राज और नीता की सुहागरात

राज और नीता की सुहागरात

शादी की रात। लंदन का वो विशाल लग्जरी सूट, पूरा १८०० स्क्वायर फुट का प्राइवेट सुइट। कमरा गहरे लाल, गोल्डन और सॉफ्ट वाइन लाइट्स से जगमगा रहा है। फर्श पर सफेद और लाल गुलाब की हजारों ताज़ा पंखुड़ियाँ बिछी हुई हैं, हवा में जूही, चन्दन, रोज़ और वेनिला की मीठी-तीखी खुशबू घुली हुई है। बेड किंग साइज, सिल्क की चमकदार क्रीम कलर की चादरें, चारों तरफ मोमबत्तियों की लपटें धीरे-धीरे नाच रही हैं। बाहर बालकनी से टेम्स नदी की रात की चमक और शहर की दूर की रोशनी दिख रही है, लेकिन अंदर सिर्फ उनकी तेज़ होती साँसों, कपड़ों की सरसराहट और हल्की-हल्की सिसकारियों की आवाज़ें भर रही हैं।

नीता अभी-अभी रिसेप्शन से वापस आई है। उसका भारी लाल लेहंगा पूरा फैला हुआ है, दुपट्टा कंधे पर लहरा रहा है, घुटनों तक नीचे झूल रहा है। मेकअप थोड़ा पसीने और किस के कारण गीला और फैला हुआ – काजल की काली लकीर आँखों के नीचे हल्की-हल्की बह रही है, लिपस्टिक आधी मिट चुकी है, गालों पर हल्की लाली चढ़ी हुई है। उसके लंबे, घने, काले बाल खुले हुए हैं, कमर तक लहराते हुए, कुछ बाल चेहरे पर चिपक गए हैं। राज शेरवानी में है, ऊपरी तीन बटन खुले हुए, छाती के घने बाल दिख रहे हैं, आँखों में वो जंगली, भूखी चमक जो शादी के बाद पहली बार पूरी तरह उभर रही है।

मैं दीवार से सटा खड़ा हूँ। हवा में उनकी शरीर की गर्मी और खुशबू दोनों महसूस हो रही हैं।

राज धीरे-धीरे नीता के बहुत पास आया। उसने दोनों हाथों से उसके गाल थाम लिए, अँगूठों से हल्का-हल्का दबाते हुए उसके चेहरे को ऊपर उठाया। “आज से तुम मेरी हो… पूरी तरह मेरी… तुम्हारा हर हिस्सा, हर छेद, हर साँस मेरा है,” उसकी आवाज भारी, गहरी और थरथराती हुई थी। फिर उसने नीता के नरम, गुलाबी होंठों पर अपना मोटा, गर्म होंठ रख दिया। पहला किस बहुत धीमा, बहुत गहरा, बहुत लंबा। राज ने नीता के निचले होंठ को चूसा, फिर ऊपरी को, फिर अपनी जीभ को उसके मुंह में डाल दिया। दोनों की जीभें एक-दूसरे से उलझ गईं, चाटने लगीं, घुमने लगीं। राज ने नीता का सिर थोड़ा पीछे झुकाया और किस को और गहरा, और गीला बनाया। नीता की साँसें तेज़ हो गईं, उसकी छाती ऊपर-नीचे हो रही थी, हाथ राज की पीठ पर फिसल रहे थे, नाखून हल्के-हल्के उसके मांस में गड़ रहे थे। यह किस पूरे ५-६ मिनट तक लगातार चला। दोनों के मुँह से हल्की-हल्की “म्ह्म्म…” और “आह्ह…” की आवाज़ें निकल रही थीं।

राज ने नीता को धीरे से बेड की तरफ धकेल दिया। सबसे पहले उसने भारी दुपट्टे को कंधों से उतारा और फर्श पर फेंक दिया। फिर ब्लाउज के एक-एक हुक को बहुत धीरे-धीरे खोलना शुरू किया। हर हुक खुलते ही नीता की साँस रुक रही थी, उसकी छाती तेज़ी से हिल रही थी। ब्लाउज पूरी तरह निकल गया तो नीता का लाल जरी वाला ब्रा सामने आ गया – ३४D, दोनों स्तन भरे-भरे, ऊपर से उभरे हुए, निप्पल्स पहले से ही सख्त होकर खड़े थे। राज ने ब्रा के कपड़े के ऊपर से ही दोनों स्तनों को दोनों हाथों से मसलना शुरू कर दिया। अँगुलियाँ गोल-गोल घुमा रहा था, कभी हल्का दबा रहा, कभी जोर से निचोड़ रहा, निप्पल्स को अँगुलियों के बीच दबाकर खींच रहा था। नीता की आँखें आधी बंद, मुँह थोड़ा खुला, “राज… धीरे… मुझे बहुत डर लग रहा है… मैं… मैं कभी नहीं किया…”

