पत्नी की सहमति से विधवा सास के साथ संभोग- 2

इस सेक्स कहानी के पहले भाग
कुंवारी पत्नी के साथ सुहागरात
में आपने पढ़ा था कि तपोश को अपने से बड़ी उम्र की महिलाएं अच्छी लगती थीं.
फिर तपोश ने अपने ऑफिस में काम करने वाली अनुप्रिया से शादी हो गयी.
तपोश को अपनी सास यानि अनुप्रिया की विधवा माँ अच्छी लगने लगी थीं.

अब आगे की वाइफ मदर सेक्स कहानी तपोश की जुबानी सुनें.

हमारी शादी हुए एक महीना हो गया था.

हम हफ्ते में 2-3 बार मम्मी से मिलने जाते, हमने देखा था कि मम्मी कुछ कमजोर हो गयी थीं.
शायद वे ठीक से खाना नहीं खा रही थीं.

अनु के पूछने पर उन्होंने बताया कि अकेली के लिए खाना बनाने का मन नहीं करता.
हम दोनों अपने घर वापस आ गए.

मैं- अनु हम मम्मी को अपने घर ले आते हैं, अपना दो बेडरूम का फ्लैट है कोई मुश्किल नहीं होगी. मम्मी का स्कूल हमारे फ्लैट से पास ही है.
अनु- हां … मैं भी यही कहने वाली थी.

हम दोनों मम्मी को समझा बुझा कर अपने फ्लैट ले आए.
अब मम्मी खुश रहने लगीं और उनकी तबियत सुधर गयी.

जब मैं अपनी पत्नी अनुप्रिया को अनु कहकर आवाज़ लगाता, तो कभी कभी मम्मी कह उठतीं- आती हूँ!
मम्मी का नाम अनुश्री है.

मुझे मेरी पत्नी ने बताया उसके पिताजी माँ को अनु कहते थे.
मैं सोच में पड़ गया.

उस दिन मेरा जन्म दिन था.
अनु बोली- हम वोडका पार्टी करेंगे, माँ पिताजी के साथ पीती थीं, उन्हें भी पिलाएंगे. पहले हम सब एक एक पैग पिएंगे, फिर केक काटेंगे.

तीनों ने एक एक पैग पिया, फिर मैंने केक काटा.
हमने एक दूसरे को केक खिलाया.

अनु ने मुझे आलिंगन में लेकर जन्मदिन की बधाई दी और मुझसे बोली- मैं किचन से प्लेट लाती हूँ.

वह यह कहकर चली गयी.

मैंने हाथ फैलाकर कहा- आंटी, अपने दोस्त के गले लगकर बधाई नहीं देंगी?

मम्मी ने मुझे कसकर आलिंगन में लेकर बधाई दी.
मैंने भी उनको कसकर पकड़ लिया.

फिर मम्मी के गाल में चुम्मी देकर कहा- थैंक्स.

हम काफी देर आलिंगन में खड़े रहे थे.

मम्मी के चूचे मेरी छाती में दबे हुए थे, लंड खड़ा हो रहा था.

तभी अनु ने किचन से आवाज़ लगायी- खाना अभी खाएंगे या एक और पैग के बाद!

उसकी आवाज सुनकर हम दोनों आलिंगन से अलग हुए.

डिनर के बाद बेडरूम में मैंने और अनु ने एक एक पैग और लगाया और फोरप्ले करने लगे.

अनु- तपोश, मैंने देखा था कि कैसे तुम और माँ काफी देर तक आलिंगन का मजा ले रहे थे. यदि तुम माँ को भी यौन सुख दो तो मुझे बहुत अच्छा लगेगा, तुम्हें बड़ी उम्र की महिला अच्छी लगती हैं. मैंने देखा था कि तुम्हारा लंड खड़ा होने लगा था.

मम्मी को गले लगाकर मैं जोश में था, ऊपर से शराब का नशा मस्ती दे रहा था.

