Category: Indian Sex Stories

  • तीन बहुओं का घोड़ा 12

    अध्याय 12: तीनों बहुओं के साथ रूस हनीमून (विस्तृत)

    सुहागरात के 12 दिन बाद विक्रम ने फैसला किया कि अब तीनों बहुओं को साथ लेकर हनीमून मनाएगा। मामा-मामी को भी मना लिया। destination चुना — Russia (Saint Petersburg + Moscow)। प्राइवेट जेट से उड़ान भरी।

    एयरपोर्ट और फ्लाइट

    प्रिया, नेहा और अदिति तीनों ने खूबसूरत व्हाइट ड्रेस पहनी थी। अदिति अभी भी थोड़ी शरमाती हुई थी। जेट में विक्रम ने तीनों को बिजनेस क्लास सीट्स पर बिठाया। उड़ान के 2 घंटे बाद लाइट्स डिम कर दी गईं।

    विक्रम ने अदिति की ड्रेस ऊपर खींची और उंगली उसकी चुत में डाल दी। 
    “नहीं… विक्रम जी… यहां मत… लोग देख लेंगे… आह्ह… उंगली मत घुमाओ… अभी भी सूजन है…” अदिति फुसफुसाई। 

    प्रिया ने विक्रम के लंड को पैंट के ऊपर से सहलाया, “पति जी… रूस पहुंचकर पूरा एंजॉय करेंगे… अभी थोड़ा रुकिए…” 

    सेंट पीटर्सबर्ग पहुंचना

    विक्रम ने Neva River के किनारे एक लग्जरी प्राइवेट विला बुक किया था — 5 बेडरूम, प्राइवेट सौना, इनडोर पूल, और पूरा फ्लोर सिर्फ उनके लिए। बाहर बर्फ की हल्की परत, अंदर गर्मी।

    पहली रात विला में। 

    तीनों को विक्रम ने एक साथ नंगी कर दिया। कमरे में फायरप्लेस जल रहा था, रोशनी नरम। 

    विक्रम ने सबसे पहले अदिति को उठाकर बेड पर लिटाया। 
    “आज मैं तुम तीनों को रूस की ठंड में गर्म करूंगा…” 

    अदिति कांपते हुए बोली, “विक्रम जी… प्लीज धीरे… अभी भी मेरी चुत पूरी तरह ठीक नहीं हुई है… आह्ह…” 

    विक्रम ने कंडोम लगाया, लुब्रिकेंट लगाया और एक जोरदार धक्का मारा। पूरा लंड अदिति की चुत में समा गया। 

    “आआआह्ह्ह… नहीं… फट गई… इतना मोटा… पेट फाड़ रहा है… विक्रम जी… रुक जाओ… आह्ह… और मत दबाओ… मैं रो रही हूँ…” अदिति चीख पड़ी। 

    प्रिया और नेहा दोनों अदिति के स्तन चूस रही थीं। विक्रम ने 25 मिनट तक अदिति को जोर-जोर से चोदा। अदिति 4 बार झड़ गई। 

    फिर नेहा की बारी — उसे डॉगी स्टाइल में मोड़कर गांड मारी। 
    “नहीं… गांड में मत… आह्ह… फट रही है… विक्रम जी… बहुत जोर से… आआह्ह… मेरी गांड चीर दी… हाँ… और गहरा… मत रुकना…” 

    प्रिया को विक्रम ने खड़े-खड़े उठाकर चोदा, उसकी टांगें अपनी कमर पर लपेटी हुईं। 
    “हाँ पति जी… जोर से… मेरी चुत फाड़ दो… आह्ह… रूस आकर भी आपका लंड नहीं थकता… और तेज…” 

    रात भर चार राउंड चले। तीनों की चुत और गांड फिर से सूज गईं, लेकिन अब वे मजे ले रही थीं।

    दूसरे दिन – सेंट पीटर्सबर्ग घूमना + हिडन प्ले

    सुबह तीनों को Hermitage Museum ले गया। अदिति ने लंबी कोट पहनी थी, अंदर कुछ नहीं। विक्रम ने रिमोट वाइब्रेटर उसकी चुत में डाल रखा था। 

    म्यूजियम में घूमते हुए विक्रम ने रिमोट ऑन किया। 
    “आह्ह… विक्रम जी… यहां मत… लोग देख लेंगे… आह्ह… वाइब्रेटर तेज मत करो… मेरी चुत गीली हो रही है… प्लीज… मैं खड़ी नहीं रह पा रही…” अदिति दीवार का सहारा लेकर कांप रही थी। 

    नेहा ने हंसते हुए कहा, “बहन… सह ले… मैंने कल रात भी यही सहा था।” 

    शाम को Neva River पर प्राइवेट यॉट बुक किया। यॉट पर तीनों नंगी हो गईं। ठंडी हवा में विक्रम ने उन्हें यॉट के डेक पर चोदा। 

    अदिति को रेलिंग पकड़वाकर पीछे से चोदा। 
    “नहीं… बाहर ठंड है… आह्ह… लंड गर्म है… मेरी चुत जल रही है… विक्रम जी… और जोर से… आआह्ह… मैं समुद्र में झड़ जाऊंगी…” 

    तीसरे दिन – Moscow ट्रांसफर

    Moscow पहुंचकर Red Square के पास 5 स्टार होटल में Presidential Suite लिया। 

    रात को सौना रूम में तीनों के साथ। गर्मी में पसीने से तर तीनों को विक्रम ने एक-एक करके चोदा। 

    प्रिया: “हाँ पति जी… सौने की गर्मी में भी आपका लंड और गर्म है… फाड़ दो…” 

    नेहा: “मेरी गांड में डालिए… ठंड के बाद गर्मी में गांड चोदने का मजा अलग है… आह्ह… पूरा घुसा दो…” 

    अदिति अब थोड़ी हिम्मत कर चुकी थी, “विक्रम जी… मुझे भी गांड में… आह्ह… दर्द तो होता है… लेकिन मज़ा भी बहुत आता है… धीरे… आआह्ह… पूरा अंदर…” 

    4 दिन तक का सिलसिला

    – Kremlin के पास प्राइवेट डिनर के बाद होटल में फोरसम 
    – Moscow River क्रूज पर तीनों को बालकनी में चोदा 
    – स्नोफॉल देखते हुए विला की बालकनी पर नंगी चुदाई 
    – सौना, जकूजी, प्राइवेट पूल — हर जगह 

    अदिति अब पूरी तरह खुल चुकी थी। वह खुद कहने लगी थी, 
    “विक्रम जी… आज मेरी चुत और गांड दोनों लीजिए… मैं आपकी सबसे छोटी पत्नी हूँ… मुझे सबसे ज्यादा चोदिए…” 

    प्रिया और नेहा उसे सिखा रही थीं — कैसे लंड चूसना है, कैसे गांड हिलाकर चुदवाना है।

    आखिरी रात Moscow में। विक्रम ने तीनों को एक साथ बेड पर लिटाया। पहले प्रिया, फिर नेहा, फिर अदिति — और अंत में तीनों की चुतों पर एक-एक करके झड़ा (कंडोम में)।

    तीनों थककर उसके सीने पर लेटी हुई थीं।

    प्रिया: “ये हनीमून सबसे यादगार रहा…”
    नेहा: “अब घर जाकर भी रोज यही चाहिए…”
    अदिति: “मैं अब डरती नहीं… बस आपका लंड चाहिए…”

    विक्रम ने तीनों को चूमते हुए कहा,
    “घर जाकर नया नियम — रोज रात चारों साथ में…”

  • तीन बहुओं का घोड़ा 11

    अध्याय 11: सुहागरात के बाद – सुबह का दृश्य (विस्तृत)

    सुबह के 6:15 बज रहे थे। मास्टर बेडरूम में अब भी हल्की गुलाबी रोशनी बिखरी हुई थी, लेकिन कमरा अब पूरी तरह बदल चुका था। गुलाब की पंखुड़ियां चारों तरफ बिखरी हुई थीं, कई पंखुड़ियां तीनों बहुओं के नंगे शरीर पर चिपकी हुई थीं। कमरे में पसीने, चूत के रस और कंडोम की हल्की खुशबू मिली हुई थी। एयर कंडीशनर अभी भी चल रहा था, लेकिन तीनों औरतों के शरीर अभी भी गर्मी से तप रहे थे।

    विक्रम बेड के बीच में लेटा हुआ था, पूरी तरह नंगा। उसका 13 इंच का लंड अब थोड़ा ढीला होकर भी पेट पर लेटा हुआ था, फिर भी मोटा और प्रभावशाली दिख रहा था। उसके सीने पर प्रिया सिर रखे लेटी थी, नेहा उसकी बाईं जांघ पर सिर रखे पड़ी थी, और अदिति उसकी दाईं तरफ करवट लेकर लेटी हुई थी, उसका एक हाथ विक्रम के लंड पर ही रखा हुआ था।

    तीनों की हालत बुरी तरह खराब थी, लेकिन अब दर्द के साथ-साथ संतोष भी था।

    प्रिया की हालत
    प्रिया की चुत और गांड दोनों बुरी तरह सूज गई थीं। लाल हो चुकी थीं। उसकी जांघों पर सूखा वीर्य और अपना रस चिपका हुआ था। वह हल्के-हल्के कराह रही थी।

    नेहा की हालत
    नेहा की गांड सबसे ज्यादा प्रभावित थी। क्योंकि विक्रम ने उसे सबसे ज्यादा गांड मारी थी। वह सीधे लेट भी नहीं पा रही थी। करवट लेकर लेटी हुई थी। उसकी गांड का छेद अभी भी थोड़ा खुला हुआ दिख रहा था।

    अदिति की हालत (नई दुल्हन) 
    अदिति की हालत सबसे खराब थी। पहली रात ही 13 इंच का लंड सहना पड़ा था। उसकी चुत सूजकर मोटी हो गई थी, लाल-लाल, और हल्का खून भी रिसा था। वह आँखें बंद किए हुए दर्द से सिसक रही थी।

    विक्रम ने आँखें खोलीं। उसने पहले प्रिया के स्तन को हल्का दबाया, फिर नेहा की गांड पर हाथ फेरा और अंत में अदिति के बाल सहलाए।

    “सुबह हो गई… तीनों कैसे हो?” विक्रम ने गहरी आवाज में पूछा।

    प्रिया ने कराहते हुए कहा, 
    “पति जी… बहुत थक गई हूँ… मेरी चुत और गांड दोनों जल रही हैं… कल रात आपने हमें पूरी तरह फाड़ दिया… चल भी नहीं पा रही… लेकिन… मज़ा भी बहुत आया…”

    नेहा ने आँखें बंद रखते हुए बोली, 
    “जी… मेरी गांड अभी भी फटी हुई लग रही है… आपने कल रात 5-6 बार गांड मारी… उठने की हिम्मत नहीं है… लेकिन आपका लंड अब मेरी गांड का दीवाना बन गया है…”

    अदिति ने बहुत धीमी, कांपती आवाज में कहा, 
    “विक्रम जी… मैं… मैं तो उठ भी नहीं पा रही… मेरी चुत फट गई है… पहली रात में ही इतना बड़ा… आह्ह… बहुत दर्द हो रहा है… प्लीज आज मत करिए… मैं अभी भी कांप रही हूँ…”

    विक्रम मुस्कुराया। उसने उठकर तीनों को देखा। उसका लंड फिर से आधा खड़ा होने लगा।

    “तुम तीनों आज आराम करो। लेकिन शाम को फिर तैयार रहना। अब चारों को संभालना है।”

    सुबह 7:30 बजे – ब्रेकफास्ट और देखभाल

    मामी सुमन कमरे में आईं। उन्होंने तीनों को देखा और सिर हिलाया। 
    “बेचारी… विक्रम ने कल रात तुम तीनों को पूरी तरह तोड़ दिया।” 

    मामी ने खुद तीनों को उठाने में मदद की। प्रिया और नेहा तो किसी तरह उठ गईं, लेकिन अदिति को उठाने में बहुत दिक्कत हुई। उसकी चुत पर मामा ने हल्का दर्द निवारक जेल लगवाया। तीनों को गर्म पानी से नहलाया गया।

    नहाने के बाद तीनों ने हल्के-हल्के कपड़े पहने — सिर्फ लूज नाइट गाउन, अंदर कुछ नहीं। वे लंगड़ाते हुए डाइनिंग टेबल पर आईं।

    विक्रम पहले से बैठा था। उसने मुस्कुराते हुए कहा, 
    “कल रात तुम तीनों ने मुझे बहुत खुश किया। अदिति… तुम बहुत टाइट थी… लेकिन अब आदत पड़ जाएगी।”

    अदिति शरमा कर सिर झुका ली, उसके गाल लाल हो गए। 
    “जी… लेकिन… आज थोड़ा आराम… प्लीज…”

    प्रिया ने अदिति का हाथ पकड़कर कहा, 
    “बहन… अब हम तीनों साथ हैं। पहले 2-3 दिन दर्द रहेगा, फिर तुम भी हमारी तरह मांगने लगोगी।”

    नेहा ने हल्के से हंसते हुए कहा, 
    “हाँ… मैंने भी पहली बार रोई थी… अब तो बिना इसके नींद नहीं आती।”

    सुबह 9 बजे – बेडरूम में आराम

    तीनों फिर बेडरूम में लेट गईं। विक्रम भी उनके बीच लेट गया। उसने तीनों की चुतों और गांड पर हल्का-हल्का जेल लगाया। हर बार हाथ लगाते ही तीनों सिसक उठतीं।

    “आह्ह… पति जी… हल्के हाथ से… अभी भी बहुत सेंसिटिव है…” प्रिया बोली।

    विक्रम ने अदिति की सूजी हुई चुत पर उंगली फेरते हुए कहा, 
    “देखो… कितनी सुंदर लग रही है अब… पूरी तरह मेरी हो चुकी है।”

    अदिति शर्म और दर्द से कांप उठी, लेकिन उसकी चुत हल्की-हल्की गीली भी होने लगी।

    मामी सुमन ने कमरे में आकर कहा, 
    “मैं कल अपने घर जा रही हूँ। अब तुम चारों का परिवार है। संभालकर रखना।”

    विक्रम ने मामी को देखकर मुस्कुराया, लेकिन कुछ नहीं बोला।

    तीनों बहुएं एक-दूसरे से सटकर लेटी रहीं। अदिति बीच में थी। प्रिया और नेहा उसे comfort दे रही थीं।

  • तीन बहुओं का घोड़ा 10

    अध्याय 10: मास्टर बेडरूम – तीनों बहुओं की सुहागरात (विस्तृत संशोधित संस्करण)

    रात के ठीक 10:45 बजे थे। पूरा घर सुनसान था, सिर्फ मास्टर बेडरूम में हल्की-हल्की रोशनी जल रही थी। मामी सुमन ने कमरे को खुद इतना खास बना दिया था कि देखते ही सांसें थम जातीं। किंग साइज बेड पर लाल और गुलाबी सिल्क की चादर बिछी हुई थी, जिस पर हजारों गुलाब की ताज़ा पंखुड़ियां बिखरी हुई थीं। चारों कोनों में छोटे-छोटे खुशबूदार मोमबत्तियाँ जल रही थीं, जिनकी हल्की-हल्की लौ कमरे को गुलाबी-नीली रोमांटिक रोशनी में डुबो रही थी। एयर कंडीशनर में जेस्मिन और चंदन की महक घुली हुई थी। बेड के सिरहाने पर तीन बड़े बॉक्स रखे थे — हर बॉक्स में 100-100 एक्स्ट्रा लार्ज अल्ट्रा-थिन कंडोम (रिब्ड, डिले और फ्लेवर्ड)। साथ में दो बोतलें एक्स्ट्रा स्ट्रॉन्ग लुब्रिकेंट और एक बोतल एनाल लुब्रिकेंट। 

    मामी सुमन ने तीनों बहुओं को खुद तैयार किया था। प्रिया ने लाल ट्रांसपेरेंट बेबीडॉल पहना था, जिससे उसके भरे-भरे 36D स्तन और वैक्स वाली गुलाबी चुत साफ दिख रही थी। नेहा ने काली शॉर्ट नेग्लिजी पहनी थी, जो उसकी मोटी गांड और टाइट चुत को और उभार रही थी। नई दुल्हन अदिति ने सफेद शीअर लिंगरी पहनी थी — बहुत पतली, लगभग पारदर्शी — जिससे उसकी 34C स्तनों की गुलाबी निप्पल और पूरी तरह बाल-रहित चुत एकदम नंगी-सी दिख रही थी। तीनों की चुतें और गांडें कल की वैक्सिंग से चमक रही थीं, गुलाबी और पूरी तरह साफ। 

    मामी ने अदिति के कान में धीरे से फुसफुसाया, 
    “बेटी… डरो मत। विक्रम बहुत जोर से करता है, बहुत बड़ा है। पहले थोड़ा दर्द होगा, लेकिन ये दोनों बहनें साथ हैं। पूरी रात सह लेना… कल सुबह तक तुम तीनों उसकी हो जाओगी।” 

    अदिति शरमा कर सिर झुका ली, उसके गाल लाल हो गए। 

    मामी सुमन ने आखिरी बार कमरे की व्यवस्था चेक की, फिर तीनों को अंदर धकेल दिया। 
    “जाओ… अब तुम तीनों की रात है। मैं राहुल जी के साथ सोने जा रही हूँ।” 

    मामी ने दरवाजा बंद कर दिया और चाबी बाहर से घुमा दी। 

    सुहागरात की शुरुआत

    विक्रम बेड के बीच में बैठा था, सिर्फ काला शॉर्ट्स पहने। जैसे ही तीनों अंदर आईं, उसने शॉर्ट्स उतार दिया। उसका 13 इंच लंबा, मोटा, काला लंड पहले से ही आधा खड़ा होकर लटक रहा था, नसें उभरी हुईं, सिर पर मोटा फोड़ा चमक रहा था। 

    “आज तुम तीनों मेरी हो… पूरी रात… बिना किसी मना करने के…” विक्रम की आवाज भारी और भूखी थी। 

    सबसे पहले उसने नई दुल्हन अदिति को कलाई पकड़कर अपनी तरफ खींच लिया। अदिति कांप रही थी, उसकी सांसें तेज हो गई थीं। विक्रम ने अदिति की लिंगरी के दोनों स्ट्रैप खींचे। सफेद लिंगरी फिसलकर नीचे गिर गई। अदिति के गोरे, भरे स्तन बाहर आ गए, निप्पल पहले से ही सख्त हो चुके थे। विक्रम ने एक स्तन मुंह में भर लिया और जोर-जोर से चूसने लगा, दांतों से हल्का-हल्का काटते हुए। 

    “आह्ह्ह… नहीं… विक्रम जी… बहुत जोर से मत चूसो… दर्द हो रहा है… आह्ह… स्तन फट जाएंगे… प्लीज… धीरे…” अदिति की आवाज कांप रही थी, लेकिन उसकी कमर खुद-ब-खुद आगे बढ़ रही थी। 

    प्रिया ने आगे बढ़कर विक्रम की जांघों के बीच बैठ गई। उसने दोनों हाथों से लंड पकड़ा — एक हाथ में भी पूरी मुट्ठी नहीं आ रही थी — और धीरे-धीरे मुठ मारने लगी। नेहा ने लंड का सिर अदिति के मुंह के पास किया। 

    “बहन… चूसो… स्वाद ले लो… ये अब तुम्हारा भी है…” नेहा ने फुसफुसाया। 

    अदिति ने डरते हुए मुंह खोला। लंड का मोटा सिर उसके होंठों पर रखा। “उम्म्म… नहीं… इतना मोटा… गला फट जाएगा… आह्ह… सिर्फ सिर ही मुंह में आ रहा है… लार टपक रही है…” अदिति की आँखों से आंसू निकल आए, लेकिन वह चूसती रही। 

    विक्रम ने अदिति को बेड पर लिटा दिया। उसकी दोनों टांगें कंधों पर रखीं। प्रिया ने कंडोम का पहला पैकेट खोला, लंड पर लुब्रिकेंट लगाया और कंडोम चढ़ा दिया। विक्रम ने लंड का सिर अदिति की चुत के होंठों पर रखा और हल्का दबाया। 

    “नहीं… विक्रम जी… प्लीज… बहुत बड़ा है… मेरी चुत फट जाएगी… आआह्ह… सिर्फ सिर ही घुसा… रुक जाओ… मैं पहली बार हूँ… बहुत दर्द हो रहा है… आंसू आ रहे हैं…” अदिति जोर से चीख पड़ी, उसका पूरा शरीर ऐंठ गया। 

    विक्रम ने एक जोरदार धक्का मारा। आधा लंड अंदर चला गया। अदिति का पेट ऊपर उठ गया, उभार साफ दिखने लगा। 

