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  • सुहागरात पर ससुर ने चोदा

    साथियो, आज मैं आप लोगों को अपनी सुहागरात पर ससुर के साथ चुदाई की कहानी बताने जा रही हूँ.

    मेरी उम्र 20 साल की है.
    मेरी शादी कुछ दिन पहले ही हुई थी.

    हम लोग एक मेहनत मजदूरी करने वाली जनजाति से हैं.
    हमारे यहां शराब और मांस आदि का सेवन सभी लोग करते हैं.

    मेरी पहली सुहागरात मेरे ससुर के साथ हुई थी क्योंकि हमारे यहां रिवाज़ है कि पहली रात घर के मुखिया के साथ सोना पड़ता है.
    वे जैसा बोलते हैं, वैसे करना पड़ता है.

    मेरी शादी हुई और मैं अपने पति के साथ अपनी ससुराल आ गई.
    मेरे घर में मेरी सास नहीं हैं, वे मर चुकी हैं.

    मेरे ससुर पैसे वाले हैं और मैं गरीब घर की थी इसलिए मैं भी खुशी खुशी शादी करने को राजी हो गई थी.

    वहां पर रात को मुझे मेरे ससुर के कमरे में हल्दी वाला दूध देकर ले जाया गया.

    वह कमरा सुहागरात के कमरे के जैसे सज़ा हुआ था.

    मैं अन्दर गई, दूध को रखा और बेड पर बैठ गई.

    तब मैं फर्स्ट नाईट सेक्स के लिए अपने ससुर जी के आने का इंतज़ार करने लगी.

    कुछ देर बाद मेरे ससुर जी कमरे में आए और उन्होंने अन्दर से दरवाज़ा बन्द कर दिया.

    मेरे ससुर की उम्र 50 साल की रही होगी.
    वे दारू पीकर आए हुए थे.

    अन्दर आते ही उन्होंने सबसे पहले मेरा घूँघट उठाया.

    मैंने कहा- पहले दूध पी लीजिए.
    वे बोले- हां, आज तो मैं तुम्हारा दूध पियूंगा!

    मैं सोचने लगी कि ये क्या बोल रहे हैं!

    कुछ देर बाद उन्होंने मेरी साड़ी का पल्लू नीचे कर दिया.

    मैंने गहरे गले का ब्लाउज पहना था. उसमें से मेरे आधे दूध देखते ही वे मानो पागल हो गए.
    उन्होंने एक झटके से मेरी साड़ी निकाल दी.

    अब मैं उनके सामने ब्लाउज और पेटीकोट में थी.

    वे मेरे होंठों को चूसने लगे, काटने लगे, फिर गर्दन पर चूमने लगे.
    मेरी चूत भी गीली होती जा रही थी.

    कुछ देर बाद उन्होंने मेरा पेटीकोट और ब्लाउज भी फाड़ दिया और उन्हें मेरे जिस्म से अलग कर दिया.

    अब मैं अपने ससुर के सामने ब्लैक ब्रा और पैंटी में थी. वे मेरे गोरे बदन को काली ब्रा पैंटी में देखकर पागल हुए जा रहे थे.

    अब मेरे ससुर मेरे मम्मों को ब्रा के ऊपर से ही दबाने लगे और कुछ देर में उन्होंने मेरी ब्रा को भी खींच कर मम्मों से अलग कर दिया.
    ब्रा हटने से मेरे दूध आज़ाद हो गए थे और चूचियां हवा में फुदकने लगी थीं.

    मेरे ससुर मेरी चूचियों को हाथ से मसलने लगे और उन्हें काटने चूसने लगे.

    मेरी चूत पानी छोड़ कर गीली हुई जा रही थी.

    कुछ देर बाद उन्होंने मेरी चूत पर हाथ फेरा और उसकी फांक में उंगली करने लगे.

    मेरी कामुक जवानी देखकर उनका लंड खड़ा हो गया था.
    अब मैंने भी उनके कपड़े निकाल दिए.

    ससुर जी नंगे हुए तो मैंने देखा कि उनका लंड काफी बड़ा था.
    इतना बड़ा और मोटा लौड़ा देख कर मैं उनसे चुदवाने के लिए मरी जा रही थी.

    इधर ससुर जी अपने मुँह से कभी मेरे होंठों को चूसते तो कभी मेरी चूचियों को पीते.
    साथ ही साथ वे मेरी चूत में उंगली कर रहे थे.

    इस सबसे मैं भी पागल हुई जा रही थी.
    मैं बोलने लगी- आआअहह ससुर जी … और पीजिए मेरे दूध आह!

    मेरे ससुर इस तरह बोलने से और मदमस्त होकर मेरे दूध काटने पीने लगे.

    वे धीरे धीरे मेरी नाभि को चाटने लगे और चूत तक आकर पैंटी को चाटने लगे.

    मेरी पैंटी चूत रस से भीगी पड़ी थी.
    वे पैंटी के ऊपर से चूत का रस काटने लगे और अगले कुछ पल बाद उन्होंने मेरी पैंटी को भी फाड़ कर अलग कर दिया.

    अब मैं उनके सामने बिल्कुल नंगी थी.
    ससुर जी मेरी टांगें फैला कर मेरी चूत चाटने लगे.

    मुझे भी अपनी चूत चटवाने में मजा आ रहा था और मैं कमर उठा कर अपने ससुर के मुँह से अपनी चूत चुसवा रही थी.
    कुछ देर तक चूत चाटने के बाद मैं एकदम पागल हो रही थी.

    मैंने कहा- अब और मत तड़पाओ … चोद डालो ससुर जी!

    फिर उन्होंने अपना लौड़ा मेरे मुँह में दे दिया.
    उनके मोटे लंड से तो में साँस भी नहीं ले पा रही थी.

    लेकिन कुछ ही देर बाद मुझे अपने ससुर का लंड चूसने में मज़ा आने लगा था.
    मैं ससुर का लंड चूस रही थी.

    तभी ससुर ने कमरे में रखी हुई देसी दारू की बोतल से शराब को लौड़े पर टपकाना शुरू कर दिया.

    मैं दारू पीती थी, तो मुझे उनके लौड़े से टपकती दारू पीने में मजा आने लगा.

    बहुत देर तक मैं लंड चूसती रही और दारू का स्वाद लेती रही.

    उसके बाद ससुर जी ने मुझे चुदाई की पोजीशन में लिटाया और मेरी चूत में लंड डालने लगे.

    लंड ने चूत में घुसने का रास्ता खीज लिया और सुपारे ने चूत के मुँह पर अपनी पोजीशन सैट कर ली.
    मेरे ससुर ने एक ज़बरदस्त झटका मारा और उनका आधा लंड मेरी चूत को फाड़ते हुए अन्दर चला गया.

    मैं दर्द से चिल्लाने लगी पर उन्हें कहां सुनाई देने वाला था.
    चूंकि मैं भी कुछ दारू की मस्ती में थी तो उनके हैवी लौड़े को झेल गई.

    मैं अभी कसमसा ही रही थी कि मेरे ससुर ने फिर से धक्का दे मारा.
    इस बार उन्होंने अपना पूरा लंड मेरी चूत में ठांस दिया था.

    मेरी चूत फट गई थी और उसमें से रक्त बहने लगा था.
    कुछ देर रुक कर ससुर जी मेरी चूत में धक्के देने लगे.

    कुछ देर तक तो मुझे उनके लौड़े से चुदवाने में दर्द हुआ.
    फिर मज़ा आने लगा.

    अब मैं भी अपनी कमर उठा उठा कर सपने ससुर का साथ देने लगी.
    वे भी मुझे पूरी ताकत से चोदने लगे.

    पूरे कमरे में पच पच की आवाज़ गूंज रही थी.

    मैं बोलने लगी- आह ससुर जी और तेज चोदिए … आह मजा आ रहा है.
    वे बोलने लगे- साली रंडी, तुझे तो मैं रोज नंगी करके दिन रात चोदूंगा. इसलिए तो तुझे अपने बेटे से शादी करवा के घर लाया हूँ! तेरे ऊपर तो कब से मेरी नजर थी.

    मैं भी मस्ती से अपनी गांड उठा उठा कर अपने ससुर से चुद रही थी.
    ससुर अपनी ठरक में बके जा रहा था- साली, जब तक तू मेरे बच्चे को पैदा नहीं करेगी, तब तक तू रोज इसी बिस्तर पर नंगी होकर दिन रात मेरे लौड़े से चुदेगी.

    उनकी ऐसी बात सुन कर मैं और पागल हुई जा रही थी.
    मैंने भी उनको उत्तेजित करते हुए कहा- हां ससुर जी चोदो अपनी इस रंडी को … मां बना दो अपने बच्चे की!

    उनके तेज तेज लाने वाले धक्कों से मैं अब तक दो बार झड़ चुकी थी और मेरी चूत चुद चुद कर पूरी लाल हो गई थी.

    अब मेरे ससुर जी ने मुझे घोड़ी बनाया और पीछे से मुझे पेलने लगे.
    मुझे दर्द हो रहा था पर मजा भी आ रहा था.

    दूसरी तरफ वे नशे में थे तो कुछ सुनने समझने को तैयार ही नहीं थे.

    कुछ देर बाद उन्होंने मुझे घोड़ी बनाए रखा और दारू पिला कर मेरी गांड भी मारी.
    अब तो मेरी चूत और गांड एकदम लाल हो गई थी.

    ससुर जी बड़े पहलवान किस्म के चोदू थे. वे मुझे धकापेल चोदे ही जा रहे थे.

    वे बोल रहे थे- साली रंडी जब तक तू मेरे बच्चों की मां नहीं बनेगी … तब तक दिन रात तू मेरे बिस्तर पर ऐसी ही नंगी रहेगी और ऐसे ही चुदेगी.

    फिर ससुर जी मेरी चूत में झड़ गए और उसके बाद उन्होंने मेरे मम्मों को देसी दारू से नहला कर उन्हें खूब चूसा व काटा.

    वे मेरे निप्पलों से दारू पीने लगे.
    फिर लंड लगा कर मम्मों को चोदने लगे.

    मेरे बूब्स भी एकदम लाल हो गए थे.
    वे अभी भी मेरे दूध चूसे जा रहे थे.

    कुछ देर बाद उन्होंने मुझे फिर से अपनी कुतिया बनाया और मेरी चूत और गांड मारी.
    आधा घंटा तक चोदने के बाद वह मेरी चूत में ही झड़ गए.

    उसके बाद उन्होंने मेरे पूरे जिस्म पर अपनी दारू की बोतल से दारू डालकर मुझे चूसने लगे और मेरे अंगों को चाटने लगे.

    वे अब तक मेरी चूत में दो बार झड़ चुके थे और अब आराम कर रहे थे.

    कुछ देर बाद वे उठे और ग्लास का दूध पीकर मुझे कमरे के एक एक कोने में ले जाकर मेरी चुदाई करने लगे.
    उन्होंने मुझे सोफा, मेज, बेड हर जगह चोदा और हर बार मुझे बुरी तरह से ठोका.

    मैं दर्द के मारे चल और उठ नहीं पा रही थी.
    रात भर अपने ससुर से चुदवाने के बाद हम दोनों सो गए.

    सुबह जब मैं उठी तो ससुर जी भी उठ गए.
    वे मुझे अपनी गोद में लेकर बाथरूम में ले गए और वहां पर फुव्वारे के नीचे मुझे खड़ी करके मेरी चूत और गांड मारी.

    ससुर जी ने मुझे दीवार से सटा कर अपने लंड के ऊपर बैठा कर खूब पेला.
    मुझे भी घोड़ी बन कर चुदवाने में मजा आ रहा था.
    मैं मीठे मजे से चिल्ला रही थी.

    अब वे मुझे नहला कर कमरे में लाए और बिस्तर पर पटक दिया.
    फिर अपने कपड़े पहन कर ससुर जी बाहर चले गए.

    मेरी इतनी ज्यादा ठुकाई हुई थी कि मैं सही से खड़ी भी नहीं हो पा रही थी.
    मैं बेड पर ही नंगी पड़ी थी.

    कुछ देर बाद ससुर जी वापस कमरे में आए और बोले कि तुम्हारे पति को काम आ गया है, वह वापस अपने काम पर चला गया है.

    मेरी ससुराल में मेरे पति और ससुर ही थे.
    पति तो बाहर चले गए थे और ससुर मेरी ले रहे थे.

    शादी के एक महीने हो गए थे.
    मेरी चूत बुरी तरह फट गई थी.

    ससुर जी मुझे दिन रात ठोकते रहते हैं, वे मुझे पूरे घर में कहीं भी पकड़ कर चोद देते हैं.
    रात को छत पर, सीढ़ी पर, किचन में, सोफा पर, बाथरूम में … पूरे घर में एक भी जगह ऐसी नहीं बची है, जहां मैं अपने ससुर के हैवी लंड न चुदी होऊं.

    दिन रात रंडी की तरह बस मेरी चुदाई होती है.
    मैंने अब कपड़े पहनना ही बंद कर दिए हैं.

    ससुर जी भी घर में नंगे ही रहते हैं.

    जब तक एक दिन में अपने ससुर से चार बार न चुद लूँ, मेरा मन खुद नहीं भरता है.
    एक महीने बाद जब मेरा पति घर आया तो उस दिन ससुर ने कहा कि आज घर में पार्टी होगी.

    मैं समझी कि आज मेरा पति मेरी लेगा, इसलिए ससुर जी ऐसा कह रहे हैं.

    वे आज अंग्रेजी दारू की बोतल लाए और मुर्गा लाए.
    मैंने मुर्गा बनाया और अपने पति व ससुर को खाना परोसने लगी.

    उसी वक्त मेरे ससुर ने मुझे खींच कर अपनी गोदी में बिठा लिया और वे मुझे दारू पिलाने लगे.
    मैं भी बिना हील हुज्जत के उनके लंड पर बैठ कर दारू मुर्गा का मजा लेने लगी.

    कुछ देर बाद हम तीनों नशे में धुत्त हो गए और मेरे ससुर ने मुझे नंगी कर दिया.
    ससुर ने कहा- आज तुझे हम बाप बेटे मिल कर चोदेंगे.

    मैं भी उन दोनों के साथ सेक्स का मजा लेने के लिए तैयार हो गई थी.

    ससुर ने मुझे अपने लौड़े के ऊपर बिठाया और मेरी चूत चोदने लगे.
    उसी वक्त मेरे पति ने मेरी गांड में लंड पेल दिया और वे दोनों मिल कर मेरी सैंडविच चुदाई करने लगे.

    इस तरह से मुझे मेरे ससुर ने रंडी बना दिया था. मुझे भी अब अपने दोनों छेदों में एक साथ लंड लेने में मजा आने लगा था.
    आपको मैं अपनी सेक्स कहानी के अगले भाग में कुछ और भी रोचक सेक्स के बारे में लिखूँगी.

  • दिव्या मामी को सुहागरात की तरह चोदा

    हैल्लो दोस्तों आप सभी आंटी, दीदी, भाभी और लड़कियों के लिए में अभी यहाँ पर नया आया हूँ तो प्लीज आप सभी मेरा थोड़ा ख्याल रखना। अब में आप सभी को थोड़ा बहुत अपने बारे में बताता हूँ, दोस्तों में 33 साल का एक नौजवान लड़का हूँ और अभी तक कुंवारा हूँ मेरा नाम राज है और में आगरा का रहने वाला हूँ, मेरी हाईट 5 फीट 8 इंच है मेरा रंग गोरा है और मेरा लंड 7.5 इंच लंबा है और 3.5 इंच मोटा भी है। दोस्तों में हमेशा से ही नाभि का बहुत दिवाना हूँ मुझे गहरी और लम्बी नाभि बहुत पसंद है, नाभि इतनी बड़ी हो कि उसमे नींबू पूरा आ जाए फिर चाहे वो नाभि किसी लड़की, आंटी, भाभी और दीदी किसी की ही क्यों ना हो मुझे बहुत अच्छी लगती है। मुझे उसे चूसने को, चाटने को, काटने को, देखने को, इतना दिल करता है कि बस में नाभि के पास ही बैठा रहूँ, तो यह था मेरा पूरा परिचय और अब में अपनी कहानी पर आता हूँ यह मेरी चोद्काम डॉट कॉम पर पहली कहानी है जो कि करीब दस साल पहले की है यानी कि 2003 की तब मेरी उम्र 23 साल थी में उस समय अपनी पढ़ाई करने चंडीगढ़ अपने मामा के घर पर गया हुआ था क्योंकि आगरा के कुछ दोस्तों के साथ मेरी उस समय लड़ाई झगड़े हो गये थे इसलिए पापा ने मुझे चंडीगढ़ पढ़ाई करने भेज दिया था।
    दोस्तों में अपने मामा के पास पहली बार गया था और मैंने मामा और मामी को पहली बार देखा था। में 10 जून 2003 को चंडीगढ़ के लिए निकल पड़ा और 11 जून 2003 की सुबह में चंडीगढ़ पहुंच गया। वहाँ पर मामा ने अपने ड्राइवर को गाड़ी से मुझे घर पर लाने के लिए भेज दिया था, ड्राइवर ने मुझे अपने साथ में लिया और घर की तरफ निकल पड़ा में जैसे ही घर पर पहुंचा तो मेरी मामी बाहर आई और मुझसे बोली कि वहीं पर रुक जाओ। तो में वहीं पर रुक गया और वो एक आरती की थाली लेकर आई और उन्होंने मेरी आरती की और बोली कि हाँ अब अंदर आ जाओ। दोस्तों मेरी मामी का नाम दिव्या है और उनकी उम्र 35 साल है उनका रंग गोरा है और बदन बहुत सेक्सी है और उनके फिगर का साईज 36-30-32 था। दोस्तों मेरी मामी का फिगर बिल्कुल वैसा था जैसा में चाहता था। तभी अचानक जैसे ही मामी अंदर की तरफ बड़ी तो उनकी कमर पर लगा चाबी का गुच्छा निकलकर नीचे गिर गया और मामी उस गुच्छे को जैसे ही उठाने के लिए नीचे झुकी तो मुझे उनके बूब्स दिख गये। वाह दोस्तों क्या बूब्स थे एकदम गोरे और बड़े जैसे पका हुआ पपीता हो, लेकिन जब वो चाबी उठाकर उठी तब उनके पेट से साड़ी हट गई और मैंने उनकी नाभि को देख लिया उनकी नाभि करीब दो इंच गहरी और तीन इंच लंबी एकदम गोल थी और उसे देखकर मेरा लंड धीरे धीरे टाईट होने लगा। मुझे ऐसा लग रहा था कि मामी अपनी नाभि रोज़ मामा के लंड से चुदवाती है।

    फिर में नज़र नीचे करके अंदर चला गया, मामी बोली कि तुम बैठ जाओ में तुम्हारे लिए नाश्ता लाती हूँ मैंने उनसे पूछा कि मामा कहाँ है? तो मामी ने मुझे बताया कि मामा किसी काम के सिलसिले में दुबई गए हुए है और एक महीने बाद लोटेंगे। अब मैंने जैसे ही उनके मुहं से यह सब सुना मेरे मुहं में पानी आ गया में सोचने लगा कि में मामी को जरुर पटाउंगा और फिर शाम हुई और रात भी हो गई तो में उस समय अपने कमरे में था तो मामी ने आवाज़ लगाई कि राजा आ जाओ खाना खा लो, में अंदर गया और मैंने देखा कि मामी ने जीन्स और टॉप पहन रखा था वो टॉप एकदम टाईट था जिसमे से बूब्स बाहर आने को तड़प रहे थे और ब्रा की डोरी साफ साफ दिख रही थी और वो जीन्स मामी ने नाभि से करीब पांच इंच नीचे पहनी हुई थी जिससे नाभि साफ साफ दिखे, मुझे लगा कि शायद मामी को पता लग गया है कि में उनकी नाभि को देखना पसंद करता हूँ और जब में उनकी नाभि देख रहा था तो उन्होंने मुझे यह सब करते हुए देख लिया था और फिर हम लोग खाना खाने लगे और खाना खाने के बाद में अपने कमरे में चला गया। फिर रात को करीब 9 बजे मामी के कमरे में से आवाज़ आई कि राजा यहाँ आओ। तो में उनके कमरे के अंदर चला गया और मैंने देखा कि मामी ने उस समय मेक्सी पहन रखी थी और वो भी पूरी जालीदार जिसमे उनकी स्टाइलिश ब्रा और पेंटी साफ साफ नज़र आ रही थी। फिर मामी मुझसे मुस्कुराकर बोली कि दूर से देखते रहोगे क्या आओ राजा यहाँ पर बैठो।

    फिर मैंने पूछा कि जी मामी आपने मुझे क्यों बुलाया? मामी बोली कि मुझे अकेले सोने में बहुत डर लग रहा था तो मैंने सोचा कि तुम भी यहीं पर सो जाओ तो मुझे भी डर कम लगेगा और तुम्हे भी अच्छी नींद आ जाएगी। तो मैंने कहा कि ठीक है में सोफे पर सो जाता हूँ, तभी वो बोली कि अरे नहीं तुम मेरे पास यहीं बेड पर सो जाओ, तो मैंने कहा कि नहीं और फिर वो बोली कि लेकिन क्यों नहीं तुम मेरे पास क्यों नहीं सो सकते? तो मैंने कहा कि जी सो सकता हूँ। तो वो बोली कि फिर तुम अब ज्यादा सोचो मत और में उनके सो गया। तभी मामी मुझसे पूछने लगी कि क्यों सो गये? में बोला कि नहीं, तो मामी बोली कि कुछ अपने बारे में बताओ ना तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है या नहीं? में बोला कि नहीं मामी मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है। तो मामी बोली कि तुमने क्या कभी सेक्स भी नहीं किया है? क्या मामी आप मुझसे यह क्या पूछ रही हो? तो वो बोली कि हाँ मैंने तुमसे पूछा कि तुमने कभी सेक्स किया है कि नहीं? क्या तुम करना चाहोगे? तो मैंने पूछा कि किसके साथ? मामी बोली कि मेरे साथ, में बोला कि नहीं में आपके साथ यह सब कैसे कर सकता हूँ? तो वो बोली कि क्यों नहीं कर सकते? सुबह और अभी बाहर मेरी नाभि और बूब्स को तो तुम बहुत घूरकर देख रहे थे क्या तब तुम्हारे मन में सेक्स की भावना नहीं आ रही थी? दोस्तों मैंने सोचा कि यह एक बहुत अच्छा मौका है हाथ से मत जाने दो। तभी मैंने कहा कि लेकिन मेरी एक शर्त है कि में आपको शादी के जोड़े में सुहागरात की तरह चोदना चाहता हूँ। तो मामी बोली कि बहुत अच्छे, मुझे यह सुनकर बहुत अच्छा लगा, तुम बहुत सेक्सी हो में एक घंटे में तैयार होकर तुम्हे अंदर बुलाती हूँ।

