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सास ससुर की चूदाई

गर्मी का वो रात था, जब बिजली चली गई और पूरा घर भट्टी की तरह तप रहा था। राधा (48 साल), मेरी सास, अपने बेडरूम में अकेली लेटी हुई थीं। उनकी हल्की सी नीली साड़ी पसीने से पूरी तरह भीग चुकी थी। साड़ी का पल्लू उनके भारी 38D साइज़ की छातियों पर से सरक गया था, जिससे ब्लाउज़ के अंदर की सफ़ेद ब्रा का किनारा साफ़ दिख रहा था। उनकी कमर की गोलाई और नाभि पसीने की वजह से चमक रही थी।

वे बार-बार करवट बदल रही थीं। उनकी साँसें भारी हो रही थीं। “उफ्फ… कितनी गर्मी है आज…” उन्होंने फुसफुसाते हुए कहा।

तभी दरवाज़ा धीरे से खुला। ससुर रामलाल (52 साल) अंदर आए। वे सिर्फ़ लूंगी पहने हुए थे। उनकी छाती पर सफ़ेद बाल थे, लेकिन शरीर अभी भी मजबूत था। उनकी आँखें राधा के पसीने से तर बदन पर टिक गईं।

“बहू… नींद नहीं आ रही क्या?” रामलाल ने गहरी आवाज़ में पूछा।

राधा ने शरमाते हुए साड़ी का पल्लू ठीक करने की कोशिश की, लेकिन पसीने की वजह से वो और चिपक गया। “जी… बहुत गर्मी है ससुर जी। पंखा भी काम नहीं कर रहा।”

रामलाल बिस्तर के पास आए और किनारे पर बैठ गए। उनकी नज़र राधा की जाँघों पर पड़ी, जहाँ साड़ी ऊपर सरक गई थी और गोरी, मोटी जाँघें चमक रही थीं। उन्होंने धीरे से हाथ बढ़ाया और राधा की कमर पर रख दिया।

“ये गर्मी तो शरीर के अंदर भी है ना बहू…?” उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा। उनकी उँगलियाँ राधा की नाभि के आस-पास घूमने लगीं। राधा का शरीर हल्का सा काँप गया।

“ससुर जी… ये क्या…” राधा ने कमज़ोर विरोध किया, लेकिन उनकी आवाज़ में शरम के साथ उत्तेजना भी थी।

रामलाल ने कोई जवाब नहीं दिया। उन्होंने राधा का पल्लू पूरी तरह खींच लिया। साड़ी का आंचल अब बिस्तर पर बिखरा पड़ा था। फिर उन्होंने ब्लाउज़ के हुक एक-एक करके खोलने शुरू किए। हर हुक खुलने के साथ राधा की साँसें तेज़ होती गईं।

जब आखिरी हुक खुला, तो राधा की भारी, दूधिया छातियाँ ब्रा से बाहर झाँकने लगीं। रामलाल ने ब्रा का हुक भी खोल दिया। दोनों बड़े-बड़े स्तन एकदम से बाहर आ गए। उनकी ब्राउन निप्पल्स पहले से ही सख्त हो चुकी थीं और पसीने से चमक रही थीं।

“वाह… सास जी, कितनी सुंदर हैं आपकी चूचियाँ…” रामलाल ने प्रशंसा की और दोनों हाथों से उन्हें थाम लिया। उन्होंने धीरे-धीरे मसलना शुरू किया। उँगलियाँ नरम मांस में धंस रही थीं। राधा की आँखें बंद हो गईं। “आह्ह… ससुर जी… धीरे… उफ्फ…”

रामलाल झुक गए और एक निप्पल को मुँह में ले लिया। उन्होंने जोर-जोर से चूसना शुरू किया, जीभ से चारों तरफ़ घुमाते हुए। दूसरे स्तन को हाथ से दबाते और निप्पल को उँगलियों से नोचते रहे। राधा की कमर बार-बार ऊपर उठ रही थी। उनके मुँह से अनायास आहें निकल रही थीं — “हाय… अाह… और चूसिए… मजा आ रहा है…”

रामलाल ने साड़ी की बाकी लपेट भी खोल दी। अब राधा सिर्फ़ पेटीकोट में थीं। उन्होंने पेटीकोट की नाड़ी खींची और उसे भी उतार दिया। राधा की जाँघें पूरी तरह नंगी हो गईं। उनकी चूत पर हल्के-हल्के बाल थे, लेकिन पसीने और रस की वजह से पूरी तरह गीली और चमकदार दिख रही थी। चूत की फाँकें थोड़ी-थोड़ी खुली हुई थीं।

