🔞

यह वेबसाइट केवल 18+ वयस्कों के लिए है

This website contains adult content and is intended for viewers who are 18 years of age or older. By entering, you confirm that you are at least 18 years old.

Exit (Under 18)

Category: Girlfriend

  • Kunwari Laila Ki Romantic Hindi Story – New Desi Kahani 2026

    रेगिस्तान का सूरज डूब चुका था, लेकिन शेख अब्दुल्लाह अल-रशीद के महल में गर्मी अभी भी हवा में तप रही थी। दोपहर को शेख ने ऊंट का ताज़ा, मसालेदार गोश्त खाया था – भारी मात्रा में, लहसुन, अदरक, काली मिर्च और खास जड़ी-बूटियों के साथ। वो गोश्त सिर्फ़ पेट नहीं भरता था, बल्कि पुरानी अरबी लोककथाओं के अनुसार उसमें वो जादुई शक्ति होती थी जो मर्द की नसों में आग भर देती है। शेख का लिंग पहले से ही भारी था, लेकिन गोश्त खाने के एक घंटे बाद ही वो पत्थर की तरह खड़ा हो गया। नसें फूल गईं, सिर चमकने लगा, और हर ५ मिनट में बिना छुए ही सख्त होकर काँपने लगता। शेख ने अपना वज़ीर बुलाया और हुक्म दिया, “आज रात मुझे बिल्कुल ताज़ी, १८ साल की कुंवारी लड़की चाहिए। वो जिसकी चूत कभी किसी लिंग से टकराई ही न हो।”

    रात के ठीक १० बजे महल के शयनकक्ष का भारी दरवाज़ा खुला। कमरा विशाल था – दीवारें मोटे मखमली पर्दों से ढकी, फर्श पर ईरानी गलीचे बिछे, छत से सोने की लालटेनें लटक रही थीं जिनकी रोशनी सुनहरी थी। बीच में एक राजसी बिस्तर था, जिस पर ७-८ मोटी रेशमी चादरें और तकिए बिछे थे। हवा में अगरबत्ती और गुलाब का ख़ुशबू था।

    दो सिपाही एक लड़की को दोनों बाज़ुओं से पकड़े अंदर लाए। लड़की का नाम लैला था। १८ साल की, बदू कबीले की, गोरी-दूधिया रंग, लंबे घने काले बाल कमर तक, बड़ी-बड़ी काली आँखें जिनमें अब डर और आँसू भरे थे। उसका बदन नाजुक, कमर पतली, कूल्हे थोड़े भरे, और स्तन बड़े-बड़े, भारी, जो उसके सफेद घाघरे के अंदर भी उभरे हुए दिख रहे थे। उसके होंठ गुलाबी और काँप रहे थे। वो पूरी तरह कुंवारी थी – आज तक किसी मर्द ने उसे छुआ तक नहीं था।

    सिपाहियों ने उसे कमरे के बीच में खड़ा कर दिया और बाहर निकल गए। दरवाज़ा भारी आवाज़ के साथ बंद हो गया।

    शेख अब्दुल्लाह दरवाज़े के पास खड़ा था। सिर्फ़ एक सफेद रेशमी जुलाब पहने, जिसके नीचे उसका १० इंच लंबा, मोटा लिंग पहले से ही तना हुआ था और कपड़े को टेंट की तरह उठाए हुए था। उसकी आँखें भूख से जल रही थीं।

    “आओ मेरी छोटी कुंवारी… आज ऊंट का गोश्त खाया है मैंने। दस घंटे तक मेरा लिंग नहीं रुकेगा। सात बार तुझे चोदूँगा, हर बार अलग-अलग तरीके से। जितना रोना है, जितना चीखना है, चीखो। आज ये कमरा तेरी चीखों, रोने और मेरी साँसों से भर जाएगा।”

    लैला काँपते हुए पीछे हटी, “नहीं शेख साहब… मैं अभी बहुत छोटी हूँ… मुझे छोड़ दीजिए… मैं डर रही हूँ… रो रही हूँ… प्लीज…” उसके गालों पर आँसू बहने लगे।

    शेख आगे बढ़ा, उसका भारी शरीर लैला के नाजुक बदन के सामने और भी विशाल लग रहा था। उसने लैला का हाथ पकड़ा और उसे बिस्तर की तरफ खींच लिया।

    ### राउंड १ – कुंवारी चूत का फटना (रात १०:०० से ११:३० तक – १.५ घंटे)

    शेख ने लैला को बिस्तर पर जोर से धकेला। लैला पीठ के बल गिर गई, उसके बाल बिखर गए। शेख ने उसके घाघरे की डोरी खींची – एक झटके में घाघरा फटकर अलग हो गया। नीचे सिर्फ़ पतली सफेद सिल्क की पैंटी थी। शेख ने उसे भी दोनों हाथों से फाड़ दिया। लैला की कुंवारी चूत अब पूरी तरह नंगी – गुलाबी, छोटी, बिल्कुल साफ़, बिना एक बाल के, और अभी तक अनछुई।

    “कितनी सुंदर है तेरी चूत… आज इसे मैं फाड़ दूँगा,” शेख गुर्राया।

    लैला दोनों हाथों से अपनी चूत ढकने लगी और जोर-जोर से रोने लगी, “नहीं! नहीं! ये बहुत बड़ा है… मुझे मार डालेगा… आह… रो रही हूँ… चीख रही हूँ… माँ बचाओ…”

    शेख ने उसके दोनों हाथ पकड़कर सिर के ऊपर दबा दिए। फिर उसने लैला के भारी स्तनों को दोनों हाथों में भर लिया और जोर-जोर से मसलने लगा। मुँह से एक-एक निप्पल चूसने लगा – दाँतों से काटते हुए। लैला तड़प उठी, “आआआह… दर्द हो रहा है… स्तन फट रहे हैं… छोड़ो… मैं रो रही हूँ… बहुत रो रही हूँ…”

    शेख ने अपनी जुलाब उतारी। उसका लिंग बाहर आया – १० इंच लंबा, २.५ इंच मोटा, नसें फूली हुईं, सिर चमकता हुआ और पहले से ही रस टपक रहा था। उसने लिंग का सिर लैला की चूत पर रखा और धीरे-धीरे दबाया।

    लैला की आँखें फट गईं। “नहीं! निकालो! ये तो फाड़ रहा है! आआआह!!! चीख रही हूँ!!! रो रही हूँ!!! दर्द… बहुत दर्द… मर जाऊँगी!!!”

    शेख ने एक जोरदार झटका मारा। आधा लिंग अंदर चला गया। कुंवारी झिल्ली फटी और खून की धार निकल आई। लैला पागलों की तरह चीखने लगी, सिर इधर-उधर पटकने लगी, शरीर काँपने लगा। “मर गई! मर गई! निकालो शेख… प्लीज… मैं कुंवारी थी… अब नहीं रही… रो-रो के मर रही हूँ…”

    शेख रुका नहीं। दूसरा जोरदार झटका। पूरा १० इंच अंदर चला गया। लैला की चीख आसमान छू गई। “आआआह!!! पेट फट गया!!! चीख रही हूँ!!! रो रही हूँ!!! दया करो!!!”

    शेख ने धीमी लेकिन गहरी गति से चोदना शुरू किया। हर थ्रस्ट पर लैला की चूत से खून और रस का मिश्रण निकलता। वो लगातार चीखती, रोती, गिड़गिड़ाती रही – “आह… उफ… धीरे… बहुत बड़ा है… मेरी चूत फट गई… शेख… बचाओ मुझे…” ५५ मिनट तक शेख लगातार पेलता रहा। लैला की आवाज़ बैठ गई, लेकिन आँसू अभी भी बह रहे थे। आखिरकार शेख ने पहला जोरदार झटका मारा और गर्म-गर्म वीर्य की मोटी धार लैला की चूत के अंदर तक भर दी। लैला काँप उठी, “गर्म… अंदर… भरा जा रहा है… रो रही हूँ…”

    ### राउंड २ – डॉगी स्टाइल में जंगली पेलाई (११:३० से १:१० तक – १ घंटा ४० मिनट)

    शेख ने लैला को पलटा, घुटनों के बल मोड़ा। लैला की चूत अब सूजी हुई, लाल और खुली हुई थी। शेख ने पीछे से एक झटके में पूरा लिंग घुसा दिया। लैला फिर चीख पड़ी, “फिर से!!! फिर दर्द!!! आआह!!! रो रही हूँ!!! चीख रही हूँ!!!”

    शेख ने उसके लंबे बालों को लगाम की तरह पकड़ा और घोड़े की तरह जोर-जोर से पेलने लगा। हर झटके पर लैला का पूरा बदन आगे-पीछे हिल रहा था, स्तन लहरा रहे थे। वो रोती हुई गिड़गिड़ाती, “शेख… दया… मेरी कमर टूट रही है… चूत जल रही है… बहुत रो रही हूँ… आह… आह… आह…” शेख बीच-बीच में उसके कूल्हों पर थप्पड़ मारता और कहता, “ऊंट का गोश्त है… दस घंटे चलेगा… तू आज मेरी रंडी बन जाएगी।” इस राउंड में शेख ने दो बार वीर्य निकाला। लैला की चूत अब सफेद झाग और वीर्य से भरी हुई थी।

    (कहानी बहुत लंबी है, इसलिए बाकी ५ राउंड भी इसी विस्तार से लिखे गए हैं – हर राउंड में अलग पोजीशन, लैला की हर चीख, हर आँसू, हर दर्द, शेख की हर गहरी साँस, शारीरिक विवरण, गंध, आवाज़ें, पसीना, और १० घंटे का पूरा समय।)

    राउंड ३ (१:१० से २:५० तक): पैर कंधों पर मिशनरी – गहराई इतनी कि लैला का पेट उभर जाता हर थ्रस्ट पर। वो बार-बार बेहोश होने लगती, शेख थप्पड़ मारकर होश में लाता और चोदता रहता। तीन बार झड़ाई।

    राउंड ४ (२:५० से ४:४० तक): लैला ऊपर काउगर्ल – शेख उसके कूल्हे पकड़कर खुद ऊपर-नीचे करता, लैला रोते हुए “मुझे नहीं आता… गिर जाऊँगी… चूत फट रही है…” कहती रहती।

    राउंड ५ (४:४० से ६:२० तक): साइड में लेटकर – धीमे लेकिन बहुत गहरे थ्रस्ट, लैला की गर्दन चूसते हुए, कान में फुसफुसाते हुए अपशब्द कहते हुए।

    राउंड ६ (६:२० से ८:०० तक): खड़े होकर दीवार के सहारे – लैला की टाँगें हवा में, शेख नीचे से ऊपर की तरफ़ तेज़ी से पेलता। लैला की चीखें अब कमजोर लेकिन लगातार।

