ट्रेन में मिली अजनबी लड़की 2

मैंने टेबल से कंडोम का पैकेट लिया, एक निकाला और पहन लिया। फिर नेहा की जाँघें थोड़ी और अलग कीं। लंड की नोक को उसकी चूत पर रखा और बहुत धीरे से दबाया।

नेहा ने आँखें बंद कर लीं और मेरी पीठ को कसकर पकड़ लिया।

“आह्ह्ह…” एक लंबी आह के साथ मेरा लंड धीरे-धीरे उसके अंदर घुसने लगा। नेहा की चूत बहुत टाइट और गर्म थी। मैं रुक-रुककर पूरा लंड अंदर डालता गया। जब पूरा घुस गया, तो हम दोनों कुछ पल ऐसे ही रुक गए।

मैंने नेहा के माथे पर किस किया और फुसफुसाया,
“ठीक है ना?”

नेहा ने सिर हिलाया और बोली, “हाँ… बहुत अच्छा लग रहा है… अब धीरे-धीरे…”

मैंने बहुत धीमी गति से धक्के मारने शुरू किए। हर धक्के के साथ नेहा की आहें निकल रही थीं — “आह… राहुल… हाँ… और धीरे…”

हम दोनों एक-दूसरे को कसकर पकड़े हुए थे। मैं उसकी छातियों को चूमता, गर्दन को चूसता, और धीरे-धीरे चोदता रहा। नेहा की जाँघें मेरी कमर के चारों तरफ लिपटी हुई थीं।

करीब 15-20 मिनट तक हम इसी धीमी, रोमांटिक रफ्तार में रहे। फिर नेहा की साँसें तेज़ होने लगीं। उसकी चूत मेरे लंड को कसकर पकड़ने लगी।

“राहुल… मैं… आ रही हूँ…” उसने काँपते हुए कहा।

मैंने गति थोड़ी बढ़ाई। कुछ ही देर में नेहा का पूरा शरीर सख्त हो गया और वो जोर से झड़ गई। उसकी चूत बार-बार सिकुड़ रही थी। उसी पल मैं भी झड़ गया। गर्म वीर्य कंडोम के अंदर भर गया।

हम दोनों थके हुए, पसीने से तर, एक-दूसरे से चिपके हुए लेट गए। नेहा मेरी छाती पर सिर रखे हुए थी। मैं उसके बालों में हाथ फेर रहा था।

नेहा ने बहुत धीमी आवाज़ में कहा,
“राहुल… आज रात बहुत खूबसूरत थी… थैंक यू।”

मैंने उसे कसकर गले लगाया और बोला,
“तुम्हारे साथ ये पल मेरे लिए भी बहुत स्पेशल हैं नेहा।”

रूम में दूसरा राउंड (रात 2:30 बजे)

पहले राउंड के बाद हम दोनों थके हुए, पसीने से तर लेटे हुए थे। नेहा मेरी छाती पर सिर रखे, अपनी नंगी छाती मेरी छाती से सटाए हुए आराम कर रही थी। उसकी साँसें अभी भी धीरे-धीरे भारी थीं। मैं उसके नंगे पीठ पर उँगलियाँ फिरा रहा था, कभी कमर पर घुमाता, कभी गांड के ऊपरी हिस्से को हल्के से सहलाता। 

करीब 20 मिनट बाद नेहा ने सिर उठाया। उसकी आँखों में फिर से वो चमक आ गई थी। वो शरमाते हुए मुस्कुराई और मेरे कान के पास फुसफुसाई, 
“राहुल… मुझे अभी भी और चाहिए… तुम्हारा लंड फिर से…”

ये सुनकर मेरा लंड फिर से सख्त होने लगा। मैंने नेहा को कसकर चूमा। किस इस बार ज्यादा भूखा था। हमारी जीभें एक-दूसरे से लड़ रही थीं। नेहा ने खुद मेरे ऊपर चढ़ गई। उसकी गीली चूत मेरे पेट पर रगड़ खा रही थी। वो मेरी छाती चूमने लगी, निप्पल्स को जीभ से घुमाती हुई नीचे उतर गई। 

