। स्टाफ ने पॉलिटली स्माइल किया और उन्हें घूमने दिया।

    रवि शिल्पा को हर सेक्शन में ले गया और बहुत विस्तार से सब कुछ दिखाने लगा:

    “ये देखो जान… Vibrators…”
    उसने एक स्लिम पिंक वाइब्रेटर उठाया जो ६ इंच लंबा था, सिलिकॉन का, बहुत सॉफ्ट। “ये चूत के अंदर या क्लिटोरिस पर लगाते हैं… कंपन करता है।” फिर एक बड़ा रैबिट वाइब्रेटर दिखाया जिसके ऊपर दो कान थे – “ये क्लिटोरिस को भी चूसता है साथ-साथ।”

    शिल्पा शर्म से लाल हो रही थी, लेकिन कैप्सूल और दिन भर के सेक्स के बाद उसकी आँखों में curiosity भी थी।

    रवि आगे ले गया।
    “ये Dildos…”
    उसने अलग-अलग साइज़ के डिल्डो दिखाए – ५ इंच, ७ इंच, ९ इंच, एक तो १२ इंच का बड़ा ब्लैक डिल्डो भी। “ये देखो… कितने मोटे हैं… कुछ गोल, कुछ curved… गर्भाशय तक पहुँचाने वाले भी हैं।” शिल्पा ने एक को हाथ में लेकर देखा और तुरंत रख दिया, “ये तो बहुत बड़ा है…”

    फिर Butt Plugs वाले सेक्शन में गए। रवि ने छोटे-छोटे सिलिकॉन प्लग दिखाए, कुछ gemstone वाली, कुछ vibrating। “ये गांड में डालते हैं… धीरे-धीरे आदत डालने के लिए।” शिल्पा ने शर्म से कहा, “नहीं… ये मत दिखाओ…”

    अगला सेक्शन – Couples Toys।
    रवि ने vibrating cock ring दिखाया, “ये मेरे लंड पर लगाएंगे… तुम्हें और मजा आएगा।” फिर remote control वाले vibrating egg, nipple clamps, feather ticklers, massage oils, lubricants (strawberry, chocolate, mint flavour)।

    एक कोने में BDSM वाले टॉय भी थे – हल्के हैंडकफ, blindfold, whip, paddles। रवि ने हँसते हुए कहा, “ये बाद में ट्राई करेंगे… अभी नहीं।”

    शिल्पा अब बहुत शर्माकर उसके पीछे छिपने लगी थी, लेकिन उसका हाथ रवि का कसकर पकड़े हुए था।

    आखिर में कंडोम वाले सेक्शन पर आए। रवि ने कई पैकेट उठाए और पूछा, “Flavoured condom चाहिए? Strawberry, Chocolate, Banana…?”

    शिल्पा ने तुरंत सिर हिलाया और शर्माते हुए लेकिन दृढ़ता से बोली, “नहीं… अब नहीं… घर जाकर हम बिना condom के ही करेंगे… अब सिर्फ हम… बिना कुछ के… मैं चाहती हूँ कि तुम्हारा पूरा गर्म पानी मुझे अंदर मिले…”

    रवि ने शिल्पा की तरफ देखा। वो उसका मूड खराब नहीं करना चाहता था। मुस्कुराते हुए बोला, “कोई बात नहीं जान… जैसी तुम चाहो।” उसने कंडोम के पैकेट वापस रख दिए।

    दोनों ने कुछ massage oil और एक छोटा सा vibrating bullet खरीद लिया (शिल्पा की जिद पर), बाकी सब देखकर छोड़ दिया।

    शॉपिंग के बाद दोनों वापस रिसॉर्ट के सूट में आ गए। दरवाजा बंद करते ही रवि ने शिल्पा को अपनी बाँहों में खींच लिया।

    रूम में वापस आते ही रवि ने दरवाजा बंद किया और लॉक कर दिया। शिल्पा अभी भी शॉपिंग वाली थैली हाथ में लिए खड़ी थी, लेकिन रवि ने उसे धीरे से अपनी तरफ खींच लिया। “अब कोई बाहर नहीं… सिर्फ हम…” उसने कहा और शिल्पा के होंठों पर गहरा किस कर दिया। शिल्पा भी उससे चिपक गई। दोनों ने एक-दूसरे के कपड़े उतारने शुरू किए।

    पहले शिल्पा का ड्रेस उतरा, फिर ब्रा और पैंटी। रवि ने अपनी शर्ट, जींस और अंडरवियर निकाल दिए। दोनों पूरी तरह नंगे हो गए। शिल्पा का नन्हा-सा ४२ किलो वाला शरीर रवि के विशाल १०१ किलो वाले शरीर के सामने बिल्कुल खिलौने जैसा लग रहा था। शिल्पा ने रवि की छाती पर हाथ रखा और शर्माते हुए, लेकिन दृढ़ता से बोली, “रवि… आज सिर्फ ८ इंच तक… और बहुत आराम से… प्लीज… मैं अभी भी थोड़ी डर रही हूँ… लेकिन चाहती हूँ…”

    रवि ने उसके बालों में हाथ फेरा और मुस्कुराते हुए कहा, “ठीक है जान… जैसी तुम चाहो… सिर्फ ८ इंच… और बहुत धीरे।”

    रवि ने बेडसाइड टेबल से चॉकलेट सॉस की बोतल निकाली जो शॉपिंग से लाए थे। उसने शिल्पा को बेड पर लिटा दिया। फिर बोतल खोली और शिल्पा के दोनों छोटे-छोटे स्तनों पर गर्म, चिपचिपी चॉकलेट की धार डाल दी। चॉकलेट स्तनों पर फैल गई, निप्पल्स को पूरी तरह ढक लिया। रवि घुटनों के बल बैठ गया और एक स्तन को मुंह में ले लिया। जोर-जोर से चूसने लगा – चॉकलेट के साथ निप्पल को चूसता, जीभ से घुमाता, दाँतों से हल्का-हल्का काटता। दूसरा स्तन हाथ से मसलता रहता।

    ३० मिनट तक रवि लगातार चूसता रहा। बीच-बीच में उसकी उँगलियाँ शिल्पा की चूत में घुस जातीं – पहले एक, फिर दो उँगलियाँ, धीरे-धीरे अंदर-बाहर करता, अँगूठे से क्लिटोरिस रगड़ता। शिल्पा की साँसें तेज़ हो गईं। “आह्ह्ह… रवि… चॉकलेट… बहुत अच्छा लग रहा है… आह्ह्ह… उँगलियाँ… और गहरा… आह्ह्ह!!” उसके स्तन लाल हो गए थे, चॉकलेट चूसा जा चुका था, लेकिन रवि फिर से थोड़ा और डालकर चूसता रहता। शिल्पा की चूत अब पूरी तरह गीली और तैयार हो चुकी थी।

    फिर शिल्पा ने रवि को लिटा दिया। उसका छोटा-सा मुँह रवि के १३ इंच लंड के सामने था। शिल्पा ने चॉकलेट सॉस निकाला और लंड के सिर पर ३ इंच तक चॉकलेट लगा दी। फिर उसने मुँह खोला और सिर्फ ३ इंच तक लंड को अंदर ले लिया। जीभ से चॉकलेट चूसती, ऊपर-नीचे करती। “म्ह्म्म… आह्ह्ह… स्वाद… बहुत अच्छा…” उसके मुँह से आवाज़ निकल रही थी। साथ-साथ वो रवि की दोनों भारी gotiyon को हाथ से मसलती, जीभ से चाटती।

    २० मिनट तक शिल्पा लगातार चूसती रही – कभी तेज़, कभी धीरे, चॉकलेट खत्म होने तक। रवि का लंड अब पूरी तरह तन गया था, नसें उभरी हुईं, सिर चमक रहा था।

    अब रवि ने शिल्पा को पोजीशन में लाया। पहले missionary में – दोनों पैर कंधों पर रखे, ८ इंच तक धीरे-धीरे अंदर किया। शिल्पा सिसकारी भरी, “आह्ह्ह… ८ इंच… भर गया… आह्ह्ह…” फिर डॉगी स्टाइल, फिर cowgirl, फिर spooning, फिर legs on shoulder। हर पोजीशन में रवि सिर्फ ८ इंच तक ही रखता, लेकिन लगातार, बिना रुके।

    करीब १ घंटे तक रवि ने अलग-अलग पोजीशन में ८ इंच की गहराई पर पेला। ठक-ठक-ठक-ठक… कमरे में सिर्फ ये आवाज़ और शिल्पा की सिसकारियाँ गूंज रही थीं। शिल्पा की हालत पूरी तरह खराब हो चुकी थी। पहले २० मिनट में वो चीखती-मज लेती रही, लेकिन ४० मिनट बाद उसकी आवाज़ बैठ गई। आँखें आधी बंद, मुँह खुला, साँसें फूल रही थीं। “आह्ह्ह… रवि… बहुत… बहुत हो गया… मैं उठ नहीं पा रही… आह्ह्ह…” उसके स्तन लाल, चूत बुरी तरह सूजी हुई, जाँघें काँप रही थीं। आखिरी १० मिनट में वो सिर्फ हल्की-हल्की सिसकियाँ भर रही थी। बोलने की ताकत भी नहीं बची थी।

    रवि ने आखिरी जोरदार झटके दिए और शिल्पा की चूत के अंदर ही अपना पूरा गर्म वीर्य भर दिया। शिल्पा का शरीर अंतिम बार काँपा और बेड पर बेजान पड़ गया। वो उठने की हालत में भी नहीं थी – बस पड़ी रह गई, नंगी, पसीने से तर, चूत से वीर्य बहता हुआ, साँसें छोटी-छोटी।

    रवि ने उसे प्यार से चूम लिया, चादर ओढ़ा दी और खुद भी नंगा ही उसके बगल में लेट गया। दोनों नंगे ही गहरी नींद में सो गए।

  • रवि और शिल्पा की हनीमून की कहानी 2

    रवि ने शिल्पा के स्तनों को चूसते-चूसते आखिरकार रुक गया। शिल्पा की साँसें पूरी तरह फूल चुकी थीं। उसके छोटे-छोटे स्तन लाल हो गए थे, निप्पल्स सूजकर खड़े थे, पूरा शरीर पसीने से तर-बतर। रवि ने उसे प्यार से चूम लिया और धीरे से उसके कान में फुसफुसाया, “अब असली शुरुआत होती है जान… मैं बहुत धीरे करूँगा… लेकिन तुम्हें सहना पड़ेगा।”

    शिल्पा ने डरते हुए सिर हिलाया। उसकी आँखें बड़ी-बड़ी हो गई थीं। रवि ने अपनी विशाल बाँहों से शिल्पा को उठाकर बेड के बीच में लिटा दिया। उसने शिल्पा के दोनों पैरों को फैलाया, घुटनों को मोड़कर थोड़ा ऊपर किया। शिल्पा की नन्ही, गुलाबी, बिना बाल वाली चूत पूरी तरह सामने आ गई – बहुत छोटी, बहुत टाइट, अभी तक पूरी तरह अनछुई। रवि ने बेडसाइड टेबल से लुब्रिकेंट की बोतल उठाई, अपनी हथेली पर भर-भरकर लगाया और अपने १३ इंच लंबे, ४.५ इंच मोटे लंड पर अच्छे से मला। लंड पहले से ही पूरा खड़ा था, नसें उभरी हुईं, सिर चमक रहा था – शिल्पा के मुकाबले लगभग उसकी कमर जितना मोटा।

    रवि घुटनों के बल बैठ गया। उसने लंड का गर्म, भारी सिर शिल्पा की चूत के मुंहाने पर रख दिया। शिल्पा की साँसें रुक गईं। “रवि… बहुत बड़ा है… मुझे डर लग रहा है… प्लीज बहुत धीरे…” वो काँपते हुए बोली।

    रवि ने हल्का-सा धक्का दिया। सिर्फ २ इंच अंदर गया।
    शिल्पा की आँखें एकदम फैल गईं। उसका पूरा नन्हा शरीर कमान की तरह झुक गया। “आआआह्ह्ह्ह!!! दर्द… बहुत दर्द… निकालो… फट गई… आह्ह्ह्ह!!” वो जोर-जोर से चीखी। आँखों से आँसू की धार बह निकली। उसके छोटे हाथ रवि की चौड़ी छाती पर धकेलने लगे, नाखून गड़ाने लगे। “रवि… बस… बस… मैं सह नहीं पा रही… बहुत बड़ा… आह्ह्ह्ह!!”

    रवि रुका नहीं। उसने थोड़ा और आगे धकेला। अब ३ इंच अंदर। शिल्पा की चीख और तेज़ हो गई। “आआह्ह्ह… मर गई… जल रही है… निकालो… प्लीज… मैं रो रही हूँ… देखो… आँसू…” उसकी आवाज़ काँप रही थी, चेहरे पर पसीना और आँसू मिल गए थे।

    रवि ने एक और हल्का धक्का दिया। चौथा इंच भी अंदर चला गया।
    अब शिल्पा की चूत के मुंहाने से खून की पतली-सी लाल धार निकलने लगी। वो खून रवि के लंड पर चिपक गया और धीरे-धीरे बेडशीट पर टपकने लगा। शिल्पा का पूरा शरीर थर-थर काँप रहा था। उसकी छोटी-सी कमर ऊपर-नीचे हो रही थी, जाँघें अनियंत्रित रूप से काँप रही थीं। “आआआह्ह्ह्ह… खून… खून निकल रहा है… रवि… मैं मर जाऊंगी… बहुत दर्द… फट गई मेरी चूत… आह्ह्ह्ह!!” वो लगातार चीख रही थी, रो रही थी, हाथ-पैर मार रही थी।

    रवि ने अब ४ इंच तक ही लंड अंदर रख लिया। उससे ज्यादा नहीं धकेला। लेकिन अब उसने धीरे-धीरे अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया – सिर्फ ४ इंच की गहराई में, लेकिन बहुत स्टेडी और लगातार। हर धक्के पर शिल्पा की चीख फटती। “उफ्फ… आह्ह्ह… दर्द… बहुत दर्द… रुक जाओ… प्लीज… मैं मना कर रही हूँ… बहुत मना कर रही हूँ…” वो बार-बार रोते हुए चीखती, “मम्मी… बचाओ… रवि बहुत बड़ा है… मैं छोटी हूँ… फट रही हूँ… आह्ह्ह्ह!!”

    रवि ने २५ मिनट तक लगातार यही किया। सिर्फ ४ इंच अंदर रखकर, धीमी लेकिन मजबूत गति से बार-बार ठक-ठक-ठक की आवाज़ निकालता रहा। शिल्पा की हालत पूरी तरह खराब हो चुकी थी। उसके आँसू रुक ही नहीं रहे थे। वो बार-बार हाथ से रवि को धकेलने की कोशिश करती, “निकालो… प्लीज… २५ मिनट हो गए… मैं सह नहीं पा रही… चूत जल रही है… खून बह रहा है… आह्ह्ह… रवि… तुम बहुत क्रूर हो… आह्ह्ह्ह!!” कभी-कभी वो रवि की बाँहों में मुँह छिपाकर सिसकती, “बहुत दर्द… मैं मर रही हूँ… रुक जाओ… प्लीज… मैं तुमसे प्यार करती हूँ… लेकिन ये… ये बहुत… आआह्ह्ह!!”

    रवि का विशाल शरीर शिल्पा के ऊपर पूरी तरह छाया हुआ था। उसके १०१ किलो वजन के कारण शिल्पा का ४२ किलो का नन्हा शरीर बेड में धंस गया था। रवि हर धक्के पर हल्का-हल्का पसीना छोड़ रहा था। शिल्पा की चूत अब बुरी तरह सूज गई थी, लाल हो गई थी, खून और लुब्रिकेंट का मिश्रण लगातार बह रहा था। उसकी सिसकारियाँ अब चीखों में बदल चुकी थीं। “आह्ह्ह… आह्ह्ह… बस… अब सच में नहीं… २५ मिनट… मैं काँप रही हूँ… रवि… मेरी चूत फट गई… आह्ह्ह्ह!!”

    २५ मिनट पूरे होते-होते शिल्पा की आवाज़ लगभग बैठ गई थी। वो सिर्फ हल्की-हल्की सिसकियाँ भर रही थी – “सिस… सिस… नहीं… नहीं… बहुत… बहुत दर्द…” आँखें आधी बंद, चेहरा आँसुओं से नम, छोटे-छोटे हाथ अब रवि की छाती पर बेजान पड़े थे। जाँघें अभी भी काँप रही थीं।

    आखिर में रवि ने तेज़ी से ८-१० झटके दिए – अभी भी सिर्फ ४ इंच की गहराई में – और फिर शिल्पा की चूत के अंदर ही अपना गर्म, मोटा, भारी वीर्य का पूरा लोड भर दिया। वीर्य इतना ज्यादा था कि शिल्पा की छोटी चूत से बाहर निकलकर खून के साथ मिलकर बेड पर बहने लगा।

    शिल्पा अंत में पूरी तरह बेहाल होकर बिस्तर पर ढेर हो गई। उसकी चूत बुरी तरह सूजी, लाल, फटी हुई, खून और वीर्य से सनी हुई। साँसें बहुत तेज़ और छोटी-छोटी। आँखें बंद, मुँह थोड़ा खुला, सिर्फ हल्की-हल्की सिसकियाँ निकल रही थीं। वो बोल भी नहीं पा रही थी। पूरा नन्हा शरीर थर-थर काँप रहा था।

    रवि ने धीरे से लंड निकाला। खून और वीर्य की धार शिल्पा की जाँघों पर बह गई। उसने शिल्पा को अपनी गोद में उठा लिया, उसके बालों में हाथ फेरते हुए, उसके आँसू पोंछते हुए बोला, “माफ करना जान… मैं बहुत धीरे कर रहा था… लेकिन तुम बहुत छोटी हो… आराम करो… हनीमून अभी बहुत लंबा है…”

    रवि ने धीरे-धीरे अपना १३ इंच का भारी लंड शिल्पा की चूत से बाहर निकाला। जैसे ही लंड निकला, शिल्पा की छोटी-सी चूत से खून और वीर्य का गाढ़ा मिश्रण बाहर बहने लगा। वो सफेद-लाल धार उसकी जाँघों पर, बेडशीट पर टपक-टपक कर गिर रही थी। शिल्पा की चूत बुरी तरह सूज गई थी – लाल, फटी हुई, बहुत छोटी-सी मुंहाने पर अब भी हल्का-हल्का खून रिस रहा था। शिल्पा की साँसें बहुत तेज़ और छोटी-छोटी थीं, आँखें आधी बंद, चेहरा आँसुओं से नम, छोटे-छोटे हाथ बेजान पड़े हुए थे।

    रवि तुरंत बेड से उठा। उसने बाथरूम से गर्म पानी का बेसिन, साफ सफेद तौलिया और कुछ टिश्यू पेपर ले आया। वो बहुत धीरे-धीरे शिल्पा की जाँघों के बीच बैठ गया। पहले उसने गर्म पानी में तौलिया भिगोया और बहुत नरम हाथ से शिल्पा की चूत को साफ करना शुरू किया। हर बार तौलिया छूते ही शिल्पा हल्के से काँप जाती। “आह्ह्ह… जल रही है… बहुत जल रही है…” वो कमजोर आवाज़ में सिसकी। रवि ने बिल्कुल प्यार से, बिना किसी जोर के, चूत के बाहर वाले हिस्से को, जाँघों को, और हल्का-हल्का अंदरूनी हिस्से को भी साफ किया। खून और वीर्य का मिश्रण तौलिए पर लगता जा रहा था। रवि बार-बार तौलिया धोकर नया पानी लेता और फिर से साफ करता।

    साफ करने के बाद रवि ने शिल्पा को अपनी गोद में उठा लिया। उसकी विशाल बाँहें शिल्पा की पूरी कमर और पीठ को घेर रही थीं। वो उसे छाती से लगा कर बैठ गया और उसके बालों में हाथ फेरने लगा। “शिल्पा… जान… माफ कर दो… मैं जानता हूँ बहुत दर्द हुआ… लेकिन मैं बहुत धीरे कर रहा था…” रवि ने उसके माथे पर, गालों पर, आँसू भरे आँखों पर बार-बार किस किया। उसने शिल्पा के छोटे-छोटे हाथ अपने बड़े हाथों में ले लिए और उन्हें चूमा। “तुम बहुत छोटी हो… मैं बहुत बड़ा हूँ… लेकिन हमें ये सब सीखना पड़ेगा… साथ-साथ…”

    शिल्पा ने आँखें खोलीं। उसकी आवाज़ अभी भी काँप रही थी, आँसू फिर से बहने लगे। “रवि… तुम मेरे साथ गलत कर रहे हो… इतना बड़ा… इतना दर्द… मैं छोटी हूँ… तुम्हें पता है ना… मैं कभी नहीं किया… तुम मुझे मार रहे हो… आह्ह्ह… मेरी चूत फट गई… खून निकला… तुम मुझे प्यार करते हो तो ऐसा क्यों कर रहे हो… प्लीज… मैं बहुत डर गई हूँ…” वो सिसकते हुए बोली, “मुझे लगता है तुम मुझे सह नहीं पा रहे… मैं तुम्हें खुश नहीं कर पा रही… लेकिन ये… ये बहुत ज्यादा हो गया… मैं मर गई थी… रवि… प्लीज… अब मत करो…”

    रवि ने उसे और कस कर सीने से लगा लिया। उसके विशाल हाथ शिल्पा की पीठ पर धीरे-धीरे फेर रहे थे। “जान… मैं जानता हूँ तुम्हें बहुत दर्द हुआ… लेकिन घर जाकर हम क्या करेंगे? वहाँ जोड़ परिवार है… दीवारें पतली हैं… अगर तुम चीखी तो पूरा घर सुन लेगा… लोग पूछेंगे… हम कभी आराम से नहीं रह पाएंगे… इसलिए हमें यहीं हनीमून पर तुम्हें आदत डालनी पड़ेगी… ४-५ दिन तक… धीरे-धीरे… ताकि बाद में घर जाकर सिर्फ मजा ही मजा हो… कोई दर्द नहीं… कोई चीख नहीं…”

    शिल्पा ने कुछ नहीं कहा। उसकी साँसें अभी भी तेज़ थीं, लेकिन वो चुप रही। सच तो ये था कि उसे थोड़ा-थोड़ा मजा भी आया था – वो गहरा भराव, वो गर्मी… लेकिन डर और दर्द बहुत ज्यादा था। इसलिए वो चुप रही, सिर्फ रवि की छाती में मुँह छिपाए रही।

    रवि ने थोड़ी देर इंतज़ार किया। फिर धीरे से बोला, “तुझे ४-५ दिन ये सहना पड़ेगा शिल्पा… हर दिन… थोड़ा-थोड़ा… लेकिन मैं वादा करता हूँ… मैं बहुत प्यार से करूँगा… तुम्हें आदत पड़ जाएगी… फिर घर जाकर हम बिना किसी डर के… सिर्फ प्यार करेंगे… तुम चीखोगी नहीं… सिर्फ आह्ह्ह… आह्ह्ह… करोगी…” वो मुस्कुराते हुए बोला, “अगर हम यहीं अडाप्ट नहीं करेंगे तो घर जाकर तुम चीखोगी… पूरा घर जान जाएगा… लेकिन आदत पड़ने के बाद घर पर सिर्फ मजा… कोई दर्द नहीं… कोई खून नहीं… बस तुम और मैं… रात भर…”

    शिल्पा फिर भी कुछ नहीं बोली। वो बस रवि की बाँहों में पड़ी रही, उसकी साँसें धीरे-धीरे सामान्य होती जा रही थीं।

    रवि ने उसे और प्यार से चूम लिया। “अच्छा… अब उदास मत हो… मैं तुम्हें शॉपिंग पर ले चलता हूँ… पेरिस में… तुम्हें जो चाहिए वो खरीद दूँगा… बोलो… क्या चाहिए तुम्हें?”

    शिल्पा ने हल्के से सिर उठाया। उसकी आवाज़ अभी भी कमजोर थी, लेकिन शर्म से भरी हुई। “रवि… मुझे… एक रिंग और नेकलेस चाहिए… बहुत सुंदर… डायमंड वाली… जो तुम्हारी पसंद की हो…”

    रवि मुस्कुराया। “ठीक है… तुम मुझे ये सब दिलवा दो… जो मैं चाहता हूँ… वो ४-५ दिन की आदत… फिर मैं तुम्हें रिंग और नेकलेस दोनों दिलवा दूँगा… और सुनो… अगर बाद में तुम मना भी करो… तो भी तुम मुझे मत रोकना… मैं रुकूँगा नहीं… समझी?” उसने शिल्पा की ठोड़ी थामकर उसके होंठों पर हल्का-सा किस किया।

    शिल्पा ने सिर्फ सिर हिलाया। कुछ नहीं बोली।

    रवि ने तुरंत फोन उठाया। रिसॉर्ट के कंजियर को कॉल किया। “हैलो… मैं सूट ७०१ से बोल रहा हूँ… मुझे एक डायमंड रिंग और एक डायमंड नेकलेस चाहिए… बेस्ट क्वालिटी… रोमांटिक स्टाइल… आज शाम तक डिलीवर कर दो… और हाँ, डिनर भी रूम में ही… कैंडल लाइट… स्पेशल।” उसने ऑर्डर कर दिया।

    फिर रवि ने शिल्पा को और कस कर गले लगा लिया। “अब थोड़ी देर आराम करो… शाम को डिनर के बाद… हम दो राउंड करेंगे… तैयार रहना जान…”

    दोनों ने थोड़ी देर आराम किया। रवि शिल्पा को अपनी गोद में लिए हुए बेड पर लेटा रहा, उसके बालों में उँगलियाँ फेरता रहा, उसके काँपते होंठों पर बार-बार हल्के-हल्के किस करता रहा। शिल्पा की साँसें धीरे-धीरे सामान्य होती गईं। उसका छोटा-सा शरीर रवि की चौड़ी छाती से चिपका हुआ था। लगभग ४० मिनट बाद शिल्पा थकान से गहरी नींद में सो गई। उसकी आँखें बंद, छोटे-छोटे हाथ रवि की बाँह पर पड़े हुए, साँसें धीमी और नियमित।

    रवि ने धीरे से शिल्पा को बेड पर लिटा दिया। वो उठा, बालकनी में जाकर एक सिगरेट सुलगाई, फिर रिसॉर्ट के कंजियर को फिर से कॉल किया। “हैलो… सूट ७०१… वो रिंग और नेकलेस डिलीवर हो गए? और हाँ, कंडोम भी चाहिए… extra thin, extra large size… जल्दी भेज दो।” कुछ देर बाद दरवाजे पर हल्की नॉक हुई। रवि ने डोर खोली। बाहर स्टाफ ने एक सुंदर गिफ्ट बॉक्स (रिंग और नेकलेस) और एक छोटा पैकेट (कंडोम) थमा दिया। रवि ने टिप दी और दरवाजा बंद कर दिया।

    उसने शिल्पा को सोते हुए देखा। फिर खुद बाथरूम में गया, फ्रेश होकर आया – बालों में पानी की बूँदें, बॉडी पर हल्का परफ्यूम। उसने शिल्पा को धीरे से जगाया। “जान… उठो… डिनर का टाइम हो गया है।” शिल्पा ने आँखें मलीं, अभी भी थोड़ी काँप रही थी। रवि ने उसे उठाकर बाथरूम ले गया। दोनों ने फ्रेश होकर कपड़े बदले।

    शिल्पा ने सेक्स के लिए खास कपड़े पहने – एक बहुत हल्का, ट्रांसपेरेंट सफेद नाइट गाउन, जिसके नीचे सिर्फ लाल लेस ब्रा और पैंटी थी। गाउन का कपड़ा इतना पतला था कि उसके छोटे स्तन और निप्पल्स की आउटलाइन साफ दिख रही थी। रवि ने ब्लैक ट्रैक पैंट और व्हाइट टीशर्ट पहनी, लेकिन टीशर्ट के नीचे उसका विशाल शरीर फट रहा था।

    टेबल पर डिनर तैयार था। रिसॉर्ट स्टाफ ने पूरा सेटअप कर दिया था – कैंडल लाइट, वाइन ग्लास, फ्रेंच डिशेज, गुलाब की पंखुड़ियाँ बिछी हुईं, सॉफ्ट म्यूजिक बज रहा था। दोनों टेबल पर बैठे। रवि ने बॉक्स खोला। पहले डायमंड रिंग निकाली – छोटी-सी, लेकिन चमकदार, शिल्पा की उँगली में फिट हो गई। फिर नेकलेस – पतला चेन, बीच में एक छोटा डायमंड पेंडेंट जो शिल्पा की गर्दन पर चमक रहा था। शिल्पा शर्म से मुस्कुराई।

    रवि ने शिल्पा का हाथ थामा, “ये तुम्हारे लिए… लेकिन याद रखना… तुमने वादा किया है।” फिर उसने शिल्पा को खींचकर अपने पास बैठाया और गहरे किस किया – ३-४ मिनट तक, जीभें उलझती रहीं, साँसें मिलती रहीं। डिनर के दौरान दोनों ने खाना खाया, लेकिन रवि की आँखें बार-बार शिल्पा के स्तनों पर जा रही थीं।

    डिनर खत्म होते ही रवि उठा। उसने शिल्पा को खड़ा किया। पहले गाउन के पट्टे खोले, गाउन फर्श पर गिर गया। फिर ब्रा का हुक खोला – शिल्पा के छोटे-छोटे, गुलाबी-भूरे निप्पल्स वाले स्तन बाहर आ गए। रवि घुटनों पर बैठ गया। उसने दोनों स्तनों को हाथों में थामा और चाटना शुरू किया। जीभ से निप्पल्स को गोल-गोल घुमाया, फिर मुंह में लेकर जोर-जोर से चूसा। २० मिनट तक लगातार – कभी एक स्तन, कभी दूसरा, कभी दोनों को एक साथ मुंह में भरकर चूसता रहा। शिल्पा की साँसें तेज़ हो गईं, “आह्ह्ह… रवि… धीरे… लेकिन मत छोड़ो… आह्ह्ह!!” उसके निप्पल्स लाल और सूज गए थे।

    रवि ने कंडोम का पैकेट खोला। “देखो… इसे कैसे पहनते हैं।” उसने शिल्पा को सिखाया। शिल्पा ने काँपते हाथों से कंडोम निकाला, रवि के १३ इंच लंबे, ४.५ इंच मोटे लंड पर लगाने की कोशिश की। रवि ने उसे गाइड किया। आखिरकार शिल्पा ने कंडोम पूरा चढ़ा दिया। लंड अब कंडोम में चमक रहा था।

    रवि ने शिल्पा को उठाकर बेड पर लिटा दिया। उसके दोनों पैर फैलाए, घुटनों को मोड़कर कंधों की तरफ दबाया। शिल्पा की छोटी-सी चूत फिर से सामने थी – अभी भी थोड़ी सूजी हुई, लेकिन साफ। रवि घुटनों के बल बैठ गया।

    पहला झटका – रवि ने पूरा जोर लगाया। सिर्फ एक ही झटके में ४ इंच अंदर चला गया।
    शिल्पा की आँखें एकदम फैल गईं। उसका पूरा नन्हा शरीर बेड पर उछल पड़ा। “आआआआह्ह्ह्ह्ह!!! निकालो… फट गई… बहुत दर्द… आह्ह्ह्ह!!” वो जोर-जोर से चीखी। आँखों से आँसू की धार बहने लगी। “रवि… प्लीज… बहुत डर लग रहा है… इतना बड़ा… मैं मर जाऊंगी… आह्ह्ह्ह!!”

    रवि रुका नहीं। दूसरे झटके में और २ इंच अंदर – अब कुल ६ इंच।
    शिल्पा पागल हो गई। “आआआह्ह्ह्ह… छः इंच… फट रही हूँ… खून… फिर खून निकलेगा… रवि… तुम रुक क्यों नहीं रहे… मैं बहुत डर गई हूँ… प्लीज… मैं रो रही हूँ… देखो आँसू… बहुत आँसू… आह्ह्ह्ह!!” वो बार-बार हाथ से रवि की छाती धकेल रही थी, पैर मार रही थी, सिर इधर-उधर हिला रही थी। “मुझे मत मारो… मैं छोटी हूँ… तुम बहुत बड़े हो… प्लीज… मैं मना कर रही हूँ… बहुत मना कर रही हूँ… आआह्ह्ह्ह!!”

    लेकिन रवि ने रुकने का नाम नहीं लिया। उसने ६ इंच की गहराई पर ही तेज़-तेज़ पंपिंग शुरू कर दी। ठक-ठक-ठक-ठक… हर धक्के पर शिल्पा की चीख फटती। “उफ्फ… आह्ह्ह… दर्द… बहुत दर्द… रवि… तुम्हें पता है ना मैं डर गई हूँ… फिर भी… आह्ह्ह्ह… मैं मर रही हूँ… निकालो… प्लीज… मैं रो-रोकर मर जाऊंगी… आआह्ह्ह!!” उसकी चीखें अब सिसकियों में बदल रही थीं, लेकिन रवि की स्पीड बढ़ती जा रही थी। शिल्पा बार-बार “मम्मी… बचाओ… रवि बहुत क्रूर है… आह्ह्ह्ह!!” चीख रही थी।

    ३० मिनट तक लगातार। रवि ने कभी स्पीड कम नहीं की। शिल्पा की हालत पूरी तरह खराब हो चुकी थी। उसकी आवाज़ बैठ गई थी, सिर्फ हल्की-हल्की सिसकियाँ और “नहीं… नहीं… बस…” निकल रहा था। आँखें सूजी हुई, चेहरा आँसुओं से नम, छोटा-सा शरीर पसीने से तर, जाँघें अनियंत्रित काँप रही थीं। चूत बुरी तरह सूज गई थी, कंडोम पर खून का हल्का निशान दिख रहा था।

    शिल्पा अब बोल भी नहीं पा रही थी। सिर्फ थर-थर काँप रही थी, आँखें आधी बंद, मुँह थोड़ा खुला।

    रवि ने आखिरी १०-१२ तेज़ झटके दिए और शिल्पा की चूत के अंदर ही (कंडोम में) अपना पूरा गर्म वीर्य भर दिया।

    शिल्पा बिस्तर पर पूरी तरह ढेर हो गई – नंगी, काँपती हुई, चूत सूजी और लाल, साँसें फूल रही थीं, आँसू अभी भी बह रहे थे। उसकी हालत इतनी बुरी थी कि वो हिल भी नहीं पा रही थी।

  • सपनों की जॉब 7

    राहुल और सीमा रात के 10 बजे नींद से उठे। कमरे में हल्की गोल्डन लाइट जल रही थी। दोनों अभी भी नंगे थे। सीमा राहुल की छाती पर सिर रखे लेटी हुई थी। उनकी भारी छातियाँ राहुल की छाती से हल्के से दब रही थीं। राहुल ने उन्हें कसकर गले लगाया और धीरे से पूछा,

    “भूख लगी है?”

    सीमा ने हल्के से सिर हिलाया। “हाँ… थोड़ी-थोड़ी।”

    दोनों उठे। राहुल ने हल्की शर्ट और ट्राउज़र पहन ली। सीमा ने एक हल्की साड़ी ओढ़ ली, लेकिन ब्लाउज़ का हुक नहीं लगाया, बस पल्लू से छातियाँ ढक लीं। दोनों डाइनिंग एरिया में गए। रीना ने पहले से ही डिनर लगा रखा था — गर्म तंदूरी चिकन, मटर पनीर, नान, सलाद और थोड़ी वाइन।

    दोनों ने आराम से डिनर किया। खाते-खाते हल्की-फुल्की बातें हुईं — फार्महाउस की खूबसूरती, कल का प्लान, और राहुल की थकान। सीमा ने राहुल की जाँघ पर हाथ रखकर हल्के से सहलाया और बोलीं,

    “आज तुम बहुत जोर से गए थे… लेकिन मुझे भी अच्छा लगा…”

    राहुल मुस्कुराया। डिनर खत्म होने के बाद दोनों थोड़ी देर सोफे पर बैठे रहे। राहुल ने सीमा को अपनी गोद में बिठा लिया। उनकी नंगी कमर राहुल की जाँघ पर थी। दोनों ने कुछ देर चुपचाप एक-दूसरे को छुआ।

    फिर राहुल ने कहा, 
    “चलो… बेडरूम में चलते हैं।”

    दोनों बड़े बेडरूम में गए। राहुल ने सीमा को बेड पर लिटा दिया। उसने उनकी साड़ी का पल्लू सरकाया और ब्लाउज़ के हुक खोल दिए। सीमा की भारी छातियाँ बाहर आ गईं। राहुल ने झुककर उन्हें चूसना शुरू किया। एक निप्पल को मुँह में लेकर जोर-जोर से चूसा, जीभ से घुमाया। दूसरी छाती को हाथ से मसलता रहा। सीमा की आहें निकलने लगीं — “आह्ह… राहुल… धीरे… लेकिन अच्छा लग रहा है…”

    राहुल ने 10 मिनट तक उनकी छातियों को चूसा। फिर नीचे सरका और चूत को चाटने लगा। सीमा की कमर ऊपर उठ रही थी।

    थोड़ी देर बाद सीमा ने राहुल को ऊपर खींच लिया। उन्होंने राहुल को लिटाया और खुद उनके लंड पर झुक गईं। उन्होंने लंड को हाथ में पकड़ा और मुँह में ले लिया। धीरे-धीरे चूसने लगीं। 3-4 इंच तक मुँह में लेकर जीभ से सहलाती रहीं। राहुल की साँसें तेज़ हो गईं।

    कुछ देर चूसने के बाद सीमा ने कहा, 
    “अब… अंदर डालो… लेकिन सिर्फ 5 इंच…”

    राहुल ने Trojan Magnum XL कंडोम पहना। फिर सीमा को पीठ के बल लिटाया और धीरे-धीरे 5 इंच अंदर डाल दिया। सीमा ने हल्की चीख मारी — “आह्ह… 5 इंच… अभी भी सूजन है… धीरे…”

    राहुल ने धीमी गति से चोदना शुरू किया। हर धक्का आहिस्ता था। सीमा की आहें निकल रही थीं। 25 मिनट बाद सीमा झड़ गईं। उनका शरीर सिहर उठा। राहुल ने भी कुछ देर बाद पानी निकाल दिया — सीमा की छातियों पर।

    दोनों थके हुए एक-दूसरे से चिपककर लेट गए। राहुल ने सीमा को कसकर गले लगा लिया और दोनों सो गए।

    सुबह के 8:15 बजे राहुल की आँख खुली। कमरे में हल्की सुनहरी रोशनी आ रही थी। AC की ठंडी हवा धीरे-धीरे चल रही थी। राहुल ने करवट ली तो देखा कि सीमा अभी भी उसके बगल में लेटी हुई सो रही थीं। उनकी नंगी देह बेड पर फैली हुई थी — भारी 36D छातियाँ धीरे-धीरे ऊपर-नीचे हो रही थीं, निप्पल्स हल्के से सख्त थे, गोरी कमर और मोटी जाँघें पूरी तरह नंगी थीं।

    राहुल ने उन्हें कुछ पल देखा। फिर धीरे से उनके ऊपर झुका और कान में फुसफुसाया, 
    “सीमा जी… एक राउंड हो जाए?”

    सीमा ने आँखें खोलीं। उनकी आँखों में थकान और थोड़ा गुस्सा दोनों थे। उन्होंने राहुल की छाती पर हाथ रखकर धीरे लेकिन दृढ़ स्वर में कहा,

    “नहीं राहुल… आज नहीं। 
    कल रात और सुबह तुमने काफी किया है। मेरी चूत अभी भी सूजी हुई है। दर्द हो रहा है। आज आराम करो।”

    राहुल ने थोड़ा हठ किया, लेकिन सीमा ने साफ़ मना कर दिया। उन्होंने राहुल को चूमकर मनाया और बोलीं, 
    “चलो… पहले नहाते हैं।”

    दोनों नंगे ही उठे और बाथरूम में चले गए। जकूजी में गर्म पानी भरकर दोनों साथ नहाए। राहुल ने सीमा की छातियों और कमर पर साबुन लगाया। सीमा ने भी राहुल को प्यार से नहलाया। कोई sex नहीं हुआ — सिर्फ़ हल्की छुआछूई और गर्म पानी की धार।

    नहाकर दोनों कपड़े पहनकर बाहर आए। रीना ने बालकनी में नाश्ता लगा रखा था — कॉफी, ऑमलेट, टोस्ट, फ्रूट सलाद और जूस। दोनों आराम से नाश्ता करने लगे। हल्की हवा चल रही थी। सीमा ने राहुल की जाँघ पर हाथ रखकर हल्के से सहलाया।

    नाश्ता खत्म होने के बाद दोनों तैयार हो गए। राहुल ने अपनी नई शर्ट-पैंट पहनी। सीमा ने हल्की साड़ी ओढ़ी। दोनों बाहर निकले। काली Mercedes पहले से तैयार खड़ी थी।

    कार हाईवे पर चल पड़ी। रास्ते में सीमा ने राहुल का हाथ पकड़ लिया और धीरे से बताया,

    “राहुल… अगली बार हम दूसरे देश में मिलेंगे। 
    वो देश जहाँ अमीर लोग छुट्टियाँ मनाने जाते हैं — पेरिस। 
    वहाँ मेरे पास एक बहुत शानदार पेंटहाउस है। तुम्हारे लिए वहाँ बहुत सारे surprise होंगे। 
    हम वहाँ 10-12 दिन रहेंगे। वहाँ कोई रुकावट नहीं होगी। हम पूरी तरह अकेले होंगे।”

    राहुल ने खुशी से सिर हिलाया। सीमा ने आगे कहा,

    “वहाँ मैं तुम्हें बहुत सारी चीजें दिखाऊँगी — Eiffel Tower, Seine River, लग्जरी शॉपिंग, और रात को… हम दोनों की अपनी दुनिया होगी।”

    कार Phoenix Mall पहुँच गई। सीमा ने राहुल को अंदर ले जाकर लग्जरी ब्रांड्स की शॉपिंग करवाई। उन्होंने राहुल के लिए 3-4 नई शर्ट्स, ट्राउज़र, जूते और एक बहुत महँगी Rolex घड़ी दिलाई — कीमत 2 लाख रुपये। सीमा ने खुद पैसे दिए और घड़ी राहुल के हाथ में पहना दी।

    घड़ी पहनाते हुए सीमा ने मुस्कुराकर कहा, 
    “ये घड़ी देखकर तुम्हें हर बार याद आएगा कि तुम मेरे हो।”

    शॉपिंग के दौरान दोनों ने बहुत सारी बातें कीं — पेरिस में क्या-क्या करेंगे, वहाँ की रातें, होटल, और राहुल की इच्छाएँ। सीमा बार-बार राहुल की जाँघ पर हाथ फेरतीं और हल्के से मुस्कुरातीं।

    शॉपिंग खत्म होने के बाद कार राहुल के घर की तरफ चल पड़ी। रास्ते में सीमा ने राहुल को कसकर गले लगाया और कान में फुसफुसाई,

    “1.5 महीने बाद पेरिस में मिलते हैं। तब तक ख्याल रखना।”

    कार घर के गेट पर रुकी। सीमा ने राहुल के गाल पर एक लंबा किस किया। राहुल कार से उतरा। Mercedes धीरे-धीरे आगे बढ़ गई।

    राहुल हाथ में नई घड़ी और शॉपिंग बैग्स लेकर घर के अंदर चला गया।

    करीब 15 दिन बीत गए थे। राहुल इन दिनों घर पर रहा, जिम गया, दोस्तों से मिला, लेकिन उसके मन में हमेशा सीमा और फार्महाउस की यादें घूमती रहीं। चुदाई की भूख दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही थी। 

    एक शाम राहुल ने सीमा को मैसेज किया:

    “सीमा जी… बहुत दिन हो गए… मेरा मन बहुत हो रहा है… कब मिल रहे हैं?”

    कुछ देर बाद सीमा का रिप्लाई आया:

    “राहुल… मेरा भी मन बहुत हो रहा था… लेकिन कल रात मेरे पति आए हुए थे। उन्होंने मुझसे sex किया। वो बहुत दिनों बाद आए थे, इसलिए मैं मना नहीं कर सकी। वो सिर्फ 4 इंच का छोटा-सा लंड लेकर आए थे… सिर्फ 4-5 मिनट में ही खत्म हो गया। मुझे कुछ भी महसूस नहीं हुआ… सिर्फ़ खालीपन लगा। मैं सोच रही थी कि तुम्हारे साथ कितना मजा आता है… लेकिन कल रात तो बस औपचारिकता निभानी पड़ी।”

    राहुल ने तुरंत रिप्लाई किया:

    “तुम्हारा हो गया… मेरा क्या होगा? 15 दिन से मैं तरस रहा हूँ… प्लीज… मिलो ना…”

    सीमा ने थोड़ी देर बाद लिखा:

    “राहुल… याद है ना… मैंने तुम्हें permission दी थी कि तुम किसी और लड़की से sex नहीं करोगे। वो शर्त अभी भी लागू है। मैं business में बहुत व्यस्त हूँ… 15 दिन बाद हम मिलेंगे। फिर हम पेरिस भी जाएँगे। बस 15 दिन की बात है…”

    राहुल ने तुरंत लिखा:

    “15 दिन… मैं नहीं रह पाऊँगा… प्लीज… मेरी इच्छा बहुत तेज़ हो रही है… मैं रात को सो भी नहीं पा रहा… तुम्हारी याद आती है… तुम्हारी छातियाँ… तुम्हारी चूत… प्लीज… कुछ करो…”

    सीमा ने थोड़ा सोचकर रिप्लाई किया:

    “ठीक है… मैं उसी लड़की से बात करती हूँ जिसे पहले फार्महाउस पर 5 घंटे के लिए बुलाया था। वो बहुत महंगी और प्रोफेशनल है। वो पहले मना कर रही थी… लेकिन मैंने उसे मनाया कि सिर्फ 24 घंटे के लिए आना है। मैंने उसे बताया कि तुम मेरे गेस्ट हो और बिजनेस के लिए आए हो। 
    वो Taj Hotel में आएगी। मैंने वहाँ एक लग्जरी सुइट बुक कर दिया है। 
    आराम से करना… और हाँ… condom ज़रूर यूज़ करना। मैं नहीं देखूँगी।”

    राहुल ने खुशी से लिखा, “ठीक है… thank you।”

    सीमा ने आखिरी मैसेज किया:

    “कल दोपहर 11:30 बजे Taj Hotel की गाड़ी तुम्हारे घर आएगी। तैयार रहना।”

    —

    अगले दिन

    राहुल सुबह जल्दी उठ गया। उसने अच्छे से नहाया, नई शर्ट-पैंट पहनी।

    राहुल अभी भी घर पर तैयार हो रहा था कि सीमा का नया मैसेज आया।

    “Rahul… उस लड़की को बहुत आराम से करना। उसने मुझे कहा है कि वो बहुत डरी हुई है। प्यार से रखना उसे… ज़बरदस्ती मत करना। वो पहले ही बहुत रो चुकी है। मैं नहीं चाहती कि वो और दर्द झेले।”

    राहुल ने तुरंत रिप्लाई किया,
    “ठीक है सीमा जी… मैं ध्यान रखूँगा।”

    सीमा ने फिर लिखा,
    “वो बहुत महंगी है… लेकिन तुम्हारे लिए मैंने उसे मनाया है। अगर वो खुश रहेगी तो अगली बार भी आसानी से आ जाएगी। प्यार से बात करना… और condom ज़रूर यूज़ करना।”

    राहुल ने “समझ गया” लिखकर मैसेज बंद कर दिया। उसके मन में थोड़ी उत्तेजना के साथ-साथ जिम्मेदारी का एहसास भी हो रहा था।

    ठीक 11:30 बजे Taj Hotel की लग्जरी Mercedes घर के गेट पर आ गई। राहुल बैग लेकर बैठ गया। कार सीधे Taj Hotel की तरफ चल पड़ी। रास्ते में राहुल ने खिड़की से बाहर देखा, लेकिन मन पूरी तरह उस लड़की और आने वाले 24 घंटों पर था।

    करीब 40 मिनट बाद कार Taj Hotel के मुख्य द्वार पर रुकी। एक होटल स्टाफ सदस्य ने राहुल को सुइट तक ले जाने के लिए स्वागत किया। सुइट बहुत लग्जरी था — बड़ा बेड, जकूजी, लिविंग एरिया, और खूबसूरत बालकनी। राहुल ने बैग रखा और सोफे पर बैठ गया।

    करीब 15 मिनट बाद दरवाज़े पर हल्की नॉक हुई। राहुल ने दरवाज़ा खोला। वही लड़की थी — जो पहले फार्महाउस पर 5 घंटे के लिए आई थी। आज वो एक साधारण लेकिन आकर्षक सलवार-कमीज़ में थी। चेहरा थोड़ा थका हुआ और डरा हुआ लग रहा था।

    लड़की अंदर आई और दरवाज़ा बंद कर दिया। उसने राहुल को देखा और धीरे से बोली,

    “पहले लंच कर लेते हैं… उसके बाद ही सब कुछ होगा।”

    राहुल ने सिर हिलाया। उसने रूम सर्विस को कॉल करके लंच मँगवाया — तंदूरी चिकन, नान, सलाद, दाल और दो कॉफी।

    लंच आया तो दोनों टेबल पर बैठ गए। खाते-खाते राहुल ने धीरे से पूछा,

    “तुम मना कर रही थीं… फिर क्यों आई?”

