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ससुर जी की जवानी

कोमल ki शादी को दो साल हो चुके थे. बचपन से ही कोमल बहुत खूबसूरत थी. १६ साल की उम्र में ही जिस्म खिलने लग गया था. सोलहवां साल लगते लगते तो कोमल की जवानी पूरी तरह नीखर आई थी. ऐसा लगता ही नहीं था की अभी १०थ् क्लास में पर्ती है. School की स्किर्ट में उसकी भरी भरी जांघें लड़कों पे कहर ढाने लागी थी. School के लड़के skirt के नीचे सी झाँक कर कोमल की पैंटी की एक झलक पाने के लीये पागल रहते थे. कभी कभार जब बास्केटबाल खेलते हुए या कभी हवा के झोंके सी कोमल की स्किर्ट उठ जाती तो किस्मत वालों को उसकी पैंटी के दर्शन हो जाते. लड़के तो लड़के, School के Teacher भी कोमल की जवानी के असर से नहीं बचे थे. कोमल के भारी नितम्ब, पतली कमर और उभरती चूचियां देखके उनके सीने पे चहुरियन चल जाती. कोमल को भी अपनी जवानी पे नाज़ था. वो भी लोगों का दिल जलाने में कोई कसर नहीं छोड़ती थी.

उनीस साल की होते ही कोमल की शादी हो गई. कोमल ने शादी तक अपने कुंवारे बदन को संभाल के रखा था. उसने सोच रखा था की उसका कुंवारा बदन ही उसके पति के लीये सुहाग रात को एक उन्मोल तोह्फहोगा. सुहाग रात को पति का मोटा लम्बा लंड देख कर कोमल के होश उर गए थे. उस मोटे लंड ने कोमल की कुंवारी चूत लहू लुहान कर दी थी. शादी के बाद कुछ din तो कोमल का पति उसे रोज़ चार पाँच बार चोद्ता था. कोमल भी एक लम्बा मोटा लौडा पा कर बहुत खुश थी. लेकीन धीरे धीरे चुदाई कम होने लगी और शादी के एक्साल बाद तो ये नौबत आ गई थी की महीने में मुश्किल से एक दो बार ही कोमल की चुदाई होती. हालांकी कोमल ने सुहाग रात को अपने पति को अपनी कुंवारी चूत का तोहफा दीया था, लेकीन वो बचपन से ही बहुत कामुक लड़की थी. बस कीसी तरह अपनी वासना को कंट्रोल करके, अपने School और कॉलेज के लड़कों और टीचर्स से शादी तक अपनी चूत को बचा के रखने में सफल हो गई थी. महीने में एक दो बार की चुदाई से

कोमल की वासना की प्यास कैसे बुझती ? उसे तो एक दिन में कम से कम तीन चार बार चुदाई की ज़रूरत थी.
आखिकार जब कोमल का पति जब तीन महीने के लीये टुर पे गया तो कोमल के देवर ने उसके अकेलेपन का फायदा उठा कर उसकी वासना को तृप्त किया. अब तो कोमल का देवर रामू कोमल को रोज़ चोद कर उसकी प्यास बुझाता था. एक दिन गाँव से टेलीग्राम आया की सास की तबियत कुछ ख़राब हो गई है. कोमल के ससुर एक बड़े ज़मींदार थे. गाँव में उनकी काफ़ी खेती थी. कोमल का पति राजेश काम के कारण नहीं जा सकता था और देवर रामू का कॉलेज था. कोमल को ही गाँव जाना पड़ा. वैसे भी वहां कोमल की ही ज़रूरत थी, जो सास और सुर दोनों का ख्याल कर सके और सास की जगह घर को संभाल सके.

कोमल शादी के फौरन बाद अपने ससुराल गई थी. सास सौर की खूब सेवा करके कोमल ने उन्हें खुश कर दीया था. कोमल की खूबसूरती और भोलेपन से दोनों ही बहुत प्राभवित थे. कोमल की सास माया देवी तो उसकी प्रशंसा करते नहीं थकती थी. दोनों इतनी सुंदर, सुशील और मेहनती बहू से बहुत खुश थे. बात बात पे शर्मा जाने की अदा पे तो ससुर रामलाल फीदा थे. उन्होंने ख़ास कर कोमल को कम से कम दो महीने के लीये भेजने को कहा था. दो महीने सुन कर कोमल का कलेजा धक् रह गया था. दो महीने बिना चुदाई के रहना बहुत मुश्किल था. यहाँ तो पति की कमी उसका देवर रामू पूरी कर देता था. गाँव में दो महीने तक क्या होगा, ये सोच सोच कर कोमल परेशान थी लेकीन कोई चारा भी तो नहीं था. जाना तो था ही. राजेश ने कोमल को कानपूर में ट्रेन में बैठा दीया. अगले दिन सबह ट्रेन गोपालपुर गाँव पहुँच गई जो की कोमल की सौराल थी.

कोमल ने चूरिदार पहन रखा था. कुरता कोमल के घुटनों से करीब आठ इंच ऊपर था और कुरते के दोनों साइड का कटाव कमर तक था. चूरिदार कोमल के नितम्ब तक तैघ्त था. चलते वक्त जब कुरते का पल्ला आगे पीछे होता या हवा के झोंके से उठ जाता तो तिघ्त चूरिदार में कसी कोमल की टांगें, मदहोश कर देने वाली मांसल जांघें और विशाल नितम्ब बहुत ही Sexy लगते. ट्रेन में सब मर्दों की नज़रें कोमल की टांगों पर लगी हुई थी. स्टेशन पर कोमल को लेने सास और ससुर दोनों आए हुए थे. कोमल अपने ससुर से परदा कत्र्ती थी इसलिए उसने चुन्नी का घूँघट अपने सिर पे ले लिया. अभी तक जो चुन्नी कोमल की छातीयों के उभार को छुपा रही थी, अब उसके घूँघट का काम करने लगी. कोमल की बड़ी बड़ी छातियन स्टेशन पे सबका ध्यान खींच रही थी. कोमल ने झुक के सास के पाँव छूए. जैसे ही कोमल पों छूने के लीये झुकी रामलाल को उसकी चूरिदार में कसी मांसल जांघें और नितम्ब नज़र आने लगे. रामलाल का दिल एक बार तो धड़क उठा. शादी के बाद से बहू किखूब्सूरती को चार चाँद लग गए थे.

