मेरा नाम राहुल है। मैं एक प्राइवेट कंपनी में मैनेजर के पद पर काम करता हूँ। कंपनी का काम ऐसा था कि मुझे अक्सर दूसरे राज्यों में जाना पड़ता। इस बार प्रोजेक्ट के लिए मुझे मेरे राज्य गुजरात से बाहर, मध्य प्रदेश के एक छोटे शहर में 25 दिन रहना पड़ा। मैं अकेला था, होटल में ठहरा हुआ था। दिन भर मीटिंग्स, काम और रात को अकेलेपन में गुजरती।
25 दिन पूरे होने वाले थे। मैंने घर जाने के लिए बस की टिकट करवा ली थी। आखिरी दिन सुबह मैं होटल से चेकआउट करके बस स्टैंड जाने के लिए बाहर निकला। बैग कंधे पर लटकाए, मैं सड़क पर खड़ा था। तभी मेरी नज़र एक शानदार काली BMW पर पड़ी — गुजरात का नंबर प्लेट।
मजाक में मैंने हाथ उठाकर हिचहाइक का इशारा कर दिया। उम्मीद नहीं थी कि रुकेंगी, लेकिन कार धीरे से रुक गई। ड्राइवर साइड की खिड़की नीचे हुई। पीछे की सीट से एक औरत ने झाँककर देखा।
कार के अंदर का माहौल लग्जरी था — सॉफ्ट क्रिम कलर की लेदर सीट्स, वुड फिनिश डैशबोर्ड, एंबिएंट लाइटिंग और हल्की सी महक।
पीछे बैठी औरत ने मुस्कुराते हुए कहा, “कहाँ जाना है भाई?”
मैंने अपनी भाषा (गुजराती मिक्स हिंदी) में जवाब दिया, “दीदी, मैं अहमदाबाद जा रहा हूँ। बस स्टैंड तक लिफ्ट मिल जाए तो अच्छा रहे।”
वो हँस पड़ीं। उनकी हँसी में एक खास आकर्षण था। “आ जाओ… बैठो पीछे। हम भी अहमदाबाद ही जा रहे हैं।”
मैं बैग लेकर पीछे बैठ गया। कार के अंदर ठंडी AC की हवा और हल्का परफ्यूम का नशा था। ड्राइवर आगे था, और वो औरत मेरे बगल में बैठी थीं।
उनका नाम सीमा था। उम्र 41 साल, लेकिन देखने में 34-35 से ज्यादा नहीं लगती थीं। वो काफी हॉट और सेक्सी थीं। लंबाई करीब 5’5″, शरीर अच्छी तरह से मेंटेन किया हुआ — पतली कमर, लेकिन भारी और गोल छातियाँ (36D साइज़ की), जो उनकी हल्की साड़ी के ब्लाउज़ में भी साफ़ उभर रही थीं। उनकी त्वचा गोरी और चमकदार थी, चेहरा नूरानी, आँखें बड़ी-बड़ी और काजल लगी हुईं। होंठ मोटे और लाल, बाल खुले हुए कंधों तक। साड़ी का पल्लू थोड़ा सरका हुआ था, जिससे उनकी गहरी ब्लाउज़ और क्लेवेज की झलक दिख रही थी। कमर में साड़ी की फोल्ड्स से उनकी नाभि की हल्की झलक भी आ रही थी। कुल मिलाकर वो एक mature, confident और बेहद आकर्षक महिला लग रही थीं — वैसी जो देखते ही मन में गर्मी पैदा कर दे।
बातचीत शुरू हुई। मैंने बताया कि मैं प्राइवेट कंपनी में काम करता हूँ और 25 दिन यहाँ प्रोजेक्ट पर था। वो मुस्कुराईं और बोलीं, “अरे वाह, मैं भी अहमदाबाद की ही हूँ। बिजनेस के सिलसिले में आई थी।”
जब उन्होंने सुना कि मैं बस से जाने वाला हूँ, तो तुरंत बोलीं, “बस की टिकट कैंसल कर दो। मेरे साथ चलो। 8 घंटे की ड्राइव है, लेकिन आराम से पहुँच जाएँगे। अकेले बस में क्या मजा?”