मैं- तुम सोचकर बोल रही हो या नशे में?
अनु- मैं काफी दिनों से यह बात बोलने का मौक़ा देख रही थी. सेक्स में इतना मजा आता है. पिताजी के देहांत के बाद माँ 11 साल बिना सेक्स के रही हैं. उन्होंने किसी पुरुष को अपने पास नहीं आने दिया, पूरा ध्यान मुझे बड़ा करने में दिया. मेरी माँ को बिना सेक्स के कितनी मुश्किल हुई होगी, मैं अब समझ सकती हूँ. माँ का ऑपरेशन हो गया है, वे गर्भवती नहीं हो सकतीं.

मैं- मैं तैयार हूँ, पर क्या मम्मी राजी होंगी? तुम उनको राजी करो!
अनु- मैं उनसे बात करूंगी.

अगली रात अनु माँ के कमरे में सोई.

सुबह अनु ने बताया- मैंने माँ को कहा कि शादी के बाद मुझे पता चला सेक्स में कितना मजा आता है. आप 11 साल मेरे लिए बिना सेक्स के रही हैं, आपको कितनी मुश्किल हुई, मैं अब समझ सकती हूँ. हम दोनों को जो भी मिला, हमने आपस में बांटा. मैंने देखा है कि आप और तपोश के दूसरे के प्रति आकर्षित हो. मैं तपोश को तुमसे बांटना चाहती हूँ. तपोश राजी हो गया है. माँ ने ना नुकर के बाद हाँ कह दिया है.

इतना कह कर अनु नहाने चली गयी.

मम्मी ने मुझे चाय दी और मुस्कुरा कर बोलीं- क्या तुम अभी भी बड़ी उम्र की महिलाओं को निहारने स्टेशन जाते हो?
मैं समझ गया कि अनु ने यह बात बतायी है.

मैं- नहीं अब नहीं जाता, मुझे खूबसूरत मधुर स्वभाव की कठिनाइयों के बावजूद खुश रहने वाली दोस्त जो मिल गयी है!

यह कहकर मैंने मम्मी को अपने आलिंगन में भरा और उनके होंठ चूम लिए.

वे पहले तो अचकचाईं फिर उन्होंने खुद को ढीला छोड़ दिया.

अब मैं रोज मम्मी से करीबी बढ़ाने लगा, उनके हाथ पकड़कर उन्हें करीब बिठा कर बात करता, उनके कूल्हों पर हल्की चपत मार देता.

तीन दिन बाद हमारे हेड ऑफिस में 7 दिन की ट्रैनिंग थी.
अनु उसमें भाग लेने चली गयी.

वह जाते समय बोली- आप दोनों एक दूसरे का ख्याल रखना.

शाम को जब मैं घर आया, मम्मी तैयार होकर मेरा इन्तजार कर रही थीं.

वे कुछ ज्यादा ही सुन्दर लग रही थीं.
मुझे चाय देते समय शर्मा भी रही थीं.

उस दिन वे स्लीवलेस ब्लाउज पहने हुई थीं.

मैंने देखा मम्मी के हाथ पर जो छोटे छोटे बाल थे, वे गायब थे.
मैं समझ गया कि मम्मी वैक्सिंग कराकर आयी हैं.

चाय पीने के बाद मैं बाथरूम में फ्रेश होने गया.

पहली बार वहां मम्मी की ब्रा टंगी थी.
मैंने उसको अलट पलट कर देखा कि उनके चूचों का साइज 34 सी था.

मैं वापस आकर उनसे बात करने लगा.

मैं- आंटी, आज आप बहुत सुंदर लग रही हो. मेरी दोस्त, आज रात हम दोनों पार्टी करते हैं. मैं वोडका, स्प्राइट, चिकन टिक्का ले आया हूँ.

मम्मी गिलास प्लेट लेकर आ गईं.

हम दोनों सोफे पर पास पास पीने बैठे, टेबल पर चखना रखा था.

मैंने मम्मी की जांघ पर हाथ रखकर कहा- चखने की प्लेट देना.
मम्मी कसमसाईं, पर मेरे हाथ नहीं हटाए.

पैग ख़त्म होने के बाद मैंने मम्मी के हाथ पकड़ कर उन्हें खड़ा किया.