    फिर मामी ने तैयार होकर मुझे आवाज़ लगाई आ जाओ जी में जब अंदर गया तो उन्होंने मेरे पैर छुए और मुझसे बोली कि तुम मेरी माँग भरो तब में तुम्हे सुहागरात मनाने दूँगी। अब में बोला कि ठीक है और मैंने उनकी माँग भर दी और फिर मैंने मामी को बिस्तर पर लेटा दिया मैंने देखा कि मामी ने लहंगा पहन रखा है और वो भी पीछे से पूरा खुला हुआ और पीछे सिर्फ़ दो डोरी से चोली बंधी हुई थी और ब्रा नहीं पहनी थी और चोली में से बहुत हद तक बूब्स बाहर आ रहे थे और जब मैंने नीचे की तरफ देखा तो उनका लहंगा नाभि से 6 इंच नीचे बंधा हुआ था चूत से थोड़ा ही उपर यह सब देखने में बहुत सेक्सी था और उससे भी कहीं ज्यादा सेक्सी लग रही थी उनकी गहरी नाभि जो कि अब उनके लेटे हुए होने की वजह से और भी गहरी हो गई थी। फिर मैंने पूछा कि मामी आपकी नाभि इतनी गहरी कैसे हुई? सबसे पहले तो मामी बोली कि मुझे तुम अब मामी मत बोलो, मुझे सिर्फ दिव्या बोलो और आप नहीं तुम या तू बोलो ठीक है। तो मैंने कहा कि ठीक है और फिर दिव्या बोली कि तुम्हारे मामा मेरी नाभि रोज़ चूसते चाटते और चोदते है तो फिर यह बड़ी क्यों नहीं होगी? दिव्या बोली कि तुम्हे मेरी नाभि क्यों पसंद है? तो मैंने कहा कि क्योंकि तुम्हारी नाभि बहुत बड़ी है और मुझे ठीक ऐसी ही नाभि बहुत पसंद है। फिर वो बोली कि पसंद है तो कुछ करो ना जानू, क्यों अब किस बात की देर है? तो दोस्तों जैसे ही मामी ने मुझे हुक्म दिया और मैंने उनकी नाभि को चाटना शुरू कर दिया में अब उनकी नाभि चाट रहा था तो मामी के मुहं से सेक्सी आवाज़ आना शुरू हो गई इसस्स्सस्स आअहह उूुुुईईईईईईई मर गई थोड़ा जीभ और अंदर करो ना आह्ह्हह्ह्ह्ह मज़ा आ रहा है, नाभि कहाँ से चूसना सीखा तुमने? तो मैंने कहा कि कहीं से नहीं आपको देखकर अपने आप नाभि चूसने का मन करने लगा। तो वो बोली कि क्या मेरी नाभि इतनी सेक्सी है? मैंने कहा कि हाँ मेरी रानी तेरी नाभि बहुत सेक्सी है। तो वो बोली कि तो थोड़ा और चूस ना, चूस चूसकर इसे लाल कर दो मेरे जानू और फिर मैंने नाभि को काटना शुरू किया, हल्के हल्के मामी के मुहं से आवाज़ आ रही थी हाँ और तेज जानू आहह्ह्ह् उहहह और तेज़।

    फिर वो बोली कि ज़रा मेरी नाभि में उंगली घुमाओ ना और फिर जैसे ही मैंने उंगली डाली मामी बोली कि हाँ और वो मेरी ऊँगली को पकड़ कर और अंदर ले गई और उंगली को नाभि में कसकर जकड़ लिया और मामी बोली कि कोई और दूसरे तरीके से नाभि का मज़ा दो ना। फिर मैंने कहा कि ठीक है फिर मैंने उनकी नाभि में एक चोकलेट खड़ी कर दी और फिर उसे खाता गया और जैसे ही में नाभि के पास पहुंचा वैसे ही नाभि को भी मुहं में भरा और काटने लगा, मामी बोली ऊहहह्ह्ह अह्ह्ह्ह कितना मज़ा आ रहा है जानू उूईईईईइ माँ मरी। फिर मैंने मामी को पलट कर उल्टा कर दिया और उनकी पीठ पर चूमने लगा मामी मुझसे बोली कि चूमो ना जानू और फिर मैंने उनकी पीछे से खुली हुई चोली की दोनों डोरी को खोल दिया और अब चोली को बाहर निकाल दिया ऊओफफफफफ्फ़ वाह क्या बूब्स थे मामी के एकदम बड़े और कसे हुए एकदम गोल, में आखें बन्द करके उन पर टूट पड़ा और उनके बूब्स पर और कसकर चूसने लगा। मामी मुझसे हर बार कर रही थी आआह्ह्ह्हहहह और ज़ोर से चूसो ना आईईईईई। दोस्तों फिर में क्या ज़ोर ज़ोर से बूब्स दबा रहा था और जमकर चूस रहा था और मामी सिसकियों के साथ साथ मोनिंग कर रही थी उूउइईईईईईईईईई आआआहह उूउउफफफफफफफ्फ़।
    फिर मैंने मामी का नाड़ा खोला तो मामी शरमा गई। मैंने मामी का लहंगा उतार दिया और मामी को पूरा नंगा कर दिया वो अब मेरे सामने सिर्फ़ पेंटी में थी और वो भी तीन बार गीली हो चुकी थी। फिर जैसे ही मैंने पेंटी उतारी वैसे ही मामी बोली कि नहीं आज चूत नहीं दूँगी आज मेरा मन सिर्फ़ नाभि सेक्स के लिए है और बूब्स दबाओ और पियो दूध निकल दो मेरे बूब्स से नाभि को चोदकर और गहरा कर दो। तो मैंने उनसे कहा कि तुम तो हर तरफ से सेक्सी लगती हो फिर मैंने मामी की नाभि में लंड डाला तो मामी बोली कि मज़ा नहीं आ रहा है और तभी मामी ने मेरा लंड पकड़ा और मेरे लंड पर मुठ मारने लगी और बोल रही थी कि तुम्हारे मामा ने मुझे कभी लंड पर मुठ नहीं मारने दिया और ना ही कभी लंड को मेरे मुहं में डाला। तुम अपना लंड मेरे मुहं में दो ना, में इसे चूसना चाहती हूँ। फिर मैंने कहा कि हाँ लो ना मेरी जान चूसो ज़ोर से चूसो इसे और मामी मेरे लंड को चूस रही थी और मुझसे कह रही थी कि वाह कितना बड़ा है जानू तुम्हारा लंड, तुम्हारे मामा का तो इसका आधा भी नहीं है और ऐसा ही करते करते 20 मिनट तक मामी मेरा लंड चूसती रही और मैंने कहा कि में अब झड़ने वाला हूँ। फिर मामी बोली कि प्लीज मेरे मुहं में ही अपना सारा पानी छोड़ दो मेरे लंड का पानी पीने की बहुत इच्छा थी प्लीज आज उसे तुम पूरा कर दो। फिर मैंने अपना सारा गरम गरम वीर्य उनके मुहं में डाल दिया और वो उसे चूस चूसकर पी गई, लेकिन फिर मेरा लंड सिकुड़कर बहुत छोटा हो गया और में उदास हो गया क्योंकि में अभी तक नाभि को नहीं चोद पाया था। फिर मामी मेरे मन की यह बात समझ गई और वो मेरे लंड पर एक बार फिर से मुठ मारने लगी और लंड को फिर से मुहं में लेकर वो मेरे लंड को खड़ा करने लगी उनके हाथों के स्पर्श से मेरा लंड फिर से लोहे जैसे रोड की तरह खड़ा हो गया और फिर मामी ने कहा कि लो अब इसे जल्दी से डाल दो मेरी गहरी नाभि में और अब मैंने उनकी नाभि में जैसे ही अपना लंड डाला तो मेरा तीन इंच मोटा लंड नाभि में चला गया और मैंने नाभि को चोदना शुरू किया मामी के मुहं से सिसकियों की आवाज़ आ रही थी आह्ह्ह्हह्ह ऊउक्ककच आईईईईईई उईईईईईइ माँ हाँ और तेज़ चोदो मेरी नाभि को। फिर में लगातार नाभि को चोदता रहा और मामी को बहुत मज़ा आ रहा था वो हाँ में और अब रोज़ चुदवाउंगी तुमसे कह रही थी। दोस्तों मुझे लगातार चोदते हुए करीब अब तीस मिनट होने वाले थे और में झड़ने वाला था तो मामी बोली कि सारा वीर्य मेरी नाभि में भर दो। फिर मैंने सारा वीर्य नाभि में भर दिया और फिर मामी ने अपने पूरे पेट की उसी पानी से मालिश की और बोली कि इस पानी से औरत का जिस्म और भी खिल जाता है फिर में लेट गया ।।

  • मामी की सुहागरात की अधूरी प्यास-1

    मेरे मामा की शादी हुई. मैंने मामी के मोटे चूचों को देखा तो मेरा मन मामी की नंगी चूत देखने के लिए मचलने लगा. उस चाहत को मैंने पूरा करने के लिए क्या किया?

    मेरा नाम सुधीर है और मैं उत्तर प्रदेश के पीलीभीत का रहने वाला हूं. मेरे लंड की लंबाई सात इंच है और मेरा लंड इतना मोटा है कि वो किसी भी औरत की चीख निकालने के लिए काफी है.

    औरत की चूत चाहे कितनी भी चौड़ी क्यों न हो लेकिन खड़ा होने के बाद मेरा लंड उसमें फंस जाता है. आप समझ ही गये होंगे कि मेरे लंड की मोटाई कितनी हो सकती है. मैंने एक दिन अपने लंड को नापने की कोशिश की तो पता लगा कि मेरा लंड पूरी उत्तेजना में 3 इंच से भी ज्यादा चौड़ा हो जाता है.

    आज मैं आपको अपने जीवन की एक सच्ची घटना बताने जा रहा हूं जो मेरे ननिहाल में हुई थी. मैं अपनी नानी के घर पर रह रहा था. मेरे मामा की शादी थी. जब मैंने उनकी दुल्हन यानि कि अपनी मामी को देखा तो मेरी हालत खराब हो गई. वो देखने में बहुत ही सेक्सी थी.

    उसका रंग एकदम दूध जैसा सफेद था. उसके स्तन भी काफी बड़े थे. मगर कमर एकदम पतली सी थी. कहने का मतलब है कि देखने में एकदम कयामत लग रही थी. मगर मैं क्या कर सकता था. मैं तो भान्जा था. ये सोच कर मन में आग लगी हुई थी कि मेरे मामा को इतनी मस्त चूत चोदने के लिए मिल रही है.

    मन मसोस रहा था कि वो मेरे मामा के पास चुदने के लिए जा रही है. तभी मेरे मन में ख्याल आया कि क्यों न मामा और मामी की सुहागरात देख लूं. इस बहाने मामी की चूत के दर्शन भी हो जायेंगे. मैंने मन बना लिया कि मामी की सुहागरात देख कर ही रहूंगा. देखूंगा कि मामा मेरी मामी को कैसे चोदते हैं. उनका पहला सेक्स कैसे होगा.

    मैंने प्लान करना शुरू कर दिया. उस दिन सब लोग अपने काम में लगे हुए थे. मैं सबसे नजर बचा कर मामा के कमरे में गया. वहां पर देखने लगा कि कहां से नजारा दिखाई दे सकता है. मैंने पाया कि खिड़की की दरार में से अंदर बिछा हुआ बेड साफ दिख रहा था. यह मेरी किस्मत ही थी कि उनकी सुहागरात के लिए इस तरह की व्यवस्था की गई थी कि खिड़की से ही सारा नजारा देखा जा सकता था.

    जिस रूम में मैं रहता था उसमें कोई नहीं जाता था. उसमें बस कुछ सामान रखा हुआ था. मैं रात होने का इंतजार करने लगा. रात में सब लोगों ने खाना खाया और तब तक 10 बज गये. रात के 10.30 बजे से ही मैं उस रूम में जाकर बैठ गया.

    रात के करीब 11 बजे मामा कमरे में आये. मेरी नई नवेली दुल्हन बनी मामी बेड पर घूंघट निकाल कर बैठी हुई थी. मामा धीरे से कमरे में दाखिल हो गये और उन्होंने दरवाजा बंद कर लिया. मैंने भी खिड़की की दरार पर अपनी नजरें जमा लीं.

    पहले तो वो दोनों आपस में कुछ बातें करने लगे. उसके बाद बातें करते हुए ही मामा ने मेरी मामी का हाथ पकड़ लिया. उन्होंने उनके हाथ को अपने हाथ में लेकर चूम लिया. मामी शरमाने लगी. मामा ने कुर्ता और धोती पहनी हुई थी. मामा ने अपने कुर्ते के बटन की तरफ हाथ बढ़ाते हुए कुर्ते को उतारना शुरू किया.

    उन्होंने कुर्ता उतार दिया. फिर अपने बनियान को भी उतार दिया. मामा ऊपर से नंगे हो गये. उनकी धोती अभी भी बची हुई थी. मामा ने मामी की तरफ देखा तो मामी ने मुंह फेर लिया था. वो दूसरी तरफ मुंह करके बैठ गयी थी.

    मामा ने अपनी धोती को खोलना शुरू किया और उसको अपनी टांगों से अलग कर दिया. नीचे से मामा ने बड़ा सा कच्छा पहना हुआ था. उनका लंड अभी ज्यादा तनाव में नहीं दिखाई दे रहा था मगर हल्का सा तनाव आने के कारण पता लग पा रहा था कि लंड उत्तेजना में आ रहा है.

    उसके बाद मामा मेरी मामी की तरफ बढ़े. बेड पर जाकर मामी के कंधे को सहलाना शुरू किया. मामी अभी भी शरमा रही थी और ऊपर की तरफ नजर नहीं उठा रही थी. मामा ने उनकी साड़ी को हटाना शुरू किया. मामी के लाल रंग के ब्लाउज में भरे हुए उनके मोटे और बड़े स्तन दिखने लगे.

    उनको देखते ही मेरा लंड भी तनाव में आ गया. मैंने देखा कि जैसे ही मामा की नजर मामी के ब्लाउज पर गई तो उनके लंड में भी एकदम से तनाव आ गया था. उनका लंड उनके कच्छे में तन कर टाइट हो गया था. उसके बाद मामा ने अपने लंड को मामी के कंधे पर सहलाना शुरू किया. मामी अभी भी नीचे नजर करके ही देख रही थी.

    अब मामा ने उनकी कमर को सहलाना शुरू किया, फिर उनके स्तनों की तरफ हाथ बढ़ाने लगे तो मामी ने उनके हाथ को रोक दिया. उसके बाद मामी ने उनके हाथ को छोड़ दिया. मामा ने ब्लाउज के ऊपर से ही अपने हाथ मामी के स्तनों पर रख दिये. मामी की बेचैन सी हो उठी.

    मामा ने उनको बेड पर लेटा दिया. उनकी साड़ी की सिलवटें खोल दीं और अब मामी केवल ब्लाउज और पैटीकोट में ही रह गई थी. उसके बाद मामा बेड पर आये और मामी के ऊपर लेट कर उनके होंठों को चूसने लगे. मामी भी पहले तो शरमाती रही लेकिन फिर उन्होंने मामा को अपनी बांहों में भर लिया मामा के होंठों को चूसने लगी.

    वो दोनों काफी देर तक एक दूसरे के होंठों को चूसते हुए एक दूसरे के होंठों का रस पीते रहे. उसके बाद मामा ने उनके होंठों से हट कर अपने होंठों को मामी के ब्लाउज के अंदर के क्लीवेज पर लगा दिया. वो अपने दोनों हाथों से मामी के स्तनों को दबाने लगे और उनका लंड मामी की जांघों के बीच में घुसने की कोशिश करने लगा.

    अब शायद दोनों ही गर्म हो चुके थे. मामा ने फिर मामी को पेट के बल पलटी दी और उसके ब्लाउज को खोलने लगे. अगले ही कुछ पलों में मामी की गुलाबी ब्रा दिखने लगी. उसकी ब्रा में उसके चूचे एकदम से फंसे हुए थे. मामा ने उसकी ब्रा को हड़बड़ी में खोलना शुरू कर दिया. फिर दो पल के अंदर ही मामी के चूचे हवा में झूल रहे थे.

    बाहर से देखते हुए ऐसा लग रहा था कि मामी की छाती पर बड़ी बड़ी फुटबॉल लटकी हुई हैं जिनको देख कर मेरे लंड का बुरा हाल होने लगा था. मैंने वहीं पर खड़े होकर अपने लंड को मसलना शुरू कर दिया था. इधर मामा की हालत मुझसे भी ज्यादा खराब हो रही थी. उसने मामी के चूचों को जोर से दबाना शुरू किया और फिर मामी के मोटे मोटे चूचों को मुंह में भर कर पीने लगे.

    अब मामी के मुंह से आहें निकलने लगीं. वो मामा के सामने बेबस होने लगी. मामा ने जोर से मामी के चूचों को चूसना शुरू कर दिया. वो मामी के चूचों को दोनों हाथों से जैसे निचोड़ते हुए उनका दूध निकालने की कोशिश कर रहे थे. मामी की गांड ऊपर उठने लगी थी. इससे मुझे भी पता चल गया था कि मामी की चूत में खुजली होना शुरू हो गई है.

    मेरी मामी बार मामा के मुंह को अपने चूचों में दबाने लगी थी. इधर मामा ने कुछ देर तक चूचों को चूसा और फिर उसके निप्पलों को जीभ से चूसने लगे. फिर शायद उन्होंने दांत से काट लिया तो मामी की सिसकारी निकल गई. मेरा हाथ मेरे लंड को रगड़ रहा था. मैं भूल गया था कि मैं बेपरवाह होकर उनकी ये रासलीला देख रहा हूं.

    कुछ देर तक मामी के निप्पलों को पीने के बाद मामा ने उसके पैटीकोट को खोल दिया. मामी की काली पैंटी दिखने लगी. मामा ने उसकी पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत को चूम लिया. मामी की गोरी जांघें देख कर मैं भी और ज्यादा उत्तेजित हो रहा था. मेरे मामा मेरी मामी की चूत को पैंटी के ऊपर से ही चाटने में लगे हुए थे.

    फिर मुझे ध्यान आया कि क्यों मामी के नंगे बदन को कैमरे में कैद कर लिया जाये. ऐसा मौका फिर शायद मिले न मिले. मैंने अपनी जेब से फोन निकाला और कैमरा ऑन करके वीडियो बनाना शुरू कर दिया. दूर से ज्यादा साफ तो नहीं दिखाई दे रहा था मगर इतना तो पता चल रहा था कि मामी का नंगा बदन कैसा है.

    मामी के चूचे ऊपर नीचे होते हुए वीडियो में साफ दिख रहे थे. वो इस बात को बता रहे थे कि मामी की चूत पूरी गर्म हो चुकी है. उसके बाद मामा ने उसकी पैंटी को उतार दिया. मामी की चूत एकदम बाल रहित थी. उनकी चूत को देख कर मुझसे भी रहा न गया और मैंने अपने लंड को अपनी पैंट से बाहर निकाल कर उसकी मुठ मारनी शुरू कर दी.

    मेरी हालत बहुत खराब हो रही थी. मन कर रहा था कि मैं भी अभी के अभी कमरे में घुस जाऊं और मामी की चूत को चाट लूं. मगर किस्मत तो मामा की चमक रही थी. उन्होंने मामी की चूत में उंगली की और उनकी चूत को चूसने लगे. मामी अब जोर से सिसकारियां लेने लगी. उनको देख कर ऐसा लग रहा था कि वो पहले भी इस तरह का कुछ कर चुकी हैं.

    मामी भी पूरी गर्म थी और मामा भी गर्मजोशी से उसकी चूत को चूसने में लगे हुए थे. पूरे कमरे में आह्ह … इस्सस… पुच-पुच … मुच-मुच की आवाज हो रही थी. उनकी इन कामुक आवाजों को सुन कर मेरे लंड का हाल और बुरा होने लगा था. मैंने जोर से अपने लंड को रगड़ना शुरू कर दिया था. मगर साथ ही फोन को भी संभाल रहा था. बहुत मजा आ रहा था मुझे.

    उसके बाद मामा से जब रहा न गया तो उन्होंने उनकी चूत से जीभ को हटा लिया और अपना कच्छा निकाल दिया. मामा का लंड एकदम से टनटना रहा था. मामा के लंड का साइज देख कर मैं हैरान रह गया. मेरे मामा शरीर से काफी हट्टे कट्टे थे लेकिन उनका लंड देखा तो मुझे यकीन नहीं हुआ.

    उनका लंड ज्यादा लम्बा नहीं था. देखने में चार इंच या उससे थोड़ा ज्यादा का लग रहा था. मामा के लंड की मोटाई न के बराबर थी. देखने में एक पतली सी डंडी के जैसा लग रहा था. मामा ने मामी की टांगों को चौड़ी किया और उनकी चूत में लंड को लगा कर उसके ऊपर लेट गये.

    दोनों के दोनों नंगे थे और मामा ने मामी की चूत को चोदना शुरू कर दिया. मगर मामी को देख कर लग रहा था कि उनको जैसे पता ही नहीं लग रहा कि मामा ने उनकी चूत में लंड को डाला हुआ है. वो मामी की चूत में लंड डाल कर हिलाते रहे मगर मामी को जैसे कुछ फर्क ही नहीं पड़ रहा था.

