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  • पापा की भूख, मम्मी की चूत

    रात की चुप्पी और पापा की भूख

    रात के ठीक 1:45 बजे थे। हमारे घर का मास्टर बेडरूम अंधेरे में डूबा हुआ था, सिर्फ बेडसाइड लैंप की हल्की-सी पीली रोशनी जल रही थी। मैं (उनका 22 साल का बेटा) अपने बेड पर लेटा हुआ था, आँखें बंद किए हुए, लेकिन नींद नाम की चीज नहीं थी। मैं चुपके से आँखें खोलकर देख रहा था।

    मेरे सामने, सिर्फ 8 फीट की दूरी पर, पापा और मम्मी का बेड था।

    पापा ने मम्मी का पेटीकोट ऊपर चढ़ा दिया था। मम्मी की गोरी, मोटी जांघें और पूरी तरह बाल-रहित चूत अब खुली हुई थी। पापा का 12 इंच लंबा, मोटा, काला लंड पहले से ही पूरा खड़ा था — नसें उभरी हुईं, सिर पर मोटा फोड़ा चमक रहा था। पापा ने मम्मी की पेटीकोट पूरी तरह खोलकर खुद नीचे से ऊपर निकल आए और पेटीकोट को मम्मी की कमर पर कसकर बांध दिया, ताकि मम्मी हिल भी न सकें।

    मम्मी ने पापा के कान में फुसफुसाकर कहा,
    “बच्चे के सामने तो छोड़ दो ना… प्लीज… वो सो रहा है… आज मत करो…”

    लेकिन पापा ने मम्मी के दोनों उरोजों को जोर-जोर से मसलना शुरू कर दिया। उनके बड़े-बड़े, भारी स्तन पापा की हथेलियों में दब रहे थे। पापा ने मम्मी की टांगें कंधों पर रख दीं और अपना 12 इंच का विशाल लंड मम्मी की चूत के होंठों पर सेट कर दिया।

    “आह्ह… नहीं… राम… प्लीज… आज मत… मैंने कहा ना बच्चा सामने है… आह्ह… बहुत मोटा है… फट जाएगी…” मम्मी ने कांपते स्वर में कहा।

    पापा ने एक जोरदार धक्का मारा। पूरा 12 इंच का लंड मम्मी की चूत में आधा घुस गया। मम्मी की आँखें फट गईं।

    “आआआह्ह्ह… राम… निकालो… बहुत दर्द हो रहा है… मेरी चुत फट गई… प्लीज… बच्चे के सामने मत… आह्ह… रुक जाओ…” मम्मी चीखना चाहती थीं लेकिन पापा ने उनके होंठों को अपने होंठों से कसकर बंद कर रखा था।

    मैं चुपके से बेड पर लेटा सब देख रहा था। मेरी सांसें तेज हो गई थीं। पापा का लंड इतना बड़ा था कि मम्मी की चूत पूरी तरह फैल गई थी। पेट पर उभार साफ दिख रहा था।

    पापा अब गधे की तरह चोदने लगे थे — तेज, बेरहम, बिना रुके। हर धक्के पर “पच… पच… पच…” की आवाज कमरे में गूंज रही थी। मम्मी के स्तन उछल-उछलकर पापा के चेहरे पर पड़ रहे थे।

    मम्मी बार-बार सिर हिला रही थीं, लेकिन पापा के होंठों से मुंह नहीं छूट रहा था। उनकी आँखों से आंसू बह रहे थे।

    आधे घंटे तक पापा उसी अवस्था में मम्मी को चोदते रहे। दोनों पसीने से तर हो चुके थे। आखिरकार पापा ने होंठ छोड़े और गरजते हुए बोले,
    “तुझे और किसी मर्द से चुदते देख मुझे मुठ मारनी है… तेरी चूत बहुत मस्त है रे… कितनी टाइट… कितनी गीली…”

    मम्मी हांफते हुए बोलीं,
    “तुम्हारी बीबी हूँ… कोई रंडी नहीं… जिससे मन हुआ चुदवा दोगे… प्लीज… आज काफी हो गया…”

    पापा जानबूझकर मम्मी को उत्तेजित कर रहे थे। वे जानते थे कि मम्मी को सेक्स बिल्कुल पसंद नहीं है, फिर भी वे उन्हें गुस्सा दिलाकर और जोर से चोदना चाहते थे।

    मम्मी के इतना कहते ही पापा और तेज हो गए।
    “तू मेरी रंडी तो है… रोज रात मुझसे अपनी चूत मरवाती है… भूल गई क्या? सुहागरात पर तेरे साथ क्या किया था… याद है ना?”

    पापा अपनी स्पीड बढ़ाते जा रहे थे। हर धक्के पर मम्मी का पूरा शरीर हिल रहा था।

    मम्मी सिसकते हुए बोलीं,
    “धीरे करो… नहीं… बच्चा जग जाएगा… आह्ह… राम… बहुत जोर से… मेरी चुत जल रही है… प्लीज… रुक जाओ…”

    लेकिन पापा की धुन में मस्त थे। वे मम्मी की चूत को पूरी तरह फाड़ रहे थे। मम्मी अब सिसकने लगीं। उनकी चूत से पानी निकलना शुरू हो गया था।

    “आह्ह… नहीं… मैं… मैं झड़ रही हूँ… राम… प्लीज… मत… आआह्ह… पूरा अंदर… बहुत गहरा…”

    मैं चुपके से देखता रहा। मेरी पैंट में लंड खड़ा हो चुका था। पापा का 12 इंच का लंड मम्मी की चूत में बार-बार घुस-घुसकर बाहर आ रहा था। मम्मी की चूत पूरी तरह लाल और सूजी हुई दिख रही थी।

    पापा ने मम्मी को घुटनों के बल मोड़ दिया। अब मम्मी की गांड ऊपर थी। पापा ने लंड गांड पर रखा और एक झटके में आधा घुसा दिया।

    “नहीं… वहाँ मत… गांड फट जाएगी… राम… प्लीज… बच्चे के सामने… आआह्ह… पूरा घुस गया… दर्द… आह्ह… मत मारो…”

    पापा ने मम्मी की कमर पकड़कर जोर-जोर से गांड मारनी शुरू कर दी। कमरे में सिर्फ थपाकों की आवाज और मम्मी की दबी हुई सिसकियाँ गूंज रही थीं।

    मैं बिस्तर पर लेटा-लेटा सब देख रहा था। मेरी सांसें भारी हो रही थीं। पापा मम्मी को बिना रुके 40 मिनट तक चोदते रहे। आखिरकार पापा ने जोर से धक्का मारा और मम्मी की चूत में अपना गर्म वीर्य भर दिया।

    मम्मी थककर बेड पर गिर पड़ीं। उनकी चुत और गांड दोनों सूजी हुई, लाल, और वीर्य से भरी हुई थीं।

    पापा ने मम्मी के कान में फुसफुसाया,
    “कल रात फिर करूंगा… और परसों भी… तू मेरी बीबी है… मेरी रंडी भी…”

    मम्मी ने आँखें बंद कर लीं और धीरे से रो पड़ीं।

    मैं चुपके से लेटा रहा। लेकिन मेरे मन में एक आग जल रही थी।

  • तीन बहुओं का घोड़ा 12

    अध्याय 12: तीनों बहुओं के साथ रूस हनीमून (विस्तृत)

    सुहागरात के 12 दिन बाद विक्रम ने फैसला किया कि अब तीनों बहुओं को साथ लेकर हनीमून मनाएगा। मामा-मामी को भी मना लिया। destination चुना — Russia (Saint Petersburg + Moscow)। प्राइवेट जेट से उड़ान भरी।

    एयरपोर्ट और फ्लाइट

    प्रिया, नेहा और अदिति तीनों ने खूबसूरत व्हाइट ड्रेस पहनी थी। अदिति अभी भी थोड़ी शरमाती हुई थी। जेट में विक्रम ने तीनों को बिजनेस क्लास सीट्स पर बिठाया। उड़ान के 2 घंटे बाद लाइट्स डिम कर दी गईं।

    विक्रम ने अदिति की ड्रेस ऊपर खींची और उंगली उसकी चुत में डाल दी। 
    “नहीं… विक्रम जी… यहां मत… लोग देख लेंगे… आह्ह… उंगली मत घुमाओ… अभी भी सूजन है…” अदिति फुसफुसाई। 

    प्रिया ने विक्रम के लंड को पैंट के ऊपर से सहलाया, “पति जी… रूस पहुंचकर पूरा एंजॉय करेंगे… अभी थोड़ा रुकिए…” 

    सेंट पीटर्सबर्ग पहुंचना

    विक्रम ने Neva River के किनारे एक लग्जरी प्राइवेट विला बुक किया था — 5 बेडरूम, प्राइवेट सौना, इनडोर पूल, और पूरा फ्लोर सिर्फ उनके लिए। बाहर बर्फ की हल्की परत, अंदर गर्मी।

    पहली रात विला में। 

    तीनों को विक्रम ने एक साथ नंगी कर दिया। कमरे में फायरप्लेस जल रहा था, रोशनी नरम। 

    विक्रम ने सबसे पहले अदिति को उठाकर बेड पर लिटाया। 
    “आज मैं तुम तीनों को रूस की ठंड में गर्म करूंगा…” 

    अदिति कांपते हुए बोली, “विक्रम जी… प्लीज धीरे… अभी भी मेरी चुत पूरी तरह ठीक नहीं हुई है… आह्ह…” 

    विक्रम ने कंडोम लगाया, लुब्रिकेंट लगाया और एक जोरदार धक्का मारा। पूरा लंड अदिति की चुत में समा गया। 

    “आआआह्ह्ह… नहीं… फट गई… इतना मोटा… पेट फाड़ रहा है… विक्रम जी… रुक जाओ… आह्ह… और मत दबाओ… मैं रो रही हूँ…” अदिति चीख पड़ी। 

    प्रिया और नेहा दोनों अदिति के स्तन चूस रही थीं। विक्रम ने 25 मिनट तक अदिति को जोर-जोर से चोदा। अदिति 4 बार झड़ गई। 

    फिर नेहा की बारी — उसे डॉगी स्टाइल में मोड़कर गांड मारी। 
    “नहीं… गांड में मत… आह्ह… फट रही है… विक्रम जी… बहुत जोर से… आआह्ह… मेरी गांड चीर दी… हाँ… और गहरा… मत रुकना…” 

    प्रिया को विक्रम ने खड़े-खड़े उठाकर चोदा, उसकी टांगें अपनी कमर पर लपेटी हुईं। 
    “हाँ पति जी… जोर से… मेरी चुत फाड़ दो… आह्ह… रूस आकर भी आपका लंड नहीं थकता… और तेज…” 

    रात भर चार राउंड चले। तीनों की चुत और गांड फिर से सूज गईं, लेकिन अब वे मजे ले रही थीं।

    दूसरे दिन – सेंट पीटर्सबर्ग घूमना + हिडन प्ले

    सुबह तीनों को Hermitage Museum ले गया। अदिति ने लंबी कोट पहनी थी, अंदर कुछ नहीं। विक्रम ने रिमोट वाइब्रेटर उसकी चुत में डाल रखा था। 

    म्यूजियम में घूमते हुए विक्रम ने रिमोट ऑन किया। 
    “आह्ह… विक्रम जी… यहां मत… लोग देख लेंगे… आह्ह… वाइब्रेटर तेज मत करो… मेरी चुत गीली हो रही है… प्लीज… मैं खड़ी नहीं रह पा रही…” अदिति दीवार का सहारा लेकर कांप रही थी। 

    नेहा ने हंसते हुए कहा, “बहन… सह ले… मैंने कल रात भी यही सहा था।” 

    शाम को Neva River पर प्राइवेट यॉट बुक किया। यॉट पर तीनों नंगी हो गईं। ठंडी हवा में विक्रम ने उन्हें यॉट के डेक पर चोदा। 

    अदिति को रेलिंग पकड़वाकर पीछे से चोदा। 
    “नहीं… बाहर ठंड है… आह्ह… लंड गर्म है… मेरी चुत जल रही है… विक्रम जी… और जोर से… आआह्ह… मैं समुद्र में झड़ जाऊंगी…” 

    तीसरे दिन – Moscow ट्रांसफर

    Moscow पहुंचकर Red Square के पास 5 स्टार होटल में Presidential Suite लिया। 

    रात को सौना रूम में तीनों के साथ। गर्मी में पसीने से तर तीनों को विक्रम ने एक-एक करके चोदा। 

    प्रिया: “हाँ पति जी… सौने की गर्मी में भी आपका लंड और गर्म है… फाड़ दो…” 

    नेहा: “मेरी गांड में डालिए… ठंड के बाद गर्मी में गांड चोदने का मजा अलग है… आह्ह… पूरा घुसा दो…” 

    अदिति अब थोड़ी हिम्मत कर चुकी थी, “विक्रम जी… मुझे भी गांड में… आह्ह… दर्द तो होता है… लेकिन मज़ा भी बहुत आता है… धीरे… आआह्ह… पूरा अंदर…” 

    4 दिन तक का सिलसिला

    – Kremlin के पास प्राइवेट डिनर के बाद होटल में फोरसम 
    – Moscow River क्रूज पर तीनों को बालकनी में चोदा 
    – स्नोफॉल देखते हुए विला की बालकनी पर नंगी चुदाई 
    – सौना, जकूजी, प्राइवेट पूल — हर जगह 

    अदिति अब पूरी तरह खुल चुकी थी। वह खुद कहने लगी थी, 
    “विक्रम जी… आज मेरी चुत और गांड दोनों लीजिए… मैं आपकी सबसे छोटी पत्नी हूँ… मुझे सबसे ज्यादा चोदिए…” 

    प्रिया और नेहा उसे सिखा रही थीं — कैसे लंड चूसना है, कैसे गांड हिलाकर चुदवाना है।

    आखिरी रात Moscow में। विक्रम ने तीनों को एक साथ बेड पर लिटाया। पहले प्रिया, फिर नेहा, फिर अदिति — और अंत में तीनों की चुतों पर एक-एक करके झड़ा (कंडोम में)।

    तीनों थककर उसके सीने पर लेटी हुई थीं।

    प्रिया: “ये हनीमून सबसे यादगार रहा…”
    नेहा: “अब घर जाकर भी रोज यही चाहिए…”
    अदिति: “मैं अब डरती नहीं… बस आपका लंड चाहिए…”

    विक्रम ने तीनों को चूमते हुए कहा,
    “घर जाकर नया नियम — रोज रात चारों साथ में…”

  • तीन बहुओं का घोड़ा 11

    अध्याय 11: सुहागरात के बाद – सुबह का दृश्य (विस्तृत)

    सुबह के 6:15 बज रहे थे। मास्टर बेडरूम में अब भी हल्की गुलाबी रोशनी बिखरी हुई थी, लेकिन कमरा अब पूरी तरह बदल चुका था। गुलाब की पंखुड़ियां चारों तरफ बिखरी हुई थीं, कई पंखुड़ियां तीनों बहुओं के नंगे शरीर पर चिपकी हुई थीं। कमरे में पसीने, चूत के रस और कंडोम की हल्की खुशबू मिली हुई थी। एयर कंडीशनर अभी भी चल रहा था, लेकिन तीनों औरतों के शरीर अभी भी गर्मी से तप रहे थे।

    विक्रम बेड के बीच में लेटा हुआ था, पूरी तरह नंगा। उसका 13 इंच का लंड अब थोड़ा ढीला होकर भी पेट पर लेटा हुआ था, फिर भी मोटा और प्रभावशाली दिख रहा था। उसके सीने पर प्रिया सिर रखे लेटी थी, नेहा उसकी बाईं जांघ पर सिर रखे पड़ी थी, और अदिति उसकी दाईं तरफ करवट लेकर लेटी हुई थी, उसका एक हाथ विक्रम के लंड पर ही रखा हुआ था।

    तीनों की हालत बुरी तरह खराब थी, लेकिन अब दर्द के साथ-साथ संतोष भी था।

    प्रिया की हालत
    प्रिया की चुत और गांड दोनों बुरी तरह सूज गई थीं। लाल हो चुकी थीं। उसकी जांघों पर सूखा वीर्य और अपना रस चिपका हुआ था। वह हल्के-हल्के कराह रही थी।

    नेहा की हालत
    नेहा की गांड सबसे ज्यादा प्रभावित थी। क्योंकि विक्रम ने उसे सबसे ज्यादा गांड मारी थी। वह सीधे लेट भी नहीं पा रही थी। करवट लेकर लेटी हुई थी। उसकी गांड का छेद अभी भी थोड़ा खुला हुआ दिख रहा था।

    अदिति की हालत (नई दुल्हन) 
    अदिति की हालत सबसे खराब थी। पहली रात ही 13 इंच का लंड सहना पड़ा था। उसकी चुत सूजकर मोटी हो गई थी, लाल-लाल, और हल्का खून भी रिसा था। वह आँखें बंद किए हुए दर्द से सिसक रही थी।

    विक्रम ने आँखें खोलीं। उसने पहले प्रिया के स्तन को हल्का दबाया, फिर नेहा की गांड पर हाथ फेरा और अंत में अदिति के बाल सहलाए।

    “सुबह हो गई… तीनों कैसे हो?” विक्रम ने गहरी आवाज में पूछा।

    प्रिया ने कराहते हुए कहा, 
    “पति जी… बहुत थक गई हूँ… मेरी चुत और गांड दोनों जल रही हैं… कल रात आपने हमें पूरी तरह फाड़ दिया… चल भी नहीं पा रही… लेकिन… मज़ा भी बहुत आया…”

    नेहा ने आँखें बंद रखते हुए बोली, 
    “जी… मेरी गांड अभी भी फटी हुई लग रही है… आपने कल रात 5-6 बार गांड मारी… उठने की हिम्मत नहीं है… लेकिन आपका लंड अब मेरी गांड का दीवाना बन गया है…”

    अदिति ने बहुत धीमी, कांपती आवाज में कहा, 
    “विक्रम जी… मैं… मैं तो उठ भी नहीं पा रही… मेरी चुत फट गई है… पहली रात में ही इतना बड़ा… आह्ह… बहुत दर्द हो रहा है… प्लीज आज मत करिए… मैं अभी भी कांप रही हूँ…”

    विक्रम मुस्कुराया। उसने उठकर तीनों को देखा। उसका लंड फिर से आधा खड़ा होने लगा।

    “तुम तीनों आज आराम करो। लेकिन शाम को फिर तैयार रहना। अब चारों को संभालना है।”

    सुबह 7:30 बजे – ब्रेकफास्ट और देखभाल

    मामी सुमन कमरे में आईं। उन्होंने तीनों को देखा और सिर हिलाया। 
    “बेचारी… विक्रम ने कल रात तुम तीनों को पूरी तरह तोड़ दिया।” 

    मामी ने खुद तीनों को उठाने में मदद की। प्रिया और नेहा तो किसी तरह उठ गईं, लेकिन अदिति को उठाने में बहुत दिक्कत हुई। उसकी चुत पर मामा ने हल्का दर्द निवारक जेल लगवाया। तीनों को गर्म पानी से नहलाया गया।

    नहाने के बाद तीनों ने हल्के-हल्के कपड़े पहने — सिर्फ लूज नाइट गाउन, अंदर कुछ नहीं। वे लंगड़ाते हुए डाइनिंग टेबल पर आईं।

    विक्रम पहले से बैठा था। उसने मुस्कुराते हुए कहा, 
    “कल रात तुम तीनों ने मुझे बहुत खुश किया। अदिति… तुम बहुत टाइट थी… लेकिन अब आदत पड़ जाएगी।”

    अदिति शरमा कर सिर झुका ली, उसके गाल लाल हो गए। 
    “जी… लेकिन… आज थोड़ा आराम… प्लीज…”

    प्रिया ने अदिति का हाथ पकड़कर कहा, 
    “बहन… अब हम तीनों साथ हैं। पहले 2-3 दिन दर्द रहेगा, फिर तुम भी हमारी तरह मांगने लगोगी।”

    नेहा ने हल्के से हंसते हुए कहा, 
    “हाँ… मैंने भी पहली बार रोई थी… अब तो बिना इसके नींद नहीं आती।”

    सुबह 9 बजे – बेडरूम में आराम

    तीनों फिर बेडरूम में लेट गईं। विक्रम भी उनके बीच लेट गया। उसने तीनों की चुतों और गांड पर हल्का-हल्का जेल लगाया। हर बार हाथ लगाते ही तीनों सिसक उठतीं।

    “आह्ह… पति जी… हल्के हाथ से… अभी भी बहुत सेंसिटिव है…” प्रिया बोली।

    विक्रम ने अदिति की सूजी हुई चुत पर उंगली फेरते हुए कहा, 
    “देखो… कितनी सुंदर लग रही है अब… पूरी तरह मेरी हो चुकी है।”

    अदिति शर्म और दर्द से कांप उठी, लेकिन उसकी चुत हल्की-हल्की गीली भी होने लगी।

    मामी सुमन ने कमरे में आकर कहा, 
    “मैं कल अपने घर जा रही हूँ। अब तुम चारों का परिवार है। संभालकर रखना।”

    विक्रम ने मामी को देखकर मुस्कुराया, लेकिन कुछ नहीं बोला।

    तीनों बहुएं एक-दूसरे से सटकर लेटी रहीं। अदिति बीच में थी। प्रिया और नेहा उसे comfort दे रही थीं।

  • तीन बहुओं का घोड़ा 10

    अध्याय 10: मास्टर बेडरूम – तीनों बहुओं की सुहागरात (विस्तृत संशोधित संस्करण)

    रात के ठीक 10:45 बजे थे। पूरा घर सुनसान था, सिर्फ मास्टर बेडरूम में हल्की-हल्की रोशनी जल रही थी। मामी सुमन ने कमरे को खुद इतना खास बना दिया था कि देखते ही सांसें थम जातीं। किंग साइज बेड पर लाल और गुलाबी सिल्क की चादर बिछी हुई थी, जिस पर हजारों गुलाब की ताज़ा पंखुड़ियां बिखरी हुई थीं। चारों कोनों में छोटे-छोटे खुशबूदार मोमबत्तियाँ जल रही थीं, जिनकी हल्की-हल्की लौ कमरे को गुलाबी-नीली रोमांटिक रोशनी में डुबो रही थी। एयर कंडीशनर में जेस्मिन और चंदन की महक घुली हुई थी। बेड के सिरहाने पर तीन बड़े बॉक्स रखे थे — हर बॉक्स में 100-100 एक्स्ट्रा लार्ज अल्ट्रा-थिन कंडोम (रिब्ड, डिले और फ्लेवर्ड)। साथ में दो बोतलें एक्स्ट्रा स्ट्रॉन्ग लुब्रिकेंट और एक बोतल एनाल लुब्रिकेंट। 

    मामी सुमन ने तीनों बहुओं को खुद तैयार किया था। प्रिया ने लाल ट्रांसपेरेंट बेबीडॉल पहना था, जिससे उसके भरे-भरे 36D स्तन और वैक्स वाली गुलाबी चुत साफ दिख रही थी। नेहा ने काली शॉर्ट नेग्लिजी पहनी थी, जो उसकी मोटी गांड और टाइट चुत को और उभार रही थी। नई दुल्हन अदिति ने सफेद शीअर लिंगरी पहनी थी — बहुत पतली, लगभग पारदर्शी — जिससे उसकी 34C स्तनों की गुलाबी निप्पल और पूरी तरह बाल-रहित चुत एकदम नंगी-सी दिख रही थी। तीनों की चुतें और गांडें कल की वैक्सिंग से चमक रही थीं, गुलाबी और पूरी तरह साफ। 

    मामी ने अदिति के कान में धीरे से फुसफुसाया, 
    “बेटी… डरो मत। विक्रम बहुत जोर से करता है, बहुत बड़ा है। पहले थोड़ा दर्द होगा, लेकिन ये दोनों बहनें साथ हैं। पूरी रात सह लेना… कल सुबह तक तुम तीनों उसकी हो जाओगी।” 

    अदिति शरमा कर सिर झुका ली, उसके गाल लाल हो गए। 

    मामी सुमन ने आखिरी बार कमरे की व्यवस्था चेक की, फिर तीनों को अंदर धकेल दिया। 
    “जाओ… अब तुम तीनों की रात है। मैं राहुल जी के साथ सोने जा रही हूँ।” 

    मामी ने दरवाजा बंद कर दिया और चाबी बाहर से घुमा दी। 

    सुहागरात की शुरुआत

    विक्रम बेड के बीच में बैठा था, सिर्फ काला शॉर्ट्स पहने। जैसे ही तीनों अंदर आईं, उसने शॉर्ट्स उतार दिया। उसका 13 इंच लंबा, मोटा, काला लंड पहले से ही आधा खड़ा होकर लटक रहा था, नसें उभरी हुईं, सिर पर मोटा फोड़ा चमक रहा था। 

    “आज तुम तीनों मेरी हो… पूरी रात… बिना किसी मना करने के…” विक्रम की आवाज भारी और भूखी थी। 

    सबसे पहले उसने नई दुल्हन अदिति को कलाई पकड़कर अपनी तरफ खींच लिया। अदिति कांप रही थी, उसकी सांसें तेज हो गई थीं। विक्रम ने अदिति की लिंगरी के दोनों स्ट्रैप खींचे। सफेद लिंगरी फिसलकर नीचे गिर गई। अदिति के गोरे, भरे स्तन बाहर आ गए, निप्पल पहले से ही सख्त हो चुके थे। विक्रम ने एक स्तन मुंह में भर लिया और जोर-जोर से चूसने लगा, दांतों से हल्का-हल्का काटते हुए। 

    “आह्ह्ह… नहीं… विक्रम जी… बहुत जोर से मत चूसो… दर्द हो रहा है… आह्ह… स्तन फट जाएंगे… प्लीज… धीरे…” अदिति की आवाज कांप रही थी, लेकिन उसकी कमर खुद-ब-खुद आगे बढ़ रही थी। 

    प्रिया ने आगे बढ़कर विक्रम की जांघों के बीच बैठ गई। उसने दोनों हाथों से लंड पकड़ा — एक हाथ में भी पूरी मुट्ठी नहीं आ रही थी — और धीरे-धीरे मुठ मारने लगी। नेहा ने लंड का सिर अदिति के मुंह के पास किया। 

    “बहन… चूसो… स्वाद ले लो… ये अब तुम्हारा भी है…” नेहा ने फुसफुसाया। 

    अदिति ने डरते हुए मुंह खोला। लंड का मोटा सिर उसके होंठों पर रखा। “उम्म्म… नहीं… इतना मोटा… गला फट जाएगा… आह्ह… सिर्फ सिर ही मुंह में आ रहा है… लार टपक रही है…” अदिति की आँखों से आंसू निकल आए, लेकिन वह चूसती रही। 

    विक्रम ने अदिति को बेड पर लिटा दिया। उसकी दोनों टांगें कंधों पर रखीं। प्रिया ने कंडोम का पहला पैकेट खोला, लंड पर लुब्रिकेंट लगाया और कंडोम चढ़ा दिया। विक्रम ने लंड का सिर अदिति की चुत के होंठों पर रखा और हल्का दबाया। 

    “नहीं… विक्रम जी… प्लीज… बहुत बड़ा है… मेरी चुत फट जाएगी… आआह्ह… सिर्फ सिर ही घुसा… रुक जाओ… मैं पहली बार हूँ… बहुत दर्द हो रहा है… आंसू आ रहे हैं…” अदिति जोर से चीख पड़ी, उसका पूरा शरीर ऐंठ गया। 

    विक्रम ने एक जोरदार धक्का मारा। आधा लंड अंदर चला गया। अदिति का पेट ऊपर उठ गया, उभार साफ दिखने लगा। 

    “आआआह्ह्ह… फट गई… पेट फाड़ रहा है… विक्रम जी… निकालो… प्लीज… मैं मर जाऊंगी… बहुत मोटा… चीर रहा है… आह्ह… और मत दबाओ…” अदिति रोते हुए चीख रही थी, उसके नाखून विक्रम की पीठ में गड़ रहे थे। 

    प्रिया ने अदिति के स्तन चूसते हुए कहा, “बहन… सह ले… पूरा अंदर ले… देख, कितना अच्छा लगेगा…”

    विक्रम ने कमर हिलाई और पूरा 13 इंच एक झटके में अंदर धकेल दिया। अब अदिति की चुत पूरी तरह फैल चुकी थी। विक्रम ने तेज-तेज धक्के मारने शुरू कर दिए — पच… पच… पच… पच… हर धक्के पर लंड गहराई तक जा रहा था, अदिति का पेट बार-बार उभर रहा था।

    “आह्ह… नहीं… जोर से मत… आआह्ह… मेरी चुत जल रही है… प्लीज रुक जाओ… मैं सह नहीं पा रही… आह्ह… हाँ… और गहरा… नहीं… मत… मैं झड़ रही हूँ… पहली बार… आआआह्ह्ह… पूरा रस निकल रहा है…”

    20 मिनट बाद अदिति पहली बार झड़ गई। उसकी चुत ने लंड को कसकर पकड़ लिया, सफेद रस कंडोम के बाहर रिसने लगा।

    विक्रम ने कंडोम बदलकर नेहा को खींच लिया। नेहा को घुटनों के बल मोड़कर डॉगी स्टाइल में खड़ा किया। लंड को गांड के छेद पर रखा और लुब्रिकेंट लगाकर धीरे से दबाया।

    “नहीं… विक्रम जी… गांड में मत… आज चुत में ही… आह्ह… बहुत टाइट है… फट रही है… आआह्ह… आधा घुस गया… दर्द… प्लीज निकालो… मेरी गांड चीर दी…” नेहा रोते हुए चीखी।

    विक्रम ने पूरा लंड गांड में धकेल दिया। फिर तेजी से पीछे से ठोकने लगा। नेहा की गांड हर धक्के पर हिल रही थी। प्रिया नेहा की चुत उंगलियों से चला रही थी।

    “आह्ह… विक्रम जी… और जोर से… गांड फाड़ दो… आह्ह… मज़ा आ रहा है… नहीं… मत रुकना… मैं झड़ रही हूँ… आआह्ह…”

    इसके बाद विक्रम ने प्रिया को अपनी गोद में उठा लिया। प्रिया ने खुद लंड पकड़कर अपनी चुत में उतारा। “हाँ पति जी… पूरा अंदर… मेरी चुत अब तुम्हारी है… फाड़ दो… आह्ह… जोर से… रोज की तरह…”

    रात भर यही सिलसिला चला। विक्रम ने तीनों को हर पोजीशन में चोदा —

    • अदिति को मिशनरी में 25 मिनट
    • नेहा को राइडिंग में (वो ऊपर चढ़कर खुद हिल रही थी)
    • प्रिया को स्पूनिंग में (साथ में दोनों बहनों की चुत चाटते हुए)
    • तीनों को 69 पोजीशन में (विक्रम नीचे, तीनों ऊपर)
    • स्टैंडिंग में बालकनी की तरफ मुंह करके
    • आखिर में तीनों को बेड पर सिर टिकाकर गांड ऊपर करके एक-एक करके

    कुल 14 कंडोम इस्तेमाल हुए। कमरे में सिर्फ चीखें, “आह्ह… नहीं… हाँ… और जोर से… प्लीज रुक जाओ… मत निकालो… फाड़ दो… मैं झड़ गई…” की आवाजें और पच-पच की थपाके गूंज रहे थे।

    सुबह 5:30 बजे तीनों थककर विक्रम के सीने, पेट और जांघों पर नंगी लेटी हुई थीं। उनकी चुतें और गांडें सूजी हुई, लाल, लेकिन पूरी तरह भरी हुई थीं। गुलाब की पंखुड़ियां उनके शरीर पर चिपकी हुई थीं।

    विक्रम ने तीनों के बालों में हाथ फेरते हुए कहा,
    “अब तुम तीनों मेरी हो… रोज यही होगा। कोई मना नहीं।”

    तीनों ने थकी हुई लेकिन संतुष्ट आवाज में “जी…” कहा।

  • तीन बहुओं का घोड़ा 9

    अध्याय 9: मामा का फैसला और तीसरी शादी

    विक्रम के सिंगापुर से लौटने के तीन दिन बाद मामा राहुल अचानक घर आ गए। वे सीधे लिविंग रूम में बैठ गए और तीनों — प्रिया, नेहा और मामी सुमन को बुला लिया।

    मामा ने गंभीर स्वर में कहा, “विक्रम, मैंने सब देख लिया है। सुमन की हालत भी खराब हो चुकी है। अब ये सिलसिला और नहीं चल सकता।”

    मामी सुमन तुरंत बोलीं, उनकी आवाज में दृढ़ता थी, 
    “हाँ राहुल जी… मैंने फैसला कर लिया है। मैं विक्रम के साथ कभी नहीं करूंगी। चाहे जो हो जाए। मैं उसकी मामी हूँ… ये पाप अब और नहीं चलेगा। मैं कल ही अपने घर चली जाऊंगी।”

    मामा ने कुछ पल सोचा। फिर उन्होंने आखिरी विकल्प रख दिया, 
    “ठीक है। अगर सुमन नहीं कर सकती, तो अब विक्रम की एक और आखिरी शादी करवा देते हैं। बस एक आखिरी। कोई और विकल्प नहीं बचा।”

    प्रिया और नेहा एक-दूसरे को देखकर चुप रह गईं। विक्रम ने बस सिर हिला दिया।

    मामा ने तुरंत फोन उठाया और अपनी एक दूर की रिश्तेदार की बेटी का प्रस्ताव रख दिया। लड़की का नाम था अदिति — 22 साल, बहुत खूबसूरत, गोरी, 34C स्तन, पतली कमर और गोल-मटोल गांड। शादी की तारीख सिर्फ 5 दिन बाद तय कर दी गई।

    शादी की तैयारी – दोनों का वैक्सिंग

    शादी से दो दिन पहले प्रिया और नेहा दोनों ने फैसला किया कि वे पूरी तरह तैयार होंगी। उन्होंने एक लग्जरी ब्यूटी सैलून बुक किया। दोनों ने एक साथ प्राइवेट रूम लिया।

    वैक्सिंग करने वाली लड़की ने उन्हें नंगी देखा और मुस्कुराई, “मैडम… आप दोनों की स्किन तो पहले से ही साफ है, लेकिन आज पूरा ब्राजीलियन वैक्सिंग करेंगे ना?”

    प्रिया ने शरमाते हुए सिर हिलाया, “हाँ… बिल्कुल साफ… चुत, गांड, सब।”

    दोनों ने लेट गए। पहले प्रिया की बारी। गर्म वैक्स लगाते ही प्रिया की सांसें तेज हो गईं। 
    “आह्ह… गर्म है… धीरे… मेरी चुत पर मत लगाओ… आह्ह… उखड़ रहा है… लेकिन ठीक है… आज बिल्कुल साफ होना है…”

    नेहा बगल में लेटी देख रही थी। उसकी बारी आई तो वो भी कांप उठी। 
    “दीदी… दर्द हो रहा है… आआह्ह… मेरी गांड पर भी… पूरा साफ कर दो… विक्रम जी को पसंद है… आह्ह… बहुत जलन हो रही है…”

    दोनों की चुत और गांड पूरी तरह क्लीन हो गईं — बिल्कुल बाल-रहित, गुलाबी और चमकदार। वैक्सिंग के बाद दोनों ने वहाँ ही आइस पैक लगवाए। फिर दोनों ने एक साथ मेनिक्योर-पेडीक्योर, फेशियल और बॉडी पॉलिश भी करवाया।

    सैलून से निकलते समय प्रिया ने नेहा से कहा, 
    “बहन… अब हम तीन हो जाएंगी… लेकिन हम दोनों ही संभाल लेंगी ना?” 
    नेहा मुस्कुराई, “हाँ दीदी… अब कोई दर्द नहीं… सिर्फ तैयारी।”

    शादी का दिन

    शादी बहुत धूमधाम से हुई। अदिति को देखकर सब हैरान रह गए — बेहद खूबसूरत, शर्मीली, लेकिन आकर्षक। मंदिर में फेरे हुए। प्रिया और नेहा दोनों ने अदिति को बहुत प्यार से तैयार किया था।

    शादी सम्पन्न हो गई।

    अब घर में चार औरतें थीं — प्रिया, नेहा, अदिति और (अभी के लिए) मामी सुमन (जो कल जाने वाली थीं)।

  • तीन बहुओं का घोड़ा 8

    अध्याय 8: मामा-मामी का आगमन और नई व्यवस्था

    शीला माँ अब permanently अपने घर चली गई थीं। उन्होंने साफ कह दिया था कि अब वो इस घर में कभी नहीं आएंगी। कहानी में भी उनकी कोई भूमिका नहीं रही। अब सिर्फ प्रिया, नेहा और विक्रम थे।

    दोनों की गांड और चुत अभी भी बुरी तरह सूजी हुई थीं। वे बेड पर लेटी कराह रही थीं। चलने-फिरने की हिम्मत नहीं थी। विक्रम का लंड फिर भी हर समय खड़ा रहता था।

    उसी शाम विक्रम के मामा (राहुल) और मामी (सुमन) अचानक घर आ गए। मामा 58 साल के थे, मामी सुमन 46 साल की — अभी भी बहुत आकर्षक, गोरी, 36D स्तन, भारी गांड, मोटी जांघें।

    मामा ने पूरे मामले को सुना — प्रिया और नेहा की हालत, विक्रम की अनियंत्रित भूख, मालदीव्स में हुई गांड चुदाई।

    मामा गुस्से से बोले, “विक्रम! ये क्या कर रहा है तू? दोनों लड़कियों की हालत खराब कर दी है। संयम रखो।”

    विक्रम सिर झुकाए बैठा था। फिर अचानक फूट पड़ा, 
    “मामा… मुझसे नहीं रुक रहा… मैं कोशिश करता हूँ लेकिन लंड खड़ा हो जाता है। प्रिया और नेहा अभी चल भी नहीं पा रही… मुझे रोज चाहिए… मैं कंट्रोल नहीं कर पा रहा…”

    मामी सुमन शर्म से सिर झुकाए बैठी थीं।

    मामा ने कुछ देर सोचा और फिर गहरी सांस ली। 
    “ठीक है… जब तक प्रिया और नेहा ठीक नहीं हो जातीं, तब तक… सुमन को यहीं रहने दो। वो थोड़े दिन तुम्हें संभाल लेगी। लेकिन सिर्फ जब तक ये दोनों ठीक न हो जाएं।”

    मामी चौंककर बोलीं, “राहुल… आप क्या कह रहे हैं? मैं विक्रम की मामी हूँ… ये गलत है…”

    मामा ने सख्ती से कहा, “सुमन, परिवार की भलाई के लिए। विक्रम बेकाबू हो रहा है। तू थोड़े दिन मदद कर दे।”

    मामी कुछ नहीं बोलीं, सिर्फ शर्म से लाल हो गईं।

    उसी रात – मामी की पहली सेवा

    रात 11 बजे। प्रिया और नेहा अपने कमरे में दर्द से कराह रही थीं। विक्रम मामी को अपने मास्टर बेडरूम में ले गया।

    मामी ने साड़ी पहनी हुई थी। विक्रम ने उनकी साड़ी की पल्लू खींची। 
    “मामी… प्लीज… मुझे रोक नहीं रहा…”

    मामी कांपते हुए बोलीं, 
    “विक्रम… बेटा… ये गलत है… मैं तेरी मामी हूँ… प्लीज… मत करो… राहुल जी ने सिर्फ कह दिया है, लेकिन मैं… आह्ह…”

    विक्रम ने मामी की ब्लाउज खोली, ब्रा उतारी और भरे-भरे स्तनों को चूसने लगा। फिर उनकी साड़ी और पेटीकोट खींचकर फेंक दिया। मामी सिर्फ पैंटी में खड़ी थीं।

    विक्रम ने पैंटी खींची और अपना 13 इंच का लंड बाहर निकाला। मामी की आँखें फट गईं। 
    “नहीं… विक्रम… इतना बड़ा… मेरी उम्र 46 है… ये मेरी चुत में नहीं जाएगा… प्लीज… रुक जाओ… मैं तेरी मामी हूँ… आआह्ह…”

    विक्रम ने मामी को बेड पर लिटाया, टांगें फैलाईं और कंडोम लगाकर एक जोरदार धक्का मारा।

    “आआआह्ह्ह… नहीं… फट गई… विक्रम… निकालो… बहुत मोटा… मेरी चुत चीर दी… प्लीज… धीरे… आह्ह… पूरा घुस गया… पेट फाड़ रहा है… रुक जाओ बेटा… मैं सह नहीं पा रही…” मामी जोर से चीख पड़ीं।

    विक्रम ने घोड़े जैसी रफ्तार पकड़ ली। पच… पच… पच… पच… 

    मामी रोते हुए चीख रही थीं, 
    “नहीं… बेटा… मत मारो… इतना जोर से… मैं तेरी मामी हूँ… ये पाप है… आह्ह… मेरी चुत जल रही है… प्लीज रुक जाओ… आआह्ह… हाँ… और मत… मैं झड़ रही हूँ…”

    विक्रम ने उन्हें 35 मिनट तक लगातार चोदा। फिर डॉगी स्टाइल में मोड़कर गांड में भी घुसाने की कोशिश की।

    “नहीं… गांड में बिल्कुल नहीं… विक्रम… वो तो बहुत टाइट है… प्लीज… वहाँ मत… आआह्ह… दर्द… आधा घुस गया… निकालो… मैं मर जाऊंगी…”

    विक्रम ने मामी की गांड भी पूरी तरह फाड़ दी। मामी की हालत खराब हो गई। वो रोती-चीखती रहीं, लेकिन विक्रम ने तीन राउंड लिए।

    सुबह मामी बेड से उठ भी नहीं पा रही थीं। उनकी चुत और गांड सूज गई थीं।

    प्रिया और नेहा को जब पता चला तो दोनों हैरान रह गईं।

    नेहा कमजोर आवाज में बोली, “अब मामी भी… हम तीनों को संभालना पड़ेगा…”

  • तीन बहुओं का घोड़ा 7

    अध्याय 7: मालदीव्स – पहली बार गांड की सजा (बिना मर्जी के)

    अगले दिन सुबह 11 बजे। मालदीव्स का विला अभी भी नीली रोशनी में चमक रहा था। प्रिया और नेहा दोनों पिछले रात की चुदाई से थोड़ी थकी हुई थीं, लेकिन अब उन्हें मजा आ रहा था। दोनों ने बिकिनी पहनी थी और ब्रेकफास्ट कर रही थीं।

    विक्रम अचानक उनके पीछे आया। उसका लंड पहले से ही खड़ा था। उसने दोनों की बिकिनी नीचे खींच दी और सीधे कहा, 
    “आज तुम दोनों की गांड लूंगा… पहली बार… और बिना पूछे।”

    प्रिया चौंक गई, “नहीं विक्रम… गांड में कभी नहीं… वो बहुत टाइट है… प्लीज… मत करो… मैं डर रही हूँ…” 
    नेहा भी कांप उठी, “जी… प्लीज… चुत में ही कर लो… गांड फट जाएगी… मैं नहीं सह पाऊंगी…”

    विक्रम ने दोनों को बाल पकड़कर बेड पर झुका दिया। पहले प्रिया। उसने कंडोम लगाया, लंड पर बहुत सारा लुब्रिकेंट लगाया, लेकिन फिर भी मोटा सिर देखकर प्रिया चीख पड़ी।

    “नहीं… विक्रम… वहाँ मत… प्लीज रुक जाओ… मेरी गांड में नहीं जाएगा… आआह्ह… दर्द… निकालो… बहुत मोटा है… फट रही है… आह्ह… आधा भी नहीं घुसा… प्लीज… मैं मना कर रही हूँ…” प्रिया रोते हुए चीखी।

    विक्रम ने एक जोरदार धक्का मारा। पूरा 13 इंच का लंड प्रिया की गांड में घुस गया। प्रिया की आँखें बाहर निकल आईं। 

    “आआआआह्ह्ह… नहीं… मेरी गांड चीर दी… विक्रम… प्लीज निकालो… बहुत दर्द हो रहा है… मैं मर जाऊंगी… आह्ह… रुक जाओ… बिना मर्जी के मत करो…” 

    विक्रम ने प्रिया की कमर पकड़कर जोर-जोर से ठोकना शुरू कर दिया। पच… पच… पच… गांड की चुदाई की आवाज पूरे विला में गूंज रही थी। प्रिया रो रही थी, लेकिन विक्रम 25 मिनट तक लगातार चोदता रहा। प्रिया की गांड सूज गई, लाल हो गई।

    फिर नेहा की बारी। 
    “नहीं… मेरी बारी मत… दीदी की तरह मत करो… प्लीज विक्रम जी… मैं नई-नई दुल्हन हूँ… गांड में मत… आआह्ह… फट गई… पूरा अंदर… दर्द… रुक जाओ… मैं रो रही हूँ…” 