राज घुटनों पर बैठ गया। पेटीकोट का नादा खोला, लेहंगा धीरे-धीरे सरककर फर्श पर गिर गया। अब नीता सिर्फ ब्रा और मैचिंग लाल लेस पैंटी में खड़ी थी। उसकी जाँघें चिकनी, गोरी, हल्के-हल्के काँप रही थीं। राज ने दोनों जाँघों के अंदरूनी हिस्से को चूमना शुरू किया – बहुत धीरे, बहुत ऊपर की तरफ। जब उसकी नाक और होंठ पैंटी के ऊपर से चूत के पास पहुँचे तो नीता ने जोर से सिसकारी भरी, “आह्ह्ह…!” पैंटी का कपड़ा पहले से ही गीला हो चुका था, नमी साफ दिख रही थी।

राज ने ब्रा का हुक खोला। दोनों बड़े, भारी, गोल, दूध जैसे सफेद स्तन बाहर छलांग लगाकर निकले। गुलाबी-भूरे निप्पल्स पूरी तरह सख्त और खड़े थे। राज ने एक निप्पल मुंह में ले लिया, जीभ से चारों तरफ घुमाया, दाँतों से हल्का-हल्का काटा, फिर जोर-जोर से चूसने लगा। दूसरा हाथ नीचे गया, पैंटी के अंदर उँगलियाँ डाल दीं। नीता की चूत गर्म, सिकुड़ी हुई, पहले से बहुत गीली थी। राज ने मध्यमा उँगली धीरे-धीरे अंदर डाली, फिर अंदर-बाहर करने लगा, अँगूठे से क्लिटोरिस को रगड़ते हुए। नीता के घुटने लड़खड़ाए। वो राज के बाल पकड़कर चीखी, “उफ्फ… राज… मैं वर्जिन हूँ… बहुत धीरे… प्लीज…”

राज ने पैंटी भी उतार दी। नीता अब पूरी तरह नंगी खड़ी थी। उसकी चूत छोटी-छोटी बालों वाली, गुलाबी, सूजी हुई, पहले से चमक रही थी। राज ने उसे बेड पर लिटा दिया, दोनों पैर कंधों पर रखे। फिर उसकी गर्म, नम जीभ चूत पर रख दी। ऊपर से नीचे चाटा, क्लिटोरिस पर गोल-गोल घुमाया, फिर जीभ अंदर डालकर अंदर-बाहर करने लगा। नीता पूरी तरह पागल हो गई। दोनों हाथों से चादर को जोर-जोर

से पकड़कर खींच रही थी, कमर उठा-उठाकर चूत को राज के मुंह में धकेल रही थी। “आआह्ह्ह… राज… क्या कर रहे हो… उफ्फ… मैं मर जाऊंगी… बस… बस… बहुत अच्छा लग रहा है… आह्ह्ह!!”

५-७ मिनट तक राज ने चूत चाटी। नीता दो-तीन बार छोटी-छोटी झड़ गई, उसका पूरा शरीर हर बार काँप उठा।

अब राज उठा। उसने शेरवानी, पैंट, अंडरवियर सब उतार दिया। जब उसका १० इंच लंबा, मोटा, नसों से भरा, काला-भूरा लंड बाहर निकला – पूरा खड़ा, सिर चमकदार, नीचे दो भारी अंडकोष लटक रहे – नीता की आँखें फैल गईं। “ये… ये अंदर जाएगा? राज… इतना बड़ा… नहीं… मैं नहीं कर पाऊंगी… डर लग रहा है…”

राज ने नीता के पैर कंधों पर रखे, लंड का गर्म सिर चूत के मुंहाने पर रखा। बहुत धीरे दबाया। आधा लंड घुसा तो नीता चीखी, “आह्ह्ह… दर्द… बहुत दर्द हो रहा है…” राज ने एक जोरदार झटका दिया। पूरा १० इंच एकदम अंदर चला गया। नीता की चूत फट गई। खून की पतली धार निकली। नीता जोर से चीखी, “आआआह्ह्ह… मर गई… निकालो… फट गई… बहुत तेज़ दर्द… आह्ह्ह!!”