    मामी के चेहरे से साफ पता लग रहा था कि उनको मजा नहीं आ रहा है. तीन-चार मिनट तक मामा उनकी चूत में लंड को डाल कर हिलते रहे और फिर अचानक है ढीले पड़ कर मामी के ऊपर गिर गये. फिर कुछ पल तक मामी के ऊपर पड़े रहे और फिर साइड में जाकर लेट गये. पांच मिनट तक मामा ऐसे ही पड़े रहे.

    मामी के चेहरे पर मायूसी सी छा गयी थी. फिर कुछ देर के बाद मामा ने मेरी मामी के गालों को किस करने कोशिश की तो मामी ने मरे मन से उनको किस करने दिया. फिर जब मामी के ऊपर आने की कोशिश करने लगे तो मामी ने उनको एक तरफ धकेल दिया और चादर ओढ़ कर लेट गई.

    दोबारा मामा की हिम्मत नहीं हुई कि वो मामी के करीब आ सकें. मामी की चूत प्यासी की प्यासी रह गई थी. मुझे भी मामी पर तरस आ रहा था. मामा ने दोबारा से मामी को मनाने की कोशिश की लेकिन उन्होंने फिर मामा को फिर अपने बदन को छूने नहीं दिया. फिर मामा उठ कर कमरे के दरवाजे की तरफ आने लगे.

    मैंने अपने लंड को अंदर किया और वहां से एक तरफ छिप गया. बाहर बाथरूम बना हुआ था. मामा बाथरूम में गये और कुछ देर के बाद वापस आ गये. अंदर जाने के बाद मैंने देखा कि मामी ने अपने रात वाले कपड़े पहन लिये थे. वो एक तरफ होकर सो गई और मामा भी अपनी धोती लपेट कर बेड पर लेट गये. उसके बाद मामा ने लाइट बंद कर दी.

    उसके बाद मैं भी वहां से वापस आ गया. अपने रूम में आकर मैंने वीडियो को देखा. मामी के मोटे चूचे वीडियो में हिलते हुए देख कर मैंने तेजी से अपने लंड पर हाथ चलाना शुरू कर दिया. फिर अपने लंड की मुठ मारी. वीर्य निकलने के बाद मुझे संतुष्टि मिली. उसके बाद मैं सोचने लगा कि मामा का लंड शायद मामी की प्यास नहीं बुझा पायेगा. मुझे इस बात का फायदा उठाना चाहिए.

  • पति विदेश गया तो सर्दी की रात में देवर के साथ सैक्स का मजा

    मेरा नाम अनाया है और मैं 25 साल की हूँ।

    यह गरम भाभी की गरम कहानी तब की है, जब मेरी शादी को मात्र 4 महीने ही हुए थे।

    मेरे पति एक विदेशी कम्पनी में काम करते है इसीलिए वे शादी के कुछ दिन बाद ही अपने काम पर चले गए।

    मेरी तो नई-नई शादी हुई थी इसलिए मेरा मन अक्सर सेक्स करने का होता था।लेकिन मैं कुछ कर भी तो नहीं सकती थी।

    कहानी में आगे बढ़ने से पहले मैं आपको अपने परिवार के बारे में बता देती हूँ।

    मेरे परिवार में मेरे और मेरे पति के अलावा, मेरे सास-ससुर और एक प्यारा सा देवर रहता है।उसका नाम अंकित है, और वो सिर्फ़ 19 साल का है।दरअसल मेरे सास-ससुर को दूसरा बच्चा शादी के बहुत लेट हुआ था, इसीलिए मेरे पती और देवर की उम्र में थोड़ा ज्यादा अंतर है।

    चलिए अब कहानी को आगे बढ़ाते है।

    कई दिनों तक बिना सेक्स के रहने के बाद अब मैं अपने आप को कन्ट्रोल नहीं कर पा रही थी।मुझे अब बस एक लंड की तलाश थी।

    मेरे ससुर उम्र में बहुत बड़े थे और शरीफ़ घर से होने के कारण मैं कहीं बाहर यह सब नहीं कर सकती थी।

    अब बचा सिर्फ़ मेरा देवर।लेकिन वह उम्र में छोटा था और मुझे लगता था कि उसे इस बारे में कुछ पता भी नहीं था।क्योंकि मैंने एक-दो बार उस पर लाइन मारने की कोशिश की थी.अगर उसे इस सब के बारे में थोड़ी भी जानकारी होती, तो वह यह मौका कभी नहीं छोड़ता।

    पर अब धीरे-धीरे मेरी सेक्स की इच्छा बढ़ती जा रही थी।

    इसलिए मैंने एक प्लान बनाया जिसके जरिए मैं अपने देवर के साथ मज़े कर सकती थी।

    एक रात जब हम दोनों सब के साथ बैठकर खाना खा रहे थे.तब मैं उससे बोली- क्या तुम आज मेरे साथ एक मूवी देखोगे?

    क्योंकि उसके इक्ज़ाम ख़त्म हो गए थे इसलिए उसने झट से हाँ कर दी।

    मेरा आधा काम तो हो चुका था, बस आधा बाकी था।

    वह दूध पीने के बाद मेरे पास आया और बोला- भाभी, कौन सी मूवी देखेंगे?मैंने कहा- कोई होलीवुड की मूवी देखेंगे।वह बोला- चलो फ़िर मूवी देखते हैं।

    मैं उससे बोली- पहले तुम कपड़े बदल लो क्योंकि मूवी बहुत बड़ी है। इसलिए तुम मूवी देखने के बाद यहीं सो जाना।वह झट से मेरी बात मान गया।

    जब तक वह आया, मैंने भी अपने कपड़े बदल लिए।

    अब मैंने एक हाफ़ स्कर्ट और एक हाफ़ मैक्सी पहनी जिसमें से मेरे बड़ी-बड़ी चुच्चियां दिख रही थी.जबकि उसने एक हाफ़ टीशर्ट और पजामा पहना हुआ था।

    उन दिनों थोड़ी सर्दियां पड़ रही थी इसलिए हम दोनों एक ही कंबल में घुस गए।

    थोड़ी देर बाद मैंने मूवी प्ले कर दी।वो एक रोमैन्टिक मूवी थी।

    हम दोनो ही उस मूवी को बड़े मज़े से देख रहे थे।

    तभी मूवी में एक सैक्स का सीन आया जिसमें एक छोटी उम्र का लड़का अपनी गरम भाभी की चुदाई कर रहा था।मुझे किसी ऐसे ही मौके का इंतज़ार था।

    इस सीन के बाद जब मैंने उसकी तरफ़ देखा तो उसके पजामे में से उसका लंड साफ़ दिख रहा था।

    मैं समझ गई थी कि अब चिंगारी तो भड़क चुकी है, बस विस्फ़ोट होना बाकी है।

    थोड़ी देर बाद जब मूवी ख़त्म हुई तो मैं उससे बोली- तुम चाहो तो आज यहीं सो जाओ, मेरा मन भी लगा रहेगा।वह यह बात भी झट से मान गया।

    वह आख़िर था तो एक किशोरवय ही, उसे क्या पता था कि आज उसे कितना मजा आने वाला है।

    कुछ देर बाद मैं उससे बोली- मुझे बहुत खुजली हो रही है, क्या तुम तेल से मेरी मालिश कर दोगे?वह बोला- ठीक है भाभी।

    मैं झट से तेल ले आई।

    अब वह बोला- कहाँ मालिश करनी है भाभी?मैंने अपनी पीठ की तरफ़ इशारा करते हुए कहा- यहाँ खुजली हो रही है।

    यह सुनते ही वह शर्मा गया.मैं उससे बोली- कोई बात नहीं, अगर तुम्हारा मन नहीं है तो रहने दो।वह बोला- नहीं, ऐसी कोई बात नहीं है, मैं आपके अभी मालिश कर देता हूँ।

    अब उसने तेल लिया और मेरी पीठ की मालिश करने लगा।मालिश करते करते अब शायद उसे भी मजा आ रहा था।

    अब वह धीरे-धीरे मेरे कूल्हों तक हाथ फिराने लगा।

    लेकिन जब उसने देखा कि मुझे नींद आ गई है तो उसकी हिम्मत और बढ़ गई।

    अब वह जोर-जोर से मेरे चूतड़ों को सहलाने लगा।दरअसल मैं भी इस दौरान सोई नहीं थी बल्कि सोने का नाटक कर रही थी।

    जब उसे लगा कि अब मैं गहरी नींद में हूँ तो उसने मेरी मैक्सी की चेन खोली और मेरी ब्रा के ऊपर से ही मेरी चुच्चियों को दबाने लगा।

    मुझे भी अब बहुत मजा आ रहा था इसीलिए मैं उसे बिना कुछ बोले चुपचाप लेटी रही।थोड़ी देर बाद मैंने करवट ली ताकि वह मेरी ब्रा को खोल सके।

    पहले तो उसने थोड़ा इंतजार किया.लेकिन जब उसे यकीन हो गया कि मैं सो ही रही हू तो उसने मेरी ब्रा के हुक खोले और मेरी बड़ी-बड़ी चुच्चियों को ब्रा की कैद से आजाद कर दिया।

    अब मैं भी गर्म होने लगी थी।

    तभी वह नीचे आया और उसने मेरी स्कर्ट को मेरी जांघों तक ऊपर कर दिया।तब वह मेरी जांघों को सहलाने लगा.

    अब मैं भी कन्ट्रोल नहीं कर सकती थी इसलिए अब मैं धीरे-धीरे सिसकारियां लेने लगी।

    अब तो उसे इस बात का यकीन हो गया था कि मुझे भी सैक्स करने का मन है।इसलिए वह मेरी जांघों को छोड़कर ऊपर आया और मेरे लबों पर अपने होंठ रख दिये।

    अब मैं भी उसका भरपूर साथ दे रही थी।

    फ़िर वह एक बार फ़िर मेरी गर्दन से होता हुआ मेरी चुच्चियों तक पहुँचा और मेरे निप्पल को जोर-जोर से चूसने लगा।अब मुझे भी बहुत दर्द हो रहा था।

    फ़िर उसने अपने सारे कपड़े उतारे.जब मैंने उसका लंड देखा तो मैं हैरान हो गई, इतने से लड़के का इतना बड़ा लंड।मेरे मन में तो लड्डू फ़ूट रहे थे.

    इसलिए मैंने झट से उसका लंड मेरे मुँह में ले लिया और उसे जोर-जोर से चूसने लगी।

    थोड़ी देर बाद वह झड़ गया।

    फ़िर उसने मेरी स्कर्ट निकाल दी.अब मैं सिर्फ़ एक पैन्टी में थी।

    वह मेरी पैंटी के ऊपर से ही अपनी गरम भाभी की गरम चूत को सहलाने लगा.मैं तो अब पागल होती जा रही थी।

    मैंने उससे कहा- अब जल्दी मेरी चूत में लंड डाल दो।वह बोला- भाभी, इतनी भी जल्दी क्या है?

    इतना कहकर उसने मेरी पैन्टी उतारी और मेरी बिना बालों की चूत को अपनी जीभ से चाटने लगा।

    थोड़ी देर बाद मैं झड़ गई और वह मेरा सारा पानी पी गया।

    अब तक उसका लंड दोबारा खड़ा हो चुका था।उसने अपने लंड को मेरी चूत पर रखा और एक जोर के धक्के के साथ उसका पूरा लंड मेरी चूत में चला गया।

    अब मुझे बहुत दर्द हो रहा था लेकिन उसने अपने धक्के जारी रखे।

    पाँच मिनट बाद वह बोला- भाभी, मेरा होने वाला है।मैं बोली- मेरे अंदर ही निकाल दो। मैं बाद में दवाई खा लूँगी।

    इतना सुनकर उसने अपने धक्कों की स्पीड बढ़ा दी और थोड़ी देर बाद वह और मैं एक साथ झड़ गए।

    तब मैंने उससे पूछा- मैं तो सोचती थी कि तुम्हें सैक्स के बारे में कुछ नहीं पता?वह बोला- भाभी, मैं पहले भी सैक्स कर चुका हूँ।

    मैं बोली- कब?वह बताने लगा:

    जब आपकी और भैया की सुहागरात थी, उस रात मैं भैया और आपके साथ सोने की ज़िद कर रहा था।तब मम्मी मुझसे बोली- आज उनकी सुहागरात है। आज तुम उनके पास नहीं सो सकते।मैंने मम्मी से पूछा- सुहागरात में ऐसा क्या होता है कि मैं उनके पास नहीं सो सकता?मम्मी कुछ नहीं बोली।मैं बोला- या तो मुझे बताओ, वर्ना मैं उनके पास जा रहा हूँ।

    मेरे ज़िद करने पर मम्मी बोली- चल ठीक है, मैं सब कुछ बताऊंगी पर तुम उनके पास मत जाओ।मैं मान गया।

    और जब पापा सो गए तो मम्मी ने मुझे सब कुछ बता दिया।

    तभी से मैं एक मौके की तलाश में था क्योंकि मम्मी ने मुझे यह बताया था कि शादी के बाद एक बार यह सब करने के बाद यह सब दोबारा करने का मन करता है।और मैं जानता था कि आपने भैया के विदेश जाने के बाद एक बार भी सैक्स नहीं किया। इस लिए मैं अपनी भाभी की प्यासबुझाना चाहता था। इसलिए मैंने यह नाटक किया कि मैं सैक्स के बारे में कुछ नहीं जानता। ताकि आप खुद पहल करो।

    उसकी ये बातें सुनकर मैंने उसे अपने गले से लगा लिया।

    फ़िर तो हम दोनों ने उस रात कई बार सैक्स किया।और अब तो हम जब चाहें तब सैक्स कर लेते हैं.इसलिए मुझे अब मेरे पति की याद भी नहीं आती।

  • लोकडाउन में दिया बुआ ने गांड का मजा

    दोस्तो, मेरा नाम अमित है और मेरी उम्र 24 साल है. मैं जबलपुर में रहता हूं. यह Hindi Sex Stories मेरे पड़ोस में रहने वाली एक बुआ की है जिनका नाम कविता (बदला हुआ) है.

    उनकी शादी हो चुकी है परन्तु अब वो अपने पति के साथ नहीं रहती हैं. वो अब मायके में रहती हैं इसलिए सामाजिक रिश्ते के हिसाब से वो मेरी बुआ लगी.

    उनकी उम्र 40 के करीब है और 3 बच्चे हैं.

    दोस्तो, आपने कभी ध्यान दिया होगा कि जब भी आपके पास कोई काम नहीं होता है तो आपका ध्यान केवल एक चीज की तरफ ही ज्यादा जाता है और वह है सेक्स!

    मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ.

    उस वक्त लॉकडाउन का दौर था. किसी के पास कुछ करने को नहीं था.

    इस दौरान अक्सर शाम को पड़ोसी गली में आ जाते थे और पड़ोस के सब लोग गेम खेला करते थे.

    एक दिन की बात है जब मैं और मेरे दोस्त शाम के समय कैरम खेल रहे थे.

    हम तीन लोग थे तो चौथी खिलाड़ी बुआ आ गई और बोली कि मैं भी तुम लोगों के साथ खेलूंगी.

    तो हम सब खेलने लगे लेकिन बीच खेल में दोस्त को कुछ काम आ गया तो वो दोनों दोस्त अपने अपने घर चले गए.

    फिर मैं और बुआ ही बचे तो मैं खेल बंद करने लगा.

    मगर बुआ बोली- हम दोनों ही खेल लेते हैं.

    मैंने उनसे कहा- आपको कहां अच्छे से खेलना आता है, आप तो थोड़ी देर में ही हार जाओगी मुझसे!

    वो बोली- अच्छा, यह बात है तो शर्त लगा लो.

    मैंने कहा- ठीक है, मगर जो जीतेगा उसको मिलेगा क्या?

    कविता- जो हारेगा उसको जीतने वाली की एक बात माननी पड़ेगी.

    मैं- ठीक है, परन्तु आप सोच लो, अगर मैं जीता तो जो मांगूंगा वो आपको देना पड़ेगा?

    कविता- पहले जीत तो जाओ … फिर देखते हैं.

    फिर हमारा गेम चालू हुआ और हम दोनों अपनी धुन में ही खेलने लगे.

    मैंने एक ऐसा शॉट मारा कि मेरी गोटी उनके गाउन में चली गई.

    दोस्तो, वो ज्यादातर गाउन ही पहना करती थी.

    उसने गोटी को निकालने से मना कर दिया और बोली- अभी नहीं निकाल सकती, दूसरी से खेल लो.

    मगर मेरे मन में इतनी ही बात से हवस जाग गई.

    मैंने सोचा कि ये अच्छा मौका है; मैंने कहा- नहीं बुआ, अगर गेम आगे बढ़ाना है तो सारी गोटी ही चाहिए हैं. नहीं तो ये फिर चीटिंग हो जाएगी.

    मेरे कई बार कहने पर उसने गोटी गाउन से निकाली.

    धीरे धीरे गेम चलता रहा और आखिर में मैं ही जीत गया.

    अब शर्त के मुताबिक मैं उनसे कुछ भी मांग सकता था. मुझे तो बुआ की चुदाई करनी थी लेकिन सीधे सीधे तो कह नहीं सकता था कि बुआ मुझे चूत दे दो!

    मैंने दिमाग लगाया और सोचा कि इनसे कुछ ऐसा काम करवाता हूं जो कि ये कर ही न पाए और फिर मुझे फिर से एक बार उनको दूसरा काम देने का मौका मिले.

    फिर मैंने कहा- बुआ आपको एक बार चौराहे का चक्कर लगाकर आना है.

    वो डर गई और बोली- नहीं, तुम पागल हो क्या? जानते नहीं कि बाहर पुलिस का पहरा है, ऐसे कोई घूम नहीं सकता.

    मैंने कहा- तो फिर आप हार गईं, अब आपको शर्त तो पूरी करनी ही होगी.

    वो बोली- ठीक है, तो कुछ और काम बताओ.

    फिर मैंने कहा- तो फिर आपको रात के 11 बजे अकेले घर में एक भूतिया फिल्म देखनी होगी.

    वो बोली- कहां? तुम्हारे घर?

    मैं बोली- नहीं, आपके घर.

    वो बोली- मगर मेरे घर में तो कोई नहीं है, मेरी मां तो भाई के घर गई है दूसरी कॉलोनी में, बच्चे भी उनके साथ ही हैं.

    मैंने कहा- फिर तो और अच्छी बात है, यही तो चैलेंज है. आपको अकेले घर में भूतिया फिल्म देखनी है और वो भी आधी रात के वक्त.

    वो बोली- नहीं, मैं नहीं देखूंगी.

    तो मैंने फिर जोर देकर कहा- अगर आप में शर्त पूरी करने की हिम्मत नहीं थी तो फिर शर्त लगाई ही क्यों? मैं अपने दोस्तों को बता दूंगा कि आपको आगे से हमारे साथ न खेलने दें. या तो आप शर्त पूरी करो या फिर हमारे साथ मत खेलना.

    ये सुनकर वो भी थोड़े जोश में आ गई और बोली- ठीक है, मगर मैं अकेली नहीं देखूंगी. तुम भी रहना घर में.

    मैं मन ही मन खुश हो गया क्योंकि मैं तो यही चाहता था.

    मैंने कहा- ठीक है, मैं दूसरे रूम में रहूंगा. आप अपने रूम में अकेली देखना.

    इस तरह रात का प्रोग्राम तय हो गया.

    अब मैंने जानबूझकर उनको ऐसी मूवी देखने को कहा जिसमें कई सारे नंगे सेक्स सीन थे.

    रात को मैं उनके घर पहुंच गया.

    खाना मैं खा ही चुका था.

    बुआ भी सारा काम निपटाकर मेरा इंतजार कर रही थी.

    मैंने मूवी चला दी और सामने हॉल में जाकर अपने फोन में टाइमपास करने लगा.

    घर की लाइटें मैंने बंद करवा दीं और बुआ को अंधेरे रूम में मूवी देखने को कहा.

    वो मूवी देखने लगी और कुछ देर बाद ही वो डरने लगी.

    वो बोली- अमित, ये गलत बात है. मैं ऐसे अकेली नहीं देख सकती.

    मैंने कहा- यही तो शर्त है.

    बुआ ने कहा- मगर तुम कम से कम रूम में तो आ जाओ. यहां मुझे बहुत डर लग रहा है, हार्ट अटैक आ जाएगा.

    मैंने कहा- ठीक है.

    फिर मैं मन ही मन खुश होता हुआ बुआ के पास रूम में गया और बेड पर उनके साथ जाकर लेट गया और मूवी देखने लगा.

    मूवी में बीच बीच में सेक्स सीन आ रहे थे.

    मेरा लंड तो पहले से ही तना हुआ था.

    जब भी कोई सेक्स सीन आता था तो मैं अपने लंड को सहला देता था ताकि बुआ का ध्यान मेरे लंड पर जा सके.

    मैंने देखा भी कि जब जब मैं अपने लंड को सहला रहा था तो बुआ मेरे लंड की ओर देखती थी.

    मैं समझ गया कि इतने दिनों की प्यास बुआ की चूत को भी गीली कर रही है.

    अब वो डर के मारे मेरे और करीब आ गयी.

    मेरे लंड में और ज्यादा तनाव आ गया और लोवर में साफ साफ लंड के झटके लगते हुए दिखने लगे.

    जब एक गर्म सेक्स सीन आया तो मुझसे रहा न गया और मैंने बुआ की जांघ पर हाथ रख दिया और सहलाने लगा.

    वो सीधा टीवी में देखती रही और कोई प्रतिक्रिया नहीं दी.

    इससे मेरी हिम्मत बढ़ी और मैंने उनका हाथ पकड़ कर अपने उछल रहे लंड पर रखवा दिया.

    बुआ ने लंड पकड़ लिया और मेरी तरफ देखने लगी.

    बस इतना होना था कि हम दोनों एक दूसरे के होंठों पर टूट पड़े.

    मैंने बुआ को नीचे गिरा लिया और उसकी चूचियों को दबात हुए उसके होंठों को चूसने लगा.

