अध्याय 1: सुहागरात की परंपरा – जब दुल्हन की माँ भी मजबूर हुई
रात के ठीक 11:40 बज चुके थे। मास्टर बेडरूम में सिर्फ हल्की लाल रोशनी जल रही थी। गुलाब की ताज़ा पंखुड़ियाँ बेड पर बिखरी हुई थीं। हवा में अगरबत्ती और गुलाब की महक घुली हुई थी।
रिया (22 साल, पूरी तरह कुँवारी दुल्हन) लाल लहंगे में घूंघट निकाले बेड पर बैठी थी। उसकी सांसें तेज चल रही थीं, हाथ कांप रहे थे। उसकी माँ सुधा (46 साल) बेटी का हाथ थामे बगल में बैठी थीं। अर्जुन (28 साल) कुर्ता-पजामा में खड़ा था, उसकी आँखों में भूख साफ झलक रही थी।
अर्जुन ने पहले रिया का घूंघट हटाया। रिया शरमा कर सिर झुका ली। अर्जुन ने रिया के होंठों को अपने होंठों से छुआ, धीरे-धीरे किस करना शुरू किया। उसकी जीभ रिया के मुंह में घुस गई। रिया ने मुंह हटाने की कोशिश की।
“उम्म्म… नहीं… अर्जुन जी… शरम आ रही है… मम्मी के सामने… प्लीज… छोड़ दीजिए…” रिया ने नखरा दिखाते हुए कहा।
अर्जुन ने रिया की साड़ी की पल्लू धीरे-धीरे खींची। सुधा माँ ने खुद बेटी की ब्लाउज के हुक खोले। रिया की गोरी, नाजुक ब्रा बाहर आई। अर्जुन ने ब्रा का हुक खोला। रिया के छोटे-छोटे, गुलाबी निप्पल वाले स्तन बाहर आ गए। अर्जुन ने एक स्तन को हाथ में लेकर मसलना शुरू किया और निप्पल को चूसने लगा।
“आह्ह… नहीं… अर्जुन जी… बहुत शरम आ रही है… मम्मी देख रही हैं… प्लीज… छोड़ दीजिए… आह्ह…” रिया ने कमर हिलाकर नखरा किया।
अर्जुन ने रिया की साड़ी और पेटीकोट भी खोल दिया। अब रिया सिर्फ पैंटी में थी। उसकी टाइट, पूरी तरह बाल-रहित, गुलाबी चूत पैंटी के ऊपर से साफ दिख रही थी। अर्जुन ने खुद का कुर्ता और पजामा उतार दिया।
उसका 10 इंच लंबा और 4 इंच मोटा लंड बाहर निकला — काला, मोटा, नसें उभरी हुईं, सिर पर मोटा फोड़ा चमक रहा था। रिया ने देखकर सिहर उठी।
“नहीं… ये… ये बहुत बड़ा है… मैं नहीं ले पाऊंगी… मम्मी… प्लीज रोकिए… मैं डर रही हूँ…” रिया ने रोते हुए कहा।
सुधा माँ ने बेटी को चुप कराया, “बेटी… परंपरा है… सह ले… मैं हूँ ना…”
अर्जुन ने रिया को बेड पर लिटा दिया। उसने रिया की पैंटी भी धीरे-धीरे उतार दी। अब रिया पूरी नंगी थी। अर्जुन ने रिया के होंठों को फिर से चूमा, जीभ अंदर डाली। एक हाथ से रिया की चूत पर उंगली फेरनी शुरू की।
“आह्ह… नहीं… वहाँ मत छुओ… आह्ह… गीली हो रही हूँ… शरम आ रही है… अर्जुन जी… प्लीज… धीरे…” रिया नखरे दिखा रही थी, कमर हिला रही थी।
अर्जुन ने कंडोम का पैकेट खोला। लंड पर कंडोम चढ़ाया। फिर लुब्रिकेंट की बोतल उठाई और खूब सारा लुब्रिकेंट लंड पर और रिया की चूत पर लगाया।
अर्जुन ने रिया की टांगें फैला दीं। लंड का मोटा, गर्म सिर रिया की चूत के होंठों पर रख दिया। रिया कांप उठी।
“नहीं… अर्जुन जी… प्लीज… अभी मत… मैं तैयार नहीं हूँ… बहुत डर लग रहा है… मम्मी… बचाओ…” रिया ने कमर पीछे खींचने की कोशिश की।
अर्जुन ने धीरे-धीरे दबाना शुरू किया।
सिर्फ 1 इंच अंदर गया।
रिया की आँखें फट गईं।
“आआह्ह… दर्द… बहुत जलन हो रही है… निकालिए… प्लीज… सिर्फ सिर ही बहुत मोटा है… आह्ह… मेरी चूत फट रही है…” रिया रो पड़ी।
अर्जुन रुका नहीं। उसने थोड़ा और दबाया। अब 3 इंच अंदर चला गया।
रिया जोर से चीख पड़ी।
“आआआह्ह्ह… नहीं… 3 इंच भी नहीं… बहुत दर्द… मैं रो रही हूँ… अर्जुन जी… प्लीज रुक जाइए… मेरी चूत चीर दी… आह्ह… और मत दबाइए…”
