तीन बहुओं का घोड़ा 8

अध्याय 8: मामा-मामी का आगमन और नई व्यवस्था

शीला माँ अब permanently अपने घर चली गई थीं। उन्होंने साफ कह दिया था कि अब वो इस घर में कभी नहीं आएंगी। कहानी में भी उनकी कोई भूमिका नहीं रही। अब सिर्फ प्रिया, नेहा और विक्रम थे।

दोनों की गांड और चुत अभी भी बुरी तरह सूजी हुई थीं। वे बेड पर लेटी कराह रही थीं। चलने-फिरने की हिम्मत नहीं थी। विक्रम का लंड फिर भी हर समय खड़ा रहता था।

उसी शाम विक्रम के मामा (राहुल) और मामी (सुमन) अचानक घर आ गए। मामा 58 साल के थे, मामी सुमन 46 साल की — अभी भी बहुत आकर्षक, गोरी, 36D स्तन, भारी गांड, मोटी जांघें।

मामा ने पूरे मामले को सुना — प्रिया और नेहा की हालत, विक्रम की अनियंत्रित भूख, मालदीव्स में हुई गांड चुदाई।

मामा गुस्से से बोले, “विक्रम! ये क्या कर रहा है तू? दोनों लड़कियों की हालत खराब कर दी है। संयम रखो।”

विक्रम सिर झुकाए बैठा था। फिर अचानक फूट पड़ा, 
“मामा… मुझसे नहीं रुक रहा… मैं कोशिश करता हूँ लेकिन लंड खड़ा हो जाता है। प्रिया और नेहा अभी चल भी नहीं पा रही… मुझे रोज चाहिए… मैं कंट्रोल नहीं कर पा रहा…”

मामी सुमन शर्म से सिर झुकाए बैठी थीं।

मामा ने कुछ देर सोचा और फिर गहरी सांस ली। 
“ठीक है… जब तक प्रिया और नेहा ठीक नहीं हो जातीं, तब तक… सुमन को यहीं रहने दो। वो थोड़े दिन तुम्हें संभाल लेगी। लेकिन सिर्फ जब तक ये दोनों ठीक न हो जाएं।”

मामी चौंककर बोलीं, “राहुल… आप क्या कह रहे हैं? मैं विक्रम की मामी हूँ… ये गलत है…”

मामा ने सख्ती से कहा, “सुमन, परिवार की भलाई के लिए। विक्रम बेकाबू हो रहा है। तू थोड़े दिन मदद कर दे।”

मामी कुछ नहीं बोलीं, सिर्फ शर्म से लाल हो गईं।

उसी रात – मामी की पहली सेवा

रात 11 बजे। प्रिया और नेहा अपने कमरे में दर्द से कराह रही थीं। विक्रम मामी को अपने मास्टर बेडरूम में ले गया।

मामी ने साड़ी पहनी हुई थी। विक्रम ने उनकी साड़ी की पल्लू खींची। 
“मामी… प्लीज… मुझे रोक नहीं रहा…”

मामी कांपते हुए बोलीं, 
“विक्रम… बेटा… ये गलत है… मैं तेरी मामी हूँ… प्लीज… मत करो… राहुल जी ने सिर्फ कह दिया है, लेकिन मैं… आह्ह…”

विक्रम ने मामी की ब्लाउज खोली, ब्रा उतारी और भरे-भरे स्तनों को चूसने लगा। फिर उनकी साड़ी और पेटीकोट खींचकर फेंक दिया। मामी सिर्फ पैंटी में खड़ी थीं।

विक्रम ने पैंटी खींची और अपना 13 इंच का लंड बाहर निकाला। मामी की आँखें फट गईं। 
“नहीं… विक्रम… इतना बड़ा… मेरी उम्र 46 है… ये मेरी चुत में नहीं जाएगा… प्लीज… रुक जाओ… मैं तेरी मामी हूँ… आआह्ह…”

विक्रम ने मामी को बेड पर लिटाया, टांगें फैलाईं और कंडोम लगाकर एक जोरदार धक्का मारा।

“आआआह्ह्ह… नहीं… फट गई… विक्रम… निकालो… बहुत मोटा… मेरी चुत चीर दी… प्लीज… धीरे… आह्ह… पूरा घुस गया… पेट फाड़ रहा है… रुक जाओ बेटा… मैं सह नहीं पा रही…” मामी जोर से चीख पड़ीं।

विक्रम ने घोड़े जैसी रफ्तार पकड़ ली। पच… पच… पच… पच… 

मामी रोते हुए चीख रही थीं, 
“नहीं… बेटा… मत मारो… इतना जोर से… मैं तेरी मामी हूँ… ये पाप है… आह्ह… मेरी चुत जल रही है… प्लीज रुक जाओ… आआह्ह… हाँ… और मत… मैं झड़ रही हूँ…”

विक्रम ने उन्हें 35 मिनट तक लगातार चोदा। फिर डॉगी स्टाइल में मोड़कर गांड में भी घुसाने की कोशिश की।

“नहीं… गांड में बिल्कुल नहीं… विक्रम… वो तो बहुत टाइट है… प्लीज… वहाँ मत… आआह्ह… दर्द… आधा घुस गया… निकालो… मैं मर जाऊंगी…”

विक्रम ने मामी की गांड भी पूरी तरह फाड़ दी। मामी की हालत खराब हो गई। वो रोती-चीखती रहीं, लेकिन विक्रम ने तीन राउंड लिए।

सुबह मामी बेड से उठ भी नहीं पा रही थीं। उनकी चुत और गांड सूज गई थीं।

प्रिया और नेहा को जब पता चला तो दोनों हैरान रह गईं।

नेहा कमजोर आवाज में बोली, “अब मामी भी… हम तीनों को संभालना पड़ेगा…”

Comments

One response to “तीन बहुओं का घोड़ा 8”

  1. […] तीन बहुओं का घोड़ा 8 Desi Sex Stories, Hot girl, Kamukta, Mastram Sex Story, Mom Sex Stories, Nangi Ladki, Non Veg Story, Oral Sex, public sex ←तीन बहुओं का घोड़ा 6 तीन बहुओं का घोड़ा 8→ […]

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *