Tag: दूसरी सुहागरात

  • ट्रेन में मिली अजनबी लड़की 2

    मैंने टेबल से कंडोम का पैकेट लिया, एक निकाला और पहन लिया। फिर नेहा की जाँघें थोड़ी और अलग कीं। लंड की नोक को उसकी चूत पर रखा और बहुत धीरे से दबाया।

    नेहा ने आँखें बंद कर लीं और मेरी पीठ को कसकर पकड़ लिया।

    “आह्ह्ह…” एक लंबी आह के साथ मेरा लंड धीरे-धीरे उसके अंदर घुसने लगा। नेहा की चूत बहुत टाइट और गर्म थी। मैं रुक-रुककर पूरा लंड अंदर डालता गया। जब पूरा घुस गया, तो हम दोनों कुछ पल ऐसे ही रुक गए।

    मैंने नेहा के माथे पर किस किया और फुसफुसाया,
    “ठीक है ना?”

    नेहा ने सिर हिलाया और बोली, “हाँ… बहुत अच्छा लग रहा है… अब धीरे-धीरे…”

    मैंने बहुत धीमी गति से धक्के मारने शुरू किए। हर धक्के के साथ नेहा की आहें निकल रही थीं — “आह… राहुल… हाँ… और धीरे…”

    हम दोनों एक-दूसरे को कसकर पकड़े हुए थे। मैं उसकी छातियों को चूमता, गर्दन को चूसता, और धीरे-धीरे चोदता रहा। नेहा की जाँघें मेरी कमर के चारों तरफ लिपटी हुई थीं।

    करीब 15-20 मिनट तक हम इसी धीमी, रोमांटिक रफ्तार में रहे। फिर नेहा की साँसें तेज़ होने लगीं। उसकी चूत मेरे लंड को कसकर पकड़ने लगी।

    “राहुल… मैं… आ रही हूँ…” उसने काँपते हुए कहा।

    मैंने गति थोड़ी बढ़ाई। कुछ ही देर में नेहा का पूरा शरीर सख्त हो गया और वो जोर से झड़ गई। उसकी चूत बार-बार सिकुड़ रही थी। उसी पल मैं भी झड़ गया। गर्म वीर्य कंडोम के अंदर भर गया।

    हम दोनों थके हुए, पसीने से तर, एक-दूसरे से चिपके हुए लेट गए। नेहा मेरी छाती पर सिर रखे हुए थी। मैं उसके बालों में हाथ फेर रहा था।

    नेहा ने बहुत धीमी आवाज़ में कहा,
    “राहुल… आज रात बहुत खूबसूरत थी… थैंक यू।”

    मैंने उसे कसकर गले लगाया और बोला,
    “तुम्हारे साथ ये पल मेरे लिए भी बहुत स्पेशल हैं नेहा।”

    रूम में दूसरा राउंड (रात 2:30 बजे)

    पहले राउंड के बाद हम दोनों थके हुए, पसीने से तर लेटे हुए थे। नेहा मेरी छाती पर सिर रखे, अपनी नंगी छाती मेरी छाती से सटाए हुए आराम कर रही थी। उसकी साँसें अभी भी धीरे-धीरे भारी थीं। मैं उसके नंगे पीठ पर उँगलियाँ फिरा रहा था, कभी कमर पर घुमाता, कभी गांड के ऊपरी हिस्से को हल्के से सहलाता। 

    करीब 20 मिनट बाद नेहा ने सिर उठाया। उसकी आँखों में फिर से वो चमक आ गई थी। वो शरमाते हुए मुस्कुराई और मेरे कान के पास फुसफुसाई, 
    “राहुल… मुझे अभी भी और चाहिए… तुम्हारा लंड फिर से…”

    ये सुनकर मेरा लंड फिर से सख्त होने लगा। मैंने नेहा को कसकर चूमा। किस इस बार ज्यादा भूखा था। हमारी जीभें एक-दूसरे से लड़ रही थीं। नेहा ने खुद मेरे ऊपर चढ़ गई। उसकी गीली चूत मेरे पेट पर रगड़ खा रही थी। वो मेरी छाती चूमने लगी, निप्पल्स को जीभ से घुमाती हुई नीचे उतर गई। 

    उसने मेरा लंड हाथ में लिया, धीरे-धीरे सहलाया और फिर मुँह में ले लिया। नेहा बहुत धीरे से चूस रही थी। उसकी गर्म जीभ लंड के सिरे पर घूम रही थी, कभी पूरा मुँह में लेकर गहरी गला दे रही थी। मैंने उसके बाल पकड़ लिए और हल्के से सिर दबाया। नेहा की आँखें ऊपर देख रही थीं, मुँह से सलाइवा टपक रहा था। “मम्म… राहुल… कितना स्वादिष्ट है…” वो फुसफुसाई। 

    कुछ देर चूसने के बाद नेहा ने दूसरा कंडोम निकाला, खुद मेरे लंड पर चढ़ाया और फिर मेरे ऊपर बैठ गई। इस बार वो बहुत धीरे से नीचे बैठी। उसकी चूत अभी भी पिछले राउंड से गीली थी, लेकिन टाइट थी। पूरा लंड अंदर घुसते ही नेहा की कमर काँप गई — “आआह्ह्ह… फिर से भर गया… बहुत मोटा लग रहा है…”

    वो राइडिंग पोज़िशन में धीरे-धीरे ऊपर-नीचे होने लगी। हर बार जब वो नीचे बैठती, उसकी भारी छातियाँ जोर से उछलतीं और मेरे चेहरे के पास आ जातीं। मैंने उन्हें दोनों हाथों से थाम लिया, निप्पल्स को मुँह में लेकर जोर-जोर से चूसने लगा। नेहा की रफ्तार बढ़ने लगी। “फच… फच… फच…” की आवाज़ रूम में गूँज रही थी। नेहा की आहें तेज़ हो गईं — “हाँ राहुल… और तेज़… मेरी चूत को चोदो… आह्ह… मुझे फाड़ दो… बहुत मजा आ रहा है…”

    मैंने नीचे से जोर-जोर से धक्के मारे। नेहा झुककर मेरे होंठ चूसने लगी। उसका पसीना मेरी छाती पर टपक रहा था। करीब 18 मिनट तक ये राइडिंग चली। नेहा दो बार छोटे-छोटे ऑर्गेज्म आई। आखिर में वो जोर से काँपी, चूत मेरे लंड को कसकर दबाई और झड़ गई। उसी पल मैं भी उसके अंदर झड़ गया। 

    नेहा मेरी छाती पर ढेर हो गई। हम दोनों लंबी साँसें लेते हुए एक-दूसरे को चूमते रहे। फिर थकान से सो गए।

    सुबह का पहला राउंड (सुबह 7:45 बजे)

    सुबह की हल्की रोशनी खिड़की से आ रही थी। नेहा मेरी बाँहों में लिपटी सो रही थी। उसका नंगा बदन मेरे बदन से पूरी तरह चिपका हुआ था। मैं जाग गया और उसके गाल पर किस किया। नेहा की आँखें खुलीं। वो मुस्कुराई और मुझे और कसकर चिपक गई। 

    “Good morning baby…” मैंने कहा। 
    नेहा ने शरमाते हुए जवाब दिया, “बहुत अच्छी मॉर्निंग है…”

    मेरा लंड फिर से उसकी जाँघों के बीच सख्त हो चुका था। नेहा ने उसे महसूस किया और मुस्कुराई। इस बार वो खुद मेरे ऊपर चढ़ गई। सुबह की ताज़गी में उसका गोरा नंगा बदन और भी खूबसूरत लग रहा था। उसने कंडोम चढ़ाया और धीरे से लंड पर बैठ गई। 

    “आह्ह… सुबह-सुबह कितना अच्छा लग रहा है…” नेहा ने आँखें बंद करके कहा। वो धीरे-धीरे ऊपर-नीचे होने लगी। मैंने उसके कूल्हों को पकड़ लिया और नीचे से मदद करने लगा। उसकी छातियाँ मेरे चेहरे के सामने हिल रही थीं। मैंने उन्हें चूमा, चाटा और निप्पल्स को हल्के से काटा। नेहा की साँसें तेज़ हो गईं। 