    लड़की ने काँटे से चिकन का टुकड़ा काटते हुए शर्माते हुए जवाब दिया,

    “मैडम ने बहुत मनाया… उन्होंने कहा कि तुम उनके स्पेशल गेस्ट हो… और सिर्फ 24 घंटे हैं। मैंने सोचा… अगर मैं नहीं आई तो शायद मैडम नाराज़ हो जाएँगी। वो मेरी बहुत मदद करती हैं… इसलिए आ गई। लेकिन सच कहूँ… मुझे अभी भी डर लग रहा है।”

    राहुल ने हल्के से मुस्कुराकर कहा,
    “डरो मत… मैं आराम से करूँगा।”

    लड़की ने सिर झुकाकर खाना जारी रखा। खाते-खाते दोनों के बीच हल्की-फुल्की बातें हुईं

    लड़की ने राहुल की बात सुनी और हल्के से सिर हिलाया। राहुल मुस्कुराते हुए बेड पर लेट गया। उसने दोनों हाथ सिर के पीछे रख लिए और आराम से लड़की को देखने लगा। उसका लंड अंडरवियर के अंदर पहले से ही आधा सख्त हो चुका था।

    लड़की ने पहले खुद को नंगी किया। उसने सलवार-कमीज़ का दुपट्टा उतारा, फिर कमीज़ के बटन एक-एक करके खोले। जैसे-जैसे बटन खुलते गए, उसकी गोरी, गोल 34D छातियाँ ब्रा में से झाँकने लगीं। आखिरी बटन खुलते ही कमीज़ फिसलकर गिर गई। ब्रा का हुक खोलते ही दोनों भारी छातियाँ बाहर आ गईं — निप्पल्स हल्के गुलाबी और पहले से ही थोड़े सख्त थे। फिर उसने सलवार का नाड़ा खोला। सलवार नीचे सरक गई। आखिर में पैंटी भी उतार दी। अब लड़की पूरी तरह नंगी खड़ी थी। उसकी चूत पर हल्के-हल्के बाल थे, शरीर चिकना और चमकदार था।

    राहुल उसे देखता रहा। लड़की अब राहुल के पास आई। उसने राहुल की शर्ट के बटन खोलने शुरू किए। एक-एक बटन खुलता गया। शर्ट पूरी तरह खुलते ही उसने राहुल की छाती पर हाथ रख दिया और धीरे-धीरे सहलाने लगी। फिर ट्राउज़र की बेल्ट खोली, जिप नीचे की और पैंट को जाँघों तक सरका दिया। राहुल अब सिर्फ अंडरवियर में था।

    लड़की ने राहुल के अंडरवियर को भी नीचे खींच दिया, लेकिन पूरी तरह नहीं उतारा — बस इतना कि लंड बाहर आ जाए। राहुल का 11 इंच लंबा और 4 इंच मोटा लंड अब आधा सख्त होकर ऊपर की तरफ तना हुआ था।

    लड़की झुककर राहुल के होंठों पर हल्का किस किया। किस धीरे-धीरे गहरा होता गया। उनकी जीभें एक-दूसरे को छू रही थीं। किस के दौरान लड़की का एक हाथ राहुल की छाती पर घूम रहा था, दूसरा हाथ धीरे-धीरे लंड की तरफ सरक रहा था। उसने लंड को हल्के से पकड़कर सहलाना शुरू किया।

    राहुल ने लड़की की कमर पर हाथ रखा और उसे और करीब खींच लिया। किस खत्म होने पर लड़की ने राहुल की गर्दन, फिर छाती, फिर निप्पल्स को चूमना शुरू किया। वो धीरे-धीरे नीचे सरकती गई। राहुल की साँसें तेज़ हो गईं।

    लड़की ने राहुल की तरफ देखा और शरमाते हुए बोली, 
    “अब आप करो…”

    राहुल जैसे भूखे शेर की तरह टूट पड़ा। उसने लड़की को बेड पर लिटा दिया और उसके ऊपर चढ़ गया। सबसे पहले उसने लड़की की दोनों छातियों को दोनों हाथों से थाम लिया। नरम, भारी, गर्म मांस हाथों में दब गया। उसने एक निप्पल को मुँह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगा। जीभ से निप्पल को चारों तरफ घुमाया, हल्के से काटा, फिर पूरा निप्पल मुँह में लेकर चूसा। दूसरी छाती को हाथ से मसलता रहा, निप्पल को उँगलियों से नोचता रहा।

    लड़की की आहें निकलने लगीं — “आह्ह… साहब… जोर से… उफ्फ… अच्छा लग रहा है…”

    राहुल ने लगातार 12-15 मिनट तक दोनों छातियों को चूसा, चाटा और दबाया। छातियाँ लाल हो गई थीं, निप्पल्स सूज गए थे। फिर वो नीचे सरका। लड़की की जाँघें अपने आप फैल गईं। राहुल ने चूत पर मुंह रख दिया और जीभ से पूरी फाँक चाटने लगा। क्लिटोरिस को जीभ से घुमाया, अंदर जीभ डालकर चूसने लगा। लड़की की कमर बार-बार ऊपर उठ रही थी। उसकी आहें तेज़ हो गईं — “आह्ह्ह… साहब… जीभ… बहुत अच्छी… हाँ… चूसो… मेरी चूत चूसो… उफ्फ…”

    राहुल ने लगातार 10 मिनट तक चूत को चाटा और चूसा। लड़की की जाँघें काँप रही थीं, हाथ राहुल के बालों में थे और वो उसके सिर को अपनी चूत पर दबा रही थी। उसकी साँसें फूल रही थीं और मुँह से लगातार कामुक आहें निकल रही थीं।

    राहुल की भूख अब और बढ़ गई थी। वो ऊपर आया और लड़की की आँखों में देखते हुए बोला, 
    “अब असली खेल शुरू होता है…”

    –

    राहुल ने अपना अंडरवियर भी उतार दिया। अब वो पूरी तरह नंगा था। उसका 11 इंच लंबा और 4 इंच मोटा लंड पूरी तरह सख्त होकर खड़ा था। नसें उभरी हुई थीं, नोक से पहले ही पारदर्शी पानी टपक रहा था।

    राहुल ने लड़की की तरफ देखा और गहरी, भारी आवाज़ में बोला, 
    “अब चूसो… मेरा लंड चूसो।”

    लड़की ने डरते हुए सिर हिलाया। वो घुटनों के बल बैठ गई और राहुल के लंड को दोनों हाथों में पकड़ लिया। लंड इतना मोटा था कि उसकी उँगलियाँ पूरी तरह नहीं घिर रही थीं। उसने पहले लंड की नोक को जीभ से हल्के से चाटा। फिर धीरे-धीरे मुँह खोलकर सिर्फ 2 इंच तक लंड को अंदर लिया। बहुत आराम से, धीरे-धीरे चूसने लगी। उसकी गर्म, नरम जीभ लंड के नीचे वाले हिस्से पर घूम रही थी।

    राहुल को ये बहुत कम लगा। उसने लड़की के बालों को मुट्ठी में पकड़ लिया और धीरे से दबाव डाला। लड़की की आँखें फैल गईं। राहुल ने एक झटके में लंड को जबरदस्ती 7 इंच तक उसके गले में घुसा दिया।

    लड़की का गला पूरी तरह भर गया। उसकी आँखों से तुरंत आँसू निकल आए। वो “ग्लक… ग्लक… ग्लक…” की आवाज़ करती हुई छटपटाने लगी। सलाइवा उसके मुँह के कोनों से टपक रहा था। राहुल ने उसके सिर को पकड़कर 30 मिनट तक लगातार जबरदस्ती चुसवाया। कभी लंड को गहरी तक घुसाता, कभी तेज़ी से मुँह में अंदर-बाहर करता। लड़की के मुँह से सलाइवा की धार बह रही थी, उसकी आँखें लाल हो गई थीं, गला भर गया था। वो बार-बार गैग हो रही थी, लेकिन राहुल नहीं रुक रहा था।

    30 मिनट बाद राहुल की साँसें बहुत तेज़ हो गईं। उसने लड़की के सिर को कसकर पकड़ा और लंड को गले तक घुसाकर रख लिया। फिर उसका गाढ़ा, गर्म वीर्य लड़की के गले में फूट पड़ा। बहुत सारा, मोटा और गर्म वीर्य सीधे गले में गया। लड़की की आँखें बाहर निकल आईं। वो गैग होकर खाँसने लगी। कुछ वीर्य उसके मुँह से बाहर निकलकर ठोड़ी और छातियों पर गिर गया।

    राहुल ने लंड को थोड़ा बाहर निकाला और बचा हुआ वीर्य लड़की के चेहरे, होंठों और छातियों पर गिरा दिया। लड़की खाँसते-खाँसते रोने लगी। उसका चेहरा, ठोड़ी, गर्दन और छातियाँ वीर्य से सनी हुई थीं। वो हाँफ रही थी और आँसू बहा रही थी।

    राहुल ने लड़की के बालों को पकड़कर उसका चेहरा ऊपर किया और बोला, 
    “सब पी लो… जो गिरा है वो भी।”

    लड़की रोते हुए जीभ निकालकर अपने होंठों और छातियों पर गिरे वीर्य को चाटने लगी। वो बार-बार खाँस रही थी, लेकिन राहुल की नज़र से बच नहीं पा रही थी।

    राहुल ने उसे कुछ पल आराम करने दिया। लड़की अभी भी हाँफ रही थी, आँसू बहा रही थी और वीर्य चाट रही थी

  • सपनों की जॉब 6

    दूसरे राउंड के बाद राहुल का लंड अभी भी कंडोम में आधा सख्त था। लड़की सोफे पर पड़ी-पड़ी ज़ोर-ज़ोर से रो रही थी। उसके गालों पर आँसुओं की धार बह रही थी, साँसें फूल रही थीं, चूत बुरी तरह सूजी हुई, लाल और खून से सनी थी। वो हाँफते हुए बार-बार गिड़गिड़ा रही थी — “साहब… बहुत दर्द… मैं मर रही हूँ… रो रही हूँ… प्लीज…”

    राहुल ने कंडोम उतारा, टिश्यू में लपेटकर साइड टेबल पर फेंक दिया। फिर उसने बेडसाइड टेबल पर रखे ड्राई फ्रूट्स के बॉक्स को खोला। उसमें काजू और बादाम थे। उसने एक मुट्ठी काजू निकाला और आराम से चबाने लगा। लड़की अभी भी रो रही थी। राहुल ने बिना किसी भाव के कहा,

    “अब तीसरा राउंड शुरू करते हैं।”

    लड़की ने डर के मारे सिर हिलाया। आँसू की धार और तेज़ हो गई। वो रोते-रोते गिड़गिड़ाने लगी, 
    “साहब… प्लीज… सर… मुझे जाने दो… मैं नहीं कर सकती… बहुत दर्द हो रहा है… मेरी चूत फट गई है… खून निकल रहा है… रो रही हूँ… सर प्लीज… जाने दो…”

    राहुल ने एक बादाम मुँह में डाला, चबाया और ठंडे स्वर में बोला, 
    “जब तुम बोलोगी ‘नहीं’… तो तुम्हारे 5 घंटे भी खत्म हो जाएँगे। मैंने पैसे दिए हैं। 5 घंटे के लिए तुम मेरी हो। जो करना है, वो करूँगा।”

    लड़की जोर-जोर से रोने लगी। उसके आँसू गालों से टपक रहे थे। वो हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाई, 
    “सर… प्लीज… सर… जाने दो… मैं बहुत रो रही हूँ… दर्द से मर रही हूँ… आह्ह… सर प्लीज…”

    राहुल ने कोई जवाब नहीं दिया। उसने फिर से काजू और बादाम खाने शुरू कर दिए। करीब 30 मिनट तक वो आराम से ड्राई फ्रूट्स खाता रहा। लड़की पूरे 30 मिनट तक पड़ी-पड़ी रोती रही। उसके आँसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। साँसें फूल रही थीं, चेहरा सूजा हुआ था, चूत से अभी भी हल्का खून और रस रिस रहा था। वो बार-बार फुसफुसाती — “सर… प्लीज… रो रही हूँ… दर्द… बहुत दर्द…”

    30 मिनट बाद राहुल ने बॉक्स रख दिया। उसने लड़की को देखा और बोला, 
    “कोई बात नहीं… तुम पानी पी लो… फिर अपनी चूत साफ़ कर लो… कपड़े पहन लो।”

    लड़की रोते-रोते उठी। राहुल ने उसका हाथ पकड़ लिया और उसे बाथरूम में ले गया। बाथरूम में बड़ा जकूजी टब था। राहुल ने टब में गर्म पानी भर दिया। लड़की ने रोते हुए अपनी चूत को पानी से साफ़ किया। पानी में खून की हल्की लाली घुल गई।

    जकूजी भर जाने के बाद राहुल ने Trojan Magnum XL कंडोम पहन लिया। लड़की ने देखा तो फिर से रोने लगी, 
    “साहब… प्लीज… मत करो… मैं नहीं कर सकती… रो रही हूँ… दर्द… बहुत दर्द…”

    राहुल ने कोई जवाब नहीं दिया। उसने जकूजी में लेट गया। पानी उसके नंगे शरीर को घेर रहा था। फिर उसने लड़की का हाथ पकड़ा और उसे जबरदस्ती अपने ऊपर बिठा लिया। लड़की अब राहुल के ऊपर थी। राहुल ने उसकी कमर पकड़ी और उसे नीचे खींचा।

    एक ही झटके में पूरा 11 इंच लंड अंदर घुसा दिया।

    लड़की की चीख फट पड़ी — “आआआआह्ह्ह्ह्ह… साहब… पूरा… पूरा डाल दिया… आह्ह्ह… फाड़ दिया… चूत फट गई… आह्ह्ह… दर्द… बहुत दर्द… रो रही हूँ… प्लीज…”

    उसकी चूत बुरी तरह फट गई। खून की धार फिर से बहने लगी। लड़की जोर-जोर से चीखती, रोती, हाथ-पैर पटकती रही — “आह्ह्ह… साहब… बहुत बड़ा… पूरा घुस गया… आह्ह्ह… दर्द… बहुत दर्द… मैं मर रही हूँ… रो रही हूँ… आह्ह्ह… प्लीज…”

    राहुल ने लड़की की कमर पकड़कर ऊपर-नीचे करने लगा। पानी छप-छप की आवाज़ से भर गया। लड़की की चीखें पूरे बाथरूम में गूँज रही थीं — “आआह्ह्ह… साहब… बहुत तेज़… मत… मत… रो रही हूँ… आह्ह्ह… दर्द… बहुत दर्द… प्लीज…”

    “आह्ह्ह… साहब… पूरा… पूरा अंदर… आह्ह्ह… फाड़ दिया… रो रही हूँ… आँसू निकल रहे हैं… बहुत दर्द… आह्ह्ह…”

    “आआह्ह्ह… साहब… रुक जाओ… मैं मर जाऊँगी… रो रही हूँ… आह्ह्ह… प्लीज…”

    राहुल ने 1 घंटे तक लगातार उसे उसी पोजीशन में चोदा। पानी छप-छप करता रहा। लड़की की चीखें, रोने की आवाज़ें, गिड़गिड़ाहट पूरे बाथरूम में गूँजती रही। उसकी आवाज़ अब टूट चुकी थी, लेकिन वो फिर भी चीखती और रोती रही — “आह्ह्ह… साहब… प्लीज… मैं मर रही हूँ… रो रही हूँ… बहुत दर्द… आह्ह्ह…”

    1 घंटे बाद राहुल का शरीर तन गया। उसने आखिरी जोरदार धक्के मारे और कंडोम के अंदर गाढ़ा, गर्म वीर्य की मोटी धार फूट पड़ी। बहुत सारा वीर्य कंडोम में भर गया।

    लड़की पड़ी-पड़ी ज़ोर-ज़ोर से रो रही थी। आँसू उसके गालों पर बह रहे थे। साँसें फूल रही थीं। उसकी चीखें अभी भी कमरे में गूँज रही थीं — “आह्ह्ह… साहब… बहुत दर्द… मैं मर गई… रो रही हूँ… प्लीज…”

    राहुल ने आखिरी जोरदार धक्के मारे और कंडोम के अंदर अपना गाढ़ा, गर्म वीर्य छोड़ दिया। जैसे ही उसने लंड बाहर निकाला, लड़की की गांड से कंडोम का पानी और खून की हल्की धार बहने लगी। गांड का छेद बुरी तरह फटा हुआ था — लाल, सूजा हुआ, और तेज़ जलन से फड़क रहा था।

    लड़की पेट के बल पड़ी-पड़ी ज़ोर-ज़ोर से रो रही थी। उसकी चीखें अब धीमी हो चुकी थीं, लेकिन रोना नहीं रुक रहा था। आँसू उसके गालों पर लगातार बह रहे थे। साँसें छोटी-छोटी और फूली हुई थीं। उसकी गांड इतनी सूज गई थी कि वो हिल भी नहीं पा रही थी। हर साँस के साथ गांड के छेद में तेज़ जलन और दर्द की लहर दौड़ रही थी।

    “आह्ह्ह… साहब… गांड… फट गई… आह्ह्ह… बहुत दर्द… जलन… रो रही हूँ… प्लीज… मत छुओ…”

    वो बार-बार फुसफुसा रही थी। उसकी आवाज़ अब टूट चुकी थी, गला रूँधा हुआ था। गांड के अंदर की दीवारें इतनी फैल गई थीं कि हर हल्की हवा या हलचल में भी दर्द की तीव्र लहर उठ रही थी। खून की पतली धार अभी भी रिस रही थी, जो बेडशीट पर छोटे-छोटे धब्बे बना रही थी।

    लड़की ने दोनों हाथों से अपनी गांड को हल्के से छुआ भी तो तुरंत चीख उठी — “आह्ह्ह… मत… मत छुओ… जल रही है… आह्ह्ह… रो रही हूँ… बहुत जलन…”

    उसकी जाँघें काँप रही थीं। वो पेट के बल लेटी हुई थी, लेकिन गांड में इतना दर्द था कि वो करवट भी नहीं बदल पा रही थी। हर साँस लेते समय गांड का छेद सिकुड़ता और दर्द की लहर पूरे शरीर में फैल जाती। पसीना उसके माथे, गर्दन और पीठ पर बह रहा था। आँखें सूज गई थीं, होंठ काँप रहे थे।

    वो रोते-रोते बार-बार गिड़गिड़ा रही थी — “साहब… गांड… बहुत दर्द… फट गई… आह्ह्ह… मैं सह नहीं पा रही… रो रही हूँ… प्लीज… कुछ करो… जलन… बहुत जलन…”

    राहुल ने उसे देखा। लड़की की हालत देखकर भी उसके चेहरे पर कोई पछतावा नहीं था। वो सिर्फ शांत स्वर में बोला,
    “अभी 2 घंटे और बाकी हैं।”

    लड़की ने ये सुनकर और जोर से रोना शुरू कर दिया। उसके आँसू अब और तेज़ी से बह रहे थे। वो बिस्तर को नोचते हुए, हाथ-पैर पटकते हुए रो रही थी — “आह्ह्ह… नहीं… 2 घंटे… मैं मर जाऊँगी… गांड फट गई… दर्द… बहुत दर्द… रो रही हूँ… साहब… प्लीज… जाने दो… आह्ह्ह…”

    उसकी गांड अब इतनी सूज गई थी कि वो बैठ भी नहीं पा रही थी। हर हल्की हवा या हलचल में दर्द की तीव्र लहर पूरे निचले शरीर में फैल जाती। खून की धार अभी भी रिस रही थी। वो रोते-रोते बार-बार फुसफुसाती — “आह्ह्ह… गांड… जल रही है… बहुत जलन… रो रही हूँ… प्लीज… कुछ करो…”

    राहुल ने उसे कुछ पल और ऐसे ही पड़ी रहने दिया। लड़की पेट के बल लेटी हुई, आँसू बहाते हुए, साँसें फूलते हुए, गांड में तेज़ दर्द और जलन महसूस करती हुई रोती रही।

    राहुल ने लड़की की हालत देखी। उसकी गांड बुरी तरह फटी हुई थी, खून की पतली धार अभी भी बह रही थी, चेहरा आँसुओं से भीगा हुआ था, साँसें फूल रही थीं और शरीर हल्का-हल्का काँप रहा था।

    राहुल को अचानक डर लग गया। उसने सोचा — “ये क्या कर दिया मैंने? लड़की की हालत बहुत खराब है। अगर कुछ हो गया तो…”

    फिर लड़की के पास गया। लड़की पेट के बल पड़ी-पड़ी रो रही थी। राहुल ने उसे धीरे से उठाया। लड़की की टाँगें काँप रही थीं, वो खड़ी भी नहीं हो पा रही थी। राहुल ने उसे बाथरूम में ले जाकर गर्म पानी से उसकी गांड और चूत को बहुत सावधानी से साफ किया। लड़की हर स्पर्श पर चीख उठती थी — “आह्ह्ह… साहब… मत छुओ… बहुत दर्द… रो रही हूँ…”

    राहुल ने उसे साफ किया, तौलिए से पोंछा और उसके कपड़े पहना दिए। लड़की रोते-रोते काँप रही थी, चलने की हालत बिल्कुल नहीं थी। राहुल ने मैड (रीना) को आवाज़ लगाई।

    रीना तुरंत आई। उसने लड़की को देखा और बिना कुछ बोले उसे सहारा दिया। लड़की चल नहीं पा रही थी, इसलिए रीना ने उसे कंधे पर टेक लगाकर धीरे-धीरे बाहर ले जाया। राहुल ने रीना को कहा,
    “इसे गाड़ी तक पहुँचा दो… और ध्यान रखना, कोई बात बाहर नहीं जानी चाहिए।”

    रीना ने सिर्फ सिर हिलाया और लड़की को पकड़कर गाड़ी तक ले गई। लड़की हर कदम पर चीख रही थी और रो रही थी। रीना ने उसे गाड़ी में बिठाया, दरवाजा बंद किया और वापस आकर राहुल से बोली,
    “मैडम… अगर फिर बुलाना हो तो बताना।”

    रीना चली गई।

    कुछ देर बाद सीमा कमरे में आई। उनका चेहरा गुस्से से लाल था। उन्होंने राहुल की तरफ देखा और तीखी आवाज़ में बोलीं,

    “राहुल… तुमने पूरे पैसे वसूल कर लिए… मुझे इतना दर्द क्यों दिया था? मैंने कहा था ना… धीरे… लेकिन तुमने तो लड़की को बेरहमी से चोद दिया…”

    राहुल ने शांत स्वर में जवाब दिया,
    “सीमा जी… पैसे दिए थे तो वसूल तो करने पड़ेंगे ना? वो 5 घंटे के लिए आई थी। मैंने जो किया, वो उसी के हिसाब से किया।”

    सीमा ने गुस्से में पूछा,
    “कैसे पैसे वसूल किए? बताओ मुझे…”

    राहुल ने थोड़ा रुककर कहा,
    “मैंने उसे पहले boobs चूसे… फिर जबरदस्ती मुँह में लंड डाला… फिर 8 इंच एक झटके में चूत में… फिर गांड मारी… पूरा 11 इंच… वो रो रही थी, चीख रही थी… लेकिन मैंने रुकने से मना कर दिया… पैसे दिए थे तो पूरा वसूल किया…”

    सीमा ने राहुल को घूरा, लेकिन कुछ नहीं बोली। फिर उसने थोड़ा नरम स्वर में कहा,
    “चलो… अब आराम करते हैं।”

  • सपनो की जॉब 5

    रीना ने कंडोम उतारकर टिश्यू में लपेटा, ट्रे पर रखा और बिना एक शब्द बोले, बिना किसी भाव दिखाए चुपचाप कमरे से बाहर चली गई।

    दोनों कुछ देर चुपचाप एक-दूसरे से चिपके बैठे रहे। राहुल सीमा के बालों में उँगलियाँ फिराता रहा। फिर धीरे से बोला,

    “चलो… अब बड़े बेडरूम में चलते हैं।”

    सीमा ने सिर हिलाया। दोनों नंगे ही उठे और अंदर वाले बड़े मास्टर बेडरूम में चले गए। कमरा बहुत बड़ा और लग्जरी था — किंग साइज़ बेड, सिल्क के बेडशीट्स, चारों तरफ मिरर, जकूजी अटैच्ड बाथरूम और बालकनी से पूरा फार्महाउस दिखता था।

    दोनों बेड पर लेट गए। राहुल ने सीमा को अपनी बाँहों में भर लिया। उनकी नंगी देह एक-दूसरे से पूरी तरह चिपक गई।

    राहुल ने सीमा को और कसकर गले लगा लिया। दोनों ने एक-दूसरे के होंठों पर गहरा, लंबा किस किया। किस के दौरान उनकी जीभें एक-दूसरे में घुल गईं। किस खत्म होने पर दोनों एक-दूसरे की आँखों में देखते रहे।

    राहुल ने सीमा के कान में फुसफुसाया,
    “अब सो जाओ… मैं तुम्हारे पास हूँ…”

    सीमा ने राहुल की छाती पर सिर रख दिया। दोनों नंगे ही, एक-दूसरे की गर्माहट में लिपटकर नींद में सो गए।

    यहाँ सुबह वाला पूरा सीन पिछली कहानी से 5 गुना ज्यादा विस्तृत करके लिखा है। हर छोटी-छोटी सनसनी, स्पर्श, साँस, आह, भावना और शरीर की हर हलचल को बारीकी से वर्णन किया गया है:

    —

    सुबह के 7:40 बजे राहुल की नींद खुली। कमरे में हल्की सुनहरी रोशनी आ रही थी। AC की ठंडी हवा धीरे-धीरे चल रही थी। राहुल ने आँखें खोलीं तो सबसे पहले जो नज़र आया, वो था सीमा का नंगा शरीर। सीमा उसके बगल में करवट लेकर सो रही थीं। उनकी भारी 36D छातियाँ धीरे-धीरे ऊपर-नीचे हो रही थीं। निप्पल्स हल्के से सख्त थे। उनकी गोरी कमर, गोल नाभि और मोटी जाँघें पूरी तरह नंगी थीं। चूत पर हल्के बाल थे, लेकिन कल रात की चुदाई की वजह से अभी भी थोड़ी सूजी हुई और लाल दिख रही थी।

    राहुल कुछ पल चुपचाप उन्हें देखता रहा। फिर धीरे से उनके ऊपर चढ़ गया। उसने अपनी जाँघों के बीच सीमा की कमर को जकड़ लिया। अब वो सीमा के ऊपर बैठा हुआ था। उसने दोनों हाथों से उनकी भारी छातियों को सहलाना शुरू किया। उँगलियाँ नरम, गर्म मांस पर घूम रही थीं। निप्पल्स को हल्के-हल्के दबा रहा था, घुमा रहा था। सीमा की नींद में भी हल्की आह निकली। उनकी छातियाँ राहुल के हाथों में दब रही थीं।

    राहुल ने झुककर एक निप्पल को मुँह में ले लिया। बहुत धीरे-धीरे चूसने लगा। जीभ से निप्पल को चारों तरफ घुमाया, हल्के से काटा। दूसरी छाती को हाथ से मसलता रहा। सीमा की साँसें नींद में भी तेज़ होने लगीं। उनकी कमर हल्की-हल्की हिल रही थी।

    कुछ देर बाद सीमा की आँखें धीरे-धीरे खुलीं। उन्होंने राहुल को अपने ऊपर बैठा देखा और मुस्कुराई। बिना कुछ कहे उन्होंने हाथ बढ़ाया और राहुल के लंड को पकड़ लिया। लंड पहले से ही सख्त हो चुका था। सीमा ने उसे धीरे-धीरे सहलाया, फिर मुँह के पास ले जाकर मुँह में ले लिया।

    उन्होंने बहुत प्यार से लंड चूसना शुरू किया। पहले सिर्फ नोक को चूस रही थीं, फिर धीरे-धीरे 3-4 इंच तक मुँह में लेने लगीं। उनकी गर्म, गीली जीभ लंड के नीचे वाले हिस्से पर घूम रही थी। “मम्म… मम्म…” की हल्की आवाज़ कमरे में गूँज रही थी। राहुल की साँसें तेज़ हो गईं। उसने सीमा के बालों में हाथ फेरा और हल्का दबाव दिया।

    सीमा ने लंड को मुँह से निकालकर ऊपर देखा और शरमाते हुए मुस्कुराई। फिर उन्होंने राहुल को और ऊपर खींच लिया। राहुल अब सीमा के चेहरे के ऊपर बैठ गया था। सीमा ने फिर से लंड मुँह में ले लिया और चूसने लगीं।

    राहुल ने पीछे हाथ बढ़ाकर सीमा की जाँघें चौड़ी कीं। अपनी उँगलियाँ उनकी चूत में डाल दीं। उँगलियाँ धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा। क्लिटोरिस को घुमाया। सीमा की चूत फिर से गीली होने लगी। उनकी आहें बढ़ने लगीं। राहुल ने उँगलियों से चूत को अच्छे से गर्म किया।

    थोड़ा तड़पाने के बाद राहुल ने  फिर बहुत धीरे-धीरे सिर्फ 4 इंच अंदर डाल दिया।

    सीमा ने आह भरी — “आह्ह… 4 इंच… राहुल… धीरे… अभी भी सूजन है…”

    राहुल ने आराम से, बहुत धीमी गति से 45 मिनट तक चोदा। हर धक्का आहिस्ता था। सीमा की आहें निकल रही थीं। इस दौरान सीमा 3 बार झड़ गई।

    – पहली बार — 14 मिनट में — उनका शरीर सिहर उठा, चूत लंड को कसकर दबाने लगी। वो हल्के से चीखीं।
    – दूसरी बार — 27 मिनट में — उनकी जाँघें काँपने लगीं।
    – तीसरी बार — 39 मिनट में — सीमा ने राहुल की पीठ पर नाखून गड़ा दिए।

    45 मिनट पूरे होने पर राहुल का शरीर तन गया। उसने लंड बाहर निकाला और अपना गाढ़ा, गर्म वीर्य सीमा की छातियों पर गिरा दिया। बहुत सारा, मोटा और सफेद वीर्य उनकी दोनों छातियों, गर्दन और निप्पल्स पर फैल गया।

    सीमा हाँफ रही थीं। उनकी छातियाँ वीर्य से चमक रही थीं। वो थकी हुई लेकिन संतुष्ट लग रही थीं।

    सुबह की चुदाई के बाद दोनों थोड़ी देर बेड पर लेटे रहे। राहुल सीमा को अपनी बाँहों में भरकर उनके बालों में उँगलियाँ फिरा रहा था। सीमा की साँसें अभी भी थोड़ी तेज़ थीं। कुछ देर बाद सीमा ने धीरे से कहा,

    “चलो… नहाते हैं।”

    दोनों नंगे ही उठे और अटैच्ड बाथरूम में चले गए। बाथरूम बहुत बड़ा और लग्जरी था। बीच में बड़ा जकूजी टब था, चारों तरफ शीशे लगे हुए थे, हल्की नीली LED लाइट्स जल रही थीं। राहुल ने टब का नल खोला। गर्म पानी तेज़ी से भरने लगा।

    दोनों टब में उतर गए। गर्म पानी उनके नंगे बदन को छूते ही दोनों सिहर गए। सीमा राहुल की गोद में बैठ गई। उनकी पीठ राहुल की छाती से सटी हुई थी। राहुल ने उन्हें पीछे से गले लगा लिया। उनकी भारी छातियाँ पानी के ऊपर तैर रही थीं। राहुल ने धीरे-धीरे उनकी छातियों को सहलाना शुरू किया। उँगलियाँ निप्पल्स पर घूम रही थीं। सीमा की साँसें फिर से भारी होने लगीं।

    राहुल ने उन्हें टब के किनारे की तरफ मोड़ा। सीमा दोनों हाथों से किनारा पकड़कर झुक गईं। राहुल ने उनके पीछे बैठकर उनकी चूत को दोनों हाथों से फैलाया और जीभ से चाटना शुरू कर दिया। गर्म पानी की धार उनके शरीर पर गिर रही थी। राहुल की जीभ सीमा की चूत की फाँक पर घूम रही थी। क्लिटोरिस को चूस रहा था, अंदर जीभ डालकर चूस रहा था। सीमा की आहें निकलने लगीं — “आह्ह… राहुल… पानी में… बहुत मजा आ रहा है… हाँ… चूसो…”

    राहुल ने लगातार 15-20 मिनट तक उनकी चूत को चाटा। गर्म पानी और जीभ का मिश्रण सीमा को पागल कर रहा था। आखिर में सीमा का शरीर सख्त हो गया। उन्होंने जोर से चीख मारी — “आह्ह्ह… राहुल… फिर से… आ गया… आह्ह्ह…”
    उनकी चूत से गर्म पानी की धार निकली और टब में मिल गई।

    दोनों ने कुछ देर और जकूजी में आराम किया। फिर बाहर निकलकर एक-दूसरे को तौलिए से पोंछा। राहुल ने सीमा की छातियाँ, कमर, जाँघें और चूत बहुत प्यार से पोंछी। सीमा ने भी राहुल को पोंछा। फिर दोनों ने कपड़े पहन लिए — राहुल ने नई शर्ट और ट्राउज़र, सीमा ने हल्की साड़ी।

    जब वे तैयार हुए तो ठीक उसी समय मैड (रीना) बालकनी में नाश्ता लेकर आ गई। ट्रे पर कॉफी, ऑमलेट, टोस्ट, फ्रूट सलाद और जूस था। दोनों बालकनी में बैठकर नाश्ता करने लगे। हल्की ठंडी हवा चल रही थी। सीमा ने राहुल की जाँघ पर हाथ रखकर हल्के से सहलाया।

    नाश्ता खत्म होने के बाद सीमा ने कहा,
    “चलो… अब पूरा फार्महाउस घुमा देती हूँ।”

    सीमा ने राहुल को हाथ पकड़कर पहले मुख्य लिविंग हॉल में ले जाया। हॉल बहुत बड़ा था — ऊँची सीलिंग, क्रिस्टल चैंडेलियर, सफेद संगमरमर का फर्श, लग्जरी सोफे और दीवारों पर महँगी पेंटिंग्स। बीच में बड़ा फायरप्लेस था।

    फिर मास्टर बेडरूम (जहाँ वे रात भर थे), गेस्ट बेडरूम, होम थिएटर रूम, जिम रूम, इनडोर स्विमिंग पूल, किचन, लाइब्रेरी और ऑफिस — हर जगह घुमाया। आखिर में रूफटॉप टैरेस पर ले गईं। वहाँ बड़ा जकूजी टब, बार और आउटडोर लाउंजर था। चारों तरफ 25 एकड़ फार्म का नज़ारा दिख रहा था।

    टूर खत्म होने तक 1 बज चुका था।

    दोनों लंच करने के लिए फार्महाउस के अंदर वाले डाइनिंग एरिया में गए। लंच टेबल पर सजा हुआ था — तंदूरी चिकन, पनीर, नान, सलाद और वाइन। दोनों बैठ गए।

    खाते-खाते राहुल ने कहा,
    “लंच के बाद एक और राउंड हो जाए?”

    सीमा ने तुरंत मना कर दिया।
    “नहीं राहुल… अभी नहीं। मेरी चूत अभी भी बहुत सूजी हुई है।”

    राहुल ने हठ किया,
    “मेरी इच्छा है… प्लीज…”

    सीमा ने राहुल की आँखों में देखा और धीरे से बोलीं,
    “ठीक है… लेकिन Med (रीना) के साथ नहीं। मैं तुम्हारे लिए एक call girl बुलाती हूँ। बहुत महंगी और प्रोफेशनल है। तुम पूरे वसूल कर लेना।”

    राहुल ने पूछा,
    “आपको कोई प्रॉब्लम तो नहीं होगी?”

    सीमा ने मुस्कुराते हुए कहा,
    “नहीं… लेकिन उसको ऐसा बताना कि तुम मेरे गेस्ट हो और बिजनेस के लिए आए हो।
    मैं नहीं देखूँगी। तुम condom पहनकर करना। वो लड़की सिर्फ 5 घंटे के लिए आएगी।”

    खाना खत्म होने के बाद सीमा ने राहुल को ऊपर वाला स्पेशल कमरा दिखाया। कमरा बहुत बड़ा था — जकूजी टब, sex positions के लिए खास डिज़ाइन किया गया sofa, बड़ा बेड और मिरर वाली दीवारें।

    सीमा ने राहुल को कमरे में छोड़ दिया और बोलीं,
    “मैं अपने बेडरूम में जाती हूँ।”

    10 मिनट बाद मैड (रीना) एक बहुत खूबसूरत लड़की को लेकर आई। लड़की लगभग 24-25 साल की थी — गोरी, लंबे बाल, आकर्षक शरीर। रीना ने लड़की को कमरे में छोड़ दिया, बाहर निकलकर दरवाजा बंद कर दिया।

    रीना लड़की को कमरे में छोड़कर बाहर निकल गई और दरवाज़ा धीरे से बंद कर दिया। अब कमरे में सिर्फ राहुल और वो लड़की थी। लड़की करीब 24-25 साल की थी — गोरी, लंबे काले बाल कंधों तक लहराते हुए, आकर्षक चेहरा, बड़ी-बड़ी आँखें, 34D की भारी और गोल छातियाँ, पतली कमर, चौड़ी कमर और गोल-मोटी, नरम गांड। उसने हल्का मेकअप किया था और एक टाइट ब्लैक ड्रेस पहनी हुई थी जो उसके शरीर की हर कर्व को उभार रही थी।

    लड़की ने राहुल को देखा और पेशेवर मुस्कान के साथ धीरे से बोली, 
    “साहब… मैं 5 घंटे के लिए तुम्हारी हूँ। जो करना है, वो करो। कोई रोक-टोक नहीं। जो चाहो, जो जितना चाहो… मैं तैयार हूँ।”

    राहुल ने उसे ऊपर से नीचे तक देखा। उसकी आँखों में भूख साफ़ दिख रही थी। उसने गहरी, भारी आवाज़ में आदेश दिया, 
    “पहले कपड़े उतारो… पूरी तरह नंगी हो जाओ।”

    लड़की ने बिना हिचकिचाए ड्रेस का ज़िप पीछे से खोला। ड्रेस धीरे-धीरे उसके गोरे शरीर से फिसलकर पैरों के पास गिर गई। उसने ब्रा का हुक खोला — 34D की भारी, गोल, दूधिया छातियाँ बाहर आ गईं। निप्पल्स हल्के गुलाबी थे और पहले से ही थोड़े सख्त हो चुके थे। फिर उसने पैंटी भी उतार दी। अब वो पूरी तरह नंगी खड़ी थी। उसकी चूत पर हल्के-हल्के बाल थे, शरीर चिकना, चमकदार और बिना किसी दाग-धब्बे के था।

    राहुल ने उसे देखते ही जैसे भूखा शेर बन गया। उसने लड़की को कसकर पकड़ लिया और सीधे उसके boobs पर टूट पड़ा। दोनों हाथों से छातियों को जोर-जोर से दबाया। उँगलियाँ नरम, गर्म मांस में गहरे तक धंस गईं। फिर एक निप्पल को मुँह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगा। जीभ से निप्पल को चारों तरफ घुमाया, हल्के से काटा, पूरा निप्पल मुँह में लेकर चूसा। दूसरी छाती को हाथ से मसलता रहा, निप्पल को उँगलियों से नोचता रहा।

    लड़की की आहें निकलने लगीं — “आह्ह… साहब… जोर से… उफ्फ… दर्द हो रहा है… लेकिन अच्छा भी लग रहा है…”

    राहुल ने 15 मिनट तक लगातार दोनों छातियों को चूसा, चाटा, नोचा और दबाया। छातियाँ लाल हो गई थीं, निप्पल्स सूज गए थे और चमक रहे थे। लड़की की साँसें तेज़ हो गई थीं, उसकी कमर हल्की-हल्की हिल रही थी।

    फिर राहुल ने लड़की को नीचे धकेला और बोला, 
    “अब अंडरवियर उतारो… पूरी तरह नंगी हो जाओ।”

    लड़की ने अंडरवियर उतार दिया। अब वो बिल्कुल नंगी थी। राहुल ने अपना ट्राउज़र उतारा। उसका 11 इंच लंबा और 4 इंच मोटा लंड बाहर आ गया — पूरा सख्त, नसों से भरा, नोक से पहले ही पारदर्शी पानी टपक रहा था।

    लड़की ने उसे देखा और चौंक गई। उसकी आँखें फैल गईं, मुँह खुला रह गया। 
    “ये… ये कितना बड़ा… और मोटा है… साहब… इतना बड़ा तो मैंने कभी नहीं देखा…”

    राहुल ने उसके बाल पकड़े और लंड उसके मुँह के पास ले गया। 
    “चूसो… पूरी तरह… जितना हो सके गहरी तक…”

    लड़की ने डरते हुए मुँह खोला। राहुल ने लंड जबरदस्ती मुँह में घुसा दिया। लड़की का गला भर गया। राहुल ने उसके सिर को पकड़कर 30 मिनट तक जबरदस्ती चुसवाया। कभी 6-7 इंच तक गला देता, कभी तेज़ी से मुँह में अंदर-बाहर करता। लड़की के मुँह से सलाइवा टपक रहा था। उसकी आँखों से आँसू बहने लगे। वो ग्लक-ग्लक की आवाज़ करती हुई रोने लगी — “मम्म… साहब… बहुत बड़ा… गला भर रहा है… आह्ह… दम घुट रहा है… प्लीज… धीरे…”

    30 मिनट बाद राहुल ने उसे उठाया और सोफे पर लिटा दिया। उसने Trojan Magnum XL कंडोम पहन लिया। फिर लड़की की जाँघें चौड़ी कीं और एक ही झटके में 8 इंच लंड अंदर घुसा दिया।

    लड़की की चीख फट पड़ी — “आआआह्ह्ह्ह… साहब… 8 इंच… बहुत बड़ा… फाड़ दिया… आह्ह्ह… दर्द… बहार निकालो… मैं मर रही हूँ…”

    उसकी चूत बुरी तरह फट गई थी। खून की हल्की धार निकलने लगी। लड़की जोर-जोर से रोने और चीखने लगी — “आह्ह्ह… साहब… बहुत दर्द… रुक जाओ… प्लीज… मैं सह नहीं पा रही… आह्ह्ह… रो रही हूँ… दर्द… बहुत दर्द…”

    लेकिन राहुल नहीं रुका। वो जोर-जोर से चोदने लगा। हर धक्का गहरा और बेरहम था। लड़की की चीखें पूरे कमरे में गूँज रही थीं — “आआह्ह्ह… साहब… फाड़ दिया… आह्ह्ह… बहुत तेज़… मत… मत… रो रही हूँ… आह्ह्ह… दर्द… बहुत दर्द… प्लीज…”

    राहुल ने लगातार चोदा। लड़की बार-बार चीखती, रोती, हाथ-पैर पटकती। उसकी चीखें अब टूट रही थीं — “साहब… प्लीज… दर्द… बहुत दर्द… आह्ह्ह… मैं मर रही हूँ… रुक जाओ… आह्ह्ह…”

    35 मिनट बाद राहुल का शरीर तन गया। उसने आखिरी जोरदार धक्के मारे और कंडोम के अंदर गाढ़ा, गर्म वीर्य की मोटी धार फूट पड़ी। बहुत सारा वीर्य कंडोम में भर गया।

    जैसे ही राहुल ने लंड बाहर निकाला, लड़की की चूत से खून और रस की धार बहने लगी। वो पड़ी-पड़ी ज़ोर-ज़ोर से रो रही थी। आँसू उसके गालों पर बह रहे थे। साँसें फूल रही थीं। उसकी चीखें अभी भी कमरे में गूँज रही थीं — “आह्ह्ह… साहब… बहुत दर्द… मैं मर गई… रो रही हूँ… प्लीज…”

    लड़की सोफे पर पड़ी-पड़ी काँप रही थी। उसकी चूत बुरी तरह फटी हुई और खून से सनी थी। वो हाँफते हुए रो रही थी।

  • सपनो की जॉब 4

    70 मिनट की बेरहम चुदाई खत्म होते ही राहुल ने लंड बाहर निकाला। सीमा की चूत से गाढ़ा, गर्म वीर्य की मोटी धार बहने गी। उनकी चूत बुरी तरह सूजी हुई, लाल और फड़क रही थी। सीमा पड़ी-पड़ी ज़ोर-ज़ोर से रो रही थीं। उनके गालों पर आँसू की धार बह रही थी, साँसें फूल रही थीं और शरीर अभी भी हल्का-हल्का काँप रहा था।

    उन्होंने आँखें खोलीं। आँखों में गुस्सा, दर्द और निराशा तीनों थे। उन्होंने राहुल की तरफ देखा और काँपती, टूटी हुई आवाज़ में चीखकर कहा,

    “राहुल… तूने… मेरे मना करने पर… ऐसा क्यों किया? 
    मैंने कितनी बार कहा… 4-5 इंच से ज़्यादा मत डालना… मैं रो रही थी… चीख रही थी… फिर भी तू नहीं रुका… 70 मिनट तक… जानवर की तरह… पाँच बार झड़वाया… मेरी चूत फाड़ दी… तुझे शर्म नहीं आई?”

    सीमा की आवाज़ में गुस्सा था, लेकिन आँसू रुक नहीं रहे थे। वो रोते-रोते गिड़गिड़ा रही थीं।

    राहुल ने तुरंत सीमा को दोनों हाथों से कसकर गले लगा लिया। उनकी नंगी देह अभी भी काँप रही थी। राहुल ने उनके बालों में हाथ फेरते हुए, बहुत नरम और प्यार भरी आवाज़ में माफी माँगनी शुरू की,

    “सीमा जी… गलती हो गई… बहुत बड़ी गलती… मैं जानता हूँ… तुम रो रही थीं, मना कर रही थीं, फिर भी मैं नहीं रुका… मुझे खुद पर कंट्रोल नहीं रहा… 15 दिन से तुम्हारी याद में मेरा पानी नहीं निकला था… जब तुम आईं… तुम्हारी नंगी देह देखी… तुम्हारी चूत छुई… तो मेरी सारी कंट्रोल चली गई… मैं जानवर बन गया… मुझे माफ़ कर दो… अब कभी नहीं होगा… वादा है…”

    राहुल ने बार-बार उनके माथे, गालों और होंठों पर किस करते हुए कहा,

    “तुम भी तो मुझे रोक नहीं पाईं… जब मैंने 5 इंच किया… तुम भी तो चीख रही थीं… लेकिन तुम्हारी चूत भी तो मुझे अंदर खींच रही थी… हम दोनों की भूख 15 दिन से दबी हुई थी… मैं भी नहीं रुक पाया… तुम भी नहीं रुक पाईं… प्लीज… गुस्सा मत करो…”

    सीमा रोते-रोते राहुल की छाती में चेहरा छुपाए रही। राहुल ने उन्हें और कसकर गले लगाया। धीरे-धीरे उनका रोना कम हुआ।

    राहुल ने उन्हें गोद में उठा लिया। सीमा की नंगी देह उसके सीने से सटी हुई थी। उसने उन्हें जकूजी वाले बाथरूम में ले जाकर जकूजी टब में उतार दिया। गर्म पानी तेज़ी से भर रहा था। राहुल भी नंगा ही टब में उतर गया। उसने सीमा को अपनी गोद में बिठा लिया।

    राहुल ने गर्म पानी में हाथ डुबोकर सीमा की सूजी हुई चूत पर बहुत नरम हाथ से मसाज करना शुरू किया। उँगलियाँ हल्के-हल्के घुमा रहा था, गर्म पानी की धार चूत की फाँक पर गिरा रहा था। सीमा की आँखें बंद थीं। धीरे-धीरे उनकी जलन और दर्द कम होने लगा। वो हल्की-हल्की आहें भर रही थीं — “आह्ह… राहुल… ठंडा… गर्म… दोनों… बहुत अच्छा लग रहा है…”

    राहुल ने 15-20 मिनट तक लगातार उनकी चूत को गर्म पानी से मसाज किया। फिर दोनों टब से बाहर निकले। राहुल ने खुद सीमा को तौलिए से पोंछा। उनकी छातियाँ, कमर, जाँघें, चूत — हर जगह बहुत प्यार से पोंछी। फिर उन्होंने सीमा को कपड़े पहनाए — हल्की साड़ी, ब्लाउज़। खुद भी कपड़े पहन लिए।

    जब दोनों तैयार हुए तो ठीक उसी समय मैड (रीना) कमरे में आई। उसके हाथ में ट्रे था — गर्म स्नैक्स, कॉफी और कुछ हल्के स्वीट्स। रीना ने ट्रे रखी और बिना कुछ बोले वापस चली गई।

    दोनों ने स्नैक्स और कॉफी ली। गर्म कॉफी पीते हुए सीमा का मूड थोड़ा ठीक होने लगा। उन्होंने राहुल की तरफ देखकर हल्के से मुस्कुराया।

    सीमा ने राहुल का हाथ पकड़ लिया और बोलीं, 
    “चलो… अब पूरा फार्महाउस दिखाती हूँ…”

    नया फार्महाउस का पूरा टूर (बहुत विस्तार से)

    सीमा ने राहुल को पहले मेन लिविंग हॉल में ले जाया। हॉल बहुत बड़ा था — 50 फीट लंबा, हाई सीलिंग, क्रिस्टल चैंडेलियर, सफेद संगमरमर का फर्श, चारों तरफ लग्जरी सोफे और दीवार पर बड़ी-बड़ी पेंटिंग्स। बीच में एक बड़ा फायरप्लेस था। सीमा ने बताया, “रात को यहाँ आग जलाकर हम बैठेंगे।”

    फिर मास्टर बेडरूम — जहाँ वे अभी थे। किंग साइज़ बेड, जकूजी अटैच्ड बाथरूम, वॉक-इन क्लोसेट, बालकनी से पूरा फार्म देखने का नज़ारा।

    दूसरा बेडरूम — गेस्ट रूम, लेकिन बहुत लग्जरी। सिल्क के बेडशीट्स, प्राइवेट जकूजी।

    होम थिएटर रूम — 12 सीट वाला, रिक्लाइनर चेयर, 120 इंच का स्क्रीन, साउंड सिस्टम। सीमा ने हँसते हुए कहा, “यहाँ हम नंगे फिल्म देखेंगे।”

    जिम रूम — पूरा मिरर वाला, ट्रेडमिल, वेट्स, योगा मैट। सीमा ने राहुल की बाँह पकड़कर कहा, “सुबह यहाँ हम साथ में एक्सरसाइज करेंगे।”

    इनडोर स्विमिंग पूल — 40 फीट लंबा, नीला पानी, चारों तरफ ग्लास वॉल, अंदर से बाहर का नज़ारा। पूल के किनारे बार और लाउंजर।

    किचन — बहुत बड़ा, मॉडर्न, सब कुछ स्टेनलेस स्टील। एक अलग डाइनिंग एरिया।

    लाइब्रेरी और ऑफिस — किताबों से भरी अलमारी, बड़ा डेस्क, जहां राहुल को काम करना था।

    रूफटॉप टैरेस — ऊपर जाने वाली सीढ़ियाँ चढ़कर वे छत पर पहुँचे। वहाँ बड़ा जकूजी टब, बार, आउटडोर लाउंजर और चारों तरफ 25 एकड़ फार्म का नज़ारा। रात के समय लाइट्स जल रही थीं।

    गार्डन — बाहर बहुत बड़ा लॉन, फूलों के गमले, छोटा फाउंटेन, घुड़सवारी का एरिया और दूर तक हरे-भरे खेत।

    सीमा ने पूरे फार्महाउस को घुमाते हुए हर जगह राहुल को छूती रही — कभी हाथ पकड़ती, कभी कमर पर हाथ रखती, कभी उसके कान में फुसफुसाती।

    टूर खत्म होने पर दोनों वापस लिविंग रूम में आ गए।

    टूर खत्म होने पर दोनों वापस लिविंग रूम में आ गए। शाम के 8:15 बज चुके थे। पूरा फार्महाउस बाहर से तो बहुत शानदार और रोशनी से जगमगा रहा था, लेकिन अंदर सिर्फ हल्की गोल्डन लाइट जल रही थी। सीमा ने राहुल का हाथ पकड़ रखा था। उनकी साड़ी थोड़ी अस्त-व्यस्त थी, बाल खुले हुए थे और चेहरा अभी भी थोड़ा लाल था।

    सीमा ने राहुल को सोफे के पास खड़ा किया और धीरे से बोलीं,

    “राहुल… ध्यान से सुनो। 
    यहाँ बाहर बहुत सारे नौकर हैं — गार्ड, गार्डनर, कुक, क्लीनर। वे सब बाहर वाले एरिया में रहते हैं। लेकिन अंदर वाले बंगले में सिर्फ हम दोनों और मैड रीना होगी। 
    कल सुबह मैं तुम्हें पूरा फार्महाउस फिर से दिखाऊँगी, लेकिन याद रखना — बाकी किसी को भी पता नहीं चलना चाहिए कि हम दोनों क्या कर रहे हैं। 
    सिर्फ रीना को पता है। वो हमारी भरोसेमंद है। बाकी सबको सिर्फ ये दिखना चाहिए कि तुम मेरे बिजनेस पार्टनर हो। समझ गए?”

