सीमा की आँखें अब बंद थीं, लेकिन उनके चेहरे पर एक हल्की मुस्कान आ गई थी। 45 मिनट की धीमी, आहिस्ता चुदाई के बाद उनकी साँसें अब सामान्य हो रही थीं। उन्होंने राहुल की छाती पर हाथ रखा, उसे कसकर गले लगा लिया और धीरे से फुसफुसाईं,
“राहुल… तुम बहुत अच्छे हो… बहुत धीरे-धीरे किया… मैं खुश हूँ… बहुत खुश…”
सीमा उठीं। उनकी नंगी देह अभी भी पसीने से चमक रही थी। उन्होंने बेडसाइड टेबल से एक छोटा सा गिफ्ट बॉक्स निकाला जो पहले से रखा हुआ था। बॉक्स पर सुनहरी रिबन बँधा था। उन्होंने राहुल को देते हुए मुस्कुराकर कहा,
“ये तुम्हारे लिए… मेरी तरफ से पहला गिफ्ट।”
राहुल ने बॉक्स खोला। अंदर ब्रांड न्यू iPhone 16 Pro Max (256 GB, टाइटेनियम ब्लैक) रखा था। फोन अभी भी प्लास्टिक में लिपटा हुआ था। सीमा ने कहा,
“अब तुम्हारा पुराना फोन फेंक दो… ये तुम्हारा नया फोन है। मेरे नंबर पहले से सेव है। जब भी कॉल करूँ, तुरंत उठाना।”
राहुल ने फोन हाथ में लिया। वो थोड़ा हैरान था, लेकिन खुश भी। दोनों थोड़ी देर आराम करने लगे। सीमा राहुल की बाँहों में सिर रखकर लेट गईं। उनकी नंगी छातियाँ राहुल की छाती से सटी हुई थीं। दोनों की साँसें एक-दूसरे के चेहरे पर पड़ रही थीं। फार्महाउस के कमरे में सिर्फ हल्की AC की आवाज़ और बाहर पक्षियों की चहचहाहट सुनाई दे रही थी।
करीब 20 मिनट बाद राहुल की भूख लग गई। उसने धीरे से सीमा को बताया, “सीमा जी… मुझे बहुत भूख लग रही है।”
सीमा मुस्कुराईं। उन्होंने बेडसाइड फोन उठाया और एक नंबर डायल किया। फोन पर सिर्फ दो रिंग गईं और दूसरी तरफ से आवाज आई। सीमा ने बहुत शांत और अधिकारपूर्ण स्वर में कहा,
“मैड… नाश्ता तैयार करो… और जल्दी से ले आओ।”
मिनट भर बाद बाहर से हल्की-सी खटखटाहट हुई। दरवाज़ा धीरे से खुला। एक 28-29 साल की लड़की अंदर आई। वो मैड थी — फार्महाउस में काम करने वाली। वो अकेली थी। उसने ट्रे में नाश्ता तैयार करके लाया था — ओमलेट, टोस्ट, फ्रूट सलाद, कॉफी और जूस।
राहुल और सीमा दोनों पूरी तरह नंगे बेड पर लेटे हुए थे। राहुल का 11 इंच का लंड अभी भी आधा सख्त था और कंडोम में लिपटा हुआ था। सीमा की नंगी छातियाँ, सूजी हुई चूत और बिखरे बाल सब कुछ खुला हुआ था।
राहुल ने चौंककर पूछा, “ये कौन है? …बाहर किसी को पता चल गया तो…”
सीमा ने राहुल की जाँघ पर हाथ रखकर उसे शांत किया और मुस्कुराते हुए बोलीं,
“घबराओ मत राहुल… ये मेरी बारोसेंड लड़की है। मैड… बहुत पुरानी और भरोसेमंद है। यहाँ फार्महाउस में सिर्फ़ वो ही काम करती है। मैंने इसे पहले ही सब कुछ समझा रखा है। वो किसी को कुछ नहीं बताएगी। न बाहर, न कहीं। ये हमारा राज़ है… और ये राज़ यहीं रहेगा।”
मैड ने नज़रें नीचे रखी हुई थीं। उसने ट्रे को टेबल पर रख दिया। उसके चेहरे पर कोई हैरानी या शर्म नहीं थी। वो चुपचाप मुड़ी और नाश्ता बनाने के लिए किचन की तरफ चली गई।
राहुल और सीमा दोनों अभी भी पूरी तरह नंगे बेड पर पड़े हुए थे। राहुल का लंड हल्का-हल्का हिल रहा था। सीमा की नंगी देह बेड पर फैली हुई थी — भारी छातियाँ, पसीने से चमकती कमर, और जाँघों के बीच अभी भी हल्की लाली। दोनों एक-दूसरे से सटे हुए थे। कमरे में अब नाश्ते की खुशबू आने लगी थी।
मैड किचन में नाश्ता बनाने चली गई थी…
सीमा राहुल की छाती पर सिर रखे कुछ देर लेटी रहीं। उनकी साँसें अब शांत हो चुकी थीं। उन्होंने धीरे से उठकर राहुल को चूम लिया और मुस्कुराते हुए कहा,
“चलो… अब हम दोनों नंगे ही फार्महाउस घूमते हैं। मैं तुम्हें पूरा घर दिखाती हूँ।”
राहुल ने हँसकर सिर हिलाया। दोनों पूरी तरह नंगे थे। राहुल का 11 इंच का मोटा लंड अभी भी आधा सख्त था और हल्का-हल्का लहरा रहा था। सीमा की भारी 36D छातियाँ, गोल नाभि, सूजी हुई चूत और गोरी जाँघें पूरी तरह खुली हुई थीं। दोनों बेड से उठे और नंगे ही कमरे से बाहर निकल गए।
