राज और फोरम की जुनूनी कहानी 1

अगला दिन, सुबह १०:३० बजे।
मैं अपने अहमदाबाद के लग्जरी फ्लैट के बेडरूम में लेटा हुआ था। सिर्फ ब्लैक बॉक्सर पहने, छाती नंगी। कल रात मैंने फोरम को ताज होटल में दो दिन के लिए साथ रहने का प्लान बताया था। लेकिन वो अभी तक कोई साफ जवाब नहीं दे रही थी। मेरा दिल तेज-तेज धड़क रहा था। मैंने फोन उठाया और व्हाट्सएप पर लंबा मैसेज टाइप करना शुरू किया।

“मेरी जान फोरम ❤️
कल सुबह ५ बजे ताज होटल की लॉबी में मिलते हैं। मैंने पहले से ही १७वीं मंजिल का प्रेसिडेंशियल सूट बुक कर लिया है – पूरा प्राइवेट, जकूजी, बालकनी, किंग साइज बेड। दो दिन सिर्फ तू और मैं। पहले दिन शॉपिंग करवाऊंगा – साड़ी, ड्रेस, लिंगरी, ज्वेलरी, जो तेरा मन करे। शाम को कैंडल लाइट डिनर, फिर रूम में सिर्फ रोमांस। मैं तेरे बाल सहलाऊंगा, तेरे होंठ चूमूंगा, तेरे शरीर को छूकर तुझे महसूस करूंगा। कोई जल्दबाजी नहीं। जब तक तू तैयार न हो, कुछ नहीं करूंगा। मैं तेरे बिना अधूरा हूँ बेबी। प्लीज हाँ बोल दे। मैं तेरी हर इच्छा पूरी करूंगा। तेरी मुस्कान के लिए पूरा ताज बुक करवा सकता हूँ।”

मैसेज भेजकर मैं इंतजार करने लगा। ४ मिनट बाद “टाइपिंग…” दिखा। फिर रुक गया। फिर फिर से टाइपिंग। आखिरकार मैसेज आया:

“राज… दो दिन होटल में? मैं बहुत डर रही हूँ। घरवाले क्या कहेंगे? और… मैं अभी वर्जिन हूँ। तुम जानते हो ना?”

मैंने तुरंत रिप्लाई किया:
“हाँ मेरी जान, मैं सब जानता हूँ। लेकिन दो दिन सिर्फ तेरा और मेरा समय होगा। अगर तू नहीं चाहे तो हम सिर्फ बातें करेंगे, गले लगेंगे, किस करेंगे। मैं तेरी इज्जत का पूरा ख्याल रखूंगा। घर पर बोल देना फ्रेंड्स के साथ शॉपिंग और पार्टी है। मैं सब संभाल लूंगा। प्लीज फोरम… मुझे तेरे साथ रहना है।”

फिर मैंने वीडियो कॉल लगा दी। घंटी बजती रही। सातवीं घंटी पर उसने कॉल उठाई। उसकी प्यारी गोरी फेस स्क्रीन पर आई। बाल खुले, आंखों में शर्म और डर का मिश्रण। पीछे उसका रूम दिख रहा था।

“राज… तुम सच में दो दिन होटल में रहना चाहते हो?” उसकी आवाज थोड़ी कांप रही थी।

मैंने बहुत प्यार से कहा, “हाँ बेबी। लेकिन मैं तुझे कभी मजबूर नहीं करूंगा। हम पहले शॉपिंग करेंगे, तुझे नई-नई चीजें खरीद दूंगा। फिर डिनर में कैंडल लाइट में बातें करेंगे। रूम में जाकर मैं तुझे अपनी गोद में बैठाकर बाल सहलाऊंगा, गर्दन चूमूंगा, जितना तू चाहे उतना प्यार करूंगा। अगर तू कहेगी ‘बस’ तो मैं रुक जाऊंगा। मैं सिर्फ तेरे साथ होना चाहता हूँ। तेरी सांसों को महसूस करना चाहता हूँ। प्लीज मेरी रानी… हाँ बोल दे।”

फोरम ने लंबी सांस ली। उसकी आंखें नीची हो गईं। “लेकिन राज… अगर कुछ हो गया तो?”

