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  • ट्रेन में मिली अजनबी लड़की 2

    मैंने टेबल से कंडोम का पैकेट लिया, एक निकाला और पहन लिया। फिर नेहा की जाँघें थोड़ी और अलग कीं। लंड की नोक को उसकी चूत पर रखा और बहुत धीरे से दबाया।

    नेहा ने आँखें बंद कर लीं और मेरी पीठ को कसकर पकड़ लिया।

    “आह्ह्ह…” एक लंबी आह के साथ मेरा लंड धीरे-धीरे उसके अंदर घुसने लगा। नेहा की चूत बहुत टाइट और गर्म थी। मैं रुक-रुककर पूरा लंड अंदर डालता गया। जब पूरा घुस गया, तो हम दोनों कुछ पल ऐसे ही रुक गए।

    मैंने नेहा के माथे पर किस किया और फुसफुसाया,
    “ठीक है ना?”

    नेहा ने सिर हिलाया और बोली, “हाँ… बहुत अच्छा लग रहा है… अब धीरे-धीरे…”

    मैंने बहुत धीमी गति से धक्के मारने शुरू किए। हर धक्के के साथ नेहा की आहें निकल रही थीं — “आह… राहुल… हाँ… और धीरे…”

    हम दोनों एक-दूसरे को कसकर पकड़े हुए थे। मैं उसकी छातियों को चूमता, गर्दन को चूसता, और धीरे-धीरे चोदता रहा। नेहा की जाँघें मेरी कमर के चारों तरफ लिपटी हुई थीं।

    करीब 15-20 मिनट तक हम इसी धीमी, रोमांटिक रफ्तार में रहे। फिर नेहा की साँसें तेज़ होने लगीं। उसकी चूत मेरे लंड को कसकर पकड़ने लगी।

    “राहुल… मैं… आ रही हूँ…” उसने काँपते हुए कहा।

    मैंने गति थोड़ी बढ़ाई। कुछ ही देर में नेहा का पूरा शरीर सख्त हो गया और वो जोर से झड़ गई। उसकी चूत बार-बार सिकुड़ रही थी। उसी पल मैं भी झड़ गया। गर्म वीर्य कंडोम के अंदर भर गया।

    हम दोनों थके हुए, पसीने से तर, एक-दूसरे से चिपके हुए लेट गए। नेहा मेरी छाती पर सिर रखे हुए थी। मैं उसके बालों में हाथ फेर रहा था।

    नेहा ने बहुत धीमी आवाज़ में कहा,
    “राहुल… आज रात बहुत खूबसूरत थी… थैंक यू।”

    मैंने उसे कसकर गले लगाया और बोला,
    “तुम्हारे साथ ये पल मेरे लिए भी बहुत स्पेशल हैं नेहा।”

    रूम में दूसरा राउंड (रात 2:30 बजे)

    पहले राउंड के बाद हम दोनों थके हुए, पसीने से तर लेटे हुए थे। नेहा मेरी छाती पर सिर रखे, अपनी नंगी छाती मेरी छाती से सटाए हुए आराम कर रही थी। उसकी साँसें अभी भी धीरे-धीरे भारी थीं। मैं उसके नंगे पीठ पर उँगलियाँ फिरा रहा था, कभी कमर पर घुमाता, कभी गांड के ऊपरी हिस्से को हल्के से सहलाता। 

    करीब 20 मिनट बाद नेहा ने सिर उठाया। उसकी आँखों में फिर से वो चमक आ गई थी। वो शरमाते हुए मुस्कुराई और मेरे कान के पास फुसफुसाई, 
    “राहुल… मुझे अभी भी और चाहिए… तुम्हारा लंड फिर से…”

    ये सुनकर मेरा लंड फिर से सख्त होने लगा। मैंने नेहा को कसकर चूमा। किस इस बार ज्यादा भूखा था। हमारी जीभें एक-दूसरे से लड़ रही थीं। नेहा ने खुद मेरे ऊपर चढ़ गई। उसकी गीली चूत मेरे पेट पर रगड़ खा रही थी। वो मेरी छाती चूमने लगी, निप्पल्स को जीभ से घुमाती हुई नीचे उतर गई। 

    उसने मेरा लंड हाथ में लिया, धीरे-धीरे सहलाया और फिर मुँह में ले लिया। नेहा बहुत धीरे से चूस रही थी। उसकी गर्म जीभ लंड के सिरे पर घूम रही थी, कभी पूरा मुँह में लेकर गहरी गला दे रही थी। मैंने उसके बाल पकड़ लिए और हल्के से सिर दबाया। नेहा की आँखें ऊपर देख रही थीं, मुँह से सलाइवा टपक रहा था। “मम्म… राहुल… कितना स्वादिष्ट है…” वो फुसफुसाई। 

    कुछ देर चूसने के बाद नेहा ने दूसरा कंडोम निकाला, खुद मेरे लंड पर चढ़ाया और फिर मेरे ऊपर बैठ गई। इस बार वो बहुत धीरे से नीचे बैठी। उसकी चूत अभी भी पिछले राउंड से गीली थी, लेकिन टाइट थी। पूरा लंड अंदर घुसते ही नेहा की कमर काँप गई — “आआह्ह्ह… फिर से भर गया… बहुत मोटा लग रहा है…”

    वो राइडिंग पोज़िशन में धीरे-धीरे ऊपर-नीचे होने लगी। हर बार जब वो नीचे बैठती, उसकी भारी छातियाँ जोर से उछलतीं और मेरे चेहरे के पास आ जातीं। मैंने उन्हें दोनों हाथों से थाम लिया, निप्पल्स को मुँह में लेकर जोर-जोर से चूसने लगा। नेहा की रफ्तार बढ़ने लगी। “फच… फच… फच…” की आवाज़ रूम में गूँज रही थी। नेहा की आहें तेज़ हो गईं — “हाँ राहुल… और तेज़… मेरी चूत को चोदो… आह्ह… मुझे फाड़ दो… बहुत मजा आ रहा है…”

    मैंने नीचे से जोर-जोर से धक्के मारे। नेहा झुककर मेरे होंठ चूसने लगी। उसका पसीना मेरी छाती पर टपक रहा था। करीब 18 मिनट तक ये राइडिंग चली। नेहा दो बार छोटे-छोटे ऑर्गेज्म आई। आखिर में वो जोर से काँपी, चूत मेरे लंड को कसकर दबाई और झड़ गई। उसी पल मैं भी उसके अंदर झड़ गया। 

    नेहा मेरी छाती पर ढेर हो गई। हम दोनों लंबी साँसें लेते हुए एक-दूसरे को चूमते रहे। फिर थकान से सो गए।

    सुबह का पहला राउंड (सुबह 7:45 बजे)

    सुबह की हल्की रोशनी खिड़की से आ रही थी। नेहा मेरी बाँहों में लिपटी सो रही थी। उसका नंगा बदन मेरे बदन से पूरी तरह चिपका हुआ था। मैं जाग गया और उसके गाल पर किस किया। नेहा की आँखें खुलीं। वो मुस्कुराई और मुझे और कसकर चिपक गई। 

    “Good morning baby…” मैंने कहा। 
    नेहा ने शरमाते हुए जवाब दिया, “बहुत अच्छी मॉर्निंग है…”

    मेरा लंड फिर से उसकी जाँघों के बीच सख्त हो चुका था। नेहा ने उसे महसूस किया और मुस्कुराई। इस बार वो खुद मेरे ऊपर चढ़ गई। सुबह की ताज़गी में उसका गोरा नंगा बदन और भी खूबसूरत लग रहा था। उसने कंडोम चढ़ाया और धीरे से लंड पर बैठ गई। 

    “आह्ह… सुबह-सुबह कितना अच्छा लग रहा है…” नेहा ने आँखें बंद करके कहा। वो धीरे-धीरे ऊपर-नीचे होने लगी। मैंने उसके कूल्हों को पकड़ लिया और नीचे से मदद करने लगा। उसकी छातियाँ मेरे चेहरे के सामने हिल रही थीं। मैंने उन्हें चूमा, चाटा और निप्पल्स को हल्के से काटा। नेहा की साँसें तेज़ हो गईं। 

    रफ्तार बढ़ने लगी। नेहा अब जोर-जोर से बैठ रही थी। “हाँ राहुल… और गहरा… मेरी चूत में पूरा डाल दो… आह्ह… मैं झड़ने वाली हूँ…” कुछ ही मिनट में नेहा का शरीर सख्त हो गया और वो पहली बार झड़ गई। मैंने उसे पलटकर मिशनरी पोज़िशन में लिया और तेज़ धक्के मारने लगा। नेहा की टाँगें मेरी कमर पर लिपटी हुई थीं। आखिर में हम दोनों साथ में झड़ गए। 

    हम पसीने से तर लेटे रहे। नेहा मेरी गर्दन में चेहरा छुपाए हुए थी।

    सुबह का दूसरा राउंड (सुबह 9:20 बजे — शावर में)

    हम दोनों नहाने गए। शावर के नीचे गर्म पानी की धार गिर रही थी। नेहा मेरे सामने खड़ी थी। मैंने उसे दीवार से सटाकर खड़ा किया। पीछे से उसकी छातियों को दोनों हाथों से दबाया और गर्दन चूसने लगा। नेहा की साँसें फिर से भारी हो गईं। 

    मैंने उसे झुकाया, शावर के नीचे ही डॉगी स्टाइल में लिया। पानी हमारे गीले बदन पर गिर रहा था। मैंने पीछे से लंड अंदर डाला और जोर से ठोकना शुरू किया। नेहा की गांड हर धक्के पर लहरा रही थी। पानी की धार के साथ “फच फच” की आवाज़ और तेज़ हो रही थी।

    “आह्ह… राहुल… शावर में चोदना… बहुत गंदा और मजेदार है… हाँ… और जोर से… मेरी गांड पकड़कर फाड़ दो…” नेहा चीख रही थी। मैंने एक हाथ से उसके बाल पकड़े, दूसरे से क्लिटोरिस रगड़ा। पानी हम दोनों के शरीर से बह रहा था। नेहा दो बार झड़ गई। आखिर में मैं भी उसके अंदर झड़ गया। 

    शावर के नीचे हम दोनों एक-दूसरे को चूमते हुए खड़े रहे।

    पैकिंग और टैक्सी में स्टेशन पहुँचना

    शावर से निकलकर हमने कपड़े पहने। नेहा ने सफेद टॉप और जीन्स पहनी, मैंने शर्ट और जींस। फिर हमने सामान पैक करना शुरू किया। नेहा अपना बैग पैक कर रही थी, मैं अपना। बीच-बीच में हम एक-दूसरे को किस कर लेते। नेहा ने कहा, “ये गोवा की यादें कभी नहीं भूलूँगी राहुल… तुमने मुझे बहुत स्पेशल फील कराया।”

    पैकिंग खत्म होने के बाद हमने होटल से चेकआउट किया। टैक्सी बुक की और स्टेशन की तरफ चल दिए। टैक्सी में हम पीछे की सीट पर बैठे थे। नेहा ने अपना सिर मेरे कंधे पर रख दिया। मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और उँगलियाँ फंसाईं। 

    टैक्सी चल रही थी। बाहर गोवा के खूबसूरत रास्ते दिख रहे थे। नेहा ने धीरे से मेरे कान में कहा, “ट्रेन में भी… वही वाला केबिन मिल जाए तो…”

    मैं मुस्कुराया और उसके गाल पर किस किया। टैक्सी स्टेशन पहुँचते-पहुँचते हम दोनों फिर से एक-दूसरे के करीब आ गए थे। दिल में वो पुरानी उत्तेजना फिर से जाग रही थी।

    ट्रेन में बैठने से पहले नेहा ने मुझे कसकर गले लगाया और फुसफुसाई, 
    “अब ट्रेन का इंतज़ार है…”

    ट्रेन आई और अपने शीट पर गए और
    नेहा ने मुझे बिस्तर पर धकेल दिया। वो खुद मेरे ऊपर चढ़ गई। उसने मेरी शर्ट उतारी, मेरी छाती चूमने लगी। उसकी जीभ मेरे निप्पल्स पर घूम रही थी। फिर नीचे हाथ बढ़ाया, मेरे लंड को पैंट से बाहर निकाला और धीरे-धीरे सहलाने लगी। लंड सख्त हो गया। नेहा ने कंडोम चढ़ाया, अपनी ड्रेस ऊपर उठाई, पैंटी सरकाई और धीरे से मेरे लंड पर बैठ गई।

    उसकी गीली, गरम चूत मेरे मोटे लंड को धीरे-धीरे निगल रही थी। जब पूरा घुस गया, नेहा की आँखें बंद हो गईं और मुँह से लंबी आह निकली — “आआह्ह्ह… राहुल… कितना मोटा और गहरा… पूरी तरह भर गया है…”

    वो धीरे-धीरे ऊपर-नीचे होने लगी। हर बार जब नीचे बैठती, उसकी भारी छातियाँ जोर से उछलतीं। मैंने दोनों हाथों से उन्हें थाम लिया, निप्पल्स को उँगलियों के बीच दबाया और खींचा। नेहा की रफ्तार बढ़ने लगी। “फच… फच… फच…” की आवाज़ केबिन में गूँज रही थी। नेहा की जाँघें मेरी कमर से सट रही थीं। उसका पसीना मेरी छाती पर टपक रहा था।

    वो झुककर मुझे किस करने लगी। उसके बाल मेरे चेहरे पर गिर रहे थे। मैंने नीचे से तेज़ धक्के मारे। नेहा चीख उठी — “हाँ… राहुल… और जोर से… मेरी चूत फाड़ दो… आह्ह… बहुत मजा आ रहा है… मैं पागल हो रही हूँ…” उसकी चूत मेरे लंड को कसकर पकड़ रही थी। करीब 15 मिनट बाद नेहा का शरीर सख्त हो गया। उसकी चूत बार-बार सिकुड़ी और वो जोर से झड़ गई। गर्म रस मेरे लंड पर बहने लगा। उसी पल मैं भी कंडोम के अंदर झड़ गया। नेहा मेरी छाती पर ढेर हो गई। हम दोनों लंबी साँसें लेते रहे।

    दूसरा राउंड (रात 12:30 बजे — मिशनरी पोज़िशन)
    हम थोड़ी देर आराम करने के बाद फिर से शुरू हो गए। इस बार मैंने नेहा को लिटाया। उसकी जाँघें चौड़ी कीं और उसके ऊपर लेट गया। लंड फिर से सख्त था। मैंने धीरे से अंदर डाला। नेहा की आँखें नम हो गईं। “राहुल… धीरे… लेकिन गहरा…”

    मैंने बहुत धीमी गति से शुरू किया। हर धक्के के साथ उसकी छातियाँ हिल रही थीं। मैंने एक-एक करके दोनों निप्पल्स को मुँह में लिया, जोर-जोर से चूसा। नेहा मेरी पीठ पर नाखून गड़ा रही थी। मैंने रफ्तार बढ़ाई। लंड जड़ तक घुस रहा था और बाहर निकल रहा था। चूत से सफ़ेद झाग बनने लगा। नेहा बार-बार चीख रही थी — “आह… हाँ… इसी तरह… मेरी चूत को चोदते रहो… उफ्फ… मैं मर रही हूँ मजा से…”

    उसने अपनी टाँगें मेरी कमर पर लपेट लीं। मैंने गति और तेज़ कर दी। केबिन में सिर्फ चुदाई की फच-फच आवाज़ और नेहा की कामुक आहें गूँज रही थीं। नेहा तीन बार छोटे-छोटे ऑर्गेज्म आई। आखिर में वो जोर से काँपी और झड़ गई। मैं भी उसके अंदर झड़ गया। हम पसीने से तर लेटे रहे। नेहा मेरे कान में फुसफुसाई — “तुम मुझे पूरी तरह अपना बना रहे हो…”

    तीसरा राउंड (सुबह 3 बजे — साइड पोज़िशन)
    नींद में ही हम लिपटे हुए थे। नेहा ने खुद जागकर मेरा लंड सहलाया। मैं जाग गया। हम साइड में लेटे रहे। मैंने पीछे से उसकी जाँघ ऊपर उठाई और लंड अंदर डाला। ये पोज़िशन बहुत गहरा और intimate था। मैं धीरे-धीरे धक्के मार रहा था। एक हाथ से उसकी छाती मसल रहा था, दूसरे से क्लिटोरिस रगड़ रहा था।

    नेहा की साँसें फूल रही थीं। “राहुल… ये पोज़िशन… बहुत अच्छा लग रहा है… गहराई तक महसूस हो रहा है…” मैंने गति बढ़ाई। उसकी गांड मेरे पेट से टकरा रही थी। हम दोनों एक-दूसरे को चूमते रहे। नेहा का एक हाथ पीछे करके मेरी जाँघ पकड़े हुए था। करीब 12 मिनट बाद हम दोनों साथ में झड़ गए।

    चौथा राउंड (सुबह 5:30 बजे — डॉगी स्टाइल)
    सुबह की हल्की रोशनी में नेहा घुटनों के बल हो गई। मैंने पीछे से उसकी कमर पकड़ी और एक झटके में पूरा लंड अंदर ठोक दिया। नेहा चीख उठी — “आआह्ह्ह… बहुत तेज़… लेकिन मत रुकना…”

    मैंने उसके बाल पकड़े और घोड़े की तरह तेज़ी से चोदना शुरू किया। उसकी गांड हर धक्के पर लहरा रही थी। मैंने एक हाथ से उसकी लटकती छातियों को दबाया, दूसरे से क्लिटोरिस रगड़ा। नेहा बार-बार चिल्ला रही थी — “हाँ… फाड़ दो… मेरी गांड पकड़कर चोदो… राहुल… मैं तुम्हारी हूँ… आह्ह… और तेज़…”

    पसीना हम दोनों के शरीर पर बह रहा था। ट्रेन की लहर के साथ चुदाई और भी मजेदार हो रही थी। नेहा दो बार झड़ी। आखिर में मैंने जोर-जोर से ठोककर झड़ गया।

    पाँचवाँ राउंड (दिल्ली पहुँचने से ठीक पहले — गोद में बैठकर)
    ट्रेन दिल्ली के पास थी। नेहा मेरी गोद में बैठ गई। हम दोनों आमने-सामने थे। उसने लंड अंदर लिया और कसकर चिपक गई। मैंने उसकी कमर पकड़कर ऊपर-नीचे किया। नेहा मेरी गर्दन में चेहरे को छुपाए हुए थी। किस करते हुए हम तेज़ी से चुदाई कर रहे थे।

    “राहुल… आखिरी बार… मुझे भर दो…” नेहा फुसफुसाई। मैंने तेज़ धक्के मारे। उसकी छातियाँ मेरी छाती से रगड़ खा रही थीं। आखिर में हम दोनों एक साथ जोर से झड़ गए।

    ट्रेन स्टेशन पर रुकी। हम दोनों थके लेकिन संतुष्ट थे। नेहा ने मुझे आखिरी गहरा किस दिया और बोली, “ये ट्रिप कभी नहीं भूलूँगी…”

  • ट्रेन में मिली अजनबी लड़की 1

    गोवा जा रही थी। 1st AC का प्राइवेट केबिन — सिर्फ दो बर्थ। ऊपरी बर्थ पर मैं (राहुल, 32 साल) बैठा था। लैपटॉप पर कुछ काम कर रहा था, लेकिन मन कहीं और था। नीचे वाली बर्थ पर एक लड़की बैठी हुई थी — नेहा। उम्र करीब 28-29। गोरी, लंबे काले बाल, हल्की-सी मुस्कान और आँखों में वो चमक जो ट्रेन की खिड़की से बाहर देखते हुए भी अंदर तक उतर जाती थी।

    ट्रेन दिल्ली से छूटते ही हमारी नज़रें मिलीं।

    “हाय… मैं नेहा,” उसने मुस्कुराते हुए कहा। “दिल्ली से गोवा… अकेली ट्रैवल कर रही हूँ।”

    मैंने भी मुस्कुराकर जवाब दिया, “राहुल… वही हाल। सोलो ट्रिप।”

    पहले तो बातें हल्की-फुल्की थीं — काम, मौसम, गोवा के प्लान। लेकिन जैसे-जैसे रात ढलती गई, बातें गहरी होती गईं। नेहा ने बताया कि वो सॉफ्टवेयर इंजीनियर है, मुंबई में जॉब करती है, लेकिन दिल में घूमने का शौक है। मैंने अपनी स्टार्टअप की कहानी सुनाई। हम दोनों हँसते रहे। चाय आई, हमने साथ में पिए। रात के 12 बजे तक हम दोनों केबिन में बैठे गप्पें मार रहे थे।

    ट्रेन की हल्की-सी लहर और बाहर की अंधेरी रात… नेहा की हँसी में एक अजीब सा जादू था। मैंने देखा कि वो बार-बार मेरी तरफ देख रही है। मैं भी छुप-छुपकर उसकी आँखों में देख रहा था।

    “तुम बहुत अच्छे लगते हो बात करने में,” उसने शरमाते हुए कहा।
    “तुम भी… सच में,” मैंने जवाब दिया।

    उस रात हम दोनों थक गए थे, लेकिन नींद नहीं आ रही थी। मैंने नीचे उतरकर उसके बर्थ के पास बैठ गया। हमने हेडफोन शेयर किए, एक ही गाना सुनते रहे — “तुम ही हो”। उसकी कंधे मेरे कंधे से छू रहे थे। हल्की-सी ठंडी हवा केबिन में घुस रही थी। हम बस एक-दूसरे के पास बैठे रहे, बातें करते रहे। कोई टच नहीं, बस वो गर्माहट… वो अनकही केमिस्ट्री।

    सुबह गोवा स्टेशन पर हम साथ उतरे।

    “अकेले घूमने का मजा नहीं आएगा,” मैंने कहा।
    नेहा मुस्कुराई, “तो फिर साथ घूमें?”

