राज और फोरम की जुनूनी कहानी 2

एक राउंड पूरा होने तक फोरम लगातार चिल्लाती और रोती रही। मैंने धीरे-धीरे स्पीड बढ़ाई लेकिन ज्यादा नहीं। करीब १५-२० मिनट तक अंदर-बाहर करने के बाद मैं झड़ गया। कंडोम में गरम स्पर्म का फव्वारा छूटा।

फोरम थककर बिस्तर पर पड़ी थी। उसकी सांसें अभी भी तेज थीं। चूत से थोड़ा खून और पानी मिला हुआ निकल रहा था। मैंने कंडोम उतारा, उसे गले लगा लिया और उसके माथे पर किस किया।

“मेरी रानी… तू बहुत बहादुर है। अब दर्द कम हो जाएगा। मैं तुझे बहुत प्यार करता हूँ।”

फोरम मेरी छाती में मुंह छिपाकर धीरे से रो रही थी और फुसफुसा रही थी, “राज… बहुत दर्द हुआ… लेकिन… तुम्हारी हूँ अब…”

हम दोनों पसीने और थकान से तर थे। मैंने उसे कसकर गले लगा रखा था।

पहला राउंड खत्म होने के बाद हम दोनों थककर बेड पर लेटे हुए थे। फोरम मेरी छाती से चिपकी हुई थी। उसकी सांसें अभी भी तेज चल रही थीं। चूत से हल्का खून और पानी मिला हुआ निकल रहा था। मैं उसके बालों को प्यार से सहला रहा था और बार-बार उसके माथे पर किस कर रहा था।

“मेरी जान… तू ठीक है ना?” मैंने धीरे से पूछा।
फोरम ने सिर्फ सिर हिलाया और मेरी छाती में मुंह छिपा लिया। वो अभी भी हल्का-हल्का रो रही थी।

ठीक १० मिनट बाद मैंने उसे फिर से चूमना शुरू किया। उसके होंठों को चूसा, गर्दन पर किस किए। मेरे हाथ उसके स्तनों पर फिरने लगे। फोरम की सांसें फिर से तेज हो गईं। मैंने उसके कान में फुसफुसाया, “बेबी… दूसरा राउंड शुरू करते हैं। लेकिन अब तेरी मर्जी से। तू बोल जब शुरू करना हो।”

फोरम ने कुछ सेकंड सोचा, फिर शरमाते हुए धीरे से बोली, “राज… शुरू कर दो… लेकिन बहुत धीरे… प्लीज।”

मैंने मुस्कुराकर उसे फिर मिशनरी पोजीशन में लिटा दिया। उसके पैर फैलाए और अपनी कमर के दोनों तरफ रख दिए। नया कंडोम निकाला, खुद लगाया और लुब्रिकेंट अच्छे से लगाया। लंड फिर से पूरा खड़ा हो चुका था।

मैंने लंड की नोक को उसकी सूजी हुई चूत पर रखा और बहुत धीरे से धक्का दिया। सिर्फ १ इंच अंदर गया।

“आह… राज… फिर दर्द… चिल्ला…!”
फोरम फिर से चिल्ला उठी। उसकी चूत अब और भी सूज गई थी, इसलिए दर्द पहले से ज्यादा था। वो रोने लगी। आंसू उसके गालों पर बह रहे थे।

मैं रुका नहीं। धीरे-धीरे २ इंच… ३ इंच… हर इंच पर फोरम जोर-जोर से चिल्ला रही थी और रो रही थी।
“राज… बहुत दर्द हो रहा है… आह… निकालो… रो… मैं सह नहीं पा रही… चीख…!”

लेकिन इस बार मैंने उसकी मर्जी से शुरू किया था, इसलिए मैं धीरे-धीरे आगे बढ़ता रहा। ५ इंच होने पर उसकी चूत बुरी तरह सूज चुकी थी। लाल हो गई थी और हर धक्के पर वो तड़प रही थी। उसके नाखून मेरी पीठ पर गहरे निशान बना रहे थे। वो बार-बार चिल्लाती, “राज… बस… बहुत हो गया… आह… दर्द… रो रही हूँ…”

मैं बीच-बीच में रुककर उसके होंठ चूमता, स्तन चूसता, आंसू पोछता और कहता, “मेरी रानी… बस थोड़ा और… तू बहुत अच्छी है… मैं तुझे प्यार करता हूँ।”