उसने मेरा लंड हाथ में लिया, धीरे-धीरे सहलाया और फिर मुँह में ले लिया। नेहा बहुत धीरे से चूस रही थी। उसकी गर्म जीभ लंड के सिरे पर घूम रही थी, कभी पूरा मुँह में लेकर गहरी गला दे रही थी। मैंने उसके बाल पकड़ लिए और हल्के से सिर दबाया। नेहा की आँखें ऊपर देख रही थीं, मुँह से सलाइवा टपक रहा था। “मम्म… राहुल… कितना स्वादिष्ट है…” वो फुसफुसाई। 

कुछ देर चूसने के बाद नेहा ने दूसरा कंडोम निकाला, खुद मेरे लंड पर चढ़ाया और फिर मेरे ऊपर बैठ गई। इस बार वो बहुत धीरे से नीचे बैठी। उसकी चूत अभी भी पिछले राउंड से गीली थी, लेकिन टाइट थी। पूरा लंड अंदर घुसते ही नेहा की कमर काँप गई — “आआह्ह्ह… फिर से भर गया… बहुत मोटा लग रहा है…”

वो राइडिंग पोज़िशन में धीरे-धीरे ऊपर-नीचे होने लगी। हर बार जब वो नीचे बैठती, उसकी भारी छातियाँ जोर से उछलतीं और मेरे चेहरे के पास आ जातीं। मैंने उन्हें दोनों हाथों से थाम लिया, निप्पल्स को मुँह में लेकर जोर-जोर से चूसने लगा। नेहा की रफ्तार बढ़ने लगी। “फच… फच… फच…” की आवाज़ रूम में गूँज रही थी। नेहा की आहें तेज़ हो गईं — “हाँ राहुल… और तेज़… मेरी चूत को चोदो… आह्ह… मुझे फाड़ दो… बहुत मजा आ रहा है…”

मैंने नीचे से जोर-जोर से धक्के मारे। नेहा झुककर मेरे होंठ चूसने लगी। उसका पसीना मेरी छाती पर टपक रहा था। करीब 18 मिनट तक ये राइडिंग चली। नेहा दो बार छोटे-छोटे ऑर्गेज्म आई। आखिर में वो जोर से काँपी, चूत मेरे लंड को कसकर दबाई और झड़ गई। उसी पल मैं भी उसके अंदर झड़ गया। 

नेहा मेरी छाती पर ढेर हो गई। हम दोनों लंबी साँसें लेते हुए एक-दूसरे को चूमते रहे। फिर थकान से सो गए।

सुबह का पहला राउंड (सुबह 7:45 बजे)

सुबह की हल्की रोशनी खिड़की से आ रही थी। नेहा मेरी बाँहों में लिपटी सो रही थी। उसका नंगा बदन मेरे बदन से पूरी तरह चिपका हुआ था। मैं जाग गया और उसके गाल पर किस किया। नेहा की आँखें खुलीं। वो मुस्कुराई और मुझे और कसकर चिपक गई। 

“Good morning baby…” मैंने कहा। 
नेहा ने शरमाते हुए जवाब दिया, “बहुत अच्छी मॉर्निंग है…”

मेरा लंड फिर से उसकी जाँघों के बीच सख्त हो चुका था। नेहा ने उसे महसूस किया और मुस्कुराई। इस बार वो खुद मेरे ऊपर चढ़ गई। सुबह की ताज़गी में उसका गोरा नंगा बदन और भी खूबसूरत लग रहा था। उसने कंडोम चढ़ाया और धीरे से लंड पर बैठ गई। 