    हमने तय किया — एक ही होटल में बुकिंग, लेकिन दो अलग-अलग रूम। मैंने ऑनलाइन दो रूम बुक कर दिए — दोनों बिलकुल पास-पास, बालकनी से एक-दूसरे को देख सकते थे।

    पहला दिन — हमने कैलंगुट बीच पर घूमना शुरू किया। पानी में पैर डुबोए, फोटो खिंचवाईं, नारियल पानी पिया। नेहा का हँसना सुनकर मैं बार-बार मुड़ जाता। दोपहर में हमने पुराने गोवा के चर्च घूमे। शाम को पणजी के बाजार में घूमते हुए उसने मेरे हाथ में अपना हाथ डाल दिया। बस हल्का-सा… लेकिन दिल जोर-जोर से धड़कने लगा।

    दूसरा दिन और भी खूबसूरत। हम दोनों अंजुना बीच गए। सूरज ढल रहा था। नेहा ने सफेद ड्रेस पहनी थी जो हवा में लहरा रही थी। हम बालू पर बैठे, सूरजास्त देखा। उसने अपना सिर मेरे कंधे पर रख दिया। मैंने धीरे से उसके बालों में हाथ फेरा। कोई बात नहीं हुई… बस सन्नाटा और समंदर की लहरें।

    शाम को होटल लौटे।

    रात के 11:30 बजे थे। मैं अपने रूम में था। बालकनी में खड़ा समंदर की आवाज सुन रहा था। तभी मेरा फोन बजा — नेहा का मैसेज:

    “नींद नहीं आ रही… तुम्हारे रूम में आ जाऊँ? सिर्फ बातें करेंगे 😊”

    मैंने तुरंत रिप्लाई किया — “आ जाओ… दरवाजा खुला है।”

    दो मिनट बाद दरवाजा धीरे से खुला। नेहा हल्के गुलाबी नाइट सूट में थी। बाल खुले हुए, चेहरे पर हल्की शरम। वो अंदर आई और दरवाजा बंद कर दिया।

    हम दोनों बालकनी में खड़े हो गए। हवा ठंडी थी। नेहा ने कहा, “दो दिन में कितना अच्छा लग रहा है राहुल… तुम्हारे साथ।”

    मैंने मुड़कर उसे देखा। उसकी आँखों में चमक थी। मैंने धीरे से उसका हाथ पकड़ा और कहा, “मुझे भी… बहुत अच्छा लग रहा है नेहा।”

    हम दोनों एक-दूसरे के बहुत करीब आ गए। उसकी साँसें मेरे चेहरे पर पड़ रही थीं। मैंने धीरे से उसकी कमर पर हाथ रखा। नेहा ने अपनी आँखें बंद कर लीं। मैंने आगे बढ़कर उसके माथे पर हल्का-सा किस किया। फिर उसकी नाक पर… फिर गाल पर।

    “राहुल…” उसने फुसफुसाकर कहा और मेरी छाती पर सिर रख दिया।

    मैंने उसे गले लगा लिया। उसकी गरमाहट मेरे शरीर में उतर रही थी। हम बस एक-दूसरे को कसकर गले लगाए खड़े रहे। कोई जल्दी नहीं थी। बस वो पल… वो closeness… वो normal romance।

    नेहा ने धीरे से सिर ऊपर किया। हमारी नज़रें मिलीं। उसके होंठ हल्के से खुले हुए थे। मैंने धीरे-धीरे अपना चेहरा उसके चेहरे की तरफ ले जाया…

    नेहा मेरी आँखों में देखकर कुछ पल चुप रही। उसके गाल हल्के गुलाबी हो गए थे। बालकनी की हल्की ठंडी हवा उसके खुले बालों को उड़ा रही थी। मैंने उसकी कमर पर हाथ रखे हुए थे और धीरे-धीरे उसकी पीठ सहला रहा था।

    नेहा ने आखिरकार बहुत धीमी आवाज़ में कहा,
    “राहुल… मैं डर रही हूँ, लेकिन… मैं भी तुम्हारे साथ रहना चाहती हूँ आज रात। बस… बहुत धीरे-धीरे, ठीक है?”

    मैंने मुस्कुराकर उसके माथे पर किस किया और फुसफुसाया,
    “बिल्कुल धीरे-धीरे नेहा। जितना तुम चाहोगी, उतना ही। मैं कभी जल्दबाजी नहीं करूँगा।”

    नेहा ने हल्के से सिर हिलाया और मेरी छाती से लग गई। मैंने उसे कसकर गले लगा लिया। फिर धीरे से उसे अंदर रूम की तरफ ले आया। रूम में सिर्फ एक हल्की गोल्डन लाइट जल रही थी, जिससे पूरा कमरा रोमांटिक लग रहा था। खिड़की से समंदर की दूर की आवाज़ आ रही थी।

    हम दोनों बिस्तर के किनारे बैठ गए। नेहा की साँसें थोड़ी तेज़ थीं। मैंने उसका हाथ अपने हाथ में लिया और उँगलियों को आपस में फंसाया। कुछ देर हम बस ऐसे ही बैठे रहे, एक-दूसरे की आँखों में देखते हुए।

    फिर मैंने धीरे से उसकी तरफ झुका और उसके होंठों को फिर से चूमा। ये किस पहले से ज्यादा गहरा और लंबा था। नेहा ने भी जवाब दिया। उसके होंठ नरम और गर्म थे। हमारी जीभें हल्के-हल्के छूने लगीं। किस के दौरान मैंने एक हाथ से उसके बालों को सहलाया, दूसरे हाथ से उसकी कमर को पकड़ रखा था।

    किस खत्म होने पर नेहा ने शरमाते हुए कहा,
    “राहुल… मेरी ड्रेस…”

    मैंने धीरे से उसके कंधे से ड्रेस की पट्टियाँ सरकाईं। ड्रेस धीरे-धीरे नीचे खिसकती गई और उसके गोरे, नरम कंधे बाहर आ गए। मैंने ड्रेस को और नीचे खींचा। अब नेहा सिर्फ़ काले रंग की ब्रा और पैंटी में थी। उसकी छातियाँ भरी हुई थीं और ब्रा के अंदर हल्के-हल्के उभर रही थीं। उसकी कमर पतली थी और जाँघें गोल और नरम दिख रही थीं।

    नेहा ने शरमा कर अपनी बाँहें छाती पर रख लीं। मैंने मुस्कुराते हुए उसके हाथ हटाए और बोला,
    “तुम बहुत सुंदर हो नेहा… डरो मत।”

    फिर मैंने अपनी शर्ट के बटन एक-एक करके खोले और उतार दी। अब मैं सिर्फ़ ट्राउज़र में था। नेहा ने मेरी छाती पर हाथ रखा और धीरे-धीरे सहलाने लगी। उसकी उँगलियाँ मेरे शरीर पर घूम रही थीं। मैंने उसे फिर से किस किया — इस बार गर्दन पर, कंधे पर, फिर क्लेविकल बोन पर। हर किस के साथ नेहा की साँसें भारी होती जा रही थीं।

    मैंने धीरे से उसकी ब्रा का हुक खोला। ब्रा ढीली हो गई और मैंने उसे उतार दिया। नेहा की दोनों छातियाँ पूरी तरह बाहर आ गईं — गोल, भरी हुई, हल्के ब्राउन निप्पल्स के साथ। वे हल्के-हल्के हिल रही थीं। मैंने एक हाथ से उन्हें बहुत नरम तरीके से छुआ। उँगलियाँ उनके नरम मांस पर घूम रही थीं। नेहा की आँखें बंद हो गईं और उसके मुँह से हल्की सी आह निकली — “आह्ह… राहुल…”

    मैंने झुककर एक निप्पल को होंठों से छुआ, फिर धीरे से चूसा। नेहा का शरीर काँप गया। मैं दूसरी छाती को हाथ से धीरे-धीरे मसल रहा था। नेहा ने मेरे सिर को अपने सीने से दबाया और बालों में उँगलियाँ फिराने लगी।

    “राहुल… बहुत अच्छा लग रहा है…” उसने फुसफुसाकर कहा।

    कुछ देर तक मैं उसकी छातियों को चूमता और सहलाता रहा। फिर मैंने धीरे से उसे बिस्तर पर लिटा दिया। अब नेहा सिर्फ़ पैंटी में थी। मैंने उसकी जाँघों पर हाथ फेरा, फिर पैंटी के किनारे पर उँगलियाँ चलाईं। नेहा ने शरमाते हुए जाँघें हल्की सी बंद कर लीं।

    मैंने धीरे से उसकी पैंटी भी उतार दी। अब नेहा पूरी तरह नंगी मेरे सामने लेटी थी। उसकी चूत पर हल्के बाल थे, लेकिन बहुत साफ़ और गुलाबी दिख रही थी। मैंने उसकी जाँघों को धीरे से अलग किया। नेहा की साँसें अब बहुत तेज़ हो गई थीं।

    मैंने भी अपनी ट्राउज़र और अंडरवियर उतार दी। मेरा लंड पहले से ही सख्त हो चुका था। नेहा ने उसे देखा और शरमा गई।

    मैं बिस्तर पर उसके पास लेट गया। हम दोनों एक-दूसरे को कसकर गले लगाए हुए थे। नंगे शरीर एक-दूसरे से चिपके हुए थे। मैंने उसे फिर से किस किया — होंठों पर, गर्दन पर, छातियों पर। मेरे हाथ उसकी पीठ, कमर, जाँघों पर घूम रहे थे। नेहा भी मेरी पीठ और कूल्हों को सहला रही थी।

    धीरे-धीरे मैंने अपना हाथ उसकी जाँघों के बीच ले जाया। उँगलियाँ उसकी चूत की फाँक पर घूमने लगीं। नेहा बहुत गीली हो चुकी थी। जब मैंने क्लिटोरिस पर हल्के से उँगली घुमाई, तो नेहा ने जोर से कराह मारी — “आह्ह… राहुल… धीरे…”

    मैं बहुत धीरे-धीरे उँगली अंदर-बाहर करने लगा। नेहा की कमर उठ रही थी। उसकी साँसें फूल रही थीं। मैंने दूसरी उँगली भी डाल दी और धीरे से गति बढ़ाई। नेहा का पूरा शरीर सिहर रहा था।

    कुछ देर बाद नेहा ने मेरी तरफ देखा और शर्माते हुए कहा,
    “राहुल… अब…”

  • पापा की सुहागरात 2

    पापा ने रिया की जांघें और फैलाईं। रिया की चूत अब पूरी तरह गीली हो चुकी थी – गुलाबी फांके चमक रही थीं और बीच में छोटी-सी क्लिटोरिस सूजकर बाहर निकल आई थी। पापा ने दोनों हाथों से रिया की जांघें पकड़ीं, सिर नीचे किया और अपनी गर्म जीभ सीधी रिया की चूत पर लगा दी।

    “आआह्ह्ह…” रिया की पूरी कमर उठ गई। पापा ने पहले तो चूत की दोनों फांकों को जीभ से अलग-अलग चाटा, फिर पूरी चूत पर लंबी-लंबी लिक्कड़ें मारीं। उनकी जीभ रिया की क्लिटोरिस पर रुककर जोर-जोर से घुमने लगी। रिया दोनों हाथों से चादर पकड़कर कराह रही थी – “पापा… उफ्फ… क्या कर रहे हो… आह्ह्ह… बहुत अच्छा लग रहा है…”

    पापा ने अपनी जीभ को रिया की चूत के अंदर भी थोड़ा डाला और अंदर-बाहर करने लगे। रिया की चूत से अब चिकनाहट निकलकर पापा की ठुड्डी तक बह रही थी। पापा लगातार चूस रहे थे, चाट रहे थे, हल्के से काट भी रहे थे। रिया की सांसें इतनी तेज हो गई थीं कि वो लगातार कराह रही थी।

    कुछ देर बाद पापा ने सिर उठाया। उनके होंठ और ठुड्डी रिया की चूत के रस से चमक रहे थे। उन्होंने रिया की तरफ देखा और गहरी आवाज में बोले,

    “अब तुम मेरे लंड को चूसो रिया…”

    रिया शर्मा गई। उसने आँखें नीची कर लीं और धीमी आवाज में बोली, “पापा… मुझे नहीं आता… मैंने कभी नहीं किया…”

    पापा मुस्कुराए। मम्मी ने आगे बढ़कर रिया के बालों को प्यार से सहलाया और बोलीं, “कोई बात नहीं बेटा… मैं सिखाती हूँ।”

    मम्मी ने पापा के सामने घुटनों के बल बैठ गईं। पापा का लंड अभी भी पूरी तरह तना हुआ, मोटा और लाल सिरा चमक रहा था। मम्मी ने पहले तो लंड को हाथ में पकड़ा, ऊपर-नीचे हिलाया, फिर जीभ निकालकर लंड के सिरे पर घुमाई। पापा से हल्की सी कराह निकली।

    मम्मी ने रिया की तरफ देखा और कहा, “देखो… पहले लंड को हाथ में पकड़ो… फिर जीभ से चाटो… और फिर मुंह में ले लो… धीरे-धीरे… जैसे लॉलीपॉप चूसती हो।”

    मम्मी ने पापा का पूरा लंड मुंह में ले लिया। उन्होंने गहरी चूसाई शुरू कर दी – ऊपर-नीचे सिर हिलाते हुए, कभी-कभी लंड को गले तक ले जातीं। उनके मुंह से “ग्लक-ग्लक” की आवाजें आने लगीं। पापा की उंगलियां मम्मी के बालों में फंस गईं।

    कुछ देर बाद मम्मी ने लंड मुंह से निकाला। लंड अब और भी ज्यादा चमकदार और लार से तर था। मम्मी ने रिया को इशारा किया, “अब तुम ट्राई करो।”

    रिया झिझकते हुए घुटनों के बल बैठ गई। उसने कांपते हाथों से पापा का लंड पकड़ा। पहले तो सिर्फ जीभ से सिरा चाटा। फिर धीरे-धीरे मुंह खोलकर लंड के आधे हिस्से को मुंह में ले लिया। मम्मी ने उसके सिर को हल्के से आगे-पीछे किया और सिखाया, “हां… ऐसे… जीभ अंदर भी घुमाओ… चूसो…”

    रिया अब धीरे-धीरे सीख रही थी। वो पापा का लंड चूसने लगी – कभी-कभी गहरी चूसाई, कभी सिर्फ सिरा चूसती। पापा आंखें बंद करके कराह रहे थे – “हां रिया… बहुत अच्छा… आह्ह्ह…”

    मम्मी ने रिया की चूचियां सहलाते हुए कहा, “अब हम दोनों मिलकर करते हैं।”

    दोनों औरतें – मम्मी और रिया – पापा के लंड के दोनों तरफ बैठ गईं। उन्होंने अपनी-अपनी बड़ी-बड़ी चूचियां पापा के लंड के इर्द-गिर्द लगा दीं। मम्मी ने अपनी चूचियों को दबाकर लंड को बीच में फंसा लिया। रिया ने भी अपनी चूचियां जोड़ लीं। अब पापा का मोटा, गर्म लंड दोनों की चूचियों के बीच पूरी तरह दबा हुआ था।

    पापा ने कमर हिलानी शुरू कर दी। लंड दोनों की चूचियों के बीच ऊपर-नीचे घिसने लगा। चूचियों की नरम, गर्मी और लार की चिकनाहट से लंड फिसल रहा था। कभी मम्मी चूचियां दबाकर और जोर से रगड़तीं, कभी रिया अपनी चूचियों को ऊपर-नीचे करके लंड को मसलती। पापा के लंड का सिरा दोनों की चूचियों के बीच से बाहर निकल-निकलकर चमक रहा था।

    तीनों के मुंह से सिर्फ सिसकारियां और हल्की-हल्की कराहें निकल रही थीं। कमरे में गर्मी बढ़ गई थी।

    पापा ने दोनों की चूचियों के बीच से लंड निकाला। लंड अब पूरी तरह लार और चूत के रस से चमक रहा था, बहुत सख्त और मोटा। उन्होंने रिया को बेड पर लिटा दिया। रिया की जांघें खुद-ब-खुद फैल गईं। उसकी चूत पूरी तरह गीली, सूजी हुई और चमक रही थी।

    पापा ने रिया की जांघों को कंधों पर रख लिया और लंड का मोटा सिरा रिया की चूत के मुंह पर रख दिया। रिया ने घबराकर आँखें बंद कर लीं। पापा ने धीरे से कमर आगे की और लंड का सिरा रिया की चूत में घुसने लगा।

    “आआह्ह्ह्ह… पापा… धीरे… बहुत मोटा है…” रिया जोर से कराह उठी।

    पापा ने एक जोरदार झटका दिया। आधा लंड एक ही बार में रिया की चूत में घुस गया। रिया की आँखें खुल गईं, मुंह से चीख निकल गई – “उफ्फ्फ्फ… आह्ह्ह… फट जाएगी…”

    पापा रुके नहीं। उन्होंने दूसरा जोरदार झटका मारा और पूरा मोटा लंड रिया की चूत के अंदर तक धंस गया। रिया की चूत पूरी तरह फैल गई थी। पापा ने धीरे-धीरे चुदाई शुरू की – लंबे-लंबे स्ट्रोक। हर झटके में लंड पूरी तरह बाहर निकलता और फिर जोर से अंदर चला जाता।

    रिया लगातार चीख रही थी – “पापा… आह्ह्ह… बहुत गहरा… उफ्फ… और जोर से… हां… हां…”

    पहला राउंड काफी तेज था। पापा ने रिया को मिशनरी पोजिशन में 10-12 मिनट तक चोदा। रिया की चूचियां हर झटके के साथ उछल रही थीं। आखिर में पापा ने तेज-तेज झटके मारे और रिया की चूत के अंदर ही जोर से झड़ गए। गर्म वीर्य रिया की चूत में भर गया। रिया भी पहली बार में ही झड़ गई – उसकी चूत सिकुड़-सिकुड़कर पापा का लंड दबा रही थी।

    थोड़ी देर आराम के बाद पापा ने रिया को घुटनों के बल करवाया – डॉगी स्टाइल। दूसरा राउंड शुरू हुआ। इस बार पापा ने रिया की कमर पकड़कर बहुत जोर-जोर से चोदा। हर झटका इतना तेज था कि रिया का पूरा शरीर आगे की तरफ धकेला जा रहा था। रिया की चूत से “पच-पच-पच” की आवाजें आने लगीं।

    “हां पापा… फाड़ दो… आह्ह्ह… मेरी चूत फाड़ दो…” रिया अब पूरी तरह भड़क चुकी थी।

    पापा ने रिया की गांड पर थप्पड़ मारे और बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा। दूसरे राउंड में भी पापा ने रिया की चूत में ही झड़ दिया। रिया दो बार झड़ चुकी थी। उसकी जांघें कांप रही थीं।

    तीसरा राउंड सबसे लंबा था। पापा ने रिया को अपनी गोद में उठा लिया – स्टैंडिंग पोजिशन। रिया की टांगें पापा की कमर के चारों तरफ लिपटी हुई थीं। पापा खड़े-खड़े ही रिया को ऊपर-नीचे करके चोद रहे थे। रिया की चूचियां पापा के मुंह के सामने उछल रही थीं। पापा उन्हें चूस रहे थे। इस राउंड में रिया लगातार चीख रही थी और तीन बार झड़ गई। आखिर में पापा ने भी बहुत जोर से झड़कर रिया की चूत को वीर्य से भर दिया।

    अब रिया पूरी तरह थक चुकी थी। वो बेड पर लेटी हुई हांफ रही थी। उसकी चूत से पापा का सफेद वीर्य बाहर निकल-निकलकर चादर पर गिर रहा था।

    पापा ने मम्मी की तरफ देखा। मम्मी अभी भी नंगी बैठी सब देख रही थीं और उनकी चूत भी गीली हो चुकी थी। पापा ने मम्मी को बेड पर लिटाया और तुरंत उन पर चढ़ गए।

    मम्मी की चुदाई सिर्फ एक राउंड हुई, लेकिन वो बहुत प्यार भरा और गहरा था। पापा ने मम्मी को मिशनरी में चोदा – धीरे-धीरे लेकिन गहरे स्ट्रोक। मम्मी पापा की पीठ पर नाखून गाड़ रही थीं और बार-बार किस ले रही थीं।

    “मेरे प्यारे… आज भी तुम्हारा लंड मुझे बहुत अच्छा लगता है…” मम्मी कराह रही थीं।

    पापा ने मम्मी की चूत में भी झड़ दिया। मम्मी भी झड़ गईं। दोनों एक-दूसरे को कसकर चिपके रहे।

    तीन राउंड रिया की और एक राउंड मम्मी की चुदाई के बाद रात के करीब 3 बजे थे। तीनों पूरी तरह थक चुके थे। पापा बीच में लेट गए। रिया उनकी दाईं तरफ और मम्मी बाईं तरफ। दोनों औरतें पापा की छाती पर सिर रखकर लेट गईं। पापा ने दोनों को अपनी बाहों में कस लिया।

    रिया और मम्मी दोनों की चूतें अब सूजी हुई और वीर्य से भरी हुई थीं। कमरे में सेक्स की तेज महक फैली हुई थी।

    धीरे-धीरे तीनों की आंखें बंद हो गईं और वो गहरी नींद में सो गए।

  • सास ससुर की चूदाई

    गर्मी का वो रात था, जब बिजली चली गई और पूरा घर भट्टी की तरह तप रहा था। राधा (48 साल), मेरी सास, अपने बेडरूम में अकेली लेटी हुई थीं। उनकी हल्की सी नीली साड़ी पसीने से पूरी तरह भीग चुकी थी। साड़ी का पल्लू उनके भारी 38D साइज़ की छातियों पर से सरक गया था, जिससे ब्लाउज़ के अंदर की सफ़ेद ब्रा का किनारा साफ़ दिख रहा था। उनकी कमर की गोलाई और नाभि पसीने की वजह से चमक रही थी।

    वे बार-बार करवट बदल रही थीं। उनकी साँसें भारी हो रही थीं। “उफ्फ… कितनी गर्मी है आज…” उन्होंने फुसफुसाते हुए कहा।

    तभी दरवाज़ा धीरे से खुला। ससुर रामलाल (52 साल) अंदर आए। वे सिर्फ़ लूंगी पहने हुए थे। उनकी छाती पर सफ़ेद बाल थे, लेकिन शरीर अभी भी मजबूत था। उनकी आँखें राधा के पसीने से तर बदन पर टिक गईं।