    “आआआह्ह्ह… फट गई… पेट फाड़ रहा है… विक्रम जी… निकालो… प्लीज… मैं मर जाऊंगी… बहुत मोटा… चीर रहा है… आह्ह… और मत दबाओ…” अदिति रोते हुए चीख रही थी, उसके नाखून विक्रम की पीठ में गड़ रहे थे। 

    प्रिया ने अदिति के स्तन चूसते हुए कहा, “बहन… सह ले… पूरा अंदर ले… देख, कितना अच्छा लगेगा…”

    विक्रम ने कमर हिलाई और पूरा 13 इंच एक झटके में अंदर धकेल दिया। अब अदिति की चुत पूरी तरह फैल चुकी थी। विक्रम ने तेज-तेज धक्के मारने शुरू कर दिए — पच… पच… पच… पच… हर धक्के पर लंड गहराई तक जा रहा था, अदिति का पेट बार-बार उभर रहा था।

    “आह्ह… नहीं… जोर से मत… आआह्ह… मेरी चुत जल रही है… प्लीज रुक जाओ… मैं सह नहीं पा रही… आह्ह… हाँ… और गहरा… नहीं… मत… मैं झड़ रही हूँ… पहली बार… आआआह्ह्ह… पूरा रस निकल रहा है…”

    20 मिनट बाद अदिति पहली बार झड़ गई। उसकी चुत ने लंड को कसकर पकड़ लिया, सफेद रस कंडोम के बाहर रिसने लगा।

    विक्रम ने कंडोम बदलकर नेहा को खींच लिया। नेहा को घुटनों के बल मोड़कर डॉगी स्टाइल में खड़ा किया। लंड को गांड के छेद पर रखा और लुब्रिकेंट लगाकर धीरे से दबाया।

    “नहीं… विक्रम जी… गांड में मत… आज चुत में ही… आह्ह… बहुत टाइट है… फट रही है… आआह्ह… आधा घुस गया… दर्द… प्लीज निकालो… मेरी गांड चीर दी…” नेहा रोते हुए चीखी।

    विक्रम ने पूरा लंड गांड में धकेल दिया। फिर तेजी से पीछे से ठोकने लगा। नेहा की गांड हर धक्के पर हिल रही थी। प्रिया नेहा की चुत उंगलियों से चला रही थी।

    “आह्ह… विक्रम जी… और जोर से… गांड फाड़ दो… आह्ह… मज़ा आ रहा है… नहीं… मत रुकना… मैं झड़ रही हूँ… आआह्ह…”

    इसके बाद विक्रम ने प्रिया को अपनी गोद में उठा लिया। प्रिया ने खुद लंड पकड़कर अपनी चुत में उतारा। “हाँ पति जी… पूरा अंदर… मेरी चुत अब तुम्हारी है… फाड़ दो… आह्ह… जोर से… रोज की तरह…”

    रात भर यही सिलसिला चला। विक्रम ने तीनों को हर पोजीशन में चोदा —

    • अदिति को मिशनरी में 25 मिनट
    • नेहा को राइडिंग में (वो ऊपर चढ़कर खुद हिल रही थी)
    • प्रिया को स्पूनिंग में (साथ में दोनों बहनों की चुत चाटते हुए)
    • तीनों को 69 पोजीशन में (विक्रम नीचे, तीनों ऊपर)
    • स्टैंडिंग में बालकनी की तरफ मुंह करके
    • आखिर में तीनों को बेड पर सिर टिकाकर गांड ऊपर करके एक-एक करके

    कुल 14 कंडोम इस्तेमाल हुए। कमरे में सिर्फ चीखें, “आह्ह… नहीं… हाँ… और जोर से… प्लीज रुक जाओ… मत निकालो… फाड़ दो… मैं झड़ गई…” की आवाजें और पच-पच की थपाके गूंज रहे थे।

    सुबह 5:30 बजे तीनों थककर विक्रम के सीने, पेट और जांघों पर नंगी लेटी हुई थीं। उनकी चुतें और गांडें सूजी हुई, लाल, लेकिन पूरी तरह भरी हुई थीं। गुलाब की पंखुड़ियां उनके शरीर पर चिपकी हुई थीं।

    विक्रम ने तीनों के बालों में हाथ फेरते हुए कहा,
    “अब तुम तीनों मेरी हो… रोज यही होगा। कोई मना नहीं।”

    तीनों ने थकी हुई लेकिन संतुष्ट आवाज में “जी…” कहा।

  • तीन बहुओं का घोड़ा 9

    अध्याय 9: मामा का फैसला और तीसरी शादी

    विक्रम के सिंगापुर से लौटने के तीन दिन बाद मामा राहुल अचानक घर आ गए। वे सीधे लिविंग रूम में बैठ गए और तीनों — प्रिया, नेहा और मामी सुमन को बुला लिया।

    मामा ने गंभीर स्वर में कहा, “विक्रम, मैंने सब देख लिया है। सुमन की हालत भी खराब हो चुकी है। अब ये सिलसिला और नहीं चल सकता।”

    मामी सुमन तुरंत बोलीं, उनकी आवाज में दृढ़ता थी, 
    “हाँ राहुल जी… मैंने फैसला कर लिया है। मैं विक्रम के साथ कभी नहीं करूंगी। चाहे जो हो जाए। मैं उसकी मामी हूँ… ये पाप अब और नहीं चलेगा। मैं कल ही अपने घर चली जाऊंगी।”

    मामा ने कुछ पल सोचा। फिर उन्होंने आखिरी विकल्प रख दिया, 
    “ठीक है। अगर सुमन नहीं कर सकती, तो अब विक्रम की एक और आखिरी शादी करवा देते हैं। बस एक आखिरी। कोई और विकल्प नहीं बचा।”

    प्रिया और नेहा एक-दूसरे को देखकर चुप रह गईं। विक्रम ने बस सिर हिला दिया।

    मामा ने तुरंत फोन उठाया और अपनी एक दूर की रिश्तेदार की बेटी का प्रस्ताव रख दिया। लड़की का नाम था अदिति — 22 साल, बहुत खूबसूरत, गोरी, 34C स्तन, पतली कमर और गोल-मटोल गांड। शादी की तारीख सिर्फ 5 दिन बाद तय कर दी गई।

    शादी की तैयारी – दोनों का वैक्सिंग

    शादी से दो दिन पहले प्रिया और नेहा दोनों ने फैसला किया कि वे पूरी तरह तैयार होंगी। उन्होंने एक लग्जरी ब्यूटी सैलून बुक किया। दोनों ने एक साथ प्राइवेट रूम लिया।

    वैक्सिंग करने वाली लड़की ने उन्हें नंगी देखा और मुस्कुराई, “मैडम… आप दोनों की स्किन तो पहले से ही साफ है, लेकिन आज पूरा ब्राजीलियन वैक्सिंग करेंगे ना?”

    प्रिया ने शरमाते हुए सिर हिलाया, “हाँ… बिल्कुल साफ… चुत, गांड, सब।”

    दोनों ने लेट गए। पहले प्रिया की बारी। गर्म वैक्स लगाते ही प्रिया की सांसें तेज हो गईं। 
    “आह्ह… गर्म है… धीरे… मेरी चुत पर मत लगाओ… आह्ह… उखड़ रहा है… लेकिन ठीक है… आज बिल्कुल साफ होना है…”

    नेहा बगल में लेटी देख रही थी। उसकी बारी आई तो वो भी कांप उठी। 
    “दीदी… दर्द हो रहा है… आआह्ह… मेरी गांड पर भी… पूरा साफ कर दो… विक्रम जी को पसंद है… आह्ह… बहुत जलन हो रही है…”

    दोनों की चुत और गांड पूरी तरह क्लीन हो गईं — बिल्कुल बाल-रहित, गुलाबी और चमकदार। वैक्सिंग के बाद दोनों ने वहाँ ही आइस पैक लगवाए। फिर दोनों ने एक साथ मेनिक्योर-पेडीक्योर, फेशियल और बॉडी पॉलिश भी करवाया।

    सैलून से निकलते समय प्रिया ने नेहा से कहा, 
    “बहन… अब हम तीन हो जाएंगी… लेकिन हम दोनों ही संभाल लेंगी ना?” 
    नेहा मुस्कुराई, “हाँ दीदी… अब कोई दर्द नहीं… सिर्फ तैयारी।”

    शादी का दिन

    शादी बहुत धूमधाम से हुई। अदिति को देखकर सब हैरान रह गए — बेहद खूबसूरत, शर्मीली, लेकिन आकर्षक। मंदिर में फेरे हुए। प्रिया और नेहा दोनों ने अदिति को बहुत प्यार से तैयार किया था।

    शादी सम्पन्न हो गई।

    अब घर में चार औरतें थीं — प्रिया, नेहा, अदिति और (अभी के लिए) मामी सुमन (जो कल जाने वाली थीं)।

  • तीन बहुओं का घोड़ा 8

    अध्याय 8: मामा-मामी का आगमन और नई व्यवस्था

    शीला माँ अब permanently अपने घर चली गई थीं। उन्होंने साफ कह दिया था कि अब वो इस घर में कभी नहीं आएंगी। कहानी में भी उनकी कोई भूमिका नहीं रही। अब सिर्फ प्रिया, नेहा और विक्रम थे।

    दोनों की गांड और चुत अभी भी बुरी तरह सूजी हुई थीं। वे बेड पर लेटी कराह रही थीं। चलने-फिरने की हिम्मत नहीं थी। विक्रम का लंड फिर भी हर समय खड़ा रहता था।

    उसी शाम विक्रम के मामा (राहुल) और मामी (सुमन) अचानक घर आ गए। मामा 58 साल के थे, मामी सुमन 46 साल की — अभी भी बहुत आकर्षक, गोरी, 36D स्तन, भारी गांड, मोटी जांघें।

    मामा ने पूरे मामले को सुना — प्रिया और नेहा की हालत, विक्रम की अनियंत्रित भूख, मालदीव्स में हुई गांड चुदाई।

    मामा गुस्से से बोले, “विक्रम! ये क्या कर रहा है तू? दोनों लड़कियों की हालत खराब कर दी है। संयम रखो।”

    विक्रम सिर झुकाए बैठा था। फिर अचानक फूट पड़ा, 
    “मामा… मुझसे नहीं रुक रहा… मैं कोशिश करता हूँ लेकिन लंड खड़ा हो जाता है। प्रिया और नेहा अभी चल भी नहीं पा रही… मुझे रोज चाहिए… मैं कंट्रोल नहीं कर पा रहा…”

    मामी सुमन शर्म से सिर झुकाए बैठी थीं।

    मामा ने कुछ देर सोचा और फिर गहरी सांस ली। 
    “ठीक है… जब तक प्रिया और नेहा ठीक नहीं हो जातीं, तब तक… सुमन को यहीं रहने दो। वो थोड़े दिन तुम्हें संभाल लेगी। लेकिन सिर्फ जब तक ये दोनों ठीक न हो जाएं।”

    मामी चौंककर बोलीं, “राहुल… आप क्या कह रहे हैं? मैं विक्रम की मामी हूँ… ये गलत है…”

    मामा ने सख्ती से कहा, “सुमन, परिवार की भलाई के लिए। विक्रम बेकाबू हो रहा है। तू थोड़े दिन मदद कर दे।”

    मामी कुछ नहीं बोलीं, सिर्फ शर्म से लाल हो गईं।

    उसी रात – मामी की पहली सेवा

    रात 11 बजे। प्रिया और नेहा अपने कमरे में दर्द से कराह रही थीं। विक्रम मामी को अपने मास्टर बेडरूम में ले गया।

    मामी ने साड़ी पहनी हुई थी। विक्रम ने उनकी साड़ी की पल्लू खींची। 
    “मामी… प्लीज… मुझे रोक नहीं रहा…”

    मामी कांपते हुए बोलीं, 
    “विक्रम… बेटा… ये गलत है… मैं तेरी मामी हूँ… प्लीज… मत करो… राहुल जी ने सिर्फ कह दिया है, लेकिन मैं… आह्ह…”

    विक्रम ने मामी की ब्लाउज खोली, ब्रा उतारी और भरे-भरे स्तनों को चूसने लगा। फिर उनकी साड़ी और पेटीकोट खींचकर फेंक दिया। मामी सिर्फ पैंटी में खड़ी थीं।

    विक्रम ने पैंटी खींची और अपना 13 इंच का लंड बाहर निकाला। मामी की आँखें फट गईं। 
    “नहीं… विक्रम… इतना बड़ा… मेरी उम्र 46 है… ये मेरी चुत में नहीं जाएगा… प्लीज… रुक जाओ… मैं तेरी मामी हूँ… आआह्ह…”

    विक्रम ने मामी को बेड पर लिटाया, टांगें फैलाईं और कंडोम लगाकर एक जोरदार धक्का मारा।

    “आआआह्ह्ह… नहीं… फट गई… विक्रम… निकालो… बहुत मोटा… मेरी चुत चीर दी… प्लीज… धीरे… आह्ह… पूरा घुस गया… पेट फाड़ रहा है… रुक जाओ बेटा… मैं सह नहीं पा रही…” मामी जोर से चीख पड़ीं।

    विक्रम ने घोड़े जैसी रफ्तार पकड़ ली। पच… पच… पच… पच… 

    मामी रोते हुए चीख रही थीं, 
    “नहीं… बेटा… मत मारो… इतना जोर से… मैं तेरी मामी हूँ… ये पाप है… आह्ह… मेरी चुत जल रही है… प्लीज रुक जाओ… आआह्ह… हाँ… और मत… मैं झड़ रही हूँ…”

    विक्रम ने उन्हें 35 मिनट तक लगातार चोदा। फिर डॉगी स्टाइल में मोड़कर गांड में भी घुसाने की कोशिश की।

    “नहीं… गांड में बिल्कुल नहीं… विक्रम… वो तो बहुत टाइट है… प्लीज… वहाँ मत… आआह्ह… दर्द… आधा घुस गया… निकालो… मैं मर जाऊंगी…”

    विक्रम ने मामी की गांड भी पूरी तरह फाड़ दी। मामी की हालत खराब हो गई। वो रोती-चीखती रहीं, लेकिन विक्रम ने तीन राउंड लिए।

    सुबह मामी बेड से उठ भी नहीं पा रही थीं। उनकी चुत और गांड सूज गई थीं।

    प्रिया और नेहा को जब पता चला तो दोनों हैरान रह गईं।

    नेहा कमजोर आवाज में बोली, “अब मामी भी… हम तीनों को संभालना पड़ेगा…”

  • तीन बहुओं का घोड़ा 7

    अध्याय 7: मालदीव्स – पहली बार गांड की सजा (बिना मर्जी के)

    अगले दिन सुबह 11 बजे। मालदीव्स का विला अभी भी नीली रोशनी में चमक रहा था। प्रिया और नेहा दोनों पिछले रात की चुदाई से थोड़ी थकी हुई थीं, लेकिन अब उन्हें मजा आ रहा था। दोनों ने बिकिनी पहनी थी और ब्रेकफास्ट कर रही थीं।

    विक्रम अचानक उनके पीछे आया। उसका लंड पहले से ही खड़ा था। उसने दोनों की बिकिनी नीचे खींच दी और सीधे कहा, 
    “आज तुम दोनों की गांड लूंगा… पहली बार… और बिना पूछे।”

    प्रिया चौंक गई, “नहीं विक्रम… गांड में कभी नहीं… वो बहुत टाइट है… प्लीज… मत करो… मैं डर रही हूँ…” 
    नेहा भी कांप उठी, “जी… प्लीज… चुत में ही कर लो… गांड फट जाएगी… मैं नहीं सह पाऊंगी…”

    विक्रम ने दोनों को बाल पकड़कर बेड पर झुका दिया। पहले प्रिया। उसने कंडोम लगाया, लंड पर बहुत सारा लुब्रिकेंट लगाया, लेकिन फिर भी मोटा सिर देखकर प्रिया चीख पड़ी।

    “नहीं… विक्रम… वहाँ मत… प्लीज रुक जाओ… मेरी गांड में नहीं जाएगा… आआह्ह… दर्द… निकालो… बहुत मोटा है… फट रही है… आह्ह… आधा भी नहीं घुसा… प्लीज… मैं मना कर रही हूँ…” प्रिया रोते हुए चीखी।

    विक्रम ने एक जोरदार धक्का मारा। पूरा 13 इंच का लंड प्रिया की गांड में घुस गया। प्रिया की आँखें बाहर निकल आईं। 

    “आआआआह्ह्ह… नहीं… मेरी गांड चीर दी… विक्रम… प्लीज निकालो… बहुत दर्द हो रहा है… मैं मर जाऊंगी… आह्ह… रुक जाओ… बिना मर्जी के मत करो…” 

    विक्रम ने प्रिया की कमर पकड़कर जोर-जोर से ठोकना शुरू कर दिया। पच… पच… पच… गांड की चुदाई की आवाज पूरे विला में गूंज रही थी। प्रिया रो रही थी, लेकिन विक्रम 25 मिनट तक लगातार चोदता रहा। प्रिया की गांड सूज गई, लाल हो गई।

    फिर नेहा की बारी। 
    “नहीं… मेरी बारी मत… दीदी की तरह मत करो… प्लीज विक्रम जी… मैं नई-नई दुल्हन हूँ… गांड में मत… आआह्ह… फट गई… पूरा अंदर… दर्द… रुक जाओ… मैं रो रही हूँ…” 

    विक्रम ने नेहा को भी बिना रुके चोदा। दोनों की गांड पहली बार फाड़ी जा रही थी।

    दो दिन तक का सिलसिला

    अगले 2 दिन विक्रम ने दोनों को बिना उनकी मर्जी के गांड मारी। दिन में 4-5 बार, रात में 5-5 बार — कुल 10-10 बार हर एक की।

    – सुबह पूल में 
    – दोपहर बालकनी में 
    – शाम जकूजी में 
    – रात बेड पर अलग-अलग पोजीशन — डॉगी, स्पूनिंग, स्टैंडिंग 

    प्रिया हर बार चीखती, 
    “नहीं… बस… अब मत… मेरी गांड फट चुकी है… 6 बार हो चुका… प्लीज विक्रम… चल नहीं पा रही… आह्ह… फिर से… बहुत दर्द… मैं मना कर रही हूँ… रुक जाओ…” 

    नेहा और भी ज्यादा रोती, 
    “विक्रम जी… प्लीज… मेरी गांड में अब कुछ नहीं बचा… सूज गई है… आआह्ह… 8वीं बार… निकालो… मैं उठ भी नहीं सकती… बिना पूछे मत मारो… मैं तेरी पत्नी हूँ… आह्ह… दर्द…”

    दूसरे दिन शाम तक दोनों की हालत बेहद खराब हो गई। दोनों की गांडें बुरी तरह सूजी हुईं, लाल, चलने में असमर्थ। वे बिस्तर पर पड़ी कराह रही थीं। बैठ नहीं पा रही थीं, पैर कांप रहे थे। चुत भी बार-बार चुदाई से सूज गई थी।

    विक्रम ने प्राइवेट जेट बुलाया। दोनों को स्ट्रेचर पर लिटाकर जेट में लादा गया। उड़ान भरते समय भी दोनों दर्द से तड़प रही थीं।

    प्रिया ने कमजोर आवाज में कहा, “विक्रम… अब काफी… हम दोनों की गांड खराब कर दी… चल नहीं पा रहे… घर ले चलो…” 
    नेहा सिर्फ रो रही थी, कुछ बोल भी नहीं पा रही थी।

    प्राइवेट जेट में विक्रम ने फिर से दोनों की गांड में उंगली डालकर खेला, लेकिन पूरा लंड नहीं डाला। दोनों बस कराहती रहीं।

    घर पहुंचने पर

    घर आकर दोनों को सीधे बेडरूम में लिटाया गया। दोनों नंगी पड़ी थीं, गांड पर बर्फ के पैक लगाए हुए। चलने की हिम्मत नहीं थी।

    शीला माँ (प्रिया की माँ) उन्हें देखकर बोलीं, “बेटी… क्या हालत बना दी तुम दोनों की… अब मैं भी नहीं आ सकती… तुम दोनों ही संभालो… लेकिन सावधानी से…” 

    प्रिया और नेहा दोनों एक-दूसरे को देखकर रो पड़ीं। उनकी गांडें 2 दिन की बिना मर्जी वाली चुदाई से बुरी तरह खराब हो चुकी थीं। लेकिन विक्रम संतुष्ट मुस्कान के साथ बेड के पास बैठा था।

  • तीन बहुओं का घोड़ा 6

    अध्याय 6: मालदीव्स – अब पूरी मस्ती, कोई दर्द नहीं

    मालदीव्स के पानी वाले विला में तीसरी रात। अब प्रिया और नेहा दोनों की चुतें पूरी तरह आदत डाल चुकी थीं। वैक्सिंग के बाद की सूजन उतर गई थी, शरीर ने विक्रम के 13 इंच के घोड़े जैसे लंड को स्वीकार कर लिया था। दोनों को अब दर्द की जगह सिर्फ गहरा मज़ा आ रहा था।