उन्हें आलिंगन में लेकर उनकी गर्दन चूमने लगा, कूल्हों पर हाथ फेरने लगा.
काफी देर बाद हम दोनों अलग हुए.

मैं उनके होंठ चूमने लगा, चूचे दबाने लगा.

मम्मी का संयम का बांध टूट गया, वे भी मेरे होंठ चूमने लगीं.
हम दोनों की सांसें तेज हो गईं.

मम्मी अपने बेडरूम की ओर जाने लगीं, मैं उनके पीछे आ गया.

बेडरूम में हम खड़े खड़े एक दूसरे के होंठ चूमने लगे.

मम्मी की साड़ी का आंचल गिर गया, उनके ब्लाउज में ढके भरे हुए चूचे मुझे उत्तेजित करने लगे तो मैं उनके दूध दबाने लगा.

वे होंठ काटने लगीं और सिसकारियां भरने लगीं.
मैं उनके ब्लाउज के हुक खोलने लगा, मम्मी ने हाथ उठाकर ब्लाउज निकालने में मदद की.

ब्लाउज हटा तो मैंने देखा कि उनकी कांख (आर्मपिट) पर एक भी बाल नहीं था.
मैं कांख चूमने लगा और साथ ही साथ उनकी ब्रा को भी उतार दिया.

भरे गेंहुए चूचे हल्के से लटके थे, पर उन पर भूरे निप्पल तने हुए थे.

मैं एक चूचे को चूस रहा था और दूसरे को दबा रहा था.

आंटी- ये ज्यादती है, तुम मेरे सब कपड़े उतार रहे हो, खुद कपड़े पहने हुए हो!

यह कहकर मम्मी ने मेरा कुर्ता उतार दिया.
हम दोनों कमर के ऊपर तक नंगे हो गए.

मम्मी ने मुझे आलिंगन में ले लिया.

मेरी नंगी छाती पर मम्मी के नंगे चूचे दबने लगे थे. मुझे बड़ा सकून मिल रहा था.

मैंने मम्मी के साये के नाड़े की गांठ खोल दी तो साया ज़मीन पर गिर गया.
मम्मी ने मेरा पजामा चड्डी सहित उतार दिया.

मम्मी पलंग पर चित लेट गईं.
मैंने उनकी पैंटी उतार दी.

मैं मम्मी के नंगे भरे चिकने बदन को निहारने लगा.
मम्मी की मोटी मांसल जांघें, फूली हुई चूत, बड़े बड़े चूचे, थोड़ा मोटा पेट … उस पर गहरी नाभि थी.

मेरा खड़ा लंड उत्तेजना से झटके ले रहा था.

मैं मम्मी के पैरों के बीच आ गया.
मम्मी ने अपने पैर घुटनों से मोड़ लिए और कमर के नीचे टॉवल रख लिया.

आंटी- अपने लंड पर तेल लगा लो, इतने साल बिना सम्भोग से मेरी चुत टाइट हो गयी है.
मम्मी वोदका की मस्ती में खुल कर लंड चुत कह रही थीं.

मुझसे तेल लगाने की कहकर उन्होंने पलंग के पास की टेबल पर रखी तेल की बोतल मुझे दे दी.

मैंने लंड पर तेल लगाया और धीरे से लंड चूत में डालने लगा.

उनकी चूत कुंवारी लड़की की तरह टाइट थी.

मम्मी लंड घुसते ही दर्द से ‘आह आ’ करने लगीं.

मैंने धीरे धीरे करके पूरा लंड चूत में पेल दिया और मम्मी के ऊपर लेट गया.

मम्मी का बदन नर्म गद्देदार था.

कुछ देर बाद मम्मी ने कमर हिलायी.
मैं हाथों के दम पर उठकर उन्हें जोर जोर से चोदने लगा.

आंटी- आह थोड़ा धीरे, मैं कहीं भागी नहीं जा रही!

मैंने चोदने की गति कम कर दी, बीच बीच में रुक कर मैं चूचे दबाता, होंठ चूमता … फिर चोदने लगता.

मम्मी थोड़ी देर कमर को उछालती रहीं … फिर लेट कर आधी आंखें बंद कर चुदाई का मजा लेने लगीं.