    “बहू… नींद नहीं आ रही क्या?” रामलाल ने गहरी आवाज़ में पूछा।

    राधा ने शरमाते हुए साड़ी का पल्लू ठीक करने की कोशिश की, लेकिन पसीने की वजह से वो और चिपक गया। “जी… बहुत गर्मी है ससुर जी। पंखा भी काम नहीं कर रहा।”

    रामलाल बिस्तर के पास आए और किनारे पर बैठ गए। उनकी नज़र राधा की जाँघों पर पड़ी, जहाँ साड़ी ऊपर सरक गई थी और गोरी, मोटी जाँघें चमक रही थीं। उन्होंने धीरे से हाथ बढ़ाया और राधा की कमर पर रख दिया।

    “ये गर्मी तो शरीर के अंदर भी है ना बहू…?” उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा। उनकी उँगलियाँ राधा की नाभि के आस-पास घूमने लगीं। राधा का शरीर हल्का सा काँप गया।

    “ससुर जी… ये क्या…” राधा ने कमज़ोर विरोध किया, लेकिन उनकी आवाज़ में शरम के साथ उत्तेजना भी थी।

    रामलाल ने कोई जवाब नहीं दिया। उन्होंने राधा का पल्लू पूरी तरह खींच लिया। साड़ी का आंचल अब बिस्तर पर बिखरा पड़ा था। फिर उन्होंने ब्लाउज़ के हुक एक-एक करके खोलने शुरू किए। हर हुक खुलने के साथ राधा की साँसें तेज़ होती गईं।

    जब आखिरी हुक खुला, तो राधा की भारी, दूधिया छातियाँ ब्रा से बाहर झाँकने लगीं। रामलाल ने ब्रा का हुक भी खोल दिया। दोनों बड़े-बड़े स्तन एकदम से बाहर आ गए। उनकी ब्राउन निप्पल्स पहले से ही सख्त हो चुकी थीं और पसीने से चमक रही थीं।

    “वाह… सास जी, कितनी सुंदर हैं आपकी चूचियाँ…” रामलाल ने प्रशंसा की और दोनों हाथों से उन्हें थाम लिया। उन्होंने धीरे-धीरे मसलना शुरू किया। उँगलियाँ नरम मांस में धंस रही थीं। राधा की आँखें बंद हो गईं। “आह्ह… ससुर जी… धीरे… उफ्फ…”

    रामलाल झुक गए और एक निप्पल को मुँह में ले लिया। उन्होंने जोर-जोर से चूसना शुरू किया, जीभ से चारों तरफ़ घुमाते हुए। दूसरे स्तन को हाथ से दबाते और निप्पल को उँगलियों से नोचते रहे। राधा की कमर बार-बार ऊपर उठ रही थी। उनके मुँह से अनायास आहें निकल रही थीं — “हाय… अाह… और चूसिए… मजा आ रहा है…”

    रामलाल ने साड़ी की बाकी लपेट भी खोल दी। अब राधा सिर्फ़ पेटीकोट में थीं। उन्होंने पेटीकोट की नाड़ी खींची और उसे भी उतार दिया। राधा की जाँघें पूरी तरह नंगी हो गईं। उनकी चूत पर हल्के-हल्के बाल थे, लेकिन पसीने और रस की वजह से पूरी तरह गीली और चमकदार दिख रही थी। चूत की फाँकें थोड़ी-थोड़ी खुली हुई थीं।

    रामलाल ने अपनी उँगली राधा की चूत पर रखी और धीरे से ऊपर-नीचे रगड़ने लगे। क्लिटोरिस पर जब उँगली घूमी, राधा ने जोर से कराह उठाई — “अाह्ह्ह… वहाँ… हाँ… ससुर जी…”

    उन्होंने एक उँगली अंदर डाली। अंदर बहुत गर्म और फिसलन भरा था। रामलाल ने दूसरी उँगली भी डाल दी और तेज़ी से अंदर-बाहर करने लगे। राधा की चूत से “फच फच” की आवाज़ आने लगी। उनका रस उँगलियों पर चिपक रहा था।

    “बहुत दिन से प्यासी थीं ना सास जी? देखो कितना पानी निकल रहा है…” रामलाल ने गंदी बात करते हुए कहा।

    राधा शरमा गई लेकिन जवाब में उनकी जाँघें और फैल गईं।

    अब रामलाल ने अपनी लूंगी उतार दी। उनका लंड बाहर निकला — मोटा, 7 इंच लंबा, सिर लाल और नोक से पारदर्शी पानी टपक रहा था। वे राधा के ऊपर चढ़ गए। लंड की नोक को चूत की फाँक पर रखा और धीरे-धीरे रगड़ने लगे।

    फिर एक जोरदार झटका।

    “आआआह्ह्ह…!” राधा की चीख निकल गई। रामलाल का पूरा मोटा लंड एक ही बार में राधा की चूत में घुस गया था। चूत की दीवारें लंड को कसकर जकड़ रही थीं।

    रामलाल रुक गए, राधा को सम्हलने का समय दिया। फिर धीरे-धीरे धक्के मारने शुरू किए। हर धक्के के साथ राधा की छातियाँ जोर-जोर से उछल रही थीं। कमरे में सिर्फ़ चुदाई की फच-फच आवाज़, राधा की आहें और रामलाल की भारी साँसें गूँज रही थीं।

    “हाँ… और जोर से… ससुर जी… फाड़ दो मेरी चूत… बहुत दिन से तरस रही थी…” राधा अब पूरी तरह उत्तेजित हो चुकी थीं।

    रामलाल ने रफ़्तार बढ़ा दी। वे राधा की जाँघें कंधों पर रखकर गहरे धक्के मारने लगे। लंड हर बार पूरी तरह बाहर निकलकर फिर से जड़ तक घुस रहा था। राधा की चूत से सफ़ेद झाग बनने लगा था।

    कुछ देर बाद उन्होंने राधा को घुटनों के बल करवाया। डॉगी स्टाइल में अब लंड और भी गहराई तक जा रहा था। रामलाल ने राधा के बाल पकड़े और घोड़े की तरह तेज़ी से ठोकने लगे। राधा की गांड हर धक्के पर लहरा रही थी।

    “अाह… हाँ… इसी तरह… मेरी गांड पकड़कर चोदिए… उफ्फ… मजा आ रहा है…”

    रामलाल ने एक हाथ से राधा की लटकती छातियों को दबाया, दूसरे हाथ से क्लिटोरिस रगड़ा। राधा पहली बार झड़ गईं। उनका पूरा शरीर सिहर उठा, चूत सिकुड़-सिकुड़कर लंड को दबाने लगी। लेकिन रामलाल रुके नहीं।

    वे लगातार 25-30 मिनट तक चोदते रहे। कई बार पोज़िशन बदले — कभी मिशनरी, कभी राधा ऊपर, कभी साइड से। राधा तीन बार झड़ चुकी थीं। उनका पूरा बदन पसीने और रस से तर था।

    आखिर में रामलाल ने राधा को वापस लेटाया। उन्होंने अपना लंड राधा की छातियों के बीच रखा और जोर-जोर से रगड़ने लगे। कुछ ही देर में उनका गर्म, गाढ़ा वीर्य राधा की छातियों, गर्दन, ठोड़ी और मुँह पर फैल गया। कुछ बूँदें राधा के होंठों पर भी पड़ीं।

    राधा ने जीभ निकालकर वीर्य चाट लिया और मुस्कुराई। फिर उन्होंने रामलाल के लंड को हाथ में लेकर बचा हुआ वीर्य चूस लिया।

    दोनों थके हुए, लेकिन बेहद संतुष्ट, एक-दूसरे से लिपटकर लेट गए।

    राधा ने धीरे से कहा, “ससुर जी… आज तो सारी गर्मी निकल गई… लेकिन कल फिर लगेगी तो… आप फिर उतार देंगे ना?”

    रामलाल हँसे और राधा की छाती पर हाथ फेरते हुए बोले, “जब भी गर्मी लगे, बता देना बहू… मैं पूरी रात गर्मी उतार दूँगा।”

  • पापा की सुहागरात 1

    मेरे पापा बहुत अमीर घर के हैं। उनके पास पैसे की कोई कमी नहीं। 21 साल पहले उनकी शादी मेरी मम्मी से हुई थी। दोनों बहुत खुश थे, लेकिन मेरे जन्म के बाद मम्मी को कुछ प्रॉब्लम हो गई थी। डॉक्टर ने कहा कि अब मम्मी प्रेग्नेंट नहीं हो सकतीं। पापा को एक बहुत खूबसूरत लड़की बहुत पसंद थी – नाम था रिया। वो 24 साल की थी, गोरी, लंबी, मॉडल जैसी फिगर वाली। पापा और मम्मी ने मिलकर फैसला लिया कि पापा दूसरी शादी कर लेंगे। मम्मी ने खुद कहा – “मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं, घर में बच्चा चाहिए ना… और तुम्हें भी खुशी मिलेगी।”

    शादी फिक्स हो गई। अब तैयारी शुरू हुई।

    सबसे पहले शॉपिंग। पापा ने मुझे और मम्मी को साथ लिया। सबसे महंगे ब्रांड के शॉप में गए। मम्मी ने खुद रिया के लिए लहंगा चुना – गोल्डन और रेड कलर का, बहुत भारी, गहनों वाला। रिया का माप लेकर सिलवाया। पापा ने रिया के लिए डायमंड ज्वेलरी का सेट लिया – नेकलेस, ईयररिंग्स, मंगलसूत्र सब कुछ। मम्मी ने कहा, “ये मेरी बहू के लिए है, परफेक्ट होना चाहिए।” पापा हंस रहे थे, उनकी आंखों में वो चमक थी जो शादी वाली रात की होती है।

    मम्मी को भी नया साड़ी और मेकअप सेट मिला। मैंने भी सूट लिया। फिर पापा को तैयार करने की बारी। पापा ने सबसे एक्सपेंसिव शेरवानी ऑर्डर की – व्हाइट और गोल्ड, बहुत शाही। टेलर घर पर आया, फिटिंग की।

    अगले दिन सबको शॉपिंग के बाद पार्लर जाना था। मम्मी और रिया दोनों को एक ही हाई-क्लास पार्लर में बुकिंग थी। मैं और पापा भी साथ गए। रिया को देखकर मेरा मुंह खुला रह गया – वो इतनी खूबसूरत लग रही थी। पार्लर में रिया का फेशियल, हेयर स्टाइल, मेहंदी, सब हो रहा था। उसकी नरम त्वचा पर मेहंदी लगाते समय वो हल्के से मुस्कुरा रही थी। पापा उसे घूर रहे थे, उनकी नजरें उसकी गर्दन, उसके होंठों और उसके ब्लाउज के ऊपर वाले हिस्से पर अटक रही थीं। मम्मी ने पापा को कोहनी मारी और हंस दी – “अभी तो सुहागरात बाकी है, सब्र करो।”

    पापा का भी पार्लर ट्रीटमेंट हुआ – हेयर कट, फेशियल, मसाज। वो 50 के ऊपर थे लेकिन फिट और हैंडसम लग रहे थे। शेरवानी में जब तैयार हुए तो लग रहे थे जैसे कोई राजा।

    शादी का दिन आ गया। छोटी लेकिन बहुत लग्जरी शादी थी – सिर्फ फैमिली और क्लोज फ्रेंड्स। मंदिर में फेरे हुए। रिया ने लहंगे में इतनी खूबसूरत लग रही थी कि पापा की सांसें थम सी गईं। जब पापा ने रिया को मंगलसूत्र पहनाया तो रिया की आंखें झुक गईं, लेकिन उसके होंठों पर हल्की मुस्कान थी। फेरे के बाद पापा ने रिया का हाथ पकड़ लिया और उसे गाड़ी में बिठाया।

    रात के 11 बजे गाड़ी घर पहुंची। घर पूरी तरह से फूलों और लाइट्स से सजाया हुआ था। मैं, मम्मी और बाकी सब बाहर खड़े थे। पापा ने रिया को गोद में उठाया (जैसा कि रीति है) और घर के अंदर ले आए। रिया की सांसें तेज हो रही थीं। पापा की छाती से सटकर वो चुपचाप लेटी रही।

    घर आ चुका था।

    सुहागरात की रात शुरू होने वाली थी…

    हम सबने खाना खाया। खाने के बाद माहौल थोड़ा शरमाया हुआ लेकिन रोमांटिक था। मम्मी हल्के से मुस्कुरा रही थीं। रिया की आंखें नीची थीं, उसके गालों पर हल्की लाली चढ़ी हुई थी। पापा ने सबको देखा और फिर मम्मी की तरफ मुड़कर बोले,

    “आज की रात मेरी दूसरी सुहागरात है… मैं चाहता हूँ कि तुम दोनों मेरे साथ रहो।”

    मम्मी ने हल्के से सिर हिलाया और रिया की तरफ देखकर मुस्कुराई। रिया शरमा गई लेकिन कुछ नहीं बोली।

    पापा ने रिया का हाथ पकड़ लिया और तीनों master bedroom की तरफ चल पड़े। master bedroom सच में बहुत बड़ा था – किंग साइज बेड, सोफा, ड्रेसिंग टेबल, बड़ा सा मिरर और डिम लाइट्स। पापा ने रिया को अंदर ले जाकर दरवाजा बंद कर दिया।

    मैं पहले ही चार छोटे-छोटे हाई डेफिनिशन कैमरे खरीदकर master bedroom में फिट कर चुका था। ये कैमरे इतने छोटे और छिपे हुए थे कि किसी को शक भी नहीं होता। मैंने सब कैमरों को अपने रूम के बड़े TV से कनेक्ट कर लिया था। अब मैं अपने रूम में आ गया।

    दरवाजा बंद करके मैंने TV ऑन किया।

    स्क्रीन पर master bedroom साफ-साफ दिख रहा था। चारों कैमरों से अलग-अलग एंगल थे – एक बेड के ऊपर से, एक साइड से, एक मिरर के पास से और एक थोड़ा ऊपर से।

    पापा और रिया बेड के पास खड़े थे। मम्मी बेड के एक कोने पर बैठ गई थीं, चुपचाप देख रही थीं।

    पापा ने रिया को अपनी तरफ खींचा। रिया की सांसें तेज हो रही थीं। पापा ने धीरे से रिया के लहंगे का दुपट्टा उतारा और फर्श पर गिरा दिया। रिया की गोरी गर्दन और कंधे अब खुले थे। पापा ने झुककर रिया की गर्दन पर हल्का सा किस किया। रिया के शरीर में झुरझुरी सी दौड़ गई।

    “तुम बहुत खूबसूरत हो रिया…” पापा ने धीमी आवाज में कहा और रिया को अपनी बाहों में कसकर जकड़ लिया।

    रिया ने शरमाते हुए पापा की छाती पर हाथ रखा। पापा ने रिया का चेहरा ऊपर उठाया और उसके होंठों पर धीरे से किस किया। पहले तो रिया के होंठ सख्त थे, लेकिन धीरे-धीरे वो पिघलने लगी। पापा का किस गहरा होता गया। रिया की सांसें अब और तेज हो गई थीं।

    पापा ने एक हाथ रिया की कमर पर रखा और दूसरे हाथ से उसके बालों में उंगलियां फिराईं। किस के बीच में पापा ने रिया के निचले होंठ को हल्के से काटा। रिया से एक हल्की सी सिसकारी निकल गई – “आह…”

    मम्मी चुपचाप बैठी देख रही थीं, उनके चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान थी।

    पापा ने किस छोड़कर रिया की आंखों में देखा। फिर धीरे से रिया के ब्लाउज की तरफ हाथ बढ़ाया। रिया शर्मा गई और पापा की छाती में मुंह छिपा लिया। पापा हल्के से हंसे और रिया को और कसकर अपनी बाहों में ले लिया।

    अभी सिर्फ normal romance चल रहा था… लेकिन हवा में गर्मी बढ़ने लगी थी।

    पापा ने रिया को अपनी बाहों में कसकर जकड़े रखा था। किस के बाद उन्होंने मम्मी की तरफ देखा और धीमी, गहरी आवाज में बोले,

    “शुरू हो जा…”

    मम्मी मुस्कुराईं। उनकी आंखों में एक शरारती चमक थी। वो बेड से उठीं और रिया के पास आईं। रिया अभी भी शर्मा रही थी, उसकी सांसें तेज थीं। मम्मी ने धीरे से रिया के लहंगे की साइड वाली जिप खोली और लहंगा नीचे सरका दिया। अब रिया सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में खड़ी थी।

    मम्मी ने ब्लाउज के हुक एक-एक करके खोले। ब्लाउज खुलते ही रिया की गोरी, भरी हुई ब्रेस्ट्स बाहर आ गईं – सिर्फ एक पतला सा ब्रा उन्हें ढके हुए था। रिया ने शरम से आँखें बंद कर लीं। मम्मी ने ब्रा का हुक भी खोल दिया। रिया की बड़ी-बड़ी, गोल, गोरी चूचियां पूरी तरह नंगी हो गईं। उनकी निप्पल्स हल्के गुलाबी रंग की थीं और पहले से ही थोड़ी सी खड़ी हो चुकी थीं।

    फिर मम्मी ने रिया का पेटीकोट भी उतार दिया। अब रिया सिर्फ एक पतली सी लेस वाली पैंटी में खड़ी थी। उसकी जांघें गोरी और मोटी थीं, कमर पतली, और गांड गोल-गोल। मम्मी ने आखिरी में रिया की पैंटी भी उतार दी। रिया अब पूरी तरह नंगी थी। उसकी चूत पर हल्के-हल्के बाल थे, जो साफ दिख रहे थे। रिया ने दोनों हाथों से अपनी चूचियां और चूत ढकने की कोशिश की, लेकिन मम्मी ने उसके हाथ हटा दिए और बोलीं, “शर्मा मत बेटा… आज तुम्हारी सुहागरात है।”

    अब मम्मी पापा की तरफ मुड़ीं। उन्होंने पापा की शेरवानी के बटन खोले और पूरी शेरवानी उतार दी। फिर अंडरवियर भी निकाल दिया। पापा अब बिल्कुल नंगे थे। उनका लंड एकदम तना हुआ, खड़ा और मोटा था – लंबाई अच्छी-खासी, मोटाई भी काफी, सिरा लाल और चमकदार, नसें उभरी हुईं। पापा का लंड पूरी तरह तैयार था, हल्के-हल्के झूल रहा था।

    पापा ने रिया को बेड पर लिटा दिया। रिया लेट गई, उसकी सांसें तेज हो रही थीं। पापा उसके ऊपर झुके और पहले उसके होंठों पर फिर से गहरा किस किया। किस के दौरान उनकी जीभ रिया के मुंह में घुस गई और रिया की जीभ से खेलने लगी। रिया से हल्की-हल्की सिसकारियां निकल रही थीं।

    फिर पापा ने रिया की गर्दन चूमी, उसके कंधों को चाटा। धीरे-धीरे वो नीचे उतरे और रिया की दोनों चूचियों को अपने हाथों में ले लिया। वो नरम लेकिन भरी हुई थीं। पापा ने एक चूची को जोर से दबाया और दूसरे की निप्पल को मुंह में ले लिया। वे चूसने लगे, जीभ से चाटने लगे, हल्के से काटने लगे। रिया की कमर उठने लगी। वो कराह रही थी – “आह… पापा… उफ्फ…”

    मम्मी भी अब शामिल हो गईं। उन्होंने पापा को थोड़ा हटाया और खुद रिया की दूसरी चूची को चूसना शुरू कर दिया। दोनों तरफ से रिया की चूचियां चूस-चूसकर लार से तर हो गईं। रिया की आंखें बंद थीं, उसके मुंह से लगातार हल्की सिसकारियां निकल रही थीं।

    पापा ने मम्मी की तरफ देखा और बोले, “अपने कपड़े भी उतार दो।”

    मम्मी ने अपनी साड़ी, ब्लाउज, पेटीकोट और ब्रा-पैंटी सब उतार दिए। मम्मी भी अब पूरी नंगी थीं। उनकी चूचियां रिया से थोड़ी छोटी लेकिन अभी भी अच्छी थीं, कमर पर हल्का सा मोटापा था, लेकिन गांड और जांघें अभी भी आकर्षक थीं।

    अब पापा दोनों औरतों को गर्म करने में लग गए। उन्होंने रिया को चूमते हुए एक हाथ मम्मी की चूत पर रख दिया और उंगलियों से उसकी चूत सहलाने लगे। मम्मी से भी सिसकारी निकली। फिर पापा ने रिया की जांघें फैलाईं और उसकी चूत पर हाथ फेरा। रिया की चूत पहले से ही गीली होने लगी थी। पापा ने अपनी उंगली से रिया की चूत की फांकों को अलग किया और बीच वाली गुलाबी जगह को हल्के से सहलाया। रिया ने जोर से कराहा – “आह्ह्ह… पापा…”

    मम्मी ने रिया की चूचियां दबाते हुए और चूसते हुए उसे और गर्म कर रही थीं। पापा दोनों को बारी-बारी से किस कर रहे थे, उनकी चूचियां चाट रहे थे, उनकी जांघों को सहला रहे थे। कमरे में सिर्फ तीनों की सांसों की आवाज और हल्की-हल्की कराहें गूंज रही थीं।

    दोनों औरतें अब काफी गर्म हो चुकी थीं – रिया की चूत से थोड़ी-थोड़ी चिकनाहट निकल रही थी और मम्मी भी सांसें फुला रही थीं।

  • नाना को देखा नानी की चूदाई करते

    नाना-नानी का जुनूनी राउंड

    मेरा नाम राहुल है। उम्र २१ साल। मैं अहमदाबाद में पढ़ता हूँ। मैं अपने मामा के घर गया था। मामा-मामी दोनों बाहर गए थे – किसी शादी में, दो दिन के लिए। मामा ने मुझे फोन पर बोला था, “राहुल, तू वहीं रुक जाना। नाना-नानी अकेले हैं, ८५ और ७८ साल के। तू उनके पास रहना, खाना-पीना देख लेना।”

