अध्याय 1: थाईलैंड हनीमून – पहली रात की आग
मेरा नाम प्रिया है, 26 साल। शादी को सिर्फ 12 दिन हुए थे। मेरे पति विक्रम, 32 साल का, लंबा-चौड़ा, जिम वाली बॉडी, घनी मूंछें। हम दोनों थाईलैंड के पटाया बीच पर हनीमून मनाने आए थे। 5 स्टार रिसॉर्ट का प्राइवेट विला बुक किया था – सामने नीला समुद्र, प्राइवेट पूल, जकूजी, और चारों तरफ रोमांटिक लाइट्स। लेकिन मेरी चुत पहले ही डर रही थी।
विक्रम का लंड… भगवान, वो सच में घोड़े जैसा था। 13 इंच लंबा, मोटा, काला, नसें उभरी हुईं। शादी से पहले मैंने सिर्फ दो बार लिया था, वो भी बहुत धीरे। लेकिन विक्रम चुदाई करता था जैसे गधा – बिना रुके, बिना थके, घंटों तक जोर-जोर से।
पहली रात। हम दोनों शैंपेन पीकर बेड पर थे। विक्रम ने मुझे नंगी कर दिया। मेरी साड़ी, ब्लाउज, ब्रा, पैंटी सब फर्श पर पड़ी थीं। मैं नंगी लेटी थी, टांगें थोड़ी खुली।
“प्रिया… आज मैं तुझे पूरी तरह चोदूंगा,” विक्रम ने कहा और अपना लंड बाहर निकाला। सोया हुआ भी 7 इंच का मोटा। मैंने डरते हुए हाथ लगाया।
“विक्रम… प्लीज… धीरे… तुम्हारा इतना बड़ा है… मैं सह नहीं पाऊंगी…” मैंने कांपते स्वर में कहा।
लेकिन विक्रम ने मेरी टांगें कंधों पर रखीं और कंडोम लगाकर लंड का सिर मेरी चुत पर रख दिया। एक जोरदार धक्का।
“आआआह्ह्ह… नहीं… विक्रम… रुक जाओ… फट रही है मेरी चुत… प्लीज… आधा भी नहीं घुसा… बहुत मोटा है… दर्द हो रहा है…” मैं चीख पड़ी। आंसू निकल आए।
विक्रम रुका नहीं। उसने कमर जोर से हिलाई और पूरा लंड एक झटके में अंदर धकेल दिया। मेरी चुत पूरी तरह फैल गई। पेट में उभार दिखने लगा।
“नहीं… विक्रम… निकालो… प्लीज… मैं मर जाऊंगी… इतना गहरा… पेट फाड़ रहा है… आह्ह… धीरे… मत मारो…” मैं रोते हुए उसके सीने पर हाथ मार रही थी।
लेकिन विक्रम ने मेरी कमर पकड़ ली और घोड़े जैसी रफ्तार से चोदना शुरू कर दिया। पच… पच… पच… पच… हर धक्के पर कमरा गूंज रहा था। लंड मेरी गर्भाशय तक टकरा रहा था।
“आह्ह… नहीं… बस… रुक जाओ… मैं सह नहीं पा रही… तुम गधे की तरह चोद रहे हो… प्लीज… थोड़ा आराम दो… आआह्ह… हाँ… और गहरा… नहीं… मत…”
मेरा पहला ऑर्गेज्म आया। चुत ने लंड को कसकर पकड़ लिया। लेकिन विक्रम रुका नहीं। उसने मुझे कुत्ते की मुद्रा में मोड़ दिया, गांड ऊपर की और पीछे से जोर-जोर से ठोकने लगा।
“नहीं… इस पोजीशन में नहीं… बहुत गहरा जा रहा है… विक्रम… प्लीज… मेरी चुत फट गई… रुक जाओ ना… मैं मना कर रही हूँ… आह्ह… और जोर से मत…”
दूसरा ऑर्गेज्म। तीसरा। चौथा। मैं थककर बिस्तर पर गिर पड़ी थी। लेकिन विक्रम अभी भी चोद रहा था। 45 मिनट हो चुके थे।
