रवि और शिल्पा की हनीमून की कहानी 3

रवि ने कंडोम उतारा और शिल्पा की चूत से बाहर निकला। जैसे ही लंड निकला, शिल्पा की छोटी-सी चूत से कंडोम का थोड़ा-सा वीर्य और हल्का खून बाहर बहने लगा। रवि तुरंत उठा। उसने बेडसाइड टेबल से पानी का ग्लास उठाया, शिल्पा के सिर को हल्का सहारा दिया और बहुत प्यार से बोला, “जान… पानी पी लो… थोड़ा आराम करो…” शिल्पा की आँखें सूजी हुई थीं, गालों पर आँसू सूख चुके थे लेकिन नई धार बह रही थी। उसने काँपते हाथ से ग्लास पकड़ा, दो-तीन घूँट पीए, लेकिन गला रुंधा हुआ था। “रवि… मैं ठीक नहीं हूँ… बहुत दर्द हो रहा है… चूत जल रही है… सूज गई है… मैं उठ भी नहीं पा रही… तुमने मुझे बहुत मार दिया…” वो सिसकते हुए बोली, आवाज़ इतनी कमजोर कि मुश्किल से सुनाई दे रही थी।

रवि जानता था कि अगर यही हालत रही तो घर जाकर शिल्पा चीखेगी, पूरा जोड़ परिवार सुन लेगा, सवाल होंगे। उसे आदत डालनी ही पड़ेगी। उसने शिल्पा को प्यार से चूम लिया, उसके माथे पर हाथ रखा और फुसफुसाया, “मैं जानता हूँ बहुत दर्द हुआ… लेकिन हमें करना पड़ेगा… वरना घर जाकर तुम चीखोगी… सबको पता चल जाएगा… इसलिए मैं तुम्हारी मदद करता हूँ…”

उसने तुरंत रिसॉर्ट के कंजियर को कॉल किया। “हैलो… सूट ७०१… एक strong painkiller tablet चाहिए… जो दर्द और सूजन कम करे… और हाँ, crushed ice भी भेज दो… जल्दी।” दस मिनट बाद दरवाजे पर नॉक हुई। रवि ने डोर खोली। स्टाफ ने एक छोटी दवा की शीशी (pink painkiller tablet) और एक छोटा आइस बैग थमा दिया। रवि ने टिप दी और दरवाजा बंद कर दिया।

वो बेड पर वापस आया। शिल्पा अभी भी पेट के बल पड़ी थी, जाँघें हल्के-हल्के काँप रही थीं। रवि ने गोलियाँ निकालीं – सिर्फ एक pink painkiller tablet। उसने शिल्पा को गोद में उठाया, उसे बैठाया और पानी के साथ वो एक गोली उसके मुंह में रख दी। “ये लो… दर्द कम हो जाएगा… डर भी कम होगा… पी लो…” शिल्पा ने काँपते हाथ से पानी पिया और गोली निगल ली। फिर रवि ने आइस बैग से crushed ice निकाला, एक साफ सफेद कपड़े में लपेटा और बहुत धीरे-धीरे शिल्पा की सूजी हुई चूत पर लगाने लगा। ठंडी बर्फ छूते ही शिल्पा ने सिसकारी भरी, “आह्ह्ह… ठंडा… लेकिन अच्छा लग रहा है… जलन कम हो रही है…” रवि ने १०-१० मिनट तक बर्फ लगाई – कभी हल्का दबाकर, कभी घुमाकर, कभी सिर्फ रखकर। बर्फ पिघलकर पानी बन रहा था, शिल्पा की जाँघों पर बह रहा था।

लगभग २ घंटे बाद रवि ने शिल्पा की चूत को ध्यान से देखा। सूजन काफी कम हो गई थी – लालिमा कम, मुंहाना थोड़ा सामान्य दिख रहा था। रवि ने शिल्पा की ठोड़ी थामी, आँखों में आँखें डालीं और बहुत प्यार से पूछा, “अब बताओ… डर कम हुआ है ना? सूजन भी कम हो गई है…” शिल्पा ने हल्के से सिर हिलाया, “हाँ… थोड़ा… डर कम हुआ है… लेकिन अभी भी डर लग रहा है…” रवि मुस्कुराया। वो अब और ज्यादा sure हो गया था।

लेकिन इस बार उसने सिर्फ ६ इंच तक ही जाने का फैसला किया। उसने फिर कंडोम चढ़ाया, शिल्पा को प्यार से लिटाया, दोनों पैर फैलाए। पहला झटका – ४ इंच। दूसरा झटका – ६ इंच। शिल्पा फिर चीखी, लेकिन पिछली बार जितनी तेज़ नहीं। “आह्ह्ह… फिर दर्द… लेकिन कम… आह्ह्ह… रवि… अभी भी जल रही है… आह्ह्ह!!” रवि ने ४० मिनट तक लगातार ६ इंच की गहराई पर पंपिंग की। हर धक्के पर शिल्पा चीखती, रोती, लेकिन इस बार चीख में थोड़ा-थोड़ा मजा भी आने लगा। “उफ्फ… आह्ह्ह… दर्द तो है… लेकिन… अंदर तक भर गया है… आह्ह्ह… रवि… धीरे… लेकिन मत रुको… आह्ह्ह!!” वो बार-बार रो रही थी, आँसू बह रहे थे, लेकिन कभी-कभी उसकी कमर खुद उठने लगती थी। फिर भी वो मना कर रही थी – “नहीं… रवि… मैं मना करती हूँ… बहुत मना करती हूँ… बस करो… आह्ह्ह… मैं सह नहीं पा रही… लेकिन… थोड़ा अच्छा भी लग रहा है… आह्ह्ह!!”