    मैं शाम को ६ बजे पहुंच गया। मामा-मामी मुझे गेट तक छोड़कर चले गए। घर में सिर्फ नाना और नानी थे। नाना जी ८५ साल के थे, लेकिन अभी भी तगड़े दिखते थे – लंबे कद-काठी, सफेद दाढ़ी, आवाज भारी। नानी जी ७८ की थीं, लेकिन चेहरे पर अभी भी नूर था, शरीर मोटा-मोटा, बड़े-बड़े स्तन और चौड़ी कमर।

    रात का खाना हम तीनों ने साथ खाया। नानी ने रोटी-दाल बनाया था। खाते-खाते नाना जी हंस रहे थे, “राहुल बेटा, तू सो जा, हम बूढ़े लोग जल्दी सो जाते हैं।” मैं ऊपर वाले कमरे में सो गया।

    रात के करीब ११:३० बजे मुझे प्यास लगी। मैं नीचे पानी पीने गया। नाना-नानी का कमरा आधा खुला था। अंदर से हल्की-हल्की आवाजें आ रही थीं। मैंने चुपके से झांका।

    नाना जी बिस्तर पर लेटे थे। उनकी लुंगी ऊपर थी। नानी जी उनके पास बैठी थीं। नाना का ८ इंच लंबा, मोटा लंड पूरा खड़ा था – बूढ़े होने के बावजूद नसें उभरी हुईं, सिरा गुलाबी और चमकदार। नानी जी उसे दोनों हाथों से सहला रही थीं।

    “अरे वाह… आज कितना तगड़ा है…” नानी जी फुसफुसा रही थीं।
    नाना जी हंसकर बोले, “आज तुझे पूरा मजा दूंगा रानी।”

    मैं दरवाजे के पीछे छिपकर देखता रह गया। दिल जोर-जोर से धड़क रहा था।

    नानी जी ने अपनी साड़ी का पल्लू हटाया। उनके बड़े-बड़े, थोड़े झूलते स्तन बाहर आ गए। चूचियां गुलाबी-काली थीं। नाना जी ने एक हाथ बढ़ाकर उन्हें दबाया। नानी जी कराह उठीं, “आह… धीरे… अभी तो शुरू ही किया है।”

    नानी जी झुककर नाना के लंड को मुंह में ले लिया। ८ इंच का मोटा लंड उनका मुंह भर गया। वो जोर-जोर से चूस रही थीं – ऊपर-नीचे, जीभ घुमाते हुए। नाना जी की आंखें बंद थीं, “हां… रानी… चूस… ८० साल बाद भी तू ही मेरी जान है…”

    ५-६ मिनट चूसने के बाद नानी जी ऊपर चढ़ गईं। उन्होंने नाना के लंड को अपनी चूत पर रखा और धीरे-धीरे बैठ गईं। पूरा ८ इंच एक ही बार में अंदर चला गया। नानी जी की आंखें बंद हो गईं, मुंह से लंबी सांस निकली, “आह… भगवान… आज भी पूरा भर गया… कितना मोटा है तेरा…”

    फिर शुरू हुआ असली खेल। नानी जी खुद ऊपर-नीचे होने लगीं। उनके बड़े स्तन उछल-उछल कर नाना के चेहरे पर गिर रहे थे। नाना जी नीचे से जोर-जोर से धक्के दे रहे थे। कमरा “पच… पच… पच…” की आवाज से भर गया था।

    नानी जी चीख रही थीं, “हां… और जोर से… चोदो मुझे… ८५ साल के होकर भी ८ इंच का तगड़ा लंड… आह… मजा आ रहा है… और तेज…!”

    नाना जी का टाइमिंग कमाल का था। ४० मिनट तक लगातार ठोकते रहे। कभी मिशनरी, कभी डॉगी स्टाइल, कभी नानी को गोद में बिठाकर। नानी जी चार बार झड़ चुकी थीं – हर बार शरीर कांप जाता, चूत से पानी की धार निकलती।

    आखिरकार नाना जी ने जोर से धक्का मारा और नानी के अंदर ही झड़ गए। नानी जी चीखकर उन पर गिर पड़ीं, “आह… गरम… पूरा भर गया… कितना मजा आया…”

    दोनों पसीने से तर थे। नानी जी नाना की छाती पर सिर रखकर लेट गईं।

    मैं अभी भी दरवाजे के पीछे खड़ा था। मेरा अपना लंड पैंट में तना हुआ था। १५ मिनट बाद फिर आवाजें आने लगीं।

    इस बार नाना जी ने नानी को चारों हाथ-पैरों पर किया। गांड ऊपर थी। नाना ने लंड पर थूक लगाया और पूरा ८ इंच नानी की गांड में उतार दिया। नानी जोर से चिल्लाईं, “आह… गांड फट गई… लेकिन मत निकालो… चोदो…!”

    नाना जी ने ५० मिनट तक नानी की गांड मारी। नानी जी लगातार चीखती रहीं, “हां… मेरे बूढ़े राजा… आज तो मुझे स्वर्ग पहुंचा दिया… आह… और जोर से… गांड मारो…!”

    दूसरे राउंड में भी नानी तीन बार झड़ीं। आखिरकार नाना ने गांड के अंदर ही झड़ दिया।

    रात के २ बजे दोनों सो गए।

  • राज और फोरम की जुनूनी कहानी 3

    जकूजी वाला लंबा ९० मिनट का राउंड खत्म होने के बाद हम दोनों थककर बेड पर लेटे हुए थे। फोरम मेरी बांहों में समाई हुई थी। उसकी सांसें अभी भी तेज थीं और चूत बुरी तरह सूजी हुई थी। मैंने उसे प्यार से चूमते हुए कहा,

    “चल बेबी, अब डिनर करने चलते हैं। नीचे रेस्टोरेंट में कैंडल लाइट डिनर करेंगे, फिर आराम से बातें करेंगे।”

    फोरम ने तुरंत सिर हिलाया और थकी हुई आवाज में बोली,
    “नहीं राज… डिनर के बाद सीधा घर चलते हैं। मैं बहुत थक गई हूँ। चूत में अभी भी बहुत दर्द और सूजन है। मैं और नहीं सह पाऊंगी। प्लीज घर ले चलो।”

    मैंने बहुत मनाया। “बस एक डिनर तो कर लें मेरी जान। दो दिन का प्लान था ना।”
    लेकिन फोरम जिद पर अड़ी रही। “नहीं राज… अब सच में बस हो गया। मैं घर जाना चाहती हूँ।”

    मैंने सोचा कि अगर मैं और शॉपिंग करवाऊं तो शायद वो मन जाए। मैंने मुस्कुराते हुए कहा,
    “ठीक है… लेकिन चल, थोड़ी और शॉपिंग कर लेते हैं। जो तेरा मन करे खरीद लें। फिर देखते हैं।”

    फोरम ने थोड़ा सोचा और फिर मान गई। हम दोनों तैयार हुए। मैंने सफेद शर्ट और ब्लैक ट्राउजर पहना। फोरम ने कल खरीदी हुई क्रीम साड़ी पहनी। साड़ी उसकी सूजी हुई कमर और थकी हुई चाल के बावजूद भी बहुत खूबसूरत लग रही थी। मैंने उसे डायमंड नेकलेस पहना दी।

    हम होटल की लग्जरी शॉप्स में गए। मैंने उसे और शॉपिंग करवाई। पहले एक सेक्सी ब्लैक बिकिनी सेट खरीदा — जिसमें ऊपर सिर्फ पतली स्ट्रिप्स थीं और नीचे बहुत कम कपड़ा। फोरम शरमा रही थी लेकिन मैंने कहा, “ये अगली बार स्विमिंग पूल के लिए।” फिर एक महंगा परफ्यूम खरीदा — चैनल का, जो उसके शरीर पर लगाने पर बहुत अच्छी खुशबू देता। उसके बाद एक सुंदर ब्रेसलेट और कुछ छोटी-छोटी बैग्स।

    फिर वो एक घड़ी देखने लगी। बहुत महंगी लग्जरी वॉच थी — ४.५ लाख रुपये की। फोरम की आंखें चमक रही थीं। उसने कहा, “राज… ये बहुत पसंद है।”
    मैंने जानबूझकर कहा, “बेबी, ये बहुत महंगी है। अगली बार ले लेंगे।”

    फोरम ने थोड़ा मुँह बनाया और घड़ी रख दी। लेकिन कुल मिलाकर शॉपिंग में मैंने लगभग ३ लाख रुपये और खर्च कर दिए। फोरम अब थोड़ी खुश लग रही थी।

    शॉपिंग खत्म करके हम वापस सूट में आ गए। मैं थक गया था, इसलिए बेड पर लेट गया और आंखें बंद कर लीं। “थोड़ा आराम कर लेता हूँ बेबी।”

    मैं करीब २०-२५ मिनट तक लेटा रहा। जब मेरी आंख खुली तो मैं हैरान रह गया।

    फोरम पूरी तरह नंगी हो चुकी थी। वो मेरे पैरों के पास बैठी हुई थी। उसने मेरी पैंट का बटन खोल दिया था और जिपर नीचे कर दी थी। मेरा लंड बाहर निकालकर हाथ में पकड़े हुए थी। वो उसे हल्का-हल्का सहला रही थी। उसकी आंखों में शर्म और जुनून दोनों थे।

    “फोरम…” मैंने आश्चर्य से कहा।

    वो शरमाते हुए मुस्कुराई और बोली, “शॉपिंग का पावर है ना राज… तुमने इतना सब खरीदा… तो मैं भी तुम्हें खुश कर दूँ।”

    फिर वो मेरे ऊपर चढ़ आई। पूरी तरह नंगी, उसके सूजे हुए स्तन हिल रहे थे। उसने खुद से कंडोम का पैकेट फाड़ा, मेरे लंड पर कंडोम चढ़ाया और लुब्रिकेंट लगाया। फिर मेरे लंड को अपनी सूजी हुई चूत पर रखा और धीरे से बैठ गई।

    “आह… राज… अभी भी दर्द है… लेकिन…”
    वो धीरे-धीरे नीचे बैठी। पूरा ९ इंच उसकी चूत में घुस गया। फोरम कराह उठी, “आह… सूजन… बहुत दर्द… लेकिन… मैं करूंगी…”

    फिर वो खुद ऊपर-नीचे होने लगी। पहला राउंड उसने खुद शुरू किया। वो मेरे ऊपर बैठकर काउगर्ल पोजीशन में चोद रही थी। उसके सूजे हुए स्तन उछल रहे थे। मैं नीचे से उसके कूल्हों को पकड़कर मदद कर रहा था। फोरम कराह रही थी, “आह… राज… दर्द हो रहा है… लेकिन अच्छा भी लग रहा है… हां…”

    पहला राउंड करीब २५ मिनट चला। फिर वो थक गई तो मैंने उसे नीचे लिटाया और दूसरा राउंड शुरू किया। इस बार मैंने उसे मिशनरी में चोदा। धीरे-धीरे लेकिन गहराई से। फोरम पूरे समय कराहती रही — “आह… राज… मेरी चूत सूज गई है… फिर भी… हां… चोदो…”

    दूसरा राउंड भी करीब ३० मिनट चला। दोनों राउंड में फोरम कई बार झड़ गई। आखिरकार मैं भी झड़ गया।

    सेक्स खत्म होने के बाद फोरम मेरी छाती पर गिर पड़ी। वो हांफ रही थी। उसकी चूत अब और ज्यादा सूज गई थी लेकिन चेहरा संतुष्ट था।

    वो धीरे से बोली, “राज… शॉपिंग के बदले ये दे दिया… अब खुश हो ना?”

    मैंने उसे कसकर गले लगा लिया और कहा, “बहुत खुश हूँ मेरी रानी। तू सच में मेरी जान है।”

    हम दोनों कुछ देर ऐसे ही लेटे रहे। बाहर रात हो चुकी थी। अब आगे क्या होगा, ये फोरम के मन पर निर्भर था।

    दूसरे राउंड के बाद फोरम मेरी छाती पर लेटी हुई हांफ रही थी। उसकी सूजी हुई चूत अभी भी मेरे लंड के पास चिपकी हुई थी। मैंने उसके बाल सहलाते हुए कहा,

    “चल बेबी, अब डिनर करने चलते हैं।”

    लेकिन फोरम ने थकी हुई आवाज में जवाब दिया, “नहीं राज… अब डिनर भी नहीं। मैं बहुत थक गई हूँ। बस घर चलते हैं।”

    मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “ठीक है, लेकिन रात का डिनर तो कर लें। फिर एक छोटा सा सरप्राइज भी है तेरे लिए।”

    हम दोनों कपड़े पहनकर नीचे रेस्टोरेंट गए। कैंडल लाइट डिनर था। फोरम खाना खाते समय भी बार-बार अपनी जांघें कसकर बंद कर रही थी क्योंकि चूत में अभी भी सूजन और दर्द था। डिनर खत्म होते ही वो फिर बोली, “अब घर चलते हैं राज।”

    मैंने उसे रोकते हुए कहा, “बेबी, एक बात सुनो। वो घड़ी जो तुझे बहुत पसंद आई थी ना… ४.५ लाख वाली… मैं तुझे दिलवा दूंगा। लेकिन उसके बदले में मुझे तेरी गांड मारने दे। सिर्फ एक राउंड।”

    फोरम की आंखें फट गईं। वो तुरंत बोली, “नहीं राज! बिल्कुल नहीं। मैं वर्जिन थी, चूत ही फट गई, अब गांड? नहीं… मैं नहीं कर पाऊंगी। बहुत दर्द होगा।”

    मैंने बहुत मनाया। “बस एक बार मेरी जान। घड़ी तेरी हो जाएगी। मैं बहुत धीरे करूंगा।”

    फोरम ने १०-१२ मिनट तक मना किया। वो रोने लगी, “राज प्लीज… मत करो… मैं डर रही हूँ।”

    आखिरकार जब मैंने कहा, “ठीक है, अगर नहीं तो घड़ी नहीं लूंगा,” तो वो थोड़ा नरम पड़ी। उसने आंसू पोछते हुए कहा, “ठीक है… लेकिन बहुत धीरे करना… और अगर बहुत दर्द हो तो रुक जाना।”

    हम वापस सूट में आ गए। मैंने तुरंत घड़ी की शॉप में कॉल करके डिलीवरी मंगवा ली। १५ मिनट बाद घड़ी आ गई। मैंने फोरम की कलाई में पहना दी। वो घड़ी देखकर थोड़ी खुश हुई लेकिन डर भी साफ दिख रहा था।

    मैंने उसे नंगा किया। फोरम चारों हाथ-पैरों के बल बेड पर हो गई। मैंने उसके गांड के छेद पर बहुत अच्छे से लुब्रिकेंट लगाया। मेरा ९ इंच का लंड भी लुब्रिकेंट से चिकना कर लिया और कंडोम चढ़ा लिया।

    “आराम से बेबी…” मैंने कहा और लंड की नोक को उसके गांड के छोटे से छेद पर रखा।

    जैसे ही मैंने धक्का दिया, सिर्फ सिरा अंदर गया।

    “आआआह… राज… निकालो… बहुत दर्द… चीख…!” 
    फोरम जोर से चिल्लाई और रोने लगी। उसका पूरा शरीर कांप रहा था।

    मैं रुका नहीं। धीरे-धीरे आगे बढ़ता गया। २ इंच… ३ इंच… ४ इंच… हर इंच पर फोरम बुरी तरह चिल्ला रही थी और रो रही थी। 
    “राज… मेरी गांड फट गई… आह… बहुत दर्द… रो रही हूँ… प्लीज निकालो… चीख…!”

    ५ इंच होने पर उसकी गांड से हल्का खून भी निकलने लगा। फोरम अब जोर-जोर से चिल्ला रही थी, “आह… राज… मार डालोगे… बहुत जलन… रो… चिल्ला… बस करो…!”

    लेकिन मैं नहीं रुका। पूरे ९० मिनट तक मैंने उसकी गांड मारी। पहले धीरे-धीरे, फिर थोड़ी तेजी से। फोरम पूरे समय रोती रही, चिल्लाती रही, तकिए को मुंह से काटती रही। उसके नाखून बेडशीट को नोच रहे थे। “राज… बहुत हो गया… गांड खराब हो गई… आह… चीख… रो… प्लीज…!”

    ९० मिनट बाद मैं उसके गांड में झड़ गया। फोरम थककर बेड पर गिर पड़ी। उसकी गांड बुरी तरह सूज गई थी और लाल हो गई थी।

    फिर मैंने उसे चूत में एक छोटा सा राउंड और किया। करीब २० मिनट तक धीरे-धीरे चोदा। उसके बाद हम दोनों थककर सो गए।

    सुबह का सीन

    सुबह ६:४५ बजे मैं उठा। फोरम अभी भी गहरी नींद में सो रही थी — नंगी, घुटनों को छाती से लगाकर। मैंने चुपके से कंडोम लगाया, लुब्रिकेंट लगाया और उसके पीछे लेट गया।

    धीरे से उसके गांड के छेद पर लंड रखा और एक जोरदार धक्का दिया। पूरा ९ इंच एक ही झटके में उसकी गांड में घुस गया।

    “आआआह… राज… क्या कर रहे हो… चीख…!” 
    फोरम नींद से चौंककर जोर से चिल्ला उठी। आंसू तुरंत निकल आए। “बहुत दर्द… गांड फट गई… रो… निकालो…!”

    मैंने उसे कसकर पकड़ लिया और पूरे २५ मिनट तक उसकी गांड मारी। फोरम लगातार चिल्लाती और रोती रही। आखिरकार मैं झड़ गया।

    फिर हमने नाश्ता किया। नाश्ते के बाद मैंने उसे एक लास्ट राउंड चूत में मारा — मिशनरी पोजीशन में, करीब ३० मिनट तक। फोरम इस बार कम रोई लेकिन फिर भी कराह रही थी।

    आखिर में हमने चेकआउट किया। मैंने फोरम को गाड़ी में बिठाया। उसकी चाल बहुत लड़खड़ा रही थी। गांड और चूत दोनों बुरी तरह सूजी हुई थीं। वो मेरे कंधे पर सिर रखकर बैठी रही।

    घर पहुंचकर मैंने उसे गले लगाया और कहा, “मेरी रानी… अगली बार फिर ले जाऊंगा।”

    फोरम ने थके हुए लेकिन प्यार भरे स्वर में कहा, “राज… तुम बहुत शैतान हो… लेकिन मैं तुम्हारी हूँ।”

  • राज और फोरम की जुनूनी कहानी 2

    एक राउंड पूरा होने तक फोरम लगातार चिल्लाती और रोती रही। मैंने धीरे-धीरे स्पीड बढ़ाई लेकिन ज्यादा नहीं। करीब १५-२० मिनट तक अंदर-बाहर करने के बाद मैं झड़ गया। कंडोम में गरम स्पर्म का फव्वारा छूटा।

    फोरम थककर बिस्तर पर पड़ी थी। उसकी सांसें अभी भी तेज थीं। चूत से थोड़ा खून और पानी मिला हुआ निकल रहा था। मैंने कंडोम उतारा, उसे गले लगा लिया और उसके माथे पर किस किया।

    “मेरी रानी… तू बहुत बहादुर है। अब दर्द कम हो जाएगा। मैं तुझे बहुत प्यार करता हूँ।”

    फोरम मेरी छाती में मुंह छिपाकर धीरे से रो रही थी और फुसफुसा रही थी, “राज… बहुत दर्द हुआ… लेकिन… तुम्हारी हूँ अब…”

    हम दोनों पसीने और थकान से तर थे। मैंने उसे कसकर गले लगा रखा था।

    पहला राउंड खत्म होने के बाद हम दोनों थककर बेड पर लेटे हुए थे। फोरम मेरी छाती से चिपकी हुई थी। उसकी सांसें अभी भी तेज चल रही थीं। चूत से हल्का खून और पानी मिला हुआ निकल रहा था। मैं उसके बालों को प्यार से सहला रहा था और बार-बार उसके माथे पर किस कर रहा था।

    “मेरी जान… तू ठीक है ना?” मैंने धीरे से पूछा।
    फोरम ने सिर्फ सिर हिलाया और मेरी छाती में मुंह छिपा लिया। वो अभी भी हल्का-हल्का रो रही थी।

    ठीक १० मिनट बाद मैंने उसे फिर से चूमना शुरू किया। उसके होंठों को चूसा, गर्दन पर किस किए। मेरे हाथ उसके स्तनों पर फिरने लगे। फोरम की सांसें फिर से तेज हो गईं। मैंने उसके कान में फुसफुसाया, “बेबी… दूसरा राउंड शुरू करते हैं। लेकिन अब तेरी मर्जी से। तू बोल जब शुरू करना हो।”

    फोरम ने कुछ सेकंड सोचा, फिर शरमाते हुए धीरे से बोली, “राज… शुरू कर दो… लेकिन बहुत धीरे… प्लीज।”

    मैंने मुस्कुराकर उसे फिर मिशनरी पोजीशन में लिटा दिया। उसके पैर फैलाए और अपनी कमर के दोनों तरफ रख दिए। नया कंडोम निकाला, खुद लगाया और लुब्रिकेंट अच्छे से लगाया। लंड फिर से पूरा खड़ा हो चुका था।

    मैंने लंड की नोक को उसकी सूजी हुई चूत पर रखा और बहुत धीरे से धक्का दिया। सिर्फ १ इंच अंदर गया।

    “आह… राज… फिर दर्द… चिल्ला…!”
    फोरम फिर से चिल्ला उठी। उसकी चूत अब और भी सूज गई थी, इसलिए दर्द पहले से ज्यादा था। वो रोने लगी। आंसू उसके गालों पर बह रहे थे।

    मैं रुका नहीं। धीरे-धीरे २ इंच… ३ इंच… हर इंच पर फोरम जोर-जोर से चिल्ला रही थी और रो रही थी।
    “राज… बहुत दर्द हो रहा है… आह… निकालो… रो… मैं सह नहीं पा रही… चीख…!”

