Tag:  कामुकता स्टोरी – Kamukta Story माँ बेटे की चुदाई की कहानी छोटी साली की प्यासी चूत

  • सपनो की जॉब 2

    सीमा की आँखें अब बंद थीं, लेकिन उनके चेहरे पर एक हल्की मुस्कान आ गई थी। 45 मिनट की धीमी, आहिस्ता चुदाई के बाद उनकी साँसें अब सामान्य हो रही थीं। उन्होंने राहुल की छाती पर हाथ रखा, उसे कसकर गले लगा लिया और धीरे से फुसफुसाईं, 
    “राहुल… तुम बहुत अच्छे हो… बहुत धीरे-धीरे किया… मैं खुश हूँ… बहुत खुश…”

    सीमा उठीं। उनकी नंगी देह अभी भी पसीने से चमक रही थी। उन्होंने बेडसाइड टेबल से एक छोटा सा गिफ्ट बॉक्स निकाला जो पहले से रखा हुआ था। बॉक्स पर सुनहरी रिबन बँधा था। उन्होंने राहुल को देते हुए मुस्कुराकर कहा, 
    “ये तुम्हारे लिए… मेरी तरफ से पहला गिफ्ट।”

    राहुल ने बॉक्स खोला। अंदर ब्रांड न्यू iPhone 16 Pro Max (256 GB, टाइटेनियम ब्लैक) रखा था। फोन अभी भी प्लास्टिक में लिपटा हुआ था। सीमा ने कहा, 
    “अब तुम्हारा पुराना फोन फेंक दो… ये तुम्हारा नया फोन है। मेरे नंबर पहले से सेव है। जब भी कॉल करूँ, तुरंत उठाना।”

    राहुल ने फोन हाथ में लिया। वो थोड़ा हैरान था, लेकिन खुश भी। दोनों थोड़ी देर आराम करने लगे। सीमा राहुल की बाँहों में सिर रखकर लेट गईं। उनकी नंगी छातियाँ राहुल की छाती से सटी हुई थीं। दोनों की साँसें एक-दूसरे के चेहरे पर पड़ रही थीं। फार्महाउस के कमरे में सिर्फ हल्की AC की आवाज़ और बाहर पक्षियों की चहचहाहट सुनाई दे रही थी।

    करीब 20 मिनट बाद राहुल की भूख लग गई। उसने धीरे से सीमा को बताया, “सीमा जी… मुझे बहुत भूख लग रही है।”

    सीमा मुस्कुराईं। उन्होंने बेडसाइड फोन उठाया और एक नंबर डायल किया। फोन पर सिर्फ दो रिंग गईं और दूसरी तरफ से आवाज आई। सीमा ने बहुत शांत और अधिकारपूर्ण स्वर में कहा, 
    “मैड… नाश्ता तैयार करो… और जल्दी से ले आओ।”

    मिनट भर बाद बाहर से हल्की-सी खटखटाहट हुई। दरवाज़ा धीरे से खुला। एक 28-29 साल की लड़की अंदर आई। वो मैड थी — फार्महाउस में काम करने वाली। वो अकेली थी। उसने ट्रे में नाश्ता तैयार करके लाया था — ओमलेट, टोस्ट, फ्रूट सलाद, कॉफी और जूस।

    राहुल और सीमा दोनों पूरी तरह नंगे बेड पर लेटे हुए थे। राहुल का 11 इंच का लंड अभी भी आधा सख्त था और कंडोम में लिपटा हुआ था। सीमा की नंगी छातियाँ, सूजी हुई चूत और बिखरे बाल सब कुछ खुला हुआ था।

    राहुल ने चौंककर पूछा, “ये कौन है? …बाहर किसी को पता चल गया तो…”

    सीमा ने राहुल की जाँघ पर हाथ रखकर उसे शांत किया और मुस्कुराते हुए बोलीं, 
    “घबराओ मत राहुल… ये मेरी बारोसेंड लड़की है। मैड… बहुत पुरानी और भरोसेमंद है। यहाँ फार्महाउस में सिर्फ़ वो ही काम करती है। मैंने इसे पहले ही सब कुछ समझा रखा है। वो किसी को कुछ नहीं बताएगी। न बाहर, न कहीं। ये हमारा राज़ है… और ये राज़ यहीं रहेगा।”

    मैड ने नज़रें नीचे रखी हुई थीं। उसने ट्रे को टेबल पर रख दिया। उसके चेहरे पर कोई हैरानी या शर्म नहीं थी। वो चुपचाप मुड़ी और नाश्ता बनाने के लिए किचन की तरफ चली गई।

    राहुल और सीमा दोनों अभी भी पूरी तरह नंगे बेड पर पड़े हुए थे। राहुल का लंड हल्का-हल्का हिल रहा था। सीमा की नंगी देह बेड पर फैली हुई थी — भारी छातियाँ, पसीने से चमकती कमर, और जाँघों के बीच अभी भी हल्की लाली। दोनों एक-दूसरे से सटे हुए थे। कमरे में अब नाश्ते की खुशबू आने लगी थी।

    मैड किचन में नाश्ता बनाने चली गई थी…

    सीमा राहुल की छाती पर सिर रखे कुछ देर लेटी रहीं। उनकी साँसें अब शांत हो चुकी थीं। उन्होंने धीरे से उठकर राहुल को चूम लिया और मुस्कुराते हुए कहा, 
    “चलो… अब हम दोनों नंगे ही फार्महाउस घूमते हैं। मैं तुम्हें पूरा घर दिखाती हूँ।”

    राहुल ने हँसकर सिर हिलाया। दोनों पूरी तरह नंगे थे। राहुल का 11 इंच का मोटा लंड अभी भी आधा सख्त था और हल्का-हल्का लहरा रहा था। सीमा की भारी 36D छातियाँ, गोल नाभि, सूजी हुई चूत और गोरी जाँघें पूरी तरह खुली हुई थीं। दोनों बेड से उठे और नंगे ही कमरे से बाहर निकल गए।

    सीमा ने राहुल का हाथ पकड़ लिया। उनकी नंगी देह राहुल की नंगी देह से हल्के-हल्के टकरा रही थी। पहले उन्होंने मुख्य विला का पूरा टूर करवाया। 

    लिविंग रूम — बहुत बड़ा, सफेद संगमरमर का फर्श, लेदर सोफा, दीवार पर बड़ी LED TV। सीमा ने राहुल को सोफे पर बैठाया, खुद उसकी गोद में बैठ गईं। उनकी नंगी गांड राहुल की जाँघों पर दब रही थी। 

    किचन — मॉडर्न, सब कुछ स्टेनलेस स्टील। सीमा ने राहुल को काउंटर पर चढ़ा दिया और खुद उसके सामने खड़ी हो गईं। उनकी छातियाँ राहुल के चेहरे के सामने लहरा रही थीं। 

    मास्टर बेडरूम — जहाँ वे अभी थे। किंग साइज़ बेड, जकूजी बाथटब, शावर के साथ अटैच्ड बाथरूम। 

    गेस्ट रूम — दो और बेडरूम, दोनों में प्राइवेट बालकनी। 

    होम थिएटर रूम — अंधेरा, रिक्लाइनर सीट्स। सीमा ने राहुल को एक सीट पर बैठाया और खुद उसकी गोद में बैठकर उसके लंड को हल्के से सहलाया। 

    जिम रूम — ट्रेडमिल, वेट्स, मिरर वाली दीवार। दोनों नंगे ही जिम के शीशे के सामने खड़े हो गए। सीमा ने राहुल को पीछे से गले लगाया। उनकी छातियाँ उसकी पीठ से दब रही थीं। 

    स्विमिंग पूल एरिया — इनडोर पूल, नीला पानी, चारों तरफ ग्लास वॉल। सीमा ने राहुल को पूल के किनारे ले जाकर कहा, “रात को हम यहाँ नंगे नहाएँगे।”

    लाइब्रेरी और ऑफिस — किताबों से भरी अलमारी, बड़ा डेस्क। सीमा ने बताया, “यहाँ तुम्हें हफ्ते में 2 दिन काम करना है।”

    रूफटॉप टैरेस — ऊपर जाने वाली सीढ़ियाँ चढ़कर वे छत पर पहुँचे। वहाँ जकूजी टब, बार और लाउंजर थे। सूरज ढल रहा था। दोनों नंगे ही छत पर खड़े होकर सूर्यास्त देखने लगे। 

    इस तरह शाम के 6 बजे तक सीमा ने पूरा फार्महाउस घुमा दिया। हर कमरे में वे रुक-रुककर राहुल को चूमतीं, उसकी छाती सहलातीं, कभी उसके लंड को हल्के से पकड़ लेतीं। राहुल भी उनकी छातियों को छूता, निप्पल्स को हल्के से नोचता। दोनों की देह पूरे टूर में गर्म होती रही।

    शाम 6:10 बजे वे बाहर गार्डन में निकले। फार्महाउस के पीछे बहुत बड़ा गार्डन था — हरे-भरे लॉन, फूलों के गमले, छोटा फाउंटेन और चारों तरफ ऊँची दीवार। सूरज ढल चुका था, हल्की ठंडी हवा चल रही थी। 

    राहुल ने सीमा को गार्डन के बीच वाले लॉन पर खड़ा किया। उसने उन्हें कसकर गले लगा लिया। दोनों की नंगी देह एक-दूसरे से पूरी तरह चिपक गईं। राहुल ने पहले उनके होंठों पर गहरा किस किया। किस लंबा और भूखा था। उनकी जीभें एक-दूसरे में घुल रही थीं। किस के दौरान राहुल के हाथ सीमा की पीठ पर घूम रहे थे, उनकी गांड को दबा रहे थे। 

    किस खत्म होने पर राहुल ने सीमा की एक छाती को दोनों हाथों से थाम लिया। भारी, नरम मांस हाथ में दब गया। उसने ब्राउन निप्पल को मुँह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगा। जीभ से निप्पल को घुमाता, हल्के से काटता। दूसरी छाती को हाथ से मसलता रहा। सीमा की आहें निकलने लगीं — “आह्ह… राहुल… और जोर से चूसो… उफ्फ… कितना अच्छा लग रहा है…” 

    राहुल ने उन्हें घास पर लिटा दिया। सीमा की जाँघें अपने आप फैल गईं। राहुल उनके ऊपर झुका और उनकी चूत पर मुंह रख दिया। उसने जीभ से चूत चाटना शुरू किया। पहले क्लिटोरिस को धीरे-धीरे घुमाया, फिर पूरी फाँक चाटी। सीमा की चूत फिर से गीली होने लगी। राहुल ने जीभ अंदर डालकर चूसना शुरू किया। सीमा की कमर ऊपर-नीचे हो रही थी। 

    “आह्ह्ह… राहुल… तुम्हारी जीभ… बहुत गहरी… हाँ… चाटो… मेरी चूत चाटो… उफ्फ… मैं फिर से गर्म हो रही हूँ…” 

    सीमा की साँसें तेज़ हो गईं। उनकी जाँघें काँप रही थीं। वो पूरी तरह गर्म हो चुकी थीं। 

    राहुल ने सिर उठाया। उसका लंड फिर से पूरा खड़ा हो चुका था। उसने सीमा की आँखों में देखते हुए कहा, 
    “सीमा जी… अब कंडोम चाहिए…”