    वो भी मेरे सिर को सहलाते हुए मेरी जीभ को अपने मुंह में खींचने लगी.

    हम दोनों की लार एक दूसरे के मुंह में जा रही थी.

    कम से कम 5 मिनट तक हम दोनों एक दूसरे को किस ही करते रहे.

    फिर अलग हुए तो मैं गाऊन के उपर से ही उनके दूध दबाने लगा जिससे कविता को दर्द होने लगा.

    मेरे हाथों की ताकत इतनी ज्यादा थी कि मुझे पता ही नहीं चला कि कितना जोर डाल रहा हूं.

    मैं पूरे जोश में था और बुआ की चुदाई के लिए तड़प रहा था.

    बहुत दिनों के बाद आज मुझे चूत मिलने वाली थी.

    फिर मैंने उसके गाऊन को उतार दिया.

    उसने नीचे से रेड कलर की ब्रा और पैंटी पहनी हुई थी.

    मैं ब्रा के ऊपर से ही दूधों को चूसने चाटने लगा.

    धीरे धीरे उसके बदन पर होते हुए मेरा एक हाथ उसकी पैंटी में जाने लगा.

    जैसे ही मेरा हाथ उसकी चूत पर पहुंचा तो उसने अपनी टांगें चौड़ी करके अपनी चूत को खोल दिया ताकि मैं अच्छे से उसकी चूत की मालिश कर सकूं.

    मैं बुआ की चूत को रगड़ने लगा और हथेली से उसकी चूत की फांकों को सहलाने लगा.

    वो अपनी चूत को उठाकर मेरे हाथ की तरफ दबाने लगी.

    लग रहा था जैसे कि उसकी चूत में बरसों की आग लगी हो.

    मेरी उंगली उसकी चूत को बार बार छेड़ रही थी.

    हल्की सी उंगली मैं उसकी चूत में अंदर भी डाल रहा था.

    जब मेरी उंगली उसकी चूत में थोड़ी अंदर जाती तो वह अपनी जांघों को भींच लेती थी.

    इससे पता चल रहा था कि वो लंड लेने के लिए कितनी बेताब हो चुकी है.

    मगर वो मुंह से कुछ नहीं बोल रही थी.

    बुआ ने चूत को क्लीन शेव किया हुआ था.

    चूत एकदम से चिकनी महसूस हो रही थी.

    उसकी गर्म गर्म चूत में जब उंगली अंदर जा रही थी तो मेरे लंड में जोर जोर से झटके लग रहे थे.

    धीरे धीरे अब उसकी चूत में मुझे गीलापन महसूस होने लगा था.

    मुझे चूत सहलाते और उंगली करते हुए दो-तीन मिनट हो चुके थे.

    वो भी अब तड़प चुकी थी.

    मैं अब चोदने के लिए और इंतजार नहीं कर सकता था.

    उधर बुआ भी लंड के लिए और इंतजार नहीं कर सकती थी.

    मैंने जल्दी से अपने कपड़े उतारे और बुआ की ब्रा-पैंटी को उतार कर उसको भी नंगी कर लिया.

    एक बार चोदने से पहले मैं बुआ की चूत की खुशबू और उसके रस का स्वाद लेना चाहता था.

    जल्दी से मैंने उसको बेड पर पटका और उसकी टांगों को अपने कंधे पर लेकर उसकी चूत में मुंह दे दिया.

    मैं बुआ की नमकीन-मीठे रस से भरी चूत को चूसने लगा.

    उसकी चूत में जीभ दे देकर उसको अंदर तक खोदने लगा.

    उसकी हालत खराब होने लगी; वो मेरी पीठ पर नाखून गड़ाने लगी.

    मेरी पीठ पर खरोंचें आने लगीं जिससे मुझे जलन होने लगी.

    मुझे थोड़ा गुस्सा आने लगा और मैंने उसके मुंह में लंड देने की सोची.

    मैंने लंड उसके मुंह के सामने कर दिया और चूसने को कहा.

    मगर उसने लंड को मुंह में लेने से मना कर दिया.

    मैंने कई बार उसको कहा लेकिन वो नहीं मानी.

    मैं फिर से उसकी चूत में जीभ देकर चाटने लगा.

    वो मेरे बालों को नोंचने लगी.

    मैं ज्यादा देर उसकी चुदास के सामने टिक नहीं सकता था.

    मैंने पांच मिनट तक किसी तरह उसकी चूत में जीभ देकर उसकी चूत का स्वाद लिया और खूब जोर से उसके चूचे भी दबाए.

    अब चुदने के लिए गुहार लगाने लगी- आह्ह … हरामी … बस कर … जान निकालेगा क्या … अब चोद भी दे … पागल कर दिया है तूने मुझे!

    मैंने मौका देखा और बोला- अगर लंड चूसने का मजा दोगी तो चोदूंगा… नहीं तो उंगली से चूत का पानी निकाल दूंगा.

    वो बोली- बड़ा मादरचोद है तू, ला … चूस देती हूं.

    मैं उठा और लंड उसके होंठों पर फिराते हुए कहा- चूस दे कविता डार्लिंग!

    उसने मुंह खोला और मेरे लंड को अपने गर्म गर्म मुंह में लिया- आह्ह …. मेरे मुंह से तो आनंद के सीत्कार फूट पड़े.

    इतनी देर से तना हुआ लंड दर्द कर रहा था.

    अब कविता के मुंह में जाने के बाद उसने ऐसा मजा दिया कि मैं तो पागल सा होने लगा.

    मैं बता नहीं सकता कि मेरे तड़पते लंड को कितना सुकून मिल रहा था.

    लंड चुसवाने की इच्छा पूरी होने के बाद अब उसको चोदने की बारी थी.

    मैंने उसकी गांड के नीचे तकिया लगाया और अपना लंड उसकी गीली चूत पर सेट करके उसके ऊपर लेटता चला गया.

    मेरा लंड बुआ की गीली चूत में प्रवेश करके अपना रास्ता बनाता चला गया.

    बीच में एक बार लंड अटका तो मैंने धक्का देकर उसको अंदर सरका दिया.

    बुआ ने मेरी पीठ को जकड़ लिया और मेरी नंगी गांड पर अपनी टांगें लपेट लीं.

    हम दोनों के होंठ मिल गए और मैं बुआ को चोदने लगा.

    वो थोड़ी देर तो कराहती रही और फिर मस्ती में आकर चुदने लगी.

    ऐसा मन कर रहा था कि चोदते हुए उसके जिस्म को काटकर खा लूं.

    मैं कभी उसके होंठों को खा रहा था तो कभी उसकी मोटी मोटी चूचियों को पी रहा था.

    उसकी चूचियों को चूस चूसकर मैंने लाल कर दिया था.

    15 मिनट की चुदाई के बाद मेरा माल निकलने को हो गया.

    मैंने बिना बताए उसकी चूत में ही माल छोड़ दिया.

    फिर हांफते हुए उसके ऊपर लेट गया.

    जब हम दोनों शांत हुए तो मैंने पूछा- तुम्हारा पानी नहीं निकला क्या?

    वो बोली- ऐसे जानवरों की तरह चोदते हो कि दो बार झड़ गई मैं!

    फिर मैंने उसकी चूत को रगड़ते हुए कहा- बहुत गर्मी है अभी इसमें.

    वो बोली- पांच साल से नहीं चुदी थी. आज जाकर प्यास थोड़ी शांत हुई है.

    अब हम दोनों फिर से चूमा चाटी में लग गए.

    कुछ देर बाद मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया.

    उसकी भारी गांड देखकर मेरा मन उसकी गांड मारने के लिए करने लगा.

    मैं बोला- कविता डार्लिंग … गांड दे दो ना प्लीज?

    वो बोली- नहीं, मैंने गांड न तो दी और न ही दूंगी.

    मैंने कहा- मैंने तुम्हारी बरसों की प्यास बुझाई, तुम इतना नहीं कर सकती?

    वो काफी देर तक ना-नुकुर करती रही. फिर आखिरकार वो मान गयी.

    मैंने उसकी गांड के छेद में उंगली से तेल लगाया और लंड के टोपे को भी तेल में तर कर लिया.

    फिर उसकी गांड के छेद पर लंड रखा और पीछे से उसकी गांड में देने लगा.

    उसको दर्द होने लगा तो वो आगे भागने लगी लेकिन मैंने उसके हाथ पकड़ लिए.

    मैं बोला- बस एक बार होगा दर्द फिर मजा ही मजा है.

    वो किसी तरह डटी रही और मैंने लंड को उसकी गांड में घुसा दिया.

    फिर मैं दो मिनट लंड डाले उस पर लेटा रहा और फिर उसकी गांड चुदाई शुरू की.

    थोड़ी देर में उसे भी गांड चुदवाने में मजा आने लगा और अबकी बार मैं उसकी गांड में खाली हुआ.

    इस तरह से हमने उस रात खूब मजा किया.

    उसके बाद से बुआ और मेरा चक्कर चला आ रहा है.

    जब भी वो घर में अकेली होती है तो मैं उसको चोदने पहुंच जाता हूं या फिर वो खुद ही मुझे बुला लेती है.

  • मामी की चूत और कुंवारी गांड मिली 

    यह बात 2010 की है.

    उससे पहले मैंने कभी किसी लड़की या औरत के साथ चुदाई नहीं की थी और न ही कभी मुठ मारी थी.

    उस वक्त तक मुझे सेक्स के बारे में ज्यादा कुछ मालूम नहीं था.

    यह Desi Sex Kahani उन दिनों की है, जब मेरे मामा की नई नई शादी हुई थी.

    उस समय मेरी 19 साल थी और मामी की उम्र 22 साल की थी.

    वे दिखने में बेहद ही खूबसूरत थीं.

    उनका रंग एकदम दूध सा गोरा था और शरीर भरा हुआ था.

    शादी के दो महीने बाद मामा काम के सिलसिले में शहर चले गए थे.

    इसलिए उस समय घर में नाना, नानी और मामी ही थीं.

    एक दिन मैं अपने चाचा की शादी का कार्ड देने मामा के घर गया हुआ था और शाम होने की वजह से मैं वहीं रुक गया.

    मामा की शादी के बाद मैं पहली बार मामी से मिला था.

    कुछ ही घंटों में मामी से मेरी अच्छी जान पहचान हो गई.

    हम दोनों रात होने से पहले एक दूसरे से काफी हंसी मजाक करते रहे.

    मेरे मामा का घर बहुत बड़ा था लेकिन सिर्फ आगे का हिस्सा ही पूरी तरह बना हुआ था.

    जबकि पीछे के हिस्सा चारों तरफ से 7 फुट की बाउंड्री बना कर यूं ही छोड़ दिया गया था.

    रात को खाना खाने के बाद, नाना और नानी घर के बाहर सोने चले गए.

    गर्मियों में गांव के लोग ज्यादातर घर से बाहर ही सोते हैं.

    काफी गर्मी होने के कारण मामी ने घर के पीछे बाउंड्री वाले ओपन ग्राउंड में ही मेरा और अपना बिस्तर अलग अलग चारपाई पर लगा दिया.

    बिस्तर लगाने के बाद मैं मामी के साथ छेड़खानी करने लगा.

    मामी ने भी मजाक मजाक में मुझे बिस्तर पर पटक कर मेरे ऊपर चढ़ गईं.

    पहली बार किसी औरत कर स्पर्श पाकर मेरा लंड खड़ा हो गया और मुझे बहुत मजा आने लगा.

    कुछ देर तक हम दोनों पटका पटकी करते रहे.

    फिर जब मामी को अहसास हुआ कि मेरा लंड खड़ा हो गया है तो वे मेरे गाल पर किस करके हंसती हुई मुझे छोड़ कर अपने बिस्तर पर चली गईं.

    उनके जाने के बाद मैं अपने हाथ से ही अपने लंड को दबा कर शान्त करने लगा.

    शायद मामी की भी चूत में आग लग चुकी थी.

    लेकिन मेरी तरफ से कोई प्रक्रिया न पाकर मामी खुद ही बोलीं- अक्की … तुम्हारे अन्दर दम नहीं है, अगर दम होता तो तुम मेरे बिस्तर पर आकर अपना किस वापिस लेकर चले जाते.

    इतना सुनते ही मैं झट से मामी के बिस्तर पर जाकर उनके बगल में सीधा होकर लेट गया.

    लेकिन उन्हें छूने की हिम्मत अब भी नहीं हो रही थी.

    उस वक्त मामी आसमानी रंग की साड़ी पहनी हुई थीं और उनके जिस्म की खुशबू मुझे रह रह कर और कामुक कर रही थी.

    मामी- बस इतनी ही हिम्मत है?

    मैं- पहले आप मेरा किस वापिस कर दीजिए, फिर आपको अपनी हिम्मत दिखाता हूं.

    मामी समझ चुकी थीं कि मैं डर रहा हूं.

    फिर मामी ने धीरे से अपना पेटीकोट ऊपर करके मेरा हाथ अपनी नंगी चूत पर रख दिया और बोलीं- बस किस ही चाहिए?

    मैं पहली बार किसी चूत को छू रहा था.

    वाह … क्या चूत थी मामी की … एकदम मख़मली और बहुत ही बड़ी शायद कामसूत्र में कही हुई ‘हथिनी योनि’ जैसी!

    उनकी चूत पर एक भी बाल नहीं था.

    बिना कुछ बोले मैं मामी के अन्दर चल रही कामभावना को समझ चुका था.

    आज मेरे लंड को पहली चूत मिलने वाली थी इसलिए मैं कुछ नहीं बोला, बस धीरे धीरे उनकी चूत को अपने हाथ से सहलाने लगा.

    मामी को सांसें तेज होने लगीं.

    वे मेरे हाथ पर अपना हाथ रख कर अपनी चूत सहलवाती हुई सिसकारियां लेने लगीं- आह्ह्ह … उम्मम्म … उह्ह!

    दो मिनट तक चूत सहलाने के बाद मुझे अहसास हुआ कि उनकी चूत से चिपचिपा पानी जैसा कुछ निकाल रहा है.

    वह पदार्थ बिलकुल गर्म घी की तरह था.

    अब मेरा लंड उनकी चूत मे जाने के लिए बेचैन हो गया था.

    मैं झट से मामी के ऊपर चढ़ कर चुदाई की पोजीशन में आ गया और अपना लंड उनकी चूत पर सैट करने लगा.

    मामी भी मेरा लंड अपने हाथ में पकड़ती हुई बोलीं- मुझे पता है कि तुम पहली बार कर रहे हो और तुम्हें कुछ पता नहीं है, लेकिन मैं जैसा बोल रही हूं बस वैसा करो और वह भी बिना कुछ सवाल किए, तभी हम दोनों अच्छे से मजा ले पाएंगे!

    मैंने उनकी तरफ देखते हुए ‘हां’ में अपना सर हिला दिया.

    मामी ने धीरे से मेरे कान में कहा- पहले नीचे सरक कर मेरी चूत चाटो.

    मैं- छी: … मामी यह मुझे नहीं हो पाएगा.

    मामी गुस्से में बोली- ठीक है. तब तुम अपनी जगह जाकर सो जाओ, कुछ करने की जरूरत नहीं है.

    मैं पहली बार चूत चोदने के लिए काफी उत्सुक था इसलिए मैं उन्हें गुस्से में देख कर रिक्वेस्ट करते हुए बोला- प्लीज़ मामी. मैंने आज से पहले ऐसा कुछ नहीं किया है और मुझे आता भी नहीं है.

    मामी मेरे सर का पकड़ कर मुझे किस करती हुई आगे को हुईं और उन्होंने अपनी पूरी जीभ मेरे मुँह के अन्दर डाल दी.

    मैंने भी मामी के होंठों पर अपने होंठ रख दिए और उनके होंठों को ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा.

    मामी जी भी मेरा साथ देने लग गई थीं.

    धीरे धीरे मेरा हाथ मामी जी के स्तनों पर जा पहुंचा, मैं ब्लाउज के ऊपर से ही स्तनों को सहलाने लगा.

    मामी भी मेरी पीठ को अपने हाथों से सहला रही थीं.

    मैंने मामी जी की होंठ चुसाई के बाद उनकी गर्दन पर चूमना चालू कर दिया.

    मामी जी गर्म हो गई थीं, वे मेरा पूरा साथ दे रहीं थीं.

    उफ्फ … उनके होंठों का स्वाद मुझे पागल कर रहा था.

    हम दोनों एक दूसरे की जीभ और होंठों को बेतहाशा चूसने लगे थे.

    कभी कभी तो ऐसा लगता कि मामी मुझे पूरा खा जाना चाहती हैं.

    कुछ देर बाद मामी मुझे अलग करती हुई बोलीं- कैसा लगा?

    मैं- अहह मामी … मजा मजा आ गया.

    फिर मामी मेरे सर पकड़ कर नीचे करती हुई बोलीं- जैसे कुत्ते पानी पीते हैं, बस वैसे अपनी जीभ से मेरी चूत चाटो. उसके बाद तुम्हें और भी मजा आएगा.

    मैं समझ गया था कि बिना चूत चाटे वे अपनी चूत नहीं चोदने देंगी.

    इसलिए बिना झिझके मैं उनकी दोनों टांगों के बीच आ गया.

    चांदनी रात में मामी की नंगी जवानी क्या मस्त लग रही थी.

    मामी जी की चूत रात में एकदम चमाचमा उठी थी.

    उनकी चिकनी चूत कामरस से भीगी हुई थी.

    इस तरह चूत के दीदार करने के साथ मैंने अपनी जीभ उनकी चूत में घुसा दी.

    मामी जी एकदम से तिलमिला उठीं.

    फिर मैं धीरे धीरे उनकी चूत को जीभ से सहलाने लगा.

    मैं उनकी चूत की दोनों पंखुड़ियों के बीच की दरार में अपनी जीभ नीचे से ऊपर करके चूत चाटने लगा.

    मामी की सांसें तेज होने लगीं- आआह … उईई … ओह्ह … अई!

    वे मादक सिसकारियां भरने लगीं.

    अचानक से वे मुझे अपने ऊपर खींच कर मेरी चड्डी को निकल कर फेंकती हुई बोलीं- आह्ह्ह … मजा आ गया … अब तुम जल्दी से मेरी चूत में अपना लंड डालकर मुझे चोद दो.

    मेरा लंड कब से इस पल का इंतजार कर रहा था.

    मैं जल्दी से अपने हाथ में लंड को पकड़ कर उनकी चूत पर इधर उधर फिराने लगा.

    लेकिन मुझे उनकी चूत का छेद नहीं मिल रहा था.

    मामी थोड़ी मुस्कुराती हुई मेरे हाथ से लंड अपनी हाथ में लेती हुई बोलीं- मेरे राजा … तुम तो एक छेद भी नहीं ढूंढ पा रहे हो … मेरी चुदाई कैसे करोगे?

    फिर वे हंसती हुई अपनी चूत की छेद पर मेरे लंड सैट करती हुई बोलीं- अब धीरे धीरे अन्दर धकेलो.

    उनकी बात सुन कर मुझे बहुत बुरा लगा और उन पर गुस्सा आने लगा.

    मैंने गुस्से में अपनी पूरी ताकत के साथ एक ही झटके में अपना पूरा लंड उनकी चूत में पेल दिया.

    उस वक्त मेरा लंड सिर्फ पांच इंच का ही था.

    मामी की चुदाई शायद काफी दिनों से हुई नहीं थी और मेरे एक ही झटके में पूरा लंड अन्दर जाने से वह तिलमिला उठीं- अह्ह्ह … बहनचोद … उह्ह्ह … मर गई मादरचोद रुक जा भोसड़ी के!

    वे मुझे गन्दी गन्दी गालियां देने लगीं.

    मैं उनके दर्द के परवाह किए बगैर ताबड़तोड़ चुदाई करने लगा.

    मामी को मैं इतनी तेजी से चोदने लगा कि पट … पट … अह्ह हम्म्म उह्ह … आउच … की आवाजें गूंजने लगीं.

    उनकी जोर जोर से चीख निकलने लगी- आह आआआ … हा … उम्म्ह … अहह मर गई प्लीज़ … आराम से करो, बहुत दर्द हो रहा है.

    लेकिन मैंने अपना काम जारी रखा.

    कुछ धक्के मारने के बाद अब उनका दर्द भी कम हो गया था, वे भी अपनी गांड उठा उठा कर चुदाई करवाने लगीं.

    उनको भी मजा आने लगा और वे अब जोर जोर से सिसकारियां भर रही थीं- ऊफ्फ … ऊऊ श्श्श्श श्श्श्ह्स … म्म्म्ह म्म्म्म्म … चोदो और चोदो मुझे अक्की … मेरी चूत की प्यास बुझा दो … फाड़ डालो मेरी चूत!

    करीब 5 मिनट की चुदाई के बाद मेरा शरीर अकड़ने लगा.

    मैंने एक आह्ह्ह … के साथ अपना पहला गाढ़ा वीर्य उनकी चूत में छोड़ दिया और उनके बगल में लेट गया.

    मामी उठ कर बैठती हुई बोलीं- मुझे पता था कि तुम जल्दी झड़ जाओगे.

    मैं शर्म के वजह से कुछ नहीं बोला.

    मामी अपनी साड़ी को निकालती हुई मुझे देखने लगीं और साड़ी के साथ ही उन्होंने अपने ब्लाउज को भी निकल दिया.

    अब वह सिर्फ पेटीकोट और ब्रा में थीं.

    फिर उन्होंने अपने पेटीकोट को ऊपर करके अपनी एक टांग मेरे मुरझाए हुए लंड पर रख दी और अपने हाथ से पकड़ कर मेरे लंड को सहलाती हुई अपना आधा शरीर मेरे ऊपर रख कर लेट गईं.

    मैंने भी अपना एक हाथ उनकी गांड पर रख दिया और एक हाथ से उनकी चूचियों को दबाने लगा.

    एक बार फिर उनके मुँह से सिसकारियां निकलने लगीं- उम्म्ह … अहह … हय … याह … आआ आह्हह!

    नीचे उनके पैर मेरे पैरों पर रेंग रहे थे.

    मैं फिर से ऊपर आकर उनके निर्वस्त्र स्तनों पर जीभ फेरने लगा.