    रफ्तार बढ़ने लगी। नेहा अब जोर-जोर से बैठ रही थी। “हाँ राहुल… और गहरा… मेरी चूत में पूरा डाल दो… आह्ह… मैं झड़ने वाली हूँ…” कुछ ही मिनट में नेहा का शरीर सख्त हो गया और वो पहली बार झड़ गई। मैंने उसे पलटकर मिशनरी पोज़िशन में लिया और तेज़ धक्के मारने लगा। नेहा की टाँगें मेरी कमर पर लिपटी हुई थीं। आखिर में हम दोनों साथ में झड़ गए। 

    हम पसीने से तर लेटे रहे। नेहा मेरी गर्दन में चेहरा छुपाए हुए थी।

    सुबह का दूसरा राउंड (सुबह 9:20 बजे — शावर में)

    हम दोनों नहाने गए। शावर के नीचे गर्म पानी की धार गिर रही थी। नेहा मेरे सामने खड़ी थी। मैंने उसे दीवार से सटाकर खड़ा किया। पीछे से उसकी छातियों को दोनों हाथों से दबाया और गर्दन चूसने लगा। नेहा की साँसें फिर से भारी हो गईं। 

    मैंने उसे झुकाया, शावर के नीचे ही डॉगी स्टाइल में लिया। पानी हमारे गीले बदन पर गिर रहा था। मैंने पीछे से लंड अंदर डाला और जोर से ठोकना शुरू किया। नेहा की गांड हर धक्के पर लहरा रही थी। पानी की धार के साथ “फच फच” की आवाज़ और तेज़ हो रही थी।

    “आह्ह… राहुल… शावर में चोदना… बहुत गंदा और मजेदार है… हाँ… और जोर से… मेरी गांड पकड़कर फाड़ दो…” नेहा चीख रही थी। मैंने एक हाथ से उसके बाल पकड़े, दूसरे से क्लिटोरिस रगड़ा। पानी हम दोनों के शरीर से बह रहा था। नेहा दो बार झड़ गई। आखिर में मैं भी उसके अंदर झड़ गया। 

    शावर के नीचे हम दोनों एक-दूसरे को चूमते हुए खड़े रहे।

    पैकिंग और टैक्सी में स्टेशन पहुँचना

    शावर से निकलकर हमने कपड़े पहने। नेहा ने सफेद टॉप और जीन्स पहनी, मैंने शर्ट और जींस। फिर हमने सामान पैक करना शुरू किया। नेहा अपना बैग पैक कर रही थी, मैं अपना। बीच-बीच में हम एक-दूसरे को किस कर लेते। नेहा ने कहा, “ये गोवा की यादें कभी नहीं भूलूँगी राहुल… तुमने मुझे बहुत स्पेशल फील कराया।”

    पैकिंग खत्म होने के बाद हमने होटल से चेकआउट किया। टैक्सी बुक की और स्टेशन की तरफ चल दिए। टैक्सी में हम पीछे की सीट पर बैठे थे। नेहा ने अपना सिर मेरे कंधे पर रख दिया। मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और उँगलियाँ फंसाईं। 

    टैक्सी चल रही थी। बाहर गोवा के खूबसूरत रास्ते दिख रहे थे। नेहा ने धीरे से मेरे कान में कहा, “ट्रेन में भी… वही वाला केबिन मिल जाए तो…”

    मैं मुस्कुराया और उसके गाल पर किस किया। टैक्सी स्टेशन पहुँचते-पहुँचते हम दोनों फिर से एक-दूसरे के करीब आ गए थे। दिल में वो पुरानी उत्तेजना फिर से जाग रही थी।

    ट्रेन में बैठने से पहले नेहा ने मुझे कसकर गले लगाया और फुसफुसाई, 
    “अब ट्रेन का इंतज़ार है…”

    ट्रेन आई और अपने शीट पर गए और
    नेहा ने मुझे बिस्तर पर धकेल दिया। वो खुद मेरे ऊपर चढ़ गई। उसने मेरी शर्ट उतारी, मेरी छाती चूमने लगी। उसकी जीभ मेरे निप्पल्स पर घूम रही थी। फिर नीचे हाथ बढ़ाया, मेरे लंड को पैंट से बाहर निकाला और धीरे-धीरे सहलाने लगी। लंड सख्त हो गया। नेहा ने कंडोम चढ़ाया, अपनी ड्रेस ऊपर उठाई, पैंटी सरकाई और धीरे से मेरे लंड पर बैठ गई।

    उसकी गीली, गरम चूत मेरे मोटे लंड को धीरे-धीरे निगल रही थी। जब पूरा घुस गया, नेहा की आँखें बंद हो गईं और मुँह से लंबी आह निकली — “आआह्ह्ह… राहुल… कितना मोटा और गहरा… पूरी तरह भर गया है…”

    वो धीरे-धीरे ऊपर-नीचे होने लगी। हर बार जब नीचे बैठती, उसकी भारी छातियाँ जोर से उछलतीं। मैंने दोनों हाथों से उन्हें थाम लिया, निप्पल्स को उँगलियों के बीच दबाया और खींचा। नेहा की रफ्तार बढ़ने लगी। “फच… फच… फच…” की आवाज़ केबिन में गूँज रही थी। नेहा की जाँघें मेरी कमर से सट रही थीं। उसका पसीना मेरी छाती पर टपक रहा था।

    वो झुककर मुझे किस करने लगी। उसके बाल मेरे चेहरे पर गिर रहे थे। मैंने नीचे से तेज़ धक्के मारे। नेहा चीख उठी — “हाँ… राहुल… और जोर से… मेरी चूत फाड़ दो… आह्ह… बहुत मजा आ रहा है… मैं पागल हो रही हूँ…” उसकी चूत मेरे लंड को कसकर पकड़ रही थी। करीब 15 मिनट बाद नेहा का शरीर सख्त हो गया। उसकी चूत बार-बार सिकुड़ी और वो जोर से झड़ गई। गर्म रस मेरे लंड पर बहने लगा। उसी पल मैं भी कंडोम के अंदर झड़ गया। नेहा मेरी छाती पर ढेर हो गई। हम दोनों लंबी साँसें लेते रहे।

    दूसरा राउंड (रात 12:30 बजे — मिशनरी पोज़िशन)
    हम थोड़ी देर आराम करने के बाद फिर से शुरू हो गए। इस बार मैंने नेहा को लिटाया। उसकी जाँघें चौड़ी कीं और उसके ऊपर लेट गया। लंड फिर से सख्त था। मैंने धीरे से अंदर डाला। नेहा की आँखें नम हो गईं। “राहुल… धीरे… लेकिन गहरा…”

    मैंने बहुत धीमी गति से शुरू किया। हर धक्के के साथ उसकी छातियाँ हिल रही थीं। मैंने एक-एक करके दोनों निप्पल्स को मुँह में लिया, जोर-जोर से चूसा। नेहा मेरी पीठ पर नाखून गड़ा रही थी। मैंने रफ्तार बढ़ाई। लंड जड़ तक घुस रहा था और बाहर निकल रहा था। चूत से सफ़ेद झाग बनने लगा। नेहा बार-बार चीख रही थी — “आह… हाँ… इसी तरह… मेरी चूत को चोदते रहो… उफ्फ… मैं मर रही हूँ मजा से…”

    उसने अपनी टाँगें मेरी कमर पर लपेट लीं। मैंने गति और तेज़ कर दी। केबिन में सिर्फ चुदाई की फच-फच आवाज़ और नेहा की कामुक आहें गूँज रही थीं। नेहा तीन बार छोटे-छोटे ऑर्गेज्म आई। आखिर में वो जोर से काँपी और झड़ गई। मैं भी उसके अंदर झड़ गया। हम पसीने से तर लेटे रहे। नेहा मेरे कान में फुसफुसाई — “तुम मुझे पूरी तरह अपना बना रहे हो…”

    तीसरा राउंड (सुबह 3 बजे — साइड पोज़िशन)
    नींद में ही हम लिपटे हुए थे। नेहा ने खुद जागकर मेरा लंड सहलाया। मैं जाग गया। हम साइड में लेटे रहे। मैंने पीछे से उसकी जाँघ ऊपर उठाई और लंड अंदर डाला। ये पोज़िशन बहुत गहरा और intimate था। मैं धीरे-धीरे धक्के मार रहा था। एक हाथ से उसकी छाती मसल रहा था, दूसरे से क्लिटोरिस रगड़ रहा था।

