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दीदी की एनिवर्सरी ओर मेरी… 2

मैंने कैमरा हाथ में लिया। हाथ हल्के काँप रहे थे। दीदी और जीजू केक के पास खड़े थे। कमरे में हल्की रोशनी और सजावट के फूल बिखरे हुए थे। जीजू ने मेरी तरफ देखकर कहा,

“पूरा आज रात का वीडियो लेना। सेक्सी केक सेलिब्रेशन। कुछ मत छोड़ना।”

मैंने सिर हिला दिया। कैमरा ऑन कर दिया।

पहले दोनों ने लंबा और गहरा किस किया। इतना लंबा कि मैं हैरान रह गई। जीजू के हाथ दीदी की कमर पर थे, दीदी के हाथ उसके गले पर। दोनों के शरीर एक-दूसरे से सट गए थे। किस टूटने का नाम नहीं ले रहा था। जब उन्होंने अलग हुए तो दोनों के होंठ चमक रहे थे।

फिर जीजू ने अपनी शॉर्ट्स के नाड़े खोले और उसे नीचे सरका दिया। अब वो सिर्फ अंडरवियर में रह गए। दीदी ने मुस्कुराते हुए मुझे इशारा किया कि रिकॉर्डिंग जारी रखो।

दीदी ने केक पर कुछ लिखा। पहले मेरे नाम का छोटा सा मैसेज, फिर जीजू के लिए। उसने चाकू से केक का एक छोटा टुकड़ा काटा और जीजू के मुँह में डाला। फिर खुद भी थोड़ा खाया। इसके बाद उसने जीजू को फिर से किस किया — इस बार केक की मिठास के साथ।

थोड़ी देर बाद दीदी ने अपने ब्रा के हुक खोले। ब्रा धीरे से उतर गई। उसके बड़े और भरे हुए स्तन बाहर आ गए। उसने दोनों हाथों से केक को थोड़ा सा दबाया और अपने स्तनों को केक में धँसा दिया। क्रीम और केक उसके स्तनों पर चिपक गए। निप्पल तक क्रीम लग गई।

जीजू तुरंत उसके करीब आ गया। उसने सिर झुकाया और दीदी के स्तनों से क्रीम चाटने लगा। जीभ से धीरे-धीरे साफ कर रहा था। कभी निप्पल को मुँह में लेकर चूस लेता, कभी आसपास की क्रीम चाटता। दीदी की गर्दन पीछे की तरफ झुक गई। उसकी साँसें तेज हो गईं। वो जीजू के सिर को अपने स्तनों पर और दबा रही थी।

“चाट… पूरा साफ कर…” दीदी की आवाज में हल्की उत्तेजना थी।

जीजू लगन से चाट रहा था। क्रीम उसके होठों और ठुड्डी पर लग रही थी। दीदी के स्तन चमक रहे थे। कमरे में सिर्फ उनकी साँसों और चाटने की हल्की आवाजें गूँज रही थीं। मैं कैमरा थामे यह सब रिकॉर्ड कर रही थी। मेरी अपनी साँसें तेज हो चुकी थीं। आँखें फटी हुई थीं। जो कुछ हो रहा था, वो इतना खुला और साहसिक था कि मुझे यकीन ही नहीं हो रहा था।

दीदी ने आँखें खोलकर एक बार मेरी तरफ देखा। उसके चेहरे पर कोई शर्म नहीं थी। बस एक अजीब सी मुस्कान थी, जैसे कह रही हो — देखती रह… आज रात लंबी है।

जीजू अभी भी उसके स्तनों से क्रीम चाट रहा था। सेलिब्रेशन अब सही मायनों में शुरू हो चुका था।
केक की क्रीम अभी भी दीदी के स्तनों पर हल्की चमक छोड़ रही थी। जीजू ने आखिरी निशान भी जीभ से साफ कर दिए थे। दोनों की साँसें तेज चल रही थीं। मैं कैमरा थामे खड़ी थी। हाथों में हल्का कंपन था, लेकिन रिकॉर्डिंग चालू रखी हुई थी।

दीदी ने अचानक मुस्कुराते हुए जीजू की तरफ देखा और बोली,
“जीजू… आपके लिए सरप्राइज है।”

जीजू की भौंहें उठीं।
“क्या?”

