राज और फोरम की जुनूनी कहानी 3

जकूजी वाला लंबा ९० मिनट का राउंड खत्म होने के बाद हम दोनों थककर बेड पर लेटे हुए थे। फोरम मेरी बांहों में समाई हुई थी। उसकी सांसें अभी भी तेज थीं और चूत बुरी तरह सूजी हुई थी। मैंने उसे प्यार से चूमते हुए कहा,

“चल बेबी, अब डिनर करने चलते हैं। नीचे रेस्टोरेंट में कैंडल लाइट डिनर करेंगे, फिर आराम से बातें करेंगे।”

फोरम ने तुरंत सिर हिलाया और थकी हुई आवाज में बोली,
“नहीं राज… डिनर के बाद सीधा घर चलते हैं। मैं बहुत थक गई हूँ। चूत में अभी भी बहुत दर्द और सूजन है। मैं और नहीं सह पाऊंगी। प्लीज घर ले चलो।”

मैंने बहुत मनाया। “बस एक डिनर तो कर लें मेरी जान। दो दिन का प्लान था ना।”
लेकिन फोरम जिद पर अड़ी रही। “नहीं राज… अब सच में बस हो गया। मैं घर जाना चाहती हूँ।”

मैंने सोचा कि अगर मैं और शॉपिंग करवाऊं तो शायद वो मन जाए। मैंने मुस्कुराते हुए कहा,
“ठीक है… लेकिन चल, थोड़ी और शॉपिंग कर लेते हैं। जो तेरा मन करे खरीद लें। फिर देखते हैं।”

फोरम ने थोड़ा सोचा और फिर मान गई। हम दोनों तैयार हुए। मैंने सफेद शर्ट और ब्लैक ट्राउजर पहना। फोरम ने कल खरीदी हुई क्रीम साड़ी पहनी। साड़ी उसकी सूजी हुई कमर और थकी हुई चाल के बावजूद भी बहुत खूबसूरत लग रही थी। मैंने उसे डायमंड नेकलेस पहना दी।

हम होटल की लग्जरी शॉप्स में गए। मैंने उसे और शॉपिंग करवाई। पहले एक सेक्सी ब्लैक बिकिनी सेट खरीदा — जिसमें ऊपर सिर्फ पतली स्ट्रिप्स थीं और नीचे बहुत कम कपड़ा। फोरम शरमा रही थी लेकिन मैंने कहा, “ये अगली बार स्विमिंग पूल के लिए।” फिर एक महंगा परफ्यूम खरीदा — चैनल का, जो उसके शरीर पर लगाने पर बहुत अच्छी खुशबू देता। उसके बाद एक सुंदर ब्रेसलेट और कुछ छोटी-छोटी बैग्स।

फिर वो एक घड़ी देखने लगी। बहुत महंगी लग्जरी वॉच थी — ४.५ लाख रुपये की। फोरम की आंखें चमक रही थीं। उसने कहा, “राज… ये बहुत पसंद है।”
मैंने जानबूझकर कहा, “बेबी, ये बहुत महंगी है। अगली बार ले लेंगे।”

फोरम ने थोड़ा मुँह बनाया और घड़ी रख दी। लेकिन कुल मिलाकर शॉपिंग में मैंने लगभग ३ लाख रुपये और खर्च कर दिए। फोरम अब थोड़ी खुश लग रही थी।

शॉपिंग खत्म करके हम वापस सूट में आ गए। मैं थक गया था, इसलिए बेड पर लेट गया और आंखें बंद कर लीं। “थोड़ा आराम कर लेता हूँ बेबी।”

मैं करीब २०-२५ मिनट तक लेटा रहा। जब मेरी आंख खुली तो मैं हैरान रह गया।

फोरम पूरी तरह नंगी हो चुकी थी। वो मेरे पैरों के पास बैठी हुई थी। उसने मेरी पैंट का बटन खोल दिया था और जिपर नीचे कर दी थी। मेरा लंड बाहर निकालकर हाथ में पकड़े हुए थी। वो उसे हल्का-हल्का सहला रही थी। उसकी आंखों में शर्म और जुनून दोनों थे।

“फोरम…” मैंने आश्चर्य से कहा।

वो शरमाते हुए मुस्कुराई और बोली, “शॉपिंग का पावर है ना राज… तुमने इतना सब खरीदा… तो मैं भी तुम्हें खुश कर दूँ।”