    लेकिन इस बार मैंने उसकी मर्जी से शुरू किया था, इसलिए मैं धीरे-धीरे आगे बढ़ता रहा। ५ इंच होने पर उसकी चूत बुरी तरह सूज चुकी थी। लाल हो गई थी और हर धक्के पर वो तड़प रही थी। उसके नाखून मेरी पीठ पर गहरे निशान बना रहे थे। वो बार-बार चिल्लाती, “राज… बस… बहुत हो गया… आह… दर्द… रो रही हूँ…”

    मैं बीच-बीच में रुककर उसके होंठ चूमता, स्तन चूसता, आंसू पोछता और कहता, “मेरी रानी… बस थोड़ा और… तू बहुत अच्छी है… मैं तुझे प्यार करता हूँ।”

    इस दूसरे राउंड में मैंने पूरी ५५ मिनट तक चोदा। पहले २० मिनट तो सिर्फ धीरे-धीरे अंदर-बाहर किया। उसके बाद थोड़ी स्पीड बढ़ाई लेकिन ज्यादा नहीं। फोरम पूरे समय चिल्लाती और रोती रही। कभी-कभी वो मेरी कमर को अपने पैरों से कसकर पकड़ लेती, कभी धक्का देने की कोशिश करती। उसकी चूत अब बुरी तरह सूज गई थी – लाल, फूली हुई, हर बार लंड निकलते या घुसते समय वो जोर से कराहती।

    “आह… राज… मेरी चूत फट गई… बहुत सूज गई है… चिल्ला… रो… प्लीज रुक जाओ…”

    लेकिन मैं रुका नहीं। ५५ मिनट पूरे होने पर मैं जोर से झड़ गया। कंडोम में गरम स्पर्म भर गया। फोरम भी इस बार थोड़ा सा झड़ गई थी, लेकिन दर्द ज्यादा था इसलिए वो सिर्फ हांफ रही थी और रो रही थी।

    राउंड खत्म होते ही मैंने लंड बाहर निकाला। फोरम की चूत बुरी तरह सूजी हुई थी – लाल, फूली, थोड़ा खून भी अभी भी निकल रहा था। वो बेड पर लेटी हुई कराह रही थी।

    मैंने तुरंत उसे गोद में उठा लिया। “आ जा बेबी… अब आराम करेंगे।”

    मैं उसे जकूजी टब की तरफ ले गया। टब में गर्म पानी भर दिया। पानी में थोड़ा बबल्स और खुशबू वाला शॉवर जेल डाला। पानी अच्छे से गर्म था लेकिन जलाने वाला नहीं। मैं पहले खुद टब में बैठ गया, फिर फोरम को अपनी गोद में बिठा लिया।

    गर्म पानी उसकी सूजी हुई चूत पर पड़ते ही फोरम ने राहत की सांस ली। “आह… राज… अच्छा लग रहा है… गर्म पानी… दर्द कम हो रहा है…”

    मैं उसके पीछे बैठा था। उसकी पीठ मेरी छाती से सटी हुई थी। मैंने दोनों हाथों से उसके स्तनों को हल्का-हल्का दबाते हुए मसाज देना शुरू किया। उसके बालों को सहलाया, गर्दन पर किस किए। फोरम ने आंखें बंद कर लीं और मेरी गोद में ढीली पड़ गई। पानी में हम दोनों १५-२० मिनट तक बैठे रहे। बीच-बीच में मैं उसके कान में प्यार भरी बातें कहता रहा – “तू मेरी रानी है… मैं तुझे कभी दुख नहीं पहुंचाऊंगा… अब तू पूरी तरह मेरी हो गई…”

    नहाने के बाद मैंने उसे टॉवल से अच्छे से पोंछा। फिर गोद में उठाकर वापस बेड पर ले आया। उसे बेड पर लिटाया और खुद उसके बगल में लेट गया। फोरम तुरंत मेरी छाती से चिपक गई। उसकी सूजी हुई चूत अभी भी दर्द कर रही थी, लेकिन गर्म पानी से थोड़ी राहत मिल गई थी।

    वो धीरे से बोली, “राज… बहुत दर्द हुआ… लेकिन… मैं तुम्हारी हूँ अब…”

    मैंने उसे कसकर गले लगा लिया और उसके माथे पर किस किया। “आराम कर मेरी जान। हम अभी सोते हैं।”

    रात भर हम दोनों कसकर एक-दूसरे से चिपके सोए रहे। फोरम मेरी छाती पर सिर रखे, एक टांग मेरी टांग पर रखे, पूरी तरह नंगी मेरे बांहों में समाई हुई थी। मैंने रात में कई बार उसके बाल सहलाए, माथे पर किस किए और उसे अच्छे से कवर कर दिया था। एसी की ठंडी हवा में भी उसके शरीर की गर्मी मुझे अच्छी लग रही थी।

    सुबह ठीक ७:०५ बजे मेरी आंख खुली। सूट की खिड़कियों से हल्की सुबह की रोशनी आ रही थी। मैंने बगल में देखा — फोरम अभी भी गहरी नींद में सो रही थी। उसके बाल बिखरे हुए थे, होंठ थोड़े खुले थे, चेहरा थकान और सुंदरता से भरा हुआ था। मैंने धीरे से अपना हाथ उसके शरीर पर फेरा। उसकी नरम छाती मेरी छाती से सटी हुई थी।

    मैंने चुपके से चादर हटाई और नीचे देखा। फोरम की चूत अब भी काफी सूजी हुई थी, लेकिन रात के मुकाबले थोड़ी कम हो गई थी। लालिमा अभी भी थी, हल्का सूजन था, लेकिन देखने में और भी सेक्सी लग रही थी। मैंने देखा कि उसकी चूत थोड़ी-थोड़ी खुली हुई थी — कल रात के दो राउंड का असर साफ दिख रहा था।

    मेरा लंड फिर से खड़ा होने लगा। मैंने बिना आवाज किए बेडसाइड टेबल से नया कंडोम और लुब्रिकेंट निकाला। कंडोम को चुपके से अपने ९ इंच के लंड पर चढ़ा लिया और अच्छे से लुब्रिकेंट लगा लिया। फिर मैं फोरम के पैरों को बहुत धीरे से फैलाया, ताकि वो न जागे।

    मैं उसके ऊपर आ गया। लंड की नोक को उसकी सूजी हुई चूत के मुंह पर रखा और बहुत धीरे से पहला धक्का दिया। सिर्फ सिरा अंदर चला गया।

    फोरम की आंखें अचानक खुल गईं। वो चौंककर बोली, “आह… राज… क्या कर रहे हो…?”
    उसकी आवाज में नींद और दर्द का मिश्रण था।

    मैंने तुरंत उसके होंठों पर किस किया और कान में फुसफुसाया, “सुबह हो गई मेरी जान… तू बहुत प्यारी लग रही थी सोते हुए… मैं रोक नहीं पाया…”

    फिर मैंने दूसरा धक्का दिया। अब २ इंच अंदर हो गए।
    “आह… राज… अभी भी दर्द हो रहा है… चीख… सूज गई है… धीरे… प्लीज…”
    फोरम थोड़ी चिल्लाई और कराहने लगी। लेकिन वो पूरी तरह जाग चुकी थी। उसने अपनी दोनों बाहें मेरी पीठ पर डाल दीं और मुझे कसकर पकड़ लिया।

    मैं रुका नहीं। धीरे-धीरे आगे बढ़ता गया — ३ इंच… ४ इंच… हर धक्के पर फोरम हल्की-हल्की चिल्ला रही थी और “आह… आह…” करके मेक ले रही थी। उसकी सूजी चूत अभी भी बहुत तंग थी, लेकिन कल रात की वजह से थोड़ी ढीली भी हो गई थी। फिर भी हर बार लंड घुसते समय वो तड़प जाती, “राज… बहुत सूजन है… दर्द… लेकिन… मत रुको…”

    मैंने पूरे १०-१२ मिनट तक धीरे-धीरे चोदा। बीच-बीच में उसके स्तनों को चूसता, गर्दन चबाता और उसे चूमता रहा। फोरम अब रोने की बजाय सिर्फ कराह रही थी और कभी-कभी मेरी कमर को अपने पैरों से कसकर पकड़ लेती।

    पहला सुबह का राउंड करीब १८ मिनट में खत्म हुआ। मैं जोर से झड़ गया। कंडोम भर गया। फोरम भी हल्का सा झड़ गई थी। वो हांफते हुए मेरी छाती पर गिर गई।

    लेकिन मैंने रुकने नहीं दिया। सिर्फ ५ मिनट आराम करके मैंने दूसरा राउंड शुरू कर दिया। इस बार मैंने उसे साइड पोजीशन में किया — उसके एक पैर को ऊपर उठाकर। लंड फिर से अंदर किया।

    “आह… राज… फिर… सूज गई चूत… चिल्ला… आह… मेक…!”
    फोरम फिर चिल्लाई लेकिन अब दर्द कम था। वो “आह… आह…” करके मेक ले रही थी। मैंने इस राउंड में थोड़ी तेजी से चोदा। २२ मिनट तक लगातार धक्के दिए। उसके सूजे हुए स्तन मेरे हाथों में थे। मैं उन्हें दबाता, चूसता और नीचे से जोर-जोर से ठोकता रहा।

    फोरम पूरे समय कराहती रही — “राज… हां… धीरे… आह… अच्छा लग रहा है… लेकिन सूजन… आह…!”
    दूसरा राउंड भी खत्म हुआ। मैं फिर झड़ गया। फोरम की चूत अब और ज्यादा सूज गई थी, लेकिन वो अब दर्द के साथ-साथ मजा भी ले रही थी।

    दोनों राउंड खत्म होने के बाद मैंने कंडोम उतारा और फोरम को कसकर गले लगा लिया। वो मेरी बांहों में पूरी तरह ढीली पड़ गई थी। उसके चेहरे पर पसीना था, बाल बिखरे हुए थे, होंठ सूजे हुए थे।

    “राज… सुबह-सुबह… तुम बहुत शैतान हो…” वो शरमाते हुए बोली और मेरी छाती में मुंह छिपा लिया।

    मैंने हंसते हुए उसके बाल सहलाए और कहा, “मेरी रानी… तू सोते हुए इतनी प्यारी लग रही थी कि रोक नहीं पाया। अब उठो, हम नाश्ता करेंगे। फिर और मजा करेंगे।”

    फोरम ने शरमा कर मुझे और कसकर गले लगा लिया। उसकी सूजी हुई चूत अभी भी मेरी जांघ से सटी हुई थी। हम दोनों कुछ देर ऐसे ही लेटे रहे — प्यार, थकान और सुबह की गर्माहट में डूबे हुए।

    दो सुबह के राउंड के बाद फोरम मेरी छाती से चिपकी हुई थी। उसकी सांसें अभी भी भारी थीं और चूत बुरी तरह सूजी हुई थी। मैंने उसे प्यार से चूमते हुए कहा, “मेरी जान, अब हम दोनों फ्रेश हो जाते हैं।”

    मैं सबसे पहले उठा और बाथरूम में चला गया। गर्म पानी से अच्छे से नहाया, दांत ब्रश किए, चेहरा धोया। जब मैं बाहर निकला तो सिर्फ एक सफेद टॉवल कमर पर लपेटे हुए था। फोरम अब बेड पर बैठ गई थी। उसके बाल बिखरे हुए थे, चेहरा थका हुआ लेकिन बहुत प्यारा लग रहा था।

    “तू भी फ्रेश हो जा बेबी,” मैंने मुस्कुराते हुए कहा।

    फोरम शरमाते हुए उठी। जब वो चलने लगी तो उसकी चाल थोड़ी अजीब थी — पैरों को थोड़ा फैलाकर चल रही थी क्योंकि चूत में अभी भी सूजन और दर्द था। वो बाथरूम में गई। मैंने बाहर खड़े होकर सुना — वो गर्म पानी से नहा रही थी और हल्का-हल्का कराह रही थी जब पानी उसकी सूजी चूत पर पड़ता। १५ मिनट बाद वो बाहर आई। उसके बाल गीले थे, शरीर पर सिर्फ एक सफेद टॉवल लपेटा हुआ था। टॉवल उसके स्तनों को मुश्किल से ढक पा रहा था और ऊपर से उसकी गोरी जांघें दिख रही थीं।

    हम दोनों अब थोड़े फ्रेश हो चुके थे। मैंने रूम सर्विस को फोन किया और नाश्ता मंगवाया — फ्रेश फ्रूट्स (तरबूज, अंगूर, स्ट्रॉबेरी), ऑमलेट, टोस्ट, जूस, कॉफी और कुछ स्वीट डिश।

    नाश्ता आ गया। मैंने ट्रे को बेड पर रख दिया। हम दोनों पूरी तरह नंगे थे। फोरम शरमा रही थी लेकिन मैंने उसे अपनी गोद में बिठा लिया। हमने साथ में नाश्ता किया। मैं स्ट्रॉबेरी उसके मुंह में डालता, वो मेरे मुंह में अंगूर रखती। बीच-बीच में मैं उसके स्तनों को हल्का छू लेता या गर्दन पर किस कर लेता। फोरम हंस रही थी लेकिन जब मैंने कहा, “अब एक राउंड और कर लें,” तो उसने तुरंत मना कर दिया।

    “नहीं राज… अब बस हो गया। बहुत दर्द हो रहा है। मेरी चूत बुरी तरह सूज गई है। प्लीज आज और मत करो।”

    मैंने जिद की, “बस एक बार बेबी… जकूजी में। पानी में बहुत आराम रहेगा।”

    फोरम ने बहुत मना किया। “नहीं… सच में बस हो गया। मैं चल भी नहीं पा रही ठीक से।”

    मैंने उसे मनाने के लिए १० मिनट तक कोशिश की — कभी गले लगाकर, कभी उसके कान में प्यार भरी बातें करके, कभी उसके स्तनों को सहलाकर। आखिरकार वो थोड़ी मान गई। “ठीक है… लेकिन सिर्फ जकूजी में… और बहुत धीरे… वरना मैं रोने लगूंगी।”

    मैं खुश हो गया। हम दोनों नंगे ही जकूजी टब की तरफ गए। मैंने टब में गर्म पानी भरा, बबल्स चालू किए और थोड़ा खुशबू वाला ऑयल डाला। पानी अच्छे से गर्म लेकिन सहने लायक था। मैं पहले टब में बैठ गया। फिर फोरम को अपनी गोद में बिठा लिया — उसकी पीठ मेरी छाती से सटी हुई।

    मैंने लंड पर फिर कंडोम चढ़ाया और लुब्रिकेंट लगाया। फोरम की सूजी चूत पानी में थोड़ी राहत महसूस कर रही थी। मैंने उसे अपनी गोद में सही से सेट किया और लंड को उसकी चूत पर रखा। धीरे से ऊपर से धक्का दिया।

    “आह… राज… फिर दर्द…!” फोरम हल्की चिल्लाई।

    लेकिन पानी की वजह से घर्षण कम था। मैंने बहुत धीरे-धीरे पूरा ९ इंच अंदर कर दिया। फोरम रोने लगी, “आह… सूजन… बहुत दर्द… राज… रो रही हूँ…”

    मैंने उसे कसकर पकड़ लिया और जकूजी में ही धीरे-धीरे चोदना शुरू कर दिया। पानी छप-छप कर उछल रहा था। मैंने एक हाथ से उसके स्तन दबाए, दूसरे हाथ से क्लिटोरिस सहलाया। फोरम लगातार रो रही थी और चिल्ला रही थी — “आह… राज… बहुत तेज… सूज गई है… चीख… प्लीज धीरे… रो… आह…!”

    यह राउंड पूरे ९० मिनट तक चला। मैंने उसे कई पोजीशन में चोदा — कभी वो मेरी गोद में ऊपर-नीचे, कभी मैं पीछे से, कभी साइड में। पानी के अंदर होने की वजह से हर धक्का गहरा लग रहा था। फोरम पूरे ९० मिनट तक रोती रही, चिल्लाती रही, कभी मेरी बांहों को कसकर पकड़ लेती, कभी “बस हो गया… रो रही हूँ…” कहती। लेकिन बीच में कई बार वो खुद भी हिलने लगी। उसकी चूत अब बुरी तरह सूज चुकी थी और लाल हो गई थी।

    आखिरकार ९० मिनट बाद मैं जोर से झड़ गया। फोरम भी थककर मेरी गोद में ढीली पड़ गई। वो हांफ रही थी और आंसू बहा रही थी।

    राउंड खत्म होने के बाद मैंने उसे टब से उठाया। अच्छे से टॉवल से पोंछा। फोरम की चाल अब और भी लड़खड़ा रही थी। मैंने उसे गोद में उठाकर बेड पर लिटा दिया।

    फिर हम दोनों ने कपड़े पहने — मैंने सफेद शर्ट और ब्लैक ट्राउजर पहना, फोरम ने कल खरीदी हुई नई क्रीम साड़ी पहनी। साड़ी उसकी सूजी हुई चूत और थकी हुई शरीर पर भी बहुत खूबसूरत लग रही थी। मैंने उसे डायमंड नेकलेस भी पहना दी।

    अब हम डिनर के लिए तैयार थे, लेकिन फोरम की चाल अभी भी धीमी थी और चेहरा थका हुआ था। वो मेरे बाजू में आकर बोली, “राज… अब सच में बस… मैं बहुत थक गई हूँ।”

    मैंने उसे गले लगा लिया और कहा, “चलो मेरी रानी, अब सिर्फ डिनर और आराम।”

  • राज और फोरम की जुनूनी कहानी 1

    अगला दिन, सुबह १०:३० बजे।
    मैं अपने अहमदाबाद के लग्जरी फ्लैट के बेडरूम में लेटा हुआ था। सिर्फ ब्लैक बॉक्सर पहने, छाती नंगी। कल रात मैंने फोरम को ताज होटल में दो दिन के लिए साथ रहने का प्लान बताया था। लेकिन वो अभी तक कोई साफ जवाब नहीं दे रही थी। मेरा दिल तेज-तेज धड़क रहा था। मैंने फोन उठाया और व्हाट्सएप पर लंबा मैसेज टाइप करना शुरू किया।

    “मेरी जान फोरम ❤️
    कल सुबह ५ बजे ताज होटल की लॉबी में मिलते हैं। मैंने पहले से ही १७वीं मंजिल का प्रेसिडेंशियल सूट बुक कर लिया है – पूरा प्राइवेट, जकूजी, बालकनी, किंग साइज बेड। दो दिन सिर्फ तू और मैं। पहले दिन शॉपिंग करवाऊंगा – साड़ी, ड्रेस, लिंगरी, ज्वेलरी, जो तेरा मन करे। शाम को कैंडल लाइट डिनर, फिर रूम में सिर्फ रोमांस। मैं तेरे बाल सहलाऊंगा, तेरे होंठ चूमूंगा, तेरे शरीर को छूकर तुझे महसूस करूंगा। कोई जल्दबाजी नहीं। जब तक तू तैयार न हो, कुछ नहीं करूंगा। मैं तेरे बिना अधूरा हूँ बेबी। प्लीज हाँ बोल दे। मैं तेरी हर इच्छा पूरी करूंगा। तेरी मुस्कान के लिए पूरा ताज बुक करवा सकता हूँ।”

    मैसेज भेजकर मैं इंतजार करने लगा। ४ मिनट बाद “टाइपिंग…” दिखा। फिर रुक गया। फिर फिर से टाइपिंग। आखिरकार मैसेज आया:

    “राज… दो दिन होटल में? मैं बहुत डर रही हूँ। घरवाले क्या कहेंगे? और… मैं अभी वर्जिन हूँ। तुम जानते हो ना?”

    मैंने तुरंत रिप्लाई किया:
    “हाँ मेरी जान, मैं सब जानता हूँ। लेकिन दो दिन सिर्फ तेरा और मेरा समय होगा। अगर तू नहीं चाहे तो हम सिर्फ बातें करेंगे, गले लगेंगे, किस करेंगे। मैं तेरी इज्जत का पूरा ख्याल रखूंगा। घर पर बोल देना फ्रेंड्स के साथ शॉपिंग और पार्टी है। मैं सब संभाल लूंगा। प्लीज फोरम… मुझे तेरे साथ रहना है।”

    फिर मैंने वीडियो कॉल लगा दी। घंटी बजती रही। सातवीं घंटी पर उसने कॉल उठाई। उसकी प्यारी गोरी फेस स्क्रीन पर आई। बाल खुले, आंखों में शर्म और डर का मिश्रण। पीछे उसका रूम दिख रहा था।

    “राज… तुम सच में दो दिन होटल में रहना चाहते हो?” उसकी आवाज थोड़ी कांप रही थी।

    मैंने बहुत प्यार से कहा, “हाँ बेबी। लेकिन मैं तुझे कभी मजबूर नहीं करूंगा। हम पहले शॉपिंग करेंगे, तुझे नई-नई चीजें खरीद दूंगा। फिर डिनर में कैंडल लाइट में बातें करेंगे। रूम में जाकर मैं तुझे अपनी गोद में बैठाकर बाल सहलाऊंगा, गर्दन चूमूंगा, जितना तू चाहे उतना प्यार करूंगा। अगर तू कहेगी ‘बस’ तो मैं रुक जाऊंगा। मैं सिर्फ तेरे साथ होना चाहता हूँ। तेरी सांसों को महसूस करना चाहता हूँ। प्लीज मेरी रानी… हाँ बोल दे।”

    फोरम ने लंबी सांस ली। उसकी आंखें नीची हो गईं। “लेकिन राज… अगर कुछ हो गया तो?”