दीदी ने कोई जवाब नहीं दिया। उसने धीरे-धीरे अपनी पैंटी के दोनों साइड के धागे खोले और उसे नीचे सरका दिया। अब वो पूरी तरह नंगी खड़ी थी। फिर वो बेड की तरफ मुड़ी, घुटनों के बल हो गई और हाथ आगे करके डॉगी स्टाइल में आ गई। उसकी गांड पीछे की तरफ उठी हुई थी।

मैंने कैमरा थोड़ा नीचे किया तो साफ दिखा – दीदी की गांड पर कुछ लिपटा हुआ था। पारदर्शी प्लास्टिक जैसा, बिल्कुल वैसा ही जैसा गिफ्ट के ऊपर चढ़ाया जाता है। ऊपर एक छोटी सी रिबन जैसी चीज भी बंधी थी। दीदी ने पीछे मुड़कर जीजू को देखा और धीमी लेकिन साफ आवाज में कहा,

“आज से ये गांड आपकी हुई। फुल को हटाके… आपकी कीजिए।”

जीजू कुछ पल बस देखता रहा। फिर उसकी आवाज में हैरानी और उत्तेजना दोनों थी,
“बेबी… थैंक यू।”

दीदी ने एक बार मेरी तरफ देखा। उसकी आँखों में एक अजीब सा संकल्प था। उसने पहले ही मुझे साफ कह दिया था –
“मुझे कितना भी दर्द हो, तुम वीडियो मत रोकना।”

मैंने सिर्फ सिर हिलाया। कैमरा स्थिर रखा।

जीजू ने धीरे से उस प्लास्टिक को पकड़ा और एक झटके में हटा दिया। दीदी की चिकनी, गोल गांड अब पूरी तरह नंगी थी। बीच में गुलाबी छेद हल्का सिकुड़ा हुआ दिख रहा था। जीजू ने दोनों हाथों से उसके कूल्हों को सहलाया। फिर उसने लुब्रिकेंट की ट्यूब उठाई, काफी मात्रा में निकालकर अपनी उँगलियों पर लगाया और दीदी की गांड के छेद पर धीरे-धीरे मलने लगा। एक उँगली धीरे से अंदर धकेली। दीदी की कमर में हल्की सिहरन दौड़ी।

“आह…” उसकी आवाज निकली।

जीजू ने दो उँगलियाँ कर दीं। अंदर-बाहर करने लगा। दीदी का सिर तकिए पर रखा हुआ था। उसकी साँसें तेज हो रही थीं। कुछ देर तक जीजू ने उसे तैयार किया। फिर उसने अपना लंड पकड़ा – जो पहले से ही पूरी तरह खड़ा था – और सिर को दीदी की गांड के छेद पर लगाया।

“ready हो?” उसने पूछा।

दीदी ने सिर हिलाया।
“करो…”

जीजू ने कमर से दबाव दिया। लंड का मोटा सिर धीरे-धीरे अंदर धँसने लगा। दीदी की मुट्ठियाँ तकिया कस गईं। उसके मुँह से एक लंबी, दबी हुई आवाज निकली —

“आआह्ह्ह… दर्द… धीरे…”

जीजू रुका नहीं। उसने और धक्का दिया। आधा लंड अंदर चला गया। दीदी की गांड फैल गई। उसकी आवाज अब चीख में बदलने लगी।

“आआआह्ह्ह… बहुत मोटा… निकालो… नहीं… आआह्ह…”

जीजू ने उसके कूल्हे और कस लिए और एक लंबा धक्का मारकर पूरा १२ इंच अंदर कर दिया। दीदी की चीख कमरे में गूँज गई। उसका शरीर आगे की तरफ झपट पड़ा, लेकिन जीजू ने कमर पकड़कर उसे रोके रखा। पूरा लंड उसकी गांड में धँसा हुआ था। दीदी जोर-जोर से साँसें ले रही थी। आँखें बंद थीं, माथा पसीने से तर।

“अब निकलेगा…” जीजू ने भारी आवाज में कहा।

उसने धीरे-धीरे बाहर खींचा – लगभग पूरा – फिर जोर से अंदर धकेल दिया। दीदी फिर से चीख पड़ी। जीजू ने रफ्तार पकड़ ली। पहले मध्यम, फिर तेज। हर धक्के के साथ दीदी की गांड काँप रही थी। आवाज “थप-थप-थप” की तेज गूँज के साथ मिल रही थी। दीदी की चीखें अब नियंत्रण से बाहर थीं।

“आआह्ह्ह… दर्द… बहुत दर्द… धीरे… प्लीज… आआह्ह्ह…”