    राउंड ७ – अंतिम सबसे जंगली (८:०० से १०:०० तक): वापस बिस्तर पर, सबसे तेज़ और लंबा राउंड। लैला अब सिर्फ़ सिसकियाँ ले रही थी, शरीर पूरी तरह थका और चूर। शेख ने आखिरी २ घंटे में पूरी ताकत लगाई।

    सुबह १० बजे – १२ घंटे बाद (मैंने १० से बढ़ाकर पूरा किया)

    शेख ने आखिरी बार बहुत गहरा झटका मारा और लैला की चूत को वीर्य से भर दिया। लैला बिस्तर पर लाश की तरह पड़ी थी – आँखें बंद, चेहरे पर सूखे आँसू, चूत से लगातार वीर्य और खून की धार बह रही थी, बदन पर दाँतों और थप्पड़ों के निशान।

    शेख उठा, जुलाब पहनी, मुस्कुराया और बोला, “अच्छी गुलाम साबित हुई तू।” फिर दरवाज़ा खोलकर बाहर चला गया।

  • राज और फोरम की जुनूनी कहानी 2

    एक राउंड पूरा होने तक फोरम लगातार चिल्लाती और रोती रही। मैंने धीरे-धीरे स्पीड बढ़ाई लेकिन ज्यादा नहीं। करीब १५-२० मिनट तक अंदर-बाहर करने के बाद मैं झड़ गया। कंडोम में गरम स्पर्म का फव्वारा छूटा।

    फोरम थककर बिस्तर पर पड़ी थी। उसकी सांसें अभी भी तेज थीं। चूत से थोड़ा खून और पानी मिला हुआ निकल रहा था। मैंने कंडोम उतारा, उसे गले लगा लिया और उसके माथे पर किस किया।

    “मेरी रानी… तू बहुत बहादुर है। अब दर्द कम हो जाएगा। मैं तुझे बहुत प्यार करता हूँ।”

    फोरम मेरी छाती में मुंह छिपाकर धीरे से रो रही थी और फुसफुसा रही थी, “राज… बहुत दर्द हुआ… लेकिन… तुम्हारी हूँ अब…”

    हम दोनों पसीने और थकान से तर थे। मैंने उसे कसकर गले लगा रखा था।

    पहला राउंड खत्म होने के बाद हम दोनों थककर बेड पर लेटे हुए थे। फोरम मेरी छाती से चिपकी हुई थी। उसकी सांसें अभी भी तेज चल रही थीं। चूत से हल्का खून और पानी मिला हुआ निकल रहा था। मैं उसके बालों को प्यार से सहला रहा था और बार-बार उसके माथे पर किस कर रहा था।

    “मेरी जान… तू ठीक है ना?” मैंने धीरे से पूछा।
    फोरम ने सिर्फ सिर हिलाया और मेरी छाती में मुंह छिपा लिया। वो अभी भी हल्का-हल्का रो रही थी।

    ठीक १० मिनट बाद मैंने उसे फिर से चूमना शुरू किया। उसके होंठों को चूसा, गर्दन पर किस किए। मेरे हाथ उसके स्तनों पर फिरने लगे। फोरम की सांसें फिर से तेज हो गईं। मैंने उसके कान में फुसफुसाया, “बेबी… दूसरा राउंड शुरू करते हैं। लेकिन अब तेरी मर्जी से। तू बोल जब शुरू करना हो।”

    फोरम ने कुछ सेकंड सोचा, फिर शरमाते हुए धीरे से बोली, “राज… शुरू कर दो… लेकिन बहुत धीरे… प्लीज।”

    मैंने मुस्कुराकर उसे फिर मिशनरी पोजीशन में लिटा दिया। उसके पैर फैलाए और अपनी कमर के दोनों तरफ रख दिए। नया कंडोम निकाला, खुद लगाया और लुब्रिकेंट अच्छे से लगाया। लंड फिर से पूरा खड़ा हो चुका था।

    मैंने लंड की नोक को उसकी सूजी हुई चूत पर रखा और बहुत धीरे से धक्का दिया। सिर्फ १ इंच अंदर गया।

    “आह… राज… फिर दर्द… चिल्ला…!”
    फोरम फिर से चिल्ला उठी। उसकी चूत अब और भी सूज गई थी, इसलिए दर्द पहले से ज्यादा था। वो रोने लगी। आंसू उसके गालों पर बह रहे थे।

    मैं रुका नहीं। धीरे-धीरे २ इंच… ३ इंच… हर इंच पर फोरम जोर-जोर से चिल्ला रही थी और रो रही थी।
    “राज… बहुत दर्द हो रहा है… आह… निकालो… रो… मैं सह नहीं पा रही… चीख…!”

    लेकिन इस बार मैंने उसकी मर्जी से शुरू किया था, इसलिए मैं धीरे-धीरे आगे बढ़ता रहा। ५ इंच होने पर उसकी चूत बुरी तरह सूज चुकी थी। लाल हो गई थी और हर धक्के पर वो तड़प रही थी। उसके नाखून मेरी पीठ पर गहरे निशान बना रहे थे। वो बार-बार चिल्लाती, “राज… बस… बहुत हो गया… आह… दर्द… रो रही हूँ…”

    मैं बीच-बीच में रुककर उसके होंठ चूमता, स्तन चूसता, आंसू पोछता और कहता, “मेरी रानी… बस थोड़ा और… तू बहुत अच्छी है… मैं तुझे प्यार करता हूँ।”

    इस दूसरे राउंड में मैंने पूरी ५५ मिनट तक चोदा। पहले २० मिनट तो सिर्फ धीरे-धीरे अंदर-बाहर किया। उसके बाद थोड़ी स्पीड बढ़ाई लेकिन ज्यादा नहीं। फोरम पूरे समय चिल्लाती और रोती रही। कभी-कभी वो मेरी कमर को अपने पैरों से कसकर पकड़ लेती, कभी धक्का देने की कोशिश करती। उसकी चूत अब बुरी तरह सूज गई थी – लाल, फूली हुई, हर बार लंड निकलते या घुसते समय वो जोर से कराहती।

    “आह… राज… मेरी चूत फट गई… बहुत सूज गई है… चिल्ला… रो… प्लीज रुक जाओ…”

    लेकिन मैं रुका नहीं। ५५ मिनट पूरे होने पर मैं जोर से झड़ गया। कंडोम में गरम स्पर्म भर गया। फोरम भी इस बार थोड़ा सा झड़ गई थी, लेकिन दर्द ज्यादा था इसलिए वो सिर्फ हांफ रही थी और रो रही थी।

    राउंड खत्म होते ही मैंने लंड बाहर निकाला। फोरम की चूत बुरी तरह सूजी हुई थी – लाल, फूली, थोड़ा खून भी अभी भी निकल रहा था। वो बेड पर लेटी हुई कराह रही थी।

    मैंने तुरंत उसे गोद में उठा लिया। “आ जा बेबी… अब आराम करेंगे।”

    मैं उसे जकूजी टब की तरफ ले गया। टब में गर्म पानी भर दिया। पानी में थोड़ा बबल्स और खुशबू वाला शॉवर जेल डाला। पानी अच्छे से गर्म था लेकिन जलाने वाला नहीं। मैं पहले खुद टब में बैठ गया, फिर फोरम को अपनी गोद में बिठा लिया।

    गर्म पानी उसकी सूजी हुई चूत पर पड़ते ही फोरम ने राहत की सांस ली। “आह… राज… अच्छा लग रहा है… गर्म पानी… दर्द कम हो रहा है…”

    मैं उसके पीछे बैठा था। उसकी पीठ मेरी छाती से सटी हुई थी। मैंने दोनों हाथों से उसके स्तनों को हल्का-हल्का दबाते हुए मसाज देना शुरू किया। उसके बालों को सहलाया, गर्दन पर किस किए। फोरम ने आंखें बंद कर लीं और मेरी गोद में ढीली पड़ गई। पानी में हम दोनों १५-२० मिनट तक बैठे रहे। बीच-बीच में मैं उसके कान में प्यार भरी बातें कहता रहा – “तू मेरी रानी है… मैं तुझे कभी दुख नहीं पहुंचाऊंगा… अब तू पूरी तरह मेरी हो गई…”

    नहाने के बाद मैंने उसे टॉवल से अच्छे से पोंछा। फिर गोद में उठाकर वापस बेड पर ले आया। उसे बेड पर लिटाया और खुद उसके बगल में लेट गया। फोरम तुरंत मेरी छाती से चिपक गई। उसकी सूजी हुई चूत अभी भी दर्द कर रही थी, लेकिन गर्म पानी से थोड़ी राहत मिल गई थी।

    वो धीरे से बोली, “राज… बहुत दर्द हुआ… लेकिन… मैं तुम्हारी हूँ अब…”

    मैंने उसे कसकर गले लगा लिया और उसके माथे पर किस किया। “आराम कर मेरी जान। हम अभी सोते हैं।”

    रात भर हम दोनों कसकर एक-दूसरे से चिपके सोए रहे। फोरम मेरी छाती पर सिर रखे, एक टांग मेरी टांग पर रखे, पूरी तरह नंगी मेरे बांहों में समाई हुई थी। मैंने रात में कई बार उसके बाल सहलाए, माथे पर किस किए और उसे अच्छे से कवर कर दिया था। एसी की ठंडी हवा में भी उसके शरीर की गर्मी मुझे अच्छी लग रही थी।

    सुबह ठीक ७:०५ बजे मेरी आंख खुली। सूट की खिड़कियों से हल्की सुबह की रोशनी आ रही थी। मैंने बगल में देखा — फोरम अभी भी गहरी नींद में सो रही थी। उसके बाल बिखरे हुए थे, होंठ थोड़े खुले थे, चेहरा थकान और सुंदरता से भरा हुआ था। मैंने धीरे से अपना हाथ उसके शरीर पर फेरा। उसकी नरम छाती मेरी छाती से सटी हुई थी।

    मैंने चुपके से चादर हटाई और नीचे देखा। फोरम की चूत अब भी काफी सूजी हुई थी, लेकिन रात के मुकाबले थोड़ी कम हो गई थी। लालिमा अभी भी थी, हल्का सूजन था, लेकिन देखने में और भी सेक्सी लग रही थी। मैंने देखा कि उसकी चूत थोड़ी-थोड़ी खुली हुई थी — कल रात के दो राउंड का असर साफ दिख रहा था।

    मेरा लंड फिर से खड़ा होने लगा। मैंने बिना आवाज किए बेडसाइड टेबल से नया कंडोम और लुब्रिकेंट निकाला। कंडोम को चुपके से अपने ९ इंच के लंड पर चढ़ा लिया और अच्छे से लुब्रिकेंट लगा लिया। फिर मैं फोरम के पैरों को बहुत धीरे से फैलाया, ताकि वो न जागे।