सीमा ने राहुल का हाथ पकड़ लिया। उनकी नंगी देह राहुल की नंगी देह से हल्के-हल्के टकरा रही थी। पहले उन्होंने मुख्य विला का पूरा टूर करवाया।
लिविंग रूम — बहुत बड़ा, सफेद संगमरमर का फर्श, लेदर सोफा, दीवार पर बड़ी LED TV। सीमा ने राहुल को सोफे पर बैठाया, खुद उसकी गोद में बैठ गईं। उनकी नंगी गांड राहुल की जाँघों पर दब रही थी।
किचन — मॉडर्न, सब कुछ स्टेनलेस स्टील। सीमा ने राहुल को काउंटर पर चढ़ा दिया और खुद उसके सामने खड़ी हो गईं। उनकी छातियाँ राहुल के चेहरे के सामने लहरा रही थीं।
मास्टर बेडरूम — जहाँ वे अभी थे। किंग साइज़ बेड, जकूजी बाथटब, शावर के साथ अटैच्ड बाथरूम।
गेस्ट रूम — दो और बेडरूम, दोनों में प्राइवेट बालकनी।
होम थिएटर रूम — अंधेरा, रिक्लाइनर सीट्स। सीमा ने राहुल को एक सीट पर बैठाया और खुद उसकी गोद में बैठकर उसके लंड को हल्के से सहलाया।
जिम रूम — ट्रेडमिल, वेट्स, मिरर वाली दीवार। दोनों नंगे ही जिम के शीशे के सामने खड़े हो गए। सीमा ने राहुल को पीछे से गले लगाया। उनकी छातियाँ उसकी पीठ से दब रही थीं।
स्विमिंग पूल एरिया — इनडोर पूल, नीला पानी, चारों तरफ ग्लास वॉल। सीमा ने राहुल को पूल के किनारे ले जाकर कहा, “रात को हम यहाँ नंगे नहाएँगे।”
लाइब्रेरी और ऑफिस — किताबों से भरी अलमारी, बड़ा डेस्क। सीमा ने बताया, “यहाँ तुम्हें हफ्ते में 2 दिन काम करना है।”
रूफटॉप टैरेस — ऊपर जाने वाली सीढ़ियाँ चढ़कर वे छत पर पहुँचे। वहाँ जकूजी टब, बार और लाउंजर थे। सूरज ढल रहा था। दोनों नंगे ही छत पर खड़े होकर सूर्यास्त देखने लगे।
इस तरह शाम के 6 बजे तक सीमा ने पूरा फार्महाउस घुमा दिया। हर कमरे में वे रुक-रुककर राहुल को चूमतीं, उसकी छाती सहलातीं, कभी उसके लंड को हल्के से पकड़ लेतीं। राहुल भी उनकी छातियों को छूता, निप्पल्स को हल्के से नोचता। दोनों की देह पूरे टूर में गर्म होती रही।
शाम 6:10 बजे वे बाहर गार्डन में निकले। फार्महाउस के पीछे बहुत बड़ा गार्डन था — हरे-भरे लॉन, फूलों के गमले, छोटा फाउंटेन और चारों तरफ ऊँची दीवार। सूरज ढल चुका था, हल्की ठंडी हवा चल रही थी।
राहुल ने सीमा को गार्डन के बीच वाले लॉन पर खड़ा किया। उसने उन्हें कसकर गले लगा लिया। दोनों की नंगी देह एक-दूसरे से पूरी तरह चिपक गईं। राहुल ने पहले उनके होंठों पर गहरा किस किया। किस लंबा और भूखा था। उनकी जीभें एक-दूसरे में घुल रही थीं। किस के दौरान राहुल के हाथ सीमा की पीठ पर घूम रहे थे, उनकी गांड को दबा रहे थे।
किस खत्म होने पर राहुल ने सीमा की एक छाती को दोनों हाथों से थाम लिया। भारी, नरम मांस हाथ में दब गया। उसने ब्राउन निप्पल को मुँह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगा। जीभ से निप्पल को घुमाता, हल्के से काटता। दूसरी छाती को हाथ से मसलता रहा। सीमा की आहें निकलने लगीं — “आह्ह… राहुल… और जोर से चूसो… उफ्फ… कितना अच्छा लग रहा है…”
राहुल ने उन्हें घास पर लिटा दिया। सीमा की जाँघें अपने आप फैल गईं। राहुल उनके ऊपर झुका और उनकी चूत पर मुंह रख दिया। उसने जीभ से चूत चाटना शुरू किया। पहले क्लिटोरिस को धीरे-धीरे घुमाया, फिर पूरी फाँक चाटी। सीमा की चूत फिर से गीली होने लगी। राहुल ने जीभ अंदर डालकर चूसना शुरू किया। सीमा की कमर ऊपर-नीचे हो रही थी।
“आह्ह्ह… राहुल… तुम्हारी जीभ… बहुत गहरी… हाँ… चाटो… मेरी चूत चाटो… उफ्फ… मैं फिर से गर्म हो रही हूँ…”
सीमा की साँसें तेज़ हो गईं। उनकी जाँघें काँप रही थीं। वो पूरी तरह गर्म हो चुकी थीं।
राहुल ने सिर उठाया। उसका लंड फिर से पूरा खड़ा हो चुका था। उसने सीमा की आँखों में देखते हुए कहा,
“सीमा जी… अब कंडोम चाहिए…”
सीमा ने हाँ में सिर हिलाया। उनकी साँसें अभी भी फूल रही थीं। उन्होंने पास पड़े इंटरकॉम फोन उठाया और मैड को बुलाया।