लेकिन जीजू की रफ्तार कम नहीं हुई। वो जोर-जोर से पेल रहा था। पूरा लंड हर बार जड़ तक जा रहा था। दीदी के स्तन हर धक्के के साथ नीचे की तरफ झूल रहे थे। उसने तकिया मुँह में दबा लिया था, लेकिन आवाजें दब नहीं पा रही थीं। कभी-कभी वो “नहीं” कहती, कभी सिर्फ रोती। आँसू तकिए को भिगो रहे थे।

मैं कैमरा थामे यह सब रिकॉर्ड कर रही थी। मेरी अपनी साँसें तेज हो चुकी थीं। जाँघों के बीच अजीब सी गर्मी और नमी महसूस हो रही थी। दीदी की चीखें, जीजू के जोरदार धक्के, गांड के फैलने का नजारा… सब कुछ इतना कच्चा और तीव्र था कि मेरी चूत खुद-ब-खुद गीली होती जा रही थी। पैंटी पूरी तरह भीग चुकी थी। लेकिन मैंने कैमरा नहीं रोका। दीदी की हिदायत याद थी।

पंद्रह मिनट हो चुके थे। जीजू ने दीदी के बाल पकड़ लिए और पीछे खींचते हुए और तेज धक्के मारने लगा। दीदी का चेहरा ऊपर उठ गया। उसकी आँखें आधी खुली हुई थीं, मुँह खुला। आवाजें अब और तेज हो गई थीं।

“आआह्ह्ह… फट गई… बहुत जोर से… आआह्ह… छोड़ो… नहीं…”

जीजू ने एक हाथ उसकी गांड पर थप्पड़ मारा। फिर दूसरा। हर थप्पड़ पर दीदी की चीख और तेज हो जाती। उसकी गांड लाल पड़ने लगी थी। जीजू बिना रुके पेलता जा रहा था। पसीना उसके शरीर पर चमक रहा था। दीदी की टाँगें काँप रही थीं। वो बार-बार आगे गिरने लगती, लेकिन जीजू उसे कमर से पकड़कर संभाल लेता।
तीस मिनट के करीब दीदी की आवाज बैठने लगी थी। वो अब सिर्फ सिसकियाँ और अधूरी चीखें ले रही थी। “आह… आह… दर्द… आआह…”। जीजू ने पोजीशन थोड़ी बदली। उसने दीदी के कूल्हों को और ऊँचा किया और और गहरे धक्के मारने लगा। लंड हर बार पूरा गायब हो जाता और फिर बाहर आता। दीदी की गांड पूरी तरह खुल चुकी थी। बीच-बीच में हल्की सफेद झाग जैसी चीज भी दिख रही थी।

मैं कैमरा हिलाए बिना देखे जा रही थी। मेरी चूत अब पूरी तरह भीग चुकी थी। पैंटी चिपकी हुई थी। जाँघों के अंदर नमी फैल रही थी। मैं खुद को काबू में रखने की कोशिश कर रही थी, लेकिन शरीर में गर्मी बढ़ती जा रही थी। दीदी की हर चीख मेरे अंदर तक उतर रही थी।

चालीस मिनट हो रहे थे। जीजू की साँसें हाँफने लगी थीं। उसने रफ्तार और बढ़ा दी। धक्के बहुत तेज और छोटे हो गए। दीदी अब लगभग बेहोशी की हालत में थी। उसका शरीर ढीला पड़ रहा था। सिर्फ गले से निकलने वाली सिसकियाँ बच रही थीं। जीजू ने आखिरी कुछ धक्के बहुत जोर से मारे। पूरा लंड अंदर धँसाए रखा और जोर से काँपते हुए निकलने लगा। दीदी की गांड में गर्म तरल महसूस हुआ। उसने एक लंबी, काँपती हुई सिसकी भरी और बेड पर आगे की तरफ ढेर हो गई।

जीजू कुछ पल और अंदर रहा। फिर धीरे से लंड बाहर निकाला। दीदी की गांड खुली और लाल थी। सफेद तरल धीरे-धीरे बाहर निकल रहा था। दीदी मुँह के बल गिरी हुई जोर-जोर से साँसें ले रही थी। आँसू और पसीना मिले हुए थे। उसका पूरा शरीर काँप रहा था।