    नेहा की साँसें फूल रही थीं। “राहुल… ये पोज़िशन… बहुत अच्छा लग रहा है… गहराई तक महसूस हो रहा है…” मैंने गति बढ़ाई। उसकी गांड मेरे पेट से टकरा रही थी। हम दोनों एक-दूसरे को चूमते रहे। नेहा का एक हाथ पीछे करके मेरी जाँघ पकड़े हुए था। करीब 12 मिनट बाद हम दोनों साथ में झड़ गए।

    चौथा राउंड (सुबह 5:30 बजे — डॉगी स्टाइल)
    सुबह की हल्की रोशनी में नेहा घुटनों के बल हो गई। मैंने पीछे से उसकी कमर पकड़ी और एक झटके में पूरा लंड अंदर ठोक दिया। नेहा चीख उठी — “आआह्ह्ह… बहुत तेज़… लेकिन मत रुकना…”

    मैंने उसके बाल पकड़े और घोड़े की तरह तेज़ी से चोदना शुरू किया। उसकी गांड हर धक्के पर लहरा रही थी। मैंने एक हाथ से उसकी लटकती छातियों को दबाया, दूसरे से क्लिटोरिस रगड़ा। नेहा बार-बार चिल्ला रही थी — “हाँ… फाड़ दो… मेरी गांड पकड़कर चोदो… राहुल… मैं तुम्हारी हूँ… आह्ह… और तेज़…”

    पसीना हम दोनों के शरीर पर बह रहा था। ट्रेन की लहर के साथ चुदाई और भी मजेदार हो रही थी। नेहा दो बार झड़ी। आखिर में मैंने जोर-जोर से ठोककर झड़ गया।

    पाँचवाँ राउंड (दिल्ली पहुँचने से ठीक पहले — गोद में बैठकर)
    ट्रेन दिल्ली के पास थी। नेहा मेरी गोद में बैठ गई। हम दोनों आमने-सामने थे। उसने लंड अंदर लिया और कसकर चिपक गई। मैंने उसकी कमर पकड़कर ऊपर-नीचे किया। नेहा मेरी गर्दन में चेहरे को छुपाए हुए थी। किस करते हुए हम तेज़ी से चुदाई कर रहे थे।

    “राहुल… आखिरी बार… मुझे भर दो…” नेहा फुसफुसाई। मैंने तेज़ धक्के मारे। उसकी छातियाँ मेरी छाती से रगड़ खा रही थीं। आखिर में हम दोनों एक साथ जोर से झड़ गए।

    ट्रेन स्टेशन पर रुकी। हम दोनों थके लेकिन संतुष्ट थे। नेहा ने मुझे आखिरी गहरा किस दिया और बोली, “ये ट्रिप कभी नहीं भूलूँगी…”

  • ट्रेन में मिली अजनबी लड़की 1

    गोवा जा रही थी। 1st AC का प्राइवेट केबिन — सिर्फ दो बर्थ। ऊपरी बर्थ पर मैं (राहुल, 32 साल) बैठा था। लैपटॉप पर कुछ काम कर रहा था, लेकिन मन कहीं और था। नीचे वाली बर्थ पर एक लड़की बैठी हुई थी — नेहा। उम्र करीब 28-29। गोरी, लंबे काले बाल, हल्की-सी मुस्कान और आँखों में वो चमक जो ट्रेन की खिड़की से बाहर देखते हुए भी अंदर तक उतर जाती थी।

    ट्रेन दिल्ली से छूटते ही हमारी नज़रें मिलीं।

    “हाय… मैं नेहा,” उसने मुस्कुराते हुए कहा। “दिल्ली से गोवा… अकेली ट्रैवल कर रही हूँ।”

    मैंने भी मुस्कुराकर जवाब दिया, “राहुल… वही हाल। सोलो ट्रिप।”

    पहले तो बातें हल्की-फुल्की थीं — काम, मौसम, गोवा के प्लान। लेकिन जैसे-जैसे रात ढलती गई, बातें गहरी होती गईं। नेहा ने बताया कि वो सॉफ्टवेयर इंजीनियर है, मुंबई में जॉब करती है, लेकिन दिल में घूमने का शौक है। मैंने अपनी स्टार्टअप की कहानी सुनाई। हम दोनों हँसते रहे। चाय आई, हमने साथ में पिए। रात के 12 बजे तक हम दोनों केबिन में बैठे गप्पें मार रहे थे।

    ट्रेन की हल्की-सी लहर और बाहर की अंधेरी रात… नेहा की हँसी में एक अजीब सा जादू था। मैंने देखा कि वो बार-बार मेरी तरफ देख रही है। मैं भी छुप-छुपकर उसकी आँखों में देख रहा था।

    “तुम बहुत अच्छे लगते हो बात करने में,” उसने शरमाते हुए कहा।
    “तुम भी… सच में,” मैंने जवाब दिया।

    उस रात हम दोनों थक गए थे, लेकिन नींद नहीं आ रही थी। मैंने नीचे उतरकर उसके बर्थ के पास बैठ गया। हमने हेडफोन शेयर किए, एक ही गाना सुनते रहे — “तुम ही हो”। उसकी कंधे मेरे कंधे से छू रहे थे। हल्की-सी ठंडी हवा केबिन में घुस रही थी। हम बस एक-दूसरे के पास बैठे रहे, बातें करते रहे। कोई टच नहीं, बस वो गर्माहट… वो अनकही केमिस्ट्री।

    सुबह गोवा स्टेशन पर हम साथ उतरे।

    “अकेले घूमने का मजा नहीं आएगा,” मैंने कहा।
    नेहा मुस्कुराई, “तो फिर साथ घूमें?”

    हमने तय किया — एक ही होटल में बुकिंग, लेकिन दो अलग-अलग रूम। मैंने ऑनलाइन दो रूम बुक कर दिए — दोनों बिलकुल पास-पास, बालकनी से एक-दूसरे को देख सकते थे।

    पहला दिन — हमने कैलंगुट बीच पर घूमना शुरू किया। पानी में पैर डुबोए, फोटो खिंचवाईं, नारियल पानी पिया। नेहा का हँसना सुनकर मैं बार-बार मुड़ जाता। दोपहर में हमने पुराने गोवा के चर्च घूमे। शाम को पणजी के बाजार में घूमते हुए उसने मेरे हाथ में अपना हाथ डाल दिया। बस हल्का-सा… लेकिन दिल जोर-जोर से धड़कने लगा।

    दूसरा दिन और भी खूबसूरत। हम दोनों अंजुना बीच गए। सूरज ढल रहा था। नेहा ने सफेद ड्रेस पहनी थी जो हवा में लहरा रही थी। हम बालू पर बैठे, सूरजास्त देखा। उसने अपना सिर मेरे कंधे पर रख दिया। मैंने धीरे से उसके बालों में हाथ फेरा। कोई बात नहीं हुई… बस सन्नाटा और समंदर की लहरें।

    शाम को होटल लौटे।

    रात के 11:30 बजे थे। मैं अपने रूम में था। बालकनी में खड़ा समंदर की आवाज सुन रहा था। तभी मेरा फोन बजा — नेहा का मैसेज:

    “नींद नहीं आ रही… तुम्हारे रूम में आ जाऊँ? सिर्फ बातें करेंगे 😊”

    मैंने तुरंत रिप्लाई किया — “आ जाओ… दरवाजा खुला है।”

    दो मिनट बाद दरवाजा धीरे से खुला। नेहा हल्के गुलाबी नाइट सूट में थी। बाल खुले हुए, चेहरे पर हल्की शरम। वो अंदर आई और दरवाजा बंद कर दिया।

    हम दोनों बालकनी में खड़े हो गए। हवा ठंडी थी। नेहा ने कहा, “दो दिन में कितना अच्छा लग रहा है राहुल… तुम्हारे साथ।”

    मैंने मुड़कर उसे देखा। उसकी आँखों में चमक थी। मैंने धीरे से उसका हाथ पकड़ा और कहा, “मुझे भी… बहुत अच्छा लग रहा है नेहा।”

    हम दोनों एक-दूसरे के बहुत करीब आ गए। उसकी साँसें मेरे चेहरे पर पड़ रही थीं। मैंने धीरे से उसकी कमर पर हाथ रखा। नेहा ने अपनी आँखें बंद कर लीं। मैंने आगे बढ़कर उसके माथे पर हल्का-सा किस किया। फिर उसकी नाक पर… फिर गाल पर।

    “राहुल…” उसने फुसफुसाकर कहा और मेरी छाती पर सिर रख दिया।

    मैंने उसे गले लगा लिया। उसकी गरमाहट मेरे शरीर में उतर रही थी। हम बस एक-दूसरे को कसकर गले लगाए खड़े रहे। कोई जल्दी नहीं थी। बस वो पल… वो closeness… वो normal romance।

    नेहा ने धीरे से सिर ऊपर किया। हमारी नज़रें मिलीं। उसके होंठ हल्के से खुले हुए थे। मैंने धीरे-धीरे अपना चेहरा उसके चेहरे की तरफ ले जाया…

    नेहा मेरी आँखों में देखकर कुछ पल चुप रही। उसके गाल हल्के गुलाबी हो गए थे। बालकनी की हल्की ठंडी हवा उसके खुले बालों को उड़ा रही थी। मैंने उसकी कमर पर हाथ रखे हुए थे और धीरे-धीरे उसकी पीठ सहला रहा था।

    नेहा ने आखिरकार बहुत धीमी आवाज़ में कहा,
    “राहुल… मैं डर रही हूँ, लेकिन… मैं भी तुम्हारे साथ रहना चाहती हूँ आज रात। बस… बहुत धीरे-धीरे, ठीक है?”