    विक्रम ने नेहा को भी बिना रुके चोदा। दोनों की गांड पहली बार फाड़ी जा रही थी।

    दो दिन तक का सिलसिला

    अगले 2 दिन विक्रम ने दोनों को बिना उनकी मर्जी के गांड मारी। दिन में 4-5 बार, रात में 5-5 बार — कुल 10-10 बार हर एक की।

    – सुबह पूल में 
    – दोपहर बालकनी में 
    – शाम जकूजी में 
    – रात बेड पर अलग-अलग पोजीशन — डॉगी, स्पूनिंग, स्टैंडिंग 

    प्रिया हर बार चीखती, 
    “नहीं… बस… अब मत… मेरी गांड फट चुकी है… 6 बार हो चुका… प्लीज विक्रम… चल नहीं पा रही… आह्ह… फिर से… बहुत दर्द… मैं मना कर रही हूँ… रुक जाओ…” 

    नेहा और भी ज्यादा रोती, 
    “विक्रम जी… प्लीज… मेरी गांड में अब कुछ नहीं बचा… सूज गई है… आआह्ह… 8वीं बार… निकालो… मैं उठ भी नहीं सकती… बिना पूछे मत मारो… मैं तेरी पत्नी हूँ… आह्ह… दर्द…”

    दूसरे दिन शाम तक दोनों की हालत बेहद खराब हो गई। दोनों की गांडें बुरी तरह सूजी हुईं, लाल, चलने में असमर्थ। वे बिस्तर पर पड़ी कराह रही थीं। बैठ नहीं पा रही थीं, पैर कांप रहे थे। चुत भी बार-बार चुदाई से सूज गई थी।

    विक्रम ने प्राइवेट जेट बुलाया। दोनों को स्ट्रेचर पर लिटाकर जेट में लादा गया। उड़ान भरते समय भी दोनों दर्द से तड़प रही थीं।

    प्रिया ने कमजोर आवाज में कहा, “विक्रम… अब काफी… हम दोनों की गांड खराब कर दी… चल नहीं पा रहे… घर ले चलो…” 
    नेहा सिर्फ रो रही थी, कुछ बोल भी नहीं पा रही थी।

    प्राइवेट जेट में विक्रम ने फिर से दोनों की गांड में उंगली डालकर खेला, लेकिन पूरा लंड नहीं डाला। दोनों बस कराहती रहीं।

    घर पहुंचने पर

    घर आकर दोनों को सीधे बेडरूम में लिटाया गया। दोनों नंगी पड़ी थीं, गांड पर बर्फ के पैक लगाए हुए। चलने की हिम्मत नहीं थी।

    शीला माँ (प्रिया की माँ) उन्हें देखकर बोलीं, “बेटी… क्या हालत बना दी तुम दोनों की… अब मैं भी नहीं आ सकती… तुम दोनों ही संभालो… लेकिन सावधानी से…” 

    प्रिया और नेहा दोनों एक-दूसरे को देखकर रो पड़ीं। उनकी गांडें 2 दिन की बिना मर्जी वाली चुदाई से बुरी तरह खराब हो चुकी थीं। लेकिन विक्रम संतुष्ट मुस्कान के साथ बेड के पास बैठा था।

  • तीन बहुओं का घोड़ा 6

    अध्याय 6: मालदीव्स – अब पूरी मस्ती, कोई दर्द नहीं

    मालदीव्स के पानी वाले विला में तीसरी रात। अब प्रिया और नेहा दोनों की चुतें पूरी तरह आदत डाल चुकी थीं। वैक्सिंग के बाद की सूजन उतर गई थी, शरीर ने विक्रम के 13 इंच के घोड़े जैसे लंड को स्वीकार कर लिया था। दोनों को अब दर्द की जगह सिर्फ गहरा मज़ा आ रहा था।

    विक्रम पूल के किनारे खड़ा था, उसका लंड पूरा खड़ा, कंडोम लगा हुआ। प्रिया और नेहा दोनों नंगी, बिकिनी फेंककर उसके पास आईं।

    प्रिया ने विक्रम के लंड को हाथ में पकड़ा और मुस्कुराते हुए कहा, 
    “अब कोई समस्या नहीं है विक्रम… मेरी चुत अब तुम्हारे लंड की दीवानी हो गई है।” 

    नेहा ने पीछे से विक्रम को चिपकते हुए उसके कान में फुसफुसाया, 
    “हाँ जी… पहले तो चीखती थी, अब तो बिना आपके लंड के नींद भी नहीं आती… आज हम दोनों आपको पूरा एंजॉय करेंगी।”

    विक्रम ने दोनों को पूल में खींच लिया। पानी में ही उसने प्रिया को दीवार से लगा दिया और एक जोरदार धक्का मारा। पूरा लंड एक बार में अंदर चला गया।

    “आह्ह्ह… हाँ विक्रम… अब पूरा घुसा दो… पहले वाला दर्द चला गया… अब तो मज़ा आ रहा है… और जोर से… आह्ह… मेरी चुत फाड़ दो आज…” प्रिया ने आँखें बंद करके चीखते हुए कहा। उसकी कमर खुद आगे-पीछे हिल रही थी।

    नेहा प्रिया के स्तनों को चूस रही थी और अपनी उंगलियाँ प्रिया की क्लिट पर घुमा रही थी। 
    “दीदी… आज मुझे भी पूरा दो… मैं भी तैयार हूँ… विक्रम जी… मेरी चुत में भी घुसाइए…”

    विक्रम ने प्रिया को 15 मिनट तक पूल में खड़े-खड़े चोदा। हर धक्के पर पानी छपछपा रहा था। प्रिया लगातार झड़ रही थी। 
    “आआह्ह… हाँ… और गहरा… पेट तक पहुँच रहा है… मज़ा आ रहा है… नहीं रुकना… जोर से चोदो मुझे… मैं अब तुम्हारी रंडी हूँ…”

    फिर विक्रम ने नेहा को ग्लास फ्लोर पर लिटा दिया। नीचे समुद्र दिख रहा था। उसने नेहा की टांगें कंधों पर रखीं और पूरे जोर से अंदर घुसा।

    “आह्ह्ह… विक्रम जी… हाँ… अब दर्द नहीं… सिर्फ मज़ा… पूरा लंड अंदर… मेरी चुत को चीर दो… आह्ह… और तेज… मैं सह सकती हूँ अब…” नेहा चीखते हुए बोली। उसकी कमर ऊपर उठ रही थी, लंड को और गहरा लेने के लिए।

    प्रिया नेहा के मुंह पर बैठ गई। नेहा उसकी चुत चाट रही थी। 
    “बहन… चाटो अच्छे से… विक्रम तुम्हें चोद रहा है… मैं तुम्हारी जीभ पर झड़ना चाहती हूँ… आह्ह… हाँ… यही…”

    अब पूरा थ्रीसम जोरों पर था। विक्रम ने दोनों को बारी-बारी चोदा — 
    – डॉगी स्टाइल में बालकनी में 
    – राइडिंग पोजीशन में बेड पर (दोनों बारी-बारी ऊपर चढ़कर) 
    – स्पूनिंग में जकूजी में 

    प्रिया अब पूरी तरह बोल रही थी, 
    “विक्रम… पहले मैं मना करती थी… अब तो लगता है तुम्हारा लंड मेरी चुत का हिस्सा बन गया है… और जोर से… मेरी चुत फाड़ दो… आह्ह… हाँ… मैं झड़ गई… फिर से…”

    नेहा भी अब शर्म छोड़ चुकी थी, 
    “जी… मुझे भी घोड़े की तरह चोदिए… मेरी गांड में भी डालिए… आह्ह… हाँ… पूरा घुसा दो… दर्द नहीं… सिर्फ आग लग रही है… मज़ा आ रहा है… मैं आपकी दूसरी पत्नी हूँ… रोज चोदिए मुझे…”

    रात 2 बजे तक दोनों की चुतें विक्रम के लंड से भर-भरकर झड़ रही थीं। अब उन्हें कोई समस्या नहीं थी — चुतें पूरी तरह खुल चुकी थीं, गीली और भूखी रहती थीं।

    विक्रम ने आखिर में दोनों को घुटनों के बल बिठाया और दोनों के मुंह पर कंडोम उतारकर झड़ दिया। दोनों ने मिलकर लंड चाटा और वीर्य पिया।

    प्रिया ने नेहा को चूमते हुए कहा, 
    “अब हम दोनों साथ में ही संभालेंगी… कोई दर्द नहीं, सिर्फ मज़ा… मालदीव्स हमारा असली हनीमून बन गया।”

    नेहा मुस्कुराई, “हाँ दीदी… अब रोज रात को हम दोनों मिलकर विक्रम जी को खुश करेंगी… हमारी चुतें अब उनकी हो चुकी हैं।”

    विक्रम दोनों को अपनी बाहों में लेकर लेट गया। बाहर समुद्र शांत था, लेकिन अंदर तीनों की आग अभी भी जल रही थी।

  • तीन बहुओं का घोड़ा 5

    अध्याय 5: रिकवरी, वैक्सिंग और मालदीव्स का दूसरा हनीमून

    शीला माँ अब नहीं आ रही थीं। उनकी हालत इतनी खराब हो चुकी थी कि वो बिस्तर से उठ भी नहीं पा रही थीं। उन्होंने साफ मना कर दिया — “बेटी, अब मैं नहीं संभाल सकती… मेरी उम्र हो गई… तुम दोनों ही अब संभालो…”

    अब सिर्फ प्रिया और नेहा रह गई थीं।

    पिछले 10 दिनों में विक्रम ने दोनों को रोज रात भर चोदा था। दोनों की हालत बुरी तरह खराब हो गई थी। चुतें सूजी हुईं, लाल, चलने में भी दर्द, बैठने में तकलीफ। सुबह उठते ही दोनों कराहतीं।

    प्रिया ने नेहा को देखा और कहा, “बहन… अब हम दोनों को ही संभालना पड़ेगा… माँ नहीं आएंगी…” 
    नेहा कमजोर आवाज में बोली, “दीदी… मेरी चुत अभी भी जल रही है… चल नहीं पा रही… विक्रम जी रोज घोड़े की तरह…”

    तीन दिन तक दोनों ने विक्रम से मना किया। विक्रम ने मजबूरन कंट्रोल किया, लेकिन उसका लंड हर वक्त खड़ा रहता।

    चौथे दिन – बिकनी वैक्सिंग

    प्रिया ने कहा, “चल नेहा, दोनों बिकनी वैक्सिंग करवाते हैं… मालदीव्स जाना है… वहाँ साफ-सुथरा होना चाहिए।”

    दोनों एक लग्जरी ब्यूटी सैलून गईं। प्राइवेट रूम में दोनों नंगी लेट गईं।

    वैक्सिंग करने वाली लड़की (रिया) ने देखा और मुस्कुराई, “मैडम… आप दोनों की हालत तो खराब लग रही है… चुत सूजी हुई है…”

    प्रिया शरमाई, “हाँ… पति बहुत… जोर से…” 
    नेहा ने आँखें बंद कर लीं।

    वैक्सिंग शुरू हुई। गर्म वैक्स लगाते ही दोनों चीख पड़ीं। 
    “आह्ह… नहीं… बहुत गर्म है… आआह्ह… मेरी सूजी चुत पर मत लगाओ… प्लीज धीरे…” प्रिया चीखी।

    नेहा तो रो पड़ी, “दीदी… दर्द हो रहा है… मेरी चुत पहले से ही फटी हुई है… आह्ह… नहीं… बाल उखड़ रहे हैं… रुक जाओ…”

    रिया ने दोनों की चुत, गांड और आस-पास पूरी तरह क्लीन किया। दोनों की चुत अब बिल्कुल साफ, गुलाबी और चमकदार हो गई थीं, लेकिन वैक्सिंग के बाद दर्द और बढ़ गया।

    घर लौटकर दोनों बर्फ लगाकर लेटी रहीं। विक्रम ने देखा तो हँसा, “अब मालदीव्स में मजा आएगा।”

    10 दिन बाद – मालदीव्स दूसरा हनीमून

    सब ठीक होने के बाद विक्रम ने दोनों को मालदीव्स ले जाया। पानी के ऊपर वाला विला बुक किया — प्राइवेट पूल, समुद्र के ऊपर ग्लास फ्लोर, रोमांटिक।

    पहली रात।

    दोनों ने बिकिनी पहनी थी — प्रिया लाल, नेहा सफेद। विक्रम ने दोनों को पूल में खींच लिया।

    पहले तो किसिंग, फिर विक्रम ने प्रिया की बिकिनी उतारी। 
    “नहीं विक्रम… अभी भी थोड़ा दर्द है… प्लीज आज मत… नेहा को पहले…” प्रिया बोली।

    विक्रम ने नेहा को पूल के किनारे झुका दिया और कंडोम लगाकर पीछे से घुसा दिया।

    “आआह्ह… विक्रम जी… नहीं… इतनी तेज मत… मेरी नई वैक्स की चुत… फट जाएगी… प्लीज धीरे… आह्ह… पूरा घुस गया… पेट में उभार…” नेहा चीखी।

    प्रिया बगल में बैठी देख रही थी। विक्रम ने नेहा को 30 मिनट तक डॉगी स्टाइल में चोदा। नेहा 4 बार झड़ गई।

    फिर विक्रम ने प्रिया को उठाकर ग्लास फ्लोर पर लिटा दिया। नीचे समुद्र की मछलियाँ दिख रही थीं।

    “नहीं… विक्रम… यहाँ नहीं… कोई देख लेगा… आह्ह… धीरे… मेरी चुत अभी भी सेंसिटिव है… प्लीज रुक जाओ… आआह्ह… पूरा अंदर… बहुत मोटा… फाड़ रहा है…”

    विक्रम ने प्रिया की टांगें कंधों पर रखीं और घोड़े जैसी चुदाई शुरू कर दी। नेहा प्रिया के स्तन चूस रही थी।

    “आह्ह… नेहा… तुम भी मत… दीदी की चुत जल रही है… विक्रम… प्लीज… थोड़ा आराम… नहीं… मैं झड़ रही हूँ… आआआह्ह… मत रुकना… हाँ… और जोर से…”

    रात भर थ्रीसम चला। विक्रम ने दोनों को बारी-बारी चोदा — पूल में, बेड पर, बालकनी में, जकूजी में। दोनों की चीखें समुद्र में गूंज रही थीं।

    “नहीं… विक्रम… अब काफी… हम दोनों की हालत फिर खराब हो जाएगी… प्लीज… नेहा को ले लो… आह्ह… मेरी गांड में मत… नहीं… पूरा घुस गया… आआह्ह… दर्द… मजे… मत निकालो…”

    दोनों थककर सुबह नंगी पड़ी थीं। चुतें फिर से सूज गई थीं, लेकिन दोनों मुस्कुरा रही थीं।

    नेहा ने प्रिया के कान में कहा, “दीदी… अब हम दोनों मिलकर ही संभालेंगी… माँ नहीं आएंगी तो हम ही विक्रम जी की भूख शांत करेंगी…”

    प्रिया ने सिर हिलाया, “हाँ बहन… लेकिन रोज नहीं… वरना हम दोनों अस्पताल पहुंच जाएंगी।”

    विक्रम संतुष्ट मुस्कान के साथ दोनों को अपनी बाहों में लिए लेटा था।

  • तीन बहुओं का घोड़ा 4

    अध्याय 4: दूसरी शादी और सुहागरात की शिक्षा

    विक्रम ने प्रिया को माँ के घर छोड़ दिया और अकेला घर चला गया। उसकी भूख अब और बढ़ गई थी। उसने अपनी मामा-मामी को सब कुछ बता दिया — प्रिया की असमर्थता, सास शीला के साथ जो कुछ हुआ, सब। मामा-मामी ने पहले तो शॉक जताया, लेकिन विक्रम के पास अरबों की दौलत थी। उन्होंने फैसला किया कि विक्रम की दूसरी शादी कर दी जाए।

    दूसरी दुल्हन का नाम था नेहा — 23 साल, बहुत सुंदर, गोरी, 34D स्तन, पतली कमर, मोटी गांड। नेहा साधारण परिवार से थी। शादी तय हो गई।

    सुहागरात की रात।

    विक्रम ने नेहा को 5 स्टार होटल के हनीमून सूट में ले जाया। प्रिया और शीला (प्रिया की माँ) भी वहीं थीं — “सिखाने” के लिए।

    कमरे में रोशनी मद्धिम थी। नेहा लाल लहंगे में नजर आ रही थी। विक्रम ने लहंगे की पल्लू खींची।

    नेहा शरमाई, “विक्रम जी… प्लीज… धीरे… मैं पहली बार हूँ…”

    प्रिया ने पास आकर नेहा के कान में कहा, “बहन… तैयार रहो… विक्रम का लंड बहुत बड़ा है… मैं सह नहीं पाई, इसलिए तुम्हें चुन लिया गया है।”

    शीला माँ ने मुस्कुराते हुए नेहा के ब्लाउज के हुक खोलने शुरू कर दिए।

    विक्रम ने अपना लंड बाहर निकाला। 13 इंच का मोटा, काला, नसों वाला लंड देखकर नेहा के मुँह से चीख निकल गई।

    “नहीं… ये… ये क्या है… इतना बड़ा… मैं नहीं ले पाऊंगी… प्लीज विक्रम जी… रुक जाइए… मैं डर रही हूँ…” नेहा काँपते हुए पीछे हटी।

    प्रिया ने नेहा को बेड पर लिटाया और उसकी टांगें फैला दीं। “बहन… डरो मत… मैं सिखाती हूँ। पहले चूसो…”

    नेहा ने रोते हुए लंड मुंह में लिया, लेकिन सिर्फ सिर ही जा पाया। “उम्म्म… नहीं… गला फट जाएगा… इतना मोटा… प्लीज… मैं नहीं कर सकती…”

    शीला माँ ने नेहा की चुत पर तेल लगाया और उंगलियाँ डालकर फैलाने लगीं। “बेटी… तैयार हो जा… विक्रम बिना रुके चोदता है।”

    विक्रम ने कंडोम लगाया और नेहा की टांगें कंधों पर रख दीं। एक जोरदार धक्का।

    “आआआह्ह्ह… नहीं… फट गई… विक्रम जी… निकालिए… प्लीज… बहुत दर्द हो रहा है… आधा भी नहीं घुसा… मेरी चुत चीर दी… आह्ह… रुक जाइए…” नेहा जोर से चीख पड़ी। आंसू बहने लगे।

    प्रिया ने नेहा के स्तन चूसते हुए कहा, “बहन… सह ले… मैं भी यही सहती थी… अब तू सह…”

    विक्रम ने और जोर से धक्का मारा। पूरा लंड अंदर चला गया। नेहा का पेट उभर आया।

    “नहीं… पेट फाड़ रहा है… विक्रम जी… प्लीज… रुक जाओ… मैं मर जाऊंगी… आह्ह… धीरे… मत मारो… मैं तेरी पत्नी हूँ… ये गलत है… आआह्ह… हाँ… और गहरा… नहीं… मत…”

    विक्रम ने घोड़े जैसी रफ्तार पकड़ ली। पच… पच… पच… पच… कमरा चीखों और थपाकों से भर गया।

    शीला माँ ने नेहा का सिर थामा और बोली, “बेटी… सह ले… मैं भी सह रही हूँ रोज… प्रिया भी देख रही है…”

    प्रिया ने नेहा की क्लिट पर उंगली रखकर रगड़ना शुरू कर दिया। “बहन… झड़ जा… दर्द कम हो जाएगा…”

    नेहा का पहला ऑर्गेज्म आया। “आआआह्ह्ह… नहीं… झड़ रही हूँ… विक्रम जी… रुक जाओ… मैं सह नहीं पा रही… आह्ह… और मत मारो…”

    लेकिन विक्रम रुका नहीं। 40 मिनट तक लगातार चोदा। नेहा 5 बार झड़ चुकी थी। उसकी चुत सूज गई थी, लाल हो गई थी।

    फिर थ्रीसम शुरू हुआ।

    प्रिया नेहा के ऊपर लेट गई। दोनों की चुतें एक-दूसरे से सटी हुईं। विक्रम ने बारी-बारी दोनों में डाला।

    “नहीं… विक्रम… अब मेरी चुत में मत… अभी भी दर्द है… प्लीज… नेहा को चोदो… आह्ह… दोनों को साथ मत… मैं माँ हूँ… नहीं… आआह्ह…” शीला भी शामिल हो गई।

    नेहा रोते हुए बोली, “प्रीया दीदी… माँ जी… प्लीज… मुझे बचाओ… विक्रम जी बहुत जोर से कर रहे हैं… मेरी चुत फट गई… आह्ह… नहीं… गांड में मत… प्लीज… रुक जाओ…”

    विक्रम ने नेहा की गांड में भी घुसा दिया। प्रिया नेहा की चुत चाट रही थी। शीला विक्रम के अंडकोष चूस रही थी।

    रात भर यही चला। नेहा की हालत पूरी तरह खराब हो गई — वो उठ भी नहीं पा रही थी, चुत और गांड दोनों सूजी हुई, शरीर काँप रहा था, लेकिन विक्रम ने तीनों को बारी-बारी चोदा।

    सुबह नेहा बेहोश पड़ी थी। प्रिया ने उसके माथे पर हाथ फेरा और कहा, “अब तू संभाल लेगी ना बहन?”

    नेहा कमजोर आवाज में बोली, “हाँ दीदी… लेकिन… रोज नहीं… प्लीज…”

    शीला माँ ने मुस्कुराते हुए कहा, “बेटी… आदत पड़ जाएगी।”

    विक्रम संतुष्ट था। अब उसके पास तीन औरतें थीं — प्रिया, शीला और नेहा।

  • तीन बहुओं का घोड़ा 3

    अध्याय 3: घर वापसी और माँ की कुर्बानी

    थाईलैंड से वापस आने के बाद सिर्फ 4 दिन बीते थे। पटाया की वो रातें अभी भी मेरी चुत में दर्द के रूप में महसूस हो रही थीं। विक्रम हर रात लावा की तरह मुझे चोदना चाहता था, लेकिन मैं अब और सह नहीं पा रही थी। उसका 13 इंच का घोड़े जैसा लंड मेरी चुत के लिए अब सजा बन गया था।

    रात को विक्रम फिर से तैयार था। 
    “प्रिया… आज फिर से जोर से लेंगे…” 
    “नहीं विक्रम… प्लीज… अभी भी सूजन है… मैं चल भी नहीं पा रही… कल से ट्राई करेंगे…” मैं रोते हुए बोली। 

    लेकिन विक्रम ने मेरी टांगें खोल दीं और कंडोम लगाकर एक जोरदार धक्का मार दिया। 
    “आआआह्ह्ह… नहीं… फट गई… विक्रम रुक जाओ… बहुत दर्द हो रहा है… मैं मर जाऊंगी… प्लीज निकालो…” मैं चीख पड़ी। 

    वो रुका नहीं। 25 मिनट तक मुझे चोदा। मैं सिर्फ रोती रही। आखिर में जब वो झड़ा तो मैं बिस्तर पर बेहोश जैसी पड़ी थी। 

    अगली सुबह मैंने फैसला कर लिया। 
    “मुझे माँ के घर जाना है… 2-3 दिन के लिए…” 
    विक्रम ने हामी भरी। मैं सीधा मम्मी के घर चली गई। 

    मेरी माँ का नाम शीला है। उम्र 48 साल, लेकिन देखने में 38-40 जैसी लगती हैं। गोरी, भरे-भरे 38D स्तन, पतली कमर, मोटी गांड। विधवा हो चुकी हैं। घर में अकेली रहती हैं। 

    जैसे ही मैं घर पहुंची, माँ ने मुझे गले लगाया। मैं रो पड़ी। 
    “क्या हुआ बेटी? हनीमून से लौटकर इतनी उदास क्यों?” 

    मैंने सारी बात बता दी – विक्रम का बहुत बड़ा और मोटा लंड, घोड़े जैसी चुदाई, थाईलैंड में लावा को बुलाना, और मेरी हालत। 

    माँ ने मुझे सिर सहलाते हुए कहा, “बेटी… पुरुषों की भूख ऐसी ही होती है। तू चिंता मत कर। मैं बात कर लूंगी विक्रम से।” 

    उसी शाम विक्रम मम्मी के घर आया मुझे लेने। मम्मी ने उसे चाय दी और सीधे मुद्दे पर आ गईं। 
    “विक्रम बेटा… प्रिया बहुत परेशान है। तुम्हारा सामान बहुत बड़ा है, वो सह नहीं पा रही।” 

    विक्रम शर्माया। माँ ने मुस्कुराते हुए कहा, 
    “मैं समझती हूँ… पुरुष को संतोष चाहिए। अगर तू चाहे तो… मैं मदद कर सकती हूँ… बस प्रिया को आराम मिल जाए।” 

    मैं हैरान रह गई। “माँ… तुम क्या कह रही हो?” 

    माँ ने मेरे सिर पर हाथ फेरा, “बेटी… माँ-बेटी का रिश्ता। तेरा सुख मेरे लिए सबसे बड़ा है।” 

    विक्रम की आँखें चमक उठीं। 

    उसी रात… 

    मैं अपने कमरे में थी। माँ और विक्रम वाले कमरे में गए। दरवाजा बंद था, लेकिन मैं चुपके से बाहर खड़ी सुन रही थी। 

    पहले तो बातें हुईं। फिर आवाजें… 

    “आह्ह… विक्रम… धीरे… तुम्हारा तो बहुत बड़ा है… आआह्ह… पूरा मत घुसाओ… मेरी चुत 48 साल बाद खुल रही है…” माँ की आवाज आई। 

    विक्रम ने जोरदार धक्का मारा। 
    “पच… पच… पच…” 

    माँ चीखीं, “नहीं… बेटा… रुक जाओ… फट रही है… इतना मोटा… आह्ह… पेट तक जा रहा है… प्लीज धीरे… मैं तेरी सास हूँ… आआह्ह… नहीं… और जोर से मत…” 

    लेकिन विक्रम ने घोड़े जैसी रफ्तार पकड़ ली। मैं बाहर खड़ी सुन रही थी। माँ की चीखें लगातार बढ़ रही थीं। 

    “विक्रम… नहीं… मैं सह नहीं पा रही… आह्ह… मेरी चुत फाड़ दी… प्लीज रुक… मैं तेरी सास हूँ… ये गलत है… आआह्ह… हाँ… और गहरा… नहीं… मत… मैं झड़ रही हूँ… आआआह्ह्ह…” 

    मैंने दरवाजे की दरार से झांका। माँ कुत्ते की मुद्रा में थीं। विक्रम पीछे से जोर-जोर से ठोक रहा था। माँ के स्तन लटक-लटककर हिल रहे थे। उनका चेहरा पसीने से तर, आँखें बंद, मुंह से लार टपक रही थी। 

    विक्रम ने माँ के बाल पकड़े और और तेज किया। 
    “सास जी… आपकी चुत तो बहुत टाइट है… प्रिया से ज्यादा सह ले रही हो…” 

    माँ रोते हुए चीखीं, “नहीं… मैं प्रिया की माँ हूँ… प्लीज… मेरी हालत खराब मत करो… आह्ह… मैं मर जाऊंगी… रुक जाओ… बहुत हो गया… आआह्ह… फिर से झड़ गई…” 

    एक घंटे बाद माँ की हालत पूरी तरह खराब हो चुकी थी। वो बिस्तर पर लेटी हुई थीं, टांगें फैली हुईं, चुत लाल और सूजी हुई, विक्रम का वीर्य (कंडोम में) बाहर रिस रहा था। उनका शरीर कांप रहा था। 

    विक्रम अभी भी खड़ा था। उसने माँ को घसीटकर फिर से अपनी गोद में लिया। 
    “सास जी… एक राउंड और…” 

    माँ ने कमजोर आवाज में कहा, “नहीं बेटा… प्लीज… अब मत… मैं चल भी नहीं पा रही… मेरी चुत जल रही है… प्रिया को बुला लो…” 

    लेकिन विक्रम ने फिर से घुसा दिया। 
    “आआह्ह… नहीं… फिर से… विक्रम… तू तो जानलेवा है… प्लीज रुक… मैं तेरी सास हूँ… आह्ह… हाँ… मत निकाल… पूरा अंदर…” 

    मैं बाहर खड़ी रो रही थी, लेकिन मेरी चुत भी गीली हो गई थी।

    रात भर माँ की चीखें, “नहीं… प्लीज… रुक जाओ… मैं मर जाऊंगी… आह्ह… और जोर से…” सुनाई देती रहीं। सुबह तक माँ की हालत बुरी तरह खराब हो गई थी – वो उठ भी नहीं पा रही थीं, चुत सूजकर लाल हो गई थी, शरीर में दर्द, लेकिन चेहरा संतोष से भरा था।

    विक्रम ने मुझे बुलाकर कहा, “अब तू आराम कर। तेरी माँ ने मुझे संभाल लिया।”

    माँ ने कमजोर आवाज में मुझे देखा और कहा, “बेटी… अब तू चिंता मत कर… माँ है ना…”

  • तीन बहुओं का घोड़ा 2

    अध्याय 2: दूसरी रात – लावा के साथ थ्रीसम

    दूसरी रात, 10:30 बजे। विला में सिर्फ नीली लाइट्स जल रही थीं। बाहर समुद्र की लहरें शांत थीं, लेकिन अंदर तूफान आने वाला था। लावा अभी भी हमारे साथ थी। उसने शॉवर लेकर हल्का मेकअप किया था – लाल लिपस्टिक, काला ट्रांसपेरेंट नेग्लिजी, जिसके अंदर कुछ नहीं था। उसके भरे-भरे 36D स्तन और गोल गांड देखकर मेरी सांसें तेज हो रही थीं।

    विक्रम शैंपेन के दो ग्लास लेकर आया। उसका लंड पहले से ही लुंगी में तना हुआ था।

    “आज पूरा थ्रीसम होगा,” विक्रम ने कहा और मुझे अपनी तरफ खींच लिया। “प्रिया, तू देखना और एंजॉय करना।”

    मैंने शरमाते हुए सिर हिलाया, लेकिन दिल में डर भी था। “विक्रम… प्लीज… धीरे करना… लावा को भी मत तोड़ देना… तुम गधे की तरह चोदते हो… मैं पहले ही दो रात से सह नहीं पा रही…”

    लावा मुस्कुराई। उसने मेरी नाइट गाउन की स्ट्रैप खींची और मेरे स्तनों को बाहर निकाल लिया। “मैडम… डरो मत… मैं संभाल लूंगी… सर का लंड बहुत पावरफुल है…”

    विक्रम ने मुझे बेड पर लिटा दिया। लावा मेरे ऊपर चढ़ गई। उसने मेरे होंठ चूमे, फिर मेरे स्तनों को चूसने लगी। मैं कांप रही थी।

    “नहीं… लावा… मैं लड़की हूँ… ये… आह्ह… मत चूसो… बहुत जोर से… विक्रम देख रहा है… प्लीज… रुक जाओ…” मैंने कहा, लेकिन मेरी उंगलियाँ लावा के बालों में फंस गईं।

    विक्रम ने अपना लंड बाहर निकाला। 13 इंच का वो विशाल काला लंड देखकर लावा की आँखें चमक उठीं। उसने कंडोम लिया, मुंह से लगाया और पूरा मुंह भरकर चूसने लगी। गला तक ले जा रही थी।

    “उम्म्म… सर… कितना मोटा… मेरी चुत तैयार है…” लावा बोली।

    विक्रम ने लावा को मेरे बगल में लिटाया और उसकी टांगें फैला दीं। एक जोरदार धक्का।

    “आआह्ह… सर… पूरा घुस गया… हाँ… जोर से चोदिए…” लावा चीखी।

    विक्रम ने घोड़े जैसी रफ्तार पकड़ ली। पच… पच… पच… पच… कमरा आवाजों से भर गया। लावा की चुत से सफेद फेन निकल रहा था।

    मैं बगल में लेटी देख रही थी। मेरी चुत गीली हो गई थी। विक्रम ने मुझे बुलाया, “प्रिया… आ… लावा के स्तन चूस…”

    “नहीं… विक्रम… मैं नहीं कर सकती… ये गलत है… प्लीज… मैं सिर्फ देखूंगी…” मैंने मना किया, लेकिन विक्रम ने मेरे सिर को लावा के स्तन पर दबा दिया।

    मैंने अनमने मन से लावा का निप्पल मुंह में लिया और चूसने लगी। “उम्म्म… नहीं… आह्ह… स्वाद… लावा… तुम्हारे स्तन कितने बड़े हैं…”

    विक्रम ने लावा को 20 मिनट तक लगातार चोदा। फिर उसने लावा को उठाकर मुझे बेड के बीच में लिटा दिया। अब दोनों मेरे साथ थे।

    विक्रम ने मेरी टांगें खोलीं और कंडोम लगाकर लंड मेरी चुत पर रख दिया।

    “नहीं… विक्रम… आज मत… मैं अभी भी कल की चुदाई से सूजी हुई हूँ… प्लीज… रुक जाओ… लावा को चोदो… आआह्ह… आधा घुस गया… बहुत मोटा… फट रही है… प्लीज धीरे…” मैं रो पड़ी।

    विक्रम ने आधा लंड अंदर किया ही था कि लावा मेरे मुंह पर बैठ गई। उसकी चुत मेरे होंठों पर।

    “चाटो मैडम… अच्छे से चाटो…” लावा ने कहा और मेरी नाक पर अपनी चुत रगड़ने लगी।

    “नहीं… लावा… मैं नहीं… आह्ह… स्वीट… चूत का रस… उम्म्म… नहीं… मैं पत्नी हूँ… प्लीज… मत दबाओ…” मैं चाट रही थी और विक्रम मेरी चुत में धक्के मार रहा था।

    अब थ्रीसम पूरा शुरू हो गया। विक्रम मेरी चुत चोद रहा था, लावा मेरी चुत चाट रही थी और मैं लावा की चुत चाट रही थी। कमरे में “चुप… चुप… पच… पच…” की आवाजें और हमारी चीखें गूंज रही थीं।

    “आह्ह… विक्रम… नहीं… इतना जोर से मत… मेरी चुत फट जाएगी… लावा… तुम भी मत… आआह्ह… मैं झड़ रही हूँ… प्लीज रुक जाओ… दोनों… मैं सह नहीं पा रही…”

    मेरा पहला ऑर्गेज्म आया। शरीर कांप उठा।

    फिर पोजीशन बदली। विक्रम ने लावा को डॉगी स्टाइल में चोदा और मैं लावा के नीचे लेटकर उसकी चुत चाट रही थी। विक्रम का लंड मेरी जीभ से टकरा रहा था।

    “नहीं… विक्रम… लावा की चुत फाड़ रहे हो… प्लीज धीरे… आह्ह… लावा… तुम चीख क्यों रही हो… हाँ… और चूसो मेरी चुत…”

    दूसरा राउंड। विक्रम ने मुझे और लावा को बगल में लिटाया। एक-एक करके दोनों को चोद रहा था। 10-10 मिनट। कंडोम बदलता जा रहा था।

    “प्रिया… देख… लावा कितना सह ले रही है… तू क्यों नहीं सह पाती?” विक्रम ने हांफते हुए कहा।

    “क्योंकि तुम गधे हो… आह्ह… नहीं… फिर से मेरी बारी… प्लीज… बस 5 मिनट… मेरी चुत जल रही है… लावा… तुम ले लो…”

    तीसरा राउंड। अब मैं विक्रम के ऊपर थी, लावा मेरे पीछे। लावा ने अपना उंगली मेरी गांड में डाल दी।

    “नहीं… लावा… गांड में मत… प्लीज… दर्द हो रहा है… विक्रम… तुम भी मत… आआह्ह… दोनों… मैं मर जाऊँगी… हाँ… और अंदर… नहीं… रुक जाओ…”

    रात 3 बजे तक चला। मैं 7 बार झड़ चुकी थी। लावा 8-9 बार। विक्रम ने आखिर में दोनों के मुंह पर झड़ने की कोशिश की, लेकिन कंडोम में ही झड़ा।

    हम तीनों पसीने से तर, नंगे बेड पर लेटे थे। लावा मेरी छाती पर सिर रखे हुए थी। विक्रम दूसरी तरफ।

    लावा ने फुसफुसाया, “मैडम… कल तीसरी रात भी रहूंगी… सर बहुत पावरफुल हैं… पैसे वसूल कर लूंगी।”

    मैं थकी हुई मुस्कुराई। “हाँ… लेकिन मेरी चुत को आराम दो…”

  • ससुर के लण्ड की दीवानी हो गई मैं

    रियल फॅमिली Xxx स्टोरी में पढ़ें कि जब मैं जवान हुई तो मेरी सहेली ने मुझे अपने भाई का लंड दिखाया. लेकिन मेरी बुर में पहला लंड मेरे खालू का गया. मेरी शुरूआती चुदाई की घटनाओं का मजा लें इस कहानी में!

    दोस्तो, मेरा नाम रेहाना बेगम है.

    मैं एक बेहद खूबसूरत गोरी चिट्टी हॉट बीवी हूँ।
    ज्यादा पढ़ी लिखी तो नहीं हूँ पर बहुत बोल्ड और निडर हूँ. मुझे सेक्स बहुत ज्यादा पसंद है।

    मैं जब नई नई जवान हुई थी तो लड़कों की तरफ आकर्षित होने लगी थी, उनके पाजामे में हाथ घुसेड़ने लगी थी।
    मैंने जब पहला लण्ड पकड़ा था, तभी मुझे मालूम हुआ था कि लण्ड एक ऐसी चीज है जो वैसे तो लुंज पुंज पड़ा रहता है लेकिन हाथ लगाते ही खड़ा हो जाता है और बढ़ने लगता है, मोटा होने लगता है।

    सबसे पहले मैंने जो लण्ड पकड़ा था वह मेरी सहेली के चचेरे भाई जान का था।

    हुआ यह कि एक दिन उसने मुझे अपने घर बुलाया और कहा- यार, आज मैं घर में केवल मैं हूँ और मेरा चचेरा भाई जान है। मेरी अम्मी जान अब्बू के साथ कहीं बाहर गईं हैं। मेरा भाई जान तुमको बहुत पसंद करता है. चलो मैं तुमको उससे मिलवाती हूँ।

    मैं जब उससे मिली तो मुझे बड़ा अच्छा लगा।

    फिर वह मेरे कान में बोली- रेहाना मेरे भाई जान का लण्ड पकड़ोगी?
    मैं थोड़ा शर्मा गई और बोली- नहीं बाबा नहीं, मैं नहीं पकड़ूँगी, पता नहीं पकड़ने से क्या होगा? पहले तो मैंने कभी पकड़ा नहीं लण्ड!

    वह बोली- कुछ नहीं होगा, बड़ा मज़ा आएगा यार! एक बार पकड़ कर तो देखो!

    ऐसा कह कर उसने अपने भाई जान का पजामा खोल दिया वह मेरे आगे नंगा हो गया।
    मैंने नज़र उठा कर लण्ड देखा तो सिहर गई, थोड़ा सकपका गई.

    लेकिन मुझे लण्ड बहन चोद बड़ा अच्छा लग रहा था।
    मैं बार बार अपनी नज़रें उठा उठा कर लंड देखने लगी।

    फिर उसने मेरे हाथ पकड़ कर लण्ड पर रख दिया।

    मैंने झिझकते हुए लण्ड पकड़ लिया और मैं अपने आप ही हौले हौले उसे सहलाने लगी।

    मुझे देख कर वह बोली- कैसा लगा तुझे मेरे भाई जान का लण्ड रेहाना?
    मैंने कहा- बहुत अच्छा लगा यार!

    फिर उसने अपने कपड़े खोले और मेरे भी कपड़े खोलने लगी।
    जैसे जैसे मेरे कपड़े खुलने लगे, वैसे वैसे मेरी चूत की आग भड़कने लगी।

    इतने में हम तीनों एकदम नंगे हो गए तो मेरी शर्म ख़त्म हो गयी।
    पहले उसने लण्ड चाटा, फिर मैं भी चाटने लगी।

    फिर उसने लंड मुंह में लेकर चूसा … तो मैं भी उसका लंड अपने मुंह में लेकर चूसने लगी।

    वह बोली- तू तो बुरचोदी … अच्छी तरह लण्ड चूस लेती है।
    मैंने कहा- हां यार, बड़ा मज़ा आ रहा है।

    फिर मैं मस्ती से लंड हिलाने और चूसने लगी … उसे अपने होठों से, अपने गालों से टकराने लगी।
    मैं उसके पेल्हड़ भी सहलाने लगी।

    उसने भी मेरी चुम्मी ली, मुझे प्यार किया, मेरी चूचियाँ दबायीं, मेरे नंगे बदन पर बड़े प्यार से हाथ फिराया।

    मैं और ज्यादा बेशरम होने लगी मस्ती में आने लगी।
    तब मैं अपने आप ही लण्ड मुठ्ठी में लेकर आगे पीछे करने लगी।
    वह मेरा साथ देने लगी.

    इतने में हम दोनों के चूसते चूसते ही लण्ड झड़ने लगा।
    उसने मुझे झड़ता हुआ लण्ड चाटना भी सिखा दिया।

    उस दिन मैंने पहली बार अपनी सहेली के साथ झड़ता हुआ लण्ड चाटा।

    उसके बाद तो मैं बड़ी तेजी से जवान होने लगी, मेरे बूब्स भी तेजी से बढ़ने लगे और मैं लण्ड पे लण्ड पकड़ने लगी।
    कुनबे के लोग भी मुझे लण्ड पकड़ाने लगे।

    रियल फॅमिली Xxx स्टोरी मेरे खालू के लंड से शुरू हुई थी.

    एक दिन मेरा खालू मेरे सामने लुंगी खोल कर खड़ा हो गया बोला- बेटी रेहाना, लो मेरा भी लण्ड पकड़ कर देखो!
    तो मैंने मस्ती से मौसा का लंड पकड़ भी लिया।

    उसने मुझे नंगी कर दिया और लण्ड पेल कर खोल दी मेरी बुर।
    फिर मैं भी पेलवाने लगी लण्ड और चुदवाने लगी अपनी चूत।

    इस तरह मैं अपनी शादी के पहले 6 /7 लोगों से चुदवा चुकी थी, मुझे बड़ा मज़ा आने लगा था और मैं भोसड़ी वाली बन गई थी एक चुदक्कड़ लड़की।
    शादी के पहले ही अच्छी तरह चुद चुकी थी। कई लण्ड का मज़ा ले चुकी थी।

    मैं शादी के बाद ससुराल आ गई तो सबसे पहले अपनी सास से मिली और फिर ननद से भी मिली।

    वहां मैं अपनी सास को देख कर खुश इसलिए हुई कि वे अभी एकदम मस्त जवान और सेक्सी दिखतीं थी।
    उनकी बेटी यानि मेरी ननद भी बेहद खूबसूरत और अच्छी नाक नक्श वाली है।

    मेरी सास मेरी ननद की माँ नहीं बल्कि उसकी बड़ी बहन लगती थीं।

    सास का नाम है आहिरा बेगम और मेरी ननद का नाम है हिना।

    सच बताऊँ दोस्तो, मेरे मन आया कि अगर मैं लड़का होती तो सबसे पहले सास की चूत में लण्ड पेल देती. सास की चूचियों के बीच में भी घुसेड़ देती लण्ड! फिर उसी के सामने बड़े प्यार से चोदती उसकी बिटिया की बुर.

    मेरी सास की बिटिया यानि मेरी ननद भी बुर चोदी बड़ी हॉट लड़की है।
    मैं सोचने लगी कि मेरी शादी के एक साल पहले उसकी शादी हो चुकी है तो वह अब तक जाने कितने लण्ड खा चुकी होगी?

    वैसे मैं भी अपनी शादी के पहले कई लण्ड खा कर आई हूँ। खूब मस्ती से कई लोगों से चुद कर आई हूँ।
    यह बात केवल दो लोगों को मालूम है।
    एक तो मुझे मालूम है और दूसरे मेरी चूत को!

    बाकी किसी भोसड़ी वाले को कुछ नहीं मालूम!

    अपनी सुहागरात में मैंने अपने शौहर से जिस अदा से कसमसाते हुए, सिसकारियों लेते हुए चुदवाया कि उसे पूरा यकीन हो गया कि आज ही उसने मेरी कुंवारी चूत की सील तोड़ी है।
    मुझसे कहीं ज्यादा तो वह खुश था मुझे चोद कर!
    यह बात मुझे बाद में मेरी ननद ने बताई।

    मेरी ससुराल में सब मादरचोद मुझे बुरी नियत से देखने लगे।
    मैं भी मज़ा लेने के लिए अपने जिस्म का प्रदर्शन करने लगी।
    कभी अपनी मस्त मस्त टांगें और घुटने दिखाती, कभी अपने बड़े बड़े मम्मों के दीदार कराती, कभी अपनी आँखें मटका मटका कर बातें करती, कभी तिरछीं निगाहों से देख देख कर सबका मन मोह लेती।

    एक दिन मैं सास और ननद तीनों बैठी हुई चुहलबाजी कर रहीं थीं, हंसी मजाक कर रहीं थीं।

    तभी अचानक सास ने पूछा- बहू, मुझे सच सच बता कि तू शादी के पहले कितनी बार चुदी थी?
    मैंने कहा- यह सच है कि मैं शादी के पहले कई बार चुदी थी. कॉलेज के लड़कों से भी चुदी थी और कुनबे के लोगों से भी!

