रवि और शिल्पा की हनीमून की कहानी 2

रवि ने शिल्पा के स्तनों को चूसते-चूसते आखिरकार रुक गया। शिल्पा की साँसें पूरी तरह फूल चुकी थीं। उसके छोटे-छोटे स्तन लाल हो गए थे, निप्पल्स सूजकर खड़े थे, पूरा शरीर पसीने से तर-बतर। रवि ने उसे प्यार से चूम लिया और धीरे से उसके कान में फुसफुसाया, “अब असली शुरुआत होती है जान… मैं बहुत धीरे करूँगा… लेकिन तुम्हें सहना पड़ेगा।”

शिल्पा ने डरते हुए सिर हिलाया। उसकी आँखें बड़ी-बड़ी हो गई थीं। रवि ने अपनी विशाल बाँहों से शिल्पा को उठाकर बेड के बीच में लिटा दिया। उसने शिल्पा के दोनों पैरों को फैलाया, घुटनों को मोड़कर थोड़ा ऊपर किया। शिल्पा की नन्ही, गुलाबी, बिना बाल वाली चूत पूरी तरह सामने आ गई – बहुत छोटी, बहुत टाइट, अभी तक पूरी तरह अनछुई। रवि ने बेडसाइड टेबल से लुब्रिकेंट की बोतल उठाई, अपनी हथेली पर भर-भरकर लगाया और अपने १३ इंच लंबे, ४.५ इंच मोटे लंड पर अच्छे से मला। लंड पहले से ही पूरा खड़ा था, नसें उभरी हुईं, सिर चमक रहा था – शिल्पा के मुकाबले लगभग उसकी कमर जितना मोटा।

रवि घुटनों के बल बैठ गया। उसने लंड का गर्म, भारी सिर शिल्पा की चूत के मुंहाने पर रख दिया। शिल्पा की साँसें रुक गईं। “रवि… बहुत बड़ा है… मुझे डर लग रहा है… प्लीज बहुत धीरे…” वो काँपते हुए बोली।

रवि ने हल्का-सा धक्का दिया। सिर्फ २ इंच अंदर गया।
शिल्पा की आँखें एकदम फैल गईं। उसका पूरा नन्हा शरीर कमान की तरह झुक गया। “आआआह्ह्ह्ह!!! दर्द… बहुत दर्द… निकालो… फट गई… आह्ह्ह्ह!!” वो जोर-जोर से चीखी। आँखों से आँसू की धार बह निकली। उसके छोटे हाथ रवि की चौड़ी छाती पर धकेलने लगे, नाखून गड़ाने लगे। “रवि… बस… बस… मैं सह नहीं पा रही… बहुत बड़ा… आह्ह्ह्ह!!”

रवि रुका नहीं। उसने थोड़ा और आगे धकेला। अब ३ इंच अंदर। शिल्पा की चीख और तेज़ हो गई। “आआह्ह्ह… मर गई… जल रही है… निकालो… प्लीज… मैं रो रही हूँ… देखो… आँसू…” उसकी आवाज़ काँप रही थी, चेहरे पर पसीना और आँसू मिल गए थे।

रवि ने एक और हल्का धक्का दिया। चौथा इंच भी अंदर चला गया।
अब शिल्पा की चूत के मुंहाने से खून की पतली-सी लाल धार निकलने लगी। वो खून रवि के लंड पर चिपक गया और धीरे-धीरे बेडशीट पर टपकने लगा। शिल्पा का पूरा शरीर थर-थर काँप रहा था। उसकी छोटी-सी कमर ऊपर-नीचे हो रही थी, जाँघें अनियंत्रित रूप से काँप रही थीं। “आआआह्ह्ह्ह… खून… खून निकल रहा है… रवि… मैं मर जाऊंगी… बहुत दर्द… फट गई मेरी चूत… आह्ह्ह्ह!!” वो लगातार चीख रही थी, रो रही थी, हाथ-पैर मार रही थी।

रवि ने अब ४ इंच तक ही लंड अंदर रख लिया। उससे ज्यादा नहीं धकेला। लेकिन अब उसने धीरे-धीरे अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया – सिर्फ ४ इंच की गहराई में, लेकिन बहुत स्टेडी और लगातार। हर धक्के पर शिल्पा की चीख फटती। “उफ्फ… आह्ह्ह… दर्द… बहुत दर्द… रुक जाओ… प्लीज… मैं मना कर रही हूँ… बहुत मना कर रही हूँ…” वो बार-बार रोते हुए चीखती, “मम्मी… बचाओ… रवि बहुत बड़ा है… मैं छोटी हूँ… फट रही हूँ… आह्ह्ह्ह!!”

