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  • कुंवारी लैला की वो जंगली रात

    रेगिस्तान का सूरज डूब चुका था, लेकिन शेख अब्दुल्लाह अल-रशीद के महल में गर्मी अभी भी हवा में तप रही थी। दोपहर को शेख ने ऊंट का ताज़ा, मसालेदार गोश्त खाया था – भारी मात्रा में, लहसुन, अदरक, काली मिर्च और खास जड़ी-बूटियों के साथ। वो गोश्त सिर्फ़ पेट नहीं भरता था, बल्कि पुरानी अरबी लोककथाओं के अनुसार उसमें वो जादुई शक्ति होती थी जो मर्द की नसों में आग भर देती है। शेख का लिंग पहले से ही भारी था, लेकिन गोश्त खाने के एक घंटे बाद ही वो पत्थर की तरह खड़ा हो गया। नसें फूल गईं, सिर चमकने लगा, और हर ५ मिनट में बिना छुए ही सख्त होकर काँपने लगता। शेख ने अपना वज़ीर बुलाया और हुक्म दिया, “आज रात मुझे बिल्कुल ताज़ी, १८ साल की कुंवारी लड़की चाहिए। वो जिसकी चूत कभी किसी लिंग से टकराई ही न हो।”

    रात के ठीक १० बजे महल के शयनकक्ष का भारी दरवाज़ा खुला। कमरा विशाल था – दीवारें मोटे मखमली पर्दों से ढकी, फर्श पर ईरानी गलीचे बिछे, छत से सोने की लालटेनें लटक रही थीं जिनकी रोशनी सुनहरी थी। बीच में एक राजसी बिस्तर था, जिस पर ७-८ मोटी रेशमी चादरें और तकिए बिछे थे। हवा में अगरबत्ती और गुलाब का ख़ुशबू था।

    दो सिपाही एक लड़की को दोनों बाज़ुओं से पकड़े अंदर लाए। लड़की का नाम लैला था। १८ साल की, बदू कबीले की, गोरी-दूधिया रंग, लंबे घने काले बाल कमर तक, बड़ी-बड़ी काली आँखें जिनमें अब डर और आँसू भरे थे। उसका बदन नाजुक, कमर पतली, कूल्हे थोड़े भरे, और स्तन बड़े-बड़े, भारी, जो उसके सफेद घाघरे के अंदर भी उभरे हुए दिख रहे थे। उसके होंठ गुलाबी और काँप रहे थे। वो पूरी तरह कुंवारी थी – आज तक किसी मर्द ने उसे छुआ तक नहीं था।

    सिपाहियों ने उसे कमरे के बीच में खड़ा कर दिया और बाहर निकल गए। दरवाज़ा भारी आवाज़ के साथ बंद हो गया।

    शेख अब्दुल्लाह दरवाज़े के पास खड़ा था। सिर्फ़ एक सफेद रेशमी जुलाब पहने, जिसके नीचे उसका १० इंच लंबा, मोटा लिंग पहले से ही तना हुआ था और कपड़े को टेंट की तरह उठाए हुए था। उसकी आँखें भूख से जल रही थीं।

    “आओ मेरी छोटी कुंवारी… आज ऊंट का गोश्त खाया है मैंने। दस घंटे तक मेरा लिंग नहीं रुकेगा। सात बार तुझे चोदूँगा, हर बार अलग-अलग तरीके से। जितना रोना है, जितना चीखना है, चीखो। आज ये कमरा तेरी चीखों, रोने और मेरी साँसों से भर जाएगा।”

    लैला काँपते हुए पीछे हटी, “नहीं शेख साहब… मैं अभी बहुत छोटी हूँ… मुझे छोड़ दीजिए… मैं डर रही हूँ… रो रही हूँ… प्लीज…” उसके गालों पर आँसू बहने लगे।

    शेख आगे बढ़ा, उसका भारी शरीर लैला के नाजुक बदन के सामने और भी विशाल लग रहा था। उसने लैला का हाथ पकड़ा और उसे बिस्तर की तरफ खींच लिया।

    ### राउंड १ – कुंवारी चूत का फटना (रात १०:०० से ११:३० तक – १.५ घंटे)

    शेख ने लैला को बिस्तर पर जोर से धकेला। लैला पीठ के बल गिर गई, उसके बाल बिखर गए। शेख ने उसके घाघरे की डोरी खींची – एक झटके में घाघरा फटकर अलग हो गया। नीचे सिर्फ़ पतली सफेद सिल्क की पैंटी थी। शेख ने उसे भी दोनों हाथों से फाड़ दिया। लैला की कुंवारी चूत अब पूरी तरह नंगी – गुलाबी, छोटी, बिल्कुल साफ़, बिना एक बाल के, और अभी तक अनछुई।

    “कितनी सुंदर है तेरी चूत… आज इसे मैं फाड़ दूँगा,” शेख गुर्राया।

    लैला दोनों हाथों से अपनी चूत ढकने लगी और जोर-जोर से रोने लगी, “नहीं! नहीं! ये बहुत बड़ा है… मुझे मार डालेगा… आह… रो रही हूँ… चीख रही हूँ… माँ बचाओ…”

    शेख ने उसके दोनों हाथ पकड़कर सिर के ऊपर दबा दिए। फिर उसने लैला के भारी स्तनों को दोनों हाथों में भर लिया और जोर-जोर से मसलने लगा। मुँह से एक-एक निप्पल चूसने लगा – दाँतों से काटते हुए। लैला तड़प उठी, “आआआह… दर्द हो रहा है… स्तन फट रहे हैं… छोड़ो… मैं रो रही हूँ… बहुत रो रही हूँ…”

    शेख ने अपनी जुलाब उतारी। उसका लिंग बाहर आया – १० इंच लंबा, २.५ इंच मोटा, नसें फूली हुईं, सिर चमकता हुआ और पहले से ही रस टपक रहा था। उसने लिंग का सिर लैला की चूत पर रखा और धीरे-धीरे दबाया।

    लैला की आँखें फट गईं। “नहीं! निकालो! ये तो फाड़ रहा है! आआआह!!! चीख रही हूँ!!! रो रही हूँ!!! दर्द… बहुत दर्द… मर जाऊँगी!!!”

    शेख ने एक जोरदार झटका मारा। आधा लिंग अंदर चला गया। कुंवारी झिल्ली फटी और खून की धार निकल आई। लैला पागलों की तरह चीखने लगी, सिर इधर-उधर पटकने लगी, शरीर काँपने लगा। “मर गई! मर गई! निकालो शेख… प्लीज… मैं कुंवारी थी… अब नहीं रही… रो-रो के मर रही हूँ…”

    शेख रुका नहीं। दूसरा जोरदार झटका। पूरा १० इंच अंदर चला गया। लैला की चीख आसमान छू गई। “आआआह!!! पेट फट गया!!! चीख रही हूँ!!! रो रही हूँ!!! दया करो!!!”

    शेख ने धीमी लेकिन गहरी गति से चोदना शुरू किया। हर थ्रस्ट पर लैला की चूत से खून और रस का मिश्रण निकलता। वो लगातार चीखती, रोती, गिड़गिड़ाती रही – “आह… उफ… धीरे… बहुत बड़ा है… मेरी चूत फट गई… शेख… बचाओ मुझे…” ५५ मिनट तक शेख लगातार पेलता रहा। लैला की आवाज़ बैठ गई, लेकिन आँसू अभी भी बह रहे थे। आखिरकार शेख ने पहला जोरदार झटका मारा और गर्म-गर्म वीर्य की मोटी धार लैला की चूत के अंदर तक भर दी। लैला काँप उठी, “गर्म… अंदर… भरा जा रहा है… रो रही हूँ…”

    ### राउंड २ – डॉगी स्टाइल में जंगली पेलाई (११:३० से १:१० तक – १ घंटा ४० मिनट)

    शेख ने लैला को पलटा, घुटनों के बल मोड़ा। लैला की चूत अब सूजी हुई, लाल और खुली हुई थी। शेख ने पीछे से एक झटके में पूरा लिंग घुसा दिया। लैला फिर चीख पड़ी, “फिर से!!! फिर दर्द!!! आआह!!! रो रही हूँ!!! चीख रही हूँ!!!”

  • सपनो की जॉब 3

    कमरे में सिर्फ हल्की गोल्डन बेडसाइड लाइट जल रही थी। AC की ठंडी हवा दोनों के नंगे बदन पर लग रही थी। राहुल ने सीमा को बेड पर लिटा दिया। उनकी नंगी देह पूरी तरह फैली हुई थी — भारी 36D छातियाँ ऊपर-नीचे हो रही थीं, कमर पसीने से चमक रही थी, जाँघें थोड़ी फैली हुई थीं।

    राहुल उनके ऊपर झुका। पहले उसने उनके होंठों पर बहुत गहरा और लंबा किस किया। जीभें एक-दूसरे में घुल गईं। किस के दौरान राहुल ने सीमा की छातियों को दोनों हाथों से थाम लिया और धीरे-धीरे मसलने लगा। नरम, भारी मांस उँगलियों में दब रहा था। फिर उसने एक निप्पल को मुँह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगा। जीभ से चारों तरफ घुमाता, हल्के से काटता, फिर पूरा निप्पल मुँह में लेकर चूसता। दूसरी छाती को हाथ से मसलता रहा। सीमा की आहें निकलने लगीं — “आह्ह… राहुल… धीरे… बहुत अच्छा लग रहा है… उफ्फ…”

    राहुल ने लगातार 12-15 मिनट तक उनकी दोनों छातियों को चूसा, चाटा और नोचा। निप्पल्स लाल और सख्त हो चुके थे। फिर वो धीरे-धीरे नीचे सरका। सीमा की नाभि में जीभ डाली, फिर कमर चूमता हुआ उनकी जाँघों के बीच पहुँच गया। उसने सीमा की जाँघें चौड़ी कीं और चूत पर मुंह रख दिया। पहले क्लिटोरिस को जीभ से धीरे-धीरे घुमाया, फिर पूरी फाँक चाटी। जीभ अंदर डालकर चूसने लगा। सीमा की कमर बार-बार ऊपर उठ रही थी। उनकी चूत से गर्म रस निकल रहा था।

    “आह्ह्ह… राहुल… तुम्हारी जीभ… बहुत गहरी… हाँ… चूसो… मेरी चूत चूसो… उफ्फ… मैं गर्म हो रही हूँ…” सीमा की साँसें फूल रही थीं।

    राहुल ने 10 मिनट तक उनकी चूत को चाटा और चूसा। सीमा की जाँघें काँप रही थीं। उनकी चूत अब पूरी तरह गीली और तैयार थी।

    तभी सीमा ने काँपते हुए कहा, “राहुल… अब… कंडोम… कंडोम लगाओ…”

    राहुल ने सिर हिलाया। सीमा ने बेडसाइड ड्रॉअर से Trojan Magnum XL का पैकेट निकाला। उन्होंने पैकेट फाड़ा और राहुल के सामने घुटनों के बल बैठ गईं। राहुल का 11 इंच लंबा और 4 इंच मोटा लंड पहले से ही पूरा खड़ा था। सीमा ने कंडोम की रिंग लंड की नोक पर रखी और दोनों हाथों से धीरे-धीरे नीचे खींचा। कंडोम लंड की मोटाई पर पूरी तरह तन गया। अब राहुल का पूरा लंड कंडोम में चमक रहा था।

    सीमा ने राहुल की आँखों में देखकर गिड़गिड़ाते हुए कहा, “राहुल… प्लीज… सिर्फ 3 इंच… उससे ज़्यादा मत डालना… मेरी चूत अभी भी सूजी हुई है… दर्द हो रहा है… वादा करो…”

    राहुल ने सिर हिलाया। उसने सीमा को पीठ के बल लिटा दिया। उनकी जाँघें चौड़ी कीं। लंड की नोक को सूजी हुई चूत की फाँक पर रखा और बहुत धीरे-धीरे 3 इंच अंदर डाल दिया।

    सीमा की आँखें बंद हो गईं। “आह्ह… बस… बस इतना ही… और मत डालना…”

    राहुल ने 3 इंच ही रखकर धीमी गति से अंदर-बाहर करना शुरू किया। हर धक्का बहुत आहिस्ता था। लेकिन कुछ मिनट बाद राहुल ने अचानक कमर को जोर से आगे धकेला। लंड 6 इंच तक एक झटके में अंदर चला गया।

    सीमा की चीख फट पड़ी — “आआआह्ह्ह्ह… राहुल… नहीं… 6 इंच… बहुत दर्द… बहार निकालो… आह्ह्ह…”

    उनकी आँखों से तुरंत आँसू बहने लगे। चूत की सूजी हुई दीवारें लंड को कसकर जकड़ रही थीं। सीमा दोनों हाथों से राहुल की छाती को धकेल रही थीं। “राहुल… प्लीज… बहार निकालो… मैं सह नहीं पा रही… रो रही हूँ… आह्ह्ह…”

    लेकिन राहुल नहीं रुका। उसने और जोर से धक्के मारने शुरू कर दिए। अब लंड 6 इंच तक लगातार अंदर-बाहर हो रहा था। कमरे में फच… फच… फच… की तेज़ आवाज़ गूँज रही थी। सीमा ज़ोर-ज़ोर से चीख रही थीं और रो रही थीं। उनके आँसू गालों पर बह रहे थे। “राहुल… मत… मत… दर्द हो रहा है… बहार निकालो… आह्ह्ह…”

    राहुल ने 30 मिनट तक लगातार उन्हें पेला। हर धक्का गहरा और तेज़ था। सीमा की चूत पूरी तरह फैल गई थी। 18 मिनट में सीमा पहली बार झड़ गईं। उनका शरीर सख्त हो गया, चूत सिकुड़-सिकुड़कर लंड को दबाने लगी। “आह्ह्ह… पहली बार… राहुल… मैं आ गई…” लेकिन राहुल रुका नहीं।

    32 मिनट बाद सीमा दूसरी बार झड़ गईं। इस बार वो चीख पड़ीं — “दूसरी बार… आह्ह्ह… बहुत दर्द… रुक जाओ…”

    सीमा अब रो-रोकर गिड़गिड़ा रही थीं। “राहुल… प्लीज रुक जाओ… मैं सह नहीं पा रही… चूत फट रही है… आह्ह्ह…”

    लेकिन राहुल ने और तेज़ी से पेलना जारी रखा। 50 मिनट पूरे होने वाले थे। सीमा की हालत पूरी तरह खराब हो चुकी थी। उनकी आँखें सूज गई थीं, चेहरा लाल था, साँसें फूल रही थीं। वो पड़ी-पड़ी रो रही थीं।

    आखिरकार राहुल का शरीर तन गया। उसने सीमा की कमर को कसकर पकड़ा और आखिरी जोरदार धक्के मारे। कंडोम के अंदर गर्म, गाढ़ा वीर्य की मोटी धार निकली। राहुल ने पूरा पानी सीमा की चूत के अंदर छोड़ दिया।

    राहुल ने सीमा की चूत से लंड बाहर निकाला तो पूरा कमरा उनकी चीखों और रोने की आवाज़ से भर गया था। सीमा पड़ी-पड़ी ज़ोर-ज़ोर से रो रही थीं। उनकी आँखें सूज गई थीं, गालों पर आँसू की धार बह रही थी, साँसें फूल रही थीं। चूत बुरी तरह सूजी हुई, लाल और दर्द से फड़क रही थी। राहुल का दिल एक पल के लिए धड़क गया।

    उसने तुरंत कंडोम उतारा और बेड के किनारे बैठ गया। सीमा को दोनों हाथों से कसकर गले लगा लिया। उनकी नंगी देह अभी भी काँप रही थी। राहुल ने उनके बालों में हाथ फेरते हुए बहुत नरम और प्यार भरी आवाज़ में कहा,

    “सीमा जी… गलती हो गई… बहुत बड़ी गलती हो गई… मैंने आपकी बात नहीं मानी… आप रो रही थीं, मना कर रही थीं, फिर भी मैं नहीं रुका… मुझे माफ़ कर दो… अबसे कभी नहीं होगा… वादा है…”

    सीमा रोते-रोते राहुल की छाती में चेहरा छुपाए हुए थीं। राहुल ने उन्हें और कसकर गले लगाया। उनकी पीठ पर हल्के-हल्के हाथ फेरता रहा। वो बार-बार माफी माँगता रहा,

    “मैं बहुत गलत था… आपकी चूत पहले से ही सूजी हुई थी… फिर भी मैंने 6 इंच तक घुसा दिया… आपकी चीखें सुनकर भी मैं नहीं रुका… मुझे माफ़ कर दो सीमा जी… मैं आगे से हमेशा आपकी बात मानूँगा… आप जितना कहोगी उतना ही करूँगा… प्लीज रोना बंद करो…”

    राहुल ने उनके गालों से आँसू पोंछे, माथे पर किस किया, फिर दोनों गालों पर किस किया। वो बहुत प्यार से बातें कर रहा था — “आप मेरे लिए बहुत स्पेशल हो… मैं आपको कभी दर्द नहीं पहुँचाना चाहता था… बस भूख में होश नहीं रहा… अब कभी नहीं…”

    सीमा की रोना थोड़ा कम हुआ, लेकिन दर्द बढ़ता जा रहा था। उनकी चूत में जलन और सूजन इतनी तेज़ हो गई थी कि वो बार-बार कराह रही थीं — “आह्ह… राहुल… बहुत जलन हो रही है… दर्द… बहुत दर्द…”

    राहुल ने तुरंत उठकर इंटरकॉम फोन उठाया और मैड को बुलाया। 
    “रीना… जल्दी से बर्फ़ ले आओ… ज्यादा बर्फ़… और एक साफ़ कपड़ा भी।”

    रीना कुछ ही मिनट में बर्फ़ का कटोरा और साफ़ तौलिया लेकर आई। उसने ट्रे रखी और चुपचाप बाहर चली गई।

    राहुल ने बर्फ़ के टुकड़े कपड़े में लपेटे और बहुत धीरे-धीरे सीमा की सूजी हुई चूत पर लगाने लगा। ठंडी बर्फ़ छूते ही सीमा का शरीर हल्का सा काँप गया। “आह्ह… ठंडा… राहुल… धीरे…” राहुल ने बर्फ़ को बहुत नरम हाथों से उनकी फाँक पर, क्लिटोरिस पर और सूजे हुए हिस्से पर घुमाया। बर्फ़ पिघल रही थी और ठंडा पानी उनकी जाँघों पर बह रहा था। राहुल ने 10-12 मिनट तक लगातार बर्फ़ लगाई। धीरे-धीरे सीमा की जलन कम होने लगी। उनकी साँसें थोड़ी शांत हुईं।

    जब दर्द थोड़ा कम हुआ तो राहुल ने सीमा को अपनी गोद में उठा लिया। दोनों नंगे ही एक-दूसरे से चिपके बैठे थे। राहुल ने उन्हें बहुत प्यार से पूछा,

    “सीमा जी… एक बात बताओ ना… तुम्हारा एक लड़का है ना? वो किसकी pregnancy थी? वो निकला है यहीं से… तुम्हारी चूत से ही निकला होगा ना? फिर तुम इतना बड़ा लंड क्यों नहीं सह पा रही हो? अगर बच्चा निकल सकता है तो मेरा लंड भी तो अंदर जा सकता था…”

    सीमा ने राहुल की छाती पर सिर रखे हुए ही थोड़ी देर चुप रही। उनकी साँसें एक पल के लिए रुक गईं। फिर उन्होंने धीरे-धीरे सिर उठाया। उनकी आँखें अभी भी नम थीं। उन्होंने राहुल की आँखों में देखा और बहुत धीमी, शर्मीली लेकिन स्पष्ट आवाज़ में बोलीं,

    “राहुल… बात ये नहीं है… 
    मेरा बेटा मेरे पति का ही है… लेकिन वो मेरी चूत से नहीं निकला। 
    डॉक्टर ने कहा था कि मेरी चूत बहुत टाइट है और बच्चा बड़ा था… इसलिए नॉर्मल डिलीवरी नहीं हो सकती थी। उन्होंने C-section (ऑपरेशन) कर दिया। 
    बच्चा मेरी पेट की चीर-फाड़ करके निकाला गया… मेरी चूत कभी खुली ही नहीं। 
    वो आज भी वैसी की वैसी टाइट और संकरी है… जितनी शादी के समय थी।”

    सीमा ने राहुल की छाती पर हाथ फेरते हुए आगे कहा,

    “मेरे पति बहुत अच्छे इंसान हैं राहुल… 
    वे हमेशा मेरी इज्जत करते थे। कभी ज़ोर नहीं लगाया। हफ्ते में सिर्फ़ एक-दो बार… वो भी बहुत धीरे और प्यार से… कभी 3-4 मिनट से ज्यादा नहीं। 
    मैंने कभी उनसे ज़्यादा माँगा भी नहीं… शर्म आती थी। 
    पर अंदर ही अंदर मेरी भूख बढ़ती जा रही थी। 
    जब उन्होंने खुद कहा कि ‘अगर तुम किसी और से संतुष्ट होना चाहो तो करवा लो… मैं मना नहीं करूँगा’… तब मुझे लगा कि अब मौका है। 
    और जब तुम्हारा चेकअप हुआ… रिपोर्ट आई… 11 इंच लंबा और 4 इंच मोटा… तो पति ने खुद कहा — ‘ये लड़का सही है… इसे रख लो… लेकिन राज़ रहे’।”

    सीमा की आवाज़ में पति के लिए सम्मान और कृतज्ञता दोनों थी। उन्होंने राहुल की गर्दन में चेहरा छुपा लिया और धीरे से बोलीं,

    “मेरे पति ने मुझे कभी मजबूर नहीं किया… कभी गाली नहीं दी… कभी बाहर नहीं रखा… सब कुछ दिया… पैसे, घर, इज्जत, बेटा… बस एक चीज़ नहीं दे पाए — वो संतुष्टि… जो एक औरत को चाहिए। 
    इसलिए उन्होंने मुझे आजादी दी… ताकि मैं खुश रह सकूँ। 
    मैं उनके बहुत आभारी हूँ राहुल…”

    राहुल ने सीमा को और कसकर गले लगा लिया। दोनों की नंगी देह एक-दूसरे में पूरी तरह समा गई। राहुल ने सीमा के माथे पर, फिर दोनों गालों पर, फिर होंठों पर बहुत प्यार भरा किस किया। किस लंबा, गहरा और भावुक था। उनकी जीभें धीरे-धीरे एक-दूसरे में घुल गईं। किस के दौरान राहुल सीमा की पीठ पर हल्के-हल्के हाथ फेरता रहा। सीमा ने भी राहुल की गर्दन में हाथ डालकर जवाब दिया।

    किस खत्म होने पर दोनों एक-दूसरे की आँखों में देखते रहे। कोई शब्द नहीं, सिर्फ़ गहरी नज़रें। फिर सीमा ने राहुल की छाती पर सिर रख दिया। राहुल ने उन्हें अपनी बाँहों में कसकर भर लिया। दोनों पूरी तरह नंगे, एक-दूसरे की गर्माहट में लिपटे हुए थे। सीमा की भारी छातियाँ राहुल की छाती से दब रही थीं, उनकी जाँघें राहुल की जाँघों के बीच फँसी हुई थीं।

    राहुल ने सीमा के बालों में उँगलियाँ फिराईं और बहुत धीरे से फुसफुसाया, 
    “सो जाओ सीमा जी… मैं तुम्हारे पास हूँ…”

    सीमा ने आँखें बंद कर लीं। उनकी साँसें धीमी और शांत हो गईं। राहुल भी उनकी गरमाहट में डूबते हुए आँखें बंद कर लीं।

    दोनों नंगे ही, एक-दूसरे से चिपके हुए, गहरी नींद में सो गए। कमरे में सिर्फ AC की हल्की आवाज़ और बाहर हवा में पेड़ों की सरसराहट थी।

    राहुल की नींद सुबह के 7:40 बजे खुली। 

    जैसे ही उसकी आँखें खुलीं, सबसे पहले जो महसूस हुआ वो था — गर्म, नरम, गीली जीभ। सीमा उसके पैरों के बीच घुटनों के बल बैठी हुई थीं। उनकी लंबी, काली बालों की लटें राहुल की जाँघों पर बिखरी हुई थीं। उन्होंने राहुल के 11 इंच लंबे और 4 इंच मोटे लंड को एक हाथ में पकड़ रखा था और अपनी गर्म जीभ से उसकी गोतियों को चाट रही थीं। 

    एक-एक गोती को मुँह में लेकर बहुत प्यार से चूस रही थीं। जीभ चारों तरफ घुमा रही थीं, हल्के से चबा रही थीं, फिर मुँह में लेकर नरम-नरम चूस रही थीं। राहुल का पूरा लंड पहले से ही सख्त हो चुका था और पेट पर तना हुआ खड़ा था। सीमा की सलाइवा गोतियों से लेकर लंड की जड़ तक बह रहा था। 

    राहुल चुपचाप लेटा रहा। उसने आँखें बंद नहीं कीं। बस देखता रहा। सीमा की आँखें बंद थीं, चेहरा पूरी तरह भूख और समर्पण में डूबा हुआ था। उनकी भारी छातियाँ लटक रही थीं और हर हलचल के साथ हिल रही थीं। 

    कुछ देर बाद सीमा ने लंड को नीचे सरकाया और उसका सिरा मुँह में ले लिया। उन्होंने सिर्फ 3 इंच तक ही लंड को मुँह में लिया। उनके होंठ लंड की मोटाई से पूरी तरह फैल गए थे। वो धीरे-धीरे ऊपर-नीचे करने लगीं। गर्म, गीला मुँह लंड को निचोड़ रहा था। “मम्म… मम्म…” की हल्की आवाज़ कमरे में गूँज रही थी। 

    राहुल अब और नहीं देख सकता था। उसने सीमा के बाल पकड़े और उन्हें ऊपर खींच लिया। फिर खुद उनके ऊपर चढ़ गया। उसने सीमा को पीठ के बल लिटाया और उनकी दोनों छातियों को दोनों हाथों से थाम लिया। नरम, भारी मांस उँगलियों में दब गया। उसने एक निप्पल को मुँह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगा। जीभ से घुमाया, हल्के से काटा। दूसरी छाती को हाथ से मसलता रहा। सीमा की आहें निकलने लगीं — “आह्ह… राहुल… और जोर से… चूसो… उफ्फ…”

    राहुल ने लगातार 8-10 मिनट तक उनकी छातियों को चूसा। फिर वो नीचे सरका। सीमा की जाँघें अपने आप फैल गईं। राहुल ने उनकी चूत पर मुंह रख दिया और जीभ से पूरी फाँक चाटने लगा। क्लिटोरिस को घुमाया, अंदर जीभ डालकर चूसने लगा। सीमा की कमर बार-बार ऊपर उठ रही थी। उनकी आहें तेज़ हो गईं — “आह्ह्ह… राहुल… तुम्हारी जीभ… बहुत अच्छी… हाँ… चूसो… मेरी चूत चूसो…”

    ठीक 20 मिनट बाद सीमा का शरीर सख्त हो गया। उनकी चूत राहुल की जीभ को कसकर दबाने लगी। उन्होंने जोर से चीख मारी — “आआह्ह्ह… राहुल… मैं… आ गई… आह्ह्ह…” 
    पहला पानी निकला। गर्म, पतला रस राहुल के मुँह और चेहरे पर बह गया। सीमा का पूरा शरीर सिहर उठा। वो हाँफ रही थीं।

    सीमा ने राहुल को हल्के से धकेला और उठ बैठीं। उनकी साँसें अभी भी तेज़ थीं। उन्होंने बेडसाइड फोन उठाया और मैड को बुलाया। 

    रीना तुरंत आई। उसने बिना एक शब्द बोले बेडसाइड ड्रॉअर से Trojan Magnum XL का पैकेट निकाला। पैकेट फाड़ा, कंडोम निकाला और राहुल के सामने घुटनों के बल बैठकर बहुत सावधानी से लंड पर चढ़ा दिया। कंडोम लंड की 4 इंच मोटाई पर पूरी तरह तन गया।

    रीना ने अपनी साड़ी ऊपर करके standing doggy-style पोजीशन में आ गई। वो सामने वाले बड़े टीबल पर झुक गई। उसकी गोल, मोटी गांड ऊपर उठी हुई थी। साड़ी कमर तक लिपटी हुई थी। उसकी चूत पीछे से पूरी तरह खुली हुई दिख रही थी।

    सीमा ने राहुल की तरफ देखा। उनकी आवाज़ अभी भी थोड़ी काँप रही थी, 
    “राहुल… सिर्फ आधा… सिर्फ 5.5 इंच… उससे ज़्यादा मत डालना… प्लीज…”

    राहुल ने रीना की कमर पकड़ी। लंड की नोक को उसकी चूत पर रखा और धीरे-धीरे आधा (5.5 इंच) अंदर डाल दिया। रीना की आँखें फट गईं, लेकिन वो चुप रही। राहुल ने उसी पोजीशन में धीमी गति से चोदना शुरू किया।

    45 मिनट तक वो लगातार उसी standing doggy-style पोजीशन में रीना को चोदता रहा। हर धक्का गहरा और नियंत्रित था। रीना की गांड हर धक्के पर लहरा रही थी। कमरे में सिर्फ फच-फच… फच-फच… की तेज़ आवाज़ और रीना की दबी हुई आहें गूँज रही थीं। 

    सीमा पूरे समय बेड पर बैठी देख रही थीं। उनकी आँखें नम थीं, लेकिन वो कुछ नहीं बोलीं।

    रीना (मैड) ने राहुल के लंड से कंडोम उतारा, उसे टिश्यू में लपेटकर साइड टेबल पर रख दिया। फिर उसने अपनी साड़ी नीचे की तरफ सरकाई, कमर पर कसकर बाँधा, ब्लाउज़ का हुक ठीक किया और बिना एक शब्द बोले, बिना किसी सवाल या भावना दिखाए चुपचाप कमरे से बाहर चली गई। दरवाज़ा धीरे से बंद हो गया।

    राहुल अभी भी बेड पर बैठा था। उसका लंड अभी भी आधा सख्त था। उसने सीमा की तरफ देखा, जो बेड पर थकी हुई लेटी हुई थीं। उनकी चूत अभी भी सूजी हुई और लाल थी। राहुल ने धीरे से पूछा,

    “सीमा जी… ये मैड… रीना… बिना किसी सवाल के, बिना कुछ कहे… सब कुछ कर देती है? सेक्स भी… और इतनी आसानी से…?”

    सीमा ने धीरे से सिर उठाया। उनकी आँखें अभी भी नम थीं। उन्होंने राहुल की छाती पर हाथ रखा और बहुत धीमी, थकी हुई लेकिन स्पष्ट आवाज़ में बताया,

    “रीना विधवा है राहुल… सिर्फ 27 साल की… उसका पति दो साल पहले एक्सीडेंट में मर गया। 
    उसके बाद से उसकी ज़िंदगी में कोई पुरुष नहीं आया। 
    वो यहाँ फार्महाउस में अकेली काम करती है। मैंने उसे पूरा भरोसा दिया है। 
    उसे पता है कि यहाँ जो होता है, वो राज़ रहेगा। 
    उसकी अपनी भी इच्छा होती है… लेकिन वो कभी किसी से कुछ नहीं माँगती। 
    मैं उसकी सब कुछ हूँ — उसकी मालकिन भी, सहारा भी, और कभी-कभी… उसकी इच्छा पूरी करने वाली भी। 
    इसलिए वो बिना कुछ पूछे, बिना शर्माए, जो मैं कहती हूँ, वो करती है।”

    सीमा ने राहुल की जाँघ पर हाथ फेरा और बोलीं, 
    “चलो… अब नहाते हैं।”

    दोनों नंगे ही उठे और अटैच्ड बाथरूम में चले गए। बाथरूम बहुत बड़ा और लग्जरी था — बीच में बड़ा जकूजी टब, चारों तरफ शीशे, हल्की नीली लाइट्स और गर्म पानी का सिस्टम।

    सीमा ने जकूजी का नल खोला। गर्म पानी तेज़ी से भरने लगा। दोनों नंगे ही टब में उतर गए। गर्म पानी उनके नंगे बदन को छूते ही दोनों सिहर गए। सीमा राहुल की गोद में बैठ गईं। उनकी पीठ राहुल की छाती से सटी हुई थी। राहुल ने उन्हें पीछे से गले लगा लिया। उनकी भारी छातियाँ पानी के ऊपर तैर रही थीं।

    राहुल ने सीमा की गर्दन चूमनी शुरू की। फिर उनके कंधे, फिर कान। सीमा की साँसें फिर से भारी होने लगीं। राहुल ने उन्हें टब के किनारे की तरफ मोड़ा। सीमा दोनों हाथों से टब का किनारा पकड़कर झुक गईं। राहुल ने उनके पीछे बैठकर उनकी चूत को दोनों हाथों से फैलाया और जीभ से चाटना शुरू कर दिया।

    गर्म पानी की धार उनके शरीर पर गिर रही थी। राहुल की जीभ सीमा की चूत की फाँक पर घूम रही थी। क्लिटोरिस को चूस रहा था, अंदर जीभ डालकर चूस रहा था। सीमा की आहें निकलने लगीं — “आह्ह… राहुल… पानी में… बहुत मजा आ रहा है… हाँ… चूसो…”

    राहुल ने 12-15 मिनट तक उनकी चूत को चाटा। गर्म पानी और जीभ का मिश्रण सीमा को पागल कर रहा था। आखिर में सीमा का शरीर सख्त हो गया। उन्होंने जोर से चीख मारी — “आह्ह्ह… राहुल… फिर से… आ गया… आह्ह्ह…” 
    उनकी चूत से दूसरा पानी निकला। गर्म पानी के साथ उनका रस टब में मिल गया।

    सीमा थककर राहुल की गोद में आ गईं। अब राहुल ने उन्हें अपनी तरफ मोड़ा। उसने अपनी छातियों के बीच अपना 11 इंच लंबा और 4 इंच मोटा लंड रख लिया। फिर दोनों हाथों से सीमा की छातियों को आपस में दबाकर लंड को बीच में फँसा लिया। धीरे-धीरे आगे-पीछे करना शुरू कर दिया।

    लंड की नोक सीमा की ठोड़ी तक पहुँच रही थी। छातियों का नरम, गर्म, गीला मांस लंड को चारों तरफ से निचोड़ रहा था। राहुल ने 30 मिनट तक लगातार छातियों के बीच लंड रगड़ा। कभी तेज़, कभी धीरे। सीमा भी अपनी छातियों को और जोर से दबा रही थीं। लेकिन राहुल का पानी फिर भी नहीं निकला। लंड वैसा का वैसा सख्त और तना हुआ था।

    आखिरकार सीमा ने राहुल की आँखों में देखा। उन्होंने अपना एक हाथ नीचे ले जाकर लंड को पकड़ लिया और जोर-जोर से मुठ मारने लगीं। दूसरा हाथ गोतियों को सहला रहा था। उनकी उँगलियाँ बहुत तेज़ी से ऊपर-नीचे हो रही थीं।

    कुछ ही मिनट बाद राहुल का शरीर तन गया। उसने लंबी साँस ली और सीमा के हाथ पर गाढ़ा, गर्म, सफेद वीर्य की मोटी-मोटी धार निकलने लगी। बहुत सारा पानी सीमा की हथेली पर, उनकी छातियों पर और पानी में फैल गया।

    दोनों ने कुछ देर जकूजी में ही आराम किया। फिर बाहर निकलकर नहाए, तौलिए से शरीर पोंछा और कपड़े पहन लिए — राहुल ने नई शर्ट-पैंट, सीमा ने हल्की साड़ी।

    दोनों नाश्ते के लिए बालकनी की तरफ चले गए।

    नाश्ते के समय ठीक 8:45 बजे मैड (रीना) बालकनी में आई। उसके हाथ में बड़ा ट्रे था। ट्रे पर दो प्लेट्स में ऑमलेट, टोस्ट, फ्रेश फ्रूट सलाद, ब्रेड बटर, कॉफी और ऑरेंज जूस रखा हुआ था। रीना ने ट्रे को टेबल पर रखा, दोनों की तरफ देखा और बिना कुछ बोले मुस्कुराते हुए वापस चली गई।

    राहुल और सीमा दोनों ने नाश्ता शुरू किया। सुबह की हल्की ठंडी हवा बालकनी में आ रही थी। सीमा ने सफेद साड़ी पहनी थी, जिसमें उनकी भारी छातियाँ हल्के से उभर रही थीं। राहुल नई शर्ट और ट्राउज़र में था।

    दोनों ने कुछ देर चुपचाप खाया। फिर सीमा ने राहुल की तरफ देखकर धीरे से कहा, 
    “राहुल… कल रात तुमने मुझे बहुत दर्द दिया था… लेकिन आज सुबह तुमने बहुत प्यार से संभाला… थैंक यू।”

    राहुल मुस्कुराया और बोला, “मैंने वादा किया था ना… अबसे हमेशा आपकी बात मानूँगा।”

    सीमा ने हल्के से सिर हिलाया और दोनों ने फिर से खाना जारी रखा। बीच-बीच में छोटी-छोटी बातें हुईं — मौसम की, फार्महाउस की खूबसूरती की, और राहुल की नई शॉपिंग की। सीमा ने राहुल की नई शर्ट की तारीफ की और हँसते हुए कहा, “अब तुम और भी हैंडसम लग रहे हो।”

    नाश्ता खत्म होने के बाद दोनों बालकनी में ही बैठे रहे। सीमा ने राहुल का हाथ अपने हाथ में ले लिया और हल्के से सहलाने लगीं। ठीक उसी समय सीमा का फोन बज उठा। उन्होंने स्क्रीन देखा और फोन उठाया। बात कुछ मिनट चली। सीमा ने “हाँ”, “ठीक है” और “मैं तैयार कर लूँगी” जैसे शब्द कहे और फोन काट दिया।

    उन्होंने राहुल की तरफ देखकर कहा, 
    “चलो… अब वापस चलते हैं।”

    दोनों उठे। राहुल ने अपना बैग उठाया। सीमा ने ड्राइवर को बुलाया। काली BMW तैयार थी। दोनों कार में बैठ गए। कार फार्महाउस से निकलकर हाईवे की तरफ चल पड़ी।

    रास्ते में सीमा ने राहुल की तरफ मुड़कर धीरे से बताया,

    “राहुल… अब हम दूसरी बार मिलेंगे तो मेरे दूसरे और भी बड़े, और ज़्यादा लग्जरी फार्महाउस पर। वो फार्म 15 एकड़ में फैला हुआ है। वहाँ प्राइवेट स्विमिंग पूल, जकूजी, होम थिएटर, स्पा रूम और बहुत बड़ा गार्डन है। वहाँ सिर्फ हम दोनों ही रहेंगे। कोई और नहीं।”

    सीमा ने राहुल का हाथ पकड़ लिया और बोलीं, 
    “वहाँ हम और आराम से, और धीरे-धीरे आगे बढ़ेंगे। मैं चाहती हूँ कि तुम मुझे धीरे-धीरे तैयार करो… ताकि मैं तुम्हारा पूरा लंड ले सकूँ।”

    राहुल ने सिर हिलाया। सीमा ने अपनी पर्स से 50,000 रुपये नोटों में निकाले और राहुल को थमा दिए।

    “ये लो…

    ओर हम 1.5 महीने बाद हम पेरिस जा रहे हैं। वहाँ भी हम साथ रहेंगे। 
    अब घर जाकर आराम करो। अगले हफ्ते या उसके बाद मैं तुम्हें बुलाऊँगी।”

    राहुल ने पैसे ले लिए और धन्यवाद कहा। कार शहर में दाखिल हो चुकी थी। कुछ देर बाद कार राहुल के घर के गेट पर रुक गई।

    सीमा ने झुककर राहुल के गाल पर हल्का किस किया और फुसफुसाई, 
    “ख्याल रखना।

    राहुल कार से उतरा। BMW धीरे-धीरे आगे बढ़ गई। राहुल हाथ में 50,000 रुपये और मन में नई उम्मीद लेकर घर के अंदर चला गया।

    राहुल के लिए अगले सात दिन सामान्य लेकिन व्यस्त गुजरे। सुबह जल्दी उठकर वो जिम जाता, फिर नाश्ता करके शहर घूमने निकल पड़ता। कभी पुरानी किताबों की दुकान पर घंटों बिताता, कभी मॉल में घूमता-फिरता, कभी अकेले कैफे में बैठकर कॉफी पीते हुए सीमा की याद में खो जाता। 

    तीन दिन बाद उसने दोस्तों के साथ शॉपिंग की — नई घड़ी, कुछ अच्छे परफ्यूम और दो प्रीमियम शर्ट्स खरीदे। शाम को कभी बीच पर घूमता, कभी पुराने किले की दीवारों पर बैठकर सूरजास्त देखता। लेकिन हर पल उसके दिमाग में सिर्फ़ एक ही चेहरा घूमता — सीमा। उनकी भारी छातियाँ, उनकी सूजी हुई चूत, उनकी चीखें, उनकी रोती हुई आँखें… सब कुछ बार-बार याद आता। वो रात को बिस्तर पर लेटकर बार-बार सोचता, “कब बुलाएँगी…?”

    7वें दिन शाम 6:45 बजे सीमा का मैसेज आया।

    “राहुल, अगले हफ्ते मिलेंगे। अभी मेरे बिजनेस में थोड़ा काम है। तैयार रहना।”

    राहुल ने तुरंत रिप्लाई किया — “जी मैडम, तैयार रहूँगा।”

    फिर करीब 15 दिन और निकल गए। राहुल ने इन दिनों को भी अच्छे से बिताया — सुबह रनिंग, दोपहर में दोस्तों के साथ घूमना-फिरना, एक दिन नई कार देखने गया, एक दिन सिनेमा गया। लेकिन मन पूरी तरह सीमा पर था।

    15वें दिन रात 11:20 बजे फोन पर मैसेज आया।

    “सुबह 10 बजे तैयार रहना। गाड़ी आ जाएगी।”

    राहुल ने मुस्कुराते हुए “ओके मैडम” लिख दिया और सो गया।

    —

    अगली सुबह — 9:50 बजे

    राहुल पहले से तैयार खड़ा था। नई शर्ट, डिज़ाइनर ट्राउज़र, नया परफ्यूम। ठीक 10 बजे घर के गेट के बाहर एक शानदार ब्लैक कलर की Mercedes-Maybach आकर रुकी। कार की चमक इतनी तेज़ थी कि राहुल को आँखें सिकोड़नी पड़ीं। ड्राइवर ने दरवाज़ा खोला। राहुल बैठ गया।

    कार सीधे शहर के सबसे लग्जरी सैलून की तरफ चल पड़ी। सैलून पहुँचते ही राहुल को प्राइवेट VIP रूम में ले जाया गया।

    पहले बाल और दाढ़ी का सेशन शुरू हुआ। स्टाइलिश हेयरकट — साइड्स फेड, ऊपर थोड़ा वॉल्यूम। दाढ़ी पूरी क्लीन शेव। फिर फुल बॉडी वैक्सिंग। राहुल को नंगा करके गर्म वैक्स लगाया गया। छाती, पीठ, हाथ, पैर, जाँघें, लंड, अंडकोष और गांड तक हर जगह के बाल एक-एक करके निकाले गए। जलन हुई, लेकिन जब सब हो गया तो राहुल का शरीर बिल्कुल स्मूद, चमकदार और नया-नया लग रहा था।

    वैक्सिंग के बाद अच्छा मसाज और परफ्यूम लगाया गया।

    जब राहुल बाहर निकला तो सीमा बाहर ही खड़ी थीं। आज वो काली साड़ी में थीं — बहुत हॉट और पावरफुल लग रही थीं। उनकी भारी छातियाँ ब्लाउज़ में कसकर भरी हुई थीं। उन्होंने राहुल को देखते ही मुस्कुराकर गले लगा लिया और कान में फुसफुसाईं,

    “बहुत अच्छे लग रहे हो… चलो, नया फार्महाउस चलते हैं।”

    दोनों Mercedes में बैठ गए। कार हाईवे पर दौड़ पड़ी।

    3 घंटे का सफर

    रास्ते में सीमा ने राहुल का हाथ पकड़ रखा था। उन्होंने बताया,

    “ये नया फार्महाउस मेरे सबसे बड़े प्रोजेक्ट में से एक है। 25 एकड़ में फैला हुआ है। अंदर-बाहर बहुत सारे नौकर हैं — गार्ड, गार्डनर, कुक, क्लीनर — सब। लेकिन अंदर वाले बंगले में सिर्फ़ हम दोनों और पुरानी मैड (रीना) होगी। कोई और नहीं।”

    कार ठीक 3 घंटे बाद नए फार्महाउस के विशाल गेट पर रुकी। गेट खुला। अंदर घुसते ही राहुल को आश्चर्य हुआ — इतना बड़ा फार्महाउस उसने पहले कभी नहीं देखा था। हरे-भरे लॉन, चारों तरफ ताड़ के पेड़, बड़ा स्विमिंग पूल, टेनिस कोर्ट, घुड़सवारी का एरिया और बीच में बहुत बड़ा, लग्जरी बंगला।

    बंगले के बाहर बहुत सारे नौकर काम कर रहे थे — गार्डनर लॉन काट रहे थे, कुछ लोग पूल साफ़ कर रहे थे। लेकिन जैसे ही कार बंगले के मुख्य द्वार के पास रुकी, सब नौकर दूर हट गए।

    अंदर सिर्फ़ पुरानी मैड (रीना) खड़ी थी। वो चुपचाप मुस्कुराई और दोनों का स्वागत किया।

    सीमा ने राहुल का हाथ पकड़ लिया। उनकी आँखों में इस बार बहुत तेज़ तड़प थी। उन्होंने राहुल को कान में फुसफुसाकर कहा,

    “राहुल… इस बार मैं बहुत तड़प रही हूँ… बहुत दिन हो गए… मुझे जल्दी से अंदर ले चलो…”

    यहाँ कहानी का अगला हिस्सा बहुत विस्तार से लिखा है:

    —

    कार बंगले के मुख्य द्वार के ठीक सामने रुकी। सीमा ने राहुल का हाथ कसकर पकड़ लिया और लगभग खींचते हुए उसे अंदर ले गईं। जैसे ही मुख्य दरवाज़ा बंद हुआ, बाहर की दुनिया पूरी तरह कट गई। अंदर सिर्फ़ ठंडी AC की हवा, हल्की परफ्यूम की महक और दोनों की तेज़ होती साँसें थीं।

    सीमा ने राहुल को सीधे लिविंग रूम के बड़े, सॉफ्ट लेदर सोफे की तरफ ले जाया। बिना एक पल भी बर्बाद किए उन्होंने राहुल को सोफे पर धकेल दिया। राहुल पीठ के बल बैठ गया। सीमा तुरंत उसके सामने घुटनों के बल बैठ गईं।

    उनकी आँखों में भूख थी — बहुत दिनों की तड़प, बहुत दिनों की प्यास। उन्होंने राहुल की शर्ट के बटन एक-एक करके खोलने शुरू किए। हर बटन खुलने के साथ उनकी साँसें तेज़ होती जा रही थीं। शर्ट पूरी तरह खुलते ही उन्होंने राहुल की छाती पर हाथ रख दिया और नरम-नरम सहलाने लगीं। फिर ट्राउज़र की बेल्ट खोली, जिप नीचे की और पैंट को जाँघों तक सरका दिया। राहुल अब सिर्फ़ अंडरवियर में था।

    सीमा ने अंडरवियर को भी नीचे खींच दिया। राहुल का 11 इंच लंबा और 4 इंच मोटा लंड एकदम से बाहर आ गया — पहले से ही आधा सख्त और नब्ज की तरह धड़क रहा था।

    सीमा ने राहुल को सोफे पर और पीछे धकेला ताकि वो पूरी तरह लेट जाए। फिर उन्होंने खुद भी जल्दी-जल्दी अपने कपड़े उतारने शुरू कर दिए। साड़ी का पल्लू गिरा, ब्लाउज़ के हुक खोले, ब्रा उतारी। उनकी भारी 36D छातियाँ बाहर आ गईं। फिर साड़ी और पेटीकोट फिसलकर गिर गए। आखिर में उन्होंने पैंटी भी उतार दी और सिर्फ़ एक छोटी-सी काली बिकनी पहने रही। लेकिन कुछ सेकंड बाद उन्होंने बिकनी की ब्रा भी निकाल दी। अब उनकी छातियाँ पूरी तरह नंगी थीं।

    सीमा फिर से राहुल के पैरों के बीच बैठ गईं। उन्होंने दोनों हाथों से राहुल के लंड को पकड़ा और नीचे सरककर उसकी गोतियों को चूसना शुरू कर दिया। एक-एक गोती को मुँह में लेकर बहुत प्यार से चूस रही थीं। जीभ से घुमा रही थीं, हल्के से चबा रही थीं। राहुल की साँसें भारी हो गईं।

    फिर सीमा ने लंड को ऊपर किया और उसका सिरा मुँह में ले लिया। उन्होंने धीरे-धीरे 3 इंच तक लंड को मुँह में लिया और सहलाते हुए चूसने लगीं। उनकी गर्म जीभ लंड के नीचे वाले हिस्से पर घूम रही थी। कभी-कभी वो लंड को पूरी तरह मुँह से निकालकर सिर्फ़ नोक को चूसतीं, फिर फिर से अंदर ले लेतीं।

    राहुल ने हाथ बढ़ाकर सीमा की नंगी छातियों को थाम लिया और उन्हें चूसने लगा। एक निप्पल को मुँह में लेकर जोर-जोर से चूसता, दूसरी छाती को हाथ से मसलता। बीच-बीच में दोनों किस भी कर लेते। 

    इस तरह 25 मिनट बीत गए। 

    सीमा अब और नहीं रुक सकती थीं। उनकी चूत पहले से ही गीली हो चुकी थी। उन्होंने राहुल के लंड को मुँह से निकाला, उसकी तरफ देखा और हाँफते हुए कहा,

    “राहुल… अब जaldi… अंदर डाल दो… मैं बहुत तड़प रही हूँ…”

    यहाँ कहानी का अगला हिस्सा बहुत विस्तार से लिखा है:

    —

    कार बंगले के मुख्य द्वार के ठीक सामने रुकी। सीमा ने राहुल का हाथ कसकर पकड़ लिया और लगभग खींचते हुए उसे अंदर ले गईं। जैसे ही मुख्य दरवाज़ा बंद हुआ, बाहर की दुनिया पूरी तरह कट गई। अंदर सिर्फ़ ठंडी AC की हवा, हल्की परफ्यूम की महक और दोनों की तेज़ होती साँसें थीं।

    सीमा ने राहुल को सीधे लिविंग रूम के बड़े, सॉफ्ट लेदर सोफे की तरफ ले जाया। बिना एक पल भी बर्बाद किए उन्होंने राहुल को सोफे पर धकेल दिया। राहुल पीठ के बल बैठ गया। सीमा तुरंत उसके सामने घुटनों के बल बैठ गईं।

    उनकी आँखों में भूख थी — बहुत दिनों की तड़प, बहुत दिनों की प्यास। उन्होंने राहुल की शर्ट के बटन एक-एक करके खोलने शुरू किए। हर बटन खुलने के साथ उनकी साँसें तेज़ होती जा रही थीं। शर्ट पूरी तरह खुलते ही उन्होंने राहुल की छाती पर हाथ रख दिया और नरम-नरम सहलाने लगीं। फिर ट्राउज़र की बेल्ट खोली, जिप नीचे की और पैंट को जाँघों तक सरका दिया। राहुल अब सिर्फ़ अंडरवियर में था।

    सीमा ने अंडरवियर को भी नीचे खींच दिया। राहुल का 11 इंच लंबा और 4 इंच मोटा लंड एकदम से बाहर आ गया — पहले से ही आधा सख्त और नब्ज की तरह धड़क रहा था।

    सीमा ने राहुल को सोफे पर और पीछे धकेला ताकि वो पूरी तरह लेट जाए। फिर उन्होंने खुद भी जल्दी-जल्दी अपने कपड़े उतारने शुरू कर दिए। साड़ी का पल्लू गिरा, ब्लाउज़ के हुक खोले, ब्रा उतारी। उनकी भारी 36D छातियाँ बाहर आ गईं। फिर साड़ी और पेटीकोट फिसलकर गिर गए। आखिर में उन्होंने पैंटी भी उतार दी और सिर्फ़ एक छोटी-सी काली बिकनी पहने रही। लेकिन कुछ सेकंड बाद उन्होंने बिकनी की ब्रा भी निकाल दी। अब उनकी छातियाँ पूरी तरह नंगी थीं।

    सीमा फिर से राहुल के पैरों के बीच बैठ गईं। उन्होंने दोनों हाथों से राहुल के लंड को पकड़ा और नीचे सरककर उसकी गोतियों को चूसना शुरू कर दिया। एक-एक गोती को मुँह में लेकर बहुत प्यार से चूस रही थीं। जीभ से घुमा रही थीं, हल्के से चबा रही थीं। राहुल की साँसें भारी हो गईं।

    फिर सीमा ने लंड को ऊपर किया और उसका सिरा मुँह में ले लिया। उन्होंने धीरे-धीरे 3 इंच तक लंड को मुँह में लिया और सहलाते हुए चूसने लगीं। उनकी गर्म जीभ लंड के नीचे वाले हिस्से पर घूम रही थी। कभी-कभी वो लंड को पूरी तरह मुँह से निकालकर सिर्फ़ नोक को चूसतीं, फिर फिर से अंदर ले लेतीं।

    राहुल ने हाथ बढ़ाकर सीमा की नंगी छातियों को थाम लिया और उन्हें चूसने लगा। एक निप्पल को मुँह में लेकर जोर-जोर से चूसता, दूसरी छाती को हाथ से मसलता। बीच-बीच में दोनों किस भी कर लेते। 

    इस तरह 25 मिनट बीत गए। 

    सीमा अब और नहीं रुक सकती थीं। उनकी चूत पहले से ही गीली हो चुकी थी। उन्होंने राहुल के लंड को मुँह से निकाला, उसकी तरफ देखा और हाँफते हुए कहा,

    “राहुल… अब जaldi… अंदर डाल दो… मैं बहुत तड़प रही हूँ…”

    राहुल ने सीमा को सोफे पर लिटाया। उसका 11 इंच लंबा और 4 इंच मोटा लंड अभी भी पूरी तरह खड़ा और नब्ज की तरह धड़क रहा था। सीमा की आँखों में प्यास थी, लेकिन राहुल ने एक पल रुककर सीमा की तरफ देखा और दृढ़ स्वर में कहा,

    “सीमा जी… कंडोम… पहले कंडोम लगाओ… मैं बिना कंडोम के कभी नहीं करूँगा…”

    सीमा ने राहुल की छाती पर हाथ रखा। उनकी साँसें बहुत तेज़ थीं। उन्होंने शर्माते हुए, लेकिन बहुत प्यार और तड़प के साथ कहा,

    “राहुल… मैं… मैं कंडोम भूल गई हूँ… घर से निकलते समय याद ही नहीं रहा… प्लीज… आज बिना कंडोम के ही कर लो… मैं बहुत तड़प रही हूँ… 15 दिन हो गए… मेरी चूत सूखी पड़ गई है…”

    राहुल ने तुरंत सिर हिला दिया। उसकी आवाज़ सख्त थी,

    “नहीं सीमा जी… मैंने वादा किया था… बिना कंडोम के कभी नहीं…”

    सीमा ने राहुल को कसकर गले लगा लिया। उनकी नंगी छातियाँ राहुल की छाती से पूरी तरह दब गईं। उन्होंने राहुल के कान में फुसफुसाते हुए, रोते-रोते, गिड़गिड़ाते हुए मनाना शुरू किया,

    “राहुल… प्लीज… सिर्फ़ आज के लिए… मैं प्रॉमिस करती हूँ… अगली बार से हमेशा कंडोम यूज़ करेंगे… लेकिन आज… आज मुझे रोक मत… मेरी चूत जल रही है… तुम्हारे बिना 15 दिन कैसे कटे… प्लीज… मैं तेरी हूँ… तेरी चूत हूँ… आज बिना कंडोम के भर दो मुझे…”

    सीमा ने राहुल के लंड को दोनों हाथों में पकड़ लिया और उसे अपनी चूत की फाँक पर रगड़ने लगीं। उनकी गर्म, गीली चूत लंड की नोक को छू रही थी। उन्होंने राहुल की आँखों में देखकर आँसू भरकर कहा,

    “देखो… कितनी गीली हो गई हूँ… सिर्फ़ तुम्हारे लंड को देखकर… प्लीज राहुल… आज एक बार… मैं तेरी हूँ…”

    राहुल कुछ पल तक चुप रहा। फिर उसकी भूख और सीमा की तड़प देखकर वो थोड़ा नरम पड़ा। उसने गहरी साँस ली और बोला,

    “ठीक है… लेकिन सिर्फ़ 4-5 इंच… उससे ज़्यादा नहीं…”

    सीमा ने राहुल को कसकर चूम लिया।

    यहाँ कहानी का वह हिस्सा बहुत ज्यादा विस्तार से लिखा है। 70 मिनट की चुदाई को हर 12-15 मिनट के अंतराल पर ब्रेकडाउन करके, हर झड़ने को अलग-अलग विस्तार से, सीमा की चीखों, आँसुओं, शरीर की हर हलचल, दर्द-मजा के मिश्रण और राहुल की बेरहमी को बारीकी से लिखा गया है।

    —

    राहुल ने सीमा को बेड पर लिटाया। उसका 11 इंच लंबा और 4 इंच मोटा लंड बिना कंडोम के, पूरी तरह नंगा और चमकदार था। सीमा की सूजी हुई चूत पहले से ही गीली थी, लेकिन राहुल की भूख 15 दिनों की थी। उसने सीमा की जाँघें चौड़ी कीं और लंड की नोक को चूत की फाँक पर रखकर एक जोरदार धक्का मारा।

    पहले 12 मिनट

    राहुल ने शुरू में 5 इंच तक ही रखकर धीमी गति से चोदना शुरू किया। लेकिन जैसे-जैसे सीमा की चूत गीली होती गई, उसकी रफ्तार बढ़ती गई। हर धक्का अब गहरा और तेज़ होता जा रहा था। सीमा की भारी छातियाँ हर झटके के साथ ऊपर-नीचे उछल रही थीं। उनकी आँखें आधी बंद थीं और मुँह से लगातार आहें निकल रही थीं।

    “आह्ह… राहुल… धीरे… आह्ह… 5 इंच… बहुत मोटा लग रहा है… उफ्फ…”

    12वें मिनट में सीमा का शरीर अचानक सख्त हो गया। उनकी चूत राहुल के लंड को कसकर जकड़ने लगी। उन्होंने जोर से चीख मारी — “आआह्ह्ह… राहुल… पहली बार… आ गया… आह्ह्ह…” 
    उनकी चूत से गर्म पानी की पहली धार फूट पड़ी। पूरा शरीर सिहर उठा। सीमा की जाँघें काँप रही थीं। राहुल ने इस दौरान भी रफ्तार कम नहीं की। वो लगातार धक्के मारता रहा।

    12 से 28 मिनट तक

    राहुल की गति अब और तेज़ हो गई थी। लंड अब 5.5 इंच तक अंदर-बाहर हो रहा था। हर धक्के के साथ सीमा की चूत से सफ़ेद झाग बनने लगा था। उनकी छातियाँ जोर-जोर से उछल रही थीं। सीमा अब दर्द और मजा के मिश्रण में चीख रही थीं।

    “आह्ह… राहुल… बहुत तेज़… आह्ह… चूत फट रही है… लेकिन… मजा भी आ रहा है… हाँ… इसी तरह…”

    28वें मिनट में सीमा दूसरी बार झड़ गईं। इस बार झड़ना और भी तीव्र था। उनकी कमर ऊपर उठ गई, आँखें पलट गईं और उन्होंने लंबी चीख मारी — “आआह्ह्ह… दूसरी बार… राहुल… मैं मर रही हूँ… आह्ह्ह…” 
    चूत से दूसरा गर्म रस निकला और राहुल के लंड को और फिसलन भरा बना दिया। सीमा के आँसू बहने लगे थे। लेकिन राहुल रुका नहीं। उसने और जोर से पेलना जारी रखा।

    28 से 42 मिनट तक

    अब राहुल पूरी तरह जानवर बन चुका था। उसकी कमर मशीन की तरह चल रही थी। लंड 5.5-6 इंच तक अंदर जा रहा था। हर धक्के पर सीमा की गांड उठ रही थी। कमरे में सिर्फ चुदाई की तेज़ फच-फच आवाज़ और सीमा की चीखें गूँज रही थीं।

    सीमा अब लगातार रो रही थीं। “राहुल… बहुत हो गया… आह्ह… दर्द… मजा… दोनों… आह्ह्ह…”

    42वें मिनट में तीसरा ऑर्गेज्म आया। सीमा का पूरा शरीर सख्त हो गया। उन्होंने राहुल की पीठ पर नाखून गड़ा दिए और चीख पड़ीं — “तीसरी बार… आह्ह्ह… राहुल… मैं सह नहीं पा रही… आह्ह्ह…” 
    उनकी चूत बार-बार सिकुड़ रही थी। रस की तीसरी धार निकली। अब सीमा की साँसें फूल रही थीं और चेहरा लाल हो चुका था।

    42 से 55 मिनट तक

    राहुल की रफ्तार अब और बढ़ गई थी। वो पूरी ताकत से धक्के मार रहा था। सीमा की छातियाँ लाल हो गई थीं। उनकी चूत से सफ़ेद झाग अब और ज्यादा बन रहा था। सीमा अब चीख-चीखकर रो रही थीं।

    “राहुल… प्लीज… रुक जाओ… आह्ह… चौथी बार आने वाली है… मैं मर जाऊँगी…”

    55वें मिनट में चौथा ऑर्गेज्म आया। इस बार सीमा की चीख बहुत लंबी और तेज़ थी — “आआह्ह्ह… चौथी बार… राहुल… बहुत दर्द… लेकिन… आ गया… आह्ह्ह…” 
    उनका शरीर इतना जोर से काँपा कि राहुल को भी महसूस हुआ। चूत से चौथा रस निकला और बेडशीट को गीला कर दिया।

    55 से 68 मिनट तक

    राहुल अब पूरी तरह बेकाबू था। वो 6 इंच तक लंड अंदर डालकर जोर-जोर से पेल रहा था। सीमा की चूत पूरी तरह फैल चुकी थी। उनकी आवाज़ अब लगभग टूट चुकी थी। वो रो-रोकर गिड़गिड़ा रही थीं,

    “राहुल… पाँचवी बार… आह्ह… मैं सह नहीं पा रही… रुक जाओ… प्लीज…”

    68वें मिनट में पाँचवाँ ऑर्गेज्म आया। सीमा ने जोर से चीख मारी — “पाँचवी बार… आह्ह्ह… राहुल… मैं… मर गई… आह्ह्ह…” 
    उनका शरीर इतना जोर से सिहरा कि लग रहा था जैसे वो बेहोश हो जाएँगी। चूत से पाँचवाँ रस निकला। अब सीमा की साँसें बहुत तेज़ और छोटी हो गई थीं। उनका चेहरा आँसुओं से भीगा हुआ था।

    70 मिनट पूरे होने पर

    राहुल ने आखिरी 2 मिनट और भी तेज़ी से पेला। उसकी कमर मशीन की तरह चल रही थी। आखिरकार उसका शरीर तन गया। उसने सीमा की कमर को दोनों हाथों से कसकर पकड़ा और आखिरी 8-10 बहुत जोरदार धक्के मारे।

    फिर उसका गाढ़ा, गर्म वीर्य सीमा की चूत के अंदर फूट पड़ा। बहुत सारा, मोटा और गर्म वीर्य लगातार निकलता रहा। सीमा की चूत भर गई और अतिरिक्त वीर्य बाहर बहने लगा।

    जैसे ही राहुल ने लंड बाहर निकाला, सीमा की चूत से सफ़ेद वीर्य की मोटी धार निकलकर बेडशीट पर फैल गई। उनकी चूत बुरी तरह सूजी हुई, लाल और फड़क रही थी।

    सीमा पड़ी-पड़ी ज़ोर-ज़ोर से रो रही थीं। उनके आँसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। साँसें फूल रही थीं। शरीर अभी भी हल्का-हल्का काँप रहा था। उन्होंने काँपती हुई आवाज़ में रोते हुए कहा,

    “राहुल… 70 मिनट… पाँच बार… तुमने मुझे… पूरी तरह तोड़ दिया…”

  • सपनो की जॉब 2

    सीमा की आँखें अब बंद थीं, लेकिन उनके चेहरे पर एक हल्की मुस्कान आ गई थी। 45 मिनट की धीमी, आहिस्ता चुदाई के बाद उनकी साँसें अब सामान्य हो रही थीं। उन्होंने राहुल की छाती पर हाथ रखा, उसे कसकर गले लगा लिया और धीरे से फुसफुसाईं, 
    “राहुल… तुम बहुत अच्छे हो… बहुत धीरे-धीरे किया… मैं खुश हूँ… बहुत खुश…”

    सीमा उठीं। उनकी नंगी देह अभी भी पसीने से चमक रही थी। उन्होंने बेडसाइड टेबल से एक छोटा सा गिफ्ट बॉक्स निकाला जो पहले से रखा हुआ था। बॉक्स पर सुनहरी रिबन बँधा था। उन्होंने राहुल को देते हुए मुस्कुराकर कहा, 
    “ये तुम्हारे लिए… मेरी तरफ से पहला गिफ्ट।”

    राहुल ने बॉक्स खोला। अंदर ब्रांड न्यू iPhone 16 Pro Max (256 GB, टाइटेनियम ब्लैक) रखा था। फोन अभी भी प्लास्टिक में लिपटा हुआ था। सीमा ने कहा, 
    “अब तुम्हारा पुराना फोन फेंक दो… ये तुम्हारा नया फोन है। मेरे नंबर पहले से सेव है। जब भी कॉल करूँ, तुरंत उठाना।”

    राहुल ने फोन हाथ में लिया। वो थोड़ा हैरान था, लेकिन खुश भी। दोनों थोड़ी देर आराम करने लगे। सीमा राहुल की बाँहों में सिर रखकर लेट गईं। उनकी नंगी छातियाँ राहुल की छाती से सटी हुई थीं। दोनों की साँसें एक-दूसरे के चेहरे पर पड़ रही थीं। फार्महाउस के कमरे में सिर्फ हल्की AC की आवाज़ और बाहर पक्षियों की चहचहाहट सुनाई दे रही थी।

    करीब 20 मिनट बाद राहुल की भूख लग गई। उसने धीरे से सीमा को बताया, “सीमा जी… मुझे बहुत भूख लग रही है।”

    सीमा मुस्कुराईं। उन्होंने बेडसाइड फोन उठाया और एक नंबर डायल किया। फोन पर सिर्फ दो रिंग गईं और दूसरी तरफ से आवाज आई। सीमा ने बहुत शांत और अधिकारपूर्ण स्वर में कहा, 
    “मैड… नाश्ता तैयार करो… और जल्दी से ले आओ।”

    मिनट भर बाद बाहर से हल्की-सी खटखटाहट हुई। दरवाज़ा धीरे से खुला। एक 28-29 साल की लड़की अंदर आई। वो मैड थी — फार्महाउस में काम करने वाली। वो अकेली थी। उसने ट्रे में नाश्ता तैयार करके लाया था — ओमलेट, टोस्ट, फ्रूट सलाद, कॉफी और जूस।

    राहुल और सीमा दोनों पूरी तरह नंगे बेड पर लेटे हुए थे। राहुल का 11 इंच का लंड अभी भी आधा सख्त था और कंडोम में लिपटा हुआ था। सीमा की नंगी छातियाँ, सूजी हुई चूत और बिखरे बाल सब कुछ खुला हुआ था।

    राहुल ने चौंककर पूछा, “ये कौन है? …बाहर किसी को पता चल गया तो…”

    सीमा ने राहुल की जाँघ पर हाथ रखकर उसे शांत किया और मुस्कुराते हुए बोलीं, 
    “घबराओ मत राहुल… ये मेरी बारोसेंड लड़की है। मैड… बहुत पुरानी और भरोसेमंद है। यहाँ फार्महाउस में सिर्फ़ वो ही काम करती है। मैंने इसे पहले ही सब कुछ समझा रखा है। वो किसी को कुछ नहीं बताएगी। न बाहर, न कहीं। ये हमारा राज़ है… और ये राज़ यहीं रहेगा।”

    मैड ने नज़रें नीचे रखी हुई थीं। उसने ट्रे को टेबल पर रख दिया। उसके चेहरे पर कोई हैरानी या शर्म नहीं थी। वो चुपचाप मुड़ी और नाश्ता बनाने के लिए किचन की तरफ चली गई।

    राहुल और सीमा दोनों अभी भी पूरी तरह नंगे बेड पर पड़े हुए थे। राहुल का लंड हल्का-हल्का हिल रहा था। सीमा की नंगी देह बेड पर फैली हुई थी — भारी छातियाँ, पसीने से चमकती कमर, और जाँघों के बीच अभी भी हल्की लाली। दोनों एक-दूसरे से सटे हुए थे। कमरे में अब नाश्ते की खुशबू आने लगी थी।

    मैड किचन में नाश्ता बनाने चली गई थी…

    सीमा राहुल की छाती पर सिर रखे कुछ देर लेटी रहीं। उनकी साँसें अब शांत हो चुकी थीं। उन्होंने धीरे से उठकर राहुल को चूम लिया और मुस्कुराते हुए कहा, 
    “चलो… अब हम दोनों नंगे ही फार्महाउस घूमते हैं। मैं तुम्हें पूरा घर दिखाती हूँ।”

    राहुल ने हँसकर सिर हिलाया। दोनों पूरी तरह नंगे थे। राहुल का 11 इंच का मोटा लंड अभी भी आधा सख्त था और हल्का-हल्का लहरा रहा था। सीमा की भारी 36D छातियाँ, गोल नाभि, सूजी हुई चूत और गोरी जाँघें पूरी तरह खुली हुई थीं। दोनों बेड से उठे और नंगे ही कमरे से बाहर निकल गए।

    सीमा ने राहुल का हाथ पकड़ लिया। उनकी नंगी देह राहुल की नंगी देह से हल्के-हल्के टकरा रही थी। पहले उन्होंने मुख्य विला का पूरा टूर करवाया। 

    लिविंग रूम — बहुत बड़ा, सफेद संगमरमर का फर्श, लेदर सोफा, दीवार पर बड़ी LED TV। सीमा ने राहुल को सोफे पर बैठाया, खुद उसकी गोद में बैठ गईं। उनकी नंगी गांड राहुल की जाँघों पर दब रही थी। 

    किचन — मॉडर्न, सब कुछ स्टेनलेस स्टील। सीमा ने राहुल को काउंटर पर चढ़ा दिया और खुद उसके सामने खड़ी हो गईं। उनकी छातियाँ राहुल के चेहरे के सामने लहरा रही थीं। 

    मास्टर बेडरूम — जहाँ वे अभी थे। किंग साइज़ बेड, जकूजी बाथटब, शावर के साथ अटैच्ड बाथरूम। 

    गेस्ट रूम — दो और बेडरूम, दोनों में प्राइवेट बालकनी। 

    होम थिएटर रूम — अंधेरा, रिक्लाइनर सीट्स। सीमा ने राहुल को एक सीट पर बैठाया और खुद उसकी गोद में बैठकर उसके लंड को हल्के से सहलाया। 

    जिम रूम — ट्रेडमिल, वेट्स, मिरर वाली दीवार। दोनों नंगे ही जिम के शीशे के सामने खड़े हो गए। सीमा ने राहुल को पीछे से गले लगाया। उनकी छातियाँ उसकी पीठ से दब रही थीं। 

    स्विमिंग पूल एरिया — इनडोर पूल, नीला पानी, चारों तरफ ग्लास वॉल। सीमा ने राहुल को पूल के किनारे ले जाकर कहा, “रात को हम यहाँ नंगे नहाएँगे।”

    लाइब्रेरी और ऑफिस — किताबों से भरी अलमारी, बड़ा डेस्क। सीमा ने बताया, “यहाँ तुम्हें हफ्ते में 2 दिन काम करना है।”

    रूफटॉप टैरेस — ऊपर जाने वाली सीढ़ियाँ चढ़कर वे छत पर पहुँचे। वहाँ जकूजी टब, बार और लाउंजर थे। सूरज ढल रहा था। दोनों नंगे ही छत पर खड़े होकर सूर्यास्त देखने लगे। 

    इस तरह शाम के 6 बजे तक सीमा ने पूरा फार्महाउस घुमा दिया। हर कमरे में वे रुक-रुककर राहुल को चूमतीं, उसकी छाती सहलातीं, कभी उसके लंड को हल्के से पकड़ लेतीं। राहुल भी उनकी छातियों को छूता, निप्पल्स को हल्के से नोचता। दोनों की देह पूरे टूर में गर्म होती रही।

    शाम 6:10 बजे वे बाहर गार्डन में निकले। फार्महाउस के पीछे बहुत बड़ा गार्डन था — हरे-भरे लॉन, फूलों के गमले, छोटा फाउंटेन और चारों तरफ ऊँची दीवार। सूरज ढल चुका था, हल्की ठंडी हवा चल रही थी। 

    राहुल ने सीमा को गार्डन के बीच वाले लॉन पर खड़ा किया। उसने उन्हें कसकर गले लगा लिया। दोनों की नंगी देह एक-दूसरे से पूरी तरह चिपक गईं। राहुल ने पहले उनके होंठों पर गहरा किस किया। किस लंबा और भूखा था। उनकी जीभें एक-दूसरे में घुल रही थीं। किस के दौरान राहुल के हाथ सीमा की पीठ पर घूम रहे थे, उनकी गांड को दबा रहे थे। 

    किस खत्म होने पर राहुल ने सीमा की एक छाती को दोनों हाथों से थाम लिया। भारी, नरम मांस हाथ में दब गया। उसने ब्राउन निप्पल को मुँह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगा। जीभ से निप्पल को घुमाता, हल्के से काटता। दूसरी छाती को हाथ से मसलता रहा। सीमा की आहें निकलने लगीं — “आह्ह… राहुल… और जोर से चूसो… उफ्फ… कितना अच्छा लग रहा है…” 

    राहुल ने उन्हें घास पर लिटा दिया। सीमा की जाँघें अपने आप फैल गईं। राहुल उनके ऊपर झुका और उनकी चूत पर मुंह रख दिया। उसने जीभ से चूत चाटना शुरू किया। पहले क्लिटोरिस को धीरे-धीरे घुमाया, फिर पूरी फाँक चाटी। सीमा की चूत फिर से गीली होने लगी। राहुल ने जीभ अंदर डालकर चूसना शुरू किया। सीमा की कमर ऊपर-नीचे हो रही थी। 

    “आह्ह्ह… राहुल… तुम्हारी जीभ… बहुत गहरी… हाँ… चाटो… मेरी चूत चाटो… उफ्फ… मैं फिर से गर्म हो रही हूँ…” 

    सीमा की साँसें तेज़ हो गईं। उनकी जाँघें काँप रही थीं। वो पूरी तरह गर्म हो चुकी थीं। 

    राहुल ने सिर उठाया। उसका लंड फिर से पूरा खड़ा हो चुका था। उसने सीमा की आँखों में देखते हुए कहा, 
    “सीमा जी… अब कंडोम चाहिए…”

    सीमा ने हाँ में सिर हिलाया। उनकी साँसें अभी भी फूल रही थीं। उन्होंने पास पड़े इंटरकॉम फोन उठाया और मैड को बुलाया। 

    “मैड… एक Trojan Magnum XL कंडोम ले आओ… जल्दी।”

    मैड कुछ ही मिनट में गार्डन में आ गई। वो नजरें नीचे रखे हुए थी। उसके हाथ में Trojan Magnum XL का पैकेट था। उसने पैकेट सीमा को दे दिया और चुपचाप वापस चली गई।

    सीमा ने पैकेट राहुल की तरफ बढ़ाया। उनकी आँखों में फिर से भूख और थोड़ा डर दोनों थे…

    सीमा ने राहुल की आँखों में देखा। उनकी साँसें अभी भी तेज़ थीं। गार्डन की हल्की ठंडी हवा उनके नंगे बदन पर लग रही थी, लेकिन उनकी चूत अभी भी पिछले राउंड से सूजी हुई थी — लाल, थोड़ी फूली हुई और बहुत संवेदनशील। उन्होंने राहुल की छाती पर हाथ रखा और काँपती हुई आवाज़ में गिड़गिड़ाते हुए कहा,

    “राहुल… प्लीज… फिर से 3 इंच से ज़्यादा मत डालना… बस 3 इंच… उससे ज़्यादा नहीं… मेरी चूत बहुत सूजी हुई है… दर्द हो रहा है… प्लीज… वादा करो…”

    राहुल ने सिर हिलाया। उसने Trojan Magnum XL कंडोम पहले से ही पहन रखा था। उसका 11 इंच लंबा और 4 इंच मोटा लंड कंडोम में पूरी तरह तना हुआ था। उसने सीमा को घास पर लिटा दिया। सीमा की जाँघें अपने आप थोड़ी फैल गईं, लेकिन उनके चेहरे पर डर और दर्द साफ़ दिख रहा था।

    राहुल उनके ऊपर आ गया। लंड की नोक को सूजी हुई चूत की फाँक पर रखा। बहुत धीरे-धीरे, बिना किसी झटके के उसने 3 इंच अंदर डाल दिया।

    सीमा की आँखें फट गईं। “आआह्ह्ह… राहुल… दर्द… बहुत दर्द हो रहा है… सूजी हुई है… बस… बस यही रखो… और मत डालना…” उनकी आँखों से तुरंत आँसू निकल आए। चूत की सूजन की वजह से सिर्फ़ 3 इंच भी उन्हें बहुत भारी लग रहा था। उनकी दीवारें लंड को कसकर जकड़ रही थीं।

    राहुल ने 3 इंच ही अंदर रखकर बहुत धीमी गति से अंदर-बाहर करना शुरू किया। हर धक्का बेहद आहिस्ता था — बाहर निकालकर फिर से 3 इंच तक ही घुसाना। लेकिन चूत सूजी हुई होने की वजह से हर हलचल में सीमा रो रही थीं। “उफ्फ… राहुल… धीरे… आह्ह… रो रही हूँ… बहुत जलन हो रही है… प्लीज… 3 इंच ही…”

    राहुल ने उनकी छातियों को दोनों हाथों से थाम लिया और धीरे-धीरे चूसने लगा। लेकिन उसकी कमर नीचे से लगातार 3 इंच की गति में चल रही थी। सीमा की आहें दर्द और थोड़े मजा के मिश्रण में निकल रही थीं। उनकी जाँघें काँप रही थीं। आँसू गालों पर बह रहे थे।

    15 मिनट बाद सीमा का शरीर अचानक सख्त हो गया। उनकी चूत राहुल के लंड को कसकर दबाने लगी। उन्होंने जोर से चीख मारी — “आआह्ह्ह… राहुल… मैं… मैं आ रही हूँ… आह्ह्ह…” 
    पहला ऑर्गेज्म आ गया। उनका पूरा शरीर सिहर उठा। चूत से गर्म रस निकला और कंडोम पर बहने लगा। सीमा की आँखें बंद थीं, मुँह खुला था और वो हल्के-हल्के काँप रही थीं।

    राहुल रुका नहीं। वो अभी भी 3 इंच ही रखकर धीमी गति से चोदता रहा।

    40 मिनट पूरे होने वाले थे। राहुल की गति थोड़ी बढ़ गई थी, लेकिन अभी भी 3 इंच से ज़्यादा नहीं। सीमा की चूत अब और भी गीली हो चुकी थी, लेकिन सूजन अभी भी थी। अचानक दूसरा ऑर्गेज्म आया। सीमा ने राहुल की पीठ पर नाखून गड़ा दिए और ज़ोर से चीखी — “आह्ह्ह… दूसरी बार… राहुल… मैं फिर झड़ गई… आह्ह…”

    उनका शरीर फिर से सख्त हो गया। चूत बार-बार सिकुड़ रही थी। वो हाँफ रही थीं।

    दूसरे ऑर्गेज्म के तुरंत बाद सीमा ने राहुल को दोनों हाथों से पीछे धकेलना शुरू किया। उनकी आवाज़ रोते-रोते निकल रही थी, 
    “राहुल… अब बस… बस हो गया… बहुत हो गया… मैं सह नहीं पा रही… चूत बहुत सूजी हुई है… दर्द हो रहा है… प्लीज… अब निकाल दो…”

    लेकिन राहुल का लंड अभी भी पूरी तरह खड़ा था। 40 मिनट चुदाई के बाद भी वो बिल्कुल सख्त और तना हुआ था। कोई थकान नहीं, कोई झड़ना नहीं।

    सीमा ने काँपते हाथ से राहुल का लंड पकड़ा और उसे सहलाने लगीं। उन्होंने जोर-जोर से ऊपर-नीचे किया, नोक को दबाया, लेकिन राहुल का लंड वैसा का वैसा ही खड़ा रहा। कोई पानी नहीं निकला।

    सीमा की आँखें फैल गईं। वो हाँफते हुए बोलीं, “राहुल… तुम्हारा… अभी भी खड़ा है… पानी भी नहीं गिरा…”

    राहुल ने उनकी आँखों में देखा। उसकी साँसें गहरी थीं। उसका पूरा शरीर और भी गर्म हो गया था। वो और ज़्यादा उत्तेजित हो चुका था।

    सीमा अभी भी राहुल की गोद में लेटी हुई थी। उनकी साँसें धीमी हो चुकी थीं, लेकिन राहुल का 11 इंच लंबा और 4 इंच मोटा लंड अभी भी पूरी तरह सख्त और तना हुआ था। कंडोम में लिपटा हुआ वो लंड हल्का-हल्का नब्ज की तरह धड़क रहा था। राहुल ने सीमा को उठाया और खुद घास पर बैठ गया। उसने सीमा को अपनी गोद में बिठा लिया — लेकिन इस बार उल्टा। सीमा की पीठ राहुल की छाती से सट गई। राहुल ने अपनी दोनों टाँगें फैला लीं और सीमा को अपने लंड के ऊपर बिठा दिया।

    राहुल ने सीमा की भारी 36D छातियों को दोनों हाथों से थाम लिया। उसने उन्हें आपस में जोर से दबाया और बीच में अपना 11 इंच का मोटा लंड रख दिया। फिर धीरे-धीरे आगे-पीछे करना शुरू कर दिया। लंड की नोक सीमा की छातियों के बीच से निकलती और फिर वापस दब जाती। छातियों का नरम, गर्म मांस लंड को चारों तरफ से दबा रहा था। हर बार आगे धकेलने पर लंड की मोटी नोक सीमा की ठोड़ी तक पहुँच जाती।

    सीमा की आहें निकलने लगीं — “आह्ह… राहुल… तुम्हारा लंड… छातियों के बीच… इतना गर्म… उफ्फ…” राहुल की गति धीरे-धीरे तेज़ होती गई। लंड छातियों के बीच फिसल-फिसलकर आगे-पीछे हो रहा था। सीमा की छातियाँ लंड के साथ-साथ हिल रही थीं। काफी देर तक — करीब 12-15 मिनट तक — राहुल ने इस तरह छातियों के बीच लंड रगड़ा। लेकिन उसका पानी अभी भी नहीं गिरा। लंड वैसा का वैसा ही सख्त और खड़ा था।

    आखिरकार राहुल ने सीमा को उठाया। दोनों नंगे ही अंदर चले गए। फार्महाउस के अंदर ठंडी AC की हवा उनके नंगे बदन पर लग रही थी। थोड़ी देर बाद दोनों ने नहाया — एक साथ शावर के नीचे। राहुल ने सीमा की छातियाँ साबुन लगाकर मलाईं, उनकी चूत को हल्के हाथ से धोया। फिर दोनों ने कपड़े पहने (सिर्फ़ हल्के घरेलू कपड़े) और डाइनिंग टेबल पर बैठकर खाना खाया। नाश्ता नहीं, बल्कि पूरा डिनर — ग्रिल्ड चिकन, सलाद, रोटी और वाइन। दोनों के बीच हल्की-फुल्की बातें हो रही थीं, लेकिन राहुल का लंड अभी भी पैंट के अंदर गर्म और सख्त था।

    खाना खत्म होने के बाद दोनों लिविंग रूम के बड़े सोफे पर आ गए। राहुल सोफे पर बैठ गया। उसका लंड फिर से पूरी तरह खड़ा और गर्म था। उसने सीमा को पास खींचा और उनके होंठों पर किस करने की कोशिश की। लेकिन सीमा ने हल्के से मना कर दिया। “राहुल… अभी नहीं… थोड़ा आराम…”

    राहुल ने तुरंत मैड की तरफ इशारा किया। मैड पास ही खड़ी थी। सीमा उठीं, मैड के पास गईं, कुछ देर कान में फुसफुसाईं और वापस राहुल के पास आईं। उन्होंने राहुल की आँखों में देखते हुए कहा,

    “अधा ही घुसाना… सिर्फ़ एक राउंड… और वो भी डिनर के बाद…”

    फिर दोनों ने डिनर किया। खाना खाते समय सीमा बार-बार राहुल की तरफ देख रही थीं। खाना खत्म होते ही मैड ने Trojan Magnum XL का पैकेट लेकर आ गई। उसने पैकेट फाड़ा, कंडोम निकाला और राहुल के सामने घुटनों के बल बैठकर बहुत सावधानी से कंडोम पहना दिया। कंडोम लंड की 4 इंच मोटाई पर पूरी तरह तन गया।

    मैड ने सिर्फ़ अपनी पैंटी उतार दी। बाकी टॉप और ब्रा वैसे ही थी। उन्होंने सोफे पर घुटनों के बल डोगी पोजीशन में लेट गईं। उनकी गोल, मोटी गांड ऊपर उठी हुई थी। सूजी हुई चूत पीछे से साफ़ दिख रही थी। मैड ने पीछे मुड़कर राहुल से कहा, “आराम से डालना राहुल… बहुत धीरे…”

    राहुल ने पीछे से मैड की कमर पकड़ी। लंड की नोक को सूजी हुई चूत की फाँक पर रखा और बहुत धीरे-धीरे 5 इंच अंदर डाल दिया। सीमा की कमर काँप गई। “आह्ह… 5 इंच… राहुल… धीरे…”

    लेकिन राहुल ने अब गति बढ़ा दी। वो अंदर-बाहर करने लगा। हर धक्के के साथ लंड 5 इंच से थोड़ा-थोड़ा और अंदर जाने लगा। मैड की चूत फिर से फैल रही थी। “आह्ह… राहुल… धीरे… आह्ह…”

    राहुल की रफ्तार बढ़ती गई। 50 मिनट तक वो लगातार चोदता रहा। हर धक्का गहरा और जोरदार था। सोफे की चरमराहट, चुदाई की फच-फच आवाज़ और मैड की चीखें पूरे लिविंग रूम में गूँज रही थीं।

    मैड तीन बार झड़ गई। 
    पहली बार — 18 मिनट में — उनकी चूत सिकुड़ गई और वो चीखीं, “आह्ह… पहली बार… राहुल…” 
    दूसरी बार — 32 मिनट में — उनका पूरा शरीर हिल गया। 
    तीसरी बार — 48 मिनट में — वो चीखती रहीं, “.. ज्यादा नहीं… ऐसे… आह्ह… मैं सह नहीं पा रही…”

    50 मिनट पूरे होने पर राहुल का शरीर तन गया। उसने मैड की कमर को कसकर पकड़ा और आखिरी जोरदार धक्के मारे। फिर कंडोम के अंदर गर्म, गाढ़ा वीर्य निकलने लगा। राहुल ने लंबी साँस ली और पूरा पानी चूत के अंदर ही छोड़ दिया।

    जब उसने लंड बाहर निकाला तो सीमा की चूत से कंडोम का पानी और उनका रस दोनों मिलकर बहने लगे। चूत पूरी तरह सूजी हुई और लाल थी।

    मैड ने चुपचाप अपनी पैंटी पहनी, साड़ी ठीक की और बिना कुछ कहे कमरे से चली गई।

    सीमा राहुल की छाती पर सिर रखे हुए थकी हुई लेटी थी। दोनों की साँसें अब शांत हो चुकी थीं। राहुल ने सीमा को कसकर गले लगाया और धीरे से उनके माथे पर किस किया। “चलो सोते हैं,” उसने फुसफुसाकर कहा। 

    दोनों बेडरूम में गए। राहुल ने AC ऑन किया और लाइट बंद कर दी। सिर्फ बेडसाइड की हल्की गोल्डन लाइट जल रही थी। दोनों नंगे ही बेड पर लेट गए। सीमा राहुल की बाँहों में सिमटकर लेट गईं। उनकी भारी छातियाँ राहुल की छाती से सटी हुई थीं, उनकी नंगी जाँघ राहुल की जाँघ पर रखी हुई थी। 

    राहुल की आँखें बंद थे, लेकिन नींद नहीं आ रही थी। वो सोच रहा था — ये औरत 42 साल की है, फिर भी मेरे 11 इंच लंबे और 4 इंच मोटे लंड को सिर्फ 3-5 इंच ही ले पा रही है। इतनी हल्की-सी चुदाई में तीन बार झड़ गई, रोई, चीखी… 

    तभी उसे अचानक एहसास हुआ। 

    सीमा को सेक्स के बारे में कभी कुछ पता ही नहीं था। 
    उनके पति ने हफ्ते में सिर्फ 1 या 2 बार से ज्यादा कभी सेक्स नहीं किया था। वो भी सिर्फ 2-3 मिनट का, छोटा-सा लंड डालकर। सीमा ने कभी अपने पति से ज़्यादा माँगा भी नहीं था। उन्होंने कभी ज़ोर देकर नहीं कहा था कि “मुझे और चाहिए”। उनकी भूख दबी हुई थी, लेकिन उन्होंने कभी उसे व्यक्त नहीं किया था। 

    राहुल को अचानक याद आया — 2 दिन पहले की वो बात। 

    सीमा ने खुद बताया था कि उनके पति ने 2 दिन पहले रात को कहा था, 
    “सीमा, मैं तुम्हें खुश नहीं कर पा रहा हूँ। मैं जानता हूँ। तुम जवान हो, तुम्हारी भूख है। अगर तुम किसी और से करवाना चाहो तो करवा लो। मुझे कोई एतराज़ नहीं है। बस राज़ रहे।” 

    उसके बाद जब राहुल का चेकअप हुआ और डॉक्टर ने रिपोर्ट में लिखा कि “लंड 11 इंच लंबा, 4 इंच मोटा, बहुत पावरफुल”, तो सीमा के पति ने तुरंत फैसला कर लिया — “ये लड़का परफेक्ट है। इसे रख लो।” 

    राहुल ने ये सब याद करके मन ही मन मुस्कुराया। उसने सीमा को और कसकर गले लगा लिया। सीमा ने आँखें खोलीं, राहुल की तरफ देखा, उसके होंठों पर हल्का किस किया और फुसफुसाई, “सो जाओ राहुल… कल फिर से…” 

    दोनों एक-दूसरे से चिपके हुए सो गए। 

    —

    सुबह 7:30 बजे

    राहुल की आँख खुली। वो देखता है कि सीमा उसके लंड को दोनों हाथों में पकड़े हुए हैं। उन्होंने धीरे-धीरे लंड को मुँह में ले लिया था। बहुत नरम, बहुत प्यार से चूस रही थीं। उनकी गर्म जीभ लंड की नोक पर घूम रही थी। राहुल की साँसें तेज़ हो गईं। 

    सीमा ने ऊपर देखा, आँखों में शरम और भूख थी। “गुड मॉर्निंग…” उन्होंने लंड को मुँह से निकालकर कहा और फिर से पूरा मुँह में ले लिया। 

    राहुल ने उनके बाल पकड़कर हल्का दबाव दिया। सीमा 6 इंच तक गला दे रही थीं। 10 मिनट तक उन्होंने बहुत प्यार से ब्लोजॉब दिया। फिर राहुल ने उन्हें ऊपर खींचा, किस किया, उनकी छातियाँ चूसीं। 

    फिर सीमा ने खुद Trojan Magnum XL कंडोम निकाला, फाड़ा और राहुल के लंड पर पहन दिया। उन्होंने कहा, “आज सिर्फ 3 इंच… प्लीज…” 

    राहुल ने उन्हें मिशनरी पोजीशन में लिटाया। बहुत धीरे-धीरे सिर्फ 3 इंच अंदर डाला और 25 मिनट तक धीमी गति से चोदा। सीमा इस बार कम रोईं, लेकिन फिर भी आहें भर रही थीं। आखिर में राहुल ने 3 इंच ही रखकर झड़ दिया। 

    —

    नाश्ता

    दोनों नहाकर तैयार हुए। मैड (रीना) ने नाश्ता और चाय ले आकर टेबल पर रख दी। दोनों ने साथ में नाश्ता किया। 

    खाते-खाते सीमा ने कहा, 
    “राहुल… हमारा प्लान तो 2 दिन का था, लेकिन अब मैं सोच रही हूँ… हम एक-दो हफ्ते आराम-आराम से करेंगे। मेरी चूत अभी बहुत सूज गई है। दर्द हो रहा है। अगले हफ्ते तक ठीक हो जाएगी। तब तक हम धीरे-धीरे बढ़ाएँगे।”

    राहुल ने सिर हिलाया। 

    नाश्ता खत्म होने के बाद सीमा ने अपनी पर्स से 50,000 रुपये नोटों में निकाले और राहुल को थमा दिए। 
    “ये तुम्हारे लिए। अगले हफ्ते मिलते हैं। तब तक घर जाकर आराम करो और एंजॉय करो।”

    फिर सीमा ने खुद ड्राइवर को बुलाया। BMW तैयार थी। दोनों कार में बैठे। सीमा ने राहुल को उसके घर तक छोड़ दिया। 

    कार घर के गेट पर रुकी। सीमा ने राहुल के गाल पर किस किया और फुसफुसाई, 
    “अगले हफ्ते… मैं इंतज़ार करूँगी।”

    राहुल कार से उतरा। उसके हाथ में 50,000 रुपये थे, जेब में नया iPhone था और दिमाग में पिछले 2 दिनों की यादें थीं।

    अब सीमा पूरी तरह नंगी घास पर खड़ी थीं। उनकी गोरी देह शाम की रोशनी में चमक रही थी — भारी छातियाँ, पतली कमर, गोल नाभि, मोटी जाँघें और हल्के बालों वाली चूत।

    राहुल आगे बढ़ा। उसने सीमा को कसकर गले लगा लिया। दोनों की नंगी देह एक-दूसरे से चिपक गईं। राहुल ने पहले उनके होंठों पर गहरा किस किया। किस लंबा और भूखा था। फिर वो धीरे-धीरे नीचे उतरा।

    उसने सीमा की दोनों छातियों को दोनों हाथों से थाम लिया। नरम, भारी मांस हाथ में पूरी तरह दब गया। राहुल ने एक निप्पल को मुँह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगा। जीभ से निप्पल को चारों तरफ घुमाया, हल्के से काटा, फिर पूरा निप्पल मुँह में लेकर चूसा। दूसरी छाती को हाथ से मसलता रहा। सीमा की आहें निकलने लगीं — “आह्ह… राहुल… और जोर से… चूसो… उफ्फ… कितना अच्छा लग रहा है…”

    राहुल ने लगातार 15 मिनट तक सीमा की दोनों छातियों को चूसा, चाटा और दूध पिया जैसे। निप्पल्स लाल और सख्त हो गए थे। फिर वो धीरे-धीरे नीचे उतरा। सीमा की जाँघें अपने आप फैल गईं। राहुल ने घुटनों के बल बैठकर उनकी चूत पर मुंह रख दिया।

    उसने जीभ से चूत की फाँक को धीरे-धीरे चाटना शुरू किया। पहले क्लिटोरिस को घुमाया, फिर पूरी फाँक चाटी, फिर जीभ अंदर डालकर चूसने लगा। सीमा की कमर ऊपर-नीचे होने लगी। उनकी आहें तेज़ हो गईं — “आह्ह्ह… राहुल… तुम्हारी जीभ… बहुत गहरी… हाँ… चूसो… मेरी चूत चूसो… उफ्फ… मैं गर्म हो रही हूँ…”

    राहुल ने लगातार 10-12 मिनट तक सीमा की चूत को चाटा और चूसा। उनकी चूत अब गीली और चमकदार हो चुकी थी। सीमा की जाँघें काँप रही थीं, हाथ राहुल के बालों में थे और वो उसके सिर को अपनी चूत पर दबा रही थीं।

    सीमा ने राहुल की आँखों में गहरी नज़र डाली। शाम की सुनहरी रोशनी गार्डन में फैली हुई थी। हल्की हवा फूलों की महक लेकर बह रही थी। सीमा ने राहुल का हाथ पकड़ा और उसे घास पर धीरे से लिटा दिया। घास नरम और ठंडी थी। राहुल पीठ के बल लेट गया। उसका पूरा नंगा शरीर शाम की रोशनी में चमक रहा था। उसका 11 इंच लंबा और 4 इंच मोटा लंड पहले से ही आधा सख्त होकर ऊपर की तरफ खड़ा था।

    सीमा मुस्कुराई। उन्होंने राहुल की जाँघों के बीच बैठकर अपनी गोरी, नंगी देह को झुकाया। उनकी भारी 36D छातियाँ लहराती हुई राहुल के पेट पर छू रही थीं। उन्होंने पहले राहुल के नाभि के पास किस किया, फिर धीरे-धीरे नीचे सरकती गईं।

    राहुल ने आँखें बंद कर लीं। वह महसूस कर रहा था कि सीमा की गर्म साँसें उसके लंड के पास आ रही हैं। सीमा ने दोनों हाथों से राहुल के मोटे लंड को पकड़ लिया। उन्होंने पहले लंड की नोक को जीभ से चाटा, फिर पूरा सिरा मुँह में ले लिया। “मम्म…” उन्होंने धीरे से मुँह से निकाला और फिर गहरी चूसने लगीं।

    फिर उन्होंने लंड को नीचे सरकाकर राहुल की गोतियों को चूसना शुरू किया। दोनों गोतियाँ एक-एक करके मुँह में लेकर बहुत प्यार से चूसने लगीं। जीभ से घुमातीं, हल्के से चबातीं, फिर मुँह में लेकर चूसतीं। राहुल का पूरा शरीर सिहर उठा। उसने मन ही मन सोचा — किसी ने सिखाया है… इतनी अच्छी तरीके से चूस रही हैं…

    सीमा 15-20 मिनट तक लगातार लंड और गोतियों को चूसती रहीं। उनका मुँह पूरी तरह भीगा हुआ था। सलाइवा लंड पर बह रहा था। राहुल की साँसें तेज़ हो गई थीं।

    20 मिनट बाद सीमा ने राहुल को घसीटकर 69 पोजीशन में ले आईं। सीमा ऊपर थीं। उनकी सूजी हुई, गीली चूत राहुल के मुँह के ठीक ऊपर थी। राहुल ने दोनों हाथों से सीमा की मोटी गांड पकड़ ली और उनकी चूत को मुँह से चूसना शुरू कर दिया।

    सीमा ने राहुल के लंड को दोनों हाथों में पकड़ा और मुँह में ले लिया। इस बार वो 5 इंच तक गला दे रही थीं। उनका गला पूरी तरह भर गया था। “ग्लक… ग्लक… ग्लक…” की आवाज़ गार्डन में गूँज रही थी। सीमा का सलाइवा लंड पर बह रहा था। वो लगातार ऊपर-नीचे कर रही थीं।

    राहुल भी उनकी चूत को जोर-जोर से चूस रहा था। जीभ अंदर डालकर चूस रहा था। कुछ ही देर में सीमा की कमर काँपने लगी। उनकी चूत सिकुड़ने लगी। उन्होंने राहुल के लंड को मुँह से निकाले बिना ही जोर से चीख मारी — “आआह्ह्ह… राहुल… मैं… आ रही हूँ…” 

    सीमा की चूत से गर्म पानी की धार निकली। वो पहली बार झड़ गईं। उनका पूरा रस राहुल के मुँह पर और चेहरे पर बह गया।

    लेकिन राहुल का लंड अभी भी पूरी तरह खड़ा था। उसने सीमा को उठाया। अब वो खड़ा हो गया। सीमा को घुटनों के बल बिठा दिया। सीमा घुटनों पर बैठ गईं। उनका चेहरा राहुल के लंड के ठीक सामने था।

    राहुल ने उनके बाल पकड़ लिए। सीमा ने फिर से लंड मुँह में ले लिया। इस बार वो पूरी ताकत से चूस रही थीं। 25 मिनट तक लगातार चूसती रहीं। कभी गहरी गला देतीं, कभी सिर्फ नोक चूसतीं, कभी गोतियों को चूसतीं। उनका मुँह, ठोड़ी, छातियाँ सब सलाइवा से भीग गए थे।

    25 मिनट बाद राहुल का शरीर तन गया। उसकी साँसें बहुत तेज़ हो गईं। उसने सीमा के बाल कसकर पकड़े और बोला, “सीमा जी… पानी निकलने वाला है… कहाँ निकालूँ?”