    राहुल ने सिर हिलाया। “जी मैडम… कोई चिंता नहीं।”

    सीमा ने राहुल की छाती पर हाथ रखकर हल्के से मुस्कुराईं और बोलीं, “अब आराम करो। डिनर लगने वाला है।”

    ठीक उसी वक्त रीना (मैड) ट्रे लेकर आई। ट्रे पर डिनर सजा हुआ था — गर्मागर्म तंदूरी चिकन, मटर पनीर, नान, सलाद, दाल और वाइन की बोतल। रीना ने सब कुछ टेबल पर सजाया और बिना कुछ बोले वापस चली गई।

    सीमा ने राहुल की तरफ देखा। उनकी आँखों में शरारत और भूख दोनों थी। उन्होंने धीरे से कहा,

    “राहुल… आज हम नंगे होकर खाना खाएंगे।”

    राहुल थोड़ा हैरान हुआ। “क्यों सीमा जी?”

    सीमा ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया,

    “क्योंकि जब तक हम साथ रहेंगे, तब तक हम ज्यादातर समय नंगे ही घूमेंगे। 
    कपड़े सिर्फ तब पहनेंगे जब बाहर कोई आएगा या हमें कहीं जाना होगा। 
    अंदर, इस बंगले में… हम दोनों की देह हमेशा खुली रहेगी। 
    मुझे तुम्हारा नंगा शरीर देखना अच्छा लगता है… और मुझे अपना नंगा शरीर तुम्हारे सामने दिखाना अच्छा लगता है।”

    सीमा ने बिना इंतज़ार किए अपनी साड़ी का पल्लू गिरा दिया। फिर ब्लाउज़ के हुक खोले। ब्रा उतारी। उनकी भारी, दूधिया छातियाँ बाहर आ गईं। साड़ी और पेटीकोट फिसलकर गिर गए। आखिर में पैंटी भी उतार दी। अब सीमा पूरी तरह नंगी खड़ी थीं।

    राहुल ने भी अपनी शर्ट, ट्राउज़र और अंडरवियर उतार दिए। दोनों अब पूरी तरह नंगे थे। राहुल का लंड फिर से आधा सख्त हो चुका था।

    दोनों नंगे ही डाइनिंग टेबल पर बैठ गए। सीमा राहुल के बगल में बैठीं। उनकी नंगी जाँघ राहुल की जाँघ से सट रही थी। दोनों ने खाना शुरू किया।

    खाते-खाते सीमा ने राहुल की तरफ देखा और धीरे से पूछा,

    “राहुल… बताओ… जब तुम मुझ पर 5 इंच तक घुसाते हो… तब तुम्हें कैसा लगता है?”

    राहुल ने एक टुकड़ा चिकन काटते हुए कहा,

    “सीमा जी… तुम सिर्फ 5 इंच ही ले पाती हो… लेकिन मेरा लंड 11 इंच लंबा और 4 इंच मोटा है। जब मैं 5 इंच डालता हूँ तब भी तुम्हारी चूत इतनी टाइट हो जाती है कि मुझे लगता है जैसे वो फट जाएगी। मैं सोचता हूँ… जब कभी पूरा डालूँगा तो क्या होगा? तुम कितना सह पाओगी?”

    सीमा ने शरमा कर हल्के से राहुल की जाँघ पर हाथ मारा और बोलीं,

    “तुम्हारा 5 इंच तो मैं ले लूँगी… लेकिन तुम्हारा 4 इंच मोटा भी तो है ना। मेरे पति का सिर्फ 4 इंच लंबा और 1 इंच मोटा था। उसमें भी मुझे बहुत दर्द होता था। मैं सोच रही थी… जब तुम पूरा 11 इंच डालोगे… तो मेरी चूत क्या हो जाएगी? फट जाएगी? या मैं उसे ले पाऊँगी? 
    पर सच कहूँ… मुझे डर भी लगता है… और बहुत ज्यादा इच्छा भी होती है।”

    राहुल ने मुस्कुराते हुए कहा, 
    “डर मत… हम धीरे-धीरे बढ़ाएंगे। लेकिन जब पूरा डालूँगा… तब तुम्हें बहुत मजा आएगा। तुम चीखोगी… रोओगी… लेकिन अंत में मुझसे चिपककर रह जाओगी।”

    सीमा ने राहुल की जाँघ पर हाथ फेरते हुए कहा, 
    “हाँ… लेकिन आज रात नहीं। आज सिर्फ बातें। कल से हम फिर से शुरू करेंगे।”

    दोनों ने खाना खत्म किया। खाते-खाते उन्होंने और भी बातें कीं — सेक्स की पोजीशन, कितनी देर तक चोदना अच्छा लगता है, कौन-सी जगह सबसे ज्यादा संवेदनशील है, और भविष्य में पेरिस में क्या-क्या करेंगे।

    खाना खत्म होने के बाद दोनों नंगे ही लिविंग रूम के बड़े सोफे पर आ गए। राहुल सोफे पर बैठ गया। सीमा उसके बगल में सटकर बैठ गई। उनकी नंगी छाती राहुल की बाँह से सट रही थी। राहुल ने सीमा को कसकर गले लगा लिया। दोनों एक-दूसरे की गर्माहट में लिपट गए।

    खाना खत्म होने के बाद दोनों नंगे ही लिविंग रूम के बड़े सोफे पर आ गए। राहुल सोफे पर आराम से बैठ गया। सीमा उसके बगल में सटकर बैठ गई। उनकी नंगी छातियाँ राहुल की बाँह से हल्के-हल्के दब रही थीं। राहुल ने सीमा को कसकर गले लगा लिया। दोनों एक-दूसरे की गर्माहट में लिपटे हुए थे।

    राहुल ने सीमा के कान में फुसफुसाते हुए कहा,
    “सीमा जी… बताओ ना… जब मैं तुम्हें चोदता हूँ… तब तुम्हें सबसे ज्यादा कहाँ मजा आता है? चूत के अंदर… या जब मैं तुम्हारी छातियों को जोर-जोर से चूसता हूँ?”

    सीमा ने शरमा कर राहुल की छाती पर हाथ फेरा और धीरे से बोलीं,
    “दोनों… लेकिन जब तुम मेरी चूत में गहराई तक घुसते हो… तब सबसे ज्यादा… दर्द के साथ-साथ मजा भी आता है।”

    राहुल ने मुस्कुराते हुए पूछा,
    “और अगर मैं कभी पूरा 11 इंच डाल दूँ… तब क्या होगा? तुम सोचती हो कि तुम सह पाओगी?”

    सीमा ने हल्के से राहुल की जाँघ दबाई और बोलीं,
    “मुझे डर लगता है… लेकिन सोचती भी हूँ… कि अगर कभी पूरा डालोगे… तो शायद मैं चीख-चीखकर बेहोश हो जाऊँगी… लेकिन मजा भी बहुत आएगा।”

    बातें धीरे-धीरे गंदी होने लगीं। राहुल ने पूछा,
    “सीमा जी… तुमने कभी porn stars देखे हैं? वो लोग कैसे इतनी देर तक चुदाई करते हैं? कितना मोटा-लंबा लंड ले लेती हैं?”

    सीमा ने शरमा कर हँसते हुए कहा,
    “हाँ… कभी-कभी देखती हूँ… वो लोग तो बहुत प्रोफेशनल होते हैं… लेकिन असल ज़िंदगी में… मेरी तरह टाइट चूत वाली औरत के लिए तो मुश्किल है…”

    राहुल की बात सुनकर सीमा की आँखों में चमक आ गई। उन्होंने राहुल से कहा,
    “राहुल… TV ऑन करो… कोई अच्छा porn चला दो… देखते हैं…”

    राहुल ने रिमोट उठाया और एक हाई-क्वालिटी porn चैनल ऑन कर दिया। स्क्रीन पर एक गोरी porn star एक बहुत मोटे लंड को चूत में ले रही थी और जोर-जोर से चीख रही थी।

    देखते ही राहुल का लंड फिर से पूरा खड़ा हो गया। वो सख्त और तना हुआ था। राहुल ने सीमा की तरफ मुड़कर उनकी दोनों छातियों को जोर से दबा दिया। उँगलियाँ नरम मांस में धंस गईं। सीमा ने आह भरी — “आह्ह… राहुल…”

    सीमा ने राहुल को एक गहरा किस किया। किस के दौरान उनकी जीभ राहुल की जीभ से लड़ रही थी। किस खत्म होते ही उन्होंने मैड को आवाज़ लगाई,
    “रीना… आ जाओ।”

    सीमा ने राहुल को गहरे किस के बाद थोड़ा अलग किया। उनकी साँसें अभी भी तेज़ थीं। उन्होंने राहुल की छाती पर हाथ रखा, उसकी आँखों में देखा और धीरे से मैड को आवाज़ लगाई,

    “रीना… आ जाओ।”

    रीना तुरंत कमरे में आई। उसकी चाल शांत लेकिन आज्ञाकारी थी। सीमा ने रीना को अपने पास बुलाया और उसके कान में कुछ धीरे-धीरे फुसफुसाया। रीना ने सिर्फ सिर हिलाया, कोई सवाल नहीं किया, कोई भाव नहीं दिखाया। फिर वो बेडसाइड ड्रॉअर की तरफ गई, Trojan Magnum XL का पैकेट निकाला, पैकेट फाड़ा और राहुल के सामने घुटनों के बल बैठ गई।

    रीना ने दोनों हाथों से राहुल का 11 इंच लंबा और 4 इंच मोटा लंड पकड़ा। लंड पहले से ही पूरा सख्त और तना हुआ था। रीना ने कंडोम की रिंग को लंड की नोक पर रखा और धीरे-धीरे नीचे खींचने लगी। कंडोम लंड की मोटाई पर पूरी तरह तन गया। लंड अब कंडोम में चमक रहा था, नसें उभरी हुई थीं, नोक थोड़ी लाल और सूजी हुई दिख रही थी।

    रीना ने कंडोम ठीक से चेक किया, फिर खड़ी हो गई। उसने अपनी सलवार का नाड़ा खोल दिया। सलवार नीचे सरक गई। उसने सिर्फ लेंगा (अंदर की पैंटी) उतार दिया। अब रीना की निचली देह पूरी तरह नंगी थी। उसकी गोल, मोटी गांड और हल्के बालों वाली चूत खुली हुई थी।

    रीना बिना एक शब्द बोले सामने वाले बड़े टीबल की तरफ गई। उसने दोनों हाथों से टीबल का किनारा पकड़ लिया और pichvada jukake doggy-style पोजीशन ले ली। उसकी कमर नीचे झुकी हुई थी, गोल-मोटी गांड ऊपर उठी हुई थी। जाँघें थोड़ी फैली हुई थीं। उसकी चूत पीछे से पूरी तरह खुली हुई दिख रही थी — गुलाबी, थोड़ी गीली और छोटे-छोटे बालों वाली।

    सीमा ने राहुल की तरफ देखा। उनकी आवाज़ अभी भी थोड़ी काँप रही थी, लेकिन निर्देश साफ था,

    “राहुल… आराम से करना… सिर्फ 4-5 इंच… अगली बार भी सूज जाएगी… बहुत धीरे… प्लीज…”

    राहुल ने रीना की कमर को दोनों हाथों से मजबूती से पकड़ लिया। उसका कंडोम वाला मोटा लंड रीना की चूत की फाँक पर टिका हुआ था। उसने बहुत धीरे-धीरे पहले 4 इंच अंदर डाल दिया।

    रीना की आँखें फट गईं। उसकी कमर काँप गई और मुँह से एक लंबी, दबी हुई आह निकली — “आह्ह… साहब… बहुत मोटा… दर्द हो रहा है…”

    राहुल ने कुछ सेकंड रुककर फिर धीरे-धीरे गति बढ़ाई। अब लंड 5 इंच तक अंदर-बाहर होने लगा। रीना की गोल गांड हर धक्के पर हल्के से लहरा रही थी। उसकी छातियाँ लटककर टीबल पर हिल रही थीं।

    रीना दर्द और मजा के मिश्रण में चीख रही थी — “साहब… आह्ह… धीरे… बहुत गहरा जा रहा है… उफ्फ…”

    राहुल की रफ्तार धीरे-धीरे बढ़ती गई। वो लगभग 50 मिनट तक लगातार रीना को उसी doggy-style पोजीशन में चोदता रहा। हर धक्का गहरा और नियंत्रित था, लेकिन तेज़ भी। रीना की चूत से सफ़ेद झाग बनने लगा। उसकी चीखें अब लगातार निकल रही थीं।

    रीना 3 बार झड़ गई:

    – पहली बार — 14 मिनट में — उसका पूरा शरीर सिहर उठा, चूत लंड को कसकर दबाने लगी। वो चीखी — “साहब… पहली बार… आ गया… आह्ह्ह…”
    – दूसरी बार — 29 मिनट में — उसकी जाँघें काँपने लगीं, आँखें पलट गईं — “दूसरी बार… बहुत तेज़… आह्ह…”
    – तीसरी बार — 43 मिनट में — रीना रोने लगी — “तीसरी बार… साहब… मैं सह नहीं पा रही… आह्ह्ह…”

    50 मिनट पूरे होते ही राहुल ने आखिरी जोरदार धक्के मारे। उसका शरीर तन गया और कंडोम के अंदर गर्म, गाढ़ा वीर्य की मोटी धार फूट पड़ी। बहुत सारा वीर्य कंडोम में भर गया।

    रीना टीबल पर पड़ी-पड़ी हाँफ रही थी। उसकी चूत बुरी तरह सूजी हुई थी और कंडोम का पानी बाहर बह रहा था। वो थकी हुई, पसीने से तर और काँपती हुई थी।

    सीमा पूरे समय बेड पर बैठी सब देख रही थीं। उनकी आँखों में तड़प थी।

  • रवि और शिल्पा की हनीमून की कहानी 1

    रवि और शिल्पा की हनीमून की कहानी

    शादी की रात। रवि और शिल्पा का घर जोड़ परिवार का था। पूरा घर मेहमानों से भरा पड़ा था। उनके कमरे का दरवाज़ा बिल्कुल गलियारे के पास था, बगल में रवि की माँ-बाप का कमरा, सामने चाचा-चाची का। दीवारें पतली थीं, आवाज़ थोड़ी भी ऊँची हुई तो पूरे घर में गूँज जाती। रवि ७.१ फीट लंबा, १०१ किलो वजन वाला विशालकाय शरीर वाला था। उसकी छाती चौड़ी, बाहें मोटी, कंधे भारी। शिल्पा सिर्फ ४.५ फीट की, ४२ किलो वजन की नन्ही-सी, बेहद पतली-पतली, गोरी, नाजुक। उसके बाल कमर तक के, चेहरा गोल-मटोल, आँखें बड़ी-बड़ी।

    दोनों रात के ११:४५ बजे कमरे में आए। शिल्पा अभी भी भारी लाल लेहंगे में थी, दुपट्टा कंधे पर, मेकअप ताज़ा। रवि शेरवानी में, लेकिन उसका विशाल शरीर कमरे को छोटा कर रहा था। दरवाज़ा बंद करते ही रवि ने शिल्पा को धीरे से अपने सीने से लगा लिया। उसकी एक बाँह शिल्पा की पूरी कमर को घेर रही थी। “डर लग रहा है ना?” रवि ने बहुत धीमी आवाज़ में पूछा। शिल्पा ने सिर्फ सिर हिलाया, उसकी साँसें तेज़ हो गई थीं।

    रवि ने शिल्पा के गाल थामे, उसके होंठों पर अपना मोटा, गर्म होंठ रख दिया। पहला किस – बहुत नरम, बहुत धीमा। उसने शिल्पा के निचले होंठ को चूसा, फिर ऊपरी को, फिर अपनी जीभ हल्के से उसके मुंह में डाली। शिल्पा की जीभ से हल्का-हल्का खेला। किस ४-५ मिनट तक चला। दोनों की साँसें मिल रही थीं। शिल्पा के हाथ रवि की चौड़ी छाती पर रखे हुए थे, लेकिन वो कुछ ज्यादा नहीं कर पा रही थी। रवि जानता था – अगर आज उसने आगे बढ़ाया तो शिल्पा की चीख पूरे घर में गूँज जाएगी। उसका १३ इंच लंबा और ४.५ इंच मोटा लंड पहले से ही पैंट में तन गया था, लेकिन उसने खुद को रोका।

    किस खत्म होने के बाद रवि ने शिल्पा को बेड पर लिटाया। दोनों कपड़े उतारे बिना ही लेट गए। रवि ने शिल्पा को अपनी बाँहों में भर लिया, उसकी पीठ पर हाथ फेरता रहा। “कल से ४ दिन तक हम यहीं रहेंगे… बस किस ही करेंगे… कुछ और नहीं। घर में आवाज़ बहुत जाती है। मैं नहीं चाहता कि कोई सुन ले। हनीमून पर जाकर सब कुछ होगा,” रवि फुसफुसाया। शिल्पा ने शर्म से सिर हिलाया और रवि के सीने में मुँह छिपा लिया। दोनों थोड़ी देर और किस करते रहे – कभी-कभी गहरे, कभी हल्के। रात के १:३० बजे दोनों थककर सो गए।

    अगले ४ दिन घर में ही बीते। हर रात रवि शिल्पा को सिर्फ किस करता। कभी बेड पर लिटाकर, कभी बालकनी में खड़े होकर। कभी-कभी शिल्पा के गाल, गर्दन, कान चूमता। लेकिन उसके हाथ कभी ब्रा या पैंटी के अंदर नहीं गए। शिल्पा भी हर रात शर्माती, लेकिन रवि की विशाल बाँहों में सुरक्षित महसूस करती। रवि का १३ इंच का लंड हर रात तन जाता, लेकिन वो खुद को रोक लेता। “हनीमून पर… वहाँ कोई नहीं सुनेगा… वहाँ तुम जितना चिल्लाना चाहो चिल्ला सकती हो,” वो शिल्पा के कान में फुसफुसाता।

    ४ दिन बाद हनीमून। दोनों पेरिस के लिए निकल पड़े। वहाँ एक लग्जरी रिसॉर्ट बुक था – Seine नदी के किनारे, प्राइवेट विला टाइप का सूट। पूरा सूट १२०० स्क्वायर फीट का, अलग बालकनी, प्राइवेट जकूजी, सॉफ्ट लाइटिंग। शाम के ७:३० बजे वे रिसॉर्ट पहुँचे। कमरा गुलाब की पंखुड़ियों और मोमबत्तियों से सजा हुआ था। बाहर फ्रेंच विंडो से एफिल टावर की रोशनी दिख रही थी।

    दरवाज़ा बंद करते ही रवि ने शिल्पा को उठा लिया। शिल्पा उसकी विशाल बाँहों में बिल्कुल खिलौने जैसी लग रही थी – ४.५ फीट की वो नन्ही लड़की ७.१ फीट के रवि की गोद में समा गई। रवि ने उसे बेड पर लिटाया। “अब कोई डर नहीं… कोई आवाज़ नहीं… सिर्फ तुम और मैं,” उसने कहा।

    रवि ने बहुत धीरे-धीरे शिल्पा का ट्रैवलिंग टॉप उतारा। फिर स्कर्ट का बटन खोला। शिल्पा की साँसें तेज़ हो गईं। रवि ने ब्रा का हुक खोला। शिल्पा के छोटे-छोटे, लेकिन बहुत नाजुक, गुलाबी-भूरे निप्पल्स वाले स्तन बाहर आ गए। रवि ने एक लंबी साँस ली। फिर उसने शिल्पा की पैंटी भी उतार दी। अब शिल्पा पूरी तरह नंगी लेटी थी – उसका छोटा-सा, चिकना, गोरा शरीर, पतली कमर, छोटी जाँघें, बिल्कुल नन्ही चूत।

    रवि ने खुद के कपड़े उतारे। उसका १०१ किलो का विशाल शरीर सामने आया। जब उसने अपनी पैंट उतारी तो १३ इंच लंबा और ४.५ इंच मोटा, नसों वाला, भारी लंड बाहर आ गया – पूरा खड़ा, सिर चमक रहा था। शिल्पा की आँखें फैल गईं, लेकिन रवि ने उसे चुप कराया। “आज सिर्फ ये…” उसने कहा।

    रवि शिल्पा के ऊपर झुका। उसने दोनों हाथों से शिल्पा के स्तनों को थामा। वे उसके विशाल हाथों में पूरी तरह समा गए। फिर उसने एक निप्पल मुंह में ले लिया। बहुत धीरे, बहुत प्यार से चूसना शुरू किया। जीभ से घुमाया, होंठों से चूसा, कभी हल्का-हल्का दाँत लगाया। दूसरा स्तन हाथ से मसलता रहा। शिल्पा की साँसें भारी हो गईं। “रवि… आह्ह्ह…” वो पहली

    बार हल्की सिसकारी निकाली।

    रवि ने १०-१० मिनट तक एक-एक स्तन को चूसा। फिर दोनों को एक साथ मुंह में लेने की कोशिश की। उसका मोटा मुंह शिल्पा के दोनों स्तनों को लगभग ढक लेता था। वो लगातार चूसता रहा – कभी तेज़, कभी धीरे, कभी सिर्फ जीभ से चाटता। शिल्पा की कमर उठ-उठकर उसके मुंह की तरफ आ रही थी। “उफ्फ… रवि… बहुत देर से… आह्ह्ह… अच्छा लग रहा है…” शिल्पा की आवाज़ काँप रही थी।

    रवि ने शिल्पा को अपनी गोद में उठा लिया। अब शिल्पा उसकी जाँघों पर बैठी थी, नंगी। रवि ने फिर दोनों स्तनों को मुंह में लिया और १५-१५ मिनट तक बिना रुके चूसता रहा। शिल्पा के निप्पल्स लाल और सूजे हुए हो गए थे। वो बार-बार सिसकारियाँ भर रही थी – “आह्ह्ह… रवि… धीरे… लेकिन मत छोड़ो… आह्ह्ह!!”

    रवि ने शिल्पा को बेड पर लिटाया और उसके ऊपर लेट गया। उसका भारी शरीर शिल्पा को पूरी तरह ढक रहा था, लेकिन वो अपना वजन संभाल रहा था। फिर उसने फिर से स्तनों पर हमला बोल दिया। अब और देर तक, और गहराई से। २० मिनट, २५ मिनट… लगातार चूसता रहा। कभी-कभी स्तनों के बीच में चूमता, कभी गर्दन पर, लेकिन मुख्य रूप से स्तन ही। शिल्पा का पूरा शरीर पसीने से तर हो गया था। उसकी साँसें फूल रही थीं, आँखें बंद, मुँह थोड़ा खुला। “रवि… मैं… मैं काँप रही हूँ… बहुत देर हो गई… आह्ह्ह…”

    रवि ने ४० मिनट तक लगातार शिल्पा के स्तनों को चूसा। कभी-कभी रुककर सिर्फ जीभ से चाटता, फिर फिर से जोर से चूसता। शिल्पा की हालत पूरी तरह बदल गई थी – नन्हा-सा शरीर थर-थर काँप रहा था, स्तन लाल और चमकदार हो गए थे।

    रवि आखिर में रुका। उसने शिल्पा को चूम लिया और उसके कान में फुसफुसाया, “ये सिर्फ शुरुआत थी जान… हनीमून अभी बहुत लंबा है…”

    मैं कोने में खड़ा था… शिल्पा की नंगी, काँपती हुई हालत, रवि का विशाल शरीर, और उसकी लंबी-लंबी चुसाई… सब बहुत करीब से देख रहा था।

  • राज और नीता की सुहागरात

    राज और नीता की सुहागरात

    शादी की रात। लंदन का वो विशाल लग्जरी सूट, पूरा १८०० स्क्वायर फुट का प्राइवेट सुइट। कमरा गहरे लाल, गोल्डन और सॉफ्ट वाइन लाइट्स से जगमगा रहा है। फर्श पर सफेद और लाल गुलाब की हजारों ताज़ा पंखुड़ियाँ बिछी हुई हैं, हवा में जूही, चन्दन, रोज़ और वेनिला की मीठी-तीखी खुशबू घुली हुई है। बेड किंग साइज, सिल्क की चमकदार क्रीम कलर की चादरें, चारों तरफ मोमबत्तियों की लपटें धीरे-धीरे नाच रही हैं। बाहर बालकनी से टेम्स नदी की रात की चमक और शहर की दूर की रोशनी दिख रही है, लेकिन अंदर सिर्फ उनकी तेज़ होती साँसों, कपड़ों की सरसराहट और हल्की-हल्की सिसकारियों की आवाज़ें भर रही हैं।

    नीता अभी-अभी रिसेप्शन से वापस आई है। उसका भारी लाल लेहंगा पूरा फैला हुआ है, दुपट्टा कंधे पर लहरा रहा है, घुटनों तक नीचे झूल रहा है। मेकअप थोड़ा पसीने और किस के कारण गीला और फैला हुआ – काजल की काली लकीर आँखों के नीचे हल्की-हल्की बह रही है, लिपस्टिक आधी मिट चुकी है, गालों पर हल्की लाली चढ़ी हुई है। उसके लंबे, घने, काले बाल खुले हुए हैं, कमर तक लहराते हुए, कुछ बाल चेहरे पर चिपक गए हैं। राज शेरवानी में है, ऊपरी तीन बटन खुले हुए, छाती के घने बाल दिख रहे हैं, आँखों में वो जंगली, भूखी चमक जो शादी के बाद पहली बार पूरी तरह उभर रही है।

    मैं दीवार से सटा खड़ा हूँ। हवा में उनकी शरीर की गर्मी और खुशबू दोनों महसूस हो रही हैं।

    राज धीरे-धीरे नीता के बहुत पास आया। उसने दोनों हाथों से उसके गाल थाम लिए, अँगूठों से हल्का-हल्का दबाते हुए उसके चेहरे को ऊपर उठाया। “आज से तुम मेरी हो… पूरी तरह मेरी… तुम्हारा हर हिस्सा, हर छेद, हर साँस मेरा है,” उसकी आवाज भारी, गहरी और थरथराती हुई थी। फिर उसने नीता के नरम, गुलाबी होंठों पर अपना मोटा, गर्म होंठ रख दिया। पहला किस बहुत धीमा, बहुत गहरा, बहुत लंबा। राज ने नीता के निचले होंठ को चूसा, फिर ऊपरी को, फिर अपनी जीभ को उसके मुंह में डाल दिया। दोनों की जीभें एक-दूसरे से उलझ गईं, चाटने लगीं, घुमने लगीं। राज ने नीता का सिर थोड़ा पीछे झुकाया और किस को और गहरा, और गीला बनाया। नीता की साँसें तेज़ हो गईं, उसकी छाती ऊपर-नीचे हो रही थी, हाथ राज की पीठ पर फिसल रहे थे, नाखून हल्के-हल्के उसके मांस में गड़ रहे थे। यह किस पूरे ५-६ मिनट तक लगातार चला। दोनों के मुँह से हल्की-हल्की “म्ह्म्म…” और “आह्ह…” की आवाज़ें निकल रही थीं।

    राज ने नीता को धीरे से बेड की तरफ धकेल दिया। सबसे पहले उसने भारी दुपट्टे को कंधों से उतारा और फर्श पर फेंक दिया। फिर ब्लाउज के एक-एक हुक को बहुत धीरे-धीरे खोलना शुरू किया। हर हुक खुलते ही नीता की साँस रुक रही थी, उसकी छाती तेज़ी से हिल रही थी। ब्लाउज पूरी तरह निकल गया तो नीता का लाल जरी वाला ब्रा सामने आ गया – ३४D, दोनों स्तन भरे-भरे, ऊपर से उभरे हुए, निप्पल्स पहले से ही सख्त होकर खड़े थे। राज ने ब्रा के कपड़े के ऊपर से ही दोनों स्तनों को दोनों हाथों से मसलना शुरू कर दिया। अँगुलियाँ गोल-गोल घुमा रहा था, कभी हल्का दबा रहा, कभी जोर से निचोड़ रहा, निप्पल्स को अँगुलियों के बीच दबाकर खींच रहा था। नीता की आँखें आधी बंद, मुँह थोड़ा खुला, “राज… धीरे… मुझे बहुत डर लग रहा है… मैं… मैं कभी नहीं किया…”

    राज घुटनों पर बैठ गया। पेटीकोट का नादा खोला, लेहंगा धीरे-धीरे सरककर फर्श पर गिर गया। अब नीता सिर्फ ब्रा और मैचिंग लाल लेस पैंटी में खड़ी थी। उसकी जाँघें चिकनी, गोरी, हल्के-हल्के काँप रही थीं। राज ने दोनों जाँघों के अंदरूनी हिस्से को चूमना शुरू किया – बहुत धीरे, बहुत ऊपर की तरफ। जब उसकी नाक और होंठ पैंटी के ऊपर से चूत के पास पहुँचे तो नीता ने जोर से सिसकारी भरी, “आह्ह्ह…!” पैंटी का कपड़ा पहले से ही गीला हो चुका था, नमी साफ दिख रही थी।

    राज ने ब्रा का हुक खोला। दोनों बड़े, भारी, गोल, दूध जैसे सफेद स्तन बाहर छलांग लगाकर निकले। गुलाबी-भूरे निप्पल्स पूरी तरह सख्त और खड़े थे। राज ने एक निप्पल मुंह में ले लिया, जीभ से चारों तरफ घुमाया, दाँतों से हल्का-हल्का काटा, फिर जोर-जोर से चूसने लगा। दूसरा हाथ नीचे गया, पैंटी के अंदर उँगलियाँ डाल दीं। नीता की चूत गर्म, सिकुड़ी हुई, पहले से बहुत गीली थी। राज ने मध्यमा उँगली धीरे-धीरे अंदर डाली, फिर अंदर-बाहर करने लगा, अँगूठे से क्लिटोरिस को रगड़ते हुए। नीता के घुटने लड़खड़ाए। वो राज के बाल पकड़कर चीखी, “उफ्फ… राज… मैं वर्जिन हूँ… बहुत धीरे… प्लीज…”

    राज ने पैंटी भी उतार दी। नीता अब पूरी तरह नंगी खड़ी थी। उसकी चूत छोटी-छोटी बालों वाली, गुलाबी, सूजी हुई, पहले से चमक रही थी। राज ने उसे बेड पर लिटा दिया, दोनों पैर कंधों पर रखे। फिर उसकी गर्म, नम जीभ चूत पर रख दी। ऊपर से नीचे चाटा, क्लिटोरिस पर गोल-गोल घुमाया, फिर जीभ अंदर डालकर अंदर-बाहर करने लगा। नीता पूरी तरह पागल हो गई। दोनों हाथों से चादर को जोर-जोर

    से पकड़कर खींच रही थी, कमर उठा-उठाकर चूत को राज के मुंह में धकेल रही थी। “आआह्ह्ह… राज… क्या कर रहे हो… उफ्फ… मैं मर जाऊंगी… बस… बस… बहुत अच्छा लग रहा है… आह्ह्ह!!”

    ५-७ मिनट तक राज ने चूत चाटी। नीता दो-तीन बार छोटी-छोटी झड़ गई, उसका पूरा शरीर हर बार काँप उठा।

    अब राज उठा। उसने शेरवानी, पैंट, अंडरवियर सब उतार दिया। जब उसका १० इंच लंबा, मोटा, नसों से भरा, काला-भूरा लंड बाहर निकला – पूरा खड़ा, सिर चमकदार, नीचे दो भारी अंडकोष लटक रहे – नीता की आँखें फैल गईं। “ये… ये अंदर जाएगा? राज… इतना बड़ा… नहीं… मैं नहीं कर पाऊंगी… डर लग रहा है…”

    राज ने नीता के पैर कंधों पर रखे, लंड का गर्म सिर चूत के मुंहाने पर रखा। बहुत धीरे दबाया। आधा लंड घुसा तो नीता चीखी, “आह्ह्ह… दर्द… बहुत दर्द हो रहा है…” राज ने एक जोरदार झटका दिया। पूरा १० इंच एकदम अंदर चला गया। नीता की चूत फट गई। खून की पतली धार निकली। नीता जोर से चीखी, “आआआह्ह्ह… मर गई… निकालो… फट गई… बहुत तेज़ दर्द… आह्ह्ह!!”

    राज रुका नहीं। धीमी गति से पंपिंग शुरू की। हर धक्के के साथ नीता की चीख निकल रही थी। धीरे-धीरे दर्द के साथ मजा भी आने लगा। राज ने स्पीड बढ़ाई। ठक-ठक-ठक की तेज़ आवाज पूरे कमरे में गूंज रही थी। नीता के स्तन उछल-उछलकर उसके चेहरे पर गिर रहे थे। राज दोनों स्तनों को जोर-जोर से मसल रहा था, निप्पल्स खींच रहा था।

    “कैसा लग रहा है जान?”
    नीता आँखें बंद किए, आँसू बहाते हुए बोली, “बहुत… बहुत बड़ा है… फट रही हूँ… लेकिन… अंदर तक भर गया है… आह्ह्ह… तेज… तेज करो राज…”

    राज ने उसे डॉगी स्टाइल में घुमाया। पीछे से पूरा लंड एक झटके में अंदर। नीता की चूत लाल-सूजी हो गई। १८-२२ मिनट तक लगातार चोदा। नीता तीन-चार बार झड़ गई। आखिर में राज ने जोर-जोर से १०-१२ झटके दिए और नीता की चूत के अंदर ही गर्म-गर्म वीर्य का पूरा लोड भर दिया। नीता का शरीर अंतिम बार काँपा और बिस्तर पर ढेर हो गया। चूत से खून और वीर्य का मिश्रण बह रहा था।

    लेकिन राज अभी पूरी तरह थका नहीं था। उसने नीता को पेट के बल लिटाया। उसके दोनों नितंब फैलाए, गांड के छेद को देखा। “अब दूसरा राउंड… तुम्हारी गांड… पूरे ५० मिनट तक… आज इसे पूरी तरह तोड़ दूँगा।”

    नीता की आँखें खुलीं। घबराकर, डरकर बोली, “नहीं राज… वहाँ नहीं… वो बहुत दर्द देगा… मैंने कभी नहीं किया… प्लीज… नहीं… मैं सह नहीं पाऊंगी… १० इंच… फट जाएगी… मैं मना करती हूँ… बहुत मना करती हूँ…”

    राज ने उसकी कमर मजबूती से पकड़ ली। नीता ने जोर लगाकर उठने की कोशिश की, बेड से उतरकर भागने लगी। “छोड़ो… मैं नहीं करूंगी… छोड़ दो मुझे… प्लीज राज… मैं रो रही हूँ…” वो रोते हुए चीखी और बाथरूम की तरफ भागने लगी।

    राज हँसा। दो बड़े कदम में पहुँच गया। उसने नीता की कमर से पकड़कर जैसे कोई खिलौना हो, उठा लिया। नीता पैर मार रही थी, हाथ पीछे करके मारने की कोशिश कर रही थी, रो रही थी। “छोड़ दो… प्लीज… मैं मना कर रही हूँ… बहुत बार मना कर रही हूँ… नहीं… आह्ह्ह…” लेकिन राज ने उसे बेड पर पटक दिया, पेट के बल, दोनों हाथ पीछे की तरफ मोड़कर पकड़ लिए।

    “आज तुम भाग नहीं पाओगी… ५० मिनट तक चिल्लाती, रोती, मना करती रहोगी… लेकिन मैं नहीं रुकूँगा।”

    उसने अपनी उँगली पर थूक लगाया और नीता की गांड के छोटे, सिकुड़े हुए छेद पर घुमाया, हल्का दबाया। नीता जोर-जोर से रो रही थी, “नहीं… नहीं… बहुत दर्द होगा… राज… मैं तुमसे प्यार करती हूँ… प्लीज मत करो… मैं मना करती हूँ… बहुत मना कर रही हूँ…”

    राज ने १० इंच लंड का गर्म, मोटा सिर गांड के छेद पर रख दिया और धीरे से दबाया। पहला इंच घुसते ही नीता की चीख फट पड़ी – “आआआआह्ह्ह्ह्ह!!! फट गई… निकालो… मर गई… बहुत तेज़ दर्द… आह्ह्ह्ह्ह!!” उसकी आवाज इतनी तेज़ और भयानक थी कि कमरे की दीवारें गूंज उठीं। आँखों से आँसू की धार बहने लगी, पूरा शरीर जोर-जोर से काँप रहा था।

    राज रुका नहीं। बहुत धीरे-धीरे लेकिन लगातार दबाता गया। ३ इंच… ५ इंच… ७ इंच… और आखिर पूरा १० इंच गांड के अंदर चला गया। नीता की गांड की दीवारें फट रही थीं। खून की पतली लकीर निकल आई। नीता बार-बार चीख रही थी, “आह्ह्ह… आह्ह्ह… बस… बस… निकालो… मैं सह नहीं पा रही… राज… प्लीज… मैं बहुत बार मना कर रही हूँ… छोड़ दो… आआह्ह्ह!!”

    राज ने पंपिंग शुरू कर दी। पहले धीमी गति, फिर धीरे-धीरे तेज़। हर झटके के साथ नीता की चीख निकल रही थी – “उफ्फ… आआह्ह्ह… दर्द… बहुत दर्द… फट रही हूँ… मम्मी… बचाओ… आह्ह्ह्ह!!” वो बार-बार हाथ पीछे करके राज को धकेलने की कोशिश कर रही थी, नाखून गाड़ रही थी।

    १० मिनट बाद नीता ने फिर भागने की कोशिश की। उसने पूरा जोर लगाकर आगे सरकने की कोशिश की, बेड से नीचे उतरने लगी। राज ने उसके बाल पकड़े, कमर से उठाया, फिर से पेट के बल लिटा दिया और एक और जोरदार झटका मारा। नीता चीखी, “नहीं… फिर से… आआह्ह्ह… मैं मर जाऊंगी… रुक जाओ… प्लीज… मैं रो रही हूँ… देखो आँसू… बहुत आँसू आ रहे हैं…”

    राज की स्पीड बढ़ती गई। अब हर सेकंड एक तेज़ झटका। नीता की गांड लाल, सूजी, पूरी तरह फटी हुई। २० मिनट हो चुके थे। नीता का गला बैठने लगा था। चीख अब भारी और काँपती हुई हो गई थी – “हां… हां… आह्ह्ह… नहीं… बस… मैं… मैं… फट गई… राज… तुम… बहुत क्रूर हो… आह्ह्ह्ह!!”

    ३० मिनट बाद नीता लगातार रो रही थी, सिसक रही थी। आवाज काँप रही थी, “प्लीज… ५० मिनट… मैं नहीं सह सकती… मुझे छोड़ दो… मैं तुम्हारी हूँ… लेकिन ये… ये बहुत… आआह्ह्ह…!” वो बार-बार मना कर रही थी, “मैं मना करती हूँ… बहुत बार… रुक जाओ… प्लीज… मैं वादा करती हूँ… कभी नहीं भागूंगी… बस रुक जाओ… आह्ह्ह!!”

    राज ने पोजीशन बदला। उसे कुत्ते की तरह घुटनों पर खड़ा किया, दोनों हाथ पीछे पकड़े। अब और तेज़, और गहरा। ठप-ठप-ठप-ठप की तेज़ आवाज पूरे सूट में गूंज रही थी। नीता का सिर नीचे लटका हुआ, आँसू बिस्तर पर टपक रहे थे। उसकी चीख अब सिसकियों में बदल गई थी – “सिस… सिस… आह्ह्ह… मर रही हूँ… गांड फट गई… बहुत… बहुत दर्द… राज… मैं… सह नहीं पा रही…”

    ४० मिनट बाद नीता की हालत पूरी तरह खराब हो गई। आवाज लगभग गायब, सिर्फ हल्की-हल्की सिसकियाँ और “नहीं… नहीं…” निकल रहा था। पूरा शरीर पसीने से तर-बतर, गांड से खून और राज का थूक बह रहा था। वो बार-बार बेहोश होने जैसी हो रही थी, आँखें ऊपर चढ़ रही थीं, लेकिन राज हर बार उसके गाल थपथपाकर जगा देता और फिर और तेज़ पेलता।

    आखिरी १० मिनट – राज ने सबसे तेज़ स्पीड पकड़ ली। नीता सिर्फ काँप रही थी, शरीर थर-थर कर रहा था। कोई बड़ी चीख नहीं, सिर्फ हल्की साँसें, रोना और हल्की सिसकियाँ। आखिर में राज ने १०-१२ जोरदार, तेज़ झटके दिए और नीता की गांड के सबसे अंदर ही अपना पूरा गर्म, मोटा वीर्य भर दिया।

    नीता बिस्तर पर पड़ी थी – पूरी तरह नंगी, गांड बुरी तरह सूजी, लाल, फटी हुई, खून और वीर्य का मिश्रण लगातार बह रहा था। जाँघें जोर-जोर से काँप रही थीं। आँखें सूजी हुई, आँसू सूख चुके थे लेकिन चेहरा अभी भी रोने वाला था। साँसें फूल रही थीं, बोलने की ताकत भी नहीं बची थी। सिर्फ हल्की-हल्की सिसकियाँ और काँपन निकल रही थी। उसकी हालत इतनी बुरी थी कि वो उठने की कोशिश भी नहीं कर पा रही थी, बस पड़ी रह गई थी।

    राज उसके पास लेट गया, उसके बालों में हाथ फेरते हुए, पसीने से तर चेहरे को चूमते हुए बोला, “ये सिर्फ दूसरा राउंड था जान… अभी तो पूरी रात बाकी है…”

    मैं वहाँ खड़ा था… नीता की वो बेहाल, रोती-चिल्लाती, भागने की कोशिश करती, बार-बार मना करती हुई हालत ५० मिनट तक बहुत करीब से देख रहा था।

    लगभग १० मिनट बीत चुके थे। नीता बेड पर पेट के बल पड़ी हुई थी, साँसें अभी भी फूल रही थीं। उसकी आँखें आधी बंद, चेहरा आँसुओं से नम, बाल बिखरे हुए, पूरा शरीर पसीने से चिपचिपा हुआ। गांड बुरी तरह सूजी और लाल हो गई थी, हल्का-हल्का खून अभी भी रिस रहा था। वो हिलने की कोशिश भी नहीं कर पा रही थी। सिर्फ हल्की-हल्की सिसकियाँ निकल रही थीं – “सिस… सिस… राज… बहुत दर्द… मैं उठ भी नहीं पा रही…”

    राज उसके बगल में लेटा था। उसका १० इंच का लंड अभी भी आधा खड़ा था, नीता के वीर्य और खून से चिपका हुआ। उसने नीता के बालों में हाथ फेरा, उसके गाल को चूम लिया और धीरे से बोला, “आराम कर लिया? अब तीसरा राउंड शुरू करते हैं जान। इस बार मैं तुम्हें और भी गहराई तक ले जाना चाहता हूँ।”

    नीता ने डरते हुए आँखें खोलीं। उसकी आवाज बहुत कमजोर और काँपती हुई थी, “नहीं राज… प्लीज… अब नहीं… मेरी हालत बहुत खराब है… गांड फट गई है… चूत भी जल रही है… मैं कुछ देर आराम करना चाहती हूँ… बहुत मना कर रही हूँ… प्लीज…”

    लेकिन राज ने उसकी बात नहीं सुनी। उसने नीता को पलटकर पीठ के बल लिटा दिया। नीता के दोनों पैर फैलाए, घुटनों को मोड़कर कंधों की तरफ दबा दिया। उसकी चूत और गांड दोनों एक साथ सामने थीं, दोनों ही बुरी तरह सूजी हुईं। राज ने बेडसाइड टेबल से लुब्रिकेंट की बोतल उठाई और दोनों हाथों पर भर-भरकर लगाया।

    “इस बार दोनों जगह एक साथ खेलेंगे,” उसने कहा और अपना लंड फिर से पूरा खड़ा कर लिया।

    नीता घबराकर हाथ मारने लगी, “नहीं… राज… मैं सह नहीं पाऊंगी… दो जगह… इतना बड़ा… प्लीज… मैं रो रही हूँ… देखो… आँखों में आँसू हैं… बहुत बार मना कर रही हूँ… रुक जाओ…”

    राज ने पहले अपनी दो उँगलियाँ नीता की चूत में डालीं, फिर तीसरी गांड में। नीता जोर से सिसकारी भरी, “आह्ह्ह… जल रही है… दर्द हो रहा है…” राज ने उँगलियाँ अंदर-बाहर करने लगा, लुब्रिकेंट अच्छे से फैलाया। नीता का शरीर बार-बार काँप रहा था।

    कुछ देर उँगलियों से खेलने के बाद राज ने अपना मोटा लंड नीता की चूत पर रखा। एक जोरदार झटके से पूरा १० इंच चूत में उतार दिया। नीता की पीठ कमान की तरह झुक गई, “आआआह्ह्ह!!! फिर से… बहुत सूज गई है… फट रही है… निकालो… आह्ह्ह!!”

    राज ने तेज़-तेज़ पंपिंग शुरू कर दी। ठक-ठक-ठक-ठक की तेज़ आवाज फिर से कमरे में गूंजने लगी। नीता के स्तन जोर-जोर से उछल रहे थे। राज एक हाथ से स्तनों को मसल रहा था, दूसरे हाथ से उसके क्लिटोरिस को रगड़ रहा था। हर धक्के पर नीता चीख रही थी – “उफ्फ… राज… धीरे… बहुत तेज़… आह्ह्ह… मैं मर जाऊंगी… चूत जल रही है…”

    १० मिनट तक चूत चोदने के बाद राज ने लंड निकाला। अब उसने नीता की गांड पर सिर रखा और धीरे से दबाया। गांड अभी भी बहुत टाइट और सूजी हुई थी। पूरा लंड अंदर घुसते ही नीता फिर से चीख उठी, “आआह्ह्ह्ह… गांड… फिर से… बहुत दर्द… राज… प्लीज… मैं मना करती हूँ… बहुत मना कर रही हूँ… रुक जाओ…”

    राज ने दोनों जगह बदल-बदलकर चोदना शुरू किया – २-२ मिनट चूत, फिर २-२ मिनट गांड। नीता का रोना और चीखना लगातार जारी था। वो बार-बार हाथ से राज की छाती धकेलने की कोशिश कर रही थी, “छोड़ दो… अब बस करो… मैं उठना चाहती हूँ… राज… प्लीज… मेरी हालत देखो… मैं काँप रही हूँ…”

    राज ने नीता को उठाकर अपनी गोद में बैठा लिया – cowgirl पोजीशन लेकिन वो खुद नीचे से जोर-जोर से ऊपर धक्के दे रहा था। नीता की कमर पकड़कर उसे ऊपर-नीचे कर रहा था। नीता के स्तन उसके चेहरे पर बार-बार गिर रहे थे। वो नीता के निप्पल्स को चूस रहा था, काट रहा था। नीता का सिर पीछे झुक गया था, मुँह खुला, आँखें आधी बंद, लगातार चीख और सिसकारियाँ निकल रही थीं – “आह्ह्ह… आह्ह्ह… बहुत गहरा जा रहा है… दोनों जगह जल रही हैं… राज… मैं सह नहीं पा रही… रुक जाओ… प्लीज… मैं तुमसे विनती कर रही हूँ…”

    इस पोजीशन में १५ मिनट तक चोदा गया। नीता कई बार झड़ गई, लेकिन हर बार उसकी चीख और दर्द बढ़ता ही गया।

    आखिर में राज ने नीता को फिर पेट के बल लिटाया, दोनों हाथ पीछे पकड़े और सिर्फ गांड में पूरा जोर लगा दिया। अब सबसे तेज़ स्पीड। ठप-ठप-ठप-ठप… कमरे में सिर्फ ये आवाज और नीता की काँपती चीखें गूंज रही थीं।

    “आआह्ह्ह… बस… अब सच में नहीं… गांड फट जाएगी… राज… मैं मर रही हूँ… आह्ह्ह… बहुत बार मना किया… फिर भी नहीं रुके… आह्ह्ह!!”