“कुछ नहीं होगा जो तू नहीं चाहे। मैं प्रॉमिस करता हूँ। बस तेरे साथ दो दिन बिताना है। तेरे हाथ थामना है, तेरे पैरों को अपने पैरों से रगड़ना है। तेरी हंसी सुननी है।”

उसने फिर २-३ मिनट सोचा। फिर धीरे से बोली, “ठीक है… लेकिन बहुत डर लग रहा है। कल सुबह ५ बजे आऊंगी। लेकिन अगर मैं मना कर दूं तो मान जाना।”

मैं खुशी से मुस्कुरा दिया। “प्रॉमिस बेबी। मैं तुझे कभी दुख नहीं पहुंचाऊंगा। कल ५ बजे लॉबी में गुलदस्ता लेकर इंतजार करूंगा।”

फिर हमारी बातें रात तक चलती रहीं। मैंने उसे डिटेल में बताया कि कैसे हम शॉपिंग करेंगे, कौन-कौन सी ड्रेस खरीदेंगे, कैसे डिनर में रोमांस करेंगे। फोरम शरमा-शरमा कर हंसती रही। रात ११:५५ बजे उसने आखिरी मैसेज किया:

“राज… मैं आ रही हूँ। लेकिन प्लीज मुझे अच्छे से रखना। ❤️”

मैंने रिप्लाई किया: “तू मेरी जान है। मैं तेरी हर खुशी का ख्याल रखूंगा। सो जा अब, कल सुबह मिलते हैं।”

अगली सुबह ७:१५ बजे मैं उठा। दिल में उत्साह था। सबसे पहले मैंने अपना प्राइवेट पार्ट वैक्सिंग के लिए अपॉइंटमेंट लिया। सैलून पहुंचकर मैंने पूरा साफ करवाया – लंड, अंडकोष, आस-पास का सारा एरिया। वैक्सिंग के बाद मेरा ९ इंच का लंड बिल्कुल चिकना, चमकदार और मोटा लग रहा था। नसें साफ उभरी हुईं, सिरा गुलाबी और तैयार। मैंने महंगा परफ्यूम लगाया, सफेद शर्ट और ब्लैक ट्राउजर पहना। जेब में कंडोम, लुब्रिकेंट और छोटी-छोटी सरप्राइज रख लीं।

शाम के ठीक ४:४५ बजे मैं ताज होटल की भव्य लॉबी में पहुंच गया। हाथ में २५ लाल गुलाबों का बड़ा गुलदस्ता। लॉबी में हल्की रोशनी और क्लासिकल म्यूजिक चल रही थी। ठीक ५:०० बजे लिफ्ट के दरवाजे खुले। फोरम बाहर निकली। हल्का गुलाबी कुर्ता जो उसके गोरे शरीर पर फिट बैठ रहा था, नीचे ब्लैक टाइट जींस। बाल खुले हुए, चेहरे पर हल्का मेकअप, होंठों पर पिंक लिपस्टिक। वो मुझे देखते ही शर्मा गई और धीरे-धीरे मेरी तरफ आई।

मैंने आगे बढ़कर उसे कसकर गले लगा लिया। उसकी नरम, गर्म छाती मेरी छाती से सट गई। मैंने उसके कान में फुसफुसाया, “मेरी जान… आ गई तू। अब दो दिन सिर्फ हम दोनों।

डिनर खत्म होने के बाद रात के करीब ९:४५ बजे हम दोनों रेस्टोरेंट से निकले। फोरम का हाथ मेरे हाथ में था। उसके चेहरे पर शर्म, उत्सुकता और थोड़ा डर साफ दिख रहा था। मैंने उसे धीरे से अपनी तरफ खींचा और लिफ्ट की तरफ ले गया। लिफ्ट में कोई और नहीं था। जैसे ही दरवाजे बंद हुए, मैंने उसे दीवार से लगा लिया और उसके होंठों पर हल्का सा किस किया। फोरम कांप गई लेकिन किस में थोड़ा जवाब दिया।

लिफ्ट १७वीं मंजिल पर रुकी। हम सूट के दरवाजे पर पहुंचे। मैंने कार्ड से दरवाजा खोला। अंदर घुसते ही लाइट्स ऑटोमैटिक जल गईं। पूरा सूट बहुत खूबसूरत था – बड़ा किंग साइज बेड, सॉफ्ट लाइटिंग, जकूजी टब एक तरफ, बालकनी से अहमदाबाद की रात की चमकती लाइट्स दिख रही थीं। एयर कंडीशनर की ठंडी हवा कमरे में फैली हुई थी।