    तब सास बोली- यार, चुदी हुई तो मैं भी बहुत थी अपनी शादी के पहले। मुझे इस बात की ख़ुशी है कि तू भी चुदी हुई है। मैं वास्तव में चुदी हुई बहू चाहती थी। और सुन, तेरी बुरचोदी ननद भी खूब चुदी थी अपनी शादी के पहले।
    मेरी ननद बोली- अरे भाभी जान, तेरी सास ने खुद मेरी बुर चुदवाई थी अपने देवर से! अपने देवर लण्ड पेला था मेरी चूत में तेरी सास ने भाभीजान। फिर मैंने भी अपनी शादी के बाद अपने देवर का लण्ड इसकी चूत में पेला था और रात भर पेलती रही। मैंने खूब चुदवाया फिर तेरी सास का भोसड़ा। बदला तो लेना ही था तो ले ले लया।

    मैंने दोनों की बातें सुनकर खूब एन्जॉय किया।

    अब मुझे मालूम हो गया कि मुझे ससुराल में चुदाई का मज़ा खूब मिलेगा।

    एक दिन मेरी फुफिया सास की बेटी हिबा आ गयी।
    वह भी शादीशुदा है.

    उससे भी बातें होने लगीं।
    बातों बातों में मैं उससे पूछ बैठी- यार हिबा, यह बताओ कि इन कुनबे में सबसे बड़ा और सबके मोटा लण्ड किसका है?
    उसने दिमाग दौड़ाया और फिर एकदम से बोली- यार, सबसे बड़ा और मोटा लण्ड तो तेरे ससुर का ही है भाभी जान. मेरे हाथ के बराबर तो लम्बा हैं उसका लण्ड और मेरी कलाई के बराबर मोटा!

    तो मैंने पूछा- क्या तुमने कभी मेरे ससुर का लण्ड पकड़ा है?
    वह बोली- हां पकड़ा है यार … और चुदवाया भी है। उसने तो मेरी बुर फाड़ डाली थी। तीन दिन तक मेरी चूत में दर्द होता रहा। अच्छा रुको!

    उसने फोन अपनी अम्मी जान को लगाया और पूछा- अम्मी जान, कुनबे में सबसे बड़ा और मोटा लण्ड किसका है?
    उसने जबाब दिया- हिना के अब्बू का लण्ड! उसके लण्ड के मुकाबले किसी का लण्ड नहीं है बहनचोद पूरे कुनबे में। उसके बाद तेरे ससुर का लण्ड आता है।

    मैंने कहा- हाय दईया, तेरी अम्मीजान तो सबके लण्ड के बारे में जानतीं हैं।
    हिबा बोली- अरे यार रेहाना भाभी, मेरी बुर चोदी अम्मीजान बहुत बड़ी चुदक्कड़ औरत है। पूरे कुनबे के लण्ड का मज़ा लेती है मादरचोद और मेरे मियां से भी खूब घपाघप चुदवाती है भोसड़ी वाली।

    अपने ससुर लण्ड के बारे में सुनकर मेरी तो चूत की आग बहुत जयादा ही भड़क उठी।
    मैंने ठान लिया कि अब मैं किसी न किसी दिन अपने ससुर का लण्ड पकड़ कर ही दम लूंगी।

    मेरे ससुर का नाम है फ़िरोज़।
    वह 48 साल का एकदम गोरा चिट्टा जवान मर्द है। वह अपने काम धंधे में मशगूल रहता है और उसकी बीवी और बेटी ग़ैर मर्दों लण्ड में मशगूल रहतीं हैं।
    अब तो उसकी बहू भी यानि मैं सास ननद के साथ गैर मर्दों के लण्ड का मज़ा लूटने लगी हूँ।

    मेरा ससुर न दाढ़ी रखता है और न टोपी पहनता है।
    मुझे तो उसके सर की टोपी नहीं उसके लण्ड का टोपा परेशान कर रहा था।

    मैं उसके लण्ड का टोपा देखने के लिए पागल बनी घूम रही थी।
    उसके हर काम पर नज़रें गड़ाए हुए थी, उसके हर कदम को बड़ी बारीकी से देख रही थी।

    मैं उसको नहाते धोते हुए, कपड़े पदलते हुए, लुंगी खोलते और पहनते हुए, नाड़ा खोलते और बांधते हुए इसी मकसद से देख रही थी कि कहीं से मुझे उसके लण्ड की झलक मिल जाए। कहीं से वह लण्ड का टोपा मुझे दिख जाए!
    लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
    मैं दिन पर दिन बेकरार होती जा रही थी।

    इधर मैं भी उसे अपने बड़े बड़े मम्मो का उभार दिखाती थी लेकिन निप्पल बिल्कुल नहीं, अपनी मोटी मोटी जांघें दिखाती थी लेकिन चूत बिल्कुल नहीं, अपने चूतड़ भी दिखाती थी लेकिन गांड का छेद बिल्कुल नहीं।

    मैं उसे रिझाने में जुटी हुई थी; उसके लण्ड में आग लगाने में लगी हुई थी।
    मैंने सोचा कि अगर वह मर्द है तो एक न एक दिन मुझ पर टूट पड़ेगा, दबोच लेगा मुझे … पेल देगा अपना लण्ड मेरे जिस्म के हर एक छेद में।
    जब वह अपनी बहन का भोसड़ा चोद सकता है, उसकी बिटिया की बुर चोद सकता है तो मुझे क्यों नहीं चोद सकता?

    जैसे कोई बिल्ली किसी चूहे की तलाश में रहती है वैसे ही मैं भी अपने ससुर लण्ड के तलाश में रहने लगी।

    इत्तिफाक से एक दिन मेरी सास अपने मायके चली गई और ननद अपनी ससुराल।
    घर में मैं थी और मेरा ससुर।
    बस मुझे मौक़ा मिल गया।

    रात को मेरा ससुर आ गया।
    वह खा पीकर जब वह बिस्तर पर लेटने जा रहा था तो उसने मुझे देखा और बोला- वाह बहू रानी, तुम तो आज माशाल्ला बहुत ही खूबसूरत लग रही हो।

    मैं उस समय बाथ रूम से निकली थी और अपना पेटकोट ऊपर चूचियों तक उठा कर बाँध लिया था। मेरी बड़ी बड़ी चूचियों का उभार उसे साफ़ साफ़ दिखाई पड़ रहा था। और साथ में मेरे घुटने भी दिखाई पड़ रहे थे। मेरी बाहें तो एकदम खुली हुई थीं।

    उसने मेरा हाथ पकड़ लिया बोला- मैंने तुमको इस तरह कभी नहीं देखा बहू! आज तुम मेरी जान ले रही हो। मेरी नीयत तुम पर ख़राब हो गई है बहू रानी। हटाओ ये बहनचोद पेटीकोट … यह यहाँ क्या कर रहा है?

    ससुरे ने मेरे पेटीकोट में हाथ डाल दिया।
    पेटीकोट के अंदर चूचियाँ भी थीं और चूत भी!

    वह मेरे बड़े बड़े मम्मे दबाता हुआ बोला- क्या बात है … इतने बड़े बड़े दूध तो किसी के नहीं है बहूरानी! तुम तो बिल्कुल ज़न्नत को हूर हो. मुझे पता ही नहीं था कि इतनी बड़ी हुश्न की मलिका मेरे घर में ही मौजूद है।

    उसने मुझे गोद में उठा लिया और पलंग पर पटक दिया, फिर मेरे ऊपर चढ़ गया।

    मैंने कहा- अरे ससुर जी, मैं आपकी बहू हूँ। बहू तो बेटी के सामान होती है।
    वह बोला- हां होती है. पर आजकल बेटियां भी बड़ी ख़ुशी ख़ुशी देतीं हैं अपनी बुर। तुम भी मुझे दो अपनी बुर बहूरानी

    इतने में उसने मेरा पेटीकोट नीचे उतार कर फेंक दिया।
    मैं मादरचोद उसकी बाँहों में एकदम नंगी हो गयी।

    वह मेरे दूध खूब अच्छी तरह से मसलने लगा, मेरी चूत सहलाने लगा और मेरे नंगे जिस्म पर हाथ फिराने लगा।

    फिर मैंने भी उसका लौड़ा टटोलना शुरू किया।

    जैसे ही मेरा हाथ उसके लण्ड से टकराया, वह एकदम नंगा होकर अपना खड़ा लण्ड मुझे दिखाता हुआ बोला- लो मेरा लण्ड चूसो मेरी बहू रानी … जैसे कुनबे की सब बहू बेटियां चूसतीं हैं।

    लण्ड देखते ही मेरी बहनचोद गांड फट गई।
    मेरे मुंह से निकला- हाय दईया, इतना बड़ा लण्ड … बाप रे बाप … यह तो बिल्कुल घोड़े का लण्ड लग रहा है।

    मुझे पहली बार इस बात का अहसास हुआ कि लण्ड इतने बड़े बड़े भी होते हैं।

    मैंने कहा- मैं लण्ड चूसूंगी बाद में, पहले जी भर कर देख तो लूं तेरा ये भोसड़ी का लण्ड। तेरा लण्ड जितना खूबसूरत लग रहा है उतना ही खूंखार भी लग रहा है। तेरा तो लण्ड चूत क्या भोसड़ा भी फाड़ डालेगा बहनचोद।

    फिर मैंने कहा- ससुर जी, तू बेटी चोद इतना हरामी है यह मुझे नहीं मालूम था। तू अपनी बेटी बहू की बुर लेता है। बेटी बहू की बुर में लण्ड पेलता है, तुझे शर्म नहीं आती?

    वह बोला- यहाँ सब लोग लेते हैं अपनी बेटी बहू की बुर! हमारे यहाँ चुदाई में सब जायज़ है, कुछ भी गलत नहीं है। जब लण्ड खड़ा होता है तो उसे चाहिए बुर, वह बुर चाहे जिसकी हो. चूत जब गरमा जाती है तो उसे चाहिए लण्ड वह लण्ड चाहे जिसका हो. तूने भी तो बड़ी मस्ती से पकड़ लिया अपने ससुर लण्ड, तुझे शर्म आई क्या?

    उसकी बात में दम था।

    मैं लण्ड चारों तरफ से घुमा घुमा कर देखने लगी और बीच बीच में बड़े प्यार से उसका टोपा भी चूमने लगी।

    फिर मैंने अपने पर्स से इंची टेप निकाला और लण्ड को नापा।
    लण्ड साला 9″ लंबा और 6″ मोटा निकला।
    मैंने इंची टेप लण्ड पर लपेट कर नापा।

    मुझे लण्ड नापने का बड़ा शौक है, मैं जो भी नया लण्ड पकड़ती हूँ उसकी नाप लेकर अपनी डायरी में लिख लेती हूँ।

    मैं एक भूखी बिल्ली की तरह लण्ड चाटने लगी, पेल्हड़ भी चाटने लगी।
    उसकी झांटें बिल्कुल साफ़ थीं तो लण्ड चाटने में बड़ा मज़ा आ रहा था।

    वह भी मेरी बुर चाटने लगा।

    मैंने पूछा- तुमको अपनी बहू की बुर कैसी लगी ससुर जी?
    तो वह बोला- तेरी बुर तो बड़ी लाजबाब है बहू रानी, एकदम मक्खन मलाई की तरह है। बड़ा मज़ा दे रही है मुझे!

    वह मेरी गांड भी चाट रहा था। वह अपने दोनों हाथों से मेरी चूचियाँ मसल रहा था, मेरे नंगे जिस्म को अपने दांतों से पोले पोले काट काट कर मज़ा ले रहा था.

    मैं भी हर पल उत्तेजित होती जा रही थी। मैं फिर लण्ड मुंह में भर कर चूसने लगी।
    मुझे पराया मरद नंगा नंगा बहुत ही प्यारा लगता है।
    मैं तो ससुर के लण्ड में खो गईं।

    मैंने लण्ड को अपने चेहरे पर और अपनी चूचियों पर खूब मजे से रगड़ रगड़ कर मज़ा लिया।

    मन में मैंने सोच लिया कि मेरा ससुर ही मेरा असली शौहर है। मैं इसके लण्ड का मज़ा खुल्लम खुल्ला लेती रहूंगी। मुझे किसी भोसड़ी वाले का डर नहीं है।

    काफी देर तक यह सब होता रहा।

    फिर उसने मेरी टांगें फैलाई और लण्ड धच्च से घुसा दिया मेरी चूत में अंदर!
    मैं केवल उफ़ कह कर रह गयी क्योंकि मैं चुदी हुई थी इसलिए दर्द का तो कोई सवाल ही नहीं था.

    उसकी चुदाई में मुझे ज़न्नत आने लगा। इतनी अच्छी तरह तो मेरे शौहर ने भी नहीं चोदा था.

    उसे भी मज़ा आया तो बोलने लगा- तेरी चूत बड़ा मज़ा दे रही है बहू! मैं आज तेरी चूत फाड़ डालूँगा बुरचोदी रेहाना। तू बहुत गज़ब की चीज है यार। तू भोसड़ी की चुदवाने में बड़ी माहिर है। इतनी माहिर तो तेरी ननद भी नहीं है। हाय तेरी चूत बड़ी टाइट है बहन चोद। मेरा लण्ड चिपक कर घुस रहा है अंदर!

    मैंने कहा- हाय रे ससुर जी, चोदे जाओ मेरी फुदी, तेरा लण्ड बड़ा जबरदस्त है यार, धज्जियाँ उड़ा दो मेरी चूत की, मेरी चूत लण्ड लण्ड बहुत चिल्लाती रहती है, आज इसे असली लण्ड मिला है।

    फिर क्या … उसने चुदाई की रफ़्तार बढ़ा दी।
    धच्च धच्च, भच्च भच्च, गच्च गच्च की आवाज़ें लगीं।

    मैं भी अपनी गांड उठा उठा के मजे से चुदवाने लगी, मस्ती में बोलने लगी- हाय मेरे राजा, खूब चोदो मुझे, तुम मेरे असली हीरो हो, मेरे असली शौहर हो! मैं ही तेरी बीवी हूँ, तेरी रानी हूँ, तेरी रखैल हूँ, तेरी रंडी हूँ, तेरी हरामजादी बुर चोदी चुदक्कड़ बहू हूँ! तू ही मेरी चूत का असली मालिक है. फाड़ डालो मेरी चूत, चीर डालो मेरी बुर, तेरा लण्ड मुझे बहुत पसंद है यार। मैं तेरे लण्ड की गुलाम हो गई हूँ।

    फिर उसने मुझे इस कदर चोदा कि मैं दो मिनट में ही खलास हो गयी और उसके लण्ड ने भी उगल दिया वीर्य।

    इस तरह मैं ससुर से रात भर चुदी और हर तरफ से चुदी।
    आगे से भी चुदी, पीछे से भी चुदी और लण्ड पर बैठ कर भी चुदी।
    मैं तो ससुर के लण्ड की दीवानी हो गयी, उसके लण्ड की गुलाम हो गई।

    दूसरे दिन मेरी ननद अपने ससुर फ़राज़ के साथ आ गयी।

    मैं तो फ़राज़ को देख कर मस्त हो गयी।
    वह भी बहन चोद बड़ा बांका मरद था।
    मेरा दिल उस पर आ गया।
    मैं तो उसके लण्ड के बारे में सोचने लगी.

    रात को जब हम दोनों ननद भौजाई बिस्तर पर आईं तो उधर से मेरा ससुर और मेरी ननद का ससुर भी आ गया।

    तब मुझे मालूम हुआ कि मेरी ननद का ससुर मेरे ससुर का दोस्त है।
    इसी दोस्ती के कारण मेरे ससुर ने अपनी बेटी की शादी फ़राज़ के बेटे से कर दी और हिना मेरी ननद बन गयी उसकी बहू।

    मुझे यह भी मालूम हुआ कि ये दोनों अपने ज़माने में एक साथ मिलकर लड़कियां चोदा करते थे, दूसरों की बीवियां और बहू बेटियां भी चोदा करते थे।

    मेरा ससुर एकदम खुल कर बोला- यार फ़राज़ तेरी बहू दिल खोल कर तुझे चूत देती है या नहीं? मेरी बहू तो एकदम बिंदास हो कर मुझे अपनी चूत देती है। मैंने कल रात भर कई बार उसकी चूत ली है।

    वह बोला- अरे यार, मेरी बहू भी खूब मस्ती से दिल खोल कर देती है अपनी चूत! बड़ा मज़ा आता है उसे चोदने में। मैं तो मस्त हो जाता हूँ। कल मैंने भी रात भर मारी अपनी बहू की चूत!

    तब तक मेरी ननद बोली- अच्छा ठीक है। तुम लोग अपनी अपनी बहू चोद चुके हो अब आज तुम लोग आमने सामने एक दूसरे की बहू चोदो। तब देखो कितना मज़ा आता है?

    सब लोग उसकी बात मान गए।
    मैं तो यही चाहती ही थी।
    सबके चेहरे पर चमक आ गयी।

    मुझे ननद के ससुर ने अपनी तरफ खींच लिया और मेरी बड़े प्यार से चुम्मी ली।

    वह बोला- तुम मेरी बहू की भाभीजान हो. मेरा रिश्ता तो तुम्हें डबल चोदने का है रेहाना बहू।
    मैंने कहा- हां तो फिर दो दो बार चोदो न मुझे! जितना चाहो उतना चोदो।

    बस उसने मुझे अपने बदन से चिपका लिया।

    उधर मेरी ननद मेरे ससुर से चिपक गयी यानी वह अपने अब्बू जान से चिपक गयी।

    उधर मेरी ननद मेरे ससुर से चिपक गयी यानी वह अपने अब्बू जान से चिपक गयी।

    दोनों तरफ गज़ब की आग लगी हुई थी।

    हम लोगों के धीरे धीरे कपड़े उतरने लगे।

    जब मेरी ननद पूरी नंगी हुई तो उसे देखकर मैं मस्त हो गयी।

    उसकी बड़ी बड़ी सख्त चूचियाँ बड़ी सेक्सी थीं, उसका कसा हुआ जिस्म और उसकी टाइट चूत किसी को भी अपना दीवाना बना सकती है।
    मेरी ननद की खूबसूरत बाहें तो सबका मन मोह लेती हैं।

    मुझे उसके ससुर का लण्ड देखने की जल्दी थी तो मैंने उसे पहले नंगा किया।
    वह जब नंगा हुआ तो उसका लण्ड टन्न से मेरे गाल में लगा तो मेरी ख़ुशी का ठिकाना न रहा।

    उसका लण्ड मेरे ससुर के लण्ड जैसा ही था।
    दोनों लण्ड लगभग एक ही साइज के थे एक ही रंग रूप के भी थे।

    बस फरक यह था की इसके लण्ड का टोपा एकदम गोल था जबकि उसके लण्ड का टोपा अंडाकार था।

    मैं बिना रुके उसका लण्ड चाटने लगी और वह मेरे बदन का मज़ा लेने लगा।

    मेरी ननद ने भी अपना नंगा जिस्म अपने अब्बू जान को सौंप दिया।
    उसको मालूम था कि उसका शौहर उसकी माँ का भोसड़ा चोदता है इसलिए ननद को अपने अब्बू से चुदवाने में कोई शर्म नहीं थी।

    उसका कहना था जो मेरे मियां से चुदवायेगी मैं उसके मियां से चुदवाऊंगी चाहे वह मेरा अब्बू जान ही क्यों न हो … मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता।

    कुछ देर बार ननद के ससुर ने लण्ड मेरी चूत में पेल दिया और मेरे ससुर ने लण्ड मेरी ननद की चूत में पेल दिया।

    ये दोनों भोसड़ी वाले ससुर एक दूसरे की बहू की बुर बेहिचक चोदने लगे।
    दूसरे की बहू की बुर अपनी बीवी की बुर समझ कर खूब घपाघप चोदने लगे।

    फिर क्या … रियल फॅमिली Xxx चुदाई की आवाज़ बढ़ने लगी और चुदाई की महक भी पूरे घर में फ़ैलने लगी।

    मुझे अपनी चुदाई से ज्यादा ननद की चुदाई देखने में मज़ा आ रहा था।

    मैंने मन में सोच लिया कि कल जब मेरी ननद अपनी माँ को लिवाने उसके मायके जाएगी तब मैं इन दोनों के लण्ड का मज़ा एक साथ लूंगी। दोनों लण्ड से खूब धकाधक चुदवाऊंगी.

    और मैंने अगले दिन दोनों लण्ड से एक साथ चुदवाया भी।

    तो दोस्तो, मैं आज भी अपने ससुर से चुदवाती हूँ और उसके मस्ताने लण्ड का पूरा मज़ा लेती हूँ।

    आपको कैसी लगी यह मेरी सच्ची रियल फॅमिली Xxx स्टोरी?
    मुझे बताइयेगा जरूर।

  • कामवाली गर्लफ्रेंड हो गई प्रेगनेंट

    नमस्कार दोस्तो, कैसे हैं आप सब!
    उम्मीद करता हूं सब अच्छे होंगे।

    आप सभी ने मेरी पिछली कहानी
    कामवाली को गर्लफ्रेंड बना कर चोदा
    को खूब पसंद किया। इसके लिए धन्यवाद.

    मेरा नाम वेदांत है और मैं छत्तीसगढ़ का रहने वाला हूं।
    मेरी उम्र 20 साल है. मैं लंबा चौड़ा नौजवान लड़का हूं। मेरे लौड़े का साइज 7 इंच है और 3 इंच मोटा है।
    मैं कॉलेज में B.Sc की पढ़ाई कर रहा हूं।

    मेरी पहली कहानी में आप लोगों ने पढ़ा कि कैसे मैंने अपनी कामवाली को पटाया और फिर उसे चोदा।

    इस कहानी में आपको आज बताऊंगा कि कैसे मैंने अपनी कामवाली को एक बार प्रेगनेंट कर दिया और यह बात उसकी बहन को पता चल गई।
    इसे भी प्यार दीजिएगा।

    तो शुरू करता हूँ सेक्सी लड़की देसी Xxx कहानी।

    मैं और मेरी कामवाली या फिर गर्लफ्रेंड तन्नू कई बार सेक्स कर चुके हैं और यह बात कि हम दोनों रिलेशनशिप में हैं.
    तन्नू की बहन रोज़ी को भी पता है.
    लेकिन शायद उसे ये नहीं पता कि हमने 3 महीने में 15 बार से भी ज्यादा सेक्स किया है।
    और तन्नू अब बिना लण्ड के एक हफ्ता भी नहीं रह सकती।

    जब मैं और मेरी तन्नू ने अगली बार सेक्स करने का प्लान किया तो मैंने बिल्कुल नहीं सोचा था कि तन्नू गर्भवती हो जायगी।

    मैं अपनी जीएफ को लेकर एक होटल में ले गया जहां हमने सेक्स का प्लान बनाया था।
    मैंने 4 घंटे की बुकिंग करा ली।

    इस सेक्स डेट के लिए तन्नू को मैंने स्पेशल कपड़े गिफ्ट किए थे। मैंने उसे नीले रंग की ड्रेस और लाल लायेंजरी दी।
    उस ड्रेस में तन्नू तो पटाखा बम माल जैसी लग रही थी.
    कोई उसे देख कर सोच भी नहीं सकता था कि वह कामवाली है।

    होटल के रूम में घुसते ही मैं दरवाजा बन्द करके उसके चूचों पर टूट पड़ा।
    इस ड्रेस में उसके बूब्स और गांड दुगने बड़े लग रहे थे।

    हम दोनों पागलों जैसे चूमा चाटी करने लगे।
    मैंने उसकी ड्रेस को उतार दिया और उसने भी मेरे कपड़े उतार दिए।

    अब वह लाल ब्रा पैंटी में सनी लियोनी लग रही थी।
    आज तक मैंने उसे इतने प्यार और हवस से नहीं देखा था।

    तन्नू तो जैसे पोर्न स्टार हो।

    अब उसने मुझे बेड पर धकेल दिया और मेरे ऊपर चढ़ गई और पूरे बदन को चूमने लगी।

    मेरा लण्ड तो बेकाबू हो गया; उसकी चूत में घुस कर ही दम लेगा।

    मैंने करवट बदली और तन्नू को अपने नीचे लाया।
    तब मैंने उसकी ब्रा को खोल दिया और उसके बूब्स को आजाद कर दिया।

    आज उसके बूब्स दबाने में जो मजा था, वो कभी नहीं मिला।
    मैं उसके चूचे से दूध पी रहा था।

    अब मेरा हाथ उसकी जालीदार पैंटी पर चला गया।
    पैंटी की जाली से उसके छोटे छोटे झांट के बाल दिख रहे थे जो मैंने ही साफ किए थे।

    मैं पैंटी के ऊपर से उसकी गीली चूत को सहला रहा था।

    थोड़ी देर बाद मैंने उसकी पैंटी भी निकाल दी।
    उसकी फटी हुई चूत में मेरी 3 उंगली घुस गई।

    10 मिनट के फिंगरिंग के बाद मैंने 69 पोजिशन बना ली।
    मेरा लण्ड उसके मुंह में और मेरी जीभ उसकी चूत में!

    करीब 20 मिनट के इस कार्यक्रम के बाद हम दोनों एक साथ झड़ गए।
    मेरा सारा वीर्य तन्नू पी गई और मैं उसकी चूत का रस चाट गया।

    हम दोनों ही थक चुके थे लेकिन हमारे अंदर का हवस नहीं थकी थी।

    तन्नू उठी और मेरी गोद में बैठ गई।
    उसने मुझे एक गोली खिलाई और उसके पास दूसरी गोली थी, जो वो खुद खाई। ये सेक्स बढ़ाने की गोलियां थी।

    गोली खाने के बाद हमारे अंदर बिजली दौड़ने लगी और हम दुबारा शुरू हो गए।

    मेरा लण्ड तो बास के तरह लंबा और लोहे के डंडे जैसा कड़ा हो गया.
    और तन्नू भी लण्ड लेने के लिए इतनी बेताब कभी नहीं हुई थी।

    हमने पोजिशन ली और मैंने धक्के लगाने शुरु किए।
    मेरा लण्ड पहले धक्के में आधा घुसा और दूसरे धक्के में पूरा।

    लण्ड घुसते ही तन्नू की तो जैसे रूह ही निकल गई।

    लण्ड घुसाने के बाद मैंने अपने हाथों को उसके चूचों पर जमा लिए और धकापेल चुदाई शुरू कर दी।
    तन्नू ने भी मेरा पूरा साथ दिया।
    अपनी गांड उठा उठा कर वो मेरा लण्ड ले रही थी।

    ‘उह्ह … अह्ह्ह! उफ्फ … उम्ह! ओह्ह्ह यस बेबी … उह्ह्ह उई उई चोदो मुझे! ओहो अह्ह!’ जैसी मादक सिसकारियां पूरे कमरे में गूंज रही थी।

    10 मिनट तक मिशनरी, 5 मिनट तक डॉगी स्टाइल, 5 मिनट तक कॉउगर्ल और 5 मिनट तक दुबारा मिशनरी के बाद हम झड़े.

    मैंने अपना माल उसके अंदर ही निकाल दिया।
    यह पहली बार था कि हमने कॉन्डम के बिना ही सेक्स किया था।

    ऐसी पलंग तोड़ चुदाई करके हम दोनों थक कर चूर हो गए थे।
    मैं सर से पैर तक पसीने से भीग गया था और तन्नू भी थक गई थी।

    अब भी हमारे पास करीब 2 घंटे बचे थे।
    मैंने तन्नू को गोद में उठाया और बाथरूम में ले गया।

    हम दोनों एक साथ नहाए और फिर लिपट कर सो गए।
    फिर हमने होटल से चेक आउट किया और मैं तन्नू को एक रेस्टोरेंट ले गया जहां हमने खाना खाया और फिर उसे घर छोड़ दिया।

    थोड़े दिन बाद मुझे तन्नू का फोन आया और उसने बताया कि वह सेक्सी लड़की देसी Xxx से प्रेगनेंट हो गई है और यह बात उसकी बहन रोजी को पता चल गई है। तन्नू की बहन ने उसको खूब डांटा और कहा कि वह यह बात घर में सबको बता देगी।

    किसी तरह तन्नू ने अपनी बहन को मना लिया लेकिन अब रोजी मुझसे मिलना चाहती थी।
    यह बात सुनकर मेरे होश उड़ गए.
    इसलिए नहीं कि तन्नू प्रेगनेंट है बल्कि इसलिए कि यह बात उसकी बहन रोजी को पता चल गई है।

    मुझे पता था कि तन्नू गर्भवती हो जायगी और मैंने इसकी तैयारी कर ली थी।
    मैंने गर्भ निरोधक का इंतजाम कर लिया था।

    लेकिन मैंने सपने में भी नहीं सोचा था कि यह बात उसकी बहन को पता चल जायगी।

    मैंने तन्नू से पूछा कि उसकी बहन को ये बात कैसे पता चली।
    तो उसने बताया कि वो प्रेग्नेंसी टेस्ट किट खरीद रही थी तभी उसकी बहन ने उसे देख लिया। जब वो टेस्ट करके बाथरूम से बाहर निकली, तभी अचानक से उसकी बहन ने उसके हाथ से टेस्ट किट ले लिया।

    फिर उससे पूछा कि ये सब क्या है और उसने सेक्स कब किया।
    तन्नू ने डर से सारी बातें बता दी और फिर उसकी बहन ने उसको बहुत डांटा।
    उसने पूछा कि तुम लोग कितने बार सेक्स किए हो तो तन्नू ने 5 बार बोल दिया।

    इसके बाद वह बोली- अपने ब्वॉयफ्रेंड से मेरी बात कराओ।
    तो तन्नू ने बोला- अभी नहीं, 3 बजे।

    3 बजे मुझे तन्नू की बहन का फोन आया।
    मैं भी डरा हुआ था कि कहीं कुछ गड़बड़ न हो जाए।

    उसने मुझसे डायरेक्ट पूछा कि कॉन्डम यूज क्यूं नहीं किया।
    मैंने कहा- मैंने गोली खा ली थी जिससे मुझे कुछ होश नहीं था। तन्नू ने भी ध्यान नहीं दिया और फिर ये सब हो गया।

    उसने मुझे बहुत डांटा और कहा कि अब हम दोनों ब्रेकअप कर लें।
    मैंने कहा- किसी दूसरे के बोलने से तो मैं ब्रेकअप नहीं करूंगा।

    और मैंने उसे कहा- आपका भी तो कोई बीएफ होगा?
    तो वह थोड़ी शांत हुई।

    फिर मैंने यह भी कह दिया कि आपकी बहन ने इतनी बार सेक्स किया है तो आपने खुद कितनी बार सेक्स किया होगा।

    यह सुनते ही वह बोली कि उसके अब तक 5 ब्रेकअप हुए हैं और छठे बीएफ के साथ है। जब भी हम मिलते हैं तो सेक्स करते हैं।

    मैं समझ गया कि जब बड़ी बहन ही रण्डी है तो छोटी बहन में उसके गुण आयेंगे ही। थोड़े देर से आए लेकिन आए जरूर!

    फिर उसने कहा- ठीक है … लेकिन अब तुम दोनों कुछ मत करना.
    और तन्नू को गर्भ निरोधक गोली खिलाने को भी बोल दिया।

    यह बात मैंने तन्नू को बताई तो उसने राहत की सांस ली।
    उसकी बहन ने बोला था कि अब कुछ मत करना।
    लेकिन मैंने तो तन्नू की गोल गांड मारने का प्लान बना लिया था।

  • ट्रेन में लेडीज कोच में मौसी के साथ

    दोस्तो, मैं गौरव हाजिर हूँ, अपनी आप बीती सुनाने के लिए. ये मेरा पहला अवसर है इसलिए मुझसे कोई ग़लती हो जाए तो प्लीज़ माफ़ कर देना.

    मैं अब 20 साल का हो गया हूँ. मेरी हाईट 5 फुट 11 इंच है. मेरी बॉडी भी अच्छी है. मैं दिल्ली में अपनी मौसी के घर रहता हूँ क्योंकि मेरे मम्मी पापा एक्सिडेंट में एक्सपायर हो गए. मेरी मौसी की दो लड़कियां हैं, बड़ी 26 साल की स्वाति और छोटी 24 साल की पूजा. मेरे मौसा जी नहीं हैं, वो भी एक्सपायर हो चुके हैं.

    जून 2014 को मैं और मौसी जिनका नाम पुष्पा है, अपनी नानी के घर ट्रेन से जा रहे थे. पुष्पा मौसी की उम्र 45 साल की है, उनका फिगर 44-40-46 का है. लंबाई साढ़े चार फुट की है.

    हम रात को ट्रेन से जा रहे थे, ग़लती से ट्रेन में लेडीज कोच में चढ़ गए, उस डिब्बे के गेट पर कई औरतें खड़ी थीं, उन्होंने मुझे रोक लिया. लेकिन मेरी मौसी कहने पर मुझे और मौसी थोड़ी आगे जाने दिया क्योंकि ट्रेन चल दी थी. मौसी को सीट नहीं मिली, इसलिए मैं और मौसी गेट के पास खड़े थे.

    थोड़ी देर बाद वो औरतें जिन्होंने मुझे रोका था, वो भी खड़ी थीं. तीन चार मेरे साइड में खड़ी थीं और चार मौसी की साइड में थीं. उनमें से एक मौसी से बात कर रही थी. तो एक दूसरी औरत ने मेरी जाँघ और छाती लंड पर हाथ फेरने में लग गई. मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि ये औरतें क्या करने लगी हैं.

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    उस वक्त मेरी मौसी का मुँह दूसरी तरफ था. जो औरत मेरी जांघ पर हाथ फेर रही थी, उससे मैंने सवालिया निगाहों से पूछा कि ‘आप ये क्या कर रही हैं?’
    तो उस औरत ने मुझे चुप रहने का इशारा करते हुए मेरा लंड बाहर निकाल लिया और लंड हिलाने लगी.

    जब एक औरत एक जवान लौंडे के लंड पर अपना हाथ चलाएगी तो लौंडे को तो मजा आना पक्का ही समझिए, सो बस मैं भी गर्म हो गया, मेरा लंड तन गया, जो 7 इंच लम्बा 3 इंच मोटा था.

    उस औरत की देखा देखी दूसरी औरत भी ऐसा ही करने लगी थी. उधर माहौल गर्म हो गया था. उन औरतों में से कुछ सलवार कमीज़ और कुछ ने साड़ी पहन रखी थी. एक ने अपनी कमीज़ उतार कर अपनी एक मस्त चुची मेरे मुँह में दे दी. मैंने भी गर्म होकर उस औरत की चुची को अपने मुँह में दबा कर चूसना शुरू कर दिया. इस वक्त मुझे मौसी की चिंता भी नहीं हो रही थी.

    तभी इतने में मौसी ने पलट कर देखा और चौंक कर बोलीं- ये क्या हो रहा है?
    वहां खड़ी एक लेडी ने मौसी को चाकू दिखा दिया और मौसी डर गईं. उस औरत ने कहा कि चुप रह साली वर्ना इसका लंड काट कर तेरे हाथ में दे दूँगी.
    मौसी ने डरते हुए मुझसे कहा- बेटा जो हो रहा, वो होने दे.

    हालांकि उस औरत के हाथ में चाकू देखने से मेरे लंड का तनाव खत्म होने लगा और मुझे भी कुछ डर सा लगने लगा था.

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    उन औरतों की उम्र 30 से 50 साल तक थी. वहां वो ऐसे खड़ी थीं कि डिब्बे में कोई अन्दर आ ना सके. फिर वो औरत जो मेरे मुँह में अपने चुचे घुसा कर चुसा रही थी, मादक सीत्कार करने लगी.

    वो मेरे कान में धीमे स्वर में बोली- राजा चूची चूसना बंद मत कर … तेरे साथ हम कुछ नहीं करेंगे, ये तो बस इसको डराने के लिए ड्रामा किया था.
    उसकी बात सुन कर मुझे जरा राहत सी मिली और मैं फिर से उसके दूध को चूसने लगा, मेरा लंड फिर से झटके लेने लगा. अब मेरा मन खुल कर सेक्स के लिए मचलने लगा था. उस औरत की फिगर वास्तव में बड़ी मस्त थी. मैं मौसी को देख कर बेबसी का दिखावा कर रहा था … पर मज़ा मुझे भी आ रहा था.

    फिर वहां खड़ी चार औरतों में से तीन ने अपनी सलवार और एक ने अपनी साड़ी उतार दी. एक औरत ने जिम्नास्टिक जैसे उलटते हुए अपनी चुत मेरे मुँह के सामने कर दी. मुझे इशारा मिल गया कि इसकी चुत चूसना है. मैंने अपनी जीभ उसकी चिकनी चुत में लगा दी और कुत्ते जैसे उसकी चुत को चाटना शुरू कर दिया.

    इसके बाद उन सभी ने मेरे से एक एक करके अपनी चुत चुसवाई और चुत का पानी और अपनी पेशाब भी पिलाई. इसके बाद उन औरतों ने कपड़े पहन लिए. अब बची हुई औरतें मुझसे अपनी चुत और गांड चुसवाई करवाने लगीं. फिर जिस औरत ने मेरी मौसी को चाकू लगा रखा था, उसने अपने कपड़े और मेरे कपड़े उतरवाए और फिर चुत चुसवाई कराने के बाद के बाद मेरे मुँह में अपने चुचे ठूंस कर कहा- ले दूध चूस चिकने.

    वो अपने चूचे चुसाते हुए मेरे लंड को भी सहला रही थी. थोड़ी देर बाद उसने कहा- अपने इस मोटे लंड को मेरी चुत में घुसा दे.

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    जैसे ही मैंने उसको चुदाई की पोजीशन में करके अपना लंड उसकी चुत में घुसाया, वैसे मुझे लगा कि लंड किसी गर्म भट्टी में दे दिया हो. उसकी भी इतना बड़ा लंड लेने से माँ चुद गई, वो भी कराहने लगी.

    दो मिनट बाद मैं उसकी चुत में लंड आगे पीछे करने लगा. मैंने उसे आधे घंटे तक चोदा. उसके बाद भी उसने मुझे मेरे कपड़े नहीं दिए.

    तो जैसे कि आप लोग जानते हो कि उन औरतों ने मेरे कपड़े नहीं दिए और थोड़ी देर बाद मेरे मौसी के कपड़े भी उतरवा दिए. मौसी का बदन देख कर मैं पागल हो गया. वो मौसी को मेरे पास लाई. उन्होंने हमारे कपड़े सामान पैसे आदि सब ले लिए थे.

    मेरी मौसी ने कहा- हमें हमारा सामान तो दे दो.
    उन्होंने कहा- दे देंगे, पर जो कहेंगे, वो करना पड़ेगा.
    मौसी ने कहा- क्या?
    “जो हमने इसके साथ किया है, वो करना पड़ेगा.”

    मौसी ना कर रही थीं तो उसने मौसी के कपड़े और हमारा एक बैग नीचे फेंकने का ड्रामा किया.

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    इस पर मौसी मान गईं.

    एक औरत ने मौसी का हाथ मेरे लंड पे रखा और मेरे हाथ मौसी के चुचे पर रखवा दिए. मौसी के चुचे उन औरतों से काफी सख्त थे. मेरा लंड थोड़ी देर बाद खड़ा हो गया. फिर उनमें से एक मोबाइल से हमारी हरकतें रिकॉर्ड करने लगी. उन्होंने मुझे नीचे लेटने को कहा और मौसी की चुत मेरे मुँह पर रखवा कर मौसी को लिटा दिया. इस तरह हम 69 की पोज़िशन में आ गए. मुझे मौसी की चुत चाट कर मज़ा आ रहा था. मौसी भी कमोवेश गर्म हो गई थीं क्योंकि उनकी चुत से भी नमकीन पानी टपकने लगा था.

    दस मिनट बाद हम एक दूसरे के मुँह में झड़ गए.

    फिर मौसी खड़ी हुईं, तो उन्होंने मौसी को उल्टा खड़े होने को कहा. मौसी कुतिया सी बनी, तो एक औरत ने मेरे मुँह को पकड़ कर मेरी मौसी की गांड में दे दिया और चाटने के लिए बोला. मुझे मौसी की गांड चाटते हुए कुछ मिनट ही हुए थे कि मेरा लंड तन गया.
    उन्होंने कहा- चल बे अपनी मौसी की गांड मार.

    मैंने जैसे ही लंड मौसी की गांड पे लगाया, मौसी बोलीं- नहीं बेटा … मेरी आज तक किसी ने गांड नहीं मारी … ऐसा मत कर.
    उस औरत ने धमकी देते हुए एक बैग और कपड़े नीचे फेंक दिए और बोली- देख ले साली तुझे नंगी ही जाना है या बात मानेगी?

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    फिर मैंने लंड को मौसी की गांड में डाल दिया. मेरा सुपारा जैसे ही अन्दर गया मौसी चिल्ला उठीं और छूटने के लिए तड़फ उठीं.
    इस पर दो औरतों ने मौसी के हाथ पकड़ लिए और मुझसे बोलीं- अब हचक के गांड मार साले.

    मैंने जैसे ही लंड डाला, मौसी की अनचुदी गांड की कसावट से मुझे भी दर्द होने लगा. लेकिन मुझे मजा आ रहा था तो मैं धक्के लगाने लगा. इससे मेरा लंड आधे से ज्यादा मौसी की गांड में चला गया. मौसी कंप गईं, पर कुछ देर बाद उनका दर्द कम हुआ और मौसी भी गांड हिला कर मेरा साथ देने लगीं. मैंने मौसी के मम्मे पकड़ लिए और मौसी की धकापेल गांड चुदाई शुरू कर दी. मौसी भी मस्त आवाज निकाल कर अपनी गांड पीछे करते हुए मेरे लंड से टक्कर ले रही थीं.

    कुछ देर की गांड चुदाई के साथ मैंने मौसी की चुत में उंगली करना शुरू कर दी. जिससे मौसी को डबल मजा आने लगा और वे झड़ने की कगार पर आ गईं.

    कुछ मिनट की इस रसभरी गांड चुदाई के जब हम दोनों झड़े तो मैंने अपना रस मौसी की गांड में छोड़ दिया.

    मौसी भी शिथिल होकर उन औरतों से बोलीं- अब बस करो … हम दोनों को छोड़ दो.
    वो औरतें बोलीं- ये वीडियो नेट पे डाल देंगे.
    मौसी उनके हाथ जोड़ने लगीं, वो बोलीं- हमको और पैसे चाहिए.
    मौसी ने उनसे कहा- अब और रुपये कहां से लाएं?
    लेकिन वे मौसी से और पैसे मांगने लगीं तो मौसी बोलीं- मेरे पास और नहीं है.
    वे बोलीं कि देख ले … किसी को फोन करके मंगा ले. बिना पैसे के तो तुझे जाने नहीं देंगे.
    मौसी बोलीं कि मेरे पास एटीएम कार्ड है.
    वे बोलीं कि हमारे साथ अगले स्टेशन पर उतर कर पैसे दे देना.
    मौसी बोलीं- ठीक है.

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    पर उन्होंने मौसी के कपड़े और बैग फेंक दिए थे तो उन्होंने मेरे कपड़े और एक वाइट सूट सलवार दिया, जो बहुत चुस्त था, जिसे पहन कर मौसी की हर चीज़ दिख रही थी.

    कुछ देर बाद स्टेशन आया और हम उतर कर स्टेशन बाहर आए. दो औरतें मौसी के साथ जाकर 25000 रूपए ले आईं. फिर वे सब चली गईं.

    मौसी मुझसे बोलीं कि अब और कोई ट्रेन नहीं है तो सामने उस होटल में रुक जाते हैं और कल कुछ कपड़े लेकर चलेंगे.
    मैंने कहा- ठीक है मौसी.

    फिर हमने एक रूम ले लिया, वहां जाकर मौसी बिस्तर पे बैठ कर बोलीं- तू कुछ खाने के लिए ले आ.
    मैं गया वहां से खाना और बियर की बोतलें ले आया. मैं जब आया तब तक मौसी नहा कर एक तौलिया लपेट कर बैठी थीं.
    फिर मैं भी नहा लिया.

    मौसी खाना लगाने लगीं तो उनको बियर की बोतलें दिखीं. वे बोलीं- ये क्या लाया है?
    मैंने कहा- बियर हैं, टेंशन हो रही थी तो ले आया.
    उन्होंने कहा- ठीक है.
    मैं मौसी की गांड देख कर बोला- दर्द हो रहा है तो आप बियर पी लीजिये मौसी, दर्द कम हो जाएगा.