    “कुछ नहीं होगा जो तू नहीं चाहे। मैं प्रॉमिस करता हूँ। बस तेरे साथ दो दिन बिताना है। तेरे हाथ थामना है, तेरे पैरों को अपने पैरों से रगड़ना है। तेरी हंसी सुननी है।”

    उसने फिर २-३ मिनट सोचा। फिर धीरे से बोली, “ठीक है… लेकिन बहुत डर लग रहा है। कल सुबह ५ बजे आऊंगी। लेकिन अगर मैं मना कर दूं तो मान जाना।”

    मैं खुशी से मुस्कुरा दिया। “प्रॉमिस बेबी। मैं तुझे कभी दुख नहीं पहुंचाऊंगा। कल ५ बजे लॉबी में गुलदस्ता लेकर इंतजार करूंगा।”

    फिर हमारी बातें रात तक चलती रहीं। मैंने उसे डिटेल में बताया कि कैसे हम शॉपिंग करेंगे, कौन-कौन सी ड्रेस खरीदेंगे, कैसे डिनर में रोमांस करेंगे। फोरम शरमा-शरमा कर हंसती रही। रात ११:५५ बजे उसने आखिरी मैसेज किया:

    “राज… मैं आ रही हूँ। लेकिन प्लीज मुझे अच्छे से रखना। ❤️”

    मैंने रिप्लाई किया: “तू मेरी जान है। मैं तेरी हर खुशी का ख्याल रखूंगा। सो जा अब, कल सुबह मिलते हैं।”

    अगली सुबह ७:१५ बजे मैं उठा। दिल में उत्साह था। सबसे पहले मैंने अपना प्राइवेट पार्ट वैक्सिंग के लिए अपॉइंटमेंट लिया। सैलून पहुंचकर मैंने पूरा साफ करवाया – लंड, अंडकोष, आस-पास का सारा एरिया। वैक्सिंग के बाद मेरा ९ इंच का लंड बिल्कुल चिकना, चमकदार और मोटा लग रहा था। नसें साफ उभरी हुईं, सिरा गुलाबी और तैयार। मैंने महंगा परफ्यूम लगाया, सफेद शर्ट और ब्लैक ट्राउजर पहना। जेब में कंडोम, लुब्रिकेंट और छोटी-छोटी सरप्राइज रख लीं।

    शाम के ठीक ४:४५ बजे मैं ताज होटल की भव्य लॉबी में पहुंच गया। हाथ में २५ लाल गुलाबों का बड़ा गुलदस्ता। लॉबी में हल्की रोशनी और क्लासिकल म्यूजिक चल रही थी। ठीक ५:०० बजे लिफ्ट के दरवाजे खुले। फोरम बाहर निकली। हल्का गुलाबी कुर्ता जो उसके गोरे शरीर पर फिट बैठ रहा था, नीचे ब्लैक टाइट जींस। बाल खुले हुए, चेहरे पर हल्का मेकअप, होंठों पर पिंक लिपस्टिक। वो मुझे देखते ही शर्मा गई और धीरे-धीरे मेरी तरफ आई।

    मैंने आगे बढ़कर उसे कसकर गले लगा लिया। उसकी नरम, गर्म छाती मेरी छाती से सट गई। मैंने उसके कान में फुसफुसाया, “मेरी जान… आ गई तू। अब दो दिन सिर्फ हम दोनों।

    डिनर खत्म होने के बाद रात के करीब ९:४५ बजे हम दोनों रेस्टोरेंट से निकले। फोरम का हाथ मेरे हाथ में था। उसके चेहरे पर शर्म, उत्सुकता और थोड़ा डर साफ दिख रहा था। मैंने उसे धीरे से अपनी तरफ खींचा और लिफ्ट की तरफ ले गया। लिफ्ट में कोई और नहीं था। जैसे ही दरवाजे बंद हुए, मैंने उसे दीवार से लगा लिया और उसके होंठों पर हल्का सा किस किया। फोरम कांप गई लेकिन किस में थोड़ा जवाब दिया।

    लिफ्ट १७वीं मंजिल पर रुकी। हम सूट के दरवाजे पर पहुंचे। मैंने कार्ड से दरवाजा खोला। अंदर घुसते ही लाइट्स ऑटोमैटिक जल गईं। पूरा सूट बहुत खूबसूरत था – बड़ा किंग साइज बेड, सॉफ्ट लाइटिंग, जकूजी टब एक तरफ, बालकनी से अहमदाबाद की रात की चमकती लाइट्स दिख रही थीं। एयर कंडीशनर की ठंडी हवा कमरे में फैली हुई थी।

    दरवाजा बंद करते ही मैंने फोरम को अपनी तरफ घुमाया। “मेरी जान…” मैंने उसे दोनों हाथों से कमर से पकड़कर अचानक गोद में उठा लिया। फोरम चौंक गई, “आह… राज… क्या कर रहे हो?” उसकी दोनों टांगें मेरी कमर के चारों तरफ लिपट गईं। मैंने उसे कसकर पकड़े हुए बेड की तरफ ले गया। उसके स्तन मेरी छाती से दब रहे थे। मैंने उसके गाल, गर्दन और फिर होंठों पर कई सारे हल्के-हल्के किस किए। फोरम मेरी गर्दन में हाथ डालकर शरमा रही थी।

    बेड के पास पहुंचकर मैंने उसे बहुत धीरे से बेड पर लिटा दिया। फिर खुद उसके ऊपर झुक गया। “फोरम… तू बहुत खूबसूरत है।” मैंने उसके होंठों को चूसना शुरू किया। पहले हल्के किस, फिर गहरे किस। मेरी जीभ उसके मुंह में घुस गई। फोरम की सांसें तेज हो गईं। मैंने उसके गाल, कान की लोब, गर्दन को चूमा और हल्का-हल्का चाटा। वो कराह रही थी, “आह… राज… धीरे…”

    अब मैंने arm in arm से उसके कपड़े उतारने शुरू किए। पहले उसके कुर्ते के बटन खोले। कुर्ता धीरे-धीरे ऊपर किया और उतार दिया। उसके गोरे, नरम ३४C स्तन ब्रा में कैद थे। ब्रा का हुक पीछे से खोला और ब्रा भी उतार दी। उसके गुलाबी चूचियां बाहर आ गईं। मैंने दोनों हाथों से उन्हें हल्का दबाया और चूमा। फोरम ने आंखें बंद कर लीं और सांसें भारी हो गईं।

    फिर मैंने उसकी जींस का बटन खोला। जिपर नीचे किया और जींस को धीरे-धीरे उसकी टांगों से उतारा। अब वो सिर्फ पैंटी में थी – हल्की गुलाबी पैंटी। मैंने उसे भी बहुत धीरे से उतार दिया। पहली बार फोरम की पूरी नंगी चूत मेरे सामने थी – बिल्कुल साफ, गुलाबी, छोटी-छोटी लेबिया, बीच में तंग सुराख। वो शर्मा कर दोनों हाथों से अपना चेहरा ढक ले रही थी।

    मैंने उसके पैरों को फैलाया और खुद उसके बीच में लेट गया। पहले उसके पेट पर किस किए, फिर नाभि को चाटा। धीरे-धीरे नीचे आया। उसकी जांघों को चूमा, फिर चूत के आस-पास चाटा। फोरम की कमर तन गई, “उफ्फ… राज… क्या कर रहे हो… शर्म आ रही है… आह…”

    मैंने थोड़ी देर उसके स्तनों के साथ खेला। दोनों चूचियों को मुंह में लेकर चूसा, जीभ से चक्कर लगाया, हल्का काटा। फोरम अब कराह रही थी, “आह… राज… अच्छा लग रहा है…”

    फिर मैंने खुद की शर्ट उतार दी। अब मैं सिर्फ पैंट में था। फोरम ने शरमाते हुए मेरी शर्ट उतारने में मदद की। उसके हाथ मेरी छाती पर फिर रहे थे। मैंने उसकी पैंटी पूरी तरह उतार दी (जो पहले ही उतार चुका था)। अब वो पूरी नंगी थी।

    मैंने फिर उसके स्तनों को चूमा-चाटा। फिर गर्म करने के लिए उसके पूरे शरीर पर किस करने लगा – गर्दन, कंधे, पेट, जांघें। फोरम अब पूरी तरह गर्म हो चुकी थी। उसकी सांसें तेज थीं और चूत थोड़ी भीग चुकी थी।

    अब मैंने अपनी पैंट और बॉक्सर उतार दिया। मेरा ९ इंच का लंड पूरा तना हुआ, वैक्स किया हुआ, मोटा और चमकता हुआ बाहर आ गया। फोरम की आंखें फट गईं। “राज… ये… इतना बड़ा…”

    मैंने उसके हाथ को पकड़कर लंड पर रख दिया। फोरम ने शरमाते हुए लेकिन उत्सुकता से लंड को हाथ में लिया और हल्का-हल्का सहलाने लगी। वो उसे ऊपर-नीचे कर रही थी, अंगूठे से सिरे को छू रही थी। मैं कराह उठा, “हां बेबी… अच्छा लग रहा है…”

    फिर मैंने धीरे से कहा, “फोरम… मुंह में ले ले बेबी।”

    फोरम ने तुरंत सिर हिला दिया। “नहीं राज… प्लीज… मैं नहीं कर पाऊंगी… अभी नहीं। सिर्फ किस कर सकती हूँ।”

    मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “ठीक है मेरी जान। जो तू चाहे।”

    फिर फोरम ने झुककर मेरे लंड के सिरे पर सिर्फ हल्के-हल्के किस किए। उसके नरम, गर्म होंठ मेरे लंड के टिप पर लग रहे थे। वो बार-बार किस कर रही थी लेकिन मुंह में नहीं ले रही थी। मैं उसके बालों को सहलाता रहा और उसे प्यार से देखता रहा।

    अब तक हम दोनों बहुत गर्म हो चुके थे। फोरम की चूत पूरी तरह भीगी हुई थी और मेरा लंड लोहे की तरह सख्त था। मैंने उसे फिर से चूमना शुरू किया…

    अब तक हम दोनों पूरी तरह गर्म हो चुके थे। सूट की एसी ठंडी हवा में भी हमारे शरीर गर्मी से तप रहे थे। फोरम की सांसें तेज थीं, उसके गाल लाल हो गए थे, आंखें आधी बंद थीं। उसकी चूत पूरी तरह भीग चुकी थी और चमक रही थी। मेरा ९ इंच का लंड भी लोहे की तरह सख्त था, नसें उभरी हुईं, सिरा चमक रहा था।

    मैं फोरम के ऊपर झुका हुआ था। उसके नंगे शरीर को अपनी छाती से दबाते हुए मैंने उसके कान में फुसफुसाया, “मेरी जान… अब मैं तुझे पूरी तरह अपनी बना लूंगा। लेकिन पहली बार है, बहुत धीरे करूंगा।”

    फोरम ने शरमाते हुए सिर हिलाया। उसकी आवाज कांप रही थी, “राज… डर लग रहा है… लेकिन मैं तुम्हारी हूँ…”

    मैंने उसे प्यार से चूमते हुए कहा, “कंडोम लाओ बेबी। बैग में है।”

    फोरम ने उठकर बेड के पास रखे मेरे बैग से कंडोम और लुब्रिकेंट की बोतल निकाली। उसके नंगे शरीर पर लाइट पड़ रही थी, जिससे उसके स्तन हल्के-हल्के हिल रहे थे। वो वापस आई और मेरे सामने बैठ गई। उसने कंडोम का पैकेट फाड़ा और कांपते हाथों से मेरे लंड पर कंडोम चढ़ाने की कोशिश की। पहले दो बार हाथ फिसल गए, फिर उसने धीरे-धीरे कंडोम पूरा चढ़ा दिया। उसके बाद उसने लुब्रिकेंट की बोतल खोली और मेरे लंड पर अच्छे से लगाया। ठंडा, चिकना लुब्रिकेंट लंड पर फैल गया।

    “अब लेट जा बेबी,” मैंने कहा।

    फोरम ने लेट जाने की कोशिश की लेकिन मैंने उसे मिशनरी पोजीशन में सेट किया। उसके दोनों पैरों को फैलाकर मेरी कमर के दोनों तरफ रख दिया। मैं उसके बीच में आ गया। मेरा लंड उसकी भीगी चूत के मुंह पर टिका हुआ था। फोरम की सांसें बहुत तेज हो गई थीं। उसकी आंखें मेरी आंखों में थीं।

    मैंने धीरे से कहा, “आराम से बेबी… मैं बहुत धीरे करूंगा।”

    फिर मैंने लंड की नोक को उसके चूत के छेद पर रखा और बहुत हल्का सा धक्का दिया। सिर्फ १ इंच अंदर गया।

    “आआआह… राज… दर्द हो रहा है… निकालो… चीख…!”
    फोरम जोर से चिल्ला उठी। उसका पूरा शरीर तन गया। उसके नाखून मेरी पीठ में गड़ गए। आंखों में आंसू आ गए।

    मैं तुरंत रुक गया। उसके होंठों को चूमने लगा, गर्दन को चूसने लगा और बोला, “शांत हो जा मेरी जान… बस थोड़ा सा… धीरे-धीरे ठीक हो जाएगा।”

    १-२ मिनट रुकने के बाद मैंने फिर हल्का धक्का दिया। अब २ इंच अंदर चला गया।

    “आह… राज… बहुत दर्द… रो… रो रही हूँ… प्लीज रुको…!”
    फोरम रोने लगी। उसके आंसू गालों पर बह रहे थे। वो बार-बार सिर हिला रही थी और मेरी पीठ पर नाखून गाड़ रही थी। उसकी चूत बहुत तंग थी, जैसे मेरे मोटे लंड को निचोड़ रही हो।

    मैं फिर रुका। उसके स्तनों को हल्का दबाते हुए, चूचियों को चूसते हुए उसे शांत करने की कोशिश की। “मेरी रानी… बस थोड़ा और… तू बहुत बहादुर है। मैं तुझे प्यार करता हूँ।”

    फिर धीरे-धीरे मैंने तीसरा धक्का दिया। अब ३ इंच अंदर हो गए।
    अचानक फोरम की चूत से हल्का खून निकलने लगा। गर्म खून कंडोम के बाहर थोड़ा सा बहने लगा।

    “आआआह… राज… फट रही हूँ… बहुत दर्द… चीख… रो…!”
    फोरम जोर-जोर से चिल्ला रही थी और रो रही थी। उसका शरीर बार-बार कांप रहा था। वो अपने पैरों को कसकर मेरी कमर से लिपटाए हुए थी लेकिन दर्द से उसके पैर भी कांप रहे थे।

    मैं पूरी तरह रुक गया। ५-७ मिनट तक मैंने सिर्फ उसके होंठ चूमे, आंसू पोछे, बाल सहलाए और प्यार भरी बातें कीं। “फोरम… मेरी जान… तू मेरी हो गई। बस थोड़ा और सह ले। फिर मजा आएगा।”

    धीरे-धीरे मैंने आगे बढ़ना शुरू किया। ४ इंच… ५ इंच… हर इंच पर फोरम चिल्लाती, रोती, “राज… बस… निकालो… आह… दर्द… बहुत दर्द…”
    उसकी चूत से और खून निकल रहा था। लेकिन मैं बहुत धीरे-धीरे, रुक-रुककर पूरा लंड अंदर करने की कोशिश कर रहा था।

    ४० मिनट तक यह सिलसिला चला। हर २-३ मिनट में एक छोटा धक्का, फिर रुकना, चूमना, शांत करना। फोरम लगातार चिल्लाती और रोती रही। कभी-कभी वो मेरी पीठ पर नाखून गाड़ देती, कभी मेरे बाल पकड़ लेती। उसकी आवाज बार-बार टूट जाती, “राज… मैं मर जाऊंगी… आह… बहुत बड़ा है…”

    आखिरकार ४० मिनट बाद पूरा ९ इंच उसकी तंग चूत में घुस गया। मेरा लंड की जड़ तक अंदर था। फोरम की चूत पूरी तरह फैल चुकी थी। उसका पेट हल्का सा उभरा हुआ दिख रहा था। वो अब चिल्ला तो रही थी लेकिन आवाज कमजोर हो गई थी। आंसू लगातार बह रहे थे।

    “पूरा… अंदर… आ गया… मेरी जान,” मैंने उसके कान में फुसफुसाया।

    फोरम सिर्फ हांफ रही थी और रो रही थी। “राज… बहुत… दर्द… हो रहा है…”

    मैंने फिर से रुककर उसे चूमना शुरू किया। उसके स्तनों को सहलाया, चूचियों को चूसा। ५ मिनट बाद जब उसका दर्द थोड़ा कम हुआ तो मैंने बहुत धीरे-धीरे हल्के-हल्के धक्के देना शुरू किए।

  • सुहागरात की चीखें 3

    रिया मायके से चार दिन बाद वापस आई। उसका चेहरा थोड़ा सख्त था, लेकिन आँखों में अब पहले जितना डर नहीं था। अर्जुन एयरपोर्ट पर उसे लेने गया था। घर आते समय कार में दोनों के बीच सन्नाटा था। 

    घर पहुँचकर रिया ने सीधे कहा, 
    “अर्जुन जी… मैंने आपको पहले ही बता दिया था। अगर आपने फिर से जबरदस्ती की, खासकर गांड में, तो मैं चिल्ला दूंगी।” 

    अर्जुन ने सिर हिलाया और नरम स्वर में बोला, 
    “मैं समझ गया हूँ रिया। अब मैं जबरदस्ती नहीं करूंगा। हम दस दिन बाद बाली हनीमून पर जा रहे हैं। तब तक मैं धीरे-धीरे ही करूंगा।” 

    रिया ने बस सिर हिला दिया। 

    दस दिन की नरम सुहागरात

    अगले दस दिन अर्जुन ने सच में अपनी जिद पर काबू रखा। वह रिया को जबरदस्ती नहीं छू रहा था। 

    पहली रात (वापसी की रात)
    अर्जुन ने रिया को बहुत धीरे से चूमा। उसके गाल, गर्दन, होंठ, फिर स्तनों को चूसा। रिया अभी भी थोड़ी紧张 थी। जब अर्जुन ने लंड पर कंडोम चढ़ाकर रिया की चूत पर रखा तो रिया ने कांपते हुए कहा, 
    “धीरे… बहुत धीरे… अभी भी दर्द है…” 

    अर्जुन ने सिर्फ 3 इंच घुसाया। धीरे-धीरे हिलाया। रिया आँखें बंद करके सिसक रही थी, 
    “आह्ह… धीरे… आह्ह… बहुत मोटा है… जलन हो रही है… बस इतना ही…” 

    तीसरी रात
    अर्जुन ने 4 इंच तक घुसाया। रिया अब थोड़ी शांत थी, लेकिन फिर भी नखरे कर रही थी, 
    “आह्ह… और मत घुसाइए… बस… आह्ह… धीरे हिलाइए… मैं सह नहीं पाती तेज…” 

    सातवीं रात
    अर्जुन ने 5 इंच तक घुसाया। इस बार रिया ने खुद थोड़ा कमर हिलाया। लेकिन गांड की बात छेड़ते ही रिया सख्त हो गई, 
    “गांड मत छूना भी… वरना मैं फिर धमकी दूंगी।” 

    अर्जुन ने मजबूरन चुप रहकर चुत में ही 5 इंच तक धीरे-धीरे चोदा। 

    दसवें दिन – शॉपिंग

    हनीमून से एक दिन पहले अर्जुन रिया को शॉपिंग ले गया। 

    पहले कंडोम शॉप गए। अर्जुन ने 200 पीस एक्स्ट्रा लार्ज, अल्ट्रा थिन, रिब्ड और फ्लेवर्ड कंडोम खरीदे। रिया शरमा रही थी। 

    फिर बिकिनी शॉप गए। रिया ने कई बिकिनी ट्राई कीं — लाल, ब्लैक, व्हाइट। अर्जुन ने तीन बहुत sexy बिकिनी खरीदीं, जिनमें से दो तो सिर्फ धागे वाली थीं। रिया ने शरमाते हुए कहा, 
    “ये तो बहुत छोटी हैं… बाली में पहनूंगी तो सब देख लेंगे…” 

    अर्जुन मुस्कुराया, “हनीमून है… पहनना।” 

    बाली पहुंचना

    दस दिन पूरे होने के बाद दोनों प्राइवेट जेट से बाली के लिए रवाना हुए। 

    जब वे बाली के लग्जरी विला में पहुंचे, तो शाम हो चुकी थी। सामने नीला समुद्र, प्राइवेट पूल, और चारों तरफ palm trees। विला बहुत खूबसूरत था। 

    रिया ने बालकनी में खड़े होकर समुद्र देखा। अर्जुन उसके पीछे आकर खड़ा हो गया।

    अर्जुन रिया के ठीक पीछे आकर खड़ा हो गया। बालकनी में समुद्र की लहरों की आवाज आ रही थी। हल्की ठंडी हवा चल रही थी। रिया दोनों हाथ बालकनी की रेलिंग पर रखे खड़ी थी। अर्जुन ने धीरे से उसके कमर पर हाथ रखा और उसे अपनी तरफ खींच लिया। 

    रिया का शरीर थोड़ा कांप गया। 

    अर्जुन ने उसके कान में फुसफुसाते हुए कहा, 
    “रिया… हम यहाँ बाली में 15 दिन के लिए हैं। यहाँ कोई घर नहीं, कोई रिश्तेदार नहीं, कोई पड़ोसी नहीं। तू जितना चाहे चिल्ला ले… कोई नहीं सुनने वाला। तू भाग भी नहीं सकती। यहाँ से कहीं भागने का रास्ता भी नहीं है। 

    तो अब फैसला तेरा है — या तो इन 15 दिनों को मजे से बिताएगी… या फिर रो-रोकर, दुखी होकर बिताएगी। लेकिन इन 15 दिनों में तुझे मेरी हर इच्छा पूरी करनी पड़ेगी। समझ गई?” 