रवि ने रुकने का नाम नहीं लिया। ४० मिनट तक ठक-ठक-ठक की आवाज़ गूंजती रही। शिल्पा की हालत खराब थी, लेकिन पिछली बार जितनी बुरी नहीं। आखिर में रवि ने तेज़ झटके दिए और चूत के अंदर ही (कंडोम में) पूरा भर दिया। शिल्पा अंत में काँपती हुई, रोती हुई, लेकिन थोड़े मजा के साथ ढेर हो गई।

रवि ने उसे साफ किया, पानी पिलाया, गले लगाया। “कोई बात नहीं जान… तुम ठीक हो जाओगी…” फिर उसने शिल्पा को प्यार से चूम लिया और बोला, “अब बस हो गया… लेकिन अगले २ दिन तक हर सुबह उठते ही ये एक टैबलेट ले लेना… ताकि दर्द न हो… मैं तुम्हें हर रोज़ दूँगा…” शिल्पा ने थकान से सिर हिलाया। रवि ने वो एक गोली उसके हाथ में रख दी, खुद भी लेट गया और दोनों सो गए।

दूसरे दिन सुबह। सूरज की हल्की सुनहरी किरणें खिड़की से अंदर आ रही थीं, कमरे में हल्की गुलाबी रोशनी फैल गई थी। शिल्पा सबसे पहले उठी। उसका नन्हा-सा शरीर अभी भी थोड़ा थका हुआ था, लेकिन कल रात की सूजन अब काफी कम हो गई थी। उसने रवि की तरफ देखा – रवि अभी गहरी नींद में था, उसका विशाल १०१ किलो का शरीर चादर के नीचे फैला हुआ, छाती ऊपर-नीचे हो रही थी।

शिल्पा ने बेडसाइड टेबल की तरफ हाथ बढ़ाया। वहाँ वो एक कैप्सूल रखा था – Women Sex Power Booster Capsule। रवि ने कल रात उसे यही दिया था, कहकर कि “ये ले लो… दर्द नहीं होगा… और सब ठीक हो जाएगा।” शिल्पा ने कैप्सूल को पानी के ग्लास के साथ निगल लिया। ठंडा पानी गले से नीचे उतरा, कैप्सूल अंदर चला गया।

शिल्पा वापस लेट गई, रवि की बाँह में अपना सिर रख दिया। पहले तो कुछ नहीं हुआ। लेकिन धीरे-धीरे, सिर्फ १०-१२ मिनट बाद, उसका शरीर अजीब सा महसूस करने लगा।

पहले तो उसकी छाती में हल्की गर्मी उठी। फिर वो गर्मी धीरे-धीरे नीचे उतरने लगी – पेट में, जाँघों में, और सबसे ज्यादा उसकी चूत में। शिल्पा की साँसें थोड़ी तेज़ हो गईं। उसकी चूत अचानक गर्म और नम होने लगी – बिना कुछ छुए भी अंदर से पल-पल गीली होती जा रही थी। निप्पल्स सख्त होकर खड़े हो गए, छोटे-छोटे स्तन भारी लगने लगे। पूरा शरीर हल्का-हल्का काँपने लगा, लेकिन ये काँपना दर्द का नहीं, बल्कि एक अजीब सी भूख का था।

शिल्पा ने रवि की तरफ देखा। उसकी नजर रवि के चेहरे पर, फिर उसकी चौड़ी छाती पर, और फिर चादर के नीचे उभरे हुए उसके १३ इंच लंड पर अटक गई। कैप्सूल का असर तेज़ी से बढ़ रहा था। शिल्पा को अचानक बहुत गर्मी लगने लगी। उसका मुँह सूख गया, लेकिन चूत से लगातार नमी निकल रही थी। वो खुद को रोक नहीं पाई।

धीरे से वो रवि के करीब सरकी। पहले तो उसने रवि के गाल पर हल्का-सा किस किया। फिर होंठों पर। किस गहरा होता गया। शिल्पा की जीभ रवि के होंठों पर घूमने लगी, उसके मुँह में घुसने लगी। “म्ह्म्म…” वो खुद ही हल्की सिसकारी भर रही थी। फिर उसका हाथ रवि की छाती पर फिसला, नीचे की तरफ गया। चादर हटाई और रवि का भारी, मोटा लंड हाथ में ले लिया। वो अभी सोया हुआ था, लेकिन शिल्पा के गर्म हाथ लगते ही हल्का सा हिल गया।

शिल्पा ने रवि की तरफ झुककर लंड को चूम लिया। पहले सिर को, फिर पूरे शाफ्ट को। फिर उसने मुँह खोला और सिर्फ २ इंच तक लंड को अंदर ले लिया। जीभ से घुमाने लगी, ऊपर-नीचे चूसने लगी। “म्ह्म्म… आह्ह्ह…” उसके मुँह से आवाज़ निकल रही थी। लंड का स्वाद, उसकी गर्मी, उसकी मोटाई – सब कुछ उसे और ज्यादा उत्तेजित कर रहा था।