मैंने थोड़ा सोचा, फिर मान गया। ड्राइवर को बस स्टैंड पर रोककर मैंने टिकट कैंसल कर दी और वापस कार में आ गया। अब हम तीनों अहमदाबाद की तरफ निकल पड़े।
रास्ते में बातें होती रहीं। सीमा बहुत मिलनसार थीं। उन्होंने अपनी जिंदगी के बारे में बताया — पति बिजनेसमैन हैं, ज्यादातर बाहर रहते हैं, एक बेटा दिल्ली में पढ़ता है। वो खुद कुछ सोशल वर्क और बिजनेस संभालती हैं। उनकी आवाज़ में एक मधुर गहराई थी, और जब वो हँसतीं तो उनकी छातियाँ हल्के से हिलतीं, जो मुझे बार-बार आकर्षित कर रही थीं।
मैंने भी अपनी बातें शेयर कीं। धीरे-धीरे बातें पर्सनल होती गईं। वो मेरी कंपनी, मेरे काम और मेरी लाइफस्टाइल के बारे में पूछ रही थीं। बीच-बीच में उनकी नज़र मेरे चेहरे और शरीर पर रुक जाती। कार की लग्जरी सीट्स पर हम दोनों काफी करीब बैठे थे। उनकी साड़ी की सिल्क मेरे हाथ को छू रही थी।
8 घंटे की ड्राइव में हमने कई बार रुककर चाय-कॉफी पी, खाना खाया। हर बार वो मेरे साथ बहुत सहज और फ्लर्टी तरीके से बात कर रही थीं। उनकी हँसी, उनकी नज़रें और उनका वो mature आकर्षण मुझे खूब भा रहा था।
आखिरकार शाम को हम अहमदाबाद पहुँच गए। उन्होंने ड्राइवर को मेरे घर के पास छोड़ने को कहा। कार रुकने पर वो मुस्कुराईं, अपना मोबाइल निकाला और बोलीं,
“राहुल, नंबर दो… कभी मिलना हो तो कॉन्टैक्ट कर लेंगे।”
मैंने नंबर दिया। उन्होंने अपना नंबर सेव कर लिया और मुझे भी दे दिया। फिर हल्के से मेरे हाथ पर हाथ रखकर बोलीं,
“सुरक्षित पहुँच जाना। और हाँ… अगर कभी फिर से बाहर जाना हो तो बताना, मैं अकेली नहीं रहना पसंद करती।”
उनकी आँखों में एक खास चमक थी। मैं मुस्कुराया, “जी जरूर… थैंक यू सीमा दीदी।”
कार आगे बढ़ गई। मैं घर की तरफ जाते हुए उनके नंबर को देख रहा था और मन में सोच रहा था — ये मुलाकात बस एक लिफ्ट नहीं थी, शायद कुछ और शुरूआत थी…
चार दिन बाद, सुबह 10:30 बजे मेरा फोन बजा। मैसेज था — सीमा का।
“राहुल, गुड मॉर्निंग। कल रात सोच रही थी… तुम्हारे साथ काम करने का मन है। सैलरी तुम्हारी कंपनी से दोगुनी दूँगी। काम हफ्ते में सिर्फ 2 दिन। इंटरेस्ट है तो बताओ।”
मैंने तुरंत रिप्लाई किया — “जी हाँ सीमा दीदी, बिल्कुल इंटरेस्ट है।”
उनका तुरंत रिप्लाई आया — “पर एक शर्त है। मेरे साथ काम करने से पहले तुम्हें फुल बॉडी चेकअप करवाना पड़ेगा। आज ही। मैं गाड़ी लेकर आ रही हूँ। तैयार रहना।”
मुझे थोड़ा अजीब लगा। चेकअप? क्यों? लेकिन सैलरी दोगुनी और सिर्फ 2 दिन का काम सोचकर मैंने “ओके” कर दिया।
आधे घंटे बाद उनकी काली BMW मेरे घर के नीचे आकर रुकी। मैं नीचे उतरा। सीमा कार के पीछे बैठी थीं। आज वो और भी हॉट लग रही थीं — क्रीम कलर की साड़ी, जिसमें उनकी 36D छातियाँ ब्लाउज़ में फँसी हुई थीं। पल्लू थोड़ा सरका हुआ था, गहरी क्लेवेज साफ दिख रही थी। मेकअप परफेक्ट, लिपस्टिक गहरी लाल, आँखों में काजल। उन्होंने मुस्कुराकर कहा, “बैठो राहुल… चलते हैं।”
कार में AC की ठंडी हवा और उनकी परफ्यूम की महक पूरे केबिन में फैली हुई थी। हम अस्पताल पहुँचे — एक प्राइवेट हाई-क्लास हॉस्पिटल। सीमा ने पहले से अपॉइंटमेंट कर रखा था। डॉक्टर ने मुझे अंदर बुलाया।
फुल बॉडी चेकअप शुरू हुआ। ब्लड प्रेशर, ECG, ब्लड टेस्ट, अल्ट्रासाउंड… सब कुछ। आखिर में डॉक्टर ने कहा, “अब प्राइवेट चेकअप। पैंट उतारो।”
मुझे थोड़ा शर्म आ गई, लेकिन मैंने पैंट और अंडरवियर उतार दिया। डॉक्टर ने मेरे लंड को हाथ में लिया, ऊपर-नीचे किया, नोक को देखा, फिर अंडकोष को दबाकर चेक किया। उन्होंने कहा, “सब नॉर्मल है, लेकिन बहुत अच्छी लंबाई और मोटाई है। कोई समस्या नहीं।”
सीमा बाहर इंतज़ार कर रही थीं। जब मैं बाहर निकला तो उन्होंने मुस्कुराकर पूछा, “सब ठीक है ना?” मैंने शरमाते हुए सिर हिलाया। उन्होंने मुझे घर छोड़ दिया और बोलीं, “कल सुबह तक रिपोर्ट आ जाएगी।”