    मैंने मुस्कुराकर उसके माथे पर किस किया और फुसफुसाया,
    “बिल्कुल धीरे-धीरे नेहा। जितना तुम चाहोगी, उतना ही। मैं कभी जल्दबाजी नहीं करूँगा।”

    नेहा ने हल्के से सिर हिलाया और मेरी छाती से लग गई। मैंने उसे कसकर गले लगा लिया। फिर धीरे से उसे अंदर रूम की तरफ ले आया। रूम में सिर्फ एक हल्की गोल्डन लाइट जल रही थी, जिससे पूरा कमरा रोमांटिक लग रहा था। खिड़की से समंदर की दूर की आवाज़ आ रही थी।

    हम दोनों बिस्तर के किनारे बैठ गए। नेहा की साँसें थोड़ी तेज़ थीं। मैंने उसका हाथ अपने हाथ में लिया और उँगलियों को आपस में फंसाया। कुछ देर हम बस ऐसे ही बैठे रहे, एक-दूसरे की आँखों में देखते हुए।

    फिर मैंने धीरे से उसकी तरफ झुका और उसके होंठों को फिर से चूमा। ये किस पहले से ज्यादा गहरा और लंबा था। नेहा ने भी जवाब दिया। उसके होंठ नरम और गर्म थे। हमारी जीभें हल्के-हल्के छूने लगीं। किस के दौरान मैंने एक हाथ से उसके बालों को सहलाया, दूसरे हाथ से उसकी कमर को पकड़ रखा था।

    किस खत्म होने पर नेहा ने शरमाते हुए कहा,
    “राहुल… मेरी ड्रेस…”

    मैंने धीरे से उसके कंधे से ड्रेस की पट्टियाँ सरकाईं। ड्रेस धीरे-धीरे नीचे खिसकती गई और उसके गोरे, नरम कंधे बाहर आ गए। मैंने ड्रेस को और नीचे खींचा। अब नेहा सिर्फ़ काले रंग की ब्रा और पैंटी में थी। उसकी छातियाँ भरी हुई थीं और ब्रा के अंदर हल्के-हल्के उभर रही थीं। उसकी कमर पतली थी और जाँघें गोल और नरम दिख रही थीं।

    नेहा ने शरमा कर अपनी बाँहें छाती पर रख लीं। मैंने मुस्कुराते हुए उसके हाथ हटाए और बोला,
    “तुम बहुत सुंदर हो नेहा… डरो मत।”

    फिर मैंने अपनी शर्ट के बटन एक-एक करके खोले और उतार दी। अब मैं सिर्फ़ ट्राउज़र में था। नेहा ने मेरी छाती पर हाथ रखा और धीरे-धीरे सहलाने लगी। उसकी उँगलियाँ मेरे शरीर पर घूम रही थीं। मैंने उसे फिर से किस किया — इस बार गर्दन पर, कंधे पर, फिर क्लेविकल बोन पर। हर किस के साथ नेहा की साँसें भारी होती जा रही थीं।

    मैंने धीरे से उसकी ब्रा का हुक खोला। ब्रा ढीली हो गई और मैंने उसे उतार दिया। नेहा की दोनों छातियाँ पूरी तरह बाहर आ गईं — गोल, भरी हुई, हल्के ब्राउन निप्पल्स के साथ। वे हल्के-हल्के हिल रही थीं। मैंने एक हाथ से उन्हें बहुत नरम तरीके से छुआ। उँगलियाँ उनके नरम मांस पर घूम रही थीं। नेहा की आँखें बंद हो गईं और उसके मुँह से हल्की सी आह निकली — “आह्ह… राहुल…”

    मैंने झुककर एक निप्पल को होंठों से छुआ, फिर धीरे से चूसा। नेहा का शरीर काँप गया। मैं दूसरी छाती को हाथ से धीरे-धीरे मसल रहा था। नेहा ने मेरे सिर को अपने सीने से दबाया और बालों में उँगलियाँ फिराने लगी।

    “राहुल… बहुत अच्छा लग रहा है…” उसने फुसफुसाकर कहा।

    कुछ देर तक मैं उसकी छातियों को चूमता और सहलाता रहा। फिर मैंने धीरे से उसे बिस्तर पर लिटा दिया। अब नेहा सिर्फ़ पैंटी में थी। मैंने उसकी जाँघों पर हाथ फेरा, फिर पैंटी के किनारे पर उँगलियाँ चलाईं। नेहा ने शरमाते हुए जाँघें हल्की सी बंद कर लीं।

    मैंने धीरे से उसकी पैंटी भी उतार दी। अब नेहा पूरी तरह नंगी मेरे सामने लेटी थी। उसकी चूत पर हल्के बाल थे, लेकिन बहुत साफ़ और गुलाबी दिख रही थी। मैंने उसकी जाँघों को धीरे से अलग किया। नेहा की साँसें अब बहुत तेज़ हो गई थीं।

    मैंने भी अपनी ट्राउज़र और अंडरवियर उतार दी। मेरा लंड पहले से ही सख्त हो चुका था। नेहा ने उसे देखा और शरमा गई।

    मैं बिस्तर पर उसके पास लेट गया। हम दोनों एक-दूसरे को कसकर गले लगाए हुए थे। नंगे शरीर एक-दूसरे से चिपके हुए थे। मैंने उसे फिर से किस किया — होंठों पर, गर्दन पर, छातियों पर। मेरे हाथ उसकी पीठ, कमर, जाँघों पर घूम रहे थे। नेहा भी मेरी पीठ और कूल्हों को सहला रही थी।

    धीरे-धीरे मैंने अपना हाथ उसकी जाँघों के बीच ले जाया। उँगलियाँ उसकी चूत की फाँक पर घूमने लगीं। नेहा बहुत गीली हो चुकी थी। जब मैंने क्लिटोरिस पर हल्के से उँगली घुमाई, तो नेहा ने जोर से कराह मारी — “आह्ह… राहुल… धीरे…”

    मैं बहुत धीरे-धीरे उँगली अंदर-बाहर करने लगा। नेहा की कमर उठ रही थी। उसकी साँसें फूल रही थीं। मैंने दूसरी उँगली भी डाल दी और धीरे से गति बढ़ाई। नेहा का पूरा शरीर सिहर रहा था।

    कुछ देर बाद नेहा ने मेरी तरफ देखा और शर्माते हुए कहा,
    “राहुल… अब…”

  • पापा की सुहागरात 2

    पापा ने रिया की जांघें और फैलाईं। रिया की चूत अब पूरी तरह गीली हो चुकी थी – गुलाबी फांके चमक रही थीं और बीच में छोटी-सी क्लिटोरिस सूजकर बाहर निकल आई थी। पापा ने दोनों हाथों से रिया की जांघें पकड़ीं, सिर नीचे किया और अपनी गर्म जीभ सीधी रिया की चूत पर लगा दी।

    “आआह्ह्ह…” रिया की पूरी कमर उठ गई। पापा ने पहले तो चूत की दोनों फांकों को जीभ से अलग-अलग चाटा, फिर पूरी चूत पर लंबी-लंबी लिक्कड़ें मारीं। उनकी जीभ रिया की क्लिटोरिस पर रुककर जोर-जोर से घुमने लगी। रिया दोनों हाथों से चादर पकड़कर कराह रही थी – “पापा… उफ्फ… क्या कर रहे हो… आह्ह्ह… बहुत अच्छा लग रहा है…”

