तीन बहुओं का घोड़ा 6

अध्याय 6: मालदीव्स – अब पूरी मस्ती, कोई दर्द नहीं

मालदीव्स के पानी वाले विला में तीसरी रात। अब प्रिया और नेहा दोनों की चुतें पूरी तरह आदत डाल चुकी थीं। वैक्सिंग के बाद की सूजन उतर गई थी, शरीर ने विक्रम के 13 इंच के घोड़े जैसे लंड को स्वीकार कर लिया था। दोनों को अब दर्द की जगह सिर्फ गहरा मज़ा आ रहा था।

विक्रम पूल के किनारे खड़ा था, उसका लंड पूरा खड़ा, कंडोम लगा हुआ। प्रिया और नेहा दोनों नंगी, बिकिनी फेंककर उसके पास आईं।

प्रिया ने विक्रम के लंड को हाथ में पकड़ा और मुस्कुराते हुए कहा, 
“अब कोई समस्या नहीं है विक्रम… मेरी चुत अब तुम्हारे लंड की दीवानी हो गई है।” 

नेहा ने पीछे से विक्रम को चिपकते हुए उसके कान में फुसफुसाया, 
“हाँ जी… पहले तो चीखती थी, अब तो बिना आपके लंड के नींद भी नहीं आती… आज हम दोनों आपको पूरा एंजॉय करेंगी।”

विक्रम ने दोनों को पूल में खींच लिया। पानी में ही उसने प्रिया को दीवार से लगा दिया और एक जोरदार धक्का मारा। पूरा लंड एक बार में अंदर चला गया।

“आह्ह्ह… हाँ विक्रम… अब पूरा घुसा दो… पहले वाला दर्द चला गया… अब तो मज़ा आ रहा है… और जोर से… आह्ह… मेरी चुत फाड़ दो आज…” प्रिया ने आँखें बंद करके चीखते हुए कहा। उसकी कमर खुद आगे-पीछे हिल रही थी।

नेहा प्रिया के स्तनों को चूस रही थी और अपनी उंगलियाँ प्रिया की क्लिट पर घुमा रही थी। 
“दीदी… आज मुझे भी पूरा दो… मैं भी तैयार हूँ… विक्रम जी… मेरी चुत में भी घुसाइए…”

विक्रम ने प्रिया को 15 मिनट तक पूल में खड़े-खड़े चोदा। हर धक्के पर पानी छपछपा रहा था। प्रिया लगातार झड़ रही थी। 
“आआह्ह… हाँ… और गहरा… पेट तक पहुँच रहा है… मज़ा आ रहा है… नहीं रुकना… जोर से चोदो मुझे… मैं अब तुम्हारी रंडी हूँ…”

फिर विक्रम ने नेहा को ग्लास फ्लोर पर लिटा दिया। नीचे समुद्र दिख रहा था। उसने नेहा की टांगें कंधों पर रखीं और पूरे जोर से अंदर घुसा।

“आह्ह्ह… विक्रम जी… हाँ… अब दर्द नहीं… सिर्फ मज़ा… पूरा लंड अंदर… मेरी चुत को चीर दो… आह्ह… और तेज… मैं सह सकती हूँ अब…” नेहा चीखते हुए बोली। उसकी कमर ऊपर उठ रही थी, लंड को और गहरा लेने के लिए।

प्रिया नेहा के मुंह पर बैठ गई। नेहा उसकी चुत चाट रही थी। 
“बहन… चाटो अच्छे से… विक्रम तुम्हें चोद रहा है… मैं तुम्हारी जीभ पर झड़ना चाहती हूँ… आह्ह… हाँ… यही…”

अब पूरा थ्रीसम जोरों पर था। विक्रम ने दोनों को बारी-बारी चोदा — 
– डॉगी स्टाइल में बालकनी में 
– राइडिंग पोजीशन में बेड पर (दोनों बारी-बारी ऊपर चढ़कर) 
– स्पूनिंग में जकूजी में 

प्रिया अब पूरी तरह बोल रही थी, 
“विक्रम… पहले मैं मना करती थी… अब तो लगता है तुम्हारा लंड मेरी चुत का हिस्सा बन गया है… और जोर से… मेरी चुत फाड़ दो… आह्ह… हाँ… मैं झड़ गई… फिर से…”

नेहा भी अब शर्म छोड़ चुकी थी, 
“जी… मुझे भी घोड़े की तरह चोदिए… मेरी गांड में भी डालिए… आह्ह… हाँ… पूरा घुसा दो… दर्द नहीं… सिर्फ आग लग रही है… मज़ा आ रहा है… मैं आपकी दूसरी पत्नी हूँ… रोज चोदिए मुझे…”

रात 2 बजे तक दोनों की चुतें विक्रम के लंड से भर-भरकर झड़ रही थीं। अब उन्हें कोई समस्या नहीं थी — चुतें पूरी तरह खुल चुकी थीं, गीली और भूखी रहती थीं।

विक्रम ने आखिर में दोनों को घुटनों के बल बिठाया और दोनों के मुंह पर कंडोम उतारकर झड़ दिया। दोनों ने मिलकर लंड चाटा और वीर्य पिया।

प्रिया ने नेहा को चूमते हुए कहा, 
“अब हम दोनों साथ में ही संभालेंगी… कोई दर्द नहीं, सिर्फ मज़ा… मालदीव्स हमारा असली हनीमून बन गया।”

नेहा मुस्कुराई, “हाँ दीदी… अब रोज रात को हम दोनों मिलकर विक्रम जी को खुश करेंगी… हमारी चुतें अब उनकी हो चुकी हैं।”

विक्रम दोनों को अपनी बाहों में लेकर लेट गया। बाहर समुद्र शांत था, लेकिन अंदर तीनों की आग अभी भी जल रही थी।

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