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दूसरे दिन
सुबह 9 बजे मैसेज आया — “चेकअप क्लियर है। तुम्हारा जॉइनिंग आज है। मैं आ रही हूँ, तैयार रहना।”
मैं तैयार होकर नीचे उतरा। BMW फिर आई। सीमा आज ब्लैक साड़ी में थीं — बहुत सेक्सी और पावरफुल लग रही थीं। हम सीधे एक बड़े, लग्जरी सैलून में गए — अहमदाबाद के सबसे हाई-क्लास यूनिसेक्स सैलून में।
सीमा ने मैनेजर से कहा, “इसके दाढ़ी, सिर के बाल, और प्राइवेट पार्ट के सारे बाल क्लीन कर दो। पूरा स्मूद।”
मुझे अंदर ले जाया गया। पहले दाढ़ी शेव की गई, फिर हेयरकट — बहुत स्टाइलिश, साइड से फेड, ऊपर थोड़ा लंबा। उसके बाद प्राइवेट पार्ट का सेशन। एक खास रूम में मुझे नंगा कर दिया गया। दो लड़कियाँ आईं। उन्होंने पहले ट्रिमिंग की, फिर हॉट वैक्सिंग। मेरे लंड और अंडकोष पर गर्म वैक्स लगाया, पट्टी चिपकाई और एक झटके में खींच ली। जलन हुई, लेकिन जब पूरा बाल साफ हो गया तो लंड चमकने लगा। पूरी जाँघें, गांड के आस-पास भी क्लीन किया गया। अब मेरा प्राइवेट एरिया बिल्कुल स्मूद, साफ और नया-नया लग रहा था।
सैलून से निकलकर सीमा मुझे एक बड़े शॉपिंग मॉल ले गईं। उन्होंने खुद मेरे लिए कपड़े चुने — 3 लग्जरी शर्ट, 2 प्रीमियम ट्राउज़र, एक ब्लैक ब्लेज़र, बेल्ट, और सबसे महंगे जूते। फिर एक रोलैक्स जैसा लग्जरी वॉच भी खरीद लिया। सब कुछ उनके पैसे से। वो बार-बार मुझे देखकर मुस्कुरा रही थीं।
“अब तुम बिल्कुल परफेक्ट लग रहे हो राहुल,” उन्होंने मेरे कान के पास फुसफुसाकर कहा।
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फार्महाउस की तरफ
शॉपिंग के बाद हम अहमदाबाद से बाहर निकल पड़े। BMW हाईवे पर तेज़ चल रही थी। करीब 1.5 घंटे बाद हम शहर से काफी दूर एक सुनसान, खूबसूरत जगह पर पहुँचे। एक बड़ा गेट खुला। अंदर एक विशाल फार्महाउस था — 5 एकड़ में फैला, चारों तरफ हरे-भरे बागान, स्विमिंग पूल, प्राइवेट गार्डन और एक बहुत बड़ा मॉडर्न विला।
कार अंदर घुसी। सीमा ने ड्राइवर को छुट्टी दे दी। अब सिर्फ हम दोनों थे। उन्होंने मुझे अंदर ले जाकर पूरे फार्महाउस की घुमाई। लिविंग रूम में बड़ी सोफा, बैडरूम में किंग साइज़ बेड, जकूजी बाथटब, और बालकनी से पूरा फार्म देखने का नज़ारा।
सीमा ने साड़ी का पल्लू ठीक करते हुए मेरी तरफ देखा। उनकी आँखों में एक खास चमक थी। उन्होंने धीरे से कहा,
“राहुल… अब ये तुम्हारा नया ऑफिस है। हफ्ते में सिर्फ 2 दिन। बाकी समय… हम दोनों यहाँ अकेले रहेंगे।”
उन्होंने मेरे नए शर्ट के कॉलर को ठीक किया, फिर मेरे सीने पर हाथ रख दिया। उनकी उँगलियाँ धीरे-धीरे नीचे सरक रही थीं।
फार्महाउस के लिविंग रूम में हल्की गोल्डन लाइट में सीमा मेरे बहुत करीब खड़ी थीं। उनकी काली साड़ी का पल्लू अब लगभग गिरने ही वाला था। उनकी भारी छातियाँ साँस के साथ ऊपर-नीचे हो रही थीं। उन्होंने मेरी शर्ट का आखिरी बटन भी खोल दिया और अपना नरम, गर्म हाथ मेरे नंगे सीने पर रख दिया।
सीमा ने मेरी आँखों में गहरी नज़र डाली और धीरे-धीरे बोलीं,
“राहुल… अब मैं तुम्हें साफ-साफ बता देती हूँ कि तुम्हारा काम क्या होगा।
हफ्ते में सिर्फ 2 दिन तुम्हें मेरे साथ रहना है। ये दो दिन पूरे फार्महाउस में सिर्फ हम दोनों होंगे। कोई और नहीं। इन दो दिनों में तुम्हारा सारा समय मेरी सेवा में होगा। मुझे खुश रखना, मेरी हर इच्छा पूरी करना, मेरे शरीर को संतुष्ट करना — यही तुम्हारा मुख्य काम है।
बाकी 5 दिन तुम पूरी तरह फ्री हो। तुम घर जा सकते हो, अपनी कंपनी का काम कर सकते हो, जहाँ जाना हो जा सकते हो। लेकिन इन 5 दिनों में भी मेरे किसी भी कॉल या मैसेज पर तुम्हें तुरंत आना होगा। समझ गए?”