    मामी के मुँह से तो बस मादक सिसकारियां निकली जा रही थीं- अह्ह्ह ह्ह्ह्ह … मम्म … और जोर से!

    कुछ देर बाद मेरा लंड एक बार और खड़ा हो गया.

    अब मामी जी ने कहा- अब तुम नीचे लेट जाओ, मैं तुम्हारे लंड पर बैठ कर अपनी चूत चुदवाऊंगी.

    मैं बिस्तर पर सीधा होकर लेट गया.

    पहले तो वे मेरे लौड़े को अपने होंठों पर रख कर मुँह के अन्दर लेने लगीं और उसे कुल्फी की तरफ चूसने लगीं.

    पहली बार मेरा लंड किसी युवती के मुँह में था, जिससे मेरे मुँह से मादक आवाजें निकलने लगी थीं- आह … हहहह … इस्स … चूस साली रण्डी बड़ा मजा आ रहा है!

    मैं भी उत्तेजना से उनके मुँह में अपना लंड घपाघप पेले जा रहा था.

    उनके मुँह में इस तरह से लंड पेलने से गों … गों … की आवाज आ रही थी जिससे मैं और उत्तेजित होकर उन्हें और जोर से पेल रहा था.

    उनकी आंखों से आंसू निकल रहे थे.

    करीब पांच मिनट बाद उन्होंने मेरा लंड अपने मुँह से निकाला.

    मेरा लंड उनकी लार से भीग चुका था.

    उसके बाद जल्दी से मेरे लंड को अपनी चूत पर सैट करके वे धीरे धीरे बैठने लगीं.

    मामी के मुँह से ‘आआह … उऊऊ उफ फफ्फ़ … सईई … ’ की आवाजें निकल रही थीं.

    मेरा लंड अब पूरी तरह से उनकी चूत में घुस गया था.

    मामी जी जोर जोर से सिसकारियां भर रही थीं.

    अब मैंने नीचे से ही धीरे धीरे धक्के लगाना शुरू कर दिए.

    मामी को मज़ा आने लगा.

    वे मुझसे कहने लगीं- उम्म्ह … अहह … हय … याह … ओर जोर से … जोर जोर से चोदो मुझे अक्की!

    मैंने धक्कों की स्पीड बढ़ा दी, मामी भी अपनी कमर को अपने चूतड़ों को उछाल उछाल कर चुद रही थीं.

    मामी पूरे जोश में बोल रही थीं- आह आह्ह उई … उम्म्ह … अहह … हय … याह … उफ ओ आह्ह … अक्की और तेज पेलो … अह्ह्ह!

    इस तरह करीब पांच मिनट के बाद चुदाई करते हुए अचानक उनकी सांसें भी जोर जोर से चलने लगीं.

    इसी बीच मामी ने मुझे कस कर पकड़ लिया और चिल्लाईं- आआह हुउऊ सस्सीईई …

    बस यही सब करते करते उन्होंने अपना गर्म गर्म पानी छोड़ दिया और बगल में लेट गईं.

    हम दोनों पसीने से भीग चुके थे लेकिन मेरा लंड अभी भी खड़ा था.

    मैंने गुस्से में मामी के बालों को पकड़ते हुए गाल पर खींच कर तमाचा मार दिया और गाली देने लगा- साली रण्डी, जब पहली बार मैं झड़ गया था, तब बहुत नाटक कर रही थी. अब तेरी चूत का पानी निकल गया तो आराम करने लगी. इतनी ही गर्मी थी तुम में, गांड फट गई तेरी!

    उनकी आंखों में आँसू आ गए.

    मामी दर्द से अह्ह्ह … करके हुए बोली- मादरचोद … तू तो बहुत जल्दी चोदूं बन गया!

    मैं फिर एक तमाचा मरते हुए बोला- हां साली … तूने आज मेरी नुन्नू को लौड़ा बना दिया. मेरे कुंवारे लंड का पहला मजा ले लिया!

    इस बार मामी ने मेरे लंड को हाथ में पकड़ कर सोचती हुई बोलीं- मेरी एक चीज कुंवारी बची है, जो मैं तुम्हें दे सकती हूं. जिससे तेरा लंड शांत हो जाएगा.

    मैं- क्या?

    मामी चारपाई से उठती हुई बोलीं- चल मेरे साथ कमरे में, वहीं बताऊंगी.

    मैं बिना कुछ बोले नंगा ही उनके साथ चल दिया.

    मामी के कमरे के अन्दर अंधेरा था, कुछ भी साफ नहीं दिखाई दे रहा था.

    मैंने मामी से लाइट चालू करने के लिए कहा, तो उन्होंने मना कर दिया.

    वे बोलीं- लाइट चालू होगी तो मम्मी पापा को पता चल जाएगा कि हम दोनों जागे हुए हैं.

    इस पर मैं बोला- हां ठीक है, लेकिन जल्दी बताओ कि आपके पास ऐसा क्या है, जो आपकी अब तक कुंवारी है? प्लीज जल्दी बताओ मुझसे अब और बर्दाश्त नहीं हो रहा है.

    मामी ने मेरा हाथ पकड़ा और उसे अपनी मखमली गांड पर रखती हुई बोलीं- ये रही मेरी कुंवारी मख़मली गांड, जो आज तक किसी ने नहीं मारी. आज तुम इसे खोल कर मार लो.

    मैं उनकी गांड को दबाते हुए बोला- वाउ … मामी हो तो आपकी जैसी!

    मामी ने बगल की अलमारी से वैसलीन निकाल कर मेरे लंड पर लगाना शुरू किया.

    वे लंड की मसाज करती हुई बोलीं- कुंवारे लंड के लिए कुंवारी गांड तो बनती है!

    फिर मामी जल्दी से बेड पर चढ़ कर घोड़ी बनती हुई बोलीं- आओ जल्दी से और मेरी गांड में अपना लंड पेल कर इसकी सील तोड़ दो. तुम्हारे मामा जी ने तो आज तक इसको छुआ तक नहीं है … इसलिए प्लीज थोड़ा रहम दिखाना और आराम से उद्घाटन करना.

    मैं ‘ठीक है!’ बोल कर मामी की गांड मारने पीछे की तरफ आ गया.

    मैंने मामी जी की कमर को जोर से पकड़ लिया और लंड का सुपारा गांड के छेद पर लगा दिया.

    कोरी करारी गांड पर लंड का गर्म गर्म स्पर्श होते ही मामी के बदन में एक सिहरन सी दौड़ गई.

    मैंने धीरे से अन्दर की ओर दबाव बनाया और सुपारे को मामी की गांड के पहले छल्ले में फंसा दिया.

    लंड पर वैसलीन लगने की वजह से एक ही बार मेरे लंड का सुपारा मामी जी की गांड में चला गया.

    जैसे ही सुपारे का हमला हुआ तो उस वजह वे ज़ोर से चीख पड़ीं- आईईई मैं मर गई … प्लीज … आराम से आह्ह … उई आह आहिस्ते आहिस्ते डालो … प्लीज़ दर्द हो रहा है. मैं पहली बार गांड मरवा रही हूं.

    मैं थोड़ी देर के लिए रुक गया उसके बाद मैंने अपने लंड को एक बार थोड़ा सा बाहर खींचा और फिर से एक धक्का लगा दिया.

    इस बार लगभग मेरा आधा लंड मामी की गांड की गहराई में उतर गया था.

    मामी के मुँह से फिर से चीख निकल गई- इईईई … श्श्शशश … अआह … उम्म्ह!

    उन्होंने कसकर बेडशीट पकड़ ली और अपनी आंखें बंद कर लीं.

    मैंने देखा कि मामी की आँखों में से पानी निकल आया था.

    मैं थोड़ी देर वैसे ही रुका रहा.

    जैसे ही मामी थोड़ी नॉर्मल हुईं, मैंने धीरे धीरे धक्के लगाने शुरू कर दिए.

    अब उनको भी मज़ा आ रहा था.

    वे मादक कराह लेती हुई सिसकारने लगी थीं- हाईई रे … हाई … इसमें तो चूत से भी ज़्यादा मज़ा आता है … और कसकर पेलो मेरे राजा … हाईईई रे सच में बहुत मजा आ रहा है … सीई हाईई … और रगड़ कर चोदो … आह सीईई ईई और कसकर … हाय माँ … आआह … मजा आ गया रे!

    यह सुनकर मैं अब उनको बस धकापेल चोदने लगा और ताबड़तोड़ गांड को तबला समझ कर बजाता ही जा रहा था.

    वे ‘उफ्फ्फ … स्स्स्सस … ’ करती जा रही थीं.

    अब मेरी गोटियां भी मामी के मुलायम नितंबों से टकरा रही थीं.

    मैं थूक टपकाता जा रहा था और मस्ती से अपने लंड को मामी की गांड में अन्दर बाहर कर रहा था.

    उनकी मक्खन जैसी कोमल मुलायम गांड में मेरा लंड बड़े प्यार से चल रहा था.

    साथ ही मैं अपने हाथ की उंगलियों से उनकी चूत के दाने को भी मसल रहा था.

    इससे कुछ ही देर में मामी जी बहुत ही उत्तेजित हो गई थीं- अहह हहाआ इईई … श्शशश … आआह … मज़ा आ गया … ऊफ्फफ … फाड़ दे अपने लौड़े से मेरी गांड … अया … अब तो मैं तेरी बीवी हो गई हूँ … आअह सुहागरात को तेरे मामा जी ने मेरी कुंवारी चूत चोदी थी और आज तुम उईई … अहह हहाआ … मेरी कुंवारी गांड मार रहे हो … आह … चोद मेरे राजा चोद मुझे … जी भर के चोद आआअ … उम्म उफ्फ़ हाय मजा आ गया!

    इसी के साथ मेरे धक्के और भी तेज होते जा रहे थे, मैं मामी जी को पूरे जोश के साथ चोद रहा था.

    मामी फक करते हुए मेरा लंड पच पच की आवाज के साथ अन्दर बाहर हो रहा था.

    मैं- मामी जी मेरी जान, आपने तो मुझे जन्नत की सैर ही करवा दी आह … मेरी जान … मैं तो … मैं … तो … ग … गयाआ … आआह … मेरा पानी निकलने वाला है, कहां निकालूँ?

    मामी बोलीं- मेरी गांड में ही अपना पानी निकाल दो!

    फिर मैंने ‘ये आअहह … ऊहह … लो’ कहा और उनकी गांड में ही अपना वीर्य छोड़ दिया.

    मैं सारा वीर्य उनकी गांड में आखिरी बूँद तक डालकर ऐसे ही कुछ देर तक उनके ऊपर लेटा रहा.

    फिर जब मैंने अपना आधा सिकुड़ा हुआ लंड उनकी गांड से बाहर निकाला तो मैंने देखा कि उनकी गांड मेरे वीर्य से लबालब भरी हुई थी और लंड की रगड़ से लाल हो गई थी.

    उनकी गांड से थोड़ा थोड़ा करके वीर्य उनकी चूत की तरफ बहने लगा था.

    थोड़ी देर बाद मामी ने उठ कर अपनी चूत और गांड को बेडशीट से अच्छे से पौंछ कर साफ किया.

    उसके बाद हम दोनों फिर बाहर चारपाई पर आ गए और सुबह तक चुदाई करते रहे.

    उस दिन सुबह में मामी ठीक से चल भी नहीं पा रही थीं.

    यह देख कर मैं मुस्कुरा रहा था.

  • विधवा मौसी मेरे बाप से चुद गई

    मेरा नाम राजू है. मेरा जन्म उत्तर प्रदेश के एक शहर में हुआ. मेरे परिवार में मेरे माता पिता, मेरी एक सौतेली बहन है और मैं हूं. आज मेरी उम्र 30 साल के लगभग होगी. आज मेरी शादी हो चुकी मेरे बीवी के साथ मेरे अच्छे संबंध हैं और मेरी एक बेटी है.

    मुझको 10 साल पुरानी बात आज भी याद है कि मैं सेक्स प्रति कितना उत्तेजित हुआ करता था. मेरी छुट्टी खत्म होने को थी. मैं रोज़ शाम को दोस्तों के साथ घूमने फिरने के बहाने लड़कियां ताड़ने शहर में घूमा करता था. शाम की चाय और सिगरेट पीना, मुझे आज भी अपने पुराने दिनों की याद दिला देता है.

    ये वाकिया आज से करीब 8 साल पहले का है. मैं कॉलेज की पढ़ाई कर रहा था और इम्तिहान खत्म होने के बाद घर में छुट्टी मनाने के लिए घर आ गया था.घर परिवार में सब लोग खुश थे कि बेटा घर आया है. मेरे आने की ख़ुशी में घर पर पकवान बन रहे थे. उस दिन मेरा काफी खातिरदारी के साथ स्वागत हुआ था. जो लोग कॉलेज में रहे हैं, उन्हें मेरी बात समझ में आती होगी.

    जब शाम को मैं घर पहुंचा, तो पता लगा कि घर में मेहमान आए हुए हैं. मेरी मौसी और मौसा जी आए थे. घर का माहौल कुछ अलग सा था. सब अपनी बातें कर रहे थे.

    मेरी मौसी मुझे अपने पास बुलाकर बोलीं- बेटा कैसे हो … मैंने आज बड़े दिनों के बाद तुमको देखा है … कितना बड़ा हो गया है रे तू.

    कुछ देर बाद मौसा जी का फोन बजा और वो जल्दी से ‘अर्जेंट कॉल है …’ बोलकर बाहर निकल गए. वे अपने ऑफिस के रवाना हो गए. कुछ देर बाद उनकी कंपनी से फोन आया कि उनका एक्सिडेंट हो गया है.

    हम सब हॉस्पिटल के लिए दौड़े … और हमारे वहां पहुंचने से पहले ही उनका निधन हो चुका था. हम सब एकदम से अवाक थे कि ये क्या हो गया. सभी बेहद दुखी थे. मेरी मौसी और माता जी को रोते हुए देख कर मेरा भी मन खराब हो गया.

    मेरे पिताजी उन दोनों को हौसला देकर चुप करने की कोशिश कर रहे थे. मैंने अपनी छुट्टियां बढ़ा दीं और घर पर रुक गया.

    मौसी अब हमारे घर पर ही थीं. मौसी की कोई औलाद नहीं थी. उनका कोई भी नहीं था, जो उनके लिए कुछ कर सके.

    इसलिए मौसाजी की मृत्यु के बाद वो हमारे साथ ही रहने लगी थीं और हमने भी उनको अपने यहां ही रोकने का फैसला ले लिया था.

    जैसे तैसे दिन काट कर छुट्टियां खत्म हुईं और मैं कॉलेज आ गया.

    इसके 6 महीने बाद ही मैं घर आया. घर में सब लोग नॉर्मल थे. हम सभी एक नई शुरूआत में लग गए.

    दिन यूं ही बीत रहे थे. कुछ दिन बाद मेरे वापस जाने का दिन नजदीक था. मैं अपने पिता के द्वारा गिफ्ट किए गए मोबाइल फोन से बहुत खुश था और उसी फोन में सेक्स कहानी पढ़ रहा था.

    रात को खाना खाने के बाद मैं अपने कमरे में जाकर सोने की तैयारी करने लगा. मेरा कमरा और मेरे माता पिता का कमरा अगल बगल में ही था, जिससे उनके कमरे की कुछ आवाजें मैं आसानी से सुन सकता था.

    देर रात को मैंने कुछ आहट सुनी और मन किया कि सुना जाए क्या बातें चल रही हैं. उनके कमरे से मुझे आज कुछ अजीब सी आवाजें आ रही थीं. मैंने अपने रूम से बाहर निकल कर सुनने की कोशिश की.

    खिड़की की एक झिरी में से कमरे के अन्दर झांक कर देखा कि कमरे में एक छोटा सा बल्ब जल रहा था और कमरे के अन्दर से चाटने की आवाज आ रही थीं. मुझे इधर से कुछ दिखाई नहीं दे रहा था. इसलिए मैंने इधर उधर देखा तो मुझे अपने कमरे में से कॉमन दरवाजे से अन्दर देखना ठीक लगा. मैंने अपने और पापा के कमरे के बीच के दरवाजे में जगह देखी तो मुझे उधर एक बड़ी सी झिरी दिखने लगी. उस झिरी में से मैंने झांक कर देखा तो मैं हैरान रह गया.

    मेरी माँ और मौसी जी लगभग नंगी होकर एक दूसरे को चूमने का प्रयास कर रही थीं और वे दोनों एक दूसरे के ब्लाउज खोल रही थीं.

    इसके आगे का सीन देख कर तो मेरे होश ही उड़ गए. जब मैंने देखा कि पिता नग्न अवस्था में बिस्तर पर लेटे हुए थे. वे अपने लिंग पर उत्तेजक तेल से मालिश कर रहे थे.

    यह सब देख कर मुझे कुछ समझ नहीं आया और मैं अपनी सांसें नियंत्रित करने लगा. कुछ देर बाद मुझे खेल समझ में आया, तो मेरे अन्दर का शैतान भी जाग उठा. मैं अपने फोन को निकाला और चुपचाप उस झिरी में से झांक कर वीडियो रिकार्डिंग करने लगा.

    मैंने वीडियो बनाना ही शुरू किया था कि पिताजी अपने लिंग को सहलाते हुए बोले- लोहा गर्म है … जल्दी से आ जाओ दोनों मेरी पटरानियों … इसका मजा ले लो.

    तभी मेरी मां और मेरी मौसी दोनों ही मेरे पिता की तरफ लपकीं.मेरे पिता ने मौसी को इशारा किया कि वो उनके मुँह पर आकर बैठ जाएं और मेरी मां उनके लिंग की ओर आ जाएं.

    ये सब देखकर मेरा लिंग भी जोर मार रहा था.

    मैंने किसी तरह अपने आप पर कंट्रोल किया और देखा कि मेरी मां ने पिता का लिंग अपने मुँह से चूमना और चूसना शुरू कर दिया. मौसी अपनी योनि को मेरे पिता के मुँह पर रख कर बैठ गईं. मेरे पिता एक पेशेवर जिगोलो के जैसे मौसी की योनि को चूस रहे थे और मौसी अपने वक्षस्थल को मसल रही थीं.

    मेरे पिता ने मौसी की योनि में उंगली डालकर चूसना चालू किया, मौसी भी उनका भरपूर साथ दे रही थीं.

    मुझे अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था कि मेरे सामने ये सब हो रहा है. मगर मुझे इस खेल में अजीब सा मजा आ रहा था.

    कुछ देर बाद मौसी और मां, दोनों ने अपनी जगह बदल दी. अब मेरी मां पिता जी के मुँह पर जाकर बैठ गईं और अपनी योनि को पिता जी की जीभ से चुदवाने लगीं. दूसरी तरफ मेरी मौसी मेरे पिता के लिंग को हाथ में लेकर हस्तमैथुन करने लगीं. उस समय मेरे पिता की उम्र भी करीब 45 साल रही होगी. वो भी काफी मजबूत शरीर के आदमी थे.

    अब तक पिता जी उत्तेजित हो चुके थे और मेरी मौसी और मां भी गरमा गई थीं. पिता ने मौसी को लिंग को चूत पर सैट करने के लिए कहा.मौसी ने वैसा ही किया; वो पिता जी के लिंग को अपनी योनि में लगा आकर बैठ गईं. पिता जी ने कमर उचका कर लिंग को मौसी की योनि में डाल दिया.

    अब मौसी उनके हथौड़ेनुमा लिंग बैठ कर उछल रही थीं. पूरा कमरा फुच फुच की आवाज से गूंज रहा था. उधर मेरी मां ने अपना मोर्चा संभाल रखा था. वह अपनी योनि से पिता जी के जोश को बांटने की कोशिश कर रही थीं, पर मेरे पिता जी अपने जमाने मशहूर लड़कीबाज थे, वह एक अलग किस्सा है. जो मैं फिर कभी सुनाऊंगा.

    इधर इस सबको देखकर मेरे लिंग में उबाल आ रहा था. मौसी और मां दोनों ने मिलकर पिता के साथ 30 मिनट तक यह कामक्रीड़ा की. फिर पिता जी ने अखिर में उन दोनों के वक्ष स्थलों के ऊपर अपने वीर्य का छिड़काव कर दिया.

    उसके बाद मौसी और मेरी मां एक दूसरे को चाट चाट कर साफ़ करने लगीं. उसके बाद पिताजी ने दोनों को चुंबन किया और उनके कानों में कुछ कहने लगे.

    अब मेरी मां भी झड़ कर थक चुकी थीं. वह बिस्तर पर लेट गईं. मगर मेरे पिता का बड़ा लिंग अब भी जोर मार रहा था. मेरी मौसी ने उसे फिर से सहलाना शुरू कर दिया लिंग के पूरी तरह से खड़े हो जाने के बाद मौसी कंडोम का पैकट निकाल कर फाड़ने लगीं.

    तभी मेरी मां ने कंडोम छीन लिया और कहा- अपने जीजा से कैसा परहेज है तुझे … कंडोम रहने दो और अपनी योनि को राजू के बाप के लिंग से संभोग करवा लो.

    मेरी मौसी बोलीं- दीदी अगर मैं प्रेगनेंट हो गई, तो क्या होगा?तभी मेरे पिता जी ने कहा- तू भी मेरी आधी घरवाली है … पर आज से तू पूरी है.

    पिता ये कहते हुए मौसी का मुँह देखकर हंसने लगे. उसके बाद पिता जी ने मौसी को जमीन पर टांगें रखवा कर पलंग के सहारे से कुतिया जैसा बना दिया और पीछे से आकर मौसी की योनि में लिंग डाल कर कुत्ता कुतिया के जैसे कामक्रीड़ा करने लगे.

    मौसी नीचे से अपनी योनि को सहला कर पिताजी का पूरा साथ दे रही थीं.

    पिता जी का लिंग अन्दर घुसते ही एक बार फिर से कमरा फुच फुच की आवाज़ों से गूंज उठा. पिता जी ने मौसी की योनि के साथ 15 मिनट तक भरपूर कामक्रीड़ा की और अपना वीर्य मौसी की योनि में ही प्रवाहित कर दिया.