फिर वो नीचे सरकी। रवि की दो भारी-भारी gotiya (अंडकोष) को देखा। उन्होंने भी उसे बहुत आकर्षित किया। शिल्पा ने जीभ निकाली और पहले एक goti को चाटा, फिर दूसरी को। दोनों को बारी-बारी से मुँह में लिया, जीभ से घुमाया, हल्का-हल्का चूसा। कैप्सूल का असर अब पूरा छा गया था। शिल्पा का पूरा शरीर गर्म हो रहा था, चूत से लगातार पानी बह रहा था, जाँघें भीग रही थीं। वो खुद को रोक नहीं पा रही थी। लंड को फिर २ इंच तक मुँह में लिया, जोर-जोर से चूसने लगी, gotiyon को हाथ से मसलते हुए। “आह्ह्ह… रवि… तुम्हारा… बहुत अच्छा लग रहा है…” वो फुसफुसाई, हालाँकि रवि अभी सोया हुआ था।

उसका सिर ऊपर-नीचे होने लगा, लंड के सिर को चूसते हुए, कभी-कभी पूरी लंबाई पर जीभ फेरते हुए। पूरा कमरा सिर्फ उसकी सिसकारियों और चूसने की हल्की-हल्की आवाज़ से भर गया था।

तभी रवि की आँखें धीरे-धीरे खुलीं।

रवि की आँखें धीरे-धीरे खुलीं। पहले तो वो थोड़ा confused था, लेकिन फिर सब समझ में आ गया। शिल्पा का नन्हा-सा मुँह उसके १३ इंच लंबे, मोटे लंड को २ इंच तक चूस रहा था, जीभ ऊपर-नीचे घुमा रही थी, gotiyon को हाथ से मसल रही थी। शिल्पा की साँसें तेज़ थीं, आँखें बंद, चेहरा गर्म और लाल। रवि ने तुरंत समझ लिया – वो Women Sex Power Booster Capsule काम कर रहा था। शिल्पा अब खुद-ब-खुद भूखी हो रही थी।

रवि मुस्कुराया। उसने शिल्पा के बालों में हाथ डाला, हल्का-सा सहलाया और धीरे से बोला, “अरे… जान… इतनी जल्दी? कैप्सूल का असर शुरू हो गया लगता है…” शिल्पा ने लंड मुँह से निकाला नहीं, सिर्फ आँखें ऊपर उठाकर देखा और “म्ह्म्म…” करके और जोर से चूसने लगी।

रवि ने शिल्पा को पलटकर अपने ऊपर खींच लिया। “आ… ६९ में आ जा…” उसने कहा। शिल्पा को उसने अपनी छाती पर लिटा लिया, लेकिन उल्टा – उसका मुँह रवि के लंड की तरफ, और रवि का मुँह शिल्पा की चूत की तरफ। शिल्पा का छोटा-सा ४२ किलो वाला शरीर रवि के विशाल शरीर पर पूरी तरह फैल गया।

दोनों एक साथ शुरू हो गए।

शिल्पा ने फिर से रवि का लंड मुँह में लिया – अब और गहराई से, २.५-३ इंच तक। जोर-जोर से चूसने लगी, जीभ से नसों पर घुमाती, सिर को चाटती। कभी-कभी gotiyon को भी चूस लेती। उसके मुँह से “म्ह्म्म… आह्ह्ह…” की आवाज़ें निकल रही थीं।

रवि ने शिल्पा की जाँघें फैलाईं और अपनी जीभ सीधे उसकी चूत पर रख दी। चूत पहले से ही गीली और गर्म थी – कैप्सूल की वजह से। रवि ने ऊपर से नीचे चाटा, क्लिटोरिस को जीभ से घुमाया, फिर जीभ अंदर डालकर अंदर-बाहर करने लगा। शिल्पा की कमर अपने आप उठने लगी। “आह्ह्ह… रवि… वहाँ… और जोर से… आह्ह्ह!!” वो लंड चूसते हुए ही चीखी।

दोनों २० मिनट तक लगातार ६९ में रहे। कमरे में सिर्फ चूसने की, चाटने की, सिसकारियों की और हल्की-हल्की ठक-ठक की आवाज़ें गूंज रही थीं। शिल्पा का पूरा शरीर पसीने से तर हो गया था। उसकी चूत रवि के मुँह पर लगातार गीली होती जा रही थी। रवि का लंड भी शिल्पा के मुँह में और सख्त हो गया था।

अचानक २० मिनट बाद शिल्पा ने लंड मुँह से निकाला। उसके होंठ चमक रहे थे, साँसें बहुत तेज़ थीं। वो रवि की जाँघों के बीच से उठी, उसकी आँखों में भूख और desperation था। शिल्पा ने रवि की छाती पर हाथ रखे, अपनी चूत को रवि के लंड के ठीक ऊपर ले आई और काँपते हुए बोली, “रवि… प्लीज… अंदर डाल दो… please under dalo… मुझे बहुत जरूरत है… मैं सह नहीं पा रही… आह्ह्ह… बहुत गर्मी हो रही है… प्लीज… अब मत तड़पाओ…”