मैंने सिर हिलाया। मेरा गला सूख रहा था।
सीमा ने मुस्कुराते हुए आगे कहा,
“और हाँ… मुझे तुम्हारे बारे में सब पता है। चेकअप रिपोर्ट मैंने खुद देखी है।
तुम्हारा लंड 11 इंच लंबा और 4 इंच मोटा है। डॉक्टर ने लिखा है कि ये बहुत रेयर और पावरफुल साइज़ है।
और सबसे बड़ी बात — तुम अभी तक कुंवारे हो। किसी लड़की को कभी छुआ तक नहीं है।”
सीमा की आँखों में एक शिकारी वाली चमक आ गई। उन्होंने मेरी छाती पर हाथ फेरते हुए धीरे से कहा,
“मुझे यही चाहिए था राहुल।
मैं 41 साल की हूँ। मेरी चूत बहुत गहरी और भूखी है। मैं अभी तक कुंवारी हूँ। कभी किसी लंड ने मुझे पूरी तरह नहीं भरा है। मुझे एक ऐसे ताज़ा, कुंवारे, 11 इंच लंबे और 4 इंच मोटे लंड की जरूरत थी जो मेरी चूत को पहली बार पूरी तरह भर सके, उसे फैला सके और बार-बार चोदकर मुझे संतुष्ट कर सके।
तुम बिल्कुल परफेक्ट हो।”
सीमा ने अब अपना दूसरा हाथ भी मेरे शरीर पर रख दिया। एक हाथ मेरी छाती पर, दूसरा धीरे-धीरे मेरी बेल्ट की तरफ सरक रहा था। उनकी साँसें मेरे चेहरे पर गर्म हो रही थीं।
“इन 2 दिनों में तुम सिर्फ मेरे हो।
मैं जो कहूँगी वो करना है।
मुझे चूमना है, मेरी छातियाँ चूसना है, मेरी चूत चाटना है, मुझे अपनी 11 इंच की मोटी लंड से बार-बार चोदना है। जितनी बार मैं चाहूँ, उतनी बार।
और याद रखना — ये राज कभी बाहर नहीं जाना चाहिए। अगर किसी को भी पता चला कि तुम मेरे साथ ये सब करते हो, तो तुम्हारी नौकरी, पैसे, इज्जत… सब खत्म।”
सीमा ने मेरी बेल्ट का बकसुआ खोल दिया। उनकी उँगलियाँ अब मेरी पैंट की जिप पर थीं। उन्होंने बहुत धीरे से जिप नीचे खींची और मेरी पैंट को हल्का सा ढीला कर दिया।
“अब बताओ राहुल…”
उनकी आवाज़ और भी सेक्सी हो गई थी।
“क्या तुम तैयार हो?
अपनी 11 इंच लंबी और 4 इंच मोटी कुंवारी लंड से मुझे खुश करने के लिए?
मेरी 41 साल की भूखी चूत को पहली बार भरने के लिए?
ये दो दिन मेरे लिए समर्पित करने के लिए?”
सीमा ने मेरे होंठों के सिर्फ एक इंच दूर अपना मुँह ले जाया। उनकी गरम साँस मेरे होंठों को छू रही थी। उनकी भारी छातियाँ अब मेरी छाती से पूरी तरह दब रही थीं।
“हाँ बोलो राहुल…
बोलो कि तुम मेरे हो… इन दो दिनों के लिए… पूरी तरह मेरे।”
उनकी उँगलियाँ अब मेरी अंडरवियर के अंदर घुसने को तैयार थीं। पूरा फार्महाउस सन्नाटे में था। सिर्फ उनकी सेक्सी आवाज़ और मेरी तेज़ होती साँसें गूँज रही थीं।
राहुल ने सीमा की आँखों में गहरी नज़र डाली। उसकी साँसें तेज़ हो रही थीं, लेकिन उसने खुद को संभाला। फार्महाउस का लिविंग रूम अब और भी सन्नाटे में था। सिर्फ उनकी साँसों की आवाज़ और बाहर हवा में पेड़ों की सरसराहट सुनाई दे रही थी।
राहुल ने धीरे से सीमा का हाथ पकड़ लिया और अपनी तरफ खींचा। उसकी आवाज़ दृढ़ लेकिन सम्मान भरी थी।
“सीमा जी… मैं तैयार हूँ। लेकिन कुछ शर्तें हैं। इन्हें मान लो तो मैं पूरी तरह आपका हूँ। ये शर्तें इसलिए ताकि बाद में कोई समस्या न आए।
पहली शर्त — आपका पति या कोई और इस राज़ को कभी नहीं जानना चाहिए। अगर कभी भी उन्हें शक हुआ या पता चला, तो मैं तुरंत सब छोड़कर चला जाऊँगा। मुझे कोई परेशानी नहीं चाहिए।
दूसरी शर्त — मैं कभी भी बिना कंडोम के सेक्स नहीं करूँगा। चाहे कितनी भी उत्तेजना हो, कंडोम जरूरी है।
तीसरी शर्त — जब हम सेक्स करेंगे तो मुझे ये बिल्कुल जॉब जैसा नहीं लगना चाहिए। मैं आपको खुश करूँगा, लेकिन ये हम दोनों के बीच का प्यार और भूख होगा, न कि कोई ड्यूटी।
चौथी शर्त — एक बार हम शुरू हो जाएँ तो कोई भी बात हो, कोई भी हालत हो, आप मना नहीं करेंगी। जितनी देर तक मैं चाहूँगा, उतनी देर तक चलेगा।
पाँचवी शर्त — हम कभी भी फोटो या वीडियो नहीं बनाएँगे। न आप, न मैं। कोई रिकॉर्डिंग नहीं।
छठी शर्त — अगर कभी आपकी कोई लिमिट हो या कोई बात मुझे पसंद न आए तो मैं बता सकता हूँ और आप उसे मानेंगी।”