दरवाजा बंद करते ही मैंने फोरम को अपनी तरफ घुमाया। “मेरी जान…” मैंने उसे दोनों हाथों से कमर से पकड़कर अचानक गोद में उठा लिया। फोरम चौंक गई, “आह… राज… क्या कर रहे हो?” उसकी दोनों टांगें मेरी कमर के चारों तरफ लिपट गईं। मैंने उसे कसकर पकड़े हुए बेड की तरफ ले गया। उसके स्तन मेरी छाती से दब रहे थे। मैंने उसके गाल, गर्दन और फिर होंठों पर कई सारे हल्के-हल्के किस किए। फोरम मेरी गर्दन में हाथ डालकर शरमा रही थी।

बेड के पास पहुंचकर मैंने उसे बहुत धीरे से बेड पर लिटा दिया। फिर खुद उसके ऊपर झुक गया। “फोरम… तू बहुत खूबसूरत है।” मैंने उसके होंठों को चूसना शुरू किया। पहले हल्के किस, फिर गहरे किस। मेरी जीभ उसके मुंह में घुस गई। फोरम की सांसें तेज हो गईं। मैंने उसके गाल, कान की लोब, गर्दन को चूमा और हल्का-हल्का चाटा। वो कराह रही थी, “आह… राज… धीरे…”

अब मैंने arm in arm से उसके कपड़े उतारने शुरू किए। पहले उसके कुर्ते के बटन खोले। कुर्ता धीरे-धीरे ऊपर किया और उतार दिया। उसके गोरे, नरम ३४C स्तन ब्रा में कैद थे। ब्रा का हुक पीछे से खोला और ब्रा भी उतार दी। उसके गुलाबी चूचियां बाहर आ गईं। मैंने दोनों हाथों से उन्हें हल्का दबाया और चूमा। फोरम ने आंखें बंद कर लीं और सांसें भारी हो गईं।

फिर मैंने उसकी जींस का बटन खोला। जिपर नीचे किया और जींस को धीरे-धीरे उसकी टांगों से उतारा। अब वो सिर्फ पैंटी में थी – हल्की गुलाबी पैंटी। मैंने उसे भी बहुत धीरे से उतार दिया। पहली बार फोरम की पूरी नंगी चूत मेरे सामने थी – बिल्कुल साफ, गुलाबी, छोटी-छोटी लेबिया, बीच में तंग सुराख। वो शर्मा कर दोनों हाथों से अपना चेहरा ढक ले रही थी।

मैंने उसके पैरों को फैलाया और खुद उसके बीच में लेट गया। पहले उसके पेट पर किस किए, फिर नाभि को चाटा। धीरे-धीरे नीचे आया। उसकी जांघों को चूमा, फिर चूत के आस-पास चाटा। फोरम की कमर तन गई, “उफ्फ… राज… क्या कर रहे हो… शर्म आ रही है… आह…”

मैंने थोड़ी देर उसके स्तनों के साथ खेला। दोनों चूचियों को मुंह में लेकर चूसा, जीभ से चक्कर लगाया, हल्का काटा। फोरम अब कराह रही थी, “आह… राज… अच्छा लग रहा है…”

फिर मैंने खुद की शर्ट उतार दी। अब मैं सिर्फ पैंट में था। फोरम ने शरमाते हुए मेरी शर्ट उतारने में मदद की। उसके हाथ मेरी छाती पर फिर रहे थे। मैंने उसकी पैंटी पूरी तरह उतार दी (जो पहले ही उतार चुका था)। अब वो पूरी नंगी थी।

मैंने फिर उसके स्तनों को चूमा-चाटा। फिर गर्म करने के लिए उसके पूरे शरीर पर किस करने लगा – गर्दन, कंधे, पेट, जांघें। फोरम अब पूरी तरह गर्म हो चुकी थी। उसकी सांसें तेज थीं और चूत थोड़ी भीग चुकी थी।