    मौसी ने बियर ले ली. मैंने तीन बोतलें और मौसी ने दो बियर पी लीं. मौसी नशे में बोलीं- तेरा लंड इतना लम्बा कैसे हो गया?
    मैंने कहा- अपने आप.
    वे बोलीं- तूने पहले भी किसी की चुत मारी है?
    मैंने कहा- नहीं.
    अब मैं खुल गया था, मैं बोला- हस्तमैथुन कई बार किया है.
    मौसी बोलीं- किसे देख कर मुठ मारी है?
    मैं चुप रहा तो बोलीं कि अब क्यों शर्मा रहा … जब तू मेरी गांड बड़े मज़े से मार रहा था तब तेरी शर्म किधर थी.

    ये कहते हुए मौसी ने अपना तौलिया हटा दिया. मैंने देखा कि मौसी की गांड सूज गई थी.

    जैसा कि आप लोग जानते हो कि उन औरतों ने मुझे बदलने लायक कपड़े नहीं दिए थे. थोड़ी देर बाद मौसी ने मेरे कपड़े भी उतरवा दिए.

    मैं बियर के नशे में और मौसी का कामुक बदन देख कर पागल हो गया. मौसी ने भी अपनी चुत पसार दी और इशारा कर दिया कि चुत में अपना लंड पेल दे.

    कुछ देर बाद मैं मौसी के ऊपर चढ़ गया और धकापेल चुदाई शुरू हो गई. इस चुदाई में मैं मौसी से काफी खुल गया था. मैंने मौसी से कहा कि अब मुझे आपकी दोनों बेटियों की चुत भी चोदना है, आप मुझसे वायदा करो कि मुझे रोकोगी नहीं.
    मौसी लंड लीलते हुए बोलीं- ठीक है चोद लेना पर पहले मुझे तो ठंडा कर दे.

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    मौसी की चुदाई के बाद हम दोनों सो गए. दूसरे दिन घर आए तो मौसी की लड़कियों को कैसे चुदाई के लिए राजी किया, ये मैं आपको अगई चुदाई की कहानी में लिखूंगा.

  • भतीजे के साथ पहली चुदाई

    हेलो दोस्तों, यह मेरी पहली कहानी है।

    मैं इस साइट का बहुत धन्यवाद देती हूं क्योंकि इस साइट की वजह से ही मैं अपने साथ हुए एक अनुभव को शेयर करने जा रही हूं।

    मैं इस साइट की रेगुलर रीडर हूं।

    मेरा नाम पूजा है और मैं पंजाब की रहने वाली हूं।

    मैं आज आप सभी को अपना एक सच्चा सेक्स अनुभव बताने जा रही हूं।

    जो मेरे साथ हुआ और जिससे मेरी पूरी जिंदगी ही बदल गई।

    दोस्तों मैंने आजतक किसी और को अपने जिस्म को छूने का मौका नहीं दिया था।

    मेरे पति ही थे जो मेरी चूत और बाकी के बदन के अकेले मालिक थे।

    मेरी उमर 34 साल है लेकिन मैं दिखने में बहुत सेक्सी लगती हूं।

    मेरा रंग गोरा है और मेरा फिगर 38-34-36 है।

    मैं दिखने में बहुत अच्छी हूं।

    तो आप लोगों को और बोअर न करते हुए मैं अब स्टोरी पर आती हूं।

    दोस्तों यह एक रियल चुदाई स्टोरी है और मेरे और मेरे जेठ के बेटे के बीच की है।

    उसने मुझे सेक्स करने के लिए गरम किया उस दिन!

    मेरी फैमिली में मेरे पति और हमारा 8 साल का बेटा और मेरे ससुर रहते हैं।

    मेरे जेठ और उनकी फैमिली किसी और शहर में रहते हैं और उनका भी एक बेटा है जो 22 साल का है।

    और यह लड़का अब तो मुझसे पचासों बार सेक्स कर चुका है।

    दोस्तों जैसे मैंने शुरू में बताया कि मैं सिर्फ अपने पति से प्यार करती थी और उनसे ही चुदवाती थी।

    मेरे जेठ के बेटे का नाम रोहित है और वो दिखने में एवरेज है।

    रोहित की और मेरे पति की बहुत अच्छी बनती थी।

    उनकी शादी के पहले और शादी के बाद वो मेरे साथ भी अच्छी तरह से घुलमिल गया था।

    लेकिन मुझे पता नहीं था कि वो अपनी बातों से मुझे फंसाने और चोदने का प्लान बना रहा है।

    अगर मुझे पता होता तो शायद मैं उससे थोड़ा दूर रहती।

    लेकिन जब भी वो लोग हमारे घर पर आते या हम उनके घर पर जाते तो हम बहुत सारी बातें करते और रोहित और मैं अक्सर एक दूसरे को मैसेज भी भेजा करते थे।

    इससे हम और भी नजदीक आने लगे थे।

    एक दिन हम बैठ के ऐसे ही बात कर रहे थे।

    मैंने रोहित से बोला कि क्यों तुम्हें मेरे साथ चैट करने का इतना शौक है?

    रोहित बोला, हां चाची।

    मैंने कहा, वैसे मुझे भी अच्छा लगता है क्योंकि मेरे साथ बात करने वाला कोई नहीं है।

    रोहित बोला, मैं हूं ना चाची।

    शायद यह मेरा पहला स्टेप था।

    अब जब भी मेरे पति सो जाते तो मैं उसके साथ चैट करती और ऐसे ही एक दिन चैट करते हुए मैंने उसे पूछा।

    मैं: क्या तेरी कोई गर्लफ्रेंड है?

    रोहित: जी नहीं चाची मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है..

    मैं: सच अच्छा बताना।

    रोहित: प्लीज आप कोई और बात करो।

    मैं: अरे शर्मा मत बता ना वैसे भी हम बहुत अच्छे दोस्त बन ही चुके हैं, क्योंकि हम बहुत दिनों से चैट कर रहे हैं।

    रोहित: नहीं चाची हम अच्छे दोस्त नहीं हैं।

    मैं: क्यों?

    रोहित: क्या आप सच में मेरी अच्छी दोस्त बनना चाहती हो?

    मैं: लेकिन तेरे चाचा को पता चल गया तो?

    रोहित: ऐसे कैसे पता चल जाएगा चाची।

    मैं उससे चैट करती हूं और मेरे पति को नहीं पता है वो बात रोहित भी जानता था।

    मैं: ठीक है।

    फिर उसके बाद हम किसी रिश्तेदार के घर शादी पर मिले।

    वहां पर उनकी बेटी की शादी थी और हम एक दूसरे से मजाक कर रहे थे।

    उस दिन ही मेरी जिंदगी बदल गई।

    वहां पर मेरे पति ने कुछ सामान मंगवाया।

    मेरे पति और जेठ के जिम्मे ही ज्यादा काम था शादी का।

    वो दोनों बिजी थे इसलिए मेरे पति ने रोहित को बुलाया और कहा, रोहित एक काम कर गाड़ी ले के चाची के साथ जा कुछ सामान ले के आना है।

    मैंने रोहित को देखा तो वो खुश लग रहा था बड़ा।

    वो आगे गया और उसने कार को पार्किंग से गेट की बाहर निकाला।

    उसने कार का दरवाजा खोल के मुझे अंदर लिया।

    कार चालू हुई और हम दोनों बात करने लगे।

    कार में स्लो स्लो AC ऑन था और रोहित की शर्ट से महंगे सेंट की खुशबू भी आ रही थी।

    हम चलती हुई कार में बातें कर रहे थे।

    उसने हंसते हुए कहा, क्या बात है आज तो मेरी गर्लफ्रेंड बड़ी सेक्सी लग रही है।

    मैं: इतनी ज्यादा भी नहीं कि जितनी तुम तारीफ कर रहे हो।

    रोहित: आज मुझे अपनी इस गर्लफ्रेंड से एक गिफ्ट चाहिए।

    मैं: क्या?

    रोहित हंस के बोला, लिप किस!

    मैं एकदम से चुप हो गई और मैंने उसे एक थप्पड़ मारा।

    और मैंने उसे कहा, यह क्या बोल रहे हो।

    वो कुछ नहीं बोला और कार ड्राइव करने लगा।

    कुछ ही देर में हम लोग घर पहुंच गए।

    मैं अंदर गई और सामान ले कर वापस आई।

    जब मैं कार में बैठ गई तो वो थोड़ा शांत था और मैं उसको बोली कि तुम अभी बच्चे हो।

    और तुम्हें नहीं पता कि यह बातें कहां तक चली जाती हैं।

    फिर मैंने उसे थप्पड़ के लिए सॉरी कहा।

    लेकिन बहुत बातचीत के बाद भी जब वो नहीं बोला तो मैंने कहा, क्या चाहिए तुम्हें?

    तो रोहित ने कहा, तुम!

    मैं एकदम से चुप हो गई और सोचने लगी कि कहीं मेरे पति और उनके बड़े भाई के बीच में कहीं इस बात को ले के झगड़ा न हो जाए।

    अगर इसने बता दिया कि चाची ने आज मुझे मारा तो वो पूछते कि क्यों!

    मैं उसके साथ चैट करती थी और मिलती भी थी।

    यह सब बातें सोच के मैं डर सी गई थी।

    मैंने रोहित से कहा, तुम मेरी सिर्फ किस ले सकते हो।

    रोहित कुछ नहीं बोला और मैं डर गई।

    मैं कुछ नहीं बोली और रोहित मेरा हाथ पकड़ के कमरे में चल दिया।

    उसने मुझे दीवार के साथ खड़ा कर दिया और जानवरों के जैसे वो मेरी ऊपर टूट पड़ा।

    उसके होंठों से मेरे होंठ लगने से मैं भी बेकाबू होने लगी थी।

    और तभी उसके हाथ मेरे बूब्स पर आ गए।

    मैं कहना चाहती थी कि नहीं हम सेक्स नहीं करेंगे लेकिन डर की वजह से मैं कुछ नहीं बोल पाई।

    मैं नहीं चाहती थी कि वो गुस्से में ऐसा कुछ कर दे जिससे मेरी शादीशुदा जिंदगी में दरार आ जाए।

    उसके हाथ मेरे बूब्स को ऐसे दबा रहे थे जैसे मेरे संतरे का जूस निकालना हो।

    और फिर जो हुआ वो मुझे आजतक याद है।

    उसने मेरा ब्लाउज ऊपर कर के मेरे बूब्स को चाटना चालू कर दिया।

    मैं उसे बहुत बार रुकने के लिए मना कर रही थी हंसते हंसते।

    यह मेरी मजबूरी थी कि मैं उसे जोर नहीं कर सकती थी और वो बात का उल्टा मतलब निकाल रहा था शायद।

    वो सोच रहा था कि हंसी तो फंसी और मैं सच में फंस गई।

    कुछ ही देर में मेरे सारे कपड़े जमीन पर पड़े थे और मेरे सामने मेरे इस भतीजे का बड़ा लंड था।

    उसने उसका लोड़ा मेरे मुंह में डाल के चूसने के लिए कहा।

    मैंने डरते हुए लेकिन अंदर से एक अजीब सी गर्मी महसूस करते हुए उसके मोटे लंड को मुंह में लिया।

    मेरी जीभ उसके सिरे पर घूम रही थी और मैं धीरे धीरे चूसने लगी जबकि मेरे मन में पति की याद आ रही थी जिससे मुझे बहुत अपराधबोध हो रहा था।

    फिर उसने अपनी हवस को संतोष लिया।

    एक बार उसने मेरी चूत मारी और चूत को लगातार 10 मिनट तक चोदा।

    एक छोटे लड़के में इतनी शक्ति पता नहीं कहां से आ गई थी।

    उसने मुझे बिस्तर पर लिटाया और मेरी टांगें फैला दीं।

    उसका मोटा लंड मेरी चूत के मुंह पर रगड़ने लगा जिससे मेरी चूत गीली होने लगी।

    फिर उसने धीरे से अपना लंड मेरी चूत में घुसाया।

    पहले तो थोड़ा दर्द हुआ लेकिन जैसे ही वो अंदर बाहर होने लगा मेरे शरीर में एक अनजानी खुशी की लहर दौड़ने लगी।

    मेरा दिल तेज धड़क रहा था और अपराधबोध से मेरा चेहरा गर्म हो रहा था कि मैं अपने पति को धोखा दे रही हूं लेकिन रोहित की चुदाई मुझे अपने पति से कहीं ज्यादा अच्छी लग रही थी।

    उसका लंड गच गच की आवाज से मेरी ढीली चूत में लगातार अंदर बाहर हो रहा था।

    हर थ्रस्ट के साथ मेरी चूत की दीवारें उसके लंड को कस कर पकड़ रही थीं और मुझे बहुत मजा आ रहा था लेकिन मैंने मुंह से कोई आवाज नहीं निकाली ताकि वो न समझे कि मैं एंजॉय कर रही हूं।

    मैं अंदर ही अंदर कराह रही थी और सोच रही थी कि यह गलत है फिर भी रुकना नहीं चाहती।

    और वो मुझे चोदते हुए मेरे बूब्स को चूस रहा था।

    उसके मुंह में मेरे निप्पल्स को चूसते समय मेरे बदन में झुरझुरी सी दौड़ रही थी।

    मैं अंदर ही अंदर कराह रही थी लेकिन बाहर से चुप थी।

    कभी अपराधबोध इतना बढ़ जाता कि आंसू आ जाते लेकिन अगले ही पल रोहित का जोरदार धक्का मुझे फिर से आनंद में डुबो देता।

    उसने मेरे पूरे बदन को लाल कर दिया था।

    जब उसका छूटा तो वीर्य से मेरी चूत पूरी गीली हो गई।

    और एक लंबी सांस ले के उसने अपना लंड बाहर निकाल लिया।

    मैंने टिश्यू से गीली चूत को साफ किया और कपड़े पहन के हम निकल पड़े।

    मेरे पति ने पूछा भी कि इतनी देर क्यों हुई लेकिन मेरे पास जवाब नहीं था।

    रोहित ने बताया कि पीछे के टायर में हवा कम लग रही थी इसलिए भरवाने चले गए थे।

    यह दिन और आज….रोहित रुका नहीं है।

    जब भी मैं अकेली होती हूं वो मेरे पास आके अपनी सेक्स की भूख को मिटा लेता है।

    पिछले महीने से तो वो एनल सेक्स भी करने लगा है।

    और अकसर वो मुझे होटल में सेक्स के लिए भी जिद कर रहा है।

    कहता है चाची कभी कभी घर पर पूरा मौका नहीं मिलता है।

    आप ही बताओ इस चुदक्कड़ भतीजे को कैसे हैंडल करूं?

    मैं भी चाहती हूं उसके साथ भरपूर सेक्स करना लेकिन मैं ये भी चाहती हूं कि उसको लगे कि वही जिम्मेदार है और मैं मजबूरी में कर रही हूं।

  • सड़क पर लड़की को पटाकर घर में चोद दिया

    बुर की चुदाई हिंदी में पढ़ें कि कैसे मैंने सडक पर एक लड़की देखी और वो मुझे पसंद आ गयी. उसके बाद मैंने उसे कैसे पटाया और कैसे उसको अपने घर बुलाकर चोदा.

    नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम सचिन है.
    मैं 24 साल का हूँ और हरियाणा के रोहतक जिले का रहने वाला हूँ.

    मेरी पिछली कहानी थी: होटल में गर्लफ्रेंड की सील तोड़ी

    अब मैं एक नयी बुर की चुदाई हिंदी में लिख रहा हूँ. लुत्फ़ लें इस कहानी का!
    खेती हमारा पारिवारिक काम है.
    खेत में काम करते रहने की वजह से मेरा शरीर एक खिलाड़ी टाइप का है, मेरी हाइट 5′ 11″ है और लन्ड का साइज 7 इंच है.

    बात अभी कुछ दिन पहले की है, मैं रोहतक के बाजार में ऐसे ही बाइक पर फालतू में चक्कर लगा रहा था.

    तभी मेरी नज़र एक खूबसूरत सी लड़की पर पड़ी।
    उसका नाम सोनिया(बदला हुआ) जो मुझे बाद में पता चला था।

    उसकी हाइट 5′ 4″ होगी और रंग उसका दूध से भी साफ!
    32-28-32 का फिगर होगा उसका!

    वो एक ऑटो रिक्शा में बैठ कर कहीं जा रही थी।

    मैंने उसके आटो के आगे पीछे चक्कर काटने चालू कर दिया।

    करीब 6-7 चक्कर काटने के बाद उसने मुझे देख होगा।
    फिर तो मेरी 4 बार उससे नजर मिली।

    आगे चल कर वह एक पार्क के सामने उतर गयी।
    वहाँ पर वो किसी आदमी के साथ बाइक पर बैठ कर चली गयी।

    मैंने भी उनके पीछे पीछे चलना शुरू कर दिया।

    सोनिया बार बार मेरी तरफ देख रही थी और धीरे धीरे मुस्कुरा रही थी।

    मैंने सोचा कि मेरा काम बन सकता है।
    पर आगे चल कर वे पता नहीं किस गली में चले गए औऱ मैं उनसे बिछड़ गया।

    मैंने लगभग 1 घण्टा उस कालोनी में चक्कर लगाए लेकिन मेरे हाथ कुछ नहीं लगा।

    घर आकर रात में मैंने उसके नाम की 3 बार बार मुठ मारी और सो गया।
    रात को सपने में भी मुझे सोनिया दिखाई दे रही थी।

    अगले दिन उसी टाइम पर मैं उसी पार्क के आगे पहुँच गया जहाँ पर सोनिया आटो से उतरी थी.
    वहां कोई नहीं था, न ही वहाँ पर वो अंकल थे जिनके पीछे सोनिया बैठ कर गयी थी।

    मैंने करीब एक घण्टा वहाँ पर इंतज़ार किया होगा लेकिन मुझे वो नहीं मिली।
    तीसरे दिन भी मैं वहाँ पर गया लेकिन कुछ नहीं पता चला।

    चौथे दिन मैं फिर से बाजार में ऐसे ही फिर से फालतू में घूम रहा था तो मुझे फिर से सोनिया दिखाई दी।
    हमारी फिर से नज़र से नज़र मिली और सोनिया मुस्कुराने लगी।

    अब मैंने मौका नहीं छोड़ना था।
    मैंने जल्दी से एक दुकान से पैन पेपर लिया और एक पर्ची पर अपना मोबाईल नम्बर लिख कर जेब में डाल लिया और उसके आटो के पीछे चक्कर लगाने लग गया।

    मैंने सोनिया को पर्ची दिखा दी तो वो हंसने लगी।
    शायद उसके मन में भी कुछ था।

    आगे चल कर वो उस पार्क से 150 मीटर पीछे ही उत्तर गयी और पैदल ही पार्क की तरफ चलने लगी।

    मैंने भी उसके पास बाइक ले जाकर उसके सामने पर्ची कर दी।
    उसने झट से मेरे हाथ से परची ले ली।
    फिर वो पार्क के आगे से उस बाइक वाले आदमी के साथ बैठकर चली गयी।

    मैंने पूरी रात उसके फ़ोन का इंतज़ार किया लेकिन उसका कोई फ़ोन नहीं आया।

    फिर मैं उसके नाम की 2 बार मुठ मार कर सो गया।

    अगले दो दिन तक उसकी कोई कॉल नहीं आई.
    अब मैंने भी उम्मीद छोड़ दी थी।

    फिर एक दिन एक अनजान नंबर से कॉल आयी तो मैंने सोचा आ शायद उसी का हो सकता है.
    और वो उसी का फोन था।
    हाय हेलो हुआ … थोड़ी से बातचीत हुई।

    अब लगभग हर रोज मैसेज पर ओर कॉल पर हमारी बाते हों लग गयी थी।

    बातों ही बातों में गाली वगैरा देना और नॉन वेज चुटकुले शेयर करना अब सामान्य सी बात हो गयी थी।

    अब रात को हर रोज की तरह बात करते करते मैं उसको गर्म कर देता था और अपना पानी भी निकल लेता ओर उसका भी निकलवा देता था।

    सोनिया भी मेरे से उतना ही मिलना चाहती थी जितना मैं उससे!

    अब पार्क में मिलना और आपस में चूमाचाटी करना हमारा रोज का काम हो गया था।
    लेकिन हमें सेक्स का मोक्का नहीं मिल पा रहा था।

    एक बार मेरे घर वाले 3-4 दिन के लिए कहीं बाहर जाने वाले थे तो मैंने दुकान का (सॉरी, मैंने बताया नहीं कि खेती से अलग मेरी सी सी टी वी कैमरों की दुकान और है) बहाना मार कर नहीं गया।

    मैंने उसको अपने घर पर आने के लिए मना लिया.

    उसने भी अपनी किसी सहेली की शादी के लिए घर पर बोल दिया और शाम के टाइम ही मेरी बताई जगह पर आ गयी।

    उस दिन उसने स्काई ब्लू जीन्स और सफेद टॉप पहना था।

    हम दोनों मेरे घर पर आ गए, वो अपने साथ शादी में पहनने वाला लाचा भी लेकर आई थी।

    घर आ कर हम दोनों ने कॉफी बनाई और साथ बैठ कर पीने लगे।

    कॉफी पीते पीते मैं उसको छेड़ने लगा तो वो बोली- रुक भी जाओ, सारी रात अपनी ही है।
    लेकिन मैं नहीं माना और उसको पकड़ कर किस करने लगा।

    पहले तो वो थोड़ी ना नुकर करने लगी, फिर वो भी मेरा साथ देने लगी।

    मैंने एक एक करके उसके उसकी जीन्स ऒर टॉप उतार दिया।
    अब वो सिर्फ ब्रा ओर पैंटी में थी।

    उसने मेरे भी कपड़े उतार दिए।

    अब मैं भी ब्रा के ऊपर से ही उसकी चूचियों को मसलने लग गया।

    और जब मैंने उसकी पैंटी के अंदर हाथ दिया तो वो पानी छोड़ चुकी थी।
    मैं अब उसकी चूत में उंगली करने लग गया और उसकी पैंटी भी उतार दी।

    उसने भी अब मेरा अंडरवीयर भी उतर दिया और मेरा लन्ड पकड़ लिया था।
    हम दोनों अब जन्मजात नंगे थे।

    अब मैंने उसको उठाया और अपने बेडरूम में ले गया।
    वहाँ पर उसकी चूत को चाटने लग गया।

    कुछ ही देर में हम दोनों 69 की पोजीशन में आ गये।

    पहले तो उसने लन्ड चूसने से मना कर दिया लेकिन थोड़ा जोर देने पर वो लन्ड को चूसने लग गयी।
    बड़ा गजब से लन्ड चूस रही थी।
    मुझे लन्ड चुसवान में बहुत मज़ा आ रहा था।

    उसके मुंह के अंदर ही मेरा पानी निकल गया।

    तभी उसने सारा का सारा माल अपने मुंह से उल्टी कर दिया और मुझसे लड़ने लग गयी।
    लेकिन फिर बाद में मैंने उसकी चूत चाट कर और उसका पानी पीकर मना लिया।

    अब वो फिर से मेरा लन्ड चूसने लग गयी।

    थोड़ी देर में मेरा लन्ड दोबारा पूरा तन चुका था।
    अब सोनिया बार बार अपनी कमर उठा कर लन्ड को चूत में आने का न्योता दे रही थी।

    मैंने भी उसकी दोनों टांगों को उठाया और उसकी चूत की फांकों के अंदर लन्ड को एडजस्ट किया और एक जोर का झटका दे मारा.
    मेरा आधा लन्ड उसकी चूत के अंदर!

    सोनिया ने बड़ी जोर से चीख मारी.
    मैंने जल्दी से उसके होंठों को अपने होंठों से दबाया और दो मिनट तक ऐसे ही उसके ऊपर पड़ा रहा।
    टीवी का रिमोट पास ही पडा था तो मैंने टीवी चला कर उसकी आवाज़ तेज़ कर दी।

    सोनिया को थोड़ा आराम मिलने के बाद बोली- आराम से करो! अभी तक मैंने सिर्फ गाजर मूली से काम चलाया है लन्ड नहीं लिया है किसी का!

    मैं उसकी चूचियों को छेड़ने लग गया।

    सोनिया को थोड़ा आराम मिलने के बाद बिना बताए मैंने एक और जोर का झटका मार दिया.
    अब उसके चिललाने से कोई फर्क नहीं पड़ रहा था। अब मैंने उसकी ताबड़ तोड़ चुदाई चालू कर दी।

    इस बीच सोनिया झड़ गयी।
    मैं भी थोड़ा थक गया था।

    अब मैंने सोनिया को पेट के बल लेटाकर पीछे से उसकी चूत मारनी चालू कर दी।

    कुछ मिनट बाद जब मैं झड़ने वाला था तो मैंने सोनिया से पूछा.
    तो सोनिया बोली- अंदर ही निकालना … मैं पहली बार पूरा फील लेना चाहती हूँ।

    मैं उसकी चूत में ही झड़ गया।
    हम दोनों उठे तो देखा कि चादर पर खून के धब्बे पड़ गये थे।

    सोनिया से चला भी नहीं जा रहा था।
    मैं उसको पकड़ कर वाशरूम तक ले गया और वहीं पर फव्वारे के नीचे हम दोनों नहाने लग गए।

    वहीं बाथरूम में ही मैंने उसको एक बार फिर से चोदा।

    अब हम दोनों थक कर सो गए।

    सुबह जब मैं उठा तो सोनिया मेरे से पहले उठ कर खाना बना रही थी।

    सोनिया ने मुझे बताया कि रात को उसके गाँव में किसी को मौत हो गयी है. सभी घर वाले रात को ही गाँव जा चुके है वे कल तक आएंगे. मुझे मेरी सहेली के ही घर रुकने को बोला है।

    अब हमारे पास एक पूरा दिन और एक पूरी रात ओर थी।

    फिर हमने एक बार ओर सेक्स किया और पूरा दिन आराम करते रहे।

    शाम को मैं थोड़ी देर बाजार से कुछ खाने का सामान लेने चला गया।

    बाजार से आने के बाद देखा कि सोनिया लाचा पहने घूम रही थी।
    क्या गजब की लग रही थी … जी कर रहा था कि अभी पकड़ कर चोद दूँ!

    लेकिन मैंने थोड़ा इंतज़ार करना ही ठीक समझा.

    रात को खाना खाने के बाद हम दोनों फिर एक दूसरे को किस करने लगे.

    एक बार चूत चुदाई हो जाने के बाद अब मेरा दिल उसकी गांड मारने का कर रहा था.
    तो मैंने उसे अपनी इच्छा बतायी.

    पहले तो सोनिया गांड मरवाने से मना करने लगी क्योंकि उसने अपनी सहेलियों और भाभी से सुन रखा था कि गांड में लंड लेने से बहुत दर्द होता है.
    लेकिन थोड़ा सा ज़ोर देने कर बाद वो मान गयी.

    अब मैं उसकी गांड में तेल डाल कर गांड में उंगली करने लग गया.
    पहले तो उसको उंगली में भी थोड़ा दर्द हो रहा था लेकिन बाद में उसकी गांड थोड़ी ढीली पड़ गयी।

    अब मैंने उसकी गांड के छेद में अपना लौड़े का सुपारा एडजस्ट करके थोड़ा जोर लगाया लेकिन लन्ड फिसल गया।

    तब सोनिया ने अपने दोनों चूतड़ों को पकड़ कर गांड के छेद को चौड़ा किया.
    मैंने भी लन्ड छेद पर लगाकर जोर लगाया तो लंड धीमे धीमे उसकी गांड में घुसाने लगा और वो दर्द से कराहने लगी.

    मेरा आधा लन्ड की गांड में घुस गया।
    उसकी गांड से खून आने लग गया था और उसकी आँखों से पानी!

    थोड़ी देर मैं ऐसे ही रुक रहा … फिर उसने धीरे धीरे कमर हिलाना चालू किया तो मैंने एक झटका ओर मार दिया.

    अब मेरा पूरा लन्ड उसकी गांड में जा चुका था.

    थोड़ी देर हल्के हल्के झटके मारने के बाद उसे भी मज़ा आने लग गया था।
    तब मैंने भी थोड़ा जोर जोर से झटके मारने चालू कर दिए और थोड़ी देर बाद उसकी गांड में ही झड़ गया।

    उस दिन और रात मैंने उसकी 2 बार चूत और 2 बार गांड मारी।
    अब तो चुदाई का खेल हमारे लिए हर हफ्ते का खेल हो गया था।

    हमारी दोस्ती करीब 5 महीने तक रही. फिर हमारे बीच में कुछ गलतफहमी होने के कारण अब हम दोनों दूर हो चुके हैं।

    उसको एक नया बॉयफ्रेंड मिल गया, लेकिन मैं अभी भी अकेला हूँ।

  • चोदना था गर्लफ्रेंड को चुद गयी उसकी मम्मी

    गर्लफ्रेंड मॉम सेक्स कहानी में पढ़ें कि मेरे गाँव के स्कूल की दोस्त मुझे शहर में मिल गयी. हमारी आपस में सेटिंग हो गयी. मैं उसकी चुदाई करना चाहता था पर …

    हाय दोस्तो, मैं राहुल वैद्या, उम्र 26 वर्ष, हाइट 5 फीट 10 इंच, रंग गोरा!
    मैं एक गांव में रहने वाला लड़का हूँ।

    यह कहानी शत प्रतिशत सही है, इस गर्लफ्रेंड मॉम सेक्स कहानी में केवल सभी पात्रों के नाम और जगह का नाम गोपनीयता के लिए बदल दिए गए हैं।

    बात उन दिनों की है जब इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए शहर में रहता था. मैं इंजीनियरिंग के चौथा सेमेस्टर में था.

    तब अचानक एक दिन शहर के सब्जी बाजार में मेरी एक स्कूल की फ्रेंड जिसका नाम रेशमा था, वो मुझे मिल गयी।

    रेशमा के पापा सरकारी नौकरी वाले हैं तो पहले वो हमारे गाँव में उनका पोस्टिंग था तो उस समय रेशमा हमारे स्कूल में ही पढ़ती थी।
    फिर जब हम लोग नवमी कक्षा में आये तो उनके पापा का ट्रांसफर हो गया।

    तब उनकी फैमिली सभी शहर में आ गयी. उसके बाद सब्जी मार्किट में अचानक उससे मिला.
    5 साल के लंबे अंतराल के बाद उसे देखा बहुत चेंज हो गयी थी, अब वो माल बन गयी थी।

    मैं पहले से ही उसको पसंद करता था लेकिन तब तक इतनी हिम्मत नहीं थी उसको इजहार करूँ।
    अचानक मिले तो दोनों ही हैरान हो गए।

    उसने मुझसे हाथ मिलाया.
    काफ़ी देर तक हमने वहीं बात की फिर दोनों ने नम्बर एक्सचेंज किया. हम दोनों ने फिर से मिलने का वादा किया.
    फिर हम दोनों अपने अपने घर आ गए।

    उससे मिलने के बाद मुझे बहुत ही बेचैनी हुई उससे बात करने की लेकिन हिम्मत नहीं हो पा रही थी।
    लगता है कि जो मुझे फील हो रहा था उसे भी कुछ ऐसा ही एहसास हो रहा था।

    तब रात को 10 बजे रेशमा का कॉल आया।
    हमने बात करना शुरू किया. उस दिन लगातार एक घंटा बातें की, हमने पुरानी बातें याद की हमारे स्कूल की … पुरानी यादों को याद करने लगे।

    बातों बातों में मैंने उसकी तारीफ करना चालू कर दिया- यार रेशमा, आप मुझे स्कूल लाइफ से ही बहुत अच्छी लगती हो, आप बहुत सुंदर हो!
    उसने हंसते हुए कहा- चल झूठा।
    मैंने कहा- सच्ची यार।

    फिर वो कहने लगी- तुम भी कम नहीं हो किसी से, हैंडसम इंटेलीजेंट!

    यूँ ही हमारी बातें चलती रही. जितनी बातें हमने स्कूल की लाइफ में नहीं की, उससे ज्यादा हमने 2 घंटे में ही कर दी.
    मैं जिस एरिया से बिलोंग करता था, वहाँ लड़के अगर लड़कियों से बात करे, हाथ मिलाये मतलब उन दोनों के बीच कोई न कोई चक्कर है.
    ऐसा माना जाता था स्कूल लाइफ में।

    बीच में रास्ता खराब था जिसकी वजह से बार आंटी की चूचियां मेरी पीठ दब जाती थी. जिससे मुझे बहुत ही आनंद का अनुभव होता था।

    11 बजे हम घर पहुंच गए.
    मैंने रेशमा को काल करके बताया कि हम लोग पहुंच गए।

    वहाँ पहुंचे तो रेशमा के बड़े पापा और उसकी बड़ी माँ से मिलकर उनको प्रणाम किया।

    फिर हम लोग फ्रेश होकर दोपहर का भोजन करके आराम करने लगी।
    लंबा सफर होने की वजह से थकावट बहुत थी।

    रेशमा के गांव के घर में 3 कमरे थे, एक में उसके बड़े पापा मम्मी और एक रेशमा के परिवार का था, जब भी ये लोग आते थे, वहीं रहते थे।

    रात में भोजन के बाद मैं अपना समान गेस्टरूम में ले जा रहा था.

    तभी आँटी ने कहा- बेटा, कहाँ जा रहा है?
    तो मैंने कहा- आँटी गेस्ट रूम में सोने!
    उन्होंने कहा- बेटा, मुझे अकेले सोने की आदत नहीं है. मेरे रूम में कोई न कोई सोता है तब अच्छा लगता है. इधर मैंने बगल में बिस्तर लगा दिया है, यहाँ सो जा।
    तो मैं वहाँ सो गया।

    मैं आँटी से जब से मिला, तबसे उनको चोदने की मेरी इच्छा तो बहुत थी लेकिन मैंने ‘रेशमा की माँ है’ सोच कर के कभी ट्राय नहीं किया.
    और डर भी लगता था कि कहीं लेने के देने ना पड़ जायें।

    अगले दिन मैं सुबह 8 बजे उठा आँटी उठ गई थी.
    रेशमा के बड़े पापा और बड़ी माँ कहीं बाहर चले गए थे।

    मैं बाड़ी के तरफ गया तो देखा आँटी अपने साड़ी और पेटीकोट अपने घुटनों के ऊपर जांघों तक चढ़ाकर नीचे बैठकर बर्तन धो रही थी।

    आँटी को ऐसी अवस्था में देखकर मेरा लंड खड़ा हो गया.
    आप लोग जानते हो कि गांव में बेसिन वगैरा नहीं होता तो गांव की महिलायें जमीन पर बैठकर बर्तन धोती हैं।

    मुझे वो देख नहीं रही थी.

    फिर वो उठी और उसने फिर साड़ी और पेटिकोट को चढ़ा कर अपने कमर पे अटका दिया।

    उनकी गदरायी हुई माँसल जांघों को देखकर मेरा लंड पैंट में पूरी तरह खड़ा हो गया।

    फिर उन्होंने मुझे देखा और कहा- बेटा उठ गए … चलो मुंह हाथ धो लो … मैं चाय बना देती हूँ तुम्हारे लिए!

    उनकी नजर मेरे शार्ट्स पर पड़ी.
    मेरा खड़ा लंड ऊपर से ही पता चल रहा था.
    वो उसे देखकर मुस्कुरा रही थी।

    पानी भरने तक मैंने उनकी जांघों को देखा.
    फिर मैंने टॉयलेट में जाकर मुठ मारी. तब मेरा लंड शांत हुआ।

    थोड़ी देर बाद आँटी नहाने बाड़ी में गयी वो पेटीकोट को अपने वक्ष पर बांध कर नहा रही थी.
    मैं बाड़ी में गया तो उनके भीगे अधनंगे जिस्म को देखकर मैं पागल हो गया।

    फिर शाम को बड़े पापा, माँ आ गए.
    हमने रात का भोजन किया.

    फिर 9 बजे आँटी उठकर बाड़ी की तरफ गयी.
    आधा घंटा से ज्यादा हो गया था, वो वापिस नहीं आई।
    गांव में 9 बजे से ही सब सो जाते हैं.

    तो मैंने जाकर देखा तो बड़े पापा और आँटी की बातें चल रही थी।

    बड़े पापा आँटी को बोल रहे थे- यहां क्यों आई है? चुदवाने आयी है तो क्यों नहीं दे रही है जानेमन?

    आँटी ने कहा- मैं तो चाहती हूं कि आप मुझे चोदो. लेकिन ये राहुल आया है, उसने देख लिया तो … और रेशमा को बता दिया तो फिर तो हमारी बैंड बज जाएगी।

    तब आँटी ने कहा- 3 बजे रात को आप गेस्टरूम में आना, मैं वहीं मिलूँगी।

    फिर क्या था … मैं उनके बारे में जान गया कि वो बहुत बड़ी रांड है।
    और इसको बड़े पापा से नहीं अब मुझसे चुदना होगा … मैं इनकी जेठ से चुदाई आज होने नहीं दूँगा।

    फिर मैं बाड़ी तरफ गया अनजान बनते हुए!
    मुझे देख वे दोनों छुप गए.

    मैं अपना लंड निकाल के वहीं पे मूतने लगा.
    मेरा लंड खड़ा था, उसे देखकर आँटी के मुंह में पानी आ गया।

    फिर मैं वहाँ से आ गया.
    तुरंत आँटी भी आकर सो गई।

    मैं जागता रहा था.
    3 बजे आंटी अपने जेठ का लंड लेने जाने लगी तो तभी मैंने उनको बोला- कहाँ जा रहे हो?
    आँटी- कही नहीं बेटा … वॉशरूम जा रही हूं।

    फिर मैंने उनका पीछा किया, वो गेस्टरूम में गयी.
    वहाँ अंकल थे.

    अंकल ने उन्हें जाते ही पकड़ लिया.
    फिर आँटी ने कहा- नहीं, हम लोग आज नहीं कर सकते क्योंकि राहुल जग रहा है। मैं अभी आ रही थी तो उसने मुझसे पूछा कि कहाँ जा रही हो आँटी. मैं उससे वाशरूम कहकर आई हूँ. लेट हुई तो वो फिर मुझसे कहेगा।

    इस बात पर बड़े पापा भड़क गए- तू ही मुझे चूत देना नहीं चाहती. इसलिये बहाने मारती है. तू उसी को चूत देती होगी।

    आँटी ने कहा- तुमको नहीं देना रहता तो गांव नहीं आती. और दूसरी बात … उससे चुदना होता तो रूम में ही चुद लेती चिल्ला चिल्ला के … क्योंकि उसका लंड आपसे बहुत बड़ा है, अपने खुद देखा अभी मूतने आया था तब! अब मैं जा रही हूं. आज के बाद आपसे कभी नहीं चुदूँगी.

    इतना बोलकर आंटी आकर सो गई।
    मैं तो मन ही मन खुश हो गया।

    फिर अगले दिन से पता नहीं आँटी का व्यवहार मेरे लिए बहुत चेंज हो गया. वो जो बेटा बेटा बोलती थी, अब राहुल कहने लगी।
    नहाने के समय अपने पेटिकोट को पूरा ऊपर चढ़ाकर अपने जांघों में साबुन लगाने लगी। मुझसे एकदम सट कर बैठती … अपनी नंगी जांघों में मेरे सामने तेल लगाती।

    उनको इस तरह से मेरे सामने अपने जिस्म की नुमाइश करते देखकर आज मेरा मूड बदल गया था.
    “आज रात में उनको चोदना ही है. पर पटाऊं कैसे?” मैं ये सोचने लगा।

    आँटी का दिमाग बहुत खराब था क्योंकि वो जिस मकसद से गांव आयी थी वो मकसद पूरा नहीं हुआ.
    वो सो गई।

    मेरी सबसे बड़ी कमजोरी महिलाओं की लंबी गदराई हुई टांग और जांघें हैं. औरतों के बूब्स देखकर मेरा लंड खड़ा नहीं होता।
    अगर मुझे नंगी जांघे दिख जाएँ तो मैं बगैर मुठ मारे शांत नहीं हो सकता।

    रात के जैसे ही 9:30 हुए, मैंने सोच लिया कि कुछ भी हो जाये आज आँटी को चोदकर ही रहूंगा।

    फिर मैं उनके पलँग के करीब गया.
    आँटी की साड़ी घुटनों तक उठी हुई थी।

    मैं अपने मोबाइल का फ़्लैश लाइट ऑन करके उनकी टांगों करीब से देखने लगा.
    धीरे धीरे करके मैंने आँटी की साड़ी को पूरा जाँघों तक ऊपर उठा दिया।

    मैं आंटी की नंगी टांगें एकदम करीब से देख रहा था. साथ में एक हाथ से मैं अपने हथियार को मसल रहा था।

    फिर मैं फ़्लैश लाइट ऑफ करके उनकी टांगों को नाक से करीब के सूंघने लगा और जोश में आकर मैंने उनकी साड़ी पूरी तरह से ऊपर करने की कोशिश की।

    तभी आँटी झनझना कर उठ गई और उन्होंने तुरंत रूम की लाइट ऑन कर दिया।
    आँटी ने कहा- ये क्या कर रहे हो राहुल ?ये सब गलत है … मैं तुम्हारी माँ की तरह हूँ।

    मैं उनके करीब गया, उनके हाथों को पकड़ लिया और कहा- आँटी, आप बहुत खूबसूरत हैं. आप मुझे बेहद अच्छी लगती हो।
    “नहीं राहुल … मैं तुम्हारे साथ ये सब कर नहीं सकती. तुम मेरे बेटे जैसे हो।”

    फिर मैंने उनसे कहा- अच्छा जी, आपकी कल की रात की बातें मैं अगर रेशमा को बता दूं जो आपके और बड़े पापा के बीच हुआ बाड़ी में?

    वो बोलने लगी- कैसी बातें?
    मैंने कहा- आंटी आप कब से चुद रही हो अपने जेठ से?

    मैंने कहा- आप माल ही ऐसी हो जिसे प्यार से, आराम से, इत्मीनान से खाया जाए।
    फिर मैं बूब्स को छोड़कर उनकी चूत चाटने लगा.

    सबसे पहले जब मैंने उनकी चूत में जीभ लगाई तो वो कहने लगी- ऐसे कौन करता है?
    मैंने कहा- जानेमन, सेक्स में औरत को चोदने से पहले उनके शरीर के हर एक अंग को चूमकर चाटकर जब तक रोमांचित न करो तो वो सेक्स अधूरा है।

    “वाकयी में राहुल … तुम खूब मजा दे रहे हो मुझे!”

    मैं उनकी चूत को चाट रहा था.

    फिर मैंने अपनी जीभ गांड के छेद में डाल दी.
    वो पागल हो गई।

    फिर मैंने उनको अपना लंड चूसने को कहा.
    उन्होंने शुरु में मना किया, फिर जिद करने पे मान गई।
    वो मेरे लंड को चूसने लगी बेतहाशा!

    फिर हम दोनों 69 की पोजीशन में आ गए और एक दूसरे को चाटने चूसने लगे.
    कुछ देर में ही हम दोनों एक साथ एक दूसरे के मुंह में झड़ गए।

    मैंने उनका सारा रस पी लिया. मुझे देखकर वो पी मेरे पूरा वीर्य पी गयी।

    थोड़ी देर के बाद हम दोनों फिर गर्म हो गए. मैं उनकी चूत के ऊपर लंड को ले जाकर घिसने लगा.
    तो वो कहने लगी- जान अब तो डाल दो. मैं तुम्हारे इस विशाल लंड को अपनी चूत में कब से लेना चाह रही हूं।

    मैंने उनकी चूत के छेद में लंड टिकाकर एक जोर का झटका दिया.
    वो जोर से चिल्ला पड़ी- मार दिया रे … आराम से नहीं डाल सकता कुत्ते? इतना बड़ा मूसल लंड है तेरा … एक बार में कहाँ घुसेगा।

    फिर मैं धीरे धीरे उनके चूत में अपना लंड डालने लगा वो धीरे धीरे चीखने लगी- आह आह … चोद राहुल चोद!

    मैंने धीरे धीरे स्पीड बढ़ायी तो वो कहने लगी- और जोर से चोद राहुल … और जोर से!

    आंटी की चुदाई की चीख सुनकर बड़े पापा आ गए.
    वो हमें खिड़की से देखने लगे.

    मैं उनको देखकर और जोर जोर से चोद रहा था.

    फिर मैंने कहा- जानू मुझे लाइट चालू करके आपके बदन को देखते हुए चोदना है।
    मैंने लाइट आन कर ली.