राहुल ने सारी शर्तें एक-एक करके बताईं। उसकी आवाज़ में कोई हिचकिचाहट नहीं थी।
सीमा कुछ पल चुप रहीं। फिर उन्होंने धीरे से मुस्कुराकर राहुल की छाती पर हाथ फेरा और बोलीं,
“राहुल… तुम बहुत समझदार हो। ये सारी शर्तें मैं पूरा मानती हूँ।
मुझे कोई दिक्कत नहीं।
अगर मैं इनमें से एक भी शर्त तोड़ूँगी तो वो मेरी सबसे बड़ी गलती होगी।
तुम मेरे साथ इतने खुलकर आ रहे हो, तो मैं भी तुम्हारा पूरा सम्मान करूँगी।
अब कोई शर्त बाकी नहीं है।”
सीमा ने राहुल की शर्ट पूरी तरह खोल दी। अब राहुल का ऊपरी बदन नंगा था। उन्होंने खुद पीछे हटकर अपनी साड़ी का पल्लू पूरी तरह गिरा दिया। ब्लाउज़ का हुक खोलना शुरू किया। एक-एक हुक खुलता गया। उनकी भारी, दूधिया 36D छातियाँ ब्रा में कैद थीं। आखिरी हुक खुलते ही ब्रा गिर गई। दोनों बड़े-बड़े, भरे हुए स्तन बाहर आ गए। ब्राउन निप्पल्स पहले से ही सख्त हो चुके थे।
सीमा ने साड़ी की नाड़ी खींची। साड़ी धीरे-धीरे फिसलकर उनके पैरों के पास गिर गई। अब वो सिर्फ पतली सी काली पैंटी में थीं। उनकी गोरी कमर, गोल नाभि और मोटी जाँघें पूरी तरह नंगी थीं। पैंटी पर हल्का गीला धब्बा दिख रहा था।
सीमा ने पैंटी भी उतार दी। अब वो पूरी तरह नंगी खड़ी थीं। उनकी चूत पर हल्के-हल्के बाल थे, लेकिन फाँकें थोड़ी खुली हुईं और गीली चमक रही थीं। 41 साल की उम्र में भी उनका बदन इतना हॉट और टाइट था कि राहुल का लंड पैंट में तन गया।
राहुल आगे बढ़ा। उसने सीमा को कसकर गले लगा लिया। दोनों नंगी छाती एक-दूसरे से दब गईं। राहुल ने पहले उनके होंठों पर गहरा किस किया। किस धीरे-धीरे शुरू हुआ, फिर तेज़ होता गया। उनकी जीभें एक-दूसरे में घुलने लगीं। सीमा ने राहुल की गर्दन में हाथ डालकर किस और गहरा कर दिया। किस के दौरान उनकी साँसें एक-दूसरे के मुँह में मिल रही थीं।
किस खत्म होने पर राहुल ने सीमा को सोफे पर लिटा दिया। उसने झुककर उनकी एक छाती को दोनों हाथों से थाम लिया। नरम, भारी मांस हाथ में दब गया। उसने ब्राउन निप्पल को मुँह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगा। जीभ से निप्पल को चारों तरफ घुमाया, हल्के से काटा। दूसरी छाती को हाथ से मसलता रहा। सीमा की आहें निकलने लगीं — “आह्ह… राहुल… और जोर से चूसो… उफ्फ… कितना अच्छा लग रहा है…”
राहुल ने दोनों छातियों को बारी-बारी चूसा, चाटा, नोचा। फिर धीरे-धीरे नीचे उतरता गया। उसने उनकी नाभि में जीभ डाली, फिर कमर चूमता हुआ उनकी जाँघों के बीच पहुँच गया।
सीमा की जाँघें अपने आप फैल गईं। राहुल ने अपनी जीभ उनकी चूत की फाँक पर रखी और धीरे-धीरे चाटना शुरू किया। पहले क्लिटोरिस को घुमाया, फिर पूरी फाँक चाटी। सीमा की चूत से गर्म रस निकल रहा था। राहुल ने जीभ अंदर डालकर चूसना शुरू किया। सीमा की कमर ऊपर-नीचे हो रही थी।
“आह्ह्ह… राहुल… तुम्हारी जीभ… बहुत गहरी… हाँ… चाटो… मेरी चूत चाटो… उफ्फ… मैं पागल हो रही हूँ…”
राहुल ने लगातार 8-10 मिनट तक उनकी चूत चाटी। कभी तेज़, कभी धीरे। कभी सिर्फ क्लिटोरिस चूसता, कभी पूरी चूत को मुँह में लेकर चूसता। सीमा की जाँघें काँप रही थीं। उनके हाथ राहुल के बालों में थे और वो उसका सिर चूत पर दबा रही थीं।
काफी देर चाटने के बाद राहुल उठा। उसने अपनी बाकी कपड़े भी उतार दिए। अब वो पूरी तरह नंगा था। उसका 11 इंच लंबा और 4 इंच मोटा लंड पूरी तरह खड़ा था। नोक से पहले ही पारदर्शी पानी टपक रहा था। लंड इतना मोटा और लंबा था कि सीमा की आँखें फैल गईं।
राहुल ने सीमा की आँखों में देखा और धीमी, दृढ़ आवाज़ में कहा,
“सीमा जी… अब तुम मेरी 11 इंच की लंड को मुँह में लो।
पूरी तरह।
जितना हो सके, गहरी तक ले जाओ।”
सीमा ने राहुल की आँखों में देखा। उनकी साँसें भारी हो चुकी थीं। उन्होंने धीरे से घुटनों के बल बैठकर राहुल के सामने आ गईं। राहुल का 11 इंच लंबा और 4 इंच मोटा लंड उनके चेहरे के ठीक सामने खड़ा था — सख्त, नसों से भरा, नोक से पहले ही पारदर्शी पानी टपक रहा था।