“मैड… एक Trojan Magnum XL कंडोम ले आओ… जल्दी।”
मैड कुछ ही मिनट में गार्डन में आ गई। वो नजरें नीचे रखे हुए थी। उसके हाथ में Trojan Magnum XL का पैकेट था। उसने पैकेट सीमा को दे दिया और चुपचाप वापस चली गई।
सीमा ने पैकेट राहुल की तरफ बढ़ाया। उनकी आँखों में फिर से भूख और थोड़ा डर दोनों थे…
सीमा ने राहुल की आँखों में देखा। उनकी साँसें अभी भी तेज़ थीं। गार्डन की हल्की ठंडी हवा उनके नंगे बदन पर लग रही थी, लेकिन उनकी चूत अभी भी पिछले राउंड से सूजी हुई थी — लाल, थोड़ी फूली हुई और बहुत संवेदनशील। उन्होंने राहुल की छाती पर हाथ रखा और काँपती हुई आवाज़ में गिड़गिड़ाते हुए कहा,
“राहुल… प्लीज… फिर से 3 इंच से ज़्यादा मत डालना… बस 3 इंच… उससे ज़्यादा नहीं… मेरी चूत बहुत सूजी हुई है… दर्द हो रहा है… प्लीज… वादा करो…”
राहुल ने सिर हिलाया। उसने Trojan Magnum XL कंडोम पहले से ही पहन रखा था। उसका 11 इंच लंबा और 4 इंच मोटा लंड कंडोम में पूरी तरह तना हुआ था। उसने सीमा को घास पर लिटा दिया। सीमा की जाँघें अपने आप थोड़ी फैल गईं, लेकिन उनके चेहरे पर डर और दर्द साफ़ दिख रहा था।
राहुल उनके ऊपर आ गया। लंड की नोक को सूजी हुई चूत की फाँक पर रखा। बहुत धीरे-धीरे, बिना किसी झटके के उसने 3 इंच अंदर डाल दिया।
सीमा की आँखें फट गईं। “आआह्ह्ह… राहुल… दर्द… बहुत दर्द हो रहा है… सूजी हुई है… बस… बस यही रखो… और मत डालना…” उनकी आँखों से तुरंत आँसू निकल आए। चूत की सूजन की वजह से सिर्फ़ 3 इंच भी उन्हें बहुत भारी लग रहा था। उनकी दीवारें लंड को कसकर जकड़ रही थीं।
राहुल ने 3 इंच ही अंदर रखकर बहुत धीमी गति से अंदर-बाहर करना शुरू किया। हर धक्का बेहद आहिस्ता था — बाहर निकालकर फिर से 3 इंच तक ही घुसाना। लेकिन चूत सूजी हुई होने की वजह से हर हलचल में सीमा रो रही थीं। “उफ्फ… राहुल… धीरे… आह्ह… रो रही हूँ… बहुत जलन हो रही है… प्लीज… 3 इंच ही…”
राहुल ने उनकी छातियों को दोनों हाथों से थाम लिया और धीरे-धीरे चूसने लगा। लेकिन उसकी कमर नीचे से लगातार 3 इंच की गति में चल रही थी। सीमा की आहें दर्द और थोड़े मजा के मिश्रण में निकल रही थीं। उनकी जाँघें काँप रही थीं। आँसू गालों पर बह रहे थे।
15 मिनट बाद सीमा का शरीर अचानक सख्त हो गया। उनकी चूत राहुल के लंड को कसकर दबाने लगी। उन्होंने जोर से चीख मारी — “आआह्ह्ह… राहुल… मैं… मैं आ रही हूँ… आह्ह्ह…”
पहला ऑर्गेज्म आ गया। उनका पूरा शरीर सिहर उठा। चूत से गर्म रस निकला और कंडोम पर बहने लगा। सीमा की आँखें बंद थीं, मुँह खुला था और वो हल्के-हल्के काँप रही थीं।
राहुल रुका नहीं। वो अभी भी 3 इंच ही रखकर धीमी गति से चोदता रहा।
40 मिनट पूरे होने वाले थे। राहुल की गति थोड़ी बढ़ गई थी, लेकिन अभी भी 3 इंच से ज़्यादा नहीं। सीमा की चूत अब और भी गीली हो चुकी थी, लेकिन सूजन अभी भी थी। अचानक दूसरा ऑर्गेज्म आया। सीमा ने राहुल की पीठ पर नाखून गड़ा दिए और ज़ोर से चीखी — “आह्ह्ह… दूसरी बार… राहुल… मैं फिर झड़ गई… आह्ह…”
उनका शरीर फिर से सख्त हो गया। चूत बार-बार सिकुड़ रही थी। वो हाँफ रही थीं।
दूसरे ऑर्गेज्म के तुरंत बाद सीमा ने राहुल को दोनों हाथों से पीछे धकेलना शुरू किया। उनकी आवाज़ रोते-रोते निकल रही थी,
“राहुल… अब बस… बस हो गया… बहुत हो गया… मैं सह नहीं पा रही… चूत बहुत सूजी हुई है… दर्द हो रहा है… प्लीज… अब निकाल दो…”
लेकिन राहुल का लंड अभी भी पूरी तरह खड़ा था। 40 मिनट चुदाई के बाद भी वो बिल्कुल सख्त और तना हुआ था। कोई थकान नहीं, कोई झड़ना नहीं।
सीमा ने काँपते हाथ से राहुल का लंड पकड़ा और उसे सहलाने लगीं। उन्होंने जोर-जोर से ऊपर-नीचे किया, नोक को दबाया, लेकिन राहुल का लंड वैसा का वैसा ही खड़ा रहा। कोई पानी नहीं निकला।
सीमा की आँखें फैल गईं। वो हाँफते हुए बोलीं, “राहुल… तुम्हारा… अभी भी खड़ा है… पानी भी नहीं गिरा…”
