तीन बहुओं का घोड़ा 2

अध्याय 2: दूसरी रात – लावा के साथ थ्रीसम

दूसरी रात, 10:30 बजे। विला में सिर्फ नीली लाइट्स जल रही थीं। बाहर समुद्र की लहरें शांत थीं, लेकिन अंदर तूफान आने वाला था। लावा अभी भी हमारे साथ थी। उसने शॉवर लेकर हल्का मेकअप किया था – लाल लिपस्टिक, काला ट्रांसपेरेंट नेग्लिजी, जिसके अंदर कुछ नहीं था। उसके भरे-भरे 36D स्तन और गोल गांड देखकर मेरी सांसें तेज हो रही थीं।

विक्रम शैंपेन के दो ग्लास लेकर आया। उसका लंड पहले से ही लुंगी में तना हुआ था।

“आज पूरा थ्रीसम होगा,” विक्रम ने कहा और मुझे अपनी तरफ खींच लिया। “प्रिया, तू देखना और एंजॉय करना।”

मैंने शरमाते हुए सिर हिलाया, लेकिन दिल में डर भी था। “विक्रम… प्लीज… धीरे करना… लावा को भी मत तोड़ देना… तुम गधे की तरह चोदते हो… मैं पहले ही दो रात से सह नहीं पा रही…”

लावा मुस्कुराई। उसने मेरी नाइट गाउन की स्ट्रैप खींची और मेरे स्तनों को बाहर निकाल लिया। “मैडम… डरो मत… मैं संभाल लूंगी… सर का लंड बहुत पावरफुल है…”

विक्रम ने मुझे बेड पर लिटा दिया। लावा मेरे ऊपर चढ़ गई। उसने मेरे होंठ चूमे, फिर मेरे स्तनों को चूसने लगी। मैं कांप रही थी।

“नहीं… लावा… मैं लड़की हूँ… ये… आह्ह… मत चूसो… बहुत जोर से… विक्रम देख रहा है… प्लीज… रुक जाओ…” मैंने कहा, लेकिन मेरी उंगलियाँ लावा के बालों में फंस गईं।

विक्रम ने अपना लंड बाहर निकाला। 13 इंच का वो विशाल काला लंड देखकर लावा की आँखें चमक उठीं। उसने कंडोम लिया, मुंह से लगाया और पूरा मुंह भरकर चूसने लगी। गला तक ले जा रही थी।

“उम्म्म… सर… कितना मोटा… मेरी चुत तैयार है…” लावा बोली।

विक्रम ने लावा को मेरे बगल में लिटाया और उसकी टांगें फैला दीं। एक जोरदार धक्का।

“आआह्ह… सर… पूरा घुस गया… हाँ… जोर से चोदिए…” लावा चीखी।

विक्रम ने घोड़े जैसी रफ्तार पकड़ ली। पच… पच… पच… पच… कमरा आवाजों से भर गया। लावा की चुत से सफेद फेन निकल रहा था।

मैं बगल में लेटी देख रही थी। मेरी चुत गीली हो गई थी। विक्रम ने मुझे बुलाया, “प्रिया… आ… लावा के स्तन चूस…”

“नहीं… विक्रम… मैं नहीं कर सकती… ये गलत है… प्लीज… मैं सिर्फ देखूंगी…” मैंने मना किया, लेकिन विक्रम ने मेरे सिर को लावा के स्तन पर दबा दिया।

मैंने अनमने मन से लावा का निप्पल मुंह में लिया और चूसने लगी। “उम्म्म… नहीं… आह्ह… स्वाद… लावा… तुम्हारे स्तन कितने बड़े हैं…”

विक्रम ने लावा को 20 मिनट तक लगातार चोदा। फिर उसने लावा को उठाकर मुझे बेड के बीच में लिटा दिया। अब दोनों मेरे साथ थे।

विक्रम ने मेरी टांगें खोलीं और कंडोम लगाकर लंड मेरी चुत पर रख दिया।

“नहीं… विक्रम… आज मत… मैं अभी भी कल की चुदाई से सूजी हुई हूँ… प्लीज… रुक जाओ… लावा को चोदो… आआह्ह… आधा घुस गया… बहुत मोटा… फट रही है… प्लीज धीरे…” मैं रो पड़ी।

विक्रम ने आधा लंड अंदर किया ही था कि लावा मेरे मुंह पर बैठ गई। उसकी चुत मेरे होंठों पर।

“चाटो मैडम… अच्छे से चाटो…” लावा ने कहा और मेरी नाक पर अपनी चुत रगड़ने लगी।

“नहीं… लावा… मैं नहीं… आह्ह… स्वीट… चूत का रस… उम्म्म… नहीं… मैं पत्नी हूँ… प्लीज… मत दबाओ…” मैं चाट रही थी और विक्रम मेरी चुत में धक्के मार रहा था।

अब थ्रीसम पूरा शुरू हो गया। विक्रम मेरी चुत चोद रहा था, लावा मेरी चुत चाट रही थी और मैं लावा की चुत चाट रही थी। कमरे में “चुप… चुप… पच… पच…” की आवाजें और हमारी चीखें गूंज रही थीं।

“आह्ह… विक्रम… नहीं… इतना जोर से मत… मेरी चुत फट जाएगी… लावा… तुम भी मत… आआह्ह… मैं झड़ रही हूँ… प्लीज रुक जाओ… दोनों… मैं सह नहीं पा रही…”

मेरा पहला ऑर्गेज्म आया। शरीर कांप उठा।

फिर पोजीशन बदली। विक्रम ने लावा को डॉगी स्टाइल में चोदा और मैं लावा के नीचे लेटकर उसकी चुत चाट रही थी। विक्रम का लंड मेरी जीभ से टकरा रहा था।

“नहीं… विक्रम… लावा की चुत फाड़ रहे हो… प्लीज धीरे… आह्ह… लावा… तुम चीख क्यों रही हो… हाँ… और चूसो मेरी चुत…”

दूसरा राउंड। विक्रम ने मुझे और लावा को बगल में लिटाया। एक-एक करके दोनों को चोद रहा था। 10-10 मिनट। कंडोम बदलता जा रहा था।

“प्रिया… देख… लावा कितना सह ले रही है… तू क्यों नहीं सह पाती?” विक्रम ने हांफते हुए कहा।

“क्योंकि तुम गधे हो… आह्ह… नहीं… फिर से मेरी बारी… प्लीज… बस 5 मिनट… मेरी चुत जल रही है… लावा… तुम ले लो…”

तीसरा राउंड। अब मैं विक्रम के ऊपर थी, लावा मेरे पीछे। लावा ने अपना उंगली मेरी गांड में डाल दी।

“नहीं… लावा… गांड में मत… प्लीज… दर्द हो रहा है… विक्रम… तुम भी मत… आआह्ह… दोनों… मैं मर जाऊँगी… हाँ… और अंदर… नहीं… रुक जाओ…”

रात 3 बजे तक चला। मैं 7 बार झड़ चुकी थी। लावा 8-9 बार। विक्रम ने आखिर में दोनों के मुंह पर झड़ने की कोशिश की, लेकिन कंडोम में ही झड़ा।

हम तीनों पसीने से तर, नंगे बेड पर लेटे थे। लावा मेरी छाती पर सिर रखे हुए थी। विक्रम दूसरी तरफ।

लावा ने फुसफुसाया, “मैडम… कल तीसरी रात भी रहूंगी… सर बहुत पावरफुल हैं… पैसे वसूल कर लूंगी।”

मैं थकी हुई मुस्कुराई। “हाँ… लेकिन मेरी चुत को आराम दो…”

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