उनके कंठ से मादक सिसकारी निकलती रही.
चुदाई के कारण मेरी जांघें उनकी जांघों से टकरा कर थप थप की मधुर आवाज़ निकाल रही थीं.

आंटी- आह और जोर से तप्पू … मेरा होने वाला है!
मैंने चुदाई की गति बढ़ा दी.

मम्मी का बदन कांपने लगा और शरीर धनुष की तरह हो गया.

उनकी चूत से निकले कामरस से मेरा लंड भीग गया और मम्मी निढाल हो गईं.
मैंने चुदाई जारी रखी.

अब मम्मी की गीली चूत से फच फच की आवाज़ आ रही थी.
थोड़ी देर में वीर्य की पिचकारी चूत में भर गयी.

मम्मी के चेहरे पर सकून भरी मुस्कुराहट थी.
मैं मम्मी के ऊपर लेट गया.

कुछ देर में लंड सिकुड़ कर चूत से निकल गया तो मैं उनके ऊपर से उतर गया.

मैं- मम्मी कैसा रहा, मैं पास हो गया न?

मम्मी ने मुस्कुरा कर और शर्माकर अपना चेहरा हाथों से छुपाकर कहा- अव्वल नंबर से पास हुए हो. तुम्हारे लिंग ने मेरी योनि को बहुत सुख दिया है. तुम अकेले में मुझे मम्मी नहीं, अनुश्री कहा करो!

मैं- अनुश्री तुम लिंग योनि नहीं, लंड चूत कहा करो.

हमने फ्रेश होकर कपड़े पहनकर डिनर किया. मेरी मम्मी को एक बार और चोदने की इच्छा थी. अनुश्री मम्मी राजी नहीं हो रही थीं.
उन्होंने कहा- मैं थक गयी हूँ.

हम दोनों सो गए.

सुबह मैं जागा, तब मम्मी सो रही थीं.

मैं चाय बनाकर लाया और अनुश्री मम्मी के होंठ चूमकर उन्हें जगाया.
चाय पीकर हम दोनों फ्रेश हुए.

उस दिन हम दोनों ने छुट्टी ले ली.

अनुश्री आंटी- रात में तुमने मुझे बहुत थका दिया था, अभी तक बदन दुःख रहा है.
मैं- मालिश कर देता हूँ.

मम्मी कपड़े उतार कर पलंग पर पेट के बल लेट गईं.
मैं भी नंगा होकर उनकी पीठ की मालिश के बाद उनके गोल सुडौल कूल्हों की मालिश करने लगा.

मालिश करते हुए मैं हल्के हाथ से थप्पड़ मारता, तो मम्मी के कूल्हे मस्त हिलते.
मैं झट से उनके कूल्हों को चूम लेता.

मैंने मम्मी को चित लिटा दिया, उनकी भरी हुई जांघों की मालिश की, चूत पर हाथ फेरा, फिर छाती और चूचों की मालिश करते समय चूचे दबाने लगा और निप्पल मरोड़ने लगा.
वे सिसकारी लेने लगीं.

मैं- एक बार हो जाए?
आंटी- तुम्हें बहुत कुछ सिखाना है.

यह कहकर वे बैठ कर पलंग के किनारे पर लेट गईं.
उनकी कमर तक का शरीर पलंग पर था, पाँव आसमान की तरफ.

वे बोली- अब मेरे पाँव अपने कंधों पर रखो और शुरू हो जाओ!

मैं लंड लहराता हुआ आया, उनके पाँव अपने कंधों पर रखे और लंड पेल कर चोदना शुरू कर दिया.
मम्मी के चूचे मस्त हिल रहे थे.

मैं बहुत जोश में था, लग रहा था जल्द झड़ जाऊंगा.

मम्मी ने मुझे रोककर कहा- मेरे होने से पहले झड़ना नहीं. जब लगे कि थोड़ी देर में झड़ने वाले हो, लंड बाहर निकाल लेना लंड की जड़ को उंगलियों से कसकर पकड़ लेना और लम्बी लम्बी सांसें लेना … अपना ध्यान दूसरी तरफ लगाना. फिर जब लगे कि झड़ना टल गया है तो फिर शुरू हो जाना.