    पापा ने अपनी जीभ को रिया की चूत के अंदर भी थोड़ा डाला और अंदर-बाहर करने लगे। रिया की चूत से अब चिकनाहट निकलकर पापा की ठुड्डी तक बह रही थी। पापा लगातार चूस रहे थे, चाट रहे थे, हल्के से काट भी रहे थे। रिया की सांसें इतनी तेज हो गई थीं कि वो लगातार कराह रही थी।

    कुछ देर बाद पापा ने सिर उठाया। उनके होंठ और ठुड्डी रिया की चूत के रस से चमक रहे थे। उन्होंने रिया की तरफ देखा और गहरी आवाज में बोले,

    “अब तुम मेरे लंड को चूसो रिया…”

    रिया शर्मा गई। उसने आँखें नीची कर लीं और धीमी आवाज में बोली, “पापा… मुझे नहीं आता… मैंने कभी नहीं किया…”

    पापा मुस्कुराए। मम्मी ने आगे बढ़कर रिया के बालों को प्यार से सहलाया और बोलीं, “कोई बात नहीं बेटा… मैं सिखाती हूँ।”

    मम्मी ने पापा के सामने घुटनों के बल बैठ गईं। पापा का लंड अभी भी पूरी तरह तना हुआ, मोटा और लाल सिरा चमक रहा था। मम्मी ने पहले तो लंड को हाथ में पकड़ा, ऊपर-नीचे हिलाया, फिर जीभ निकालकर लंड के सिरे पर घुमाई। पापा से हल्की सी कराह निकली।

    मम्मी ने रिया की तरफ देखा और कहा, “देखो… पहले लंड को हाथ में पकड़ो… फिर जीभ से चाटो… और फिर मुंह में ले लो… धीरे-धीरे… जैसे लॉलीपॉप चूसती हो।”

    मम्मी ने पापा का पूरा लंड मुंह में ले लिया। उन्होंने गहरी चूसाई शुरू कर दी – ऊपर-नीचे सिर हिलाते हुए, कभी-कभी लंड को गले तक ले जातीं। उनके मुंह से “ग्लक-ग्लक” की आवाजें आने लगीं। पापा की उंगलियां मम्मी के बालों में फंस गईं।

    कुछ देर बाद मम्मी ने लंड मुंह से निकाला। लंड अब और भी ज्यादा चमकदार और लार से तर था। मम्मी ने रिया को इशारा किया, “अब तुम ट्राई करो।”

    रिया झिझकते हुए घुटनों के बल बैठ गई। उसने कांपते हाथों से पापा का लंड पकड़ा। पहले तो सिर्फ जीभ से सिरा चाटा। फिर धीरे-धीरे मुंह खोलकर लंड के आधे हिस्से को मुंह में ले लिया। मम्मी ने उसके सिर को हल्के से आगे-पीछे किया और सिखाया, “हां… ऐसे… जीभ अंदर भी घुमाओ… चूसो…”

    रिया अब धीरे-धीरे सीख रही थी। वो पापा का लंड चूसने लगी – कभी-कभी गहरी चूसाई, कभी सिर्फ सिरा चूसती। पापा आंखें बंद करके कराह रहे थे – “हां रिया… बहुत अच्छा… आह्ह्ह…”

    मम्मी ने रिया की चूचियां सहलाते हुए कहा, “अब हम दोनों मिलकर करते हैं।”

    दोनों औरतें – मम्मी और रिया – पापा के लंड के दोनों तरफ बैठ गईं। उन्होंने अपनी-अपनी बड़ी-बड़ी चूचियां पापा के लंड के इर्द-गिर्द लगा दीं। मम्मी ने अपनी चूचियों को दबाकर लंड को बीच में फंसा लिया। रिया ने भी अपनी चूचियां जोड़ लीं। अब पापा का मोटा, गर्म लंड दोनों की चूचियों के बीच पूरी तरह दबा हुआ था।

    पापा ने कमर हिलानी शुरू कर दी। लंड दोनों की चूचियों के बीच ऊपर-नीचे घिसने लगा। चूचियों की नरम, गर्मी और लार की चिकनाहट से लंड फिसल रहा था। कभी मम्मी चूचियां दबाकर और जोर से रगड़तीं, कभी रिया अपनी चूचियों को ऊपर-नीचे करके लंड को मसलती। पापा के लंड का सिरा दोनों की चूचियों के बीच से बाहर निकल-निकलकर चमक रहा था।

    तीनों के मुंह से सिर्फ सिसकारियां और हल्की-हल्की कराहें निकल रही थीं। कमरे में गर्मी बढ़ गई थी।

    पापा ने दोनों की चूचियों के बीच से लंड निकाला। लंड अब पूरी तरह लार और चूत के रस से चमक रहा था, बहुत सख्त और मोटा। उन्होंने रिया को बेड पर लिटा दिया। रिया की जांघें खुद-ब-खुद फैल गईं। उसकी चूत पूरी तरह गीली, सूजी हुई और चमक रही थी।

    पापा ने रिया की जांघों को कंधों पर रख लिया और लंड का मोटा सिरा रिया की चूत के मुंह पर रख दिया। रिया ने घबराकर आँखें बंद कर लीं। पापा ने धीरे से कमर आगे की और लंड का सिरा रिया की चूत में घुसने लगा।

    “आआह्ह्ह्ह… पापा… धीरे… बहुत मोटा है…” रिया जोर से कराह उठी।

    पापा ने एक जोरदार झटका दिया। आधा लंड एक ही बार में रिया की चूत में घुस गया। रिया की आँखें खुल गईं, मुंह से चीख निकल गई – “उफ्फ्फ्फ… आह्ह्ह… फट जाएगी…”

    पापा रुके नहीं। उन्होंने दूसरा जोरदार झटका मारा और पूरा मोटा लंड रिया की चूत के अंदर तक धंस गया। रिया की चूत पूरी तरह फैल गई थी। पापा ने धीरे-धीरे चुदाई शुरू की – लंबे-लंबे स्ट्रोक। हर झटके में लंड पूरी तरह बाहर निकलता और फिर जोर से अंदर चला जाता।

    रिया लगातार चीख रही थी – “पापा… आह्ह्ह… बहुत गहरा… उफ्फ… और जोर से… हां… हां…”

    पहला राउंड काफी तेज था। पापा ने रिया को मिशनरी पोजिशन में 10-12 मिनट तक चोदा। रिया की चूचियां हर झटके के साथ उछल रही थीं। आखिर में पापा ने तेज-तेज झटके मारे और रिया की चूत के अंदर ही जोर से झड़ गए। गर्म वीर्य रिया की चूत में भर गया। रिया भी पहली बार में ही झड़ गई – उसकी चूत सिकुड़-सिकुड़कर पापा का लंड दबा रही थी।

    थोड़ी देर आराम के बाद पापा ने रिया को घुटनों के बल करवाया – डॉगी स्टाइल। दूसरा राउंड शुरू हुआ। इस बार पापा ने रिया की कमर पकड़कर बहुत जोर-जोर से चोदा। हर झटका इतना तेज था कि रिया का पूरा शरीर आगे की तरफ धकेला जा रहा था। रिया की चूत से “पच-पच-पच” की आवाजें आने लगीं।

    “हां पापा… फाड़ दो… आह्ह्ह… मेरी चूत फाड़ दो…” रिया अब पूरी तरह भड़क चुकी थी।

    पापा ने रिया की गांड पर थप्पड़ मारे और बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा। दूसरे राउंड में भी पापा ने रिया की चूत में ही झड़ दिया। रिया दो बार झड़ चुकी थी। उसकी जांघें कांप रही थीं।

    तीसरा राउंड सबसे लंबा था। पापा ने रिया को अपनी गोद में उठा लिया – स्टैंडिंग पोजिशन। रिया की टांगें पापा की कमर के चारों तरफ लिपटी हुई थीं। पापा खड़े-खड़े ही रिया को ऊपर-नीचे करके चोद रहे थे। रिया की चूचियां पापा के मुंह के सामने उछल रही थीं। पापा उन्हें चूस रहे थे। इस राउंड में रिया लगातार चीख रही थी और तीन बार झड़ गई। आखिर में पापा ने भी बहुत जोर से झड़कर रिया की चूत को वीर्य से भर दिया।