राहुल ने उनकी आँखों में देखा। उसकी साँसें गहरी थीं। उसका पूरा शरीर और भी गर्म हो गया था। वो और ज़्यादा उत्तेजित हो चुका था।
सीमा अभी भी राहुल की गोद में लेटी हुई थी। उनकी साँसें धीमी हो चुकी थीं, लेकिन राहुल का 11 इंच लंबा और 4 इंच मोटा लंड अभी भी पूरी तरह सख्त और तना हुआ था। कंडोम में लिपटा हुआ वो लंड हल्का-हल्का नब्ज की तरह धड़क रहा था। राहुल ने सीमा को उठाया और खुद घास पर बैठ गया। उसने सीमा को अपनी गोद में बिठा लिया — लेकिन इस बार उल्टा। सीमा की पीठ राहुल की छाती से सट गई। राहुल ने अपनी दोनों टाँगें फैला लीं और सीमा को अपने लंड के ऊपर बिठा दिया।
राहुल ने सीमा की भारी 36D छातियों को दोनों हाथों से थाम लिया। उसने उन्हें आपस में जोर से दबाया और बीच में अपना 11 इंच का मोटा लंड रख दिया। फिर धीरे-धीरे आगे-पीछे करना शुरू कर दिया। लंड की नोक सीमा की छातियों के बीच से निकलती और फिर वापस दब जाती। छातियों का नरम, गर्म मांस लंड को चारों तरफ से दबा रहा था। हर बार आगे धकेलने पर लंड की मोटी नोक सीमा की ठोड़ी तक पहुँच जाती।
सीमा की आहें निकलने लगीं — “आह्ह… राहुल… तुम्हारा लंड… छातियों के बीच… इतना गर्म… उफ्फ…” राहुल की गति धीरे-धीरे तेज़ होती गई। लंड छातियों के बीच फिसल-फिसलकर आगे-पीछे हो रहा था। सीमा की छातियाँ लंड के साथ-साथ हिल रही थीं। काफी देर तक — करीब 12-15 मिनट तक — राहुल ने इस तरह छातियों के बीच लंड रगड़ा। लेकिन उसका पानी अभी भी नहीं गिरा। लंड वैसा का वैसा ही सख्त और खड़ा था।
आखिरकार राहुल ने सीमा को उठाया। दोनों नंगे ही अंदर चले गए। फार्महाउस के अंदर ठंडी AC की हवा उनके नंगे बदन पर लग रही थी। थोड़ी देर बाद दोनों ने नहाया — एक साथ शावर के नीचे। राहुल ने सीमा की छातियाँ साबुन लगाकर मलाईं, उनकी चूत को हल्के हाथ से धोया। फिर दोनों ने कपड़े पहने (सिर्फ़ हल्के घरेलू कपड़े) और डाइनिंग टेबल पर बैठकर खाना खाया। नाश्ता नहीं, बल्कि पूरा डिनर — ग्रिल्ड चिकन, सलाद, रोटी और वाइन। दोनों के बीच हल्की-फुल्की बातें हो रही थीं, लेकिन राहुल का लंड अभी भी पैंट के अंदर गर्म और सख्त था।
खाना खत्म होने के बाद दोनों लिविंग रूम के बड़े सोफे पर आ गए। राहुल सोफे पर बैठ गया। उसका लंड फिर से पूरी तरह खड़ा और गर्म था। उसने सीमा को पास खींचा और उनके होंठों पर किस करने की कोशिश की। लेकिन सीमा ने हल्के से मना कर दिया। “राहुल… अभी नहीं… थोड़ा आराम…”
राहुल ने तुरंत मैड की तरफ इशारा किया। मैड पास ही खड़ी थी। सीमा उठीं, मैड के पास गईं, कुछ देर कान में फुसफुसाईं और वापस राहुल के पास आईं। उन्होंने राहुल की आँखों में देखते हुए कहा,
“अधा ही घुसाना… सिर्फ़ एक राउंड… और वो भी डिनर के बाद…”
फिर दोनों ने डिनर किया। खाना खाते समय सीमा बार-बार राहुल की तरफ देख रही थीं। खाना खत्म होते ही मैड ने Trojan Magnum XL का पैकेट लेकर आ गई। उसने पैकेट फाड़ा, कंडोम निकाला और राहुल के सामने घुटनों के बल बैठकर बहुत सावधानी से कंडोम पहना दिया। कंडोम लंड की 4 इंच मोटाई पर पूरी तरह तन गया।
मैड ने सिर्फ़ अपनी पैंटी उतार दी। बाकी टॉप और ब्रा वैसे ही थी। उन्होंने सोफे पर घुटनों के बल डोगी पोजीशन में लेट गईं। उनकी गोल, मोटी गांड ऊपर उठी हुई थी। सूजी हुई चूत पीछे से साफ़ दिख रही थी। मैड ने पीछे मुड़कर राहुल से कहा, “आराम से डालना राहुल… बहुत धीरे…”
राहुल ने पीछे से मैड की कमर पकड़ी। लंड की नोक को सूजी हुई चूत की फाँक पर रखा और बहुत धीरे-धीरे 5 इंच अंदर डाल दिया। सीमा की कमर काँप गई। “आह्ह… 5 इंच… राहुल… धीरे…”
लेकिन राहुल ने अब गति बढ़ा दी। वो अंदर-बाहर करने लगा। हर धक्के के साथ लंड 5 इंच से थोड़ा-थोड़ा और अंदर जाने लगा। मैड की चूत फिर से फैल रही थी। “आह्ह… राहुल… धीरे… आह्ह…”