रिया के आंसू बहने लगे। वह बार-बार कमर हिला रही थी, नखरे कर रही थी, “मम्मी… प्लीज… रोकिए… मैं सह नहीं पा रही… बहुत मोटा… जलन हो रही है…”
अर्जुन ने रिया के होंठों को फिर से चूस लिया और धीरे-धीरे और दबाने लगा।
अब 4 इंच… 5 इंच…
रिया सिसक रही थी।
“आह्ह… नहीं… आधा भी नहीं… पेट फाड़ रहा है… बहुत गहरा जा रहा है… प्लीज… बस… मैं कुँवारी हूँ… आआह्ह… और मत घुसाइए…”
पहले राउंड में पूरा लंड नहीं घुसा। सिर्फ 5 इंच (आधा) ही अंदर गया। रिया की चूत पूरी तरह फैल गई थी। पेट पर हल्का उभार दिख रहा था। अर्जुन ने धीरे-धीरे हिलाना शुरू किया। हर छोटे-छोटे धक्के पर रिया चीख रही थी।
“आह्ह… नहीं… जोर से मत… आह्ह… बहुत दर्द… मैं झड़ रही हूँ… प्लीज… निकालिए…”
पहला राउंड पूरा होने में 35 मिनट लगे। रिया की चूत लाल और सूजी हुई थी। वह रो-रोकर थक गई थी।
दूसरा राउंड शुरू हुआ। इस बार अर्जुन थोड़ा तेज हुआ, लेकिन फिर भी पूरा लंड नहीं घुसा। सिर्फ 6 इंच तक ही गया। रिया लगातार नखरे कर रही थी, “बस… काफी हो गया… मैं और नहीं… आह्ह… मेरी चूत फट गई… प्लीज रुक जाइए…”
दूसरे राउंड के बाद रिया लगभग बेहोश हो गई।
अर्जुन ने लंड बाहर निकाला। कंडोम में वीर्य भरा हुआ था। उसने तीसरा कंडोम खोला और बोला,
“अब मैं गांड लूंगा।”
रिया डर गई, “नहीं… गांड में बिल्कुल नहीं… वहाँ बहुत टाइट है… मैं मर जाऊंगी… प्लीज… मम्मी… मना करो…”
अर्जुन जिद पर अड़ा था।
सुधा माँ ने रिया को देखा और बोली, “बेटी… परंपरा है… गांड भी देनी पड़ेगी… सह ले…”
रिया गुस्से में बोली, “मेरे से नहीं होगा… जो ऐसा ही है तो तू ही मरवा ले अपनी गांड… मैं नहीं करूंगी…”
सुधा माँ ने तुरंत मना किया, “रिया… चुप… ऐसी बात मत बोल… ये गलत है…”
अर्जुन ने गुस्से से कहा, “आज मेरी सुहागरात है… मैं क्या सो जाऊं? परंपरा है… गांड लेनी ही पड़ेगी…”
रिया ने फिर रोते हुए कहा, “मेरी माँ के साथ कर लो… मुझे मत… प्लीज… मेरी माँ को ले लो…”
अर्जुन ने रिया को जबरदस्ती घुटनों के बल मोड़ दिया। रिया चीख रही थी, “नहीं… जबरदस्ती मत… मम्मी… बचाओ… आह्ह… गांड में मत…”
रिया की चुत अब पूरी तरह सूज चुकी थी। वह बेड पर करवट लेकर लेटी हुई थी, दोनों हाथों से अपनी चूत को ढककर, आंसू बहा रही थी। उसकी सांसें भारी हो रही थीं। अर्जुन अभी भी खड़ा था, उसका 10 इंच का मोटा लंड कंडोम लगाए हुए, पूरी तरह खड़ा और चमक रहा था।
सुधा माँ बेटी के सिरहाने बैठी थीं, बेटी के बालों में हाथ फेर रही थीं।
अर्जुन ने गहरी सांस ली और बोला,
“अब गांड की बारी है रिया। परंपरा है… दुल्हन की गांड भी दामाद को मिलनी चाहिए।”
रिया तुरंत सिहर उठी। उसने घुटनों को छाती से सटाकर बैठने की कोशिश की और चीखते हुए बोली,
“नहीं! बिल्कुल नहीं! गांड में मैं नहीं दूंगी… कभी नहीं! आप पागल हो गए हो क्या? मेरी चुत ही फट गई है… गांड में डालोगे तो मैं मर जाऊंगी!”
अर्जुन की आँखें संकरी हो गईं।
“रिया, आज मेरी सुहागरात है। परंपरा पूरी करनी पड़ेगी। तू मना मत कर।”
रिया गुस्से में रोते हुए बोली,
“परंपरा का नाम लेकर मेरी जान ले लोगे? मेरी चूत अभी भी जल रही है… आधा लंड भी नहीं घुसा था… और अब गांड? नहीं… मैं मना करती हूँ! मम्मी… आप बोलिए ना… ये आदमी मुझे मार डालेगा!”