    मेरा जोश और बढ़ गया.
    इधर जोरदार चुदाई चल रही थी, उधर बड़े पापा हमें देखकर अपने आप को कोस रहे थे।

    मैं आंटी के होंठों को चूमते हुए चोद रहा था।

    फिर वो कहने लगी- जोर से चोद मुझे मेरी जान … आज मेरी चूत का भोसड़ा बना दे।

    मैं भी उनको कहने लगा- हाँ जानू, आज तुम्हें मेरी रांड बनाऊंगा. तुम्हें देखकर किसी का भी लंड खड़ा हो जाए. आप विशाल गोल गोल चूचों की मालकिन हो … बड़ी सी गांड की मालकिन हो … आपकी गदरायी माँसल जांघों ने मुझे सबसे ज्यादा पागल बनाया!

    फिर मैंने उनसे कहा- आप मेरे लंड पर बैठ जाओ!
    वो मेरे ऊपर आकर मेरा लंड अपनी चूत में टिकाकर बैठ गयी और कूदने लगी.

    उसी दौरान उन्होंने बड़े पापा को देख लिया. फिर वो उनको दिखा दिखाकर और जोर जोर कूदने लगी।

    फिर मैंने उनको गोदी में उठा लिया और गोदी में उठाकर चोदने लगा.
    वो इस पोज़ से बहुत खुश हुई और कहा- मेरी जान, ये मेरा बेस्ट पोज़ है जो आज तुम्हारे द्वारा पहली बार मुझे मिला।

    इसी तरह हम दोनों घनघोर चुदाई के सागर में डूब गए.
    वो झड़ गयी जिससे मेरा लंड उसके चूत में आसानी से फिसल रहा था पूरा!
    फच फच की आवाज आ रही थी और मेरा लंड उसके चूत में गच गच जा रहा था।

    फिर मैं भी झड़ने वाला था तो मैंने स्पीड और बढ़ा दी.
    तो वो बोली- अमेजिंग जानू … मेरे अंदर ही डालना तुम्हारा सारा माल!

    मैंने सारा माल आंटी की चूत में छोड़ दिया।
    फिर उसी तरह हम दोनों नंगे ही एक दूसरे से चिपककर सो गए।

    थोड़ी देर बाद मैंने उनसे पूछा- बेबी आप इतनी माल चीज हो. तो आपको अंकल अच्छे से नहीं चोदते क्या जो इधर उधर मुंह मारती हो?
    उन्होंने कहा- चोदना तो दूर … छूते ही नहीं! पहले 4 बच्चे पैदा करने तक खूब चोदे. तब जाके 4 बच्चे हुए. जोरदार चुदाई की आदत तो उन्होंने ही मुझे डाली थी. पर अब अचानक चोदना छोड़ दिए तो मेरी शरीर की जरूरत थी तो कैसे करती। बच्चे होने के बाद सरकारी क्वाटर में जगह तो भी नहीं होती चुदाई के लिए … बच्चों के सामने तो नहीं चोद सकते … इसलिये बंद हो गया। सच बताऊं तो इतने दिनों बाद मुझे आज सही चुदाई मिली।

    मैंने उनको उस रात 3 बार चोदा … हम रात भर सोये नहीं।
    सुबह 6 बजे सोये!

    9 बजे हमे बड़े पापा उठाने आये.
    हम दोनों एक दूसरे से लिपटकर नंगे सोये थे।
    उन्होंने हमें उठाया.

    फिर हम दोनों उठे. उनके सामने आँटी ने मुझे लिप किस किया और कहा- इतनी हसीन रात के लिए धन्यवाद जानू! अब तुम मेरे हर रात के राजा हो।

    इसके बाद तो हम दोनों गांव में पाँच दिन और रुके. पांचों दिन हमने फुल चुदाई की.

    फिर रेशमा के पापा का कॉल आया, उन्होंने हमें शहर बुलाया.
    तो हम लोग शहर आ गए।

    इसके बाद से हम दोनों एक दूसरे से जब चाहे तब अपने जिस्म की प्यास बुझाते।
    गर्लफ्रेंड मॉम सेक्स की यह बात किसी को पता नहीं चली सिवाय उसके बड़े पापा के … लेकिन वो खुद किसी को बता नहीं सकते थे।

  • सुहागरात पर ससुर ने चोदा

    साथियो, आज मैं आप लोगों को अपनी सुहागरात पर ससुर के साथ चुदाई की कहानी बताने जा रही हूँ.

    मेरी उम्र 20 साल की है.
    मेरी शादी कुछ दिन पहले ही हुई थी.

    हम लोग एक मेहनत मजदूरी करने वाली जनजाति से हैं.
    हमारे यहां शराब और मांस आदि का सेवन सभी लोग करते हैं.

    मेरी पहली सुहागरात मेरे ससुर के साथ हुई थी क्योंकि हमारे यहां रिवाज़ है कि पहली रात घर के मुखिया के साथ सोना पड़ता है.
    वे जैसा बोलते हैं, वैसे करना पड़ता है.

    मेरी शादी हुई और मैं अपने पति के साथ अपनी ससुराल आ गई.
    मेरे घर में मेरी सास नहीं हैं, वे मर चुकी हैं.

    मेरे ससुर पैसे वाले हैं और मैं गरीब घर की थी इसलिए मैं भी खुशी खुशी शादी करने को राजी हो गई थी.

    वहां पर रात को मुझे मेरे ससुर के कमरे में हल्दी वाला दूध देकर ले जाया गया.

    वह कमरा सुहागरात के कमरे के जैसे सज़ा हुआ था.

    मैं अन्दर गई, दूध को रखा और बेड पर बैठ गई.

    तब मैं फर्स्ट नाईट सेक्स के लिए अपने ससुर जी के आने का इंतज़ार करने लगी.

    कुछ देर बाद मेरे ससुर जी कमरे में आए और उन्होंने अन्दर से दरवाज़ा बन्द कर दिया.

    मेरे ससुर की उम्र 50 साल की रही होगी.
    वे दारू पीकर आए हुए थे.

    अन्दर आते ही उन्होंने सबसे पहले मेरा घूँघट उठाया.

    मैंने कहा- पहले दूध पी लीजिए.
    वे बोले- हां, आज तो मैं तुम्हारा दूध पियूंगा!

    मैं सोचने लगी कि ये क्या बोल रहे हैं!

    कुछ देर बाद उन्होंने मेरी साड़ी का पल्लू नीचे कर दिया.

    मैंने गहरे गले का ब्लाउज पहना था. उसमें से मेरे आधे दूध देखते ही वे मानो पागल हो गए.
    उन्होंने एक झटके से मेरी साड़ी निकाल दी.

    अब मैं उनके सामने ब्लाउज और पेटीकोट में थी.

    वे मेरे होंठों को चूसने लगे, काटने लगे, फिर गर्दन पर चूमने लगे.
    मेरी चूत भी गीली होती जा रही थी.

    कुछ देर बाद उन्होंने मेरा पेटीकोट और ब्लाउज भी फाड़ दिया और उन्हें मेरे जिस्म से अलग कर दिया.

    अब मैं अपने ससुर के सामने ब्लैक ब्रा और पैंटी में थी. वे मेरे गोरे बदन को काली ब्रा पैंटी में देखकर पागल हुए जा रहे थे.

    अब मेरे ससुर मेरे मम्मों को ब्रा के ऊपर से ही दबाने लगे और कुछ देर में उन्होंने मेरी ब्रा को भी खींच कर मम्मों से अलग कर दिया.
    ब्रा हटने से मेरे दूध आज़ाद हो गए थे और चूचियां हवा में फुदकने लगी थीं.

    मेरे ससुर मेरी चूचियों को हाथ से मसलने लगे और उन्हें काटने चूसने लगे.

    मेरी चूत पानी छोड़ कर गीली हुई जा रही थी.

    कुछ देर बाद उन्होंने मेरी चूत पर हाथ फेरा और उसकी फांक में उंगली करने लगे.

    मेरी कामुक जवानी देखकर उनका लंड खड़ा हो गया था.
    अब मैंने भी उनके कपड़े निकाल दिए.

    ससुर जी नंगे हुए तो मैंने देखा कि उनका लंड काफी बड़ा था.
    इतना बड़ा और मोटा लौड़ा देख कर मैं उनसे चुदवाने के लिए मरी जा रही थी.

    इधर ससुर जी अपने मुँह से कभी मेरे होंठों को चूसते तो कभी मेरी चूचियों को पीते.
    साथ ही साथ वे मेरी चूत में उंगली कर रहे थे.

    इस सबसे मैं भी पागल हुई जा रही थी.
    मैं बोलने लगी- आआअहह ससुर जी … और पीजिए मेरे दूध आह!

    मेरे ससुर इस तरह बोलने से और मदमस्त होकर मेरे दूध काटने पीने लगे.

    वे धीरे धीरे मेरी नाभि को चाटने लगे और चूत तक आकर पैंटी को चाटने लगे.

    मेरी पैंटी चूत रस से भीगी पड़ी थी.
    वे पैंटी के ऊपर से चूत का रस काटने लगे और अगले कुछ पल बाद उन्होंने मेरी पैंटी को भी फाड़ कर अलग कर दिया.

    अब मैं उनके सामने बिल्कुल नंगी थी.
    ससुर जी मेरी टांगें फैला कर मेरी चूत चाटने लगे.

    मुझे भी अपनी चूत चटवाने में मजा आ रहा था और मैं कमर उठा कर अपने ससुर के मुँह से अपनी चूत चुसवा रही थी.
    कुछ देर तक चूत चाटने के बाद मैं एकदम पागल हो रही थी.

    मैंने कहा- अब और मत तड़पाओ … चोद डालो ससुर जी!

    फिर उन्होंने अपना लौड़ा मेरे मुँह में दे दिया.
    उनके मोटे लंड से तो में साँस भी नहीं ले पा रही थी.

    लेकिन कुछ ही देर बाद मुझे अपने ससुर का लंड चूसने में मज़ा आने लगा था.
    मैं ससुर का लंड चूस रही थी.

    तभी ससुर ने कमरे में रखी हुई देसी दारू की बोतल से शराब को लौड़े पर टपकाना शुरू कर दिया.

    मैं दारू पीती थी, तो मुझे उनके लौड़े से टपकती दारू पीने में मजा आने लगा.

    बहुत देर तक मैं लंड चूसती रही और दारू का स्वाद लेती रही.

    उसके बाद ससुर जी ने मुझे चुदाई की पोजीशन में लिटाया और मेरी चूत में लंड डालने लगे.

    लंड ने चूत में घुसने का रास्ता खीज लिया और सुपारे ने चूत के मुँह पर अपनी पोजीशन सैट कर ली.
    मेरे ससुर ने एक ज़बरदस्त झटका मारा और उनका आधा लंड मेरी चूत को फाड़ते हुए अन्दर चला गया.

    मैं दर्द से चिल्लाने लगी पर उन्हें कहां सुनाई देने वाला था.
    चूंकि मैं भी कुछ दारू की मस्ती में थी तो उनके हैवी लौड़े को झेल गई.

    मैं अभी कसमसा ही रही थी कि मेरे ससुर ने फिर से धक्का दे मारा.
    इस बार उन्होंने अपना पूरा लंड मेरी चूत में ठांस दिया था.

    मेरी चूत फट गई थी और उसमें से रक्त बहने लगा था.
    कुछ देर रुक कर ससुर जी मेरी चूत में धक्के देने लगे.

    कुछ देर तक तो मुझे उनके लौड़े से चुदवाने में दर्द हुआ.
    फिर मज़ा आने लगा.

    अब मैं भी अपनी कमर उठा उठा कर सपने ससुर का साथ देने लगी.
    वे भी मुझे पूरी ताकत से चोदने लगे.

    पूरे कमरे में पच पच की आवाज़ गूंज रही थी.

    मैं बोलने लगी- आह ससुर जी और तेज चोदिए … आह मजा आ रहा है.
    वे बोलने लगे- साली रंडी, तुझे तो मैं रोज नंगी करके दिन रात चोदूंगा. इसलिए तो तुझे अपने बेटे से शादी करवा के घर लाया हूँ! तेरे ऊपर तो कब से मेरी नजर थी.

    मैं भी मस्ती से अपनी गांड उठा उठा कर अपने ससुर से चुद रही थी.
    ससुर अपनी ठरक में बके जा रहा था- साली, जब तक तू मेरे बच्चे को पैदा नहीं करेगी, तब तक तू रोज इसी बिस्तर पर नंगी होकर दिन रात मेरे लौड़े से चुदेगी.

    उनकी ऐसी बात सुन कर मैं और पागल हुई जा रही थी.
    मैंने भी उनको उत्तेजित करते हुए कहा- हां ससुर जी चोदो अपनी इस रंडी को … मां बना दो अपने बच्चे की!

    उनके तेज तेज लाने वाले धक्कों से मैं अब तक दो बार झड़ चुकी थी और मेरी चूत चुद चुद कर पूरी लाल हो गई थी.

    अब मेरे ससुर जी ने मुझे घोड़ी बनाया और पीछे से मुझे पेलने लगे.
    मुझे दर्द हो रहा था पर मजा भी आ रहा था.

    दूसरी तरफ वे नशे में थे तो कुछ सुनने समझने को तैयार ही नहीं थे.

    कुछ देर बाद उन्होंने मुझे घोड़ी बनाए रखा और दारू पिला कर मेरी गांड भी मारी.
    अब तो मेरी चूत और गांड एकदम लाल हो गई थी.

    ससुर जी बड़े पहलवान किस्म के चोदू थे. वे मुझे धकापेल चोदे ही जा रहे थे.

    वे बोल रहे थे- साली रंडी जब तक तू मेरे बच्चों की मां नहीं बनेगी … तब तक दिन रात तू मेरे बिस्तर पर ऐसी ही नंगी रहेगी और ऐसे ही चुदेगी.

    फिर ससुर जी मेरी चूत में झड़ गए और उसके बाद उन्होंने मेरे मम्मों को देसी दारू से नहला कर उन्हें खूब चूसा व काटा.

    वे मेरे निप्पलों से दारू पीने लगे.
    फिर लंड लगा कर मम्मों को चोदने लगे.

    मेरे बूब्स भी एकदम लाल हो गए थे.
    वे अभी भी मेरे दूध चूसे जा रहे थे.

    कुछ देर बाद उन्होंने मुझे फिर से अपनी कुतिया बनाया और मेरी चूत और गांड मारी.
    आधा घंटा तक चोदने के बाद वह मेरी चूत में ही झड़ गए.

    उसके बाद उन्होंने मेरे पूरे जिस्म पर अपनी दारू की बोतल से दारू डालकर मुझे चूसने लगे और मेरे अंगों को चाटने लगे.

    वे अब तक मेरी चूत में दो बार झड़ चुके थे और अब आराम कर रहे थे.

    कुछ देर बाद वे उठे और ग्लास का दूध पीकर मुझे कमरे के एक एक कोने में ले जाकर मेरी चुदाई करने लगे.
    उन्होंने मुझे सोफा, मेज, बेड हर जगह चोदा और हर बार मुझे बुरी तरह से ठोका.

    मैं दर्द के मारे चल और उठ नहीं पा रही थी.
    रात भर अपने ससुर से चुदवाने के बाद हम दोनों सो गए.

    सुबह जब मैं उठी तो ससुर जी भी उठ गए.
    वे मुझे अपनी गोद में लेकर बाथरूम में ले गए और वहां पर फुव्वारे के नीचे मुझे खड़ी करके मेरी चूत और गांड मारी.

    ससुर जी ने मुझे दीवार से सटा कर अपने लंड के ऊपर बैठा कर खूब पेला.
    मुझे भी घोड़ी बन कर चुदवाने में मजा आ रहा था.
    मैं मीठे मजे से चिल्ला रही थी.

    अब वे मुझे नहला कर कमरे में लाए और बिस्तर पर पटक दिया.
    फिर अपने कपड़े पहन कर ससुर जी बाहर चले गए.

    मेरी इतनी ज्यादा ठुकाई हुई थी कि मैं सही से खड़ी भी नहीं हो पा रही थी.
    मैं बेड पर ही नंगी पड़ी थी.

    कुछ देर बाद ससुर जी वापस कमरे में आए और बोले कि तुम्हारे पति को काम आ गया है, वह वापस अपने काम पर चला गया है.

    मेरी ससुराल में मेरे पति और ससुर ही थे.
    पति तो बाहर चले गए थे और ससुर मेरी ले रहे थे.

    शादी के एक महीने हो गए थे.
    मेरी चूत बुरी तरह फट गई थी.

    ससुर जी मुझे दिन रात ठोकते रहते हैं, वे मुझे पूरे घर में कहीं भी पकड़ कर चोद देते हैं.
    रात को छत पर, सीढ़ी पर, किचन में, सोफा पर, बाथरूम में … पूरे घर में एक भी जगह ऐसी नहीं बची है, जहां मैं अपने ससुर के हैवी लंड न चुदी होऊं.

    दिन रात रंडी की तरह बस मेरी चुदाई होती है.
    मैंने अब कपड़े पहनना ही बंद कर दिए हैं.

    ससुर जी भी घर में नंगे ही रहते हैं.

    जब तक एक दिन में अपने ससुर से चार बार न चुद लूँ, मेरा मन खुद नहीं भरता है.
    एक महीने बाद जब मेरा पति घर आया तो उस दिन ससुर ने कहा कि आज घर में पार्टी होगी.

    मैं समझी कि आज मेरा पति मेरी लेगा, इसलिए ससुर जी ऐसा कह रहे हैं.

    वे आज अंग्रेजी दारू की बोतल लाए और मुर्गा लाए.
    मैंने मुर्गा बनाया और अपने पति व ससुर को खाना परोसने लगी.

    उसी वक्त मेरे ससुर ने मुझे खींच कर अपनी गोदी में बिठा लिया और वे मुझे दारू पिलाने लगे.
    मैं भी बिना हील हुज्जत के उनके लंड पर बैठ कर दारू मुर्गा का मजा लेने लगी.

    कुछ देर बाद हम तीनों नशे में धुत्त हो गए और मेरे ससुर ने मुझे नंगी कर दिया.
    ससुर ने कहा- आज तुझे हम बाप बेटे मिल कर चोदेंगे.

    मैं भी उन दोनों के साथ सेक्स का मजा लेने के लिए तैयार हो गई थी.

    ससुर ने मुझे अपने लौड़े के ऊपर बिठाया और मेरी चूत चोदने लगे.
    उसी वक्त मेरे पति ने मेरी गांड में लंड पेल दिया और वे दोनों मिल कर मेरी सैंडविच चुदाई करने लगे.

    इस तरह से मुझे मेरे ससुर ने रंडी बना दिया था. मुझे भी अब अपने दोनों छेदों में एक साथ लंड लेने में मजा आने लगा था.
    आपको मैं अपनी सेक्स कहानी के अगले भाग में कुछ और भी रोचक सेक्स के बारे में लिखूँगी.

  • दिव्या मामी को सुहागरात की तरह चोदा

    हैल्लो दोस्तों आप सभी आंटी, दीदी, भाभी और लड़कियों के लिए में अभी यहाँ पर नया आया हूँ तो प्लीज आप सभी मेरा थोड़ा ख्याल रखना। अब में आप सभी को थोड़ा बहुत अपने बारे में बताता हूँ, दोस्तों में 33 साल का एक नौजवान लड़का हूँ और अभी तक कुंवारा हूँ मेरा नाम राज है और में आगरा का रहने वाला हूँ, मेरी हाईट 5 फीट 8 इंच है मेरा रंग गोरा है और मेरा लंड 7.5 इंच लंबा है और 3.5 इंच मोटा भी है। दोस्तों में हमेशा से ही नाभि का बहुत दिवाना हूँ मुझे गहरी और लम्बी नाभि बहुत पसंद है, नाभि इतनी बड़ी हो कि उसमे नींबू पूरा आ जाए फिर चाहे वो नाभि किसी लड़की, आंटी, भाभी और दीदी किसी की ही क्यों ना हो मुझे बहुत अच्छी लगती है। मुझे उसे चूसने को, चाटने को, काटने को, देखने को, इतना दिल करता है कि बस में नाभि के पास ही बैठा रहूँ, तो यह था मेरा पूरा परिचय और अब में अपनी कहानी पर आता हूँ यह मेरी चोद्काम डॉट कॉम पर पहली कहानी है जो कि करीब दस साल पहले की है यानी कि 2003 की तब मेरी उम्र 23 साल थी में उस समय अपनी पढ़ाई करने चंडीगढ़ अपने मामा के घर पर गया हुआ था क्योंकि आगरा के कुछ दोस्तों के साथ मेरी उस समय लड़ाई झगड़े हो गये थे इसलिए पापा ने मुझे चंडीगढ़ पढ़ाई करने भेज दिया था।
    दोस्तों में अपने मामा के पास पहली बार गया था और मैंने मामा और मामी को पहली बार देखा था। में 10 जून 2003 को चंडीगढ़ के लिए निकल पड़ा और 11 जून 2003 की सुबह में चंडीगढ़ पहुंच गया। वहाँ पर मामा ने अपने ड्राइवर को गाड़ी से मुझे घर पर लाने के लिए भेज दिया था, ड्राइवर ने मुझे अपने साथ में लिया और घर की तरफ निकल पड़ा में जैसे ही घर पर पहुंचा तो मेरी मामी बाहर आई और मुझसे बोली कि वहीं पर रुक जाओ। तो में वहीं पर रुक गया और वो एक आरती की थाली लेकर आई और उन्होंने मेरी आरती की और बोली कि हाँ अब अंदर आ जाओ। दोस्तों मेरी मामी का नाम दिव्या है और उनकी उम्र 35 साल है उनका रंग गोरा है और बदन बहुत सेक्सी है और उनके फिगर का साईज 36-30-32 था। दोस्तों मेरी मामी का फिगर बिल्कुल वैसा था जैसा में चाहता था। तभी अचानक जैसे ही मामी अंदर की तरफ बड़ी तो उनकी कमर पर लगा चाबी का गुच्छा निकलकर नीचे गिर गया और मामी उस गुच्छे को जैसे ही उठाने के लिए नीचे झुकी तो मुझे उनके बूब्स दिख गये। वाह दोस्तों क्या बूब्स थे एकदम गोरे और बड़े जैसे पका हुआ पपीता हो, लेकिन जब वो चाबी उठाकर उठी तब उनके पेट से साड़ी हट गई और मैंने उनकी नाभि को देख लिया उनकी नाभि करीब दो इंच गहरी और तीन इंच लंबी एकदम गोल थी और उसे देखकर मेरा लंड धीरे धीरे टाईट होने लगा। मुझे ऐसा लग रहा था कि मामी अपनी नाभि रोज़ मामा के लंड से चुदवाती है।

    फिर में नज़र नीचे करके अंदर चला गया, मामी बोली कि तुम बैठ जाओ में तुम्हारे लिए नाश्ता लाती हूँ मैंने उनसे पूछा कि मामा कहाँ है? तो मामी ने मुझे बताया कि मामा किसी काम के सिलसिले में दुबई गए हुए है और एक महीने बाद लोटेंगे। अब मैंने जैसे ही उनके मुहं से यह सब सुना मेरे मुहं में पानी आ गया में सोचने लगा कि में मामी को जरुर पटाउंगा और फिर शाम हुई और रात भी हो गई तो में उस समय अपने कमरे में था तो मामी ने आवाज़ लगाई कि राजा आ जाओ खाना खा लो, में अंदर गया और मैंने देखा कि मामी ने जीन्स और टॉप पहन रखा था वो टॉप एकदम टाईट था जिसमे से बूब्स बाहर आने को तड़प रहे थे और ब्रा की डोरी साफ साफ दिख रही थी और वो जीन्स मामी ने नाभि से करीब पांच इंच नीचे पहनी हुई थी जिससे नाभि साफ साफ दिखे, मुझे लगा कि शायद मामी को पता लग गया है कि में उनकी नाभि को देखना पसंद करता हूँ और जब में उनकी नाभि देख रहा था तो उन्होंने मुझे यह सब करते हुए देख लिया था और फिर हम लोग खाना खाने लगे और खाना खाने के बाद में अपने कमरे में चला गया। फिर रात को करीब 9 बजे मामी के कमरे में से आवाज़ आई कि राजा यहाँ आओ। तो में उनके कमरे के अंदर चला गया और मैंने देखा कि मामी ने उस समय मेक्सी पहन रखी थी और वो भी पूरी जालीदार जिसमे उनकी स्टाइलिश ब्रा और पेंटी साफ साफ नज़र आ रही थी। फिर मामी मुझसे मुस्कुराकर बोली कि दूर से देखते रहोगे क्या आओ राजा यहाँ पर बैठो।

    फिर मैंने पूछा कि जी मामी आपने मुझे क्यों बुलाया? मामी बोली कि मुझे अकेले सोने में बहुत डर लग रहा था तो मैंने सोचा कि तुम भी यहीं पर सो जाओ तो मुझे भी डर कम लगेगा और तुम्हे भी अच्छी नींद आ जाएगी। तो मैंने कहा कि ठीक है में सोफे पर सो जाता हूँ, तभी वो बोली कि अरे नहीं तुम मेरे पास यहीं बेड पर सो जाओ, तो मैंने कहा कि नहीं और फिर वो बोली कि लेकिन क्यों नहीं तुम मेरे पास क्यों नहीं सो सकते? तो मैंने कहा कि जी सो सकता हूँ। तो वो बोली कि फिर तुम अब ज्यादा सोचो मत और में उनके सो गया। तभी मामी मुझसे पूछने लगी कि क्यों सो गये? में बोला कि नहीं, तो मामी बोली कि कुछ अपने बारे में बताओ ना तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है या नहीं? में बोला कि नहीं मामी मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है। तो मामी बोली कि तुमने क्या कभी सेक्स भी नहीं किया है? क्या मामी आप मुझसे यह क्या पूछ रही हो? तो वो बोली कि हाँ मैंने तुमसे पूछा कि तुमने कभी सेक्स किया है कि नहीं? क्या तुम करना चाहोगे? तो मैंने पूछा कि किसके साथ? मामी बोली कि मेरे साथ, में बोला कि नहीं में आपके साथ यह सब कैसे कर सकता हूँ? तो वो बोली कि क्यों नहीं कर सकते? सुबह और अभी बाहर मेरी नाभि और बूब्स को तो तुम बहुत घूरकर देख रहे थे क्या तब तुम्हारे मन में सेक्स की भावना नहीं आ रही थी? दोस्तों मैंने सोचा कि यह एक बहुत अच्छा मौका है हाथ से मत जाने दो। तभी मैंने कहा कि लेकिन मेरी एक शर्त है कि में आपको शादी के जोड़े में सुहागरात की तरह चोदना चाहता हूँ। तो मामी बोली कि बहुत अच्छे, मुझे यह सुनकर बहुत अच्छा लगा, तुम बहुत सेक्सी हो में एक घंटे में तैयार होकर तुम्हे अंदर बुलाती हूँ।

    फिर मामी ने तैयार होकर मुझे आवाज़ लगाई आ जाओ जी में जब अंदर गया तो उन्होंने मेरे पैर छुए और मुझसे बोली कि तुम मेरी माँग भरो तब में तुम्हे सुहागरात मनाने दूँगी। अब में बोला कि ठीक है और मैंने उनकी माँग भर दी और फिर मैंने मामी को बिस्तर पर लेटा दिया मैंने देखा कि मामी ने लहंगा पहन रखा है और वो भी पीछे से पूरा खुला हुआ और पीछे सिर्फ़ दो डोरी से चोली बंधी हुई थी और ब्रा नहीं पहनी थी और चोली में से बहुत हद तक बूब्स बाहर आ रहे थे और जब मैंने नीचे की तरफ देखा तो उनका लहंगा नाभि से 6 इंच नीचे बंधा हुआ था चूत से थोड़ा ही उपर यह सब देखने में बहुत सेक्सी था और उससे भी कहीं ज्यादा सेक्सी लग रही थी उनकी गहरी नाभि जो कि अब उनके लेटे हुए होने की वजह से और भी गहरी हो गई थी। फिर मैंने पूछा कि मामी आपकी नाभि इतनी गहरी कैसे हुई? सबसे पहले तो मामी बोली कि मुझे तुम अब मामी मत बोलो, मुझे सिर्फ दिव्या बोलो और आप नहीं तुम या तू बोलो ठीक है। तो मैंने कहा कि ठीक है और फिर दिव्या बोली कि तुम्हारे मामा मेरी नाभि रोज़ चूसते चाटते और चोदते है तो फिर यह बड़ी क्यों नहीं होगी? दिव्या बोली कि तुम्हे मेरी नाभि क्यों पसंद है? तो मैंने कहा कि क्योंकि तुम्हारी नाभि बहुत बड़ी है और मुझे ठीक ऐसी ही नाभि बहुत पसंद है। फिर वो बोली कि पसंद है तो कुछ करो ना जानू, क्यों अब किस बात की देर है? तो दोस्तों जैसे ही मामी ने मुझे हुक्म दिया और मैंने उनकी नाभि को चाटना शुरू कर दिया में अब उनकी नाभि चाट रहा था तो मामी के मुहं से सेक्सी आवाज़ आना शुरू हो गई इसस्स्सस्स आअहह उूुुुईईईईईईई मर गई थोड़ा जीभ और अंदर करो ना आह्ह्हह्ह्ह्ह मज़ा आ रहा है, नाभि कहाँ से चूसना सीखा तुमने? तो मैंने कहा कि कहीं से नहीं आपको देखकर अपने आप नाभि चूसने का मन करने लगा। तो वो बोली कि क्या मेरी नाभि इतनी सेक्सी है? मैंने कहा कि हाँ मेरी रानी तेरी नाभि बहुत सेक्सी है। तो वो बोली कि तो थोड़ा और चूस ना, चूस चूसकर इसे लाल कर दो मेरे जानू और फिर मैंने नाभि को काटना शुरू किया, हल्के हल्के मामी के मुहं से आवाज़ आ रही थी हाँ और तेज जानू आहह्ह्ह् उहहह और तेज़।

    फिर वो बोली कि ज़रा मेरी नाभि में उंगली घुमाओ ना और फिर जैसे ही मैंने उंगली डाली मामी बोली कि हाँ और वो मेरी ऊँगली को पकड़ कर और अंदर ले गई और उंगली को नाभि में कसकर जकड़ लिया और मामी बोली कि कोई और दूसरे तरीके से नाभि का मज़ा दो ना। फिर मैंने कहा कि ठीक है फिर मैंने उनकी नाभि में एक चोकलेट खड़ी कर दी और फिर उसे खाता गया और जैसे ही में नाभि के पास पहुंचा वैसे ही नाभि को भी मुहं में भरा और काटने लगा, मामी बोली ऊहहह्ह्ह अह्ह्ह्ह कितना मज़ा आ रहा है जानू उूईईईईइ माँ मरी। फिर मैंने मामी को पलट कर उल्टा कर दिया और उनकी पीठ पर चूमने लगा मामी मुझसे बोली कि चूमो ना जानू और फिर मैंने उनकी पीछे से खुली हुई चोली की दोनों डोरी को खोल दिया और अब चोली को बाहर निकाल दिया ऊओफफफफफ्फ़ वाह क्या बूब्स थे मामी के एकदम बड़े और कसे हुए एकदम गोल, में आखें बन्द करके उन पर टूट पड़ा और उनके बूब्स पर और कसकर चूसने लगा। मामी मुझसे हर बार कर रही थी आआह्ह्ह्हहहह और ज़ोर से चूसो ना आईईईईई। दोस्तों फिर में क्या ज़ोर ज़ोर से बूब्स दबा रहा था और जमकर चूस रहा था और मामी सिसकियों के साथ साथ मोनिंग कर रही थी उूउइईईईईईईईईई आआआहह उूउउफफफफफफफ्फ़।
    फिर मैंने मामी का नाड़ा खोला तो मामी शरमा गई। मैंने मामी का लहंगा उतार दिया और मामी को पूरा नंगा कर दिया वो अब मेरे सामने सिर्फ़ पेंटी में थी और वो भी तीन बार गीली हो चुकी थी। फिर जैसे ही मैंने पेंटी उतारी वैसे ही मामी बोली कि नहीं आज चूत नहीं दूँगी आज मेरा मन सिर्फ़ नाभि सेक्स के लिए है और बूब्स दबाओ और पियो दूध निकल दो मेरे बूब्स से नाभि को चोदकर और गहरा कर दो। तो मैंने उनसे कहा कि तुम तो हर तरफ से सेक्सी लगती हो फिर मैंने मामी की नाभि में लंड डाला तो मामी बोली कि मज़ा नहीं आ रहा है और तभी मामी ने मेरा लंड पकड़ा और मेरे लंड पर मुठ मारने लगी और बोल रही थी कि तुम्हारे मामा ने मुझे कभी लंड पर मुठ नहीं मारने दिया और ना ही कभी लंड को मेरे मुहं में डाला। तुम अपना लंड मेरे मुहं में दो ना, में इसे चूसना चाहती हूँ। फिर मैंने कहा कि हाँ लो ना मेरी जान चूसो ज़ोर से चूसो इसे और मामी मेरे लंड को चूस रही थी और मुझसे कह रही थी कि वाह कितना बड़ा है जानू तुम्हारा लंड, तुम्हारे मामा का तो इसका आधा भी नहीं है और ऐसा ही करते करते 20 मिनट तक मामी मेरा लंड चूसती रही और मैंने कहा कि में अब झड़ने वाला हूँ। फिर मामी बोली कि प्लीज मेरे मुहं में ही अपना सारा पानी छोड़ दो मेरे लंड का पानी पीने की बहुत इच्छा थी प्लीज आज उसे तुम पूरा कर दो। फिर मैंने अपना सारा गरम गरम वीर्य उनके मुहं में डाल दिया और वो उसे चूस चूसकर पी गई, लेकिन फिर मेरा लंड सिकुड़कर बहुत छोटा हो गया और में उदास हो गया क्योंकि में अभी तक नाभि को नहीं चोद पाया था। फिर मामी मेरे मन की यह बात समझ गई और वो मेरे लंड पर एक बार फिर से मुठ मारने लगी और लंड को फिर से मुहं में लेकर वो मेरे लंड को खड़ा करने लगी उनके हाथों के स्पर्श से मेरा लंड फिर से लोहे जैसे रोड की तरह खड़ा हो गया और फिर मामी ने कहा कि लो अब इसे जल्दी से डाल दो मेरी गहरी नाभि में और अब मैंने उनकी नाभि में जैसे ही अपना लंड डाला तो मेरा तीन इंच मोटा लंड नाभि में चला गया और मैंने नाभि को चोदना शुरू किया मामी के मुहं से सिसकियों की आवाज़ आ रही थी आह्ह्ह्हह्ह ऊउक्ककच आईईईईईई उईईईईईइ माँ हाँ और तेज़ चोदो मेरी नाभि को। फिर में लगातार नाभि को चोदता रहा और मामी को बहुत मज़ा आ रहा था वो हाँ में और अब रोज़ चुदवाउंगी तुमसे कह रही थी। दोस्तों मुझे लगातार चोदते हुए करीब अब तीस मिनट होने वाले थे और में झड़ने वाला था तो मामी बोली कि सारा वीर्य मेरी नाभि में भर दो। फिर मैंने सारा वीर्य नाभि में भर दिया और फिर मामी ने अपने पूरे पेट की उसी पानी से मालिश की और बोली कि इस पानी से औरत का जिस्म और भी खिल जाता है फिर में लेट गया ।।

  • मामी की सुहागरात की अधूरी प्यास-1

    मेरे मामा की शादी हुई. मैंने मामी के मोटे चूचों को देखा तो मेरा मन मामी की नंगी चूत देखने के लिए मचलने लगा. उस चाहत को मैंने पूरा करने के लिए क्या किया?

    मेरा नाम सुधीर है और मैं उत्तर प्रदेश के पीलीभीत का रहने वाला हूं. मेरे लंड की लंबाई सात इंच है और मेरा लंड इतना मोटा है कि वो किसी भी औरत की चीख निकालने के लिए काफी है.

    औरत की चूत चाहे कितनी भी चौड़ी क्यों न हो लेकिन खड़ा होने के बाद मेरा लंड उसमें फंस जाता है. आप समझ ही गये होंगे कि मेरे लंड की मोटाई कितनी हो सकती है. मैंने एक दिन अपने लंड को नापने की कोशिश की तो पता लगा कि मेरा लंड पूरी उत्तेजना में 3 इंच से भी ज्यादा चौड़ा हो जाता है.

    आज मैं आपको अपने जीवन की एक सच्ची घटना बताने जा रहा हूं जो मेरे ननिहाल में हुई थी. मैं अपनी नानी के घर पर रह रहा था. मेरे मामा की शादी थी. जब मैंने उनकी दुल्हन यानि कि अपनी मामी को देखा तो मेरी हालत खराब हो गई. वो देखने में बहुत ही सेक्सी थी.

    उसका रंग एकदम दूध जैसा सफेद था. उसके स्तन भी काफी बड़े थे. मगर कमर एकदम पतली सी थी. कहने का मतलब है कि देखने में एकदम कयामत लग रही थी. मगर मैं क्या कर सकता था. मैं तो भान्जा था. ये सोच कर मन में आग लगी हुई थी कि मेरे मामा को इतनी मस्त चूत चोदने के लिए मिल रही है.

    मन मसोस रहा था कि वो मेरे मामा के पास चुदने के लिए जा रही है. तभी मेरे मन में ख्याल आया कि क्यों न मामा और मामी की सुहागरात देख लूं. इस बहाने मामी की चूत के दर्शन भी हो जायेंगे. मैंने मन बना लिया कि मामी की सुहागरात देख कर ही रहूंगा. देखूंगा कि मामा मेरी मामी को कैसे चोदते हैं. उनका पहला सेक्स कैसे होगा.

    मैंने प्लान करना शुरू कर दिया. उस दिन सब लोग अपने काम में लगे हुए थे. मैं सबसे नजर बचा कर मामा के कमरे में गया. वहां पर देखने लगा कि कहां से नजारा दिखाई दे सकता है. मैंने पाया कि खिड़की की दरार में से अंदर बिछा हुआ बेड साफ दिख रहा था. यह मेरी किस्मत ही थी कि उनकी सुहागरात के लिए इस तरह की व्यवस्था की गई थी कि खिड़की से ही सारा नजारा देखा जा सकता था.

    जिस रूम में मैं रहता था उसमें कोई नहीं जाता था. उसमें बस कुछ सामान रखा हुआ था. मैं रात होने का इंतजार करने लगा. रात में सब लोगों ने खाना खाया और तब तक 10 बज गये. रात के 10.30 बजे से ही मैं उस रूम में जाकर बैठ गया.

    रात के करीब 11 बजे मामा कमरे में आये. मेरी नई नवेली दुल्हन बनी मामी बेड पर घूंघट निकाल कर बैठी हुई थी. मामा धीरे से कमरे में दाखिल हो गये और उन्होंने दरवाजा बंद कर लिया. मैंने भी खिड़की की दरार पर अपनी नजरें जमा लीं.

    पहले तो वो दोनों आपस में कुछ बातें करने लगे. उसके बाद बातें करते हुए ही मामा ने मेरी मामी का हाथ पकड़ लिया. उन्होंने उनके हाथ को अपने हाथ में लेकर चूम लिया. मामी शरमाने लगी. मामा ने कुर्ता और धोती पहनी हुई थी. मामा ने अपने कुर्ते के बटन की तरफ हाथ बढ़ाते हुए कुर्ते को उतारना शुरू किया.

    उन्होंने कुर्ता उतार दिया. फिर अपने बनियान को भी उतार दिया. मामा ऊपर से नंगे हो गये. उनकी धोती अभी भी बची हुई थी. मामा ने मामी की तरफ देखा तो मामी ने मुंह फेर लिया था. वो दूसरी तरफ मुंह करके बैठ गयी थी.

    मामा ने अपनी धोती को खोलना शुरू किया और उसको अपनी टांगों से अलग कर दिया. नीचे से मामा ने बड़ा सा कच्छा पहना हुआ था. उनका लंड अभी ज्यादा तनाव में नहीं दिखाई दे रहा था मगर हल्का सा तनाव आने के कारण पता लग पा रहा था कि लंड उत्तेजना में आ रहा है.

    उसके बाद मामा मेरी मामी की तरफ बढ़े. बेड पर जाकर मामी के कंधे को सहलाना शुरू किया. मामी अभी भी शरमा रही थी और ऊपर की तरफ नजर नहीं उठा रही थी. मामा ने उनकी साड़ी को हटाना शुरू किया. मामी के लाल रंग के ब्लाउज में भरे हुए उनके मोटे और बड़े स्तन दिखने लगे.

    उनको देखते ही मेरा लंड भी तनाव में आ गया. मैंने देखा कि जैसे ही मामा की नजर मामी के ब्लाउज पर गई तो उनके लंड में भी एकदम से तनाव आ गया था. उनका लंड उनके कच्छे में तन कर टाइट हो गया था. उसके बाद मामा ने अपने लंड को मामी के कंधे पर सहलाना शुरू किया. मामी अभी भी नीचे नजर करके ही देख रही थी.

    अब मामा ने उनकी कमर को सहलाना शुरू किया, फिर उनके स्तनों की तरफ हाथ बढ़ाने लगे तो मामी ने उनके हाथ को रोक दिया. उसके बाद मामी ने उनके हाथ को छोड़ दिया. मामा ने ब्लाउज के ऊपर से ही अपने हाथ मामी के स्तनों पर रख दिये. मामी की बेचैन सी हो उठी.

    मामा ने उनको बेड पर लेटा दिया. उनकी साड़ी की सिलवटें खोल दीं और अब मामी केवल ब्लाउज और पैटीकोट में ही रह गई थी. उसके बाद मामा बेड पर आये और मामी के ऊपर लेट कर उनके होंठों को चूसने लगे. मामी भी पहले तो शरमाती रही लेकिन फिर उन्होंने मामा को अपनी बांहों में भर लिया मामा के होंठों को चूसने लगी.

    वो दोनों काफी देर तक एक दूसरे के होंठों को चूसते हुए एक दूसरे के होंठों का रस पीते रहे. उसके बाद मामा ने उनके होंठों से हट कर अपने होंठों को मामी के ब्लाउज के अंदर के क्लीवेज पर लगा दिया. वो अपने दोनों हाथों से मामी के स्तनों को दबाने लगे और उनका लंड मामी की जांघों के बीच में घुसने की कोशिश करने लगा.

    अब शायद दोनों ही गर्म हो चुके थे. मामा ने फिर मामी को पेट के बल पलटी दी और उसके ब्लाउज को खोलने लगे. अगले ही कुछ पलों में मामी की गुलाबी ब्रा दिखने लगी. उसकी ब्रा में उसके चूचे एकदम से फंसे हुए थे. मामा ने उसकी ब्रा को हड़बड़ी में खोलना शुरू कर दिया. फिर दो पल के अंदर ही मामी के चूचे हवा में झूल रहे थे.

    बाहर से देखते हुए ऐसा लग रहा था कि मामी की छाती पर बड़ी बड़ी फुटबॉल लटकी हुई हैं जिनको देख कर मेरे लंड का बुरा हाल होने लगा था. मैंने वहीं पर खड़े होकर अपने लंड को मसलना शुरू कर दिया था. इधर मामा की हालत मुझसे भी ज्यादा खराब हो रही थी. उसने मामी के चूचों को जोर से दबाना शुरू किया और फिर मामी के मोटे मोटे चूचों को मुंह में भर कर पीने लगे.

    अब मामी के मुंह से आहें निकलने लगीं. वो मामा के सामने बेबस होने लगी. मामा ने जोर से मामी के चूचों को चूसना शुरू कर दिया. वो मामी के चूचों को दोनों हाथों से जैसे निचोड़ते हुए उनका दूध निकालने की कोशिश कर रहे थे. मामी की गांड ऊपर उठने लगी थी. इससे मुझे भी पता चल गया था कि मामी की चूत में खुजली होना शुरू हो गई है.

    मेरी मामी बार मामा के मुंह को अपने चूचों में दबाने लगी थी. इधर मामा ने कुछ देर तक चूचों को चूसा और फिर उसके निप्पलों को जीभ से चूसने लगे. फिर शायद उन्होंने दांत से काट लिया तो मामी की सिसकारी निकल गई. मेरा हाथ मेरे लंड को रगड़ रहा था. मैं भूल गया था कि मैं बेपरवाह होकर उनकी ये रासलीला देख रहा हूं.

    कुछ देर तक मामी के निप्पलों को पीने के बाद मामा ने उसके पैटीकोट को खोल दिया. मामी की काली पैंटी दिखने लगी. मामा ने उसकी पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत को चूम लिया. मामी की गोरी जांघें देख कर मैं भी और ज्यादा उत्तेजित हो रहा था. मेरे मामा मेरी मामी की चूत को पैंटी के ऊपर से ही चाटने में लगे हुए थे.

    फिर मुझे ध्यान आया कि क्यों मामी के नंगे बदन को कैमरे में कैद कर लिया जाये. ऐसा मौका फिर शायद मिले न मिले. मैंने अपनी जेब से फोन निकाला और कैमरा ऑन करके वीडियो बनाना शुरू कर दिया. दूर से ज्यादा साफ तो नहीं दिखाई दे रहा था मगर इतना तो पता चल रहा था कि मामी का नंगा बदन कैसा है.