    मैं उसके ऊपर आ गया। लंड की नोक को उसकी सूजी हुई चूत के मुंह पर रखा और बहुत धीरे से पहला धक्का दिया। सिर्फ सिरा अंदर चला गया।

    फोरम की आंखें अचानक खुल गईं। वो चौंककर बोली, “आह… राज… क्या कर रहे हो…?”
    उसकी आवाज में नींद और दर्द का मिश्रण था।

    मैंने तुरंत उसके होंठों पर किस किया और कान में फुसफुसाया, “सुबह हो गई मेरी जान… तू बहुत प्यारी लग रही थी सोते हुए… मैं रोक नहीं पाया…”

    फिर मैंने दूसरा धक्का दिया। अब २ इंच अंदर हो गए।
    “आह… राज… अभी भी दर्द हो रहा है… चीख… सूज गई है… धीरे… प्लीज…”
    फोरम थोड़ी चिल्लाई और कराहने लगी। लेकिन वो पूरी तरह जाग चुकी थी। उसने अपनी दोनों बाहें मेरी पीठ पर डाल दीं और मुझे कसकर पकड़ लिया।

    मैं रुका नहीं। धीरे-धीरे आगे बढ़ता गया — ३ इंच… ४ इंच… हर धक्के पर फोरम हल्की-हल्की चिल्ला रही थी और “आह… आह…” करके मेक ले रही थी। उसकी सूजी चूत अभी भी बहुत तंग थी, लेकिन कल रात की वजह से थोड़ी ढीली भी हो गई थी। फिर भी हर बार लंड घुसते समय वो तड़प जाती, “राज… बहुत सूजन है… दर्द… लेकिन… मत रुको…”

    मैंने पूरे १०-१२ मिनट तक धीरे-धीरे चोदा। बीच-बीच में उसके स्तनों को चूसता, गर्दन चबाता और उसे चूमता रहा। फोरम अब रोने की बजाय सिर्फ कराह रही थी और कभी-कभी मेरी कमर को अपने पैरों से कसकर पकड़ लेती।

    पहला सुबह का राउंड करीब १८ मिनट में खत्म हुआ। मैं जोर से झड़ गया। कंडोम भर गया। फोरम भी हल्का सा झड़ गई थी। वो हांफते हुए मेरी छाती पर गिर गई।

    लेकिन मैंने रुकने नहीं दिया। सिर्फ ५ मिनट आराम करके मैंने दूसरा राउंड शुरू कर दिया। इस बार मैंने उसे साइड पोजीशन में किया — उसके एक पैर को ऊपर उठाकर। लंड फिर से अंदर किया।

    “आह… राज… फिर… सूज गई चूत… चिल्ला… आह… मेक…!”
    फोरम फिर चिल्लाई लेकिन अब दर्द कम था। वो “आह… आह…” करके मेक ले रही थी। मैंने इस राउंड में थोड़ी तेजी से चोदा। २२ मिनट तक लगातार धक्के दिए। उसके सूजे हुए स्तन मेरे हाथों में थे। मैं उन्हें दबाता, चूसता और नीचे से जोर-जोर से ठोकता रहा।

    फोरम पूरे समय कराहती रही — “राज… हां… धीरे… आह… अच्छा लग रहा है… लेकिन सूजन… आह…!”
    दूसरा राउंड भी खत्म हुआ। मैं फिर झड़ गया। फोरम की चूत अब और ज्यादा सूज गई थी, लेकिन वो अब दर्द के साथ-साथ मजा भी ले रही थी।

    दोनों राउंड खत्म होने के बाद मैंने कंडोम उतारा और फोरम को कसकर गले लगा लिया। वो मेरी बांहों में पूरी तरह ढीली पड़ गई थी। उसके चेहरे पर पसीना था, बाल बिखरे हुए थे, होंठ सूजे हुए थे।

    “राज… सुबह-सुबह… तुम बहुत शैतान हो…” वो शरमाते हुए बोली और मेरी छाती में मुंह छिपा लिया।

    मैंने हंसते हुए उसके बाल सहलाए और कहा, “मेरी रानी… तू सोते हुए इतनी प्यारी लग रही थी कि रोक नहीं पाया। अब उठो, हम नाश्ता करेंगे। फिर और मजा करेंगे।”

    फोरम ने शरमा कर मुझे और कसकर गले लगा लिया। उसकी सूजी हुई चूत अभी भी मेरी जांघ से सटी हुई थी। हम दोनों कुछ देर ऐसे ही लेटे रहे — प्यार, थकान और सुबह की गर्माहट में डूबे हुए।

    दो सुबह के राउंड के बाद फोरम मेरी छाती से चिपकी हुई थी। उसकी सांसें अभी भी भारी थीं और चूत बुरी तरह सूजी हुई थी। मैंने उसे प्यार से चूमते हुए कहा, “मेरी जान, अब हम दोनों फ्रेश हो जाते हैं।”

    मैं सबसे पहले उठा और बाथरूम में चला गया। गर्म पानी से अच्छे से नहाया, दांत ब्रश किए, चेहरा धोया। जब मैं बाहर निकला तो सिर्फ एक सफेद टॉवल कमर पर लपेटे हुए था। फोरम अब बेड पर बैठ गई थी। उसके बाल बिखरे हुए थे, चेहरा थका हुआ लेकिन बहुत प्यारा लग रहा था।

    “तू भी फ्रेश हो जा बेबी,” मैंने मुस्कुराते हुए कहा।

    फोरम शरमाते हुए उठी। जब वो चलने लगी तो उसकी चाल थोड़ी अजीब थी — पैरों को थोड़ा फैलाकर चल रही थी क्योंकि चूत में अभी भी सूजन और दर्द था। वो बाथरूम में गई। मैंने बाहर खड़े होकर सुना — वो गर्म पानी से नहा रही थी और हल्का-हल्का कराह रही थी जब पानी उसकी सूजी चूत पर पड़ता। १५ मिनट बाद वो बाहर आई। उसके बाल गीले थे, शरीर पर सिर्फ एक सफेद टॉवल लपेटा हुआ था। टॉवल उसके स्तनों को मुश्किल से ढक पा रहा था और ऊपर से उसकी गोरी जांघें दिख रही थीं।

    हम दोनों अब थोड़े फ्रेश हो चुके थे। मैंने रूम सर्विस को फोन किया और नाश्ता मंगवाया — फ्रेश फ्रूट्स (तरबूज, अंगूर, स्ट्रॉबेरी), ऑमलेट, टोस्ट, जूस, कॉफी और कुछ स्वीट डिश।

    नाश्ता आ गया। मैंने ट्रे को बेड पर रख दिया। हम दोनों पूरी तरह नंगे थे। फोरम शरमा रही थी लेकिन मैंने उसे अपनी गोद में बिठा लिया। हमने साथ में नाश्ता किया। मैं स्ट्रॉबेरी उसके मुंह में डालता, वो मेरे मुंह में अंगूर रखती। बीच-बीच में मैं उसके स्तनों को हल्का छू लेता या गर्दन पर किस कर लेता। फोरम हंस रही थी लेकिन जब मैंने कहा, “अब एक राउंड और कर लें,” तो उसने तुरंत मना कर दिया।

    “नहीं राज… अब बस हो गया। बहुत दर्द हो रहा है। मेरी चूत बुरी तरह सूज गई है। प्लीज आज और मत करो।”

    मैंने जिद की, “बस एक बार बेबी… जकूजी में। पानी में बहुत आराम रहेगा।”

    फोरम ने बहुत मना किया। “नहीं… सच में बस हो गया। मैं चल भी नहीं पा रही ठीक से।”

    मैंने उसे मनाने के लिए १० मिनट तक कोशिश की — कभी गले लगाकर, कभी उसके कान में प्यार भरी बातें करके, कभी उसके स्तनों को सहलाकर। आखिरकार वो थोड़ी मान गई। “ठीक है… लेकिन सिर्फ जकूजी में… और बहुत धीरे… वरना मैं रोने लगूंगी।”

    मैं खुश हो गया। हम दोनों नंगे ही जकूजी टब की तरफ गए। मैंने टब में गर्म पानी भरा, बबल्स चालू किए और थोड़ा खुशबू वाला ऑयल डाला। पानी अच्छे से गर्म लेकिन सहने लायक था। मैं पहले टब में बैठ गया। फिर फोरम को अपनी गोद में बिठा लिया — उसकी पीठ मेरी छाती से सटी हुई।

    मैंने लंड पर फिर कंडोम चढ़ाया और लुब्रिकेंट लगाया। फोरम की सूजी चूत पानी में थोड़ी राहत महसूस कर रही थी। मैंने उसे अपनी गोद में सही से सेट किया और लंड को उसकी चूत पर रखा। धीरे से ऊपर से धक्का दिया।

    “आह… राज… फिर दर्द…!” फोरम हल्की चिल्लाई।

    लेकिन पानी की वजह से घर्षण कम था। मैंने बहुत धीरे-धीरे पूरा ९ इंच अंदर कर दिया। फोरम रोने लगी, “आह… सूजन… बहुत दर्द… राज… रो रही हूँ…”

    मैंने उसे कसकर पकड़ लिया और जकूजी में ही धीरे-धीरे चोदना शुरू कर दिया। पानी छप-छप कर उछल रहा था। मैंने एक हाथ से उसके स्तन दबाए, दूसरे हाथ से क्लिटोरिस सहलाया। फोरम लगातार रो रही थी और चिल्ला रही थी — “आह… राज… बहुत तेज… सूज गई है… चीख… प्लीज धीरे… रो… आह…!”