    सीमा ने हाँ में सिर हिलाया। उनकी साँसें अभी भी फूल रही थीं। उन्होंने पास पड़े इंटरकॉम फोन उठाया और मैड को बुलाया। 

    “मैड… एक Trojan Magnum XL कंडोम ले आओ… जल्दी।”

    मैड कुछ ही मिनट में गार्डन में आ गई। वो नजरें नीचे रखे हुए थी। उसके हाथ में Trojan Magnum XL का पैकेट था। उसने पैकेट सीमा को दे दिया और चुपचाप वापस चली गई।

    सीमा ने पैकेट राहुल की तरफ बढ़ाया। उनकी आँखों में फिर से भूख और थोड़ा डर दोनों थे…

    सीमा ने राहुल की आँखों में देखा। उनकी साँसें अभी भी तेज़ थीं। गार्डन की हल्की ठंडी हवा उनके नंगे बदन पर लग रही थी, लेकिन उनकी चूत अभी भी पिछले राउंड से सूजी हुई थी — लाल, थोड़ी फूली हुई और बहुत संवेदनशील। उन्होंने राहुल की छाती पर हाथ रखा और काँपती हुई आवाज़ में गिड़गिड़ाते हुए कहा,

    “राहुल… प्लीज… फिर से 3 इंच से ज़्यादा मत डालना… बस 3 इंच… उससे ज़्यादा नहीं… मेरी चूत बहुत सूजी हुई है… दर्द हो रहा है… प्लीज… वादा करो…”

    राहुल ने सिर हिलाया। उसने Trojan Magnum XL कंडोम पहले से ही पहन रखा था। उसका 11 इंच लंबा और 4 इंच मोटा लंड कंडोम में पूरी तरह तना हुआ था। उसने सीमा को घास पर लिटा दिया। सीमा की जाँघें अपने आप थोड़ी फैल गईं, लेकिन उनके चेहरे पर डर और दर्द साफ़ दिख रहा था।

    राहुल उनके ऊपर आ गया। लंड की नोक को सूजी हुई चूत की फाँक पर रखा। बहुत धीरे-धीरे, बिना किसी झटके के उसने 3 इंच अंदर डाल दिया।

    सीमा की आँखें फट गईं। “आआह्ह्ह… राहुल… दर्द… बहुत दर्द हो रहा है… सूजी हुई है… बस… बस यही रखो… और मत डालना…” उनकी आँखों से तुरंत आँसू निकल आए। चूत की सूजन की वजह से सिर्फ़ 3 इंच भी उन्हें बहुत भारी लग रहा था। उनकी दीवारें लंड को कसकर जकड़ रही थीं।

    राहुल ने 3 इंच ही अंदर रखकर बहुत धीमी गति से अंदर-बाहर करना शुरू किया। हर धक्का बेहद आहिस्ता था — बाहर निकालकर फिर से 3 इंच तक ही घुसाना। लेकिन चूत सूजी हुई होने की वजह से हर हलचल में सीमा रो रही थीं। “उफ्फ… राहुल… धीरे… आह्ह… रो रही हूँ… बहुत जलन हो रही है… प्लीज… 3 इंच ही…”

    राहुल ने उनकी छातियों को दोनों हाथों से थाम लिया और धीरे-धीरे चूसने लगा। लेकिन उसकी कमर नीचे से लगातार 3 इंच की गति में चल रही थी। सीमा की आहें दर्द और थोड़े मजा के मिश्रण में निकल रही थीं। उनकी जाँघें काँप रही थीं। आँसू गालों पर बह रहे थे।

    15 मिनट बाद सीमा का शरीर अचानक सख्त हो गया। उनकी चूत राहुल के लंड को कसकर दबाने लगी। उन्होंने जोर से चीख मारी — “आआह्ह्ह… राहुल… मैं… मैं आ रही हूँ… आह्ह्ह…” 
    पहला ऑर्गेज्म आ गया। उनका पूरा शरीर सिहर उठा। चूत से गर्म रस निकला और कंडोम पर बहने लगा। सीमा की आँखें बंद थीं, मुँह खुला था और वो हल्के-हल्के काँप रही थीं।

    राहुल रुका नहीं। वो अभी भी 3 इंच ही रखकर धीमी गति से चोदता रहा।

    40 मिनट पूरे होने वाले थे। राहुल की गति थोड़ी बढ़ गई थी, लेकिन अभी भी 3 इंच से ज़्यादा नहीं। सीमा की चूत अब और भी गीली हो चुकी थी, लेकिन सूजन अभी भी थी। अचानक दूसरा ऑर्गेज्म आया। सीमा ने राहुल की पीठ पर नाखून गड़ा दिए और ज़ोर से चीखी — “आह्ह्ह… दूसरी बार… राहुल… मैं फिर झड़ गई… आह्ह…”

    उनका शरीर फिर से सख्त हो गया। चूत बार-बार सिकुड़ रही थी। वो हाँफ रही थीं।

    दूसरे ऑर्गेज्म के तुरंत बाद सीमा ने राहुल को दोनों हाथों से पीछे धकेलना शुरू किया। उनकी आवाज़ रोते-रोते निकल रही थी, 
    “राहुल… अब बस… बस हो गया… बहुत हो गया… मैं सह नहीं पा रही… चूत बहुत सूजी हुई है… दर्द हो रहा है… प्लीज… अब निकाल दो…”

    लेकिन राहुल का लंड अभी भी पूरी तरह खड़ा था। 40 मिनट चुदाई के बाद भी वो बिल्कुल सख्त और तना हुआ था। कोई थकान नहीं, कोई झड़ना नहीं।

    सीमा ने काँपते हाथ से राहुल का लंड पकड़ा और उसे सहलाने लगीं। उन्होंने जोर-जोर से ऊपर-नीचे किया, नोक को दबाया, लेकिन राहुल का लंड वैसा का वैसा ही खड़ा रहा। कोई पानी नहीं निकला।

    सीमा की आँखें फैल गईं। वो हाँफते हुए बोलीं, “राहुल… तुम्हारा… अभी भी खड़ा है… पानी भी नहीं गिरा…”

    राहुल ने उनकी आँखों में देखा। उसकी साँसें गहरी थीं। उसका पूरा शरीर और भी गर्म हो गया था। वो और ज़्यादा उत्तेजित हो चुका था।

    सीमा अभी भी राहुल की गोद में लेटी हुई थी। उनकी साँसें धीमी हो चुकी थीं, लेकिन राहुल का 11 इंच लंबा और 4 इंच मोटा लंड अभी भी पूरी तरह सख्त और तना हुआ था। कंडोम में लिपटा हुआ वो लंड हल्का-हल्का नब्ज की तरह धड़क रहा था। राहुल ने सीमा को उठाया और खुद घास पर बैठ गया। उसने सीमा को अपनी गोद में बिठा लिया — लेकिन इस बार उल्टा। सीमा की पीठ राहुल की छाती से सट गई। राहुल ने अपनी दोनों टाँगें फैला लीं और सीमा को अपने लंड के ऊपर बिठा दिया।

    राहुल ने सीमा की भारी 36D छातियों को दोनों हाथों से थाम लिया। उसने उन्हें आपस में जोर से दबाया और बीच में अपना 11 इंच का मोटा लंड रख दिया। फिर धीरे-धीरे आगे-पीछे करना शुरू कर दिया। लंड की नोक सीमा की छातियों के बीच से निकलती और फिर वापस दब जाती। छातियों का नरम, गर्म मांस लंड को चारों तरफ से दबा रहा था। हर बार आगे धकेलने पर लंड की मोटी नोक सीमा की ठोड़ी तक पहुँच जाती।

    सीमा की आहें निकलने लगीं — “आह्ह… राहुल… तुम्हारा लंड… छातियों के बीच… इतना गर्म… उफ्फ…” राहुल की गति धीरे-धीरे तेज़ होती गई। लंड छातियों के बीच फिसल-फिसलकर आगे-पीछे हो रहा था। सीमा की छातियाँ लंड के साथ-साथ हिल रही थीं। काफी देर तक — करीब 12-15 मिनट तक — राहुल ने इस तरह छातियों के बीच लंड रगड़ा। लेकिन उसका पानी अभी भी नहीं गिरा। लंड वैसा का वैसा ही सख्त और खड़ा था।

    आखिरकार राहुल ने सीमा को उठाया। दोनों नंगे ही अंदर चले गए। फार्महाउस के अंदर ठंडी AC की हवा उनके नंगे बदन पर लग रही थी। थोड़ी देर बाद दोनों ने नहाया — एक साथ शावर के नीचे। राहुल ने सीमा की छातियाँ साबुन लगाकर मलाईं, उनकी चूत को हल्के हाथ से धोया। फिर दोनों ने कपड़े पहने (सिर्फ़ हल्के घरेलू कपड़े) और डाइनिंग टेबल पर बैठकर खाना खाया। नाश्ता नहीं, बल्कि पूरा डिनर — ग्रिल्ड चिकन, सलाद, रोटी और वाइन। दोनों के बीच हल्की-फुल्की बातें हो रही थीं, लेकिन राहुल का लंड अभी भी पैंट के अंदर गर्म और सख्त था।

    खाना खत्म होने के बाद दोनों लिविंग रूम के बड़े सोफे पर आ गए। राहुल सोफे पर बैठ गया। उसका लंड फिर से पूरी तरह खड़ा और गर्म था। उसने सीमा को पास खींचा और उनके होंठों पर किस करने की कोशिश की। लेकिन सीमा ने हल्के से मना कर दिया। “राहुल… अभी नहीं… थोड़ा आराम…”

    राहुल ने तुरंत मैड की तरफ इशारा किया। मैड पास ही खड़ी थी। सीमा उठीं, मैड के पास गईं, कुछ देर कान में फुसफुसाईं और वापस राहुल के पास आईं। उन्होंने राहुल की आँखों में देखते हुए कहा,

    “अधा ही घुसाना… सिर्फ़ एक राउंड… और वो भी डिनर के बाद…”

    फिर दोनों ने डिनर किया। खाना खाते समय सीमा बार-बार राहुल की तरफ देख रही थीं। खाना खत्म होते ही मैड ने Trojan Magnum XL का पैकेट लेकर आ गई। उसने पैकेट फाड़ा, कंडोम निकाला और राहुल के सामने घुटनों के बल बैठकर बहुत सावधानी से कंडोम पहना दिया। कंडोम लंड की 4 इंच मोटाई पर पूरी तरह तन गया।

    मैड ने सिर्फ़ अपनी पैंटी उतार दी। बाकी टॉप और ब्रा वैसे ही थी। उन्होंने सोफे पर घुटनों के बल डोगी पोजीशन में लेट गईं। उनकी गोल, मोटी गांड ऊपर उठी हुई थी। सूजी हुई चूत पीछे से साफ़ दिख रही थी। मैड ने पीछे मुड़कर राहुल से कहा, “आराम से डालना राहुल… बहुत धीरे…”

    राहुल ने पीछे से मैड की कमर पकड़ी। लंड की नोक को सूजी हुई चूत की फाँक पर रखा और बहुत धीरे-धीरे 5 इंच अंदर डाल दिया। सीमा की कमर काँप गई। “आह्ह… 5 इंच… राहुल… धीरे…”