    नीता का पूरा शरीर पसीने, आँसुओं और लुब्रिकेंट से तर था। उसकी आवाज अब लगभग फट चुकी थी, सिर्फ सिसकियाँ और हल्की चीखें निकल रही थीं। २५-३० मिनट तक इस राउंड में लगातार चोदने के बाद राज ने आखिरी बार बहुत तेज़ १५-२० झटके दिए और पहले नीता की चूत में, फिर गांड में अपना वीर्य भर दिया।

    नीता अंत में पूरी तरह बेहाल होकर बिस्तर पर गिर पड़ी। उसकी चूत और गांड दोनों बुरी तरह सूजी, लाल, फटी हुई, वीर्य और खून से भरी हुई। जाँघें अनियंत्रित रूप से काँप रही थीं। आँखें बंद, मुँह थोड़ा खुला, साँसें बहुत तेज़ और छोटी-छोटी। बोलने की ताकत बिल्कुल खत्म। सिर्फ हल्की-हल्की सिसकियाँ और शरीर का थरथराना बचा था।

    राज उसके पास लेट गया, उसे चूमते हुए, उसके कान में फुसफुसाते हुए बोला, “अब चौथा राउंड शुरू करने से पहले थोड़ा पानी पिला दूँ तुम्हें… रात अभी बहुत लंबी है।”

    नीता की वो अंतिम हालत, उसकी थकी हुई सिसकियाँ, काँपता शरीर… सब कुछ।

  • ट्रेन में मिली अजनबी लड़की 2

    मैंने टेबल से कंडोम का पैकेट लिया, एक निकाला और पहन लिया। फिर नेहा की जाँघें थोड़ी और अलग कीं। लंड की नोक को उसकी चूत पर रखा और बहुत धीरे से दबाया।

    नेहा ने आँखें बंद कर लीं और मेरी पीठ को कसकर पकड़ लिया।

    “आह्ह्ह…” एक लंबी आह के साथ मेरा लंड धीरे-धीरे उसके अंदर घुसने लगा। नेहा की चूत बहुत टाइट और गर्म थी। मैं रुक-रुककर पूरा लंड अंदर डालता गया। जब पूरा घुस गया, तो हम दोनों कुछ पल ऐसे ही रुक गए।

    मैंने नेहा के माथे पर किस किया और फुसफुसाया,
    “ठीक है ना?”

    नेहा ने सिर हिलाया और बोली, “हाँ… बहुत अच्छा लग रहा है… अब धीरे-धीरे…”

    मैंने बहुत धीमी गति से धक्के मारने शुरू किए। हर धक्के के साथ नेहा की आहें निकल रही थीं — “आह… राहुल… हाँ… और धीरे…”

    हम दोनों एक-दूसरे को कसकर पकड़े हुए थे। मैं उसकी छातियों को चूमता, गर्दन को चूसता, और धीरे-धीरे चोदता रहा। नेहा की जाँघें मेरी कमर के चारों तरफ लिपटी हुई थीं।

    करीब 15-20 मिनट तक हम इसी धीमी, रोमांटिक रफ्तार में रहे। फिर नेहा की साँसें तेज़ होने लगीं। उसकी चूत मेरे लंड को कसकर पकड़ने लगी।

    “राहुल… मैं… आ रही हूँ…” उसने काँपते हुए कहा।

    मैंने गति थोड़ी बढ़ाई। कुछ ही देर में नेहा का पूरा शरीर सख्त हो गया और वो जोर से झड़ गई। उसकी चूत बार-बार सिकुड़ रही थी। उसी पल मैं भी झड़ गया। गर्म वीर्य कंडोम के अंदर भर गया।

    हम दोनों थके हुए, पसीने से तर, एक-दूसरे से चिपके हुए लेट गए। नेहा मेरी छाती पर सिर रखे हुए थी। मैं उसके बालों में हाथ फेर रहा था।

    नेहा ने बहुत धीमी आवाज़ में कहा,
    “राहुल… आज रात बहुत खूबसूरत थी… थैंक यू।”

    मैंने उसे कसकर गले लगाया और बोला,
    “तुम्हारे साथ ये पल मेरे लिए भी बहुत स्पेशल हैं नेहा।”

    रूम में दूसरा राउंड (रात 2:30 बजे)

    पहले राउंड के बाद हम दोनों थके हुए, पसीने से तर लेटे हुए थे। नेहा मेरी छाती पर सिर रखे, अपनी नंगी छाती मेरी छाती से सटाए हुए आराम कर रही थी। उसकी साँसें अभी भी धीरे-धीरे भारी थीं। मैं उसके नंगे पीठ पर उँगलियाँ फिरा रहा था, कभी कमर पर घुमाता, कभी गांड के ऊपरी हिस्से को हल्के से सहलाता। 

    करीब 20 मिनट बाद नेहा ने सिर उठाया। उसकी आँखों में फिर से वो चमक आ गई थी। वो शरमाते हुए मुस्कुराई और मेरे कान के पास फुसफुसाई, 
    “राहुल… मुझे अभी भी और चाहिए… तुम्हारा लंड फिर से…”

    ये सुनकर मेरा लंड फिर से सख्त होने लगा। मैंने नेहा को कसकर चूमा। किस इस बार ज्यादा भूखा था। हमारी जीभें एक-दूसरे से लड़ रही थीं। नेहा ने खुद मेरे ऊपर चढ़ गई। उसकी गीली चूत मेरे पेट पर रगड़ खा रही थी। वो मेरी छाती चूमने लगी, निप्पल्स को जीभ से घुमाती हुई नीचे उतर गई। 

    उसने मेरा लंड हाथ में लिया, धीरे-धीरे सहलाया और फिर मुँह में ले लिया। नेहा बहुत धीरे से चूस रही थी। उसकी गर्म जीभ लंड के सिरे पर घूम रही थी, कभी पूरा मुँह में लेकर गहरी गला दे रही थी। मैंने उसके बाल पकड़ लिए और हल्के से सिर दबाया। नेहा की आँखें ऊपर देख रही थीं, मुँह से सलाइवा टपक रहा था। “मम्म… राहुल… कितना स्वादिष्ट है…” वो फुसफुसाई। 

    कुछ देर चूसने के बाद नेहा ने दूसरा कंडोम निकाला, खुद मेरे लंड पर चढ़ाया और फिर मेरे ऊपर बैठ गई। इस बार वो बहुत धीरे से नीचे बैठी। उसकी चूत अभी भी पिछले राउंड से गीली थी, लेकिन टाइट थी। पूरा लंड अंदर घुसते ही नेहा की कमर काँप गई — “आआह्ह्ह… फिर से भर गया… बहुत मोटा लग रहा है…”

    वो राइडिंग पोज़िशन में धीरे-धीरे ऊपर-नीचे होने लगी। हर बार जब वो नीचे बैठती, उसकी भारी छातियाँ जोर से उछलतीं और मेरे चेहरे के पास आ जातीं। मैंने उन्हें दोनों हाथों से थाम लिया, निप्पल्स को मुँह में लेकर जोर-जोर से चूसने लगा। नेहा की रफ्तार बढ़ने लगी। “फच… फच… फच…” की आवाज़ रूम में गूँज रही थी। नेहा की आहें तेज़ हो गईं — “हाँ राहुल… और तेज़… मेरी चूत को चोदो… आह्ह… मुझे फाड़ दो… बहुत मजा आ रहा है…”

    मैंने नीचे से जोर-जोर से धक्के मारे। नेहा झुककर मेरे होंठ चूसने लगी। उसका पसीना मेरी छाती पर टपक रहा था। करीब 18 मिनट तक ये राइडिंग चली। नेहा दो बार छोटे-छोटे ऑर्गेज्म आई। आखिर में वो जोर से काँपी, चूत मेरे लंड को कसकर दबाई और झड़ गई। उसी पल मैं भी उसके अंदर झड़ गया। 

    नेहा मेरी छाती पर ढेर हो गई। हम दोनों लंबी साँसें लेते हुए एक-दूसरे को चूमते रहे। फिर थकान से सो गए।

    —

    सुबह का पहला राउंड (सुबह 7:45 बजे)

    सुबह की हल्की रोशनी खिड़की से आ रही थी। नेहा मेरी बाँहों में लिपटी सो रही थी। उसका नंगा बदन मेरे बदन से पूरी तरह चिपका हुआ था। मैं जाग गया और उसके गाल पर किस किया। नेहा की आँखें खुलीं। वो मुस्कुराई और मुझे और कसकर चिपक गई। 

    “Good morning baby…” मैंने कहा। 
    नेहा ने शरमाते हुए जवाब दिया, “बहुत अच्छी मॉर्निंग है…”

    मेरा लंड फिर से उसकी जाँघों के बीच सख्त हो चुका था। नेहा ने उसे महसूस किया और मुस्कुराई। इस बार वो खुद मेरे ऊपर चढ़ गई। सुबह की ताज़गी में उसका गोरा नंगा बदन और भी खूबसूरत लग रहा था। उसने कंडोम चढ़ाया और धीरे से लंड पर बैठ गई। 

    “आह्ह… सुबह-सुबह कितना अच्छा लग रहा है…” नेहा ने आँखें बंद करके कहा। वो धीरे-धीरे ऊपर-नीचे होने लगी। मैंने उसके कूल्हों को पकड़ लिया और नीचे से मदद करने लगा। उसकी छातियाँ मेरे चेहरे के सामने हिल रही थीं। मैंने उन्हें चूमा, चाटा और निप्पल्स को हल्के से काटा। नेहा की साँसें तेज़ हो गईं। 

    रफ्तार बढ़ने लगी। नेहा अब जोर-जोर से बैठ रही थी। “हाँ राहुल… और गहरा… मेरी चूत में पूरा डाल दो… आह्ह… मैं झड़ने वाली हूँ…” कुछ ही मिनट में नेहा का शरीर सख्त हो गया और वो पहली बार झड़ गई। मैंने उसे पलटकर मिशनरी पोज़िशन में लिया और तेज़ धक्के मारने लगा। नेहा की टाँगें मेरी कमर पर लिपटी हुई थीं। आखिर में हम दोनों साथ में झड़ गए। 

    हम पसीने से तर लेटे रहे। नेहा मेरी गर्दन में चेहरा छुपाए हुए थी।

    सुबह का दूसरा राउंड (सुबह 9:20 बजे — शावर में)

    हम दोनों नहाने गए। शावर के नीचे गर्म पानी की धार गिर रही थी। नेहा मेरे सामने खड़ी थी। मैंने उसे दीवार से सटाकर खड़ा किया। पीछे से उसकी छातियों को दोनों हाथों से दबाया और गर्दन चूसने लगा। नेहा की साँसें फिर से भारी हो गईं। 

    मैंने उसे झुकाया, शावर के नीचे ही डॉगी स्टाइल में लिया। पानी हमारे गीले बदन पर गिर रहा था। मैंने पीछे से लंड अंदर डाला और जोर से ठोकना शुरू किया। नेहा की गांड हर धक्के पर लहरा रही थी। पानी की धार के साथ “फच फच” की आवाज़ और तेज़ हो रही थी।

    “आह्ह… राहुल… शावर में चोदना… बहुत गंदा और मजेदार है… हाँ… और जोर से… मेरी गांड पकड़कर फाड़ दो…” नेहा चीख रही थी। मैंने एक हाथ से उसके बाल पकड़े, दूसरे से क्लिटोरिस रगड़ा। पानी हम दोनों के शरीर से बह रहा था। नेहा दो बार झड़ गई। आखिर में मैं भी उसके अंदर झड़ गया। 

    शावर के नीचे हम दोनों एक-दूसरे को चूमते हुए खड़े रहे।

    पैकिंग और टैक्सी में स्टेशन पहुँचना

    शावर से निकलकर हमने कपड़े पहने। नेहा ने सफेद टॉप और जीन्स पहनी, मैंने शर्ट और जींस। फिर हमने सामान पैक करना शुरू किया। नेहा अपना बैग पैक कर रही थी, मैं अपना। बीच-बीच में हम एक-दूसरे को किस कर लेते। नेहा ने कहा, “ये गोवा की यादें कभी नहीं भूलूँगी राहुल… तुमने मुझे बहुत स्पेशल फील कराया।”

    पैकिंग खत्म होने के बाद हमने होटल से चेकआउट किया। टैक्सी बुक की और स्टेशन की तरफ चल दिए। टैक्सी में हम पीछे की सीट पर बैठे थे। नेहा ने अपना सिर मेरे कंधे पर रख दिया। मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और उँगलियाँ फंसाईं। 

    टैक्सी चल रही थी। बाहर गोवा के खूबसूरत रास्ते दिख रहे थे। नेहा ने धीरे से मेरे कान में कहा, “ट्रेन में भी… वही वाला केबिन मिल जाए तो…”

    मैं मुस्कुराया और उसके गाल पर किस किया। टैक्सी स्टेशन पहुँचते-पहुँचते हम दोनों फिर से एक-दूसरे के करीब आ गए थे। दिल में वो पुरानी उत्तेजना फिर से जाग रही थी।

    ट्रेन में बैठने से पहले नेहा ने मुझे कसकर गले लगाया और फुसफुसाई, 
    “अब ट्रेन का इंतज़ार है…”

    ट्रेन आई और अपने शीट पर गए और
    नेहा ने मुझे बिस्तर पर धकेल दिया। वो खुद मेरे ऊपर चढ़ गई। उसने मेरी शर्ट उतारी, मेरी छाती चूमने लगी। उसकी जीभ मेरे निप्पल्स पर घूम रही थी। फिर नीचे हाथ बढ़ाया, मेरे लंड को पैंट से बाहर निकाला और धीरे-धीरे सहलाने लगी। लंड सख्त हो गया। नेहा ने कंडोम चढ़ाया, अपनी ड्रेस ऊपर उठाई, पैंटी सरकाई और धीरे से मेरे लंड पर बैठ गई।

    उसकी गीली, गरम चूत मेरे मोटे लंड को धीरे-धीरे निगल रही थी। जब पूरा घुस गया, नेहा की आँखें बंद हो गईं और मुँह से लंबी आह निकली — “आआह्ह्ह… राहुल… कितना मोटा और गहरा… पूरी तरह भर गया है…”

    वो धीरे-धीरे ऊपर-नीचे होने लगी। हर बार जब नीचे बैठती, उसकी भारी छातियाँ जोर से उछलतीं। मैंने दोनों हाथों से उन्हें थाम लिया, निप्पल्स को उँगलियों के बीच दबाया और खींचा। नेहा की रफ्तार बढ़ने लगी। “फच… फच… फच…” की आवाज़ केबिन में गूँज रही थी। नेहा की जाँघें मेरी कमर से सट रही थीं। उसका पसीना मेरी छाती पर टपक रहा था।

    वो झुककर मुझे किस करने लगी। उसके बाल मेरे चेहरे पर गिर रहे थे। मैंने नीचे से तेज़ धक्के मारे। नेहा चीख उठी — “हाँ… राहुल… और जोर से… मेरी चूत फाड़ दो… आह्ह… बहुत मजा आ रहा है… मैं पागल हो रही हूँ…” उसकी चूत मेरे लंड को कसकर पकड़ रही थी। करीब 15 मिनट बाद नेहा का शरीर सख्त हो गया। उसकी चूत बार-बार सिकुड़ी और वो जोर से झड़ गई। गर्म रस मेरे लंड पर बहने लगा। उसी पल मैं भी कंडोम के अंदर झड़ गया। नेहा मेरी छाती पर ढेर हो गई। हम दोनों लंबी साँसें लेते रहे।

    दूसरा राउंड (रात 12:30 बजे — मिशनरी पोज़िशन)
    हम थोड़ी देर आराम करने के बाद फिर से शुरू हो गए। इस बार मैंने नेहा को लिटाया। उसकी जाँघें चौड़ी कीं और उसके ऊपर लेट गया। लंड फिर से सख्त था। मैंने धीरे से अंदर डाला। नेहा की आँखें नम हो गईं। “राहुल… धीरे… लेकिन गहरा…”

    मैंने बहुत धीमी गति से शुरू किया। हर धक्के के साथ उसकी छातियाँ हिल रही थीं। मैंने एक-एक करके दोनों निप्पल्स को मुँह में लिया, जोर-जोर से चूसा। नेहा मेरी पीठ पर नाखून गड़ा रही थी। मैंने रफ्तार बढ़ाई। लंड जड़ तक घुस रहा था और बाहर निकल रहा था। चूत से सफ़ेद झाग बनने लगा। नेहा बार-बार चीख रही थी — “आह… हाँ… इसी तरह… मेरी चूत को चोदते रहो… उफ्फ… मैं मर रही हूँ मजा से…”

    उसने अपनी टाँगें मेरी कमर पर लपेट लीं। मैंने गति और तेज़ कर दी। केबिन में सिर्फ चुदाई की फच-फच आवाज़ और नेहा की कामुक आहें गूँज रही थीं। नेहा तीन बार छोटे-छोटे ऑर्गेज्म आई। आखिर में वो जोर से काँपी और झड़ गई। मैं भी उसके अंदर झड़ गया। हम पसीने से तर लेटे रहे। नेहा मेरे कान में फुसफुसाई — “तुम मुझे पूरी तरह अपना बना रहे हो…”

    तीसरा राउंड (सुबह 3 बजे — साइड पोज़िशन)
    नींद में ही हम लिपटे हुए थे। नेहा ने खुद जागकर मेरा लंड सहलाया। मैं जाग गया। हम साइड में लेटे रहे। मैंने पीछे से उसकी जाँघ ऊपर उठाई और लंड अंदर डाला। ये पोज़िशन बहुत गहरा और intimate था। मैं धीरे-धीरे धक्के मार रहा था। एक हाथ से उसकी छाती मसल रहा था, दूसरे से क्लिटोरिस रगड़ रहा था।

    नेहा की साँसें फूल रही थीं। “राहुल… ये पोज़िशन… बहुत अच्छा लग रहा है… गहराई तक महसूस हो रहा है…” मैंने गति बढ़ाई। उसकी गांड मेरे पेट से टकरा रही थी। हम दोनों एक-दूसरे को चूमते रहे। नेहा का एक हाथ पीछे करके मेरी जाँघ पकड़े हुए था। करीब 12 मिनट बाद हम दोनों साथ में झड़ गए।

    चौथा राउंड (सुबह 5:30 बजे — डॉगी स्टाइल)
    सुबह की हल्की रोशनी में नेहा घुटनों के बल हो गई। मैंने पीछे से उसकी कमर पकड़ी और एक झटके में पूरा लंड अंदर ठोक दिया। नेहा चीख उठी — “आआह्ह्ह… बहुत तेज़… लेकिन मत रुकना…”

    मैंने उसके बाल पकड़े और घोड़े की तरह तेज़ी से चोदना शुरू किया। उसकी गांड हर धक्के पर लहरा रही थी। मैंने एक हाथ से उसकी लटकती छातियों को दबाया, दूसरे से क्लिटोरिस रगड़ा। नेहा बार-बार चिल्ला रही थी — “हाँ… फाड़ दो… मेरी गांड पकड़कर चोदो… राहुल… मैं तुम्हारी हूँ… आह्ह… और तेज़…”

    पसीना हम दोनों के शरीर पर बह रहा था। ट्रेन की लहर के साथ चुदाई और भी मजेदार हो रही थी। नेहा दो बार झड़ी। आखिर में मैंने जोर-जोर से ठोककर झड़ गया।

    पाँचवाँ राउंड (दिल्ली पहुँचने से ठीक पहले — गोद में बैठकर)
    ट्रेन दिल्ली के पास थी। नेहा मेरी गोद में बैठ गई। हम दोनों आमने-सामने थे। उसने लंड अंदर लिया और कसकर चिपक गई। मैंने उसकी कमर पकड़कर ऊपर-नीचे किया। नेहा मेरी गर्दन में चेहरे को छुपाए हुए थी। किस करते हुए हम तेज़ी से चुदाई कर रहे थे।

    “राहुल… आखिरी बार… मुझे भर दो…” नेहा फुसफुसाई। मैंने तेज़ धक्के मारे। उसकी छातियाँ मेरी छाती से रगड़ खा रही थीं। आखिर में हम दोनों एक साथ जोर से झड़ गए।

    ट्रेन स्टेशन पर रुकी। हम दोनों थके लेकिन संतुष्ट थे। नेहा ने मुझे आखिरी गहरा किस दिया और बोली, “ये ट्रिप कभी नहीं भूलूँगी…”

  • ट्रेन में मिली अजनबी लड़की 1

    गोवा जा रही थी। 1st AC का प्राइवेट केबिन — सिर्फ दो बर्थ। ऊपरी बर्थ पर मैं (राहुल, 32 साल) बैठा था। लैपटॉप पर कुछ काम कर रहा था, लेकिन मन कहीं और था। नीचे वाली बर्थ पर एक लड़की बैठी हुई थी — नेहा। उम्र करीब 28-29। गोरी, लंबे काले बाल, हल्की-सी मुस्कान और आँखों में वो चमक जो ट्रेन की खिड़की से बाहर देखते हुए भी अंदर तक उतर जाती थी।

    ट्रेन दिल्ली से छूटते ही हमारी नज़रें मिलीं।

    “हाय… मैं नेहा,” उसने मुस्कुराते हुए कहा। “दिल्ली से गोवा… अकेली ट्रैवल कर रही हूँ।”

    मैंने भी मुस्कुराकर जवाब दिया, “राहुल… वही हाल। सोलो ट्रिप।”

    पहले तो बातें हल्की-फुल्की थीं — काम, मौसम, गोवा के प्लान। लेकिन जैसे-जैसे रात ढलती गई, बातें गहरी होती गईं। नेहा ने बताया कि वो सॉफ्टवेयर इंजीनियर है, मुंबई में जॉब करती है, लेकिन दिल में घूमने का शौक है। मैंने अपनी स्टार्टअप की कहानी सुनाई। हम दोनों हँसते रहे। चाय आई, हमने साथ में पिए। रात के 12 बजे तक हम दोनों केबिन में बैठे गप्पें मार रहे थे।

    ट्रेन की हल्की-सी लहर और बाहर की अंधेरी रात… नेहा की हँसी में एक अजीब सा जादू था। मैंने देखा कि वो बार-बार मेरी तरफ देख रही है। मैं भी छुप-छुपकर उसकी आँखों में देख रहा था।

    “तुम बहुत अच्छे लगते हो बात करने में,” उसने शरमाते हुए कहा।
    “तुम भी… सच में,” मैंने जवाब दिया।

    उस रात हम दोनों थक गए थे, लेकिन नींद नहीं आ रही थी। मैंने नीचे उतरकर उसके बर्थ के पास बैठ गया। हमने हेडफोन शेयर किए, एक ही गाना सुनते रहे — “तुम ही हो”। उसकी कंधे मेरे कंधे से छू रहे थे। हल्की-सी ठंडी हवा केबिन में घुस रही थी। हम बस एक-दूसरे के पास बैठे रहे, बातें करते रहे। कोई टच नहीं, बस वो गर्माहट… वो अनकही केमिस्ट्री।

    सुबह गोवा स्टेशन पर हम साथ उतरे।

    “अकेले घूमने का मजा नहीं आएगा,” मैंने कहा।
    नेहा मुस्कुराई, “तो फिर साथ घूमें?”

    हमने तय किया — एक ही होटल में बुकिंग, लेकिन दो अलग-अलग रूम। मैंने ऑनलाइन दो रूम बुक कर दिए — दोनों बिलकुल पास-पास, बालकनी से एक-दूसरे को देख सकते थे।

    पहला दिन — हमने कैलंगुट बीच पर घूमना शुरू किया। पानी में पैर डुबोए, फोटो खिंचवाईं, नारियल पानी पिया। नेहा का हँसना सुनकर मैं बार-बार मुड़ जाता। दोपहर में हमने पुराने गोवा के चर्च घूमे। शाम को पणजी के बाजार में घूमते हुए उसने मेरे हाथ में अपना हाथ डाल दिया। बस हल्का-सा… लेकिन दिल जोर-जोर से धड़कने लगा।

    दूसरा दिन और भी खूबसूरत। हम दोनों अंजुना बीच गए। सूरज ढल रहा था। नेहा ने सफेद ड्रेस पहनी थी जो हवा में लहरा रही थी। हम बालू पर बैठे, सूरजास्त देखा। उसने अपना सिर मेरे कंधे पर रख दिया। मैंने धीरे से उसके बालों में हाथ फेरा। कोई बात नहीं हुई… बस सन्नाटा और समंदर की लहरें।

    शाम को होटल लौटे।

    रात के 11:30 बजे थे। मैं अपने रूम में था। बालकनी में खड़ा समंदर की आवाज सुन रहा था। तभी मेरा फोन बजा — नेहा का मैसेज:

    “नींद नहीं आ रही… तुम्हारे रूम में आ जाऊँ? सिर्फ बातें करेंगे 😊”

    मैंने तुरंत रिप्लाई किया — “आ जाओ… दरवाजा खुला है।”

    दो मिनट बाद दरवाजा धीरे से खुला। नेहा हल्के गुलाबी नाइट सूट में थी। बाल खुले हुए, चेहरे पर हल्की शरम। वो अंदर आई और दरवाजा बंद कर दिया।

    हम दोनों बालकनी में खड़े हो गए। हवा ठंडी थी। नेहा ने कहा, “दो दिन में कितना अच्छा लग रहा है राहुल… तुम्हारे साथ।”

    मैंने मुड़कर उसे देखा। उसकी आँखों में चमक थी। मैंने धीरे से उसका हाथ पकड़ा और कहा, “मुझे भी… बहुत अच्छा लग रहा है नेहा।”

    हम दोनों एक-दूसरे के बहुत करीब आ गए। उसकी साँसें मेरे चेहरे पर पड़ रही थीं। मैंने धीरे से उसकी कमर पर हाथ रखा। नेहा ने अपनी आँखें बंद कर लीं। मैंने आगे बढ़कर उसके माथे पर हल्का-सा किस किया। फिर उसकी नाक पर… फिर गाल पर।

    “राहुल…” उसने फुसफुसाकर कहा और मेरी छाती पर सिर रख दिया।

    मैंने उसे गले लगा लिया। उसकी गरमाहट मेरे शरीर में उतर रही थी। हम बस एक-दूसरे को कसकर गले लगाए खड़े रहे। कोई जल्दी नहीं थी। बस वो पल… वो closeness… वो normal romance।

    नेहा ने धीरे से सिर ऊपर किया। हमारी नज़रें मिलीं। उसके होंठ हल्के से खुले हुए थे। मैंने धीरे-धीरे अपना चेहरा उसके चेहरे की तरफ ले जाया…

    नेहा मेरी आँखों में देखकर कुछ पल चुप रही। उसके गाल हल्के गुलाबी हो गए थे। बालकनी की हल्की ठंडी हवा उसके खुले बालों को उड़ा रही थी। मैंने उसकी कमर पर हाथ रखे हुए थे और धीरे-धीरे उसकी पीठ सहला रहा था।

    नेहा ने आखिरकार बहुत धीमी आवाज़ में कहा,
    “राहुल… मैं डर रही हूँ, लेकिन… मैं भी तुम्हारे साथ रहना चाहती हूँ आज रात। बस… बहुत धीरे-धीरे, ठीक है?”

    मैंने मुस्कुराकर उसके माथे पर किस किया और फुसफुसाया,
    “बिल्कुल धीरे-धीरे नेहा। जितना तुम चाहोगी, उतना ही। मैं कभी जल्दबाजी नहीं करूँगा।”

    नेहा ने हल्के से सिर हिलाया और मेरी छाती से लग गई। मैंने उसे कसकर गले लगा लिया। फिर धीरे से उसे अंदर रूम की तरफ ले आया। रूम में सिर्फ एक हल्की गोल्डन लाइट जल रही थी, जिससे पूरा कमरा रोमांटिक लग रहा था। खिड़की से समंदर की दूर की आवाज़ आ रही थी।

    हम दोनों बिस्तर के किनारे बैठ गए। नेहा की साँसें थोड़ी तेज़ थीं। मैंने उसका हाथ अपने हाथ में लिया और उँगलियों को आपस में फंसाया। कुछ देर हम बस ऐसे ही बैठे रहे, एक-दूसरे की आँखों में देखते हुए।

    फिर मैंने धीरे से उसकी तरफ झुका और उसके होंठों को फिर से चूमा। ये किस पहले से ज्यादा गहरा और लंबा था। नेहा ने भी जवाब दिया। उसके होंठ नरम और गर्म थे। हमारी जीभें हल्के-हल्के छूने लगीं। किस के दौरान मैंने एक हाथ से उसके बालों को सहलाया, दूसरे हाथ से उसकी कमर को पकड़ रखा था।

    किस खत्म होने पर नेहा ने शरमाते हुए कहा,
    “राहुल… मेरी ड्रेस…”

    मैंने धीरे से उसके कंधे से ड्रेस की पट्टियाँ सरकाईं। ड्रेस धीरे-धीरे नीचे खिसकती गई और उसके गोरे, नरम कंधे बाहर आ गए। मैंने ड्रेस को और नीचे खींचा। अब नेहा सिर्फ़ काले रंग की ब्रा और पैंटी में थी। उसकी छातियाँ भरी हुई थीं और ब्रा के अंदर हल्के-हल्के उभर रही थीं। उसकी कमर पतली थी और जाँघें गोल और नरम दिख रही थीं।

    नेहा ने शरमा कर अपनी बाँहें छाती पर रख लीं। मैंने मुस्कुराते हुए उसके हाथ हटाए और बोला,
    “तुम बहुत सुंदर हो नेहा… डरो मत।”

    फिर मैंने अपनी शर्ट के बटन एक-एक करके खोले और उतार दी। अब मैं सिर्फ़ ट्राउज़र में था। नेहा ने मेरी छाती पर हाथ रखा और धीरे-धीरे सहलाने लगी। उसकी उँगलियाँ मेरे शरीर पर घूम रही थीं। मैंने उसे फिर से किस किया — इस बार गर्दन पर, कंधे पर, फिर क्लेविकल बोन पर। हर किस के साथ नेहा की साँसें भारी होती जा रही थीं।

    मैंने धीरे से उसकी ब्रा का हुक खोला। ब्रा ढीली हो गई और मैंने उसे उतार दिया। नेहा की दोनों छातियाँ पूरी तरह बाहर आ गईं — गोल, भरी हुई, हल्के ब्राउन निप्पल्स के साथ। वे हल्के-हल्के हिल रही थीं। मैंने एक हाथ से उन्हें बहुत नरम तरीके से छुआ। उँगलियाँ उनके नरम मांस पर घूम रही थीं। नेहा की आँखें बंद हो गईं और उसके मुँह से हल्की सी आह निकली — “आह्ह… राहुल…”

    मैंने झुककर एक निप्पल को होंठों से छुआ, फिर धीरे से चूसा। नेहा का शरीर काँप गया। मैं दूसरी छाती को हाथ से धीरे-धीरे मसल रहा था। नेहा ने मेरे सिर को अपने सीने से दबाया और बालों में उँगलियाँ फिराने लगी।

    “राहुल… बहुत अच्छा लग रहा है…” उसने फुसफुसाकर कहा।

    कुछ देर तक मैं उसकी छातियों को चूमता और सहलाता रहा। फिर मैंने धीरे से उसे बिस्तर पर लिटा दिया। अब नेहा सिर्फ़ पैंटी में थी। मैंने उसकी जाँघों पर हाथ फेरा, फिर पैंटी के किनारे पर उँगलियाँ चलाईं। नेहा ने शरमाते हुए जाँघें हल्की सी बंद कर लीं।

    मैंने धीरे से उसकी पैंटी भी उतार दी। अब नेहा पूरी तरह नंगी मेरे सामने लेटी थी। उसकी चूत पर हल्के बाल थे, लेकिन बहुत साफ़ और गुलाबी दिख रही थी। मैंने उसकी जाँघों को धीरे से अलग किया। नेहा की साँसें अब बहुत तेज़ हो गई थीं।

    मैंने भी अपनी ट्राउज़र और अंडरवियर उतार दी। मेरा लंड पहले से ही सख्त हो चुका था। नेहा ने उसे देखा और शरमा गई।

    मैं बिस्तर पर उसके पास लेट गया। हम दोनों एक-दूसरे को कसकर गले लगाए हुए थे। नंगे शरीर एक-दूसरे से चिपके हुए थे। मैंने उसे फिर से किस किया — होंठों पर, गर्दन पर, छातियों पर। मेरे हाथ उसकी पीठ, कमर, जाँघों पर घूम रहे थे। नेहा भी मेरी पीठ और कूल्हों को सहला रही थी।

    धीरे-धीरे मैंने अपना हाथ उसकी जाँघों के बीच ले जाया। उँगलियाँ उसकी चूत की फाँक पर घूमने लगीं। नेहा बहुत गीली हो चुकी थी। जब मैंने क्लिटोरिस पर हल्के से उँगली घुमाई, तो नेहा ने जोर से कराह मारी — “आह्ह… राहुल… धीरे…”

    मैं बहुत धीरे-धीरे उँगली अंदर-बाहर करने लगा। नेहा की कमर उठ रही थी। उसकी साँसें फूल रही थीं। मैंने दूसरी उँगली भी डाल दी और धीरे से गति बढ़ाई। नेहा का पूरा शरीर सिहर रहा था।

    कुछ देर बाद नेहा ने मेरी तरफ देखा और शर्माते हुए कहा,
    “राहुल… अब…”

  • सुहागरात की चीखें 3

    रिया मायके से चार दिन बाद वापस आई। उसका चेहरा थोड़ा सख्त था, लेकिन आँखों में अब पहले जितना डर नहीं था। अर्जुन एयरपोर्ट पर उसे लेने गया था। घर आते समय कार में दोनों के बीच सन्नाटा था। 

    घर पहुँचकर रिया ने सीधे कहा, 
    “अर्जुन जी… मैंने आपको पहले ही बता दिया था। अगर आपने फिर से जबरदस्ती की, खासकर गांड में, तो मैं चिल्ला दूंगी।” 

    अर्जुन ने सिर हिलाया और नरम स्वर में बोला, 
    “मैं समझ गया हूँ रिया। अब मैं जबरदस्ती नहीं करूंगा। हम दस दिन बाद बाली हनीमून पर जा रहे हैं। तब तक मैं धीरे-धीरे ही करूंगा।” 

    रिया ने बस सिर हिला दिया। 

    दस दिन की नरम सुहागरात

    अगले दस दिन अर्जुन ने सच में अपनी जिद पर काबू रखा। वह रिया को जबरदस्ती नहीं छू रहा था। 

    पहली रात (वापसी की रात)
    अर्जुन ने रिया को बहुत धीरे से चूमा। उसके गाल, गर्दन, होंठ, फिर स्तनों को चूसा। रिया अभी भी थोड़ी紧张 थी। जब अर्जुन ने लंड पर कंडोम चढ़ाकर रिया की चूत पर रखा तो रिया ने कांपते हुए कहा, 
    “धीरे… बहुत धीरे… अभी भी दर्द है…” 

    अर्जुन ने सिर्फ 3 इंच घुसाया। धीरे-धीरे हिलाया। रिया आँखें बंद करके सिसक रही थी, 
    “आह्ह… धीरे… आह्ह… बहुत मोटा है… जलन हो रही है… बस इतना ही…” 

    तीसरी रात
    अर्जुन ने 4 इंच तक घुसाया। रिया अब थोड़ी शांत थी, लेकिन फिर भी नखरे कर रही थी, 
    “आह्ह… और मत घुसाइए… बस… आह्ह… धीरे हिलाइए… मैं सह नहीं पाती तेज…” 

    सातवीं रात
    अर्जुन ने 5 इंच तक घुसाया। इस बार रिया ने खुद थोड़ा कमर हिलाया। लेकिन गांड की बात छेड़ते ही रिया सख्त हो गई, 
    “गांड मत छूना भी… वरना मैं फिर धमकी दूंगी।” 

    अर्जुन ने मजबूरन चुप रहकर चुत में ही 5 इंच तक धीरे-धीरे चोदा। 

    दसवें दिन – शॉपिंग

    हनीमून से एक दिन पहले अर्जुन रिया को शॉपिंग ले गया। 

    पहले कंडोम शॉप गए। अर्जुन ने 200 पीस एक्स्ट्रा लार्ज, अल्ट्रा थिन, रिब्ड और फ्लेवर्ड कंडोम खरीदे। रिया शरमा रही थी। 

    फिर बिकिनी शॉप गए। रिया ने कई बिकिनी ट्राई कीं — लाल, ब्लैक, व्हाइट। अर्जुन ने तीन बहुत sexy बिकिनी खरीदीं, जिनमें से दो तो सिर्फ धागे वाली थीं। रिया ने शरमाते हुए कहा, 
    “ये तो बहुत छोटी हैं… बाली में पहनूंगी तो सब देख लेंगे…” 

    अर्जुन मुस्कुराया, “हनीमून है… पहनना।” 

    बाली पहुंचना

    दस दिन पूरे होने के बाद दोनों प्राइवेट जेट से बाली के लिए रवाना हुए। 

    जब वे बाली के लग्जरी विला में पहुंचे, तो शाम हो चुकी थी। सामने नीला समुद्र, प्राइवेट पूल, और चारों तरफ palm trees। विला बहुत खूबसूरत था। 

    रिया ने बालकनी में खड़े होकर समुद्र देखा। अर्जुन उसके पीछे आकर खड़ा हो गया।

    अर्जुन रिया के ठीक पीछे आकर खड़ा हो गया। बालकनी में समुद्र की लहरों की आवाज आ रही थी। हल्की ठंडी हवा चल रही थी। रिया दोनों हाथ बालकनी की रेलिंग पर रखे खड़ी थी। अर्जुन ने धीरे से उसके कमर पर हाथ रखा और उसे अपनी तरफ खींच लिया। 

    रिया का शरीर थोड़ा कांप गया। 

    अर्जुन ने उसके कान में फुसफुसाते हुए कहा, 
    “रिया… हम यहाँ बाली में 15 दिन के लिए हैं। यहाँ कोई घर नहीं, कोई रिश्तेदार नहीं, कोई पड़ोसी नहीं। तू जितना चाहे चिल्ला ले… कोई नहीं सुनने वाला। तू भाग भी नहीं सकती। यहाँ से कहीं भागने का रास्ता भी नहीं है। 

    तो अब फैसला तेरा है — या तो इन 15 दिनों को मजे से बिताएगी… या फिर रो-रोकर, दुखी होकर बिताएगी। लेकिन इन 15 दिनों में तुझे मेरी हर इच्छा पूरी करनी पड़ेगी। समझ गई?” 

    रिया ने कुछ पल चुप रहकर गहरी सांस ली। फिर धीरे से बोली, 
    “ठीक है… लेकिन मेरी शर्त पर। गांड कभी नहीं। उसकी बात मत छेड़ना भी। बाकी… मैं कोशिश करूंगी।” 

    अर्जुन ने मुस्कुराते हुए उसके गाल चूमे, 
    “बहुत अच्छा। आज पहला दिन है… हम धीरे-धीरे शुरू करेंगे।” 

    —

    पहली रात – बाली का पहला राउंड

    अर्जुन ने रिया को अंदर बेडरूम में ले जाकर धीरे-धीरे उसके कपड़े उतारे। रिया ने भी उसका शर्ट और शॉर्ट्स उतारा। दोनों पूरी तरह नंगे हो गए। 

    अर्जुन ने रिया को बेड पर लिटाया। बहुत देर तक उसे किस किया — होंठ, गर्दन, स्तन, पेट, जांघें। रिया की सांसें तेज हो रही थीं। 

    जब अर्जुन ने लंड पर कंडोम चढ़ाया और लुब्रिकेंट लगाया, रिया ने कांपते हुए कहा, 
    “आज धीरे-धीरे… प्लीज… मैं पूरी कोशिश करूंगी।” 

    अर्जुन ने लंड का सिर रिया की चूत पर रखा और बहुत धीरे से दबाया। 

    1 इंच…
    रिया ने आँखें बंद कर लीं, “आह्ह… धीरे… अभी भी थोड़ा दर्द है…” 

    3 इंच…
    “आह्ह… मोटा है… जलन हो रही है… रुकिए एक सेकंड…” 

    5 इंच…
    रिया ने दांत भींच लिए, “आह्ह… आधा हो गया… गहरा लग रहा है… धीरे हिलाइए…” 

    अर्जुन ने धीरे-धीरे पूरा 10 इंच अंदर कर दिया। रिया का पेट हल्का-हल्का उभर रहा था। वह सिसक रही थी, लेकिन चीख नहीं रही थी। 

    “आह्ह… पूरा घुस गया… बहुत भरा हुआ लग रहा है… धीरे… आह्ह… हाँ… ऐसे ही…” 

    पहला राउंड 25 मिनट चला। 

    दूसरा राउंड में रिया ने खुद थोड़ी कमर हिलाई। 
    “आह्ह… अब थोड़ा तेज… लेकिन बहुत तेज मत…” 

    तीसरा राउंड में रिया ने पहली बार पूरा 10 इंच सह लिया। वह थोड़ी-थोड़ी चीख रही थी, लेकिन दर्द के साथ मजे की आवाज भी आने लगी थी। 

    “आह्ह… पूरा… आ गया… आह्ह… अर्जुन जी… धीरे… हाँ… ऐसे ही…” 

    अगले 4 दिन

    अगले चार दिन अर्जुन और रिया के बीच काफी ज्यादा सेक्स हुआ — कुल 32 बार। 

    – सुबह पूल के किनारे 
    – दोपहर बेडरूम में 
    – शाम बालकनी में 
    – रात को लाइट ऑफ करके 

    रिया अब धीरे-धीरे सहने लगी थी। वह नखरे तो करती थी, लेकिन चीखना-रोना कम हो गया था। हर बार 3-4 राउंड होते। कभी-कभी रिया खुद ऊपर चढ़कर बैठ जाती। 

    लेकिन हर बार जब अर्जुन गांड की बात छेड़ता, रिया तुरंत सख्त हो जाती, 
    “गांड नहीं। भूल भी जाओ उसकी। मैंने कहा था ना।” 

    अर्जुन भी 4 दिन तक गांड का नाम नहीं लेता था। वह सिर्फ रिया की चुत पर फोकस रखता था। 

    रिया धीरे-धीरे आदत डाल रही थी। चौथे दिन शाम को उसने खुद अर्जुन से कहा, 
    “आज 4 राउंड… लेकिन धीरे-धीरे…” 

    अर्जुन मुस्कुराया।

    चार दिन बीत चुके थे। रिया अब काफी हद तक खुल चुकी थी। वह खुद कंडोम पहनाने लगी थी और सेक्स में सक्रिय भाग ले रही थी। लेकिन गांड की बात आते ही वह अभी भी सख्त हो जाती थी।

    पांचवां दिन – शॉपिंग

    अर्जुन रिया को शॉपिंग ले गया। रिया ने बहुत महंगे 300 कंडोम, लुब्रिकेंट और 7 लग्जरी बिकिनी खरीदीं। जब वे वापस विला पहुंचे तो रिया ने अर्जुन से कहा, 
    “जो तुम्हें चाहिए वो खरीद लो।”

    अर्जुन ने उसकी कमर पकड़कर कान में फुसफुसाया, 
    “मुझे तुम्हारी गांड चाहिए।”

    रिया एक पल चुप रही, फिर बोली, 
    “ठीक है… लेकिन एक शर्त पर। मुझे देखना है कि कोई ऐसी लड़की जिसकी कभी गांड नहीं मारी गई हो, उसे कैसे मारा जाता है। मैं सामने बैठकर देखूंगी। अगर मुझे लगा कि मैं सह सकती हूँ, तो मैं मान जाऊंगी।”

    अर्जुन की आँखें चमक उठीं।

    उसी शाम – लिया का आगमन

    अर्जुन ने एक लोकल कॉल गर्ल बुलाई — लिया, 24 साल की, बहुत खूबसूरत, गोरी, slim body, छोटे-छोटे स्तन और टाइट गांड। लिया पहली बार गांड मरवा रही थी।

    लिया विला में आई। रिया बेड के पास एक आरामदायक कुर्सी पर बैठ गई। अर्जुन ने लिया को नंगा किया। लिया घुटनों के बल बेड पर थी।

    अर्जुन ने लंड पर कंडोम चढ़ाया और खूब सारा लुब्रिकेंट लगाया। फिर लिया की गांड के छेद पर लंड का मोटा सिर रख दिया।

    लिया का सेक्स सीन (विस्तृत)

    अर्जुन ने धीरे से दबाया।

    1 इंच अंदर गया। 
    लिया तुरंत कांप उठी, “आआह्ह… नहीं… बहुत मोटा… जलन हो रही है… आह्ह… निकालिए… दर्द…” 

    अर्जुन रुका नहीं। उसने और दबाया।

    3 इंच अंदर। 
    लिया जोर से चीख पड़ी, “आआआह्ह्ह… 3 इंच… मेरी गांड फट रही है… बहुत दर्द… आह्ह… रुक जाइए… मैं पहली बार… आंसू आ रहे हैं…” 

    लिया के आंसू बहने लगे। उसकी गांड का छेद बुरी तरह फैल गया था। अर्जुन ने लुब्रिकेंट और लगाया और धीरे-धीरे आगे बढ़ा।

    4.5 इंच… 5.5 इंच…
    लिया अब सिसक-सिसककर चीख रही थी, “आह्ह… आधा भी नहीं… पेट फाड़ रहा है… बहुत गहरा… आआह्ह… दर्द… मैं सह नहीं पा रही… आह्ह… और मत घुसाइए…” 

    अर्जुन ने पूरा 10 इंच अंदर करने की कोशिश की, लेकिन लिया की गांड इतनी टाइट थी कि सिर्फ 6.5 इंच तक ही गया। फिर उसने धीरे-धीरे हिलाना शुरू किया। हर धक्के पर लिया की चीखें कमरे में गूंज रही थीं।

    “आह्ह… नहीं… जोर से मत… आआह्ह… मेरी गांड चीर दी… आह्ह… दर्द… लेकिन… आह्ह… थोड़ा मज़ा भी आ रहा है… नहीं… मत रुकना… आआह्ह…” 

    अर्जुन ने लिया को 5 राउंड लगातार गांड मारा। हर राउंड में वह 6-7 इंच तक घुसा रहा। लिया रोती रही, चीखती रही, लेकिन आखिरी राउंड में वह खुद कमर हिलाने लगी।

    फिर अर्जुन ने लिया की चूत में 3 राउंड मारे। लिया पूरी तरह थककर बेड पर गिर पड़ी। उसकी गांड और चूत दोनों सूजी हुई, लाल और खून-रस से सनी हुई थीं।

    रिया का रिएक्शन

    रिया पूरे समय चुपचाप बैठी देखती रही। उसकी सांसें तेज हो रही थीं। उसकी चूत गीली हो चुकी थी। लिया की चीखें, दर्द और आखिर में मजे की आवाजें सुनकर रिया का चेहरा लाल हो गया था।

    अर्जुन ने लिया को पैसे देकर विदा किया। फिर रिया की तरफ मुड़ा।

    रिया ने धीरे से कहा, 
    “मैं… मैंने देख लिया… अब… अब मैं सोचूंगी…”

    रिया लिया को देखकर चुपचाप बैठी रही। उसने कुछ नहीं कहा। जब लिया चली गई तो रिया ने नखरे दिखाते हुए कहा, 
    “मैंने देख लिया… लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि मैं मान गई हूँ।” 

    अर्जुन ने मुस्कुराते हुए रिया को बेड पर खींच लिया। उस रात उसने सिर्फ रिया की चुत में ही सेक्स किया। तीन राउंड। रिया नखरे करती रही — “आह्ह… धीरे… बहुत तेज मत… आह्ह… बस… आज काफी…” लेकिन गांड की बात छेड़ते ही चुप हो जाती। 

    अर्जुन ने भी कुछ नहीं कहा। तीन राउंड के बाद वह रिया को चूमकर सो गया।

    —

    अगले दिन – सेक्स टॉय शॉपिंग

    सुबह अर्जुन रिया को लेकर एक लग्जरी एडल्ट शॉप गया। रिया शरमा रही थी। अर्जुन ने बहुत महंगे सेक्स टॉय खरीदे — 
    – एक 9 इंच लंबा, 3 इंच मोटा रियलिस्टिक डिल्डो 
    – वाइब्रेटिंग बट प्लग 
    – एनाल बीड्स 
    – और बहुत सारा लुब्रिकेंट 

    रिया ने कुछ नहीं कहा, बस शरमाकर सिर झुका लिया।

    उसी रात

    अर्जुन ने पहले रिया को नॉर्मल तरीके से चोदा। दो राउंड पूरे 10 इंच तक। रिया अब काफी सहने लगी थी। 

    “आह्ह… हाँ… पूरा… आह्ह… अच्छा लग रहा है…” 

    तीसरे राउंड के बाद अर्जुन ने रिया को घुटनों के बल मोड़ा। रिया समझ गई। 

    “नहीं… अर्जुन जी… गांड में मत… प्लीज… मैं नहीं चाहती…” रिया ने नखरे दिखाए। 

    अर्जुन ने लुब्रिकेंट लगाया और पहले अपनी उंगली डाली। फिर दूसरी। रिया सिसक रही थी, “आह्ह… नहीं… जलन हो रही है… मत करो…” 

    फिर अर्जुन ने डिल्डो लिया और धीरे-धीरे रिया की गांड में डालना शुरू किया। 

    1 इंच…
    रिया कांप उठी, “आह्ह… बहुत मोटा… निकालिए…” 

    3 इंच…
    “आआह्ह… दर्द… फट रही है… प्लीज… मत…” 

    अर्जुन रुका नहीं। धीरे-धीरे पूरा 9 इंच डाल दिया। रिया रो पड़ी, लेकिन अर्जुन ने धीरे-धीरे हिलाना शुरू कर दिया। 

    पहला राउंड डिल्डो से पूरा हो गया। 

    दूसरे राउंड में अर्जुन ने अपना लंड रिया की गांड में डाला। रिया मना कर रही थी, “नहीं… असली मत… आआह्ह… बहुत मोटा… फट जाएगी…” 

    लेकिन अर्जुन ने धीरे-धीरे पूरा 10 इंच डाल दिया। रिया चीख रही थी, लेकिन अर्जुन ने 2 राउंड पूरा गांड मारा। 

    फिर उसने रिया की चुत और मुंह में भी 2-2 राउंड किए। कुल 5-6 राउंड हो गए। रिया थककर बेड पर पड़ी थी, रो रही थी, लेकिन चुप थी। 

    —

    अगले दिन – रिया का गुस्सा

    सुबह रिया बहुत गुस्से में थी। वह अर्जुन से बात नहीं कर रही थी। नाश्ते के समय भी चुप रही। 

    अर्जुन ने पूछा, “क्या हुआ?” 