    यह राउंड पूरे ९० मिनट तक चला। मैंने उसे कई पोजीशन में चोदा — कभी वो मेरी गोद में ऊपर-नीचे, कभी मैं पीछे से, कभी साइड में। पानी के अंदर होने की वजह से हर धक्का गहरा लग रहा था। फोरम पूरे ९० मिनट तक रोती रही, चिल्लाती रही, कभी मेरी बांहों को कसकर पकड़ लेती, कभी “बस हो गया… रो रही हूँ…” कहती। लेकिन बीच में कई बार वो खुद भी हिलने लगी। उसकी चूत अब बुरी तरह सूज चुकी थी और लाल हो गई थी।

    आखिरकार ९० मिनट बाद मैं जोर से झड़ गया। फोरम भी थककर मेरी गोद में ढीली पड़ गई। वो हांफ रही थी और आंसू बहा रही थी।

    राउंड खत्म होने के बाद मैंने उसे टब से उठाया। अच्छे से टॉवल से पोंछा। फोरम की चाल अब और भी लड़खड़ा रही थी। मैंने उसे गोद में उठाकर बेड पर लिटा दिया।

    फिर हम दोनों ने कपड़े पहने — मैंने सफेद शर्ट और ब्लैक ट्राउजर पहना, फोरम ने कल खरीदी हुई नई क्रीम साड़ी पहनी। साड़ी उसकी सूजी हुई चूत और थकी हुई शरीर पर भी बहुत खूबसूरत लग रही थी। मैंने उसे डायमंड नेकलेस भी पहना दी।

    अब हम डिनर के लिए तैयार थे, लेकिन फोरम की चाल अभी भी धीमी थी और चेहरा थका हुआ था। वो मेरे बाजू में आकर बोली, “राज… अब सच में बस… मैं बहुत थक गई हूँ।”

    मैंने उसे गले लगा लिया और कहा, “चलो मेरी रानी, अब सिर्फ डिनर और आराम।”

  • राज और फोरम की जुनूनी कहानी 1

    अगला दिन, सुबह १०:३० बजे।
    मैं अपने अहमदाबाद के लग्जरी फ्लैट के बेडरूम में लेटा हुआ था। सिर्फ ब्लैक बॉक्सर पहने, छाती नंगी। कल रात मैंने फोरम को ताज होटल में दो दिन के लिए साथ रहने का प्लान बताया था। लेकिन वो अभी तक कोई साफ जवाब नहीं दे रही थी। मेरा दिल तेज-तेज धड़क रहा था। मैंने फोन उठाया और व्हाट्सएप पर लंबा मैसेज टाइप करना शुरू किया।

    “मेरी जान फोरम ❤️
    कल सुबह ५ बजे ताज होटल की लॉबी में मिलते हैं। मैंने पहले से ही १७वीं मंजिल का प्रेसिडेंशियल सूट बुक कर लिया है – पूरा प्राइवेट, जकूजी, बालकनी, किंग साइज बेड। दो दिन सिर्फ तू और मैं। पहले दिन शॉपिंग करवाऊंगा – साड़ी, ड्रेस, लिंगरी, ज्वेलरी, जो तेरा मन करे। शाम को कैंडल लाइट डिनर, फिर रूम में सिर्फ रोमांस। मैं तेरे बाल सहलाऊंगा, तेरे होंठ चूमूंगा, तेरे शरीर को छूकर तुझे महसूस करूंगा। कोई जल्दबाजी नहीं। जब तक तू तैयार न हो, कुछ नहीं करूंगा। मैं तेरे बिना अधूरा हूँ बेबी। प्लीज हाँ बोल दे। मैं तेरी हर इच्छा पूरी करूंगा। तेरी मुस्कान के लिए पूरा ताज बुक करवा सकता हूँ।”

    मैसेज भेजकर मैं इंतजार करने लगा। ४ मिनट बाद “टाइपिंग…” दिखा। फिर रुक गया। फिर फिर से टाइपिंग। आखिरकार मैसेज आया:

    “राज… दो दिन होटल में? मैं बहुत डर रही हूँ। घरवाले क्या कहेंगे? और… मैं अभी वर्जिन हूँ। तुम जानते हो ना?”

    मैंने तुरंत रिप्लाई किया:
    “हाँ मेरी जान, मैं सब जानता हूँ। लेकिन दो दिन सिर्फ तेरा और मेरा समय होगा। अगर तू नहीं चाहे तो हम सिर्फ बातें करेंगे, गले लगेंगे, किस करेंगे। मैं तेरी इज्जत का पूरा ख्याल रखूंगा। घर पर बोल देना फ्रेंड्स के साथ शॉपिंग और पार्टी है। मैं सब संभाल लूंगा। प्लीज फोरम… मुझे तेरे साथ रहना है।”

    फिर मैंने वीडियो कॉल लगा दी। घंटी बजती रही। सातवीं घंटी पर उसने कॉल उठाई। उसकी प्यारी गोरी फेस स्क्रीन पर आई। बाल खुले, आंखों में शर्म और डर का मिश्रण। पीछे उसका रूम दिख रहा था।

    “राज… तुम सच में दो दिन होटल में रहना चाहते हो?” उसकी आवाज थोड़ी कांप रही थी।

    मैंने बहुत प्यार से कहा, “हाँ बेबी। लेकिन मैं तुझे कभी मजबूर नहीं करूंगा। हम पहले शॉपिंग करेंगे, तुझे नई-नई चीजें खरीद दूंगा। फिर डिनर में कैंडल लाइट में बातें करेंगे। रूम में जाकर मैं तुझे अपनी गोद में बैठाकर बाल सहलाऊंगा, गर्दन चूमूंगा, जितना तू चाहे उतना प्यार करूंगा। अगर तू कहेगी ‘बस’ तो मैं रुक जाऊंगा। मैं सिर्फ तेरे साथ होना चाहता हूँ। तेरी सांसों को महसूस करना चाहता हूँ। प्लीज मेरी रानी… हाँ बोल दे।”

    फोरम ने लंबी सांस ली। उसकी आंखें नीची हो गईं। “लेकिन राज… अगर कुछ हो गया तो?”

    “कुछ नहीं होगा जो तू नहीं चाहे। मैं प्रॉमिस करता हूँ। बस तेरे साथ दो दिन बिताना है। तेरे हाथ थामना है, तेरे पैरों को अपने पैरों से रगड़ना है। तेरी हंसी सुननी है।”

    उसने फिर २-३ मिनट सोचा। फिर धीरे से बोली, “ठीक है… लेकिन बहुत डर लग रहा है। कल सुबह ५ बजे आऊंगी। लेकिन अगर मैं मना कर दूं तो मान जाना।”

    मैं खुशी से मुस्कुरा दिया। “प्रॉमिस बेबी। मैं तुझे कभी दुख नहीं पहुंचाऊंगा। कल ५ बजे लॉबी में गुलदस्ता लेकर इंतजार करूंगा।”

    फिर हमारी बातें रात तक चलती रहीं। मैंने उसे डिटेल में बताया कि कैसे हम शॉपिंग करेंगे, कौन-कौन सी ड्रेस खरीदेंगे, कैसे डिनर में रोमांस करेंगे। फोरम शरमा-शरमा कर हंसती रही। रात ११:५५ बजे उसने आखिरी मैसेज किया:

    “राज… मैं आ रही हूँ। लेकिन प्लीज मुझे अच्छे से रखना। ❤️”

    मैंने रिप्लाई किया: “तू मेरी जान है। मैं तेरी हर खुशी का ख्याल रखूंगा। सो जा अब, कल सुबह मिलते हैं।”

    अगली सुबह ७:१५ बजे मैं उठा। दिल में उत्साह था। सबसे पहले मैंने अपना प्राइवेट पार्ट वैक्सिंग के लिए अपॉइंटमेंट लिया। सैलून पहुंचकर मैंने पूरा साफ करवाया – लंड, अंडकोष, आस-पास का सारा एरिया। वैक्सिंग के बाद मेरा ९ इंच का लंड बिल्कुल चिकना, चमकदार और मोटा लग रहा था। नसें साफ उभरी हुईं, सिरा गुलाबी और तैयार। मैंने महंगा परफ्यूम लगाया, सफेद शर्ट और ब्लैक ट्राउजर पहना। जेब में कंडोम, लुब्रिकेंट और छोटी-छोटी सरप्राइज रख लीं।

    शाम के ठीक ४:४५ बजे मैं ताज होटल की भव्य लॉबी में पहुंच गया। हाथ में २५ लाल गुलाबों का बड़ा गुलदस्ता। लॉबी में हल्की रोशनी और क्लासिकल म्यूजिक चल रही थी। ठीक ५:०० बजे लिफ्ट के दरवाजे खुले। फोरम बाहर निकली। हल्का गुलाबी कुर्ता जो उसके गोरे शरीर पर फिट बैठ रहा था, नीचे ब्लैक टाइट जींस। बाल खुले हुए, चेहरे पर हल्का मेकअप, होंठों पर पिंक लिपस्टिक। वो मुझे देखते ही शर्मा गई और धीरे-धीरे मेरी तरफ आई।

    मैंने आगे बढ़कर उसे कसकर गले लगा लिया। उसकी नरम, गर्म छाती मेरी छाती से सट गई। मैंने उसके कान में फुसफुसाया, “मेरी जान… आ गई तू। अब दो दिन सिर्फ हम दोनों।

    डिनर खत्म होने के बाद रात के करीब ९:४५ बजे हम दोनों रेस्टोरेंट से निकले। फोरम का हाथ मेरे हाथ में था। उसके चेहरे पर शर्म, उत्सुकता और थोड़ा डर साफ दिख रहा था। मैंने उसे धीरे से अपनी तरफ खींचा और लिफ्ट की तरफ ले गया। लिफ्ट में कोई और नहीं था। जैसे ही दरवाजे बंद हुए, मैंने उसे दीवार से लगा लिया और उसके होंठों पर हल्का सा किस किया। फोरम कांप गई लेकिन किस में थोड़ा जवाब दिया।

    लिफ्ट १७वीं मंजिल पर रुकी। हम सूट के दरवाजे पर पहुंचे। मैंने कार्ड से दरवाजा खोला। अंदर घुसते ही लाइट्स ऑटोमैटिक जल गईं। पूरा सूट बहुत खूबसूरत था – बड़ा किंग साइज बेड, सॉफ्ट लाइटिंग, जकूजी टब एक तरफ, बालकनी से अहमदाबाद की रात की चमकती लाइट्स दिख रही थीं। एयर कंडीशनर की ठंडी हवा कमरे में फैली हुई थी।

    दरवाजा बंद करते ही मैंने फोरम को अपनी तरफ घुमाया। “मेरी जान…” मैंने उसे दोनों हाथों से कमर से पकड़कर अचानक गोद में उठा लिया। फोरम चौंक गई, “आह… राज… क्या कर रहे हो?” उसकी दोनों टांगें मेरी कमर के चारों तरफ लिपट गईं। मैंने उसे कसकर पकड़े हुए बेड की तरफ ले गया। उसके स्तन मेरी छाती से दब रहे थे। मैंने उसके गाल, गर्दन और फिर होंठों पर कई सारे हल्के-हल्के किस किए। फोरम मेरी गर्दन में हाथ डालकर शरमा रही थी।

    बेड के पास पहुंचकर मैंने उसे बहुत धीरे से बेड पर लिटा दिया। फिर खुद उसके ऊपर झुक गया। “फोरम… तू बहुत खूबसूरत है।” मैंने उसके होंठों को चूसना शुरू किया। पहले हल्के किस, फिर गहरे किस। मेरी जीभ उसके मुंह में घुस गई। फोरम की सांसें तेज हो गईं। मैंने उसके गाल, कान की लोब, गर्दन को चूमा और हल्का-हल्का चाटा। वो कराह रही थी, “आह… राज… धीरे…”