मैंने वैसा ही किया.
इस विधि से मैं लंबा चला और मम्मी के झड़ने के बाद झड़ा.

फिर हम दोनों एक साथ नहाये.

नाश्ते के बाद मैंने कहा- मुझे तुम्हारी गांड मारनी है!

अनुश्री- चार दिन बाद मारना, गांड टाइट हो गयी है.
यह कहकर वे दो आस प्लग ले आईं.

वे बोलीं- पहले दो दिन जितनी देर हो सके छोटा प्लग लगाकर रहूंगी, फिर दो दिन बड़ा वाला. गांड थोड़ी ढीली हो जाएगी. टाइट गांड में लंड डालने से बहुत दर्द होता है, गांड चिर भी सकती है.

तब मैं समझा कि जब मैंने अपनी पत्नी अनु की गांड मारने की कोशिश की, पहले तो वह मान गयी, पर जब लंड डालने लगा तो उसे बहुत दर्द हुआ और वह रोने लगी थी. उसने मना कर दिया था.

रात भर हम दोनों नंगे रह कर फोरप्ले करते रहे थे.

अनुश्री आंटी- मैं घोड़ी बन जाती हूँ.

बेडरूम में बड़ा आइना लगा ड्रेसिंग टेबल था.
मम्मी ने डेढ़ फुट ऊंचा मजबूत टेबल आईने के सामने रखा, आईने की तरफ मुँह करकर उन्होंने अपने हाथ टेबल पर रखे और पैर फैलाकर कहा- अब हम अपनी चुदाई का लाइव शो देख पाएंगे.

मैं पीछे से चूत चोदने लगा और कूल्हों पर थप्पड़ मारने लगा.

अनुश्री मम्मी के पैंडुलम की तरह डोलते चूचे आइने में दिख रहे थे.

मम्मी ने अपनी गांड में आस प्लग लगा रखा था.
जब मुझे लगा मैं थोड़ी देर में झड़ जाऊंगा, मैं लंड बाहर निकाल कर लंड की जड़ को उंगलियों से पकड़ कर लम्बी लम्बी सांस लेने लगा. मेरा झड़ना टल गया, तो मैं फिर से चोदने लगा.

अनुश्री मम्मी का कामरस बहने लगा.
वे बोलीं- मेरा हो गया!

मैंने चुदाई की गति बढ़ा दी तो मैं भी झड़ गया.

सुबह अनुश्री मम्मी सिर्फ मैक्सी पहनती थीं, उसके अन्दर वे कुछ नहीं पहनती थीं.

फ्रेश होने के बाद मैंने गुड मॉर्निंग कहकर अनुश्री मम्मी की आंख, होंठ चूमे, फिर पीछे जाकर मैक्सी कमर तक उठाकर उनके कूल्हों को चूमा.

मैक्सी में हाथ डालकर चूचे दबाये.

तब से रोज मैं गुड मॉर्निंग ऐसे ही कह रहा हूँ.

शाम को काम से आने के बाद चाय पीते समय मैंने कहा- मेरी एक फतांसी है, मुझे तुम्हारा मूत पीना है!
अनुश्री आंटी- सेक्स में कुछ भी कुछ भी अच्छा बुरा नहीं होता, सिर्फ आपसी सहमति चाहिए.

वे मुझे बाथरूम ले गईं, कपड़े उतार दिए और सिर्फ चश्मा पहने रहने को कहा.

फिर अनुश्री मम्मी ने दीवार पर अपनी पीठ टिकाकर पाँव फैला दिए.
मैंने नंगे होकर नीचे स्टूल पर बैठकर मुँह खोला और मम्मी की चूत पर मुँह लगा दिया.
वे मूतने लगीं और मैं पीने लगा.

मूत ख़त्म होने पर अनुश्री मम्मी ने स्टूल पर बैठकर कहा- अब मैं पिऊंगी!
उन्होंने मुँह खोल दिया, मैं मूतने लगा.
वे पीने लगीं.

चश्मे के कारण मूत्र हम दोनों की आंखों में नहीं जा रहा था.
फिर हम साथ में नहाए.