    रिया ने कुछ पल चुप रहकर गहरी सांस ली। फिर धीरे से बोली, 
    “ठीक है… लेकिन मेरी शर्त पर। गांड कभी नहीं। उसकी बात मत छेड़ना भी। बाकी… मैं कोशिश करूंगी।” 

    अर्जुन ने मुस्कुराते हुए उसके गाल चूमे, 
    “बहुत अच्छा। आज पहला दिन है… हम धीरे-धीरे शुरू करेंगे।” 

    पहली रात – बाली का पहला राउंड

    अर्जुन ने रिया को अंदर बेडरूम में ले जाकर धीरे-धीरे उसके कपड़े उतारे। रिया ने भी उसका शर्ट और शॉर्ट्स उतारा। दोनों पूरी तरह नंगे हो गए। 

    अर्जुन ने रिया को बेड पर लिटाया। बहुत देर तक उसे किस किया — होंठ, गर्दन, स्तन, पेट, जांघें। रिया की सांसें तेज हो रही थीं। 

    जब अर्जुन ने लंड पर कंडोम चढ़ाया और लुब्रिकेंट लगाया, रिया ने कांपते हुए कहा, 
    “आज धीरे-धीरे… प्लीज… मैं पूरी कोशिश करूंगी।” 

    अर्जुन ने लंड का सिर रिया की चूत पर रखा और बहुत धीरे से दबाया। 

    1 इंच…
    रिया ने आँखें बंद कर लीं, “आह्ह… धीरे… अभी भी थोड़ा दर्द है…” 

    3 इंच…
    “आह्ह… मोटा है… जलन हो रही है… रुकिए एक सेकंड…” 

    5 इंच…
    रिया ने दांत भींच लिए, “आह्ह… आधा हो गया… गहरा लग रहा है… धीरे हिलाइए…” 

    अर्जुन ने धीरे-धीरे पूरा 10 इंच अंदर कर दिया। रिया का पेट हल्का-हल्का उभर रहा था। वह सिसक रही थी, लेकिन चीख नहीं रही थी। 

    “आह्ह… पूरा घुस गया… बहुत भरा हुआ लग रहा है… धीरे… आह्ह… हाँ… ऐसे ही…” 

    पहला राउंड 25 मिनट चला। 

    दूसरा राउंड में रिया ने खुद थोड़ी कमर हिलाई। 
    “आह्ह… अब थोड़ा तेज… लेकिन बहुत तेज मत…” 

    तीसरा राउंड में रिया ने पहली बार पूरा 10 इंच सह लिया। वह थोड़ी-थोड़ी चीख रही थी, लेकिन दर्द के साथ मजे की आवाज भी आने लगी थी। 

    “आह्ह… पूरा… आ गया… आह्ह… अर्जुन जी… धीरे… हाँ… ऐसे ही…” 

    अगले 4 दिन

    अगले चार दिन अर्जुन और रिया के बीच काफी ज्यादा सेक्स हुआ — कुल 32 बार। 

    – सुबह पूल के किनारे 
    – दोपहर बेडरूम में 
    – शाम बालकनी में 
    – रात को लाइट ऑफ करके 

    रिया अब धीरे-धीरे सहने लगी थी। वह नखरे तो करती थी, लेकिन चीखना-रोना कम हो गया था। हर बार 3-4 राउंड होते। कभी-कभी रिया खुद ऊपर चढ़कर बैठ जाती। 

    लेकिन हर बार जब अर्जुन गांड की बात छेड़ता, रिया तुरंत सख्त हो जाती, 
    “गांड नहीं। भूल भी जाओ उसकी। मैंने कहा था ना।” 

    अर्जुन भी 4 दिन तक गांड का नाम नहीं लेता था। वह सिर्फ रिया की चुत पर फोकस रखता था। 

    रिया धीरे-धीरे आदत डाल रही थी। चौथे दिन शाम को उसने खुद अर्जुन से कहा, 
    “आज 4 राउंड… लेकिन धीरे-धीरे…” 

    अर्जुन मुस्कुराया।

    चार दिन बीत चुके थे। रिया अब काफी हद तक खुल चुकी थी। वह खुद कंडोम पहनाने लगी थी और सेक्स में सक्रिय भाग ले रही थी। लेकिन गांड की बात आते ही वह अभी भी सख्त हो जाती थी।

    पांचवां दिन – शॉपिंग

    अर्जुन रिया को शॉपिंग ले गया। रिया ने बहुत महंगे 300 कंडोम, लुब्रिकेंट और 7 लग्जरी बिकिनी खरीदीं। जब वे वापस विला पहुंचे तो रिया ने अर्जुन से कहा, 
    “जो तुम्हें चाहिए वो खरीद लो।”

    अर्जुन ने उसकी कमर पकड़कर कान में फुसफुसाया, 
    “मुझे तुम्हारी गांड चाहिए।”

    रिया एक पल चुप रही, फिर बोली, 
    “ठीक है… लेकिन एक शर्त पर। मुझे देखना है कि कोई ऐसी लड़की जिसकी कभी गांड नहीं मारी गई हो, उसे कैसे मारा जाता है। मैं सामने बैठकर देखूंगी। अगर मुझे लगा कि मैं सह सकती हूँ, तो मैं मान जाऊंगी।”

    अर्जुन की आँखें चमक उठीं।

    उसी शाम – लिया का आगमन

    अर्जुन ने एक लोकल कॉल गर्ल बुलाई — लिया, 24 साल की, बहुत खूबसूरत, गोरी, slim body, छोटे-छोटे स्तन और टाइट गांड। लिया पहली बार गांड मरवा रही थी।

    लिया विला में आई। रिया बेड के पास एक आरामदायक कुर्सी पर बैठ गई। अर्जुन ने लिया को नंगा किया। लिया घुटनों के बल बेड पर थी।

    अर्जुन ने लंड पर कंडोम चढ़ाया और खूब सारा लुब्रिकेंट लगाया। फिर लिया की गांड के छेद पर लंड का मोटा सिर रख दिया।

    लिया का सेक्स सीन (विस्तृत)

    अर्जुन ने धीरे से दबाया।

    1 इंच अंदर गया। 
    लिया तुरंत कांप उठी, “आआह्ह… नहीं… बहुत मोटा… जलन हो रही है… आह्ह… निकालिए… दर्द…” 

    अर्जुन रुका नहीं। उसने और दबाया।

    3 इंच अंदर। 
    लिया जोर से चीख पड़ी, “आआआह्ह्ह… 3 इंच… मेरी गांड फट रही है… बहुत दर्द… आह्ह… रुक जाइए… मैं पहली बार… आंसू आ रहे हैं…” 

    लिया के आंसू बहने लगे। उसकी गांड का छेद बुरी तरह फैल गया था। अर्जुन ने लुब्रिकेंट और लगाया और धीरे-धीरे आगे बढ़ा।

    4.5 इंच… 5.5 इंच…
    लिया अब सिसक-सिसककर चीख रही थी, “आह्ह… आधा भी नहीं… पेट फाड़ रहा है… बहुत गहरा… आआह्ह… दर्द… मैं सह नहीं पा रही… आह्ह… और मत घुसाइए…” 

    अर्जुन ने पूरा 10 इंच अंदर करने की कोशिश की, लेकिन लिया की गांड इतनी टाइट थी कि सिर्फ 6.5 इंच तक ही गया। फिर उसने धीरे-धीरे हिलाना शुरू किया। हर धक्के पर लिया की चीखें कमरे में गूंज रही थीं।

    “आह्ह… नहीं… जोर से मत… आआह्ह… मेरी गांड चीर दी… आह्ह… दर्द… लेकिन… आह्ह… थोड़ा मज़ा भी आ रहा है… नहीं… मत रुकना… आआह्ह…” 

    अर्जुन ने लिया को 5 राउंड लगातार गांड मारा। हर राउंड में वह 6-7 इंच तक घुसा रहा। लिया रोती रही, चीखती रही, लेकिन आखिरी राउंड में वह खुद कमर हिलाने लगी।

    फिर अर्जुन ने लिया की चूत में 3 राउंड मारे। लिया पूरी तरह थककर बेड पर गिर पड़ी। उसकी गांड और चूत दोनों सूजी हुई, लाल और खून-रस से सनी हुई थीं।

    रिया का रिएक्शन

    रिया पूरे समय चुपचाप बैठी देखती रही। उसकी सांसें तेज हो रही थीं। उसकी चूत गीली हो चुकी थी। लिया की चीखें, दर्द और आखिर में मजे की आवाजें सुनकर रिया का चेहरा लाल हो गया था।

    अर्जुन ने लिया को पैसे देकर विदा किया। फिर रिया की तरफ मुड़ा।

    रिया ने धीरे से कहा, 
    “मैं… मैंने देख लिया… अब… अब मैं सोचूंगी…”

    रिया लिया को देखकर चुपचाप बैठी रही। उसने कुछ नहीं कहा। जब लिया चली गई तो रिया ने नखरे दिखाते हुए कहा, 
    “मैंने देख लिया… लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि मैं मान गई हूँ।” 

    अर्जुन ने मुस्कुराते हुए रिया को बेड पर खींच लिया। उस रात उसने सिर्फ रिया की चुत में ही सेक्स किया। तीन राउंड। रिया नखरे करती रही — “आह्ह… धीरे… बहुत तेज मत… आह्ह… बस… आज काफी…” लेकिन गांड की बात छेड़ते ही चुप हो जाती। 

    अर्जुन ने भी कुछ नहीं कहा। तीन राउंड के बाद वह रिया को चूमकर सो गया।

    अगले दिन – सेक्स टॉय शॉपिंग

    सुबह अर्जुन रिया को लेकर एक लग्जरी एडल्ट शॉप गया। रिया शरमा रही थी। अर्जुन ने बहुत महंगे सेक्स टॉय खरीदे — 
    – एक 9 इंच लंबा, 3 इंच मोटा रियलिस्टिक डिल्डो 
    – वाइब्रेटिंग बट प्लग 
    – एनाल बीड्स 
    – और बहुत सारा लुब्रिकेंट 

    रिया ने कुछ नहीं कहा, बस शरमाकर सिर झुका लिया।

    उसी रात

    अर्जुन ने पहले रिया को नॉर्मल तरीके से चोदा। दो राउंड पूरे 10 इंच तक। रिया अब काफी सहने लगी थी। 

    “आह्ह… हाँ… पूरा… आह्ह… अच्छा लग रहा है…” 

    तीसरे राउंड के बाद अर्जुन ने रिया को घुटनों के बल मोड़ा। रिया समझ गई। 

    “नहीं… अर्जुन जी… गांड में मत… प्लीज… मैं नहीं चाहती…” रिया ने नखरे दिखाए। 

    अर्जुन ने लुब्रिकेंट लगाया और पहले अपनी उंगली डाली। फिर दूसरी। रिया सिसक रही थी, “आह्ह… नहीं… जलन हो रही है… मत करो…” 

    फिर अर्जुन ने डिल्डो लिया और धीरे-धीरे रिया की गांड में डालना शुरू किया। 

    1 इंच…
    रिया कांप उठी, “आह्ह… बहुत मोटा… निकालिए…” 

    3 इंच…
    “आआह्ह… दर्द… फट रही है… प्लीज… मत…” 

    अर्जुन रुका नहीं। धीरे-धीरे पूरा 9 इंच डाल दिया। रिया रो पड़ी, लेकिन अर्जुन ने धीरे-धीरे हिलाना शुरू कर दिया। 

    पहला राउंड डिल्डो से पूरा हो गया। 

    दूसरे राउंड में अर्जुन ने अपना लंड रिया की गांड में डाला। रिया मना कर रही थी, “नहीं… असली मत… आआह्ह… बहुत मोटा… फट जाएगी…” 

    लेकिन अर्जुन ने धीरे-धीरे पूरा 10 इंच डाल दिया। रिया चीख रही थी, लेकिन अर्जुन ने 2 राउंड पूरा गांड मारा। 

    फिर उसने रिया की चुत और मुंह में भी 2-2 राउंड किए। कुल 5-6 राउंड हो गए। रिया थककर बेड पर पड़ी थी, रो रही थी, लेकिन चुप थी। 

    अगले दिन – रिया का गुस्सा

    सुबह रिया बहुत गुस्से में थी। वह अर्जुन से बात नहीं कर रही थी। नाश्ते के समय भी चुप रही। 

    अर्जुन ने पूछा, “क्या हुआ?” 

    रिया ने गुस्से से कहा, 
    “तुमने कल मेरी गांड जबरदस्ती मारी… मैंने मना किया था… फिर भी किया… मैं तुमसे नाराज हूँ।” 

    अर्जुन ने उसे मनाने की कोशिश की, लेकिन रिया पूरे दिन नाराज रही। 

    शाम को अर्जुन ने उसे बहुत प्यार से चूमकर मनाया। रिया थोड़ी नरम पड़ी। 

    दस दिन बाद – घर वापसी

    15 दिन पूरे होने के बाद दोनों घर वापस आ गए। रिया अब थोड़ी बदल चुकी थी, लेकिन गांड वाली बात पर अभी भी सख्त थी। 

    अर्जुन जानता था कि अब असली खेल घर आकर शुरू होगा।

  • सुहागरात की चीखें 2

    रिया अभी भी तकिए में मुंह छुपाए जोर-जोर से रो रही थी। उसकी चूत बुरी तरह सूजी हुई थी, लाल हो चुकी थी। अर्जुन बेड पर बैठा था, उसका 10 इंच का मोटा लंड अभी भी कंडोम लगाए खड़ा था, नसें फड़ी हुईं। 

    अर्जुन का गुस्सा अब चरम पर था। उसने अचानक रिया के बाल पकड़ लिए और उसे जबरदस्ती घुटनों के बल मोड़ दिया। रिया चीख पड़ी। 

    “नहीं! छोड़ो मुझे! मैं गांड नहीं दूंगी! अर्जुन जी… प्लीज… जबरदस्ती मत करो… मैं चिल्ला दूंगी… पूरा घर जाग जाएगा…” रिया ने हाथ-पैर मारते हुए विरोध किया। 

    अर्जुन ने रिया की कमर को मजबूती से पकड़ लिया और बोला, 
    “आज मेरी सुहागरात है रिया। तू मेरी बीवी है। गांड भी मेरी है। परंपरा पूरी होगी।” 

    रिया ने जोर से सिर हिलाया, आंसू बहाते हुए चीखी, 
    “मैं परंपरा नहीं मानती! मेरी गांड टाइट है… आपका लंड 4 इंच मोटा है… वो घुसेगा तो मैं फट जाऊंगी… खून निकलेगा… मैं मर जाऊंगी… मम्मी… बचाओ मुझे… प्लीज…” 

    सुधा माँ ने तुरंत आगे बढ़कर अर्जुन का हाथ पकड़ लिया। 
    “दामाद जी… प्लीज… बेटी की हालत देखिए… उसकी चुत अभी भी सूजी हुई है… गांड में बिल्कुल नहीं सह पाएगी… आज छोड़ दीजिए… मैं… मैं तैयार हूँ… मेरी गांड ले लीजिए… जितना मन हो…” 

    अर्जुन ने सुधा माँ को घूरा और बोला, 
    “सास जी, आप बार-बार बीच में क्यों पड़ रही हैं? ये मेरी पत्नी है। मैं आज उसकी गांड लूंगा।” 

    रिया रोते हुए बोली, 
    “मम्मी… आप मत बोलो… ये आदमी मुझे मार डालेगा… मैं गांड नहीं दूंगी… कभी नहीं… अर्जुन जी… मेरी माँ के साथ कर लो… उनकी गांड ले लो… लेकिन मेरी मत छुओ…” 

    अर्जुन ने रिया की कमर को और कसकर पकड़ा। उसने लंड पर नया कंडोम चढ़ाया, खूब सारा लुब्रिकेंट लगाया। फिर रिया की गांड के छेद पर लंड का मोटा सिर रख दिया। 

    रिया जोर से चीख पड़ी, 
    “नहीं! छोड़ो! आआह्ह… मत दबाओ… बहुत डर लग रहा है… मम्मी… प्लीज… रोकिए…” 

    अर्जुन ने धीरे से दबाया। 

    सिर्फ 1 इंच अंदर गया। 

    रिया का पूरा शरीर कांप उठा। 
    “आआह्ह… दर्द… गांड फट रही है… निकालिए… प्लीज… सिर्फ सिर ही बहुत मोटा है… आह्ह… जलन हो रही है… मैं सह नहीं पा रही…” रिया रो पड़ी, हाथ-पैर मारने लगी। 

    अर्जुन ने और दबाया। अब 3 इंच अंदर चला गया। 

    रिया जोर-जोर से चीखने लगी, 
    “आआआह्ह्ह… नहीं… 3 इंच… बहुत दर्द… मेरी गांड चीर दी… अर्जुन जी… प्लीज रुक जाइए… मैं मर रही हूँ… आह्ह… और मत घुसाइए… बहुत मोटा… फट जाएगी…” 

    रिया के आंसू बह रहे थे। वह बार-बार कमर हिला रही थी, नखरे कर रही थी, “मम्मी… बचाओ… मैं रो रही हूँ… बहुत जलन… प्लीज…” 

    सुधा माँ ने अर्जुन के हाथ पकड़कर रोते हुए कहा, 
    “दामाद जी… बस करिए… बेटी की हालत देखिए… वो सह नहीं पा रही… मेरी गांड ले लीजिए… प्लीज… बेटी को छोड़ दीजिए…” 

    अर्जुन ने सुधा माँ को धक्का देकर अलग किया और बोला, 
    “आप चुप रहिए सास जी। आज मैं रिया की गांड लूंगा।” 

    उसने और दबाया। अब 4.5 इंच अंदर चला गया। 

    रिया सिसक-सिसककर चीख रही थी, 
    “आह्ह… आधा भी नहीं… पेट फाड़ रहा है… बहुत गहरा… आआह्ह… निकालिए… मैं सह नहीं पा रही… मम्मी… रो रही हूँ… बहुत दर्द… प्लीज… बस कर दीजिए…” 

    रिया की गांड का छेद बुरी तरह फैल गया था। हल्का खून भी रिसने लगा था। वह लगातार रो रही थी और नखरे कर रही थी। 

    “मैंने कहा ना… मेरी गांड मत… मैं मना करती हूँ… आप जबरदस्ती कर रहे हो… मैं आपको कभी माफ नहीं करूंगी…” 

    अर्जुन ने रिया की कमर को और मजबूती से पकड़ लिया और धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगा। 

    5 इंच… 5.5 इंच…

    रिया अब लगभग चीखते-चीखते बेहोश होने लगी थी। 
    “आआह्ह… बस… काफी… आधा भी नहीं… मेरी गांड फट गई… आह्ह… दर्द… बहुत जलन… प्लीज… निकालिए…” 

    सुधा माँ रोते हुए अर्जुन के पैरों में गिर पड़ीं, 
    “दामाद जी… प्लीज… मेरी बेटी को मत तोड़िए… मैं… मैं अपनी गांड देती हूँ… आप मुझे जितना चाहे चोदिए… लेकिन बेटी को छोड़ दीजिए…” 

    अर्जुन ने रिया की गांड में लंड को आधा ही रखकर रुक गया। रिया सिसक रही थी। उसकी हालत बेहद खराब थी। 

    अर्जुन ने गहरी सांस ली और बोला, 
    “ठीक है… आज रिया की गांड आधी ही लेता हूँ… लेकिन कल पूरी लूंगा।” 

    रिया ने कमजोर आवाज में रोते हुए कहा, 
    “कल भी नहीं… कभी नहीं… मैं गांड नहीं दूंगी…” 

    सुधा माँ ने बेटी को गले लगा लिया। अर्जुन लंड आधा ही गांड में रखे हुए बैठा रहा। कमरे में सिर्फ रिया की सिसकियाँ और सुधा माँ की दबी हुई रोने की आवाज गूंज रही थी।

    अर्जुन ने रिया की गांड में अपना लंड आधा ही रखा हुआ था। रिया सिसक-सिसककर रो रही थी, उसका पूरा शरीर कांप रहा था। उसकी गांड का छेद बुरी तरह फैला हुआ था, हल्का खून भी रिस रहा था। 

    “आह्ह… बस… काफी… निकालिए… मेरी गांड फट गई… आआह्ह… दर्द… बहुत जलन… प्लीज… अर्जुन जी…” रिया ने कमजोर आवाज में रोते हुए कहा। 

    अर्जुन ने एक गहरी सांस ली। उसने धीरे से लंड बाहर निकाला। रिया ने राहत की सांस ली, लेकिन उसकी आँखों में अभी भी डर था। 

    अर्जुन ने सुधा माँ की तरफ देखा। सुधा माँ बेटी के सिरहाने बैठी थीं, उनके हाथ कांप रहे थे। अर्जुन ने ठंडे स्वर में कहा, 
    “ठीक है… आज रिया की गांड आधी ही लेता हूँ। लेकिन अब तुम्हारी बारी है सास जी। मेरी सुहागरात पूरी होनी चाहिए।” 

    सुधा माँ ने सिर झुका लिया। उनकी आवाज कांप रही थी, 
    “दामाद जी… प्लीज… बेटी की हालत देखिए… उसकी चूत और गांड दोनों सूज गई हैं… आज छोड़ दीजिए… मैं… मैं तैयार हूँ… मेरी चूत और गांड… जितना मन हो ले लीजिए… लेकिन बेटी को मत छुईए…” 

    रिया ने माँ को पकड़कर रोते हुए कहा, 
    “मम्मी… आप मत… मैं नहीं सह पाऊंगी अगर आपकी हालत खराब हुई तो… प्लीज… अर्जुन जी… मेरी माँ को मत छुओ…” 

    अर्जुन ने सुधा माँ का हाथ पकड़कर उन्हें बेड पर घुटनों के बल मोड़ दिया। सुधा माँ की साड़ी, पेटीकोट और पैंटी पहले ही खुली हुई थी। उनकी मोटी, गोरी गांड और सूजी हुई चूत पूरी तरह नंगी थी। 

    अर्जुन ने नया कंडोम खोला, लंड पर चढ़ाया, खूब सारा लुब्रिकेंट लगाया। फिर सुधा माँ की चूत पर लंड का सिर रख दिया। 

    “आह्ह… दामाद जी… धीरे… मेरी उम्र 46 है… बहुत दिन बाद… आआह्ह… सिर्फ सिर ही… बहुत मोटा है… जलन हो रही है…” सुधा माँ सिसक पड़ीं। 

    अर्जुन ने धीरे से दबाया — 1 इंच अंदर गया। 

    सुधा माँ कांप उठीं, “आह्ह… दर्द… बहुत जलन… धीरे… आह्ह… 3 इंच… आआह्ह… बहुत मोटा… मेरी चूत फट रही है… प्लीज… रुक जाइए…” 

    अर्जुन ने और दबाया — 4 इंच… 5 इंच…

    सुधा माँ जोर से सिसकने लगीं, “आह्ह… आधा भी नहीं… पेट फाड़ रहा है… दामाद जी… बहुत गहरा… आआह्ह… और मत घुसाइए… मैं तेरी सास हूँ… आह्ह…” 