    लेकिन राहुल ने अब गति बढ़ा दी। वो अंदर-बाहर करने लगा। हर धक्के के साथ लंड 5 इंच से थोड़ा-थोड़ा और अंदर जाने लगा। मैड की चूत फिर से फैल रही थी। “आह्ह… राहुल… धीरे… आह्ह…”

    राहुल की रफ्तार बढ़ती गई। 50 मिनट तक वो लगातार चोदता रहा। हर धक्का गहरा और जोरदार था। सोफे की चरमराहट, चुदाई की फच-फच आवाज़ और मैड की चीखें पूरे लिविंग रूम में गूँज रही थीं।

    मैड तीन बार झड़ गई। 
    पहली बार — 18 मिनट में — उनकी चूत सिकुड़ गई और वो चीखीं, “आह्ह… पहली बार… राहुल…” 
    दूसरी बार — 32 मिनट में — उनका पूरा शरीर हिल गया। 
    तीसरी बार — 48 मिनट में — वो चीखती रहीं, “.. ज्यादा नहीं… ऐसे… आह्ह… मैं सह नहीं पा रही…”

    50 मिनट पूरे होने पर राहुल का शरीर तन गया। उसने मैड की कमर को कसकर पकड़ा और आखिरी जोरदार धक्के मारे। फिर कंडोम के अंदर गर्म, गाढ़ा वीर्य निकलने लगा। राहुल ने लंबी साँस ली और पूरा पानी चूत के अंदर ही छोड़ दिया।

    जब उसने लंड बाहर निकाला तो सीमा की चूत से कंडोम का पानी और उनका रस दोनों मिलकर बहने लगे। चूत पूरी तरह सूजी हुई और लाल थी।

    मैड ने चुपचाप अपनी पैंटी पहनी, साड़ी ठीक की और बिना कुछ कहे कमरे से चली गई।

    सीमा राहुल की छाती पर सिर रखे हुए थकी हुई लेटी थी। दोनों की साँसें अब शांत हो चुकी थीं। राहुल ने सीमा को कसकर गले लगाया और धीरे से उनके माथे पर किस किया। “चलो सोते हैं,” उसने फुसफुसाकर कहा। 

    दोनों बेडरूम में गए। राहुल ने AC ऑन किया और लाइट बंद कर दी। सिर्फ बेडसाइड की हल्की गोल्डन लाइट जल रही थी। दोनों नंगे ही बेड पर लेट गए। सीमा राहुल की बाँहों में सिमटकर लेट गईं। उनकी भारी छातियाँ राहुल की छाती से सटी हुई थीं, उनकी नंगी जाँघ राहुल की जाँघ पर रखी हुई थी। 

    राहुल की आँखें बंद थे, लेकिन नींद नहीं आ रही थी। वो सोच रहा था — ये औरत 42 साल की है, फिर भी मेरे 11 इंच लंबे और 4 इंच मोटे लंड को सिर्फ 3-5 इंच ही ले पा रही है। इतनी हल्की-सी चुदाई में तीन बार झड़ गई, रोई, चीखी… 

    तभी उसे अचानक एहसास हुआ। 

    सीमा को सेक्स के बारे में कभी कुछ पता ही नहीं था। 
    उनके पति ने हफ्ते में सिर्फ 1 या 2 बार से ज्यादा कभी सेक्स नहीं किया था। वो भी सिर्फ 2-3 मिनट का, छोटा-सा लंड डालकर। सीमा ने कभी अपने पति से ज़्यादा माँगा भी नहीं था। उन्होंने कभी ज़ोर देकर नहीं कहा था कि “मुझे और चाहिए”। उनकी भूख दबी हुई थी, लेकिन उन्होंने कभी उसे व्यक्त नहीं किया था। 

    राहुल को अचानक याद आया — 2 दिन पहले की वो बात। 

    सीमा ने खुद बताया था कि उनके पति ने 2 दिन पहले रात को कहा था, 
    “सीमा, मैं तुम्हें खुश नहीं कर पा रहा हूँ। मैं जानता हूँ। तुम जवान हो, तुम्हारी भूख है। अगर तुम किसी और से करवाना चाहो तो करवा लो। मुझे कोई एतराज़ नहीं है। बस राज़ रहे।” 

    उसके बाद जब राहुल का चेकअप हुआ और डॉक्टर ने रिपोर्ट में लिखा कि “लंड 11 इंच लंबा, 4 इंच मोटा, बहुत पावरफुल”, तो सीमा के पति ने तुरंत फैसला कर लिया — “ये लड़का परफेक्ट है। इसे रख लो।” 

    राहुल ने ये सब याद करके मन ही मन मुस्कुराया। उसने सीमा को और कसकर गले लगा लिया। सीमा ने आँखें खोलीं, राहुल की तरफ देखा, उसके होंठों पर हल्का किस किया और फुसफुसाई, “सो जाओ राहुल… कल फिर से…” 

    दोनों एक-दूसरे से चिपके हुए सो गए। 



    सुबह 7:30 बजे

    राहुल की आँख खुली। वो देखता है कि सीमा उसके लंड को दोनों हाथों में पकड़े हुए हैं। उन्होंने धीरे-धीरे लंड को मुँह में ले लिया था। बहुत नरम, बहुत प्यार से चूस रही थीं। उनकी गर्म जीभ लंड की नोक पर घूम रही थी। राहुल की साँसें तेज़ हो गईं। 

    सीमा ने ऊपर देखा, आँखों में शरम और भूख थी। “गुड मॉर्निंग…” उन्होंने लंड को मुँह से निकालकर कहा और फिर से पूरा मुँह में ले लिया। 

    राहुल ने उनके बाल पकड़कर हल्का दबाव दिया। सीमा 6 इंच तक गला दे रही थीं। 10 मिनट तक उन्होंने बहुत प्यार से ब्लोजॉब दिया। फिर राहुल ने उन्हें ऊपर खींचा, किस किया, उनकी छातियाँ चूसीं। 

    फिर सीमा ने खुद Trojan Magnum XL कंडोम निकाला, फाड़ा और राहुल के लंड पर पहन दिया। उन्होंने कहा, “आज सिर्फ 3 इंच… प्लीज…” 

    राहुल ने उन्हें मिशनरी पोजीशन में लिटाया। बहुत धीरे-धीरे सिर्फ 3 इंच अंदर डाला और 25 मिनट तक धीमी गति से चोदा। सीमा इस बार कम रोईं, लेकिन फिर भी आहें भर रही थीं। आखिर में राहुल ने 3 इंच ही रखकर झड़ दिया। 



    नाश्ता

    दोनों नहाकर तैयार हुए। मैड (रीना) ने नाश्ता और चाय ले आकर टेबल पर रख दी। दोनों ने साथ में नाश्ता किया। 

    खाते-खाते सीमा ने कहा, 
    “राहुल… हमारा प्लान तो 2 दिन का था, लेकिन अब मैं सोच रही हूँ… हम एक-दो हफ्ते आराम-आराम से करेंगे। मेरी चूत अभी बहुत सूज गई है। दर्द हो रहा है। अगले हफ्ते तक ठीक हो जाएगी। तब तक हम धीरे-धीरे बढ़ाएँगे।”

    राहुल ने सिर हिलाया। 

    नाश्ता खत्म होने के बाद सीमा ने अपनी पर्स से 50,000 रुपये नोटों में निकाले और राहुल को थमा दिए। 
    “ये तुम्हारे लिए। अगले हफ्ते मिलते हैं। तब तक घर जाकर आराम करो और एंजॉय करो।”

    फिर सीमा ने खुद ड्राइवर को बुलाया। BMW तैयार थी। दोनों कार में बैठे। सीमा ने राहुल को उसके घर तक छोड़ दिया। 

    कार घर के गेट पर रुकी। सीमा ने राहुल के गाल पर किस किया और फुसफुसाई, 
    “अगले हफ्ते… मैं इंतज़ार करूँगी।”

    राहुल कार से उतरा। उसके हाथ में 50,000 रुपये थे, जेब में नया iPhone था और दिमाग में पिछले 2 दिनों की यादें थीं।

    अब सीमा पूरी तरह नंगी घास पर खड़ी थीं। उनकी गोरी देह शाम की रोशनी में चमक रही थी — भारी छातियाँ, पतली कमर, गोल नाभि, मोटी जाँघें और हल्के बालों वाली चूत।

    राहुल आगे बढ़ा। उसने सीमा को कसकर गले लगा लिया। दोनों की नंगी देह एक-दूसरे से चिपक गईं। राहुल ने पहले उनके होंठों पर गहरा किस किया। किस लंबा और भूखा था। फिर वो धीरे-धीरे नीचे उतरा।

    उसने सीमा की दोनों छातियों को दोनों हाथों से थाम लिया। नरम, भारी मांस हाथ में पूरी तरह दब गया। राहुल ने एक निप्पल को मुँह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगा। जीभ से निप्पल को चारों तरफ घुमाया, हल्के से काटा, फिर पूरा निप्पल मुँह में लेकर चूसा। दूसरी छाती को हाथ से मसलता रहा। सीमा की आहें निकलने लगीं — “आह्ह… राहुल… और जोर से… चूसो… उफ्फ… कितना अच्छा लग रहा है…”

    राहुल ने लगातार 15 मिनट तक सीमा की दोनों छातियों को चूसा, चाटा और दूध पिया जैसे। निप्पल्स लाल और सख्त हो गए थे। फिर वो धीरे-धीरे नीचे उतरा। सीमा की जाँघें अपने आप फैल गईं। राहुल ने घुटनों के बल बैठकर उनकी चूत पर मुंह रख दिया।

    उसने जीभ से चूत की फाँक को धीरे-धीरे चाटना शुरू किया। पहले क्लिटोरिस को घुमाया, फिर पूरी फाँक चाटी, फिर जीभ अंदर डालकर चूसने लगा। सीमा की कमर ऊपर-नीचे होने लगी। उनकी आहें तेज़ हो गईं — “आह्ह्ह… राहुल… तुम्हारी जीभ… बहुत गहरी… हाँ… चूसो… मेरी चूत चूसो… उफ्फ… मैं गर्म हो रही हूँ…”

    राहुल ने लगातार 10-12 मिनट तक सीमा की चूत को चाटा और चूसा। उनकी चूत अब गीली और चमकदार हो चुकी थी। सीमा की जाँघें काँप रही थीं, हाथ राहुल के बालों में थे और वो उसके सिर को अपनी चूत पर दबा रही थीं।

    सीमा ने राहुल की आँखों में गहरी नज़र डाली। शाम की सुनहरी रोशनी गार्डन में फैली हुई थी। हल्की हवा फूलों की महक लेकर बह रही थी। सीमा ने राहुल का हाथ पकड़ा और उसे घास पर धीरे से लिटा दिया। घास नरम और ठंडी थी। राहुल पीठ के बल लेट गया। उसका पूरा नंगा शरीर शाम की रोशनी में चमक रहा था। उसका 11 इंच लंबा और 4 इंच मोटा लंड पहले से ही आधा सख्त होकर ऊपर की तरफ खड़ा था।