    इसके बाद वो तीनों एक पलंग पर नंगे ही लेट गए. मैं भी समझ गया कि अब खेल समाप्त हो गया है. मुझको भी अगले दिन हॉस्टल जाना था. मैं भी अपने लिंग को सहलाता हुआ अपने बिस्तर पर चला गया.मेरे मोबाइल फोन में यह पूरी घटना रिकॉर्ड हो गई थी.

    अगले दिन सब एकदम सामान्य था और मां मौसी आदि सभी मुझसे सामान्य व्यवहार करने लगे. मैं अब भी रात की उस घटना से स्तब्ध था.

    मेरे पिताजी बोले- चलो बेटा, तुम्हारी ट्रेन का टाइम हो रहा है.

    अपना बैग उठा कर मैं भी घर से निकल गया. मौसी और माता जी मुझको बाल्कनी से बाय बाय कर रही थी.

    मैं चला गया.

    कुछ समय बाद अगले साल छुट्टियां आने को थीं और मैं घर आने को बड़ा उत्तेजित था. मैंने पूरे नौ महीने तक हॉस्टल में रह कर हर दिन घर की उस वीडियो रिकॉर्डिंग को देखा था और मैं हस्तमैथुन कर लिया करता था.

    मगर इस बार घर वापस आते समय मैं एक खुश खबरी से अनजान था.

    जब मैं घर पहुंचा, तो मौसी को वहां पर नहीं देखा. मैंने मां से पूछा- मां मौसी कहां गई हैं?तो मां ने जवाब दिया- वो हॉस्पिटल में एडमिट हैं.

    मुझे लगा कि मौसी कुछ बीमार होंगी. फिर मैंने पिता के बारे पूछा, तो पता लगा कि वो ही मौसी को लेकर गए हैं.

    अब हमें भी हॉस्पिटल जाना होगा. मेरी मां और मैं, दोनों हॉस्पिटल के लिए रवाना हुए. उधर पता लगा कि मौसी प्रसूता वार्ड में हैं. मुझे तब समझ आया कि मौसी अब मेरी सौतेली मां बन चुकी हैं और उन्हें एक बच्ची को जन्म दिया है.

    मैंने मां से पूछा- क्या मैं जान सकता हूँ कि मौसी अब मेरी कौन लगती हैं?मां ने धीरे से कहा कि अब वो भी तेरी मां हैं. उन्होंने पापा से ही इस बच्ची को जन्म दिया है.

    मैं कुछ नहीं बोला और मौसी के पास जाकर उनको मां कह कर बोलने लगा. मेरी मौसी भी मेरी बात से खुश हो गई थीं.

    हालांकि ये पल मेरे लिए सोचने वाले थे, लेकिन दोस्तो, मैं ये समझता था कि बिना पति के मौसी की जिन्दगी जीना दुश्वार था. हो सकता था कि किसी अन्य से अपने जिस्मानी सम्बन्ध बना लेतीं, जो कि शायद हम सभी के लिए बेहद गलत होता. इसलिए मैंने मौसी को अपनी मां ही बना लिया था.

    मेरे पिताजी को भी अब किसी बात का मलाल नहीं था क्योंकि उनको भी मालूम हो गया था कि मैं सब जान गया हूँ.

    दोस्तो, ये मेरे ज़िन्दगी के कुछ ना भूल पाने वाले पल थे, मैं आशा करता हूं कि आपको मेरी ये गरम और सच्ची सेक्स कहानी पसंद आई होगी.

  • क्लासरूम में जवान कुंवारी लड़की की पहली बार चुदाई

    मेरी क्लास की एक लड़की पर सब लड़के बुरी नजर डालते थे क्योंकि वो बेपनाह हुस्न की मलिका थी. मुझे बहुत बुरा लगता था लड़कों की बातें सुन कर. तो मैंने क्या किया?

    मेरा नाम रोहण है. जब मैं 19 साल का था, तब मुझे जैनब (काल्पनिक नाम) नाम की एक लड़की पसंद आ गयी. जैनब मेरे कोचिंग में पढ़ती थी. जैनब का रंग गोरा था और वो करीबन साढ़े पांच फिट लंबी थी. उसकी चुचियों की साइज 32 इंच थी और नजरें कंटीली थीं.

    जैनब को देख कर कोचिंग और मोहल्ले के लड़के मुठ मार कर खुद को शांत कर लेते थे.

    हमारी ये कोचिंग स्कूल में ही थी. स्कूल के बाद शाम में 03:00 बजे से कोचिंग से घर के लिए चल देता था. मैं पढ़ाई में अच्छा हूँ … लड़कियों से हमेशा से दूरी रखने वाला लड़का हूँ.

    मुझे उसको देख कर न जाने ऐसा क्यों लगने लगता था कि इस लड़की को मुझे इन भूखे भेड़ियों की वासना से बचा लेना चाहिए. यही सोच कर मैं कोचिंग से जब भी घर जाने के लिए निकलता तो जैनब के पीछे पीछे कुछ दूरी बनाता हुआ उसे उसके घर तक पहुंचा कर ही अपने घर जाता था.

    मेरी इस बात को मेरा एक दोस्त समझता था. पहले पहल तो उसने मेरी इस बात पर ध्यान नहीं दिया. मगर जब दोस्तों के बीच जैनब की जवानी की चर्चा होने लगती, तो मैं उखड़ जाता था.

    ये सब देख कर मेरा वो दोस्त समझ गया था कि जैनब मुझे बेहद पसंद है.
    उसने मुझसे कहा कि यदि तुमको जैनब पसंद है, तो उससे अपनी बात कहते क्यों नहीं?

    मगर मैं ऐसा नहीं कह सकता था, शायद मेरा शर्मीलापन मुझे ऐसा करने देने के आड़े आ रहा था.

    फिर एक दिन की बात है कि मेरे इसी दोस्त ने मुझे चैलेंज किया कि तुम यदि उस लड़की को किसी लड़के की जबरदस्ती से बचाना चाहते हो, तो उस लड़की को पटा लो. वरना कोई न कोई उस कली को मसल देगा.
    मैंने कहा- ठीक है … एक महीने में मैं उससे ही खुद को प्रपोज करवा लूंगा.

    अब ये सामने चैलेंज था, तो मैंने एक तरकीब सोची. मैं हमेशा की तरह कोचिंग आता और जाता, लेकिन पढ़ाई के साथ अब साथ जैनब को देखता रहता. इसी दौरान जब उसकी नजर मुझसे मिल जाती थी, तो मैं नजरें घुमा कर बोर्ड पर कर लेता. इस तरह से देखने से एक दो बार जैनब भी मुस्कुराई … मगर मैंने उसकी तरफ से अपना मुँह मोड़ लिया.

    अब भी कोचिंग के बाद जब अपने घर जाने लगता, तो उसे घर तक पहुंचा कर ही जाता. ये बात उसने नोट कर ली थी.

    इस बीच मैं उससे कुछ नहीं कहता था. जैनब भी ये समझ गयी थी कि मैं उससे कुछ भी कहने से रहा.

    एक दिन टेस्ट एग्जाम चल रहे थे. मैंने सारे प्रश्न हल कर दिए थे. इस बीच जिसने भी मुझे हेल्प मांगी … मैंने सबको मदद की.

    अचानक से मेरे पेन की स्याही खत्म हो गई. मैं परेशान हो गया. मुझे परेशान देख कर मेरे एक दोस्त ने मुझसे पूछा- क्या हुआ?

    मैंने पेन को हथेली पर चला कर उसे बताया कि पेन की इंक खत्म हो गई.

    मेरे दोस्त ने ये देखा तो उसने जोर से लगभग चिल्लाते हुए क्लास से कहा- भाई कोई एक्स्ट्रा पेन लाया है, तो दे दो … रोहण का पेन काम नहीं कर रहा है.

    जैनब ने मुस्कुराते हुए मुझे देखा और सबसे पहले अपने बॉक्स में से एक पेन निकाल कर मेरी तरफ बढ़ा दिया.

    फिर उसने मुझसे अपने आंसर भी मिलवा लिए कि उसने सही लिखे या नहीं.

    ये देख कर मेरे दोस्त उसे या मुझे देख कर फब्ती कसने लगे थे. हम दोनों ये सब चुपचाप होकर सुनते और मुस्कुरा कर सबकी फब्तियों को टाल देते.

    फिर 5 सितंबर आने वाला हो गया. सभी शिक्षक दिवस मनाने के लिए चंदा जमा करने लगे. लड़कियों ने गिफ्ट और लड़कों ने डेकोरेशन की जिम्मेदारी ली. केक का जिम्मा मैंने ले लिया और डिसाइड किया कि मैं पांच सितंबर को एक बजे ही कोचिंग क्लास में केक लेकर आ जाऊंगा और 2:30 बजे से सजावट के सामान लाने चलूंगा.

    जैनब को मेरा प्लान पता चल गया. जैनब पांच सितंबर को एक बजे से कुछ पहले ही कोचिंग पहुंच गयी. मैं भी पांच मिनट बाद पहुंच गया.

    मैं जैनब को देख कर सरप्राइज हो गया. मैंने पूछा- इतनी जल्दी आ गयी?

    उसने उसी समय मुझे प्रपोज कर दिया. मैं हक्का-बक्का था … निशब्द हो गया था. वो मुझे चुप देख कर रोने लगी. मैं कुछ बोल पाता, उसने आगे बढ़ कर मुझे लिपकिस कर दिया.

    जैसे ही वो मुझसे लिपटी, मुझे उसके कपड़ों का अहसास हो गया. उसने शर्ट के अन्दर कुछ भी नहीं पहना था. मुझे तो जैनब से चिपकने की तमन्ना न जाने कबसे थी. उसकी भरी हुई छातियों ने मुझे एकदम से गर्म कर दिया और मैंने भी बदले में उससे पूरा लिपट कर उसे किस करने लगा.

    मैंने उसे अपनी बांहों में कस लिया. उसकी आंखों से प्यार को पा लेने के आंसू झड़ रहे थे और मैं भी उसे अपने सीने में चिपकाए हुए एक अजीब सा सुकून पा रहा था. उसके मादक जिस्म की महक मुझे एक अजीब से लोक में ले गई थी.

    हम थोड़ी देर में अलग हो गए. मैं उसे देखने लगा. वो भी मेरी आंखों में झांकने लगी. फिर उसने शर्म से अपनी आंखें झुका लीं.

    मैं हंस दिया, तो वो भी हंस दी.

    मैंने कहा- मुझे तुमसे कुछ कहना है.
    वो बोली- अब भी कुछ कहना बाकी है?
    मैंने कहा- हां.

    वो मेरी तरफ देखने लगी.

    आज मैं उसे पाना चाहता था, इसलिए मैंने बिना कुछ कहे फिर से अपनी बांहें उसकी तरफ फ़ैला दीं.

    वो समझ गई. उसने नजरें झुका कर बोला कि अभी एक घंटा है, तुम्हारा जवाब जो भी हो … मुझे इस एक घंटे में प्यार करके बता दो प्लीज़.

    ये कहते हुए उसने क्लास रूम बंद कर दिया और एक एक करके अपनी शर्ट के बटन खोल दिए और मुझसे लिपट गयी.

    अब शेर के आगे बकरे को डालोगे, तो उसका शिकार तय है. मैंने भी सोचना छोड़ दिया और उससे लिपट गया. मैं उसे कस कस कर लिपकिस करने लगा. मेरे हाथों ने उसकी शर्ट को निकाल दिया. उसने भी मेरी शर्ट निकाल दी.

    उसकी चुचियां बिल्कुल तनी हुई और कसी हुई थीं, किसी बॉल की तरह गर्म थीं. हम दोनों की सांसें एकदम गर्म हो चुकी थीं. उसने मेरी जींस और जांघिया खोल कर मुझे नंगा कर दिया. मैंने भी उसे पूरी तरह से नंगा कर दिया और हम दोनों एक दूसरे के नंगे जिस्मों की अगन को महसूस करने लगे.

    इस समय हम दोनों ही कामवासना के वशीभूत थे. मैंने इधर उधर देखा और दो हाई बेंच मिलाकर अपने लिए सेज तैयार कर ली. मैंने उसे उस पर लिटा दिया. उसने भी लेट कर अपनी आंखें मूंद लीं.

    मैंने उसके दोनों चुचों को चूसना चालू कर दिया और हाथ चुत पर लगा दिया. वो ‘आ आ आआ आऊऊऊ ऊऊऊऊ आउच..’ कर रही थी.

    उसने अपने पैर फैलाते हुए कहा- रोहण अब जल्दी से मेरी चुत में अपना लंड डाल दो … मुझसे सहन नहीं हो रहा.

    मैंने उसके दोनों पैर पूरी तरह से फैला दिए और उसकी चुत को देखने लगा. उसकी चुत पर हल्के बाल थे और उसकी चुत एकदम गुलाब की पंखुड़ियों के जैसे पिंक थी.

    मैंने पोर्न फिल्मों से चुदाई करना कुछ सीख लिया था. बस वही सब याद करते हुए मैंने सीधे अपनी जीभ को उसकी चुत पर लगा दी.

    जैनब इस समय गर्म हो चुकी थी. उसने आंख खोल कर मिन्नत भरी आवाज बोली कि रोहण अभी ये सब छोड़ो … पहले जल्दी से अन्दर डाल दो … नहीं तो लंड खा जाऊँ गी.

    मगर मैं उसकी चुत चूसने में लीन रहा. उसकी चुत की आग बेहद बढ़ गई थी.
    उसने अपने दोनों पैरों और हाथों से मेरा सिर अपनी चुत में ठेल दिया और मादक आवाजें निकलाने लगी ‘ऊऊऊ यसस्स … सीसीई.’

    वो तेज आवाज निकलते हुए झड़ने लगी और फिर ढीली होने लगी.

    एक मिनट तक मानो झंझावात थम सा गया था. अचानक से जैनब उठ गई और मेरा लंड मुँह में लेकर लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी.

    अब मैं ‘आहा आह..’ की आवाज निकालने लगा.

    एक मिनट बाद ही मैंने जैनब के मुँह से लंड खींच लिया और उसकी चुत फाड़ने की तैयारी में जुट गया.

    मैं इस समय पूरे जोश में आ गया था. मैंने हाई बेंच पर जैनब को चित लिटाया और अपने लंड को उसकी चुत पर घिसने लगा.

    जैनब फिर से गरम हो गयी थी. उसने खुद ही लंड चुत पर सैट कर लिया. उसकी चुत सील बंद थी.

    उसने बोला- रोहण मेरा पहली बार है … प्लीज़ मेरी चुत में धीरे धीरे धक्का देना … मुझे दर्द होगा, लेकिन तुम छोड़ना नहीं.

    मैं ठहरा अनाड़ी … मैंने पहले ही धक्के में 3 इंच लंड चुत में उतार दिया. जैनब की चूत से खून आने लगा. वो दर्द से छटपटाने लगी. मैंने उसे गले लगा कर कस कर दाबे रखा और किस करने लगा.

    उसकी आंखों से आंसू आ रहे थे, वो कांप रही थी. उसके शरीर की कम्पन के रुकते ही मैंने लंड चुत में पेल दिया. चुत चीरता हुआ मेरा 7 इंच का लंड चुत में गायब हो गया.

    जैनब ने मुझे कसके जकड़ लिया और दबी जुबान से चिल्लाई- उई ममउम्मी … मर गई!

    मैं उसे चूमता रहा. उसकी चुचियों को चूसता रहा और धीरे धीरे उसे चोदने लगा.

    अब जैनब को भी मजा आने लगा. वो भी मस्त हो गई औऱ ‘आह आह आउच ओह आह..’ की आवाज निकलने लगी.

    ‘आह और जोर से … मेरे रोहण..’

    मैं भी पूरी ताकत से उसे चोदने लगा. कुछ ही मिनट बाद वो मुझे पकड़ कर झड़ चुकी थी. मैंने भी देर नहीं करते हुए ताबड़तोड़ धक्के देना शुरू कर दिए. मैं भी झड़ने वाला हो गया था.

    मैंने उससे पूछा, तो वो बोली- मैंने पहली बार किसी को पसंद किया है … आज चुत का उद्घाटन हुआ है … तुम अन्दर ही डाल दो.

    मैंने 20 धक्के मारकर जैनब को जकड़ लिया. जैनब ने भी मुझे जकड़ लिया और हम दोनों झड़ने लगे.

    जैनब की आंखों में ख़ुशी थी. हमने एक दूसरे को जबरदस्त किस किया और अलग होकर कपड़े पहने.

    मैंने जैनब को दूसरे लड़कों और मोहल्ले के लड़कों के विचार उसे बताए और उसे बताया कि मैंने तो तुम्हें उनसे बचाने के लिए अब तक ऐसे किया था.

    उसने बोला- जो भी हो … मेरी तरफ से सिग्नल मिलने के बाद भी तुमने अपनी अच्छाई नहीं छोड़ी … ये मुझे बहुत अच्छा लगा.
    मैंने उससे पूछा- और क्या क्या अच्छा लगा … मेरा मतलब अभी दस मिनट पहले.
    वो हंस दी और कहने लगी- तुमने बहुत अच्छा चोदा है मुझे … जब भी मन हो बोल देना, लेकिन मैं जानती हूं तुम अभी भी नहीं बोल पाओगे.

    मैंने उसे फिर से चूम लिया.

    वो बोली- रोहण ये बात हम दोनों के बीच ही रहनी चाहिए.
    मैंने बोला- ठीक है.

    अब तक 2:30 बज चुके थे. मैं उससे केक देखने को कह कर डेकोरेशन का सामान लेने चला गया.

    अब हम दोनों जब भी मिलते, मुस्कुरा देते थे. हालांकि मेरा प्यार परवान तो चढ़ा, पर मंजिल नहीं पा सका. उसकी शादी हो गयी और बच्चे भी हो गए.

  • भाईजान ने बहन की चूत चोदी

    मेरी दो बहनें हैं. एक दिन मैं अपनी बहन के कॉलेज गया तो मुझे पता चला कि वो लड़कों से चुदती है. मैंने सोचा कि मैं भी अपनी बहन की चूत चुदाई करूंगा. ये मैंने कैसे किया?

    दोस्तो, मैं आपका दोस्त साजिद मुरादाबाद उ.प्र. से हूँ. मैं 22 साल की उम्र का एक नौजवान लड़का हूँ. मैं बहुत ही क्यूट सा बंदा हूँ. जो लड़की मुझे एक बार देख ले, तो वो मुझसे चुदने को राजी हो जाएगी.

    मैं अन्तर्वासना पर प्रकाशित हर सेक्स कहानी को पढ़ता हूँ और लंड हिला कर मज़ा भी लेता हूँ. इधर की सेक्स कहानी को पढ़ते हुए एक दिन मैंने सोचा कि क्यों ना मैं अपनी भी कहानी आप सबके साथ साझा करूं.

    मेरे परिवार में मम्मी पापा और एक छोटा भाई व 2 बहनें हैं. एक बहन का नाम हिना है, दूसरी का नाम रूबी है. रूभी अभी 19 साल की है.

    मैं घर में सबसे बड़ा हूँ. अब तक मैं बीएससी कर चुका हूँ. मैंने अपनी ही एक शॉप खोल ली थी.

    मेरी छोटी बहन रूबी अभी बारहवीं में पढ़ती है. मेरी चिकनी चिकनी चुत वाली प्यारी प्यारी पाठिकाओं और लंबे लंड वाले दोस्तों … आज मैं आपको अपनी इस कहानी में ये बताने वाला हूँ कि मैंने किस तरह अपनी छोटी बहन रूबी की चुदाई की और रूबी से बड़ी वाली हिना को लंड का रस पिलाया.

    वैसे तो मैं हर हफ्ते अपनी गर्लफ्रेंड की भी चुदाई करता हूँ, लेकिन सच तो ये है कि बहन की चुदाई करने में अलग ही आनन्द आता है. मैं अपने घर में एक अलग रूम में सोता हूँ.

    ये बात उस टाइम की है, जब मेरी रंडी बहन हिना ने कॉलेज में एडमिशन लिया था. उसका पहला ही साल था. वो रोज कॉलेज आती जाती थी.

    एक दिन मैंने सोचा कि चलो आज हिना बहन के कॉलेज घूम कर आते हैं. हिना अपने कॉलेज में कैसा पढ़ रही है. यही सब सोच कर मैं उसको कॉलेज चला गया. जब मैं अन्दर गया तो देखा कि अन्दर लड़का लड़की तो आपस में बात करते ही हैं. कुछ कुछ लड़के लड़कियां तो बातचीत के बहाने मजे भी लेने में लगे थे.

    ये सब देख कर मैंने सोचा कि मेरी बहन तो ऐसी नहीं है, वो ये सब काम में नहीं पड़ने वाली है.

    जब मैं उसकी क्लास में गया … तो उधर हिना नहीं थी. मैंने एक लड़की से पूछा- हिना कहां है?
    उसने मुझे बताया कि आज तो वो कॉलेज आई ही नहीं है.

    ये सुनकर मैं एकदम से हैरान हो गया कि वो तो सुबह ही तो मेरे सामने घर से कॉलेज के लिए निकली थी. कहां चली गई. कहीं उसे कुछ हो तो नहीं गया.
    अब मैं दिमाग़ लड़ाने लगा और मेरे मन में अलग अलग तरह के विचार आने लगे.

    कुछ देर बाद कॉलेज की छुट्टी का समय हो गया. मैं बाहर आकर कॉलेज के गेट के पास एक तरफ छिप कर खड़ा हो गया और बाहर निकलने वाले स्टूडेंट्स को देखने लगा.

    तभी मैंने देखा कि मेरी भोली भाली बहन और एक लड़की के साथ बाहर निकली और बाहर खड़ी एक कार में कुछ लड़कों के साथ उसी कार के अन्दर जाकर बैठ गई.

    मैंने सोचा कि कुछ तो दाल में काला है. कुछ ही समय में मैंने हिना के बारे में पूरा पता निकाल लिया और घर आ गया. हिना घर आ चुकी थी … मगर मैंने उससे कुछ नहीं बोला.