रवि ने २५ मिनट तक लगातार यही किया। सिर्फ ४ इंच अंदर रखकर, धीमी लेकिन मजबूत गति से बार-बार ठक-ठक-ठक की आवाज़ निकालता रहा। शिल्पा की हालत पूरी तरह खराब हो चुकी थी। उसके आँसू रुक ही नहीं रहे थे। वो बार-बार हाथ से रवि को धकेलने की कोशिश करती, “निकालो… प्लीज… २५ मिनट हो गए… मैं सह नहीं पा रही… चूत जल रही है… खून बह रहा है… आह्ह्ह… रवि… तुम बहुत क्रूर हो… आह्ह्ह्ह!!” कभी-कभी वो रवि की बाँहों में मुँह छिपाकर सिसकती, “बहुत दर्द… मैं मर रही हूँ… रुक जाओ… प्लीज… मैं तुमसे प्यार करती हूँ… लेकिन ये… ये बहुत… आआह्ह्ह!!”

रवि का विशाल शरीर शिल्पा के ऊपर पूरी तरह छाया हुआ था। उसके १०१ किलो वजन के कारण शिल्पा का ४२ किलो का नन्हा शरीर बेड में धंस गया था। रवि हर धक्के पर हल्का-हल्का पसीना छोड़ रहा था। शिल्पा की चूत अब बुरी तरह सूज गई थी, लाल हो गई थी, खून और लुब्रिकेंट का मिश्रण लगातार बह रहा था। उसकी सिसकारियाँ अब चीखों में बदल चुकी थीं। “आह्ह्ह… आह्ह्ह… बस… अब सच में नहीं… २५ मिनट… मैं काँप रही हूँ… रवि… मेरी चूत फट गई… आह्ह्ह्ह!!”

२५ मिनट पूरे होते-होते शिल्पा की आवाज़ लगभग बैठ गई थी। वो सिर्फ हल्की-हल्की सिसकियाँ भर रही थी – “सिस… सिस… नहीं… नहीं… बहुत… बहुत दर्द…” आँखें आधी बंद, चेहरा आँसुओं से नम, छोटे-छोटे हाथ अब रवि की छाती पर बेजान पड़े थे। जाँघें अभी भी काँप रही थीं।

आखिर में रवि ने तेज़ी से ८-१० झटके दिए – अभी भी सिर्फ ४ इंच की गहराई में – और फिर शिल्पा की चूत के अंदर ही अपना गर्म, मोटा, भारी वीर्य का पूरा लोड भर दिया। वीर्य इतना ज्यादा था कि शिल्पा की छोटी चूत से बाहर निकलकर खून के साथ मिलकर बेड पर बहने लगा।

शिल्पा अंत में पूरी तरह बेहाल होकर बिस्तर पर ढेर हो गई। उसकी चूत बुरी तरह सूजी, लाल, फटी हुई, खून और वीर्य से सनी हुई। साँसें बहुत तेज़ और छोटी-छोटी। आँखें बंद, मुँह थोड़ा खुला, सिर्फ हल्की-हल्की सिसकियाँ निकल रही थीं। वो बोल भी नहीं पा रही थी। पूरा नन्हा शरीर थर-थर काँप रहा था।

रवि ने धीरे से लंड निकाला। खून और वीर्य की धार शिल्पा की जाँघों पर बह गई। उसने शिल्पा को अपनी गोद में उठा लिया, उसके बालों में हाथ फेरते हुए, उसके आँसू पोंछते हुए बोला, “माफ करना जान… मैं बहुत धीरे कर रहा था… लेकिन तुम बहुत छोटी हो… आराम करो… हनीमून अभी बहुत लंबा है…”