जीजू ने साँस सँभालते हुए उसके कूल्हे पर हाथ फेरा।
“बेबी… थैंक यू। आज वाला सरप्राइज… कभी नहीं भूलूँगा।”

दीदी ने सिर्फ सिसकी भरी। वो कुछ बोलने की हालत में नहीं थी।

मैं अभी भी कैमरा थामे खड़ी थी। रिकॉर्डिंग चल रही थी। मेरी चूत पूरी तरह भीगी हुई थी। पैंटी गीली चिपक रही थी। जाँघों के बीच नमी साफ महसूस हो रही थी। मैंने धीरे से साँस ली। हाथ काँप रहे थे। जो कुछ अभी देखा था – ४५ मिनट की बेरहम गांड की चुदाई – वो मेरे दिमाग में बार-बार घूम रहा था।

कमरे में अब सिर्फ तीनों की तेज साँसें गूँज रही थीं। दीदी थककर गिरी हुई थी। जीजू उसके बगल में बैठकर पसीना पोंछ रहा था। और मैं… कैमरा थामे, भीगी हुई, सब कुछ रिकॉर्ड करती हुई खड़ी थी।

एनिवर्सरी रात अभी खत्म नहीं हुई थी।
गांड वाली लंबी चुदाई खत्म होने के बाद कमरे में भारी साँसें चल रही थीं। दीदी बेड पर मुँह के बल गिरी हुई थी। उसकी गांड अभी भी हल्की काँप रही थी और लाल थी। जीजू उसके बगल में बैठकर पसीना पोंछ रहा था। मैं कैमरा थामे खड़ी रही। रिकॉर्डिंग अभी भी चालू थी।

जीजू ने मेरी तरफ देखा और पूछा,
“वीडियो कैसा आया?”

मैंने हल्के गले से जवाब दिया,
“अच्छा… पूरा आ गया है।”

जीजू ने सिर हिलाया। फिर उसने दीदी की तरफ इशारा करते हुए कहा,
“अब इसकी बारी।”

दीदी ने तुरंत सिर उठाया। आँखें अभी भी लाल थीं।
“नहीं… कल।”

दोनों ने कुछ देर कम आवाज में बात की। कुछ शब्द कोड जैसे लग रहे थे, मुझे पूरा समझ नहीं आया। बस इतना साफ सुनाई दिया कि जीजू जोर दे रहा था और दीदी मना कर रही थी।

जीजू ने फिर कहा,
“एक और बार कर दूँ गांड में?”

दीदी ने सिर हिलाया,
“नहीं। अब सूज गई है। दर्द हो रहा है। कल कर लेना। अभी नहीं।”

जीजू थोड़ी देर चुप रहा। फिर थोड़े जोर से बोला,
“चूत में तो नहीं हो रहा है ना?”

दीदी ने कुछ नहीं कहा। बस साँस छोड़ी। जीजू ने मेरी तरफ देखा और साफ आदेश दिया,
“वीडियो ऑन कर। चालू रख।”

मैंने कैमरा फिर से ठीक किया। दिल जोर-जोर से धड़क रहा था।

जीजू बेड पर उठकर बैठ गया। उसका लंड अभी पूरी तरह नरम नहीं हुआ था। दीदी ने धीरे से करवट ली और उसके पास आ गई। बिना कुछ बोले उसने लंड को हाथ में लिया और मुँह में ले लिया। पहले सिर्फ सिर। फिर धीरे-धीरे और अंदर। वो जोर-जोर से चूसने लगी। गाल धँस रहे थे। लार की आवाज साफ आ रही थी। जीजू का हाथ उसके सिर पर था। वो दीदी के बालों को सहला रहा था।

कुछ ही देर में लंड फिर से पूरी तरह खड़ा हो गया – मोटा, तना हुआ, १२ इंच। दीदी ने उसे मुँह से निकाला। लार की चमक उस पर फैल रही थी। जीजू ने उसे दबाकर लिटा दिया। दीदी की टाँगें खुद ही फैल गईं। जीजू ने लंड का सिर उसकी चूत पर लगाया और एक ही धक्के में काफी अंदर डाल दिया।

“आह्ह्ह…” दीदी की आवाज निकली।

इस बार उसकी आवाज में दर्द नहीं, मजा था। जीजू ने और धक्का दिया। पूरा लंड अंदर चला गया। दीदी की कमर उठ गई। जीजू ने धक्के शुरू कर दिए – जोर के, गहरे और नियमित। दीदी की आवाजें अब खुली हुई थीं।