इस दूसरे राउंड में मैंने पूरी ५५ मिनट तक चोदा। पहले २० मिनट तो सिर्फ धीरे-धीरे अंदर-बाहर किया। उसके बाद थोड़ी स्पीड बढ़ाई लेकिन ज्यादा नहीं। फोरम पूरे समय चिल्लाती और रोती रही। कभी-कभी वो मेरी कमर को अपने पैरों से कसकर पकड़ लेती, कभी धक्का देने की कोशिश करती। उसकी चूत अब बुरी तरह सूज गई थी – लाल, फूली हुई, हर बार लंड निकलते या घुसते समय वो जोर से कराहती।

“आह… राज… मेरी चूत फट गई… बहुत सूज गई है… चिल्ला… रो… प्लीज रुक जाओ…”

लेकिन मैं रुका नहीं। ५५ मिनट पूरे होने पर मैं जोर से झड़ गया। कंडोम में गरम स्पर्म भर गया। फोरम भी इस बार थोड़ा सा झड़ गई थी, लेकिन दर्द ज्यादा था इसलिए वो सिर्फ हांफ रही थी और रो रही थी।

राउंड खत्म होते ही मैंने लंड बाहर निकाला। फोरम की चूत बुरी तरह सूजी हुई थी – लाल, फूली, थोड़ा खून भी अभी भी निकल रहा था। वो बेड पर लेटी हुई कराह रही थी।

मैंने तुरंत उसे गोद में उठा लिया। “आ जा बेबी… अब आराम करेंगे।”

मैं उसे जकूजी टब की तरफ ले गया। टब में गर्म पानी भर दिया। पानी में थोड़ा बबल्स और खुशबू वाला शॉवर जेल डाला। पानी अच्छे से गर्म था लेकिन जलाने वाला नहीं। मैं पहले खुद टब में बैठ गया, फिर फोरम को अपनी गोद में बिठा लिया।

गर्म पानी उसकी सूजी हुई चूत पर पड़ते ही फोरम ने राहत की सांस ली। “आह… राज… अच्छा लग रहा है… गर्म पानी… दर्द कम हो रहा है…”

मैं उसके पीछे बैठा था। उसकी पीठ मेरी छाती से सटी हुई थी। मैंने दोनों हाथों से उसके स्तनों को हल्का-हल्का दबाते हुए मसाज देना शुरू किया। उसके बालों को सहलाया, गर्दन पर किस किए। फोरम ने आंखें बंद कर लीं और मेरी गोद में ढीली पड़ गई। पानी में हम दोनों १५-२० मिनट तक बैठे रहे। बीच-बीच में मैं उसके कान में प्यार भरी बातें कहता रहा – “तू मेरी रानी है… मैं तुझे कभी दुख नहीं पहुंचाऊंगा… अब तू पूरी तरह मेरी हो गई…”

नहाने के बाद मैंने उसे टॉवल से अच्छे से पोंछा। फिर गोद में उठाकर वापस बेड पर ले आया। उसे बेड पर लिटाया और खुद उसके बगल में लेट गया। फोरम तुरंत मेरी छाती से चिपक गई। उसकी सूजी हुई चूत अभी भी दर्द कर रही थी, लेकिन गर्म पानी से थोड़ी राहत मिल गई थी।

वो धीरे से बोली, “राज… बहुत दर्द हुआ… लेकिन… मैं तुम्हारी हूँ अब…”

मैंने उसे कसकर गले लगा लिया और उसके माथे पर किस किया। “आराम कर मेरी जान। हम अभी सोते हैं।”

रात भर हम दोनों कसकर एक-दूसरे से चिपके सोए रहे। फोरम मेरी छाती पर सिर रखे, एक टांग मेरी टांग पर रखे, पूरी तरह नंगी मेरे बांहों में समाई हुई थी। मैंने रात में कई बार उसके बाल सहलाए, माथे पर किस किए और उसे अच्छे से कवर कर दिया था। एसी की ठंडी हवा में भी उसके शरीर की गर्मी मुझे अच्छी लग रही थी।

