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रवि और शिल्पा की हनीमून की कहानी 1

रवि और शिल्पा की हनीमून की कहानी

शादी की रात। रवि और शिल्पा का घर जोड़ परिवार का था। पूरा घर मेहमानों से भरा पड़ा था। उनके कमरे का दरवाज़ा बिल्कुल गलियारे के पास था, बगल में रवि की माँ-बाप का कमरा, सामने चाचा-चाची का। दीवारें पतली थीं, आवाज़ थोड़ी भी ऊँची हुई तो पूरे घर में गूँज जाती। रवि ७.१ फीट लंबा, १०१ किलो वजन वाला विशालकाय शरीर वाला था। उसकी छाती चौड़ी, बाहें मोटी, कंधे भारी। शिल्पा सिर्फ ४.५ फीट की, ४२ किलो वजन की नन्ही-सी, बेहद पतली-पतली, गोरी, नाजुक। उसके बाल कमर तक के, चेहरा गोल-मटोल, आँखें बड़ी-बड़ी।

दोनों रात के ११:४५ बजे कमरे में आए। शिल्पा अभी भी भारी लाल लेहंगे में थी, दुपट्टा कंधे पर, मेकअप ताज़ा। रवि शेरवानी में, लेकिन उसका विशाल शरीर कमरे को छोटा कर रहा था। दरवाज़ा बंद करते ही रवि ने शिल्पा को धीरे से अपने सीने से लगा लिया। उसकी एक बाँह शिल्पा की पूरी कमर को घेर रही थी। “डर लग रहा है ना?” रवि ने बहुत धीमी आवाज़ में पूछा। शिल्पा ने सिर्फ सिर हिलाया, उसकी साँसें तेज़ हो गई थीं।

रवि ने शिल्पा के गाल थामे, उसके होंठों पर अपना मोटा, गर्म होंठ रख दिया। पहला किस – बहुत नरम, बहुत धीमा। उसने शिल्पा के निचले होंठ को चूसा, फिर ऊपरी को, फिर अपनी जीभ हल्के से उसके मुंह में डाली। शिल्पा की जीभ से हल्का-हल्का खेला। किस ४-५ मिनट तक चला। दोनों की साँसें मिल रही थीं। शिल्पा के हाथ रवि की चौड़ी छाती पर रखे हुए थे, लेकिन वो कुछ ज्यादा नहीं कर पा रही थी। रवि जानता था – अगर आज उसने आगे बढ़ाया तो शिल्पा की चीख पूरे घर में गूँज जाएगी। उसका १३ इंच लंबा और ४.५ इंच मोटा लंड पहले से ही पैंट में तन गया था, लेकिन उसने खुद को रोका।

किस खत्म होने के बाद रवि ने शिल्पा को बेड पर लिटाया। दोनों कपड़े उतारे बिना ही लेट गए। रवि ने शिल्पा को अपनी बाँहों में भर लिया, उसकी पीठ पर हाथ फेरता रहा। “कल से ४ दिन तक हम यहीं रहेंगे… बस किस ही करेंगे… कुछ और नहीं। घर में आवाज़ बहुत जाती है। मैं नहीं चाहता कि कोई सुन ले। हनीमून पर जाकर सब कुछ होगा,” रवि फुसफुसाया। शिल्पा ने शर्म से सिर हिलाया और रवि के सीने में मुँह छिपा लिया। दोनों थोड़ी देर और किस करते रहे – कभी-कभी गहरे, कभी हल्के। रात के १:३० बजे दोनों थककर सो गए।

अगले ४ दिन घर में ही बीते। हर रात रवि शिल्पा को सिर्फ किस करता। कभी बेड पर लिटाकर, कभी बालकनी में खड़े होकर। कभी-कभी शिल्पा के गाल, गर्दन, कान चूमता। लेकिन उसके हाथ कभी ब्रा या पैंटी के अंदर नहीं गए। शिल्पा भी हर रात शर्माती, लेकिन रवि की विशाल बाँहों में सुरक्षित महसूस करती। रवि का १३ इंच का लंड हर रात तन जाता, लेकिन वो खुद को रोक लेता। “हनीमून पर… वहाँ कोई नहीं सुनेगा… वहाँ तुम जितना चिल्लाना चाहो चिल्ला सकती हो,” वो शिल्पा के कान में फुसफुसाता।

४ दिन बाद हनीमून। दोनों पेरिस के लिए निकल पड़े। वहाँ एक लग्जरी रिसॉर्ट बुक था – Seine नदी के किनारे, प्राइवेट विला टाइप का सूट। पूरा सूट १२०० स्क्वायर फीट का, अलग बालकनी, प्राइवेट जकूजी, सॉफ्ट लाइटिंग। शाम के ७:३० बजे वे रिसॉर्ट पहुँचे। कमरा गुलाब की पंखुड़ियों और मोमबत्तियों से सजा हुआ था। बाहर फ्रेंच विंडो से एफिल टावर की रोशनी दिख रही थी।