सीमा ने पहले अपनी जीभ बाहर निकाली और लंड की नोक को हल्के से चाटा। फिर उन्होंने मुँह खोला और धीरे-धीरे लंड का सिरा मुँह में ले लिया। पहले सिर्फ़ 4 इंच तक ही ले पाईं। उनका मुँह पहले से ही भर गया था। लंड की मोटाई उनके होंठों को पूरी तरह फैला रही थी।
“मम्म… राहुल… इतना मोटा… और लंबा…” उन्होंने लंड को मुँह से निकालकर फुसफुसाया, फिर फिर से मुँह में ले लिया।
राहुल ने धीरे से सीमा के बाल पकड़ लिए। उसकी आँखों में भूख थी। उसने हल्का सा दबाव डाला और बोला, “और ले लो सीमा जी… पूरा लेने की कोशिश करो।”
सीमा ने आँखें बंद कीं और गला खोलकर आगे बढ़ीं। लंड के अगले 2 इंच और जबरदस्ती उनके गले में घुस गए। कुल 6 इंच लंड अब उनके मुँह के अंदर था। उनका गला पूरी तरह भर गया। आँखों से पानी आने लगा। लेकिन वो रुकी नहीं।
राहुल ने अब और जोर से बाल पकड़े और हल्का-हल्का धक्का देने लगा। “हाँ… इसी तरह… चूसो… गहरी तक ले जाओ…”
सीमा अब पूरी तरह लग गईं। उन्होंने लंड को मुँह में लेकर जोर-जोर से चूसना शुरू किया। उनकी जीभ लंड के नीचे वाले हिस्से पर घूम रही थी। कभी वो सिरा चूसतीं, कभी पूरा गला देतीं। “ग्लक… ग्लक… ग्लक…” की आवाज़ फार्महाउस के लिविंग रूम में गूँजने लगी। उनके मुँह से सलाइवा लंड पर बह रहा था, लंड पूरी तरह चमक रहा था।
राहुल ने 20 मिनट तक लगातार चुसवाया।
पहले 5 मिनट में सीमा धीरे-धीरे चूस रही थीं — लंड को मुँह में रखकर जीभ से घुमा रही थीं, नोक को चूस रही थीं।
10 मिनट बाद राहुल ने उनके बाल पकड़कर गति तेज़ कर दी। अब वो सीमा के मुँह में धीरे-धीरे लंड को अंदर-बाहर कर रहा था। 6 इंच तक हर बार गला दे रहा था।
15 मिनट बाद सीमा की हालत खराब होने लगी। उनकी आँखों से आँसू बह रहे थे। साँस लेने में तकलीफ हो रही थी। गला बार-बार सिकुड़ रहा था। उनके पति का लंड बहुत छोटा था — सिर्फ़ 4 इंच का और पतला। आज पहली बार इतना मोटा और लंबा लंड उनके गले तक जा रहा था।
सीमा के मुँह से अब सिर्फ़ “ग्लक… ग्लक… उर्र्र… आह्ह…” जैसी आवाज़ें निकल रही थीं। उनका चेहरा लाल हो गया था। सलाइवा उनके ठोड़ी से लेकर छातियों तक बह रहा था। लेकिन वो रुक नहीं रही थीं। वो पूरी कोशिश कर रही थीं कि राहुल को मजा आए।
20 मिनट पूरे होने पर राहुल ने सीमा के बाल छोड़ दिए। लंड को उनके मुँह से बाहर निकाला। लंड अब और भी सख्त और चमकदार हो गया था — पूरा सलाइवा से भीगा हुआ।
राहुल ने सीमा का चेहरा ऊपर उठाया। उनकी आँखें नम थीं, साँसें फूल रही थीं। राहुल ने मुस्कुराते हुए कहा,
“सीमा जी… अब काफी हो गया।
अब कंडोम लगाओ।
मैं बिना कंडोम के कभी नहीं करूँगा।”
सीमा ने हाँ में सिर हिलाया। वो अभी भी साँस संभाल रही थीं। उन्होंने पास पड़ी अपनी हैंडबैग से एक छोटा सा गोल्डन पैकेट निकाला। पैकेट पर लिखा था — Trojan Magnum XL (दुनिया का सबसे महंगा और बड़े साइज़ के लिए बना प्रीमियम कंडोम — अमेरिकन, बहुत पतला लेकिन बेहद मजबूत, 11 इंच और 4 इंच मोटे लंड के लिए खास तौर पर डिज़ाइन किया गया)।
राहुल ने उन्हें देखकर कहा, “खुद लगाओ… अपने हाथों से…”
सीमा ने पैकेट को फाड़ा। अंदर से बहुत पतला, पारदर्शी, गोल्डन रिंग वाला कंडोम निकला। उन्होंने राहुल के सामने घुटनों के बल बैठकर लंड को एक हाथ में पकड़ा। लंड अभी भी 11 इंच का खड़ा था। उन्होंने कंडोम की रिंग को लंड की नोक पर रखा और धीरे-धीरे नीचे की तरफ खींचना शुरू किया।
कंडोम धीरे-धीरे लंड पर चढ़ने लगा। 4 इंच मोटाई की वजह से कंडोम पूरी तरह तन गया। सीमा को दोनों हाथों से खींचना पड़ रहा था। कंडोम आखिरकार जड़ तक पहुँच गया। अब राहुल का पूरा 11 इंच लंबा और 4 इंच मोटा लंड Trojan Magnum XL कंडोम में पूरी तरह लिपटा हुआ था — चमकदार, सख्त और तैयार।
सीमा ने लंड को हल्के से सहलाया और राहुल की तरफ देखा। उनकी आँखों में अब और भी ज्यादा भूख थी।