    मामी के चूचे ऊपर नीचे होते हुए वीडियो में साफ दिख रहे थे. वो इस बात को बता रहे थे कि मामी की चूत पूरी गर्म हो चुकी है. उसके बाद मामा ने उसकी पैंटी को उतार दिया. मामी की चूत एकदम बाल रहित थी. उनकी चूत को देख कर मुझसे भी रहा न गया और मैंने अपने लंड को अपनी पैंट से बाहर निकाल कर उसकी मुठ मारनी शुरू कर दी.

    मेरी हालत बहुत खराब हो रही थी. मन कर रहा था कि मैं भी अभी के अभी कमरे में घुस जाऊं और मामी की चूत को चाट लूं. मगर किस्मत तो मामा की चमक रही थी. उन्होंने मामी की चूत में उंगली की और उनकी चूत को चूसने लगे. मामी अब जोर से सिसकारियां लेने लगी. उनको देख कर ऐसा लग रहा था कि वो पहले भी इस तरह का कुछ कर चुकी हैं.

    मामी भी पूरी गर्म थी और मामा भी गर्मजोशी से उसकी चूत को चूसने में लगे हुए थे. पूरे कमरे में आह्ह … इस्सस… पुच-पुच … मुच-मुच की आवाज हो रही थी. उनकी इन कामुक आवाजों को सुन कर मेरे लंड का हाल और बुरा होने लगा था. मैंने जोर से अपने लंड को रगड़ना शुरू कर दिया था. मगर साथ ही फोन को भी संभाल रहा था. बहुत मजा आ रहा था मुझे.

    उसके बाद मामा से जब रहा न गया तो उन्होंने उनकी चूत से जीभ को हटा लिया और अपना कच्छा निकाल दिया. मामा का लंड एकदम से टनटना रहा था. मामा के लंड का साइज देख कर मैं हैरान रह गया. मेरे मामा शरीर से काफी हट्टे कट्टे थे लेकिन उनका लंड देखा तो मुझे यकीन नहीं हुआ.

    उनका लंड ज्यादा लम्बा नहीं था. देखने में चार इंच या उससे थोड़ा ज्यादा का लग रहा था. मामा के लंड की मोटाई न के बराबर थी. देखने में एक पतली सी डंडी के जैसा लग रहा था. मामा ने मामी की टांगों को चौड़ी किया और उनकी चूत में लंड को लगा कर उसके ऊपर लेट गये.

    दोनों के दोनों नंगे थे और मामा ने मामी की चूत को चोदना शुरू कर दिया. मगर मामी को देख कर लग रहा था कि उनको जैसे पता ही नहीं लग रहा कि मामा ने उनकी चूत में लंड को डाला हुआ है. वो मामी की चूत में लंड डाल कर हिलाते रहे मगर मामी को जैसे कुछ फर्क ही नहीं पड़ रहा था.

    मामी के चेहरे से साफ पता लग रहा था कि उनको मजा नहीं आ रहा है. तीन-चार मिनट तक मामा उनकी चूत में लंड को डाल कर हिलते रहे और फिर अचानक है ढीले पड़ कर मामी के ऊपर गिर गये. फिर कुछ पल तक मामी के ऊपर पड़े रहे और फिर साइड में जाकर लेट गये. पांच मिनट तक मामा ऐसे ही पड़े रहे.

    मामी के चेहरे पर मायूसी सी छा गयी थी. फिर कुछ देर के बाद मामा ने मेरी मामी के गालों को किस करने कोशिश की तो मामी ने मरे मन से उनको किस करने दिया. फिर जब मामी के ऊपर आने की कोशिश करने लगे तो मामी ने उनको एक तरफ धकेल दिया और चादर ओढ़ कर लेट गई.

    दोबारा मामा की हिम्मत नहीं हुई कि वो मामी के करीब आ सकें. मामी की चूत प्यासी की प्यासी रह गई थी. मुझे भी मामी पर तरस आ रहा था. मामा ने दोबारा से मामी को मनाने की कोशिश की लेकिन उन्होंने फिर मामा को फिर अपने बदन को छूने नहीं दिया. फिर मामा उठ कर कमरे के दरवाजे की तरफ आने लगे.

    मैंने अपने लंड को अंदर किया और वहां से एक तरफ छिप गया. बाहर बाथरूम बना हुआ था. मामा बाथरूम में गये और कुछ देर के बाद वापस आ गये. अंदर जाने के बाद मैंने देखा कि मामी ने अपने रात वाले कपड़े पहन लिये थे. वो एक तरफ होकर सो गई और मामा भी अपनी धोती लपेट कर बेड पर लेट गये. उसके बाद मामा ने लाइट बंद कर दी.

    उसके बाद मैं भी वहां से वापस आ गया. अपने रूम में आकर मैंने वीडियो को देखा. मामी के मोटे चूचे वीडियो में हिलते हुए देख कर मैंने तेजी से अपने लंड पर हाथ चलाना शुरू कर दिया. फिर अपने लंड की मुठ मारी. वीर्य निकलने के बाद मुझे संतुष्टि मिली. उसके बाद मैं सोचने लगा कि मामा का लंड शायद मामी की प्यास नहीं बुझा पायेगा. मुझे इस बात का फायदा उठाना चाहिए.

  • पति विदेश गया तो सर्दी की रात में देवर के साथ सैक्स का मजा

    मेरा नाम अनाया है और मैं 25 साल की हूँ।

    यह गरम भाभी की गरम कहानी तब की है, जब मेरी शादी को मात्र 4 महीने ही हुए थे।

    मेरे पति एक विदेशी कम्पनी में काम करते है इसीलिए वे शादी के कुछ दिन बाद ही अपने काम पर चले गए।

    मेरी तो नई-नई शादी हुई थी इसलिए मेरा मन अक्सर सेक्स करने का होता था।लेकिन मैं कुछ कर भी तो नहीं सकती थी।

    कहानी में आगे बढ़ने से पहले मैं आपको अपने परिवार के बारे में बता देती हूँ।

    मेरे परिवार में मेरे और मेरे पति के अलावा, मेरे सास-ससुर और एक प्यारा सा देवर रहता है।उसका नाम अंकित है, और वो सिर्फ़ 19 साल का है।दरअसल मेरे सास-ससुर को दूसरा बच्चा शादी के बहुत लेट हुआ था, इसीलिए मेरे पती और देवर की उम्र में थोड़ा ज्यादा अंतर है।

    चलिए अब कहानी को आगे बढ़ाते है।

    कई दिनों तक बिना सेक्स के रहने के बाद अब मैं अपने आप को कन्ट्रोल नहीं कर पा रही थी।मुझे अब बस एक लंड की तलाश थी।

    मेरे ससुर उम्र में बहुत बड़े थे और शरीफ़ घर से होने के कारण मैं कहीं बाहर यह सब नहीं कर सकती थी।

    अब बचा सिर्फ़ मेरा देवर।लेकिन वह उम्र में छोटा था और मुझे लगता था कि उसे इस बारे में कुछ पता भी नहीं था।क्योंकि मैंने एक-दो बार उस पर लाइन मारने की कोशिश की थी.अगर उसे इस सब के बारे में थोड़ी भी जानकारी होती, तो वह यह मौका कभी नहीं छोड़ता।

    पर अब धीरे-धीरे मेरी सेक्स की इच्छा बढ़ती जा रही थी।

    इसलिए मैंने एक प्लान बनाया जिसके जरिए मैं अपने देवर के साथ मज़े कर सकती थी।

    एक रात जब हम दोनों सब के साथ बैठकर खाना खा रहे थे.तब मैं उससे बोली- क्या तुम आज मेरे साथ एक मूवी देखोगे?

    क्योंकि उसके इक्ज़ाम ख़त्म हो गए थे इसलिए उसने झट से हाँ कर दी।

    मेरा आधा काम तो हो चुका था, बस आधा बाकी था।

    वह दूध पीने के बाद मेरे पास आया और बोला- भाभी, कौन सी मूवी देखेंगे?मैंने कहा- कोई होलीवुड की मूवी देखेंगे।वह बोला- चलो फ़िर मूवी देखते हैं।

    मैं उससे बोली- पहले तुम कपड़े बदल लो क्योंकि मूवी बहुत बड़ी है। इसलिए तुम मूवी देखने के बाद यहीं सो जाना।वह झट से मेरी बात मान गया।

    जब तक वह आया, मैंने भी अपने कपड़े बदल लिए।

    अब मैंने एक हाफ़ स्कर्ट और एक हाफ़ मैक्सी पहनी जिसमें से मेरे बड़ी-बड़ी चुच्चियां दिख रही थी.जबकि उसने एक हाफ़ टीशर्ट और पजामा पहना हुआ था।

    उन दिनों थोड़ी सर्दियां पड़ रही थी इसलिए हम दोनों एक ही कंबल में घुस गए।

    थोड़ी देर बाद मैंने मूवी प्ले कर दी।वो एक रोमैन्टिक मूवी थी।

    हम दोनो ही उस मूवी को बड़े मज़े से देख रहे थे।

    तभी मूवी में एक सैक्स का सीन आया जिसमें एक छोटी उम्र का लड़का अपनी गरम भाभी की चुदाई कर रहा था।मुझे किसी ऐसे ही मौके का इंतज़ार था।

    इस सीन के बाद जब मैंने उसकी तरफ़ देखा तो उसके पजामे में से उसका लंड साफ़ दिख रहा था।

    मैं समझ गई थी कि अब चिंगारी तो भड़क चुकी है, बस विस्फ़ोट होना बाकी है।

    थोड़ी देर बाद जब मूवी ख़त्म हुई तो मैं उससे बोली- तुम चाहो तो आज यहीं सो जाओ, मेरा मन भी लगा रहेगा।वह यह बात भी झट से मान गया।

    वह आख़िर था तो एक किशोरवय ही, उसे क्या पता था कि आज उसे कितना मजा आने वाला है।

    कुछ देर बाद मैं उससे बोली- मुझे बहुत खुजली हो रही है, क्या तुम तेल से मेरी मालिश कर दोगे?वह बोला- ठीक है भाभी।

    मैं झट से तेल ले आई।

    अब वह बोला- कहाँ मालिश करनी है भाभी?मैंने अपनी पीठ की तरफ़ इशारा करते हुए कहा- यहाँ खुजली हो रही है।

    यह सुनते ही वह शर्मा गया.मैं उससे बोली- कोई बात नहीं, अगर तुम्हारा मन नहीं है तो रहने दो।वह बोला- नहीं, ऐसी कोई बात नहीं है, मैं आपके अभी मालिश कर देता हूँ।

    अब उसने तेल लिया और मेरी पीठ की मालिश करने लगा।मालिश करते करते अब शायद उसे भी मजा आ रहा था।

    अब वह धीरे-धीरे मेरे कूल्हों तक हाथ फिराने लगा।

    लेकिन जब उसने देखा कि मुझे नींद आ गई है तो उसकी हिम्मत और बढ़ गई।

    अब वह जोर-जोर से मेरे चूतड़ों को सहलाने लगा।दरअसल मैं भी इस दौरान सोई नहीं थी बल्कि सोने का नाटक कर रही थी।

    जब उसे लगा कि अब मैं गहरी नींद में हूँ तो उसने मेरी मैक्सी की चेन खोली और मेरी ब्रा के ऊपर से ही मेरी चुच्चियों को दबाने लगा।

    मुझे भी अब बहुत मजा आ रहा था इसीलिए मैं उसे बिना कुछ बोले चुपचाप लेटी रही।थोड़ी देर बाद मैंने करवट ली ताकि वह मेरी ब्रा को खोल सके।

    पहले तो उसने थोड़ा इंतजार किया.लेकिन जब उसे यकीन हो गया कि मैं सो ही रही हू तो उसने मेरी ब्रा के हुक खोले और मेरी बड़ी-बड़ी चुच्चियों को ब्रा की कैद से आजाद कर दिया।

    अब मैं भी गर्म होने लगी थी।

    तभी वह नीचे आया और उसने मेरी स्कर्ट को मेरी जांघों तक ऊपर कर दिया।तब वह मेरी जांघों को सहलाने लगा.

    अब मैं भी कन्ट्रोल नहीं कर सकती थी इसलिए अब मैं धीरे-धीरे सिसकारियां लेने लगी।

    अब तो उसे इस बात का यकीन हो गया था कि मुझे भी सैक्स करने का मन है।इसलिए वह मेरी जांघों को छोड़कर ऊपर आया और मेरे लबों पर अपने होंठ रख दिये।

    अब मैं भी उसका भरपूर साथ दे रही थी।

    फ़िर वह एक बार फ़िर मेरी गर्दन से होता हुआ मेरी चुच्चियों तक पहुँचा और मेरे निप्पल को जोर-जोर से चूसने लगा।अब मुझे भी बहुत दर्द हो रहा था।

    फ़िर उसने अपने सारे कपड़े उतारे.जब मैंने उसका लंड देखा तो मैं हैरान हो गई, इतने से लड़के का इतना बड़ा लंड।मेरे मन में तो लड्डू फ़ूट रहे थे.

    इसलिए मैंने झट से उसका लंड मेरे मुँह में ले लिया और उसे जोर-जोर से चूसने लगी।

    थोड़ी देर बाद वह झड़ गया।

    फ़िर उसने मेरी स्कर्ट निकाल दी.अब मैं सिर्फ़ एक पैन्टी में थी।

    वह मेरी पैंटी के ऊपर से ही अपनी गरम भाभी की गरम चूत को सहलाने लगा.मैं तो अब पागल होती जा रही थी।

    मैंने उससे कहा- अब जल्दी मेरी चूत में लंड डाल दो।वह बोला- भाभी, इतनी भी जल्दी क्या है?

    इतना कहकर उसने मेरी पैन्टी उतारी और मेरी बिना बालों की चूत को अपनी जीभ से चाटने लगा।

    थोड़ी देर बाद मैं झड़ गई और वह मेरा सारा पानी पी गया।

    अब तक उसका लंड दोबारा खड़ा हो चुका था।उसने अपने लंड को मेरी चूत पर रखा और एक जोर के धक्के के साथ उसका पूरा लंड मेरी चूत में चला गया।

    अब मुझे बहुत दर्द हो रहा था लेकिन उसने अपने धक्के जारी रखे।

    पाँच मिनट बाद वह बोला- भाभी, मेरा होने वाला है।मैं बोली- मेरे अंदर ही निकाल दो। मैं बाद में दवाई खा लूँगी।

    इतना सुनकर उसने अपने धक्कों की स्पीड बढ़ा दी और थोड़ी देर बाद वह और मैं एक साथ झड़ गए।

    तब मैंने उससे पूछा- मैं तो सोचती थी कि तुम्हें सैक्स के बारे में कुछ नहीं पता?वह बोला- भाभी, मैं पहले भी सैक्स कर चुका हूँ।

    मैं बोली- कब?वह बताने लगा:

    जब आपकी और भैया की सुहागरात थी, उस रात मैं भैया और आपके साथ सोने की ज़िद कर रहा था।तब मम्मी मुझसे बोली- आज उनकी सुहागरात है। आज तुम उनके पास नहीं सो सकते।मैंने मम्मी से पूछा- सुहागरात में ऐसा क्या होता है कि मैं उनके पास नहीं सो सकता?मम्मी कुछ नहीं बोली।मैं बोला- या तो मुझे बताओ, वर्ना मैं उनके पास जा रहा हूँ।

    मेरे ज़िद करने पर मम्मी बोली- चल ठीक है, मैं सब कुछ बताऊंगी पर तुम उनके पास मत जाओ।मैं मान गया।

    और जब पापा सो गए तो मम्मी ने मुझे सब कुछ बता दिया।

    तभी से मैं एक मौके की तलाश में था क्योंकि मम्मी ने मुझे यह बताया था कि शादी के बाद एक बार यह सब करने के बाद यह सब दोबारा करने का मन करता है।और मैं जानता था कि आपने भैया के विदेश जाने के बाद एक बार भी सैक्स नहीं किया। इस लिए मैं अपनी भाभी की प्यासबुझाना चाहता था। इसलिए मैंने यह नाटक किया कि मैं सैक्स के बारे में कुछ नहीं जानता। ताकि आप खुद पहल करो।

    उसकी ये बातें सुनकर मैंने उसे अपने गले से लगा लिया।

    फ़िर तो हम दोनों ने उस रात कई बार सैक्स किया।और अब तो हम जब चाहें तब सैक्स कर लेते हैं.इसलिए मुझे अब मेरे पति की याद भी नहीं आती।

  • लोकडाउन में दिया बुआ ने गांड का मजा

    दोस्तो, मेरा नाम अमित है और मेरी उम्र 24 साल है. मैं जबलपुर में रहता हूं. यह Hindi Sex Stories मेरे पड़ोस में रहने वाली एक बुआ की है जिनका नाम कविता (बदला हुआ) है.

    उनकी शादी हो चुकी है परन्तु अब वो अपने पति के साथ नहीं रहती हैं. वो अब मायके में रहती हैं इसलिए सामाजिक रिश्ते के हिसाब से वो मेरी बुआ लगी.

    उनकी उम्र 40 के करीब है और 3 बच्चे हैं.

    दोस्तो, आपने कभी ध्यान दिया होगा कि जब भी आपके पास कोई काम नहीं होता है तो आपका ध्यान केवल एक चीज की तरफ ही ज्यादा जाता है और वह है सेक्स!

    मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ.

    उस वक्त लॉकडाउन का दौर था. किसी के पास कुछ करने को नहीं था.

    इस दौरान अक्सर शाम को पड़ोसी गली में आ जाते थे और पड़ोस के सब लोग गेम खेला करते थे.

    एक दिन की बात है जब मैं और मेरे दोस्त शाम के समय कैरम खेल रहे थे.

    हम तीन लोग थे तो चौथी खिलाड़ी बुआ आ गई और बोली कि मैं भी तुम लोगों के साथ खेलूंगी.

    तो हम सब खेलने लगे लेकिन बीच खेल में दोस्त को कुछ काम आ गया तो वो दोनों दोस्त अपने अपने घर चले गए.

    फिर मैं और बुआ ही बचे तो मैं खेल बंद करने लगा.

    मगर बुआ बोली- हम दोनों ही खेल लेते हैं.

    मैंने उनसे कहा- आपको कहां अच्छे से खेलना आता है, आप तो थोड़ी देर में ही हार जाओगी मुझसे!

    वो बोली- अच्छा, यह बात है तो शर्त लगा लो.

    मैंने कहा- ठीक है, मगर जो जीतेगा उसको मिलेगा क्या?

    कविता- जो हारेगा उसको जीतने वाली की एक बात माननी पड़ेगी.

    मैं- ठीक है, परन्तु आप सोच लो, अगर मैं जीता तो जो मांगूंगा वो आपको देना पड़ेगा?

    कविता- पहले जीत तो जाओ … फिर देखते हैं.

    फिर हमारा गेम चालू हुआ और हम दोनों अपनी धुन में ही खेलने लगे.

    मैंने एक ऐसा शॉट मारा कि मेरी गोटी उनके गाउन में चली गई.

    दोस्तो, वो ज्यादातर गाउन ही पहना करती थी.

    उसने गोटी को निकालने से मना कर दिया और बोली- अभी नहीं निकाल सकती, दूसरी से खेल लो.

    मगर मेरे मन में इतनी ही बात से हवस जाग गई.

    मैंने सोचा कि ये अच्छा मौका है; मैंने कहा- नहीं बुआ, अगर गेम आगे बढ़ाना है तो सारी गोटी ही चाहिए हैं. नहीं तो ये फिर चीटिंग हो जाएगी.

    मेरे कई बार कहने पर उसने गोटी गाउन से निकाली.

    धीरे धीरे गेम चलता रहा और आखिर में मैं ही जीत गया.

    अब शर्त के मुताबिक मैं उनसे कुछ भी मांग सकता था. मुझे तो बुआ की चुदाई करनी थी लेकिन सीधे सीधे तो कह नहीं सकता था कि बुआ मुझे चूत दे दो!

    मैंने दिमाग लगाया और सोचा कि इनसे कुछ ऐसा काम करवाता हूं जो कि ये कर ही न पाए और फिर मुझे फिर से एक बार उनको दूसरा काम देने का मौका मिले.

    फिर मैंने कहा- बुआ आपको एक बार चौराहे का चक्कर लगाकर आना है.

    वो डर गई और बोली- नहीं, तुम पागल हो क्या? जानते नहीं कि बाहर पुलिस का पहरा है, ऐसे कोई घूम नहीं सकता.

    मैंने कहा- तो फिर आप हार गईं, अब आपको शर्त तो पूरी करनी ही होगी.

    वो बोली- ठीक है, तो कुछ और काम बताओ.

    फिर मैंने कहा- तो फिर आपको रात के 11 बजे अकेले घर में एक भूतिया फिल्म देखनी होगी.

    वो बोली- कहां? तुम्हारे घर?

    मैं बोली- नहीं, आपके घर.

    वो बोली- मगर मेरे घर में तो कोई नहीं है, मेरी मां तो भाई के घर गई है दूसरी कॉलोनी में, बच्चे भी उनके साथ ही हैं.

    मैंने कहा- फिर तो और अच्छी बात है, यही तो चैलेंज है. आपको अकेले घर में भूतिया फिल्म देखनी है और वो भी आधी रात के वक्त.

    वो बोली- नहीं, मैं नहीं देखूंगी.

    तो मैंने फिर जोर देकर कहा- अगर आप में शर्त पूरी करने की हिम्मत नहीं थी तो फिर शर्त लगाई ही क्यों? मैं अपने दोस्तों को बता दूंगा कि आपको आगे से हमारे साथ न खेलने दें. या तो आप शर्त पूरी करो या फिर हमारे साथ मत खेलना.

    ये सुनकर वो भी थोड़े जोश में आ गई और बोली- ठीक है, मगर मैं अकेली नहीं देखूंगी. तुम भी रहना घर में.

    मैं मन ही मन खुश हो गया क्योंकि मैं तो यही चाहता था.

    मैंने कहा- ठीक है, मैं दूसरे रूम में रहूंगा. आप अपने रूम में अकेली देखना.

    इस तरह रात का प्रोग्राम तय हो गया.

    अब मैंने जानबूझकर उनको ऐसी मूवी देखने को कहा जिसमें कई सारे नंगे सेक्स सीन थे.

    रात को मैं उनके घर पहुंच गया.

    खाना मैं खा ही चुका था.

    बुआ भी सारा काम निपटाकर मेरा इंतजार कर रही थी.

    मैंने मूवी चला दी और सामने हॉल में जाकर अपने फोन में टाइमपास करने लगा.

    घर की लाइटें मैंने बंद करवा दीं और बुआ को अंधेरे रूम में मूवी देखने को कहा.

    वो मूवी देखने लगी और कुछ देर बाद ही वो डरने लगी.

    वो बोली- अमित, ये गलत बात है. मैं ऐसे अकेली नहीं देख सकती.

    मैंने कहा- यही तो शर्त है.

    बुआ ने कहा- मगर तुम कम से कम रूम में तो आ जाओ. यहां मुझे बहुत डर लग रहा है, हार्ट अटैक आ जाएगा.

    मैंने कहा- ठीक है.

    फिर मैं मन ही मन खुश होता हुआ बुआ के पास रूम में गया और बेड पर उनके साथ जाकर लेट गया और मूवी देखने लगा.

    मूवी में बीच बीच में सेक्स सीन आ रहे थे.

    मेरा लंड तो पहले से ही तना हुआ था.

    जब भी कोई सेक्स सीन आता था तो मैं अपने लंड को सहला देता था ताकि बुआ का ध्यान मेरे लंड पर जा सके.

    मैंने देखा भी कि जब जब मैं अपने लंड को सहला रहा था तो बुआ मेरे लंड की ओर देखती थी.

    मैं समझ गया कि इतने दिनों की प्यास बुआ की चूत को भी गीली कर रही है.

    अब वो डर के मारे मेरे और करीब आ गयी.

    मेरे लंड में और ज्यादा तनाव आ गया और लोवर में साफ साफ लंड के झटके लगते हुए दिखने लगे.

    जब एक गर्म सेक्स सीन आया तो मुझसे रहा न गया और मैंने बुआ की जांघ पर हाथ रख दिया और सहलाने लगा.

    वो सीधा टीवी में देखती रही और कोई प्रतिक्रिया नहीं दी.

    इससे मेरी हिम्मत बढ़ी और मैंने उनका हाथ पकड़ कर अपने उछल रहे लंड पर रखवा दिया.

    बुआ ने लंड पकड़ लिया और मेरी तरफ देखने लगी.

    बस इतना होना था कि हम दोनों एक दूसरे के होंठों पर टूट पड़े.

    मैंने बुआ को नीचे गिरा लिया और उसकी चूचियों को दबात हुए उसके होंठों को चूसने लगा.

    वो भी मेरे सिर को सहलाते हुए मेरी जीभ को अपने मुंह में खींचने लगी.

    हम दोनों की लार एक दूसरे के मुंह में जा रही थी.

    कम से कम 5 मिनट तक हम दोनों एक दूसरे को किस ही करते रहे.

    फिर अलग हुए तो मैं गाऊन के उपर से ही उनके दूध दबाने लगा जिससे कविता को दर्द होने लगा.

    मेरे हाथों की ताकत इतनी ज्यादा थी कि मुझे पता ही नहीं चला कि कितना जोर डाल रहा हूं.

    मैं पूरे जोश में था और बुआ की चुदाई के लिए तड़प रहा था.

    बहुत दिनों के बाद आज मुझे चूत मिलने वाली थी.

    फिर मैंने उसके गाऊन को उतार दिया.

    उसने नीचे से रेड कलर की ब्रा और पैंटी पहनी हुई थी.

    मैं ब्रा के ऊपर से ही दूधों को चूसने चाटने लगा.

    धीरे धीरे उसके बदन पर होते हुए मेरा एक हाथ उसकी पैंटी में जाने लगा.

    जैसे ही मेरा हाथ उसकी चूत पर पहुंचा तो उसने अपनी टांगें चौड़ी करके अपनी चूत को खोल दिया ताकि मैं अच्छे से उसकी चूत की मालिश कर सकूं.

    मैं बुआ की चूत को रगड़ने लगा और हथेली से उसकी चूत की फांकों को सहलाने लगा.

    वो अपनी चूत को उठाकर मेरे हाथ की तरफ दबाने लगी.

    लग रहा था जैसे कि उसकी चूत में बरसों की आग लगी हो.

    मेरी उंगली उसकी चूत को बार बार छेड़ रही थी.

    हल्की सी उंगली मैं उसकी चूत में अंदर भी डाल रहा था.

    जब मेरी उंगली उसकी चूत में थोड़ी अंदर जाती तो वह अपनी जांघों को भींच लेती थी.

    इससे पता चल रहा था कि वो लंड लेने के लिए कितनी बेताब हो चुकी है.

    मगर वो मुंह से कुछ नहीं बोल रही थी.

    बुआ ने चूत को क्लीन शेव किया हुआ था.

    चूत एकदम से चिकनी महसूस हो रही थी.

    उसकी गर्म गर्म चूत में जब उंगली अंदर जा रही थी तो मेरे लंड में जोर जोर से झटके लग रहे थे.

    धीरे धीरे अब उसकी चूत में मुझे गीलापन महसूस होने लगा था.

    मुझे चूत सहलाते और उंगली करते हुए दो-तीन मिनट हो चुके थे.

    वो भी अब तड़प चुकी थी.

    मैं अब चोदने के लिए और इंतजार नहीं कर सकता था.

    उधर बुआ भी लंड के लिए और इंतजार नहीं कर सकती थी.

    मैंने जल्दी से अपने कपड़े उतारे और बुआ की ब्रा-पैंटी को उतार कर उसको भी नंगी कर लिया.

    एक बार चोदने से पहले मैं बुआ की चूत की खुशबू और उसके रस का स्वाद लेना चाहता था.

    जल्दी से मैंने उसको बेड पर पटका और उसकी टांगों को अपने कंधे पर लेकर उसकी चूत में मुंह दे दिया.

    मैं बुआ की नमकीन-मीठे रस से भरी चूत को चूसने लगा.

    उसकी चूत में जीभ दे देकर उसको अंदर तक खोदने लगा.

    उसकी हालत खराब होने लगी; वो मेरी पीठ पर नाखून गड़ाने लगी.

    मेरी पीठ पर खरोंचें आने लगीं जिससे मुझे जलन होने लगी.

    मुझे थोड़ा गुस्सा आने लगा और मैंने उसके मुंह में लंड देने की सोची.

    मैंने लंड उसके मुंह के सामने कर दिया और चूसने को कहा.

    मगर उसने लंड को मुंह में लेने से मना कर दिया.

    मैंने कई बार उसको कहा लेकिन वो नहीं मानी.

    मैं फिर से उसकी चूत में जीभ देकर चाटने लगा.

    वो मेरे बालों को नोंचने लगी.

    मैं ज्यादा देर उसकी चुदास के सामने टिक नहीं सकता था.

    मैंने पांच मिनट तक किसी तरह उसकी चूत में जीभ देकर उसकी चूत का स्वाद लिया और खूब जोर से उसके चूचे भी दबाए.

    अब चुदने के लिए गुहार लगाने लगी- आह्ह … हरामी … बस कर … जान निकालेगा क्या … अब चोद भी दे … पागल कर दिया है तूने मुझे!

    मैंने मौका देखा और बोला- अगर लंड चूसने का मजा दोगी तो चोदूंगा… नहीं तो उंगली से चूत का पानी निकाल दूंगा.

    वो बोली- बड़ा मादरचोद है तू, ला … चूस देती हूं.

    मैं उठा और लंड उसके होंठों पर फिराते हुए कहा- चूस दे कविता डार्लिंग!

    उसने मुंह खोला और मेरे लंड को अपने गर्म गर्म मुंह में लिया- आह्ह …. मेरे मुंह से तो आनंद के सीत्कार फूट पड़े.

    इतनी देर से तना हुआ लंड दर्द कर रहा था.

    अब कविता के मुंह में जाने के बाद उसने ऐसा मजा दिया कि मैं तो पागल सा होने लगा.

    मैं बता नहीं सकता कि मेरे तड़पते लंड को कितना सुकून मिल रहा था.

    लंड चुसवाने की इच्छा पूरी होने के बाद अब उसको चोदने की बारी थी.

    मैंने उसकी गांड के नीचे तकिया लगाया और अपना लंड उसकी गीली चूत पर सेट करके उसके ऊपर लेटता चला गया.

    मेरा लंड बुआ की गीली चूत में प्रवेश करके अपना रास्ता बनाता चला गया.

    बीच में एक बार लंड अटका तो मैंने धक्का देकर उसको अंदर सरका दिया.

    बुआ ने मेरी पीठ को जकड़ लिया और मेरी नंगी गांड पर अपनी टांगें लपेट लीं.

    हम दोनों के होंठ मिल गए और मैं बुआ को चोदने लगा.

    वो थोड़ी देर तो कराहती रही और फिर मस्ती में आकर चुदने लगी.

    ऐसा मन कर रहा था कि चोदते हुए उसके जिस्म को काटकर खा लूं.

    मैं कभी उसके होंठों को खा रहा था तो कभी उसकी मोटी मोटी चूचियों को पी रहा था.

    उसकी चूचियों को चूस चूसकर मैंने लाल कर दिया था.

    15 मिनट की चुदाई के बाद मेरा माल निकलने को हो गया.

    मैंने बिना बताए उसकी चूत में ही माल छोड़ दिया.

    फिर हांफते हुए उसके ऊपर लेट गया.

    जब हम दोनों शांत हुए तो मैंने पूछा- तुम्हारा पानी नहीं निकला क्या?

    वो बोली- ऐसे जानवरों की तरह चोदते हो कि दो बार झड़ गई मैं!

    फिर मैंने उसकी चूत को रगड़ते हुए कहा- बहुत गर्मी है अभी इसमें.

    वो बोली- पांच साल से नहीं चुदी थी. आज जाकर प्यास थोड़ी शांत हुई है.

    अब हम दोनों फिर से चूमा चाटी में लग गए.

    कुछ देर बाद मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया.

    उसकी भारी गांड देखकर मेरा मन उसकी गांड मारने के लिए करने लगा.

    मैं बोला- कविता डार्लिंग … गांड दे दो ना प्लीज?

    वो बोली- नहीं, मैंने गांड न तो दी और न ही दूंगी.

    मैंने कहा- मैंने तुम्हारी बरसों की प्यास बुझाई, तुम इतना नहीं कर सकती?

    वो काफी देर तक ना-नुकुर करती रही. फिर आखिरकार वो मान गयी.

    मैंने उसकी गांड के छेद में उंगली से तेल लगाया और लंड के टोपे को भी तेल में तर कर लिया.

    फिर उसकी गांड के छेद पर लंड रखा और पीछे से उसकी गांड में देने लगा.

    उसको दर्द होने लगा तो वो आगे भागने लगी लेकिन मैंने उसके हाथ पकड़ लिए.

    मैं बोला- बस एक बार होगा दर्द फिर मजा ही मजा है.

    वो किसी तरह डटी रही और मैंने लंड को उसकी गांड में घुसा दिया.

    फिर मैं दो मिनट लंड डाले उस पर लेटा रहा और फिर उसकी गांड चुदाई शुरू की.

    थोड़ी देर में उसे भी गांड चुदवाने में मजा आने लगा और अबकी बार मैं उसकी गांड में खाली हुआ.

    इस तरह से हमने उस रात खूब मजा किया.

    उसके बाद से बुआ और मेरा चक्कर चला आ रहा है.

    जब भी वो घर में अकेली होती है तो मैं उसको चोदने पहुंच जाता हूं या फिर वो खुद ही मुझे बुला लेती है.

  • मामी की चूत और कुंवारी गांड मिली 

    यह बात 2010 की है.

    उससे पहले मैंने कभी किसी लड़की या औरत के साथ चुदाई नहीं की थी और न ही कभी मुठ मारी थी.

    उस वक्त तक मुझे सेक्स के बारे में ज्यादा कुछ मालूम नहीं था.

    यह Desi Sex Kahani उन दिनों की है, जब मेरे मामा की नई नई शादी हुई थी.

    उस समय मेरी 19 साल थी और मामी की उम्र 22 साल की थी.

    वे दिखने में बेहद ही खूबसूरत थीं.

    उनका रंग एकदम दूध सा गोरा था और शरीर भरा हुआ था.

    शादी के दो महीने बाद मामा काम के सिलसिले में शहर चले गए थे.

    इसलिए उस समय घर में नाना, नानी और मामी ही थीं.

    एक दिन मैं अपने चाचा की शादी का कार्ड देने मामा के घर गया हुआ था और शाम होने की वजह से मैं वहीं रुक गया.

    मामा की शादी के बाद मैं पहली बार मामी से मिला था.

    कुछ ही घंटों में मामी से मेरी अच्छी जान पहचान हो गई.

    हम दोनों रात होने से पहले एक दूसरे से काफी हंसी मजाक करते रहे.

    मेरे मामा का घर बहुत बड़ा था लेकिन सिर्फ आगे का हिस्सा ही पूरी तरह बना हुआ था.

    जबकि पीछे के हिस्सा चारों तरफ से 7 फुट की बाउंड्री बना कर यूं ही छोड़ दिया गया था.

    रात को खाना खाने के बाद, नाना और नानी घर के बाहर सोने चले गए.

    गर्मियों में गांव के लोग ज्यादातर घर से बाहर ही सोते हैं.

    काफी गर्मी होने के कारण मामी ने घर के पीछे बाउंड्री वाले ओपन ग्राउंड में ही मेरा और अपना बिस्तर अलग अलग चारपाई पर लगा दिया.

    बिस्तर लगाने के बाद मैं मामी के साथ छेड़खानी करने लगा.

    मामी ने भी मजाक मजाक में मुझे बिस्तर पर पटक कर मेरे ऊपर चढ़ गईं.

    पहली बार किसी औरत कर स्पर्श पाकर मेरा लंड खड़ा हो गया और मुझे बहुत मजा आने लगा.

    कुछ देर तक हम दोनों पटका पटकी करते रहे.

    फिर जब मामी को अहसास हुआ कि मेरा लंड खड़ा हो गया है तो वे मेरे गाल पर किस करके हंसती हुई मुझे छोड़ कर अपने बिस्तर पर चली गईं.

    उनके जाने के बाद मैं अपने हाथ से ही अपने लंड को दबा कर शान्त करने लगा.

    शायद मामी की भी चूत में आग लग चुकी थी.

    लेकिन मेरी तरफ से कोई प्रक्रिया न पाकर मामी खुद ही बोलीं- अक्की … तुम्हारे अन्दर दम नहीं है, अगर दम होता तो तुम मेरे बिस्तर पर आकर अपना किस वापिस लेकर चले जाते.

    इतना सुनते ही मैं झट से मामी के बिस्तर पर जाकर उनके बगल में सीधा होकर लेट गया.

    लेकिन उन्हें छूने की हिम्मत अब भी नहीं हो रही थी.

    उस वक्त मामी आसमानी रंग की साड़ी पहनी हुई थीं और उनके जिस्म की खुशबू मुझे रह रह कर और कामुक कर रही थी.

    मामी- बस इतनी ही हिम्मत है?

    मैं- पहले आप मेरा किस वापिस कर दीजिए, फिर आपको अपनी हिम्मत दिखाता हूं.

    मामी समझ चुकी थीं कि मैं डर रहा हूं.

    फिर मामी ने धीरे से अपना पेटीकोट ऊपर करके मेरा हाथ अपनी नंगी चूत पर रख दिया और बोलीं- बस किस ही चाहिए?

    मैं पहली बार किसी चूत को छू रहा था.

    वाह … क्या चूत थी मामी की … एकदम मख़मली और बहुत ही बड़ी शायद कामसूत्र में कही हुई ‘हथिनी योनि’ जैसी!

    उनकी चूत पर एक भी बाल नहीं था.

    बिना कुछ बोले मैं मामी के अन्दर चल रही कामभावना को समझ चुका था.

    आज मेरे लंड को पहली चूत मिलने वाली थी इसलिए मैं कुछ नहीं बोला, बस धीरे धीरे उनकी चूत को अपने हाथ से सहलाने लगा.

    मामी को सांसें तेज होने लगीं.

    वे मेरे हाथ पर अपना हाथ रख कर अपनी चूत सहलवाती हुई सिसकारियां लेने लगीं- आह्ह्ह … उम्मम्म … उह्ह!

    दो मिनट तक चूत सहलाने के बाद मुझे अहसास हुआ कि उनकी चूत से चिपचिपा पानी जैसा कुछ निकाल रहा है.

    वह पदार्थ बिलकुल गर्म घी की तरह था.

    अब मेरा लंड उनकी चूत मे जाने के लिए बेचैन हो गया था.

    मैं झट से मामी के ऊपर चढ़ कर चुदाई की पोजीशन में आ गया और अपना लंड उनकी चूत पर सैट करने लगा.

    मामी भी मेरा लंड अपने हाथ में पकड़ती हुई बोलीं- मुझे पता है कि तुम पहली बार कर रहे हो और तुम्हें कुछ पता नहीं है, लेकिन मैं जैसा बोल रही हूं बस वैसा करो और वह भी बिना कुछ सवाल किए, तभी हम दोनों अच्छे से मजा ले पाएंगे!

    मैंने उनकी तरफ देखते हुए ‘हां’ में अपना सर हिला दिया.

    मामी ने धीरे से मेरे कान में कहा- पहले नीचे सरक कर मेरी चूत चाटो.

    मैं- छी: … मामी यह मुझे नहीं हो पाएगा.

    मामी गुस्से में बोली- ठीक है. तब तुम अपनी जगह जाकर सो जाओ, कुछ करने की जरूरत नहीं है.

    मैं पहली बार चूत चोदने के लिए काफी उत्सुक था इसलिए मैं उन्हें गुस्से में देख कर रिक्वेस्ट करते हुए बोला- प्लीज़ मामी. मैंने आज से पहले ऐसा कुछ नहीं किया है और मुझे आता भी नहीं है.

    मामी मेरे सर का पकड़ कर मुझे किस करती हुई आगे को हुईं और उन्होंने अपनी पूरी जीभ मेरे मुँह के अन्दर डाल दी.

    मैंने भी मामी के होंठों पर अपने होंठ रख दिए और उनके होंठों को ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा.

    मामी जी भी मेरा साथ देने लग गई थीं.

    धीरे धीरे मेरा हाथ मामी जी के स्तनों पर जा पहुंचा, मैं ब्लाउज के ऊपर से ही स्तनों को सहलाने लगा.

    मामी भी मेरी पीठ को अपने हाथों से सहला रही थीं.

    मैंने मामी जी की होंठ चुसाई के बाद उनकी गर्दन पर चूमना चालू कर दिया.

    मामी जी गर्म हो गई थीं, वे मेरा पूरा साथ दे रहीं थीं.

    उफ्फ … उनके होंठों का स्वाद मुझे पागल कर रहा था.

    हम दोनों एक दूसरे की जीभ और होंठों को बेतहाशा चूसने लगे थे.

    कभी कभी तो ऐसा लगता कि मामी मुझे पूरा खा जाना चाहती हैं.

    कुछ देर बाद मामी मुझे अलग करती हुई बोलीं- कैसा लगा?

    मैं- अहह मामी … मजा मजा आ गया.

    फिर मामी मेरे सर पकड़ कर नीचे करती हुई बोलीं- जैसे कुत्ते पानी पीते हैं, बस वैसे अपनी जीभ से मेरी चूत चाटो. उसके बाद तुम्हें और भी मजा आएगा.

    मैं समझ गया था कि बिना चूत चाटे वे अपनी चूत नहीं चोदने देंगी.

    इसलिए बिना झिझके मैं उनकी दोनों टांगों के बीच आ गया.

    चांदनी रात में मामी की नंगी जवानी क्या मस्त लग रही थी.

    मामी जी की चूत रात में एकदम चमाचमा उठी थी.

    उनकी चिकनी चूत कामरस से भीगी हुई थी.

    इस तरह चूत के दीदार करने के साथ मैंने अपनी जीभ उनकी चूत में घुसा दी.

    मामी जी एकदम से तिलमिला उठीं.

    फिर मैं धीरे धीरे उनकी चूत को जीभ से सहलाने लगा.

    मैं उनकी चूत की दोनों पंखुड़ियों के बीच की दरार में अपनी जीभ नीचे से ऊपर करके चूत चाटने लगा.

    मामी की सांसें तेज होने लगीं- आआह … उईई … ओह्ह … अई!

    वे मादक सिसकारियां भरने लगीं.

    अचानक से वे मुझे अपने ऊपर खींच कर मेरी चड्डी को निकल कर फेंकती हुई बोलीं- आह्ह्ह … मजा आ गया … अब तुम जल्दी से मेरी चूत में अपना लंड डालकर मुझे चोद दो.

    मेरा लंड कब से इस पल का इंतजार कर रहा था.

    मैं जल्दी से अपने हाथ में लंड को पकड़ कर उनकी चूत पर इधर उधर फिराने लगा.

    लेकिन मुझे उनकी चूत का छेद नहीं मिल रहा था.

    मामी थोड़ी मुस्कुराती हुई मेरे हाथ से लंड अपनी हाथ में लेती हुई बोलीं- मेरे राजा … तुम तो एक छेद भी नहीं ढूंढ पा रहे हो … मेरी चुदाई कैसे करोगे?

    फिर वे हंसती हुई अपनी चूत की छेद पर मेरे लंड सैट करती हुई बोलीं- अब धीरे धीरे अन्दर धकेलो.

    उनकी बात सुन कर मुझे बहुत बुरा लगा और उन पर गुस्सा आने लगा.

    मैंने गुस्से में अपनी पूरी ताकत के साथ एक ही झटके में अपना पूरा लंड उनकी चूत में पेल दिया.

    उस वक्त मेरा लंड सिर्फ पांच इंच का ही था.

    मामी की चुदाई शायद काफी दिनों से हुई नहीं थी और मेरे एक ही झटके में पूरा लंड अन्दर जाने से वह तिलमिला उठीं- अह्ह्ह … बहनचोद … उह्ह्ह … मर गई मादरचोद रुक जा भोसड़ी के!

    वे मुझे गन्दी गन्दी गालियां देने लगीं.

    मैं उनके दर्द के परवाह किए बगैर ताबड़तोड़ चुदाई करने लगा.

    मामी को मैं इतनी तेजी से चोदने लगा कि पट … पट … अह्ह हम्म्म उह्ह … आउच … की आवाजें गूंजने लगीं.

    उनकी जोर जोर से चीख निकलने लगी- आह आआआ … हा … उम्म्ह … अहह मर गई प्लीज़ … आराम से करो, बहुत दर्द हो रहा है.

    लेकिन मैंने अपना काम जारी रखा.

    कुछ धक्के मारने के बाद अब उनका दर्द भी कम हो गया था, वे भी अपनी गांड उठा उठा कर चुदाई करवाने लगीं.