    सीमा ने लंड को मुँह से निकालकर हाँफते हुए कहा, “बाहर… घास पर निकाल दो…”

    राहुल ने लंड को हाथ में पकड़ा। सीमा अभी भी घुटनों के बल बैठी हुई थीं। राहुल ने जोर-जोर से हिलाना शुरू किया। कुछ ही सेकंड बाद उसके लंड से गाढ़ा, गर्म, सफेद वीर्य की मोटी-मोटी धार निकलने लगी।

    बहुत सारा पानी — पहली धार सीमा की छातियों पर गिरी, दूसरी उनके गाल और होंठों पर, बाकी सारी घास पर गिर गई। वीर्य की मोटी बूँदें घास पर फैल गईं। राहुल ने पूरा पानी निकाल दिया — इतना सारा कि घास का एक छोटा सा हिस्सा गीला हो गया।

    सीमा अभी भी घुटनों के बल बैठी हुई थीं। उनके चेहरे, छातियों और होंठों पर राहुल का वीर्य लगा हुआ था। वो हाँफ रही थीं। राहुल भी खड़े-खड़े साँस ले रहा था।

    सीमा ने राहुल को घास पर लिटा दिया था। शाम के 7 बजे थे। गार्डन में हल्की-हल्की ठंडी हवा चल रही थी। सूरज ढल चुका था, लेकिन आसमान में अभी भी हल्की नारंगी रोशनी बाकी थी। दोनों पूरी तरह नंगे थे। राहुल पीठ के बल लेटा हुआ था। उसका 11 इंच लंबा और 4 इंच मोटा लंड आधा सख्त होकर पेट पर लेटा हुआ था। सीमा उसके बगल में लेटी हुई थीं। उनकी भारी 36D छातियाँ राहुल की बाँह से सटी हुई थीं। उनकी नंगी जाँघ राहुल की जाँघ पर रखी हुई थी।

    दोनों ने एक-दूसरे को छूना शुरू किया। कोई जल्दबाजी नहीं थी। कोई चुदाई नहीं थी। सिर्फ़ धीमी, गहरी और रोमांचक छुआछूई।

    सीमा ने राहुल की छाती पर हाथ फेरा। उनकी नरम उँगलियाँ उसके निप्पल्स पर घूम रही थीं। राहुल ने सीमा की कमर पर हाथ रखा और धीरे-धीरे उनकी पीठ सहलाने लगा। दोनों की साँसें एक-दूसरे के चेहरे पर पड़ रही थीं। सीमा ने झुककर राहुल के गाल पर हल्का किस किया, फिर गर्दन पर, फिर छाती पर। उन्होंने राहुल के निप्पल को जीभ से घुमाया और हल्के से चूसा। राहुल की साँसें भारी हो गईं।

    राहुल ने सीमा को अपने ऊपर खींच लिया। अब सीमा उसकी छाती पर लेटी हुई थीं। उनकी भारी छातियाँ राहुल की छाती से पूरी तरह दब रही थीं। राहुल ने अपनी दोनों टाँगें सीमा की टाँगों के बीच रख लीं। दोनों की नंगी देह एक-दूसरे से पूरी तरह चिपक गई थी। राहुल ने सीमा की गांड पर हाथ फेरा। नरम, गोल मांस हाथ में दब रहा था। सीमा ने राहुल की गर्दन में चेहरा छुपा लिया और धीरे-धीरे उसके कानों को चूमने लगीं।

    7:30 बजे तक दोनों ऐसे ही लेटे रहे। कभी-कभी किस करते, कभी छातियों को सहलाते, कभी कमर पर हाथ फेरते। कोई शब्द नहीं, सिर्फ़ साँसों की आवाज़ और हल्की-हल्की आहें। सीमा की चूत राहुल की जाँघ से हल्के-हल्के रगड़ खा रही थी, लेकिन राहुल ने जान-बूझकर आगे नहीं बढ़ाया।

    7:45 बजे सीमा उठीं। उन्होंने राहुल को भी खड़ा किया। दोनों नंगे ही गार्डन में घूमने लगे। सीमा ने राहुल का हाथ पकड़ रखा था। वे फूलों के पास गए, फाउंटेन के पास गए। हवा में उनकी नंगी देह पर हल्की ठंडक लग रही थी। सीमा ने राहुल को फाउंटेन के किनारे खड़ा किया और खुद उसके सामने घुटनों के बल बैठ गईं। उन्होंने राहुल के लंड को दोनों हाथों में पकड़ा और सिर्फ़ हल्के-हल्के सहलाया। कोई मुँह नहीं लगाया, सिर्फ़ उँगलियों से नरम-नरम सहलाती रहीं। राहुल की साँसें तेज़ हो गईं।

    8:15 बजे दोनों वापस घास पर लेट गए। इस बार राहुल सीमा के ऊपर आ गया। उसने उनकी छातियों को दोनों हाथों से थाम लिया और बहुत धीरे-धीरे मसलने लगा। निप्पल्स को उँगलियों से घुमाता रहा। सीमा की आँखें बंद थीं। वो हल्की-हल्की आहें भर रही थीं। राहुल ने उनकी नाभि में जीभ डाली और फिर नीचे उतरकर उनकी जाँघों को चूमा। लेकिन चूत को छुआ नहीं। सिर्फ़ जाँघों के अंदरूनी हिस्से को चूमा और सहलाया।

    8:45 बजे तक दोनों ऐसे ही एक-दूसरे को छूते, सहलाते, किस करते रहे। कोई चुदाई नहीं, कोई penetration नहीं। सिर्फ़ गहरी, नंगी closeness।

    9:00 बजे मैड (रीना) ने आवाज़ लगाई — “मैडम, डिनर तैयार है।”

    दोनों नंगे ही उठे और डाइनिंग एरिया की तरफ चले गए। टेबल पर डिनर लगा हुआ था — ग्रिल्ड फिश, सलाद, रोटी, दाल और वाइन। दोनों नंगे ही कुर्सी पर बैठ गए। सीमा की छातियाँ टेबल पर हल्के से दब रही थीं। राहुल का लंड टेबल के नीचे आधा सख्त था। दोनों ने आराम से खाना खाया। बीच-बीच में सीमा राहुल की जाँघ पर हाथ रख देतीं। राहुल भी सीमा की कमर पर हाथ फेर देता। खाने के दौरान हल्की-फुल्की बातें होती रहीं।

    डिनर खत्म होने के बाद दोनों वापस लिविंग रूम के बड़े सोफे पर आए। दोनों पूरी तरह नंगे ही सोफे पर लेट गए। राहुल पीठ के बल लेटा। सीमा उसके बगल में लेटी। उनकी नंगी देह एक-दूसरे से सटी हुई थी। 15-20 मिनट तक दोनों ऐसे ही पड़े रहे। कभी-कभी किस करते, कभी छाती सहलाते।

    9:40 बजे राहुल का लंड फिर से पूरा खड़ा हो गया। वो सख्त और तना हुआ था। राहुल ने सीमा को देखा और धीरे से कहा, “सीमा जी… चलो रूम में चलते हैं।”

    सीमा मुस्कुराईं। ठीक उसी वक्त मैड (रीना) कमरे में आई। उसके हाथ में दो गिलास गर्म दूध थे। उसने ट्रे रखी, दोनों को दूध दे दिया और बिना कुछ कहे चुपचाप चली गई।

    दोनों ने गर्म दूध पिया। दूध पीते समय सीमा राहुल की जाँघ पर हाथ फेर रही थीं। राहुल का लंड अब और भी सख्त हो चुका था। दूध पीकर राहुल ने गिलास रख दिया। उसका पूरा शरीर तैयार था। उसने सीमा की तरफ देखा और धीरे से बोला,

    “अब मैं तैयार हूँ…”

  • सपनो की जॉब 1

    मेरा नाम राहुल है। मैं एक प्राइवेट कंपनी में मैनेजर के पद पर काम करता हूँ। कंपनी का काम ऐसा था कि मुझे अक्सर दूसरे राज्यों में जाना पड़ता। इस बार प्रोजेक्ट के लिए मुझे मेरे राज्य गुजरात से बाहर, मध्य प्रदेश के एक छोटे शहर में 25 दिन रहना पड़ा। मैं अकेला था, होटल में ठहरा हुआ था। दिन भर मीटिंग्स, काम और रात को अकेलेपन में गुजरती।

    25 दिन पूरे होने वाले थे। मैंने घर जाने के लिए बस की टिकट करवा ली थी। आखिरी दिन सुबह मैं होटल से चेकआउट करके बस स्टैंड जाने के लिए बाहर निकला। बैग कंधे पर लटकाए, मैं सड़क पर खड़ा था। तभी मेरी नज़र एक शानदार काली BMW पर पड़ी — गुजरात का नंबर प्लेट।

    मजाक में मैंने हाथ उठाकर हिचहाइक का इशारा कर दिया। उम्मीद नहीं थी कि रुकेंगी, लेकिन कार धीरे से रुक गई। ड्राइवर साइड की खिड़की नीचे हुई। पीछे की सीट से एक औरत ने झाँककर देखा।

    कार के अंदर का माहौल लग्जरी था — सॉफ्ट क्रिम कलर की लेदर सीट्स, वुड फिनिश डैशबोर्ड, एंबिएंट लाइटिंग और हल्की सी महक।

    पीछे बैठी औरत ने मुस्कुराते हुए कहा, “कहाँ जाना है भाई?”

    मैंने अपनी भाषा (गुजराती मिक्स हिंदी) में जवाब दिया, “दीदी, मैं अहमदाबाद जा रहा हूँ। बस स्टैंड तक लिफ्ट मिल जाए तो अच्छा रहे।”

    वो हँस पड़ीं। उनकी हँसी में एक खास आकर्षण था। “आ जाओ… बैठो पीछे। हम भी अहमदाबाद ही जा रहे हैं।”

    मैं बैग लेकर पीछे बैठ गया। कार के अंदर ठंडी AC की हवा और हल्का परफ्यूम का नशा था। ड्राइवर आगे था, और वो औरत मेरे बगल में बैठी थीं।

    उनका नाम सीमा था। उम्र 41 साल, लेकिन देखने में 34-35 से ज्यादा नहीं लगती थीं। वो काफी हॉट और सेक्सी थीं। लंबाई करीब 5’5″, शरीर अच्छी तरह से मेंटेन किया हुआ — पतली कमर, लेकिन भारी और गोल छातियाँ (36D साइज़ की), जो उनकी हल्की साड़ी के ब्लाउज़ में भी साफ़ उभर रही थीं। उनकी त्वचा गोरी और चमकदार थी, चेहरा नूरानी, आँखें बड़ी-बड़ी और काजल लगी हुईं। होंठ मोटे और लाल, बाल खुले हुए कंधों तक। साड़ी का पल्लू थोड़ा सरका हुआ था, जिससे उनकी गहरी ब्लाउज़ और क्लेवेज की झलक दिख रही थी। कमर में साड़ी की फोल्ड्स से उनकी नाभि की हल्की झलक भी आ रही थी। कुल मिलाकर वो एक mature, confident और बेहद आकर्षक महिला लग रही थीं — वैसी जो देखते ही मन में गर्मी पैदा कर दे।

    बातचीत शुरू हुई। मैंने बताया कि मैं प्राइवेट कंपनी में काम करता हूँ और 25 दिन यहाँ प्रोजेक्ट पर था। वो मुस्कुराईं और बोलीं, “अरे वाह, मैं भी अहमदाबाद की ही हूँ। बिजनेस के सिलसिले में आई थी।”

    जब उन्होंने सुना कि मैं बस से जाने वाला हूँ, तो तुरंत बोलीं, “बस की टिकट कैंसल कर दो। मेरे साथ चलो। 8 घंटे की ड्राइव है, लेकिन आराम से पहुँच जाएँगे। अकेले बस में क्या मजा?”

    मैंने थोड़ा सोचा, फिर मान गया। ड्राइवर को बस स्टैंड पर रोककर मैंने टिकट कैंसल कर दी और वापस कार में आ गया। अब हम तीनों अहमदाबाद की तरफ निकल पड़े।

    रास्ते में बातें होती रहीं। सीमा बहुत मिलनसार थीं। उन्होंने अपनी जिंदगी के बारे में बताया — पति बिजनेसमैन हैं, ज्यादातर बाहर रहते हैं, एक बेटा दिल्ली में पढ़ता है। वो खुद कुछ सोशल वर्क और बिजनेस संभालती हैं। उनकी आवाज़ में एक मधुर गहराई थी, और जब वो हँसतीं तो उनकी छातियाँ हल्के से हिलतीं, जो मुझे बार-बार आकर्षित कर रही थीं।

    मैंने भी अपनी बातें शेयर कीं। धीरे-धीरे बातें पर्सनल होती गईं। वो मेरी कंपनी, मेरे काम और मेरी लाइफस्टाइल के बारे में पूछ रही थीं। बीच-बीच में उनकी नज़र मेरे चेहरे और शरीर पर रुक जाती। कार की लग्जरी सीट्स पर हम दोनों काफी करीब बैठे थे। उनकी साड़ी की सिल्क मेरे हाथ को छू रही थी।

    8 घंटे की ड्राइव में हमने कई बार रुककर चाय-कॉफी पी, खाना खाया। हर बार वो मेरे साथ बहुत सहज और फ्लर्टी तरीके से बात कर रही थीं। उनकी हँसी, उनकी नज़रें और उनका वो mature आकर्षण मुझे खूब भा रहा था।

    आखिरकार शाम को हम अहमदाबाद पहुँच गए। उन्होंने ड्राइवर को मेरे घर के पास छोड़ने को कहा। कार रुकने पर वो मुस्कुराईं, अपना मोबाइल निकाला और बोलीं,

    “राहुल, नंबर दो… कभी मिलना हो तो कॉन्टैक्ट कर लेंगे।”

    मैंने नंबर दिया। उन्होंने अपना नंबर सेव कर लिया और मुझे भी दे दिया। फिर हल्के से मेरे हाथ पर हाथ रखकर बोलीं,

    “सुरक्षित पहुँच जाना। और हाँ… अगर कभी फिर से बाहर जाना हो तो बताना, मैं अकेली नहीं रहना पसंद करती।”

    उनकी आँखों में एक खास चमक थी। मैं मुस्कुराया, “जी जरूर… थैंक यू सीमा दीदी।”

    कार आगे बढ़ गई। मैं घर की तरफ जाते हुए उनके नंबर को देख रहा था और मन में सोच रहा था — ये मुलाकात बस एक लिफ्ट नहीं थी, शायद कुछ और शुरूआत थी…

    चार दिन बाद, सुबह 10:30 बजे मेरा फोन बजा। मैसेज था — सीमा का।

    “राहुल, गुड मॉर्निंग। कल रात सोच रही थी… तुम्हारे साथ काम करने का मन है। सैलरी तुम्हारी कंपनी से दोगुनी दूँगी। काम हफ्ते में सिर्फ 2 दिन। इंटरेस्ट है तो बताओ।”

    मैंने तुरंत रिप्लाई किया — “जी हाँ सीमा दीदी, बिल्कुल इंटरेस्ट है।”

    उनका तुरंत रिप्लाई आया — “पर एक शर्त है। मेरे साथ काम करने से पहले तुम्हें फुल बॉडी चेकअप करवाना पड़ेगा। आज ही। मैं गाड़ी लेकर आ रही हूँ। तैयार रहना।”

    मुझे थोड़ा अजीब लगा। चेकअप? क्यों? लेकिन सैलरी दोगुनी और सिर्फ 2 दिन का काम सोचकर मैंने “ओके” कर दिया।

    आधे घंटे बाद उनकी काली BMW मेरे घर के नीचे आकर रुकी। मैं नीचे उतरा। सीमा कार के पीछे बैठी थीं। आज वो और भी हॉट लग रही थीं — क्रीम कलर की साड़ी, जिसमें उनकी 36D छातियाँ ब्लाउज़ में फँसी हुई थीं। पल्लू थोड़ा सरका हुआ था, गहरी क्लेवेज साफ दिख रही थी। मेकअप परफेक्ट, लिपस्टिक गहरी लाल, आँखों में काजल। उन्होंने मुस्कुराकर कहा, “बैठो राहुल… चलते हैं।”

    कार में AC की ठंडी हवा और उनकी परफ्यूम की महक पूरे केबिन में फैली हुई थी। हम अस्पताल पहुँचे — एक प्राइवेट हाई-क्लास हॉस्पिटल। सीमा ने पहले से अपॉइंटमेंट कर रखा था। डॉक्टर ने मुझे अंदर बुलाया।

    फुल बॉडी चेकअप शुरू हुआ। ब्लड प्रेशर, ECG, ब्लड टेस्ट, अल्ट्रासाउंड… सब कुछ। आखिर में डॉक्टर ने कहा, “अब प्राइवेट चेकअप। पैंट उतारो।”

    मुझे थोड़ा शर्म आ गई, लेकिन मैंने पैंट और अंडरवियर उतार दिया। डॉक्टर ने मेरे लंड को हाथ में लिया, ऊपर-नीचे किया, नोक को देखा, फिर अंडकोष को दबाकर चेक किया। उन्होंने कहा, “सब नॉर्मल है, लेकिन बहुत अच्छी लंबाई और मोटाई है। कोई समस्या नहीं।”

    सीमा बाहर इंतज़ार कर रही थीं। जब मैं बाहर निकला तो उन्होंने मुस्कुराकर पूछा, “सब ठीक है ना?” मैंने शरमाते हुए सिर हिलाया। उन्होंने मुझे घर छोड़ दिया और बोलीं, “कल सुबह तक रिपोर्ट आ जाएगी।”

    —

    दूसरे दिन

    सुबह 9 बजे मैसेज आया — “चेकअप क्लियर है। तुम्हारा जॉइनिंग आज है। मैं आ रही हूँ, तैयार रहना।”

    मैं तैयार होकर नीचे उतरा। BMW फिर आई। सीमा आज ब्लैक साड़ी में थीं — बहुत सेक्सी और पावरफुल लग रही थीं। हम सीधे एक बड़े, लग्जरी सैलून में गए — अहमदाबाद के सबसे हाई-क्लास यूनिसेक्स सैलून में।

    सीमा ने मैनेजर से कहा, “इसके दाढ़ी, सिर के बाल, और प्राइवेट पार्ट के सारे बाल क्लीन कर दो। पूरा स्मूद।”

    मुझे अंदर ले जाया गया। पहले दाढ़ी शेव की गई, फिर हेयरकट — बहुत स्टाइलिश, साइड से फेड, ऊपर थोड़ा लंबा। उसके बाद प्राइवेट पार्ट का सेशन। एक खास रूम में मुझे नंगा कर दिया गया। दो लड़कियाँ आईं। उन्होंने पहले ट्रिमिंग की, फिर हॉट वैक्सिंग। मेरे लंड और अंडकोष पर गर्म वैक्स लगाया, पट्टी चिपकाई और एक झटके में खींच ली। जलन हुई, लेकिन जब पूरा बाल साफ हो गया तो लंड चमकने लगा। पूरी जाँघें, गांड के आस-पास भी क्लीन किया गया। अब मेरा प्राइवेट एरिया बिल्कुल स्मूद, साफ और नया-नया लग रहा था।

    सैलून से निकलकर सीमा मुझे एक बड़े शॉपिंग मॉल ले गईं। उन्होंने खुद मेरे लिए कपड़े चुने — 3 लग्जरी शर्ट, 2 प्रीमियम ट्राउज़र, एक ब्लैक ब्लेज़र, बेल्ट, और सबसे महंगे जूते। फिर एक रोलैक्स जैसा लग्जरी वॉच भी खरीद लिया। सब कुछ उनके पैसे से। वो बार-बार मुझे देखकर मुस्कुरा रही थीं।

    “अब तुम बिल्कुल परफेक्ट लग रहे हो राहुल,” उन्होंने मेरे कान के पास फुसफुसाकर कहा।

    —

    फार्महाउस की तरफ

    शॉपिंग के बाद हम अहमदाबाद से बाहर निकल पड़े। BMW हाईवे पर तेज़ चल रही थी। करीब 1.5 घंटे बाद हम शहर से काफी दूर एक सुनसान, खूबसूरत जगह पर पहुँचे। एक बड़ा गेट खुला। अंदर एक विशाल फार्महाउस था — 5 एकड़ में फैला, चारों तरफ हरे-भरे बागान, स्विमिंग पूल, प्राइवेट गार्डन और एक बहुत बड़ा मॉडर्न विला।

    कार अंदर घुसी। सीमा ने ड्राइवर को छुट्टी दे दी। अब सिर्फ हम दोनों थे। उन्होंने मुझे अंदर ले जाकर पूरे फार्महाउस की घुमाई। लिविंग रूम में बड़ी सोफा, बैडरूम में किंग साइज़ बेड, जकूजी बाथटब, और बालकनी से पूरा फार्म देखने का नज़ारा।

    सीमा ने साड़ी का पल्लू ठीक करते हुए मेरी तरफ देखा। उनकी आँखों में एक खास चमक थी। उन्होंने धीरे से कहा,

    “राहुल… अब ये तुम्हारा नया ऑफिस है। हफ्ते में सिर्फ 2 दिन। बाकी समय… हम दोनों यहाँ अकेले रहेंगे।”

    उन्होंने मेरे नए शर्ट के कॉलर को ठीक किया, फिर मेरे सीने पर हाथ रख दिया। उनकी उँगलियाँ धीरे-धीरे नीचे सरक रही थीं।

    फार्महाउस के लिविंग रूम में हल्की गोल्डन लाइट में सीमा मेरे बहुत करीब खड़ी थीं। उनकी काली साड़ी का पल्लू अब लगभग गिरने ही वाला था। उनकी भारी छातियाँ साँस के साथ ऊपर-नीचे हो रही थीं। उन्होंने मेरी शर्ट का आखिरी बटन भी खोल दिया और अपना नरम, गर्म हाथ मेरे नंगे सीने पर रख दिया।

    सीमा ने मेरी आँखों में गहरी नज़र डाली और धीरे-धीरे बोलीं,

    “राहुल… अब मैं तुम्हें साफ-साफ बता देती हूँ कि तुम्हारा काम क्या होगा। 

    हफ्ते में सिर्फ 2 दिन तुम्हें मेरे साथ रहना है। ये दो दिन पूरे फार्महाउस में सिर्फ हम दोनों होंगे। कोई और नहीं। इन दो दिनों में तुम्हारा सारा समय मेरी सेवा में होगा। मुझे खुश रखना, मेरी हर इच्छा पूरी करना, मेरे शरीर को संतुष्ट करना — यही तुम्हारा मुख्य काम है। 

    बाकी 5 दिन तुम पूरी तरह फ्री हो। तुम घर जा सकते हो, अपनी कंपनी का काम कर सकते हो, जहाँ जाना हो जा सकते हो। लेकिन इन 5 दिनों में भी मेरे किसी भी कॉल या मैसेज पर तुम्हें तुरंत आना होगा। समझ गए?”

    मैंने सिर हिलाया। मेरा गला सूख रहा था।

    सीमा ने मुस्कुराते हुए आगे कहा,

    “और हाँ… मुझे तुम्हारे बारे में सब पता है। चेकअप रिपोर्ट मैंने खुद देखी है। 
    तुम्हारा लंड 11 इंच लंबा और 4 इंच मोटा है। डॉक्टर ने लिखा है कि ये बहुत रेयर और पावरफुल साइज़ है। 
    और सबसे बड़ी बात — तुम अभी तक कुंवारे हो। किसी लड़की को कभी छुआ तक नहीं है।”

    सीमा की आँखों में एक शिकारी वाली चमक आ गई। उन्होंने मेरी छाती पर हाथ फेरते हुए धीरे से कहा,

    “मुझे यही चाहिए था राहुल। 
    मैं 41 साल की हूँ। मेरी चूत बहुत गहरी और भूखी है। मैं अभी तक कुंवारी हूँ। कभी किसी लंड ने मुझे पूरी तरह नहीं भरा है। मुझे एक ऐसे ताज़ा, कुंवारे, 11 इंच लंबे और 4 इंच मोटे लंड की जरूरत थी जो मेरी चूत को पहली बार पूरी तरह भर सके, उसे फैला सके और बार-बार चोदकर मुझे संतुष्ट कर सके।

    तुम बिल्कुल परफेक्ट हो।”

    सीमा ने अब अपना दूसरा हाथ भी मेरे शरीर पर रख दिया। एक हाथ मेरी छाती पर, दूसरा धीरे-धीरे मेरी बेल्ट की तरफ सरक रहा था। उनकी साँसें मेरे चेहरे पर गर्म हो रही थीं।

    “इन 2 दिनों में तुम सिर्फ मेरे हो। 
    मैं जो कहूँगी वो करना है। 
    मुझे चूमना है, मेरी छातियाँ चूसना है, मेरी चूत चाटना है, मुझे अपनी 11 इंच की मोटी लंड से बार-बार चोदना है। जितनी बार मैं चाहूँ, उतनी बार। 

    और याद रखना — ये राज कभी बाहर नहीं जाना चाहिए। अगर किसी को भी पता चला कि तुम मेरे साथ ये सब करते हो, तो तुम्हारी नौकरी, पैसे, इज्जत… सब खत्म।”

    सीमा ने मेरी बेल्ट का बकसुआ खोल दिया। उनकी उँगलियाँ अब मेरी पैंट की जिप पर थीं। उन्होंने बहुत धीरे से जिप नीचे खींची और मेरी पैंट को हल्का सा ढीला कर दिया।

    “अब बताओ राहुल…” 
    उनकी आवाज़ और भी सेक्सी हो गई थी। 
    “क्या तुम तैयार हो? 
    अपनी 11 इंच लंबी और 4 इंच मोटी कुंवारी लंड से मुझे खुश करने के लिए? 
    मेरी 41 साल की भूखी चूत को पहली बार भरने के लिए? 
    ये दो दिन मेरे लिए समर्पित करने के लिए?”

    सीमा ने मेरे होंठों के सिर्फ एक इंच दूर अपना मुँह ले जाया। उनकी गरम साँस मेरे होंठों को छू रही थी। उनकी भारी छातियाँ अब मेरी छाती से पूरी तरह दब रही थीं।

    “हाँ बोलो राहुल… 
    बोलो कि तुम मेरे हो… इन दो दिनों के लिए… पूरी तरह मेरे।”

    उनकी उँगलियाँ अब मेरी अंडरवियर के अंदर घुसने को तैयार थीं। पूरा फार्महाउस सन्नाटे में था। सिर्फ उनकी सेक्सी आवाज़ और मेरी तेज़ होती साँसें गूँज रही थीं।

    राहुल ने सीमा की आँखों में गहरी नज़र डाली। उसकी साँसें तेज़ हो रही थीं, लेकिन उसने खुद को संभाला। फार्महाउस का लिविंग रूम अब और भी सन्नाटे में था। सिर्फ उनकी साँसों की आवाज़ और बाहर हवा में पेड़ों की सरसराहट सुनाई दे रही थी।

    राहुल ने धीरे से सीमा का हाथ पकड़ लिया और अपनी तरफ खींचा। उसकी आवाज़ दृढ़ लेकिन सम्मान भरी थी।

    “सीमा जी… मैं तैयार हूँ। लेकिन कुछ शर्तें हैं। इन्हें मान लो तो मैं पूरी तरह आपका हूँ। ये शर्तें इसलिए ताकि बाद में कोई समस्या न आए।

    पहली शर्त — आपका पति या कोई और इस राज़ को कभी नहीं जानना चाहिए। अगर कभी भी उन्हें शक हुआ या पता चला, तो मैं तुरंत सब छोड़कर चला जाऊँगा। मुझे कोई परेशानी नहीं चाहिए।

    दूसरी शर्त — मैं कभी भी बिना कंडोम के सेक्स नहीं करूँगा। चाहे कितनी भी उत्तेजना हो, कंडोम जरूरी है।

    तीसरी शर्त — जब हम सेक्स करेंगे तो मुझे ये बिल्कुल जॉब जैसा नहीं लगना चाहिए। मैं आपको खुश करूँगा, लेकिन ये हम दोनों के बीच का प्यार और भूख होगा, न कि कोई ड्यूटी।

    चौथी शर्त — एक बार हम शुरू हो जाएँ तो कोई भी बात हो, कोई भी हालत हो, आप मना नहीं करेंगी। जितनी देर तक मैं चाहूँगा, उतनी देर तक चलेगा।

    पाँचवी शर्त — हम कभी भी फोटो या वीडियो नहीं बनाएँगे। न आप, न मैं। कोई रिकॉर्डिंग नहीं।

    छठी शर्त — अगर कभी आपकी कोई लिमिट हो या कोई बात मुझे पसंद न आए तो मैं बता सकता हूँ और आप उसे मानेंगी।”

    राहुल ने सारी शर्तें एक-एक करके बताईं। उसकी आवाज़ में कोई हिचकिचाहट नहीं थी।

    सीमा कुछ पल चुप रहीं। फिर उन्होंने धीरे से मुस्कुराकर राहुल की छाती पर हाथ फेरा और बोलीं,

    “राहुल… तुम बहुत समझदार हो। ये सारी शर्तें मैं पूरा मानती हूँ। 
    मुझे कोई दिक्कत नहीं। 
    अगर मैं इनमें से एक भी शर्त तोड़ूँगी तो वो मेरी सबसे बड़ी गलती होगी। 
    तुम मेरे साथ इतने खुलकर आ रहे हो, तो मैं भी तुम्हारा पूरा सम्मान करूँगी। 
    अब कोई शर्त बाकी नहीं है।”

    सीमा ने राहुल की शर्ट पूरी तरह खोल दी। अब राहुल का ऊपरी बदन नंगा था। उन्होंने खुद पीछे हटकर अपनी साड़ी का पल्लू पूरी तरह गिरा दिया। ब्लाउज़ का हुक खोलना शुरू किया। एक-एक हुक खुलता गया। उनकी भारी, दूधिया 36D छातियाँ ब्रा में कैद थीं। आखिरी हुक खुलते ही ब्रा गिर गई। दोनों बड़े-बड़े, भरे हुए स्तन बाहर आ गए। ब्राउन निप्पल्स पहले से ही सख्त हो चुके थे।

    सीमा ने साड़ी की नाड़ी खींची। साड़ी धीरे-धीरे फिसलकर उनके पैरों के पास गिर गई। अब वो सिर्फ पतली सी काली पैंटी में थीं। उनकी गोरी कमर, गोल नाभि और मोटी जाँघें पूरी तरह नंगी थीं। पैंटी पर हल्का गीला धब्बा दिख रहा था।

    सीमा ने पैंटी भी उतार दी। अब वो पूरी तरह नंगी खड़ी थीं। उनकी चूत पर हल्के-हल्के बाल थे, लेकिन फाँकें थोड़ी खुली हुईं और गीली चमक रही थीं। 41 साल की उम्र में भी उनका बदन इतना हॉट और टाइट था कि राहुल का लंड पैंट में तन गया।

    राहुल आगे बढ़ा। उसने सीमा को कसकर गले लगा लिया। दोनों नंगी छाती एक-दूसरे से दब गईं। राहुल ने पहले उनके होंठों पर गहरा किस किया। किस धीरे-धीरे शुरू हुआ, फिर तेज़ होता गया। उनकी जीभें एक-दूसरे में घुलने लगीं। सीमा ने राहुल की गर्दन में हाथ डालकर किस और गहरा कर दिया। किस के दौरान उनकी साँसें एक-दूसरे के मुँह में मिल रही थीं।

    किस खत्म होने पर राहुल ने सीमा को सोफे पर लिटा दिया। उसने झुककर उनकी एक छाती को दोनों हाथों से थाम लिया। नरम, भारी मांस हाथ में दब गया। उसने ब्राउन निप्पल को मुँह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगा। जीभ से निप्पल को चारों तरफ घुमाया, हल्के से काटा। दूसरी छाती को हाथ से मसलता रहा। सीमा की आहें निकलने लगीं — “आह्ह… राहुल… और जोर से चूसो… उफ्फ… कितना अच्छा लग रहा है…”

    राहुल ने दोनों छातियों को बारी-बारी चूसा, चाटा, नोचा। फिर धीरे-धीरे नीचे उतरता गया। उसने उनकी नाभि में जीभ डाली, फिर कमर चूमता हुआ उनकी जाँघों के बीच पहुँच गया।

    सीमा की जाँघें अपने आप फैल गईं। राहुल ने अपनी जीभ उनकी चूत की फाँक पर रखी और धीरे-धीरे चाटना शुरू किया। पहले क्लिटोरिस को घुमाया, फिर पूरी फाँक चाटी। सीमा की चूत से गर्म रस निकल रहा था। राहुल ने जीभ अंदर डालकर चूसना शुरू किया। सीमा की कमर ऊपर-नीचे हो रही थी।

    “आह्ह्ह… राहुल… तुम्हारी जीभ… बहुत गहरी… हाँ… चाटो… मेरी चूत चाटो… उफ्फ… मैं पागल हो रही हूँ…”

    राहुल ने लगातार 8-10 मिनट तक उनकी चूत चाटी। कभी तेज़, कभी धीरे। कभी सिर्फ क्लिटोरिस चूसता, कभी पूरी चूत को मुँह में लेकर चूसता। सीमा की जाँघें काँप रही थीं। उनके हाथ राहुल के बालों में थे और वो उसका सिर चूत पर दबा रही थीं।

    काफी देर चाटने के बाद राहुल उठा। उसने अपनी बाकी कपड़े भी उतार दिए। अब वो पूरी तरह नंगा था। उसका 11 इंच लंबा और 4 इंच मोटा लंड पूरी तरह खड़ा था। नोक से पहले ही पारदर्शी पानी टपक रहा था। लंड इतना मोटा और लंबा था कि सीमा की आँखें फैल गईं।

    राहुल ने सीमा की आँखों में देखा और धीमी, दृढ़ आवाज़ में कहा,

    “सीमा जी… अब तुम मेरी 11 इंच की लंड को मुँह में लो। 
    पूरी तरह। 
    जितना हो सके, गहरी तक ले जाओ।”

    सीमा ने राहुल की आँखों में देखा। उनकी साँसें भारी हो चुकी थीं। उन्होंने धीरे से घुटनों के बल बैठकर राहुल के सामने आ गईं। राहुल का 11 इंच लंबा और 4 इंच मोटा लंड उनके चेहरे के ठीक सामने खड़ा था — सख्त, नसों से भरा, नोक से पहले ही पारदर्शी पानी टपक रहा था।

    सीमा ने पहले अपनी जीभ बाहर निकाली और लंड की नोक को हल्के से चाटा। फिर उन्होंने मुँह खोला और धीरे-धीरे लंड का सिरा मुँह में ले लिया। पहले सिर्फ़ 4 इंच तक ही ले पाईं। उनका मुँह पहले से ही भर गया था। लंड की मोटाई उनके होंठों को पूरी तरह फैला रही थी।

    “मम्म… राहुल… इतना मोटा… और लंबा…” उन्होंने लंड को मुँह से निकालकर फुसफुसाया, फिर फिर से मुँह में ले लिया।

    राहुल ने धीरे से सीमा के बाल पकड़ लिए। उसकी आँखों में भूख थी। उसने हल्का सा दबाव डाला और बोला, “और ले लो सीमा जी… पूरा लेने की कोशिश करो।”

    सीमा ने आँखें बंद कीं और गला खोलकर आगे बढ़ीं। लंड के अगले 2 इंच और जबरदस्ती उनके गले में घुस गए। कुल 6 इंच लंड अब उनके मुँह के अंदर था। उनका गला पूरी तरह भर गया। आँखों से पानी आने लगा। लेकिन वो रुकी नहीं।

    राहुल ने अब और जोर से बाल पकड़े और हल्का-हल्का धक्का देने लगा। “हाँ… इसी तरह… चूसो… गहरी तक ले जाओ…”

    सीमा अब पूरी तरह लग गईं। उन्होंने लंड को मुँह में लेकर जोर-जोर से चूसना शुरू किया। उनकी जीभ लंड के नीचे वाले हिस्से पर घूम रही थी। कभी वो सिरा चूसतीं, कभी पूरा गला देतीं। “ग्लक… ग्लक… ग्लक…” की आवाज़ फार्महाउस के लिविंग रूम में गूँजने लगी। उनके मुँह से सलाइवा लंड पर बह रहा था, लंड पूरी तरह चमक रहा था।

    राहुल ने 20 मिनट तक लगातार चुसवाया। 
    पहले 5 मिनट में सीमा धीरे-धीरे चूस रही थीं — लंड को मुँह में रखकर जीभ से घुमा रही थीं, नोक को चूस रही थीं। 
    10 मिनट बाद राहुल ने उनके बाल पकड़कर गति तेज़ कर दी। अब वो सीमा के मुँह में धीरे-धीरे लंड को अंदर-बाहर कर रहा था। 6 इंच तक हर बार गला दे रहा था। 
    15 मिनट बाद सीमा की हालत खराब होने लगी। उनकी आँखों से आँसू बह रहे थे। साँस लेने में तकलीफ हो रही थी। गला बार-बार सिकुड़ रहा था। उनके पति का लंड बहुत छोटा था — सिर्फ़ 4 इंच का और पतला। आज पहली बार इतना मोटा और लंबा लंड उनके गले तक जा रहा था।

    सीमा के मुँह से अब सिर्फ़ “ग्लक… ग्लक… उर्र्र… आह्ह…” जैसी आवाज़ें निकल रही थीं। उनका चेहरा लाल हो गया था। सलाइवा उनके ठोड़ी से लेकर छातियों तक बह रहा था। लेकिन वो रुक नहीं रही थीं। वो पूरी कोशिश कर रही थीं कि राहुल को मजा आए।

    20 मिनट पूरे होने पर राहुल ने सीमा के बाल छोड़ दिए। लंड को उनके मुँह से बाहर निकाला। लंड अब और भी सख्त और चमकदार हो गया था — पूरा सलाइवा से भीगा हुआ।

    राहुल ने सीमा का चेहरा ऊपर उठाया। उनकी आँखें नम थीं, साँसें फूल रही थीं। राहुल ने मुस्कुराते हुए कहा,

    “सीमा जी… अब काफी हो गया। 
    अब कंडोम लगाओ। 
    मैं बिना कंडोम के कभी नहीं करूँगा।”

    सीमा ने हाँ में सिर हिलाया। वो अभी भी साँस संभाल रही थीं। उन्होंने पास पड़ी अपनी हैंडबैग से एक छोटा सा गोल्डन पैकेट निकाला। पैकेट पर लिखा था — Trojan Magnum XL (दुनिया का सबसे महंगा और बड़े साइज़ के लिए बना प्रीमियम कंडोम — अमेरिकन, बहुत पतला लेकिन बेहद मजबूत, 11 इंच और 4 इंच मोटे लंड के लिए खास तौर पर डिज़ाइन किया गया)।

    राहुल ने उन्हें देखकर कहा, “खुद लगाओ… अपने हाथों से…”

    सीमा ने पैकेट को फाड़ा। अंदर से बहुत पतला, पारदर्शी, गोल्डन रिंग वाला कंडोम निकला। उन्होंने राहुल के सामने घुटनों के बल बैठकर लंड को एक हाथ में पकड़ा। लंड अभी भी 11 इंच का खड़ा था। उन्होंने कंडोम की रिंग को लंड की नोक पर रखा और धीरे-धीरे नीचे की तरफ खींचना शुरू किया।

    कंडोम धीरे-धीरे लंड पर चढ़ने लगा। 4 इंच मोटाई की वजह से कंडोम पूरी तरह तन गया। सीमा को दोनों हाथों से खींचना पड़ रहा था। कंडोम आखिरकार जड़ तक पहुँच गया। अब राहुल का पूरा 11 इंच लंबा और 4 इंच मोटा लंड Trojan Magnum XL कंडोम में पूरी तरह लिपटा हुआ था — चमकदार, सख्त और तैयार।

    सीमा ने लंड को हल्के से सहलाया और राहुल की तरफ देखा। उनकी आँखों में अब और भी ज्यादा भूख थी।

    सीमा का चेहरा एकदम सफेद पड़ गया था। राहुल के 11 इंच लंबे और 4 इंच मोटे लंड को देखकर, जो Trojan Magnum XL कंडोम में चमक रहा था, उनकी आँखों में पछतावा साफ़ दिखने लगा। उन्होंने जो सारी शर्तें हँसते-हँसते मान ली थीं, अब वही शर्तें उनके गले की हड्डी बन गई थीं।

    सीमा ने दोनों हाथों से अपना मुँह ढँक लिया। उनकी साँसें फूल रही थीं। आँखों से आँसू बहने लगे। वो धीरे-धीरे पीछे हटीं और सोफे पर बैठ गईं। उनकी नंगी छातियाँ तेज़-तेज़ ऊपर-नीचे हो रही थीं।

    “राहुल… मैंने… मैंने बहुत बड़ी गलती कर दी…” उनकी आवाज़ काँप रही थी। “मैंने सारी शर्तें इतनी आसानी से मान लीं… मुझे नहीं पता था कि तुम्हारा… इतना बड़ा और मोटा होगा… मेरे पति का… सिर्फ़ 4 इंच का पतला-सा है… मैंने सोचा था कि मैं संभाल लूँगी… लेकिन अब… अब मुझे डर लग रहा है…”

    सीमा रोने लगीं। पहले हल्के-हल्के सुबकियाँ, फिर ज़ोर-ज़ोर से रोना। उनके गालों पर आँसू बह रहे थे। वो दोनों हाथों से अपना चेहरा छुपा रही थीं। “मुझे माफ़ कर दो राहुल… मैंने सोचा नहीं था कि हालत इतनी खराब हो जाएगी… मैं… मैं बहुत भारी महसूस कर रही हूँ… मेरी चूत… इतनी टाइट और कुंवारी है… तुम्हारा लंड देखकर ही मुझे लग रहा है कि ये मुझे फाड़ देगा…”

    राहुल ने शांत लेकिन दृढ़ स्वर में पूछा, 
    “सीमा जी… जब आपका पति है, तो मुझे क्यों रखा? आपने खुद कहा था ना कि ‘तेरी मर्ज़ी है, वो कर’… फिर अब क्यों रो रही हैं?”

    सीमा रोते-रोते बोलीं, “हाँ… मैंने कहा था… लेकिन मैंने कभी सोचा नहीं था कि तुम इतने बड़े होगे… मेरे पति ने कभी मुझे पूरी तरह नहीं भरा… मैंने सोचा था कि मैं मजा ले लूँगी… लेकिन अब… अब मुझे बहुत डर लग रहा है… राहुल… प्लीज…”

    राहुल ने सीमा को दोनों कंधों से पकड़ा और धीरे से सोफे पर लिटा दिया। उनकी नंगी जाँघें अपने आप थोड़ी फैल गईं। राहुल उनके ऊपर आ गया। उसका 11 इंच का मोटा लंड कंडोम में लिपटा हुआ, सीमा की चूत की फाँक पर टिका हुआ था।

    राहुल ने बहुत धीरे से पहले 2 इंच अंदर डाला। 

    सीमा की आँखें फट गईं। “आह्ह्ह… राहुल… धीरे… बस… बस इतना ही…” उनकी चूत की दीवारें पहले ही तन गईं।

    राहुल ने और थोड़ा दबाव डाला। अब 3 इंच अंदर चला गया। 

    सीमा की कमर ऊपर उठ गई। “उफ्फ… नहीं… 3 इंच ही काफी है… और मत डालो…”

    राहुल रुका नहीं। उसने धीरे-धीरे और दबाया। 4 इंच अंदर घुस गया। 

    सीमा अब ज़ोर-ज़ोर से मना करने लगीं। उनके हाथ राहुल की छाती पर थे, उसे पीछे धकेलने की कोशिश कर रही थीं। “राहुल… बस… बस इतना ही डालना है… 4 इंच ही काफी है… और मत डालो… प्लीज… मेरी चूत फट जाएगी…”

    लेकिन राहुल ने अब गति बढ़ा दी। उसने कूल्हों को थोड़ा और आगे धकेला। लंड 5 इंच तक चला गया। 

    सीमा की चीख निकल गई। “आआआह्ह्ह्ह… नहीं… नहीं… बहुत दर्द हो रहा है… बहार निकालो… बहार निकालो राहुल… प्लीज… मैं सह नहीं पा रही…”

    राहुल ने और थोड़ा और अंदर डाला। अब 6 इंच अंदर था। 

    सीमा पूरी तरह चीखने लगीं। उनके आँसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। वो रो रही थीं, चीख रही थीं, हाथ-पैर पटक रही थीं। “बाहर निकालो… बाहर निकालो… आह्ह्ह… मेरी चूत फट रही है… राहुल… बहुत बड़ा है… मैं मर जाऊँगी… बहार निकालो… प्लीज… मैंने गलती कर दी… मैंने सारी शर्तें मान ली थीं… लेकिन ये… ये बहुत ज्यादा है…”

    सीमा की चूत की दीवारें लंड को कसकर जकड़ रही थीं। उनका पूरा शरीर काँप रहा था। आँखों से आँसू की धार बह रही थी। वो बार-बार चीख रही थीं — “बाहर निकालो… बाहर निकालो… राहुल… मैं बर्दाश्त नहीं कर पा रही…”

    राहुल का लंड अभी भी आधा से भी कम अंदर था, लेकिन सीमा की हालत पूरी तरह बिगड़ चुकी थी। वो रो-रोकर गिड़गिड़ा रही थीं, हाथ से राहुल को पीछे धकेलने की कोशिश कर रही थीं, लेकिन राहुल ऊपर से मजबूती से उन्हें दबाए हुए था।

    सीमा की चीखें फार्महाउस के खाली कमरे में गूँज रही थीं। “बाहर निकालो… प्लीज… मैं बहुत रो रही हूँ… बहार निकालो राहुल…”

    राहुल को अच्छी तरह पता था कि ऐसी नौकरी और कोई नहीं दे सकता। इतनी ऊँची सैलरी, लग्जरी फार्महाउस, सिर्फ हफ्ते में 2 दिन काम और बाकी 5 दिन छुट्टी — ये सब छोड़ना उसके बस की बात नहीं थी। उसने मन में फैसला कर लिया कि नौकरी किसी भी हाल में रखनी है।

    सीमा अभी भी रो रही थीं। उनकी चीखें कम नहीं हुई थीं। राहुल ने धीरे से अपना 11 इंच लंबा और 4 इंच मोटा लंड उनकी चूत से बाहर निकाल लिया। लंड कंडोम में पूरी तरह भीगा हुआ था। सीमा की चूत अब थोड़ी लाल और सूजी हुई दिख रही थी। वो राहत की साँस लेते हुए रो-रोकर बोलीं, “थैंक यू राहुल… थैंक यू… बहुत दर्द हो रहा था…”

    राहुल ने सीमा को कुछ पल आराम करने दिया। वो उनके बगल में लेट गया। लेकिन उसका दिमाग कुछ और ही सोच रहा था। उसने चुपके से अपना मोबाइल उठाया। सीमा आँखें बंद करके रो रही थीं और कुछ समझ नहीं पा रही थीं। राहुल ने फटाफट 3-4 फोटो खींच लीं — सीमा पूरी तरह नंगी, आँसू भरी आँखें, सूजी हुई चूत, छातियाँ फैली हुईं, बाल बिखरे हुए। फोटो में साफ़ दिख रहा था कि वो किस हालत में हैं। राहुल ने फटाफट फोटो गैलरी में सेव कर लीं और मोबाइल साइलेंट करके रख दिया। अब उसके पास सबूत था।

    थोड़ी देर बाद राहुल ने सीमा को फिर से गर्म करना शुरू किया। उसने बहुत प्यार से उनके गालों पर हाथ फेरा, आँसू पोंछे और धीरे से उनके होंठों पर किस किया। “सीमा जी… शांत हो जाओ… मैं बहुत धीरे-धीरे करूँगा… आप जैसा कहोगी वैसा ही करूँगा…”

    सीमा अभी भी काँप रही थीं, लेकिन राहुल की मुलायम आवाज़ और स्पर्श से थोड़ी शांत हुईं। राहुल ने उनकी छातियों को बहुत नरम हाथों से सहलाना शुरू किया। उँगलियों से निप्पल्स को हल्के-हल्के घुमाया। फिर झुककर एक निप्पल को मुँह में ले लिया और बहुत धीरे-धीरे चूसने लगा। दूसरी छाती को हाथ से मसलता रहा। सीमा की साँसें फिर से भारी होने लगीं। “राहुल… धीरे… बहुत डर लग रहा है…”

    राहुल ने उनकी जाँघों को धीरे से अलग किया। उसने अपनी जीभ से उनकी चूत की फाँक को बहुत हल्के-हल्के चाटना शुरू किया। सिर्फ़ क्लिटोरिस पर जीभ घुमाता, कभी पूरी फाँक चाटता। सीमा की कमर हल्की-हल्की ऊपर उठने लगी। वो धीरे-धीरे फिर से गर्म होने लगीं। “आह्ह… राहुल… धीरे… हाँ… यही… बहुत अच्छा लग रहा है…”

    करीब 15-20 मिनट तक राहुल ने उन्हें चाटा, चूमा और सहलाया। सीमा की चूत अब फिर से गीली होने लगी थी।

    सीमा ने काँपते हुए कहा, “राहुल… अब… बहुत धीरे-धीरे… सिर्फ़ 3 इंच ही डालना… उससे ज्यादा नहीं… प्लीज…”

    राहुल ने सिर हिलाया। उसने Trojan Magnum XL कंडोम फिर से चेक किया और सीमा के ऊपर आ गया। लंड की नोक को उनकी चूत की फाँक पर रखा। बहुत धीरे-धीरे, बिना किसी झटके के 3 इंच अंदर डाल दिया।

    सीमा की आँखें बंद हो गईं। “आह्ह… बस… बस इतना ही… और मत डालना… हाँ… यही ठीक है…”

    राहुल रुका नहीं। वो 3 इंच ही अंदर रखकर बहुत धीमी गति से अंदर-बाहर करने लगा। हर धक्का बहुत आहिस्ता था। लंड की मोटाई अभी भी उनकी चूत को फैला रही थी, लेकिन 3 इंच की वजह से दर्द कम था। सीमा की आहें अब दर्द वाली नहीं, बल्कि थोड़ी सुख वाली निकलने लगीं। “हाँ… राहुल… धीरे… इसी तरह… आह्ह…”

    राहुल ने पूरे 45 मिनट तक इसी धीमी, आहिस्ता गति से उन्हें चोदा। कभी-कभी वो रुककर उनकी छातियाँ चूसता, कभी उनके होंठ चूमता। बीच-बीच में सीमा खुद कह रही थीं, “और धीरे… 3 इंच ही रखना… हाँ… अच्छा लग रहा है…”

    45 मिनट पूरे होने पर राहुल की रफ्तार थोड़ी बढ़ी। उसने सीमा की कमर पकड़ ली और आखिरी कुछ धक्के दिए। फिर उसका पूरा शरीर तन गया। कंडोम के अंदर गर्म, गाढ़ा वीर्य निकलने लगा। राहुल ने लंबी साँस ली और सीमा के अंदर ही रहते हुए झड़ गया।

    सीमा भी काँप रही थीं। उनकी आँखें बंद थीं और वो हल्के-हल्के रो-रोकर साँस ले रही थीं।

  • ट्रेन में मिली अजनबी लड़की 2

    मैंने टेबल से कंडोम का पैकेट लिया, एक निकाला और पहन लिया। फिर नेहा की जाँघें थोड़ी और अलग कीं। लंड की नोक को उसकी चूत पर रखा और बहुत धीरे से दबाया।

    नेहा ने आँखें बंद कर लीं और मेरी पीठ को कसकर पकड़ लिया।

    “आह्ह्ह…” एक लंबी आह के साथ मेरा लंड धीरे-धीरे उसके अंदर घुसने लगा। नेहा की चूत बहुत टाइट और गर्म थी। मैं रुक-रुककर पूरा लंड अंदर डालता गया। जब पूरा घुस गया, तो हम दोनों कुछ पल ऐसे ही रुक गए।

    मैंने नेहा के माथे पर किस किया और फुसफुसाया,
    “ठीक है ना?”

    नेहा ने सिर हिलाया और बोली, “हाँ… बहुत अच्छा लग रहा है… अब धीरे-धीरे…”

    मैंने बहुत धीमी गति से धक्के मारने शुरू किए। हर धक्के के साथ नेहा की आहें निकल रही थीं — “आह… राहुल… हाँ… और धीरे…”

    हम दोनों एक-दूसरे को कसकर पकड़े हुए थे। मैं उसकी छातियों को चूमता, गर्दन को चूसता, और धीरे-धीरे चोदता रहा। नेहा की जाँघें मेरी कमर के चारों तरफ लिपटी हुई थीं।

    करीब 15-20 मिनट तक हम इसी धीमी, रोमांटिक रफ्तार में रहे। फिर नेहा की साँसें तेज़ होने लगीं। उसकी चूत मेरे लंड को कसकर पकड़ने लगी।

    “राहुल… मैं… आ रही हूँ…” उसने काँपते हुए कहा।

    मैंने गति थोड़ी बढ़ाई। कुछ ही देर में नेहा का पूरा शरीर सख्त हो गया और वो जोर से झड़ गई। उसकी चूत बार-बार सिकुड़ रही थी। उसी पल मैं भी झड़ गया। गर्म वीर्य कंडोम के अंदर भर गया।

    हम दोनों थके हुए, पसीने से तर, एक-दूसरे से चिपके हुए लेट गए। नेहा मेरी छाती पर सिर रखे हुए थी। मैं उसके बालों में हाथ फेर रहा था।

    नेहा ने बहुत धीमी आवाज़ में कहा,
    “राहुल… आज रात बहुत खूबसूरत थी… थैंक यू।”

    मैंने उसे कसकर गले लगाया और बोला,
    “तुम्हारे साथ ये पल मेरे लिए भी बहुत स्पेशल हैं नेहा।”

    रूम में दूसरा राउंड (रात 2:30 बजे)

    पहले राउंड के बाद हम दोनों थके हुए, पसीने से तर लेटे हुए थे। नेहा मेरी छाती पर सिर रखे, अपनी नंगी छाती मेरी छाती से सटाए हुए आराम कर रही थी। उसकी साँसें अभी भी धीरे-धीरे भारी थीं। मैं उसके नंगे पीठ पर उँगलियाँ फिरा रहा था, कभी कमर पर घुमाता, कभी गांड के ऊपरी हिस्से को हल्के से सहलाता। 

    करीब 20 मिनट बाद नेहा ने सिर उठाया। उसकी आँखों में फिर से वो चमक आ गई थी। वो शरमाते हुए मुस्कुराई और मेरे कान के पास फुसफुसाई, 
    “राहुल… मुझे अभी भी और चाहिए… तुम्हारा लंड फिर से…”

    ये सुनकर मेरा लंड फिर से सख्त होने लगा। मैंने नेहा को कसकर चूमा। किस इस बार ज्यादा भूखा था। हमारी जीभें एक-दूसरे से लड़ रही थीं। नेहा ने खुद मेरे ऊपर चढ़ गई। उसकी गीली चूत मेरे पेट पर रगड़ खा रही थी। वो मेरी छाती चूमने लगी, निप्पल्स को जीभ से घुमाती हुई नीचे उतर गई। 

    उसने मेरा लंड हाथ में लिया, धीरे-धीरे सहलाया और फिर मुँह में ले लिया। नेहा बहुत धीरे से चूस रही थी। उसकी गर्म जीभ लंड के सिरे पर घूम रही थी, कभी पूरा मुँह में लेकर गहरी गला दे रही थी। मैंने उसके बाल पकड़ लिए और हल्के से सिर दबाया। नेहा की आँखें ऊपर देख रही थीं, मुँह से सलाइवा टपक रहा था। “मम्म… राहुल… कितना स्वादिष्ट है…” वो फुसफुसाई। 

    कुछ देर चूसने के बाद नेहा ने दूसरा कंडोम निकाला, खुद मेरे लंड पर चढ़ाया और फिर मेरे ऊपर बैठ गई। इस बार वो बहुत धीरे से नीचे बैठी। उसकी चूत अभी भी पिछले राउंड से गीली थी, लेकिन टाइट थी। पूरा लंड अंदर घुसते ही नेहा की कमर काँप गई — “आआह्ह्ह… फिर से भर गया… बहुत मोटा लग रहा है…”

    वो राइडिंग पोज़िशन में धीरे-धीरे ऊपर-नीचे होने लगी। हर बार जब वो नीचे बैठती, उसकी भारी छातियाँ जोर से उछलतीं और मेरे चेहरे के पास आ जातीं। मैंने उन्हें दोनों हाथों से थाम लिया, निप्पल्स को मुँह में लेकर जोर-जोर से चूसने लगा। नेहा की रफ्तार बढ़ने लगी। “फच… फच… फच…” की आवाज़ रूम में गूँज रही थी। नेहा की आहें तेज़ हो गईं — “हाँ राहुल… और तेज़… मेरी चूत को चोदो… आह्ह… मुझे फाड़ दो… बहुत मजा आ रहा है…”

    मैंने नीचे से जोर-जोर से धक्के मारे। नेहा झुककर मेरे होंठ चूसने लगी। उसका पसीना मेरी छाती पर टपक रहा था। करीब 18 मिनट तक ये राइडिंग चली। नेहा दो बार छोटे-छोटे ऑर्गेज्म आई। आखिर में वो जोर से काँपी, चूत मेरे लंड को कसकर दबाई और झड़ गई। उसी पल मैं भी उसके अंदर झड़ गया। 

    नेहा मेरी छाती पर ढेर हो गई। हम दोनों लंबी साँसें लेते हुए एक-दूसरे को चूमते रहे। फिर थकान से सो गए।

    —

    सुबह का पहला राउंड (सुबह 7:45 बजे)

    सुबह की हल्की रोशनी खिड़की से आ रही थी। नेहा मेरी बाँहों में लिपटी सो रही थी। उसका नंगा बदन मेरे बदन से पूरी तरह चिपका हुआ था। मैं जाग गया और उसके गाल पर किस किया। नेहा की आँखें खुलीं। वो मुस्कुराई और मुझे और कसकर चिपक गई। 

    “Good morning baby…” मैंने कहा। 
    नेहा ने शरमाते हुए जवाब दिया, “बहुत अच्छी मॉर्निंग है…”

    मेरा लंड फिर से उसकी जाँघों के बीच सख्त हो चुका था। नेहा ने उसे महसूस किया और मुस्कुराई। इस बार वो खुद मेरे ऊपर चढ़ गई। सुबह की ताज़गी में उसका गोरा नंगा बदन और भी खूबसूरत लग रहा था। उसने कंडोम चढ़ाया और धीरे से लंड पर बैठ गई। 

    “आह्ह… सुबह-सुबह कितना अच्छा लग रहा है…” नेहा ने आँखें बंद करके कहा। वो धीरे-धीरे ऊपर-नीचे होने लगी। मैंने उसके कूल्हों को पकड़ लिया और नीचे से मदद करने लगा। उसकी छातियाँ मेरे चेहरे के सामने हिल रही थीं। मैंने उन्हें चूमा, चाटा और निप्पल्स को हल्के से काटा। नेहा की साँसें तेज़ हो गईं। 

    रफ्तार बढ़ने लगी। नेहा अब जोर-जोर से बैठ रही थी। “हाँ राहुल… और गहरा… मेरी चूत में पूरा डाल दो… आह्ह… मैं झड़ने वाली हूँ…” कुछ ही मिनट में नेहा का शरीर सख्त हो गया और वो पहली बार झड़ गई। मैंने उसे पलटकर मिशनरी पोज़िशन में लिया और तेज़ धक्के मारने लगा। नेहा की टाँगें मेरी कमर पर लिपटी हुई थीं। आखिर में हम दोनों साथ में झड़ गए। 

    हम पसीने से तर लेटे रहे। नेहा मेरी गर्दन में चेहरा छुपाए हुए थी।

    सुबह का दूसरा राउंड (सुबह 9:20 बजे — शावर में)

    हम दोनों नहाने गए। शावर के नीचे गर्म पानी की धार गिर रही थी। नेहा मेरे सामने खड़ी थी। मैंने उसे दीवार से सटाकर खड़ा किया। पीछे से उसकी छातियों को दोनों हाथों से दबाया और गर्दन चूसने लगा। नेहा की साँसें फिर से भारी हो गईं। 

    मैंने उसे झुकाया, शावर के नीचे ही डॉगी स्टाइल में लिया। पानी हमारे गीले बदन पर गिर रहा था। मैंने पीछे से लंड अंदर डाला और जोर से ठोकना शुरू किया। नेहा की गांड हर धक्के पर लहरा रही थी। पानी की धार के साथ “फच फच” की आवाज़ और तेज़ हो रही थी।

    “आह्ह… राहुल… शावर में चोदना… बहुत गंदा और मजेदार है… हाँ… और जोर से… मेरी गांड पकड़कर फाड़ दो…” नेहा चीख रही थी। मैंने एक हाथ से उसके बाल पकड़े, दूसरे से क्लिटोरिस रगड़ा। पानी हम दोनों के शरीर से बह रहा था। नेहा दो बार झड़ गई। आखिर में मैं भी उसके अंदर झड़ गया। 

    शावर के नीचे हम दोनों एक-दूसरे को चूमते हुए खड़े रहे।

    पैकिंग और टैक्सी में स्टेशन पहुँचना

    शावर से निकलकर हमने कपड़े पहने। नेहा ने सफेद टॉप और जीन्स पहनी, मैंने शर्ट और जींस। फिर हमने सामान पैक करना शुरू किया। नेहा अपना बैग पैक कर रही थी, मैं अपना। बीच-बीच में हम एक-दूसरे को किस कर लेते। नेहा ने कहा, “ये गोवा की यादें कभी नहीं भूलूँगी राहुल… तुमने मुझे बहुत स्पेशल फील कराया।”

    पैकिंग खत्म होने के बाद हमने होटल से चेकआउट किया। टैक्सी बुक की और स्टेशन की तरफ चल दिए। टैक्सी में हम पीछे की सीट पर बैठे थे। नेहा ने अपना सिर मेरे कंधे पर रख दिया। मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और उँगलियाँ फंसाईं। 

    टैक्सी चल रही थी। बाहर गोवा के खूबसूरत रास्ते दिख रहे थे। नेहा ने धीरे से मेरे कान में कहा, “ट्रेन में भी… वही वाला केबिन मिल जाए तो…”

    मैं मुस्कुराया और उसके गाल पर किस किया। टैक्सी स्टेशन पहुँचते-पहुँचते हम दोनों फिर से एक-दूसरे के करीब आ गए थे। दिल में वो पुरानी उत्तेजना फिर से जाग रही थी।

    ट्रेन में बैठने से पहले नेहा ने मुझे कसकर गले लगाया और फुसफुसाई, 
    “अब ट्रेन का इंतज़ार है…”

    ट्रेन आई और अपने शीट पर गए और
    नेहा ने मुझे बिस्तर पर धकेल दिया। वो खुद मेरे ऊपर चढ़ गई। उसने मेरी शर्ट उतारी, मेरी छाती चूमने लगी। उसकी जीभ मेरे निप्पल्स पर घूम रही थी। फिर नीचे हाथ बढ़ाया, मेरे लंड को पैंट से बाहर निकाला और धीरे-धीरे सहलाने लगी। लंड सख्त हो गया। नेहा ने कंडोम चढ़ाया, अपनी ड्रेस ऊपर उठाई, पैंटी सरकाई और धीरे से मेरे लंड पर बैठ गई।

    उसकी गीली, गरम चूत मेरे मोटे लंड को धीरे-धीरे निगल रही थी। जब पूरा घुस गया, नेहा की आँखें बंद हो गईं और मुँह से लंबी आह निकली — “आआह्ह्ह… राहुल… कितना मोटा और गहरा… पूरी तरह भर गया है…”

    वो धीरे-धीरे ऊपर-नीचे होने लगी। हर बार जब नीचे बैठती, उसकी भारी छातियाँ जोर से उछलतीं। मैंने दोनों हाथों से उन्हें थाम लिया, निप्पल्स को उँगलियों के बीच दबाया और खींचा। नेहा की रफ्तार बढ़ने लगी। “फच… फच… फच…” की आवाज़ केबिन में गूँज रही थी। नेहा की जाँघें मेरी कमर से सट रही थीं। उसका पसीना मेरी छाती पर टपक रहा था।

    वो झुककर मुझे किस करने लगी। उसके बाल मेरे चेहरे पर गिर रहे थे। मैंने नीचे से तेज़ धक्के मारे। नेहा चीख उठी — “हाँ… राहुल… और जोर से… मेरी चूत फाड़ दो… आह्ह… बहुत मजा आ रहा है… मैं पागल हो रही हूँ…” उसकी चूत मेरे लंड को कसकर पकड़ रही थी। करीब 15 मिनट बाद नेहा का शरीर सख्त हो गया। उसकी चूत बार-बार सिकुड़ी और वो जोर से झड़ गई। गर्म रस मेरे लंड पर बहने लगा। उसी पल मैं भी कंडोम के अंदर झड़ गया। नेहा मेरी छाती पर ढेर हो गई। हम दोनों लंबी साँसें लेते रहे।

    दूसरा राउंड (रात 12:30 बजे — मिशनरी पोज़िशन)
    हम थोड़ी देर आराम करने के बाद फिर से शुरू हो गए। इस बार मैंने नेहा को लिटाया। उसकी जाँघें चौड़ी कीं और उसके ऊपर लेट गया। लंड फिर से सख्त था। मैंने धीरे से अंदर डाला। नेहा की आँखें नम हो गईं। “राहुल… धीरे… लेकिन गहरा…”

    मैंने बहुत धीमी गति से शुरू किया। हर धक्के के साथ उसकी छातियाँ हिल रही थीं। मैंने एक-एक करके दोनों निप्पल्स को मुँह में लिया, जोर-जोर से चूसा। नेहा मेरी पीठ पर नाखून गड़ा रही थी। मैंने रफ्तार बढ़ाई। लंड जड़ तक घुस रहा था और बाहर निकल रहा था। चूत से सफ़ेद झाग बनने लगा। नेहा बार-बार चीख रही थी — “आह… हाँ… इसी तरह… मेरी चूत को चोदते रहो… उफ्फ… मैं मर रही हूँ मजा से…”

    उसने अपनी टाँगें मेरी कमर पर लपेट लीं। मैंने गति और तेज़ कर दी। केबिन में सिर्फ चुदाई की फच-फच आवाज़ और नेहा की कामुक आहें गूँज रही थीं। नेहा तीन बार छोटे-छोटे ऑर्गेज्म आई। आखिर में वो जोर से काँपी और झड़ गई। मैं भी उसके अंदर झड़ गया। हम पसीने से तर लेटे रहे। नेहा मेरे कान में फुसफुसाई — “तुम मुझे पूरी तरह अपना बना रहे हो…”

    तीसरा राउंड (सुबह 3 बजे — साइड पोज़िशन)
    नींद में ही हम लिपटे हुए थे। नेहा ने खुद जागकर मेरा लंड सहलाया। मैं जाग गया। हम साइड में लेटे रहे। मैंने पीछे से उसकी जाँघ ऊपर उठाई और लंड अंदर डाला। ये पोज़िशन बहुत गहरा और intimate था। मैं धीरे-धीरे धक्के मार रहा था। एक हाथ से उसकी छाती मसल रहा था, दूसरे से क्लिटोरिस रगड़ रहा था।

    नेहा की साँसें फूल रही थीं। “राहुल… ये पोज़िशन… बहुत अच्छा लग रहा है… गहराई तक महसूस हो रहा है…” मैंने गति बढ़ाई। उसकी गांड मेरे पेट से टकरा रही थी। हम दोनों एक-दूसरे को चूमते रहे। नेहा का एक हाथ पीछे करके मेरी जाँघ पकड़े हुए था। करीब 12 मिनट बाद हम दोनों साथ में झड़ गए।

    चौथा राउंड (सुबह 5:30 बजे — डॉगी स्टाइल)
    सुबह की हल्की रोशनी में नेहा घुटनों के बल हो गई। मैंने पीछे से उसकी कमर पकड़ी और एक झटके में पूरा लंड अंदर ठोक दिया। नेहा चीख उठी — “आआह्ह्ह… बहुत तेज़… लेकिन मत रुकना…”

    मैंने उसके बाल पकड़े और घोड़े की तरह तेज़ी से चोदना शुरू किया। उसकी गांड हर धक्के पर लहरा रही थी। मैंने एक हाथ से उसकी लटकती छातियों को दबाया, दूसरे से क्लिटोरिस रगड़ा। नेहा बार-बार चिल्ला रही थी — “हाँ… फाड़ दो… मेरी गांड पकड़कर चोदो… राहुल… मैं तुम्हारी हूँ… आह्ह… और तेज़…”

    पसीना हम दोनों के शरीर पर बह रहा था। ट्रेन की लहर के साथ चुदाई और भी मजेदार हो रही थी। नेहा दो बार झड़ी। आखिर में मैंने जोर-जोर से ठोककर झड़ गया।

    पाँचवाँ राउंड (दिल्ली पहुँचने से ठीक पहले — गोद में बैठकर)
    ट्रेन दिल्ली के पास थी। नेहा मेरी गोद में बैठ गई। हम दोनों आमने-सामने थे। उसने लंड अंदर लिया और कसकर चिपक गई। मैंने उसकी कमर पकड़कर ऊपर-नीचे किया। नेहा मेरी गर्दन में चेहरे को छुपाए हुए थी। किस करते हुए हम तेज़ी से चुदाई कर रहे थे।

    “राहुल… आखिरी बार… मुझे भर दो…” नेहा फुसफुसाई। मैंने तेज़ धक्के मारे। उसकी छातियाँ मेरी छाती से रगड़ खा रही थीं। आखिर में हम दोनों एक साथ जोर से झड़ गए।

    ट्रेन स्टेशन पर रुकी। हम दोनों थके लेकिन संतुष्ट थे। नेहा ने मुझे आखिरी गहरा किस दिया और बोली, “ये ट्रिप कभी नहीं भूलूँगी…”

  • ट्रेन में मिली अजनबी लड़की 1

    गोवा जा रही थी। 1st AC का प्राइवेट केबिन — सिर्फ दो बर्थ। ऊपरी बर्थ पर मैं (राहुल, 32 साल) बैठा था। लैपटॉप पर कुछ काम कर रहा था, लेकिन मन कहीं और था। नीचे वाली बर्थ पर एक लड़की बैठी हुई थी — नेहा। उम्र करीब 28-29। गोरी, लंबे काले बाल, हल्की-सी मुस्कान और आँखों में वो चमक जो ट्रेन की खिड़की से बाहर देखते हुए भी अंदर तक उतर जाती थी।

    ट्रेन दिल्ली से छूटते ही हमारी नज़रें मिलीं।

    “हाय… मैं नेहा,” उसने मुस्कुराते हुए कहा। “दिल्ली से गोवा… अकेली ट्रैवल कर रही हूँ।”

    मैंने भी मुस्कुराकर जवाब दिया, “राहुल… वही हाल। सोलो ट्रिप।”

    पहले तो बातें हल्की-फुल्की थीं — काम, मौसम, गोवा के प्लान। लेकिन जैसे-जैसे रात ढलती गई, बातें गहरी होती गईं। नेहा ने बताया कि वो सॉफ्टवेयर इंजीनियर है, मुंबई में जॉब करती है, लेकिन दिल में घूमने का शौक है। मैंने अपनी स्टार्टअप की कहानी सुनाई। हम दोनों हँसते रहे। चाय आई, हमने साथ में पिए। रात के 12 बजे तक हम दोनों केबिन में बैठे गप्पें मार रहे थे।

    ट्रेन की हल्की-सी लहर और बाहर की अंधेरी रात… नेहा की हँसी में एक अजीब सा जादू था। मैंने देखा कि वो बार-बार मेरी तरफ देख रही है। मैं भी छुप-छुपकर उसकी आँखों में देख रहा था।

    “तुम बहुत अच्छे लगते हो बात करने में,” उसने शरमाते हुए कहा।
    “तुम भी… सच में,” मैंने जवाब दिया।

    उस रात हम दोनों थक गए थे, लेकिन नींद नहीं आ रही थी। मैंने नीचे उतरकर उसके बर्थ के पास बैठ गया। हमने हेडफोन शेयर किए, एक ही गाना सुनते रहे — “तुम ही हो”। उसकी कंधे मेरे कंधे से छू रहे थे। हल्की-सी ठंडी हवा केबिन में घुस रही थी। हम बस एक-दूसरे के पास बैठे रहे, बातें करते रहे। कोई टच नहीं, बस वो गर्माहट… वो अनकही केमिस्ट्री।

    सुबह गोवा स्टेशन पर हम साथ उतरे।

    “अकेले घूमने का मजा नहीं आएगा,” मैंने कहा।
    नेहा मुस्कुराई, “तो फिर साथ घूमें?”

    हमने तय किया — एक ही होटल में बुकिंग, लेकिन दो अलग-अलग रूम। मैंने ऑनलाइन दो रूम बुक कर दिए — दोनों बिलकुल पास-पास, बालकनी से एक-दूसरे को देख सकते थे।

    पहला दिन — हमने कैलंगुट बीच पर घूमना शुरू किया। पानी में पैर डुबोए, फोटो खिंचवाईं, नारियल पानी पिया। नेहा का हँसना सुनकर मैं बार-बार मुड़ जाता। दोपहर में हमने पुराने गोवा के चर्च घूमे। शाम को पणजी के बाजार में घूमते हुए उसने मेरे हाथ में अपना हाथ डाल दिया। बस हल्का-सा… लेकिन दिल जोर-जोर से धड़कने लगा।

    दूसरा दिन और भी खूबसूरत। हम दोनों अंजुना बीच गए। सूरज ढल रहा था। नेहा ने सफेद ड्रेस पहनी थी जो हवा में लहरा रही थी। हम बालू पर बैठे, सूरजास्त देखा। उसने अपना सिर मेरे कंधे पर रख दिया। मैंने धीरे से उसके बालों में हाथ फेरा। कोई बात नहीं हुई… बस सन्नाटा और समंदर की लहरें।

    शाम को होटल लौटे।

    रात के 11:30 बजे थे। मैं अपने रूम में था। बालकनी में खड़ा समंदर की आवाज सुन रहा था। तभी मेरा फोन बजा — नेहा का मैसेज:

    “नींद नहीं आ रही… तुम्हारे रूम में आ जाऊँ? सिर्फ बातें करेंगे 😊”

    मैंने तुरंत रिप्लाई किया — “आ जाओ… दरवाजा खुला है।”

    दो मिनट बाद दरवाजा धीरे से खुला। नेहा हल्के गुलाबी नाइट सूट में थी। बाल खुले हुए, चेहरे पर हल्की शरम। वो अंदर आई और दरवाजा बंद कर दिया।

    हम दोनों बालकनी में खड़े हो गए। हवा ठंडी थी। नेहा ने कहा, “दो दिन में कितना अच्छा लग रहा है राहुल… तुम्हारे साथ।”

    मैंने मुड़कर उसे देखा। उसकी आँखों में चमक थी। मैंने धीरे से उसका हाथ पकड़ा और कहा, “मुझे भी… बहुत अच्छा लग रहा है नेहा।”

    हम दोनों एक-दूसरे के बहुत करीब आ गए। उसकी साँसें मेरे चेहरे पर पड़ रही थीं। मैंने धीरे से उसकी कमर पर हाथ रखा। नेहा ने अपनी आँखें बंद कर लीं। मैंने आगे बढ़कर उसके माथे पर हल्का-सा किस किया। फिर उसकी नाक पर… फिर गाल पर।

    “राहुल…” उसने फुसफुसाकर कहा और मेरी छाती पर सिर रख दिया।

    मैंने उसे गले लगा लिया। उसकी गरमाहट मेरे शरीर में उतर रही थी। हम बस एक-दूसरे को कसकर गले लगाए खड़े रहे। कोई जल्दी नहीं थी। बस वो पल… वो closeness… वो normal romance।

    नेहा ने धीरे से सिर ऊपर किया। हमारी नज़रें मिलीं। उसके होंठ हल्के से खुले हुए थे। मैंने धीरे-धीरे अपना चेहरा उसके चेहरे की तरफ ले जाया…

    नेहा मेरी आँखों में देखकर कुछ पल चुप रही। उसके गाल हल्के गुलाबी हो गए थे। बालकनी की हल्की ठंडी हवा उसके खुले बालों को उड़ा रही थी। मैंने उसकी कमर पर हाथ रखे हुए थे और धीरे-धीरे उसकी पीठ सहला रहा था।

    नेहा ने आखिरकार बहुत धीमी आवाज़ में कहा,
    “राहुल… मैं डर रही हूँ, लेकिन… मैं भी तुम्हारे साथ रहना चाहती हूँ आज रात। बस… बहुत धीरे-धीरे, ठीक है?”