सुबह ठीक ७:०५ बजे मेरी आंख खुली। सूट की खिड़कियों से हल्की सुबह की रोशनी आ रही थी। मैंने बगल में देखा — फोरम अभी भी गहरी नींद में सो रही थी। उसके बाल बिखरे हुए थे, होंठ थोड़े खुले थे, चेहरा थकान और सुंदरता से भरा हुआ था। मैंने धीरे से अपना हाथ उसके शरीर पर फेरा। उसकी नरम छाती मेरी छाती से सटी हुई थी।

मैंने चुपके से चादर हटाई और नीचे देखा। फोरम की चूत अब भी काफी सूजी हुई थी, लेकिन रात के मुकाबले थोड़ी कम हो गई थी। लालिमा अभी भी थी, हल्का सूजन था, लेकिन देखने में और भी सेक्सी लग रही थी। मैंने देखा कि उसकी चूत थोड़ी-थोड़ी खुली हुई थी — कल रात के दो राउंड का असर साफ दिख रहा था।

मेरा लंड फिर से खड़ा होने लगा। मैंने बिना आवाज किए बेडसाइड टेबल से नया कंडोम और लुब्रिकेंट निकाला। कंडोम को चुपके से अपने ९ इंच के लंड पर चढ़ा लिया और अच्छे से लुब्रिकेंट लगा लिया। फिर मैं फोरम के पैरों को बहुत धीरे से फैलाया, ताकि वो न जागे।

मैं उसके ऊपर आ गया। लंड की नोक को उसकी सूजी हुई चूत के मुंह पर रखा और बहुत धीरे से पहला धक्का दिया। सिर्फ सिरा अंदर चला गया।

फोरम की आंखें अचानक खुल गईं। वो चौंककर बोली, “आह… राज… क्या कर रहे हो…?”
उसकी आवाज में नींद और दर्द का मिश्रण था।

मैंने तुरंत उसके होंठों पर किस किया और कान में फुसफुसाया, “सुबह हो गई मेरी जान… तू बहुत प्यारी लग रही थी सोते हुए… मैं रोक नहीं पाया…”

फिर मैंने दूसरा धक्का दिया। अब २ इंच अंदर हो गए।
“आह… राज… अभी भी दर्द हो रहा है… चीख… सूज गई है… धीरे… प्लीज…”
फोरम थोड़ी चिल्लाई और कराहने लगी। लेकिन वो पूरी तरह जाग चुकी थी। उसने अपनी दोनों बाहें मेरी पीठ पर डाल दीं और मुझे कसकर पकड़ लिया।

मैं रुका नहीं। धीरे-धीरे आगे बढ़ता गया — ३ इंच… ४ इंच… हर धक्के पर फोरम हल्की-हल्की चिल्ला रही थी और “आह… आह…” करके मेक ले रही थी। उसकी सूजी चूत अभी भी बहुत तंग थी, लेकिन कल रात की वजह से थोड़ी ढीली भी हो गई थी। फिर भी हर बार लंड घुसते समय वो तड़प जाती, “राज… बहुत सूजन है… दर्द… लेकिन… मत रुको…”

मैंने पूरे १०-१२ मिनट तक धीरे-धीरे चोदा। बीच-बीच में उसके स्तनों को चूसता, गर्दन चबाता और उसे चूमता रहा। फोरम अब रोने की बजाय सिर्फ कराह रही थी और कभी-कभी मेरी कमर को अपने पैरों से कसकर पकड़ लेती।

पहला सुबह का राउंड करीब १८ मिनट में खत्म हुआ। मैं जोर से झड़ गया। कंडोम भर गया। फोरम भी हल्का सा झड़ गई थी। वो हांफते हुए मेरी छाती पर गिर गई।

लेकिन मैंने रुकने नहीं दिया। सिर्फ ५ मिनट आराम करके मैंने दूसरा राउंड शुरू कर दिया। इस बार मैंने उसे साइड पोजीशन में किया — उसके एक पैर को ऊपर उठाकर। लंड फिर से अंदर किया।

“आह… राज… फिर… सूज गई चूत… चिल्ला… आह… मेक…!”
फोरम फिर चिल्लाई लेकिन अब दर्द कम था। वो “आह… आह…” करके मेक ले रही थी। मैंने इस राउंड में थोड़ी तेजी से चोदा। २२ मिनट तक लगातार धक्के दिए। उसके सूजे हुए स्तन मेरे हाथों में थे। मैं उन्हें दबाता, चूसता और नीचे से जोर-जोर से ठोकता रहा।