    अब मैंने arm in arm से उसके कपड़े उतारने शुरू किए। पहले उसके कुर्ते के बटन खोले। कुर्ता धीरे-धीरे ऊपर किया और उतार दिया। उसके गोरे, नरम ३४C स्तन ब्रा में कैद थे। ब्रा का हुक पीछे से खोला और ब्रा भी उतार दी। उसके गुलाबी चूचियां बाहर आ गईं। मैंने दोनों हाथों से उन्हें हल्का दबाया और चूमा। फोरम ने आंखें बंद कर लीं और सांसें भारी हो गईं।

    फिर मैंने उसकी जींस का बटन खोला। जिपर नीचे किया और जींस को धीरे-धीरे उसकी टांगों से उतारा। अब वो सिर्फ पैंटी में थी – हल्की गुलाबी पैंटी। मैंने उसे भी बहुत धीरे से उतार दिया। पहली बार फोरम की पूरी नंगी चूत मेरे सामने थी – बिल्कुल साफ, गुलाबी, छोटी-छोटी लेबिया, बीच में तंग सुराख। वो शर्मा कर दोनों हाथों से अपना चेहरा ढक ले रही थी।

    मैंने उसके पैरों को फैलाया और खुद उसके बीच में लेट गया। पहले उसके पेट पर किस किए, फिर नाभि को चाटा। धीरे-धीरे नीचे आया। उसकी जांघों को चूमा, फिर चूत के आस-पास चाटा। फोरम की कमर तन गई, “उफ्फ… राज… क्या कर रहे हो… शर्म आ रही है… आह…”

    मैंने थोड़ी देर उसके स्तनों के साथ खेला। दोनों चूचियों को मुंह में लेकर चूसा, जीभ से चक्कर लगाया, हल्का काटा। फोरम अब कराह रही थी, “आह… राज… अच्छा लग रहा है…”

    फिर मैंने खुद की शर्ट उतार दी। अब मैं सिर्फ पैंट में था। फोरम ने शरमाते हुए मेरी शर्ट उतारने में मदद की। उसके हाथ मेरी छाती पर फिर रहे थे। मैंने उसकी पैंटी पूरी तरह उतार दी (जो पहले ही उतार चुका था)। अब वो पूरी नंगी थी।

    मैंने फिर उसके स्तनों को चूमा-चाटा। फिर गर्म करने के लिए उसके पूरे शरीर पर किस करने लगा – गर्दन, कंधे, पेट, जांघें। फोरम अब पूरी तरह गर्म हो चुकी थी। उसकी सांसें तेज थीं और चूत थोड़ी भीग चुकी थी।

    अब मैंने अपनी पैंट और बॉक्सर उतार दिया। मेरा ९ इंच का लंड पूरा तना हुआ, वैक्स किया हुआ, मोटा और चमकता हुआ बाहर आ गया। फोरम की आंखें फट गईं। “राज… ये… इतना बड़ा…”

    मैंने उसके हाथ को पकड़कर लंड पर रख दिया। फोरम ने शरमाते हुए लेकिन उत्सुकता से लंड को हाथ में लिया और हल्का-हल्का सहलाने लगी। वो उसे ऊपर-नीचे कर रही थी, अंगूठे से सिरे को छू रही थी। मैं कराह उठा, “हां बेबी… अच्छा लग रहा है…”

    फिर मैंने धीरे से कहा, “फोरम… मुंह में ले ले बेबी।”

    फोरम ने तुरंत सिर हिला दिया। “नहीं राज… प्लीज… मैं नहीं कर पाऊंगी… अभी नहीं। सिर्फ किस कर सकती हूँ।”

    मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “ठीक है मेरी जान। जो तू चाहे।”

    फिर फोरम ने झुककर मेरे लंड के सिरे पर सिर्फ हल्के-हल्के किस किए। उसके नरम, गर्म होंठ मेरे लंड के टिप पर लग रहे थे। वो बार-बार किस कर रही थी लेकिन मुंह में नहीं ले रही थी। मैं उसके बालों को सहलाता रहा और उसे प्यार से देखता रहा।

    अब तक हम दोनों बहुत गर्म हो चुके थे। फोरम की चूत पूरी तरह भीगी हुई थी और मेरा लंड लोहे की तरह सख्त था। मैंने उसे फिर से चूमना शुरू किया…

    अब तक हम दोनों पूरी तरह गर्म हो चुके थे। सूट की एसी ठंडी हवा में भी हमारे शरीर गर्मी से तप रहे थे। फोरम की सांसें तेज थीं, उसके गाल लाल हो गए थे, आंखें आधी बंद थीं। उसकी चूत पूरी तरह भीग चुकी थी और चमक रही थी। मेरा ९ इंच का लंड भी लोहे की तरह सख्त था, नसें उभरी हुईं, सिरा चमक रहा था।

    मैं फोरम के ऊपर झुका हुआ था। उसके नंगे शरीर को अपनी छाती से दबाते हुए मैंने उसके कान में फुसफुसाया, “मेरी जान… अब मैं तुझे पूरी तरह अपनी बना लूंगा। लेकिन पहली बार है, बहुत धीरे करूंगा।”

    फोरम ने शरमाते हुए सिर हिलाया। उसकी आवाज कांप रही थी, “राज… डर लग रहा है… लेकिन मैं तुम्हारी हूँ…”

    मैंने उसे प्यार से चूमते हुए कहा, “कंडोम लाओ बेबी। बैग में है।”

    फोरम ने उठकर बेड के पास रखे मेरे बैग से कंडोम और लुब्रिकेंट की बोतल निकाली। उसके नंगे शरीर पर लाइट पड़ रही थी, जिससे उसके स्तन हल्के-हल्के हिल रहे थे। वो वापस आई और मेरे सामने बैठ गई। उसने कंडोम का पैकेट फाड़ा और कांपते हाथों से मेरे लंड पर कंडोम चढ़ाने की कोशिश की। पहले दो बार हाथ फिसल गए, फिर उसने धीरे-धीरे कंडोम पूरा चढ़ा दिया। उसके बाद उसने लुब्रिकेंट की बोतल खोली और मेरे लंड पर अच्छे से लगाया। ठंडा, चिकना लुब्रिकेंट लंड पर फैल गया।

    “अब लेट जा बेबी,” मैंने कहा।

    फोरम ने लेट जाने की कोशिश की लेकिन मैंने उसे मिशनरी पोजीशन में सेट किया। उसके दोनों पैरों को फैलाकर मेरी कमर के दोनों तरफ रख दिया। मैं उसके बीच में आ गया। मेरा लंड उसकी भीगी चूत के मुंह पर टिका हुआ था। फोरम की सांसें बहुत तेज हो गई थीं। उसकी आंखें मेरी आंखों में थीं।

    मैंने धीरे से कहा, “आराम से बेबी… मैं बहुत धीरे करूंगा।”

    फिर मैंने लंड की नोक को उसके चूत के छेद पर रखा और बहुत हल्का सा धक्का दिया। सिर्फ १ इंच अंदर गया।

    “आआआह… राज… दर्द हो रहा है… निकालो… चीख…!”
    फोरम जोर से चिल्ला उठी। उसका पूरा शरीर तन गया। उसके नाखून मेरी पीठ में गड़ गए। आंखों में आंसू आ गए।

    मैं तुरंत रुक गया। उसके होंठों को चूमने लगा, गर्दन को चूसने लगा और बोला, “शांत हो जा मेरी जान… बस थोड़ा सा… धीरे-धीरे ठीक हो जाएगा।”

    १-२ मिनट रुकने के बाद मैंने फिर हल्का धक्का दिया। अब २ इंच अंदर चला गया।

    “आह… राज… बहुत दर्द… रो… रो रही हूँ… प्लीज रुको…!”
    फोरम रोने लगी। उसके आंसू गालों पर बह रहे थे। वो बार-बार सिर हिला रही थी और मेरी पीठ पर नाखून गाड़ रही थी। उसकी चूत बहुत तंग थी, जैसे मेरे मोटे लंड को निचोड़ रही हो।

    मैं फिर रुका। उसके स्तनों को हल्का दबाते हुए, चूचियों को चूसते हुए उसे शांत करने की कोशिश की। “मेरी रानी… बस थोड़ा और… तू बहुत बहादुर है। मैं तुझे प्यार करता हूँ।”

    फिर धीरे-धीरे मैंने तीसरा धक्का दिया। अब ३ इंच अंदर हो गए।
    अचानक फोरम की चूत से हल्का खून निकलने लगा। गर्म खून कंडोम के बाहर थोड़ा सा बहने लगा।

    “आआआह… राज… फट रही हूँ… बहुत दर्द… चीख… रो…!”
    फोरम जोर-जोर से चिल्ला रही थी और रो रही थी। उसका शरीर बार-बार कांप रहा था। वो अपने पैरों को कसकर मेरी कमर से लिपटाए हुए थी लेकिन दर्द से उसके पैर भी कांप रहे थे।

    मैं पूरी तरह रुक गया। ५-७ मिनट तक मैंने सिर्फ उसके होंठ चूमे, आंसू पोछे, बाल सहलाए और प्यार भरी बातें कीं। “फोरम… मेरी जान… तू मेरी हो गई। बस थोड़ा और सह ले। फिर मजा आएगा।”

    धीरे-धीरे मैंने आगे बढ़ना शुरू किया। ४ इंच… ५ इंच… हर इंच पर फोरम चिल्लाती, रोती, “राज… बस… निकालो… आह… दर्द… बहुत दर्द…”
    उसकी चूत से और खून निकल रहा था। लेकिन मैं बहुत धीरे-धीरे, रुक-रुककर पूरा लंड अंदर करने की कोशिश कर रहा था।

    ४० मिनट तक यह सिलसिला चला। हर २-३ मिनट में एक छोटा धक्का, फिर रुकना, चूमना, शांत करना। फोरम लगातार चिल्लाती और रोती रही। कभी-कभी वो मेरी पीठ पर नाखून गाड़ देती, कभी मेरे बाल पकड़ लेती। उसकी आवाज बार-बार टूट जाती, “राज… मैं मर जाऊंगी… आह… बहुत बड़ा है…”

    आखिरकार ४० मिनट बाद पूरा ९ इंच उसकी तंग चूत में घुस गया। मेरा लंड की जड़ तक अंदर था। फोरम की चूत पूरी तरह फैल चुकी थी। उसका पेट हल्का सा उभरा हुआ दिख रहा था। वो अब चिल्ला तो रही थी लेकिन आवाज कमजोर हो गई थी। आंसू लगातार बह रहे थे।

    “पूरा… अंदर… आ गया… मेरी जान,” मैंने उसके कान में फुसफुसाया।

    फोरम सिर्फ हांफ रही थी और रो रही थी। “राज… बहुत… दर्द… हो रहा है…”

    मैंने फिर से रुककर उसे चूमना शुरू किया। उसके स्तनों को सहलाया, चूचियों को चूसा। ५ मिनट बाद जब उसका दर्द थोड़ा कम हुआ तो मैंने बहुत धीरे-धीरे हल्के-हल्के धक्के देना शुरू किए।

  • क्लासरूम में जवान कुंवारी लड़की की पहली बार चुदाई

    मेरी क्लास की एक लड़की पर सब लड़के बुरी नजर डालते थे क्योंकि वो बेपनाह हुस्न की मलिका थी. मुझे बहुत बुरा लगता था लड़कों की बातें सुन कर. तो मैंने क्या किया?