    अब रिया पूरी तरह थक चुकी थी। वो बेड पर लेटी हुई हांफ रही थी। उसकी चूत से पापा का सफेद वीर्य बाहर निकल-निकलकर चादर पर गिर रहा था।

    पापा ने मम्मी की तरफ देखा। मम्मी अभी भी नंगी बैठी सब देख रही थीं और उनकी चूत भी गीली हो चुकी थी। पापा ने मम्मी को बेड पर लिटाया और तुरंत उन पर चढ़ गए।

    मम्मी की चुदाई सिर्फ एक राउंड हुई, लेकिन वो बहुत प्यार भरा और गहरा था। पापा ने मम्मी को मिशनरी में चोदा – धीरे-धीरे लेकिन गहरे स्ट्रोक। मम्मी पापा की पीठ पर नाखून गाड़ रही थीं और बार-बार किस ले रही थीं।

    “मेरे प्यारे… आज भी तुम्हारा लंड मुझे बहुत अच्छा लगता है…” मम्मी कराह रही थीं।

    पापा ने मम्मी की चूत में भी झड़ दिया। मम्मी भी झड़ गईं। दोनों एक-दूसरे को कसकर चिपके रहे।

    तीन राउंड रिया की और एक राउंड मम्मी की चुदाई के बाद रात के करीब 3 बजे थे। तीनों पूरी तरह थक चुके थे। पापा बीच में लेट गए। रिया उनकी दाईं तरफ और मम्मी बाईं तरफ। दोनों औरतें पापा की छाती पर सिर रखकर लेट गईं। पापा ने दोनों को अपनी बाहों में कस लिया।

    रिया और मम्मी दोनों की चूतें अब सूजी हुई और वीर्य से भरी हुई थीं। कमरे में सेक्स की तेज महक फैली हुई थी।

    धीरे-धीरे तीनों की आंखें बंद हो गईं और वो गहरी नींद में सो गए।

  • सास ससुर की चूदाई

    गर्मी का वो रात था, जब बिजली चली गई और पूरा घर भट्टी की तरह तप रहा था। राधा (48 साल), मेरी सास, अपने बेडरूम में अकेली लेटी हुई थीं। उनकी हल्की सी नीली साड़ी पसीने से पूरी तरह भीग चुकी थी। साड़ी का पल्लू उनके भारी 38D साइज़ की छातियों पर से सरक गया था, जिससे ब्लाउज़ के अंदर की सफ़ेद ब्रा का किनारा साफ़ दिख रहा था। उनकी कमर की गोलाई और नाभि पसीने की वजह से चमक रही थी।

    वे बार-बार करवट बदल रही थीं। उनकी साँसें भारी हो रही थीं। “उफ्फ… कितनी गर्मी है आज…” उन्होंने फुसफुसाते हुए कहा।

    तभी दरवाज़ा धीरे से खुला। ससुर रामलाल (52 साल) अंदर आए। वे सिर्फ़ लूंगी पहने हुए थे। उनकी छाती पर सफ़ेद बाल थे, लेकिन शरीर अभी भी मजबूत था। उनकी आँखें राधा के पसीने से तर बदन पर टिक गईं।

    “बहू… नींद नहीं आ रही क्या?” रामलाल ने गहरी आवाज़ में पूछा।

    राधा ने शरमाते हुए साड़ी का पल्लू ठीक करने की कोशिश की, लेकिन पसीने की वजह से वो और चिपक गया। “जी… बहुत गर्मी है ससुर जी। पंखा भी काम नहीं कर रहा।”

    रामलाल बिस्तर के पास आए और किनारे पर बैठ गए। उनकी नज़र राधा की जाँघों पर पड़ी, जहाँ साड़ी ऊपर सरक गई थी और गोरी, मोटी जाँघें चमक रही थीं। उन्होंने धीरे से हाथ बढ़ाया और राधा की कमर पर रख दिया।

    “ये गर्मी तो शरीर के अंदर भी है ना बहू…?” उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा। उनकी उँगलियाँ राधा की नाभि के आस-पास घूमने लगीं। राधा का शरीर हल्का सा काँप गया।

    “ससुर जी… ये क्या…” राधा ने कमज़ोर विरोध किया, लेकिन उनकी आवाज़ में शरम के साथ उत्तेजना भी थी।

    रामलाल ने कोई जवाब नहीं दिया। उन्होंने राधा का पल्लू पूरी तरह खींच लिया। साड़ी का आंचल अब बिस्तर पर बिखरा पड़ा था। फिर उन्होंने ब्लाउज़ के हुक एक-एक करके खोलने शुरू किए। हर हुक खुलने के साथ राधा की साँसें तेज़ होती गईं।

    जब आखिरी हुक खुला, तो राधा की भारी, दूधिया छातियाँ ब्रा से बाहर झाँकने लगीं। रामलाल ने ब्रा का हुक भी खोल दिया। दोनों बड़े-बड़े स्तन एकदम से बाहर आ गए। उनकी ब्राउन निप्पल्स पहले से ही सख्त हो चुकी थीं और पसीने से चमक रही थीं।

    “वाह… सास जी, कितनी सुंदर हैं आपकी चूचियाँ…” रामलाल ने प्रशंसा की और दोनों हाथों से उन्हें थाम लिया। उन्होंने धीरे-धीरे मसलना शुरू किया। उँगलियाँ नरम मांस में धंस रही थीं। राधा की आँखें बंद हो गईं। “आह्ह… ससुर जी… धीरे… उफ्फ…”

    रामलाल झुक गए और एक निप्पल को मुँह में ले लिया। उन्होंने जोर-जोर से चूसना शुरू किया, जीभ से चारों तरफ़ घुमाते हुए। दूसरे स्तन को हाथ से दबाते और निप्पल को उँगलियों से नोचते रहे। राधा की कमर बार-बार ऊपर उठ रही थी। उनके मुँह से अनायास आहें निकल रही थीं — “हाय… अाह… और चूसिए… मजा आ रहा है…”

    रामलाल ने साड़ी की बाकी लपेट भी खोल दी। अब राधा सिर्फ़ पेटीकोट में थीं। उन्होंने पेटीकोट की नाड़ी खींची और उसे भी उतार दिया। राधा की जाँघें पूरी तरह नंगी हो गईं। उनकी चूत पर हल्के-हल्के बाल थे, लेकिन पसीने और रस की वजह से पूरी तरह गीली और चमकदार दिख रही थी। चूत की फाँकें थोड़ी-थोड़ी खुली हुई थीं।

    रामलाल ने अपनी उँगली राधा की चूत पर रखी और धीरे से ऊपर-नीचे रगड़ने लगे। क्लिटोरिस पर जब उँगली घूमी, राधा ने जोर से कराह उठाई — “अाह्ह्ह… वहाँ… हाँ… ससुर जी…”

    उन्होंने एक उँगली अंदर डाली। अंदर बहुत गर्म और फिसलन भरा था। रामलाल ने दूसरी उँगली भी डाल दी और तेज़ी से अंदर-बाहर करने लगे। राधा की चूत से “फच फच” की आवाज़ आने लगी। उनका रस उँगलियों पर चिपक रहा था।

    “बहुत दिन से प्यासी थीं ना सास जी? देखो कितना पानी निकल रहा है…” रामलाल ने गंदी बात करते हुए कहा।

    राधा शरमा गई लेकिन जवाब में उनकी जाँघें और फैल गईं।

    अब रामलाल ने अपनी लूंगी उतार दी। उनका लंड बाहर निकला — मोटा, 7 इंच लंबा, सिर लाल और नोक से पारदर्शी पानी टपक रहा था। वे राधा के ऊपर चढ़ गए। लंड की नोक को चूत की फाँक पर रखा और धीरे-धीरे रगड़ने लगे।

    फिर एक जोरदार झटका।

    “आआआह्ह्ह…!” राधा की चीख निकल गई। रामलाल का पूरा मोटा लंड एक ही बार में राधा की चूत में घुस गया था। चूत की दीवारें लंड को कसकर जकड़ रही थीं।