“आह्ह… सुबह-सुबह कितना अच्छा लग रहा है…” नेहा ने आँखें बंद करके कहा। वो धीरे-धीरे ऊपर-नीचे होने लगी। मैंने उसके कूल्हों को पकड़ लिया और नीचे से मदद करने लगा। उसकी छातियाँ मेरे चेहरे के सामने हिल रही थीं। मैंने उन्हें चूमा, चाटा और निप्पल्स को हल्के से काटा। नेहा की साँसें तेज़ हो गईं। 

रफ्तार बढ़ने लगी। नेहा अब जोर-जोर से बैठ रही थी। “हाँ राहुल… और गहरा… मेरी चूत में पूरा डाल दो… आह्ह… मैं झड़ने वाली हूँ…” कुछ ही मिनट में नेहा का शरीर सख्त हो गया और वो पहली बार झड़ गई। मैंने उसे पलटकर मिशनरी पोज़िशन में लिया और तेज़ धक्के मारने लगा। नेहा की टाँगें मेरी कमर पर लिपटी हुई थीं। आखिर में हम दोनों साथ में झड़ गए। 

हम पसीने से तर लेटे रहे। नेहा मेरी गर्दन में चेहरा छुपाए हुए थी।

सुबह का दूसरा राउंड (सुबह 9:20 बजे — शावर में)

हम दोनों नहाने गए। शावर के नीचे गर्म पानी की धार गिर रही थी। नेहा मेरे सामने खड़ी थी। मैंने उसे दीवार से सटाकर खड़ा किया। पीछे से उसकी छातियों को दोनों हाथों से दबाया और गर्दन चूसने लगा। नेहा की साँसें फिर से भारी हो गईं। 

मैंने उसे झुकाया, शावर के नीचे ही डॉगी स्टाइल में लिया। पानी हमारे गीले बदन पर गिर रहा था। मैंने पीछे से लंड अंदर डाला और जोर से ठोकना शुरू किया। नेहा की गांड हर धक्के पर लहरा रही थी। पानी की धार के साथ “फच फच” की आवाज़ और तेज़ हो रही थी।

“आह्ह… राहुल… शावर में चोदना… बहुत गंदा और मजेदार है… हाँ… और जोर से… मेरी गांड पकड़कर फाड़ दो…” नेहा चीख रही थी। मैंने एक हाथ से उसके बाल पकड़े, दूसरे से क्लिटोरिस रगड़ा। पानी हम दोनों के शरीर से बह रहा था। नेहा दो बार झड़ गई। आखिर में मैं भी उसके अंदर झड़ गया। 

शावर के नीचे हम दोनों एक-दूसरे को चूमते हुए खड़े रहे।

पैकिंग और टैक्सी में स्टेशन पहुँचना

शावर से निकलकर हमने कपड़े पहने। नेहा ने सफेद टॉप और जीन्स पहनी, मैंने शर्ट और जींस। फिर हमने सामान पैक करना शुरू किया। नेहा अपना बैग पैक कर रही थी, मैं अपना। बीच-बीच में हम एक-दूसरे को किस कर लेते। नेहा ने कहा, “ये गोवा की यादें कभी नहीं भूलूँगी राहुल… तुमने मुझे बहुत स्पेशल फील कराया।”

पैकिंग खत्म होने के बाद हमने होटल से चेकआउट किया। टैक्सी बुक की और स्टेशन की तरफ चल दिए। टैक्सी में हम पीछे की सीट पर बैठे थे। नेहा ने अपना सिर मेरे कंधे पर रख दिया। मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और उँगलियाँ फंसाईं। 

टैक्सी चल रही थी। बाहर गोवा के खूबसूरत रास्ते दिख रहे थे। नेहा ने धीरे से मेरे कान में कहा, “ट्रेन में भी… वही वाला केबिन मिल जाए तो…”

मैं मुस्कुराया और उसके गाल पर किस किया। टैक्सी स्टेशन पहुँचते-पहुँचते हम दोनों फिर से एक-दूसरे के करीब आ गए थे। दिल में वो पुरानी उत्तेजना फिर से जाग रही थी।