    मैंने मुस्कुराकर उसके माथे पर किस किया और फुसफुसाया,
    “बिल्कुल धीरे-धीरे नेहा। जितना तुम चाहोगी, उतना ही। मैं कभी जल्दबाजी नहीं करूँगा।”

    नेहा ने हल्के से सिर हिलाया और मेरी छाती से लग गई। मैंने उसे कसकर गले लगा लिया। फिर धीरे से उसे अंदर रूम की तरफ ले आया। रूम में सिर्फ एक हल्की गोल्डन लाइट जल रही थी, जिससे पूरा कमरा रोमांटिक लग रहा था। खिड़की से समंदर की दूर की आवाज़ आ रही थी।

    हम दोनों बिस्तर के किनारे बैठ गए। नेहा की साँसें थोड़ी तेज़ थीं। मैंने उसका हाथ अपने हाथ में लिया और उँगलियों को आपस में फंसाया। कुछ देर हम बस ऐसे ही बैठे रहे, एक-दूसरे की आँखों में देखते हुए।

    फिर मैंने धीरे से उसकी तरफ झुका और उसके होंठों को फिर से चूमा। ये किस पहले से ज्यादा गहरा और लंबा था। नेहा ने भी जवाब दिया। उसके होंठ नरम और गर्म थे। हमारी जीभें हल्के-हल्के छूने लगीं। किस के दौरान मैंने एक हाथ से उसके बालों को सहलाया, दूसरे हाथ से उसकी कमर को पकड़ रखा था।

    किस खत्म होने पर नेहा ने शरमाते हुए कहा,
    “राहुल… मेरी ड्रेस…”

    मैंने धीरे से उसके कंधे से ड्रेस की पट्टियाँ सरकाईं। ड्रेस धीरे-धीरे नीचे खिसकती गई और उसके गोरे, नरम कंधे बाहर आ गए। मैंने ड्रेस को और नीचे खींचा। अब नेहा सिर्फ़ काले रंग की ब्रा और पैंटी में थी। उसकी छातियाँ भरी हुई थीं और ब्रा के अंदर हल्के-हल्के उभर रही थीं। उसकी कमर पतली थी और जाँघें गोल और नरम दिख रही थीं।

    नेहा ने शरमा कर अपनी बाँहें छाती पर रख लीं। मैंने मुस्कुराते हुए उसके हाथ हटाए और बोला,
    “तुम बहुत सुंदर हो नेहा… डरो मत।”

    फिर मैंने अपनी शर्ट के बटन एक-एक करके खोले और उतार दी। अब मैं सिर्फ़ ट्राउज़र में था। नेहा ने मेरी छाती पर हाथ रखा और धीरे-धीरे सहलाने लगी। उसकी उँगलियाँ मेरे शरीर पर घूम रही थीं। मैंने उसे फिर से किस किया — इस बार गर्दन पर, कंधे पर, फिर क्लेविकल बोन पर। हर किस के साथ नेहा की साँसें भारी होती जा रही थीं।

    मैंने धीरे से उसकी ब्रा का हुक खोला। ब्रा ढीली हो गई और मैंने उसे उतार दिया। नेहा की दोनों छातियाँ पूरी तरह बाहर आ गईं — गोल, भरी हुई, हल्के ब्राउन निप्पल्स के साथ। वे हल्के-हल्के हिल रही थीं। मैंने एक हाथ से उन्हें बहुत नरम तरीके से छुआ। उँगलियाँ उनके नरम मांस पर घूम रही थीं। नेहा की आँखें बंद हो गईं और उसके मुँह से हल्की सी आह निकली — “आह्ह… राहुल…”

    मैंने झुककर एक निप्पल को होंठों से छुआ, फिर धीरे से चूसा। नेहा का शरीर काँप गया। मैं दूसरी छाती को हाथ से धीरे-धीरे मसल रहा था। नेहा ने मेरे सिर को अपने सीने से दबाया और बालों में उँगलियाँ फिराने लगी।

    “राहुल… बहुत अच्छा लग रहा है…” उसने फुसफुसाकर कहा।

    कुछ देर तक मैं उसकी छातियों को चूमता और सहलाता रहा। फिर मैंने धीरे से उसे बिस्तर पर लिटा दिया। अब नेहा सिर्फ़ पैंटी में थी। मैंने उसकी जाँघों पर हाथ फेरा, फिर पैंटी के किनारे पर उँगलियाँ चलाईं। नेहा ने शरमाते हुए जाँघें हल्की सी बंद कर लीं।

    मैंने धीरे से उसकी पैंटी भी उतार दी। अब नेहा पूरी तरह नंगी मेरे सामने लेटी थी। उसकी चूत पर हल्के बाल थे, लेकिन बहुत साफ़ और गुलाबी दिख रही थी। मैंने उसकी जाँघों को धीरे से अलग किया। नेहा की साँसें अब बहुत तेज़ हो गई थीं।

    मैंने भी अपनी ट्राउज़र और अंडरवियर उतार दी। मेरा लंड पहले से ही सख्त हो चुका था। नेहा ने उसे देखा और शरमा गई।

    मैं बिस्तर पर उसके पास लेट गया। हम दोनों एक-दूसरे को कसकर गले लगाए हुए थे। नंगे शरीर एक-दूसरे से चिपके हुए थे। मैंने उसे फिर से किस किया — होंठों पर, गर्दन पर, छातियों पर। मेरे हाथ उसकी पीठ, कमर, जाँघों पर घूम रहे थे। नेहा भी मेरी पीठ और कूल्हों को सहला रही थी।

    धीरे-धीरे मैंने अपना हाथ उसकी जाँघों के बीच ले जाया। उँगलियाँ उसकी चूत की फाँक पर घूमने लगीं। नेहा बहुत गीली हो चुकी थी। जब मैंने क्लिटोरिस पर हल्के से उँगली घुमाई, तो नेहा ने जोर से कराह मारी — “आह्ह… राहुल… धीरे…”

    मैं बहुत धीरे-धीरे उँगली अंदर-बाहर करने लगा। नेहा की कमर उठ रही थी। उसकी साँसें फूल रही थीं। मैंने दूसरी उँगली भी डाल दी और धीरे से गति बढ़ाई। नेहा का पूरा शरीर सिहर रहा था।

    कुछ देर बाद नेहा ने मेरी तरफ देखा और शर्माते हुए कहा,
    “राहुल… अब…”

  • पापा की सुहागरात 2

    पापा ने रिया की जांघें और फैलाईं। रिया की चूत अब पूरी तरह गीली हो चुकी थी – गुलाबी फांके चमक रही थीं और बीच में छोटी-सी क्लिटोरिस सूजकर बाहर निकल आई थी। पापा ने दोनों हाथों से रिया की जांघें पकड़ीं, सिर नीचे किया और अपनी गर्म जीभ सीधी रिया की चूत पर लगा दी।

    “आआह्ह्ह…” रिया की पूरी कमर उठ गई। पापा ने पहले तो चूत की दोनों फांकों को जीभ से अलग-अलग चाटा, फिर पूरी चूत पर लंबी-लंबी लिक्कड़ें मारीं। उनकी जीभ रिया की क्लिटोरिस पर रुककर जोर-जोर से घुमने लगी। रिया दोनों हाथों से चादर पकड़कर कराह रही थी – “पापा… उफ्फ… क्या कर रहे हो… आह्ह्ह… बहुत अच्छा लग रहा है…”

    पापा ने अपनी जीभ को रिया की चूत के अंदर भी थोड़ा डाला और अंदर-बाहर करने लगे। रिया की चूत से अब चिकनाहट निकलकर पापा की ठुड्डी तक बह रही थी। पापा लगातार चूस रहे थे, चाट रहे थे, हल्के से काट भी रहे थे। रिया की सांसें इतनी तेज हो गई थीं कि वो लगातार कराह रही थी।

    कुछ देर बाद पापा ने सिर उठाया। उनके होंठ और ठुड्डी रिया की चूत के रस से चमक रहे थे। उन्होंने रिया की तरफ देखा और गहरी आवाज में बोले,

    “अब तुम मेरे लंड को चूसो रिया…”

    रिया शर्मा गई। उसने आँखें नीची कर लीं और धीमी आवाज में बोली, “पापा… मुझे नहीं आता… मैंने कभी नहीं किया…”

    पापा मुस्कुराए। मम्मी ने आगे बढ़कर रिया के बालों को प्यार से सहलाया और बोलीं, “कोई बात नहीं बेटा… मैं सिखाती हूँ।”

    मम्मी ने पापा के सामने घुटनों के बल बैठ गईं। पापा का लंड अभी भी पूरी तरह तना हुआ, मोटा और लाल सिरा चमक रहा था। मम्मी ने पहले तो लंड को हाथ में पकड़ा, ऊपर-नीचे हिलाया, फिर जीभ निकालकर लंड के सिरे पर घुमाई। पापा से हल्की सी कराह निकली।

    मम्मी ने रिया की तरफ देखा और कहा, “देखो… पहले लंड को हाथ में पकड़ो… फिर जीभ से चाटो… और फिर मुंह में ले लो… धीरे-धीरे… जैसे लॉलीपॉप चूसती हो।”

    मम्मी ने पापा का पूरा लंड मुंह में ले लिया। उन्होंने गहरी चूसाई शुरू कर दी – ऊपर-नीचे सिर हिलाते हुए, कभी-कभी लंड को गले तक ले जातीं। उनके मुंह से “ग्लक-ग्लक” की आवाजें आने लगीं। पापा की उंगलियां मम्मी के बालों में फंस गईं।

    कुछ देर बाद मम्मी ने लंड मुंह से निकाला। लंड अब और भी ज्यादा चमकदार और लार से तर था। मम्मी ने रिया को इशारा किया, “अब तुम ट्राई करो।”

    रिया झिझकते हुए घुटनों के बल बैठ गई। उसने कांपते हाथों से पापा का लंड पकड़ा। पहले तो सिर्फ जीभ से सिरा चाटा। फिर धीरे-धीरे मुंह खोलकर लंड के आधे हिस्से को मुंह में ले लिया। मम्मी ने उसके सिर को हल्के से आगे-पीछे किया और सिखाया, “हां… ऐसे… जीभ अंदर भी घुमाओ… चूसो…”

    रिया अब धीरे-धीरे सीख रही थी। वो पापा का लंड चूसने लगी – कभी-कभी गहरी चूसाई, कभी सिर्फ सिरा चूसती। पापा आंखें बंद करके कराह रहे थे – “हां रिया… बहुत अच्छा… आह्ह्ह…”

    मम्मी ने रिया की चूचियां सहलाते हुए कहा, “अब हम दोनों मिलकर करते हैं।”

    दोनों औरतें – मम्मी और रिया – पापा के लंड के दोनों तरफ बैठ गईं। उन्होंने अपनी-अपनी बड़ी-बड़ी चूचियां पापा के लंड के इर्द-गिर्द लगा दीं। मम्मी ने अपनी चूचियों को दबाकर लंड को बीच में फंसा लिया। रिया ने भी अपनी चूचियां जोड़ लीं। अब पापा का मोटा, गर्म लंड दोनों की चूचियों के बीच पूरी तरह दबा हुआ था।

    पापा ने कमर हिलानी शुरू कर दी। लंड दोनों की चूचियों के बीच ऊपर-नीचे घिसने लगा। चूचियों की नरम, गर्मी और लार की चिकनाहट से लंड फिसल रहा था। कभी मम्मी चूचियां दबाकर और जोर से रगड़तीं, कभी रिया अपनी चूचियों को ऊपर-नीचे करके लंड को मसलती। पापा के लंड का सिरा दोनों की चूचियों के बीच से बाहर निकल-निकलकर चमक रहा था।

    तीनों के मुंह से सिर्फ सिसकारियां और हल्की-हल्की कराहें निकल रही थीं। कमरे में गर्मी बढ़ गई थी।

    पापा ने दोनों की चूचियों के बीच से लंड निकाला। लंड अब पूरी तरह लार और चूत के रस से चमक रहा था, बहुत सख्त और मोटा। उन्होंने रिया को बेड पर लिटा दिया। रिया की जांघें खुद-ब-खुद फैल गईं। उसकी चूत पूरी तरह गीली, सूजी हुई और चमक रही थी।

    पापा ने रिया की जांघों को कंधों पर रख लिया और लंड का मोटा सिरा रिया की चूत के मुंह पर रख दिया। रिया ने घबराकर आँखें बंद कर लीं। पापा ने धीरे से कमर आगे की और लंड का सिरा रिया की चूत में घुसने लगा।

    “आआह्ह्ह्ह… पापा… धीरे… बहुत मोटा है…” रिया जोर से कराह उठी।

    पापा ने एक जोरदार झटका दिया। आधा लंड एक ही बार में रिया की चूत में घुस गया। रिया की आँखें खुल गईं, मुंह से चीख निकल गई – “उफ्फ्फ्फ… आह्ह्ह… फट जाएगी…”

    पापा रुके नहीं। उन्होंने दूसरा जोरदार झटका मारा और पूरा मोटा लंड रिया की चूत के अंदर तक धंस गया। रिया की चूत पूरी तरह फैल गई थी। पापा ने धीरे-धीरे चुदाई शुरू की – लंबे-लंबे स्ट्रोक। हर झटके में लंड पूरी तरह बाहर निकलता और फिर जोर से अंदर चला जाता।

    रिया लगातार चीख रही थी – “पापा… आह्ह्ह… बहुत गहरा… उफ्फ… और जोर से… हां… हां…”

    पहला राउंड काफी तेज था। पापा ने रिया को मिशनरी पोजिशन में 10-12 मिनट तक चोदा। रिया की चूचियां हर झटके के साथ उछल रही थीं। आखिर में पापा ने तेज-तेज झटके मारे और रिया की चूत के अंदर ही जोर से झड़ गए। गर्म वीर्य रिया की चूत में भर गया। रिया भी पहली बार में ही झड़ गई – उसकी चूत सिकुड़-सिकुड़कर पापा का लंड दबा रही थी।

    थोड़ी देर आराम के बाद पापा ने रिया को घुटनों के बल करवाया – डॉगी स्टाइल। दूसरा राउंड शुरू हुआ। इस बार पापा ने रिया की कमर पकड़कर बहुत जोर-जोर से चोदा। हर झटका इतना तेज था कि रिया का पूरा शरीर आगे की तरफ धकेला जा रहा था। रिया की चूत से “पच-पच-पच” की आवाजें आने लगीं।

    “हां पापा… फाड़ दो… आह्ह्ह… मेरी चूत फाड़ दो…” रिया अब पूरी तरह भड़क चुकी थी।

    पापा ने रिया की गांड पर थप्पड़ मारे और बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा। दूसरे राउंड में भी पापा ने रिया की चूत में ही झड़ दिया। रिया दो बार झड़ चुकी थी। उसकी जांघें कांप रही थीं।

    तीसरा राउंड सबसे लंबा था। पापा ने रिया को अपनी गोद में उठा लिया – स्टैंडिंग पोजिशन। रिया की टांगें पापा की कमर के चारों तरफ लिपटी हुई थीं। पापा खड़े-खड़े ही रिया को ऊपर-नीचे करके चोद रहे थे। रिया की चूचियां पापा के मुंह के सामने उछल रही थीं। पापा उन्हें चूस रहे थे। इस राउंड में रिया लगातार चीख रही थी और तीन बार झड़ गई। आखिर में पापा ने भी बहुत जोर से झड़कर रिया की चूत को वीर्य से भर दिया।

    अब रिया पूरी तरह थक चुकी थी। वो बेड पर लेटी हुई हांफ रही थी। उसकी चूत से पापा का सफेद वीर्य बाहर निकल-निकलकर चादर पर गिर रहा था।

    पापा ने मम्मी की तरफ देखा। मम्मी अभी भी नंगी बैठी सब देख रही थीं और उनकी चूत भी गीली हो चुकी थी। पापा ने मम्मी को बेड पर लिटाया और तुरंत उन पर चढ़ गए।

    मम्मी की चुदाई सिर्फ एक राउंड हुई, लेकिन वो बहुत प्यार भरा और गहरा था। पापा ने मम्मी को मिशनरी में चोदा – धीरे-धीरे लेकिन गहरे स्ट्रोक। मम्मी पापा की पीठ पर नाखून गाड़ रही थीं और बार-बार किस ले रही थीं।

    “मेरे प्यारे… आज भी तुम्हारा लंड मुझे बहुत अच्छा लगता है…” मम्मी कराह रही थीं।

    पापा ने मम्मी की चूत में भी झड़ दिया। मम्मी भी झड़ गईं। दोनों एक-दूसरे को कसकर चिपके रहे।

    तीन राउंड रिया की और एक राउंड मम्मी की चुदाई के बाद रात के करीब 3 बजे थे। तीनों पूरी तरह थक चुके थे। पापा बीच में लेट गए। रिया उनकी दाईं तरफ और मम्मी बाईं तरफ। दोनों औरतें पापा की छाती पर सिर रखकर लेट गईं। पापा ने दोनों को अपनी बाहों में कस लिया।

    रिया और मम्मी दोनों की चूतें अब सूजी हुई और वीर्य से भरी हुई थीं। कमरे में सेक्स की तेज महक फैली हुई थी।

    धीरे-धीरे तीनों की आंखें बंद हो गईं और वो गहरी नींद में सो गए।

  • सास ससुर की चूदाई

    गर्मी का वो रात था, जब बिजली चली गई और पूरा घर भट्टी की तरह तप रहा था। राधा (48 साल), मेरी सास, अपने बेडरूम में अकेली लेटी हुई थीं। उनकी हल्की सी नीली साड़ी पसीने से पूरी तरह भीग चुकी थी। साड़ी का पल्लू उनके भारी 38D साइज़ की छातियों पर से सरक गया था, जिससे ब्लाउज़ के अंदर की सफ़ेद ब्रा का किनारा साफ़ दिख रहा था। उनकी कमर की गोलाई और नाभि पसीने की वजह से चमक रही थी।

    वे बार-बार करवट बदल रही थीं। उनकी साँसें भारी हो रही थीं। “उफ्फ… कितनी गर्मी है आज…” उन्होंने फुसफुसाते हुए कहा।

    तभी दरवाज़ा धीरे से खुला। ससुर रामलाल (52 साल) अंदर आए। वे सिर्फ़ लूंगी पहने हुए थे। उनकी छाती पर सफ़ेद बाल थे, लेकिन शरीर अभी भी मजबूत था। उनकी आँखें राधा के पसीने से तर बदन पर टिक गईं।

    “बहू… नींद नहीं आ रही क्या?” रामलाल ने गहरी आवाज़ में पूछा।

    राधा ने शरमाते हुए साड़ी का पल्लू ठीक करने की कोशिश की, लेकिन पसीने की वजह से वो और चिपक गया। “जी… बहुत गर्मी है ससुर जी। पंखा भी काम नहीं कर रहा।”

    रामलाल बिस्तर के पास आए और किनारे पर बैठ गए। उनकी नज़र राधा की जाँघों पर पड़ी, जहाँ साड़ी ऊपर सरक गई थी और गोरी, मोटी जाँघें चमक रही थीं। उन्होंने धीरे से हाथ बढ़ाया और राधा की कमर पर रख दिया।

    “ये गर्मी तो शरीर के अंदर भी है ना बहू…?” उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा। उनकी उँगलियाँ राधा की नाभि के आस-पास घूमने लगीं। राधा का शरीर हल्का सा काँप गया।

    “ससुर जी… ये क्या…” राधा ने कमज़ोर विरोध किया, लेकिन उनकी आवाज़ में शरम के साथ उत्तेजना भी थी।

    रामलाल ने कोई जवाब नहीं दिया। उन्होंने राधा का पल्लू पूरी तरह खींच लिया। साड़ी का आंचल अब बिस्तर पर बिखरा पड़ा था। फिर उन्होंने ब्लाउज़ के हुक एक-एक करके खोलने शुरू किए। हर हुक खुलने के साथ राधा की साँसें तेज़ होती गईं।

    जब आखिरी हुक खुला, तो राधा की भारी, दूधिया छातियाँ ब्रा से बाहर झाँकने लगीं। रामलाल ने ब्रा का हुक भी खोल दिया। दोनों बड़े-बड़े स्तन एकदम से बाहर आ गए। उनकी ब्राउन निप्पल्स पहले से ही सख्त हो चुकी थीं और पसीने से चमक रही थीं।

    “वाह… सास जी, कितनी सुंदर हैं आपकी चूचियाँ…” रामलाल ने प्रशंसा की और दोनों हाथों से उन्हें थाम लिया। उन्होंने धीरे-धीरे मसलना शुरू किया। उँगलियाँ नरम मांस में धंस रही थीं। राधा की आँखें बंद हो गईं। “आह्ह… ससुर जी… धीरे… उफ्फ…”

    रामलाल झुक गए और एक निप्पल को मुँह में ले लिया। उन्होंने जोर-जोर से चूसना शुरू किया, जीभ से चारों तरफ़ घुमाते हुए। दूसरे स्तन को हाथ से दबाते और निप्पल को उँगलियों से नोचते रहे। राधा की कमर बार-बार ऊपर उठ रही थी। उनके मुँह से अनायास आहें निकल रही थीं — “हाय… अाह… और चूसिए… मजा आ रहा है…”

    रामलाल ने साड़ी की बाकी लपेट भी खोल दी। अब राधा सिर्फ़ पेटीकोट में थीं। उन्होंने पेटीकोट की नाड़ी खींची और उसे भी उतार दिया। राधा की जाँघें पूरी तरह नंगी हो गईं। उनकी चूत पर हल्के-हल्के बाल थे, लेकिन पसीने और रस की वजह से पूरी तरह गीली और चमकदार दिख रही थी। चूत की फाँकें थोड़ी-थोड़ी खुली हुई थीं।

    रामलाल ने अपनी उँगली राधा की चूत पर रखी और धीरे से ऊपर-नीचे रगड़ने लगे। क्लिटोरिस पर जब उँगली घूमी, राधा ने जोर से कराह उठाई — “अाह्ह्ह… वहाँ… हाँ… ससुर जी…”

    उन्होंने एक उँगली अंदर डाली। अंदर बहुत गर्म और फिसलन भरा था। रामलाल ने दूसरी उँगली भी डाल दी और तेज़ी से अंदर-बाहर करने लगे। राधा की चूत से “फच फच” की आवाज़ आने लगी। उनका रस उँगलियों पर चिपक रहा था।

    “बहुत दिन से प्यासी थीं ना सास जी? देखो कितना पानी निकल रहा है…” रामलाल ने गंदी बात करते हुए कहा।

    राधा शरमा गई लेकिन जवाब में उनकी जाँघें और फैल गईं।

    अब रामलाल ने अपनी लूंगी उतार दी। उनका लंड बाहर निकला — मोटा, 7 इंच लंबा, सिर लाल और नोक से पारदर्शी पानी टपक रहा था। वे राधा के ऊपर चढ़ गए। लंड की नोक को चूत की फाँक पर रखा और धीरे-धीरे रगड़ने लगे।

    फिर एक जोरदार झटका।

    “आआआह्ह्ह…!” राधा की चीख निकल गई। रामलाल का पूरा मोटा लंड एक ही बार में राधा की चूत में घुस गया था। चूत की दीवारें लंड को कसकर जकड़ रही थीं।

    रामलाल रुक गए, राधा को सम्हलने का समय दिया। फिर धीरे-धीरे धक्के मारने शुरू किए। हर धक्के के साथ राधा की छातियाँ जोर-जोर से उछल रही थीं। कमरे में सिर्फ़ चुदाई की फच-फच आवाज़, राधा की आहें और रामलाल की भारी साँसें गूँज रही थीं।

    “हाँ… और जोर से… ससुर जी… फाड़ दो मेरी चूत… बहुत दिन से तरस रही थी…” राधा अब पूरी तरह उत्तेजित हो चुकी थीं।

    रामलाल ने रफ़्तार बढ़ा दी। वे राधा की जाँघें कंधों पर रखकर गहरे धक्के मारने लगे। लंड हर बार पूरी तरह बाहर निकलकर फिर से जड़ तक घुस रहा था। राधा की चूत से सफ़ेद झाग बनने लगा था।

    कुछ देर बाद उन्होंने राधा को घुटनों के बल करवाया। डॉगी स्टाइल में अब लंड और भी गहराई तक जा रहा था। रामलाल ने राधा के बाल पकड़े और घोड़े की तरह तेज़ी से ठोकने लगे। राधा की गांड हर धक्के पर लहरा रही थी।

    “अाह… हाँ… इसी तरह… मेरी गांड पकड़कर चोदिए… उफ्फ… मजा आ रहा है…”

    रामलाल ने एक हाथ से राधा की लटकती छातियों को दबाया, दूसरे हाथ से क्लिटोरिस रगड़ा। राधा पहली बार झड़ गईं। उनका पूरा शरीर सिहर उठा, चूत सिकुड़-सिकुड़कर लंड को दबाने लगी। लेकिन रामलाल रुके नहीं।

    वे लगातार 25-30 मिनट तक चोदते रहे। कई बार पोज़िशन बदले — कभी मिशनरी, कभी राधा ऊपर, कभी साइड से। राधा तीन बार झड़ चुकी थीं। उनका पूरा बदन पसीने और रस से तर था।

    आखिर में रामलाल ने राधा को वापस लेटाया। उन्होंने अपना लंड राधा की छातियों के बीच रखा और जोर-जोर से रगड़ने लगे। कुछ ही देर में उनका गर्म, गाढ़ा वीर्य राधा की छातियों, गर्दन, ठोड़ी और मुँह पर फैल गया। कुछ बूँदें राधा के होंठों पर भी पड़ीं।

    राधा ने जीभ निकालकर वीर्य चाट लिया और मुस्कुराई। फिर उन्होंने रामलाल के लंड को हाथ में लेकर बचा हुआ वीर्य चूस लिया।

    दोनों थके हुए, लेकिन बेहद संतुष्ट, एक-दूसरे से लिपटकर लेट गए।

    राधा ने धीरे से कहा, “ससुर जी… आज तो सारी गर्मी निकल गई… लेकिन कल फिर लगेगी तो… आप फिर उतार देंगे ना?”

    रामलाल हँसे और राधा की छाती पर हाथ फेरते हुए बोले, “जब भी गर्मी लगे, बता देना बहू… मैं पूरी रात गर्मी उतार दूँगा।”

  • पापा की सुहागरात 1

    मेरे पापा बहुत अमीर घर के हैं। उनके पास पैसे की कोई कमी नहीं। 21 साल पहले उनकी शादी मेरी मम्मी से हुई थी। दोनों बहुत खुश थे, लेकिन मेरे जन्म के बाद मम्मी को कुछ प्रॉब्लम हो गई थी। डॉक्टर ने कहा कि अब मम्मी प्रेग्नेंट नहीं हो सकतीं। पापा को एक बहुत खूबसूरत लड़की बहुत पसंद थी – नाम था रिया। वो 24 साल की थी, गोरी, लंबी, मॉडल जैसी फिगर वाली। पापा और मम्मी ने मिलकर फैसला लिया कि पापा दूसरी शादी कर लेंगे। मम्मी ने खुद कहा – “मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं, घर में बच्चा चाहिए ना… और तुम्हें भी खुशी मिलेगी।”

    शादी फिक्स हो गई। अब तैयारी शुरू हुई।

    सबसे पहले शॉपिंग। पापा ने मुझे और मम्मी को साथ लिया। सबसे महंगे ब्रांड के शॉप में गए। मम्मी ने खुद रिया के लिए लहंगा चुना – गोल्डन और रेड कलर का, बहुत भारी, गहनों वाला। रिया का माप लेकर सिलवाया। पापा ने रिया के लिए डायमंड ज्वेलरी का सेट लिया – नेकलेस, ईयररिंग्स, मंगलसूत्र सब कुछ। मम्मी ने कहा, “ये मेरी बहू के लिए है, परफेक्ट होना चाहिए।” पापा हंस रहे थे, उनकी आंखों में वो चमक थी जो शादी वाली रात की होती है।

    मम्मी को भी नया साड़ी और मेकअप सेट मिला। मैंने भी सूट लिया। फिर पापा को तैयार करने की बारी। पापा ने सबसे एक्सपेंसिव शेरवानी ऑर्डर की – व्हाइट और गोल्ड, बहुत शाही। टेलर घर पर आया, फिटिंग की।

    अगले दिन सबको शॉपिंग के बाद पार्लर जाना था। मम्मी और रिया दोनों को एक ही हाई-क्लास पार्लर में बुकिंग थी। मैं और पापा भी साथ गए। रिया को देखकर मेरा मुंह खुला रह गया – वो इतनी खूबसूरत लग रही थी। पार्लर में रिया का फेशियल, हेयर स्टाइल, मेहंदी, सब हो रहा था। उसकी नरम त्वचा पर मेहंदी लगाते समय वो हल्के से मुस्कुरा रही थी। पापा उसे घूर रहे थे, उनकी नजरें उसकी गर्दन, उसके होंठों और उसके ब्लाउज के ऊपर वाले हिस्से पर अटक रही थीं। मम्मी ने पापा को कोहनी मारी और हंस दी – “अभी तो सुहागरात बाकी है, सब्र करो।”

    पापा का भी पार्लर ट्रीटमेंट हुआ – हेयर कट, फेशियल, मसाज। वो 50 के ऊपर थे लेकिन फिट और हैंडसम लग रहे थे। शेरवानी में जब तैयार हुए तो लग रहे थे जैसे कोई राजा।

    शादी का दिन आ गया। छोटी लेकिन बहुत लग्जरी शादी थी – सिर्फ फैमिली और क्लोज फ्रेंड्स। मंदिर में फेरे हुए। रिया ने लहंगे में इतनी खूबसूरत लग रही थी कि पापा की सांसें थम सी गईं। जब पापा ने रिया को मंगलसूत्र पहनाया तो रिया की आंखें झुक गईं, लेकिन उसके होंठों पर हल्की मुस्कान थी। फेरे के बाद पापा ने रिया का हाथ पकड़ लिया और उसे गाड़ी में बिठाया।

    रात के 11 बजे गाड़ी घर पहुंची। घर पूरी तरह से फूलों और लाइट्स से सजाया हुआ था। मैं, मम्मी और बाकी सब बाहर खड़े थे। पापा ने रिया को गोद में उठाया (जैसा कि रीति है) और घर के अंदर ले आए। रिया की सांसें तेज हो रही थीं। पापा की छाती से सटकर वो चुपचाप लेटी रही।

    घर आ चुका था।

    सुहागरात की रात शुरू होने वाली थी…

    हम सबने खाना खाया। खाने के बाद माहौल थोड़ा शरमाया हुआ लेकिन रोमांटिक था। मम्मी हल्के से मुस्कुरा रही थीं। रिया की आंखें नीची थीं, उसके गालों पर हल्की लाली चढ़ी हुई थी। पापा ने सबको देखा और फिर मम्मी की तरफ मुड़कर बोले,

    “आज की रात मेरी दूसरी सुहागरात है… मैं चाहता हूँ कि तुम दोनों मेरे साथ रहो।”

    मम्मी ने हल्के से सिर हिलाया और रिया की तरफ देखकर मुस्कुराई। रिया शरमा गई लेकिन कुछ नहीं बोली।

    पापा ने रिया का हाथ पकड़ लिया और तीनों master bedroom की तरफ चल पड़े। master bedroom सच में बहुत बड़ा था – किंग साइज बेड, सोफा, ड्रेसिंग टेबल, बड़ा सा मिरर और डिम लाइट्स। पापा ने रिया को अंदर ले जाकर दरवाजा बंद कर दिया।

    मैं पहले ही चार छोटे-छोटे हाई डेफिनिशन कैमरे खरीदकर master bedroom में फिट कर चुका था। ये कैमरे इतने छोटे और छिपे हुए थे कि किसी को शक भी नहीं होता। मैंने सब कैमरों को अपने रूम के बड़े TV से कनेक्ट कर लिया था। अब मैं अपने रूम में आ गया।

    दरवाजा बंद करके मैंने TV ऑन किया।

    स्क्रीन पर master bedroom साफ-साफ दिख रहा था। चारों कैमरों से अलग-अलग एंगल थे – एक बेड के ऊपर से, एक साइड से, एक मिरर के पास से और एक थोड़ा ऊपर से।

    पापा और रिया बेड के पास खड़े थे। मम्मी बेड के एक कोने पर बैठ गई थीं, चुपचाप देख रही थीं।

    पापा ने रिया को अपनी तरफ खींचा। रिया की सांसें तेज हो रही थीं। पापा ने धीरे से रिया के लहंगे का दुपट्टा उतारा और फर्श पर गिरा दिया। रिया की गोरी गर्दन और कंधे अब खुले थे। पापा ने झुककर रिया की गर्दन पर हल्का सा किस किया। रिया के शरीर में झुरझुरी सी दौड़ गई।

    “तुम बहुत खूबसूरत हो रिया…” पापा ने धीमी आवाज में कहा और रिया को अपनी बाहों में कसकर जकड़ लिया।

    रिया ने शरमाते हुए पापा की छाती पर हाथ रखा। पापा ने रिया का चेहरा ऊपर उठाया और उसके होंठों पर धीरे से किस किया। पहले तो रिया के होंठ सख्त थे, लेकिन धीरे-धीरे वो पिघलने लगी। पापा का किस गहरा होता गया। रिया की सांसें अब और तेज हो गई थीं।

    पापा ने एक हाथ रिया की कमर पर रखा और दूसरे हाथ से उसके बालों में उंगलियां फिराईं। किस के बीच में पापा ने रिया के निचले होंठ को हल्के से काटा। रिया से एक हल्की सी सिसकारी निकल गई – “आह…”

    मम्मी चुपचाप बैठी देख रही थीं, उनके चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान थी।

    पापा ने किस छोड़कर रिया की आंखों में देखा। फिर धीरे से रिया के ब्लाउज की तरफ हाथ बढ़ाया। रिया शर्मा गई और पापा की छाती में मुंह छिपा लिया। पापा हल्के से हंसे और रिया को और कसकर अपनी बाहों में ले लिया।

    अभी सिर्फ normal romance चल रहा था… लेकिन हवा में गर्मी बढ़ने लगी थी।

    पापा ने रिया को अपनी बाहों में कसकर जकड़े रखा था। किस के बाद उन्होंने मम्मी की तरफ देखा और धीमी, गहरी आवाज में बोले,

    “शुरू हो जा…”

    मम्मी मुस्कुराईं। उनकी आंखों में एक शरारती चमक थी। वो बेड से उठीं और रिया के पास आईं। रिया अभी भी शर्मा रही थी, उसकी सांसें तेज थीं। मम्मी ने धीरे से रिया के लहंगे की साइड वाली जिप खोली और लहंगा नीचे सरका दिया। अब रिया सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में खड़ी थी।

    मम्मी ने ब्लाउज के हुक एक-एक करके खोले। ब्लाउज खुलते ही रिया की गोरी, भरी हुई ब्रेस्ट्स बाहर आ गईं – सिर्फ एक पतला सा ब्रा उन्हें ढके हुए था। रिया ने शरम से आँखें बंद कर लीं। मम्मी ने ब्रा का हुक भी खोल दिया। रिया की बड़ी-बड़ी, गोल, गोरी चूचियां पूरी तरह नंगी हो गईं। उनकी निप्पल्स हल्के गुलाबी रंग की थीं और पहले से ही थोड़ी सी खड़ी हो चुकी थीं।

    फिर मम्मी ने रिया का पेटीकोट भी उतार दिया। अब रिया सिर्फ एक पतली सी लेस वाली पैंटी में खड़ी थी। उसकी जांघें गोरी और मोटी थीं, कमर पतली, और गांड गोल-गोल। मम्मी ने आखिरी में रिया की पैंटी भी उतार दी। रिया अब पूरी तरह नंगी थी। उसकी चूत पर हल्के-हल्के बाल थे, जो साफ दिख रहे थे। रिया ने दोनों हाथों से अपनी चूचियां और चूत ढकने की कोशिश की, लेकिन मम्मी ने उसके हाथ हटा दिए और बोलीं, “शर्मा मत बेटा… आज तुम्हारी सुहागरात है।”

    अब मम्मी पापा की तरफ मुड़ीं। उन्होंने पापा की शेरवानी के बटन खोले और पूरी शेरवानी उतार दी। फिर अंडरवियर भी निकाल दिया। पापा अब बिल्कुल नंगे थे। उनका लंड एकदम तना हुआ, खड़ा और मोटा था – लंबाई अच्छी-खासी, मोटाई भी काफी, सिरा लाल और चमकदार, नसें उभरी हुईं। पापा का लंड पूरी तरह तैयार था, हल्के-हल्के झूल रहा था।

    पापा ने रिया को बेड पर लिटा दिया। रिया लेट गई, उसकी सांसें तेज हो रही थीं। पापा उसके ऊपर झुके और पहले उसके होंठों पर फिर से गहरा किस किया। किस के दौरान उनकी जीभ रिया के मुंह में घुस गई और रिया की जीभ से खेलने लगी। रिया से हल्की-हल्की सिसकारियां निकल रही थीं।

    फिर पापा ने रिया की गर्दन चूमी, उसके कंधों को चाटा। धीरे-धीरे वो नीचे उतरे और रिया की दोनों चूचियों को अपने हाथों में ले लिया। वो नरम लेकिन भरी हुई थीं। पापा ने एक चूची को जोर से दबाया और दूसरे की निप्पल को मुंह में ले लिया। वे चूसने लगे, जीभ से चाटने लगे, हल्के से काटने लगे। रिया की कमर उठने लगी। वो कराह रही थी – “आह… पापा… उफ्फ…”

    मम्मी भी अब शामिल हो गईं। उन्होंने पापा को थोड़ा हटाया और खुद रिया की दूसरी चूची को चूसना शुरू कर दिया। दोनों तरफ से रिया की चूचियां चूस-चूसकर लार से तर हो गईं। रिया की आंखें बंद थीं, उसके मुंह से लगातार हल्की सिसकारियां निकल रही थीं।

    पापा ने मम्मी की तरफ देखा और बोले, “अपने कपड़े भी उतार दो।”

    मम्मी ने अपनी साड़ी, ब्लाउज, पेटीकोट और ब्रा-पैंटी सब उतार दिए। मम्मी भी अब पूरी नंगी थीं। उनकी चूचियां रिया से थोड़ी छोटी लेकिन अभी भी अच्छी थीं, कमर पर हल्का सा मोटापा था, लेकिन गांड और जांघें अभी भी आकर्षक थीं।

    अब पापा दोनों औरतों को गर्म करने में लग गए। उन्होंने रिया को चूमते हुए एक हाथ मम्मी की चूत पर रख दिया और उंगलियों से उसकी चूत सहलाने लगे। मम्मी से भी सिसकारी निकली। फिर पापा ने रिया की जांघें फैलाईं और उसकी चूत पर हाथ फेरा। रिया की चूत पहले से ही गीली होने लगी थी। पापा ने अपनी उंगली से रिया की चूत की फांकों को अलग किया और बीच वाली गुलाबी जगह को हल्के से सहलाया। रिया ने जोर से कराहा – “आह्ह्ह… पापा…”

    मम्मी ने रिया की चूचियां दबाते हुए और चूसते हुए उसे और गर्म कर रही थीं। पापा दोनों को बारी-बारी से किस कर रहे थे, उनकी चूचियां चाट रहे थे, उनकी जांघों को सहला रहे थे। कमरे में सिर्फ तीनों की सांसों की आवाज और हल्की-हल्की कराहें गूंज रही थीं।

    दोनों औरतें अब काफी गर्म हो चुकी थीं – रिया की चूत से थोड़ी-थोड़ी चिकनाहट निकल रही थी और मम्मी भी सांसें फुला रही थीं।

  • नाना को देखा नानी की चूदाई करते

    नाना-नानी का जुनूनी राउंड

    मेरा नाम राहुल है। उम्र २१ साल। मैं अहमदाबाद में पढ़ता हूँ। मैं अपने मामा के घर गया था। मामा-मामी दोनों बाहर गए थे – किसी शादी में, दो दिन के लिए। मामा ने मुझे फोन पर बोला था, “राहुल, तू वहीं रुक जाना। नाना-नानी अकेले हैं, ८५ और ७८ साल के। तू उनके पास रहना, खाना-पीना देख लेना।”

    मैं शाम को ६ बजे पहुंच गया। मामा-मामी मुझे गेट तक छोड़कर चले गए। घर में सिर्फ नाना और नानी थे। नाना जी ८५ साल के थे, लेकिन अभी भी तगड़े दिखते थे – लंबे कद-काठी, सफेद दाढ़ी, आवाज भारी। नानी जी ७८ की थीं, लेकिन चेहरे पर अभी भी नूर था, शरीर मोटा-मोटा, बड़े-बड़े स्तन और चौड़ी कमर।

    रात का खाना हम तीनों ने साथ खाया। नानी ने रोटी-दाल बनाया था। खाते-खाते नाना जी हंस रहे थे, “राहुल बेटा, तू सो जा, हम बूढ़े लोग जल्दी सो जाते हैं।” मैं ऊपर वाले कमरे में सो गया।

    रात के करीब ११:३० बजे मुझे प्यास लगी। मैं नीचे पानी पीने गया। नाना-नानी का कमरा आधा खुला था। अंदर से हल्की-हल्की आवाजें आ रही थीं। मैंने चुपके से झांका।

    नाना जी बिस्तर पर लेटे थे। उनकी लुंगी ऊपर थी। नानी जी उनके पास बैठी थीं। नाना का ८ इंच लंबा, मोटा लंड पूरा खड़ा था – बूढ़े होने के बावजूद नसें उभरी हुईं, सिरा गुलाबी और चमकदार। नानी जी उसे दोनों हाथों से सहला रही थीं।

    “अरे वाह… आज कितना तगड़ा है…” नानी जी फुसफुसा रही थीं।
    नाना जी हंसकर बोले, “आज तुझे पूरा मजा दूंगा रानी।”

    मैं दरवाजे के पीछे छिपकर देखता रह गया। दिल जोर-जोर से धड़क रहा था।

    नानी जी ने अपनी साड़ी का पल्लू हटाया। उनके बड़े-बड़े, थोड़े झूलते स्तन बाहर आ गए। चूचियां गुलाबी-काली थीं। नाना जी ने एक हाथ बढ़ाकर उन्हें दबाया। नानी जी कराह उठीं, “आह… धीरे… अभी तो शुरू ही किया है।”

    नानी जी झुककर नाना के लंड को मुंह में ले लिया। ८ इंच का मोटा लंड उनका मुंह भर गया। वो जोर-जोर से चूस रही थीं – ऊपर-नीचे, जीभ घुमाते हुए। नाना जी की आंखें बंद थीं, “हां… रानी… चूस… ८० साल बाद भी तू ही मेरी जान है…”

    ५-६ मिनट चूसने के बाद नानी जी ऊपर चढ़ गईं। उन्होंने नाना के लंड को अपनी चूत पर रखा और धीरे-धीरे बैठ गईं। पूरा ८ इंच एक ही बार में अंदर चला गया। नानी जी की आंखें बंद हो गईं, मुंह से लंबी सांस निकली, “आह… भगवान… आज भी पूरा भर गया… कितना मोटा है तेरा…”

    फिर शुरू हुआ असली खेल। नानी जी खुद ऊपर-नीचे होने लगीं। उनके बड़े स्तन उछल-उछल कर नाना के चेहरे पर गिर रहे थे। नाना जी नीचे से जोर-जोर से धक्के दे रहे थे। कमरा “पच… पच… पच…” की आवाज से भर गया था।

    नानी जी चीख रही थीं, “हां… और जोर से… चोदो मुझे… ८५ साल के होकर भी ८ इंच का तगड़ा लंड… आह… मजा आ रहा है… और तेज…!”

    नाना जी का टाइमिंग कमाल का था। ४० मिनट तक लगातार ठोकते रहे। कभी मिशनरी, कभी डॉगी स्टाइल, कभी नानी को गोद में बिठाकर। नानी जी चार बार झड़ चुकी थीं – हर बार शरीर कांप जाता, चूत से पानी की धार निकलती।

    आखिरकार नाना जी ने जोर से धक्का मारा और नानी के अंदर ही झड़ गए। नानी जी चीखकर उन पर गिर पड़ीं, “आह… गरम… पूरा भर गया… कितना मजा आया…”

    दोनों पसीने से तर थे। नानी जी नाना की छाती पर सिर रखकर लेट गईं।

    मैं अभी भी दरवाजे के पीछे खड़ा था। मेरा अपना लंड पैंट में तना हुआ था। १५ मिनट बाद फिर आवाजें आने लगीं।

    इस बार नाना जी ने नानी को चारों हाथ-पैरों पर किया। गांड ऊपर थी। नाना ने लंड पर थूक लगाया और पूरा ८ इंच नानी की गांड में उतार दिया। नानी जोर से चिल्लाईं, “आह… गांड फट गई… लेकिन मत निकालो… चोदो…!”

    नाना जी ने ५० मिनट तक नानी की गांड मारी। नानी जी लगातार चीखती रहीं, “हां… मेरे बूढ़े राजा… आज तो मुझे स्वर्ग पहुंचा दिया… आह… और जोर से… गांड मारो…!”

    दूसरे राउंड में भी नानी तीन बार झड़ीं। आखिरकार नाना ने गांड के अंदर ही झड़ दिया।

    रात के २ बजे दोनों सो गए।

  • राज और फोरम की जुनूनी कहानी 3

    जकूजी वाला लंबा ९० मिनट का राउंड खत्म होने के बाद हम दोनों थककर बेड पर लेटे हुए थे। फोरम मेरी बांहों में समाई हुई थी। उसकी सांसें अभी भी तेज थीं और चूत बुरी तरह सूजी हुई थी। मैंने उसे प्यार से चूमते हुए कहा,

    “चल बेबी, अब डिनर करने चलते हैं। नीचे रेस्टोरेंट में कैंडल लाइट डिनर करेंगे, फिर आराम से बातें करेंगे।”

    फोरम ने तुरंत सिर हिलाया और थकी हुई आवाज में बोली,
    “नहीं राज… डिनर के बाद सीधा घर चलते हैं। मैं बहुत थक गई हूँ। चूत में अभी भी बहुत दर्द और सूजन है। मैं और नहीं सह पाऊंगी। प्लीज घर ले चलो।”

    मैंने बहुत मनाया। “बस एक डिनर तो कर लें मेरी जान। दो दिन का प्लान था ना।”
    लेकिन फोरम जिद पर अड़ी रही। “नहीं राज… अब सच में बस हो गया। मैं घर जाना चाहती हूँ।”

    मैंने सोचा कि अगर मैं और शॉपिंग करवाऊं तो शायद वो मन जाए। मैंने मुस्कुराते हुए कहा,
    “ठीक है… लेकिन चल, थोड़ी और शॉपिंग कर लेते हैं। जो तेरा मन करे खरीद लें। फिर देखते हैं।”

    फोरम ने थोड़ा सोचा और फिर मान गई। हम दोनों तैयार हुए। मैंने सफेद शर्ट और ब्लैक ट्राउजर पहना। फोरम ने कल खरीदी हुई क्रीम साड़ी पहनी। साड़ी उसकी सूजी हुई कमर और थकी हुई चाल के बावजूद भी बहुत खूबसूरत लग रही थी। मैंने उसे डायमंड नेकलेस पहना दी।

    हम होटल की लग्जरी शॉप्स में गए। मैंने उसे और शॉपिंग करवाई। पहले एक सेक्सी ब्लैक बिकिनी सेट खरीदा — जिसमें ऊपर सिर्फ पतली स्ट्रिप्स थीं और नीचे बहुत कम कपड़ा। फोरम शरमा रही थी लेकिन मैंने कहा, “ये अगली बार स्विमिंग पूल के लिए।” फिर एक महंगा परफ्यूम खरीदा — चैनल का, जो उसके शरीर पर लगाने पर बहुत अच्छी खुशबू देता। उसके बाद एक सुंदर ब्रेसलेट और कुछ छोटी-छोटी बैग्स।

    फिर वो एक घड़ी देखने लगी। बहुत महंगी लग्जरी वॉच थी — ४.५ लाख रुपये की। फोरम की आंखें चमक रही थीं। उसने कहा, “राज… ये बहुत पसंद है।”
    मैंने जानबूझकर कहा, “बेबी, ये बहुत महंगी है। अगली बार ले लेंगे।”

    फोरम ने थोड़ा मुँह बनाया और घड़ी रख दी। लेकिन कुल मिलाकर शॉपिंग में मैंने लगभग ३ लाख रुपये और खर्च कर दिए। फोरम अब थोड़ी खुश लग रही थी।

    शॉपिंग खत्म करके हम वापस सूट में आ गए। मैं थक गया था, इसलिए बेड पर लेट गया और आंखें बंद कर लीं। “थोड़ा आराम कर लेता हूँ बेबी।”

    मैं करीब २०-२५ मिनट तक लेटा रहा। जब मेरी आंख खुली तो मैं हैरान रह गया।

    फोरम पूरी तरह नंगी हो चुकी थी। वो मेरे पैरों के पास बैठी हुई थी। उसने मेरी पैंट का बटन खोल दिया था और जिपर नीचे कर दी थी। मेरा लंड बाहर निकालकर हाथ में पकड़े हुए थी। वो उसे हल्का-हल्का सहला रही थी। उसकी आंखों में शर्म और जुनून दोनों थे।

    “फोरम…” मैंने आश्चर्य से कहा।

    वो शरमाते हुए मुस्कुराई और बोली, “शॉपिंग का पावर है ना राज… तुमने इतना सब खरीदा… तो मैं भी तुम्हें खुश कर दूँ।”

    फिर वो मेरे ऊपर चढ़ आई। पूरी तरह नंगी, उसके सूजे हुए स्तन हिल रहे थे। उसने खुद से कंडोम का पैकेट फाड़ा, मेरे लंड पर कंडोम चढ़ाया और लुब्रिकेंट लगाया। फिर मेरे लंड को अपनी सूजी हुई चूत पर रखा और धीरे से बैठ गई।

    “आह… राज… अभी भी दर्द है… लेकिन…”
    वो धीरे-धीरे नीचे बैठी। पूरा ९ इंच उसकी चूत में घुस गया। फोरम कराह उठी, “आह… सूजन… बहुत दर्द… लेकिन… मैं करूंगी…”

    फिर वो खुद ऊपर-नीचे होने लगी। पहला राउंड उसने खुद शुरू किया। वो मेरे ऊपर बैठकर काउगर्ल पोजीशन में चोद रही थी। उसके सूजे हुए स्तन उछल रहे थे। मैं नीचे से उसके कूल्हों को पकड़कर मदद कर रहा था। फोरम कराह रही थी, “आह… राज… दर्द हो रहा है… लेकिन अच्छा भी लग रहा है… हां…”

    पहला राउंड करीब २५ मिनट चला। फिर वो थक गई तो मैंने उसे नीचे लिटाया और दूसरा राउंड शुरू किया। इस बार मैंने उसे मिशनरी में चोदा। धीरे-धीरे लेकिन गहराई से। फोरम पूरे समय कराहती रही — “आह… राज… मेरी चूत सूज गई है… फिर भी… हां… चोदो…”

    दूसरा राउंड भी करीब ३० मिनट चला। दोनों राउंड में फोरम कई बार झड़ गई। आखिरकार मैं भी झड़ गया।

    सेक्स खत्म होने के बाद फोरम मेरी छाती पर गिर पड़ी। वो हांफ रही थी। उसकी चूत अब और ज्यादा सूज गई थी लेकिन चेहरा संतुष्ट था।

    वो धीरे से बोली, “राज… शॉपिंग के बदले ये दे दिया… अब खुश हो ना?”

    मैंने उसे कसकर गले लगा लिया और कहा, “बहुत खुश हूँ मेरी रानी। तू सच में मेरी जान है।”

    हम दोनों कुछ देर ऐसे ही लेटे रहे। बाहर रात हो चुकी थी। अब आगे क्या होगा, ये फोरम के मन पर निर्भर था।

    दूसरे राउंड के बाद फोरम मेरी छाती पर लेटी हुई हांफ रही थी। उसकी सूजी हुई चूत अभी भी मेरे लंड के पास चिपकी हुई थी। मैंने उसके बाल सहलाते हुए कहा,

    “चल बेबी, अब डिनर करने चलते हैं।”

    लेकिन फोरम ने थकी हुई आवाज में जवाब दिया, “नहीं राज… अब डिनर भी नहीं। मैं बहुत थक गई हूँ। बस घर चलते हैं।”

    मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “ठीक है, लेकिन रात का डिनर तो कर लें। फिर एक छोटा सा सरप्राइज भी है तेरे लिए।”

    हम दोनों कपड़े पहनकर नीचे रेस्टोरेंट गए। कैंडल लाइट डिनर था। फोरम खाना खाते समय भी बार-बार अपनी जांघें कसकर बंद कर रही थी क्योंकि चूत में अभी भी सूजन और दर्द था। डिनर खत्म होते ही वो फिर बोली, “अब घर चलते हैं राज।”

    मैंने उसे रोकते हुए कहा, “बेबी, एक बात सुनो। वो घड़ी जो तुझे बहुत पसंद आई थी ना… ४.५ लाख वाली… मैं तुझे दिलवा दूंगा। लेकिन उसके बदले में मुझे तेरी गांड मारने दे। सिर्फ एक राउंड।”

    फोरम की आंखें फट गईं। वो तुरंत बोली, “नहीं राज! बिल्कुल नहीं। मैं वर्जिन थी, चूत ही फट गई, अब गांड? नहीं… मैं नहीं कर पाऊंगी। बहुत दर्द होगा।”

    मैंने बहुत मनाया। “बस एक बार मेरी जान। घड़ी तेरी हो जाएगी। मैं बहुत धीरे करूंगा।”

    फोरम ने १०-१२ मिनट तक मना किया। वो रोने लगी, “राज प्लीज… मत करो… मैं डर रही हूँ।”

    आखिरकार जब मैंने कहा, “ठीक है, अगर नहीं तो घड़ी नहीं लूंगा,” तो वो थोड़ा नरम पड़ी। उसने आंसू पोछते हुए कहा, “ठीक है… लेकिन बहुत धीरे करना… और अगर बहुत दर्द हो तो रुक जाना।”

    हम वापस सूट में आ गए। मैंने तुरंत घड़ी की शॉप में कॉल करके डिलीवरी मंगवा ली। १५ मिनट बाद घड़ी आ गई। मैंने फोरम की कलाई में पहना दी। वो घड़ी देखकर थोड़ी खुश हुई लेकिन डर भी साफ दिख रहा था।

    मैंने उसे नंगा किया। फोरम चारों हाथ-पैरों के बल बेड पर हो गई। मैंने उसके गांड के छेद पर बहुत अच्छे से लुब्रिकेंट लगाया। मेरा ९ इंच का लंड भी लुब्रिकेंट से चिकना कर लिया और कंडोम चढ़ा लिया।

    “आराम से बेबी…” मैंने कहा और लंड की नोक को उसके गांड के छोटे से छेद पर रखा।

    जैसे ही मैंने धक्का दिया, सिर्फ सिरा अंदर गया।

    “आआआह… राज… निकालो… बहुत दर्द… चीख…!” 
    फोरम जोर से चिल्लाई और रोने लगी। उसका पूरा शरीर कांप रहा था।

    मैं रुका नहीं। धीरे-धीरे आगे बढ़ता गया। २ इंच… ३ इंच… ४ इंच… हर इंच पर फोरम बुरी तरह चिल्ला रही थी और रो रही थी। 
    “राज… मेरी गांड फट गई… आह… बहुत दर्द… रो रही हूँ… प्लीज निकालो… चीख…!”

    ५ इंच होने पर उसकी गांड से हल्का खून भी निकलने लगा। फोरम अब जोर-जोर से चिल्ला रही थी, “आह… राज… मार डालोगे… बहुत जलन… रो… चिल्ला… बस करो…!”

    लेकिन मैं नहीं रुका। पूरे ९० मिनट तक मैंने उसकी गांड मारी। पहले धीरे-धीरे, फिर थोड़ी तेजी से। फोरम पूरे समय रोती रही, चिल्लाती रही, तकिए को मुंह से काटती रही। उसके नाखून बेडशीट को नोच रहे थे। “राज… बहुत हो गया… गांड खराब हो गई… आह… चीख… रो… प्लीज…!”

    ९० मिनट बाद मैं उसके गांड में झड़ गया। फोरम थककर बेड पर गिर पड़ी। उसकी गांड बुरी तरह सूज गई थी और लाल हो गई थी।

    फिर मैंने उसे चूत में एक छोटा सा राउंड और किया। करीब २० मिनट तक धीरे-धीरे चोदा। उसके बाद हम दोनों थककर सो गए।

    सुबह का सीन

    सुबह ६:४५ बजे मैं उठा। फोरम अभी भी गहरी नींद में सो रही थी — नंगी, घुटनों को छाती से लगाकर। मैंने चुपके से कंडोम लगाया, लुब्रिकेंट लगाया और उसके पीछे लेट गया।

    धीरे से उसके गांड के छेद पर लंड रखा और एक जोरदार धक्का दिया। पूरा ९ इंच एक ही झटके में उसकी गांड में घुस गया।

    “आआआह… राज… क्या कर रहे हो… चीख…!” 
    फोरम नींद से चौंककर जोर से चिल्ला उठी। आंसू तुरंत निकल आए। “बहुत दर्द… गांड फट गई… रो… निकालो…!”

    मैंने उसे कसकर पकड़ लिया और पूरे २५ मिनट तक उसकी गांड मारी। फोरम लगातार चिल्लाती और रोती रही। आखिरकार मैं झड़ गया।

    फिर हमने नाश्ता किया। नाश्ते के बाद मैंने उसे एक लास्ट राउंड चूत में मारा — मिशनरी पोजीशन में, करीब ३० मिनट तक। फोरम इस बार कम रोई लेकिन फिर भी कराह रही थी।

    आखिर में हमने चेकआउट किया। मैंने फोरम को गाड़ी में बिठाया। उसकी चाल बहुत लड़खड़ा रही थी। गांड और चूत दोनों बुरी तरह सूजी हुई थीं। वो मेरे कंधे पर सिर रखकर बैठी रही।

    घर पहुंचकर मैंने उसे गले लगाया और कहा, “मेरी रानी… अगली बार फिर ले जाऊंगा।”

    फोरम ने थके हुए लेकिन प्यार भरे स्वर में कहा, “राज… तुम बहुत शैतान हो… लेकिन मैं तुम्हारी हूँ।”

  • राज और फोरम की जुनूनी कहानी 2

    एक राउंड पूरा होने तक फोरम लगातार चिल्लाती और रोती रही। मैंने धीरे-धीरे स्पीड बढ़ाई लेकिन ज्यादा नहीं। करीब १५-२० मिनट तक अंदर-बाहर करने के बाद मैं झड़ गया। कंडोम में गरम स्पर्म का फव्वारा छूटा।

    फोरम थककर बिस्तर पर पड़ी थी। उसकी सांसें अभी भी तेज थीं। चूत से थोड़ा खून और पानी मिला हुआ निकल रहा था। मैंने कंडोम उतारा, उसे गले लगा लिया और उसके माथे पर किस किया।

    “मेरी रानी… तू बहुत बहादुर है। अब दर्द कम हो जाएगा। मैं तुझे बहुत प्यार करता हूँ।”

    फोरम मेरी छाती में मुंह छिपाकर धीरे से रो रही थी और फुसफुसा रही थी, “राज… बहुत दर्द हुआ… लेकिन… तुम्हारी हूँ अब…”

    हम दोनों पसीने और थकान से तर थे। मैंने उसे कसकर गले लगा रखा था।

    पहला राउंड खत्म होने के बाद हम दोनों थककर बेड पर लेटे हुए थे। फोरम मेरी छाती से चिपकी हुई थी। उसकी सांसें अभी भी तेज चल रही थीं। चूत से हल्का खून और पानी मिला हुआ निकल रहा था। मैं उसके बालों को प्यार से सहला रहा था और बार-बार उसके माथे पर किस कर रहा था।

    “मेरी जान… तू ठीक है ना?” मैंने धीरे से पूछा।
    फोरम ने सिर्फ सिर हिलाया और मेरी छाती में मुंह छिपा लिया। वो अभी भी हल्का-हल्का रो रही थी।

    ठीक १० मिनट बाद मैंने उसे फिर से चूमना शुरू किया। उसके होंठों को चूसा, गर्दन पर किस किए। मेरे हाथ उसके स्तनों पर फिरने लगे। फोरम की सांसें फिर से तेज हो गईं। मैंने उसके कान में फुसफुसाया, “बेबी… दूसरा राउंड शुरू करते हैं। लेकिन अब तेरी मर्जी से। तू बोल जब शुरू करना हो।”

    फोरम ने कुछ सेकंड सोचा, फिर शरमाते हुए धीरे से बोली, “राज… शुरू कर दो… लेकिन बहुत धीरे… प्लीज।”

    मैंने मुस्कुराकर उसे फिर मिशनरी पोजीशन में लिटा दिया। उसके पैर फैलाए और अपनी कमर के दोनों तरफ रख दिए। नया कंडोम निकाला, खुद लगाया और लुब्रिकेंट अच्छे से लगाया। लंड फिर से पूरा खड़ा हो चुका था।

    मैंने लंड की नोक को उसकी सूजी हुई चूत पर रखा और बहुत धीरे से धक्का दिया। सिर्फ १ इंच अंदर गया।

    “आह… राज… फिर दर्द… चिल्ला…!”
    फोरम फिर से चिल्ला उठी। उसकी चूत अब और भी सूज गई थी, इसलिए दर्द पहले से ज्यादा था। वो रोने लगी। आंसू उसके गालों पर बह रहे थे।

    मैं रुका नहीं। धीरे-धीरे २ इंच… ३ इंच… हर इंच पर फोरम जोर-जोर से चिल्ला रही थी और रो रही थी।
    “राज… बहुत दर्द हो रहा है… आह… निकालो… रो… मैं सह नहीं पा रही… चीख…!”

    लेकिन इस बार मैंने उसकी मर्जी से शुरू किया था, इसलिए मैं धीरे-धीरे आगे बढ़ता रहा। ५ इंच होने पर उसकी चूत बुरी तरह सूज चुकी थी। लाल हो गई थी और हर धक्के पर वो तड़प रही थी। उसके नाखून मेरी पीठ पर गहरे निशान बना रहे थे। वो बार-बार चिल्लाती, “राज… बस… बहुत हो गया… आह… दर्द… रो रही हूँ…”

    मैं बीच-बीच में रुककर उसके होंठ चूमता, स्तन चूसता, आंसू पोछता और कहता, “मेरी रानी… बस थोड़ा और… तू बहुत अच्छी है… मैं तुझे प्यार करता हूँ।”

    इस दूसरे राउंड में मैंने पूरी ५५ मिनट तक चोदा। पहले २० मिनट तो सिर्फ धीरे-धीरे अंदर-बाहर किया। उसके बाद थोड़ी स्पीड बढ़ाई लेकिन ज्यादा नहीं। फोरम पूरे समय चिल्लाती और रोती रही। कभी-कभी वो मेरी कमर को अपने पैरों से कसकर पकड़ लेती, कभी धक्का देने की कोशिश करती। उसकी चूत अब बुरी तरह सूज गई थी – लाल, फूली हुई, हर बार लंड निकलते या घुसते समय वो जोर से कराहती।

    “आह… राज… मेरी चूत फट गई… बहुत सूज गई है… चिल्ला… रो… प्लीज रुक जाओ…”

    लेकिन मैं रुका नहीं। ५५ मिनट पूरे होने पर मैं जोर से झड़ गया। कंडोम में गरम स्पर्म भर गया। फोरम भी इस बार थोड़ा सा झड़ गई थी, लेकिन दर्द ज्यादा था इसलिए वो सिर्फ हांफ रही थी और रो रही थी।

    राउंड खत्म होते ही मैंने लंड बाहर निकाला। फोरम की चूत बुरी तरह सूजी हुई थी – लाल, फूली, थोड़ा खून भी अभी भी निकल रहा था। वो बेड पर लेटी हुई कराह रही थी।

    मैंने तुरंत उसे गोद में उठा लिया। “आ जा बेबी… अब आराम करेंगे।”

    मैं उसे जकूजी टब की तरफ ले गया। टब में गर्म पानी भर दिया। पानी में थोड़ा बबल्स और खुशबू वाला शॉवर जेल डाला। पानी अच्छे से गर्म था लेकिन जलाने वाला नहीं। मैं पहले खुद टब में बैठ गया, फिर फोरम को अपनी गोद में बिठा लिया।

    गर्म पानी उसकी सूजी हुई चूत पर पड़ते ही फोरम ने राहत की सांस ली। “आह… राज… अच्छा लग रहा है… गर्म पानी… दर्द कम हो रहा है…”

    मैं उसके पीछे बैठा था। उसकी पीठ मेरी छाती से सटी हुई थी। मैंने दोनों हाथों से उसके स्तनों को हल्का-हल्का दबाते हुए मसाज देना शुरू किया। उसके बालों को सहलाया, गर्दन पर किस किए। फोरम ने आंखें बंद कर लीं और मेरी गोद में ढीली पड़ गई। पानी में हम दोनों १५-२० मिनट तक बैठे रहे। बीच-बीच में मैं उसके कान में प्यार भरी बातें कहता रहा – “तू मेरी रानी है… मैं तुझे कभी दुख नहीं पहुंचाऊंगा… अब तू पूरी तरह मेरी हो गई…”

    नहाने के बाद मैंने उसे टॉवल से अच्छे से पोंछा। फिर गोद में उठाकर वापस बेड पर ले आया। उसे बेड पर लिटाया और खुद उसके बगल में लेट गया। फोरम तुरंत मेरी छाती से चिपक गई। उसकी सूजी हुई चूत अभी भी दर्द कर रही थी, लेकिन गर्म पानी से थोड़ी राहत मिल गई थी।

    वो धीरे से बोली, “राज… बहुत दर्द हुआ… लेकिन… मैं तुम्हारी हूँ अब…”

    मैंने उसे कसकर गले लगा लिया और उसके माथे पर किस किया। “आराम कर मेरी जान। हम अभी सोते हैं।”

    रात भर हम दोनों कसकर एक-दूसरे से चिपके सोए रहे। फोरम मेरी छाती पर सिर रखे, एक टांग मेरी टांग पर रखे, पूरी तरह नंगी मेरे बांहों में समाई हुई थी। मैंने रात में कई बार उसके बाल सहलाए, माथे पर किस किए और उसे अच्छे से कवर कर दिया था। एसी की ठंडी हवा में भी उसके शरीर की गर्मी मुझे अच्छी लग रही थी।

    सुबह ठीक ७:०५ बजे मेरी आंख खुली। सूट की खिड़कियों से हल्की सुबह की रोशनी आ रही थी। मैंने बगल में देखा — फोरम अभी भी गहरी नींद में सो रही थी। उसके बाल बिखरे हुए थे, होंठ थोड़े खुले थे, चेहरा थकान और सुंदरता से भरा हुआ था। मैंने धीरे से अपना हाथ उसके शरीर पर फेरा। उसकी नरम छाती मेरी छाती से सटी हुई थी।

    मैंने चुपके से चादर हटाई और नीचे देखा। फोरम की चूत अब भी काफी सूजी हुई थी, लेकिन रात के मुकाबले थोड़ी कम हो गई थी। लालिमा अभी भी थी, हल्का सूजन था, लेकिन देखने में और भी सेक्सी लग रही थी। मैंने देखा कि उसकी चूत थोड़ी-थोड़ी खुली हुई थी — कल रात के दो राउंड का असर साफ दिख रहा था।

    मेरा लंड फिर से खड़ा होने लगा। मैंने बिना आवाज किए बेडसाइड टेबल से नया कंडोम और लुब्रिकेंट निकाला। कंडोम को चुपके से अपने ९ इंच के लंड पर चढ़ा लिया और अच्छे से लुब्रिकेंट लगा लिया। फिर मैं फोरम के पैरों को बहुत धीरे से फैलाया, ताकि वो न जागे।

    मैं उसके ऊपर आ गया। लंड की नोक को उसकी सूजी हुई चूत के मुंह पर रखा और बहुत धीरे से पहला धक्का दिया। सिर्फ सिरा अंदर चला गया।

    फोरम की आंखें अचानक खुल गईं। वो चौंककर बोली, “आह… राज… क्या कर रहे हो…?”
    उसकी आवाज में नींद और दर्द का मिश्रण था।

    मैंने तुरंत उसके होंठों पर किस किया और कान में फुसफुसाया, “सुबह हो गई मेरी जान… तू बहुत प्यारी लग रही थी सोते हुए… मैं रोक नहीं पाया…”

    फिर मैंने दूसरा धक्का दिया। अब २ इंच अंदर हो गए।
    “आह… राज… अभी भी दर्द हो रहा है… चीख… सूज गई है… धीरे… प्लीज…”
    फोरम थोड़ी चिल्लाई और कराहने लगी। लेकिन वो पूरी तरह जाग चुकी थी। उसने अपनी दोनों बाहें मेरी पीठ पर डाल दीं और मुझे कसकर पकड़ लिया।

    मैं रुका नहीं। धीरे-धीरे आगे बढ़ता गया — ३ इंच… ४ इंच… हर धक्के पर फोरम हल्की-हल्की चिल्ला रही थी और “आह… आह…” करके मेक ले रही थी। उसकी सूजी चूत अभी भी बहुत तंग थी, लेकिन कल रात की वजह से थोड़ी ढीली भी हो गई थी। फिर भी हर बार लंड घुसते समय वो तड़प जाती, “राज… बहुत सूजन है… दर्द… लेकिन… मत रुको…”

    मैंने पूरे १०-१२ मिनट तक धीरे-धीरे चोदा। बीच-बीच में उसके स्तनों को चूसता, गर्दन चबाता और उसे चूमता रहा। फोरम अब रोने की बजाय सिर्फ कराह रही थी और कभी-कभी मेरी कमर को अपने पैरों से कसकर पकड़ लेती।

    पहला सुबह का राउंड करीब १८ मिनट में खत्म हुआ। मैं जोर से झड़ गया। कंडोम भर गया। फोरम भी हल्का सा झड़ गई थी। वो हांफते हुए मेरी छाती पर गिर गई।

    लेकिन मैंने रुकने नहीं दिया। सिर्फ ५ मिनट आराम करके मैंने दूसरा राउंड शुरू कर दिया। इस बार मैंने उसे साइड पोजीशन में किया — उसके एक पैर को ऊपर उठाकर। लंड फिर से अंदर किया।

    “आह… राज… फिर… सूज गई चूत… चिल्ला… आह… मेक…!”
    फोरम फिर चिल्लाई लेकिन अब दर्द कम था। वो “आह… आह…” करके मेक ले रही थी। मैंने इस राउंड में थोड़ी तेजी से चोदा। २२ मिनट तक लगातार धक्के दिए। उसके सूजे हुए स्तन मेरे हाथों में थे। मैं उन्हें दबाता, चूसता और नीचे से जोर-जोर से ठोकता रहा।

    फोरम पूरे समय कराहती रही — “राज… हां… धीरे… आह… अच्छा लग रहा है… लेकिन सूजन… आह…!”
    दूसरा राउंड भी खत्म हुआ। मैं फिर झड़ गया। फोरम की चूत अब और ज्यादा सूज गई थी, लेकिन वो अब दर्द के साथ-साथ मजा भी ले रही थी।

    दोनों राउंड खत्म होने के बाद मैंने कंडोम उतारा और फोरम को कसकर गले लगा लिया। वो मेरी बांहों में पूरी तरह ढीली पड़ गई थी। उसके चेहरे पर पसीना था, बाल बिखरे हुए थे, होंठ सूजे हुए थे।

    “राज… सुबह-सुबह… तुम बहुत शैतान हो…” वो शरमाते हुए बोली और मेरी छाती में मुंह छिपा लिया।

    मैंने हंसते हुए उसके बाल सहलाए और कहा, “मेरी रानी… तू सोते हुए इतनी प्यारी लग रही थी कि रोक नहीं पाया। अब उठो, हम नाश्ता करेंगे। फिर और मजा करेंगे।”

    फोरम ने शरमा कर मुझे और कसकर गले लगा लिया। उसकी सूजी हुई चूत अभी भी मेरी जांघ से सटी हुई थी। हम दोनों कुछ देर ऐसे ही लेटे रहे — प्यार, थकान और सुबह की गर्माहट में डूबे हुए।

    दो सुबह के राउंड के बाद फोरम मेरी छाती से चिपकी हुई थी। उसकी सांसें अभी भी भारी थीं और चूत बुरी तरह सूजी हुई थी। मैंने उसे प्यार से चूमते हुए कहा, “मेरी जान, अब हम दोनों फ्रेश हो जाते हैं।”

    मैं सबसे पहले उठा और बाथरूम में चला गया। गर्म पानी से अच्छे से नहाया, दांत ब्रश किए, चेहरा धोया। जब मैं बाहर निकला तो सिर्फ एक सफेद टॉवल कमर पर लपेटे हुए था। फोरम अब बेड पर बैठ गई थी। उसके बाल बिखरे हुए थे, चेहरा थका हुआ लेकिन बहुत प्यारा लग रहा था।

    “तू भी फ्रेश हो जा बेबी,” मैंने मुस्कुराते हुए कहा।

    फोरम शरमाते हुए उठी। जब वो चलने लगी तो उसकी चाल थोड़ी अजीब थी — पैरों को थोड़ा फैलाकर चल रही थी क्योंकि चूत में अभी भी सूजन और दर्द था। वो बाथरूम में गई। मैंने बाहर खड़े होकर सुना — वो गर्म पानी से नहा रही थी और हल्का-हल्का कराह रही थी जब पानी उसकी सूजी चूत पर पड़ता। १५ मिनट बाद वो बाहर आई। उसके बाल गीले थे, शरीर पर सिर्फ एक सफेद टॉवल लपेटा हुआ था। टॉवल उसके स्तनों को मुश्किल से ढक पा रहा था और ऊपर से उसकी गोरी जांघें दिख रही थीं।

    हम दोनों अब थोड़े फ्रेश हो चुके थे। मैंने रूम सर्विस को फोन किया और नाश्ता मंगवाया — फ्रेश फ्रूट्स (तरबूज, अंगूर, स्ट्रॉबेरी), ऑमलेट, टोस्ट, जूस, कॉफी और कुछ स्वीट डिश।

    नाश्ता आ गया। मैंने ट्रे को बेड पर रख दिया। हम दोनों पूरी तरह नंगे थे। फोरम शरमा रही थी लेकिन मैंने उसे अपनी गोद में बिठा लिया। हमने साथ में नाश्ता किया। मैं स्ट्रॉबेरी उसके मुंह में डालता, वो मेरे मुंह में अंगूर रखती। बीच-बीच में मैं उसके स्तनों को हल्का छू लेता या गर्दन पर किस कर लेता। फोरम हंस रही थी लेकिन जब मैंने कहा, “अब एक राउंड और कर लें,” तो उसने तुरंत मना कर दिया।

    “नहीं राज… अब बस हो गया। बहुत दर्द हो रहा है। मेरी चूत बुरी तरह सूज गई है। प्लीज आज और मत करो।”

    मैंने जिद की, “बस एक बार बेबी… जकूजी में। पानी में बहुत आराम रहेगा।”

    फोरम ने बहुत मना किया। “नहीं… सच में बस हो गया। मैं चल भी नहीं पा रही ठीक से।”

    मैंने उसे मनाने के लिए १० मिनट तक कोशिश की — कभी गले लगाकर, कभी उसके कान में प्यार भरी बातें करके, कभी उसके स्तनों को सहलाकर। आखिरकार वो थोड़ी मान गई। “ठीक है… लेकिन सिर्फ जकूजी में… और बहुत धीरे… वरना मैं रोने लगूंगी।”

    मैं खुश हो गया। हम दोनों नंगे ही जकूजी टब की तरफ गए। मैंने टब में गर्म पानी भरा, बबल्स चालू किए और थोड़ा खुशबू वाला ऑयल डाला। पानी अच्छे से गर्म लेकिन सहने लायक था। मैं पहले टब में बैठ गया। फिर फोरम को अपनी गोद में बिठा लिया — उसकी पीठ मेरी छाती से सटी हुई।

    मैंने लंड पर फिर कंडोम चढ़ाया और लुब्रिकेंट लगाया। फोरम की सूजी चूत पानी में थोड़ी राहत महसूस कर रही थी। मैंने उसे अपनी गोद में सही से सेट किया और लंड को उसकी चूत पर रखा। धीरे से ऊपर से धक्का दिया।

    “आह… राज… फिर दर्द…!” फोरम हल्की चिल्लाई।

    लेकिन पानी की वजह से घर्षण कम था। मैंने बहुत धीरे-धीरे पूरा ९ इंच अंदर कर दिया। फोरम रोने लगी, “आह… सूजन… बहुत दर्द… राज… रो रही हूँ…”

    मैंने उसे कसकर पकड़ लिया और जकूजी में ही धीरे-धीरे चोदना शुरू कर दिया। पानी छप-छप कर उछल रहा था। मैंने एक हाथ से उसके स्तन दबाए, दूसरे हाथ से क्लिटोरिस सहलाया। फोरम लगातार रो रही थी और चिल्ला रही थी — “आह… राज… बहुत तेज… सूज गई है… चीख… प्लीज धीरे… रो… आह…!”

    यह राउंड पूरे ९० मिनट तक चला। मैंने उसे कई पोजीशन में चोदा — कभी वो मेरी गोद में ऊपर-नीचे, कभी मैं पीछे से, कभी साइड में। पानी के अंदर होने की वजह से हर धक्का गहरा लग रहा था। फोरम पूरे ९० मिनट तक रोती रही, चिल्लाती रही, कभी मेरी बांहों को कसकर पकड़ लेती, कभी “बस हो गया… रो रही हूँ…” कहती। लेकिन बीच में कई बार वो खुद भी हिलने लगी। उसकी चूत अब बुरी तरह सूज चुकी थी और लाल हो गई थी।

    आखिरकार ९० मिनट बाद मैं जोर से झड़ गया। फोरम भी थककर मेरी गोद में ढीली पड़ गई। वो हांफ रही थी और आंसू बहा रही थी।

    राउंड खत्म होने के बाद मैंने उसे टब से उठाया। अच्छे से टॉवल से पोंछा। फोरम की चाल अब और भी लड़खड़ा रही थी। मैंने उसे गोद में उठाकर बेड पर लिटा दिया।

    फिर हम दोनों ने कपड़े पहने — मैंने सफेद शर्ट और ब्लैक ट्राउजर पहना, फोरम ने कल खरीदी हुई नई क्रीम साड़ी पहनी। साड़ी उसकी सूजी हुई चूत और थकी हुई शरीर पर भी बहुत खूबसूरत लग रही थी। मैंने उसे डायमंड नेकलेस भी पहना दी।

    अब हम डिनर के लिए तैयार थे, लेकिन फोरम की चाल अभी भी धीमी थी और चेहरा थका हुआ था। वो मेरे बाजू में आकर बोली, “राज… अब सच में बस… मैं बहुत थक गई हूँ।”

    मैंने उसे गले लगा लिया और कहा, “चलो मेरी रानी, अब सिर्फ डिनर और आराम।”

  • राज और फोरम की जुनूनी कहानी 1

    अगला दिन, सुबह १०:३० बजे।
    मैं अपने अहमदाबाद के लग्जरी फ्लैट के बेडरूम में लेटा हुआ था। सिर्फ ब्लैक बॉक्सर पहने, छाती नंगी। कल रात मैंने फोरम को ताज होटल में दो दिन के लिए साथ रहने का प्लान बताया था। लेकिन वो अभी तक कोई साफ जवाब नहीं दे रही थी। मेरा दिल तेज-तेज धड़क रहा था। मैंने फोन उठाया और व्हाट्सएप पर लंबा मैसेज टाइप करना शुरू किया।

    “मेरी जान फोरम ❤️
    कल सुबह ५ बजे ताज होटल की लॉबी में मिलते हैं। मैंने पहले से ही १७वीं मंजिल का प्रेसिडेंशियल सूट बुक कर लिया है – पूरा प्राइवेट, जकूजी, बालकनी, किंग साइज बेड। दो दिन सिर्फ तू और मैं। पहले दिन शॉपिंग करवाऊंगा – साड़ी, ड्रेस, लिंगरी, ज्वेलरी, जो तेरा मन करे। शाम को कैंडल लाइट डिनर, फिर रूम में सिर्फ रोमांस। मैं तेरे बाल सहलाऊंगा, तेरे होंठ चूमूंगा, तेरे शरीर को छूकर तुझे महसूस करूंगा। कोई जल्दबाजी नहीं। जब तक तू तैयार न हो, कुछ नहीं करूंगा। मैं तेरे बिना अधूरा हूँ बेबी। प्लीज हाँ बोल दे। मैं तेरी हर इच्छा पूरी करूंगा। तेरी मुस्कान के लिए पूरा ताज बुक करवा सकता हूँ।”

    मैसेज भेजकर मैं इंतजार करने लगा। ४ मिनट बाद “टाइपिंग…” दिखा। फिर रुक गया। फिर फिर से टाइपिंग। आखिरकार मैसेज आया:

    “राज… दो दिन होटल में? मैं बहुत डर रही हूँ। घरवाले क्या कहेंगे? और… मैं अभी वर्जिन हूँ। तुम जानते हो ना?”

    मैंने तुरंत रिप्लाई किया:
    “हाँ मेरी जान, मैं सब जानता हूँ। लेकिन दो दिन सिर्फ तेरा और मेरा समय होगा। अगर तू नहीं चाहे तो हम सिर्फ बातें करेंगे, गले लगेंगे, किस करेंगे। मैं तेरी इज्जत का पूरा ख्याल रखूंगा। घर पर बोल देना फ्रेंड्स के साथ शॉपिंग और पार्टी है। मैं सब संभाल लूंगा। प्लीज फोरम… मुझे तेरे साथ रहना है।”

    फिर मैंने वीडियो कॉल लगा दी। घंटी बजती रही। सातवीं घंटी पर उसने कॉल उठाई। उसकी प्यारी गोरी फेस स्क्रीन पर आई। बाल खुले, आंखों में शर्म और डर का मिश्रण। पीछे उसका रूम दिख रहा था।

    “राज… तुम सच में दो दिन होटल में रहना चाहते हो?” उसकी आवाज थोड़ी कांप रही थी।

    मैंने बहुत प्यार से कहा, “हाँ बेबी। लेकिन मैं तुझे कभी मजबूर नहीं करूंगा। हम पहले शॉपिंग करेंगे, तुझे नई-नई चीजें खरीद दूंगा। फिर डिनर में कैंडल लाइट में बातें करेंगे। रूम में जाकर मैं तुझे अपनी गोद में बैठाकर बाल सहलाऊंगा, गर्दन चूमूंगा, जितना तू चाहे उतना प्यार करूंगा। अगर तू कहेगी ‘बस’ तो मैं रुक जाऊंगा। मैं सिर्फ तेरे साथ होना चाहता हूँ। तेरी सांसों को महसूस करना चाहता हूँ। प्लीज मेरी रानी… हाँ बोल दे।”

    फोरम ने लंबी सांस ली। उसकी आंखें नीची हो गईं। “लेकिन राज… अगर कुछ हो गया तो?”

    “कुछ नहीं होगा जो तू नहीं चाहे। मैं प्रॉमिस करता हूँ। बस तेरे साथ दो दिन बिताना है। तेरे हाथ थामना है, तेरे पैरों को अपने पैरों से रगड़ना है। तेरी हंसी सुननी है।”

    उसने फिर २-३ मिनट सोचा। फिर धीरे से बोली, “ठीक है… लेकिन बहुत डर लग रहा है। कल सुबह ५ बजे आऊंगी। लेकिन अगर मैं मना कर दूं तो मान जाना।”

    मैं खुशी से मुस्कुरा दिया। “प्रॉमिस बेबी। मैं तुझे कभी दुख नहीं पहुंचाऊंगा। कल ५ बजे लॉबी में गुलदस्ता लेकर इंतजार करूंगा।”

    फिर हमारी बातें रात तक चलती रहीं। मैंने उसे डिटेल में बताया कि कैसे हम शॉपिंग करेंगे, कौन-कौन सी ड्रेस खरीदेंगे, कैसे डिनर में रोमांस करेंगे। फोरम शरमा-शरमा कर हंसती रही। रात ११:५५ बजे उसने आखिरी मैसेज किया:

    “राज… मैं आ रही हूँ। लेकिन प्लीज मुझे अच्छे से रखना। ❤️”

    मैंने रिप्लाई किया: “तू मेरी जान है। मैं तेरी हर खुशी का ख्याल रखूंगा। सो जा अब, कल सुबह मिलते हैं।”

    अगली सुबह ७:१५ बजे मैं उठा। दिल में उत्साह था। सबसे पहले मैंने अपना प्राइवेट पार्ट वैक्सिंग के लिए अपॉइंटमेंट लिया। सैलून पहुंचकर मैंने पूरा साफ करवाया – लंड, अंडकोष, आस-पास का सारा एरिया। वैक्सिंग के बाद मेरा ९ इंच का लंड बिल्कुल चिकना, चमकदार और मोटा लग रहा था। नसें साफ उभरी हुईं, सिरा गुलाबी और तैयार। मैंने महंगा परफ्यूम लगाया, सफेद शर्ट और ब्लैक ट्राउजर पहना। जेब में कंडोम, लुब्रिकेंट और छोटी-छोटी सरप्राइज रख लीं।

    शाम के ठीक ४:४५ बजे मैं ताज होटल की भव्य लॉबी में पहुंच गया। हाथ में २५ लाल गुलाबों का बड़ा गुलदस्ता। लॉबी में हल्की रोशनी और क्लासिकल म्यूजिक चल रही थी। ठीक ५:०० बजे लिफ्ट के दरवाजे खुले। फोरम बाहर निकली। हल्का गुलाबी कुर्ता जो उसके गोरे शरीर पर फिट बैठ रहा था, नीचे ब्लैक टाइट जींस। बाल खुले हुए, चेहरे पर हल्का मेकअप, होंठों पर पिंक लिपस्टिक। वो मुझे देखते ही शर्मा गई और धीरे-धीरे मेरी तरफ आई।

    मैंने आगे बढ़कर उसे कसकर गले लगा लिया। उसकी नरम, गर्म छाती मेरी छाती से सट गई। मैंने उसके कान में फुसफुसाया, “मेरी जान… आ गई तू। अब दो दिन सिर्फ हम दोनों।

    डिनर खत्म होने के बाद रात के करीब ९:४५ बजे हम दोनों रेस्टोरेंट से निकले। फोरम का हाथ मेरे हाथ में था। उसके चेहरे पर शर्म, उत्सुकता और थोड़ा डर साफ दिख रहा था। मैंने उसे धीरे से अपनी तरफ खींचा और लिफ्ट की तरफ ले गया। लिफ्ट में कोई और नहीं था। जैसे ही दरवाजे बंद हुए, मैंने उसे दीवार से लगा लिया और उसके होंठों पर हल्का सा किस किया। फोरम कांप गई लेकिन किस में थोड़ा जवाब दिया।

    लिफ्ट १७वीं मंजिल पर रुकी। हम सूट के दरवाजे पर पहुंचे। मैंने कार्ड से दरवाजा खोला। अंदर घुसते ही लाइट्स ऑटोमैटिक जल गईं। पूरा सूट बहुत खूबसूरत था – बड़ा किंग साइज बेड, सॉफ्ट लाइटिंग, जकूजी टब एक तरफ, बालकनी से अहमदाबाद की रात की चमकती लाइट्स दिख रही थीं। एयर कंडीशनर की ठंडी हवा कमरे में फैली हुई थी।

    दरवाजा बंद करते ही मैंने फोरम को अपनी तरफ घुमाया। “मेरी जान…” मैंने उसे दोनों हाथों से कमर से पकड़कर अचानक गोद में उठा लिया। फोरम चौंक गई, “आह… राज… क्या कर रहे हो?” उसकी दोनों टांगें मेरी कमर के चारों तरफ लिपट गईं। मैंने उसे कसकर पकड़े हुए बेड की तरफ ले गया। उसके स्तन मेरी छाती से दब रहे थे। मैंने उसके गाल, गर्दन और फिर होंठों पर कई सारे हल्के-हल्के किस किए। फोरम मेरी गर्दन में हाथ डालकर शरमा रही थी।

    बेड के पास पहुंचकर मैंने उसे बहुत धीरे से बेड पर लिटा दिया। फिर खुद उसके ऊपर झुक गया। “फोरम… तू बहुत खूबसूरत है।” मैंने उसके होंठों को चूसना शुरू किया। पहले हल्के किस, फिर गहरे किस। मेरी जीभ उसके मुंह में घुस गई। फोरम की सांसें तेज हो गईं। मैंने उसके गाल, कान की लोब, गर्दन को चूमा और हल्का-हल्का चाटा। वो कराह रही थी, “आह… राज… धीरे…”

    अब मैंने arm in arm से उसके कपड़े उतारने शुरू किए। पहले उसके कुर्ते के बटन खोले। कुर्ता धीरे-धीरे ऊपर किया और उतार दिया। उसके गोरे, नरम ३४C स्तन ब्रा में कैद थे। ब्रा का हुक पीछे से खोला और ब्रा भी उतार दी। उसके गुलाबी चूचियां बाहर आ गईं। मैंने दोनों हाथों से उन्हें हल्का दबाया और चूमा। फोरम ने आंखें बंद कर लीं और सांसें भारी हो गईं।

    फिर मैंने उसकी जींस का बटन खोला। जिपर नीचे किया और जींस को धीरे-धीरे उसकी टांगों से उतारा। अब वो सिर्फ पैंटी में थी – हल्की गुलाबी पैंटी। मैंने उसे भी बहुत धीरे से उतार दिया। पहली बार फोरम की पूरी नंगी चूत मेरे सामने थी – बिल्कुल साफ, गुलाबी, छोटी-छोटी लेबिया, बीच में तंग सुराख। वो शर्मा कर दोनों हाथों से अपना चेहरा ढक ले रही थी।

    मैंने उसके पैरों को फैलाया और खुद उसके बीच में लेट गया। पहले उसके पेट पर किस किए, फिर नाभि को चाटा। धीरे-धीरे नीचे आया। उसकी जांघों को चूमा, फिर चूत के आस-पास चाटा। फोरम की कमर तन गई, “उफ्फ… राज… क्या कर रहे हो… शर्म आ रही है… आह…”

    मैंने थोड़ी देर उसके स्तनों के साथ खेला। दोनों चूचियों को मुंह में लेकर चूसा, जीभ से चक्कर लगाया, हल्का काटा। फोरम अब कराह रही थी, “आह… राज… अच्छा लग रहा है…”

    फिर मैंने खुद की शर्ट उतार दी। अब मैं सिर्फ पैंट में था। फोरम ने शरमाते हुए मेरी शर्ट उतारने में मदद की। उसके हाथ मेरी छाती पर फिर रहे थे। मैंने उसकी पैंटी पूरी तरह उतार दी (जो पहले ही उतार चुका था)। अब वो पूरी नंगी थी।

    मैंने फिर उसके स्तनों को चूमा-चाटा। फिर गर्म करने के लिए उसके पूरे शरीर पर किस करने लगा – गर्दन, कंधे, पेट, जांघें। फोरम अब पूरी तरह गर्म हो चुकी थी। उसकी सांसें तेज थीं और चूत थोड़ी भीग चुकी थी।

    अब मैंने अपनी पैंट और बॉक्सर उतार दिया। मेरा ९ इंच का लंड पूरा तना हुआ, वैक्स किया हुआ, मोटा और चमकता हुआ बाहर आ गया। फोरम की आंखें फट गईं। “राज… ये… इतना बड़ा…”

    मैंने उसके हाथ को पकड़कर लंड पर रख दिया। फोरम ने शरमाते हुए लेकिन उत्सुकता से लंड को हाथ में लिया और हल्का-हल्का सहलाने लगी। वो उसे ऊपर-नीचे कर रही थी, अंगूठे से सिरे को छू रही थी। मैं कराह उठा, “हां बेबी… अच्छा लग रहा है…”

    फिर मैंने धीरे से कहा, “फोरम… मुंह में ले ले बेबी।”

    फोरम ने तुरंत सिर हिला दिया। “नहीं राज… प्लीज… मैं नहीं कर पाऊंगी… अभी नहीं। सिर्फ किस कर सकती हूँ।”

    मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “ठीक है मेरी जान। जो तू चाहे।”

    फिर फोरम ने झुककर मेरे लंड के सिरे पर सिर्फ हल्के-हल्के किस किए। उसके नरम, गर्म होंठ मेरे लंड के टिप पर लग रहे थे। वो बार-बार किस कर रही थी लेकिन मुंह में नहीं ले रही थी। मैं उसके बालों को सहलाता रहा और उसे प्यार से देखता रहा।

    अब तक हम दोनों बहुत गर्म हो चुके थे। फोरम की चूत पूरी तरह भीगी हुई थी और मेरा लंड लोहे की तरह सख्त था। मैंने उसे फिर से चूमना शुरू किया…

    अब तक हम दोनों पूरी तरह गर्म हो चुके थे। सूट की एसी ठंडी हवा में भी हमारे शरीर गर्मी से तप रहे थे। फोरम की सांसें तेज थीं, उसके गाल लाल हो गए थे, आंखें आधी बंद थीं। उसकी चूत पूरी तरह भीग चुकी थी और चमक रही थी। मेरा ९ इंच का लंड भी लोहे की तरह सख्त था, नसें उभरी हुईं, सिरा चमक रहा था।

    मैं फोरम के ऊपर झुका हुआ था। उसके नंगे शरीर को अपनी छाती से दबाते हुए मैंने उसके कान में फुसफुसाया, “मेरी जान… अब मैं तुझे पूरी तरह अपनी बना लूंगा। लेकिन पहली बार है, बहुत धीरे करूंगा।”

    फोरम ने शरमाते हुए सिर हिलाया। उसकी आवाज कांप रही थी, “राज… डर लग रहा है… लेकिन मैं तुम्हारी हूँ…”

    मैंने उसे प्यार से चूमते हुए कहा, “कंडोम लाओ बेबी। बैग में है।”

    फोरम ने उठकर बेड के पास रखे मेरे बैग से कंडोम और लुब्रिकेंट की बोतल निकाली। उसके नंगे शरीर पर लाइट पड़ रही थी, जिससे उसके स्तन हल्के-हल्के हिल रहे थे। वो वापस आई और मेरे सामने बैठ गई। उसने कंडोम का पैकेट फाड़ा और कांपते हाथों से मेरे लंड पर कंडोम चढ़ाने की कोशिश की। पहले दो बार हाथ फिसल गए, फिर उसने धीरे-धीरे कंडोम पूरा चढ़ा दिया। उसके बाद उसने लुब्रिकेंट की बोतल खोली और मेरे लंड पर अच्छे से लगाया। ठंडा, चिकना लुब्रिकेंट लंड पर फैल गया।

    “अब लेट जा बेबी,” मैंने कहा।

    फोरम ने लेट जाने की कोशिश की लेकिन मैंने उसे मिशनरी पोजीशन में सेट किया। उसके दोनों पैरों को फैलाकर मेरी कमर के दोनों तरफ रख दिया। मैं उसके बीच में आ गया। मेरा लंड उसकी भीगी चूत के मुंह पर टिका हुआ था। फोरम की सांसें बहुत तेज हो गई थीं। उसकी आंखें मेरी आंखों में थीं।

    मैंने धीरे से कहा, “आराम से बेबी… मैं बहुत धीरे करूंगा।”

    फिर मैंने लंड की नोक को उसके चूत के छेद पर रखा और बहुत हल्का सा धक्का दिया। सिर्फ १ इंच अंदर गया।

    “आआआह… राज… दर्द हो रहा है… निकालो… चीख…!”
    फोरम जोर से चिल्ला उठी। उसका पूरा शरीर तन गया। उसके नाखून मेरी पीठ में गड़ गए। आंखों में आंसू आ गए।

    मैं तुरंत रुक गया। उसके होंठों को चूमने लगा, गर्दन को चूसने लगा और बोला, “शांत हो जा मेरी जान… बस थोड़ा सा… धीरे-धीरे ठीक हो जाएगा।”

    १-२ मिनट रुकने के बाद मैंने फिर हल्का धक्का दिया। अब २ इंच अंदर चला गया।

    “आह… राज… बहुत दर्द… रो… रो रही हूँ… प्लीज रुको…!”
    फोरम रोने लगी। उसके आंसू गालों पर बह रहे थे। वो बार-बार सिर हिला रही थी और मेरी पीठ पर नाखून गाड़ रही थी। उसकी चूत बहुत तंग थी, जैसे मेरे मोटे लंड को निचोड़ रही हो।

    मैं फिर रुका। उसके स्तनों को हल्का दबाते हुए, चूचियों को चूसते हुए उसे शांत करने की कोशिश की। “मेरी रानी… बस थोड़ा और… तू बहुत बहादुर है। मैं तुझे प्यार करता हूँ।”

    फिर धीरे-धीरे मैंने तीसरा धक्का दिया। अब ३ इंच अंदर हो गए।
    अचानक फोरम की चूत से हल्का खून निकलने लगा। गर्म खून कंडोम के बाहर थोड़ा सा बहने लगा।

    “आआआह… राज… फट रही हूँ… बहुत दर्द… चीख… रो…!”
    फोरम जोर-जोर से चिल्ला रही थी और रो रही थी। उसका शरीर बार-बार कांप रहा था। वो अपने पैरों को कसकर मेरी कमर से लिपटाए हुए थी लेकिन दर्द से उसके पैर भी कांप रहे थे।

    मैं पूरी तरह रुक गया। ५-७ मिनट तक मैंने सिर्फ उसके होंठ चूमे, आंसू पोछे, बाल सहलाए और प्यार भरी बातें कीं। “फोरम… मेरी जान… तू मेरी हो गई। बस थोड़ा और सह ले। फिर मजा आएगा।”

    धीरे-धीरे मैंने आगे बढ़ना शुरू किया। ४ इंच… ५ इंच… हर इंच पर फोरम चिल्लाती, रोती, “राज… बस… निकालो… आह… दर्द… बहुत दर्द…”
    उसकी चूत से और खून निकल रहा था। लेकिन मैं बहुत धीरे-धीरे, रुक-रुककर पूरा लंड अंदर करने की कोशिश कर रहा था।

    ४० मिनट तक यह सिलसिला चला। हर २-३ मिनट में एक छोटा धक्का, फिर रुकना, चूमना, शांत करना। फोरम लगातार चिल्लाती और रोती रही। कभी-कभी वो मेरी पीठ पर नाखून गाड़ देती, कभी मेरे बाल पकड़ लेती। उसकी आवाज बार-बार टूट जाती, “राज… मैं मर जाऊंगी… आह… बहुत बड़ा है…”

    आखिरकार ४० मिनट बाद पूरा ९ इंच उसकी तंग चूत में घुस गया। मेरा लंड की जड़ तक अंदर था। फोरम की चूत पूरी तरह फैल चुकी थी। उसका पेट हल्का सा उभरा हुआ दिख रहा था। वो अब चिल्ला तो रही थी लेकिन आवाज कमजोर हो गई थी। आंसू लगातार बह रहे थे।

    “पूरा… अंदर… आ गया… मेरी जान,” मैंने उसके कान में फुसफुसाया।

    फोरम सिर्फ हांफ रही थी और रो रही थी। “राज… बहुत… दर्द… हो रहा है…”

    मैंने फिर से रुककर उसे चूमना शुरू किया। उसके स्तनों को सहलाया, चूचियों को चूसा। ५ मिनट बाद जब उसका दर्द थोड़ा कम हुआ तो मैंने बहुत धीरे-धीरे हल्के-हल्के धक्के देना शुरू किए।

  • सुहागरात की चीखें 3

    रिया मायके से चार दिन बाद वापस आई। उसका चेहरा थोड़ा सख्त था, लेकिन आँखों में अब पहले जितना डर नहीं था। अर्जुन एयरपोर्ट पर उसे लेने गया था। घर आते समय कार में दोनों के बीच सन्नाटा था। 

    घर पहुँचकर रिया ने सीधे कहा, 
    “अर्जुन जी… मैंने आपको पहले ही बता दिया था। अगर आपने फिर से जबरदस्ती की, खासकर गांड में, तो मैं चिल्ला दूंगी।” 

    अर्जुन ने सिर हिलाया और नरम स्वर में बोला, 
    “मैं समझ गया हूँ रिया। अब मैं जबरदस्ती नहीं करूंगा। हम दस दिन बाद बाली हनीमून पर जा रहे हैं। तब तक मैं धीरे-धीरे ही करूंगा।” 

    रिया ने बस सिर हिला दिया। 

    दस दिन की नरम सुहागरात

    अगले दस दिन अर्जुन ने सच में अपनी जिद पर काबू रखा। वह रिया को जबरदस्ती नहीं छू रहा था। 

    पहली रात (वापसी की रात)
    अर्जुन ने रिया को बहुत धीरे से चूमा। उसके गाल, गर्दन, होंठ, फिर स्तनों को चूसा। रिया अभी भी थोड़ी紧张 थी। जब अर्जुन ने लंड पर कंडोम चढ़ाकर रिया की चूत पर रखा तो रिया ने कांपते हुए कहा, 
    “धीरे… बहुत धीरे… अभी भी दर्द है…” 

    अर्जुन ने सिर्फ 3 इंच घुसाया। धीरे-धीरे हिलाया। रिया आँखें बंद करके सिसक रही थी, 
    “आह्ह… धीरे… आह्ह… बहुत मोटा है… जलन हो रही है… बस इतना ही…” 

    तीसरी रात
    अर्जुन ने 4 इंच तक घुसाया। रिया अब थोड़ी शांत थी, लेकिन फिर भी नखरे कर रही थी, 
    “आह्ह… और मत घुसाइए… बस… आह्ह… धीरे हिलाइए… मैं सह नहीं पाती तेज…” 

    सातवीं रात
    अर्जुन ने 5 इंच तक घुसाया। इस बार रिया ने खुद थोड़ा कमर हिलाया। लेकिन गांड की बात छेड़ते ही रिया सख्त हो गई, 
    “गांड मत छूना भी… वरना मैं फिर धमकी दूंगी।” 

    अर्जुन ने मजबूरन चुप रहकर चुत में ही 5 इंच तक धीरे-धीरे चोदा। 

    दसवें दिन – शॉपिंग

    हनीमून से एक दिन पहले अर्जुन रिया को शॉपिंग ले गया। 

    पहले कंडोम शॉप गए। अर्जुन ने 200 पीस एक्स्ट्रा लार्ज, अल्ट्रा थिन, रिब्ड और फ्लेवर्ड कंडोम खरीदे। रिया शरमा रही थी। 

    फिर बिकिनी शॉप गए। रिया ने कई बिकिनी ट्राई कीं — लाल, ब्लैक, व्हाइट। अर्जुन ने तीन बहुत sexy बिकिनी खरीदीं, जिनमें से दो तो सिर्फ धागे वाली थीं। रिया ने शरमाते हुए कहा, 
    “ये तो बहुत छोटी हैं… बाली में पहनूंगी तो सब देख लेंगे…” 

    अर्जुन मुस्कुराया, “हनीमून है… पहनना।” 

    बाली पहुंचना

    दस दिन पूरे होने के बाद दोनों प्राइवेट जेट से बाली के लिए रवाना हुए। 

    जब वे बाली के लग्जरी विला में पहुंचे, तो शाम हो चुकी थी। सामने नीला समुद्र, प्राइवेट पूल, और चारों तरफ palm trees। विला बहुत खूबसूरत था। 

    रिया ने बालकनी में खड़े होकर समुद्र देखा। अर्जुन उसके पीछे आकर खड़ा हो गया।

    अर्जुन रिया के ठीक पीछे आकर खड़ा हो गया। बालकनी में समुद्र की लहरों की आवाज आ रही थी। हल्की ठंडी हवा चल रही थी। रिया दोनों हाथ बालकनी की रेलिंग पर रखे खड़ी थी। अर्जुन ने धीरे से उसके कमर पर हाथ रखा और उसे अपनी तरफ खींच लिया। 

    रिया का शरीर थोड़ा कांप गया। 

    अर्जुन ने उसके कान में फुसफुसाते हुए कहा, 
    “रिया… हम यहाँ बाली में 15 दिन के लिए हैं। यहाँ कोई घर नहीं, कोई रिश्तेदार नहीं, कोई पड़ोसी नहीं। तू जितना चाहे चिल्ला ले… कोई नहीं सुनने वाला। तू भाग भी नहीं सकती। यहाँ से कहीं भागने का रास्ता भी नहीं है। 

    तो अब फैसला तेरा है — या तो इन 15 दिनों को मजे से बिताएगी… या फिर रो-रोकर, दुखी होकर बिताएगी। लेकिन इन 15 दिनों में तुझे मेरी हर इच्छा पूरी करनी पड़ेगी। समझ गई?” 