राज रुका नहीं। धीमी गति से पंपिंग शुरू की। हर धक्के के साथ नीता की चीख निकल रही थी। धीरे-धीरे दर्द के साथ मजा भी आने लगा। राज ने स्पीड बढ़ाई। ठक-ठक-ठक की तेज़ आवाज पूरे कमरे में गूंज रही थी। नीता के स्तन उछल-उछलकर उसके चेहरे पर गिर रहे थे। राज दोनों स्तनों को जोर-जोर से मसल रहा था, निप्पल्स खींच रहा था।

“कैसा लग रहा है जान?”
नीता आँखें बंद किए, आँसू बहाते हुए बोली, “बहुत… बहुत बड़ा है… फट रही हूँ… लेकिन… अंदर तक भर गया है… आह्ह्ह… तेज… तेज करो राज…”

राज ने उसे डॉगी स्टाइल में घुमाया। पीछे से पूरा लंड एक झटके में अंदर। नीता की चूत लाल-सूजी हो गई। १८-२२ मिनट तक लगातार चोदा। नीता तीन-चार बार झड़ गई। आखिर में राज ने जोर-जोर से १०-१२ झटके दिए और नीता की चूत के अंदर ही गर्म-गर्म वीर्य का पूरा लोड भर दिया। नीता का शरीर अंतिम बार काँपा और बिस्तर पर ढेर हो गया। चूत से खून और वीर्य का मिश्रण बह रहा था।

लेकिन राज अभी पूरी तरह थका नहीं था। उसने नीता को पेट के बल लिटाया। उसके दोनों नितंब फैलाए, गांड के छेद को देखा। “अब दूसरा राउंड… तुम्हारी गांड… पूरे ५० मिनट तक… आज इसे पूरी तरह तोड़ दूँगा।”

नीता की आँखें खुलीं। घबराकर, डरकर बोली, “नहीं राज… वहाँ नहीं… वो बहुत दर्द देगा… मैंने कभी नहीं किया… प्लीज… नहीं… मैं सह नहीं पाऊंगी… १० इंच… फट जाएगी… मैं मना करती हूँ… बहुत मना करती हूँ…”

राज ने उसकी कमर मजबूती से पकड़ ली। नीता ने जोर लगाकर उठने की कोशिश की, बेड से उतरकर भागने लगी। “छोड़ो… मैं नहीं करूंगी… छोड़ दो मुझे… प्लीज राज… मैं रो रही हूँ…” वो रोते हुए चीखी और बाथरूम की तरफ भागने लगी।

राज हँसा। दो बड़े कदम में पहुँच गया। उसने नीता की कमर से पकड़कर जैसे कोई खिलौना हो, उठा लिया। नीता पैर मार रही थी, हाथ पीछे करके मारने की कोशिश कर रही थी, रो रही थी। “छोड़ दो… प्लीज… मैं मना कर रही हूँ… बहुत बार मना कर रही हूँ… नहीं… आह्ह्ह…” लेकिन राज ने उसे बेड पर पटक दिया, पेट के बल, दोनों हाथ पीछे की तरफ मोड़कर पकड़ लिए।

“आज तुम भाग नहीं पाओगी… ५० मिनट तक चिल्लाती, रोती, मना करती रहोगी… लेकिन मैं नहीं रुकूँगा।”

उसने अपनी उँगली पर थूक लगाया और नीता की गांड के छोटे, सिकुड़े हुए छेद पर घुमाया, हल्का दबाया। नीता जोर-जोर से रो रही थी, “नहीं… नहीं… बहुत दर्द होगा… राज… मैं तुमसे प्यार करती हूँ… प्लीज मत करो… मैं मना करती हूँ… बहुत मना कर रही हूँ…”

राज ने १० इंच लंड का गर्म, मोटा सिर गांड के छेद पर रख दिया और धीरे से दबाया। पहला इंच घुसते ही नीता की चीख फट पड़ी – “आआआआह्ह्ह्ह्ह!!! फट गई… निकालो… मर गई… बहुत तेज़ दर्द… आह्ह्ह्ह्ह!!” उसकी आवाज इतनी तेज़ और भयानक थी कि कमरे की दीवारें गूंज उठीं। आँखों से आँसू की धार बहने लगी, पूरा शरीर जोर-जोर से काँप रहा था।

राज रुका नहीं। बहुत धीरे-धीरे लेकिन लगातार दबाता गया। ३ इंच… ५ इंच… ७ इंच… और आखिर पूरा १० इंच गांड के अंदर चला गया। नीता की गांड की दीवारें फट रही थीं। खून की पतली लकीर निकल आई। नीता बार-बार चीख रही थी, “आह्ह्ह… आह्ह्ह… बस… बस… निकालो… मैं सह नहीं पा रही… राज… प्लीज… मैं बहुत बार मना कर रही हूँ… छोड़ दो… आआह्ह्ह!!”