    रिया ने गुस्से से कहा, 
    “तुमने कल मेरी गांड जबरदस्ती मारी… मैंने मना किया था… फिर भी किया… मैं तुमसे नाराज हूँ।” 

    अर्जुन ने उसे मनाने की कोशिश की, लेकिन रिया पूरे दिन नाराज रही। 

    शाम को अर्जुन ने उसे बहुत प्यार से चूमकर मनाया। रिया थोड़ी नरम पड़ी। 

    दस दिन बाद – घर वापसी

    15 दिन पूरे होने के बाद दोनों घर वापस आ गए। रिया अब थोड़ी बदल चुकी थी, लेकिन गांड वाली बात पर अभी भी सख्त थी। 

    अर्जुन जानता था कि अब असली खेल घर आकर शुरू होगा।

  • सुहागरात की चीखें 2

    रिया अभी भी तकिए में मुंह छुपाए जोर-जोर से रो रही थी। उसकी चूत बुरी तरह सूजी हुई थी, लाल हो चुकी थी। अर्जुन बेड पर बैठा था, उसका 10 इंच का मोटा लंड अभी भी कंडोम लगाए खड़ा था, नसें फड़ी हुईं। 

    अर्जुन का गुस्सा अब चरम पर था। उसने अचानक रिया के बाल पकड़ लिए और उसे जबरदस्ती घुटनों के बल मोड़ दिया। रिया चीख पड़ी। 

    “नहीं! छोड़ो मुझे! मैं गांड नहीं दूंगी! अर्जुन जी… प्लीज… जबरदस्ती मत करो… मैं चिल्ला दूंगी… पूरा घर जाग जाएगा…” रिया ने हाथ-पैर मारते हुए विरोध किया। 

    अर्जुन ने रिया की कमर को मजबूती से पकड़ लिया और बोला, 
    “आज मेरी सुहागरात है रिया। तू मेरी बीवी है। गांड भी मेरी है। परंपरा पूरी होगी।” 

    रिया ने जोर से सिर हिलाया, आंसू बहाते हुए चीखी, 
    “मैं परंपरा नहीं मानती! मेरी गांड टाइट है… आपका लंड 4 इंच मोटा है… वो घुसेगा तो मैं फट जाऊंगी… खून निकलेगा… मैं मर जाऊंगी… मम्मी… बचाओ मुझे… प्लीज…” 

    सुधा माँ ने तुरंत आगे बढ़कर अर्जुन का हाथ पकड़ लिया। 
    “दामाद जी… प्लीज… बेटी की हालत देखिए… उसकी चुत अभी भी सूजी हुई है… गांड में बिल्कुल नहीं सह पाएगी… आज छोड़ दीजिए… मैं… मैं तैयार हूँ… मेरी गांड ले लीजिए… जितना मन हो…” 

    अर्जुन ने सुधा माँ को घूरा और बोला, 
    “सास जी, आप बार-बार बीच में क्यों पड़ रही हैं? ये मेरी पत्नी है। मैं आज उसकी गांड लूंगा।” 

    रिया रोते हुए बोली, 
    “मम्मी… आप मत बोलो… ये आदमी मुझे मार डालेगा… मैं गांड नहीं दूंगी… कभी नहीं… अर्जुन जी… मेरी माँ के साथ कर लो… उनकी गांड ले लो… लेकिन मेरी मत छुओ…” 

    अर्जुन ने रिया की कमर को और कसकर पकड़ा। उसने लंड पर नया कंडोम चढ़ाया, खूब सारा लुब्रिकेंट लगाया। फिर रिया की गांड के छेद पर लंड का मोटा सिर रख दिया। 

    रिया जोर से चीख पड़ी, 
    “नहीं! छोड़ो! आआह्ह… मत दबाओ… बहुत डर लग रहा है… मम्मी… प्लीज… रोकिए…” 

    अर्जुन ने धीरे से दबाया। 

    सिर्फ 1 इंच अंदर गया। 

    रिया का पूरा शरीर कांप उठा। 
    “आआह्ह… दर्द… गांड फट रही है… निकालिए… प्लीज… सिर्फ सिर ही बहुत मोटा है… आह्ह… जलन हो रही है… मैं सह नहीं पा रही…” रिया रो पड़ी, हाथ-पैर मारने लगी। 

    अर्जुन ने और दबाया। अब 3 इंच अंदर चला गया। 

    रिया जोर-जोर से चीखने लगी, 
    “आआआह्ह्ह… नहीं… 3 इंच… बहुत दर्द… मेरी गांड चीर दी… अर्जुन जी… प्लीज रुक जाइए… मैं मर रही हूँ… आह्ह… और मत घुसाइए… बहुत मोटा… फट जाएगी…” 

    रिया के आंसू बह रहे थे। वह बार-बार कमर हिला रही थी, नखरे कर रही थी, “मम्मी… बचाओ… मैं रो रही हूँ… बहुत जलन… प्लीज…” 

    सुधा माँ ने अर्जुन के हाथ पकड़कर रोते हुए कहा, 
    “दामाद जी… बस करिए… बेटी की हालत देखिए… वो सह नहीं पा रही… मेरी गांड ले लीजिए… प्लीज… बेटी को छोड़ दीजिए…” 

    अर्जुन ने सुधा माँ को धक्का देकर अलग किया और बोला, 
    “आप चुप रहिए सास जी। आज मैं रिया की गांड लूंगा।” 

    उसने और दबाया। अब 4.5 इंच अंदर चला गया। 

    रिया सिसक-सिसककर चीख रही थी, 
    “आह्ह… आधा भी नहीं… पेट फाड़ रहा है… बहुत गहरा… आआह्ह… निकालिए… मैं सह नहीं पा रही… मम्मी… रो रही हूँ… बहुत दर्द… प्लीज… बस कर दीजिए…” 

    रिया की गांड का छेद बुरी तरह फैल गया था। हल्का खून भी रिसने लगा था। वह लगातार रो रही थी और नखरे कर रही थी। 

    “मैंने कहा ना… मेरी गांड मत… मैं मना करती हूँ… आप जबरदस्ती कर रहे हो… मैं आपको कभी माफ नहीं करूंगी…” 

    अर्जुन ने रिया की कमर को और मजबूती से पकड़ लिया और धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगा। 

    5 इंच… 5.5 इंच…

    रिया अब लगभग चीखते-चीखते बेहोश होने लगी थी। 
    “आआह्ह… बस… काफी… आधा भी नहीं… मेरी गांड फट गई… आह्ह… दर्द… बहुत जलन… प्लीज… निकालिए…” 

    सुधा माँ रोते हुए अर्जुन के पैरों में गिर पड़ीं, 
    “दामाद जी… प्लीज… मेरी बेटी को मत तोड़िए… मैं… मैं अपनी गांड देती हूँ… आप मुझे जितना चाहे चोदिए… लेकिन बेटी को छोड़ दीजिए…” 

    अर्जुन ने रिया की गांड में लंड को आधा ही रखकर रुक गया। रिया सिसक रही थी। उसकी हालत बेहद खराब थी। 

    अर्जुन ने गहरी सांस ली और बोला, 
    “ठीक है… आज रिया की गांड आधी ही लेता हूँ… लेकिन कल पूरी लूंगा।” 

    रिया ने कमजोर आवाज में रोते हुए कहा, 
    “कल भी नहीं… कभी नहीं… मैं गांड नहीं दूंगी…” 

    सुधा माँ ने बेटी को गले लगा लिया। अर्जुन लंड आधा ही गांड में रखे हुए बैठा रहा। कमरे में सिर्फ रिया की सिसकियाँ और सुधा माँ की दबी हुई रोने की आवाज गूंज रही थी।

    अर्जुन ने रिया की गांड में अपना लंड आधा ही रखा हुआ था। रिया सिसक-सिसककर रो रही थी, उसका पूरा शरीर कांप रहा था। उसकी गांड का छेद बुरी तरह फैला हुआ था, हल्का खून भी रिस रहा था। 

    “आह्ह… बस… काफी… निकालिए… मेरी गांड फट गई… आआह्ह… दर्द… बहुत जलन… प्लीज… अर्जुन जी…” रिया ने कमजोर आवाज में रोते हुए कहा। 

    अर्जुन ने एक गहरी सांस ली। उसने धीरे से लंड बाहर निकाला। रिया ने राहत की सांस ली, लेकिन उसकी आँखों में अभी भी डर था। 

    अर्जुन ने सुधा माँ की तरफ देखा। सुधा माँ बेटी के सिरहाने बैठी थीं, उनके हाथ कांप रहे थे। अर्जुन ने ठंडे स्वर में कहा, 
    “ठीक है… आज रिया की गांड आधी ही लेता हूँ। लेकिन अब तुम्हारी बारी है सास जी। मेरी सुहागरात पूरी होनी चाहिए।” 

    सुधा माँ ने सिर झुका लिया। उनकी आवाज कांप रही थी, 
    “दामाद जी… प्लीज… बेटी की हालत देखिए… उसकी चूत और गांड दोनों सूज गई हैं… आज छोड़ दीजिए… मैं… मैं तैयार हूँ… मेरी चूत और गांड… जितना मन हो ले लीजिए… लेकिन बेटी को मत छुईए…” 

    रिया ने माँ को पकड़कर रोते हुए कहा, 
    “मम्मी… आप मत… मैं नहीं सह पाऊंगी अगर आपकी हालत खराब हुई तो… प्लीज… अर्जुन जी… मेरी माँ को मत छुओ…” 

    अर्जुन ने सुधा माँ का हाथ पकड़कर उन्हें बेड पर घुटनों के बल मोड़ दिया। सुधा माँ की साड़ी, पेटीकोट और पैंटी पहले ही खुली हुई थी। उनकी मोटी, गोरी गांड और सूजी हुई चूत पूरी तरह नंगी थी। 

    अर्जुन ने नया कंडोम खोला, लंड पर चढ़ाया, खूब सारा लुब्रिकेंट लगाया। फिर सुधा माँ की चूत पर लंड का सिर रख दिया। 

    “आह्ह… दामाद जी… धीरे… मेरी उम्र 46 है… बहुत दिन बाद… आआह्ह… सिर्फ सिर ही… बहुत मोटा है… जलन हो रही है…” सुधा माँ सिसक पड़ीं। 

    अर्जुन ने धीरे से दबाया — 1 इंच अंदर गया। 

    सुधा माँ कांप उठीं, “आह्ह… दर्द… बहुत जलन… धीरे… आह्ह… 3 इंच… आआह्ह… बहुत मोटा… मेरी चूत फट रही है… प्लीज… रुक जाइए…” 

    अर्जुन ने और दबाया — 4 इंच… 5 इंच…

    सुधा माँ जोर से सिसकने लगीं, “आह्ह… आधा भी नहीं… पेट फाड़ रहा है… दामाद जी… बहुत गहरा… आआह्ह… और मत घुसाइए… मैं तेरी सास हूँ… आह्ह…” 

    पहला राउंड चूत में सिर्फ 5.5 इंच तक ही गया। अर्जुन ने धीरे-धीरे हिलाना शुरू किया। हर छोटे धक्के पर सुधा माँ सिसक रही थीं। रिया बगल में लेटी रो रही थी, “मम्मी… आपकी हालत खराब हो रही है… प्लीज… रुक जाइए…” 

    पहला राउंड 40 मिनट चला। सुधा माँ की चूत लाल और सूजी हो गई। 

    दूसरा राउंड शुरू हुआ। अर्जुन ने सुधा माँ को मिशनरी पोजीशन में लिटाया, उनके होंठ चूसते हुए लंड फिर से चूत में डाला। 

    “आह्ह… नहीं… फिर से… आआह्ह… 1 इंच… दर्द… 3 इंच… आह्ह… बहुत मोटा… मैं सह नहीं पा रही… दामाद जी… प्लीज धीरे…” सुधा माँ रो रही थीं। 

    अर्जुन ने 5.5 इंच तक ही घुसाया। सुधा माँ बार-बार सिसक रही थीं। 

    तीसरा राउंड चूत में भी आधा ही। 

    फिर अर्जुन ने सुधा माँ को घुटनों के बल मोड़ दिया। अब गांड की बारी। 

    “आह्ह… गांड में मत… आआह्ह… 1 इंच… फट रही है… दामाद जी… बहुत मोटा… आह्ह… 3 इंच… जलन… मैं रो रही हूँ… प्लीज…” 

    अर्जुन ने सुधा माँ की गांड में भी 5 इंच तक ही घुसाया। तीन-तीन राउंड — चूत और गांड — पूरे होने में रात के 3:30 बज गए। सुधा माँ की हालत बेहद खराब थी। उनकी चूत और गांड दोनों सूजी हुई, लाल, खून रिस रहा था। वह थककर बेड पर गिर पड़ी थीं। 

    अर्जुन ने अब रिया की तरफ देखा। रिया अभी भी रो रही थी। 

    “अब फिर तेरी गांड की बारी है रिया।” 

    रिया ने जोर से सिर हिलाया, 
    “नहीं! मैंने कहा ना… कभी नहीं! मेरी गांड मत छुओ… मम्मी की हालत देखिए… आपने उन्हें फाड़ दिया… मुझे भी मत फाड़िए… प्लीज… मैं मना करती हूँ…” 

    अर्जुन ने रिया को फिर घुटनों के बल मोड़ने की कोशिश की। रिया हाथ-पैर मारने लगी, 
    “छोड़ो मुझे! मैं चिल्ला दूंगी… मैं गांड नहीं दूंगी… मम्मी… बचाओ…” 

    सुधा माँ ने कमजोर आवाज में कहा, 
    “दामाद जी… बेटी को मत… मैं फिर तैयार हूँ… मेरी गांड फिर ले लीजिए… लेकिन बेटी को छोड़ दीजिए…” 

    रिया रोते हुए बोली, 
    “मम्मी… आप चुप रहिए… ये आदमी मुझे मार डालेगा… मैं गांड नहीं दूंगी… कभी नहीं…” 

    अर्जुन ने रिया की कमर पकड़ ली। लंड फिर से रिया की गांड पर रख दिया। 

    “आआह्ह… नहीं… 1 इंच… दर्द… आआह्ह… 3 इंच… फट रही है… अर्जुन जी… प्लीज… मैं रो रही हूँ… मम्मी… देखिए… मैं सह नहीं पा रही…”

    रिया अभी भी बेड पर करवट लेकर लेटी हुई थी। उसकी चूत और गांड दोनों बुरी तरह सूजी हुई थीं। वह हल्के-हल्के सिसक रही थी। अर्जुन बेड के किनारे बैठा था, उसका लंड अभी भी कंडोम में था और आधा खड़ा था। 

    रिया ने आंसू पोछते हुए फिर से सख्त स्वर में कहा, 
    “सुन लो अर्जुन जी… अगर आपने फिर से जबरदस्ती की… चाहे चुत हो या गांड… तो मैं चिल्ला दूंगी। पूरा घर, पूरा मोहल्ला, सारे रिश्तेदार जाग जाएंगे। मैं सबको बता दूंगी कि मेरी सुहागरात में मेरे पति मुझे मार रहे थे। आपकी इज्जत, आपका नाम, सब बर्बाद हो जाएगा।” 

    अर्जुन का चेहरा तन गया। वह समझ गया कि रिया अब गंभीर है। अगर उसने चिल्लाया तो वाकई बड़ी बदनामी हो जाएगी। 

    अर्जुन ने गहरी सांस ली और बोला, 
    “ठीक है रिया… मैं जबरदस्ती नहीं करूंगा। लेकिन तू मेरी बीवी है… सुहागरात है… कम से कम चुत तो दे दे।” 

    रिया ने सिर हिलाया, 
    “धीरे-धीरे… और सिर्फ चुत… गांड की बात मत छेड़ना। वरना मैं अभी चिल्ला दूंगी।” 

    अगले 3-4 दिन की मजबूरी

    अगले तीन दिन अर्जुन को पूरी तरह काबू में रहना पड़ा। रिया मायके जाने वाली थी, इसलिए उसने धमकी दे रखी थी। 

    दूसरी रात
    अर्जुन ने रिया को बहुत धीरे-धीरे चूमा। उसके स्तनों को सहलाया, चूत पर उंगली फेरी। जब लंड डाला तो सिर्फ 3 इंच ही घुसाया। 

    रिया ने आँखें बंद करके कहा, 
    “आह्ह… धीरे… अभी भी दर्द है… और मत घुसाइए… बस इतना ही… आह्ह…” 

    अर्जुन को मजबूरी में रुकना पड़ा। 

    तीसरी रात
    इस बार अर्जुन ने 4 इंच तक घुसाया। रिया फिर भी नखरे कर रही थी, 
    “बहुत मोटा है… जलन हो रही है… प्लीज… और मत… मैं मायके जा रही हूँ… वहाँ भी दर्द रहेगा तो लोग पूछेंगे…” 

    अर्जुन गुस्से में था, लेकिन चुप रहा। 

    चौथी रात
    रिया कल मायके जाने वाली थी। अर्जुन ने आखिरी मौका समझकर रिया को चोदा। इस बार उसने 5 इंच तक घुसाया, लेकिन बहुत धीरे-धीरे। रिया बार-बार मना कर रही थी, 
    “आह्ह… काफी है… और मत… मैं सह नहीं पा रही… गांड की बात मत सोचिए भी…” 

    अर्जुन ने मजबूरन रुक जाना पड़ा। 

    रिया का मायके जाना

    पांचवें दिन सुबह रिया मायके चली गई। जाते समय उसने अर्जुन से साफ-साफ कहा, 
    “4 दिन बाद आऊंगी। तब तक सोच लीजिए। अगर आपने फिर से जबरदस्ती की… खासकर गांड में… तो मैं सबको बता दूंगी।” 

    अर्जुन ने सिर्फ सिर हिला दिया, लेकिन अंदर से उसका गुस्सा और भूख दोनों बढ़ रहे थे। 

    अब घर में सिर्फ अर्जुन अकेला था। वह सोच रहा था — रिया जब वापस आएगी तो वह कैसे अपनी जिद पूरी करेगा।

  • सुहागरात की चीखें

    अध्याय 1: सुहागरात की परंपरा – जब दुल्हन की माँ भी मजबूर हुई

    रात के ठीक 11:40 बज चुके थे। मास्टर बेडरूम में सिर्फ हल्की लाल रोशनी जल रही थी। गुलाब की ताज़ा पंखुड़ियाँ बेड पर बिखरी हुई थीं। हवा में अगरबत्ती और गुलाब की महक घुली हुई थी। 

    रिया (22 साल, पूरी तरह कुँवारी दुल्हन) लाल लहंगे में घूंघट निकाले बेड पर बैठी थी। उसकी सांसें तेज चल रही थीं, हाथ कांप रहे थे। उसकी माँ सुधा (46 साल) बेटी का हाथ थामे बगल में बैठी थीं। अर्जुन (28 साल) कुर्ता-पजामा में खड़ा था, उसकी आँखों में भूख साफ झलक रही थी। 

    अर्जुन ने पहले रिया का घूंघट हटाया। रिया शरमा कर सिर झुका ली। अर्जुन ने रिया के होंठों को अपने होंठों से छुआ, धीरे-धीरे किस करना शुरू किया। उसकी जीभ रिया के मुंह में घुस गई। रिया ने मुंह हटाने की कोशिश की। 

    “उम्म्म… नहीं… अर्जुन जी… शरम आ रही है… मम्मी के सामने… प्लीज… छोड़ दीजिए…” रिया ने नखरा दिखाते हुए कहा। 

    अर्जुन ने रिया की साड़ी की पल्लू धीरे-धीरे खींची। सुधा माँ ने खुद बेटी की ब्लाउज के हुक खोले। रिया की गोरी, नाजुक ब्रा बाहर आई। अर्जुन ने ब्रा का हुक खोला। रिया के छोटे-छोटे, गुलाबी निप्पल वाले स्तन बाहर आ गए। अर्जुन ने एक स्तन को हाथ में लेकर मसलना शुरू किया और निप्पल को चूसने लगा। 

    “आह्ह… नहीं… अर्जुन जी… बहुत शरम आ रही है… मम्मी देख रही हैं… प्लीज… छोड़ दीजिए… आह्ह…” रिया ने कमर हिलाकर नखरा किया। 

    अर्जुन ने रिया की साड़ी और पेटीकोट भी खोल दिया। अब रिया सिर्फ पैंटी में थी। उसकी टाइट, पूरी तरह बाल-रहित, गुलाबी चूत पैंटी के ऊपर से साफ दिख रही थी। अर्जुन ने खुद का कुर्ता और पजामा उतार दिया। 

    उसका 10 इंच लंबा और 4 इंच मोटा लंड बाहर निकला — काला, मोटा, नसें उभरी हुईं, सिर पर मोटा फोड़ा चमक रहा था। रिया ने देखकर सिहर उठी। 

    “नहीं… ये… ये बहुत बड़ा है… मैं नहीं ले पाऊंगी… मम्मी… प्लीज रोकिए… मैं डर रही हूँ…” रिया ने रोते हुए कहा। 

    सुधा माँ ने बेटी को चुप कराया, “बेटी… परंपरा है… सह ले… मैं हूँ ना…” 

    अर्जुन ने रिया को बेड पर लिटा दिया। उसने रिया की पैंटी भी धीरे-धीरे उतार दी। अब रिया पूरी नंगी थी। अर्जुन ने रिया के होंठों को फिर से चूमा, जीभ अंदर डाली। एक हाथ से रिया की चूत पर उंगली फेरनी शुरू की। 

    “आह्ह… नहीं… वहाँ मत छुओ… आह्ह… गीली हो रही हूँ… शरम आ रही है… अर्जुन जी… प्लीज… धीरे…” रिया नखरे दिखा रही थी, कमर हिला रही थी। 

    अर्जुन ने कंडोम का पैकेट खोला। लंड पर कंडोम चढ़ाया। फिर लुब्रिकेंट की बोतल उठाई और खूब सारा लुब्रिकेंट लंड पर और रिया की चूत पर लगाया। 

    अर्जुन ने रिया की टांगें फैला दीं। लंड का मोटा, गर्म सिर रिया की चूत के होंठों पर रख दिया। रिया कांप उठी। 

    “नहीं… अर्जुन जी… प्लीज… अभी मत… मैं तैयार नहीं हूँ… बहुत डर लग रहा है… मम्मी… बचाओ…” रिया ने कमर पीछे खींचने की कोशिश की। 

    अर्जुन ने धीरे-धीरे दबाना शुरू किया। 

    सिर्फ 1 इंच अंदर गया। 

    रिया की आँखें फट गईं। 
    “आआह्ह… दर्द… बहुत जलन हो रही है… निकालिए… प्लीज… सिर्फ सिर ही बहुत मोटा है… आह्ह… मेरी चूत फट रही है…” रिया रो पड़ी। 

    अर्जुन रुका नहीं। उसने थोड़ा और दबाया। अब 3 इंच अंदर चला गया। 

    रिया जोर से चीख पड़ी। 
    “आआआह्ह्ह… नहीं… 3 इंच भी नहीं… बहुत दर्द… मैं रो रही हूँ… अर्जुन जी… प्लीज रुक जाइए… मेरी चूत चीर दी… आह्ह… और मत दबाइए…” 

    रिया के आंसू बहने लगे। वह बार-बार कमर हिला रही थी, नखरे कर रही थी, “मम्मी… प्लीज… रोकिए… मैं सह नहीं पा रही… बहुत मोटा… जलन हो रही है…” 

    अर्जुन ने रिया के होंठों को फिर से चूस लिया और धीरे-धीरे और दबाने लगा। 

    अब 4 इंच… 5 इंच…

    रिया सिसक रही थी। 
    “आह्ह… नहीं… आधा भी नहीं… पेट फाड़ रहा है… बहुत गहरा जा रहा है… प्लीज… बस… मैं कुँवारी हूँ… आआह्ह… और मत घुसाइए…” 

    पहले राउंड में पूरा लंड नहीं घुसा। सिर्फ 5 इंच (आधा) ही अंदर गया। रिया की चूत पूरी तरह फैल गई थी। पेट पर हल्का उभार दिख रहा था। अर्जुन ने धीरे-धीरे हिलाना शुरू किया। हर छोटे-छोटे धक्के पर रिया चीख रही थी। 

    “आह्ह… नहीं… जोर से मत… आह्ह… बहुत दर्द… मैं झड़ रही हूँ… प्लीज… निकालिए…” 

    पहला राउंड पूरा होने में 35 मिनट लगे। रिया की चूत लाल और सूजी हुई थी। वह रो-रोकर थक गई थी। 

    दूसरा राउंड शुरू हुआ। इस बार अर्जुन थोड़ा तेज हुआ, लेकिन फिर भी पूरा लंड नहीं घुसा। सिर्फ 6 इंच तक ही गया। रिया लगातार नखरे कर रही थी, “बस… काफी हो गया… मैं और नहीं… आह्ह… मेरी चूत फट गई… प्लीज रुक जाइए…” 

    दूसरे राउंड के बाद रिया लगभग बेहोश हो गई।

    अर्जुन ने लंड बाहर निकाला। कंडोम में वीर्य भरा हुआ था। उसने तीसरा कंडोम खोला और बोला,
    “अब मैं गांड लूंगा।”

    रिया डर गई, “नहीं… गांड में बिल्कुल नहीं… वहाँ बहुत टाइट है… मैं मर जाऊंगी… प्लीज… मम्मी… मना करो…”

    अर्जुन जिद पर अड़ा था।

    सुधा माँ ने रिया को देखा और बोली, “बेटी… परंपरा है… गांड भी देनी पड़ेगी… सह ले…”

    रिया गुस्से में बोली, “मेरे से नहीं होगा… जो ऐसा ही है तो तू ही मरवा ले अपनी गांड… मैं नहीं करूंगी…”

    सुधा माँ ने तुरंत मना किया, “रिया… चुप… ऐसी बात मत बोल… ये गलत है…”

    अर्जुन ने गुस्से से कहा, “आज मेरी सुहागरात है… मैं क्या सो जाऊं? परंपरा है… गांड लेनी ही पड़ेगी…”

    रिया ने फिर रोते हुए कहा, “मेरी माँ के साथ कर लो… मुझे मत… प्लीज… मेरी माँ को ले लो…”

    अर्जुन ने रिया को जबरदस्ती घुटनों के बल मोड़ दिया। रिया चीख रही थी, “नहीं… जबरदस्ती मत… मम्मी… बचाओ… आह्ह… गांड में मत…”

    रिया की चुत अब पूरी तरह सूज चुकी थी। वह बेड पर करवट लेकर लेटी हुई थी, दोनों हाथों से अपनी चूत को ढककर, आंसू बहा रही थी। उसकी सांसें भारी हो रही थीं। अर्जुन अभी भी खड़ा था, उसका 10 इंच का मोटा लंड कंडोम लगाए हुए, पूरी तरह खड़ा और चमक रहा था।

    सुधा माँ बेटी के सिरहाने बैठी थीं, बेटी के बालों में हाथ फेर रही थीं।

    अर्जुन ने गहरी सांस ली और बोला,
    “अब गांड की बारी है रिया। परंपरा है… दुल्हन की गांड भी दामाद को मिलनी चाहिए।”

    रिया तुरंत सिहर उठी। उसने घुटनों को छाती से सटाकर बैठने की कोशिश की और चीखते हुए बोली,
    “नहीं! बिल्कुल नहीं! गांड में मैं नहीं दूंगी… कभी नहीं! आप पागल हो गए हो क्या? मेरी चुत ही फट गई है… गांड में डालोगे तो मैं मर जाऊंगी!”

    अर्जुन की आँखें संकरी हो गईं।
    “रिया, आज मेरी सुहागरात है। परंपरा पूरी करनी पड़ेगी। तू मना मत कर।”

    रिया गुस्से में रोते हुए बोली,
    “परंपरा का नाम लेकर मेरी जान ले लोगे? मेरी चूत अभी भी जल रही है… आधा लंड भी नहीं घुसा था… और अब गांड? नहीं… मैं मना करती हूँ! मम्मी… आप बोलिए ना… ये आदमी मुझे मार डालेगा!”

    सुधा माँ ने बीच में पड़ते हुए कहा,
    “दामाद जी… प्लीज… बेटी अभी बहुत छोटी है… उसकी हालत देखिए… चुत सूज गई है… गांड में तो बिल्कुल नहीं सह पाएगी… आज छोड़ दीजिए…”

    अर्जुन ने सुधा माँ की तरफ देखा और तीखे स्वर में बोला,
    “सास जी, आप चुप रहिए। ये मेरी पत्नी है। आज की रात मैं जो चाहूंगा वो होगा। रिया, अब घुटनों के बल हो जा।”

    रिया ने जोर से सिर हिलाया, आंसू पोछते हुए चीखी,
    “मैं नहीं हूंगी! आप मुझे जबरदस्ती करेंगे तो मैं चिल्लाऊंगी… पूरा घर जाग जाएगा… मैं गांड नहीं मरने दूंगी… चाहे आप मुझे मार ही डालें!”

    अर्जुन ने बेड पर घुटनों के बल चढ़ते हुए कहा,
    “तू मेरी बीवी है… सुहागरात है… गांड भी मेरी है। परंपरा हजारों साल पुरानी है। तू मना नहीं कर सकती।”

    रिया ने तकिए को सीने से चिपकाकर पीछे हटते हुए बोली,
    “परंपरा मेरी जान ले रही है तो भाड़ में जाए परंपरा! मेरी गांड टाइट है… आपका लंड 4 इंच मोटा है… वो घुसेगा तो मैं फट जाऊंगी… खून निकलेगा… मैं सह नहीं पाऊंगी… प्लीज… आज छोड़ दीजिए… कल देख लेंगे…”

    सुधा माँ ने फिर बीच में आने की कोशिश की,
    “दामाद जी… बेटी रो रही है… उसकी इज्जत रखिए… आज चुत में ही काफी हो गया… गांड की बात कल करें…”

    अर्जुन गुस्से में बोला,
    “सास जी, आप बेटी को बिगाड़ रही हैं। आज सुहागरात है… मैं सो नहीं जाऊंगा। रिया, अब काफी नाटक कर चुकी है। पलट!”

    रिया ने जोर से रोते हुए कहा,
    “मैं पलटूंगी नहीं! आप मेरी माँ के साथ कर लीजिए… उनकी गांड लीजिए… जितना मन हो… लेकिन मेरी गांड मत छुईए… मैं बिल्कुल नहीं दूंगी… मैं मना करती हूँ… मैं रो रही हूँ… देखिए मेरी हालत…”

    रिया ने अपनी सूजी हुई चूत अर्जुन को दिखाते हुए कहा,
    “देखिए… कितनी लाल और सूजी हुई है… आधा लंड भी सह नहीं पाई… गांड में डालोगे तो मैं अस्पताल पहुंच जाऊंगी… प्लीज… मम्मी… आप समझाइए ना…”

    सुधा माँ ने अर्जुन से हाथ जोड़ते हुए कहा,
    “दामाद जी… मेरी बेटी अभी बच्ची है… आज रात उसे छोड़ दीजिए… मैं… मैं तैयार हूँ… मेरी गांड ले लीजिए… लेकिन बेटी को मत छुईए…”

    अर्जुन ने सुधा माँ को घूरते हुए कहा,
    “सास जी, आपकी बेटी मेरी बीवी है। उसकी गांड भी मेरी है। आज मैं उसे गांड मारकर ही सोऊंगा।”

    रिया फिर चीख पड़ी,
    “नहीं! मैं कभी नहीं दूंगी! आप जबरदस्ती करेंगे तो मैं आपको कभी माफ नहीं करूंगी… मैं चिल्ला-चिल्लाकर पूरा घर जगा दूंगी… मेरी गांड मत छुओ… प्लीज… मम्मी… रो रही हूँ… देखिए…”

    रिया ने तकिए में मुंह छुपा लिया और जोर-जोर से रोने लगी।

    अर्जुन बेड पर बैठ गया, लंड अभी भी खड़ा था। उसने गुस्से से कहा,
    “ठीक है… आज नहीं मारूंगा… लेकिन कल जरूर मारूंगा। और परसों भी। और जब तक तू मेरी गांड नहीं देगी, मैं तुझे चुत भी नहीं दूंगा।”

    रिया ने सिसकते हुए सिर हिलाया,
    “जो करना है कर लो… लेकिन गांड नहीं… कभी नहीं…”

    सुधा माँ ने बेटी को गले लगाकर चुप कराया।

    कमरे में भारी सन्नाटा छा गया। अर्जुन का लंड अभी भी खड़ा था, लेकिन वह बेड पर बैठकर गुस्से से तीनों को देख रहा था।

    रिया अभी भी रो रही थी और बार-बार दोहरा रही थी,
    “मेरी गांड नहीं… कभी नहीं… मैं मना करती हूँ…”

  • तीन बहुओं का घोड़ा 12

    अध्याय 12: तीनों बहुओं के साथ रूस हनीमून (विस्तृत)

    सुहागरात के 12 दिन बाद विक्रम ने फैसला किया कि अब तीनों बहुओं को साथ लेकर हनीमून मनाएगा। मामा-मामी को भी मना लिया। destination चुना — Russia (Saint Petersburg + Moscow)। प्राइवेट जेट से उड़ान भरी।

    एयरपोर्ट और फ्लाइट

    प्रिया, नेहा और अदिति तीनों ने खूबसूरत व्हाइट ड्रेस पहनी थी। अदिति अभी भी थोड़ी शरमाती हुई थी। जेट में विक्रम ने तीनों को बिजनेस क्लास सीट्स पर बिठाया। उड़ान के 2 घंटे बाद लाइट्स डिम कर दी गईं।

    विक्रम ने अदिति की ड्रेस ऊपर खींची और उंगली उसकी चुत में डाल दी। 
    “नहीं… विक्रम जी… यहां मत… लोग देख लेंगे… आह्ह… उंगली मत घुमाओ… अभी भी सूजन है…” अदिति फुसफुसाई। 

    प्रिया ने विक्रम के लंड को पैंट के ऊपर से सहलाया, “पति जी… रूस पहुंचकर पूरा एंजॉय करेंगे… अभी थोड़ा रुकिए…” 

    सेंट पीटर्सबर्ग पहुंचना

    विक्रम ने Neva River के किनारे एक लग्जरी प्राइवेट विला बुक किया था — 5 बेडरूम, प्राइवेट सौना, इनडोर पूल, और पूरा फ्लोर सिर्फ उनके लिए। बाहर बर्फ की हल्की परत, अंदर गर्मी।

    पहली रात विला में। 

    तीनों को विक्रम ने एक साथ नंगी कर दिया। कमरे में फायरप्लेस जल रहा था, रोशनी नरम। 

    विक्रम ने सबसे पहले अदिति को उठाकर बेड पर लिटाया। 
    “आज मैं तुम तीनों को रूस की ठंड में गर्म करूंगा…” 

    अदिति कांपते हुए बोली, “विक्रम जी… प्लीज धीरे… अभी भी मेरी चुत पूरी तरह ठीक नहीं हुई है… आह्ह…” 

    विक्रम ने कंडोम लगाया, लुब्रिकेंट लगाया और एक जोरदार धक्का मारा। पूरा लंड अदिति की चुत में समा गया। 

    “आआआह्ह्ह… नहीं… फट गई… इतना मोटा… पेट फाड़ रहा है… विक्रम जी… रुक जाओ… आह्ह… और मत दबाओ… मैं रो रही हूँ…” अदिति चीख पड़ी। 

    प्रिया और नेहा दोनों अदिति के स्तन चूस रही थीं। विक्रम ने 25 मिनट तक अदिति को जोर-जोर से चोदा। अदिति 4 बार झड़ गई। 

    फिर नेहा की बारी — उसे डॉगी स्टाइल में मोड़कर गांड मारी। 
    “नहीं… गांड में मत… आह्ह… फट रही है… विक्रम जी… बहुत जोर से… आआह्ह… मेरी गांड चीर दी… हाँ… और गहरा… मत रुकना…” 

    प्रिया को विक्रम ने खड़े-खड़े उठाकर चोदा, उसकी टांगें अपनी कमर पर लपेटी हुईं। 
    “हाँ पति जी… जोर से… मेरी चुत फाड़ दो… आह्ह… रूस आकर भी आपका लंड नहीं थकता… और तेज…” 

    रात भर चार राउंड चले। तीनों की चुत और गांड फिर से सूज गईं, लेकिन अब वे मजे ले रही थीं।

    दूसरे दिन – सेंट पीटर्सबर्ग घूमना + हिडन प्ले

    सुबह तीनों को Hermitage Museum ले गया। अदिति ने लंबी कोट पहनी थी, अंदर कुछ नहीं। विक्रम ने रिमोट वाइब्रेटर उसकी चुत में डाल रखा था। 

    म्यूजियम में घूमते हुए विक्रम ने रिमोट ऑन किया। 
    “आह्ह… विक्रम जी… यहां मत… लोग देख लेंगे… आह्ह… वाइब्रेटर तेज मत करो… मेरी चुत गीली हो रही है… प्लीज… मैं खड़ी नहीं रह पा रही…” अदिति दीवार का सहारा लेकर कांप रही थी। 

    नेहा ने हंसते हुए कहा, “बहन… सह ले… मैंने कल रात भी यही सहा था।” 

    शाम को Neva River पर प्राइवेट यॉट बुक किया। यॉट पर तीनों नंगी हो गईं। ठंडी हवा में विक्रम ने उन्हें यॉट के डेक पर चोदा। 

    अदिति को रेलिंग पकड़वाकर पीछे से चोदा। 
    “नहीं… बाहर ठंड है… आह्ह… लंड गर्म है… मेरी चुत जल रही है… विक्रम जी… और जोर से… आआह्ह… मैं समुद्र में झड़ जाऊंगी…” 

    तीसरे दिन – Moscow ट्रांसफर

    Moscow पहुंचकर Red Square के पास 5 स्टार होटल में Presidential Suite लिया। 

    रात को सौना रूम में तीनों के साथ। गर्मी में पसीने से तर तीनों को विक्रम ने एक-एक करके चोदा। 

    प्रिया: “हाँ पति जी… सौने की गर्मी में भी आपका लंड और गर्म है… फाड़ दो…” 

    नेहा: “मेरी गांड में डालिए… ठंड के बाद गर्मी में गांड चोदने का मजा अलग है… आह्ह… पूरा घुसा दो…” 

    अदिति अब थोड़ी हिम्मत कर चुकी थी, “विक्रम जी… मुझे भी गांड में… आह्ह… दर्द तो होता है… लेकिन मज़ा भी बहुत आता है… धीरे… आआह्ह… पूरा अंदर…” 

    4 दिन तक का सिलसिला

    – Kremlin के पास प्राइवेट डिनर के बाद होटल में फोरसम 
    – Moscow River क्रूज पर तीनों को बालकनी में चोदा 
    – स्नोफॉल देखते हुए विला की बालकनी पर नंगी चुदाई 
    – सौना, जकूजी, प्राइवेट पूल — हर जगह 

    अदिति अब पूरी तरह खुल चुकी थी। वह खुद कहने लगी थी, 
    “विक्रम जी… आज मेरी चुत और गांड दोनों लीजिए… मैं आपकी सबसे छोटी पत्नी हूँ… मुझे सबसे ज्यादा चोदिए…” 

    प्रिया और नेहा उसे सिखा रही थीं — कैसे लंड चूसना है, कैसे गांड हिलाकर चुदवाना है।

    आखिरी रात Moscow में। विक्रम ने तीनों को एक साथ बेड पर लिटाया। पहले प्रिया, फिर नेहा, फिर अदिति — और अंत में तीनों की चुतों पर एक-एक करके झड़ा (कंडोम में)।

    तीनों थककर उसके सीने पर लेटी हुई थीं।

    प्रिया: “ये हनीमून सबसे यादगार रहा…”
    नेहा: “अब घर जाकर भी रोज यही चाहिए…”
    अदिति: “मैं अब डरती नहीं… बस आपका लंड चाहिए…”

    विक्रम ने तीनों को चूमते हुए कहा,
    “घर जाकर नया नियम — रोज रात चारों साथ में…”

    “

  • तीन बहुओं का घोड़ा 11

    अध्याय 11: सुहागरात के बाद – सुबह का दृश्य (विस्तृत)

    सुबह के 6:15 बज रहे थे। मास्टर बेडरूम में अब भी हल्की गुलाबी रोशनी बिखरी हुई थी, लेकिन कमरा अब पूरी तरह बदल चुका था। गुलाब की पंखुड़ियां चारों तरफ बिखरी हुई थीं, कई पंखुड़ियां तीनों बहुओं के नंगे शरीर पर चिपकी हुई थीं। कमरे में पसीने, चूत के रस और कंडोम की हल्की खुशबू मिली हुई थी। एयर कंडीशनर अभी भी चल रहा था, लेकिन तीनों औरतों के शरीर अभी भी गर्मी से तप रहे थे।

    विक्रम बेड के बीच में लेटा हुआ था, पूरी तरह नंगा। उसका 13 इंच का लंड अब थोड़ा ढीला होकर भी पेट पर लेटा हुआ था, फिर भी मोटा और प्रभावशाली दिख रहा था। उसके सीने पर प्रिया सिर रखे लेटी थी, नेहा उसकी बाईं जांघ पर सिर रखे पड़ी थी, और अदिति उसकी दाईं तरफ करवट लेकर लेटी हुई थी, उसका एक हाथ विक्रम के लंड पर ही रखा हुआ था।

    तीनों की हालत बुरी तरह खराब थी, लेकिन अब दर्द के साथ-साथ संतोष भी था।

    प्रिया की हालत
    प्रिया की चुत और गांड दोनों बुरी तरह सूज गई थीं। लाल हो चुकी थीं। उसकी जांघों पर सूखा वीर्य और अपना रस चिपका हुआ था। वह हल्के-हल्के कराह रही थी।

    नेहा की हालत
    नेहा की गांड सबसे ज्यादा प्रभावित थी। क्योंकि विक्रम ने उसे सबसे ज्यादा गांड मारी थी। वह सीधे लेट भी नहीं पा रही थी। करवट लेकर लेटी हुई थी। उसकी गांड का छेद अभी भी थोड़ा खुला हुआ दिख रहा था।

    अदिति की हालत (नई दुल्हन) 
    अदिति की हालत सबसे खराब थी। पहली रात ही 13 इंच का लंड सहना पड़ा था। उसकी चुत सूजकर मोटी हो गई थी, लाल-लाल, और हल्का खून भी रिसा था। वह आँखें बंद किए हुए दर्द से सिसक रही थी।

    विक्रम ने आँखें खोलीं। उसने पहले प्रिया के स्तन को हल्का दबाया, फिर नेहा की गांड पर हाथ फेरा और अंत में अदिति के बाल सहलाए।

    “सुबह हो गई… तीनों कैसे हो?” विक्रम ने गहरी आवाज में पूछा।

    प्रिया ने कराहते हुए कहा, 
    “पति जी… बहुत थक गई हूँ… मेरी चुत और गांड दोनों जल रही हैं… कल रात आपने हमें पूरी तरह फाड़ दिया… चल भी नहीं पा रही… लेकिन… मज़ा भी बहुत आया…”

    नेहा ने आँखें बंद रखते हुए बोली, 
    “जी… मेरी गांड अभी भी फटी हुई लग रही है… आपने कल रात 5-6 बार गांड मारी… उठने की हिम्मत नहीं है… लेकिन आपका लंड अब मेरी गांड का दीवाना बन गया है…”

    अदिति ने बहुत धीमी, कांपती आवाज में कहा, 
    “विक्रम जी… मैं… मैं तो उठ भी नहीं पा रही… मेरी चुत फट गई है… पहली रात में ही इतना बड़ा… आह्ह… बहुत दर्द हो रहा है… प्लीज आज मत करिए… मैं अभी भी कांप रही हूँ…”

    विक्रम मुस्कुराया। उसने उठकर तीनों को देखा। उसका लंड फिर से आधा खड़ा होने लगा।

    “तुम तीनों आज आराम करो। लेकिन शाम को फिर तैयार रहना। अब चारों को संभालना है।”

    सुबह 7:30 बजे – ब्रेकफास्ट और देखभाल

    मामी सुमन कमरे में आईं। उन्होंने तीनों को देखा और सिर हिलाया। 
    “बेचारी… विक्रम ने कल रात तुम तीनों को पूरी तरह तोड़ दिया।” 

    मामी ने खुद तीनों को उठाने में मदद की। प्रिया और नेहा तो किसी तरह उठ गईं, लेकिन अदिति को उठाने में बहुत दिक्कत हुई। उसकी चुत पर मामा ने हल्का दर्द निवारक जेल लगवाया। तीनों को गर्म पानी से नहलाया गया।

    नहाने के बाद तीनों ने हल्के-हल्के कपड़े पहने — सिर्फ लूज नाइट गाउन, अंदर कुछ नहीं। वे लंगड़ाते हुए डाइनिंग टेबल पर आईं।

    विक्रम पहले से बैठा था। उसने मुस्कुराते हुए कहा, 
    “कल रात तुम तीनों ने मुझे बहुत खुश किया। अदिति… तुम बहुत टाइट थी… लेकिन अब आदत पड़ जाएगी।”

    अदिति शरमा कर सिर झुका ली, उसके गाल लाल हो गए। 
    “जी… लेकिन… आज थोड़ा आराम… प्लीज…”

    प्रिया ने अदिति का हाथ पकड़कर कहा, 
    “बहन… अब हम तीनों साथ हैं। पहले 2-3 दिन दर्द रहेगा, फिर तुम भी हमारी तरह मांगने लगोगी।”

    नेहा ने हल्के से हंसते हुए कहा, 
    “हाँ… मैंने भी पहली बार रोई थी… अब तो बिना इसके नींद नहीं आती।”

    सुबह 9 बजे – बेडरूम में आराम

    तीनों फिर बेडरूम में लेट गईं। विक्रम भी उनके बीच लेट गया। उसने तीनों की चुतों और गांड पर हल्का-हल्का जेल लगाया। हर बार हाथ लगाते ही तीनों सिसक उठतीं।

    “आह्ह… पति जी… हल्के हाथ से… अभी भी बहुत सेंसिटिव है…” प्रिया बोली।

    विक्रम ने अदिति की सूजी हुई चुत पर उंगली फेरते हुए कहा, 
    “देखो… कितनी सुंदर लग रही है अब… पूरी तरह मेरी हो चुकी है।”

    अदिति शर्म और दर्द से कांप उठी, लेकिन उसकी चुत हल्की-हल्की गीली भी होने लगी।

    मामी सुमन ने कमरे में आकर कहा, 
    “मैं कल अपने घर जा रही हूँ। अब तुम चारों का परिवार है। संभालकर रखना।”

    विक्रम ने मामी को देखकर मुस्कुराया, लेकिन कुछ नहीं बोला।

    तीनों बहुएं एक-दूसरे से सटकर लेटी रहीं। अदिति बीच में थी। प्रिया और नेहा उसे comfort दे रही थीं।

  • तीन बहुओं का घोड़ा 10

    अध्याय 10: मास्टर बेडरूम – तीनों बहुओं की सुहागरात (विस्तृत संशोधित संस्करण)

    रात के ठीक 10:45 बजे थे। पूरा घर सुनसान था, सिर्फ मास्टर बेडरूम में हल्की-हल्की रोशनी जल रही थी। मामी सुमन ने कमरे को खुद इतना खास बना दिया था कि देखते ही सांसें थम जातीं। किंग साइज बेड पर लाल और गुलाबी सिल्क की चादर बिछी हुई थी, जिस पर हजारों गुलाब की ताज़ा पंखुड़ियां बिखरी हुई थीं। चारों कोनों में छोटे-छोटे खुशबूदार मोमबत्तियाँ जल रही थीं, जिनकी हल्की-हल्की लौ कमरे को गुलाबी-नीली रोमांटिक रोशनी में डुबो रही थी। एयर कंडीशनर में जेस्मिन और चंदन की महक घुली हुई थी। बेड के सिरहाने पर तीन बड़े बॉक्स रखे थे — हर बॉक्स में 100-100 एक्स्ट्रा लार्ज अल्ट्रा-थिन कंडोम (रिब्ड, डिले और फ्लेवर्ड)। साथ में दो बोतलें एक्स्ट्रा स्ट्रॉन्ग लुब्रिकेंट और एक बोतल एनाल लुब्रिकेंट। 