    रिया ने कुछ पल चुप रहकर गहरी सांस ली। फिर धीरे से बोली, 
    “ठीक है… लेकिन मेरी शर्त पर। गांड कभी नहीं। उसकी बात मत छेड़ना भी। बाकी… मैं कोशिश करूंगी।” 

    अर्जुन ने मुस्कुराते हुए उसके गाल चूमे, 
    “बहुत अच्छा। आज पहला दिन है… हम धीरे-धीरे शुरू करेंगे।” 

    —

    पहली रात – बाली का पहला राउंड

    अर्जुन ने रिया को अंदर बेडरूम में ले जाकर धीरे-धीरे उसके कपड़े उतारे। रिया ने भी उसका शर्ट और शॉर्ट्स उतारा। दोनों पूरी तरह नंगे हो गए। 

    अर्जुन ने रिया को बेड पर लिटाया। बहुत देर तक उसे किस किया — होंठ, गर्दन, स्तन, पेट, जांघें। रिया की सांसें तेज हो रही थीं। 

    जब अर्जुन ने लंड पर कंडोम चढ़ाया और लुब्रिकेंट लगाया, रिया ने कांपते हुए कहा, 
    “आज धीरे-धीरे… प्लीज… मैं पूरी कोशिश करूंगी।” 

    अर्जुन ने लंड का सिर रिया की चूत पर रखा और बहुत धीरे से दबाया। 

    1 इंच…
    रिया ने आँखें बंद कर लीं, “आह्ह… धीरे… अभी भी थोड़ा दर्द है…” 

    3 इंच…
    “आह्ह… मोटा है… जलन हो रही है… रुकिए एक सेकंड…” 

    5 इंच…
    रिया ने दांत भींच लिए, “आह्ह… आधा हो गया… गहरा लग रहा है… धीरे हिलाइए…” 

    अर्जुन ने धीरे-धीरे पूरा 10 इंच अंदर कर दिया। रिया का पेट हल्का-हल्का उभर रहा था। वह सिसक रही थी, लेकिन चीख नहीं रही थी। 

    “आह्ह… पूरा घुस गया… बहुत भरा हुआ लग रहा है… धीरे… आह्ह… हाँ… ऐसे ही…” 

    पहला राउंड 25 मिनट चला। 

    दूसरा राउंड में रिया ने खुद थोड़ी कमर हिलाई। 
    “आह्ह… अब थोड़ा तेज… लेकिन बहुत तेज मत…” 

    तीसरा राउंड में रिया ने पहली बार पूरा 10 इंच सह लिया। वह थोड़ी-थोड़ी चीख रही थी, लेकिन दर्द के साथ मजे की आवाज भी आने लगी थी। 

    “आह्ह… पूरा… आ गया… आह्ह… अर्जुन जी… धीरे… हाँ… ऐसे ही…” 

    अगले 4 दिन

    अगले चार दिन अर्जुन और रिया के बीच काफी ज्यादा सेक्स हुआ — कुल 32 बार। 

    – सुबह पूल के किनारे 
    – दोपहर बेडरूम में 
    – शाम बालकनी में 
    – रात को लाइट ऑफ करके 

    रिया अब धीरे-धीरे सहने लगी थी। वह नखरे तो करती थी, लेकिन चीखना-रोना कम हो गया था। हर बार 3-4 राउंड होते। कभी-कभी रिया खुद ऊपर चढ़कर बैठ जाती। 

    लेकिन हर बार जब अर्जुन गांड की बात छेड़ता, रिया तुरंत सख्त हो जाती, 
    “गांड नहीं। भूल भी जाओ उसकी। मैंने कहा था ना।” 

    अर्जुन भी 4 दिन तक गांड का नाम नहीं लेता था। वह सिर्फ रिया की चुत पर फोकस रखता था। 

    रिया धीरे-धीरे आदत डाल रही थी। चौथे दिन शाम को उसने खुद अर्जुन से कहा, 
    “आज 4 राउंड… लेकिन धीरे-धीरे…” 

    अर्जुन मुस्कुराया।

    चार दिन बीत चुके थे। रिया अब काफी हद तक खुल चुकी थी। वह खुद कंडोम पहनाने लगी थी और सेक्स में सक्रिय भाग ले रही थी। लेकिन गांड की बात आते ही वह अभी भी सख्त हो जाती थी।

    पांचवां दिन – शॉपिंग

    अर्जुन रिया को शॉपिंग ले गया। रिया ने बहुत महंगे 300 कंडोम, लुब्रिकेंट और 7 लग्जरी बिकिनी खरीदीं। जब वे वापस विला पहुंचे तो रिया ने अर्जुन से कहा, 
    “जो तुम्हें चाहिए वो खरीद लो।”

    अर्जुन ने उसकी कमर पकड़कर कान में फुसफुसाया, 
    “मुझे तुम्हारी गांड चाहिए।”

    रिया एक पल चुप रही, फिर बोली, 
    “ठीक है… लेकिन एक शर्त पर। मुझे देखना है कि कोई ऐसी लड़की जिसकी कभी गांड नहीं मारी गई हो, उसे कैसे मारा जाता है। मैं सामने बैठकर देखूंगी। अगर मुझे लगा कि मैं सह सकती हूँ, तो मैं मान जाऊंगी।”

    अर्जुन की आँखें चमक उठीं।

    उसी शाम – लिया का आगमन

    अर्जुन ने एक लोकल कॉल गर्ल बुलाई — लिया, 24 साल की, बहुत खूबसूरत, गोरी, slim body, छोटे-छोटे स्तन और टाइट गांड। लिया पहली बार गांड मरवा रही थी।

    लिया विला में आई। रिया बेड के पास एक आरामदायक कुर्सी पर बैठ गई। अर्जुन ने लिया को नंगा किया। लिया घुटनों के बल बेड पर थी।

    अर्जुन ने लंड पर कंडोम चढ़ाया और खूब सारा लुब्रिकेंट लगाया। फिर लिया की गांड के छेद पर लंड का मोटा सिर रख दिया।

    लिया का सेक्स सीन (विस्तृत)

    अर्जुन ने धीरे से दबाया।

    1 इंच अंदर गया। 
    लिया तुरंत कांप उठी, “आआह्ह… नहीं… बहुत मोटा… जलन हो रही है… आह्ह… निकालिए… दर्द…” 

    अर्जुन रुका नहीं। उसने और दबाया।

    3 इंच अंदर। 
    लिया जोर से चीख पड़ी, “आआआह्ह्ह… 3 इंच… मेरी गांड फट रही है… बहुत दर्द… आह्ह… रुक जाइए… मैं पहली बार… आंसू आ रहे हैं…” 

    लिया के आंसू बहने लगे। उसकी गांड का छेद बुरी तरह फैल गया था। अर्जुन ने लुब्रिकेंट और लगाया और धीरे-धीरे आगे बढ़ा।

    4.5 इंच… 5.5 इंच…
    लिया अब सिसक-सिसककर चीख रही थी, “आह्ह… आधा भी नहीं… पेट फाड़ रहा है… बहुत गहरा… आआह्ह… दर्द… मैं सह नहीं पा रही… आह्ह… और मत घुसाइए…” 

    अर्जुन ने पूरा 10 इंच अंदर करने की कोशिश की, लेकिन लिया की गांड इतनी टाइट थी कि सिर्फ 6.5 इंच तक ही गया। फिर उसने धीरे-धीरे हिलाना शुरू किया। हर धक्के पर लिया की चीखें कमरे में गूंज रही थीं।

    “आह्ह… नहीं… जोर से मत… आआह्ह… मेरी गांड चीर दी… आह्ह… दर्द… लेकिन… आह्ह… थोड़ा मज़ा भी आ रहा है… नहीं… मत रुकना… आआह्ह…” 

    अर्जुन ने लिया को 5 राउंड लगातार गांड मारा। हर राउंड में वह 6-7 इंच तक घुसा रहा। लिया रोती रही, चीखती रही, लेकिन आखिरी राउंड में वह खुद कमर हिलाने लगी।

    फिर अर्जुन ने लिया की चूत में 3 राउंड मारे। लिया पूरी तरह थककर बेड पर गिर पड़ी। उसकी गांड और चूत दोनों सूजी हुई, लाल और खून-रस से सनी हुई थीं।

    रिया का रिएक्शन

    रिया पूरे समय चुपचाप बैठी देखती रही। उसकी सांसें तेज हो रही थीं। उसकी चूत गीली हो चुकी थी। लिया की चीखें, दर्द और आखिर में मजे की आवाजें सुनकर रिया का चेहरा लाल हो गया था।

    अर्जुन ने लिया को पैसे देकर विदा किया। फिर रिया की तरफ मुड़ा।

    रिया ने धीरे से कहा, 
    “मैं… मैंने देख लिया… अब… अब मैं सोचूंगी…”

    रिया लिया को देखकर चुपचाप बैठी रही। उसने कुछ नहीं कहा। जब लिया चली गई तो रिया ने नखरे दिखाते हुए कहा, 
    “मैंने देख लिया… लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि मैं मान गई हूँ।” 

    अर्जुन ने मुस्कुराते हुए रिया को बेड पर खींच लिया। उस रात उसने सिर्फ रिया की चुत में ही सेक्स किया। तीन राउंड। रिया नखरे करती रही — “आह्ह… धीरे… बहुत तेज मत… आह्ह… बस… आज काफी…” लेकिन गांड की बात छेड़ते ही चुप हो जाती। 

    अर्जुन ने भी कुछ नहीं कहा। तीन राउंड के बाद वह रिया को चूमकर सो गया।

    —

    अगले दिन – सेक्स टॉय शॉपिंग

    सुबह अर्जुन रिया को लेकर एक लग्जरी एडल्ट शॉप गया। रिया शरमा रही थी। अर्जुन ने बहुत महंगे सेक्स टॉय खरीदे — 
    – एक 9 इंच लंबा, 3 इंच मोटा रियलिस्टिक डिल्डो 
    – वाइब्रेटिंग बट प्लग 
    – एनाल बीड्स 
    – और बहुत सारा लुब्रिकेंट 

    रिया ने कुछ नहीं कहा, बस शरमाकर सिर झुका लिया।

    उसी रात

    अर्जुन ने पहले रिया को नॉर्मल तरीके से चोदा। दो राउंड पूरे 10 इंच तक। रिया अब काफी सहने लगी थी। 

    “आह्ह… हाँ… पूरा… आह्ह… अच्छा लग रहा है…” 

    तीसरे राउंड के बाद अर्जुन ने रिया को घुटनों के बल मोड़ा। रिया समझ गई। 

    “नहीं… अर्जुन जी… गांड में मत… प्लीज… मैं नहीं चाहती…” रिया ने नखरे दिखाए। 

    अर्जुन ने लुब्रिकेंट लगाया और पहले अपनी उंगली डाली। फिर दूसरी। रिया सिसक रही थी, “आह्ह… नहीं… जलन हो रही है… मत करो…” 

    फिर अर्जुन ने डिल्डो लिया और धीरे-धीरे रिया की गांड में डालना शुरू किया। 

    1 इंच…
    रिया कांप उठी, “आह्ह… बहुत मोटा… निकालिए…” 

    3 इंच…
    “आआह्ह… दर्द… फट रही है… प्लीज… मत…” 

    अर्जुन रुका नहीं। धीरे-धीरे पूरा 9 इंच डाल दिया। रिया रो पड़ी, लेकिन अर्जुन ने धीरे-धीरे हिलाना शुरू कर दिया। 

    पहला राउंड डिल्डो से पूरा हो गया। 

    दूसरे राउंड में अर्जुन ने अपना लंड रिया की गांड में डाला। रिया मना कर रही थी, “नहीं… असली मत… आआह्ह… बहुत मोटा… फट जाएगी…” 

    लेकिन अर्जुन ने धीरे-धीरे पूरा 10 इंच डाल दिया। रिया चीख रही थी, लेकिन अर्जुन ने 2 राउंड पूरा गांड मारा। 

    फिर उसने रिया की चुत और मुंह में भी 2-2 राउंड किए। कुल 5-6 राउंड हो गए। रिया थककर बेड पर पड़ी थी, रो रही थी, लेकिन चुप थी। 

    —

    अगले दिन – रिया का गुस्सा

    सुबह रिया बहुत गुस्से में थी। वह अर्जुन से बात नहीं कर रही थी। नाश्ते के समय भी चुप रही। 

    अर्जुन ने पूछा, “क्या हुआ?” 

    रिया ने गुस्से से कहा, 
    “तुमने कल मेरी गांड जबरदस्ती मारी… मैंने मना किया था… फिर भी किया… मैं तुमसे नाराज हूँ।” 

    अर्जुन ने उसे मनाने की कोशिश की, लेकिन रिया पूरे दिन नाराज रही। 

    शाम को अर्जुन ने उसे बहुत प्यार से चूमकर मनाया। रिया थोड़ी नरम पड़ी। 

    दस दिन बाद – घर वापसी

    15 दिन पूरे होने के बाद दोनों घर वापस आ गए। रिया अब थोड़ी बदल चुकी थी, लेकिन गांड वाली बात पर अभी भी सख्त थी। 

    अर्जुन जानता था कि अब असली खेल घर आकर शुरू होगा।

  • सुहागरात की चीखें 2

    रिया अभी भी तकिए में मुंह छुपाए जोर-जोर से रो रही थी। उसकी चूत बुरी तरह सूजी हुई थी, लाल हो चुकी थी। अर्जुन बेड पर बैठा था, उसका 10 इंच का मोटा लंड अभी भी कंडोम लगाए खड़ा था, नसें फड़ी हुईं। 

    अर्जुन का गुस्सा अब चरम पर था। उसने अचानक रिया के बाल पकड़ लिए और उसे जबरदस्ती घुटनों के बल मोड़ दिया। रिया चीख पड़ी। 

    “नहीं! छोड़ो मुझे! मैं गांड नहीं दूंगी! अर्जुन जी… प्लीज… जबरदस्ती मत करो… मैं चिल्ला दूंगी… पूरा घर जाग जाएगा…” रिया ने हाथ-पैर मारते हुए विरोध किया। 

    अर्जुन ने रिया की कमर को मजबूती से पकड़ लिया और बोला, 
    “आज मेरी सुहागरात है रिया। तू मेरी बीवी है। गांड भी मेरी है। परंपरा पूरी होगी।” 

    रिया ने जोर से सिर हिलाया, आंसू बहाते हुए चीखी, 
    “मैं परंपरा नहीं मानती! मेरी गांड टाइट है… आपका लंड 4 इंच मोटा है… वो घुसेगा तो मैं फट जाऊंगी… खून निकलेगा… मैं मर जाऊंगी… मम्मी… बचाओ मुझे… प्लीज…” 

    सुधा माँ ने तुरंत आगे बढ़कर अर्जुन का हाथ पकड़ लिया। 
    “दामाद जी… प्लीज… बेटी की हालत देखिए… उसकी चुत अभी भी सूजी हुई है… गांड में बिल्कुल नहीं सह पाएगी… आज छोड़ दीजिए… मैं… मैं तैयार हूँ… मेरी गांड ले लीजिए… जितना मन हो…” 

    अर्जुन ने सुधा माँ को घूरा और बोला, 
    “सास जी, आप बार-बार बीच में क्यों पड़ रही हैं? ये मेरी पत्नी है। मैं आज उसकी गांड लूंगा।” 

    रिया रोते हुए बोली, 
    “मम्मी… आप मत बोलो… ये आदमी मुझे मार डालेगा… मैं गांड नहीं दूंगी… कभी नहीं… अर्जुन जी… मेरी माँ के साथ कर लो… उनकी गांड ले लो… लेकिन मेरी मत छुओ…” 

    अर्जुन ने रिया की कमर को और कसकर पकड़ा। उसने लंड पर नया कंडोम चढ़ाया, खूब सारा लुब्रिकेंट लगाया। फिर रिया की गांड के छेद पर लंड का मोटा सिर रख दिया। 

    रिया जोर से चीख पड़ी, 
    “नहीं! छोड़ो! आआह्ह… मत दबाओ… बहुत डर लग रहा है… मम्मी… प्लीज… रोकिए…” 

    अर्जुन ने धीरे से दबाया। 

    सिर्फ 1 इंच अंदर गया। 

    रिया का पूरा शरीर कांप उठा। 
    “आआह्ह… दर्द… गांड फट रही है… निकालिए… प्लीज… सिर्फ सिर ही बहुत मोटा है… आह्ह… जलन हो रही है… मैं सह नहीं पा रही…” रिया रो पड़ी, हाथ-पैर मारने लगी। 

    अर्जुन ने और दबाया। अब 3 इंच अंदर चला गया। 

    रिया जोर-जोर से चीखने लगी, 
    “आआआह्ह्ह… नहीं… 3 इंच… बहुत दर्द… मेरी गांड चीर दी… अर्जुन जी… प्लीज रुक जाइए… मैं मर रही हूँ… आह्ह… और मत घुसाइए… बहुत मोटा… फट जाएगी…” 

    रिया के आंसू बह रहे थे। वह बार-बार कमर हिला रही थी, नखरे कर रही थी, “मम्मी… बचाओ… मैं रो रही हूँ… बहुत जलन… प्लीज…” 

    सुधा माँ ने अर्जुन के हाथ पकड़कर रोते हुए कहा, 
    “दामाद जी… बस करिए… बेटी की हालत देखिए… वो सह नहीं पा रही… मेरी गांड ले लीजिए… प्लीज… बेटी को छोड़ दीजिए…” 

    अर्जुन ने सुधा माँ को धक्का देकर अलग किया और बोला, 
    “आप चुप रहिए सास जी। आज मैं रिया की गांड लूंगा।” 

    उसने और दबाया। अब 4.5 इंच अंदर चला गया। 

    रिया सिसक-सिसककर चीख रही थी, 
    “आह्ह… आधा भी नहीं… पेट फाड़ रहा है… बहुत गहरा… आआह्ह… निकालिए… मैं सह नहीं पा रही… मम्मी… रो रही हूँ… बहुत दर्द… प्लीज… बस कर दीजिए…” 

    रिया की गांड का छेद बुरी तरह फैल गया था। हल्का खून भी रिसने लगा था। वह लगातार रो रही थी और नखरे कर रही थी। 

    “मैंने कहा ना… मेरी गांड मत… मैं मना करती हूँ… आप जबरदस्ती कर रहे हो… मैं आपको कभी माफ नहीं करूंगी…” 

    अर्जुन ने रिया की कमर को और मजबूती से पकड़ लिया और धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगा। 

    5 इंच… 5.5 इंच…

    रिया अब लगभग चीखते-चीखते बेहोश होने लगी थी। 
    “आआह्ह… बस… काफी… आधा भी नहीं… मेरी गांड फट गई… आह्ह… दर्द… बहुत जलन… प्लीज… निकालिए…” 

    सुधा माँ रोते हुए अर्जुन के पैरों में गिर पड़ीं, 
    “दामाद जी… प्लीज… मेरी बेटी को मत तोड़िए… मैं… मैं अपनी गांड देती हूँ… आप मुझे जितना चाहे चोदिए… लेकिन बेटी को छोड़ दीजिए…” 

    अर्जुन ने रिया की गांड में लंड को आधा ही रखकर रुक गया। रिया सिसक रही थी। उसकी हालत बेहद खराब थी। 

    अर्जुन ने गहरी सांस ली और बोला, 
    “ठीक है… आज रिया की गांड आधी ही लेता हूँ… लेकिन कल पूरी लूंगा।” 

    रिया ने कमजोर आवाज में रोते हुए कहा, 
    “कल भी नहीं… कभी नहीं… मैं गांड नहीं दूंगी…” 

    सुधा माँ ने बेटी को गले लगा लिया। अर्जुन लंड आधा ही गांड में रखे हुए बैठा रहा। कमरे में सिर्फ रिया की सिसकियाँ और सुधा माँ की दबी हुई रोने की आवाज गूंज रही थी।

    अर्जुन ने रिया की गांड में अपना लंड आधा ही रखा हुआ था। रिया सिसक-सिसककर रो रही थी, उसका पूरा शरीर कांप रहा था। उसकी गांड का छेद बुरी तरह फैला हुआ था, हल्का खून भी रिस रहा था। 

    “आह्ह… बस… काफी… निकालिए… मेरी गांड फट गई… आआह्ह… दर्द… बहुत जलन… प्लीज… अर्जुन जी…” रिया ने कमजोर आवाज में रोते हुए कहा। 

    अर्जुन ने एक गहरी सांस ली। उसने धीरे से लंड बाहर निकाला। रिया ने राहत की सांस ली, लेकिन उसकी आँखों में अभी भी डर था। 

    अर्जुन ने सुधा माँ की तरफ देखा। सुधा माँ बेटी के सिरहाने बैठी थीं, उनके हाथ कांप रहे थे। अर्जुन ने ठंडे स्वर में कहा, 
    “ठीक है… आज रिया की गांड आधी ही लेता हूँ। लेकिन अब तुम्हारी बारी है सास जी। मेरी सुहागरात पूरी होनी चाहिए।” 

    सुधा माँ ने सिर झुका लिया। उनकी आवाज कांप रही थी, 
    “दामाद जी… प्लीज… बेटी की हालत देखिए… उसकी चूत और गांड दोनों सूज गई हैं… आज छोड़ दीजिए… मैं… मैं तैयार हूँ… मेरी चूत और गांड… जितना मन हो ले लीजिए… लेकिन बेटी को मत छुईए…” 

    रिया ने माँ को पकड़कर रोते हुए कहा, 
    “मम्मी… आप मत… मैं नहीं सह पाऊंगी अगर आपकी हालत खराब हुई तो… प्लीज… अर्जुन जी… मेरी माँ को मत छुओ…” 

    अर्जुन ने सुधा माँ का हाथ पकड़कर उन्हें बेड पर घुटनों के बल मोड़ दिया। सुधा माँ की साड़ी, पेटीकोट और पैंटी पहले ही खुली हुई थी। उनकी मोटी, गोरी गांड और सूजी हुई चूत पूरी तरह नंगी थी। 

    अर्जुन ने नया कंडोम खोला, लंड पर चढ़ाया, खूब सारा लुब्रिकेंट लगाया। फिर सुधा माँ की चूत पर लंड का सिर रख दिया। 

    “आह्ह… दामाद जी… धीरे… मेरी उम्र 46 है… बहुत दिन बाद… आआह्ह… सिर्फ सिर ही… बहुत मोटा है… जलन हो रही है…” सुधा माँ सिसक पड़ीं। 

    अर्जुन ने धीरे से दबाया — 1 इंच अंदर गया। 

    सुधा माँ कांप उठीं, “आह्ह… दर्द… बहुत जलन… धीरे… आह्ह… 3 इंच… आआह्ह… बहुत मोटा… मेरी चूत फट रही है… प्लीज… रुक जाइए…” 

    अर्जुन ने और दबाया — 4 इंच… 5 इंच…

    सुधा माँ जोर से सिसकने लगीं, “आह्ह… आधा भी नहीं… पेट फाड़ रहा है… दामाद जी… बहुत गहरा… आआह्ह… और मत घुसाइए… मैं तेरी सास हूँ… आह्ह…” 

    पहला राउंड चूत में सिर्फ 5.5 इंच तक ही गया। अर्जुन ने धीरे-धीरे हिलाना शुरू किया। हर छोटे धक्के पर सुधा माँ सिसक रही थीं। रिया बगल में लेटी रो रही थी, “मम्मी… आपकी हालत खराब हो रही है… प्लीज… रुक जाइए…” 

    पहला राउंड 40 मिनट चला। सुधा माँ की चूत लाल और सूजी हो गई। 

    दूसरा राउंड शुरू हुआ। अर्जुन ने सुधा माँ को मिशनरी पोजीशन में लिटाया, उनके होंठ चूसते हुए लंड फिर से चूत में डाला। 

    “आह्ह… नहीं… फिर से… आआह्ह… 1 इंच… दर्द… 3 इंच… आह्ह… बहुत मोटा… मैं सह नहीं पा रही… दामाद जी… प्लीज धीरे…” सुधा माँ रो रही थीं। 

    अर्जुन ने 5.5 इंच तक ही घुसाया। सुधा माँ बार-बार सिसक रही थीं। 

    तीसरा राउंड चूत में भी आधा ही। 

    फिर अर्जुन ने सुधा माँ को घुटनों के बल मोड़ दिया। अब गांड की बारी। 

    “आह्ह… गांड में मत… आआह्ह… 1 इंच… फट रही है… दामाद जी… बहुत मोटा… आह्ह… 3 इंच… जलन… मैं रो रही हूँ… प्लीज…” 

    अर्जुन ने सुधा माँ की गांड में भी 5 इंच तक ही घुसाया। तीन-तीन राउंड — चूत और गांड — पूरे होने में रात के 3:30 बज गए। सुधा माँ की हालत बेहद खराब थी। उनकी चूत और गांड दोनों सूजी हुई, लाल, खून रिस रहा था। वह थककर बेड पर गिर पड़ी थीं। 

    अर्जुन ने अब रिया की तरफ देखा। रिया अभी भी रो रही थी। 

    “अब फिर तेरी गांड की बारी है रिया।” 

    रिया ने जोर से सिर हिलाया, 
    “नहीं! मैंने कहा ना… कभी नहीं! मेरी गांड मत छुओ… मम्मी की हालत देखिए… आपने उन्हें फाड़ दिया… मुझे भी मत फाड़िए… प्लीज… मैं मना करती हूँ…” 

    अर्जुन ने रिया को फिर घुटनों के बल मोड़ने की कोशिश की। रिया हाथ-पैर मारने लगी, 
    “छोड़ो मुझे! मैं चिल्ला दूंगी… मैं गांड नहीं दूंगी… मम्मी… बचाओ…” 

    सुधा माँ ने कमजोर आवाज में कहा, 
    “दामाद जी… बेटी को मत… मैं फिर तैयार हूँ… मेरी गांड फिर ले लीजिए… लेकिन बेटी को छोड़ दीजिए…” 

    रिया रोते हुए बोली, 
    “मम्मी… आप चुप रहिए… ये आदमी मुझे मार डालेगा… मैं गांड नहीं दूंगी… कभी नहीं…” 

    अर्जुन ने रिया की कमर पकड़ ली। लंड फिर से रिया की गांड पर रख दिया। 

    “आआह्ह… नहीं… 1 इंच… दर्द… आआह्ह… 3 इंच… फट रही है… अर्जुन जी… प्लीज… मैं रो रही हूँ… मम्मी… देखिए… मैं सह नहीं पा रही…”

    रिया अभी भी बेड पर करवट लेकर लेटी हुई थी। उसकी चूत और गांड दोनों बुरी तरह सूजी हुई थीं। वह हल्के-हल्के सिसक रही थी। अर्जुन बेड के किनारे बैठा था, उसका लंड अभी भी कंडोम में था और आधा खड़ा था। 

    रिया ने आंसू पोछते हुए फिर से सख्त स्वर में कहा, 
    “सुन लो अर्जुन जी… अगर आपने फिर से जबरदस्ती की… चाहे चुत हो या गांड… तो मैं चिल्ला दूंगी। पूरा घर, पूरा मोहल्ला, सारे रिश्तेदार जाग जाएंगे। मैं सबको बता दूंगी कि मेरी सुहागरात में मेरे पति मुझे मार रहे थे। आपकी इज्जत, आपका नाम, सब बर्बाद हो जाएगा।” 

    अर्जुन का चेहरा तन गया। वह समझ गया कि रिया अब गंभीर है। अगर उसने चिल्लाया तो वाकई बड़ी बदनामी हो जाएगी। 

    अर्जुन ने गहरी सांस ली और बोला, 
    “ठीक है रिया… मैं जबरदस्ती नहीं करूंगा। लेकिन तू मेरी बीवी है… सुहागरात है… कम से कम चुत तो दे दे।” 

    रिया ने सिर हिलाया, 
    “धीरे-धीरे… और सिर्फ चुत… गांड की बात मत छेड़ना। वरना मैं अभी चिल्ला दूंगी।” 

    अगले 3-4 दिन की मजबूरी

    अगले तीन दिन अर्जुन को पूरी तरह काबू में रहना पड़ा। रिया मायके जाने वाली थी, इसलिए उसने धमकी दे रखी थी। 

    दूसरी रात
    अर्जुन ने रिया को बहुत धीरे-धीरे चूमा। उसके स्तनों को सहलाया, चूत पर उंगली फेरी। जब लंड डाला तो सिर्फ 3 इंच ही घुसाया। 

    रिया ने आँखें बंद करके कहा, 
    “आह्ह… धीरे… अभी भी दर्द है… और मत घुसाइए… बस इतना ही… आह्ह…” 

    अर्जुन को मजबूरी में रुकना पड़ा। 

    तीसरी रात
    इस बार अर्जुन ने 4 इंच तक घुसाया। रिया फिर भी नखरे कर रही थी, 
    “बहुत मोटा है… जलन हो रही है… प्लीज… और मत… मैं मायके जा रही हूँ… वहाँ भी दर्द रहेगा तो लोग पूछेंगे…” 

    अर्जुन गुस्से में था, लेकिन चुप रहा। 

    चौथी रात
    रिया कल मायके जाने वाली थी। अर्जुन ने आखिरी मौका समझकर रिया को चोदा। इस बार उसने 5 इंच तक घुसाया, लेकिन बहुत धीरे-धीरे। रिया बार-बार मना कर रही थी, 
    “आह्ह… काफी है… और मत… मैं सह नहीं पा रही… गांड की बात मत सोचिए भी…” 

    अर्जुन ने मजबूरन रुक जाना पड़ा। 

    रिया का मायके जाना

    पांचवें दिन सुबह रिया मायके चली गई। जाते समय उसने अर्जुन से साफ-साफ कहा, 
    “4 दिन बाद आऊंगी। तब तक सोच लीजिए। अगर आपने फिर से जबरदस्ती की… खासकर गांड में… तो मैं सबको बता दूंगी।” 

    अर्जुन ने सिर्फ सिर हिला दिया, लेकिन अंदर से उसका गुस्सा और भूख दोनों बढ़ रहे थे। 

    अब घर में सिर्फ अर्जुन अकेला था। वह सोच रहा था — रिया जब वापस आएगी तो वह कैसे अपनी जिद पूरी करेगा।

  • सुहागरात की चीखें

    अध्याय 1: सुहागरात की परंपरा – जब दुल्हन की माँ भी मजबूर हुई

    रात के ठीक 11:40 बज चुके थे। मास्टर बेडरूम में सिर्फ हल्की लाल रोशनी जल रही थी। गुलाब की ताज़ा पंखुड़ियाँ बेड पर बिखरी हुई थीं। हवा में अगरबत्ती और गुलाब की महक घुली हुई थी। 

    रिया (22 साल, पूरी तरह कुँवारी दुल्हन) लाल लहंगे में घूंघट निकाले बेड पर बैठी थी। उसकी सांसें तेज चल रही थीं, हाथ कांप रहे थे। उसकी माँ सुधा (46 साल) बेटी का हाथ थामे बगल में बैठी थीं। अर्जुन (28 साल) कुर्ता-पजामा में खड़ा था, उसकी आँखों में भूख साफ झलक रही थी। 

    अर्जुन ने पहले रिया का घूंघट हटाया। रिया शरमा कर सिर झुका ली। अर्जुन ने रिया के होंठों को अपने होंठों से छुआ, धीरे-धीरे किस करना शुरू किया। उसकी जीभ रिया के मुंह में घुस गई। रिया ने मुंह हटाने की कोशिश की। 

    “उम्म्म… नहीं… अर्जुन जी… शरम आ रही है… मम्मी के सामने… प्लीज… छोड़ दीजिए…” रिया ने नखरा दिखाते हुए कहा। 

    अर्जुन ने रिया की साड़ी की पल्लू धीरे-धीरे खींची। सुधा माँ ने खुद बेटी की ब्लाउज के हुक खोले। रिया की गोरी, नाजुक ब्रा बाहर आई। अर्जुन ने ब्रा का हुक खोला। रिया के छोटे-छोटे, गुलाबी निप्पल वाले स्तन बाहर आ गए। अर्जुन ने एक स्तन को हाथ में लेकर मसलना शुरू किया और निप्पल को चूसने लगा। 

    “आह्ह… नहीं… अर्जुन जी… बहुत शरम आ रही है… मम्मी देख रही हैं… प्लीज… छोड़ दीजिए… आह्ह…” रिया ने कमर हिलाकर नखरा किया। 

    अर्जुन ने रिया की साड़ी और पेटीकोट भी खोल दिया। अब रिया सिर्फ पैंटी में थी। उसकी टाइट, पूरी तरह बाल-रहित, गुलाबी चूत पैंटी के ऊपर से साफ दिख रही थी। अर्जुन ने खुद का कुर्ता और पजामा उतार दिया। 

    उसका 10 इंच लंबा और 4 इंच मोटा लंड बाहर निकला — काला, मोटा, नसें उभरी हुईं, सिर पर मोटा फोड़ा चमक रहा था। रिया ने देखकर सिहर उठी। 

    “नहीं… ये… ये बहुत बड़ा है… मैं नहीं ले पाऊंगी… मम्मी… प्लीज रोकिए… मैं डर रही हूँ…” रिया ने रोते हुए कहा। 

    सुधा माँ ने बेटी को चुप कराया, “बेटी… परंपरा है… सह ले… मैं हूँ ना…” 

    अर्जुन ने रिया को बेड पर लिटा दिया। उसने रिया की पैंटी भी धीरे-धीरे उतार दी। अब रिया पूरी नंगी थी। अर्जुन ने रिया के होंठों को फिर से चूमा, जीभ अंदर डाली। एक हाथ से रिया की चूत पर उंगली फेरनी शुरू की। 

    “आह्ह… नहीं… वहाँ मत छुओ… आह्ह… गीली हो रही हूँ… शरम आ रही है… अर्जुन जी… प्लीज… धीरे…” रिया नखरे दिखा रही थी, कमर हिला रही थी। 

    अर्जुन ने कंडोम का पैकेट खोला। लंड पर कंडोम चढ़ाया। फिर लुब्रिकेंट की बोतल उठाई और खूब सारा लुब्रिकेंट लंड पर और रिया की चूत पर लगाया। 

    अर्जुन ने रिया की टांगें फैला दीं। लंड का मोटा, गर्म सिर रिया की चूत के होंठों पर रख दिया। रिया कांप उठी। 

    “नहीं… अर्जुन जी… प्लीज… अभी मत… मैं तैयार नहीं हूँ… बहुत डर लग रहा है… मम्मी… बचाओ…” रिया ने कमर पीछे खींचने की कोशिश की। 

    अर्जुन ने धीरे-धीरे दबाना शुरू किया। 

    सिर्फ 1 इंच अंदर गया। 

    रिया की आँखें फट गईं। 
    “आआह्ह… दर्द… बहुत जलन हो रही है… निकालिए… प्लीज… सिर्फ सिर ही बहुत मोटा है… आह्ह… मेरी चूत फट रही है…” रिया रो पड़ी। 

    अर्जुन रुका नहीं। उसने थोड़ा और दबाया। अब 3 इंच अंदर चला गया। 

    रिया जोर से चीख पड़ी। 
    “आआआह्ह्ह… नहीं… 3 इंच भी नहीं… बहुत दर्द… मैं रो रही हूँ… अर्जुन जी… प्लीज रुक जाइए… मेरी चूत चीर दी… आह्ह… और मत दबाइए…” 

    रिया के आंसू बहने लगे। वह बार-बार कमर हिला रही थी, नखरे कर रही थी, “मम्मी… प्लीज… रोकिए… मैं सह नहीं पा रही… बहुत मोटा… जलन हो रही है…” 

    अर्जुन ने रिया के होंठों को फिर से चूस लिया और धीरे-धीरे और दबाने लगा। 

    अब 4 इंच… 5 इंच…

    रिया सिसक रही थी। 
    “आह्ह… नहीं… आधा भी नहीं… पेट फाड़ रहा है… बहुत गहरा जा रहा है… प्लीज… बस… मैं कुँवारी हूँ… आआह्ह… और मत घुसाइए…” 

    पहले राउंड में पूरा लंड नहीं घुसा। सिर्फ 5 इंच (आधा) ही अंदर गया। रिया की चूत पूरी तरह फैल गई थी। पेट पर हल्का उभार दिख रहा था। अर्जुन ने धीरे-धीरे हिलाना शुरू किया। हर छोटे-छोटे धक्के पर रिया चीख रही थी। 

    “आह्ह… नहीं… जोर से मत… आह्ह… बहुत दर्द… मैं झड़ रही हूँ… प्लीज… निकालिए…” 

    पहला राउंड पूरा होने में 35 मिनट लगे। रिया की चूत लाल और सूजी हुई थी। वह रो-रोकर थक गई थी। 

    दूसरा राउंड शुरू हुआ। इस बार अर्जुन थोड़ा तेज हुआ, लेकिन फिर भी पूरा लंड नहीं घुसा। सिर्फ 6 इंच तक ही गया। रिया लगातार नखरे कर रही थी, “बस… काफी हो गया… मैं और नहीं… आह्ह… मेरी चूत फट गई… प्लीज रुक जाइए…” 

    दूसरे राउंड के बाद रिया लगभग बेहोश हो गई।

    अर्जुन ने लंड बाहर निकाला। कंडोम में वीर्य भरा हुआ था। उसने तीसरा कंडोम खोला और बोला,
    “अब मैं गांड लूंगा।”

    रिया डर गई, “नहीं… गांड में बिल्कुल नहीं… वहाँ बहुत टाइट है… मैं मर जाऊंगी… प्लीज… मम्मी… मना करो…”

    अर्जुन जिद पर अड़ा था।

    सुधा माँ ने रिया को देखा और बोली, “बेटी… परंपरा है… गांड भी देनी पड़ेगी… सह ले…”

    रिया गुस्से में बोली, “मेरे से नहीं होगा… जो ऐसा ही है तो तू ही मरवा ले अपनी गांड… मैं नहीं करूंगी…”

    सुधा माँ ने तुरंत मना किया, “रिया… चुप… ऐसी बात मत बोल… ये गलत है…”

    अर्जुन ने गुस्से से कहा, “आज मेरी सुहागरात है… मैं क्या सो जाऊं? परंपरा है… गांड लेनी ही पड़ेगी…”

    रिया ने फिर रोते हुए कहा, “मेरी माँ के साथ कर लो… मुझे मत… प्लीज… मेरी माँ को ले लो…”

    अर्जुन ने रिया को जबरदस्ती घुटनों के बल मोड़ दिया। रिया चीख रही थी, “नहीं… जबरदस्ती मत… मम्मी… बचाओ… आह्ह… गांड में मत…”

    रिया की चुत अब पूरी तरह सूज चुकी थी। वह बेड पर करवट लेकर लेटी हुई थी, दोनों हाथों से अपनी चूत को ढककर, आंसू बहा रही थी। उसकी सांसें भारी हो रही थीं। अर्जुन अभी भी खड़ा था, उसका 10 इंच का मोटा लंड कंडोम लगाए हुए, पूरी तरह खड़ा और चमक रहा था।

    सुधा माँ बेटी के सिरहाने बैठी थीं, बेटी के बालों में हाथ फेर रही थीं।

    अर्जुन ने गहरी सांस ली और बोला,
    “अब गांड की बारी है रिया। परंपरा है… दुल्हन की गांड भी दामाद को मिलनी चाहिए।”

    रिया तुरंत सिहर उठी। उसने घुटनों को छाती से सटाकर बैठने की कोशिश की और चीखते हुए बोली,
    “नहीं! बिल्कुल नहीं! गांड में मैं नहीं दूंगी… कभी नहीं! आप पागल हो गए हो क्या? मेरी चुत ही फट गई है… गांड में डालोगे तो मैं मर जाऊंगी!”

    अर्जुन की आँखें संकरी हो गईं।
    “रिया, आज मेरी सुहागरात है। परंपरा पूरी करनी पड़ेगी। तू मना मत कर।”

    रिया गुस्से में रोते हुए बोली,
    “परंपरा का नाम लेकर मेरी जान ले लोगे? मेरी चूत अभी भी जल रही है… आधा लंड भी नहीं घुसा था… और अब गांड? नहीं… मैं मना करती हूँ! मम्मी… आप बोलिए ना… ये आदमी मुझे मार डालेगा!”

    सुधा माँ ने बीच में पड़ते हुए कहा,
    “दामाद जी… प्लीज… बेटी अभी बहुत छोटी है… उसकी हालत देखिए… चुत सूज गई है… गांड में तो बिल्कुल नहीं सह पाएगी… आज छोड़ दीजिए…”

    अर्जुन ने सुधा माँ की तरफ देखा और तीखे स्वर में बोला,
    “सास जी, आप चुप रहिए। ये मेरी पत्नी है। आज की रात मैं जो चाहूंगा वो होगा। रिया, अब घुटनों के बल हो जा।”

    रिया ने जोर से सिर हिलाया, आंसू पोछते हुए चीखी,
    “मैं नहीं हूंगी! आप मुझे जबरदस्ती करेंगे तो मैं चिल्लाऊंगी… पूरा घर जाग जाएगा… मैं गांड नहीं मरने दूंगी… चाहे आप मुझे मार ही डालें!”

    अर्जुन ने बेड पर घुटनों के बल चढ़ते हुए कहा,
    “तू मेरी बीवी है… सुहागरात है… गांड भी मेरी है। परंपरा हजारों साल पुरानी है। तू मना नहीं कर सकती।”

    रिया ने तकिए को सीने से चिपकाकर पीछे हटते हुए बोली,
    “परंपरा मेरी जान ले रही है तो भाड़ में जाए परंपरा! मेरी गांड टाइट है… आपका लंड 4 इंच मोटा है… वो घुसेगा तो मैं फट जाऊंगी… खून निकलेगा… मैं सह नहीं पाऊंगी… प्लीज… आज छोड़ दीजिए… कल देख लेंगे…”

    सुधा माँ ने फिर बीच में आने की कोशिश की,
    “दामाद जी… बेटी रो रही है… उसकी इज्जत रखिए… आज चुत में ही काफी हो गया… गांड की बात कल करें…”

    अर्जुन गुस्से में बोला,
    “सास जी, आप बेटी को बिगाड़ रही हैं। आज सुहागरात है… मैं सो नहीं जाऊंगा। रिया, अब काफी नाटक कर चुकी है। पलट!”

    रिया ने जोर से रोते हुए कहा,
    “मैं पलटूंगी नहीं! आप मेरी माँ के साथ कर लीजिए… उनकी गांड लीजिए… जितना मन हो… लेकिन मेरी गांड मत छुईए… मैं बिल्कुल नहीं दूंगी… मैं मना करती हूँ… मैं रो रही हूँ… देखिए मेरी हालत…”

    रिया ने अपनी सूजी हुई चूत अर्जुन को दिखाते हुए कहा,
    “देखिए… कितनी लाल और सूजी हुई है… आधा लंड भी सह नहीं पाई… गांड में डालोगे तो मैं अस्पताल पहुंच जाऊंगी… प्लीज… मम्मी… आप समझाइए ना…”

    सुधा माँ ने अर्जुन से हाथ जोड़ते हुए कहा,
    “दामाद जी… मेरी बेटी अभी बच्ची है… आज रात उसे छोड़ दीजिए… मैं… मैं तैयार हूँ… मेरी गांड ले लीजिए… लेकिन बेटी को मत छुईए…”

    अर्जुन ने सुधा माँ को घूरते हुए कहा,
    “सास जी, आपकी बेटी मेरी बीवी है। उसकी गांड भी मेरी है। आज मैं उसे गांड मारकर ही सोऊंगा।”

    रिया फिर चीख पड़ी,
    “नहीं! मैं कभी नहीं दूंगी! आप जबरदस्ती करेंगे तो मैं आपको कभी माफ नहीं करूंगी… मैं चिल्ला-चिल्लाकर पूरा घर जगा दूंगी… मेरी गांड मत छुओ… प्लीज… मम्मी… रो रही हूँ… देखिए…”

    रिया ने तकिए में मुंह छुपा लिया और जोर-जोर से रोने लगी।

    अर्जुन बेड पर बैठ गया, लंड अभी भी खड़ा था। उसने गुस्से से कहा,
    “ठीक है… आज नहीं मारूंगा… लेकिन कल जरूर मारूंगा। और परसों भी। और जब तक तू मेरी गांड नहीं देगी, मैं तुझे चुत भी नहीं दूंगा।”

    रिया ने सिसकते हुए सिर हिलाया,
    “जो करना है कर लो… लेकिन गांड नहीं… कभी नहीं…”

    सुधा माँ ने बेटी को गले लगाकर चुप कराया।

    कमरे में भारी सन्नाटा छा गया। अर्जुन का लंड अभी भी खड़ा था, लेकिन वह बेड पर बैठकर गुस्से से तीनों को देख रहा था।

    रिया अभी भी रो रही थी और बार-बार दोहरा रही थी,
    “मेरी गांड नहीं… कभी नहीं… मैं मना करती हूँ…”

  • तीन बहुओं का घोड़ा 1

    अध्याय 1: थाईलैंड हनीमून – पहली रात की आग

    मेरा नाम प्रिया है, 26 साल। शादी को सिर्फ 12 दिन हुए थे। मेरे पति विक्रम, 32 साल का, लंबा-चौड़ा, जिम वाली बॉडी, घनी मूंछें। हम दोनों थाईलैंड के पटाया बीच पर हनीमून मनाने आए थे। 5 स्टार रिसॉर्ट का प्राइवेट विला बुक किया था – सामने नीला समुद्र, प्राइवेट पूल, जकूजी, और चारों तरफ रोमांटिक लाइट्स। लेकिन मेरी चुत पहले ही डर रही थी।

    विक्रम का लंड… भगवान, वो सच में घोड़े जैसा था। 13 इंच लंबा, मोटा, काला, नसें उभरी हुईं। शादी से पहले मैंने सिर्फ दो बार लिया था, वो भी बहुत धीरे। लेकिन विक्रम चुदाई करता था जैसे गधा – बिना रुके, बिना थके, घंटों तक जोर-जोर से।

    पहली रात। हम दोनों शैंपेन पीकर बेड पर थे। विक्रम ने मुझे नंगी कर दिया। मेरी साड़ी, ब्लाउज, ब्रा, पैंटी सब फर्श पर पड़ी थीं। मैं नंगी लेटी थी, टांगें थोड़ी खुली।

    “प्रिया… आज मैं तुझे पूरी तरह चोदूंगा,” विक्रम ने कहा और अपना लंड बाहर निकाला। सोया हुआ भी 7 इंच का मोटा। मैंने डरते हुए हाथ लगाया।

    “विक्रम… प्लीज… धीरे… तुम्हारा इतना बड़ा है… मैं सह नहीं पाऊंगी…” मैंने कांपते स्वर में कहा।

    लेकिन विक्रम ने मेरी टांगें कंधों पर रखीं और कंडोम लगाकर लंड का सिर मेरी चुत पर रख दिया। एक जोरदार धक्का।

    “आआआह्ह्ह… नहीं… विक्रम… रुक जाओ… फट रही है मेरी चुत… प्लीज… आधा भी नहीं घुसा… बहुत मोटा है… दर्द हो रहा है…” मैं चीख पड़ी। आंसू निकल आए।

    विक्रम रुका नहीं। उसने कमर जोर से हिलाई और पूरा लंड एक झटके में अंदर धकेल दिया। मेरी चुत पूरी तरह फैल गई। पेट में उभार दिखने लगा।

    “नहीं… विक्रम… निकालो… प्लीज… मैं मर जाऊंगी… इतना गहरा… पेट फाड़ रहा है… आह्ह… धीरे… मत मारो…” मैं रोते हुए उसके सीने पर हाथ मार रही थी।

    लेकिन विक्रम ने मेरी कमर पकड़ ली और घोड़े जैसी रफ्तार से चोदना शुरू कर दिया। पच… पच… पच… पच… हर धक्के पर कमरा गूंज रहा था। लंड मेरी गर्भाशय तक टकरा रहा था।

    “आह्ह… नहीं… बस… रुक जाओ… मैं सह नहीं पा रही… तुम गधे की तरह चोद रहे हो… प्लीज… थोड़ा आराम दो… आआह्ह… हाँ… और गहरा… नहीं… मत…”

    मेरा पहला ऑर्गेज्म आया। चुत ने लंड को कसकर पकड़ लिया। लेकिन विक्रम रुका नहीं। उसने मुझे कुत्ते की मुद्रा में मोड़ दिया, गांड ऊपर की और पीछे से जोर-जोर से ठोकने लगा।

    “नहीं… इस पोजीशन में नहीं… बहुत गहरा जा रहा है… विक्रम… प्लीज… मेरी चुत फट गई… रुक जाओ ना… मैं मना कर रही हूँ… आह्ह… और जोर से मत…”

    दूसरा ऑर्गेज्म। तीसरा। चौथा। मैं थककर बिस्तर पर गिर पड़ी थी। लेकिन विक्रम अभी भी चोद रहा था। 45 मिनट हो चुके थे।

    “विक्रम… प्लीज… अब काफी… मैं और नहीं ले सकती… तुम्हारा लंड बहुत बड़ा है… रोज-रोज मैं मर जाऊंगी…” मैं हांफते हुए बोली।

    विक्रम ने मुझे फिर मिशनरी में लिटाया और तेजी बढ़ा दी। आखिरकार वह कंडोम में झड़ गया। गर्म वीर्य कंडोम में भर गया।

    वो मेरे ऊपर लेट गया। मैं पसीने से तर, चुत लाल और सूजी हुई।

    दूसरे दिन सुबह। विक्रम फिर से खड़ा हो गया। उसने मुझे जकूजी में ले जाकर चोदा। फिर पूल के किनारे। फिर बेड पर। हर बार मैं “नहीं… प्लीज… रुक जाओ… मैं सह नहीं पा रही…” कहती, लेकिन वो घोड़े जैसा चोदता रहता।

    शाम को मैं थककर बिस्तर पर लेटी थी। चुत में दर्द हो रहा था। विक्रम फिर से तैयार था।

    मैंने हिम्मत जुटाकर कहा, “विक्रम… सुनो… तुम्हारा लंड बहुत बड़ा है… मैं जितनी बार चाहकर भी नहीं ले पा रही… प्लीज… कोई लड़की बुला लो… प्रोफेशनल… वो तुम्हें संभाल लेगी… मैं भी देखूंगी… बस मेरी चुत को आराम मिल जाए…”

    विक्रम मुस्कुराया। “तुम सच कह रही हो?”

    “हाँ… प्लीज… मैं मना नहीं कर रही… बस 2 दिन के लिए कोई अच्छी लड़की बुला लो… पैसे दे देंगे… कंडोम लगाकर… मैं तुम्हें देखना चाहती हूँ…”

    विक्रम ने रिसॉर्ट के कांटेक्ट से एक थाई-इंडियन कॉल गर्ल का नंबर लिया। नाम था “लावा”। 24 साल, 36-24-38 फिगर, बहुत खूबसूरत। 2 दिन के लिए 80,000 रुपये तय हुए।

    रात 9 बजे लावा आई। टाइट ड्रेस में। लंबे बाल, भरे स्तन, मोटी गांड।

    विक्रम ने उसे अंदर बुलाया। मैं बेड पर बैठी थी, सिर्फ नाइट गाउन में।

    लावा ने मुस्कुराते हुए कहा, “सर… मैडम… दोनों साथ में एंजॉय करेंगे?”

    मैंने शरमाते हुए सिर हिलाया। “हाँ… लेकिन विक्रम बहुत जोर से करते हैं… तुम संभाल लेना…”

    विक्रम ने लावा को नंगी किया। उसका लंड पहले से खड़ा था। लावा ने कंडोम लिया, मुंह से लगाया और चूसने लगी।

    “वाह… सर… कितना बड़ा… मैं पूरी ले लूंगी…” लावा बोली।

    विक्रम ने लावा को बेड पर लिटाया और घोड़े जैसी चुदाई शुरू कर दी।

    “आह्ह… सर… जोर से… हाँ… और जोर से…” लावा चीख रही थी।

    मैं बगल में बैठी देख रही थी। विक्रम लावा को 1 घंटे तक लगातार चोदता रहा – मिशनरी, डॉगी, राइडिंग। हर बार कंडोम बदलता। लावा पैसे वसूल कर रही थी – वो भी जोर-जोर से चीख रही थी लेकिन सह ले रही थी।

    “प्रिया… देख… तेरा पति कितना जोर से चोदता है…” लावा ने मुझे बुलाया।

    मैंने पास जाकर देखा। विक्रम का लंड लावा की चुत में पूरा घुस-घुसकर बाहर आ रहा था।

    मेरी चुत फिर गीली हो गई। लेकिन मैंने खुद को रोका।

    “विक्रम… प्लीज… लावा को आराम दो… अब मेरी बारी…” मैंने कहा।

    लेकिन विक्रम ने मुझे भी खींच लिया। अब दोनों को बारी-बारी चोद रहा था।

    रात भर यही चला। लावा ने पैसे के हिसाब से पूरा 2 दिन का प्लान बनाया – सुबह, दोपहर, शाम, रात।

  • कामवाली गर्लफ्रेंड हो गई प्रेगनेंट

    नमस्कार दोस्तो, कैसे हैं आप सब!
    उम्मीद करता हूं सब अच्छे होंगे।

    आप सभी ने मेरी पिछली कहानी
    कामवाली को गर्लफ्रेंड बना कर चोदा
    को खूब पसंद किया। इसके लिए धन्यवाद.

    मेरा नाम वेदांत है और मैं छत्तीसगढ़ का रहने वाला हूं।
    मेरी उम्र 20 साल है. मैं लंबा चौड़ा नौजवान लड़का हूं। मेरे लौड़े का साइज 7 इंच है और 3 इंच मोटा है।
    मैं कॉलेज में B.Sc की पढ़ाई कर रहा हूं।

    मेरी पहली कहानी में आप लोगों ने पढ़ा कि कैसे मैंने अपनी कामवाली को पटाया और फिर उसे चोदा।

    इस कहानी में आपको आज बताऊंगा कि कैसे मैंने अपनी कामवाली को एक बार प्रेगनेंट कर दिया और यह बात उसकी बहन को पता चल गई।
    इसे भी प्यार दीजिएगा।

    तो शुरू करता हूँ सेक्सी लड़की देसी Xxx कहानी।

    मैं और मेरी कामवाली या फिर गर्लफ्रेंड तन्नू कई बार सेक्स कर चुके हैं और यह बात कि हम दोनों रिलेशनशिप में हैं.
    तन्नू की बहन रोज़ी को भी पता है.
    लेकिन शायद उसे ये नहीं पता कि हमने 3 महीने में 15 बार से भी ज्यादा सेक्स किया है।
    और तन्नू अब बिना लण्ड के एक हफ्ता भी नहीं रह सकती।

    जब मैं और मेरी तन्नू ने अगली बार सेक्स करने का प्लान किया तो मैंने बिल्कुल नहीं सोचा था कि तन्नू गर्भवती हो जायगी।

    मैं अपनी जीएफ को लेकर एक होटल में ले गया जहां हमने सेक्स का प्लान बनाया था।
    मैंने 4 घंटे की बुकिंग करा ली।

    इस सेक्स डेट के लिए तन्नू को मैंने स्पेशल कपड़े गिफ्ट किए थे। मैंने उसे नीले रंग की ड्रेस और लाल लायेंजरी दी।
    उस ड्रेस में तन्नू तो पटाखा बम माल जैसी लग रही थी.
    कोई उसे देख कर सोच भी नहीं सकता था कि वह कामवाली है।

    होटल के रूम में घुसते ही मैं दरवाजा बन्द करके उसके चूचों पर टूट पड़ा।
    इस ड्रेस में उसके बूब्स और गांड दुगने बड़े लग रहे थे।

    हम दोनों पागलों जैसे चूमा चाटी करने लगे।
    मैंने उसकी ड्रेस को उतार दिया और उसने भी मेरे कपड़े उतार दिए।

    अब वह लाल ब्रा पैंटी में सनी लियोनी लग रही थी।
    आज तक मैंने उसे इतने प्यार और हवस से नहीं देखा था।

    तन्नू तो जैसे पोर्न स्टार हो।

    अब उसने मुझे बेड पर धकेल दिया और मेरे ऊपर चढ़ गई और पूरे बदन को चूमने लगी।

    मेरा लण्ड तो बेकाबू हो गया; उसकी चूत में घुस कर ही दम लेगा।

    मैंने करवट बदली और तन्नू को अपने नीचे लाया।
    तब मैंने उसकी ब्रा को खोल दिया और उसके बूब्स को आजाद कर दिया।

    आज उसके बूब्स दबाने में जो मजा था, वो कभी नहीं मिला।
    मैं उसके चूचे से दूध पी रहा था।

    अब मेरा हाथ उसकी जालीदार पैंटी पर चला गया।
    पैंटी की जाली से उसके छोटे छोटे झांट के बाल दिख रहे थे जो मैंने ही साफ किए थे।

    मैं पैंटी के ऊपर से उसकी गीली चूत को सहला रहा था।

    थोड़ी देर बाद मैंने उसकी पैंटी भी निकाल दी।
    उसकी फटी हुई चूत में मेरी 3 उंगली घुस गई।

    10 मिनट के फिंगरिंग के बाद मैंने 69 पोजिशन बना ली।
    मेरा लण्ड उसके मुंह में और मेरी जीभ उसकी चूत में!

    करीब 20 मिनट के इस कार्यक्रम के बाद हम दोनों एक साथ झड़ गए।
    मेरा सारा वीर्य तन्नू पी गई और मैं उसकी चूत का रस चाट गया।

    हम दोनों ही थक चुके थे लेकिन हमारे अंदर का हवस नहीं थकी थी।

    तन्नू उठी और मेरी गोद में बैठ गई।
    उसने मुझे एक गोली खिलाई और उसके पास दूसरी गोली थी, जो वो खुद खाई। ये सेक्स बढ़ाने की गोलियां थी।

    गोली खाने के बाद हमारे अंदर बिजली दौड़ने लगी और हम दुबारा शुरू हो गए।

    मेरा लण्ड तो बास के तरह लंबा और लोहे के डंडे जैसा कड़ा हो गया.
    और तन्नू भी लण्ड लेने के लिए इतनी बेताब कभी नहीं हुई थी।

    हमने पोजिशन ली और मैंने धक्के लगाने शुरु किए।
    मेरा लण्ड पहले धक्के में आधा घुसा और दूसरे धक्के में पूरा।

    लण्ड घुसते ही तन्नू की तो जैसे रूह ही निकल गई।

    लण्ड घुसाने के बाद मैंने अपने हाथों को उसके चूचों पर जमा लिए और धकापेल चुदाई शुरू कर दी।
    तन्नू ने भी मेरा पूरा साथ दिया।
    अपनी गांड उठा उठा कर वो मेरा लण्ड ले रही थी।

    ‘उह्ह … अह्ह्ह! उफ्फ … उम्ह! ओह्ह्ह यस बेबी … उह्ह्ह उई उई चोदो मुझे! ओहो अह्ह!’ जैसी मादक सिसकारियां पूरे कमरे में गूंज रही थी।

    10 मिनट तक मिशनरी, 5 मिनट तक डॉगी स्टाइल, 5 मिनट तक कॉउगर्ल और 5 मिनट तक दुबारा मिशनरी के बाद हम झड़े.

    मैंने अपना माल उसके अंदर ही निकाल दिया।
    यह पहली बार था कि हमने कॉन्डम के बिना ही सेक्स किया था।

    ऐसी पलंग तोड़ चुदाई करके हम दोनों थक कर चूर हो गए थे।
    मैं सर से पैर तक पसीने से भीग गया था और तन्नू भी थक गई थी।

    अब भी हमारे पास करीब 2 घंटे बचे थे।
    मैंने तन्नू को गोद में उठाया और बाथरूम में ले गया।

    हम दोनों एक साथ नहाए और फिर लिपट कर सो गए।
    फिर हमने होटल से चेक आउट किया और मैं तन्नू को एक रेस्टोरेंट ले गया जहां हमने खाना खाया और फिर उसे घर छोड़ दिया।

    थोड़े दिन बाद मुझे तन्नू का फोन आया और उसने बताया कि वह सेक्सी लड़की देसी Xxx से प्रेगनेंट हो गई है और यह बात उसकी बहन रोजी को पता चल गई है। तन्नू की बहन ने उसको खूब डांटा और कहा कि वह यह बात घर में सबको बता देगी।

    किसी तरह तन्नू ने अपनी बहन को मना लिया लेकिन अब रोजी मुझसे मिलना चाहती थी।
    यह बात सुनकर मेरे होश उड़ गए.
    इसलिए नहीं कि तन्नू प्रेगनेंट है बल्कि इसलिए कि यह बात उसकी बहन रोजी को पता चल गई है।

    मुझे पता था कि तन्नू गर्भवती हो जायगी और मैंने इसकी तैयारी कर ली थी।
    मैंने गर्भ निरोधक का इंतजाम कर लिया था।

    लेकिन मैंने सपने में भी नहीं सोचा था कि यह बात उसकी बहन को पता चल जायगी।

    मैंने तन्नू से पूछा कि उसकी बहन को ये बात कैसे पता चली।
    तो उसने बताया कि वो प्रेग्नेंसी टेस्ट किट खरीद रही थी तभी उसकी बहन ने उसे देख लिया। जब वो टेस्ट करके बाथरूम से बाहर निकली, तभी अचानक से उसकी बहन ने उसके हाथ से टेस्ट किट ले लिया।

    फिर उससे पूछा कि ये सब क्या है और उसने सेक्स कब किया।
    तन्नू ने डर से सारी बातें बता दी और फिर उसकी बहन ने उसको बहुत डांटा।
    उसने पूछा कि तुम लोग कितने बार सेक्स किए हो तो तन्नू ने 5 बार बोल दिया।

    इसके बाद वह बोली- अपने ब्वॉयफ्रेंड से मेरी बात कराओ।
    तो तन्नू ने बोला- अभी नहीं, 3 बजे।

    3 बजे मुझे तन्नू की बहन का फोन आया।
    मैं भी डरा हुआ था कि कहीं कुछ गड़बड़ न हो जाए।

    उसने मुझसे डायरेक्ट पूछा कि कॉन्डम यूज क्यूं नहीं किया।
    मैंने कहा- मैंने गोली खा ली थी जिससे मुझे कुछ होश नहीं था। तन्नू ने भी ध्यान नहीं दिया और फिर ये सब हो गया।

    उसने मुझे बहुत डांटा और कहा कि अब हम दोनों ब्रेकअप कर लें।
    मैंने कहा- किसी दूसरे के बोलने से तो मैं ब्रेकअप नहीं करूंगा।

    और मैंने उसे कहा- आपका भी तो कोई बीएफ होगा?
    तो वह थोड़ी शांत हुई।

    फिर मैंने यह भी कह दिया कि आपकी बहन ने इतनी बार सेक्स किया है तो आपने खुद कितनी बार सेक्स किया होगा।

    यह सुनते ही वह बोली कि उसके अब तक 5 ब्रेकअप हुए हैं और छठे बीएफ के साथ है। जब भी हम मिलते हैं तो सेक्स करते हैं।

    मैं समझ गया कि जब बड़ी बहन ही रण्डी है तो छोटी बहन में उसके गुण आयेंगे ही। थोड़े देर से आए लेकिन आए जरूर!

    फिर उसने कहा- ठीक है … लेकिन अब तुम दोनों कुछ मत करना.
    और तन्नू को गर्भ निरोधक गोली खिलाने को भी बोल दिया।

    यह बात मैंने तन्नू को बताई तो उसने राहत की सांस ली।
    उसकी बहन ने बोला था कि अब कुछ मत करना।
    लेकिन मैंने तो तन्नू की गोल गांड मारने का प्लान बना लिया था।

  • भतीजे के साथ पहली चुदाई

    हेलो दोस्तों, यह मेरी पहली कहानी है।

    मैं इस साइट का बहुत धन्यवाद देती हूं क्योंकि इस साइट की वजह से ही मैं अपने साथ हुए एक अनुभव को शेयर करने जा रही हूं।

    मैं इस साइट की रेगुलर रीडर हूं।

    मेरा नाम पूजा है और मैं पंजाब की रहने वाली हूं।

    मैं आज आप सभी को अपना एक सच्चा सेक्स अनुभव बताने जा रही हूं।

    जो मेरे साथ हुआ और जिससे मेरी पूरी जिंदगी ही बदल गई।

    दोस्तों मैंने आजतक किसी और को अपने जिस्म को छूने का मौका नहीं दिया था।

    मेरे पति ही थे जो मेरी चूत और बाकी के बदन के अकेले मालिक थे।

    मेरी उमर 34 साल है लेकिन मैं दिखने में बहुत सेक्सी लगती हूं।

    मेरा रंग गोरा है और मेरा फिगर 38-34-36 है।

    मैं दिखने में बहुत अच्छी हूं।

    तो आप लोगों को और बोअर न करते हुए मैं अब स्टोरी पर आती हूं।

    दोस्तों यह एक रियल चुदाई स्टोरी है और मेरे और मेरे जेठ के बेटे के बीच की है।

    उसने मुझे सेक्स करने के लिए गरम किया उस दिन!

    मेरी फैमिली में मेरे पति और हमारा 8 साल का बेटा और मेरे ससुर रहते हैं।

    मेरे जेठ और उनकी फैमिली किसी और शहर में रहते हैं और उनका भी एक बेटा है जो 22 साल का है।

    और यह लड़का अब तो मुझसे पचासों बार सेक्स कर चुका है।

    दोस्तों जैसे मैंने शुरू में बताया कि मैं सिर्फ अपने पति से प्यार करती थी और उनसे ही चुदवाती थी।

    मेरे जेठ के बेटे का नाम रोहित है और वो दिखने में एवरेज है।

    रोहित की और मेरे पति की बहुत अच्छी बनती थी।

    उनकी शादी के पहले और शादी के बाद वो मेरे साथ भी अच्छी तरह से घुलमिल गया था।

    लेकिन मुझे पता नहीं था कि वो अपनी बातों से मुझे फंसाने और चोदने का प्लान बना रहा है।

    अगर मुझे पता होता तो शायद मैं उससे थोड़ा दूर रहती।

    लेकिन जब भी वो लोग हमारे घर पर आते या हम उनके घर पर जाते तो हम बहुत सारी बातें करते और रोहित और मैं अक्सर एक दूसरे को मैसेज भी भेजा करते थे।

    इससे हम और भी नजदीक आने लगे थे।

    एक दिन हम बैठ के ऐसे ही बात कर रहे थे।

    मैंने रोहित से बोला कि क्यों तुम्हें मेरे साथ चैट करने का इतना शौक है?

    रोहित बोला, हां चाची।

    मैंने कहा, वैसे मुझे भी अच्छा लगता है क्योंकि मेरे साथ बात करने वाला कोई नहीं है।

    रोहित बोला, मैं हूं ना चाची।

    शायद यह मेरा पहला स्टेप था।

    अब जब भी मेरे पति सो जाते तो मैं उसके साथ चैट करती और ऐसे ही एक दिन चैट करते हुए मैंने उसे पूछा।

    मैं: क्या तेरी कोई गर्लफ्रेंड है?

    रोहित: जी नहीं चाची मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है..

    मैं: सच अच्छा बताना।

    रोहित: प्लीज आप कोई और बात करो।

    मैं: अरे शर्मा मत बता ना वैसे भी हम बहुत अच्छे दोस्त बन ही चुके हैं, क्योंकि हम बहुत दिनों से चैट कर रहे हैं।

    रोहित: नहीं चाची हम अच्छे दोस्त नहीं हैं।

    मैं: क्यों?

    रोहित: क्या आप सच में मेरी अच्छी दोस्त बनना चाहती हो?

    मैं: लेकिन तेरे चाचा को पता चल गया तो?

    रोहित: ऐसे कैसे पता चल जाएगा चाची।

    मैं उससे चैट करती हूं और मेरे पति को नहीं पता है वो बात रोहित भी जानता था।

    मैं: ठीक है।

    फिर उसके बाद हम किसी रिश्तेदार के घर शादी पर मिले।

    वहां पर उनकी बेटी की शादी थी और हम एक दूसरे से मजाक कर रहे थे।

    उस दिन ही मेरी जिंदगी बदल गई।

    वहां पर मेरे पति ने कुछ सामान मंगवाया।

    मेरे पति और जेठ के जिम्मे ही ज्यादा काम था शादी का।

    वो दोनों बिजी थे इसलिए मेरे पति ने रोहित को बुलाया और कहा, रोहित एक काम कर गाड़ी ले के चाची के साथ जा कुछ सामान ले के आना है।

    मैंने रोहित को देखा तो वो खुश लग रहा था बड़ा।

    वो आगे गया और उसने कार को पार्किंग से गेट की बाहर निकाला।

    उसने कार का दरवाजा खोल के मुझे अंदर लिया।

    कार चालू हुई और हम दोनों बात करने लगे।

    कार में स्लो स्लो AC ऑन था और रोहित की शर्ट से महंगे सेंट की खुशबू भी आ रही थी।

    हम चलती हुई कार में बातें कर रहे थे।

    उसने हंसते हुए कहा, क्या बात है आज तो मेरी गर्लफ्रेंड बड़ी सेक्सी लग रही है।

    मैं: इतनी ज्यादा भी नहीं कि जितनी तुम तारीफ कर रहे हो।

    रोहित: आज मुझे अपनी इस गर्लफ्रेंड से एक गिफ्ट चाहिए।

    मैं: क्या?

    रोहित हंस के बोला, लिप किस!

    मैं एकदम से चुप हो गई और मैंने उसे एक थप्पड़ मारा।

    और मैंने उसे कहा, यह क्या बोल रहे हो।

    वो कुछ नहीं बोला और कार ड्राइव करने लगा।

    कुछ ही देर में हम लोग घर पहुंच गए।

    मैं अंदर गई और सामान ले कर वापस आई।

    जब मैं कार में बैठ गई तो वो थोड़ा शांत था और मैं उसको बोली कि तुम अभी बच्चे हो।

    और तुम्हें नहीं पता कि यह बातें कहां तक चली जाती हैं।

    फिर मैंने उसे थप्पड़ के लिए सॉरी कहा।

    लेकिन बहुत बातचीत के बाद भी जब वो नहीं बोला तो मैंने कहा, क्या चाहिए तुम्हें?

    तो रोहित ने कहा, तुम!

    मैं एकदम से चुप हो गई और सोचने लगी कि कहीं मेरे पति और उनके बड़े भाई के बीच में कहीं इस बात को ले के झगड़ा न हो जाए।

    अगर इसने बता दिया कि चाची ने आज मुझे मारा तो वो पूछते कि क्यों!

    मैं उसके साथ चैट करती थी और मिलती भी थी।

    यह सब बातें सोच के मैं डर सी गई थी।

    मैंने रोहित से कहा, तुम मेरी सिर्फ किस ले सकते हो।

    रोहित कुछ नहीं बोला और मैं डर गई।

    मैं कुछ नहीं बोली और रोहित मेरा हाथ पकड़ के कमरे में चल दिया।

    उसने मुझे दीवार के साथ खड़ा कर दिया और जानवरों के जैसे वो मेरी ऊपर टूट पड़ा।

    उसके होंठों से मेरे होंठ लगने से मैं भी बेकाबू होने लगी थी।

    और तभी उसके हाथ मेरे बूब्स पर आ गए।

    मैं कहना चाहती थी कि नहीं हम सेक्स नहीं करेंगे लेकिन डर की वजह से मैं कुछ नहीं बोल पाई।

    मैं नहीं चाहती थी कि वो गुस्से में ऐसा कुछ कर दे जिससे मेरी शादीशुदा जिंदगी में दरार आ जाए।

    उसके हाथ मेरे बूब्स को ऐसे दबा रहे थे जैसे मेरे संतरे का जूस निकालना हो।

    और फिर जो हुआ वो मुझे आजतक याद है।

    उसने मेरा ब्लाउज ऊपर कर के मेरे बूब्स को चाटना चालू कर दिया।

    मैं उसे बहुत बार रुकने के लिए मना कर रही थी हंसते हंसते।

    यह मेरी मजबूरी थी कि मैं उसे जोर नहीं कर सकती थी और वो बात का उल्टा मतलब निकाल रहा था शायद।

    वो सोच रहा था कि हंसी तो फंसी और मैं सच में फंस गई।

    कुछ ही देर में मेरे सारे कपड़े जमीन पर पड़े थे और मेरे सामने मेरे इस भतीजे का बड़ा लंड था।

    उसने उसका लोड़ा मेरे मुंह में डाल के चूसने के लिए कहा।

    मैंने डरते हुए लेकिन अंदर से एक अजीब सी गर्मी महसूस करते हुए उसके मोटे लंड को मुंह में लिया।

    मेरी जीभ उसके सिरे पर घूम रही थी और मैं धीरे धीरे चूसने लगी जबकि मेरे मन में पति की याद आ रही थी जिससे मुझे बहुत अपराधबोध हो रहा था।

    फिर उसने अपनी हवस को संतोष लिया।

    एक बार उसने मेरी चूत मारी और चूत को लगातार 10 मिनट तक चोदा।

    एक छोटे लड़के में इतनी शक्ति पता नहीं कहां से आ गई थी।

    उसने मुझे बिस्तर पर लिटाया और मेरी टांगें फैला दीं।

    उसका मोटा लंड मेरी चूत के मुंह पर रगड़ने लगा जिससे मेरी चूत गीली होने लगी।

    फिर उसने धीरे से अपना लंड मेरी चूत में घुसाया।

    पहले तो थोड़ा दर्द हुआ लेकिन जैसे ही वो अंदर बाहर होने लगा मेरे शरीर में एक अनजानी खुशी की लहर दौड़ने लगी।

    मेरा दिल तेज धड़क रहा था और अपराधबोध से मेरा चेहरा गर्म हो रहा था कि मैं अपने पति को धोखा दे रही हूं लेकिन रोहित की चुदाई मुझे अपने पति से कहीं ज्यादा अच्छी लग रही थी।

    उसका लंड गच गच की आवाज से मेरी ढीली चूत में लगातार अंदर बाहर हो रहा था।

    हर थ्रस्ट के साथ मेरी चूत की दीवारें उसके लंड को कस कर पकड़ रही थीं और मुझे बहुत मजा आ रहा था लेकिन मैंने मुंह से कोई आवाज नहीं निकाली ताकि वो न समझे कि मैं एंजॉय कर रही हूं।

    मैं अंदर ही अंदर कराह रही थी और सोच रही थी कि यह गलत है फिर भी रुकना नहीं चाहती।

    और वो मुझे चोदते हुए मेरे बूब्स को चूस रहा था।

    उसके मुंह में मेरे निप्पल्स को चूसते समय मेरे बदन में झुरझुरी सी दौड़ रही थी।

    मैं अंदर ही अंदर कराह रही थी लेकिन बाहर से चुप थी।

    कभी अपराधबोध इतना बढ़ जाता कि आंसू आ जाते लेकिन अगले ही पल रोहित का जोरदार धक्का मुझे फिर से आनंद में डुबो देता।

    उसने मेरे पूरे बदन को लाल कर दिया था।

    जब उसका छूटा तो वीर्य से मेरी चूत पूरी गीली हो गई।

    और एक लंबी सांस ले के उसने अपना लंड बाहर निकाल लिया।

    मैंने टिश्यू से गीली चूत को साफ किया और कपड़े पहन के हम निकल पड़े।

    मेरे पति ने पूछा भी कि इतनी देर क्यों हुई लेकिन मेरे पास जवाब नहीं था।

    रोहित ने बताया कि पीछे के टायर में हवा कम लग रही थी इसलिए भरवाने चले गए थे।

    यह दिन और आज….रोहित रुका नहीं है।

    जब भी मैं अकेली होती हूं वो मेरे पास आके अपनी सेक्स की भूख को मिटा लेता है।

    पिछले महीने से तो वो एनल सेक्स भी करने लगा है।

    और अकसर वो मुझे होटल में सेक्स के लिए भी जिद कर रहा है।

    कहता है चाची कभी कभी घर पर पूरा मौका नहीं मिलता है।

    आप ही बताओ इस चुदक्कड़ भतीजे को कैसे हैंडल करूं?

    मैं भी चाहती हूं उसके साथ भरपूर सेक्स करना लेकिन मैं ये भी चाहती हूं कि उसको लगे कि वही जिम्मेदार है और मैं मजबूरी में कर रही हूं।

  • दूसरी शादी की सुहागरात का मजा

    मेरा नाम रेनू है और मैं जयपुर में रहती हूँ. मेरी उम्र 37 वर्ष की है.
    मेरे पति और मैं दोनों सरकारी नौकरी करते थे.
    हम दोनों का एक ब/च्चा है.

    हमारी लाइफ ठीक चल रही थी.
    मेरे पति सुनील मुझे बहुत प्यार करते थे.
    हम दोनों भगवान की नेमत से बहुत खुश थे लेकिन एक दिन सड़क हादसे में उनकी मौत हो गई.

    ये खबर सुन कर मुझ पर दुखों का पहाड़ सा टूट पड़ा.

    मैं अपने पति के बिना जीना नहीं चाहती थी और मर जाना चाहती थी … लेकिन अपने ब/च्चे को देखकर अपने आप को संभाला.

    पीहर और ससुराल वाले ढांढस बँधाते और हिम्मत से काम लेने को बोलते.
    मैं किसी के ऊपर बोझ बनना नहीं चाहती थी.
    मैं रोज़ अपने पति को याद करती और अकेले में बैठकर रोती रहती.

    धीरे-धीरे ये मुश्किल वक्त निकल गया और मैं अकेली ही अपने ब/च्चे के साथ रहने लगी.

    अब मैंने उनकी यादों के सहारे अकेले जीना सीख लिया था.
    मुझे उनके इंश्योरेंस और फंड्स से बहुत पैसे मिले थे, पैसे की कोई कमी नहीं थी लेकिन पति की कमी कोई भी चीज़ पूरी नहीं कर सकती थी.

    जैसे-जैसे समय निकला, मैं अपनी नौकरी करके ब/च्चे को पालने लगी. मेरा पूरा समय ब/च्चे को खुश रखने और उसे खिलाने में निकल जाता था.
    बस इसी तरह से समय निकल रहा था.

    लेकिन एक औरत के लिए ये सब आसान नहीं होता.
    लोग मुझ पर गंदी निगाहें डालते; हर कोई हमदर्द बनना चाहता था.
    मैं किसी से बात नहीं करती थी; मुझे ऐसे लोगों से नफ़रत होती थी.

    मुझे अब पति की यादों के सहारे ही जीना था.
    मैं बिल्कुल साधारण तरीके से रहने लगी.

    मुझे अपनी चूत के बाल भी साफ़ करने का मन नहीं करता था.
    मेरी झांटें बहुत बड़ी हो गई थीं.

    जैसे ही एक बरसी पूरी हुई, घरवा ले बोलने लगे- बेटी अभी तेरी पूरी उम्र पड़ी है. ब/च्चे के भविष्य का सोच … दूसरी शादी कर ले!

    मुझे ये सब सुन कर गुस्सा आता था.
    अब तो मेरी सहेलियां भी शादी करने की बोलने लगी थीं.

    मेरी एक खास सहेली मुझसे बोली- देख यार, ऐसे जीवन नहीं चलता!

    लेकिन मैं किसी से शादी करना नहीं चाहती थी.
    मैं अपने पति को बहुत प्यार करती थी; उनकी यादों को मैं किसी के साथ बांटना नहीं चाहती थी.

    मेरे घर वालों ने पीछा नहीं छोड़ा.
    वे बोलते रहे कि बेटी समाज में विधवा का जीवन नरक से भी बदतर होता है. ब/च्चे के बारे में सोच … इसको भी तो बाप का प्यार चाहिए.

    ब/च्चे के बारे में सोचकर एक दिन मैंने हां कर दी.
    घर वाले बहुत खुश हुए.

    वैसे मैं जवान-सुंदर थी, नौकरी थी और अब पैसा भी बहुत था तो रिश्तों की कोई कमी नहीं थी.

    रोज़-रोज़ रिश्ते आ रहे थे.
    अनमैरिड और मैरिड सब तरह के रिश्ते आ रहे थे.

    घर वालों ने बहुत से लड़कों के फ़ोटो भेजे पसंद करने के लिए … लेकिन मैंने सब उन्हीं पर छोड़ दिया कि जो आपको ठीक लगे, वह करो.

    फिर उन्होंने एक लड़का फ़ाइनल कर दिया.
    वह भी शादीशुदा था.
    उसकी शादी दो साल पहले हुई थी लेकिन शादी के 3 दिन बाद ही उसकी बीवी पीहर में करंट लगने की वजह से चल बसी थी.

    उन्होंने फ़ाइनल किए लड़के की डिटेल और उसकी फ़ोटो मुझे भेज दी.
    उस लड़के का नाम रवि था.

    मुझे एक प्रतिशत भी इंट्रेस्ट नहीं था पर ब/च्चे की खातिर मैंने एक बार फ़ोटो देख लिया.
    वह लड़का बहुत स्मार्ट था अभी केवल 32 साल का था.
    उसकी सरकारी नौकरी थी और वह इंजीनियर था.

    मैं तो सोच भी नहीं सकती थी कि किसी विधवा को ऐसा हैंडसम जवान पति मिल सकता है.
    यहीं से इस हैपी एंडिंग सेक्स कहानी की शुरुआत हुई.

    घर वाले और सहेलियां मुझे पार्लर जाने और हुलिया सुधारने को बोलती थीं.
    लेकिन मैं तो शादी भी सिर्फ घर वालों और ब/च्चे की खुशी के लिए ही कर रही थी … अपने लिए नहीं.

    फिर भी रोज़-रोज़ उनकी ज़िद की वजह से मैं पार्लर जाने लगी.

    मेरी उसी पक्की सहेली ने कसम दी कि एक दुल्हन की तरह तैयार होना वर्ना कभी बात नहीं करूँगी.

    इस वजह से मैं फुल बॉडी वैक्सिंग और मेकअप करवाने लगी.
    फिर मैंने चूत को भी बिल्कुल साफ़ कर लिया.

    अब मैं भी किसी हीरोइन से कम नहीं लग रही थी.

    सब कुछ तय होने के एक महीने बाद ही हमारी शादी कर दी गई और मैं अब ससुराल आ गई.

    मेरे लिए सब नए थे.
    सभी लोग बहुत अच्छे थे.

    मेरी खूबसूरती की सबने तारीफ़ की … मुझे ऐसा नहीं लगा कि अनजान हैं.
    सबने मेरा खूब ध्यान रखा.

    मेरा ब/च्चा भी उनमें घुल-मिल गया.

    ये देख कर मेरा दुख कम हुआ लेकिन मैं तो बस मेरे पहले पति को ही याद कर रही थी.

    ये शादी मैंने खुद के लिए नहीं … ब/च्चे की खातिर की थी.

    जैसे-जैसे सुहागरात नज़दीक आ रही थी, मैं घबरा रही थी.
    मैं किसी और मर्द को खुद को छूने देना नहीं चाहती थी.

    सुहागरात को मैं कमरे में बेड पर घूँघट करके बैठी थी कि तभी दरवाज़ा खुला और रवि अन्दर आ गए.

    मैं चुपचाप घूँघट में से उनको देख रही थी.
    उनकी हाइट छह फीट, रंग गोरा था.

    तभी उन्होंने अपनी टाइट शर्ट-पैंट उतार दिए.
    उनकी पर्सनैलिटी किसी फौजी जैसी थी.

    वे बाथरूम में गए और हाथ-मुँह धोकर सिर्फ़ तौलिया लपेट कर बाहर निकल आए.

    फिर ड्रेसिंग टेबल के सामने खड़े होकर नीचे से कंघा उठाने जैसे ही झुके, उनका तौलिया खुल कर गिर गया.

    तभी मेरी नज़र ड्रेसिंग टेबल के ग्लास पर जा पड़ी.
    उन्होंने चड्डी नहीं पहनी हुई थी.

    मेरी आंखें फटी की फटी रह गईं.
    ये आदमी का लंड था या घोड़े का …

    मैंने ऐसा लंड कभी सोचा भी नहीं था.

    उन्होंने तुरंत तौलिया पहन ली लेकिन मेरी आंखों के सामने तो उनके लंड की फ़ोटो बन गई.

    इतने समय बाद आंखों के सामने लंड देखकर मेरी चूत भारी-भारी सी होने लगी.
    जैसे-तैसे करके मैंने खुद को संभाला.

    उन्होंने कमरे की लाइट बंद करके नाइट बल्ब जला दिया.
    वे बेड पर बैठे और मेरा घूँघट उठा कर बोले- यार कितनी खूबसूरत हो तुम … मेरा तो नसीब ही खुल गया!

    ये बोलकर उन्होंने मेरे हाथों में गिफ़्ट का डिब्बा पकड़ा दिया और खोलने को बोले.
    मैंने डिब्बा खोला तो उसमें एप्पल आईफ़ोन था.

    वाह … आई फोन!
    मैं बहुत खुश हुई.
    मैंने पहली बार एप्पल आईफ़ोन हाथ में लिया था.

    उन्होंने पूछा- कैसा लगा गिफ़्ट?
    तो मैंने सिर्फ़ गर्दन हिला कर हामी भर दी.

    तभी रवि ने मेरे हाथ को छुआ तो मैं बेड से नीचे उतर गई और बोली- सॉरी … ये सब हमारे बीच कभी नहीं होगा … आप मुझे कभी छूना मत!

    ये सुनकर वे मेरे पास आए और मेरे सामने खड़े होकर मेरे दोनों हाथों को पकड़ कर बोले- जान. ये मेरी पहली सुहागरात है. पहली बीवी सुहागरात के समय पीरियड्स में थी!

    ये ‘जान’ शब्द सुने डेढ़ साल हो गया था.
    उनकी पहली सुहागरात वाली बात सुनकर मैं मन ही मन खुश होने लगी लेकिन फिर भी मुँह बनाकर हाथ छुड़ाकर दूर हट गई और ड्रेसिंग टेबल के सामने खड़ी हो गई.

    तभी रवि मेरे पीछे आए और उन्होंने पीछे से अपने हाथ आगे करके मेरे दोनों बूब्स को पकड़ लिया.
    साथ ही अपना मूसल जैसा हथियार मेरी गांड पर टिका दिया.
    वे मेरे बूब्स को हल्के हाथों से सहलाने लगे.

    मेरे पूरे शरीर में करंट सा रेंगने लगा, चूत का भारीपन मैं संभाल नहीं पा रही थी कि अब पैर भी भारी लगने लगे और एक एक कदम उठाना भी भारी पड़ रहा था.

    मैं खुद को हटा नहीं पाई कि तभी रवि अपने एक हाथ से मेरे पेट पर सहलाते हुए उंगलियों को मेरी नाभि के चारों तरफ़ घुमाने लगे.
    फिर नाभि से नीचे मेरे पेड़ू पर रख लिया.

    दोस्तो, डेढ़ साल बाद अगर कोई हट्टा-कट्टा मर्द नाइट बल्ब के उजाले में पीछे से पकड़ ले और उसका लंड मूसल जैसा हथियार लड़की देख चुकी हो … तो खुद ही सोचो कि उस वक्त मेरी क्या हालत हुई होगी.

    मैं निढाल होकर पीछे की तरफ़ रवि के ऊपर गिरने लगी और मन ही मन खुश होने लगी कि इतने दिन की प्यास आज मिटेगी.

    तभी रवि ने पकड़ कर मुझे अपनी तरफ़ मोड़ कर सीधा कर लिया.
    वे अपनी गर्म सांसें मेरे मुँह पर छोड़ने लगे.

    मेरे हाथ खुद ही उनके कंधों पर पहुंच गए और मेरे बूब्स तन कर रवि की छाती को छूने लगे थे.

    रवि ने मेरे होंठों को अपने मुँह में भर लिया.
    मुझ पर उनके लौड़े का नशा चढ़ गया था इसलिए मैं चुपचाप उनका साथ देती रही.

    थोड़ी देर अपने होंठों को चुसवाने के बाद मैंने मुँह खींच लिया.
    मेरी चूत रिसने लगी थी, पूरी पैंटी गीली हो गई थी.

    मेरा मन अब चुदाने को हां करने के बहाने ढूँढने लगा.
    मैं सोचने लगी कि अब कभी ना कभी तो नए जीवन की शुरुआत करनी पड़ेगी … मैं इनका जीवन क्यों खराब करूँ? इनका भी तो हक़ है मुझ पर!

    मैंने अपनी चूत की हालत देखकर सुनील को मन ही मन बोला- सॉरी, अब मैं नहीं रुक पाऊंगी.
    बस मैंने रवि के लौड़े पर हाथ रख दिया.

    ये देख रवि बहुत खुश हुए और मेरे हाथ के ऊपर अपना हाथ रख कर लौड़े को कस लिया.

    उनका आधा लौड़ा भी मेरी मुट्ठी में नहीं आ पा रहा था और यह एक बिलांड जितना लंबा था.
    कमाल की बात यह थी कि रवि का लंड गोरा था उसका टोपा बहुत मोटा था, झांटें बिल्कुल साफ़ थीं.

    सुनील का लंड तो इसके आगे आधा भी नहीं था.
    यह देखकर मैं बहुत खुश हुई कि अब से इस पर मेरा हक़ है और कभी भी चुदवा सकती हूँ.

    मैं ऊपर से लंड को सहला रही थी और रवि काम भरी सिसकारियां लेने लगे थे.

    तभी रवि ने मुझे अपनी बांहों में उठा लिया और बेड पर लिटा दिया.

    उसके बाद रवि ने मेरे गहने एक-एक करके उतारना शुरू कर दिए.
    मैंने आंखें बंद कर लीं और बस चुपचाप लेटी हुई रवि के हाथों से खुद को नंगी करवा रही थी.

    गहनों के बाद वे साड़ी की पिन खोलने लगे.
    ये देखकर तो मेरी चूत में आग सी लग गई क्योंकि अब ज़्यादा देर नहीं थी हमबिस्तर होने में.

    जल्द ही मैं सिर्फ़ ब्रा और पेटीकोट में थी.

    रवि मेरे दोनों पैरों के बीच आए और पेटीकोट को उठा कर अपने फौलादी हाथों को जांघों पर फिराने लगे.

    मैंने अंगड़ाई लेकर दोनों हाथों से बेडशीट पकड़ ली.
    तभी रवि ने अपना हाथ चूत के ऊपर रख दिया.

    उन्होंने मेरी तरफ़ देख कर नॉटी सी स्माइल दी तो मैं समझ गई कि रवि को मेरी चूत गीली होने का पता लग गया है.

    मैंने भी शर्मा कर स्माइल करके खुद को रवि को समर्पित करने का इशारा कर दिया.

    अब रवि ने पैंटी को नीचे खींच कर निकाल दिया.
    मेरी चिकनी साफ़ चूत देखकर वे बोले- वाह, कितनी सुंदर हो तुम … और तुम्हारा जिस्म!
    मैं मन ही मन बहुत खुश हुई.

    तभी रवि ने मुझे पकड़ कर उल्टा लिटा दिया और वे मेरे पैरों को चूमते हुए ऊपर आने लगे.
    उन्होंने फिर से मेरी जांघों को चूमा और मेरे एक कूल्हे को अपने मुँह में भर कर दांतों से काट लिया.

    ‘आआआह’ करके मैंने उस लव बाइट का मज़ा लिया.
    फिर मेरी कमर को चूमते हुए मेरी पीठ पर चिपक गए.

    उनका लंड मेरी गांड पर दब रहा था.
    उस Xxx लंड की लंबाई और मोटाई मैं अपने मन में नापने लगी.
    इससे मेरी चूत गर्म हो कर फड़कने लगी.