सुधा माँ ने बीच में पड़ते हुए कहा,
“दामाद जी… प्लीज… बेटी अभी बहुत छोटी है… उसकी हालत देखिए… चुत सूज गई है… गांड में तो बिल्कुल नहीं सह पाएगी… आज छोड़ दीजिए…”
अर्जुन ने सुधा माँ की तरफ देखा और तीखे स्वर में बोला,
“सास जी, आप चुप रहिए। ये मेरी पत्नी है। आज की रात मैं जो चाहूंगा वो होगा। रिया, अब घुटनों के बल हो जा।”
रिया ने जोर से सिर हिलाया, आंसू पोछते हुए चीखी,
“मैं नहीं हूंगी! आप मुझे जबरदस्ती करेंगे तो मैं चिल्लाऊंगी… पूरा घर जाग जाएगा… मैं गांड नहीं मरने दूंगी… चाहे आप मुझे मार ही डालें!”
अर्जुन ने बेड पर घुटनों के बल चढ़ते हुए कहा,
“तू मेरी बीवी है… सुहागरात है… गांड भी मेरी है। परंपरा हजारों साल पुरानी है। तू मना नहीं कर सकती।”
रिया ने तकिए को सीने से चिपकाकर पीछे हटते हुए बोली,
“परंपरा मेरी जान ले रही है तो भाड़ में जाए परंपरा! मेरी गांड टाइट है… आपका लंड 4 इंच मोटा है… वो घुसेगा तो मैं फट जाऊंगी… खून निकलेगा… मैं सह नहीं पाऊंगी… प्लीज… आज छोड़ दीजिए… कल देख लेंगे…”
सुधा माँ ने फिर बीच में आने की कोशिश की,
“दामाद जी… बेटी रो रही है… उसकी इज्जत रखिए… आज चुत में ही काफी हो गया… गांड की बात कल करें…”
अर्जुन गुस्से में बोला,
“सास जी, आप बेटी को बिगाड़ रही हैं। आज सुहागरात है… मैं सो नहीं जाऊंगा। रिया, अब काफी नाटक कर चुकी है। पलट!”
रिया ने जोर से रोते हुए कहा,
“मैं पलटूंगी नहीं! आप मेरी माँ के साथ कर लीजिए… उनकी गांड लीजिए… जितना मन हो… लेकिन मेरी गांड मत छुईए… मैं बिल्कुल नहीं दूंगी… मैं मना करती हूँ… मैं रो रही हूँ… देखिए मेरी हालत…”
रिया ने अपनी सूजी हुई चूत अर्जुन को दिखाते हुए कहा,
“देखिए… कितनी लाल और सूजी हुई है… आधा लंड भी सह नहीं पाई… गांड में डालोगे तो मैं अस्पताल पहुंच जाऊंगी… प्लीज… मम्मी… आप समझाइए ना…”
सुधा माँ ने अर्जुन से हाथ जोड़ते हुए कहा,
“दामाद जी… मेरी बेटी अभी बच्ची है… आज रात उसे छोड़ दीजिए… मैं… मैं तैयार हूँ… मेरी गांड ले लीजिए… लेकिन बेटी को मत छुईए…”
अर्जुन ने सुधा माँ को घूरते हुए कहा,
“सास जी, आपकी बेटी मेरी बीवी है। उसकी गांड भी मेरी है। आज मैं उसे गांड मारकर ही सोऊंगा।”
रिया फिर चीख पड़ी,
“नहीं! मैं कभी नहीं दूंगी! आप जबरदस्ती करेंगे तो मैं आपको कभी माफ नहीं करूंगी… मैं चिल्ला-चिल्लाकर पूरा घर जगा दूंगी… मेरी गांड मत छुओ… प्लीज… मम्मी… रो रही हूँ… देखिए…”
रिया ने तकिए में मुंह छुपा लिया और जोर-जोर से रोने लगी।
अर्जुन बेड पर बैठ गया, लंड अभी भी खड़ा था। उसने गुस्से से कहा,
“ठीक है… आज नहीं मारूंगा… लेकिन कल जरूर मारूंगा। और परसों भी। और जब तक तू मेरी गांड नहीं देगी, मैं तुझे चुत भी नहीं दूंगा।”
रिया ने सिसकते हुए सिर हिलाया,
“जो करना है कर लो… लेकिन गांड नहीं… कभी नहीं…”
सुधा माँ ने बेटी को गले लगाकर चुप कराया।
कमरे में भारी सन्नाटा छा गया। अर्जुन का लंड अभी भी खड़ा था, लेकिन वह बेड पर बैठकर गुस्से से तीनों को देख रहा था।
रिया अभी भी रो रही थी और बार-बार दोहरा रही थी,
“मेरी गांड नहीं… कभी नहीं… मैं मना करती हूँ…”
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