    सीमा मुस्कुराई। उन्होंने राहुल की जाँघों के बीच बैठकर अपनी गोरी, नंगी देह को झुकाया। उनकी भारी 36D छातियाँ लहराती हुई राहुल के पेट पर छू रही थीं। उन्होंने पहले राहुल के नाभि के पास किस किया, फिर धीरे-धीरे नीचे सरकती गईं।

    राहुल ने आँखें बंद कर लीं। वह महसूस कर रहा था कि सीमा की गर्म साँसें उसके लंड के पास आ रही हैं। सीमा ने दोनों हाथों से राहुल के मोटे लंड को पकड़ लिया। उन्होंने पहले लंड की नोक को जीभ से चाटा, फिर पूरा सिरा मुँह में ले लिया। “मम्म…” उन्होंने धीरे से मुँह से निकाला और फिर गहरी चूसने लगीं।

    फिर उन्होंने लंड को नीचे सरकाकर राहुल की गोतियों को चूसना शुरू किया। दोनों गोतियाँ एक-एक करके मुँह में लेकर बहुत प्यार से चूसने लगीं। जीभ से घुमातीं, हल्के से चबातीं, फिर मुँह में लेकर चूसतीं। राहुल का पूरा शरीर सिहर उठा। उसने मन ही मन सोचा — किसी ने सिखाया है… इतनी अच्छी तरीके से चूस रही हैं…

    सीमा 15-20 मिनट तक लगातार लंड और गोतियों को चूसती रहीं। उनका मुँह पूरी तरह भीगा हुआ था। सलाइवा लंड पर बह रहा था। राहुल की साँसें तेज़ हो गई थीं।

    20 मिनट बाद सीमा ने राहुल को घसीटकर 69 पोजीशन में ले आईं। सीमा ऊपर थीं। उनकी सूजी हुई, गीली चूत राहुल के मुँह के ठीक ऊपर थी। राहुल ने दोनों हाथों से सीमा की मोटी गांड पकड़ ली और उनकी चूत को मुँह से चूसना शुरू कर दिया।

    सीमा ने राहुल के लंड को दोनों हाथों में पकड़ा और मुँह में ले लिया। इस बार वो 5 इंच तक गला दे रही थीं। उनका गला पूरी तरह भर गया था। “ग्लक… ग्लक… ग्लक…” की आवाज़ गार्डन में गूँज रही थी। सीमा का सलाइवा लंड पर बह रहा था। वो लगातार ऊपर-नीचे कर रही थीं।

    राहुल भी उनकी चूत को जोर-जोर से चूस रहा था। जीभ अंदर डालकर चूस रहा था। कुछ ही देर में सीमा की कमर काँपने लगी। उनकी चूत सिकुड़ने लगी। उन्होंने राहुल के लंड को मुँह से निकाले बिना ही जोर से चीख मारी — “आआह्ह्ह… राहुल… मैं… आ रही हूँ…” 

    सीमा की चूत से गर्म पानी की धार निकली। वो पहली बार झड़ गईं। उनका पूरा रस राहुल के मुँह पर और चेहरे पर बह गया।

    लेकिन राहुल का लंड अभी भी पूरी तरह खड़ा था। उसने सीमा को उठाया। अब वो खड़ा हो गया। सीमा को घुटनों के बल बिठा दिया। सीमा घुटनों पर बैठ गईं। उनका चेहरा राहुल के लंड के ठीक सामने था।

    राहुल ने उनके बाल पकड़ लिए। सीमा ने फिर से लंड मुँह में ले लिया। इस बार वो पूरी ताकत से चूस रही थीं। 25 मिनट तक लगातार चूसती रहीं। कभी गहरी गला देतीं, कभी सिर्फ नोक चूसतीं, कभी गोतियों को चूसतीं। उनका मुँह, ठोड़ी, छातियाँ सब सलाइवा से भीग गए थे।

    25 मिनट बाद राहुल का शरीर तन गया। उसकी साँसें बहुत तेज़ हो गईं। उसने सीमा के बाल कसकर पकड़े और बोला, “सीमा जी… पानी निकलने वाला है… कहाँ निकालूँ?”

    सीमा ने लंड को मुँह से निकालकर हाँफते हुए कहा, “बाहर… घास पर निकाल दो…”

    राहुल ने लंड को हाथ में पकड़ा। सीमा अभी भी घुटनों के बल बैठी हुई थीं। राहुल ने जोर-जोर से हिलाना शुरू किया। कुछ ही सेकंड बाद उसके लंड से गाढ़ा, गर्म, सफेद वीर्य की मोटी-मोटी धार निकलने लगी।

    बहुत सारा पानी — पहली धार सीमा की छातियों पर गिरी, दूसरी उनके गाल और होंठों पर, बाकी सारी घास पर गिर गई। वीर्य की मोटी बूँदें घास पर फैल गईं। राहुल ने पूरा पानी निकाल दिया — इतना सारा कि घास का एक छोटा सा हिस्सा गीला हो गया।

    सीमा अभी भी घुटनों के बल बैठी हुई थीं। उनके चेहरे, छातियों और होंठों पर राहुल का वीर्य लगा हुआ था। वो हाँफ रही थीं। राहुल भी खड़े-खड़े साँस ले रहा था।

    सीमा ने राहुल को घास पर लिटा दिया था। शाम के 7 बजे थे। गार्डन में हल्की-हल्की ठंडी हवा चल रही थी। सूरज ढल चुका था, लेकिन आसमान में अभी भी हल्की नारंगी रोशनी बाकी थी। दोनों पूरी तरह नंगे थे। राहुल पीठ के बल लेटा हुआ था। उसका 11 इंच लंबा और 4 इंच मोटा लंड आधा सख्त होकर पेट पर लेटा हुआ था। सीमा उसके बगल में लेटी हुई थीं। उनकी भारी 36D छातियाँ राहुल की बाँह से सटी हुई थीं। उनकी नंगी जाँघ राहुल की जाँघ पर रखी हुई थी।

    दोनों ने एक-दूसरे को छूना शुरू किया। कोई जल्दबाजी नहीं थी। कोई चुदाई नहीं थी। सिर्फ़ धीमी, गहरी और रोमांचक छुआछूई।

    सीमा ने राहुल की छाती पर हाथ फेरा। उनकी नरम उँगलियाँ उसके निप्पल्स पर घूम रही थीं। राहुल ने सीमा की कमर पर हाथ रखा और धीरे-धीरे उनकी पीठ सहलाने लगा। दोनों की साँसें एक-दूसरे के चेहरे पर पड़ रही थीं। सीमा ने झुककर राहुल के गाल पर हल्का किस किया, फिर गर्दन पर, फिर छाती पर। उन्होंने राहुल के निप्पल को जीभ से घुमाया और हल्के से चूसा। राहुल की साँसें भारी हो गईं।

    राहुल ने सीमा को अपने ऊपर खींच लिया। अब सीमा उसकी छाती पर लेटी हुई थीं। उनकी भारी छातियाँ राहुल की छाती से पूरी तरह दब रही थीं। राहुल ने अपनी दोनों टाँगें सीमा की टाँगों के बीच रख लीं। दोनों की नंगी देह एक-दूसरे से पूरी तरह चिपक गई थी। राहुल ने सीमा की गांड पर हाथ फेरा। नरम, गोल मांस हाथ में दब रहा था। सीमा ने राहुल की गर्दन में चेहरा छुपा लिया और धीरे-धीरे उसके कानों को चूमने लगीं।

    7:30 बजे तक दोनों ऐसे ही लेटे रहे। कभी-कभी किस करते, कभी छातियों को सहलाते, कभी कमर पर हाथ फेरते। कोई शब्द नहीं, सिर्फ़ साँसों की आवाज़ और हल्की-हल्की आहें। सीमा की चूत राहुल की जाँघ से हल्के-हल्के रगड़ खा रही थी, लेकिन राहुल ने जान-बूझकर आगे नहीं बढ़ाया।

    7:45 बजे सीमा उठीं। उन्होंने राहुल को भी खड़ा किया। दोनों नंगे ही गार्डन में घूमने लगे। सीमा ने राहुल का हाथ पकड़ रखा था। वे फूलों के पास गए, फाउंटेन के पास गए। हवा में उनकी नंगी देह पर हल्की ठंडक लग रही थी। सीमा ने राहुल को फाउंटेन के किनारे खड़ा किया और खुद उसके सामने घुटनों के बल बैठ गईं। उन्होंने राहुल के लंड को दोनों हाथों में पकड़ा और सिर्फ़ हल्के-हल्के सहलाया। कोई मुँह नहीं लगाया, सिर्फ़ उँगलियों से नरम-नरम सहलाती रहीं। राहुल की साँसें तेज़ हो गईं।

    8:15 बजे दोनों वापस घास पर लेट गए। इस बार राहुल सीमा के ऊपर आ गया। उसने उनकी छातियों को दोनों हाथों से थाम लिया और बहुत धीरे-धीरे मसलने लगा। निप्पल्स को उँगलियों से घुमाता रहा। सीमा की आँखें बंद थीं। वो हल्की-हल्की आहें भर रही थीं। राहुल ने उनकी नाभि में जीभ डाली और फिर नीचे उतरकर उनकी जाँघों को चूमा। लेकिन चूत को छुआ नहीं। सिर्फ़ जाँघों के अंदरूनी हिस्से को चूमा और सहलाया।

    8:45 बजे तक दोनों ऐसे ही एक-दूसरे को छूते, सहलाते, किस करते रहे। कोई चुदाई नहीं, कोई penetration नहीं। सिर्फ़ गहरी, नंगी closeness।

    9:00 बजे मैड (रीना) ने आवाज़ लगाई — “मैडम, डिनर तैयार है।”

    दोनों नंगे ही उठे और डाइनिंग एरिया की तरफ चले गए। टेबल पर डिनर लगा हुआ था — ग्रिल्ड फिश, सलाद, रोटी, दाल और वाइन। दोनों नंगे ही कुर्सी पर बैठ गए। सीमा की छातियाँ टेबल पर हल्के से दब रही थीं। राहुल का लंड टेबल के नीचे आधा सख्त था। दोनों ने आराम से खाना खाया। बीच-बीच में सीमा राहुल की जाँघ पर हाथ रख देतीं। राहुल भी सीमा की कमर पर हाथ फेर देता। खाने के दौरान हल्की-फुल्की बातें होती रहीं।

    डिनर खत्म होने के बाद दोनों वापस लिविंग रूम के बड़े सोफे पर आए। दोनों पूरी तरह नंगे ही सोफे पर लेट गए। राहुल पीठ के बल लेटा। सीमा उसके बगल में लेटी। उनकी नंगी देह एक-दूसरे से सटी हुई थी। 15-20 मिनट तक दोनों ऐसे ही पड़े रहे। कभी-कभी किस करते, कभी छाती सहलाते।

    9:40 बजे राहुल का लंड फिर से पूरा खड़ा हो गया। वो सख्त और तना हुआ था। राहुल ने सीमा को देखा और धीरे से कहा, “सीमा जी… चलो रूम में चलते हैं।”

    सीमा मुस्कुराईं। ठीक उसी वक्त मैड (रीना) कमरे में आई। उसके हाथ में दो गिलास गर्म दूध थे। उसने ट्रे रखी, दोनों को दूध दे दिया और बिना कुछ कहे चुपचाप चली गई।