    फिर रवि ने मेरे बालों को एक तरफ़ कर के मेरी गर्दन पर गर्म सांसें छोड़ते हुए मुझे चूमने लगे तो मैं कामुक सिसकारियां लेती हुई उनका साथ देने लगी.
    मुझे इस तरह पोजीशन में बहुत अच्छा लग रहा था.

    फिर रवि ने अपने दोनों हाथों से बोबे पकड़ लिए और दबाने लगे.
    मैं अपने पैरों को रवि के पैरों में कसने लगी.

    फिर उन्होंने अपने हाथ नीचे ले जाते हुए मेरी कमर के नीचे घुसा दिए.
    हाय … मैं तो मज़े में पागल सी होने लगी और अपनी कमर उठा कर ऊपर-नीचे करने लगी.

    तभी मेरी कामुक अदाओं को देखकर रवि पूरे जोश में आ गए और मुझे सीधा करके खुद बेड से उतर गए.
    मैं समझ नहीं पाई कि वे क्या करना चाह रहे हैं.

    तभी वे मेरे दोनों पैर खींचकर बेड के एक कोने में ले गए तो मैं एकदम से सन्न ही रह गई.
    रवि ने मेरे पैर फैलाए और मेरी चूत की पंखुड़ियों को अपने मुँह में भर लिया.

    आआ आह रवि बहुत मज़ा आ रहा है … चूसो मुझे … आआहा उफ़्फ़ आआह्ह्ह!’
    मैं मदमस्त होकर के बुदबुदाने लगी.

    मेरी कामुक सिसकारियां सुन कर रवि ने अपनी पूरी जीभ मेरी तड़फती चूत में घुसेड़ दी.

    मैंने भी अपने दोनों हाथों से रवि का सिर पकड़ लिया और चूत पर दबाती हुई अपने कूल्हे उठा-उठा कर उनकी जीभ को अन्दर तक घुसवाने लगी.

    मुझे लग रहा था कि अगर एक-दो बार और कूल्हे उठा दिए तो मैं अभी झड़ जाऊंगी.
    मुझसे अब और रुका ही नहीं जा रहा था.

    मैंने जल्दी से रवि को अपने ऊपर खींच लिया- प्लीज डाल दो रवि जी … अब रुका नहीं जा रहा … अपनी बीवी बना लो मुझे … मैं बहुत समय से प्यासी हूँ. मेरी प्यास बुझा दो!

    तभी रवि ने लंड को चूत पर रगड़ कर टोपे को मेरी चूत के ही पानी से गीला किया और मुझसे चिपक कर चूत के ऊपर लंड को रगड़ कर मुझे तड़पाने लगे.

    मैं उनके लंड की प्यासी हो गई और कराहती हुई बोली- आह डालो ना रवि जी … आह!
    लेकिन शायद उन्हें मेरी तड़प भरी सिसकारियों को सुनने में बहुत मज़ा आ रहा था.

    अब इंतज़ार की हद हो गई थी और मेरे लिए और रुक पाना संभव नहीं हो पा रहा था.
    मैंने पूरी शर्म छोड़ कर उनका घोड़े जैसा लंड … जिसमें बहुत वज़न लग रहा था, उसे अपने हाथों में पकड़ा और चूत के छेद पर रख कर रवि की कमर को पकड़ लिया.
    उसी पल मैंने अपने कूल्हे एक ज़ोरदार झटके से ऊपर उठाए तो उनका लंड का सुपार अन्दर घुस तो गया, लेकिन मेरी जान ही निकल गई.

    इतनी गीली चूत होने के बाद भी लंड का सुपारा मेरी चुत में फंस गया था.
    लंड अब ना अन्दर घुस पा रहा था और ना बाहर निकल पा रहा था.

    ‘प्लीज़ रवि जी … इसे बाहर निकालो मैं मर जाऊंगी!’
    मैं उनकी कमर को दूर धकेलने लगी.

    तभी रवि ने धीरे-धीरे से अपने लंड के सुपारे को मेरी चुत से बाहर निकाला.
    अब जाकर मुझे सांस आई.

    रवि समझ चुके थे कि चाहे मैं कितनी भी चुद गई हूँ लेकिन चूत एकदम कुंवारी जैसी ही है.
    अब उनके घोड़े जैसे बिग लंड के आगे तो मैं कुंवारी जैसी ही थी.

    तभी रवि ने आलमारी से एक जैल निकाला और अपने लंड पर मल लिया.
    उन्होंने कुछ जैल उंगलियों में लेकर मेरी चूत में भी लगा दिया.

    अब उन्होंने वापिस अपने लंड को मेरी चुत के छेद पर लगा कर एक झटका मारा.
    ‘आ आआह मर गई आआ हाह छोड़ो प्लीज़ …’

    लेकिन इस बार उन्होंने मेरी एक ना सुनी और लंड को चुत की गहराई में दबाते ही चले गए.
    जैल की वजह से लंड फंसता-रगड़ता हुआ घुसता जा रहा था और मैं तड़पड़ाती रही थी.
    एक बार तो मेरे आंसू निकल गए.

    वे एक पल को रुके और बस चुपचाप मुझसे चिपक कर मेरे एक बोबे को चूसने लगे.
    जब चूत पानी छोड़ने लगी, तब जाकर दर्द कम होने लगा और मज़ा आने लगा.

    तभी उन्होंने फिर से एक झटका मारा तो Xxx लंड ब/च्चेदानी से अटक गया.

    अब मैं समझ चुकी थी कि यह इससे ज़्यादा नहीं घुस पाएगा.
    उनके बिग लंड की लंबाई मेरी चूत की गहराई से भी ज़्यादा थी.

    वे रुके और मेरे आंसू पौंछ कर मेरे माथे को चूमा.
    फिर होंठों को अपने होंठों में भरकर मेरे मुँह में अपनी जीभ डाल दी.
    मैं उनकी जीभ चूसने लगी.

    रवि एक सॉलिड मर्द हैं … ये मैं जान गई थी.

    अब मेरे जिस्म में सिर्फ़ हवस ही हवस भर गई थी … और क्यों ना भरे, ऐसा लंड पाकर तो बुढ़िया भी जवान हो जाए.

    अब रवि ने अपने दोनों हाथ पीठ के नीचे लगाए और धीरे-धीरे लंड को अन्दर-बाहर करने लगे.

    मैंने अपने पैर अपने पेट पर मोड़ लिए, जिससे लंड अन्दर-बाहर करने में थोड़ी आसानी हो.

    मेरी चूत का सफ़ेद-सफ़ेद सा गाढ़ा चिकना तरल रवि जी के लंड से चिपक कर बाहर आ रहा था

    आज मुझे पता चला कि असली संभोग क्या होता है.
    इतने सालों से मेरे पति सुनील के साथ कभी इतना मज़ा नहीं आया था.

    मैं मन ही मन अपनी उस सहेली को थैंक्स बोलने लगी, जिसने मुझ पर शादी के लिए दबाव बनाया था.

    अब तक मेरा पूरा दर्द ख़त्म हो गया था और मज़ा आने लगा था.

    उन्होंने धक्कों की स्पीड बढ़ा दी.
    मैं भी उनकी पीठ को सहलाने लगी.

    वे ज़ोर-ज़ोर से लंड पेलने लगे.
    जोश में मेरे नाखून उनकी पीठ पर गड़ने लगे.

    ‘आह चोदो रवि जी … आह मेरे राजा चोदो मुझे … इस चूत में जो आग लगी है आह उसे आज बुझा दो … अब से मुझे रोज़ ऐसे ही चोदना … ऐसी तो मैं कभी नहीं चुदी … आ आआह फ़ाड़ डालो रवि जी प्लीज़ … आआह उफ़्फ़ फ़क्क्क …’
    मेरा पानी झड़ने वाला था तो मैंने ज़ोर से रवि जी को कस लिया और अपने पैरों से उनकी जांघों को लपेट लिया.

    मैं खुद अपनी गांड उठा कर नीचे से झटका मारने लगी.
    ऊपर से रवि जी के झटके मेरी चुत को भोसड़ा बनाने पर तुले हुए थे.

    ‘आआह उऊऊई चोदोओओ …’

    हम दोनों के बदन की थरथराहट के बीच मेरी नाज़ुक चूत पिस कर झड़ गई थी.
    मैं चिपकी रह गई थी.

    ये देख वे भी रुक गए और बस हम दोनों कुछ मिनट तक ऐसे ही पड़े रहे.

    फिर रवि जी ने अपने लंड को बाहर निकाला तो मैंने देखा कि वह एकदम लाल हो चुका था.
    मेरी चूत भी लाल हो गई थी.

    लेकिन रवि जी अभी भी भूखे थे.
    उन्होंने मुझे उल्टा पटक कर कुतिया बनाया और पीछे से चुत में वापस लंड डाल दिया.

    उन्होंने पलक झपकते ही मेरी कमर पर अपने दोनों हाथ जमाए और झटके मारने लगे.
    उनके लंड के आगे मेरी चूत छोटी पड़ रही थी.
    इसलिए हर झटका मेरी ब/च्चेदानी को छू रहा था.

    इससे मैं फिर से तैयार होने लगी.
    मैंने मुँह बेड पर टिका लिया और झटकों का मज़ा लेने लगी.

    हर ज़ोरदार प्रहार के साथ मैं आगे को होती जा रही थी, इसलिए रवि जी ने मेरे हाथ पकड़े और पीछे की तरफ़ खींचने लगे.

    तभी अचानक से करंट बढ़ा और मैं फिर से झड़ने वाली हो गई थी.
    रवि जी के लंड के प्रहारों के सामने मेरी चूत टिक नहीं पाई और एक बार फिर झड़ गई.

    फिर वापिस उन्होंने मेरे मना करने के बावजूद मुझे सीधा लिटाकर पेलना शुरू कर दिया.
    जैसे ही वे झड़ने वाले थे, उनकी स्पीड बढ़ गई.
    हैपी एंडिंग सेक्स करती हुई मेरी ब/च्चेदानी से लंड टकराने से मैं तीसरी बार खाली हो गई.

    इस बार वे भी मुझे मेरे होंठों को चूसते हुए खाली हो गए.

    उस दिन मैं सुनील को भूल गई थी.
    रवि ही मुझे सुनील लगने लगे थे.
    उनका प्यार पाकर मैं निहाल हो गई थी.

    अब मैं रवि जी से रोज़ खुल कर चुदवाने लगी थी.
    यह मेरे जीवन की सेक्स कहानी उन जवान विधवाओं को समर्पित है जो अपनी शर्म को छोड़ कर जीवन का आनन्द लेने के लिए आगे बढ़ने में संकोच करती हैं.

    मैं उन्हें कहना चाहती हूँ कि जीवन में सेक्स करना एक प्राकृर्तिक क्रिया है और यह हरेक के जीवन में कुछ ही समय के लिए कारगर होटी है.
    इससे कोई समस्या नहीं है, प्लीज जीवन का आनन्द जरूर लें.

    आप मुझे मेरी हैपी एंडिंग सेक्स कहानी के लिए अपने विचार जरूर पोस्ट करें.

  • कुंवारी गर्लफ्रेंड के साथ पहली बार चुदाई

    वर्जिन गर्ल फर्स्ट सेक्स कहानी में मेरी दोस्ती एक लड़की से हो गयी. मैंने उसे प्रोपोज भी कर दिया. हम सेक्सी बातें करने लगे और अपने पहले सेक्स के लिए उतावले थे.

    दोस्तो!
    मेरा नाम राहुल है और मैं आगरा का रहने वाला हूँ.
    मैं अभी हाल ही में अपनी b.sc. पूरी की है.

    मेरी हाईट 5 फुट 8 इंच है और मेरे लन्ड का साइज 7 इंच है.

    फिलहाल मेरी उम्र 23 साल है।

    मैं इस साइट का नियमित पाठक हूँ.
    यहाँ बहुत सी उत्तेजित कहानियां पढ़ कर मुझे लगा कि मैं भी अपनी कहानी आपके साथ शेयर करूं।

    मेरी यह पहली कहानी है तो आप मुझे मेरे मेल आईडी पर अपना बहुमूल्य मत साझा करें।

    तो वर्जिन गर्ल फर्स्ट सेक्स कहानी में अब मैं आपको काजल के बारे में बारे में बताता हूँ.
    वह मुझे अपनी ग्रेजुएशन के दौरान ही मिली थी.

    वह दिखने में एकदम सिंपल सेक्सी जीरो फिगर वाली लड़की है, उसके बूब्स 30, कमर 26 और गांड 32 की है।

    तो अब आपको ज्यादा बोर न करते हुए कहानी पर आते हैं.

    यह कहानी आज से 2 साल पहले की है.
    इस समय तक मैं और काजल अच्छे दोस्त बन चुके थे.
    हम दोनों आपस में हर तरह बात शेयर किया करते थे।

    मैं उसे मन ही मन पसंद करता था.
    तो मैंने उसे वेलेंटाइन वाले दिन प्रपोज करने का सोचा.

    पर उस समय मेरी गांड भी फट रही थी कि कहीं वह मना ना कर दे!

    जैसे तैसे करके मैंने उसे लाल गुलाब देकर प्रपोज कर दिया.
    लेकिन हुआ कुछ उल्टा!
    पता चला कि वह भी मुझे पसंद करती थी और उसने मेरा प्रपोजल स्वीकार कर लिया।

    फिर मैं उसे पास ही के एक पार्क में ले गया.
    वहाँ जाकर हमने थोड़ी बहुत इधर उधर की बातें की.

    और अचानक से मैंने उसके लिप्स पर किस कर दिया.

    उसे समझ नही आया कि क्या हुआ और उसने अपनी आंखें बड़ी कर ली.
    मुझे लगा कि वह गुस्सा हो गई.

    लेकिन उसने कोई रिस्पॉन्स नहीं दिया और मैं उसके लब चूसता ही रहा.
    थोड़ी देर बाद वह भी जोश में आ गई तो उसने भी मुझे किस करना शुरू कर दिया.

    मैं धीरे धीरे आगे बढ़ा और उसके कमीज के ऊपर से ही उसके छोटे छोटे मजेदार बूब्स को सहलाना शुरू कर दिया.

    उसे जोश आने लगा तो वह वहीं घूम कर मेरे पैंट में बने हुए लन्ड के तंबू के ऊपर बैठ गई और पागलों की तरह मुझे किस करने लगी।

    थोड़ी देर बाद मुझे पता लगा कि कुछ लड़के हमारी तरफ आ रहे हैं.
    मुझे समझ आ रहा था कि वे क्या करने वाले हैं.

    इसीलिए मैंने उसे रोका और हम वहाँ से खिसक गए।

    फिर रात को हमारी फोन पर बात हुई.

    शायद दिन में जो जोश हमें आया था, वह ठंडा नहीं हुआ था.
    तो हमने फिर फोन सेक्स करना शुरू कर दिया.

    शायद यह इसीलिए भी था कि अब तक न उसने किसी के साथ सेक्स किया था और ना ही मैंने!

    कुछ दिन तक ऐसे ही रात को न्यूड वीडियो कॉल पर ही सेक्स चलता रहा.

    फिर हमारे एग्जाम्स भी पास आ रहे थे, उसी टाइम उसके घर वालों उनके गांव जाना था.
    लेकिन एग्जाम्स और असाईनमेंट्स की वजह से वह नहीं गई.
    तो उसके घर वालों ने उसके पड़ोस की लड़की को उसके पास सोने के लिए बोल दिया।

    जब यह बात उसने मुझे बताई तो मैं मन ही मन खुश हो गया और उससे मिलने की बात की.
    तो उसने बोला कि रात को 11 बजे कंडोम लेकर उससे मिलने आऊं।

    फिर उसके इतना बोलने पर 10 बजे मैं घर से निकल गया और ठेके से जाकर 2 बीयर ले ली.
    लेकिन मैंने कंडोम नही लिया क्योंकि मैं पहली बार बिना कंडोम के ही करना चाहता था।

    जब मैं उसके घर पहुंचा तो उसे फोन किया.
    तो वह और उसके साथ वाली लड़की दोनों दरवाजे पर आ गई.
    मैं दूसरी लड़की को देख कर एकदम चौंक गया क्योंकि काजल ने मुझे उसके बारे में कुछ बताया ही नहीं था.

    वैसे उस लड़की का नाम प्रिया था, वह दिखने में बहुत ही मस्त माल थी साली!
    उसके बूब्स 32, कमर 28 और गांड 34 की थी.

    मैंने उसको भी चोदा था. उसकी कहानी मैं आपको बाद मैं बताऊंगा, आज मैं सिर्फ आपको काजल की चुदाई के बारे में ही बताता हूँ।

    फिर काजल ने बताया कि प्रिया बस उसकी हेल्प के लिए ही है और उसे सब पता है.
    तो मैं थोड़ा नॉर्मल हुआ.
    लेकिन प्रिया की आंखों में एक अजीब सी ही मस्ती थी।

    ये सब इग्नोर करके मैं अंदर आ गया.
    अभी तो बस मैं काजल की वर्जिन जवानी का ही मजा लेना चाहता था।

    तो हम प्रिया को नीचे छोड़ कर सीधा ऊपर काजल के रूम में आ गए.

    जैसे ही काजल ने रूम लॉक किया, वैसे ही मैंने काजल को पीछे से जकड़ लिया और उसके बेड पर पटक दिया.

    मैं उसके ऊपर कूद गया और उसे पागलों की तरह चूमने और चाटने लग गया.
    वह भी मेरा साथ देने लगी.

    फिर एक झटके में ही मैंने उसकी शर्ट और सलवार उतार फैंकी.
    उफ्फ दोस्तो … क्या बताऊं! मैं पहली बार किसी लड़की को ब्रा और पैंटी में देख रहा था.

    मैं तो मानो जैसे पागल हो गया और अगले ही पल उसकी ब्रा भी निकाल फेंकी और उसके निप्पल को मुंह में लेकर चूसने लग गया।

    फिर उसने मुझे धक्का दिया और बोली- मुझे ही नंगी करोगे या खुद अपना भी आजाद करोगे? देखो कैसे पैंट में से बाहर आने को उतावला है।
    मैं- तुम खुद ही आजाद कर दो ना इसे मेरी जान!

    बस इतने कहने की ही देर थी कि अगले ही पल उसने मेरे सारे कपड़े निकाल दिए और मेरे लन्ड को अपने हाथ में लेकर बोली- उफ्फ राहुल … मेरी चूत बहुत छोटी है. यह अंदर कैसे जायेगा?
    मैं- देखून तो कैसी है?

    इतने में मैंने उसकी पैंटी निकाल के उसे पूरी नंगी कर दिया और उसकी चूत को अपने हाथ से सहलाने लगा.
    काजल- उफ्फ आह … ओह यस बेबी हा हा ओह!
    वह ऐसे ही जोर जोर से सिसकारियां ले रही थी.

    फिर मैंने उससे लन्ड चूसने को कहा.
    तो वह मना करने लगी.

    उसके मना करने पर मैं उसके बूब्स पर टूट पड़ा और जोर जोर से चूसने और काटने लगा.
    मैं अपने एक हाथ से उसकी चूत सहला रहा था.

    और फिर अपनी एक उंगली मैंने उसकी चूत में डाल दी.
    तो वह एकदम सिहर उठी.

    सच में यार बहुत टाइट थी उसकी चूत!
    मैं उसकी चूत में उंगली करता रहा.

    पहले तो उसे थोड़ा दर्द हुआ, फिर बाद में वह गांड़ उठा उठा कर मेरी उंगली अपनी चूत में लेने लगी.
    और वह बस जोर जोर से सिसकारियां ले रही थी.
    साथ ही मेरे लन्ड को अपने हाथ से आगे पीछे कर रही थी।

    फिर जब उससे रहा न गया तो उसने मेरा लन्ड अपनी चूत में लेने को कहा.
    मैं भी अपना लन्ड उसकी चूत में डालने को बेकरार था।

    अगले ही पल में उसकी चूत के पास आ गया और अपना लन्ड उसकी चूत के ऊपर सेट किया और एक धक्का दिया.
    तो मेरा लन्ड फिसल गया.
    थोड़ी और कोशिश करने पर भी अंदर नहीं गया.

    फिर मैंने उसके बेड के पास रखी वेसलीन देखी तो ढेर सारी वेसलीन अपने लन्ड पर लगा ली और थोड़ी उसकी चूत पर भी लगा दी.
    मैं समझ गया था कि काजल ने इसी लिए वेसलीन लाकर रखी हुई थी.

    तब मैंने उसकी चूत को थोड़ा खोलकर उसमें एक जोरदार धक्का लगाया और मेरा लन्ड का आगे का हिस्सा उसकी चूत में था.

    तो वह एकदम से चिहुंक उठी और चिल्लाने ही वाली थी कि मैंने अपने होठों से उसके होंठ बंद कर दिए.
    लेकिन वह अपने हाथों से मुझे पीछे धकेलने लगी.

    तो मैंने उसे पूरा जकड़ लिया तो वह कुछ कर नहीं सकती थी।

    फिर मैंने उसके लब चूसने और उसके बूब्स सहलाने शुरू कर दिए.
    फिर थोड़ी देर बाद वह थोड़ी नॉर्मल हुई तो मैंने बिना देर किए एक और धक्का लगा दिया.

    इस बार तो मुझे भी ऐसा लगा कि जैसे मेरा लन्ड ही फट गया हो.

    और काजल का भी हाल बेहाल था.
    वह छटपटाने लगी और उसकी आंखों से आंसू बह रहे थे.

    और मुझे भी बहुत दर्द हो रहा था.

    तभी मेरी नजर पास ही टेबल पर रखी बीयर पर गई जो मैं लेकर आया था।

    मैंने उसकी चूत में लन्ड डाले डाले ही बीयर उठाई.
    एक मैंने ली और एक उसे दे दी और बोला- इससे दर्द थोड़ा कम होगा.

    फिर हम दोनों ने अलग होकर बीयर पीकर खत्म की.

    तब तक थोड़ा दर्द भी कम हुआ तो मैंने अपना पूरा लन्ड उसकी चूत में ही डाल दिया.
    उसकी चूत से खून आने लगा.

    लेकिन थोड़ा सा बीयर का और थोड़ा हमारी हवस का नशा हमारे सिर चढ़ा हुआ था तो दर्द ज्यादा महसूस नहीं हुआ.

    फिर मैं धीरे धीरे लन्ड आगे पीछे करने लगा और हमारी चुदाई शुरू हो गई.

    और थोड़ी देर बाद तो हम जैसे दर्द को भूल ही गए।
    हमारी धकापेल चुदाई शुरू हो गई.

    और थोड़ी देर बाद तो हम जैसे दर्द को भूल ही गए।
    हमारी धकापेल चुदाई शुरू हो गई.

    काजल जोर जोर से सिसकारियां लेने लगी.
    हम दोनों इतने मदहोश हो गए कि प्रिया के बारे में बिल्कुल ही भूल गए.
    बस हमें अब अपनी चुदाई से मतलब रह गया था।

    काजल- आह आह … उफ्फ यस राहुल … चोदो उफ्फ … आह ओह हां हां … यस चोदो मुझे!

    मुझे उसकी ये सिसकारियां सुन के जोश चढ़ने लगा और मैं बस उसे चोदने के बारे में ही सोच रहा था.

    मेरे दिमाग में बस उसकी चूत और बूब्स का ही ख्याल था … और किसी चीज का मुझे होश ही नहीं था.

    मैं बस उसे जोर जोर से चोदे जा रहा था और वह सिसकारियां ले रही थी.

    उसकी मादक सिसकारियों से पूरा कमरा गूंजने लगा.
    और मेरा लन्ड अपनी पहली चूत चुदाई का पूरा अहसास ले रहा था.

    फिर कुछ देर बाद वह वर्जिन गर्ल फर्स्ट सेक्स करके झड़ गई और निढाल होकर बेड पर लेट गई.

    लेकिन यह मेरी पहली चुदाई का अनुभव था तो मैंने उसे चोदना बंद नहीं किया और उसे लगातार चोद रहा था.
    फिर करीब 2 मिनट बाद मेरा लन्ड भी अपना रस छोड़ने वाला था तो मैंने उसकी चूत से अपना लन्ड निकाला और उसके बूब्स पर अपना रस छोड़ दिया.
    और फिर मैं उसी के ऊपर लेट गया।

    थोड़ी देर बाद उसे होश आया तो उसने मुझे अपने ऊपर से बगल में लिटा दिया और मुझसे चिपक कर सो गई।

    और मैं भी थका हुआ था मुझे भी नींद आ गई.
    सुबह जब हम उठे तो उसकी चूत और मेरा लन्ड दोनों ही दर्द कर रहे थे.

    अब न मुझमें उसे चोदने की हिम्मत हो रही थी और न ही उसे चुदवाने की.
    तो मैंने अपने कपड़े पहने और उसे किस करके घर आ गया।

    अब तो हम दोनों ही चुदाई का मजा ले चुके थे.
    तो अब हमें जब भी मौका मिलता, हम चुदाई कर लेते थे.

    फिर उसने प्रिया को भी मुझसे चुदवाया.
    वह मैं आपको अगली कहानी में बताऊंगा।

    तो दोस्तो, कैसी लगी आपको मेरी पहली चुदाई की वर्जिन गर्ल फर्स्ट सेक्स कहानी?

  • पड़ोसी लड़के से बुर की सील तुड़वा ली मैंने

    दोस्तो, मैं अंजलि फिर एक बार एक नई सेक्स कहानी के साथ हाजिर हूँ.

    यह सेक्स कहानी मेरी एक प्रशंसिका सपना ने मुझे भेजी है और कहा है कि मैं उसके लिए इस घटना को कहानी के रूप में लिख कर अन्तर्वासना या फ्री सेक्स कहानी की साइट पर प्रकाशित करवाऊं.

    इस कहानी में गोपनीयता के लिहाज से सब नाम बदले हुए हैं.

    इस सेक्स विद टीनऐज गर्लफ्रेंड कहानी को आप सपना के शब्दों में सुनें.

    नमस्ते दोस्तो, मेरा नाम सपना है और मैं सूरत से हूं.
    मेरी उम्र 28 वर्ष है और मेरी शादी हो चुकी है, मेरा एक बेटा भी है.

    आज मैं जो कहानी बताने जा रही हूं, यह मेरी जीवन की एक सच्चाई है.

    यह घटना आज से सात साल पहले शुरू हुई दास्तान है जो हमारे पड़ोस में रहने आए एक व्यक्ति के साथ शुरू हुई थी.

    मेरे घर में हम चार लोग थे. मैं, मेरी बहन खुशबू, मां विमला और हमारे पापा अशोक.
    मेरे पापा एक कपड़े की मिल में मुंशी हैं.
    मां घर में ही रहती हैं. हम दोनों बहनों की पढ़ाई चल रही थी.

    मेरा पढ़ाई में मन बिल्कुल भी नहीं लगता था, बस ग्रेजुएशन पूरा कर रही थी.

    वहीं खुशबू पढ़ने में ज्यादा होशियार थी इसलिए वह सबकी लाड़ली भी थी.

    खुशबू मुझसे केवल एक साल ही छोटी है.
    तब मैं 21 साल थी.

    एक दिन हमारे घर के ठीक सामने एक परिवार रहने आया.
    उसमें माता पिता और उनका एक लड़का था, जो 25-26 वर्ष का होगा.

    उस परिवार का परिचय हम सबसे हुआ तो पता लगा कि उस लड़के का नाम विपुल है, वह एक मेडिकल कंपनी में काम करता है.

    वह अक्सर छत पर दिखता था और हमें ही घूरता रहता था.
    खुशबू उस पर ध्यान नहीं देती थी, पर मैं भी उसे ही देखती थी.
    मुझे वह अच्छा लगता था.

    कुछ दिनों बाद उसके माता पिता चले गए और अब विपुल अकेला ही रह गया था.

    मेरे पापा पर उनके सेठ जी को सबसे ज्यादा भरोसा था इसलिए वे पापा के ऊपर ही सारी जिम्मेदारी दिए रहते थे.
    इसी कारण से पापा कुछ ज्यादा ही व्यस्त रहते थे.
    वे घर पर ज्यादा ध्यान नहीं दे पाते थे.
    इस कारण से मां अक्सर नाराज रहती थीं.

    एक बार कुछ काम पड़ा तो मां बोलीं- जा, विपुल को बुला कर ला!

    हम दोनों बहनों को थोड़ा अजीब लगा कि ज्यादा जान पहचान नहीं है … और मां उसे बुलाने के लिए पूरे जोश से बोल रही हैं.

    मां और विपुल में क्या बात हुई, ये तो पता नहीं … पर उसने उसी वक्त हमारी मदद के लिए कुछ पैसे दिए थे.

    विपुल मुझे अच्छा लगता था, उसका कद 5 फुट 10 इंच का था.
    उसने अपने शरीर का काफी ध्यान रखा था और काफी स्मार्ट था.

    वहीं मेरा कद 5 फुट 5 इंच का था और फिगर 30-28-32 का था.

    मैं विपुल को अपना बॉयफ्रेंड ही मानने लगी थी.
    लेकिन वह क्या सोचता था, इसका मुझे कुछ नहीं पता था.

    मां काफी देर तक उससे बातें करती थीं.

    तब मेरी समझ में यह नहीं आया था कि ऐसा क्यों होता था?

    हमारी परीक्षाएं खत्म हो गई थीं.

    उसके एक दिन पहले हमारे मोहल्ले में एक पार्टी थी और सभी को बुलाया गया था.

    तय समय पर हम सब पार्टी में पहुंच गए.

    मेरी मां पहले से ही वहां थीं, जो अपनी सहेलियों से बात कर रही थीं.
    वहां वे विपुल के साथ दिख रही थीं.

    मैं वहां गई तो विपुल ने मेरी गांड पर धीरे से हाथ फेर दिया.
    जब मैंने मुड़कर देखा, तो उसने ऐसे देखा … जैसे कुछ हुआ ही नहीं.

    थोड़ी देर बाद उसने फिर वही एक चांटा सा धीरे से मारा और उधर से खिसक गया.

    अब मेरी नजरें विपुल को ही ढूंढ रही थीं क्योंकि वह अचानक से गायब हो गया था.
    मेरी मां भी नहीं दिख रही थीं.

    मां का तो पता था कि वह ज्यादा देर तक पार्टी में नहीं रहती हैं.

    रात के बारह बजे तक पार्टी खत्म खत्म होने को थी.
    सब खत्म होने के बाद मैं भी घर लौटी, तो देखा खुशबू छत पर फोन से बात कर रही थी और मां सो चुकी थीं.

    अगले दिन पापा ने खुशबू से कहा- विपुल को बुलाओ.
    जब वह आया तो हम सभी थे.

    पापा ने उससे कहा कि वह मुझे पढ़ाई में हेल्प करे!
    शायद पापा ने इसलिए कहा था क्योंकि यह मेरा आखिरी साल था.

    पहले उसने कुछ नखरे दिखाए, फिर मां ने कहा- थोड़ा ध्यान दो, मुझे तुमसे कुछ उम्मीद है.
    इस पर वह तैयार हो गया.

    मैं भी काफी खुश थी कि मुझे उसके साथ समय बिताने को मिलेगा.
    वहीं वह मेरी मां की तरफ देख रहा था और वे दोनों हंस रहे थे.

    मेरे प्रति उसके व्यवहार में कुछ फर्क आ गया था.
    अब वह मुझ पर एक हक सा जता रहा था.

    पढ़ाते हुए उसके हाथ मेरे जिस्म से टकरा जाते थे, तो कभी वह मेरे बूब्स पर हाथ से सहला देता.

    मुझे भी अच्छा लगता था इसलिए मैं भी उससे चिपक कर बैठ जाती थी.
    जिससे उसकी हिम्मत बढ़ गई.

    एक दिन पढ़ाते हुए उसने अचानक से मेरी चूत पर हाथ रखा और सहलाने लगा.
    मेरे मुँह से ‘आह …’ निकल गई.

    तभी उसने मुझे कमर से पकड़ लिया और दबाते हुए बोला- क्या हुआ, तुम ठीक हो न?
    मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि क्या कहूं?

    वह लगातार मेरी चूत सहलाता रहा.
    इससे पहले कि मैं कुछ कहती, उसने मुझे कस कर दबाया और मुझे किस करने लगा.

    इसमें पता ही नहीं चला कि कब मैं झड़ गई.
    तभी उसने मुझे छोड़ते हुए कहा कि हो गया काम!
    फिर वह उठकर चला गया.

    मैं यही सोचती रही कि ये क्या हुआ, सही था या नहीं?

    फिर मां से कहकर मैं अगले दिन कॉलेज चली गई.
    और जब लौटी तो देखा कि वह पहले से मौजूद है.

    मां मुझे आया देख कर वहां से बाहर निकल गईं.
    अब ये रोज होता था.

    मेरे से पहले वह मौजूद रहता था और मेरे शरीर को छूने के बहाने ढूंढता था.
    यह मुझे भी अच्छा लगता था.

    फिर एक दिन उसने पूछा- क्या हुआ आज कॉलेज में?
    मैं- कुछ खास नहीं, आज बस दो ही क्लास हुईं.

    विपुल- कौन कौन सी?
    यह कहते हुए वह आगे बढ़ा और मुझे अपनी बांहों में जकड़ लिया और मेरे माथे पर, आंखों पर किस करने लगा.

    तभी मैंने भी उसका लंड पकड़ लिया, जो तन रहा था.
    उसे शायद उम्मीद नहीं थी.

    तभी मैंने कहा- क्या है ये सब?
    वह मुझे अपनी बांहों में कसते हुए तेज आवाज में बोला- आंटी, आज मैं सपना को अपने साथ ले जा रहा हूं और इसको वहीं पढ़ा भी दूंगा.

    मैं धीमे से बोली- इसका क्या मतलब हुआ?
    विपुल- आज तुम्हें, तुम्हारी मां से मांग रहा हूं.

    इससे पहले कि मैं कुछ समझती कि मां ने जवाब देते हुए कहा- हां ठीक है, ध्यान रखना.
    विपुल बोला- हां जी बिल्कुल.

    उसने मुझे चलने का इशारा किया.

    मैं- वहां क्यों आज?
    विपुल- यहां कुछ सही नहीं लग रहा है … पता नहीं क्यों आज मजा नहीं आ रहा. मैं तुम्हारे दोनों होंठों को चखना चाहता हूं.

    मैं समझ गई कि यह मेरे नीचे वाले होंठों को जोड़ कर दोनों होंठों को चखने की बात कर रहा है.
    मैंने भी न जाने कौं सी रौ में कह दिया- अभी तक एक ही को लिया है क्या?

    वह शायद सुन नहीं पाया था.
    मेरा मतलब यह था कि क्या उसने अब तक किसी की चूत नहीं चोदी है क्या!

    घर पहुंचते ही उसने दरवाजा बंद किया और मुझे बेड पर धकेल दिया.
    फिर घूरते हुए कहा- क्या मस्त है तेरी जवानी भी!

    मैंने कहा- उस रात तुम्हीं मुझे तंग कर रहे थे न!

    विपुल- हां साली, चोदना तो मैं तुझे ही चाहता था लेकिन तेरी मां बीच में आ गई. लेकिन आज तुझे पूरा लेना होगा.
    मैं हंस कर रह गई और बोली- क्या पूरा लेना है?
    तभी उसने ‘लंड’ कहते हुए मेरी कुर्ती उतार दी.

    अब मैं सिर्फ ब्रा में थी और शर्मा कर मैंने अपनी आंखों को ढक लिया.

    मेरी आंखों पर से हाथ हटाते हुए वह मुझे किस करने लगा और अपना लंड सलवार के ऊपर से ही रगड़ने लगा.

    मैं भी मदहोश हो रही थी.

    तभी उसने मेरी सलवार भी उतार दी और बूब्स को दबाते हुए बोला- इनको तो बड़ा करना होगा.
    मैंने उसकी तरफ देखा तो वह सिर्फ अंडरवियर में था.

    मैं उठ कर उसका लंड सहलाने लगी जो अब काफी कड़क हो गया था और मोटा भी.

    हम दोनों अब एक दूसरे को चूमने लगे और एक दूसरे के जिस्म से खेल रहे थे.

    विपुल- अपनी मां से एक बात पूछेगी क्या?
    मैं- क्या?
    विपुल- वह क्या खाती थी जब तुझे पैदा किया?
    मैं- मतलब!

    विपुल- साली तू जो इतनी चिकनी है कि बस तुझे मसलते रहने का ही मन करता है.
    मैं चुदास भर स्वर में बोली- तो मसल दो न … मैंने कब मना किया है?

    मेरी चूचियों को दबाते हुए बोला- पूरी रंडी की तरह तैयार है चूत खुलवाने को!
    मैं अपने होंठ काट कर मुस्कुरा दी.

    वह मेरी चड्डी उतारते हुए मेरी जांघों को चूमने लगा और धीरे धीरे ऊपर आता जा रहा था.
    अब वह मेरी चूत में अपने होंठों को लगा कर चूसने लगा.

    मुझे चूत चुसवाने में बहुत अच्छा लग रहा था और मैं मचल रही थी.
    तभी उसने अपनी दो उंगलियां मेरी चूत में डाल दीं.

    मैंने कसमसा कर चादर को जोर से पकड़ लिया और मचलने लगी.

    कुछ ही देर में मेरा पानी निकल गया

    विपुल- साली लंड के लिए आवाज भी नहीं निकाल रही … मादरचोद, आज तेरी चूत का भोसड़ा बनाता हूं.

    वह मेरी चूत को अभी भी अपनी उंगलियों से चोद रहा था और मैं बस ‘आह ओह … ऐसे ही आज बना लो अपना आह मुझे!’ कह रही थी.

    विपुल- क्या बनाऊं साली … बहन की लौड़ी? बता न कुतिया बनेगी मेरी?
    मैं- आह … अपनी बीवी बना लो आह और मत तड़पाओ मुझे … अब चोद … दो आ … आह.

    तभी अचानक से उसने अपना 7 इंच का लंड मेरे मुँह में डाल दिया.
    विपुल- ले बहनचोद चूस इसे … आह.

    मैं भी उसका लंड चूसने लगी.
    उसका मोटा लंड मेरे गले में फंस रहा था और मैं जितनी ताकत से उसके लंड को बाहर निकालने की कोशिश करती, वह उतनी ही जोर से डाल रहा था.

    विपुल- ले साली छिनाल … आह चू….स अच्छे से मां की लौड़ी!
    मुझे उसकी गालियां अच्छी लग रही थीं.

    फिर उसने मुझे लिटा कर अचानक से एक ही झटके में मेरी चूत में अपना लंड ठांस दिया.

    मैं एकदम से लंड घुसने से जोर से चीख पड़ी.
    मुझे दर्द से बेहद तकलीफ हो रही थी.

    ऐसा लग रहा था मानो उसने मेरी चूत में गर्म खंजर घुसेड़ दिया हो.

    कुछ देर के लिए मेरी आंखें बंद रहीं.
    फिर मैं जैसे ही संभली तो देखा कि वह मुझे किस कर रहा है और धीरे धीरे लंड को चूत में अन्दर बाहर कर रहा है.

    मैं- आह बाहर निकालो … आह दर्द हो रहा है … आह अब बस … औ…र नहीं.
    विपुल- चुप साली रंडी, तेरी चूत फाड़ने के लिए अपने घर लाया हूं! ऐसे ही चुदती रह … तुझे मजा आएगा. इस वक्त मेरा लंड तेरे दूसरे होंठों को चूस रहा है बहन की लवड़ी … आज तेरे दोनों होंठों ने मेरा लंड चूसा. हां मेरी जान ऐसे ही लेती रह आह … तेरी चूत बहुत मस्त है.

    कुछ देर बाद मुझे अच्छा लगने लगा और मैं चुपचाप उससे चुदाई का मजा लेने लगी.

    फिर उसने मुझे पलटा और बोला- चल कुतिया बन जा!
    मैं जैसे ही कुतिया बनी उसने पीछे से मेरी चूत में अपना फनफनाता हुआ लंड एक झटके में ही घुसेड़ दिया और चोदने लगा.

    अब मैं भी उसका साथ दे रही थी और अपनी गांड उसके लंड के हिसाब से हिला रही थी.
    मैं भी पूरी मस्ती में आ गई थी और वह भी.

    मैं अब तक दो बार झड़ चुकी थी लेकिन वह अभी भी वैसे ही चोद रहा था.

    तब मैं बोली- आज मार ही डालोगे क्या … और कितना ठोकोगे मेरे नीचे वाले होंठों को?
    विपुल- बस मेरी जान ऐसे ही मजा लेती रह … आज तो तेरी चूत रबड़ी के जैसी मजा दे रही है!

    मैं- अब बस भी करो यार … तुम्हारे लंड के चक्कर में मेरी हालत खराब हो गई है.
    विपुल- बस आ रहा हूं मैं भी … ये ले और ले … आह साली कुत्ती … तेरी मां को चोदूं … बहन की लौड़ी आह आह.
    यही कहते हुए वह मेरी चूत में ही झड़ गया.

    हम दोनों हांफ रहे थे.

    तभी मेरी नज़र बेड पर गई.
    मेरी गांड के नीचे की तरफ वाला चादर खून से लाल हुआ पड़ा था.

    मैं- ये क्या किया तुमने?
    विपुल- आज तुझे जन्नत की सैर कराते हुए तुझे तेरी जवानी के बारे में बताया मेरी जान … और कुछ नहीं!

    मैं- अब ये साफ कैसे किया जाए?
    विपुल- घबराओ मत, तेरी मां ही सफाई करेगी!

    यह कहते हुए वह मुझे किस करने लगा और बोला- चल मेरे लौड़े को साफ कर!
    मैंने उसके लंड को उसी चादर से साफ किया. उसके बाद मैंने खुद को भी साफ किया और नहाने चली गई.

    सेक्स विद टीनऐज गर्लफ्रेंड का मजा लेने देने के बाद मैं अपने घर आ गई.

    कुछ देर बाद मैंने देखा कि सच में वह चादर हमारे घर में ही धुलाई के लिए रखी हुई है.

    उसके अगले दिन मां ने वह चादर धोकर विपुल के घर भिजवा दी.

    इसके बाद क्या हुआ अगली देसी कहानी में बताऊंगी.
    इस सेक्स विद टीनऐज गर्लफ्रेंड कहानी पर आप अपनी राय जरूर बताएं.

  • मामी ने मुठ मारना सिखाया

    मैं नया नया जवान हुआ था, मामा के घर गया. एक दिन मामी अपने बेटे को दूध पिला रही थी, मैं उनकी चूची देख रहा था. देखते हुए मामी ने मुझे पकड़ लिया. उसके बाद मामी ने …

    दोस्तो, मेरा नाम राज है। मैं पटना का रहने वाला हूं, मेरी उम्र 21 साल है और मैं अभी इंजीनियरिंग कर रहा हूं। मैं अन्तर्वासना का पुराना पाठक हूं. मैने सोचा कि क्यों न मैं भी अपनी एक कहानी लिखूं। मैं बहुत ही ठरकी किस्म का इंसान हूं लेकिन मैंने अभी तक किसी को चोदा नहीं है।

    अपनी ठरक के चलते मैं रोज पोर्न सेक्स वीडियो देखा करता हूं और सेक्स स्टोरी पढ़ कर मुठ भी मारा करता हूं. मुझे ये सेक्स और इससे संबंधित वीडियो और साहित्य में बहुत रूचि है. ऐसी चीजें देखते और पढ़ते समय मैं बहुत ही ज्यादा उत्तेजित हो जाता हूं. मुझे सेक्स चैट करने का भी शौक है.

    अब मैं आपका और समय न लेते हुए अपनी कहानी को आपके सामने रख रहा हूं. जैसा कि मैंने बताया कि मैंने अभी तक सेक्स नहीं किया है इसलिए मैं वर्जिन हूं. यह कहानी मेरी एक कल्पना है जिसमें मैंने अपनी सेक्स इच्छा को उजागर किया है.

    कहानी मेरी मामी के बारे में है. मेरी मामी देखने में एक टॉप माल है. उसकी उम्र 30 साल है और उसका फीगर 34-32-36 के करीब तो जरूर होगा. उसकी चूचियां काफी बड़ी बड़ी हैं. उसकी टाइट चूचियों और मोटी मोटी चूचियों को देख कर मेरे अंदर एकदम से वासना भर जाती है.

    मुझे हमेशा से ही बड़ी चूचियों को देखने और उनको हाथ से छूने की बहुत तमन्ना रहती थी. मगर आज तक मुझे ऐसी चूची को छूने का मौका नहीं मिला था. जब भी मैं अपने मामा के यहां जाता था तो मामी की चूचियों को देख कर मेरा मन बेकाबू सा हो जाता था.

    मेरी मामी दिल्ली में ही रहती है. मेरे मामा जी दिल्ली में नौकरी करते हैं. उनका एक 2 साल का बेटा भी है. उसका नाम करण है. दोस्तो, मैं देखने में काफी शरीफ सा लगता हूं लेकिन मेरे अंदर इतनी हवस भरी हुई है कि मैं हर वक्त लेडीज की चूचियों और गांड को ही ताड़ता रहता हूं.

    उस वक्त मैं अपने बोर्ड्स के एग्जाम देकर छुट्टियों में अपने मामा के यहां जा रहा था. स्टेशन पर ही मेरे मामा मुझे लेने के लिए आ गये. मैं और मामा घर के लिए निकल लिये.

    घर जाकर मेरी मामी ने दरवाजा खोला और मुस्कराकर मेरा स्वागत किया. उस वक्त मुझे उनके बारे में कुछ गलत ख्याल नहीं आ रहे थे. मैं नया नया जवान हुआ था लेकिन इतना भी ठरकी नहीं बना था कि अपनी मामी की चूत के बारे में ही सोचने लगूं. मुझे मुठ मारने या सेक्स करने के बारे में ज्यादा कुछ नहीं पता था.

    पहला दिन मैंने आराम किया. अगले दिन मामाजी की ऑफिस की छुट्टी थी तो मैं उनके साथ घूमने के लिए चला गया. शाम को हम लोग खाना भी बाहर ही खाकर आये थे. घर आकर मैंने थोड़ी देर के लिए टीवी देखा और फिर मैं सोने के लिए चला गया.

    मेरी मामी और मामा अपने बेटे करण के साथ एक रूम में सोने लगे. मैं दूसरे रूम में था. मुझे नींद नहीं आ रही थी. रात को मुझे फेसबुक और यूट्यूब पर वीडियो वगैरह देखने और फेसबुक चैट करने की आदत थी. मैं किसी लेडी के साथ बातें करते हुए अपने लंड को सहलाता रहता था. इस सब में मुझे बहुत मजा आता था.

    रात के 12 बज गये थे. मैं अपने लंड को सहला रहा था. मुझे पेशाब लगी तो मैं उठ कर बाथरूम में गया. जाते हुए मेरे कानों में कुछ धीमी धीमी आवाजें आईं. मैंने सुनने की कोशिश की तो मामी की आवाज थी- आह्ह… आह्ह… ईस्स… थोड़ा आराम से करिये न, अगर राज को सुनाई दे गया तो वो क्या सोचेगा?

    मुझे अंदाजा हो गया था कि अंदर मामा और मामी चुदाई कर रहे थे शायद. मगर मेरी इतनी हिम्मत नहीं हो रही थी कि मैं उनकी चुदाई देखने की कोशिश करूं या फिर वहीं खड़ा होकर उनकी बातें सुनूं. इसलिए मैं अपने रूम में वापस आ गया.

    अगली सुबह जब उठा तो उस दिन मामाजी घर पर ही थे. रविवार का दिन था. मैं फ्रेश हुआ और फिर किचन में गया. वहां पर मामी नाश्ता बना रही थी. पानी का गिलास भरते हुए मैंने मामी से पूछा- रात में आपको कुछ हुआ था क्या मामी?

    वो बोली- नहीं तो, मुझे क्या होने वाला था, ऐसा क्यों पूछ रहा है तू?
    मैंने कहा- पता नहीं, आपके रूम से कुछ दर्द भरी आवाजें आ रही थीं. मुझे लगा कि आपकी तबियत ठीक नहीं होगी.
    मेरी बात सुनकर मामी की जुबान जैसे लडखड़ा गयी और वो बोली- नन्.. नहीं तो … ऐसा तो कुछ भी नहीं हुआ.

    उसके बाद मामी मेरे सामने आने से बचने लगी. दोपहर को मैंने मूवी देख कर टाइम पास किया और उसके बाद फिर शाम को मैं घूमने के लिए निकल गया. वापस आकर खाना खाने के बाद मैं सोने के लिए चला गया.

    उस रात मेरे कान मामा-मामी के रूम की ओर ही लगे हुए थे लेकिन मुझे उस रात को कुछ भी आवाज नहीं सुनाई दी. फिर मुझे नींद आ गयी और मैं भी सो गया.

    अगले दिन मामाजी सुबह 8 बजे ऑफिस चले गये. मैं मामी के साथ बैठ कर बातें कर रहा था. तभी उनका बेटा करण रोने लगा. वो अभी 2 साल का ही था इसलिए उसको बार बार संभालना पड़ता था. उसको शायद भूख लगी थी.

    मेरी मामी ने मेरे सामने ही एक साइड से ब्लाउज के ऊपर करके अपनी चूची बाहर निकाली और अपने बेटे को दूध पिलाने लगी. उनकी मोटी और बड़ी चूची देख कर मेरी आंखें जैसे फटी रह गयी. मैं उनकी चूची को घूरने लगा.

    जब मामी ने देखा कि मैं उनकी चूची को ही घूर रहा हूं तो उन्होंने अपनी चूची को अपनी साड़ी के पल्लू से ढक लिया.
    मामी बोली- क्या देख रहा है?
    मैंने कहा- कुछ नहीं मामी, सॉरी.
    वो बोली- ठीक है, कोई बात नहीं

    फिर पता नहीं मामी के मन में क्या आया कि वो पूछ बैठी- तुमने अभी तक कोई गर्लफ्रेंड बनाई है या नहीं?
    मैंने कहा- नहीं मामी, मेरी तो कोई गर्लफ्रेंड नहीं है.
    वो बोली- ऐसा कैसे हो सकता है. तुम जवान हो गये हो. अभी तक हाथ से ही काम चला रहे हो क्या?

    मैंने अनजान बनते हुए कहा- मामी मैं आपकी बात समझा नहीं, हाथ से मतलब?
    वो बोली- बनो मत, सीधे से मेरे सवाल का जवाब दो.
    मैंने कहा- मैं नहीं समझ पा रहा आपकी बात.
    वो बोली- मुठ नहीं मारते क्या?

    इतना तो मैं जानता था कि मामी लंड के बारे में ही बात कर रही है लेकिन मुझे मुठ मारने का नहीं पता था.
    मैंने कहा- मुठ क्या होता है मामी?

    मामी बोली- तुम मेरे सामने ही नाटक कर रहे हो या तुम्हें सच में नहीं पता? इतने बड़े हो गये हो, तुम कंट्रोल कैसे करते हो?
    मैंने कहा- मामी, आप साफ साफ बताओ ना क्या कहना चाह रही हो?
    मामी बोली- अच्छा, सेक्स के बारे में तो पता होगा या वो भी नहीं पता?

    मैंने कहा- हां, उसमें तो लड़की को किस करते हैं.
    मामी बोली- किस से आगे और भी बहुत कुछ होता है. तुम्हें तो कुछ भी नहीं पता है अभी. अच्छा ये बताओ, तुमने कभी अपने पप्पू (लंड) को हिलाने की कोशिश नहीं की? अगर तुम अपने लंड को हिलाकर देखोगे तो तुम्हें बहुत मजा आयेगा.

    मुझे अपने लंड को सहलाने की आदत थी लेकिन मामी शायद किसी और बारे में बात कर रही थी.
    मैंने कहा- मुझे तो नहीं पता कि लंड को कैसे हिलाया जाता है.

    मामी बोली- कोई बात नहीं, मैं तुम्हें सिखा दूंगी लेकिन ये बात किसी से कहना मत.
    मैंने हां में गर्दन हिला दी.

    अभी मामी अपने बेटे करण को दूध पिला रही थी. दूध पिलाते हुए ही उन्होंने अपने चूचे से अपना पल्लू हटा दिया. मैं मामी के चूचे को नंगा देख कर आंखें फाड़ कर घूरने लगा.
    मामी बोली- पहले कभी नहीं देखा है क्या तुमने ये?

    मैंने कहा- मामी, देखा तो है लेकिन इतने पास से नहीं.
    वो बोली- कभी छूकर देखा है इसको?
    मैंने कहा- कभी नहीं.

    तभी मामी ने अपने दोनों बूब्स को बाहर कर लिया. उनके बूब्स बाहर लटकने लगे. एक को करण चूस रहा था और दूसरा हवा में झूल रहा था.
    मैंने कहा- मामी आपके दूध इतने बड़े कैसे हो गये?
    वो बोली- मुझे भी नहीं पता. बस हो गये हैं. एक तो ये करण इनको सारा दिन चूसता रहता है और तेरे मामा भी इनको नहीं छोड़ते हैं. दोनों बाप-बेटे मेरे दूधों को चूसते रहते हैं इसलिए शायद इतने बड़े हो गये हैं.

    मैंने पूछा- मामाजी और क्या करते हैं इनके साथ?
    वो बोली- इनको दबाते हैं.
    मैंने पूछा- आपके अपने दूध दबवाने से अच्छा लगता है क्या?
    वो बोली- हां, तुम्हें भी दबा कर देखना है क्या इनको?
    मैंने कहा- मुझे तो शर्म आती है मामी आपके सामने.

    मामी बोली- जब देख ही लिया है तो अब दबा कर भी देख लो कि कैसा लगता है. मजा आयेगा तुम्हें.
    मैंने घबराते हुए मामी के बूब्स की ओर हाथ बढ़ाया. मामी ने झटके से मेरा हाथ अपनी ओर खींच लिया और अपने बूब्स पर रखवा लिया.

    अपने बूब्स पर अपने हाथ से मेरे हाथ को दबाते हुए मामी ने कहा- अब दबाओ इनको!
    मुझे मामी के बूब्स काफी सोफ्ट लगे. मैं हल्के हल्के से उनको दबाने लगा.

    मामी ने करण को झूले में लिटा दिया. वो सो चुका था. उसके बाद मामी ने अपना ब्लाउज पूरी तरह से उतार ही दिया. उनकी दोनों चूचियां एकदम से नग्न हो गयीं.
    मामी बोली- अब आराम से दोनों हाथों से दबाओ.

    मैं दोनों हाथों से मामी के बूब्स को दबाने लगा. मुझे मजा आ रहा था. मामी ने पूछा- कैसा लग रहा है?
    मैंने कहा- अच्छा लग रहा है.
    मामी- लंड खड़ा हुआ?
    मैं- हां मामी, बिल्कुल टाइट हो गया है.

    मामी बोली- आओ, आज मैं तुम्हें मुठ मारना सिखाऊंगी. अपनी पैंट को उतार लो.
    मैं शरमा रहा था. उनके सामने इस तरह से पैंट उतारने में मुझे अजीब सा लग रहा था.

    वो बोली- शरमा क्यों रहे हो, मैंने भी तो तुम्हारे सामने अपना ब्लाउज उतारा है. तुम भी अपनी पैंट उतार लो.
    मैंने अपनी पैंट खोल दी और अंडरवियर को नीचे खींच दिया.
    मेरे जवानी के झाँट मेरे लंड के चारों ओर फैले हुए थे. मैंने कभी अपने झाँटों को नहीं काटा था.

    मैं मुठ भी नहीं मारा करता था उस वक्त तक, इसलिए मेरा लंड भी ज्यादा मोटा नहीं दिख रहा था. मामी ने मेरे लंड को देखा और मुस्कराने लगी. मगर कुछ बोली नहीं.
    फिर बोली- तुम अपने बालों को साफ नहीं करते हो क्या? कितने ज्यादा घने हो गये हैं.
    मैंने कहा- यहां के बाल तो मैंने कभी नहीं काटे मामी

    वो बोली- अच्छा ठीक है. मैं इनको शेव कर दूंगी.
    मैंने पूछा- आपके वहां भी नीचे ऐसे ही बाल हैं क्या?
    मामी ने कहा- हां, सबके ही होते हैं. मगर मेरे अभी कम हैं क्योंकि मैंने एक सप्ताह के पहले ही शेव किये थे. मगर मुझे झाँटें बहुत पसंद हैं. चलो अब मैं तुम्हें मुठ मारना सिखाती हूं.

    मामी ने मुट्ठी बना कर अपने हाथ से दिखाते हुए कहा कि इस तरह से अपने लंड को मुट्ठी में भर लो.
    मैंने लंड को मुट्ठी में भर लिया.
    मामी- अब इसकी स्किन को नीचे करो.
    मैंने स्किन नीचे कर दी.
    मामी- अब इसको ऊपर करो.

    उनके कहे अनुसार मैंने फिर ऊपर किया.
    वो बोली- अब इसी तरह से जल्दी जल्दी करो.
    मैं जल्दी जल्दी से लंड की स्किन को ऊपर नीचे करने लगा. मगर मैं बीच बीच में रुक जा रहा था.
    मामी बोली- रुको, मैं करके बताती हूं.

    मामी ने मेरे लंड को अपनी मुट्ठी में ले लिया. फिर उसको जोर जोर से हिलाने लगी. मामी का हाथ टच होते ही मुझे अजीब सा लगा. मुझे गुदगुदी होने लगी. मुझे बहुत मजा आया. मामी करते करते बीच में रुक गयी.

    मुझसे कहने लगी- अब तुम खुद करो. मैं जरा अपनी वाली (चूत) को देख लेती हूं. मेरा मन भी कर रहा है कुछ करने का.
    फिर मामी ने अपनी साड़ी खोल दी. मेरे देखते ही देखते मामी ने अपना सब कुछ उतार दिया. मामी मेरे सामने बिल्कुल नंगी हो गयी.

    मैंने देखा कि मामी की चूत पर बाल थे. उनकी चूत पर बाल काफी अच्छे लग रहे थे. मैंने मुठ मारना छोड़ कर मामी की चूत पर ही ध्यान लगा दिया.
    वो बोली- तुम क्यों रुक गये, ऐसे ही हिलाते रहो. कुछ देर के बाद तुम्हें करंट जैसी एक फीलिंग आयेगी जो तुम्हें बहुत मजा देगी.

    मामी से मैंने पूछा- मामी, लड़कियां भी अपनी चूत को अपने हाथ से मजा देती हैं क्या?
    वो बोली- तुम्हारी उम्र के सब लड़के-लड़कियां करते हैं. कुछ तो तुम्हारी उम्र में सेक्स का मजा भी ले चुके होते हैं.

    अपनी चूत को खोल कर दिखाते हुए मामी ने कहा- लड़के इसी चूत के छेद में अपने लंड को अंदर डालते हैं. इसमें लड़का और लड़की दोनों को ही बहुत मजा आता है. अभी तुम मुठ मारना सीखो, इसके आगे क्या और कैसे करते हैं वो सब मैं तुम्हें बाद में सिखा दूंगी.

    उसके बाद मामी अपनी चूत को रगड़ने लगी. वो तेजी के साथ अपनी चूत को सहला रही थी. कभी उसमें उंगली को अंदर डाल रही थी. मैं भी अपने लंड को जोर जोर से हिलाने लगा. मुझे भी मजा आ रहा था.

    मामी मेरे लंड को देख कर तेजी के साथ चूत को सहला रही थी और मैं मामी की चूत को देखते हुए तेजी के साथ लंड की मुठ मार रहा था. मुझे इतना मजा कभी नहीं आया था जितना अब मामी के सामने आ रहा था.

    कुछ ही देर के बाद मुझे लगने लगा कि मेरे लंड से कुछ बाहर निकलने वाला है.
    मैंने मामी से कहा- लगता है कि कुछ बाहर आने वाला है.
    वो बोली- रुकना मत, हिलाते रहो!

    फिर 5-10 सेकेंड के बाद मेरा वीर्य निकल गया. वीर्य निकलते ही ऐसा लगा कि मैं काफी थक सा गया हूं. मामी मेरे वीर्य को देख कर जोश में आ गयी और तेजी के साथ अपनी चूत में उंगली करने लगी.

    कुछ ही देर के बाद फिर वो भी झड़ गयी.
    मामी ने पूछा- कैसा लगा?
    मैं- बहुत मज़ा आया।

    मामी- तुम इतने दिन से इस मज़े से अनजान थे और तुम्हारी मामी ने तुम्हें सिखाया। तुम्हें मुझको थैंक्स बोलना होगा।
    मैंने मामी को थैंक्स बोला तो मामी बोली- ऐसे नहीं, इधर आओ और मेरे बूब्स को चूसो.
    मैंने पहले मामी के बूब्स को दबाया और फिर मुंह में लेकर चूसने लगा. कुछ देर तक हमने ऐसे ही मजे लिये.

    उसके बाद मामी बोली- सेक्स के बारे में मैं तुम्हें कल सिखाऊंगी.
    उस रात जब मैं सोने की तैयारी में था तो मैंने सुना कि मामी के रूम से आवाजें आ रही थीं. मैं समझ गया कि मामी आज अपनी चूत में मामा का लंड ले रही है.

    दोस्तो, इस तरह से मामी ने मुझे मुठ मारना सिखाया. पहली बार मामी के सामने मुठ मार कर मुझे बहुत मजा आया. उस दिन के बाद से मुझे मुठ मारने की लत सी लग गयी. मैं रोज रात को अपने लंड मुठ मारने लगा और मुझे बहुत मजा आता था.

    अपनी आने वाली कहानी में मैं आपको बताऊंगा कि मामी ने मुझे सेक्स करना कैसे सिखाया.

  • मकान मालिक की पत्नी की यौन तृप्ति

    मैं किराये पर रहता हूँ. मकानमालिक दुबला पतला है. पर उसकी पत्नी की गदरायी जवानी किसी को भी पागल कर सकती है. मुझे लगा कि वो अपने पति से खुश नहीं है. तो मैंने क्या किया?

    नमस्कार दोस्तो,
    मेरा नाम अबन कुमार मिश्रा है. मैं कोलकाता का रहने वाला हूं पर अभी मैं दिल्ली में हूं और मैं किसी बैंक का कर्मचारी हूं.

    यह मेरी पहली कहानी है और बिल्कुल सच्ची कहानी है इसमें जरा भी झूठ नहीं है. मुझे झूठ बिल्कुल पसंद नहीं इसलिए जो भी मैं कहानी बताने जा रहा हूं यह बिल्कुल सच है.
    अगर कहानी लिखने में कोई गलती हो जाए तो प्लीज मुझे माफ कर देना.

    मेरी उम्र 28 साल है और मैं दिखने में ठीक हूं.
    पिछले 4 सालों से दिल्ली में मैं एक किराए के कमरे में रहता हूं. मैंने कमरा नहीं बदला. जिस कमरे में मैं 4 साल पहले था उस कमरे में मैं आज भी हूं.

    मेरा मकान मालिक भी उसी बिल्डिंग में रहता है और उसकी पत्नी है नाम है रचना. मेरा मकान मालिक अपनी पत्नी के ऊपर बहुत शक करता है. यह आप लोग बहुत अच्छे से जानते हैं जो मर्द अपनी पत्नी को शारीरिक सुख नहीं दे पाता है, वही अपनी पत्नी पर शक करता है.

    मकान मालिक थोड़ा दुबला पतला और सेक्स के बारे में थोड़ा ढीला है. ऐसा दिखने में लगता है तो होगा भी!

    और आपको मैं रचना भाभी के बारे में बताऊँ जो दिखने में इतनी गजब की माल है कि मैं आपको लिखकर के बयां नहीं कर सकता. रचना भाभी की लंबाई 5 फीट 11 इंच है और उसके शरीर की बनावट 40 की छाती 32 की कमर और उसकी गांड 38 की है. भाभी की फूले हुए गाल, रसीले होंठ और 36 की उम्र, और उसकी गदराई जवानी उसकी एक नजर किसी भी लड़के को पागल बनाने के लिए काफी हैं. एक ऐसी औरत जिसको पाने के लिए मर्द अपना सब कुछ लुटा दे.

    तो मैं आपको बताता हूं कि मैंने उससे पटाया कैसे और पेला कैसे, मुझे उसको अपने बिस्तर तक लाने में 4 साल लग गए.

    शुरू शुरू में मैं समझता था कि वे ऐसी औरत नहीं है और मैं उस पर ध्यान नहीं देता था. इसी तरह मेरे 2 साल निकल गये.
    वो मुझसे ज्यादा बात भी नहीं किया करती थी, सिर्फ काम की बात किया करती थी.

    दो साल बीतने के बाद उसके पति की जॉब ऐसी जगह लगी जहां वह दोपहर के बाद ड्यूटी पर जाता है और रात में दो बजे घर वापस आता है. मैं बैंक कर्मचारी हूं तो मैं शाम को पाँच बजे अपने कमरे पर आ जाता हूं.

    उसका पति घर पर नहीं होता तो उससे बात करने का ज्यादा मौका मिलता है और वह मुझसे थोड़ा घुल मिल भी गई है. धीरे-धीरे हम दोनों में मजाक भी होने लगा. और ऐसे ही मजाक मजाक में हम दोनों में बहुत अंदर की बातें भी होने लगी.
    यह सिलसिला 2 सालों तक चला.

    पहले के 2 साल जिसमें हम दोनों में बहुत कम बातें हुई, सिर्फ काम की बात हुई. मैं रचना भाभी को पेलना तो बहुत पहले से चाहता था लेकिन मुझे लगता था ये औरत ऐसी नहीं है मजाक तो कर लेती है गंदा लेकिन मेरे बिस्तर में नहीं आ सकती. मैं इसे कभी चोद नहीं पाऊंगा.

    एक दिन मेरे बैंक की छुट्टी थी मैं अपने कमरे पर अपने कपड़े धो रहा था. और वह सीढ़ी पर बैठकर मुझसे बातें कर रही थी. बातों बातों में रचना भाभी ने मुझसे कहा- मेरी तबीयत ठीक नहीं है मुझे डॉक्टर के पास दिखाने जाना है.
    मैंने कहा- सुबह तो भैया घर पर ही होते हैं, भैया के साथ अस्पताल चली जाना.
    रचना भाभी ने मुझसे कहा- उनके पास टाइम कहाँ होता है.
    तो मैंने कहा- तुम खुद चली जाना.

    रचना भाभी ने मुझसे कहा- मुझे नहीं मालूम है अस्पताल का!
    तो मैंने भाभी से बोला- मैं आपको अस्पताल ले चलूंगा.
    भाभी बोली- ठीक है.

    बैंक का कर्मचारी गणित वाला दिमाग बाद में मेरे समझ में यह बात आई कि यह अपने पति के साथ नहीं जाना चाहती. यह लोकल औरत है और इसे अस्पताल के बारे में नहीं पता. मैं तो यहां चार साल पहले आया हूं. मैं बाहर का हूं लेकिन यह मेरे साथ अस्पताल जाना चाहती है.
    मैं सब कुछ समझ गया था लेकिन खुलकर नहीं समझ पाया.

    अब मैं इसके दिल की बात जानना चाहता था कि यह चाहती क्या मुझसे. जैसे मैं इसकी वासना में 4 साल से तड़प रहा हूं. क्या रचना भाभी भी जवानी की आग मेरे लौड़े से बुझाना चाहती है?

    एक दिन मैंने भैया को देखा चड्डी में छत पर टहल रहे थे. भैया की शरीर को देखने के बाद मुझे लगा कि रचना भाभी की प्यास भैया से बिल्कुल नहीं बुझती होगी.
    रचना भाभी का जैसा शरीर है रचना भाभी जैसी औरत को शांत करने के लिए घोड़े जैसा लौड़ा चाहिए और धमाकेदार मर्द.

    मैंने सोचा कि एक बार भैया के बारे में बात करूंगा भाभी से!
    हमारा मकान मालिक है लेकिन मैं उनको भैया और उनकी पत्नी को यानी रचना को भाभी बोलता हूं.

    एक दिन मौका मिला और मैंने रचना को यह बात बोल दी- भैया के शरीर को मैंने देखा चड्डी में … वे छत पर टहल रहे थे. मुझे नहीं लगता कि वे आपको शारीरिक सुख दे पाते होंगे.
    रचना भाभी ने बहुत आश्चर्य मुझसे कहा- तुम्हें कैसे पता? तुम कैसे जानते हो? तुमने मेरे बेडरुम में झांक कर देखा है क्या? तुम यह कैसे कह सकते हो?

    फिर मैंने कहा रचना भाभी को- भैया की उम्र 45 साल, आपकी उमर 36 साल. आपके शरीर को और उनके शरीर को देख कर के मैंने यह अनुमान लगाया है.
    रचना भाभी ने मुझसे कहा- इन सब बातों पर ज्यादा दिमाग मत लगाओ.

    फिर मेरे दिमाग में पहले वाली बात आई कि यह औरत ऐसी नहीं है.

    इसी तरह कुछ दिन बीत गये.

    रचना भाभी नीचे रहती हैं और मैं पहले मंजिला पर रहता हूं. एक दिन मैं सीढ़ियों से नीचे उतर रहा था और उसी टाइम भाभी छत पर जाने के लिए सीढ़ियों पर चढ़ रही थी. मैं आधी सीढ़ियों पर था तो मैंने दीवार के साइड में रुक कर के उसे जाने का रास्ता दे दिया,
    मुझे देखकर वह मुस्कुराते हुए सीढ़ियों पर चल रही थी और मेरे लौड़े पर अपनी कमर को रगड़ती हुई निकल गई.

    उसके बाद मैं समझ चुका था कि यह मेरे लौड़े से चुदाना चाहती है.

    दो दिनों बाद रचना भाभी ने अचानक मुझे आवाज लगाई- अबन नीचे आओ!
    मैंने कहा- आ रहा हूं मैं!

    जब मैं नीचे आया तो रचना भाभी ने पूछा- क्या तुमने खाना खा लिया?
    तो मैंने कहा- नहीं, अभी मैं खाना खाने जा रहा हूं.
    रचना भाभी ने कहा- जाओ कपड़े बदल कर आओ, हम दोनों शादी में चल रहे हैं. पास में शादी है.

    मैं कपड़े बदल कर आया और हम दोनों शादी में चले गए.
    रचना भाभी ने मुझसे पूछा- तुम पहले क्या खाओगे?
    मैंने कहा- दही भल्ले मेरा पसंदीदा हैं, मैं दही भल्ले पहले खाऊंगा.
    रचना भाभी ने कहा- मेरे भी पसंदीदा हैं, पहले मैं भी दही भल्ले ही खाऊंगी.

    दही भल्ले के लिए तीन-चार लोग पहले से खड़े थे उसके पीछे रचना भाभी खड़ी हो गई और रचना भाभी के पीछे खड़ा हो गया.
    रचना भाभी ने साड़ी पहन रकही थी और गजब की माल लग रही थी.

    मैं रचना भाभी के पीछे खड़ा था तो मेरा लौड़ा उसकी गांड पर लग रहा था. जब रचना भाभी को अपनी गांड पर मेरा लंड महसूस हुआ तो उसने मुझसे पीछे पलट के कहा- क्या कर रहे हो अबन?
    मैंने कहा- माफ करना भाभी, गलती से लग गया.
    रचना भाभी ने कहा- कोई बात नहीं, चलता है.

    इसके बाद डांस हो रहा था शादी में … हम दोनों डांस देखने लगे.
    धीरे-धीरे डांस देखने वालों की भीड़ लग गई. हम दोनों भीड़ के बीच में पड़ गए.

    भाभी मेरे दाहिने तरफ खड़ी थी भाभी ने मुझसे कहा- मैं तुम्हारे आगे आ जाती हूं तुम मुझे सुरक्षा दो.
    शायद भीड़ में भाभी ने अपने आप को असुरक्षित महसूस किया था.

    अपनी बांहों से मैंने रचना भाभी को घेर लिया. उसके बाद तो मेरा लौड़ा रचना भाभी की गांड पर ही टिका हुआ था.
    मैंने रचना भाभी के कान में कहा- माफ करना जो गलती हो रही है.
    रचना भाभी ने मेरे कान में कहा- कोई बात नहीं अबन, तुमको मेरी अनुमति है.
    और अपनी गांड खुद मेरे लौड़े पर दबा दी.

    मैंने पूछा- ये क्या?
    रचना भाभी ने कहा- सवाल मत करो, जो कर रहे हो, बस चुपचाप करते रहो.
    1 घंटे तक मैं रचना भाभी की गांड पर अपना लौड़ा रगड़ता रहा.

    जब मुझ से बर्दाश्त नहीं हुआ तो मैंने रचना भाभी को कहा- चलो अब यहां से!

    भाभी ने गांड पर लौड़ा सटाने की अनुमति दे दी, चूत देने में देर नहीं करेगी, ये मैं समझ गया था.

    हमने खाना खाया और हम दोनों वहां से निकल लिये.

    रास्ते में हम दोनों बात करते हुए आ रहे थे.
    भाभी ने पूछा- डांस देखने का मजा आया?
    मैंने कहा- हां.
    भाभी ने हंसते हुए पूछा- मेरी साड़ी तो गीली नहीं की है न?
    मैंने कहा- नहीं.

    भाभी मेरे हाथों में हाथ डालकर चलने लगी.

    सुनसान रास्ता हो गया था एक जगह मुझे अंधेरा मिला मैंने भाभी को पकड़कर दीवार पर चिपका दिया और जबरदस्त किस करने लगा. तकरीबन 10 मिनट तक मैं भाभी के होंठ को चूसता रहा
    भाभी भी पूरे जोश में साथ दे रही थी. वह भी हार मानने का नाम नहीं ले रही थी. लग रहा था वह मेरे ऊपर चढ़ जाएगी.
    लेकिन मैं भी जवान लड़का … भाभी को दीवार में रगड़ रगड़ के चूसा मैंने.

    तभी किसी के आने की आहट सुनाई दी और भाभी ने मुझे धक्का दिया और कहा- यहां नहीं, घर चलो.

    जब हम अपनी गली में आ गए तो वहां भी थोड़ा सुनसान है और अंधेरा भी.
    फिर से मैंने भाभी को पकड़ा और चूसना शुरू कर दिया. फिर भाभी ने पूरा साथ दिया पर दो मिनट के बाद अलग हो गई बोली- नहीं … घर चलो!

    मैंने मन में सोच लिया था कि आज भाभी की चूत में लौड़े का धमाका करूंगा. इसके पति को घर वापस आने में अभी टीम घंटे बाकी हैं. 2 घंटे के अंदर ऐसा चोदूंगा, उसकी चूत का भरता बना दूंगा. असली मर्द की ताकत आज नहीं दिखाई तो इसके सामने मैं अपना मुंह नहीं दिखा पाऊंगा.

    रचना भाभी ने दरवाजे का लॉक खोला, अंदर गए, रचना ने फ्रिज के पानी की बोतल निकाली हम दोनों ने पानी पिया.
    और वह किनारे में खड़ी होकर मुझे देख कर के मुस्कुराने लगी.

    फिर मैंने रचना भाभी को पकड़ा और दीवार में सटा दिया. उसके बाद फिर से उसके होंठों को चूसने लगा और हाथ से रचना भाभी की चूचियों को पकड़ कर मसल रहा था.

    यह सिलसिला 15 मिनट तक चला. रचना की हालत एक बेकाबू जानवर की तरह हो गई थी

    उसने मुझे एक जोर का धक्का दिया और खुद से अलग कर दिया.

    अलग करने के बाद मेरे पास आई और मेरे कपड़े उतारने लगी.
    मैंने भी बिना समय गवाए उसको नंगी कर दिया. रचना को बेड पर धकेल दिया. रचना बेड पर सीधे गिरी और मैं उसके ऊपर फौरन आ गया.
    फिर से मैं रचना के होंठों को चूसने लगा और चूचियों को खूब मसलने लगा.

    रचना ने 5 मिनट के बाद मेरे होंठ से अपना होंठ छुड़ा लिया और कराहने लगी.

    मेरी एक जांघ रचना की दोनों जांघों के बीच में फंसी थी और उसकी चूत को दबा रही थी. रचना की चूत मेरी जांघ को गीला कर रही थी.

    अब समय था रचना की चूत में अपना लौड़ा पेलने का! मैं रचना के दोनों जांघों के बीच में आ गया और अपने दोनों हाथों से रचना की कमर पकड़कर उसकी गांड उठा दी.
    रचना को कहा- इसके नीचे तकिया लगाओ!
    उसने बिना देर किए हुए आगे से तकिया लिया और अपनी गांड के नीचे लगा लिया.

    मैंने रचना के दोनों पैर पकड़ कर हवा में लहरा दिया. फिर मैंने रचना को किस करना शुरू कर दिया और उसकी चूचियों को दबाने लगा.

    फिर मैंने अपने एक हाथ से रचना की चूत पर अपने लौड़े को सेट किया और फिर अपने दोनों हाथों से रचना के सिर को पकड़ लिया ताकि लौड़े का धक्का लगने के बाद रचना आगे की तरफ ना उछले.
    और एक जोरदार लौड़ा का थक्का उसकी चूत में मारा. रचना दर्द से तिलमिलाने लगी. रचना की हालत देख कर के मुझे भी दया आ गयी.
    अभी आधा ही लौड़ा उसकी चूत में गया था

    फिर मैंने अगला धक्का अपने लौड़ा का उसकी चूत में नहीं मारा, मैं रुक कर उसके दर्द कम होने का इंतजार करने लगा.

    लगभग मिनट के बाद रचना का दर्द कम हुआ तो रचना ने मेरे सीने पर हाथ रखा और कहा- अबन आराम से, जब तक मैं ना बोलूं तब तक तुम धीरे धीरे करो. जब मेरा इशारा तुम्हें मिल जाए उसके बाद तुम मेरी चूत फाड़ देना. मर्द की मर्दानगी औरत देखकर ही परख लेती है और मैंने तुम्हारी मर्दानगी का अंदाजा तुमको देख कर लगा लिया था.

    रचना ने मेरे सीने से अपना हाथ हटा लिया.

    मैंने बाकी का आधा लौड़ा मैंने धीरे से रचना की चूत में डाल दिया और धीरे धीरे उसे चोदने लगा.

    5 मिनट बाद रचना ने खुद अपना पैर और हवा में फैलाया और मुझे कहा- अब करो आपकी मर्जी से!
    मैंने फिर रचना के सिर को जोर से पकड़ा और लौड़े का जबरदस्त धक्का उसकी चूत पर मारने लगा.

    15 मिनट चुदने के बाद रचना ने अपना पूरा बदन को बहुत टाइट कर लिया. मैं अपनी पूरी ताकत से लंड उसकी चूत में पेल रहा था. 2 मिनट बाद उसने अपने शरीर को ढीला छोड़ दिया.

    मैं रचना का अपने दोनों हाथों से सिर पकड़े उसकी चूत पर अपने लौड़े से धमाकेदार वार किए जा रहा था.

    कुछ समय बाद रचना ने दोबारा अपना पूरा शरीर टाइट कर लिया. जब भी रचना अपना पूरा शरीर टाइट करती थी, उसकी चूत से गर्म गर्म पानी निकलता था. और यह मैं अपने लौड़े पर महसूस कर रहा था.
    जब भी रचना की चूत का गर्म पानी मेरे लौड़े पर महसूस होता तो मेरी आग और भड़क जाती थी. मैं रचना को और भी ज्यादा जबरदस्त चोदने लगता था. एक लंबी ऊंची औरत को मैंने ऊपर से उसका सिर अपने दोनों हाथों से पकड़ रखा था और उसकी चूत पर अपने लौड़ा का जबरदस्त धक्के मार रहा था.

    रचना बिल्कुल सिकुड़ गई थी. मेरी और रचना की जांघ जब टकराती थी तो चट चट की आवाज पूरे कमरे में गूंज रही थी.

    मैं और रचना पसीने से तरबतर हो गए थे. 45 मिनट तक घमासान चोदाई चलने के बाद रचना ने फिर से अपना पूरा शरीर टाइट कर लिया और अपनी चूत से गर्म पानी छोड़ने लगी. रचना की चूत का गर्म पानी में अपने लौड़ा पे महसूस कर रहा था.

    रचना की चूत के गर्म पानी के जोश में मेरे लौड़ा से भी लावा निकलने लगा. रचना ने अपने शरीर को ढीला छोड़ दिया और शांत हो गई.
    मेरे लौड़े से दो मिनट तक लावा निकलता रहा थोड़ा थोड़ा करके और रचना शांत पड़ी रही.

    जब मेरे लौड़े का लावा रचना की चूत में आखरी बूंद तक टपक गया तो मैं निढाल होकर के रचना की बगल में लेट गया.
    हम दोनों पसीने से भीगे हुए थे. हम दोनों की सांसें बहुत तेज चल रही थी.

    10 मिनट के बाद हम दोनों की सांसें नॉर्मल हुई तो रचना ने पलटकर मेरी तरफ देखा. मैंने रचना को अपनी बांहों में भर लिया. रचना ने प्यारी सी मुस्कुराहट के साथ मुझे किस किया.

    मैंने रचना से पूछा- क्या तुम खुश हो? क्या तुम्हें वह सुख मिल पाया जिसकी उम्मीद करती थी तुम मेरी मर्दानगी से?
    रचना ने मुस्कुराहट के साथ मुझे बहुत कस के पकड़ा और एक जोरदार किस किया और कहा- समझदार के लिए इशारा काफी है. खुद ही समझ जाओ.

    15 मिनट तक मुझे बांहों में लेकर गहरी सांस भरती रही. जब भी मैं कुछ कहता तो मुझसे कहती- शांत लेटे रहो अबन!

    उसके बाद रचना ने खुद से मुझे अलग किया और मुझसे कहा- कपड़े पहन लो.
    मैंने कपड़े पहन लिये.
    रचना से मैंने पूछा- फिर कब दोगी?
    वह बोली- अभी जरा रुको,!

    रचना अभी कपड़े पहनने गई थी. कपड़े पहनने के बाद मेरे पास आई और मेरे गले से लिपट गई. रचना बोली- इस जीवन में मैंने अपना पूरा शरीर अबन … तुमको हमेशा के लिए सौंप दिया.
    तुम जो चाहो मेरे शरीर के साथ करो. ये अनुमति हमने तुम्हें दे दी. जब भी मुझे मौका मिलेगा मैं खुद चलकर तुम्हारे पास आ जाऊंगी. अब तुम्हारे लंड राजा को कभी चूत की कमी महसूस नहीं होने दूँगी, यह मेरा वादा है. कसम से अबन … तुमको जाने देने का दिल नहीं कर रहा है. लेकिन रात ज्यादा हो चुकी है, तुम्हारे भैया के आने का समय हो गया.

    रचना ने एक जोरदार किस किया.
    मैंने भी रचना का साथ दिया और वो बोली- जाओ!

    और मैं अपने कमरे में आ गया.

  • लखनऊ में मिली लड़की को चोदा

    लखनऊ की लोकल बस में मेरे बगल में एक लड़की बैठी थी. बार बार ब्रेक लगने से मेरी कोहनी उसके चूचों पर टकराती थी. उसके बाद क्या हुआ? मैंने उसे कैसे चोदा?

    नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम आरव है. मेरी उम्र 24 साल है. मैं उत्तर प्रदेश के एक शहर का रहने वाला हूं और एक जिम ट्रेनर की नौकरी करता हूं.

    अन्तर्वासना पर ये मेरी पहली इंडियन सेक्स स्टोरी है. यह कहानी आज से लगभग 2 साल पहले की है. मैं कुछ काम से लखनऊ गया हुआ था. वहां चारबाग स्टेशन पर उतर कर मैंने महानगर के लिए बस पकड़ी.

    उसी बस में मेरे बगल में एक लड़की बैठी हुई थी. पहले तो मैंने उस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया, लेकिन जैसे ही बस चलने लगी, तो ट्रैफिक की वजह से बार बार ब्रेक लग रही थी. बस यहीं खेल हो गया. बार बार ब्रेक लगने से मेरी कोहनी उसके चूचों पर टच होने लगी थीं. मुझे एकदम से उसके मस्त मुलायम मम्मों का स्पर्श मिला, तो मैं अन्दर तक गनगना गया.

    फिर मैंने ध्यान से उस लड़की को देखा, तो उसका फिगर बहुत ही कमाल का था. बंदी के 34डी साइज़ के चूचे, पेट एकदम सपाट 30 इंच का और कमर के नीचे के उठे हुए चूतड़ों की नाप भी लगभग 36 की थी.

    मुझे उसमें रस आने लगा. जब बस धीरे धीरे चलने लगी, तो मैंने उससे बात करना शुरू किया. उसने अपना नाम रूबी (बदला हुआ) बताया. वो केसरबाग बस स्टैंड के पास किराये के रूम में रहती थी. लखनऊ में रहकर किसी इलैक्ट्रॉनिक कंपनी में नौकरी करती थी.

    हमारी काफी देर तक बातें हुईं और न जाने कुछ ऐसी बात बनी कि हमने एक दूसरे के नंबर तक ले दे लिए.

    उस दिन शाम को ही मैं वापस अपने शहर आ गया. अब हमारी फोन पर धीरे धीरे करके काफी बातें होने लगी थीं. उसका एक साल से कोई ब्वॉयफ्रेंड नहीं था.

    अगले ही हफ्ते मुझे फिर से लखनऊ जाना पड़ा. ये बात मैंने उसे बताई, तो वो एक दिन अपने पास रोकने को बोलने लगी. मैं भी यही चाहता था, तो मैंने भी तुरंत ही हां बोल दिया.

    मैं शनिवार की सुबह लखनऊ के लिए निकला और लगभग 3 घंटे में पहुंच गया. मैंने अपना काम खत्म करके शाम को 5 बजे उसे कॉल किया, तो वो भी बस अपने ऑफिस से निकलने ही वाली थी. हम दोनों हजरतगंज में मिले और फिर वहां से सीधे केसरबाग रूबी के रूम पर आ गए.

    उसका एक रूम का फ्लैट था, जिसमें किचन और बाथरूम अटैच थे. रूबी ने रूम को अच्छे से साफ-सुथरा रखा हुआ था.

    मैंने देखा कि उसके कमरे में एक सिंगल बेड था. उसके सामने एक अलमारी और पास में ही टीवी लगी हुई थी. मैं बेड पर बैठकर टीवी देखने लगा. रूबी ने भी बाथरूम में जाकर कपड़े बदली कर लिए थे.

    बाथरूम से आकर उसने चाय बनाई और दो कप में लाकर मेरे साथ बैठ गई. हम दोनों ने चाय पी और बातें करने लगे. उससे मेरी बातें इतनी घनिष्ठता से हो रही थीं, मानो हम दोनों न जाने कब से एक दूसरे से परिचित हों.

    इसी तरह इधर उधर की बातें करते हुए रात को 8 बज गए. फिर हम दोनों ने साथ में डिनर बनाया और खाना खाकर आराम करने लगे. अगले दिन संडे था, तो ऑफिस की किसी को टेंशन नहीं थी.

    सिंगल बेड में हम दोनों ही दीवार में टेक लगाकर बैठे थे और बातें कर रहे थे. थोड़ी देर में मैंने अपना एक हाथ रूबी की तरफ उठाकर उसके कंधे में रख दिया, जिससे अब वो पूरी तरह मेरी तरफ आ गई.

    उसने अपना सर भी मेरे सीने में रख लिया. उसके चूचे मेरे मेरे पेट में घुसे जा रहे थे. तभी मैं भी धीरे धीरे अपना हाथ उसकी पीठ पर चलाने लगा.
    उसने टी-शर्ट और लोअर पहना हुआ था. मैं भी टी-शर्ट और शॉर्ट्स में था.

    शॉर्ट्स में मेरा लंड धीरे धीरे खड़ा होने लगा था. मैंने एक हाथ से उसके चेहरे पर फैले बालों को हटाया और माथे पर एक किस किया. जिसका उसने भी कोई विरोध नहीं किया बल्कि मेरे से और चिपक गई.

    फिर मैंने पीठ से एक हाथ को टी-शर्ट के अन्दर डालकर सहलाने लगा. अन्दर उसने ब्रा पहनी थी, जो मेरे हाथों में फंस रही थी. मैंने उसके हुक को खोलकर ये रास्ता भी साफ कर लिया. ब्रा अब भी उसके शरीर पर थी, मगर उससे अब मुझे कोई दिक्कत नहीं हो रही थी. धीरे धीरे मैंने उसकी टी-शर्ट को भी ऊपर कर दिया, जिससे अब मेरा हाथ उसके चूचों पर लगने लगा था.

    फिर मैंने धीरे से एक चूची को सहला कर दबा दिया, तो रूबी की एक सिसकारी निकल गई. फिर मैं धीरे धीरे उसकी दोनों चूचियों को बारी बारी से दबाने लगा. वो मस्त आवाजें लेते हुए मेरे हाथों का मजा ले रही थी.

    मैंने उसके चेहरे को ऊपर उठाया. उसकी आंखें लाल हो गई थीं. मुझसे नजर मिलते ही उसने अपनी आंखें बंद कर लीं.

    मैंने उसके थरथराते होंठों को अपने होंठों से बंद कर लिया और किस करने लगा. वो भी शायद इसी का वेट कर रही थी. उसने भी मेरा पूरा साथ दिया. हम दोनों एक दूसरे की जीभ को आपस में कुश्ती करने लगे. ऐसा करते हुए मैंने उसकी ब्रा और टी-शर्ट को उसके शरीर से अलग कर दिया. अब मैं उसकी गर्दन पर किस करने लगा.. जिससे उसके शरीर का तापमान और बढ़ गया. नीचे उसके दोनों कबूतर आजाद थे. दूधिया रंग के चूचे उस पर हल्के भूरे रंग के किशमिश की तरह उठे हुए निप्पल एकदम मस्ती दिला रहे थे.

    उसके कड़क निप्पल देखते ही मैं उन पर टूट पड़ा और बारी बारी से चूसने लगा. उसके चूचियों को मैंने खूब दबाया और चूसा.

    इसके बाद मैंने एक हाथ नीचे रूबी की पैंटी में डाला, तो उसकी चूत पहले से ही रसीली हो गई थी. मैंने उसकी लोअर और पैंटी को एक साथ नीचे करके उतार दिया. खुद नीचे की तरफ बढ़ते हुए मैं उसकी नाभि में किस करने लगा. नाभि में किस करते ही वो मचलने लगी. मेरी निगाह चुत पर गई, तो नीचे उसने चूत को बिल्कुल साफ किया हुआ था, एक भी बाल नहीं बचा था. रूबी की चूत बिल्कुल गीली हो चुकी थी.

    मैंने जैसे ही एक हाथ से उसकी चूत को सहलाया, तो रूबी की बड़ी आह निकल गई.

    उसे किस करते करते मैं, अब उसकी जांघों पर किस करने लगा. पैरों पर किस करते करते मैंने अचानक उसकी गीली चूत को मुँह में भर लिया. अचानक हुए इस हमले के लिए वह तैयार नहीं थी. इससे उसकी हल्की से चीख निकल गई और उसने मेरे सर को जोर से पकड़ कर अपनी चूत पर दबा दिया और सर को चुत पर रगड़ने लगी. मैं भी मस्ती से रूबी की चुत को चाटे जा रहा था.

    अभी बस कुछ पल ही हुए होंगे कि रूबी एक लम्बी आहहह … के साथ झड़ गई और बेड पर बिल्कुल बेहोश सी लेटी रही.

    थोड़ी देर बाद वो मुझसे बोली कि आज तक उसके किसी ब्वॉयफ्रेंड ने उसकी चूत नहीं चूसी.

    मैं फिर से उस किस करने लगा. अब रूबी ने खुद आगे बढ़कर मेरा शॉर्ट्स और अंडरवियर उतार दिया. मेरा लंड पहले ही खड़ा हुआ था. वो लंड को किस करने लगी और फिर धीरे से मेरे लंड के टोपे को चूसने लगी. हम दोनों ने नजरें मिलाईं और पोजिशन लेकर 69 में आ गए.

    मेरा लंड वो और मैं उसकी चूत चूस रहा था. तभी मैं उसकी चूत के दाने को होंठों से पकड़ कर खींच कर जीभ से सहलाने लगा. इससे उसकी ‘आह …’ की सिसकारी निकल गई. वो भी मेरे लंड को बहुत अच्छे से चूस रही थी, पूरा गले तक ले जा रही थी, जिससे मेरे टट्टे उसकी नाक के ऊपर फिट हो जा रहे थे.

    काफी देर तक की चुसम चुसाई के बाद रूबी झड़ गई और मेरा भी वीर्यपात हो गया. फिर हम दोनों सीधे हुए और मैं उसके होंठों को चूसने लगा. वो सीधी बेड पर लेटी थी, मैंने अपने लंड को उसकी चूत पर सैट किया और धीरे से एक धक्का मारा, जिससे मेरे लंड का टोपा सीधे उसकी गीली चूत में फिट हो गया.

    लंड का टोपा घुसते ही रूबी ‘आःह्ह…’ की सिसकारी के साथ ऊपर की तरफ खिसक गई. मैंने फिर से उसको नीचे किया और किस करते हुए फिर से एक जोरदार शॉट मारा. अबकी बार मेरा पूरा लंड उसकी चूत में घुस गया और मेरे टट्टे उसकी गांड से लड़ गए.

    ‘आह्ह..’ की मस्त आवाज के साथ रूबी मुझे जोर से किस करने लगी. मैंने अपने धक्के तेज कर दिए और रूबी भी गांड उठाकर मेरा पूरा साथ दे रही थी.

    दसेक मिनट तक मैंने उसको हचक कर चोदा. उसकी टांगें उत्तेजना की अधिकता में और मस्त चुदाई से हवा में उठी हुई थीं.

