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नाना को देखा नानी की चूदाई करते

नाना-नानी का जुनूनी राउंड

मेरा नाम राहुल है। उम्र २१ साल। मैं अहमदाबाद में पढ़ता हूँ। मैं अपने मामा के घर गया था। मामा-मामी दोनों बाहर गए थे – किसी शादी में, दो दिन के लिए। मामा ने मुझे फोन पर बोला था, “राहुल, तू वहीं रुक जाना। नाना-नानी अकेले हैं, ८५ और ७८ साल के। तू उनके पास रहना, खाना-पीना देख लेना।”

मैं शाम को ६ बजे पहुंच गया। मामा-मामी मुझे गेट तक छोड़कर चले गए। घर में सिर्फ नाना और नानी थे। नाना जी ८५ साल के थे, लेकिन अभी भी तगड़े दिखते थे – लंबे कद-काठी, सफेद दाढ़ी, आवाज भारी। नानी जी ७८ की थीं, लेकिन चेहरे पर अभी भी नूर था, शरीर मोटा-मोटा, बड़े-बड़े स्तन और चौड़ी कमर।

रात का खाना हम तीनों ने साथ खाया। नानी ने रोटी-दाल बनाया था। खाते-खाते नाना जी हंस रहे थे, “राहुल बेटा, तू सो जा, हम बूढ़े लोग जल्दी सो जाते हैं।” मैं ऊपर वाले कमरे में सो गया।

रात के करीब ११:३० बजे मुझे प्यास लगी। मैं नीचे पानी पीने गया। नाना-नानी का कमरा आधा खुला था। अंदर से हल्की-हल्की आवाजें आ रही थीं। मैंने चुपके से झांका।

नाना जी बिस्तर पर लेटे थे। उनकी लुंगी ऊपर थी। नानी जी उनके पास बैठी थीं। नाना का ८ इंच लंबा, मोटा लंड पूरा खड़ा था – बूढ़े होने के बावजूद नसें उभरी हुईं, सिरा गुलाबी और चमकदार। नानी जी उसे दोनों हाथों से सहला रही थीं।

“अरे वाह… आज कितना तगड़ा है…” नानी जी फुसफुसा रही थीं।
नाना जी हंसकर बोले, “आज तुझे पूरा मजा दूंगा रानी।”

मैं दरवाजे के पीछे छिपकर देखता रह गया। दिल जोर-जोर से धड़क रहा था।

नानी जी ने अपनी साड़ी का पल्लू हटाया। उनके बड़े-बड़े, थोड़े झूलते स्तन बाहर आ गए। चूचियां गुलाबी-काली थीं। नाना जी ने एक हाथ बढ़ाकर उन्हें दबाया। नानी जी कराह उठीं, “आह… धीरे… अभी तो शुरू ही किया है।”

नानी जी झुककर नाना के लंड को मुंह में ले लिया। ८ इंच का मोटा लंड उनका मुंह भर गया। वो जोर-जोर से चूस रही थीं – ऊपर-नीचे, जीभ घुमाते हुए। नाना जी की आंखें बंद थीं, “हां… रानी… चूस… ८० साल बाद भी तू ही मेरी जान है…”

५-६ मिनट चूसने के बाद नानी जी ऊपर चढ़ गईं। उन्होंने नाना के लंड को अपनी चूत पर रखा और धीरे-धीरे बैठ गईं। पूरा ८ इंच एक ही बार में अंदर चला गया। नानी जी की आंखें बंद हो गईं, मुंह से लंबी सांस निकली, “आह… भगवान… आज भी पूरा भर गया… कितना मोटा है तेरा…”

फिर शुरू हुआ असली खेल। नानी जी खुद ऊपर-नीचे होने लगीं। उनके बड़े स्तन उछल-उछल कर नाना के चेहरे पर गिर रहे थे। नाना जी नीचे से जोर-जोर से धक्के दे रहे थे। कमरा “पच… पच… पच…” की आवाज से भर गया था।

नानी जी चीख रही थीं, “हां… और जोर से… चोदो मुझे… ८५ साल के होकर भी ८ इंच का तगड़ा लंड… आह… मजा आ रहा है… और तेज…!”

नाना जी का टाइमिंग कमाल का था। ४० मिनट तक लगातार ठोकते रहे। कभी मिशनरी, कभी डॉगी स्टाइल, कभी नानी को गोद में बिठाकर। नानी जी चार बार झड़ चुकी थीं – हर बार शरीर कांप जाता, चूत से पानी की धार निकलती।

आखिरकार नाना जी ने जोर से धक्का मारा और नानी के अंदर ही झड़ गए। नानी जी चीखकर उन पर गिर पड़ीं, “आह… गरम… पूरा भर गया… कितना मजा आया…”

दोनों पसीने से तर थे। नानी जी नाना की छाती पर सिर रखकर लेट गईं।

मैं अभी भी दरवाजे के पीछे खड़ा था। मेरा अपना लंड पैंट में तना हुआ था। १५ मिनट बाद फिर आवाजें आने लगीं।

इस बार नाना जी ने नानी को चारों हाथ-पैरों पर किया। गांड ऊपर थी। नाना ने लंड पर थूक लगाया और पूरा ८ इंच नानी की गांड में उतार दिया। नानी जोर से चिल्लाईं, “आह… गांड फट गई… लेकिन मत निकालो… चोदो…!”

नाना जी ने ५० मिनट तक नानी की गांड मारी। नानी जी लगातार चीखती रहीं, “हां… मेरे बूढ़े राजा… आज तो मुझे स्वर्ग पहुंचा दिया… आह… और जोर से… गांड मारो…!”

दूसरे राउंड में भी नानी तीन बार झड़ीं। आखिरकार नाना ने गांड के अंदर ही झड़ दिया।

रात के २ बजे दोनों सो गए।

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