अध्याय 4: दूसरी शादी और सुहागरात की शिक्षा
विक्रम ने प्रिया को माँ के घर छोड़ दिया और अकेला घर चला गया। उसकी भूख अब और बढ़ गई थी। उसने अपनी मामा-मामी को सब कुछ बता दिया — प्रिया की असमर्थता, सास शीला के साथ जो कुछ हुआ, सब। मामा-मामी ने पहले तो शॉक जताया, लेकिन विक्रम के पास अरबों की दौलत थी। उन्होंने फैसला किया कि विक्रम की दूसरी शादी कर दी जाए।
दूसरी दुल्हन का नाम था नेहा — 23 साल, बहुत सुंदर, गोरी, 34D स्तन, पतली कमर, मोटी गांड। नेहा साधारण परिवार से थी। शादी तय हो गई।
सुहागरात की रात।
विक्रम ने नेहा को 5 स्टार होटल के हनीमून सूट में ले जाया। प्रिया और शीला (प्रिया की माँ) भी वहीं थीं — “सिखाने” के लिए।
कमरे में रोशनी मद्धिम थी। नेहा लाल लहंगे में नजर आ रही थी। विक्रम ने लहंगे की पल्लू खींची।
नेहा शरमाई, “विक्रम जी… प्लीज… धीरे… मैं पहली बार हूँ…”
प्रिया ने पास आकर नेहा के कान में कहा, “बहन… तैयार रहो… विक्रम का लंड बहुत बड़ा है… मैं सह नहीं पाई, इसलिए तुम्हें चुन लिया गया है।”
शीला माँ ने मुस्कुराते हुए नेहा के ब्लाउज के हुक खोलने शुरू कर दिए।
विक्रम ने अपना लंड बाहर निकाला। 13 इंच का मोटा, काला, नसों वाला लंड देखकर नेहा के मुँह से चीख निकल गई।
“नहीं… ये… ये क्या है… इतना बड़ा… मैं नहीं ले पाऊंगी… प्लीज विक्रम जी… रुक जाइए… मैं डर रही हूँ…” नेहा काँपते हुए पीछे हटी।
प्रिया ने नेहा को बेड पर लिटाया और उसकी टांगें फैला दीं। “बहन… डरो मत… मैं सिखाती हूँ। पहले चूसो…”
नेहा ने रोते हुए लंड मुंह में लिया, लेकिन सिर्फ सिर ही जा पाया। “उम्म्म… नहीं… गला फट जाएगा… इतना मोटा… प्लीज… मैं नहीं कर सकती…”
शीला माँ ने नेहा की चुत पर तेल लगाया और उंगलियाँ डालकर फैलाने लगीं। “बेटी… तैयार हो जा… विक्रम बिना रुके चोदता है।”
विक्रम ने कंडोम लगाया और नेहा की टांगें कंधों पर रख दीं। एक जोरदार धक्का।
“आआआह्ह्ह… नहीं… फट गई… विक्रम जी… निकालिए… प्लीज… बहुत दर्द हो रहा है… आधा भी नहीं घुसा… मेरी चुत चीर दी… आह्ह… रुक जाइए…” नेहा जोर से चीख पड़ी। आंसू बहने लगे।
प्रिया ने नेहा के स्तन चूसते हुए कहा, “बहन… सह ले… मैं भी यही सहती थी… अब तू सह…”
विक्रम ने और जोर से धक्का मारा। पूरा लंड अंदर चला गया। नेहा का पेट उभर आया।
“नहीं… पेट फाड़ रहा है… विक्रम जी… प्लीज… रुक जाओ… मैं मर जाऊंगी… आह्ह… धीरे… मत मारो… मैं तेरी पत्नी हूँ… ये गलत है… आआह्ह… हाँ… और गहरा… नहीं… मत…”
विक्रम ने घोड़े जैसी रफ्तार पकड़ ली। पच… पच… पच… पच… कमरा चीखों और थपाकों से भर गया।
शीला माँ ने नेहा का सिर थामा और बोली, “बेटी… सह ले… मैं भी सह रही हूँ रोज… प्रिया भी देख रही है…”
प्रिया ने नेहा की क्लिट पर उंगली रखकर रगड़ना शुरू कर दिया। “बहन… झड़ जा… दर्द कम हो जाएगा…”
नेहा का पहला ऑर्गेज्म आया। “आआआह्ह्ह… नहीं… झड़ रही हूँ… विक्रम जी… रुक जाओ… मैं सह नहीं पा रही… आह्ह… और मत मारो…”
लेकिन विक्रम रुका नहीं। 40 मिनट तक लगातार चोदा। नेहा 5 बार झड़ चुकी थी। उसकी चुत सूज गई थी, लाल हो गई थी।
फिर थ्रीसम शुरू हुआ।
प्रिया नेहा के ऊपर लेट गई। दोनों की चुतें एक-दूसरे से सटी हुईं। विक्रम ने बारी-बारी दोनों में डाला।
“नहीं… विक्रम… अब मेरी चुत में मत… अभी भी दर्द है… प्लीज… नेहा को चोदो… आह्ह… दोनों को साथ मत… मैं माँ हूँ… नहीं… आआह्ह…” शीला भी शामिल हो गई।
नेहा रोते हुए बोली, “प्रीया दीदी… माँ जी… प्लीज… मुझे बचाओ… विक्रम जी बहुत जोर से कर रहे हैं… मेरी चुत फट गई… आह्ह… नहीं… गांड में मत… प्लीज… रुक जाओ…”
विक्रम ने नेहा की गांड में भी घुसा दिया। प्रिया नेहा की चुत चाट रही थी। शीला विक्रम के अंडकोष चूस रही थी।
रात भर यही चला। नेहा की हालत पूरी तरह खराब हो गई — वो उठ भी नहीं पा रही थी, चुत और गांड दोनों सूजी हुई, शरीर काँप रहा था, लेकिन विक्रम ने तीनों को बारी-बारी चोदा।
सुबह नेहा बेहोश पड़ी थी। प्रिया ने उसके माथे पर हाथ फेरा और कहा, “अब तू संभाल लेगी ना बहन?”
नेहा कमजोर आवाज में बोली, “हाँ दीदी… लेकिन… रोज नहीं… प्लीज…”
शीला माँ ने मुस्कुराते हुए कहा, “बेटी… आदत पड़ जाएगी।”
विक्रम संतुष्ट था। अब उसके पास तीन औरतें थीं — प्रिया, शीला और नेहा।
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