फिर वो मेरे ऊपर चढ़ आई। पूरी तरह नंगी, उसके सूजे हुए स्तन हिल रहे थे। उसने खुद से कंडोम का पैकेट फाड़ा, मेरे लंड पर कंडोम चढ़ाया और लुब्रिकेंट लगाया। फिर मेरे लंड को अपनी सूजी हुई चूत पर रखा और धीरे से बैठ गई।

“आह… राज… अभी भी दर्द है… लेकिन…”
वो धीरे-धीरे नीचे बैठी। पूरा ९ इंच उसकी चूत में घुस गया। फोरम कराह उठी, “आह… सूजन… बहुत दर्द… लेकिन… मैं करूंगी…”

फिर वो खुद ऊपर-नीचे होने लगी। पहला राउंड उसने खुद शुरू किया। वो मेरे ऊपर बैठकर काउगर्ल पोजीशन में चोद रही थी। उसके सूजे हुए स्तन उछल रहे थे। मैं नीचे से उसके कूल्हों को पकड़कर मदद कर रहा था। फोरम कराह रही थी, “आह… राज… दर्द हो रहा है… लेकिन अच्छा भी लग रहा है… हां…”

पहला राउंड करीब २५ मिनट चला। फिर वो थक गई तो मैंने उसे नीचे लिटाया और दूसरा राउंड शुरू किया। इस बार मैंने उसे मिशनरी में चोदा। धीरे-धीरे लेकिन गहराई से। फोरम पूरे समय कराहती रही — “आह… राज… मेरी चूत सूज गई है… फिर भी… हां… चोदो…”

दूसरा राउंड भी करीब ३० मिनट चला। दोनों राउंड में फोरम कई बार झड़ गई। आखिरकार मैं भी झड़ गया।

सेक्स खत्म होने के बाद फोरम मेरी छाती पर गिर पड़ी। वो हांफ रही थी। उसकी चूत अब और ज्यादा सूज गई थी लेकिन चेहरा संतुष्ट था।

वो धीरे से बोली, “राज… शॉपिंग के बदले ये दे दिया… अब खुश हो ना?”

मैंने उसे कसकर गले लगा लिया और कहा, “बहुत खुश हूँ मेरी रानी। तू सच में मेरी जान है।”

हम दोनों कुछ देर ऐसे ही लेटे रहे। बाहर रात हो चुकी थी। अब आगे क्या होगा, ये फोरम के मन पर निर्भर था।

दूसरे राउंड के बाद फोरम मेरी छाती पर लेटी हुई हांफ रही थी। उसकी सूजी हुई चूत अभी भी मेरे लंड के पास चिपकी हुई थी। मैंने उसके बाल सहलाते हुए कहा,

“चल बेबी, अब डिनर करने चलते हैं।”

लेकिन फोरम ने थकी हुई आवाज में जवाब दिया, “नहीं राज… अब डिनर भी नहीं। मैं बहुत थक गई हूँ। बस घर चलते हैं।”

मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “ठीक है, लेकिन रात का डिनर तो कर लें। फिर एक छोटा सा सरप्राइज भी है तेरे लिए।”

हम दोनों कपड़े पहनकर नीचे रेस्टोरेंट गए। कैंडल लाइट डिनर था। फोरम खाना खाते समय भी बार-बार अपनी जांघें कसकर बंद कर रही थी क्योंकि चूत में अभी भी सूजन और दर्द था। डिनर खत्म होते ही वो फिर बोली, “अब घर चलते हैं राज।”

मैंने उसे रोकते हुए कहा, “बेबी, एक बात सुनो। वो घड़ी जो तुझे बहुत पसंद आई थी ना… ४.५ लाख वाली… मैं तुझे दिलवा दूंगा। लेकिन उसके बदले में मुझे तेरी गांड मारने दे। सिर्फ एक राउंड।”

फोरम की आंखें फट गईं। वो तुरंत बोली, “नहीं राज! बिल्कुल नहीं। मैं वर्जिन थी, चूत ही फट गई, अब गांड? नहीं… मैं नहीं कर पाऊंगी। बहुत दर्द होगा।”

मैंने बहुत मनाया। “बस एक बार मेरी जान। घड़ी तेरी हो जाएगी। मैं बहुत धीरे करूंगा।”

फोरम ने १०-१२ मिनट तक मना किया। वो रोने लगी, “राज प्लीज… मत करो… मैं डर रही हूँ।”

आखिरकार जब मैंने कहा, “ठीक है, अगर नहीं तो घड़ी नहीं लूंगा,” तो वो थोड़ा नरम पड़ी। उसने आंसू पोछते हुए कहा, “ठीक है… लेकिन बहुत धीरे करना… और अगर बहुत दर्द हो तो रुक जाना।”