अब मैंने अपनी पैंट और बॉक्सर उतार दिया। मेरा ९ इंच का लंड पूरा तना हुआ, वैक्स किया हुआ, मोटा और चमकता हुआ बाहर आ गया। फोरम की आंखें फट गईं। “राज… ये… इतना बड़ा…”

मैंने उसके हाथ को पकड़कर लंड पर रख दिया। फोरम ने शरमाते हुए लेकिन उत्सुकता से लंड को हाथ में लिया और हल्का-हल्का सहलाने लगी। वो उसे ऊपर-नीचे कर रही थी, अंगूठे से सिरे को छू रही थी। मैं कराह उठा, “हां बेबी… अच्छा लग रहा है…”

फिर मैंने धीरे से कहा, “फोरम… मुंह में ले ले बेबी।”

फोरम ने तुरंत सिर हिला दिया। “नहीं राज… प्लीज… मैं नहीं कर पाऊंगी… अभी नहीं। सिर्फ किस कर सकती हूँ।”

मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “ठीक है मेरी जान। जो तू चाहे।”

फिर फोरम ने झुककर मेरे लंड के सिरे पर सिर्फ हल्के-हल्के किस किए। उसके नरम, गर्म होंठ मेरे लंड के टिप पर लग रहे थे। वो बार-बार किस कर रही थी लेकिन मुंह में नहीं ले रही थी। मैं उसके बालों को सहलाता रहा और उसे प्यार से देखता रहा।

अब तक हम दोनों बहुत गर्म हो चुके थे। फोरम की चूत पूरी तरह भीगी हुई थी और मेरा लंड लोहे की तरह सख्त था। मैंने उसे फिर से चूमना शुरू किया…

अब तक हम दोनों पूरी तरह गर्म हो चुके थे। सूट की एसी ठंडी हवा में भी हमारे शरीर गर्मी से तप रहे थे। फोरम की सांसें तेज थीं, उसके गाल लाल हो गए थे, आंखें आधी बंद थीं। उसकी चूत पूरी तरह भीग चुकी थी और चमक रही थी। मेरा ९ इंच का लंड भी लोहे की तरह सख्त था, नसें उभरी हुईं, सिरा चमक रहा था।

मैं फोरम के ऊपर झुका हुआ था। उसके नंगे शरीर को अपनी छाती से दबाते हुए मैंने उसके कान में फुसफुसाया, “मेरी जान… अब मैं तुझे पूरी तरह अपनी बना लूंगा। लेकिन पहली बार है, बहुत धीरे करूंगा।”

फोरम ने शरमाते हुए सिर हिलाया। उसकी आवाज कांप रही थी, “राज… डर लग रहा है… लेकिन मैं तुम्हारी हूँ…”

मैंने उसे प्यार से चूमते हुए कहा, “कंडोम लाओ बेबी। बैग में है।”

फोरम ने उठकर बेड के पास रखे मेरे बैग से कंडोम और लुब्रिकेंट की बोतल निकाली। उसके नंगे शरीर पर लाइट पड़ रही थी, जिससे उसके स्तन हल्के-हल्के हिल रहे थे। वो वापस आई और मेरे सामने बैठ गई। उसने कंडोम का पैकेट फाड़ा और कांपते हाथों से मेरे लंड पर कंडोम चढ़ाने की कोशिश की। पहले दो बार हाथ फिसल गए, फिर उसने धीरे-धीरे कंडोम पूरा चढ़ा दिया। उसके बाद उसने लुब्रिकेंट की बोतल खोली और मेरे लंड पर अच्छे से लगाया। ठंडा, चिकना लुब्रिकेंट लंड पर फैल गया।

“अब लेट जा बेबी,” मैंने कहा।

फोरम ने लेट जाने की कोशिश की लेकिन मैंने उसे मिशनरी पोजीशन में सेट किया। उसके दोनों पैरों को फैलाकर मेरी कमर के दोनों तरफ रख दिया। मैं उसके बीच में आ गया। मेरा लंड उसकी भीगी चूत के मुंह पर टिका हुआ था। फोरम की सांसें बहुत तेज हो गई थीं। उसकी आंखें मेरी आंखों में थीं।

मैंने धीरे से कहा, “आराम से बेबी… मैं बहुत धीरे करूंगा।”