    मामी सुमन ने तीनों बहुओं को खुद तैयार किया था। प्रिया ने लाल ट्रांसपेरेंट बेबीडॉल पहना था, जिससे उसके भरे-भरे 36D स्तन और वैक्स वाली गुलाबी चुत साफ दिख रही थी। नेहा ने काली शॉर्ट नेग्लिजी पहनी थी, जो उसकी मोटी गांड और टाइट चुत को और उभार रही थी। नई दुल्हन अदिति ने सफेद शीअर लिंगरी पहनी थी — बहुत पतली, लगभग पारदर्शी — जिससे उसकी 34C स्तनों की गुलाबी निप्पल और पूरी तरह बाल-रहित चुत एकदम नंगी-सी दिख रही थी। तीनों की चुतें और गांडें कल की वैक्सिंग से चमक रही थीं, गुलाबी और पूरी तरह साफ। 

    मामी ने अदिति के कान में धीरे से फुसफुसाया, 
    “बेटी… डरो मत। विक्रम बहुत जोर से करता है, बहुत बड़ा है। पहले थोड़ा दर्द होगा, लेकिन ये दोनों बहनें साथ हैं। पूरी रात सह लेना… कल सुबह तक तुम तीनों उसकी हो जाओगी।” 

    अदिति शरमा कर सिर झुका ली, उसके गाल लाल हो गए। 

    मामी सुमन ने आखिरी बार कमरे की व्यवस्था चेक की, फिर तीनों को अंदर धकेल दिया। 
    “जाओ… अब तुम तीनों की रात है। मैं राहुल जी के साथ सोने जा रही हूँ।” 

    मामी ने दरवाजा बंद कर दिया और चाबी बाहर से घुमा दी। 

    सुहागरात की शुरुआत

    विक्रम बेड के बीच में बैठा था, सिर्फ काला शॉर्ट्स पहने। जैसे ही तीनों अंदर आईं, उसने शॉर्ट्स उतार दिया। उसका 13 इंच लंबा, मोटा, काला लंड पहले से ही आधा खड़ा होकर लटक रहा था, नसें उभरी हुईं, सिर पर मोटा फोड़ा चमक रहा था। 

    “आज तुम तीनों मेरी हो… पूरी रात… बिना किसी मना करने के…” विक्रम की आवाज भारी और भूखी थी। 

    सबसे पहले उसने नई दुल्हन अदिति को कलाई पकड़कर अपनी तरफ खींच लिया। अदिति कांप रही थी, उसकी सांसें तेज हो गई थीं। विक्रम ने अदिति की लिंगरी के दोनों स्ट्रैप खींचे। सफेद लिंगरी फिसलकर नीचे गिर गई। अदिति के गोरे, भरे स्तन बाहर आ गए, निप्पल पहले से ही सख्त हो चुके थे। विक्रम ने एक स्तन मुंह में भर लिया और जोर-जोर से चूसने लगा, दांतों से हल्का-हल्का काटते हुए। 

    “आह्ह्ह… नहीं… विक्रम जी… बहुत जोर से मत चूसो… दर्द हो रहा है… आह्ह… स्तन फट जाएंगे… प्लीज… धीरे…” अदिति की आवाज कांप रही थी, लेकिन उसकी कमर खुद-ब-खुद आगे बढ़ रही थी। 

    प्रिया ने आगे बढ़कर विक्रम की जांघों के बीच बैठ गई। उसने दोनों हाथों से लंड पकड़ा — एक हाथ में भी पूरी मुट्ठी नहीं आ रही थी — और धीरे-धीरे मुठ मारने लगी। नेहा ने लंड का सिर अदिति के मुंह के पास किया। 

    “बहन… चूसो… स्वाद ले लो… ये अब तुम्हारा भी है…” नेहा ने फुसफुसाया। 

    अदिति ने डरते हुए मुंह खोला। लंड का मोटा सिर उसके होंठों पर रखा। “उम्म्म… नहीं… इतना मोटा… गला फट जाएगा… आह्ह… सिर्फ सिर ही मुंह में आ रहा है… लार टपक रही है…” अदिति की आँखों से आंसू निकल आए, लेकिन वह चूसती रही। 

    विक्रम ने अदिति को बेड पर लिटा दिया। उसकी दोनों टांगें कंधों पर रखीं। प्रिया ने कंडोम का पहला पैकेट खोला, लंड पर लुब्रिकेंट लगाया और कंडोम चढ़ा दिया। विक्रम ने लंड का सिर अदिति की चुत के होंठों पर रखा और हल्का दबाया। 

    “नहीं… विक्रम जी… प्लीज… बहुत बड़ा है… मेरी चुत फट जाएगी… आआह्ह… सिर्फ सिर ही घुसा… रुक जाओ… मैं पहली बार हूँ… बहुत दर्द हो रहा है… आंसू आ रहे हैं…” अदिति जोर से चीख पड़ी, उसका पूरा शरीर ऐंठ गया। 

    विक्रम ने एक जोरदार धक्का मारा। आधा लंड अंदर चला गया। अदिति का पेट ऊपर उठ गया, उभार साफ दिखने लगा। 

    “आआआह्ह्ह… फट गई… पेट फाड़ रहा है… विक्रम जी… निकालो… प्लीज… मैं मर जाऊंगी… बहुत मोटा… चीर रहा है… आह्ह… और मत दबाओ…” अदिति रोते हुए चीख रही थी, उसके नाखून विक्रम की पीठ में गड़ रहे थे। 

    प्रिया ने अदिति के स्तन चूसते हुए कहा, “बहन… सह ले… पूरा अंदर ले… देख, कितना अच्छा लगेगा…”

    विक्रम ने कमर हिलाई और पूरा 13 इंच एक झटके में अंदर धकेल दिया। अब अदिति की चुत पूरी तरह फैल चुकी थी। विक्रम ने तेज-तेज धक्के मारने शुरू कर दिए — पच… पच… पच… पच… हर धक्के पर लंड गहराई तक जा रहा था, अदिति का पेट बार-बार उभर रहा था।

    “आह्ह… नहीं… जोर से मत… आआह्ह… मेरी चुत जल रही है… प्लीज रुक जाओ… मैं सह नहीं पा रही… आह्ह… हाँ… और गहरा… नहीं… मत… मैं झड़ रही हूँ… पहली बार… आआआह्ह्ह… पूरा रस निकल रहा है…”

    20 मिनट बाद अदिति पहली बार झड़ गई। उसकी चुत ने लंड को कसकर पकड़ लिया, सफेद रस कंडोम के बाहर रिसने लगा।

    विक्रम ने कंडोम बदलकर नेहा को खींच लिया। नेहा को घुटनों के बल मोड़कर डॉगी स्टाइल में खड़ा किया। लंड को गांड के छेद पर रखा और लुब्रिकेंट लगाकर धीरे से दबाया।

    “नहीं… विक्रम जी… गांड में मत… आज चुत में ही… आह्ह… बहुत टाइट है… फट रही है… आआह्ह… आधा घुस गया… दर्द… प्लीज निकालो… मेरी गांड चीर दी…” नेहा रोते हुए चीखी।

    विक्रम ने पूरा लंड गांड में धकेल दिया। फिर तेजी से पीछे से ठोकने लगा। नेहा की गांड हर धक्के पर हिल रही थी। प्रिया नेहा की चुत उंगलियों से चला रही थी।

    “आह्ह… विक्रम जी… और जोर से… गांड फाड़ दो… आह्ह… मज़ा आ रहा है… नहीं… मत रुकना… मैं झड़ रही हूँ… आआह्ह…”

    इसके बाद विक्रम ने प्रिया को अपनी गोद में उठा लिया। प्रिया ने खुद लंड पकड़कर अपनी चुत में उतारा। “हाँ पति जी… पूरा अंदर… मेरी चुत अब तुम्हारी है… फाड़ दो… आह्ह… जोर से… रोज की तरह…”

    रात भर यही सिलसिला चला। विक्रम ने तीनों को हर पोजीशन में चोदा —

    • अदिति को मिशनरी में 25 मिनट
    • नेहा को राइडिंग में (वो ऊपर चढ़कर खुद हिल रही थी)
    • प्रिया को स्पूनिंग में (साथ में दोनों बहनों की चुत चाटते हुए)
    • तीनों को 69 पोजीशन में (विक्रम नीचे, तीनों ऊपर)
    • स्टैंडिंग में बालकनी की तरफ मुंह करके
    • आखिर में तीनों को बेड पर सिर टिकाकर गांड ऊपर करके एक-एक करके

    कुल 14 कंडोम इस्तेमाल हुए। कमरे में सिर्फ चीखें, “आह्ह… नहीं… हाँ… और जोर से… प्लीज रुक जाओ… मत निकालो… फाड़ दो… मैं झड़ गई…” की आवाजें और पच-पच की थपाके गूंज रहे थे।

    सुबह 5:30 बजे तीनों थककर विक्रम के सीने, पेट और जांघों पर नंगी लेटी हुई थीं। उनकी चुतें और गांडें सूजी हुई, लाल, लेकिन पूरी तरह भरी हुई थीं। गुलाब की पंखुड़ियां उनके शरीर पर चिपकी हुई थीं।

    विक्रम ने तीनों के बालों में हाथ फेरते हुए कहा,
    “अब तुम तीनों मेरी हो… रोज यही होगा। कोई मना नहीं।”

    तीनों ने थकी हुई लेकिन संतुष्ट आवाज में “जी…” कहा।

  • तीन बहुओं का घोड़ा 9

    अध्याय 9: मामा का फैसला और तीसरी शादी

    विक्रम के सिंगापुर से लौटने के तीन दिन बाद मामा राहुल अचानक घर आ गए। वे सीधे लिविंग रूम में बैठ गए और तीनों — प्रिया, नेहा और मामी सुमन को बुला लिया।

    मामा ने गंभीर स्वर में कहा, “विक्रम, मैंने सब देख लिया है। सुमन की हालत भी खराब हो चुकी है। अब ये सिलसिला और नहीं चल सकता।”

    मामी सुमन तुरंत बोलीं, उनकी आवाज में दृढ़ता थी, 
    “हाँ राहुल जी… मैंने फैसला कर लिया है। मैं विक्रम के साथ कभी नहीं करूंगी। चाहे जो हो जाए। मैं उसकी मामी हूँ… ये पाप अब और नहीं चलेगा। मैं कल ही अपने घर चली जाऊंगी।”

    मामा ने कुछ पल सोचा। फिर उन्होंने आखिरी विकल्प रख दिया, 
    “ठीक है। अगर सुमन नहीं कर सकती, तो अब विक्रम की एक और आखिरी शादी करवा देते हैं। बस एक आखिरी। कोई और विकल्प नहीं बचा।”

    प्रिया और नेहा एक-दूसरे को देखकर चुप रह गईं। विक्रम ने बस सिर हिला दिया।

    मामा ने तुरंत फोन उठाया और अपनी एक दूर की रिश्तेदार की बेटी का प्रस्ताव रख दिया। लड़की का नाम था अदिति — 22 साल, बहुत खूबसूरत, गोरी, 34C स्तन, पतली कमर और गोल-मटोल गांड। शादी की तारीख सिर्फ 5 दिन बाद तय कर दी गई।

    शादी की तैयारी – दोनों का वैक्सिंग

    शादी से दो दिन पहले प्रिया और नेहा दोनों ने फैसला किया कि वे पूरी तरह तैयार होंगी। उन्होंने एक लग्जरी ब्यूटी सैलून बुक किया। दोनों ने एक साथ प्राइवेट रूम लिया।

    वैक्सिंग करने वाली लड़की ने उन्हें नंगी देखा और मुस्कुराई, “मैडम… आप दोनों की स्किन तो पहले से ही साफ है, लेकिन आज पूरा ब्राजीलियन वैक्सिंग करेंगे ना?”

    प्रिया ने शरमाते हुए सिर हिलाया, “हाँ… बिल्कुल साफ… चुत, गांड, सब।”

    दोनों ने लेट गए। पहले प्रिया की बारी। गर्म वैक्स लगाते ही प्रिया की सांसें तेज हो गईं। 
    “आह्ह… गर्म है… धीरे… मेरी चुत पर मत लगाओ… आह्ह… उखड़ रहा है… लेकिन ठीक है… आज बिल्कुल साफ होना है…”

    नेहा बगल में लेटी देख रही थी। उसकी बारी आई तो वो भी कांप उठी। 
    “दीदी… दर्द हो रहा है… आआह्ह… मेरी गांड पर भी… पूरा साफ कर दो… विक्रम जी को पसंद है… आह्ह… बहुत जलन हो रही है…”

    दोनों की चुत और गांड पूरी तरह क्लीन हो गईं — बिल्कुल बाल-रहित, गुलाबी और चमकदार। वैक्सिंग के बाद दोनों ने वहाँ ही आइस पैक लगवाए। फिर दोनों ने एक साथ मेनिक्योर-पेडीक्योर, फेशियल और बॉडी पॉलिश भी करवाया।

    सैलून से निकलते समय प्रिया ने नेहा से कहा, 
    “बहन… अब हम तीन हो जाएंगी… लेकिन हम दोनों ही संभाल लेंगी ना?” 
    नेहा मुस्कुराई, “हाँ दीदी… अब कोई दर्द नहीं… सिर्फ तैयारी।”

    शादी का दिन

    शादी बहुत धूमधाम से हुई। अदिति को देखकर सब हैरान रह गए — बेहद खूबसूरत, शर्मीली, लेकिन आकर्षक। मंदिर में फेरे हुए। प्रिया और नेहा दोनों ने अदिति को बहुत प्यार से तैयार किया था।

    शादी सम्पन्न हो गई।

    अब घर में चार औरतें थीं — प्रिया, नेहा, अदिति और (अभी के लिए) मामी सुमन (जो कल जाने वाली थीं)।

  • तीन बहुओं का घोड़ा 8

    अध्याय 8: मामा-मामी का आगमन और नई व्यवस्था

    शीला माँ अब permanently अपने घर चली गई थीं। उन्होंने साफ कह दिया था कि अब वो इस घर में कभी नहीं आएंगी। कहानी में भी उनकी कोई भूमिका नहीं रही। अब सिर्फ प्रिया, नेहा और विक्रम थे।

    दोनों की गांड और चुत अभी भी बुरी तरह सूजी हुई थीं। वे बेड पर लेटी कराह रही थीं। चलने-फिरने की हिम्मत नहीं थी। विक्रम का लंड फिर भी हर समय खड़ा रहता था।

    उसी शाम विक्रम के मामा (राहुल) और मामी (सुमन) अचानक घर आ गए। मामा 58 साल के थे, मामी सुमन 46 साल की — अभी भी बहुत आकर्षक, गोरी, 36D स्तन, भारी गांड, मोटी जांघें।

    मामा ने पूरे मामले को सुना — प्रिया और नेहा की हालत, विक्रम की अनियंत्रित भूख, मालदीव्स में हुई गांड चुदाई।

    मामा गुस्से से बोले, “विक्रम! ये क्या कर रहा है तू? दोनों लड़कियों की हालत खराब कर दी है। संयम रखो।”

    विक्रम सिर झुकाए बैठा था। फिर अचानक फूट पड़ा, 
    “मामा… मुझसे नहीं रुक रहा… मैं कोशिश करता हूँ लेकिन लंड खड़ा हो जाता है। प्रिया और नेहा अभी चल भी नहीं पा रही… मुझे रोज चाहिए… मैं कंट्रोल नहीं कर पा रहा…”

    मामी सुमन शर्म से सिर झुकाए बैठी थीं।

    मामा ने कुछ देर सोचा और फिर गहरी सांस ली। 
    “ठीक है… जब तक प्रिया और नेहा ठीक नहीं हो जातीं, तब तक… सुमन को यहीं रहने दो। वो थोड़े दिन तुम्हें संभाल लेगी। लेकिन सिर्फ जब तक ये दोनों ठीक न हो जाएं।”

    मामी चौंककर बोलीं, “राहुल… आप क्या कह रहे हैं? मैं विक्रम की मामी हूँ… ये गलत है…”

    मामा ने सख्ती से कहा, “सुमन, परिवार की भलाई के लिए। विक्रम बेकाबू हो रहा है। तू थोड़े दिन मदद कर दे।”

    मामी कुछ नहीं बोलीं, सिर्फ शर्म से लाल हो गईं।

    उसी रात – मामी की पहली सेवा

    रात 11 बजे। प्रिया और नेहा अपने कमरे में दर्द से कराह रही थीं। विक्रम मामी को अपने मास्टर बेडरूम में ले गया।

    मामी ने साड़ी पहनी हुई थी। विक्रम ने उनकी साड़ी की पल्लू खींची। 
    “मामी… प्लीज… मुझे रोक नहीं रहा…”

    मामी कांपते हुए बोलीं, 
    “विक्रम… बेटा… ये गलत है… मैं तेरी मामी हूँ… प्लीज… मत करो… राहुल जी ने सिर्फ कह दिया है, लेकिन मैं… आह्ह…”

    विक्रम ने मामी की ब्लाउज खोली, ब्रा उतारी और भरे-भरे स्तनों को चूसने लगा। फिर उनकी साड़ी और पेटीकोट खींचकर फेंक दिया। मामी सिर्फ पैंटी में खड़ी थीं।

    विक्रम ने पैंटी खींची और अपना 13 इंच का लंड बाहर निकाला। मामी की आँखें फट गईं। 
    “नहीं… विक्रम… इतना बड़ा… मेरी उम्र 46 है… ये मेरी चुत में नहीं जाएगा… प्लीज… रुक जाओ… मैं तेरी मामी हूँ… आआह्ह…”

    विक्रम ने मामी को बेड पर लिटाया, टांगें फैलाईं और कंडोम लगाकर एक जोरदार धक्का मारा।

    “आआआह्ह्ह… नहीं… फट गई… विक्रम… निकालो… बहुत मोटा… मेरी चुत चीर दी… प्लीज… धीरे… आह्ह… पूरा घुस गया… पेट फाड़ रहा है… रुक जाओ बेटा… मैं सह नहीं पा रही…” मामी जोर से चीख पड़ीं।

    विक्रम ने घोड़े जैसी रफ्तार पकड़ ली। पच… पच… पच… पच… 

    मामी रोते हुए चीख रही थीं, 
    “नहीं… बेटा… मत मारो… इतना जोर से… मैं तेरी मामी हूँ… ये पाप है… आह्ह… मेरी चुत जल रही है… प्लीज रुक जाओ… आआह्ह… हाँ… और मत… मैं झड़ रही हूँ…”

    विक्रम ने उन्हें 35 मिनट तक लगातार चोदा। फिर डॉगी स्टाइल में मोड़कर गांड में भी घुसाने की कोशिश की।

    “नहीं… गांड में बिल्कुल नहीं… विक्रम… वो तो बहुत टाइट है… प्लीज… वहाँ मत… आआह्ह… दर्द… आधा घुस गया… निकालो… मैं मर जाऊंगी…”

    विक्रम ने मामी की गांड भी पूरी तरह फाड़ दी। मामी की हालत खराब हो गई। वो रोती-चीखती रहीं, लेकिन विक्रम ने तीन राउंड लिए।

    सुबह मामी बेड से उठ भी नहीं पा रही थीं। उनकी चुत और गांड सूज गई थीं।

    प्रिया और नेहा को जब पता चला तो दोनों हैरान रह गईं।

    नेहा कमजोर आवाज में बोली, “अब मामी भी… हम तीनों को संभालना पड़ेगा…”

  • तीन बहुओं का घोड़ा 7

    अध्याय 7: मालदीव्स – पहली बार गांड की सजा (बिना मर्जी के)

    अगले दिन सुबह 11 बजे। मालदीव्स का विला अभी भी नीली रोशनी में चमक रहा था। प्रिया और नेहा दोनों पिछले रात की चुदाई से थोड़ी थकी हुई थीं, लेकिन अब उन्हें मजा आ रहा था। दोनों ने बिकिनी पहनी थी और ब्रेकफास्ट कर रही थीं।

    विक्रम अचानक उनके पीछे आया। उसका लंड पहले से ही खड़ा था। उसने दोनों की बिकिनी नीचे खींच दी और सीधे कहा, 
    “आज तुम दोनों की गांड लूंगा… पहली बार… और बिना पूछे।”

    प्रिया चौंक गई, “नहीं विक्रम… गांड में कभी नहीं… वो बहुत टाइट है… प्लीज… मत करो… मैं डर रही हूँ…” 
    नेहा भी कांप उठी, “जी… प्लीज… चुत में ही कर लो… गांड फट जाएगी… मैं नहीं सह पाऊंगी…”

    विक्रम ने दोनों को बाल पकड़कर बेड पर झुका दिया। पहले प्रिया। उसने कंडोम लगाया, लंड पर बहुत सारा लुब्रिकेंट लगाया, लेकिन फिर भी मोटा सिर देखकर प्रिया चीख पड़ी।

    “नहीं… विक्रम… वहाँ मत… प्लीज रुक जाओ… मेरी गांड में नहीं जाएगा… आआह्ह… दर्द… निकालो… बहुत मोटा है… फट रही है… आह्ह… आधा भी नहीं घुसा… प्लीज… मैं मना कर रही हूँ…” प्रिया रोते हुए चीखी।

    विक्रम ने एक जोरदार धक्का मारा। पूरा 13 इंच का लंड प्रिया की गांड में घुस गया। प्रिया की आँखें बाहर निकल आईं। 

    “आआआआह्ह्ह… नहीं… मेरी गांड चीर दी… विक्रम… प्लीज निकालो… बहुत दर्द हो रहा है… मैं मर जाऊंगी… आह्ह… रुक जाओ… बिना मर्जी के मत करो…” 

    विक्रम ने प्रिया की कमर पकड़कर जोर-जोर से ठोकना शुरू कर दिया। पच… पच… पच… गांड की चुदाई की आवाज पूरे विला में गूंज रही थी। प्रिया रो रही थी, लेकिन विक्रम 25 मिनट तक लगातार चोदता रहा। प्रिया की गांड सूज गई, लाल हो गई।

    फिर नेहा की बारी। 
    “नहीं… मेरी बारी मत… दीदी की तरह मत करो… प्लीज विक्रम जी… मैं नई-नई दुल्हन हूँ… गांड में मत… आआह्ह… फट गई… पूरा अंदर… दर्द… रुक जाओ… मैं रो रही हूँ…” 

    विक्रम ने नेहा को भी बिना रुके चोदा। दोनों की गांड पहली बार फाड़ी जा रही थी।

    दो दिन तक का सिलसिला

    अगले 2 दिन विक्रम ने दोनों को बिना उनकी मर्जी के गांड मारी। दिन में 4-5 बार, रात में 5-5 बार — कुल 10-10 बार हर एक की।

    – सुबह पूल में 
    – दोपहर बालकनी में 
    – शाम जकूजी में 
    – रात बेड पर अलग-अलग पोजीशन — डॉगी, स्पूनिंग, स्टैंडिंग 

    प्रिया हर बार चीखती, 
    “नहीं… बस… अब मत… मेरी गांड फट चुकी है… 6 बार हो चुका… प्लीज विक्रम… चल नहीं पा रही… आह्ह… फिर से… बहुत दर्द… मैं मना कर रही हूँ… रुक जाओ…” 

    नेहा और भी ज्यादा रोती, 
    “विक्रम जी… प्लीज… मेरी गांड में अब कुछ नहीं बचा… सूज गई है… आआह्ह… 8वीं बार… निकालो… मैं उठ भी नहीं सकती… बिना पूछे मत मारो… मैं तेरी पत्नी हूँ… आह्ह… दर्द…”

    दूसरे दिन शाम तक दोनों की हालत बेहद खराब हो गई। दोनों की गांडें बुरी तरह सूजी हुईं, लाल, चलने में असमर्थ। वे बिस्तर पर पड़ी कराह रही थीं। बैठ नहीं पा रही थीं, पैर कांप रहे थे। चुत भी बार-बार चुदाई से सूज गई थी।

    विक्रम ने प्राइवेट जेट बुलाया। दोनों को स्ट्रेचर पर लिटाकर जेट में लादा गया। उड़ान भरते समय भी दोनों दर्द से तड़प रही थीं।

    प्रिया ने कमजोर आवाज में कहा, “विक्रम… अब काफी… हम दोनों की गांड खराब कर दी… चल नहीं पा रहे… घर ले चलो…” 
    नेहा सिर्फ रो रही थी, कुछ बोल भी नहीं पा रही थी।

    प्राइवेट जेट में विक्रम ने फिर से दोनों की गांड में उंगली डालकर खेला, लेकिन पूरा लंड नहीं डाला। दोनों बस कराहती रहीं।

    घर पहुंचने पर

    घर आकर दोनों को सीधे बेडरूम में लिटाया गया। दोनों नंगी पड़ी थीं, गांड पर बर्फ के पैक लगाए हुए। चलने की हिम्मत नहीं थी।

    शीला माँ (प्रिया की माँ) उन्हें देखकर बोलीं, “बेटी… क्या हालत बना दी तुम दोनों की… अब मैं भी नहीं आ सकती… तुम दोनों ही संभालो… लेकिन सावधानी से…” 

    प्रिया और नेहा दोनों एक-दूसरे को देखकर रो पड़ीं। उनकी गांडें 2 दिन की बिना मर्जी वाली चुदाई से बुरी तरह खराब हो चुकी थीं। लेकिन विक्रम संतुष्ट मुस्कान के साथ बेड के पास बैठा था।

  • तीन बहुओं का घोड़ा 6

    अध्याय 6: मालदीव्स – अब पूरी मस्ती, कोई दर्द नहीं

    मालदीव्स के पानी वाले विला में तीसरी रात। अब प्रिया और नेहा दोनों की चुतें पूरी तरह आदत डाल चुकी थीं। वैक्सिंग के बाद की सूजन उतर गई थी, शरीर ने विक्रम के 13 इंच के घोड़े जैसे लंड को स्वीकार कर लिया था। दोनों को अब दर्द की जगह सिर्फ गहरा मज़ा आ रहा था।

    विक्रम पूल के किनारे खड़ा था, उसका लंड पूरा खड़ा, कंडोम लगा हुआ। प्रिया और नेहा दोनों नंगी, बिकिनी फेंककर उसके पास आईं।

    प्रिया ने विक्रम के लंड को हाथ में पकड़ा और मुस्कुराते हुए कहा, 
    “अब कोई समस्या नहीं है विक्रम… मेरी चुत अब तुम्हारे लंड की दीवानी हो गई है।” 

    नेहा ने पीछे से विक्रम को चिपकते हुए उसके कान में फुसफुसाया, 
    “हाँ जी… पहले तो चीखती थी, अब तो बिना आपके लंड के नींद भी नहीं आती… आज हम दोनों आपको पूरा एंजॉय करेंगी।”

    विक्रम ने दोनों को पूल में खींच लिया। पानी में ही उसने प्रिया को दीवार से लगा दिया और एक जोरदार धक्का मारा। पूरा लंड एक बार में अंदर चला गया।

    “आह्ह्ह… हाँ विक्रम… अब पूरा घुसा दो… पहले वाला दर्द चला गया… अब तो मज़ा आ रहा है… और जोर से… आह्ह… मेरी चुत फाड़ दो आज…” प्रिया ने आँखें बंद करके चीखते हुए कहा। उसकी कमर खुद आगे-पीछे हिल रही थी।

    नेहा प्रिया के स्तनों को चूस रही थी और अपनी उंगलियाँ प्रिया की क्लिट पर घुमा रही थी। 
    “दीदी… आज मुझे भी पूरा दो… मैं भी तैयार हूँ… विक्रम जी… मेरी चुत में भी घुसाइए…”

    विक्रम ने प्रिया को 15 मिनट तक पूल में खड़े-खड़े चोदा। हर धक्के पर पानी छपछपा रहा था। प्रिया लगातार झड़ रही थी। 
    “आआह्ह… हाँ… और गहरा… पेट तक पहुँच रहा है… मज़ा आ रहा है… नहीं रुकना… जोर से चोदो मुझे… मैं अब तुम्हारी रंडी हूँ…”

    फिर विक्रम ने नेहा को ग्लास फ्लोर पर लिटा दिया। नीचे समुद्र दिख रहा था। उसने नेहा की टांगें कंधों पर रखीं और पूरे जोर से अंदर घुसा।

    “आह्ह्ह… विक्रम जी… हाँ… अब दर्द नहीं… सिर्फ मज़ा… पूरा लंड अंदर… मेरी चुत को चीर दो… आह्ह… और तेज… मैं सह सकती हूँ अब…” नेहा चीखते हुए बोली। उसकी कमर ऊपर उठ रही थी, लंड को और गहरा लेने के लिए।

    प्रिया नेहा के मुंह पर बैठ गई। नेहा उसकी चुत चाट रही थी। 
    “बहन… चाटो अच्छे से… विक्रम तुम्हें चोद रहा है… मैं तुम्हारी जीभ पर झड़ना चाहती हूँ… आह्ह… हाँ… यही…”

    अब पूरा थ्रीसम जोरों पर था। विक्रम ने दोनों को बारी-बारी चोदा — 
    – डॉगी स्टाइल में बालकनी में 
    – राइडिंग पोजीशन में बेड पर (दोनों बारी-बारी ऊपर चढ़कर) 
    – स्पूनिंग में जकूजी में 

    प्रिया अब पूरी तरह बोल रही थी, 
    “विक्रम… पहले मैं मना करती थी… अब तो लगता है तुम्हारा लंड मेरी चुत का हिस्सा बन गया है… और जोर से… मेरी चुत फाड़ दो… आह्ह… हाँ… मैं झड़ गई… फिर से…”

    नेहा भी अब शर्म छोड़ चुकी थी, 
    “जी… मुझे भी घोड़े की तरह चोदिए… मेरी गांड में भी डालिए… आह्ह… हाँ… पूरा घुसा दो… दर्द नहीं… सिर्फ आग लग रही है… मज़ा आ रहा है… मैं आपकी दूसरी पत्नी हूँ… रोज चोदिए मुझे…”

    रात 2 बजे तक दोनों की चुतें विक्रम के लंड से भर-भरकर झड़ रही थीं। अब उन्हें कोई समस्या नहीं थी — चुतें पूरी तरह खुल चुकी थीं, गीली और भूखी रहती थीं।

    विक्रम ने आखिर में दोनों को घुटनों के बल बिठाया और दोनों के मुंह पर कंडोम उतारकर झड़ दिया। दोनों ने मिलकर लंड चाटा और वीर्य पिया।

    प्रिया ने नेहा को चूमते हुए कहा, 
    “अब हम दोनों साथ में ही संभालेंगी… कोई दर्द नहीं, सिर्फ मज़ा… मालदीव्स हमारा असली हनीमून बन गया।”

    नेहा मुस्कुराई, “हाँ दीदी… अब रोज रात को हम दोनों मिलकर विक्रम जी को खुश करेंगी… हमारी चुतें अब उनकी हो चुकी हैं।”

    विक्रम दोनों को अपनी बाहों में लेकर लेट गया। बाहर समुद्र शांत था, लेकिन अंदर तीनों की आग अभी भी जल रही थी।

  • तीन बहुओं का घोड़ा 5

    अध्याय 5: रिकवरी, वैक्सिंग और मालदीव्स का दूसरा हनीमून

    शीला माँ अब नहीं आ रही थीं। उनकी हालत इतनी खराब हो चुकी थी कि वो बिस्तर से उठ भी नहीं पा रही थीं। उन्होंने साफ मना कर दिया — “बेटी, अब मैं नहीं संभाल सकती… मेरी उम्र हो गई… तुम दोनों ही अब संभालो…”

    अब सिर्फ प्रिया और नेहा रह गई थीं।

    पिछले 10 दिनों में विक्रम ने दोनों को रोज रात भर चोदा था। दोनों की हालत बुरी तरह खराब हो गई थी। चुतें सूजी हुईं, लाल, चलने में भी दर्द, बैठने में तकलीफ। सुबह उठते ही दोनों कराहतीं।

    प्रिया ने नेहा को देखा और कहा, “बहन… अब हम दोनों को ही संभालना पड़ेगा… माँ नहीं आएंगी…” 
    नेहा कमजोर आवाज में बोली, “दीदी… मेरी चुत अभी भी जल रही है… चल नहीं पा रही… विक्रम जी रोज घोड़े की तरह…”

    तीन दिन तक दोनों ने विक्रम से मना किया। विक्रम ने मजबूरन कंट्रोल किया, लेकिन उसका लंड हर वक्त खड़ा रहता।

    चौथे दिन – बिकनी वैक्सिंग

    प्रिया ने कहा, “चल नेहा, दोनों बिकनी वैक्सिंग करवाते हैं… मालदीव्स जाना है… वहाँ साफ-सुथरा होना चाहिए।”

    दोनों एक लग्जरी ब्यूटी सैलून गईं। प्राइवेट रूम में दोनों नंगी लेट गईं।

    वैक्सिंग करने वाली लड़की (रिया) ने देखा और मुस्कुराई, “मैडम… आप दोनों की हालत तो खराब लग रही है… चुत सूजी हुई है…”

    प्रिया शरमाई, “हाँ… पति बहुत… जोर से…” 
    नेहा ने आँखें बंद कर लीं।

    वैक्सिंग शुरू हुई। गर्म वैक्स लगाते ही दोनों चीख पड़ीं। 
    “आह्ह… नहीं… बहुत गर्म है… आआह्ह… मेरी सूजी चुत पर मत लगाओ… प्लीज धीरे…” प्रिया चीखी।

    नेहा तो रो पड़ी, “दीदी… दर्द हो रहा है… मेरी चुत पहले से ही फटी हुई है… आह्ह… नहीं… बाल उखड़ रहे हैं… रुक जाओ…”

    रिया ने दोनों की चुत, गांड और आस-पास पूरी तरह क्लीन किया। दोनों की चुत अब बिल्कुल साफ, गुलाबी और चमकदार हो गई थीं, लेकिन वैक्सिंग के बाद दर्द और बढ़ गया।

    घर लौटकर दोनों बर्फ लगाकर लेटी रहीं। विक्रम ने देखा तो हँसा, “अब मालदीव्स में मजा आएगा।”

    10 दिन बाद – मालदीव्स दूसरा हनीमून

    सब ठीक होने के बाद विक्रम ने दोनों को मालदीव्स ले जाया। पानी के ऊपर वाला विला बुक किया — प्राइवेट पूल, समुद्र के ऊपर ग्लास फ्लोर, रोमांटिक।

    पहली रात।

    दोनों ने बिकिनी पहनी थी — प्रिया लाल, नेहा सफेद। विक्रम ने दोनों को पूल में खींच लिया।

    पहले तो किसिंग, फिर विक्रम ने प्रिया की बिकिनी उतारी। 
    “नहीं विक्रम… अभी भी थोड़ा दर्द है… प्लीज आज मत… नेहा को पहले…” प्रिया बोली।

    विक्रम ने नेहा को पूल के किनारे झुका दिया और कंडोम लगाकर पीछे से घुसा दिया।

    “आआह्ह… विक्रम जी… नहीं… इतनी तेज मत… मेरी नई वैक्स की चुत… फट जाएगी… प्लीज धीरे… आह्ह… पूरा घुस गया… पेट में उभार…” नेहा चीखी।

    प्रिया बगल में बैठी देख रही थी। विक्रम ने नेहा को 30 मिनट तक डॉगी स्टाइल में चोदा। नेहा 4 बार झड़ गई।

    फिर विक्रम ने प्रिया को उठाकर ग्लास फ्लोर पर लिटा दिया। नीचे समुद्र की मछलियाँ दिख रही थीं।

    “नहीं… विक्रम… यहाँ नहीं… कोई देख लेगा… आह्ह… धीरे… मेरी चुत अभी भी सेंसिटिव है… प्लीज रुक जाओ… आआह्ह… पूरा अंदर… बहुत मोटा… फाड़ रहा है…”

    विक्रम ने प्रिया की टांगें कंधों पर रखीं और घोड़े जैसी चुदाई शुरू कर दी। नेहा प्रिया के स्तन चूस रही थी।

    “आह्ह… नेहा… तुम भी मत… दीदी की चुत जल रही है… विक्रम… प्लीज… थोड़ा आराम… नहीं… मैं झड़ रही हूँ… आआआह्ह… मत रुकना… हाँ… और जोर से…”

    रात भर थ्रीसम चला। विक्रम ने दोनों को बारी-बारी चोदा — पूल में, बेड पर, बालकनी में, जकूजी में। दोनों की चीखें समुद्र में गूंज रही थीं।

    “नहीं… विक्रम… अब काफी… हम दोनों की हालत फिर खराब हो जाएगी… प्लीज… नेहा को ले लो… आह्ह… मेरी गांड में मत… नहीं… पूरा घुस गया… आआह्ह… दर्द… मजे… मत निकालो…”

    दोनों थककर सुबह नंगी पड़ी थीं। चुतें फिर से सूज गई थीं, लेकिन दोनों मुस्कुरा रही थीं।

    नेहा ने प्रिया के कान में कहा, “दीदी… अब हम दोनों मिलकर ही संभालेंगी… माँ नहीं आएंगी तो हम ही विक्रम जी की भूख शांत करेंगी…”

    प्रिया ने सिर हिलाया, “हाँ बहन… लेकिन रोज नहीं… वरना हम दोनों अस्पताल पहुंच जाएंगी।”

    विक्रम संतुष्ट मुस्कान के साथ दोनों को अपनी बाहों में लिए लेटा था।

  • तीन बहुओं का घोड़ा 4

    अध्याय 4: दूसरी शादी और सुहागरात की शिक्षा

    विक्रम ने प्रिया को माँ के घर छोड़ दिया और अकेला घर चला गया। उसकी भूख अब और बढ़ गई थी। उसने अपनी मामा-मामी को सब कुछ बता दिया — प्रिया की असमर्थता, सास शीला के साथ जो कुछ हुआ, सब। मामा-मामी ने पहले तो शॉक जताया, लेकिन विक्रम के पास अरबों की दौलत थी। उन्होंने फैसला किया कि विक्रम की दूसरी शादी कर दी जाए।

    दूसरी दुल्हन का नाम था नेहा — 23 साल, बहुत सुंदर, गोरी, 34D स्तन, पतली कमर, मोटी गांड। नेहा साधारण परिवार से थी। शादी तय हो गई।

    सुहागरात की रात।

    विक्रम ने नेहा को 5 स्टार होटल के हनीमून सूट में ले जाया। प्रिया और शीला (प्रिया की माँ) भी वहीं थीं — “सिखाने” के लिए।

    कमरे में रोशनी मद्धिम थी। नेहा लाल लहंगे में नजर आ रही थी। विक्रम ने लहंगे की पल्लू खींची।

    नेहा शरमाई, “विक्रम जी… प्लीज… धीरे… मैं पहली बार हूँ…”

    प्रिया ने पास आकर नेहा के कान में कहा, “बहन… तैयार रहो… विक्रम का लंड बहुत बड़ा है… मैं सह नहीं पाई, इसलिए तुम्हें चुन लिया गया है।”

    शीला माँ ने मुस्कुराते हुए नेहा के ब्लाउज के हुक खोलने शुरू कर दिए।

    विक्रम ने अपना लंड बाहर निकाला। 13 इंच का मोटा, काला, नसों वाला लंड देखकर नेहा के मुँह से चीख निकल गई।

    “नहीं… ये… ये क्या है… इतना बड़ा… मैं नहीं ले पाऊंगी… प्लीज विक्रम जी… रुक जाइए… मैं डर रही हूँ…” नेहा काँपते हुए पीछे हटी।

    प्रिया ने नेहा को बेड पर लिटाया और उसकी टांगें फैला दीं। “बहन… डरो मत… मैं सिखाती हूँ। पहले चूसो…”

    नेहा ने रोते हुए लंड मुंह में लिया, लेकिन सिर्फ सिर ही जा पाया। “उम्म्म… नहीं… गला फट जाएगा… इतना मोटा… प्लीज… मैं नहीं कर सकती…”

    शीला माँ ने नेहा की चुत पर तेल लगाया और उंगलियाँ डालकर फैलाने लगीं। “बेटी… तैयार हो जा… विक्रम बिना रुके चोदता है।”

    विक्रम ने कंडोम लगाया और नेहा की टांगें कंधों पर रख दीं। एक जोरदार धक्का।

    “आआआह्ह्ह… नहीं… फट गई… विक्रम जी… निकालिए… प्लीज… बहुत दर्द हो रहा है… आधा भी नहीं घुसा… मेरी चुत चीर दी… आह्ह… रुक जाइए…” नेहा जोर से चीख पड़ी। आंसू बहने लगे।

    प्रिया ने नेहा के स्तन चूसते हुए कहा, “बहन… सह ले… मैं भी यही सहती थी… अब तू सह…”

    विक्रम ने और जोर से धक्का मारा। पूरा लंड अंदर चला गया। नेहा का पेट उभर आया।

    “नहीं… पेट फाड़ रहा है… विक्रम जी… प्लीज… रुक जाओ… मैं मर जाऊंगी… आह्ह… धीरे… मत मारो… मैं तेरी पत्नी हूँ… ये गलत है… आआह्ह… हाँ… और गहरा… नहीं… मत…”

    विक्रम ने घोड़े जैसी रफ्तार पकड़ ली। पच… पच… पच… पच… कमरा चीखों और थपाकों से भर गया।

    शीला माँ ने नेहा का सिर थामा और बोली, “बेटी… सह ले… मैं भी सह रही हूँ रोज… प्रिया भी देख रही है…”

    प्रिया ने नेहा की क्लिट पर उंगली रखकर रगड़ना शुरू कर दिया। “बहन… झड़ जा… दर्द कम हो जाएगा…”

    नेहा का पहला ऑर्गेज्म आया। “आआआह्ह्ह… नहीं… झड़ रही हूँ… विक्रम जी… रुक जाओ… मैं सह नहीं पा रही… आह्ह… और मत मारो…”

    लेकिन विक्रम रुका नहीं। 40 मिनट तक लगातार चोदा। नेहा 5 बार झड़ चुकी थी। उसकी चुत सूज गई थी, लाल हो गई थी।

    फिर थ्रीसम शुरू हुआ।

    प्रिया नेहा के ऊपर लेट गई। दोनों की चुतें एक-दूसरे से सटी हुईं। विक्रम ने बारी-बारी दोनों में डाला।

    “नहीं… विक्रम… अब मेरी चुत में मत… अभी भी दर्द है… प्लीज… नेहा को चोदो… आह्ह… दोनों को साथ मत… मैं माँ हूँ… नहीं… आआह्ह…” शीला भी शामिल हो गई।

    नेहा रोते हुए बोली, “प्रीया दीदी… माँ जी… प्लीज… मुझे बचाओ… विक्रम जी बहुत जोर से कर रहे हैं… मेरी चुत फट गई… आह्ह… नहीं… गांड में मत… प्लीज… रुक जाओ…”

    विक्रम ने नेहा की गांड में भी घुसा दिया। प्रिया नेहा की चुत चाट रही थी। शीला विक्रम के अंडकोष चूस रही थी।

    रात भर यही चला। नेहा की हालत पूरी तरह खराब हो गई — वो उठ भी नहीं पा रही थी, चुत और गांड दोनों सूजी हुई, शरीर काँप रहा था, लेकिन विक्रम ने तीनों को बारी-बारी चोदा।

    सुबह नेहा बेहोश पड़ी थी। प्रिया ने उसके माथे पर हाथ फेरा और कहा, “अब तू संभाल लेगी ना बहन?”

    नेहा कमजोर आवाज में बोली, “हाँ दीदी… लेकिन… रोज नहीं… प्लीज…”

    शीला माँ ने मुस्कुराते हुए कहा, “बेटी… आदत पड़ जाएगी।”

    विक्रम संतुष्ट था। अब उसके पास तीन औरतें थीं — प्रिया, शीला और नेहा।

  • तीन बहुओं का घोड़ा 3

    अध्याय 3: घर वापसी और माँ की कुर्बानी

    थाईलैंड से वापस आने के बाद सिर्फ 4 दिन बीते थे। पटाया की वो रातें अभी भी मेरी चुत में दर्द के रूप में महसूस हो रही थीं। विक्रम हर रात लावा की तरह मुझे चोदना चाहता था, लेकिन मैं अब और सह नहीं पा रही थी। उसका 13 इंच का घोड़े जैसा लंड मेरी चुत के लिए अब सजा बन गया था।

    रात को विक्रम फिर से तैयार था। 
    “प्रिया… आज फिर से जोर से लेंगे…” 
    “नहीं विक्रम… प्लीज… अभी भी सूजन है… मैं चल भी नहीं पा रही… कल से ट्राई करेंगे…” मैं रोते हुए बोली। 

    लेकिन विक्रम ने मेरी टांगें खोल दीं और कंडोम लगाकर एक जोरदार धक्का मार दिया। 
    “आआआह्ह्ह… नहीं… फट गई… विक्रम रुक जाओ… बहुत दर्द हो रहा है… मैं मर जाऊंगी… प्लीज निकालो…” मैं चीख पड़ी। 

    वो रुका नहीं। 25 मिनट तक मुझे चोदा। मैं सिर्फ रोती रही। आखिर में जब वो झड़ा तो मैं बिस्तर पर बेहोश जैसी पड़ी थी। 

    अगली सुबह मैंने फैसला कर लिया। 
    “मुझे माँ के घर जाना है… 2-3 दिन के लिए…” 
    विक्रम ने हामी भरी। मैं सीधा मम्मी के घर चली गई। 

    मेरी माँ का नाम शीला है। उम्र 48 साल, लेकिन देखने में 38-40 जैसी लगती हैं। गोरी, भरे-भरे 38D स्तन, पतली कमर, मोटी गांड। विधवा हो चुकी हैं। घर में अकेली रहती हैं। 

    जैसे ही मैं घर पहुंची, माँ ने मुझे गले लगाया। मैं रो पड़ी। 
    “क्या हुआ बेटी? हनीमून से लौटकर इतनी उदास क्यों?” 

    मैंने सारी बात बता दी – विक्रम का बहुत बड़ा और मोटा लंड, घोड़े जैसी चुदाई, थाईलैंड में लावा को बुलाना, और मेरी हालत। 

    माँ ने मुझे सिर सहलाते हुए कहा, “बेटी… पुरुषों की भूख ऐसी ही होती है। तू चिंता मत कर। मैं बात कर लूंगी विक्रम से।” 

    उसी शाम विक्रम मम्मी के घर आया मुझे लेने। मम्मी ने उसे चाय दी और सीधे मुद्दे पर आ गईं। 
    “विक्रम बेटा… प्रिया बहुत परेशान है। तुम्हारा सामान बहुत बड़ा है, वो सह नहीं पा रही।” 

    विक्रम शर्माया। माँ ने मुस्कुराते हुए कहा, 
    “मैं समझती हूँ… पुरुष को संतोष चाहिए। अगर तू चाहे तो… मैं मदद कर सकती हूँ… बस प्रिया को आराम मिल जाए।” 

    मैं हैरान रह गई। “माँ… तुम क्या कह रही हो?” 