    जब वो दूसरे दिन फिर कॉलेज के लिए घर से निकली, तो मैं उसके पीछे जाने लगा.

    थोड़ी दूर एक जगह उसकी सहेली मिल गई और वो दोनों लड़कियां आगे बढ़ गईं. उस लड़की ने मोबाइल से किसी से बात करना शुरू कर दी. कुछ ही पल बाद एक कार उन दोनों के पास आकर रुकी और वे दोनों उस कार में बैठने लगीं. मैंने देखा कि ये कल वाली ही कार थी और उसमें कई लड़के बैठे थे.

    वे सब कार में बैठ कर कहीं जाने लगे. मैं बाइक से था, तो मैंने उस कार का पीछा करना शुरू कर दिया. काफी दूर तक जाने के बाद मैंने देखा कि कार एक घर के आगे रुक गई थी. वे सब कार से उतर कर उस घर में जाने लगे थे. वो सब अन्दर चले गए. पीछे से मैं भी उस घर के नजदीक गया और अन्दर देखने की जुगाड़ बनाने लगा.

    उस घर के बगल में एक गैलरी थी. मैं उधर गया तो उधर एक खिड़की थी. मैंने खिड़की में देखा तो अन्दर का नजारा साफ़ दिखाई देने लगा. मैं वहां छुप गया और अन्दर देखने लगा.

    मेरी जैसे ही अन्दर निगाह गई, मैं तो समझो पागल सा ही हो गया. उन सब लोगों ने बहुत जल्दी से अपने सारे कपड़े उतारे और सिर्फ चड्डी में होकर बैठ गए. तभी उनमें से एक लड़का बीयर की बोतलें लेकर आया और सबने एक एक बोतल ले ली. बियर पीने के बाद में वो सारे लड़के सिगरेट पीने लगे. एक लड़का मेरी बहन हिना से लिपटने लगा. दूसरा लड़का उस लड़की को अपने से लिपटाने लगा. बाकी के तीन सिगरेट का मजा लेते हुए उन दोनों लड़कियों की मस्ती देखने लगे.

    तभी सबने कुछ गोलियां खाईं और सब एक साथ उन दोनों लड़कियों के नजदीक आ गए. उन सभी ने लड़कियों को किस करना शुरू कर दिया. ये देख कर मैं गरम होने लगा. मैं इस लाइव ब्लूफिल्म देख कर ये भी भूल गया कि इन दो लड़कियों में से एक मेरी बहन भी है.

    वो लोग सेक्स में चालू हो गए. मैंने सोचा कि अब मुझे भी अपनी बहन को चोद लेने में ही फायदा है.

    उसकी चुदाई की बात दिमाग में आते ही मैंने प्लान बनाया और अपना फोन निकाल कर अपनी बहन की चूत चुदाई की वीडियो रेकॉर्ड करनी चालू कर दी.

    उन लोगों ने मेरी बहन को एकदम नंगी कर लिया और उसके ऊपर एक लड़का चढ़ गया. दूसरे ने अपना लंड मेरी बहन के मुँह में दे दिया और हिना लंड चूसने लगी.

    पहले वाले लड़के ने मेरी बहन की टांगें फैला दीं और अपना लंड उसकी चुत में ठांस दिया. हिना की हल्की सी कराह निकल गई, मगर वो लड़का उसे चोदता ही रहा.

    उसने बीस मिनट तक मेरी बहन की चुदाई का मजा लिया और अपने लंड का पानी उसके मुँह में ही निकाल दिया. साली मेरी रंडी बहन ने लंड के पानी को पूरा गटक लिया और वो लंड का पानी पीकर बहुत खुश दिखने लगी.

    इस सबका वीडियो बना कर मैं वहां से निकल आया.

    जब शाम को वो घर आई, तो मेरी बड़ी बहन हिना के चेहरे पर संतुष्टि भरी मुस्कुराहट थी.

    मैंने उसे देखा और कहा- हिना यार … ऐसी मुस्कुराहट तो मैं भी तुझे हर रोज दे सकता हूँ … इसके लिए कॉलेज क्या जाना.
    वो बोली- क्या मतलब भाईजान?
    मैं बोला- कुछ नहीं … तुम अन्दर जाओ … मैं बाद में बताऊंगा.

    मेरी बहन मेरे तेवर देख कर कुछ डर गई. मगर उस समय मैंने कुछ नहीं कहा. मैं रात होने का इंतज़ार करने लगा. मैं मन ही मन बहुत खुश था कि अब तो एक जवान कॉलेज गर्ल की चुत घर में ही मिलेगी … वो भी बिल्कुल फ्री में.

    आख़िर वो टाइम आ ही गया, जब रात को दस बज गए. इन दिनों सर्दियों का मौसम था, तो सब लोग जल्दी ही सो गए थे. मैं अपने रूम से निकला और बहन के रूम में गया. मैंने देखा कि वे दोनों बहनें सो रही हैं. जब मैं पास में गया, तो पागल ही हो गया. मैंने देखा कि मेरी बहन की सलवार खुली है और उसने अपनी चुत पर हाथ रखा हुआ है.

    आह क्या मस्त चुत थी … एकदम साफ और प्यारी सी. उसकी सलवार पर पानी भी निकला हुआ पड़ा था. मैं देख कर खुश हो गया था. शायद वो बस अभी अभी ही अपनी चुत में उंगली हिला कर सोई थी. उसकी चुत के पानी से सलवार अभी गीली थी.

    मैंने पहले तो धीरे से सलवार नीचे की और उसकी चुत का सारा पानी पिया. उसकी चुत के पानी स्वाद बड़ा मस्त था. उसे चाट कर मैं बहुत मस्त फील कर रहा था. क्योंकि आज मुझे कोई डर नहीं था. बस इतना सा मसला था कि छोटी वाली बहन ना जाग जाए.

    कुछ देर के बाद बाद मैंने उसकी सलवार पूरी तरह से निकाल दी और एक हाथ को उसकी नंगी टांगों पर फेरने लगा.

    आह उम्म्मह क्या मज़ा आ रहा था यार!

    इसके बाद मैंने ब्रा से अपनी बहन के चूचे बाहर निकाले और देखने लगा. सच में मेरी बहन के चूचे बड़े रसीले थे … एकदम गोल और भरे हुए. एकदम बड़ी साइज़ की गेंद के जैसे मम्मों को देख कर मेरा लंड टनटना उठा.

    नीचे उसकी चुत पूरी तरह से खुली थी. मैंने उसकी चुत में उंगली डाली, तो मुझे पता ही नहीं चल रहा था कि कितनी बड़ी है. आख़िर वो पांच लड़कों के लंड से जो चुदवा चुकी थी.

    जब मैंने उसके होंठों पर किस करना शुरू किया, तो वो जाग गई और खड़ी हो गई. पूरी नंगी क्या मस्त रांड लग रही थी. उसकी टाइट गांड देख कर मुझे बड़ा मजा आ रहा था.

    वो बोली- भाई ये क्या कर रहे हो?
    मैंने बोला- चल नाटक मत कर … मेरे लंड को मुँह में ले ले.
    वो बोली- मैं अभी पापा को बोलती हूँ.
    मैं बोला- अच्छा जानू … पहले ये भी देख लो.

    जैसे ही मैंने उसे उसकी चुदाई की वीडियो दिखाई, तो जैसे उसको सांप सूंघ गया.
    वो मुँह लटका कर बैठ गई और बोली- इसमें मेरी गलती नहीं है.

    मैंने कहा- तो मैं भी कुछ नहीं बोल रहा हूँ … मुझे क्यों मना कर रही है … मैं भी किसी को ये फिल्म नहीं दिखाने वाला हूँ.
    वो बोलने लगी- तुम बड़े भाई हो … मुझे शर्म आती है.
    मैंने कहा- सुन तू ये समझ कर लंड चूस ले … जैसे वो लड़के तुझे चोदते हैं, वैसे ही में हूँ.

    आख़िर कुछ देर बाद वो मान ही गई. वो हंस कर बोली- चलो आज एक लंड और ठीक …
    उसने ये कहते हुए बहुत तेज़ी से मेरे लंड को अपने मुँह में भर लिया और चूसने लगी.

    मेरे मुँह से ‘अहह उसस्स अम्म्म्म … ऊहह..’ की मस्त आवाज़ निकलने लगी थीं. पहली बार में तो मैंने उसके मुँह में ही पानी निकाल दिया.

    फिर दस मिनट बाद मैंने उसकी टांगें फैला दीं और एक उंगली चुत में डाल कर चुत चाटने लगा.
    अब उसके मुँह से भी ‘आह उउह … सस्स्सीई भाईजान..’ की आवाजें आने लगी थीं.

    हिना बोली- भाईजान … अब और मत सताओ … जल्दी से अपनी बहन की चुत में लंड पेल दो … वरना ये रंडी मर जाएगी भाई … जल्दी अन्दर करो.
    उसने चुत को फैला दिया और मैंने बिना सोचे पूरा का पूरा लंड चुत में पेल दिया.

    ओफ … यार क्या मस्ती आ रही थी … बस कुछ ना पूछो. मैं ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने लगा. मेरी बहन को भी मज़ा आ रहा था. मेरे मुँह में उसके मम्मे थे. मैं बीस मिनट में उसकी चुत में ही झड़ गया और मेरी बहन का पानी भी निकल गया. उसका पानी मैंने अपने मुँह में ले लिया.

    मैंने उस रात में 4 बार अपनी सग़ी बहन को चोदा और उसकी मखमली गांड भी चाटी.

    अब मैं उसकी रोज़ चुदाई करता हूँ. आज तक इतना मज़ा तो मुझे अपनी गर्लफ्रेंड को चोदने में भी कभी नहीं आया.

    मेरी बहनो, सोचो मत … भाईजान को पटाओ और उनका लंड ले लो. मेरे दोस्तो, अगर आपकी बहन भी मस्त है, तो समझो कि आपके पास अनमोल हीरा है. खूब लंड पेलो … घर का माल है चोदो.

  • सेक्स चैट वेबसाइट पर मेरा पहला अनुभव

    मैं आज आपको दिल्ली सेक्स चैट वेबसाइट पर मेरा पहला अनुभव बता रहा हूँ. मेरी भी सेक्स लाइफ एकदम मज़ेदार हो गयी है दिल्ली सेक्स चैट पर अपना समय बिताकर!

    नमस्ते दोस्तो, मेरा नाम निलेश तिवारी है. मैं आज आप लोगों को दिल्ली सेक्स चैट वेबसाइट पर मेरा पहला अनुभव बताने वाला हूँ. दिल्ली सेक्स चैट एक जानी मानी वेबसाइट है जहाँ पर लोग सेक्स का मज़ा लेते हैं.
    मेरी भी सेक्स लाइफ एकदम मज़ेदार हो गयी है दिल्ली सेक्स चैट पर अपना समय बिताकर!
    कैसे?
    कहानी पढ़कर जान लीजिए.

    कुछ दिनों पहले की बात है. मैं दोपहर को अपने बिस्तर पर लेटे सोच रहा था कि मैं 20 साल का हो गया हूँ और मेरी ना तो कोई गर्लफ्रेंड है और ना ही मैंने किसी लड़की को चोदा है.
    दुनिया में लोग आए दिन अपनी और दूसरों की माँ, बहन, बेटी, भाभी को दिन-रात मज़े से चोदते रहते हैं और एक मैं हूँ जिसे कोई भी लड़की घास नहीं डालती.

    मुझमें कुछ कमी नहीं है. तक़लीफ़ यह है कि ये साली लड़कियां बहुत भाव खाती हैं. इन पर पैसे खर्च करो, इनकी बकवास बातें सुनो, इनके काम करो. इतना सब कुछ करने के बाद इस बात की कोई गांरटी नहीं हैं कि ये हमें चोदने देंगी.

    ऐसे ही सोचते-सोचते मेरे दिमाग में विचार आया कि क्यों ना इंटरनेट में सेक्स लाइफ के मज़े लेने की तरकीब पता करूं. 20-25 मिनट इंटरनेट सर्फिंग करने के बाद पता चला कि लाइव सेक्स चैट से सेक्स का मज़ा घर बैठे ले सकते हैं.
    लाइव सेक्स चैट पर खूबसूरत लड़कियां और महिलायें अपने बातों सें और अंग प्रदर्शन से मर्दों के लंड को खड़ा करतीं है.

    मैंने काफ़ी सारी वेबसाइट में से दिल्ली सेक्स चैट को चुना और अपना नसीब आज़माया. वैसे भी मैं लड़कियों की नंगी तस्वीरें देखते मुठ मारकर थक गया था. अब वक़्त था उनसे गंदी बातें और मस्ती करने का.

    दिल्ली सेक्स चैट के वेबसाइट पर जाते ही इतनी सारी सुंदर लड़कियों के प्रोफाइल देखकर मेरा शरीर गर्म होने लगा. वेबसाइट पर एक से एक छमिया जिस में से कुछ ने ब्रा-पेंटी पहनी थी. कुछ ऊपर से नंगी थी और कुछ अपने गांड का छेद दिखाते हुए.

    मैंने बिना कोई देरी किए दिल्ली सेक्स चैट पर अपना अकाउंट बना दिया. मेरा लंड तो सिर्फ़ लड़कियों का प्रोफाइल देखकर ही खड़ा हो गया. मुझें इस बार सिर्फ़ तस्वीर देखकर मूठ नहीं मारनी था. इसलिए मैंने अपने लंड को हाथ ही नहीं लगाया.

    अब रास्ता बिलकुल साफ़ था क्योंकि मेरे पिताजी ऑफ़िस से रात दस बजे तक ही आते हैं और मेरी माँ स्कूल टीचर हैं जो शाम को घर आती हैं.

    मैंने बेडरूम का पर्दा लगा दिया और घर के मुख्य दरवाज़े की कुंडी लगा दी ताकि माँ या पिताजी में से अगर आज कोई घर जल्दी आ जाए तो किसी से भी दरवाज़ा चाबी से ना खुले.
    मैं नहीं चाहता था कि माँ पिताजी की नज़रों में मैं गिर जाऊं और वे मेरी आजादी छीन लें.
    वैसे भी सेक्स का मज़ा आराम से और बिना किसी चिंता के लेना चाहिए ना कि जल्दबाजी में डर डर कर!

    सभी चीज़ों का ध्यान मैंने रखा था ताकि लाइव सेक्स चैट करतें समय कोई दिक्कत ना हो.

    दिल्ली सेक्स चैट के वेबसाइट पर मैं सेक्सी लड़की और भाभियों का प्रोफाइल देख रहा था और सोच रहा था कि इनमें से किसे चुनूं.
    मैं कुछ सालों सें अपनी माँ को गंदी नज़रों सें देखने लगा था. इसलिए सोचा कि कोई भाभी से सेक्स चैट करूं जिसका फिगर मेरी मोटी गांड वाली माँ जैसा हैं. मुझे ज़्यादा देर नहीं लगी ऐसी भाभी ढूंढ़ने में जिसे देखकर मुझें मेरीं माँ याद आती हो.

    मुझे एक भाभी मिली जिसका नाम निकिता है. उसका प्रोफाइल चुनकर मैं पेमेंट मोड की तरफ बढ़ा. मैंने XXX वीडियो वाला सेक्स चैट चुना और पेमेंट देकर भाभी को बुक किया.

    दिल्ली सेक्स चैट पर मेरा पहला लाइव सेक्स चैट सेशन शुरू हो गया; स्क्रीन पर थी नॉटी निकिता भाभी. गोर रंग की भरे बदन वाली निकिता भाभी ने गुलाबी रंग की साड़ी पहनी थी और सफ़ेद रंग का ब्लाउज जिसका एक ही बटन लगा हुआ था.

    निकिता भाभी का फिगर मेरी माँ जैसा ही था- भूरा रंग, बड़े स्तन, मोटी कमर, उभरी हुई गांड और मोटे जांघ. निकिता भाभी ने सुहागरात वाला माहौल बनाया हुआ था लेकिन मुझे तो उनको अपनी माँ बनाकर उनके साथ कामुक आनंद लेनी थी. मैंने अपने लंड पे नारियल का तेल लगाकर मालिश की और अपनी माँ को याद करते हुए मूड बनाया.

    निकिता भाभी- हेलो जानेमन, बताओ अपनी फरमाइश. मेरी चूत का पानी किस तरह निकालना चाहोगे तुम? (अपनी चूत को रगड़ते हुए).

    मैं- भाभी आप तो बहुत सेक्सी लग रही हो. आपको देखकर मुझे मेरी बड़ी गांड वाली माँ की याद आती है. मेरी माँ को बाथरूम में नहाते देख मैंने कई बार मुठ मारी है. असल जिंदगी में नहीं तो आप को ही मेरी माँ समझ कर आपका पेशाब निकाल दूंगा. चलो एक रोल-प्ले गेम खेलते है.

    निकिता भाभी- तो राजा बेटा को अपनी माँ के साथ मस्ती करनी है. मुझे भी रोल-प्ले गेम खेलना पसंद है; बताओ क्या करना है?

    मैं- आपकी जांघों में दर्द है और आप मुझे बैडरूम में बुलाती है आपकी मालिश करने के लिए. अपने बेटे के हाथों से मालिश करवाते समय आप गर्म हो जाती हैं. आप अपने बेटे के साथ थोड़ी कामुक मस्ती करने की सोचती है. बातें करते हुए आप कल रात वाली चुदाई के बारे में बोलने लगती हैं. ये सब बोलते वक़्त आप उत्तेजित होकर गैर मर्दों के साथ आपकी चुदाई के बारे में बताती हैं. यहीं से माँ-बेटे की चुदाई शुरू हो जाती है.

    निकिता भाभी ने इशारा कर दिया कि उनको खेल समझ आ गया है. वो बिस्तर पर अपनी साड़ी ठीक करके लेट जाती है. उत्तेजना की वजह से मुझे भी गंदी मस्ती करने की हिम्मत आ जाती है. अपनी माँ के साथ हकीकत में नहीं तो किसी दूसरी औरत को अपनी माँ बनाकर अपनी हवस मिटाऊंगा.

    निकिता भाभी- अरे नीलेश बेटा, ज़रा बैडरूम में आना तो!

    मैं- क्या हुआ माँ? कल रात को भी बैडरूम से तुम्हारी आवाज़ आ रही थी, तुम ठीक तो हो ना?

    निकिता भाभी- मेरी जांघों में दर्द हो रहा है, ज़रा मालिश कर देना तो. रात भर सोई नहीं हूँ मैं, तू भी रात भर मेरी आवाज़ सुनकर जाग रहा था? (मुस्कुराते हुए)

    निकिता भाभी साड़ी को अपने जांघों तक उठाती है और अपने पैर थोड़ा सा फैला लेती है. मैं जल्दी नहीं झड़ना चाहता था इसलिए मैंने अपना लंड हिलाना बंद कर दिया. फिर निकिता भाभी अपने हाथों से अपने जांघों को सहलाने लगी. वो अपने हाथ को चूत के हिस्से के बेहद नज़दीक ले जा रही थी.

    – मैं कैसे सोता माँ? आवाज़ ही कुछ ऐसी आ रही थी कि मुझे फिर नींद नहीं आई. (आँख मारते हुए)

    निकिता भाभी- आह! तेरे मालिश से तो मुझे कुछ अजीब सा लग रहा है. मेरी जांघों तक ही मालिश करना, मैंने अंदर कुछ पहना नहीं है. नहीं तो तू जोश में आकर मेरी चूत में उंगली डाल देगा.

    मैं- आपकी चूत से ही तो मैं निकला हूँ. क्या उस पर मेरा भी हक़ नहीं बनता?

    निकिता भाभी- छी नालायक़!
    फिर हंसती हुई- अपनी माँ के साथ कोई ऐसे बात करता है भला? वैसे तू हक़ की बात मत कर, तेरे बाप ने अपना हक़ मेरी चूत पर कल सारी रात जताया है. तेरे बाप के लंड पे पूरी रात उछल-उछल कर मेरी कमर टूट गई. रात को अचानक उसका मूड बन गया और मुझे अपने ऊपर चढ़ाकर मेरी गांड मसलने लगा. मेरे स्तनों को ऐसे चूसा कि कभी चूसने मिला ही ना हो. तू मेरे स्तनों की भी मालिश कर दे ज़रा. तू मत चूसना; तूने अपने हिस्से का दूध पी लिया है.

    निकिता भाभी ने अपना साड़ी का पल्लू उतारा और अपना ब्लाउज खोलकर अपने भूरे, पपीते जैसे आकार वाले स्तनों के दर्शन दे दिए. उन्होंने अपने हाथों से अपने स्तनों को दबाया और मुझे चिढ़ाया. मैंने अपने माँ की वैसी चूचियाँ जब वो नहाती थी तब देकही है, मेरा मन करता था कि उसे वहीं जाकर पीछे से दबोच लूं.

    निकिता भाभी- उम्! तू कितने अच्छे से मेरी चूचियों की मालिश कर रहा है. और एक तेरा बाप है, कुत्ते को हर वक़्त इन्हें दबोचकर काटनी होती है. देख अभी भी मेरी चूची लाल है. चल तू अब इतने अच्छे से मालिश कर ही रहा है तो मेरी चूत की भी मालिश कर दे. अपनी उंगली डालकर अच्छे से सहला मेरी चूत को.
    फिर हंसती हुई बोली- ध्यान रख कि तू अपना लंड ना घुसेड़ दे.

    निकिता भाभी ने अपनी साड़ी पूरी उठा दी. उसकी काले रंग वाली बालों से भरी चूत देखकर मैं अपने लंड को जोर से हिलाने लगा. मेरी माँ की भी चूत ऐसी ही दिखती है. वो नहाते वक़्त अपने पैर फैलाती है और अपनी ऊँगली से चूत को साफ़ करती है.

    मैं- माँ तेरी चूत को देखकर ऐसा लगता है कि पापा तुम्हारी रोज़ रात को चुदाई करते हैं. लगता है कि पापा तुम्हारी गांड में भी अपना लंड घुसाते हैं. इसमें मेरी दो उँगलियाँ आसानी से घुस जायेंगी.