    उसने मेरी तरफ देखा, तो मैं समझ गया. मैंने लंड बाहर खींचा और उसकी चूची पकड़ कर उसे उठने का इशारा किया. वो उठी और पलंग के किनारे कुतिया की पोजीशन में खड़ी हो गई. मैं पलंग से नीचे आ गया और लंड को उसकी चुत के छेद में लगा कर धक्का मार दिया.

    रूबी की मजेदार सीत्कार निकल गई. लंड चुत की कबड्डी होने लगी. मैं लंड खींचता, तो चुत भी आगे को हो जाती, फिर एक लय के साथ लंड चुत आपस में अन्दर तक जाकर मिलन करने लगते.

    मैंने उसकी चूचियों को पकड़ कर उसकी चुत खूब बजाई. इसके बाद वो फिर से पोजीशन बदलने की कहने लगी. मैंने इस बार उसे अपने लंड पर बिठाया और उसकी उछलती चूचियों को अपने हथेलियों में भर कर खूब मींजा.

    इस तरह से हम दोनों काफी देर तक सेक्स करते रहे. मैं हैरान था कि मैंने इतनी देर तक सेक्स कैसे किया. पर मुझे ध्यान आया और खुद पर गर्व भी हुआ कि ये मेरे मेडीटेशन करने का असर था.. जो आज मुझे पता चल रहा था.

    मैं पिछले 50 मिनट से रूबी को चोद रहा था. इस बीच वो 4 बार झड़ चुकी थी और मेरा लंड अभी भी जोरदार चुदाई में लगा हुआ था. आखिरकार एक बार फिर से घोड़ी बनी रूबी को चोदते हुए मेरे लंड की बारिश उसकी चूत पर हुई. रूबी की गर्म चूत भी वीर्य की फुहार से ठंडी हो गई.

    हम दोनों लिपट कर लेटे रहे. उस रात मैंने रूबी को 5 बार जमकर चोदा और अगली सुबह वापस अपने शहर आ गया.

    मैं अभी जब भी लखनऊ जाता हूं, तो रूबी के यहां रुक कर सारी रात उसकी चूत को शांत करता हूं.

  • दोस्त की सेक्सी बीवी की चूत चुदाई स्टोरी

    मेरे दोस्त की पत्नी बीवी … आह … कसम से क्या लड़की थी. वह दिखने में एकदम कमसिन लगती थी. उसका बदन बड़ा मस्त था. उसने कैसे मेरी लंड पर चढ़ कर ज़न्नत की सैर की?

    दोस्तो, मैं मनीष शर्मा अन्तर्वासना का एक नियमित पाठक हूँ और कोटा से हूं. वैसे तो मैं भी शादीशुदा हूँ और मेरा शादीशुदा जीवन भी बहुत अच्छा है. सुंदर बीवी के साथ मेरे दो बेटे भी हैं.

    आज यहां मैं वो दास्तान लिख रहा हूँ, जिसमें मेरे दोस्त की पत्नी ने किस तरह मुझे अपनी चुदाई करने को लेकर मुझे उकसाया. और जो नहीं होना चाहिये था, वो हो गया. क्योंकि तन की इंद्रियों पर भी किसी का जोर नहीं चलता है.

    दोस्तो, ये बात करीब डेढ़ महीने पहले की है. मेरा दोस्त जिसका नाम पार्थिव है, वो एक होटल में मैनेजर है तथा मेरे मकान से करीब आधे किलोमीटर की दूरी पर ही किराये के मकान में रहता है. चूंकि वो मेरा दोस्त था, इसलिए मैं कभी कभी उसकी आर्थिक मदद भी कर देता था. इसी लेनदेन के बहाने मेरा उसके घर आना जाना था.

    उसकी पत्नी माया … आह … कसम से क्या लड़की थी … बस एक बार जो देख ले, बार बार देखता रहे. माया दिखने में एकदम कमसिन लगती थी … उसका बदन बड़ा मस्त था. झील सी गहरी उसकी कजरारी आंखें … फिगर 32-34-32 साइज का. उसके उठे हुए चुच्चे, पतली सी कमर और टाईट सी गांड. जब वो अपनी गांड मटका कर चलती, तो अच्छे अच्छे के लौड़े भी खड़े हो जाते.

    कमाल की बात यह कि इतनी मस्त मॉल होने के बावजूद मैंने कभी भी माया को गलत नज़र से नहीं देखा था. क्योंकि मैं ये सोचता था कि माया मेरे दोस्त की पत्नी है … किंतु वो मेरे बारे में क्या सोचती थी, मुझे इसकी जानकारी बिल्कुल नहीं थी.

    वैसे पार्थिव की शादी को 3 साल हो गए थे, लेकिन उनको कोई बच्चा नहीं हुआ था. मैं इस बारे में उससे पूछता, तो वो हर बार हंस कर टाल देता था.

    एक दिन सुबह मैं उसके घर गया और डोरबेल बजाई. मुझे पार्थिव से जरूरी काम था. उसकी पत्नी ने दरवाज़ा खोला और मैंने माया को देखा, तो उसने सफेद कलर की गाउन पहन रखा था. उसमें से उसकी ब्लैक स्टेप और ब्लैक पेंटी साफ दिखाई दे रही थी, जो उसने पहन रखी थी. उस दिन पहली बार उसको देखकर मन में हलचल हुई थी. शायद वो भी इस बात को समझ चुकी थी कि मेरा ध्यान कहां हैं.

    वो बोली- हां भइया बोलिए … इतनी सुबह सुबह … कैसे आना हुआ!
    उसकी आवाज़ से जैसे मैं जागा, मैं बोला- पार्थिव है घर पर!
    वो बोली- हां यही हैं, वो सो रहे हैं.

    उसने मुझे अन्दर बुलाकर बिठाया और पानी का गिलास देकर चाय बनाने की बोल कर अन्दर किचन में चली गई. मेरी तो हालत उसके 32 साइज़ के चुच्चे देखकर ही खराब हो गई थी. जैसे तैसे मैंने अपने आप पर कंट्रोल किया, लेकिन मेरा लंड पूरा खड़ा हो गया था, जो ऊपर से साफ दिख रहा था.

    इतने में माया चाय लेकर आ गई थी. उसने मुझे चाय दी और खुद भी वहीं मेरे सामने बैठकर चाय पीने लगी. हालांकि मैं चाय पी रहा था, लेकिन मेरी नज़र बार बार उसके चुचों पर जा रही थी. मैं समझ नहीं पा रहा था कि वो मुझे उकसा रही है या उसके मन में कुछ और बात है.

    मैंने माया को पार्थिव को बुलाने के लिए बोला तो बोली- आप मुझे काम बता दीजिए, मैं उन्हें बोल दूंगी.
    फिर मैंने कहा- पार्थिव ने कुछ समय पहले मुझसे पैसे लिए थे, तो मुझे जरूरत है पैसों की, तो मैं लेने आया था.
    माया बोली- ठीक है … मैं उन्हें बोल दूंगी. आप शाम को आकर अपने पैसे ले जाना.

    इस तरह बोल कर वो मुस्कुराने लगी और फिर मैं भी वापस अपने घर आ गया.

    घर आकर सबसे पहले तो माया की चुदाई को याद करके मुठ मारी, तब जाकर शरीर को थोड़ी शांति मिली.

    दिन में मुझे पार्थिव मिला. शायद वो कहीं बाहर जा रहा था.
    मैं उससे कुछ बोलता, उससे पहले वो आ गया और बोला- शाम को घर जाकर पैसे ले लेना. मैं माया को देकर आ गया. मैं दो दिन के लिए शहर से बाहर जा रहा हूँ … कोई भी प्रॉब्लम हो, तो सम्भाल लेना.

    मैं बोला- ठीक है.

    अब तो मेरे मन में लड्डू फूटने लग गए कि हो सकता है आज शाम को मुझे माया की चूत चुदाई नसीब हो जाए.

    जैसे तैसे मैंने पूरा दिन निकाला और शाम को पार्थिव के घर पहुंच गया. मैंने डोरबेल बजाई. जैसे ही माया ने दरवाजा खोला, मैं तो उसे देखता ही रह गया.

    उसने ब्लैक कलर की साड़ी पहन रखी थी. कसम से क्या माल लग रही थी. उसने मुझे अन्दर बुलाया और वहीं ड्राइंगरूम में सोफे पर बिठाकर खुद भी मेरे सामने बैठ गई. मैं बस माया को ही देख रहा था.

    माया बोली- क्या हुआ भैया?
    जैसे मैं गहरी नींद से जगा … मैं बोला- कुछ नहीं … लेकिन आज तुम बला की ख़ूबसूरत लग रही हो.
    वो मुस्कुराई और बोली- वो आपको पैसे देने के लिए बोल कर गए हैं कि आप पैसे लेने आओगे.
    मैं बोला- हां जरूरत थी, इसलिए पार्थिव को बोला.

    मैं माया से बात तो कर रहा था, लेकिन मेरी बार बार नज़र उसके चुचों पर जा रही थी. दिल कर रहा था कि अभी पकड़ कर मसल दूँ, लेकिन क्या कर सकता था. उधर नीचे मेरा लंड अपना पूरा आकार ले चुका था. माया भी सब कुछ देख कर भी अनजान बन रही थी.

    वो बोली- क्या देख रहे हैं आप घूर घूर के?
    न जाने मैंने किस झौंक में उसके चुचों की तरफ इशारा करते हुए कह दिया- इनको देख रहा हूँ.
    माया पल्ला हटा कर अपने चूचे उठाते हुए बोली- आखिर इनमें ऐसा क्या है?

    ऐसा वो मुस्कुराते हुए बोली. उसकी इस हरकत से मैं समझ गया कि बंदी चुदने को रेडी है.

    मैं बोला- अगर तुम इज़ाज़त दो, तो बताऊं.
    उसने मुस्कुराते हुए हां में सर हिलाया.

    मैं उसके पास जाकर बैठ गया और माया को देखने लगा और धीरे धीरे उसके होंठों की तरफ अपने होंठों को बढ़ाने लगा.

    माया ने अपनी आंखें बंद कर लीं, जैसे उसने मुझे स्वीकृति दी हो. मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और उन्हें चूसने लगा और एक हाथ उसकी पीठ पर घुमाने लगा.

    थोड़ी देर में वो भी मेरा साथ देने लगी और हम एक दूसरे के होंठों को जोर जोर से चूसने लगे. मैं उसके पीठ को सहलाते हुए उसकी गर्दन के बायीं ओर उसे चूमने लगा. वो अपने मुँह से हल्की हल्की सीत्कारें निकालने लगी. मैं उसके चेहरे और उसके होंठों को पागलों की तरह चूमने लगा और वो अपने मुँह से ‘सीई ससीईई सससीईईई..’ की आवाजें करने लगी.

    धीरे से मैं अपने एक हाथ को नीचे उसके उरोजों पर ले गया और ब्लाउज के ऊपर से ही उन्हें दबाने लगा. क्या नर्म नर्म उरोज थे उसके. फिर मैंने उसके शरीर से उसकी साड़ी को अलग कर दिया और फिर से उसके उरोजों को दबाते मसलते हुए उसे चूमता रहा और वो अपने मुँह से ‘ऊह हहहह आह आह सस्स सस्स ससीई..’ की आवाजें निकालती रही.

    मैं अपने हाथ से माया के शरीर को सहला रहा था और उसे बेहताशा पागलों की तरह चूम भी रहा था. वो मदहोश होने लगी थी. धीरे धीरे मैंने माया का पेटीकोट ऊंचा कर दिया और उसकी जांघों को सहलाते हुए उसकी पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत को मसलने लगा.

    उसने मस्ती के मारे कस के मेरा लंड भींच दिया. मेरे मुँह से एक सिसकारी निकल गई. फिर मैंने उसका ब्लाउज और उसकी ब्रा दोनों को उतार दिया. उसके उरोजों को देखकर मेरी वासना और भड़क गई और मैं दोनों हाथों से उसके उरोजों को प्यार से मसलने और दबाने लगा. माया मस्ती के मारे ‘आह आह आह आह..’ करने लगी.

    वो बोली- ओह भैया … जोर से और जोर से दबाओ.

    मैं उन्हें प्यार से ही दबाने लगा. वो भी प्यार से मेरे लंड को मेरी पैंट के ऊपर से ही दबाने लगी थी.

    फिर मैं वापस माया के होंठों को चूमने लगा तथा दूसरे हाथ उसका पेटीकोट का नाड़ा खींचकर खोला और उसे उतार दिया. अब सामने उसकी चूत को मैं पेंटी के ऊपर से ही मसल और दबा रहा था.

    मैंने अपनी शर्ट और बनियान दोनों उतार दिए. मैंने फिर से माया को चूमना शुरू किया और एक हाथ से उसके चुचों को सहलाए जा रहा था. इसके बाद मैं थोड़ा नीचे आया, उसके उरोजों के सामने अपने होंठ लाया. उसके एक उरोज की चौंच को मैं अपनी जुबान से सहलाने लगा और होंठों के बीच दबाकर खींचकर छोड़ने लगा. वो मस्त हो गई.

    इधर मैं दूसरे को जोर जोर से मसलने लगा. फिर दूसरे उरोज को भी मुँह में लेकर उसकी चौंच को जुबान से सहलाने लगा. ऐसा करने पर वो ओर मचलने लग गई और बड़े प्यार से मुझे अपने मम्मे पिलाने लगी. मैं उसके निप्पलों को मुँह में लेकर जोर-जोर से चूसने लगा. मैं बहुत देर तक दूध चूसता रहा. वो मेरे सर में हाथ फिराते हुए ‘ससीईउई ससीईई..’ करने लगी और मेरे लंड को जोर से दबाने लगी.

    फिर माया ने मेरा मुँह वहां से हटाकर मेरे होंठों को चूसने लगी.

    उसके हाथों में इतनी जान थी कि मैं चाहकर भी अपना चेहरा नहीं हटा पा रहा था. फिर उसने मेरी पैंट और मेरे अंडरवियर को एक ही बार में उतार दिया और सीधा मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर ऐसे चूसने लगी, जैसे कई दिनों की भूखी हो.

    खैर माया मस्त होकर मेरे लंड को चूस रही थी. लंड के टोपे को अपने पतले होंठों के बीच लेकर खींच कर चूस रही थी. मेरे लंड के टोपे पर जुबान फिराकर और पूरा मुँह में लेकर ऐसे चूस रही थी, जैसे लंड को नहीं, सोफ्टी आइसक्रीम को चूस रही हो.

    मैं ज्यादा समय तक उसकी इस अदा पर नहीं टिक पाया और मेरे लंड ने सारा लावा उसके मुँह में ही उड़ेल दिया. माया एक एक बूंद को चूस चूस के पी गई, लेकिन इसके बावजूद वो मेरे लौड़े को चूसती रही.

    थोड़ी देर में मेरा लंड वापस खड़ा हो गया. फिर मैंने माया को सोफे पर बिठाया और उसके उरोजों को मसलकर चूसने लगा, वापस दबाने लगा. थोड़ी देर बाद उरोजों को चूसते हुए मैंने माया की पेंटी उतार दी और उसकी चूत को सहलाने लगा

    माया ‘सस्स सससीईईई..’ की आवाज़ निकलने लगी. फिर मैंने जैसे ही अपनी जुबान से उसकी चूत के दाने को सहलाया, वो तो बस ‘उईईई आह आह आह ससीईई..’ करने लगी. मैं उसकी चूत चाटने में लग गया.
    उसकी चूत से लगातार नमकीन टेस्टी पानी निकल रहा था, जिसे मैं चूसते हुए चाट रहा था.

    तभी माया ने मेरा मुँह अपनी चूत पर दबा लिया और अपनी गांड को हिलाने लगी. वो अपनी चूत को मेरे मुँह पर तेजी से घिसने लगी. मैं भी पूरा पक्का चूत चूसने में लगा रहा. उसकी चूत की दोनों फांकों को पूरा मुँह में दबा कर खींच कर चूसने लगा.

    माया बोली- अब तो अपना लंड मेरी चूत में डाल दो … मुझसे सहन नहीं होता.

    मैंने भी देर न करते हुए उसको थोड़ा आगे खींच कर उसके दोनों पैरों को अपने कंधे पर रख लिया. अपने लंड को उसकी चूत पर टिकाकर एक ही बार में पूरा लंड उसकी चूत की गहराइयों में उतार दिया.

    उसकी एक मीठी सी आह निकली और वो पूरा लंड लील गई.

    मैं अपने लंड को उसकी चूत के अन्दर बाहर करने लगा. वो भी मेरी कमर को पकड़ कर मुझे अपनी चूत की तरफ खींच रही थी.

    वो मस्ती में बोल रही थी- आंह चोदो और तेज चोदो … फाड़ डालो मेरी चूत को और … सससीईईई सससीईई आह आह आह उह उह आह..

    मैं भी उसे गाली दे दे कर चोद रहा. लंड अपनी पूरी रफ्तार से माया की चूत का बाज़ा बजा रहा था.
    माया बोली- मुझे तुम्हारे लंड की सैर करनी है.
    फिर मैं रुक गया.

    उसने मुझे सोफे पर बिठाया और खुद अपनी चूत को लंड पर सैट करके सोफे को पकड़ कर बैठ गई और ऊपर नीचे होने लगी.

    वो बोली- आहआह आह भैया … ऐसे तो पार्थिव ने मुझे कभी नहीं चोदा … आह आह आह!

    मैं उसकी बातों पर ध्यान नहीं दिया और उसकी चूची को मुँह में दबा कर चूसने लग गया. इस तरह माया ‘सससीईई सससीईई..’ करते हुई और जोर से लंड पर कूदने लगी.

    थोड़ी देर में उसकी चूत पानी छोड़ने लगी और ‘पच पच पच..’ की आवाजें आने लगीं. उसकी स्पीड कम हो गई थी, तो मैं अपनी गांड उचका कर उसको नीचे से चोदने लगा. मैं भी फुल स्पीड से चोदने में लगा था. तभी मेरा भी पानी छूटने वाला था.

    मैं बोला- माया अन्दर ही निकाल दूँ.
    वो बोली- हां भैया निकाल दो, मुझे आप अपने बच्चे की मां बना दो. शादी को 2 साल से ऊपर हो गए. बहुत कुछ सुनना पड़ता है.

    फिर मैंने अपने लंड का सारा लावा उसकी चूत में भर दिया. हम दोनों ने एक दूसरे को कसके बांहों में जकड़ लिया. जब थोड़ा नॉर्मल हुए, तो वो अलग हुई और बाथरूम जाकर खुद को ठीक करके मेरे लिए किचन से चाय बनाकर लायी.

    चाय पीने के बाद और हम दोनों ने एक और राउंड लिया. इस बार मैंने उसे खड़े खड़े घोड़ी बना कर चोदा.

    उसके बाद जब भी पार्थिव बाहर जाता, मैं माया की चूत को अपने लंड की सैर करवाता.

    कुछ दिनों के बाद उसने मुझे गर्भवती होने की बात बोली. वो भी खुश थी और मैं भी. उसके बाद माया ने किस तरह अपनी सहेली को भी मुझसे चुदवाया, वो अगली सेक्स कहानी में लिखूंगा.

  • नई आई चाची के साथ सुहागरात जैसी चुदाई

    न्यू चाची Xxx चुदाई कहानी में मेरे चाचा शादी के कुछ दिन बाद जॉब पर चले गए. पीछे चाची लंड की कमी से तड़पती थी. एक रात मैंने चाची को पूरी नंगी देखा. वे चूत में उंगली कर रही थी.

    हाय दोस्तो, मेरा नाम राज है.
    मैं 24 साल का हूँ और महाराष्ट्र के छोटे से गांव से हूँ.

    यह मेरी पहली सेक्स स्टोरी है जो मेरी सगी चाची और मेरे बीच घटी घटना है.

    मेरी चाची का नाम सोना है.
    जैसा उनका नाम है, वैसा ही उनका रंग है. वो बिल्कुल ऐश्वर्या राय जैसी दिखती हैं.
    उनका फिगर 32-28-34 का है, जो भी देखे उन्हें चोदने का मन करे!

    हमारा संयुक्त परिवार है. हम सब एक साथ ही रहते हैं.
    हमारे घर में मेरे दादा-दादी, मेरे पापा और हम दो भाई, दो चाचा और चाची हैं.

    न्यू चाची Xxx चुदाई कहानी में हुआ यूँ कि चाचा की शादी के 3 महीने बाद काम के सिलसिले में मुंबई चले गए और वहीं काम करने लगे.

    चाचा के जाने के बाद चाची उदास रहने लगीं.

    चाचा से रात में फोन पर चाची की बात होती, पर नई-नवेली दुल्हन सेक्स के बिना कितने दिन रहेगी?
    घर में मैं चाची के साथ एक दोस्त की तरह रहता था, कोई छोटा बच्चा नहीं था … तो चाचा के मुंबई जाने के बाद चाची के डबल बेड पलंग पर मैं और मेरी चाची दोनों साथ में सोते थे.

    हम रोज 10 बजे तक टीवी देखकर सब अपने-अपने कमरे में सो जाते. तब तक मेरे मन में चाची के लिए कोई गलत विचार नहीं था.

    लेकिन एक दिन रात को अचानक जब मेरी नींद खुली.
    तो मैंने देखा चाची बिल्कुल नंगी होकर दीवार के पास खड़ी होकर अपनी चूत में उंगली कर रही थीं.

    वे अपने संतरे जैसे बूब्स को एक हाथ से दबा रही थीं और सिसकारियां ले रही थीं.
    मैं उन्हें देखने लगा, पर उस वक्त मैं हैरान हो गया जब मैंने उनके मुँह से अपना नाम सुना.

    वे अपनी चुत रगड़ती हुई मेरा नाम लेती हुई बड़बड़ा रही थीं.
    ये सब देखकर मैं हैरान हो गया और पैंट में मेरा लंड खड़ा हो गया.

    थोड़ी देर बाद चाची झड़ गईं और पुनः सो गईं.
    फिर मैं थोड़ी देर बाद उठकर बाथरूम में जाकर चाची को याद करके मुठ मारकर सो गया.

    दूसरे दिन से चाची के लिए मेरी नजर बदल गई.
    अब मैं चाची को चोदने का प्लान बनाने लगा और सोचते-सोचते एक आइडिया मेरे दिमाग में आ गया.

    मैं खाना खाने के तुरंत बाद चाची के रूम में जाकर सोने का नाटक करने लगा.
    चाची काम निपटा कर रात के करीब दस बजे आईं और उन्होंने मुझे आवाज़ दी.
    मैं जगा हुआ था, लेकिन सोने का नाटक करता रहा.

    चाची ने जब देखा कि मैं गहरी नींद में सो रहा हूँ तो उन्होंने अपनी साड़ी उतारी. फिर पेटीकोट भी उतार दिया.
    वे मेरी तरफ अपनी गांड करके खड़ी थीं.
    मैं उन्हें देख रहा था.

    चाची ने ब्लाउज़ भी उतार दिया और ब्रा उतार कर पैंटी को भी उतार दिया.

    मैं ये सब चुपके से देख रहा था.
    फिर चाची पलंग पर रखी हुई अपनी नाइटी लेने के लिए जैसे ही मुड़ीं, मुझे उनकी चूत के दर्शन हो गए!

    क्या मस्त पावरोटी सी फूली हुई चूत थी यार … बिल्कुल क्लीन शेव्ड!
    उनकी मखमली चूत देखकर ऐसा लगा कि अभी पटक कर अपना 6 इंच लंबा और 3 इंच मोटा लंड चाची की चूत में डाल दूँ!

    पर मैं इतनी जल्दी ऐसा नहीं कर सकता था.

    फिर चाची ने अपनी चूत पर हाथ फिराया और नाइटी उठाई.
    वे मुझे देखती हुई नाइटी पहनने लगीं और आकर मेरे बाजू में लेट गईं.
    चाची की गांड मेरी तरफ थी और मेरा कंट्रोल खोता जा रहा था.

    मैं थोड़ी देर बाद उठा और बाथरूम जाकर मुठ मार कर वापस आया.
    मैंने वापस आकर देखा तो चाची की नाइटी उनकी जांघों तक आ गई थी.

    अब नींद मुझसे कोसों दूर थी, तो मैंने लाइट बंद की और जाकर उनसे चिपक कर सो गया.
    चाची के बदन की गर्मी मुझे महसूस हो रही थी.

    मैंने सोने का नाटक करते हुए चाची के ऊपर अपना एक हाथ रखा.
    इस पर चाची कुछ नहीं बोलीं, ऐसा लग रहा था मानो वे घोड़े बेच कर सो रही हों!

    यह देख कर मेरी हिम्मत बढ़ी.

    मैं धीरे-धीरे उनकी नाइटी के ऊपर से हाथ फिराने लगा और उनके चूचे दबाने लगा.
    चाची की गर्म सांसें मुझे महसूस हो रही थीं.

    अब मैंने आगे बढ़ने की सोची और दूसरा हाथ उनकी जांघ पर रखकर सहलाने लगा.
    इससे चाची गर्म होने लगीं और वे अचानक से मुड़ गईं.

    मैं डर गया कि अब लौड़े लग गए … लेकिन वे सोई रहीं.
    अब उनके चूचे बिल्कुल मेरे मुँह के सामने थे और उनके निप्पल एकदम खड़े हो गए थे.

    उनकी सांसें तेज़-तेज़ चल रही थीं और इस वजह से अब मेरा लंड उनकी चूत को छूने लगा था.

    मुझे उनकी तेज तेज चलती सांसों से समझ आ गया था कि चाची भी जाग रही हैं पर सोने का नाटक कर रही हैं.

    मैंने उनकी नाइटी को धीरे-धीरे सरकाना शुरू किया और उसे पूरी उतार दी.
    इसमें चाची ने भी बिना आंखें खोले मेरी मदद की.

    जब उन्होंने अपनी गांड उठाकर नाइटी निकल जाने दी और अपनी आंख नहीं खोली … न कुछ बोलीं, तो मुझे पक्का हो गया कि आज चाची चुत चुदवाने के लिए राजी है.
    कुछ देर के बाद मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए और अपना 6 इंच लौड़ा लेकर उनके साथ चिपक गया.

    मैं चाची की चूत में उंगली करने लगा तो यह उनसे सहन नहीं हुआ और वे मादक आंहों में आवाज निकालती हुई सिसकारने लगीं ‘आह सी आह्ह्ह … स्स्स आह्ह्ह्ह आआह मेरे राजा आह बहुत प्यासी हूँ मैं … आह!’

    चाची की चूत बहुत गर्म लग रही थी और टाइट भी थी.

    मैंने उन्हें किस किया और चाची के कान में धीरे से कहा- चाची, अब बस भी करो प्लीज … थोड़ा सपोर्ट करो न! वैसे तो मेरा नाम ले लेकर चूत में उंगली करती हो न!

    यह सुनकर तो चाची बिल्कुल जंगली बिल्ली की तरह मुझ पर झपटीं और मुझे अपनी बांहों में कसके भरने लगीं.
    मैं भी किस करते-करते उनके चूचे मसलने लगा और एक हाथ से चूत में उंगली करने लगा.

    चाची चुदास भरे स्वर में बोलीं- राज और मत तड़पाओ … प्लीज मुझे चोद दो!

    मैंने चाची को कुछ और तड़पाने की सोची और उनकी चूत में मुँह लगाकर जीभ अन्दर डालने लगा.
    इससे चाची को बहुत मज़ा आया.

    वे मादक स्वर में चिल्लाने लगीं- आआह ईई … अहम्ह्ह बहुत मज़ा आ रहा है … तुम्हारे चाचा ने पहले ऐसा कभी नहीं किया!
    यह कहती हुई चाची अकड़ने लगीं और मेरे सर को अपनी चूत में दबाने लगीं.

    वे कुछ ही पलों में झड़ गईं.

    अब मैंने उन्हें लंड मुँह में लेने को बोला.
    तो वे नानुकुर करने लगीं.

    मेरे थोड़ा ज़ोर देने पर वे मान गईं और मेरा लंड चूसने लगीं.

    मैं तेज़-तेज़ उनके मुँह को चोदने लगा, चाची के गले तक लौड़े को पेलने लगा.
    चाची ‘गो-गो’ करने लगीं.

    फिर मैंने पोजीशन ली.
    एक तकिया चाची की गांड के नीचे लगाया और उनके पैर अपने कंधे पर रखकर लंड का सुपारा उनकी गुलाबी चूत के मुँह पर रख कर रगड़ने लगा.

    चाची मस्त होने लगीं तो मैंने एक जोर का झटका दे मारा.
    पहली बार में मेरा लंड फिसल गया.

    चाची हंसने लगीं.

    मैंने फिर से लौड़े को चुत के मुँह पर सैट किया और करारा झटका दे मारा.
    इस बार मेरा 2 इंच लंड चूत के अन्दर चला गया और चाची की चीख निकल गई.
    उन्हें बहुत दर्द हुआ.

    मैंने कहा- क्या हुआ?
    चाची ने कहा- मैंने पहले कभी इतना बड़ा नहीं लिया! शादी से पहले मेरा कोई बॉयफ्रेंड भी नहीं था और तुम्हारे चाचा का बहुत पतला और छोटा सा है! प्लीज आराम से करो!

    मैंने उनसे हां कहा और उनकी कोई परवाह न करते हुए उनके होंठों पर होंठ रख कर चूसने लगा.
    मैं उनकी चीख न निकले इसलिए मुँह बंद किये हुए था.

    जैसे ही चाची मस्त हुईं, मैंने एक ज़ोरदार धक्का मारा.
    इस झटके से मेरा पूरा लंड चूत में उतर गया.

    वे दर्द से छटपटाने लगीं.
    उनकी चुत फट गई थी तो चूत से खू.न आने लगा था.
    पर मैंने उन्हें नहीं बताया.

    उनकी आंखों से आंसू आने लगे.

    मेरा भी पूरा लंड छिल गया, मुझे भी बहुत दर्द होने लगा.
    लेकिन कसी हुई चुत में लंड पेलने में बहुत सुख मिला था.

    चाची की चूत गर्म भट्टी जैसे तप रही थी.

    मैं थोड़ी देर ऐसे ही पड़ा रहा.
    फिर जैसे चाची का दर्द कम हुआ, मैंने दोबारा से झटके मारने चालू कर दिए.

    न्यू चाची अब लौड़े से Xxx चुदाई के मज़े लेने लगीं और मादक आवाज में सिसकारने लगीं ‘आह … आ मज़ा आ गया … और तेज़ करो … आह अह अह फाड़ दो आह ऐसे ही चोदो!’

    वे गर्मागर्म आहें भरने लगीं तो मैंने फुल स्पीड में चुदाई चालू कर दी.
    फिर जब मैं झड़ने को आया, तो मैंने चाची से कहा कि मेरा काम होने वाला है … माल कहां निकालूँ?

    चाची बोलीं- आह, मेरा भी होने वाला है … बाहर मत निकालना … अन्दर ही छोड़ दो!
    मैंने यह सुनते ही तेज़-तेज़ चार-पाँच झटके मार और चाची की चूत के अन्दर झड़ गया.

    झड़ कर मैं हांफने लगा था तो उसी अवस्था में चाची के ऊपर ढेर हो गया.
    थोड़ी देर बाद हम दोनों उठे और एक-दूसरे को साफ किया.

    उनकी बेडशीट पर पूरा खू.न लग गया था.
    चाची ने बेडशीट चेंज की और हम दोनों नंगे ही सो गए.

    इसके बाद तो रोज़ रात को हम दोनों नंगे होकर चुदाई करते और मजा लेते.
    जब तक चाचा नहीं आए, मैंने चाची की चुत को अपनी चुत समझा.

    चाचा के आने के बाद भी जब हमें मौका मिलता है, तो हम दोनों चुदाई कर लेते हैं.
    चाची मेरे लौड़े से बड़ी खुश हैं.

  • गर्लफ्रैंड की माँ ने चूत चुदवायी

    मैंने मेरे घर के सामने की एक लड़की पटा ली, हम दोनों में खूब चुदाई होती थी। एक दिन उसकी मम्मी ने हमारी चैट पढ़ ली और मुझे अपने घर बुलाया. उसके बाद क्या हुआ?

    हाय दोस्तो, मैं योगी रंग गोरा कद 5 फिट 8 इंच का गबरू जवान हूँ। मैं अभी 23 साल का हूँ मेरा लंड का साइज 7 इंच लंबा और 3 इंच मोटा है।

    चलो दोस्तो अब मैं कहानी पे आता हूँ. ये कहानी तब की है जब 20 साल का था.
    मैं जब फर्स्ट ईयर की पढ़ाई करने गांव से शहर गया. तब मैं वहाँ के माहौल में ढला और मेरे घर के सामने की एक लड़की पटा ली जिसको मैं बहुत प्यार करता था. और वो लड़की भी मुझसे प्यार करती थी, हम दोनों में खूब चुदाई होती थी।

    एक दिन हुआ क्या कि वो मुझसे चैट करते करते सो गई. रात के 11 बजे उसकी माँ उसके रूम में गयी लाइट बंद करने!
    इधर मैं सोच रहा था कि वो कैसे रिप्लाई नहीं कर रही है. यह सोच कर मैंने उसको कॉल किया तो उसकी माँ ने फोन उठाया.

    मैंने उसकी माँ के कुछ बोलने से पहले से बोल डाला- जानेमन … कुछ जवाब नहीं दे रही हो?
    तो उसकी माँ में कुछ नहीं कहा और हमारी सारी चैट को पढ़ लिया, उस चैट में हम लोग बहुत अश्लील बातें कर रहे थे.

    मेरी गर्लफ्रैंड की माँ के बारे में बता दूं … वो बहुत बड़ी चुदक्कड़ औरत थी. उसके जिस्म का साइज़ 36-30-38 था. माँ कसम यारो … उनको चोदने में जितना मजा आया, उतना तो मेरी गर्लफ्रैंड को चोदने में मजा नहीं आया और ना ही मेरी गर्लफ्रैंड की दोनों मामी और उसके एक विधवा बड़ी माँ (मेरे गर्लफ्रैंड की माँ की बड़ी बहन) को!

    मैं आप लोगों को एक बात बता दूँ कि उसकी फैमिली की सभी लेडिस बहुत चुदक्कड़ हैं। जब मैं थर्ड ईयर में बाहर में रहता था तो वो मेरे साथ हर रात बिताती थी. उसकी दोनों मामी और उसकी बड़ी माँ को मैंने कैसे पटाया और चोदा, ये बाद में बताऊंगा. आज उसकी माँ के बारे में बताऊंगा जो इन सबसे बड़ी चुदक्कड़ थी. जिसने मुझे खुद प्लान करके पटाया था।

    हाँ तो दोस्तो, जैसे मैंने बताया कि उस रात मेरी गर्लफ्रैंड मुझसे चैट करते सो गई तो उस दिन से मुझसे चुदवाने वाली की एक और संख्या बढ़ गयी।

    सुबह मुझे एक अज्ञात नंबर से कॉल आया. मैंने फोन उठाया तो वो मेरी गर्लफ्रेंड का नाम लेते हुए बोला- मैं इसकी माँ बोल रही हूं.
    मेरी गांड फट गयी क्योंकि मैं उनसे बहुत डरता था।
    उन्होंने कहा- क्या तुम घर आकर मुझसे मिलके बात कर सकते हो? मुझे तुमसे एक शिकायत है।

    मैंने उनसे कहा- क्या शिकायत है, आप बोलिये?
    तो उन्होंने कहा- घर में आओ अभी!
    “ठीक है आंटी!” कहक़र मैं उनके घर गया.

    तो उन्होंने मुझे बैठक कमरे में बिठाया और फिर मुझे कहा- तुम मेरी लड़की से प्यार करते हो?
    तो मैंने कहा- हाँ करता हूँ.
    “मैंने कल रात तुम्हारी चैटिंग पूरी पढ़ ली है।”

    फिन मेरी गर्लफ्रेंड की मम्मी ने पूछा- इसी तरह से बात करते हो या रियल में भी ये सब करते हो?
    तो मैंने उनसे कहा- नहीं आंटी, ये सब तो हम शादी के बाद करेंगे।
    तो उन्होंने खूब डांटा.
    मैं अपना सिर नीचे करके बस जवाब दे रहा था.

    तो उन्होंने कहा- तुम लड़कियों की तरह सिर क्यों झुकाये हो?
    मैंने सर उठाकर देखा वो बहुत गहरे गले का ब्लाउज पहने थी. उनके बड़े बड़े बूब्स की क्लीवेज साफ साफ दिख रहा था.
    तो उन्होंने मुझे देखते हुए देख लिया और पूछा- क्या देख रहा है?
    मैं चुप रहा.

    उन्होंने मुझसे कहा- लड़के तो तुम मुझे अच्छे लगते हो लेकिन ऐसी अश्लील बातें क्यो करते हो?

    तो मैंने उनसे कहा- सॉरी आँटी, आज के बाद नहीं करूँगा।
    वो बोली- मैं तो उसके पापा को सब बताने वाली हूँ. तू तो जानता है कि वो बहुत खतरनाक हैं. मैंने भी कई बार उनके हाथों से मार खायी है.

    मैंने उनसे गिड़गिड़ाते हुए माफी मांगी.
    तो उन्होंने कहा- ठीक है, नहीं कहूँगी उनसे! लेकिन तुम मेरा एक काम करोगे तब … और जब मैं बोलूंगी, वो काम तुमको करना पड़ेगा.
    मैंने कहा- ठीक है आँटी!
    उन्होंने कहा- कल 10 बजे सुबह आना।

    मैं रात भर नहीं सोया. ना ही अपनी गर्लफ्रैंड से बात की. बस सुबह होने का इंतजार किया.
    सुबह सुबह 4 बजे आंख लगने के कारण 9 बजे उठा.

    उन्होंने कॉल किया- आ रहा है या नहीं?
    मुझे कुछ पता नहीं था कि मेरे साथ क्या होना था.
    मेरे को क्या पता था कि वो मेरी ज़िंदगी का सबसे हसीन पल था.

    मेरी सेक्स लाइफ का, अय्याशी का सब जबरदस्त मोड़ था क्योंकि मैंने इसके बाद मेरी गर्लफ्रैंड की फैमिली में केवल उसकी नानी को बस को नहीं चोदा क्योंकि वो बहुत ज्यादा बूढ़ी हो गयी थी. उसके मामा की पूरी फैमिली चुदती थी. मजे की बात यह कि इसके बारे में मेरी गर्लफ्रैंड को कुछ नहीं पता था।

    9 बजकर 55 मिनट में मैं उनके घर पहुंचा. मैंने उनको आवाज दी तो वो बोली- मेरे रूम में बैठ … मैं नहा रही हूँ.
    तो मैं उनके रूम में गया.

    उनके बेड पे उनकी ब्रा और पेंटी रखी थी. मैं उनकी ब्रा और पैंटी को नाक के पास ले जाकर सूंघने लगा. क्या मस्त खुशबू आ रही थी. लेकिन मैंने डर में भी अपने कमीनेपन को नहीं छोड़ा।

    फिर वो नहा कर टॉवल में बाथरूम से बाहर आयी. मैंने अचानक से उनको देखा तो उनकी पैंटी को बेड पे रख दिया. जब वो टॉवल में आ रही थी तब वो सेक्स की देवी लग रही थी. मैं उनको एकटक देखते रह गया.
    तो उन्होंने कहा- क्या देख रहा है?
    मैंने उनसे कुछ नहीं कहा।

    फिर वो मेरे को बकने लगी- तू मेरे बिस्तर पे कैसे बैठा है? तू नीचे बैठ! वो एक टॉवल रखा है उसको उठा कर ला और मेरे हाथ पैर को टॉवल से पौंछ!

    मैंने उनके हाथ पैर के पानी को टॉवेल से साफ किया. उनके बाल भी सुखाये. ये सब करते हुए मुझे डर तो लग रहा था लेकिन उनके अर्धनग्न शरीर का दीदार भी हो रहा था.
    मन तो कर रहा था कि उसके टॉवल को खींचकर नंगी करके चोद दूँ. लेकिन डर भी रहा था कि अगर बात बिगड़ गयी थी सबसे हाथ धोना पड़ जाए!

    फिर उन्होंने मुझसे कहा- किस सोच में पड़ गए तुम? उस बॉडी लोशन को लाओ और मेरे हाथों में लगाओ, पैरों में लगाओ. आज से तुम मेरा रोज ऐसी काम करोगे।

    मैंने बॉडी लोशन आंटी की बाजू पर लगाया. फिर उसके बाद मैंने उनके पैरों में आया, जांघों पर आया. क्या मोटी और सेक्सी जाँघें थी आंटी की! मेरा लंड पूरा 7 इंच का हो गया.
    उन्होंने ये सब देख लिया.

    फिर मैंने जैसे ही लोशन जाँघों में लगाया तो वो बोली- बस इतना ही?
    बोल करके आंटी ने अपने दोनों पैरों को फैला दिया और मेरे हाथों को अपनी चूत में ले जाकर कहने लगी- यहां कौन करेगा?
    और वो अपने टॉवल को निकालकर पूरी तरह से नंगी हो गयी.

    मैं तो पागल हो गया. फिर उठकर मैंने ढेर सारा बॉडी लोशन को उनके पूरे नंगे जिस्म पर डाल के लगाया.

    फिर मैं उनके होंठों को चूमने लगा. वो भी बेतहाशा मुझे चूमने लगी.
    मैं धीरे धीरे उसके पूरे बदन को चूमने लगा.

    फिर मैंने आंटी की चूत को चाटना चालू कर दिया. फिर वो उह आह करने लगी और बड़बड़ाने लगी- जबसे मैंने तुम्हारा मैसेज पढ़ा … तब से पता चल गया था कि तुम माहिर खिलाड़ी हो. तब से ही मैं तुम से चुदवाना चाहती हूँ योगी!

    मैं बोला- उस दिन आपका क्लीवेज देखा तब से आपको चोदने का मन था मेरा … लेकिन डर रहा था.

    फिर मैंने भी अपने कपड़े निकाले, मेरा 7 इंच का लंड देखकर आंटी का मुंह खुल गया. मैंने इसको देखकर आंटी के मुँह में लंड डाल दिया. तो आंटी पागल की तरह चूसने लग गयी.
    मेरे को चूत चाटना बहुत ज्यादा पसंद है और गांड का छेद चाटना … मैंने आंटी को 69 में किया और इत्मीनान के साथ आंटी की चूत चाट रहा था.

    हम दोनों ही 69 की अवस्था में एक दूसरे को संतुष्ट कर रहे थे. फिर वो झड़ने वाली थी तो वो मेरा सर अपने चूत में दबा रही थी.
    फिर वो झड़ गयी. मैंने उनके पानी पी लिया और वो भी मेरा गटक गयी.

    थोड़ी देर के बाद फिर हम चुदाई के लिये तैयार हो गए. मेरी गर्लफ्रेंड की माँ कहने लगी- डाल दे जानू!
    मैंने अपने लंड को उनकी चूत में डाला.
    वो तड़प गयी.
    शुरु में गर्लफ्रेंड की माँ की चूत में लंड बहुत टाइट जा रहा था क्योंकि वो बहुत दिनों से चुदी नहीं थी।

    मैंने उनको दो बार चोदा 10 बजे से 12 बजे तक. फिर उन्होंने हम दोनों के लिए खाना बनाया. फिर हम लोगों ने खाया फिर हम सो गए.

    हम 3 बजे उठे दोपहर में! अब फिर मैंने उनको चोदा.
    फिर उन्होंने कहा- रात में सबके सोने के बाद आना. मैं अपने पति के साथ सोती नहीं, अलग से रूम से सोती हूँ. तुम आना, फिर रातभर करेंगे.

    मैं रात को 10 बजे गया, सुबह 5 बजे वापस आया. पूरी रात चली चुदाई से वो चल भी नहीं पा रही थी.

    अब तो हर रात और दोपहर में चुदाई चली शनिवार और रविवार छोड़कर। ऐसी पूरे एक साल चला.

    फिर मैंने थर्ड इयर में मैं दूसरी जगह रूम लेकर रहने लगा तो वो उस रूम में आने लगी।

  • ट्रेन में मिले टीसी ने होटल में मुझे चोदा

    दोस्तो, मेरा नाम गुड़िया है. मैं दिल्ली के आनंद बिहार में रहती हूँ. मेरे पति एक एमएनसी में नौकरी करते हैं.
    हमारी शादी को 14 साल हो चुके हैं और हमारा एक बेटा है, जो अब 12 साल का है.

    मेरे पति ज्यादा सेक्सुअली एक्टिव नहीं हैं.
    हम दोनों महीने में बस 2-3 बार ही सेक्स करते हैं.

    ये HindiXxx चुदाई कहानी उस समय की है, जब मेरा बेटा चार साल का था लेकिन वह अभी भी मेरा दूध पीता था

    मुझे अपने घर लखनऊ जाना था, तो मैं अकेली ट्रेन से जा रही थी.

    मेरे पास थर्ड एसी का टिकट था.
    मैंने साड़ी पहनी थी और उस दिन नेट की साड़ी में मेरा फिगर बहुत सेक्सी दिख रहा था.
    ट्रेन हजरत निजामुद्दीन से निकल चुकी थी.

    मैंने डिनर का ऑर्डर किया और अपने बेटे को अपनी सीट पर सुला दिया.
    मैं भी निचली सीट पर साड़ी में ही सोने जा रही थी.

    तभी एक स्टेशन आया और सामने वाली सीट पर एक 40 साल का टीसी आया. उसने कहा- ये सीट खाली है, मैं यहीं सोऊंगा.
    मैंने कहा- ठीक है. हालांकि मुझे अपने बेटे के साथ सोने में थोड़ी असहजता होगी, लेकिन मैं अडजस्ट कर लूँगी.

    अब मेरा बेटा और मैं एक ही सीट पर थे.
    मुझे नहीं पता था कि आगे क्या होगा.

    फिर टीसी बोला- फर्स्ट एसी में एक कूपा खाली है. आप अपने बेटे को लेकर वहां लखनऊ तक आराम से सोती हुई चली जाइए.
    पहले तो मैंने मना किया लेकिन बाद में मान गई.

    उसने मेरा सामान लिया और मुझे फर्स्ट एसी में शिफ्ट कर दिया.
    पूरा कूपा खाली था और सीटें भी बहुत आरामदायक थीं.

    मुझे वहां अच्छी नींद आई.

    सुबह जब मैं उठी, तो ट्रेन लखनऊ से 2 घंटे दूर थी.
    तभी टीसी आया और उसने कहा- गुड मॉर्निंग मैडम.

    मैंने उसे धन्यवाद बोला.
    उसने मुस्कुराते हुए कहा- धन्यवाद से काम नहीं चलेगा. आप मुझे कुछ …

    मैंने उसकी बात को समझ लिया और अपने पर्स से 1000 रुपये निकाल कर उसे दे दिए.
    उसने 500 रुपये और माँगे, लेकिन मैंने मना कर दिया.

    अब वह मुझसे बातें करने लगा.
    मैंने उससे कहा- आप जब तक यहां बैठे हैं, तब तक मेरे बेटे को देख लीजिए. उतनी देर में मैं फ्रेश हो आती हूँ.
    उसने हामी भर दी.

    मैं फ्रेश होने वॉशरूम गई.
    वहां साड़ी उतार कर पेटीकोट और ब्लाउज में फ्रेश हुई.

    फिर सोचा कि अब साड़ी नहीं पहनूँगी. तो मैंने वापस साड़ी लपेटी और कूपे में आकर अपने बैग से जींस और टॉप निकाला, नई ब्रा-पैंटी भी निकाली और तौलिया लेकर वॉशरूम चली गई.

    वह यह सब देख रहा था.

    वॉशरूम में मैंने सारे कपड़े उतार दिए, सिवाय ब्रा-पैंटी के.
    तभी टीसी की आवाज आई- मैडम, आपका बेटा रो रहा है!

    मैंने कहा- प्लीज, उसे मेरे पास लेकर आ जाइए.
    तब तक मैं नहा चुकी थी और पूरी नंगी थी.

    टीसी ने दरवाजा खटखटाया.
    मैंने जल्दी से जींस पहनी और लॉक खोला.

    मेरी ब्रा पूरी भीग चुकी थी.

    टीसी मुझे देखकर बोला- सॉरी!
    मैंने कहा- प्लीज, 2 मिनट बाद इसे सीट पर ले जाइए. मैं इसे दूध पिला देती हूँ तो यह चुप हो जाएगा.
    वह बोला- ओके!

    मैंने गेट लॉक करके अपने बेटे को दूध पिलाया और उसे टीसी की गोद में दे दिया.
    वह मेरी भीगी ब्रा को देखकर हंस रहा था, उसे हंसता देख कर मैं भी मुस्कुरा दी.

    वह चला गया.

    मैंने नहाकर जींस और टॉप पहना और वापस सीट पर आ गई.

    टीसी फिर आया और बोला- मैं भी लखनऊ जा रहा हूँ, किसी काम से. क्या आप किसी होटल के बारे में जानती हैं?
    मैंने उससे कहा- हां आप चाहें तो मेरे साथ चल सकते हैं.

    वह भी राजी हो गया.
    मैंने उसे अपने साथ ऑटो में ले लिया.
    ऑटो में सामान होने की वजह से जगह कम थी.

    मेरे मोटे नितंब, जो जींस में और भी सेक्सी लग रहे थे, उसकी जांघ के ऊपर थे.

    रास्ते में मैंने उसके लंड के उभार को भी महसूस किया. उसने मेरे स्तनों को भी हाथ से छुआ.
    मेरे निपल्स तंग होकर खड़े हो गए.

    उसके लौड़े का उभार साफ दिख रहा था.
    इससे मुझे भी चुदाई का मन होने लगा.

    उसका शरीर बहुत मजबूत था.
    मैं उसकी मर्दानगी को अपने बिस्तर पर महसूस करना चाहती थी.
    उसके लंड को अपने कोमल शरीर पर रगड़ना चाहती थी.
    पूरी नंगी होकर उसके साथ कंबल में सोना चाहती थी और उसके मोटे औजार को अपनी नंगी टांगों के बीच में महसूस करना चाहती थी.

    यह सब सोचकर मैं गर्म हो गई थी.

    तभी ऑटो वाले ने एक होटल के सामने रोक कर कहा कि यह होटल देख लीजिए … यह बढ़िया है!
    वह उतर कर गया और एक कमरा बुक करके आ गया.

    फिर उसने मुझे अपने कमरे में चाय के लिए बुलाया.
    मैं आ गई और उसने चाय मंगवाई.

    हम दोनों बिस्तर पर बैठकर चाय पीने लगे.
    उसकी बातों में एक अपनापन था.

    मुझे उसके साथ एक ही बिस्तर पर उसका पूरा अहसास चाहिए था.

    चाय पीते-पीते वह मेरे बेटे के साथ खेलने लगा.
    मेरा बेटा मेरे दूध निकाल कर पीने लगा.

    टीसी अब मस्त नजरों से मुझे दूध पिलाता हुआ देख रहा था.

    वह बोला- सही से पिला दो न!
    मैं भी उसकी बात सुनकर मुस्कुरा दी और जानबूझ कर अपना टॉप उतार दिया.

    मैंने उससे कहा- दरअसल मेरी ब्रा टाइट है न … तो दूध पिलाने में दिक्कत हो रही है. क्या मैं इसे भी निकाल दूँ?
    वह उठकर जाने लगा.

    मैंने उसे रोक लिया और मुस्कुराते हुए कहा- आप यहीं बैठे रहो.
    वह हंसकर वहीं बैठ गया.

    मैंने अपनी ब्रा उतार दी.
    मेरे स्तन बड़े-बड़े होकर उसके सामने फुदकने लगे थे.

    मेरे नग्न दूध देख कर उसका लंड उफान मारने लगा.

    मैंने पूछा- तुम्हारी बीवी नहीं है?
    उसने कहा- वह गांव में रहती है.
    उसने मेरे बेटे को गोद में ले लिया और मेरा फोन लेकर उसे यूट्यूब पर शॉर्ट फिल्म दिखाने के लिए साइड में बिठा दिया.

    मेरा बेटा फोन देखने लगा.
    टीसी बोला- यार, दो साल से मैंने किसी औरत को छुआ नहीं है, आज आपका सेक्सी बदन देखकर मुझसे रहा नहीं जाता है … अगर …

    यह सुनते ही मैंने उसकी बाकी की बात पूरी होने से पहले तुरंत अपने होंठ उसके होंठों से लगा दिए.

    वह भूखे कुत्ते की तरह मेरे होंठ चूसने लगा, मेरे गाल चाटने लगा और अपने मजबूत हाथों से मेरे चूतड़ दबाने लगा.

    हम दोनों खड़े होकर एक-दूसरे को चूम रहे थे.
    उसका लंड मेरी चूत को टच कर रहा था.
    उसने मेरी गांड के छेद में जींस के अन्दर करके उंगली डाल दी.

    मैं बहुत गर्म हो चुकी थी.
    मुझे लग रहा था कि अभी उसका लंड मेरी चूत फाड़ देगा.

    उसने मुझे पेट के बल लिटा दिया और मेरे उभरे हुए मोटे-मोटे चूतड़ों को जींस के ऊपर से ही काटने लगा.

    मैंने भी जींस का बटन खोल दिया
    तभी मेरे पति का फोन आ गया.
    मैंने ट्रेन लेट होने का बहाना बना दिया.

    तब तक टीसी ने मुझे पूरी नंगी कर दिया था.

    मैंने कहा- जल्दी से मेरी प्यास बुझा दो, राजा!
    उसके मजबूत शरीर ने मुझे पूरा मसल दिया था.

    जैसे ही उसने अपना लोअर उतारा और उसका लंड एकदम से मेरे सामने किसी अजगर की तरह लहराने लगा.
    मैं उसके मोटे लंड को देख कर समझ गई कि आज चुत का भोसड़ा बनने में कसर नहीं रहने वाली है.

    वह अपने लौड़े को मेरे चूतड़ों पर फिराने लगा.
    मैं पागल हो गई.

    उसका लंड लोहे की रॉड जैसा था.
    मैंने पीठ के बल लेटकर अपनी टांगें उसके मजबूत कंधों पर रख दीं.

    उसके लंड से प्री-कम बहुत निकल रहा था और मेरी चूत उसके लंड को निगलने के मचली जा रही थी.

    जैसे ही उसके लंड का सुपारा मेरी चूत में घुसा, मैं जोर से चिल्ला उठी- आह जोर से चोद दे मुझे!
    उसका 6 इंच का लंड मेरे प्राण निकाल रहा था, लेकिन मुझे चुदाई का भूत सवार हो गया था.

    मैं अपनी दर्द भरी आवाज निकाल रही थी और उसके लंड को अन्दर लेती जा रही थी.
    पूरा कमरा हम दोनों की आवाजों से गूँज रहा था.

    मेरा बेटा फोन में ईयरफोन लगाए हुए था.
    उस मर्द टीसी के झटकों से मैं काफी सुकून महसूस कर रही थी.
    जल्दी ही मैं चरम सुख के करीब आ गई थी.

    हम दोनों मिशनरी पोजीशन में चुदाई कर रहे थे.
    उसने मेरे होंठों को अपने दांतों से काटना शुरू कर दिया.

    मैं उत्तेजना से कांपने लगी और मेरी चूत से पेशाब जैसा कुछ बहने लगा.

    मैं थक कर एकदम से शिथिल हो गई लेकिन उसका लंड मेरी चूत में झटके मार रहा था.

    कुछ देर बाद उसने अपना लंड निकाला और मुझे डॉगी स्टाइल में करके मेरी चूत चोदने लगा.
    मेरी चूत में उसके लंड के तेज धक्कों की आवाज गूँज रही थी.

    फिर उसने अपनी पिचकारी मेरे चूतड़ों के ऊपर छोड़ दी.

    हम दोनों 15 मिनट में ही शांत हो गए.
    उसने जल्दी से टिश्यू पेपर लिया और मेरे चूतड़ों पर लगे अपने स्पर्म को साफ कर दिया.

    उसने मेरे बेटे को प्यार से किस किया.
    मैंने अब साड़ी पहन ली क्योंकि मेरी जींस उसके थूक से पूरी गीली हो चुकी थी.

    मेरा बेटा बोला- मम्मा, अंकल आपको क्यों मार रहे थे? वह आपको किस क्यों कर रहे थे?
    मैंने बस मुस्कुरा दिया और सामान लेकर अपने घर पहुंच गई.

    घर पहुंचने के बाद भी मेरा बेटा बोला- मम्मा, जब अंकल आपको किस कर रहे थे और आपकी पैंट चाट रहे थे, तब मैंने वीडियो बना लिया था.
    मैंने उससे फोन लिया और देखा तो पूरा 12 मिनट का वीडियो था!

  • मम्मी और उनके फ्रेंड अंकल की चुदाई देखी

    लाइव सेक्स शो स्टोरी में मैं अपनी मम्मी के साथ उनके दोस्त के घर में रहती हूँ. पापा मम्मी अलग हो चुके हैं. एक रात मेरी नींद खुली कुछ आवाजों से जो मम्मी के कमरे से आ रही थी.

    दोस्तो, मेरा नाम शिक्षा है.
    मैं लखनऊ, उत्तर प्रदेश की रहने वाली हूँ.
    मेरी उम्र 18 साल है.

    मैं 30 साइज़ की ब्रा पहनती हूँ. मेरी कमर का साइज़ 26 है और मेरी कमर के नीचे का साइज़ 32 है.
    मेरा रंग गोरा है और देखने में मैं बहुत प्यारी दिखती हूँ.

    मैं अपनी मम्मा के साथ उनके बेस्ट फ्रेंड के विला में रहती हूँ क्योंकि मेरी मम्मा ने पापा से तलाक ले लिया है.
    अब वे अपने बेस्ट फ्रेंड के साथ रहती हैं.

    मेरी मम्मा की उम्र 37 साल है और उनकी ब्रा का साइज़ 34 है.
    उनकी कमर शायद 29 होगी या मान सकते हैं 30 होगी … और उनकी कमर के नीचे का साइज़ 34 होगा.

    मेरी मम्मा बहुत ही हॉट दिखती हैं, जब वे साड़ी पहनती हैं … तो समझो आग लगा देती हैं!

    उनके बेस्ट फ्रेंड की उम्र 35 साल है. उनका नाम सम्राट है.
    वे बहुत ही स्मार्ट दिखते हैं.

    उनकी हाइट होगी 175 सेमी.
    उनकी बॉडी में सिक्स पैक एब्स हैं.

    वे रोज़ जिम जाते हैं तो उनकी बॉडी एकदम मस्त है.

    आज मैं आपको अपनी ज़िंदगी की पहली सेक्स कहानी सुनाने जा रही हूँ.
    लाइव सेक्स शो स्टोरी अगर अच्छी लगे, तो अपना प्यार ज़रूर देना!

    इतना मेरा वादा है कि कहानी पढ़ने के बाद आप मेरे दीवाने हो जाएंगे क्योंकि ये कहानी बहुत ही रोमांटिक और इरोटिक है.

    जितना हॉट आप इस लाइव सेक्स शो स्टोरी को पढ़कर फील करेंगे, रियल में ये उससे भी ज़्यादा इरोटिक और रोमांटिक थी क्योंकि मैंने इसे खुद फील किया है!

    ये बात है आज से दो महीने पहले की, जब मैं और मेरी मम्मा लखनऊ से अहमदाबाद रहने आ गए थे, मम्मा के बेस्ट फ्रेंड के विला में रहने के लिए.

    हम लोग उनके यहां रहने लगे.
    सम्राट अंकल ने मेरा ट्रांसफर लखनऊ से अहमदाबाद के स्कूल में करा दिया था तो मैं यहां 12वीं में पढ़ती हूँ.

    दिन में मैं स्कूल चली जाती हूँ.

    सम्राट अंकल को बिज़नेस का काम रहता है, तो वे भी बिज़ी रहते हैं और मम्मा विला में अकेली रहती हैं.

    शाम को हम सब साथ होते हैं और डिनर साथ में करते हैं.

    फिर मम्मा अपने बेडरूम में चली जाती हैं और मैं अपने बेडरूम में क्योंकि सम्राट अंकल के यहां दो बेडरूम हैं.
    एक उनका पर्सनल, जिसमें वे और मम्मा सोते हैं.

    एक दूसरा कमरा है, उसमें मैं सोती हूँ.
    हम लोग वीकेंड पर काफ़ी मस्ती करते हैं. घूमने जाते हैं, डिनर पर जाते हैं.

    सब मिलाकर हम सम्राट अंकल के साथ बहुत खुशहाल ज़िंदगी जी रहे हैं.

    सेक्स कहानी में आगे बढ़ने से पहले मैं बता दूँ, ये सेक्स कहानी रियल है और मैं इसका यूनिवर्स बनाना चाहती हूँ.

    अगर इस कहानी को आपका भरपूर सपोर्ट मिला, तो इसके आगे के पार्ट में रियल स्टोरी को और नेक्स्ट लेवल तक ले जाने का ट्राई करूँगी!

    तो हम लोग अंकल के साथ हैप्पी लाइफ जी रहे हैं.

    एक दिन की बात है, जब मेरी थोड़ी सी बेवकूफी की वजह से मैं खुद ही मुसीबत में फंस गई.

    वह करवा चौथ की रात का दिन था.
    मैं अपने बेडरूम में सो रही थी.

    वैसे तो मैं रात को कभी नहीं जागती, पढ़ने की वजह से मुझे नींद आ जाती है और मैं सुबह ही जागती हूँ.

    लेकिन उस रात मुझे प्यास लगी तो मैं जागी और कॉमन हॉल में पानी पीने के लिए गई.

    मुझे लगा जैसे मम्मा के बेडरूम से कुछ आवाज़ आ रही है.

    वह आवाज़ कुछ अजीब-सी थी, जैसे किसी ने मम्मा का गला दबा रखा हो और वो सांस लेने के लिए तड़प रही हों.

    मैं उनके बेडरूम के पास गई, तो देखा कि उनके बेडरूम के दरवाज़े में थोड़ी-सी दरार है और रूम की लाइट भी ऑन है.

    वैसे तो मम्मा के बेडरूम का दरवाज़ा हमेशा लॉक ही रहता है और उन्हें बुलाने के लिए बेल ही बजानी पड़ती है.
    आज उनका दरवाज़ा लॉक नहीं था.
    शायद वे लॉक करना भूल गए होंगी।

    मैंने दरवाज़े की सांस से अन्दर देखने की कोशिश की कि मम्मा के साथ क्या हो रहा है!
    चूंकि वे ऐसे कराह रही थीं, जैसे वे किसी बड़ी मुसीबत में हों.

    मैंने अपनी आंखें दरवाज़े की सांस में लगा दीं और अन्दर का नज़ारा देखने की कोशिश करने लगी.
    जैसे ही मेरी नज़र मम्मा के बेड पर पड़ी, मैं डर गई!

    थोड़ी देर के लिए लगा जैसे मैं न तो हिल पा रही हूँ, न डुल पा रही हूँ!

    अन्दर का नज़ारा देखकर मुझे बहुत तेज़ पसीना आ गया … मेरे रोंगटे खड़े हो गए.

    मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूँ, इसलिए मैं बस टकटकी लगाए देखती रह गई.

    बेड पर मम्मा लेटी थीं, अपने दोनों हाथों से बेड को पकड़े हुए थीं और बहुत तेज़ी से सांसें ले रही थीं.
    उनके जिस्म पर एक भी कपड़ा नहीं था.
    उनके ऊपर एक सफेद चादर डाली हुई थी, जो उनके आधे सीने से लेकर नीचे की बॉडी को ढके हुई थी.

    मैंने जब देखा, तो मम्मा उस बेड पर ऐसे तड़प रही थीं जैसे सेक्स मूवी में कोई एक्ट्रेस तड़पती है!
    चूंकि मेरी मम्मा किसी एक्ट्रेस से कम नहीं लगतीं तो वे बिल्कुल वैसी ही लग रही थीं.

    उस समय तो वे एक्ट्रेस से भी ज़्यादा खूबसूरत दिख रही थीं!

    पूरा बेड सफेद कपड़ों से बहुत ही सुंदर तरीके से सजाया गया था.
    मम्मा को ऐसे तड़पती देख मुझे अन्दर से अजीब-सी फीलिंग आने लगी.

    तभी मेरी नज़र मम्मा के ऊपर डाली गई चादर पर पड़ी, तो मुझे लगा कि चादर के अन्दर कोई है, नीचे की साइड!
    मैंने ध्यान से देखा कि जैसे ही चादर के अन्दर हलचल हुई, मेरी मम्मा बहुत तेज़ी से उछल पड़ीं और तड़पने लगीं.

    मैं सोच में पड़ गई कि चादर के अन्दर कौन हो सकता है, क्योंकि जब हम लोग सोने गए थे, तब अंकल घर पर नहीं थे!
    मैं उस इंसान के चादर से बाहर निकलने का इंतज़ार करने लगी, लेकिन वह इंसान निकलने को तैयार ही नहीं था.

    रूम में AC चल रहा था, लेकिन फिर भी मेरी मम्मा पसीने से तर हो चुकी थीं और तड़पती हुई बोल रही थीं- प्लीज़, बस करो ना आह … आह्ह् … आह्ह मैं मर जाऊंगी प्लीज़ … आह्ह आह्ह आह्ह!
    लेकिन वह इंसान रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था!

    पता नहीं चादर के अन्दर से ऐसा क्या कर रहा था कि मम्मा कंट्रोल खो रही थीं!
    जब मम्मा ने हद से ज़्यादा आवाज़ें निकालनी शुरू कीं, तो आवाज़ पूरे रूम में गूँजने लगी.

    तभी मैंने देखा कि वह चादर धीरे-धीरे मम्मा के जिस्म से नीचे की साइड जा रही है.
    थोड़ी-सी ही देर में मम्मा के बूब्स खुल गए!

    मैं देखकर शॉक्ड हो गई!
    मम्मा के बूब्स एकदम फूले हुए थे, बहुत ही टाइट थे.

    वे एक खूबसूरत अप्सरा लग रही थीं और कह रही थीं- आ आ आ … आह्ह ओह माय गॉड … ओह माय गॉड मैं मर जाऊंगी … प्लीज़!
    उस समय पूरी चादर नीचे चली गई और मैं देखकर हैरान हो गई!

    जो इंसान चादर के अन्दर से निकला, मैं यकीन नहीं कर पा रही थी कि वह और कोई नहीं … सम्राट अंकल ही थे!
    वे पूरी तरह नंगे थे और ऋतिक रोशन से कम नहीं लग रहे थे.

    वे मम्मा के पैरों के पास बैठे थे और मम्मा के दोनों पैर पकड़ कर घुमा दिए.
    मम्मा भी एकदम नंगी थीं!

    जब मम्मा घूमीं, तो मैंने देखा कि मम्मा की दोनों टांगों के बीच लाल-लाल, गुलाबी-गुलाबी सा कुछ दिख रहा था.
    वह उनकी चूत थी.

    फिर अंकल मम्मा के पीछे लेट गए और अपने दोनों हाथों से मम्मा के मम्मों को पीछे से दबाने लगे.
    वे लोग ऐसे लेटे थे कि मम्मा के बूब्स मुझे दिख रहे थे.

    मम्मा की आवाज़ें बढ़ती ही जा रही थीं- आह आह्ह आह … म्म्म्ह ओह्ह!

    उनकी तड़प और तेज़ होती जा रही थी.
    फिर थोड़ी देर में अंकल बैठे और मम्मा को सीधा करके उनकी टांगें उठाने लगे.

    तब मैंने देखा, अंकल का लंड एकदम टाइट और बहुत बड़ा लग रहा था!
    मैं देखकर डर गई!

    उन्होंने मम्मा की चूत में अपना लंड रखा.
    मम्मा पहले से ही बहुत तड़प रही थीं और आवाज़ें निकाल रही थीं इसलिए शायद अंकल और भी ज़्यादा उत्तेजित थे!

    उन्होंने मम्मा की टांगें उठाईं और बीच में जाकर लंड मम्मा की चूत में रखा.

    मम्मा ने अपनी दोनों टांगों से उन्हें जकड़ लिया और बोलीं- आह्ह आह्ह म्म्ह बेबी … फक मी हार्डर हार्डर बेबी! फक मी हार्डर!

    अंकल ने मम्मा के कंधों को पकड़ा और ज़ोर का धक्का दे दिया.
    मेरी मम्मा उछल पड़ीं और तेज़ आवाज़ निकालने लगीं- आआह्ह … आह्ह … ओह नो … आह्ह!

    मम्मा का मुँह बंद ही नहीं हो पा रहा था.
    तभी उन्होंने दोबारा से धक्का मारा. मम्मा का चेहरा पहले से लाल हो रखा था.
    अब और लाल हो गया.

    वे बहुत तेज आवाज़ें निकालने लगीं- आह्ह ओह्ह माय गॉड आह्ह!
    अंकल ने थोड़ा आराम से मम्मा की चूत में अपना लंड अन्दर-बाहर करना शुरू किया.

    जैसे ही अंकल लंड बाहर की साइड लाते, मम्मा को थोड़ा चैन सा मिल जाता, लेकिन जैसे ही वे लौड़े को अन्दर ले जाते, मम्मा मचलने लगती थीं.
    ऐसे ही थोड़ी देर चलता रहा.

    मम्मा के हाव भाव देखकर अंकल बोले- तुम इतनी कामुक आवाज़ निकालती हो तो मेरा हंड्रेड परसेंट निकलवा लेती हो! मुझे और तेज़-तेज़ करने का मन होता है!
    तभी मेरे हाथ से गलती से दरवाज़े पर थोड़ा धक्का लग गया.

    मम्मा तो खोई हुई थीं, उन्हें पता ही नहीं चला.

    लेकिन अंकल ने मुड़कर देखा … तो मैं छुप गई ताकि अंकल मुझे न देख लें.
    लेकिन शायद अंकल को शक हो गया कि कोई दरवाज़े पर है.

    उन्हें तो पता ही था कि ज़्यादा-से-ज़्यादा कौन हो सकता है … शिक्षा यानि मैं!
    वे थोड़ा मुस्कुराए और उन्होंने मम्मा को तेज़-तेज़ धक्के मारना शुरू कर दिया.

    मम्मा की कामुक आवाज़ें पूरे रूम में गूँजने लगीं.
    मम्मा भी खुलकर आवाज़ें निकाल रही थीं- ओह ओह … आह्ह बेबी …आआह्ह .. बी स्लो हनी … आआह्ह म्म्म्ह!

    उन्हें मालूम था कि आवाज़ रूम के बाहर नहीं जाएगी, बस उन्हें यह नहीं पता था कि रूम आज लॉक नहीं है.
    अंकल मम्मा को इतने तेज़-तेज़ धक्के मार रहे थे कि उन दोनों के जिस्मों के मिलने की आवाज़ मेरे पास तक आ रही थी … और मम्मा का तो बुरा हाल था.

    ऐसा लग रहा था कि बस अब उनकी जान निकल जाएगी.
    मम्मा की आंखों से आंसू भी निकलने लगे, लेकिन अंकल रुक नहीं रहे थे!

    मम्मा की आवाज़ें बहुत तेज़ होती जा रही थीं.
    उन्होंने ने अपने हाथों से अंकल की पीठ को पकड़ रखा था.

    करीब 20-25 मिनट बाद मम्मा और अंकल दोनों तेज़-तेज़ झटके मारने लगे.

    फिर 8-10 झटकों के बाद अंकल धीरे-धीरे झटके मारने लगे और उनकी पूरी उत्तेजना खत्म हो गई.

    दोनों एक-दूसरे से चिपक कर लेट गए.
    तभी मेरी नज़र अंकल की पीठ पर पड़ी, जहां से खू.न निकल रहा था.
    मुझे समझ आ गया था कि मेरी मम्मा के नाखून उनकी पीठ में लग गए थे.

    फिर मेरी भी बुरी हालत थी तो मैं झट से अपने बेडरूम में जाकर लेट गई और सो गई.
    सुबह जागी तो पता चला कि मम्मा को बुखार है.

    मम्मा सारा दिन अपने बेडरूम में ही आराम करती रहीं.
    उस दिन जब रात को अंकल घर आए, तो हम सब बैठे थे.

    उन्होंने मुझसे पूछा- मम्मा कैसी हैं?
    तो मैंने बताया कि उन्हें बुखार है.

    तो वे हंसने लगे और मेरी तरफ देखने लगे.
    उस वक्त उन्हें देखकर मुझे बहुत अजीब सा फील हो रहा था.

    अंकल धीरे से बोले- तुमको मजा आया न!
    मैं भौंचक्की थी.

    तभी अंकल ने मेरे गाल पर हाथ फेर कर कहा- यू आर सो स्वीट बेबी!

    अब आगे की सेक्स कहानी आपके कमेंट्स मिलने के बाद बताऊंगी.

  • मौसेरी बहन की चूत में मेरा

    Xxx कजिन सेक्स कहानी में मैंने अपनी मौसी की जवान बेटी की चूत का मजा लिया. मैं उनके घर गया हुआ था तो मैंने अपनी कजिन को उसके बॉयफ्रेंड से चुदती देखा.

    सबको मेरा नमस्कार, यह मेरी पहली सेक्स कहानी है.
    आशा करता हूँ कि ये Xxx कजिन सेक्स कहानी सबको पसंद आएगी कि कैसे मैंने अपनी मौसी की बेटी को अपने लंड की रानी बनाया.

    मेरा नाम रोहित है. मैं जम्मू का रहने वाला हूँ. मेरा कद 5 फुट 10 इंच है. उम्र 26 साल, रंग सांवला.

    मेरे लंड की लंबाई इतनी है कि जिसके भी ऊपर एक बार चोदने के लिए चढ़ जाता हूँ तो संतुष्ट किए बिना रुकता नहीं हूँ.

    मेरी मौसी की बेटी के बारे में बताऊं तो उसका नाम सिमरन (बदला हुआ) नाम है.
    उसकी हाइट 5 फुट 6 इंच है. उसके बूब्स का आकार 34 डी का है. रंग एकदम दूध सा सफेद … जो भी उसे एक बार देखता, तो बस देखता ही रह जाता.

    जब यह सब हुआ था, वो उस वक्त टीचर की जॉब कर रही थी; साथ ही वो अपने घर पर ट्यूशन भी पढ़ाती थी.

    हुआ ऐसा कि मैं उस समय मौसी के रहता था.
    शाम को खाली टाईम मिलता तो हम दोनों घूमने निकल जाते थे.

    मेरे मन में उसके लिए कभी कोई बुरा ख्याल नहीं आया था.
    सब बहुत अच्छा चल रहा था.

    एक दिन ऐसा हुआ कि उसके बर्थडे के दिन उसका ब्वॉयफ्रेंड रात को चोरी छिपे घर पर मिलने आया.
    उसके आने का मुझे पता लग गया और मैं चोरी से सब देखता रहा.

    उस रात मैं पानी पीने उठा था और किचन में गया था.
    तभी मुझे सिमरन की कुछ आवाज आई.

    मैं आगे बढ़ा और सिमरन के कमरे में देखने लगा.
    वो अन्दर किसी लड़के के साथ एकदम नंगी थी.
    मैं उसे देख कर हैरान रह गया.

    वो लड़का सिमरन का ब्वॉयफ्रेंड था जो उसे उसकी बर्थडे पर चोदने आया था.

    उसने सिमरन को कुछ देर धकापेल चोदा और अपना माल उसके पेट पर छोड़ कर अलग हो गया.
    हालांकि सिमरन के चेहरे पर कुछ गुस्सा सा था; शायद उसका ब्वॉयफ्रेंड उसे सन्तुष्ट किए बिना झड़ गया था.

    सिमरन का सेक्सी बदन देख कर मेरा लंड में आग लग गई और ऐसा लगा कि मैं अभी अन्दर जाकर उसे चोद दूँ.

    फिर मैं अपने कमरे में आ गया और मुठ मारकर सो गया.

    मैंने जब से ये सब देखा, तब से सिमरन को लेकर मेरा ख्याल बदल गया.
    अब मैंने उसको टच करना शुरू कर दिया.

    कमाल की बात ये कि उसने सब कुछ समझ लिया कि मेरा टच करने का मतलब क्या है और उसने कोई विरोध भी नहीं किया.

    मैं सोचने लगा कि सिमरन तो एकदम चालू माल निकली जबकि मैं इसे बड़ी मासूम लड़की समझ रहा था.
    फिर वो घड़ी आई, जब हमने एक दूसरे को पहली बारी किस किया.

    उस दिन वो ट्यूशन पढ़ा रही थी तो मैं उसके कमरे में जाकर बैठ गया.
    हमारी बातें होने लगीं.

    कुछ टाइम बाद ट्यूशन ऑफ हुई, तो हम दोनों बिस्तर पर लेट गए और हम दोनों में बातें होने लगी.

    उसने कहा- मुझे शाम को परेड जाना है … साथ चलेगा?
    मैंने भी कहा- हां, मुझे भी तेरे साथ चलना है.

    वो बोली- शाम को घूमना है तो क्यों ना अभी आराम कर लेते हैं!
    मैंने ओके कहा.

    हम दोनों ने कुछ टाइम आराम करने का सोचा.
    वो सोने लगी.
    उसकी आंखें एकदम बंद हो गई थीं.

    मैं उसके चूचियों को ही देख रहा था और अन्दर ही अन्दर मेरे लौड़े की आग भड़क रही थी.

    मैंने बहुत हिम्मत की और सोने का नाटक करते करते उसको टच करने लगा.
    उसने जरा सा भी ऐतराज नहीं किया.

    यह सब कुछ टाइम यूं ही चलता रहा.

    मैंने उसके गाल पर अपने होंठ रख दिए.

    तभी अचानक से सिमरन उठ गई.
    तो मैं डर गया कि आज गया काम से.

    सिमरन ने उठ कर रूम का दरवाजा बंद कर दिया और मेरी साइड अपनी गांड करके सोने का नाटक करने लगी.
    मैंने उसको पीछे से हग किया, वो कुछ नहीं बोली और सोने का नाटक करती रही.

    मैंने पीछे से अपना लंड उसकी गांड पर रगड़ा, तो उसकी बॉडी में गर्मी बढ़ने लगी जिसे वो रोक नहीं पाई.
    वो एकदम से पलट कर मेरी तरफ घूमी और उसने मुझे बहुत टाइट हग कर लिया.

    मैं कुछ समझ पाता कि वो पागलों के जैसे मुझे किस करने लगी.
    मैं भी लग गया.

    हम दोनों के बीच यह चूमाचाटी का सिलसिला कोई 15 मिनट तक चला.
    उसके बाद किसी ने दरवाजा खटखटा दिया, तो हम दोनों डर गए.

    उसने मुझसे कहा- तुम सोने का नाटक करो, मैं देखती हूँ.
    उसने दरवाजा खोला, तो मौसी थीं.

    वो बोलीं- अब उठो बेटा, कितना सोना है?
    सिमरन ने बोला- बस हो गया … मुझे जाना भी है. आप इसको उठा दो मम्मी, इसे भी मेरे साथ जाना है. जब तक मैं तैयार हो जाती हूँ.

    मौसी ने मुझे उठाया.
    फिर हम दोनों तैयार होकर शहर चले गए.

    सिमरन और मैं एक दूसरे के साथ एकदम शांत होकर चल रहे थे.
    मैंने कहा- सब अचानक हो गया … उसके लिए सॉरी!

    सिमरन बोली- जो होना था, वो हो गया. इसमें हम दोनों गलत थे.
    मैंने बोला- इसमें गलत क्या था?

    वो बोली- नहीं यार, हम ऐसा नहीं कर सकते!
    मैंने बोला- जब तुम अपने ब्वॉयफ्रेंड के साथ कर रही होती हो, तब कुछ गलत नहीं लगता? मैंने देखा था कि उसने तुझे आधे रास्ते में छोड़ दिया था.

    वो ये सुनकर सोच में पड़ गई.

    मैंने कहा- मुझसे तुम निराश नहीं होगी.
    उसने मेरी तरफ देखा और मुस्कुरा दी.

    शाम को जब वापिस आए तो हम दोनों थक गए थे इसलिए जल्द सो गए.

    रात के 2 बजे मैंने सिमरन को मेसेज किया.

    वो ही जाग रही थी. उसका तुरंत उत्तर आया कि तू सोया नहीं?
    मैंने कहा- तू कौन सा सो गई है. तू भी तो जाग रही है!

    ऐसे ही हमारी बात शुरू हुई.

    तो मैंने उससे कहा- मेरे रूम में आ जा!
    उसने मना कर दिया कि अभी नहीं.

    मैंने भी उसको ज्यादा फोर्स नहीं किया.

    अगले दिन गुरुपर्व था, मौसी और घर के बाकी के सदस्य गुरुद्वारा चले गए.
    मैं देर से सोया था तो सुबह देर से उठ पाया और अपने काम से जा ही नहीं पाया.

    सिमरन भी कहीं चली गई थी.

    मैं घर से बाहर निकल गया और इधर उधर टहलता रहा; एक पार्क में बैठ कर सिमरन के बारे में ही सोचता रहा.

    फिर जब घर वापस आया तो घर पर देखा कि सिमरन आ चुकी थी.

    उस वक्त घर में सिर्फ मैं और सिमरन थे.
    मैं उसके पास गया और उससे बातें होने लगीं.

    मैंने टीवी चलाया और उस पर एक मूवी लगा दी.
    उसमें सेक्सी सीन आने पर सिमरन उठ कर जाने लगी.

    मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और उसको खींचा, तो वो मेरी गोद में गिर गई और हम दोनों चिपक गए.
    मैं उसके होंठों पर होंठ रख कर चूमने लगा.

    पहले उसने बहुत नखरे किए पर मैंने उसको किस करना शुरू कर दिया.
    वो गर्म हो गई और मेरा साथ देने लगी.

    कोई 15 मिनट तक सब चला.
    फिर वो बोली- मैं गेट बंद करके आती हूँ.
    मैंने उसे जाने दिया.

    उसके वापस आते ही हम दोनों फिर से शुरू हो गए.
    मैंने टाइम खराब न करते हुए उसको नंगी कर दिया और उसने भी मेरे कपड़े खोलना शुरू कर दिया.

    जल्द ही हम दोनों ने एक दूसरे के सारे कपड़े उतार दिए.
    मैंने उसके मम्मों को मसलना शुरू कर दिया.
    उसकी सिसकारियां निकलने लगीं.

    कुछ देर बाद मैंने उसको बेड पर लिटा दिया और उसके जिस्म के साथ खेलने लगा.
    वो भी मेरे साथ मस्ती कर रही थी.

    उसके दूध बड़े मस्त थे.
    मैं उसके मम्मों के साथ मस्ती कर रहा था और उसके निप्पल अपने मुँह में लेकर खींच खींच कर चूस रहा था, जिससे उसकी चूत में सनसनी होने लगी थी.

    वो ‘इस्स आंह धीरे कर न …’ कहती हुई मुझसे मजे लेने लगी थी.
    मम्मों से खेलते खेलते मैंने उसकी फुद्दी में उंगली घुसा दी.
    वो तड़फ उठी.

    मैंने समय खराब न करते हुए उसकी फुद्दी को चाटना शुरू कर दिया और कुछ ही देर में हम दोनों 69 की पोजीशन में आ गए.

    एक दूसरे के गुप्तांग चाटते चूसते हुए 20 मिनट हो गए.
    यह सब मस्त चला.
    फिर वो झड़ गई और उसके बाद मैं भी झड़ गया.

    अब बारी उसको चोदने की थी.
    वो मेरे लंड के साथ खेलने लगी और जल्दी ही मैं फिर से उसको चोदने को तैयार हो गया.

    मैंने उसकी गांड के नीचे एक तकिया रखा और उसकी टांगें खोल कर उसकी फुद्दी पर लंड रगड़ने लगा.
    वो तड़फने लगी और बोलने लगी- आह … अब पेल भी दे बहनचोद साले … फाड़ दे मेरी फुद्दी!

    वो खुल कर गालियां निकालने लगी.
    उसकी मादक सिसकारियां मुझे पागल कर रही थीं.

    मैंने जैसे ही अपना लंड फुद्दी में डाला, उसको रोना आ गया.
    वो दर्द से तड़फने लगी और बोली- आह धीमे कर … मैं कहीं भागी थोड़ी जा रही हूँ.

    मैंने उसको किस की और अपने काम पर लग गया.

    धीरे धीरे मेरा पूरा लंड उसकी फुद्दी में घुस गया और हम दोनों चुदाई का मजा लेने लगे.

    कोई 10 मिनट बाद मैंने उसको घोड़ी बनाया और हमारी धकापेल चुदाई चलने लगी.

    सिमरन के मुँह से लगातार गालियां निकल रही थीं- आह चोद दे साले भड़वे … आह पेल मादरचोद आह पूरा लंड पेल कमीने!
    उसकी गालियां मुझे और भी पागल बना रही थीं.

    करीब 20 मिनट बाद मैं झड़ने को हुआ.
    मैंने उससे पूछा, तो सिमरन बोली- मुझे तेरा माल अन्दर लेना है.
    मैंने भी बिंदास अपनी ट्रेन सरपट दौड़ा दी.

    उसके बाद हम दोनों वाशरूम गए.
    मैंने उसको नहलाया और उसने मुझे!

    उसके बाद मौसी का कॉल आया कि हम सब रात को 10 बजे तक आ पाएंगे.

    जब मौसी ने यह कहा तो सिमरन बहुत खुश हो गई क्योंकि उस वक्त शाम के 5 बज रहे थे.

    सिमरन बोली- जा और बाहर से कुछ खाने का ले आ!
    मैंने उसको किस किया और चला गया.

    मैं जैसे ही वापिस आया तो देखा कि सिमरन वनपीस पहनी हुई थी.
    वो बोली- चलो, पहले जल्दी से खाना खाओ .. फिर दोबारा शुरू करते हैं.

    हम दोनों ने दो दो पैग लगाए और खाने के बाद 2 राउंड और लगाए.
    जिसमें मैंने उसकी फुद्दी पर डेरी मिल्क सिल्क चॉकलेट लगाकर उसको खूब चूसा भी और चोदा भी.

    यह Xxx कजिन सेक्स का सिलसिला अब हर दूसरे दिन चलने लगा था.
    अभी दो साल पहले उसकी शादी हो गई और जीजू उसको अपने साथ न्यूजीलैंड लेकर चले गए.

    उसके जाने के बाद लॉकडाउन लग गया, जिसकी वजह से वो अभी तक वापिस नहीं आई है.
    इस साल उसका वापसी आना तय हो गया है.
    शायद हम दोनों मिल पाएं क्योंकि मैं भी फिलहाल देश से बाहर जाने वाला हूँ.

    ये सब हमारे वीजा पर निर्भर है कि हमारा मिलन हो पाता है या नहीं.

    हालांकि सिमरन के जाने के बाद मैंने बहुत सी लड़कियों को चोदा था, पर उसके जैसा मजा कहीं नहीं आया.

    मैंने अपने चाचा की बेटी, जिसके 2 बच्चे हैं, उसको भी चोदा था.
    वो सेक्स कहानी भी आपको सुनाऊंगा.

  • पड़ोसी आंटी को चोदा बीयर पिलाकर

    देसी आंटी सेक्स कहानी तब की है जब मैं गुड़गांव में रहता था, एक प्राइवेट कम्पनी में काम करता था.

    मैं जिस बिल्डिंग में रहता था, पास में एक अंकल और आंटी भी किराए पर रहने आये.

    एक दिन मेरी नज़र आंटी पर गयी. मस्त भरे मम्मे. उभरी गांड देखकर बुड्ढा भी लंड खड़ा कर ले.
    मेरा भी लंड खड़ा होने लगा.

    मैं अपने रूम में आ गया लेकिन उसका बदन मेरे सामने था जैसे!
    मेरा लौड़ा खड़ा हो गया और मैंने धीरे धीरे सहलाना शुरू कर दिया.

    उसे याद करके लंड हिलाने लगा और झटके मारने लगा थोड़ी देर में मेरा पानी निकल गया.
    अब मैं सोचने लगा कैसे इसको चोदा जाए.

    फिर मैंने धीरे धीरे उनसे नजदीकियां बढ़ाना शुरू कर दिया और हमारी दोस्ती हो गयी.

    एक दिन मैं कम्पनी ऑफिस से रूम पर आया.
    तभी अंजुमन आंटी ने आवाज़ दी.
    मैं रूक गया.

    वो बोली- राज, रात का खाना मेरे रूम में खा लेना आज. मैंने अंडे बनाए हैं.
    मैं बोला- हां आंटी, ठीक है.
    और मैं अपने रूम में आ गया।

    मैं बहुत खुश था कि देसी आंटी सेक्स का मौक़ा मिल सकता है.

    मैंने तुरंत एक प्लान बनाया.
    मैं बाजार गया, 4 बोतल बीयर, कंडोम और सैक्स की गोलियां लाया.

    मैंने लोवर के अंदर अंडरवियर नहीं पहना और पूरी तैयारी से नीचे आ गया.

    नीचे आया तो देखा अंजुमन आंटी भी दुल्हन के जैसे तैयार थी.
    मैंने पूछा- आंटी, कहीं शादी में जा रही हो क्या?
    और मैं मन ही मन दुखी हो गया कि आज का प्लान बेकार हो गया।

    वो बोली- नहीं, आज मेरा जन्मदिन है. लेकिन तेरे अंकल काम से नोएडा गये हैं.
    और रोने लगी.

    मैंने मौका देखकर उसको पकड़ा और बोला- आंटी, आप रोना बंद करो. मैं मनाऊंगा आपका जन्मदिन!
    और मैं जल्दी से केक ले आया.

    आंटी ने केक काटा, मुझे खिलाया और मैंने उनको!
    उन्होंने एकदम से मुझे अपने सीने से लगा लिया और बोली- थैंक्स राज!
    मैंने कहा- पार्टी तो बाकी है.
    और मैंने बैग से बीयर निकाली.

    पहले आंटी मना करने लगी लेकिन मेरे बोलने से मान गयी.
    हमने 2 बोतल खाली कर दी.

    अब आंटी को नशा होने लगा. मैंने धीरे से गोली निकाली और पैग मैं डाल दी और वो गटागट पी गयी.
    थोड़ी देर में गोली ने अपना काम शुरू कर दिया.

    फिर एक गोली मैंने खा‌ ली तीसरी बोतल भी खाली कर दी.

    अब आंटी के बदन में आग जलने लगी, आंटी बोली- राज, मेरा गिफ्ट कहां है?
    मैं चुप हो गया क्योंकि जल्दी जल्दी में गिफ्ट लाना भूल गया था.

    मैं चुप था तो वो बोली- क्या हुआ?
    तो मैं बोला- गिफ्ट कल मिल जाएगा. क्या चाहिए बोलो?
    वो बोली- आज जन्मदिन है तो गिफ्ट भी आज लूंगी.

    मैंने एकदम से उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और चूसने लगा.
    थोड़ी देर बाद वे दोनों अलग हो गये.

    वो बोली- ये नहीं … मुझे मेरा गिफ्ट चाहिए.
    और एकदम से लोवर के उपर से ही लंड को पकड़ कर बोली- दो मेरा गिफ्ट!

    मैं चौंक गया और कुछ ना बोला.
    उसने मेरे लोवर के अंदर हाथ डाल दिया.

    जैसे ही उसने मेरे लौड़े को अपने हाथ में लिया, मेरे शरीर में करंट दौड़ने लगा और मैंने उसके बूब्स दबाने शुरू कर दिए; उसकी साड़ी अलग कर दी और उसको लेकर बिस्तर में आ गया.

    अब आंटी के बूब्स बाहर आने को बैचेन थे. मैंने उसका ब्लाउज और ब्रा अलग किये तो उसके पके आम मेरे हाथ में आ गये और मैं चूसने लगा.
    वो भी धीरे धीरे मेरे लौड़े को सहलाने लगी.
    उसने मेरी लोवर उतार दी और मेरे लौड़े से खेलने लगी.

    मैं उठा और उसकी छाती पर बैठ गया और लन्ड को उसके होंठों पर रगड़ने लगा.
    उसने लन्ड को तुरंत मुंह में लिया और लोलीपॉप के जैसे चूसने लगी जैसे बहुत दिनों से प्यासी हो.

    और मैं झटके मारके उसका मुंह चोदने लगा. वो लंड को लोलीपॉप के जैसे मस्त हो कर चूस रही थी.

    अब दोनों बहुत गर्म हो चुके थे.
    मेरे शरीर में अकड़न हुई और लंड का पानी निकल गया. उसने गटागट करके पी लिया.
    मैं थोड़ी देर लंड मुंह में डाले लेटा रहा.

    उसके बाद मैं उठा और उसका पेटीकोट उतारा तो उसने भी पैंटी नहीं पहनी थी.
    आंटी की चूत बिल्कुल चिकनी थी जैसे उसने आज ही बाल साफ़ किए हों.

    मैंने बिना देर किए अपने होंठ उसकी मखमली गुलाबी चूत में रख दिए और धीरे धीरे चाटने लगा.
    वो सिसकारियां भरने लगी.

    मैंने जैसे ही जीभ घुसाई, वो चिल्लाने लगी.

    अब मैंने जल्दी जल्दी जीभ चलाना शुरू कर दिया.
    वो मचलने लगी, बोली- राज, मेरी चूत को खा जा! ये तेरे लिए कब से तड़प रही थी.
    मैं चौंक गया.

    अब मेरा जोश दुगुना हो गया और जोर जोर से आंटी की चूत चाटने लगा.
    वो उईई आआहह सीईई की आवाज निकालने लगी.

    थोड़ी देर बाद अंजुमन आंटी की चूत से नमकीन पानी निकलने लगा और मैं पी गया.

    फिर मैं उठा और कंडोम निकाला.
    आंटी ने मेरा हाथ पकड़ लिया और बोली- राज, आज मेरा जन्मदिन है आज मेरी चलेगी.