    विक्रम पूल के किनारे खड़ा था, उसका लंड पूरा खड़ा, कंडोम लगा हुआ। प्रिया और नेहा दोनों नंगी, बिकिनी फेंककर उसके पास आईं।

    प्रिया ने विक्रम के लंड को हाथ में पकड़ा और मुस्कुराते हुए कहा, 
    “अब कोई समस्या नहीं है विक्रम… मेरी चुत अब तुम्हारे लंड की दीवानी हो गई है।” 

    नेहा ने पीछे से विक्रम को चिपकते हुए उसके कान में फुसफुसाया, 
    “हाँ जी… पहले तो चीखती थी, अब तो बिना आपके लंड के नींद भी नहीं आती… आज हम दोनों आपको पूरा एंजॉय करेंगी।”

    विक्रम ने दोनों को पूल में खींच लिया। पानी में ही उसने प्रिया को दीवार से लगा दिया और एक जोरदार धक्का मारा। पूरा लंड एक बार में अंदर चला गया।

    “आह्ह्ह… हाँ विक्रम… अब पूरा घुसा दो… पहले वाला दर्द चला गया… अब तो मज़ा आ रहा है… और जोर से… आह्ह… मेरी चुत फाड़ दो आज…” प्रिया ने आँखें बंद करके चीखते हुए कहा। उसकी कमर खुद आगे-पीछे हिल रही थी।

    नेहा प्रिया के स्तनों को चूस रही थी और अपनी उंगलियाँ प्रिया की क्लिट पर घुमा रही थी। 
    “दीदी… आज मुझे भी पूरा दो… मैं भी तैयार हूँ… विक्रम जी… मेरी चुत में भी घुसाइए…”

    विक्रम ने प्रिया को 15 मिनट तक पूल में खड़े-खड़े चोदा। हर धक्के पर पानी छपछपा रहा था। प्रिया लगातार झड़ रही थी। 
    “आआह्ह… हाँ… और गहरा… पेट तक पहुँच रहा है… मज़ा आ रहा है… नहीं रुकना… जोर से चोदो मुझे… मैं अब तुम्हारी रंडी हूँ…”

    फिर विक्रम ने नेहा को ग्लास फ्लोर पर लिटा दिया। नीचे समुद्र दिख रहा था। उसने नेहा की टांगें कंधों पर रखीं और पूरे जोर से अंदर घुसा।

    “आह्ह्ह… विक्रम जी… हाँ… अब दर्द नहीं… सिर्फ मज़ा… पूरा लंड अंदर… मेरी चुत को चीर दो… आह्ह… और तेज… मैं सह सकती हूँ अब…” नेहा चीखते हुए बोली। उसकी कमर ऊपर उठ रही थी, लंड को और गहरा लेने के लिए।

    प्रिया नेहा के मुंह पर बैठ गई। नेहा उसकी चुत चाट रही थी। 
    “बहन… चाटो अच्छे से… विक्रम तुम्हें चोद रहा है… मैं तुम्हारी जीभ पर झड़ना चाहती हूँ… आह्ह… हाँ… यही…”

    अब पूरा थ्रीसम जोरों पर था। विक्रम ने दोनों को बारी-बारी चोदा — 
    – डॉगी स्टाइल में बालकनी में 
    – राइडिंग पोजीशन में बेड पर (दोनों बारी-बारी ऊपर चढ़कर) 
    – स्पूनिंग में जकूजी में 

    प्रिया अब पूरी तरह बोल रही थी, 
    “विक्रम… पहले मैं मना करती थी… अब तो लगता है तुम्हारा लंड मेरी चुत का हिस्सा बन गया है… और जोर से… मेरी चुत फाड़ दो… आह्ह… हाँ… मैं झड़ गई… फिर से…”

    नेहा भी अब शर्म छोड़ चुकी थी, 
    “जी… मुझे भी घोड़े की तरह चोदिए… मेरी गांड में भी डालिए… आह्ह… हाँ… पूरा घुसा दो… दर्द नहीं… सिर्फ आग लग रही है… मज़ा आ रहा है… मैं आपकी दूसरी पत्नी हूँ… रोज चोदिए मुझे…”

    रात 2 बजे तक दोनों की चुतें विक्रम के लंड से भर-भरकर झड़ रही थीं। अब उन्हें कोई समस्या नहीं थी — चुतें पूरी तरह खुल चुकी थीं, गीली और भूखी रहती थीं।

    विक्रम ने आखिर में दोनों को घुटनों के बल बिठाया और दोनों के मुंह पर कंडोम उतारकर झड़ दिया। दोनों ने मिलकर लंड चाटा और वीर्य पिया।

    प्रिया ने नेहा को चूमते हुए कहा, 
    “अब हम दोनों साथ में ही संभालेंगी… कोई दर्द नहीं, सिर्फ मज़ा… मालदीव्स हमारा असली हनीमून बन गया।”

    नेहा मुस्कुराई, “हाँ दीदी… अब रोज रात को हम दोनों मिलकर विक्रम जी को खुश करेंगी… हमारी चुतें अब उनकी हो चुकी हैं।”

    विक्रम दोनों को अपनी बाहों में लेकर लेट गया। बाहर समुद्र शांत था, लेकिन अंदर तीनों की आग अभी भी जल रही थी।

  • तीन बहुओं का घोड़ा 5

    अध्याय 5: रिकवरी, वैक्सिंग और मालदीव्स का दूसरा हनीमून

    शीला माँ अब नहीं आ रही थीं। उनकी हालत इतनी खराब हो चुकी थी कि वो बिस्तर से उठ भी नहीं पा रही थीं। उन्होंने साफ मना कर दिया — “बेटी, अब मैं नहीं संभाल सकती… मेरी उम्र हो गई… तुम दोनों ही अब संभालो…”

    अब सिर्फ प्रिया और नेहा रह गई थीं।

    पिछले 10 दिनों में विक्रम ने दोनों को रोज रात भर चोदा था। दोनों की हालत बुरी तरह खराब हो गई थी। चुतें सूजी हुईं, लाल, चलने में भी दर्द, बैठने में तकलीफ। सुबह उठते ही दोनों कराहतीं।

    प्रिया ने नेहा को देखा और कहा, “बहन… अब हम दोनों को ही संभालना पड़ेगा… माँ नहीं आएंगी…” 
    नेहा कमजोर आवाज में बोली, “दीदी… मेरी चुत अभी भी जल रही है… चल नहीं पा रही… विक्रम जी रोज घोड़े की तरह…”

    तीन दिन तक दोनों ने विक्रम से मना किया। विक्रम ने मजबूरन कंट्रोल किया, लेकिन उसका लंड हर वक्त खड़ा रहता।

    चौथे दिन – बिकनी वैक्सिंग

    प्रिया ने कहा, “चल नेहा, दोनों बिकनी वैक्सिंग करवाते हैं… मालदीव्स जाना है… वहाँ साफ-सुथरा होना चाहिए।”

    दोनों एक लग्जरी ब्यूटी सैलून गईं। प्राइवेट रूम में दोनों नंगी लेट गईं।

    वैक्सिंग करने वाली लड़की (रिया) ने देखा और मुस्कुराई, “मैडम… आप दोनों की हालत तो खराब लग रही है… चुत सूजी हुई है…”

    प्रिया शरमाई, “हाँ… पति बहुत… जोर से…” 
    नेहा ने आँखें बंद कर लीं।

    वैक्सिंग शुरू हुई। गर्म वैक्स लगाते ही दोनों चीख पड़ीं। 
    “आह्ह… नहीं… बहुत गर्म है… आआह्ह… मेरी सूजी चुत पर मत लगाओ… प्लीज धीरे…” प्रिया चीखी।

    नेहा तो रो पड़ी, “दीदी… दर्द हो रहा है… मेरी चुत पहले से ही फटी हुई है… आह्ह… नहीं… बाल उखड़ रहे हैं… रुक जाओ…”

    रिया ने दोनों की चुत, गांड और आस-पास पूरी तरह क्लीन किया। दोनों की चुत अब बिल्कुल साफ, गुलाबी और चमकदार हो गई थीं, लेकिन वैक्सिंग के बाद दर्द और बढ़ गया।

    घर लौटकर दोनों बर्फ लगाकर लेटी रहीं। विक्रम ने देखा तो हँसा, “अब मालदीव्स में मजा आएगा।”

    10 दिन बाद – मालदीव्स दूसरा हनीमून

    सब ठीक होने के बाद विक्रम ने दोनों को मालदीव्स ले जाया। पानी के ऊपर वाला विला बुक किया — प्राइवेट पूल, समुद्र के ऊपर ग्लास फ्लोर, रोमांटिक।

    पहली रात।

    दोनों ने बिकिनी पहनी थी — प्रिया लाल, नेहा सफेद। विक्रम ने दोनों को पूल में खींच लिया।

    पहले तो किसिंग, फिर विक्रम ने प्रिया की बिकिनी उतारी। 
    “नहीं विक्रम… अभी भी थोड़ा दर्द है… प्लीज आज मत… नेहा को पहले…” प्रिया बोली।

    विक्रम ने नेहा को पूल के किनारे झुका दिया और कंडोम लगाकर पीछे से घुसा दिया।

    “आआह्ह… विक्रम जी… नहीं… इतनी तेज मत… मेरी नई वैक्स की चुत… फट जाएगी… प्लीज धीरे… आह्ह… पूरा घुस गया… पेट में उभार…” नेहा चीखी।

    प्रिया बगल में बैठी देख रही थी। विक्रम ने नेहा को 30 मिनट तक डॉगी स्टाइल में चोदा। नेहा 4 बार झड़ गई।

    फिर विक्रम ने प्रिया को उठाकर ग्लास फ्लोर पर लिटा दिया। नीचे समुद्र की मछलियाँ दिख रही थीं।

    “नहीं… विक्रम… यहाँ नहीं… कोई देख लेगा… आह्ह… धीरे… मेरी चुत अभी भी सेंसिटिव है… प्लीज रुक जाओ… आआह्ह… पूरा अंदर… बहुत मोटा… फाड़ रहा है…”

    विक्रम ने प्रिया की टांगें कंधों पर रखीं और घोड़े जैसी चुदाई शुरू कर दी। नेहा प्रिया के स्तन चूस रही थी।

    “आह्ह… नेहा… तुम भी मत… दीदी की चुत जल रही है… विक्रम… प्लीज… थोड़ा आराम… नहीं… मैं झड़ रही हूँ… आआआह्ह… मत रुकना… हाँ… और जोर से…”

    रात भर थ्रीसम चला। विक्रम ने दोनों को बारी-बारी चोदा — पूल में, बेड पर, बालकनी में, जकूजी में। दोनों की चीखें समुद्र में गूंज रही थीं।

    “नहीं… विक्रम… अब काफी… हम दोनों की हालत फिर खराब हो जाएगी… प्लीज… नेहा को ले लो… आह्ह… मेरी गांड में मत… नहीं… पूरा घुस गया… आआह्ह… दर्द… मजे… मत निकालो…”

    दोनों थककर सुबह नंगी पड़ी थीं। चुतें फिर से सूज गई थीं, लेकिन दोनों मुस्कुरा रही थीं।

    नेहा ने प्रिया के कान में कहा, “दीदी… अब हम दोनों मिलकर ही संभालेंगी… माँ नहीं आएंगी तो हम ही विक्रम जी की भूख शांत करेंगी…”

    प्रिया ने सिर हिलाया, “हाँ बहन… लेकिन रोज नहीं… वरना हम दोनों अस्पताल पहुंच जाएंगी।”

    विक्रम संतुष्ट मुस्कान के साथ दोनों को अपनी बाहों में लिए लेटा था।

  • तीन बहुओं का घोड़ा 4

    अध्याय 4: दूसरी शादी और सुहागरात की शिक्षा

    विक्रम ने प्रिया को माँ के घर छोड़ दिया और अकेला घर चला गया। उसकी भूख अब और बढ़ गई थी। उसने अपनी मामा-मामी को सब कुछ बता दिया — प्रिया की असमर्थता, सास शीला के साथ जो कुछ हुआ, सब। मामा-मामी ने पहले तो शॉक जताया, लेकिन विक्रम के पास अरबों की दौलत थी। उन्होंने फैसला किया कि विक्रम की दूसरी शादी कर दी जाए।

    दूसरी दुल्हन का नाम था नेहा — 23 साल, बहुत सुंदर, गोरी, 34D स्तन, पतली कमर, मोटी गांड। नेहा साधारण परिवार से थी। शादी तय हो गई।

    सुहागरात की रात।

    विक्रम ने नेहा को 5 स्टार होटल के हनीमून सूट में ले जाया। प्रिया और शीला (प्रिया की माँ) भी वहीं थीं — “सिखाने” के लिए।

    कमरे में रोशनी मद्धिम थी। नेहा लाल लहंगे में नजर आ रही थी। विक्रम ने लहंगे की पल्लू खींची।

    नेहा शरमाई, “विक्रम जी… प्लीज… धीरे… मैं पहली बार हूँ…”

    प्रिया ने पास आकर नेहा के कान में कहा, “बहन… तैयार रहो… विक्रम का लंड बहुत बड़ा है… मैं सह नहीं पाई, इसलिए तुम्हें चुन लिया गया है।”

    शीला माँ ने मुस्कुराते हुए नेहा के ब्लाउज के हुक खोलने शुरू कर दिए।

    विक्रम ने अपना लंड बाहर निकाला। 13 इंच का मोटा, काला, नसों वाला लंड देखकर नेहा के मुँह से चीख निकल गई।

    “नहीं… ये… ये क्या है… इतना बड़ा… मैं नहीं ले पाऊंगी… प्लीज विक्रम जी… रुक जाइए… मैं डर रही हूँ…” नेहा काँपते हुए पीछे हटी।

    प्रिया ने नेहा को बेड पर लिटाया और उसकी टांगें फैला दीं। “बहन… डरो मत… मैं सिखाती हूँ। पहले चूसो…”

    नेहा ने रोते हुए लंड मुंह में लिया, लेकिन सिर्फ सिर ही जा पाया। “उम्म्म… नहीं… गला फट जाएगा… इतना मोटा… प्लीज… मैं नहीं कर सकती…”

    शीला माँ ने नेहा की चुत पर तेल लगाया और उंगलियाँ डालकर फैलाने लगीं। “बेटी… तैयार हो जा… विक्रम बिना रुके चोदता है।”

    विक्रम ने कंडोम लगाया और नेहा की टांगें कंधों पर रख दीं। एक जोरदार धक्का।

    “आआआह्ह्ह… नहीं… फट गई… विक्रम जी… निकालिए… प्लीज… बहुत दर्द हो रहा है… आधा भी नहीं घुसा… मेरी चुत चीर दी… आह्ह… रुक जाइए…” नेहा जोर से चीख पड़ी। आंसू बहने लगे।

    प्रिया ने नेहा के स्तन चूसते हुए कहा, “बहन… सह ले… मैं भी यही सहती थी… अब तू सह…”

    विक्रम ने और जोर से धक्का मारा। पूरा लंड अंदर चला गया। नेहा का पेट उभर आया।

    “नहीं… पेट फाड़ रहा है… विक्रम जी… प्लीज… रुक जाओ… मैं मर जाऊंगी… आह्ह… धीरे… मत मारो… मैं तेरी पत्नी हूँ… ये गलत है… आआह्ह… हाँ… और गहरा… नहीं… मत…”

    विक्रम ने घोड़े जैसी रफ्तार पकड़ ली। पच… पच… पच… पच… कमरा चीखों और थपाकों से भर गया।

    शीला माँ ने नेहा का सिर थामा और बोली, “बेटी… सह ले… मैं भी सह रही हूँ रोज… प्रिया भी देख रही है…”

    प्रिया ने नेहा की क्लिट पर उंगली रखकर रगड़ना शुरू कर दिया। “बहन… झड़ जा… दर्द कम हो जाएगा…”

    नेहा का पहला ऑर्गेज्म आया। “आआआह्ह्ह… नहीं… झड़ रही हूँ… विक्रम जी… रुक जाओ… मैं सह नहीं पा रही… आह्ह… और मत मारो…”

    लेकिन विक्रम रुका नहीं। 40 मिनट तक लगातार चोदा। नेहा 5 बार झड़ चुकी थी। उसकी चुत सूज गई थी, लाल हो गई थी।

    फिर थ्रीसम शुरू हुआ।

    प्रिया नेहा के ऊपर लेट गई। दोनों की चुतें एक-दूसरे से सटी हुईं। विक्रम ने बारी-बारी दोनों में डाला।

    “नहीं… विक्रम… अब मेरी चुत में मत… अभी भी दर्द है… प्लीज… नेहा को चोदो… आह्ह… दोनों को साथ मत… मैं माँ हूँ… नहीं… आआह्ह…” शीला भी शामिल हो गई।

    नेहा रोते हुए बोली, “प्रीया दीदी… माँ जी… प्लीज… मुझे बचाओ… विक्रम जी बहुत जोर से कर रहे हैं… मेरी चुत फट गई… आह्ह… नहीं… गांड में मत… प्लीज… रुक जाओ…”

    विक्रम ने नेहा की गांड में भी घुसा दिया। प्रिया नेहा की चुत चाट रही थी। शीला विक्रम के अंडकोष चूस रही थी।

    रात भर यही चला। नेहा की हालत पूरी तरह खराब हो गई — वो उठ भी नहीं पा रही थी, चुत और गांड दोनों सूजी हुई, शरीर काँप रहा था, लेकिन विक्रम ने तीनों को बारी-बारी चोदा।

    सुबह नेहा बेहोश पड़ी थी। प्रिया ने उसके माथे पर हाथ फेरा और कहा, “अब तू संभाल लेगी ना बहन?”

    नेहा कमजोर आवाज में बोली, “हाँ दीदी… लेकिन… रोज नहीं… प्लीज…”

    शीला माँ ने मुस्कुराते हुए कहा, “बेटी… आदत पड़ जाएगी।”

    विक्रम संतुष्ट था। अब उसके पास तीन औरतें थीं — प्रिया, शीला और नेहा।

  • तीन बहुओं का घोड़ा 3

    अध्याय 3: घर वापसी और माँ की कुर्बानी

    थाईलैंड से वापस आने के बाद सिर्फ 4 दिन बीते थे। पटाया की वो रातें अभी भी मेरी चुत में दर्द के रूप में महसूस हो रही थीं। विक्रम हर रात लावा की तरह मुझे चोदना चाहता था, लेकिन मैं अब और सह नहीं पा रही थी। उसका 13 इंच का घोड़े जैसा लंड मेरी चुत के लिए अब सजा बन गया था।

    रात को विक्रम फिर से तैयार था। 
    “प्रिया… आज फिर से जोर से लेंगे…” 
    “नहीं विक्रम… प्लीज… अभी भी सूजन है… मैं चल भी नहीं पा रही… कल से ट्राई करेंगे…” मैं रोते हुए बोली। 

    लेकिन विक्रम ने मेरी टांगें खोल दीं और कंडोम लगाकर एक जोरदार धक्का मार दिया। 
    “आआआह्ह्ह… नहीं… फट गई… विक्रम रुक जाओ… बहुत दर्द हो रहा है… मैं मर जाऊंगी… प्लीज निकालो…” मैं चीख पड़ी। 

    वो रुका नहीं। 25 मिनट तक मुझे चोदा। मैं सिर्फ रोती रही। आखिर में जब वो झड़ा तो मैं बिस्तर पर बेहोश जैसी पड़ी थी। 

    अगली सुबह मैंने फैसला कर लिया। 
    “मुझे माँ के घर जाना है… 2-3 दिन के लिए…” 
    विक्रम ने हामी भरी। मैं सीधा मम्मी के घर चली गई। 

    मेरी माँ का नाम शीला है। उम्र 48 साल, लेकिन देखने में 38-40 जैसी लगती हैं। गोरी, भरे-भरे 38D स्तन, पतली कमर, मोटी गांड। विधवा हो चुकी हैं। घर में अकेली रहती हैं। 

    जैसे ही मैं घर पहुंची, माँ ने मुझे गले लगाया। मैं रो पड़ी। 
    “क्या हुआ बेटी? हनीमून से लौटकर इतनी उदास क्यों?” 

