तीन बहुओं का घोड़ा 12

अध्याय 12: तीनों बहुओं के साथ रूस हनीमून (विस्तृत)

सुहागरात के 12 दिन बाद विक्रम ने फैसला किया कि अब तीनों बहुओं को साथ लेकर हनीमून मनाएगा। मामा-मामी को भी मना लिया। destination चुना — Russia (Saint Petersburg + Moscow)। प्राइवेट जेट से उड़ान भरी।

एयरपोर्ट और फ्लाइट

प्रिया, नेहा और अदिति तीनों ने खूबसूरत व्हाइट ड्रेस पहनी थी। अदिति अभी भी थोड़ी शरमाती हुई थी। जेट में विक्रम ने तीनों को बिजनेस क्लास सीट्स पर बिठाया। उड़ान के 2 घंटे बाद लाइट्स डिम कर दी गईं।

विक्रम ने अदिति की ड्रेस ऊपर खींची और उंगली उसकी चुत में डाल दी। 
“नहीं… विक्रम जी… यहां मत… लोग देख लेंगे… आह्ह… उंगली मत घुमाओ… अभी भी सूजन है…” अदिति फुसफुसाई। 

प्रिया ने विक्रम के लंड को पैंट के ऊपर से सहलाया, “पति जी… रूस पहुंचकर पूरा एंजॉय करेंगे… अभी थोड़ा रुकिए…” 

सेंट पीटर्सबर्ग पहुंचना

विक्रम ने Neva River के किनारे एक लग्जरी प्राइवेट विला बुक किया था — 5 बेडरूम, प्राइवेट सौना, इनडोर पूल, और पूरा फ्लोर सिर्फ उनके लिए। बाहर बर्फ की हल्की परत, अंदर गर्मी।

पहली रात विला में। 

तीनों को विक्रम ने एक साथ नंगी कर दिया। कमरे में फायरप्लेस जल रहा था, रोशनी नरम। 

विक्रम ने सबसे पहले अदिति को उठाकर बेड पर लिटाया। 
“आज मैं तुम तीनों को रूस की ठंड में गर्म करूंगा…” 

अदिति कांपते हुए बोली, “विक्रम जी… प्लीज धीरे… अभी भी मेरी चुत पूरी तरह ठीक नहीं हुई है… आह्ह…” 

विक्रम ने कंडोम लगाया, लुब्रिकेंट लगाया और एक जोरदार धक्का मारा। पूरा लंड अदिति की चुत में समा गया। 

“आआआह्ह्ह… नहीं… फट गई… इतना मोटा… पेट फाड़ रहा है… विक्रम जी… रुक जाओ… आह्ह… और मत दबाओ… मैं रो रही हूँ…” अदिति चीख पड़ी। 

प्रिया और नेहा दोनों अदिति के स्तन चूस रही थीं। विक्रम ने 25 मिनट तक अदिति को जोर-जोर से चोदा। अदिति 4 बार झड़ गई। 

फिर नेहा की बारी — उसे डॉगी स्टाइल में मोड़कर गांड मारी। 
“नहीं… गांड में मत… आह्ह… फट रही है… विक्रम जी… बहुत जोर से… आआह्ह… मेरी गांड चीर दी… हाँ… और गहरा… मत रुकना…” 

प्रिया को विक्रम ने खड़े-खड़े उठाकर चोदा, उसकी टांगें अपनी कमर पर लपेटी हुईं। 
“हाँ पति जी… जोर से… मेरी चुत फाड़ दो… आह्ह… रूस आकर भी आपका लंड नहीं थकता… और तेज…” 

रात भर चार राउंड चले। तीनों की चुत और गांड फिर से सूज गईं, लेकिन अब वे मजे ले रही थीं।

दूसरे दिन – सेंट पीटर्सबर्ग घूमना + हिडन प्ले

सुबह तीनों को Hermitage Museum ले गया। अदिति ने लंबी कोट पहनी थी, अंदर कुछ नहीं। विक्रम ने रिमोट वाइब्रेटर उसकी चुत में डाल रखा था। 

म्यूजियम में घूमते हुए विक्रम ने रिमोट ऑन किया। 
“आह्ह… विक्रम जी… यहां मत… लोग देख लेंगे… आह्ह… वाइब्रेटर तेज मत करो… मेरी चुत गीली हो रही है… प्लीज… मैं खड़ी नहीं रह पा रही…” अदिति दीवार का सहारा लेकर कांप रही थी। 

नेहा ने हंसते हुए कहा, “बहन… सह ले… मैंने कल रात भी यही सहा था।” 

शाम को Neva River पर प्राइवेट यॉट बुक किया। यॉट पर तीनों नंगी हो गईं। ठंडी हवा में विक्रम ने उन्हें यॉट के डेक पर चोदा। 

अदिति को रेलिंग पकड़वाकर पीछे से चोदा। 
“नहीं… बाहर ठंड है… आह्ह… लंड गर्म है… मेरी चुत जल रही है… विक्रम जी… और जोर से… आआह्ह… मैं समुद्र में झड़ जाऊंगी…” 

तीसरे दिन – Moscow ट्रांसफर

Moscow पहुंचकर Red Square के पास 5 स्टार होटल में Presidential Suite लिया। 

रात को सौना रूम में तीनों के साथ। गर्मी में पसीने से तर तीनों को विक्रम ने एक-एक करके चोदा। 

प्रिया: “हाँ पति जी… सौने की गर्मी में भी आपका लंड और गर्म है… फाड़ दो…” 

नेहा: “मेरी गांड में डालिए… ठंड के बाद गर्मी में गांड चोदने का मजा अलग है… आह्ह… पूरा घुसा दो…” 

अदिति अब थोड़ी हिम्मत कर चुकी थी, “विक्रम जी… मुझे भी गांड में… आह्ह… दर्द तो होता है… लेकिन मज़ा भी बहुत आता है… धीरे… आआह्ह… पूरा अंदर…” 

4 दिन तक का सिलसिला

– Kremlin के पास प्राइवेट डिनर के बाद होटल में फोरसम 
– Moscow River क्रूज पर तीनों को बालकनी में चोदा 
– स्नोफॉल देखते हुए विला की बालकनी पर नंगी चुदाई 
– सौना, जकूजी, प्राइवेट पूल — हर जगह 

अदिति अब पूरी तरह खुल चुकी थी। वह खुद कहने लगी थी, 
“विक्रम जी… आज मेरी चुत और गांड दोनों लीजिए… मैं आपकी सबसे छोटी पत्नी हूँ… मुझे सबसे ज्यादा चोदिए…” 

प्रिया और नेहा उसे सिखा रही थीं — कैसे लंड चूसना है, कैसे गांड हिलाकर चुदवाना है।

आखिरी रात Moscow में। विक्रम ने तीनों को एक साथ बेड पर लिटाया। पहले प्रिया, फिर नेहा, फिर अदिति — और अंत में तीनों की चुतों पर एक-एक करके झड़ा (कंडोम में)।

तीनों थककर उसके सीने पर लेटी हुई थीं।

प्रिया: “ये हनीमून सबसे यादगार रहा…”
नेहा: “अब घर जाकर भी रोज यही चाहिए…”
अदिति: “मैं अब डरती नहीं… बस आपका लंड चाहिए…”

विक्रम ने तीनों को चूमते हुए कहा,
“घर जाकर नया नियम — रोज रात चारों साथ में…”

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