राहुल की रफ्तार बढ़ती गई। 50 मिनट तक वो लगातार चोदता रहा। हर धक्का गहरा और जोरदार था। सोफे की चरमराहट, चुदाई की फच-फच आवाज़ और मैड की चीखें पूरे लिविंग रूम में गूँज रही थीं।
मैड तीन बार झड़ गई।
पहली बार — 18 मिनट में — उनकी चूत सिकुड़ गई और वो चीखीं, “आह्ह… पहली बार… राहुल…”
दूसरी बार — 32 मिनट में — उनका पूरा शरीर हिल गया।
तीसरी बार — 48 मिनट में — वो चीखती रहीं, “.. ज्यादा नहीं… ऐसे… आह्ह… मैं सह नहीं पा रही…”
50 मिनट पूरे होने पर राहुल का शरीर तन गया। उसने मैड की कमर को कसकर पकड़ा और आखिरी जोरदार धक्के मारे। फिर कंडोम के अंदर गर्म, गाढ़ा वीर्य निकलने लगा। राहुल ने लंबी साँस ली और पूरा पानी चूत के अंदर ही छोड़ दिया।
जब उसने लंड बाहर निकाला तो सीमा की चूत से कंडोम का पानी और उनका रस दोनों मिलकर बहने लगे। चूत पूरी तरह सूजी हुई और लाल थी।
मैड ने चुपचाप अपनी पैंटी पहनी, साड़ी ठीक की और बिना कुछ कहे कमरे से चली गई।
सीमा राहुल की छाती पर सिर रखे हुए थकी हुई लेटी थी। दोनों की साँसें अब शांत हो चुकी थीं। राहुल ने सीमा को कसकर गले लगाया और धीरे से उनके माथे पर किस किया। “चलो सोते हैं,” उसने फुसफुसाकर कहा।
दोनों बेडरूम में गए। राहुल ने AC ऑन किया और लाइट बंद कर दी। सिर्फ बेडसाइड की हल्की गोल्डन लाइट जल रही थी। दोनों नंगे ही बेड पर लेट गए। सीमा राहुल की बाँहों में सिमटकर लेट गईं। उनकी भारी छातियाँ राहुल की छाती से सटी हुई थीं, उनकी नंगी जाँघ राहुल की जाँघ पर रखी हुई थी।
राहुल की आँखें बंद थे, लेकिन नींद नहीं आ रही थी। वो सोच रहा था — ये औरत 42 साल की है, फिर भी मेरे 11 इंच लंबे और 4 इंच मोटे लंड को सिर्फ 3-5 इंच ही ले पा रही है। इतनी हल्की-सी चुदाई में तीन बार झड़ गई, रोई, चीखी…
तभी उसे अचानक एहसास हुआ।
सीमा को सेक्स के बारे में कभी कुछ पता ही नहीं था।
उनके पति ने हफ्ते में सिर्फ 1 या 2 बार से ज्यादा कभी सेक्स नहीं किया था। वो भी सिर्फ 2-3 मिनट का, छोटा-सा लंड डालकर। सीमा ने कभी अपने पति से ज़्यादा माँगा भी नहीं था। उन्होंने कभी ज़ोर देकर नहीं कहा था कि “मुझे और चाहिए”। उनकी भूख दबी हुई थी, लेकिन उन्होंने कभी उसे व्यक्त नहीं किया था।
राहुल को अचानक याद आया — 2 दिन पहले की वो बात।
सीमा ने खुद बताया था कि उनके पति ने 2 दिन पहले रात को कहा था,
“सीमा, मैं तुम्हें खुश नहीं कर पा रहा हूँ। मैं जानता हूँ। तुम जवान हो, तुम्हारी भूख है। अगर तुम किसी और से करवाना चाहो तो करवा लो। मुझे कोई एतराज़ नहीं है। बस राज़ रहे।”
उसके बाद जब राहुल का चेकअप हुआ और डॉक्टर ने रिपोर्ट में लिखा कि “लंड 11 इंच लंबा, 4 इंच मोटा, बहुत पावरफुल”, तो सीमा के पति ने तुरंत फैसला कर लिया — “ये लड़का परफेक्ट है। इसे रख लो।”
राहुल ने ये सब याद करके मन ही मन मुस्कुराया। उसने सीमा को और कसकर गले लगा लिया। सीमा ने आँखें खोलीं, राहुल की तरफ देखा, उसके होंठों पर हल्का किस किया और फुसफुसाई, “सो जाओ राहुल… कल फिर से…”
दोनों एक-दूसरे से चिपके हुए सो गए।
—
सुबह 7:30 बजे
राहुल की आँख खुली। वो देखता है कि सीमा उसके लंड को दोनों हाथों में पकड़े हुए हैं। उन्होंने धीरे-धीरे लंड को मुँह में ले लिया था। बहुत नरम, बहुत प्यार से चूस रही थीं। उनकी गर्म जीभ लंड की नोक पर घूम रही थी। राहुल की साँसें तेज़ हो गईं।
सीमा ने ऊपर देखा, आँखों में शरम और भूख थी। “गुड मॉर्निंग…” उन्होंने लंड को मुँह से निकालकर कहा और फिर से पूरा मुँह में ले लिया।
राहुल ने उनके बाल पकड़कर हल्का दबाव दिया। सीमा 6 इंच तक गला दे रही थीं। 10 मिनट तक उन्होंने बहुत प्यार से ब्लोजॉब दिया। फिर राहुल ने उन्हें ऊपर खींचा, किस किया, उनकी छातियाँ चूसीं।
फिर सीमा ने खुद Trojan Magnum XL कंडोम निकाला, फाड़ा और राहुल के लंड पर पहन दिया। उन्होंने कहा, “आज सिर्फ 3 इंच… प्लीज…”