    मैंने सारी बात बता दी – विक्रम का बहुत बड़ा और मोटा लंड, घोड़े जैसी चुदाई, थाईलैंड में लावा को बुलाना, और मेरी हालत। 

    माँ ने मुझे सिर सहलाते हुए कहा, “बेटी… पुरुषों की भूख ऐसी ही होती है। तू चिंता मत कर। मैं बात कर लूंगी विक्रम से।” 

    उसी शाम विक्रम मम्मी के घर आया मुझे लेने। मम्मी ने उसे चाय दी और सीधे मुद्दे पर आ गईं। 
    “विक्रम बेटा… प्रिया बहुत परेशान है। तुम्हारा सामान बहुत बड़ा है, वो सह नहीं पा रही।” 

    विक्रम शर्माया। माँ ने मुस्कुराते हुए कहा, 
    “मैं समझती हूँ… पुरुष को संतोष चाहिए। अगर तू चाहे तो… मैं मदद कर सकती हूँ… बस प्रिया को आराम मिल जाए।” 

    मैं हैरान रह गई। “माँ… तुम क्या कह रही हो?” 

    माँ ने मेरे सिर पर हाथ फेरा, “बेटी… माँ-बेटी का रिश्ता। तेरा सुख मेरे लिए सबसे बड़ा है।” 

    विक्रम की आँखें चमक उठीं। 

    उसी रात… 

    मैं अपने कमरे में थी। माँ और विक्रम वाले कमरे में गए। दरवाजा बंद था, लेकिन मैं चुपके से बाहर खड़ी सुन रही थी। 

    पहले तो बातें हुईं। फिर आवाजें… 

    “आह्ह… विक्रम… धीरे… तुम्हारा तो बहुत बड़ा है… आआह्ह… पूरा मत घुसाओ… मेरी चुत 48 साल बाद खुल रही है…” माँ की आवाज आई। 

    विक्रम ने जोरदार धक्का मारा। 
    “पच… पच… पच…” 

    माँ चीखीं, “नहीं… बेटा… रुक जाओ… फट रही है… इतना मोटा… आह्ह… पेट तक जा रहा है… प्लीज धीरे… मैं तेरी सास हूँ… आआह्ह… नहीं… और जोर से मत…” 

    लेकिन विक्रम ने घोड़े जैसी रफ्तार पकड़ ली। मैं बाहर खड़ी सुन रही थी। माँ की चीखें लगातार बढ़ रही थीं। 

    “विक्रम… नहीं… मैं सह नहीं पा रही… आह्ह… मेरी चुत फाड़ दी… प्लीज रुक… मैं तेरी सास हूँ… ये गलत है… आआह्ह… हाँ… और गहरा… नहीं… मत… मैं झड़ रही हूँ… आआआह्ह्ह…” 

    मैंने दरवाजे की दरार से झांका। माँ कुत्ते की मुद्रा में थीं। विक्रम पीछे से जोर-जोर से ठोक रहा था। माँ के स्तन लटक-लटककर हिल रहे थे। उनका चेहरा पसीने से तर, आँखें बंद, मुंह से लार टपक रही थी। 

    विक्रम ने माँ के बाल पकड़े और और तेज किया। 
    “सास जी… आपकी चुत तो बहुत टाइट है… प्रिया से ज्यादा सह ले रही हो…” 

    माँ रोते हुए चीखीं, “नहीं… मैं प्रिया की माँ हूँ… प्लीज… मेरी हालत खराब मत करो… आह्ह… मैं मर जाऊंगी… रुक जाओ… बहुत हो गया… आआह्ह… फिर से झड़ गई…” 

    एक घंटे बाद माँ की हालत पूरी तरह खराब हो चुकी थी। वो बिस्तर पर लेटी हुई थीं, टांगें फैली हुईं, चुत लाल और सूजी हुई, विक्रम का वीर्य (कंडोम में) बाहर रिस रहा था। उनका शरीर कांप रहा था। 

    विक्रम अभी भी खड़ा था। उसने माँ को घसीटकर फिर से अपनी गोद में लिया। 
    “सास जी… एक राउंड और…” 

    माँ ने कमजोर आवाज में कहा, “नहीं बेटा… प्लीज… अब मत… मैं चल भी नहीं पा रही… मेरी चुत जल रही है… प्रिया को बुला लो…” 

    लेकिन विक्रम ने फिर से घुसा दिया। 
    “आआह्ह… नहीं… फिर से… विक्रम… तू तो जानलेवा है… प्लीज रुक… मैं तेरी सास हूँ… आह्ह… हाँ… मत निकाल… पूरा अंदर…” 

    मैं बाहर खड़ी रो रही थी, लेकिन मेरी चुत भी गीली हो गई थी।

    रात भर माँ की चीखें, “नहीं… प्लीज… रुक जाओ… मैं मर जाऊंगी… आह्ह… और जोर से…” सुनाई देती रहीं। सुबह तक माँ की हालत बुरी तरह खराब हो गई थी – वो उठ भी नहीं पा रही थीं, चुत सूजकर लाल हो गई थी, शरीर में दर्द, लेकिन चेहरा संतोष से भरा था।

    विक्रम ने मुझे बुलाकर कहा, “अब तू आराम कर। तेरी माँ ने मुझे संभाल लिया।”

    माँ ने कमजोर आवाज में मुझे देखा और कहा, “बेटी… अब तू चिंता मत कर… माँ है ना…”

  • तीन बहुओं का घोड़ा 1

    अध्याय 1: थाईलैंड हनीमून – पहली रात की आग

    मेरा नाम प्रिया है, 26 साल। शादी को सिर्फ 12 दिन हुए थे। मेरे पति विक्रम, 32 साल का, लंबा-चौड़ा, जिम वाली बॉडी, घनी मूंछें। हम दोनों थाईलैंड के पटाया बीच पर हनीमून मनाने आए थे। 5 स्टार रिसॉर्ट का प्राइवेट विला बुक किया था – सामने नीला समुद्र, प्राइवेट पूल, जकूजी, और चारों तरफ रोमांटिक लाइट्स। लेकिन मेरी चुत पहले ही डर रही थी।

    विक्रम का लंड… भगवान, वो सच में घोड़े जैसा था। 13 इंच लंबा, मोटा, काला, नसें उभरी हुईं। शादी से पहले मैंने सिर्फ दो बार लिया था, वो भी बहुत धीरे। लेकिन विक्रम चुदाई करता था जैसे गधा – बिना रुके, बिना थके, घंटों तक जोर-जोर से।

    पहली रात। हम दोनों शैंपेन पीकर बेड पर थे। विक्रम ने मुझे नंगी कर दिया। मेरी साड़ी, ब्लाउज, ब्रा, पैंटी सब फर्श पर पड़ी थीं। मैं नंगी लेटी थी, टांगें थोड़ी खुली।

    “प्रिया… आज मैं तुझे पूरी तरह चोदूंगा,” विक्रम ने कहा और अपना लंड बाहर निकाला। सोया हुआ भी 7 इंच का मोटा। मैंने डरते हुए हाथ लगाया।

    “विक्रम… प्लीज… धीरे… तुम्हारा इतना बड़ा है… मैं सह नहीं पाऊंगी…” मैंने कांपते स्वर में कहा।

    लेकिन विक्रम ने मेरी टांगें कंधों पर रखीं और कंडोम लगाकर लंड का सिर मेरी चुत पर रख दिया। एक जोरदार धक्का।

    “आआआह्ह्ह… नहीं… विक्रम… रुक जाओ… फट रही है मेरी चुत… प्लीज… आधा भी नहीं घुसा… बहुत मोटा है… दर्द हो रहा है…” मैं चीख पड़ी। आंसू निकल आए।

    विक्रम रुका नहीं। उसने कमर जोर से हिलाई और पूरा लंड एक झटके में अंदर धकेल दिया। मेरी चुत पूरी तरह फैल गई। पेट में उभार दिखने लगा।

    “नहीं… विक्रम… निकालो… प्लीज… मैं मर जाऊंगी… इतना गहरा… पेट फाड़ रहा है… आह्ह… धीरे… मत मारो…” मैं रोते हुए उसके सीने पर हाथ मार रही थी।

    लेकिन विक्रम ने मेरी कमर पकड़ ली और घोड़े जैसी रफ्तार से चोदना शुरू कर दिया। पच… पच… पच… पच… हर धक्के पर कमरा गूंज रहा था। लंड मेरी गर्भाशय तक टकरा रहा था।

    “आह्ह… नहीं… बस… रुक जाओ… मैं सह नहीं पा रही… तुम गधे की तरह चोद रहे हो… प्लीज… थोड़ा आराम दो… आआह्ह… हाँ… और गहरा… नहीं… मत…”

    मेरा पहला ऑर्गेज्म आया। चुत ने लंड को कसकर पकड़ लिया। लेकिन विक्रम रुका नहीं। उसने मुझे कुत्ते की मुद्रा में मोड़ दिया, गांड ऊपर की और पीछे से जोर-जोर से ठोकने लगा।

    “नहीं… इस पोजीशन में नहीं… बहुत गहरा जा रहा है… विक्रम… प्लीज… मेरी चुत फट गई… रुक जाओ ना… मैं मना कर रही हूँ… आह्ह… और जोर से मत…”

    दूसरा ऑर्गेज्म। तीसरा। चौथा। मैं थककर बिस्तर पर गिर पड़ी थी। लेकिन विक्रम अभी भी चोद रहा था। 45 मिनट हो चुके थे।

    “विक्रम… प्लीज… अब काफी… मैं और नहीं ले सकती… तुम्हारा लंड बहुत बड़ा है… रोज-रोज मैं मर जाऊंगी…” मैं हांफते हुए बोली।

    विक्रम ने मुझे फिर मिशनरी में लिटाया और तेजी बढ़ा दी। आखिरकार वह कंडोम में झड़ गया। गर्म वीर्य कंडोम में भर गया।

    वो मेरे ऊपर लेट गया। मैं पसीने से तर, चुत लाल और सूजी हुई।

    दूसरे दिन सुबह। विक्रम फिर से खड़ा हो गया। उसने मुझे जकूजी में ले जाकर चोदा। फिर पूल के किनारे। फिर बेड पर। हर बार मैं “नहीं… प्लीज… रुक जाओ… मैं सह नहीं पा रही…” कहती, लेकिन वो घोड़े जैसा चोदता रहता।

    शाम को मैं थककर बिस्तर पर लेटी थी। चुत में दर्द हो रहा था। विक्रम फिर से तैयार था।

    मैंने हिम्मत जुटाकर कहा, “विक्रम… सुनो… तुम्हारा लंड बहुत बड़ा है… मैं जितनी बार चाहकर भी नहीं ले पा रही… प्लीज… कोई लड़की बुला लो… प्रोफेशनल… वो तुम्हें संभाल लेगी… मैं भी देखूंगी… बस मेरी चुत को आराम मिल जाए…”

    विक्रम मुस्कुराया। “तुम सच कह रही हो?”

    “हाँ… प्लीज… मैं मना नहीं कर रही… बस 2 दिन के लिए कोई अच्छी लड़की बुला लो… पैसे दे देंगे… कंडोम लगाकर… मैं तुम्हें देखना चाहती हूँ…”

    विक्रम ने रिसॉर्ट के कांटेक्ट से एक थाई-इंडियन कॉल गर्ल का नंबर लिया। नाम था “लावा”। 24 साल, 36-24-38 फिगर, बहुत खूबसूरत। 2 दिन के लिए 80,000 रुपये तय हुए।

    रात 9 बजे लावा आई। टाइट ड्रेस में। लंबे बाल, भरे स्तन, मोटी गांड।

    विक्रम ने उसे अंदर बुलाया। मैं बेड पर बैठी थी, सिर्फ नाइट गाउन में।

    लावा ने मुस्कुराते हुए कहा, “सर… मैडम… दोनों साथ में एंजॉय करेंगे?”

    मैंने शरमाते हुए सिर हिलाया। “हाँ… लेकिन विक्रम बहुत जोर से करते हैं… तुम संभाल लेना…”

    विक्रम ने लावा को नंगी किया। उसका लंड पहले से खड़ा था। लावा ने कंडोम लिया, मुंह से लगाया और चूसने लगी।

    “वाह… सर… कितना बड़ा… मैं पूरी ले लूंगी…” लावा बोली।

    विक्रम ने लावा को बेड पर लिटाया और घोड़े जैसी चुदाई शुरू कर दी।

    “आह्ह… सर… जोर से… हाँ… और जोर से…” लावा चीख रही थी।

    मैं बगल में बैठी देख रही थी। विक्रम लावा को 1 घंटे तक लगातार चोदता रहा – मिशनरी, डॉगी, राइडिंग। हर बार कंडोम बदलता। लावा पैसे वसूल कर रही थी – वो भी जोर-जोर से चीख रही थी लेकिन सह ले रही थी।

    “प्रिया… देख… तेरा पति कितना जोर से चोदता है…” लावा ने मुझे बुलाया।

    मैंने पास जाकर देखा। विक्रम का लंड लावा की चुत में पूरा घुस-घुसकर बाहर आ रहा था।

    मेरी चुत फिर गीली हो गई। लेकिन मैंने खुद को रोका।

    “विक्रम… प्लीज… लावा को आराम दो… अब मेरी बारी…” मैंने कहा।

    लेकिन विक्रम ने मुझे भी खींच लिया। अब दोनों को बारी-बारी चोद रहा था।

    रात भर यही चला। लावा ने पैसे के हिसाब से पूरा 2 दिन का प्लान बनाया – सुबह, दोपहर, शाम, रात।

  • तीन बहुओं का घोड़ा 2

    अध्याय 2: दूसरी रात – लावा के साथ थ्रीसम

    दूसरी रात, 10:30 बजे। विला में सिर्फ नीली लाइट्स जल रही थीं। बाहर समुद्र की लहरें शांत थीं, लेकिन अंदर तूफान आने वाला था। लावा अभी भी हमारे साथ थी। उसने शॉवर लेकर हल्का मेकअप किया था – लाल लिपस्टिक, काला ट्रांसपेरेंट नेग्लिजी, जिसके अंदर कुछ नहीं था। उसके भरे-भरे 36D स्तन और गोल गांड देखकर मेरी सांसें तेज हो रही थीं।

    विक्रम शैंपेन के दो ग्लास लेकर आया। उसका लंड पहले से ही लुंगी में तना हुआ था।

    “आज पूरा थ्रीसम होगा,” विक्रम ने कहा और मुझे अपनी तरफ खींच लिया। “प्रिया, तू देखना और एंजॉय करना।”

    मैंने शरमाते हुए सिर हिलाया, लेकिन दिल में डर भी था। “विक्रम… प्लीज… धीरे करना… लावा को भी मत तोड़ देना… तुम गधे की तरह चोदते हो… मैं पहले ही दो रात से सह नहीं पा रही…”

    लावा मुस्कुराई। उसने मेरी नाइट गाउन की स्ट्रैप खींची और मेरे स्तनों को बाहर निकाल लिया। “मैडम… डरो मत… मैं संभाल लूंगी… सर का लंड बहुत पावरफुल है…”

    विक्रम ने मुझे बेड पर लिटा दिया। लावा मेरे ऊपर चढ़ गई। उसने मेरे होंठ चूमे, फिर मेरे स्तनों को चूसने लगी। मैं कांप रही थी।

    “नहीं… लावा… मैं लड़की हूँ… ये… आह्ह… मत चूसो… बहुत जोर से… विक्रम देख रहा है… प्लीज… रुक जाओ…” मैंने कहा, लेकिन मेरी उंगलियाँ लावा के बालों में फंस गईं।

    विक्रम ने अपना लंड बाहर निकाला। 13 इंच का वो विशाल काला लंड देखकर लावा की आँखें चमक उठीं। उसने कंडोम लिया, मुंह से लगाया और पूरा मुंह भरकर चूसने लगी। गला तक ले जा रही थी।

    “उम्म्म… सर… कितना मोटा… मेरी चुत तैयार है…” लावा बोली।

    विक्रम ने लावा को मेरे बगल में लिटाया और उसकी टांगें फैला दीं। एक जोरदार धक्का।

    “आआह्ह… सर… पूरा घुस गया… हाँ… जोर से चोदिए…” लावा चीखी।

    विक्रम ने घोड़े जैसी रफ्तार पकड़ ली। पच… पच… पच… पच… कमरा आवाजों से भर गया। लावा की चुत से सफेद फेन निकल रहा था।

    मैं बगल में लेटी देख रही थी। मेरी चुत गीली हो गई थी। विक्रम ने मुझे बुलाया, “प्रिया… आ… लावा के स्तन चूस…”

    “नहीं… विक्रम… मैं नहीं कर सकती… ये गलत है… प्लीज… मैं सिर्फ देखूंगी…” मैंने मना किया, लेकिन विक्रम ने मेरे सिर को लावा के स्तन पर दबा दिया।

    मैंने अनमने मन से लावा का निप्पल मुंह में लिया और चूसने लगी। “उम्म्म… नहीं… आह्ह… स्वाद… लावा… तुम्हारे स्तन कितने बड़े हैं…”

    विक्रम ने लावा को 20 मिनट तक लगातार चोदा। फिर उसने लावा को उठाकर मुझे बेड के बीच में लिटा दिया। अब दोनों मेरे साथ थे।

    विक्रम ने मेरी टांगें खोलीं और कंडोम लगाकर लंड मेरी चुत पर रख दिया।

    “नहीं… विक्रम… आज मत… मैं अभी भी कल की चुदाई से सूजी हुई हूँ… प्लीज… रुक जाओ… लावा को चोदो… आआह्ह… आधा घुस गया… बहुत मोटा… फट रही है… प्लीज धीरे…” मैं रो पड़ी।

    विक्रम ने आधा लंड अंदर किया ही था कि लावा मेरे मुंह पर बैठ गई। उसकी चुत मेरे होंठों पर।

    “चाटो मैडम… अच्छे से चाटो…” लावा ने कहा और मेरी नाक पर अपनी चुत रगड़ने लगी।

    “नहीं… लावा… मैं नहीं… आह्ह… स्वीट… चूत का रस… उम्म्म… नहीं… मैं पत्नी हूँ… प्लीज… मत दबाओ…” मैं चाट रही थी और विक्रम मेरी चुत में धक्के मार रहा था।

    अब थ्रीसम पूरा शुरू हो गया। विक्रम मेरी चुत चोद रहा था, लावा मेरी चुत चाट रही थी और मैं लावा की चुत चाट रही थी। कमरे में “चुप… चुप… पच… पच…” की आवाजें और हमारी चीखें गूंज रही थीं।

    “आह्ह… विक्रम… नहीं… इतना जोर से मत… मेरी चुत फट जाएगी… लावा… तुम भी मत… आआह्ह… मैं झड़ रही हूँ… प्लीज रुक जाओ… दोनों… मैं सह नहीं पा रही…”

    मेरा पहला ऑर्गेज्म आया। शरीर कांप उठा।

    फिर पोजीशन बदली। विक्रम ने लावा को डॉगी स्टाइल में चोदा और मैं लावा के नीचे लेटकर उसकी चुत चाट रही थी। विक्रम का लंड मेरी जीभ से टकरा रहा था।

    “नहीं… विक्रम… लावा की चुत फाड़ रहे हो… प्लीज धीरे… आह्ह… लावा… तुम चीख क्यों रही हो… हाँ… और चूसो मेरी चुत…”

    दूसरा राउंड। विक्रम ने मुझे और लावा को बगल में लिटाया। एक-एक करके दोनों को चोद रहा था। 10-10 मिनट। कंडोम बदलता जा रहा था।

    “प्रिया… देख… लावा कितना सह ले रही है… तू क्यों नहीं सह पाती?” विक्रम ने हांफते हुए कहा।

    “क्योंकि तुम गधे हो… आह्ह… नहीं… फिर से मेरी बारी… प्लीज… बस 5 मिनट… मेरी चुत जल रही है… लावा… तुम ले लो…”

    तीसरा राउंड। अब मैं विक्रम के ऊपर थी, लावा मेरे पीछे। लावा ने अपना उंगली मेरी गांड में डाल दी।

    “नहीं… लावा… गांड में मत… प्लीज… दर्द हो रहा है… विक्रम… तुम भी मत… आआह्ह… दोनों… मैं मर जाऊँगी… हाँ… और अंदर… नहीं… रुक जाओ…”

    रात 3 बजे तक चला। मैं 7 बार झड़ चुकी थी। लावा 8-9 बार। विक्रम ने आखिर में दोनों के मुंह पर झड़ने की कोशिश की, लेकिन कंडोम में ही झड़ा।

    हम तीनों पसीने से तर, नंगे बेड पर लेटे थे। लावा मेरी छाती पर सिर रखे हुए थी। विक्रम दूसरी तरफ।

    लावा ने फुसफुसाया, “मैडम… कल तीसरी रात भी रहूंगी… सर बहुत पावरफुल हैं… पैसे वसूल कर लूंगी।”

    मैं थकी हुई मुस्कुराई। “हाँ… लेकिन मेरी चुत को आराम दो…”

  • सड़क पर लड़की को पटाकर घर में चोद दिया

    बुर की चुदाई हिंदी में पढ़ें कि कैसे मैंने सडक पर एक लड़की देखी और वो मुझे पसंद आ गयी. उसके बाद मैंने उसे कैसे पटाया और कैसे उसको अपने घर बुलाकर चोदा.

    नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम सचिन है.
    मैं 24 साल का हूँ और हरियाणा के रोहतक जिले का रहने वाला हूँ.

    मेरी पिछली कहानी थी: होटल में गर्लफ्रेंड की सील तोड़ी

    अब मैं एक नयी बुर की चुदाई हिंदी में लिख रहा हूँ. लुत्फ़ लें इस कहानी का!
    खेती हमारा पारिवारिक काम है.
    खेत में काम करते रहने की वजह से मेरा शरीर एक खिलाड़ी टाइप का है, मेरी हाइट 5′ 11″ है और लन्ड का साइज 7 इंच है.

    बात अभी कुछ दिन पहले की है, मैं रोहतक के बाजार में ऐसे ही बाइक पर फालतू में चक्कर लगा रहा था.

    तभी मेरी नज़र एक खूबसूरत सी लड़की पर पड़ी।
    उसका नाम सोनिया(बदला हुआ) जो मुझे बाद में पता चला था।

    उसकी हाइट 5′ 4″ होगी और रंग उसका दूध से भी साफ!
    32-28-32 का फिगर होगा उसका!

    वो एक ऑटो रिक्शा में बैठ कर कहीं जा रही थी।

    मैंने उसके आटो के आगे पीछे चक्कर काटने चालू कर दिया।

    करीब 6-7 चक्कर काटने के बाद उसने मुझे देख होगा।
    फिर तो मेरी 4 बार उससे नजर मिली।

    आगे चल कर वह एक पार्क के सामने उतर गयी।
    वहाँ पर वो किसी आदमी के साथ बाइक पर बैठ कर चली गयी।

    मैंने भी उनके पीछे पीछे चलना शुरू कर दिया।

    सोनिया बार बार मेरी तरफ देख रही थी और धीरे धीरे मुस्कुरा रही थी।

    मैंने सोचा कि मेरा काम बन सकता है।
    पर आगे चल कर वे पता नहीं किस गली में चले गए औऱ मैं उनसे बिछड़ गया।

    मैंने लगभग 1 घण्टा उस कालोनी में चक्कर लगाए लेकिन मेरे हाथ कुछ नहीं लगा।

    घर आकर रात में मैंने उसके नाम की 3 बार बार मुठ मारी और सो गया।
    रात को सपने में भी मुझे सोनिया दिखाई दे रही थी।

    अगले दिन उसी टाइम पर मैं उसी पार्क के आगे पहुँच गया जहाँ पर सोनिया आटो से उतरी थी.
    वहां कोई नहीं था, न ही वहाँ पर वो अंकल थे जिनके पीछे सोनिया बैठ कर गयी थी।

    मैंने करीब एक घण्टा वहाँ पर इंतज़ार किया होगा लेकिन मुझे वो नहीं मिली।
    तीसरे दिन भी मैं वहाँ पर गया लेकिन कुछ नहीं पता चला।

    चौथे दिन मैं फिर से बाजार में ऐसे ही फिर से फालतू में घूम रहा था तो मुझे फिर से सोनिया दिखाई दी।
    हमारी फिर से नज़र से नज़र मिली और सोनिया मुस्कुराने लगी।

    अब मैंने मौका नहीं छोड़ना था।
    मैंने जल्दी से एक दुकान से पैन पेपर लिया और एक पर्ची पर अपना मोबाईल नम्बर लिख कर जेब में डाल लिया और उसके आटो के पीछे चक्कर लगाने लग गया।

    मैंने सोनिया को पर्ची दिखा दी तो वो हंसने लगी।
    शायद उसके मन में भी कुछ था।

    आगे चल कर वो उस पार्क से 150 मीटर पीछे ही उत्तर गयी और पैदल ही पार्क की तरफ चलने लगी।

    मैंने भी उसके पास बाइक ले जाकर उसके सामने पर्ची कर दी।
    उसने झट से मेरे हाथ से परची ले ली।
    फिर वो पार्क के आगे से उस बाइक वाले आदमी के साथ बैठकर चली गयी।

    मैंने पूरी रात उसके फ़ोन का इंतज़ार किया लेकिन उसका कोई फ़ोन नहीं आया।

    फिर मैं उसके नाम की 2 बार मुठ मार कर सो गया।

    अगले दो दिन तक उसकी कोई कॉल नहीं आई.
    अब मैंने भी उम्मीद छोड़ दी थी।

    फिर एक दिन एक अनजान नंबर से कॉल आयी तो मैंने सोचा आ शायद उसी का हो सकता है.
    और वो उसी का फोन था।
    हाय हेलो हुआ … थोड़ी से बातचीत हुई।

    अब लगभग हर रोज मैसेज पर ओर कॉल पर हमारी बाते हों लग गयी थी।

    बातों ही बातों में गाली वगैरा देना और नॉन वेज चुटकुले शेयर करना अब सामान्य सी बात हो गयी थी।

    अब रात को हर रोज की तरह बात करते करते मैं उसको गर्म कर देता था और अपना पानी भी निकल लेता ओर उसका भी निकलवा देता था।

    सोनिया भी मेरे से उतना ही मिलना चाहती थी जितना मैं उससे!

    अब पार्क में मिलना और आपस में चूमाचाटी करना हमारा रोज का काम हो गया था।
    लेकिन हमें सेक्स का मोक्का नहीं मिल पा रहा था।

    एक बार मेरे घर वाले 3-4 दिन के लिए कहीं बाहर जाने वाले थे तो मैंने दुकान का (सॉरी, मैंने बताया नहीं कि खेती से अलग मेरी सी सी टी वी कैमरों की दुकान और है) बहाना मार कर नहीं गया।

    मैंने उसको अपने घर पर आने के लिए मना लिया.

    उसने भी अपनी किसी सहेली की शादी के लिए घर पर बोल दिया और शाम के टाइम ही मेरी बताई जगह पर आ गयी।

    उस दिन उसने स्काई ब्लू जीन्स और सफेद टॉप पहना था।

    हम दोनों मेरे घर पर आ गए, वो अपने साथ शादी में पहनने वाला लाचा भी लेकर आई थी।

    घर आ कर हम दोनों ने कॉफी बनाई और साथ बैठ कर पीने लगे।

    कॉफी पीते पीते मैं उसको छेड़ने लगा तो वो बोली- रुक भी जाओ, सारी रात अपनी ही है।
    लेकिन मैं नहीं माना और उसको पकड़ कर किस करने लगा।

    पहले तो वो थोड़ी ना नुकर करने लगी, फिर वो भी मेरा साथ देने लगी।

    मैंने एक एक करके उसके उसकी जीन्स ऒर टॉप उतार दिया।
    अब वो सिर्फ ब्रा ओर पैंटी में थी।

    उसने मेरे भी कपड़े उतार दिए।

    अब मैं भी ब्रा के ऊपर से ही उसकी चूचियों को मसलने लग गया।

    और जब मैंने उसकी पैंटी के अंदर हाथ दिया तो वो पानी छोड़ चुकी थी।
    मैं अब उसकी चूत में उंगली करने लग गया और उसकी पैंटी भी उतार दी।

    उसने भी अब मेरा अंडरवीयर भी उतर दिया और मेरा लन्ड पकड़ लिया था।
    हम दोनों अब जन्मजात नंगे थे।

    अब मैंने उसको उठाया और अपने बेडरूम में ले गया।
    वहाँ पर उसकी चूत को चाटने लग गया।

    कुछ ही देर में हम दोनों 69 की पोजीशन में आ गये।

    पहले तो उसने लन्ड चूसने से मना कर दिया लेकिन थोड़ा जोर देने पर वो लन्ड को चूसने लग गयी।
    बड़ा गजब से लन्ड चूस रही थी।
    मुझे लन्ड चुसवान में बहुत मज़ा आ रहा था।

    उसके मुंह के अंदर ही मेरा पानी निकल गया।

    तभी उसने सारा का सारा माल अपने मुंह से उल्टी कर दिया और मुझसे लड़ने लग गयी।
    लेकिन फिर बाद में मैंने उसकी चूत चाट कर और उसका पानी पीकर मना लिया।

    अब वो फिर से मेरा लन्ड चूसने लग गयी।

    थोड़ी देर में मेरा लन्ड दोबारा पूरा तन चुका था।
    अब सोनिया बार बार अपनी कमर उठा कर लन्ड को चूत में आने का न्योता दे रही थी।

    मैंने भी उसकी दोनों टांगों को उठाया और उसकी चूत की फांकों के अंदर लन्ड को एडजस्ट किया और एक जोर का झटका दे मारा.
    मेरा आधा लन्ड उसकी चूत के अंदर!

    सोनिया ने बड़ी जोर से चीख मारी.
    मैंने जल्दी से उसके होंठों को अपने होंठों से दबाया और दो मिनट तक ऐसे ही उसके ऊपर पड़ा रहा।
    टीवी का रिमोट पास ही पडा था तो मैंने टीवी चला कर उसकी आवाज़ तेज़ कर दी।

    सोनिया को थोड़ा आराम मिलने के बाद बोली- आराम से करो! अभी तक मैंने सिर्फ गाजर मूली से काम चलाया है लन्ड नहीं लिया है किसी का!

    मैं उसकी चूचियों को छेड़ने लग गया।

    सोनिया को थोड़ा आराम मिलने के बाद बिना बताए मैंने एक और जोर का झटका मार दिया.
    अब उसके चिललाने से कोई फर्क नहीं पड़ रहा था। अब मैंने उसकी ताबड़ तोड़ चुदाई चालू कर दी।

    इस बीच सोनिया झड़ गयी।
    मैं भी थोड़ा थक गया था।

    अब मैंने सोनिया को पेट के बल लेटाकर पीछे से उसकी चूत मारनी चालू कर दी।

    कुछ मिनट बाद जब मैं झड़ने वाला था तो मैंने सोनिया से पूछा.
    तो सोनिया बोली- अंदर ही निकालना … मैं पहली बार पूरा फील लेना चाहती हूँ।

    मैं उसकी चूत में ही झड़ गया।
    हम दोनों उठे तो देखा कि चादर पर खून के धब्बे पड़ गये थे।

    सोनिया से चला भी नहीं जा रहा था।
    मैं उसको पकड़ कर वाशरूम तक ले गया और वहीं पर फव्वारे के नीचे हम दोनों नहाने लग गए।

    वहीं बाथरूम में ही मैंने उसको एक बार फिर से चोदा।

    अब हम दोनों थक कर सो गए।

    सुबह जब मैं उठा तो सोनिया मेरे से पहले उठ कर खाना बना रही थी।

    सोनिया ने मुझे बताया कि रात को उसके गाँव में किसी को मौत हो गयी है. सभी घर वाले रात को ही गाँव जा चुके है वे कल तक आएंगे. मुझे मेरी सहेली के ही घर रुकने को बोला है।

    अब हमारे पास एक पूरा दिन और एक पूरी रात ओर थी।

    फिर हमने एक बार ओर सेक्स किया और पूरा दिन आराम करते रहे।

    शाम को मैं थोड़ी देर बाजार से कुछ खाने का सामान लेने चला गया।

    बाजार से आने के बाद देखा कि सोनिया लाचा पहने घूम रही थी।
    क्या गजब की लग रही थी … जी कर रहा था कि अभी पकड़ कर चोद दूँ!

    लेकिन मैंने थोड़ा इंतज़ार करना ही ठीक समझा.

    रात को खाना खाने के बाद हम दोनों फिर एक दूसरे को किस करने लगे.

    एक बार चूत चुदाई हो जाने के बाद अब मेरा दिल उसकी गांड मारने का कर रहा था.
    तो मैंने उसे अपनी इच्छा बतायी.

    पहले तो सोनिया गांड मरवाने से मना करने लगी क्योंकि उसने अपनी सहेलियों और भाभी से सुन रखा था कि गांड में लंड लेने से बहुत दर्द होता है.
    लेकिन थोड़ा सा ज़ोर देने कर बाद वो मान गयी.

    अब मैं उसकी गांड में तेल डाल कर गांड में उंगली करने लग गया.
    पहले तो उसको उंगली में भी थोड़ा दर्द हो रहा था लेकिन बाद में उसकी गांड थोड़ी ढीली पड़ गयी।

    अब मैंने उसकी गांड के छेद में अपना लौड़े का सुपारा एडजस्ट करके थोड़ा जोर लगाया लेकिन लन्ड फिसल गया।

    तब सोनिया ने अपने दोनों चूतड़ों को पकड़ कर गांड के छेद को चौड़ा किया.
    मैंने भी लन्ड छेद पर लगाकर जोर लगाया तो लंड धीमे धीमे उसकी गांड में घुसाने लगा और वो दर्द से कराहने लगी.

    मेरा आधा लन्ड की गांड में घुस गया।
    उसकी गांड से खून आने लग गया था और उसकी आँखों से पानी!

    थोड़ी देर मैं ऐसे ही रुक रहा … फिर उसने धीरे धीरे कमर हिलाना चालू किया तो मैंने एक झटका ओर मार दिया.

    अब मेरा पूरा लन्ड उसकी गांड में जा चुका था.

    थोड़ी देर हल्के हल्के झटके मारने के बाद उसे भी मज़ा आने लग गया था।
    तब मैंने भी थोड़ा जोर जोर से झटके मारने चालू कर दिए और थोड़ी देर बाद उसकी गांड में ही झड़ गया।

    उस दिन और रात मैंने उसकी 2 बार चूत और 2 बार गांड मारी।
    अब तो चुदाई का खेल हमारे लिए हर हफ्ते का खेल हो गया था।

    हमारी दोस्ती करीब 5 महीने तक रही. फिर हमारे बीच में कुछ गलतफहमी होने के कारण अब हम दोनों दूर हो चुके हैं।

    उसको एक नया बॉयफ्रेंड मिल गया, लेकिन मैं अभी भी अकेला हूँ।

  • चोदना था गर्लफ्रेंड को चुद गयी उसकी मम्मी

    गर्लफ्रेंड मॉम सेक्स कहानी में पढ़ें कि मेरे गाँव के स्कूल की दोस्त मुझे शहर में मिल गयी. हमारी आपस में सेटिंग हो गयी. मैं उसकी चुदाई करना चाहता था पर …

    हाय दोस्तो, मैं राहुल वैद्या, उम्र 26 वर्ष, हाइट 5 फीट 10 इंच, रंग गोरा!
    मैं एक गांव में रहने वाला लड़का हूँ।

    यह कहानी शत प्रतिशत सही है, इस गर्लफ्रेंड मॉम सेक्स कहानी में केवल सभी पात्रों के नाम और जगह का नाम गोपनीयता के लिए बदल दिए गए हैं।

    बात उन दिनों की है जब इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए शहर में रहता था. मैं इंजीनियरिंग के चौथा सेमेस्टर में था.

    तब अचानक एक दिन शहर के सब्जी बाजार में मेरी एक स्कूल की फ्रेंड जिसका नाम रेशमा था, वो मुझे मिल गयी।

    रेशमा के पापा सरकारी नौकरी वाले हैं तो पहले वो हमारे गाँव में उनका पोस्टिंग था तो उस समय रेशमा हमारे स्कूल में ही पढ़ती थी।
    फिर जब हम लोग नवमी कक्षा में आये तो उनके पापा का ट्रांसफर हो गया।

    तब उनकी फैमिली सभी शहर में आ गयी. उसके बाद सब्जी मार्किट में अचानक उससे मिला.
    5 साल के लंबे अंतराल के बाद उसे देखा बहुत चेंज हो गयी थी, अब वो माल बन गयी थी।

    मैं पहले से ही उसको पसंद करता था लेकिन तब तक इतनी हिम्मत नहीं थी उसको इजहार करूँ।
    अचानक मिले तो दोनों ही हैरान हो गए।

    उसने मुझसे हाथ मिलाया.
    काफ़ी देर तक हमने वहीं बात की फिर दोनों ने नम्बर एक्सचेंज किया. हम दोनों ने फिर से मिलने का वादा किया.
    फिर हम दोनों अपने अपने घर आ गए।

    उससे मिलने के बाद मुझे बहुत ही बेचैनी हुई उससे बात करने की लेकिन हिम्मत नहीं हो पा रही थी।
    लगता है कि जो मुझे फील हो रहा था उसे भी कुछ ऐसा ही एहसास हो रहा था।

    तब रात को 10 बजे रेशमा का कॉल आया।
    हमने बात करना शुरू किया. उस दिन लगातार एक घंटा बातें की, हमने पुरानी बातें याद की हमारे स्कूल की … पुरानी यादों को याद करने लगे।

    बातों बातों में मैंने उसकी तारीफ करना चालू कर दिया- यार रेशमा, आप मुझे स्कूल लाइफ से ही बहुत अच्छी लगती हो, आप बहुत सुंदर हो!
    उसने हंसते हुए कहा- चल झूठा।
    मैंने कहा- सच्ची यार।

    फिर वो कहने लगी- तुम भी कम नहीं हो किसी से, हैंडसम इंटेलीजेंट!

    यूँ ही हमारी बातें चलती रही. जितनी बातें हमने स्कूल की लाइफ में नहीं की, उससे ज्यादा हमने 2 घंटे में ही कर दी.
    मैं जिस एरिया से बिलोंग करता था, वहाँ लड़के अगर लड़कियों से बात करे, हाथ मिलाये मतलब उन दोनों के बीच कोई न कोई चक्कर है.
    ऐसा माना जाता था स्कूल लाइफ में।

    बीच में रास्ता खराब था जिसकी वजह से बार आंटी की चूचियां मेरी पीठ दब जाती थी. जिससे मुझे बहुत ही आनंद का अनुभव होता था।

    11 बजे हम घर पहुंच गए.
    मैंने रेशमा को काल करके बताया कि हम लोग पहुंच गए।

    वहाँ पहुंचे तो रेशमा के बड़े पापा और उसकी बड़ी माँ से मिलकर उनको प्रणाम किया।

    फिर हम लोग फ्रेश होकर दोपहर का भोजन करके आराम करने लगी।
    लंबा सफर होने की वजह से थकावट बहुत थी।

    रेशमा के गांव के घर में 3 कमरे थे, एक में उसके बड़े पापा मम्मी और एक रेशमा के परिवार का था, जब भी ये लोग आते थे, वहीं रहते थे।

    रात में भोजन के बाद मैं अपना समान गेस्टरूम में ले जा रहा था.

    तभी आँटी ने कहा- बेटा, कहाँ जा रहा है?
    तो मैंने कहा- आँटी गेस्ट रूम में सोने!
    उन्होंने कहा- बेटा, मुझे अकेले सोने की आदत नहीं है. मेरे रूम में कोई न कोई सोता है तब अच्छा लगता है. इधर मैंने बगल में बिस्तर लगा दिया है, यहाँ सो जा।
    तो मैं वहाँ सो गया।

    मैं आँटी से जब से मिला, तबसे उनको चोदने की मेरी इच्छा तो बहुत थी लेकिन मैंने ‘रेशमा की माँ है’ सोच कर के कभी ट्राय नहीं किया.
    और डर भी लगता था कि कहीं लेने के देने ना पड़ जायें।

    अगले दिन मैं सुबह 8 बजे उठा आँटी उठ गई थी.
    रेशमा के बड़े पापा और बड़ी माँ कहीं बाहर चले गए थे।

    मैं बाड़ी के तरफ गया तो देखा आँटी अपने साड़ी और पेटीकोट अपने घुटनों के ऊपर जांघों तक चढ़ाकर नीचे बैठकर बर्तन धो रही थी।

    आँटी को ऐसी अवस्था में देखकर मेरा लंड खड़ा हो गया.
    आप लोग जानते हो कि गांव में बेसिन वगैरा नहीं होता तो गांव की महिलायें जमीन पर बैठकर बर्तन धोती हैं।

    मुझे वो देख नहीं रही थी.

    फिर वो उठी और उसने फिर साड़ी और पेटिकोट को चढ़ा कर अपने कमर पे अटका दिया।

    उनकी गदरायी हुई माँसल जांघों को देखकर मेरा लंड पैंट में पूरी तरह खड़ा हो गया।

    फिर उन्होंने मुझे देखा और कहा- बेटा उठ गए … चलो मुंह हाथ धो लो … मैं चाय बना देती हूँ तुम्हारे लिए!