लेकिन रवि ने मुस्कुराकर शिल्पा की कमर पकड़ ली और उसे थोड़ा ऊपर उठा दिया, ताकि लंड अभी भी बाहर ही रहे। उसने शिल्पा की आँखों में देखा और धीरे से बोला, “अभी नहीं जान… थोड़ा और तड़प लो… मैं देखना चाहता हूँ तुम कितनी भूखी हो…”

शिल्पा की साँसें और तेज़ हो गईं। वो रवि की छाती पर गिरकर फिर से गिड़गिड़ाई, “प्लीज रवि… under dalo… मैं मर रही हूँ… आह्ह्ह… बहुत जरूरत है…”

रवि ने शिल्पा की कमर को अपनी बड़ी-बड़ी हथेलियों में कसकर पकड़ लिया और उसे थोड़ा ऊपर उठा दिया, ताकि उसका लंड अभी भी शिल्पा की चूत के मुंहाने से सिर्फ छू रहा हो, अंदर न जाए। शिल्पा का पूरा नन्हा शरीर रवि के विशाल सीने पर काँप रहा था। उसकी साँसें बहुत तेज़ और गर्म थीं, चूत से लगातार गर्म पानी बह रहा था, जाँघें भीग चुकी थीं। कैप्सूल का असर अब पूरी तरह चरम पर था।

“प्लीज रवि… under dalo ना… मैं मर रही हूँ… बहुत गर्मी हो रही है… आह्ह्ह… देखो मेरी चूत कितनी गीली हो गई है…” शिल्पा रवि की छाती पर गिरकर गिड़गिड़ाई, उसकी आवाज़ में desperation और भूख साफ झलक रही थी। वो अपनी कमर नीचे करने की कोशिश कर रही थी, लेकिन रवि की मजबूत बाँहें उसे ऊपर ही रोक रही थीं।

रवि मुस्कुराया। उसने शिल्पा के गाल थामे, उसकी आँखों में गहरी नजर डाली और धीरे-धीरे बोला, “अभी नहीं जान… पहले थोड़ा और तड़प लो… मैं देखना चाहता हूँ तुम कितनी पागल हो गई हो…” उसने शिल्पा की चूत के मुंहाने पर अपना लंड का सिर सिर्फ रगड़ा – ऊपर-नीचे, गोल-गोल, लेकिन अंदर नहीं डाला। हर बार छूते ही शिल्पा की कमर झनझना जाती, वो जोर से सिसकारी भरती, “आह्ह्ह… रवि… मत तड़पाओ… प्लीज… मैं सह नहीं पा रही… आह्ह्ह!!”

शिल्पा ने रवि की छाती पर नाखून गड़ाए, उसके कंधे पकड़े और रो-रोकर गिड़गिड़ाई, “रवि… please under dalo… मैं तुम्हारी हूँ… जितना चाहो कर लो… लेकिन अब मत रोको… बहुत जरूरत है… आह्ह्ह… देखो मैं कितनी गर्म हो गई हूँ…” उसकी चूत रवि के लंड के सिर को बार-बार छू रही थी, लेकिन रवि हर बार हल्का सा पीछे खींच लेता।

लगभग २-३ मिनट तक रवि ने उसे इसी तरह तड़पाया। शिल्पा अब पूरी तरह बेकाबू हो गई थी। आँखें आधी बंद, मुँह खुला, साँसें फूल रही थीं। “रवि… जaldi… मैं जल रही हूँ… आह्ह्ह… condom bina karlo… जaldi dalo… प्लीज… बिना condom के ही डाल दो… मुझे अब इंतज़ार नहीं हो रहा…”

रवि ने शिल्पा की कमर को और मजबूती से पकड़ा और बोला, “अब नहीं… पहले condom लगाओ… जल्दी करो…” शिल्पा बहुत गर्म थी, उसकी उँगलियाँ काँप रही थीं, लेकिन वो तुरंत बेडसाइड टेबल की तरफ झुकी। कंडोम का पैकेट फाड़ा, कंडोम निकाला और रवि के खड़े, मोटे लंड पर काँपते हाथों से चढ़ाने लगी। “जaldi… जaldi…” वो खुद ही फुसफुसा रही थी। आखिरकार कंडोम पूरा चढ़ गया।

रवि ने शिल्पा को फिर से अपनी गोद में खींच लिया और बोला, “अब पूरा डालूँगा… लेकिन जैसा तुम चाहो वैसा डालो… बस मुझे मत तड़पाना… समझी?” शिल्पा ने हाँ में सिर हिलाया, उसकी आँखों में भूख और प्यास साफ दिख रही थी।

रवि को पता था कि कैप्सूल के असर से आज शिल्पा एक ही बार में पूरा ले पाएगी। उसने शिल्पा को ऊपर उठाया। शिल्पा ने खुद अपनी जाँघें फैलाईं, रवि के लंड को अपनी चूत के मुंहाने पर रखा और धीरे-धीरे नीचे बैठने लगी।

पहले ४ इंच… फिर ५… और फिर ६ इंच तक लंड एक ही बार में अंदर चला गया। शिल्पा की आँखें बंद हो गईं, मुँह से लंबी सिसकारी निकली, “आआह्ह्ह… भर गया… ६ इंच… आह्ह्ह… बहुत अच्छा लग रहा है…” वो रवि के लंड पर बैठकर ६ इंच के ही मजा लेने लगी।