राहुल ने उन्हें मिशनरी पोजीशन में लिटाया। बहुत धीरे-धीरे सिर्फ 3 इंच अंदर डाला और 25 मिनट तक धीमी गति से चोदा। सीमा इस बार कम रोईं, लेकिन फिर भी आहें भर रही थीं। आखिर में राहुल ने 3 इंच ही रखकर झड़ दिया।
—
नाश्ता
दोनों नहाकर तैयार हुए। मैड (रीना) ने नाश्ता और चाय ले आकर टेबल पर रख दी। दोनों ने साथ में नाश्ता किया।
खाते-खाते सीमा ने कहा,
“राहुल… हमारा प्लान तो 2 दिन का था, लेकिन अब मैं सोच रही हूँ… हम एक-दो हफ्ते आराम-आराम से करेंगे। मेरी चूत अभी बहुत सूज गई है। दर्द हो रहा है। अगले हफ्ते तक ठीक हो जाएगी। तब तक हम धीरे-धीरे बढ़ाएँगे।”
राहुल ने सिर हिलाया।
नाश्ता खत्म होने के बाद सीमा ने अपनी पर्स से 50,000 रुपये नोटों में निकाले और राहुल को थमा दिए।
“ये तुम्हारे लिए। अगले हफ्ते मिलते हैं। तब तक घर जाकर आराम करो और एंजॉय करो।”
फिर सीमा ने खुद ड्राइवर को बुलाया। BMW तैयार थी। दोनों कार में बैठे। सीमा ने राहुल को उसके घर तक छोड़ दिया।
कार घर के गेट पर रुकी। सीमा ने राहुल के गाल पर किस किया और फुसफुसाई,
“अगले हफ्ते… मैं इंतज़ार करूँगी।”
राहुल कार से उतरा। उसके हाथ में 50,000 रुपये थे, जेब में नया iPhone था और दिमाग में पिछले 2 दिनों की यादें थीं।
अब सीमा पूरी तरह नंगी घास पर खड़ी थीं। उनकी गोरी देह शाम की रोशनी में चमक रही थी — भारी छातियाँ, पतली कमर, गोल नाभि, मोटी जाँघें और हल्के बालों वाली चूत।
राहुल आगे बढ़ा। उसने सीमा को कसकर गले लगा लिया। दोनों की नंगी देह एक-दूसरे से चिपक गईं। राहुल ने पहले उनके होंठों पर गहरा किस किया। किस लंबा और भूखा था। फिर वो धीरे-धीरे नीचे उतरा।
उसने सीमा की दोनों छातियों को दोनों हाथों से थाम लिया। नरम, भारी मांस हाथ में पूरी तरह दब गया। राहुल ने एक निप्पल को मुँह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगा। जीभ से निप्पल को चारों तरफ घुमाया, हल्के से काटा, फिर पूरा निप्पल मुँह में लेकर चूसा। दूसरी छाती को हाथ से मसलता रहा। सीमा की आहें निकलने लगीं — “आह्ह… राहुल… और जोर से… चूसो… उफ्फ… कितना अच्छा लग रहा है…”
राहुल ने लगातार 15 मिनट तक सीमा की दोनों छातियों को चूसा, चाटा और दूध पिया जैसे। निप्पल्स लाल और सख्त हो गए थे। फिर वो धीरे-धीरे नीचे उतरा। सीमा की जाँघें अपने आप फैल गईं। राहुल ने घुटनों के बल बैठकर उनकी चूत पर मुंह रख दिया।
उसने जीभ से चूत की फाँक को धीरे-धीरे चाटना शुरू किया। पहले क्लिटोरिस को घुमाया, फिर पूरी फाँक चाटी, फिर जीभ अंदर डालकर चूसने लगा। सीमा की कमर ऊपर-नीचे होने लगी। उनकी आहें तेज़ हो गईं — “आह्ह्ह… राहुल… तुम्हारी जीभ… बहुत गहरी… हाँ… चूसो… मेरी चूत चूसो… उफ्फ… मैं गर्म हो रही हूँ…”
राहुल ने लगातार 10-12 मिनट तक सीमा की चूत को चाटा और चूसा। उनकी चूत अब गीली और चमकदार हो चुकी थी। सीमा की जाँघें काँप रही थीं, हाथ राहुल के बालों में थे और वो उसके सिर को अपनी चूत पर दबा रही थीं।
सीमा ने राहुल की आँखों में गहरी नज़र डाली। शाम की सुनहरी रोशनी गार्डन में फैली हुई थी। हल्की हवा फूलों की महक लेकर बह रही थी। सीमा ने राहुल का हाथ पकड़ा और उसे घास पर धीरे से लिटा दिया। घास नरम और ठंडी थी। राहुल पीठ के बल लेट गया। उसका पूरा नंगा शरीर शाम की रोशनी में चमक रहा था। उसका 11 इंच लंबा और 4 इंच मोटा लंड पहले से ही आधा सख्त होकर ऊपर की तरफ खड़ा था।
सीमा मुस्कुराई। उन्होंने राहुल की जाँघों के बीच बैठकर अपनी गोरी, नंगी देह को झुकाया। उनकी भारी 36D छातियाँ लहराती हुई राहुल के पेट पर छू रही थीं। उन्होंने पहले राहुल के नाभि के पास किस किया, फिर धीरे-धीरे नीचे सरकती गईं।