    उन्होंने कंडोम वापस रखवा दिया.
    वो बोली- पूरे 7 माह हो गये मेरी चूत में लन्ड नहीं गया. मैं कबसे तड़प रही थी लेकिन मौका नहीं मिला. उस दिन जब तुम अपने कमरे में मेरा नाम लेकर मुठ मार रहे थे तो मेरा मन किया था कि मैं आ जाती. पर डरती थी. आज मौका मिला है.
    इतना बोलकर आंटी लंड चूसने लगी.

    अब मेरे लौड़े में करंट दौड़ने लगा.
    मैं उससे बोला- कंडोम तो लगाने दो.
    वो बोली- नहीं.
    मैं भी क्या करता!

    मैंने कहा- रूको, और लंड में केक लगा लिया.
    आंटी उसे मुंह में लेकर चूसने लगी और पूरे लंड को गीला कर दिया.

    आंटी को लिटाकर मैंने उनके चूतड़ों के नीचे तकिया लगाया और चूत में लन्ड रगड़ने लगा.
    वो सिसकारियां भरने लगी और बोली- राज, आज की रात को यादगार बना दो. अब तड़पाओ नहीं … अपना लौड़ा मेरी चूत में घुसा दो.

    मैं बोला- आंटीजी, आपने मुझे बहुत तड़पाया है.
    तो वो बोली- आंटी नहीं अंजुमन बोलो राज!

    मैंने एकदम से झटके से लंड उसकी मखमली चूत में घुसा दिया और अंजुमन की चीख और आंसू निकलने लगे.

    अब मैंने लंड को बाहर किया और एक झटके से पूरा घुसा दिया.
    उसकी चीख निकल पड़ी.

    मैंने धीरे से उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और शांत हो गया.
    थोड़ी देर बाद जब अंजुमन के शरीर में हरक़त होने लगी तो मैंने लंड को चलाना शुरू कर दिया.

    अंजुमन 7 माह से चुदी नहीं थी तो उसकी चूत एकदम टाइट थी.
    मेरे लौड़े के हर झटके से उसकी सिसकारी तेज़ होने लगी.

    अब मैं तेज़ तेज़ झटके मारने लगा.
    अंजुमन बोली- चोदो राजा, मेरी प्यासी चूत की आज प्यास मिटा दो.

    मेरे लौड़े को और जोश आ गया.
    पूरे कमरे में पच्च पच्च फच्च फच्च उईई आआहह उईई सीईई की आवाज तेज होने लगी.

    अंजुमन की चीख के साथ पानी निकल गया. मेरा लौड़ा गर्म पानी से और टाइट हो गया.

    अब मैंने उसे अपने लौड़े पर बैठने को कहा.
    उसने लंड को अपने मुंह में लेकर थूक से गीला कर दिया और वो मेरे लौड़े पर आ गई.

    जैसे ही उसने चूत को लंड पर रखा, लंड सट्ट से अंदर घुस गया और अंजुमन की चीख निकल पड़ी.
    मैंने बिना रूके झटके मारने शुरू कर दिया.
    वो बोली- राज फ़ाड़ दे मेरी चूत!
    और लंड पर उछलने लगी.

    मैंने अपनी रफ़्तार बढ़ा दी और फच्च फच्च उईई आआहह उईई आआहह उईई आआहह की आवाज तेज हो गई.
    मेरे दोनों हाथ उसके बूब्स पर थे और वो लंड के घोड़े पर सवार होकर जन्नत पहुंच गई थी.
    आंटी की चूत ने पानी छोड़ दिया और मेरा लौड़ा गर्म पानी से भीग गया; फच्च फच्च फच्च फच्च की आवाज होने लगी.

    गोली के असर से मेरे लौड़े ने पानी नहीं छोड़ा.

    मैंने अंजुमन को बेड के नीचे किया और खड़ा हो गया.
    वो लंड मुंह में लेकर चूसने लगी और लन्ड को तैयार करके घोड़ी बन गई.

    मैंने उसकी मखमली चूत में थूक लगाया और लंड डालकर चोदने लगा.

    आंटी बोली- राज, यह मेरी लाइफ का सबसे अच्छा गिफ्ट है.
    मैं खुश हो गया और लन्ड को तुरंत चौथे गियर में डाल दिया और फुल स्पीड से उसकी चुदाई करने लगा.

    थोड़ी देर बाद मैंने अंजुमन को बेड पर लिटा दिया और उसकी टांगों को अपने कंधे पर रख दिया. फिर मैंने चूत में लन्ड घुसा दिया और धीरे धीरे झटके मारने लगा.

    अब दोनों थकने लगे थे, उसने नीचे से गांड चलाना शुरू कर दी. दोनों की सिसकारियों से कमरा गूंजने लगा और सांसें तेज होने लगी.

    मैंने कई औरतों, लड़कियों को चोदा लेकिन जो मजा आज अंजुमन ने दिया, ऐसा कभी नहीं मिला।

    अब अंजुमन के पैर नीचे कर दिए और मैं ऊपर आ गया.
    आज मेरा लौड़ा झड़ने का नाम नहीं ले रहा था.

    अंजुमन ने फिर से पानी छोड़ दिया मैंने भी झटकों की रफ्तार बढ़ा दी मैं तो जैसे स्वर्ग में था।

    अब धीरे धीरे मेरे शरीर में अकड़न होने लगी.
    मैं बोला- अंजुमन, मेरा निकलने वाला है.
    तो वो खुश हो गई और उसने अपनी गांड चलाना शुरू कर दी.

    आंटी बोली- राज अंदर पानी छोड़ना!
    और उसने मुझे कसकर अपनी बांहों में भर लिया और हम दोनों जोर जोर से झटके मारने लगे.

    एकदम से मेरी आंखें बंद होने लगी और लंड से निकलकर आग अंजुमन की चूत में भर गई.
    फिर हम दोनों वैसे ही पड़े रहे, दोनों को बहुत खुशी थी क्योंकि दोनों को आज जन्नत का मज़ा मिला।

    हम दोनों एक साथ बाथरूम गये और मैं उसको गोद में लेकर वापस आया।

    उस रात हमने 4 बार चुदाई की.

    फिर जब भी हमें मौका मिलता हम दोनों एक हो जाते।
    मैंने आंटी की गान्ड भी मारी. वो अगली कहानी में!

  • पति के गधेछाप लंड से चुत गांड चुदाई

    मैं एक इंटीरियर डिज़ाइनर हूँ और मेरा फिगर बहुत ही सेक्सी व स्लिम ट्रिम फिगर है.

    मेरी उम्र 25 साल है. मैं दूध की तरह गोरी हूँ, पूरे बदन के कटाव एकदम सेक्सी हैं. पेट पूरा सपाट है, तोंद तो है ही नहीं. मेरे बूब्स और चूतड़ तने हुए बड़े बड़े हैं.
    मेरा एक छोटा बच्चा भी है, जो अभी 4 महीने का ही है.

    ऐसे तो मेरे पति मुझे रोज चोदते हैं और ऐसे वैसे नहीं, एकदम किसी जंगली जानवर की तरह चोदते हैं.

    लेकिन आज रात तो अलग ही किस्म के जानवर या कहूँ कि सांड बन गए थे वो!
    उनकी चुदाई से कमरे में आधे से ज्यादा चीजें टूट चुकी थीं.

    हुआ यूं कि उस दिन मेरे पति ऑफिस में थे और मैं घर पर रह कर अपना काम कर रही थी.
    आजकल मेरा वर्क फ्रॉम होम चल रहा था.

    उसी समय मेरे पति का मुझे कॉल आया और हम दोनों बात करने लगे.
    हमारे बीच मजाक मस्ती की बातें होने लगीं.

    वो बोले- आज रात मैं अलग ही जोश में हूँ. आज पूरी रात इतनी ज़ोर से चुदाई करूँगा कि पूरा घर हिलने लगेगा.
    मैं भी जोश में बोली- ठीक है मेरे पति देव … पहले घर तो आ जाओ. क्या फोन से ही चोदोगे?

    वो बोले- काश, मेरा लंड इतना लम्बा होता कि फोन से घुस कर ही तुम्हारी चुत में घुस जाता तो मैं जरूर तुम्हारी चुदाई फ़ोन से ही कर देता.
    मैं हंस पड़ी.

    हम दोनों की बातें खत्म हुईं और मैंने घड़ी में देखा तो रात के दस बज चुके थे.
    मैंने काम करते करते टेबल पर खाना लगा दिया था.

    कुछ देर बाद मेरे पति घर आ गए.

    वो मुझे किस करना चाहते थे लेकिन मैंने उनको करने नहीं दी क्योंकि मैं एक नए छात्र को फोन पर कुछ टिप्स दे रही थी.

    उस नए छात्र से बात करते हुए मैंने उससे कहा- तुम्हारा पेन्सिल बॉक्स गलती से मेरे पास आ गया. मैं कल तुमको ऑफिस में दे दूंगी.
    उसने ओके कह दिया.

    अब तक मेरे पति फ्रेश होने चले गए थे, वो कुछ देर के बाद आ गए.

    वो खाना खाने बैठ गए और मैं भी कॉल खत्म करके खाना खाने बैठ गयी.

    खाना खाने बाद मेरे पति ने मुझे पीछे से पकड़ लिया और मुझे किस करने लगे.
    मुझे अभी भी उस छात्र को एक फाइल भेजना बाकी रह गया था.

    मैंने उनसे कहा- प्लीज, अभी कुछ देर रुक जाओ क्योंकि मुझे एक आखिरी फाइल भेज देने दो.
    मगर वो माने ही नहीं और मेरे मम्मों व गांड को दबाने लगे.

    मैं भी सनसनी में आने लगी.
    उन्होंने एक हाथ से अपने पजामा को खोल दिया और जल्द ही टी-शर्ट खोल कर सिर्फ अंडरवियर में रह गए.

    मैंने हंस कर कहा- ये भी क्यों रह गया, इसे भी हटा दो.
    इस पर उन्होंने अपना अंडरवियर भी खोल दिया.

    हमारा नन्हा सा बेटा बेडरूम में सो रहा था.

    उन्होंने मुझे गोद में उठाया और टेबल पर ही लेटा दिया.
    टेबल पर बहुत सारा खाने का सामान रखा था. साथ ही मेरे काम की चीजें भी थीं. कुछ पेपर्स, लैपटॉप और उसी छात्र का पेन्सिल बॉक्स आदि भी रखा था.

    मेरे पति ने मुझे टेबल पर उन सबके ऊपर ही लेटा दिया और मेरे कपड़े फाड़ दिए.
    वो मिशनरी पोजीशन में मेरे ऊपर आ गए और अपने बदन से मेरे बदन को ज़ोर से दबाए हुए थे.

    मेरे पति बहुत भारी हैं क्योंकि उनका पेट काफी बड़ा है.
    मैं पेपर्स और पेन्सिल बॉक्स के ऊपर लेटी हुई थी.

    पेन्सिल बॉक्स ठीक मेरी गांड के नीचे था और मेरे पति मेरे ऊपर पूरे जोश में मेरे बदन को काट रहे थे.
    फिर उन्होंने अपना काला लंड मेरी चुत में ज़ोर से घुसा दिया.

    मैं चिल्ला उठी.
    मैंने उन्हें धीरे चोदने के लिए कहा लेकिन वो माने ही नहीं.

    उन्होंने फुल स्पीड से चुदाई शुरू कर दी.
    मैं चिल्ला चिल्ला कर कामुक सिसकारियां ले रही थी- ऊऊओ … ऊऊ … जान आई मर गई … थोड़ा आराम से.
    लेकिन वो मान ही नहीं रहे थे.

    उन्होंने मेरी सिसकारियां सुनकर और ज्यादा वजन डाल दिया और मुझे और स्पीड से चोदने लगे.
    पूरी टेबल धप धाप धाप की आवाज कर रही थी और हम दोनों के वजन से ज़ोर ज़ोर से हिल रही थी.

    मेरी गांड के नीचे जो पेन्सिल बॉक्स था वो चुदाई से पूरा टूट गया था और पेपर फट गए थे.
    पेन्सिल बॉक्स के पीस मुझे मेरी गांड में चुभ रहे थे. लेकिन मेरे पति पूरे जोश में वाइल्ड सेक्स के नशे में थे और कूद कूद कर कर मुझे चोद रहे थे.

    जब वो मेरे ऊपर कूद कूद कर चुदाई कर रहे थे तो पूरी टेबल आगे पीछे होती हुई इतनी ज़ोर से हिलने लगी थी मानो अभी ही टूट जाएगी.
    खाने का सारा सामान नीचे जमीन पर गिरता जा रहा था और देखते ही टेबल टूट भी गई.

    हम लोग के चुदाई करते हुए ही खाने के ऊपर गिर गए.
    प्लास्टिक की चम्मचें आदि इधर उधर छिटक गईं.

    फिर भी उन्होंने मुझे चोदना नहीं रोका. वो मुझे किसी जंगली जानवर की तरह चोदे जा रहे थे.
    मैं चिल्ला रही थी- आह अय मांआ … मर गयी … अह रुको तो यार … आह सीइ सीई.

    वो नॉनस्टॉप चुदाई करने में लगे रहे.
    सब बचा हुआ खाना आदि मेरे जिस्म के नीचे पिसा जा रहा था.

    मगर मेरे पति कूद कूद कर जंगली जानवर की तरह मेरी चुदाई कर रहे थे.
    जब उनका माल निकल गया, तब वो रुके … और मुझे राहत मिली.
    वो मेरे ऊपर लेटे रहे.

    मुझे चूमते हुए बोले- मजा आया?
    मैंने कहा- मजा तो तुम्हें आया होगा. मेरी तो गांड छिल गई.

    वो बोले- क्यों?
    मैंने कहा- टेबल पर बहुत सारा सामान था, वो सब मेरी गांड में रगड़ कर पिस गया.

    वो हंसने लगे.
    मैं अपनी गांड सहलाने लगी.

    मुझे भी अपने पति के मोटे लंड से चुदकर मजा आया था मगर आपको तो मालूम ही है कि औरतों की आदत होती है, वो कभी संतुष्ट नहीं होतीं.

    फिर जब हम लोग उठे तो मैंने नीचे देखा.
    पूरा सत्यानाश हो चुका था. टेबल और खाने का सब सामान टूट गया था.

    मैं फ्रेश होने गयी.
    मेरे फ्रेश होने के बाद मेरे पति भी फ्रेश होकर आए.

    हम दोनों कमरे में आ गए और बेड पर लेट कर सोने लगे.

    मैंने देखा कि बगल में हमारा बेटा चैन की नींद सो रहा था.

    एक घंटा बाद मेरे पति का लंड फिर से खड़ा हो गया और वो फिर से मेरे ऊपर चढ़ गए.

    फिर से मिशनरी पोज़िशन में वो मेरी बॉडी को अपने जिस्म से ज़ोर से दबाए हुए थे.

    मेरी तो जान ही निकल रही थी.
    मैंने समझ लिया कि ये बिना लंड पेले मानेंगे नहीं, तो मैंने अपनी टांगें खोल दीं.

    उन्होंने अपना लंड ज़ोर से मेरी चुत में घुसा दिया और धकापेल ज़ोर ज़ोर से पूरी रफ़्तार में मेरी चुदाई कर रहे थे.
    पूरा बेड ज़ोर ज़ोर से हिलने लगा और मैंने देखा कि चुदाई से हमारा बेटा भी हिल रहा था.

    मुझे डर था कि मेरा बेटा जाग ना जाए. चुदाई के समय में ज़ोर से सिसकारियां ले रही थी.
    मैं- अया अयाया अयाया बस करो, फीलिक्स आराम से … आउच आह अयाया अया … आराम से.
    लेकिन मेरे पति मान ही नहीं रहे थे.

    कुछ देर बाद उन्होंने मुझे उल्टा कर दिया और मेरी गांड पर लंड सैट कर दिया.

    मैं कांप गई कि अब गांड भी मारी जाएगी.
    हालांकि मैं गांड तरफ से भी चुदती हूँ लेकिन उन महिलाओं को मालूम होगा कि गांड में लंड लेना कितना दुरूह कार्य होता है.
    फिर मेरे पति का लंड तो गधे के लंड से मैच करता है.

    वही हुआ … मेरे पति ने मेरी गांड में पूरी ताकत से अपना मूसल लंड घुसा दिया.
    लंड घुसा और वो कूद कूद कर गांड चुदाई करने लगे.

    पूरा बेड अब और ज़ोर से हिल रहा था.
    काफी देर बाद मेरे पति ने मुझे फिर से सीधा लेटा दिया और इस बार गलती से उन्होंने मुझे मेरे बेटे की प्लास्टिक टॉय कार के ऊपर लेटा दिया.

    मुझे पता नहीं था कि मेरे बेटे की टॉय कार हमारे बेड पर पड़ी है.
    क्योंकि वो बेड पर ही खेलता रहता है और कभी कभी उसके खिलौने बेड पर पड़े रह जाते हैं.
    चूँकि रूम में भी पूरा अंधेरा था इसलिए मैं भी देख नहीं पाई.

    मेरे पति अपने जिस्म का बोझ मेरे ऊपर इतना ज़ोर से दबाए हुए थे कि मेरी जान ही निकल रही थी.
    वो फिर से मिशनरी पोज़िशन में जंगली जानवर की तरह मेरी चुदाई करने लगे.

    उन्होंने मेरे जिस्म को एकदम कसके पकड़ा हुआ था और मेरे पैर को अपने पैर से दबाए हुए थे.
    वो कूद कूद कर रगड़ रगड़ कर जंगली सांड की तरह मुझे चोदने लगे.

    मैं लगातार चिल्लाए जा रही थी- आआह आआ फीलिक्स धीरे आराम से आह बस करो.
    मगर उनको चुदाई के समय कुछ होश नहीं रहता है.

    हमारा बेड बहुत ज़ोर से आगे पीछे हिल रहा था और चूं छुं कर रहा था, धाप धाप की आवाज आने लगी थी.
    फिर मुझे किसी चीज की टूटने की आवाज आई.

    ये आवाज मेरे जिस्म के नीचे से आई थी.
    मेरे बेटे की प्लास्टिक टॉय कार मेरे पति की जंगली चुदाई से टूट गयी थी.

    मैंने उन्हें रोकने की कोशिश की लेकिन मेरे पति फिर भी नहीं रुके.

    वो पूरी ताक़त के साथ इतनी ज़ोर से मुझे चोद रहे थे कि मेरी जान ही निकल रही थी.
    मुझे ऐसा लग रहा था कि बस किसी तरह से मैं अपने पति से छूट कर अलग हो जाऊं.

    फिर वही हुआ जिसका डर था.
    उनकी इस तरह की जंगली चुदाई से बेड टूट गया और मेरा बेटा नीचे गिर गया.

    उसी समय मेरे पति का स्पर्म निकल गया.
    मेरा बेटा रोने लगा था.

    फिर मैंने पति से हटने का कहा.
    वो मेरे ऊपर से हट गए.

    मैंने अपने बेटे को उठाया और उसे गोद में उठाकर चुप कराने लगी.
    चुदाई से हम दोनों की बॉडी पसीने से तर हो गयी थी.

    मैं चल नहीं पा रही थी. क्योंकि मेरे पति ने मेरी चुत लगभग फाड़ दी थी और गांड भी चिर गई थी.
    फिर वो फ्रेश हुए और मैं बेटे को चुप कराके उसको दूसरे बेड पर सुला आई.
    मैं और मेरे पति भी उसी कमरे में बेड पर सो गए.

    जब सुबह हुई तो फिर से मॉर्निंग रफ मिशनरी सेक्स हुआ और उसके बाद मैं ऑफिस चली गयी.
    मैं सही से चल भी नहीं पा रही थी.

    मैंने एक नया पेन्सिल बॉक्स खरीदा.
    ऑफिस में मेरे उस इन्टर्न छात्र ने मुझसे पूछा कि मेम आपको क्या हुआ आप ठीक से चल क्यों नहीं पा रही हैं?
    मैंने कहा- मेरे पैर में चोट लग गई है.

    फिर उसने पूछा कि ये न्यू पेन्सिल बॉक्स क्यों? मेरा पुराना वाला कहां गया?
    मैं बोली- यह गिफ्ट है, रख लो.

    मुझे कुछ बहाना मिला ही नहीं था. क्या ही बोलती उससे.
    तो यह थी मेरी ताबड़तोड़ चुदाई की सेक्स विद हसबैंड वाइफ पोर्न स्टोरी!

    मेरे पति मुझे रोज हर रात मुझे ऐसे ही चोदते हैं, रफ वाइल्ड मिशनरी सेक्स करते हैं.
    अब फर्क बस इतना है कि जिस कमरे में हम दोनों अब चुदाई करते हैं, वहां का बेड बहुत मजबूत है.
    लेकिन मेरे पति की रफ चुदाई से वो बेड भी हिलने लगता है और चूँ चूँ की आवाज आने लगती है.

    अपने पति के गधे छाप लंड से चुदने के बाद मुझे बहुत मस्त नींद आती है और बाद में उनकी चुदाई से मुझे मीठा मीठा सपना आता है.

  • पापा की परी की मटकती गांड में गधे जैसा लंड-Baap Beti Ki Chudai

    पापा का मजबूत लंड पजामे को फाडने को तैयार हो रहा था। तो मैरी चुत भी उस भयंकर लंड को लेने को बेताब थी। पापा की परी पापा की दुल्हन बन गयी थी मेरी दिल की धड़कन बढने लगी जैसे जैसे रात गहरी हो रही थी।

    दोस्तो मे सोनम कपूर मुंबई से आपके सामने मेरे जीवन का एक हसीन लम्हा जो आगे चलकर मेरी जिंदगी बन गया वो शेयर कर रही हूँ। इस Baap Beti Sex Story को अगर लिखने मे कोई गलती हो तो क्षमाँ करना मेरे सभी चोदू दोस्तो!

    मेरे परिवार मे मेरे से दो छोटी ओर मोम डेड है कॉलेज की पढाई के बाद मेरी शादी 19 साल की उम्र मे कर दी गयी। मेरे पापा एक बिजनेसमैन है तो उन्होंने मेरे लिए भी एक बिजनेसमैन लडका ही खोजा ओर हमाँरी शादी कर दी।

    सुहागरात पर ही मुझे मेरे गांडू पति की हकीकत पता चली वो पैसेवाला तो है मगर दमदार मर्द नही, मेरे ख्वाब ख्वाब ही रह गये। मगर ओर कोई रास्ता नही था शादी से पहले मेरा कोई अफेयर नही था। तो मैने सब अपनी किस्मत पर छोड़ दिया था।

    शादी के एक साल बाद मे जब पिहर आई तो माँ ओर बहने मेरी नानी के घर जा रही थी वो मुझे देखकर बहुत खुश हुई ओर मुझे भी साथ चलने का कहने लगी। मगर मेरा ननिहाल मे मन नही लगता था तो मैने मना कर दिया,

    ओर कहा – मै पापा के पास ही रहूगी!

    ये सुनकर माँ ने कहा – चलो ठीक है हम कल सुबह जाकर तीन दिन मे लोट आएगे तुम अपने पापा का ख्याल रखना।

    मेरे पापा की उम्र उस समय 40 की थी ओर मेरी19 की मेरी माँ भी मेरी बडी बहन जैसी लगती थी। वो उस समय 32 की थी उनका शरीर भी बडा कामुक था खैर दिन बातो मे निकल गया ओर रात को खाना खाकर हम सब सो गये।

    हम तीनो बहने ऊपर सो रही थी तभी रात को मुझे प्यास लगी तो मै पानी पीने नीचे आई तो माँ की आवाजे सुनकर मै उनके कमरे की तरफ देखने चली गयी। कमरा बंद था मगर मम्मी की आहे सुनकर मुझे पता चल गया की मेरा बाप मेरी माँ चोद रहे थे।

    माँ की कामुक आवाजो से मेरी भी चुदास भडक गयी ओर मै चुदाई देखने का जुगाड करने लगी। तभी कमरे के अंदर झाकने का मुझे जुगाड मिल गया, गेट के लोक के सामने बेड होने से मुझे अंदर का दृश्य साफ साफ दिखाई दे रहा था। मेरे पापा ने मेरे माँ के पैर चांद की तरफ कर रखे थे ओर माँ की चुत मै अपना गधे जैसा लंड पेल रहे थे।

    पापा का लंड देखते ही मेरी चुत का झरना बहने लगा ओर मेरा हाथ लोवर के अंदर से मेरी चुत को सहला रहा था। माँ की चिखे तो मेरी माँ की माँ की चीख निकल जाती अगर इतने बडे लंड से चुदती।

    वो कुछ देर बाद पापा ने माँ को कुतिया बनाया तो उनकी नजरे गेट पर चली ओर उन्हे गेट के नीचे से मेरे पैर दिखाई दिये। जिसे देखकर उन्होने अंदाजा लगाया की वहा मै उनकी चुदाई देख रही हू। माँ की चुत मे पापा का लंड अंदर जाता तो उनकी चीख निकल जाती ओर वो गाली देती हर बार।

    माँ – अब तो छोड दे मुझे हवशी जानवर… मेरे किस्मत मे ही लिखा था… ऐसा जानवरतो पापा ने कहा – रानी लोग देखने को तरसते है ऐसे लंड को!

    ओर उन्होने गेट की तरफ देखकर मुझे आंख माँर दी ओर हंसकर माँ की गांड मे उगली डाल दी। ओर वो लगातार गेट पर नजरे गढ़ाकर माँ की चुदाई करते रहै ओर इधर माँ की चुदाई देखकर मेरे बदन मे भी आग लग गयी थी। मगर मेरे पास कुछ नही था उस आग को बुझाने के लिए।

    दस मिनट बाद पापा ने माँ की चुत मे ढेर सारा वीर्य भर दिया ओर फिर अपना लंबा लंड चुत से बाहर निकाल लिया ओर गेट के सामने खडे होकर हिलाने लगे। तो मेरी उगलिओ की हरकत से मेरी चुत ने भी खडे खडे दोबारा अपना रस बाहर निकाल दिया।

    अब मै भागकर अपने कमरे मे चली गयी मगर पापा का मूसल लंड मेरी आंखो के सामने घुम रहा था ओर मेरी नींद भी गायब थी। पता नही कब आंख लगी मेरी सुबह जब माँ ओर बहन तैयार हो गयी तो मुझे उठाया।

    ओर कहने लगी – अब सोती ही रहेगी क्या उठ जा रात को क्या देख रही थी

    माँ की बात सुनकर मुझे रात का नजारा फिर से याद आ गया ओर मै मुह धोकर नीचे आ गयी। बहन ने चाय लाकर दे दी ओर वो कमरे मे समाँन पैक करने चली गयी।

    तो माँ ने कहा – सोनम क्या हुआ सब ठीक है

    तो पापा ने कहा – कुछ उदास तो है सोनम पता नही क्या बात है

    तो मम्मी बोली – कोई बात नही… तीन दिन आप ख्याल रखना ज्यादा तंग मत करना उसे…

    तो पापा बोले – तुम भी ना सोनम को तंग क्यो करूगा!

    तो मम्मी बोली – पता नही आपका मै जानती हू, मे ही झेल सकती हू,हर कोई नही,

    तो पापा ने कहा – सोनम क्या कम है वो भी झेल लेगी आराम से

    तो माँ बोली – रहने दो इसके बस की बात नही

    तो मै कहा – माँ.. मै भी झैल लूंगी आपकी बेटी हू!

    तो माँ बोली – बेटा देखने ओर करने मे बहुत फर्क है!  ये सुनकर मे सकपका गयी!

    तो पापा बोले – तुम डराओ मत तुमको कुछ हुआ था क्या जो संजू को होगा

    तो मम्मी बोली – मुझे ही पता है क्या हुआ था आपको क्या पता

    तो पापा बोले – संजू कुछ हुआ क्या माँलूम लगा तेरे को तो

    माँ – बोली आने के बाद पता लगेगा वो तो, मगर संभाल कर करना…

    ये सब बाते सुनकर मुझे एहसास हो गया था, माँ मेरी मदद कर रही है क्योकी माँ जानती थी मेरे पति मे दम नही है ओर मै खुश भी नही हू उस से, तो माँ ने ही पापा को मनाया था इसके लिए।

    तभी पापा बोले – सोनम रात के लिए तैयार तो हो ना?!!

    मैने भी कह दिया – पापा आपकी परी तैयार है बिलकुल!

    तो पापा बोले – फिर दोपहर मै लडके साथ समाँन भिजवा दूंगा, तुम तैयारी कर लेना अच्छे से ओर खाना मै लेकर आ जाऊगा, कोई दिक्कत है तो अपनी माँ को बता दो, अगर मुझे ना कहना चाहो!

    तो मैने कहा – ठीक है पापा!

    ओर मै रसोई मे जाकर माँ से गले लग गयी!

    तो माँ बोली – बेटी एकबार दर्द होगा बस थोडी हिम्मत रखना तुम्हारी खुशी के लिए बहुत मुश्किल से हा की है तेरे पापा ने!

    ये सुनकर मैने कहा – ठीक है माँ !

    तो माँ ने कहा – आज तेरी सुहागरात ही है इसलिए दुल्हन बनकर तैयार हो जाना अच्छे से, तेरे पापा कपडे भी भेज देगे। हमने सब तैयारी कर रखी है तुम वैक्स करवा आना अभी फिर कमरे को संजाकर तैयार भी करना है, गहने भी पार्लर वाली से ले आना तुम।

    ये सब सुनकर मैरी आंखो से आंसू निकल आए।  तो माँ ने आंसू पूछते हुए कहा – बेटा हम तेरी खुशी के लिए सबकुछ कर रहै तो तुम भी खुशी खुशी मजे करो।

    तो मैने कहा – हा माँ जरूर!  मम्मी ओर बहन को छोड़ने के लिए पापा उनको साथ लेकर निकले ओर फिर वो फैक्ट्री चले गये वही से। मै गाडी लेकर पार्लर चली गयी ओर फिर वही से मैने वैक्स फेशियल करवाया ओर गहने लेकर आ गयी। दोपहर मे नहाकर गाऊन पहनकर समाँन का इंतजार कर रही थी।

    तभी लडका एक फूलो की टोकरी लेकर आ गया ओर एक बैग मे कपडे मैने पहले कमरे को अच्छे से सजा दिया। अब कमरे मे गुलाब की खुशबु महक रही थी तो मै भी कामुक हो रही थी।

    रात की चुदाई को लेकर फिर मैने कपडे देखे तो उसमे मेरा फेवरिट कलर का घाघरा चोली था लाल रंग का मै कुछ देर आराम करने लेटी तो दो घंटे बाद मुझे जाग आयी मम्मी का फोन आने पर।

    माँ ने पूछा – तैयारी कर ली

    तो मैने कहा – हा माँ

    तो माँ बोली – बेटा अब बाथरूम जाकर पेशाब करने के बाद सरसो के तेल से अंदर की माँलिश कर लेना अपनी उगलिओ से।ताकी रात को तकलीफ कम हो डरना मत बस थोडी हिम्मत रखना ओर पहले पूरा फोरप्ले करना जब बर्दाश्त से बाहर हो जाए तब पापा से कहना। एकबार ले लिया तो फिर कभी कोई दिक्कत नही होगी!

    ये सब बाते सुनकर ही मेरी चुचिया कडक हो गयी ओर मेरी चुत से कामरस निकलने लगा। माँ के फोन रखते ही मै एकबार फिर से नहाने चली ओर फिर चुत मे अच्छे से तेल माँलिश की अब मै बाहर आकर तैयार होने लगी। तभी पापा का फोन आया,

    तो मैने कहा – आप नो बजे तक आना

    तो पापा बोले – बेटा मुझे भी तैयार होना है

    तो मैने कहा – हो जाना पापा क्या जल्दी है

    तो पापा बोले – ठीक है बेटा

    ओर मैने अच्छे से मेकअप कर के अपनी ड्रेस पहनकर आज पापा की दुल्हन बन ने लगी! दो घंटे के मेकअप के बाद आखिरकार पापा की परी पापा की दुल्हन बन गयी थी मेरी दिल की धड़कन बढने लगी जैसे जैसे रात गहरी हो रही थी।

    आखिरकार पापा ने डोरबैल बजाई,

    तो मैने कहा – दरवाजा खुला है

    तो पापा लोक करके अंदर आ गये ओर वाशरूम जाकर वो नहाकर बाहर आये ओर उन्होने एक शेरवानी पहनी ओर पगडी लगाकर। फिर सेन्ट डालकर उन्होने मेरे कमरे का दरवाजा खटखटाया। तो मेरी सांसे उपर नीचे होने लगी तभी उन्होने दरवाजा खोला ओर अंदर आकर दरवाजा लोक कर दिया।

    पापा को देखकर मेरी चुत भी मचलने लगी, तभी पापा धीरे से फूलो की लडियो को हटाकर बेड पर बैठ गये ओर मेरे पास आ गये। मैने गर्दन नीचे कर ली, पापा को सामने देखकर।

    तब पापा ने बात शुरू करते हुए कहा – सोनम  बेटा ये सब हम मजबूरी मे कर रहै है तो अच्छा है हमे जब ये करना ही है तो हम मजे भी ले, ताकी तुझे जो सुख नही मिल पाया वो सुख मिले ये!सुनकर मैने कहा – पापा मै इस सुख के लिए ही तो आपकी दुल्हन बन गयी हू,अब मुझे ये सुख दे दो आप!

    तो पापा ने मेरा घुघट उठा दिया ओर मेरे चेहरे को प्यार से देखते रहै, मेरी आंखे बंद थी ओर गर्दन झुकी हुई।

    तभी पापा ने कहा – तुम कितनी खूबसूरत को आज देखा सही से मेने बिलकुल  लड़की लग रही हो। सोनम अब आखे खोलो शर्म करोगी तो केसै होगा ये सुनकर मै पापा से लिपट गयी ओर पापा ने मुझे बाहो मे भर लिया ओर हम दोनो एकदूसरे से लिपटकर बैठे रहे बहुत देर। पापा के हाथ अब धीरे धीरे मेरे बदन को सहलाकर मुझे गर्म कर रहे थे।

    तभी पापा ने मेरे मुह को अपने मुह के सामने कीया ओर मेरे होठो पर लगी लाल लिपस्टिक को खाने लगे। मेरी लिपस्टिक से पापा के होठ भी लाल हो गये तो पापा के हाथ मेरी चुचियो पर पहुंच गये ओर वो उन्हे मसलने लगे। धीरे धीरे हम दोनो गर्म होने लगे।

    पापा ने एक एक कर के मेरे सभी गहने उतारकर रखे तो फिर मैने पापा की शेरवानी के बटन खोलकर उनकी शेरवानी को खोलने मे मदद की। अब मै घाघरा चोली मै बैठी थी तो पापा बनियान ओर पजामे मे पापा का गधे जैसा लंड पजामे को फाडने को तैयार हो रहा था। तो मैरी चुत भी उस भयंकर लंड को लेने को बेताब थी।

    अब देखते ही देखते पापा ने मेरी काली ब्रा ओर चोली एक साथ खोल डाली उसके बाद उन्होने मेरे लांचे का नाडा खिंचकर मुझे खडा होने का कहा ओर मेने पेरो से लांचा निकालकर बाहर फेंका।

    तो पापा ने मेरी पेंटी को खींचकर निकाल दिया, मेरी चिकनी लाल चुत को देखकर पापा खो से गये ओर फिर पापा भी खडे हो गये ओर अपना पजापा कच्छा बनियान खोलकर फेंक डाला।

    अब हम दोनो नंगे हो गये तो पापा ने मुझे बेड पर सुला दिया ओर मेरे पेरो की उगलिओ को मुह मे भरकर चुसने लगे। ओर धीरे धीरे वो मेरि चुत तक पहुंच गये मेरी चुत से रह रहकर कामरस निकल रहा था। तो पापा अब वो कामरस का स्वाद लेने लगे।

    पापा की जबरदस्त चुसाई ने कुछ देर मे ही मेरी चुत ने उनके मुह मे ढेर सारा कामरस छोड़कर उनको अपने योवन रस का मजा दिया। तो फिर अब मेने पापा के मूसल लंड को हाथो मे लेकर सहलाने लगी। पापा का लंड कीसी गर्म पाइप की तरह तप रहा था।

    तभी मैने पापा के सुपारे को अपनी जीभ से चाटकर उसे अपने मुह मे भर लिया ओर सच कहू तो उनको इतना बडा लंड मेरे मुह मे नही जा रहा था। पापा का लंड सिर्फ लंबा ही नही साला मोटा भी बहुत था। मगर मेरी चुदास इतनी ज्यादा थी की मैने ना मुह मे जाते हुए ही पापा का लंड फंसा लिया मुह मे।

    मेरा मुह तो उनके आधे लंड से फटने को हो गया था, मगर फिर पापा मेरे सर को पकडकर धीरे धीरे मेरे मुह को चोदने लग गये। जब पापा लंड अंदर डालते तो मुझे सांस भी नही आ रहा था, मगर मेरी हवस इतनी बढ चुकी थी मै उनका पूरा लंड निगल जाना चाहती थी।

    मगर सारी कोशिश के बाद भी मे 7 इंच तक उनका लंड मुह मे ले पाई ओर पांच मिनट के अंदर मेरे जबडे भी दर्द करने लगे। तो मैने पापा का लंड बाहर निकाल दिया ओर फिर लंबी लंबी सांसे लेकर मेने खुद को नोर्मल कीया। तो पापा ने मुझे बाहो मे भर लिया ओर मेरे होठो पर होठ लगाकर कीस करने लगे।

    उनका मूसल लंड मेरी जाघो के बीच से गांड तक पहुंच रहा था पापा के दोनो हाथ मेरी चुचियो को दबा रहै थे। अब मै पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी। पापा के लंड को पकडकर मे दबाने लगी,

    ओर आखिरकार पापा को कहना पडा – पापा अब करो कुछ मे मर जाऊगी

    तो पापा बोले – ठीक है मेरी परि!

    पापा ने मुझे सुला दिया ओर मेरी गांड के नीचे दो तकिये लगा दिये, पापा ने मेरे हाथो को बांध दिया।

    मैने पूछा – पापा हाथ क्यो बांध रहै हो??!

    तो पापा बोले – बेटा तुम्हे दर्द नही होगा इसलिए

    ओर फिर पापा ने बेड की डोवर मे रखी बोरोप्लस अपनी उगलिओ पर लगाकर अपनी उगली मेरी चुत मे डालकर मेरी चुत चिकनी करने लगे ओर मेरा इतना बुरा हाल हो चुका था की मुझे अब चाहे कितना भी लंड हो मै लेने को तैयार थी।

    पापा ने थोडी सी क्रीम अपने लंड पर लगाई ओर अपने हाथो से मेरी नाजुक चुत की पंखुडियो को खोलकर उसका लंड का टोपा रख दिया। मेरी ओर धीरे धीरे मेरी चुत मे उन्होने अपना लंड का टोपा उतार दिया उसके बाद उन्होने झटके से टोपा पूरा अंदर कीया। तो मेरी चुत की दिवार हिल गयी ओर मै दर्द से कराहने लगी।

    मगर अभी तो सिर्फ दो इंच लंड ही घुसा था चुत मै तभी पापा ने एक तेज झटका लगाकर आधा लंड मेरी चुत मे फंसा दिया। तो मेरी चीख निकल गयी जोर से तभी पापा मेरे उपर लेट गये ओर मेरे होठो को अपने होठो मे कैद कर लिया।

    मगर मैने पूरा बेड हिला दिया उनकी पकड से निकलने के लिए मगर मै उनके शक्तिशाली शरीर के आगे बेबस लाचार थी। मेरा दर्द कम होने का नाम ही नही ले रहा था ओर तभी पापा ने दो झटके लगातार लगाकर अपना पूरा लंड मेरी चुत मे फंसा दिया।

    मेरी चुत फट गयी मेरा दर्द से बुरा हाल था मे लगभग बेहोश होने वाली थी तभी पापा ने मेरी चुचीयो को इतनी बेदर्दी से मसला की मेरा दर्द दुगना हो गया ओर मै बेहाल हो उठी। दोस्तो इस चुदाई  में, दस मिनट तक पापा अपनी मनमाँनी करते रहै, मै लगातार रोती रही, दस मिनट के बाद मेरा रोना बंद हुआ। तो उन्होने मेरे होठो को छोड़ा ओर मुझे खुली सांस लेने का मोका मिला।

    मगर सांस की बजाय मेरे मुह से सबसे पहले गाली निकली – कुते अपना लंड बाहर निकाल, मुझे नही चुदवाना हरामी,

    तो पापा बोले – कुतिया फट गयी इतनी जल्दी कब से फुदक फुदक कर रही थी… रंडी रूक जा अभी तेरी तो फटेगी तेरी ओर,ओर उन्होने अपना आधा लंड बाहर निकालकर एक झटके मे फिर से पूरा लंड चुत मे उतार दिया। तो मेरी चुत की दीवार हिल उठी मे फिर से चिल्ला उठी।

    तो पापा बोली – बस फट गयी एक झटके मे कुतिया तब तो बहुत मचल रही थी।

    मैने कहा – हा! कुते फट गयी अब बोल ओर बचा है तो वो भी डाल दे, बेटीचोद !!!

    दोस्तो इतना दर्द तो बच्चा पैदा करने मे भी नही हुआ जितना की पापा की पहली चुदाई से हुआ बेड पर चद्दर के उपर डाला सफेद तोलिया मेरी फटी चुत की दास्तान बयान कर रहा था। तभी पापा ने अपना लंड बाहर निकाला जिसे देखकर मुझे चक्कर आ गये! उन्होने एक बार फिर से अपने लंड पर ढेर सारी बोरोप्लस लगाने लगे!

    तो मै बोली – पापा बहुत दर्द हो रहा रहने दो प्लीज…

    पापा बोले – बेटा अब दर्द नही होगा…

    तो मैने अपनी टांगो को मोडकर चुत को छिपा लिया…

    ये देखकर पापा भडक गये – बोली बहुत नखरे कर रही है अब देख तू बहन की लोंडी बहुत देर हो गयी, तेरे नाटक को देखते!

    ओर उन्होने गुस्से मे आकर अपना लंड मेरी चुत मे पेल दिया, इसबार दर्द कम हुआ मगर मेरी चुत के अंदर अब भयंकर जलन हो रही थी ओर पापा गुस्से मे आकर ताबडतोड झटके दे रहे थे।

    मेरी चीखो से भी पापा को कोई फर्क नही पडा ओर वो मुझे गंदी गंदी गालिया देने लगे,रंडी की ओलाद चुप कर साली कुतिया, साली रंडी! तेरी माँ भी तो रोज चुदती है तो तेरी चुत कुछ अलग थोडी है बहनचोद रंडी क्यो चिल्लाह रही है!!!

    छिनाल। रंडी। बहन की चुत माँरू तेरी। तेरी माँ तो बडे मजे लेकर चुत ओर गांड मरवाती है। बुरचोदी रंडी। गालिया सुनकर मुझे भी गुस्सा आया, तो मैने भी पापा को गालिया देनी चालू कर दी – हा… भडवे चोद! कुते की ओलाद चोद अपनी बेटी की बुर को। हरामी की ओलाद।

    माँ के चोदे माँदरजात। बहन के लंड। हा चोद अपनी बेटी की बुर को हरामी माँदरचोद। लगता है तूने अपनी माँ को भी चोदा होगा हरामी। बेटीचोद।

    पापा – हा कुतिया अभी तो तेरी चुत फाडी है तेरी छोटी बहन की चुत भी मै ही फाडूगा वो भी गांड मटकाकर चलती है बहुत तुम दोनो की खुजली इसी लंड से मिटेगी अपनी माँ पर गयी हो तुम दोनो कुतिया वो भी ऐसे ही चुदती है मजे लेकर

    मेने बोला – बहनचोद रंडी की ओलाद आज रंडी बन ही गयी!

    दोस्तो बीस मिनट के बाद मेरी चुत उस मूसल लंड को आराम से अंदर लेने लगी तो मैने भी गांड उठाकर लंड चुत मे लेना चालू कर दिया अब दर्द तो हो रहा था मगर दर्द के साथ साथ मुझे मजा भी आने लगा

    मेरी चीखे अब आहो मे बदन गयी। ओर मे – हा आ आ अहह आ अम्म पापा… आ अहह अपनी परी को ऐसे ही पेलो जोर से रगडो मेरी चुत को पापा इसकी माँ की बहुत तंग करती है ये मुझे!

    पापा – अब से तंग नही करेगी बेटी आज तेरी चुत की माँ चुद जाएगी!

    मै बोली – तो चोद दे मेरी चुत बेटीचोद या बकचोदी ही करेगा हरामी

    पापा – अरे बहन की लोंडी अभी तो तू रो कर माँफी माँंग रही,अब बकचोदी करने लगी|

    ओर पापा ने मेरी टांगे सीधी कर के अपने पेट से लगाकर सीधी कर अपने दोनो हाथो से कसकर पकड ली ओर फिर पूरी ताकत से चुत का भोसडा बनाने लगे। तो मेरी गांड भी फटने लगी मेरी चुत ने एकबार फिर से ढेर सारा कामरस छोडा तो पापा का लंड ओर चिकना होकर मेरी चुत को फाडने लगा ओर मै मजे लेकर दर्द को भूलाकर चुदने लगी थी।

    मै बोली – ओ माँ बचाओ मारली पापा ने

    पापा हंसकर – नही बेटा ऐसा तो कुछ नही बस मजे ले लो एकबार की बात है

    ओर फिर पापा की बेरहम चुदाई बीस मिनट ओर जारी रही चालीस मिनट की इस चुदाई से मेरी माँ बहन चुद गयी थी। दोस्तो जब पापा ने मेरी चुत मे अपना गर्म गर्म वीर्य भर तो मुझे कुछ राहत मिली। दोस्तो पापा पसीने से नहा चुके थे ओर मेरा बदन भी पसीने से भर चुका था।

    कुछ देर बाद पापा खडे हुए ओर कहा – पापा की परी,तुम ठीक तो हो!

    मेने कहा – पापा अब पूछ रहै हो मेरी माँ चोदकर

    तो पापा हंसने लगे – बेटा तेरे पति का छोटा है तो भी दिक्कत ओर तेरे पापा का बडा है तो भी दिक्कत!

    तो मै बोली – पापा आपका बडा नही बहुत बडा है!!!

    तो पापा बोले – चल ठीक है खडी हो वाशरूम चलते है।

    मेरी तो बैठने की हिम्मत नही थी, पापा बचपन मे जैसे गोद मै लेकर मुझे घुमाँते थे वैसे ही आज पापा ने मुझे गोद मे उठा लिया ओर बाथरूम मे ले गये।

    मै सीट पर बैठकर मूतने लगी, तो मैरी चुत मे पेशाब की जलन भी हो रही थी बहुत ओर उससे मेरी आंखो मे आंसू भर आए। तभी पापा ने पास आकर मुझे चुमाँ ओर फिर पापा ने शावर चला दिया ओर अपने हाथो से मेरे बदन पर साबुन लगाकर अपने बदन पर साबुन लगाई।

    ओर फिर मुझे अच्छे से नहलाया नहाने के बाद मुझे कुछ आराम मिला तो पापा ने तोलिया लाकर मेरा ओर अपना बदन साफ कीया ओर फिर मै चलकर बेड पर पहुंची।

    तो पापा ने मुझे गाऊन लाकर दिया ओर फिर पापा किचन से खाना लेकर आये ओर मुझे अपने हाथो से खाना खिलाया। फिर पापा ने मुझे दर्द के लिए एक गोली दी जिसे खाने के बाद मुझे नींद आने लगी।ओर सुबह 9 बजे मुझे पापा ने उठाया – बेटा चाय तैयार है खडी हो जा

    तो मेरी आंख खुली मै अब ठीक महसूस कर रही थी काफी मेरे शरीर का दर्द गायब था। मगर चुत पर सोजन थी अब पेशाब कीया तो रात जितनी जलन नही थी मतलब मे अब पापा का गधे जैसा लंड लेने के लिए बिल्कुल तैयार थी।

    मै मुह धोकर बाहर आई ओर पापा की गोद मे जाकर बैठ गयी!

    तो पापा बोले – कैसा है मेरा बेटा??!!!

    तो मैने कहा – जिंदा हू पापा ओर हंसने लगी!!

    तो पापा बोले – मेरी परी अब से तो तुझे मजे ही मजे करने है बस ओर मुझे चुमने लगे!

    फिर हमने चाय पी ओर पापा ने कहा – मुझे फैक्ट्री जाकर आना है कुछ देर फिर दो दिन मे घर पर ही रहूगा। तो तुम नहा लेना हम दोपहर मे कही बाहर खाना खाने चलेगे। ये सुनकर मैने कहा – जी पापा!ओर पापा नहाकर फैक्ट्री चले गये। तभी माँ का फोन आ गया ओर वो पूछने लगी – केसी रही मेरी लाडो की सुहागरात!!

    तो मैने कहा – माँ हालत ख़राब करदी, चूत का पसीना निकल दिया, आपकी भी ऐसी ही रही होगी!!!!

    तो माँ बोली – एक बार दो दर्द होगा ही बेटा अब दो तीन दिन मे अपनी जवानी के असली मजे ले तू आराम से घर पर,तो मैने कहा माँ सही कहा अब इतना दर्द सहा है तो मजे तो लूंगी ही ओर फिर हम दोनो हंसने लगी…

    अगले भाग मे दर्द भरी दास्तान सुनने को मिलेगी क्योकी अब मेरी गांड की बारी थी जिससे मे बिलकुल अनजान थी। चलिए मिलते है अगले भाग मे आपको कैसी लगी मुझे कमेन्ट कर के जरूर बताना दोस्तो।

  • दादाजी – का लंड या गधे का लंड

    मेरा नाम रेशमा है, हमारा 3 लोगों का छोटा सा परिवार है मम्मी पापा और में. मेरे मम्मी पापा दोनों ही जॉब करते है और में दिखने में सुंदर हूँ और लंबे बाल है. में इस साईट की बहुत बड़ी फैन हूँ और आज में आपके साथ मेरा अनुभव शेयर करने जा रही हूँ. यह 3 साल से भी ज्यादा पुरानी बात है, तब मेरी उम्र 19 साल थी और मेरी हाईट 5 फुट 1 इंच और फिगर 32-25-32 था. हम लोग एक अपार्टमेंट में रहते थे,

    तभी हमारे पास के फ्लेट में एक नई फेमिली रहने को आई, जो कि कुछ दिनों से खाली था. उनकी फेमिली में एक कपल और उनके पिताजी थे, उन लोगों के रहने के बाद पड़ोसी के नाते दोनों फेमिली के बीच बातचीत शुरू हुई वो दोनों पति पत्नी जॉब करते थे.

    फिर अंकल ने बताया कि उनकी मम्मी 12 साल पहले गुजर गई और उनकी दीदी शादी के बाद अमेरिका में रहती है और उनके पापा रिटायर्ड होने के बाद उनके पास रहने आ गये. फिर मेरे मम्मी पापा उनके पापा को चाचा जी बोलने लगे और उसी हिसाब से में उनको अंकल, आंटी और दादा जी बुलाने लगी,

    इन 2 महीनों में दोनों परिवार काफ़ी नजदीक हो गये थे. एक दिन दोपहर में स्कूल के बाद घर आने के लिए में सिटी बस स्टॉप पहुँची और उसी बस स्टॉप पर दादा जी घर आने के लिए बस का इंतजार कर रहे थे, दादाजी 5 फुट 8 इंच और मजबूत बॉडी के थे, हांलाकि उनकी उम्र 61 साल के आस पास थी, लेकिन वो 50 साल के दिखते थे. फिर बस आने के बाद हम दोनों बस पर सवार हो गये और अपने घर की तरफ निकल पड़े.

    जब बारिश का महीना था और हल्की-हल्की बारिश शुरू हो गयी थी, बस स्टॉप पर सिर्फ़ हम दोनों उतरे. हम दोनों के पास छाता ना होने की वजह से हल्की-हल्की बारिश में भीगते हुए हम घर की और बढ़े, बस स्टॉप से घर करीब 10 मिनट पैदल जाने की दूरी पर है, हम बस स्टॉप से 2-3 मिनट ही चले थे कि बारिश जोर से होने लगी तो हम दोनों तेज-तेज चलने लगे, लेकिन ज़्यादा बारिश होने की वजह से दादा जी बोले कि साईड के बड़े पेड़ के नीचे इंतजार कर लेते है और तेज की बारिश की वजह से में मान गयी और हम दोनों साईड के पेड़ के नीचे चले गये, लेकिन तब तक हम दोनों पूरी तरह से भीग चुके थे और हमारे कपड़े गीले हो चुके थे,

    उस वक़्त में स्कूल ड्रेस पहने हुई थी जो कि सफ़ेद शर्ट और ग्रे स्कर्ट थी, में पूरी तरह से भीग चुकी थी और मेरी सफ़ेद शर्ट पारदर्शी होकर चिपक गयी थी. मैंने अन्दर ब्रा पहनी हुई थी, लेकिन गीली शर्ट से मेरे बूब्स के शेप का मालूम चल रहा था. फिर मैंने दादा जी की तरफ देखा तो उनकी नज़र मेरी भीगी हुई शर्ट में दिख रहे बूब्स और क्लीवेज पर थी.

    अब वो इधर उधर की बातें करने लगे वो बीच बीच में मेरी बूब्स की और देख रहे थे, जैसे कि मुझे कोई शक़ ना हो. जब वो मेरी बूब्स की तरफ देख रहे थे, तब मेरे दिल में हलचल मच रही थी और मुझे एक अजीब सी ख़ुशी महसूस हुई और इससे पहले किसी ने मुझे इस तरह से नहीं देखा था. फिर 15 मिनट के बाद बारिश कम होते ही हम दोनों घर की और चल पड़े और चलते-चलते दादा जी मेरे भीगे हुए बदन को तिरछी नज़र से देख रहे थे, अब मुझे उनका देखना अच्छा लग रहा था.

    फिर हम दोनों अपने-अपने घर चले गये, आज तक मैंने सिर्फ़ सेक्स की वासना और सेक्स की नजर से देखने के बारे में पढ़ा और सुना था, लेकिन कभी महसूस नहीं किया था, लेकिन आज दादा जी जिस तरह से मुझे और मेरे भीगे हुए बूब्स को देख रहे थे तो मुझे एक ख़ुशी महसूस होने लगी थी और में उनके बारे में सोचने लगी. उस कच्ची उम्र में यह भावना आते ही मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था और में यह भूल चुकी थी कि वो 61 साल के और में सिर्फ़ 19 साल की हूँ, इसी हसीन याद से टाईम कट गया और देखते ही देखते शाम हो गयी.

    फिर में शाम तक अपना सब होमवर्क ख़त्म करके छत पर खुली हवा खाने के लिए चली गयी, तभी धीरे धीरे अंधेरा होने लगा था. जब में छत पर गयी तो वहां सामने कोई नहीं था, जब मैंने पूरी छत पर नज़र घुमाई तो एक कोने में दादा जी बेंच पर बैठे थे. उनको देखते ही मुझे एक ख़ुशी महसूस हुई, जैसे कि में उनसे वर्षो से मिलना चाहती हूँ और आज सामने मिल गये हो और मुझे देखते ही उनका चेहरा भी खुशी से चमक उठा और उन्होंने मुझे एक बड़ी सी स्माईल दी. फिर मैंने भी उनको रिप्लाई में एक स्माईल दी और जाकर उनकी बगल में बैठ गयी, उस वक़्त में लोंग स्कर्ट और वी गले की टॉप पहने हुई थी और दादा जी बात करते-करते मेरी क्लीवेज और बूब्स देख रहे थे और में जानबूझ कर अंजान बन रही थी.

    फिर थोड़ी देर के बाद दादाजी ने अपना एक हाथ मेरी जांघ पर रख दिया और सामने की तरफ देखकर मुझसे बात करने लगे. फिर में भी चुपचाप बैठकर उनसे बात करने लगी और मैंने उनका हाथ हटाने की कोई कोशिश भी नहीं की थी. फिर 2 मिनट के बाद दादा जी अपने हाथ से मेरी जांघ को सहलाने लगे और में चुपचाप बैठी हुई सामने की तरफ देख रही थी. फिर थोड़ी देर के बाद जब मैंने उनकी तरफ देखा तो वो मेरी जांघ सहला रहे थे और मेरी क्लीवेज को देख रहे थे.

    फिर उन्होंने मेरी आँखों में देखकर एक स्माइल दी, तो मैंने भी उन्हें एक स्माइल दे दी. फिर में हंसते हुए बोली कि मम्मी पापा के आने का टाईम हो गया है और अब में नीचे घर जाती हूँ और फिर में नीचे चली आई. फिर थोड़ी देर में मम्मी पापा अपनी जॉब से वापस आ गये, अब शाम के 9 बजे हुए थे और में सोफे पर बैठकर टी.वी देख रही थी और मम्मी किचन में काम कर रही थी और पापा लेपटॉप में अपना काम कर रहे थे. तभी डोर बेल बजी और मैंने जाकर दरवाजा खोला तो मैंने देखा कि दरवाजे के सामने दादा जी खड़े हुए थे.

    फिर उन्होंने मुझे देखते ही आँख मारी और स्माइल करते हुए अंदर आ गये, अब उन्हें देखकर मेरा दिल जोरो का धड़कने लगा था. अब पापा ने उनके चाचा जी को देखकर बड़ी खुशी से उनका स्वागत किया, तब दादा जी मुझसे बोले कि आओ और आराम से अपनी टी.वी देखो और में फिर से सोफे पर जाकर टी.वी देखने लगी और दादा जी आकर मेरे बगल में बैठ गये और पापा से बात करने लगे. फिर मम्मी किचन में उनके लिए चाय बनाने के लिए चली गयी, अब पापा अपने लेपटॉप पर काम करते-करते दादा जी से बात कर रहे थे, तो दादाजी अपने हाथ से मेरी पीठ सहलाने लगे. फिर जब मैंने उनकी तरफ देखा तो वो स्माइल देते हुए मेरे टॉप के अंदर हाथ घुसाते हुए मेरी नंगी पीठ सहलाने लगे, तभी दादाजी ने पापा से मेरे बारे में बात की.

    दादा जी : मुस्कान 11वीं में क्लास आ गयी है, उसकी पढाई कैसी चल रही है? तुम हेल्प कर रहे हो या नहीं ?

    पापा : नहीं चाचा जी, काम थोड़ा ज़्यादा है इसलिए ध्यान नहीं दे पा रहे है.

    दादा जी : अरे भाई काम तो चलता रहेगा, लेकिन बेटी की पढ़ाई का ध्यान तो रखना पड़ेगा ना.

    पापा : जी आप सही बोल रहे है, लेकिन काम का बोझ भी है अगर बुरा ना माने तो क्या आप मुस्कान की पढाई देख लेंगे? अगर आपके पास टाईम हो तो.

    दादा जी : अरे इसमें बुरा मानने की क्या बात है? में दोपहर को खाली बैठे-बैठे बोर होता रहता हूँ तो मेरा भी टाईम पास हो जायेगा. (फिर मेरी तरफ देखकर आँख मारी, और में स्माइल देते हुए फिर से टी.वी देखने लगी) तभी मम्मी चाय ले कर आई, तो दादा जी ने अपना हाथ मेरे टॉप से बाहर निकाल लिया और वो मुझे स्माईल कर रहे थे.

    मम्मी : चाचा जी आपको कोई परेशानी तो नहीं होगी ना.

    दादा जी : बिल्कुल नहीं बल्कि मुझे तो खुशी होगी.

    मम्मी : अकेली लड़की घर पर रहती है तो डर लगा रहता है और आप साथ रहेंगे तो दिल को तसल्ली भी रहेगी.

    दादा जी : हाँ बेटी सही कहा तुमने, माँ हो चिंता तो रहेगी, लेकिन आगे से मुस्कान अकेली नहीं रहेगी मेरे यहाँ आ जाया करेगी, तो में उसकी पढाई में हेल्प कर दूंगा.

    पापा : थैंक यू चाचा जी, मुस्कान कल से तुम स्कूल से आकर लंच के बाद पढाई करने के लिए चाचा जी के पास चली जाना.

    में : जी पापा.

    फिर चाय के बाद मम्मी किचन में चली गयी और दादा जी ने अपना हाथ फिर से मेरे टॉप के अंदर डाल दिया और उन्होंने इस बार नीचे कि तरफ स्कर्ट के अंदर डालने की कोशिश की, लेकिन स्कर्ट टाईट थी इसलिए वो सफल नहीं हुए. फिर वो मेरी पीठ को टॉप के अंदर से ही सहलाते रहे, फिर थोड़ी देर के बाद वो अपने घर जाने के लिए उठे और मुझे स्माइल देते हुए बोले कि कल वो इंतज़ार करेंगे, फिर वो चले गये. उसी रात अगले दिन के बारे में सोचते-सोचते कब मेरी आँख लग गयी मुझे मालूम ही नहीं चला.

    फिर में सुबह उठकर स्कूल के लिए तैयार हो गयी, फिर स्कूल जाते वक़्त मम्मी ने मुझे याद दिलाया कि लंच के बाद दादा जी के यहाँ पढ़ाई के लिए जाना है और में हाँ बोली. फिर स्कूल कैसे ख़त्म हो गया? मुझे पता भी नहीं चला और में घर वापस आ गयी. फिर में लंच करके दादा जी के यहाँ जाने के लिए तैयार होने लगी, उस टाईम मैंने टॉप और स्कर्ट पहने थी.

    अब मैंने दादा जी के घर के दरवाजे पर जाकर घंटी बजाई, फिर दरवाजा ओपन हुआ और अब सामने दादा जी सिर्फ़ एक पजामे में खड़े थे. मुझे देखते ही उनका चेहरा खुशी से चमक उठा और मुस्कुराते हुए बोले कि वो मेरा ही इंतज़ार कर रहे थे.

    अब मेरे अंदर जाते ही उन्होंने दरवाजा अन्दर से बंद कर दिया, और अब में जाकर सोफे पर बैठ गयी और सामने की टेबल पर अपनी किताब रख दी. तभी दादा जी एक ग्लास जूस मुझे देते हुए मेरे बगल में बैठ गये और अब वो मेरी पढ़ाई के बारे में पूछ रहे थे और में धीरे-धीरे जूस पीते हुए उन्हें जवाब दे रही थी, इसी बीच दादा जी ने मेरी जांघ पर हाथ रखकर सहलाना शुरू कर दिया.

    अब मेरा दिल ज़ोर से धड़कने लगा था और में चुपचाप अपना सिर नीचे करके जूस पीने लगी थी. तभी दादा जी ने पूछा कि मुझे बुरा तो नहीं लग रहा है वो मुझे टच कर रहे है, तो मैंने स्माइल देते हुए ना में सिर हिलाया. अब यह सुनकर दादा जी अपना दूसरा हाथ मेरे टॉप के अंदर डालकर मेरी पीठ सहलाने लगे.

    फिर मेरे हाथ को किस करते हुए बोले यहाँ हम सुरक्षित नहीं है और मेरा हाथ पकड़कर बेडरूम में ले गये. अब दादाजी मुस्कुराते हुए बोले यहाँ आराम से बात कर सकते है और हम दोनों बेड पर बैठ गये, फिर दादा जी ने अपना लेफ्ट हाथ मेरे कंधे पर रख दिया और अपने राईट हाथ से मेरे लेफ्ट बूब्स को सहलाने लगे. तब मैंने उनका हाथ पकड़ लिया, लेकिन मैंने उनका हाथ हटाने की कोशिश नहीं की, तो वो बूब्स को धीरे धीरे दबाने लगे. अब मैंने मेरी आँखे बंद कर ली, तभी उन्होंने दोनों बूब्स को दबाते हुए पूछा कि कैसा लग रहा है? तो मैंने कहा अच्छा लग रहा है.

    फिर वो अपना हाथ टॉप के अंदर डालकर मेरे बूब्स को ब्रा के ऊपर से सहलाने लगे और धीरे-धीरे दबाने लगे. अब में अपनी आँखें बंद करके मज़ा ले रही थी और उन्होंने अपना सर मेरे कंधे पर रखकर मेरी गर्दन को चूमना शुरू कर दिया. यह सब मेरे साथ पहली बार हो रहा था और अब में भी गर्म होने लगी थी, तभी दादा जी ने मेरे टॉप को नीचे से पकड़कर ऊपर किया और मेरे दोनों हाथ ऊपर करते ही एक झटके में मेरी टॉप मुझसे अलग हो गयी और अगले ही पल में मेरी ब्रा के हुक खोलकर ब्रा को भी मुझसे अलग कर दिया.

    अब में नीचे सिर्फ़ स्कर्ट में थी और ऊपर से पूरी नंगी थी, मेरी बूब्स देखकर दादा जी के मुँह से वाउ निकल गया और बोले, आआअहह क्या खूबसूरत बूब्स है? जी कर रहा है कच्चा खा जाऊं, क्या किसी ने आज से पहले बूब्स टच किया है? तो फिर मैंने ना में सिर हिलाया और वो एक भूखे बच्चे की तरह मेरे बूब्स को चूसने लगे और अपना हाथ मेरी स्कर्ट के अंदर डालकर मेरी जांघो को सहलाने लगे, तब तक मेरी पेंटी पूरी गीली हो चुकी थी.

    फिर थोड़ी देर में ही दादा जी अपने हाथ से मेरी चूत को पेंटी के ऊपर से ही टच करने लगे तो मैंने अपना हाथ उनके पजामे के ऊपर रख दिया और धीरे-धीरे उनके लंड को दबाने लगी. तभी दादा जी ने अपना पजामा उतार दिया और अब वो सिर्फ़ चड्डी में थे. फिर वो मुझसे बोले कि मुस्कान क्या तुम अपने दोस्त को बाहर नहीं निकालोगी?

    यह कहकर उन्होंने मेरा हाथ अपनी चड्डी के अंदर डाल दिया, अब मुझे ऐसा लगा कि मेरे हाथ में कोई गर्म रोड आ गयी है. फिर मैंने चड्डी में से उनका लंड बाहर निकाला, में लाईफ में पहली बार इतने बड़े और मोटे लंड को देख और छू रही थी, उनका लंड करीब 8 इंच लंबा, और 3 इंच चौड़ा था मैंने एक बार गधे का लंड देखा था दादाजी का लंड भी किसी घोड़े के लंड जैसा लग रहा था और में उसे एक ही नज़र में देखे जा रही थी, जैसे मुझे कोई अजूबा हाथ लगा हो. इसी बीच दादा जी ने अपनी चड्डी ऊतार दी और मेरी स्कर्ट भी खोल दी. अब वो मेरे सामने पूरे नंगे थे और में सिर्फ़ एक पेंटी में थी.

    अब में उनके लंड को अपने हाथ से सहला रही थी और वो मेरे बूब्स दबाते हुए मेरी आँखो में देख रहे थे. फिर धीरे-धीरे वो मेरे चेहरे के पास आकर मेरे लिप को चूमने लगे, अब में भी किस में उनका साथ देने लगी. फिर 2-3 मिनट तक लिप किस करने के बाद दादा जी मेरे सामने खड़े हो गये और अब उनका लंड ठीक मेरे सामने तनकर खड़ा था, मानों जैसे वो मुझे सलामी दे रहा है.

    फिर दादा जी मुझे लंड को मुँह में लेने के लिए बोले और मैंने लंड को दोनों हाथों से पकड़कर मुँह में ले लिया. अब दादा जी मेरे बालों को पकड़कर मेरे सिर को अपने लंड पर आगे पीछे करने लगे और अपनी आँखे बंद करके, उम्म्म हम्मम्मम्म करके सिसकारियाँ निकाल रहे थे. फिर में 3-4 मिनट तक उनका लंड चूसती रही और उन्होंने अचानक से ज़ोर से, आहह करते हुए अपना पूरा पानी मेरे मुँह के अंदर ही छोड़ दिया. उनके लंड के पानी का टेस्ट कुछ अजीब सा था, लेकिन में उनके लंड का सारा पानी पी गयी और मैंने लंड चाट कर साफ कर दिया.

    अब दादा जी ने मुझे उठाकर बेड पर लेटा दिया और मेरी पेंटी को नीचे खींचने लगे, अब देखते ही देखते मेरी पेंटी मुझसे अलग हो गयी और में पूरी नंगी बेड पर लेटी रही. फिर मेरी दोनों टांगो को खोलकर अपना सिर मेरी जांघो के बीच में रख दिया और मेरी चूत की फंको को खोलकर को किस करने लगे, मुझे ऐसी फीलिंग हो रही थी, जैसे कि हज़ारो चीटियाँ मेरी चूत को काट रही हो, मुझे इतनी अच्छी फीलिंग पहले कभी नहीं आई थी.

    फिर वो मेरी चूत को चाटने लगे और देखते ही देखते अपनी जीभ मेरी चूत में डालने लगे, अब वो मेरी चूत को चूसते रहे और अब में उनका सिर पकड़कर दबाब डाल रही थी और चूत चुसाई का मज़ा ले रही थी. अब करीब 5-6 मिनट तक चुसाई करवाने से मेरी चूत से पानी निकलने लगा था और वो मेरी चूत पर मुँह लगाकर पूरा पानी पी गये. अब पानी निकलने के बाद में हल्का महसूस कर रही थी और अब दादा जी मेरे ऊपर आकर मेरे बूब्स के साथ खेलने लगे और अब में भी उनके लंड को अपने हाथ से सहलाते हुए खेलने लगी.

    फिर 2 मिनट में ही दादा जी का हलब्बी लंड सलामी देते हुए फिर से खड़ा हो गया, तो वो मेरी दोनों टांगो के बीच में आकर बैठ गये. अब उन्होंने एक तकिया लेकर मेरी कमर के नीचे रख दिया, ताकि मेरी चूत थोड़ी ऊपर हो जाए. फिर बेड के साईड में टेबल पर रखी वेसलिन क्रीम निकाल कर थोड़ी मेरी चूत को खोलकर उस पर लगाई और थोड़ी अपने लंड पर लगा ली, फिर अपने हाथ से लंड को पकड़कर मेरी चूत के होल के सामने रगड़ने लगे.

    फिर वो मेरे ऊपर लेट गये और मेरे लिप पर किस करने लगे, अब में भी उनके किस का साथ दे रही थी और इसी बीच दादा जी ने एक ज़ोर के धक्के के साथ अपना लंड मेरी चूत के अंदर डाल दिया, तो में दर्द के मारे चिल्लाने लगी, लेकिन उन्होंने मेरे लिप को अपने लिप से बंद कर रखा था और अब में उनको हटाने लगी, लेकिन उन्होंने मेरी कमर को पकड़ कर रखा था और में हिल भी नहीं पा रही थी, अब दर्द के मारे मेरी आँखो से आंसू निकलने लगे थे.

    फिर दादा जी ने मेरे बूब्स को चूसा और फिर थोड़ी देर में जब मेरा दर्द कम हुआ तो वो फिर से अपनी कमर चलाने लगे. अब उनका लंड धीरे-धीरे चूत में अंदर बाहर होने लगा था, फिर जब में थोड़ी नोर्मल हुई तो उन्होंने और एक ज़ोर के धक्के से अपना पूरा लंड मेरी चूत में अंदर डाल दिया और तभी ज़ोर से पकड़कर मुझे किस करने लगे और धीरे-धीरे मेरा दर्द कम होने लगा और मेरा दर्द कम होने के बाद लंड को अंदर बाहर करके चोदने लगे.

    फिर थोड़ी देर में मुझे भी मज़ा आने लगा और में अपनी कमर उठा- उठाकर उनका साथ देने लगी और अब मुझे देखकर दादा जी भी जोश में आ गये और ज़ोर ज़ोर से मुझे चोदने लगे. फिर 7-8 मिनट तक चुदवाने के बाद मेरे पानी छोड़ने के बाद दादा जी भी कुछ 15-20 धक्के लगाकर वो भी अपना पानी मेरी चूत के अंदर डाल कर झड़ गये. अब चुदाई के बाद हम दोनों ही थक चुके थे और कुछ देर तक हम दोनों वैसे ही नंगे बेड पर पड़े रहे. दोस्तों यह थी मेरी पहली चुदाई की कहानी

  • ट्रक ड्राइवर बना मेरे जिस्म का मालिक

    दोस्तो, मेरा नाम काजल है, उम्र 23 साल, फिगर साइज 33-28-34 है.

    मैं दिखने में सांवली हूँ, मेरा कोई बॉयफ्रेंड नहीं था।
    मेरी चुत की आग ने मुझे जैसे रंडी ही बना दिया।

    तो अब माय सेक्स डिजायर X कहानी शुरू करती हूँ.

    मैं काजल अपनी दुनिया में खुश रहती थी.
    मेरी सहेलियों के ब्वॉयफ्रेंड थे और वे सब उनके साथ जवानी का मजा करती थीं.

    चुदाई के बाद मेरी सहेलियां जब मिलतीं तो वे सब चटखारे ले लेकर अपनी चुदाई के किस्से सुनातीं.
    मैं उनकी सेक्स की बातों को सुनकर गर्म हो जाती और बाद में अपनी बुर में उंगली करके अपनी बुर को, माय सेक्स डिजायर को ठंडा कर लेती थी.

    इसी तरह मैं रोज कॉलेज जाती और घर आ जाती.

    एक दिन मेरी सहेली फोन पर एक पोर्न साईट पर किसी से चैट कर रही थी.
    मैंने देखा तो उससे पूछा कि यह सब कैसे करते हैं.

    तो उसने मेरी भी आईडी उस साईट पर बना दी.

    अब मैं भी उस साईट पर रोज आने लगी.
    पर मुझे किसी का कोई मैसेज ही नहीं आता था.

    एक दिन मेरी सहेली ने पूछा- चैट हो रही है न वहां पर … अब तो मजा आ रहा होगा!
    तो मैंने उसको मना करते हुए सारी बात बताई.

    उसने मेरा फोन लिया और साईट को खोल कर उसने मेरी प्रोफाइल में 4-5 गंदी और अश्लील सी फोटो डाल दीं, साथ ही उसने बहुत कुछ चुदाई वाला मसाला भी लिख दिया.
    मैं शाम को घर आ गई.

    अगले 2 दिन तक कॉलेज की छुट्टी थी, तो मैं अपने घर के काम में व्यस्त रही.

    रविवार को रात को मैं बोर हो रही थी तो मैंने सोचा कि अब साईट खोल कर वीडियो देखा जाए और अपनी बुर को ठंडी कर लूं!
    मैंने अपने कमरे को अन्दर से बन्द किया और सलवार उतार कर बैड पर बैठ गई.

    मैंने मोबाईल पर पॉर्न साईट खोली तो देखा किसी का मैसेज आया हुआ था.
    तभी मैंने मैसेज खोला तो उसमें एक लड़के ने मेरी फ़ोटोज़ की बहुत तारीफ की थी.

    मैं बहुत खुश हुई.
    मैंने भी उसको धन्यवाद का रिप्लाई कर दिया.

    अब मैं गंदी फिल्म देखकर माय सेक्स डिजायर X शांत करने लगी.
    थोड़ी देर में ही उस लड़के का वापस रिप्लाई आया और इस बार उसने अपने लंड की तस्वीर के साथ मैसेज भेजा था.

    उस मैसेज में लिखा था कि लंड पसंद आया हो, तो रिप्लाई देना.
    उसका लंड देख कर ही मेरी बुर पानी छोड़ने लगी.

    उसका लंड सच में काफी लंबा और मोटा था.
    थोड़ी देर बाद मैंने उसको रिप्लाई किया- तुम्हारा बहुत अच्छा है!

    वह- धन्यवाद, तुम कहां से हो?
    मैंने अपनी जगह बता दी.

    वह- तुम तो बहुत सेक्सी हो, आज तक कितने लंड ली हो?
    मैं- अभी तक एक भी नहीं.
    वह- हो ही नहीं सकता है, तेरी बुर की फोटो देख कर लगता है कि तू बहुत चुदी है!

    मैं- वह मैंने तो ऐसे ही लगा दी है.
    वह- तो अपनी असली बुर ही दिखा दो न!
    मैं- नहीं!

    वह- अच्छा तो अपनी एक सेक्सी सी फोटो तो दिखा दो, अब मना मत करना.
    मैं- ठीक है, पर एक ही फ़ोटो दूँगी.
    वह- हां, पर अपनी ही दिखाना!

    मैंने उसको अपनी फोटो भेज दी, उसने मेरी बहुत तारीफ की.
    मैं भी बहुत खुश हुई.

    अब जब भी मौका मिलता, हम बात करने लगते.

    कुछ ही समय बाद हम दोनों ने अपने नम्बर भी एक दूसरे के साथ शेयर कर लिए थे.
    अब हम दोनों वीडियो कॉल पर भी बात करते थे.

    कुछ दिनों तक बात हुई, तो हम दोनों खुल कर बात करने लगे.
    हम दोनों को सेक्सी बातें करते हुए एक महीने से ऊपर हो गया था.

    एक दिन हम दोनों नंगे होकर बात कर रहे थे.

    हम दोनों जब भी नंगे होते थे तो अपना चेहरा नहीं दिखाते थे.
    उस दिन उसने मुझसे कहा- काजल मैं कोई जवान लड़का नहीं हूँ. मैं 45 साल एक हट्टा-कट्टा मर्द हूँ.

    मैंने भी सोचा कि यह मजाक कर रहा है.
    वह बोला- लोगी मेरे लंड को?

    मैंने भी कहा- कब से तो तड़फ रही हूँ … पर आप हो कि आते ही नहीं हो!
    तो वह एकदम से बोल पड़ा- तुम रात को 10 बजे घर से बाहर आ सकती हो?

    मैंने सोची कि यह मजाक कर रहा होगा.
    तो मैंने भी हां कर दी.
    अब वह ऑफ लाइन हो गया.

    रात को ठीक 10 बज कर 10 मिनट पर उसका फोन आया ‘कहां हो तुम, मैं बाहर इंतजार कर रहा हूँ … जल्दी बाहर आओ!’
    मैं कुछ समझ पाती कि उसने फोन रख दिया.

    मैंने सोचा कि मैंने तो उसको अपने घर का पता अभी तक बताया ही नहीं था, तो कहां से बाहर आ गया!

    मैं फिर घर के पीछे वाले दरवाजे से बाहर आ गई.

    बाहर अन्धेरा बहुत था, मैं एक साइड खड़ी हो गई.

    तभी एक हाथ निकल कर आया और मेरे मुँह पर आ गया.
    मैं एकदम से इस हरकत से बहुत डर गई.

    जब मैंने पीछे देखा तो पास के रमेश अंकल थे.

    मैं उनसे छूट कर दूर हुई और बोली- यह क्या गंदी हरकत कर रहे हो अंकल?
    अंकल बोले- वही, जो रोज फोन में करते थे.

    अब मैं समझ गई कि मैं जिसको एक लड़का समझ रही थी, वह लड़का रमेश अंकल हैं.

    अंकल ने मुझे पकड़ लिया और मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए.
    वे पागलों की तरह मुझे किस किए जा रहे थे.

    अब अंकल मेरी कमीज के ऊपर से मेरे बूब्स को दबाने लगे.
    मैंने उनको धक्का देकर पीछे कर दिया.

    अंकल बोले- क्या हुआ?
    मेरे मुँह से निकल गया कि कोई देख लेगा अंकल!

    ‘अब यहां इस टाइम कौन आएगा?’
    मैं- नहीं, कोई भी आ सकता है.

    अंकल ने मेरा हाथ पकड़ा और वे मुझे एक ट्रक के पास ले आए.
    उन्होंने जल्दी से ट्रक के गेट को खोला और मुझे ट्रक के अन्दर ले गए.

    अंकल ने ट्रक के अगले शीशे पर स्क्रीन लगा दी.
    इससे ट्रक के अन्दर अन्धेरा हो गया.

    अब अंकल ने मुझे पकड़ा और मेरे होंठों पर अपने होंठ रख कर चूसने लगे.
    मुझे भी मजा आने लगा था तो मैं भी अंकल का साथ देने लगी थी.

    थोड़ी देर में ही हम दोनों पूरे नंगे हो गए.

    अंकल ट्रक की पिछली सीट पर लेट गए और लंड को हाथ में पकड़कर बोले- चूस रानी, पूरा चूस!
    यह कह कर उन्होंने मेरा एक दूध पकड़ लिया और उसे मसलते हुए सहलाने लगे.

    मैंने भी ब्लू फिल्मों में लंड की चुसाई देखी थी और मेरी सहेलियां भी खुल कर बताती थीं कि वे अपने ब्वॉयफ्रेंड्स का लंड चूसती हैं.

    यह सब सोच कर मैंने रमेश अंकल के लंड को पकड़ा और अपने मुँह में लेकर चूसने लगी.

    अंकल का लंड सच में बहुत बड़ा था; पूरा लंड मुँह में नहीं आ रहा था.
    तो अंकल अपनी गांड उठा कर अपना लंड पूरा का पूरा मेरे मुँह में डालने की कोशिश कर रहे थे.

    मैं अंकल के लंड को चूसने के साथ एक हाथ से अपनी बुर को भी सहला रही थी.

    कुछ देर बाद अंकल उठ गए और बोले- लंड की गोलियां भी चूस ले … बहुत मजा आ रहा है तेरे साथ!
    मैं अंकल के टट्टे भी मुँह में लेकर चूसने लगी.

    अंकल बोले- साली काजल, तू तो वीडियो देख कर ही एक पूरी रंडी के जैसा मजा दे रही है!
    अंकल के मुँह से ‘रंडी’ शब्द सुनते ही मैं उनके लंड को और जोर से चूसने लगी.

    अंकल ने अब मुझे नीचे लिटाया और वे मेरी बुर चाटने लगे.
    तभी अंकल ने एक उंगली मेरी गांड में डाल दी जिससे मेरी हल्की सी चीख निकल गई.

    अंकल अपने काम में लगे रहे.

    कुछ ही देर बाद अंकल मेरी गांड पर टूट पड़े.
    उनकी एक उंगली मेरी बुर के अन्दर थी और जीभ मेरी गांड में चलने लगी थी.
    उनकी नर्म गर्म जीभ से मुझे बहुत मजा आ रहा था.

    कुछ पल बाद अंकल मेरे ऊपर चढ़ गए और अपने लंड को मेरी बुर पर घिसने लगे.
    उन्होंने अपने एक हाथ से मेरा मुँह बन्द कर दिया और एक कड़क झटका मारते हुए अपना लंड अन्दर पेल दिया.

    इस एक ही कड़क झटके में उनका लंड मेरी बुर को फाड़ता हुआ अन्दर चला गया.

    मेरे मुँह से निकली हुई चीख मेरे मुँह में ही दब कर रह गई.
    मुझे बेहद दर्द हो रहा था और चाह कर भी मैं चिल्ला नहीं पा रही थी.

    तभी अंकल ने फिर से झटका मारा.
    इस बार ऐसा लगा मानो उनका पूरा लंड मेरे पेट के अन्दर चला गया हो.

    इसके बाद थोड़ी देर तक अंकल मेरे ऊपर वैसे ही चढ़े रहे और उनका लंड मेरी बुर में अपनी जगह बनाता रहा.

    फिर मेरा दर्द कम हुआ तो अंकल धीरे धीरे अपने लंड को बुर में आगे पीछे करने लगे.

    कुछ देर बाद अंकल ने मेरे मुँह से अपना हाथ हटा दिया तो मैं जोर जोर से सांस लेने लगी.
    मैं बोली- बाहर निकाल लो अंकल, बहुत दर्द हो रहा है.

    अंकल ने मेरी कोई बात नहीं सुनी और मेरी बुर को चोदना जारी रखा.

    कुछ देर बाद मुझे भी अंकल के लंड से मजा आने लगा था.
    मैं भी गांड उठाकर अंकल का साथ देने लगी.

    थोड़ी देर में ही मेरी बुर ने पानी छोड़ दिया और मैं निढाल हो गई.
    अंकल लगातार अपनी गंदी गंदी गालियों के साथ मुझे चोदे जा रहे थे- आह साली छिनाल रंडी … बहन की लौड़ी बड़ा मजा दे रही है तेरी बुर … आह आज तो साली तेरी बुर का भोसड़ा बना कर रहूँगा!

    कुछ ही देर में मैं फिर से चार्ज हो गई और अंकल की चुदाई में सहयोग करने लगी.

    अंकल अब झड़ने वाले थे.
    तो उन्होंने मुझे पेट के बल कर दिया और सारा पानी मेरी गांड पर छोड़ दिया.

    उसके बाद अंकल ने अपने पानी को मेरी गांड में मल दिया.

    मैं हाँफ रही थी और मुझे बेहद सुकून मिल रहा था.
    मेरा जिस्म फूल की भान्ति हल्का हो गया था.
    चुदाई के बाद इतना चैन मिल सकता है, इसका अहसास मुझे पहली बार हुआ था.

    मैं अंकल के साथ चिपक कर सो गई.

    कुछ देर बाद अंकल मेरे एक दूध को मसलते हुए बोले- साली रंडी, तेरी गांड का भी मजा लेना है! मुझे पता नहीं था कि तेरे जैसी मस्त रंडी मुझे यहीं मिल जाएगी.
    यह बोलते हुए अंकल ने मेरे चूतड़ों पर अपना एक हाथ भी फेर रहे थे.

    तभी अंकल ने एक उंगली मेरी गांड में घुसेड़ दी.
    मुझे फिर से बहुत दर्द हुआ.
    पर अंकल को कोई फर्क नहीं पड़ रहा था.

    अंकल ने मेरी गांड को उंगली से चोदना शुरू कर दिया.

    कुछ ही देर में अंकल ने अपनी एक और उंगली गांड में डाल दी.
    मुझे भी अब मजा आ रहा था.

    अंकल का लंड भी अब टाईट हो गया था. अंकल ने मुझे कुतिया बना दिया.
    मैंने भी अपने हाथों से अपनी गांड को पकड़ कर खोल दिया.

    अंकल ने मेरी गांड और अपने लंड पर थूक लगाया और लंड को गांड में सैट कर दिया.

    उसके ठीक बाद अंकल ने जोर का झटका मारा तो लंड गांड के अन्दर चला गया.

    मैं तड़फ उठी.
    अंकल बोले- शाबाश रंडी, बस थोड़ा और सह ले.

    यह कहते हुए अंकल ने दूसरे झटके में अपना पूरा लंड गांड में डाल दिया.

    मेरी तो समझो मेरी गांड फट ही गई थी.
    उनका हाथ मेरे मुँह पर जमा हुआ था तो आवाज बंद थी.

    अंकल अब मेरी गांड में लंड के साथ थप्पड़ भी मार रहे थे- साली रंडी बहुत मस्त कुतिया है तू!

    वे यह सब बोल कर गांड फाड़ चुदाई किये जा रहे थे.
    अंकल कभी मेरे बूब्स पकड़ कर दबाते तो कभी मुझे बालों से पकड़ कर एक घोड़ी की तरह खींचते.

    कुछ 25 मिनट तक मेरी गांड चोदने के बाद अंकल ने अपने दोनों हाथों से मेरे दोनों दूध दबोचे और वे मेरी गांड में ही झड़ गए.
    झड़ कर वे मेरे ऊपर ही लेट गए.

    कब हम दोनों को नींद आ गई, कुछ पता ही नहीं चला.
    जब मेरी नींद खुली तो मैंने देखा कि सुबह होने वाली है.
    मैंने अपने कपड़े पहने, अंकल नंगे ही सोए थे.

    मैं ट्रक से बाहर निकल कर घर आ गई.

    अगले दिन कॉलेज भी नहीं गई, चूत से ज्यादा मेरी गांड में दर्द हो रहा था.

    उसके बाद अंकल ने मेरी बहुत बार चुदाई की, कभी ट्रक में चोदा तो कभी बाहर खड़े खड़े ही चोद देते थे.

    एक दिन अंकल और उनके दोस्त ने एक साथ मुझे मिल कर चोदा.
    यह घटना मैं आपको अगली सेक्स कहानी में बताऊंगी.

  • पहले पहले प्यार में पड़कर बुर चुदाई

    मेरा नाम प्रिया है और मैं आपको, प्यार में पहली बार हुई मेरी चुदाई के बारे में बता रही हूँ.

    मेरा राहुल नाम का एक ब्वॉयफ्रेंड था, हम दोनों एक दूसरे से बहुत प्यार करते थे.

    राहुल हमारे घर के पास ही में रहता था. राहुल और मैं साथ में पढ़ाई करते थे.

    BF Chudai GF कहानी ऐसे शुरू हुई.

    एक दिन मां बाजार से खरीददारी करने के लिए गई थीं और घर में मैं अकेली ही थी.
    राहुल हर रोज की तरह पढ़ाई करने के लिए घर पर आया.
    हम दोनों साथ में पढ़ाई करने के लिए बैठ गए.

    राहुल ने मुझसे पूछा- तुम्हारे घर में कोई नहीं है क्या?
    मैंने कहा- पापा काम पर गए हैं और मां बाजार से सामान आदि लाने गई हैं.

    राहुल बोला- मतलब हम दोनों ही घर में हैं!
    मैंने हाँ कहा.
    अब हम दोनों पढ़ाई करने बैठ गए.

    राहुल ने मुझसे पूछा- तुम मुझे कितना प्यार करती हो?
    मैंने कहा- बहुत!

    राहुल बोला- मैं जो तुम्हें कहूंगा, वह करोगी!
    मैं बोली- हां!

    राहुल मेरे पास आया और मेरी तरफ देखने लगा.
    फिर अचानक से वह मुझे किस करने लगा, मेरे होंठों को चूसने लगा.

    मैं राहुल से कहने लगी- मुझे छोड़ो … ये सब अभी नहीं राहुल!
    पर राहुल मेरी बात नहीं सुन रहा था, वह मुझे चूमता ही जा रहा था.

    मैंने उस दिन जींस पैन्ट और टी-शर्ट पहनी थी.
    राहुल का एक हाथ मेरी जींस के ऊपर से मेरी गांड को दबा रहा था और दूसरे हाथ से वो मेरे स्तनों को दबा रहा था.

    उसने मुझे चूमते चूमते मेरी टी-शर्ट निकाली और मेरी गर्दन पर चूमने लगा.
    अब मैं राहुल के सामने ब्रा और जींस पैन्ट में थी.

    वो मेरी नाभि को चूमने लगा.
    मेरी सांसें धीरे धीरे तेज होने लगीं.

    राहुल मेरी पैन्ट निकालने ही वाला था, तभी दरवाजे की घंटी बजी.
    मैंने राहुल को दूर धकेल दिया और जल्दी कपड़े पहन कर दरवाजे खोलने के लिए गई.

    मां मार्केट से वापस आ गई थीं.
    रोहन और मैं उनके सामने खड़े थे.

    मेरी मां ने राहुल से पूछा- कैसी पढ़ाई चल रही है?
    राहुल- हां आंटी, पढ़ाई अच्छी चल रही है.

    मम्मी अन्दर चली गईं और राहुल मुझे गुस्से से देखता हुआ वहां से चला गया.
    चूंकि मैंने उसे धकेल दिया था इसलिए वह मुझ पर गुस्सा हो गया था.

    मां मुझसे बोलीं- प्रिया राहुल को क्या हुआ, ये क्यों चला गया?
    “कुछ नहीं मां … उसकी तबीयत ठीक नहीं है.”

    बाद में मैंने राहुल को कॉल किया- राहुल क्या हुआ, तुम उस दिन घर से गुस्से से क्यों निकल गए?
    राहुल- प्रिया तुम मुझसे प्यार नहीं करती हो!

    मैं- मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ.
    राहुल- फिर तुमने मुझे धकेला क्यों?
    मैं- मैं डर गई थी. मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था और दरवाजे की घंटी बजी इसलिए मैंने तुम्हें धकेल दिया.

    राहुल- प्रिया फोन रखो, तुम मुझसे बात मत करो.
    मैं- राहुल तुम गुस्सा मत करो, पंद्रह दिन बाद मम्मी पापा दोस्त के शादी में जाने वाले हैं. उस दिन तुम घर आना और जो चाहे वह कर लेना, मैं कुछ नहीं कहूंगी.

    राहुल- सच में कुछ नहीं कहोगी ना!
    मैंने हां कहकर फोन रख दिया और खाना खाकर सोने चली गई.

    सोते समय राहुल ने जो आज किया, मैं उसके बारे में सोच रही थी.
    आज दोपहर में जो राहुल ने आग लगाई थी, मुझे उसे हर हाल में बुझाना ही था इसलिए मैंने अपने रूम का दरवाजा बंद किया और अपनी पैंट निकाल दी.

    मैं एक हाथ से चूत को सहलाने लगी, उसके अन्दर उंगली अन्दर बाहर करने लगी.
    दूसरे हाथ से मैं अपने मम्मों को दबाने लगी.

    कोई दस पंद्रह मिनट तक अपनी चूत को सहलाने के बाद मैं झड़ गई और सो गई.

    अगले दिन मैंने बाथरूम में जाकर अपनी चूत के सारे बाल साफ किए और बुर को शीशे में देखने लगी.
    मेरी चूत एकदम चिकनी दिखने लगी थी.

    मैं शीशे में देख कर फिर से अपनी बुर को सहलाने लगी.
    मुझे फिर से चुदास चढ़ने लगी और मैं बुर में कुछ डालने की सोचने लगी.

    मैं जल्दी से कमरे में आई और बुर में पेलने के लिए कुछ ढूँढने लगी.
    मुझे गोल हत्थे वाली कंघी दिखाई दी और मैं उसी को लेकर वापस बाथरूम में आ गई.
    मैंने उसे बुर में रगड़ना चालू किया तो मुझे मजा आने लगा.