    उनकी नजर मेरे शार्ट्स पर पड़ी.
    मेरा खड़ा लंड ऊपर से ही पता चल रहा था.
    वो उसे देखकर मुस्कुरा रही थी।

    पानी भरने तक मैंने उनकी जांघों को देखा.
    फिर मैंने टॉयलेट में जाकर मुठ मारी. तब मेरा लंड शांत हुआ।

    थोड़ी देर बाद आँटी नहाने बाड़ी में गयी वो पेटीकोट को अपने वक्ष पर बांध कर नहा रही थी.
    मैं बाड़ी में गया तो उनके भीगे अधनंगे जिस्म को देखकर मैं पागल हो गया।

    फिर शाम को बड़े पापा, माँ आ गए.
    हमने रात का भोजन किया.

    फिर 9 बजे आँटी उठकर बाड़ी की तरफ गयी.
    आधा घंटा से ज्यादा हो गया था, वो वापिस नहीं आई।
    गांव में 9 बजे से ही सब सो जाते हैं.

    तो मैंने जाकर देखा तो बड़े पापा और आँटी की बातें चल रही थी।

    बड़े पापा आँटी को बोल रहे थे- यहां क्यों आई है? चुदवाने आयी है तो क्यों नहीं दे रही है जानेमन?

    आँटी ने कहा- मैं तो चाहती हूं कि आप मुझे चोदो. लेकिन ये राहुल आया है, उसने देख लिया तो … और रेशमा को बता दिया तो फिर तो हमारी बैंड बज जाएगी।

    तब आँटी ने कहा- 3 बजे रात को आप गेस्टरूम में आना, मैं वहीं मिलूँगी।

    फिर क्या था … मैं उनके बारे में जान गया कि वो बहुत बड़ी रांड है।
    और इसको बड़े पापा से नहीं अब मुझसे चुदना होगा … मैं इनकी जेठ से चुदाई आज होने नहीं दूँगा।

    फिर मैं बाड़ी तरफ गया अनजान बनते हुए!
    मुझे देख वे दोनों छुप गए.

    मैं अपना लंड निकाल के वहीं पे मूतने लगा.
    मेरा लंड खड़ा था, उसे देखकर आँटी के मुंह में पानी आ गया।

    फिर मैं वहाँ से आ गया.
    तुरंत आँटी भी आकर सो गई।

    मैं जागता रहा था.
    3 बजे आंटी अपने जेठ का लंड लेने जाने लगी तो तभी मैंने उनको बोला- कहाँ जा रहे हो?
    आँटी- कही नहीं बेटा … वॉशरूम जा रही हूं।

    फिर मैंने उनका पीछा किया, वो गेस्टरूम में गयी.
    वहाँ अंकल थे.

    अंकल ने उन्हें जाते ही पकड़ लिया.
    फिर आँटी ने कहा- नहीं, हम लोग आज नहीं कर सकते क्योंकि राहुल जग रहा है। मैं अभी आ रही थी तो उसने मुझसे पूछा कि कहाँ जा रही हो आँटी. मैं उससे वाशरूम कहकर आई हूँ. लेट हुई तो वो फिर मुझसे कहेगा।

    इस बात पर बड़े पापा भड़क गए- तू ही मुझे चूत देना नहीं चाहती. इसलिये बहाने मारती है. तू उसी को चूत देती होगी।

    आँटी ने कहा- तुमको नहीं देना रहता तो गांव नहीं आती. और दूसरी बात … उससे चुदना होता तो रूम में ही चुद लेती चिल्ला चिल्ला के … क्योंकि उसका लंड आपसे बहुत बड़ा है, अपने खुद देखा अभी मूतने आया था तब! अब मैं जा रही हूं. आज के बाद आपसे कभी नहीं चुदूँगी.

    इतना बोलकर आंटी आकर सो गई।
    मैं तो मन ही मन खुश हो गया।

    फिर अगले दिन से पता नहीं आँटी का व्यवहार मेरे लिए बहुत चेंज हो गया. वो जो बेटा बेटा बोलती थी, अब राहुल कहने लगी।
    नहाने के समय अपने पेटिकोट को पूरा ऊपर चढ़ाकर अपने जांघों में साबुन लगाने लगी। मुझसे एकदम सट कर बैठती … अपनी नंगी जांघों में मेरे सामने तेल लगाती।

    उनको इस तरह से मेरे सामने अपने जिस्म की नुमाइश करते देखकर आज मेरा मूड बदल गया था.
    “आज रात में उनको चोदना ही है. पर पटाऊं कैसे?” मैं ये सोचने लगा।

    आँटी का दिमाग बहुत खराब था क्योंकि वो जिस मकसद से गांव आयी थी वो मकसद पूरा नहीं हुआ.
    वो सो गई।

    मेरी सबसे बड़ी कमजोरी महिलाओं की लंबी गदराई हुई टांग और जांघें हैं. औरतों के बूब्स देखकर मेरा लंड खड़ा नहीं होता।
    अगर मुझे नंगी जांघे दिख जाएँ तो मैं बगैर मुठ मारे शांत नहीं हो सकता।

    रात के जैसे ही 9:30 हुए, मैंने सोच लिया कि कुछ भी हो जाये आज आँटी को चोदकर ही रहूंगा।

    फिर मैं उनके पलँग के करीब गया.
    आँटी की साड़ी घुटनों तक उठी हुई थी।

    मैं अपने मोबाइल का फ़्लैश लाइट ऑन करके उनकी टांगों करीब से देखने लगा.
    धीरे धीरे करके मैंने आँटी की साड़ी को पूरा जाँघों तक ऊपर उठा दिया।

    मैं आंटी की नंगी टांगें एकदम करीब से देख रहा था. साथ में एक हाथ से मैं अपने हथियार को मसल रहा था।

    फिर मैं फ़्लैश लाइट ऑफ करके उनकी टांगों को नाक से करीब के सूंघने लगा और जोश में आकर मैंने उनकी साड़ी पूरी तरह से ऊपर करने की कोशिश की।

    तभी आँटी झनझना कर उठ गई और उन्होंने तुरंत रूम की लाइट ऑन कर दिया।
    आँटी ने कहा- ये क्या कर रहे हो राहुल ?ये सब गलत है … मैं तुम्हारी माँ की तरह हूँ।

    मैं उनके करीब गया, उनके हाथों को पकड़ लिया और कहा- आँटी, आप बहुत खूबसूरत हैं. आप मुझे बेहद अच्छी लगती हो।
    “नहीं राहुल … मैं तुम्हारे साथ ये सब कर नहीं सकती. तुम मेरे बेटे जैसे हो।”

    फिर मैंने उनसे कहा- अच्छा जी, आपकी कल की रात की बातें मैं अगर रेशमा को बता दूं जो आपके और बड़े पापा के बीच हुआ बाड़ी में?

    वो बोलने लगी- कैसी बातें?
    मैंने कहा- आंटी आप कब से चुद रही हो अपने जेठ से?

    मैंने कहा- आप माल ही ऐसी हो जिसे प्यार से, आराम से, इत्मीनान से खाया जाए।
    फिर मैं बूब्स को छोड़कर उनकी चूत चाटने लगा.

    सबसे पहले जब मैंने उनकी चूत में जीभ लगाई तो वो कहने लगी- ऐसे कौन करता है?
    मैंने कहा- जानेमन, सेक्स में औरत को चोदने से पहले उनके शरीर के हर एक अंग को चूमकर चाटकर जब तक रोमांचित न करो तो वो सेक्स अधूरा है।

    “वाकयी में राहुल … तुम खूब मजा दे रहे हो मुझे!”

    मैं उनकी चूत को चाट रहा था.

    फिर मैंने अपनी जीभ गांड के छेद में डाल दी.
    वो पागल हो गई।

    फिर मैंने उनको अपना लंड चूसने को कहा.
    उन्होंने शुरु में मना किया, फिर जिद करने पे मान गई।
    वो मेरे लंड को चूसने लगी बेतहाशा!

    फिर हम दोनों 69 की पोजीशन में आ गए और एक दूसरे को चाटने चूसने लगे.
    कुछ देर में ही हम दोनों एक साथ एक दूसरे के मुंह में झड़ गए।

    मैंने उनका सारा रस पी लिया. मुझे देखकर वो पी मेरे पूरा वीर्य पी गयी।

    थोड़ी देर के बाद हम दोनों फिर गर्म हो गए. मैं उनकी चूत के ऊपर लंड को ले जाकर घिसने लगा.
    तो वो कहने लगी- जान अब तो डाल दो. मैं तुम्हारे इस विशाल लंड को अपनी चूत में कब से लेना चाह रही हूं।

    मैंने उनकी चूत के छेद में लंड टिकाकर एक जोर का झटका दिया.
    वो जोर से चिल्ला पड़ी- मार दिया रे … आराम से नहीं डाल सकता कुत्ते? इतना बड़ा मूसल लंड है तेरा … एक बार में कहाँ घुसेगा।

    फिर मैं धीरे धीरे उनके चूत में अपना लंड डालने लगा वो धीरे धीरे चीखने लगी- आह आह … चोद राहुल चोद!

    मैंने धीरे धीरे स्पीड बढ़ायी तो वो कहने लगी- और जोर से चोद राहुल … और जोर से!

    आंटी की चुदाई की चीख सुनकर बड़े पापा आ गए.
    वो हमें खिड़की से देखने लगे.

    मैं उनको देखकर और जोर जोर से चोद रहा था.

    फिर मैंने कहा- जानू मुझे लाइट चालू करके आपके बदन को देखते हुए चोदना है।
    मैंने लाइट आन कर ली.

    मेरा जोश और बढ़ गया.
    इधर जोरदार चुदाई चल रही थी, उधर बड़े पापा हमें देखकर अपने आप को कोस रहे थे।

    मैं आंटी के होंठों को चूमते हुए चोद रहा था।

    फिर वो कहने लगी- जोर से चोद मुझे मेरी जान … आज मेरी चूत का भोसड़ा बना दे।

    मैं भी उनको कहने लगा- हाँ जानू, आज तुम्हें मेरी रांड बनाऊंगा. तुम्हें देखकर किसी का भी लंड खड़ा हो जाए. आप विशाल गोल गोल चूचों की मालकिन हो … बड़ी सी गांड की मालकिन हो … आपकी गदरायी माँसल जांघों ने मुझे सबसे ज्यादा पागल बनाया!

    फिर मैंने उनसे कहा- आप मेरे लंड पर बैठ जाओ!
    वो मेरे ऊपर आकर मेरा लंड अपनी चूत में टिकाकर बैठ गयी और कूदने लगी.

    उसी दौरान उन्होंने बड़े पापा को देख लिया. फिर वो उनको दिखा दिखाकर और जोर जोर कूदने लगी।

    फिर मैंने उनको गोदी में उठा लिया और गोदी में उठाकर चोदने लगा.
    वो इस पोज़ से बहुत खुश हुई और कहा- मेरी जान, ये मेरा बेस्ट पोज़ है जो आज तुम्हारे द्वारा पहली बार मुझे मिला।

    इसी तरह हम दोनों घनघोर चुदाई के सागर में डूब गए.
    वो झड़ गयी जिससे मेरा लंड उसके चूत में आसानी से फिसल रहा था पूरा!
    फच फच की आवाज आ रही थी और मेरा लंड उसके चूत में गच गच जा रहा था।

    फिर मैं भी झड़ने वाला था तो मैंने स्पीड और बढ़ा दी.
    तो वो बोली- अमेजिंग जानू … मेरे अंदर ही डालना तुम्हारा सारा माल!

    मैंने सारा माल आंटी की चूत में छोड़ दिया।
    फिर उसी तरह हम दोनों नंगे ही एक दूसरे से चिपककर सो गए।

    थोड़ी देर बाद मैंने उनसे पूछा- बेबी आप इतनी माल चीज हो. तो आपको अंकल अच्छे से नहीं चोदते क्या जो इधर उधर मुंह मारती हो?
    उन्होंने कहा- चोदना तो दूर … छूते ही नहीं! पहले 4 बच्चे पैदा करने तक खूब चोदे. तब जाके 4 बच्चे हुए. जोरदार चुदाई की आदत तो उन्होंने ही मुझे डाली थी. पर अब अचानक चोदना छोड़ दिए तो मेरी शरीर की जरूरत थी तो कैसे करती। बच्चे होने के बाद सरकारी क्वाटर में जगह तो भी नहीं होती चुदाई के लिए … बच्चों के सामने तो नहीं चोद सकते … इसलिये बंद हो गया। सच बताऊं तो इतने दिनों बाद मुझे आज सही चुदाई मिली।

    मैंने उनको उस रात 3 बार चोदा … हम रात भर सोये नहीं।
    सुबह 6 बजे सोये!

    9 बजे हमे बड़े पापा उठाने आये.
    हम दोनों एक दूसरे से लिपटकर नंगे सोये थे।
    उन्होंने हमें उठाया.

    फिर हम दोनों उठे. उनके सामने आँटी ने मुझे लिप किस किया और कहा- इतनी हसीन रात के लिए धन्यवाद जानू! अब तुम मेरे हर रात के राजा हो।

    इसके बाद तो हम दोनों गांव में पाँच दिन और रुके. पांचों दिन हमने फुल चुदाई की.

    फिर रेशमा के पापा का कॉल आया, उन्होंने हमें शहर बुलाया.
    तो हम लोग शहर आ गए।

    इसके बाद से हम दोनों एक दूसरे से जब चाहे तब अपने जिस्म की प्यास बुझाते।
    गर्लफ्रेंड मॉम सेक्स की यह बात किसी को पता नहीं चली सिवाय उसके बड़े पापा के … लेकिन वो खुद किसी को बता नहीं सकते थे।

  • दिव्या मामी को सुहागरात की तरह चोदा

    हैल्लो दोस्तों आप सभी आंटी, दीदी, भाभी और लड़कियों के लिए में अभी यहाँ पर नया आया हूँ तो प्लीज आप सभी मेरा थोड़ा ख्याल रखना। अब में आप सभी को थोड़ा बहुत अपने बारे में बताता हूँ, दोस्तों में 33 साल का एक नौजवान लड़का हूँ और अभी तक कुंवारा हूँ मेरा नाम राज है और में आगरा का रहने वाला हूँ, मेरी हाईट 5 फीट 8 इंच है मेरा रंग गोरा है और मेरा लंड 7.5 इंच लंबा है और 3.5 इंच मोटा भी है। दोस्तों में हमेशा से ही नाभि का बहुत दिवाना हूँ मुझे गहरी और लम्बी नाभि बहुत पसंद है, नाभि इतनी बड़ी हो कि उसमे नींबू पूरा आ जाए फिर चाहे वो नाभि किसी लड़की, आंटी, भाभी और दीदी किसी की ही क्यों ना हो मुझे बहुत अच्छी लगती है। मुझे उसे चूसने को, चाटने को, काटने को, देखने को, इतना दिल करता है कि बस में नाभि के पास ही बैठा रहूँ, तो यह था मेरा पूरा परिचय और अब में अपनी कहानी पर आता हूँ यह मेरी चोद्काम डॉट कॉम पर पहली कहानी है जो कि करीब दस साल पहले की है यानी कि 2003 की तब मेरी उम्र 23 साल थी में उस समय अपनी पढ़ाई करने चंडीगढ़ अपने मामा के घर पर गया हुआ था क्योंकि आगरा के कुछ दोस्तों के साथ मेरी उस समय लड़ाई झगड़े हो गये थे इसलिए पापा ने मुझे चंडीगढ़ पढ़ाई करने भेज दिया था।
    दोस्तों में अपने मामा के पास पहली बार गया था और मैंने मामा और मामी को पहली बार देखा था। में 10 जून 2003 को चंडीगढ़ के लिए निकल पड़ा और 11 जून 2003 की सुबह में चंडीगढ़ पहुंच गया। वहाँ पर मामा ने अपने ड्राइवर को गाड़ी से मुझे घर पर लाने के लिए भेज दिया था, ड्राइवर ने मुझे अपने साथ में लिया और घर की तरफ निकल पड़ा में जैसे ही घर पर पहुंचा तो मेरी मामी बाहर आई और मुझसे बोली कि वहीं पर रुक जाओ। तो में वहीं पर रुक गया और वो एक आरती की थाली लेकर आई और उन्होंने मेरी आरती की और बोली कि हाँ अब अंदर आ जाओ। दोस्तों मेरी मामी का नाम दिव्या है और उनकी उम्र 35 साल है उनका रंग गोरा है और बदन बहुत सेक्सी है और उनके फिगर का साईज 36-30-32 था। दोस्तों मेरी मामी का फिगर बिल्कुल वैसा था जैसा में चाहता था। तभी अचानक जैसे ही मामी अंदर की तरफ बड़ी तो उनकी कमर पर लगा चाबी का गुच्छा निकलकर नीचे गिर गया और मामी उस गुच्छे को जैसे ही उठाने के लिए नीचे झुकी तो मुझे उनके बूब्स दिख गये। वाह दोस्तों क्या बूब्स थे एकदम गोरे और बड़े जैसे पका हुआ पपीता हो, लेकिन जब वो चाबी उठाकर उठी तब उनके पेट से साड़ी हट गई और मैंने उनकी नाभि को देख लिया उनकी नाभि करीब दो इंच गहरी और तीन इंच लंबी एकदम गोल थी और उसे देखकर मेरा लंड धीरे धीरे टाईट होने लगा। मुझे ऐसा लग रहा था कि मामी अपनी नाभि रोज़ मामा के लंड से चुदवाती है।

    फिर में नज़र नीचे करके अंदर चला गया, मामी बोली कि तुम बैठ जाओ में तुम्हारे लिए नाश्ता लाती हूँ मैंने उनसे पूछा कि मामा कहाँ है? तो मामी ने मुझे बताया कि मामा किसी काम के सिलसिले में दुबई गए हुए है और एक महीने बाद लोटेंगे। अब मैंने जैसे ही उनके मुहं से यह सब सुना मेरे मुहं में पानी आ गया में सोचने लगा कि में मामी को जरुर पटाउंगा और फिर शाम हुई और रात भी हो गई तो में उस समय अपने कमरे में था तो मामी ने आवाज़ लगाई कि राजा आ जाओ खाना खा लो, में अंदर गया और मैंने देखा कि मामी ने जीन्स और टॉप पहन रखा था वो टॉप एकदम टाईट था जिसमे से बूब्स बाहर आने को तड़प रहे थे और ब्रा की डोरी साफ साफ दिख रही थी और वो जीन्स मामी ने नाभि से करीब पांच इंच नीचे पहनी हुई थी जिससे नाभि साफ साफ दिखे, मुझे लगा कि शायद मामी को पता लग गया है कि में उनकी नाभि को देखना पसंद करता हूँ और जब में उनकी नाभि देख रहा था तो उन्होंने मुझे यह सब करते हुए देख लिया था और फिर हम लोग खाना खाने लगे और खाना खाने के बाद में अपने कमरे में चला गया। फिर रात को करीब 9 बजे मामी के कमरे में से आवाज़ आई कि राजा यहाँ आओ। तो में उनके कमरे के अंदर चला गया और मैंने देखा कि मामी ने उस समय मेक्सी पहन रखी थी और वो भी पूरी जालीदार जिसमे उनकी स्टाइलिश ब्रा और पेंटी साफ साफ नज़र आ रही थी। फिर मामी मुझसे मुस्कुराकर बोली कि दूर से देखते रहोगे क्या आओ राजा यहाँ पर बैठो।

    फिर मैंने पूछा कि जी मामी आपने मुझे क्यों बुलाया? मामी बोली कि मुझे अकेले सोने में बहुत डर लग रहा था तो मैंने सोचा कि तुम भी यहीं पर सो जाओ तो मुझे भी डर कम लगेगा और तुम्हे भी अच्छी नींद आ जाएगी। तो मैंने कहा कि ठीक है में सोफे पर सो जाता हूँ, तभी वो बोली कि अरे नहीं तुम मेरे पास यहीं बेड पर सो जाओ, तो मैंने कहा कि नहीं और फिर वो बोली कि लेकिन क्यों नहीं तुम मेरे पास क्यों नहीं सो सकते? तो मैंने कहा कि जी सो सकता हूँ। तो वो बोली कि फिर तुम अब ज्यादा सोचो मत और में उनके सो गया। तभी मामी मुझसे पूछने लगी कि क्यों सो गये? में बोला कि नहीं, तो मामी बोली कि कुछ अपने बारे में बताओ ना तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है या नहीं? में बोला कि नहीं मामी मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है। तो मामी बोली कि तुमने क्या कभी सेक्स भी नहीं किया है? क्या मामी आप मुझसे यह क्या पूछ रही हो? तो वो बोली कि हाँ मैंने तुमसे पूछा कि तुमने कभी सेक्स किया है कि नहीं? क्या तुम करना चाहोगे? तो मैंने पूछा कि किसके साथ? मामी बोली कि मेरे साथ, में बोला कि नहीं में आपके साथ यह सब कैसे कर सकता हूँ? तो वो बोली कि क्यों नहीं कर सकते? सुबह और अभी बाहर मेरी नाभि और बूब्स को तो तुम बहुत घूरकर देख रहे थे क्या तब तुम्हारे मन में सेक्स की भावना नहीं आ रही थी? दोस्तों मैंने सोचा कि यह एक बहुत अच्छा मौका है हाथ से मत जाने दो। तभी मैंने कहा कि लेकिन मेरी एक शर्त है कि में आपको शादी के जोड़े में सुहागरात की तरह चोदना चाहता हूँ। तो मामी बोली कि बहुत अच्छे, मुझे यह सुनकर बहुत अच्छा लगा, तुम बहुत सेक्सी हो में एक घंटे में तैयार होकर तुम्हे अंदर बुलाती हूँ।