सीमा का चेहरा एकदम सफेद पड़ गया था। राहुल के 11 इंच लंबे और 4 इंच मोटे लंड को देखकर, जो Trojan Magnum XL कंडोम में चमक रहा था, उनकी आँखों में पछतावा साफ़ दिखने लगा। उन्होंने जो सारी शर्तें हँसते-हँसते मान ली थीं, अब वही शर्तें उनके गले की हड्डी बन गई थीं।
सीमा ने दोनों हाथों से अपना मुँह ढँक लिया। उनकी साँसें फूल रही थीं। आँखों से आँसू बहने लगे। वो धीरे-धीरे पीछे हटीं और सोफे पर बैठ गईं। उनकी नंगी छातियाँ तेज़-तेज़ ऊपर-नीचे हो रही थीं।
“राहुल… मैंने… मैंने बहुत बड़ी गलती कर दी…” उनकी आवाज़ काँप रही थी। “मैंने सारी शर्तें इतनी आसानी से मान लीं… मुझे नहीं पता था कि तुम्हारा… इतना बड़ा और मोटा होगा… मेरे पति का… सिर्फ़ 4 इंच का पतला-सा है… मैंने सोचा था कि मैं संभाल लूँगी… लेकिन अब… अब मुझे डर लग रहा है…”
सीमा रोने लगीं। पहले हल्के-हल्के सुबकियाँ, फिर ज़ोर-ज़ोर से रोना। उनके गालों पर आँसू बह रहे थे। वो दोनों हाथों से अपना चेहरा छुपा रही थीं। “मुझे माफ़ कर दो राहुल… मैंने सोचा नहीं था कि हालत इतनी खराब हो जाएगी… मैं… मैं बहुत भारी महसूस कर रही हूँ… मेरी चूत… इतनी टाइट और कुंवारी है… तुम्हारा लंड देखकर ही मुझे लग रहा है कि ये मुझे फाड़ देगा…”
राहुल ने शांत लेकिन दृढ़ स्वर में पूछा,
“सीमा जी… जब आपका पति है, तो मुझे क्यों रखा? आपने खुद कहा था ना कि ‘तेरी मर्ज़ी है, वो कर’… फिर अब क्यों रो रही हैं?”
सीमा रोते-रोते बोलीं, “हाँ… मैंने कहा था… लेकिन मैंने कभी सोचा नहीं था कि तुम इतने बड़े होगे… मेरे पति ने कभी मुझे पूरी तरह नहीं भरा… मैंने सोचा था कि मैं मजा ले लूँगी… लेकिन अब… अब मुझे बहुत डर लग रहा है… राहुल… प्लीज…”
राहुल ने सीमा को दोनों कंधों से पकड़ा और धीरे से सोफे पर लिटा दिया। उनकी नंगी जाँघें अपने आप थोड़ी फैल गईं। राहुल उनके ऊपर आ गया। उसका 11 इंच का मोटा लंड कंडोम में लिपटा हुआ, सीमा की चूत की फाँक पर टिका हुआ था।
राहुल ने बहुत धीरे से पहले 2 इंच अंदर डाला।
सीमा की आँखें फट गईं। “आह्ह्ह… राहुल… धीरे… बस… बस इतना ही…” उनकी चूत की दीवारें पहले ही तन गईं।
राहुल ने और थोड़ा दबाव डाला। अब 3 इंच अंदर चला गया।
सीमा की कमर ऊपर उठ गई। “उफ्फ… नहीं… 3 इंच ही काफी है… और मत डालो…”
राहुल रुका नहीं। उसने धीरे-धीरे और दबाया। 4 इंच अंदर घुस गया।
सीमा अब ज़ोर-ज़ोर से मना करने लगीं। उनके हाथ राहुल की छाती पर थे, उसे पीछे धकेलने की कोशिश कर रही थीं। “राहुल… बस… बस इतना ही डालना है… 4 इंच ही काफी है… और मत डालो… प्लीज… मेरी चूत फट जाएगी…”
लेकिन राहुल ने अब गति बढ़ा दी। उसने कूल्हों को थोड़ा और आगे धकेला। लंड 5 इंच तक चला गया।
सीमा की चीख निकल गई। “आआआह्ह्ह्ह… नहीं… नहीं… बहुत दर्द हो रहा है… बहार निकालो… बहार निकालो राहुल… प्लीज… मैं सह नहीं पा रही…”
राहुल ने और थोड़ा और अंदर डाला। अब 6 इंच अंदर था।
सीमा पूरी तरह चीखने लगीं। उनके आँसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। वो रो रही थीं, चीख रही थीं, हाथ-पैर पटक रही थीं। “बाहर निकालो… बाहर निकालो… आह्ह्ह… मेरी चूत फट रही है… राहुल… बहुत बड़ा है… मैं मर जाऊँगी… बहार निकालो… प्लीज… मैंने गलती कर दी… मैंने सारी शर्तें मान ली थीं… लेकिन ये… ये बहुत ज्यादा है…”
सीमा की चूत की दीवारें लंड को कसकर जकड़ रही थीं। उनका पूरा शरीर काँप रहा था। आँखों से आँसू की धार बह रही थी। वो बार-बार चीख रही थीं — “बाहर निकालो… बाहर निकालो… राहुल… मैं बर्दाश्त नहीं कर पा रही…”
राहुल का लंड अभी भी आधा से भी कम अंदर था, लेकिन सीमा की हालत पूरी तरह बिगड़ चुकी थी। वो रो-रोकर गिड़गिड़ा रही थीं, हाथ से राहुल को पीछे धकेलने की कोशिश कर रही थीं, लेकिन राहुल ऊपर से मजबूती से उन्हें दबाए हुए था।
सीमा की चीखें फार्महाउस के खाली कमरे में गूँज रही थीं। “बाहर निकालो… प्लीज… मैं बहुत रो रही हूँ… बहार निकालो राहुल…”