    निकिता भाभी- तेरा बाप तो क्या हमारा पड़ोसी भी मेरी चुदाई करता है. बेटा अब जो मैं तुझे बताने जा रही हूँ वो बात तेरे पापा को मत बताना. नहीं तो मेरी आजादी छीन ली जायेगी. तेरे पापा को कभी कभार ही सेक्स का मूड आता हैं और मेरी प्यास तो रोज़ बुझनी ज़रूरी है नहीं तो मैं इधर उधर मुँह मार लेती हूँ.

    निकिता भाभी की बातें सुनकर मेरा लंड तो और कड़क हो गया. अपनी माँ के बारे में ऐसा सुनकर मेरी हवस को राहत मिली. अब से मैं अपनी माँ के बारे में ऐसे ही विचार लाऊँगा. दिल्ली सेक्स चैट की भाभियाँ वाकई में कमाल की हैं दोस्तो.

    निकिता भाभी- सुबह जब मैं हमारे कॉमन बाथरूम में नहाने जाती हूँ, तब हमारा पड़ोसी भी मेरे साथ बाथरूम में घुस जाता है. मेरी मैक्सी उतारकर सबसे पहले मेरी चूतड़ों को फैलाकर मेरी गांड के छेद में अपनी ज़ुबान डालकर मुझे मस्त कर देता है. फिर उसके बाद मेरी बालों से भरी चूत को अपने मुंह में डालकर भीगा देता है. मेरी चीखें न निकलें इसलिए अपना हाथ मेरे मुँह पर रखता है.
    इतने में तो मेरे चूत से एक बार पानी निकल जाता है. फिर मुझे मेरी जांघों से उठाकर उसके लंड पे उछालता रहता है. ऐसे मैं रोज़ उसके साथ सुबह सेक्स करती हूँ.

    एक बार तो वो अपने भाई को भी मेरी चुदाई करने ले आया. दोनों मिलकर सुबह सुबह मेरे शरीर के हर एक छेद को चाटकर साफ़ करने लगे. फिर मुझे अपने बीच में दबाकर बारी बारी मेरी चूत और गांड में अपना लंड घुसाने लगे.

    उस दिन तो मेरी चूत से पेशाब निकल गया था ऐसी चुदाई की थी.

    तू चाहता है कि तेरी माँ ऐसे ही किसी गैर मर्दों के साथ सेक्स करती रहे? क्या तू अपनी माँ को अपनी रंडी नहीं बना सकता? घुसा अपना लौड़ा मेरी चूत में और कर मेरी चुदाई. जब मेरे ही घर में जवान लौड़ा है तो में क्यूँ किसी दूसरे का लौड़ा चुसूं, आह! निकाल मेरा पेशाब, उफ़! ऐसी ही घुसते रेह और फाड़ दे मेरी चूत.

    निकिता भाभी ने एक नकली लौड़ा यानि डिलडो निकाला और उसे वो अपनी चूत में घुसाने लगी. उसने अपने दोनों पैर उठाकर फैला दिए और अपनी गांड में उंगली भी डालने लगी.

    मैं इधर अपने लंड को ज़ोर जोर से हिला रहा था. मेरा तो थोड़ी देर में झड़ने को आ गया था. मेरे से और रहा नहीं गया क्यूंकि ऐसा दृश्य तो मैंने कभी नहीं देखा था. मैंने अपना लंड का माल निकाल दिया. वहाँ पर निकिता भाभी नकली लंड को अपनी गांड में घुस रही थी.

    मैं- अरे भाभी मेरे लंड का पानी तो निकल गया आपकी गांड को देखकर, उफ़ मज़ा आ गया.

    निकिता भाभी- ये तुम्हारा पहला सेक्स चैट सेशन है इसलिए तुम इतनी जल्दी झड़ गए. मेरे साथ कुछ और समय बिताओ फिर देखो हम घंटों तक मस्ती करते रहेंगे. क्या पता शायद तुम अपनी असली माँ की भी चुदाई कर दो (आँख मारते हुए).

    मैं- सही कहा भाभी आपने. मैं अब रोज़ आपसे सेक्स चैट करूँगा. आप मुझे लड़की को पटाने के तरीके बताना फिर उसे मैं यहाँ लाकर आपके सामने उसकी गांड में अपना लंड घुसाउँगा. चलो तो फिर कल मिलते हैं भाभी.

    निकिता भाभी- बिल्कुल, कल मिलेंगे जानेमन. (अपनी गांड का छेड दिखाकर मुझे चिढ़ाते हुए).

    दोस्तो, ये था दिल्ली सेक्स चैट वेबसाइट पर मेरा पहला अनुभव.

    उस दिन के बाद से मैंने कई सेक्सी लड़की और कामुक भाभियों को पटाया है. अब मैं तो हर रोज़ ऐश करता रहता हूँ. आप लोग भी दिल्ली सेक्स चैट वेबसाइट पर जाकर सेक्स के मज़े लीजिये. एक बात और, लड़की और भाभियों की लिस्ट बनाना नहीं तो आप भूल जाओगे कि आपने कितनी आइटम लड़कियों भाभियों को पटाया है.

  • गर्लफ्रेंड की पहली चुदाई मौसी के कमरे में

    यंग गर्ल वेट पुसी स्टोरी में मेरी दोस्ती एक लड़की से हुई. हम दोनों सेक्स करना चाहते थे पर मौक़ा नहीं मिल रहा था. मैं उसे अपनी मौसी के घर ले गया.

    नमस्ते दोस्तो, मेरा नाम शिवराज है और मैं विदिशा, एमपी का रहने वाला हूँ.
    मैं मध्यमवर्गीय परिवार से हूँ.

    मैंने बी.एस.सी. कंप्यूटर से ग्रेजुएशन किया हुआ है और कॉम्पिटिशन एग्ज़ाम की तैयारी कर रहा हूँ.

    पढ़ाई के साथ ही बाइक के शोरूम पर कंप्यूटर ऑपरेटर की जॉब भी कर रहा हूँ.

    मैं साढ़े पांच फीट का हट्टा-कट्टा नौजवान हूँ.
    मेरा औज़ार 5 इंच का है तथा ये 2.5 इंच मोटा है.

    यह यंग गर्ल वेट पुसी स्टोरी मेरी गर्लफ्रेंड भारती की है.
    भारती से मेरी फ्रेंडशिप 4 साल पहले फेसबुक पर हुई थी.

    जब भी वह अपनी फोटो अपलोड करती, तो मैं उसकी बहुत तारीफ़ करता और उसकी फोटो पर अच्छे-अच्छे कमेंट करता.

    इस तरह वह मुझसे प्रभावित होने लगी.
    भारती का रंग गेहुंआ जरूर है लेकिन फेस कट बहुत खूबसूरत है.

    उसके घर में उसके मां-पापा, भाई-भाभी और उनकी एक लड़की थी जो कि अभी एक साल की थी.

    कुछ ही समय में हमारी फ्रेंडशिप प्यार में बदल गई और हम व्हाट्सएप पर भी बात करने लगे.
    फिर धीरे-धीरे कॉल पर प्यार भरी बातें करने लगे.

    भारती का फिगर 30-28-32 का है.
    उसके चूचे ज्यादा बड़े नहीं, पर एकदम मस्त और सख्त हैं.

    उसके दोनों चूतड़ एकदम गोल, पावभाजी वाले बन-रोटी की तरह हैं.
    उसकी गांड मसलने में खूब मजा आता है.

    भारती बी.टेक प्रथम वर्ष में अध्ययनरत है और रेंट पर भोपाल शहर में रहकर पढ़ाई कर रही थी.

    जल्द ही हमने मिलने का प्लान बनाया और मैं उससे मिलने भोपाल पहुंच गया.
    भोपाल में हम घूमे-फिरे, बहुत मौज-मस्ती की.

    दोपहर को मैंने उसे अपनी मौसी के रूम पर चलने को कहा जो कि भोपाल में ही अपने पति के साथ किराए के रूम पर रह रही थीं.
    मेरी मौसी से सैटिंग है, वह एक अलग सेक्स कहानी में लिख कर बताऊंगा कि मौसी मेरे साथ कैसे खुली थीं.

    भारती मान गई और मेरे साथ मौसी के रूम पर चली आई.
    मौसी ने हमारे लिए चाय बनाई और थोड़ी देर बाद मौसी कुछ सामान लाने का बोलकर बाज़ार चली गईं.

    यह मैंने मौसी को पहले ही बता दिया था कि मैं उसे लेकर जब आऊं, तब आप एक-दो घंटे के लिए कहीं चली जाना और उन्होंने ठीक वैसा ही किया.

    मौसा जी तो शाम से पहले अपने काम से लौटने वाले नहीं थे तो मैं बेफिक्र था.

    मौसी के जाते ही मैंने उसे अपनी बांहों में भर लिया और धीरे-धीरे मेरा एक हाथ उसके स्तनों पर आ गया.

    मैं एक हाथ से उसकी चूचियों को व दूसरे हाथ से उसकी पीठ को सहलाने लगा.
    उसने सफेद कलर का टॉप पहन रखा था.

    मैंने धीरे-धीरे करके अपना हाथ टॉप के नीचे से अन्दर डाल दिया और ब्रा के ऊपर से उसके एक स्तन को सहलाने लगा.
    वह मस्त होने लगी, तो मैंने धीरे से उसका टॉप निकाल दिया.

    उसने अपने हाथों को ऊपर करके टॉप निकालने में मेरी मदद की.
    वह खुद चुदने के मूड में आ गई थी तो मैं उसे मौसी के बेड पर ले गया.

    उधर मैंने फिर से उसके साथ चूमाचाटी शुरू कर दी और अपने दोनों हाथों से उसके चूचों को ब्रा के ऊपर से दबाने लगा.
    उसने सफेद कलर की ब्रा पहन रखी थी.

    फिर उसे किस करते हुए ही मैं एक हाथ नीचे ले गया और उसकी सफेद लैगिंग्स के ऊपर से उसकी चूत को सहलाने लगा.
    उसने अपनी टांगें फैला दीं और चुत की रगड़ाई का मजा लेने लगी.

    यह देख कर मैंने उसकी लैगिंग्स को धीरे से नीचे को सरकाते हुए टांगों से बाहर निकाल दिया.
    उसने अपनी गांड उठाकर लैगिंग्स को निकालने में मेरी मदद की.

    लैगिंग्स के नीचे उसने अन्दर ब्लैक कलर की पैंटी पहन रखी थी जो हल्की सी भीग गई थी.
    मैं पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत सहलाने लगा.

    इस सब में वह मेरा पूरा साथ दे रही थी और बहुत गर्म हो गई थी.
    फिर मैंने उसके होंठों को अपने होंठों से अलग किया और उसकी ब्रा को ऊपर करके उसके एक चूचे को मुँह में भर लिया और दूसरे दूध को मसलने लगा.

    वह आह आह करने लगी और जल्दी ही उसने खुद ही अपनी ब्रा निकाल दी.
    जब वह अपनी ब्रा निकाल रही थी, उसी वक्त मैंने उसकी पैंटी निकाल दी.

    उसकी चूत पर घुंघराले काले बाल थे जो कि ज्यादा बड़े नहीं थे, शायद उसने दो हफ्ते पहले ही साफ किए थे.
    फिर उसने मेरे कान में कहा- पहले बताया होता कि यह करने वाले हो तो मैं मैदान साफ करके आती!

    मैंने हंस कर कहा- कोई बात नहीं जान, आज तेरी घुंघराली झाड़ियों में लंड घुसेड़ कर मजा ले लूँगा, तुम अगली बार मैदान चमका कर आ जाना!
    यह सुनकर वह धीरे से हंस दी.

    अब मैंने उसके दोनों पैरों को फैलाया और उसकी टांगों के बीच में आ गया.
    अपने लंड को मैं उसकी चूत पर रगड़ते हुए किस करने लगा.
    मैं अपने दोनों हाथों से उसके मम्मों को जोर-जोर से मसलने लगा.

    वह बहुत गर्म हो गई थी और मेरे कूल्हों पर हाथ रखकर अपनी चूत पर लंड को दबाने लगी थी.
    मैंने एक हाथ नीचे ले जाकर लंड को उसकी चूत पर रखा और जोर का धक्का लगाया.

    चूत बहुत गीली होने के कारण लंड का टोपा अन्दर चला गया.
    उसके होंठ मेरे होंठों में दबे होने के कारण उसकी चीख दब कर रह गई, वरना वह बहुत जोर से चिल्ला देती.

    लौड़े की नोक चुत में घुसने से वह बहुत मचलने लगी और मुझे अपने हाथों से धकेलने की कोशिश करने लगी.
    पर मैंने उसे जकड़ रखा था.
    उसकी आंखों से आंसू बह निकले.

    मैं थोड़ी देर ऐसे ही रुका रहा.

    फिर एक और जोर के धक्के के साथ पूरा लंड मैंने उसकी चूत में पेल दिया.
    उसकी चूत फट चुकी थी और उससे खून आने लगा था जो कि मुझे मेरे लंड पर गर्म महसूस हुआ.

    वह लगभग बेहोश हो चुकी थी.
    मैं ऐसे ही रुक गया और उसे किस करने लगा.

    धीरे-धीरे उसे होश आने लगा और अब वह थोड़ा शांत हो गई थी.
    मैं धीरे-धीरे लंड को अन्दर-बाहर करने लगा.

    वह अपने मुँह से कामुक आवाज़ निकालने लगी थी.

    उसका मीठा दर्द अब मादक सिसकारियों में बदल चुका था और शायद उसे भी अब मज़ा आने लगा था.
    वह धीरे-धीरे ‘अह … उह …’ की आवाज़ें निकालने लगी.

    करीब आधे घंटे तक मस्त चुदाई चली.
    इस बीच में वह दो बार झड़ चुकी थी और अब मैं भी झड़ने वाला था.

    लंड का पानी चुत के अन्दर ना निकले इसलिए मैंने तुरंत अपने लंड को झटके से बाहर निकाल लिया.

    मैं आपको बताना भूल गया कि मेरे लंड का टोपा थोड़ा बड़ा है इसलिए जैसे ही लंड बाहर निकाला, एक पक्क की आवाज़ हुई और उसकी चीख निकल गई!
    वह बोली- अह … शिबु मर गई … ऐसे कोई निकालता है क्या!

    उसे थोड़ा दर्द होने लगा.
    अब तक करीब डेढ़ घंटा बीत गया था तो हम दोनों ने जल्दी-जल्दी अपने कपड़े उठाए और वह कपड़े लेकर अपनी चूत को साफ करने के लिए बाथरूम में चली गई.

    वह कुछ पल बाद बाहर आ गई.
    अब तक मैंने भी अपने कपड़े पहन लिए थे.

    थोड़ी देर में मौसी आ गईं और हम लोग नाश्ता करके निकल गए.
    रास्ते में उसने मुझसे कहा- मुझे चूत में बहुत जलन हो रही है और शायद खून भी आ रहा है.

    मैंने मेडिकल शॉप से पेन किलर खरीद कर उसे दे दिया.
    फिर उसके रूम के पास आकर मैं उसे सड़क पर विदा करके अपने घर को निकल गया.

    उसके बाद तो हम रोज़ रात को सेक्स चैट करने लगे और व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर एक-दूसरे को अपने-अपने अंगों का प्रदर्शन करने लगे.
    वह अलग-अलग रंग व डिज़ाइन की ब्रा पहन कर मुझे फोटो भेजा करती थी और मैं उन फोटोज़ को अपने पास मेमोरी बना कर रख लेता था.

    वह साड़ी वगैरह पहन कर भी अपनी फोटो भेजा करती थी.
    मैं उसे अपनी चूत और गांड में उंगली करने को कहता तो वह मेरी खुशी के लिए दर्द होते हुए भी करती थी.

    उसकी गांड एकदम कुंवारी थी और उसका छेद बहुत छोटा था इसलिए उसे बहुत दर्द होता था.
    फिर भी वह मेरी खुशी के लिए यह सब करती थी.

    एक बार जब मैं उससे नाराज़ हो गया तो उसने मुझे एक वीडियो बनाकर भेजी जिसमें वह टूथब्रश को अपनी गांड में डालकर अन्दर-बाहर कर रही थी.

    गांड में टूथब्रश करने के साथ ही वह बोली- यह सब मैं आपकी खुशी के लिए कर रही हूँ, अब अगर आप हंसे नहीं तो मैं अपनी जान दे दूँगी!
    मैंने उसे माफ़ कर दिया और हम फिर से बात करने लगे.

    फिर कुछ दिनों बाद उसके भाई की बेटी यानि उसकी भतीजी का बर्थडे था.
    तो उसने मुझे अपने घर पर इनवाइट किया.

    उसने मुझे अपने परिवार से कॉलेज फ्रेंड कहकर मिलवाया और फिर मेरे साथ ही वह मार्केट जाकर केक वगैरह और सजावट का सामान लेकर आई.

    मैंने उसकी भतीजी के लिए साइकिल खरीदी गिफ्ट करने के लिए.
    वह फुसफुसाती हुई बोली- वाह फूफा जी! अपनी भतीजी के लिए गिफ्ट खरीद रहे हो!
    मैं भी हंस दिया.

    हम लोग खरीदी करके वापस उसके गांव वाले घर पहुंच गए.
    वहां बहुत से मेहमान आए हुए थे, जिनमें उसके कजिन्स भी थे.

    सबने मेरी खूब खातिरदारी की और मैंने भी साज-सज्जा में भारती की मदद की.

    फिर वह तैयार होने के लिए चली गई और लगभग एक घंटे बाद वह तैयार होकर आई तो मैं उसे देखता ही रह गया.

    उसने गांव के हिसाब से चूड़ीदार कुर्ता और लैगिंग्स पहन रखा था जो कि प्याजी कलर का था और सफेद लैगिंग्स थी.

    मैंने उसे लोगों से नज़रें चुराकर एक फ्लाइंग किस दी.
    उसने भी लोगों से नज़रें चुराते हुए मेरे किस का जवाब दिया.
    अपने होठों को चुम्मा बनाकर मुझे इशारा किया.

    फिर केक कटिंग हुई और मैंने भतीजी को साइकिल दी.
    भारती और मैंने भतीजी के साथ फोटो खिंचाया.

    वह मेरे एकदम पास खड़ी थी तो मैंने मौका देखकर उससे पूछा कि किस रंग की ब्रा-पैंटी पहनी तो उसने धीरे से फुसफुसाते हुए कहा- रेड कलर का सैट!

    मेरा मन हुआ कि अभी उसके कपड़े उतरवा कर उसे रेड कलर के 2 पीस में देखूँ, पर वहां बहुत मेहमान थे तो यह संभव नहीं था.

    हम लोगों ने साथ में खाना खाया और डीजे पर बहुत डांस किया.
    फिर मैं थक कर साइड में खड़ा हो गया.

    तब देखा कि वह एक लड़के के साथ नाच रही थी तो मैंने उसे घूर कर देखा, जिससे वह डर गई और धीरे से एक कान पकड़कर माफी मांगने लगी और मेरे पास आकर खड़ी हो गई.

    मैंने स्माइल की और उसकी मम्मी का डांस देखने लगा.
    उसकी मम्मी की गांड भी बहुत बड़ी थी जो कि वह मटका-मटका कर नाच रही थी.

    तकरीबन रात के 11:00 बजे मैंने उसके पापा से घर जाने की आज्ञा ली तो उन्होंने मुझे जाने से इनकार कर दिया और कहा- बेटा, रात ज्यादा हो गई है, आज रात यहीं रुक जाओ, हमें भी अच्छा लगेगा.
    फिर भारती और भारती के मम्मी-पापा के कहने पर मैं वहीं रुक गया और अपने घर पर कह दिया कि मैं कल सुबह आऊंगा, लेट हो जाने के कारण मैं आज अपने दोस्त के घर रुक गया हूँ.

    मेहमान ज्यादा होने के कारण हम लोग हॉल में सोए.
    मेरे साइड में उसका भाई सोया हुआ था और लेफ्ट साइड में भारती थोड़ी दूरी पर अपना बिस्तर बिछाकर सोई हुई थी.
    उसके साथ उसकी बुआ की लड़की भी सोई हुई थी.

    रात को करीबन 3:00 बजे मेरी नींद खुली, तो मैंने देखा सभी लोग गहरी नींद में सोए हुए थे.
    मैंने धीरे से अपना हाथ भारती की ओर बढ़ाया और उसके कुर्ते को ऊपर उठाते हुए उसकी लैगिंग्स और पैंटी के अन्दर हाथ डाल दिया और उसकी चूत पर चलाने लगा.

    शायद वह जाग गई थी पर कोई रिएक्शन नहीं दे रही थी और मज़ा ले रही थी.
    फिर धीरे-धीरे मैंने एक उंगली उसकी चूत के अन्दर डालकर अन्दर-बाहर करना शुरू कर दिया.

    यह सब मैं उसके भाई पर ध्यान रखते हुए कर रहा था.
    बुआ की लड़की की वजह से ज्यादा रिस्क नहीं कर रही थी, बस मेरे हाथ पर अपना हाथ रखे हुई थी.

    फिर धीरे-धीरे मैंने दूसरी उंगली भी उसकी चूत में डाल दी और यंग गर्ल वेट पुसी के अन्दर-बाहर करने लगा.
    उसने अपनी टांगें थोड़ी फैला ली थी. अब उसकी चूत बहुत गीली हो चुकी थी और पानी छोड़ने लगी.

    फिर मैं उसकी पैंटी से अपना हाथ निकाल लिया और हाथ को ऊपर ले जाकर उसके कुर्ते के गले से अन्दर डालने लगा और उसके दूध सहलाने लगा.

    थोड़ी देर बाद मुझे नींद आने लगी तो मैं अपने हाथ उसके स्तन से हटाकर सो गया.

    सुबह जब मैं उठा तो 8:00 बज चुके थे और सभी लोग उठ चुके थे.
    भारती भी उठ चुकी थी और मेरे लिए चाय लेकर आई थी.

    उसी ने मुझे उठाया और मेरे होंठों पर इधर-उधर देखकर किस कर दी और ‘गुड मॉर्निंग!’ कहा.
    फिर मैं 9:00 बजे उसके घर से निकल गया.