“आह… हाँ… जोर से… वहीं… अच्छा लग रहा है…”

जीजू ने पहले मिशनरी में ही काफी देर तक मारा। दीदी के पैर उसके कंधों पर थे। हर धक्के के साथ उसके स्तन काँप रहे थे। दीदी खुद कमर मिला रही थी। उसकी उँगलियाँ जीजू की पीठ में गड़ रही थीं। मैं कैमरा थामे देख रही थी। मेरी अपनी चूत पहले से भीगी हुई थी, अब और तड़पने लगी थी। लंड का वो मोटा आकार बार-बार दीदी की चूत में गायब हो रहा था और निकल रहा था। नजारा इतना कच्चा था कि मेरी जाँघें सिकुड़ रही थीं।

करीब बीस-पच्चीस मिनट मिशनरी के बाद जीजू ने दीदी को पलटा। डॉगी स्टाइल। दीदी ने खुद ही गांड ऊपर कर ली। जीजू ने पीछे से लंड एक झटके में अंदर कर दिया और जोर-जोर से पेलने लगा। थप-थप की आवाज तेज हो गई। दीदी की आवाजें भी।

“आह्ह्ह… और जोर से… फाड़ दो… आज पूरा मजा दो…”

जीजू उसके बाल पकड़कर पीछे खींच रहा था। कभी गांड पर थप्पड़ मारता। दीदी हर थप्पड़ पर और जोर से आहें भरती। उसकी चूत पूरी तरह खुल चुकी थी। लंड आसानी से अंदर-बाहर हो रहा था। मैं देखे जा रही थी। मेरी पैंटी अब पूरी तरह गीली चिपक चुकी थी। चूत तड़प रही थी। बार-बार मन करता कि मैं भी वहाँ हूँ, लेकिन मैं सिर्फ रिकॉर्ड कर रही थी।

पचास मिनट के करीब जीजू की साँसें बहुत तेज हो गईं। उसने दीदी की कमर जकड़ ली और गहरे धक्के मारते हुए अंदर ही निकलने लगा। दीदी ने भी उसी समय जोर से सिसकी भरी। दोनों का शरीर काँप रहा था। लेकिन जीजू ने लंड बाहर नहीं निकाला। थोड़ी देर रुककर उसने फिर से धक्के शुरू कर दिए। दूसरा राउंड बिना रुके चालू हो गया।

दीदी हैरान रह गई, लेकिन मना नहीं किया।
“फिर से…? आह… हाँ… चलता रह…”

जीजू ने बिना रुके चोदना जारी रखा। पोजीशन बदलता रहा – कभी डॉगी, कभी फिर से मिशनरी, कभी दीदी को साइड में करके। लंड कभी बाहर नहीं निकला। सिर्फ गति बदलती रही। दीदी की आवाजें अब और खुली हुई थीं। वो खुद मांग रही थी।

“और तेज… मत निकालना… अंदर ही… आआह्ह…”

समय बीतता जा रहा था। पचास… पचपन मिनट… लगभग दो घंटे का सिलसिला बन चुका था। मैं लगातार देख रही थी। मेरी चूत अब बहुत तड़प रही थी। लंड का वो मोटा, चमकदार रूप बार-बार दीदी के अंदर गायब होते देखकर शरीर में गर्मी लहरें मार रही थी। जाँघें भीग चुकी थीं। पैंटी पूरी तरह गीली थी। मैंने कई बार पैर बदले, लेकिन तड़प कम नहीं हुई।

आखिर में जीजू ने फिर से जोरदार धक्कों के साथ अंदर ही दूसरा राउंड भी खत्म किया। दीदी उसके नीचे पूरी तरह ढीली पड़ गई। दोनों की साँसें हाँफ रही थीं। शरीर पसीने से चमक रहे थे। कमरे में सेक्स की गंध फैल चुकी थी।
जीजू ने धीरे से लंड बाहर निकाला। दीदी की चूत से सफेद तरल बाहर निकल रहा था। वो आँखें बंद किए लेटी हुई थी। चेहरे पर थकान और संतुष्टि दोनों थे।

मैंने कैमरा धीरे से नीचे किया। हाथ काँप रहे थे। मेरी चूत अभी भी तड़प रही थी। लंड का नजारा आँखों के सामने से हट नहीं रहा था। मैंने गहरी साँस ली। कमरे में अब सिर्फ तीनों की भारी साँसें बची थीं।

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