राहुल को अच्छी तरह पता था कि ऐसी नौकरी और कोई नहीं दे सकता। इतनी ऊँची सैलरी, लग्जरी फार्महाउस, सिर्फ हफ्ते में 2 दिन काम और बाकी 5 दिन छुट्टी — ये सब छोड़ना उसके बस की बात नहीं थी। उसने मन में फैसला कर लिया कि नौकरी किसी भी हाल में रखनी है।
सीमा अभी भी रो रही थीं। उनकी चीखें कम नहीं हुई थीं। राहुल ने धीरे से अपना 11 इंच लंबा और 4 इंच मोटा लंड उनकी चूत से बाहर निकाल लिया। लंड कंडोम में पूरी तरह भीगा हुआ था। सीमा की चूत अब थोड़ी लाल और सूजी हुई दिख रही थी। वो राहत की साँस लेते हुए रो-रोकर बोलीं, “थैंक यू राहुल… थैंक यू… बहुत दर्द हो रहा था…”
राहुल ने सीमा को कुछ पल आराम करने दिया। वो उनके बगल में लेट गया। लेकिन उसका दिमाग कुछ और ही सोच रहा था। उसने चुपके से अपना मोबाइल उठाया। सीमा आँखें बंद करके रो रही थीं और कुछ समझ नहीं पा रही थीं। राहुल ने फटाफट 3-4 फोटो खींच लीं — सीमा पूरी तरह नंगी, आँसू भरी आँखें, सूजी हुई चूत, छातियाँ फैली हुईं, बाल बिखरे हुए। फोटो में साफ़ दिख रहा था कि वो किस हालत में हैं। राहुल ने फटाफट फोटो गैलरी में सेव कर लीं और मोबाइल साइलेंट करके रख दिया। अब उसके पास सबूत था।
थोड़ी देर बाद राहुल ने सीमा को फिर से गर्म करना शुरू किया। उसने बहुत प्यार से उनके गालों पर हाथ फेरा, आँसू पोंछे और धीरे से उनके होंठों पर किस किया। “सीमा जी… शांत हो जाओ… मैं बहुत धीरे-धीरे करूँगा… आप जैसा कहोगी वैसा ही करूँगा…”
सीमा अभी भी काँप रही थीं, लेकिन राहुल की मुलायम आवाज़ और स्पर्श से थोड़ी शांत हुईं। राहुल ने उनकी छातियों को बहुत नरम हाथों से सहलाना शुरू किया। उँगलियों से निप्पल्स को हल्के-हल्के घुमाया। फिर झुककर एक निप्पल को मुँह में ले लिया और बहुत धीरे-धीरे चूसने लगा। दूसरी छाती को हाथ से मसलता रहा। सीमा की साँसें फिर से भारी होने लगीं। “राहुल… धीरे… बहुत डर लग रहा है…”
राहुल ने उनकी जाँघों को धीरे से अलग किया। उसने अपनी जीभ से उनकी चूत की फाँक को बहुत हल्के-हल्के चाटना शुरू किया। सिर्फ़ क्लिटोरिस पर जीभ घुमाता, कभी पूरी फाँक चाटता। सीमा की कमर हल्की-हल्की ऊपर उठने लगी। वो धीरे-धीरे फिर से गर्म होने लगीं। “आह्ह… राहुल… धीरे… हाँ… यही… बहुत अच्छा लग रहा है…”
करीब 15-20 मिनट तक राहुल ने उन्हें चाटा, चूमा और सहलाया। सीमा की चूत अब फिर से गीली होने लगी थी।
सीमा ने काँपते हुए कहा, “राहुल… अब… बहुत धीरे-धीरे… सिर्फ़ 3 इंच ही डालना… उससे ज्यादा नहीं… प्लीज…”
राहुल ने सिर हिलाया। उसने Trojan Magnum XL कंडोम फिर से चेक किया और सीमा के ऊपर आ गया। लंड की नोक को उनकी चूत की फाँक पर रखा। बहुत धीरे-धीरे, बिना किसी झटके के 3 इंच अंदर डाल दिया।
सीमा की आँखें बंद हो गईं। “आह्ह… बस… बस इतना ही… और मत डालना… हाँ… यही ठीक है…”
राहुल रुका नहीं। वो 3 इंच ही अंदर रखकर बहुत धीमी गति से अंदर-बाहर करने लगा। हर धक्का बहुत आहिस्ता था। लंड की मोटाई अभी भी उनकी चूत को फैला रही थी, लेकिन 3 इंच की वजह से दर्द कम था। सीमा की आहें अब दर्द वाली नहीं, बल्कि थोड़ी सुख वाली निकलने लगीं। “हाँ… राहुल… धीरे… इसी तरह… आह्ह…”
राहुल ने पूरे 45 मिनट तक इसी धीमी, आहिस्ता गति से उन्हें चोदा। कभी-कभी वो रुककर उनकी छातियाँ चूसता, कभी उनके होंठ चूमता। बीच-बीच में सीमा खुद कह रही थीं, “और धीरे… 3 इंच ही रखना… हाँ… अच्छा लग रहा है…”
45 मिनट पूरे होने पर राहुल की रफ्तार थोड़ी बढ़ी। उसने सीमा की कमर पकड़ ली और आखिरी कुछ धक्के दिए। फिर उसका पूरा शरीर तन गया। कंडोम के अंदर गर्म, गाढ़ा वीर्य निकलने लगा। राहुल ने लंबी साँस ली और सीमा के अंदर ही रहते हुए झड़ गया।
सीमा भी काँप रही थीं। उनकी आँखें बंद थीं और वो हल्के-हल्के रो-रोकर साँस ले रही थीं।
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