    रामलाल रुक गए, राधा को सम्हलने का समय दिया। फिर धीरे-धीरे धक्के मारने शुरू किए। हर धक्के के साथ राधा की छातियाँ जोर-जोर से उछल रही थीं। कमरे में सिर्फ़ चुदाई की फच-फच आवाज़, राधा की आहें और रामलाल की भारी साँसें गूँज रही थीं।

    “हाँ… और जोर से… ससुर जी… फाड़ दो मेरी चूत… बहुत दिन से तरस रही थी…” राधा अब पूरी तरह उत्तेजित हो चुकी थीं।

    रामलाल ने रफ़्तार बढ़ा दी। वे राधा की जाँघें कंधों पर रखकर गहरे धक्के मारने लगे। लंड हर बार पूरी तरह बाहर निकलकर फिर से जड़ तक घुस रहा था। राधा की चूत से सफ़ेद झाग बनने लगा था।

    कुछ देर बाद उन्होंने राधा को घुटनों के बल करवाया। डॉगी स्टाइल में अब लंड और भी गहराई तक जा रहा था। रामलाल ने राधा के बाल पकड़े और घोड़े की तरह तेज़ी से ठोकने लगे। राधा की गांड हर धक्के पर लहरा रही थी।

    “अाह… हाँ… इसी तरह… मेरी गांड पकड़कर चोदिए… उफ्फ… मजा आ रहा है…”

    रामलाल ने एक हाथ से राधा की लटकती छातियों को दबाया, दूसरे हाथ से क्लिटोरिस रगड़ा। राधा पहली बार झड़ गईं। उनका पूरा शरीर सिहर उठा, चूत सिकुड़-सिकुड़कर लंड को दबाने लगी। लेकिन रामलाल रुके नहीं।

    वे लगातार 25-30 मिनट तक चोदते रहे। कई बार पोज़िशन बदले — कभी मिशनरी, कभी राधा ऊपर, कभी साइड से। राधा तीन बार झड़ चुकी थीं। उनका पूरा बदन पसीने और रस से तर था।

    आखिर में रामलाल ने राधा को वापस लेटाया। उन्होंने अपना लंड राधा की छातियों के बीच रखा और जोर-जोर से रगड़ने लगे। कुछ ही देर में उनका गर्म, गाढ़ा वीर्य राधा की छातियों, गर्दन, ठोड़ी और मुँह पर फैल गया। कुछ बूँदें राधा के होंठों पर भी पड़ीं।

    राधा ने जीभ निकालकर वीर्य चाट लिया और मुस्कुराई। फिर उन्होंने रामलाल के लंड को हाथ में लेकर बचा हुआ वीर्य चूस लिया।

    दोनों थके हुए, लेकिन बेहद संतुष्ट, एक-दूसरे से लिपटकर लेट गए।

    राधा ने धीरे से कहा, “ससुर जी… आज तो सारी गर्मी निकल गई… लेकिन कल फिर लगेगी तो… आप फिर उतार देंगे ना?”

    रामलाल हँसे और राधा की छाती पर हाथ फेरते हुए बोले, “जब भी गर्मी लगे, बता देना बहू… मैं पूरी रात गर्मी उतार दूँगा।”

  • पापा की सुहागरात 1

    मेरे पापा बहुत अमीर घर के हैं। उनके पास पैसे की कोई कमी नहीं। 21 साल पहले उनकी शादी मेरी मम्मी से हुई थी। दोनों बहुत खुश थे, लेकिन मेरे जन्म के बाद मम्मी को कुछ प्रॉब्लम हो गई थी। डॉक्टर ने कहा कि अब मम्मी प्रेग्नेंट नहीं हो सकतीं। पापा को एक बहुत खूबसूरत लड़की बहुत पसंद थी – नाम था रिया। वो 24 साल की थी, गोरी, लंबी, मॉडल जैसी फिगर वाली। पापा और मम्मी ने मिलकर फैसला लिया कि पापा दूसरी शादी कर लेंगे। मम्मी ने खुद कहा – “मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं, घर में बच्चा चाहिए ना… और तुम्हें भी खुशी मिलेगी।”

    शादी फिक्स हो गई। अब तैयारी शुरू हुई।

    सबसे पहले शॉपिंग। पापा ने मुझे और मम्मी को साथ लिया। सबसे महंगे ब्रांड के शॉप में गए। मम्मी ने खुद रिया के लिए लहंगा चुना – गोल्डन और रेड कलर का, बहुत भारी, गहनों वाला। रिया का माप लेकर सिलवाया। पापा ने रिया के लिए डायमंड ज्वेलरी का सेट लिया – नेकलेस, ईयररिंग्स, मंगलसूत्र सब कुछ। मम्मी ने कहा, “ये मेरी बहू के लिए है, परफेक्ट होना चाहिए।” पापा हंस रहे थे, उनकी आंखों में वो चमक थी जो शादी वाली रात की होती है।

    मम्मी को भी नया साड़ी और मेकअप सेट मिला। मैंने भी सूट लिया। फिर पापा को तैयार करने की बारी। पापा ने सबसे एक्सपेंसिव शेरवानी ऑर्डर की – व्हाइट और गोल्ड, बहुत शाही। टेलर घर पर आया, फिटिंग की।

    अगले दिन सबको शॉपिंग के बाद पार्लर जाना था। मम्मी और रिया दोनों को एक ही हाई-क्लास पार्लर में बुकिंग थी। मैं और पापा भी साथ गए। रिया को देखकर मेरा मुंह खुला रह गया – वो इतनी खूबसूरत लग रही थी। पार्लर में रिया का फेशियल, हेयर स्टाइल, मेहंदी, सब हो रहा था। उसकी नरम त्वचा पर मेहंदी लगाते समय वो हल्के से मुस्कुरा रही थी। पापा उसे घूर रहे थे, उनकी नजरें उसकी गर्दन, उसके होंठों और उसके ब्लाउज के ऊपर वाले हिस्से पर अटक रही थीं। मम्मी ने पापा को कोहनी मारी और हंस दी – “अभी तो सुहागरात बाकी है, सब्र करो।”

    पापा का भी पार्लर ट्रीटमेंट हुआ – हेयर कट, फेशियल, मसाज। वो 50 के ऊपर थे लेकिन फिट और हैंडसम लग रहे थे। शेरवानी में जब तैयार हुए तो लग रहे थे जैसे कोई राजा।

    शादी का दिन आ गया। छोटी लेकिन बहुत लग्जरी शादी थी – सिर्फ फैमिली और क्लोज फ्रेंड्स। मंदिर में फेरे हुए। रिया ने लहंगे में इतनी खूबसूरत लग रही थी कि पापा की सांसें थम सी गईं। जब पापा ने रिया को मंगलसूत्र पहनाया तो रिया की आंखें झुक गईं, लेकिन उसके होंठों पर हल्की मुस्कान थी। फेरे के बाद पापा ने रिया का हाथ पकड़ लिया और उसे गाड़ी में बिठाया।

    रात के 11 बजे गाड़ी घर पहुंची। घर पूरी तरह से फूलों और लाइट्स से सजाया हुआ था। मैं, मम्मी और बाकी सब बाहर खड़े थे। पापा ने रिया को गोद में उठाया (जैसा कि रीति है) और घर के अंदर ले आए। रिया की सांसें तेज हो रही थीं। पापा की छाती से सटकर वो चुपचाप लेटी रही।

    घर आ चुका था।

    सुहागरात की रात शुरू होने वाली थी…

    हम सबने खाना खाया। खाने के बाद माहौल थोड़ा शरमाया हुआ लेकिन रोमांटिक था। मम्मी हल्के से मुस्कुरा रही थीं। रिया की आंखें नीची थीं, उसके गालों पर हल्की लाली चढ़ी हुई थी। पापा ने सबको देखा और फिर मम्मी की तरफ मुड़कर बोले,

    “आज की रात मेरी दूसरी सुहागरात है… मैं चाहता हूँ कि तुम दोनों मेरे साथ रहो।”

    मम्मी ने हल्के से सिर हिलाया और रिया की तरफ देखकर मुस्कुराई। रिया शरमा गई लेकिन कुछ नहीं बोली।

    पापा ने रिया का हाथ पकड़ लिया और तीनों master bedroom की तरफ चल पड़े। master bedroom सच में बहुत बड़ा था – किंग साइज बेड, सोफा, ड्रेसिंग टेबल, बड़ा सा मिरर और डिम लाइट्स। पापा ने रिया को अंदर ले जाकर दरवाजा बंद कर दिया।