    उनको भी मजा आने लगा और वे अब जोर जोर से सिसकारियां भर रही थीं- ऊफ्फ … ऊऊ श्श्श्श श्श्श्ह्स … म्म्म्ह म्म्म्म्म … चोदो और चोदो मुझे अक्की … मेरी चूत की प्यास बुझा दो … फाड़ डालो मेरी चूत!

    करीब 5 मिनट की चुदाई के बाद मेरा शरीर अकड़ने लगा.

    मैंने एक आह्ह्ह … के साथ अपना पहला गाढ़ा वीर्य उनकी चूत में छोड़ दिया और उनके बगल में लेट गया.

    मामी उठ कर बैठती हुई बोलीं- मुझे पता था कि तुम जल्दी झड़ जाओगे.

    मैं शर्म के वजह से कुछ नहीं बोला.

    मामी अपनी साड़ी को निकालती हुई मुझे देखने लगीं और साड़ी के साथ ही उन्होंने अपने ब्लाउज को भी निकल दिया.

    अब वह सिर्फ पेटीकोट और ब्रा में थीं.

    फिर उन्होंने अपने पेटीकोट को ऊपर करके अपनी एक टांग मेरे मुरझाए हुए लंड पर रख दी और अपने हाथ से पकड़ कर मेरे लंड को सहलाती हुई अपना आधा शरीर मेरे ऊपर रख कर लेट गईं.

    मैंने भी अपना एक हाथ उनकी गांड पर रख दिया और एक हाथ से उनकी चूचियों को दबाने लगा.

    एक बार फिर उनके मुँह से सिसकारियां निकलने लगीं- उम्म्ह … अहह … हय … याह … आआ आह्हह!

    नीचे उनके पैर मेरे पैरों पर रेंग रहे थे.

    मैं फिर से ऊपर आकर उनके निर्वस्त्र स्तनों पर जीभ फेरने लगा.

    मामी के मुँह से तो बस मादक सिसकारियां निकली जा रही थीं- अह्ह्ह ह्ह्ह्ह … मम्म … और जोर से!

    कुछ देर बाद मेरा लंड एक बार और खड़ा हो गया.

    अब मामी जी ने कहा- अब तुम नीचे लेट जाओ, मैं तुम्हारे लंड पर बैठ कर अपनी चूत चुदवाऊंगी.

    मैं बिस्तर पर सीधा होकर लेट गया.

    पहले तो वे मेरे लौड़े को अपने होंठों पर रख कर मुँह के अन्दर लेने लगीं और उसे कुल्फी की तरफ चूसने लगीं.

    पहली बार मेरा लंड किसी युवती के मुँह में था, जिससे मेरे मुँह से मादक आवाजें निकलने लगी थीं- आह … हहहह … इस्स … चूस साली रण्डी बड़ा मजा आ रहा है!

    मैं भी उत्तेजना से उनके मुँह में अपना लंड घपाघप पेले जा रहा था.

    उनके मुँह में इस तरह से लंड पेलने से गों … गों … की आवाज आ रही थी जिससे मैं और उत्तेजित होकर उन्हें और जोर से पेल रहा था.

    उनकी आंखों से आंसू निकल रहे थे.

    करीब पांच मिनट बाद उन्होंने मेरा लंड अपने मुँह से निकाला.

    मेरा लंड उनकी लार से भीग चुका था.

    उसके बाद जल्दी से मेरे लंड को अपनी चूत पर सैट करके वे धीरे धीरे बैठने लगीं.

    मामी के मुँह से ‘आआह … उऊऊ उफ फफ्फ़ … सईई … ’ की आवाजें निकल रही थीं.

    मेरा लंड अब पूरी तरह से उनकी चूत में घुस गया था.

    मामी जी जोर जोर से सिसकारियां भर रही थीं.

    अब मैंने नीचे से ही धीरे धीरे धक्के लगाना शुरू कर दिए.

    मामी को मज़ा आने लगा.

    वे मुझसे कहने लगीं- उम्म्ह … अहह … हय … याह … ओर जोर से … जोर जोर से चोदो मुझे अक्की!

    मैंने धक्कों की स्पीड बढ़ा दी, मामी भी अपनी कमर को अपने चूतड़ों को उछाल उछाल कर चुद रही थीं.

    मामी पूरे जोश में बोल रही थीं- आह आह्ह उई … उम्म्ह … अहह … हय … याह … उफ ओ आह्ह … अक्की और तेज पेलो … अह्ह्ह!

    इस तरह करीब पांच मिनट के बाद चुदाई करते हुए अचानक उनकी सांसें भी जोर जोर से चलने लगीं.

    इसी बीच मामी ने मुझे कस कर पकड़ लिया और चिल्लाईं- आआह हुउऊ सस्सीईई …

    बस यही सब करते करते उन्होंने अपना गर्म गर्म पानी छोड़ दिया और बगल में लेट गईं.

    हम दोनों पसीने से भीग चुके थे लेकिन मेरा लंड अभी भी खड़ा था.

    मैंने गुस्से में मामी के बालों को पकड़ते हुए गाल पर खींच कर तमाचा मार दिया और गाली देने लगा- साली रण्डी, जब पहली बार मैं झड़ गया था, तब बहुत नाटक कर रही थी. अब तेरी चूत का पानी निकल गया तो आराम करने लगी. इतनी ही गर्मी थी तुम में, गांड फट गई तेरी!

    उनकी आंखों में आँसू आ गए.

    मामी दर्द से अह्ह्ह … करके हुए बोली- मादरचोद … तू तो बहुत जल्दी चोदूं बन गया!

    मैं फिर एक तमाचा मरते हुए बोला- हां साली … तूने आज मेरी नुन्नू को लौड़ा बना दिया. मेरे कुंवारे लंड का पहला मजा ले लिया!

    इस बार मामी ने मेरे लंड को हाथ में पकड़ कर सोचती हुई बोलीं- मेरी एक चीज कुंवारी बची है, जो मैं तुम्हें दे सकती हूं. जिससे तेरा लंड शांत हो जाएगा.

    मैं- क्या?

    मामी चारपाई से उठती हुई बोलीं- चल मेरे साथ कमरे में, वहीं बताऊंगी.

    मैं बिना कुछ बोले नंगा ही उनके साथ चल दिया.

    मामी के कमरे के अन्दर अंधेरा था, कुछ भी साफ नहीं दिखाई दे रहा था.

    मैंने मामी से लाइट चालू करने के लिए कहा, तो उन्होंने मना कर दिया.

    वे बोलीं- लाइट चालू होगी तो मम्मी पापा को पता चल जाएगा कि हम दोनों जागे हुए हैं.

    इस पर मैं बोला- हां ठीक है, लेकिन जल्दी बताओ कि आपके पास ऐसा क्या है, जो आपकी अब तक कुंवारी है? प्लीज जल्दी बताओ मुझसे अब और बर्दाश्त नहीं हो रहा है.

    मामी ने मेरा हाथ पकड़ा और उसे अपनी मखमली गांड पर रखती हुई बोलीं- ये रही मेरी कुंवारी मख़मली गांड, जो आज तक किसी ने नहीं मारी. आज तुम इसे खोल कर मार लो.

    मैं उनकी गांड को दबाते हुए बोला- वाउ … मामी हो तो आपकी जैसी!

    मामी ने बगल की अलमारी से वैसलीन निकाल कर मेरे लंड पर लगाना शुरू किया.

    वे लंड की मसाज करती हुई बोलीं- कुंवारे लंड के लिए कुंवारी गांड तो बनती है!

    फिर मामी जल्दी से बेड पर चढ़ कर घोड़ी बनती हुई बोलीं- आओ जल्दी से और मेरी गांड में अपना लंड पेल कर इसकी सील तोड़ दो. तुम्हारे मामा जी ने तो आज तक इसको छुआ तक नहीं है … इसलिए प्लीज थोड़ा रहम दिखाना और आराम से उद्घाटन करना.

    मैं ‘ठीक है!’ बोल कर मामी की गांड मारने पीछे की तरफ आ गया.

    मैंने मामी जी की कमर को जोर से पकड़ लिया और लंड का सुपारा गांड के छेद पर लगा दिया.

    कोरी करारी गांड पर लंड का गर्म गर्म स्पर्श होते ही मामी के बदन में एक सिहरन सी दौड़ गई.

    मैंने धीरे से अन्दर की ओर दबाव बनाया और सुपारे को मामी की गांड के पहले छल्ले में फंसा दिया.

    लंड पर वैसलीन लगने की वजह से एक ही बार मेरे लंड का सुपारा मामी जी की गांड में चला गया.

    जैसे ही सुपारे का हमला हुआ तो उस वजह वे ज़ोर से चीख पड़ीं- आईईई मैं मर गई … प्लीज … आराम से आह्ह … उई आह आहिस्ते आहिस्ते डालो … प्लीज़ दर्द हो रहा है. मैं पहली बार गांड मरवा रही हूं.

    मैं थोड़ी देर के लिए रुक गया उसके बाद मैंने अपने लंड को एक बार थोड़ा सा बाहर खींचा और फिर से एक धक्का लगा दिया.

    इस बार लगभग मेरा आधा लंड मामी की गांड की गहराई में उतर गया था.

    मामी के मुँह से फिर से चीख निकल गई- इईईई … श्श्शशश … अआह … उम्म्ह!

    उन्होंने कसकर बेडशीट पकड़ ली और अपनी आंखें बंद कर लीं.

    मैंने देखा कि मामी की आँखों में से पानी निकल आया था.

    मैं थोड़ी देर वैसे ही रुका रहा.

    जैसे ही मामी थोड़ी नॉर्मल हुईं, मैंने धीरे धीरे धक्के लगाने शुरू कर दिए.

    अब उनको भी मज़ा आ रहा था.

    वे मादक कराह लेती हुई सिसकारने लगी थीं- हाईई रे … हाई … इसमें तो चूत से भी ज़्यादा मज़ा आता है … और कसकर पेलो मेरे राजा … हाईईई रे सच में बहुत मजा आ रहा है … सीई हाईई … और रगड़ कर चोदो … आह सीईई ईई और कसकर … हाय माँ … आआह … मजा आ गया रे!

    यह सुनकर मैं अब उनको बस धकापेल चोदने लगा और ताबड़तोड़ गांड को तबला समझ कर बजाता ही जा रहा था.

    वे ‘उफ्फ्फ … स्स्स्सस … ’ करती जा रही थीं.

    अब मेरी गोटियां भी मामी के मुलायम नितंबों से टकरा रही थीं.

    मैं थूक टपकाता जा रहा था और मस्ती से अपने लंड को मामी की गांड में अन्दर बाहर कर रहा था.

    उनकी मक्खन जैसी कोमल मुलायम गांड में मेरा लंड बड़े प्यार से चल रहा था.

    साथ ही मैं अपने हाथ की उंगलियों से उनकी चूत के दाने को भी मसल रहा था.

    इससे कुछ ही देर में मामी जी बहुत ही उत्तेजित हो गई थीं- अहह हहाआ इईई … श्शशश … आआह … मज़ा आ गया … ऊफ्फफ … फाड़ दे अपने लौड़े से मेरी गांड … अया … अब तो मैं तेरी बीवी हो गई हूँ … आअह सुहागरात को तेरे मामा जी ने मेरी कुंवारी चूत चोदी थी और आज तुम उईई … अहह हहाआ … मेरी कुंवारी गांड मार रहे हो … आह … चोद मेरे राजा चोद मुझे … जी भर के चोद आआअ … उम्म उफ्फ़ हाय मजा आ गया!

    इसी के साथ मेरे धक्के और भी तेज होते जा रहे थे, मैं मामी जी को पूरे जोश के साथ चोद रहा था.

    मामी फक करते हुए मेरा लंड पच पच की आवाज के साथ अन्दर बाहर हो रहा था.

    मैं- मामी जी मेरी जान, आपने तो मुझे जन्नत की सैर ही करवा दी आह … मेरी जान … मैं तो … मैं … तो … ग … गयाआ … आआह … मेरा पानी निकलने वाला है, कहां निकालूँ?

    मामी बोलीं- मेरी गांड में ही अपना पानी निकाल दो!

    फिर मैंने ‘ये आअहह … ऊहह … लो’ कहा और उनकी गांड में ही अपना वीर्य छोड़ दिया.

    मैं सारा वीर्य उनकी गांड में आखिरी बूँद तक डालकर ऐसे ही कुछ देर तक उनके ऊपर लेटा रहा.

    फिर जब मैंने अपना आधा सिकुड़ा हुआ लंड उनकी गांड से बाहर निकाला तो मैंने देखा कि उनकी गांड मेरे वीर्य से लबालब भरी हुई थी और लंड की रगड़ से लाल हो गई थी.

    उनकी गांड से थोड़ा थोड़ा करके वीर्य उनकी चूत की तरफ बहने लगा था.

    थोड़ी देर बाद मामी ने उठ कर अपनी चूत और गांड को बेडशीट से अच्छे से पौंछ कर साफ किया.

    उसके बाद हम दोनों फिर बाहर चारपाई पर आ गए और सुबह तक चुदाई करते रहे.

    उस दिन सुबह में मामी ठीक से चल भी नहीं पा रही थीं.

    यह देख कर मैं मुस्कुरा रहा था.

  • विधवा मौसी मेरे बाप से चुद गई

    मेरा नाम राजू है. मेरा जन्म उत्तर प्रदेश के एक शहर में हुआ. मेरे परिवार में मेरे माता पिता, मेरी एक सौतेली बहन है और मैं हूं. आज मेरी उम्र 30 साल के लगभग होगी. आज मेरी शादी हो चुकी मेरे बीवी के साथ मेरे अच्छे संबंध हैं और मेरी एक बेटी है.

    मुझको 10 साल पुरानी बात आज भी याद है कि मैं सेक्स प्रति कितना उत्तेजित हुआ करता था. मेरी छुट्टी खत्म होने को थी. मैं रोज़ शाम को दोस्तों के साथ घूमने फिरने के बहाने लड़कियां ताड़ने शहर में घूमा करता था. शाम की चाय और सिगरेट पीना, मुझे आज भी अपने पुराने दिनों की याद दिला देता है.

    ये वाकिया आज से करीब 8 साल पहले का है. मैं कॉलेज की पढ़ाई कर रहा था और इम्तिहान खत्म होने के बाद घर में छुट्टी मनाने के लिए घर आ गया था.घर परिवार में सब लोग खुश थे कि बेटा घर आया है. मेरे आने की ख़ुशी में घर पर पकवान बन रहे थे. उस दिन मेरा काफी खातिरदारी के साथ स्वागत हुआ था. जो लोग कॉलेज में रहे हैं, उन्हें मेरी बात समझ में आती होगी.

    जब शाम को मैं घर पहुंचा, तो पता लगा कि घर में मेहमान आए हुए हैं. मेरी मौसी और मौसा जी आए थे. घर का माहौल कुछ अलग सा था. सब अपनी बातें कर रहे थे.

    मेरी मौसी मुझे अपने पास बुलाकर बोलीं- बेटा कैसे हो … मैंने आज बड़े दिनों के बाद तुमको देखा है … कितना बड़ा हो गया है रे तू.

    कुछ देर बाद मौसा जी का फोन बजा और वो जल्दी से ‘अर्जेंट कॉल है …’ बोलकर बाहर निकल गए. वे अपने ऑफिस के रवाना हो गए. कुछ देर बाद उनकी कंपनी से फोन आया कि उनका एक्सिडेंट हो गया है.

    हम सब हॉस्पिटल के लिए दौड़े … और हमारे वहां पहुंचने से पहले ही उनका निधन हो चुका था. हम सब एकदम से अवाक थे कि ये क्या हो गया. सभी बेहद दुखी थे. मेरी मौसी और माता जी को रोते हुए देख कर मेरा भी मन खराब हो गया.

    मेरे पिताजी उन दोनों को हौसला देकर चुप करने की कोशिश कर रहे थे. मैंने अपनी छुट्टियां बढ़ा दीं और घर पर रुक गया.

    मौसी अब हमारे घर पर ही थीं. मौसी की कोई औलाद नहीं थी. उनका कोई भी नहीं था, जो उनके लिए कुछ कर सके.

    इसलिए मौसाजी की मृत्यु के बाद वो हमारे साथ ही रहने लगी थीं और हमने भी उनको अपने यहां ही रोकने का फैसला ले लिया था.

    जैसे तैसे दिन काट कर छुट्टियां खत्म हुईं और मैं कॉलेज आ गया.

    इसके 6 महीने बाद ही मैं घर आया. घर में सब लोग नॉर्मल थे. हम सभी एक नई शुरूआत में लग गए.

    दिन यूं ही बीत रहे थे. कुछ दिन बाद मेरे वापस जाने का दिन नजदीक था. मैं अपने पिता के द्वारा गिफ्ट किए गए मोबाइल फोन से बहुत खुश था और उसी फोन में सेक्स कहानी पढ़ रहा था.

    रात को खाना खाने के बाद मैं अपने कमरे में जाकर सोने की तैयारी करने लगा. मेरा कमरा और मेरे माता पिता का कमरा अगल बगल में ही था, जिससे उनके कमरे की कुछ आवाजें मैं आसानी से सुन सकता था.

    देर रात को मैंने कुछ आहट सुनी और मन किया कि सुना जाए क्या बातें चल रही हैं. उनके कमरे से मुझे आज कुछ अजीब सी आवाजें आ रही थीं. मैंने अपने रूम से बाहर निकल कर सुनने की कोशिश की.

    खिड़की की एक झिरी में से कमरे के अन्दर झांक कर देखा कि कमरे में एक छोटा सा बल्ब जल रहा था और कमरे के अन्दर से चाटने की आवाज आ रही थीं. मुझे इधर से कुछ दिखाई नहीं दे रहा था. इसलिए मैंने इधर उधर देखा तो मुझे अपने कमरे में से कॉमन दरवाजे से अन्दर देखना ठीक लगा. मैंने अपने और पापा के कमरे के बीच के दरवाजे में जगह देखी तो मुझे उधर एक बड़ी सी झिरी दिखने लगी. उस झिरी में से मैंने झांक कर देखा तो मैं हैरान रह गया.

    मेरी माँ और मौसी जी लगभग नंगी होकर एक दूसरे को चूमने का प्रयास कर रही थीं और वे दोनों एक दूसरे के ब्लाउज खोल रही थीं.

    इसके आगे का सीन देख कर तो मेरे होश ही उड़ गए. जब मैंने देखा कि पिता नग्न अवस्था में बिस्तर पर लेटे हुए थे. वे अपने लिंग पर उत्तेजक तेल से मालिश कर रहे थे.

    यह सब देख कर मुझे कुछ समझ नहीं आया और मैं अपनी सांसें नियंत्रित करने लगा. कुछ देर बाद मुझे खेल समझ में आया, तो मेरे अन्दर का शैतान भी जाग उठा. मैं अपने फोन को निकाला और चुपचाप उस झिरी में से झांक कर वीडियो रिकार्डिंग करने लगा.

    मैंने वीडियो बनाना ही शुरू किया था कि पिताजी अपने लिंग को सहलाते हुए बोले- लोहा गर्म है … जल्दी से आ जाओ दोनों मेरी पटरानियों … इसका मजा ले लो.

    तभी मेरी मां और मेरी मौसी दोनों ही मेरे पिता की तरफ लपकीं.मेरे पिता ने मौसी को इशारा किया कि वो उनके मुँह पर आकर बैठ जाएं और मेरी मां उनके लिंग की ओर आ जाएं.

    ये सब देखकर मेरा लिंग भी जोर मार रहा था.

    मैंने किसी तरह अपने आप पर कंट्रोल किया और देखा कि मेरी मां ने पिता का लिंग अपने मुँह से चूमना और चूसना शुरू कर दिया. मौसी अपनी योनि को मेरे पिता के मुँह पर रख कर बैठ गईं. मेरे पिता एक पेशेवर जिगोलो के जैसे मौसी की योनि को चूस रहे थे और मौसी अपने वक्षस्थल को मसल रही थीं.

    मेरे पिता ने मौसी की योनि में उंगली डालकर चूसना चालू किया, मौसी भी उनका भरपूर साथ दे रही थीं.

    मुझे अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था कि मेरे सामने ये सब हो रहा है. मगर मुझे इस खेल में अजीब सा मजा आ रहा था.

    कुछ देर बाद मौसी और मां, दोनों ने अपनी जगह बदल दी. अब मेरी मां पिता जी के मुँह पर जाकर बैठ गईं और अपनी योनि को पिता जी की जीभ से चुदवाने लगीं. दूसरी तरफ मेरी मौसी मेरे पिता के लिंग को हाथ में लेकर हस्तमैथुन करने लगीं. उस समय मेरे पिता की उम्र भी करीब 45 साल रही होगी. वो भी काफी मजबूत शरीर के आदमी थे.

    अब तक पिता जी उत्तेजित हो चुके थे और मेरी मौसी और मां भी गरमा गई थीं. पिता ने मौसी को लिंग को चूत पर सैट करने के लिए कहा.मौसी ने वैसा ही किया; वो पिता जी के लिंग को अपनी योनि में लगा आकर बैठ गईं. पिता जी ने कमर उचका कर लिंग को मौसी की योनि में डाल दिया.

    अब मौसी उनके हथौड़ेनुमा लिंग बैठ कर उछल रही थीं. पूरा कमरा फुच फुच की आवाज से गूंज रहा था. उधर मेरी मां ने अपना मोर्चा संभाल रखा था. वह अपनी योनि से पिता जी के जोश को बांटने की कोशिश कर रही थीं, पर मेरे पिता जी अपने जमाने मशहूर लड़कीबाज थे, वह एक अलग किस्सा है. जो मैं फिर कभी सुनाऊंगा.

    इधर इस सबको देखकर मेरे लिंग में उबाल आ रहा था. मौसी और मां दोनों ने मिलकर पिता के साथ 30 मिनट तक यह कामक्रीड़ा की. फिर पिता जी ने अखिर में उन दोनों के वक्ष स्थलों के ऊपर अपने वीर्य का छिड़काव कर दिया.

    उसके बाद मौसी और मेरी मां एक दूसरे को चाट चाट कर साफ़ करने लगीं. उसके बाद पिताजी ने दोनों को चुंबन किया और उनके कानों में कुछ कहने लगे.

    अब मेरी मां भी झड़ कर थक चुकी थीं. वह बिस्तर पर लेट गईं. मगर मेरे पिता का बड़ा लिंग अब भी जोर मार रहा था. मेरी मौसी ने उसे फिर से सहलाना शुरू कर दिया लिंग के पूरी तरह से खड़े हो जाने के बाद मौसी कंडोम का पैकट निकाल कर फाड़ने लगीं.

    तभी मेरी मां ने कंडोम छीन लिया और कहा- अपने जीजा से कैसा परहेज है तुझे … कंडोम रहने दो और अपनी योनि को राजू के बाप के लिंग से संभोग करवा लो.

    मेरी मौसी बोलीं- दीदी अगर मैं प्रेगनेंट हो गई, तो क्या होगा?तभी मेरे पिता जी ने कहा- तू भी मेरी आधी घरवाली है … पर आज से तू पूरी है.

    पिता ये कहते हुए मौसी का मुँह देखकर हंसने लगे. उसके बाद पिता जी ने मौसी को जमीन पर टांगें रखवा कर पलंग के सहारे से कुतिया जैसा बना दिया और पीछे से आकर मौसी की योनि में लिंग डाल कर कुत्ता कुतिया के जैसे कामक्रीड़ा करने लगे.

    मौसी नीचे से अपनी योनि को सहला कर पिताजी का पूरा साथ दे रही थीं.

    पिता जी का लिंग अन्दर घुसते ही एक बार फिर से कमरा फुच फुच की आवाज़ों से गूंज उठा. पिता जी ने मौसी की योनि के साथ 15 मिनट तक भरपूर कामक्रीड़ा की और अपना वीर्य मौसी की योनि में ही प्रवाहित कर दिया.

    इसके बाद वो तीनों एक पलंग पर नंगे ही लेट गए. मैं भी समझ गया कि अब खेल समाप्त हो गया है. मुझको भी अगले दिन हॉस्टल जाना था. मैं भी अपने लिंग को सहलाता हुआ अपने बिस्तर पर चला गया.मेरे मोबाइल फोन में यह पूरी घटना रिकॉर्ड हो गई थी.

    अगले दिन सब एकदम सामान्य था और मां मौसी आदि सभी मुझसे सामान्य व्यवहार करने लगे. मैं अब भी रात की उस घटना से स्तब्ध था.

    मेरे पिताजी बोले- चलो बेटा, तुम्हारी ट्रेन का टाइम हो रहा है.

    अपना बैग उठा कर मैं भी घर से निकल गया. मौसी और माता जी मुझको बाल्कनी से बाय बाय कर रही थी.

    मैं चला गया.

    कुछ समय बाद अगले साल छुट्टियां आने को थीं और मैं घर आने को बड़ा उत्तेजित था. मैंने पूरे नौ महीने तक हॉस्टल में रह कर हर दिन घर की उस वीडियो रिकॉर्डिंग को देखा था और मैं हस्तमैथुन कर लिया करता था.

    मगर इस बार घर वापस आते समय मैं एक खुश खबरी से अनजान था.

    जब मैं घर पहुंचा, तो मौसी को वहां पर नहीं देखा. मैंने मां से पूछा- मां मौसी कहां गई हैं?तो मां ने जवाब दिया- वो हॉस्पिटल में एडमिट हैं.

    मुझे लगा कि मौसी कुछ बीमार होंगी. फिर मैंने पिता के बारे पूछा, तो पता लगा कि वो ही मौसी को लेकर गए हैं.

    अब हमें भी हॉस्पिटल जाना होगा. मेरी मां और मैं, दोनों हॉस्पिटल के लिए रवाना हुए. उधर पता लगा कि मौसी प्रसूता वार्ड में हैं. मुझे तब समझ आया कि मौसी अब मेरी सौतेली मां बन चुकी हैं और उन्हें एक बच्ची को जन्म दिया है.

    मैंने मां से पूछा- क्या मैं जान सकता हूँ कि मौसी अब मेरी कौन लगती हैं?मां ने धीरे से कहा कि अब वो भी तेरी मां हैं. उन्होंने पापा से ही इस बच्ची को जन्म दिया है.

    मैं कुछ नहीं बोला और मौसी के पास जाकर उनको मां कह कर बोलने लगा. मेरी मौसी भी मेरी बात से खुश हो गई थीं.

    हालांकि ये पल मेरे लिए सोचने वाले थे, लेकिन दोस्तो, मैं ये समझता था कि बिना पति के मौसी की जिन्दगी जीना दुश्वार था. हो सकता था कि किसी अन्य से अपने जिस्मानी सम्बन्ध बना लेतीं, जो कि शायद हम सभी के लिए बेहद गलत होता. इसलिए मैंने मौसी को अपनी मां ही बना लिया था.

    मेरे पिताजी को भी अब किसी बात का मलाल नहीं था क्योंकि उनको भी मालूम हो गया था कि मैं सब जान गया हूँ.

    दोस्तो, ये मेरे ज़िन्दगी के कुछ ना भूल पाने वाले पल थे, मैं आशा करता हूं कि आपको मेरी ये गरम और सच्ची सेक्स कहानी पसंद आई होगी.

  • क्लासरूम में जवान कुंवारी लड़की की पहली बार चुदाई

    मेरी क्लास की एक लड़की पर सब लड़के बुरी नजर डालते थे क्योंकि वो बेपनाह हुस्न की मलिका थी. मुझे बहुत बुरा लगता था लड़कों की बातें सुन कर. तो मैंने क्या किया?

    मेरा नाम रोहण है. जब मैं 19 साल का था, तब मुझे जैनब (काल्पनिक नाम) नाम की एक लड़की पसंद आ गयी. जैनब मेरे कोचिंग में पढ़ती थी. जैनब का रंग गोरा था और वो करीबन साढ़े पांच फिट लंबी थी. उसकी चुचियों की साइज 32 इंच थी और नजरें कंटीली थीं.

    जैनब को देख कर कोचिंग और मोहल्ले के लड़के मुठ मार कर खुद को शांत कर लेते थे.

    हमारी ये कोचिंग स्कूल में ही थी. स्कूल के बाद शाम में 03:00 बजे से कोचिंग से घर के लिए चल देता था. मैं पढ़ाई में अच्छा हूँ … लड़कियों से हमेशा से दूरी रखने वाला लड़का हूँ.

    मुझे उसको देख कर न जाने ऐसा क्यों लगने लगता था कि इस लड़की को मुझे इन भूखे भेड़ियों की वासना से बचा लेना चाहिए. यही सोच कर मैं कोचिंग से जब भी घर जाने के लिए निकलता तो जैनब के पीछे पीछे कुछ दूरी बनाता हुआ उसे उसके घर तक पहुंचा कर ही अपने घर जाता था.

    मेरी इस बात को मेरा एक दोस्त समझता था. पहले पहल तो उसने मेरी इस बात पर ध्यान नहीं दिया. मगर जब दोस्तों के बीच जैनब की जवानी की चर्चा होने लगती, तो मैं उखड़ जाता था.

    ये सब देख कर मेरा वो दोस्त समझ गया था कि जैनब मुझे बेहद पसंद है.
    उसने मुझसे कहा कि यदि तुमको जैनब पसंद है, तो उससे अपनी बात कहते क्यों नहीं?

    मगर मैं ऐसा नहीं कह सकता था, शायद मेरा शर्मीलापन मुझे ऐसा करने देने के आड़े आ रहा था.

    फिर एक दिन की बात है कि मेरे इसी दोस्त ने मुझे चैलेंज किया कि तुम यदि उस लड़की को किसी लड़के की जबरदस्ती से बचाना चाहते हो, तो उस लड़की को पटा लो. वरना कोई न कोई उस कली को मसल देगा.
    मैंने कहा- ठीक है … एक महीने में मैं उससे ही खुद को प्रपोज करवा लूंगा.

    अब ये सामने चैलेंज था, तो मैंने एक तरकीब सोची. मैं हमेशा की तरह कोचिंग आता और जाता, लेकिन पढ़ाई के साथ अब साथ जैनब को देखता रहता. इसी दौरान जब उसकी नजर मुझसे मिल जाती थी, तो मैं नजरें घुमा कर बोर्ड पर कर लेता. इस तरह से देखने से एक दो बार जैनब भी मुस्कुराई … मगर मैंने उसकी तरफ से अपना मुँह मोड़ लिया.

    अब भी कोचिंग के बाद जब अपने घर जाने लगता, तो उसे घर तक पहुंचा कर ही जाता. ये बात उसने नोट कर ली थी.

    इस बीच मैं उससे कुछ नहीं कहता था. जैनब भी ये समझ गयी थी कि मैं उससे कुछ भी कहने से रहा.

    एक दिन टेस्ट एग्जाम चल रहे थे. मैंने सारे प्रश्न हल कर दिए थे. इस बीच जिसने भी मुझे हेल्प मांगी … मैंने सबको मदद की.

    अचानक से मेरे पेन की स्याही खत्म हो गई. मैं परेशान हो गया. मुझे परेशान देख कर मेरे एक दोस्त ने मुझसे पूछा- क्या हुआ?

    मैंने पेन को हथेली पर चला कर उसे बताया कि पेन की इंक खत्म हो गई.

    मेरे दोस्त ने ये देखा तो उसने जोर से लगभग चिल्लाते हुए क्लास से कहा- भाई कोई एक्स्ट्रा पेन लाया है, तो दे दो … रोहण का पेन काम नहीं कर रहा है.

    जैनब ने मुस्कुराते हुए मुझे देखा और सबसे पहले अपने बॉक्स में से एक पेन निकाल कर मेरी तरफ बढ़ा दिया.

    फिर उसने मुझसे अपने आंसर भी मिलवा लिए कि उसने सही लिखे या नहीं.

    ये देख कर मेरे दोस्त उसे या मुझे देख कर फब्ती कसने लगे थे. हम दोनों ये सब चुपचाप होकर सुनते और मुस्कुरा कर सबकी फब्तियों को टाल देते.

    फिर 5 सितंबर आने वाला हो गया. सभी शिक्षक दिवस मनाने के लिए चंदा जमा करने लगे. लड़कियों ने गिफ्ट और लड़कों ने डेकोरेशन की जिम्मेदारी ली. केक का जिम्मा मैंने ले लिया और डिसाइड किया कि मैं पांच सितंबर को एक बजे ही कोचिंग क्लास में केक लेकर आ जाऊंगा और 2:30 बजे से सजावट के सामान लाने चलूंगा.

    जैनब को मेरा प्लान पता चल गया. जैनब पांच सितंबर को एक बजे से कुछ पहले ही कोचिंग पहुंच गयी. मैं भी पांच मिनट बाद पहुंच गया.

    मैं जैनब को देख कर सरप्राइज हो गया. मैंने पूछा- इतनी जल्दी आ गयी?

    उसने उसी समय मुझे प्रपोज कर दिया. मैं हक्का-बक्का था … निशब्द हो गया था. वो मुझे चुप देख कर रोने लगी. मैं कुछ बोल पाता, उसने आगे बढ़ कर मुझे लिपकिस कर दिया.

    जैसे ही वो मुझसे लिपटी, मुझे उसके कपड़ों का अहसास हो गया. उसने शर्ट के अन्दर कुछ भी नहीं पहना था. मुझे तो जैनब से चिपकने की तमन्ना न जाने कबसे थी. उसकी भरी हुई छातियों ने मुझे एकदम से गर्म कर दिया और मैंने भी बदले में उससे पूरा लिपट कर उसे किस करने लगा.

    मैंने उसे अपनी बांहों में कस लिया. उसकी आंखों से प्यार को पा लेने के आंसू झड़ रहे थे और मैं भी उसे अपने सीने में चिपकाए हुए एक अजीब सा सुकून पा रहा था. उसके मादक जिस्म की महक मुझे एक अजीब से लोक में ले गई थी.

    हम थोड़ी देर में अलग हो गए. मैं उसे देखने लगा. वो भी मेरी आंखों में झांकने लगी. फिर उसने शर्म से अपनी आंखें झुका लीं.

    मैं हंस दिया, तो वो भी हंस दी.

    मैंने कहा- मुझे तुमसे कुछ कहना है.
    वो बोली- अब भी कुछ कहना बाकी है?
    मैंने कहा- हां.

    वो मेरी तरफ देखने लगी.

    आज मैं उसे पाना चाहता था, इसलिए मैंने बिना कुछ कहे फिर से अपनी बांहें उसकी तरफ फ़ैला दीं.

    वो समझ गई. उसने नजरें झुका कर बोला कि अभी एक घंटा है, तुम्हारा जवाब जो भी हो … मुझे इस एक घंटे में प्यार करके बता दो प्लीज़.

    ये कहते हुए उसने क्लास रूम बंद कर दिया और एक एक करके अपनी शर्ट के बटन खोल दिए और मुझसे लिपट गयी.

    अब शेर के आगे बकरे को डालोगे, तो उसका शिकार तय है. मैंने भी सोचना छोड़ दिया और उससे लिपट गया. मैं उसे कस कस कर लिपकिस करने लगा. मेरे हाथों ने उसकी शर्ट को निकाल दिया. उसने भी मेरी शर्ट निकाल दी.

    उसकी चुचियां बिल्कुल तनी हुई और कसी हुई थीं, किसी बॉल की तरह गर्म थीं. हम दोनों की सांसें एकदम गर्म हो चुकी थीं. उसने मेरी जींस और जांघिया खोल कर मुझे नंगा कर दिया. मैंने भी उसे पूरी तरह से नंगा कर दिया और हम दोनों एक दूसरे के नंगे जिस्मों की अगन को महसूस करने लगे.

    इस समय हम दोनों ही कामवासना के वशीभूत थे. मैंने इधर उधर देखा और दो हाई बेंच मिलाकर अपने लिए सेज तैयार कर ली. मैंने उसे उस पर लिटा दिया. उसने भी लेट कर अपनी आंखें मूंद लीं.

    मैंने उसके दोनों चुचों को चूसना चालू कर दिया और हाथ चुत पर लगा दिया. वो ‘आ आ आआ आऊऊऊ ऊऊऊऊ आउच..’ कर रही थी.

    उसने अपने पैर फैलाते हुए कहा- रोहण अब जल्दी से मेरी चुत में अपना लंड डाल दो … मुझसे सहन नहीं हो रहा.

    मैंने उसके दोनों पैर पूरी तरह से फैला दिए और उसकी चुत को देखने लगा. उसकी चुत पर हल्के बाल थे और उसकी चुत एकदम गुलाब की पंखुड़ियों के जैसे पिंक थी.

    मैंने पोर्न फिल्मों से चुदाई करना कुछ सीख लिया था. बस वही सब याद करते हुए मैंने सीधे अपनी जीभ को उसकी चुत पर लगा दी.

    जैनब इस समय गर्म हो चुकी थी. उसने आंख खोल कर मिन्नत भरी आवाज बोली कि रोहण अभी ये सब छोड़ो … पहले जल्दी से अन्दर डाल दो … नहीं तो लंड खा जाऊँ गी.

    मगर मैं उसकी चुत चूसने में लीन रहा. उसकी चुत की आग बेहद बढ़ गई थी.
    उसने अपने दोनों पैरों और हाथों से मेरा सिर अपनी चुत में ठेल दिया और मादक आवाजें निकलाने लगी ‘ऊऊऊ यसस्स … सीसीई.’

    वो तेज आवाज निकलते हुए झड़ने लगी और फिर ढीली होने लगी.

    एक मिनट तक मानो झंझावात थम सा गया था. अचानक से जैनब उठ गई और मेरा लंड मुँह में लेकर लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी.

    अब मैं ‘आहा आह..’ की आवाज निकालने लगा.

    एक मिनट बाद ही मैंने जैनब के मुँह से लंड खींच लिया और उसकी चुत फाड़ने की तैयारी में जुट गया.

    मैं इस समय पूरे जोश में आ गया था. मैंने हाई बेंच पर जैनब को चित लिटाया और अपने लंड को उसकी चुत पर घिसने लगा.

    जैनब फिर से गरम हो गयी थी. उसने खुद ही लंड चुत पर सैट कर लिया. उसकी चुत सील बंद थी.

    उसने बोला- रोहण मेरा पहली बार है … प्लीज़ मेरी चुत में धीरे धीरे धक्का देना … मुझे दर्द होगा, लेकिन तुम छोड़ना नहीं.

    मैं ठहरा अनाड़ी … मैंने पहले ही धक्के में 3 इंच लंड चुत में उतार दिया. जैनब की चूत से खून आने लगा. वो दर्द से छटपटाने लगी. मैंने उसे गले लगा कर कस कर दाबे रखा और किस करने लगा.

    उसकी आंखों से आंसू आ रहे थे, वो कांप रही थी. उसके शरीर की कम्पन के रुकते ही मैंने लंड चुत में पेल दिया. चुत चीरता हुआ मेरा 7 इंच का लंड चुत में गायब हो गया.

    जैनब ने मुझे कसके जकड़ लिया और दबी जुबान से चिल्लाई- उई ममउम्मी … मर गई!

    मैं उसे चूमता रहा. उसकी चुचियों को चूसता रहा और धीरे धीरे उसे चोदने लगा.

    अब जैनब को भी मजा आने लगा. वो भी मस्त हो गई औऱ ‘आह आह आउच ओह आह..’ की आवाज निकलने लगी.

    ‘आह और जोर से … मेरे रोहण..’

    मैं भी पूरी ताकत से उसे चोदने लगा. कुछ ही मिनट बाद वो मुझे पकड़ कर झड़ चुकी थी. मैंने भी देर नहीं करते हुए ताबड़तोड़ धक्के देना शुरू कर दिए. मैं भी झड़ने वाला हो गया था.

    मैंने उससे पूछा, तो वो बोली- मैंने पहली बार किसी को पसंद किया है … आज चुत का उद्घाटन हुआ है … तुम अन्दर ही डाल दो.

    मैंने 20 धक्के मारकर जैनब को जकड़ लिया. जैनब ने भी मुझे जकड़ लिया और हम दोनों झड़ने लगे.

    जैनब की आंखों में ख़ुशी थी. हमने एक दूसरे को जबरदस्त किस किया और अलग होकर कपड़े पहने.

    मैंने जैनब को दूसरे लड़कों और मोहल्ले के लड़कों के विचार उसे बताए और उसे बताया कि मैंने तो तुम्हें उनसे बचाने के लिए अब तक ऐसे किया था.

    उसने बोला- जो भी हो … मेरी तरफ से सिग्नल मिलने के बाद भी तुमने अपनी अच्छाई नहीं छोड़ी … ये मुझे बहुत अच्छा लगा.
    मैंने उससे पूछा- और क्या क्या अच्छा लगा … मेरा मतलब अभी दस मिनट पहले.
    वो हंस दी और कहने लगी- तुमने बहुत अच्छा चोदा है मुझे … जब भी मन हो बोल देना, लेकिन मैं जानती हूं तुम अभी भी नहीं बोल पाओगे.

    मैंने उसे फिर से चूम लिया.

    वो बोली- रोहण ये बात हम दोनों के बीच ही रहनी चाहिए.
    मैंने बोला- ठीक है.

    अब तक 2:30 बज चुके थे. मैं उससे केक देखने को कह कर डेकोरेशन का सामान लेने चला गया.

    अब हम दोनों जब भी मिलते, मुस्कुरा देते थे. हालांकि मेरा प्यार परवान तो चढ़ा, पर मंजिल नहीं पा सका. उसकी शादी हो गयी और बच्चे भी हो गए.

  • भाईजान ने बहन की चूत चोदी

    मेरी दो बहनें हैं. एक दिन मैं अपनी बहन के कॉलेज गया तो मुझे पता चला कि वो लड़कों से चुदती है. मैंने सोचा कि मैं भी अपनी बहन की चूत चुदाई करूंगा. ये मैंने कैसे किया?

    दोस्तो, मैं आपका दोस्त साजिद मुरादाबाद उ.प्र. से हूँ. मैं 22 साल की उम्र का एक नौजवान लड़का हूँ. मैं बहुत ही क्यूट सा बंदा हूँ. जो लड़की मुझे एक बार देख ले, तो वो मुझसे चुदने को राजी हो जाएगी.

    मैं अन्तर्वासना पर प्रकाशित हर सेक्स कहानी को पढ़ता हूँ और लंड हिला कर मज़ा भी लेता हूँ. इधर की सेक्स कहानी को पढ़ते हुए एक दिन मैंने सोचा कि क्यों ना मैं अपनी भी कहानी आप सबके साथ साझा करूं.

    मेरे परिवार में मम्मी पापा और एक छोटा भाई व 2 बहनें हैं. एक बहन का नाम हिना है, दूसरी का नाम रूबी है. रूभी अभी 19 साल की है.

    मैं घर में सबसे बड़ा हूँ. अब तक मैं बीएससी कर चुका हूँ. मैंने अपनी ही एक शॉप खोल ली थी.

    मेरी छोटी बहन रूबी अभी बारहवीं में पढ़ती है. मेरी चिकनी चिकनी चुत वाली प्यारी प्यारी पाठिकाओं और लंबे लंड वाले दोस्तों … आज मैं आपको अपनी इस कहानी में ये बताने वाला हूँ कि मैंने किस तरह अपनी छोटी बहन रूबी की चुदाई की और रूबी से बड़ी वाली हिना को लंड का रस पिलाया.

    वैसे तो मैं हर हफ्ते अपनी गर्लफ्रेंड की भी चुदाई करता हूँ, लेकिन सच तो ये है कि बहन की चुदाई करने में अलग ही आनन्द आता है. मैं अपने घर में एक अलग रूम में सोता हूँ.

    ये बात उस टाइम की है, जब मेरी रंडी बहन हिना ने कॉलेज में एडमिशन लिया था. उसका पहला ही साल था. वो रोज कॉलेज आती जाती थी.

    एक दिन मैंने सोचा कि चलो आज हिना बहन के कॉलेज घूम कर आते हैं. हिना अपने कॉलेज में कैसा पढ़ रही है. यही सब सोच कर मैं उसको कॉलेज चला गया. जब मैं अन्दर गया तो देखा कि अन्दर लड़का लड़की तो आपस में बात करते ही हैं. कुछ कुछ लड़के लड़कियां तो बातचीत के बहाने मजे भी लेने में लगे थे.

    ये सब देख कर मैंने सोचा कि मेरी बहन तो ऐसी नहीं है, वो ये सब काम में नहीं पड़ने वाली है.

    जब मैं उसकी क्लास में गया … तो उधर हिना नहीं थी. मैंने एक लड़की से पूछा- हिना कहां है?
    उसने मुझे बताया कि आज तो वो कॉलेज आई ही नहीं है.

    ये सुनकर मैं एकदम से हैरान हो गया कि वो तो सुबह ही तो मेरे सामने घर से कॉलेज के लिए निकली थी. कहां चली गई. कहीं उसे कुछ हो तो नहीं गया.
    अब मैं दिमाग़ लड़ाने लगा और मेरे मन में अलग अलग तरह के विचार आने लगे.