रवि ने धीरे-धीरे अपना १३ इंच का भारी लंड शिल्पा की चूत से बाहर निकाला। जैसे ही लंड निकला, शिल्पा की छोटी-सी चूत से खून और वीर्य का गाढ़ा मिश्रण बाहर बहने लगा। वो सफेद-लाल धार उसकी जाँघों पर, बेडशीट पर टपक-टपक कर गिर रही थी। शिल्पा की चूत बुरी तरह सूज गई थी – लाल, फटी हुई, बहुत छोटी-सी मुंहाने पर अब भी हल्का-हल्का खून रिस रहा था। शिल्पा की साँसें बहुत तेज़ और छोटी-छोटी थीं, आँखें आधी बंद, चेहरा आँसुओं से नम, छोटे-छोटे हाथ बेजान पड़े हुए थे।

रवि तुरंत बेड से उठा। उसने बाथरूम से गर्म पानी का बेसिन, साफ सफेद तौलिया और कुछ टिश्यू पेपर ले आया। वो बहुत धीरे-धीरे शिल्पा की जाँघों के बीच बैठ गया। पहले उसने गर्म पानी में तौलिया भिगोया और बहुत नरम हाथ से शिल्पा की चूत को साफ करना शुरू किया। हर बार तौलिया छूते ही शिल्पा हल्के से काँप जाती। “आह्ह्ह… जल रही है… बहुत जल रही है…” वो कमजोर आवाज़ में सिसकी। रवि ने बिल्कुल प्यार से, बिना किसी जोर के, चूत के बाहर वाले हिस्से को, जाँघों को, और हल्का-हल्का अंदरूनी हिस्से को भी साफ किया। खून और वीर्य का मिश्रण तौलिए पर लगता जा रहा था। रवि बार-बार तौलिया धोकर नया पानी लेता और फिर से साफ करता।

साफ करने के बाद रवि ने शिल्पा को अपनी गोद में उठा लिया। उसकी विशाल बाँहें शिल्पा की पूरी कमर और पीठ को घेर रही थीं। वो उसे छाती से लगा कर बैठ गया और उसके बालों में हाथ फेरने लगा। “शिल्पा… जान… माफ कर दो… मैं जानता हूँ बहुत दर्द हुआ… लेकिन मैं बहुत धीरे कर रहा था…” रवि ने उसके माथे पर, गालों पर, आँसू भरे आँखों पर बार-बार किस किया। उसने शिल्पा के छोटे-छोटे हाथ अपने बड़े हाथों में ले लिए और उन्हें चूमा। “तुम बहुत छोटी हो… मैं बहुत बड़ा हूँ… लेकिन हमें ये सब सीखना पड़ेगा… साथ-साथ…”

शिल्पा ने आँखें खोलीं। उसकी आवाज़ अभी भी काँप रही थी, आँसू फिर से बहने लगे। “रवि… तुम मेरे साथ गलत कर रहे हो… इतना बड़ा… इतना दर्द… मैं छोटी हूँ… तुम्हें पता है ना… मैं कभी नहीं किया… तुम मुझे मार रहे हो… आह्ह्ह… मेरी चूत फट गई… खून निकला… तुम मुझे प्यार करते हो तो ऐसा क्यों कर रहे हो… प्लीज… मैं बहुत डर गई हूँ…” वो सिसकते हुए बोली, “मुझे लगता है तुम मुझे सह नहीं पा रहे… मैं तुम्हें खुश नहीं कर पा रही… लेकिन ये… ये बहुत ज्यादा हो गया… मैं मर गई थी… रवि… प्लीज… अब मत करो…”

रवि ने उसे और कस कर सीने से लगा लिया। उसके विशाल हाथ शिल्पा की पीठ पर धीरे-धीरे फेर रहे थे। “जान… मैं जानता हूँ तुम्हें बहुत दर्द हुआ… लेकिन घर जाकर हम क्या करेंगे? वहाँ जोड़ परिवार है… दीवारें पतली हैं… अगर तुम चीखी तो पूरा घर सुन लेगा… लोग पूछेंगे… हम कभी आराम से नहीं रह पाएंगे… इसलिए हमें यहीं हनीमून पर तुम्हें आदत डालनी पड़ेगी… ४-५ दिन तक… धीरे-धीरे… ताकि बाद में घर जाकर सिर्फ मजा ही मजा हो… कोई दर्द नहीं… कोई चीख नहीं…”

