अध्याय 11: सुहागरात के बाद – सुबह का दृश्य (विस्तृत)
सुबह के 6:15 बज रहे थे। मास्टर बेडरूम में अब भी हल्की गुलाबी रोशनी बिखरी हुई थी, लेकिन कमरा अब पूरी तरह बदल चुका था। गुलाब की पंखुड़ियां चारों तरफ बिखरी हुई थीं, कई पंखुड़ियां तीनों बहुओं के नंगे शरीर पर चिपकी हुई थीं। कमरे में पसीने, चूत के रस और कंडोम की हल्की खुशबू मिली हुई थी। एयर कंडीशनर अभी भी चल रहा था, लेकिन तीनों औरतों के शरीर अभी भी गर्मी से तप रहे थे।
विक्रम बेड के बीच में लेटा हुआ था, पूरी तरह नंगा। उसका 13 इंच का लंड अब थोड़ा ढीला होकर भी पेट पर लेटा हुआ था, फिर भी मोटा और प्रभावशाली दिख रहा था। उसके सीने पर प्रिया सिर रखे लेटी थी, नेहा उसकी बाईं जांघ पर सिर रखे पड़ी थी, और अदिति उसकी दाईं तरफ करवट लेकर लेटी हुई थी, उसका एक हाथ विक्रम के लंड पर ही रखा हुआ था।
तीनों की हालत बुरी तरह खराब थी, लेकिन अब दर्द के साथ-साथ संतोष भी था।
प्रिया की हालत
प्रिया की चुत और गांड दोनों बुरी तरह सूज गई थीं। लाल हो चुकी थीं। उसकी जांघों पर सूखा वीर्य और अपना रस चिपका हुआ था। वह हल्के-हल्के कराह रही थी।
नेहा की हालत
नेहा की गांड सबसे ज्यादा प्रभावित थी। क्योंकि विक्रम ने उसे सबसे ज्यादा गांड मारी थी। वह सीधे लेट भी नहीं पा रही थी। करवट लेकर लेटी हुई थी। उसकी गांड का छेद अभी भी थोड़ा खुला हुआ दिख रहा था।
अदिति की हालत (नई दुल्हन)
अदिति की हालत सबसे खराब थी। पहली रात ही 13 इंच का लंड सहना पड़ा था। उसकी चुत सूजकर मोटी हो गई थी, लाल-लाल, और हल्का खून भी रिसा था। वह आँखें बंद किए हुए दर्द से सिसक रही थी।
विक्रम ने आँखें खोलीं। उसने पहले प्रिया के स्तन को हल्का दबाया, फिर नेहा की गांड पर हाथ फेरा और अंत में अदिति के बाल सहलाए।
“सुबह हो गई… तीनों कैसे हो?” विक्रम ने गहरी आवाज में पूछा।
प्रिया ने कराहते हुए कहा,
“पति जी… बहुत थक गई हूँ… मेरी चुत और गांड दोनों जल रही हैं… कल रात आपने हमें पूरी तरह फाड़ दिया… चल भी नहीं पा रही… लेकिन… मज़ा भी बहुत आया…”
नेहा ने आँखें बंद रखते हुए बोली,
“जी… मेरी गांड अभी भी फटी हुई लग रही है… आपने कल रात 5-6 बार गांड मारी… उठने की हिम्मत नहीं है… लेकिन आपका लंड अब मेरी गांड का दीवाना बन गया है…”
अदिति ने बहुत धीमी, कांपती आवाज में कहा,
“विक्रम जी… मैं… मैं तो उठ भी नहीं पा रही… मेरी चुत फट गई है… पहली रात में ही इतना बड़ा… आह्ह… बहुत दर्द हो रहा है… प्लीज आज मत करिए… मैं अभी भी कांप रही हूँ…”
विक्रम मुस्कुराया। उसने उठकर तीनों को देखा। उसका लंड फिर से आधा खड़ा होने लगा।
“तुम तीनों आज आराम करो। लेकिन शाम को फिर तैयार रहना। अब चारों को संभालना है।”
सुबह 7:30 बजे – ब्रेकफास्ट और देखभाल
मामी सुमन कमरे में आईं। उन्होंने तीनों को देखा और सिर हिलाया।
“बेचारी… विक्रम ने कल रात तुम तीनों को पूरी तरह तोड़ दिया।”
मामी ने खुद तीनों को उठाने में मदद की। प्रिया और नेहा तो किसी तरह उठ गईं, लेकिन अदिति को उठाने में बहुत दिक्कत हुई। उसकी चुत पर मामा ने हल्का दर्द निवारक जेल लगवाया। तीनों को गर्म पानी से नहलाया गया।
नहाने के बाद तीनों ने हल्के-हल्के कपड़े पहने — सिर्फ लूज नाइट गाउन, अंदर कुछ नहीं। वे लंगड़ाते हुए डाइनिंग टेबल पर आईं।
विक्रम पहले से बैठा था। उसने मुस्कुराते हुए कहा,
“कल रात तुम तीनों ने मुझे बहुत खुश किया। अदिति… तुम बहुत टाइट थी… लेकिन अब आदत पड़ जाएगी।”
अदिति शरमा कर सिर झुका ली, उसके गाल लाल हो गए।
“जी… लेकिन… आज थोड़ा आराम… प्लीज…”
प्रिया ने अदिति का हाथ पकड़कर कहा,
“बहन… अब हम तीनों साथ हैं। पहले 2-3 दिन दर्द रहेगा, फिर तुम भी हमारी तरह मांगने लगोगी।”
नेहा ने हल्के से हंसते हुए कहा,
“हाँ… मैंने भी पहली बार रोई थी… अब तो बिना इसके नींद नहीं आती।”
सुबह 9 बजे – बेडरूम में आराम
तीनों फिर बेडरूम में लेट गईं। विक्रम भी उनके बीच लेट गया। उसने तीनों की चुतों और गांड पर हल्का-हल्का जेल लगाया। हर बार हाथ लगाते ही तीनों सिसक उठतीं।
“आह्ह… पति जी… हल्के हाथ से… अभी भी बहुत सेंसिटिव है…” प्रिया बोली।
विक्रम ने अदिति की सूजी हुई चुत पर उंगली फेरते हुए कहा,
“देखो… कितनी सुंदर लग रही है अब… पूरी तरह मेरी हो चुकी है।”
अदिति शर्म और दर्द से कांप उठी, लेकिन उसकी चुत हल्की-हल्की गीली भी होने लगी।
मामी सुमन ने कमरे में आकर कहा,
“मैं कल अपने घर जा रही हूँ। अब तुम चारों का परिवार है। संभालकर रखना।”
विक्रम ने मामी को देखकर मुस्कुराया, लेकिन कुछ नहीं बोला।
तीनों बहुएं एक-दूसरे से सटकर लेटी रहीं। अदिति बीच में थी। प्रिया और नेहा उसे comfort दे रही थीं।
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