    मेरा नाम रोहण है. जब मैं 19 साल का था, तब मुझे जैनब (काल्पनिक नाम) नाम की एक लड़की पसंद आ गयी. जैनब मेरे कोचिंग में पढ़ती थी. जैनब का रंग गोरा था और वो करीबन साढ़े पांच फिट लंबी थी. उसकी चुचियों की साइज 32 इंच थी और नजरें कंटीली थीं.

    जैनब को देख कर कोचिंग और मोहल्ले के लड़के मुठ मार कर खुद को शांत कर लेते थे.

    हमारी ये कोचिंग स्कूल में ही थी. स्कूल के बाद शाम में 03:00 बजे से कोचिंग से घर के लिए चल देता था. मैं पढ़ाई में अच्छा हूँ … लड़कियों से हमेशा से दूरी रखने वाला लड़का हूँ.

    मुझे उसको देख कर न जाने ऐसा क्यों लगने लगता था कि इस लड़की को मुझे इन भूखे भेड़ियों की वासना से बचा लेना चाहिए. यही सोच कर मैं कोचिंग से जब भी घर जाने के लिए निकलता तो जैनब के पीछे पीछे कुछ दूरी बनाता हुआ उसे उसके घर तक पहुंचा कर ही अपने घर जाता था.

    मेरी इस बात को मेरा एक दोस्त समझता था. पहले पहल तो उसने मेरी इस बात पर ध्यान नहीं दिया. मगर जब दोस्तों के बीच जैनब की जवानी की चर्चा होने लगती, तो मैं उखड़ जाता था.

    ये सब देख कर मेरा वो दोस्त समझ गया था कि जैनब मुझे बेहद पसंद है.
    उसने मुझसे कहा कि यदि तुमको जैनब पसंद है, तो उससे अपनी बात कहते क्यों नहीं?

    मगर मैं ऐसा नहीं कह सकता था, शायद मेरा शर्मीलापन मुझे ऐसा करने देने के आड़े आ रहा था.

    फिर एक दिन की बात है कि मेरे इसी दोस्त ने मुझे चैलेंज किया कि तुम यदि उस लड़की को किसी लड़के की जबरदस्ती से बचाना चाहते हो, तो उस लड़की को पटा लो. वरना कोई न कोई उस कली को मसल देगा.
    मैंने कहा- ठीक है … एक महीने में मैं उससे ही खुद को प्रपोज करवा लूंगा.

    अब ये सामने चैलेंज था, तो मैंने एक तरकीब सोची. मैं हमेशा की तरह कोचिंग आता और जाता, लेकिन पढ़ाई के साथ अब साथ जैनब को देखता रहता. इसी दौरान जब उसकी नजर मुझसे मिल जाती थी, तो मैं नजरें घुमा कर बोर्ड पर कर लेता. इस तरह से देखने से एक दो बार जैनब भी मुस्कुराई … मगर मैंने उसकी तरफ से अपना मुँह मोड़ लिया.

    अब भी कोचिंग के बाद जब अपने घर जाने लगता, तो उसे घर तक पहुंचा कर ही जाता. ये बात उसने नोट कर ली थी.

    इस बीच मैं उससे कुछ नहीं कहता था. जैनब भी ये समझ गयी थी कि मैं उससे कुछ भी कहने से रहा.

    एक दिन टेस्ट एग्जाम चल रहे थे. मैंने सारे प्रश्न हल कर दिए थे. इस बीच जिसने भी मुझे हेल्प मांगी … मैंने सबको मदद की.

    अचानक से मेरे पेन की स्याही खत्म हो गई. मैं परेशान हो गया. मुझे परेशान देख कर मेरे एक दोस्त ने मुझसे पूछा- क्या हुआ?

    मैंने पेन को हथेली पर चला कर उसे बताया कि पेन की इंक खत्म हो गई.

    मेरे दोस्त ने ये देखा तो उसने जोर से लगभग चिल्लाते हुए क्लास से कहा- भाई कोई एक्स्ट्रा पेन लाया है, तो दे दो … रोहण का पेन काम नहीं कर रहा है.

    जैनब ने मुस्कुराते हुए मुझे देखा और सबसे पहले अपने बॉक्स में से एक पेन निकाल कर मेरी तरफ बढ़ा दिया.

    फिर उसने मुझसे अपने आंसर भी मिलवा लिए कि उसने सही लिखे या नहीं.

    ये देख कर मेरे दोस्त उसे या मुझे देख कर फब्ती कसने लगे थे. हम दोनों ये सब चुपचाप होकर सुनते और मुस्कुरा कर सबकी फब्तियों को टाल देते.

    फिर 5 सितंबर आने वाला हो गया. सभी शिक्षक दिवस मनाने के लिए चंदा जमा करने लगे. लड़कियों ने गिफ्ट और लड़कों ने डेकोरेशन की जिम्मेदारी ली. केक का जिम्मा मैंने ले लिया और डिसाइड किया कि मैं पांच सितंबर को एक बजे ही कोचिंग क्लास में केक लेकर आ जाऊंगा और 2:30 बजे से सजावट के सामान लाने चलूंगा.

    जैनब को मेरा प्लान पता चल गया. जैनब पांच सितंबर को एक बजे से कुछ पहले ही कोचिंग पहुंच गयी. मैं भी पांच मिनट बाद पहुंच गया.

    मैं जैनब को देख कर सरप्राइज हो गया. मैंने पूछा- इतनी जल्दी आ गयी?

    उसने उसी समय मुझे प्रपोज कर दिया. मैं हक्का-बक्का था … निशब्द हो गया था. वो मुझे चुप देख कर रोने लगी. मैं कुछ बोल पाता, उसने आगे बढ़ कर मुझे लिपकिस कर दिया.

    जैसे ही वो मुझसे लिपटी, मुझे उसके कपड़ों का अहसास हो गया. उसने शर्ट के अन्दर कुछ भी नहीं पहना था. मुझे तो जैनब से चिपकने की तमन्ना न जाने कबसे थी. उसकी भरी हुई छातियों ने मुझे एकदम से गर्म कर दिया और मैंने भी बदले में उससे पूरा लिपट कर उसे किस करने लगा.

    मैंने उसे अपनी बांहों में कस लिया. उसकी आंखों से प्यार को पा लेने के आंसू झड़ रहे थे और मैं भी उसे अपने सीने में चिपकाए हुए एक अजीब सा सुकून पा रहा था. उसके मादक जिस्म की महक मुझे एक अजीब से लोक में ले गई थी.

    हम थोड़ी देर में अलग हो गए. मैं उसे देखने लगा. वो भी मेरी आंखों में झांकने लगी. फिर उसने शर्म से अपनी आंखें झुका लीं.

    मैं हंस दिया, तो वो भी हंस दी.

    मैंने कहा- मुझे तुमसे कुछ कहना है.
    वो बोली- अब भी कुछ कहना बाकी है?
    मैंने कहा- हां.

    वो मेरी तरफ देखने लगी.

    आज मैं उसे पाना चाहता था, इसलिए मैंने बिना कुछ कहे फिर से अपनी बांहें उसकी तरफ फ़ैला दीं.

    वो समझ गई. उसने नजरें झुका कर बोला कि अभी एक घंटा है, तुम्हारा जवाब जो भी हो … मुझे इस एक घंटे में प्यार करके बता दो प्लीज़.

    ये कहते हुए उसने क्लास रूम बंद कर दिया और एक एक करके अपनी शर्ट के बटन खोल दिए और मुझसे लिपट गयी.

    अब शेर के आगे बकरे को डालोगे, तो उसका शिकार तय है. मैंने भी सोचना छोड़ दिया और उससे लिपट गया. मैं उसे कस कस कर लिपकिस करने लगा. मेरे हाथों ने उसकी शर्ट को निकाल दिया. उसने भी मेरी शर्ट निकाल दी.

    उसकी चुचियां बिल्कुल तनी हुई और कसी हुई थीं, किसी बॉल की तरह गर्म थीं. हम दोनों की सांसें एकदम गर्म हो चुकी थीं. उसने मेरी जींस और जांघिया खोल कर मुझे नंगा कर दिया. मैंने भी उसे पूरी तरह से नंगा कर दिया और हम दोनों एक दूसरे के नंगे जिस्मों की अगन को महसूस करने लगे.

    इस समय हम दोनों ही कामवासना के वशीभूत थे. मैंने इधर उधर देखा और दो हाई बेंच मिलाकर अपने लिए सेज तैयार कर ली. मैंने उसे उस पर लिटा दिया. उसने भी लेट कर अपनी आंखें मूंद लीं.

    मैंने उसके दोनों चुचों को चूसना चालू कर दिया और हाथ चुत पर लगा दिया. वो ‘आ आ आआ आऊऊऊ ऊऊऊऊ आउच..’ कर रही थी.

    उसने अपने पैर फैलाते हुए कहा- रोहण अब जल्दी से मेरी चुत में अपना लंड डाल दो … मुझसे सहन नहीं हो रहा.

    मैंने उसके दोनों पैर पूरी तरह से फैला दिए और उसकी चुत को देखने लगा. उसकी चुत पर हल्के बाल थे और उसकी चुत एकदम गुलाब की पंखुड़ियों के जैसे पिंक थी.

    मैंने पोर्न फिल्मों से चुदाई करना कुछ सीख लिया था. बस वही सब याद करते हुए मैंने सीधे अपनी जीभ को उसकी चुत पर लगा दी.

    जैनब इस समय गर्म हो चुकी थी. उसने आंख खोल कर मिन्नत भरी आवाज बोली कि रोहण अभी ये सब छोड़ो … पहले जल्दी से अन्दर डाल दो … नहीं तो लंड खा जाऊँ गी.

    मगर मैं उसकी चुत चूसने में लीन रहा. उसकी चुत की आग बेहद बढ़ गई थी.
    उसने अपने दोनों पैरों और हाथों से मेरा सिर अपनी चुत में ठेल दिया और मादक आवाजें निकलाने लगी ‘ऊऊऊ यसस्स … सीसीई.’

    वो तेज आवाज निकलते हुए झड़ने लगी और फिर ढीली होने लगी.