फोरम पूरे समय कराहती रही — “राज… हां… धीरे… आह… अच्छा लग रहा है… लेकिन सूजन… आह…!”
दूसरा राउंड भी खत्म हुआ। मैं फिर झड़ गया। फोरम की चूत अब और ज्यादा सूज गई थी, लेकिन वो अब दर्द के साथ-साथ मजा भी ले रही थी।

दोनों राउंड खत्म होने के बाद मैंने कंडोम उतारा और फोरम को कसकर गले लगा लिया। वो मेरी बांहों में पूरी तरह ढीली पड़ गई थी। उसके चेहरे पर पसीना था, बाल बिखरे हुए थे, होंठ सूजे हुए थे।

“राज… सुबह-सुबह… तुम बहुत शैतान हो…” वो शरमाते हुए बोली और मेरी छाती में मुंह छिपा लिया।

मैंने हंसते हुए उसके बाल सहलाए और कहा, “मेरी रानी… तू सोते हुए इतनी प्यारी लग रही थी कि रोक नहीं पाया। अब उठो, हम नाश्ता करेंगे। फिर और मजा करेंगे।”

फोरम ने शरमा कर मुझे और कसकर गले लगा लिया। उसकी सूजी हुई चूत अभी भी मेरी जांघ से सटी हुई थी। हम दोनों कुछ देर ऐसे ही लेटे रहे — प्यार, थकान और सुबह की गर्माहट में डूबे हुए।

दो सुबह के राउंड के बाद फोरम मेरी छाती से चिपकी हुई थी। उसकी सांसें अभी भी भारी थीं और चूत बुरी तरह सूजी हुई थी। मैंने उसे प्यार से चूमते हुए कहा, “मेरी जान, अब हम दोनों फ्रेश हो जाते हैं।”

मैं सबसे पहले उठा और बाथरूम में चला गया। गर्म पानी से अच्छे से नहाया, दांत ब्रश किए, चेहरा धोया। जब मैं बाहर निकला तो सिर्फ एक सफेद टॉवल कमर पर लपेटे हुए था। फोरम अब बेड पर बैठ गई थी। उसके बाल बिखरे हुए थे, चेहरा थका हुआ लेकिन बहुत प्यारा लग रहा था।

“तू भी फ्रेश हो जा बेबी,” मैंने मुस्कुराते हुए कहा।

फोरम शरमाते हुए उठी। जब वो चलने लगी तो उसकी चाल थोड़ी अजीब थी — पैरों को थोड़ा फैलाकर चल रही थी क्योंकि चूत में अभी भी सूजन और दर्द था। वो बाथरूम में गई। मैंने बाहर खड़े होकर सुना — वो गर्म पानी से नहा रही थी और हल्का-हल्का कराह रही थी जब पानी उसकी सूजी चूत पर पड़ता। १५ मिनट बाद वो बाहर आई। उसके बाल गीले थे, शरीर पर सिर्फ एक सफेद टॉवल लपेटा हुआ था। टॉवल उसके स्तनों को मुश्किल से ढक पा रहा था और ऊपर से उसकी गोरी जांघें दिख रही थीं।

हम दोनों अब थोड़े फ्रेश हो चुके थे। मैंने रूम सर्विस को फोन किया और नाश्ता मंगवाया — फ्रेश फ्रूट्स (तरबूज, अंगूर, स्ट्रॉबेरी), ऑमलेट, टोस्ट, जूस, कॉफी और कुछ स्वीट डिश।

नाश्ता आ गया। मैंने ट्रे को बेड पर रख दिया। हम दोनों पूरी तरह नंगे थे। फोरम शरमा रही थी लेकिन मैंने उसे अपनी गोद में बिठा लिया। हमने साथ में नाश्ता किया। मैं स्ट्रॉबेरी उसके मुंह में डालता, वो मेरे मुंह में अंगूर रखती। बीच-बीच में मैं उसके स्तनों को हल्का छू लेता या गर्दन पर किस कर लेता। फोरम हंस रही थी लेकिन जब मैंने कहा, “अब एक राउंड और कर लें,” तो उसने तुरंत मना कर दिया।

“नहीं राज… अब बस हो गया। बहुत दर्द हो रहा है। मेरी चूत बुरी तरह सूज गई है। प्लीज आज और मत करो।”