“विक्रम… प्लीज… अब काफी… मैं और नहीं ले सकती… तुम्हारा लंड बहुत बड़ा है… रोज-रोज मैं मर जाऊंगी…” मैं हांफते हुए बोली।
विक्रम ने मुझे फिर मिशनरी में लिटाया और तेजी बढ़ा दी। आखिरकार वह कंडोम में झड़ गया। गर्म वीर्य कंडोम में भर गया।
वो मेरे ऊपर लेट गया। मैं पसीने से तर, चुत लाल और सूजी हुई।
दूसरे दिन सुबह। विक्रम फिर से खड़ा हो गया। उसने मुझे जकूजी में ले जाकर चोदा। फिर पूल के किनारे। फिर बेड पर। हर बार मैं “नहीं… प्लीज… रुक जाओ… मैं सह नहीं पा रही…” कहती, लेकिन वो घोड़े जैसा चोदता रहता।
शाम को मैं थककर बिस्तर पर लेटी थी। चुत में दर्द हो रहा था। विक्रम फिर से तैयार था।
मैंने हिम्मत जुटाकर कहा, “विक्रम… सुनो… तुम्हारा लंड बहुत बड़ा है… मैं जितनी बार चाहकर भी नहीं ले पा रही… प्लीज… कोई लड़की बुला लो… प्रोफेशनल… वो तुम्हें संभाल लेगी… मैं भी देखूंगी… बस मेरी चुत को आराम मिल जाए…”
विक्रम मुस्कुराया। “तुम सच कह रही हो?”
“हाँ… प्लीज… मैं मना नहीं कर रही… बस 2 दिन के लिए कोई अच्छी लड़की बुला लो… पैसे दे देंगे… कंडोम लगाकर… मैं तुम्हें देखना चाहती हूँ…”
विक्रम ने रिसॉर्ट के कांटेक्ट से एक थाई-इंडियन कॉल गर्ल का नंबर लिया। नाम था “लावा”। 24 साल, 36-24-38 फिगर, बहुत खूबसूरत। 2 दिन के लिए 80,000 रुपये तय हुए।
रात 9 बजे लावा आई। टाइट ड्रेस में। लंबे बाल, भरे स्तन, मोटी गांड।
विक्रम ने उसे अंदर बुलाया। मैं बेड पर बैठी थी, सिर्फ नाइट गाउन में।
लावा ने मुस्कुराते हुए कहा, “सर… मैडम… दोनों साथ में एंजॉय करेंगे?”
मैंने शरमाते हुए सिर हिलाया। “हाँ… लेकिन विक्रम बहुत जोर से करते हैं… तुम संभाल लेना…”
विक्रम ने लावा को नंगी किया। उसका लंड पहले से खड़ा था। लावा ने कंडोम लिया, मुंह से लगाया और चूसने लगी।
“वाह… सर… कितना बड़ा… मैं पूरी ले लूंगी…” लावा बोली।
विक्रम ने लावा को बेड पर लिटाया और घोड़े जैसी चुदाई शुरू कर दी।
“आह्ह… सर… जोर से… हाँ… और जोर से…” लावा चीख रही थी।
मैं बगल में बैठी देख रही थी। विक्रम लावा को 1 घंटे तक लगातार चोदता रहा – मिशनरी, डॉगी, राइडिंग। हर बार कंडोम बदलता। लावा पैसे वसूल कर रही थी – वो भी जोर-जोर से चीख रही थी लेकिन सह ले रही थी।
“प्रिया… देख… तेरा पति कितना जोर से चोदता है…” लावा ने मुझे बुलाया।
मैंने पास जाकर देखा। विक्रम का लंड लावा की चुत में पूरा घुस-घुसकर बाहर आ रहा था।
मेरी चुत फिर गीली हो गई। लेकिन मैंने खुद को रोका।
“विक्रम… प्लीज… लावा को आराम दो… अब मेरी बारी…” मैंने कहा।
लेकिन विक्रम ने मुझे भी खींच लिया। अब दोनों को बारी-बारी चोद रहा था।
रात भर यही चला। लावा ने पैसे के हिसाब से पूरा 2 दिन का प्लान बनाया – सुबह, दोपहर, शाम, रात।
Leave a Reply