    दोनों ने गर्म दूध पिया। दूध पीते समय सीमा राहुल की जाँघ पर हाथ फेर रही थीं। राहुल का लंड अब और भी सख्त हो चुका था। दूध पीकर राहुल ने गिलास रख दिया। उसका पूरा शरीर तैयार था। उसने सीमा की तरफ देखा और धीरे से बोला,

    “अब मैं तैयार हूँ…”

  • सपनो की जॉब 1

    मेरा नाम राहुल है। मैं एक प्राइवेट कंपनी में मैनेजर के पद पर काम करता हूँ। कंपनी का काम ऐसा था कि मुझे अक्सर दूसरे राज्यों में जाना पड़ता। इस बार प्रोजेक्ट के लिए मुझे मेरे राज्य गुजरात से बाहर, मध्य प्रदेश के एक छोटे शहर में 25 दिन रहना पड़ा। मैं अकेला था, होटल में ठहरा हुआ था। दिन भर मीटिंग्स, काम और रात को अकेलेपन में गुजरती।

    25 दिन पूरे होने वाले थे। मैंने घर जाने के लिए बस की टिकट करवा ली थी। आखिरी दिन सुबह मैं होटल से चेकआउट करके बस स्टैंड जाने के लिए बाहर निकला। बैग कंधे पर लटकाए, मैं सड़क पर खड़ा था। तभी मेरी नज़र एक शानदार काली BMW पर पड़ी — गुजरात का नंबर प्लेट।

    मजाक में मैंने हाथ उठाकर हिचहाइक का इशारा कर दिया। उम्मीद नहीं थी कि रुकेंगी, लेकिन कार धीरे से रुक गई। ड्राइवर साइड की खिड़की नीचे हुई। पीछे की सीट से एक औरत ने झाँककर देखा।

    कार के अंदर का माहौल लग्जरी था — सॉफ्ट क्रिम कलर की लेदर सीट्स, वुड फिनिश डैशबोर्ड, एंबिएंट लाइटिंग और हल्की सी महक।

    पीछे बैठी औरत ने मुस्कुराते हुए कहा, “कहाँ जाना है भाई?”

    मैंने अपनी भाषा (गुजराती मिक्स हिंदी) में जवाब दिया, “दीदी, मैं अहमदाबाद जा रहा हूँ। बस स्टैंड तक लिफ्ट मिल जाए तो अच्छा रहे।”

    वो हँस पड़ीं। उनकी हँसी में एक खास आकर्षण था। “आ जाओ… बैठो पीछे। हम भी अहमदाबाद ही जा रहे हैं।”

    मैं बैग लेकर पीछे बैठ गया। कार के अंदर ठंडी AC की हवा और हल्का परफ्यूम का नशा था। ड्राइवर आगे था, और वो औरत मेरे बगल में बैठी थीं।

    उनका नाम सीमा था। उम्र 41 साल, लेकिन देखने में 34-35 से ज्यादा नहीं लगती थीं। वो काफी हॉट और सेक्सी थीं। लंबाई करीब 5’5″, शरीर अच्छी तरह से मेंटेन किया हुआ — पतली कमर, लेकिन भारी और गोल छातियाँ (36D साइज़ की), जो उनकी हल्की साड़ी के ब्लाउज़ में भी साफ़ उभर रही थीं। उनकी त्वचा गोरी और चमकदार थी, चेहरा नूरानी, आँखें बड़ी-बड़ी और काजल लगी हुईं। होंठ मोटे और लाल, बाल खुले हुए कंधों तक। साड़ी का पल्लू थोड़ा सरका हुआ था, जिससे उनकी गहरी ब्लाउज़ और क्लेवेज की झलक दिख रही थी। कमर में साड़ी की फोल्ड्स से उनकी नाभि की हल्की झलक भी आ रही थी। कुल मिलाकर वो एक mature, confident और बेहद आकर्षक महिला लग रही थीं — वैसी जो देखते ही मन में गर्मी पैदा कर दे।

    बातचीत शुरू हुई। मैंने बताया कि मैं प्राइवेट कंपनी में काम करता हूँ और 25 दिन यहाँ प्रोजेक्ट पर था। वो मुस्कुराईं और बोलीं, “अरे वाह, मैं भी अहमदाबाद की ही हूँ। बिजनेस के सिलसिले में आई थी।”

    जब उन्होंने सुना कि मैं बस से जाने वाला हूँ, तो तुरंत बोलीं, “बस की टिकट कैंसल कर दो। मेरे साथ चलो। 8 घंटे की ड्राइव है, लेकिन आराम से पहुँच जाएँगे। अकेले बस में क्या मजा?”

    मैंने थोड़ा सोचा, फिर मान गया। ड्राइवर को बस स्टैंड पर रोककर मैंने टिकट कैंसल कर दी और वापस कार में आ गया। अब हम तीनों अहमदाबाद की तरफ निकल पड़े।

    रास्ते में बातें होती रहीं। सीमा बहुत मिलनसार थीं। उन्होंने अपनी जिंदगी के बारे में बताया — पति बिजनेसमैन हैं, ज्यादातर बाहर रहते हैं, एक बेटा दिल्ली में पढ़ता है। वो खुद कुछ सोशल वर्क और बिजनेस संभालती हैं। उनकी आवाज़ में एक मधुर गहराई थी, और जब वो हँसतीं तो उनकी छातियाँ हल्के से हिलतीं, जो मुझे बार-बार आकर्षित कर रही थीं।

    मैंने भी अपनी बातें शेयर कीं। धीरे-धीरे बातें पर्सनल होती गईं। वो मेरी कंपनी, मेरे काम और मेरी लाइफस्टाइल के बारे में पूछ रही थीं। बीच-बीच में उनकी नज़र मेरे चेहरे और शरीर पर रुक जाती। कार की लग्जरी सीट्स पर हम दोनों काफी करीब बैठे थे। उनकी साड़ी की सिल्क मेरे हाथ को छू रही थी।

    8 घंटे की ड्राइव में हमने कई बार रुककर चाय-कॉफी पी, खाना खाया। हर बार वो मेरे साथ बहुत सहज और फ्लर्टी तरीके से बात कर रही थीं। उनकी हँसी, उनकी नज़रें और उनका वो mature आकर्षण मुझे खूब भा रहा था।

    आखिरकार शाम को हम अहमदाबाद पहुँच गए। उन्होंने ड्राइवर को मेरे घर के पास छोड़ने को कहा। कार रुकने पर वो मुस्कुराईं, अपना मोबाइल निकाला और बोलीं,

    “राहुल, नंबर दो… कभी मिलना हो तो कॉन्टैक्ट कर लेंगे।”

    मैंने नंबर दिया। उन्होंने अपना नंबर सेव कर लिया और मुझे भी दे दिया। फिर हल्के से मेरे हाथ पर हाथ रखकर बोलीं,

    “सुरक्षित पहुँच जाना। और हाँ… अगर कभी फिर से बाहर जाना हो तो बताना, मैं अकेली नहीं रहना पसंद करती।”

    उनकी आँखों में एक खास चमक थी। मैं मुस्कुराया, “जी जरूर… थैंक यू सीमा दीदी।”

    कार आगे बढ़ गई। मैं घर की तरफ जाते हुए उनके नंबर को देख रहा था और मन में सोच रहा था — ये मुलाकात बस एक लिफ्ट नहीं थी, शायद कुछ और शुरूआत थी…

    चार दिन बाद, सुबह 10:30 बजे मेरा फोन बजा। मैसेज था — सीमा का।

    “राहुल, गुड मॉर्निंग। कल रात सोच रही थी… तुम्हारे साथ काम करने का मन है। सैलरी तुम्हारी कंपनी से दोगुनी दूँगी। काम हफ्ते में सिर्फ 2 दिन। इंटरेस्ट है तो बताओ।”

    मैंने तुरंत रिप्लाई किया — “जी हाँ सीमा दीदी, बिल्कुल इंटरेस्ट है।”

    उनका तुरंत रिप्लाई आया — “पर एक शर्त है। मेरे साथ काम करने से पहले तुम्हें फुल बॉडी चेकअप करवाना पड़ेगा। आज ही। मैं गाड़ी लेकर आ रही हूँ। तैयार रहना।”

    मुझे थोड़ा अजीब लगा। चेकअप? क्यों? लेकिन सैलरी दोगुनी और सिर्फ 2 दिन का काम सोचकर मैंने “ओके” कर दिया।

    आधे घंटे बाद उनकी काली BMW मेरे घर के नीचे आकर रुकी। मैं नीचे उतरा। सीमा कार के पीछे बैठी थीं। आज वो और भी हॉट लग रही थीं — क्रीम कलर की साड़ी, जिसमें उनकी 36D छातियाँ ब्लाउज़ में फँसी हुई थीं। पल्लू थोड़ा सरका हुआ था, गहरी क्लेवेज साफ दिख रही थी। मेकअप परफेक्ट, लिपस्टिक गहरी लाल, आँखों में काजल। उन्होंने मुस्कुराकर कहा, “बैठो राहुल… चलते हैं।”

    कार में AC की ठंडी हवा और उनकी परफ्यूम की महक पूरे केबिन में फैली हुई थी। हम अस्पताल पहुँचे — एक प्राइवेट हाई-क्लास हॉस्पिटल। सीमा ने पहले से अपॉइंटमेंट कर रखा था। डॉक्टर ने मुझे अंदर बुलाया।

    फुल बॉडी चेकअप शुरू हुआ। ब्लड प्रेशर, ECG, ब्लड टेस्ट, अल्ट्रासाउंड… सब कुछ। आखिर में डॉक्टर ने कहा, “अब प्राइवेट चेकअप। पैंट उतारो।”

    मुझे थोड़ा शर्म आ गई, लेकिन मैंने पैंट और अंडरवियर उतार दिया। डॉक्टर ने मेरे लंड को हाथ में लिया, ऊपर-नीचे किया, नोक को देखा, फिर अंडकोष को दबाकर चेक किया। उन्होंने कहा, “सब नॉर्मल है, लेकिन बहुत अच्छी लंबाई और मोटाई है। कोई समस्या नहीं।”

    सीमा बाहर इंतज़ार कर रही थीं। जब मैं बाहर निकला तो उन्होंने मुस्कुराकर पूछा, “सब ठीक है ना?” मैंने शरमाते हुए सिर हिलाया। उन्होंने मुझे घर छोड़ दिया और बोलीं, “कल सुबह तक रिपोर्ट आ जाएगी।”



    दूसरे दिन

    सुबह 9 बजे मैसेज आया — “चेकअप क्लियर है। तुम्हारा जॉइनिंग आज है। मैं आ रही हूँ, तैयार रहना।”

    मैं तैयार होकर नीचे उतरा। BMW फिर आई। सीमा आज ब्लैक साड़ी में थीं — बहुत सेक्सी और पावरफुल लग रही थीं। हम सीधे एक बड़े, लग्जरी सैलून में गए — अहमदाबाद के सबसे हाई-क्लास यूनिसेक्स सैलून में।

    सीमा ने मैनेजर से कहा, “इसके दाढ़ी, सिर के बाल, और प्राइवेट पार्ट के सारे बाल क्लीन कर दो। पूरा स्मूद।”

