अध्याय 5: रिकवरी, वैक्सिंग और मालदीव्स का दूसरा हनीमून
शीला माँ अब नहीं आ रही थीं। उनकी हालत इतनी खराब हो चुकी थी कि वो बिस्तर से उठ भी नहीं पा रही थीं। उन्होंने साफ मना कर दिया — “बेटी, अब मैं नहीं संभाल सकती… मेरी उम्र हो गई… तुम दोनों ही अब संभालो…”
अब सिर्फ प्रिया और नेहा रह गई थीं।
पिछले 10 दिनों में विक्रम ने दोनों को रोज रात भर चोदा था। दोनों की हालत बुरी तरह खराब हो गई थी। चुतें सूजी हुईं, लाल, चलने में भी दर्द, बैठने में तकलीफ। सुबह उठते ही दोनों कराहतीं।
प्रिया ने नेहा को देखा और कहा, “बहन… अब हम दोनों को ही संभालना पड़ेगा… माँ नहीं आएंगी…”
नेहा कमजोर आवाज में बोली, “दीदी… मेरी चुत अभी भी जल रही है… चल नहीं पा रही… विक्रम जी रोज घोड़े की तरह…”
तीन दिन तक दोनों ने विक्रम से मना किया। विक्रम ने मजबूरन कंट्रोल किया, लेकिन उसका लंड हर वक्त खड़ा रहता।
चौथे दिन – बिकनी वैक्सिंग
प्रिया ने कहा, “चल नेहा, दोनों बिकनी वैक्सिंग करवाते हैं… मालदीव्स जाना है… वहाँ साफ-सुथरा होना चाहिए।”
दोनों एक लग्जरी ब्यूटी सैलून गईं। प्राइवेट रूम में दोनों नंगी लेट गईं।
वैक्सिंग करने वाली लड़की (रिया) ने देखा और मुस्कुराई, “मैडम… आप दोनों की हालत तो खराब लग रही है… चुत सूजी हुई है…”
प्रिया शरमाई, “हाँ… पति बहुत… जोर से…”
नेहा ने आँखें बंद कर लीं।
वैक्सिंग शुरू हुई। गर्म वैक्स लगाते ही दोनों चीख पड़ीं।
“आह्ह… नहीं… बहुत गर्म है… आआह्ह… मेरी सूजी चुत पर मत लगाओ… प्लीज धीरे…” प्रिया चीखी।
नेहा तो रो पड़ी, “दीदी… दर्द हो रहा है… मेरी चुत पहले से ही फटी हुई है… आह्ह… नहीं… बाल उखड़ रहे हैं… रुक जाओ…”
रिया ने दोनों की चुत, गांड और आस-पास पूरी तरह क्लीन किया। दोनों की चुत अब बिल्कुल साफ, गुलाबी और चमकदार हो गई थीं, लेकिन वैक्सिंग के बाद दर्द और बढ़ गया।
घर लौटकर दोनों बर्फ लगाकर लेटी रहीं। विक्रम ने देखा तो हँसा, “अब मालदीव्स में मजा आएगा।”
10 दिन बाद – मालदीव्स दूसरा हनीमून
सब ठीक होने के बाद विक्रम ने दोनों को मालदीव्स ले जाया। पानी के ऊपर वाला विला बुक किया — प्राइवेट पूल, समुद्र के ऊपर ग्लास फ्लोर, रोमांटिक।
पहली रात।
दोनों ने बिकिनी पहनी थी — प्रिया लाल, नेहा सफेद। विक्रम ने दोनों को पूल में खींच लिया।
पहले तो किसिंग, फिर विक्रम ने प्रिया की बिकिनी उतारी।
“नहीं विक्रम… अभी भी थोड़ा दर्द है… प्लीज आज मत… नेहा को पहले…” प्रिया बोली।
विक्रम ने नेहा को पूल के किनारे झुका दिया और कंडोम लगाकर पीछे से घुसा दिया।
“आआह्ह… विक्रम जी… नहीं… इतनी तेज मत… मेरी नई वैक्स की चुत… फट जाएगी… प्लीज धीरे… आह्ह… पूरा घुस गया… पेट में उभार…” नेहा चीखी।
प्रिया बगल में बैठी देख रही थी। विक्रम ने नेहा को 30 मिनट तक डॉगी स्टाइल में चोदा। नेहा 4 बार झड़ गई।
फिर विक्रम ने प्रिया को उठाकर ग्लास फ्लोर पर लिटा दिया। नीचे समुद्र की मछलियाँ दिख रही थीं।
“नहीं… विक्रम… यहाँ नहीं… कोई देख लेगा… आह्ह… धीरे… मेरी चुत अभी भी सेंसिटिव है… प्लीज रुक जाओ… आआह्ह… पूरा अंदर… बहुत मोटा… फाड़ रहा है…”
विक्रम ने प्रिया की टांगें कंधों पर रखीं और घोड़े जैसी चुदाई शुरू कर दी। नेहा प्रिया के स्तन चूस रही थी।
“आह्ह… नेहा… तुम भी मत… दीदी की चुत जल रही है… विक्रम… प्लीज… थोड़ा आराम… नहीं… मैं झड़ रही हूँ… आआआह्ह… मत रुकना… हाँ… और जोर से…”
रात भर थ्रीसम चला। विक्रम ने दोनों को बारी-बारी चोदा — पूल में, बेड पर, बालकनी में, जकूजी में। दोनों की चीखें समुद्र में गूंज रही थीं।
“नहीं… विक्रम… अब काफी… हम दोनों की हालत फिर खराब हो जाएगी… प्लीज… नेहा को ले लो… आह्ह… मेरी गांड में मत… नहीं… पूरा घुस गया… आआह्ह… दर्द… मजे… मत निकालो…”
दोनों थककर सुबह नंगी पड़ी थीं। चुतें फिर से सूज गई थीं, लेकिन दोनों मुस्कुरा रही थीं।
नेहा ने प्रिया के कान में कहा, “दीदी… अब हम दोनों मिलकर ही संभालेंगी… माँ नहीं आएंगी तो हम ही विक्रम जी की भूख शांत करेंगी…”
प्रिया ने सिर हिलाया, “हाँ बहन… लेकिन रोज नहीं… वरना हम दोनों अस्पताल पहुंच जाएंगी।”
विक्रम संतुष्ट मुस्कान के साथ दोनों को अपनी बाहों में लिए लेटा था।
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