उस रात हम दोनों ने 69 पोजीशन में एक दूसरे के लंड चूत चूसे.

अनुश्री मम्मी मेरे लंड का वीर्य पी गईं.
मैंने चूत से निकला कामरस पी लिया.

अगली रात अनुश्री मम्मी ने लंड की सवारी की, पर उनके भारी शरीर के कारण वे ज्यादा देर लंड पर नहीं उछल सकीं.

मैंने बाकी चुदाई मिसनरी आसन में की.
वे रोज चुदाई के वक्त अपनी गांड में आस प्लग लगाए रहती थीं.

पांचवी रात गांड मारने की बारी थी.

एक दूसरे को गर्म करने के बाद अनुश्री मम्मी ने कहा- गांड और लंड पर तेल लगाकर धीरे धीरे से डालना, मुझे थोड़ा दर्द हो सकता है! लंड डालकर रुकना, मैं जब कहूँ, तब चुदाई शुरू करना. सेक्स के बाद लंड साबुन से धो लेना, गांड के कीटाणु से लंड पर इन्फेक्शन हो सकता है.

अनुश्री मम्मी ने पेट के बल लेटकर अपने कूल्हे हाथ से फैलाए और छेद से दूर कर दिए.

मैंने उनकी गांड के अन्दर उंगली से तेल लगाया, लंड पर तेल लगाया.
फिर धीरे से लंड गांड में डालकर उनके ऊपर लेट गया.

अनुश्री मम्मी दर्द से आ आ कर रही थीं. उन्होंने तकिये को पकड़ रखा था.

कुछ देर बाद अनुश्री मम्मी बोलीं- अब ठीक है.

मैं मम्मी की गांड मारने लगा.

जब लंड पूरा अन्दर जाता, मम्मी की गद्देदार कूल्हों से मेरी कमर टकराती, तो थप थप की मीठी आवाज़ आती.

मम्मी सिसकारी लेने लगी थीं.
उनकी गांड मारने में अलग ही आनन्द आया.

इस तरह से हमने इन सात रातों में तरह तरह के आसनों में सम्भोग किया.

अनुश्री मम्मी को सेक्स में दस वर्षों का गहरा अनुभव था.
वाइफ मदर सेक्स करके मैंने बहुत कुछ नया सीखा.

अगले दिन मेरी पत्नी अनु वापस आने वाली थी.

अनुश्री आंटी- तपोश, अनु को हमारे यौन क्रीड़ा और सम्भोग के बारे में विस्तार से नहीं बताना, यह रुचिकर नहीं होगा. तुम उससे सिर्फ इतना कह सकते हो कि हम दोनों ने काफी मजे किए. अनु से सेक्स करते समय मेरे साथ किये सेक्स की तुलना नहीं करना, उस समय का आनन्द लेना.

अनु शाम को आयी, अपनी माँ का खिला चेहरा देख समझ गयी कि उन्हें भरपूर यौन आनन्द मिला.
वह माँ को गले लगाकर बोली- माँ, तुम्हें वर्षों बाद इतना खुश देख रही हूँ!

अनु ने मुझे कुछ नहीं पूछा.

उस रात अनु बहुत जोश में थी, हमने दो बार सम्भोग किया.
हम करीब रोज रात अलग अलग आसन में सम्भोग करते.

मैंने अनुश्री मम्मी से सेक्स में बहुत कुछ सीखा था, वह सब काम आया.
हफ्ते में एक दो रात रात मैं अपनी सास अनुश्री मम्मी के बेडरूम में सोता.

हम दोनों घमासान सेक्स करते.

शादी के एक साल बाद अनु ने बेटी को जन्म दिया.

मैं अनुप्रिया और अनुश्री मम्मी 10 साल से साथ रह रहे हैं.

मैं दोनों के साथ यौन आनन्द लेता हूँ और उनको यौन आनन्द देता हूँ.

आपको मेरी यह वाइफ मदर सेक्स कहानी कैसी लगी, प्लीज जरूर बताएं.

Comments

One response to “पत्नी की सहमति से विधवा सास के साथ संभोग- 2”

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