    पहला राउंड चूत में सिर्फ 5.5 इंच तक ही गया। अर्जुन ने धीरे-धीरे हिलाना शुरू किया। हर छोटे धक्के पर सुधा माँ सिसक रही थीं। रिया बगल में लेटी रो रही थी, “मम्मी… आपकी हालत खराब हो रही है… प्लीज… रुक जाइए…” 

    पहला राउंड 40 मिनट चला। सुधा माँ की चूत लाल और सूजी हो गई। 

    दूसरा राउंड शुरू हुआ। अर्जुन ने सुधा माँ को मिशनरी पोजीशन में लिटाया, उनके होंठ चूसते हुए लंड फिर से चूत में डाला। 

    “आह्ह… नहीं… फिर से… आआह्ह… 1 इंच… दर्द… 3 इंच… आह्ह… बहुत मोटा… मैं सह नहीं पा रही… दामाद जी… प्लीज धीरे…” सुधा माँ रो रही थीं। 

    अर्जुन ने 5.5 इंच तक ही घुसाया। सुधा माँ बार-बार सिसक रही थीं। 

    तीसरा राउंड चूत में भी आधा ही। 

    फिर अर्जुन ने सुधा माँ को घुटनों के बल मोड़ दिया। अब गांड की बारी। 

    “आह्ह… गांड में मत… आआह्ह… 1 इंच… फट रही है… दामाद जी… बहुत मोटा… आह्ह… 3 इंच… जलन… मैं रो रही हूँ… प्लीज…” 

    अर्जुन ने सुधा माँ की गांड में भी 5 इंच तक ही घुसाया। तीन-तीन राउंड — चूत और गांड — पूरे होने में रात के 3:30 बज गए। सुधा माँ की हालत बेहद खराब थी। उनकी चूत और गांड दोनों सूजी हुई, लाल, खून रिस रहा था। वह थककर बेड पर गिर पड़ी थीं। 

    अर्जुन ने अब रिया की तरफ देखा। रिया अभी भी रो रही थी। 

    “अब फिर तेरी गांड की बारी है रिया।” 

    रिया ने जोर से सिर हिलाया, 
    “नहीं! मैंने कहा ना… कभी नहीं! मेरी गांड मत छुओ… मम्मी की हालत देखिए… आपने उन्हें फाड़ दिया… मुझे भी मत फाड़िए… प्लीज… मैं मना करती हूँ…” 

    अर्जुन ने रिया को फिर घुटनों के बल मोड़ने की कोशिश की। रिया हाथ-पैर मारने लगी, 
    “छोड़ो मुझे! मैं चिल्ला दूंगी… मैं गांड नहीं दूंगी… मम्मी… बचाओ…” 

    सुधा माँ ने कमजोर आवाज में कहा, 
    “दामाद जी… बेटी को मत… मैं फिर तैयार हूँ… मेरी गांड फिर ले लीजिए… लेकिन बेटी को छोड़ दीजिए…” 

    रिया रोते हुए बोली, 
    “मम्मी… आप चुप रहिए… ये आदमी मुझे मार डालेगा… मैं गांड नहीं दूंगी… कभी नहीं…” 

    अर्जुन ने रिया की कमर पकड़ ली। लंड फिर से रिया की गांड पर रख दिया। 

    “आआह्ह… नहीं… 1 इंच… दर्द… आआह्ह… 3 इंच… फट रही है… अर्जुन जी… प्लीज… मैं रो रही हूँ… मम्मी… देखिए… मैं सह नहीं पा रही…”

    रिया अभी भी बेड पर करवट लेकर लेटी हुई थी। उसकी चूत और गांड दोनों बुरी तरह सूजी हुई थीं। वह हल्के-हल्के सिसक रही थी। अर्जुन बेड के किनारे बैठा था, उसका लंड अभी भी कंडोम में था और आधा खड़ा था। 

    रिया ने आंसू पोछते हुए फिर से सख्त स्वर में कहा, 
    “सुन लो अर्जुन जी… अगर आपने फिर से जबरदस्ती की… चाहे चुत हो या गांड… तो मैं चिल्ला दूंगी। पूरा घर, पूरा मोहल्ला, सारे रिश्तेदार जाग जाएंगे। मैं सबको बता दूंगी कि मेरी सुहागरात में मेरे पति मुझे मार रहे थे। आपकी इज्जत, आपका नाम, सब बर्बाद हो जाएगा।” 

    अर्जुन का चेहरा तन गया। वह समझ गया कि रिया अब गंभीर है। अगर उसने चिल्लाया तो वाकई बड़ी बदनामी हो जाएगी। 

    अर्जुन ने गहरी सांस ली और बोला, 
    “ठीक है रिया… मैं जबरदस्ती नहीं करूंगा। लेकिन तू मेरी बीवी है… सुहागरात है… कम से कम चुत तो दे दे।” 

    रिया ने सिर हिलाया, 
    “धीरे-धीरे… और सिर्फ चुत… गांड की बात मत छेड़ना। वरना मैं अभी चिल्ला दूंगी।” 

    अगले 3-4 दिन की मजबूरी

    अगले तीन दिन अर्जुन को पूरी तरह काबू में रहना पड़ा। रिया मायके जाने वाली थी, इसलिए उसने धमकी दे रखी थी। 

    दूसरी रात
    अर्जुन ने रिया को बहुत धीरे-धीरे चूमा। उसके स्तनों को सहलाया, चूत पर उंगली फेरी। जब लंड डाला तो सिर्फ 3 इंच ही घुसाया। 

    रिया ने आँखें बंद करके कहा, 
    “आह्ह… धीरे… अभी भी दर्द है… और मत घुसाइए… बस इतना ही… आह्ह…” 

    अर्जुन को मजबूरी में रुकना पड़ा। 

    तीसरी रात
    इस बार अर्जुन ने 4 इंच तक घुसाया। रिया फिर भी नखरे कर रही थी, 
    “बहुत मोटा है… जलन हो रही है… प्लीज… और मत… मैं मायके जा रही हूँ… वहाँ भी दर्द रहेगा तो लोग पूछेंगे…” 

    अर्जुन गुस्से में था, लेकिन चुप रहा। 

    चौथी रात
    रिया कल मायके जाने वाली थी। अर्जुन ने आखिरी मौका समझकर रिया को चोदा। इस बार उसने 5 इंच तक घुसाया, लेकिन बहुत धीरे-धीरे। रिया बार-बार मना कर रही थी, 
    “आह्ह… काफी है… और मत… मैं सह नहीं पा रही… गांड की बात मत सोचिए भी…” 

    अर्जुन ने मजबूरन रुक जाना पड़ा। 

    रिया का मायके जाना

    पांचवें दिन सुबह रिया मायके चली गई। जाते समय उसने अर्जुन से साफ-साफ कहा, 
    “4 दिन बाद आऊंगी। तब तक सोच लीजिए। अगर आपने फिर से जबरदस्ती की… खासकर गांड में… तो मैं सबको बता दूंगी।” 

    अर्जुन ने सिर्फ सिर हिला दिया, लेकिन अंदर से उसका गुस्सा और भूख दोनों बढ़ रहे थे। 

    अब घर में सिर्फ अर्जुन अकेला था। वह सोच रहा था — रिया जब वापस आएगी तो वह कैसे अपनी जिद पूरी करेगा।

  • सुहागरात की चीखें

    अध्याय 1: सुहागरात की परंपरा – जब दुल्हन की माँ भी मजबूर हुई

    रात के ठीक 11:40 बज चुके थे। मास्टर बेडरूम में सिर्फ हल्की लाल रोशनी जल रही थी। गुलाब की ताज़ा पंखुड़ियाँ बेड पर बिखरी हुई थीं। हवा में अगरबत्ती और गुलाब की महक घुली हुई थी। 

    रिया (22 साल, पूरी तरह कुँवारी दुल्हन) लाल लहंगे में घूंघट निकाले बेड पर बैठी थी। उसकी सांसें तेज चल रही थीं, हाथ कांप रहे थे। उसकी माँ सुधा (46 साल) बेटी का हाथ थामे बगल में बैठी थीं। अर्जुन (28 साल) कुर्ता-पजामा में खड़ा था, उसकी आँखों में भूख साफ झलक रही थी। 

    अर्जुन ने पहले रिया का घूंघट हटाया। रिया शरमा कर सिर झुका ली। अर्जुन ने रिया के होंठों को अपने होंठों से छुआ, धीरे-धीरे किस करना शुरू किया। उसकी जीभ रिया के मुंह में घुस गई। रिया ने मुंह हटाने की कोशिश की। 

    “उम्म्म… नहीं… अर्जुन जी… शरम आ रही है… मम्मी के सामने… प्लीज… छोड़ दीजिए…” रिया ने नखरा दिखाते हुए कहा। 

    अर्जुन ने रिया की साड़ी की पल्लू धीरे-धीरे खींची। सुधा माँ ने खुद बेटी की ब्लाउज के हुक खोले। रिया की गोरी, नाजुक ब्रा बाहर आई। अर्जुन ने ब्रा का हुक खोला। रिया के छोटे-छोटे, गुलाबी निप्पल वाले स्तन बाहर आ गए। अर्जुन ने एक स्तन को हाथ में लेकर मसलना शुरू किया और निप्पल को चूसने लगा। 

    “आह्ह… नहीं… अर्जुन जी… बहुत शरम आ रही है… मम्मी देख रही हैं… प्लीज… छोड़ दीजिए… आह्ह…” रिया ने कमर हिलाकर नखरा किया। 

    अर्जुन ने रिया की साड़ी और पेटीकोट भी खोल दिया। अब रिया सिर्फ पैंटी में थी। उसकी टाइट, पूरी तरह बाल-रहित, गुलाबी चूत पैंटी के ऊपर से साफ दिख रही थी। अर्जुन ने खुद का कुर्ता और पजामा उतार दिया। 

    उसका 10 इंच लंबा और 4 इंच मोटा लंड बाहर निकला — काला, मोटा, नसें उभरी हुईं, सिर पर मोटा फोड़ा चमक रहा था। रिया ने देखकर सिहर उठी। 

    “नहीं… ये… ये बहुत बड़ा है… मैं नहीं ले पाऊंगी… मम्मी… प्लीज रोकिए… मैं डर रही हूँ…” रिया ने रोते हुए कहा। 

    सुधा माँ ने बेटी को चुप कराया, “बेटी… परंपरा है… सह ले… मैं हूँ ना…” 

    अर्जुन ने रिया को बेड पर लिटा दिया। उसने रिया की पैंटी भी धीरे-धीरे उतार दी। अब रिया पूरी नंगी थी। अर्जुन ने रिया के होंठों को फिर से चूमा, जीभ अंदर डाली। एक हाथ से रिया की चूत पर उंगली फेरनी शुरू की। 

    “आह्ह… नहीं… वहाँ मत छुओ… आह्ह… गीली हो रही हूँ… शरम आ रही है… अर्जुन जी… प्लीज… धीरे…” रिया नखरे दिखा रही थी, कमर हिला रही थी। 

    अर्जुन ने कंडोम का पैकेट खोला। लंड पर कंडोम चढ़ाया। फिर लुब्रिकेंट की बोतल उठाई और खूब सारा लुब्रिकेंट लंड पर और रिया की चूत पर लगाया। 

    अर्जुन ने रिया की टांगें फैला दीं। लंड का मोटा, गर्म सिर रिया की चूत के होंठों पर रख दिया। रिया कांप उठी। 

    “नहीं… अर्जुन जी… प्लीज… अभी मत… मैं तैयार नहीं हूँ… बहुत डर लग रहा है… मम्मी… बचाओ…” रिया ने कमर पीछे खींचने की कोशिश की। 

    अर्जुन ने धीरे-धीरे दबाना शुरू किया। 

    सिर्फ 1 इंच अंदर गया। 

    रिया की आँखें फट गईं। 
    “आआह्ह… दर्द… बहुत जलन हो रही है… निकालिए… प्लीज… सिर्फ सिर ही बहुत मोटा है… आह्ह… मेरी चूत फट रही है…” रिया रो पड़ी। 

    अर्जुन रुका नहीं। उसने थोड़ा और दबाया। अब 3 इंच अंदर चला गया। 

    रिया जोर से चीख पड़ी। 
    “आआआह्ह्ह… नहीं… 3 इंच भी नहीं… बहुत दर्द… मैं रो रही हूँ… अर्जुन जी… प्लीज रुक जाइए… मेरी चूत चीर दी… आह्ह… और मत दबाइए…” 

    रिया के आंसू बहने लगे। वह बार-बार कमर हिला रही थी, नखरे कर रही थी, “मम्मी… प्लीज… रोकिए… मैं सह नहीं पा रही… बहुत मोटा… जलन हो रही है…” 

    अर्जुन ने रिया के होंठों को फिर से चूस लिया और धीरे-धीरे और दबाने लगा। 

    अब 4 इंच… 5 इंच…

    रिया सिसक रही थी। 
    “आह्ह… नहीं… आधा भी नहीं… पेट फाड़ रहा है… बहुत गहरा जा रहा है… प्लीज… बस… मैं कुँवारी हूँ… आआह्ह… और मत घुसाइए…” 

    पहले राउंड में पूरा लंड नहीं घुसा। सिर्फ 5 इंच (आधा) ही अंदर गया। रिया की चूत पूरी तरह फैल गई थी। पेट पर हल्का उभार दिख रहा था। अर्जुन ने धीरे-धीरे हिलाना शुरू किया। हर छोटे-छोटे धक्के पर रिया चीख रही थी। 

    “आह्ह… नहीं… जोर से मत… आह्ह… बहुत दर्द… मैं झड़ रही हूँ… प्लीज… निकालिए…” 

    पहला राउंड पूरा होने में 35 मिनट लगे। रिया की चूत लाल और सूजी हुई थी। वह रो-रोकर थक गई थी। 

    दूसरा राउंड शुरू हुआ। इस बार अर्जुन थोड़ा तेज हुआ, लेकिन फिर भी पूरा लंड नहीं घुसा। सिर्फ 6 इंच तक ही गया। रिया लगातार नखरे कर रही थी, “बस… काफी हो गया… मैं और नहीं… आह्ह… मेरी चूत फट गई… प्लीज रुक जाइए…” 

    दूसरे राउंड के बाद रिया लगभग बेहोश हो गई।

    अर्जुन ने लंड बाहर निकाला। कंडोम में वीर्य भरा हुआ था। उसने तीसरा कंडोम खोला और बोला,
    “अब मैं गांड लूंगा।”

    रिया डर गई, “नहीं… गांड में बिल्कुल नहीं… वहाँ बहुत टाइट है… मैं मर जाऊंगी… प्लीज… मम्मी… मना करो…”

    अर्जुन जिद पर अड़ा था।

    सुधा माँ ने रिया को देखा और बोली, “बेटी… परंपरा है… गांड भी देनी पड़ेगी… सह ले…”

    रिया गुस्से में बोली, “मेरे से नहीं होगा… जो ऐसा ही है तो तू ही मरवा ले अपनी गांड… मैं नहीं करूंगी…”

    सुधा माँ ने तुरंत मना किया, “रिया… चुप… ऐसी बात मत बोल… ये गलत है…”

    अर्जुन ने गुस्से से कहा, “आज मेरी सुहागरात है… मैं क्या सो जाऊं? परंपरा है… गांड लेनी ही पड़ेगी…”

    रिया ने फिर रोते हुए कहा, “मेरी माँ के साथ कर लो… मुझे मत… प्लीज… मेरी माँ को ले लो…”

    अर्जुन ने रिया को जबरदस्ती घुटनों के बल मोड़ दिया। रिया चीख रही थी, “नहीं… जबरदस्ती मत… मम्मी… बचाओ… आह्ह… गांड में मत…”

    रिया की चुत अब पूरी तरह सूज चुकी थी। वह बेड पर करवट लेकर लेटी हुई थी, दोनों हाथों से अपनी चूत को ढककर, आंसू बहा रही थी। उसकी सांसें भारी हो रही थीं। अर्जुन अभी भी खड़ा था, उसका 10 इंच का मोटा लंड कंडोम लगाए हुए, पूरी तरह खड़ा और चमक रहा था।

    सुधा माँ बेटी के सिरहाने बैठी थीं, बेटी के बालों में हाथ फेर रही थीं।

    अर्जुन ने गहरी सांस ली और बोला,
    “अब गांड की बारी है रिया। परंपरा है… दुल्हन की गांड भी दामाद को मिलनी चाहिए।”

    रिया तुरंत सिहर उठी। उसने घुटनों को छाती से सटाकर बैठने की कोशिश की और चीखते हुए बोली,
    “नहीं! बिल्कुल नहीं! गांड में मैं नहीं दूंगी… कभी नहीं! आप पागल हो गए हो क्या? मेरी चुत ही फट गई है… गांड में डालोगे तो मैं मर जाऊंगी!”

    अर्जुन की आँखें संकरी हो गईं।
    “रिया, आज मेरी सुहागरात है। परंपरा पूरी करनी पड़ेगी। तू मना मत कर।”

    रिया गुस्से में रोते हुए बोली,
    “परंपरा का नाम लेकर मेरी जान ले लोगे? मेरी चूत अभी भी जल रही है… आधा लंड भी नहीं घुसा था… और अब गांड? नहीं… मैं मना करती हूँ! मम्मी… आप बोलिए ना… ये आदमी मुझे मार डालेगा!”

    सुधा माँ ने बीच में पड़ते हुए कहा,
    “दामाद जी… प्लीज… बेटी अभी बहुत छोटी है… उसकी हालत देखिए… चुत सूज गई है… गांड में तो बिल्कुल नहीं सह पाएगी… आज छोड़ दीजिए…”

    अर्जुन ने सुधा माँ की तरफ देखा और तीखे स्वर में बोला,
    “सास जी, आप चुप रहिए। ये मेरी पत्नी है। आज की रात मैं जो चाहूंगा वो होगा। रिया, अब घुटनों के बल हो जा।”

    रिया ने जोर से सिर हिलाया, आंसू पोछते हुए चीखी,
    “मैं नहीं हूंगी! आप मुझे जबरदस्ती करेंगे तो मैं चिल्लाऊंगी… पूरा घर जाग जाएगा… मैं गांड नहीं मरने दूंगी… चाहे आप मुझे मार ही डालें!”

    अर्जुन ने बेड पर घुटनों के बल चढ़ते हुए कहा,
    “तू मेरी बीवी है… सुहागरात है… गांड भी मेरी है। परंपरा हजारों साल पुरानी है। तू मना नहीं कर सकती।”

    रिया ने तकिए को सीने से चिपकाकर पीछे हटते हुए बोली,
    “परंपरा मेरी जान ले रही है तो भाड़ में जाए परंपरा! मेरी गांड टाइट है… आपका लंड 4 इंच मोटा है… वो घुसेगा तो मैं फट जाऊंगी… खून निकलेगा… मैं सह नहीं पाऊंगी… प्लीज… आज छोड़ दीजिए… कल देख लेंगे…”

    सुधा माँ ने फिर बीच में आने की कोशिश की,
    “दामाद जी… बेटी रो रही है… उसकी इज्जत रखिए… आज चुत में ही काफी हो गया… गांड की बात कल करें…”

    अर्जुन गुस्से में बोला,
    “सास जी, आप बेटी को बिगाड़ रही हैं। आज सुहागरात है… मैं सो नहीं जाऊंगा। रिया, अब काफी नाटक कर चुकी है। पलट!”

    रिया ने जोर से रोते हुए कहा,
    “मैं पलटूंगी नहीं! आप मेरी माँ के साथ कर लीजिए… उनकी गांड लीजिए… जितना मन हो… लेकिन मेरी गांड मत छुईए… मैं बिल्कुल नहीं दूंगी… मैं मना करती हूँ… मैं रो रही हूँ… देखिए मेरी हालत…”

    रिया ने अपनी सूजी हुई चूत अर्जुन को दिखाते हुए कहा,
    “देखिए… कितनी लाल और सूजी हुई है… आधा लंड भी सह नहीं पाई… गांड में डालोगे तो मैं अस्पताल पहुंच जाऊंगी… प्लीज… मम्मी… आप समझाइए ना…”

    सुधा माँ ने अर्जुन से हाथ जोड़ते हुए कहा,
    “दामाद जी… मेरी बेटी अभी बच्ची है… आज रात उसे छोड़ दीजिए… मैं… मैं तैयार हूँ… मेरी गांड ले लीजिए… लेकिन बेटी को मत छुईए…”

    अर्जुन ने सुधा माँ को घूरते हुए कहा,
    “सास जी, आपकी बेटी मेरी बीवी है। उसकी गांड भी मेरी है। आज मैं उसे गांड मारकर ही सोऊंगा।”

    रिया फिर चीख पड़ी,
    “नहीं! मैं कभी नहीं दूंगी! आप जबरदस्ती करेंगे तो मैं आपको कभी माफ नहीं करूंगी… मैं चिल्ला-चिल्लाकर पूरा घर जगा दूंगी… मेरी गांड मत छुओ… प्लीज… मम्मी… रो रही हूँ… देखिए…”

    रिया ने तकिए में मुंह छुपा लिया और जोर-जोर से रोने लगी।

    अर्जुन बेड पर बैठ गया, लंड अभी भी खड़ा था। उसने गुस्से से कहा,
    “ठीक है… आज नहीं मारूंगा… लेकिन कल जरूर मारूंगा। और परसों भी। और जब तक तू मेरी गांड नहीं देगी, मैं तुझे चुत भी नहीं दूंगा।”

    रिया ने सिसकते हुए सिर हिलाया,
    “जो करना है कर लो… लेकिन गांड नहीं… कभी नहीं…”

    सुधा माँ ने बेटी को गले लगाकर चुप कराया।

    कमरे में भारी सन्नाटा छा गया। अर्जुन का लंड अभी भी खड़ा था, लेकिन वह बेड पर बैठकर गुस्से से तीनों को देख रहा था।

    रिया अभी भी रो रही थी और बार-बार दोहरा रही थी,
    “मेरी गांड नहीं… कभी नहीं… मैं मना करती हूँ…”