    एक मिनट तक मानो झंझावात थम सा गया था. अचानक से जैनब उठ गई और मेरा लंड मुँह में लेकर लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी.

    अब मैं ‘आहा आह..’ की आवाज निकालने लगा.

    एक मिनट बाद ही मैंने जैनब के मुँह से लंड खींच लिया और उसकी चुत फाड़ने की तैयारी में जुट गया.

    मैं इस समय पूरे जोश में आ गया था. मैंने हाई बेंच पर जैनब को चित लिटाया और अपने लंड को उसकी चुत पर घिसने लगा.

    जैनब फिर से गरम हो गयी थी. उसने खुद ही लंड चुत पर सैट कर लिया. उसकी चुत सील बंद थी.

    उसने बोला- रोहण मेरा पहली बार है … प्लीज़ मेरी चुत में धीरे धीरे धक्का देना … मुझे दर्द होगा, लेकिन तुम छोड़ना नहीं.

    मैं ठहरा अनाड़ी … मैंने पहले ही धक्के में 3 इंच लंड चुत में उतार दिया. जैनब की चूत से खून आने लगा. वो दर्द से छटपटाने लगी. मैंने उसे गले लगा कर कस कर दाबे रखा और किस करने लगा.

    उसकी आंखों से आंसू आ रहे थे, वो कांप रही थी. उसके शरीर की कम्पन के रुकते ही मैंने लंड चुत में पेल दिया. चुत चीरता हुआ मेरा 7 इंच का लंड चुत में गायब हो गया.

    जैनब ने मुझे कसके जकड़ लिया और दबी जुबान से चिल्लाई- उई ममउम्मी … मर गई!

    मैं उसे चूमता रहा. उसकी चुचियों को चूसता रहा और धीरे धीरे उसे चोदने लगा.

    अब जैनब को भी मजा आने लगा. वो भी मस्त हो गई औऱ ‘आह आह आउच ओह आह..’ की आवाज निकलने लगी.

    ‘आह और जोर से … मेरे रोहण..’

    मैं भी पूरी ताकत से उसे चोदने लगा. कुछ ही मिनट बाद वो मुझे पकड़ कर झड़ चुकी थी. मैंने भी देर नहीं करते हुए ताबड़तोड़ धक्के देना शुरू कर दिए. मैं भी झड़ने वाला हो गया था.

    मैंने उससे पूछा, तो वो बोली- मैंने पहली बार किसी को पसंद किया है … आज चुत का उद्घाटन हुआ है … तुम अन्दर ही डाल दो.

    मैंने 20 धक्के मारकर जैनब को जकड़ लिया. जैनब ने भी मुझे जकड़ लिया और हम दोनों झड़ने लगे.

    जैनब की आंखों में ख़ुशी थी. हमने एक दूसरे को जबरदस्त किस किया और अलग होकर कपड़े पहने.

    मैंने जैनब को दूसरे लड़कों और मोहल्ले के लड़कों के विचार उसे बताए और उसे बताया कि मैंने तो तुम्हें उनसे बचाने के लिए अब तक ऐसे किया था.

    उसने बोला- जो भी हो … मेरी तरफ से सिग्नल मिलने के बाद भी तुमने अपनी अच्छाई नहीं छोड़ी … ये मुझे बहुत अच्छा लगा.
    मैंने उससे पूछा- और क्या क्या अच्छा लगा … मेरा मतलब अभी दस मिनट पहले.
    वो हंस दी और कहने लगी- तुमने बहुत अच्छा चोदा है मुझे … जब भी मन हो बोल देना, लेकिन मैं जानती हूं तुम अभी भी नहीं बोल पाओगे.

    मैंने उसे फिर से चूम लिया.

    वो बोली- रोहण ये बात हम दोनों के बीच ही रहनी चाहिए.
    मैंने बोला- ठीक है.

    अब तक 2:30 बज चुके थे. मैं उससे केक देखने को कह कर डेकोरेशन का सामान लेने चला गया.

    अब हम दोनों जब भी मिलते, मुस्कुरा देते थे. हालांकि मेरा प्यार परवान तो चढ़ा, पर मंजिल नहीं पा सका. उसकी शादी हो गयी और बच्चे भी हो गए.

  • गर्लफ्रेंड की पहली चुदाई मौसी के कमरे में

    यंग गर्ल वेट पुसी स्टोरी में मेरी दोस्ती एक लड़की से हुई. हम दोनों सेक्स करना चाहते थे पर मौक़ा नहीं मिल रहा था. मैं उसे अपनी मौसी के घर ले गया.

    नमस्ते दोस्तो, मेरा नाम शिवराज है और मैं विदिशा, एमपी का रहने वाला हूँ.
    मैं मध्यमवर्गीय परिवार से हूँ.

    मैंने बी.एस.सी. कंप्यूटर से ग्रेजुएशन किया हुआ है और कॉम्पिटिशन एग्ज़ाम की तैयारी कर रहा हूँ.

    पढ़ाई के साथ ही बाइक के शोरूम पर कंप्यूटर ऑपरेटर की जॉब भी कर रहा हूँ.

    मैं साढ़े पांच फीट का हट्टा-कट्टा नौजवान हूँ.
    मेरा औज़ार 5 इंच का है तथा ये 2.5 इंच मोटा है.

    यह यंग गर्ल वेट पुसी स्टोरी मेरी गर्लफ्रेंड भारती की है.
    भारती से मेरी फ्रेंडशिप 4 साल पहले फेसबुक पर हुई थी.

    जब भी वह अपनी फोटो अपलोड करती, तो मैं उसकी बहुत तारीफ़ करता और उसकी फोटो पर अच्छे-अच्छे कमेंट करता.

    इस तरह वह मुझसे प्रभावित होने लगी.
    भारती का रंग गेहुंआ जरूर है लेकिन फेस कट बहुत खूबसूरत है.

    उसके घर में उसके मां-पापा, भाई-भाभी और उनकी एक लड़की थी जो कि अभी एक साल की थी.

    कुछ ही समय में हमारी फ्रेंडशिप प्यार में बदल गई और हम व्हाट्सएप पर भी बात करने लगे.
    फिर धीरे-धीरे कॉल पर प्यार भरी बातें करने लगे.

    भारती का फिगर 30-28-32 का है.
    उसके चूचे ज्यादा बड़े नहीं, पर एकदम मस्त और सख्त हैं.

    उसके दोनों चूतड़ एकदम गोल, पावभाजी वाले बन-रोटी की तरह हैं.
    उसकी गांड मसलने में खूब मजा आता है.

    भारती बी.टेक प्रथम वर्ष में अध्ययनरत है और रेंट पर भोपाल शहर में रहकर पढ़ाई कर रही थी.

    जल्द ही हमने मिलने का प्लान बनाया और मैं उससे मिलने भोपाल पहुंच गया.
    भोपाल में हम घूमे-फिरे, बहुत मौज-मस्ती की.

    दोपहर को मैंने उसे अपनी मौसी के रूम पर चलने को कहा जो कि भोपाल में ही अपने पति के साथ किराए के रूम पर रह रही थीं.
    मेरी मौसी से सैटिंग है, वह एक अलग सेक्स कहानी में लिख कर बताऊंगा कि मौसी मेरे साथ कैसे खुली थीं.

    भारती मान गई और मेरे साथ मौसी के रूम पर चली आई.
    मौसी ने हमारे लिए चाय बनाई और थोड़ी देर बाद मौसी कुछ सामान लाने का बोलकर बाज़ार चली गईं.

    यह मैंने मौसी को पहले ही बता दिया था कि मैं उसे लेकर जब आऊं, तब आप एक-दो घंटे के लिए कहीं चली जाना और उन्होंने ठीक वैसा ही किया.

    मौसा जी तो शाम से पहले अपने काम से लौटने वाले नहीं थे तो मैं बेफिक्र था.

    मौसी के जाते ही मैंने उसे अपनी बांहों में भर लिया और धीरे-धीरे मेरा एक हाथ उसके स्तनों पर आ गया.

    मैं एक हाथ से उसकी चूचियों को व दूसरे हाथ से उसकी पीठ को सहलाने लगा.
    उसने सफेद कलर का टॉप पहन रखा था.

    मैंने धीरे-धीरे करके अपना हाथ टॉप के नीचे से अन्दर डाल दिया और ब्रा के ऊपर से उसके एक स्तन को सहलाने लगा.
    वह मस्त होने लगी, तो मैंने धीरे से उसका टॉप निकाल दिया.

    उसने अपने हाथों को ऊपर करके टॉप निकालने में मेरी मदद की.
    वह खुद चुदने के मूड में आ गई थी तो मैं उसे मौसी के बेड पर ले गया.

    उधर मैंने फिर से उसके साथ चूमाचाटी शुरू कर दी और अपने दोनों हाथों से उसके चूचों को ब्रा के ऊपर से दबाने लगा.
    उसने सफेद कलर की ब्रा पहन रखी थी.

    फिर उसे किस करते हुए ही मैं एक हाथ नीचे ले गया और उसकी सफेद लैगिंग्स के ऊपर से उसकी चूत को सहलाने लगा.
    उसने अपनी टांगें फैला दीं और चुत की रगड़ाई का मजा लेने लगी.

    यह देख कर मैंने उसकी लैगिंग्स को धीरे से नीचे को सरकाते हुए टांगों से बाहर निकाल दिया.
    उसने अपनी गांड उठाकर लैगिंग्स को निकालने में मेरी मदद की.

    लैगिंग्स के नीचे उसने अन्दर ब्लैक कलर की पैंटी पहन रखी थी जो हल्की सी भीग गई थी.
    मैं पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत सहलाने लगा.

    इस सब में वह मेरा पूरा साथ दे रही थी और बहुत गर्म हो गई थी.
    फिर मैंने उसके होंठों को अपने होंठों से अलग किया और उसकी ब्रा को ऊपर करके उसके एक चूचे को मुँह में भर लिया और दूसरे दूध को मसलने लगा.

    वह आह आह करने लगी और जल्दी ही उसने खुद ही अपनी ब्रा निकाल दी.
    जब वह अपनी ब्रा निकाल रही थी, उसी वक्त मैंने उसकी पैंटी निकाल दी.

    उसकी चूत पर घुंघराले काले बाल थे जो कि ज्यादा बड़े नहीं थे, शायद उसने दो हफ्ते पहले ही साफ किए थे.
    फिर उसने मेरे कान में कहा- पहले बताया होता कि यह करने वाले हो तो मैं मैदान साफ करके आती!

    मैंने हंस कर कहा- कोई बात नहीं जान, आज तेरी घुंघराली झाड़ियों में लंड घुसेड़ कर मजा ले लूँगा, तुम अगली बार मैदान चमका कर आ जाना!
    यह सुनकर वह धीरे से हंस दी.