बदन भर गया था और्जवानी पूरी तरह नीखर आई थी. रामलाल को साफ दीख रहा था की बहू का तिघत चूरिदार और कुरता बरी मुश्किल से उसकी जवानी को समेटे हुए थे. सास से आशिर्वाद लेने के बाद कोमल ने सुर्जी के भी पैर छूए. रामलाल ने बहू को प्यार से गले लगा लीया. बहू के जवान बदन का स्पर्श पाते ही रामलाल कांप गया. कोमल की सास माया देवी बहू के आने से बहुत खुश थी. स्टेशन के बाहर नीकल कर उन्होंने तांगा कीया. पहले माया देवी टाँगे पे चढी. उसके बाद रामलाल ने बहू को चढ़ने दीया. रामलाल को मालूम था की जब बहू टाँगे पे चढ़ने के लीये टांग ऊपर करेगी तो उसे कुरते के कटाव में से बहू की पूरी टांग और नितम्ब भी देखने को मिल जाएंगे. वाही हुआ. जैसे ही कोमल ने टाँगे पे बैठने के लीये टांग ऊपर की राम्म्लाल को चूरिदार में कसी बहू की Sexy टांगों और भारी चूतडों की झलक मिल गई. यहाँ तक की रमलाल को चूरिदार के सफ़ेद महीन कपरे में से बहू की कच्छी (पैंटी) की भी झलक मिल गई. बहू ने गुलाबी रंग की कच्छी पहन रखी थी. अब तो रामलाल का लंड भी हरकत करने लगा. उसने बरी मुश्किल से अपने को संभाला. रामलाल को अपनी बहू के बरे में ऐसा सोचते हुए अपने ऊपर शरम आ रही थी. वो सोच रहा था की मैं कैसा इंसान हूँ जो अपनी ही बहू को ऐसी नज़रों से देख रहा हूँ. बहू तो बेटी के समान होती है. लेकीन क्या करता ? था तो मरद ही. घर पहुँच कर सास ससुर ने बहू की खूब खातिरदारी की.

गाँव में आ कर अब कोमल को १५ दिन हो चुके थे. सास की तबियत ख़राब होने के कारण कोमल ने सारा घरका काम संभाल लीया था. उसने सास ससुर की खूब सेवा करके उन्हें खुश कर दीया था. गाँव में औरतें लहंगा चोली पहनती थी, इसलिए कोमल ने भी कभी कभी लहंगा चोली पहनना शुरू कर दीया. लहंगे चोली ने तो कोमल की जवानी पे चार चाँद लगा दिए. गोरी पतली कमर और उसके नीचे फैलते हुए भारी नितम्ब ने तो रामलाल का जीना हराम कर रखा था.
पिताजी.” कोमल सोच रही थी की कीसी तरह ये धरती फत्जाए और मैं उसमे समा जाऊं.” बेटी इसमे शर्माने की क्या बात है ?. तुम्हारी उम्र में लड़किओं कि कछी अक्सर बहुत जल्दी छोटी हो जाती है. गाँव में तो और्तें कच्च्ही पहनती नहीं हैं. अगर छोटी हो गई है तो सासू माँ सेकः देना शहर जा कर और खरीद एंगी. हम गए तो हम ले आएँगे.लो ये सूख गई है, रख लो.” ये कह कर रामलाल ने कोमल को उस्कि पंटी और ब्रा दे दी. इस घटना के बाद रामलाल ने कोमल के साथ और्खुल कर बातें करना शुरू कर दीया था एक दिन माया देवी को शहर सत्संग में जन था. रामलाल उनको ले कर शहर जाने वाला था.

दोनों घर से सबह स्टेशन की और चल पड़े.रास्ते में रामलाल के जान पहचान का लड़का कार से शहर जाता हामिल गया. रामलाल ने कहा की Aunty को भी साथ ले जाओ. लड़का मंगाया और माया देवी उसके साथ कार में शहर चली गई. रामलाल घर्वापस आ गया. दरवाज़ा उंदर से बूंद था. बाथरूम से पानी गिरने किअवाज़ आ रही थी. शायद बहू नहा रही थी. कोमल तो समझ रहिथि की सास ससुर शाम तक ही वापस लौटेंगे. रामलाल के कमरे का एक्दार्वाज़ा गली में भी खुलता था. रामलाल कमरे का टला खोल के अप्नेकमरे में आ गया. उधर कोमल बेखबर थी. वो तो समझ रही थीकि घर में कोई नहीं है. नहा कर कोमल सिर्फ़ पेटीकोट और ब्लाउज में ही बाथरूम से बाहर नीकल आई. उसका बदन अब भी गीला था. बाल भीगे हुए थे. कोमल अपनी पैंटी और ब्रा जो अभी उसने धोई थी सुखाने के लीये आँगन में आ गई. रामलाल अपने कमरे के परदे के पीछे से सारा नज़ारा देख रहा था. बहू को पेटीकोट और ब्लाउज में देख कर रामलाल को पसीना आ गया. क्या बाला की खूबसूरत थी.



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