    फिर मामी ने तैयार होकर मुझे आवाज़ लगाई आ जाओ जी में जब अंदर गया तो उन्होंने मेरे पैर छुए और मुझसे बोली कि तुम मेरी माँग भरो तब में तुम्हे सुहागरात मनाने दूँगी। अब में बोला कि ठीक है और मैंने उनकी माँग भर दी और फिर मैंने मामी को बिस्तर पर लेटा दिया मैंने देखा कि मामी ने लहंगा पहन रखा है और वो भी पीछे से पूरा खुला हुआ और पीछे सिर्फ़ दो डोरी से चोली बंधी हुई थी और ब्रा नहीं पहनी थी और चोली में से बहुत हद तक बूब्स बाहर आ रहे थे और जब मैंने नीचे की तरफ देखा तो उनका लहंगा नाभि से 6 इंच नीचे बंधा हुआ था चूत से थोड़ा ही उपर यह सब देखने में बहुत सेक्सी था और उससे भी कहीं ज्यादा सेक्सी लग रही थी उनकी गहरी नाभि जो कि अब उनके लेटे हुए होने की वजह से और भी गहरी हो गई थी। फिर मैंने पूछा कि मामी आपकी नाभि इतनी गहरी कैसे हुई? सबसे पहले तो मामी बोली कि मुझे तुम अब मामी मत बोलो, मुझे सिर्फ दिव्या बोलो और आप नहीं तुम या तू बोलो ठीक है। तो मैंने कहा कि ठीक है और फिर दिव्या बोली कि तुम्हारे मामा मेरी नाभि रोज़ चूसते चाटते और चोदते है तो फिर यह बड़ी क्यों नहीं होगी? दिव्या बोली कि तुम्हे मेरी नाभि क्यों पसंद है? तो मैंने कहा कि क्योंकि तुम्हारी नाभि बहुत बड़ी है और मुझे ठीक ऐसी ही नाभि बहुत पसंद है। फिर वो बोली कि पसंद है तो कुछ करो ना जानू, क्यों अब किस बात की देर है? तो दोस्तों जैसे ही मामी ने मुझे हुक्म दिया और मैंने उनकी नाभि को चाटना शुरू कर दिया में अब उनकी नाभि चाट रहा था तो मामी के मुहं से सेक्सी आवाज़ आना शुरू हो गई इसस्स्सस्स आअहह उूुुुईईईईईईई मर गई थोड़ा जीभ और अंदर करो ना आह्ह्हह्ह्ह्ह मज़ा आ रहा है, नाभि कहाँ से चूसना सीखा तुमने? तो मैंने कहा कि कहीं से नहीं आपको देखकर अपने आप नाभि चूसने का मन करने लगा। तो वो बोली कि क्या मेरी नाभि इतनी सेक्सी है? मैंने कहा कि हाँ मेरी रानी तेरी नाभि बहुत सेक्सी है। तो वो बोली कि तो थोड़ा और चूस ना, चूस चूसकर इसे लाल कर दो मेरे जानू और फिर मैंने नाभि को काटना शुरू किया, हल्के हल्के मामी के मुहं से आवाज़ आ रही थी हाँ और तेज जानू आहह्ह्ह् उहहह और तेज़।

    फिर वो बोली कि ज़रा मेरी नाभि में उंगली घुमाओ ना और फिर जैसे ही मैंने उंगली डाली मामी बोली कि हाँ और वो मेरी ऊँगली को पकड़ कर और अंदर ले गई और उंगली को नाभि में कसकर जकड़ लिया और मामी बोली कि कोई और दूसरे तरीके से नाभि का मज़ा दो ना। फिर मैंने कहा कि ठीक है फिर मैंने उनकी नाभि में एक चोकलेट खड़ी कर दी और फिर उसे खाता गया और जैसे ही में नाभि के पास पहुंचा वैसे ही नाभि को भी मुहं में भरा और काटने लगा, मामी बोली ऊहहह्ह्ह अह्ह्ह्ह कितना मज़ा आ रहा है जानू उूईईईईइ माँ मरी। फिर मैंने मामी को पलट कर उल्टा कर दिया और उनकी पीठ पर चूमने लगा मामी मुझसे बोली कि चूमो ना जानू और फिर मैंने उनकी पीछे से खुली हुई चोली की दोनों डोरी को खोल दिया और अब चोली को बाहर निकाल दिया ऊओफफफफफ्फ़ वाह क्या बूब्स थे मामी के एकदम बड़े और कसे हुए एकदम गोल, में आखें बन्द करके उन पर टूट पड़ा और उनके बूब्स पर और कसकर चूसने लगा। मामी मुझसे हर बार कर रही थी आआह्ह्ह्हहहह और ज़ोर से चूसो ना आईईईईई। दोस्तों फिर में क्या ज़ोर ज़ोर से बूब्स दबा रहा था और जमकर चूस रहा था और मामी सिसकियों के साथ साथ मोनिंग कर रही थी उूउइईईईईईईईईई आआआहह उूउउफफफफफफफ्फ़।
    फिर मैंने मामी का नाड़ा खोला तो मामी शरमा गई। मैंने मामी का लहंगा उतार दिया और मामी को पूरा नंगा कर दिया वो अब मेरे सामने सिर्फ़ पेंटी में थी और वो भी तीन बार गीली हो चुकी थी। फिर जैसे ही मैंने पेंटी उतारी वैसे ही मामी बोली कि नहीं आज चूत नहीं दूँगी आज मेरा मन सिर्फ़ नाभि सेक्स के लिए है और बूब्स दबाओ और पियो दूध निकल दो मेरे बूब्स से नाभि को चोदकर और गहरा कर दो। तो मैंने उनसे कहा कि तुम तो हर तरफ से सेक्सी लगती हो फिर मैंने मामी की नाभि में लंड डाला तो मामी बोली कि मज़ा नहीं आ रहा है और तभी मामी ने मेरा लंड पकड़ा और मेरे लंड पर मुठ मारने लगी और बोल रही थी कि तुम्हारे मामा ने मुझे कभी लंड पर मुठ नहीं मारने दिया और ना ही कभी लंड को मेरे मुहं में डाला। तुम अपना लंड मेरे मुहं में दो ना, में इसे चूसना चाहती हूँ। फिर मैंने कहा कि हाँ लो ना मेरी जान चूसो ज़ोर से चूसो इसे और मामी मेरे लंड को चूस रही थी और मुझसे कह रही थी कि वाह कितना बड़ा है जानू तुम्हारा लंड, तुम्हारे मामा का तो इसका आधा भी नहीं है और ऐसा ही करते करते 20 मिनट तक मामी मेरा लंड चूसती रही और मैंने कहा कि में अब झड़ने वाला हूँ। फिर मामी बोली कि प्लीज मेरे मुहं में ही अपना सारा पानी छोड़ दो मेरे लंड का पानी पीने की बहुत इच्छा थी प्लीज आज उसे तुम पूरा कर दो। फिर मैंने अपना सारा गरम गरम वीर्य उनके मुहं में डाल दिया और वो उसे चूस चूसकर पी गई, लेकिन फिर मेरा लंड सिकुड़कर बहुत छोटा हो गया और में उदास हो गया क्योंकि में अभी तक नाभि को नहीं चोद पाया था। फिर मामी मेरे मन की यह बात समझ गई और वो मेरे लंड पर एक बार फिर से मुठ मारने लगी और लंड को फिर से मुहं में लेकर वो मेरे लंड को खड़ा करने लगी उनके हाथों के स्पर्श से मेरा लंड फिर से लोहे जैसे रोड की तरह खड़ा हो गया और फिर मामी ने कहा कि लो अब इसे जल्दी से डाल दो मेरी गहरी नाभि में और अब मैंने उनकी नाभि में जैसे ही अपना लंड डाला तो मेरा तीन इंच मोटा लंड नाभि में चला गया और मैंने नाभि को चोदना शुरू किया मामी के मुहं से सिसकियों की आवाज़ आ रही थी आह्ह्ह्हह्ह ऊउक्ककच आईईईईईई उईईईईईइ माँ हाँ और तेज़ चोदो मेरी नाभि को। फिर में लगातार नाभि को चोदता रहा और मामी को बहुत मज़ा आ रहा था वो हाँ में और अब रोज़ चुदवाउंगी तुमसे कह रही थी। दोस्तों मुझे लगातार चोदते हुए करीब अब तीस मिनट होने वाले थे और में झड़ने वाला था तो मामी बोली कि सारा वीर्य मेरी नाभि में भर दो। फिर मैंने सारा वीर्य नाभि में भर दिया और फिर मामी ने अपने पूरे पेट की उसी पानी से मालिश की और बोली कि इस पानी से औरत का जिस्म और भी खिल जाता है फिर में लेट गया ।।

  • मामी की सुहागरात की अधूरी प्यास-1

    मेरे मामा की शादी हुई. मैंने मामी के मोटे चूचों को देखा तो मेरा मन मामी की नंगी चूत देखने के लिए मचलने लगा. उस चाहत को मैंने पूरा करने के लिए क्या किया?

    मेरा नाम सुधीर है और मैं उत्तर प्रदेश के पीलीभीत का रहने वाला हूं. मेरे लंड की लंबाई सात इंच है और मेरा लंड इतना मोटा है कि वो किसी भी औरत की चीख निकालने के लिए काफी है.

    औरत की चूत चाहे कितनी भी चौड़ी क्यों न हो लेकिन खड़ा होने के बाद मेरा लंड उसमें फंस जाता है. आप समझ ही गये होंगे कि मेरे लंड की मोटाई कितनी हो सकती है. मैंने एक दिन अपने लंड को नापने की कोशिश की तो पता लगा कि मेरा लंड पूरी उत्तेजना में 3 इंच से भी ज्यादा चौड़ा हो जाता है.

    आज मैं आपको अपने जीवन की एक सच्ची घटना बताने जा रहा हूं जो मेरे ननिहाल में हुई थी. मैं अपनी नानी के घर पर रह रहा था. मेरे मामा की शादी थी. जब मैंने उनकी दुल्हन यानि कि अपनी मामी को देखा तो मेरी हालत खराब हो गई. वो देखने में बहुत ही सेक्सी थी.

    उसका रंग एकदम दूध जैसा सफेद था. उसके स्तन भी काफी बड़े थे. मगर कमर एकदम पतली सी थी. कहने का मतलब है कि देखने में एकदम कयामत लग रही थी. मगर मैं क्या कर सकता था. मैं तो भान्जा था. ये सोच कर मन में आग लगी हुई थी कि मेरे मामा को इतनी मस्त चूत चोदने के लिए मिल रही है.

    मन मसोस रहा था कि वो मेरे मामा के पास चुदने के लिए जा रही है. तभी मेरे मन में ख्याल आया कि क्यों न मामा और मामी की सुहागरात देख लूं. इस बहाने मामी की चूत के दर्शन भी हो जायेंगे. मैंने मन बना लिया कि मामी की सुहागरात देख कर ही रहूंगा. देखूंगा कि मामा मेरी मामी को कैसे चोदते हैं. उनका पहला सेक्स कैसे होगा.

    मैंने प्लान करना शुरू कर दिया. उस दिन सब लोग अपने काम में लगे हुए थे. मैं सबसे नजर बचा कर मामा के कमरे में गया. वहां पर देखने लगा कि कहां से नजारा दिखाई दे सकता है. मैंने पाया कि खिड़की की दरार में से अंदर बिछा हुआ बेड साफ दिख रहा था. यह मेरी किस्मत ही थी कि उनकी सुहागरात के लिए इस तरह की व्यवस्था की गई थी कि खिड़की से ही सारा नजारा देखा जा सकता था.

    जिस रूम में मैं रहता था उसमें कोई नहीं जाता था. उसमें बस कुछ सामान रखा हुआ था. मैं रात होने का इंतजार करने लगा. रात में सब लोगों ने खाना खाया और तब तक 10 बज गये. रात के 10.30 बजे से ही मैं उस रूम में जाकर बैठ गया.

    रात के करीब 11 बजे मामा कमरे में आये. मेरी नई नवेली दुल्हन बनी मामी बेड पर घूंघट निकाल कर बैठी हुई थी. मामा धीरे से कमरे में दाखिल हो गये और उन्होंने दरवाजा बंद कर लिया. मैंने भी खिड़की की दरार पर अपनी नजरें जमा लीं.

    पहले तो वो दोनों आपस में कुछ बातें करने लगे. उसके बाद बातें करते हुए ही मामा ने मेरी मामी का हाथ पकड़ लिया. उन्होंने उनके हाथ को अपने हाथ में लेकर चूम लिया. मामी शरमाने लगी. मामा ने कुर्ता और धोती पहनी हुई थी. मामा ने अपने कुर्ते के बटन की तरफ हाथ बढ़ाते हुए कुर्ते को उतारना शुरू किया.

    उन्होंने कुर्ता उतार दिया. फिर अपने बनियान को भी उतार दिया. मामा ऊपर से नंगे हो गये. उनकी धोती अभी भी बची हुई थी. मामा ने मामी की तरफ देखा तो मामी ने मुंह फेर लिया था. वो दूसरी तरफ मुंह करके बैठ गयी थी.

    मामा ने अपनी धोती को खोलना शुरू किया और उसको अपनी टांगों से अलग कर दिया. नीचे से मामा ने बड़ा सा कच्छा पहना हुआ था. उनका लंड अभी ज्यादा तनाव में नहीं दिखाई दे रहा था मगर हल्का सा तनाव आने के कारण पता लग पा रहा था कि लंड उत्तेजना में आ रहा है.

    उसके बाद मामा मेरी मामी की तरफ बढ़े. बेड पर जाकर मामी के कंधे को सहलाना शुरू किया. मामी अभी भी शरमा रही थी और ऊपर की तरफ नजर नहीं उठा रही थी. मामा ने उनकी साड़ी को हटाना शुरू किया. मामी के लाल रंग के ब्लाउज में भरे हुए उनके मोटे और बड़े स्तन दिखने लगे.

    उनको देखते ही मेरा लंड भी तनाव में आ गया. मैंने देखा कि जैसे ही मामा की नजर मामी के ब्लाउज पर गई तो उनके लंड में भी एकदम से तनाव आ गया था. उनका लंड उनके कच्छे में तन कर टाइट हो गया था. उसके बाद मामा ने अपने लंड को मामी के कंधे पर सहलाना शुरू किया. मामी अभी भी नीचे नजर करके ही देख रही थी.

    अब मामा ने उनकी कमर को सहलाना शुरू किया, फिर उनके स्तनों की तरफ हाथ बढ़ाने लगे तो मामी ने उनके हाथ को रोक दिया. उसके बाद मामी ने उनके हाथ को छोड़ दिया. मामा ने ब्लाउज के ऊपर से ही अपने हाथ मामी के स्तनों पर रख दिये. मामी की बेचैन सी हो उठी.

    मामा ने उनको बेड पर लेटा दिया. उनकी साड़ी की सिलवटें खोल दीं और अब मामी केवल ब्लाउज और पैटीकोट में ही रह गई थी. उसके बाद मामा बेड पर आये और मामी के ऊपर लेट कर उनके होंठों को चूसने लगे. मामी भी पहले तो शरमाती रही लेकिन फिर उन्होंने मामा को अपनी बांहों में भर लिया मामा के होंठों को चूसने लगी.

    वो दोनों काफी देर तक एक दूसरे के होंठों को चूसते हुए एक दूसरे के होंठों का रस पीते रहे. उसके बाद मामा ने उनके होंठों से हट कर अपने होंठों को मामी के ब्लाउज के अंदर के क्लीवेज पर लगा दिया. वो अपने दोनों हाथों से मामी के स्तनों को दबाने लगे और उनका लंड मामी की जांघों के बीच में घुसने की कोशिश करने लगा.

    अब शायद दोनों ही गर्म हो चुके थे. मामा ने फिर मामी को पेट के बल पलटी दी और उसके ब्लाउज को खोलने लगे. अगले ही कुछ पलों में मामी की गुलाबी ब्रा दिखने लगी. उसकी ब्रा में उसके चूचे एकदम से फंसे हुए थे. मामा ने उसकी ब्रा को हड़बड़ी में खोलना शुरू कर दिया. फिर दो पल के अंदर ही मामी के चूचे हवा में झूल रहे थे.

    बाहर से देखते हुए ऐसा लग रहा था कि मामी की छाती पर बड़ी बड़ी फुटबॉल लटकी हुई हैं जिनको देख कर मेरे लंड का बुरा हाल होने लगा था. मैंने वहीं पर खड़े होकर अपने लंड को मसलना शुरू कर दिया था. इधर मामा की हालत मुझसे भी ज्यादा खराब हो रही थी. उसने मामी के चूचों को जोर से दबाना शुरू किया और फिर मामी के मोटे मोटे चूचों को मुंह में भर कर पीने लगे.

    अब मामी के मुंह से आहें निकलने लगीं. वो मामा के सामने बेबस होने लगी. मामा ने जोर से मामी के चूचों को चूसना शुरू कर दिया. वो मामी के चूचों को दोनों हाथों से जैसे निचोड़ते हुए उनका दूध निकालने की कोशिश कर रहे थे. मामी की गांड ऊपर उठने लगी थी. इससे मुझे भी पता चल गया था कि मामी की चूत में खुजली होना शुरू हो गई है.

    मेरी मामी बार मामा के मुंह को अपने चूचों में दबाने लगी थी. इधर मामा ने कुछ देर तक चूचों को चूसा और फिर उसके निप्पलों को जीभ से चूसने लगे. फिर शायद उन्होंने दांत से काट लिया तो मामी की सिसकारी निकल गई. मेरा हाथ मेरे लंड को रगड़ रहा था. मैं भूल गया था कि मैं बेपरवाह होकर उनकी ये रासलीला देख रहा हूं.

    कुछ देर तक मामी के निप्पलों को पीने के बाद मामा ने उसके पैटीकोट को खोल दिया. मामी की काली पैंटी दिखने लगी. मामा ने उसकी पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत को चूम लिया. मामी की गोरी जांघें देख कर मैं भी और ज्यादा उत्तेजित हो रहा था. मेरे मामा मेरी मामी की चूत को पैंटी के ऊपर से ही चाटने में लगे हुए थे.

    फिर मुझे ध्यान आया कि क्यों मामी के नंगे बदन को कैमरे में कैद कर लिया जाये. ऐसा मौका फिर शायद मिले न मिले. मैंने अपनी जेब से फोन निकाला और कैमरा ऑन करके वीडियो बनाना शुरू कर दिया. दूर से ज्यादा साफ तो नहीं दिखाई दे रहा था मगर इतना तो पता चल रहा था कि मामी का नंगा बदन कैसा है.

    मामी के चूचे ऊपर नीचे होते हुए वीडियो में साफ दिख रहे थे. वो इस बात को बता रहे थे कि मामी की चूत पूरी गर्म हो चुकी है. उसके बाद मामा ने उसकी पैंटी को उतार दिया. मामी की चूत एकदम बाल रहित थी. उनकी चूत को देख कर मुझसे भी रहा न गया और मैंने अपने लंड को अपनी पैंट से बाहर निकाल कर उसकी मुठ मारनी शुरू कर दी.

    मेरी हालत बहुत खराब हो रही थी. मन कर रहा था कि मैं भी अभी के अभी कमरे में घुस जाऊं और मामी की चूत को चाट लूं. मगर किस्मत तो मामा की चमक रही थी. उन्होंने मामी की चूत में उंगली की और उनकी चूत को चूसने लगे. मामी अब जोर से सिसकारियां लेने लगी. उनको देख कर ऐसा लग रहा था कि वो पहले भी इस तरह का कुछ कर चुकी हैं.

    मामी भी पूरी गर्म थी और मामा भी गर्मजोशी से उसकी चूत को चूसने में लगे हुए थे. पूरे कमरे में आह्ह … इस्सस… पुच-पुच … मुच-मुच की आवाज हो रही थी. उनकी इन कामुक आवाजों को सुन कर मेरे लंड का हाल और बुरा होने लगा था. मैंने जोर से अपने लंड को रगड़ना शुरू कर दिया था. मगर साथ ही फोन को भी संभाल रहा था. बहुत मजा आ रहा था मुझे.