अब शिल्पा ऊपर-नीचे होने लगी – धीरे-धीरे, लेकिन लगातार। हर बार नीचे बैठते ही वो जोर से सिसकारती, “आह्ह्ह… गहरा… बहुत गहरा… आह्ह्ह… रवि… कितना मोटा है… आह्ह्ह!!” कभी वो घुमाकर बैठती, कभी सीधे ऊपर-नीचे। उसके छोटे स्तन उछल-उछल रहे थे। रवि उसके स्तनों को हाथों में थामे हुए था, निप्पल्स को हल्का-हल्का दबाता। शिल्पा की चूत अब पूरी तरह गीली और चिकनी हो गई थी, हर बार उठते-बैठते ठक-ठक-ठक की हल्की आवाज़ निकल रही थी।

२५ मिनट तक शिल्पा इसी तरह ६ इंच पर सवार रही। वो कभी तेज़ हो जाती, कभी धीमी, कभी रुककर सिर्फ अंदर घुमाती। “आह्ह्ह… रवि… इतना मजा… पहले कभी नहीं हुआ… आह्ह्ह… ६ इंच ही काफी है… लेकिन और चाहिए… आह्ह्ह!!” उसकी साँसें फूल रही थीं, पसीना टपक रहा था, लेकिन वो रुकने का नाम नहीं ले रही थी। रवि सिर्फ नीचे से हल्का-हल्का धक्के दे रहा था, उसे पूरा कंट्रोल लेने दे रहा था।

२५ मिनट बाद रवि ने अचानक पोजीशन बदल दी। उसने शिल्पा को अपनी गोद से उठाया, बेड पर पीठ के बल लिटा दिया, उसके दोनों पैर कंधों पर रखे और ऊँचे कर दिए। शिल्पा की चूत अब पूरी तरह ऊपर की तरफ थी, पूरी तरह खुली हुई। रवि घुटनों के बल बैठ गया, लंड फिर से मुंहाने पर रखा।

शिल्पा ने दोनों हाथों से रवि की बाँहें पकड़ीं और काँपते हुए बोली, “अब डालो रवि… पूरा डाल दो… प्लीज… मैं तड़प रही हूँ… आह्ह्ह… जल्दी करो…”

लेकिन रवि ने फिर से मुस्कुराकर सिर्फ लंड का सिर चूत के मुंहाने पर रगड़ना शुरू कर दिया – ऊपर-नीचे, गोल-गोल, लेकिन अंदर नहीं डाला। शिल्पा पागल हो गई। “रवि… मत तड़पाओ… प्लीज… अब मत… मैं मर जाऊंगी… आह्ह्ह… under dalo ना… पूरा डालो… आह्ह्ह!!”

“प्लीज रवि… अब मत तड़पाओ… मैं जल रही हूँ… आह्ह्ह… under dalo ना…” शिल्पा रो-रोकर गिड़गिड़ा रही थी, उसकी आँखों में आँसू थे, लेकिन भूख भी थी। रवि मुस्कुराया और धीरे-धीरे बोला, “अभी नहीं जान… पहले और थोड़ा तड़प लो… मैं देखना चाहता हूँ तुम कितनी पागल हो चुकी हो…”

लगभग ४-५ मिनट तक रवि ने उसे इसी तरह तड़पाया। लंड का सिर सिर्फ चूत के मुंहाने पर रगड़ता, कभी गोल-गोल घुमाता, कभी हल्का-हल्का दबाता, लेकिन अंदर नहीं डालता। शिल्पा पागल हो गई थी। वो रवि की छाती पर नाखून गड़ाती, “आह्ह्ह… रवि… मैं मर जाऊंगी… बहुत गर्मी… चूत फट रही है… प्लीज… अब मत रोको…” उसकी साँसें फूल रही थीं, जाँघें काँप रही थीं, चूत से लगातार गर्म पानी बह रहा था।

आखिरकार रवि ने शिल्पा की कमर को नीचे दबाया। पहले ६ इंच लंड एक ही झटके में अंदर चला गया। शिल्पा की आँखें बंद हो गईं, मुँह से लंबी सिसकारी निकली, “आआह्ह्ह… भर गया… ६ इंच… बहुत अच्छा… आह्ह्ह!!” लेकिन रवि रुका नहीं। उसने और जोर लगाया। अगला २ इंच और अंदर – कुल ८ इंच।

जैसे ही वो अतिरिक्त २ इंच घुसा, शिल्पा की चीख फट पड़ी – “आआआआह्ह्ह्ह्ह!!! फट गई… बहुत दर्द… आह्ह्ह्ह्ह!! रवि… निकालो… ८ इंच… फट रही हूँ… आआह्ह्ह्ह!!” उसकी आवाज़ इतनी तेज़ और भयानक थी कि पूरा कमरा गूँज उठा। आँखों से आँसू की धार बहने लगी, पूरा नन्हा शरीर बेड पर उछल पड़ा। “आह्ह्ह… दर्द… बहुत दर्द… लेकिन… अंदर तक भर गया है… आह्ह्ह्ह!!” दर्द के साथ-साथ एक अजीब सा मजा भी आने लगा था। शिल्पा बार-बार चीखती, “उफ्फ… आह्ह्ह… रवि… रुक जाओ… लेकिन मत रुको… आह्ह्ह्ह!!” कभी दर्द से चीखती, “मर गई… फट गई… आआह्ह्ह्ह!!” तो कभी मजा आने पर सिसकारती, “आह्ह्ह… गहरा… बहुत गहरा… अच्छा लग रहा है… आह्ह्ह!!”