    अब मैंने उसके दोनों पैरों को फैलाया और उसकी टांगों के बीच में आ गया.
    अपने लंड को मैं उसकी चूत पर रगड़ते हुए किस करने लगा.
    मैं अपने दोनों हाथों से उसके मम्मों को जोर-जोर से मसलने लगा.

    वह बहुत गर्म हो गई थी और मेरे कूल्हों पर हाथ रखकर अपनी चूत पर लंड को दबाने लगी थी.
    मैंने एक हाथ नीचे ले जाकर लंड को उसकी चूत पर रखा और जोर का धक्का लगाया.

    चूत बहुत गीली होने के कारण लंड का टोपा अन्दर चला गया.
    उसके होंठ मेरे होंठों में दबे होने के कारण उसकी चीख दब कर रह गई, वरना वह बहुत जोर से चिल्ला देती.

    लौड़े की नोक चुत में घुसने से वह बहुत मचलने लगी और मुझे अपने हाथों से धकेलने की कोशिश करने लगी.
    पर मैंने उसे जकड़ रखा था.
    उसकी आंखों से आंसू बह निकले.

    मैं थोड़ी देर ऐसे ही रुका रहा.

    फिर एक और जोर के धक्के के साथ पूरा लंड मैंने उसकी चूत में पेल दिया.
    उसकी चूत फट चुकी थी और उससे खून आने लगा था जो कि मुझे मेरे लंड पर गर्म महसूस हुआ.

    वह लगभग बेहोश हो चुकी थी.
    मैं ऐसे ही रुक गया और उसे किस करने लगा.

    धीरे-धीरे उसे होश आने लगा और अब वह थोड़ा शांत हो गई थी.
    मैं धीरे-धीरे लंड को अन्दर-बाहर करने लगा.

    वह अपने मुँह से कामुक आवाज़ निकालने लगी थी.

    उसका मीठा दर्द अब मादक सिसकारियों में बदल चुका था और शायद उसे भी अब मज़ा आने लगा था.
    वह धीरे-धीरे ‘अह … उह …’ की आवाज़ें निकालने लगी.

    करीब आधे घंटे तक मस्त चुदाई चली.
    इस बीच में वह दो बार झड़ चुकी थी और अब मैं भी झड़ने वाला था.

    लंड का पानी चुत के अन्दर ना निकले इसलिए मैंने तुरंत अपने लंड को झटके से बाहर निकाल लिया.

    मैं आपको बताना भूल गया कि मेरे लंड का टोपा थोड़ा बड़ा है इसलिए जैसे ही लंड बाहर निकाला, एक पक्क की आवाज़ हुई और उसकी चीख निकल गई!
    वह बोली- अह … शिबु मर गई … ऐसे कोई निकालता है क्या!

    उसे थोड़ा दर्द होने लगा.
    अब तक करीब डेढ़ घंटा बीत गया था तो हम दोनों ने जल्दी-जल्दी अपने कपड़े उठाए और वह कपड़े लेकर अपनी चूत को साफ करने के लिए बाथरूम में चली गई.

    वह कुछ पल बाद बाहर आ गई.
    अब तक मैंने भी अपने कपड़े पहन लिए थे.

    थोड़ी देर में मौसी आ गईं और हम लोग नाश्ता करके निकल गए.
    रास्ते में उसने मुझसे कहा- मुझे चूत में बहुत जलन हो रही है और शायद खून भी आ रहा है.

    मैंने मेडिकल शॉप से पेन किलर खरीद कर उसे दे दिया.
    फिर उसके रूम के पास आकर मैं उसे सड़क पर विदा करके अपने घर को निकल गया.

    उसके बाद तो हम रोज़ रात को सेक्स चैट करने लगे और व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर एक-दूसरे को अपने-अपने अंगों का प्रदर्शन करने लगे.
    वह अलग-अलग रंग व डिज़ाइन की ब्रा पहन कर मुझे फोटो भेजा करती थी और मैं उन फोटोज़ को अपने पास मेमोरी बना कर रख लेता था.

    वह साड़ी वगैरह पहन कर भी अपनी फोटो भेजा करती थी.
    मैं उसे अपनी चूत और गांड में उंगली करने को कहता तो वह मेरी खुशी के लिए दर्द होते हुए भी करती थी.

    उसकी गांड एकदम कुंवारी थी और उसका छेद बहुत छोटा था इसलिए उसे बहुत दर्द होता था.
    फिर भी वह मेरी खुशी के लिए यह सब करती थी.

    एक बार जब मैं उससे नाराज़ हो गया तो उसने मुझे एक वीडियो बनाकर भेजी जिसमें वह टूथब्रश को अपनी गांड में डालकर अन्दर-बाहर कर रही थी.

    गांड में टूथब्रश करने के साथ ही वह बोली- यह सब मैं आपकी खुशी के लिए कर रही हूँ, अब अगर आप हंसे नहीं तो मैं अपनी जान दे दूँगी!
    मैंने उसे माफ़ कर दिया और हम फिर से बात करने लगे.

    फिर कुछ दिनों बाद उसके भाई की बेटी यानि उसकी भतीजी का बर्थडे था.
    तो उसने मुझे अपने घर पर इनवाइट किया.

    उसने मुझे अपने परिवार से कॉलेज फ्रेंड कहकर मिलवाया और फिर मेरे साथ ही वह मार्केट जाकर केक वगैरह और सजावट का सामान लेकर आई.

    मैंने उसकी भतीजी के लिए साइकिल खरीदी गिफ्ट करने के लिए.
    वह फुसफुसाती हुई बोली- वाह फूफा जी! अपनी भतीजी के लिए गिफ्ट खरीद रहे हो!
    मैं भी हंस दिया.

    हम लोग खरीदी करके वापस उसके गांव वाले घर पहुंच गए.
    वहां बहुत से मेहमान आए हुए थे, जिनमें उसके कजिन्स भी थे.

    सबने मेरी खूब खातिरदारी की और मैंने भी साज-सज्जा में भारती की मदद की.

    फिर वह तैयार होने के लिए चली गई और लगभग एक घंटे बाद वह तैयार होकर आई तो मैं उसे देखता ही रह गया.

    उसने गांव के हिसाब से चूड़ीदार कुर्ता और लैगिंग्स पहन रखा था जो कि प्याजी कलर का था और सफेद लैगिंग्स थी.

    मैंने उसे लोगों से नज़रें चुराकर एक फ्लाइंग किस दी.
    उसने भी लोगों से नज़रें चुराते हुए मेरे किस का जवाब दिया.
    अपने होठों को चुम्मा बनाकर मुझे इशारा किया.

    फिर केक कटिंग हुई और मैंने भतीजी को साइकिल दी.
    भारती और मैंने भतीजी के साथ फोटो खिंचाया.

    वह मेरे एकदम पास खड़ी थी तो मैंने मौका देखकर उससे पूछा कि किस रंग की ब्रा-पैंटी पहनी तो उसने धीरे से फुसफुसाते हुए कहा- रेड कलर का सैट!

    मेरा मन हुआ कि अभी उसके कपड़े उतरवा कर उसे रेड कलर के 2 पीस में देखूँ, पर वहां बहुत मेहमान थे तो यह संभव नहीं था.

    हम लोगों ने साथ में खाना खाया और डीजे पर बहुत डांस किया.
    फिर मैं थक कर साइड में खड़ा हो गया.

    तब देखा कि वह एक लड़के के साथ नाच रही थी तो मैंने उसे घूर कर देखा, जिससे वह डर गई और धीरे से एक कान पकड़कर माफी मांगने लगी और मेरे पास आकर खड़ी हो गई.

    मैंने स्माइल की और उसकी मम्मी का डांस देखने लगा.
    उसकी मम्मी की गांड भी बहुत बड़ी थी जो कि वह मटका-मटका कर नाच रही थी.

    तकरीबन रात के 11:00 बजे मैंने उसके पापा से घर जाने की आज्ञा ली तो उन्होंने मुझे जाने से इनकार कर दिया और कहा- बेटा, रात ज्यादा हो गई है, आज रात यहीं रुक जाओ, हमें भी अच्छा लगेगा.
    फिर भारती और भारती के मम्मी-पापा के कहने पर मैं वहीं रुक गया और अपने घर पर कह दिया कि मैं कल सुबह आऊंगा, लेट हो जाने के कारण मैं आज अपने दोस्त के घर रुक गया हूँ.

    मेहमान ज्यादा होने के कारण हम लोग हॉल में सोए.
    मेरे साइड में उसका भाई सोया हुआ था और लेफ्ट साइड में भारती थोड़ी दूरी पर अपना बिस्तर बिछाकर सोई हुई थी.
    उसके साथ उसकी बुआ की लड़की भी सोई हुई थी.

    रात को करीबन 3:00 बजे मेरी नींद खुली, तो मैंने देखा सभी लोग गहरी नींद में सोए हुए थे.
    मैंने धीरे से अपना हाथ भारती की ओर बढ़ाया और उसके कुर्ते को ऊपर उठाते हुए उसकी लैगिंग्स और पैंटी के अन्दर हाथ डाल दिया और उसकी चूत पर चलाने लगा.

    शायद वह जाग गई थी पर कोई रिएक्शन नहीं दे रही थी और मज़ा ले रही थी.
    फिर धीरे-धीरे मैंने एक उंगली उसकी चूत के अन्दर डालकर अन्दर-बाहर करना शुरू कर दिया.

    यह सब मैं उसके भाई पर ध्यान रखते हुए कर रहा था.
    बुआ की लड़की की वजह से ज्यादा रिस्क नहीं कर रही थी, बस मेरे हाथ पर अपना हाथ रखे हुई थी.

    फिर धीरे-धीरे मैंने दूसरी उंगली भी उसकी चूत में डाल दी और यंग गर्ल वेट पुसी के अन्दर-बाहर करने लगा.
    उसने अपनी टांगें थोड़ी फैला ली थी. अब उसकी चूत बहुत गीली हो चुकी थी और पानी छोड़ने लगी.

    फिर मैं उसकी पैंटी से अपना हाथ निकाल लिया और हाथ को ऊपर ले जाकर उसके कुर्ते के गले से अन्दर डालने लगा और उसके दूध सहलाने लगा.

    थोड़ी देर बाद मुझे नींद आने लगी तो मैं अपने हाथ उसके स्तन से हटाकर सो गया.

    सुबह जब मैं उठा तो 8:00 बज चुके थे और सभी लोग उठ चुके थे.
    भारती भी उठ चुकी थी और मेरे लिए चाय लेकर आई थी.

    उसी ने मुझे उठाया और मेरे होंठों पर इधर-उधर देखकर किस कर दी और ‘गुड मॉर्निंग!’ कहा.
    फिर मैं 9:00 बजे उसके घर से निकल गया.