    माँ ने मेरे सिर पर हाथ फेरा, “बेटी… माँ-बेटी का रिश्ता। तेरा सुख मेरे लिए सबसे बड़ा है।” 

    विक्रम की आँखें चमक उठीं। 

    उसी रात… 

    मैं अपने कमरे में थी। माँ और विक्रम वाले कमरे में गए। दरवाजा बंद था, लेकिन मैं चुपके से बाहर खड़ी सुन रही थी। 

    पहले तो बातें हुईं। फिर आवाजें… 

    “आह्ह… विक्रम… धीरे… तुम्हारा तो बहुत बड़ा है… आआह्ह… पूरा मत घुसाओ… मेरी चुत 48 साल बाद खुल रही है…” माँ की आवाज आई। 

    विक्रम ने जोरदार धक्का मारा। 
    “पच… पच… पच…” 

    माँ चीखीं, “नहीं… बेटा… रुक जाओ… फट रही है… इतना मोटा… आह्ह… पेट तक जा रहा है… प्लीज धीरे… मैं तेरी सास हूँ… आआह्ह… नहीं… और जोर से मत…” 

    लेकिन विक्रम ने घोड़े जैसी रफ्तार पकड़ ली। मैं बाहर खड़ी सुन रही थी। माँ की चीखें लगातार बढ़ रही थीं। 

    “विक्रम… नहीं… मैं सह नहीं पा रही… आह्ह… मेरी चुत फाड़ दी… प्लीज रुक… मैं तेरी सास हूँ… ये गलत है… आआह्ह… हाँ… और गहरा… नहीं… मत… मैं झड़ रही हूँ… आआआह्ह्ह…” 

    मैंने दरवाजे की दरार से झांका। माँ कुत्ते की मुद्रा में थीं। विक्रम पीछे से जोर-जोर से ठोक रहा था। माँ के स्तन लटक-लटककर हिल रहे थे। उनका चेहरा पसीने से तर, आँखें बंद, मुंह से लार टपक रही थी। 

    विक्रम ने माँ के बाल पकड़े और और तेज किया। 
    “सास जी… आपकी चुत तो बहुत टाइट है… प्रिया से ज्यादा सह ले रही हो…” 

    माँ रोते हुए चीखीं, “नहीं… मैं प्रिया की माँ हूँ… प्लीज… मेरी हालत खराब मत करो… आह्ह… मैं मर जाऊंगी… रुक जाओ… बहुत हो गया… आआह्ह… फिर से झड़ गई…” 

    एक घंटे बाद माँ की हालत पूरी तरह खराब हो चुकी थी। वो बिस्तर पर लेटी हुई थीं, टांगें फैली हुईं, चुत लाल और सूजी हुई, विक्रम का वीर्य (कंडोम में) बाहर रिस रहा था। उनका शरीर कांप रहा था। 

    विक्रम अभी भी खड़ा था। उसने माँ को घसीटकर फिर से अपनी गोद में लिया। 
    “सास जी… एक राउंड और…” 

    माँ ने कमजोर आवाज में कहा, “नहीं बेटा… प्लीज… अब मत… मैं चल भी नहीं पा रही… मेरी चुत जल रही है… प्रिया को बुला लो…” 

    लेकिन विक्रम ने फिर से घुसा दिया। 
    “आआह्ह… नहीं… फिर से… विक्रम… तू तो जानलेवा है… प्लीज रुक… मैं तेरी सास हूँ… आह्ह… हाँ… मत निकाल… पूरा अंदर…” 

    मैं बाहर खड़ी रो रही थी, लेकिन मेरी चुत भी गीली हो गई थी।

    रात भर माँ की चीखें, “नहीं… प्लीज… रुक जाओ… मैं मर जाऊंगी… आह्ह… और जोर से…” सुनाई देती रहीं। सुबह तक माँ की हालत बुरी तरह खराब हो गई थी – वो उठ भी नहीं पा रही थीं, चुत सूजकर लाल हो गई थी, शरीर में दर्द, लेकिन चेहरा संतोष से भरा था।

    विक्रम ने मुझे बुलाकर कहा, “अब तू आराम कर। तेरी माँ ने मुझे संभाल लिया।”

    माँ ने कमजोर आवाज में मुझे देखा और कहा, “बेटी… अब तू चिंता मत कर… माँ है ना…”

  • तीन बहुओं का घोड़ा 1

    अध्याय 1: थाईलैंड हनीमून – पहली रात की आग

    मेरा नाम प्रिया है, 26 साल। शादी को सिर्फ 12 दिन हुए थे। मेरे पति विक्रम, 32 साल का, लंबा-चौड़ा, जिम वाली बॉडी, घनी मूंछें। हम दोनों थाईलैंड के पटाया बीच पर हनीमून मनाने आए थे। 5 स्टार रिसॉर्ट का प्राइवेट विला बुक किया था – सामने नीला समुद्र, प्राइवेट पूल, जकूजी, और चारों तरफ रोमांटिक लाइट्स। लेकिन मेरी चुत पहले ही डर रही थी।

    विक्रम का लंड… भगवान, वो सच में घोड़े जैसा था। 13 इंच लंबा, मोटा, काला, नसें उभरी हुईं। शादी से पहले मैंने सिर्फ दो बार लिया था, वो भी बहुत धीरे। लेकिन विक्रम चुदाई करता था जैसे गधा – बिना रुके, बिना थके, घंटों तक जोर-जोर से।

    पहली रात। हम दोनों शैंपेन पीकर बेड पर थे। विक्रम ने मुझे नंगी कर दिया। मेरी साड़ी, ब्लाउज, ब्रा, पैंटी सब फर्श पर पड़ी थीं। मैं नंगी लेटी थी, टांगें थोड़ी खुली।

    “प्रिया… आज मैं तुझे पूरी तरह चोदूंगा,” विक्रम ने कहा और अपना लंड बाहर निकाला। सोया हुआ भी 7 इंच का मोटा। मैंने डरते हुए हाथ लगाया।

    “विक्रम… प्लीज… धीरे… तुम्हारा इतना बड़ा है… मैं सह नहीं पाऊंगी…” मैंने कांपते स्वर में कहा।

    लेकिन विक्रम ने मेरी टांगें कंधों पर रखीं और कंडोम लगाकर लंड का सिर मेरी चुत पर रख दिया। एक जोरदार धक्का।

    “आआआह्ह्ह… नहीं… विक्रम… रुक जाओ… फट रही है मेरी चुत… प्लीज… आधा भी नहीं घुसा… बहुत मोटा है… दर्द हो रहा है…” मैं चीख पड़ी। आंसू निकल आए।

    विक्रम रुका नहीं। उसने कमर जोर से हिलाई और पूरा लंड एक झटके में अंदर धकेल दिया। मेरी चुत पूरी तरह फैल गई। पेट में उभार दिखने लगा।

    “नहीं… विक्रम… निकालो… प्लीज… मैं मर जाऊंगी… इतना गहरा… पेट फाड़ रहा है… आह्ह… धीरे… मत मारो…” मैं रोते हुए उसके सीने पर हाथ मार रही थी।

    लेकिन विक्रम ने मेरी कमर पकड़ ली और घोड़े जैसी रफ्तार से चोदना शुरू कर दिया। पच… पच… पच… पच… हर धक्के पर कमरा गूंज रहा था। लंड मेरी गर्भाशय तक टकरा रहा था।

    “आह्ह… नहीं… बस… रुक जाओ… मैं सह नहीं पा रही… तुम गधे की तरह चोद रहे हो… प्लीज… थोड़ा आराम दो… आआह्ह… हाँ… और गहरा… नहीं… मत…”

    मेरा पहला ऑर्गेज्म आया। चुत ने लंड को कसकर पकड़ लिया। लेकिन विक्रम रुका नहीं। उसने मुझे कुत्ते की मुद्रा में मोड़ दिया, गांड ऊपर की और पीछे से जोर-जोर से ठोकने लगा।

    “नहीं… इस पोजीशन में नहीं… बहुत गहरा जा रहा है… विक्रम… प्लीज… मेरी चुत फट गई… रुक जाओ ना… मैं मना कर रही हूँ… आह्ह… और जोर से मत…”

    दूसरा ऑर्गेज्म। तीसरा। चौथा। मैं थककर बिस्तर पर गिर पड़ी थी। लेकिन विक्रम अभी भी चोद रहा था। 45 मिनट हो चुके थे।

    “विक्रम… प्लीज… अब काफी… मैं और नहीं ले सकती… तुम्हारा लंड बहुत बड़ा है… रोज-रोज मैं मर जाऊंगी…” मैं हांफते हुए बोली।

    विक्रम ने मुझे फिर मिशनरी में लिटाया और तेजी बढ़ा दी। आखिरकार वह कंडोम में झड़ गया। गर्म वीर्य कंडोम में भर गया।

    वो मेरे ऊपर लेट गया। मैं पसीने से तर, चुत लाल और सूजी हुई।

    दूसरे दिन सुबह। विक्रम फिर से खड़ा हो गया। उसने मुझे जकूजी में ले जाकर चोदा। फिर पूल के किनारे। फिर बेड पर। हर बार मैं “नहीं… प्लीज… रुक जाओ… मैं सह नहीं पा रही…” कहती, लेकिन वो घोड़े जैसा चोदता रहता।

    शाम को मैं थककर बिस्तर पर लेटी थी। चुत में दर्द हो रहा था। विक्रम फिर से तैयार था।

    मैंने हिम्मत जुटाकर कहा, “विक्रम… सुनो… तुम्हारा लंड बहुत बड़ा है… मैं जितनी बार चाहकर भी नहीं ले पा रही… प्लीज… कोई लड़की बुला लो… प्रोफेशनल… वो तुम्हें संभाल लेगी… मैं भी देखूंगी… बस मेरी चुत को आराम मिल जाए…”

    विक्रम मुस्कुराया। “तुम सच कह रही हो?”

    “हाँ… प्लीज… मैं मना नहीं कर रही… बस 2 दिन के लिए कोई अच्छी लड़की बुला लो… पैसे दे देंगे… कंडोम लगाकर… मैं तुम्हें देखना चाहती हूँ…”

    विक्रम ने रिसॉर्ट के कांटेक्ट से एक थाई-इंडियन कॉल गर्ल का नंबर लिया। नाम था “लावा”। 24 साल, 36-24-38 फिगर, बहुत खूबसूरत। 2 दिन के लिए 80,000 रुपये तय हुए।

    रात 9 बजे लावा आई। टाइट ड्रेस में। लंबे बाल, भरे स्तन, मोटी गांड।

    विक्रम ने उसे अंदर बुलाया। मैं बेड पर बैठी थी, सिर्फ नाइट गाउन में।

    लावा ने मुस्कुराते हुए कहा, “सर… मैडम… दोनों साथ में एंजॉय करेंगे?”

    मैंने शरमाते हुए सिर हिलाया। “हाँ… लेकिन विक्रम बहुत जोर से करते हैं… तुम संभाल लेना…”

    विक्रम ने लावा को नंगी किया। उसका लंड पहले से खड़ा था। लावा ने कंडोम लिया, मुंह से लगाया और चूसने लगी।

    “वाह… सर… कितना बड़ा… मैं पूरी ले लूंगी…” लावा बोली।

    विक्रम ने लावा को बेड पर लिटाया और घोड़े जैसी चुदाई शुरू कर दी।

    “आह्ह… सर… जोर से… हाँ… और जोर से…” लावा चीख रही थी।

    मैं बगल में बैठी देख रही थी। विक्रम लावा को 1 घंटे तक लगातार चोदता रहा – मिशनरी, डॉगी, राइडिंग। हर बार कंडोम बदलता। लावा पैसे वसूल कर रही थी – वो भी जोर-जोर से चीख रही थी लेकिन सह ले रही थी।

    “प्रिया… देख… तेरा पति कितना जोर से चोदता है…” लावा ने मुझे बुलाया।

    मैंने पास जाकर देखा। विक्रम का लंड लावा की चुत में पूरा घुस-घुसकर बाहर आ रहा था।

    मेरी चुत फिर गीली हो गई। लेकिन मैंने खुद को रोका।

    “विक्रम… प्लीज… लावा को आराम दो… अब मेरी बारी…” मैंने कहा।

    लेकिन विक्रम ने मुझे भी खींच लिया। अब दोनों को बारी-बारी चोद रहा था।

    रात भर यही चला। लावा ने पैसे के हिसाब से पूरा 2 दिन का प्लान बनाया – सुबह, दोपहर, शाम, रात।

  • तीन बहुओं का घोड़ा 2

    अध्याय 2: दूसरी रात – लावा के साथ थ्रीसम

    दूसरी रात, 10:30 बजे। विला में सिर्फ नीली लाइट्स जल रही थीं। बाहर समुद्र की लहरें शांत थीं, लेकिन अंदर तूफान आने वाला था। लावा अभी भी हमारे साथ थी। उसने शॉवर लेकर हल्का मेकअप किया था – लाल लिपस्टिक, काला ट्रांसपेरेंट नेग्लिजी, जिसके अंदर कुछ नहीं था। उसके भरे-भरे 36D स्तन और गोल गांड देखकर मेरी सांसें तेज हो रही थीं।

    विक्रम शैंपेन के दो ग्लास लेकर आया। उसका लंड पहले से ही लुंगी में तना हुआ था।

    “आज पूरा थ्रीसम होगा,” विक्रम ने कहा और मुझे अपनी तरफ खींच लिया। “प्रिया, तू देखना और एंजॉय करना।”

    मैंने शरमाते हुए सिर हिलाया, लेकिन दिल में डर भी था। “विक्रम… प्लीज… धीरे करना… लावा को भी मत तोड़ देना… तुम गधे की तरह चोदते हो… मैं पहले ही दो रात से सह नहीं पा रही…”

    लावा मुस्कुराई। उसने मेरी नाइट गाउन की स्ट्रैप खींची और मेरे स्तनों को बाहर निकाल लिया। “मैडम… डरो मत… मैं संभाल लूंगी… सर का लंड बहुत पावरफुल है…”

    विक्रम ने मुझे बेड पर लिटा दिया। लावा मेरे ऊपर चढ़ गई। उसने मेरे होंठ चूमे, फिर मेरे स्तनों को चूसने लगी। मैं कांप रही थी।

    “नहीं… लावा… मैं लड़की हूँ… ये… आह्ह… मत चूसो… बहुत जोर से… विक्रम देख रहा है… प्लीज… रुक जाओ…” मैंने कहा, लेकिन मेरी उंगलियाँ लावा के बालों में फंस गईं।

    विक्रम ने अपना लंड बाहर निकाला। 13 इंच का वो विशाल काला लंड देखकर लावा की आँखें चमक उठीं। उसने कंडोम लिया, मुंह से लगाया और पूरा मुंह भरकर चूसने लगी। गला तक ले जा रही थी।

    “उम्म्म… सर… कितना मोटा… मेरी चुत तैयार है…” लावा बोली।

    विक्रम ने लावा को मेरे बगल में लिटाया और उसकी टांगें फैला दीं। एक जोरदार धक्का।

    “आआह्ह… सर… पूरा घुस गया… हाँ… जोर से चोदिए…” लावा चीखी।

    विक्रम ने घोड़े जैसी रफ्तार पकड़ ली। पच… पच… पच… पच… कमरा आवाजों से भर गया। लावा की चुत से सफेद फेन निकल रहा था।

    मैं बगल में लेटी देख रही थी। मेरी चुत गीली हो गई थी। विक्रम ने मुझे बुलाया, “प्रिया… आ… लावा के स्तन चूस…”

    “नहीं… विक्रम… मैं नहीं कर सकती… ये गलत है… प्लीज… मैं सिर्फ देखूंगी…” मैंने मना किया, लेकिन विक्रम ने मेरे सिर को लावा के स्तन पर दबा दिया।

    मैंने अनमने मन से लावा का निप्पल मुंह में लिया और चूसने लगी। “उम्म्म… नहीं… आह्ह… स्वाद… लावा… तुम्हारे स्तन कितने बड़े हैं…”

    विक्रम ने लावा को 20 मिनट तक लगातार चोदा। फिर उसने लावा को उठाकर मुझे बेड के बीच में लिटा दिया। अब दोनों मेरे साथ थे।

    विक्रम ने मेरी टांगें खोलीं और कंडोम लगाकर लंड मेरी चुत पर रख दिया।

    “नहीं… विक्रम… आज मत… मैं अभी भी कल की चुदाई से सूजी हुई हूँ… प्लीज… रुक जाओ… लावा को चोदो… आआह्ह… आधा घुस गया… बहुत मोटा… फट रही है… प्लीज धीरे…” मैं रो पड़ी।

    विक्रम ने आधा लंड अंदर किया ही था कि लावा मेरे मुंह पर बैठ गई। उसकी चुत मेरे होंठों पर।

    “चाटो मैडम… अच्छे से चाटो…” लावा ने कहा और मेरी नाक पर अपनी चुत रगड़ने लगी।

    “नहीं… लावा… मैं नहीं… आह्ह… स्वीट… चूत का रस… उम्म्म… नहीं… मैं पत्नी हूँ… प्लीज… मत दबाओ…” मैं चाट रही थी और विक्रम मेरी चुत में धक्के मार रहा था।

    अब थ्रीसम पूरा शुरू हो गया। विक्रम मेरी चुत चोद रहा था, लावा मेरी चुत चाट रही थी और मैं लावा की चुत चाट रही थी। कमरे में “चुप… चुप… पच… पच…” की आवाजें और हमारी चीखें गूंज रही थीं।

    “आह्ह… विक्रम… नहीं… इतना जोर से मत… मेरी चुत फट जाएगी… लावा… तुम भी मत… आआह्ह… मैं झड़ रही हूँ… प्लीज रुक जाओ… दोनों… मैं सह नहीं पा रही…”

    मेरा पहला ऑर्गेज्म आया। शरीर कांप उठा।

    फिर पोजीशन बदली। विक्रम ने लावा को डॉगी स्टाइल में चोदा और मैं लावा के नीचे लेटकर उसकी चुत चाट रही थी। विक्रम का लंड मेरी जीभ से टकरा रहा था।

    “नहीं… विक्रम… लावा की चुत फाड़ रहे हो… प्लीज धीरे… आह्ह… लावा… तुम चीख क्यों रही हो… हाँ… और चूसो मेरी चुत…”

    दूसरा राउंड। विक्रम ने मुझे और लावा को बगल में लिटाया। एक-एक करके दोनों को चोद रहा था। 10-10 मिनट। कंडोम बदलता जा रहा था।

    “प्रिया… देख… लावा कितना सह ले रही है… तू क्यों नहीं सह पाती?” विक्रम ने हांफते हुए कहा।

    “क्योंकि तुम गधे हो… आह्ह… नहीं… फिर से मेरी बारी… प्लीज… बस 5 मिनट… मेरी चुत जल रही है… लावा… तुम ले लो…”

    तीसरा राउंड। अब मैं विक्रम के ऊपर थी, लावा मेरे पीछे। लावा ने अपना उंगली मेरी गांड में डाल दी।

    “नहीं… लावा… गांड में मत… प्लीज… दर्द हो रहा है… विक्रम… तुम भी मत… आआह्ह… दोनों… मैं मर जाऊँगी… हाँ… और अंदर… नहीं… रुक जाओ…”

    रात 3 बजे तक चला। मैं 7 बार झड़ चुकी थी। लावा 8-9 बार। विक्रम ने आखिर में दोनों के मुंह पर झड़ने की कोशिश की, लेकिन कंडोम में ही झड़ा।

    हम तीनों पसीने से तर, नंगे बेड पर लेटे थे। लावा मेरी छाती पर सिर रखे हुए थी। विक्रम दूसरी तरफ।

    लावा ने फुसफुसाया, “मैडम… कल तीसरी रात भी रहूंगी… सर बहुत पावरफुल हैं… पैसे वसूल कर लूंगी।”

    मैं थकी हुई मुस्कुराई। “हाँ… लेकिन मेरी चुत को आराम दो…”

  • सड़क पर लड़की को पटाकर घर में चोद दिया

    बुर की चुदाई हिंदी में पढ़ें कि कैसे मैंने सडक पर एक लड़की देखी और वो मुझे पसंद आ गयी. उसके बाद मैंने उसे कैसे पटाया और कैसे उसको अपने घर बुलाकर चोदा.

    नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम सचिन है.
    मैं 24 साल का हूँ और हरियाणा के रोहतक जिले का रहने वाला हूँ.

    मेरी पिछली कहानी थी: होटल में गर्लफ्रेंड की सील तोड़ी

    अब मैं एक नयी बुर की चुदाई हिंदी में लिख रहा हूँ. लुत्फ़ लें इस कहानी का!
    खेती हमारा पारिवारिक काम है.
    खेत में काम करते रहने की वजह से मेरा शरीर एक खिलाड़ी टाइप का है, मेरी हाइट 5′ 11″ है और लन्ड का साइज 7 इंच है.

    बात अभी कुछ दिन पहले की है, मैं रोहतक के बाजार में ऐसे ही बाइक पर फालतू में चक्कर लगा रहा था.

    तभी मेरी नज़र एक खूबसूरत सी लड़की पर पड़ी।
    उसका नाम सोनिया(बदला हुआ) जो मुझे बाद में पता चला था।

    उसकी हाइट 5′ 4″ होगी और रंग उसका दूध से भी साफ!
    32-28-32 का फिगर होगा उसका!

    वो एक ऑटो रिक्शा में बैठ कर कहीं जा रही थी।

    मैंने उसके आटो के आगे पीछे चक्कर काटने चालू कर दिया।

    करीब 6-7 चक्कर काटने के बाद उसने मुझे देख होगा।
    फिर तो मेरी 4 बार उससे नजर मिली।

    आगे चल कर वह एक पार्क के सामने उतर गयी।
    वहाँ पर वो किसी आदमी के साथ बाइक पर बैठ कर चली गयी।

    मैंने भी उनके पीछे पीछे चलना शुरू कर दिया।

    सोनिया बार बार मेरी तरफ देख रही थी और धीरे धीरे मुस्कुरा रही थी।

    मैंने सोचा कि मेरा काम बन सकता है।
    पर आगे चल कर वे पता नहीं किस गली में चले गए औऱ मैं उनसे बिछड़ गया।

    मैंने लगभग 1 घण्टा उस कालोनी में चक्कर लगाए लेकिन मेरे हाथ कुछ नहीं लगा।

    घर आकर रात में मैंने उसके नाम की 3 बार बार मुठ मारी और सो गया।
    रात को सपने में भी मुझे सोनिया दिखाई दे रही थी।

    अगले दिन उसी टाइम पर मैं उसी पार्क के आगे पहुँच गया जहाँ पर सोनिया आटो से उतरी थी.
    वहां कोई नहीं था, न ही वहाँ पर वो अंकल थे जिनके पीछे सोनिया बैठ कर गयी थी।

    मैंने करीब एक घण्टा वहाँ पर इंतज़ार किया होगा लेकिन मुझे वो नहीं मिली।
    तीसरे दिन भी मैं वहाँ पर गया लेकिन कुछ नहीं पता चला।

    चौथे दिन मैं फिर से बाजार में ऐसे ही फिर से फालतू में घूम रहा था तो मुझे फिर से सोनिया दिखाई दी।
    हमारी फिर से नज़र से नज़र मिली और सोनिया मुस्कुराने लगी।

    अब मैंने मौका नहीं छोड़ना था।
    मैंने जल्दी से एक दुकान से पैन पेपर लिया और एक पर्ची पर अपना मोबाईल नम्बर लिख कर जेब में डाल लिया और उसके आटो के पीछे चक्कर लगाने लग गया।

    मैंने सोनिया को पर्ची दिखा दी तो वो हंसने लगी।
    शायद उसके मन में भी कुछ था।

    आगे चल कर वो उस पार्क से 150 मीटर पीछे ही उत्तर गयी और पैदल ही पार्क की तरफ चलने लगी।

    मैंने भी उसके पास बाइक ले जाकर उसके सामने पर्ची कर दी।
    उसने झट से मेरे हाथ से परची ले ली।
    फिर वो पार्क के आगे से उस बाइक वाले आदमी के साथ बैठकर चली गयी।

    मैंने पूरी रात उसके फ़ोन का इंतज़ार किया लेकिन उसका कोई फ़ोन नहीं आया।

    फिर मैं उसके नाम की 2 बार मुठ मार कर सो गया।

    अगले दो दिन तक उसकी कोई कॉल नहीं आई.
    अब मैंने भी उम्मीद छोड़ दी थी।

    फिर एक दिन एक अनजान नंबर से कॉल आयी तो मैंने सोचा आ शायद उसी का हो सकता है.
    और वो उसी का फोन था।
    हाय हेलो हुआ … थोड़ी से बातचीत हुई।

    अब लगभग हर रोज मैसेज पर ओर कॉल पर हमारी बाते हों लग गयी थी।

    बातों ही बातों में गाली वगैरा देना और नॉन वेज चुटकुले शेयर करना अब सामान्य सी बात हो गयी थी।

    अब रात को हर रोज की तरह बात करते करते मैं उसको गर्म कर देता था और अपना पानी भी निकल लेता ओर उसका भी निकलवा देता था।

    सोनिया भी मेरे से उतना ही मिलना चाहती थी जितना मैं उससे!

    अब पार्क में मिलना और आपस में चूमाचाटी करना हमारा रोज का काम हो गया था।
    लेकिन हमें सेक्स का मोक्का नहीं मिल पा रहा था।

    एक बार मेरे घर वाले 3-4 दिन के लिए कहीं बाहर जाने वाले थे तो मैंने दुकान का (सॉरी, मैंने बताया नहीं कि खेती से अलग मेरी सी सी टी वी कैमरों की दुकान और है) बहाना मार कर नहीं गया।

    मैंने उसको अपने घर पर आने के लिए मना लिया.

    उसने भी अपनी किसी सहेली की शादी के लिए घर पर बोल दिया और शाम के टाइम ही मेरी बताई जगह पर आ गयी।

    उस दिन उसने स्काई ब्लू जीन्स और सफेद टॉप पहना था।

    हम दोनों मेरे घर पर आ गए, वो अपने साथ शादी में पहनने वाला लाचा भी लेकर आई थी।

    घर आ कर हम दोनों ने कॉफी बनाई और साथ बैठ कर पीने लगे।

    कॉफी पीते पीते मैं उसको छेड़ने लगा तो वो बोली- रुक भी जाओ, सारी रात अपनी ही है।
    लेकिन मैं नहीं माना और उसको पकड़ कर किस करने लगा।

    पहले तो वो थोड़ी ना नुकर करने लगी, फिर वो भी मेरा साथ देने लगी।

    मैंने एक एक करके उसके उसकी जीन्स ऒर टॉप उतार दिया।
    अब वो सिर्फ ब्रा ओर पैंटी में थी।

    उसने मेरे भी कपड़े उतार दिए।

    अब मैं भी ब्रा के ऊपर से ही उसकी चूचियों को मसलने लग गया।

    और जब मैंने उसकी पैंटी के अंदर हाथ दिया तो वो पानी छोड़ चुकी थी।
    मैं अब उसकी चूत में उंगली करने लग गया और उसकी पैंटी भी उतार दी।

    उसने भी अब मेरा अंडरवीयर भी उतर दिया और मेरा लन्ड पकड़ लिया था।
    हम दोनों अब जन्मजात नंगे थे।

    अब मैंने उसको उठाया और अपने बेडरूम में ले गया।
    वहाँ पर उसकी चूत को चाटने लग गया।

    कुछ ही देर में हम दोनों 69 की पोजीशन में आ गये।

    पहले तो उसने लन्ड चूसने से मना कर दिया लेकिन थोड़ा जोर देने पर वो लन्ड को चूसने लग गयी।
    बड़ा गजब से लन्ड चूस रही थी।
    मुझे लन्ड चुसवान में बहुत मज़ा आ रहा था।

    उसके मुंह के अंदर ही मेरा पानी निकल गया।

    तभी उसने सारा का सारा माल अपने मुंह से उल्टी कर दिया और मुझसे लड़ने लग गयी।
    लेकिन फिर बाद में मैंने उसकी चूत चाट कर और उसका पानी पीकर मना लिया।

    अब वो फिर से मेरा लन्ड चूसने लग गयी।

    थोड़ी देर में मेरा लन्ड दोबारा पूरा तन चुका था।
    अब सोनिया बार बार अपनी कमर उठा कर लन्ड को चूत में आने का न्योता दे रही थी।

    मैंने भी उसकी दोनों टांगों को उठाया और उसकी चूत की फांकों के अंदर लन्ड को एडजस्ट किया और एक जोर का झटका दे मारा.
    मेरा आधा लन्ड उसकी चूत के अंदर!

    सोनिया ने बड़ी जोर से चीख मारी.
    मैंने जल्दी से उसके होंठों को अपने होंठों से दबाया और दो मिनट तक ऐसे ही उसके ऊपर पड़ा रहा।
    टीवी का रिमोट पास ही पडा था तो मैंने टीवी चला कर उसकी आवाज़ तेज़ कर दी।

    सोनिया को थोड़ा आराम मिलने के बाद बोली- आराम से करो! अभी तक मैंने सिर्फ गाजर मूली से काम चलाया है लन्ड नहीं लिया है किसी का!

    मैं उसकी चूचियों को छेड़ने लग गया।

    सोनिया को थोड़ा आराम मिलने के बाद बिना बताए मैंने एक और जोर का झटका मार दिया.
    अब उसके चिललाने से कोई फर्क नहीं पड़ रहा था। अब मैंने उसकी ताबड़ तोड़ चुदाई चालू कर दी।

    इस बीच सोनिया झड़ गयी।
    मैं भी थोड़ा थक गया था।

    अब मैंने सोनिया को पेट के बल लेटाकर पीछे से उसकी चूत मारनी चालू कर दी।

    कुछ मिनट बाद जब मैं झड़ने वाला था तो मैंने सोनिया से पूछा.
    तो सोनिया बोली- अंदर ही निकालना … मैं पहली बार पूरा फील लेना चाहती हूँ।

    मैं उसकी चूत में ही झड़ गया।
    हम दोनों उठे तो देखा कि चादर पर खून के धब्बे पड़ गये थे।

    सोनिया से चला भी नहीं जा रहा था।
    मैं उसको पकड़ कर वाशरूम तक ले गया और वहीं पर फव्वारे के नीचे हम दोनों नहाने लग गए।

    वहीं बाथरूम में ही मैंने उसको एक बार फिर से चोदा।

    अब हम दोनों थक कर सो गए।

    सुबह जब मैं उठा तो सोनिया मेरे से पहले उठ कर खाना बना रही थी।

    सोनिया ने मुझे बताया कि रात को उसके गाँव में किसी को मौत हो गयी है. सभी घर वाले रात को ही गाँव जा चुके है वे कल तक आएंगे. मुझे मेरी सहेली के ही घर रुकने को बोला है।

    अब हमारे पास एक पूरा दिन और एक पूरी रात ओर थी।

    फिर हमने एक बार ओर सेक्स किया और पूरा दिन आराम करते रहे।

    शाम को मैं थोड़ी देर बाजार से कुछ खाने का सामान लेने चला गया।

    बाजार से आने के बाद देखा कि सोनिया लाचा पहने घूम रही थी।
    क्या गजब की लग रही थी … जी कर रहा था कि अभी पकड़ कर चोद दूँ!

    लेकिन मैंने थोड़ा इंतज़ार करना ही ठीक समझा.

    रात को खाना खाने के बाद हम दोनों फिर एक दूसरे को किस करने लगे.

    एक बार चूत चुदाई हो जाने के बाद अब मेरा दिल उसकी गांड मारने का कर रहा था.
    तो मैंने उसे अपनी इच्छा बतायी.

    पहले तो सोनिया गांड मरवाने से मना करने लगी क्योंकि उसने अपनी सहेलियों और भाभी से सुन रखा था कि गांड में लंड लेने से बहुत दर्द होता है.
    लेकिन थोड़ा सा ज़ोर देने कर बाद वो मान गयी.

    अब मैं उसकी गांड में तेल डाल कर गांड में उंगली करने लग गया.
    पहले तो उसको उंगली में भी थोड़ा दर्द हो रहा था लेकिन बाद में उसकी गांड थोड़ी ढीली पड़ गयी।

    अब मैंने उसकी गांड के छेद में अपना लौड़े का सुपारा एडजस्ट करके थोड़ा जोर लगाया लेकिन लन्ड फिसल गया।

    तब सोनिया ने अपने दोनों चूतड़ों को पकड़ कर गांड के छेद को चौड़ा किया.
    मैंने भी लन्ड छेद पर लगाकर जोर लगाया तो लंड धीमे धीमे उसकी गांड में घुसाने लगा और वो दर्द से कराहने लगी.

    मेरा आधा लन्ड की गांड में घुस गया।
    उसकी गांड से खून आने लग गया था और उसकी आँखों से पानी!

    थोड़ी देर मैं ऐसे ही रुक रहा … फिर उसने धीरे धीरे कमर हिलाना चालू किया तो मैंने एक झटका ओर मार दिया.

    अब मेरा पूरा लन्ड उसकी गांड में जा चुका था.

    थोड़ी देर हल्के हल्के झटके मारने के बाद उसे भी मज़ा आने लग गया था।
    तब मैंने भी थोड़ा जोर जोर से झटके मारने चालू कर दिए और थोड़ी देर बाद उसकी गांड में ही झड़ गया।

    उस दिन और रात मैंने उसकी 2 बार चूत और 2 बार गांड मारी।
    अब तो चुदाई का खेल हमारे लिए हर हफ्ते का खेल हो गया था।

    हमारी दोस्ती करीब 5 महीने तक रही. फिर हमारे बीच में कुछ गलतफहमी होने के कारण अब हम दोनों दूर हो चुके हैं।

    उसको एक नया बॉयफ्रेंड मिल गया, लेकिन मैं अभी भी अकेला हूँ।

  • चोदना था गर्लफ्रेंड को चुद गयी उसकी मम्मी

    गर्लफ्रेंड मॉम सेक्स कहानी में पढ़ें कि मेरे गाँव के स्कूल की दोस्त मुझे शहर में मिल गयी. हमारी आपस में सेटिंग हो गयी. मैं उसकी चुदाई करना चाहता था पर …

    हाय दोस्तो, मैं राहुल वैद्या, उम्र 26 वर्ष, हाइट 5 फीट 10 इंच, रंग गोरा!
    मैं एक गांव में रहने वाला लड़का हूँ।

    यह कहानी शत प्रतिशत सही है, इस गर्लफ्रेंड मॉम सेक्स कहानी में केवल सभी पात्रों के नाम और जगह का नाम गोपनीयता के लिए बदल दिए गए हैं।

    बात उन दिनों की है जब इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए शहर में रहता था. मैं इंजीनियरिंग के चौथा सेमेस्टर में था.

    तब अचानक एक दिन शहर के सब्जी बाजार में मेरी एक स्कूल की फ्रेंड जिसका नाम रेशमा था, वो मुझे मिल गयी।

    रेशमा के पापा सरकारी नौकरी वाले हैं तो पहले वो हमारे गाँव में उनका पोस्टिंग था तो उस समय रेशमा हमारे स्कूल में ही पढ़ती थी।
    फिर जब हम लोग नवमी कक्षा में आये तो उनके पापा का ट्रांसफर हो गया।

    तब उनकी फैमिली सभी शहर में आ गयी. उसके बाद सब्जी मार्किट में अचानक उससे मिला.
    5 साल के लंबे अंतराल के बाद उसे देखा बहुत चेंज हो गयी थी, अब वो माल बन गयी थी।

    मैं पहले से ही उसको पसंद करता था लेकिन तब तक इतनी हिम्मत नहीं थी उसको इजहार करूँ।
    अचानक मिले तो दोनों ही हैरान हो गए।

    उसने मुझसे हाथ मिलाया.
    काफ़ी देर तक हमने वहीं बात की फिर दोनों ने नम्बर एक्सचेंज किया. हम दोनों ने फिर से मिलने का वादा किया.
    फिर हम दोनों अपने अपने घर आ गए।

    उससे मिलने के बाद मुझे बहुत ही बेचैनी हुई उससे बात करने की लेकिन हिम्मत नहीं हो पा रही थी।
    लगता है कि जो मुझे फील हो रहा था उसे भी कुछ ऐसा ही एहसास हो रहा था।

    तब रात को 10 बजे रेशमा का कॉल आया।
    हमने बात करना शुरू किया. उस दिन लगातार एक घंटा बातें की, हमने पुरानी बातें याद की हमारे स्कूल की … पुरानी यादों को याद करने लगे।

    बातों बातों में मैंने उसकी तारीफ करना चालू कर दिया- यार रेशमा, आप मुझे स्कूल लाइफ से ही बहुत अच्छी लगती हो, आप बहुत सुंदर हो!
    उसने हंसते हुए कहा- चल झूठा।
    मैंने कहा- सच्ची यार।

    फिर वो कहने लगी- तुम भी कम नहीं हो किसी से, हैंडसम इंटेलीजेंट!

    यूँ ही हमारी बातें चलती रही. जितनी बातें हमने स्कूल की लाइफ में नहीं की, उससे ज्यादा हमने 2 घंटे में ही कर दी.
    मैं जिस एरिया से बिलोंग करता था, वहाँ लड़के अगर लड़कियों से बात करे, हाथ मिलाये मतलब उन दोनों के बीच कोई न कोई चक्कर है.
    ऐसा माना जाता था स्कूल लाइफ में।

    बीच में रास्ता खराब था जिसकी वजह से बार आंटी की चूचियां मेरी पीठ दब जाती थी. जिससे मुझे बहुत ही आनंद का अनुभव होता था।

    11 बजे हम घर पहुंच गए.
    मैंने रेशमा को काल करके बताया कि हम लोग पहुंच गए।

    वहाँ पहुंचे तो रेशमा के बड़े पापा और उसकी बड़ी माँ से मिलकर उनको प्रणाम किया।

    फिर हम लोग फ्रेश होकर दोपहर का भोजन करके आराम करने लगी।
    लंबा सफर होने की वजह से थकावट बहुत थी।

    रेशमा के गांव के घर में 3 कमरे थे, एक में उसके बड़े पापा मम्मी और एक रेशमा के परिवार का था, जब भी ये लोग आते थे, वहीं रहते थे।

    रात में भोजन के बाद मैं अपना समान गेस्टरूम में ले जा रहा था.

    तभी आँटी ने कहा- बेटा, कहाँ जा रहा है?
    तो मैंने कहा- आँटी गेस्ट रूम में सोने!
    उन्होंने कहा- बेटा, मुझे अकेले सोने की आदत नहीं है. मेरे रूम में कोई न कोई सोता है तब अच्छा लगता है. इधर मैंने बगल में बिस्तर लगा दिया है, यहाँ सो जा।
    तो मैं वहाँ सो गया।

    मैं आँटी से जब से मिला, तबसे उनको चोदने की मेरी इच्छा तो बहुत थी लेकिन मैंने ‘रेशमा की माँ है’ सोच कर के कभी ट्राय नहीं किया.
    और डर भी लगता था कि कहीं लेने के देने ना पड़ जायें।

    अगले दिन मैं सुबह 8 बजे उठा आँटी उठ गई थी.
    रेशमा के बड़े पापा और बड़ी माँ कहीं बाहर चले गए थे।

    मैं बाड़ी के तरफ गया तो देखा आँटी अपने साड़ी और पेटीकोट अपने घुटनों के ऊपर जांघों तक चढ़ाकर नीचे बैठकर बर्तन धो रही थी।

    आँटी को ऐसी अवस्था में देखकर मेरा लंड खड़ा हो गया.
    आप लोग जानते हो कि गांव में बेसिन वगैरा नहीं होता तो गांव की महिलायें जमीन पर बैठकर बर्तन धोती हैं।

    मुझे वो देख नहीं रही थी.

    फिर वो उठी और उसने फिर साड़ी और पेटिकोट को चढ़ा कर अपने कमर पे अटका दिया।

    उनकी गदरायी हुई माँसल जांघों को देखकर मेरा लंड पैंट में पूरी तरह खड़ा हो गया।

    फिर उन्होंने मुझे देखा और कहा- बेटा उठ गए … चलो मुंह हाथ धो लो … मैं चाय बना देती हूँ तुम्हारे लिए!

    उनकी नजर मेरे शार्ट्स पर पड़ी.
    मेरा खड़ा लंड ऊपर से ही पता चल रहा था.
    वो उसे देखकर मुस्कुरा रही थी।

    पानी भरने तक मैंने उनकी जांघों को देखा.
    फिर मैंने टॉयलेट में जाकर मुठ मारी. तब मेरा लंड शांत हुआ।

    थोड़ी देर बाद आँटी नहाने बाड़ी में गयी वो पेटीकोट को अपने वक्ष पर बांध कर नहा रही थी.
    मैं बाड़ी में गया तो उनके भीगे अधनंगे जिस्म को देखकर मैं पागल हो गया।

    फिर शाम को बड़े पापा, माँ आ गए.
    हमने रात का भोजन किया.

    फिर 9 बजे आँटी उठकर बाड़ी की तरफ गयी.
    आधा घंटा से ज्यादा हो गया था, वो वापिस नहीं आई।
    गांव में 9 बजे से ही सब सो जाते हैं.

    तो मैंने जाकर देखा तो बड़े पापा और आँटी की बातें चल रही थी।

    बड़े पापा आँटी को बोल रहे थे- यहां क्यों आई है? चुदवाने आयी है तो क्यों नहीं दे रही है जानेमन?

    आँटी ने कहा- मैं तो चाहती हूं कि आप मुझे चोदो. लेकिन ये राहुल आया है, उसने देख लिया तो … और रेशमा को बता दिया तो फिर तो हमारी बैंड बज जाएगी।

    तब आँटी ने कहा- 3 बजे रात को आप गेस्टरूम में आना, मैं वहीं मिलूँगी।

    फिर क्या था … मैं उनके बारे में जान गया कि वो बहुत बड़ी रांड है।
    और इसको बड़े पापा से नहीं अब मुझसे चुदना होगा … मैं इनकी जेठ से चुदाई आज होने नहीं दूँगा।

    फिर मैं बाड़ी तरफ गया अनजान बनते हुए!
    मुझे देख वे दोनों छुप गए.

    मैं अपना लंड निकाल के वहीं पे मूतने लगा.
    मेरा लंड खड़ा था, उसे देखकर आँटी के मुंह में पानी आ गया।

    फिर मैं वहाँ से आ गया.
    तुरंत आँटी भी आकर सो गई।

    मैं जागता रहा था.
    3 बजे आंटी अपने जेठ का लंड लेने जाने लगी तो तभी मैंने उनको बोला- कहाँ जा रहे हो?
    आँटी- कही नहीं बेटा … वॉशरूम जा रही हूं।

    फिर मैंने उनका पीछा किया, वो गेस्टरूम में गयी.
    वहाँ अंकल थे.

    अंकल ने उन्हें जाते ही पकड़ लिया.
    फिर आँटी ने कहा- नहीं, हम लोग आज नहीं कर सकते क्योंकि राहुल जग रहा है। मैं अभी आ रही थी तो उसने मुझसे पूछा कि कहाँ जा रही हो आँटी. मैं उससे वाशरूम कहकर आई हूँ. लेट हुई तो वो फिर मुझसे कहेगा।

    इस बात पर बड़े पापा भड़क गए- तू ही मुझे चूत देना नहीं चाहती. इसलिये बहाने मारती है. तू उसी को चूत देती होगी।

    आँटी ने कहा- तुमको नहीं देना रहता तो गांव नहीं आती. और दूसरी बात … उससे चुदना होता तो रूम में ही चुद लेती चिल्ला चिल्ला के … क्योंकि उसका लंड आपसे बहुत बड़ा है, अपने खुद देखा अभी मूतने आया था तब! अब मैं जा रही हूं. आज के बाद आपसे कभी नहीं चुदूँगी.

    इतना बोलकर आंटी आकर सो गई।
    मैं तो मन ही मन खुश हो गया।

    फिर अगले दिन से पता नहीं आँटी का व्यवहार मेरे लिए बहुत चेंज हो गया. वो जो बेटा बेटा बोलती थी, अब राहुल कहने लगी।
    नहाने के समय अपने पेटिकोट को पूरा ऊपर चढ़ाकर अपने जांघों में साबुन लगाने लगी। मुझसे एकदम सट कर बैठती … अपनी नंगी जांघों में मेरे सामने तेल लगाती।

    उनको इस तरह से मेरे सामने अपने जिस्म की नुमाइश करते देखकर आज मेरा मूड बदल गया था.
    “आज रात में उनको चोदना ही है. पर पटाऊं कैसे?” मैं ये सोचने लगा।

    आँटी का दिमाग बहुत खराब था क्योंकि वो जिस मकसद से गांव आयी थी वो मकसद पूरा नहीं हुआ.
    वो सो गई।

    मेरी सबसे बड़ी कमजोरी महिलाओं की लंबी गदराई हुई टांग और जांघें हैं. औरतों के बूब्स देखकर मेरा लंड खड़ा नहीं होता।
    अगर मुझे नंगी जांघे दिख जाएँ तो मैं बगैर मुठ मारे शांत नहीं हो सकता।

    रात के जैसे ही 9:30 हुए, मैंने सोच लिया कि कुछ भी हो जाये आज आँटी को चोदकर ही रहूंगा।

    फिर मैं उनके पलँग के करीब गया.
    आँटी की साड़ी घुटनों तक उठी हुई थी।

    मैं अपने मोबाइल का फ़्लैश लाइट ऑन करके उनकी टांगों करीब से देखने लगा.
    धीरे धीरे करके मैंने आँटी की साड़ी को पूरा जाँघों तक ऊपर उठा दिया।

    मैं आंटी की नंगी टांगें एकदम करीब से देख रहा था. साथ में एक हाथ से मैं अपने हथियार को मसल रहा था।

    फिर मैं फ़्लैश लाइट ऑफ करके उनकी टांगों को नाक से करीब के सूंघने लगा और जोश में आकर मैंने उनकी साड़ी पूरी तरह से ऊपर करने की कोशिश की।

    तभी आँटी झनझना कर उठ गई और उन्होंने तुरंत रूम की लाइट ऑन कर दिया।
    आँटी ने कहा- ये क्या कर रहे हो राहुल ?ये सब गलत है … मैं तुम्हारी माँ की तरह हूँ।

    मैं उनके करीब गया, उनके हाथों को पकड़ लिया और कहा- आँटी, आप बहुत खूबसूरत हैं. आप मुझे बेहद अच्छी लगती हो।
    “नहीं राहुल … मैं तुम्हारे साथ ये सब कर नहीं सकती. तुम मेरे बेटे जैसे हो।”

    फिर मैंने उनसे कहा- अच्छा जी, आपकी कल की रात की बातें मैं अगर रेशमा को बता दूं जो आपके और बड़े पापा के बीच हुआ बाड़ी में?

    वो बोलने लगी- कैसी बातें?
    मैंने कहा- आंटी आप कब से चुद रही हो अपने जेठ से?

    मैंने कहा- आप माल ही ऐसी हो जिसे प्यार से, आराम से, इत्मीनान से खाया जाए।
    फिर मैं बूब्स को छोड़कर उनकी चूत चाटने लगा.

    सबसे पहले जब मैंने उनकी चूत में जीभ लगाई तो वो कहने लगी- ऐसे कौन करता है?
    मैंने कहा- जानेमन, सेक्स में औरत को चोदने से पहले उनके शरीर के हर एक अंग को चूमकर चाटकर जब तक रोमांचित न करो तो वो सेक्स अधूरा है।

    “वाकयी में राहुल … तुम खूब मजा दे रहे हो मुझे!”

    मैं उनकी चूत को चाट रहा था.

    फिर मैंने अपनी जीभ गांड के छेद में डाल दी.
    वो पागल हो गई।

    फिर मैंने उनको अपना लंड चूसने को कहा.
    उन्होंने शुरु में मना किया, फिर जिद करने पे मान गई।
    वो मेरे लंड को चूसने लगी बेतहाशा!

    फिर हम दोनों 69 की पोजीशन में आ गए और एक दूसरे को चाटने चूसने लगे.
    कुछ देर में ही हम दोनों एक साथ एक दूसरे के मुंह में झड़ गए।

    मैंने उनका सारा रस पी लिया. मुझे देखकर वो पी मेरे पूरा वीर्य पी गयी।

    थोड़ी देर के बाद हम दोनों फिर गर्म हो गए. मैं उनकी चूत के ऊपर लंड को ले जाकर घिसने लगा.
    तो वो कहने लगी- जान अब तो डाल दो. मैं तुम्हारे इस विशाल लंड को अपनी चूत में कब से लेना चाह रही हूं।

    मैंने उनकी चूत के छेद में लंड टिकाकर एक जोर का झटका दिया.
    वो जोर से चिल्ला पड़ी- मार दिया रे … आराम से नहीं डाल सकता कुत्ते? इतना बड़ा मूसल लंड है तेरा … एक बार में कहाँ घुसेगा।

    फिर मैं धीरे धीरे उनके चूत में अपना लंड डालने लगा वो धीरे धीरे चीखने लगी- आह आह … चोद राहुल चोद!

    मैंने धीरे धीरे स्पीड बढ़ायी तो वो कहने लगी- और जोर से चोद राहुल … और जोर से!

    आंटी की चुदाई की चीख सुनकर बड़े पापा आ गए.
    वो हमें खिड़की से देखने लगे.

    मैं उनको देखकर और जोर जोर से चोद रहा था.

    फिर मैंने कहा- जानू मुझे लाइट चालू करके आपके बदन को देखते हुए चोदना है।
    मैंने लाइट आन कर ली.

    मेरा जोश और बढ़ गया.
    इधर जोरदार चुदाई चल रही थी, उधर बड़े पापा हमें देखकर अपने आप को कोस रहे थे।

    मैं आंटी के होंठों को चूमते हुए चोद रहा था।

    फिर वो कहने लगी- जोर से चोद मुझे मेरी जान … आज मेरी चूत का भोसड़ा बना दे।

    मैं भी उनको कहने लगा- हाँ जानू, आज तुम्हें मेरी रांड बनाऊंगा. तुम्हें देखकर किसी का भी लंड खड़ा हो जाए. आप विशाल गोल गोल चूचों की मालकिन हो … बड़ी सी गांड की मालकिन हो … आपकी गदरायी माँसल जांघों ने मुझे सबसे ज्यादा पागल बनाया!

    फिर मैंने उनसे कहा- आप मेरे लंड पर बैठ जाओ!
    वो मेरे ऊपर आकर मेरा लंड अपनी चूत में टिकाकर बैठ गयी और कूदने लगी.

    उसी दौरान उन्होंने बड़े पापा को देख लिया. फिर वो उनको दिखा दिखाकर और जोर जोर कूदने लगी।

    फिर मैंने उनको गोदी में उठा लिया और गोदी में उठाकर चोदने लगा.
    वो इस पोज़ से बहुत खुश हुई और कहा- मेरी जान, ये मेरा बेस्ट पोज़ है जो आज तुम्हारे द्वारा पहली बार मुझे मिला।

    इसी तरह हम दोनों घनघोर चुदाई के सागर में डूब गए.
    वो झड़ गयी जिससे मेरा लंड उसके चूत में आसानी से फिसल रहा था पूरा!
    फच फच की आवाज आ रही थी और मेरा लंड उसके चूत में गच गच जा रहा था।

    फिर मैं भी झड़ने वाला था तो मैंने स्पीड और बढ़ा दी.
    तो वो बोली- अमेजिंग जानू … मेरे अंदर ही डालना तुम्हारा सारा माल!

    मैंने सारा माल आंटी की चूत में छोड़ दिया।
    फिर उसी तरह हम दोनों नंगे ही एक दूसरे से चिपककर सो गए।

    थोड़ी देर बाद मैंने उनसे पूछा- बेबी आप इतनी माल चीज हो. तो आपको अंकल अच्छे से नहीं चोदते क्या जो इधर उधर मुंह मारती हो?
    उन्होंने कहा- चोदना तो दूर … छूते ही नहीं! पहले 4 बच्चे पैदा करने तक खूब चोदे. तब जाके 4 बच्चे हुए. जोरदार चुदाई की आदत तो उन्होंने ही मुझे डाली थी. पर अब अचानक चोदना छोड़ दिए तो मेरी शरीर की जरूरत थी तो कैसे करती। बच्चे होने के बाद सरकारी क्वाटर में जगह तो भी नहीं होती चुदाई के लिए … बच्चों के सामने तो नहीं चोद सकते … इसलिये बंद हो गया। सच बताऊं तो इतने दिनों बाद मुझे आज सही चुदाई मिली।

    मैंने उनको उस रात 3 बार चोदा … हम रात भर सोये नहीं।
    सुबह 6 बजे सोये!