राहुल ने आँखें बंद कर लीं। वह महसूस कर रहा था कि सीमा की गर्म साँसें उसके लंड के पास आ रही हैं। सीमा ने दोनों हाथों से राहुल के मोटे लंड को पकड़ लिया। उन्होंने पहले लंड की नोक को जीभ से चाटा, फिर पूरा सिरा मुँह में ले लिया। “मम्म…” उन्होंने धीरे से मुँह से निकाला और फिर गहरी चूसने लगीं।
फिर उन्होंने लंड को नीचे सरकाकर राहुल की गोतियों को चूसना शुरू किया। दोनों गोतियाँ एक-एक करके मुँह में लेकर बहुत प्यार से चूसने लगीं। जीभ से घुमातीं, हल्के से चबातीं, फिर मुँह में लेकर चूसतीं। राहुल का पूरा शरीर सिहर उठा। उसने मन ही मन सोचा — किसी ने सिखाया है… इतनी अच्छी तरीके से चूस रही हैं…
सीमा 15-20 मिनट तक लगातार लंड और गोतियों को चूसती रहीं। उनका मुँह पूरी तरह भीगा हुआ था। सलाइवा लंड पर बह रहा था। राहुल की साँसें तेज़ हो गई थीं।
20 मिनट बाद सीमा ने राहुल को घसीटकर 69 पोजीशन में ले आईं। सीमा ऊपर थीं। उनकी सूजी हुई, गीली चूत राहुल के मुँह के ठीक ऊपर थी। राहुल ने दोनों हाथों से सीमा की मोटी गांड पकड़ ली और उनकी चूत को मुँह से चूसना शुरू कर दिया।
सीमा ने राहुल के लंड को दोनों हाथों में पकड़ा और मुँह में ले लिया। इस बार वो 5 इंच तक गला दे रही थीं। उनका गला पूरी तरह भर गया था। “ग्लक… ग्लक… ग्लक…” की आवाज़ गार्डन में गूँज रही थी। सीमा का सलाइवा लंड पर बह रहा था। वो लगातार ऊपर-नीचे कर रही थीं।
राहुल भी उनकी चूत को जोर-जोर से चूस रहा था। जीभ अंदर डालकर चूस रहा था। कुछ ही देर में सीमा की कमर काँपने लगी। उनकी चूत सिकुड़ने लगी। उन्होंने राहुल के लंड को मुँह से निकाले बिना ही जोर से चीख मारी — “आआह्ह्ह… राहुल… मैं… आ रही हूँ…”
सीमा की चूत से गर्म पानी की धार निकली। वो पहली बार झड़ गईं। उनका पूरा रस राहुल के मुँह पर और चेहरे पर बह गया।
लेकिन राहुल का लंड अभी भी पूरी तरह खड़ा था। उसने सीमा को उठाया। अब वो खड़ा हो गया। सीमा को घुटनों के बल बिठा दिया। सीमा घुटनों पर बैठ गईं। उनका चेहरा राहुल के लंड के ठीक सामने था।
राहुल ने उनके बाल पकड़ लिए। सीमा ने फिर से लंड मुँह में ले लिया। इस बार वो पूरी ताकत से चूस रही थीं। 25 मिनट तक लगातार चूसती रहीं। कभी गहरी गला देतीं, कभी सिर्फ नोक चूसतीं, कभी गोतियों को चूसतीं। उनका मुँह, ठोड़ी, छातियाँ सब सलाइवा से भीग गए थे।
25 मिनट बाद राहुल का शरीर तन गया। उसकी साँसें बहुत तेज़ हो गईं। उसने सीमा के बाल कसकर पकड़े और बोला, “सीमा जी… पानी निकलने वाला है… कहाँ निकालूँ?”
सीमा ने लंड को मुँह से निकालकर हाँफते हुए कहा, “बाहर… घास पर निकाल दो…”
राहुल ने लंड को हाथ में पकड़ा। सीमा अभी भी घुटनों के बल बैठी हुई थीं। राहुल ने जोर-जोर से हिलाना शुरू किया। कुछ ही सेकंड बाद उसके लंड से गाढ़ा, गर्म, सफेद वीर्य की मोटी-मोटी धार निकलने लगी।
बहुत सारा पानी — पहली धार सीमा की छातियों पर गिरी, दूसरी उनके गाल और होंठों पर, बाकी सारी घास पर गिर गई। वीर्य की मोटी बूँदें घास पर फैल गईं। राहुल ने पूरा पानी निकाल दिया — इतना सारा कि घास का एक छोटा सा हिस्सा गीला हो गया।
सीमा अभी भी घुटनों के बल बैठी हुई थीं। उनके चेहरे, छातियों और होंठों पर राहुल का वीर्य लगा हुआ था। वो हाँफ रही थीं। राहुल भी खड़े-खड़े साँस ले रहा था।
सीमा ने राहुल को घास पर लिटा दिया था। शाम के 7 बजे थे। गार्डन में हल्की-हल्की ठंडी हवा चल रही थी। सूरज ढल चुका था, लेकिन आसमान में अभी भी हल्की नारंगी रोशनी बाकी थी। दोनों पूरी तरह नंगे थे। राहुल पीठ के बल लेटा हुआ था। उसका 11 इंच लंबा और 4 इंच मोटा लंड आधा सख्त होकर पेट पर लेटा हुआ था। सीमा उसके बगल में लेटी हुई थीं। उनकी भारी 36D छातियाँ राहुल की बाँह से सटी हुई थीं। उनकी नंगी जाँघ राहुल की जाँघ पर रखी हुई थी।
दोनों ने एक-दूसरे को छूना शुरू किया। कोई जल्दबाजी नहीं थी। कोई चुदाई नहीं थी। सिर्फ़ धीमी, गहरी और रोमांचक छुआछूई।