राज ने पंपिंग शुरू कर दी। पहले धीमी गति, फिर धीरे-धीरे तेज़। हर झटके के साथ नीता की चीख निकल रही थी – “उफ्फ… आआह्ह्ह… दर्द… बहुत दर्द… फट रही हूँ… मम्मी… बचाओ… आह्ह्ह्ह!!” वो बार-बार हाथ पीछे करके राज को धकेलने की कोशिश कर रही थी, नाखून गाड़ रही थी।

१० मिनट बाद नीता ने फिर भागने की कोशिश की। उसने पूरा जोर लगाकर आगे सरकने की कोशिश की, बेड से नीचे उतरने लगी। राज ने उसके बाल पकड़े, कमर से उठाया, फिर से पेट के बल लिटा दिया और एक और जोरदार झटका मारा। नीता चीखी, “नहीं… फिर से… आआह्ह्ह… मैं मर जाऊंगी… रुक जाओ… प्लीज… मैं रो रही हूँ… देखो आँसू… बहुत आँसू आ रहे हैं…”

राज की स्पीड बढ़ती गई। अब हर सेकंड एक तेज़ झटका। नीता की गांड लाल, सूजी, पूरी तरह फटी हुई। २० मिनट हो चुके थे। नीता का गला बैठने लगा था। चीख अब भारी और काँपती हुई हो गई थी – “हां… हां… आह्ह्ह… नहीं… बस… मैं… मैं… फट गई… राज… तुम… बहुत क्रूर हो… आह्ह्ह्ह!!”

३० मिनट बाद नीता लगातार रो रही थी, सिसक रही थी। आवाज काँप रही थी, “प्लीज… ५० मिनट… मैं नहीं सह सकती… मुझे छोड़ दो… मैं तुम्हारी हूँ… लेकिन ये… ये बहुत… आआह्ह्ह…!” वो बार-बार मना कर रही थी, “मैं मना करती हूँ… बहुत बार… रुक जाओ… प्लीज… मैं वादा करती हूँ… कभी नहीं भागूंगी… बस रुक जाओ… आह्ह्ह!!”

राज ने पोजीशन बदला। उसे कुत्ते की तरह घुटनों पर खड़ा किया, दोनों हाथ पीछे पकड़े। अब और तेज़, और गहरा। ठप-ठप-ठप-ठप की तेज़ आवाज पूरे सूट में गूंज रही थी। नीता का सिर नीचे लटका हुआ, आँसू बिस्तर पर टपक रहे थे। उसकी चीख अब सिसकियों में बदल गई थी – “सिस… सिस… आह्ह्ह… मर रही हूँ… गांड फट गई… बहुत… बहुत दर्द… राज… मैं… सह नहीं पा रही…”

४० मिनट बाद नीता की हालत पूरी तरह खराब हो गई। आवाज लगभग गायब, सिर्फ हल्की-हल्की सिसकियाँ और “नहीं… नहीं…” निकल रहा था। पूरा शरीर पसीने से तर-बतर, गांड से खून और राज का थूक बह रहा था। वो बार-बार बेहोश होने जैसी हो रही थी, आँखें ऊपर चढ़ रही थीं, लेकिन राज हर बार उसके गाल थपथपाकर जगा देता और फिर और तेज़ पेलता।

आखिरी १० मिनट – राज ने सबसे तेज़ स्पीड पकड़ ली। नीता सिर्फ काँप रही थी, शरीर थर-थर कर रहा था। कोई बड़ी चीख नहीं, सिर्फ हल्की साँसें, रोना और हल्की सिसकियाँ। आखिर में राज ने १०-१२ जोरदार, तेज़ झटके दिए और नीता की गांड के सबसे अंदर ही अपना पूरा गर्म, मोटा वीर्य भर दिया।