शिल्पा ने कुछ नहीं कहा। उसकी साँसें अभी भी तेज़ थीं, लेकिन वो चुप रही। सच तो ये था कि उसे थोड़ा-थोड़ा मजा भी आया था – वो गहरा भराव, वो गर्मी… लेकिन डर और दर्द बहुत ज्यादा था। इसलिए वो चुप रही, सिर्फ रवि की छाती में मुँह छिपाए रही।

रवि ने थोड़ी देर इंतज़ार किया। फिर धीरे से बोला, “तुझे ४-५ दिन ये सहना पड़ेगा शिल्पा… हर दिन… थोड़ा-थोड़ा… लेकिन मैं वादा करता हूँ… मैं बहुत प्यार से करूँगा… तुम्हें आदत पड़ जाएगी… फिर घर जाकर हम बिना किसी डर के… सिर्फ प्यार करेंगे… तुम चीखोगी नहीं… सिर्फ आह्ह्ह… आह्ह्ह… करोगी…” वो मुस्कुराते हुए बोला, “अगर हम यहीं अडाप्ट नहीं करेंगे तो घर जाकर तुम चीखोगी… पूरा घर जान जाएगा… लेकिन आदत पड़ने के बाद घर पर सिर्फ मजा… कोई दर्द नहीं… कोई खून नहीं… बस तुम और मैं… रात भर…”

शिल्पा फिर भी कुछ नहीं बोली। वो बस रवि की बाँहों में पड़ी रही, उसकी साँसें धीरे-धीरे सामान्य होती जा रही थीं।

रवि ने उसे और प्यार से चूम लिया। “अच्छा… अब उदास मत हो… मैं तुम्हें शॉपिंग पर ले चलता हूँ… पेरिस में… तुम्हें जो चाहिए वो खरीद दूँगा… बोलो… क्या चाहिए तुम्हें?”

शिल्पा ने हल्के से सिर उठाया। उसकी आवाज़ अभी भी कमजोर थी, लेकिन शर्म से भरी हुई। “रवि… मुझे… एक रिंग और नेकलेस चाहिए… बहुत सुंदर… डायमंड वाली… जो तुम्हारी पसंद की हो…”

रवि मुस्कुराया। “ठीक है… तुम मुझे ये सब दिलवा दो… जो मैं चाहता हूँ… वो ४-५ दिन की आदत… फिर मैं तुम्हें रिंग और नेकलेस दोनों दिलवा दूँगा… और सुनो… अगर बाद में तुम मना भी करो… तो भी तुम मुझे मत रोकना… मैं रुकूँगा नहीं… समझी?” उसने शिल्पा की ठोड़ी थामकर उसके होंठों पर हल्का-सा किस किया।

शिल्पा ने सिर्फ सिर हिलाया। कुछ नहीं बोली।

रवि ने तुरंत फोन उठाया। रिसॉर्ट के कंजियर को कॉल किया। “हैलो… मैं सूट ७०१ से बोल रहा हूँ… मुझे एक डायमंड रिंग और एक डायमंड नेकलेस चाहिए… बेस्ट क्वालिटी… रोमांटिक स्टाइल… आज शाम तक डिलीवर कर दो… और हाँ, डिनर भी रूम में ही… कैंडल लाइट… स्पेशल।” उसने ऑर्डर कर दिया।

फिर रवि ने शिल्पा को और कस कर गले लगा लिया। “अब थोड़ी देर आराम करो… शाम को डिनर के बाद… हम दो राउंड करेंगे… तैयार रहना जान…”

दोनों ने थोड़ी देर आराम किया। रवि शिल्पा को अपनी गोद में लिए हुए बेड पर लेटा रहा, उसके बालों में उँगलियाँ फेरता रहा, उसके काँपते होंठों पर बार-बार हल्के-हल्के किस करता रहा। शिल्पा की साँसें धीरे-धीरे सामान्य होती गईं। उसका छोटा-सा शरीर रवि की चौड़ी छाती से चिपका हुआ था। लगभग ४० मिनट बाद शिल्पा थकान से गहरी नींद में सो गई। उसकी आँखें बंद, छोटे-छोटे हाथ रवि की बाँह पर पड़े हुए, साँसें धीमी और नियमित।