    9 बजे हमे बड़े पापा उठाने आये.
    हम दोनों एक दूसरे से लिपटकर नंगे सोये थे।
    उन्होंने हमें उठाया.

    फिर हम दोनों उठे. उनके सामने आँटी ने मुझे लिप किस किया और कहा- इतनी हसीन रात के लिए धन्यवाद जानू! अब तुम मेरे हर रात के राजा हो।

    इसके बाद तो हम दोनों गांव में पाँच दिन और रुके. पांचों दिन हमने फुल चुदाई की.

    फिर रेशमा के पापा का कॉल आया, उन्होंने हमें शहर बुलाया.
    तो हम लोग शहर आ गए।

    इसके बाद से हम दोनों एक दूसरे से जब चाहे तब अपने जिस्म की प्यास बुझाते।
    गर्लफ्रेंड मॉम सेक्स की यह बात किसी को पता नहीं चली सिवाय उसके बड़े पापा के … लेकिन वो खुद किसी को बता नहीं सकते थे।

  • दिव्या मामी को सुहागरात की तरह चोदा

    हैल्लो दोस्तों आप सभी आंटी, दीदी, भाभी और लड़कियों के लिए में अभी यहाँ पर नया आया हूँ तो प्लीज आप सभी मेरा थोड़ा ख्याल रखना। अब में आप सभी को थोड़ा बहुत अपने बारे में बताता हूँ, दोस्तों में 33 साल का एक नौजवान लड़का हूँ और अभी तक कुंवारा हूँ मेरा नाम राज है और में आगरा का रहने वाला हूँ, मेरी हाईट 5 फीट 8 इंच है मेरा रंग गोरा है और मेरा लंड 7.5 इंच लंबा है और 3.5 इंच मोटा भी है। दोस्तों में हमेशा से ही नाभि का बहुत दिवाना हूँ मुझे गहरी और लम्बी नाभि बहुत पसंद है, नाभि इतनी बड़ी हो कि उसमे नींबू पूरा आ जाए फिर चाहे वो नाभि किसी लड़की, आंटी, भाभी और दीदी किसी की ही क्यों ना हो मुझे बहुत अच्छी लगती है। मुझे उसे चूसने को, चाटने को, काटने को, देखने को, इतना दिल करता है कि बस में नाभि के पास ही बैठा रहूँ, तो यह था मेरा पूरा परिचय और अब में अपनी कहानी पर आता हूँ यह मेरी चोद्काम डॉट कॉम पर पहली कहानी है जो कि करीब दस साल पहले की है यानी कि 2003 की तब मेरी उम्र 23 साल थी में उस समय अपनी पढ़ाई करने चंडीगढ़ अपने मामा के घर पर गया हुआ था क्योंकि आगरा के कुछ दोस्तों के साथ मेरी उस समय लड़ाई झगड़े हो गये थे इसलिए पापा ने मुझे चंडीगढ़ पढ़ाई करने भेज दिया था।
    दोस्तों में अपने मामा के पास पहली बार गया था और मैंने मामा और मामी को पहली बार देखा था। में 10 जून 2003 को चंडीगढ़ के लिए निकल पड़ा और 11 जून 2003 की सुबह में चंडीगढ़ पहुंच गया। वहाँ पर मामा ने अपने ड्राइवर को गाड़ी से मुझे घर पर लाने के लिए भेज दिया था, ड्राइवर ने मुझे अपने साथ में लिया और घर की तरफ निकल पड़ा में जैसे ही घर पर पहुंचा तो मेरी मामी बाहर आई और मुझसे बोली कि वहीं पर रुक जाओ। तो में वहीं पर रुक गया और वो एक आरती की थाली लेकर आई और उन्होंने मेरी आरती की और बोली कि हाँ अब अंदर आ जाओ। दोस्तों मेरी मामी का नाम दिव्या है और उनकी उम्र 35 साल है उनका रंग गोरा है और बदन बहुत सेक्सी है और उनके फिगर का साईज 36-30-32 था। दोस्तों मेरी मामी का फिगर बिल्कुल वैसा था जैसा में चाहता था। तभी अचानक जैसे ही मामी अंदर की तरफ बड़ी तो उनकी कमर पर लगा चाबी का गुच्छा निकलकर नीचे गिर गया और मामी उस गुच्छे को जैसे ही उठाने के लिए नीचे झुकी तो मुझे उनके बूब्स दिख गये। वाह दोस्तों क्या बूब्स थे एकदम गोरे और बड़े जैसे पका हुआ पपीता हो, लेकिन जब वो चाबी उठाकर उठी तब उनके पेट से साड़ी हट गई और मैंने उनकी नाभि को देख लिया उनकी नाभि करीब दो इंच गहरी और तीन इंच लंबी एकदम गोल थी और उसे देखकर मेरा लंड धीरे धीरे टाईट होने लगा। मुझे ऐसा लग रहा था कि मामी अपनी नाभि रोज़ मामा के लंड से चुदवाती है।

    फिर में नज़र नीचे करके अंदर चला गया, मामी बोली कि तुम बैठ जाओ में तुम्हारे लिए नाश्ता लाती हूँ मैंने उनसे पूछा कि मामा कहाँ है? तो मामी ने मुझे बताया कि मामा किसी काम के सिलसिले में दुबई गए हुए है और एक महीने बाद लोटेंगे। अब मैंने जैसे ही उनके मुहं से यह सब सुना मेरे मुहं में पानी आ गया में सोचने लगा कि में मामी को जरुर पटाउंगा और फिर शाम हुई और रात भी हो गई तो में उस समय अपने कमरे में था तो मामी ने आवाज़ लगाई कि राजा आ जाओ खाना खा लो, में अंदर गया और मैंने देखा कि मामी ने जीन्स और टॉप पहन रखा था वो टॉप एकदम टाईट था जिसमे से बूब्स बाहर आने को तड़प रहे थे और ब्रा की डोरी साफ साफ दिख रही थी और वो जीन्स मामी ने नाभि से करीब पांच इंच नीचे पहनी हुई थी जिससे नाभि साफ साफ दिखे, मुझे लगा कि शायद मामी को पता लग गया है कि में उनकी नाभि को देखना पसंद करता हूँ और जब में उनकी नाभि देख रहा था तो उन्होंने मुझे यह सब करते हुए देख लिया था और फिर हम लोग खाना खाने लगे और खाना खाने के बाद में अपने कमरे में चला गया। फिर रात को करीब 9 बजे मामी के कमरे में से आवाज़ आई कि राजा यहाँ आओ। तो में उनके कमरे के अंदर चला गया और मैंने देखा कि मामी ने उस समय मेक्सी पहन रखी थी और वो भी पूरी जालीदार जिसमे उनकी स्टाइलिश ब्रा और पेंटी साफ साफ नज़र आ रही थी। फिर मामी मुझसे मुस्कुराकर बोली कि दूर से देखते रहोगे क्या आओ राजा यहाँ पर बैठो।

    फिर मैंने पूछा कि जी मामी आपने मुझे क्यों बुलाया? मामी बोली कि मुझे अकेले सोने में बहुत डर लग रहा था तो मैंने सोचा कि तुम भी यहीं पर सो जाओ तो मुझे भी डर कम लगेगा और तुम्हे भी अच्छी नींद आ जाएगी। तो मैंने कहा कि ठीक है में सोफे पर सो जाता हूँ, तभी वो बोली कि अरे नहीं तुम मेरे पास यहीं बेड पर सो जाओ, तो मैंने कहा कि नहीं और फिर वो बोली कि लेकिन क्यों नहीं तुम मेरे पास क्यों नहीं सो सकते? तो मैंने कहा कि जी सो सकता हूँ। तो वो बोली कि फिर तुम अब ज्यादा सोचो मत और में उनके सो गया। तभी मामी मुझसे पूछने लगी कि क्यों सो गये? में बोला कि नहीं, तो मामी बोली कि कुछ अपने बारे में बताओ ना तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है या नहीं? में बोला कि नहीं मामी मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है। तो मामी बोली कि तुमने क्या कभी सेक्स भी नहीं किया है? क्या मामी आप मुझसे यह क्या पूछ रही हो? तो वो बोली कि हाँ मैंने तुमसे पूछा कि तुमने कभी सेक्स किया है कि नहीं? क्या तुम करना चाहोगे? तो मैंने पूछा कि किसके साथ? मामी बोली कि मेरे साथ, में बोला कि नहीं में आपके साथ यह सब कैसे कर सकता हूँ? तो वो बोली कि क्यों नहीं कर सकते? सुबह और अभी बाहर मेरी नाभि और बूब्स को तो तुम बहुत घूरकर देख रहे थे क्या तब तुम्हारे मन में सेक्स की भावना नहीं आ रही थी? दोस्तों मैंने सोचा कि यह एक बहुत अच्छा मौका है हाथ से मत जाने दो। तभी मैंने कहा कि लेकिन मेरी एक शर्त है कि में आपको शादी के जोड़े में सुहागरात की तरह चोदना चाहता हूँ। तो मामी बोली कि बहुत अच्छे, मुझे यह सुनकर बहुत अच्छा लगा, तुम बहुत सेक्सी हो में एक घंटे में तैयार होकर तुम्हे अंदर बुलाती हूँ।

    फिर मामी ने तैयार होकर मुझे आवाज़ लगाई आ जाओ जी में जब अंदर गया तो उन्होंने मेरे पैर छुए और मुझसे बोली कि तुम मेरी माँग भरो तब में तुम्हे सुहागरात मनाने दूँगी। अब में बोला कि ठीक है और मैंने उनकी माँग भर दी और फिर मैंने मामी को बिस्तर पर लेटा दिया मैंने देखा कि मामी ने लहंगा पहन रखा है और वो भी पीछे से पूरा खुला हुआ और पीछे सिर्फ़ दो डोरी से चोली बंधी हुई थी और ब्रा नहीं पहनी थी और चोली में से बहुत हद तक बूब्स बाहर आ रहे थे और जब मैंने नीचे की तरफ देखा तो उनका लहंगा नाभि से 6 इंच नीचे बंधा हुआ था चूत से थोड़ा ही उपर यह सब देखने में बहुत सेक्सी था और उससे भी कहीं ज्यादा सेक्सी लग रही थी उनकी गहरी नाभि जो कि अब उनके लेटे हुए होने की वजह से और भी गहरी हो गई थी। फिर मैंने पूछा कि मामी आपकी नाभि इतनी गहरी कैसे हुई? सबसे पहले तो मामी बोली कि मुझे तुम अब मामी मत बोलो, मुझे सिर्फ दिव्या बोलो और आप नहीं तुम या तू बोलो ठीक है। तो मैंने कहा कि ठीक है और फिर दिव्या बोली कि तुम्हारे मामा मेरी नाभि रोज़ चूसते चाटते और चोदते है तो फिर यह बड़ी क्यों नहीं होगी? दिव्या बोली कि तुम्हे मेरी नाभि क्यों पसंद है? तो मैंने कहा कि क्योंकि तुम्हारी नाभि बहुत बड़ी है और मुझे ठीक ऐसी ही नाभि बहुत पसंद है। फिर वो बोली कि पसंद है तो कुछ करो ना जानू, क्यों अब किस बात की देर है? तो दोस्तों जैसे ही मामी ने मुझे हुक्म दिया और मैंने उनकी नाभि को चाटना शुरू कर दिया में अब उनकी नाभि चाट रहा था तो मामी के मुहं से सेक्सी आवाज़ आना शुरू हो गई इसस्स्सस्स आअहह उूुुुईईईईईईई मर गई थोड़ा जीभ और अंदर करो ना आह्ह्हह्ह्ह्ह मज़ा आ रहा है, नाभि कहाँ से चूसना सीखा तुमने? तो मैंने कहा कि कहीं से नहीं आपको देखकर अपने आप नाभि चूसने का मन करने लगा। तो वो बोली कि क्या मेरी नाभि इतनी सेक्सी है? मैंने कहा कि हाँ मेरी रानी तेरी नाभि बहुत सेक्सी है। तो वो बोली कि तो थोड़ा और चूस ना, चूस चूसकर इसे लाल कर दो मेरे जानू और फिर मैंने नाभि को काटना शुरू किया, हल्के हल्के मामी के मुहं से आवाज़ आ रही थी हाँ और तेज जानू आहह्ह्ह् उहहह और तेज़।

    फिर वो बोली कि ज़रा मेरी नाभि में उंगली घुमाओ ना और फिर जैसे ही मैंने उंगली डाली मामी बोली कि हाँ और वो मेरी ऊँगली को पकड़ कर और अंदर ले गई और उंगली को नाभि में कसकर जकड़ लिया और मामी बोली कि कोई और दूसरे तरीके से नाभि का मज़ा दो ना। फिर मैंने कहा कि ठीक है फिर मैंने उनकी नाभि में एक चोकलेट खड़ी कर दी और फिर उसे खाता गया और जैसे ही में नाभि के पास पहुंचा वैसे ही नाभि को भी मुहं में भरा और काटने लगा, मामी बोली ऊहहह्ह्ह अह्ह्ह्ह कितना मज़ा आ रहा है जानू उूईईईईइ माँ मरी। फिर मैंने मामी को पलट कर उल्टा कर दिया और उनकी पीठ पर चूमने लगा मामी मुझसे बोली कि चूमो ना जानू और फिर मैंने उनकी पीछे से खुली हुई चोली की दोनों डोरी को खोल दिया और अब चोली को बाहर निकाल दिया ऊओफफफफफ्फ़ वाह क्या बूब्स थे मामी के एकदम बड़े और कसे हुए एकदम गोल, में आखें बन्द करके उन पर टूट पड़ा और उनके बूब्स पर और कसकर चूसने लगा। मामी मुझसे हर बार कर रही थी आआह्ह्ह्हहहह और ज़ोर से चूसो ना आईईईईई। दोस्तों फिर में क्या ज़ोर ज़ोर से बूब्स दबा रहा था और जमकर चूस रहा था और मामी सिसकियों के साथ साथ मोनिंग कर रही थी उूउइईईईईईईईईई आआआहह उूउउफफफफफफफ्फ़।
    फिर मैंने मामी का नाड़ा खोला तो मामी शरमा गई। मैंने मामी का लहंगा उतार दिया और मामी को पूरा नंगा कर दिया वो अब मेरे सामने सिर्फ़ पेंटी में थी और वो भी तीन बार गीली हो चुकी थी। फिर जैसे ही मैंने पेंटी उतारी वैसे ही मामी बोली कि नहीं आज चूत नहीं दूँगी आज मेरा मन सिर्फ़ नाभि सेक्स के लिए है और बूब्स दबाओ और पियो दूध निकल दो मेरे बूब्स से नाभि को चोदकर और गहरा कर दो। तो मैंने उनसे कहा कि तुम तो हर तरफ से सेक्सी लगती हो फिर मैंने मामी की नाभि में लंड डाला तो मामी बोली कि मज़ा नहीं आ रहा है और तभी मामी ने मेरा लंड पकड़ा और मेरे लंड पर मुठ मारने लगी और बोल रही थी कि तुम्हारे मामा ने मुझे कभी लंड पर मुठ नहीं मारने दिया और ना ही कभी लंड को मेरे मुहं में डाला। तुम अपना लंड मेरे मुहं में दो ना, में इसे चूसना चाहती हूँ। फिर मैंने कहा कि हाँ लो ना मेरी जान चूसो ज़ोर से चूसो इसे और मामी मेरे लंड को चूस रही थी और मुझसे कह रही थी कि वाह कितना बड़ा है जानू तुम्हारा लंड, तुम्हारे मामा का तो इसका आधा भी नहीं है और ऐसा ही करते करते 20 मिनट तक मामी मेरा लंड चूसती रही और मैंने कहा कि में अब झड़ने वाला हूँ। फिर मामी बोली कि प्लीज मेरे मुहं में ही अपना सारा पानी छोड़ दो मेरे लंड का पानी पीने की बहुत इच्छा थी प्लीज आज उसे तुम पूरा कर दो। फिर मैंने अपना सारा गरम गरम वीर्य उनके मुहं में डाल दिया और वो उसे चूस चूसकर पी गई, लेकिन फिर मेरा लंड सिकुड़कर बहुत छोटा हो गया और में उदास हो गया क्योंकि में अभी तक नाभि को नहीं चोद पाया था। फिर मामी मेरे मन की यह बात समझ गई और वो मेरे लंड पर एक बार फिर से मुठ मारने लगी और लंड को फिर से मुहं में लेकर वो मेरे लंड को खड़ा करने लगी उनके हाथों के स्पर्श से मेरा लंड फिर से लोहे जैसे रोड की तरह खड़ा हो गया और फिर मामी ने कहा कि लो अब इसे जल्दी से डाल दो मेरी गहरी नाभि में और अब मैंने उनकी नाभि में जैसे ही अपना लंड डाला तो मेरा तीन इंच मोटा लंड नाभि में चला गया और मैंने नाभि को चोदना शुरू किया मामी के मुहं से सिसकियों की आवाज़ आ रही थी आह्ह्ह्हह्ह ऊउक्ककच आईईईईईई उईईईईईइ माँ हाँ और तेज़ चोदो मेरी नाभि को। फिर में लगातार नाभि को चोदता रहा और मामी को बहुत मज़ा आ रहा था वो हाँ में और अब रोज़ चुदवाउंगी तुमसे कह रही थी। दोस्तों मुझे लगातार चोदते हुए करीब अब तीस मिनट होने वाले थे और में झड़ने वाला था तो मामी बोली कि सारा वीर्य मेरी नाभि में भर दो। फिर मैंने सारा वीर्य नाभि में भर दिया और फिर मामी ने अपने पूरे पेट की उसी पानी से मालिश की और बोली कि इस पानी से औरत का जिस्म और भी खिल जाता है फिर में लेट गया ।।

  • मामी की सुहागरात की अधूरी प्यास-1

    मेरे मामा की शादी हुई. मैंने मामी के मोटे चूचों को देखा तो मेरा मन मामी की नंगी चूत देखने के लिए मचलने लगा. उस चाहत को मैंने पूरा करने के लिए क्या किया?

    मेरा नाम सुधीर है और मैं उत्तर प्रदेश के पीलीभीत का रहने वाला हूं. मेरे लंड की लंबाई सात इंच है और मेरा लंड इतना मोटा है कि वो किसी भी औरत की चीख निकालने के लिए काफी है.

    औरत की चूत चाहे कितनी भी चौड़ी क्यों न हो लेकिन खड़ा होने के बाद मेरा लंड उसमें फंस जाता है. आप समझ ही गये होंगे कि मेरे लंड की मोटाई कितनी हो सकती है. मैंने एक दिन अपने लंड को नापने की कोशिश की तो पता लगा कि मेरा लंड पूरी उत्तेजना में 3 इंच से भी ज्यादा चौड़ा हो जाता है.

    आज मैं आपको अपने जीवन की एक सच्ची घटना बताने जा रहा हूं जो मेरे ननिहाल में हुई थी. मैं अपनी नानी के घर पर रह रहा था. मेरे मामा की शादी थी. जब मैंने उनकी दुल्हन यानि कि अपनी मामी को देखा तो मेरी हालत खराब हो गई. वो देखने में बहुत ही सेक्सी थी.

    उसका रंग एकदम दूध जैसा सफेद था. उसके स्तन भी काफी बड़े थे. मगर कमर एकदम पतली सी थी. कहने का मतलब है कि देखने में एकदम कयामत लग रही थी. मगर मैं क्या कर सकता था. मैं तो भान्जा था. ये सोच कर मन में आग लगी हुई थी कि मेरे मामा को इतनी मस्त चूत चोदने के लिए मिल रही है.

    मन मसोस रहा था कि वो मेरे मामा के पास चुदने के लिए जा रही है. तभी मेरे मन में ख्याल आया कि क्यों न मामा और मामी की सुहागरात देख लूं. इस बहाने मामी की चूत के दर्शन भी हो जायेंगे. मैंने मन बना लिया कि मामी की सुहागरात देख कर ही रहूंगा. देखूंगा कि मामा मेरी मामी को कैसे चोदते हैं. उनका पहला सेक्स कैसे होगा.

    मैंने प्लान करना शुरू कर दिया. उस दिन सब लोग अपने काम में लगे हुए थे. मैं सबसे नजर बचा कर मामा के कमरे में गया. वहां पर देखने लगा कि कहां से नजारा दिखाई दे सकता है. मैंने पाया कि खिड़की की दरार में से अंदर बिछा हुआ बेड साफ दिख रहा था. यह मेरी किस्मत ही थी कि उनकी सुहागरात के लिए इस तरह की व्यवस्था की गई थी कि खिड़की से ही सारा नजारा देखा जा सकता था.

    जिस रूम में मैं रहता था उसमें कोई नहीं जाता था. उसमें बस कुछ सामान रखा हुआ था. मैं रात होने का इंतजार करने लगा. रात में सब लोगों ने खाना खाया और तब तक 10 बज गये. रात के 10.30 बजे से ही मैं उस रूम में जाकर बैठ गया.

    रात के करीब 11 बजे मामा कमरे में आये. मेरी नई नवेली दुल्हन बनी मामी बेड पर घूंघट निकाल कर बैठी हुई थी. मामा धीरे से कमरे में दाखिल हो गये और उन्होंने दरवाजा बंद कर लिया. मैंने भी खिड़की की दरार पर अपनी नजरें जमा लीं.

    पहले तो वो दोनों आपस में कुछ बातें करने लगे. उसके बाद बातें करते हुए ही मामा ने मेरी मामी का हाथ पकड़ लिया. उन्होंने उनके हाथ को अपने हाथ में लेकर चूम लिया. मामी शरमाने लगी. मामा ने कुर्ता और धोती पहनी हुई थी. मामा ने अपने कुर्ते के बटन की तरफ हाथ बढ़ाते हुए कुर्ते को उतारना शुरू किया.

    उन्होंने कुर्ता उतार दिया. फिर अपने बनियान को भी उतार दिया. मामा ऊपर से नंगे हो गये. उनकी धोती अभी भी बची हुई थी. मामा ने मामी की तरफ देखा तो मामी ने मुंह फेर लिया था. वो दूसरी तरफ मुंह करके बैठ गयी थी.

    मामा ने अपनी धोती को खोलना शुरू किया और उसको अपनी टांगों से अलग कर दिया. नीचे से मामा ने बड़ा सा कच्छा पहना हुआ था. उनका लंड अभी ज्यादा तनाव में नहीं दिखाई दे रहा था मगर हल्का सा तनाव आने के कारण पता लग पा रहा था कि लंड उत्तेजना में आ रहा है.

    उसके बाद मामा मेरी मामी की तरफ बढ़े. बेड पर जाकर मामी के कंधे को सहलाना शुरू किया. मामी अभी भी शरमा रही थी और ऊपर की तरफ नजर नहीं उठा रही थी. मामा ने उनकी साड़ी को हटाना शुरू किया. मामी के लाल रंग के ब्लाउज में भरे हुए उनके मोटे और बड़े स्तन दिखने लगे.

    उनको देखते ही मेरा लंड भी तनाव में आ गया. मैंने देखा कि जैसे ही मामा की नजर मामी के ब्लाउज पर गई तो उनके लंड में भी एकदम से तनाव आ गया था. उनका लंड उनके कच्छे में तन कर टाइट हो गया था. उसके बाद मामा ने अपने लंड को मामी के कंधे पर सहलाना शुरू किया. मामी अभी भी नीचे नजर करके ही देख रही थी.

    अब मामा ने उनकी कमर को सहलाना शुरू किया, फिर उनके स्तनों की तरफ हाथ बढ़ाने लगे तो मामी ने उनके हाथ को रोक दिया. उसके बाद मामी ने उनके हाथ को छोड़ दिया. मामा ने ब्लाउज के ऊपर से ही अपने हाथ मामी के स्तनों पर रख दिये. मामी की बेचैन सी हो उठी.

    मामा ने उनको बेड पर लेटा दिया. उनकी साड़ी की सिलवटें खोल दीं और अब मामी केवल ब्लाउज और पैटीकोट में ही रह गई थी. उसके बाद मामा बेड पर आये और मामी के ऊपर लेट कर उनके होंठों को चूसने लगे. मामी भी पहले तो शरमाती रही लेकिन फिर उन्होंने मामा को अपनी बांहों में भर लिया मामा के होंठों को चूसने लगी.

    वो दोनों काफी देर तक एक दूसरे के होंठों को चूसते हुए एक दूसरे के होंठों का रस पीते रहे. उसके बाद मामा ने उनके होंठों से हट कर अपने होंठों को मामी के ब्लाउज के अंदर के क्लीवेज पर लगा दिया. वो अपने दोनों हाथों से मामी के स्तनों को दबाने लगे और उनका लंड मामी की जांघों के बीच में घुसने की कोशिश करने लगा.

    अब शायद दोनों ही गर्म हो चुके थे. मामा ने फिर मामी को पेट के बल पलटी दी और उसके ब्लाउज को खोलने लगे. अगले ही कुछ पलों में मामी की गुलाबी ब्रा दिखने लगी. उसकी ब्रा में उसके चूचे एकदम से फंसे हुए थे. मामा ने उसकी ब्रा को हड़बड़ी में खोलना शुरू कर दिया. फिर दो पल के अंदर ही मामी के चूचे हवा में झूल रहे थे.

    बाहर से देखते हुए ऐसा लग रहा था कि मामी की छाती पर बड़ी बड़ी फुटबॉल लटकी हुई हैं जिनको देख कर मेरे लंड का बुरा हाल होने लगा था. मैंने वहीं पर खड़े होकर अपने लंड को मसलना शुरू कर दिया था. इधर मामा की हालत मुझसे भी ज्यादा खराब हो रही थी. उसने मामी के चूचों को जोर से दबाना शुरू किया और फिर मामी के मोटे मोटे चूचों को मुंह में भर कर पीने लगे.

    अब मामी के मुंह से आहें निकलने लगीं. वो मामा के सामने बेबस होने लगी. मामा ने जोर से मामी के चूचों को चूसना शुरू कर दिया. वो मामी के चूचों को दोनों हाथों से जैसे निचोड़ते हुए उनका दूध निकालने की कोशिश कर रहे थे. मामी की गांड ऊपर उठने लगी थी. इससे मुझे भी पता चल गया था कि मामी की चूत में खुजली होना शुरू हो गई है.

    मेरी मामी बार मामा के मुंह को अपने चूचों में दबाने लगी थी. इधर मामा ने कुछ देर तक चूचों को चूसा और फिर उसके निप्पलों को जीभ से चूसने लगे. फिर शायद उन्होंने दांत से काट लिया तो मामी की सिसकारी निकल गई. मेरा हाथ मेरे लंड को रगड़ रहा था. मैं भूल गया था कि मैं बेपरवाह होकर उनकी ये रासलीला देख रहा हूं.

    कुछ देर तक मामी के निप्पलों को पीने के बाद मामा ने उसके पैटीकोट को खोल दिया. मामी की काली पैंटी दिखने लगी. मामा ने उसकी पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत को चूम लिया. मामी की गोरी जांघें देख कर मैं भी और ज्यादा उत्तेजित हो रहा था. मेरे मामा मेरी मामी की चूत को पैंटी के ऊपर से ही चाटने में लगे हुए थे.

    फिर मुझे ध्यान आया कि क्यों मामी के नंगे बदन को कैमरे में कैद कर लिया जाये. ऐसा मौका फिर शायद मिले न मिले. मैंने अपनी जेब से फोन निकाला और कैमरा ऑन करके वीडियो बनाना शुरू कर दिया. दूर से ज्यादा साफ तो नहीं दिखाई दे रहा था मगर इतना तो पता चल रहा था कि मामी का नंगा बदन कैसा है.

    मामी के चूचे ऊपर नीचे होते हुए वीडियो में साफ दिख रहे थे. वो इस बात को बता रहे थे कि मामी की चूत पूरी गर्म हो चुकी है. उसके बाद मामा ने उसकी पैंटी को उतार दिया. मामी की चूत एकदम बाल रहित थी. उनकी चूत को देख कर मुझसे भी रहा न गया और मैंने अपने लंड को अपनी पैंट से बाहर निकाल कर उसकी मुठ मारनी शुरू कर दी.

    मेरी हालत बहुत खराब हो रही थी. मन कर रहा था कि मैं भी अभी के अभी कमरे में घुस जाऊं और मामी की चूत को चाट लूं. मगर किस्मत तो मामा की चमक रही थी. उन्होंने मामी की चूत में उंगली की और उनकी चूत को चूसने लगे. मामी अब जोर से सिसकारियां लेने लगी. उनको देख कर ऐसा लग रहा था कि वो पहले भी इस तरह का कुछ कर चुकी हैं.

    मामी भी पूरी गर्म थी और मामा भी गर्मजोशी से उसकी चूत को चूसने में लगे हुए थे. पूरे कमरे में आह्ह … इस्सस… पुच-पुच … मुच-मुच की आवाज हो रही थी. उनकी इन कामुक आवाजों को सुन कर मेरे लंड का हाल और बुरा होने लगा था. मैंने जोर से अपने लंड को रगड़ना शुरू कर दिया था. मगर साथ ही फोन को भी संभाल रहा था. बहुत मजा आ रहा था मुझे.

    उसके बाद मामा से जब रहा न गया तो उन्होंने उनकी चूत से जीभ को हटा लिया और अपना कच्छा निकाल दिया. मामा का लंड एकदम से टनटना रहा था. मामा के लंड का साइज देख कर मैं हैरान रह गया. मेरे मामा शरीर से काफी हट्टे कट्टे थे लेकिन उनका लंड देखा तो मुझे यकीन नहीं हुआ.

    उनका लंड ज्यादा लम्बा नहीं था. देखने में चार इंच या उससे थोड़ा ज्यादा का लग रहा था. मामा के लंड की मोटाई न के बराबर थी. देखने में एक पतली सी डंडी के जैसा लग रहा था. मामा ने मामी की टांगों को चौड़ी किया और उनकी चूत में लंड को लगा कर उसके ऊपर लेट गये.

    दोनों के दोनों नंगे थे और मामा ने मामी की चूत को चोदना शुरू कर दिया. मगर मामी को देख कर लग रहा था कि उनको जैसे पता ही नहीं लग रहा कि मामा ने उनकी चूत में लंड को डाला हुआ है. वो मामी की चूत में लंड डाल कर हिलाते रहे मगर मामी को जैसे कुछ फर्क ही नहीं पड़ रहा था.

    मामी के चेहरे से साफ पता लग रहा था कि उनको मजा नहीं आ रहा है. तीन-चार मिनट तक मामा उनकी चूत में लंड को डाल कर हिलते रहे और फिर अचानक है ढीले पड़ कर मामी के ऊपर गिर गये. फिर कुछ पल तक मामी के ऊपर पड़े रहे और फिर साइड में जाकर लेट गये. पांच मिनट तक मामा ऐसे ही पड़े रहे.

    मामी के चेहरे पर मायूसी सी छा गयी थी. फिर कुछ देर के बाद मामा ने मेरी मामी के गालों को किस करने कोशिश की तो मामी ने मरे मन से उनको किस करने दिया. फिर जब मामी के ऊपर आने की कोशिश करने लगे तो मामी ने उनको एक तरफ धकेल दिया और चादर ओढ़ कर लेट गई.

    दोबारा मामा की हिम्मत नहीं हुई कि वो मामी के करीब आ सकें. मामी की चूत प्यासी की प्यासी रह गई थी. मुझे भी मामी पर तरस आ रहा था. मामा ने दोबारा से मामी को मनाने की कोशिश की लेकिन उन्होंने फिर मामा को फिर अपने बदन को छूने नहीं दिया. फिर मामा उठ कर कमरे के दरवाजे की तरफ आने लगे.

    मैंने अपने लंड को अंदर किया और वहां से एक तरफ छिप गया. बाहर बाथरूम बना हुआ था. मामा बाथरूम में गये और कुछ देर के बाद वापस आ गये. अंदर जाने के बाद मैंने देखा कि मामी ने अपने रात वाले कपड़े पहन लिये थे. वो एक तरफ होकर सो गई और मामा भी अपनी धोती लपेट कर बेड पर लेट गये. उसके बाद मामा ने लाइट बंद कर दी.

    उसके बाद मैं भी वहां से वापस आ गया. अपने रूम में आकर मैंने वीडियो को देखा. मामी के मोटे चूचे वीडियो में हिलते हुए देख कर मैंने तेजी से अपने लंड पर हाथ चलाना शुरू कर दिया. फिर अपने लंड की मुठ मारी. वीर्य निकलने के बाद मुझे संतुष्टि मिली. उसके बाद मैं सोचने लगा कि मामा का लंड शायद मामी की प्यास नहीं बुझा पायेगा. मुझे इस बात का फायदा उठाना चाहिए.

  • सेक्स चैट वेबसाइट पर मेरा पहला अनुभव

    मैं आज आपको दिल्ली सेक्स चैट वेबसाइट पर मेरा पहला अनुभव बता रहा हूँ. मेरी भी सेक्स लाइफ एकदम मज़ेदार हो गयी है दिल्ली सेक्स चैट पर अपना समय बिताकर!

    नमस्ते दोस्तो, मेरा नाम निलेश तिवारी है. मैं आज आप लोगों को दिल्ली सेक्स चैट वेबसाइट पर मेरा पहला अनुभव बताने वाला हूँ. दिल्ली सेक्स चैट एक जानी मानी वेबसाइट है जहाँ पर लोग सेक्स का मज़ा लेते हैं.
    मेरी भी सेक्स लाइफ एकदम मज़ेदार हो गयी है दिल्ली सेक्स चैट पर अपना समय बिताकर!
    कैसे?
    कहानी पढ़कर जान लीजिए.

    कुछ दिनों पहले की बात है. मैं दोपहर को अपने बिस्तर पर लेटे सोच रहा था कि मैं 20 साल का हो गया हूँ और मेरी ना तो कोई गर्लफ्रेंड है और ना ही मैंने किसी लड़की को चोदा है.
    दुनिया में लोग आए दिन अपनी और दूसरों की माँ, बहन, बेटी, भाभी को दिन-रात मज़े से चोदते रहते हैं और एक मैं हूँ जिसे कोई भी लड़की घास नहीं डालती.

    मुझमें कुछ कमी नहीं है. तक़लीफ़ यह है कि ये साली लड़कियां बहुत भाव खाती हैं. इन पर पैसे खर्च करो, इनकी बकवास बातें सुनो, इनके काम करो. इतना सब कुछ करने के बाद इस बात की कोई गांरटी नहीं हैं कि ये हमें चोदने देंगी.

    ऐसे ही सोचते-सोचते मेरे दिमाग में विचार आया कि क्यों ना इंटरनेट में सेक्स लाइफ के मज़े लेने की तरकीब पता करूं. 20-25 मिनट इंटरनेट सर्फिंग करने के बाद पता चला कि लाइव सेक्स चैट से सेक्स का मज़ा घर बैठे ले सकते हैं.
    लाइव सेक्स चैट पर खूबसूरत लड़कियां और महिलायें अपने बातों सें और अंग प्रदर्शन से मर्दों के लंड को खड़ा करतीं है.

    मैंने काफ़ी सारी वेबसाइट में से दिल्ली सेक्स चैट को चुना और अपना नसीब आज़माया. वैसे भी मैं लड़कियों की नंगी तस्वीरें देखते मुठ मारकर थक गया था. अब वक़्त था उनसे गंदी बातें और मस्ती करने का.

    दिल्ली सेक्स चैट के वेबसाइट पर जाते ही इतनी सारी सुंदर लड़कियों के प्रोफाइल देखकर मेरा शरीर गर्म होने लगा. वेबसाइट पर एक से एक छमिया जिस में से कुछ ने ब्रा-पेंटी पहनी थी. कुछ ऊपर से नंगी थी और कुछ अपने गांड का छेद दिखाते हुए.

    मैंने बिना कोई देरी किए दिल्ली सेक्स चैट पर अपना अकाउंट बना दिया. मेरा लंड तो सिर्फ़ लड़कियों का प्रोफाइल देखकर ही खड़ा हो गया. मुझें इस बार सिर्फ़ तस्वीर देखकर मूठ नहीं मारनी था. इसलिए मैंने अपने लंड को हाथ ही नहीं लगाया.

    अब रास्ता बिलकुल साफ़ था क्योंकि मेरे पिताजी ऑफ़िस से रात दस बजे तक ही आते हैं और मेरी माँ स्कूल टीचर हैं जो शाम को घर आती हैं.

    मैंने बेडरूम का पर्दा लगा दिया और घर के मुख्य दरवाज़े की कुंडी लगा दी ताकि माँ या पिताजी में से अगर आज कोई घर जल्दी आ जाए तो किसी से भी दरवाज़ा चाबी से ना खुले.
    मैं नहीं चाहता था कि माँ पिताजी की नज़रों में मैं गिर जाऊं और वे मेरी आजादी छीन लें.
    वैसे भी सेक्स का मज़ा आराम से और बिना किसी चिंता के लेना चाहिए ना कि जल्दबाजी में डर डर कर!

    सभी चीज़ों का ध्यान मैंने रखा था ताकि लाइव सेक्स चैट करतें समय कोई दिक्कत ना हो.

    दिल्ली सेक्स चैट के वेबसाइट पर मैं सेक्सी लड़की और भाभियों का प्रोफाइल देख रहा था और सोच रहा था कि इनमें से किसे चुनूं.
    मैं कुछ सालों सें अपनी माँ को गंदी नज़रों सें देखने लगा था. इसलिए सोचा कि कोई भाभी से सेक्स चैट करूं जिसका फिगर मेरी मोटी गांड वाली माँ जैसा हैं. मुझे ज़्यादा देर नहीं लगी ऐसी भाभी ढूंढ़ने में जिसे देखकर मुझें मेरीं माँ याद आती हो.

    मुझे एक भाभी मिली जिसका नाम निकिता है. उसका प्रोफाइल चुनकर मैं पेमेंट मोड की तरफ बढ़ा. मैंने XXX वीडियो वाला सेक्स चैट चुना और पेमेंट देकर भाभी को बुक किया.

    दिल्ली सेक्स चैट पर मेरा पहला लाइव सेक्स चैट सेशन शुरू हो गया; स्क्रीन पर थी नॉटी निकिता भाभी. गोर रंग की भरे बदन वाली निकिता भाभी ने गुलाबी रंग की साड़ी पहनी थी और सफ़ेद रंग का ब्लाउज जिसका एक ही बटन लगा हुआ था.

    निकिता भाभी का फिगर मेरी माँ जैसा ही था- भूरा रंग, बड़े स्तन, मोटी कमर, उभरी हुई गांड और मोटे जांघ. निकिता भाभी ने सुहागरात वाला माहौल बनाया हुआ था लेकिन मुझे तो उनको अपनी माँ बनाकर उनके साथ कामुक आनंद लेनी थी. मैंने अपने लंड पे नारियल का तेल लगाकर मालिश की और अपनी माँ को याद करते हुए मूड बनाया.

    निकिता भाभी- हेलो जानेमन, बताओ अपनी फरमाइश. मेरी चूत का पानी किस तरह निकालना चाहोगे तुम? (अपनी चूत को रगड़ते हुए).

    मैं- भाभी आप तो बहुत सेक्सी लग रही हो. आपको देखकर मुझे मेरी बड़ी गांड वाली माँ की याद आती है. मेरी माँ को बाथरूम में नहाते देख मैंने कई बार मुठ मारी है. असल जिंदगी में नहीं तो आप को ही मेरी माँ समझ कर आपका पेशाब निकाल दूंगा. चलो एक रोल-प्ले गेम खेलते है.

    निकिता भाभी- तो राजा बेटा को अपनी माँ के साथ मस्ती करनी है. मुझे भी रोल-प्ले गेम खेलना पसंद है; बताओ क्या करना है?

    मैं- आपकी जांघों में दर्द है और आप मुझे बैडरूम में बुलाती है आपकी मालिश करने के लिए. अपने बेटे के हाथों से मालिश करवाते समय आप गर्म हो जाती हैं. आप अपने बेटे के साथ थोड़ी कामुक मस्ती करने की सोचती है. बातें करते हुए आप कल रात वाली चुदाई के बारे में बोलने लगती हैं. ये सब बोलते वक़्त आप उत्तेजित होकर गैर मर्दों के साथ आपकी चुदाई के बारे में बताती हैं. यहीं से माँ-बेटे की चुदाई शुरू हो जाती है.

    निकिता भाभी ने इशारा कर दिया कि उनको खेल समझ आ गया है. वो बिस्तर पर अपनी साड़ी ठीक करके लेट जाती है. उत्तेजना की वजह से मुझे भी गंदी मस्ती करने की हिम्मत आ जाती है. अपनी माँ के साथ हकीकत में नहीं तो किसी दूसरी औरत को अपनी माँ बनाकर अपनी हवस मिटाऊंगा.

    निकिता भाभी- अरे नीलेश बेटा, ज़रा बैडरूम में आना तो!

    मैं- क्या हुआ माँ? कल रात को भी बैडरूम से तुम्हारी आवाज़ आ रही थी, तुम ठीक तो हो ना?

    निकिता भाभी- मेरी जांघों में दर्द हो रहा है, ज़रा मालिश कर देना तो. रात भर सोई नहीं हूँ मैं, तू भी रात भर मेरी आवाज़ सुनकर जाग रहा था? (मुस्कुराते हुए)

    निकिता भाभी साड़ी को अपने जांघों तक उठाती है और अपने पैर थोड़ा सा फैला लेती है. मैं जल्दी नहीं झड़ना चाहता था इसलिए मैंने अपना लंड हिलाना बंद कर दिया. फिर निकिता भाभी अपने हाथों से अपने जांघों को सहलाने लगी. वो अपने हाथ को चूत के हिस्से के बेहद नज़दीक ले जा रही थी.

    – मैं कैसे सोता माँ? आवाज़ ही कुछ ऐसी आ रही थी कि मुझे फिर नींद नहीं आई. (आँख मारते हुए)

    निकिता भाभी- आह! तेरे मालिश से तो मुझे कुछ अजीब सा लग रहा है. मेरी जांघों तक ही मालिश करना, मैंने अंदर कुछ पहना नहीं है. नहीं तो तू जोश में आकर मेरी चूत में उंगली डाल देगा.

    मैं- आपकी चूत से ही तो मैं निकला हूँ. क्या उस पर मेरा भी हक़ नहीं बनता?

    निकिता भाभी- छी नालायक़!
    फिर हंसती हुई- अपनी माँ के साथ कोई ऐसे बात करता है भला? वैसे तू हक़ की बात मत कर, तेरे बाप ने अपना हक़ मेरी चूत पर कल सारी रात जताया है. तेरे बाप के लंड पे पूरी रात उछल-उछल कर मेरी कमर टूट गई. रात को अचानक उसका मूड बन गया और मुझे अपने ऊपर चढ़ाकर मेरी गांड मसलने लगा. मेरे स्तनों को ऐसे चूसा कि कभी चूसने मिला ही ना हो. तू मेरे स्तनों की भी मालिश कर दे ज़रा. तू मत चूसना; तूने अपने हिस्से का दूध पी लिया है.

    निकिता भाभी ने अपना साड़ी का पल्लू उतारा और अपना ब्लाउज खोलकर अपने भूरे, पपीते जैसे आकार वाले स्तनों के दर्शन दे दिए. उन्होंने अपने हाथों से अपने स्तनों को दबाया और मुझे चिढ़ाया. मैंने अपने माँ की वैसी चूचियाँ जब वो नहाती थी तब देकही है, मेरा मन करता था कि उसे वहीं जाकर पीछे से दबोच लूं.

    निकिता भाभी- उम्! तू कितने अच्छे से मेरी चूचियों की मालिश कर रहा है. और एक तेरा बाप है, कुत्ते को हर वक़्त इन्हें दबोचकर काटनी होती है. देख अभी भी मेरी चूची लाल है. चल तू अब इतने अच्छे से मालिश कर ही रहा है तो मेरी चूत की भी मालिश कर दे. अपनी उंगली डालकर अच्छे से सहला मेरी चूत को.
    फिर हंसती हुई बोली- ध्यान रख कि तू अपना लंड ना घुसेड़ दे.

    निकिता भाभी ने अपनी साड़ी पूरी उठा दी. उसकी काले रंग वाली बालों से भरी चूत देखकर मैं अपने लंड को जोर से हिलाने लगा. मेरी माँ की भी चूत ऐसी ही दिखती है. वो नहाते वक़्त अपने पैर फैलाती है और अपनी ऊँगली से चूत को साफ़ करती है.

    मैं- माँ तेरी चूत को देखकर ऐसा लगता है कि पापा तुम्हारी रोज़ रात को चुदाई करते हैं. लगता है कि पापा तुम्हारी गांड में भी अपना लंड घुसाते हैं. इसमें मेरी दो उँगलियाँ आसानी से घुस जायेंगी.

    निकिता भाभी- तेरा बाप तो क्या हमारा पड़ोसी भी मेरी चुदाई करता है. बेटा अब जो मैं तुझे बताने जा रही हूँ वो बात तेरे पापा को मत बताना. नहीं तो मेरी आजादी छीन ली जायेगी. तेरे पापा को कभी कभार ही सेक्स का मूड आता हैं और मेरी प्यास तो रोज़ बुझनी ज़रूरी है नहीं तो मैं इधर उधर मुँह मार लेती हूँ.

    निकिता भाभी की बातें सुनकर मेरा लंड तो और कड़क हो गया. अपनी माँ के बारे में ऐसा सुनकर मेरी हवस को राहत मिली. अब से मैं अपनी माँ के बारे में ऐसे ही विचार लाऊँगा. दिल्ली सेक्स चैट की भाभियाँ वाकई में कमाल की हैं दोस्तो.

    निकिता भाभी- सुबह जब मैं हमारे कॉमन बाथरूम में नहाने जाती हूँ, तब हमारा पड़ोसी भी मेरे साथ बाथरूम में घुस जाता है. मेरी मैक्सी उतारकर सबसे पहले मेरी चूतड़ों को फैलाकर मेरी गांड के छेद में अपनी ज़ुबान डालकर मुझे मस्त कर देता है. फिर उसके बाद मेरी बालों से भरी चूत को अपने मुंह में डालकर भीगा देता है. मेरी चीखें न निकलें इसलिए अपना हाथ मेरे मुँह पर रखता है.
    इतने में तो मेरे चूत से एक बार पानी निकल जाता है. फिर मुझे मेरी जांघों से उठाकर उसके लंड पे उछालता रहता है. ऐसे मैं रोज़ उसके साथ सुबह सेक्स करती हूँ.

    एक बार तो वो अपने भाई को भी मेरी चुदाई करने ले आया. दोनों मिलकर सुबह सुबह मेरे शरीर के हर एक छेद को चाटकर साफ़ करने लगे. फिर मुझे अपने बीच में दबाकर बारी बारी मेरी चूत और गांड में अपना लंड घुसाने लगे.

    उस दिन तो मेरी चूत से पेशाब निकल गया था ऐसी चुदाई की थी.

    तू चाहता है कि तेरी माँ ऐसे ही किसी गैर मर्दों के साथ सेक्स करती रहे? क्या तू अपनी माँ को अपनी रंडी नहीं बना सकता? घुसा अपना लौड़ा मेरी चूत में और कर मेरी चुदाई. जब मेरे ही घर में जवान लौड़ा है तो में क्यूँ किसी दूसरे का लौड़ा चुसूं, आह! निकाल मेरा पेशाब, उफ़! ऐसी ही घुसते रेह और फाड़ दे मेरी चूत.

    निकिता भाभी ने एक नकली लौड़ा यानि डिलडो निकाला और उसे वो अपनी चूत में घुसाने लगी. उसने अपने दोनों पैर उठाकर फैला दिए और अपनी गांड में उंगली भी डालने लगी.

    मैं इधर अपने लंड को ज़ोर जोर से हिला रहा था. मेरा तो थोड़ी देर में झड़ने को आ गया था. मेरे से और रहा नहीं गया क्यूंकि ऐसा दृश्य तो मैंने कभी नहीं देखा था. मैंने अपना लंड का माल निकाल दिया. वहाँ पर निकिता भाभी नकली लंड को अपनी गांड में घुस रही थी.

    मैं- अरे भाभी मेरे लंड का पानी तो निकल गया आपकी गांड को देखकर, उफ़ मज़ा आ गया.

    निकिता भाभी- ये तुम्हारा पहला सेक्स चैट सेशन है इसलिए तुम इतनी जल्दी झड़ गए. मेरे साथ कुछ और समय बिताओ फिर देखो हम घंटों तक मस्ती करते रहेंगे. क्या पता शायद तुम अपनी असली माँ की भी चुदाई कर दो (आँख मारते हुए).

    मैं- सही कहा भाभी आपने. मैं अब रोज़ आपसे सेक्स चैट करूँगा. आप मुझे लड़की को पटाने के तरीके बताना फिर उसे मैं यहाँ लाकर आपके सामने उसकी गांड में अपना लंड घुसाउँगा. चलो तो फिर कल मिलते हैं भाभी.

    निकिता भाभी- बिल्कुल, कल मिलेंगे जानेमन. (अपनी गांड का छेड दिखाकर मुझे चिढ़ाते हुए).

    दोस्तो, ये था दिल्ली सेक्स चैट वेबसाइट पर मेरा पहला अनुभव.

    उस दिन के बाद से मैंने कई सेक्सी लड़की और कामुक भाभियों को पटाया है. अब मैं तो हर रोज़ ऐश करता रहता हूँ. आप लोग भी दिल्ली सेक्स चैट वेबसाइट पर जाकर सेक्स के मज़े लीजिये. एक बात और, लड़की और भाभियों की लिस्ट बनाना नहीं तो आप भूल जाओगे कि आपने कितनी आइटम लड़कियों भाभियों को पटाया है.