नीता बिस्तर पर पड़ी थी – पूरी तरह नंगी, गांड बुरी तरह सूजी, लाल, फटी हुई, खून और वीर्य का मिश्रण लगातार बह रहा था। जाँघें जोर-जोर से काँप रही थीं। आँखें सूजी हुई, आँसू सूख चुके थे लेकिन चेहरा अभी भी रोने वाला था। साँसें फूल रही थीं, बोलने की ताकत भी नहीं बची थी। सिर्फ हल्की-हल्की सिसकियाँ और काँपन निकल रही थी। उसकी हालत इतनी बुरी थी कि वो उठने की कोशिश भी नहीं कर पा रही थी, बस पड़ी रह गई थी।

राज उसके पास लेट गया, उसके बालों में हाथ फेरते हुए, पसीने से तर चेहरे को चूमते हुए बोला, “ये सिर्फ दूसरा राउंड था जान… अभी तो पूरी रात बाकी है…”

मैं वहाँ खड़ा था… नीता की वो बेहाल, रोती-चिल्लाती, भागने की कोशिश करती, बार-बार मना करती हुई हालत ५० मिनट तक बहुत करीब से देख रहा था।

लगभग १० मिनट बीत चुके थे। नीता बेड पर पेट के बल पड़ी हुई थी, साँसें अभी भी फूल रही थीं। उसकी आँखें आधी बंद, चेहरा आँसुओं से नम, बाल बिखरे हुए, पूरा शरीर पसीने से चिपचिपा हुआ। गांड बुरी तरह सूजी और लाल हो गई थी, हल्का-हल्का खून अभी भी रिस रहा था। वो हिलने की कोशिश भी नहीं कर पा रही थी। सिर्फ हल्की-हल्की सिसकियाँ निकल रही थीं – “सिस… सिस… राज… बहुत दर्द… मैं उठ भी नहीं पा रही…”

राज उसके बगल में लेटा था। उसका १० इंच का लंड अभी भी आधा खड़ा था, नीता के वीर्य और खून से चिपका हुआ। उसने नीता के बालों में हाथ फेरा, उसके गाल को चूम लिया और धीरे से बोला, “आराम कर लिया? अब तीसरा राउंड शुरू करते हैं जान। इस बार मैं तुम्हें और भी गहराई तक ले जाना चाहता हूँ।”

नीता ने डरते हुए आँखें खोलीं। उसकी आवाज बहुत कमजोर और काँपती हुई थी, “नहीं राज… प्लीज… अब नहीं… मेरी हालत बहुत खराब है… गांड फट गई है… चूत भी जल रही है… मैं कुछ देर आराम करना चाहती हूँ… बहुत मना कर रही हूँ… प्लीज…”

लेकिन राज ने उसकी बात नहीं सुनी। उसने नीता को पलटकर पीठ के बल लिटा दिया। नीता के दोनों पैर फैलाए, घुटनों को मोड़कर कंधों की तरफ दबा दिया। उसकी चूत और गांड दोनों एक साथ सामने थीं, दोनों ही बुरी तरह सूजी हुईं। राज ने बेडसाइड टेबल से लुब्रिकेंट की बोतल उठाई और दोनों हाथों पर भर-भरकर लगाया।

“इस बार दोनों जगह एक साथ खेलेंगे,” उसने कहा और अपना लंड फिर से पूरा खड़ा कर लिया।

नीता घबराकर हाथ मारने लगी, “नहीं… राज… मैं सह नहीं पाऊंगी… दो जगह… इतना बड़ा… प्लीज… मैं रो रही हूँ… देखो… आँखों में आँसू हैं… बहुत बार मना कर रही हूँ… रुक जाओ…”

राज ने पहले अपनी दो उँगलियाँ नीता की चूत में डालीं, फिर तीसरी गांड में। नीता जोर से सिसकारी भरी, “आह्ह्ह… जल रही है… दर्द हो रहा है…” राज ने उँगलियाँ अंदर-बाहर करने लगा, लुब्रिकेंट अच्छे से फैलाया। नीता का शरीर बार-बार काँप रहा था।

कुछ देर उँगलियों से खेलने के बाद राज ने अपना मोटा लंड नीता की चूत पर रखा। एक जोरदार झटके से पूरा १० इंच चूत में उतार दिया। नीता की पीठ कमान की तरह झुक गई, “आआआह्ह्ह!!! फिर से… बहुत सूज गई है… फट रही है… निकालो… आह्ह्ह!!”