हम वापस सूट में आ गए। मैंने तुरंत घड़ी की शॉप में कॉल करके डिलीवरी मंगवा ली। १५ मिनट बाद घड़ी आ गई। मैंने फोरम की कलाई में पहना दी। वो घड़ी देखकर थोड़ी खुश हुई लेकिन डर भी साफ दिख रहा था।

मैंने उसे नंगा किया। फोरम चारों हाथ-पैरों के बल बेड पर हो गई। मैंने उसके गांड के छेद पर बहुत अच्छे से लुब्रिकेंट लगाया। मेरा ९ इंच का लंड भी लुब्रिकेंट से चिकना कर लिया और कंडोम चढ़ा लिया।

“आराम से बेबी…” मैंने कहा और लंड की नोक को उसके गांड के छोटे से छेद पर रखा।

जैसे ही मैंने धक्का दिया, सिर्फ सिरा अंदर गया।

“आआआह… राज… निकालो… बहुत दर्द… चीख…!” 
फोरम जोर से चिल्लाई और रोने लगी। उसका पूरा शरीर कांप रहा था।

मैं रुका नहीं। धीरे-धीरे आगे बढ़ता गया। २ इंच… ३ इंच… ४ इंच… हर इंच पर फोरम बुरी तरह चिल्ला रही थी और रो रही थी। 
“राज… मेरी गांड फट गई… आह… बहुत दर्द… रो रही हूँ… प्लीज निकालो… चीख…!”

५ इंच होने पर उसकी गांड से हल्का खून भी निकलने लगा। फोरम अब जोर-जोर से चिल्ला रही थी, “आह… राज… मार डालोगे… बहुत जलन… रो… चिल्ला… बस करो…!”

लेकिन मैं नहीं रुका। पूरे ९० मिनट तक मैंने उसकी गांड मारी। पहले धीरे-धीरे, फिर थोड़ी तेजी से। फोरम पूरे समय रोती रही, चिल्लाती रही, तकिए को मुंह से काटती रही। उसके नाखून बेडशीट को नोच रहे थे। “राज… बहुत हो गया… गांड खराब हो गई… आह… चीख… रो… प्लीज…!”

९० मिनट बाद मैं उसके गांड में झड़ गया। फोरम थककर बेड पर गिर पड़ी। उसकी गांड बुरी तरह सूज गई थी और लाल हो गई थी।

फिर मैंने उसे चूत में एक छोटा सा राउंड और किया। करीब २० मिनट तक धीरे-धीरे चोदा। उसके बाद हम दोनों थककर सो गए।

सुबह का सीन

सुबह ६:४५ बजे मैं उठा। फोरम अभी भी गहरी नींद में सो रही थी — नंगी, घुटनों को छाती से लगाकर। मैंने चुपके से कंडोम लगाया, लुब्रिकेंट लगाया और उसके पीछे लेट गया।

धीरे से उसके गांड के छेद पर लंड रखा और एक जोरदार धक्का दिया। पूरा ९ इंच एक ही झटके में उसकी गांड में घुस गया।

“आआआह… राज… क्या कर रहे हो… चीख…!” 
फोरम नींद से चौंककर जोर से चिल्ला उठी। आंसू तुरंत निकल आए। “बहुत दर्द… गांड फट गई… रो… निकालो…!”

मैंने उसे कसकर पकड़ लिया और पूरे २५ मिनट तक उसकी गांड मारी। फोरम लगातार चिल्लाती और रोती रही। आखिरकार मैं झड़ गया।

फिर हमने नाश्ता किया। नाश्ते के बाद मैंने उसे एक लास्ट राउंड चूत में मारा — मिशनरी पोजीशन में, करीब ३० मिनट तक। फोरम इस बार कम रोई लेकिन फिर भी कराह रही थी।

आखिर में हमने चेकआउट किया। मैंने फोरम को गाड़ी में बिठाया। उसकी चाल बहुत लड़खड़ा रही थी। गांड और चूत दोनों बुरी तरह सूजी हुई थीं। वो मेरे कंधे पर सिर रखकर बैठी रही।

घर पहुंचकर मैंने उसे गले लगाया और कहा, “मेरी रानी… अगली बार फिर ले जाऊंगा।”

फोरम ने थके हुए लेकिन प्यार भरे स्वर में कहा, “राज… तुम बहुत शैतान हो… लेकिन मैं तुम्हारी हूँ।”

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