    मुझे अंदर ले जाया गया। पहले दाढ़ी शेव की गई, फिर हेयरकट — बहुत स्टाइलिश, साइड से फेड, ऊपर थोड़ा लंबा। उसके बाद प्राइवेट पार्ट का सेशन। एक खास रूम में मुझे नंगा कर दिया गया। दो लड़कियाँ आईं। उन्होंने पहले ट्रिमिंग की, फिर हॉट वैक्सिंग। मेरे लंड और अंडकोष पर गर्म वैक्स लगाया, पट्टी चिपकाई और एक झटके में खींच ली। जलन हुई, लेकिन जब पूरा बाल साफ हो गया तो लंड चमकने लगा। पूरी जाँघें, गांड के आस-पास भी क्लीन किया गया। अब मेरा प्राइवेट एरिया बिल्कुल स्मूद, साफ और नया-नया लग रहा था।

    सैलून से निकलकर सीमा मुझे एक बड़े शॉपिंग मॉल ले गईं। उन्होंने खुद मेरे लिए कपड़े चुने — 3 लग्जरी शर्ट, 2 प्रीमियम ट्राउज़र, एक ब्लैक ब्लेज़र, बेल्ट, और सबसे महंगे जूते। फिर एक रोलैक्स जैसा लग्जरी वॉच भी खरीद लिया। सब कुछ उनके पैसे से। वो बार-बार मुझे देखकर मुस्कुरा रही थीं।

    “अब तुम बिल्कुल परफेक्ट लग रहे हो राहुल,” उन्होंने मेरे कान के पास फुसफुसाकर कहा।



    फार्महाउस की तरफ

    शॉपिंग के बाद हम अहमदाबाद से बाहर निकल पड़े। BMW हाईवे पर तेज़ चल रही थी। करीब 1.5 घंटे बाद हम शहर से काफी दूर एक सुनसान, खूबसूरत जगह पर पहुँचे। एक बड़ा गेट खुला। अंदर एक विशाल फार्महाउस था — 5 एकड़ में फैला, चारों तरफ हरे-भरे बागान, स्विमिंग पूल, प्राइवेट गार्डन और एक बहुत बड़ा मॉडर्न विला।

    कार अंदर घुसी। सीमा ने ड्राइवर को छुट्टी दे दी। अब सिर्फ हम दोनों थे। उन्होंने मुझे अंदर ले जाकर पूरे फार्महाउस की घुमाई। लिविंग रूम में बड़ी सोफा, बैडरूम में किंग साइज़ बेड, जकूजी बाथटब, और बालकनी से पूरा फार्म देखने का नज़ारा।

    सीमा ने साड़ी का पल्लू ठीक करते हुए मेरी तरफ देखा। उनकी आँखों में एक खास चमक थी। उन्होंने धीरे से कहा,

    “राहुल… अब ये तुम्हारा नया ऑफिस है। हफ्ते में सिर्फ 2 दिन। बाकी समय… हम दोनों यहाँ अकेले रहेंगे।”

    उन्होंने मेरे नए शर्ट के कॉलर को ठीक किया, फिर मेरे सीने पर हाथ रख दिया। उनकी उँगलियाँ धीरे-धीरे नीचे सरक रही थीं।

    फार्महाउस के लिविंग रूम में हल्की गोल्डन लाइट में सीमा मेरे बहुत करीब खड़ी थीं। उनकी काली साड़ी का पल्लू अब लगभग गिरने ही वाला था। उनकी भारी छातियाँ साँस के साथ ऊपर-नीचे हो रही थीं। उन्होंने मेरी शर्ट का आखिरी बटन भी खोल दिया और अपना नरम, गर्म हाथ मेरे नंगे सीने पर रख दिया।

    सीमा ने मेरी आँखों में गहरी नज़र डाली और धीरे-धीरे बोलीं,

    “राहुल… अब मैं तुम्हें साफ-साफ बता देती हूँ कि तुम्हारा काम क्या होगा। 

    हफ्ते में सिर्फ 2 दिन तुम्हें मेरे साथ रहना है। ये दो दिन पूरे फार्महाउस में सिर्फ हम दोनों होंगे। कोई और नहीं। इन दो दिनों में तुम्हारा सारा समय मेरी सेवा में होगा। मुझे खुश रखना, मेरी हर इच्छा पूरी करना, मेरे शरीर को संतुष्ट करना — यही तुम्हारा मुख्य काम है। 

    बाकी 5 दिन तुम पूरी तरह फ्री हो। तुम घर जा सकते हो, अपनी कंपनी का काम कर सकते हो, जहाँ जाना हो जा सकते हो। लेकिन इन 5 दिनों में भी मेरे किसी भी कॉल या मैसेज पर तुम्हें तुरंत आना होगा। समझ गए?”

    मैंने सिर हिलाया। मेरा गला सूख रहा था।

    सीमा ने मुस्कुराते हुए आगे कहा,

    “और हाँ… मुझे तुम्हारे बारे में सब पता है। चेकअप रिपोर्ट मैंने खुद देखी है। 
    तुम्हारा लंड 11 इंच लंबा और 4 इंच मोटा है। डॉक्टर ने लिखा है कि ये बहुत रेयर और पावरफुल साइज़ है। 
    और सबसे बड़ी बात — तुम अभी तक कुंवारे हो। किसी लड़की को कभी छुआ तक नहीं है।”

    सीमा की आँखों में एक शिकारी वाली चमक आ गई। उन्होंने मेरी छाती पर हाथ फेरते हुए धीरे से कहा,

    “मुझे यही चाहिए था राहुल। 
    मैं 41 साल की हूँ। मेरी चूत बहुत गहरी और भूखी है। मैं अभी तक कुंवारी हूँ। कभी किसी लंड ने मुझे पूरी तरह नहीं भरा है। मुझे एक ऐसे ताज़ा, कुंवारे, 11 इंच लंबे और 4 इंच मोटे लंड की जरूरत थी जो मेरी चूत को पहली बार पूरी तरह भर सके, उसे फैला सके और बार-बार चोदकर मुझे संतुष्ट कर सके।

    तुम बिल्कुल परफेक्ट हो।”

    सीमा ने अब अपना दूसरा हाथ भी मेरे शरीर पर रख दिया। एक हाथ मेरी छाती पर, दूसरा धीरे-धीरे मेरी बेल्ट की तरफ सरक रहा था। उनकी साँसें मेरे चेहरे पर गर्म हो रही थीं।

    “इन 2 दिनों में तुम सिर्फ मेरे हो। 
    मैं जो कहूँगी वो करना है। 
    मुझे चूमना है, मेरी छातियाँ चूसना है, मेरी चूत चाटना है, मुझे अपनी 11 इंच की मोटी लंड से बार-बार चोदना है। जितनी बार मैं चाहूँ, उतनी बार। 

    और याद रखना — ये राज कभी बाहर नहीं जाना चाहिए। अगर किसी को भी पता चला कि तुम मेरे साथ ये सब करते हो, तो तुम्हारी नौकरी, पैसे, इज्जत… सब खत्म।”

    सीमा ने मेरी बेल्ट का बकसुआ खोल दिया। उनकी उँगलियाँ अब मेरी पैंट की जिप पर थीं। उन्होंने बहुत धीरे से जिप नीचे खींची और मेरी पैंट को हल्का सा ढीला कर दिया।

    “अब बताओ राहुल…” 
    उनकी आवाज़ और भी सेक्सी हो गई थी। 
    “क्या तुम तैयार हो? 
    अपनी 11 इंच लंबी और 4 इंच मोटी कुंवारी लंड से मुझे खुश करने के लिए? 
    मेरी 41 साल की भूखी चूत को पहली बार भरने के लिए? 
    ये दो दिन मेरे लिए समर्पित करने के लिए?”

    सीमा ने मेरे होंठों के सिर्फ एक इंच दूर अपना मुँह ले जाया। उनकी गरम साँस मेरे होंठों को छू रही थी। उनकी भारी छातियाँ अब मेरी छाती से पूरी तरह दब रही थीं।

    “हाँ बोलो राहुल… 
    बोलो कि तुम मेरे हो… इन दो दिनों के लिए… पूरी तरह मेरे।”

    उनकी उँगलियाँ अब मेरी अंडरवियर के अंदर घुसने को तैयार थीं। पूरा फार्महाउस सन्नाटे में था। सिर्फ उनकी सेक्सी आवाज़ और मेरी तेज़ होती साँसें गूँज रही थीं।

    राहुल ने सीमा की आँखों में गहरी नज़र डाली। उसकी साँसें तेज़ हो रही थीं, लेकिन उसने खुद को संभाला। फार्महाउस का लिविंग रूम अब और भी सन्नाटे में था। सिर्फ उनकी साँसों की आवाज़ और बाहर हवा में पेड़ों की सरसराहट सुनाई दे रही थी।

    राहुल ने धीरे से सीमा का हाथ पकड़ लिया और अपनी तरफ खींचा। उसकी आवाज़ दृढ़ लेकिन सम्मान भरी थी।

    “सीमा जी… मैं तैयार हूँ। लेकिन कुछ शर्तें हैं। इन्हें मान लो तो मैं पूरी तरह आपका हूँ। ये शर्तें इसलिए ताकि बाद में कोई समस्या न आए।

    पहली शर्त — आपका पति या कोई और इस राज़ को कभी नहीं जानना चाहिए। अगर कभी भी उन्हें शक हुआ या पता चला, तो मैं तुरंत सब छोड़कर चला जाऊँगा। मुझे कोई परेशानी नहीं चाहिए।

    दूसरी शर्त — मैं कभी भी बिना कंडोम के सेक्स नहीं करूँगा। चाहे कितनी भी उत्तेजना हो, कंडोम जरूरी है।

    तीसरी शर्त — जब हम सेक्स करेंगे तो मुझे ये बिल्कुल जॉब जैसा नहीं लगना चाहिए। मैं आपको खुश करूँगा, लेकिन ये हम दोनों के बीच का प्यार और भूख होगा, न कि कोई ड्यूटी।

    चौथी शर्त — एक बार हम शुरू हो जाएँ तो कोई भी बात हो, कोई भी हालत हो, आप मना नहीं करेंगी। जितनी देर तक मैं चाहूँगा, उतनी देर तक चलेगा।

    पाँचवी शर्त — हम कभी भी फोटो या वीडियो नहीं बनाएँगे। न आप, न मैं। कोई रिकॉर्डिंग नहीं।

    छठी शर्त — अगर कभी आपकी कोई लिमिट हो या कोई बात मुझे पसंद न आए तो मैं बता सकता हूँ और आप उसे मानेंगी।”

    राहुल ने सारी शर्तें एक-एक करके बताईं। उसकी आवाज़ में कोई हिचकिचाहट नहीं थी।

    सीमा कुछ पल चुप रहीं। फिर उन्होंने धीरे से मुस्कुराकर राहुल की छाती पर हाथ फेरा और बोलीं,

    “राहुल… तुम बहुत समझदार हो। ये सारी शर्तें मैं पूरा मानती हूँ। 
    मुझे कोई दिक्कत नहीं। 
    अगर मैं इनमें से एक भी शर्त तोड़ूँगी तो वो मेरी सबसे बड़ी गलती होगी। 
    तुम मेरे साथ इतने खुलकर आ रहे हो, तो मैं भी तुम्हारा पूरा सम्मान करूँगी। 
    अब कोई शर्त बाकी नहीं है।”