मैंने जिद की, “बस एक बार बेबी… जकूजी में। पानी में बहुत आराम रहेगा।”

फोरम ने बहुत मना किया। “नहीं… सच में बस हो गया। मैं चल भी नहीं पा रही ठीक से।”

मैंने उसे मनाने के लिए १० मिनट तक कोशिश की — कभी गले लगाकर, कभी उसके कान में प्यार भरी बातें करके, कभी उसके स्तनों को सहलाकर। आखिरकार वो थोड़ी मान गई। “ठीक है… लेकिन सिर्फ जकूजी में… और बहुत धीरे… वरना मैं रोने लगूंगी।”

मैं खुश हो गया। हम दोनों नंगे ही जकूजी टब की तरफ गए। मैंने टब में गर्म पानी भरा, बबल्स चालू किए और थोड़ा खुशबू वाला ऑयल डाला। पानी अच्छे से गर्म लेकिन सहने लायक था। मैं पहले टब में बैठ गया। फिर फोरम को अपनी गोद में बिठा लिया — उसकी पीठ मेरी छाती से सटी हुई।

मैंने लंड पर फिर कंडोम चढ़ाया और लुब्रिकेंट लगाया। फोरम की सूजी चूत पानी में थोड़ी राहत महसूस कर रही थी। मैंने उसे अपनी गोद में सही से सेट किया और लंड को उसकी चूत पर रखा। धीरे से ऊपर से धक्का दिया।

“आह… राज… फिर दर्द…!” फोरम हल्की चिल्लाई।

लेकिन पानी की वजह से घर्षण कम था। मैंने बहुत धीरे-धीरे पूरा ९ इंच अंदर कर दिया। फोरम रोने लगी, “आह… सूजन… बहुत दर्द… राज… रो रही हूँ…”

मैंने उसे कसकर पकड़ लिया और जकूजी में ही धीरे-धीरे चोदना शुरू कर दिया। पानी छप-छप कर उछल रहा था। मैंने एक हाथ से उसके स्तन दबाए, दूसरे हाथ से क्लिटोरिस सहलाया। फोरम लगातार रो रही थी और चिल्ला रही थी — “आह… राज… बहुत तेज… सूज गई है… चीख… प्लीज धीरे… रो… आह…!”

यह राउंड पूरे ९० मिनट तक चला। मैंने उसे कई पोजीशन में चोदा — कभी वो मेरी गोद में ऊपर-नीचे, कभी मैं पीछे से, कभी साइड में। पानी के अंदर होने की वजह से हर धक्का गहरा लग रहा था। फोरम पूरे ९० मिनट तक रोती रही, चिल्लाती रही, कभी मेरी बांहों को कसकर पकड़ लेती, कभी “बस हो गया… रो रही हूँ…” कहती। लेकिन बीच में कई बार वो खुद भी हिलने लगी। उसकी चूत अब बुरी तरह सूज चुकी थी और लाल हो गई थी।

आखिरकार ९० मिनट बाद मैं जोर से झड़ गया। फोरम भी थककर मेरी गोद में ढीली पड़ गई। वो हांफ रही थी और आंसू बहा रही थी।

राउंड खत्म होने के बाद मैंने उसे टब से उठाया। अच्छे से टॉवल से पोंछा। फोरम की चाल अब और भी लड़खड़ा रही थी। मैंने उसे गोद में उठाकर बेड पर लिटा दिया।

फिर हम दोनों ने कपड़े पहने — मैंने सफेद शर्ट और ब्लैक ट्राउजर पहना, फोरम ने कल खरीदी हुई नई क्रीम साड़ी पहनी। साड़ी उसकी सूजी हुई चूत और थकी हुई शरीर पर भी बहुत खूबसूरत लग रही थी। मैंने उसे डायमंड नेकलेस भी पहना दी।

अब हम डिनर के लिए तैयार थे, लेकिन फोरम की चाल अभी भी धीमी थी और चेहरा थका हुआ था। वो मेरे बाजू में आकर बोली, “राज… अब सच में बस… मैं बहुत थक गई हूँ।”

मैंने उसे गले लगा लिया और कहा, “चलो मेरी रानी, अब सिर्फ डिनर और आराम।”

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One response to “राज और फोरम की जुनूनी कहानी 2”

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