सीमा ने राहुल की छाती पर हाथ फेरा। उनकी नरम उँगलियाँ उसके निप्पल्स पर घूम रही थीं। राहुल ने सीमा की कमर पर हाथ रखा और धीरे-धीरे उनकी पीठ सहलाने लगा। दोनों की साँसें एक-दूसरे के चेहरे पर पड़ रही थीं। सीमा ने झुककर राहुल के गाल पर हल्का किस किया, फिर गर्दन पर, फिर छाती पर। उन्होंने राहुल के निप्पल को जीभ से घुमाया और हल्के से चूसा। राहुल की साँसें भारी हो गईं।
राहुल ने सीमा को अपने ऊपर खींच लिया। अब सीमा उसकी छाती पर लेटी हुई थीं। उनकी भारी छातियाँ राहुल की छाती से पूरी तरह दब रही थीं। राहुल ने अपनी दोनों टाँगें सीमा की टाँगों के बीच रख लीं। दोनों की नंगी देह एक-दूसरे से पूरी तरह चिपक गई थी। राहुल ने सीमा की गांड पर हाथ फेरा। नरम, गोल मांस हाथ में दब रहा था। सीमा ने राहुल की गर्दन में चेहरा छुपा लिया और धीरे-धीरे उसके कानों को चूमने लगीं।
7:30 बजे तक दोनों ऐसे ही लेटे रहे। कभी-कभी किस करते, कभी छातियों को सहलाते, कभी कमर पर हाथ फेरते। कोई शब्द नहीं, सिर्फ़ साँसों की आवाज़ और हल्की-हल्की आहें। सीमा की चूत राहुल की जाँघ से हल्के-हल्के रगड़ खा रही थी, लेकिन राहुल ने जान-बूझकर आगे नहीं बढ़ाया।
7:45 बजे सीमा उठीं। उन्होंने राहुल को भी खड़ा किया। दोनों नंगे ही गार्डन में घूमने लगे। सीमा ने राहुल का हाथ पकड़ रखा था। वे फूलों के पास गए, फाउंटेन के पास गए। हवा में उनकी नंगी देह पर हल्की ठंडक लग रही थी। सीमा ने राहुल को फाउंटेन के किनारे खड़ा किया और खुद उसके सामने घुटनों के बल बैठ गईं। उन्होंने राहुल के लंड को दोनों हाथों में पकड़ा और सिर्फ़ हल्के-हल्के सहलाया। कोई मुँह नहीं लगाया, सिर्फ़ उँगलियों से नरम-नरम सहलाती रहीं। राहुल की साँसें तेज़ हो गईं।
8:15 बजे दोनों वापस घास पर लेट गए। इस बार राहुल सीमा के ऊपर आ गया। उसने उनकी छातियों को दोनों हाथों से थाम लिया और बहुत धीरे-धीरे मसलने लगा। निप्पल्स को उँगलियों से घुमाता रहा। सीमा की आँखें बंद थीं। वो हल्की-हल्की आहें भर रही थीं। राहुल ने उनकी नाभि में जीभ डाली और फिर नीचे उतरकर उनकी जाँघों को चूमा। लेकिन चूत को छुआ नहीं। सिर्फ़ जाँघों के अंदरूनी हिस्से को चूमा और सहलाया।
8:45 बजे तक दोनों ऐसे ही एक-दूसरे को छूते, सहलाते, किस करते रहे। कोई चुदाई नहीं, कोई penetration नहीं। सिर्फ़ गहरी, नंगी closeness।
9:00 बजे मैड (रीना) ने आवाज़ लगाई — “मैडम, डिनर तैयार है।”
दोनों नंगे ही उठे और डाइनिंग एरिया की तरफ चले गए। टेबल पर डिनर लगा हुआ था — ग्रिल्ड फिश, सलाद, रोटी, दाल और वाइन। दोनों नंगे ही कुर्सी पर बैठ गए। सीमा की छातियाँ टेबल पर हल्के से दब रही थीं। राहुल का लंड टेबल के नीचे आधा सख्त था। दोनों ने आराम से खाना खाया। बीच-बीच में सीमा राहुल की जाँघ पर हाथ रख देतीं। राहुल भी सीमा की कमर पर हाथ फेर देता। खाने के दौरान हल्की-फुल्की बातें होती रहीं।
डिनर खत्म होने के बाद दोनों वापस लिविंग रूम के बड़े सोफे पर आए। दोनों पूरी तरह नंगे ही सोफे पर लेट गए। राहुल पीठ के बल लेटा। सीमा उसके बगल में लेटी। उनकी नंगी देह एक-दूसरे से सटी हुई थी। 15-20 मिनट तक दोनों ऐसे ही पड़े रहे। कभी-कभी किस करते, कभी छाती सहलाते।
9:40 बजे राहुल का लंड फिर से पूरा खड़ा हो गया। वो सख्त और तना हुआ था। राहुल ने सीमा को देखा और धीरे से कहा, “सीमा जी… चलो रूम में चलते हैं।”
सीमा मुस्कुराईं। ठीक उसी वक्त मैड (रीना) कमरे में आई। उसके हाथ में दो गिलास गर्म दूध थे। उसने ट्रे रखी, दोनों को दूध दे दिया और बिना कुछ कहे चुपचाप चली गई।
दोनों ने गर्म दूध पिया। दूध पीते समय सीमा राहुल की जाँघ पर हाथ फेर रही थीं। राहुल का लंड अब और भी सख्त हो चुका था। दूध पीकर राहुल ने गिलास रख दिया। उसका पूरा शरीर तैयार था। उसने सीमा की तरफ देखा और धीरे से बोला,
“अब मैं तैयार हूँ…”