    सीमा ने राहुल की शर्ट पूरी तरह खोल दी। अब राहुल का ऊपरी बदन नंगा था। उन्होंने खुद पीछे हटकर अपनी साड़ी का पल्लू पूरी तरह गिरा दिया। ब्लाउज़ का हुक खोलना शुरू किया। एक-एक हुक खुलता गया। उनकी भारी, दूधिया 36D छातियाँ ब्रा में कैद थीं। आखिरी हुक खुलते ही ब्रा गिर गई। दोनों बड़े-बड़े, भरे हुए स्तन बाहर आ गए। ब्राउन निप्पल्स पहले से ही सख्त हो चुके थे।

    सीमा ने साड़ी की नाड़ी खींची। साड़ी धीरे-धीरे फिसलकर उनके पैरों के पास गिर गई। अब वो सिर्फ पतली सी काली पैंटी में थीं। उनकी गोरी कमर, गोल नाभि और मोटी जाँघें पूरी तरह नंगी थीं। पैंटी पर हल्का गीला धब्बा दिख रहा था।

    सीमा ने पैंटी भी उतार दी। अब वो पूरी तरह नंगी खड़ी थीं। उनकी चूत पर हल्के-हल्के बाल थे, लेकिन फाँकें थोड़ी खुली हुईं और गीली चमक रही थीं। 41 साल की उम्र में भी उनका बदन इतना हॉट और टाइट था कि राहुल का लंड पैंट में तन गया।

    राहुल आगे बढ़ा। उसने सीमा को कसकर गले लगा लिया। दोनों नंगी छाती एक-दूसरे से दब गईं। राहुल ने पहले उनके होंठों पर गहरा किस किया। किस धीरे-धीरे शुरू हुआ, फिर तेज़ होता गया। उनकी जीभें एक-दूसरे में घुलने लगीं। सीमा ने राहुल की गर्दन में हाथ डालकर किस और गहरा कर दिया। किस के दौरान उनकी साँसें एक-दूसरे के मुँह में मिल रही थीं।

    किस खत्म होने पर राहुल ने सीमा को सोफे पर लिटा दिया। उसने झुककर उनकी एक छाती को दोनों हाथों से थाम लिया। नरम, भारी मांस हाथ में दब गया। उसने ब्राउन निप्पल को मुँह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगा। जीभ से निप्पल को चारों तरफ घुमाया, हल्के से काटा। दूसरी छाती को हाथ से मसलता रहा। सीमा की आहें निकलने लगीं — “आह्ह… राहुल… और जोर से चूसो… उफ्फ… कितना अच्छा लग रहा है…”

    राहुल ने दोनों छातियों को बारी-बारी चूसा, चाटा, नोचा। फिर धीरे-धीरे नीचे उतरता गया। उसने उनकी नाभि में जीभ डाली, फिर कमर चूमता हुआ उनकी जाँघों के बीच पहुँच गया।

    सीमा की जाँघें अपने आप फैल गईं। राहुल ने अपनी जीभ उनकी चूत की फाँक पर रखी और धीरे-धीरे चाटना शुरू किया। पहले क्लिटोरिस को घुमाया, फिर पूरी फाँक चाटी। सीमा की चूत से गर्म रस निकल रहा था। राहुल ने जीभ अंदर डालकर चूसना शुरू किया। सीमा की कमर ऊपर-नीचे हो रही थी।

    “आह्ह्ह… राहुल… तुम्हारी जीभ… बहुत गहरी… हाँ… चाटो… मेरी चूत चाटो… उफ्फ… मैं पागल हो रही हूँ…”

    राहुल ने लगातार 8-10 मिनट तक उनकी चूत चाटी। कभी तेज़, कभी धीरे। कभी सिर्फ क्लिटोरिस चूसता, कभी पूरी चूत को मुँह में लेकर चूसता। सीमा की जाँघें काँप रही थीं। उनके हाथ राहुल के बालों में थे और वो उसका सिर चूत पर दबा रही थीं।

    काफी देर चाटने के बाद राहुल उठा। उसने अपनी बाकी कपड़े भी उतार दिए। अब वो पूरी तरह नंगा था। उसका 11 इंच लंबा और 4 इंच मोटा लंड पूरी तरह खड़ा था। नोक से पहले ही पारदर्शी पानी टपक रहा था। लंड इतना मोटा और लंबा था कि सीमा की आँखें फैल गईं।

    राहुल ने सीमा की आँखों में देखा और धीमी, दृढ़ आवाज़ में कहा,

    “सीमा जी… अब तुम मेरी 11 इंच की लंड को मुँह में लो। 
    पूरी तरह। 
    जितना हो सके, गहरी तक ले जाओ।”

    सीमा ने राहुल की आँखों में देखा। उनकी साँसें भारी हो चुकी थीं। उन्होंने धीरे से घुटनों के बल बैठकर राहुल के सामने आ गईं। राहुल का 11 इंच लंबा और 4 इंच मोटा लंड उनके चेहरे के ठीक सामने खड़ा था — सख्त, नसों से भरा, नोक से पहले ही पारदर्शी पानी टपक रहा था।

    सीमा ने पहले अपनी जीभ बाहर निकाली और लंड की नोक को हल्के से चाटा। फिर उन्होंने मुँह खोला और धीरे-धीरे लंड का सिरा मुँह में ले लिया। पहले सिर्फ़ 4 इंच तक ही ले पाईं। उनका मुँह पहले से ही भर गया था। लंड की मोटाई उनके होंठों को पूरी तरह फैला रही थी।

    “मम्म… राहुल… इतना मोटा… और लंबा…” उन्होंने लंड को मुँह से निकालकर फुसफुसाया, फिर फिर से मुँह में ले लिया।

    राहुल ने धीरे से सीमा के बाल पकड़ लिए। उसकी आँखों में भूख थी। उसने हल्का सा दबाव डाला और बोला, “और ले लो सीमा जी… पूरा लेने की कोशिश करो।”

    सीमा ने आँखें बंद कीं और गला खोलकर आगे बढ़ीं। लंड के अगले 2 इंच और जबरदस्ती उनके गले में घुस गए। कुल 6 इंच लंड अब उनके मुँह के अंदर था। उनका गला पूरी तरह भर गया। आँखों से पानी आने लगा। लेकिन वो रुकी नहीं।

    राहुल ने अब और जोर से बाल पकड़े और हल्का-हल्का धक्का देने लगा। “हाँ… इसी तरह… चूसो… गहरी तक ले जाओ…”

    सीमा अब पूरी तरह लग गईं। उन्होंने लंड को मुँह में लेकर जोर-जोर से चूसना शुरू किया। उनकी जीभ लंड के नीचे वाले हिस्से पर घूम रही थी। कभी वो सिरा चूसतीं, कभी पूरा गला देतीं। “ग्लक… ग्लक… ग्लक…” की आवाज़ फार्महाउस के लिविंग रूम में गूँजने लगी। उनके मुँह से सलाइवा लंड पर बह रहा था, लंड पूरी तरह चमक रहा था।

    राहुल ने 20 मिनट तक लगातार चुसवाया। 
    पहले 5 मिनट में सीमा धीरे-धीरे चूस रही थीं — लंड को मुँह में रखकर जीभ से घुमा रही थीं, नोक को चूस रही थीं। 
    10 मिनट बाद राहुल ने उनके बाल पकड़कर गति तेज़ कर दी। अब वो सीमा के मुँह में धीरे-धीरे लंड को अंदर-बाहर कर रहा था। 6 इंच तक हर बार गला दे रहा था। 
    15 मिनट बाद सीमा की हालत खराब होने लगी। उनकी आँखों से आँसू बह रहे थे। साँस लेने में तकलीफ हो रही थी। गला बार-बार सिकुड़ रहा था। उनके पति का लंड बहुत छोटा था — सिर्फ़ 4 इंच का और पतला। आज पहली बार इतना मोटा और लंबा लंड उनके गले तक जा रहा था।

    सीमा के मुँह से अब सिर्फ़ “ग्लक… ग्लक… उर्र्र… आह्ह…” जैसी आवाज़ें निकल रही थीं। उनका चेहरा लाल हो गया था। सलाइवा उनके ठोड़ी से लेकर छातियों तक बह रहा था। लेकिन वो रुक नहीं रही थीं। वो पूरी कोशिश कर रही थीं कि राहुल को मजा आए।

    20 मिनट पूरे होने पर राहुल ने सीमा के बाल छोड़ दिए। लंड को उनके मुँह से बाहर निकाला। लंड अब और भी सख्त और चमकदार हो गया था — पूरा सलाइवा से भीगा हुआ।

    राहुल ने सीमा का चेहरा ऊपर उठाया। उनकी आँखें नम थीं, साँसें फूल रही थीं। राहुल ने मुस्कुराते हुए कहा,

    “सीमा जी… अब काफी हो गया। 
    अब कंडोम लगाओ। 
    मैं बिना कंडोम के कभी नहीं करूँगा।”

    सीमा ने हाँ में सिर हिलाया। वो अभी भी साँस संभाल रही थीं। उन्होंने पास पड़ी अपनी हैंडबैग से एक छोटा सा गोल्डन पैकेट निकाला। पैकेट पर लिखा था — Trojan Magnum XL (दुनिया का सबसे महंगा और बड़े साइज़ के लिए बना प्रीमियम कंडोम — अमेरिकन, बहुत पतला लेकिन बेहद मजबूत, 11 इंच और 4 इंच मोटे लंड के लिए खास तौर पर डिज़ाइन किया गया)।

    राहुल ने उन्हें देखकर कहा, “खुद लगाओ… अपने हाथों से…”

    सीमा ने पैकेट को फाड़ा। अंदर से बहुत पतला, पारदर्शी, गोल्डन रिंग वाला कंडोम निकला। उन्होंने राहुल के सामने घुटनों के बल बैठकर लंड को एक हाथ में पकड़ा। लंड अभी भी 11 इंच का खड़ा था। उन्होंने कंडोम की रिंग को लंड की नोक पर रखा और धीरे-धीरे नीचे की तरफ खींचना शुरू किया।

    कंडोम धीरे-धीरे लंड पर चढ़ने लगा। 4 इंच मोटाई की वजह से कंडोम पूरी तरह तन गया। सीमा को दोनों हाथों से खींचना पड़ रहा था। कंडोम आखिरकार जड़ तक पहुँच गया। अब राहुल का पूरा 11 इंच लंबा और 4 इंच मोटा लंड Trojan Magnum XL कंडोम में पूरी तरह लिपटा हुआ था — चमकदार, सख्त और तैयार।

    सीमा ने लंड को हल्के से सहलाया और राहुल की तरफ देखा। उनकी आँखों में अब और भी ज्यादा भूख थी।

    सीमा का चेहरा एकदम सफेद पड़ गया था। राहुल के 11 इंच लंबे और 4 इंच मोटे लंड को देखकर, जो Trojan Magnum XL कंडोम में चमक रहा था, उनकी आँखों में पछतावा साफ़ दिखने लगा। उन्होंने जो सारी शर्तें हँसते-हँसते मान ली थीं, अब वही शर्तें उनके गले की हड्डी बन गई थीं।