रामलाल ने अपनी उँगली राधा की चूत पर रखी और धीरे से ऊपर-नीचे रगड़ने लगे। क्लिटोरिस पर जब उँगली घूमी, राधा ने जोर से कराह उठाई — “अाह्ह्ह… वहाँ… हाँ… ससुर जी…”

उन्होंने एक उँगली अंदर डाली। अंदर बहुत गर्म और फिसलन भरा था। रामलाल ने दूसरी उँगली भी डाल दी और तेज़ी से अंदर-बाहर करने लगे। राधा की चूत से “फच फच” की आवाज़ आने लगी। उनका रस उँगलियों पर चिपक रहा था।

“बहुत दिन से प्यासी थीं ना सास जी? देखो कितना पानी निकल रहा है…” रामलाल ने गंदी बात करते हुए कहा।

राधा शरमा गई लेकिन जवाब में उनकी जाँघें और फैल गईं।

अब रामलाल ने अपनी लूंगी उतार दी। उनका लंड बाहर निकला — मोटा, 7 इंच लंबा, सिर लाल और नोक से पारदर्शी पानी टपक रहा था। वे राधा के ऊपर चढ़ गए। लंड की नोक को चूत की फाँक पर रखा और धीरे-धीरे रगड़ने लगे।

फिर एक जोरदार झटका।

“आआआह्ह्ह…!” राधा की चीख निकल गई। रामलाल का पूरा मोटा लंड एक ही बार में राधा की चूत में घुस गया था। चूत की दीवारें लंड को कसकर जकड़ रही थीं।

रामलाल रुक गए, राधा को सम्हलने का समय दिया। फिर धीरे-धीरे धक्के मारने शुरू किए। हर धक्के के साथ राधा की छातियाँ जोर-जोर से उछल रही थीं। कमरे में सिर्फ़ चुदाई की फच-फच आवाज़, राधा की आहें और रामलाल की भारी साँसें गूँज रही थीं।

“हाँ… और जोर से… ससुर जी… फाड़ दो मेरी चूत… बहुत दिन से तरस रही थी…” राधा अब पूरी तरह उत्तेजित हो चुकी थीं।

रामलाल ने रफ़्तार बढ़ा दी। वे राधा की जाँघें कंधों पर रखकर गहरे धक्के मारने लगे। लंड हर बार पूरी तरह बाहर निकलकर फिर से जड़ तक घुस रहा था। राधा की चूत से सफ़ेद झाग बनने लगा था।

कुछ देर बाद उन्होंने राधा को घुटनों के बल करवाया। डॉगी स्टाइल में अब लंड और भी गहराई तक जा रहा था। रामलाल ने राधा के बाल पकड़े और घोड़े की तरह तेज़ी से ठोकने लगे। राधा की गांड हर धक्के पर लहरा रही थी।

“अाह… हाँ… इसी तरह… मेरी गांड पकड़कर चोदिए… उफ्फ… मजा आ रहा है…”

रामलाल ने एक हाथ से राधा की लटकती छातियों को दबाया, दूसरे हाथ से क्लिटोरिस रगड़ा। राधा पहली बार झड़ गईं। उनका पूरा शरीर सिहर उठा, चूत सिकुड़-सिकुड़कर लंड को दबाने लगी। लेकिन रामलाल रुके नहीं।

वे लगातार 25-30 मिनट तक चोदते रहे। कई बार पोज़िशन बदले — कभी मिशनरी, कभी राधा ऊपर, कभी साइड से। राधा तीन बार झड़ चुकी थीं। उनका पूरा बदन पसीने और रस से तर था।

आखिर में रामलाल ने राधा को वापस लेटाया। उन्होंने अपना लंड राधा की छातियों के बीच रखा और जोर-जोर से रगड़ने लगे। कुछ ही देर में उनका गर्म, गाढ़ा वीर्य राधा की छातियों, गर्दन, ठोड़ी और मुँह पर फैल गया। कुछ बूँदें राधा के होंठों पर भी पड़ीं।

राधा ने जीभ निकालकर वीर्य चाट लिया और मुस्कुराई। फिर उन्होंने रामलाल के लंड को हाथ में लेकर बचा हुआ वीर्य चूस लिया।

दोनों थके हुए, लेकिन बेहद संतुष्ट, एक-दूसरे से लिपटकर लेट गए।

राधा ने धीरे से कहा, “ससुर जी… आज तो सारी गर्मी निकल गई… लेकिन कल फिर लगेगी तो… आप फिर उतार देंगे ना?”

रामलाल हँसे और राधा की छाती पर हाथ फेरते हुए बोले, “जब भी गर्मी लगे, बता देना बहू… मैं पूरी रात गर्मी उतार दूँगा।”

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