    फिर मैंने उसे शैंपू से चिकना किया और बुर में डालने लगी.
    वो हत्था मेरी बुर में आधा इंच से कुछ ज्यादा ही जा पा रहा था.
    उसके बाद शायद मेरी बुर की झिल्ली उसे अन्दर जाने से रोक रही थी.

    मैंने कंघी के हत्थे को और अन्दर नहीं डाल बस उससे अपनी बुर के दाने को रगड़ती रही.
    कुछ ही देर बाद मैं झड़ गई और बाहर आ गई.

    उस दिन दोपहर में खाना खाकर मुझे बहुत मस्त नींद आई.

    रात को मैंने अन्तर्वासना की साइट खोली और एक सेक्स कहानी पढ़ने लगी.
    उसमें गांड को किस तरह से मरवाते हैं, उसको लेकर लिखा था.

    मेरे दिमाग में अपने आशिक के लिए गांड का छेद खोलने की सोची और अपने उसी प्यारे से कंघी के हत्थे को उठाया लिया.

    मैं उसमें वैसलीन लगा कर उसे अपनी गांड के छेद में लगा कर छेद को कुरेदने लगी.
    गांड ने भी मुँह खोल दिया और वो हत्था मेरी गांड में घुस गया.

    हालांकि अभी वो कुछ ही अन्दर जा पाया था कि दो वजहों से वो रुकने लगा.
    एक तो शायद गांड काफी कसी हुई थी और मुझे उसकी अन्दर की बनावट के बारे में मालूम नहीं था इसलिए मैं डर रही थी कि कुछ गलत न हो जाए.

    दूसरी बात ये थी कि उस हत्थे की बनावट कुछ ऐसी थी कि वो आगे कुछ मोटा सा हो गया था.
    मतलब शुरुआत में पतला गोल था और आगे जाकर ज्यादा मोटा था.
    इसलिए वो मेरी गांड में नहीं जा रहा था.

    अब मैं जितना हत्था गांड में घुस गया था, उतने से ही अपनी गांड को कुरदने लगी.
    मुझे मजा आने लगा.

    फिर मैंने उस हत्थे को अपनी गांड में लगा कर छोड़ दिया और गांड को कसके और ढीली करके उसे अपनी गांड में फुदकता सा महसूस करने लगी.

    आह मुझे बेहद मजा आने लगा था.
    तभी मेरे हाथ की हथेली ने मेरी बुर को सहलाया तो मुझे डबल मजा आने लगा.

    उस दिन काफी देर तक मैंने ऐसा ही किया और झड़ कर एक ही करवट लिए सो गई.
    कंघी का हत्था सारी रात मेरी गांड में ही घुसा रहा.

    सुबह मुझे वो कंघी का हत्था मेरे हाथ से टकराया तो बरबस ही मुझे मुस्कान आ गई और मैंने उसे निकाल दिया.

    मैं बाथरूम में गई और पॉटी करने के लिए कमोड पर बैठी, तो पॉटी करते समय मुझे मेरी गांड में बड़ी सुरसुरी सी हुई और काफी अच्छा लगा.

    अब मैं ये रोज करने लगी.
    इससे मेरी गांड ढीली होकर आसानी से कंघी के हत्थे को तीन चार इंच तक अन्दर लेने लगी थी.

    इससे मुझे लगने लगा था कि मैं अपने आशिक का लंड अपनी गांड में बड़ी आसानी से ले लूँगी.
    ये मैंने एक सरप्राइज के रूप में उसे देने का तय किया था.

    अब वो दिन आ गया था, जिस दिन मेरी चुदाई होने वाली थी.

    मम्मी और पापा शादी के लिए निकल गए.
    मैं राहुल का इंतजार कर रही थी.

    तभी दरवाज़े की घंटी बजी.
    मैंने जाकर दरवाजा खोला.
    सामने राहुल था.

    मैंने राहुल को अन्दर बुलाया और उसे अपने कमरे में लेकर गई.
    वो मेरी तरफ देख रहा था.

    मैं- राहुल आज तुम मेरे साथ जो करना चाहते हो, वो कर सकते हो. मैं तुम्हें कुछ नहीं कहूंगी.

    राहुल मेरे पास आया और मुझे चूमने लगा.
    मेरी चूत को हाथ से सहलाने लगा और जल्दी ही वो उतावला हो गया.

    उसने मेरी जींस टी-शर्ट को निकाला. मुझे ब्रा और पैन्टी में देख कर राहुल का लंड पैंट के अन्दर ही उछलने लगा था.

    उसकी पैंट का उभार मुझे उसके फूले हुए लंड का अहसास करवाने लगा था.
    मैंने उसके लंड पर हाथ फेरा, तो राहुल ने बड़े नशीले नदाज में मुझे देखा.

    उसके बाद राहुल ने मुझे घुटनों पर बिठाया और उसने अपनी शर्ट निकाल कर मुझसे कहा- मेरी पैंट निकालो प्रिया!

    मैं राहुल की पैंट निकालने लगी.
    उसका तना हुआ लंड मेरे मुँह के सामने आ गया.

    मैं सामने से आज पहली बार किसी का लंड देखने और चूसने वाली थी.

    राहुल का लंड बहुत मोटा और लंबा था.

    उसने मेरे मुँह के अन्दर लंड डाला और मुझे लंड चूसवाने लगा.
    राहुल के लंड स्वाद कुछ अजीब सा था.
    मैंने राहुल से कहा- मैं तुम्हारा लंड नहीं चूसूँगी.

    राहुल कहने लगा- तुमने मुझे क्या कहा था कि मैं तुम्हारे साथ जो चाहे कर सकता हूं. अब ये चीटिंग है.

    मैंने ओके कहा और फिर मैंने राहुल के लंड के ऊपर स्ट्राबेरी फ्लेवर की लिपबाम लगा कर लंड चूसने लगी.

    अब लंड का स्वाद स्ट्राबेरी की तरह था.
    मैं राहुल का लंड मजे से चूसने लगी.

    थोड़ी देर के बाद राहुल ने मुझे बेड पर लिटा दिया और मेरी पैंट निकाल कर मेरी पैंटी निकाल दी.
    वो मेरी चूत को चूसने लगा.

    राहुल बोला- प्रिया तेरी चूत का स्वाद स्ट्राबेरी की तरह है.
    मैंने कहा- हां मैंने तेरे आने से पहले अपनी चूत पर स्ट्राबेरी फ्लेवर की लिप बाम लगाई थी.

    राहुल मेरी चूत को बहुत देर तक चूसता रहा.
    इसके बाद मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया.
    राहुल ने मेरी चूत का सारा पानी पी लिया.

    अब राहुल ने मेरी चूत पर थूक लगाया और मेरी चूत में जोर से लंड घुसेड़ कर धक्के मारने लगा.
    मैं दर्द के कारण चिल्लाने लगी. राहुल का मोटा लंड मेरी चूत में अभी आधा ही गया था.

    राहुल ने मेरी चीख पुकार को नजरअंदाज किया और दो तीन तेज धक्के मारकर अपना पूरा लंड अन्दर पेल दिया.
    वो लंड पेल कर रुक गया और मुझे सहलाने चूमने लगा.

    कुछ देर के बाद मेरा दर्द जाता रहा और मुझे भी मजा आने लगा.
    मैं अपनी गांड उठाने लगी तो राहुल समझ गया और वो मुझे धकापेल चोदने लगा.

    उसके बाद मैं राहुल से कहने लगी- आह मजा आ रहा है … और जोर से … और जोर से चोदो मुझे राहुल!
    अब मेरे मुँह से चुदासी सिसकारियां निकलने लगी थीं- आह हाआ हां … बहुत मजा आ रहा है राहुल!

    राहुल ने काफी देर तक मेरी चुदाई करने के बाद कहा- मैं झड़ने वाला हूँ.
    मैंने राहुल से कहा- तुमने कॉन्डम नहीं पहना है, तो सारा रस मुझे पिला दो.

    राहुल ने मेरी चूत से लंड निकाला और मेरे मुँह में डाल दिया.
    मैं लंड चूसने लगी.

    कुछ ही पलों में राहुल मेरे मुँह में झड़ गया.
    मैंने उसका सारा रस पी लिया.

    हम दोनों बेड पर ही लेट गए.

    मैंने राहुल से कहा- खाने का टाइम हो गया है. तुम यहां पर ही खाकर चले जाओ.
    राहुल बोला- ठीक है.

    मैं बेड से उतर कर कपड़े पहनने लगी.

    राहुल बोला- अभी रुको प्रिया, तुम कपड़े मत पहनो. वैसे भी घर में हम दोनों के अलावा कोई नहीं है.
    मैंने पहले तो मना किया, पर बाद में मैं मान गई.

    हम दोनों नंगे ही किचन में चले गए.

    मैं प्लेट में खाना ले रही थी और राहुल पीछे से मेरी गांड को ताड़ रहा था.
    उसका लंड मेरी गांड देख कर खड़ा हो गया.

    मैंने ये सब देख लिया था.
    मुझे पता लग गया कि राहुल को मेरी गांड पसंद आ गई है और वो मेरी गांड मारना चाहता है.

  • सुहागरात में फटी बीवी की फटी चूत का इलाज

    मेरी नयी नयी शादी हुई थी. मन में सुहागरात मनाने का जोश था और उत्साह भी. चूत चुदाई के हसीन ख्वाब देख रहा था. बड़ी मुश्किल से मैंने अपनी शादी की रस्में खत्म कीं और फिर चुदाई के लिए तैयारी करने लगा.

    नई नवेली पत्नी की चुदाई को लेकर बहुत उत्साहित था. मेरी पत्नी के बारे में आपको क्या बताऊं. वो दिखने में ऐसी थी कि आलिया भट्ट को शादी का जोड़ा पहना दिया गया हो. हूबहू आलिया की कॉपी थी.

    रात को अपने कमरे में पहुंचा तो मेरा लंड बल्ले बल्ले कर रहा था. सुहागरात की सेज पर पहुंचने से पहले ही शेरवानी की पजामी में तन गया था. एक एक पल का इंतजार करना मुश्किल हो रहा था. परीशा से मेरी बात शादी से पहले भी होती थी. फोन पर सब कुछ शेयर कर लिया था. बस अब दो जिस्मों का एक हो जाना बाकी था.

    मेरी पत्नी परीशा एकदम से नाजुक और हसीन सी कली थी. कमरे में पहुंचा तो रात के दस बज गये थे. मैंने जाते ही दरवाजा लॉक कर दिया. अब घूंघट उठाने और मुंह दिखाई जैसी रस्म के लिए सब्र नहीं हो रहा था. मैंने जाते ही परीशा को अपनी बांहों में ले लिया और उसे लेकर लेट गया.

    जल्दी ही दोनों एक दूसरे के जिस्मों की जैसे तहें खोलने लगे. मैंने उसके आभूषण उतारे और फिर उसका ब्लाउज और लहंगा. फिर पेटीकोट में उसकी नंगी चूचियों को पीते हुए उसको लेकर चूसने लगा.

    मेरी दुल्हन भी पूरी चुदासी हो रही थी. मेरे जिस्म को बांहों में भर रही थी. काफी देर तक उसके दूध से सफेद उरोजों को पीने के बाद मैंने परीशा का पेटीकोट भी उतार दिया. उसकी नयी नवेली चूत ने अपना मीठा रस छोड़ना शुरू कर दिया.

    मैंने परीशा की चूत पर मुंह रख दिया और उसकी चूत का रसपान करने लगा. दो मिनट के अंदर ही वो अपनी चूत को मेरे मुंह की ओर उठाने लगी थी. मैं भी पूरी शिद्दत के साथ अपनी पत्नी की चूत के रस को पी रहा था.

    फिर परीशा ने भी शर्म का गहना उतार फेंका और मुझे नंगा करने लगी. मेरी कमीज को उतारा और फिर नीचे की पजामी को. मैंने वी-शेप का अंडरवियर पहना हुआ था. मुझे नीचे लिटा कर मेरी पत्नी मेरी फ्रेंची के ऊपर से ही तने हुए लौड़े को अपनी जीभ से चाटने लगी.

    मेरे लंड का तो पहले से ही बुरा हाल हो गया था. परीशा की चूचियों को पीते हुए ही उसने अपनी मिठास मेरी फ्रेंची में चारों ओर फैला दी थी. इधर परीशा भी लौड़े के रस को मेरी फ्रेंची से ऐसे चूस रही थी जैसे अंडरवियर के कपड़े में अमृत लगा हो.

    परीशा ने मेरे अंडरवियर को खींच दिया और मेरे लंड को मुंह में भरकर चूसने लगी. इससे पहले मैंने परीशा को अपने लंड की पिक्स सेक्स चैट के दौरान उसके फोन में भेजी हुई थी. वो शायद मेरे लंड को देख कर शादी से पहले ही चूत में उंगली भी कर चुकी थी. इसलिए सारी शर्म छोड़कर वो लंड को पी रही थी.

    जैसे ही उसने मेरे लंड को मुंह में भरा तो मैं जन्नत की सैर करने लगा. मेरे हाथ मेरी नंगी दुल्हन के सिर को पकड़ कर लंड पर दबाने लगे. वो भी जैसे रंडियों से दीक्षा लेकर आई थी. 6.5 इंच का लौड़ा गले तक उतार रही थी.

    पांच मिनट तक लंड चुसवाने का मजा लेकर मैं अपने आपे से बाहर हो गया. मैंने उसे नीचे पटका और उसकी चूत में जोर जोर से मुख चोदन करने लगा. परीशा तड़पने लगी. वो मेरे सिर को पकड़ कर अपनी चूत में दबाने लगी.

    बात दोनों के बर्दाश्त से बाहर थी. मैंने फ्रेंची निकाल फेंकी और नंगा होकर परीशा की टांगों को खींचते हुए उसे अपनी ओर खींचा. उसकी चूत पर लंड को रगड़ते हुए उसकी आंखों में देखने लगा. दोनों पर ही पहली चुदाई का नशा सवार था.

    उसने भी आंखों ही आंखों में कह दिया- मेरी चूत का उद्घाटन करने में इतनी देर न करो स्वामी.
    मैंने उसके मन की इच्छा को भांपते हुए जिस्मों के मिलन की घड़ी को करीब लाते हुए उसकी चूत में अपने चिकने लंड का सुपारा गच से घुसा दिया.

    लंड घुसने भर की देर थी कि मैं किसी इंजन के पिस्टन की तरह परीशा की चूत को ताबड़तोड़ चोदने लगा. वो भी सिसकारियां लेते हुए कामसुख में खो सी गयी.
    पहला राउंड पांच मिनट तक ही खिंच पाया. परीशा तो 4 मिनट के करीब में ही झड़ गयी थी और उसकी चूत के रस से सराबोर अब मेरे लंड के धक्के पच-पच उसकी चूत में लगने लगे.

    एक मिनट के अंदर ही आनंद के उन्माद ने मेरे वीर्य को लंड से बाहर खींच लिया और मैं अपनी पत्नी चूत में स्खलित हो गया. एक आंधी सी आकर रुक गयी. मगर ये कुछ देर की शांति थी. तूफान तो आना अभी बाकी था.

    उसके दस मिनट बाद तक मैं उसकी चूचियों को पीता रहा और लंड महाराज फिर से चढ़ाई करने के लिए तैयार हो गये. मेरी गोरी चिट्टी पत्नी के मखमली से बदन को चोदने के लिए एक बार फिर से मैंने हथियार को पैना कर लिया.

    दोबारा से चुदाई शुरू हुई जो लगभग 30 मिनट तक चली. अबकी बार परीशा नहीं झड़ी. शायद उसकी चूत दुख गयी थी. इसलिए पहली बार वाली उत्तेजना पैदा नहीं हो पायी थी. मगर लंड को चैन कहां था.

    आधे घंटे का विराम देकर मैंने फिर से उसकी चूचियों को छेड़ना शुरू कर दिया. उसकी चूत में उंगली करने लगा और अगले तीन-चार मिनट में उसकी चूत को उंगलियों से ही स्खलित कर दिया.

    अब मैं फिर से अधूरा रह गया था लेकिन परीशा की चूत को भी गर्म करना जरूरी था. फिर मुझे उसके नंगे जिस्म पर लेटे हुए नींद आ गयी. और रात के 3 बजे के करीब फिर से लंड तना हुआ मिला.

    मैंने नींद में ही उसकी चूत में लंड को डाल दिया. अब तक ऊर्जा भी इकट्ठा हो गयी थी और परीशा की चूत को भी आराम मिल चुका था. एक घंटे की चुदाई में मैंने उसको दो बार स्खलित किया. अब मेरे लंड में भी दर्द होने लगा था.

    दोनों ही फिर से थक कर सो गये. चार बजे के सोये हुए मेरी नींद सुबह के आठ बजे परीशा ने ही खोली.
    वो कह रही थी कि उसकी चूत में बहुत तेज दर्द हो रहा है. उसको पेशाब करने में भी दिक्कत हो रही थी.

    पत्नी थी इसलिए उसका खयाल रखना भी पहली प्राथमिकता थी. मैंने उसे दिलासा दिया और करीब 11 बजे डॉक्टर दिव्या की क्लीनिक ले गया. दिव्या लगभग 40 साल की महिला रही होगी. क्षेत्र की प्रतिष्ठित डॉक्टर. उन्होंने मेरी नयी नवेली दुल्हन परीशा की जांच की.

    जांच करने के बाद पत्नी को उसने खाने व लगाने की दवा दी तथा ठीक होने तक चुदाई न करने की सलाह दी. चलते समय डॉक्टर दिव्या ने मुझसे कहा कि दो बजे अकेले आकर मिलिये.
    मैंने संकोचवश एक ओर जाकर पूछा- कुछ बड़ी समस्या है क्या?
    लेडी डॉक्टर ने कहा- चिन्ता की कोई बात नहीं लेकिन आप दो बजे आइये. तब तसल्ली से बात करते हैं. अभी इनको (पत्नी को) आराम की जरूरत है.

    घबरा कर मैं परेशान सा हो गया कि आखिर ऐसी क्या बात है जो डॉक्टर मुझे अकेले में बताना चाहती है. कहीं जोश जोश में मैंने कुछ कांड तो नहीं कर दिया अपनी कमसिन सी बीवी के साथ? मन में सौ तरह के सवाल थे लेकिन मैंने परीशा से कुछ भी नहीं कहा.

    दो बजे क्लीनिक पहुंचा तो डॉक्टर एक मरीज को देख रही थीं. मरीज के जाने के बाद डॉक्टर ने अपने स्टाफ को छुट्टी दे दी और मुझसे मुखातिब हुईं.
    वो बोली- आपकी शादी कब हुई?
    मैंने कहा- परसों हुई थी.
    दिव्या जी ने पूछा- इससे पहले आपने किसी के साथ सेक्स किया है?
    संकोचवश मैंने कहा- कभी नहीं किया मैम.

    दिव्या जी बोलीं- मिस्टर, मैं दस साल से प्रैक्टिस कर रही हूँ और बीस साल से चुदवा रही हूँ. मेरे सामने ऐसा कोई केस नहीं आया. आप अन्दर चलिये, आपका चेकअप करना होगा.

    एक बार तो मैं सकपका गया कि इसको मेरे चेकअप की क्या पड़ी है. फिर सोचा कि वो डॉक्टर है, हो सकता है कुछ जांच परख करना चाह रही हो.

    मैं उठा और अन्दर की ओर चल दिया. इस बीच डॉक्टर साहिबा ने क्लीनिक का मेन डोर लॉक कर दिया और अन्दर आ गईं. मैं अन्दर मासूम सा मुंह बनाकर खड़ा था जैसे स्कूल में उपद्रव करने के बाद बच्चे को प्रिंसीपल के सामने खड़ा कर दिया जाता है.

    वो बोली- ऐसे चेकअप होगा क्या आपका? पैंट खोलिये.
    जैसे उसने पैंट खोलने की बात कही तो लंड में गुदगुदी सी मची. लेकिन सेक्स जैसी कोई भावना नहीं थी. मैं तो इसे जांच का हिस्सा समझ रहा था.
    मैंने कहा- ओह्ह … सॉरी मैम, अभी निकाल देता हूं.

    डॉक्टर साहिबा के कहने पर मैंने अपनी पैन्ट खोल दी. अब नीचे से अंडरवियर के अंदर में मेरा लंड लटका हुआ था.
    वो बोली- ये भी उतारिये.
    उसके कहने पर मैंने सकुचाते हुए अपना अण्डरवियर भी उतार दिया.

    घबराहट भी हो रही थी और शर्म भी आ रही थी. डॉक्टर साहिबा ने लंड को लटकता देख कर एक बोतल में से कोई जेल अपने हाथ में लिया और मेरे लण्ड पर मलने लगीं.
    जैसे ही उसका हाथ मेरे गर्म से सोये हुए लंड पर लगा तो लंड में करंट सा दौड़ गया. हवस को उफनते हुए देर न लगी और लौड़ा उसके हाथ में भरता हुआ आ गया.

    वो लंड खड़ा होने के बाद भी लंड पर जेल रगड़ रही थी. उसके चेहरे पर वासना टपकने लगी थी. मैं भी मजा लेने लगा था. लंड तनकर एकदम सख्त लोहे की रॉड की तरह हो गया. मगर वो अभी भी लंड को मसले जा रही थी.

    मुझे समझते देर न लगी कि ये कोई चेकअप नहीं कर रही बल्कि ये तो चूत चुदवाने के चक्कर में है. मैं डॉक्टर साहिबा के जिस्म का मुआयना करने लगा. लगभग 40 साल की उम्र, गोरा चिट्टा भरा बदन, बड़ी बड़ी चूचियां और भारी भरकम चूतड़.

    भले ही वो बीस साल से चूत चुदवाने की बात कह चुकी थीं लेकिन थीं तो वो अविवाहित. यानि कि तकनीकी रूप से मुझे एक कुंवारी महिला को चोदने का मौका मिलने वाला था.

    मेरे लंड को हाथ में भरकर वो उसको दबाने लगी थी. फिर उसने मेरी ओर देखा और एकदम से मेरे लंड को मुंह में लेकर चूसने लगी. मैं तो पहले ही चुदाई के कयास लगाये बैठा था इसलिए लंड चुसवाने का मजा लेने लगा. मुझे हैरान नहीं हो रही थी कि क्योंकि उसकी हरकत ही चुदक्कड़ औरत वाली थी.

    लेडी डॉक्टर मेरे लंड को मुंह में लेकर जोर जोर से चूसने लगी. मेरे मुंह से सिसकारियां निकलने लगीं. उसकी चूचियों की घाटी मुझे नीचे हिलती हुई दिखाई दे रही थी जो मेरी उत्तेजना को और ज्यादा तीव्र कर रही थी.

    उसकी साड़ी का पल्लू कंधे से नीचे सरक गया था और ब्लाउज में उसकी मोटी मोटी चूचियां भरी हुई अलग से दिखाई दे रही थीं. मैंने उसके सिर को पकड़ लिया और उसके मुंह को चोदने लगा. अब मेरे धक्के उसके मुंह में लग रहे थे.

    वो भी पक्की रंडी थी. पूरा लंड गले तक ले रही थी. मेरे लौड़े की नसें फटने को हो गयी थीं. उसने माहौल ही ऐसा पैदा कर दिया था कि उसकी चूत को फाड़ देने का मन कर रहा था.

    तभी डॉक्टर साहिबा ने अपनी साड़ी, पेटीकोट को उतार कर एक तरफ फेंका और केवल पैंटी और ब्लाउज में मेरे सामने खड़ी हो गयी. मैं उसकी चूचियों पर टूट पड़ा उसके उरोजों को उसके ब्लाउज के ऊपर से दबाते हुए मसलने लगा. वो सिसकारने लगी और मेरा लंड उसकी जांघों से टकराने लगा.

    मैंने फिर उसकी पैंटी भी उतार दी और उसकी चूत को चाटने लगा. वो मेरे मुंह को अपनी चूत में दबाने लगी. जब उससे रहा न गया तो उसने मेरी शर्ट को खोला और फिर खुद जाकर बेड (जांच कक्ष के स्ट्रेचर) पर लेट गयी.

    चूत खोलकर वो चुदने के लिए तैयार थी और मेरी तोप उसकी चूत की धज्जियां उड़ाने के लिए. मैं उसकी टांगों के बीच आया तो उन्होंने अपनी टांगें फैला दीं जिससे बुर के लब अपने आप खुल गये.

    मैंने लण्ड का सुपारा बुर पर रखकर ठोका तो सुपारा टप्प से बुर के अन्दर हो गया. मैं रुका नहीं और पूरा लण्ड उनकी बुर में पेल दिया. पूरा लण्ड बुर में जाते ही डॉक्टर साहिबा ने अपने ब्लाउज़ के हुक खोलकर ब्रा ऊपर खिसका दी और अपने कबूतर आजाद कर दिये.

    चूचियां नगीं होते ही मैंने लपककर एक चूची मुंह में ले ली और चूसने लगा. डॉक्टर साहिबा बार बार अपनी बुर को अन्दर की ओर सिकोड़ रही थीं जिससे मेरा लण्ड टनटनाता जा रहा था. मैंने चूची छोड़ी और लण्ड को अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया.

    सिसकारते हुए बोली- उम्म्ह… अहह… हय… याह… इतने प्यार से चोदो, इतनी जोर से चोदो, इतनी देर तक चोदो कि मैं दुनिया भूल जाऊं.
    मैंने कहा- डॉक्टर साहिबा, अभी तीन बजे हैं, मैं अगले पांच घंटे तक फ्री हूं, आप पड़ी रहिये, मैं चोदता रहूंगा.
    वो बोलीं- मेरे पास तीन घंटे का ही समय है, छह बजे मेरा स्टाफ आ जाता है, तब तक चोद चोद कर मेरी चूत का कचूमर निकाल दो.

    मैंने उनकी दोनों टांगें उठाकर अपने कंधों पर रख लीं और राजधानी एक्सप्रेस की रफ्तार से उसकी चूत को चोदने लगा.
    लंड जाते ही चिल्ला पड़ी- बस करो, बस करो … आह्ह आराम से … चोदो.
    मैं रुक गया तो अगले ही पल फिर से सिसकार उठी- अच्छा और तेज करो … आह्ह चोदो … पूरा जोर लगाकर.

    समझ नहीं आ रहा था कि क्या कहना चाह रही थी. जाने क्या क्या बोल रहीं थी और चूतड़ उचका उचकाकर मेरा साथ दे रही थी. आधे घंटे तक उसकी चूत को पेलने के बाद मेरे स्खलन का समय नजदीक आ गया.

    उस समय मेरा लण्ड फूलकर और मोटा व टाइट होने लगा तो वो समझ गईं और बोली- अब रुकना नहीं, डिस्चार्ज होने के बाद भी नहीं.

    मैंने वैसा ही किया और डिस्चार्ज होने के बाद भी ठुकाई जारी रखी.

    फिर निढाल होकर बोली- बस करो राजा, तुमने आज जन्नत दिखा दी. आओ अब खाना खा लें, फिर दूसरा राउण्ड होगा और इस बार तुम नीचे लेटोगे और मैं तुम्हें चोदूंगी.

    चुदाई का पहला राउंड खत्म हो गया था. उसके बाद हमने कुछ देर का आराम किया और फिर से जांच कक्ष (चुदाई कक्ष) में पहुंच गये. अबकी बार मैं बेड पर लेटा और वो मेरे लंड पर अपनी चूत को चौड़ी करके बैठ गयी.

     नीचे से उसकी चूत में धक्के लगाते हुए उसको पेलना शुरू कर दिया. उसकी फुटबाल के आकार की मोटी मोटी चूचियां उछल-कूद करने लगीं. वो मेरे लंड पर कूदते हुए लंड को अंदर तक लेकर आनंदित होने लगी. दस-पंद्रह मिनट के बाद ही उसकी चूत ने पानी फेंक दिया और फच-फच की आवाज के साथ चुदाई करते हुए दो मिनट के बाद मेरा वीर्य भी उसकी चूत में निकल गया.

    दूसरा राउंड हो गया था. पंद्रह मिनट का विराम दिया और एक बार फिर से उसने मेरे लंड को चूसना शुरू कर दिया. दस मिनट लगे लंड को फिर से चुदाई लायक होने के लिए. मैंने लंड पर फिर से जेल लगाया और उस लेडी डॉक्टर को वहीं बेंच पर घोड़ी बना लिया.

    उसकी चूचियों को भींचते हुए जोर जोर से गचके लगाते हुए उसकी चूत को ठोकने लगा. वो भी साली रंडियों की तरह मेरे लंड को पूरा अंदर तक सोखने लगी. मैंने बीस मिनट तक उसकी चूत चोदी. फिर भी उसकी प्यास न बुझी तो वो मेरे सामने पीठ के बल लेटकर चूत को मसलने लगी.

    मैंने उसकी टांगों को पकड़ लिया और एक बार फिर से उसकी चूत को लंड से रगड़ना शुरू कर दिया. अबकी बार जितनी ताकत के साथ मैं धक्के लगा सकता था मैंने लगाये और उसकी चूत का कचूमर निकाल दिया.
    फिर आखिर में एक बार फिर से उसकी चूत में स्खलित होते हुए उस पर गिर पड़ा. वो भी बेसुध सी हो गयी थी.

    अब तक उसके स्टाफ के आने का समय भी हो गया था. हमने जल्दी से अपने अपने कपड़े पहने और फिर मैं वहां से निकल आया. ऐसी चुदक्कड़ लेडी डॉक्टर मुझे यूं मिल जायेगी मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था.

  • चाची की चुत और मेरी वासना

    मैंने अपनी चाची की चुत की चुदाई की. असल में चाची के उभरे चूचों को देख कर मेरा लंड खड़ा हो जाता था और मैं मौके की तलाश में था. एक बार बहाने से मैंने चाची को गर्म कर दिया और …

    मेरा नाम आर्यन है और मैं बिहार के जमुई जिले के पास में झाझा का रहने वाला हूं.

    मैं हिंदी बेस्ट सेक्स स्टोरी अन्तर्वासना की कहानियां काफी समय से पढ़ रहा हूं और मैंने इसकी कहानियां ख़ासकर चाची की चुत की चुदाई कहानी पढ़ना आज से करीब 8 या 10 साल पहले शुरू किया था. अभी मैं 28 के ऊपर का हो चुका हूं और अभी तक कुंवारा ही हूं. मगर अन्तर्वासना से मेरा नाता बहुत पुराना है.

    यह कहानी वैसे तो वास्तविक है लेकिन इस कहानी में मनोरंजन के लिए मैंने थोड़ा सा मसाला भी डाल दिया है ताकि आपको कहानी पढ़ने में मजा आये.

    यह कहानी मेरे और मेरी चाची के बीच में हुई घटना की है. इसलिए मैं अपनी चाची का नाम यहां पर नहीं बताऊंगा.

    दोस्तो, वैसे तो मैंने आज तक अपनी जिन्दगी में बहुत सी लड़कियां और भाभी चोद कर मजा लिया. मेरी गर्लफ्रेंड की चुदाई भी मैंने खूब की है. मगर चाची की चुत चुदाई की ये घटना कुछ निराली थी. इसलिए मैंने सोचा कि पाठकों के साथ अपनी चाची की चुत चुदाई का किस्सा शेयर करूं.

    मैंने रंडी की चुदाई के साथ-साथ रिश्तों में चुदाई भी खूब की है. जिसमें मेरी मौसी की चुदाई भी शामिल है. मगर इस कहानी में मैंने अपनी चाची की चुत कैसे मारी सिर्फ उस घटना का जिक्र ही किया है. तो अब आपका ज्यादा समय न लेते हुए मैं अपनी कहानी पर आता हूं. मैं उम्मीद करता हूं कि आपको मेरी चाची की चुत की कहानी पढ़ते हुए मजा आयेगा.

    कहानी तब की है जब मैंने अपनी कॉलेज की पढ़ाई शुरू की थी. उस वक्त मेरी पढ़ाई पूरी करने के लिए मैं पहली बार घर से बाहर गया था. कॉलेज के समय में मेरा लंड भी बहुत परेशान करने लगा था. मैंने कॉलेज में जाते ही गर्लफ्रेंड बना ली थी. कुछ ही दिन के बाद उसकी चुत को चोद दिया. मगर चुत की प्यास और बढ़ गई थी.

    जब मेरे कॉलेज का पहला साल खत्म हुआ तो मैं घर वापस आ गया था. एक महीने की छुट्टी थी. घर आये हुए मुझे एक सप्ताह ही हुआ था कि मेरे लंड ने मुझे फिर से परेशान करना शुरू कर दिया. कई दिनों तक मैं अन्तर्वासना सेक्स स्टोरी साइट पर सेक्सी कहानियां पढ़ कर लंड को हिलाता रहा लेकिन मुझे चुत चाहिए थी.

    एक दिन मेरी चाची मेरे घर पर आयी. मैंने एक रात पहले ही चाची की चुत की चुदाई की कहानी पढ़ी थी. कहानी को पढ़कर मेरी नजर चाची के चूचों पर गई तो मेरा लंड खड़ा हो गया. उस दिन मैंने चाची के चूचों के बारे में सोच कर मुठ मारी. फिर मैंने सोचा कि क्यों न चाची की चुत चुदाई का मजा ले लूं.

    मैंने चाची की चुदाई करने का प्लान सोचना शुरू कर दिया लेकिन मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि मैं यह कैसे कर पाऊंगा. एक दिन की बात है कि मेरे घर पर कोई भी नहीं था. पापा काम से बाहर गये हुए थे और मां किसी रिश्तेदार के यहां पर गई हुई थी. उस दिन चाची घर आई और मेरी मां के बारे में पूछने लगी.

    चाची कई बार मेरी मां के पास आ जाती थी और दिन भर बैठ कर बातें करती रहती थी. मैं भी चुपके से चाची के उभारों को देख कर मजा लिया करता था. उस दिन भी मैंने सोचा कि चाची मेरी मां के पास आई है. मैंने मां के बारे में बताया तो चाची ने कहा कि ठीक है मैं फिर बाद में आऊंगी.

    मैं बोला- चाची कुछ काम है तो मुझे बता दो.
    चाची बोली- नहीं कुछ खास नहीं, मेरे सिर में दर्द हो रहा था. मैं तो तुम्हारी मां के पास बाम लेने के लिए आई थी. मेरे घर में मुझे बाम नहीं मिल रही थी.
    मैं बोला- कोई बात नहीं चाची, मैं आपको बाम ढूंढ कर दे देता हूं.

    मैं चाची के सामने ही बाम ढूंढने लगा और मुझे मिल गई.

    चाची को बाम थमाते हुए मैंने चाची के ब्लाउज की तरफ देखा तो मुझे चाची के क्लिवेज दिख गये. मेरे मन में वासना जाग गई.
    मैंने कहा- चाची अगर ज्यादा दर्द हो रहा है तो मैं आपके सिर में बाम लगा देता हूं.
    वो बोली- नहीं, मैं खुद से लगा लूंगी.
    मैंने कहा- अरे चाची, दूसरे के हाथ से मालिश करवाने में ज्यादा आराम मिलता है.

    फिर मेरे जोर देने पर चाची मान गई. मैंने चाची को अन्दर वाले कमरे में चलने के लिए कह दिया. चाची मेरे सामने बेड पर जाकर लेट गई और मैंने चाची के सिर बाम लगाना शुरू कर दिया. अब चाची के उठे हुए चूचे मुझे और अच्छी तरह नजर आ रहे थे.

    ब्लाउज में मेरी चाची के चूचे ऐेसे तने हुए थे जैसे कोई मिसाइल हो. चाची के उभारों को देख कर मेरे लंड में तनाव आ चुका था. मैं बेड के किनारे पर खड़ा होकर चाची के सिर में बाम की मालिश कर रहा था. मेरा तना हुआ लंड मेरी लोअर में मुझे परेशान करने लगा था.

    मालिश करने के बहाने धीरे धीरे मैं चाची के कंधे पर अपने तने हुए लंड को टच कर देता था. जब मेरा लंड चाची के कंधे से टच होता था उसमें और उत्तेजना आ जाती थी और चाची के कंधे पर झटका लगता था. मेरी वासना बढ़ती जा रही थी.

    सामने चाची के चूचों की दरार मुझे दिख रही थी और दूसरी तरफ चाची के कंधे पर लंड के छूने से मेरा बुरा हाल हो रहा था.
    मैं बोला- चाची कई बार सिर में दर्द पीछे गर्दन की वजह से भी हो जाता है.
    वो बोली- ठीक है तो फिर थोडी़ मालिश गर्दन की भी कर दो.

    मेरे कहने पर चाची पलट गई. चाची के पलटते ही उसकी भारी सी गांड मुझे साड़ी के अंदर ही उठी हुई दिखाई देने लगी. अब चाची की नजर मेरी लोअर पर थी. मेरी लोअर में तना हुआ लंड चाची को दिख गया. मगर चाची ने कुछ नहीं बोला.

    मैं भी देख रहा था कि चाची मेरे तने हुए लंड को देख रही थी. इस वजह से मेरे लंड में और ज्यादा उत्तेजना हो रही थी. मैं जान बूझ कर लंड में झटके दे रहा था ताकि चाची मेरे लंड को देख कर उत्तेजित हो सके. कई बार मैंने चाची की नजर के सामने ही अपने लंड को झटका दिया.

    अब चाची की नजर मेरे लंड पर गड़ गई थी. वो बार-बार बहाने से मेरे लंड की तरफ ही देख रही थी. मैं भी अपने तने हुए लंड को चाची के होंठों के पास लेकर जाने लगा था. एक बार तो मैंने बहाने से चाची की नाक को अपने लंड से छू भी दिया.

    मुझसे बर्दाश्त करना मुश्किल हो रहा था लेकिन चाची कुछ पहल नहीं कर रही थी. फिर मैंने चाची की गर्दन पर मालिश करने के बहाने हाथ पीछे तक ले जाना शुरू कर दिया. अब चाची की पीठ पर उसकी ब्रा की पट्टियों पर मेरी उंगलियां छू रही थी. मैं जान बूझकर चाची की ब्रा को छू रहा था. मुझे बहुत मजा आ रहा था.

    कुछ देर ऐसे ही करने के बाद अब मेरी मेहनत का असर दिखने लगा था. चाची पलटते हुए बोली- अब गर्दन की मालिश बहुत हो गई. अब सिर की ही मालिश कर दे.
    चाची ने अपनी साड़ी का पल्लू अपने चूचों के ऊपर से हटा दिया था. चाची के ब्लाउज में तने हुए चूचे मुझे साफ नजर आ रहे थे.

    मैंने बाम की शीशी चाची की बाजुओं की बगल में पेट पास रख दी. इस तरह से कोण बनाया कि जिस तरफ मैं खड़ा था उसके दूसरी तरफ शीशी रखी हुई थी. अब मैं जब शीशी उठाने के लिए चाची के ऊपर झुका तो मेरा लंड चाची के सिर पर लग गया और मेरी कुहनी चाची के चूचों से छू कर जाने लगी.

    एक दो बार मैंने ऐसा ही किया. अब चाची की टांगें भी फैलने लगी थीं. शायद चाची की चुत गीली हो रही थी. मैंने मालिश करना जारी रखा.

    फिर जब चाची से रहा न गया तो उसने पीछे हाथ लाकर मेरे लंड को पकड़ लिया और उसको सहलाने लगी. चाची की आंखें बंद थीं.

    मुझे भी इसी पल का इंतजार था. मैंने तुरंत चाची के चूचों को दबाना शुरू कर दिया. अगले ही पल हम दोनों के होंठ एक दूसरे के होंठों से मिले हुए थे. मैं चाची के चूचों को दबाते हुए उसके होंठों का रस पी रहा था. चाची भी मेरा पूरा साथ दे रही थी. उसके 36 के चूचे दबाते हुए मुजे गजब का मजा आ रहा था.

    फिर चाची खुद ही उठते हुए अपने ब्लाउज को खोलने लगी. उसकी ब्रा को मैंने झट से आजाद करवा दिया. चाची ऊपर से नंगी हो गई. मैंने चाची के स्तनों को मुंह में भर कर पीना शुरू कर दिया. चाची इतनी गर्म हो गई कि मुझे अपने ऊपर लेकर लेटती चली गई.

    नीचे से मैंने चाची की साड़ी को खोल दिया और उसके पैटीकोट का नाड़ा खोल कर उसे नीचे किया तो उसकी पैंट पर हाथ जा लगा. मैंने पैंटी को हाथ से रगड़ा और चाची की गीली चुत पर हाथ लगा कर देखा तो वो उभर कर ऊपर अलग से मेरे हाथ में महसूस हो रही थी.

    अब तो हद ही हो गई थी. मैंने तुरंत चाची की चड्डी को खींच कर चाची की चुत को नंगी कर दिया और उसकी टांगों को उठा कर उसकी चुत में जीभ लगा दी. चाची तड़पते हुए मेरे मुंह को अपनी चुत में दबाने लगी. मैं चाची की चुत में जीभ डाल कर उसे चोदने लगा.

    उसके बाद चाची उठी और मेरे लोअर को निकाल दिया. उसने मेरे कच्छे को भी नीचे खींच दिया और फिर मेरे लंड को सीधा मुंह में भर कर जोर से चूसने लगी. मैं तो आनंद में डूबने लगा. चाची मेरे लंड को मुंह में लेकर तेजी के साथ चूस रही थी. दो मिनट तक चाची ने मेरे लंड को चूसा. इस बीच में मैंने टीशर्ट भी उतार दी थी. अब दोनों नंगे थे.

    मैंने चाची की टांगों को फैलाया और उसके थूक से सराबोर हो रहे लंड को उसकी चुत पर टिका दिया. मैंने जोर लगाते हुए चाची की चुत में लौड़े को घुसा दिया. चाची ने मुझे बांहों में भर लिया और अपनी चुत को चुदवाने लगी.

    दोस्तो मुझे इतना मजा आ रहा था कि मैं बता नहीं सकता. मैंने चाची की चुत चुदाई जारी रखी और पांच मिनट के बाद मेरा वीर्य निकलने को हो गया तो मैंने चाची से पूछा कि कहां निकालूं तो उसने कहा कि अन्दर मत निकालना.

    चाची के कहने पर मैंने लंड को बाहर निकाल लिया और उसके पेट पर अपने वीर्य को छोड़ दिया. हम दोनों शांत हो गये. उसके बाद चाची ने अपने कपड़े वापस से दुरुस्त किये और चली गई. मुझे मजा आ गया उस दिन.

    मेरी चाची दिखने में भले ही साधारण थी लेकिन उसके अंदर सेक्स की आग बहुत थी. उस दिन मैंने इस बात को महसूस किया. एक दिन चाचा जब घर पर नहीं थे तो चाची ने काम के बहाने से मुझे रात को घर पर बुला लिया.

    उस दिन मैंने चाची की चुत में उंगली की तो चाची बोली- मुझे तेरे लंड चाहिये, उंगली से काम नहीं चलेगा.
    उस रात को मैंने चाची की चुत की चुदाई लगभग 35 मिनट तक की. फिर तो मैं मौका मिलते ही चाची की साड़ी को ऊपर उठा कर चाची की चुत में उंगली कर देता था.

    ऐेसे ही एक बार मेरी मां मेरे मामा के यहां पर गई हुई थी. उस दिन घर पर खाना बनाने की जिम्मेदारी चाची की ही थी. हम दोनों तो बस मौके की तलाश में थे. पापा के लिए नाश्ता बनाने के बाद वो काम पर निकल गये और मैंने किचन में ही चाची को पकड़ लिया. चाची की साड़ी उठा कर वहीं पर उसकी कच्छी निकाल दी.

    किचन के स्लैब पर चाची को झुका कर चाची की चुत मारी. उस दिन मैंने चाची की चुत में ही अपना माल गिराया. दोस्तो, चुत के अंदर माल गिराने का अलग ही मजा है. चाची अब अपनी चुत में ही माल गिरवाती थी.

    उसके बाद फिर मैं पढ़ाई के लिए बैंगलोर चला गया. वहां से चार साल के बाद वापस आया. वापस आने के बाद मैंने और चाची ने आते ही चुदाई शुरू कर दी मगर चाची के बेटे ने हम दोनों को देख लिया. उसको तो हमने किसी तरह चुप करवा दिया.

    मगर सच कभी न कभी सामने आ ही जाता है. ऐसे ही एक दिन मेरी मां ने मुझे और चाची को रंगे हाथ चुदाई करते हुए पकड़ लिया तो चाची ने सारा इल्जाम मेरे सिर पर लगा दिया.

    उस दिन के बाद से मेरी और चाची की लड़ाई हो गई. फिर हम दोनों ने कभी चुदाई नहीं की. लेकिन मैंने चाची की चुत को चोद कर खूब मजे लिये. मुझे कई बार दुख होता है कि चाची ने मेरे साथ सही नहीं किया.

    आपकी राय मेरी आपबीती के बारे में क्या है मुझे जरूर बतायें.

  • शादी से पहले मेरी चूत चुदाई की कहानी

    मेरी चूत चुदाई की कहानी में पढ़ें कि मैंने कैसे पहली बार अपनी चूत और गांड चुदवाई? शादी से पहले मेरा एक बॉयफ्रेंड था कॉलेज का! मेरा सेक्स करने का बहुत मन करता था.

    मेरा नाम रश्मि है। मैं दिल्ली में रहती हूं 28 साल की औरत हूं मेरी शादी हो चुकी है।

    यह कहानी मेरी पहली चूत चुदाई की कहानी है अंतर्वासना पर जब मेरी शादी नहीं हुई थी मेरा एक बॉयफ्रेंड था कॉलेज के टाइम का मैं कैसे उसे अपनी चूत और गांड चुदवाती थी आज मैं वही आपको बताऊंगी मेरा बॉयफ्रेंड मेरी सारी ख्वाहिश पूरी करता था तो मैं भी उस पर जान छिड़कती थी।

    तब मेरी उम्र 21 साल के आसपास थी मेरा सेक्स करने का बहुत मन करता था मैं वासना से एकदम भरी हुई रहती थी उसने मुझे पटा लिया.
    मुझे खुद भी पता नहीं चला कि कब मैं उस उससे पट गई और उसकी बातों में आ गई क्योंकि वह बातें इतनी अच्छी-अच्छी करता था मेरी उससे फोन पर घंटों बात होती थी.

    एक बार उसने मुझे होटल में मिलने के लिए कहा. शुरू में मुझे बहुत डर लग रहा था तो मैंने मना कर दिया. लेकिन बाद में फिर हम उसकी ज्यादा जिद करने पर मैं मान गई और हम दोनों साथ में एक होटल में गए.

    वहां रूम में जाकर वह मेरे होठों पर चिपक गया, मुझे किस करने लगा. मैं तो गर्म होने लगी थी मेरी कामवासना धीरे धीरे जागने लगी थी.

    वो स्कर्ट के ऊपर से ही मेरी चूत पर अपना हाथ फिरा रहा था और मेरे होंठों पर किस कर रहा था. वो मेरी शर्ट के ऊपर से ही मेरे उरोज दबा रहा था.

    अब तो मुझे ऐसा लग रहा था कि मेरा यार मुझे जी भर कर चोदे. मैं हर तरह से तैयार थी उससे चुदवाने के लिए!

    फिर धीरे-धीरे उसने मेरी स्कर्ट उतार दी, मैं सिर्फ उसके सामने पेंटी में. थी मेरी नंगी जांगे उसके सामने थी वह मेरी जांघों पर किस करने लगा और पैंटी के ऊपर से ही मेरी चूत पर अपनी जीभ फिराने लगा.

    मैंने मजे में अपनी टांगें ऊपर उठा ली और उसके बालों पर हाथ फिराने लगी. मेरी उम्र ही ऐसी थी कि जब वासना जोर मारने लगती है. मैं भी कामुकता से भरी हुई थी.
    फिर मैंने खुद अपने कमीज़ उतार दी और अपनी ब्रा भी।

    मैंने उसको अपने ऊपर खींचा और उसे अपने बूब्स चूसने का इशारा किया. वह मेरे बूब्स को पागलों की तरह चूसने लगा.
    मुझे बहुत मजा आ रहा था. मेरे मुंह से कामुकता भरी आवाजें निकल रही थी. दो-तीन साल से इतनी बुरी तरह से मेरा चुदने का मन कर रहा था कि मैं ही जानती थी।

    फिर मैंने उसको बेड के दूसरी तरफ धक्का दे दिया और उसके कपड़े उतारने लगी. लेकिन मेरा मन लंड चूसने का कर रहा था इसलिए मैंने थोड़ी सी पैन्ट को नीचे उतारकर और उसके निक्कर में से उसके लंड को निकाल कर सीधा उसका लंड चूसने लगी.
    मेरे यार के मुख से सिसकारियाँ निकल रही थी ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’
    उसके आधे कपड़े निकले हुए थे, पूरे भी अभी नहीं उतरे थे।
    लेकिन मैं पूरी नंगी थी.

    मैंने अपने यार के लंड को चूस चूस कर इतना गीला कर दिया था कि उसने मुझे धक्का देकर बेड पर सीधा लिटा दिया और मेरी टांगों को हल्की सी ऊपर उठाकर मेरी चूत में अपना लंड डाल दिया.

    मैं चीखने लगी और अपने दांतों को उसकी गर्दन पर गड़ाने लगी. मुझे मजा भी आ रहा था और दर्द भी हो रहा था.

    लेकिन थोड़ी देर बाद मुझे दर्द होना बंद हो गया और पूरा मजा आने लगा।
    मैंने उसकी कमर पर अपने नाखून गड़ा दिए. वह भी मेरी कोली भरकर मुझे जमकर चोद रहा था और इसी पोज में मेरी चूत ने अपना पानी छोड़ दिया.

    मैं बहुत चिल्लाई जब मुझे मजा आया. मैंने अपने आप को उससे चिपका लिया और उसकी बांहों में सिमट कर रह गई. लेकिन वह मुझे ऐसे ही चोदता रहा.

    मेरे झड़ने के बाद मैंने उसको काफी मना किया कि अब मेरी चूत की चुदाई ना करे … लेकिन वह नहीं माना.
    मैंने अपने हाथों से उसको हटाना चाहा लेकिन वह नहीं हटा.

    तो मैं निढाल होकर बेड पर लेट गई और अपने बदन को टाइट करके उसके धक्कों का सामना करने लगी.

    10 मिनट के बाद मुझे फिर से मजा आने लगा और फिर से मैं उसका साथ देने लगी. उसने मुझे अब की बार घोड़ी बना लिया, पीछे से मेरी चूत में अपना लंड डाल दिया और मेरे बाल पकड़कर मुझे खूब चोदा.
    इस अवस्था में मुझे बहुत दर्द हुआ. मैं बहुत चिल्लाई भी लेकिन वह नहीं हटा और उसे मजा आने लगा तो उसने कहा- बेबी बताओ अपना वीर्य कहां निकालूं?
    मैंने उससे कहा- अंदर ही निकाल दो, मुझे आपके बच्चे की मां बनना है.

    और उसने ऐसे घोड़ी बने बने ही मेरी चूत में अपना सारा वीर्य छोड़ दिया. गर्म गर्म माल मेरे अंदर जाकर लग रहा था, मुझे महसूस हो रहा था उसका वीर्य, उसका पानी!

    फिर वह हट गया. मैं भी थक कर लेट गई, वीर्य मेरी चूत से निकलकर बाहर बहने लगा. हमने कपड़े से अपने अपने यौन अंगों को साफ किया और एक दूसरे से बहुत देर तक ऐसे ही नंगे चिपके रहे.

    फिर कुछ देर बाद उसका लंड फिर से खड़ा हो गया और उसने मुझे अपना लंड चूसने को कहा.

    मैंने भी अपने दोनों हाथों से उसके लंड की मालिश की थूक से! और फिर मैं उसका लंड चूसने लगी.

    वह ऊपर से मेरे सिर को दबाता तो मैं पूरा लंड उसका मुंह में ले लेती. लेकिन सांस ना आने के कारण फिर मैं जल्दी से बाहर निकाल लेती. हम दोनों इतनी गंदी तरह से सेक्स कर रहे थे क्योंकि हम दूसरे को बुरी तरह से चोदना चाहते थे.

    फिर उसने मुझे दोबारा से घोड़ी बना दिया और पीछे से मेरी गांड को चाटने लगा. उसने उंगली से मेरी गांड को धीरे-धीरे गीला कर दिया.
    मेरी गांड इतनी गीली हो गई कि बहुत ज्यादा! मैं जानती थी कि अब मेरी गांड की चुदवाने की बारी है।

    तो उसने अपनी पूरी उंगली गीली करके मेरी गांड में डाल दी. मुझे बहुत दर्द हुआ.
    मैंने चिल्ला कर कहा- नहीं बेबी, वहां नहीं!

    लेकिन वह धीरे-धीरे ऐसे ही करता रहा, कभी जीभ से चाटता, बार-बार कभी उंगली कभी चाटना!
    इस वजह से मुझे बहुत मज़ा आ रहा था.

    फिर उसने मुझे पेट के बल लेटा कर क्रीम अपने लंड पर लगा कर मेरी गांड में लंड डाल दिया. मैं बहुत चिल्लाई लेकिन उसने मेरी नहीं सुनी.

    लेकिन फिर धीरे-धीरे मुझे मजा आने लगा और मैं उसका साथ देने लगी.

    उस दिन पूरे दिन होटल में उसने मुझे बहुत चूसा मेरे कामुक बदन को … उसके दबाने काटने से मेरा सारा बदन लाल हो गया था. और मेरी चूत और मेरी गांड में उसने अपना वीर्य भर दिया था.
    हम दोनों ने खूब मजे किए फिर उस दिन … उसने मुझे बहुत चोदा. मेरी गांड में ही अपना वीर्य निकाल दिया.

    फिर एक बार मैंने उसके ऊपर राइडिंग की. मेरे बूब्स उसके मुंह में और मैंने उसके ऊपर बैठकर बहुत धक्के लगाए. वह मेरे हिप्स पर बहुत तेज मारता भी था बीच-बीच में … जिससे मुझे बहुत मजा आता था.

    उस दिन होटल में हम दोनों ने अपनी पूरी वासना निकाली; वहां पर उस दिन हम चार-पांच बार सेक्स किया और बहुत मजे किए.

    यह थी मेरी शादी से पहले की चुदाई की कहानी मेरे बॉयफ्रेंड के साथ … जिससे मैं चुदवाती थी.

    लेकिन अब तो मेरी शादी हो चुकी है और उसकी भी!
    अब वह मुझ से बात नहीं करता क्योंकि उसकी वाइफ उस पर शक करती है. और हम चाहते भी हैं कि हमारे रास्ते अलग अलग रहें.

    लेकिन मेरा फिर से मन भी करता है कि कोई ऐसा मेरी लाइफ में फिर से आए जो अच्छा हो, सच्चा हो और मेरे लिए हमेशा खड़ा रहे!

  • दोस्त की चूत फाड़ चुदाई

    मेरे बचपन की एक दोस्त मुझे काफी समय बाद मिली. तब तक मैंने किसी लड़की की चूत नहीं चोदी थी. वह इस बात पर मेरा मजाक उड़ाने लगी. तो मैंने क्या किया?

    मैं दिल्ली का रहने वाला एक सामान्य लड़का हूं. मेरी उम्र 23 साल है. मेरा शरीर भी औसत दर्जे का है. न तो मैं ज्यादा मोटा हूं और न ही पतला. मेरी बॉडी एथलेटिक है।

    मेरे पास एक अच्छा लंड है जिसे मैंने कभी नहीं मापा है. जहां तक लंड के साइज की बात है तो यह किसी भी औरत, लड़की या प्यासी चूत को संतुष्ट कर सकता है इसलिए इसके बारे में मुझे चिंता करने की आवश्यकता नहीं हुई.

    यह कहानी मेरे बचपन की दोस्त के बारे में है. उसने मुझे कभी दोस्त नहीं माना. मैं उसको अपनी अच्छी दोस्त मानता रहा लेकिन उसने फिर किसी और से शादी कर ली. समय के साथ मैं उसको भूल भी गया था.

    फिर एक दिन वह मेरे घर आई. शुरू में तो देखने पर मैं उसको पहचान भी नहीं पाया. मैंने मां से पूछा तो वो मां को सारी कहानी बता चुकी थी. उसकी बात सुनने के बाद मुझे उसके बारे में याद आई.

    उसने मुझे बाकी की कहानी सुनाई कि वह अपने पति के खिलाफ एक केस लड़ रही है और अपने पति से वह तलाक चाहती थी। मैंने उसकी पूरी बात सुनी और उसको सहजता से काम लेने की हिदायत दी. मुझसे मिलकर वो थोड़ा शांत हुई.

    एक हफ्ते बाद में मैं उसके घर गया. उससे बात करने पर पता लगा कि उसको कोई जॉब चाहिए थी. उस दिन उससे काफी देर तक बातें होती रहीं. फिर हम लोगों की फोन पर भी बातें होने लगीं.

    मुझे ऐसा लग रहा था कि उसको भी मेरे साथ बातें करना अच्छा लगता था. महीने भर तक हम दोनों फोन पर अक्सर ही बातें करते रहे. फिर ऐसे ही करते करते बात किस करने तक भी पहुंच गयी.

    उस समय तक मैं वर्जिन था. मैंने इससे पहले कभी सेक्स नहीं किया था. मुझे तो यह भी नहीं पता था कि किस कैसे करते हैं. मैंने उसको बताया कि मुझे किस करना भी नहीं आता है.

    वो बोली- इतने भी शरीफ मत बनो.
    मैंने कहा- सच में, मेरी लाइफ में आज तक कोई लड़की नहीं आई है.
    वो बोली- कोई बात नहीं, मैं तुम्हें किस करना सिखा दूंगी.

    एक महीने के बाद मेरे मां और पापा का घूमने का प्रोग्राम बना. मैंने अपनी दोस्त को छोटी सी पार्टी के लिए बुलाया. जब हमारी पार्टी खत्म हो गयी तो वो मेरा मजाक बनाने लगी.

    वो बोली- तुम तो बहुत डरपोक हो. लड़कियों से बात करना तुम्हारे बस की बात नहीं है.
    मुझे उसकी बातों पर गुस्सा आने लगा. मैंने उससे कहा- मेरी शराफत को मेरी मेरी कमजोरी न समझे.
    वो फिर भी मेरा मजाक बनाती रही.

    मेरी मर्दानगी पर बात आई तो मैंने उसको पकड़ कर किस कर दिया. वो हैरानी से मेरी ओर देखने लगी.
    फिर उसने भी मुझे गर्दन से पकड़ लिया और किस करने लगी. हम दोनों एक दूसरे के होंठों को पीने लगे.

    मेरे साथ यह सब पहली बार हो रहा था. इसलिए मैं ज्यादा आगे नहीं बढ़ना चाह रहा था. मैंने उसको किस करके छोड़ दिया. फिर उसके बाद वो कई दिन तक मुझे चिढ़ाती रही.

    उसके द्वारा किया जाने वाला ये उपहास मुझसे सहा न गया. मैंने उसको फिर से घर आने का न्यौता दिया. उस दिन भी इत्तेफाक से मैं घर पर अकेला ही था.

    कुछ देर बातें करने के बाद मैंने उसको किस करना शुरू कर दिया. वो भी शायद मुझसे चाहती थी. इसीलिए मुझे बार बार सेक्स के लिए उकसा रही थी. मैं भी अब उसकी चूत को चोद देना चाहता था.

    मैंने कई मिनट तक उसको किस किया. फिर मैंने उसके कपड़े उतारना शुरू कर दिया. उसके टॉप को उतारा और फिर उसकी पजामी को उतार दिया.

    सफेद रंग की ब्रा और पैंटी में वो काफी सेक्सी लग रही थी. मैंने उसकी ब्रा के ऊपर से उसकी चूचियों को दबा दिया. वो भी यही चाहती थी. जैसे ही मैंने उसकी चूचियां दबाईं तो वो सिसकार उठी. फिर मैंने उसकी चूचियों को जोर से दबा दिया. वो कसमसाने लगी.

    उसके बाद मैंने उसकी ब्रा को खोल दिया. मैंने पहली बार अपने सामने किसी लड़की की चूचियों को नंगी देखा था. मैंने उसकी नर्म मुलायम सी चूचियों को अपने हाथों में भर लिया. उनको प्यार से दबाकर देखने लगा.

    मेरे लंड में जोश भरने लगा. अब मुझे सेक्स चढ़ रहा था. चूंकि मेरा यह पहला सेक्स था तो मुझे ज्यादा कुछ पता नहीं था. उत्तेजना में ज्यादा कुछ सूझ भी नहीं रहा था.

    कुछ देर तक मैं उसकी चूचियों को दबाता रहा और वो मजे से अपने दूधों को मेरे हाथों में दबवाती रही. फिर उसने मेरे सिर को पकड़ कर मेरे होंठों को अपने दूधों पर रखवा दिया. मैं भी उसके दूधों को पीने लगा.

    मुझे चूचियां पीने में बहुत मजा आ रहा था. पोर्न सेक्स वीडियो में देखते हुए मुठ तो कई बार मारी थी लेकिन असल में चूचियों को पीने का मजा कुछ अलग ही होता है.

    मैं उसके निप्पलों को जोर से काटने लगा. उसकी चूचियों को चूस चूस कर मैंने एकदम से कड़क बना दिया. फिर मैंने उसको बेड पर लिटा लिया. उसकी पूरी बॉडी को किस करने लगा.

    अब मेरा मन भी कर रहा था कि वो मेरे लंड को पकड़ ले. तभी उसने खुद ही कह दिया- अपने कपड़े नहीं उतारोगे क्या?
    उसके कहते ही मैंने अपनी टीशर्ट और लोअर उतार दी. उसके सामने अंडरवियर में हो गया.

    फिर मैंने अपना अंडरवियर भी निकाल दिया और उसकी चूचियों पर टूट पड़ा. मुझे बूब्स चूसने में सबसे ज्यादा मजा आ रहा था. फिर वो मेरे होंठों को पीने लगी.

    उसने नीचे से मेरे लंड को पकड़ना चाहा. मैंने उसके हाथ में अपना लंड दे दिया. वो मेरे लंड को सहलाने लगी. उसकी मुठ मारने लगी. मुझे बहुत मजा आ रहा था.

    उसके होंठों को छोड़ कर मैं उसकी चूचियों से होते हुए उसकी नाभि पर किस करते हुए नीचे तक आ गया. फिर मैंने उसकी चूत की ओर रुख किया. उसकी पैंटी को निकाल दिया. उसकी चूत के आसपास के बाल साफ किये हुए थे.

    मैं उसकी चूत को ध्यान से देख रहा था. मैंने चूत अपनी जिन्दगी में अपनी आंखों के सामने पहली बार देखी थी. मैं उसकी चूत के इर्द गिर्द चूमने लगा और वो एकदम से सिहर गयी.

    फिर मैंने उसकी चूत पर मुंह रख दिया. मैं उसकी चूत को चाटने लगा. उसकी चूत पर मुंह लगा कर उसको चूसने लगा. उसकी चूत का रस बहुत ही मादक सा था. चूत की खुशबू पहली बार मैंने ली थी और स्वाद भी बहुत मस्त था.

    कुछ देर तक उसकी चूत को चूसने और चाटने के बाद मैंने उसकी चूत पर लंड को रख दिया. लंड को चूत पर रखने के बाद मैंने उसकी चूत में लंड को धकेला लेकिन लंड फिसल गया.

    मुझे चुदाई का तजुरबा तो था ही नहीं, साथ ही उसकी चूत भी बहुत टाइट थी. मैंने फिर से कोशिश की लेकिन फिर भी लंड नहीं गया. एक दो बार में ही मेरे लंड को सुपारा लाल हो गया. वो भी बार बार उचक रही थी.

    मैंने सोचा कि ऐसे बात नहीं बनेगी. मैंने तेल की शीशी ली और अपने लंड पर बहुत सारा तेल लगा लिया. उसकी चूत के द्वार पर भी काफी सारा तेल मल दिया.

    तेल लगाकर मैंने झटका मारा तो वो बेड पर ऊपर की ओर सरक गयी. मैंने उसको पकड़ लिया. फिर से नीचे लाकर उसकी चूत में फिर से लंड को घुसा दिया. वो चीखने को हुई लेकिन मैंने उसके मुंह को अपने मुंह से बंद कर दिया.

    धीरे धीरे करके मैंने लंड को उसकी चूत में उतार दिया और फिर उसके ऊपर लेट गया. कुछ देर का विराम देने के बाद मैंने फिर ऊपर नीचे होना शुरू किया. उसको भी अच्छा लगने लगा.

    पहले तो मैं धीरे धीरे करता रहा और फिर मैंने स्पीड बढ़ाने की सोची. उसकी चूत में अब मैं तेजी के साथ धक्के लगाने लगा. चुदाई में मुझे गजब का मजा मिल रहा था. उसकी चूत काफी टाइट थी. शायद उसके पति के साथ उसके सेक्स संबंध ज्यादा अच्छे नहीं थे.

    15 मिनट तक मैंने उसकी चूत को इसी पोज में चोदा. फिर मैंने उसको डॉगी स्टाइल में कर लिया. अब वो आराम से लंड को अंदर ले रही थी. मुझे भी चुदाई में पूरा आनंद मिल रहा था. उसके बाद मैंने उसकी चूत में पीछे से धक्के लगाना शुरू कर दिया.

    उसके मुंह को अपने हाथ से बंद कर लिया और तेज तेज उसकी चूत को चोदने लगा. वो गूं गूं की आवाज करने लगी मगर मुझे चुदाई का चस्का ऐसा चढ़ा कि मैंने उसकी चूत फाड़ ही डाली.

    आधे घंटे तक उसकी चूत चोदने के बाद मेरा पूरा बदन पसीने में भीग गया था और उसका हाल तो मुझसे भी बुरा था. उसके मुंह से अब तेज तेज आवाजें आ रही थीं उम्म्ह… अहह… हय… याह… जिनमें दर्द और आनंद का मिला जुला सा रूप था.

    चूंकि मेरा घर बाहरी एरिया में था इसलिए किसी को कुछ पता चलने का भी डर नहीं था. मैंने जमकर उसकी चूत चोदी. इतनी जबरदस्त चुदाई करने के बाद भी जब मैं नहीं झड़ा तो मैंने उसको सीधी कर लिया. उसकी टांगों को अपने कंधे पर रख लिया और उसकी चूत में फिर से लंड दे दिया.

    अगले दस मिनट तक फिर मैंने उसकी चूत को रगड़ा. वो बुरी तरह से थकी हुई लग रही थी. मुझे नहीं पता था कि औरत कितनी देर में झड़ती है. मगर मुझे लग रहा था कि इस दौरान वो 3-4 बार तो झड़ ही गई होगी.

    फिर मैं भी झड़ने के करीब पहुंच गया. मैंने उसकी चूत में वीर्य छोड़ दिया. उसकी चूत में वीर्य छोड़ने के बाद मैं हांफता हुआ उसके ऊपर गिर गया. वो जैसे बेसुध हो गयी थी.

    उसके बाद वो उठी और अपने कपड़े पहनने लगी. उससे सही से चला भी नहीं जा रहा था. फिर मैं उसको उसके घर तक छोड़ कर आया. इस तरह से मुझे बाद में पता चला कि मेरी टाइमिंग डेढ़ घंटे के करीब है.

    उस दिन मैंने उसकी चुदाई की ऑडियो रिकॉर्डिंग भी कर ली थी. वो रिकॉर्डिं करीब 45 मिनट की थी. अगर कोई लड़की उसको सुन ले तो उसकी चूत से पानी निकल जाये.

    पहली चुदाई के बाद उस दिन मुझे भी थकान हो रही थी तो मैं घर वापस आकर सो गया. उसके बाद मैंने अपनी बचपन की दोस्त की चूत कई बार चोदी. उसको होटल में ले जाकर भी कई बार चोदा.

    अब वो मेरे लंड से चुदने की आदी हो गयी थी. उसके साथ मैंने और क्या क्या किया वो सब मैं आप लोगों को फिर कभी बताऊंगा. फिलहाल की इस कहानी में इतना ही.

  • घर बुलाकर गर्लफ्रेंड की चुदाई

    मेरी एक गर्लफ्रेंड थी लेकिन दूसरे शहर की … हम फोन पर खूब बातें करते. हमारा मिलने का मन था लेकिन हम मिल नहीं पा रहे थे. जब हम मिले तो …

    हैलो फ्रेंड्स, कैसे हैं आप लोग. मेरा नाम रूबल शर्मा है और मैं बांदा उत्तर प्रदेश का रहने वाला हूँ. मैं देखने में साधारण ही हूँ. औसत बॉडी है.

    अन्तर्वासना पर ये मेरी पहली सेक्स स्टोरी है गर्लफ्रेंड की चुदाई की. चूंकि पहली बार है इसलिए ग़लती हो जाना पक्का है. प्लीज़ नजरअंदाज कर दीजिएगा.

    ये कहानी आज से 2 साल पहले की है, जब मैं अपना ग्रॅजुयेशन कर रहा था. उन दिनों मेरी एक गर्लफ्रेंड थी, जिसका नाम नम्रता था. वो ग्वालियर से थी, देखने में थोड़ी सी सांवली थी, लेकिन थी सेक्सी.

    हम लोग फोन बार खूब बात किया करते थे. उसका मुझसे मिलने का बड़ा मन था और मुझे तो था ही. लेकिन हम दोनों के मिलने का कुछ नहीं हो पा रहा था.

    एक बार मेरे घर में शादी थी, तो सब लोगों को दिल्ली जाना था. मेरा मन नहीं था. तो मैं घर में ही रुक गया.

    उस दिन जब मेरी उससे बात हुई और मैंने उससे अपने यहां आने का कहा. पहले तो वो थोड़ा डर गयी, लेकिन फिर मेरे कहने पर मान गयी.
    उसने अपने घर में कह दिया कि कॉलेज का ट्रिप है, तो बाहर जाना है.

    मैंने उसका रात वाली गाड़ी से रिज़र्वेशन भी करा दिया. रात को गाड़ी आई, तो उसे लेने मैं स्टेशन आ गया. वहाँ से उसको लिया और अपने घर ले आया. रास्ते में वो मुझसे चिपक कर बैठी थी.

    घर ले आने के बाद मैं उसे अपने कमरे में ले गया और उसे बिठा दिया. उसका गला सूख रहा था, तो उसने मुझसे पानी मांगा. मैंने उसे पानी पीने को दिया.

    वो अभी भी डर रही थी. मैं उसके बाजू में ही बैठा था. हम दोनों इधर उधर की बातें ही कर रहे थे. थोड़ी देर बाद वो नॉर्मल हुई, तो मैंने उससे बात करते करते उसके बाल खोल दिए.

    वो शर्मा गयी और उसने मेरे कंधे पर अपना सिर रख लिया. मैंने उसके सर को उठाया और किस करने लगा. उसने आँखें बंद कर लीं.

    थोड़ी देर किस करने के बाद मैंने उसे बेड पर लिटा दिया और उसके ऊपर आकर उसे किस करने लगा. उसने भी मुझे अपने से चिपका लिया.

    मैंने उसे हाथ ऊपर करने वो कहा, तो उसने हाथ ऊपर कर लिए. मैंने उसकी कुरती उतार दी. अन्दर उसने एक छोटी सी गुलाबी रंग की ब्रा पहनी हुई थी.

    मैंने एक पल उसकी ब्रा में कैद उसकी चुचियों को निहारा और अगले ही पल उसकी पूरी बॉडी पर किस करने लगा. मेरे ताबड़तोड़ चूमने से उसकी सांसें तेज हो गईं और वो भी बहकने लगी.

    जब मैंने उसकी नाभि में जीभ घुमाई, तो वो तड़प उठी और उसने मेरा सिर दबा लिया. मैं धीरे धीरे किस करता हुआ नीचे आया और उसकी सलवार भी उतार दी. मेरे सामने वो ब्रा पेंटी में थी और शर्मा रही थी. उसकी पेंटी गीली हो गयी थी.

    मैंने झुक कर चुत को भी चूम लिया. चुत पर मेरे होंठों की छुअने पाते ही उसके मुख से एक सिसकारी निकल गयी.

    अब मैं खड़ा हुआ और मैंने अपनी चड्डी छोड़ कर सारे कपड़े उतार दिए. मैंने उसको भी खड़ा कर दिया. उसके पैर काँप रहे थे, तो मैंने उसे सहारा दिया और उसे चूमते हुए दीवार से चिपका दिया और उसकी पीठ पर किस करने लगा.

    वो ‘आहह आहह’ करते हुए आहें भर रही थी.

    इसी बीच मैंने उसकी ब्रा और अपनी चड्डी को उतार दिया. वो अभी भी दीवार से लगी हुई थी, तो मैं भी पीछे से जाकर उससे चिपक कर उसकी गर्दन और कंधे पर किस करने लगा. मेरा लंड उसकी गांड में गड़ने लगा. वो लंड का स्पर्श पाकर एकदम से चिहुंक गई.

    मैंने उसको सीधा किया, तो उसने अपनी आँखें बंद की हुई थीं. मैंने उसका हाथ अपने लिंग पर रखते हुए कहा- ये ले तेरी अमानत.
    लंड छूते ही वो शर्मा गयी और उसने झट से हाथ हटा लिया.

    अब मैं उसके मम्मों को चूसने लगा और वो ‘आह आआअहह आआ…’ करते हुए सिसकारियां लेने लगी.

    एक बार मैंने उसके निप्पल को काट लिया, तो वो ‘आउच …’ बोल कर बोली- आराम से चूसो … ये अब सिर्फ़ तुम्हारे ही हैं.

    फिर मैंने अपना हाथ उसकी पेंटी में डाल दिया और उसकी चूत सहलाने लगा उसकी चूत पर थोड़े से बाल थे.

    मैंने उसकी टाँगें खोल दीं और पेंटी उतारने लगा.
    उसने मेरा हाथ पकड़ लिया.
    मैंने पूछा- क्या हुआ जानू … अब कैसी शर्म? अब तो सब कुछ मेरा है ना!

    उसने हंस कर हाथ हटा दिया. मैंने उसकी पेंटी उतारी, तो उसकी चूत पूरी गीली हो गयी थी. मैंने चुत पर हाथ लगाया तो वो ‘उई … माँ … सीईईई..’ कर उठी.

    मैं नीचे बैठ कर उसकी चूत चाटने लगा. वो तड़प उठी और ‘उफफफ्फ़ आआहह … सीईईईई.’ करने लगी. उसने अपने हाथों से मेरे सिर को अपनी चूत पर दबा लिया. मैं बेतहाशा उसकी चूत चाटे जा रहा था.

    वो लगातार ‘उम्म्म्म … अहहहह … आराम से.’ बोलते हुए सिसकारती जा रही थी. मैंने कुछ पल बाद उसका एक पैर अपने कंधे पर रखा और उसकी चूत पूरी अन्दर तक और पूरी पीछे तक चाटने लगा. मेरे मुँह में उसकी झांटों के बाल आ रहे थे, लेकिन चुत चाटने में मज़ा भी बहुत आ रहा था.

    कोई पांच मिनट तक चुत चाटने के बाद मैं उसको बेड पर ले आया और लिटा दिया. मैंने उसकी टाँगें खोल दीं और मैं उसकी चूत में उंगली डालने लगा, तो उसे तकलीफ़ होने लगी. उसकी चूत बहुत टाइट थी.

    मैंने पास रखी वैसलीन लगाई और फिर कोशिश करने लगा. इस बार मेरी आधी उंगली अन्दर चली गयी.

    वो तड़प उठी और बोली- बस करो, इतना ही रहने दो.
    मैंने कहा- जानू अभी तो आधी ही अन्दर गयी है … अभी तो मैं इसमें पूरा हाथ भर का अपना अन्दर डालूँगा.
    इस पर वो बुरी तरह से शर्मा गयी और बोली- तुम ना बहुत बदतमीज़ हो.

    उसकी इस बात से मुझे हंसी आ गयी और मैंने उसे किस कर लिया. मैं उसके ऊपर लेट गया और हमने एक दूसरे को कसके चिपका लिया.

    एक पल बाद मैं उठ कर चुदाई की पोजीशन में आया और मैंने उसे ऊपर से नीचे तक देखा.
    वो शरमा कर बोली- ऐसे क्या देख रहे हो?
    मैंने कहा- तू बहुत खूबसूरत है.
    वो शर्मा गयी.

    उसने पूछा- क्या मैं कपड़ों में खूबसूरत नहीं लगती हूँ?
    मैं हंस दिया और अपनी बात को पलटते हुए बोला- यदि तुम कपड़ों में खूबसूरत नहीं दिखतीं तो हम दोनों में प्यार कैसे हो सकता था.
    वो हंसी और बोली- तो अभी ये बात कहने का क्या मतलब है?
    मैंने उसकी चूची मसली और कहा कि मेरा मतलब ये था कि तुम पूरी नंगी होने पर और भी खूबसूरत लग रही हो.

    उसने समर्पण की मुद्रा में अपने दोनों हाथ फैला कर मुझे आगे बढ़ने का इशारा किया.

    मैंने धीरे धीरे उसकी टाँगें खोलीं और अपना लंड उसकी चूत के मुहाने पर रख कर घिसने लगा. उसकी चूत पानी छोड़ रही थी.
    उसने आँखें खोलीं और कहा- जानू आराम से करना … मेरा पहली बार है.
    मैंने कहा- चिंता मत करो बिल्कुल तकलीफ़ नहीं होगी.

    मैंने धीरे धीरे लंड घिसते हुए एक झटका मारा और मेरा लंड उसकी चूत में घुस गया.

    उसी पल वो चिल्ला दी- उई … माँ … मर गई … आआहह … फट गई … मैं मर गयी.

    मैं उसके ऊपर झुक गया और उसे किस करने लगा. उसके मम्मों को चूसने लगा. वो शांत हुई ही थी कि मैंने थोड़ा रुक कर एक और झटका दे मारा. इस बार मेरा पूरा लंड उसकी चूत में समा गया.

    उसकी चूत में से खून निकल रहा था और आँखों में से आँसू बह रहे थे. मैंने उसे सहलाते हुए कहा- बस हो गया जानू …
    अब मैं धीरे धीरे शॉट्स मारने लगा. थोड़ी देर में उसको मज़ा आने लगा और वो भी गांड उठा उठा कर मेरा साथ देने लगी.
    मैं दनादन धक्के मार रहा था और वो ‘आआह … अहह … मजा आ रहा है … और तेज करो …’ बोल रही थी.

    कोई बीस मिनट बाद हम दोनों ही झड़ गए. मैं उसके ऊपर गिर गया. उसने मुझे कसके चिपका लिया और ऐसे ही किस करते हुए हम एक दूसरे की बांहों में सो गए.

    उस रात हम दोनों ने चार बार सेक्स किया और सुबह देर तक सोने के बाद हम दोनों साथ ही नहाये और बाथरूम में भी एक बार सेक्स किया. फिर मैं उसे मोहल्ले वालों की नजर से बचाते हुए स्टेशन छोड़ कर आ गया.

    दोस्तो, ये थी मेरी गर्लफ्रेंड की सील तोड़ चुदाई … आपको मेरी ये गंदी कहानी कैसी लगी 

  • ससुर जी का घोड़े जेसा लंड

    दोस्तो मेरी उमर 26 साल की है मेरी शादी हो चुकी है मेरे पति एक मार्केटिंग कंपनी मे जॉब करते है इस लिए वो ज़्यादातर घर से बाहर ही रहते है. अभी मेरी शादी को सिर्फ़ 3 साल हुए है और ये कहानी दोस्तो आज से करीब 2 साल पहले की है. मेरे घर मे मेरे सास ससुर और मेरी एक 18 साल की ननद रहती है. बेस्ट इंडियन सेक्स स्टोरीस
    मेरी शादी को 3 साल हो चुके है और अभीतक मैं 25-30 बार ही सेक्स किया है क्योकि मेरे हज़्बेंड के पास इतना टाइम नही होता. इसलिए मैं और मेरी चूत चुदाई के लिए तड़पति रहती है. एक दिन की बात है मैं अपने रूम मे बैठकर .वी पर कुछ देख रही थी तभी मुझे प्यास लगी और मैं किचन मे से पानी पीने के लिए जाने लगी. जब मैं किचन मे जा रही थी तभी मुझे अपने ननंद के रूम मे से कुछ आवाज़े सुनी, मैने उसके रूम की विंडो मे से चुपके से देखा तो मैं पूरी तरह से हैरान रह गई.
    मैने देखा की मेरी ननंद नंगी नीचे ज़मीन पर पूरी नंगी लेटी हुई है और हमारा कुत्ता उसकी चूत को चाट रहा है और वो कुत्ते के लंड को अपने हाथ मे लेकर ज़ोर ज़ोर से उपर नीचे कर रही है और कुछ ही देर बाद वो कुत्ते के सामने कुत्ति बन गई और कुत्ता उसके उपर पीछे से चढ़ गया और ज़ोर ज़ोर से उसे चोदने लग गया. मुझसे ये सब देखा ना गया इसलिए मैं वाहा से हट गई.
    करीब 15 मिनिट बाद मेरी ननंद के रूम मे से कुत्ता बाहर आया और उसके पीछे से मेरी ननंद भी आ गई. मैने उसे सॉफ सॉफ बता दिया की मैने उसे ये सब करते हुए देख लिया है. वो मेरे सामने रोने लग गई पर मैने उसे समझाते हुए कहा तुम कोई अपना बॉयफ्रेंड बना लो ऐसे जानवर से ऐसे काम करवाना ठीक नही है.
    तब मेरी ननंद ने कहा – भाभी मैं बॉयफ्रेंड तो बना लून पर आदमी का तो कुत्ते से भी ज़्यादा बड़ा होता है इसलिए मुझे डर लगता है.
    मैं – नही इतना भी बड़ा नही होता जितना तुम समझ रही हो.
    मेरी ननद – नही भाभी मैने देखा है इस लिए मैं कह रही हूँ.
    मैं – अछा किस का देख लिया है तूने, कही हॉर्स का तो नही देख लिया.
    मेरी ननंद – नही भाभी मैने डॅड का देखा है उनका लंड तो हॉर्स से बड़ा है कसम से इतना लंबा और मोटा लंड तो मैने आज तक नही देखा.
    ननंद के मूह से ऐसी बातें सुनकर मेरी चूत मे खुज़ली होनी शुरू हो गई. मुझे तो पता ही नही था की मेरे घर मे जबरदस्त चुदाई का समान है. अब मुझे किसी भी हालत मे ससुर जी का लंड देखना था बस मुझे एक आछे से मोके की तलाश थी.
    और मुझे जल्दी ही एक . मिल गया. उस दिन मेरे सारे घरवाले किसी शादी मे 2 दिन के लिए चले गये. घर मे मैं और मेरे ससुर थे. जब रात हुई तो मैने ससुर जी के दूध मे नींद की मेडिसिन घोल कर दे दी. दूध पीते ही उन्हे नींद आनी शुरू हो गई. पर फिर भी मैं करीब 30 मिनिट बाद ही उनके रूम मे गई. बेस्ट इंडियन सेक्स स्टोरीस
    मैने अंदर जाते ही ससुर जी को बहोत हिलाया जब वो नही उठे तो मैं समझ गई अब रास्ता सॉफ है, मैं जल्दी से उनकी धोती साइड मे करी और अंडरवेर का नाडा खोल कर उनका लंड बाहर निकाल लिया. उनका लंड देख कर तो मेरी आँखों मे एक अलग सी चमक आ गई. मेरी ननंद सच मे सच कह रही थी, मेरे ससुर का लंड सच मे काफ़ी बड़ा और मोटा था वो कमाल की बात तो ये थी की अभी लंड बैठा हुआ था तो भी वो कितना ख़तरनाक लग रहा था.
    मैने अपने दोनो हाथो से लंड को पकड़ कर उपर नीचे करने लग गई और पता नही कब खुद ही मेरे होंठ लंड के पास आ गये और उसे चूमने लग गये. अब मैं लंड को अपने मूह मे लेकर चूसने लग गई और नीचे से उपर तक लंड को अपनी ज़ुबान से चाटने लग गई. तभी अचानक लंड मे एक करेंट सा लगा और लंड खड़ा होना शुरू हो गया. देखते ही देखते लॅंड 5 इंच से 14 इंच का हो गया
    मेरी आँखें खुली की खुली रह गई और मेरी खुशी का कोई ठिकाना नही था. सच मे लंड काफ़ी शानदार लग रहा था. अब तो मेरी ज़ुबान लंड को चाटने मे लगी हुई थी. लंड को देखकर अब मेरी चूत मे खुज़ली होनी शुरू हो गई थी. मैं उठी और अपनी सारी और पेटिकोट उतार सीधा लंड के उपर आ गई और लंड को अपने हाथ मे पकड़ अपनी चूत पर रगड़ने लग गई. मुझे बहोत मज़ा आ रहा था. मैं इतने बड़े लंड को चूत मे कैसे लूँगी इसके बारे मे सोच रही थी और लंड को अपनी चूत पर लगा कर नाप रही थी. मैने देखा की लंड अगर चूत मे जाता है तो वो मेरे पेट तक आता है.
    मुझे अब डर सा लगने लग गया इस लिए अब मैने जाने का फ़ैसला किया. मैं जैसे ही लंड के उपर से उठने लगी तभी मेरी कमर को किसी ने ज़ोर से पकड़ लिया. मैं एकदम बहोत डर गई, मैने देखा तो ससुर जी जाग चुके थे और उन्होने ही मुझे पकड़ा हुआ था.
    ससुर – बहू अब लंड को नाप तो लिया है तुमने अब . अपनी चूत मे भी ले लो ना तुम्हे बहोत मज़ा आएगा.
    मैं उन्हे अपने को छुड़वाने की कोशिश करी पर उन्होने एक दम मुझे बेड पर दे मारा और मेरे उपर आ कर बहोत बुरी तरह मेरे बूब्स को मसलने लग गये. मेरे आँखे बंद होनी शुरू हो गई क्योकि अब मैं मदहोश सी होनी शुरू हो गई थी. तभी ससुर जी ने मेरा ब्लाउस पकड़ा और खींच कर फाड़ दिया और मेरे नंगे बूब्स को एक एक करके अपने मूह मे लेकर चूसने लग गये.
    मुझे बहोत मज़ा आने लग गया मैं पागल सी होने लगी थी क्योकि आज तक मेरे बूब्स मेरे पति ने भी नही चूसे थे. ससुर जी अब मेरी चूत मे उंगलिया कर रहे थे. मेरी चूत गीली होनी शुरू हो गई थी. मुझे सच मे बहोत मज़ा आ रहा था. तभी ससुर जी नीचे गये और मेरी चूत को अपनी ज़ुबान से चाटने लग गये. जैसे ही उनकी ज़ुबान मेरी चूत पर लगी वैसेही मेरे पूरे जिस्म मे करेंट सा दौड़ने लग गया. अब मेरे एक हाथ मे उनका लंड था जिसे मैं ज़ोर ज़ोर से उपर नीचे कर रही थी.
    अचानक ही ससुर जी ने मेरे हात से लंड ले लिया और खुद ही अपना लंड मेरी चूत के उपर रगड़ने लग गये मेरी चूत के दाने के उपर लंड पूरी स्पीड मे उपर नीचे हो रहा था. मैं पूरी तरह से पागल हो चुकी थी क्योकि आज तक ऐसा मज़ा कभी नही मिला था. करीब 2 मिनिट बाद ही मेरी चूत ने काफ़ी सारा पानी बाहर निकाल दिया.
    ससुर जी – बहू ये क्या है अभी तो मेरा लंड तेरी चूत के अंदर गया भी नही और तेरी चूत ने पहले ही जवाब दे दिया. बेस्ट इंडियन सेक्स स्टोरीस
    उनके मूह से ऐसी बातें सुनकर मैं शर्मा गई और मैं धीरे से बोली – ससुर जी अब प्लीज़ आप मेरी चूत को आछे से चोद दे मुझे बहोत परेशान करती है.
    ये सुनते ही ससुर जी ने मेरे होंठो को चूसा और नीचे जाकर मेरी चूत को फिरसे चाटने लग गये. अब की बार वो अपनी ज़ुबान मेरी चूत के दाने पर घुमा रहे थे जिससे मेरे मूह से अब आहह आहह की मस्ती से भरी आवाज़े निकल रही थी.
    ससुर जी अब अपनी दो उंगलिया मेरी चूत मे उतार दी और ज़ोर ज़ोर से उपर नीचे कर रहे थे और साथ मे ही उपर से मेरी चूत के दाने को चाट रहे थे. एक साथ दो हमले मेरी चूत सहन ना कर पाई और करीब एक मिनिट मे ही मेरी चूत ने फिर अपना सारा पानी निकल दिया.
    मैं – ससुर जी अब क्यो आप मुझे तड़पा रहे हो प्लीज़ जल्दी से अब आप अपना लंड मेरी चूत मे डालो और मेरी प्यास को भुजा दो प्लीज़.
    मैने उनके लंड को हाथ मे पकड़ा तो मैने देखा की ये तो इतना मोटा है की ये मेरे हाथ मे नही आ रहा है ये तो मेरी चूत के चितड़े चितड़े कर देगा. मेरे चेहरे पर इस परेशानी के भाव देख कर ससुर जी बोले – मेरी बहू तू फिकर ना कर आज इस लंड को अपनी चूत मे ले फिर, आज के बाद तू किसी दूसरे के लंड को देखेंगी भी नही.
    मैं – पर ससुर जी आज आप मेरी चूत की आछे से चुदाइ करना ये साली मुझे बहोत तंग करती है.
    ये सुनते ही ससुर जीने मेरी तरफ देखकर हल्की सी स्माइल करी और अपना लंड मेरे मूह के पास कर दिया. मैं समझ गई की अब ये क्या चाहते है मैने झट से अपना मूह खोल दिया और ज़ोर ज़ोर से लंड को आछे से चूसने लगी.
    ससुर जी तभी मेरा सिर पकड़ लिया और ज़ोर ज़ोर से मेरे को अपने लंड से चोदने लग गये. अब उनका लंड मेरे गले के अंदर जा रहा था जिससे मुझे सांस लेने मे बहोत दिक्कत आ रही थी पर वो रुके नही और करीब 5 मिनिट तक मेरे मूह ऐसे ही बे- रहमी से चोदते रहे.
    अब उन्होने अपना लंड मेरे मूह से निकाला और मेरी चूत पर रखकर और थोड़ासा ज़ोर लगा कर अपने लंड का आगे वाला हिस्सा पहले मेरी चूत मे उतारा और बाद मे फिर एक ज़ोर से धक्का लगा कर करीब 4-5 इंच तक लंड मेरी चूत मे उतार दिया. बेस्ट इंडियन सेक्स स्टोरीस
    लंड अंदर जाते ही मेरी जान निकल गई मैं उनके नीचे एक मछली की तरह तड़प रही थी. अब ससुर जी बहोत पुराने खिलाड़ी थे और धीरे धीरे मेरी चूत मे अपना लंड अंदर बाहर करते रहे. अब उन्होने मेरी गॅंड के नीचे मे पिल्लो रखा जिससे अब मेरी चूत उपर उठ गई और अब तो ससुर जी ने अपना लंड मेरी चूत मे एक दम डाला और उपर नीचे करने लग गये. अब ससुर जी मेरे उपर आ गये और ज़ोर ज़ोर से मेरी चूत को चोदने लग गये.
    ससुर जी ने अब अपना बाहर निकाला और एक जोरदार धक्के से अपना पूरा 14 इंच का लंड एक ही बार मे मेरी चूत मे उतार दिया. अब मैने अपनी दोनो टाँगे उपर उठा ली और अपनी गॅंड उठा उठा कर अपने ससुर जी का लंड अपनी चूत मे लेने लग गई. ससुर जीने मेरी दोनो टाँगो को अपने मोढ़े पर रख लिया और ज़ोर ज़ोर से मुझे चोदने लग गये. मुझे बहोत मज़ा आ रहा था मैं अपनी दोनो आँखें बंद कर के ससुर जी के हर धक्के का मज़ा ले रही थी.
    करीब 20 मिनिट की इस घमासान चुदाई के बाद अचानक मेरा पूरा जिस्म अकड़ गया मेरी चूत ने ससुर जी के लंड पर अपने पानी की बारिश कर दी और 2 मिनिट बाद ही ससुर जी ने भी अपना सारा पानी मेरी चूत मे ही निकाल दिया. मुझे बहोत ज़ोर से पेशाब आ रहा था पर मुझसे उठा तक नही जा रहा था इस लिए ससुर जी मुझे अपनी गोद मे उठाकर बाथरूम मे ले गये और मैने उनके सामने बाथरूम किया क्योकि उन्होने मेरी चूत मे से निकलते पेशाब को देखना था.
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    मेरी चूत से निकलते गरम गरम पीले पीले पेशाब को देखकर ससुर जी फिर से गरम हो गये और अपना लंड मेरे मूह मे डाल कर फिर से मेरे मूह को चोदने लग गये. फिर ससुर जीने मुझे टाय्लेट की सीट पर बिताया और मेरी दोनो टाँगे उपर कर के मेरी चूत और गॅंड दोनो मारी. आज मेरी चूत और गॅंड दोनो आछे से फट चुकी थी और मेरी बहोत ज़्यादा बुरी हालत हो चुकी थी. बेस्ट इंडियन सेक्स स्टोरीस
    उस दिन से मैं रोज रात को अपने ससुर जी से चुदति हूँ, एक दिन मेरी ननंद ने मुझे और अपने डॅड से सेक्स करते देख लिया और फिर मैने अपने साथ उसे भी ले लिया. अब हम तीनो इस सेक्स लाइफ के पूरे मज़े लेते है.