रवि ने धीरे से शिल्पा को बेड पर लिटा दिया। वो उठा, बालकनी में जाकर एक सिगरेट सुलगाई, फिर रिसॉर्ट के कंजियर को फिर से कॉल किया। “हैलो… सूट ७०१… वो रिंग और नेकलेस डिलीवर हो गए? और हाँ, कंडोम भी चाहिए… extra thin, extra large size… जल्दी भेज दो।” कुछ देर बाद दरवाजे पर हल्की नॉक हुई। रवि ने डोर खोली। बाहर स्टाफ ने एक सुंदर गिफ्ट बॉक्स (रिंग और नेकलेस) और एक छोटा पैकेट (कंडोम) थमा दिया। रवि ने टिप दी और दरवाजा बंद कर दिया।

उसने शिल्पा को सोते हुए देखा। फिर खुद बाथरूम में गया, फ्रेश होकर आया – बालों में पानी की बूँदें, बॉडी पर हल्का परफ्यूम। उसने शिल्पा को धीरे से जगाया। “जान… उठो… डिनर का टाइम हो गया है।” शिल्पा ने आँखें मलीं, अभी भी थोड़ी काँप रही थी। रवि ने उसे उठाकर बाथरूम ले गया। दोनों ने फ्रेश होकर कपड़े बदले।

शिल्पा ने सेक्स के लिए खास कपड़े पहने – एक बहुत हल्का, ट्रांसपेरेंट सफेद नाइट गाउन, जिसके नीचे सिर्फ लाल लेस ब्रा और पैंटी थी। गाउन का कपड़ा इतना पतला था कि उसके छोटे स्तन और निप्पल्स की आउटलाइन साफ दिख रही थी। रवि ने ब्लैक ट्रैक पैंट और व्हाइट टीशर्ट पहनी, लेकिन टीशर्ट के नीचे उसका विशाल शरीर फट रहा था।

टेबल पर डिनर तैयार था। रिसॉर्ट स्टाफ ने पूरा सेटअप कर दिया था – कैंडल लाइट, वाइन ग्लास, फ्रेंच डिशेज, गुलाब की पंखुड़ियाँ बिछी हुईं, सॉफ्ट म्यूजिक बज रहा था। दोनों टेबल पर बैठे। रवि ने बॉक्स खोला। पहले डायमंड रिंग निकाली – छोटी-सी, लेकिन चमकदार, शिल्पा की उँगली में फिट हो गई। फिर नेकलेस – पतला चेन, बीच में एक छोटा डायमंड पेंडेंट जो शिल्पा की गर्दन पर चमक रहा था। शिल्पा शर्म से मुस्कुराई।

रवि ने शिल्पा का हाथ थामा, “ये तुम्हारे लिए… लेकिन याद रखना… तुमने वादा किया है।” फिर उसने शिल्पा को खींचकर अपने पास बैठाया और गहरे किस किया – ३-४ मिनट तक, जीभें उलझती रहीं, साँसें मिलती रहीं। डिनर के दौरान दोनों ने खाना खाया, लेकिन रवि की आँखें बार-बार शिल्पा के स्तनों पर जा रही थीं।

डिनर खत्म होते ही रवि उठा। उसने शिल्पा को खड़ा किया। पहले गाउन के पट्टे खोले, गाउन फर्श पर गिर गया। फिर ब्रा का हुक खोला – शिल्पा के छोटे-छोटे, गुलाबी-भूरे निप्पल्स वाले स्तन बाहर आ गए। रवि घुटनों पर बैठ गया। उसने दोनों स्तनों को हाथों में थामा और चाटना शुरू किया। जीभ से निप्पल्स को गोल-गोल घुमाया, फिर मुंह में लेकर जोर-जोर से चूसा। २० मिनट तक लगातार – कभी एक स्तन, कभी दूसरा, कभी दोनों को एक साथ मुंह में भरकर चूसता रहा। शिल्पा की साँसें तेज़ हो गईं, “आह्ह्ह… रवि… धीरे… लेकिन मत छोड़ो… आह्ह्ह!!” उसके निप्पल्स लाल और सूज गए थे।