रवि ने रुकने का नाम नहीं लिया। उसने ८ इंच की गहराई पर ही तेज़-तेज़ पंपिंग शुरू कर दी। ठक-ठक-ठक-ठक… हर धक्के पर शिल्पा की चीख फटती। “आह्ह्ह… आह्ह्ह… दर्द हो रहा है… लेकिन मजा भी आ रहा है… रवि… बहुत जोर से… आआह्ह्ह्ह!!” वो बार-बार रवि की बाँहें पकड़ती, नाखून गड़ाती, कभी “निकालो… फट रही हूँ…” चीखती, तो कभी “और तेज… आह्ह्ह… मत रुको…” कहती। उसकी चूत बुरी तरह सूज गई थी, लेकिन कैप्सूल के असर से दर्द के साथ मजा भी बढ़ रहा था।

३५ मिनट तक रवि लगातार पेलता रहा। शिल्पा की हालत पूरी तरह खराब हो चुकी थी। उसकी आवाज़ बैठ गई थी, लेकिन चीखें और सिसकारियाँ अभी भी निकल रही थीं – “आह्ह्ह… दर्द… बहुत दर्द… आह्ह्ह… लेकिन अंदर तक… आह्ह्ह… रवि… मैं मर रही हूँ… आआह्ह्ह!!” आँखें सूजी हुई, चेहरा पसीने और आँसुओं से नम, छोटा-सा शरीर थर-थर काँप रहा था।

आखिर में रवि ने बहुत तेज़ १५-२० झटके दिए और शिल्पा की चूत के अंदर ही (कंडोम में) अपना पूरा गर्म वीर्य भर दिया। शिल्पा अंत में एक लंबी सिसकारी के साथ ढेर हो गई। वो बस पड़ी रही – नंगी, काँपती हुई, चूत बुरी तरह सूजी और लाल, साँसें फूल रही थीं। दर्द भी सहा था और मजा भी लिया था, लेकिन बोलने की ताकत भी नहीं बची थी।

लगभग १ घंटे बाद रवि उठा। उसने रिसॉर्ट को कॉल किया और crushed ice मँगवाया। फिर शिल्पा की चूत पर बहुत धीरे-धीरे बर्फ लगाने लगा। ठंडी बर्फ छूते ही शिल्पा हल्की सिसकारी भरती, “आह्ह्ह… ठंडा… अच्छा लग रहा है…” रवि ने बर्फ लगाते-लगाते उसे वो सच्ची painkiller tablet भी दे दी। “ये लो… असली दर्द की गोली… अब आराम से हो जाओगी।”

थोड़ी देर बाद दोनों साथ में नहाने गए। शावर के नीचे रवि ने शिल्पा को अपनी छाती से लगा लिया। वो सिर्फ उसके स्तनों को धीरे-धीरे दबाता रहा, निप्पल्स को उँगलियों से घुमाता, कभी-कभी चूम लेता। शिल्पा भी उससे चिपकी रही, बस kiss करती रही। कोई और कुछ नहीं – सिर्फ प्यार भरे स्पर्श और किस।

नहाकर दोनों तैयार हुए। शिल्पा ने एक सुंदर फ्लोरल ड्रेस पहना, रवि ने कैजुअल शर्ट और जींस। दोनों घूमने निकले। पहले थोड़ी शॉपिंग की – शिल्पा ने कुछ सुंदर ज्वेलरी और एक छोटा हैंडबैग खरीदा, रवि ने उसे प्यार से सब दिलवाया। फिर Seine नदी के किनारे घूमे, एफिल टावर की रोशनी देखी, कुछ फोटो खिंचवाई। शाम ढलते-ढलते दोनों एक रोमांटिक रेस्टोरेंट में डिनर करने गए। कैंडल लाइट में दोनों ने खाना खाया, हाथों में हाथ डाले, हल्के-हल्के किस किए, नॉर्मल रोमांस किया। शिल्पा थोड़ी शर्माती रही, लेकिन खुश भी थी।

डिनर के बाद दोनों

डिनर के बाद रात के करीब १०:४५ बजे थे। पेरिस की सड़कें अभी भी रोशनी से जगमगा रही थीं। रवि और शिल्पा रेस्टोरेंट से बाहर निकले। शिल्पा का हाथ रवि के बड़े हाथ में था, वो थोड़ी शर्माती हुई उसके साथ चल रही थी। रवि ने मुस्कुराते हुए कहा, “चलो, एक जगह ले चलता हूँ… कुछ नया देखेंगे।” शिल्पा ने पूछा, “कहाँ?” रवि ने बस मुस्कुराकर उसका हाथ और कस लिया।