    उसके बाद मामा से जब रहा न गया तो उन्होंने उनकी चूत से जीभ को हटा लिया और अपना कच्छा निकाल दिया. मामा का लंड एकदम से टनटना रहा था. मामा के लंड का साइज देख कर मैं हैरान रह गया. मेरे मामा शरीर से काफी हट्टे कट्टे थे लेकिन उनका लंड देखा तो मुझे यकीन नहीं हुआ.

    उनका लंड ज्यादा लम्बा नहीं था. देखने में चार इंच या उससे थोड़ा ज्यादा का लग रहा था. मामा के लंड की मोटाई न के बराबर थी. देखने में एक पतली सी डंडी के जैसा लग रहा था. मामा ने मामी की टांगों को चौड़ी किया और उनकी चूत में लंड को लगा कर उसके ऊपर लेट गये.

    दोनों के दोनों नंगे थे और मामा ने मामी की चूत को चोदना शुरू कर दिया. मगर मामी को देख कर लग रहा था कि उनको जैसे पता ही नहीं लग रहा कि मामा ने उनकी चूत में लंड को डाला हुआ है. वो मामी की चूत में लंड डाल कर हिलाते रहे मगर मामी को जैसे कुछ फर्क ही नहीं पड़ रहा था.

    मामी के चेहरे से साफ पता लग रहा था कि उनको मजा नहीं आ रहा है. तीन-चार मिनट तक मामा उनकी चूत में लंड को डाल कर हिलते रहे और फिर अचानक है ढीले पड़ कर मामी के ऊपर गिर गये. फिर कुछ पल तक मामी के ऊपर पड़े रहे और फिर साइड में जाकर लेट गये. पांच मिनट तक मामा ऐसे ही पड़े रहे.

    मामी के चेहरे पर मायूसी सी छा गयी थी. फिर कुछ देर के बाद मामा ने मेरी मामी के गालों को किस करने कोशिश की तो मामी ने मरे मन से उनको किस करने दिया. फिर जब मामी के ऊपर आने की कोशिश करने लगे तो मामी ने उनको एक तरफ धकेल दिया और चादर ओढ़ कर लेट गई.

    दोबारा मामा की हिम्मत नहीं हुई कि वो मामी के करीब आ सकें. मामी की चूत प्यासी की प्यासी रह गई थी. मुझे भी मामी पर तरस आ रहा था. मामा ने दोबारा से मामी को मनाने की कोशिश की लेकिन उन्होंने फिर मामा को फिर अपने बदन को छूने नहीं दिया. फिर मामा उठ कर कमरे के दरवाजे की तरफ आने लगे.

    मैंने अपने लंड को अंदर किया और वहां से एक तरफ छिप गया. बाहर बाथरूम बना हुआ था. मामा बाथरूम में गये और कुछ देर के बाद वापस आ गये. अंदर जाने के बाद मैंने देखा कि मामी ने अपने रात वाले कपड़े पहन लिये थे. वो एक तरफ होकर सो गई और मामा भी अपनी धोती लपेट कर बेड पर लेट गये. उसके बाद मामा ने लाइट बंद कर दी.

    उसके बाद मैं भी वहां से वापस आ गया. अपने रूम में आकर मैंने वीडियो को देखा. मामी के मोटे चूचे वीडियो में हिलते हुए देख कर मैंने तेजी से अपने लंड पर हाथ चलाना शुरू कर दिया. फिर अपने लंड की मुठ मारी. वीर्य निकलने के बाद मुझे संतुष्टि मिली. उसके बाद मैं सोचने लगा कि मामा का लंड शायद मामी की प्यास नहीं बुझा पायेगा. मुझे इस बात का फायदा उठाना चाहिए.

  • सेक्स चैट वेबसाइट पर मेरा पहला अनुभव

    मैं आज आपको दिल्ली सेक्स चैट वेबसाइट पर मेरा पहला अनुभव बता रहा हूँ. मेरी भी सेक्स लाइफ एकदम मज़ेदार हो गयी है दिल्ली सेक्स चैट पर अपना समय बिताकर!

    नमस्ते दोस्तो, मेरा नाम निलेश तिवारी है. मैं आज आप लोगों को दिल्ली सेक्स चैट वेबसाइट पर मेरा पहला अनुभव बताने वाला हूँ. दिल्ली सेक्स चैट एक जानी मानी वेबसाइट है जहाँ पर लोग सेक्स का मज़ा लेते हैं.
    मेरी भी सेक्स लाइफ एकदम मज़ेदार हो गयी है दिल्ली सेक्स चैट पर अपना समय बिताकर!
    कैसे?
    कहानी पढ़कर जान लीजिए.

    कुछ दिनों पहले की बात है. मैं दोपहर को अपने बिस्तर पर लेटे सोच रहा था कि मैं 20 साल का हो गया हूँ और मेरी ना तो कोई गर्लफ्रेंड है और ना ही मैंने किसी लड़की को चोदा है.
    दुनिया में लोग आए दिन अपनी और दूसरों की माँ, बहन, बेटी, भाभी को दिन-रात मज़े से चोदते रहते हैं और एक मैं हूँ जिसे कोई भी लड़की घास नहीं डालती.

    मुझमें कुछ कमी नहीं है. तक़लीफ़ यह है कि ये साली लड़कियां बहुत भाव खाती हैं. इन पर पैसे खर्च करो, इनकी बकवास बातें सुनो, इनके काम करो. इतना सब कुछ करने के बाद इस बात की कोई गांरटी नहीं हैं कि ये हमें चोदने देंगी.

    ऐसे ही सोचते-सोचते मेरे दिमाग में विचार आया कि क्यों ना इंटरनेट में सेक्स लाइफ के मज़े लेने की तरकीब पता करूं. 20-25 मिनट इंटरनेट सर्फिंग करने के बाद पता चला कि लाइव सेक्स चैट से सेक्स का मज़ा घर बैठे ले सकते हैं.
    लाइव सेक्स चैट पर खूबसूरत लड़कियां और महिलायें अपने बातों सें और अंग प्रदर्शन से मर्दों के लंड को खड़ा करतीं है.

    मैंने काफ़ी सारी वेबसाइट में से दिल्ली सेक्स चैट को चुना और अपना नसीब आज़माया. वैसे भी मैं लड़कियों की नंगी तस्वीरें देखते मुठ मारकर थक गया था. अब वक़्त था उनसे गंदी बातें और मस्ती करने का.

    दिल्ली सेक्स चैट के वेबसाइट पर जाते ही इतनी सारी सुंदर लड़कियों के प्रोफाइल देखकर मेरा शरीर गर्म होने लगा. वेबसाइट पर एक से एक छमिया जिस में से कुछ ने ब्रा-पेंटी पहनी थी. कुछ ऊपर से नंगी थी और कुछ अपने गांड का छेद दिखाते हुए.

    मैंने बिना कोई देरी किए दिल्ली सेक्स चैट पर अपना अकाउंट बना दिया. मेरा लंड तो सिर्फ़ लड़कियों का प्रोफाइल देखकर ही खड़ा हो गया. मुझें इस बार सिर्फ़ तस्वीर देखकर मूठ नहीं मारनी था. इसलिए मैंने अपने लंड को हाथ ही नहीं लगाया.

    अब रास्ता बिलकुल साफ़ था क्योंकि मेरे पिताजी ऑफ़िस से रात दस बजे तक ही आते हैं और मेरी माँ स्कूल टीचर हैं जो शाम को घर आती हैं.

    मैंने बेडरूम का पर्दा लगा दिया और घर के मुख्य दरवाज़े की कुंडी लगा दी ताकि माँ या पिताजी में से अगर आज कोई घर जल्दी आ जाए तो किसी से भी दरवाज़ा चाबी से ना खुले.
    मैं नहीं चाहता था कि माँ पिताजी की नज़रों में मैं गिर जाऊं और वे मेरी आजादी छीन लें.
    वैसे भी सेक्स का मज़ा आराम से और बिना किसी चिंता के लेना चाहिए ना कि जल्दबाजी में डर डर कर!

    सभी चीज़ों का ध्यान मैंने रखा था ताकि लाइव सेक्स चैट करतें समय कोई दिक्कत ना हो.

    दिल्ली सेक्स चैट के वेबसाइट पर मैं सेक्सी लड़की और भाभियों का प्रोफाइल देख रहा था और सोच रहा था कि इनमें से किसे चुनूं.
    मैं कुछ सालों सें अपनी माँ को गंदी नज़रों सें देखने लगा था. इसलिए सोचा कि कोई भाभी से सेक्स चैट करूं जिसका फिगर मेरी मोटी गांड वाली माँ जैसा हैं. मुझे ज़्यादा देर नहीं लगी ऐसी भाभी ढूंढ़ने में जिसे देखकर मुझें मेरीं माँ याद आती हो.

    मुझे एक भाभी मिली जिसका नाम निकिता है. उसका प्रोफाइल चुनकर मैं पेमेंट मोड की तरफ बढ़ा. मैंने XXX वीडियो वाला सेक्स चैट चुना और पेमेंट देकर भाभी को बुक किया.

    दिल्ली सेक्स चैट पर मेरा पहला लाइव सेक्स चैट सेशन शुरू हो गया; स्क्रीन पर थी नॉटी निकिता भाभी. गोर रंग की भरे बदन वाली निकिता भाभी ने गुलाबी रंग की साड़ी पहनी थी और सफ़ेद रंग का ब्लाउज जिसका एक ही बटन लगा हुआ था.

    निकिता भाभी का फिगर मेरी माँ जैसा ही था- भूरा रंग, बड़े स्तन, मोटी कमर, उभरी हुई गांड और मोटे जांघ. निकिता भाभी ने सुहागरात वाला माहौल बनाया हुआ था लेकिन मुझे तो उनको अपनी माँ बनाकर उनके साथ कामुक आनंद लेनी थी. मैंने अपने लंड पे नारियल का तेल लगाकर मालिश की और अपनी माँ को याद करते हुए मूड बनाया.

    निकिता भाभी- हेलो जानेमन, बताओ अपनी फरमाइश. मेरी चूत का पानी किस तरह निकालना चाहोगे तुम? (अपनी चूत को रगड़ते हुए).

    मैं- भाभी आप तो बहुत सेक्सी लग रही हो. आपको देखकर मुझे मेरी बड़ी गांड वाली माँ की याद आती है. मेरी माँ को बाथरूम में नहाते देख मैंने कई बार मुठ मारी है. असल जिंदगी में नहीं तो आप को ही मेरी माँ समझ कर आपका पेशाब निकाल दूंगा. चलो एक रोल-प्ले गेम खेलते है.

    निकिता भाभी- तो राजा बेटा को अपनी माँ के साथ मस्ती करनी है. मुझे भी रोल-प्ले गेम खेलना पसंद है; बताओ क्या करना है?

    मैं- आपकी जांघों में दर्द है और आप मुझे बैडरूम में बुलाती है आपकी मालिश करने के लिए. अपने बेटे के हाथों से मालिश करवाते समय आप गर्म हो जाती हैं. आप अपने बेटे के साथ थोड़ी कामुक मस्ती करने की सोचती है. बातें करते हुए आप कल रात वाली चुदाई के बारे में बोलने लगती हैं. ये सब बोलते वक़्त आप उत्तेजित होकर गैर मर्दों के साथ आपकी चुदाई के बारे में बताती हैं. यहीं से माँ-बेटे की चुदाई शुरू हो जाती है.

    निकिता भाभी ने इशारा कर दिया कि उनको खेल समझ आ गया है. वो बिस्तर पर अपनी साड़ी ठीक करके लेट जाती है. उत्तेजना की वजह से मुझे भी गंदी मस्ती करने की हिम्मत आ जाती है. अपनी माँ के साथ हकीकत में नहीं तो किसी दूसरी औरत को अपनी माँ बनाकर अपनी हवस मिटाऊंगा.

    निकिता भाभी- अरे नीलेश बेटा, ज़रा बैडरूम में आना तो!

    मैं- क्या हुआ माँ? कल रात को भी बैडरूम से तुम्हारी आवाज़ आ रही थी, तुम ठीक तो हो ना?

    निकिता भाभी- मेरी जांघों में दर्द हो रहा है, ज़रा मालिश कर देना तो. रात भर सोई नहीं हूँ मैं, तू भी रात भर मेरी आवाज़ सुनकर जाग रहा था? (मुस्कुराते हुए)

    निकिता भाभी साड़ी को अपने जांघों तक उठाती है और अपने पैर थोड़ा सा फैला लेती है. मैं जल्दी नहीं झड़ना चाहता था इसलिए मैंने अपना लंड हिलाना बंद कर दिया. फिर निकिता भाभी अपने हाथों से अपने जांघों को सहलाने लगी. वो अपने हाथ को चूत के हिस्से के बेहद नज़दीक ले जा रही थी.

    – मैं कैसे सोता माँ? आवाज़ ही कुछ ऐसी आ रही थी कि मुझे फिर नींद नहीं आई. (आँख मारते हुए)

    निकिता भाभी- आह! तेरे मालिश से तो मुझे कुछ अजीब सा लग रहा है. मेरी जांघों तक ही मालिश करना, मैंने अंदर कुछ पहना नहीं है. नहीं तो तू जोश में आकर मेरी चूत में उंगली डाल देगा.

    मैं- आपकी चूत से ही तो मैं निकला हूँ. क्या उस पर मेरा भी हक़ नहीं बनता?

    निकिता भाभी- छी नालायक़!
    फिर हंसती हुई- अपनी माँ के साथ कोई ऐसे बात करता है भला? वैसे तू हक़ की बात मत कर, तेरे बाप ने अपना हक़ मेरी चूत पर कल सारी रात जताया है. तेरे बाप के लंड पे पूरी रात उछल-उछल कर मेरी कमर टूट गई. रात को अचानक उसका मूड बन गया और मुझे अपने ऊपर चढ़ाकर मेरी गांड मसलने लगा. मेरे स्तनों को ऐसे चूसा कि कभी चूसने मिला ही ना हो. तू मेरे स्तनों की भी मालिश कर दे ज़रा. तू मत चूसना; तूने अपने हिस्से का दूध पी लिया है.

    निकिता भाभी ने अपना साड़ी का पल्लू उतारा और अपना ब्लाउज खोलकर अपने भूरे, पपीते जैसे आकार वाले स्तनों के दर्शन दे दिए. उन्होंने अपने हाथों से अपने स्तनों को दबाया और मुझे चिढ़ाया. मैंने अपने माँ की वैसी चूचियाँ जब वो नहाती थी तब देकही है, मेरा मन करता था कि उसे वहीं जाकर पीछे से दबोच लूं.

    निकिता भाभी- उम्! तू कितने अच्छे से मेरी चूचियों की मालिश कर रहा है. और एक तेरा बाप है, कुत्ते को हर वक़्त इन्हें दबोचकर काटनी होती है. देख अभी भी मेरी चूची लाल है. चल तू अब इतने अच्छे से मालिश कर ही रहा है तो मेरी चूत की भी मालिश कर दे. अपनी उंगली डालकर अच्छे से सहला मेरी चूत को.
    फिर हंसती हुई बोली- ध्यान रख कि तू अपना लंड ना घुसेड़ दे.

    निकिता भाभी ने अपनी साड़ी पूरी उठा दी. उसकी काले रंग वाली बालों से भरी चूत देखकर मैं अपने लंड को जोर से हिलाने लगा. मेरी माँ की भी चूत ऐसी ही दिखती है. वो नहाते वक़्त अपने पैर फैलाती है और अपनी ऊँगली से चूत को साफ़ करती है.

    मैं- माँ तेरी चूत को देखकर ऐसा लगता है कि पापा तुम्हारी रोज़ रात को चुदाई करते हैं. लगता है कि पापा तुम्हारी गांड में भी अपना लंड घुसाते हैं. इसमें मेरी दो उँगलियाँ आसानी से घुस जायेंगी.

    निकिता भाभी- तेरा बाप तो क्या हमारा पड़ोसी भी मेरी चुदाई करता है. बेटा अब जो मैं तुझे बताने जा रही हूँ वो बात तेरे पापा को मत बताना. नहीं तो मेरी आजादी छीन ली जायेगी. तेरे पापा को कभी कभार ही सेक्स का मूड आता हैं और मेरी प्यास तो रोज़ बुझनी ज़रूरी है नहीं तो मैं इधर उधर मुँह मार लेती हूँ.

    निकिता भाभी की बातें सुनकर मेरा लंड तो और कड़क हो गया. अपनी माँ के बारे में ऐसा सुनकर मेरी हवस को राहत मिली. अब से मैं अपनी माँ के बारे में ऐसे ही विचार लाऊँगा. दिल्ली सेक्स चैट की भाभियाँ वाकई में कमाल की हैं दोस्तो.

    निकिता भाभी- सुबह जब मैं हमारे कॉमन बाथरूम में नहाने जाती हूँ, तब हमारा पड़ोसी भी मेरे साथ बाथरूम में घुस जाता है. मेरी मैक्सी उतारकर सबसे पहले मेरी चूतड़ों को फैलाकर मेरी गांड के छेद में अपनी ज़ुबान डालकर मुझे मस्त कर देता है. फिर उसके बाद मेरी बालों से भरी चूत को अपने मुंह में डालकर भीगा देता है. मेरी चीखें न निकलें इसलिए अपना हाथ मेरे मुँह पर रखता है.
    इतने में तो मेरे चूत से एक बार पानी निकल जाता है. फिर मुझे मेरी जांघों से उठाकर उसके लंड पे उछालता रहता है. ऐसे मैं रोज़ उसके साथ सुबह सेक्स करती हूँ.

    एक बार तो वो अपने भाई को भी मेरी चुदाई करने ले आया. दोनों मिलकर सुबह सुबह मेरे शरीर के हर एक छेद को चाटकर साफ़ करने लगे. फिर मुझे अपने बीच में दबाकर बारी बारी मेरी चूत और गांड में अपना लंड घुसाने लगे.

    उस दिन तो मेरी चूत से पेशाब निकल गया था ऐसी चुदाई की थी.

    तू चाहता है कि तेरी माँ ऐसे ही किसी गैर मर्दों के साथ सेक्स करती रहे? क्या तू अपनी माँ को अपनी रंडी नहीं बना सकता? घुसा अपना लौड़ा मेरी चूत में और कर मेरी चुदाई. जब मेरे ही घर में जवान लौड़ा है तो में क्यूँ किसी दूसरे का लौड़ा चुसूं, आह! निकाल मेरा पेशाब, उफ़! ऐसी ही घुसते रेह और फाड़ दे मेरी चूत.

    निकिता भाभी ने एक नकली लौड़ा यानि डिलडो निकाला और उसे वो अपनी चूत में घुसाने लगी. उसने अपने दोनों पैर उठाकर फैला दिए और अपनी गांड में उंगली भी डालने लगी.

    मैं इधर अपने लंड को ज़ोर जोर से हिला रहा था. मेरा तो थोड़ी देर में झड़ने को आ गया था. मेरे से और रहा नहीं गया क्यूंकि ऐसा दृश्य तो मैंने कभी नहीं देखा था. मैंने अपना लंड का माल निकाल दिया. वहाँ पर निकिता भाभी नकली लंड को अपनी गांड में घुस रही थी.

    मैं- अरे भाभी मेरे लंड का पानी तो निकल गया आपकी गांड को देखकर, उफ़ मज़ा आ गया.

    निकिता भाभी- ये तुम्हारा पहला सेक्स चैट सेशन है इसलिए तुम इतनी जल्दी झड़ गए. मेरे साथ कुछ और समय बिताओ फिर देखो हम घंटों तक मस्ती करते रहेंगे. क्या पता शायद तुम अपनी असली माँ की भी चुदाई कर दो (आँख मारते हुए).

    मैं- सही कहा भाभी आपने. मैं अब रोज़ आपसे सेक्स चैट करूँगा. आप मुझे लड़की को पटाने के तरीके बताना फिर उसे मैं यहाँ लाकर आपके सामने उसकी गांड में अपना लंड घुसाउँगा. चलो तो फिर कल मिलते हैं भाभी.

    निकिता भाभी- बिल्कुल, कल मिलेंगे जानेमन. (अपनी गांड का छेड दिखाकर मुझे चिढ़ाते हुए).

    दोस्तो, ये था दिल्ली सेक्स चैट वेबसाइट पर मेरा पहला अनुभव.

    उस दिन के बाद से मैंने कई सेक्सी लड़की और कामुक भाभियों को पटाया है. अब मैं तो हर रोज़ ऐश करता रहता हूँ. आप लोग भी दिल्ली सेक्स चैट वेबसाइट पर जाकर सेक्स के मज़े लीजिये. एक बात और, लड़की और भाभियों की लिस्ट बनाना नहीं तो आप भूल जाओगे कि आपने कितनी आइटम लड़कियों भाभियों को पटाया है.