    सीमा ने दोनों हाथों से अपना मुँह ढँक लिया। उनकी साँसें फूल रही थीं। आँखों से आँसू बहने लगे। वो धीरे-धीरे पीछे हटीं और सोफे पर बैठ गईं। उनकी नंगी छातियाँ तेज़-तेज़ ऊपर-नीचे हो रही थीं।

    “राहुल… मैंने… मैंने बहुत बड़ी गलती कर दी…” उनकी आवाज़ काँप रही थी। “मैंने सारी शर्तें इतनी आसानी से मान लीं… मुझे नहीं पता था कि तुम्हारा… इतना बड़ा और मोटा होगा… मेरे पति का… सिर्फ़ 4 इंच का पतला-सा है… मैंने सोचा था कि मैं संभाल लूँगी… लेकिन अब… अब मुझे डर लग रहा है…”

    सीमा रोने लगीं। पहले हल्के-हल्के सुबकियाँ, फिर ज़ोर-ज़ोर से रोना। उनके गालों पर आँसू बह रहे थे। वो दोनों हाथों से अपना चेहरा छुपा रही थीं। “मुझे माफ़ कर दो राहुल… मैंने सोचा नहीं था कि हालत इतनी खराब हो जाएगी… मैं… मैं बहुत भारी महसूस कर रही हूँ… मेरी चूत… इतनी टाइट और कुंवारी है… तुम्हारा लंड देखकर ही मुझे लग रहा है कि ये मुझे फाड़ देगा…”

    राहुल ने शांत लेकिन दृढ़ स्वर में पूछा, 
    “सीमा जी… जब आपका पति है, तो मुझे क्यों रखा? आपने खुद कहा था ना कि ‘तेरी मर्ज़ी है, वो कर’… फिर अब क्यों रो रही हैं?”

    सीमा रोते-रोते बोलीं, “हाँ… मैंने कहा था… लेकिन मैंने कभी सोचा नहीं था कि तुम इतने बड़े होगे… मेरे पति ने कभी मुझे पूरी तरह नहीं भरा… मैंने सोचा था कि मैं मजा ले लूँगी… लेकिन अब… अब मुझे बहुत डर लग रहा है… राहुल… प्लीज…”

    राहुल ने सीमा को दोनों कंधों से पकड़ा और धीरे से सोफे पर लिटा दिया। उनकी नंगी जाँघें अपने आप थोड़ी फैल गईं। राहुल उनके ऊपर आ गया। उसका 11 इंच का मोटा लंड कंडोम में लिपटा हुआ, सीमा की चूत की फाँक पर टिका हुआ था।

    राहुल ने बहुत धीरे से पहले 2 इंच अंदर डाला। 

    सीमा की आँखें फट गईं। “आह्ह्ह… राहुल… धीरे… बस… बस इतना ही…” उनकी चूत की दीवारें पहले ही तन गईं।

    राहुल ने और थोड़ा दबाव डाला। अब 3 इंच अंदर चला गया। 

    सीमा की कमर ऊपर उठ गई। “उफ्फ… नहीं… 3 इंच ही काफी है… और मत डालो…”

    राहुल रुका नहीं। उसने धीरे-धीरे और दबाया। 4 इंच अंदर घुस गया। 

    सीमा अब ज़ोर-ज़ोर से मना करने लगीं। उनके हाथ राहुल की छाती पर थे, उसे पीछे धकेलने की कोशिश कर रही थीं। “राहुल… बस… बस इतना ही डालना है… 4 इंच ही काफी है… और मत डालो… प्लीज… मेरी चूत फट जाएगी…”

    लेकिन राहुल ने अब गति बढ़ा दी। उसने कूल्हों को थोड़ा और आगे धकेला। लंड 5 इंच तक चला गया। 

    सीमा की चीख निकल गई। “आआआह्ह्ह्ह… नहीं… नहीं… बहुत दर्द हो रहा है… बहार निकालो… बहार निकालो राहुल… प्लीज… मैं सह नहीं पा रही…”

    राहुल ने और थोड़ा और अंदर डाला। अब 6 इंच अंदर था। 

    सीमा पूरी तरह चीखने लगीं। उनके आँसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। वो रो रही थीं, चीख रही थीं, हाथ-पैर पटक रही थीं। “बाहर निकालो… बाहर निकालो… आह्ह्ह… मेरी चूत फट रही है… राहुल… बहुत बड़ा है… मैं मर जाऊँगी… बहार निकालो… प्लीज… मैंने गलती कर दी… मैंने सारी शर्तें मान ली थीं… लेकिन ये… ये बहुत ज्यादा है…”

    सीमा की चूत की दीवारें लंड को कसकर जकड़ रही थीं। उनका पूरा शरीर काँप रहा था। आँखों से आँसू की धार बह रही थी। वो बार-बार चीख रही थीं — “बाहर निकालो… बाहर निकालो… राहुल… मैं बर्दाश्त नहीं कर पा रही…”

    राहुल का लंड अभी भी आधा से भी कम अंदर था, लेकिन सीमा की हालत पूरी तरह बिगड़ चुकी थी। वो रो-रोकर गिड़गिड़ा रही थीं, हाथ से राहुल को पीछे धकेलने की कोशिश कर रही थीं, लेकिन राहुल ऊपर से मजबूती से उन्हें दबाए हुए था।

    सीमा की चीखें फार्महाउस के खाली कमरे में गूँज रही थीं। “बाहर निकालो… प्लीज… मैं बहुत रो रही हूँ… बहार निकालो राहुल…”

    राहुल को अच्छी तरह पता था कि ऐसी नौकरी और कोई नहीं दे सकता। इतनी ऊँची सैलरी, लग्जरी फार्महाउस, सिर्फ हफ्ते में 2 दिन काम और बाकी 5 दिन छुट्टी — ये सब छोड़ना उसके बस की बात नहीं थी। उसने मन में फैसला कर लिया कि नौकरी किसी भी हाल में रखनी है।

    सीमा अभी भी रो रही थीं। उनकी चीखें कम नहीं हुई थीं। राहुल ने धीरे से अपना 11 इंच लंबा और 4 इंच मोटा लंड उनकी चूत से बाहर निकाल लिया। लंड कंडोम में पूरी तरह भीगा हुआ था। सीमा की चूत अब थोड़ी लाल और सूजी हुई दिख रही थी। वो राहत की साँस लेते हुए रो-रोकर बोलीं, “थैंक यू राहुल… थैंक यू… बहुत दर्द हो रहा था…”

    राहुल ने सीमा को कुछ पल आराम करने दिया। वो उनके बगल में लेट गया। लेकिन उसका दिमाग कुछ और ही सोच रहा था। उसने चुपके से अपना मोबाइल उठाया। सीमा आँखें बंद करके रो रही थीं और कुछ समझ नहीं पा रही थीं। राहुल ने फटाफट 3-4 फोटो खींच लीं — सीमा पूरी तरह नंगी, आँसू भरी आँखें, सूजी हुई चूत, छातियाँ फैली हुईं, बाल बिखरे हुए। फोटो में साफ़ दिख रहा था कि वो किस हालत में हैं। राहुल ने फटाफट फोटो गैलरी में सेव कर लीं और मोबाइल साइलेंट करके रख दिया। अब उसके पास सबूत था।

    थोड़ी देर बाद राहुल ने सीमा को फिर से गर्म करना शुरू किया। उसने बहुत प्यार से उनके गालों पर हाथ फेरा, आँसू पोंछे और धीरे से उनके होंठों पर किस किया। “सीमा जी… शांत हो जाओ… मैं बहुत धीरे-धीरे करूँगा… आप जैसा कहोगी वैसा ही करूँगा…”

    सीमा अभी भी काँप रही थीं, लेकिन राहुल की मुलायम आवाज़ और स्पर्श से थोड़ी शांत हुईं। राहुल ने उनकी छातियों को बहुत नरम हाथों से सहलाना शुरू किया। उँगलियों से निप्पल्स को हल्के-हल्के घुमाया। फिर झुककर एक निप्पल को मुँह में ले लिया और बहुत धीरे-धीरे चूसने लगा। दूसरी छाती को हाथ से मसलता रहा। सीमा की साँसें फिर से भारी होने लगीं। “राहुल… धीरे… बहुत डर लग रहा है…”

    राहुल ने उनकी जाँघों को धीरे से अलग किया। उसने अपनी जीभ से उनकी चूत की फाँक को बहुत हल्के-हल्के चाटना शुरू किया। सिर्फ़ क्लिटोरिस पर जीभ घुमाता, कभी पूरी फाँक चाटता। सीमा की कमर हल्की-हल्की ऊपर उठने लगी। वो धीरे-धीरे फिर से गर्म होने लगीं। “आह्ह… राहुल… धीरे… हाँ… यही… बहुत अच्छा लग रहा है…”

    करीब 15-20 मिनट तक राहुल ने उन्हें चाटा, चूमा और सहलाया। सीमा की चूत अब फिर से गीली होने लगी थी।

    सीमा ने काँपते हुए कहा, “राहुल… अब… बहुत धीरे-धीरे… सिर्फ़ 3 इंच ही डालना… उससे ज्यादा नहीं… प्लीज…”

    राहुल ने सिर हिलाया। उसने Trojan Magnum XL कंडोम फिर से चेक किया और सीमा के ऊपर आ गया। लंड की नोक को उनकी चूत की फाँक पर रखा। बहुत धीरे-धीरे, बिना किसी झटके के 3 इंच अंदर डाल दिया।

    सीमा की आँखें बंद हो गईं। “आह्ह… बस… बस इतना ही… और मत डालना… हाँ… यही ठीक है…”

    राहुल रुका नहीं। वो 3 इंच ही अंदर रखकर बहुत धीमी गति से अंदर-बाहर करने लगा। हर धक्का बहुत आहिस्ता था। लंड की मोटाई अभी भी उनकी चूत को फैला रही थी, लेकिन 3 इंच की वजह से दर्द कम था। सीमा की आहें अब दर्द वाली नहीं, बल्कि थोड़ी सुख वाली निकलने लगीं। “हाँ… राहुल… धीरे… इसी तरह… आह्ह…”

    राहुल ने पूरे 45 मिनट तक इसी धीमी, आहिस्ता गति से उन्हें चोदा। कभी-कभी वो रुककर उनकी छातियाँ चूसता, कभी उनके होंठ चूमता। बीच-बीच में सीमा खुद कह रही थीं, “और धीरे… 3 इंच ही रखना… हाँ… अच्छा लग रहा है…”

    45 मिनट पूरे होने पर राहुल की रफ्तार थोड़ी बढ़ी। उसने सीमा की कमर पकड़ ली और आखिरी कुछ धक्के दिए। फिर उसका पूरा शरीर तन गया। कंडोम के अंदर गर्म, गाढ़ा वीर्य निकलने लगा। राहुल ने लंबी साँस ली और सीमा के अंदर ही रहते हुए झड़ गया।

    सीमा भी काँप रही थीं। उनकी आँखें बंद थीं और वो हल्के-हल्के रो-रोकर साँस ले रही थीं।