दोनों पैदल ही कुछ दूर गए। एक छोटी लेकिन बहुत लग्जरी और प्राइवेट “Adult Toy Boutique” के सामने पहुँचे। बाहर से वो बहुत सुंदर और मॉडर्न दिख रही थी – गुलाबी-नीली नीयन लाइट, लेकिन अंदर से पूरी तरह प्राइवेट। रवि ने दरवाजा खोला और शिल्पा को अंदर ले गया।

अंदर हल्की पर्पल और गुलाबी लाइट थी, एयर में हल्की वेनिला और रोज़ की खुशबू। शॉप काफी बड़ी थी, लेकिन इस समय सिर्फ कुछ कपल्स ही थे। स्टाफ ने पॉलिटली स्माइल किया और उन्हें घूमने दिया।

रवि शिल्पा को हर सेक्शन में ले गया और बहुत विस्तार से सब कुछ दिखाने लगा:

“ये देखो जान… Vibrators…”
उसने एक स्लिम पिंक वाइब्रेटर उठाया जो ६ इंच लंबा था, सिलिकॉन का, बहुत सॉफ्ट। “ये चूत के अंदर या क्लिटोरिस पर लगाते हैं… कंपन करता है।” फिर एक बड़ा रैबिट वाइब्रेटर दिखाया जिसके ऊपर दो कान थे – “ये क्लिटोरिस को भी चूसता है साथ-साथ।”

शिल्पा शर्म से लाल हो रही थी, लेकिन कैप्सूल और दिन भर के सेक्स के बाद उसकी आँखों में curiosity भी थी।

रवि आगे ले गया।
“ये Dildos…”
उसने अलग-अलग साइज़ के डिल्डो दिखाए – ५ इंच, ७ इंच, ९ इंच, एक तो १२ इंच का बड़ा ब्लैक डिल्डो भी। “ये देखो… कितने मोटे हैं… कुछ गोल, कुछ curved… गर्भाशय तक पहुँचाने वाले भी हैं।” शिल्पा ने एक को हाथ में लेकर देखा और तुरंत रख दिया, “ये तो बहुत बड़ा है…”

फिर Butt Plugs वाले सेक्शन में गए। रवि ने छोटे-छोटे सिलिकॉन प्लग दिखाए, कुछ gemstone वाली, कुछ vibrating। “ये गांड में डालते हैं… धीरे-धीरे आदत डालने के लिए।” शिल्पा ने शर्म से कहा, “नहीं… ये मत दिखाओ…”

अगला सेक्शन – Couples Toys।
रवि ने vibrating cock ring दिखाया, “ये मेरे लंड पर लगाएंगे… तुम्हें और मजा आएगा।” फिर remote control वाले vibrating egg, nipple clamps, feather ticklers, massage oils, lubricants (strawberry, chocolate, mint flavour)।

एक कोने में BDSM वाले टॉय भी थे – हल्के हैंडकफ, blindfold, whip, paddles। रवि ने हँसते हुए कहा, “ये बाद में ट्राई करेंगे… अभी नहीं।”

शिल्पा अब बहुत शर्माकर उसके पीछे छिपने लगी थी, लेकिन उसका हाथ रवि का कसकर पकड़े हुए था।

आखिर में कंडोम वाले सेक्शन पर आए। रवि ने कई पैकेट उठाए और पूछा, “Flavoured condom चाहिए? Strawberry, Chocolate, Banana…?”

शिल्पा ने तुरंत सिर हिलाया और शर्माते हुए लेकिन दृढ़ता से बोली, “नहीं… अब नहीं… घर जाकर हम बिना condom के ही करेंगे… अब सिर्फ हम… बिना कुछ के… मैं चाहती हूँ कि तुम्हारा पूरा गर्म पानी मुझे अंदर मिले…”

रवि ने शिल्पा की तरफ देखा। वो उसका मूड खराब नहीं करना चाहता था। मुस्कुराते हुए बोला, “कोई बात नहीं जान… जैसी तुम चाहो।” उसने कंडोम के पैकेट वापस रख दिए।

दोनों ने कुछ massage oil और एक छोटा सा vibrating bullet खरीद लिया (शिल्पा की जिद पर), बाकी सब देखकर छोड़ दिया।

शॉपिंग के बाद दोनों वापस रिसॉर्ट के सूट में आ गए। दरवाजा बंद करते ही रवि ने शिल्पा को अपनी बाँहों में खींच लिया।

रूम में वापस आते ही रवि ने दरवाजा बंद किया और लॉक कर दिया। शिल्पा अभी भी शॉपिंग वाली थैली हाथ में लिए खड़ी थी, लेकिन रवि ने उसे धीरे से अपनी तरफ खींच लिया। “अब कोई बाहर नहीं… सिर्फ हम…” उसने कहा और शिल्पा के होंठों पर गहरा किस कर दिया। शिल्पा भी उससे चिपक गई। दोनों ने एक-दूसरे के कपड़े उतारने शुरू किए।

पहले शिल्पा का ड्रेस उतरा, फिर ब्रा और पैंटी। रवि ने अपनी शर्ट, जींस और अंडरवियर निकाल दिए। दोनों पूरी तरह नंगे हो गए। शिल्पा का नन्हा-सा ४२ किलो वाला शरीर रवि के विशाल १०१ किलो वाले शरीर के सामने बिल्कुल खिलौने जैसा लग रहा था। शिल्पा ने रवि की छाती पर हाथ रखा और शर्माते हुए, लेकिन दृढ़ता से बोली, “रवि… आज सिर्फ ८ इंच तक… और बहुत आराम से… प्लीज… मैं अभी भी थोड़ी डर रही हूँ… लेकिन चाहती हूँ…”