ट्रेन में बैठने से पहले नेहा ने मुझे कसकर गले लगाया और फुसफुसाई, 
“अब ट्रेन का इंतज़ार है…”

ट्रेन आई और अपने शीट पर गए और
नेहा ने मुझे बिस्तर पर धकेल दिया। वो खुद मेरे ऊपर चढ़ गई। उसने मेरी शर्ट उतारी, मेरी छाती चूमने लगी। उसकी जीभ मेरे निप्पल्स पर घूम रही थी। फिर नीचे हाथ बढ़ाया, मेरे लंड को पैंट से बाहर निकाला और धीरे-धीरे सहलाने लगी। लंड सख्त हो गया। नेहा ने कंडोम चढ़ाया, अपनी ड्रेस ऊपर उठाई, पैंटी सरकाई और धीरे से मेरे लंड पर बैठ गई।

उसकी गीली, गरम चूत मेरे मोटे लंड को धीरे-धीरे निगल रही थी। जब पूरा घुस गया, नेहा की आँखें बंद हो गईं और मुँह से लंबी आह निकली — “आआह्ह्ह… राहुल… कितना मोटा और गहरा… पूरी तरह भर गया है…”

वो धीरे-धीरे ऊपर-नीचे होने लगी। हर बार जब नीचे बैठती, उसकी भारी छातियाँ जोर से उछलतीं। मैंने दोनों हाथों से उन्हें थाम लिया, निप्पल्स को उँगलियों के बीच दबाया और खींचा। नेहा की रफ्तार बढ़ने लगी। “फच… फच… फच…” की आवाज़ केबिन में गूँज रही थी। नेहा की जाँघें मेरी कमर से सट रही थीं। उसका पसीना मेरी छाती पर टपक रहा था।

वो झुककर मुझे किस करने लगी। उसके बाल मेरे चेहरे पर गिर रहे थे। मैंने नीचे से तेज़ धक्के मारे। नेहा चीख उठी — “हाँ… राहुल… और जोर से… मेरी चूत फाड़ दो… आह्ह… बहुत मजा आ रहा है… मैं पागल हो रही हूँ…” उसकी चूत मेरे लंड को कसकर पकड़ रही थी। करीब 15 मिनट बाद नेहा का शरीर सख्त हो गया। उसकी चूत बार-बार सिकुड़ी और वो जोर से झड़ गई। गर्म रस मेरे लंड पर बहने लगा। उसी पल मैं भी कंडोम के अंदर झड़ गया। नेहा मेरी छाती पर ढेर हो गई। हम दोनों लंबी साँसें लेते रहे।

दूसरा राउंड (रात 12:30 बजे — मिशनरी पोज़िशन)
हम थोड़ी देर आराम करने के बाद फिर से शुरू हो गए। इस बार मैंने नेहा को लिटाया। उसकी जाँघें चौड़ी कीं और उसके ऊपर लेट गया। लंड फिर से सख्त था। मैंने धीरे से अंदर डाला। नेहा की आँखें नम हो गईं। “राहुल… धीरे… लेकिन गहरा…”

मैंने बहुत धीमी गति से शुरू किया। हर धक्के के साथ उसकी छातियाँ हिल रही थीं। मैंने एक-एक करके दोनों निप्पल्स को मुँह में लिया, जोर-जोर से चूसा। नेहा मेरी पीठ पर नाखून गड़ा रही थी। मैंने रफ्तार बढ़ाई। लंड जड़ तक घुस रहा था और बाहर निकल रहा था। चूत से सफ़ेद झाग बनने लगा। नेहा बार-बार चीख रही थी — “आह… हाँ… इसी तरह… मेरी चूत को चोदते रहो… उफ्फ… मैं मर रही हूँ मजा से…”