दरवाज़ा बंद करते ही रवि ने शिल्पा को उठा लिया। शिल्पा उसकी विशाल बाँहों में बिल्कुल खिलौने जैसी लग रही थी – ४.५ फीट की वो नन्ही लड़की ७.१ फीट के रवि की गोद में समा गई। रवि ने उसे बेड पर लिटाया। “अब कोई डर नहीं… कोई आवाज़ नहीं… सिर्फ तुम और मैं,” उसने कहा।

रवि ने बहुत धीरे-धीरे शिल्पा का ट्रैवलिंग टॉप उतारा। फिर स्कर्ट का बटन खोला। शिल्पा की साँसें तेज़ हो गईं। रवि ने ब्रा का हुक खोला। शिल्पा के छोटे-छोटे, लेकिन बहुत नाजुक, गुलाबी-भूरे निप्पल्स वाले स्तन बाहर आ गए। रवि ने एक लंबी साँस ली। फिर उसने शिल्पा की पैंटी भी उतार दी। अब शिल्पा पूरी तरह नंगी लेटी थी – उसका छोटा-सा, चिकना, गोरा शरीर, पतली कमर, छोटी जाँघें, बिल्कुल नन्ही चूत।

रवि ने खुद के कपड़े उतारे। उसका १०१ किलो का विशाल शरीर सामने आया। जब उसने अपनी पैंट उतारी तो १३ इंच लंबा और ४.५ इंच मोटा, नसों वाला, भारी लंड बाहर आ गया – पूरा खड़ा, सिर चमक रहा था। शिल्पा की आँखें फैल गईं, लेकिन रवि ने उसे चुप कराया। “आज सिर्फ ये…” उसने कहा।

रवि शिल्पा के ऊपर झुका। उसने दोनों हाथों से शिल्पा के स्तनों को थामा। वे उसके विशाल हाथों में पूरी तरह समा गए। फिर उसने एक निप्पल मुंह में ले लिया। बहुत धीरे, बहुत प्यार से चूसना शुरू किया। जीभ से घुमाया, होंठों से चूसा, कभी हल्का-हल्का दाँत लगाया। दूसरा स्तन हाथ से मसलता रहा। शिल्पा की साँसें भारी हो गईं। “रवि… आह्ह्ह…” वो पहली

बार हल्की सिसकारी निकाली।

रवि ने १०-१० मिनट तक एक-एक स्तन को चूसा। फिर दोनों को एक साथ मुंह में लेने की कोशिश की। उसका मोटा मुंह शिल्पा के दोनों स्तनों को लगभग ढक लेता था। वो लगातार चूसता रहा – कभी तेज़, कभी धीरे, कभी सिर्फ जीभ से चाटता। शिल्पा की कमर उठ-उठकर उसके मुंह की तरफ आ रही थी। “उफ्फ… रवि… बहुत देर से… आह्ह्ह… अच्छा लग रहा है…” शिल्पा की आवाज़ काँप रही थी।

रवि ने शिल्पा को अपनी गोद में उठा लिया। अब शिल्पा उसकी जाँघों पर बैठी थी, नंगी। रवि ने फिर दोनों स्तनों को मुंह में लिया और १५-१५ मिनट तक बिना रुके चूसता रहा। शिल्पा के निप्पल्स लाल और सूजे हुए हो गए थे। वो बार-बार सिसकारियाँ भर रही थी – “आह्ह्ह… रवि… धीरे… लेकिन मत छोड़ो… आह्ह्ह!!”

रवि ने शिल्पा को बेड पर लिटाया और उसके ऊपर लेट गया। उसका भारी शरीर शिल्पा को पूरी तरह ढक रहा था, लेकिन वो अपना वजन संभाल रहा था। फिर उसने फिर से स्तनों पर हमला बोल दिया। अब और देर तक, और गहराई से। २० मिनट, २५ मिनट… लगातार चूसता रहा। कभी-कभी स्तनों के बीच में चूमता, कभी गर्दन पर, लेकिन मुख्य रूप से स्तन ही। शिल्पा का पूरा शरीर पसीने से तर हो गया था। उसकी साँसें फूल रही थीं, आँखें बंद, मुँह थोड़ा खुला। “रवि… मैं… मैं काँप रही हूँ… बहुत देर हो गई… आह्ह्ह…”

रवि ने ४० मिनट तक लगातार शिल्पा के स्तनों को चूसा। कभी-कभी रुककर सिर्फ जीभ से चाटता, फिर फिर से जोर से चूसता। शिल्पा की हालत पूरी तरह बदल गई थी – नन्हा-सा शरीर थर-थर काँप रहा था, स्तन लाल और चमकदार हो गए थे।

रवि आखिर में रुका। उसने शिल्पा को चूम लिया और उसके कान में फुसफुसाया, “ये सिर्फ शुरुआत थी जान… हनीमून अभी बहुत लंबा है…”

मैं कोने में खड़ा था… शिल्पा की नंगी, काँपती हुई हालत, रवि का विशाल शरीर, और उसकी लंबी-लंबी चुसाई… सब बहुत करीब से देख रहा था।

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