रवि ने उसके बालों में हाथ फेरा और मुस्कुराते हुए कहा, “ठीक है जान… जैसी तुम चाहो… सिर्फ ८ इंच… और बहुत धीरे।”

रवि ने बेडसाइड टेबल से चॉकलेट सॉस की बोतल निकाली जो शॉपिंग से लाए थे। उसने शिल्पा को बेड पर लिटा दिया। फिर बोतल खोली और शिल्पा के दोनों छोटे-छोटे स्तनों पर गर्म, चिपचिपी चॉकलेट की धार डाल दी। चॉकलेट स्तनों पर फैल गई, निप्पल्स को पूरी तरह ढक लिया। रवि घुटनों के बल बैठ गया और एक स्तन को मुंह में ले लिया। जोर-जोर से चूसने लगा – चॉकलेट के साथ निप्पल को चूसता, जीभ से घुमाता, दाँतों से हल्का-हल्का काटता। दूसरा स्तन हाथ से मसलता रहता।

३० मिनट तक रवि लगातार चूसता रहा। बीच-बीच में उसकी उँगलियाँ शिल्पा की चूत में घुस जातीं – पहले एक, फिर दो उँगलियाँ, धीरे-धीरे अंदर-बाहर करता, अँगूठे से क्लिटोरिस रगड़ता। शिल्पा की साँसें तेज़ हो गईं। “आह्ह्ह… रवि… चॉकलेट… बहुत अच्छा लग रहा है… आह्ह्ह… उँगलियाँ… और गहरा… आह्ह्ह!!” उसके स्तन लाल हो गए थे, चॉकलेट चूसा जा चुका था, लेकिन रवि फिर से थोड़ा और डालकर चूसता रहता। शिल्पा की चूत अब पूरी तरह गीली और तैयार हो चुकी थी।

फिर शिल्पा ने रवि को लिटा दिया। उसका छोटा-सा मुँह रवि के १३ इंच लंड के सामने था। शिल्पा ने चॉकलेट सॉस निकाला और लंड के सिर पर ३ इंच तक चॉकलेट लगा दी। फिर उसने मुँह खोला और सिर्फ ३ इंच तक लंड को अंदर ले लिया। जीभ से चॉकलेट चूसती, ऊपर-नीचे करती। “म्ह्म्म… आह्ह्ह… स्वाद… बहुत अच्छा…” उसके मुँह से आवाज़ निकल रही थी। साथ-साथ वो रवि की दोनों भारी gotiyon को हाथ से मसलती, जीभ से चाटती।

२० मिनट तक शिल्पा लगातार चूसती रही – कभी तेज़, कभी धीरे, चॉकलेट खत्म होने तक। रवि का लंड अब पूरी तरह तन गया था, नसें उभरी हुईं, सिर चमक रहा था।

अब रवि ने शिल्पा को पोजीशन में लाया। पहले missionary में – दोनों पैर कंधों पर रखे, ८ इंच तक धीरे-धीरे अंदर किया। शिल्पा सिसकारी भरी, “आह्ह्ह… ८ इंच… भर गया… आह्ह्ह…” फिर डॉगी स्टाइल, फिर cowgirl, फिर spooning, फिर legs on shoulder। हर पोजीशन में रवि सिर्फ ८ इंच तक ही रखता, लेकिन लगातार, बिना रुके।

करीब १ घंटे तक रवि ने अलग-अलग पोजीशन में ८ इंच की गहराई पर पेला। ठक-ठक-ठक-ठक… कमरे में सिर्फ ये आवाज़ और शिल्पा की सिसकारियाँ गूंज रही थीं। शिल्पा की हालत पूरी तरह खराब हो चुकी थी। पहले २० मिनट में वो चीखती-मज लेती रही, लेकिन ४० मिनट बाद उसकी आवाज़ बैठ गई। आँखें आधी बंद, मुँह खुला, साँसें फूल रही थीं। “आह्ह्ह… रवि… बहुत… बहुत हो गया… मैं उठ नहीं पा रही… आह्ह्ह…” उसके स्तन लाल, चूत बुरी तरह सूजी हुई, जाँघें काँप रही थीं। आखिरी १० मिनट में वो सिर्फ हल्की-हल्की सिसकियाँ भर रही थी। बोलने की ताकत भी नहीं बची थी।

रवि ने आखिरी जोरदार झटके दिए और शिल्पा की चूत के अंदर ही अपना पूरा गर्म वीर्य भर दिया। शिल्पा का शरीर अंतिम बार काँपा और बेड पर बेजान पड़ गया। वो उठने की हालत में भी नहीं थी – बस पड़ी रह गई, नंगी, पसीने से तर, चूत से वीर्य बहता हुआ, साँसें छोटी-छोटी।

रवि ने उसे प्यार से चूम लिया, चादर ओढ़ा दी और खुद भी नंगा ही उसके बगल में लेट गया। दोनों नंगे ही गहरी नींद में सो गए।

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