राज ने तेज़-तेज़ पंपिंग शुरू कर दी। ठक-ठक-ठक-ठक की तेज़ आवाज फिर से कमरे में गूंजने लगी। नीता के स्तन जोर-जोर से उछल रहे थे। राज एक हाथ से स्तनों को मसल रहा था, दूसरे हाथ से उसके क्लिटोरिस को रगड़ रहा था। हर धक्के पर नीता चीख रही थी – “उफ्फ… राज… धीरे… बहुत तेज़… आह्ह्ह… मैं मर जाऊंगी… चूत जल रही है…”

१० मिनट तक चूत चोदने के बाद राज ने लंड निकाला। अब उसने नीता की गांड पर सिर रखा और धीरे से दबाया। गांड अभी भी बहुत टाइट और सूजी हुई थी। पूरा लंड अंदर घुसते ही नीता फिर से चीख उठी, “आआह्ह्ह्ह… गांड… फिर से… बहुत दर्द… राज… प्लीज… मैं मना करती हूँ… बहुत मना कर रही हूँ… रुक जाओ…”

राज ने दोनों जगह बदल-बदलकर चोदना शुरू किया – २-२ मिनट चूत, फिर २-२ मिनट गांड। नीता का रोना और चीखना लगातार जारी था। वो बार-बार हाथ से राज की छाती धकेलने की कोशिश कर रही थी, “छोड़ दो… अब बस करो… मैं उठना चाहती हूँ… राज… प्लीज… मेरी हालत देखो… मैं काँप रही हूँ…”

राज ने नीता को उठाकर अपनी गोद में बैठा लिया – cowgirl पोजीशन लेकिन वो खुद नीचे से जोर-जोर से ऊपर धक्के दे रहा था। नीता की कमर पकड़कर उसे ऊपर-नीचे कर रहा था। नीता के स्तन उसके चेहरे पर बार-बार गिर रहे थे। वो नीता के निप्पल्स को चूस रहा था, काट रहा था। नीता का सिर पीछे झुक गया था, मुँह खुला, आँखें आधी बंद, लगातार चीख और सिसकारियाँ निकल रही थीं – “आह्ह्ह… आह्ह्ह… बहुत गहरा जा रहा है… दोनों जगह जल रही हैं… राज… मैं सह नहीं पा रही… रुक जाओ… प्लीज… मैं तुमसे विनती कर रही हूँ…”

इस पोजीशन में १५ मिनट तक चोदा गया। नीता कई बार झड़ गई, लेकिन हर बार उसकी चीख और दर्द बढ़ता ही गया।

आखिर में राज ने नीता को फिर पेट के बल लिटाया, दोनों हाथ पीछे पकड़े और सिर्फ गांड में पूरा जोर लगा दिया। अब सबसे तेज़ स्पीड। ठप-ठप-ठप-ठप… कमरे में सिर्फ ये आवाज और नीता की काँपती चीखें गूंज रही थीं।

“आआह्ह्ह… बस… अब सच में नहीं… गांड फट जाएगी… राज… मैं मर रही हूँ… आह्ह्ह… बहुत बार मना किया… फिर भी नहीं रुके… आह्ह्ह!!”

नीता का पूरा शरीर पसीने, आँसुओं और लुब्रिकेंट से तर था। उसकी आवाज अब लगभग फट चुकी थी, सिर्फ सिसकियाँ और हल्की चीखें निकल रही थीं। २५-३० मिनट तक इस राउंड में लगातार चोदने के बाद राज ने आखिरी बार बहुत तेज़ १५-२० झटके दिए और पहले नीता की चूत में, फिर गांड में अपना वीर्य भर दिया।

नीता अंत में पूरी तरह बेहाल होकर बिस्तर पर गिर पड़ी। उसकी चूत और गांड दोनों बुरी तरह सूजी, लाल, फटी हुई, वीर्य और खून से भरी हुई। जाँघें अनियंत्रित रूप से काँप रही थीं। आँखें बंद, मुँह थोड़ा खुला, साँसें बहुत तेज़ और छोटी-छोटी। बोलने की ताकत बिल्कुल खत्म। सिर्फ हल्की-हल्की सिसकियाँ और शरीर का थरथराना बचा था।

राज उसके पास लेट गया, उसे चूमते हुए, उसके कान में फुसफुसाते हुए बोला, “अब चौथा राउंड शुरू करने से पहले थोड़ा पानी पिला दूँ तुम्हें… रात अभी बहुत लंबी है।”

नीता की वो अंतिम हालत, उसकी थकी हुई सिसकियाँ, काँपता शरीर… सब कुछ।

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