फिर मैंने लंड की नोक को उसके चूत के छेद पर रखा और बहुत हल्का सा धक्का दिया। सिर्फ १ इंच अंदर गया।

“आआआह… राज… दर्द हो रहा है… निकालो… चीख…!”
फोरम जोर से चिल्ला उठी। उसका पूरा शरीर तन गया। उसके नाखून मेरी पीठ में गड़ गए। आंखों में आंसू आ गए।

मैं तुरंत रुक गया। उसके होंठों को चूमने लगा, गर्दन को चूसने लगा और बोला, “शांत हो जा मेरी जान… बस थोड़ा सा… धीरे-धीरे ठीक हो जाएगा।”

१-२ मिनट रुकने के बाद मैंने फिर हल्का धक्का दिया। अब २ इंच अंदर चला गया।

“आह… राज… बहुत दर्द… रो… रो रही हूँ… प्लीज रुको…!”
फोरम रोने लगी। उसके आंसू गालों पर बह रहे थे। वो बार-बार सिर हिला रही थी और मेरी पीठ पर नाखून गाड़ रही थी। उसकी चूत बहुत तंग थी, जैसे मेरे मोटे लंड को निचोड़ रही हो।

मैं फिर रुका। उसके स्तनों को हल्का दबाते हुए, चूचियों को चूसते हुए उसे शांत करने की कोशिश की। “मेरी रानी… बस थोड़ा और… तू बहुत बहादुर है। मैं तुझे प्यार करता हूँ।”

फिर धीरे-धीरे मैंने तीसरा धक्का दिया। अब ३ इंच अंदर हो गए।
अचानक फोरम की चूत से हल्का खून निकलने लगा। गर्म खून कंडोम के बाहर थोड़ा सा बहने लगा।

“आआआह… राज… फट रही हूँ… बहुत दर्द… चीख… रो…!”
फोरम जोर-जोर से चिल्ला रही थी और रो रही थी। उसका शरीर बार-बार कांप रहा था। वो अपने पैरों को कसकर मेरी कमर से लिपटाए हुए थी लेकिन दर्द से उसके पैर भी कांप रहे थे।

मैं पूरी तरह रुक गया। ५-७ मिनट तक मैंने सिर्फ उसके होंठ चूमे, आंसू पोछे, बाल सहलाए और प्यार भरी बातें कीं। “फोरम… मेरी जान… तू मेरी हो गई। बस थोड़ा और सह ले। फिर मजा आएगा।”

धीरे-धीरे मैंने आगे बढ़ना शुरू किया। ४ इंच… ५ इंच… हर इंच पर फोरम चिल्लाती, रोती, “राज… बस… निकालो… आह… दर्द… बहुत दर्द…”
उसकी चूत से और खून निकल रहा था। लेकिन मैं बहुत धीरे-धीरे, रुक-रुककर पूरा लंड अंदर करने की कोशिश कर रहा था।

४० मिनट तक यह सिलसिला चला। हर २-३ मिनट में एक छोटा धक्का, फिर रुकना, चूमना, शांत करना। फोरम लगातार चिल्लाती और रोती रही। कभी-कभी वो मेरी पीठ पर नाखून गाड़ देती, कभी मेरे बाल पकड़ लेती। उसकी आवाज बार-बार टूट जाती, “राज… मैं मर जाऊंगी… आह… बहुत बड़ा है…”

आखिरकार ४० मिनट बाद पूरा ९ इंच उसकी तंग चूत में घुस गया। मेरा लंड की जड़ तक अंदर था। फोरम की चूत पूरी तरह फैल चुकी थी। उसका पेट हल्का सा उभरा हुआ दिख रहा था। वो अब चिल्ला तो रही थी लेकिन आवाज कमजोर हो गई थी। आंसू लगातार बह रहे थे।

“पूरा… अंदर… आ गया… मेरी जान,” मैंने उसके कान में फुसफुसाया।

फोरम सिर्फ हांफ रही थी और रो रही थी। “राज… बहुत… दर्द… हो रहा है…”

मैंने फिर से रुककर उसे चूमना शुरू किया। उसके स्तनों को सहलाया, चूचियों को चूसा। ५ मिनट बाद जब उसका दर्द थोड़ा कम हुआ तो मैंने बहुत धीरे-धीरे हल्के-हल्के धक्के देना शुरू किए।

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