    मैं पहले ही चार छोटे-छोटे हाई डेफिनिशन कैमरे खरीदकर master bedroom में फिट कर चुका था। ये कैमरे इतने छोटे और छिपे हुए थे कि किसी को शक भी नहीं होता। मैंने सब कैमरों को अपने रूम के बड़े TV से कनेक्ट कर लिया था। अब मैं अपने रूम में आ गया।

    दरवाजा बंद करके मैंने TV ऑन किया।

    स्क्रीन पर master bedroom साफ-साफ दिख रहा था। चारों कैमरों से अलग-अलग एंगल थे – एक बेड के ऊपर से, एक साइड से, एक मिरर के पास से और एक थोड़ा ऊपर से।

    पापा और रिया बेड के पास खड़े थे। मम्मी बेड के एक कोने पर बैठ गई थीं, चुपचाप देख रही थीं।

    पापा ने रिया को अपनी तरफ खींचा। रिया की सांसें तेज हो रही थीं। पापा ने धीरे से रिया के लहंगे का दुपट्टा उतारा और फर्श पर गिरा दिया। रिया की गोरी गर्दन और कंधे अब खुले थे। पापा ने झुककर रिया की गर्दन पर हल्का सा किस किया। रिया के शरीर में झुरझुरी सी दौड़ गई।

    “तुम बहुत खूबसूरत हो रिया…” पापा ने धीमी आवाज में कहा और रिया को अपनी बाहों में कसकर जकड़ लिया।

    रिया ने शरमाते हुए पापा की छाती पर हाथ रखा। पापा ने रिया का चेहरा ऊपर उठाया और उसके होंठों पर धीरे से किस किया। पहले तो रिया के होंठ सख्त थे, लेकिन धीरे-धीरे वो पिघलने लगी। पापा का किस गहरा होता गया। रिया की सांसें अब और तेज हो गई थीं।

    पापा ने एक हाथ रिया की कमर पर रखा और दूसरे हाथ से उसके बालों में उंगलियां फिराईं। किस के बीच में पापा ने रिया के निचले होंठ को हल्के से काटा। रिया से एक हल्की सी सिसकारी निकल गई – “आह…”

    मम्मी चुपचाप बैठी देख रही थीं, उनके चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान थी।

    पापा ने किस छोड़कर रिया की आंखों में देखा। फिर धीरे से रिया के ब्लाउज की तरफ हाथ बढ़ाया। रिया शर्मा गई और पापा की छाती में मुंह छिपा लिया। पापा हल्के से हंसे और रिया को और कसकर अपनी बाहों में ले लिया।

    अभी सिर्फ normal romance चल रहा था… लेकिन हवा में गर्मी बढ़ने लगी थी।

    पापा ने रिया को अपनी बाहों में कसकर जकड़े रखा था। किस के बाद उन्होंने मम्मी की तरफ देखा और धीमी, गहरी आवाज में बोले,

    “शुरू हो जा…”

    मम्मी मुस्कुराईं। उनकी आंखों में एक शरारती चमक थी। वो बेड से उठीं और रिया के पास आईं। रिया अभी भी शर्मा रही थी, उसकी सांसें तेज थीं। मम्मी ने धीरे से रिया के लहंगे की साइड वाली जिप खोली और लहंगा नीचे सरका दिया। अब रिया सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में खड़ी थी।

    मम्मी ने ब्लाउज के हुक एक-एक करके खोले। ब्लाउज खुलते ही रिया की गोरी, भरी हुई ब्रेस्ट्स बाहर आ गईं – सिर्फ एक पतला सा ब्रा उन्हें ढके हुए था। रिया ने शरम से आँखें बंद कर लीं। मम्मी ने ब्रा का हुक भी खोल दिया। रिया की बड़ी-बड़ी, गोल, गोरी चूचियां पूरी तरह नंगी हो गईं। उनकी निप्पल्स हल्के गुलाबी रंग की थीं और पहले से ही थोड़ी सी खड़ी हो चुकी थीं।

    फिर मम्मी ने रिया का पेटीकोट भी उतार दिया। अब रिया सिर्फ एक पतली सी लेस वाली पैंटी में खड़ी थी। उसकी जांघें गोरी और मोटी थीं, कमर पतली, और गांड गोल-गोल। मम्मी ने आखिरी में रिया की पैंटी भी उतार दी। रिया अब पूरी तरह नंगी थी। उसकी चूत पर हल्के-हल्के बाल थे, जो साफ दिख रहे थे। रिया ने दोनों हाथों से अपनी चूचियां और चूत ढकने की कोशिश की, लेकिन मम्मी ने उसके हाथ हटा दिए और बोलीं, “शर्मा मत बेटा… आज तुम्हारी सुहागरात है।”

    अब मम्मी पापा की तरफ मुड़ीं। उन्होंने पापा की शेरवानी के बटन खोले और पूरी शेरवानी उतार दी। फिर अंडरवियर भी निकाल दिया। पापा अब बिल्कुल नंगे थे। उनका लंड एकदम तना हुआ, खड़ा और मोटा था – लंबाई अच्छी-खासी, मोटाई भी काफी, सिरा लाल और चमकदार, नसें उभरी हुईं। पापा का लंड पूरी तरह तैयार था, हल्के-हल्के झूल रहा था।

    पापा ने रिया को बेड पर लिटा दिया। रिया लेट गई, उसकी सांसें तेज हो रही थीं। पापा उसके ऊपर झुके और पहले उसके होंठों पर फिर से गहरा किस किया। किस के दौरान उनकी जीभ रिया के मुंह में घुस गई और रिया की जीभ से खेलने लगी। रिया से हल्की-हल्की सिसकारियां निकल रही थीं।

    फिर पापा ने रिया की गर्दन चूमी, उसके कंधों को चाटा। धीरे-धीरे वो नीचे उतरे और रिया की दोनों चूचियों को अपने हाथों में ले लिया। वो नरम लेकिन भरी हुई थीं। पापा ने एक चूची को जोर से दबाया और दूसरे की निप्पल को मुंह में ले लिया। वे चूसने लगे, जीभ से चाटने लगे, हल्के से काटने लगे। रिया की कमर उठने लगी। वो कराह रही थी – “आह… पापा… उफ्फ…”

    मम्मी भी अब शामिल हो गईं। उन्होंने पापा को थोड़ा हटाया और खुद रिया की दूसरी चूची को चूसना शुरू कर दिया। दोनों तरफ से रिया की चूचियां चूस-चूसकर लार से तर हो गईं। रिया की आंखें बंद थीं, उसके मुंह से लगातार हल्की सिसकारियां निकल रही थीं।

    पापा ने मम्मी की तरफ देखा और बोले, “अपने कपड़े भी उतार दो।”

    मम्मी ने अपनी साड़ी, ब्लाउज, पेटीकोट और ब्रा-पैंटी सब उतार दिए। मम्मी भी अब पूरी नंगी थीं। उनकी चूचियां रिया से थोड़ी छोटी लेकिन अभी भी अच्छी थीं, कमर पर हल्का सा मोटापा था, लेकिन गांड और जांघें अभी भी आकर्षक थीं।

    अब पापा दोनों औरतों को गर्म करने में लग गए। उन्होंने रिया को चूमते हुए एक हाथ मम्मी की चूत पर रख दिया और उंगलियों से उसकी चूत सहलाने लगे। मम्मी से भी सिसकारी निकली। फिर पापा ने रिया की जांघें फैलाईं और उसकी चूत पर हाथ फेरा। रिया की चूत पहले से ही गीली होने लगी थी। पापा ने अपनी उंगली से रिया की चूत की फांकों को अलग किया और बीच वाली गुलाबी जगह को हल्के से सहलाया। रिया ने जोर से कराहा – “आह्ह्ह… पापा…”

    मम्मी ने रिया की चूचियां दबाते हुए और चूसते हुए उसे और गर्म कर रही थीं। पापा दोनों को बारी-बारी से किस कर रहे थे, उनकी चूचियां चाट रहे थे, उनकी जांघों को सहला रहे थे। कमरे में सिर्फ तीनों की सांसों की आवाज और हल्की-हल्की कराहें गूंज रही थीं।

    दोनों औरतें अब काफी गर्म हो चुकी थीं – रिया की चूत से थोड़ी-थोड़ी चिकनाहट निकल रही थी और मम्मी भी सांसें फुला रही थीं।