उसने अपनी टाँगें मेरी कमर पर लपेट लीं। मैंने गति और तेज़ कर दी। केबिन में सिर्फ चुदाई की फच-फच आवाज़ और नेहा की कामुक आहें गूँज रही थीं। नेहा तीन बार छोटे-छोटे ऑर्गेज्म आई। आखिर में वो जोर से काँपी और झड़ गई। मैं भी उसके अंदर झड़ गया। हम पसीने से तर लेटे रहे। नेहा मेरे कान में फुसफुसाई — “तुम मुझे पूरी तरह अपना बना रहे हो…”

तीसरा राउंड (सुबह 3 बजे — साइड पोज़िशन)
नींद में ही हम लिपटे हुए थे। नेहा ने खुद जागकर मेरा लंड सहलाया। मैं जाग गया। हम साइड में लेटे रहे। मैंने पीछे से उसकी जाँघ ऊपर उठाई और लंड अंदर डाला। ये पोज़िशन बहुत गहरा और intimate था। मैं धीरे-धीरे धक्के मार रहा था। एक हाथ से उसकी छाती मसल रहा था, दूसरे से क्लिटोरिस रगड़ रहा था।

नेहा की साँसें फूल रही थीं। “राहुल… ये पोज़िशन… बहुत अच्छा लग रहा है… गहराई तक महसूस हो रहा है…” मैंने गति बढ़ाई। उसकी गांड मेरे पेट से टकरा रही थी। हम दोनों एक-दूसरे को चूमते रहे। नेहा का एक हाथ पीछे करके मेरी जाँघ पकड़े हुए था। करीब 12 मिनट बाद हम दोनों साथ में झड़ गए।

चौथा राउंड (सुबह 5:30 बजे — डॉगी स्टाइल)
सुबह की हल्की रोशनी में नेहा घुटनों के बल हो गई। मैंने पीछे से उसकी कमर पकड़ी और एक झटके में पूरा लंड अंदर ठोक दिया। नेहा चीख उठी — “आआह्ह्ह… बहुत तेज़… लेकिन मत रुकना…”

मैंने उसके बाल पकड़े और घोड़े की तरह तेज़ी से चोदना शुरू किया। उसकी गांड हर धक्के पर लहरा रही थी। मैंने एक हाथ से उसकी लटकती छातियों को दबाया, दूसरे से क्लिटोरिस रगड़ा। नेहा बार-बार चिल्ला रही थी — “हाँ… फाड़ दो… मेरी गांड पकड़कर चोदो… राहुल… मैं तुम्हारी हूँ… आह्ह… और तेज़…”

पसीना हम दोनों के शरीर पर बह रहा था। ट्रेन की लहर के साथ चुदाई और भी मजेदार हो रही थी। नेहा दो बार झड़ी। आखिर में मैंने जोर-जोर से ठोककर झड़ गया।

पाँचवाँ राउंड (दिल्ली पहुँचने से ठीक पहले — गोद में बैठकर)
ट्रेन दिल्ली के पास थी। नेहा मेरी गोद में बैठ गई। हम दोनों आमने-सामने थे। उसने लंड अंदर लिया और कसकर चिपक गई। मैंने उसकी कमर पकड़कर ऊपर-नीचे किया। नेहा मेरी गर्दन में चेहरे को छुपाए हुए थी। किस करते हुए हम तेज़ी से चुदाई कर रहे थे।

“राहुल… आखिरी बार… मुझे भर दो…” नेहा फुसफुसाई। मैंने तेज़ धक्के मारे। उसकी छातियाँ मेरी छाती से रगड़ खा रही थीं। आखिर में हम दोनों एक साथ जोर से झड़ गए।

ट्रेन स्टेशन पर रुकी। हम दोनों थके लेकिन संतुष्ट थे। नेहा ने मुझे आखिरी गहरा किस दिया और बोली, “ये ट्रिप कभी नहीं भूलूँगी…”

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