    कुछ देर बाद कॉलेज की छुट्टी का समय हो गया. मैं बाहर आकर कॉलेज के गेट के पास एक तरफ छिप कर खड़ा हो गया और बाहर निकलने वाले स्टूडेंट्स को देखने लगा.

    तभी मैंने देखा कि मेरी भोली भाली बहन और एक लड़की के साथ बाहर निकली और बाहर खड़ी एक कार में कुछ लड़कों के साथ उसी कार के अन्दर जाकर बैठ गई.

    मैंने सोचा कि कुछ तो दाल में काला है. कुछ ही समय में मैंने हिना के बारे में पूरा पता निकाल लिया और घर आ गया. हिना घर आ चुकी थी … मगर मैंने उससे कुछ नहीं बोला.

    जब वो दूसरे दिन फिर कॉलेज के लिए घर से निकली, तो मैं उसके पीछे जाने लगा.

    थोड़ी दूर एक जगह उसकी सहेली मिल गई और वो दोनों लड़कियां आगे बढ़ गईं. उस लड़की ने मोबाइल से किसी से बात करना शुरू कर दी. कुछ ही पल बाद एक कार उन दोनों के पास आकर रुकी और वे दोनों उस कार में बैठने लगीं. मैंने देखा कि ये कल वाली ही कार थी और उसमें कई लड़के बैठे थे.

    वे सब कार में बैठ कर कहीं जाने लगे. मैं बाइक से था, तो मैंने उस कार का पीछा करना शुरू कर दिया. काफी दूर तक जाने के बाद मैंने देखा कि कार एक घर के आगे रुक गई थी. वे सब कार से उतर कर उस घर में जाने लगे थे. वो सब अन्दर चले गए. पीछे से मैं भी उस घर के नजदीक गया और अन्दर देखने की जुगाड़ बनाने लगा.

    उस घर के बगल में एक गैलरी थी. मैं उधर गया तो उधर एक खिड़की थी. मैंने खिड़की में देखा तो अन्दर का नजारा साफ़ दिखाई देने लगा. मैं वहां छुप गया और अन्दर देखने लगा.

    मेरी जैसे ही अन्दर निगाह गई, मैं तो समझो पागल सा ही हो गया. उन सब लोगों ने बहुत जल्दी से अपने सारे कपड़े उतारे और सिर्फ चड्डी में होकर बैठ गए. तभी उनमें से एक लड़का बीयर की बोतलें लेकर आया और सबने एक एक बोतल ले ली. बियर पीने के बाद में वो सारे लड़के सिगरेट पीने लगे. एक लड़का मेरी बहन हिना से लिपटने लगा. दूसरा लड़का उस लड़की को अपने से लिपटाने लगा. बाकी के तीन सिगरेट का मजा लेते हुए उन दोनों लड़कियों की मस्ती देखने लगे.

    तभी सबने कुछ गोलियां खाईं और सब एक साथ उन दोनों लड़कियों के नजदीक आ गए. उन सभी ने लड़कियों को किस करना शुरू कर दिया. ये देख कर मैं गरम होने लगा. मैं इस लाइव ब्लूफिल्म देख कर ये भी भूल गया कि इन दो लड़कियों में से एक मेरी बहन भी है.

    वो लोग सेक्स में चालू हो गए. मैंने सोचा कि अब मुझे भी अपनी बहन को चोद लेने में ही फायदा है.

    उसकी चुदाई की बात दिमाग में आते ही मैंने प्लान बनाया और अपना फोन निकाल कर अपनी बहन की चूत चुदाई की वीडियो रेकॉर्ड करनी चालू कर दी.

    उन लोगों ने मेरी बहन को एकदम नंगी कर लिया और उसके ऊपर एक लड़का चढ़ गया. दूसरे ने अपना लंड मेरी बहन के मुँह में दे दिया और हिना लंड चूसने लगी.

    पहले वाले लड़के ने मेरी बहन की टांगें फैला दीं और अपना लंड उसकी चुत में ठांस दिया. हिना की हल्की सी कराह निकल गई, मगर वो लड़का उसे चोदता ही रहा.

    उसने बीस मिनट तक मेरी बहन की चुदाई का मजा लिया और अपने लंड का पानी उसके मुँह में ही निकाल दिया. साली मेरी रंडी बहन ने लंड के पानी को पूरा गटक लिया और वो लंड का पानी पीकर बहुत खुश दिखने लगी.

    इस सबका वीडियो बना कर मैं वहां से निकल आया.

    जब शाम को वो घर आई, तो मेरी बड़ी बहन हिना के चेहरे पर संतुष्टि भरी मुस्कुराहट थी.

    मैंने उसे देखा और कहा- हिना यार … ऐसी मुस्कुराहट तो मैं भी तुझे हर रोज दे सकता हूँ … इसके लिए कॉलेज क्या जाना.
    वो बोली- क्या मतलब भाईजान?
    मैं बोला- कुछ नहीं … तुम अन्दर जाओ … मैं बाद में बताऊंगा.

    मेरी बहन मेरे तेवर देख कर कुछ डर गई. मगर उस समय मैंने कुछ नहीं कहा. मैं रात होने का इंतज़ार करने लगा. मैं मन ही मन बहुत खुश था कि अब तो एक जवान कॉलेज गर्ल की चुत घर में ही मिलेगी … वो भी बिल्कुल फ्री में.

    आख़िर वो टाइम आ ही गया, जब रात को दस बज गए. इन दिनों सर्दियों का मौसम था, तो सब लोग जल्दी ही सो गए थे. मैं अपने रूम से निकला और बहन के रूम में गया. मैंने देखा कि वे दोनों बहनें सो रही हैं. जब मैं पास में गया, तो पागल ही हो गया. मैंने देखा कि मेरी बहन की सलवार खुली है और उसने अपनी चुत पर हाथ रखा हुआ है.

    आह क्या मस्त चुत थी … एकदम साफ और प्यारी सी. उसकी सलवार पर पानी भी निकला हुआ पड़ा था. मैं देख कर खुश हो गया था. शायद वो बस अभी अभी ही अपनी चुत में उंगली हिला कर सोई थी. उसकी चुत के पानी से सलवार अभी गीली थी.

    मैंने पहले तो धीरे से सलवार नीचे की और उसकी चुत का सारा पानी पिया. उसकी चुत के पानी स्वाद बड़ा मस्त था. उसे चाट कर मैं बहुत मस्त फील कर रहा था. क्योंकि आज मुझे कोई डर नहीं था. बस इतना सा मसला था कि छोटी वाली बहन ना जाग जाए.

    कुछ देर के बाद बाद मैंने उसकी सलवार पूरी तरह से निकाल दी और एक हाथ को उसकी नंगी टांगों पर फेरने लगा.

    आह उम्म्मह क्या मज़ा आ रहा था यार!

    इसके बाद मैंने ब्रा से अपनी बहन के चूचे बाहर निकाले और देखने लगा. सच में मेरी बहन के चूचे बड़े रसीले थे … एकदम गोल और भरे हुए. एकदम बड़ी साइज़ की गेंद के जैसे मम्मों को देख कर मेरा लंड टनटना उठा.

    नीचे उसकी चुत पूरी तरह से खुली थी. मैंने उसकी चुत में उंगली डाली, तो मुझे पता ही नहीं चल रहा था कि कितनी बड़ी है. आख़िर वो पांच लड़कों के लंड से जो चुदवा चुकी थी.

    जब मैंने उसके होंठों पर किस करना शुरू किया, तो वो जाग गई और खड़ी हो गई. पूरी नंगी क्या मस्त रांड लग रही थी. उसकी टाइट गांड देख कर मुझे बड़ा मजा आ रहा था.

    वो बोली- भाई ये क्या कर रहे हो?
    मैंने बोला- चल नाटक मत कर … मेरे लंड को मुँह में ले ले.
    वो बोली- मैं अभी पापा को बोलती हूँ.
    मैं बोला- अच्छा जानू … पहले ये भी देख लो.

    जैसे ही मैंने उसे उसकी चुदाई की वीडियो दिखाई, तो जैसे उसको सांप सूंघ गया.
    वो मुँह लटका कर बैठ गई और बोली- इसमें मेरी गलती नहीं है.

    मैंने कहा- तो मैं भी कुछ नहीं बोल रहा हूँ … मुझे क्यों मना कर रही है … मैं भी किसी को ये फिल्म नहीं दिखाने वाला हूँ.
    वो बोलने लगी- तुम बड़े भाई हो … मुझे शर्म आती है.
    मैंने कहा- सुन तू ये समझ कर लंड चूस ले … जैसे वो लड़के तुझे चोदते हैं, वैसे ही में हूँ.

    आख़िर कुछ देर बाद वो मान ही गई. वो हंस कर बोली- चलो आज एक लंड और ठीक …
    उसने ये कहते हुए बहुत तेज़ी से मेरे लंड को अपने मुँह में भर लिया और चूसने लगी.

    मेरे मुँह से ‘अहह उसस्स अम्म्म्म … ऊहह..’ की मस्त आवाज़ निकलने लगी थीं. पहली बार में तो मैंने उसके मुँह में ही पानी निकाल दिया.

    फिर दस मिनट बाद मैंने उसकी टांगें फैला दीं और एक उंगली चुत में डाल कर चुत चाटने लगा.
    अब उसके मुँह से भी ‘आह उउह … सस्स्सीई भाईजान..’ की आवाजें आने लगी थीं.

    हिना बोली- भाईजान … अब और मत सताओ … जल्दी से अपनी बहन की चुत में लंड पेल दो … वरना ये रंडी मर जाएगी भाई … जल्दी अन्दर करो.
    उसने चुत को फैला दिया और मैंने बिना सोचे पूरा का पूरा लंड चुत में पेल दिया.

    ओफ … यार क्या मस्ती आ रही थी … बस कुछ ना पूछो. मैं ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने लगा. मेरी बहन को भी मज़ा आ रहा था. मेरे मुँह में उसके मम्मे थे. मैं बीस मिनट में उसकी चुत में ही झड़ गया और मेरी बहन का पानी भी निकल गया. उसका पानी मैंने अपने मुँह में ले लिया.

    मैंने उस रात में 4 बार अपनी सग़ी बहन को चोदा और उसकी मखमली गांड भी चाटी.

    अब मैं उसकी रोज़ चुदाई करता हूँ. आज तक इतना मज़ा तो मुझे अपनी गर्लफ्रेंड को चोदने में भी कभी नहीं आया.

    मेरी बहनो, सोचो मत … भाईजान को पटाओ और उनका लंड ले लो. मेरे दोस्तो, अगर आपकी बहन भी मस्त है, तो समझो कि आपके पास अनमोल हीरा है. खूब लंड पेलो … घर का माल है चोदो.

  • सेक्स चैट वेबसाइट पर मेरा पहला अनुभव

    मैं आज आपको दिल्ली सेक्स चैट वेबसाइट पर मेरा पहला अनुभव बता रहा हूँ. मेरी भी सेक्स लाइफ एकदम मज़ेदार हो गयी है दिल्ली सेक्स चैट पर अपना समय बिताकर!

    नमस्ते दोस्तो, मेरा नाम निलेश तिवारी है. मैं आज आप लोगों को दिल्ली सेक्स चैट वेबसाइट पर मेरा पहला अनुभव बताने वाला हूँ. दिल्ली सेक्स चैट एक जानी मानी वेबसाइट है जहाँ पर लोग सेक्स का मज़ा लेते हैं.
    मेरी भी सेक्स लाइफ एकदम मज़ेदार हो गयी है दिल्ली सेक्स चैट पर अपना समय बिताकर!
    कैसे?
    कहानी पढ़कर जान लीजिए.

    कुछ दिनों पहले की बात है. मैं दोपहर को अपने बिस्तर पर लेटे सोच रहा था कि मैं 20 साल का हो गया हूँ और मेरी ना तो कोई गर्लफ्रेंड है और ना ही मैंने किसी लड़की को चोदा है.
    दुनिया में लोग आए दिन अपनी और दूसरों की माँ, बहन, बेटी, भाभी को दिन-रात मज़े से चोदते रहते हैं और एक मैं हूँ जिसे कोई भी लड़की घास नहीं डालती.

    मुझमें कुछ कमी नहीं है. तक़लीफ़ यह है कि ये साली लड़कियां बहुत भाव खाती हैं. इन पर पैसे खर्च करो, इनकी बकवास बातें सुनो, इनके काम करो. इतना सब कुछ करने के बाद इस बात की कोई गांरटी नहीं हैं कि ये हमें चोदने देंगी.

    ऐसे ही सोचते-सोचते मेरे दिमाग में विचार आया कि क्यों ना इंटरनेट में सेक्स लाइफ के मज़े लेने की तरकीब पता करूं. 20-25 मिनट इंटरनेट सर्फिंग करने के बाद पता चला कि लाइव सेक्स चैट से सेक्स का मज़ा घर बैठे ले सकते हैं.
    लाइव सेक्स चैट पर खूबसूरत लड़कियां और महिलायें अपने बातों सें और अंग प्रदर्शन से मर्दों के लंड को खड़ा करतीं है.

    मैंने काफ़ी सारी वेबसाइट में से दिल्ली सेक्स चैट को चुना और अपना नसीब आज़माया. वैसे भी मैं लड़कियों की नंगी तस्वीरें देखते मुठ मारकर थक गया था. अब वक़्त था उनसे गंदी बातें और मस्ती करने का.

    दिल्ली सेक्स चैट के वेबसाइट पर जाते ही इतनी सारी सुंदर लड़कियों के प्रोफाइल देखकर मेरा शरीर गर्म होने लगा. वेबसाइट पर एक से एक छमिया जिस में से कुछ ने ब्रा-पेंटी पहनी थी. कुछ ऊपर से नंगी थी और कुछ अपने गांड का छेद दिखाते हुए.

    मैंने बिना कोई देरी किए दिल्ली सेक्स चैट पर अपना अकाउंट बना दिया. मेरा लंड तो सिर्फ़ लड़कियों का प्रोफाइल देखकर ही खड़ा हो गया. मुझें इस बार सिर्फ़ तस्वीर देखकर मूठ नहीं मारनी था. इसलिए मैंने अपने लंड को हाथ ही नहीं लगाया.

    अब रास्ता बिलकुल साफ़ था क्योंकि मेरे पिताजी ऑफ़िस से रात दस बजे तक ही आते हैं और मेरी माँ स्कूल टीचर हैं जो शाम को घर आती हैं.

    मैंने बेडरूम का पर्दा लगा दिया और घर के मुख्य दरवाज़े की कुंडी लगा दी ताकि माँ या पिताजी में से अगर आज कोई घर जल्दी आ जाए तो किसी से भी दरवाज़ा चाबी से ना खुले.
    मैं नहीं चाहता था कि माँ पिताजी की नज़रों में मैं गिर जाऊं और वे मेरी आजादी छीन लें.
    वैसे भी सेक्स का मज़ा आराम से और बिना किसी चिंता के लेना चाहिए ना कि जल्दबाजी में डर डर कर!

    सभी चीज़ों का ध्यान मैंने रखा था ताकि लाइव सेक्स चैट करतें समय कोई दिक्कत ना हो.

    दिल्ली सेक्स चैट के वेबसाइट पर मैं सेक्सी लड़की और भाभियों का प्रोफाइल देख रहा था और सोच रहा था कि इनमें से किसे चुनूं.
    मैं कुछ सालों सें अपनी माँ को गंदी नज़रों सें देखने लगा था. इसलिए सोचा कि कोई भाभी से सेक्स चैट करूं जिसका फिगर मेरी मोटी गांड वाली माँ जैसा हैं. मुझे ज़्यादा देर नहीं लगी ऐसी भाभी ढूंढ़ने में जिसे देखकर मुझें मेरीं माँ याद आती हो.

    मुझे एक भाभी मिली जिसका नाम निकिता है. उसका प्रोफाइल चुनकर मैं पेमेंट मोड की तरफ बढ़ा. मैंने XXX वीडियो वाला सेक्स चैट चुना और पेमेंट देकर भाभी को बुक किया.

    दिल्ली सेक्स चैट पर मेरा पहला लाइव सेक्स चैट सेशन शुरू हो गया; स्क्रीन पर थी नॉटी निकिता भाभी. गोर रंग की भरे बदन वाली निकिता भाभी ने गुलाबी रंग की साड़ी पहनी थी और सफ़ेद रंग का ब्लाउज जिसका एक ही बटन लगा हुआ था.

    निकिता भाभी का फिगर मेरी माँ जैसा ही था- भूरा रंग, बड़े स्तन, मोटी कमर, उभरी हुई गांड और मोटे जांघ. निकिता भाभी ने सुहागरात वाला माहौल बनाया हुआ था लेकिन मुझे तो उनको अपनी माँ बनाकर उनके साथ कामुक आनंद लेनी थी. मैंने अपने लंड पे नारियल का तेल लगाकर मालिश की और अपनी माँ को याद करते हुए मूड बनाया.

    निकिता भाभी- हेलो जानेमन, बताओ अपनी फरमाइश. मेरी चूत का पानी किस तरह निकालना चाहोगे तुम? (अपनी चूत को रगड़ते हुए).

    मैं- भाभी आप तो बहुत सेक्सी लग रही हो. आपको देखकर मुझे मेरी बड़ी गांड वाली माँ की याद आती है. मेरी माँ को बाथरूम में नहाते देख मैंने कई बार मुठ मारी है. असल जिंदगी में नहीं तो आप को ही मेरी माँ समझ कर आपका पेशाब निकाल दूंगा. चलो एक रोल-प्ले गेम खेलते है.

    निकिता भाभी- तो राजा बेटा को अपनी माँ के साथ मस्ती करनी है. मुझे भी रोल-प्ले गेम खेलना पसंद है; बताओ क्या करना है?

    मैं- आपकी जांघों में दर्द है और आप मुझे बैडरूम में बुलाती है आपकी मालिश करने के लिए. अपने बेटे के हाथों से मालिश करवाते समय आप गर्म हो जाती हैं. आप अपने बेटे के साथ थोड़ी कामुक मस्ती करने की सोचती है. बातें करते हुए आप कल रात वाली चुदाई के बारे में बोलने लगती हैं. ये सब बोलते वक़्त आप उत्तेजित होकर गैर मर्दों के साथ आपकी चुदाई के बारे में बताती हैं. यहीं से माँ-बेटे की चुदाई शुरू हो जाती है.

    निकिता भाभी ने इशारा कर दिया कि उनको खेल समझ आ गया है. वो बिस्तर पर अपनी साड़ी ठीक करके लेट जाती है. उत्तेजना की वजह से मुझे भी गंदी मस्ती करने की हिम्मत आ जाती है. अपनी माँ के साथ हकीकत में नहीं तो किसी दूसरी औरत को अपनी माँ बनाकर अपनी हवस मिटाऊंगा.

    निकिता भाभी- अरे नीलेश बेटा, ज़रा बैडरूम में आना तो!

    मैं- क्या हुआ माँ? कल रात को भी बैडरूम से तुम्हारी आवाज़ आ रही थी, तुम ठीक तो हो ना?

    निकिता भाभी- मेरी जांघों में दर्द हो रहा है, ज़रा मालिश कर देना तो. रात भर सोई नहीं हूँ मैं, तू भी रात भर मेरी आवाज़ सुनकर जाग रहा था? (मुस्कुराते हुए)

    निकिता भाभी साड़ी को अपने जांघों तक उठाती है और अपने पैर थोड़ा सा फैला लेती है. मैं जल्दी नहीं झड़ना चाहता था इसलिए मैंने अपना लंड हिलाना बंद कर दिया. फिर निकिता भाभी अपने हाथों से अपने जांघों को सहलाने लगी. वो अपने हाथ को चूत के हिस्से के बेहद नज़दीक ले जा रही थी.

    – मैं कैसे सोता माँ? आवाज़ ही कुछ ऐसी आ रही थी कि मुझे फिर नींद नहीं आई. (आँख मारते हुए)

    निकिता भाभी- आह! तेरे मालिश से तो मुझे कुछ अजीब सा लग रहा है. मेरी जांघों तक ही मालिश करना, मैंने अंदर कुछ पहना नहीं है. नहीं तो तू जोश में आकर मेरी चूत में उंगली डाल देगा.

    मैं- आपकी चूत से ही तो मैं निकला हूँ. क्या उस पर मेरा भी हक़ नहीं बनता?

    निकिता भाभी- छी नालायक़!
    फिर हंसती हुई- अपनी माँ के साथ कोई ऐसे बात करता है भला? वैसे तू हक़ की बात मत कर, तेरे बाप ने अपना हक़ मेरी चूत पर कल सारी रात जताया है. तेरे बाप के लंड पे पूरी रात उछल-उछल कर मेरी कमर टूट गई. रात को अचानक उसका मूड बन गया और मुझे अपने ऊपर चढ़ाकर मेरी गांड मसलने लगा. मेरे स्तनों को ऐसे चूसा कि कभी चूसने मिला ही ना हो. तू मेरे स्तनों की भी मालिश कर दे ज़रा. तू मत चूसना; तूने अपने हिस्से का दूध पी लिया है.

    निकिता भाभी ने अपना साड़ी का पल्लू उतारा और अपना ब्लाउज खोलकर अपने भूरे, पपीते जैसे आकार वाले स्तनों के दर्शन दे दिए. उन्होंने अपने हाथों से अपने स्तनों को दबाया और मुझे चिढ़ाया. मैंने अपने माँ की वैसी चूचियाँ जब वो नहाती थी तब देकही है, मेरा मन करता था कि उसे वहीं जाकर पीछे से दबोच लूं.

    निकिता भाभी- उम्! तू कितने अच्छे से मेरी चूचियों की मालिश कर रहा है. और एक तेरा बाप है, कुत्ते को हर वक़्त इन्हें दबोचकर काटनी होती है. देख अभी भी मेरी चूची लाल है. चल तू अब इतने अच्छे से मालिश कर ही रहा है तो मेरी चूत की भी मालिश कर दे. अपनी उंगली डालकर अच्छे से सहला मेरी चूत को.
    फिर हंसती हुई बोली- ध्यान रख कि तू अपना लंड ना घुसेड़ दे.

    निकिता भाभी ने अपनी साड़ी पूरी उठा दी. उसकी काले रंग वाली बालों से भरी चूत देखकर मैं अपने लंड को जोर से हिलाने लगा. मेरी माँ की भी चूत ऐसी ही दिखती है. वो नहाते वक़्त अपने पैर फैलाती है और अपनी ऊँगली से चूत को साफ़ करती है.

    मैं- माँ तेरी चूत को देखकर ऐसा लगता है कि पापा तुम्हारी रोज़ रात को चुदाई करते हैं. लगता है कि पापा तुम्हारी गांड में भी अपना लंड घुसाते हैं. इसमें मेरी दो उँगलियाँ आसानी से घुस जायेंगी.

    निकिता भाभी- तेरा बाप तो क्या हमारा पड़ोसी भी मेरी चुदाई करता है. बेटा अब जो मैं तुझे बताने जा रही हूँ वो बात तेरे पापा को मत बताना. नहीं तो मेरी आजादी छीन ली जायेगी. तेरे पापा को कभी कभार ही सेक्स का मूड आता हैं और मेरी प्यास तो रोज़ बुझनी ज़रूरी है नहीं तो मैं इधर उधर मुँह मार लेती हूँ.

    निकिता भाभी की बातें सुनकर मेरा लंड तो और कड़क हो गया. अपनी माँ के बारे में ऐसा सुनकर मेरी हवस को राहत मिली. अब से मैं अपनी माँ के बारे में ऐसे ही विचार लाऊँगा. दिल्ली सेक्स चैट की भाभियाँ वाकई में कमाल की हैं दोस्तो.

    निकिता भाभी- सुबह जब मैं हमारे कॉमन बाथरूम में नहाने जाती हूँ, तब हमारा पड़ोसी भी मेरे साथ बाथरूम में घुस जाता है. मेरी मैक्सी उतारकर सबसे पहले मेरी चूतड़ों को फैलाकर मेरी गांड के छेद में अपनी ज़ुबान डालकर मुझे मस्त कर देता है. फिर उसके बाद मेरी बालों से भरी चूत को अपने मुंह में डालकर भीगा देता है. मेरी चीखें न निकलें इसलिए अपना हाथ मेरे मुँह पर रखता है.
    इतने में तो मेरे चूत से एक बार पानी निकल जाता है. फिर मुझे मेरी जांघों से उठाकर उसके लंड पे उछालता रहता है. ऐसे मैं रोज़ उसके साथ सुबह सेक्स करती हूँ.

    एक बार तो वो अपने भाई को भी मेरी चुदाई करने ले आया. दोनों मिलकर सुबह सुबह मेरे शरीर के हर एक छेद को चाटकर साफ़ करने लगे. फिर मुझे अपने बीच में दबाकर बारी बारी मेरी चूत और गांड में अपना लंड घुसाने लगे.

    उस दिन तो मेरी चूत से पेशाब निकल गया था ऐसी चुदाई की थी.

    तू चाहता है कि तेरी माँ ऐसे ही किसी गैर मर्दों के साथ सेक्स करती रहे? क्या तू अपनी माँ को अपनी रंडी नहीं बना सकता? घुसा अपना लौड़ा मेरी चूत में और कर मेरी चुदाई. जब मेरे ही घर में जवान लौड़ा है तो में क्यूँ किसी दूसरे का लौड़ा चुसूं, आह! निकाल मेरा पेशाब, उफ़! ऐसी ही घुसते रेह और फाड़ दे मेरी चूत.

    निकिता भाभी ने एक नकली लौड़ा यानि डिलडो निकाला और उसे वो अपनी चूत में घुसाने लगी. उसने अपने दोनों पैर उठाकर फैला दिए और अपनी गांड में उंगली भी डालने लगी.

    मैं इधर अपने लंड को ज़ोर जोर से हिला रहा था. मेरा तो थोड़ी देर में झड़ने को आ गया था. मेरे से और रहा नहीं गया क्यूंकि ऐसा दृश्य तो मैंने कभी नहीं देखा था. मैंने अपना लंड का माल निकाल दिया. वहाँ पर निकिता भाभी नकली लंड को अपनी गांड में घुस रही थी.

    मैं- अरे भाभी मेरे लंड का पानी तो निकल गया आपकी गांड को देखकर, उफ़ मज़ा आ गया.

    निकिता भाभी- ये तुम्हारा पहला सेक्स चैट सेशन है इसलिए तुम इतनी जल्दी झड़ गए. मेरे साथ कुछ और समय बिताओ फिर देखो हम घंटों तक मस्ती करते रहेंगे. क्या पता शायद तुम अपनी असली माँ की भी चुदाई कर दो (आँख मारते हुए).

    मैं- सही कहा भाभी आपने. मैं अब रोज़ आपसे सेक्स चैट करूँगा. आप मुझे लड़की को पटाने के तरीके बताना फिर उसे मैं यहाँ लाकर आपके सामने उसकी गांड में अपना लंड घुसाउँगा. चलो तो फिर कल मिलते हैं भाभी.

    निकिता भाभी- बिल्कुल, कल मिलेंगे जानेमन. (अपनी गांड का छेड दिखाकर मुझे चिढ़ाते हुए).

    दोस्तो, ये था दिल्ली सेक्स चैट वेबसाइट पर मेरा पहला अनुभव.

    उस दिन के बाद से मैंने कई सेक्सी लड़की और कामुक भाभियों को पटाया है. अब मैं तो हर रोज़ ऐश करता रहता हूँ. आप लोग भी दिल्ली सेक्स चैट वेबसाइट पर जाकर सेक्स के मज़े लीजिये. एक बात और, लड़की और भाभियों की लिस्ट बनाना नहीं तो आप भूल जाओगे कि आपने कितनी आइटम लड़कियों भाभियों को पटाया है.

  • गर्लफ्रेंड की पहली चुदाई मौसी के कमरे में

    यंग गर्ल वेट पुसी स्टोरी में मेरी दोस्ती एक लड़की से हुई. हम दोनों सेक्स करना चाहते थे पर मौक़ा नहीं मिल रहा था. मैं उसे अपनी मौसी के घर ले गया.

    नमस्ते दोस्तो, मेरा नाम शिवराज है और मैं विदिशा, एमपी का रहने वाला हूँ.
    मैं मध्यमवर्गीय परिवार से हूँ.

    मैंने बी.एस.सी. कंप्यूटर से ग्रेजुएशन किया हुआ है और कॉम्पिटिशन एग्ज़ाम की तैयारी कर रहा हूँ.

    पढ़ाई के साथ ही बाइक के शोरूम पर कंप्यूटर ऑपरेटर की जॉब भी कर रहा हूँ.

    मैं साढ़े पांच फीट का हट्टा-कट्टा नौजवान हूँ.
    मेरा औज़ार 5 इंच का है तथा ये 2.5 इंच मोटा है.

    यह यंग गर्ल वेट पुसी स्टोरी मेरी गर्लफ्रेंड भारती की है.
    भारती से मेरी फ्रेंडशिप 4 साल पहले फेसबुक पर हुई थी.

    जब भी वह अपनी फोटो अपलोड करती, तो मैं उसकी बहुत तारीफ़ करता और उसकी फोटो पर अच्छे-अच्छे कमेंट करता.

    इस तरह वह मुझसे प्रभावित होने लगी.
    भारती का रंग गेहुंआ जरूर है लेकिन फेस कट बहुत खूबसूरत है.

    उसके घर में उसके मां-पापा, भाई-भाभी और उनकी एक लड़की थी जो कि अभी एक साल की थी.

    कुछ ही समय में हमारी फ्रेंडशिप प्यार में बदल गई और हम व्हाट्सएप पर भी बात करने लगे.
    फिर धीरे-धीरे कॉल पर प्यार भरी बातें करने लगे.

    भारती का फिगर 30-28-32 का है.
    उसके चूचे ज्यादा बड़े नहीं, पर एकदम मस्त और सख्त हैं.

    उसके दोनों चूतड़ एकदम गोल, पावभाजी वाले बन-रोटी की तरह हैं.
    उसकी गांड मसलने में खूब मजा आता है.

    भारती बी.टेक प्रथम वर्ष में अध्ययनरत है और रेंट पर भोपाल शहर में रहकर पढ़ाई कर रही थी.

    जल्द ही हमने मिलने का प्लान बनाया और मैं उससे मिलने भोपाल पहुंच गया.
    भोपाल में हम घूमे-फिरे, बहुत मौज-मस्ती की.

    दोपहर को मैंने उसे अपनी मौसी के रूम पर चलने को कहा जो कि भोपाल में ही अपने पति के साथ किराए के रूम पर रह रही थीं.
    मेरी मौसी से सैटिंग है, वह एक अलग सेक्स कहानी में लिख कर बताऊंगा कि मौसी मेरे साथ कैसे खुली थीं.

    भारती मान गई और मेरे साथ मौसी के रूम पर चली आई.
    मौसी ने हमारे लिए चाय बनाई और थोड़ी देर बाद मौसी कुछ सामान लाने का बोलकर बाज़ार चली गईं.

    यह मैंने मौसी को पहले ही बता दिया था कि मैं उसे लेकर जब आऊं, तब आप एक-दो घंटे के लिए कहीं चली जाना और उन्होंने ठीक वैसा ही किया.

    मौसा जी तो शाम से पहले अपने काम से लौटने वाले नहीं थे तो मैं बेफिक्र था.

    मौसी के जाते ही मैंने उसे अपनी बांहों में भर लिया और धीरे-धीरे मेरा एक हाथ उसके स्तनों पर आ गया.

    मैं एक हाथ से उसकी चूचियों को व दूसरे हाथ से उसकी पीठ को सहलाने लगा.
    उसने सफेद कलर का टॉप पहन रखा था.

    मैंने धीरे-धीरे करके अपना हाथ टॉप के नीचे से अन्दर डाल दिया और ब्रा के ऊपर से उसके एक स्तन को सहलाने लगा.
    वह मस्त होने लगी, तो मैंने धीरे से उसका टॉप निकाल दिया.

    उसने अपने हाथों को ऊपर करके टॉप निकालने में मेरी मदद की.
    वह खुद चुदने के मूड में आ गई थी तो मैं उसे मौसी के बेड पर ले गया.

    उधर मैंने फिर से उसके साथ चूमाचाटी शुरू कर दी और अपने दोनों हाथों से उसके चूचों को ब्रा के ऊपर से दबाने लगा.
    उसने सफेद कलर की ब्रा पहन रखी थी.

    फिर उसे किस करते हुए ही मैं एक हाथ नीचे ले गया और उसकी सफेद लैगिंग्स के ऊपर से उसकी चूत को सहलाने लगा.
    उसने अपनी टांगें फैला दीं और चुत की रगड़ाई का मजा लेने लगी.

    यह देख कर मैंने उसकी लैगिंग्स को धीरे से नीचे को सरकाते हुए टांगों से बाहर निकाल दिया.
    उसने अपनी गांड उठाकर लैगिंग्स को निकालने में मेरी मदद की.

    लैगिंग्स के नीचे उसने अन्दर ब्लैक कलर की पैंटी पहन रखी थी जो हल्की सी भीग गई थी.
    मैं पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत सहलाने लगा.

    इस सब में वह मेरा पूरा साथ दे रही थी और बहुत गर्म हो गई थी.
    फिर मैंने उसके होंठों को अपने होंठों से अलग किया और उसकी ब्रा को ऊपर करके उसके एक चूचे को मुँह में भर लिया और दूसरे दूध को मसलने लगा.

    वह आह आह करने लगी और जल्दी ही उसने खुद ही अपनी ब्रा निकाल दी.
    जब वह अपनी ब्रा निकाल रही थी, उसी वक्त मैंने उसकी पैंटी निकाल दी.

    उसकी चूत पर घुंघराले काले बाल थे जो कि ज्यादा बड़े नहीं थे, शायद उसने दो हफ्ते पहले ही साफ किए थे.
    फिर उसने मेरे कान में कहा- पहले बताया होता कि यह करने वाले हो तो मैं मैदान साफ करके आती!

    मैंने हंस कर कहा- कोई बात नहीं जान, आज तेरी घुंघराली झाड़ियों में लंड घुसेड़ कर मजा ले लूँगा, तुम अगली बार मैदान चमका कर आ जाना!
    यह सुनकर वह धीरे से हंस दी.

    अब मैंने उसके दोनों पैरों को फैलाया और उसकी टांगों के बीच में आ गया.
    अपने लंड को मैं उसकी चूत पर रगड़ते हुए किस करने लगा.
    मैं अपने दोनों हाथों से उसके मम्मों को जोर-जोर से मसलने लगा.

    वह बहुत गर्म हो गई थी और मेरे कूल्हों पर हाथ रखकर अपनी चूत पर लंड को दबाने लगी थी.
    मैंने एक हाथ नीचे ले जाकर लंड को उसकी चूत पर रखा और जोर का धक्का लगाया.

    चूत बहुत गीली होने के कारण लंड का टोपा अन्दर चला गया.
    उसके होंठ मेरे होंठों में दबे होने के कारण उसकी चीख दब कर रह गई, वरना वह बहुत जोर से चिल्ला देती.

    लौड़े की नोक चुत में घुसने से वह बहुत मचलने लगी और मुझे अपने हाथों से धकेलने की कोशिश करने लगी.
    पर मैंने उसे जकड़ रखा था.
    उसकी आंखों से आंसू बह निकले.

    मैं थोड़ी देर ऐसे ही रुका रहा.

    फिर एक और जोर के धक्के के साथ पूरा लंड मैंने उसकी चूत में पेल दिया.
    उसकी चूत फट चुकी थी और उससे खून आने लगा था जो कि मुझे मेरे लंड पर गर्म महसूस हुआ.

    वह लगभग बेहोश हो चुकी थी.
    मैं ऐसे ही रुक गया और उसे किस करने लगा.

    धीरे-धीरे उसे होश आने लगा और अब वह थोड़ा शांत हो गई थी.
    मैं धीरे-धीरे लंड को अन्दर-बाहर करने लगा.

    वह अपने मुँह से कामुक आवाज़ निकालने लगी थी.

    उसका मीठा दर्द अब मादक सिसकारियों में बदल चुका था और शायद उसे भी अब मज़ा आने लगा था.
    वह धीरे-धीरे ‘अह … उह …’ की आवाज़ें निकालने लगी.

    करीब आधे घंटे तक मस्त चुदाई चली.
    इस बीच में वह दो बार झड़ चुकी थी और अब मैं भी झड़ने वाला था.

    लंड का पानी चुत के अन्दर ना निकले इसलिए मैंने तुरंत अपने लंड को झटके से बाहर निकाल लिया.

    मैं आपको बताना भूल गया कि मेरे लंड का टोपा थोड़ा बड़ा है इसलिए जैसे ही लंड बाहर निकाला, एक पक्क की आवाज़ हुई और उसकी चीख निकल गई!
    वह बोली- अह … शिबु मर गई … ऐसे कोई निकालता है क्या!

    उसे थोड़ा दर्द होने लगा.
    अब तक करीब डेढ़ घंटा बीत गया था तो हम दोनों ने जल्दी-जल्दी अपने कपड़े उठाए और वह कपड़े लेकर अपनी चूत को साफ करने के लिए बाथरूम में चली गई.

    वह कुछ पल बाद बाहर आ गई.
    अब तक मैंने भी अपने कपड़े पहन लिए थे.

    थोड़ी देर में मौसी आ गईं और हम लोग नाश्ता करके निकल गए.
    रास्ते में उसने मुझसे कहा- मुझे चूत में बहुत जलन हो रही है और शायद खून भी आ रहा है.

    मैंने मेडिकल शॉप से पेन किलर खरीद कर उसे दे दिया.
    फिर उसके रूम के पास आकर मैं उसे सड़क पर विदा करके अपने घर को निकल गया.

    उसके बाद तो हम रोज़ रात को सेक्स चैट करने लगे और व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर एक-दूसरे को अपने-अपने अंगों का प्रदर्शन करने लगे.
    वह अलग-अलग रंग व डिज़ाइन की ब्रा पहन कर मुझे फोटो भेजा करती थी और मैं उन फोटोज़ को अपने पास मेमोरी बना कर रख लेता था.

    वह साड़ी वगैरह पहन कर भी अपनी फोटो भेजा करती थी.
    मैं उसे अपनी चूत और गांड में उंगली करने को कहता तो वह मेरी खुशी के लिए दर्द होते हुए भी करती थी.

    उसकी गांड एकदम कुंवारी थी और उसका छेद बहुत छोटा था इसलिए उसे बहुत दर्द होता था.
    फिर भी वह मेरी खुशी के लिए यह सब करती थी.

    एक बार जब मैं उससे नाराज़ हो गया तो उसने मुझे एक वीडियो बनाकर भेजी जिसमें वह टूथब्रश को अपनी गांड में डालकर अन्दर-बाहर कर रही थी.

    गांड में टूथब्रश करने के साथ ही वह बोली- यह सब मैं आपकी खुशी के लिए कर रही हूँ, अब अगर आप हंसे नहीं तो मैं अपनी जान दे दूँगी!
    मैंने उसे माफ़ कर दिया और हम फिर से बात करने लगे.

    फिर कुछ दिनों बाद उसके भाई की बेटी यानि उसकी भतीजी का बर्थडे था.
    तो उसने मुझे अपने घर पर इनवाइट किया.

    उसने मुझे अपने परिवार से कॉलेज फ्रेंड कहकर मिलवाया और फिर मेरे साथ ही वह मार्केट जाकर केक वगैरह और सजावट का सामान लेकर आई.

    मैंने उसकी भतीजी के लिए साइकिल खरीदी गिफ्ट करने के लिए.
    वह फुसफुसाती हुई बोली- वाह फूफा जी! अपनी भतीजी के लिए गिफ्ट खरीद रहे हो!
    मैं भी हंस दिया.

    हम लोग खरीदी करके वापस उसके गांव वाले घर पहुंच गए.
    वहां बहुत से मेहमान आए हुए थे, जिनमें उसके कजिन्स भी थे.

    सबने मेरी खूब खातिरदारी की और मैंने भी साज-सज्जा में भारती की मदद की.

    फिर वह तैयार होने के लिए चली गई और लगभग एक घंटे बाद वह तैयार होकर आई तो मैं उसे देखता ही रह गया.

    उसने गांव के हिसाब से चूड़ीदार कुर्ता और लैगिंग्स पहन रखा था जो कि प्याजी कलर का था और सफेद लैगिंग्स थी.

    मैंने उसे लोगों से नज़रें चुराकर एक फ्लाइंग किस दी.
    उसने भी लोगों से नज़रें चुराते हुए मेरे किस का जवाब दिया.
    अपने होठों को चुम्मा बनाकर मुझे इशारा किया.

    फिर केक कटिंग हुई और मैंने भतीजी को साइकिल दी.
    भारती और मैंने भतीजी के साथ फोटो खिंचाया.

    वह मेरे एकदम पास खड़ी थी तो मैंने मौका देखकर उससे पूछा कि किस रंग की ब्रा-पैंटी पहनी तो उसने धीरे से फुसफुसाते हुए कहा- रेड कलर का सैट!

    मेरा मन हुआ कि अभी उसके कपड़े उतरवा कर उसे रेड कलर के 2 पीस में देखूँ, पर वहां बहुत मेहमान थे तो यह संभव नहीं था.

    हम लोगों ने साथ में खाना खाया और डीजे पर बहुत डांस किया.
    फिर मैं थक कर साइड में खड़ा हो गया.

    तब देखा कि वह एक लड़के के साथ नाच रही थी तो मैंने उसे घूर कर देखा, जिससे वह डर गई और धीरे से एक कान पकड़कर माफी मांगने लगी और मेरे पास आकर खड़ी हो गई.

    मैंने स्माइल की और उसकी मम्मी का डांस देखने लगा.
    उसकी मम्मी की गांड भी बहुत बड़ी थी जो कि वह मटका-मटका कर नाच रही थी.

    तकरीबन रात के 11:00 बजे मैंने उसके पापा से घर जाने की आज्ञा ली तो उन्होंने मुझे जाने से इनकार कर दिया और कहा- बेटा, रात ज्यादा हो गई है, आज रात यहीं रुक जाओ, हमें भी अच्छा लगेगा.
    फिर भारती और भारती के मम्मी-पापा के कहने पर मैं वहीं रुक गया और अपने घर पर कह दिया कि मैं कल सुबह आऊंगा, लेट हो जाने के कारण मैं आज अपने दोस्त के घर रुक गया हूँ.

    मेहमान ज्यादा होने के कारण हम लोग हॉल में सोए.
    मेरे साइड में उसका भाई सोया हुआ था और लेफ्ट साइड में भारती थोड़ी दूरी पर अपना बिस्तर बिछाकर सोई हुई थी.
    उसके साथ उसकी बुआ की लड़की भी सोई हुई थी.

    रात को करीबन 3:00 बजे मेरी नींद खुली, तो मैंने देखा सभी लोग गहरी नींद में सोए हुए थे.
    मैंने धीरे से अपना हाथ भारती की ओर बढ़ाया और उसके कुर्ते को ऊपर उठाते हुए उसकी लैगिंग्स और पैंटी के अन्दर हाथ डाल दिया और उसकी चूत पर चलाने लगा.

    शायद वह जाग गई थी पर कोई रिएक्शन नहीं दे रही थी और मज़ा ले रही थी.
    फिर धीरे-धीरे मैंने एक उंगली उसकी चूत के अन्दर डालकर अन्दर-बाहर करना शुरू कर दिया.

    यह सब मैं उसके भाई पर ध्यान रखते हुए कर रहा था.
    बुआ की लड़की की वजह से ज्यादा रिस्क नहीं कर रही थी, बस मेरे हाथ पर अपना हाथ रखे हुई थी.

    फिर धीरे-धीरे मैंने दूसरी उंगली भी उसकी चूत में डाल दी और यंग गर्ल वेट पुसी के अन्दर-बाहर करने लगा.
    उसने अपनी टांगें थोड़ी फैला ली थी. अब उसकी चूत बहुत गीली हो चुकी थी और पानी छोड़ने लगी.

    फिर मैं उसकी पैंटी से अपना हाथ निकाल लिया और हाथ को ऊपर ले जाकर उसके कुर्ते के गले से अन्दर डालने लगा और उसके दूध सहलाने लगा.

    थोड़ी देर बाद मुझे नींद आने लगी तो मैं अपने हाथ उसके स्तन से हटाकर सो गया.

    सुबह जब मैं उठा तो 8:00 बज चुके थे और सभी लोग उठ चुके थे.
    भारती भी उठ चुकी थी और मेरे लिए चाय लेकर आई थी.

    उसी ने मुझे उठाया और मेरे होंठों पर इधर-उधर देखकर किस कर दी और ‘गुड मॉर्निंग!’ कहा.
    फिर मैं 9:00 बजे उसके घर से निकल गया.