रवि ने कंडोम का पैकेट खोला। “देखो… इसे कैसे पहनते हैं।” उसने शिल्पा को सिखाया। शिल्पा ने काँपते हाथों से कंडोम निकाला, रवि के १३ इंच लंबे, ४.५ इंच मोटे लंड पर लगाने की कोशिश की। रवि ने उसे गाइड किया। आखिरकार शिल्पा ने कंडोम पूरा चढ़ा दिया। लंड अब कंडोम में चमक रहा था।

रवि ने शिल्पा को उठाकर बेड पर लिटा दिया। उसके दोनों पैर फैलाए, घुटनों को मोड़कर कंधों की तरफ दबाया। शिल्पा की छोटी-सी चूत फिर से सामने थी – अभी भी थोड़ी सूजी हुई, लेकिन साफ। रवि घुटनों के बल बैठ गया।

पहला झटका – रवि ने पूरा जोर लगाया। सिर्फ एक ही झटके में ४ इंच अंदर चला गया।
शिल्पा की आँखें एकदम फैल गईं। उसका पूरा नन्हा शरीर बेड पर उछल पड़ा। “आआआआह्ह्ह्ह्ह!!! निकालो… फट गई… बहुत दर्द… आह्ह्ह्ह!!” वो जोर-जोर से चीखी। आँखों से आँसू की धार बहने लगी। “रवि… प्लीज… बहुत डर लग रहा है… इतना बड़ा… मैं मर जाऊंगी… आह्ह्ह्ह!!”

रवि रुका नहीं। दूसरे झटके में और २ इंच अंदर – अब कुल ६ इंच।
शिल्पा पागल हो गई। “आआआह्ह्ह्ह… छः इंच… फट रही हूँ… खून… फिर खून निकलेगा… रवि… तुम रुक क्यों नहीं रहे… मैं बहुत डर गई हूँ… प्लीज… मैं रो रही हूँ… देखो आँसू… बहुत आँसू… आह्ह्ह्ह!!” वो बार-बार हाथ से रवि की छाती धकेल रही थी, पैर मार रही थी, सिर इधर-उधर हिला रही थी। “मुझे मत मारो… मैं छोटी हूँ… तुम बहुत बड़े हो… प्लीज… मैं मना कर रही हूँ… बहुत मना कर रही हूँ… आआह्ह्ह्ह!!”

लेकिन रवि ने रुकने का नाम नहीं लिया। उसने ६ इंच की गहराई पर ही तेज़-तेज़ पंपिंग शुरू कर दी। ठक-ठक-ठक-ठक… हर धक्के पर शिल्पा की चीख फटती। “उफ्फ… आह्ह्ह… दर्द… बहुत दर्द… रवि… तुम्हें पता है ना मैं डर गई हूँ… फिर भी… आह्ह्ह्ह… मैं मर रही हूँ… निकालो… प्लीज… मैं रो-रोकर मर जाऊंगी… आआह्ह्ह!!” उसकी चीखें अब सिसकियों में बदल रही थीं, लेकिन रवि की स्पीड बढ़ती जा रही थी। शिल्पा बार-बार “मम्मी… बचाओ… रवि बहुत क्रूर है… आह्ह्ह्ह!!” चीख रही थी।

३० मिनट तक लगातार। रवि ने कभी स्पीड कम नहीं की। शिल्पा की हालत पूरी तरह खराब हो चुकी थी। उसकी आवाज़ बैठ गई थी, सिर्फ हल्की-हल्की सिसकियाँ और “नहीं… नहीं… बस…” निकल रहा था। आँखें सूजी हुई, चेहरा आँसुओं से नम, छोटा-सा शरीर पसीने से तर, जाँघें अनियंत्रित काँप रही थीं। चूत बुरी तरह सूज गई थी, कंडोम पर खून का हल्का निशान दिख रहा था।

शिल्पा अब बोल भी नहीं पा रही थी। सिर्फ थर-थर काँप रही थी, आँखें आधी बंद, मुँह थोड़ा खुला।

रवि ने आखिरी १०-१२ तेज़ झटके दिए और शिल्पा की चूत के अंदर ही (कंडोम में) अपना पूरा गर्म वीर्य भर दिया।

शिल्पा बिस्तर पर पूरी तरह ढेर हो गई – नंगी, काँपती हुई, चूत सूजी और लाल, साँसें फूल रही थीं, आँसू अभी भी बह रहे थे। उसकी हालत इतनी बुरी थी कि वो हिल भी नहीं पा रही थी।

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